प्रभासाक्षी न्यूज़ नेटवर्क के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों का विश्लेषण किया गया। प्रभासाक्षी संपादक नीरज दुबे ने सवालों के जवाब दिये। उल्लेखनीय है कि तीन राज्यों- पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में NDA की सरकार बन रही है जबकि केरलम में कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की और तमिलनाडु में TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। नीरज दुबे ने कहा कि देखा जाये तो पश्चिम बंगाल में भाजपा की इस प्रचंड सफलता के केंद्र में अमित शाह की रणनीति और नेतृत्व को निर्णायक माना जा रहा है। इस चुनाव में उन्होंने केवल एक स्टार प्रचारक की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि पूरे अभियान के मुख्य रणनीतिकार के रूप में कार्य किया। यह जीत सिर्फ एक लहर का परिणाम नहीं, बल्कि महीनों की सूक्ष्म योजना, संगठनात्मक मजबूती और जमीनी स्तर पर किए गए सतत प्रयासों का फल भी है।
नीरज दुबे ने आगे कहा कि इस चुनाव में कई ऐसे चेहरे भी उभरकर सामने आए हैं, जिन्हें “साइलेंट हीरो” कहा जा रहा है। शुभेन्दु अधिकारी और दिलीप घोष जैसे स्थानीय नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति ने भाजपा को मजबूत आधार दिया। इसके साथ ही मंगल पाण्डेय को राज्य प्रभारी बनाना भी एक सोचा-समझा कदम था। इन सबके पीछे अमित शाह की स्पष्ट रणनीतिक सोच काम कर रही थी, जिसमें स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता देना शामिल था।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर कट-मनी, भ्रष्टाचार और खराब शासन के आरोप लगाते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि राज्य में बदलाव की जरूरत है। उन्होंने विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसरों का वादा कर मतदाताओं को आकर्षित किया। बहरहाल, अमित शाह के बारे में कहा जा सकता है कि उन्होंने जिस शिद्दत के साथ बंगाल में मेहनत की और खुद पूरे चुनाव अभियान का नेतृत्व किया उससे समय रहते चूक या गलतियों की संभावनाएं खत्म हो गयीं और आजादी के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में भगवा राज आ गया।
प्रभासाक्षी के संपादक ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार से वहां के स्थानीय लोगों में जबरदस्त नाराजगी थी और यह चुनावी नतीजे में देखने को भी मिल रहा है। इसके साथ ही नीरज कुमार दुबे ने चुनाव आयोग द्वारा चुनाव के दौरान की गई व्यवस्थाओं पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोग भयमुक्त वातावरण में अपने मताधिकार का प्रयोग किया है जिसके बाद से यह बदलाव हमें देखने को मिल रहा है। नीरज दुबे ने इस बात पर भी जोर दिया कि पश्चिम बंगाल में सरकार गठन के बाद भाजपा के सामने भी कई बड़ी चुनौतियां होंगी।
असम को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि इसमें किसी को कोई हैरानी नहीं है। असम में भाजपा अपने दम पर सरकार बनाने जा रही है। हालांकि वह अपने गठबंधन के सहयोगियों को भी साथ रखेंगी। हिमंत बिस्वा सरमा असम में एक बार फिर से भाजपा के लिए बड़े नेता के तौर पर उभरे हैं। तमिलनाडु में हुए बड़े उलट फेर पर नीरज दुबे ने कहा कि वहां द्रविड़ राजनीति का अंत होता दिखाई दे रहा है। विजय में लोगों को संभावनाएं दिखाई दी और यही कारण है कि पहले ही चुनाव में विजय की पार्टी ने जबरदस्ती सफलता हासिल की है। उनकी पार्टी बहुमत के करीब है और कुछ पार्टी उन्हें समर्थन दे सकती है। इसके बाद विजय मुख्यमंत्री बन सकते हैं।
केरलम को लेकर नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि कांग्रेस के लिए यह संजीवनी का काम करेगा। केरल में कांग्रेस की जीत से प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की पार्टी में उपयोगिता और बढ़ेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि केरल में कांग्रेस के लिए चुनौतियां भी ज्यादा रहने वाली है। कांग्रेस किसको मुख्यमंत्री बनाएगी, यह भी देखने वाली बात है क्योंकि वहां कई मुख्यमंत्री की उम्मीदवार है। इसके साथ ही नीरज दुबे ने कहा कि देश से वामपंथी राजनीति का अंत होता हुआ दिखाई दे रहा है। पिछले 50 साल में यह पहला मौका है जब लेफ्ट की सरकार किसी राज्य में नहीं है।