Harmanpreet Singh विश्व कप में भारत के ट्रंपकार्ड होंगे, पूर्व दिग्गज Jugraj Singh का बयान

(मोना पार्थसारथी) नयी दिल्ली, 11 अगस्त भारत के महानतम ड्रैग फ्लिकरों में शुमार जुगराज सिंह के सुनहरे सफर पर 2003 में एक कार दुर्घटना ने विराम लगा दिया था लेकिन उन्हें हरमनप्रीत सिंह में अपना अक्स नजर आता है और उनका मानना है कि भारतीय कप्तान इस सप्ताह शुरू हो रहे विश्व कप में टीम के ‘ट्रंपकार्ड’ साबित होंगे। जुगराज ने को दिये इंटरव्यू में कहा ,‘‘ इस समय विश्व के शीर्ष तीन ड्रैग फ्लिकर में से एक हरमनप्रीत हैं। वह तोक्यो ओलंपिक के समय से ही शानदार खेल रहा है।टीम की जरूरत के समय लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाला खिलाड़ी ही ‘ट्रंपकार्ड’ होता है और मुझे लगता है कि वह हरमनप्रीत होगा। उसकी फिटनेस भी अच्छी है।’’ होबर्ट में 2001 जूनियर विश्व कप में भारत की खिताबी जीत के नायक रहे जुगराज उस दौर में पाकिस्तान के सोहेल अब्बास और जर्मनी के फ्लोरियन कुंज की टक्कर के ड्रैग फ्लिकर माने जाते थे। लेकिन जालंधर के पास 2003 में हुई कार दुर्घटना ने उनके सफर पर विराम लगा दिया था।हरमनप्रीत की ही तरह सुरजीत हॉकी अकादमी से ही निकले जुगराज ने कहा ,‘‘उसका स्टाइल हूबहू मेरे जैसा है। उसका खेलने का तरीका और आक्रामकता मुझे अपनी याद दिलाता है। उसमे मुझे अपना अक्स नजर आता है।मैं बोलता भी हूं कि खेल तू रहा होता है और मुझे लगता है कि मैं मैदान पर हूं।’’ उन्होंने बताया कि हर टूर्नामेंट या शिविर के बाद हरमनप्रीत से उनकी बात या मुलाकात होती है और वे उसके खेल को बारीकी से देखकर सलाह भी देते हैं। उन्होंने कहा ,‘‘ हम बाहर से बैठकर उसकी बहुत सारी चीजें नोट कर सकते हैं और उसे मार्गदर्शन दे सकते हैं। निश्चित तौर पर कोचिंग स्टाफ भी यह कर रहा होगा लेकिन मैने हरमन के साथ काफी लंबा समय काम किया है।’’ गुरदासपुर में पुलिस अधीक्षक के तौर पर तैनात 43 वर्ष के इस पूर्व खिलाड़ी ने कहा ,‘‘जब हम टीवी पर स्लो मोशन में देखते हैं तो रशर और गोलकीपर की मूवमेंट नजर आ जाती है।अगर ये सारी चीजें खिलाड़ी के साथ साझा करते हैं तो उसे फायदा मिलता है। वह हमेशा कहता भी है जो भी आपको कमी नजर आती है , मुझे बताया करो।’’ उन्होंने कहा ,‘‘ यह भी उसकी खासियत है कि वह हमेशा सीखने को लालायित रहता है और मार्गदर्शन लेना चाहता है। ओलंपिक के दो पदक, उसकी कप्तानी में एक पदक जीतने के बाद भी उसके पैर जमीन पर हैं।उसके पास जो कौशल है, ऐसा खिलाड़ी बरसों में एक बार आता है।’ जुगराज ने यह भी कहा कि सिर्फ ड्रैग फ्लिकर होना काफी नहीं है बल्कि आज की हॉकी में लगातार कुछ नया करते रहना और मैदान पर समग्र प्रदर्शन मायने रखता है। उन्होंने कहा ,‘‘आज की हॉकी में सिर्फ एक ड्रैग फ्लिकर होना अहम नहीं है। आपका कौशल, गोल करने में आप कितनी सहायता कर पा रहे हैं और बाकी खिलाड़ियों से तालमेल कैसा है , यह अहम है।हॉकी टीम का खेल है तो साथी खिलाड़ी भी उसका पूरा साथ देते हैं। टीम की बांडिंग इस बार जबर्दस्त दिख रही है।’’ उन्होंने कहा ,‘‘ हॉकी में आधुनिक तकनीक इतनी आ गई है कि मार्गदर्शन बहुत जरूरी है। हर टीम का ध्यान हरमन पर रहेगा और उसके खेल का पूरा वीडियो विश्लेषण किया होगा।ऐसे में उसे कुछ नया करना होगा ताकि विरोधी टीमों को हैरान कर सके।’’ यह पूछने पर कि विश्व कप के लिये क्या टिप्स दिये हैं, जुगराज ने कहा कि पुशर, स्टॉपर और फ्लिकर के तालमेल से ही गोल बनता है और इसी पर फोकस करने की जरूरत है। उन्होंने कहा ,‘‘ मैं तो हमेशा टिप्स देता रहता हूं। फ्लिकर के लिये बॉल पुशर सबसे अहम है।उसने अच्छा गेंद डाल दिया और स्टॉपर ने सही परफॉर्म कर दिया तो गोल को कोई नहीं रोक सकता। तीनों का अच्छा प्लान होना चाहिये। इसके अलावा दूसरे फ्लिकर्स की भी भूमिका अहम होगी क्योंकि सरप्राइज एलिमेंट भी जरूरी है।’’ जुगराज को यकीन है कि यह टीम 51 साल बाद विश्व कप में पोडियम पर रहने में सक्षम है।उन्होंने कहा ,‘‘मेरी हरमन से यही बात हुई थी कि तुमने हमें ओलंपिक का पदक दिला दिया, राष्ट्रमंडल, एशियाड , एशिया कप सारे पदक हैं। सिर्फ विश्व कप का पदक नहीं है और हम यही उम्मीद करते हैं कि इस बार यह कमी पूरी हो जायेगी। इस टीम की तैयारी अच्छी है और बांडिंग दिख रही है लिहाजा यह टीम पूरी तरह से सक्षम है कि 50 साल का इंतजार खत्म कर दे।

