Middle East Crisis का Global Economy पर असर, Qatar की चेतावनी- कभी भी रुक सकती है Energy Supply

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के साथ दुनिया के ऊर्जा बाजार को लेकर भी चिंता गहराने लगी है। इसी बीच क़तर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान, अमेरिका और इज़राइल से जुड़ा यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहा तो खाड़ी देशों से ऊर्जा निर्यात रुक सकता है और कच्चे तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़कर लगभग 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।मौजूद जानकारी के अनुसार साद अल-काबी ने एक अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में कहा कि अगर मौजूदा हालात ऐसे ही बने रहे तो खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा निर्यातक कुछ ही दिनों में उत्पादन रोकने के लिए मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो इसका असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।बता दें कि क़तर दुनिया में तरलीकृत प्राकृतिक गैस के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक माना जाता है। हाल ही में क़तर ने अपने रास लफ़ान गैस संयंत्र पर ड्रोन हमले के बाद “अपरिहार्य परिस्थितियों” की घोषणा की है। गौरतलब है कि यह संयंत्र देश के गैस निर्यात का प्रमुख केंद्र है और दुनिया की कुल तरलीकृत प्राकृतिक गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा क़तर से ही आता है।ऊर्जा मंत्री ने कहा कि अगर अभी संघर्ष रुक भी जाए तो भी सामान्य आपूर्ति व्यवस्था बहाल होने में कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है। मौजूद जानकारी के अनुसार हमले के बाद नुकसान का आकलन और आपूर्ति व्यवस्था को दोबारा व्यवस्थित करने में समय लगेगा।उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो खाड़ी क्षेत्र के अन्य ऊर्जा निर्यातक देशों को भी जल्द ही इसी तरह की घोषणा करनी पड़ सकती है। साद अल-काबी के मुताबिक अगर यह संघर्ष कुछ सप्ताह और जारी रहा तो दुनिया की आर्थिक वृद्धि दर पर भी असर पड़ सकता है।गौरतलब है कि उनके बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। मौजूद जानकारी के अनुसार ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत शुक्रवार को लगभग 2.5 प्रतिशत बढ़कर करीब 87.6 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। वहीं प्राकृतिक गैस की कीमतें भी बढ़कर लगभग 40 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल इकाई तक जा सकती हैं।बताया जा रहा है कि होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही भी काफी प्रभावित हुई है। यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से होकर गुजरता है। हालिया तनाव के दौरान कई जहाजों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं और बीमा प्रीमियम में भी तेज़ बढ़ोतरी देखी जा रही है।इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी नौसेना जहाजों को सुरक्षा देते हुए इस समुद्री मार्ग से गुजरने में मदद करेगी। हालांकि क़तर के ऊर्जा मंत्री का मानना है कि जब तक संघर्ष पूरी तरह नहीं रुकता तब तक यह मार्ग सुरक्षित नहीं माना जा सकता।साद अल-काबी ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा हालात में जहाजों को इस रास्ते से ले जाना बेहद खतरनाक हो सकता है। उनके अनुसार क़तर तभी दोबारा गैस उत्पादन और निर्यात को पूरी तरह सामान्य करेगा जब क्षेत्र में संघर्ष पूरी तरह समाप्त हो जाएगा और हालात स्थिर हो जाएंगे।

PNSPNS
Mar 8, 2026 - 20:10
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Middle East Crisis का Global Economy पर असर, Qatar की चेतावनी- कभी भी रुक सकती है Energy Supply
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के साथ दुनिया के ऊर्जा बाजार को लेकर भी चिंता गहराने लगी है। इसी बीच क़तर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान, अमेरिका और इज़राइल से जुड़ा यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहा तो खाड़ी देशों से ऊर्जा निर्यात रुक सकता है और कच्चे तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़कर लगभग 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार साद अल-काबी ने एक अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में कहा कि अगर मौजूदा हालात ऐसे ही बने रहे तो खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा निर्यातक कुछ ही दिनों में उत्पादन रोकने के लिए मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो इसका असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

बता दें कि क़तर दुनिया में तरलीकृत प्राकृतिक गैस के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक माना जाता है। हाल ही में क़तर ने अपने रास लफ़ान गैस संयंत्र पर ड्रोन हमले के बाद “अपरिहार्य परिस्थितियों” की घोषणा की है। गौरतलब है कि यह संयंत्र देश के गैस निर्यात का प्रमुख केंद्र है और दुनिया की कुल तरलीकृत प्राकृतिक गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा क़तर से ही आता है।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि अगर अभी संघर्ष रुक भी जाए तो भी सामान्य आपूर्ति व्यवस्था बहाल होने में कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है। मौजूद जानकारी के अनुसार हमले के बाद नुकसान का आकलन और आपूर्ति व्यवस्था को दोबारा व्यवस्थित करने में समय लगेगा।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो खाड़ी क्षेत्र के अन्य ऊर्जा निर्यातक देशों को भी जल्द ही इसी तरह की घोषणा करनी पड़ सकती है। साद अल-काबी के मुताबिक अगर यह संघर्ष कुछ सप्ताह और जारी रहा तो दुनिया की आर्थिक वृद्धि दर पर भी असर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि उनके बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। मौजूद जानकारी के अनुसार ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत शुक्रवार को लगभग 2.5 प्रतिशत बढ़कर करीब 87.6 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। वहीं प्राकृतिक गैस की कीमतें भी बढ़कर लगभग 40 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल इकाई तक जा सकती हैं।

बताया जा रहा है कि होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही भी काफी प्रभावित हुई है। यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से होकर गुजरता है। हालिया तनाव के दौरान कई जहाजों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं और बीमा प्रीमियम में भी तेज़ बढ़ोतरी देखी जा रही है।

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी नौसेना जहाजों को सुरक्षा देते हुए इस समुद्री मार्ग से गुजरने में मदद करेगी। हालांकि क़तर के ऊर्जा मंत्री का मानना है कि जब तक संघर्ष पूरी तरह नहीं रुकता तब तक यह मार्ग सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

साद अल-काबी ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा हालात में जहाजों को इस रास्ते से ले जाना बेहद खतरनाक हो सकता है। उनके अनुसार क़तर तभी दोबारा गैस उत्पादन और निर्यात को पूरी तरह सामान्य करेगा जब क्षेत्र में संघर्ष पूरी तरह समाप्त हो जाएगा और हालात स्थिर हो जाएंगे।

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