फ्रांस के सैन्य शासक नेपोलियन बोनापार्ट का 05 मई को निधन हो गया था। नेपोलियन बोनापार्ट को दुनिया के महान सैन्य शासकों में शुमार किया जाता है। नेपोलियन ने अपने दो दशक के लंबे करियर में करीब 61 से ज्यादा लड़ाइयां लड़ी थीं। नेपोलियन के विरोधी उससे नफरत करते थे, वहीं उसके सहयोगी और सैनिक उससे प्यार करते थे। तो आइए जानते हैं उसकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर नेपोलियन बोनापार्ट के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
फ्रांस के अजाचियो शहर में 15 अगस्त 1769 को नेपोलियन बोनापार्ट का जन्म हुआ था। वह एक अमीर परिवार से ताल्लुक रखता था। बचपन में नेपोलियन को सेना में जाने की प्रेरणा परिवार से मिली। परिवार ने उनको सैन्य अफसर बनाने के लिए फ्रांस की सैन्य अकादमी में भेजा। सैनिक स्कूल में शिक्षा पूरी करने के बाद नेपोलियन ने 1784 में पेरिस के एक कॉलेज में एडमिशन लिया। वहीं नेपोलियन की प्रतिभा को देखते हुए उनको फ्रांस के राजकीय तोपखाने में सब-लेफ्टिनेंट की नौकरी मिल गई।
फ्रांस का सम्राट
नेपोलियन की पहली पत्नी जोसेफिन के कोई संतान न होने पर उन्होंने ऑस्ट्रिया के सम्राट की पुत्री 'मैरी लुईस' से दूसरा विवाह किया। नेपोलियन ने अपने युद्ध कौशल से फ्रांस को विदेशी दुश्मनों से मुक्ति दिलाने का काम किया। वहीं 15 दिसंबर 1799 को फ्रांस की जनता ने नेपोलियन बोनापार्ट को अपना सम्राट स्वीकार कर लिया।
साल 1803 से लेकर 1815 तक नेपोलियन युद्धों में लगा रहा। जोकि यूरोपीय देशों के विभिन्न गठबंधनों के साथ प्रमुख संघर्षों की एक शृंखला है। वहीं भविष्य के युद्धों के लिये धन जुटाने के साधन के रूप में नेपोलियन ने 1803 में आंशिक रूप से उत्तरी अमेरिका में फ्रांस के लुइसियाना क्षेत्र को नए स्वतंत्र संयुक्त राज्य अमेरिका को 15 मिलियन में बेच दिया। इस लेन-देन को बाद में 'लुइसियाना' खरीद के रूप में जाना गया।
इसी साल दिसंबर में नेपोलियन की सेना ने ऑस्ट्रियायी और रूसियों को हराया। उसकी जीत के परिणामस्वरूप रोमन साम्राज्य का विघटन हुआ और राइन परिसंघ का निर्माण हुआ। वहीं 21 मार्च 1804 को नेपोलियन ने 'नेपोलियन संहिता' की स्थापना की। जिसको फ्रांसीसी नागरिक संहिता के रूप में जाना जाता है।
नेपोलियन का पतन
इंग्लैंड को चोट पहुंचाने की कोशिश में नेपोलियन ने कॉन्टिनेंटल सिस्टम की शुरूआत की। वहीं 1813 में मित्र देशों ने लेपज़िग की लड़ाई में नेपोलियन की सेना को हराया। इसके बाद नेपोलियम को छोटे द्वीप में एल्बा में निर्वासित कर दिया गया। वहीं 1815 में वाटरलू के युद्ध में नेपोलियन के शासन का विरोध करने के लिए यूरोपीय शक्तियां एक साथ हो गईं। 18 जून 1815 को ब्रिटिश और प्रशियाई सेनाओं ने नेपोलियन को हराया और फिर 03 जुलाई 1815 में नेपोलियम ने ब्रिटिशों को आत्मसमर्पण कर लिया। जिसके बाद नेपोलियन को सेंट हेलेना द्वीप पर निर्वासन में भेज दिया गया।
मृत्यु
वहीं 05 मई 1821 को नेपोलियन बोनापार्ट का कैंसर के कारण निधन हो गया था।