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<title>Prime News Studio &#45; : विदेश</title>
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<description>Prime News Studio &#45; : विदेश</description>
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<title>Strait of Hormuz में IRGC ने उड़ाया कार्गो शिप, फंसे कई जहाज</title>
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<description><![CDATA[ हॉर्मूस में ईरान ने कार्गो शिप पर अटैक किया है। तय किए गए रूट से ना जाने पर हमले का दावा किया गया है।  बताया गया कि वार्निंग के बावजूद भी जो रूट तय था उस पर ना जाने के चलते यह अटैक किया गया। हमले के बाद जहाजों की निकासी योजना पर रोक लगा दी गई है।  ईरान की तरफ से यह दलील दी गई कि उसी रूट पर जाने का पालन ना करना इस अटैक के पीछे का कारण है। जहां एक तरफ पीस डील पर दोनों देशों के बीच में बातचीत आगे बढ़ रही है। ऐसे में यह तनाव इस डील पर सीधा असर डालेगा।  ईरान के ड्रोन हमले के बाद हॉर्मूस में यूएन ने रेस्क्यू रोक दिया है। 11,000 नाविकों की जान को खतरा है। फारस की खाड़ी में अब कई जहाज फंसे हुए हैं। यह बड़ी खबर क्योंकि इस पीस डील के चलते हॉर्नस को पूरी तरह से खोल दिया गया था। ऐसे में उस रूट पर कई जो जहाज है उनके आने और जाने का सिलसिला जारी था। अब ऐसे में क्योंकि निकासी मार्ग जो है उसे बैन कर दिया गया। एक बार फिर से उसे जैम कर दिया गया। तो जो  जहाज जहां था वह वहीं रुक गया। अब ऐसे में 1100 नाविकों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। कई जहाज हैं जो फंसे हुए हैं सिर्फ इस एक कदम से। इसे भी पढ़ें: Hormuz में &#039;No Toll&#039; का वादा, Trump की Iran को चेतावनी- गलत निकले तो बातचीत खत्म!इसीलिए यह जो पूरी सिचुएशन है यह पैनिकिक हो चुकी है और यह इस डील पर असर डालने के लिए कई संकेत मिल चुके हैं। हॉर्मोस में तनाव के बीच कच्चे तेल में के दामों में भी जो है वो हमने देखा कि कैसे उतार-चढ़ाव आया है। लेकिन ब्रेड क्रूड की कीमत में करीब 4% तक उछाल आया। हमले के बाद वैश्विक तेल बाजार में चिंता बढ़ी है। इसके अलावा ब्रड क्रूट पहुंचा है 74.89 प्रति बैरल के करीब। हॉर्मूस में जहाज पर हमले से सप्लाई पर असर की आशंका जो है वो बढ़ गई है। हॉर्मूस में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में जो बदलाव हुआ है वह जानिए।  अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का अखाड़ा बन चुके हॉर्मोस में एक बार फिर से हड़कंप मच गया। ईरान ने सिंगापुर के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज पर ड्रोन अटैक कर दिया। ईरान ने कहा कि उसकी अनुमति के बिना अगर कोई जहाज इस इलाके से गुजरेगा तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी वो नहीं लेगा। ईरान के हमले के बाद एक बार फिर से बारूदी संघर्ष की आशंका पैदा हो गई है। दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री लाइफ लाइन हॉर्मोस स्ट्रेट एक बार फिर से भीषण जंग और बारूदी धमाकों के मुहाने पर आ खड़ा हो गया है। इसे भी पढ़ें: Hormuz Strait में बढ़ा तनाव, Drone Attack के बाद UN ने जहाजों की निकासी रोकीफारस की खाड़ी और अमान की खाड़ी को जोड़ने वाला हॉर्मोस भीषण बारूदी गंध से भर गया है। जब लग रहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच सब ठीक हो चुका है और हॉर्मूस की लहरों से जंग का शोर उठना बंद हो जाएगा कि तभी अचानक से कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया। दुनिया के इस सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग से सिंगापुर के झंडे वाला एक मालवाहक जहाज शांतिपूर्ण गुजर रहा था कि तभी अचानक से आसमान को चीरता हुआ ईरानी ड्रोन ठीक उसी जगह पर आकर टकराया जहां से जहाज का कैप्टन और चालक दल पूरे शिप को नियंत्रित करते हैं। यह हमला ओमान के अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा क्षेत्र के बेहद करीब और तट से मात्र 14 कि.मी. की दूरी पर अंजाम दिया गया। यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने भी इस बात की पुष्टि की है कि जहाज के दाहिने हिस्से पर एक अज्ञात और बेहद खतरनाक ड्रोन ने हिट किया। यह धमाका इतना जबरदस्त था कि जहाज का ब्रिज यानी कंट्रोल रूम बुरी तरह से तबाह हो गया। Hindi me international news https://www.prabhasakshi.com/international के लिए जुड़ें प्रभासाक्षी से   ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:56 +0530</pubDate>
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<title>कतर तो बड़ा खिलाड़ी निकला, अमेरिका को धोखा देकर कैसे की ईरान की मदद?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका का करीबी सहयोगी क़तर क्या चुपचाप ईरान की मदद करता रहा? एक विदेशी खुफिया रिपोर्ट ने ऐसे दावे किए हैं जिन्होंने मध्यपूर्व की राजनीति में नई बहस छीड़ दी है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि क़तर ने वर्षों तक ईरान को आर्थिक और सैन्य सहायता उपलब्ध कराई। अगर यह आरोप सही साबित होते हैं तो अमेरिका के लिए बहुत बड़ा कूटनीतिक झटका माना जाएगा क्योंकि क़तर लंबे समय से उसका प्रमुख रणनीतिक साझेदार रहा है। इजराइली मीडिया आउटलेट कान न्यूज़ के मुताबिक यह दावा एक विदेशी खुफिया रिपोर्ट के आधार पर किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2018 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डॉन्ड ट्रंप द्वारा ईरान परमाणु समझौते यानी जेसीपीओए से अमेरिका के बाहर निकलने और ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने के बाद क़तर और ईरान के बीच सहयोग और ज्यादा बढ़ गया। इसे भी पढ़ें: Iran-US में लेबनान पर बनी बात? 60 दिन का प्लान हो गया तैयारअमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान को जिन आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा उसी दौरान दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध तेज होने का दावा किया गया है। सबसे गंभीरता दावा यह किया गया है कि क़तर ने ईरान को ऐसी ड्यूल यूज़ यानी कि नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियां उपलब्ध करवाई जिनका उपयोग रॉकेट ईंधन और ड्रोन निर्माण में किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार हाइड्रोजन, एलुमिनियम और इंजन के पुरजे जैसी सामग्री ईरान तक पहुंचाई गई। आरोप है कि इन संसाधनों ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने में भूमिका निभाई। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजराइल पर किए गए हमले के बाद भी यह सहयोग जारी रहा। इसके बाद ईरान समर्थित समूहों और स्वयं ईरान की ओर से इजराइल पर मिसाइलों और ड्रोन हमलों की घटनाएं भी सामने आई। इसी आधार पर रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि क़तर से कथित तौर पर मिली सामग्रियां ईरान के रक्षा कार्यक्रम के लिए उपयोगी साबित हो सकती थी। अगर इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह अमेरिका और कतर के रिश्तों पर गंभीर सवाल खड़े कर सकती है। इसे भी पढ़ें: धोखेबाज...अब तो यहूदी भी तुमसे तंग आ गए, ट्रंप ने नेतन्याहू को लताड़ दियाक़तर को अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय सहयोगी माना जाता है। मध्यपूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा अल उदैद एयरबेस क़तर में ही स्थित है और दोनों देशों के बीच रक्षा सुरक्षा और खुफ़िया सहयोग लंबे समय से चला आ रहा है। ऐसे में अगर एक करीबी सहयोगी पर अमेरिकी प्रतिबंधों को कमजोर करने और ईरान की कथित मदद करने के आरोप सही साबित होते हैं तो इसे अमेरिका के लिए बड़े रणनीतिक झटके के रूप में देखा जाएगा। हालांकि इस पूरे मामले में अभी कई सवालों के जवाब मिलना बाकी है। जैसे क़तर ने किस तरीके से ईरान की मदद की? क़तर ने किन-किन सामग्रियों के जरिए ईरान को मदद पहुंचाई और जो आर्थिक और सैन्य मदद है उसमें क्या-क्या शामिल था। फिलहाल माना जा रहा है कि यह मामला क़तर और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि अमेरिका की मध्यपूर्व नीति और उसके सहयोगी देशों के साथ संबंधों पर भी बड़ा असर डाल सकता है। अल्लाहू अकबर। अल्लाहू अकबर। अल्लाहू अकबर। ईरान, अमेरिका जंग के बाद गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल की हकीकत और ताकत तो उजागर हो ही गई थी। लेकिन तेल बेचने वाले सबसे बड़े ग्रुप ओपेक में एक और बड़ी टूट हो सकती है। इसे भी पढ़ें: Qatar धमाके में 12 भारतीय की मौत, अमीर ने तुरंत PM मोदी को फोन मिलायापहले यूएई ओपेक से बाहर हुआ। अब खबर है कि इराक इससे हटने जा रहा है। इराक का कहना है कि अगर ओपेक में उसकी शर्तों को नहीं माना जाता तो वह इस ग्रुप से बाहर निकल जाएगा। ईरान अमेरिका जंग में जैसे ही सीज फायर हुआ था। यूएई ने खुद को ओपेक और ओपेक प्लस से अलग कर लिया था। अब संगठन के दूसरे सबसे बड़े तेल उत्पादक देश इराक ने खुलेआम बगावत का बिगुल फूंक दिया है। इराक ने ओपेक को छोड़ने की धमकी दे डाली है। मीडिया रिपोर्ट कहती है कि अगर इराक इस संगठन से बाहर निकलता है तो यह सऊदी अरब के राज और पूरे ओपेक के लिए बहुत बड़ा झजका होगा जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और पूरी ग्लोबल इकोनमी चरमरा जाएगी। अप्रैल में मिडिल ईस्ट के बदलते सुरते हाल और जंग के दौरान मिली रुवाई को देखते हुए यूएई ने वैश्विक तेल संगठन ओपेक से बाहर निकलने का ऐतिहासिक फैसला किया था। यूएई की राजधानी अबू धाबी के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 8 अप्रैल तक यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की 537 बैलस्टिक मिसाइलों और 26 क्रूज मिसाइलों और साथ ही 2000 से ज्यादा ड्रोन इंटरसेप्ट किए थे और उसे जीसीसी देशों की मदद नहीं मिली थी। ऐसे में यूएई बहुत ज्यादा गुस्सा था अरब देशों से और खासकर गल्फ कोऑपरेशन से जिसके बाद उसने ओपेक से निकलने का अचानक फैसला ले लिया। दरअसल यूएई को यह बात उस वक्त चुभ गई थी कि जब वो पिट रहा था उसके दुबई जैसे शहरों पर ईरान की मिसाइलें गिर रही थी तब ख्ते का कोई भी मुल्क उसका पुरसाने हाल नहीं था।Hindi me international news https://www.prabhasakshi.com/international के लिए जुड़ें प्रभासाक्षी से   ]]></description>
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<title>बांग्लादेश ने चीन को दिया तीस्ता प्रोजेक्ट, चिकन नेक पर बड़ा खतरा!</title>
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<description><![CDATA[ भारत के लिए यह एक तरह के खतरे की भी दस्तक हो सकती है। क्योंकि जो ख्वाब बांग्लादेश में मौजूदा सरकार से पहले जो सरकार थी उसने देखा था। यानी कि भारत के चिकन नेक को डिस्टर्ब करने का जो सपना मोहम्मद यूनुस ने देखा था। भारत के नॉर्थ ईस्टर्न स्टेट को लेकर जो एक भड़काऊ ख्याल मोहम्मद यूनुस ने चीन को भेजा था। उसको ऐसा लगता है कि तारीख रहमान आगे बढ़ाना चाहते हैं। दरअसल चीन के दौरे पर पहुंचे बांग्लादेश के पीएम तारीख रहमान ने तीस्ता प्रोजेक्ट को लेकर जो समझौता किया है उसने खतरे की घंटी बजा दी है। बता दें कि जो रिपोर्ट सामने आ रहे हैं और जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक बांग्लादेश और चीन ने तीस्ता नदी में मैनेजमेंट के सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त कर दी है। यानी कि बांग्लादेश और चीन मिलकर तीस्ता प्रोजेक्ट पर काम करते हुए दिखाई देंगे उसके मैनेजमेंट में। इसे भी पढ़ें: International Borders of India | 3 सीमाएं, 1 चुनौती: भारत का पूर्वी मोर्चा |Teh Tak Part 5बांग्लादेश और चीन जो है वह तीस्ता और दूसरी नदियों के मैनेजमेंट सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। सरकारी न्यूज़ एजेंसी जो बांग्लादेश की है बांग्लादेश सबाद संस्था बीएसएस उसकी रिपोर्ट कहती है कि यह समझौता तब हुआ जब चीन के जल संसाधन मंत्री ली गोइंग ने बीजिंग में बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान से मुलाकात की। इस साल पद संभालने के बाद अपनी पहली विदेशी यात्रा के लिए मलेशिया को चुनने वाले रहमान 22 जून को कोलालमपुर से चीन के डालियान शहर पहुंचे जहां उन्होंने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उसके बाद वह डलियान से हाई स्पीड ट्रेन से बीजिंग पहुंचे और जानकारी यह है कि उनकी कई अहम मुलाकातें होनी है और इन सबके बीच तीस्ता को लेकर जो जानकारी सामने आई वह काफी चिंताजनक है। क्योंकि रिपोर्ट में कहा गया है कि ली के साथ बैठक में रहमान ने बाढ़ के जोखिम को कम करने, पर्यावरण की रक्षा करने, जल संसाधनों के उचित मैनेजमेंट को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बांग्लादेश में चल रहे नदी खुदाई कार्यक्रम पर जोर दिया। इसी सिलसिले में उन्होंने बांग्लादेश के जल संसाधन मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए चीन का सहयोग मांगा। इसे भी पढ़ें: India- Bangladesh Relations में दरार! बांग्लादेश ने भारत के स्पष्टीकरण को नकारा, PM के सलाहकार को रोकने पर जताई कड़ी नाराज़गीरिपोर्ट के मुताबिक रहमान ने तीस्ता मैनेजमेंट प्रोजेक्ट में चीन से तकनीकी सहायता भी मांगी है। इसमें कहा गया है जो जवाब में कि चीनी मंत्री ने जल संसाधन मैनेजमेंट में बांग्लादेश सरकार की पहलों में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया। 2005 में ढाका और बीजिंग के बीच जो एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ। बीते साल चीनी जल विशेषज्ञों की बांग्लादेश यात्रा का जिक्र करते हुए ली ने कहा कि जल संसाधन मैनेजमेंट में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग व्यवहारिक और अनुसंधान आधारित है। रिपोर्ट में जानकारी दी गई कि रहमान ने नदी के किनारे के कटाव को रोकने, सिंचाई प्रणालियों को बेहतर बनाने और बांग्लादेश में अंतर देशय जल नेविगेशन को बढ़ाने में चीन से सहायता मांगी है। इसमें कहा गया है कि चीनी मंत्री ने बांग्लादेश जल मैनेजमेंट में चीन के अनुभव से लाभ उठाने के लिए कहा है। कहा है कि बांग्लादेशी जल विशेषज्ञ और संबंधित अधिकारियों को चीन में प्रशिक्षण लेने के लिए हम बुलाएंगे भी। इसे भी पढ़ें: Teesta River Management पर China-Bangladesh में करार, PM Rahman और Li Qiang ने मिलाया हाथतीस्ता प्रोजेक्ट को लेकर क्यों हर बार हमारे कान खड़े हो जाते हैं? इसमें जो भारत वाला एंगल है। तीस्ता प्रोजेक्ट जो है वो भारत बांग्लादेश संबंधों में एक बहुत संवेदनशील मुद्दा है। जिसमें फरवरी में रहमान की सरकार के सत्ता संभालने के बाद सुधार के संकेत दिए थे। रहमान की सरकार ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार से थोड़े समय के शासन को खत्म किया। जिसके दौरान नई दिल्ली और ढाका संबंधों में भरपूर गिरावट आई। बीएसएस की रिपोर्ट के मुताबिक बीते महीने जब विदेश मंत्री खलील उर रहमान ने बीजिंग का दौरा किया तो रहमान सरकार ने तीस्ता नदी के जीर्णोद्धार प्रोजेक्ट के लिए औपचारिक रूप से चीन की भागीदारी और समर्थन मांग ली थी। तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। जहां लाखों लोगों के लिए सिंचाई और आजीविका का यह मुख्य स्रोत है।Hindi me international
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:55 +0530</pubDate>
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<title>फ़िलीपींस में 6.7 तीव्रता का भूकंप आया, पूरे देश में झटके महसूस किए गए</title>
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<description><![CDATA[ जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) ने बताया कि शुक्रवार को फिलीपींस के दक्षिणी द्वीप मिंडानाओ में 6.7 तीव्रता का भूकंप आया। GFZ के अनुसार, भूकंप 29 किलोमीटर (18.02 मील) की गहराई पर आया था। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने बताया कि भूकंप शाम 7:42 बजे (1142 GMT) मिंडानाओ द्वीप के सरंगानी शहर से लगभग 21 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में 65.7 किलोमीटर (41 मील) की गहराई पर आया। सुनामी की कोई तत्काल चेतावनी जारी नहीं की गई है।इसे भी पढ़ें: वेनेज़ुएला में ज़बरदस्त भूकंप से 235 लोगों की मौत, 4,300 घायल; खोज और बचाव अभियान जारीयह घटना उसी इलाके में आए एक ज़बरदस्त भूकंप के तीन हफ़्ते से भी कम समय बाद हुई है, जिसमें 80 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी। सुनामी की कोई तत्काल चेतावनी जारी नहीं की गई। देश में यह ताज़ा भूकंप दक्षिणी फ़िलीपींस में आए एक शक्तिशाली भूकंप के कुछ हफ़्ते बाद आया है, जिसमें 80 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी और मिंडानाओ के कई हिस्सों में भारी नुकसान हुआ था।इसे भी पढ़ें: वेनेज़ुएला त्रासदी के एक दिन बाद फिलीपींस में 6.7 तीव्रता का भूकंपवेनेज़ुएला में भूकंप: मरने वालों की संख्या बढ़कर 589 हुईकार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने शुक्रवार सुबह बताया कि वेनेज़ुएला में आए दो ज़बरदस्त भूकंपों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 589 हो गई है और 2,980 लोग घायल हुए हैं। उन्होंने सरकारी और सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी में यह घोषणा की और दुनिया भर से आए बचाव दलों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हम फंसे हुए लोगों को बचाने जा रहे हैं।&quot; &quot;हम इस काम में दिन-रात जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार शाम आए 7.2 और 7.5 तीव्रता वाले भूकंपों से ला गुएरा राज्य सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है; वहां सेना तैनात कर दी गई है और बचाव दल जीवित बचे लोगों की तलाश करने के साथ-साथ भोजन और पानी भी बांट रहे हैं। बुधवार शाम आए 7.2 और 7.5 तीव्रता वाले भूकंपों के बाद मरने वालों और घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका है, क्योंकि हज़ारों लोग लापता बताए जा रहे हैं। ये भूकंप एक सदी से भी ज़्यादा समय में वेनेज़ुएला में आए सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक थे और इनका असर पूरे इलाके में महसूस किया गया।इसे भी पढ़ें: Venezuela Earthquake: भूकंप से वेनेजुएला में भारी तबाही, 188 मौतें, मलबे में दबे लोगों के लिए रेस्क्यू जारीवेनेज़ुएला में भूकंप: हज़ारों लोगों के लापता होने की खबरहज़ारों लोगों के लापता होने की खबर है और ब्राज़ील के अमेज़न तक की इमारतों को खाली कराया गया। इस तबाही के जवाब में, अमेरिकी ट्रेज़री ने गुरुवार को 23 अक्टूबर तक कुछ प्रतिबंधों में ढील देने का फ़ैसला किया, ताकि वेनेज़ुएला में भूकंप राहत कार्यों से जुड़े लेन-देन हो सकें, जिन पर आम तौर पर रोक होती है। इस बीच, उत्तरी वेनेज़ुएला के शहरों में घबराए हुए लोग सड़कों पर उतर आए और मलबे में लापता लोगों को खोजने लगे। मलबे से धूल और खून से लथपथ घायलों को बाहर निकाला गया, जिनमें बच्चे और जानवर भी शामिल थे। वेनेज़ुएला के सरकारी टीवी पर बचाव कार्य की हैरान करने वाली तस्वीरें दिखाई गईं, जिनमें एक महिला सीमेंट के स्लैब के नीचे फंसी हुई थी; बचाव दल के उसे ज़िंदा बाहर निकालने से पहले उसका सिर्फ़ नंगा पैर बाहर दिख रहा था। लेकिन काराकस के बाहर सरकारी खोज टीमें बहुत कम ही दिखाई दीं। तीन बच्चों की माँ दयाना डेलगाडो ने पूछा कि सरकारी अधिकारियों ने जिस भारी मशीनरी का वादा किया था, वह कहाँ है; उन्होंने बताया कि मलबे की खुदाई तो पड़ोसी ही कर रहे थे।Hindi me international news https://www.prabhasakshi.com/international के लिए जुड़ें प्रभासाक्षी से   ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>US का पलटवार, जहाज पर Drone Attack के बाद Iran पर दागीं मिसाइलें, तनाव चरम पर</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक मालवाहक पोत पर एक दिन पहले हुए ड्रोन हमले के जवाब में शुक्रवार को ईरान पर हमले किए।
 यह दोनों देशों के बीच महीनों से जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में काम शुरू करने और इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए एक सप्ताह पहले बनी अंतरिम सहमति की अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा है।
 अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ड्रोन हमला युद्धविराम का उल्लंघन है। अमेरिका के जवाबी हमले से कुछ समय पहले ही ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था कि अमेरिका प्रतिक्रिया देगा या नहीं, इसका ‘‘आपको पता चल जाएगा।’’
 ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान में मिसाइल और ड्रोन ठिकानों तथा तटीय रडार केंद्रों को निशाना बनाया।
 अमेरिका के जवाबी हमले से कुछ समय पहले ट्रंप ने ‘व्हाइट हाउस’ (अमेरिका के राष्ट्रपति का अधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में कहा, ‘‘मुझे यह बात पसंद नहीं आई कि उन्होंने कल हमला किया। वास्तव में उन्होंने चार हमले किए।’’
 ट्रंप से सवाल किया गया कि जब वह लगातार कह रहे हैं कि तेहरान के साथ बातचीत अच्छी चल रही है तो फिर हमले क्यों किए जाएंगे, इसके जवाब में अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘वे थोड़े अलग हैं।’’
 इसके बाद उन्होंने अचानक सवालों का जवाब देना बंद कर दिया और पत्रकारों को उनके कार्यालय से बाहर ले जाया गया।
 ईरानी संसद में राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर ट्रंप को जवाब देते हुए कहा था, ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के नियंत्रण में है इसलिए नियमों का सम्मान करें’’ और ‘‘नियंत्रण को तनाव बढ़ाने की कार्रवाई न समझें।’’
 अजीजी ने लिखा था, ‘‘यह युद्धविराम का उल्लंघन नहीं, बल्कि युद्धविराम का प्रबंधन है।’’
 एक अमेरिकी अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ द्वारा सैन्य कार्रवाई की सोशल मीडिया पर घोषणा किए जाने के करीब एक घंटे बाद ईरान पर हमले समाप्त हो गए।
 ब्रिटिश सेना ने बृहस्पतिवार को कहा था कि ओमान के तट के पास एक कंटेनर पोत किसी प्रक्षेपास्त्र की चपेट में आ गया। यह घटना ईरान द्वारा पोतों को इस मार्ग का इस्तेमाल नहीं करने की चेतावनी दिए जाने के कुछ घंटे बाद हुई।
 ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन केंद्र ने कहा कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
 यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए वार्ता कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:53 +0530</pubDate>
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<title>Xi Jinping का &amp;apos;विदेशी दखल&amp;apos; वाला दांव, Bangladesh से 13 डील, क्या है Dragon का नया प्लान?</title>
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<description><![CDATA[ बीजिंग में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ बातचीत के दौरान, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बांग्लादेश की संप्रभुता की रक्षा करने और &quot;विदेशी दखल को खारिज करने&quot; के मामले में बीजिंग के समर्थन की बात कही। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शी ने यह भी कहा कि चीन रहमान की सरकार का समर्थन करता है (जिन्होंने फरवरी में पद संभाला था) और वह ढाका के साथ मिलकर उच्च-गुणवत्ता वाले &#039;बेल्ट एंड रोड&#039; सहयोग और विकास रणनीतियों के बीच बेहतर तालमेल पर काम करने के लिए तैयार है। यह बैठक रहमान की पांच दिवसीय चीन यात्रा का समापन थी, जिसके दौरान दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, शिक्षा, नदी प्रबंधन और व्यापक क्षेत्रीय सहयोग पर चर्चा की। शी जिनपिंग ने बांग्लादेश, म्यांमार और चीन को जोड़ने वाले एक आर्थिक गलियारे का प्रस्ताव भी रखा, जबकि चीनी अधिकारियों ने तीस्ता नदी परियोजना में बीजिंग की भूमिका को लेकर जताई जा रही चिंताओं को कम करने का प्रयास किया।इसे भी पढ़ें: Xi Jinping ने बढ़ाया Bangladesh की ओर दोस्ती का हाथ, BRI समेत 13 समझौतों पर हुए साइनशी जिनपिंग ने शुक्रवार को अपनी यात्रा समाप्त करने वाले रहमान से कहा कि चीन बांग्लादेश के राष्ट्रीय स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने और विदेशी हस्तक्षेप को अस्वीकार करने में उसका समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में चाहे जो भी बदलाव आएं, चीन-बांग्लादेश के मैत्रीपूर्ण संबंधों की समग्र दिशा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में कोई कमी नहीं आने देगा। शी जिनपिंग ने कहा कि चीन क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाने के लिए चीन-म्यांमार-बांग्लादेश आर्थिक गलियारे का समर्थन करता है। प्रस्तावित गलियारा बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार आर्थिक गलियारे का एक छोटा संस्करण है, जिसे बीजिंग ने 2013 में प्रस्तावित किया था, लेकिन वह परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई। पद संभालने के बाद रहमान ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए मलेशिया को चुना। कुआलालंपुर से, वह 22 जून को चीन के शहर डालियान गए, जहाँ उन्होंने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया और चीनी निवेश के लिए बात रखी। वह बुधवार को अपनी यात्रा के आखिरी पड़ाव के तौर पर बीजिंग पहुँचे और दो दिनों तक चीन के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें प्रीमियर ली कियांग भी शामिल थे, के साथ बैठकें कीं।इसे भी पढ़ें: बांग्लादेश ने चीन को दिया तीस्ता प्रोजेक्ट, चिकन नेक पर बड़ा खतरा!गुरुवार को, &#039;ग्रेट हॉल ऑफ़ द पीपल&#039; में प्रीमियर ली ने रहमान का औपचारिक स्वागत किया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई और व्यापार, निवेश और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए 13 समझौतों (मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर किए गए। रहमान ने गुरुवार को चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग से भी मुलाकात की और दोनों देश तीस्ता नदी के मैनेजमेंट और दूसरी नदी परियोजनाओं पर सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए। तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जहाँ यह सिंचाई और आजीविका के लिए महत्वपूर्ण है। इस नदी का बेसिन भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास स्थित है, जो मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला एक संकरा रास्ता है।Hindi me international news https://www.prabhasakshi.com/international के लिए जुड़ें प्रभासाक्षी से   ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:53 +0530</pubDate>
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<title>PM Modi Seychelles 3 Day Visit: Seychelles में PM Modi की अनोखी कूटनीति, 194 साल के कछुए Jonathan से करेंगे खास मुलाकात</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार से अपने तीन दिवसीय आधिकारिक सेशेल्स दौरे पर रवाना हो गए हैं। इस यात्रा की सबसे खास बात यह है कि प्रधानमंत्री अपने दौरे की शुरुआत दुनिया के सबसे उम्रदराज़ जीवित स्थलीय कछुए &#039;जोनाथन&#039; से मुलाकात के साथ करेंगे। लगभग 194 वर्ष पुराने इस विशाल एल्डाब्रा जाइंट कछुए का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दुनिया के सबसे बुजुर्ग जीवित स्थलीय जानवर के रूप में दर्ज है।प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस (नेशनल डे) के स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह अवसर भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने का भी प्रतीक है। ऐसे में इस यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।दुनिया के सबसे बुजुर्ग कछुए &#039;जोनाथन&#039; से होगी मुलाकातप्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स पहुंचने के बाद सबसे पहले सेशेल्स नेशनल बॉटनिकल गार्डन जाएंगे, जहां उनकी मुलाकात &#039;जोनाथन&#039; नामक विशाल एल्डाब्रा जाइंट कछुए से होगी। माना जाता है कि जोनाथन की उम्र करीब 194 वर्ष है, हालांकि उसकी वास्तविक जन्मतिथि का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। जोनाथन अपनी प्रजाति की औसत आयु से कहीं अधिक समय तक जीवित रहा है और आज वह केवल सेशेल्स ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में दीर्घायु और प्राकृतिक संरक्षण का प्रतीक बन चुका है। प्रधानमंत्री की यह मुलाकात केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और प्राकृतिक विरासत के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता का संदेश भी मानी जा रही है। वृक्षारोपण कार्यक्रम में भी लेंगे हिस्सा सेशेल्स नेशनल बॉटनिकल गार्डन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वृक्षारोपण कार्यक्रम में भी भाग लेंगे। इस पहल के माध्यम से भारत और सेशेल्स जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने, हरित विकास को बढ़ावा देने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी साझा सोच को मजबूत करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते जलवायु संकट को देखते हुए यह कार्यक्रम दोनों देशों के पर्यावरणीय सहयोग को नई दिशा देगा। इसे भी पढ़ें: Vishwakhabram: बदलने वाली है India की China Policy? Early Harvest Deal की तैयारी! Xi Jinping India Visit से पहले आई बड़ी खबरएक्स पर पीएम मोदी का संदेशदौरे पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सेशेल्स को भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी और वैश्विक दक्षिण (Global South) का अहम साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि सेशेल्स भारत के विजन MAHASAGAR का महत्वपूर्ण सहयोगी है। साथ ही उन्होंने सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी से मुलाकात को लेकर उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा होगी। राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी से होगी द्विपक्षीय वार्ता प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेता भविष्य की साझेदारी के लिए नए समझौतों और सहयोग के अवसरों पर भी विचार करेंगे। बैठक में निम्नलिखित विषयों पर विशेष चर्चा होने की संभावना है:समुद्री सुरक्षा (Maritime Security)ब्लू इकोनॉमीजलवायु परिवर्तन एवं क्लाइमेट एक्शनरक्षा सहयोगव्यापार और निवेशहिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारीलोगों के बीच संपर्क (People-to-People Relations)राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत की विशेष भागीदारीप्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। इस अवसर पर भारतीय रक्षा बलों का एक विशेष दल तथा भारतीय नौसेना के युद्धपोत भी परेड और समारोह में भाग लेंगे। यह भागीदारी हिंद महासागर क्षेत्र में भारत और सेशेल्स के बीच मजबूत रक्षा सहयोग तथा सामरिक विश्वास को दर्शाती है। इसे भी पढ़ें: Vishwakhabram: बदलने वाली है India की China Policy? Early Harvest Deal की तैयारी! Xi Jinping India Visit से पहले आई बड़ी खबरसमुद्री सुरक्षा में मजबूत साझेदारीभारत और सेशेल्स लंबे समय से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, समुद्री डकैती रोकने, तटीय निगरानी और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं। भारत ने सेशेल्स को कई रक्षा उपकरण, तटीय निगरानी प्रणाली, प्रशिक्षण और नौसैनिक सहयोग उपलब्ध कराया है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत होता जा रहा है।जलवायु परिवर्तन और ब्लू इकोनॉमी पर रहेगा फोकसइस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए साझा रणनीति तैयार करना भी है। भारत और सेशेल्स ब्लू इकोनॉमी, समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग, समुद्री जैव विविधता के संरक्षण तथा स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान देंगे। इसे भी पढ़ें: भारत में ईरान बहा देगा तेल की नदियां... दिल्ली पहुंचते ही खामेनेई मंत्री का बड़ा धमाका2015 के बाद पहली यात्राप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले वर्ष 2015 में सेशेल्स के दौरे पर गए थे। करीब एक दशक बाद हो रही यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों में नई ऊर्जा का संचार करने वाली मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से न केवल रणनीतिक और आर्थिक सहयोग मजबूत होगा बल्कि पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी संबंधों को भी नई गति मिलेगी।भारत-सेशेल्स संबंधों को मिलेगी नई दिशाप्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब हिंद महासागर क्षेत्र का सामरिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में भारत और सेशेल्स के बीच मजबूत साझेदारी क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, समुद्री सहयोग और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दुनिया के सबसे बुजुर्ग जीवित कछुए &#039;जोनाथन&#039; से प्रधानमंत्री की मुलाकात इस यात्रा को एक अनूठी पहचान देती  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:52 +0530</pubDate>
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<title>MEA Toshakhana E&#45;Auction: नए रूल्स के तहत अब आम नागरिक भी खरीद सकेंगे ये विदेशी तोहफे</title>
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<description><![CDATA[ लग्ज़री रोलेक्स यॉट-मास्टर-2 घड़ी से लेकर कुवैत के अल अर्बाश ब्रांड के बहुमूल्य आभूषण सेट तक, भारत सरकार के अधिकारियों को विदेशी गणमान्य व्यक्तियों से प्राप्त लगभग 300 उपहारों की ई-नीलामी की जा रही है।
 यह नीलामी विदेश मंत्रालय के तोशाखाना द्वारा आयोजित की जा रही है। तोशाखाना वह सरकारी भंडार है, जहां भारत या विदेश में सरकारी अधिकारियों को विदेशी स्रोतों से प्राप्त उपहार, स्मृति-चिह्न और अन्य औपचारिक भेंट सुरक्षित रखी जाती हैं।
 आधिकारिक ई-नीलामी पोर्टल के अनुसार, यह नीलामी आठ जून से शुरू हुई है और 30 जून तक होगी।
 नीलामी में एक्सेसरीज़, आभूषण, सौंदर्य प्रसाधन, कांच के बर्तन, पोर्सिलेन, चांदी की वस्तुएं, इत्र सहित विभिन्न श्रेणियों की वस्तुओं पर बोली लगाई जा सकती है।
 नीलामी में शामिल प्रमुख वस्तुओं में रोलेक्स यॉट-मास्टर-2 घड़ी जिसकी शुरुआती कीमत 16,52,360 रुपये रखी गई है, कार्टियर (सैंटोस ड्यूमोंट कलेक्शन) की घड़ी, जिसकी प्रारंभिक कीमत 5,02,360 रुपये है तथा चांदी का सिगरेट बॉक्स, जिसकी प्रारंभिक कीमत 12,030 रुपये निर्धारित की गई है, शामिल हैं।
 पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इच्छुक भारतीय नागरिक ई-नीलामी पोर्टल पर पंजीकरण कर अपनी पसंद की वस्तुओं के लिए बोली लगा सकते हैं। पंजीकरण केवल भारत में निवास करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए खुला है और नीलाम की गई वस्तुओं की आपूर्ति भी केवल देश के भीतर ही की जाएगी।
 विदेश मंत्रालय के अनुसार, तोशाखाना की अभिरक्षा उसके पास इसलिए है ताकि भारत या विदेश में सरकारी अधिकारियों को विदेशी गणमान्य व्यक्तियों अथवा विदेशी स्रोतों से प्राप्त उपहारों को सुरक्षित रखा जा सके। यह ई-नीलामी पोर्टल विशेष रूप से तोशाखाना में उपलब्ध उपहार वस्तुओं की नीलामी के लिए बनाया गया है।
 पोर्टल पर जारी सूचना में कहा गया है, ‘‘संशोधित तोशाखाना नियम, 2024 के अनुपालन में, भारत सरकार के अधिकारियों को विदेशी गणमान्य व्यक्तियों से प्राप्त उपहारों की बिक्री के लिए तोशाखाना द्वारा ई-नीलामी का पहला चरण आयोजित किया जा रहा है।’’
 सूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नीलामी के लिए रखी गई अधिकांश वस्तुएं विरासत, स्मृति-चिह्न, स्मारक, सजावटी, संग्रहणीय अथवा औपचारिक महत्व की हैं। इनका उद्देश्य आवश्यक रूप से व्यावहारिक उपयोग, व्यावसायिक गतिविधियों या परिचालन संबंधी कार्यों के लिए नहीं है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:51 +0530</pubDate>
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<title>अब Hyderabad की एक सड़क का नाम Donald Trump Avenue, ट्रम्प ने  ट्रुथ सोशल और तेलंगाना का जताया आभार</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के हैदराबाद में एक मार्ग का नाम उनके नाम पर रखे जाने पर आभार जताते हुए कहा कि इस तरह सम्मानित किए गए वह अमेरिका के पहले राष्ट्रपति हैं।
 तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से सटी एक सड़क का नाम ‘‘डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू’’ रखा है जिसके बाद ट्रंप ने शुक्रवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक ‘पोस्ट’ साझा कर आभार जताया।
 ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर द्वारा औपचारिक पट्टिका का अनावरण किए जाने की एक तस्वीर साझा करते हुए कहा, ‘‘भारत के हैदराबाद में नया ‘डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू’। मैं इस तरीके से सम्मानित किया गया अमेरिका का पहला राष्ट्रपति हूं। धन्यवाद।’’
 ‘डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू’ माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अमेजन सहित अमेरिका की प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के कार्यालयों के नजदीक है।
 तेलंगाना सरकार ने कहा कि सड़क का यह नाम अमेरिका को सम्मान देने और भारत-अमेरिका संबंधों में हैदराबाद की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करने के लिए रखा गया है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:50 +0530</pubDate>
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<title>US विदेश मंत्री Marco Rubio का ऐलान, Israel&#45;Lebanon ने ऐतिहासिक शांति समझौते पर किए साइन</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका की पहल पर इजराइल और लेबनान के बीच शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार को इजराइल और लेबनान के राजदूतों की मौजूदगी में एक अहम समझौते की घोषणा की। इसे इजराइली सेना और लेबनान के चरमपंथी संगठन हिज़्बुल्ला के बीच कई महीनों से जारी संघर्ष के बाद तनाव कम करने की दिशा में पहली बड़ी पहल माना जा रहा है।हालांकि, इस समझौते की शर्तों और इसके प्रमुख बिंदुओं का अभी तक आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया गया है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से भी समझौते के विवरण को सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस समझौते पर अमेरिका में इजराइल के राजदूत येचिएल लीटर और अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमदेह ने हस्ताक्षर किए। दोनों देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुए इस समझौते को क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz में IRGC ने उड़ाया कार्गो शिप, फंसे कई जहाजअमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने समझौते की घोषणा करते हुए उम्मीद जताई कि यह पहल भविष्य में स्थायी शांति स्थापित करने और दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखेगा।गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से इजराइली सेना और हिज़्बुल्ला के बीच सीमा क्षेत्रों में लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई जारी रही है। इस संघर्ष के कारण दोनों देशों की सीमा पर सुरक्षा स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित होना पड़ा है। इसे भी पढ़ें: US का पलटवार, जहाज पर Drone Attack के बाद Iran पर दागीं मिसाइलें, तनाव चरम परविशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समझौते को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो इससे सीमा पर हिंसा में कमी आ सकती है और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, समझौते के वास्तविक प्रभाव का आकलन इसके क्रियान्वयन और दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता पर निर्भर करेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। माना जा रहा है कि यदि यह पहल सफल रहती है तो मध्य पूर्व में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:50 +0530</pubDate>
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<title>Hormuz में Drone Attack से भड़का America, बोला&#45; ईरान ने युद्धविराम तोड़ा, सैन्य एक्शन को रहें तैयार</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार को ईरान को चेतावनी दी कि अगर उसने और कोई आक्रामक कार्रवाई की, तो वॉशिंगटन की ओर से सैन्य जवाब दिया जाएगा। यह चेतावनी होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कमर्शियल कार्गो जहाज पर कथित ड्रोन हमले के बाद अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमले किए जाने के कुछ घंटों बाद दी गई। एक्स पर एक पोस्ट में वेंस ने कहा कि ईरान युद्धविराम के लिए सहमत हुआ था और तेहरान पर उसकी शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ईरान ने युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। हमने उसका पालन किया है। अगर उन्हें इस बात पर कोई असहमति है कि MOU (समझौता ज्ञापन) को कैसे लागू किया जा रहा है, तो वे फोन कर सकते हैं। लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से ही दिया जाएगा। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि ईरानी सेना द्वारा कमर्शियल जहाजों पर किए गए हमले के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज ठिकानों और तटीय रडार साइटों को निशाना बनाया। इस ऑपरेशन को एक ज़बरदस्त जवाब बताते हुए CENTCOM ने कहा कि शुक्रवार को होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुज़र रहे एक कार्गो जहाज़ पर हमला युद्धविराम का अनुचित उल्लंघन था। उसने यह भी कहा कि ईरान के साथ हुए समझौते की सभी शर्तों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी सेना इस इलाके में तैनात रहेगी। इसे भी पढ़ें: अब Hyderabad की एक सड़क का नाम Donald Trump Avenue, ट्रम्प ने  ट्रुथ सोशल और तेलंगाना का जताया आभारओमान की खाड़ी के पास एक कमर्शियल जहाज़ पर हमला हुआ। इससे ऊर्जा सप्लाई और समुद्री व्यापार के लिए दुनिया के सबसे व्यस्त रास्तों में से एक की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। यह घटना तब हुई जब ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नेविगेशन पर अपना अधिकार जताया और जहाज़ों को ओमान के तट के पास वाले दक्षिणी शिपिंग लेन से बचने की सलाह दी। हाल के हफ़्तों में कमर्शियल जहाज़ इस रास्ते का ज़्यादा इस्तेमाल कर रहे थे। इस हमले का असर संयुक्त राष्ट्र की उन कोशिशों पर भी पड़ा, जिनके तहत फ़ारस की खाड़ी से निकलने की कोशिश कर रहे फँसे हुए जहाज़ों की मदद की जा रही थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना को युद्धविराम का &quot;मूर्खतापूर्ण उल्लंघन&quot; बताया और कहा कि ईरान ने कार्गो जहाज़ पर चार &#039;वन-वे अटैक ड्रोन&#039; से हमला किया। ट्रंप के मुताबिक, एक ड्रोन जहाज़ के ऊपरी डेक से टकराया, जबकि अमेरिकी सेना ने बाकी तीन ड्रोनों को रोक दिया, जिससे नुकसान के बावजूद जहाज़ अपनी यात्रा जारी रख सका। हालांकि, ईरान ने शुक्रवार को फिर कहा कि उसे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में शिपिंग को नियंत्रित करने का अधिकार है और उसने खाड़ी देशों को वॉशिंगटन का साथ देने के खिलाफ चेतावनी दी। तेहरान का कहना है कि इस अहम समुद्री रास्ते से आवाजाही को लेकर किसी भी व्यवस्था में एक तटीय देश के तौर पर उसकी स्थिति और उस रास्ते पर उसके अधिकार को मान्यता दी जानी चाहिए। इसे भी पढ़ें: US विदेश मंत्री Marco Rubio का ऐलान, Israel-Lebanon ने ऐतिहासिक शांति समझौते पर किए साइनअमेरिका और ईरान के बीच शुरुआती समझौता ज्ञापन (MoU) एक ऐसा ढांचा तैयार करता है जिससे पश्चिमी एशिया में महीनों से चल रहे तनाव को खत्म करने और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए व्यापक बातचीत हो सके। इस समझौते के तहत, दोनों देश एक ऐसे स्थायी समझौते की दिशा में काम करने पर सहमत हुए हैं जो ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकेगा। वाशिंगटन ने यह भी संकेत दिया है कि अगर तेहरान अपने वादों को पूरा करता है, तो वह चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंधों में ढील देने पर बातचीत करने को तैयार है। ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम का भविष्य, प्रतिबंध हटाने की समयसीमा, होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले जहाजों के नियमन में तेहरान की भूमिका को मान्यता देने की मांग और जलमार्ग में नौवहन की स्वतंत्रता को लेकर मतभेद सहित कई मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। तनाव में हालिया वृद्धि से 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया के जटिल होने की आशंका है और इससे दोनों पक्षों के लिए प्रारंभिक ढांचे को एक व्यापक समझौते में बदलना मुश्किल हो सकता है।Hindi me international news https://www.prabhasakshi.com/international के लिए जुड़ें प्रभासाक्षी से   ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:49 +0530</pubDate>
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<title>PM Modi&#45;Trump की केमिस्ट्री का असर, US बोला&#45; संबंध शानदार, Trade Deal जल्द होगी फाइनल</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध &quot;बहुत अच्छे&quot; चल रहे हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच ट्रेड डील को अंतिम रूप देने और आने वाले महीनों में उच्च-स्तरीय दौरों के आदान-प्रदान की योजनाओं की घोषणा को लेकर उम्मीद जताई। वॉशिंगटन डीसी में बोलते हुए, रुबियो ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत बने हुए हैं और उन्होंने G7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई हालिया मुलाकात का भी ज़िक्र किया। रूबियो ने कहा कि मुझे लगता है कि सब कुछ बहुत बढ़िया चल रहा है। मेरा मतलब है, रिश्ते बहुत मज़बूत हैं। हमारी प्रधानमंत्री के साथ बहुत अच्छी मीटिंग हुई, और राष्ट्रपति की भी G7 में मीटिंग हुई। हम एक ट्रेड डील को फ़ाइनल करने की उम्मीद कर रहे हैं। हम इसे पूरा करने के बिल्कुल करीब हैं, और यह बहुत सकारात्मक है। हम जल्द ही एक और क्वाड मीटिंग में फिर से जुड़ने का इंतज़ार कर रहे हैं और मैं खुद भी साल के आखिर से पहले वापस आने और अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति के दौरे की योजना बनाने का इंतज़ार कर रहा हूँ।इसे भी पढ़ें: अब Hyderabad की एक सड़क का नाम Donald Trump Avenue, ट्रम्प ने  ट्रुथ सोशल और तेलंगाना का जताया आभारअगले साल राष्ट्रपति ट्रंप के भारत दौरे की संभावना के बारे में पूछे जाने पर रुबियो ने कहा कि दोनों पक्ष 2027 की शुरुआत में दौरे की योजना पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं कि राष्ट्रपति अगले साल की शुरुआत में भारत आएं। मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छी बात है। भारत, अमेरिका का बहुत करीबी पार्टनर और सहयोगी है, और प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच संबंध बहुत गहरे हैं, जो मुझे लगता है कि कूटनीति में वाकई बहुत अहम है। इस महीने की शुरुआत में हुए G7 समिट के दौरान, ट्रंप ने पीएम मोदी से बातचीत में उनकी खूब तारीफ़ की। उन्होंने प्रधानमंत्री को अच्छे व्यक्तित्व वाले व्यक्ति और सख्त बातचीत करने वाले के तौर पर बताया, और उनकी बातचीत को बहुत अच्छा करार दिया। फरवरी 2025 के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली मुलाकात थी; उस समय ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के कुछ ही हफ़्तों बाद पीएम मोदी ने वॉशिंगटन का दौरा किया था। इसे भी पढ़ें: Hormuz में Drone Attack से भड़का America, बोला- ईरान ने युद्धविराम तोड़ा, सैन्य एक्शन को रहें तैयारतब से अमेरिका और भारत के रिश्तों में तनाव आ गया है, क्योंकि वॉशिंगटन ने भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ लगा दिए हैं और रूस से तेल खरीदने के लिए नई दिल्ली पर कार्रवाई की है। खाड़ी में अमेरिकी नौसेना द्वारा कमर्शियल जहाजों पर किए गए हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद इन रिश्तों पर और बुरा असर पड़ा। Hindi me international news https://www.prabhasakshi.com/international के लिए जुड़ें प्रभासाक्षी से   ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:48 +0530</pubDate>
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<title>Oman ने ऐसा क्या कर दिया? इसलिए ईरान ने होर्मुज में जहाज ठोक दिया</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में युद्ध भले फिलहाल थम गया हो लेकिन दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइफ लाइन एक बार फिर तनाव के केंद्र में आ गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान और ओमान आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। इस बार विवाद किसी सैन्य हमले का नहीं बल्कि जहाजों के लिए बनाए गए नए ट्रांजिट रूट का है। ईरान ने साफ-साफ चेतावनी दी है कि उसकी मंजूरी के बिना हुरमुज में कोई नया समुद्री रास्ता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यही वजह है कि वैश्विक शिपिंग और तेल बाजार की नजरें फिर इस क्षेत्र पर टिक गई हैं। दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच हालिया शांति समझौते के बाद होर्मुज स्टेट को दोबारा खोला गया था। लेकिन युद्ध के दौरान जहाजों की सुरक्षा को देखते हुए ओमान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन आईएमओ के सहयोग से अपने तटीय क्षेत्र से गुजरने वाला एक नया ट्रांजिट रूट तैयार किया। इसका उद्देश्य जहाजों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना था ताकि किसी संभावित सैन्य खतरे से बचा जा सके। इसे भी पढ़ें: US का पलटवार, जहाज पर Drone Attack के बाद Iran पर दागीं मिसाइलें, तनाव चरम परहालांकि ईरान ने इस कदम का कड़ा विरोध किया। इस्लामिक रिवोशनरी गार्ड कॉप्स यानी कि आईआरजीसी की नौसेना ने बयान जारी कर कहा हुमत से केवल वही समुद्री रास्ते मान्य होंगे जिन्हें ईरानी अधिकारियों ने मंजूरी दी है। आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि तय मार्गों से हटकर किसी भी जहाज की आवाजाही को सुरक्षित नहीं माना जाएगा। तेहरान का कहना है कि एमच के प्रबंधन से जुड़े किसी भी फैसले में उसकी सहमति जरूरी है। तनाव तब और बढ़ गया जब ओमान की ओर से नए मार्ग का इस्तेमाल शुरू करने की तैयारी की गई। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने नए रूट से गुजरने वाले एक जहाज को मिसाइल की रेंज में होने की चेतावनी भी दी। इसके बाद समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने निकासी अभियान को अस्थाई रूप से रोक दिया। इसे भी पढ़ें: Hormuz में Drone Attack से भड़का America, बोला- ईरान ने युद्धविराम तोड़ा, सैन्य एक्शन को रहें तैयारस्टेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम जलमार्ग है। वैश्विक स्तर पर समुद्र के रास्ते होने वाले तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति भी काफी हद तक इसी रास्ते पर निर्भर है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक तेल बाजार पर सीधा असर डाल सकता है। ईरान का दावा है कि हुरमुच पर उसका प्राकृतिक और रणनीतिक अधिकार है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि तेरान भविष्य में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क या टोल जैसी व्यवस्था चाहता है। दूसरी तरफ ओमान और कई पश्चिमी देश खुरमुच को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानते हैं। जहां किसी एक देश का पूर्ण नियंत्रण नहीं हो सकता। अगर सैन्य क्षमता की बात करें तो ईरान इस क्षेत्र में कहीं ज्यादा ताकतवर माना जाता है। उसके पास बड़ी संख्या में सक्रिय सैनिक, बैलेस्टिक मिसाइलें, ड्रोन और एंटीशिप मिसाइलें हैं। जिनके जरिए वह होर्मुज में समुद्री गतिविधियों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। वहीं ओमान की सेना अपेक्षाकृत छोटी है और उसका मुख्य फोकस अपनी सीमाओं की सुरक्षा पर रहता है। हालांकि ओमान, अमेरिका, ब्रिटेन और खारी सहयोग परिषद जीसी के देशों का करीबी साझेदार है। इसलिए किसी बड़े सैन्य टकराव की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल राहत की बात यह है कि दोनों देशों ने बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया। हाल ही में ईरान और ओमान ने एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति जताई है। Hindi me international news https://www.prabhasakshi.com/international के लिए जुड़ें प्रभासाक्षी से  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Oman, ने, ऐसा, क्या, कर, दिया, इसलिए, ईरान, ने, होर्मुज, में, जहाज, ठोक, दिया</media:keywords>
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<title>Hormuz पर फिर छिड़ी जंग! अमेरिका ने फिर कर दिया बड़ा हमला, जवाब में ईरान ने भी ठोकी मिसाइलें</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में अभी एक हफ्ते पहले ही संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी। हालांकि यह सहमति चंद दिनों में ही टूटती नजर आ रही है। पहले ईरान ने स्ट्रीट ऑफ हॉर्मोस के जहाजों पर हमला किया। इसके बाद अमेरिका ने भी ईरान के कई ठिकानों पर जवाबी हमले कर दिए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शुक्रवार यानी 26 जून को ओमान तट के पास एक मालवाहक जहाज पर हुए ड्रोन हमले का जवाब दिया और ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर भीषण जवाबी हमले भी किए। अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन केंद्रों के साथ तटीय रडार साइटों को निशाना बनाया। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान की इस हरकत को सीजफायर समझौते का मूर्खतापूर्ण उल्लंघन करार दिया। बता दें बीते 25 जून को सिंगापुर के झंडे वाले एक बड़े मालवाहक जहाज पर ओमान तट के पास स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस से बाहर निकलते समय ईरान द्वारा आत्मघाती ड्रोन दागे गए। इसे भी पढ़ें: US का पलटवार, जहाज पर Drone Attack के बाद Iran पर दागीं मिसाइलें, तनाव चरम परराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार इस जहाज को निशाना बनाकर कुल चार ड्रोन दागे गए थे। इनमें से तीन को अमेरिकी सेना ने हवा में ही मार गिराया। हालांकि एक ड्रोन जहाज के ऊपरी डेक पर जा टकराया जिससे जहाज को नुकसान हुआ। मामले में ब्रिटिश सेना ने पुष्टि की है कि हमले में किसी भी नाविक के हताहत होने की खबर नहीं है। इस उकसावे वाले हमले के ठीक एक दिन बाद अमेरिकी विमानों ने ईरानी सीमा के भीतर घुसकर उसके ड्रोन और मिसाइल डिपो को तबाह कर दिया। सेंट कॉम ने एक्स पर जारी किए गए बयान में कहा अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जहाज पर कल हुए हमले के एक शक्तिशाली जवाब के रूप में ईरान के खिलाफ हवाई हमले किए हैं। ईरानी सैनिकों द्वारा जहाजों पर किया गया यह बिना वजह का हमला सीधे तौर पर युद्ध विराम का उल्लंघन है। वहीं शुक्रवार को वाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या ईरान को इस ड्रोन हमले के परिणाम भुगतने होंगे? इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz में IRGC ने उड़ाया कार्गो शिप, फंसे कई जहाजउन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा ठीक है आपको बहुत जल्दी पता लग जाएगा। इस बारे में बात करते हुए ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर भी लिखा कि ईरान ने 17 जून को हुए द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन किया। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका इस क्षेत्र में पूरी तरह सतर्क और ईरान के साथ हुए समझौते के हर पहलू को सख्ती से लागू करवाएगा। वहीं अमेरिका द्वारा ईरानी क्षेत्रों पर हमले किए जाने के बाद आईआरजीसी यानी ईरान के रेवोलशनरी गार्ड्स ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले का दावा किया है। हालांकि ईरान ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन विशिष्ट ठिकानों को निशाना बनाया गया है और इससे अमेरिका को कितना नुकसान पहुंचा है। ईरान की संयुक्त सैन्य कमान खातम अलबनिया की प्रवक्ता इब्राहिम अलफिकार ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है और स्पष्ट किया है कि अब ईरान भी जवाब देगा और अपने हमलों का स्थान और समय खुद तय करेगा। इस ताजा गोलाबारी के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने फारस की खाड़ी में फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के अपने अभियान को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। Hindi me international news https://www.prabhasakshi.com/international के लिए जुड़ें प्रभासाक्षी से   ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:46 +0530</pubDate>
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<title>Palestine Childrens को Target Practice के रूप में इस्तेमाल करते हैं Israeli Soldiers, अब तक 20000 बच्चे मरे, UN Commission Report से हुआ बड़ा खुलासा!</title>
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<description><![CDATA[ गाजा पट्टी और पश्चिमी किनारे में जारी संघर्ष को लेकर संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतंत्र जांच समिति की ताजा रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इजरायली सुरक्षा बलों ने फिलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाया और कई मामलों में उन्हें अभ्यास के लक्ष्य यानि टार्गेट प्रेक्टिस की तरह इस्तेमाल किया गया। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंता और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।संयुक्त राष्ट्र जांच समिति की ओर से जारी इस आकलन में कहा गया है कि अक्टूबर 2023 से अब तक बीस हजार से अधिक फिलिस्तीनी बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि चवालीस हजार से ज्यादा बच्चे घायल हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह केवल युद्ध के सामान्य दुष्परिणाम नहीं हैं, बल्कि कई घटनाओं में बच्चों को सीधे निशाना बनाए जाने के प्रमाण मिले हैं। समिति ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध और संभावित जनसंहार जैसी गंभीर श्रेणियों से जोड़ा है।इसे भी पढ़ें: UN की बैठक में China-Pakistan को भारत का करारा जवाब, कहा- Kashmir हमारा आंतरिक मामला हैरिपोर्ट में कहा गया है कि गाजा में लगातार हो रही बमबारी, स्नाइपर हमले और घनी आबादी वाले इलाकों पर सैन्य कार्रवाई का सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ा है। अस्पतालों और राहत शिविरों तक को सुरक्षित नहीं माना जा रहा। कई चिकित्सकों और मानवाधिकार संगठनों ने दावा किया है कि बच्चों के सिर और सीने पर गोली लगने के अनेक मामले सामने आए हैं, जिससे यह संदेह और मजबूत हुआ है कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया।मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि गाजा में हालात लगातार भयावह होते जा रहे हैं। हजारों बच्चे अनाथ हो चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में बच्चे स्थायी रूप से विकलांग हुए हैं। राहत एजेंसियों के अनुसार कई इलाकों में भोजन, दवा और साफ पानी की भारी कमी है। कुपोषण और बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। सेव द चिल्ड्रेन संस्था ने कहा है कि लगभग तेइस महीनों के संघर्ष में औसतन हर घंटे एक फिलिस्तीनी बच्चे की मौत हुई है।संयुक्त राष्ट्र समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एस मुरलीधर ने रिपोर्ट में कहा है कि बच्चों के खिलाफ हुई हिंसा केवल आकस्मिक नहीं मानी जा सकती। जांच में मिले साक्ष्यों से यह संकेत मिलता है कि कई हमलों में नागरिक आबादी और खासकर बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया। समिति ने यह भी कहा कि युद्ध के नियमों और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन हुआ है।रिपोर्ट में पश्चिमी किनारे के हालात का भी उल्लेख किया गया है। वहां भी फिलिस्तीनी नाबालिगों की गिरफ्तारी, मारपीट और कथित यातना के आरोप लगाए गए हैं। कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने पहले भी दावा किया था कि इजरायली सैन्य हिरासत में बच्चों के साथ कठोर व्यवहार किया जाता है। कुछ मामलों में बच्चों को मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।हालांकि इजरायल लगातार इन आरोपों को खारिज करता रहा है। इजरायली पक्ष का कहना है कि उसकी सेना केवल हमास और अन्य सशस्त्र संगठनों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और नागरिकों को नुकसान से बचाने की पूरी कोशिश की जाती है। इजरायल का यह भी दावा है कि हमास नागरिक इलाकों, स्कूलों और अस्पतालों का इस्तेमाल अपने सैन्य ठिकानों के रूप में करता है, जिससे आम लोगों की जान खतरे में पड़ती है।दूसरी ओर, दुनिया भर के कई देशों, मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने तत्काल युद्धविराम की मांग की है। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में भी इस संघर्ष को लेकर सुनवाई चल रही है, जहां जनसंहार से जुड़े आरोपों पर विचार किया जा रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो पूरी एक पीढ़ी मानसिक और शारीरिक रूप से तबाह हो सकती है।विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस संघर्ष ने केवल गाजा ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति और जनमत को प्रभावित किया है। सोशल मीडिया और वैश्विक मीडिया में इस मुद्दे पर तीखा ध्रुवीकरण देखने को मिल रहा है। कुछ अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि अलग अलग देशों का मीडिया इस संघर्ष को अलग नजरिए से प्रस्तुत कर रहा है, जिससे लोगों की राय भी प्रभावित हो रही है।बहरहाल, गाजा में बच्चों की मौत और तबाही के ताजा आंकड़े मानवता के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा कर रहे हैं। क्या आधुनिक युद्धों में भी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती? संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने इस बहस को और तेज कर दिया है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन आरोपों पर क्या कदम उठाता है और क्या गाजा के मासूम बच्चों को आगे और हिंसा से बचाया जा सकेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:45 +0530</pubDate>
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<title>स्वागत नहीं करोगे आप हमारा! अचानक भारत के दौरे पर आ रहे ट्रंप, होने वाली है अब तक की सबसे बड़ी महाडील?</title>
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<description><![CDATA[ क्या भारत और अमेरिका के बीच अब तक की सबसे बड़ी महा डील होने वाली है? क्या दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था का नया नक्शा बदलने जा रहे हैं? जी हां, वाशिंगटन से जो खबर सामने आ रही है वो सिर्फ एक ट्रेंड नहीं है बल्कि एक कूटनीतिक तूफान है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने साफ कर दिया कि डोनाल्ड ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत आ रहे हैं। लेकिन यह कोई साधारण यात्रा नहीं है। यह यात्रा है उस शानदार केमिस्ट्री की जिसे दुनिया ने हाउडी मोदी और नमस्ते ट्रंप में देखा था। आज भारत का दबदबा ऐसा है कि ट्रंप अपनी सभी प्राथमिकताओं में भारत को सबसे ऊपर रखते हैं। दरअसल अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने वह बात कही जिससे चीन से लेकर पाकिस्तान, पाकिस्तान से लेकर दुनिया के दूसरे देशों तक सन्नाटा छा गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी के बीच इससे बेहतर नहीं हो सकते। इसे भी पढ़ें: Hormuz में Drone Attack से भड़का America, बोला- ईरान ने युद्धविराम तोड़ा, सैन्य एक्शन को रहें तैयाररूबियों ने पुष्टि की कि तैयारियां जोरों पर है ताकि अगले साल की शुरुआत में ट्रंप भारत की धरती पर कदम रखें। यहां समझने वाली बात यह है कि ट्रंप की नजर में भारत सिर्फ एक बाजार नहीं बल्कि एक अनिवार्य सहयोगी है। आई थिंक ग्रेट मीटिंग प्राइम मिनिस्टर जी7 प्रेसिडेंशियल विजिट पार्ट्स नेक्स्ट रूबियों ने स्पष्ट किया कि कूटनीति में व्यक्तिगत संबंध बहुत मायने रखते हैं और मोदी ट्रंप की जोड़ी इस मामले में वर्ल्ड लीडर है। यह दौरा फरवरी 2020 के उस ऐतिहासिक यात्रा की याद दिलाएगा जिसने भारत को ग्लोबल स्टेज पर एक नई पहचान दी थी। अब बात करते हैं उस डील की जिसका जिक्र रूबियो ने किया। रूबियो के अनुसार भारत और अमेरिका एक बड़े द्विपक्षी व्यापार समझौते यानी कि ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के बिल्कुल करीब हैं। सोचिए अगर यह डील हो जाती है तो भारतीय उत्पादों के लिए अमेरिका के दरवाजे और चौड़े हो जाएंगे। इसे भी पढ़ें: PM Modi-Trump की केमिस्ट्री का असर, US बोला- संबंध शानदार, Trade Deal जल्द होगी फाइनलट्रंप हमेशा अमेरिका फर्स्ट की बात करते हैं। लेकिन उन्हें पता है कि अमेरिका के विकास के लिए भारत के साथ व्यापारिक संतुलन बनाना कितना जरूरी है। G7 शिखर सम्मेलन में जब मोदी और ट्रंप मिले थे, डील की नींव रख दी गई अब ट्रंप का भारत आना इस बात पर मुहर लगाएगा कि भारत अब वैश्विक सप्लाई चेन का नया केंद्र है। इतना ही नहीं रूबियों ने आगे एक ऐसी बात कही जो भारत के हर नागरिक को गर्व से भर देगी। उन्होंने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास हैवी क्रूड यानी भारी कच्चे तेल को रिफाइन करने की विश्वस्तरीय क्षमता है। यह सिर्फ तेल की बात नहीं है। यह ऊर्जा कूटनीति यानी कि एनर्जी डिप्लोमेसी है। अमेरिका चाहता है कि ऊर्जा की रूस और ओपेक देशों का एकाधिकार खत्म हो और इसमें भारत की रिफाइनिंग क्षमता सबसे बड़ा हथियार है। भारत और अमेरिका मिलकर ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। यानी आने वाले समय में भारत दुनिया का एनर्जी हब बनने जा रहा है और ट्रंप इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं। इसे भी पढ़ें: Hormuz पर फिर छिड़ी जंग! अमेरिका ने फिर कर दिया बड़ा हमला, जवाब में ईरान ने भी ठोकी मिसाइलेंट्रेंड है भारत की शक्ति को स्वीकार करना। रूबियों ने जिस तरह से भारत को अमेरिका का बहुत करीबी पार्टनर बताया वो दिखाता है कि दक्षिण एशिया में भारत के बिना अमेरिका का कोई भी प्लान सफल नहीं हो सकता है। चाहे वो चीन के विस्तारवाद को रोकना हो या इंडोपेसिफिक क्षेत्र में शांति बनाए रखना। मोदी ट्रंप की केमिस्ट्री ही इसका समाधान है। ट्रंप जानते हैं कि पीएम मोदी एक ऐसे नेता हैं जो अपनी शर्तों पर दोस्ती निभाते हैं। इसलिए रूबियो खुद इस साल के अंत से पहले भारत आकर ट्रंप की यात्रा को जमीन ट्रंप की यात्रा की जमीन तैयार करेंगे। खैर दोस्तों, यह समझना जरूरी है कि भारत अब वो देश नहीं जो समझौतों पर गुहार लगाता था। आज भारत वो देश है जिसके पास आकर दुनिया की महाशक्तियां समझौते करती हैं। मार्को रूबियो के बयान ने साफ कर दिया कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत की भूमिका किंग मेकर की होगी। ऊर्जा से लेकर व्यापार और अंतरिक्ष से लेकर रक्षा तक और अंतरिक्ष से लेकर रक्षा तक मोदी और ट्रंप की यह जोड़ी एक नया इतिहास लिखने जा रही है। Hindi me international news https://www.prabhasakshi.com/international के लिए जुड़ें प्रभासाक्षी से   ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:44 +0530</pubDate>
