VV Giri Birth Anniversary: इंदिरा के दांव से राष्ट्रपति बने थे वीवी गिरी, जानें अद्वितीय सफर की कहानी

भारत के चौथे राष्ट्रपति वीवी गिरी का 10 अगस्त को जन्म हुआ था। उनका पूरा नाम वराहगिरि वेंकट गिरि था। उन्होंने 24 अगस्त 1969 से 24 अगस्त 1974 तक भारत के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया था। वीवी गिरी को मजदूरों का नेता भी कहा जाता था। बता दें कि उन्होंने रेलवे कर्मचारियों के लिए 'बंगाल-नागपुर रेलवे एसोसिएशन' बनाया था। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर भारत के चौथे राष्ट्रपति वीवी गिरी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...जन्म और परिवारओडिशा के ब्रह्मपुर में 10 अगस्त 1894 को वीवी गिरी का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम वीवी जोगय्या पंतुलु था, जोकि पेशे से वकील और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सक्रि सदस्य भी थे। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा ब्रह्मपुर से पूरी की। वहीं साल 1913 में वकालत की पढ़ाई के लिए आयरलैंड गए। जहां पर उन्होंने साल 1913-16 तक डबलिन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। फिर बाद में वकालत की और ब्रह्मपुर बार काउंसलि के नेता बने। वहीं साल 1920 में उन्होंने गांधी की अपील पर असहयोग आंदोलन में हिस्‍सा लिया था।इसे भी पढ़ें: Rabindranath Tagore Death Anniversary: नोबेल जीतने वाले पहले एशियाई थे रबींद्रनाथ टैगोर, इन देशों को दिया था राष्ट्रगानगिरि अप्रोचदेश के चौथे राष्ट्रपति रहे वीवी गिरी शुरूआत से ही मजदूरों के बड़े नेता रहे। साल 1928 में गिरी के नेतृ्व में रेलवे कामगारों की अहिंसक हड़ताल हुई। ऐसे में ब्रिटिश राज और रेलवे प्रबंधन को कामगारों की मांग माननी पड़ी। ट्रेड यूनियनों को आजादी के आंदोलन का भागीदार बनाने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। वीवी गिरी ने दूसरे गोलमेज सम्मेलन में कामगारों का प्रतिनिधित्‍व किया था। साल 1952 में नेहरू सरकार ने वी वी गिरी को श्रम मंत्रालय का जिम्मा मिला। उनकी सोच थी कि औद्योगिक विवाद में प्रबंधन मजदूरों से बाच करके समाधान निकाला जाए। इसी को 'गिरी अप्रोच' कहा जाता है।चौथे राष्ट्रपतिदेश के तीसरे राष्ट्रपति जाकिर हुसैन का 13 मई 1969 को मौत हो गई थी। जिसके बाद गिरी को कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया गया। बाद में फैसला लिया गया कि अगले राष्ट्रपति का चुनाव कराया जाए। जिस पर देश की तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी और सिंडिकेट के नाम से फेमस कांग्रेस पार्टी के नेताओं के बीच तनातनी का माहौल बना। इस पर इंदिरा गांधी के विरोध को दरकिनार करते हुए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने नीलम संजीव रेड्डी को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर देने का फैसला किया।वहीं इंदिरा गांधी ने भी सिंडिकेट से नाराज होकर वीवी गिरी को समर्थन देने का ऐलान किया। इंदिरा गांधी ने सांसदों और विधायकों से अपनी अंतरात्मा से वोट करने की अपील की। फिर 16 अगस्त 1969 को नीलम संजीव रेड्डी, वीवी गिरि और विपक्ष के उम्मीदवार सीडी देशमुख के बीच मुकाबला हुई। जिसमें वीवी गिरी को जीत मिली। इस तरह से वीवी गिरी न सिर्फ देश के पहले निर्दलीय राष्ट्रपति बने, बल्कि इकलौते कार्यवाहक राष्ट्रपति थे, जोकि बाद में राष्ट्रपति बने। वह 24 अगस्त 1969 से 24 अगस्त 1974 तक राष्‍ट्रपति पद पर रहे।मृत्युवहीं चेन्नई में 24 जून 1980 को 85 साल की उम्र में वीवी गिरी का निधन हो गया।