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Aug 12, 2026 - 17:08
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Harmanpreet Singh विश्व कप में भारत के ट्रंपकार्ड होंगे, पूर्व दिग्गज Jugraj Singh का बयान

(मोना पार्थसारथी) नयी दिल्ली, 11 अगस्त भारत के महानतम ड्रैग फ्लिकरों में शुमार जुगराज सिंह के सुनहरे सफर पर 2003 में एक कार दुर्घटना ने विराम लगा दिया था लेकिन उन्हें हरमनप्रीत सिंह में अपना अक्स नजर आता है और उनका मानना है कि भारतीय कप्तान इस सप्ताह शुरू हो रहे विश्व कप में टीम के ‘ट्रंपकार्ड’ साबित होंगे। जुगराज ने को दिये इंटरव्यू में कहा ,‘‘ इस समय विश्व के शीर्ष तीन ड्रैग फ्लिकर में से एक हरमनप्रीत हैं। वह तोक्यो ओलंपिक के समय से ही शानदार खेल रहा है।

टीम की जरूरत के समय लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाला खिलाड़ी ही ‘ट्रंपकार्ड’ होता है और मुझे लगता है कि वह हरमनप्रीत होगा। उसकी फिटनेस भी अच्छी है।’’ होबर्ट में 2001 जूनियर विश्व कप में भारत की खिताबी जीत के नायक रहे जुगराज उस दौर में पाकिस्तान के सोहेल अब्बास और जर्मनी के फ्लोरियन कुंज की टक्कर के ड्रैग फ्लिकर माने जाते थे। लेकिन जालंधर के पास 2003 में हुई कार दुर्घटना ने उनके सफर पर विराम लगा दिया था।

हरमनप्रीत की ही तरह सुरजीत हॉकी अकादमी से ही निकले जुगराज ने कहा ,‘‘उसका स्टाइल हूबहू मेरे जैसा है। उसका खेलने का तरीका और आक्रामकता मुझे अपनी याद दिलाता है। उसमे मुझे अपना अक्स नजर आता है।