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<title>Israel के खिलाफ शुरू हो गई बड़ी लामबंदी, ईरान के पाले में खड़ा हो गया कतर!</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने 40 दिनों की जंग और कुर्बानियों के बाद वो हासिल किया है जो अब उसकी बादशाहत को लंबे वक्त तक बनाए रखेगा। इतना ही नहीं अरब देशों को किसी ना किसी तौर पर फारस पर डिपेंड होना पड़ेगा। फारस से संपर्क करना, रिश्ता कायम करना पड़ेगा। और तो और इजराइल के हाथ बांधने और उसे खौफजदा रखने का पूरा इंतजाम भी इस बार होने जा रहा है। सऊदी, पाकिस्तान तो साथ आ गए हैं। ईरान इशारे दे रहा है कि तुर्की, मिस्र, कतर ये सब मिलकर इतना मजबूत अलायंस बना सकते हैं कि पिछली बार की तरह इजराइल की कतर पर अटैक की हिम्मत ही ना पड़े। या लेबनान की तरफ देखने से पहले वो 10 बार सोचे। गौरतलब है कि इजराइल ने कतर में मौजूद हमास की पॉलिटिकल लीडरशिप को निशाना बनाने के लिए सीधा हमला कर दिया था। लेकिन अब प्रेसिडेंट के इशारे के बाद एक और अमीर मुस्लिम अरब देश कतर ने भी एक कदम आगे बढ़ाया है।इसे भी पढ़ें: US का पलटवार, जहाज पर Drone Attack के बाद Iran पर दागीं मिसाइलें, तनाव चरम परदरअसल कतर के प्राइम मिनिस्टर ने कहा है कि ईरान को शामिल करके फारस की खाड़ी का पूरा इलाका एक नया सिक्योरिटी सिस्टम बनाने पर विचार कर रहा है। यानी इसमें अरब का पूरा रीजन भी शामिल है। बस इसमें यूएई, कुवैत और बहरीन नहीं होंगे। बाकी सब होंगे। यानी कतर सीधे ईरान के साथ एक सिक्योरिटी अलायंस बनाने की बात कर रहा है। ओमान, ईरान, तुर्की, मिस्र होंगे। मजबूत देश ईरान के साथ सिक्योरिटी अरेंजमेंट पर ये लोग अब सोचने लगे हैं। या यूं कहें कि काम भी शुरू कर दिया है। एक्सपर्ट कहते हैं कि अरब देशों ने अमेरिका का सिक्योरिटी सिस्टम फेल होते अपनी आंखों से देख लिया है और उन्हें अच्छी खासी नसीहत लग गई है। उन्होंने देख लिया है कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन कितने मजबूत थे। अरब देशों के कई शहरों को नुकसान पहुंचा और अमेरिका का डिफेंस सिस्टम देखता रह गया। इतना ही नहीं ईरान ने स्टेट ऑफ होर्मुज को भी ऐसे बंद करवा दिया था कि अमेरिका भी नहीं खुलवा पाया था। इसलिए अब उस रीजन के देश चाहते हैं कि एक पैरेलल सिस्टम बनाना पड़ेगा ईरान के ही साथ जिसे उन्होंने अमेरिका के चक्कर में पहले किनारे कर रखा था। ईरान को सटने नहीं देते थे। इसे भी पढ़ें: Mohamed Salah का चला जादू, Egypt ने ईरान को रोककर FIFA World Cup नॉकआउट में पहली बार बनाई जगहजानकार कहते हैं कि इस जंग का सबसे बड़ा हासिल भी यही है कि जो ईरान पहले दुनिया में अपना सामान ना बेच पाता था, ना खरीद पाता था। अब वह दोनों चीजें कर पाएगा। पड़ोसी देशों के साथ एक सिक्योरिटी एलायंस में आएगा। जानकार यह भी कहते हैं कि मिडिल ईस्ट का यह सिक्योरिटी एलायंस अगर बन गया तो इजरायल को बहुत भारी पड़ने वाला है। वैसे भी अमेरिका के बिना इजरायल एकदम तन्हा हो जाता है। कोई उसे पूछता नहीं है। अब देखना होगा कि ईरान और अरब देशों का यह गठबंधन कितनी जल्दी अपना स्वरूप ले पाता है। क्या ईरान फिर से स्टेट ऑफ होर्मुज पर अपना दबदबा दिखाने लगा है? क्या एक बार फिर दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते पर तनाव बढ़ने वाला है? दरअसल होर्मुज के पास एक कंटेनर जहाज पर ड्रोन हमला हुआ है। अमेरिकी मीडिया का दावा है कि इस हमले के पीछे ईरान का हाथ है। हमले के बाद ईरान ने जहाजों के लिए नई चेतावनी जारी कर दी है। जबकि संयुक्त राष्ट्र ने फंसे हुए नाविकों को निकालने का अभियान फिलहाल रोक दिया है। दुनिया के सबसे व्यस्त तेल व्यापार मार्गों में से एक स्टेट ऑफ होर्मुज सुर्खियों में है। इसे भी पढ़ें: Hormuz पर फिर छिड़ी जंग! अमेरिका ने फिर कर दिया बड़ा हमला, जवाब में ईरान ने भी ठोकी मिसाइलेंद न्यूयॉर्क टाइम्स और अमेरिकी मीडिया के रिपोर्ट के मुताबिक ओमान के तट के पास एक कंटेनर जहाज पर ड्रोन हमला किया गया। दावा किया गया कि इस हमले के पीछे ईरान का हाथ है। हालांकि ईरान ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। तुरंत बाद ईरान की समुद्री एजेंसी पर्शियन गल्फ स्ट्रीट अथॉरिटी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि जो जहाज उनके तय किए गए समुद्री नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनकी सुरक्षित यात्रा की कोई गारंटी नहीं होगी। यानी ईरान ने संकेत दिया है कि होर्मुज में उसकी निगरानी और नियंत्रण जारी रहेगा। के बाद संयुक्त राष्ट्र की समुद्री संस्था इंटरनेशनल मैरिटाइम [संगीत] ऑर्गेनाइजेशन आईएमओ ने बड़ा फैसला लिया है। युद्ध के कारण फंसे हुए करीब 600 जहाजों और उनके क्रू को निकालने का अभियान फिलहाल रोक दिया गया है। आईएमओ के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने कहा कि मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए पहले पूरी समीक्षा की जाएगी। ही आगे का फैसला लिया जाएगा। Hindi me international news https://www.prabhasakshi.com/international के लिए जुड़ें प्रभासाक्षी से   ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:43 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan फिर बेनकाब! Shoaib Akhtar के भाई के Funeral में LeT आतंकियों का जमावड़ा, हाफिज का बेटा भी मौजूद</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर शुक्रवार को एक विवाद में फंस गए, जब लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े कथित आतंकवादियों ने इस्लामाबाद में उनके बड़े भाई शाहिद अख्तर के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया। वीडियो में लश्कर के कई आतंकवादी अंतिम संस्कार में शामिल होते दिखे। सूत्रों का कहना है कि यह वीडियो लश्कर या पाकिस्तान मरकज़ी मुस्लिम लीग (PMML) ने जारी किया था, जो प्रतिबंधित जमात-उद-दावा (JuD) का ही एक हिस्सा है। अंतिम संस्कार में शामिल लोगों की पहचान PMML के इस्लामाबाद प्रमुख इनाम-उर-रहमान कंबोह और उसके सदस्यों अब्दुल्ला तूर, हाफ़िज़ उमर और अमजद भट्टी के तौर पर की गई। लश्कर के संस्थापक हाफ़िज़ सईद के बेटे और PMML के सदस्य तलहा सईद को भी अंतिम संस्कार में शामिल होते देखा गया।इसे भी पढ़ें: Pakistan में टॉर्चर कानून पर HRCP की बड़ी चेतावनी, Shehbaz सरकार के System पर उठाए गंभीर सवालइस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान की असलियत सबके सामने ला दी है और यह साबित कर दिया है कि इस्लामाबाद क्यों आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है। गौरतलब है कि हाल के समय में यह दूसरी बार है जब तलहा को किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में देखा गया है। इससे पहले अप्रैल में, वह प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के विशेष सहायक राणा सनाउल्लाह के साथ एक ही मंच पर मौजूद थे और दोनों ने काफी देर तक आपस में बातचीत भी की थी। भारत ने बार-बार इस बात पर चिंता जताई है कि पाकिस्तान आतंकवादियों को मदद और छिपने की जगह देता है। साथ ही, भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) समेत दुनिया भर की संस्थाओं से इस्लामाबाद के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील भी की है। मार्च में अमेरिका की एक रिपोर्ट में भी इस बात को दोहराया गया था कि पाकिस्तान आतंकवादियों, खासकर भारत को निशाना बनाने वाले आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है। 25 मार्च को जारी यह रिपोर्ट &#039;कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस&#039; (CRS) ने प्रकाशित की थी। रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान उन खास आतंकवादी समूहों और व्यक्तियों को देश में खुलेआम काम करने से रोकने के लिए &quot;पर्याप्त कार्रवाई&quot; करने में नाकाम रहा है।इसे भी पढ़ें: Poonch में Indian Army का बड़ा एक्शन, LoC पर पाकिस्तानी घुसपैठिया दबोचा, एजेंसियां हाई अलर्ट परशोएब अख्तर के बड़े भाई शाहिद का इस हफ़्ते की शुरुआत में निधन हो गया। हालाँकि, पाकिस्तानी दिग्गज ने उनकी मौत की वजह नहीं बताई। शोएब ने माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि मुझे यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि मेरे प्यारे बड़े भाई, शाहिद अख्तर, अल्लाह सुब्हानहु व तआला के पास चले गए हैं। नमाज़-ए-जनाज़ा का समय और जगह सुबह बताई जाएगी।Hindi me international news https://www.prabhasakshi.com/international के लिए जुड़ें प्रभासाक्षी से Ex cricketer Shoaib Akhtar&#039;s brother, Shahid Akhtar, died of heart attack.His funeral was attended by PMML leader Inam ur Rehman Kamboh and other LeT terrorists, raising questions over their presence.UN is silent !!pic.twitter.com/tqb8pLIxFF— News Algebra (@NewsAlgebraIND) June 27, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:43 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan में &amp;apos;असली vs नकली&amp;apos; कश्मीरी पर जंग, PoK के PM और रक्षा मंत्री Khawaja Asif आपस में भिड़े</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (पीओके) के प्रधानमंत्री फ़ैसल मुमताज़ राठौर ने शुक्रवार को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ की आलोचना की। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि आसिफ़ ने इस इलाके के लोगों की पहचान को बिना मांगे ही मान्यता दे दी थी। एक्स पर ये बातें कथित तौर पर आसिफ़ के उस हालिया टीवी इंटरव्यू के जवाब में कही गईं, जिसमें उन्होंने कहा था कि PoK के रावलकोट और मीरपुर के रहने वाले लोग असली कश्मीरी नहीं हैं। आसिफ़ के जवाब में राठौर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपनी पहचान के लिए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ़ या किसी और से किसी मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि उनके जैसे बुज़ुर्ग और उनकी हरकतें लोगों को करीब लाने के बजाय उनके बीच दूरियां पैदा कर रही हैं। राठौर ने कहा कि अपनी गलती पर हुई आलोचना के बाद, अब वे आज़ाद जम्मू-कश्मीर के प्रशासन में कमियां निकालकर मामले को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Poonch में Indian Army का बड़ा एक्शन, LoC पर पाकिस्तानी घुसपैठिया दबोचा, एजेंसियां हाई अलर्ट परPoK के नेता ने आसिफ़ से माफ़ी मांगने को कहाराठौर उस घटना का ज़िक्र कर रहे थे जिसमें आसिफ़ ने बाद में अपनी बात साफ़ करने की कोशिश की थी। आसिफ़ का तर्क था कि कश्मीरी पहचान जन्म प्रमाण-पत्र से नहीं, बल्कि बरसों के संघर्ष और बलिदान से तय होती है। अपनी बात के बचाव में आसिफ़ ने PoK में कथित तौर पर प्रशासन की नाकामियों की ओर भी इशारा किया था। राठौर ने कहा कि सर, अपने वरिष्ठ अधिकारियों से पूछिए, वे आपको बता देंगे कि हमने कितना अच्छा प्रशासन चलाया है। हमारे प्रशासन को बलि का बकरा बनाने के बजाय, असल मुद्दे पर बात करना और अपनी शुरुआती टिप्पणी के लिए माफ़ी मांगना ज़्यादा सम्मानजनक काम होगा। भारत ने इस हफ़्ते की शुरुआत में ख्वाजा आसिफ़ की हालिया भड़काऊ सैन्य धमकियों का कड़ा जवाब दिया। भारत ने इन बयानों को इस्लामाबाद की एक हताशा भरी कोशिश बताया, जिसका मकसद देश के अंदर के खराब हालात और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन से ध्यान भटकाना था।इसे भी पढ़ें: Pawan Khera ने Rajnath Singh से पूछा, Operation Sindoor पर संसद को गुमराह किया या अनजान थे?नई दिल्ली का यह बयान आसिफ़ की उस धमकी के कुछ ही दिनों बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर पाकिस्तान की जल सुरक्षा पर संकट आया तो वह भारत के खिलाफ़ युद्ध छेड़ देंगे। इससे पहले, भारत ने कहा था कि सिंधु जल संधि को रोके रखने का उसका फ़ैसला &quot;बदला नहीं जाएगा। मंगलवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान, विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की टिप्पणियों के बारे में हमने इस मामले पर रिपोर्ट देखी हैं। ऐसी बातें पाकिस्तान की अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान भटकाने की हताशा भरी कोशिशें हैं। हम इन मनगढ़ंत दावों को पूरी तरह और पूरी सख्ती के साथ खारिज करते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:42 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan में भूकंप के तेज झटके, Balochistan में 5.5 तीव्रता से कांपी धरती</title>
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<description><![CDATA[ नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, शनिवार सुबह पाकिस्तान में रिक्टर स्केल पर 5.5 तीव्रता का मध्यम भूकंप आया, जिसका केंद्र बलूचिस्तान प्रांत में था। यह भूकंप सुबह 8:36:23 बजे (IST) 40 किलोमीटर की गहराई पर आया। NCS ने X पर एक पोस्ट में बताया कि भूकंप का केंद्र 30.271° उत्तर अक्षांश और 69.733° पूर्वी देशांतर पर था। देश के कई हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए, हालांकि किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की तत्काल कोई खबर नहीं है। अधिकारी स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं और आगे की जानकारी का इंतज़ार है। शुरुआती रिपोर्टों में भूकंप की तीव्रता 5.4 बताई गई थी, जबकि बाद में NCS ने इसे 5.5 दर्ज किया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:41 +0530</pubDate>
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<title>तीन दिन के दौरे पर सेशेल्स पहुंचे PM मोदी, राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने किया गर्मजोशी से स्वागत</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को तीन दिन की सरकारी यात्रा पर सेशेल्स पहुँचे। इस यात्रा के दौरान वे राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ बातचीत करेंगे और द्वीपों से बने इस देश के &#039;नेशनल डे&#039; के गोल्डन जुबली समारोह में शामिल होंगे। सेशेल्स इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हर्मिनी और एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मोदी का भव्य स्वागत किया। प्रधानमंत्री को औपचारिक &#039;गार्ड ऑफ़ ऑनर&#039; भी दिया गया। राष्ट्रपति हर्मिनी के निमंत्रण पर राजकीय यात्रा पर गए मोदी &#039;गेस्ट ऑफ़ ऑनर&#039; के तौर पर नेशनल डे के समारोह में शामिल होंगे। वह सेशेल्स की नेशनल असेंबली को भी संबोधित करेंगे और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों से बातचीत करेंगे।इसे भी पढ़ें: Dharmendra Pradhan पर PM मोदी ने दे दिया बड़ा संकेत? जन्मदिन वाले मैसेज के क्या मायने हैंअधिकारियों ने बताया कि समारोह में भारतीय सशस्त्र बलों का एक दल और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी भाग लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले 2015 में सेशेल्स की यात्रा की थी। भारत और सेशेल्स के बीच साझा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा लोगों के बीच परस्पर संबंधों पर आधारित लंबे समय से घनिष्ठ साझेदारी रही है। अधिकारियों ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी के रूप में सेशेल्स का भारत के विजन महासागर (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति) तथा ग्लोबल साउथ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता में विशेष स्थान है। ग्लोबल साउथ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:40 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran शांति समझौते पर ग्रहण! ईरान ने Bahrain में खोला New Front, बढ़ा संघर्ष</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने बहरीन को निशाना बनाकर ड्रोन से हमला किया और होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज पर भी अलग से हमला हुआ। ऐसा लग रहा था कि यह तेहरान की ओर से अमेरिका के रात भर चले हवाई हमलों का जवाब था। फारस की खाड़ी में हुई इन घटनाओं ने संघर्ष के फिर से बढ़ने के खतरे को उजागर किया, जबकि ईरान और अमेरिका युद्ध खत्म करने के लिए अंतिम समझौते तक पहुँचने के मकसद से एक अंतरिम समझौते पर सहमत हो चुके थे। स्ट्रेट से निकलने की कोशिश कर रहे एक जहाज़ पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद अमेरिका ने हवाई हमले किए। यह उन हमलों की कड़ी का हिस्सा था जिन्होंने पहले से ही नाज़ुक युद्धविराम को हिलाकर रख दिया है। इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना की देखरेख में काम करने वाली एक मल्टीनेशनल मैरीटाइम संस्था ने शनिवार को कहा कि वह स्ट्रेट में ओमान के तट के पास एक रूट का विस्तार करेगी ताकि आने-जाने वाले ट्रैफ़िक को गुज़ारा जा सके। इस कदम से तेहरान के साथ तनाव का एक नया मुद्दा पैदा होने की संभावना है।इसे भी पढ़ें: Israel के खिलाफ शुरू हो गई बड़ी लामबंदी, ईरान के पाले में खड़ा हो गया कतर!बहरीन ने कहा कि कई ईरानी ड्रोनों ने देश को निशाना बनाया और इस हमले को नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर ख़तरा बताया। ईरान द्वारा बहरीन को निशाना बनाना अहम माना गया क्योंकि यह देश तेहरान के सबसे बड़े आलोचकों में से एक है और यहाँ अमेरिकी नौसेना का 5वां बेड़ा तैनात है। इसने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेज़बानी भी की थी, जो ईरान के हमलों को रोकने और स्ट्रेट को पूरी तरह खुला रखने की अपील के साथ समाप्त हुई। इससे पहले शनिवार को, ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के ज़रिए जारी एक बयान में कहा कि उसने क्षेत्र में अमेरिकी आतंकवादी सेना के कई ठिकानों को निशाना बनाया है। बयान में यह नहीं बताया गया कि किन जगहों को निशाना बनाया गया।इसे भी पढ़ें: Hormuz पर फिर छिड़ी जंग! अमेरिका ने फिर कर दिया बड़ा हमला, जवाब में ईरान ने भी ठोकी मिसाइलेंइस बीच, ब्रिटिश सेना के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स सेंटर ने बताया कि शनिवार को जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) में एक टैंकर पर हमला हुआ। उन्होंने कहा कि क्रू सुरक्षित है और पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है। हमले की ज़िम्मेदारी तुरंत किसी ने नहीं ली, हालांकि शक़ जल्द ही ईरान पर गया। उस रिपोर्ट के तुरंत बाद, &#039;जॉइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर&#039; ने कहा कि ओमान के तट के पास वाले रास्ते को बढ़ाया जा रहा है ताकि जहाज़ दोनों दिशाओं में आ-जा सकें। ईरान ने कहा है कि जहाज़ों को उसके आदेश मानने होंगे और चेतावनी दी है कि वह इस जलडमरूमध्य से गुज़रने के लिए फ़ीस लेना शुरू करेगा; इसी रास्ते से कभी दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल और प्राकृतिक गैस गुज़रती थी। अमेरिका और खाड़ी के अरब देशों ने ईरान की मांगों को ठुकरा दिया है।इसे भी पढ़ें: Oman ने ऐसा क्या कर दिया? इसलिए ईरान ने होर्मुज में जहाज ठोक दियाहालांकि यह जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के समुद्री क्षेत्र में आता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है। अपने नोटिस में, &#039;जॉइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर&#039; ने चेतावनी दी कि इस इलाके में जहाज़ों को &quot;काफ़ी&quot; खतरा है और कहा, &quot;नाविकों को माइंस (बारूदी सुरंगों) की मौजूदगी के बारे में सूचित किया जाता है और उन्हें नौसेना की मौजूदगी की उम्मीद रखनी चाहिए क्योंकि सफ़ाई का काम जारी है।Stay updated with Latest International News in Hindi https://www.prabhasakshi.com/international on Prabhasakshi  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:39 +0530</pubDate>
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<title>ब्रिटेन का बड़ा कदम: इमिग्रेशन कानून सख्त, शरणार्थियों के लिए नए स्पॉन्सरशिप रास्ते खुले UK इमीग्रेशन</title>
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<description><![CDATA[ सरकार ने कहा है कि वह योग्य शरणार्थियों के लिए नए सुरक्षित और कानूनी रास्ते खोलेगी और साथ ही मानवाधिकार कानूनों में बदलाव करेगी ताकि देश में गैर-कानूनी तरीके से रह रहे लोगों को वापस भेजना आसान हो सके। इस योजना में शरणार्थियों के लिए नए रास्तों के साथ-साथ इमिग्रेशन से जुड़े व्यापक कानून भी शामिल हैं, जिनका मकसद सिस्टम के गलत इस्तेमाल को रोकना है, जिसे अधिकारी सिस्टम का दुरुपयोग कहते हैं। नए रास्तों के तहत, कम्युनिटी ग्रुप, यूनिवर्सिटी और एम्प्लॉयर को शरणार्थियों को यूके लाने के लिए स्पॉन्सर करने की इजाज़त होगी। अधिकारियों ने बताया कि यह योजना कनाडा के इसी तरह के कम्युनिटी स्पॉन्सरशिप प्रोग्राम से प्रेरित है, जिसके तहत 1979 से अब तक लगभग 4,00,000 लोगों को बसाया जा चुका है। होम सेक्रेटरी शबाना महमूद ने शुक्रवार को कहा कि मैं असली शरणार्थियों के लिए नए कानूनी रास्ते खोलूंगी, साथ ही उन कमियों को भी दूर करूंगी जिनका अक्सर गलत फायदा उठाया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित इमिग्रेशन कानून का मकसद मानवाधिकार कानूनों के दुरुपयोग को रोकना और &quot;बेबुनियाद दावों&quot; पर सख्ती करना होगा। इस कदम से परिवार की परिभाषा भी सख्त हो जाएगी, ताकि यह सिर्फ़ करीबी परिवार के सदस्यों पर ही लागू हो।इसे भी पढ़ें: लंदन में बढ़ा भारत का मान, मंत्री Piyush Goyal को मिला प्रतिष्ठित Britain-India Awardआलोचकों का कहना है कि मानवाधिकारों पर यूरोपीय कन्वेंशन का हवाला अक्सर उन लोगों को देश से बाहर भेजने से रोकने के लिए दिया जाता है, जिन्हें यूके में रहने का कोई अधिकार नहीं है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब महमूद को इस बात को लेकर सवालों का सामना करना पड़ रहा है कि क्या प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के पद छोड़ने के बाद वह अपने पद पर बनी रहेंगी। स्टारमर ने सोमवार को घोषणा की कि वह दो साल के कार्यकाल के बाद इस्तीफा देने की योजना बना रहे हैं; इस दौरान हुई गलतियों और गलत फैसलों ने पार्टी और जनता के बीच उनकी साख को कमजोर कर दिया था। सत्ताधारी लेबर पार्टी के नया नेता चुनने के कुछ ही हफ्तों के भीतर उनके पद छोड़ने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहम बिना किसी पार्टी-स्तरीय मुकाबले के ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बनेंगे।इसे भी पढ़ें: इस्लामाबाद नहीं बनने देंगे...यूरोपीय देश का मुस्लिमों पर होश उड़ाने वाला ऐलान, पहली बार भारत हैरान!ब्रिटेन और दूसरे पश्चिमी देशों में इमिग्रेशन (प्रवास) एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है, क्योंकि लोग बेहतर ज़िंदगी की तलाश में युद्ध, गरीबी, जलवायु परिवर्तन से प्रभावित इलाकों और राजनीतिक उत्पीड़न से भागकर यहाँ आ रहे हैं। UK में बहस का मुख्य मुद्दा तस्करों द्वारा चलाई जा रही खचाखच भरी नावों में इंग्लिश चैनल पार करने वाले प्रवासी हैं, साथ ही सरकारी खर्च पर हज़ारों शरण चाहने वालों (asylum seekers) को ठहराने को लेकर बढ़ता तनाव भी चर्चा का विषय है। हालिया घोषणा में सरकार की शरणार्थियों के लिए कानूनी रास्ते बनाने की योजना और डिपोर्टेशन (देश-निकाले) के नियमों को सख्त करने की कोशिशों को एक साथ लाया गया है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:39 +0530</pubDate>
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<title>Seychelles दौरे पर PM Modi का खास अंदाज, 194 साल के कछुए Jonathan को अपने हाथों से खिलाया खाना</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने शनिवार को विक्टोरिया में सेशेल्स के नेशनल बॉटनिकल गार्डन का दौरा किया। यह दौरा प्रधानमंत्री की इस द्वीपीय देश की आधिकारिक राजकीय यात्रा शुरू होने के कुछ ही समय बाद हुआ।इस गार्डन के दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी को बड़े कछुओं को उत्साह के साथ खाना खिलाते हुए देखा गया। इनमें मशहूर 194 साल का कछुआ &#039;जोनाथन&#039; भी शामिल था, जिसे दुनिया का सबसे उम्रदराज़ जीवित ज़मीनी जानवर माना जाता है।दोनों नेताओं ने गार्डन परिसर में एक यादगार पौधा भी लगाया और वहां के कर्मचारियों से बातचीत की, जिन्होंने मेहमानों को गार्डन के खास पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के बारे में जानकारी दी। प्रधानमंत्री शनिवार दोपहर इस द्वीपीय देश की तीन दिन की यात्रा पर राजधानी पहुंचे। दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए, पीएम मोदी देश के &#039;नेशनल डे&#039; के गोल्डन जुबली समारोह में &#039;गेस्ट ऑफ़ ऑनर&#039; (मुख्य अतिथि) होंगे। यह समारोह 1976 में यूनाइटेड किंगडम से सेशेल्स की आज़ादी के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है। दोनों लोकतंत्रों के बीच गहरे राजनयिक संबंधों को दिखाते हुए, राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने कई बड़े कैबिनेट मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मोदी का व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया।इसे भी पढ़ें:  तीन दिन के दौरे पर सेशेल्स पहुंचे PM मोदी, राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने किया गर्मजोशी से स्वागतस्वागत समारोह में शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, जिनमें गुजरात के कच्छ इलाके का पारंपरिक नृत्य भी शामिल था। इस सांस्कृतिक प्रस्तुति पर प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, अद्भुत सांस्कृतिक जुड़ाव! सेशेल्स में हवाई अड्डे पर हुए स्वागत में कच्छ का नृत्य भी शामिल था। जिस तरह से हमारे प्रवासी लोगों ने भारत के अलग-अलग हिस्सों की संस्कृति को संजोकर रखा है और उसे मनाया है, वह तारीफ़ के काबिल है।प्रधानमंत्री मोदी ने इस उत्साहपूर्ण स्वागत की झलकियाँ भी एक्स पर शेयर कीं और भारतीय प्रवासियों के अपार स्नेह और गर्मजोशी के लिए उनका आभार व्यक्त किया। हवाई अड्डे पर उतरते ही हुए आधिकारिक स्वागत का ज़िक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा को लेकर उम्मीद जताई और एक्स पर लिखा, &quot;सेशेल्स पहुँच गया हूँ। डॉ. पैट्रिक हर्मिनी द्वारा हवाई अड्डे पर किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत की मैं दिल से सराहना करता हूँ। सेशेल्स हिंद महासागर में एक अहम समुद्री साझेदार और करीबी दोस्त है। मैं इस यात्रा को लेकर उत्साहित हूँ, जिसका मकसद हमारे पुराने संबंधों को और मज़बूत करना और दोनों देशों के लोगों के फ़ायदे के लिए सहयोग बढ़ाना है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Strait of Hormuz में फिर महा&#45;तनाव! टैंकर पर Unknown Projectile से हमला, British एजेंसी का अलर्ट।</title>
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<description><![CDATA[ यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) के अनुसार, रणनीतिक तौर पर अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुज़र रहे एक टैंकर को हालिया समुद्री घटना में निशाना बनाया गया और उस पर हमला हुआ। ब्रिटिश समुद्री एजेंसी ने बताया कि टैंकर के कैप्टन ने पुष्टि की है कि जहाज़ पर एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल (हवा में तेज़ी से चलने वाली चीज़) से हमला हुआ। UKMTO ने आगे बताया कि जहाज़ के ब्रिज (कंट्रोल रूम) को नुकसान पहुँचा है। अहम बात यह है कि सभी क्रू सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं और इस हमले के बाद अभी तक पर्यावरण को किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है। UKMTO ने कहा कि संबंधित समुद्री अधिकारी अभी इस घटना की जाँच कर रहे हैं।इसे भी पढ़ें: स्वागत नहीं करोगे आप हमारा! अचानक भारत के दौरे पर आ रहे ट्रंप, होने वाली है अब तक की सबसे बड़ी महाडील?इससे पहले, वॉशिंगटन के इन आरोपों के बाद कि तेहरान ने उसी जलमार्ग से गुज़र रहे एक कार्गो जहाज़ को निशाना बनाया था, अमेरिका ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज सुविधाओं के साथ-साथ तटीय रडार ठिकानों पर सैन्य हमले किए थे।US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि ये जवाबी हमले हाल ही में समुद्र में हुए हमले का कड़ा जवाब थे। घटना के बारे में विस्तार से बताते हुए सेंट्रल कमांड ने कहा, &quot;25 जून को ईरान द्वारा &#039;M/V एवर लवली&#039; पर वन-वे अटैक ड्रोन से हमला किए जाने के बाद, US विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज ठिकानों और तटीय रडार साइटों पर हमला किया। ईरान के हमले के समय सिंगापुर के झंडे वाला यह कार्गो जहाज ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहा था।इसे भी पढ़ें: US-Iran शांति समझौते पर ग्रहण! ईरान ने Bahrain में खोला New Front, बढ़ा संघर्षबयान में आगे कहा गया, &quot;ईरानी सेना द्वारा कमर्शियल जहाजों के खिलाफ बिना किसी उकसावे के की गई आक्रामकता ने साफ तौर पर युद्धविराम का उल्लंघन किया। इसके अलावा, ईरान के खतरनाक व्यवहार ने नेविगेशन की आजादी को कमजोर किया, क्योंकि इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यापार गलियारे से बड़े पैमाने पर व्यापार होता है।इन खतरों का मुकाबला करने के लिए, अमेरिकी सेनाएं इस इलाके से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को &quot;सुरक्षित आवाजाही के लिए तालमेल और सहायता&quot; देना जारी रखे हुए हैं; इस इलाके से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का शिपमेंट नियमित रूप से गुजरता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>China के 109 मंजिला &amp;apos;बुर्ज खलीफा&amp;apos; से टकराया विमान, उड़ गए परखच्चे, Video</title>
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<description><![CDATA[ चीन की राजधानी बीजिंग शाम का वक्त और अचानक आसमान से मौत बरसने लगती है। 1700 फीट ऊंची बीजिंग की सबसे गगनचुंबी इमारत सिट्रिक टावर से एक ऐसा मंजर टकराता है जिसे देख पूरी दुनिया दहल जाती है। बीजिंग की 109 मंजिला ऊंची इमारत जो आसमान को चीरती हुई खड़ी है उससे एक छोटा विमान यानी कि लाइट स्पॉट एयरक्राफ्ट सीधे जा टकराया। टक्कर इतनी तेज थी कि 109वीं मंजिल की खिड़कियां कांच के पत्तों की तरह बिखर गई। इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर मलबे की बारिश होने लगी और देखते ही देखते धुएं का गुबार आसमान छूने लगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस विमान ने महज 30 मिनट पहले शिफोसी एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। पायलट अकेला था। सब कुछ सामान्य लग रहा था। शाम के 5:40 बज रहे थे। विमान लैंडिंग के लिए वापस मुड़ने ही वाला था। लेकिन तभी किस्मत ने करवट ली। इसे भी पढ़ें: India-China तनाव के बीच दिल्ली में अहम बैठक, Ajit Doval से मिलेंगे चीनी विदेश मंत्री Wang Yiफ्लाइट मॉनिटरिंग सिस्टम के डाटा के मुताबिक विमान अपने तय रास्ते से बुरी तरह भटक गया। रडार पर सिग्नल तब दिखा जब तक वो बीजिंग की ईस्ट फिफ्थ रिंग रोड के पास नहीं पहुंचा और फिर सन्नाटा विमान का संपर्क टूट गया और कुछ ही मिनटों बाद वो 1700 फीट ऊंचे टावर के सीने में समा चुका था। जैसे ही टक्कर हुई बीजिंग की सड़कों पर अफरातफरी मच गई। सीएनए के पत्रकारों और चश्मदीदों ने बताया कि इमारत से लोग पागलों की तरह बाहर भाग रहे थे। पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की कतारें लग गई। 109 मंजिला इस इमारत में कितने लोग फंसे थे, इसका अंदाजा लगा पाना भी मुश्किल था। ऊपर की मंजिलों पर फंसे लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। जबकि नीचे मलबे के बीच से धुआं उठ रहा था। यह किसी हॉलीवुड फिल्म के क्लाइमेक्स जैसा था। लेकिन यह सब हकीकत थी। हैरानी की बात तो यह है कि चीन ने हाल ही में बीजिंग को ड्रोन मुक्त शहर घोषित किया था। इसे भी पढ़ें: US-Iran MoU से खुश हुआ China, कहा- दुनिया के लिए Positive Signal है यह डील1 मई से यहां बिना इजाजत एक पत्ता भी नहीं हिल सकता था। फिर एक पूरा विमान इस सुरक्षा घेरे को तोड़कर शहर की सबसे ऊंची इमारत तक कैसे पहुंच गया? क्या यह सिस्टम की नाकामी है? दरअसल, फ्लाइट ट्रेडर 24 का डाटा बताता है कि विमान का रास्ता सामान्य नहीं था। क्या पायलट बेहोश हो गया था या प्लेन में कोई तकनीकी खराबी थी? जब आप अभी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। विमान का रजिस्ट्रेशन कोड बताता है कि यह चीन में ही बना एक हल्का स्पोर्ट्स एयरक्राफ्ट है जो एक स्थानीय जनरल एिएशन कंपनी का था। टक्कर इतनी भीषण थी कि एयरक्राफ्ट के परखच्चे उड़ गए। फिलहाल हताहतों की सटीक संख्या सामने नहीं आई है। लेकिन यह टक्कर 109वीं मंजिल पर हुई है जो बताती है कि नुकसान कितना बड़ा हो सकता है। राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है। ???????? A plane crashed into Beijing&#039;s tallest skyscraperDebris fell near the eastern entrance of the China Zun Tower.The China Zun skyscraper is in the top 10 tallest buildings in the world. The height of the tower is 528 meters. pic.twitter.com/Tt8hmDkc3V— Visegrád 24 (@visegrad24) June 26, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>नक्शे से मिटा देंगे, Donald Trump की धमकी के बाद US&#45;Iran में ताबड़तोड़ Missile Attack</title>
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<description><![CDATA[ शांति समझौते के कुछ ही समय बाद अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद सख्त शब्दों में खुली धमकी दी है। ट्रंप ने साफ कहा कि अगर ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो उसे दुनिया के नक्शे से ही मिटा दिया जाएगा। यह धमकी तब आई है जब दोनों देशों ने एक-दूसरे के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए हैं, जिससे इस पूरे इलाके में फिर से भयानक युद्ध छिड़ने का डर पैदा हो गया है।ट्रंप का सोशल मीडिया पर वॉर्निंग शॉटडोनाल्ड ट्रंप ने रविवार सुबह अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट लिखकर पूरी दुनिया को चौंका दिया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान पर फिर से बड़े हमले किए हैं। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए लिखा कि अगर ईरान अब भी सबक नहीं सीखता है, तो हमें मजबूरन मिलिट्री पावर का पूरा इस्तेमाल करना पड़ेगा। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि अगर ऐसा हुआ, तो ईरान का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने सीजफायर का सम्मान नहीं किया, इसलिए अमेरिकी विमानों ने उनके मिसाइल-ड्रोन डिपो और तटीय रडार साइटों को तबाह कर दिया।




&quot;United States aircraft just struck Iranian missile and drone storage locations, and coastal radar sites, for violating the Cease Fire Agreement, AGAIN! It is very possible that they will never learn!&quot; - President Donald J. Trump ???????? pic.twitter.com/btHdMaR8Hd— The White House (@WhiteHouse) June 27, 2026




इसे भी पढ़ें: China के 109 मंजिला &#039;बुर्ज खलीफा&#039; से टकराया विमान, उड़ गए परखच्चे, Videoईरान का पलटवारदूसरी तरफ, ईरान ने भी अमेरिका पर वादाखिलाफी का बड़ा आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी एयरफोर्स ने उनके दक्षिणी तट पर मौजूद सर्विलांस ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान के मुताबिक, ये हमले उस अंतरिम समझौते का सरेआम उल्लंघन हैं, जो दोनों देशों के बीच पिछले चार महीने से चल रही जंग को रोकने के लिए किया गया था। ईरान ने तंज कसते हुए कहा कि पीठ पीछे वार करना और अपने वादों को तोड़ना अमेरिका की पुरानी आदत है।क्यों भड़का अमेरिका? सेंटकॉम ने बताई वजहअमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस पूरे एक्शन पर अपनी सफाई दी है। सेंटकॉम का कहना है कि उन्होंने तेहरान को शांति समझौते को मानने का पूरा मौका दिया था, लेकिन ईरान ने इसे हल्के में लिया। ईरानी सेना ने एक कमर्शियल जहाज &#039;एम/टी किकू&#039; पर ड्रोन से हमला कर दिया। इस हरकत के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदर करीब 10 ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की और उनके मिसाइल सेंटर्स को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया। इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz में फिर महा-तनाव! टैंकर पर Unknown Projectile से हमला, British एजेंसी का अलर्ट।कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान ने किए अटैकइस पूरे विवाद में ईरान भी पीछे नहीं हटा। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स  ने दावा किया कि उन्होंने रविवार सुबह कुवैत में मौजूद &#039;अली अल-सलेम एयरबेस&#039; और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय सहित कुल 8 ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान ने इस ज्वाइंट ऑपरेशन में कई बैलिस्टिक मिसाइलें और सुसाइड ड्रोन दागे। आईआरजीसी ने साफ चेतावनी दी है कि अमेरिका की इन हरकतों की वजह से अब शांति समझौते की आगे की बातचीत पूरी तरह ठप हो सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:35 +0530</pubDate>
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<title>New York के Mayor Zohran Mamdani का अनोखा अंदाज, सूट&#45;टाई में पूल में कूदे, Video हुआ Viral</title>
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<description><![CDATA[ न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी अपने अनोखे और खुशमिजाज अंदाज के लिए अक्सर सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं। लोगों से बड़े ही कूल और तहजीब वाले तरीके से मिलना उनकी यूएसपी बन चुका है। इस बार तो मेयर साहब ने कुछ ऐसा कर दिया जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। दरअसल, न्यूयॉर्क शहर में समर पूल सीजन की शुरुआत करने के लिए वे ईस्ट हार्लेम के एक पब्लिक स्विमिंग पूल पहुंचे और बिना सोचे-समझे अपने ऑफिशियल सूट और टाई पहने-पहने ही पानी में छलांग लगा दी।13 साल पुरानी परंपरा को किया जिंदारिपोर्ट्स के मुताबिक, न्यूयॉर्क सिटीहॉल की एक बहुत पुरानी और मजेदार परंपरा रही है, जिसमें मेयर गर्मियों के सीजन की शुरुआत में खुद पब्लिक पूल के पानी में उतरते थे। हालांकि, पिछले एक दशक से ज्यादा समय से किसी भी मेयर ने इस परंपरा को फॉलो नहीं किया था। एरिक एडम्स और बिल डी ब्लासियो जैसे पूर्व मेयर्स ने अपने कार्यकाल में इससे दूरी बनाए रखी, जबकि माइकल ब्लूमबर्ग इस परंपरा में हिस्सा लेने वाले आखिरी मेयर थे। अब ममदानी ने 2013 के बाद पहली बार इस वार्षिक पूल-ओपनिंग ट्रेडिशन को फिर से जिंदा कर दिया है। इसे भी पढ़ें: Venezuela Earthquake: तबाही के बीच फिर कांपी धरती, 1500 मौतों के बाद तीसरे झटके से दहला देशममदानी का मजेदार जवाब, &quot;जब उन्होंने कहा सूट पहनो...&quot;पूल में छलांग लगाने के बाद मेयर बच्चों और लोकल लोगों के बीच पूरी तरह भीगे हुए कपड़ों में ही पहुंच गए, जिसका वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग जनता से कनेक्ट करने के उनके इस क्रेजी और अनोखे तरीके की जमकर तारीफ कर रहे हैं। इस बीच ममदानी ने खुद सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए मजाकिया अंदाज में लिखा, &quot;जब उन्होंने मुझसे कहा सूट पहनें, तो मैंने बस यही समझ लिया।&quot; भीगे कपड़ों में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें शहर में पब्लिक स्विमिंग के 90 साल पूरे होने का जश्न मनाते हुए बेहद खुशी हो रही है।



When they said, &quot;wear a suit,&quot; I just assumed…Find a public pool near you at https://t.co/V0Tzb9IlHO. https://t.co/TL5XIB4jBw pic.twitter.com/4wHWNB54fx— Mayor Zohran Kwame Mamdani (@NYCMayor) June 27, 2026




 इसे भी पढ़ें: नक्शे से मिटा देंगे, Donald Trump की धमकी के बाद US-Iran में ताबड़तोड़ Missile Attackक्या है इस पूल ओपनिंग का इतिहास?आपको बता दें कि इस यूनिक परंपरा की शुरुआत साल 1936 में हुई थी। उस समय न्यूयॉर्क के तत्कालीन मेयर फियोरेलो लागुआर्डिया ने शहर के लोगों के लिए पब्लिक स्विमिंग पूल सुविधाओं का बड़े लेवल पर विस्तार किया था। यह प्रोजेक्ट उस वक्त के अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट के &#039;वर्क्स प्रोग्रेस एडमिनिस्ट्रेशन&#039; प्रोग्राम के सपोर्ट से शुरू हुआ था, जिसके तहत शहर में 11 नए हाई-टेक पब्लिक स्विमिंग पूल बनाए गए थे। ये पूल अपने मॉडर्न डिजाइन और क्लोरीनीकरण (पानी साफ करने की तकनीक) के लिए मशहूर हुए और करीब 90 साल बाद आज भी न्यूयॉर्क के लोगों की सेवा कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:34 +0530</pubDate>
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<title>Venezuela Earthquake: तबाही के बीच फिर कांपी धरती, 1500 मौतों के बाद तीसरे झटके से दहला देश</title>
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<description><![CDATA[ वेनेजुएला के तटीय इलाके में एक बार फिर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं, जिसने लोगों को पूरी तरह डरा दिया है। यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर के मुताबिक, अरागुआ के तट के पास समुद्र में 5.6 तीव्रता का भूकंप आया। इस भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 30 किलोमीटर की गहराई में था। यह नया झटका ऐसे नाजुक समय पर आया है जब देश पहले से ही दो बेहद विनाशकारी भूकंपों की भयंकर मार झेल रहा है, और चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार मची हुई है।मलबे में जिंदगी की उम्मीदें कम, 51 हजार लोग लापताआपको बता दें कि इससे पहले बीते बुधवार को वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो बैक-टू-बैक बड़े भूकंप आए थे, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस महाविपदा में अब तक लगभग 1,500 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 51,000 लोग लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि भूकंप के शुरुआती 72 घंटे बीत जाने के बाद अब मलबे से लोगों के जिंदा बचने की उम्मीदें लगातार कम होती जा रही हैं। आशंका है कि मलबे के नीचे अभी भी हजारों लोग दबे हो सकते हैं, जिससे मौतों का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। इसे भी पढ़ें: नक्शे से मिटा देंगे, Donald Trump की धमकी के बाद US-Iran में ताबड़तोड़ Missile Attackइकनॉमी को तगड़ा झटकासंयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के शुरुआती असेसमेंट के मुताबिक, इस भयंकर आपदा से वेनेजुएला के पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है। कंक्रीट के मलबे में तब्दील हुई बड़ी-बड़ी इमारतों और तबाह हुई सड़कों के कारण देश को करीब 6.7 अरब डॉलर, जो कि देश की जीडीपी का लगभग 6% है, का सीधा नुकसान हुआ है। हालांकि, इस मुश्किल घड़ी में इंटरनेशनल लेवल पर मदद भी पहुंचने लगी है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बताया कि अमेरिका ने तुरंत सर्च एंड रेस्क्यू टीम के साथ दवाइयां और मानवीय सहायता भेजी है। इसे भी पढ़ें: China के 109 मंजिला &#039;बुर्ज खलीफा&#039; से टकराया विमान, उड़ गए परखच्चे, Videoग्राउंड जीरो पर हालात खराबइस बीच, वेनेजुएला की कार्यकारी राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने मुश्किल वक्त में साथ देने के लिए संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और आईएमएफ की एमडी क्रिस्टालिना जॉर्जीवा को थैंक्स कहा है। लेकिन दूसरी तरफ, ग्राउंड जीरो यानी जमीन पर हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट पूरी तरह ठप होने के कारण राहत और बचाव कार्यों में काफी दिक्कत आ रही है। वहीं, बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते स्थानीय लोग सरकार के लचर मैनेजमेंट से काफी नाराज और परेशान हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:34 +0530</pubDate>
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<title>Seychelles ने PM Modi को सर्वोच्च सम्मान Guardian of the Blue Horizon से नवाजा</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट में बेहतरीन लीडरशिप के लिए सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान &#039;गार्जियन ऑफ द बीच होराइजन&#039; (Guardian of the Blue Horizon) से नवाजा गया है। यह बड़ा सम्मान उन्हें ग्रीन डेवलपमेंट और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने की दिशा में उनके लंबे समय से किए जा रहे शानदार प्रयासों के लिए दिया गया है। भारत ने पिछले कुछ सालों में क्लाइमेट चेंज, रिन्यूएबल एनर्जी और सतत विकास को लेकर ग्लोबल लेवल पर अपनी एक मजबूत और एक्टिव पहचान बनाई है।मई 2026 में मिला था एग्रिकोला मेडलआपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहा गया हो। अभी हाल ही में, मई 2026 में संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन ने भी उन्हें सम्मानित किया था। दुनिया भर में फूड सिक्योरिटी को मजबूत करने, एग्रीकल्चर सेक्टर में बड़े बदलाव लाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को एग्रिकोला मेडल दिया गया था।राष्ट्रपति पैट्रिक बोले, भारत और सेशेल्स की दोस्ती अटूट हैसेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी ने पीएम मोदी के साथ अपनी मीटिंग को बेहद खास बताया। उन्होंने कहा, &quot;प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठकें करना मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है। हमारी बातचीत काफी व्यापक और फ्यूचर-ओरिएंटेड रही, जो दोनों देशों के बीच गहरी दोस्ती और भरोसे को दिखाती है।&quot; दोनों देशों के बीच डिप्लोमैटिक रिलेशंस की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर सेशेल्स और भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित और समृद्ध बनाने के अपने विजन को फिर से दोहराया है।




Prime Minister Narendra Modi has been conferred the &#039;Guardian of the Blue Horizon&#039;, Seychelles&#039; highest distinction for leadership in environmental conservation and sustainable development. The award acknowledges PM Modi&#039;s long-standing push for sustainable growth and his green… pic.twitter.com/mgqCkmT8oD— ANI (@ANI) June 28, 2026




इसे भी पढ़ें: New York के Mayor Zohran Mamdani का अनोखा अंदाज, सूट-टाई में पूल में कूदे, Video हुआ Viral140 करोड़ भारतवासियों को समर्पित किया सम्मानइस भव्य स्वागत और सम्मान से गदगद पीएम मोदी ने राष्ट्रपति हर्मिनी का दिल से शुक्रिया अदा किया। पीएम मोदी ने कहा, &quot;यह सम्मान मिलना मेरे और 140 करोड़ भारतवासियों के लिए बहुत गर्व की बात है। मैं इस अवॉर्ड को बेहद विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं और इसे दुनिया के उन सभी देशों को समर्पित करता हूं जो क्लाइमेट चेंज की चुनौती से मजबूती से लड़ रहे हैं और पर्यावरण को बचाना अपनी जिम्मेदारी समझते हैं।&quot;पीएम मोदी ने कहा, हिंद महासागर हमारा साझा घरप्रधानमंत्री ने भारत और सेशेल्स के पुराने रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि हिंद महासागर ने सदियों से हमारे संबंधों को मजबूत किया है। इसकी लहरों ने हमारे व्यापार, संस्कृति और आपसी रिश्तों को आगे बढ़ाया है। उन्होंने साफ कहा कि हिंद महासागर हम सबका एक साझा घर है और इसकी सुरक्षा और तरक्की हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। यही सोच भारत के &#039;महासागर विजन&#039; का असली बेस है। इसे भी पढ़ें: Venezuela Earthquake: तबाही के बीच फिर कांपी धरती, 1500 मौतों के बाद तीसरे झटके से दहला देशपीएम मोदी ने कहा, साइज मैटर नहीं करता, आपसी सम्मान जरूरी हैपीएम मोदी ने अपनी सेशेल्स यात्रा का मैसेज पूरी तरह क्लियर करते हुए कहा कि भारत एक ऐसे हिंद महासागर का सपना देखता है, जहां समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ इकोनॉमिक ग्रोथ भी बढ़े। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी पार्टनरशिप देश के साइज पर नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और भरोसे पर टिकी है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को अपने तीन दिवसीय दौरे पर सेशेल्स पहुंचे हैं, जहां राजधानी विक्टोरिया में खुद राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने उनका ग्रैंड वेलकम किया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:36:33 +0530</pubDate>
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<title>वेनेज़ुएला भूकम्प: पीड़ितों की मदद के लिए सामूहिक प्रयास की अपील</title>
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<description><![CDATA[ वेनेज़ुएला में आए दो विनाशकारी भूकम्पों के बाद, संयुक्त राष्ट्र की टीमें तेज़ी से राहत प्रयासों में जुट गई हैं. भूकम्पों में, राजधानी कराकस में कई इमारतें ढह गई हैं और ऐसी आशंका है कि अनेक लोग मलबे में दबे हो सकते हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:32 +0530</pubDate>
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<title>वेनेज़ुएला भूकम्प: संयुक्त राष्ट्र ने बचाव एवं राहत दल किए तैनात</title>
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<description><![CDATA[ वेनेज़ुएला में गुरूवार को आए दो शक्तिशाली भूकम्पों से जान-माल की भीषण हानि हुई है, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ प्रभावित आबादी तक मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए तैयारियों में जुट गई हैं. इस आपदा में कम से कम 164 लोगों की जान गई है, बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं, राजधानी कराकस समेत अन्य इलाक़ों में बड़े पैमाने पर इमारतों व बुनियादी ढाँचों को नुक़सान पहुँचा है और मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका है. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:32 +0530</pubDate>
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<title>वेनेज़ुएला भूकम्प: 1,400 की मौत, मलबे में जीवितों की तलाश में जुटे बचाव दल</title>
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<description><![CDATA[ वेनेज़ुएला में दो शक्तिशाली भूकम्पों से हुई व्यापक तबाही के बाद जैसे-जैसे समय बीत रहा है, मलबे में दबे लोगों को ढूंढने और बाहर निकालने के लिए प्रयासों मे तेज़ी लाई जा रही है. संयुक्त राष्ट्र के समन्वय व समर्थन में 27 देशों से 2 हज़ार से अधिक बचावकर्मियों को आपदा-प्रभावित इलाक़ों में तैनात किया गया है. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:31 +0530</pubDate>
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<title>वेनेज़ुएला भूकम्प: लोग अपने घर में वापिस लौटने से डर रहे हैं</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने बताया है कि वेनेज़ुएला में आए शक्तिशाली भूकम्पों के बाद बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता आवश्यकताएँ उपजी हैं, जिसके मद्देनज़र राहत प्रयासों में तेज़ी लाई जानी होगी. इस आपदा में अब तक 235 लोगों के मारे जाने और बड़ी संख्या में घायल होने की ख़बर है और लगभग 68 लाख लोग प्रभावित हुए हैं.  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:31 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन: सैन्य टकराव में तेज़ी पर चिन्ता, युद्धविराम के लिए तुरन्त वार्ता का आग्रह</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने आगाह किया है कि यूक्रेन, रूसी सैन्य बलों के ड्रोन व मिसाइल हमलों के बीच हिंसक टकराव में आई तेज़ी के एक ख़तरनाक दौर से गुज़र रहा है और यदि स्थिति ऐसे ही बनी रही तो और अधिक बर्बादी होने की आशंका है और रूसी महासंघ भी इसकी चपेट में होगा. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:28 +0530</pubDate>
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<title>योरोप में भीषण गर्मी का क़हर, अनेक रिकॉर्ड टूटे, रैड ऐलर्ट जारी</title>
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<description><![CDATA[ योरोप इस समय भीषण गर्मी की अभूतपूर्व लहर की चपेट में है. फ़्रांस और स्पेन ने जून महीने के सबसे गर्म दिनों का रिकॉर्ड दर्ज किया है, जबकि जर्मनी, स्विट्ज़रलैंड और अन्य देशों में रैड ऐलर्ट जारी किए गए हैं. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने आगाह किया है कि अगले दो सप्ताह तक तापमान सामान्य से 3 से 10 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है, जिससे गर्मी का दबाव (Heat stress), जंगलों में आग, सूखे और चरम मौसमी घटनाओं का ख़तरा बढ़ेगा. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:27 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन: हिंसक टकराव में फँसे हज़ारों लोगों तक सहायता पहुँचाना, एक बड़ी चुनौती</title>
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<description><![CDATA[ युद्धग्रस्त यूक्रेन के दक्षिणी हिस्से में लड़ाई के अग्रिम मोर्चे पर रह रहे हज़ारों आम नागरिकों को भोजन, मेडिकल देखभाल समेत अन्य आवश्यकताओं की क़िल्लत से जूझना पड़ रहा है और उन्हें वहाँ से सुरक्षित बाहर निकालने के मार्ग सिकुड़ते जा रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>यूक्रेन:, हिंसक, टकराव, में, फँसे, हज़ारों, लोगों, तक, सहायता, पहुँचाना, एक, बड़ी, चुनौती</media:keywords>
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<title>दुनिया भर में इबोला के 1000 मामले, DRC में मरीज़ों तक पहुँचने की कोशिशें</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया भर में इबोला के पुष्ट मामले 1,000 को पार करने के साथ ही, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के पूर्वी हिस्से में लगभग तीस लाख बच्चे और किशोर ख़तरे में हैं. वहीं दूसरी ओर, मौजूदा प्रकोप के केन्द्र के पास स्थित जेल के क़ैदियों के इलाज के लिए भी प्रयास तेज़ किए गए हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:24 +0530</pubDate>
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<title>डीआर काँगो: रोकथाम प्रयासों के मुक़ाबले तेज़ी से फैलता इबोला, दाँव पर लगी ज़िन्दगियाँ</title>
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<description><![CDATA[ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है कि काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य के पूर्वी हिस्से में इबोला वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए जिस गति से प्रयास किए जा रहे हैं, यह बीमारी उससे कहीं अधिक रफ़्तार से फैल रही है. हालांकि पिछले कुछ दिनों में संक्रमित व्यक्तियों की स्वास्थ्य देखभाल और सामुदायिक सम्पर्क व जागरूकता में प्रगति दर्ज की गई है. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:23 +0530</pubDate>
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<title>डीआर काँगो: &amp;apos;अभूतपूर्व&amp;apos; गति से फैल रहा है इबोला, पहले महीने में रिकॉर्ड संक्रमण मामले</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता एजेंसियों ने आगाह किया है कि काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआर काँगो) के पूर्वी हिस्से में इबोला वायरस, अभूतपूर्व रफ़्तार से स्थानीय समुदायों को अपनी चपेट में ले रहा है, जिसकी वजह से आम लोग भय और जोखिम के साए में अपना जीवन गुज़ार रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:23 +0530</pubDate>
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<title>सूडान युद्ध में यौन हिंसा के क्रूर और बड़े पैमाने पर प्रयोग को लेकर चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने कहा है कि सूडान में अप्रैल 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद से, युद्ध से जुड़ी यौन हिंसा व्यापक और बेहद क्रूर रूप धारण कर चुकी है, जिसके पीड़ितों, उनके परिवारों और समुदायों पर गहरे व दीर्घकालिक प्रभाव पड़ रहे हैं. ]]></description>
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<title>इबोला प्रकोप में महिलाएँ और लड़कियाँ सबसे अधिक प्रभावित</title>
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<description><![CDATA[ इबोला दुनिया की सबसे घातक बीमारियों में से एक है, जिसमें संक्रमित होने वाले लगभग आधे लोगों की मृत्यु हो जाती है. काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में फैले मौजूदा इबोला प्रकोप के लिए ज़िम्मेदार बुंडिबुग्यो वायरस के विरुद्ध अभी न तो कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध है और न ही प्रभावी उपचार, जिससे हालात पर लगातार गम्भीर चिन्ता बरक़रार है. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:22 +0530</pubDate>
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<title>अफ़ग़ानिस्तान: सूखा, भूख, महिला अधिकारों पर पाबन्दी, निरन्तर बिगड़ते हालात</title>
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<description><![CDATA[ कल्पना कीजिए कि आपके परिवार में 9 सदस्य हैं, जिन्हें भोजन के रूप में पानी में उबाले गए आलू और अन्य बची-खुची सामग्री से ही गुज़ारा करना पड़ रहा है. अफ़ग़ानिस्तान में अत्यधिक कठिन हालात में गुज़र-बसर कर रहे लोगों के लिए यह एक कटु वास्तविकता है, जो जलवायु परिवर्तन, सूखे, कुपोषण, महिला अधिकारों पर पाबन्दी समेत अन्य अनेक चुनौतियों से जूझ रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:19 +0530</pubDate>
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<title>म्याँमार: वैश्विक उदासीनता ने आम लोगों की पीड़ा को और बढ़ाया</title>
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<description><![CDATA[ म्याँमार में हिंसक टकराव व अशान्ति से सम्बन्धी हिंसा के पाँच साल बाद भी स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है और अन्तरराष्ट्रीय सहायता में आ रही कमी के कारण, लाखों लोगों की पीड़ा दीगर बढ़ रही है.  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>UNHCR &#45; शरणार्थियों की ख़ातिर, सुरक्षा, गरिमा और समावेशन का आहवान</title>
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<description><![CDATA[ विश्व शरणार्थी दिवस 2026 पर संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने नई दिल्ली में शरणार्थियों, संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों, नागरिक समाज और अन्य साझीदारों के साथ मिलकर जबरन विस्थापित लोगों के साहस और योगदान का सम्मान किया तथा सुरक्षित शरण पाने के उनके अधिकार के प्रति समर्थन दोहराया. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>इंडोनेशिया: विश्वसनीय और मज़बूत ऊर्जा प्रणाली विकसित करने की राह पर</title>
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<description><![CDATA[ ऊर्जा की बढ़ती क़ीमतों, आपूर्ति में व्यवधान और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, दुनिया भर के देशों के लिए चिन्ता का एक प्रमुख विषय बन गई है. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ, इंडोनेशिया में अधिक विश्वसनीय और मज़बूत ऊर्जा प्रणाली विकसित करने में सहयोग कर रही हैं, जिससे न केवल ऊर्जा सुरक्षा बढ़ रही है बल्कि स्थानीय समुदायों को बदलती जलवायु के प्रभावों के अनुरूप ढलने में भी मदद मिल रही है. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:18 +0530</pubDate>
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<title>मध्य प्रदेश: टिकाऊ खेती से बदली किसान परिवार की ज़िन्दगी</title>
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<description><![CDATA[ अनियमित बारिश, मिट्टी की घटती उर्वरता और महंगे उर्वरकों के कारण मध्य प्रदेश के ग्रामीण परिवारों के लिए खेती लगातार कठिन होती जा रही है. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम - UNDP की एक समुदाय-आधारित परियोजना, लघु अनुदान कार्यक्रम के समर्थन से, किसानों को जैविक खेती अपनाने, जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और टिकाऊ आजीविका बनाने में मदद कर रही है. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:18 +0530</pubDate>
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<title>वैश्विक ऊर्जा संकट का सामना करने में भारत की मज़बूती</title>
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<description><![CDATA[ अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कहा है कि मौजूदा ऊर्जा संकट का असर पूरी दुनिया में हुआ है और कोई भी देश इस वैश्विक संकट से अछूता नहीं रहा है. प्रभावित होने वाले देशों में भारत भी है मगर उसने इस झटके का सामना मज़बूती से किया है जिसमें उसके पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार ने ठोस मदद की है. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:17 +0530</pubDate>
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<title>भारत: विश्व बैंक समर्थित नई कृषि तकनीक से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन</title>
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<description><![CDATA[ विश्व बैंक समूह की पहल, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में किसानों को डिजिटल सेवाओं, वित्त और बाज़ारों से जोड़ने के साथ-साथ, कृषि एवं खाद्य क्षेत्र में रोज़गार के नए अवसर पैदा कर रही है. धान की सीधी बुवाई से कम पानी और लागत में अधिक पैदावार हो रही है और कार्बन उत्सर्जन भी घट रहा है. अब इस पद्धति को पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर अपनाने की योजना है. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:17 +0530</pubDate>
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<title>भारत: जल सुरक्षा है रोज़गार और समृद्धि का आधार</title>
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<description><![CDATA[ जल भारत की अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा, रोज़गार और विकास के लिए बेहद ज़रूरी है, मगर बढ़ती माँग, सीमित संसाधनों और जलवायु परिवर्तन से, देश के जल स्रोतों पर दबाव बढ़ रहा है. विश्व बैंक समूह, भारत को जल एवं स्वच्छता सेवाएँ बेहतर बनाने, सिंचाई का आधुनिकीकरण करने, बाढ़ व सूखे से निपटने और निवेश जुटाने में सहयोग दे रहा है, ताकि करोड़ों लोगों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:17 +0530</pubDate>
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<title>&amp;apos;इसराइल का फ़लस्तीन में जनसंहार, बच्चों पर जानबूझकर अत्याचार जारी&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अन्तरराष्ट्रीय जाँच आयोग ने बताया है कि ग़ाज़ा पट्टी और पश्चिमी तट में इसराइली सुरक्षा बलों द्वारा सोचे-समझे ढंग से फ़लस्तीनी बच्चों को निशाना बनाना जारी है जिसके परिणामस्वरूप जनसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध और युद्ध अपराधों को अंजाम दिया गया. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:14 +0530</pubDate>
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<title>होर्मुज़ संकट: हज़ारों समुद्री नाविकों को सुरक्षित बाहर निकालने की मुहिम</title>
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<description><![CDATA[ अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने बताया है कि मध्य पूर्व संकट की वजह से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में फँसे 11 हज़ार से अधिक नाविकों को इस जलक्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकालने की कार्रवाई की जा रही है. इस बीच, आपात स्थिति से जूझ रहे एक समुद्री नाविक ने बताया है कि उन्हें किस तरह से निरन्तर हमले के जोखिम का सामना करना पड़ता है.  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:35:13 +0530</pubDate>
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<media:keywords>होर्मुज़, संकट: हज़ारों, समुद्री, नाविकों, को, सुरक्षित, बाहर, निकालने, की, मुहिम</media:keywords>
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<title>Indus Waters Treaty | भारत के कड़े रुख के बाद पाकिस्तान की &amp;apos;जल युद्ध&amp;apos; की धमकी, कहा&#45; कर सकते हैं युद्ध | India&#45;Pakistan Relations</title>