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Aug 11, 2025 - 04:30
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VV Giri Birth Anniversary: इंदिरा के दांव से राष्ट्रपति बने थे वीवी गिरी, जानें अद्वितीय सफर की कहानी
भारत के चौथे राष्ट्रपति वीवी गिरी का 10 अगस्त को जन्म हुआ था। उनका पूरा नाम वराहगिरि वेंकट गिरि था। उन्होंने 24 अगस्त 1969 से 24 अगस्त 1974 तक भारत के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया था। वीवी गिरी को मजदूरों का नेता भी कहा जाता था। बता दें कि उन्होंने रेलवे कर्मचारियों के लिए 'बंगाल-नागपुर रेलवे एसोसिएशन' बनाया था। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर भारत के चौथे राष्ट्रपति वीवी गिरी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

ओडिशा के ब्रह्मपुर में 10 अगस्त 1894 को वीवी गिरी का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम वीवी जोगय्या पंतुलु था, जोकि पेशे से वकील और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सक्रि सदस्य भी थे। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा ब्रह्मपुर से पूरी की। वहीं साल 1913 में वकालत की पढ़ाई के लिए आयरलैंड गए। जहां पर उन्होंने साल 1913-16 तक डबलिन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। फिर बाद में वकालत की और ब्रह्मपुर बार काउंसलि के नेता बने। वहीं साल 1920 में उन्होंने गांधी की अपील पर असहयोग आंदोलन में हिस्‍सा लिया था।

इसे भी पढ़ें: Rabindranath Tagore Death Anniversary: नोबेल जीतने वाले पहले एशियाई थे रबींद्रनाथ टैगोर, इन देशों को दिया था राष्ट्रगान

गिरि अप्रोच

देश के चौथे राष्ट्रपति रहे वीवी गिरी शुरूआत से ही मजदूरों के बड़े नेता रहे। साल 1928 में गिरी के नेतृ्व में रेलवे कामगारों की अहिंसक हड़ताल हुई। ऐसे में ब्रिटिश राज और रेलवे प्रबंधन को कामगारों की मांग माननी पड़ी। ट्रेड यूनियनों को आजादी के आंदोलन का भागीदार बनाने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। वीवी गिरी ने दूसरे गोलमेज सम्मेलन में कामगारों का प्रतिनिधित्‍व किया था। साल 1952 में नेहरू सरकार ने वी वी गिरी को श्रम मंत्रालय का जिम्मा मिला। उनकी सोच थी कि औद्योगिक विवाद में प्रबंधन मजदूरों से बाच करके समाधान निकाला जाए। इसी को 'गिरी अप्रोच' कहा जाता है।

चौथे राष्ट्रपति

देश के तीसरे राष्ट्रपति जाकिर हुसैन का 13 मई 1969 को मौत हो गई थी। जिसके बाद गिरी को कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया गया। बाद में फैसला लिया गया कि अगले राष्ट्रपति का चुनाव कराया जाए। जिस पर देश की तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी और सिंडिकेट के नाम से फेमस कांग्रेस पार्टी के नेताओं के बीच तनातनी का माहौल बना। इस पर इंदिरा गांधी के विरोध को दरकिनार करते हुए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने नीलम संजीव रेड्डी को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर देने का फैसला किया।

वहीं इंदिरा गांधी ने भी सिंडिकेट से नाराज होकर वीवी गिरी को समर्थन देने का ऐलान किया। इंदिरा गांधी ने सांसदों और विधायकों से अपनी अंतरात्मा से वोट करने की अपील की। फिर 16 अगस्त 1969 को नीलम संजीव रेड्डी, वीवी गिरि और विपक्ष के उम्मीदवार सीडी देशमुख के बीच मुकाबला हुई। जिसमें वीवी गिरी को जीत मिली। इस तरह से वीवी गिरी न सिर्फ देश के पहले निर्दलीय राष्ट्रपति बने, बल्कि इकलौते कार्यवाहक राष्ट्रपति थे, जोकि बाद में राष्ट्रपति बने। वह 24 अगस्त 1969 से 24 अगस्त 1974 तक राष्‍ट्रपति पद पर रहे।

मृत्यु

वहीं चेन्नई में 24 जून 1980 को 85 साल की उम्र में वीवी गिरी का निधन हो गया।

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