मैं बोलता भी हूं कि खेल तू रहा होता है और मुझे लगता है कि मैं मैदान पर हूं।’’ उन्होंने बताया कि हर टूर्नामेंट या शिविर के बाद हरमनप्रीत से उनकी बात या मुलाकात होती है और वे उसके खेल को बारीकी से देखकर सलाह भी देते हैं। उन्होंने कहा ,‘‘ हम बाहर से बैठकर उसकी बहुत सारी चीजें नोट कर सकते हैं और उसे मार्गदर्शन दे सकते हैं। निश्चित तौर पर कोचिंग स्टाफ भी यह कर रहा होगा लेकिन मैने हरमन के साथ काफी लंबा समय काम किया है।’’ गुरदासपुर में पुलिस अधीक्षक के तौर पर तैनात 43 वर्ष के इस पूर्व खिलाड़ी ने कहा ,‘‘जब हम टीवी पर स्लो मोशन में देखते हैं तो रशर और गोलकीपर की मूवमेंट नजर आ जाती है।

अगर ये सारी चीजें खिलाड़ी के साथ साझा करते हैं तो उसे फायदा मिलता है। वह हमेशा कहता भी है जो भी आपको कमी नजर आती है , मुझे बताया करो।’’ उन्होंने कहा ,‘‘ यह भी उसकी खासियत है कि वह हमेशा सीखने को लालायित रहता है और मार्गदर्शन लेना चाहता है। ओलंपिक के दो पदक, उसकी कप्तानी में एक पदक जीतने के बाद भी उसके पैर जमीन पर हैं।

उसके पास जो कौशल है, ऐसा खिलाड़ी बरसों में एक बार आता है।’ जुगराज ने यह भी कहा कि सिर्फ ड्रैग फ्लिकर होना काफी नहीं है बल्कि आज की हॉकी में लगातार कुछ नया करते रहना और मैदान पर समग्र प्रदर्शन मायने रखता है। उन्होंने कहा ,‘‘आज की हॉकी में सिर्फ एक ड्रैग फ्लिकर होना अहम नहीं है। आपका कौशल, गोल करने में आप कितनी सहायता कर पा रहे हैं और बाकी खिलाड़ियों से तालमेल कैसा है , यह अहम है।

हॉकी टीम का खेल है तो साथी खिलाड़ी भी उसका पूरा साथ देते हैं। टीम की बांडिंग इस बार जबर्दस्त दिख रही है।’’ उन्होंने कहा ,‘‘ हॉकी में आधुनिक तकनीक इतनी आ गई है कि मार्गदर्शन बहुत जरूरी है। हर टीम का ध्यान हरमन पर रहेगा और उसके खेल का पूरा वीडियो विश्लेषण किया होगा।

ऐसे में उसे कुछ नया करना होगा ताकि विरोधी टीमों को हैरान कर सके।’’ यह पूछने पर कि विश्व कप के लिये क्या टिप्स दिये हैं, जुगराज ने कहा कि पुशर, स्टॉपर और फ्लिकर के तालमेल से ही गोल बनता है और इसी पर फोकस करने की जरूरत है। उन्होंने कहा ,‘‘ मैं तो हमेशा टिप्स देता रहता हूं। फ्लिकर के लिये बॉल पुशर सबसे अहम है।

उसने अच्छा गेंद डाल दिया और स्टॉपर ने सही परफॉर्म कर दिया तो गोल को कोई नहीं रोक सकता। तीनों का अच्छा प्लान होना चाहिये। इसके अलावा दूसरे फ्लिकर्स की भी भूमिका अहम होगी क्योंकि सरप्राइज एलिमेंट भी जरूरी है।’’ जुगराज को यकीन है कि यह टीम 51 साल बाद विश्व कप में पोडियम पर रहने में सक्षम है।

उन्होंने कहा ,‘‘मेरी हरमन से यही बात हुई थी कि तुमने हमें ओलंपिक का पदक दिला दिया, राष्ट्रमंडल, एशियाड , एशिया कप सारे पदक हैं। सिर्फ विश्व कप का पदक नहीं है और हम यही उम्मीद करते हैं कि इस बार यह कमी पूरी हो जायेगी। इस टीम की तैयारी अच्छी है और बांडिंग दिख रही है लिहाजा यह टीम पूरी तरह से सक्षम है कि 50 साल का इंतजार खत्म कर दे।

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