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<description><![CDATA[ भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने जल-बंटवारे समझौते (Indus Waters Treaty) को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है। नई दिल्ली द्वारा सिंधु जल संधि को सस्पेंड रखने के फैसले पर अडिग रहने के बाद, अब पाकिस्तान की ओर से &#039;जल युद्ध&#039; (Water War) की बयानबाजी शुरू हो गई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत को सीधे तौर पर युद्ध की धमकी दी है। इसे भी पढ़ें: Qatar Gas Facility Fire | रास लफ़्फान औद्योगिक क्षेत्र के गैस टर्मिनल में भीषण विस्फोट, 54 घायल और 18 लापता&quot;पानी की सप्लाई रुकी तो युद्ध मुमकिन&quot; — पाकिस्तानी रक्षा मंत्रीएक पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल से बात करते हुए रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि जल सुरक्षा पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने भारत को चेतावनी देते हुए कहा, &quot;अगर हमें लगा कि भारत की हरकतों से हमारी पानी की सप्लाई को कोई खतरा है, तो इस्लामाबाद युद्ध का रास्ता चुन सकता है।&quot; विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की तरफ से आया यह तीखा बयान दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध को और अधिक बढ़ा सकता है। भारत का फैसला नहीं बदलाभारत का कहना है कि 1960 की सिंधु जल संधि को सस्पेंड करना पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले का सीधा नतीजा है, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। नई दिल्ली ने अपना रुख साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान अपनी ज़मीन से चल रहे आतंकी समूहों के खिलाफ ठोस और वेरिफ़िएबल कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि सस्पेंड रहेगी।अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि जब तक सीमा पार आतंकवाद की चिंता बनी रहेगी, तब तक सामान्य सहयोग जारी नहीं रह सकता। इसलिए, भारत सरकार ने इस्लामाबाद की उस मांग को ठुकरा दिया है जिसमें सुरक्षा मुद्दों को हल किए बिना समझौते को बहाल करने की बात कही गई थी।नहरें सूख रही हैं, इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव हैहालांकि पाकिस्तान ने भारत पर &quot;पानी को हथियार बनाने&quot; का आरोप लगाया है, लेकिन सरकारी आंकड़े पाकिस्तान के अंदर ही एक बहुत बड़ी समस्या की ओर इशारा करते हैं - सालों से पानी का खराब मैनेजमेंट, अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और अनसुलझे आंतरिक विवाद।देश अभी हाल के सालों में पानी की सबसे गंभीर कमी का सामना कर रहा है, जिससे लाखों लोग प्रभावित हैं, खासकर सिंध और बलूचिस्तान में। खेती वाले इलाके, जो सिंचाई के लिए बहुत ज़्यादा पानी पर निर्भर हैं, पानी की उपलब्धता में लगातार कमी के कारण संघर्ष कर रहे हैं।हालांकि, इन लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक कमियों को दूर करने के बजाय, पाकिस्तान के नेतृत्व ने भारत की ओर ध्यान भटकाने का फैसला किया है। पाकिस्तान के सिंध सिंचाई विभाग का सरकारी डेटा चिंताजनक तस्वीर पेश करता है।कई बड़ी नहरें पानी की भारी कमी के साथ चल रही हैं, जिससे किसान और स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। महत्वपूर्ण सुक्कुर बैराज में भी पानी का स्तर तेज़ी से गिरा है, जिससे फसल के नुकसान और आर्थिक नुकसान की चिंता बढ़ गई है।स्थानीय नेताओं और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह संकट केवल बाहरी कारणों से नहीं, बल्कि खराब प्लानिंग और आंतरिक वितरण विवादों के कारण और भी बदतर हो रहा है। इसे भी पढ़ें: World Cup में Eloy Room का &#039;अविश्वसनीय&#039; Record, 15 Saves कर Ecuador को बराबरी पर रोका.पाकिस्तान के ख्वाजा को जानकारी नहींख्वाजा आसिफ ने भारत पर नदियों के बहाव में हेरफेर करने और जानकारी छिपाने का आरोप लगाया। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि उनके पास पिछले एक साल में हुए घटनाक्रमों के बारे में ताज़ा जानकारी नहीं थी। इस बात को मानने से इस्लामाबाद के आरोपों के आधार पर सवाल उठने लगे हैं, खासकर तब जब पाकिस्तान देश में पानी की बिगड़ती स्थिति से जूझ रहा है। पाकिस्तान की धमकियों के बावजूद, भारत ने अपना रुख बदलने का कोई संकेत नहीं दिया है। नई दिल्ली का कहना है कि सिंधु जल संधि पर भविष्य में होने वाली किसी भी बातचीत को आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई से जोड़ा जाना चाहिए। Stay updated with International
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 09:14:18 +0530</pubDate>
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<title>Uproar in Dhaka | ढाका में भगवान राम की तस्वीर के अपमान के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों हिंदू, 72 घंटे का अल्टीमेटम</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश की राजधानी ढाका सहित कई इलाकों में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है। रंगपुर में भगवान राम की सबसे ऊंची मूर्ति बनाने का विरोध कर रहे कट्टरपंथी इस्लामी समूहों द्वारा प्रभु श्रीराम की तस्वीर के कथित अपमान के बाद बांग्लादेश के हिंदू समुदाय में भारी आक्रोश है। शुक्रवार को हजारों की संख्या में हिंदुओं ने ढाका की सड़कों पर उतरकर विशाल मशाल जुलूस निकाला और &#039;जय श्री राम&#039; के नारे लगाते हुए दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Uddhav के हर वर पर Shinde का जोरदार पलटवार, Balasaheb Thackeray की विरासत को लेकर जबरदस्त महासंग्रामबांग्लादेश में यह नया तनाव उत्तरी गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी में भगवान राम की 81 फुट ऊंची मूर्ति का निर्माण कार्य रोके जाने के कुछ दिनों बाद पैदा हुआ है। इस प्रोजेक्ट को चलाने वाली श्री श्री राधा गोविंद मंदिर समिति का दावा है कि अधिकारियों को इस्लामी समूहों से धमकियां मिली थीं। इस घटना ने मुस्लिम-बहुल बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं।बांग्लादेश में हिंदू विरोध प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?हालांकि मामला दर्ज कर लिया गया है, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। शुक्रवार को कई हिंदू संगठनों और छात्रों ने प्रमुख शाहबाग चौराहे पर इकट्ठा होकर नेशनल प्रेस क्लब तक मार्च किया। विरोध प्रदर्शन का आह्वान हिंदू महाजोत ने किया था। संगठन ने नेशनल प्रेस क्लब के सामने मानव श्रृंखला भी बनाई। एक अन्य समूह ने ढाका रिपोर्टर्स यूनिटी (DRU) बिल्डिंग के पास विरोध प्रदर्शन किया। रंगपुर में, पुलिस द्वारा हिंदुओं को प्रदर्शन करने से रोकने के बाद मामूली झड़प हुई।प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस महीने की शुरुआत में गाइबांधा में एक प्रदर्शन के दौरान इस्लामी भीड़ ने भगवान राम की तस्वीर पर जूता रखकर उसका अपमान किया था। इसे भी पढ़ें: Brazil vs Haiti World Cup | &#039;रॉकी का श्राप&#039; और ब्राजीलियाई अंधविश्वास! फुटबॉल फैंस ने क्यों नहीं छुई फिलाडेल्फिया में रॉकी की मूर्ति?तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP सरकार पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए, प्रदर्शनकारियों ने इसमें शामिल लोगों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया। मांग पूरी न होने पर हिंदू समुदाय ने और रैलियां और विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। शनिवार को धार्मिक मामलों के मंत्रालय को एक ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।इसके अलावा, हिंदू महाजोत ने कहा कि अगर भगवान राम की मूर्ति का निर्माण फिर से शुरू करने की अनुमति नहीं दी गई, तो वे बांग्लादेश के सभी 64 जिलों में एक-एक करके राम मंदिर बनाएंगे। शनिवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी रहने की संभावना है, क्योंकि पूजा समारोहों के लिए राष्ट्रीय समिति ने देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है।राम मूर्ति का निर्माण क्यों रोका गया है? पलाशबाड़ी में एक मंदिर परिसर के हिस्से के तौर पर भगवान राम की मूर्ति बनाई जा रही थी। लगभग 80% काम पूरा हो चुका है।इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 22 करोड़ बांग्लादेशी टका (लगभग 15.6 करोड़ रुपये) है। इसमें भगवान कृष्ण की 50 फुट ऊंची और भगवान शिव की 30 फुट ऊंची मूर्ति भी शामिल है। श्री श्री राधा गोविंद मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिदास चंद्र दास ने बताया कि इस्लामी समूहों द्वारा प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों को धमकी दिए जाने के बाद काम रोक दिया गया। एक कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक ने तो बुलडोज़र से मूर्ति को गिराने की धमकी भी दी थी।दास ने मीडिया से कहा, &quot;हम डरे हुए हैं और इसी डर की वजह से हमने काम रोक दिया है।&quot; उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से दखल देने की अपील भी की। दास ने कहा कि यह मूर्ति सनातन धर्म की प्रमुख हस्तियों में से एक के सम्मान में बनाई जा रही थी।मंदिर समिति के सलाहकार श्यामलाल कुमार महंता ने एक बयान में कहा कि काम रोकने का फैसला &quot;सामाजिक सद्भाव बनाए रखने&quot; के लिए लिया गया था।समिति ने कहा, &quot;हम कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए यह काम रोक रहे हैं। हम किसी विवाद का कारण नहीं बनना चाहते और न ही किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना चाहते हैं।&quot; बांग्लादेश में हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय हैं, जो देश की आबादी का लगभग 8% हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पिछले मुहम्मद यूनुस शासनकाल के दौरान आए संकट के बाद हिंदुओं को निशाना बनाए जाने की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है।फरवरी में पदभार संभालने वाले रहमान ने बार-बार कहा है कि बांग्लादेश में हर किसी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। प्रधानमंत्री के तौर पर अपने पहले राष्ट्रीय संबोधन में, रहमान ने स्पष्ट रूप से कहा कि धर्म व्यक्तिगत मामला है, लेकिन देश &quot;सभी का है&quot;।हालांकि, इस साल 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच सांप्रदायिक हिंसा की लगभग 133 घटनाएं दर्ज की गई हैं। Read Latest
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:46 +0530</pubDate>
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<title>Israeli Airstrikes Lebanon | सीज़फायर के बावजूद इज़राइल ने लेबनान पर किए हवाई और ड्रोन हमले , 5 लोगों की मौत</title>
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<description><![CDATA[ इज़राइल और ईरान समर्थित चरमपंथी गुट हिज़्बुल्लाह के बीच लंबे कूटनीतिक प्रयासों के बाद हुए सीज़फायर (युद्धविराम) को शुरू हुए अभी कुछ ही घंटे बीते थे कि दक्षिणी लेबनान एक बार फिर बमबारी से दहल उठा। लेबनान की सरकारी मीडिया के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि शनिवार को इज़राइल द्वारा किए गए हवाई और ड्रोन हमलों में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई। इस ताज़ा हिंसा ने बेहद मुश्किलों से हुए इस शांति समझौते के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।लेबनान की नेशनल न्यूज़ एजेंसी (NNA) ने बताया कि इज़राइली लड़ाकू विमानों और ड्रोन ने रात भर नबातीह इलाके में हमले किए, जिससे रिहायशी इमारतें और घर नष्ट हो गए। भोर होने से पहले तोपखाने से भी नबातीह और आसपास के इलाकों को निशाना बनाया गया। ये हमले इज़राइल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह समूह के बीच लड़ाई रोकने पर सहमति बनने के कुछ ही समय बाद हुए। इससे पहले सीमा पार लड़ाई में तेज़ी आई थी, जिससे व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की चिंता बढ़ गई थी।अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सीज़फायर शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार शाम 4 बजे (1300 GMT) से कुछ समय पहले लागू हुआ। इस समझौते की पुष्टि इज़राइल के एक वरिष्ठ अधिकारी और हिज़्बुल्लाह के दो सूत्रों ने अलग-अलग रॉयटर्स से बात करते हुए की।यह समझौता अमेरिका और कतर की कूटनीतिक कोशिशों से हुआ, जिसमें ईरान का भी समर्थन था। बातचीत में शामिल अधिकारियों ने सीज़फायर को लेबनान के दक्षिणी मोर्चे को स्थिर करने और क्षेत्र में चल रही व्यापक कूटनीतिक पहलों की रक्षा करने की कोशिश बताया।यह समझौता इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच हाल ही में हुई सबसे घातक झड़पों में से एक के बाद हुआ। खबरों के अनुसार, लेबनान में इज़राइली हमलों में लगभग 40 लोग मारे गए, जबकि हिज़्बुल्लाह के हमलों में चार इज़राइली सैनिक मारे गए।हालांकि, सीज़फायर शुरू से ही कमज़ोर रहा है। लेबनान के सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि सीज़फायर लागू होने के शुरुआती घंटों में भी इज़राइली हमले जारी रहे।इज़राइली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा कि इज़राइली सेना के पास खतरों का जवाब देने की पूरी ऑपरेशनल आज़ादी है और उन्होंने ब्यूफोर्ट कैसल और अली ताहिर रिज सहित कई इलाकों में ऑपरेशन जारी रखा।उन्होंने हिज़्बुल्लाह पर सैन्य बुनियादी ढांचे को बचाने और सीज़फायर समझौतों का उल्लंघन करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।हिंसा ने व्यापक क्षेत्रीय कूटनीति को भी मुश्किल बना दिया है। स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू होने वाली है। इससे पहले लेबनान में फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण इन वार्ताओं को टाल दिया गया था, क्योंकि चिंता थी कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के भविष्य से जुड़ी बातचीत पटरी से उतर सकती है। Stay updated with International
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:46 +0530</pubDate>
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<title>आसमानी रंग हुआ पुराना, Donald Trump ने American Flag के रंगों में रंगवाया नया Air Force One</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए सिरे से तैयार किए गए ‘एयर फोर्स वन’ विमान का अनावरण किया जिसे अगले महीने की शुरुआत से राष्ट्रपति की आधिकारिक यात्राओं के लिए इस्तेमाल किए जाने से पहले परीक्षण उड़ानों पर भेजा जाएगा।
 यह विमान पहले कतर के स्वामित्व में था और इसे व्यापक रूप से नवीनीकृत करके आधुनिक बनाया गया है।
 बोइंग 747-8आई विमान को अमेरिकी ध्वज के रंगों- लाल, सफेद और गहरे नीले रंग में रंगा गया है, जबकि पुराना विमान हल्के आसमानी रंग का है और उसका इस्तेमाल अमेरिका के राष्ट्रपतियों द्वारा लगभग 40 वर्षों से किया जाता रहा है।
नए विमान की ‘टेल’ पर अमेरिकी राष्ट्रीय ध्वज का चित्र अंकित किया गया है।
 ट्रंप ने यहां के निकट ‘ज्वाइंट बेस एंड्रूज’ में एक समारोह में कहा, ‘‘सबसे बड़ा अंतर इसके आकार में है। यह लगभग दोगुना बड़ा हैं।’’
 ‘ज्वाइंट बेस एंड्रूज’ राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान का मुख्य ठिकाना है।
 ट्रंप ने कहा, ‘‘ये नए रंग हैं- लाल, सफेद और नीला। हमें हल्का आसमानी रंग भी पसंद था, लेकिन अब बदलाव का समय आ गया था... मुझे अमेरिकी ध्वज के रंग पसंद हैं।’’
 अमेरिकी वायु सेना ने कहा कि यह विमान जल्द ही ‘‘परीक्षण उड़ानें’’ भरेगा जो राष्ट्रपति के परिवहन के लिए उपयोग किए जाने से पहले इसकी अंतिम परीक्षा होगी।
 ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यह विमान कतर के अमीर (कतर के शासक) से इसलिए प्राप्त करने की पहल की क्योंकि बोइंग के एयर फोर्स वन प्रतिस्थापन कार्यक्रम में हो रही देरी से वह निराश थे। साथ ही, अमेरिका के राष्ट्रपति बेड़े के पुराने हो चुके विमानों की तुलना विदेशी सरकारों के अधिक आधुनिक विमानों से किए जाने की बातें भी लगातार बढ़ रही थीं।
 ट्रंप ने कहा, ‘‘मैंने अमीर से पूछा कि क्या हम इस बिल्कुल नए 747 विमान का उपयोग कर सकते हैं।  उन्होंने यह भी बताया कि इस विमान ने अपेक्षाकृत बहुत कम उड़ान घंटे पूरे किए हैं।
 ट्रंप ने कहा,  देखिए, कोई सामान्य राष्ट्रपति ऐसा नहीं करता। एक सामान्य राष्ट्रपति विमान जैसे मामलों से दूर रहना चाहता है लेकिन हमारे देश का प्रतिनिधित्व उचित ढंग से होना चाहिए।’’
 अमेरिकी वायु सेना ने कहा कि एयर फोर्स वन बनने वाले किसी भी विमान को कड़े सुरक्षा मानकों को पूरा करना होता है। वायु सेना के अनुसार, कतर से प्राप्त इस विमान में सुव्यवस्थित और अनुशासित इंजीनियरिंग प्रक्रिया के तहत संशोधन किए गए है।
 ट्रंप ने कहा कि नया एयर फोर्स वन अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर चार जुलाई को ‘नेशनल मॉल’’ में आयोजित समारोहों के दौरान हवाई प्रदर्शन करेगा।
 राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह अगले महीने तुर्किये में होने वाले नाटो के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए इस नए विमान का उपयोग करेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:45 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump की Great Leaders लिस्ट में PM Modi को चीन के President Xi Jinping के बराबर बताया</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जमकर प्रशंसा करते हुए उन्हें ‘‘महान नेता’’ और ‘‘बेहद सख्त व्यक्ति’’ बताया तथा कहा कि वह 12 साल से अधिक समय से सत्ता में हैं।
ट्रंप ने समाचार वेबसाइट ‘एक्सियोस’ के साथ एक साक्षात्कार में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और मोदी को प्रभाव, ताकत तथा नतीजे देने की क्षमता के लिहाज से अपने दो सबसे पसंदीदा महान नेता बताया।
ट्रंप से पूछा गया कि ताकत, प्रभाव और नतीजे देने की क्षमता के आधार पर उनके दो सबसे पसंदीदा नेता कौन हैं, तो उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि मोदी बहुत अच्छे हैं। भारत के कुछ बहुत अच्छे आंकड़े सामने आए हैं। वह युद्ध से दूर रहते हैं, जो समझदारी भरा कदम है। वह 1.5 अरब लोगों का नेतृत्व करते हैं। भारत वास्तव में सबसे बड़ा देश है और मोदी एक महान नेता हैं।’’
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार करता है लेकिन पहले भारत ‘‘हमसे अनुचित लाभ उठाता था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम उनके साथ बहुत व्यापार करते हैं लेकिन अब व्यापार निष्पक्ष तरीके से होता है। पहले वे वास्तव में हमसे बहुत अधिक लाभ उठाते थे। मैं इसके लिए उन्हें दोष नहीं देता। हमारे यहां ऐसे नासमझ नेता थे, जिन्होंने ऐसा होने दिया लेकिन हम अब भी काफी व्यापार करते हैं।’’
ट्रंप ने कहा, ‘‘वे इससे बहुत खुश नहीं हैं क्योंकि पहले उन्हें कहीं अधिक फायदा होता था।’’
अमेरिका के राष्ट्रपति ने शी को भी ऊंचे कद और आत्मविश्वास वाला नेता बताया।
ट्रंप ने कहा, ‘‘अगर इन दोनों में से किसी पर फिल्म बनाई जाए तो उनकी भूमिका निभाने के लिए हॉलीवुड में कोई उपयुक्त अभिनेता नहीं मिलेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मोदी का व्यक्तित्व बिल्कुल अलग है। उनका बहुत सम्मान किया जाता है। मैं असली मोदी को जानता हूं। वह बेहद सख्त व्यक्ति हैं। मुझे उनके व्यक्तित्व के कुछ ऐसे पहलुओं का पता चला, जिन्हें मैं पहले अच्छी तरह नहीं जानता था।’’
ट्रंप और मोदी ने बुधवार को फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकात की। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के पिछले एक साल से तनावपूर्ण रहे संबंधों को सुधारने के प्रयास के तहत यह बैठक की।
ट्रंप ने कहा कि वह कई वर्षों से भारत को देख रहे हैं और उन्होंने वहां नेताओं को अक्सर बदलते देखा है।
उन्होंने कहा, ‘‘कोई छह महीने तक पद पर रहता था तो कोई एक साल तक। फिर अचानक प्रधानमंत्री मोदी आए और वह 12 साल से अधिक समय से वहां हैं। उनकी स्थिति बहुत मजबूत है। वह बहुत शांत और संतुलित ढंग से काम करते हैं लेकिन फिर भी वह शांत व्यक्ति नहीं हैं। वह बेहद सख्त नेता हैं।’’
इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का उन नेताओं के तौर पर जिक्र किया जिन्हें वे पसंद करते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:45 +0530</pubDate>
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<title>BRICS देशों की Delhi में बड़ी बैठक, NSA Ajit Doval की अगुवाई में Security पर बनेगी नई रणनीति</title>
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<description><![CDATA[ भारत 22-23 जून 2026 को ब्रिक्स (BRICS) देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक की मेज़बानी करेगा। विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार को बताया कि इस बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक के दौरान ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख &#039;आज दुनिया के सामने मौजूद गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां&#039; विषय पर अपने विचार साझा करेंगे।  वे राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों के तेज़ी से बदलते स्वरूप और उभरते सुरक्षा खतरों में नई तकनीकों की भूमिका पर चर्चा करेंगे।इसे भी पढ़ें: डोभाल ने बुलाया, भारत आ रहे चीन के विदेश मंत्रीबयान के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार/प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख आतंकवाद-रोधी और सूचना व संचार तकनीकों के इस्तेमाल में सुरक्षा पर हाल ही में हुई ब्रिक्स संयुक्त कार्य समूहों की बैठकों के नतीजों की समीक्षा भी करेंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत 2026 में चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है; इससे पहले भारत ने 2012, 2016 और 2021 में इसकी अध्यक्षता की थी। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता &quot;लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण&quot; थीम पर आधारित है, जो प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 2025 के रियो शिखर सम्मेलन में बताए गए लोगों पर केंद्रित और मानवता को प्राथमिकता देने वाले दृष्टिकोण को दर्शाती है।इसे भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान समझौते में पाकिस्तान की भूमिका मोदी सरकार की विदेश नीति के लिए गंभीर झटका: कांग्रेसBRICS दुनिया के ग्यारह बड़े उभरते बाज़ारों और विकासशील देशों को एक साथ लाता है: ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ़्रीका और संयुक्त अरब अमीरात। यह वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के समकालीन मुद्दों, और वैश्विक राजनीतिक व आर्थिक गवर्नेंस से जुड़े मामलों पर बातचीत और सहयोग के लिए एक उपयोगी मंच के तौर पर काम करता है। BRICS 2026 की आधिकारिक वेबसाइट इस बात पर ज़ोर देती है कि कैसे BRICS का एजेंडा आपसी हित के आर्थिक मुद्दों पर शुरुआती फोकस से काफी आगे बढ़ गया है और अब यह तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है - राजनीति और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वित्त, तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान। आधिकारिक वेबसाइट ने बताया, &quot;BRICS सहयोग का दायरा कई वैश्विक मुद्दों पर लगातार बढ़ रहा है, जिनमें आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और वित्तीय स्थिति, टेलीकम्युनिकेशन, कृषि, श्रम और रोज़गार, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचा, व्यापार और WTO शामिल हैं।Stay updated with International News in Hindi https://www.prabhasakshi.com/international on Prabhasakshi   ]]></description>
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<title>पाकिस्तान पर भीषण ड्रोन अटैक, मारे गए भारत के कई दुश्मन!</title>
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<description><![CDATA[ भारत तो पाकिस्तान की खैर सेना और आतंकियों को तगड़ा सबक सिखाते हुए इन्हें 72 औरों के पास पहुंचा ही रहा है। लेकिन अब भारत के प्रति वफादारी दिखाने वाले अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के पालतू जिहादियों को ढेर करना शुरू कर दिया है। इस बार अफगानिस्तान ने पाकिस्तान से ऐसा बदला लिया है कि जिसकी तबाही को देखकर मुनीर और शहबाज ने इमरजेंसी मीटिंग बुला डाली और पाकिस्तान के कई इलाकों को हाईलाइट पर रखा गया है। दरअसल पाकिस्तान की एयरफोर्स ने हाल ही में अफगानिस्तान में कई हवाई हमले किए थे जिसमें कई आम लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि इसके जवाब में अफगानिस्तान ने भी हमले किए थे। लेकिन इन हमलों में पाकिस्तान को कम नुकसान हुआ था। मगर कुछ दिनों बाद अफगानिस्तान ने पाकिस्तान से बहुत बड़ा बदला लेते हुए पूरे पाकिस्तान को धुआधुआ कर दिया है। इसे भी पढ़ें: UN में PoJK पर बवाल, भारत ने जमकर पाकिस्तान और OIC को धोयाखबर है कि अफगानिस्तान ने बलूचिस्तान और खबर पख्तूनखा में ताबड़तोड़ ढूंढ हमले किए हैं जिसमें आईएसआईएस आतंकियों के कई ठिकाने तबाह हो गए हैं। कहा जा रहा है कि हमले इतने जबरदस्त थे कि कई आतंकियों के चितड़े उड़ गए। गौर करने वाली बात तो यह भी है कि जिन आतंकी ठिकानों को अफगानिस्तान की सेना ने इस बार निशाना बनाया है। यहां से ही भारत के खिलाफ हमले की साजिशें रचने की खबरें आती रहती है। अफगानिस्तान की इस तगड़ी कार्रवाई ने पूरे पाकिस्तान में भगदड़ मचा दी है। तालिबान का पाकिस्तान के भीतर ड्रोन हमले को अंजाम देना असीम मुनीर की सेना के लिए बहुत बड़ा झटका है। अफगान रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए पाकिस्तान में आईएसआईएस के ठिकानों पर हवाई हमलों की पुष्टि की है। इसे भी पढ़ें: इधर भारत ने भेजी मदद, उधर Taliban ने पाकिस्तान में घुसकर किया एयरस्ट्राइकअफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इन जगहों से अफगानिस्तान के खिलाफ कई घातक हमलों की साजिश रची गई थी। ऐसे में उनकी आर्मी ने ड्रोन के जरिए पाकिस्तान के दो प्रांतों में इन ठिकानों को निशाना बनाया। हवाई हमलों में आईएसआईएस के ठिकानों के साथ-साथ उन चरमपंथी समूह के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया जो अफगानिस्तान के विरोधी है। दरअसल पाकिस्तान पिछले कुछ दिनों से अफगानिस्तान पर लगातार अटैक कर रहा था। तब अफगानिस्तान ने पाकिस्तान से बदला लेने की बात कही थी। लेकिन अब उसने ऐसा कर भी दिया है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने कहा है कि पिछले हफ्ते नंगाहार और पख्तिया में पाकिस्तान के हवाई हमलों में जान माल का भारी नुकसान हुआ था। इनमें अफगान महिलाएं और बच्चे मारे गए थे। Stay updated with International News in Hindi https://www.prabhasakshi.com/international on Prabhasakshi    ]]></description>
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<title>पूरा Lebanon जला देंगे: Israeli मंत्री की धमकी पर कांग्रेस का PM Modi से तीखा सवाल</title>
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<description><![CDATA[ सीनियर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शनिवार को भारत की चुप्पी पर सवाल उठाए। यह चुप्पी तब देखी गई जब एक इज़राइली मंत्री ने पूरे लेबनान को जलाकर राख करने की धमकी दी। रमेश ने कहा कि इससे देश के हितों को नुकसान पहुँचता है। एक्स पर एक तीखी पोस्ट में उन्होंने कहा कि जहाँ दुनिया भर में ईरान-अमेरिका शांति समझौते का सावधानी के साथ स्वागत किया गया है, वहीं सीनियर इज़राइली नेता के बयानों से शांति और सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है। अमेरिका-ईरान MOU, जिसका दुनिया भर में सावधानी के साथ स्वागत किया गया है, को कई खतरों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें सबसे बड़ा खतरा इज़राइल से है। इज़राइल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर जैसे ऊँचे पद पर बैठे व्यक्ति ने अभी-अभी पूरे लेबनान को जलाकर राख करने की बात कही है। उन्होंने भारत और केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा, &quot;लेकिन हमेशा की तरह, मोदी सरकार पूरी तरह चुप है। इज़राइल के प्रति प्रधानमंत्री की अंधी भक्ति हमारे देश के हितों को नुकसान पहुँचा रही है, ताकि किसी तरह &#039;मोदानी&#039; साम्राज्य के हित सुरक्षित बने रहें।इसे भी पढ़ें: Congress का Amit Shah पर बड़ा हमला: लोकतंत्र बर्बाद कर रहे, MPs तोड़ने में जुटेसंचार प्रभारी महासचिव की ये टिप्पणियां इज़राइल और लेबनान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आई हैं। इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री, इतामार बेन-ग्वीर ने एक्स पर एक बेहद भड़काऊ पोस्ट में लेबनान में सैन्य कार्रवाई तेज करने का आह्वान किया है, जिसकी व्यापक निंदा हुई है। उन्होंने एक्स पर लिख कि  एक इज़राइली मां के हर आंसू के बदले हज़ार लेबनानी माताओं को रोना होगा। पूरा लेबनान जल जाना चाहिए!राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री ने आगे कहा, अमेरिकियों के प्रति पूर्ण सम्मान के साथ, इज़राइल को पूरी दुनिया को यह स्पष्ट करना होगा कि हमारे बेटों का खून और हमारे नागरिकों की सुरक्षा दांव पर नहीं है। पूरा लेबनान जल जाना चाहिए।इसे भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान समझौते में पाकिस्तान की भूमिका मोदी सरकार की विदेश नीति के लिए गंभीर झटका: कांग्रेसउन्होंने कहा कि इज़राइल का सर्वोच्च कर्तव्य अपने नागरिकों और आईडीएफ के सैनिकों की रक्षा करना है, &quot;और यह प्रतिबद्धता हर दूसरे विचार से ऊपर है। उन्होंने आगे कहा कि अब ये पिंग-पोंग खेलना बंद करो। मध्य पूर्व में संयमित प्रतिक्रियाओं से जीत नहीं मिलती - आपको बेकाबू होकर लड़ना होगा। सब कुछ मिटा देना होगा। आतंक को कुचल देना होगा।Stay updated with International News in Hindi https://www.prabhasakshi.com/international on Prabhasakshi  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:41 +0530</pubDate>
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<title>पानी दिलवा दो...UNSC में जाकर भारत का नाम लेकर रोया पाकिस्तान</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान  दुनिया भर को बड़ी-बड़ी ज्ञान बांट रहा है।  खुद भारत ने जब उसकी हवा टाइट की तो पाकिस्तान पानीपानी चिल्ला रहा है।  सिंधु जलसिंधी का मुद्दा पाकिस्तान यूएनएससी में लेकर पहुंच गया है। क्योंकि भारत के दिखाए हुए ठेंगे ने पाकिस्तान को परेशान कर दिया है। पाकिस्तान के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री ईशाक डार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से सिंधु जल संधि के कथित उल्लंघन के मामले में भारत के खिलाफ संज्ञान लेने की अपील की है। भारत ने तो साफ कर दिया है कि एक बूंद भी नहीं जाने देंगे और पूरी कोशिश करेंगे कि जो पानी पाकिस्तान को जाता हो उसका इस्तेमाल भारत सकुशल तरीके से कर ले क्योंकि भारत के नागरिकों का खून और भारत का पानी एक साथ नहीं बहेगा। साफ तौर पर पाकिस्तान छटपटाया हुआ है और अब यूएनएससी के दरवाजे पर है। इसे भी पढ़ें: &#039;जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और रहेगा&#039;, UN में नई दिल्ली ने पाकिस्तान को दिया करारा जवाबपाकिस्तान के स्थाई प्रतिनिधि असीम इफ्तखार अहमद ने बताया कि उन्होंने इशाक डार का पत्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष लियोनूर जालावाटा टोरेस को सौंपा है। पत्र में भारत द्वारा चिनाब नदी से जुड़ी दो बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर पाकिस्तान की चिंताओं को रेखांकित करने की बात की जा रही है। आसिफ इफ्तखार ने सोशल मीडिया पर बताया है कि इस पत्र के माध्यम से सुरक्षा परिषद का ध्यान तत्काल इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया है कि दक्षिण एशिया की मौजूदा स्थिति को लेकर यूएनएससी अध्यक्ष को जानकारी दी गई है। विश्व बैंक की मध्यता से साल 1960 में हुई सिंधु जलसंधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली और उनकी सहायक नदियों में जल बंटवारे को नियंत्रित करती रही है। इसे भी पढ़ें:  इजराइल ने UN में अचानक निकाल लिया ड्रोन, पूरी दुनिया में तहलका!अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद भारत ने इस संधि को निलंबित कर दिया। इसके पहले भी अप्रैल में इशाकदार ने इसी मुद्दे को लेकर यूएनएससी अध्यक्ष को पत्र लिखकर पाकिस्तान की चिंताओं से अवगत कराया था। इसके अलावा भी वक्त-वक्त पर पाकिस्तान की तरफ से भारत को धमकी दी जाती रही है कि अगर पानी नहीं मिलेगा तो वह भारत में तबाही ला देंगे। हालांकि यह सपने हैं और सपने देखने पर कोई टैक्स नहीं है। इसलिए पाकिस्तान सपने देख सकता है क्योंकि उसके आर्थिक हालात इतने अच्छे नहीं है कि सपने देखने पर टैक्स लगता तो वो सपने देख पाता।  Hindi me international news https://www.prabhasakshi.com/international के लिए जुड़ें प्रभासाक्षी से  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:40 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran डील पर अमेरिका ने पाकिस्तान को दिखाया आईना, JD Vance बोले&#45; वहां प्रेस फ्रीडम कहां है?</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के लिए US-ईरान शांति समझौते को लेकर शर्मिंदगी का कोई अंत नहीं दिख रहा है; इस समझौते को कराने में पाकिस्तान ने कतर के साथ मिलकर मदद की थी। एक पॉडकास्ट में यूएस के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान के साथ हुए एमओयू की जानकारी जारी करने में हुई देरी की एक वजह पाकिस्तान में प्रेस की आज़ादी के मानक थे। हालांकि यूएस के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 जून को अंतरिम शांति समझौते की घोषणा की थी, लेकिन एमओयू का आधिकारिक टेक्स्ट दो दिन बाद जारी किया गया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने &#039;इंटरेस्टिंग टाइम्स विद रॉस डौथैट&#039; पॉडकास्ट में बात करते हुए बताया कि पारदर्शिता को लेकर चिंताओं के कारण वॉशिंगटन को जानकारी जारी करने में समय लगा।इसे भी पढ़ें: इधर भारत ने भेजी मदद, उधर Taliban ने पाकिस्तान में घुसकर किया एयरस्ट्राइकपाकिस्तान में प्रेस की आज़ादी पर वेंस ने क्या कहा?वेंस ने कहा कि हम असल में इसे सामने लाना चाहते थे। मुझे लगता है कि यहाँ तालमेल न बैठने की एक वजह यह है कि पाकिस्तान और कतर के सिस्टम में &#039;फर्स्ट अमेंडमेंट&#039; (अभिव्यक्ति की आज़ादी) और प्रेस की आज़ादी जैसी व्यवस्था नहीं है। अमेरिकी संविधान का पहला संशोधन सरकार को ऐसे कानून बनाने से रोकता है जो बोलने की आज़ादी, प्रेस की आज़ादी और धर्म की आज़ादी का उल्लंघन करते हों। पाकिस्तान में ऐसी संवैधानिक सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। वेंस ने आगे कहा कि  इसलिए, (पाकिस्तान में) ऐसी कोई उम्मीद नहीं है कि यह टेक्स्ट अमेरिकी लोगों के सामने आएगा ताकि वे खुद इसकी जांच-पड़ताल कर सकें, इसे देख सकें, इसका विश्लेषण कर सकें और इसे समझ सकें। लेकिन यह सामने ज़रूर आएगा। डेमोक्रेट्स की आलोचना और विरोध के बाद, आखिरकार बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के समझौते का पूरा टेक्स्ट जारी किया गया। आलोचकों का यह भी मानना ​​था कि अमेरिका MoU की डिटेल्स इसलिए छिपा रहा था क्योंकि इस समझौते के तहत ईरान को बड़ी रियायतें दी गई होंगी, ताकि उस टकराव को खत्म किया जा सके, जिसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर तेहरान के नियंत्रण के कारण वैश्विक तेल संकट पैदा कर दिया था।इसे भी पढ़ें: चीन-अमेरिका नहीं भारत बना रहा पेरिस से भी 5 गुना बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क, क्या है अडानी का दुनिया हिलाने वाला मेगा प्लान?पाकिस्तान की हुई किरकिरीवेंस की टिप्पणी ने पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की आज़ादी और प्रेस की आज़ादी में आई भारी गिरावट को सबके सामने ला दिया है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पाकिस्तान 180 देशों में से 153वें स्थान पर है। दशकों से पाकिस्तान को पत्रकारों के लिए सबसे मुश्किल देशों में से एक माना जाता रहा है। नवंबर 2025 में पास हुए हालिया 27वें संविधान संशोधन ने प्रेस की आज़ादी को और कम कर दिया है, क्योंकि इसने सुप्रीम कोर्ट से मौलिक अधिकारों की स्वतंत्र रूप से समीक्षा करने का अधिकार छीन लिया है। पाकिस्तान के लिए और भी शर्मिंदगी की बात तब हुई, जब उसने US-ईरान डील को एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी के तौर पर पेश किया था। इस हफ़्ते की शुरुआत में, समझौते की घोषणा करते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा था कि 19 जून को स्विट्ज़रलैंड में एक आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह होगा। हालांकि, ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने गुरुवार को डिजिटल रूप से MoU पर हस्ताक्षर किए, जिससे पाकिस्तान की किरकिरी हुई। इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी साफ़ कर दिया था कि स्विट्ज़रलैंड में कोई हस्ताक्षर समारोह नहीं होगा। Hindi me international news https://www.prabhasakshi.com/international के लिए जुड़ें प्रभासाक्षी से  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:39 +0530</pubDate>
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<title>कतर का शाही विमान बना ट्रंप की नई सवारी, मेगा किचन से लेकर जिम तक की सुविधा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए सिरे से तैयार किए गए &#039;एयर फ़ोर्स वन&#039; जेट का अनावरण किया। यह जेट पहले कतर के पास था और अगले महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति को ले जाने का काम शुरू करने से पहले, यह अपनी शुरुआती उड़ानें भरने के लिए तैयार है। बोइंग 747-8i लग्ज़री जेट के लाल, सफ़ेद और नेवी ब्लू रंग-रूप ने पुराने विमान के &#039;रॉबिन्स एग ब्लू&#039; (हल्के नीले) रंग की जगह ली है। पुराने विमान ने जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश के समय से लेकर लगभग 40 साल तक राष्ट्रपतियों को लाने-ले जाने का काम किया था। हवाई जहाज़ की पूंछ पर लहराता हुआ अमेरिकी राष्ट्रीय ध्वज बना है। ट्रंप ने यहां के पास जॉइंट बेस एंड्रयूज में एक संक्षिप्त समारोह में कहा, &quot;सबसे बड़ा अंतर आकार का है। यह लगभग दोगुना बड़ा है। जॉइंट बेस एंड्रयूज राष्ट्रपति के हवाई जहाज़ का बेस है।इसे भी पढ़ें: Donald Trump की Great Leaders लिस्ट में PM Modi को चीन के President Xi Jinping के बराबर बतायाट्रंप ने कहा कि ये नए रंग हैं – लाल, सफ़ेद और नीला। हमें हल्का नीला रंग पसंद था, लेकिन अब बदलाव का समय आ गया था। मुझे अमेरिकी झंडे का रंग पसंद है। यूएस एयर फ़ोर्स ने कहा कि यह विमान जल्द ही कमीशनिंग फ़्लाइट्स शुरू करेगा। यह राष्ट्रपति को ले जाने के लिए इस्तेमाल किए जाने से पहले का उसका &quot;फ़ाइनल एग्ज़ाम&quot; होगा। ट्रंप ने कहा कि बोइंग के &#039;एयर फ़ोर्स वन&#039; रिप्लेसमेंट प्रोग्राम में देरी और US के पुराने हो रहे प्रेसिडेंशियल फ़्लीट की विदेशी सरकारों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे नए विमानों से बढ़ती तुलना से परेशान होकर उन्होंने कतर के अमीर से यह विमान मांगा था। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:38 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में सड़क किनारे हुए दो धमाकों में 7 लोगों की मौत, 3 घायल</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सड़क किनारे हुए दो धमाकों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। ये धमाके बन्नू जिले के मार्का बेरा इलाके में हुए; इनमें पहले एक यात्री वाहन को और बाद में बचाव कार्य में लगे लोगों को निशाना बनाया गया। खबर लिखे जाने तक किसी भी गुट ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी नहीं ली थी। अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है और सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है, ताकि घटना से जुड़ी परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।बन्नू ज़िले में दो धमाकेबन्नू ज़िले के पुलिस अधिकारी (DPO) यासिर अफरीदी के मुताबिक, पहला धमाका तब हुआ जब सड़क किनारे लगाया गया एक इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) उस समय फट गया, जब एक पैसेंजर वैन वहां से गुज़र रही थी। धमाके की चपेट में आने से गाड़ी में सवार पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि वैन हाथी खेल गांव से बन्नू शहर जा रही थी, तभी वह धमाके की चपेट में आ गई।कुछ देर बाद, उसी जगह पर दूसरा धमाका हुआपुलिस के मुताबिक, ऐसा लगता है कि दूसरा धमाका उन लोगों को निशाना बनाकर किया गया था जो पहले हमले के बाद बचाव कार्य के लिए वहां जमा हुए थे। दूसरे धमाके में दो और लोगों की मौत हो गई, जबकि एक गाड़ी भी क्षतिग्रस्त हो गई। इन दो घटनाओं में कुल सात लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। जांच चल रही हैपुलिस ने बताया कि घायलों और मारे गए लोगों के शवों को पास के अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है और सबूतों के लिए घटनास्थल की जांच कर रहे हैं। सुरक्षा कर्मियों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और जांच के तहत घटनास्थल से फॉरेंसिक सामग्री इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने अभी तक किसी की गिरफ्तारी की घोषणा नहीं की है और न ही हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की है।मुख्यमंत्री ने हमले की निंदा कीखैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने इस घटना की कड़ी निंदा की और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उन्होंने विस्फोटों से संबंधित परिस्थितियों की गहन जांच के आदेश भी दिए। इस घटना को &quot;बेहद दुखद&quot; और &quot;हृदयविदारक&quot; बताते हुए मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने प्रभावित परिवारों को आश्वासन दिया कि प्रांतीय सरकार इस कठिन समय में हर संभव सहायता प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि विस्फोटों में घायल हुए लोगों को सर्वोत्तम चिकित्सा उपचार मिले। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:37 +0530</pubDate>
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<title>Iran US Peace Deal Cancel: तेल लेने गई डील, नेतन्याहू में अब कहां धमाका कर दिया?</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में कई महीनों तक चले तनाव और संघर्ष के बाद दुनिया को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता क्षेत्र में स्थिरता लेकर आएगा। फ्रांस में दोनों देशों ने एक अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए और तय हुआ कि 19 जून से डील की शर्तों पर आगे की औपचारिक बातचीत शुरू होगी। लेकिन अब घटनाक्रम अचानक नया मोड़ ले लिया है। दरअसल शांति समझौते के बाद अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों की पहली औपचारिक बैठक स्विट्जरलैंड के बैगन स्टॉक रिसोर्ट में होनी थी।इसे भी पढ़ें: शांति समझौते के 24 घंटे के भीतर Lebanon लहूलुहान! इज़राइली हमलों में 16 मौतें, US-Iran &#039;ऐतिहासिक डील&#039; पर मंडराया संकटअमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडवेंस को इस वार्ता में हिस्सा लेने के लिए रवाना होना था। लेकिन अब खबर आई है कि उनकी यात्रा आखिरी समय पर रद्द कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फैसला इतना अचानक लिया गया कि वेंस का स्टाफ और उनके साथ जाने वाले पत्रकार एयरपोर्ट तक पहुंच चुके थे। जबकि कई अमेरिकी अधिकारी और विदेशी मीडिया प्रतिनिधि पहले से ही स्विट्जरलैंड में मौजूद थे। यही वह घटनाक्रम है जिसने पूरी पीस डील के भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि इस रुकावट की सबसे बड़ी वजह लेबनान को लेकर पैदा हुआ नया विवाद है। शांति समझौते में क्षेत्र के सभी मोर्चे पर लड़ाई रोकने की बात शामिल है। जिसमें लेबनान भी शामिल था। लेकिन इसी बीच इजराइल ने साफ कर दिया कि वह दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएगा। इतना ही नहीं शांति समझौता लागू होने के बाद भी लेबनान में इजराइली हमले जारी रहे हैं। जिनमें तीन लोगों की मौत की खबर भी सामने आई है। यहीं से ईरान और अमेरिका के बीच आगे की बातचीत को लेकर मतभेद बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Netanyahu का &#039;ईरान मिशन&#039; फेल! Donald Trump की शांति डील से &#039;बीबी&#039; के सियासी भविष्य पर संकट?हालांकि दूसरी ओर कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। पीस डील पर हस्ताक्षर होने के बाद हॉर्मज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही फिर से तेज हो गई है। सऊदी अरब के झंडे वाले कई बड़े तेल टैंकर इस अहम समुद्री मार्ग से सुरक्षित गुजर चुके हैं। जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों को राहत मिली है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को आगे बढ़ाया जाएगा या लेबनान और इजराइल से जुड़ा विवाद इस पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतार देगा। फिलहाल दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर टिकी है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:37 +0530</pubDate>
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<title>जानें कौन हैं IFS विश्वास विदु सपकाल, जिन्हें Slovakia में मिली भारत के Ambassador की जिम्मेदारी</title>
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<description><![CDATA[ विदेश मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS) अधिकारी विश्वास विदु सपकाल को स्लोवाकिया में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। 1998 बैच के IFS अधिकारी सपकाल के जल्द ही अपना पद संभालने की उम्मीद है। वे अभी पेरू में भारत के राजदूत के तौर पर काम कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज़ में कहा  विश्वास विदु सपकाल (IFS: 1998), जो अभी पेरू गणराज्य में भारत के राजदूत हैं, उन्हें स्लोवाक गणराज्य में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। मंत्रालय ने आगे कहा कि उनके जल्द ही अपना पद संभालने की उम्मीद है। इससे पहले, सपकाल फिजी, कुक आइलैंड्स, किरिबाती, नाउरू, टोंगा, तुवालु और वानुअतु में भारत के हाई कमिश्नर और रूस के पीटर्सबर्ग में भारत के कॉन्सल जनरल रह चुके हैं। उन्होंने रूस, आर्मेनिया, मिस्र और अमेरिका में भी अलग-अलग पदों पर काम किया है।इसे भी पढ़ें: Pawan Khera का बड़ा आरोप: PM Modi ने Trump के आगे कमजोरी दिखाई, देश का अपमानउन्होंने कई खास ज़िम्मेदारियाँ भी निभाई हैं, जैसे नवंबर 2015 में नई दिल्ली में इंडिया-अफ्रीका फोरम समिट (IAFS) में डायरेक्टर के तौर पर काम करना, फरवरी 2023 में फिजी में हुए 12वें विश्व हिंदी सम्मेलन के लिए चीफ कोऑर्डिनेटर रहना, और मई 2023 में पापुआ न्यू गिनी में हुए &quot;फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (FIPIC)&quot; के तीसरे समिट में चीफ लाइज़न ऑफिसर की भूमिका निभाना। विदेश मंत्रालय में सपकाल ने नॉर्दर्न डिवीज़न, MER डिवीज़न और फाइनेंस डिवीज़न में अलग-अलग पदों पर काम किया। वह मई-नवंबर 2019 के दौरान जॉइंट सेक्रेटरी (BIMSTEC, SAARC और नालंदा) रहे। नवंबर 2019 से जून 2023 तक वह जॉइंट सेक्रेटरी (साउथ) रहे। उन्होंने अगस्त 2021 से जनवरी 2022 तक जॉइंट सेक्रेटरी (इंडो-पैसिफिक) के तौर पर भी काम किया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:36 +0530</pubDate>
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<title>फोटो खिंचवाने के लिए मेलोनी ने...मैंने मना कर दिया, ट्रंप ने अब क्या नया दावा कर दिया?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि फ्रांस में G7 बैठक के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने बार-बार उनके साथ तस्वीर खिंचवाने की कोशिश की। उनका आरोप है कि मेलोनी ऐसा करके इटली में अपनी लोकप्रियता बढ़ाना चाहती थीं। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा फ्रांस में G-7 बैठक के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने बार-बार मेरे साथ तस्वीर खिंचवाने की गुज़ारिश की। ट्रंप ने दावा किया कि इटली में मेलोनी की लोकप्रियता घट रही है और इसे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने या बनाने से रोकने की अमेरिकी कोशिशों पर उनके रुख से जोड़ा। ट्रंप ने कहा कि इटली में उनकी लोकप्रियता का स्तर कम है, शायद इसलिए क्योंकि उन्होंने अमेरिका को ठुकरा दिया था—एक ऐसा देश जो सच में इटली से प्यार करता है और उसकी रक्षा करता है। खासकर तब जब ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने या बनाने से रोकने की बात थी।इसे भी पढ़ें: कतर का शाही विमान बना ट्रंप की नई सवारी, मेगा किचन से लेकर जिम तक की सुविधाअमेरिकी राष्ट्रपति ने इटली की भी आलोचना की क्योंकि उसने अमेरिका को अपने लैंडिंग स्ट्रिप या रनवे का इस्तेमाल नहीं करने दिया। उन्होंने इसे लॉजिस्टिक्स से जुड़ी एक बड़ी चुनौती बताया। ट्रंप ने लिखा उन्होंने हमें इटली के लैंडिंग स्ट्रिप या रनवे का इस्तेमाल भी नहीं करने दिया, जिससे लॉजिस्टिक्स में बहुत दिक्कत हुई। और यह तब हुआ, जब अमेरिका इटली और दूसरे &#039;तथाकथित&#039; नाटो सहयोगियों की सुरक्षा के लिए हर साल अरबों डॉलर खर्च करता है। ट्रंप ने आगे दावा किया कि जब अमेरिका ने ईरान को सैन्य रूप से हरा दिया तो मेलोनी ने वॉशिंगटन के साथ संबंध बेहतर करने की कोशिश की। ट्रंप ने पोस्ट में कहा कि अब, जब अमेरिका ने ईरान को सैन्य रूप से हरा दिया है, तो वह अपने &#039;आंकड़े बढ़ाने&#039; के लिए फिर से दोस्ती करना चाहती हैं। नहीं, शुक्रिया।इसे भी पढ़ें:  Iran US Peace Deal Cancel: तेल लेने गई डील, नेतन्याहू में अब कहां धमाका कर दिया?डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हाल ही में हुए G7 समिट में प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने उनसे तस्वीर खिंचवाने के लिए &quot;मिन्नत&quot; की थी। इस बयान से दोनों सहयोगियों के बीच कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया। ट्रंप ने कहा कि मेलोनी &quot;शायद खुश&quot; थीं कि समिट के दौरान उन्होंने उनसे बात की। शुक्रवार को मेलोनी ने ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज कर दिया और उन पर मनगढ़ंत कहानी बनाने का आरोप लगाया। मेलोनी ने कहा डोनाल्ड ट्रंप के बयान पूरी तरह से मनगढ़ंत हैं। मैं सचमुच हैरान हूं। मुझे समझ नहीं आता कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने सहयोगियों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं: और ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:35 +0530</pubDate>
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<title>भारत से पहली बार कांपा चीन, पुतिन के गुरु बोले हिंदू आ रहे हैं!</title>
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<description><![CDATA[ भारतीय लोगों के डर से चीन की सरकारी मीडिया और चीन के ताकतवर लोगों को बयान तक जारी करने पड़ गए हैं।  भारतीय लोगों का धमाका देखकर अब ताइवान के लोग भी चीन पर टूट पड़े हैं। पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर देख रहे होंगे कि अचानक भारत के कुछ लोगों ने चीन की गरीबी, गंदगी, झुग्गियों, सामाजिक असमानता और चीन की जाति व्यवस्था का काला चिट्ठा खोल दिया है। भारतीय लोगों ने सोशल मीडिया पर दिखाया है कि चीन भी चार जातियों में बंटा है। शी, नोंग, गोंग और शोंग शी वर्ग में आते हैं विद्वान और आधिकारिक प्रशासक। नोंग किसान थे, गोंग कारीगर और शिल्पकार थे। जबकि शोंग व्यापारियों का एक वर्ग था। यानी चीन का समाज खुद जातियों में बंटा है। इसके अलावा चीन में होऊ सिस्टम के जरिए भी भेदभाव किया जाता है। हुककोऊ सिस्टम चीन की सरकारी रजिस्ट्रेशन व्यवस्था है जिसमें यह तय होता है कि किसी नागरिक का निवास क्षेत्र कौन सा होगा। उसे सरकारी सुविधाएं मिलेंगी या नहीं मिलेंगी। इसे भी पढ़ें: Tibet में चीनी बर्बरता पर घिरा Dragon, US में &#039;Genocide&#039; जांच के लिए Bill पेशचीन के हुकऊ सिस्टम ने ग्रामीण और शहरी चीन में एक बड़ा अंतर पैदा कर रखा है। करोड़ों ग्रामीण मजदूर शहर में काम करने तो आ जाते हैं लेकिन उन्हें शहर के स्थाई निवासियों जैसी व्यवस्था, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती। बस इतना सुनते ही चीन का सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स और चीन के कई लोग इसे झूठ बोलने लगे। पूरा चीन मुट्ठी भर भारतीयों द्वारा चलाए गए कैंपेन का जवाब देता फिर रहा है। यानी चीन में बहुत भयंकर बवाल मच गया है। भारत के लोगों का साथ देते हुए अब ताइवान के लोगों ने भी सोशल मीडिया पर चीन की असमानता और गरीबी वाली वीडियो डालनी शुरू कर दी हैं। चीन दशकों से अपनी झूठी इमेज दिखाने और भारत के खिलाफ प्रॉक्सी और इंफॉर्मेशन वॉर पर अरबों रुपए खर्च कर रहा है। लेकिन भारत में बैठे लोगों ने 1 GB मोबाइल डाटा से चीन के अरबों रुपए का प्रोपोगेंडा चखनाचूर कर दिया है। चीन इतना बौखला गया है कि उसने अचानक भारत और पाकिस्तान के कुछ इन्फ्लुएंसर्स को पैसा दिया है। इसे भी पढ़ें: डोभाल ने बुलाया, भारत आ रहे चीन के विदेश मंत्रीकहा है कि हमारी इमेज और इज्जत को तुरंत बचाओ। इसीलिए आपको सोशल मीडिया पर भारत के कई ऐसे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स भी दिख रहे होंगे जो अचानक चीन के खाने, चीन के शहरों और चीन की ईमानदारी पर वीडियो बना रहे हैं। भारत में बैठे कुछ पत्रकार चीन के होऊ सिस्टम का फैक्ट चेक कर रहे हैं। बता रहे हैं कि चीन में असमानता है ही नहीं। हैरानी की बात देखिए कि चीन के पेरोल पर काम कर रहे इन इन्फ्लुएंसर्स ने कभी भारत की इमेज को बचाने की कोशिश शायद नहीं की। चीन दशकों से पैसे के दम पर पाकिस्तान, बांग्लादेश और भारत में बैठे इन्फ्लुएंसरर्स से भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म का मजाक बनवाता रहा। लेकिन तब किसी ने कुछ नहीं बोला। मगर भारतीय लोगों और हिंदुओं की क्या ताकत है वह रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन के गुरु ने पूरी दुनिया को बता दी थी। पुतिन के गुरु एलेक्जेंडर डूगिन ने कहा था कि भारतीय संस्कृति भौतिक दुनिया और मुनाफे के बारे में नहीं सोचती। हिंदुओं ने मेटाफिजिकल सोच के उच्चतम स्तर को विकसित कर लिया है। हिंदू पश्चिमी देशों की तरह भौतिकवादी नहीं है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:34 +0530</pubDate>
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<title>Britain में सियासी भूचाल, अपनी ही पार्टी में घिरे PM Keir Starmer, इस्तीफे की अटकलें हुईं तेज</title>
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<description><![CDATA[ ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। वहाँ के मशहूर अखबार द ऑब्जर्वर ने सोर्सेज के हवाले से यह दावा किया है, जिसके बाद ब्रिटेन में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा होने की उम्मीद है। हालांकि, सरकारी सोर्सेज का कहना है कि स्टार्मर का पूरा ध्यान अभी सरकार चलाने की अपनी जिम्मेदारियों पर है।क्यों बढ़ रहा है पीएम स्टार्मर पर इस्तीफा देने का प्रेशर?रिपोर्ट्स की मानें तो पिछले कुछ महीनों से स्टार्मर के खिलाफ उनकी खुद की लेबर पार्टी के अंदर बहुत ज्यादा प्रेशर बनाया जा रहा है। हाल ही में शुक्रवार को उनके बड़े प्रतिद्वंद्वी एंडी बर्नहैम ने उपचुनाव जीत लिया है और वे संसद सदस्य बन गए हैं। बर्नहैम की इस जीत ने स्टार्मर के खिलाफ सीधे तौर पर लीडरशिप को चुनौती देने का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है। इसे भी पढ़ें: भारत से पहली बार कांपा चीन, पुतिन के गुरु बोले हिंदू आ रहे हैं!सोमवार का दिन ब्रिटेन के लिए क्यों है सुपर क्रूशियल?द ऑब्जर्वर के मुताबिक, कोई भी फाइनल फैसला लेने से पहले स्टार्मर ने अपने ऑफिशियल कंट्री होम चेकर्स में अपनी वाइफ के साथ इस पूरे मामले पर लंबी चर्चा की है। पार्टी के बड़े नेताओं को उम्मीद है कि वह सोमवार को अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई बड़ा और क्लियर स्टेटमेंट दे सकते हैं।स्टार्मर का स्टैंड, चुनौती का सामना करने को तैयारदूसरी तरफ, सरकारी सोर्सेज बार-बार कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री अपनी ड्यूटी को लेकर पूरी तरह कमिटेड हैं। उन्होंने स्टार्मर के शुक्रवार के बयान की याद दिलाई, जिसमें पीएम ने साफ कहा था कि वह लीडरशिप को लेकर किसी भी चुनौती का डटकर सामना करेंगे। उन्होंने अपनी पार्टी के लोगों से अंदरूनी लड़ाई बंद करने की अपील भी की थी। इसे भी पढ़ें: फोटो खिंचवाने के लिए मेलोनी ने...मैंने मना कर दिया, ट्रंप ने अब क्या नया दावा कर दिया?लेबर पार्टी में भारी नाराजगी, बर्नहैम रेस में सबसे आगेआपको बता दें कि 2024 के आम चुनाव में लेबर पार्टी को एकतरफा जीत दिलाने के बावजूद, पिछले कुछ महीनों में कई विवादों और पॉलिसी यू-टर्न की वजह से स्टार्मर की पॉपुलैरिटी बहुत कम हुई है। पार्टी के 100 से ज्यादा सांसद खुलकर स्टार्मर से इस्तीफा या पद छोड़ने की टाइमलाइन की मांग कर चुके हैं। इस बीच, एंडी बर्नहैम को उनका सबसे मजबूत उत्तराधिकारी माना जा रहा है। हालांकि, रेस में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग भी शामिल हैं, जिन्होंने जरूरत पड़ने पर लीडरशिप की रेस में उतरने के संकेत दिए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:33 +0530</pubDate>
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<title>इधर Median Line चीन की पैंतरेबाजी, उधर Taiwan ने पहली Submarine का Sea Trial शुरू किया</title>
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<description><![CDATA[ ताइवान और चीन के बीच टेंशन एक बार फिर बढ़ गई है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रविवार सुबह 6 बजे तक ताइवान के समुद्री इलाके के आसपास चीन के 2 मिलिट्री एयरक्राफ्ट, 8 नौसैनिक जहाज और 4 सरकारी जहाज ऑपरेट करते हुए पाए गए हैं। ताइवान की सेना इस पूरी सिचुएशन पर पैनी नजर रखे हुए है और ड्रैगन को करारा जवाब देने के लिए अलर्ट मोड पर है।शनिवार को भी चीन ने दिखाई थी दादागिरीइससे ठीक एक दिन पहले, यानी शनिवार को भी ताइवान ने अपने बॉर्डर के पास चीन के 5 फाइटर जेट्स, 9 नौसैनिक जहाज और 5 सरकारी जहाजों को डिटेक्ट किया था। बड़ी बात यह है कि इन 5 चीनी फाइटर जेट्स में से एक ने दोनों देशों के बीच की मीडियन लाइन को पार कर लिया था और ताइवान के साउथ-वेस्टर्न एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन ज़ोन में एंट्री कर ली थी। चीन की इस हरकत के बाद ताइवान की आर्म्ड फोर्सेज तुरंत एक्शन में आ गई थीं। इसे भी पढ़ें: Britain में सियासी भूचाल, अपनी ही पार्टी में घिरे PM Keir Starmer, इस्तीफे की अटकलें हुईं तेजचीन के डर के बिना ताइवान का मेगा सबमरीन टेस्टचीन की इस बढ़ती मिलिट्री एक्टिविटी और धमकियों के बीच ताइवान ने भी अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। फोकस ताइवान की रिपोर्ट के मुताबिक, ताइवान की पहली डोमेस्टिकली बिल्ट सबमरीन अपने नए सी-ट्रायल के लिए काऊशुंग पोर्ट से रवाना हो चुकी है। इस ट्रायल में गहरे पानी में गोता लगाने का टेस्ट भी शामिल है। मिलिट्री न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस पनडुब्बी का यह कुल 15वां सी-ट्रायल है और पानी के नीचे चलने वाला 9वां टेस्ट है, जो दिखाता है कि ताइवान डिफेंस के मामले में आत्मनिर्भर हो रहा है। इसे भी पढ़ें: भारत से पहली बार कांपा चीन, पुतिन के गुरु बोले हिंदू आ रहे हैं!आखिर क्या है चीन और ताइवान का पूरा विवाद?चीन और ताइवान का यह विवाद ऐतिहासिक, राजनीतिक और कानूनी तौर पर बेहद पेचीदा है। बीजिंग का दावा है कि ताइवान उसका ही एक अटूट हिस्सा है और उसने इस बात को अपनी नेशनल पॉलिसी और इंटरनेशनल स्टेटमेंट्स में भी शामिल कर रखा है। चीन का यह दावा 1683 के किंग राजवंश के समय से जुड़ा है, जब चीन ने इस आइलैंड पर कब्जा किया था। दूसरी तरफ, ताइवान खुद को एक इंडिपेंडेंट देश मानता है, जिसकी अपनी सरकार, अपनी सेना और अपनी खुद की मजबूत इकोनॉमी है। ताइवान का यह स्टेटस पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी डिबेट का मुद्दा बना हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:32 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran की महाबैठक के लिए Switzerland पहुंचे उपराष्ट्रपति JD Vance</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के पहले दौर के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं। रविवार को होने वाली इस हाई प्रोफाइल मीटिंग में ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और अमेरिका द्वारा फ्रीज की गई ईरान की संपत्ति को लेकर चर्चा होने की उम्मीद है। अगर दोनों देशों के बीच बात बन जाती है, तो अमेरिका ईरान के फंड से प्रतिबंध हटा सकता है। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को अपने उन परमाणु ठिकानों का दौरा करने की इजाजत दे, जिन पर पहले अमेरिका और इजरायल ने बमबारी की थी।6 अरब डॉलर का फंड और 60 दिनों की डेडलाइनइसके बदले में खबर है कि अमेरिका ईरान के फ्रीज किए गए फंड का कुछ हिस्सा जारी करने के मूड में है। इसकी शुरुआत कतर के बैंक अकाउंट में मौजूद 6 अरब डॉलर से होगी, जिसका इस्तेमाल सिर्फ मानवीय जरूरतों जैसे खाना और दवाई खरीदने के लिए किया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच हुई एक अंतरिम शांति डील के तहत इस बातचीत के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है। यह सालों पुराने टकराव को खत्म करने की एक बड़ी शुरुआत है, हालांकि इसमें इजरायल की तरफ से रुकावट आने का खतरा बना हुआ है। इसे भी पढ़ें: इधर Median Line चीन की पैंतरेबाजी, उधर Taiwan ने पहली Submarine का Sea Trial शुरू कियापाकिस्तान बना मध्यस्थ, बैठक में शामिल होंगे शहबाज शरीफ और असीम मुनीरइस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर भी स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक पहुंच चुके हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि वे इस डील को लागू कराने में अपना पूरा सपोर्ट देंगे। दूसरी तरफ, वॉशिंगटन से रवाना होने से पहले जेडी वेंस ने मीडिया से कहा कि उनका यह दौरा काफी छोटा होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि परमाणु मुद्दे के साथ साथ लेबनान में सीजफायर के मुद्दे पर भी कुछ पॉजिटिव प्रोग्रेस होगी।बातचीत के लिए बर्गेनस्टॉक स्की रिजॉर्ट में जुटे दिग्गजईरान की सरकारी मीडिया IRIB के अनुसार, ईरान की तरफ से इस मीटिंग में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अरागची और सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती शामिल हैं। जेडी वेंस ने कहा कि इस पहली बैठक का मकसद बातचीत के लिए एक रियल और प्रैक्टिकल ढांचा तैयार करना है। इसे भी पढ़ें: Britain में सियासी भूचाल, अपनी ही पार्टी में घिरे PM Keir Starmer, इस्तीफे की अटकलें हुईं तेजक्या यूएन अधिकारियों को एंट्री देगा ईरान?अमेरिका को पूरी उम्मीद है कि ईरान संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों को अपनी उन न्यूक्लियर साइट्स पर जाने देगा, जहां जून 2025 के बाद से कोई चेकिंग नहीं हुई है। इसके बदले ईरान को उसके फ्रीज एसेट्स वापस मिल सकते हैं। इस बीच, अमेरिकी इंटेलिजेंस असेसमेंट ने एक बड़ी चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, लेबनान की स्थिति और घरेलू राजनीतिक दबाव के चलते इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस अमेरिका-ईरान बातचीत को फ्लॉप करने या इसमें अड़ंगा लगाने की पूरी कोशिश कर सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:31 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump का Iran को अल्टीमेटम, Hormuz Strait में Toll Tax वसूला तो खैर नहीं</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाली बड़ी शांति वार्ता से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान दिया। ट्रंप ने शनिवार को साफ कर दिया कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर किसी भी तरह का टोल टैक्स नहीं लगाया जाएगा।ट्रूथ सोशल पर ट्रंप ने ईरान को दी चेतावनीट्रंप का यह बयान उन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद आया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि ईरान 60 दिनों के सीजफायर के बाद इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स वसूलने की प्लानिंग कर रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर लिखा, &quot;60 दिनों के युद्धविराम के दौरान होर्मुज स्ट्रेट में कोई टोल नहीं होगा। और इसके बाद भी कोई टोल नहीं लगाया जाएगा। अगर समझौता फेल होता है, तो केवल अमेरिका ही मिडिल ईस्ट के देशों की सुरक्षा पर हुए खर्च की भरपाई के लिए खुद ऐसा कदम उठा सकता है।&quot; इसे भी पढ़ें: US-Iran की महाबैठक के लिए Switzerland पहुंचे उपराष्ट्रपति JD Vanceईरान ने फिर बंद किया दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्तालेबनान में इजरायल की तरफ से लगातार हो रहे हमलों से नाराज होकर ईरान ने शनिवार को होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने का बड़ा एलान कर दिया है। ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कहा कि यह कदम इजरायली हमलों और अमेरिका की बदनीयती के विरोध में उठाया गया है, क्योंकि अमेरिका ने युद्ध खत्म करने के अपने वादों को तोड़ा है। ईरानी सरकारी टीवी ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर हमले नहीं रुके, तो वे और भी कड़े कदम उठाएंगे। इसे भी पढ़ें: इधर Median Line चीन की पैंतरेबाजी, उधर Taiwan ने पहली Submarine का Sea Trial शुरू कियास्विट्जरलैंड में तकनीकी दौर की बातचीत आज से शुरूइस पूरे तनाव के बीच, ईरान के बातचीत करने वाले अधिकारी स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं, हालांकि उन्हें इस मीटिंग से बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं। दूसरी तरफ, मुख्य मध्यस्थ पाकिस्तान ने जानकारी दी है कि रविवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में टेक्निकल लेवल की बातचीत शुरू होगी। इस बातचीत में पाकिस्तान के साथ कतर के मध्यस्थ भी शामिल होने जा रहे हैं ताकि दोनों देशों के बीच बीच का रास्ता निकाला जा सके। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:30 +0530</pubDate>
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<title>Qatar Gas Facility Fire | रास लफ़्फान औद्योगिक क्षेत्र के गैस टर्मिनल में भीषण विस्फोट, 54 घायल और 18 लापता</title>
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<description><![CDATA[ कतर के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र &#039;रास लफ़्फान&#039; (Ras Laffan) में रविवार देर रात एक भीषण विस्फोट होने की खबर सामने आई है। इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 54 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जबकि 18 कर्मचारी अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। इसे भी पढ़ें: Hormuz Strait खुलते ही India का बड़ा दांव, Russia-UAE से रिकॉर्ड तेल खरीदकर बदली रणनीतिदोबारा परिचालन शुरू करते समय हुआ हादसाकतर सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह विस्फोट रास लफ़्फान के बारजान संयंत्र (Barzan Plant) में स्थित टर्मिनल का परिचालन दोबारा शुरू (Restart) करने के दौरान हुआ।पृष्ठभूमि: रास लफ़्फान कतर के प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यात का सबसे मुख्य और रणनीतिक टर्मिनल है। हालिया युद्ध के दौरान ईरान ने इस पूरे क्षेत्र को निशाना बनाया था, जिसके बाद सुरक्षा कारणों और नुकसान की वजह से यह टर्मिनल कई हफ्तों तक बंद रहा था। रविवार को इसे फिर से चालू करने की प्रक्रिया चल रही थी, तभी यह भीषण हादसा हो गया।कतर सरकार के बयानों में बदलावशुरुआत में कतर के गृह मंत्रालय ने इस घटना की पुष्टि करते हुए एक संक्षिप्त बयान जारी किया था, जिसमें स्थिति को नियंत्रित बताते हुए कहा गया था कि हादसे में केवल कुछ ही लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं। हालांकि, बाद में सामने आई रिपोर्टों ने इस दावे को खारिज कर दिया और घायलों की संख्या बढ़कर 54 तक पहुंच गई, साथ ही 18 लोगों के लापता होने की भी पुष्टि की गई।वैश्विक गैस आपूर्ति पर असर की आशंकारास लफ़्फान कतर का सबसे बड़ा ऊर्जा हब है, जहाँ से दुनिया के कई देशों को लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लाई की जाती है। युद्ध के बाद पहले ही बंद चल रहे इस टर्मिनल में दोबारा विस्फोट होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार और गैस आपूर्ति पर गहरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसे भी पढ़ें: जापान की फुटबॉल में नई सोच का उदय, ‘ईगोइस्ट’ स्ट्राइकर तैयार करने की मुहिम से बदल रही टीम की पहचानफिलहाल, प्रशासन का पूरा ध्यान आग पर काबू पाने, घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने और लापता लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित है। विस्फोट के सटीक तकनीकी कारणों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया गया है। Stay updated with International
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:58:30 +0530</pubDate>
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<title>DRC: इबोला का प्रकोप सीमाओं के पार बढ़ा, कार्रवाई में तेज़ी</title>
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<description><![CDATA[ काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में लगातार जारी सशस्त्र हिंसा के बीच इबोला तेज़ी से फैल रहा है, जिससे इस क्षेत्र के लिए एक गम्भीर और बढ़ता हुआ ख़तरा उत्पन्न हो गया है. विभिन्न यूएन एजेंसियाँ इस वायरस का मुक़ाबला करने के प्रयासों में जुटी हैं. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:57:29 +0530</pubDate>
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<title>म्याँमार में बन रहे हैं नए रिकॉर्ड, मगर ग़लत कारणों से</title>
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<description><![CDATA[ म्याँमार इस समय साइबर अपराध का एक वैश्विक केन्द्र बन चुका है. औद्योगिक स्तर पर धोखाधड़ी के अड्डे चलाने वाले अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेट ने अपने मानव तस्करी नैटवर्क का विस्तार अफ़्रीका तक कर लिया है, और अमेरिका, एशिया व उससे भी आगे के स्थानों पर पीड़ितों को निशाना बनाया है. म्याँमार में सभी ग़लत कारणों से नए रिकॉर्ड बन रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:57:25 +0530</pubDate>
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<title>ग़ाज़ा: युद्धविराम के दौरान भी 265 बच्चों सहित कुल एक हज़ार लोगों की मौतें</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र की सहायता एजेंसियों ने ग़ाज़ा की स्थिति पर नई चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अक्टूबर 2025 में युद्धविराम की घोषणा के बाद से अब तक वहाँ 265 फ़लस्तीनी बच्चों की मौत हो चुकी है. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:57:19 +0530</pubDate>
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<title>शांति समझौते के 24 घंटे के भीतर Lebanon लहूलुहान! इज़राइली हमलों में 16 मौतें, US&#45;Iran &amp;apos;ऐतिहासिक डील&amp;apos; पर मंडराया संकट</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में शांति बहाली के लिए अमेरिका और ईरान के बीच जिस &#039;ऐतिहासिक&#039; समझौते की घोषणा कल हुई थी, उसकी स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि पूरा क्षेत्र एक बार फिर भीषण हिंसा की आग में झुलस गया। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के ठीक एक दिन बाद, दक्षिणी लेबनान ने हाल के महीनों की सबसे खौफनाक और जानलेवा रातों में से एक का सामना किया है।लेबनान की नेशनल न्यूज़ एजेंसी (NNA) के अनुसार, दक्षिणी लेबनान के नबातीह ज़िले में इज़राइल द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों और तोपखाने की गोलाबारी में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई है। कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जबकि दर्जनों लोग जमींदोज हुई इमारतों के मलबे के नीचे दबे हुए हैं, जिससे मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है। खबरों के मुताबिक, रात के समय कई कस्बों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया। NNA ने इस हमले को हाल के समय में इस क्षेत्र में हुई सबसे भीषण बमबारी में से एक बताया। नबातीह शहर, कफ़र जौज़, कफ़र रेमन और ज़ेबदीन में इज़राइली तोपखाने की गोलाबारी की खबर मिली। बाद में हवाई हमलों ने कफ़र तिबनित और रेहान हाइट्स को निशाना बनाया।नबातीह और हारौफ़ में कम से कम आठ लोग मारे गए। अल-शरकिया और डौइर के बीच एक घर पर हमले में चार अन्य लोगों की मौत हो गई। कफ़र सिर में तीन और लोग मारे गए। एक अलग घटना में, डौइर नगर पालिका भवन के पास एक मोटरसाइकिल को निशाना बनाकर किए गए इज़राइली ड्रोन हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया।शांति समझौते में लड़ाई खत्म करने का वादा किया गया थायह हिंसा अमेरिका और ईरान द्वारा 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के ठीक एक दिन बाद हुई है, जिसे मध्य पूर्व में शांति के लिए एक रोडमैप के रूप में पेश किया गया था। समझौते के मुख्य बिंदुओं में से एक यह है कि लेबनान सहित सभी सैन्य अभियान और शत्रुतापूर्ण गतिविधियां तुरंत और स्थायी रूप से बंद होनी चाहिए।इस समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए थे और अधिकारियों ने इसे क्षेत्र में तनाव कम करने के मकसद से किया गया एक &quot;जेंटलमैन एग्रीमेंट&quot; (आपसी सहमति का समझौता) बताया था।US-ईरान समझौते में क्या शामिल हैलड़ाई खत्म करने की अपील के अलावा, समझौते में कई बड़े वादे शामिल हैं। अमेरिका ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना शुरू करने पर सहमत हो गया है, जबकि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने और अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षणों में सहयोग करने का वादा किया है।इस समझौते में आर्थिक सहयोग, ईरान के लिए पुनर्निर्माण निधि और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) सहित समुद्री व्यापार मार्गों को बहाल करने के प्रयासों की रूपरेखा भी शामिल है। शांति समझौते के ऐलान के 24 घंटे से भी कम समय में लेबनान में हुए जानलेवा हमलों से इस बात पर नए सवाल उठ सकते हैं कि इस इलाके में कितनी जल्दी स्थिरता आ सकती है। Stay updated with International
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:20 +0530</pubDate>
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<title>50 फीट समुंदर के ऊपर ईरानी बाज, कुवैत में बिछाई US सैनिकों की लाश</title>
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<description><![CDATA[ 28 फरवरी 2026 से 6 मार्च 2026 के बीच, अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद युद्ध का पहला हफ्ता चल रहा था। युद्ध अपने चरम पर था और ईरानी मिसाइलें ज्वालामुखी की तरह फट रही थीं। पूरे मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में भारी तबाही मची थी।इसी बीच, समुद्र से मात्र 50 फीट की ऊंचाई पर ईरान अपने साहस और बहादुरी की एक नई कहानी लिखने जा रहा था। ईरान का एक लड़ाकू विमान (फाइटर जेट) फारस की खाड़ी की लहरों के बिल्कुल करीब से उड़ रहा था। यह विमान आसमान में ऊंचाई पर उड़ने के बजाय, समुद्र की लहरों से बिल्कुल सटकर उड़ रहा था। इसे अपना लंबा और गुप्त सफर लहरों के ठीक ऊपर ही पूरा करना था, जहां एक छोटी सी गलती का मतलब सीधे मौत था।दुश्मन की सोच से परे एक चालइस लड़ाकू विमान में ईरान के दो पायलट सवार थे, जो इसे फारस की खाड़ी से कुवैत की ओर ले जा रहे थे। उस दिन कुछ ऐसा होने वाला था, जिसकी कल्पना ईरान के दुश्मनों अमेरिका और इजराइल ने सपने में भी नहीं की होगी। आमतौर पर दुनिया यही मानती थी कि ईरान की वायुसेना बहुत कमजोर है। यह सच है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान के पास बहुत आधुनिक लड़ाकू विमान नहीं हैं। लेकिन उनकी बहादुरी और सूझबूझ इतनी थी कि आज यह सोच गलत साबित होने वाली थी। ईरान ने अपने तरीके से चाल चली और इजराइल बस देखता रह गया। समुद्र के ठीक ऊपर उड़ने वाला यह ईरानी विमान वियतनाम युद्ध के समय का एक बहुत पुराना &#039;नॉर्थ F-5&#039; लड़ाकू विमान था। इसे 1979 की इस्लामी क्रांति से बहुत पहले, ईरान के शाही परिवार ने अमेरिका से ही खरीदा था। हथियारों से लैस यह पुराना विमान कुवैत की तरफ बढ़ रहा था।इसे भी पढ़ें: उगते सूरज को सलाम, ईरान पर क्यों मेहरबान हुए ये 3 देश?विमान को इतना नीचे क्यों उड़ाया गया?अब सवाल यह उठता है कि ईरानी पायलट इस पुराने F-5 विमान को समुद्र के इतने करीब और इतना नीचे क्यों उड़ा रहे थे? क्या इसमें कोई तकनीकी खराबी आ गई थी? इस बात का खुलासा खुद ईरान की वायुसेना के उन पायलटों ने किया है। युद्ध के करीब 100 दिन बाद, इन पायलटों ने ईरानी मीडिया को एक इंटरव्यू दिया (सुरक्षा कारणों से मीडिया ने इनके चेहरे छिपा दिए थे)। ईरान की सेना अपने सैनिकों के बलिदान और अदम्य साहस के लिए जानी जाती है, और इस मिशन में भी उनकी हिम्मत की चरम सीमा देखने को मिली। आमतौर पर दुश्मन के रडार किसी भी उड़ने वाली चीज को पहचान कर बता देते हैं कि वह खतरनाक है या नहीं। अगर वह खतरनाक होती है, तो तुरंत हमला कर दिया जाता है। इसी रडार से बचने के लिए, ईरानी पायलटों ने अपनी योग्यता और तकनीक का इस्तेमाल करते हुए 50 साल से भी पुराने इस विमान को पानी से सिर्फ 50 फीट की ऊंचाई पर उड़ाया। ईरान से कुवैत तक यह विमान केवल 50 फीट की ऊंचाई पर ही उड़ता रहा, जबकि सुरक्षा के लिहाज से लड़ाकू विमानों की ऊंचाई कम से कम 500 फीट होनी चाहिए। पायलटों ने बताया कि कई जगह तो ऐसा भी हुआ कि उनका विमान समुद्र में चल रहे बड़े-बड़े पानी के जहाजों के बराबर या उनसे भी नीचे उड़ रहा था।इसे भी पढ़ें: ईरान के पास परमाणु से भी घातक हथियार, इसलिए अमेरिका ने मानी हार!हमला और मिशन की कामयाबीअब इस घटना के दूसरे हिस्से पर आते हैं। रडार की नजरों से बचते-बचाते ईरान का यह F-5 विमान कुवैत में स्थित अमेरिकी बेस &#039;अली अल सालेम एयर बेस&#039; के ठीक ऊपर पहुंच जाता है। इससे पहले कि अमेरिका की वायु रक्षा प्रणाली (एयर डिफेंस सिस्टम) और वहां तैनात सैनिक कुछ समझ पाते, विमान ने जोरदार हमला कर दिया। इस अचानक हुए हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए। अपना काम (मिशन) पूरा करके ईरान के पायलट तुरंत वहां से सुरक्षित निकल गए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:19 +0530</pubDate>
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<title>55 साल बाद पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर की बड़ी गलती, एक्शन में भारत!</title>
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<description><![CDATA[ 55 साल बाद पाकिस्तान एक बार फिर अपनी पुरानी गलती दोहराने का दुस्साहस करता हुआ दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज आने का नाम नहीं ले रहा और इस बार चीन के साथ मिलकर उसने एक ऐसा दांव खेला है जिससे कई एक्सपर्ट्स उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक भूल भी बता रहे हैं। 1971 की जंग में बंगाल की खाड़ी पाकिस्तान के लिए कब्रगाह साबित हुई थी। भारतीय नौसेना ने ऐसा प्रहार किया कि पाकिस्तान की समुद्री ताकत बहुत बुरी तरह से बिखर गई। उसे दशकों तक उस इलाके से दूर रहना पड़ा। लेकिन अब 55 साल बाद पाकिस्तान फिर उसी बंगाल की खाड़ी में लौटने की तैयारी कर रहा है।इसे भी पढ़ें: भारत से डरा मुनीर, अब तुर्की से मंगाए ये हथियार, अमेरिका भी हैरान! चीन से मिली नई हैंगोर क्लास पनडुब्बी के दम पर पाकिस्तान भारत को आंख दिखाने की कोशिश कर रहा है। सपने देख रहा है। लेकिन क्या पाकिस्तान इतिहास भूल चुका है? बता दें कि पाकिस्तान को हाल ही में चीन से अपनी पहली हैंगोर क्लास पनडुपी मिली है जो कराची पहुंच चुकी है। इसके बाद पाकिस्तानी नौसेना के जो वरिष्ठ अधिकारी हैं यह खुलकर यह दावा कर रहे हैं कि यह पनडुब्बी भविष्य में बंगाल की खाड़ी तक उसकी सैन्य पहुंच बढ़ा सकती है। अब यहां सबसे बड़ा सवाल उठता है पाकिस्तान को अचानक बंगाल की खाड़ी में लौटने की जरूरत क्यों पड़ गई? क्योंकि 1971 की हार के बाद पाकिस्तान की नौसेना लगभग पूरी तरह अरब सागर तक सीमित हो गई थी। लेकिन अब इस्लामाबाद सिर्फ अपनी समुद्री सीमा की रक्षा नहीं बल्कि हिंद महासागर के पूर्वी हिस्से में भी रणनीतिक मौजूदगी अपनी बनाना चाहता है।इसे भी पढ़ें: भारत से डरा मुनीर, अब तुर्की से मंगाए ये हथियार, अमेरिका भी हैरान!सपने देख रहा है उसके और यहीं से शुरू होती है चीन की एंट्री। पाकिस्तान सिर्फ एक नहीं बल्कि आठ हैंगोर क्लास पनडुपियां शामिल करने की प्लानिंग कर रहा है। इस योजना पर काम कर रहा है। यह सभी पनडुपियां चीन की मदद से तैयार की जा रही है और पाकिस्तान इन्हें अपनी नौसेना का भविष्य बता रहा है। लेकिन आखिर यह हैंगोर क्लास इतनी खास क्यों है? क्यों चर्चा है इसकी? दरअसल आपको बता दें कि इसकी सबसे बड़ी ताकत है एआईपी यानी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपुलेशन तकनीक। आसान भाषा में समझे तो यह तकनीक पनडुब्बी को लंबे समय तक समुद्र के भीतर छिपे रहने की क्षमता देती है। यानी दुश्मन के लिए उसे ढूंढना पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाता है। लेकिन रुकिए। पाकिस्तान जिस पनडुब्बी को गेम चेंजर बता रहा है उसका जवाब भारत के पास ऐसा है जिसके बारे में पाकिस्तान शायद बात भी नहीं करना चाहता। पिछले कुछ समय में पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में तेजी से सुधार देखने को मिला। दोनों देशों के बीच रक्षा संपर्क बड़े हैं, व्यापार बढ़ा है और सैन्य सहयोग को लेकर भी बातचीत काफी तेज है।इसे भी पढ़ें: Modi-Trump Meeting पर Pakistan में गजब रिएक्शन, Islamabad Lahore Karachi में जो कुछ हुआ वो देखने लायक था यही वजह है कि पाकिस्तान की बंगाल की खाड़ी में बढ़ती दिलचस्पी को सिर्फ एक पनडुपी की कहानी के तौर पर नहीं माना जा रहा है। देखा जा रहा है। कई डिफेंस एक्सपर्ट्स यह मानते हैं कि अगर भविष्य में पाकिस्तान को चीन का लगातार तकनीकी सहयोग और क्षेत्रीय स्तर पर बेहतर सामरिक समन्वय मिलता है तो बंगाल की खाड़ी में उसकी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। उसकी एक्टिविटीज़ बढ़ सकती हैं। लेकिन क्या इससे भारत की मुश्किलें बढ़ जाएंगी?यहीं पर पूरी तस्वीर बदल जाती है क्योंकि जिस क्षेत्र में पाकिस्तान वापसी का सपना देख रहा है वह भारत का सबसे मजबूत समुद्री इलाका माना जाता है। भारत के पास सिर्फ एक नहीं बल्कि कई स्तर की समुद्री ताकत मौजूद है। भारतीय नौसेना के पास दो विमान वाहक पोत हैं। परमाणु पनडुपियां हैं। अत्याधुनिक विध्वंसक युद्धपोत है और लंबी दूरी तक निगरानी करने वाले समुद्री गश्ती विमान है। अगर पनडुब्बी की ताकत की बात करें तो भारत के पास पाकिस्तान की नई हैंगोर क्लास के मुकाबले कहीं ज्यादा उन्नत क्षमताएं मौजूद है। भारतीय नौसेना के बेड़े में परमाणु शक्ति से लेस आईएएस अरिहंत और आईएएस अरिघात जैसी पनडुब्बीयां पहले से ही हैं जो महीनों तक समुद्र के भीतर रह सकती है। इसके अलावा भारत के पास कलवरी क्लास की आधुनिक स्कर्पियन पनडुपियां भी है जिन्हें हिंद महासागर में बेहद खतरनाक माना जाता है। पाकिस्तान तो बहुत पीछे है। इतना ही नहीं भारत की पी8i निगरानी विमान एमए 60R एंटी सबमरीन हेलीकॉप्टर और अंडमान निकोबार की रणनीतिक स्थिति मिलाकर किसी भी संदिग्ध पनडुपी की गतिविधि पर नजर रखने की क्षमता को और भी ज्यादा मजबूत बनाते हैं। यही नहीं भारत के पास आधुनिक एंटी सबमरीन हेलीकॉप्टर उन्नत सोनार सिस्टम और समुद्र के भीतर दुश्मन पनडुब्बियों को ट्रैक करने की मजबूत क्षमता पहले से ही है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:19 +0530</pubDate>
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<title>Iran US Deal: डील हुई लेकिन सवाल बड़े, Hormuz Strait पर 60 दिन बाद क्या होगा? हो गया खुलासा!</title>
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<description><![CDATA[ 28 फरवरी से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण युद्ध का अंत एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाले कूटनीतिक समझौते (एमओयू) के साथ हुआ है। इस समझौते के तुरंत बाद जहां अमेरिका ने कदम पीछे खींचते हुए ईरानी बंदरगाहों और तेल टैंकरों से अपनी नाकेबंदी पूरी तरह हटा ली है, वहीं ईरान ने इसे अपनी &#039;ऐतिहासिक जीत&#039; करार दिया है। दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक समुद्री रास्तों में से एक &#039;होर्मुज जलडमरूमध्य&#039; पर अपना दबदबा कायम करते हुए ईरान ने दो टूक कह दिया है कि वहां जहाजों की सुरक्षा के नाम पर किसी भी यूरोपीय नौसैनिक मिशन की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, ईरान ने पश्चिमी देशों की रणनीति को झटका देते हुए एक बड़ा ऐलान किया है कि अमेरिका के साथ 60 दिनों की बातचीत की अवधि खत्म होते ही, यानी ठीक दो महीने बाद, इस रास्ते से गुजरने वाले हर जहाज से &#039;समुद्री टैक्स&#039; वसूलने की एक नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। इसे भी पढ़ें: 50 फीट समुंदर के ऊपर ईरानी बाज, कुवैत में बिछाई US सैनिकों की लाशलेबनान का मुद्दा अभी भी बना हुआगौरतलब है कि तेहरान की यह ताज़ा चेतावनी तब आई जब इज़राइली अख़बार &#039;येदिओथ अहरोनोथ&#039; ने रिपोर्ट दी कि इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इज़राइल दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा ज़ोन तब तक बनाए रखेगा जब तक हमारी सुरक्षा ज़रूरतों के लिए इसकी ज़रूरत होगी। उनका इशारा सीमा के पास इज़राइली सैनिकों के कब्ज़े वाले लेबनान के 600 वर्ग किलोमीटर से ज़्यादा इलाके की ओर था। ईरान के मामले में, इज़राइली प्रधानमंत्री ने कहा कि यहूदी देश तेहरान को परमाणु हथियार हासिल न करने देने के सर्वोच्च लक्ष्य पर कायम रहेगा। वहीं दूसरी ओर, ईरान ने ज़ोर देकर कहा कि लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ी डील के लिए इज़राइल का पूरी तरह से पीछे हटना ज़रूरी है, जिससे इज़राइल के पीछे हटने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ज़िम्मेदार हो जाते हैं।इसे भी पढ़ें: उगते सूरज को सलाम, ईरान पर क्यों मेहरबान हुए ये 3 देश?मामला सुलझा या और उलझ गया?ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को लेबनान, हिज़्बुल्लाह और इज़राइल समेत सभी मोर्चों पर पूरी तरह से युद्धविराम की उम्मीद है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर एक पोस्ट में लिखा कि हम मध्य पूर्व क्षेत्र में सभी लोगों से अपील करते हैं कि वे हमारी बातचीत को अच्छी तरह से आगे बढ़ने देने के अपने वादे पर कायम रहें। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने भी इस समझौते को मंज़ूरी दे दी और ट्रंप की टीम के साथ सीधी बातचीत का समर्थन किया। खामेनेई ने कहा कि ट्रंप ने बेचैनी में यह समझौता करने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए। यह ध्यान देने वाली बात है कि अपने पिता की हत्या के बाद मार्च में पद संभालने के बाद से खामेनेई सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। हालाँकि, स्थिति तब जटिल हो गई जब गुरुवार सुबह तक लेबनान के खिलाफ़ इज़राइली ड्रोन हमले और तोपखाने से गोलाबारी जारी रही। दूसरी ओर, हिज़्बुल्लाह ने हाल के दिनों में कफ़र तेबनित-अली अल-ताहेर इलाके में इज़राइली सेना पर हुए कई हमलों की ज़िम्मेदारी ली। हाल की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इज़राइल की आलोचना करने वालों को आड़े हाथों लिया। व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान वेंस ने कहा कि डोनाल्ड जे. ट्रंप दुनिया के एकमात्र ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं जो इस समय इज़राइल देश के प्रति सहानुभूति रखते हैं। अगर मैं इज़राइली सरकार की कैबिनेट में होता, तो मैं शायद उस एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी पर हमला नहीं करता जो मेरे पास पूरी दुनिया में बचा है। वेंस की इस आलोचना पर इज़राइल ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>लोगों को मारकर नहीं निकाल सकते समाधान...इजरायल पर भयंकर भड़क गए जेडी वेंस</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकन वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने इजराइल के कुछ नेताओं की खुले शब्दों में आलोचना की और उन्हें कुछ समझाइश दी है। यह कहीं ना कहीं दिखलाता है कि अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान को लेकर मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। अमेरिका ने खुले मंच से क्या पहली बार इजराइल को यह मैसेज दे दिया है कि सिर्फ मिलिट्री का इस्तेमाल करके हर समस्या का हल नहीं निकलता। 17 जून को यूएस प्रेसिडेंट  ट्रंप और ईरान के प्रेसिडेंट मसूद प्रजिशियान के बीच एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी एमओयू पर साइन किया गया। ये सिग्नेचर्स दोनों राष्ट्र अध्यक्षों ने बगैर मुलाकात के किए और उन साइन डॉक्यूमेंट्स को इलेक्ट्रॉनिकली एक दूसरे के साथ शेयर किया गया। एक्सचेंज किया गया। इसलिए इसे इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर वाला एमओयू कहा जा रहा है। इस एमओयू का मकसद अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग को खत्म करना और वेस्ट एशिया या मिडिल ईस्ट में तनाव कम करना है। लेकिन इजराइल के राइट विंग मंत्री बैजलेल स्मट्रच और इतामार बनग्वर इस एग्रीमेंट से खुश नहीं है। उनका मानना है कि ईरान की मिलिट्री और न्यूक्लियर काबिलियत को पूरी तरह खत्म किए बगैर किसी समझौते का कोई मतलब नहीं है। इस बात की ग्रेविटी तब और ज्यादा बढ़ जाती है जब इसे इजराइल के कोई आम नेता नहीं बल्कि नेतन्या सरकार के मंत्री कह रहे हो। बेसलेल स्मोट्रेच इजराइल के वित्त मंत्री हैं। जबकि इतामार बनगवीर नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर हैं इजराइल के।इसे भी पढ़ें: Iran US Deal: डील हुई लेकिन सवाल बड़े, Hormuz Strait पर 60 दिन बाद क्या होगा? हो गया खुलासा! दोनों ही पीएम नेतन्याहू की सरकार में बेहद बड़े पदों पर हैं।  इसलिए उनके इस रुख को लेकर यूएस के वाइस प्रेसिडेंट जे डी वेंस से भी सवाल किया गया। जिस पर न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में जेडी वेंस कहते हैं आपका यानी इजराइल का असल प्रपोजल है क्या? आप 90 लाख आबादी वाले देश हैं। आप अपने हर नेशनल सिक्योरिटी इशू का समाधान लोगों को मार कर नहीं निकाल सकते। यानी जेडी वेंस ने इजराइली नेताओं को साफ-साफ यह समझाइश दे दी है कि आप 90 लाख आबादी वाले तो देश हैं और अपना दुश्मनों को मारकर दिक्कतों का हल निकालने की कोशिश करते हैं। कोई भी देश अपनी हर ही राष्ट्रीय सुरक्षा समस्या का समाधान इस तरह नहीं कर सकता। इसलिए अमेरिका ने ईरान के साथ मिलकर ये एमओयू साइन किया है। जिस एमओयू से इजराइल को इतनी आपत्ति है, जरा उसे भी समझते हैं कि उसमें है क्या-क्या और क्या-क्या तय हुआ है। इसमें स्टेट ऑफ हॉर्मोस को दोबारा खोलने पर सहमति बनी है। ईरानी बंदरगाहों पर लगा अमेरिकन नेवल ब्लॉकेड हटाया जाएगा। यह भी कहा गया है लेबनान समेत सभी मोर्चों पर टकराव खत्म करने की बात कही गई है। ईरान के फॉसिल फ्यूल जैसे ऑयल और नेचुरल गैस उसके एक्सपोर्ट पर कुछ प्रतिबंधों में राहत देने की बात है। सिर्फ ऑयल और नेचुरल गैस नहीं बल्कि पूरे फॉसिल फ्यूल की यहां पर बात हो रही है। 300 अरब डॉलर का रिकंस्ट्रक्शन फंड बनाने का वादा किया गया है। ईरान की फ्रीज की हुई कुछ संपत्तियों को रिलीज करने और बाकी सेंशंस को धीरे-धीरे हटाने की बात भी इस एमओयू में शामिल है।इसे भी पढ़ें: स्विट्जरलैंड जाने ही वाले थे वेंस, लेकिन इजरायल...क्या डील टूट गई?इजराइल की सेना नेकहा कि दक्षिणी लेबनान में तेज संघर्ष के दौरान उसके चार सैनिकों की मौत हो गई है। सेना ने बताया कि मारे गए सैनिकों में एक लेफ्टिनेंट कर्नल शामिल है, जबकि अन्य तीन की पहचान बाद में की जाएगी। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, दक्षिणी हिस्से में रातभर हुए इजराइली हवाई हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई है। ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब ईरान युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों के तहत स्विटजरलैंड में होने जा रही ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित वार्ता स्थगित कर दी गई है। खबरों के अनुसार, अरब चैनल ‘अल-मयादीन’ ने बताया कि लेबनान में इजराइल के सैन्य अभियान के कारण ईरान ने भी अपने प्रतिनिधिमंडल की स्विट्जरलैंड यात्रा टाल दी है। इजराइल का कहना है कि उसे दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखनी होगी और हिज्बुल्ला के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी क्योंकि यह संगठन उत्तरी इजराइल पर हमले करता रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:17 +0530</pubDate>
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<title>स्विट्जरलैंड जाने ही वाले थे वेंस, लेकिन इजरायल...क्या डील टूट गई?</title>
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<description><![CDATA[ स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला अहम समझौता ऐन मौके पर खटाई में पड़ गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बहुप्रतीक्षित समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए स्विट्जरलैंड के लिए उड़ान भरने ही वाले थे, लेकिन इजरायल के एक कदम ने पूरी कूटनीतिक बिसात पलट दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर इजरायल, लेबनान और हिजबुल्लाह को सीधी हिदायत दी थी कि वे आपस में न उलझें। लेकिन इजरायल ने राष्ट्रपति ट्रंप की इस चेतावनी को दरकिनार कर दिया और गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात दक्षिणी लेबनान पर एक बड़ा सैन्य हमला कर दिया। इजरायल द्वारा लेबनान पर किए गए इस भीषण हमले में 16 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, इस हमले के बाद हुए जवाबी एक्शन में इजरायली सेना को भी नुकसान उठाना पड़ा है। इजरायल ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि लेबनान की तरफ से किए गए पलटवार में उसके 4 सैनिकों की जान चली गई। लेबनान पर हुए इस इजरायली हमले से नाराज ईरान ने स्विट्जरलैंड जाने से साफ इनकार कर दिया है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इस रुख के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी अपना दौरा रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा। ईरान की समाचार एजेंसी &#039;फार्स&#039; (Fars News Agency) ने इस घटनाक्रम पर बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि लेबनान में युद्धविराम (सीजफायर) लागू होने तक अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाली यह बैठक स्थगित रहेगी।इसे भी पढ़ें: Iran US Deal: डील हुई लेकिन सवाल बड़े, Hormuz Strait पर 60 दिन बाद क्या होगा? हो गया खुलासा!स्विट्जरलैंड में होने वाली बातचीत रुकीये बातचीत शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होनी थी। लेकिन, वेंस के ल्यूसर्न जाने को लेकर हिचकिचाहट दिखाने और ईरानी अधिकारियों के यह कहने कि बैठक की तारीख अभी तय नहीं हुई है, के बाद अनिश्चितता पैदा हो गई। व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने कहा कि बातचीत की तैयारियां चल रही हैं, लेकिन कार्यक्रम अभी भी अनिश्चित है। प्रवक्ता ने कहा कि जैसा कि उपराष्ट्रपति ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, आने वाली तकनीकी बातचीत की योजनाएँ अभी तय नहीं हुई हैं और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल सबसे पहले मिलने वाले मौके पर रवाना होने के लिए तैयार है। लेकिन इन बातचीत की प्रक्रिया कभी भी आसान या पहले से तय नहीं रही है। प्रवक्ता ने आगे कहा कि वेंस गुरुवार रात को रवाना नहीं होंगे, जैसा कि पहले तय किया गया था, और अगले कदमों की पुष्टि होने के बाद और जानकारी दी जाएगी।इसे भी पढ़ें: 50 फीट समुंदर के ऊपर ईरानी बाज, कुवैत में बिछाई US सैनिकों की लाशशांति समझौते को लागू करने का काम शुरूयह देरी उस घटना के एक दिन बाद हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने इलाके में महीनों से चल रहे तनाव को खत्म करने के मकसद से एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता तुरंत लागू हो गया और दोनों देशों के बीच युद्धविराम को आगे बढ़ा दिया गया। 14-सूत्रीय MoU (समझौता ज्ञापन) की शर्तों के तहत, वॉशिंगटन और तेहरान को समझौते के तकनीकी पहलुओं पर बातचीत करने और उन्हें अंतिम रूप देने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है।वेंस का कहना है कि अमेरिका समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैगुरुवार को व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेंस ने कहा कि अमेरिका समझौते के पहले चरण के तहत अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि MoU में तय 60 दिन की बातचीत की अवधि आधिकारिक तौर पर गुरुवार से शुरू हो गई है और भरोसा जताया कि लॉजिस्टिक्स से जुड़ी व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद तकनीकी बातचीत शुरू हो जाएगी। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा कि हम जल्द से जल्द तकनीकी बातचीत शुरू करने के लिए उत्सुक हैं। फिलहाल, अमेरिका-ईरान बातचीत का अगला दौर रुका हुआ है और दोनों पक्ष बातचीत के लिए नई तारीख और जगह की पुष्टि का इंतज़ार कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>हीटवेव रोक देगी भारत की AI क्रांति? क्या अरबों डॉलर की योजना पर लगेगा ब्रेक</title>
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<description><![CDATA[ एक तरफ जहां भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश आकर्षित करने की होड़ में है, वहीं एक नए वैश्विक आकलन ने चेतावनी दी है कि देश के नए और आधुनिक डेटा सेंटर्स पर जलवायु से जुड़ी आपदाओं का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। जलवायु जोखिम का आकलन करने वाली कंसल्टेंसी फर्म &#039;XDI&#039; (क्रॉस डिपेंडेंसी इनिशिएटिव) द्वारा बुधवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक दुनिया का ध्यान मुख्य रूप से डेटा सेंटर्स की ऊर्जा और पानी की भारी जरूरतों पर ही केंद्रित रहा है। लेकिन भीषण गर्मी और खराब मौसम के कारण बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान जैसे भौतिक जलवायु जोखिम इस सेक्टर के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर उभर रहे हैं। &#039;2026 ग्लोबल एनालिसिस ऑफ प्लान्ड डेटा सेंटर्स फॉर फिजिकल क्लाइमेट रिस्क एंड रेजिलिएंस&#039; नामक इस रिपोर्ट में दुनियाभर में बनने वाले 2,595 प्रस्तावित डेटा सेंटर्स का विश्लेषण किया गया है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य इन डेटा सेंटर्स पर जलवायु परिवर्तन से होने वाले सीधे नुकसान, भीषण गर्मी की वजह से इनके संचालन में आने वाली रुकावटों और बिजली, पानी व परिवहन नेटवर्क जैसे बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के ठप होने से पैदा होने वाले बड़े खतरों का सटीक आकलन करना है।इसे भी पढ़ें: Father Of Indian AI | कौन हैं राज रेड्डी, जिन्हें कहा जाता है फॉदर ऑफ इंडियन एआई|Matrubhoomiभारत के लिए, इन नतीजों से देश के तेज़ी से बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम की लंबे समय तक बनी रहने की क्षमता पर नए सवाल खड़े होते हैं। एक एनालिसिस के अनुसार, प्लान किए गए डेटा सेंटर्स के लिए क्लाइमेट रिस्क (जलवायु संबंधी जोखिम) के मामले में भारत दुनिया भर में 11वें स्थान पर है। और भी चौंकाने वाली बात यह है कि भारत के कई प्रमुख टेक्नोलॉजी और इन्वेस्टमेंट हब तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक दुनिया भर के उन टॉप 30 क्षेत्रों में शामिल हैं, जिन्हें अत्यधिक गर्मी के कारण कामकाज में रुकावट का सबसे ज़्यादा अनुमानित जोखिम है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब भारत AI कंप्यूटिंग, क्लाउड सेवाओं और डेटा लोकलाइज़ेशन की ज़रूरतों के कारण डेटा सेंटर निवेश के लिए एक प्रमुख डेस्टिनेशन के तौर पर खुद को स्थापित कर रहा है। एक्सडीआई के फ़ाउंडर और साइंस एंड टेक्नोलॉजी हेड, डॉ. कार्ल मैलन ने कहा, &quot;ज़्यादातर बहस एनर्जी की मांग और पानी की खपत पर केंद्रित रही है। लेकिन क्लाइमेट से जुड़े फिजिकल रिस्क (भौतिक जलवायु जोखिम) भी अपने आप में एक अहम बात बनते जा रहे हैं। अब सवाल सिर्फ़ यह नहीं है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की अगली पीढ़ी कहाँ बनेगी, बल्कि यह भी है कि क्या वे एसेट्स अपने तय जीवनकाल के दौरान चालू रह पाएँगे, उनका बीमा हो पाएगा और वे आर्थिक रूप से मज़बूत बने रह पाएँगे। इसे भी पढ़ें: France दौरे पर PM मोदी की Business Diplomacy, Saint-Gobain के CEO से की हाई-लेवल मीटिंगयह रिपोर्ट एक बड़े ग्लोबल ट्रेंड की ओर इशारा करती है। अभी दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया में ऐसे डेटा सेंटर्स का अनुपात सबसे ज़्यादा है, जिनके लिए जलवायु से जुड़ा बड़ा ख़तरा है। दक्षिण एशिया में, मौजूदा हालात में 12% प्रस्तावित सेंटर्स को पहले ही ज़्यादा जोखिम वाला माना गया है; और अनुमान है कि सदी के अंत तक, ज़्यादा उत्सर्जन वाले हालात में यह जोखिम तीन गुना से भी ज़्यादा हो जाएगा। गर्मी सबसे बड़ी चिंताओं में से एक लगती है। भारत, ब्राज़ील, मेक्सिको, इंडोनेशिया और स्पेन जैसे देशों में अत्यधिक तापमान के कारण कामकाज में रुकावट आने का जोखिम सबसे ज़्यादा है। XDI के अनुसार, इन देशों में जिन सुविधाओं का आकलन किया गया, उनमें से 75% से ज़्यादा गर्मी से जुड़ी रुकावटों के मामले में ज़्यादा जोखिम वाली श्रेणी में आती हैं। साथ ही, जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ेगा, यह जोखिम और भी बढ़ने की आशंका है। बाढ़ या तूफ़ान से बुनियादी ढांचे को भौतिक नुकसान हो सकता है, लेकिन इसके उलट, लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी रहने से उपकरणों की कार्यक्षमता कम हो सकती है, कूलिंग की लागत बढ़ सकती है, बिजली आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है और सेवाओं में रुकावट का जोखिम बढ़ सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:16 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan | गुरुद्वारे के अंदर बुजुर्ग सिख जोड़े की बेरहमी से हत्या, 3 दिन बाद मुख्य संदिग्ध गिरफ्तार, भारत में भारी आक्रोश</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से एक बेहद स्तब्ध करने वाली और दर्दनाक खबर सामने आई है। यहाँ के मर्दान जिले में एक ऐतिहासिक गुरुद्वारे के भीतर सेवादार बुजुर्ग सिख जोड़े की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस दोहरे हत्याकांड के तीन दिन बाद स्थानीय पुलिस ने मुख्य संदिग्ध को गिरफ्तार करने का दावा किया है। इस घटना के बाद पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक सिख समुदाय में दहशत का माहौल है, वहीं भारत में सिखों की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पाकिस्तान सरकार को आड़े हाथों लिया है।इसे भी पढ़ें: NEET Re-exam: केजरीवाल ने छात्रों का बढ़ाया हौसला, बोले- आप सफल होंगे, बस Confidence रखें मृतकों की पहचान 70 वर्षीय जगन्नाथ और उनकी पत्नी अस्मा वंती के रूप में हुई है। वे पेशावर से लगभग 60 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में मर्दान जिले के बाबू मोहल्ला स्थित गुरुद्वारे की देखभाल कर रहे थे। बुधवार को गुरुद्वारे के अंदर ही उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।प्रांतीय पुलिस ने गिरफ्तार संदिग्ध की पहचान अमाजुगारी के निवासी शेर शाह के रूप में की है। मर्दान जिले के पुलिस अधिकारी (DPO) मसूद अहमद बंगश ने बताया कि पुलिस अधिकारियों, आतंकवाद-रोधी विभाग (CTD) के कर्मियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की एक संयुक्त जांच टीम (JIT) द्वारा की गई जांच में अब तक संदिग्ध का किसी प्रतिबंधित समूह, आतंकवादी संगठन या संगठित नेटवर्क से जुड़ा कोई सबूत नहीं मिला है।पुलिस ने कहा कि हत्याओं के पीछे का मकसद अभी स्पष्ट नहीं है और अधिकारी संदिग्ध के बयानों और अब तक एकत्र किए गए अन्य सबूतों के आधार पर सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, &quot;हमलावर गुरुद्वारे में घुसे&quot; और गोलीबारी करने के बाद मौके से फरार हो गए।इसे भी पढ़ें: हीटवेव रोक देगी भारत की AI क्रांति? क्या अरबों डॉलर की योजना पर लगेगा ब्रेक पाकिस्तान की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गुरुद्वारे की सुरक्षा के लिए एक पुलिस गार्ड तैनात किया गया था, लेकिन हमले के समय वह वहां मौजूद नहीं था। परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, लेकिन जांचकर्ताओं ने पाया कि डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर काम नहीं कर रहा था।इस हत्या पर भारत में अकाल तख्त और बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। अकाल तख्त के जत्थेदार (प्रधान पुजारी) ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने हत्या की निंदा की और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तथा खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री मुहम्मद सोहेल खान अफरीदी से आग्रह किया कि वे इस मामले का कड़ा संज्ञान लें, जिम्मेदार लोगों को तुरंत गिरफ्तार करें और दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करें।बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने हत्याओं की निंदा की और कहा कि पाकिस्तान 1950 के नेहरू-लियाकत समझौते के तहत किए गए वादों को पूरा करने में लगातार विफल रहा है, जिसमें भारत और पाकिस्तान दोनों में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की गारंटी दी गई थी।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:16 +0530</pubDate>
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<title>Rafale, AI और Space Deal... PM Modi के सुपरहिट France दौरे से भारत की बड़ी डिप्लोमेटिक जीत</title>
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<description><![CDATA[ प्रिय मित्र नरेंद्र, मुझे बहुत खुशी हुई आपका नीस, एवियन और पेरिस में स्वागत करके। फ्रांस और भारत की दोस्ती अमर रहे। मुझे उम्मीद है कि यह सही था।  फ्रांस आपसे प्यार करता है...आप मेरे सच्चे दोस्त हैं। पीएम मोदी की फ्रांस यात्रा खत्म होने पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने राजनयिक प्रोटोकॉल तोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए हिंदी में विदाई संदेश जारी किया है।  मोदी का फ्रांस दौरा 13 जून को शुरू हुआ, जब उन्होंने नीस का दौरा किया, मैक्रों के साथ &#039;भारत इनोवेट्स&#039; कार्यक्रम का उद्घाटन किया और फ्रांसीसी राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक की। स्लोवाकिया की दो दिन की यात्रा के बाद, भारतीय नेता 16 और 17 जून को G7 समिट के लिए फ्रांस के एवियन-लेस-बैन्स लौटे, जहाँ उन्होंने 16 महीनों में पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। मोदी ने पेरिस में अपनी यात्रा पूरी कर वतन वापसी कर ली है। लेकिन मोदी की फ्रांस यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ? आइए, इस यात्रा के अहम नतीजों को समझते हैं।इसे भी पढ़ें: मैक्रों की मुस्कान, कार्नी की चुप्पी, ट्रंप की Awkward Diplomacy, G7 कैसे बना &#039;रियलिटी चेक&#039; सम्मेलनडिफेंस, ट्रेड और AI... भारत-फ्रांस संबंधों में आई और भी नज़दीकी13 जून को फ्रांस पहुँचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने नीस (Nice) शहर का दौरा किया और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच व्यापक स्तर पर बातचीत हुई, जिसमें फ्रांस की जानी-मानी डिफेंस कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की भारत की योजना भी शामिल थी। इस बातचीत के बाद, दोनों नेता भारत-फ्रांस संबंधों को एक &#039;विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी&#039; के स्तर पर ले जाने के लिए सहमत हुए। इसके साथ ही उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक कॉम्पिटिशन और सैन्य गतिविधियों के बीच ऑर्बिट (कक्षा) में होने वाली एक्टिविटीज़ को ट्रैक करने, महत्वपूर्ण सैटेलाइट इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा करने और स्पेस सिक्योरिटी पर आपसी तालमेल को और मजबूत करने के लिए &#039;स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस&#039; में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की।नए लक्ष्य तय किएभारत और फ्रांस के बीच लगातार बढ़ रहे द्विपक्षीय व्यापार पर संतोष जताते हुए अगले पांच सालों में इसे दोगुना करने के लिए एक हाई-लेवल मैकेनिज्म स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जल्द लागू करने का आह्वान किया। साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाने पर सहमति जताई।इसे भी पढ़ें: G-7 में सीढ़ियों पर लड़खड़ाए Trump, PM Modi ने गिरने से बचाया!एआई से स्पेस तक, भविष्य की तस्वीर साफपीएम ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, क्वांटम कप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मटीरियल्स को भविष्य को आकार देने वाली प्रमुख तकनीकों के रूप मे रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मानव सभ्यता का अगला अध्याय इन्हीं तकनीकी क्षेत्रों से लिखा जाएगा। हर तकनीकी क्रांति अपने साथ नई जिम्मेदारियां लेकर आती है।स्पेस सेक्टर में बढ़ेगी भागीदारीह्यूमन स्पेसफ्लाइट और स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों के बीच साझेदारी बढ़ाने के तरीकों पर बात की। नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों ने कहा कि भारत का शांति अधिनियम सहयोग के नए अवसर पैदा करता है, जिनमें छोटे और उन्नत मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टरों पर साझेदारी भी शामिल है।मोदी-ट्रंप की दोस्ती का रिसेट मोड ऑनमोदी की फ्रांस यात्रा का एक और बड़ा नतीजा फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स में हुए G7 समिट के दौरान देखने को मिला। यहीं पर PM मोदी, जिन्हें इस समिट में बुलाया गया था, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले। भारत-अमेरिका रिश्तों में 16 लंबे, मुश्किल और उतार-चढ़ाव भरे महीनों के बाद यह उनकी पहली मुलाकात थी। इस मुलाकात से पहले, भारत-अमेरिका संबंध इस दौरान अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए थे। इसमें टैरिफ विवाद, ऑपरेशन सिंदूर सीज़फायर, रूसी तेल की खरीद, अमेरिकी हमलों में भारतीय नाविकों की मौत और भारत व उसकी अर्थव्यवस्था को कमज़ोर करने वाले कई बयान शामिल थे। भारत ने UK और कनाडा के साथ अपने व्यापारिक संबंध बढ़ाए हैंफ्रांस में G7 समिट के दौरान, PM मोदी ने दूसरे देशों के साथ भी संबंध मजबूत करने की कोशिश की। असल में, G7 समिट के दौरान ही UK के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और मोदी ने उस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लागू करने पर सहमति जताई, जिस पर उन्होंने लगभग एक साल पहले हस्ताक्षर किए थे। दोनों देशों ने बुधवार को घोषणा की कि यह डील 15 जुलाई से लागू हो जाएगी। यूके के बिज़नेस और ट्रेड सेक्रेटरी पीटर काइल ने कहा कि हम भारत के साथ अपनी अहम ट्रेड डील को जल्द से जल्द लागू कर रहे हैं, क्योंकि हम चाहते हैं कि बिज़नेस और आम लोगों को इसके फ़ायदे तुरंत मिलें, जिसमें सिर्फ़ पहले साल में ही 400 मिलियन पाउंड के टैरिफ में कटौती शामिल है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:15 +0530</pubDate>
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<title>Trump के अप्रत्याशित स्वभाव का Pakistan ने अब चखा कड़वा सबक, सीधे Iran&#45;US Deal कर Shahbaz को चौंकाया</title>
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<description><![CDATA[ भारत के अंदर और बाहर मोदी सरकार के आलोचक उनकी विदेश नीति पर सवाल उठाते रहे हैं। जब अमेरिका ने ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्ष में पाकिस्तान को मध्यस्थ के तौर पर इस्तेमाल किया, तो इन आलोचकों को मज़ा आया। भारतीय विपक्ष भी इस बात पर मज़ाक उड़ा रहा था कि 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में शुरुआती बातचीत करके पाकिस्तान कैसे मुख्य भूमिका में आ गया। लेकिन फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को अब अमेरिका के अस्थिर स्वभाव वाले राष्ट्रपति के साथ काम करने के खतरों का एहसास हो गया है, क्योंकि पाकिस्तान और उसके समर्थक तब मझधार में रह गए जब डोनाल्ड ट्रंप ने 17 जून को वर्साय में एक शानदार डिनर के दौरान अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए और 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह को रद्द कर दिया। यहाँ तक कि शांति समझौते (MoU) पर भी अमेरिका और ईरान के नेताओं के बीच चुपके से और डिजिटल तरीके से हस्ताक्षर किए गए, जबकि पाकिस्तान को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई। असल में, प्रधानमंत्री शरीफ़ और विदेश मंत्री मुनीर स्विट्ज़रलैंड जाने के लिए अपना सामान भी पैक कर चुके थे, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने एक ऐतिहासिक महल में फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के सामने समझौते पर हस्ताक्षर करके उन्हें बुरी तरह शर्मिंदा कर दिया। बात यहीं खत्म नहीं हुई। इसे भी पढ़ें: लोगों को मारकर नहीं निकाल सकते समाधान...इजरायल पर भयंकर भड़क गए जेडी वेंसउसी दिन, पीएम मोदी के आलोचकों और पाकिस्तान के समर्थकों को निराश करते हुए, राष्ट्रपति ट्रंप ने PM मोदी की जमकर तारीफ़ की और यहाँ तक कह दिया कि भविष्य में अगर उन पर हमला हुआ तो अमेरिका मदद के लिए आगे आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह भारत को तय करना है कि वह मध्य-पूर्व में शांति बनाए रखने में कोई भूमिका निभाना चाहता है या नहीं, क्योंकि भारत एक ग्लोबल प्लेयर है। भले ही भारत राष्ट्रपति ट्रंप की बातों को पूरी तरह गंभीरता से न ले, लेकिन 17 जून की घटनाओं ने शरीफ़ के मुँह पर ज़ोरदार तमाचा मारा; उन्हें स्विट्ज़रलैंड का अपना दौरा रद्द करना पड़ा और इस्लामाबाद में अपने ऑफ़िस में बैठकर ही उस अंतरिम शांति समझौते की तारीफ़ करनी पड़ी। अब इस अंतरिम समझौते को &#039;इस्लामाबाद घोषणा&#039; के बजाय &#039;वर्साय समझौता&#039; कहा जाएगा, जबकि शहबाज़ शरीफ़ और ट्रंप के पसंदीदा फ़ील्ड मार्शल मुनीर को उम्मीद थी कि इसे &#039;इस्लामाबाद घोषणा&#039; कहा जाएगा। ईरान के मामले में अमेरिका के दूसरे मध्यस्थ, कतर ने समझदारी दिखाई और पाकिस्तान व उसके समर्थकों की तरह बढ़-चढ़कर बोलने के बजाय पर्दे के पीछे ही रहा। इसे भी पढ़ें: स्विट्जरलैंड जाने ही वाले थे वेंस, लेकिन इजरायल...क्या डील टूट गई?एवियन में हुई द्विपक्षीय बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के साथ सामान्य कामकाज जारी रखने का संकेत दिया, वहीं G-7 समिट में भारतीय प्रधानमंत्री का व्यवहार विनम्र और सम्मानजनक तो था, लेकिन समिट के बड़े नेताओं के सामने वे बिल्कुल भी चापलूसी करते हुए नहीं दिखे। असल में, अपने दोस्त इमैनुएल मैक्रों से मिले रेड-कार्पेट स्वागत के अलावा, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, EU की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन, UAE के प्रेसिडेंट एम. बी. ज़ायद, UK के PM कीर स्टारमर और इटली की PM जियोर्जिया मेलोनी ने भी PM मोदी की तारीफ़ की। PM मोदी ने G-7 के दौरान जापान की PM सनाए तकाइची से भी मुलाकात की, और उम्मीद है कि जापानी नेता जल्द ही भारत का दौरा करेंगी।इसे भी पढ़ें: Iran US Deal: डील हुई लेकिन सवाल बड़े, Hormuz Strait पर 60 दिन बाद क्या होगा? हो गया खुलासा!ईरान परमाणु मुद्दे और होर्मुज जलडमरूमध्य में नेविगेशन की आज़ादी के मामले में भारत और अमेरिका एक ही राय रखते हैं। PM मोदी ने ईरान के साथ शांति समझौता करने और ऊर्जा संकट को पूरी तरह फैलने से रोकने के लिए ट्रंप की तारीफ़ की। भले ही भारत और अमेरिका जल्द से जल्द व्यापार समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारत ने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ डील करना सीख लिया है—यानी एक बार में एक दिन के हिसाब से चलना। यह बात अब पाकिस्तानियों को भी समझ आ जाएगी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:15 +0530</pubDate>
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<title>Netanyahu का America को दो टूक जवाब, Southern Lebanon से पीछे नहीं हटेगा Israel, अब डील का क्या होगा?</title>
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<description><![CDATA[ इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर ने शुक्रवार को लेबनान के खिलाफ़ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि पूरा लेबनान जल जाना चाहिए यह बात उन्होंने तब कही जब इज़राइली सेना ने देश में अपने चार सैनिकों की मौत की घोषणा की। मध्य पूर्व के संघर्ष को खत्म करने के मकसद से हुए अमेरिका-ईरान समझौते के लागू होने के बाद, इज़राइली सेना को हुए नुकसान की यह पहली घोषणा थी। इस समझौते का मकसद इज़राइल और लेबनान में ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह समूह के बीच लड़ाई को रोकना भी था, हालांकि वाशिंगटन ने इज़राइल के लगातार जारी सैन्य अभियान पर निराशा जताई है। बेन ग्विर ने एक बयान में कहा कि अमेरिकियों का पूरा सम्मान करते हुए, इज़राइल को पूरी दुनिया को यह साफ़ कर देना चाहिए कि हमारे बेटों का खून और हमारे नागरिकों की सुरक्षा कोई मोल-भाव की चीज़ नहीं है। पूरा लेबनान जल जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इज़राइली माँ की आँखों से गिरे हर आँसू के बदले लेबनान की हज़ारों माताओं को रोना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि नियर ईस्ट (मध्य पूर्व) में, नपे-तुले जवाब और संयम से जीत नहीं मिलती।इसे भी पढ़ें: Rafale, AI और Space Deal... PM Modi के सुपरहिट France दौरे से भारत की बड़ी डिप्लोमेटिक जीतजहाज़ों को 60 दिनों तक फ़ीस नहीं देनी होगीईरान के स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ प्राधिकरण ने कहा है कि इस अहम समुद्री रास्ते से गुज़रने वाले जहाज़ों से अगले 60 दिनों तक कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी।इज़राइली सैनिकों और इलाक़े पर हमलों के लिए  &#039;बहुत भारी कीमत&#039; चुकानी होगीइज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इज़राइल अपने सैनिकों या इलाक़े पर हमले बर्दाश्त नहीं करेगा और चेतावनी दी कि वह हिज़्बुल्लाह से इसके लिए &#039;बहुत भारी कीमत&#039; वसूल करेगा। नेतन्याहू ने कहा कि देश की सेना लेबनान में &#039;जब तक ज़रूरी होगा&#039; तब तक बनी रहेगी। इसे भी पढ़ें: शांति सभी के लिए अच्छी: US-Iran डील पर बोले Shashi Tharoor, भारत को मिलेगा बड़ा फायदाअप्रूवल रेटिंग में कोई खास बदलाव नहीं आयाएक नए AP-NORC पोल के मुताबिक, ज़्यादातर अमेरिकी ईरान के मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रवैये को पसंद नहीं करते हैं। यह पोल तब हुआ जब ट्रंप ने संकेत दिया कि तेहरान के साथ एक समझौता हो गया है। सर्वे से पता चलता है कि ईरान के साथ तीन महीने से चल रहे टकराव को लेकर अमेरिकी लोगों में नाराज़गी है, भले ही ट्रंप ने तेहरान को धमकी देने के बजाय बातचीत फिर से शुरू करने का रुख अपनाया हो। इस मुद्दे पर राष्ट्रपति के रवैये को लेकर लोगों की राय पार्टियों के आधार पर बंटी हुई है। कुल मिलाकर, 65% अमेरिकी वयस्क ईरान के मामले में ट्रंप के रवैये को पसंद नहीं करते हैं। जहाँ डेमोक्रेट और निर्दलीय लोग उनके कदमों को नकारात्मक रूप से देखते हैं, वहीं केवल 28% रिपब्लिकन ने असंतोष जताया है, जो इस टकराव को लेकर पार्टी-आधारित मतभेद को दिखाता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:14 +0530</pubDate>
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<title>बाइडेन के सहयोगी ने Wuhan Lab को फंड कर COVID साजिश रची? तुलसी गबार्ड ने वैश्विक महामारी की नई फाइल खोल चौंका दिया</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर (DNI) के तौर पर अपने आखिरी दिन तुलसी गबार्ड ने कोविड-19 महामारी की शुरुआत से जुड़े ऐसे दस्तावेज़ जारी किए जिन्हें उन्होंने पहले कभी न देखे गए दस्तावेज़ बताया। उन्होंने अमेरिका के पूर्व शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एंथनी फौसी पर आरोप लगाया कि उन्होंने चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी में विवादित रिसर्च के लिए फ़ंडिंग की और वायरस की उत्पत्ति के बारे में जानकारी छिपाने में मदद की। एक्स पर एक वीडियो मैसेज शेयर करते हुए गैबार्ड ने कहा कि अब समय आ गया है कि आप सच जानें। इसे भी पढ़ें: Rafale, AI और Space Deal... PM Modi के सुपरहिट France दौरे से भारत की बड़ी डिप्लोमेटिक जीतफौची ने वुहान रिसर्च के लिए फंड दियागैबार्ड के आरोपों के केंद्र में डॉ. एंथनी फौची हैं, जिन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज (NIAID) का नेतृत्व किया और बाद में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के मुख्य चिकित्सा सलाहकार के तौर पर काम किया। गैबार्ड के अनुसार, फौची ने वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में चमगादड़ कोरोना वायरस से जुड़ी रिसर्च के लिए अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे से लाखों डॉलर की फंडिंग को मंज़ूरी दी। उनका दावा है कि इस फंडिंग से तथाकथित गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च को बढ़ावा मिला। ये ऐसे वैज्ञानिक प्रयोग हैं जिनमें वायरस में बदलाव करके यह अध्ययन किया जाता है कि वे कैसे ज़्यादा संक्रामक या खतरनाक बन सकते हैं। गैबर्ड ने कहा कि हाल ही में जारी किए गए दस्तावेज़ों से पता चलता है कि ऐसा शोध अमेरिकी समर्थित निधि से किया गया था और संभवतः उन घटनाओं से जुड़ा था जिन्होंने अंततः वैश्विक महामारी को जन्म दिया। गेन-ऑफ-फंक्शन शोध क्या है?गेन-ऑफ-फंक्शन शोध में रोगजनकों को परिवर्तित करना शामिल है ताकि यह बेहतर ढंग से समझा जा सके कि रोग कैसे फैलते हैं, विकसित होते हैं या मेजबानों को संक्रमित करते हैं। कुछ का तर्क है कि यह शोध वैज्ञानिकों को भविष्य के प्रकोपों ​​की तैयारी करने और टीके विकसित करने में मदद करता है। हालांकि, कुछ चेतावनी देते हैं कि यदि प्रयोगशाला सुरक्षा उपाय विफल हो जाते हैं तो वायरस को संशोधित करने से महत्वपूर्ण जोखिम होते हैं। वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय जांच के केंद्र में रहा है, क्योंकि वुहान ही वह शहर था जहां 2019 के आखिर में सबसे पहले COVID-19 सामने आया था। सच छिपाने की तीन-चरणों वाली कोशिशगैबार्ड ने फौची पर सच छिपाने के लिए तीन चरणों वाली कोशिश की योजना बनाने का आरोप लगाया।फौची ने वुहान में &#039;गेन-ऑफ-फंक्शन&#039; रिसर्च के लिए फंड दिया।उन्होंने चुनिंदा एक्सपर्ट्स और इंटेलिजेंस अधिकारियों के साथ मिलकर जनता और इंटेलिजेंस के आकलन को &#039;प्राकृतिक उत्पत्ति&#039; (natural origin) की थ्योरी की ओर मोड़ने का काम किया।इसके बाद, उन्होंने खुद को महामारी के मामले में सबसे बड़े एक्सपर्ट के तौर पर पेश किया और दूसरे विचारों को खारिज या सेंसर कर दिया। दस्तावेज़ों में क्या है?हालांकि गैबार्ड ने इन फ़ाइलों को &#039;पहले कभी न देखी गई&#039; बताया है, लेकिन इनमें उठाए गए कई मुद्दों पर सालों से सार्वजनिक रूप से बहस होती रही है। पहले भी ऐसी खबरें आई हैं कि वुहान लैब से जुड़े रिसर्च प्रोजेक्ट्स को अमेरिका से जुड़ी फंडिंग मिली थी, और वायरस की उत्पत्ति पर हुई चर्चाओं में फ़ाउची की भूमिका को लेकर वाशिंगटन में लंबे समय से राजनीतिक और वैज्ञानिक बहसें होती रही हैं। जारी की गई फ़ाइलों की समीक्षा से पता चलता है कि इनमें इंटेलिजेंस अधिकारियों के बीच कई आंतरिक ईमेल और बातचीत शामिल हैं। हालांकि, कई हिस्सों को छिपा दिया गया है (यानी उन्हें &#039;रेडैक्ट&#039; कर दिया गया है)। आलोचकों का कहना है कि इन दस्तावेज़ों में ऐसा कोई ठोस सबूत (&quot;स्मोकिंग गन&quot;) नहीं है जो यह साबित करे कि जान-बूझकर मामले को छिपाने की कोशिश की गई थी। कोविड-19 की उत्पत्ति महामारी के दौर के सबसे बड़े अनसुलझे सवालों में से एक बनी हुई है। कुछ वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि वायरस के जानवरों से इंसानों में फैलने की सबसे ज़्यादा संभावना है, और ऐसा शायद वुहान के वाइल्डलाइफ़ मार्केट के ज़रिए हुआ होगा।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:13 +0530</pubDate>
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<title>Netanyahu की Hezbollah को खुली धमकी, &amp;apos;भारी कीमत चुकानी होगी&amp;apos;, IDF ने शुरू किया बड़ा Operation</title>
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<description><![CDATA[ हिज़्बुल्लाह से बहुत भारी कीमत वसूलने का संकल्प लेते हुए, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को उन चार इज़राइली सैनिकों (जिनमें एक कमांडर भी शामिल था) के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की, जो इस &quot;घिनौने हमले&quot; में मारे गए थे। इज़राइली सेना का आरोप है कि हिज़्बुल्लाह ने युद्धविराम का उल्लंघन किया है; दक्षिणी लेबनान में एक संदिग्ध ड्रोन हमले में IDF टैंक बटालियन के कमांडर और तीन अन्य सैनिकों की मौत हो गई। एक्स पर एक पोस्ट में नेतन्याहू ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। उन्होंने इस हमले को &quot;युद्धविराम का खुला उल्लंघन&quot; बताया और पुष्टि की कि उन्होंने इज़राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) को आतंकवादी समूह पर पूरी ताकत से हमला करने का निर्देश दिया है।इसे भी पढ़ें: US-Iran Peace Deal पर Donald Trump का बड़ा खुलासा, Netanyahu ने क्यों डाला था अड़ंगा?उन्होंने पोस्ट में लिखा कि मैं 52वीं आर्मर्ड बटालियन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल डोर गैडलियाह बेन सिमोन और उन तीन बहादुर सैनिकों (जिनके नाम अभी जारी नहीं किए गए हैं) के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। उनके खून का बदला लिया जाए - और कल हुई गोलीबारी में घायल हुए लोगों के जल्द ठीक होने की कामना करता हूं। हिज़्बुल्लाह के घिनौने हमले के बाद, जो युद्धविराम का खुला उल्लंघन था, मैंने कल रात IDF को हिज़्बुल्लाह पर पूरी ताकत से हमला करने का निर्देश दिया। प्रधानमंत्री ने पुष्टि की कि घुसपैठ के बाद IDF ने 80 से ज़्यादा आतंकवादी ठिकानों पर सफलतापूर्वक हमला किया और दर्जनों आतंकवादियों को मार गिराया। उन्होंने कहा कि आज सुबह बेका घाटी में हिज़्बुल्लाह के मुख्यालय पर हमले के साथ इज़राइली ऑपरेशन जारी रहे।इसे भी पढ़ें: US-Iran Deal से इजरायल बाहर! क्या समझौते का होगा पालन, ट्रंप vs नेतन्याहू अब होने वाला है?उन्होंने कहा कि IDF ने 80 से ज़्यादा आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया और दर्जनों आतंकवादियों को मार गिराया। इसके बाद, आज सुबह IDF ने बेका घाटी में हिज़्बुल्लाह के मुख्यालय पर हमला किया। रक्षा मंत्री और जनरल स्टाफ़ के प्रमुख के साथ हालात का जायज़ा लेने के बाद, नेतन्याहू ने दोहराया कि इज़राइल अपने इलाक़े या सैन्य कर्मियों के लिए किसी भी ख़तरे को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने फिर कहा कि उत्तरी इज़राइल में समुदायों की सुरक्षा के लिए जब तक ज़रूरी होगा, इज़राइली सेना दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि आईडीएफ हमारी सेना और हमारे इलाक़े के लिए किसी भी ख़तरे को नाकाम करने के लिए कार्रवाई करेगी और इस बात पर ज़ोर दिया कि सेना को उनके निर्देश स्पष्ट और अडिग हैं।इसे भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान समझौते में पाकिस्तान की भूमिका मोदी सरकार की विदेश नीति के लिए गंभीर झटका: कांग्रेसउन्होंने लिखा, आज सुबह, मैंने रक्षा मंत्री और जनरल स्टाफ़ के प्रमुख के साथ हालात का जायज़ा लिया। मेरे निर्देश स्पष्ट हैं: इज़राइल हमारे सैनिकों या हमारे इलाक़े पर हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा, और इन हमलों के लिए हिज़्बुल्लाह को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। जैसा कि मैंने कल भी साफ़ तौर पर कहा था: उत्तर में बस्तियों की सुरक्षा के लिए जब तक ज़रूरी होगा, इज़राइल दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में बना रहेगा।इसे भी पढ़ें: Netanyahu का &#039;ईरान मिशन&#039; फेल! Donald Trump की शांति डील से &#039;बीबी&#039; के सियासी भविष्य पर संकट?अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ये बयान तब आया है जब इज़राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने शुक्रवार को लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ हमले किए, जिसमें कम से कम 16 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। हालांकि ईरान-अमेरिका समझौते में इज़राइल और लेबनान के बीच लड़ाई रोकने की बात कही गई थी, फिर भी हमले जारी रहे। अल जज़ीरा के अनुसार, IDF ने एक बयान में यह भी कहा कि उन्होंने रात भर दक्षिणी लेबनान में कई हमले किए। उन्होंने कहा कि ये हमले हिज़्बुल्लाह द्वारा &quot;सीज़फायर (युद्धविराम) के बार-बार उल्लंघन&quot; के जवाब में किए गए थे। इज़राइली वायु सेना ने कहा, &quot;वायु सेना ने कुछ समय पहले बेका घाटी में हिज़्बुल्लाह आतंकवादी संगठन के बुनियादी ढांचे पर हमला किया। यह हमला हिज़्बुल्लाह आतंकवादी संगठन द्वारा सीज़फायर के बार-बार उल्लंघन के जवाब में किया गया, जो लगातार आगे बढ़ रहा है और IDF बलों के खिलाफ आतंकी साजिशों को अंजाम दे रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:12 +0530</pubDate>
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<title>Vishwakhabram: BrahMos का नया अवतार मचाएगा पूरी दुनिया में धमाल, भारत ने बूस्टर के बाद स्वदेशी वॉरहेड भी बना लिया</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दोस्ती लगातार ऐसा कमाल दिखा रही है जिसने भारत की युद्धक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है और एशिया से लेकर पूरे दक्षिण एशिया के सामरिक संतुलन को बदलना शुरू कर दिया है। अब भारत और रूस ने ब्रह्मोस मिसाइल के छोटे और हाइपरसोनिक संस्करणों पर भी काम तेज कर दिया है, जिससे आने वाले समय में भारतीय सेना की मारक ताकत कई गुना अधिक घातक होने वाली है। इसी बीच सौवें स्वदेशी बूस्टर के निर्माण के साथ भारत ने दुनिया को साफ संदेश दे दिया है कि अब वह युद्ध की दिशा तय करने वाली महाशक्ति बनने की राह पर तेजी से बढ़ रहा है।हम आपको बता दें कि ब्रह्मोस एयरोस्पेस और सोलर इंडस्ट्रीज डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने सौवें स्वदेशी बूस्टर को तैयार कर भारत के रक्षा आत्मनिर्भरता अभियान को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा दिया है। यह वही बूस्टर है जो मिसाइल को रफ्तार, संतुलन और घातक प्रहार की शक्ति देता है। पहले भारत को इसके लिए रूस पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के बाद भारत ने न केवल इस तकनीक को आत्मसात किया बल्कि उत्पादन क्षमता को विस्फोटक गति से बढ़ा दिया। जहां शुरुआत में महीने में केवल एक बूस्टर बनता था, वहीं अब हर महीने लगभग साठ बूस्टर तैयार किए जा रहे हैं। यह बदलाव केवल उत्पादन का नहीं, बल्कि भारत की सैन्य मानसिकता के परिवर्तन का संकेत है।इसे भी पढ़ें: Vietnam से BrahMos डील लगभग फाइनल, ब्रह्मोस चीफ जयतीर्थ जोशी बोले- बातचीत आखिरी दौर मेंसोलर इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष सत्यनारायण नुवाल के मुताबिक कंपनी अब हर साल करीब डेढ़ सौ बूस्टर आराम से तैयार कर सकती है। इसका मतलब साफ है कि आने वाले समय में भारत के पास ब्रह्मोस मिसाइलों का विशाल भंडार होगा और युद्ध की स्थिति में दुश्मन के पास प्रतिक्रिया देने तक का समय नहीं बचेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब अगला निशाना ब्रह्मोस के वॉरहेड का पूर्ण स्वदेशीकरण है। यही वह हिस्सा होता है जो लक्ष्य को तबाह करता है। कंपनी ने इसका विकास कर परीक्षण के लिए भेज दिया है। यदि अगले कुछ सप्ताह में मंजूरी मिलती है तो भारत पूरी तरह स्वदेशी ब्रह्मोस वॉरहेड का उत्पादन शुरू कर देगा।इस कदम का सामरिक महत्व बेहद गहरा है। युद्ध के समय किसी भी देश की सबसे बड़ी कमजोरी विदेशी हथियारों और पुर्जों पर निर्भरता होती है। यदि आपूर्ति रुक जाए तो सेना का पूरा तंत्र ठप पड़ सकता है। भारत अब इसी जाल को तोड़ रहा है। ब्रह्मोस के बूस्टर और वॉरहेड दोनों का स्वदेशीकरण यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी संकट की घड़ी में भारत की मारक क्षमता पर बाहरी दबाव असर न डाल सके। यह आत्मनिर्भरता भारत को केवल सुरक्षित नहीं बनाएगी, बल्कि उसे हथियार निर्यातक महाशक्ति में भी बदल देगी।हम आपको यह भी बता दें कि फिलीपींस के बाद अब वियतनाम भी ब्रह्मोस खरीदने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। पूर्वी और पश्चिमी दुनिया के कई देशों के साथ बातचीत चल रही है। इसका सीधा संदेश चीन को जाता है। दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद महासागर तक भारत अब सामरिक संतुलन का निर्णायक स्तंभ बनता जा रहा है। जिन देशों को चीन की आक्रामकता से खतरा है, वह अब भारत की ओर सुरक्षा साझेदार के रूप में देख रहे हैं।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रूस ने भी ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में रुचि दिखाई है। यह वही रूस है जिसके साथ मिलकर यह परियोजना शुरू हुई थी। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि रूस को भी भारत निर्मित ब्रह्मोस की आवश्यकता महसूस हो रही है। यह बदलाव बताता है कि भारत अब केवल साझेदार नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी और उत्पादन क्षमता में बराबरी की स्थिति में पहुंच चुका है।इसी बीच, भारत और रूस ने ब्रह्मोस के छोटे और हाइपरसोनिक संस्करणों पर काम तेज कर दिया है। यह भविष्य के युद्धों की तस्वीर बदल सकता है। ब्रह्मोस का अगली पीढ़ी वाला संस्करण हल्का और अधिक घातक होगा। इसे तेजस MK1A, तेजस MK2 और भविष्य के AMCA जैसे लड़ाकू विमान एक साथ कई मिसाइलों के साथ ले जा सकेंगे। इसका अर्थ है कि भारतीय वायुसेना एक ही मिशन में दुश्मन के कई ठिकानों को मिटाने की क्षमता हासिल कर लेगी।लेकिन असली डर पैदा करेगा हाइपरसोनिक ब्रह्मोस। यह मिसाइल ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक रफ्तार से हमला करेगी। इतनी तेज गति वाली मिसाइल को रोकना लगभग असंभव माना जाता है। यदि भारत यह क्षमता हासिल कर लेता है तो चीन और पाकिस्तान दोनों की वायु रक्षा प्रणालियां बेमानी हो जाएंगी। दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का मौका तक नहीं मिलेगा। यह केवल हथियार नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबदबे का ऐसा औजार होगा जो युद्ध शुरू होने से पहले ही विरोधी का मनोबल तोड़ देगा।हम आपको बता दें कि ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत इसकी बहु आयामी क्षमता है। यह जमीन, समुद्र, पनडुब्बी और हवा से हमला कर सकती है। वर्ष 2017 में सुखोई तीस एमकेआई से इसके सफल परीक्षण के बाद भारत ने सामरिक क्रूज मिसाइल त्रिशक्ति हासिल कर ली थी। अब भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों के पास एक ऐसा साझा हथियार है जो किसी भी मोर्चे पर बिजली की तरह हमला कर सकता है।देखा जाये तो आज ब्रह्मोस केवल मिसाइल नहीं, बल्कि नए भारत की सैन्य चेतना का प्रतीक बन चुकी है। यह उस भारत की पहचान है जो अब दुश्मन के हमले का इंतजार नहीं करता, बल्कि जरूरत पड़ने पर उसकी जमीन तक कांपने पर मजबूर कर देता है। साथ ही जिस ब्रह्मोस प्रणाली के लिए कभी रूस पर भारी निर्भरता थी, आज वही मिसाइल भारत की सैन्य ताकत का सबसे तेज और सबसे घातक प्रतीक बन चुकी है। दुनिया ने देखा था कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस ने जिस तरह अपनी मारक क्षमता दिखाई, उसने दुश्मनों की रीढ़ में सिहरन पैदा कर दी थी।बहरहाल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि युद्ध के समय आपूर्ति श्रृंखलाएं कभी भी टूट सकती हैं और ऐसी स्थिति 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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:11 +0530</pubDate>
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<title>Tibet में चीनी बर्बरता पर घिरा Dragon, US में &amp;apos;Genocide&amp;apos; जांच के लिए Bill पेश</title>
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<description><![CDATA[ तिब्बतियों के साथ चीन के बर्ताव को लेकर बढ़ती चिंता के कारण अमेरिकी कांग्रेस में फिर से कार्रवाई शुरू हुई है। वरिष्ठ सांसद इस बात पर आधिकारिक फैसला चाहते हैं कि क्या तिब्बत में चीन की नीतियां &#039;नरसंहार&#039; या &#039;मानवता के खिलाफ अपराध&#039; की श्रेणी में आती हैं। &#039;फायुल&#039; के मुताबिक, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर बनी हाउस की खास समिति के चेयरमैन और कांग्रेस सदस्य जॉन मूलनार, &#039;तिब्बत एट्रोसिटीज डिटरमिनेशन एक्ट&#039; (तिब्बत में अत्याचारों के निर्धारण से जुड़ा कानून) के सह-प्रायोजक (co-sponsor) बन गए हैं। इस कानून का मकसद अमेरिकी सरकार से अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत तिब्बत में चीन के कामकाज का औपचारिक मूल्यांकन करवाना है। यह बिल रिपब्लिकन कांग्रेस सदस्य क्रिस स्मिथ और डेमोक्रेटिक कांग्रेस सदस्य टॉम सुओज़ी ने पेश किया था।इसे भी पढ़ें: चीन-अमेरिका नहीं भारत बना रहा पेरिस से भी 5 गुना बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क, क्या है अडानी का दुनिया हिलाने वाला मेगा प्लान?प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी विदेश मंत्री को यह जांच करने का निर्देश दिया गया है कि क्या चीनी अधिकारियों ने तिब्बती लोगों के खिलाफ नरसंहार या मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आने वाले काम किए हैं। इस कदम का समर्थन करते हुए मूलनार ने कहा कि अमेरिका को उस बात को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए जिसे उन्होंने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा अपनी आज़ादी और धार्मिक मान्यताओं को बचाने की कोशिश कर रहे तिब्बतियों के दमन के तौर पर बताया। उन्होंने तर्क दिया कि यह कानून तिब्बत में कथित अत्याचारों के लिए जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अगर यह कानून बन जाता है, तो विदेश विभाग को एक साल के भीतर कांग्रेस को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसमें तिब्बत में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के सबूतों की जांच की जाएगी।इसे भी पढ़ें: अब क्या हो गया? China, Russia, Iran के नेताओं ने अचानक क्यों कटाया Delhi के लिए टिकट? Modi से क्यों मिलना चाहते हैं?प्रस्तावित समीक्षा में चीनी अधिकारियों के खिलाफ कई तरह के आरोपों को शामिल किया जाएगा, जिनमें मनमानी हत्याएं, यातना, बड़े पैमाने पर हिरासत, जबरन नसबंदी, धार्मिक रीति-रिवाजों पर प्रतिबंध और सरकारी बोर्डिंग स्कूल प्रणालियों के माध्यम से तिब्बती बच्चों को उनके परिवारों से अलग करना शामिल है। कानून के समर्थकों का तर्क है कि ये नीतियां तिब्बत की अनूठी सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक पहचान को कमजोर करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा हैं, जैसा कि फायुल ने बताया है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:11 +0530</pubDate>
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<title>India&#45;Sri Lanka मछुआरा विवाद पर Rauf Hakeem की बड़ी अपील, &amp;apos;मानवीय पहलू&amp;apos; को दें प्राथमिकता</title>
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<description><![CDATA[ श्रीलंकाई मुस्लिम कांग्रेस के नेता और सांसद रऊफ़ हकीम, जो अभी भारत के सद्भावना दौरे पर हैं, ने शुक्रवार को भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से चले आ रहे मछली पकड़ने से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए संतुलित नज़रिए की वकालत की।मछली पकड़ने वाले समुदायों के &quot;मानवीय और आजीविका से जुड़े पहलू&quot; को प्राथमिकता देने पर ज़ोर देते हुए, हकीम ने तमिलनाडु सरकार, भारत सरकार और श्रीलंकाई अधिकारियों के बीच मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने माना कि इस मुद्दे को सुलझाने की बार-बार कोशिशों के बावजूद, यह तनाव का एक लगातार बना रहने वाला कारण है। कूटनीतिक कोशिशों में एक मुख्य समस्या &#039;बॉटम ट्रॉलिंग&#039; का लगातार इस्तेमाल है, जो श्रीलंकाई कानून के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है। हालांकि मछली पकड़ने के प्रतिबंधित तरीकों से जुड़े कानूनी पहलुओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, लेकिन हकीम का मानना ​​है कि मुख्य ध्यान तमिलनाडु और श्रीलंका के जाफ़ना प्रायद्वीप के मछुआरों के कल्याण पर ही होना चाहिए।इसे भी पढ़ें: श्रीलंका ए ने सुपर ओवर में भारत ए को हराया, पेनाल्टी रन और विवादों से भरा रहा रोमांचक मुकाबलाउन्होंने कहा कि मैं तमिलनाडु के सद्भावना दौरे पर हूँ। यहाँ आने पर, कई मीडियाकर्मी मुझसे कचरे की समस्या और हमारे दोनों देशों के बीच मछली पकड़ने से जुड़े विवादित मुद्दों के बारे में पूछ रहे हैं। यह एक ऐसी समस्या है जो दोनों पक्षों की ओर से इसे शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की कई कोशिशों के बावजूद बार-बार सामने आती रहती है। इस बारे में मेरे पास कहने के लिए ज़्यादा कुछ नहीं है, सिवाय इसके कि इसे मानवीय नज़रिए और दोनों तरफ़ के मछुआरों की आजीविका के मुद्दे के तौर पर देखा जाना चाहिए। शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए, श्रीलंकाई नेता ने प्रस्ताव दिया कि सभी संबंधित पक्ष मिलकर स्थायी विकल्पों पर गंभीरता से विचार करें।इसे भी पढ़ें: धक्का-मुक्की विवाद में Vaibhav Suryavanshi को मिला BCCI का साथ, बोर्ड ने Action लेने से किया इनकार&quot;दुर्भाग्य से, मछली पकड़ने के प्रतिबंधित तरीकों जिन्हें &#039;बॉटम ट्रॉलिंग&#039; कहा जाता है और जिन पर श्रीलंकाई कानून के तहत रोक है—के इस्तेमाल से जुड़े खतरे हमेशा बहस का विषय रहे हैं। अगर इन मुद्दों को सुलझाना है, तो केंद्र सरकार, तमिलनाडु सरकार और श्रीलंकाई सरकार को गंभीरता से एक साथ बैठकर समाधान खोजने होंगे, जिनमें गहरे समुद्र में मछली पकड़ने में मदद और संभवतः मिलकर मछली पकड़ने की व्यवस्था जैसे उपाय शामिल हों। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:10 +0530</pubDate>
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<title>S Jaishankar ने Bimal Patel को दी बधाई, UN Tribunal में भारत को मिला अहम पद</title>
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<description><![CDATA[ विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को भारत के उम्मीदवार प्रोफ़ेसर बिमल एन. पटेल को न्यूयॉर्क में &#039;इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ़ द सी&#039; (ITLOS) का जज चुने जाने पर बधाई दी। वे 2026-2035 के कार्यकाल के लिए इस पद पर काम करेंगे।इसे भी पढ़ें: अमेरिका की नाकेबंदी का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, भारत के विरोध के बाद रूबियो ने किया साफएक्स पर एक पोस्ट में विदेश मंत्री ने &#039;यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ़ द सी&#039; (UNCLOS) के सदस्य देशों का उनके समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। जयशंकर ने लिखा कि बधाई हो डॉ. बिमल पटेल! समर्थन के लिए UNCLOS के सदस्य देशों का तहे दिल से शुक्रिया। पटेल इस साल 1 अक्टूबर को ट्रिब्यूनल में अपना पद संभालेंगे। यह ट्रिब्यूनल एक खास ग्लोबल कोर्ट के तौर पर काम करता है, जो दुनिया के महासागरों, उनके इस्तेमाल और संसाधनों के शांतिपूर्ण और कानूनी नियमन को सुनिश्चित करता है। इससे पहले, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पटेल के चुनाव को एक अहम पड़ाव बताया था। उन्होंने कहा कि हम भारत पर भरोसा जताने के लिए सभी सदस्य देशों का शुक्रिया अदा करते हैं और प्रो. पटेल तथा ट्रिब्यूनल के लिए चुने गए सभी प्रतिष्ठित सदस्यों को बधाई देते हैं। इसे भी पढ़ें: G7 Summit से पहले France में हलचल तेज, क्या होगी PM Modi और Donald Trump की मुलाकात? इन मुद्दों पर नजर।पटेल के सफल चुनाव से ट्रिब्यूनल में भारत का प्रतिनिधित्व बना रहेगा। यह चुनाव 15 से 19 जून तक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में UNCLOS के &#039;स्टेट्स पार्टीज़&#039; (सदस्य देशों) के 36वें सम्मेलन के तहत हुआ। न्यूयॉर्क में भारत के स्थायी मिशन ने कहा कि आज न्यूयॉर्क में &#039;इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ़ द सी&#039; (ITLOS) के जज के तौर पर चुने जाने पर प्रोफ़ेसर डॉ. बिमल एन. पटेल को बधाई। उनके चुने जाने से मल्टीलेटरलिज़्म (बहुपक्षवाद) और &#039;लॉ ऑफ़ द सी&#039; (समुद्री कानून) के प्रति भारत की मज़बूत प्रतिबद्धता आगे बढ़ती है। पटेल को बधाई देते हुए, मिशन ने सभी सदस्य देशों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और UNCLOS के प्रति सभी उम्मीदवारों के विज़न और प्रतिबद्धता की सराहना की। यह 1994 में लागू हुआ था और वर्तमान में इसके 172 सदस्य हैं। &#039;इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ़ द सी&#039; (ITLOS) एक स्वतंत्र न्यायिक संस्था है, जिसे 1982 के &#039;संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन&#039; (United Nations Convention on the Law of the Sea) के तहत स्थापित किया गया था। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:10 +0530</pubDate>
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<title>PoJK में गहराया Human Rights संकट, UKPNP ने Pakistan को चेताया&#45; एक्टिविस्ट्स पर एक्शन बंद हो</title>
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<description><![CDATA[ यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति का आरोप लगाया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि इलाके में चल रहे राजनीतिक संकट के बीच लोगों में असंतोष बढ़ रहा है, नागरिक आज़ादी पर पाबंदियां हैं, खाने-पीने की चीज़ों की कमी है और कार्यकर्ताओं पर दबाव बढ़ रहा है। ये चिंताएं एक ऑनलाइन बैठक में ज़ाहिर की गईं, जिसमें UK, यूरोप और PoJK के पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए। बातचीत का मुख्य विषय हाल के विरोध प्रदर्शन, मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन, कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ कार्रवाई और इलाके की व्यापक राजनीतिक स्थिति थी। बैठक में शामिल लोगों ने हाल की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं की वजह से PoJK में लोगों की जान गई है और तनाव बढ़ा है। पार्टी ने स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया और अधिकारियों पर लोगों की बढ़ती शिकायतों को दूर करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।इसे भी पढ़ें: PoJK में घातक कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है बैठक में मुख्य रूप से &#039;जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी&#039; के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन पर चर्चा हुई। UKPNP नेताओं ने कहा कि जनता की मांगों को अब और नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता और चेतावनी दी कि अगर प्रदर्शन के नेताओं से बातचीत नहीं की गई, तो संकट और बढ़ सकता है। पार्टी ने कार्यकर्ताओं और सिविल सोसाइटी समूहों पर बढ़ते दबाव को लेकर भी गहरी चिंता जताई। वक्ताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक अधिकार है और आरोप लगाया कि जन-आंदोलनों को दबाने या बदनाम करने की कोशिशों से तनाव कम होने के बजाय और बढ़ रहा है।इसे भी पढ़ें: संयुक्त राष्ट्र में भारत का Pakistan पर अब तक का सबसे तीखा हमला, &#039;पाकिस्तान को फ्रेंकस्टीन स्टेट&#039; बतायाबैठक में शामिल लोगों ने खाने-पीने की चीज़ों की कमी और ज़रूरी सामान की सप्लाई में रुकावट की खबरों पर भी ज़ोर दिया। चर्चा के दौरान बताया गया कि लंबे समय से चल रहे धरनों और पाबंदियों की वजह से ट्रांसपोर्ट के रास्ते प्रभावित हुए हैं, जिससे खाने-पीने की चीज़ों और रोज़मर्रा की ज़रूरतों के सामान की आवाजाही में देरी हो रही है। इलाके के सूत्रों का हवाला देते हुए पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के प्रशासन वाले रावलकोट, कोटली और कई अन्य ज़िलों के लोग कड़ी पाबंदियों और बुरे बर्ताव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सड़क जाम और आवाजाही पर पाबंदियों के कारण खाने-पीने की चीज़ों और घर के ज़रूरी सामान की सप्लाई में रुकावट आ रही है, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:09 +0530</pubDate>
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<title>Europe में India का नया Strategic Partner! Cyprus संग रक्षा&#45;पर्यटन में होगी बड़ी डील</title>
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<description><![CDATA[ भारत में साइप्रस के हाई कमिश्नर इवागोरस व्रियोनिडेस ने कहा कि भारत और साइप्रस के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग को लेकर बातचीत चल रही है, जिनमें पर्यटन से लेकर शिक्षा, व्यापार और रक्षा शामिल हैं। व्रियोनिडेस ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने साइप्रस का दौरा किया था और 2025 से 2029 तक के लिए एक संयुक्त कार्य योजना बनाने पर मिलकर काम किया था। ग्यारह महीने पहले प्रधानमंत्री मोदी ने साइप्रस का दौरा किया था और 2025 से 2029 तक के लिए एक संयुक्त कार्य योजना बनाने पर मिलकर काम किया था। दो हफ़्ते पहले, राष्ट्रपति का दौरा हुआ था। राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने भारत का दौरा किया, जिसकी शुरुआत मुंबई से हुई और फिर वे नई दिल्ली आए। उन्होंने छह MoU (समझौता ज्ञापनों) पर हस्ताक्षर किए और मुंबई में साइप्रस व्यापार केंद्र की स्थापना की घोषणा की... भारत और साइप्रस के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग को लेकर बातचीत चल रही है, जिनमें पर्यटन से लेकर शिक्षा, व्यापार और रक्षा शामिल हैं।इसे भी पढ़ें: सरेआम मंच पर कांपने लगा भारत का दुश्मन! ये है ताकत साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने 23 मई को अपनी भारत यात्रा पूरी की, जिसके दौरान नई दिल्ली और निकोसिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया गया और व्यापार तथा रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के उद्देश्य से कई MoU पर हस्ताक्षर किए गए। इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश से रक्षा संबंध बना रहा तुर्किये, भारत को दो तरफ से घेरने की रणनीति!विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलाइड्स को विदा किया। उन्होंने बताया कि इस यात्रा से भारत और साइप्रस के संबंधों को मज़बूती मिली है और रिश्तों में एक नए दौर की शुरुआत हुई है। यह यात्रा आर्थिक सहयोग, कनेक्टिविटी और कूटनीतिक जुड़ाव जैसे क्षेत्रों में बढ़ती आपसी सहमति को दर्शाती है। एक कामयाब दौरा पूरा हुआ। राष्ट्रपति @Christodulides एक सफल राजकीय यात्रा के बाद नई दिल्ली से रवाना हुए। सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री,  अजय टम्टा ने उन्हें विदा किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक्स पर कहा कि इस दौरे से भारत-साइप्रस संबंधों को काफी बढ़ावा मिला और दोनों देशों के रिश्तों को &#039;रणनीतिक साझेदारी&#039; के स्तर तक ले जाकर एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:08 +0530</pubDate>
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<title>मेरे साथ फोटो खिचाने को बेताब, तरस आ गया...ट्रंप ने इटालियन PM को लेकर किया ऐसा दावा, मेलोनी ने दिया टका सा जवाब</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में फ्रांस में हुए G7 शिखर सम्मेलन का एक किस्सा साझा करते हुए नया विवाद खड़ा कर दिया है। ट्रंप ने दावा किया है कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ एक तस्वीर खिंचवाने के लिए उनसे मिन्नतें की थीं। मेलोनी ने ट्रंप के इस दावे को तुरंत खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से मनगढ़ंत करार दिया है। दरअसल, एक इतालवी मीडिया आउटलेट को दिए विशेष फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने की बहुत गुजारिश की थी, और उन्होंने सिर्फ इसलिए हामी भरी क्योंकि उन्हें मेलोनी पर तरस आ गया था। ट्रंप के इस बयान ने दोनों वैश्विक नेताओं के आपसी रिश्तों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।इसे भी पढ़ें: Rafale, AI और Space Deal... PM Modi के सुपरहिट France दौरे से भारत की बड़ी डिप्लोमेटिक जीतट्रंप और मेलोनी की मुलाक़ात फ्रांस के एवियन में 15 से 17 जून तक हुई G7 समिट में हुई। ईरान में युद्ध को लेकर इस साल पैदा हुए तनाव के बाद, दक्षिणपंथी विचारधारा वाले इन दोनों नेताओं ने अपने पहले से बिगड़े हुए रिश्तों को फिर से ठीक कर लिया था। इटली के La7 टीवी चैनल को दिए एक छोटे से इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि शायद वह खुश है कि मैंने उससे बात की। मुझे उससे बात करने की ज़रूरत नहीं थी। उसने मुझसे अपने साथ फ़ोटो खिंचवाने की गुज़ारिश की। वह मेरे साथ फ़ोटो खिंचवाने के लिए बहुत बेताब थी। मैं फ़ोटो नहीं खिंचवाता, लेकिन मुझे उस पर तरस आ गया। इसे भी पढ़ें: Trump के अप्रत्याशित स्वभाव का Pakistan ने अब चखा कड़वा सबक, सीधे Iran-US Deal कर Shahbaz को चौंकायामेलोनी ने ट्रंप के दावे का जवाब दियामेलोनी ने अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने ट्रंप के दावों को पूरी तरह से मनगढ़ंत बताया और कहा कि यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने ही सहयोगियों के बारे में अपमानजनक बातें कही हैं। वीडियो में उन्होंने कहा, &quot;डोनाल्ड ट्रंप के बयान पूरी तरह से मनगढ़ंत हैं, मैं सचमुच हैरान हूं। मुझे समझ नहीं आता कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने ही सहयोगियों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं; आखिर, ऐसा पहली बार तो नहीं हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:08 +0530</pubDate>
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<title>UAE की International Roundtable में मंथन, क्या AI रोक पाएगा Humanitarian Crisis?</title>
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<description><![CDATA[ अबू धाबी के ज़ायद नेशनल म्यूज़ियम में &#039;ह्यूमैनिटेरियन एड प्रेडिक्टिव लैंडस्केप राउंडटेबल&#039; नाम से एक इंटरनेशनल राउंडटेबल आयोजित की गई। यह कार्यक्रम प्रेसिडेंशियल कोर्ट के डेवलपमेंट अफेयर्स ऑफिस द्वारा, डेवलपमेंट और शहीद हुए नायकों के मामलों के लिए प्रेसिडेंशियल कोर्ट के डिप्टी चेयरमैन, थिएब बिन मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान की देखरेख में आयोजित किया गया था। इसका मकसद मानवीय संकटों की भविष्यवाणी करने और तुरंत राहत पहुँचाने के लिए कार्रवाई करने के बीच के अंतर को कम करने के तरीकों पर चर्चा करना था। यह कार्यक्रम कई बेहतरीन विचारों और प्रस्तावों के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में मानवीय कार्यों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र के प्रमुख ग्लोबल एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया, जो कई इंटरनेशनल संगठनों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।इसे भी पढ़ें: हीटवेव रोक देगी भारत की AI क्रांति? क्या अरबों डॉलर की योजना पर लगेगा ब्रेकअपने शुरुआती भाषण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल इकोनॉमी और रिमोट वर्क एप्लिकेशन के राज्य मंत्री, उमर सुल्तान अल ओलामा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानवीय क्षेत्र के लिए नई संभावनाएँ खोल रहा है और संकटों का पहले से अंदाज़ा लगाने और उन पर बेहतर ढंग से प्रतिक्रिया देने की क्षमता को मज़बूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज की टेक्नोलॉजी की एडवांस्ड एनालिटिकल और प्रेडिक्टिव क्षमता मानवीय संगठनों को चुनौतियों के सामने आने से पहले ही उन्हें बेहतर ढंग से समझने और भविष्य की ज़रूरतों का अंदाज़ा लगाने में मदद करती है। अल ओलामा ने कहा कि आने वाले समय में मानवीय प्राथमिकताओं को तय करने और अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में तालमेल बिठाने के तरीकों में बदलाव आएगा। यह बदलाव एडवांस्ड टेक्नोलॉजी की वजह से होगा, जो समुदायों की मदद करने और मुश्किल हालात का सामना करने की क्षमता (resilience) बढ़ाने के लिए ज़्यादा असरदार तरीके अपनाना मुमकिन बनाएगी।उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भविष्य सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, प्राइवेट सेक्टर और टेक्नोलॉजी संस्थानों के बीच बड़े पैमाने पर सहयोग पर निर्भर करता है, ताकि यह पक्का किया जा सके कि इन टूल्स का इस्तेमाल मानवता की भलाई के लिए हो। उन्होंने कहा कि AI की असली कामयाबी समाज पर इसके सकारात्मक असर में है। गोलमेज बैठक और उसके महत्व पर बात करते हुए, OECD डेवलपमेंट सेंटर में &#039;रेज़िलिएंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट स्ट्रैटेजीज़&#039; के प्रमुख जान रिलाएंडर ने कहा: &quot;AI को साफ़ सिद्धांतों - जैसे पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही - के आधार पर चलाया जाना चाहिए, ताकि यह जनहित को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसकी सेवा करे।इसे भी पढ़ें: चीन-अमेरिका नहीं भारत बना रहा पेरिस से भी 5 गुना बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क, क्या है अडानी का दुनिया हिलाने वाला मेगा प्लान?गोलमेज बैठक में हमने अनुमान और कार्रवाई के बीच संबंध के कई पहलुओं पर चर्चा की, जिसमें इसके ऑपरेशनल और संस्थागत पहलू भी शामिल थे। मेरी राय में, एक क्षेत्र जिस पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है, वह है जलवायु के प्रति लचीलापन (climate resilience) की योजना बनाना - यानी यह समझना कि जलवायु से जुड़े जोखिम कैसे बदल रहे हैं, और यह समझना स्थानीय स्तर तक ज़रूरी है, जहाँ भी लोग रहते हैं। UN ऑफिस फॉर द कोऑर्डिनेशन ऑफ ह्यूमैनिटेरियन अफेयर्स में क्लाइमेट और इनोवेशन के प्रमुख ग्रेग पुले ने कहा कि कई मानवीय आपदाओं का पहले से अनुमान लगाया जा सकता है। &quot;हमारे पास आपदाओं का अनुमान लगाने के तरीकों को बेहतर बनाने के लिए नए और शक्तिशाली टूल्स हैं, फिर भी अक्सर हम मानवीय सहायता प्रणाली में संकट आने के बाद ही प्रतिक्रिया देते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:07 +0530</pubDate>
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<title>भारत की तोपें मचाएगी धमाल, अमेरिका के साथ हुई धांसू डील!</title>
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<description><![CDATA[ भारत अब ना सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश है बल्कि अब भारत उन हथियारों का निर्माण करने वाला देश है जिसे दुनिया भर की सेनाएं इस्तेमाल करेंगी। आने वाले समय में भारत ना सिर्फ अपनी सेना के लिए बल्कि दुनिया भर की सेनाओं के लिए अत्याधुनिक आर्टिलरी सिस्टम तैयार करने जा रहा है। दरअसल खबर सामने आई है कि भारतीय रक्षा कंपनी कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम लिमिटेड यानी केएसएसएल और अमेरिका की मशहूर सैन्यवाहन निर्माता कंपनी एम जनरल ने एक बेहद रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है और इस समझौते के बाद दोनों ही कंपनियां मिलकर दुनिया भर की सेनाओं के लिए अगली पीढ़ी के माउंटेड आर्टिलरी सिस्टम को विकसित और उपलब्ध कराएंगी। यानी अगर आसान भाषा में कहें तो भारत में तैयार होंगे माउंटेड आर्टिलरी सिस्टम जिनका इस्तेमाल दुनिया भर की सेनाएं करेंगी। इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित हुई दुनिया की सबसे बड़ी रक्षा प्रदर्शनियों में से एक यूरोसेट्री डिफेंस एक्सो के दौरान यह वही मंच है जहां दुनिया भर की प्रमुख रक्षा कंपनियां अपने नए और सैन्य तकनीक को पेश करती हैं और इसी कार्यक्रम के दौरान भारतीय कंपनी केएसएसएल और अमेरिकी एएम जनरल के बीच यह समझौता हुआ है। इसे भी पढ़ें: बाइडेन के सहयोगी ने Wuhan Lab को फंड कर COVID साजिश रची? तुलसी गबार्ड ने वैश्विक महामारी की नई फाइल खोल चौंका दियाबता दें कि केएसएसएल का एमएआरजी यानी कि माउंटेड आर्टिलरी गन सिस्टम एक अत्याधुनिक तोप प्रणाली है जिसे तेजी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। यह सिस्टम हल्का है, मजबूत है और हर मौसम में काम करने वाला है। मुश्किल से मुश्किल इलाकों में भी ऑपरेट करने की क्षमता रखता है। आधुनिक युद्ध में जहां तेजी से लोकेशन बदलना और दुश्मन को अचानक निशाना बनाना बेहद जरूरी है। वहां ऐसे सिस्टम की मांग लगातार बढ़ रही है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत है। इसकी 155 मि.मी. और 52 कैलिबर वाली तोप। यह 40 कि.मी. से ज्यादा दूरी तक गोले दाग सकती है। इसके अलावा इसमें 20 से अधिक गोले और प्रोपेलेंट चार्ज साथ ले जाने की क्षमता होती है। यानी युद्ध के मैदान में इसे बार-बार सप्लाई का इंतजार नहीं करना पड़ता है। लेकिन इसकी असली ताकत है इसकी पेटेंटेड सॉफ्ट रिकइल टेक्नोलॉजी। आमतौर पर जब भी कोई बड़ी तोप फायर करती है तो बहुत ज्यादा झटका लगता है जिससे वाहन और सिस्टम पर दबाव पड़ता है। लेकिन एमएआरजी का सॉफ्ट रिकइल सिस्टम इस झटके को बेहद कम कर देता है। इसका फायदा यह होता है कि वाहन हल्का बनाया जा सकता है। उसकी उम्र बढ़ जाती है और उसकी गतिशीलता भी बेहतर हो जाती है। इसे भी पढ़ें: Netanyahu की Hezbollah को खुली धमकी, &#039;भारी कीमत चुकानी होगी&#039;, IDF ने शुरू किया बड़ा Operationइस साझेदारी का एक और बड़ा पहलू है अमेरिकी सेना का मोबाइल टैक्टिकल कैनन यानी कि एमटीसी प्रोग्राम। एएम जनरल ने अमेरिकी सरकार को प्रस्ताव दिया है जिसमें केएसएसएल की इसी तकनीक पर आधारित 155 मिलमीटर मोबाइल तोप प्रणाली विकसित करने की बात कही गई है। अगर यह प्रस्ताव चुना जाता है तो साल 2027 तक इसकी डिलीवरी शुरू हो जाएगी। वहीं बात करें इस समझौते पर भारत फ़ के वाइस चेयरमैन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कल्याणी ने क्या कहा तो उन्होंने बताया कि यह साझेदारी भारत की उन्नत आर्टिलरी क्षमता पर दुनिया के भरोसे को दिखाती है। वहीं अमेरिकी कंपनी एम जनरल के सीईओ जॉन चैडबोर्ड ने कहा कि दोनों कंपनियों का लक्ष्य अपने सहयोगी देश को आधुनिक युद्ध क्षेत्र के लिए आधुनिक और प्रभावी समाधान उपलब्ध कराना है। यह समझौता महज एक बिजनेस डील नहीं बल्कि भारत के रक्षा उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:06 +0530</pubDate>
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<title>UN में PoJK पर बवाल, भारत ने जमकर पाकिस्तान और OIC को धोया</title>
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<description><![CDATA[ युक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन यानी कि ओआईसी द्वारा जम्मू कश्मीर को लेकर लगाए गए आरोपों पर बेहद सख्त और तीखा जवाब दिया। भारत ने पाकिस्तान के सभी दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें झूठा, भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण प्रचार करार दिया। भारत की तरफ से संयुक्त राष्ट्र में फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान के आरोपों पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल करके भारत के खिलाफ गलत जानकारी फैलाने की कोशिश करता है ताकि वह अपने अंदरूनी हालात और आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन से दुनिया का ध्यान भटका सके। अनुपमा सिंह ने अपने संबोधन में साफ कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था है और हमेशा रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो मुद्दा वास्तव में अनसुलझा है वह पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों की वापसी का है। इसे भी पढ़ें: UP ATS का बड़ा एक्शन: Pakistan-ISI से जुड़े 2 आतंकी Bulandshahr से गिरफ्तारभारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर की स्थिति का मुद्दा उठाया और बताया कि कैसे वहां दशकों से दमन, सैन्य नियंत्रण और हिंसा की घटनाएं जारी है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि आम लोगों की बुनियादी मांगों का जवाब गोलियों और हिंसा से दिया जाता है। पाकिस्तान के साथ-साथ भारत ने ओआईसी द्वारा जम्मू कश्मीर को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी बेहद सख्त और तीखा पलटवार किया। इसके अलावा भारत ने सिंधु जल संधि पर भी सख्त रुख अपनाया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि यह संधि 1960 में बनी थी और बदलते समय जलवायु परिवर्तन, तकनीकी विकास को देखते हुए इस पर दोबारा विचार करने की जरूरत थी। उन्होंने यह भी कहा कि जो देश आतंकवाद को बढ़ावा देता है उससे सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती। कुल मिलाकर देखा जाए तो यूएनएआरसी में भारत की ओर से दिया गया यह जवाब काफी सख्त और निर्णायक माना जा रहा है। जिसमें पाकिस्तान के आरोपों को ना सिर्फ खारिज किया गया बल्कि उसे कूटनीतिक रूप से भी कड़ा आईना दिखाया गया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:05 +0530</pubDate>
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<title>ब्रिटेन ने पहली बार बताया पाकिस्तानियों का असली धर्म, हिला भारत!</title>
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<description><![CDATA[ संब्रिटेन की संसद में ढाई लाख ब्रिटिश बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वाले पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग्स का पहली बार असली धर्म बताया गया है। ब्रिटेन के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। ब्रिटिश पार्लियामेंट में जिस तरह से पाकिस्तानियों का धर्म बताया गया है, उसने कई देशों में बवाल मचा दिया है। वैसे ब्रिटेन की संसद में जो हुआ है ऐसा ही कुछ करने की मांग अब भारत में भी उठाई जा रही है। दरअसल ब्रिटिश पार्लियामेंट में एक रिपोर्ट पढ़ी गई जिसमें बताया गया है कि किस तरह से 40 सालों से पाकिस्तान के मुस्लिम ब्रिटेन की गैर मुस्लिम लड़कियों खासतौर पर ब्रिटिश बच्चियों के साथ दुष्कर्म कर रहे हैं। पाकिस्तान के इन अपराधियों ने हिंदू और सिख लड़कियों को भी अपना शिकार बनाया था। पाकिस्तान के इन लोगों ने ब्रिटेन की बच्चियों का शिकार करने के लिए ग्रूमिंग गैंग्स बना रखे हैं। इसे भी पढ़ें: UK में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Social Media Ban, PM Starmer बोले- सुरक्षा से समझौता नहींइन पाकिस्तानियों ने ब्रिटिश बच्चियों के साथ दुष्कर्म तो किया ही, उनका अबॉर्शन भी करवाया, उन्हें बेचा, जबरदस्ती धर्म परिवर्तन भी करवा दिया। इस इंक्वायरी रिपोर्ट में हजारों बच्चियों ने अपने बयान भी दर्ज करवाए हैं जिसमें पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग्स का काला चिट्ठा खोला गया है। यह रिपोर्ट ब्रिटिश पार्लियामेंट के एक सांसद रूप लॉस ने तैयार की है। संसद में पढ़ी गई इस रिपोर्ट में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अभी तक तो अपराध करने वाले पाकिस्तानियों को पाकिस्तानी ही कहा जाता था। लेकिन पहली बार आधिकारिक तौर पर कहा गया है कि ढाई लाख ब्रिटिश बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वाले पाकिस्तानी मुस्लिम थे। यह तो सभी जानते हैं कि पाकिस्तान के लोग मुस्लिम ही हैं। लेकिन इस तरह से पहले बोला नहीं जाता था। रिपोर्ट के मुताबिक बच्चियों का शिकार करने वाले पाकिस्तानी गैंग्स में 95% मुस्लिम थे। पहली बार अपराधियों की नेशनलिटी के साथ-साथ उनका रिलीजन भी बताया गया है। यह भी बताया गया है कि ब्रिटेन के जिन 149 इलाकों में मुस्लिम आबादी 50% तक पहुंच गई है, वहां सबसे ज्यादा पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग्स एक्टिव थे। यहीं पर सबसे ज्यादा ब्रिटिश बच्चियों को शिकार बनाया गया। इसे भी पढ़ें: 20 प्रधानमंत्री देने वाले Eton College में पढ़ेंगे Prince George, पिता William की विरासत संभालेंगेजांच रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी मुस्लिमों की शिकार लड़कियों की संख्या ढाई लाख तो कम से कम है। असली आंकड़ा तो इससे कहीं ज्यादा हो सकता है। ब्रिटिश पुलिस की मिलीभगत और राजनैतिक कारणों से अभी तक सही आंकड़ा बाहर नहीं आ पाया है और ना ही पाकिस्तानी मुस्लिम अपराधी सलाखों के पीछे डाले गए हैं। ब्रिटिश सांसद रूप लॉस की इंक्वायरी में हजारों बच्चियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। इनमें से एक 13 साल की बच्ची के साथ 3 सालों तक 700 लोगों ने दुष्कर्म किया। एक विक्टिम ने बताया कि ईद और छुट्टियों के दौरान पाकिस्तानी अपराधियों की पार्टियां और भी ज्यादा बड़ी हो जाती थी। हालात और भी बदतर हो जाते थे। इन पार्टियों में और भी ज्यादा हिंसक लोग शामिल होते थे। ज्यादा से ज्यादा लड़कियों को यहां लाया जाता था। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:04 +0530</pubDate>
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<title>इधर भारत ने भेजी मदद, उधर Taliban ने पाकिस्तान में घुसकर किया एयरस्ट्राइक</title>
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<description><![CDATA[ अफगानिस्तान से खबर आई है कि वहां की जो सरकार है अंतरिम सरकार तालीबान की जो सरकार है उसने पाकिस्तान पर स्ट्राइक करने का दावा किया है। तालिबान की जो वायु सेना है उसने कहा है कि उसने पाकिस्तान में उन आतंकी अड्डों को निशाना बनाया है जहां से बैठकर अफगानिस्तान की जमीन में हमले की प्लानिंग की जा रही थी और इस दावे ने हड़कंप मचा दिया कि  पाकिस्तान जो कर रहा था अब उसको वही दवाई अफगानिस्तान की अंतरिम तालिबानी सरकार के द्वारा दी जाने लगी है। इस खबर ने बड़ा हड़कंप मचा दिया है। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में कई हमले किए हैं। एक के बाद एक कई इलाकों को निशाना बनाते हुए यह हमला किया गया है और यह जो हमला है वो बलूचिस्तान और खैबर पख्तून ख्वा के इलाके में किया गया है। इसमें एक और बहुत अहम जानकारी जो शुरुआत में ही आपको जाननी चाहिए कि तालीबान ने अपने मन से आज सुबह उठ के ये फैसला नहीं किया कि वो हमला करेगा पाकिस्तान पर। इसे भी पढ़ें: UP ATS का बड़ा एक्शन: Pakistan-ISI से जुड़े 2 आतंकी Bulandshahr से गिरफ्तारदरअसल पाकिस्तान ही वो देश है जो लगातार अफगानिस्तान में उसकी संप्रभुता को चुनौती देते हुए लगातार बम बरसा रहा था और अब बीते कुछ महीने पहले आपको घटना याद होनी चाहिए कि उसने एक अस्पताल पर बम गिराया और 450 अफगानिस्तानी आम आवाम मारे गए। अब जब उस वक्त शांति हो गई थी। इसके बाद फिर पाकिस्तान ने एक हमला किया तो तालीबान ने भी कहा कि जवाब तो देंगे और बराबर देंगे। ठोक दिया फिर। तो खैबर पख्तून ख्वा और बलूचिस्तान के इलाके में ताबड़तोड़ एयर स्ट्राइक तालीबान के द्वारा की गई। इन हमलों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। जो कामीकाजे ड्रोन होते हैं उनका इस्तेमाल हुआ। अफगानिस्तान की वायुसेना ने बलूचिस्तान में कई आतंकी ठिकानों को ड्रोन से उड़ाया है। अफगानिस्तान का कहना है कि उसने आईएसआईएस के अड्डों पर ड्रोन बरसाए हैं। अफगानिस्तान ने कहा है कि इन जगहों का इस्तेमाल कुछ दुश्मन इंटेलिजेंस ग्रुप की मदद से अफगानिस्तान के खिलाफ हमलों की प्लानिंग और कोऑर्डिनेट करने के लिए किया गया था। और पहले भी कई जानलेवा हमलों की प्लानिंग करने और उन्हें लॉन्च करने के लिए यह ऑपरेशनल बेस के तौर पर काम किया गया था। इसे भी पढ़ें: ब्रिटेन ने पहली बार बताया पाकिस्तानियों का असली धर्म, हिला भारत!इसी के जवाब में तालिबान ने यहां बम बरसा दिए ड्रोन से। पाकिस्तान ने बीते कुछ दिनों पहले ही अफगानिस्तान में अटैक किया था। उसमें बहुत मासूम बच्चे, महिलाएं मारी गई थी। बहुत बवाल हुआ था। तो तभी अफगानिस्तान ने कहा था कि यह हमला जो है खाली नहीं जाएगा। जवाब दिया जाएगा, बदला लिया जाएगा। तो फिर उसकी शुरुआत हुई और अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि अफगानिस्तान के इस्लामिक अमीरात के रक्षा मंत्रालय की वायु सेना ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान खैबर पख्तून को प्रांतों में आईएसआईएस के ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन जगहों का इस्तेमाल अफगानिस्तान के खिलाफ हमलों की प्लानिंग और कोऑर्डिनेट के लिए किया जा रहा था। अफगानिस्तान तालिबान के मुताबिक पहले भी कई जानलेवा हमले की प्लानिंग यहां से की गई और यही वजह है कि इसे पहले जो है टारगेट किया गया।  इसे भी पढ़ें: चीन-अमेरिका नहीं भारत बना रहा पेरिस से भी 5 गुना बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क, क्या है अडानी का दुनिया हिलाने वाला मेगा प्लान?भारत एक तरफ जहां अफगानिस्तान की आम आवाम की मदद करता है। हाल ही में उसने अभी 5 टन दवाई फिर भेजा। अभी दो दिन पहले ही भेजा है। एक तरफ भारत जहां तालीबान की जो अंतरिम सरकार है उसके अंतर्गत जीने वाले जो लोग हैं अफगानिस्तान के पीपल टू पीपल टाई है उसको खत्म नहीं होने देना चाहता। लोगों की मदद के लिए लगातार दवाइयां पहले भी भेजता रहा है। अब भी मानवीय सहायता भेज रहा है। और दूसरी तरफ पड़ोस में पाकिस्तान है जो कभी तालीबानियों का दोस्त हुआ करता था। अब वो बम बरसा रहा है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:03 +0530</pubDate>
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<title>डोभाल ने बुलाया, भारत आ रहे चीन के विदेश मंत्री</title>
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<description><![CDATA[ चीन, रूस और ईरान समेत कई बड़े देश भारत में एक साथ जुटने की तैयारी कर रहे हैं। दरअसल मौका है ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की अहम बैठक का जो 22 और 23 जून को नई दिल्ली में होने वाली है। इस बैठक को सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं बल्कि आने वाले समय की वैश्विक सुरक्षा और कूटनीति की दिशा तय करने वाला मंच माना जा रहा है। इस बैठक की मेजबानी भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे। भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी वजह से यह बैठक और भी महत्वपूर्ण हो जाती। इसमें ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों के सुरक्षा और रणनीतिक अधिकारी शामिल होंगे और सबसे ज्यादा चर्चा चीन के विदेश मंत्री वांगी की मौजूदगी को लेकर है। वांगी ना सिर्फ चीन के विदेश मंत्री हैं बल्कि भारत चीन सीमा विवाद को लेकर बीजिंग के विशेष प्रतिनिधि हैं। इसे भी पढ़ें: Myanmar President Min Aung Hlaing India Visit Analysis: PM Modi की बड़ी रणनीतिक जीत! China को मिला करारा जवाबऐसे में उनकी भारत यात्रा बेहद अहम मानी जा रही है। उनके और एनएसए अजीत डोभाल के बीच द्विपक्षीय बैठक हो सकती है। जिसमें सीमा विवाद, क्षेत्रीय अस्थिरता और सुरक्षा मुद्दों पर विस्तार से बातचीत होने की संभावना है। वांगी 22 से 23 जून तक भारत में आयोजित होने वाली ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के उच्च प्रतिनिधियों की 16वीं बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे। वहीं रूस की ओर से सुरक्षा परिषद के सचिव सिरगई शोइगो इस बैठक में शामिल होंगे। वहीं ईरान की ओर से भी सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के अधिकारी मौजूद रहेंगे। यानी एक ही मंच पर दुनिया के कई ऐसे देश बैठने जा रहे हैं जिनकी भूमिका वैश्विक सुरक्षा समीकरणों में बेहद अहम थी। यह बैठक इसलिए बड़ी मानी जा रही है क्योंकि इसमें सिर्फ मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों पर ही नहीं बल्कि सितंबर में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी पर भी फोकस किया जाएगा। इसे भी पढ़ें: India-China तनाव के बीच दिल्ली में अहम बैठक, Ajit Doval से मिलेंगे चीनी विदेश मंत्री Wang Yiइस सम्मेलन में किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी? किस तरह का साझा एजेंडा बनेगा इन सभी पर चर्चा होने वाली है। वहीं सूत्रों के मुताबिक चीन के विदेश मंत्री वांगी का भारत आना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि चीन और भारत के बीच संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। खासकर सीमा विवाद के बाद बने हालातों में यह मुलाकात कूटनीतिक दृष्टि से अहम मानी जा रही है। उनके एनएसए अजीत डोभाल के साथ अलग से बातचीत की संभावना है। आपको बता दें ब्रिक्स का दायरा अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुका है। अब इसमें भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं। यानी यह समूह अब वैश्विक दक्षिण की एक बड़ी आवाज बनकर उभर रहा है। कुल मिलाकर दिल्ली में होने वाली यह बैठक सिर्फ सुरक्षा चर्चा नहीं बल्कि यह बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन की तस्वीर है। एक तरफ पश्चिमी देशों की राजनीति है तो दूसरी तरफ ब्रिक्स जैसे मंच पर उभरता हुआ नया वैश्विक ढांचा। भारत के लिए भी यह बैठक कूटनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है क्योंकि यह उसे एक ऐसे मंच पर केंद्र में लाती है जहां दुनिया की बड़ी ताकतें एक साथ बैठकर भविष्य की रणनीति तय करती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:03 +0530</pubDate>
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<title>Iran खत्म हो चुका है, 10 सेंट भी नहीं मिलेंगे, Donald Trump ने तेहरान के दावों को किया खारिज</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान खत्म हो चुका है और कसम खाई कि तेहरान को अमेरिका से दस सेंट भी नहीं मिलेंगे। उन्होंने दावा किया कि युद्ध ने देश की सैन्य क्षमताओं को बर्बाद कर दिया है और अब उसके पास न तो एयर फ़ोर्स है, न नेवी और न ही कोई ज़रूरी डिफेंस सिस्टम। ट्रुथ सोशल पर कई पोस्ट में ट्रंप ने राजनीतिक विरोधियों की आलोचना को खारिज किया और कहा कि युद्ध ने ईरान की सैन्य ताकत को बहुत कम कर दिया है। ट्रंप ने लिखा कि युद्ध ने ईरान को कमज़ोर कर दिया है! अब उसके पास एयर फ़ोर्स, नेवी, एंटी-एयरक्राफ्ट इक्विपमेंट, रडार या असल में कुछ भी नहीं बचा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने डेमोक्रेट्स पर भी निशाना साधा और इस बात का मज़ाक उड़ाया कि ईरान कुछ महीने पहले की तुलना में अब मज़बूत स्थिति में हो सकता है।इसे भी पढ़ें: मेरे साथ फोटो खिचाने को बेताब, तरस आ गया...ट्रंप ने इटालियन PM को लेकर किया ऐसा दावा, मेलोनी ने दिया टका सा जवाबट्रंप ने कहा कि फिर भी डेमोक्रेट्स का कहना है कि ईरान की हालत चार महीने पहले की तुलना में अब बेहतर है। क्या आप सोच सकते हैं कि कोई ऐसी बात कहकर बच सकता है? कुछ लोग कितने बेवकूफ हो सकते हैं? ट्रंप ने आगे कहा कि टकराव के बाद तेहरान ने बातचीत की पहल की थी, न कि वॉशिंगटन ने। उन्होंने लिखा कि हमने मजबूरी में मुलाकात नहीं की, ईरान ने की। वे खत्म हो चुके हैं!&quot; उन्होंने कूटनीतिक कोशिशों के बीच अपना सख्त रुख जाहिर किया। राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका अपनी मौजूदा समय-सीमा के अनुसार काम करता रहेगा और तेहरान को कोई आर्थिक राहत नहीं देगा। ट्रंप ने कहा कि हम 60 दिनों तक इंतजार करेंगे। उन्हें कोई पैसा नहीं मिलेगा, एक पैसा भी नहीं!इसे भी पढ़ें: ब्रिटेन ने पहली बार बताया पाकिस्तानियों का असली धर्म, हिला भारत!ये टिप्पणियां ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधे निशाना साधने के एक दिन बाद आई हैं। खामेनेई ने दावा किया था कि अमेरिकी नेता समझौते के लिए बेताब थे और इसे हासिल करने के लिए उन्होंने हर तरह के दबाव का इस्तेमाल किया। अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते पर दस्तखत होने के बाद अपने पहले बयान में, मुजतबा ने गुरुवार को ईरानी लोगों से कहा कि शुरू में उन्होंने सिद्धांत के तौर पर इस ​​समझौते का विरोध किया था, लेकिन बाद में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्यों से यह भरोसा मिलने के बाद उन्होंने इसे मंज़ूरी दे दी कि देश और रेज़िस्टेंस फ्रंट के हितों की रक्षा की जाएगी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:02 +0530</pubDate>
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<title>Video | &amp;apos;आप चुप रहेंगे&amp;apos;, संयुक्त राष्ट्र में इजरायली राजदूत और UN महिला अधिकारी के बीच तीखी बहस, शिष्टाचार की उड़ीं धज्जियां</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक सार्वजनिक सुनवाई के दौरान शुक्रवार को इजरायली राजनयिक और यूएन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बेहद तीखी और अभूतपूर्व बहस देखने को मिली। बात इतनी बढ़ गई कि इजरायल के राजदूत ने मंच से ही संयुक्त राष्ट्र की एक शीर्ष महिला अधिकारी को बार-बार चिल्लाकर &quot;चुप रहने&quot; की हिदायत दे डाली। इस टकराव ने गाजा युद्ध के बीच संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों को लेकर इजरायल के बढ़ते गुस्से को एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया है। इसे भी पढ़ें: London Train Accident | लंदन में दो ट्रेनों की आमने-सामने से टक्कर, ड्राइवर की मौत, 80 से अधिक यात्री घायलपैटन ने हाल ही में एक रिपोर्ट तैयार की थी जिसमें इज़राइल को पहली बार संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा के कथित उल्लंघनों के लिए UN की ब्लैकलिस्ट में शामिल किया गया था। जब &#039;संघर्ष में यौन हिंसा को खत्म करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस&#039; के मौके पर आयोजित सुनवाई में दोनों आमने-सामने आए, तो माहौल गरमा गया। डैनन ने UN प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस का ज़िक्र करते हुए कहा, &quot;आप इज़राइल को निशाना बनाने के महासचिव के जुनून के आगे झुक गए।&quot; इस टिप्पणी पर गुटेरेस की बच्चों और सशस्त्र संघर्ष मामलों की प्रतिनिधि वैनेसा फ़्रेज़ियर ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने &#039;पॉइंट ऑफ़ ऑर्डर&#039; के तहत बात रोकी और डैनन पर &quot;व्यक्तिगत हमले&quot; करने का आरोप लगाया।फ़्रेज़ियर ने अपने कार्यालय की रिपोर्ट का बचाव करते हुए कहा कि वे सत्यापित सबूतों पर आधारित हैं। डैनन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए UN अधिकारी से चुप रहने को कहा। इज़राइली राजदूत ने कहा, &quot;हम एक सदस्य देश हैं और आप UN के लिए काम करते हैं, और अब आप चुप रहेंगे। आप चुप रहेंगे... आप और आपकी शर्मनाक रिपोर्ट।&quot; इसे भी पढ़ें: Child Trafficking Delhi | दिल्ली पुलिस ने किया अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का भंडाफोड़, 30 से अधिक शिशुओं को बेचने का खुलासाउन्होंने आगे कहा, &quot;हम जानते हैं कि आपने यह रुख़ क्यों अपनाया। हम आपको इस शर्मनाक अभियान का हिस्सा नहीं बनने देंगे। मैं अपनी बात पूरी करूंगा।&quot; इस दौरान फ़्रेज़ियर ने बीच में टोकने की कोशिश की और बैठक के आयोजकों ने व्यवस्था बनाए रखने को कहा। डैनन ने गुस्से में कहा, &quot;अगर आप सुनना नहीं चाहतीं, तो बाहर चली जाएं।&quot;इस तनावपूर्ण बहस और राजनयिक शिष्टाचार के उल्लंघन ने गाज़ा युद्ध के दौरान इज़राइली सेना द्वारा कथित उल्लंघनों के बारे में UN की कई रिपोर्टों पर तेल अवीव के बढ़ते गुस्से को उजागर किया।गुटेरेस की ओर से इस हफ़्ते जारी फ़्रेज़ियर की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि बच्चों के ख़िलाफ़ गंभीर उल्लंघनों के लिए इज़राइली बसने वालों (सेटलर्स) के समूहों को भी वैश्विक ब्लैकलिस्ट में शामिल किया जा सकता है। रिपोर्ट में UN प्रमुख द्वारा बताई गई फ़िलिस्तीनी बच्चों के ख़िलाफ़ उल्लंघनों में &quot;चौंकाने वाली&quot; बढ़ोतरी का ज़िक्र किया गया था। बच्चों के ख़िलाफ़ कथित उल्लंघनों के लिए इज़राइल पहले से ही रिपोर्ट के तथाकथित &quot;शर्मनाक सूची&quot; (लिस्ट ऑफ़ शेम) वाले हिस्से में शामिल है। पिछले महीने, पैटन की रिपोर्ट जारी होने के बाद, डैनन ने इसके नतीजों को राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया।उन्होंने X पर लिखा, &quot;यह एक राजनीतिक फ़ैसला है! तथ्यों और असलियत से दूर!&quot; उन्होंने इस रिपोर्ट को &quot;एक नया निचला स्तर&quot; करार दिया। इज़राइल के विदेश मंत्रालय ने गुटेरेस से संबंध तोड़ने का भी संकल्प लिया; गुटेरेस का सेक्रेटरी-जनरल के तौर पर दूसरा और आखिरी कार्यकाल इस साल के आखिर में खत्म हो रहा है। पैटन और फ़्रेज़ियर, दोनों की रिपोर्ट में हमास का भी ज़िक्र है। हमास फ़िलिस्तीनी चरमपंथी गुट है जो 7 अक्टूबर को इज़राइल पर हुए उस हमले के लिए ज़िम्मेदार था, जिसके बाद गाज़ा युद्ध शुरू हुआ।पिछले साल अगस्त में, UN सुरक्षा परिषद को संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा पर अपनी सालाना रिपोर्ट सौंपते हुए, गुटेरेस ने इज़राइल और रूस, दोनों को &quot;नोटिस&quot; पर रखा था। उन्होंने कहा था कि उन्हें उन पक्षों की सूची में शामिल किया जा सकता है जिन पर &quot;बलात्कार या यौन हिंसा के अन्य रूपों को अंजाम देने या उनके लिए ज़िम्मेदार होने का विश्वसनीय संदेह&quot; है।UN प्रमुख ने कहा कि यह चेतावनी संगठन द्वारा &quot;लगातार दर्ज किए गए यौन हिंसा के कुछ रूपों के पैटर्न से जुड़ी गंभीर चिंताओं&quot; पर आधारित थी। डैनन ने उस समय इन आरोपों को बेबुनियाद बताकर खारिज कर दिया था। 

Israel envoy SCREAMS at UN for interrupting him pic.twitter.com/dUcoyXvbQ3— RT (@RT_com) June 20, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:01 +0530</pubDate>
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<title>London Train Accident | लंदन में दो ट्रेनों की आमने&#45;सामने से टक्कर, ड्राइवर की मौत, 80 से अधिक यात्री घायल</title>
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<description><![CDATA[ उत्तरी लंदन के बेडफोर्ड शहर के पास शुक्रवार शाम एक बड़ा रेल हादसा हो गया। यहाँ ईस्ट मिडलैंड्स रेलवे की दो ट्रेनें आपस में टकरा गईं, जिसमें एक ट्रेन ड्राइवर की दर्दनाक मौत हो गई और दर्जनों यात्री घायल हो गए। घायलों में से कई की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। रेल ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह हादसा शुक्रवार शाम करीब 5:15 बजे उस समय हुआ जब दोनों ट्रेनें लंदन सेंट पैनक्रास स्टेशन की ओर जा रही थीं।  यात्रियों ने टक्कर के बाद डिब्बों के अंदर मची अफरातफरी का हाल बताया। एक यात्री ने कहा कि टक्कर की वजह से लोग आगे की ओर फेंके गए और कई यात्रियों की हड्डियां टूट गईं और वे खून से लथपथ हो गए। इमरजेंसी टीमों ने बड़े पैमाने पर राहत कार्य शुरू किया और घटनास्थल पर कई यूनिट्स भेजीं, जिनमें एक एयर एम्बुलेंस और ईस्ट ऑफ़ इंग्लैंड एम्बुलेंस सर्विस की खतरनाक घटनाओं से निपटने वाली टीम शामिल थी।एपी ने पुलिस के बयान का हवाला देते हुए कहा, &quot;हमें पता चला है कि कई लोग घायल हुए हैं और दुख की बात है कि एक व्यक्ति की मौत हो गई है।&quot; &quot;इसे एक बड़ी घटना घोषित किया गया है और अधिकारी बेडफोर्डशायर पुलिस तथा स्थानीय फायर एंड रेस्क्यू और एम्बुलेंस सेवाओं के सहयोगियों के साथ घटनास्थल पर राहत कार्य में जुटे हैं।&quot; इसे भी पढ़ें: Child Trafficking Delhi | दिल्ली पुलिस ने किया अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का भंडाफोड़, 30 से अधिक शिशुओं को बेचने का खुलासाबाद में ईस्ट ऑफ़ इंग्लैंड एम्बुलेंस सर्विस ने बताया कि इस हादसे में 11 लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि 22 अन्य को गंभीर चोटें आईं और 56 लोगों को मामूली चोटें लगीं।नेशनल यूनियन ऑफ़ रेल, मैरीटाइम एंड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स के जनरल सेक्रेटरी एडी डेम्पसी ने पुष्टि की कि टक्कर में मारे गए व्यक्ति ट्रेन के ड्राइवरों में से एक थे।सोशल मीडिया पर शेयर की गई तस्वीरों में एक ट्रेन का अगला हिस्सा दूसरी ट्रेन के पिछले हिस्से में धंसा हुआ दिखाई दे रहा था, जबकि डिब्बे काफी हद तक पटरी पर ही सीधे खड़े थे। इसे भी पढ़ें: IPL 2025: Rishabh Pant की Delhi में &#039;घर वापसी&#039;, 12 करोड़ की सैलरी कट! Kuldeep Yadav जाएंगे Lucknowट्रेन में सवार एक यात्री, डॉक्टर पीटर नैप ने ब्लूस्काई पर एक पोस्ट में &quot;अचानक हुई टक्कर&quot; का ज़िक्र करते हुए बताया कि एक डिब्बा पटरी से उतर गया था और उन्हें मामूली चोटें आईं।नैप ने कहा, &quot;एक पल के लिए मैं सामने वाली सीट पर जा गिरा और फिर मैंने धुआं देखा।&quot; &quot;लोग रो रहे थे, चिल्ला रहे थे। लोग बहुत डरे हुए और घबराए हुए थे।&quot;उन्होंने आगे कहा, &quot;मैं उठा और मैंने देखा कि कई लोग बोल नहीं पा रहे थे, उनके पैर टूट गए थे।&quot; &quot;और फिर मैं ट्रेन से बाहर निकलने में कामयाब रहा, और चूंकि मैं काफी दुबला-पतला हूं, इसलिए मैं दरवाजों के बीच की जगह से निकल पाया।&quot; ईस्ट ऑफ़ इंग्लैंड एम्बुलेंस सर्विस ने लोगों से उस इलाके में न जाने की अपील की, क्योंकि बचाव और राहत का काम चल रहा था।ब्रिटेन की ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर हेइडी अलेक्जेंडर ने कहा कि वह हालात पर बारीकी से नज़र रख रही हैं। अलेक्जेंडर ने X पर एक पोस्ट में लिखा, &quot;टक्कर की खबरों से मुझे बहुत चिंता है।&quot;प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने पीड़ित के परिवार के प्रति संवेदना जताई और कहा कि उनकी संवेदनाएं इस घटना में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों के साथ हैं। स्टारमर ने X पर एक बयान में कहा, &quot;मेरी संवेदनाएं उस व्यक्ति के परिवार के साथ हैं जिसने दुखद रूप से अपनी जान गंवा दी, और उन लोगों के साथ भी जो गंभीर रूप से घायल हुए हैं।&quot;इस बीच, ईस्ट मिडलैंड्स रेलवे ने घोषणा की कि घटना के बाद शुक्रवार को बाकी समय के लिए सेंट पैनक्रास स्टेशन से आने-जाने वाली सभी सेवाएं रोक दी गई हैं। ऑपरेटर ने यह भी कहा कि वह अभी यह पक्का नहीं कह सकता कि शनिवार को ट्रेन सेवाएं सामान्य रूप से शुरू होंगी या नहीं। Stay updated with International
News in Hindi on Prabhasakshi Hugely concerning reports of a collision involving two passenger trains near Bedford. First and foremost, my thoughts are with the family of the person who has sadly lost their life, and with those who have been seriously injured.I am grateful to the emergency services for…— Keir Starmer (@Keir_Starmer) June 19, 2026 ⚠️ It’s believed the 4.40pm train from Corby to St Pancras has crashed into the rear of the 3.50pm service from Nottingham to St Pancras.The incident happened approx 2 miles south of Bedford. pic.twitter.com/bmDdmIHuTX— ???????????????????????????? Northamptonshire Weather (@NNweather) June 19, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:01 +0530</pubDate>
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<title>मैं बॉस हूँ... G7 समिट में Donald Trump के इस वायरल बयान के पीछे क्या था असली राज?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमेशा दुनिया भर के मीडिया और लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बने रहना बखूबी जानते हैं। हाल ही में फ्रांस में संपन्न हुए G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहाँ ट्रंप ने अपने अनोखे अंदाज़ और वायरल बयान &quot;मैं बॉस हूँ&quot; (I am the boss) से सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अब, मीडिया आउटलेट Axios को दिए एक विशेष इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बहुचर्चित बयान के पीछे की असली कहानी बताई है और स्पष्ट किया है कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा था। इस हफ़्ते की शुरुआत में, ट्रंप G7 समिट में दुनिया के नेताओं के साथ मीटिंग के लिए देर से पहुँचे। जब वे शान से कमरे में दाखिल हुए, तो ट्रंप ने मज़ाक में कहा, &quot;मैं बॉस हूँ&quot;, जिससे कॉन्फ्रेंस टेबल पर बैठे नेता हँस पड़े। ईरान के साथ शांति समझौता होने के बाद ट्रंप समिट में चर्चा का केंद्र बन गए थे। इस समझौते से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खुल गया, जो दुनिया का एक अहम एनर्जी कॉरिडोर है और जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुज़रता है।ट्रंप ने &#039;मैं बॉस हूँ&#039; वाले बयान के बारे में बतायाजब Axios ने उनसे उनके वायरल बयान के बारे में पूछा और यह भी कि कितने G7 नेता ऐसा मानते हैं, तो ट्रंप ने तुरंत कहा, &quot;वे सभी। लेकिन मैं बस मज़ाक कर रहा था।&quot;थोड़ी देर रुकने के बाद, ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा कि वे बॉस बनने की कोशिश नहीं कर रहे थे, और उनका बयान &quot;प्यारा और मज़ेदार&quot; था। इसके बाद उन्होंने विस्तार से बताया कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा था। इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, &quot;हुआ यह कि वे सब बैठे हुए थे, और फिर मैं कमरे में आया। यह थोड़ा मज़ेदार था क्योंकि वहाँ एक बहुत लंबी टेबल थी, लेकिन वे सिर्फ़ सात लोग थे। वह टेबल लगभग 30 लोगों के लिए थी।&quot;ट्रंप ने कहा कि कमरा बिल्कुल &quot;पोडियम-टाइप सेटअप&quot; जैसा लग रहा था। ट्रंप को शायद ऐसा लगा होगा कि पूरी दुनिया उनके लिए एक स्टेज है। ट्रेड और इकॉनमी पर हुए सेशन में मौजूद दुनिया के नेताओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के इमैनुएल मैक्रों शामिल थे।ट्रंप ने कहा, &quot;वे सभी जाने-माने लोग हैं, है ना? देशों के प्रमुख - जैसा कि आप जानते हैं, वहाँ कुछ और लोग भी थे। कुछ, जैसे उदाहरण के लिए, भारत के पीएम मोदी - बहुत अच्छे इंसान हैं। बहुत से लोग आए थे। अगर वे चाहें तो आ सकते हैं और बैठ सकते हैं।&quot; हालांकि भारत G7 का स्थायी सदस्य नहीं है, फिर भी उसे नियमित रूप से विशेष अतिथि के तौर पर बुलाया जाता है। इससे पता चलता है कि यह अहम समूह अब भारत की बात को कितनी अहमियत देता है।अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह टिप्पणी अचानक की गई थी और पहले से तय नहीं थी। उन्होंने आगे कहा, &quot;मैं वहां गया, वहां नेता मौजूद थे, और मैंने बस उन्हें देखा। मैंने कहा, &#039;मैं बॉस हूं&#039;। और आप जानते हैं कि यह मज़ाक में कहा गया था। यह बात पूरी दुनिया में फैल गई। मुझे यकीन नहीं हो रहा। मैं बस मज़ाक-मज़ाक में ऐसा कह रहा था। मैं सच में बॉस बनने की कोशिश नहीं कर रहा था।&quot; ट्रंप ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि G7 समिट &quot;शानदार&quot; और &quot;बहुत प्रभावशाली&quot; रही। ट्रंप ने कहा कि उन्हें &quot;वही मिला जो वह चाहते थे&quot;। Stay updated with International
News in Hindi on Prabhasakshi  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:00 +0530</pubDate>
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<title>सूडान: अल ओबेद पर हमले के ख़तरा, अत्याचारों को रोकने की अपील</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने सूडान के उत्तर कोर्दोफ़ान प्रान्त की राजधानी अल ओबेद पर हमले की आशंका के बारे में गम्भीर चेतावनी जारी की है. उन्होंने कहा है कि यह हमला गम्भीर अन्तरराष्ट्रीय अपराधों का जोखिम उत्पन्न कर सकता है और पहले से ही भयावह मानवीय संकट को दीगर गहरा सकता है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:55:02 +0530</pubDate>
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<title>तालेबानी फ़रमान से बाल विवाह को वैधता मिलने, महिलाओं की व्यथा बढ़ने की आशंका</title>
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<description><![CDATA[ अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान प्रशासन द्वारा पति-पत्नी के अलगाव, या वैवाहिक सम्बन्ध समाप्त करने की शर्तों पर जारी किए गए आधिकारिक आदेश से न केवल बाल विवाह को लाइसेंस मिलेगा, बल्कि महिलाओं और लड़कियों के लिए दुर्व्यवहार व पीड़ा भरे रिश्तों को छोड़ पाना भी कठिन हो जाएगा. संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने यह चेतावनी दी है.  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:54:58 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान के Khyber Pakhtunkhwa में फिर टारगेट पर सिख, Gurudwara में घुसकर बुजुर्ग दंपत्ति की हत्या</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक गुरुद्वारे के अंदर अज्ञात हमलावरों ने सिख बुजुर्ग दंपत्ति की गोली मारकर हत्या कर दी। मारे गए दोनों लोग मरदान के ख्वाजा गंज बाज़ार के बाबू मोहल्ला स्थित गुरुद्वारे के देखभाल करने वाले थे। वे 70 वर्षीय जगन्नाथ और उनकी पत्नी आसमा वंती थे। हमलावर, जिन्होंने गुरुद्वारे में घुसकर दंपत्ति की बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी, अभी फरार हैं। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं ने हत्या की निंदा की है और पाकिस्तान में &quot;धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा&quot; पर चिंता जताई है। अकाल तख्त के जत्थेदार (मुख्य पुजारी) ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने पाकिस्तान के एक प्रांत में गुरुद्वारे के अंदर हुई हत्या की निंदा की है। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री मुहम्मद सोहेल खान अफरीदी से इस मामले पर सख़्त संज्ञान लेने, ज़िम्मेदार लोगों को तुरंत गिरफ़्तार करने और दोषियों को कड़ी सज़ा दिलाने को कहा है। इसे भी पढ़ें:  पाकिस्तान में बड़ी कंपनियां बंद? जिहाद ने बनाया &#039;भिखारी&#039;!बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने इन हत्याओं की निंदा की और कहा कि पाकिस्तान 1950 के नेहरू-लियाकत समझौते के तहत किए गए वादों को पूरा करने में लगातार नाकाम रहा है; इस समझौते में भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की गारंटी दी गई थी। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने इस अपराध की निंदा की और कहा कि ये हत्याएं पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के सामने मौजूद असुरक्षा, डर और उत्पीड़न की एक और दुखद याद दिलाती हैं। सिंह ने एक्स पर लिखा, पाकिस्तान एक बार फिर दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है। पाकिस्तान की पूर्व सांसद बुशरा गोहर ने इसे बेरहमी से की गई हत्या बताते हुए कहा कि केंद्र और प्रांत की सरकारें राज्य में नागरिकों की सुरक्षा करने में नाकाम रही हैं। इसे भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान समझौते में पाकिस्तान की भूमिका मोदी सरकार की विदेश नीति के लिए गंभीर झटका: कांग्रेसअवामी नेशनल पार्टी की नेता ने इस हत्या की निंदा की और पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि अपराधियों को सज़ा मिलनी चाहिए। गोहर ने एक्स पर लिखा, सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति ने [खैबर] पख्तूनख्वा को हत्या का मैदान बना दिया है। लोगों को बेखौफ होकर मारा जा रहा है, जबकि सत्ता में बैठे लोग खामोश हैं। पाकिस्तान के अख़बार &#039;डॉन&#039; के अनुसार, मरदान ज़िले में एक गुरुद्वारे के अंदर &quot;एक अज्ञात हमलावर&quot; ने गोलीबारी की, जिसमें एक व्यक्ति और उसकी पत्नी की मौत हो गई; वे दोनों उस धार्मिक स्थल की देखभाल कर रहे थे। घटना के कुछ ही देर बाद पुलिस और &#039;रेस्क्यू 1122&#039; के अधिकारी मौके पर पहुँचे और जाँच शुरू की। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:29:04 +0530</pubDate>
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<title>Netanyahu का &amp;apos;ईरान मिशन&amp;apos; फेल! Donald Trump की शांति डील से &amp;apos;बीबी&amp;apos; के सियासी भविष्य पर संकट?</title>
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<description><![CDATA[ एक महीने तक चले भीषण सैन्य संघर्ष के बाद, डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के बीच हुआ अंतरिम शांति समझौता दुनिया के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है। वाशिंगटन इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत मान रहा है, तो दूसरी तरफ दुनिया की महाशक्तियों के हमले झेलने के बाद भी ईरान पूरी तरह झुका नहीं है। इस युद्ध में कोई स्पष्ट विजेता भले ही न निकला हो, लेकिन इसके मलबे से एक बात साफ नजर आ रही है। इस पूरे टकराव के सबसे बड़े राजनीतिक शिकार इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन &#039;बिबी&#039; नेतन्याहू हुए हैं। नए मध्य पूर्व का सपना दिखाने वाले नेतन्याहू आज अपने ही बुने चक्रव्यूह में घिर चुके हैं। पिछले तीन सालों से ईरान, हमास और हिज़्बुल्लाह के साथ लगातार जारी युद्ध ने इज़राइल को मोर्चे पर तो व्यस्त रखा, लेकिन कोई स्थायी शांति या सुरक्षा नहीं दी। अब, जब अक्टूबर में इज़राइल एक बेहद संवेदनशील और जोखिम भरे चुनाव की दहलीज़ पर खड़ा है, तब यह सवाल सबसे बड़ा हो गया है। क्या ईरान-अमेरिका समझौते ने &#039;बिबी&#039; के राजनीतिक भविष्य पर पूर्णविराम लगा दिया है?क्या नेतन्याहू सबसे बड़े हारे हुए नेता बनकर उभरे?इसके विपरीत, नया मध्य पूर्व कुछ इस तरह दिखता है हमास अभी भी गाजा के एक हिस्से पर नियंत्रण रखता है, लेबनान में हिजबुल्लाह का दबदबा कायम है, और एक घायल ईरानी शासन एक नए सर्वोच्च नेता और अधिक शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) के साथ अभी भी बरकरार है। इसके अलावा, जबकि इज़राइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के साथ युद्ध छेड़ा, तेल अवीव को शांति समझौते की बातचीत से काफी हद तक अलग रखा गया। ट्रंप द्वारा पाकिस्तान को मध्यस्थ के रूप में चुना जाना स्थिति को और भी बदतर बना दिया। कड़वी सच्चाई यह है कि नेतन्याहू ने अपनी जंग पर सब कुछ दांव पर लगा दिया। अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते से इज़राइल के कई लक्ष्य अधूरे रह गए हैं और इससे नेतन्याहू और ट्रंप के रिश्ते भी खराब हो गए हैं। रिश्ते अब वैसे नहीं रहे जैसे फरवरी में थे, जब नेतन्याहू ईरान पर हमले की योजना लेकर व्हाइट हाउस गए थे और ट्रंप को आसानी से प्रभावित कर लिया था। असल में, इस समझौते के कारण चुनाव से चार महीने पहले इज़राइली प्रधानमंत्री के पास दिखाने के लिए कोई उपलब्धि नहीं बची है। ईरान पर हमला करना और हिज़्बुल्लाह जैसे उसके प्रॉक्सी (सहयोगी गुटों) को खत्म करना नेतन्याहू का दशकों पुराना जुनून था। उन्होंने लंबे समय से ईरान और उसके प्रॉक्सी को इज़राइल और मध्य पूर्व के लिए खतरा बताया है। हालांकि, इज़राइली प्रधानमंत्री को व्हाइट हाउस में कोई ऐसा साथी नहीं मिला जो उनका साथ देने को तैयार हो। ट्रंप के दोबारा चुने जाने के बाद नेतन्याहू को एक मौका दिखा। उनका दांव काम आया और इस साल 28 फरवरी को इज़राइल और अमेरिका ने ईरान पर जोरदार हमला किया। लेबनान के मुद्दे का क्या हुआलेकिन जिस बात ने इज़राइल को सबसे ज़्यादा नाराज़ किया है, वह है इस डील में लेबनान को शामिल करना। असल में, यह डील इज़राइल को उस देश में मिलिट्री ऑपरेशन करने से रोकती है। इसके बदले में, ईरान लेबनान में हिज़्बुल्लाह समेत अपने प्रॉक्सी ग्रुप्स को काबू में रखने पर सहमत हो गया है। नेतन्याहू के लिए यह एक चौंकाने वाली घटना थी। देश में होने वाले विरोध की आशंका को देखते हुए, इज़राइली प्रधानमंत्री ने इसी हफ़्ते साफ़ कर दिया कि इज़राइल लेबनान के उन इलाकों से पीछे नहीं हटेगा जिन पर अभी उसका कब्ज़ा है। यह पूरा घटनाक्रम नेतन्याहू के लिए एक कड़ा सबक रहा है। इन घटनाओं से पता चला है कि जब मिलिट्री ऑपरेशन की बात आती है, तो ट्रंप के लिए सिर्फ़ अपना फ़ायदा ही मायने रखता है। जैसा कि भारत ने पिछले साल पाकिस्तान के साथ टकराव के दौरान देखा था। ट्रंप को शांति समझौतों से मिलने वाली तारीफ़ें पसंद हैं और वे नोबेल शांति पुरस्कार पाने के लिए बेताब हैं। इसलिए, उन्हें नेतन्याहू को मुश्किल में डालने या उनकी बलि चढ़ाने में कोई परहेज़ नहीं है।चुनाव से पहले नेतन्याहू के लिए बड़ी परीक्षा की घड़ीनेतन्याहू के कार्यकाल की एक और बड़ी मुश्किल अक्टूबर 2023 में हुई सुरक्षा की भारी चूक थी, जब हमास ने इज़राइल पर हमला किया था। एक मज़बूत इंटेलिजेंस सर्विस होने के बावजूद, इज़राइल उस अचानक हुए हमले का अंदाज़ा नहीं लगा पाया, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे। ईरान के ख़िलाफ़ एक सफल अभियान नेतन्याहू के लिए एक तरह से अपनी छवि सुधारने का मौका होता, जिसका ज़िक्र वे अपनी चुनावी रैलियों में ज़ोर-शोर से कर सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। असल में नेतन्याहू अक्टूबर 2023 के बाद से एकमात्र ऐसे बड़े नेता हैं जिन्होंने न तो इस्तीफ़ा दिया और न ही माफ़ी मांगी। हमास के हमले की वजह बनी सरकारी नाकामियों की जांच में रुकावट डालने के लिए भी उनकी आलोचना हुई है। आख़िरकार नवंबर 2025 में एक जांच शुरू की गई, लेकिन जांच करने वाली टीम को खुद नेतन्याहू ने ही चुना था। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:29:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>1971 की हार के 55 साल बाद Pakistan की Bay of Bengal में वापसी, चीन की मदद से नई पनडुब्बी की तैनाती</title>
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<description><![CDATA[ &#039;हंगोर&#039; नाम इतिहास की याद दिलाता है। 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान, पाकिस्तानी पनडुब्बी PNS हंगोर ने भारत के INS खुकरी को डुबो दिया था। आज़ादी के बाद युद्ध के समय भारतीय नौसेना का कोई युद्धपोत डूबने की यह पहली घटना थी और यह पाकिस्तान नौसेना के सबसे मशहूर हमलों में से एक था। हालाँकि, INS खुकरी के डूबने से 1971 के युद्ध के नतीजे पर कोई खास असर नहीं पड़ा। पाकिस्तान को करारी हार का सामना करना पड़ा, क्योंकि ज़मीन, हवा और समुद्र में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तानियों को बुरी तरह हराया और बांग्लादेश को आज़ाद कराने में मदद की। 1971 की उस करारी हार के 55 साल बाद, जिसने बंगाल की खाड़ी से पाकिस्तान की मौजूदगी खत्म कर दी थी, एक और पाकिस्तानी &#039;हंगोर&#039; चर्चा में है। पाकिस्तान की पहली हंगोर-क्लास पनडुब्बी, जिसे अप्रैल में चीन में कमीशन किया गया था, पिछले हफ़्ते कराची पहुँची। और, पाकिस्तान की नौसेना के सीनियर अधिकारी अब अरब सागर (जो पाकिस्तान की नौसेना का मुख्य इलाका है) से कहीं आगे की भूमिका के बारे में बात कर रहे हैं।इसे भी पढ़ें: PoJK में घातक कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही हैपाकिस्तान नौसेना के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, यह पनडुब्बी इस्लामाबाद को बंगाल की खाड़ी में अपनी मौजूदगी बनाए रखने की क्षमता दे सकती है। यह इलाका उसके देश से बहुत दूर है और 1971 की लड़ाई (जिसमें इस्लामाबाद ने अपना आधा इलाका खो दिया था) के बाद से वहाँ पाकिस्तान की नौसेना की मौजूदगी न के बराबर रही है। पाकिस्तान नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा पाकिस्तान की इस महत्वाकांक्षा का खुलासा ऐसे समय में हुआ है, जब पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच नागरिक और सैन्य संबंध बेहतर हो रहे हैं और भारत सहित हिंद महासागर के देशों के बीच नौसैनिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।इसे भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान समझौते में पाकिस्तान की भूमिका मोदी सरकार की विदेश नीति के लिए गंभीर झटका: कांग्रेस&#039;नई हैंगोर सबमरीन पाकिस्तान को बंगाल की खाड़ी में अपनी मौजूदगी बनाए रखने में मदद करेगी&#039;1971 में भारतीय सेना से हारने के बाद से ही पाकिस्तानी नौसेना की मौजूदगी मुख्य रूप से उत्तरी अरब सागर तक ही सीमित रही है। इसके उलट, बंगाल की खाड़ी पारंपरिक रूप से ऐसा इलाका रहा है जहाँ भारत को भौगोलिक और रणनीतिक रूप से काफी बढ़त हासिल है। विशाखापत्तनम में भारत के ईस्टर्न नेवल कमांड का ठिकाना होने और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के करीब होने की वजह से बंगाल की खाड़ी भारत और बांग्लादेश के बीच सामान और ऊर्जा के व्यापार के लिए बहुत अहम हो गई है। इस समुद्री इलाके से भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया और श्रीलंका जैसे देश जुड़े हैं। साथ ही, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नौसेना के मामले में एक-दूसरे को टक्कर देने वाली ताकतों के बढ़ने के बीच इस इलाके का भू-राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है। इसीलिए, इस महीने की शुरुआत में श्रीलंका में पाकिस्तानी नौसेना के एक सीनियर अधिकारी की कही बात अहम है। कोलंबो के न्यूज़ आउटलेट &#039;द मॉर्निंग&#039; के मुताबिक, नई सबमरीन को देश लाने वाले फ्लोटिला (जहाजों के समूह) के कमांडर कमोडोर उमर फारूक ने कहा कि हैंगोर-क्लास सबमरीन के शामिल होने से पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में अपनी मौजूदगी बनाए रखने में सक्षम हो जाएगा।इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान के Khyber Pakhtunkhwa में फिर टारगेट पर सिख, Gurudwara में घुसकर बुजुर्ग दंपत्ति की हत्याबंगाल की खाड़ी में पाकिस्तान की महत्वाकांक्षा और बांग्लादेश का रोलनई &#039;हंगोर&#039; पनडुब्बी का समय और बंगाल की खाड़ी में पाकिस्तान की महत्वाकांक्षा का पता चलना, दोनों ही बातें बहुत अहम हैं। यह सब पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में साफ़ सुधार के बीच हो रहा है - जिसमें सेनाओं के बीच आपसी संपर्क भी शामिल है - और इसकी शुरुआत ढाका में मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के समय हुई थी। 1971 की आज़ादी की लड़ाई के बाद कई दशकों तक ढाका और इस्लामाबाद के रिश्ते तनावपूर्ण रहे। लेकिन, जब एक इस्लामी-समर्थक साज़िश के ज़रिए प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिरा दी गई, तो पाकिस्तान ने बांग्लादेश में अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी। कई दशकों के बाद ढाका-कराची के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू हो गई हैं। बिमान बांग्लादेश की यह उड़ान, जो दो घंटे की होती है, भारतीय हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करती है। हसीना के सत्ता से हटने के बाद से ढाका यूनिवर्सिटी में उर्दू शायरी की महफ़िलें आयोजित की जा रही हैं। राहत फ़तेह अली खान ने भी ढाका में अपनी प्रस्तुति दी। मुहम्मद यूनुस ने PM शहबाज़ शरीफ़ से दो बार मुलाक़ात की। विदेश मंत्री इशाक डार ने ढाका का दौरा किया। अगस्त और दिसंबर 2024 के बीच दोनों देशों के बीच व्यापार में 27% की बढ़ोतरी हुई और दिसंबर 2025 तक इसमें सालाना आधार पर 20% की वृद्धि दर्ज की गई। वॉशिंगटन DC स्थित न्यूज़ मैगज़ीन &#039;द डिप्लोमैट&#039; के अनुसार, उन्होंने व्यापार पर एक मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर किए, जिसका लक्ष्य 1 अरब डॉलर के समझौते और निवेश करना है।1971 के बाद ऐसा पहली बार हुआसाफ़ है कि हाल के समय में कूटनीतिक, सैन्य, व्यापारिक और सांस्कृतिक स्तर पर बढ़ी गतिविधियों और आदान-प्रदान से पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्तों में एक बड़ा बदलाव आता दिख रहा है। इससे पूर्वी हिंद महासागर में पाकिस्तानी नौसेना की मौजूदगी और गतिविधियों के बढ़ने की संभावना भी पैदा होती है। स्वाभाविक रूप से, इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या बेहतर होते रिश्तों के कारण पाकिस्तानी नौसेना उन इलाकों में ज़्यादा सक्रिय हो सकती है, जहाँ पहले उसकी मौजूदगी बहुत कम रही है। नवंबर 2025 में पाकिस्तान नेवी के युद्धपोत PNS सैफ ने चट्टोग्राम का चार दिन का सद्भावना दौरा किया। 1971 के मुक्ति संग्राम के बाद से बांग्लादेश का दौरा करने वाला यह पाकिस्तान का पहला युद्धपोत था। हालांकि इस बात का कोई संकेत नहीं है कि बांग्लादेश पा ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:29:02 +0530</pubDate>
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<title>Moscow की Oil Refinery पर फिर Drone Attack, President Zelenskyy बोले&#45; &amp;apos;ये बिल्कुल सही जवाब&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ मॉस्को में एक ऑयल रिफ़ाइनरी को यूक्रेन द्वारा इस हफ़्ते दूसरी बार निशाना बनाए जाने के बाद वहाँ से काला धुआँ और आग की लपटें उठने लगीं। सोशल मीडिया पर हमले के वीडियो वायरल होने के बाद, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा कि यह हमला कीव पर हाल ही में रूस द्वारा किए गए हमलों का उचित जवाब था। ज़ेलेंस्की ने एक्स पर कहा कि यह हमारे शहरों और समुदायों पर रूस के हमलों का पूरी तरह से उचित जवाब है और रूस की युद्ध मशीन को चलाने वाली सुविधाओं के खिलाफ हमारे योद्धाओं की कार्रवाई का एक और अहम नतीजा है।इसे भी पढ़ें:  G7 Summit: भारत को रूस से तेल नहीं खरीदने देंगे! ट्रंप ने फिर बढ़ाई टेंशनमॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर हुआ हमला रूस की युद्ध क्षमता और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है। क्रेमलिन से सिर्फ़ 15 किलोमीटर दूर स्थित यह रिफाइनरी रूसी राजधानी के ईंधन इंफ्रास्ट्रक्चर का एक अहम हिस्सा है। यह मॉस्को मेट्रोपॉलिटन इलाके की पेट्रोल की ज़रूरतों का लगभग 40% और डीज़ल का 50% हिस्सा सप्लाई करती है, साथ ही सैन्य इस्तेमाल के लिए एविएशन फ्यूल भी देती है। 16 जून 2026 को यूक्रेनी ड्रोनों ने कपोटन्या में मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर हमला किया। इस हमले से ELOU-AVT-6 प्राइमरी ऑयल रिफाइनिंग यूनिट को नुकसान पहुँचा, जिसके कारण रिफाइनरी को कुछ समय के लिए अपना कामकाज रोकना पड़ा।Безпілотники уразили Московський НПЗ у Капотні: місто затягнуло густим димомhttps://t.co/PftgBimeHeВідео: Telegram\Exilenova+ pic.twitter.com/tUmXakSOhf— Українська правда ✌️ (@ukrpravda_news) June 18, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:29:01 +0530</pubDate>
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<title>PM Modi और President Trump की दोस्ती लाएगी रंग, जल्द Trade Deal पर लगेगी मुहर</title>
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<description><![CDATA[ अगले हफ़्ते अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर की भारत यात्रा से ठीक पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार शाम एवियन में हुई बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर जल्द हस्ताक्षर करने का आग्रह किया। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि बातचीत जल्द पूरी होनी चाहिए ताकि व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो सकें और भारत-अमेरिका संबंध अगले स्तर पर पहुँच सकें। हालांकि PM मोदी और उनकी विदेश नीति के आलोचकों को लग रहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप के अनिश्चित स्वभाव की वजह से भारत-अमेरिका के आपसी रिश्ते सिर्फ़ &#039;मैनेजमेंट मोड&#039; में ही रहेंगे, लेकिन यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ़ से भारत और PM मोदी के लिए पूरे समर्थन वाली साबित हुई। आपसी बातचीत के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ़ कर दिया कि वे भारत-अमेरिका रिश्तों को पूरी तरह से बढ़ावा देना चाहते हैं और उन्होंने PM मोदी की जमकर तारीफ़ और सम्मान किया। उन्होंने कहा कि जब तक PM मोदी हैं, व्हाइट हाउस में भारत का एक दोस्त है और अगर किसी तीसरे देश ने भारत पर हमला किया तो अमेरिका उसकी मदद के लिए आगे आएगा।इसे भी पढ़ें: भारत जो चाहे वो कर सकता है, कभी किसी ने उस पर हमला किया तो... G7 के मंच से मोदी के सामने ट्रंप ने दुनिया को दिया बड़ा मैसेजअमेरिका द्वारा भारत की रक्षा के लिए आगे आने की बात का असल में कोई बहुत बड़ा मतलब नहीं है, क्योंकि मोदी सरकार को अपने दुश्मनों से निपटने के लिए किसी मदद की ज़रूरत नहीं है, लेकिन साथ ही यह पाकिस्तान जैसे भारत के पड़ोसियों के लिए एक संदेश भी था। कई मायनों में, यह सभी के लिए एक साफ़ संदेश था कि राष्ट्रपति ट्रंप और PM मोदी के बीच करीबी निजी दोस्ती है और दोनों देश वैश्विक मुद्दों पर एक ही राय रखते हैं। भारत को एक वैश्विक शक्ति मानते हुए, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह तय करना नई दिल्ली का काम है कि वह मध्य-पूर्व शांति समझौते में कोई भूमिका निभाना चाहती है या नहीं। राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बातचीत के बाद PM मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वी. ज़ेलेंस्की से भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के साथ MoU करने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को आज़ाद और खुले आवागमन के लिए खोलने के फ़ैसले के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की तारीफ़ की। राष्ट्रपति ट्रंप के साथ समुद्री यात्रियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के साथ MoU के बाद 60 दिनों के संघर्ष-विराम (ceasefire) पर भी अपनी संतुष्टि ज़ाहिर की।इसे भी पढ़ें: Netanyahu का &#039;ईरान मिशन&#039; फेल! Donald Trump की शांति डील से &#039;बीबी&#039; के सियासी भविष्य पर संकट?हालांकि दोनों नेताओं के बीच कोई बहुत अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं हुई क्योंकि बातचीत दोनों तरफ़ से काफ़ी सौहार्दपूर्ण रही, लेकिन मोदी-ट्रंप की इस मुलाक़ात से निश्चित रूप से उन फ़ैसलों का रास्ता साफ़ होगा जो ट्रेड टैरिफ, भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद और मई 2025 में &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; के बाद भारत-पाकिस्तान संघर्ष-विराम में ट्रंप के कथित दखल को लेकर वॉशिंगटन की आपत्तियों की वजह से रुके हुए थे। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:29:01 +0530</pubDate>
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<title>QUAD से किनारा और टैरिफ वॉर के बाद Trump के बदले तेवर, White House ने दिए भारत दौरे के संकेत</title>
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<description><![CDATA[ भारत और अमेरिका अपने रिश्तों को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह जल्द ही भारत का दौरा करना चाहेंगे। फ्रांस में G7 समिट 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करते हुए अमेरिकी नेता ने कहा कि वह &quot;भविष्य में कभी भारत आएंगे लेकिन उन्होंने कोई तारीख या साल नहीं बताया। अगर व्हाइट हाउस भारत दौरे की घोषणा करता है, तो 2025 में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू होने के बाद यह ट्रंप का पहला दौरा होगा। उनका पिछला भारत दौरा 2020 में हुआ था, जब पूरे देश में नमस्ते ट्रंप बैनर के साथ उनका स्वागत किया गया था। नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच तनाव के बावजूद, ट्रंप ने इसे ज़्यादा अहमियत नहीं दी और कहा कि जब तक वह राष्ट्रपति हैं, भारत को &quot;व्हाइट हाउस में एक बहुत अच्छा दोस्त मिलेगा।इसे भी पढ़ें: PM Modi और President Trump की दोस्ती लाएगी रंग, जल्द Trade Deal पर लगेगी मुहरट्रंप का QUAD को नज़रअंदाज़ करनाअगस्त 2025 में, राष्ट्रपति ट्रंप नई दिल्ली में होने वाले QUAD समिट में शामिल होने के लिए भारत आने वाले थे। लेकिन, ट्रंप ने भारत पर जो 50 प्रतिशत टैरिफ दर लगाने की घोषणा की, उससे दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हो गया। इसके अलावा, मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव हुआ था, जो ट्रंप के मुताबिक उनकी वजह से ही पूर्ण युद्ध में नहीं बदला। जहां पाकिस्तान ने भारत के साथ संघर्ष-विराम (सीजफायर) कराने में ट्रंप की भूमिका की खुलकर तारीफ़ की है, वहीं नई दिल्ली का कहना है कि इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। संघर्ष-विराम में वॉशिंगटन की भूमिका पर भारत के बयान और पीएम मोदी के रुख से ट्रंप नाराज़ हो गए थे, जिसके बाद उनका QUAD समिट का दौरा रद्द कर दिया गया। &#039;द न्यूयॉर्क टाइम्स&#039; की 2025 की एक रिपोर्ट, जिसका शीर्षक &#039;नोबेल पुरस्कार और एक तनावपूर्ण फ़ोन कॉल: कैसे ट्रंप-मोदी के रिश्ते बिगड़े&#039; था, के अनुसार ट्रंप ने कई वजहों से भारत का दौरा रद्द कर दिया था। लेकिन इनमें सबसे अहम वजह &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; और पाकिस्तान के साथ संघर्ष-विराम से जुड़ी थी; ये सभी अमेरिकी राष्ट्रपति की नोबेल शांति पुरस्कार पाने की कोशिश का हिस्सा थे।इसे भी पढ़ें: Netanyahu का &#039;ईरान मिशन&#039; फेल! Donald Trump की शांति डील से &#039;बीबी&#039; के सियासी भविष्य पर संकट?भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव की क्या वजह थी?इसकी शुरुआत भारत और पाकिस्तान के बीच सीज़फायर (युद्धविराम) से हुई, जिसके रुकने का श्रेय ट्रंप ने खुद को दिया। केंद्र सरकार की ओर से इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया या पुष्टि न होने के बाद, संबंधों को तब और झटका लगा जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने अप्रैल 2025 में &#039;लिबरेशन डे&#039; (मुक्ति दिवस) पहल की घोषणा की और भारत पर 25% का शुल्क (लेवी) लगा दिया, साथ ही उसे टैरिफ का महाराजा भी कहा। रूस से तेल खरीदने और नई दिल्ली पर यूक्रेन में पुतिन के युद्ध को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया गया। इस तरह भारत पर कुल शुल्क बढ़कर 50% हो गया, जिससे वह ब्राज़ील और चीन के साथ उन देशों की सूची में शामिल हो गया जिन पर सबसे ज़्यादा शुल्क लगाया गया था। ]]></description>
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<title>ईरान के पास परमाणु से भी घातक हथियार, इसलिए अमेरिका ने मानी हार!</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और इसराइल ने धोखे से हमला किया जिसका कोई जवाब आज भी ट्रंप के पास नहीं है। और इसके बाद उल्टा अमेरिका ने खुद ईरान के हाथ एक ब्रह्मास्त्र थमा दिया। इसे ब्रह्मास्त्र कहें जिसका निशाना खाली नहीं जाना है। एक ऐसी चाबी कहें जो सटीक बैठती है। लेकिन खास बात तो यह है कि ईरान को खुद इस बात का पहले अंदाजा नहीं था कि उसके पास इतनी बड़ी ताकत है। अमेरिका इसराइल की कार्रवाई ने उसकी इस ताकत को जगा दिया और ऐसा जगा दिया कि अब अमेरिका माथा पीट रहा है कि उसने यह क्या कर डाला। यह बात खुद अमेरिका की खुफिया एजेंसियां मान रही हैं। जिस ब्रह्मास्त्र की बात कर रहे हैं, जिस कुंजी की बात कर रहे हैं, वो है होरमोस का रास्ता। मीडिया रिपोर्ट्स बता रही है कि दरअसल अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने हाल ही में यह निष्कर्ष निकाला है कि अब ईरान जब चाहे तब समंदर में स्ट्रेट ऑफ होमोस इस रास्ते को प्रभावी रूप से बंद कर सकता है। इसे भी पढ़ें: Modi-Trump meet: मोदी शांत और संयमित, मैं वैसा नहीं... G7 में ट्रंप ने की प्रधानमंत्री की तारीफअमेरिका इसे ईरान के पास न्यूक्लियर से भी बड़ा हथियार मान रहा है। यह वही अहम समुंदरी रास्ता है जिससे दुनिया के कुल तेल कारोबार का 20% हिस्सा गुजरता है। अमेरिकी मीडिया सी एनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की खुफिया एजेंसियां अब मान रही हैं कि युद्ध के बाद ईरान को दुनिया की इकॉनमी की कमजोर नब्ज़ दबाने की कला मिल गई है। एक बार ईरान हॉर्मोस पर बैठ जाता है तो अमेरिका जैसी महाशक्ति भी उससे हॉर्मोस छुड़वा नहीं सकती। जब ईरान चाहेगा खोलेगा और जब नहीं चाहेगा तो नहीं खोलेगा। दुनिया तड़प के रह जाएगी मगर कुछ नहीं कर पाएगी। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन बताते हैं कि भविष्य में भी ऐसा दोबारा हो सकता है। अमेरिका और ईरान में डील पर शुक्रवार को साइं वर्क हो जाएगा। ईरान ने बड़ा दिल दिखाते हुए इस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर आधिकारिक मोहर लगने से पहले ही हॉर्मोस को खोल दिया है। डील के बाद 60 दिनों में दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर को लेकर बातचीत होगी। फिलहाल तो हॉर्मोस का संकट टल गया है। लेकिन इसका दूसरा पहलू है कि इस पूरी जंग के दौरान ईरान ने दिखा दिया कि वो होर्मोस का रास्ता बंद कर सकता है। अभी तक यही माना जाता था कि ईरान क्या ही कर पाएगा या अगर किया भी तो अमेरिका एक-दो दिन में हॉर्मोस खाली करवा लेगा। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो सका। कुछ भी नहीं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अंदाजे बताते हैं कि भविष्य में फिर ऐसा हो सकता है। इसे भी पढ़ें: Netanyahu का &#039;ईरान मिशन&#039; फेल! Donald Trump की शांति डील से &#039;बीबी&#039; के सियासी भविष्य पर संकट?सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी एक्सपर्ट यह मान रहे हैं कि हमने होमोस पर असली कंट्रोल ईरान को दे दिया है। यह किसी भी परमाणु हथियार से ज्यादा ताकतवर हथियार है। ईरान अब होमोस को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करेगा। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि उसके पास अभी भी हथियारों का बड़ा जखीरा मौजूद है। जिनमें मिसाइलें हैं, ड्रोन है, मिसाइल लांचर है, सैकड़ों छोटी तेज रफ्तार नावें शामिल हैं। उसकी नेवी मजबूत है और सबसे बड़ा हथियार होरमुस है। जिसे खुद अमेरिका ने इसराइल के प्रभाव में आकर खुद उसे थमाया है। देने वाला जब भी देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है। लेकिन इसके लिए आपको जद्दोजहद करनी पड़ती है। सही और गलत के बीच रास्ता और अपना क्लियर स्टैंड चुनना पड़ता है। खुद पर थोपे गए हमले पर ईरान ने करारा जवाब दिया। ऐसा कि मिडिल ईस्ट में नए शक्ति संतुलन के साथ लौटा। आज उसके पास होरमोस की चाबी है और वही लोग पैसा बरसा रहे हैं जो 3 माह पहले तक उसे मिटाने का ख्वाब देखते थे।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:59 +0530</pubDate>
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<title>अब Russia भी खरीदेगा BrahMos? भारत सप्लाई करेगा मिसाइल सिस्टम, Production बढ़ाने पर बातचीत जारी</title>
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<description><![CDATA[ ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रमुख जयतीर्थ जोशी ने गुरुवार को कहा कि रूस ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल को शामिल करने का इच्छुक है और भविष्य की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए इसके उत्पादन को बढ़ाने पर बातचीत चल रही है। सोलर इंडस्ट्रीज़ इंडिया लिमिटेड द्वारा बनाए गए 100वें स्वदेशी बूस्टर को हरी झंडी दिखाए जाने के बाद नागपुर में ANI से बात करते हुए जोशी ने कहा कि मॉस्को ने इस मिसाइल में दिलचस्पी दिखाई है, जबकि ब्रह्मोस प्रोग्राम से जुड़े उसके पहले से ही औद्योगिक साझेदार मौजूद हैं।इसे भी पढ़ें: Russia से भारत की तेल दोस्ती गहरी, US की पाबंदी के बावजूद Crude Oil आयात 21% बढ़ाइस सवाल पर कि क्या रूस अपनी सेना में ब्रह्मोस को शामिल कर सकता है, जोशी ने कहा कि बातचीत चल रही है। उन्होंने यही कहा है... मेरे जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर ने बताया है कि रूस की सरकार इसे लेने में दिलचस्पी रखती है, लेकिन उनके अपने पहले से तय इंडस्ट्री पार्टनर हैं। हालांकि, वे मौजूदा हालात के हिसाब से ज़रूरत बढ़ाना चाहते हैं। हालात ऐसे हैं कि वे इसे ले सकते हैं। हम उनसे बातचीत कर रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या रूस के लिए भविष्य में भारत से मिसाइलें सप्लाई की जाएंगी, तो जोशी ने संकेत दिया कि भारतीय इंडस्ट्री रूस की मौजूदा प्रोडक्शन क्षमता को बढ़ाने में भूमिका निभा सकती है।उनके पास सुविधा है, लेकिन हो सकता है कि वह सुविधा काफी न हो--उसे बढ़ाने के लिए... हम मिलकर काम करेंगे; हम काम करेंगे और इसे भारत से सप्लाई करेंगे। ये बातें ऐसे समय में कही गई हैं जब ब्रह्मोस को एक्सपोर्ट में सफलता और ऑपरेशनल तैनाती के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज़्यादा ध्यान मिल रहा है। इस मिसाइल को भारत के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) और रूस के NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया (NPOM) ने मिलकर बनाया है। जोशी ने कहा कि &#039;सबसे तेज़ सुपरसोनिक मिसाइल&#039; की पहचान 25 सालों के डेवलपमेंट, टेस्टिंग और ऑपरेशनल तैनाती के दौरान बनी है, जिससे संभावित खरीदारों का भरोसा बढ़ा है। मिसाइल के पहले कॉम्बैट वैलिडेशन (युद्ध में सफल परीक्षण) का ज़िक्र करते हुए, जोशी ने &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; के दौरान इसके ऑपरेशनल इस्तेमाल का हवाला दिया।इसे भी पढ़ें: Siberia में आसमान से गिरा Russia का Tu-22M3 बॉम्बर, Live Crash का खौफनाक वीडियो आया सामनेउन्होंने कहा, हमने यह कर दिखाया है... आम तौर पर, हम ज़मीन पर टेस्ट करते हैं और जहाज़ वगैरह से सिम्युलेटेड टेस्ट किया जाता है। लेकिन &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; के दौरान लाइव टेस्ट किया गया, और यह एक ऐसी कामयाबी थी जिसके बारे में पूरा देश और दुनिया जानती है। और यह लोगों के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। आम तौर पर, बनी हुई मिसाइल का लाइव हालात में टेस्ट नहीं किया जाता है; यह अपनी तरह का पहला मामला है जब हम दुश्मन पर मिसाइल का टेस्ट कर पाए।इसे भी पढ़ें: G7 Summit में Japan ने खींची &#039;रेड लाइन&#039;, China की चुनौतियों से निपटने के लिए बनाया खास प्लान!ब्रह्मोस प्रमुख का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वियतनाम के साथ एक्सपोर्ट को लेकर बातचीत आखिरी दौर में है। जोशी ने एएनआई को बताया कि डील पूरी होने से पहले बस कुछ मंज़ूरी मिलनी बाकी है, साथ ही पूर्वी और पश्चिमी इलाकों के कई दूसरे देशों के साथ भी बातचीत चल रही है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:59 +0530</pubDate>
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<title>India&#45;China तनाव के बीच दिल्ली में अहम बैठक, Ajit Doval से मिलेंगे चीनी विदेश मंत्री Wang Yi</title>
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<description><![CDATA[ चीनी विदेश मंत्रालय (MFA) ने गुरुवार को बताया कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के निमंत्रण पर भारत का दौरा करेंगे। वे ब्रिक्स (BRICS) देशों के NSA और उच्च प्रतिनिधियों की 16वीं बैठक में हिस्सा लेंगे।वांग यी का यह दौरा 22-23 जून को होगा। एमएएफए ने एक्स पर कहा कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के निमंत्रण पर, CPC केंद्रीय समिति के पॉलिटिकल ब्यूरो के सदस्य और विदेश मामलों के लिए केंद्रीय आयोग के कार्यालय के निदेशक वांग यी, 22 से 23 जून तक भारत में होने वाली ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उच्च प्रतिनिधियों की 16वीं बैठक में शामिल होंगे।इसे भी पढ़ें: Tibet की पहचान मिटाने पर तुला China, Xi Jinping की &#039;जातीय नीति&#039; से तिब्बतियों में भारी खौफ वांग यी ने पिछले साल नई दिल्ली का दौरा किया था और अगस्त में स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स (विशेष प्रतिनिधियों) की 24वीं बैठक में एनएसए के साथ बातचीत की थी। एमईए के अनुसार, दोनों पक्षों ने तब यह माना था कि 23वीं SR बातचीत के बाद से भारत-चीन सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनी हुई है। उन्होंने भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व को दोहराया। यह दौरा नई दिल्ली और बीजिंग के बीच संबंधों में सुधार की प्रक्रिया का हिस्सा है। यह सुधार पिछले साल तियानजिन में SCO समिट जैसे अहम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकातों के बाद आया है। इन मुलाकातों में दोनों नेताओं ने अक्टूबर 2024 में कज़ान में हुई पिछली मुलाकात के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में आई सकारात्मक गति और लगातार हो रही प्रगति का स्वागत किया था।इसे भी पढ़ें: सोने पर 15% आयात शुल्क का बड़ा असर: देश में गोल्ड इम्पोर्ट 70 प्रतिशत घटा, भारी विदेशी मुद्रा बचाने की कवायदउन्होंने फिर से दोहराया कि दोनों देश विकास में साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं, और उनके मतभेदों को विवादों में नहीं बदलना चाहिए। नेताओं के बीच बैठक के बाद विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर भारत और चीन तथा उनके 2.8 अरब लोगों के बीच स्थिर संबंध और सहयोग दोनों देशों की तरक्की और विकास के लिए ज़रूरी हैं। साथ ही, ये 21वीं सदी के रुझानों के अनुरूप एक बहुध्रुवीय दुनिया और बहुध्रुवीय एशिया के लिए भी आवश्यक हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:59 +0530</pubDate>
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<title>भारत के डिफेंस प्रोडक्शन ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए! 110 % का ऐतिहासिक उछाल</title>
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<description><![CDATA[ आज के 10 साल पहले किसी भी देश ने इस बात की कल्पना नहीं की होगी कि आगे चलकर भारत अपनी सुरक्षा के लिए हथियार खुद बनाएगा। पहले भारत को दुनिया का सबसे बड़ा हथियार खरीददार देश कहा जाता था। हम छोटी से छोटी चीजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हुआ करते थे। आज भी हमारे पास जितने भी घातक हथियार हैं ज्यादा से ज्यादा हमने दूसरे देशों से खरीदे हैं। लेकिन अब यानी साल 2026 में भारत ने रक्षा क्षेत्र में वो कर दिखाया जो सच में एक वक्त पर असंभव लगता था और यह कोई हवाहवाई बातें नहीं है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन यानी कि डिफेंस प्रोडक्शन अपने अब तक के सबसे ऊंचे शिखर यानी कि 1.78 लाख करोड़ पर पहुंच गया है। यानी कि ₹178,000 करोड़। यह कोई मामूली बढ़त नहीं। अगर पिछले साल यानी 2024-25 की तुलना करें तब यह आंकड़ा 1.54 लाख करोड़ था। अगर एक साल के अंतर को देखें तो 15 6% की भारी उछाल दर्ज की गई।  इसे भी पढ़ें: Terrorism पर India-America का होगा साझा प्रहार, गृह मंत्री Amit Shah से मिले US राजदूत गोरयही चीज अगर 2020-21 के आंकड़ों से कंपेयर की जाए तो उस वक्त यह आंकड़ा 84,643 करोड़ का था। भारत के डिफेंस प्रोडक्शन के बारे में बताएंगे और यह भी कि कैसे पिछले 10 सालों में भारत ने पूरा गेम बदल दिया है। देखिए पहले खबर को समझ लेते हैं। अगर आज से 12 साल पीछे जाएं तो साल 2013-14 में भारत का रक्षा उत्पादन महज 43746 करोड़ था और आज 2025-26 में यह बढ़कर ₹178000 करोड़ हो गया है। यानी पिछले 10 से 12 साल के भीतर भारत का स्वदेशी रक्षा उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ चुका है। और इसी चीज को बदलाव कहते हैं। कहां 43,000 कहां 1 लाख 78,000 करोड़। मतलब ये डिफरेंस बहुत बड़ा है और जाहिर सी बात है इन 12 सालों में अपने डिफेंस प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए भारीभरकम मेहनत भी की गई है। अच्छा ऐसा नहीं है कि इसमें सिर्फ सरकारी कंपनियों का हाथ है। इसमें प्राइवेट कंपनियों की भूमिका भी बहुत बड़ी है। अगर इस आंकड़े की बात करें जो 2025-26 में आया है तो इसमें 76% हिस्सेदारी सरकारी कंपनियां डीपीएसयूस ने संभाली हैं। लेकिन साथ ही साथ देश की प्राइवेट कंपनीज की हिस्सेदारी पिछले साल के 22% से बढ़कर अब 24% हो गई है। और अगर रुपयों में कहें तो प्राइवेट सेक्टर ने अकेले ₹42,000 करोड़ का ऐतिहासिक योगदान दिया जो अब तक का ऑल टाइम हाई है।  इसे भी पढ़ें: अब Russia भी खरीदेगा BrahMos? भारत सप्लाई करेगा मिसाइल सिस्टम, Production बढ़ाने पर बातचीत जारीमान लीजिए देश में डिफेंस प्रोडक्शन बढ़ रहा है तो जाहिर सी बात है दुनिया भर के देशों की रुचि भारत के हथियारों में भी है। आज भी हम दूसरे देशों से हथियार लेते हैं। लेकिन साथ ही साथ हम अपने हथियार उन्हें बेचने का भी काम करते हैं। बता दें इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री मोदी का भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट आया है। जहां उन्होंने लिखा कि भारत की रक्षा क्षमताओं में पिछले एक दशक में बड़ा बदलाव आया है। यह बदलाव आत्मनिर्भरता के विज़न, तकनीकी नवाचार और देश में ही रक्षा उपकरणों के निर्माण की वजह से संभव हुआ है। इसके अलावा इस ऐतिहासिक कामयाबी पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी जाहिर की और लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी की लीडरशिप में भारत का रक्षा उत्पादन हर साल नई ऊंचाइयों को छू रहा है। मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। राजनाथ सिंह ने आगे लिखा यह शानदार कामयाबी डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन, पब्लिक सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:58 +0530</pubDate>
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<title>उगते सूरज को सलाम, ईरान पर क्यों मेहरबान हुए ये 3 देश?</title>
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<description><![CDATA[ ईरान और अमेरिका के बीच अंततः जंगबंदी होने जा रही है। जिसके दस्तावेजों पर अंतिम मुहर लगनी बाकी है। इस जंग में ईरान ने जितनी ताकत से अमेरिका और इजराइल का अकेले मुकाबला किया उसने दुनिया को हैरान कर दिया। वैश्विक ऊर्जा गलियारे के गले पर हाथ रखकर जहां ईरान ने कई देशों में तेल और ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया तो वहीं अमेरिका के कई अत्याधुनिक विमानों के भी परखच्चे उड़ा दिए। ईरान की ताकत को आज दुनिया नजरअंदाज नहीं कर सकती और वो यूरोपीय देश जो कभी अमेरिका के पिचलग्गू बने होते थे आज इस जंग को जल्द से जल्द खत्म करवाने पर तुले हैं और इसके लिए लाख जतन कर रहे हैं। इसी बीच फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और इटली ने इस समझौते का खुलकर स्वागत करते हुए इसे पश्चिमी एशिया में शांति और स्थिरता के दिशा में एक बड़ी राजनीतिक सफलता बताया है। इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz में जहाजों से &#039;टोल&#039; नहीं &#039;ट्रांज़िट फीस&#039; लेगा ईरान, क्या है इसका मतलब?चारों यूरोपीय देशों के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर समझौते को शीघ्र और व्यापक रूप से लागू करने का आह्वान किया है। साथ ही उन्होंने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अमेरिका, ईरान और मध्यस्थ देशों, पाकिस्तान तथा क़तर की भूमिका की सराहना की। संयुक्त बयान में कहा गया हम अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के ज्ञापन की घोषणा का हार्दिक स्वागत करते हैं। हम इस राजनीतिक सफलता के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका, ईरानी सरकार और पाकिस्तान, कतर तथा अन्य सभी मध्यस्थों सहित सभी संबंधित पक्षों को बधाई देते हैं। यूरोपियन नेताओं ने इस समझौते को केवल दो पक्षों के बीच तनाव कम करने वाला कदम नहीं बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करने का अवसर बताया। उनका मानना है कि लंबे समय से जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर पड़ रहा था। ऐसे में यह समझौता दुनिया भर के कई देशों के लिए राहत लेकर आ सकता है। चारों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि अब सबसे महत्वपूर्ण काम समझौते के विस्तृत स्वरूप को अंतिम रूप देना और उसे पूरी तरह से लागू करना है। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए वार्ता को तेजी से आगे बढ़ाना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Modi-Trump meet: मोदी शांत और संयमित, मैं वैसा नहीं... G7 में ट्रंप ने की प्रधानमंत्री की तारीफअब यह अत्यंत आवश्यक है कि विस्तृत वार्ता संपन्न हो और इस समझौते को शीघ्रता पूर्वक और व्यापक रूप से लागू किया जाए। हम इस प्रयास में सहयोग देने के लिए तैयार हैं। समझौते का सबसे बड़ा असर होर्म जलडम्रू मध्य पर पड़ सकता है जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर समुद्र के रास्ते होने वाले तेज व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। तनाव बढ़ने के कारण इस मार्ग पर जहाज रानी प्रभावित हो गई थी और अब यूरोपीय देशों ने बिना शर्त और अप्रतिबंधित नववाहन की स्वतंत्रता के साथ होमस जलडमरू मध्य को तत्काल खोलने की मांग की है।इसे भी पढ़ें: Netanyahu का &#039;ईरान मिशन&#039; फेल! Donald Trump की शांति डील से &#039;बीबी&#039; के सियासी भविष्य पर संकट? फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और इटली ने यह भी कहा कि वे समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान देने के लिए तैयार हैं। इसके तहत वे वाणिज्यिक जहाजों को भरोसा दिलाने और जरूरत पड़ने पर अपने-अपने संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार बारूदी सुरंगों को हटाने जैसी पूरी तरह से रक्षात्मक और स्वतंत्र मिशन में भी भाग ले सकते हैं। अगर यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई दे सकता है। ईरान से जुड़े होने, तनाव कम होने और समुद्री मार्ग सुरक्षित होने से कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य हो सकती है। जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव घट सकता है। इससे भारत जैसे तेल आयातक देशों को भी राहत मिल सकती है। इसे भी पढ़ें: ईरान के पास परमाणु से भी घातक हथियार, इसलिए अमेरिका ने मानी हार!पेट्रोल डीजल की कीमतों पर दबाव कम होने के साथ-साथ आयात निर्यात की लागत में भी कमी आएगी। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से चला आ रहा अविश्वास कम होने की संभावना भी बढ़ेगी। अगर आगे की वार्ताओं में परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दों पर सहमति बनती है तो ईरान पर लगे कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में ढील का रास्ता भी खुल सकता है। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और उसका तेल निर्यात बढ़ सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अभी केवल एक समझौता ज्ञापन है।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:57 +0530</pubDate>
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<title>भारत से डरा मुनीर, अब तुर्की से मंगाए ये हथियार, अमेरिका भी हैरान!</title>
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<description><![CDATA[ ऑपरेशन सिंदूर का जख्म आज भी मुल्ला मुनीर के दिल और दिमाग में जिंदा है। भारत ने मई 2025 में ऐसा जवाब दिया। ऐसी चोट दी कि उसकी गूंज आज भी इस्लामाबाद के सत्ता गलियारों में सुनाई देती है। 7 मई से 10 मई 2025 तक चली ऑपरेशन सिंदूर की वो रातें आज भी पाकिस्तान के रणनीतिकारों को बेचैन करती है। रूह कपा देती है इनकी। शायद यही कारण है कि कभी तुर्की का ड्रोन किलर सिस्टम तो कभी अमेरिकी टीपीएस 777 रडार और कभी पूरे एयर डिफेंस नेटवर्क को अपग्रेड करने की लगातार खबरें पाकिस्तान से सामने आ रही है।  दरअसल आपको बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स जो सामने आई है उसके मुताबिक पाकिस्तान ने तुर्की का अत्याधुनिक एएसईएल एसए एन शाहीन 40 एमएम काउंटर यूएएस सिस्टम तैनात करना शुरू कर दिया है। इसे ड्रोन किलर कहा जाता है आसान भाषा में समझे तो। लेकिन यह सिर्फ एक नए हथियार की कहानी नहीं है। इसे भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान समझौते में पाकिस्तान की भूमिका मोदी सरकार की विदेश नीति के लिए गंभीर झटका: कांग्रेसबता दें कि बल्कि पूरे पाकिस्तान की बढ़ती सुरक्षा चिंताओं की कहानी है। कई रक्षा एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर का असर आज भी पाकिस्तान की सुरक्षा सोच में दिखाई देता है। और यही वजह है कि एक साल बाद भी वह लगातार नए एयर डिफेंस सिस्टम, नए रडार और नए एंटी ड्रोन समाधान तलाशता हुआ नजर आ रहा है। पाकिस्तान की यह कोशिश है कि भविष्य में किसी भी संभावित चुनौती के सामने उसकी कमजोरियां उजागर ना हो। दुनिया के सामने उसकी पोल ना खुले। रिपोर्ट्स के मुताबिक तुर्की का शाहीन सिस्टम सिर्फ ड्रोन को जाम नहीं करता बल्कि उन्हें हवा में ही नष्ट करने के लिए बनाया गया है। इसमें 40 एमएम का प्रोग्रामेबल एटम गोला बारूद इस्तेमाल होता है जो लक्ष्य के पास पहुंचकर हवा में ही फटता है और छोटे ड्रोन को मार गिराने की इसकी क्षमता है। इसी कारण से इसे ड्रोन किलर भी कहा जाता है माना जाता है। लेकिन कहानी बता दें कि यहीं खत्म नहीं होती है। कुछ समय पहले मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि किराना हिल्स जैसे रणनीतिक इलाके में अमेरिकी टीपीएस 77 लॉन्ग रेंज रडार भी तैनात किया गया है। जहां पर पहले चीनी डिफेंस सिस्टम था। यानी पाकिस्तान सिर्फ तुर्की के सिस्टम पर ही नहीं बल्कि अपनी पूरी निगरानी और एयर डिफेंस व्यवस्था को यहां पर मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। तरह-तरह के ऑप्शंस तलाश रहा है। अब तस्वीर को आप ध्यान से देखिए। कभी चीनी एयर डिफेंस सिस्टम, तो कभी तुर्की का ड्रोन किलर और अब अमेरिकी रडार। पाकिस्तान एक के बाद एक नए सुरक्षा इंतजाम कर रहा है। अगर उसकी मजबूत व्यवस्था पूरी तरह से पर्याप्त थी, तो इतनी तेजी से नए सिस्टम जोड़ने की पाकिस्तान को जरूरत क्यों पड़ रही है?इसे भी पढ़ें: 1971 की हार के 55 साल बाद Pakistan की Bay of Bengal में वापसी, चीन की मदद से नई पनडुब्बी की तैनातीरक्षा मामलों के जो जानकार हैं उनका यह मानना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन, मिसाइल और निगरानी तकनीक के क्षेत्र में जिस तेजी से काम किया है उसने पाकिस्तान को अपनी सुरक्षा रणनीति पर दोबारा से विचार करने और काम करने पर मजबूर कर दिया है। भारत लगातार अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है और इससे पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ती हुई साफ नजर आ रही है। साफ दिखाई दे रही है और यही कारण है कि इस्लामाबाद लगातार नए सुरक्षा कवच तलाश रहा है। कभी तुर्की, कभी अमेरिका और कभी दूसरे साझेदारों की तरफ देख रहा है। इससे इतना तो यह साफ है कि भारत की बढ़ती सैन्य और तकनीकी क्षमता को लेकर पाकिस्तान की चिंता कम होने के बजाय लगातार बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। और यही वजह है कि जो आतंकिस्तान के जो हुक्मरान हैं यह इस समय बेचैन हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:57 +0530</pubDate>
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<title>Vietnam से BrahMos डील लगभग फाइनल, ब्रह्मोस चीफ जयतीर्थ जोशी बोले&#45; बातचीत आखिरी दौर में</title>
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<description><![CDATA[ ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रमुख जयतीर्थ जोशी ने गुरुवार को कहा कि वियतनाम के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल के एक्सपोर्ट के लिए बातचीत आखिरी दौर में है और डील पूरी होने से पहले बस कुछ मंज़ूरी मिलनी बाकी है। नागपुर में सोलर इंडस्ट्रीज़ इंडिया लिमिटेड द्वारा ब्रह्मोस मिसाइल प्रोग्राम के लिए बनाए गए 100वें स्वदेशी बूस्टर को हरी झंडी दिखाने के बाद जोशी ने कहा कि संभावित एक्सपोर्ट के लिए कई अन्य देशों के साथ भी बातचीत चल रही है। उन्होंने एएनआई को बताया, वियतनाम के साथ एक्सपोर्ट के लिए बातचीत लगभग आखिरी दौर में है, बस कुछ छोटी-मोटी मंज़ूरी मिलनी बाकी है। हम पूर्वी और पश्चिमी दोनों क्षेत्रों के कई अन्य देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं। सरकार की मंज़ूरी मिलते ही हम इस बारे में खुलकर जानकारी देंगे।इसे भी पढ़ें: भारत के दो दोस्त धांसू डील को तैयार, एक बनाएगा विमान, दूसरा बनाएगा हथियार!उनके ये बयान विदेश मंत्रालय के पूर्व सचिव (पूर्व) पी. कुमारन के 6 मई को दिए गए उस बयान के एक महीने बाद आए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में वियतनाम भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बना हुआ है और &#039;भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी 2030 के लिए संयुक्त विज़न स्टेटमेंट&#039; के तहत ब्रह्मोस सहित कई रक्षा प्लेटफॉर्म पर बातचीत जारी है। मिसाइल सिस्टम में लागत कम करने और स्वदेशी सामान का इस्तेमाल बढ़ाने की कोशिशों के बारे में बात करते हुए जोशी ने कहा कि पिछले 18 महीनों में &#039;वैल्यू इंजीनियरिंग&#039; पहलों से काफी बचत हुई है। उन्होंने कहा, पिछले डेढ़ साल में वैल्यू इंजीनियरिंग के ज़रिए लागत में काफी कमी आई है। कच्चे माल की लागत में लगभग 24 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग और कंपोनेंट की लागत में करीब 10 प्रतिशत की कमी आई है। कुल मिलाकर, अगले एक से दो वर्षों में भारतीय कंपोनेंट की लागत में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आने की उम्मीद है।इसे भी पढ़ें: भारत से डरा मुनीर, अब तुर्की से मंगाए ये हथियार, अमेरिका भी हैरान!जोशी ने मिसाइल प्रोग्राम के लिए भविष्य की डेवलपमेंट योजनाओं के बारे में भी बताया, जिसमें ब्रह्मोस-एनजी (BrahMos-NG) और एक्सटेंडेड-रेंज वेरिएंट शामिल हैं। उन्होंने कहा कि एडवांस्ड कंपोजिट मटीरियल का इस्तेमाल करके हल्की मिसाइल डिज़ाइन विकसित करने पर रिसर्च चल रही है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रमुख ने ANI को बताया, &quot;भविष्य के डेवलपमेंट में ब्रह्मोस-एनजी और एक्सटेंडेड-रेंज वेरिएंट पर काम शामिल है, साथ ही कंपोजिट मटीरियल का इस्तेमाल करके हल्की डिज़ाइन बनाने पर भी रिसर्च की जा रही है। डिज़ाइन वैलिडेशन और सिमुलेशन स्टडीज़ पूरी होने के बाद फाइनल स्पेसिफिकेशन्स तय किए जाएंगे। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:56 +0530</pubDate>
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<title>France दौरे पर PM मोदी की Business Diplomacy, Saint&#45;Gobain के CEO से की हाई&#45;लेवल मीटिंग</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में सेंट-गोबेन के चेयरमैन और CEO बेनोइट बाज़िन से मुलाकात की। यह हाई-लेवल मीटिंग प्रधानमंत्री की फ्रांस यात्रा के दौरान हुई। G7 समिट में अपने कार्यक्रमों के बाद, प्रधानमंत्री मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के हिस्से के तौर पर पेरिस पहुंचे। शहर में अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री कई अहम द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे और साथ ही VivaTech समिट 2026 में भी शामिल होंगे। VivaTech को यूरोप का सबसे बड़ा टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप कन्वेंशन माना जाता है; यह अंतरराष्ट्रीय नेताओं, उद्यमियों, वेंचर कैपिटलिस्ट और इनोवेटर्स के लिए एक प्रमुख मंच है। खास बात यह है कि इस साल के इवेंट में भारत &quot;AI पार्टनर देश&quot; के तौर पर हिस्सा ले रहा है।इसे भी पढ़ें: PM Modi के 12 साल पूरे होने पर जश्न, Delhi में CM Rekha Gupta ने शुरू किए &#039;जन कल्याण शिविर&#039;इस समिट में PM मोदी भारत के तेज़ी से बढ़ते इनोवेशन सेक्टर पर ज़ोर देंगे और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नई टेक्नोलॉजी में हुई तरक्की पर बात करेंगे। भारतीय और यूरोपीय टेक कंपनियों के बीच सहयोग के बड़े मौकों को देखते हुए, भारत इस एग्ज़िबिशन में सबसे बड़ा नेशनल पवेलियन लगाएगा। पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों &#039;VivaTech&#039; में कई हाई-लेवल सेशन में हिस्सा लेंगे। इस संयुक्त भागीदारी के बाद एक मुख्य भाषण होगा, जिसमें डिजिटल बदलाव और इनोवेशन के इंटरनेशनल हब के तौर पर भारत की बढ़ती पहचान पर ज़ोर दिए जाने की उम्मीद है।इसे भी पढ़ें: Indo Pacific Command नाम से ट्रंप को क्या दिक्कत थी? क्या अब बदल गयी है अमेरिका की Asia Policy?टेक समिट के अलावा, पेरिस में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में लोगों से मिलने-जुलने पर भी खास ध्यान दिया जाएगा। वे एक खास कार्यक्रम में भारतीय समुदाय के लोगों से बातचीत करेंगे। उनकी पेरिस यात्रा का समापन भारतीय समुदाय के लिए आयोजित एक बड़े कार्यक्रम के साथ होगा, जिसमें भारत की विविध और जीवंत संस्कृति की झलक दिखाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। यह व्यस्त कार्यक्रम G7 समिट से PM मोदी के लौटने के बाद हो रहा है, जहाँ उन्होंने सस्टेनेबल डेवलपमेंट, ग्लोबल गवर्नेंस और इंटरनेशनल ट्रेड पर भारत का नज़रिया पेश किया था। एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने समावेशी विकास और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए &#039;ग्लोबल साउथ&#039; के देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया था।इसे भी पढ़ें: भारत के डिफेंस प्रोडक्शन ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए! 110 % का ऐतिहासिक उछालG7 आउटरीच चर्चाओं के दौरान, PM मोदी ने व्यापार और कनेक्टिविटी नेटवर्क को मज़बूत करने के लिए G7 ब्लॉक, भारत और विकासशील देशों के बीच बेहतर सहयोग की वकालत की थी। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:55 +0530</pubDate>
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<title>PoJK में Pakistan के खिलाफ बगावत! 11 दिन से Lockdown, रावलकोट में कर्फ्यू जैसे हालात</title>
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<description><![CDATA[ जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JKJAAC) ने दावा किया है कि पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) का रावलकोट शहर पिछले 11 दिनों से &quot;कर्फ़्यू जैसे हालात&quot; में है, जबकि पूरे PoJK में लगातार 10 दिनों से शटडाउन और चक्का-जाम हड़ताल चल रही है। एक्स पर शेयर की गई एक पोस्ट में JKJAAC ने बताया कि रावलकोट के चारों ओर प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण धरने जारी हैं और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बढ़ती पाबंदियों और रुकावटों के बावजूद स्थानीय लोग इस आंदोलन की मांगों का समर्थन कर रहे हैं। ग्रुप ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों ने नीलम घाटी से काफिले में आ रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की। हालांकि, उन्होंने कहा कि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और इस कार्रवाई के बावजूद धरना-प्रदर्शन जारी रहा।इसे भी पढ़ें: PoJK में घातक कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही हैसमिति के अनुसार, अधिकारियों ने सोनू इलाके के पास भी पाबंदियां लगा दीं, जहां पंजाब पुलिस ने कथित तौर पर रात में नाकेबंदी की थी। प्रदर्शन के आयोजकों का दावा है कि यात्रियों को इस इलाके में दवाएं, खाने-पीने का सामान और अन्य जरूरी चीजें ले जाने से रोका गया। समूह द्वारा उद्धृत रिपोर्टों से पता चलता है कि कई वाहनों को रोका गया और उन्हें राहत सामग्री ले जाने की अनुमति नहीं दी गई। चल रही हड़ताल के कारण बाजार बंद हैं, सड़कें अवरुद्ध हैं और क्षेत्र के कई हिस्सों में जन आवागमन बुरी तरह प्रतिबंधित है।इसे भी पढ़ें: POJK में Pakistan Army का खूनी खेल! तस्लीमा अख्तर ने दुनिया से लगाई न्याय की गुहारइन परिस्थितियों के बावजूद, जेकेजेएएसी ने जोर देकर कहा कि जनता का मनोबल मजबूत बना हुआ है और विरोध आंदोलन के लिए समर्थन कम नहीं हुआ है। जेकेजेएएसी ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर गिरफ्तारी, दबाव बनाने की रणनीति और सुरक्षा उपायों के माध्यम से जनता की मांगों को दबाने का आरोप लगाया। उसने कहा कि आंदोलन तब तक शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेगा जब तक कि लोगों के बुनियादी अधिकार सुरक्षित नहीं हो जाते। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:54 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan का New Budget: आवाम पर टैक्स का बोझ, क्या IMF को खुश करने में जुटी है सरकार?</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के 2026-27 वित्तीय वर्ष के बजट की नागरिकों ने आलोचना की है। उनका कहना है कि ऐसे समय में जब देश बढ़ती महंगाई, यूटिलिटी की बढ़ती लागत और आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रहा है, यह बजट कोई खास राहत नहीं देता है। सरकार ने हाल ही में लगभग 67.5 अरब अमेरिकी डॉलर का बजट पेश किया, जिसमें अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के प्रयासों पर ज़ोर दिया गया। नेशनल असेंबली में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगज़ेब ने कहा कि क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद पाकिस्तान ने महत्वपूर्ण आर्थिक उपलब्धियां हासिल की हैं। इस बजट में रक्षा के लिए ज़्यादा आवंटन किया गया है, जबकि विकास कार्यों पर होने वाले खर्च में कटौती की गई है।इसे भी पढ़ें: कांग्रेस ने &#039;इस्लामाबाद MoU&#039; को Modi की Foreign Policy पर बड़ा झटका बताया, पाक के बढ़ते प्रभाव पर चिंताहालांकि, कराची के कई निवासियों ने निराशा जताई है। उनका तर्क है कि घोषित उपायों से आम परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने में कोई खास मदद नहीं मिलेगी। सरकार ने वेतनभोगी लोगों को कुछ टैक्स राहत दी है, लेकिन नागरिकों का कहना है कि रोज़मर्रा की कई उपभोक्ता वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाए गए हैं। यह इस बात का सबूत है कि बजट वास्तव में जन-हितैषी और उपयुक्त नहीं है। लोगों का कहना है कि खाने-पीने की चीज़ों, डेयरी उत्पादों और घर की ज़रूरी चीज़ों की बढ़ती कीमतों से परिवारों का बजट बिगड़ रहा है।इसे भी पढ़ें: भारत से डरा मुनीर, अब तुर्की से मंगाए ये हथियार, अमेरिका भी हैरान!कई लोगों का मानना ​​है कि सरकार कम और मध्यम आय वाले उन वर्गों की ज़रूरतों को पूरा करने में नाकाम रही है, जो पहले से ही देश भर में महंगाई से जूझ रहे हैं। एक निवासी ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि भले ही अधिकारी राहत देने का दावा कर रहे हों, लेकिन दूध, शैम्पू और रोज़मर्रा की अन्य ज़रूरी चीज़ों पर टैक्स बढ़ा दिए गए हैं। उनके अनुसार, लोगों को आटा, दाल, खाना पकाने का तेल और डेयरी उत्पादों जैसी ज़रूरी चीज़ें सस्ती दरों पर मिलनी चाहिए, लेकिन बजट में इस दिशा में बहुत कम मदद दी गई है। स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च भी एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। कराची के एक निवासी, जो दिल की बीमारी और डायबिटीज़ से पीड़ित हैं, ने बताया कि हाल के वर्षों में उनकी दवाओं की कीमतें तीन गुना से ज़्यादा बढ़ गई हैं, जिससे इलाज का खर्च उठाना मुश्किल होता जा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:54 +0530</pubDate>
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<title>Paris के VivaTech 2026 से PM Modi का संदेश, Technology से हर क्षेत्र में क्रांति ला रहा भारत</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत फाइनेंशियल इन्क्लूजन, शिक्षा, टेलीमेडिसिन, खेती और अन्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है और इसके स्टार्टअप कई नई पार्टनरशिप कर रहे हैं। VivaTech 2026 में बोलते हुए, PM मोदी ने कहा कि भारत स्पेस टेक्नोलॉजी से लेकर न्यूक्लियर एनर्जी तक इंसानी क्षमता के दायरे को बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे VivaTech के 10वें एडिशन के लिए पेरिस में आकर खुशी हो रही है। यह यूरोप का सबसे बड़ा टेक्नोलॉजी इवेंट है। मैं VivaTech की सफलता के लिए प्रेसिडेंट मैक्रों और आयोजकों को बधाई देता हूं। 2026 भारत और यूरोप के लिए एक खास साल है। साल की शुरुआत में, हमने ऐतिहासिक भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पूरा किया। यह एग्रीमेंट हमारे व्यापार और निवेश को बढ़ाएगा। और यह टैलेंट, टेक्नोलॉजी और टूरिज्म के आदान-प्रदान के लिए कई रास्ते खोलेगा।इसे भी पढ़ें: भारत-UK Trade Deal पर ब्रिटिश हाई कमिश्नर Lindy Cameron बोलीं- ये अब तक का सबसे तेज़ समझौताउन्होंने कहा कि इस साल &#039;भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर&#039; की शुरुआत के साथ, फ्रांस एक अहम कड़ी का काम कर रहा है जो भारत और यूरोप के टेक इकोसिस्टम को करीब ला रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत का मानना ​​है कि बदलाव के इस दौर में टेक्नोलॉजी का फ़ायदा सभी को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम फाइनेंशियल इन्क्लूजन, शिक्षा, टेलीमेडिसिन, खेती और अन्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ दिन पहले नीस में हुए &#039;भारत इनोवेट्स&#039; से लेकर आज पेरिस में हो रहे &#039;विवा टेक&#039; तक, हमारे स्टार्टअप कई नई साझेदारियां कर रहे हैं। स्पेस टेक्नोलॉजी से लेकर न्यूक्लियर एनर्जी तक, हम इंसानी क्षमता का दायरा बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दशक में भारत तेज़ी से बदल रहा है और इस बदलाव की वजह टेक्नोलॉजी है।इसे भी पढ़ें: PM Modi 20 June को जारी करेंगे PM-KISAN की 23वीं किस्त, 9.5 करोड़ किसानों को तोहफाउन्होंने कहा कि फ्रांस में भी एफिल टॉवर या पेरिस एयरपोर्ट पर UPI का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल आइडेंटिटी सिस्टम बनाने से लेकर दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म बनाने तक... फाइनेंशियल इन्क्लूजन, शिक्षा, टेलीमेडिसिन, खेती और अन्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर काम हो रहा है। हमारे यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की वजह से आज दुनिया के आधे रियल-टाइम डिजिटल ट्रांज़ैक्शन भारत में होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि अब आप फ्रांस में भी एफिल टॉवर या पेरिस एयरपोर्ट पर UPI का इस्तेमाल कर सकते हैं। हमारे पास ऐसी कई वर्ल्ड-क्लास डिजिटल पब्लिक गुड्स (जन-सुविधाएं) के उदाहरण हैं। डिजिलॉकर दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल डॉक्यूमेंट वॉलेट में से एक है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:53 +0530</pubDate>
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<title>भारत&#45;UK Trade Deal पर ब्रिटिश हाई कमिश्नर Lindy Cameron बोलीं&#45; ये अब तक का सबसे तेज़ समझौता</title>
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<description><![CDATA[ भारत में ब्रिटिश हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने गुरुवार को भारत-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) को ऐतिहासिक बताया। यह समझौता 15 जुलाई, 2026 से लागू होगा और इसे दोनों देशों के आर्थिक फ़ायदे के लिए एक मौक़े के तौर पर देखा जा रहा है। G7 समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के बीच हुई अहम बातचीत के बाद घोषित इस समझौते का लक्ष्य 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करके $100-$120 बिलियन तक पहुँचाना है। एएनआई से बात करते हुए, हाई कमिश्नर ने ज़ोर देकर कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के एक साल से भी कम समय में यह लागू हो जाएगा, और इसे दोनों देशों द्वारा लागू किया गया &quot;सबसे तेज़ी से होने वाला व्यापार समझौता&quot; बताया।इसे भी पढ़ें: Kheer Bhawani Mela: Omar Abdullah ने की पूजा, कश्मीरी पंडितों को बेहतर व्यवस्थाओं का भरोसाउन्होंने कहा कि दुनिया के मुश्किल दौर में यह समझौता बहुत अहम है। उन्होंने कहा कि इससे टेक्सटाइल, फ़ुटवियर और कार जैसे कई सेक्टर को फ़ायदा होगा। उन्होंने कहा कि यह वाकई एक ऐतिहासिक पल है। यूके-भारत फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट इस साल 15 जुलाई को लागू हो जाएगा। यह पिछले साल गर्मियों में चेकर्स में हमारे दोनों प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर होने के एक साल से भी कम समय में हो रहा है। यह अब तक का सबसे तेज़ी से लागू किया गया व्यापार समझौता है। और यह इसलिए अहम है क्योंकि हम इस रिश्ते की अहमियत समझते हैं। दुनिया के मुश्किल दौर में इस तरह के व्यापार समझौते से आर्थिक फ़ायदा उठाने का यह हमारे दोनों देशों के लिए एक असली मौक़ा है। इसलिए हम इसे जल्द से जल्द लागू करना चाहते हैं। इसमें टेक्सटाइल और फ़ुटवियर सेक्टर शामिल हैं। मैं व्हिस्की और कारों के बारे में भी सोच सकती हूँ। कई सेक्टर को इससे फ़ायदा होगा।इसे भी पढ़ें: Wedding Season शुरू हो गया, Iran-US War खत्म हो गयी, क्या अब Gold Jewellery को खरीदना सही रहेगा?यूके भारतीय एक्सपोर्ट के 99% हिस्से को तुरंत ड्यूटी-फ्री एक्सेस दे रहा है, जिससे टेक्सटाइल, लेदर, समुद्री उत्पादों और फार्मा जैसे ज़्यादा लेबर वाले सेक्टर को फ़ायदा होगा। ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर भारत का इंपोर्ट टैरिफ भी 150% से घटकर 40% हो जाएगा। यूके के स्टील सेफ़गार्ड उपायों के विवादित मुद्दे पर उन्होंने कहा कि ज़रूरी चिंताओं को दूर करने के लिए भारत के साथ बातचीत की गई। उन्होंने फिर से कहा कि इस डील से दोनों देशों को बहुत फ़ायदा होगा।इसे भी पढ़ें: Nityanand Rai का बड़ा दावा: भारत अब Naxal-मुक्त, आंतरिक सुरक्षा की ऐतिहासिक जीतउन्होंने कहा, स्टील निश्चित रूप से हमारे दोनों देशों के लिए एक अहम मुद्दा है, इसलिए हमने भारत के साथ इस पर चर्चा की, जैसा कि हम कई अहम पार्टनर देशों के साथ करते हैं। अच्छी बात यह है कि यह ट्रेड डील लागू हो गई है - या ज़्यादा सही कहें तो 15 जुलाई से लागू हो रही है - और दोनों पक्ष वास्तव में इसका पूरा फ़ायदा उठा सकेंगे। इससे पहले, सरकार के वरिष्ठ सूत्रों ने एएनआई को बताया कि सरकार यह पक्का करने के लिए काम कर रही है कि कस्टम नोटिफिकेशन और उससे जुड़ी प्रक्रियाएँ लागू हो जाएँ, ताकि एक्सपोर्टर पहले दिन से ही छूट का फ़ायदा उठाना शुरू कर सकें। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:53 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Israel Relations | टूटने की कगार पर ऐतिहासिक दोस्ती, ईरान शांति समझौते ने अमेरिका और इज़राइल के बीच पैदा की गहरी दरार</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) की भू-राजनीति में इस समय एक ऐतिहासिक और अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में घोषित अमेरिका-ईरान शांति समझौते ने वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच के दशकों पुराने और अटूट माने जाने वाले रिश्तों में एक दुर्लभ और सार्वजनिक दरार पैदा कर दी है। रणनीतिक साझेदारी की जगह अब दोनों सहयोगियों के बीच तीखी बयानबाज़ी और वैचारिक मतभेदों ने ले ली है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा इस समझौते का पुरज़ोर बचाव और इज़राइली नेतृत्व की खुली आलोचना ने यह साफ़ कर दिया है कि वाशिंगटन अब क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अपनी रणनीति बदल रहा है। वेंस का यह बयान कि &quot;सिर्फ़ सैन्य कार्रवाई से सुरक्षा की हर चुनौती का समाधान नहीं हो सकता,&quot; अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया है।ईरान समझौता अमेरिका-ईराइल संबंधों में दरार कैसे पैदा कर रहा है?हालांकि ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को एक &quot;बड़ी कूटनीतिक सफलता&quot; के तौर पर पेश किया है, लेकिन कई इज़राइली नेताओं का मानना ​​है कि यह ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु महत्वाकांक्षाओं से जुड़ी &quot;मुख्य चिंताओं को दूर करने में विफल&quot; रहा है।डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति का बचाव करते हुए, वेंस ने इज़राइली नेताओं को याद दिलाया कि अमेरिका इज़राइल का सबसे मज़बूत और प्रभावशाली सहयोगी बना हुआ है। उन्होंने तर्क दिया कि इज़राइल सुरक्षा के हर खतरे को हल करने के लिए केवल सैन्य बल पर निर्भर नहीं रह सकता और सवाल किया कि समझौते के आलोचक क्या विकल्प पेश कर रहे हैं।व्हाइट हाउस की एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान, वेंस ने कहा, &quot;नंबर 1: डोनाल्ड जे. ट्रंप दुनिया के एकमात्र ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं जो इस समय इज़राइल के प्रति सहानुभूति रखते हैं। अगर मैं इज़राइली सरकार की कैबिनेट में होता, तो मैं उस एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी की आलोचना नहीं करता जो मेरे पास पूरी दुनिया में बचा है। इज़राइल के दो-तिहाई रक्षा हथियार अमेरिकी हाथों से बनाए गए हैं और उनके लिए अमेरिकी टैक्स के पैसे से भुगतान किया गया है।&quot;वेंस ने कहा, &quot;इज़राइल के लिए समस्या डोनाल्ड जे. ट्रंप नहीं हैं, और इज़राइल में जो कोई भी यह सोचता है कि उनकी सबसे बड़ी समस्या अमेरिकी राष्ट्रपति हैं, उन्हें जागने और देश की मौजूदा हकीकत को समझने की ज़रूरत है।&quot;न्यूयॉर्क टाइम्स से बात करते हुए, वेंस ने इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर और वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच की कड़ी आलोचना की।वेंस ने कहा, &quot;आपका सटीक प्रस्ताव क्या है? आप 90 लाख लोगों का देश हैं। आप राष्ट्रीय सुरक्षा की हर समस्या का समाधान सिर्फ़ हिंसा या हत्या के ज़रिए नहीं निकाल सकते।&quot;वेंस ने कहा, &quot;मुझे इज़राइल में मची यह पूरी खलबली थोड़ी अजीब लगती है क्योंकि मुझे लगता है कि यह अविश्वास की भावना से उपजी है, और मेरा मानना ​​है कि अमेरिका ने दुनिया के उस क्षेत्र का भरोसा जीता है।&quot; इज़राइल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतामार बेन-गवीर ने वेंस की आलोचना को खारिज कर दिया और ईरान से पैदा हुए खतरे की तुलना नाज़ी जर्मनी से करते हुए कहा कि और मज़बूत सैन्य कार्रवाई ज़रूरी है।इज़राइली अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि यह समझौता ईरान की मिसाइल क्षमताओं को पर्याप्त रूप से सीमित नहीं करता है और न ही इसके परमाणु बुनियादी ढांचे को खत्म करने के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप देता है।प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा है कि समझौते के बावजूद, ज़रूरत पड़ने पर इज़राइल दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा अभियान जारी रखेगा। इस विवाद ने डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बढ़ते तनाव को भी उजागर किया है।सालों तक, नेतन्याहू ने ट्रंप को व्हाइट हाउस में इज़राइल के सबसे मज़बूत समर्थकों में से एक बताया। हालांकि, हाल के हफ़्तों में दोनों नेताओं के बीच तीखी बयानबाज़ी देखी गई है। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इज़राइल की कुछ सैन्य कार्रवाइयों, खासकर लेबनान में, की आलोचना की है और तर्क दिया है कि इनसे चल रहे राजनयिक प्रयासों को नुकसान पहुँच सकता है।उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि नेतन्याहू को क्षेत्रीय खतरों से निपटने में ज़्यादा संयमित रवैया अपनाना चाहिए। साथ ही, ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा है कि उनके प्रशासन ने इज़राइल के लिए किसी भी पिछली अमेरिकी सरकार की तुलना में ज़्यादा काम किया है। ट्रंप ने कहा, &quot;मेरे बिना इज़राइल नहीं होता,&quot; और कहा कि कोई अन्य अमेरिकी राष्ट्रपति देश के समर्थन में वे कदम उठाने को तैयार नहीं था जो उन्होंने उठाए। इंटरव्यू में उन्होंने नेतन्याहू को &quot;पागल&quot; भी कहा।शांति समझौताइस समझौते का मकसद पश्चिम एशिया में तनाव कम करना और एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष को रोकना है। ईरान के साथ युद्ध ने पहले ही वैश्विक बाज़ारों को हिला दिया था और ऊर्जा आपूर्ति में बाधा डाली थी, खासकर रणनीतिक होर्मुज़ जलडमरूमध्य शिपिंग मार्ग को लेकर चिंताएं पैदा होने के बाद।समझौते के समर्थकों का तर्क है कि कूटनीति एक और लंबे संघर्ष को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है। आलोचकों, खासकर इज़राइल में, को डर है कि यह समझौता ईरान को सैन्य क्षमताएं विकसित करना जारी रखने के लिए बहुत ज़्यादा गुंजाइश देता है।ताज़ा घटनाक्रम से पता चलता है कि ईरान, लेबनान और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर मतभेद उस साझेदारी में गहरी दरारें पैदा कर रहे हैं जिसे लंबे समय से वाशिंगटन के सबसे महत्वपूर्ण गठबंधनों में से एक माना जाता रहा है। जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ेगी, ईरान समझौते की सफलता या विफलता भविष्य के अमेरिका-इज़राइल संबंधों को आकार देने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। Stay updated with International
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:52 +0530</pubDate>
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<title>भगवान राम की सबसे ऊंची मूर्ति गिराने टूट पड़ी मुस्लिम भीड़! मोदी लेंगे तगड़ा एक्शन?</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश में तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनते ही यह कहा जा रहा था कि जो कुछ भी यूनिस के राज में हुआ वो सब बंद हो जाएगा। यानी कि हिंदुओं पर हमले रुक जाएंगे और भारत के साथ रिश्ते सुधर जाएंगे। लेकिन कुछ महीने बाद ही फिर से कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंदुओं को टारगेट करते हुए बवाल काटना शुरू कर दिया है। इस बार तो कट्टरपंथियों ने सीधे हिंदुओं की आस्था पर हमला किया है। ऐसा हमला कि जिससे भारत में भी गुस्सा फूट पड़ा है। दरअसल बांग्लादेश के पलाशवाड़ी उपजिला में पिछले कुछ समय से भगवान राम की सबसे ऊंची मूर्ति बनाने का निर्माण कार्य चल रहा है। इसका 80% काम पूरा हो चुका है। इस मूर्ति की ऊंचाई 81 फीट होनी है। लेकिन जैसे-जैसे यह मूर्ति आसमान की ओर बढ़ती जा रही है, वैसे ही बांग्लादेश के जिहादियों के पेट में दर्द हो रहा है। कट्टरपंथी संगठनों ने ऐसी-ऐसी धमकियां देनी शुरू कर दी है कि प्रशासन ने इनके आगे सरेंडर करते हुए इस मूर्ति के निर्माण कार्य को रुकवा दिया है।  इसे भी पढ़ें: 1971 की हार के 55 साल बाद Pakistan की Bay of Bengal में वापसी, चीन की मदद से नई पनडुब्बी की तैनातीपुलिस और प्रशासन ने अब इस निर्माण को लेकर हाथ खड़े कर दिया है। हैरानी की बात तो यह है कि अब कट्टरपंथियों की जमात और मौलाना ब्रिगेड इस मूर्ति को गिराने की जिद कर रही है। यह सब देखकर बांग्लादेश के हिंदू सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने एक बड़ा मशाल जुलूस निकाला और अपमान के लिए जिम्मेदार लोगों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। लेकिन फिर भी बांग्लादेश सरकार और वहां के प्रशासन के कानों पर जू तक नहीं रेंग रही कि उनके हक की बात सुनी जाए। ऐसे में हर किसी की निगाह भारत पर है कि मोदी सरकार इस मुद्दे पर क्या एक्शन लेती है और इसको लेकर अब आवाज भी उठनी शुरू हो गई है। जब भारत के कई हिंदू संगठनों ने बांग्लादेश के कट्टरपंथियों की हरकत पर अपना विरोध जाहिर करना शुरू कर दिया है तो सुप्रीम कोर्ट के जानेमाने वकील डॉ. एपी सिंह ने भारत सरकार से मांग की है कि वह इस मुद्दे पर कठोरता के साथ एक्शन ले और समस्या का समाधान निकाले। डॉ. एपी सिंह ने कहा प्रभु श्री राम से आस्था है। ऐतिहासिक 81 फुट मूर्ति का निर्माण चल रहा है। 80% निर्माण कार्य हो चुका है। लेकिन निर्माण कार्य धमकियों के बावजूद धमकियां दी गई। इसकी वजह से रोक दिया गया है। इस्लामिक कट्टरपंथी कह रहे हैं कि हम इस मूर्ति को तोड़ देंगे, बुलडोजर से गिरा देंगे। इस तरह ये धार्मिक सदभाव की बात नहीं है। इससे भारत के लोग उेलित हैं। भारत बांग्लादेश का ही रूप रहा है। लेकिन आज इस तरह से अगर वहां धार्मिक भावनाओं के जो कि कम संख्या में हैं। अल्पसंख्यक हैं। अल्पसंख्यक का यह मतलब नहीं कि बहुसंख्यक उनकी धार्मिक आस्था श्रद्धा को कुचल दे, दबा दे। इसे भी पढ़ें: क्या बांग्लादेश सीमा सुरक्षा बल के प्रमुख ने Delhi में की Amit Shah से गुप्त मुलाकात? आखिर क्या हुई बात?बांग्लादेश की सरकार को यूनाइटेड नेशंस ऑफ ऑर्गेनाइजेशन को और भारत सरकार को देश के माम राष्ट्रपति को उच्च स्तरीय बात करके इस समस्या का समाधान करना चाहिए। भारत के लोग भी उेलित होंगे जिसका विश्व स्तर पर गलत प्रभाव ना पड़े। भारत सरकार को इसमें कठोरता से यह निर्णय लेने की आवश्यकता है। तो इस तरह से अब भारत में भी भगवान राम की मूर्ति का निर्माण कार्य रोके जाने को लेकर गुस्सा फूट पड़ा है। अब देखने वाली बात यह है कि इस मुद्दे पर भारत सरकार क्या कुछ एक्शन लेती है। दरअसल बांग्लादेश के पलाशवाड़ी में एक मंदिर परिसर में भगवान राम की मूर्ति बनाई जा रही है। प्रस्तावित परियोजना की लागत लगभग 15.5 करोड़ है। इसके तहत भगवान राम की 81 फीट ऊंची मूर्ति, भगवान कृष्ण की 50 फीट ऊंची मूर्ति और भगवान शिव की 30 फीट ऊंची मूर्ति का निर्माण होना है। इस परियोजना के पीछे काम कर रही श्री श्री राधा गोविंद मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिदास चंद्रदास ने कहा कि भगवान राम की मूर्ति सनातन धर्म के प्रमुख व्यक्तित्वों में से एक के सम्मान में बनाई जा रही थी और इस्लामी समूह के परियोजना में शामिल लोगों को धमकियां दिए जाने के बाद काम रोक दिया गया। उन्होंने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री से अपील की है कि वे इस प्रोजेक्ट को पूरा करवाएं।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:52 +0530</pubDate>
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<title>Times Square Shooting Video | टाइम्स स्क्वायर में अंधाधुंध गोलीबारी से मची भारी भगदड़! जश्न के बीच चलीं गोलियां, 17 वर्षीय संदिग्ध गिरफ्तार</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया के सबसे मशहूर और व्यस्ततम पर्यटन स्थलों में से एक, न्यूयॉर्क का &#039;टाइम्स स्क्वायर&#039; गुरुवार दोपहर गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा। पर्यटकों और स्थानीय लोगों से खचाखच भरे इस चौराहे पर दोपहर के वक्त अचानक हुई गोलीबारी से वहां चीख-पुकार और अफरातफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए अंधाधुंध दिशाओं में भागने लगे और सड़कों पर लगे बैरियरों, गाड़ियों व इमारतों के पीछे छिपने को मजबूर हो गए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दिल दहला देने वाले वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे पल भर में खुशियों भरा माहौल खौफ में बदल गया और लोग बदहवास होकर भागते नज़र आए।क्या हुआ?स्थानीय खबरों के मुताबिक, यह हिंसा इलाके में हुई एक लड़ाई के बाद शुरू हुई।कहा जा रहा है कि लड़ाई के दौरान एक 26 साल के व्यक्ति को चाकू मार दिया गया, जिसके बाद गोलियां चलाई गईं। चश्मदीदों के फुटेज में काले कपड़े पहने कम से कम दो लोग गोली चलाते और फिर वहां से भागते हुए दिख रहे हैं। आस-पास मौजूद पुलिस अधिकारियों ने तुरंत संदिग्धों का पीछा किया।संदिग्ध कौन है?अधिकारियों ने मुख्य संदिग्ध की पहचान 17 साल के किशोर के तौर पर की है, जो अभी पुलिस की हिरासत में है और उस पर औपचारिक आरोप लगाए जा सकते हैं। अधिकारियों ने अभी तक घटना के पीछे के मकसद के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है और जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस घटना में कोई और भी शामिल था।क्या कोई घायल हुआ?घायलों के बारे में जानकारी अभी पूरी तरह साफ नहीं है। न्यूयॉर्क फायर डिपार्टमेंट ने पुष्टि की कि घटना के बाद एक व्यक्ति को अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, बाद में स्थानीय खबरों में कहा गया कि गोलीबारी से सीधे तौर पर कोई घायल नहीं हुआ।उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर अधिकारी इस बारे में और जानकारी देंगे।यह गोलीबारी टाइम्स स्क्वायर में हुई, जो दुनिया के सबसे मशहूर पर्यटन स्थलों में से एक है और न्यूयॉर्क शहर की सबसे व्यस्त जगहों में गिना जाता है। इस इलाके में हर दिन लाखों पैदल यात्री आते हैं और गुरुवार को न्यूयॉर्क निक्स की चैंपियनशिप परेड के जश्न की वजह से यहां काफी भीड़ थी।पुलिस जांच जारीघटना के बाद अधिकारियों ने टाइम्स स्क्वायर के कुछ हिस्सों को सील कर दिया और जांच शुरू कर दी। अधिकारी सर्विलांस फुटेज देख रहे हैं, चश्मदीदों से बात कर रहे हैं और गोलीबारी की घटना के सही क्रम का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।पुलिस ने अभी तक हमले के मकसद के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यह घटना टाइम्स स्क्वायर के बीचों-बीच हुई एक और गोलीबारी के एक हफ़्ते से भी कम समय बाद हुई है, जिसमें &#039;निक्स&#039; की जीत के बाद जश्न के दौरान 17 साल का एक किशोर घायल हो गया था। Stay updated with International
News in Hindi on Prabhasakshi VIDEO: Shots heard in Times Square in Manhattan, New York. pic.twitter.com/SrDq5yHb87— AZ Intel (@AZ_Intel_) June 18, 2026 ????????: Shots fired near 42nd Street and Broadway in Times Square, New York CityAccording to NYPD reports and eyewitness accounts, gunfire caused panic with crowds scattering. A suspect was quickly arrested, and a firearm was recovered at the scene. No injuries have been confirmed… pic.twitter.com/3Pbgnybtx1— World In Last 24hr (@world24x7hr) June 18, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:51 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran MoU Ceasefire | Mojtaba Khamenei का दावा&#45; &amp;apos;ट्रंप ने मजबूरी और बेताबी में किए दस्तखत&amp;apos;, अमेरिका ने हटाई नौसैनिक नाकेबंदी</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में महीनों से जारी भीषण सैन्य गतिरोध और युद्ध की आशंकाओं के बीच एक बेहद युगांतकारी मोड़ आया है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने के ठीक एक दिन बाद भू-राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा जुबानी हमला करते हुए दावा किया है कि अमेरिकी प्रशासन इस शांति समझौते के लिए &quot;बेताब&quot; था और इसे हासिल करने के लिए ट्रंप ने &quot;हर तरह के हथकंडे&quot; अपनाए। वहीं दूसरी ओर, समझौते की शर्तों का पालन करते हुए अमेरिका ने ईरान पर लगाई अपनी सख्त नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को आधिकारिक रूप से हटा लिया है। इसे भी पढ़ें: Market Opening Bell | Sensex 557 अंक टूटा, Nifty 24000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसला, इंफोसिस 8% क्रैशसमझौते के मसौदे पर दस्तखत होने के बाद अपनी पहली सार्वजनिक टिप्पणी में, मोजतबा ने गुरुवार को ईरानी लोगों से कहा कि शुरू में उन्होंने &quot;सिद्धांत के तौर पर&quot; इस ​​समझौते का विरोध किया था, लेकिन आखिरकार राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सदस्यों से यह भरोसा मिलने के बाद इसे मंज़ूरी दी कि देश और &quot;रेज़िस्टेंस फ्रंट&quot; (प्रतिरोध मोर्चा) के हितों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा, &quot;ज़िम्मेदार अधिकारियों ने सच्ची चिंता और सद्भावना के साथ बहुत कोशिशें कीं - और ज़ाहिर है, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ही बेताबी में इसे अंजाम तक पहुँचाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए।&quot;18 जून को, ट्रंप और पेज़ेशकियन ने औपचारिक रूप से एक समझौते पर दस्तखत किए, जिसका मकसद महीनों से चल रहे टकराव को खत्म करना और व्यापक बातचीत का रास्ता बनाना था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी वार्ताकार मोहम्मद बाक़र क़ालिबाफ़ के शुरुआती दस्तखत के बाद, दोनों नेताओं ने वर्चुअली इस दस्तावेज़ को मंज़ूरी दी। इसे भी पढ़ें: Karnataka MLC Elections 2026 | कांग्रेस की प्रचंड जीत से BJP-JD(S) में खलबली, 11 &#039;सीक्रेट&#039; वोटों ने उड़ाई विपक्ष की नींदअमेरिका ने ईरान पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाईजेडी वेंस ने गुरुवार को कहा कि अमेरिकी नौसेना ने एक दर्जन से ज़्यादा जहाजों को ईरानी बंदरगाहों तक जाने की इजाज़त दे दी है, जिससे युद्ध खत्म करने के समझौते के तहत नाकेबंदी असल में खत्म हो गई है।व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग में बोलते हुए, वेंस ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि अकेले बुधवार रात को ही इस अहम समुद्री रास्ते से 12.5 मिलियन बैरल से ज़्यादा तेल गुज़रा। वेंस ने कहा, &quot;तो हम समझौते के शुरुआती हिस्से में अपनी तरफ़ से सैन्य मोर्चे पर भी अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं।&quot; उन्होंने उन आलोचनाओं को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि यह समझौता ईरान के पक्ष में ज़्यादा झुका हुआ है।बेहद साफ़ शब्दों में बात करते हुए, उन्होंने इज़राइल में आलोचना करने वालों को चेतावनी भी दी कि वे देश के &quot;इकलौते बचे हुए ताकतवर सहयोगी&quot; पर हमला न करें। इज़राइली सरकार के सदस्यों पर निशाना साधते हुए वेंस ने कहा, &quot;डोनाल्ड जे. ट्रंप दुनिया के इकलौते ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं जो इस समय इज़राइल देश के प्रति सहानुभूति रखते हैं।&quot; उप-राष्ट्रपति ने कहा कि वे ईरान समझौते को लागू करने पर बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड जाने की योजना बना रहे हैं, हालांकि अभी कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है। उनसे उम्मीद की जा रही थी कि वे ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बातचीत का नेतृत्व करेंगे।इस सप्ताह की शुरुआत में, दो तेल टैंकर ईरान से निकले और बिना रोके-टोके अमेरिकी सैन्य नाकेबंदी को पार कर गए। मर्चेंट शिपिंग ट्रैकिंग वेबसाइट के अनुसार, इन जहाजों में कुल मिलाकर 3.8 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल लदा हुआ था।इस बीच, ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि देश के दक्षिणी बंदरगाहों पर शिपिंग गतिविधियां &quot;सामान्य&quot; हो गई हैं, हालांकि उसने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी ईरानी सेना की निगरानी और नियंत्रण में है, और इस जलमार्ग से गुजरने के लिए अभी भी समन्वय की आवश्यकता है।समुद्री डेटा फर्म &#039;लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस&#039; के अनुसार, समझौते के बाद प्रमुख शिपिंग कंपनियों ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को भेजना शुरू कर दिया है। हालांकि, कंपनी ने गुरुवार तक जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की कुल संख्या के आंकड़े नहीं दिए।&#039;लॉयड्स लिस्ट&#039; के प्रधान संपादक रिचर्ड मीड ने कहा कि 110 दिनों में पहली बार, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के जहाज जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं, जबकि फरवरी से वे प्रभावी रूप से फंसे हुए थे।ग्रिमाल्डी ग्रुप, कोस्को, नुटसेन और एनवाईके द्वारा संचालित टैंकर पहले ही इस जलमार्ग से गुजर चुके हैं। इसके अलावा, &#039;लॉयड्स लिस्ट&#039; के अनुसार, &#039;नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी&#039; के स्वामित्व वाले ईरान के झंडे वाले दो कच्चे तेल के टैंकर भी जलडमरूमध्य में प्रवेश कर चुके हैं; इस कंपनी पर अभी भी प्रतिबंध लागू हैं। Stay updated with International
News in Hindi on Prabhasakshi The full text of the message of Imam Sayyid Mojtaba Khamenei, the Leader of the Islamic Revolution, addressing the Iranian nation regarding the Memorandum of Understanding between the presidents of Iran and America, June 18, 2026 pic.twitter.com/9nSD2NfkVe— Ayatollah Mojtaba Khamenei (@MKhamenei_ir) June 18, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:50 +0530</pubDate>
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<title>मोनिका जूमा: बढ़ते ख़तरों के दौर में वैश्विक सहयोग की बागडोर</title>
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<description><![CDATA[ आपराधिक नैटवर्क तेज़ी से बढ़ रहे हैं, सीमाओं के पार अपने पैर फैला रहे हैं, और विभिन्न ख़तरों के बीच की रेखाओं को धुंधला कर रहे हैं. इस बदलते परिदृश्य का सामना करने के लिए, मोनिका जूमा ने संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC) की कार्यकारी निदेशक और वियना स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNOV) की महानिदेशक के रूप में दोहरी भूमिका संभाली है. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:14 +0530</pubDate>
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<title>डीआर काँगो: इबोला वायरस से निपटने के लिए, स्वास्थ्य देखभाल क्षमताओं का विस्तार</title>
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<description><![CDATA[ काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) के पूर्वी हिस्से में इबोला वायरस से संक्रमित लोगों के उपचार के लिए स्वास्थ्य देखभाल क्षमता को बढ़ाया जा रहा है. इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि स्थानीय समुदायों में भरोसे का अभाव, इबोला के प्रकोप पर नियंत्रण पाने में सबसे बड़ी बाधाओं में है. ]]></description>
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<title>अफ़ग़ानिस्तान: तालेबानी फ़रमान से बाल विवाह को वैधता मिलने, महिलाओं की व्यथा बढ़ने की आशंका</title>
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<description><![CDATA[ अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान प्रशासन द्वारा पति-पत्नी के अलगाव, या वैवाहिक सम्बन्ध समाप्त करने की शर्तों पर जारी किए गए आधिकारिक आदेश से न केवल बाल विवाह को लाइसेंस मिलेगा, बल्कि महिलाओं और लड़कियों के लिए दुर्व्यवहार व पीड़ा भरे रिश्तों को छोड़ पाना भी कठिन हो जाएगा. संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने गुरूवार को जारी अपने एक वक्तव्य में यह चेतावनी जारी की है.  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:07 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान: युद्धविराम के बावजूद हर दिन 12 बच्चे हताहत</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने बताया है कि 100 से अधिक दिनों से जारी युद्ध, लेबनान में इसराइली हमलों और जबरन विस्थापन के बीच फँसे आम लोगों के जीवन की एक भयावह तस्वीर पेश करता है. 2 मार्च को इसराइल और हिज़बुल्लाह चरमपंथियों के बीच हिंसक टकराव बढ़ने के बाद से, 247 बच्चे मारे गए हैं और 992 घायल हुए हैं.  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:04 +0530</pubDate>
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<title>IAEA: अमेरिका&#45;ईरान सहमति के बाद तकनीकी काम शुरू होने की राह खुली</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र की परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख रफ़ाएल ग्रॉस्सी ने  अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हुए शुरुआती समझौते (MoU) का स्वागत किया है. एजेंसी दोनों पक्षों के साथ मिलकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम के सत्यापन जैसे अहम मुद्दों पर ठोस क़दम तय करने में मदद करने के लिए तैयार है. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:03 +0530</pubDate>
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<title>ग़ाज़ावासी, &amp;apos;बुनियादी आवश्यकताओं के लिए अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकते हैं&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ ग़ाज़ा पट्टी में स्थिति पर चर्चा के लिए गुरूवार को सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान यह चिन्ता जताई गई कि मध्य पूर्व क्षेत्र में घटनाक्रम की वजह से वहाँ की मानवीय स्थिति पर समुचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है. आपात राहत मामलों के लिए यूएन प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने ज़ोर देकर कहा कि विशाल मानवीय सहायता आवश्यकताओं के बीच आम फ़लस्तीनी अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकते हैं और राहत प्रयासों के लिए जल्द से जल्द धन मुहैया कराया जाना होगा.  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:28:03 +0530</pubDate>
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<title>G7 Summit के हॉट&#45;माइक पल: जब कैमरे के पीछे मेलोनी ने सुनाई स्मोकिंग छोड़ने की कहानी, मैक्रों की घड़ी खोई और ट्रंप ने कर दिया मज़ाक!</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के संगठन G7 की बैठकें अक्सर गंभीर वैश्विक मुद्दों, आर्थिक नीतियों और कूटनीतिक बयानों के लिए जानी जाती हैं। लेकिन फ्रांस में आयोजित हो रही G7 समिट के दौरान कुछ ऐसा हुआ जिसने सुर्खियां बटोर लीं। दरअसल, औपचारिक भाषणों और बंद कमरों की बैठकों से इतर, वहां चालू रह गए &#039;हॉट माइक्रोफोन&#039; (Hot Mic) ने वैश्विक नेताओं के ऐसे अनौपचारिक और मजेदार पलों को रिकॉर्ड कर लिया, जो आमतौर पर आधिकारिक बयानों में कभी सामने नहीं आते। इसे भी पढ़ें: Maharashtra &#039;Operation Lotus Part 2 | संजय राउत का सनसनीखेज आरोप- &#039;पाला बदलने के लिए सांसदों को ₹15-15 करोड़ का एडवांस&#039;नेताओं के बीच सिगरेट छोड़ने की खुशी, फुटबॉल का रोमांच, खोई हुई घड़ी पर चुटकी और इंस्टाग्राम की लोकप्रियता जैसे कई दिलचस्प वाक्ये इन चालू माइक्रोफोन्स में दर्ज हो गए। आइए जानते हैं कूटनीति के मंच से सामने आए कुछ सबसे चर्चित अनौपचारिक किस्से:जियोर्जिया मेलोनी ने छोड़ी स्मोकिंग, नेताओं ने दी बधाईसमिट के सबसे ज्यादा चर्चा बटोरने वाले पलों में से एक इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी से जुड़ा था। जब सभी नेता अगले दिन के वर्किंग एजेंडे की तैयारी कर रहे थे, तभी जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने सहजता से मेलोनी से पूछ लिया कि क्या उन्होंने आज सुबह सिगरेट पी है? इसे भी पढ़ें: Superfoods का मिथ! महंगे Avocado-Quinoa नहीं, ये देसी चीजें हैं असली &#039;Health-Booster&#039;मेलोनी के जवाब ने सबको चौंका दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्होंने &quot;1 मई के बाद से&quot; एक भी सिगरेट नहीं पी है। यह सुनते ही मेज के चारों ओर बैठे कनाडाई पीएम मार्क कार्नी, ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर, जापानी पीएम सनाए तकाइची और यूरोपीय संघ (EU) के अधिकारियों ने तालियां बजाकर उन्हें बधाई दी। इसी बीच कनाडा के पीएम कार्नी ने हंसते हुए मेलोनी से पूछा, &quot;क्या आपने निकोटीन पैच लगा रखा है?&quot; और अपने हाथ की तरफ इशारा किया, जिस पर वहां मौजूद सभी नेता ठहाके मारकर हंस पड़े।&#039;मेलोडी&#039; का जलवा: &quot;हाँ, हम इंस्टाग्राम पर सबसे ज़्यादा मशहूर हैं!&quot;G7 समिट में पारंपरिक &#039;फैमिली फोटो&#039; के लिए इकट्ठा होने से ठीक पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की पीएम जियोर्जिया मेलोनी की मुलाकात हुई। दोनों नेताओं की बॉन्डिंग और सोशल मीडिया पर वायरल &quot;मेलोडी&quot; (Melodi) ट्रेंड की गूंज यहां भी सुनाई दी।मेलोनी ने गर्मजोशी से पीएम मोदी का स्वागत करते हुए कहा, &quot;आपसे दोबारा मिलकर बहुत अच्छा लगा!&quot; बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने हंसते हुए उनकी ऑनलाइन लोकप्रियता और &#039;इंस्टाग्राम&#039; का जिक्र किया। इस पर मेलोनी ने तुरंत सहमति जताते हुए कहा, &quot;हाँ, हम इंस्टाग्राम पर सबसे ज़्यादा मशहूर हैं,&quot; जिसे सुनकर आस-पास खड़े अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए।मैक्रों की घड़ी खोई, ट्रंप बोले- &#039;मुझे दे दो&#039;नेताओं के वर्किंग लंच के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपनी कलाई घड़ी मेज पर ही भूल गए। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की नजर उस पर पड़ी तो उन्होंने मज़ाक में कहा, &quot;मैक्रों अपनी घड़ी यहीं भूल गए हैं। अब हमारे कब्जे में उनकी घड़ी है।&quot;पास ही खड़े अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तुरंत इस मज़ाक में शामिल हो गए और अपने सिग्नेचर स्टाइल में बोले— &quot;अगर वह इसे भूल गए हैं, तो यह मुझे दे दो, मुझे दे दो (Give it to me)!&quot; ट्रंप की इस हाजिरजवाबी ने वहां के माहौल को बेहद हल्का-फुल्का बना दिया।ट्रंप की रहस्यमयी &#039;ग्रीनलैंड&#039; टिप्पणी और जर्सी नंबर 47यूरोपीय काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा के साथ बातचीत करते हुए डोनाल्ड ट्रंप का एक बेहद रहस्यमयी ऑडियो माइक्रोफोन में कैद हो गया। ट्रंप ने कोस्टा से पूछा, &quot;आप समझे?&quot; और फिर थोड़ी देर रुककर सीधे उनकी तरफ देखकर कहा— &quot;ग्रीनलैंड।&quot;इसके आगे की बातचीत सुनाई नहीं दी, लेकिन इस एक शब्द ने पूरे कूटनीतिक हलके में कौतूहल पैदा कर दिया, क्योंकि ट्रंप अतीत में डेनिश क्षेत्र ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जता चुके हैं।मैक्रों की साइकिल और फिटनेस पर मज़ाकगिफ्ट सेरेमनीफ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने अगले साल आल्प्स में होने वाली &#039;साइकिलिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप&#039; को प्रमोट करने के लिए सभी G7 नेताओं को एक खास साइकिल गिफ्ट की। हालांकि, गोल्फ के अलावा किसी कसरत को पसंद न करने वाले ट्रंप की इस साइकिल को देखकर क्या प्रतिक्रिया थी, वह माइक में दर्ज नहीं हो सकी।जर्सी नंबर 47जर्मन चांसलर का तोहफाजर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने डोनाल्ड ट्रंप को जर्मनी की नेशनल फुटबॉल टीम की एक जर्सी गिफ्ट की, जिस पर ट्रंप का नाम और &#039;नंबर 47&#039; लिखा हुआ था। यह नंबर 47वें अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में उनके मौजूदा कार्यकाल को दर्शाता है। मर्ज़ ने फोटो शेयर करते हुए लिखा, &quot;आखिरकार, हम एक ही टीम में हैं।&quot;जब कूटनीति के बीच गूंजा फुटबॉल का रोमांचचूंकि इस समय अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको संयुक्त रूप से फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी कर रहे हैं, इसलिए लंच के दौरान नेताओं के बीच फुटबॉल पर जमकर चर्चा हुई। लेक जिनेवा के खूबसूरत नजारे के बीच एक नेता को फ्रांसीसी टीम की हौसलाअफजाई करते हुए &quot;एले ले ब्लूज़!&quot; (Allez les bleus!) चिल्लाते सुना गया, तो वहीं किसी ने पेरिस सेंट-जर्मेन (PSG) की चैंपियंस लीग जीत की तारीफ की।ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर इस दौरान फुटबॉल के ज्ञान का प्रदर्शन करते हुए स्पेन के खिलाफ केप वर्डे के ऐतिहासिक 0-0 ड्रॉ मैच की सराहना करते नजर आए।मैक्रों बने &#039;मैचमेकर&#039; और कार्नी की ट्रंप को सफाईयूक्रेन पर चर्चा: एक गंभीर &#039;हॉट-माइक&#039; पल में इमैनुएल मैक्रों और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की को ट्रंप के बारे में बात करते सुना गया। मैक्रों ने जेलेंस्की से कहा, &quot;कल कैमरे के सामने हमारी एक मुश्किल बातचीत हुई थी।&quot; जब जेलेंस्की ने बताया कि वे अगले दिन ब्रुसेल्स जा रहे हैं, तो मैक्रों ने ट्रंप के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक का इंतजाम करने का भरोसा दिया।चीनी ई ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>India&#45;US Diplomatic Row | जब भारत ने झुका दिया था वाशिंगटन का गुरूर! जानिए 2013 का वो किस्सा, जिसकी चर्चा 2026 के &amp;apos;नाविक संकट&amp;apos; में फिर होने लगी</title>
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<description><![CDATA[ दिसंबर 2013 का वह दौर भारतीय कूटनीति के इतिहास में एक बड़े मील के पत्थर के रूप में दर्ज है, जब भारत और अमेरिका के बीच हाल के दशकों का सबसे गंभीर राजनयिक टकराव देखा गया था। उस समय विवाद की वजह न्यूयॉर्क में भारत की डिप्टी कॉन्सल जनरल देवयानी खोबरागड़े की अमेरिकी फेडरल एजेंटों द्वारा की गई गिरफ्तारी थी। खोबरागड़े पर अपनी घरेलू सहायिका के वीजा आवेदन में धोखाधड़ी करने के आरोप थे।हालांकि, इस घटना ने कानूनी दायरे से बाहर निकलकर जो उग्र राजनयिक रूप लिया, उसकी मुख्य वजह गिरफ्तारी का तरीका था। खोबरागड़े को उनकी बेटी के स्कूल के बाहर सार्वजनिक रूप से हथकड़ी लगाई गई, अमेरिकी मार्शल सर्विस द्वारा उनकी &#039;स्ट्रिप और कैविटी सर्च&#039; की गई और उन्हें आम अपराधियों व ड्रग एडिक्ट्स के साथ एक ही सेल में रखा गया। बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताकर उचित ठहराने की कोशिश की, जिसने भारत में गुस्से और राष्ट्रीय अपमान की भावना को और भड़का दिया।2013 में भारत का कड़ा रुख: हटा दिए गए थे अमेरिकी दूतावास के बैरिकेड्सतत्कालीन भारत सरकार ने इस अपमान का बेहद सख्त और स्पष्ट जवाब दिया था। उस समय के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) शिवशंकर मेनन ने अमेरिकी प्रशासन के इस रवैए को सार्वजनिक रूप से &quot;घिनौना और बर्बर&quot; करार दिया था। इसके बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई (Reciprocity) के तहत कई कड़े कदम उठाए:राजनयिक विशेषाधिकारों की वापसी: अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के कर्मचारियों के एयरपोर्ट पास और राजनयिक विशेष दर्जे तुरंत वापस ले लिए गए।पहचान पत्रों की जब्ती: चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई और कोलकाता में कार्यरत अमेरिकी दूतावास कर्मियों के विशेष आईडी कार्ड मंगा लिए गए।बैरिकेड्स हटाना: सबसे कड़ा और प्रतीकात्मक कदम नई दिल्ली में उठाया गया, जहां अमेरिकी दूतावास के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर लगे कंक्रीट के भारी सुरक्षा बैरिकेड्स को भारतीय क्रेन द्वारा हटा दिया गया।यह कदम वाशिंगटन को एक सीधा और साफ संदेश था कि संप्रभु देशों के बीच सम्मान का रिश्ता एकतरफा नहीं हो सकता। इस भावना का समर्थन सभी राजनीतिक दलों ने किया था; यहाँ तक कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत दौरे पर आए अमेरिकी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल (Congressional Delegation) से मिलने तक से साफ इनकार कर दिया था।जून 2026: एक नया संकट और 12 साल पुराना वही कूटनीतिक इम्तिहानआज 12 साल से अधिक समय बीतने के बाद, जून 2026 में भारत और अमेरिका के बीच एक अलग लेकिन बेहद संवेदनशील संकट खड़ा हो गया है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठा दिया है कि क्या भारत अपने नागरिकों के सम्मान और सुरक्षा के लिए आज भी वैसी ही कूटनीतिक आक्रामकता दिखाने को तैयार है। इसे भी पढ़ें: Shiv Sena Split History | बाल ठाकरे के दौर से एकनाथ शिंदे तक: जब टूटी शिवसेना, जानिए उन 4 बड़ी बगावतों की कहानी जिसने महाराष्ट्र की सियासत को बदल दियाओमान की खाड़ी में तीन भारतीय नाविकों की मौतहाल ही में ओमान की खाड़ी में ईरान के तेल शिपमेंट को रोकने के लिए वाशिंगटन द्वारा लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) के दौरान अमेरिकी सेना ने कमर्शियल जहाजों पर हमला कर दिया। इस सैन्य कार्रवाई में तीन निर्दोष भारतीय मर्चेंट नाविक—आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश—मारे गए। इस दुखद घटना ने पूरे भारत में शोक और भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) में रहने वाले नाविक आदित्य शर्मा के दादा ने मीडिया के सामने अपने पोते की तस्वीर दिखाते हुए टूटे दिल से कहा कि उनका परिवार इस दर्दनाक घटना की पूरी सच्चाई जानना चाहता है।भारत का विरोध और अमेरिका की संवेदनहीनता पर विवादइस घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने अमेरिकी चार्ज डी&#039;अफेयर्स जेसन मीक्स को तलब किया और नागरिक जहाजों के खिलाफ घातक सैन्य बल के इस्तेमाल को &quot;दुखद और पूरी तरह से टाला जा सकने वाला&quot; बताया।विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 12 जून को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर सीधे बात की और भारत का &quot;कड़ा विरोध&quot; दर्ज कराया। जयशंकर ने स्पष्ट तर्क दिया कि व्यापारिक जहाजों पर इस तरह की जानलेवा कार्रवाई किसी भी सूरत में उचित नहीं थी।बयानों में विरोधाभास: भारत के कड़े रुख के विपरीत, अमेरिकी विदेश विभाग ने जयशंकर की बातचीत के 18 घंटे बाद जो आधिकारिक बयान जारी किया, वह बेहद चौंकाने वाला था। उस बयान में न तो भारत के विरोध का कोई जिक्र था और न ही तीनों मृत भारतीय नाविकों के प्रति कोई संवेदना। इसके उलट, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले सभी कमर्शियल जहाजों को अमेरिकी सेना के निर्देशों का पालन करना ही होगा और नाकेबंदी के उल्लंघन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसे भी पढ़ें: Gurugram Police की बड़ी कार्रवाई! &#039;370 की बिरयानी&#039; विवाद में कॉमेडियन Pranit More और Himanshu Jangra पर FIR दर्ज, वीडियो हटाने के निर्देशघरेलू राजनीतिक प्रतिक्रिया और वैश्विक कूटनीति के बदलते मायनेअमेरिका के इस बेरुखे और संवेदनहीन बयान की भारत में तीखी आलोचना हो रही है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिकी प्रतिक्रिया को &quot;बेहद निराशाजनक और चौंकाने वाला&quot; बताते हुए सवाल उठाया: &quot;जो देश खुद को भारत का सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार और मित्र बताता है, वह वैश्विक मंच पर इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है? अमेरिकी प्रशासन को यह समझना होगा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में काम करने वाले मर्चेंट क्रू में भारतीय नागरिकों की एक बहुत बड़ी संख्या है, और उनकी सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।&quot;पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने इस पूरे परिदृश्य को आज की बदलती वैश्विक राजनीति के संदर्भ में देखा। उनका मानना है कि समकालीन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में संवाद और कूटनीति की जगह अब आर्थिक प्रतिबंधों, नाकेबंदी, टैरिफ और सैन्य दबाव की भाषा ने ले ली  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>अमेरिका की बड़ी गुस्ताखी! पैसिफिक कमांड की वेबसाइट पर दिखाया भारत का गलत नक्शा, PoK को पाकिस्तान का हिस्सा बताया</title>
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<description><![CDATA[ भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी और &#039;क्वाड&#039; (Quad) गठबंधन के भविष्य को लेकर एक नया कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने एक चौंकाने वाली घोषणा करते हुए &#039;US इंडो-पैसिफिक कमांड&#039; (USINDOPACOM) का नाम बदलकर एक बार फिर उसका सात दशक पुराना नाम—&#039;US पैसिफिक कमांड&#039; (USPACOM)—करने का आधिकारिक फैसला लिया है।इस प्रशासनिक और प्रतीकात्मक बदलाव के बीच, अमेरिकी मिलिट्री कमांड ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भारत का एक गलत नक्शा (Area of Responsibility Map) प्रदर्शित कर दिया है। इस नक्शे में पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को पाकिस्तान के हिस्से के रूप में दिखाया गया है, जिस पर भारत में तीखी प्रतिक्रिया होने की संभावना है।2018 के ऐतिहासिक फैसले को अमेरिका ने पलटापेंटागन का यह ताजा फैसला साल 2013-2018 के दौरान विकसित हुई अमेरिकी रणनीतिक सोच के बिल्कुल विपरीत है। साल 2018 में अमेरिका के तत्कालीन रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने हिंद महासागर क्षेत्र के बढ़ते वैश्विक महत्व और पैसिफिक सुरक्षा के साथ इसके जुड़ाव को रेखांकित करने के लिए इस सैन्य कमांड का नाम बदलकर &#039;इंडो-पैसिफिक कमांड&#039; किया था।नाम बदलने के पीछे अमेरिका का तर्क:ऐतिहासिक विरासत: अमेरिकी रक्षा विभाग ने अपने बयान में कहा है कि पुराने नाम को बहाल करने का मकसद कमांड की गहरी ऐतिहासिक जड़ों, उसकी संस्थागत विरासत का सम्मान करना और पैसिफिक में सेवा करने वाले सैनिकों में गर्व की भावना को बढ़ावा देना है।ऑपरेशनल भूमिका में बदलाव नहीं: अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नाम से &#039;इंडो&#039; शब्द हटने के बावजूद कमांड के ऑपरेशनल मिशन, रणनीतिक दायरे या भौगोलिक सीमाओं में कोई बदलाव नहीं आएगा। इसकी जिम्मेदारी अभी भी अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी समुद्री सीमा तक फैली रहेगी।क्यों बेहद खास और शक्तिशाली है यह अमेरिकी कमांड?मूल रूप से 1 जनवरी, 1947 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन के कार्यकाल में स्थापित यह कमांड अमेरिकी सैन्य प्रणाली में सबसे पुरानी और सबसे बड़ी एकीकृत लड़ाकू कमांड (Combatant Command) है।मुख्यालय और दायरा: हवाई (Hawaii) में हेडक्वार्टर वाली यह कमांड प्रशांत महासागर, हिंद महासागर के बड़े हिस्से, पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों की देखरेख करती है।ऐतिहासिक महत्व: इस कमांड ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद एशिया की सुरक्षा व्यवस्था को आकार देने, कोरियाई और वियतनाम युद्ध के दौरान सैन्य अभियानों का समन्वय करने और बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता व आपदा राहत कार्यों का नेतृत्व किया है।भारत से जुड़ाव: भारत के लिए यह कमांड अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने का सबसे अहम जरिया रही है। भारत-अमेरिका के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री तालमेल और व्यापक इंडो-पैसिफिक रणनीति के तहत खुफिया जानकारी साझा करने का काम इसी कमांड के जरिए संचालित होता है।शशि थरूर का तंज: &quot;क्या यह &#039;क्वाड&#039; के ताबूत में एक और कील है?&quot;अमेरिका द्वारा अपनी सैन्य रणनीति के नाम से &#039;इंडो&#039; शब्द को हटाए जाने और भारत का गलत नक्शा दिखाए जाने पर भारत में राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल शुरू हो गई है। कांग्रेस सांसद और पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर अमेरिकी रक्षा विभाग के इस आदेश का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए बेहद तीखा तंज कसा। थरूर ने लिखा:&quot;क्या यह &#039;क्वाड&#039; (Quad) के ताबूत में एक और कील है?&quot;जानकारों की चिंता: थरूर की यह टिप्पणी उन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की चिंताओं को दर्शाती है जो मानते हैं कि नाम से &#039;इंडो&#039; (भारत/हिंद महासागर) शब्द को गायब करना वाशिंगटन के रणनीतिक झुकाव में बदलाव का संकेत हो सकता है। यह कदम चीन के खिलाफ बने भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के &#039;क्वाड&#039; समूह की प्रासंगिकता पर भी सवाल खड़े करता है।यद्यपि अमेरिकी प्रशासन लगातार यह दलील दे रहा है कि यह केवल एक प्रशासनिक और नामकरण से जुड़ा बदलाव है और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ &quot;आजाद और खुले क्षेत्र&quot; को बनाए रखने की उसकी प्रतिबद्धता अटूट रहेगी, लेकिन प्रतीकों की दुनिया में इसे एक बड़े कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच नक्शे के विवाद और नाम बदलने के इस फैसले पर कड़े कूटनीतिक संवाद देखने को मिल सकते हैं।

One more nail in the coffin of the Quad? https://t.co/7QauDO0a3s— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) June 17, 2026 

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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Lebanon पर भड़के Donald Trump, Netanyahu को दी कड़ी चेतावनी, कहा&#45; ज़्यादा ज़िम्मेदार बनें!</title>
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<description><![CDATA[ इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उन्हें &quot;व्हाइट हाउस में इज़राइल का अब तक का सबसे बड़ा दोस्त&quot; बताया था। हालांकि, हाल ही में ईरान से जुड़े विवाद को खत्म करने के लिए डील को अंतिम रूप देने की कोशिश करते हुए ट्रंप ने बहुत ज़्यादा आलोचनात्मक रुख अपनाया है। कई सार्वजनिक बयानों में, उन्होंने इज़राइल का समर्थन करने में अपनी भूमिका का श्रेय लिया और साथ ही नेतन्याहू के नेतृत्व वाले फैसलों पर कड़े सवाल भी उठाए। ट्रंप ने कहा कि मेरे बिना इज़राइल का अस्तित्व ही नहीं होता और कहा कि अमेरिका का कोई भी दूसरा राष्ट्रपति उस देश के समर्थन में ऐसे कदम उठाने को तैयार नहीं था। इंटरव्यू में उन्होंने नेतन्याहू को &quot;पागल&quot; भी कहा, जो दोनों नेताओं के बीच हुई एक बहुत ही तीखी और सीधी बातचीत थी।इसे भी पढ़ें: France में G7 Summit: PM Modi-Trump की मुलाकात, इस बार गले नहीं मिले, सिर्फ मिलाया हाथनेतन्याहू, जो अमेरिका के चार अलग-अलग राष्ट्रपतियों के कार्यकाल के दौरान इज़राइल के प्रधानमंत्री रहे हैं, के कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों के साथ तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि उनके पिछले मतभेदों में से कोई भी इतना सार्वजनिक या सीधा नहीं था, जितना ट्रंप के साथ हुआ है। यह तनाव तब पैदा हुआ जब ट्रंप ने लेबनान में इज़राइल की हालिया सैन्य कार्रवाई की आलोचना की; उनका मानना ​​है कि इससे वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही बातचीत मुश्किल हो सकती है। वह एक कूटनीतिक समझौते के लिए ज़ोर दे रहे हैं, जबकि उन्हें अपने देश में राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि वहां यह संघर्ष अलोकप्रिय हो गया है और ईंधन की बढ़ती कीमतों का एक कारण भी बना है। खबरों के मुताबिक, शुक्रवार को जिनेवा में एक समझौते पर हस्ताक्षर होने वाले हैं।इसे भी पढ़ें: जी-7 क्या है? इसके वैश्विक मायने क्या हैं? दुनिया के विभिन्न महत्वपूर्ण देशों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?फ्रांस में G7 समिट में बोलते हुए, ट्रंप ने कहा कि उन्होंने नेतन्याहू के हालिया कदमों, खासकर लेबनान से जुड़े मामलों पर अपनी नाराजगी व्यक्तिगत रूप से जाहिर की है। इज़राइल के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए, उन्होंने अधिक सावधानी और रणनीतिक संयम बरतने की जरूरत पर जोर दिया। हाल के वर्षों में वाशिंगटन में इज़राइल के समर्थन में बनी व्यापक द्विदलीय सहमति में दरार के संकेत दिखे हैं। गाजा युद्ध को लेकर प्रगतिशील हलकों से बढ़ती आलोचना और लंबे समय से चली आ रही अमेरिकी सहायता प्रतिबद्धताओं को लेकर कुछ रूढ़िवादियों के बीच बढ़ते संदेह ने राजनीतिक समीकरणों को बदलने में भूमिका निभाई है। साथ ही, राजनीतिक दायरे के वामपंथी और दक्षिणपंथी, दोनों ही तरफ यहूदी-विरोधी भावना (एंटी-सेमिटिज्म) को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:53 +0530</pubDate>
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<title>Strait of Hormuz में जहाजों से &amp;apos;टोल&amp;apos; नहीं &amp;apos;ट्रांज़िट फीस&amp;apos; लेगा ईरान, क्या है इसका मतलब?</title>
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<description><![CDATA[ हर दिन, फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारी मात्रा में कच्चे तेल,परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का वहन होता है। इस जलमार्ग में होने वाला कोई भी व्यवधान दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों को प्रभावित करता है। अब, महीनों से चले आ रहे अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद जब यह जलमार्ग फिर से खुलने की ओर बढ़ रहा है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि होर्मुज स्थायी रूप से टोल-फ्री (कर-मुक्त) रहेगा। दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वाणिज्यिक जहाजों को अभी भी पारगमन  के दौरान दी जाने वाली सेवाओं से जुड़े भुगतान करने की आवश्यकता हो सकती है। इसमें बहुत कुछ दांव पर लगा है। दुनिया भर में होने वाले पेट्रोलियम शिपमेंट का लगभग पांचवां हिस्सा और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) के निर्यात का लगभग एक-चौथाई हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। इसे भी पढ़ें: डील से पलटा ईरान? फिर आने वाली है तबाही!क्या होर्मुज़ से गुज़रने के लिए कोई फ़ीस या टोल देना होगा?वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुए एक समझौते में लड़ाई-झगड़े को खत्म करने और जलमार्ग को फिर से खोलने की शर्तें तय की गई हैं। इसका असर तुरंत फ़ाइनेंशियल मार्केट पर दिखा। तेल की कीमतों में गिरावट आई क्योंकि ट्रेडर्स को उम्मीद थी कि खाड़ी देशों से एनर्जी की सप्लाई धीरे-धीरे फिर से शुरू हो जाएगी। ट्रंप ने घोषणा की कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (फिर से खुल जाएगा और वहाँ से गुज़रने के लिए कोई टोल नहीं देना होगा। उनके बयानों का मकसद मार्केट को भरोसा दिलाना और महीनों की अस्थिरता के बाद समुद्री कामकाज के सामान्य होने का संकेत देना लग रहा था। हालांकि, अगले दिन ईरान ने अपना रुख़ थोड़ा और साफ़ किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान का सीधे ट्रांज़िट टोल लगाने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन उन्होंने यह साफ़ किया कि जलडमरूमध्य से गुज़रने के दौरान दी जाने वाली सेवाओं के लिए जहाज़ों को शुल्क देना पड़ सकता है। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने उन सेवाओं की प्रकृति के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी है, लेकिन पर्यावरण की निगरानी से जुड़ी गतिविधियों का उन संभावित क्षेत्रों में ज़िक्र किया गया है जिनके लिए शुल्क लिया जा सकता है। रास्ते के इस्तेमाल के लिए पेमेंट को लेकर कई महीनों से बातचीत चल रही है। कमर्शियल शिपिंग से जुड़े टकराव और जवाबी कार्रवाई शुरू होने के बाद, ईरानी अधिकारियों ने समुद्री रास्ते से गुज़रने के लिए ज़रूरी पेमेंट के तरीकों पर खुलकर बात करना शुरू कर दिया। तेहरान ने संकेत दिया कि जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) से गुज़रने वाले जहाज़ों को भविष्य में पेमेंट करना पड़ सकता है। मई तक, अधिकारियों ने &#039;पर्सियन गल्फ़ स्ट्रेट अथॉरिटी&#039; बना ली थी। इस संस्था का काम उन परमिटों को मैनेज करना था, जिन्हें अधिकारियों ने सुरक्षित रास्ते के परमिट  का नाम दिया था।इसे भी पढ़ें: US-Iran Deal से इजरायल बाहर! क्या समझौते का होगा पालन, ट्रंप vs नेतन्याहू अब होने वाला है?टोल और शुल्क में क्या अंतर है?यद्यपि आम बोलचाल में इन शब्दों का प्रयोग अक्सर एक दूसरे के स्थान पर किया जाता है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून इन्हें बिल्कुल अलग-अलग मानता है। टोल को आम तौर पर एक अनिवार्य शुल्क के रूप में समझा जाता है जो केवल इसलिए लगाया जाता है क्योंकि कोई जहाज किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से गुजरना चाहता है। ऐसे मामलों में, जहाज किसी सेवा के लिए नहीं बल्कि मार्ग तक पहुँच के लिए भुगतान कर रहा होता है। सेवा शुल्क एक बिल्कुल अलग सिद्धांत पर काम करता है। इसका उद्देश्य सेवा प्रदाता को जहाज को प्रदान की गई किसी विशिष्ट गतिविधि या परिचालन सहायता के लिए मुआवजा देना होता है। ऐसी सेवाओं में पायलट सहायता, टगबोट संचालन, नौवहन मार्गदर्शन, लाइटहाउस रखरखाव, ड्रेजिंग कार्य, आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताएं या पोत यातायात प्रबंधन प्रणाली शामिल हो सकती हैं। टोल असल में किसी खास जगह तक पहुँच को नियंत्रित करके होने वाली कमाई को दिखाता है। सर्विस फ़ीस का मकसद इंफ़्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा सिस्टम या ऑपरेशनल सपोर्ट को बनाए रखने में आने वाले असल खर्चों की भरपाई करना होता है।होर्मुज जलडमरूमध्य, पनामा नहर या स्वेज नहर से अलग क्यों है?इस मामले में उलझन की एक वजह यह है कि कई बड़े शिपिंग रूट पर पहले से ही पेमेंट करना पड़ता है। पनामा नहर और स्वेज नहर से गुज़रने के लिए जहाज़ों को अक्सर बड़ी रकम चुकानी पड़ती है। इन चार्जेज़ को आम तौर पर स्वीकार किया जाता है और इन्हें कानूनी माना जाता है। इसकी वजह खुद इन जलमार्गों की बनावट है। पनामा नहर और स्वेज नहर इंसानों द्वारा बनाई गई संरचनाएँ हैं। इनके संचालन के लिए बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग, रखरखाव, ड्रेजिंग, ट्रैफ़िक मैनेजमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की ज़रूरत होती है। गुज़रने के लिए लिए जाने वाले शुल्क से इन गतिविधियों के लिए फंड मिलता है और दी जाने वाली सेवाओं का खर्च निकलता है। होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति बिल्कुल अलग है। नहरों के विपरीत, होर्मुज एक प्राकृतिक जलमार्ग है। ऐतिहासिक रूप से, जहाज बिना किसी पारगमन शुल्क के इससे होकर गुजरते रहे हैं। यदि कोई देश नौवहन की स्वतंत्रता को सशुल्क सेवा में बदल देता है, तो इससे अन्य अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर भी असर पड़ सकता है। ट्रांज़िट पैसेज को लेकर कानूनी विवाद क्या है?आम तौर पर अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य  को एक अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य माना जाता है। ऐसे जलमार्ग UNCLOS के भाग III में तय किए गए &#039;ट्रांज़िट पैसेज&#039; नियमों के तहत आते हैं। &#039;ट्रांज़िट पैसेज&#039; के तहत आवाजाही के व्यापक अधिकार मिलते हैं। कमर्शियल जहाज़, तेल टैंकर और सैन्य जहाज़ बिना रुके लगातार इस जलडमरूमध्य से गुज़र सकते हैं।  तटीय देशों को इस अधिकार को रोकने की इजाज़त नहीं है। ज़्यादातर समुद्री ताकतें इस सिद ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:52 +0530</pubDate>
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<title>Oman में अमेरिकी हमला: 2 भारतीय नाविकों के शव वतन लौटे, विदेश मंत्री Jaishankar ने चेताया</title>
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<description><![CDATA[ ओमान में भारतीय दूतावास ने बुधवार को बताया कि MT सेटेबेल्लो जहाज़ पर अमेरिकी हमलों में जान गंवाने वाले दो भारतीय नागरिकों के शव भारत वापस लाए गए हैं। एक्स पर एक पोस्ट में दूतावास ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि शवों को भारत वापस लाया गया है। दूतावास ने एक बयान में कहा कि MT सेटेबोलो पर हुए हमले में दुखद रूप से जान गंवाने वाले श्री आदित्य शर्मा और श्री शिवानंद चौरसिया के शवों को भारत वापस लाया गया है। इस मुश्किल समय में हमारी गहरी संवेदनाएं उनके परिवारों के साथ हैं। पिछले हफ़्तों में बुधवार को MT सेटेबेल्लो नाम के जहाज़ पर हमला हुआ, जब अमेरिकी सेना ने उस पर ईरानी बंदरगाहों पर चल रही नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। जहाज़ पर मौजूद 24 भारतीय क्रू सदस्यों में से 21 को बचा लिया गया, जबकि बाद में तीन अन्य की मौत की पुष्टि हुई।इसे भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान समझौते से पहले उभरते विरोध के स्वरविदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात की और खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के हमलों पर भारत की कड़ी आपत्ति जताई, जिनमें तीन भारतीय नाविक मारे गए थे। उन्होंने कमर्शियल शिपिंग के खिलाफ ऐसी कार्रवाई को अनुचित बताया। एक्स पर एक पोस्ट में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि आज शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात हुई। मैंने खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के हमलों पर भारत की कड़ी आपत्ति दोहराई, जिनमें तीन भारतीय नाविक मारे गए थे। कमर्शियल शिपिंग के खिलाफ ऐसी जानलेवा कार्रवाई उचित नहीं है। शुक्रवार को, विदेश मंत्रालय ने ओमान के तट पर कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए अमेरिकी चार्ज डी&#039;अफेयर्स जेसन मीक्स को तलब किया।इसे भी पढ़ें: Gold Price Falls Today: सोना खरीदारों की बल्ले-बल्ले! US-Iran समझौते से गिरे दाम, जानें आज का रेटइस बीच, एवियन में हो रहे G7 समिट में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री व्यापार में रुकावटों का ग्लोबल इकॉनमी पर पड़ने वाले असर पर चिंता जताई और भारतीय नागरिकों की जान जाने का भी ज़िक्र किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक होगी जब देश मिलकर आम चुनौतियों का सामना करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक हो सकती है जब हम मिलकर साझा चुनौतियों का सामना करें। भारत का दृढ़ विश्वास है कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में तनाव और संघर्षों का स्थायी समाधान केवल बातचीत, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ही निकाला जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:52 +0530</pubDate>
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<title>नाविक बिना डर के...ट्रंप को सामने बिठाकर G7 के मंच से PM मोदी ने भारतीयों की मौत पर दिया दुनिया को क्लीयर मैसेज</title>
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<description><![CDATA[ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के एवियान में जी7 शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान भारतीय नाविकों की दुर्दशा का मुद्दा उठाया। एक अमेरिकी हमले में भारतीय नाविकों की मौत पर चिंता जताने के लिए शिखर सम्मेलन का मंच चुनते हुए, मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित जी7 नेताओं से कहा हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी डर के अपना काम कर सकें। नई साझेदारियां बनाने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर से कायम करने&quot; पर आयोजित एक सत्र को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र में अस्थिरता ने न केवल अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि आम नागरिकों की जान भी ली है, जिनमें समुद्र में काम करने वाले भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।इसे भी पढ़ें: जी-7 क्या है? इसके वैश्विक मायने क्या हैं? दुनिया के विभिन्न महत्वपूर्ण देशों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार में रुकावटों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें जो वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए सभी देशों को जोड़ते हैं। हमें यह पक्का करना होगा कि समुद्री रास्ते सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी डर के अपना काम कर सकें। अपने संबोधन में भू-राजनीतिक उथल-पुथल और घटनाक्रमों पर चर्चा करते हुए मोदी ने देशों के बीच भरोसे की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज सबसे अहम रणनीतिक संपत्ति खनिज, तकनीक या बाज़ार नहीं, बल्कि आपसी भरोसा है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया पहले से कहीं ज़्यादा आपस में जुड़ी और एक-दूसरे पर निर्भर है। किसी देश की ऊर्जा, भोजन, स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा, साथ ही उसकी आर्थिक समृद्धि, सिर्फ़ उसकी अपनी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती। आवाजाही, डेटा, पूंजी और प्रौद्योगिकी ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में साझेदारी का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। हालांकि, साझेदारी तभी सफल होती है जब उसके मूल में भरोसा हो। मोदी ने ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों की चिंताओं का भी ज़िक्र किया और कहा कि वे वैश्विक विकास में भागीदार बनना चाहते हैं। इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz में जहाजों से &#039;टोल&#039; नहीं &#039;ट्रांज़िट फीस&#039; लेगा ईरान, क्या है इसका मतलब?अमेरिका के हमले में मारे गए भारतीयों के शव स्वदेश लाए गएयह बयान ओमान की खाड़ी में पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर &#039;सेटेबेलो&#039; से जुड़ी एक समुद्री घटना में तीन भारतीय क्रू सदस्यों की मौत के कुछ दिनों बाद आया है। इस जहाज पर कई देशों के क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें 24 भारतीय भी शामिल थे। अमेरिकी सेना ने इस जहाज पर हमला किया था क्योंकि आरोप था कि इसने ईरानी तेल ले जाते समय नाकेबंदी का उल्लंघन किया था। ओमान में भारतीय दूतावास ने बुधवार (17 जून) को बताया कि MT सेटेबेेलो (MT Settebello) जहाज़ पर अमेरिकी हमलों में मारे गए दो भारतीय नागरिकों के शव भारत वापस लाए गए हैं। दूतावास ने &#039;X&#039; पर एक पोस्ट में पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि शवों को भारत वापस लाया गया है। दूतावास ने एक बयान में कहा, &quot;MT सेटेबेेलो पर हुए हमले में दुखद रूप से जान गंवाने वाले श्री आदित्य शर्मा और श्री शिवानंद चौरसिया के शव भारत वापस लाए गए हैं। इस मुश्किल समय में हमारी गहरी संवेदनाएं उनके परिवारों के साथ हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:51 +0530</pubDate>
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<title>G&#45;7 में सीढ़ियों पर लड़खड़ाए Trump, PM Modi ने गिरने से बचाया!</title>
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<description><![CDATA[ फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन के दौरान कैमरों में कैद हुआ यह छोटा सा पल अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल यह पूरा घटनाक्रम G7 समिट के दूसरे फैमिली फोटो सेशन का है। दुनिया के तमाम राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और नेता ग्रुप फोटो के लिए अपनी-अपनी तय जगहों की ओर बढ़ रहे थे। सभी नेता सीढ़ियां चढ़कर मंच पर पहुंच रहे थे और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के कैमरे हर मूवमेंट को रिकॉर्ड कर रहे थे। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सीढ़ियों पर चढ़ते हुए थोड़ा असहज नजर आए। एक छोटे से स्टेप पर उनका संतुलन हल्का सा बिगड़ता हुआ दिखाई दिया और उस वक्त उनके ठीक आगे प्रधानमंत्री मोदी मौजूद थे और जैसे ही पीएम मोदी को लगा कि ट्रंप का बैलेंस बिगड़ सकता है। उन्होंने तुरंत उनकी तरफ हाथ बढ़ाया और ट्रंप ने उनका हाथ पकड़ कर सीढ़ी पार की। इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz में जहाजों से &#039;टोल&#039; नहीं &#039;ट्रांज़िट फीस&#039; लेगा ईरान, क्या है इसका मतलब?हालांकि ऊपर पहुंचने के बाद भी ट्रंप कुछ पल के लिए थोड़े असमंजस में दिखाई दिए। लेकिन गौर करने वाली बात यह रही कि ट्रंप के बाद इमैनुअल मैक्रोन की पत्नी विजिट मैक्रोन भी वहां पर संतुलन खोती हुई नजर आई और फिर उन्होंने एक तरफ ट्रंप और दूसरी तरफ राष्ट्रपति मैक्रोन का सहारा लेकर खुद को संभाला और फिर फोटो सेशन में शामिल हुई। G7 समिट का यह दृश्य ऐसे समय सामने आया जब पूरे सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात सबसे ज्यादा चर्चा में रही। दोनों नेताओं के बीच बातचीत पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। खासतौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार जैसे मुद्दे इस मुलाकात के केंद्र में बताए जा रहे हैं। हालांकि समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जी7 के मंच से वैश्विक साझेदारी और भरोसे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया पहले से कहीं ज्यादा एक दूसरे पर निर्भर है और ऐसी स्थिति में देशों के बीच विश्वास सबसे महत्वपूर्ण पूंजी है। इसे भी पढ़ें:  नाविक बिना डर के...ट्रंप को सामने बिठाकर G7 के मंच से PM मोदी ने भारतीयों की मौत पर दिया दुनिया को क्लीयर मैसेजउन्होंने समुद्री व्यापार की सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा को भी वैश्विक जिम्मेदारी बताई और अब सबकी नजरें पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच आज होने वाली आधिकारिक द्विपक्षीय बैठक पर हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में व्यापार समझौते, ऊर्जा सुरक्षा, पश्चिम एशिया संकट और हिंद प्रशांत क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। लेकिन इन तमाम कूटनीतिक चर्चाओं के बीच जी7 समिट का यह छोटा सा दृश्य खूब सुर्खियां बटोर रहा है। जहां एक तरफ मंच पर वैश्विक राजनीति की तस्वीर बन रही थी। दूसरी तरफ कैमरों ने वो पल भी कैद कर लिया जब सीढ़ियों पर संतुलन बिगड़ने के दौरान पीएम मोदी ने आगे बढ़कर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की मदद की। Trump clings to Modi for support as he climbs a single small step at the G7 summit pic.twitter.com/3tiHtH6SY5— FactPost (@factpostnews) June 16, 2026 ]]></description>
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<title>मैक्रों की मुस्कान, कार्नी की चुप्पी, ट्रंप की Awkward Diplomacy, G7 कैसे बना &amp;apos;रियलिटी चेक&amp;apos; सम्मेलन</title>
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<description><![CDATA[ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस के खूबसूरत स्पा शहर &#039;एवियन-लेस-बेन्स&#039; में G7 शिखर सम्मेलन के लिए पहुंचे, तो वहां झील किनारे का सौम्य नजारा भी अंदरूनी तनाव को छिपा न सका। हाल के महीनों में ट्रंप ने जिस तरह सार्वजनिक मंचों पर अपने साथी राष्ट्राध्यक्षों का मजाक उड़ाया, उनकी आलोचना की और उनसे उलझे, उसने न सिर्फ पुराने जख्मों को हरा कर दिया है बल्कि आपसी मतभेदों की नई खाई भी खोद दी है। ऐसे अशांत माहौल में दुनिया के ये शीर्ष नेता ईरान संकट, यूक्रेन युद्ध और डगमगाती वैश्विक अर्थव्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए जुटे हैं। इस कड़वाहट की फौरी वजह ईरान के खिलाफ वाशिंगटन (अमेरिका) के सैन्य अभियानों में शामिल होने से कई अमेरिकी सहयोगियों खासकर नाटो देशों का पीछे हटना है। वैसे, G7 के साथ ट्रंप के रिश्तों की खटास सालों पुरानी है। उनके पहले कार्यकाल के दौरान भी शिखर सम्मेलन तनाव से भरे होते थे, लेकिन तब सहयोगी देश आपसी एकजुटता बनाए रखने के लिए अक्सर ट्रंप की तीखी बयानबाजी को नजरअंदाज कर दिया करते थे। मगर सीएनएन (CNN) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार हालात बदले हुए हैं और कुछ नेताओं ने खुलकर पलटवार करना शुरू कर दिया है।इसे भी पढ़ें:  नाविक बिना डर के...ट्रंप को सामने बिठाकर G7 के मंच से PM मोदी ने भारतीयों की मौत पर दिया दुनिया को क्लीयर मैसेजG7 के दूसरे नेताओं ने ट्रंप को दिया रियलिटी चेकइमैनुएल मैक्रों: गहरी दोस्ती से लेकर पत्नी वाले मजाक तकइस साल के समिट के मेज़बान, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों उन नेताओं में से हैं जिन्हें ट्रंप सबसे लंबे समय से जानते हैं। उनके रिश्ते में कभी गर्मजोशी तो कभी खुलकर नाराजगी देखने को मिली है। सीएनएन के मुताबिक, मैक्रों को कभी ट्रंप से निपटने की अपनी काबिलियत पर गर्व था, लेकिन हाल के दिनों में वे अपने अमेरिकी समकक्ष से काफी परेशान नजर आए हैं। हाल के हफ़्तों में, ट्रम्प ने एक वायरल वीडियो पर मज़ाक किया जिसमें ब्रिजीट मैक्रॉन विदेश यात्रा के दौरान अपने पति का चेहरा धक्का देती हुई दिख रही थीं। उन्होंने मज़ाक में कहा कि फ़्रांसीसी राष्ट्रपति अभी भी जबड़े पर लगे उस थप्पड़ से उबर रहे हैं। उन्होंने व्यापार बातचीत का ज़िक्र करते हुए मैक्रॉन के बोलने के लहज़े का भी मज़ाक उड़ाया है। न्यूज़ एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने बताया कि मैक्रॉन की शादी के बारे में ट्रंप के हालिया मज़ाक तब सामने आए, जब एक वायरल वीडियो में फ़्रांस की फ़र्स्ट लेडी ब्रिगिट मैक्रॉन को विदेश यात्रा के दौरान अपने पति का चेहरा धक्का देते हुए देखा गया। ट्रंप ने मज़ाक में कहा कि मैक्रों अभी भी जबड़े पर लगी चोट से उबर रहे हैं और बातचीत का ज़िक्र करते हुए उन्होंने फ़्रांसीसी राष्ट्रपति के बोलने के लहज़े का भी मज़ाक उड़ाया। मार्क कार्नी जिन्हें ट्रंप &#039;गवर्नर&#039; कहकर बुलाते हैंशुरुआत में ट्रंप और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच रिश्ते, कार्नी से पहले के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के साथ रहे रिश्तों की तुलना में ज़्यादा अच्छे लग रहे थे। लेकिन CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापार को लेकर हुए विवादों और दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम में कार्नी के दिए भाषण ने ट्रंप की सोच बदल दी। एपी ने बताया कि ट्रंप अक्सर कनाडाई नेता को गवर्नर कार्नी कहकर बुलाते रहे हैं। यह तंज इस बात पर कसा जाता है कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बन जाना चाहिए। कार्नी ने इस पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया देने से ज़्यादातर परहेज ही किया है। कीर स्टार्मर: ‘विंस्टन चर्चिल नहीं’CNN के अनुसार, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ट्रंप के साथ करीबी कामकाजी संबंध बनाने की कोशिश में कई महीने बिताए। कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि इसका फ़ायदा भी हो रहा है। लेकिन ईरान के ख़िलाफ़ वॉशिंगटन के मिलिट्री कैंपेन का समर्थन करने से स्टार्मर के इनकार के कारण रिश्तों में खटास आ गई। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ब्रिटिश नेता को यह कहकर खारिज कर दिया कि हम विंस्टन चर्चिल से डील नहीं कर रहे हैं। बाद में ट्रंप ने कहा कि ब्रिटेन की आदत है कि वह युद्धों में तभी शामिल होता है, जब हम पहले ही जीत चुके होते हैं। इसे भी पढ़ें: UAE-कनाडा और PM मोदी की ताबड़तोड़ मीटिंग, जानें क्या हुई बात?जॉर्जिया मेलोनीइटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को अक्सर यूरोप में ट्रंप के सबसे करीबी वैचारिक सहयोगियों में से एक माना जाता रहा है। ट्रंप ने पहले भी उनकी तारीफ़ करते हुए उन्हें &quot;शानदार&quot; बताया है और उनके नेतृत्व की सराहना की है। फिर भी, CNN ने रिपोर्ट दी कि जब इटली ने ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य अभियानों में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया, तो मेलोनी को भी ट्रंप के गुस्से का सामना करना पड़ा। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में इटली की प्रधानमंत्री ने पोप लियो XIV पर ट्रंप के हमलों की आलोचना करते हुए उन्हें &quot;अस्वीकार्य&quot; बताया, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने तीखी प्रतिक्रिया दी। इस घटना से पता चला कि ट्रंप की नाराज़गी से वे नेता भी नहीं बच पाते जिन्हें स्वाभाविक सहयोगी माना जाता है।सनाए तकाइची से पर्ल हार्बर वाला जोकजापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची काफी हद तक ट्रंप की आलोचना का बार-बार शिकार बनने से बची रही हैं। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने ट्रंप के साथ निजी तालमेल बनाने की खास कोशिश की है, जिसमें दिवंगत शिंजो आबे के प्रति दोनों की आपसी पसंद ने मदद की है। हालांकि, ईरान युद्ध का समर्थन न करने के जापान के फैसले को लेकर तनाव पैदा हो गया। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:50 +0530</pubDate>
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<title>UAE&#45;कनाडा और PM मोदी की ताबड़तोड़ मीटिंग, जानें क्या हुई बात?</title>
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<description><![CDATA[ भारत के पीएम नरेंद्र मोदी फ्रांस के एवीएन में G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे तो उनकी मुलाकात अपने कई समकक्ष नेताओं के साथ भी हुई। इसी कड़ी में उनकी मुलाकात संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ैद अलहन से हुई। दोनों नेताओं के बीच साल 2026 में यह तीसरी मुलाकात है जो भारत यूएई की मजबूत संबंध को साफ तौर पर दर्शा रही है। दोनों पक्षों ने लगातार आपस में बातचीत की और पश्चिमी एशिया क्षेत्र में स्थाई शांति सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए बातचीत कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान के महत्व पर जोर दिया है। दोनों पक्ष लगातार एक दूसरे के साथ संपर्क में बने रहने पर सहमत हुए हैं। इस दौरान भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति को इस साल के अंत में भारत द्वारा आयोजित किए जाने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया है। इसे भी पढ़ें: इतिहास में पहली बार सऊदी में तहलका मचा आया भारत, दुनिया हैरानवहीं इस मौके पर भारत के पीएम नरेंद्र मोदी की मुलाकात कनाडा के पीएम मां कारणी से भी हुई और दोनों पक्षों ने अपने संबंधों में आए सकारात्मक बदलाव पर खुशी व्यक्त किया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा मेरे लिए खुशी की बात है कि हम हमारी पहली मुलाकात बीजी से में हुई थी और आज हम एक साल के बाद मिल रहे हैं और जैसा आपने कहा हम चार बार मिल चुके हैं और लगातार फोन पर भी हमारा संपर्क हो रहा है। हम बटरल रिलेशंस को लेकर के भी और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के संबंध में भी खुलकर के अपने विचार रखते रहे हैं और हमने एक अच्छी परिस्थिति में एक मित्र देश के रूप में बहुत प्रगति हो रही है। भारत का डायस्पोरा की आप जिस प्रकार से चिंता करते हैं, मैं आपका बहुत आभारी हूं और भारत के डायस्पोरा के प्रति उनका भी कुछ ना कुछ योगदान आपके यहां हमेशा रहता है। ऐसे आपका सही है कि हम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर के बहुत ही उत्सुक है और शायद जैसा आपने मुझे निमंत्रित किया है कनाडा आने के लिए। मेरा भी प्रयास है कि इसी वर्ष मैं आऊं और मेरे आने से पहले ही हम इस एग्रीमेंट को पूरा करें। हम टेक्नोलॉजी के अंदर बहुत कुछ आगे करना चाहते हैं। एनर्जी सिक्योरिटी में कनाडा हमारा बहुत बड़ा पार्टनर बन सकता है। तो ये सारे क्षेत्र हैं जिसको लेकर के आज हमारी काफी चर्चाएं भी होगी और मैं आपका बहुत आभारी हूं कि सबसे साथियों से शायद मुझे मिलने का मौका मिल रहा है। थैंक यू। इसे भी पढ़ें: Iran पर Attack से Trump को किसने रोका? UAE, कतर और Pakistan की एक फोन कॉल ने बदला खेलभारत और कनाडा के नेताओं ने द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की जिसमें एलएनजी, एलपीजी और मेटालर्जिकल कोयले से संबंधित व्यवसायिक व्यवस्थाओं के बारे में बातचीत हुई। इसके अलावा दोनों पक्षों ने सीईपीए यानी कि व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के बातचीत में हुई प्रगति पर भी खुशी व्यक्त की है। दोनों पक्ष अब एक दूसरे के साथ लगातार आगे बढ़ने पर राजी हुए हैं और दोनों पक्ष रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और गहरा करने के लिए लगातार एक दूसरे के साथ मजबूती से काम करने पर राजी हुए हैं। बीते कुछ वर्षों की बात करें तो भारत और कनाडा के संबंधों में अच्छी खासी दूरी आ गई थी। लेकिन कनाडा की सत्ता में परिवर्तन के बाद भारत कनाडा के संबंध वापस से ट्रैक पर आते हुए दिखाई दे रहे हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:50 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिका ने जंग में हर मिनट ₹6 करोड़ लुटाए, ईरान ने ऐसे लूट लिया</title>
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<description><![CDATA[ 107 दिन तक चली अमेरिका ईरान जंग भले ही अब सीजफायर तक पहुंच गई हो लेकिन अमेरिका को घाव बहुत  गहरे लगे हैं। अमेरिका को इस जंग की कीमत इतनी भारी पड़ी है कि हर सेकंड करीब ₹1 लाख हर घंटे करीब ₹394 करोड़ और हर दिन लगभग ₹9400 करोड़ खर्च करने पड़े। अब जबकि दोनों देशों के बीच सीजफायर डील डिजिटल रूप से साइन होने की खबरें सामने आ रही हैं। चर्चा इस बात की है कि आखिर इस युद्ध ने अमेरिका को कितना नुकसान पहुंचाया है। जंग की शुरुआत के पहले छह दिनों में ही अमेरिका ने लगभग 11.3 बिलियन खर्च कर दिए थे। इसका मतलब है कि शुरुआती चरण में अमेरिका रोजाना करीब $2 बिलियन जला रहा था। इसके बाद भी युद्ध का खर्च कम नहीं हुआ और औसतन $1 बिलियन प्रतिदिन का खर्च जारी रहा। इसे भी पढ़ें: G-7 में सीढ़ियों पर लड़खड़ाए Trump, PM Modi ने गिरने से बचाया!युद्ध के दौरान अमेरिका ने अपने सबसे आधुनिक और महंगे लड़ाकू विमानों को मैदान में उतारा। B2 स्पिरिट बमबर जो दुनिया के सबसे एडवांस स्टील बमबर में गिना जाता है। उसकी 1 घंटे की उड़ान का खर्च करीब 1.4 करोड़ बताया गया। F22 रैप्टर की प्रति घंटे उड़ान लागत लगभग ₹80 लाख रही। F35A की प्रति घंटे लागत करीब ₹40 लाख, F15ee की ₹31 लाख और B1B बमबर की लगभग ₹59 लाख प्रति घंटा बताई गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अभियान में 13 प्रकार के 300 से अधिक सैन्य विमान तैनात किए थे। सिर्फ हवाई ताकत ही नहीं समुद्र में भी अमेरिका की विशाल सैन्य मौजूदगी बनी रही। अमेरिका ने दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स तैनात किए थे। जिनमें यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस जेरार्ड आर फोर्ट शामिल बताए गए। इसकी दैनिक परिचालन लागत 61 से ₹82 करोड़ तक बताई जा रही है। इसके अलावा 14 डिस्ट्रयर, दो सबमरीन और तीन कॉम्बैट शिप भी तैनात किए गए। इसे भी पढ़ें: मैक्रों की मुस्कान, कार्नी की चुप्पी, ट्रंप की Awkward Diplomacy, G7 कैसे बना &#039;रियलिटी चेक&#039; सम्मेलनडिस्ट्रयर पर प्रतिदिन लगभग ₹ करोड़। सबमरीन पर करीब ₹1.5 करोड़ और कॉम्बैट चिप्स पर 1.8 से ₹4 करोड़ प्रतिदिन खर्च होने का अनुमान है। कुल मिलाकर एयरक्राफ्ट और नेवी तैनाती पर रोजाना लगभग ₹661 करोड़ खर्च हुए और 107 दिनों में इसका कुल खर्च करीब ₹71,000 करोड़ तक पहुंच गया। गोला बारूद का खर्च भी किसी बड़े युद्ध से कम नहीं था। अमेरिका ने टॉमक ब्लॉक वी क्रूज मिसाइलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। एक टॉमहॉक मिसाइल की कीमत लगभग ₹34 करोड़ बताई जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसी 174 मिसाइलें दागी गई जिन पर करीब ₹5900 करोड़ खर्च हुए। एजीएम 888 मिसाइलों की कीमत लगभग 8.2 करोड़ प्रति यूनिट रही और 45 मिसाइलों पर करीब 369 करोड़ खर्च हुए।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:47 +0530</pubDate>
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<title>G7 Summit में PM Modi ने रखी भारत की &amp;apos;विकास नीति&amp;apos;, बोले&#45; New Economic Model हो जरूरी</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आर्थिक नज़रिए में बुनियादी बदलाव की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए G7 शिखर सम्मेलन में अपने भाषण की मुख्य बातें साझा कीं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सार्थक विकास के लिए पारंपरिक पैमानों से आगे देखने की ज़रूरत है। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने बताया कि फ्रांस में चल रहे इस बड़े राजनयिक सम्मेलन में हिस्सा लेने के दौरान, उन्होंने एवियन में G7 शिखर सम्मेलन में &#039;सभी के लिए संतुलित, साझा और टिकाऊ आर्थिक विकास को फिर से शुरू करने&#039; पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित किया। मेज़बान देश की ओर से इस विषय पर खास ध्यान दिए जाने की तारीफ़ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अच्छी बात है कि फ्रांस की G7 अध्यक्षता ने इस विषय को महत्व दिया है।&quot;दुनिया के मंच पर ज़्यादा समावेशी और इंसान-केंद्रित सोच की वकालत करते हुए और पारंपरिक वित्तीय ढांचों को चुनौती देते हुए, पीएम मोदी ने देशों के तरक्की मापने के तरीके में एक अहम वैचारिक बदलाव की बात कही। इसे भी पढ़ें: UAE-कनाडा और PM मोदी की ताबड़तोड़ मीटिंग, जानें क्या हुई बात?प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में कहा कि आज सच्चाई यह है कि जब विकास की बात आती है, तो सवाल GDP या व्यापार के आंकड़ों के बारे में नहीं होना चाहिए। समान अंतरराष्ट्रीय विकास के लिए भारत की लगातार वकालत पर ज़ोर देते हुए, पीएम मोदी ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि नीति-निर्माताओं को वित्तीय तरक्की के मुख्य मकसद पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा असली सवाल यह है - किसके लिए विकास, किसके साथ विकास और किस दिशा में विकास? चल रहे G7 शिखर सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक कोशिशों को आगे बढ़ाते हुए, पीएम मोदी इस कार्यक्रम के दौरान यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ एक अहम त्रिपक्षीय बैठक करेंगे।इसे भी पढ़ें: Telegram India ban: मोदी जी, Drama छोड़िए! Rahul Gandhi बोले- माफिया पर वार करें, छात्रों पर नहींEU नेतृत्व के साथ इन उच्च-स्तरीय बातचीत के बाद, प्रधानमंत्री द्विपक्षीय चर्चा के लिए जर्मन नेताओं से मिलेंगे। यह बैठक &quot;आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सुरक्षित, तेज़ और प्रभावी इस्तेमाल को सुनिश्चित करने&quot; पर केंद्रित एक रणनीतिक वर्किंग लंच में उनके शामिल होने से पहले होगी, जो इस साल के शिखर सम्मेलन के मुख्य विषयों में से एक है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:46 +0530</pubDate>
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<title>G7 Summit: भारत को रूस से तेल नहीं खरीदने देंगे! ट्रंप ने फिर बढ़ाई टेंशन</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के साथ महीनों तक चले तनाव के बाद भी अमेरिका को वह नतीजा नहीं मिला जिसकी उसे उम्मीद थी। अपनी अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव, महंगाई और तेल संकट की चिंता के बीच वाशिंगटन अब एक बार फिर रूस के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में दिख रहा है। सवाल यह है कि जो अमेरिका अभी तक ईरान संकट के असर से पूरी तरह बाहर नहीं आ पाया है, वह अब रूस पर नए प्रतिबंधों का ऐलान क्यों कर रहा है? फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे संकेत दिए हैं जिससे रूस की अर्थव्यवस्था पर बड़ा हमला हो सकता है और अगर ऐसा हुआ तो इसका सीधा असर भारत की जेब और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। इसे भी पढ़ें: अमेरिका ने जंग में हर मिनट ₹6 करोड़ लुटाए, ईरान ने ऐसे लूट लियाट्रंप का नया प्लान अब रूस पर दबाव ईरान युद्ध के दौरान दुनिया को सबसे बड़ा डर था कि तेल की सप्लाई रुक जाएगी और कीमतें आसमान छूने लगेगी। यही वजह है कि अमेरिका ने कुछ देशों को रूस से तेल खरीदने में राहत दी थी ताकि बाजार में तेल की कमी ना हो। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। स्टेट ऑफ हॉर्मोस से तेल की आवाजाही फिर सामान्य होने लगी है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन रूस को मिलने वाली इस राहत को खत्म करने की तैयारी में है। मतलब साफ है कि अब अमेरिका फिर से रूस की कमाई पर चोट करना चाहता है ताकि यूक्रेन युद्ध में मॉस्को पर दबाव बढ़ाया जा सके। G7 देशों ने भी कसली कमर। सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि ब्रिटेन, कनाडा समेत कई G7 देशों ने भी रूस के तेल कारोबार को निशाना बनाने का फैसला किया है। रूस जिन गुप्त तेल टैंकरों और नेटवर्क के जरिए दुनिया भर में तेल बेच रहा है, उन पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। पश्चिमी देशों का मानना है कि रूस की युद्ध मशीन को रोकने का सबसे बड़ा तरीका उसकी तेल से होने वाली कमाई पर हमला करना है। इसे भी पढ़ें: मैक्रों की मुस्कान, कार्नी की चुप्पी, ट्रंप की Awkward Diplomacy, G7 कैसे बना &#039;रियलिटी चेक&#039; सम्मेलनभारत की बढ़ी चिंता ऐसे भारत की मुश्किलें शुरू होती हैं। पिछले कई महीनों में भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीदा है। यही वजह रही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल के बावजूद भारत में तेल की कीमतों पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ा। लेकिन अगर अमेरिका रूस पर दोबारा सख्त प्रतिबंध लागू करता है तो भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूसी तेल खरीदना मुश्किल हो सकता है। भुगतान से लेकर शिपिंग तक कई तरह की दिक्कतें सामने आ सकती हैं। 17 जून की डेडलाइन पर सबकी नजर। सबसे अहम बात यह है कि रूसी तेल पर दी गई अमेरिकी छूट की समय सीमा 17 जून को खत्म हो रही है। अगर इस छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाता तो दुनिया के तेल बाजार में फिर हलचल मच सकती है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और इसका असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे सकता है। मोदी ने भी जताई चिंता। G7 सम्मेलन में मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक व्यापार और सप्लाई चैन प्रभावित हो रही है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:46 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran Nuclear Deal का G7 ने किया स्वागत, कहा&#45; तेहरान को परमाणु हथियार से रोकेंगे</title>
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<description><![CDATA[ अहम जियोपॉलिटिकल घटनाक्रमों पर मज़बूत सहमति जताते हुए, G7 नेताओं ने बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुई अहम डील का स्वागत किया। उन्होंने इस समझौते को तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने और साथ ही उसकी व्यापक क्षेत्रीय और मिसाइल क्षमताओं को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। वैश्विक सुरक्षा मामलों पर अपनी सामूहिक राय बताते हुए एक संयुक्त बयान में नेताओं ने कहा कि हम राष्ट्रपति ट्रंप की मज़बूत लीडरशिप और मध्यस्थता करने वाले देशों के सहयोग से अमेरिका और ईरान के बीच हुई डील की घोषणा का स्वागत करते हैं। इस समूह ने ज़ोर दिया कि हाल ही में बनी कूटनीतिक समझ &quot;ईरान को कोई भी परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने और उसकी क्षेत्रीय व बैलिस्टिक गतिविधियों से जुड़े खतरों से निपटने का एक ऐतिहासिक मौका&quot; देती है।इसे भी पढ़ें: UAE-कनाडा और PM मोदी की ताबड़तोड़ मीटिंग, जानें क्या हुई बात?इस जियोपॉलिटिकल कामयाबी के लिए अपना व्यावहारिक समर्थन जताते हुए नेताओं ने कहा कि हम इसका समर्थन करते हैं और इसे लागू करने में योगदान देने के लिए तैयार हैं। इस अंतर-सरकारी मंच ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते के बाद लगातार जारी कूटनीतिक कोशिशों का भी समर्थन किया। G7 ने ज़ोर दिया कि बातचीत के अगले दौर में तेहरान द्वारा &quot;क्षेत्र और उससे बाहर&quot; पैदा की गई कमज़ोरियों का पूरी तरह से समाधान किया जाना चाहिए और इसमें महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, खासकर इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) को सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए। मध्य पूर्व की सुरक्षा पर अपनी मज़बूत और स्पष्ट स्थिति को दोहराते हुए नेताओं ने कहा कि हम फिर से कहते हैं कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा।इसे भी पढ़ें:  G7 Summit: भारत को रूस से तेल नहीं खरीदने देंगे! ट्रंप ने फिर बढ़ाई टेंशनलेबनान में चल रहे संकट पर ध्यान केंद्रित करते हुए, G7 ने अपनी मदद के लिए साफ़ तौर पर शर्त रखी कि लड़ाई पूरी तरह बंद होनी चाहिए और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह की हथियारबंद ताक़त को पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए। संयुक्त बयान में विस्तार से बताया गया, &quot;लेबनान में, हम हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण और हथियारों पर राज्य के एकाधिकार को हासिल करने, तथा उचित अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गारंटियों के साथ लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए लेबनानी नेतृत्व के प्रयासों का समर्थन करते हैं। इसके लिए हम तत्काल और मज़बूत युद्धविराम का समर्थन करते हैं। वैश्विक व्यापार सुरक्षा पर बात करते हुए, विश्व नेताओं ने महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से समुद्री यातायात को बिना किसी रुकावट के बहाल करने का ज़ोरदार समर्थन किया। उन्होंने कहा कि &quot;बिना किसी प्रतिबंध या टोल के आने-जाने का अधिकार अंतरराष्ट्रीय व्यापार की नींव है।इसे भी पढ़ें: G7 Summit में PM Modi ने रखी भारत की &#039;विकास नीति&#039;, बोले- New Economic Model हो जरूरीइस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते (chokepoint) को सुरक्षित करने के लिए, G7 ने प्रस्ताव दिया कि फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम के संयुक्त नेतृत्व में एक बहुराष्ट्रीय रक्षा पहल अहम भूमिका निभा सकती है। यह पहल कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा, वैश्विक शिपिंग कंपनियों के बीच भरोसा बहाल करने और समुद्री बारूदी सुरंगों (sea mines) को पूरी तरह हटाने में मदद कर सकती है। इसके अलावा, सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में विविधता लाने (diversification) की प्रक्रिया को तेज़ी से आगे बढ़ाकर और रणनीतिक ऊर्जा भंडार को मज़बूत करके होर्मुज़ जलडमरूमध्य में संभावित रुकावटों के वैश्विक असर को कम करने का संकल्प लिया। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:45 +0530</pubDate>
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<title>बात नहीं बनी तो फिर से बमबारी शुरू कर देंगे, ईरान सीजफायर पर G7 से ट्रंप की नई धमकी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ टकराव खत्म करने के लिए साइन किया गया समझौता (MoU) अंतिम नहीं है, और अगर तेहरान ठीक से पेश नहीं आता है तो वे फिर से बमबारी शुरू कर सकते हैं। फ्रांस में G7 समिट में ट्रंप की ये कड़ी बातें जो स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच MoU पर आधिकारिक तौर पर साइन होने से ठीक दो दिन पहले कही गईं।इसे भी पढ़ें: US-Iran Nuclear Deal का G7 ने किया स्वागत, कहा- तेहरान को परमाणु हथियार से रोकेंगेइस समझौते के नाजुक होने का संकेत देती हैं। ट्रंप ने कहा कि यह कोई फ़ाइनल समझौता नहीं है। यह सिर्फ़ एक समझौता ज्ञापन (MOU) है। अगर मुझे यह पसंद नहीं आया या वे (ईरान) ठीक से पेश नहीं आए, तो हम सीधे उनके सिर पर बम गिराने लगेंगे... क्योंकि वे 47 सालों से गलत हरकतें करते आ रहे हैं। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस घोषणा के बाद कि ईरान के साथ डील &quot;पूरी&quot; हो गई है और शुक्रवार को उस पर साइन किए जाएंगे, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को कहा कि दोनों पक्षों ने पहले ही &quot;डिजिटल रूप से डील पर साइन कर लिए हैं&quot;। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि समझौते के तहत तेहरान को प्रतिबंधों में कोई भी छूट, समझौते के तहत किए गए वादों को इस्लामिक रिपब्लिक द्वारा पूरा करने पर निर्भर करेगी।इसे भी पढ़ें: मैक्रों की मुस्कान, कार्नी की चुप्पी, ट्रंप की Awkward Diplomacy, G7 कैसे बना &#039;रियलिटी चेक&#039; सम्मेलनABC के &#039;गुड मॉर्निंग अमेरिका&#039; कार्यक्रम में बात करते हुए वेंस ने कहा कि डील पर साइन होने के बाद ईरान को कोई आर्थिक रियायत नहीं दी गई है वेंस ने कहा, हमने कल ही डिजिटल रूप से डील पर साइन कर लिए थे और कोई पैसा जारी नहीं किया गया है, और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।&quot; उन्होंने इस सवाल का जवाब देते हुए यह बात कही कि क्या समझौते पर साइन करने के बाद ईरान को प्रतिबंधों से राहत मिलेगी या उसकी फ्रीज़ की गई संपत्ति तक पहुँच मिलेगी। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:45 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan की अकड़ बरकरार, Indian Flights पर 24 July तक जारी रहेगा एयरस्पेस बैन</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान ने बुधवार को भारतीय रजिस्टर्ड विमानों के लिए अपने एयरस्पेस पर लगी पाबंदियों को एक और महीने के लिए, यानी 24 जुलाई तक बढ़ा दिया। ये पाबंदियां पहली बार अप्रैल 2025 में लगाई गई थीं, जब आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 लोगों की हत्या कर दी थी। इसके बाद दोनों परमाणु-सक्षम देशों के बीच तनाव पैदा हो गया था, जो चार दिन के सैन्य संघर्ष में बदल गया। भारत ने भी पाकिस्तानी विमानों के अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल पर इसी तरह की पाबंदियां लगाई हैं। पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ने बुधवार को जारी एक नोटिस में कहा कि भारतीय विमानों - सिविल और मिलिट्री दोनों - पर यह रोक 16 जून को शाम 5:50 बजे से 24 जुलाई को सुबह 4:59 बजे तक लागू रहेगी।इसे भी पढ़ें: भारत ने ट्रक पर लादी क्रूज मिसाइल, बटन दबाते ही जो हुआ...दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव तो कम हुआ है, लेकिन राजनयिक संबंध अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं क्योंकि दोनों पक्ष संकट के दौरान शुरू किए गए जवाबी कदम उठाना जारी रखे हुए हैं। लंबे समय तक एयरस्पेस बंद रहने से भारतीय एयरलाइन कंपनियों की ऑपरेशनल लागत बढ़ने की आशंका है; इनमें से कई कंपनियों को मध्य एशिया, यूरोप, पश्चिम एशिया और उत्तरी अमेरिका के गंतव्यों तक जाने के लिए लंबे रास्ते अपनाने पड़ रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:44 +0530</pubDate>
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<title>India&#45;EU की &amp;apos;Mother of all Deals&amp;apos; फाइनल! 2 अरब लोगों के लिए खुलेंगे मौके, G7 में बनी बात</title>
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<description><![CDATA[ इस साल जनवरी में ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए बातचीत को आधिकारिक रूप से अंतिम रूप दिए जाने के बाद - जिसे &quot;सभी समझौतों की जननी&quot; कहा गया है - भारत और EU इस साल के अंत तक समझौते पर हस्ताक्षर करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। यह व्यापक समझौता वस्तुओं, सेवाओं और डिजिटल व्यापार को कवर करता है। इससे लगभग दो अरब लोगों और वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक-चौथाई हिस्से को शामिल करने वाला एक विशाल मुक्त बाज़ार बनेगा, जिससे व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच हुई उच्च-स्तरीय बैठक के बाद इस ऐतिहासिक समझौते की दिशा में तेज़ी साफ़ तौर पर देखी गई।इसे भी पढ़ें: US-Iran Nuclear Deal का G7 ने किया स्वागत, कहा- तेहरान को परमाणु हथियार से रोकेंगेसोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर एक साथ किए गए पोस्ट में यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने इस अहम कूटनीतिक घटनाक्रम के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने लिखा, प्रिय @narendramodi, आपसे इतनी जल्दी दोबारा मिलकर खुशी हुई। हमने अब तक की सबसे बड़ी ट्रेड डील पूरी कर ली है, और अब हम अपने वादों को पूरा करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। हम साल के आखिर तक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन करेंगे और इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट पर काम में तेज़ी लाएंगे। हम सुरक्षा और रक्षा सहयोग को भी बढ़ाएंगे। साथ ही, IMEC (इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर) को आगे बढ़ाकर बेहतर कनेक्टिविटी के लिए मिलकर काम करेंगे।&quot;G7 समिट के दौरान हुई बैठक के बाद भारत-EU संबंधों की दिशा को लेकर बहुत उम्मीद जताते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक्स पर पोस्ट किया आज एवियन में यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन से मिलकर बहुत अच्छा लगा। इस साल की शुरुआत में, भारत को हमारे गणतंत्र दिवस समारोह के लिए उनकी मेज़बानी करने पर गर्व था। भारत-EU संबंधों के लिए यह एक शानदार समय रहा है क्योंकि हमने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पूरा कर लिया है।&quot;प्रधानमंत्री ने मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालात को समझने और आगे बढ़ने में इन चर्चाओं के रणनीतिक महत्व पर भी ज़ोर दिया।इसे भी पढ़ें: EU-US Trade Deal को European Parliament की हरी झंडी, कई अमेरिकी सामानों पर खत्म होगा टैरिफPM मोदी ने आगे कहा, &quot;हमारी बातचीत के दौरान, हमने इस बात पर चर्चा की कि आने वाले समय में आर्थिक संबंधों को और कैसे गहरा किया जाए। आज के ग्लोबल माहौल में शांति, स्थिरता और समृद्धि को मज़बूत करने में हमारा बढ़ता सहयोग एक अहम भूमिका निभा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:43 +0530</pubDate>
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<title>Modi&#45;Trump meet: मोदी शांत और संयमित, मैं वैसा नहीं... G7 में ट्रंप ने की प्रधानमंत्री की तारीफ</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (17 जून) फ्रांस के एवियन में G7 समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ द्विपक्षीय बैठक की।  ट्रंप ने अचानक पीएम मोदी की तरफ इशारा करते हुए पूरी महफिल के सामने एक बड़ा बयान दे दिया। ट्रंप ने खुले दिल से स्वीकार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी बेहद शांत, संयमित और बहुत प्रभावशाली हैं… मैं वैसा बिल्कुल नहीं हूं। फ्रांस में G7 समिट के दौरान होने वाली इस बैठक में दोनों नेता पश्चिम एशिया के हालात, रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), अमेरिका से ऊर्जा आयात और प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चर्चा कर सकते हैं। इससे पहले मंगलवार को, G7 समिट के आउटरीच सेशन के दौरान पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात हुई, उन्होंने एक-दूसरे का अभिवादन किया और संक्षिप्त बातचीत की। दोनों नेताओं की मुलाकात लगभग डेढ़ साल बाद हुई थी।इसे भी पढ़ें: US-Iran Nuclear Deal का G7 ने किया स्वागत, कहा- तेहरान को परमाणु हथियार से रोकेंगेभारत-अमेरिका संबंधों में तब बड़ी गिरावट आई थी जब वाशिंगटन ने भारत पर दंडात्मक टैरिफ लगाए और राष्ट्रपति ट्रंप ने मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव को कम करने में अपनी भूमिका को लेकर विवादास्पद दावे किए थे। पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के बाद, दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों को फिर से बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, ओमान के तट पर एक मर्चेंट जहाज पर हुए हमले में पिछले हफ्ते तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद रिश्तों में फिर से तनाव आ गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मन चांसलर के साथ द्विपक्षीय बैठक कीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज फ्रांस के एवियन में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ से मुलाकात की। इस साल दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी बैठक थी। नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की और भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी में आई नई गति पर संतोष व्यक्त किया। यह गति चांसलर की भारत यात्रा और इस साल की शुरुआत में भारत-यूरोपीय संघ FTA वार्ता के सफल समापन के कारण आई है। चूंकि भारत और जर्मनी 2026 में अपने राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, इसलिए दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, हरित और सतत विकास, प्रौद्योगिकी, नवाचार, शिक्षा और गतिशीलता जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप पर हस्ताक्षर और जर्मनी से होकर गुजरने वाले भारतीय नागरिकों के लिए ट्रांजिट वीज़ा छूट को लागू करने का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें पश्चिम एशिया की स्थिति और रूस-यूक्रेन संघर्ष शामिल हैं। उन्होंने पश्चिम एशिया में संघर्ष को समाप्त करने के लिए बनी सहमति का भी स्वागत किया।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:43 +0530</pubDate>
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<title>भारत के दो दोस्त धांसू डील को तैयार, एक बनाएगा विमान, दूसरा बनाएगा हथियार!</title>
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<description><![CDATA[ भारत और थाईलैंड के बीच में जो सहमति बनी है वो क्रांतिकारी साबित हो सकती है। तो वहीं अपने मित्र के साथ यानी कि ब्राजील अपने दोस्त भारत के साथ ऐसे प्लान तैयार करना चाह रहा है जो वाकई में बहुत बड़ा गेम चेंजर मूव साबित हो सकता है। चाइना के सामने एक बड़ी चुनौती भारत है। थाईलैंड भी सतर्क है क्योंकि साउथ चाइना सी का खतरा लगातार बढ़ता चला जा रहा है। तो भारत और थाईलैंड के बीच में डिफेंस डायलॉग हुआ है और यह बहुत अहम बैठक है और 2025 में दोनों देशों के अपने संबंध को स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया और अब रक्षा सहयोग को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने की तैयारी है। ब जो चर्चाएं हुई हैं, भारत और थाईलैंड के बीच में जो बैठक हुई, उसमें यह तय हुआ है कि साझा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर काम करते हैं। रिसर्च इनोवेशन पर काम करते हैं। कोऑपरेशन बढ़ाते हैं। यानी कि जो मिलिट्री टू मिलिट्री एक्सचेंज है, ट्रेनिंग एक्सचेंज हैं, उसमें तेजी आने वाली है। एक तो इंडोपेसिफिक क्षेत्र में सामरिक सहयोग अगर बढ़ेगा तो भारत और थाईलैंड दोनों को ही हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर में बहुत महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति में रखेगा। इस बैठक में दोनों देशों के बीच इंडोपेसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा पर चर्चा भी हुई है। इसका मतलब है समुद्री सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाना। इसे भी पढ़ें: भारत ने ट्रक पर लादी क्रूज मिसाइल, बटन दबाते ही जो हुआ...चीन के बढ़ते प्रभाव पर दोनों देशों की नजर का होना। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश करना। आतंकवाद, समुद्री डकैतों और अवैध तस्करी के खिलाफ संयुक्त प्रयास करना। रक्षा उद्योग को बड़े फायदे की जो बात है डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग रिसर्च इनोवेशन। जी हां, तो थाईलैंड को रक्षा उपकरण बेचने का भारत को मौका मिल सकता है। मेक इन इंडिया कैंपेन के तहत नए हथियार बाजार में आ सकते हैं। संयुक्त उत्पादन यानी कि जॉइंट प्रोडक्शन की जो भावना है, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग की जो बात है, उसको प्रबल कर किया जा रहा है। इसके अलावा रक्षा, स्टार्टअप और तकनीक में सहयोग को बढ़ाया जाने की प्लानिंग है। यानी कि अ जो एक ब्रह्मोस तो गेम चेंजर है। देखिए ब्रह्मोस को लेकर बहुत सारे देश खरीद रहे हैं। थाईलैंड अगला देश हो सकता है कि उसकी दिलचस्पी आ जाए क्योंकि उसे भी कई तरह के तनाव से गुजरना पड़ता है। रडार निगरानी उपकरण हो गए, ड्रोन तकनीक हो गया, नौसैनिक सुरक्षा प्रणालियां हो गई। इस तरह की चीजों में भी ये लोग थाईलैंड जो है वो मिलकर काम कर सकते हैं। ये बहुत अहम हो जाता है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच जो हमने बताया कि मिलिट्री टू मिलिट्री इंगेजमेंट जो है ट्रेनिंग एक्सचेंज जो है वो बढ़ाने की कोशिश है जिसके जरिए दोनों देश अपना सहयोग मजबूत करेंगे। आसियान में भी महत्वपूर्ण सदस्य है थाईलैंड। भारत की एक्टिस्ट पॉलिसी के लिए थाईलैंड जो है वो प्रमुख साझेदार है। इसे भी पढ़ें: मोदी की फ्रांस, स्लोवाकिया यात्रा से बदले वैश्विक समीकरण, दुनिया को दिखा नए भारत का दमएशियन देशों में भारत का प्रभाव बढ़ेगा। क्षेत्रीय सुरक्षा मंचों पे भारत की भूमिका मजबूत होगी। इसके अलावा जो जैसा कि हमने आपको बताया कि स्टेट ऑफ मलक्का जो है इससे हमको फायदा मिल सकता है। थाईलैंड जैसे देश के साथ हमारे संबंध बेहतर होंगे तो हमारी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप भी लगातार बढ़ी है। दोनों देशों के बीच सेनाएं जो है नियमित संपर्क में है। आर्थिक रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। तो काफी ज्यादा जो है वो फायदा हो सकता है। तो ये तो देखिए थाईलैंड के मोर्चे की खबर है। जहां एक बड़ा गेम चेंजर जो है डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और साझा को प्रोडक्शन की बात की जा रही है। बहुत बड़ा गेम चेंजर है ये। तो वहीं दूसरी तरफ ब्राजील की कंपनी है इमरार वो एक बड़ा ऑफर लेकर आई है जो सूत्र बता रहे हैं। मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम के लिए वो अपना C390 मिलेनियम विमान की जो है वो पेशकश कर ही रहा है। इसे भी पढ़ें: भारत में बनेगा राफेल विमान, हो गया बड़ा ऐलान!भारत अगर इसे चुनता है तो कंपनी भारत में अपनी पूरी असेंबली लाइन उत्पादन सुविधा सब लाने के लिए तैयार हो गई है। यानी कि पूरा का पूरा वह यहीं बना देगी उसको। भारत को 60 से 80 के बीच मध्य परिवहन विमानों की आवश्यकता बताई गई है और इसके पहले भी अह यह जो कंपनी है इसकी और अडानी डिफेंस एंड एयरपेस के बीच में जो है वो भारत में क्षेत्रीय यात्री विमानों के निर्माण सप्लाई चेन प्रशिक्षण रखरखाव के लिए समझौता हुआ है और इसके आने से जो है एक बड़ा फायदा जो है वह मिल सकता है। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के पुराने AN32 परिवहन विमानों का जो है अह उसकी जगह पर इनको लाया जाएगा। AN32 के साथ एक दुखद घटना भी हुई। देखा आपने आसाम में। हालांकि उसकी जांच जारी है कि क्या कारण रहे होंगे। भारत में विमान निर्माण क्षमता बढ़ जाएगी अगर ऐसा होता है तो। एयररोस्पेस क्षेत्र में जो है भारत की तकनीक और कौशल जो है वह ट्रांसफर अगर होता है तो और बेहतरीन हो जाएगा। हजारों प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रोजगार मिल जाएंगे। वहीं दूसरी तरफ ब्राजील की तरफ से भी ऑफर है। पूरी की पूरी सप्लाई यूनिटी लगा देने की हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:42 +0530</pubDate>
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<title>Tibet की पहचान मिटाने पर तुला China, Xi Jinping की &amp;apos;जातीय नीति&amp;apos; से तिब्बतियों में भारी खौफ</title>
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<description><![CDATA[ चीनी अधिकारियों ने तथाकथित हैनान तिब्बती स्वायत्त प्रान्त में एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इसमें तिब्बती धार्मिक प्रतीकों, सांस्कृतिक परंपराओं और स्थानीय सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह तिब्बतियों को चीनी राज्य के ढांचे में शामिल करने की एक तेज़ कोशिश है। तिब्बत टाइम्स के मुताबिक, अप्रैल 2026 में इस प्रान्त के कम्युनिस्ट पार्टी सचिव के तौर पर चीनी अधिकारी श्योंग युआनलाई की नियुक्ति के बाद यह कार्रवाई और तेज़ हो गई। तब से, अधिकारियों ने चाबचा, त्रिका, मांगरा, बा और ड्रैगकर जैसे इलाकों में कई कदम उठाए हैं, जिससे स्थानीय तिब्बतियों में भारी परेशानी और बेचैनी है। सूत्रों ने बताया कि तिब्बती बौद्ध धर्म के अहम प्रतीक माने जाने वाले सैकड़ों पवित्र &#039;मणि पत्थर के ढेर&#039; (Mani stone mounds) को योजनाबद्ध तरीके से नष्ट कर दिया गया और ज़मीन में दबा दिया गया।इसे भी पढ़ें: 2 देशों ने हिंदी में मोदी पर किया बड़ा ऐलान, पूरी दुनिया हैरान!खबरों के अनुसार, अधिकारियों ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जातीय नीतियों को बढ़ावा देकर और धार्मिक परंपराओं पर राज्य के अधिकार पर ज़ोर देकर इस अभियान को सही ठहराया है। एक सूत्र ने दावा किया कि इस इलाके में 90 प्रतिशत से ज़्यादा &#039;मणि पत्थर&#039; के ढांचे पहले ही हटा दिए गए हैं। यह सख्ती अब निजी घरों तक भी पहुँच गई है। कई समुदायों में प्रार्थना वाले झंडे, विंड-हॉर्स झंडे और दरवाज़ों पर लगाए जाने वाले पारंपरिक बैनर हटाकर जला दिए गए हैं। आरोप है कि स्थानीय लोगों को अपनी छतों पर चीन का राष्ट्रीय झंडा लगाने के लिए मजबूर किया गया है, जिससे इलाके के पुराने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक हट गए हैं।इसे भी पढ़ें: घाटे और कड़ी टक्कर के बीच बिका Pizza Hut, लगभग 22500 करोड़ में हुआ सौदा, जानिए क्यों यम ब्रांड्स को बेचना पड़ा सबसे मशहूर नामस्थानीय सूत्रों ने यह भी बताया है कि कई तिब्बती सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है; इसके पीछे यह तर्क दिया गया है कि सरकारी दफ्तरों में तिब्बतियों की संख्या ज़रूरत से ज़्यादा है। &#039;तिब्बत टाइम्स&#039; की रिपोर्ट के अनुसार, कई पदों पर चीनी मूल के अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। एक स्थानीय निवासी ने वहाँ के माहौल को डर और निराशा से भरा बताया। उन्होंने कहा कि नए पार्टी सेक्रेटरी के आने के बाद से लोगों को लगता है कि वे सरकारी आदेशों का विरोध नहीं कर सकते। उस व्यक्ति ने मौजूदा हालात की तुलना 1950 के दशक के आखिर में हुए दमन से की—एक ऐसा दौर जिसे कई तिब्बती लोग भारी राजनीतिक उथल-पुथल और सरकारी नियंत्रण के समय के तौर पर याद करते हैं। यह जानकारी &#039;तिब्बत टाइम्स&#039; ने दी है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:42 +0530</pubDate>
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<title>Pope Leo XIV ने America&#45;Iran Peace Deal को सराहा, कहा&#45; Middle East में बढ़ेगा भरोसा और स्थिरता</title>
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<description><![CDATA[ पोप लियो XIV ने बुधवार को ईरान और अमेरिका के बीच होने वाले शांति समझौते का स्वागत किया। शुक्रवार को इस समझौते पर हस्ताक्षर होने हैं। पोप ने उम्मीद जताई कि इस समझौते से मध्य पूर्व में आपसी भरोसा, सुरक्षा और स्थिरता आएगी। एक्स पर एक पोस्ट में, पोप ने इस समझौते को बातचीत और बातचीत के ज़रिए किए गए धैर्यपूर्ण काम का नतीजा बताया। समझौते में शामिल देशों का आभार जताते हुए, पोप ने उम्मीद जताई कि इससे लोगों के बीच बातचीत और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। पोस्ट में लिखा था, मैं इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच हुए समझौते का खुशी के साथ स्वागत करता हूँ, जिस पर शुक्रवार को हस्ताक्षर किए जाएँगे। यह समझौता बातचीत और बातचीत के ज़रिए किए गए धैर्यपूर्ण काम का एक उत्साहजनक नतीजा है। मैं उन देशों का आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने दोनों पक्षों के बीच बैठक कराने और इस समझौते को संभव बनाने के लिए काम किया है। मुझे उम्मीद है कि यह समझौता मध्य पूर्व में आपसी भरोसे, सुरक्षा और स्थिरता को मज़बूत करने में मदद करेगा और लोगों के बीच बातचीत और सहयोग के रास्ते खोलेगा।इसे भी पढ़ें: Shreyas Iyer ने Kohli-Rahul को पछाड़ा, 3000 ODI रन पूरे कर रचा इतिहासउनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही शांति प्रक्रिया में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है। हालांकि महीनों से चल रहे तनाव को खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमति बन गई है, लेकिन राष्ट्रपति ने बुधवार को संकेत दिया कि युद्धविराम अभी भी शर्तों पर आधारित और नाजुक है। मिस्र के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान ट्रंप ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अभी जो समझौता ज्ञापन (MoU) सामने है, वह कोई अंतिम या न बदला जा सकने वाला दस्तावेज़ नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तेहरान आने वाले समय में होने वाले औपचारिक समझौते में तय की गई उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है।इसे भी पढ़ें: Dharamsala में Shubman Gill और KL Rahul का तूफान, Team India ने Afghanistan को बुरी तरह हराया जब पत्रकारों ने समझौते की स्थिति के बारे में पूछा, तो ट्रंप ने मौजूदा शांति की नाजुक स्थिति के बारे में साफ़ तौर पर कहा। राष्ट्रपति ने कहा यह अंतिम नहीं है। यह एक समझौता ज्ञापन है, और अगर मुझे यह पसंद नहीं आया, तो हम वापस उन पर गोलीबारी करने और उनके सिर पर बम गिराने लगेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:41 +0530</pubDate>
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<title>PoJK में घातक कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ़ हिंसक कार्रवाई करने के आरोपों के बाद पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना हो रही है। इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फ़ाउंडेशन (IHRF) ने अधिकारियों पर यह आरोप लगाया है। इस कार्रवाई के कारण 8 जून और 16 जून, 2026 के बीच 32 से ज़्यादा आम नागरिकों की मौत हो गई। एक्स पर शेयर की गई एक पोस्ट में आईएचआरएफ ने &#039;जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी&#039; (JKJAAC) से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ़ बल के अत्यधिक इस्तेमाल की निंदा की। यह संकट तब और बढ़ गया जब अधिकारियों ने 5 जून को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत JKJAAC को &quot;प्रतिबंधित संगठन&quot; घोषित कर दिया। IHRF के अनुसार, इस कदम के बाद पूरे इलाके में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिए गए, संघीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया, कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं और इलाके में आने-जाने पर पाबंदियां लगा दी गईं।इसे भी पढ़ें: Imran Khan की बहन Aleema Khanum ने PIMS के इलाज पर उठाए गंभीर सवाल, मांगी स्वतंत्र जांIHRF ने दावा किया कि 100 से ज़्यादा कार्यकर्ताओं और नेताओं को बिना किसी ठोस वजह के हिरासत में लिया गया है। संगठन ने पाकिस्तान के &#039;प्रिवेंशन ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट&#039; के तहत पत्रकार सोहराब बरकत की गिरफ़्तारी का भी ज़िक्र किया और प्रेस की आज़ादी व अभिव्यक्ति की आज़ादी को लेकर चिंता जताई। संगठन का तर्क है कि हालिया हिंसा PoJK में मानवाधिकारों के उल्लंघन के एक बड़े पैटर्न को दिखाती है। इसने मई 2024 और अक्टूबर 2025 में JKJAAC के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों पर की गई कार्रवाई की ओर भी इशारा किया, जिसमें आम नागरिकों की भी जान गई थी।इसे भी पढ़ें: भारत ने ट्रक पर लादी क्रूज मिसाइल, बटन दबाते ही जो हुआ...IHRF के अनुसार, इस इलाके के लोगों को राजनीतिक भागीदारी, इकट्ठा होने की आज़ादी और संगठन बनाने की आज़ादी पर पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। समूह ने कहा कि ऐसे कदम &#039;इंटरनेशनल कोवेनेंट ऑन सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स&#039; (ICCPR) के तहत पाकिस्तान की ज़िम्मेदारियों का उल्लंघन करते हैं। IHRF ने पाकिस्तान सरकार और PoJK प्रशासन से मांग की कि वे प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग तुरंत बंद करें, इंटरनेट और मोबाइल सेवाएँ बहाल करें, बिना वजह हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करें और JKJAAC पर लगी पाबंदी हटाएँ। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Afghanistan के लिए भारत ने निकाले विमान, भेजी 5 टन की मदद</title>
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<description><![CDATA[ मुश्किल दौर से गुजर रहे अफगानिस्तान की मदद के लिए भारत एक बार फिर आगे आया है। भारत ने मानवीय सहायता के तहत काबुल को 5 टन जरूरी दवाइयों की खेप भेजी। यह कदम सिर्फ राहत सामग्री पहुंचाने तक सीमित नहीं है बल्कि दोनों देशों के दशकों पुराने रिश्तों और भारत की उस नीति को दर्शाता है जिसमें जिसमें पड़ोसी देशों के लोगों के कल्याण को प्राथमिकता दी जाती है। इससे पहले भी भारत ने अफगानिस्तान के स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। हाल ही में भारत ने अफगान स्वास्थ्य अधिकारियों को आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की सौगात दी थी। इनमें नवजात और बच्चों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, वेंटिलेटर, मरीजों की निगरानी करने वाली मशीनें, कार्डियोग्राफ मशीन, प्लास्टिक सर्जरी किट और अन्य विशेष मेडिकल उपकरण शामिल थे। इन संसाधनों से अफगान अस्पतालों की क्षमता बढ़ने की उम्मीद थी। भारत लगातार यह संदेश दे रहा है कि उसकी प्राथमिकता अफगान की जनता है।इसे भी पढ़ें: Afghanistan पर बदला नहीं India का स्टैंड, MEA ने कहा- शांति और विकास पहली प्राथमिकता चाहे खाद्य सुरक्षा का सवाल हो, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो या फिर शिक्षा और कौशल विकास के पहलू। भारत ने हर स्तर पर अफगान लोगों का साथ निभाने की कोशिश की। संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने साफ कहा है कि वह अफगान में शांति, स्थिरता और विकास के लिए सहयोग जारी रखेगा। दरअसल भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते सिर्फ कूटनीतिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भी हैं। दोनों देशों के संबंध सदियों पुराने हैं। पिछले दो दशकों में भारत ने अफगानिस्तान के विकास में अरबों डॉलर का निवेश किया। काबुल में संसद भवन का निर्माण, अफगान भारत मैत्रीबान, सड़कों और बिजली परियोजनाओं का विकास, अस्पताल और स्कूलों की स्थापना जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट भारत की साझेदारी की मिसाल थी। इसके अलावा हजारों अफगान छात्रों को भारत में पढ़ाई के लिए छात्रवधियां भी दी गई। यही वजह है कि अफगानिस्तान में भारत के प्रति सकारात्मक भावना आज भी दिखाई देती है। सत्ता परिवर्तन के बाद भी भारत ने अपने मानवीय सहयोग को जारी रखा और आम अफगान नागरिकों की मदद पहुंचाने का प्रयास किया। यहां पर एक और बात गौर करने वाली है। इसे भी पढ़ें: Afghanistan में Pakistan की एयरफोर्स ने किया हमला, भड़का तालिबान!लंबे समय तक अफगानिस्तान को अपने प्रभाव क्षेत्र के रूप में देखने वाला पाकिस्तान आज नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। आज तालिबान के साथ सीमा विवाद, सुरक्षा संबंधी मुद्दों और व्यापारिक बाधाओं को लेकर लगातार तनाव बढ़ा हुआ है। ऐसे में अफगानिस्तान अब व्यापार और संपर्क के लिए नए विकल्प तलाश रहा है। और इसी रणनीति के तहत तालिबान भारत से करीबी चाहता है और भारत भी लगातार अफगान जनता की मदद करते आया। यहां पर एक और बड़ी बात है। भारत और ईरान के चाबहार पोर्ट के जरिए व्यापारिक संपर्क बढ़ाने की कोशिशें अफगानिस्तान की इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:40 +0530</pubDate>
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<title>भारत का अगला शिकार है ये देश, बड़ी तैयारी शुरू, भेजे गए हथियार</title>
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<description><![CDATA[ एक देश भारत के लिए बहुत बड़ा सरदर्द बन गया है। यह देश भारत विरोधी अपराधियों और आतंकियों का नया अड्डा बन गया है। इसी वजह से यह देश भारत के टारगेट पर आ गया है। यह देश भारत का अगला बड़ा शिकार बनने वाला है। इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि पाकिस्तानी आतंकियों के साथ-साथ ये देश अब ख़स्तानियों का नया घर बन गया है। अभी तक खालिस्तानी कनाडा से अपना सबसे बड़ा नेटवर्क चला रहे थे। लेकिन भारत सरकार के एक्शन के बाद कनाडा की सरकार ने खालिस्तानियों पर नकेल कसनी शुरू कर दी। जिसके बाद पाकिस्तान की मदद से खालिस्तानियों ने अपना नेटवर्क इस देश में बनाना शुरू कर दिया। अजरबैजान ही भारत का अगला बड़ा टारगेट है। वैसे हम आपको बता दें कि भारत ने अजरबैजान का तगड़ा इलाज शुरू भी कर दिया है। मुस्लिम देश अज़रबैजान की गर्दन तोड़ने के लिए उसके पड़ोसी देश में भारत के हथियार पहुंचा दिए गए हैं। इसे भी पढ़ें: Afghanistan के लिए भारत ने निकाले विमान, भेजी 5 टन की मदददरअसल यह तो आप जानते ही हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अजरबैजान ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया था। अजरबैजान को पाकिस्तान और तुर्की का पूरा समर्थन मिलता है। ये तीनों देश मिलकर भारत के खिलाफ सबसे ज्यादा षड्यंत्र कर रहे हैं। इसी कड़ी में अजरबैजान की राजधानी बाकू में एक बहुत बड़ी भारत विरोधी कांफ्रेंस हुई। इस कांफ्रेंस में खुलकर भारत को बर्बाद करने की बातें की गई। बाकू में हुई इसी कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तानी और ख़ालिस्तानी आतंकी पहुंचे। भारत में आतंक फैलाने के लिए इन सभी ने सिखों और मुस्लिमों का नाम लेना शुरू कर दिया। इस कांफ्रेंस में गद्दार ख़ालिस्तानियों ने कहा कि हमारे सिख भाई परेशान है| जबकि असलियत यह है कि ख़ालिस्तानी सिख नहीं है। ख़ालिस्तानियों का सिख धर्म से कुछ लेना देना नहीं है। भारत के सिखों का नाम लेकर यह ख़ालिस्तानी आतंकी पाकिस्तान के टुकड़ों पर पलते हैं और अब इन्होंने अपनी नई दुकान अजरबैजान में खोल ली है। अजरबैजान में हुई इस भारत विरोधी बैठक में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा पहुंचे। इसी के साथ कनाडा, यूके और अमेरिका से आए ख़ालिस्तानी समर्थकों ने भी इस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। इसे भी पढ़ें: भारत के दो दोस्त धांसू डील को तैयार, एक बनाएगा विमान, दूसरा बनाएगा हथियार!इस कांफ्रेंस की शुरुआत में कनाडा में मारे गए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निजर के लिए मौन रखा गया। खतरे की बात यह है कि अजरबैजान में हुए इस सम्मेलन के 11 दिन बाद ही गुजरात के स्कूलों और फिर उसके बाद मंदिरों और सरकारी इमारतों में ब्लास्ट की धमकियां मिलनी शुरू हो गई। धमकी भरे ईमेल खालीस्तान नेशनल आर्मी ने भेजे थे। यह साबित करता है कि भारत में दहशत फैलाने का यह पैटर्न अजरबैजान की बैठक में तैयार किया गया था। इसी कड़ी में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और महाराष्ट्र में भी धमकी भरे ईमेल आए। इनमें भी हिंदू मंदिरों, सरकारी इमारतों, स्कूलों और रेल नेटवर्क को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। यानी पानी सर के ऊपर जा चुका है। कुछ लोगों का कहना है कि भारत ने अजरबैजान के पड़ोसी और दुश्मन अर्मेनिया को हथियार दिए थे। इसीलिए अजरबैजान खालीस्तानियों को अपनी जमीन दे रहा है। लेकिन भारत ने अज़रबैजान के पक्के इलाज की तैयारी शुरू कर दी है। भारत अर्मेनिया में एक बहुत बड़ा नेटवर्क बना रहा है। हो सकता है कि आने वाले दिनों में आपको अजरबैजान में भी अज्ञात हमलावर दिख जाएं। वैसे भारत ने अर्मेनिया में गोला बारूद भर दिया है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:39 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान में बड़ी कंपनियां बंद? जिहाद ने बनाया &amp;apos;भिखारी&amp;apos;!</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब पानी सिर के ऊपर बहने लगा है। देश पर इस समय करीब 4.8 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाने का भारी दबाव है। लेकिन कर चुकाना तो दूर अब दुनिया के बड़े-बड़े निवेशकों का भरोसा भी पाकिस्तान से पूरी तरह से उठ चुका है। नतीजा यह है कि विदेशी निवेश यानी एफडीआई तेजी से पतालोक में जा रहा है। कई बड़ी देसी और विदेशी कंपनियां पाक छोड़कर जा रही हैं। जानकार इस स्थिति के लिए उसकी विकास की जगह जिहादी सोच वाली पॉलिसी को दोष दे रहे हैं। इसे भी पढ़ें: PoJK में घातक कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही हैटाइम्स ऑफ ओमान की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक साल 2026 में पाकिस्तान में आने वाला विदेशी निवेश करीब 33% गिरकर सिर्फ 1.19 अरब डॉलर रह गया है। साथियों जरा सोचिए साल 2023-24 में यह 1.92 अरब डॉलर था जो अगले साल गिरकर 1.83 अरब डॉलर हुआ और अब तो यह बिल्कुल औंधे मुंह गिर गया है। अगर देश की कुल जीडीपी के हिसाब से देखें तो विदेशी निवेश अब 0.45% से भी नीचे आ चुका है। बाहर का कोई भी देश अब पाकिस्तान में ₹1 भी लगाने को तैयार नहीं है। माहौल इतना खराब है कि कई मल्टीीनेशनल कंपनियां अब बुरिया बिस्तर समेटकर पाकिस्तान छोड़ रही हैं। साथियों, हाल ही में मशहूर कंपनी PNG ने अपना मैन्युफैक्चरिंग यूनिट वहां पर बंद करने का फैसला ले लिया। इसके अलावा शेल, टेलीनोर, Uber, Yamaha और एनी जैसे दिग्गज कंपनियां या तो पाकिस्तान से बाहर निकल चुकी हैं या अपना कारोबार समेट रही हैं। कई विदेशी बैंक और दवा कंपनियां भी देश छोड़कर भाग रही हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि इस मंदी का पाकिस्तान के आम लोगों पर क्या असर हो रहा है। दरअसल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से इंपोर्ट यानी विदेशों से आने वाले सामान पर टिकी है। फ्यूल से लेकर खाने-पीने की चीजों तक सब बाहर से आता है। हर साल पाकिस्तान अपनी जीडीपी का करीब 4% हिस्सा सिर्फ खाड़ी देशों से तेल और फर्टिलाइजर खरीदने में उड़ा देता है। इसे भी पढ़ें: भारत का अगला शिकार है ये देश, बड़ी तैयारी शुरू, भेजे गए हथियारडॉलर की कमी के कारण अब देश में तेल और बिजली का भयंकर संकट पैदा हो गया है। हालात इतने बद से बदतर हो चुके हैं कि सरकार को बिजली बचाने के लिए स्कूल बंद करने पड़ रहे हैं और दफ्तरों में काम के दिन घटाने पड़ रहे हैं। लेबर फोर्स सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि देश में बेरोजगारी दर बढ़कर करीब 7% तक जा पहुंचा है। पाकिस्तान के ऊपर कर्ज का बोझ कितना है? इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि वित्त वर्ष 2025 के आखिर तक देश का कुल सरकारी कर्ज बढ़कर करीब 80.52 ट्रिलियन रुपए हो गया है। वहीं बाहरी कर्ज भी 138 अरब डॉलर के पार जा पहुंचा है। यह कर्ज अब पाकिस्तान की कुल जीडीपी के करीब 70% के बराबर है। आर्थिक जानकारों का साफ कहना है कि अगर पाकिस्तान ने समय रहते अपनी आदतें सुधारी होती और कट्टरवाद, आतंकवाद या जिहादी सोच को पनपने नहीं देता और उसकी जगह विकास और आर्थिक सुधारों पर ध्यान दिया होता तो आज वो कंगाली की कगार पर नहीं खड़ा होता। आज दुनिया में उसकी छवि एक भिखारी देश जैसी नहीं बनी होती। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:39 +0530</pubDate>
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<title>भारत जो चाहे वो कर सकता है, कभी किसी ने उस पर हमला किया तो... G7 के मंच से मोदी के सामने ट्रंप ने दुनिया को दिया बड़ा मैसेज</title>
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<description><![CDATA[ पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से कहा कि हमने हमेशा कहा है कि समुद्री रास्ते से आने-जाने की आज़ादी पक्की होनी चाहिए और हमें इस बात पर ज़ोर भी देना चाहिए। समुद्री व्यापार के क्षेत्र में दुनिया के अलग-अलग समुद्रों में लाखों भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। मेरा मानना ​​है कि उनकी सुरक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है। मुझे भरोसा है कि (ईरान के साथ) समझौते में नाविकों की सुरक्षा पक्की की जाएगी और उसे प्राथमिकता दी जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फ्रांस में हमारी कुछ बहुत अच्छी बैठकें हुईं। यह G7 है। इसके बाद G2 और फिर G20 होने वाली है। खास तौर पर, भारत के प्रधानमंत्री मोदी के साथ हमारी बहुत अच्छी बातचीत हुई। हम ट्रेड डील कर रहे हैं। अमेरिका और भारत के बीच बहुत कुछ हो रहा है। अमेरिका अब तक के सबसे अच्छे दौर से गुज़र रहा है। हमारे पास 19.2 ट्रिलियन डॉलर से ज़्यादा आ रहे हैं, और हम फ़ैक्टरियाँ बना रहे हैं, हम सब कुछ बना रहे हैं। प्रधानमंत्री अमेरिका में बहुत कुछ बना रहे हैं। वह अमेरिका में काफ़ी पैसा खर्च कर रहे हैं, इसलिए हम उनके इस काम की तारीफ़ करते हैं। लेकिन मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि वह लंबे समय से मेरे दोस्त रहे हैं, और हमारे रिश्ते हमेशा बहुत अच्छे रहे हैं, और आपके साथ होना बहुत अच्छा लग रहा है। इसे भी पढ़ें: भारत का अगला शिकार है ये देश, बड़ी तैयारी शुरू, भेजे गए हथियारजब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें उम्मीद है कि भारत पश्चिम एशिया में कोई भूमिका निभाएगा, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हां, मुझे उम्मीद है। मुझे लगता है कि भारत हर चीज़ में बड़ी भूमिका निभाता है। जब तक वह (पीएम नरेंद्र मोदी) नेता हैं, भारत बड़ी भूमिका निभाता रहेगा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी देखने में शांत लेकिन वार्ता में बेहद सख्त हैं। हम बहुत जल्द भारत के साथ ट्रेड डील फाइनल करने वाले हैं। मैं भविष्य में कभी भारत भी जाऊंगा। मैं भारत का बहुत सम्मान करता हूं।Sharing my remarks during the meeting with President Trump.@POTUS @realDonaldTrump https://t.co/48Jqv6uka0— Narendra Modi (@narendramodi) June 17, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:38 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran Peace Treaty 14&#45;point MoU Text | परमाणु हथियारों पर रोक, होर्मुज़ जलमार्ग खुलेगा और मिलेगा $300 अरब का फंड</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में शांति की नई सुबह की उम्मीदों के बीच, अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षरित ऐतिहासिक संधि का पूरा विवरण सार्वजनिक कर दिया गया है। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं—अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन—द्वारा डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित इस &#039;जेंटलमैन एग्रीमेंट&#039; (आपसी सम्मान पर आधारित समझौता) के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी अधिकारियों ने 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) का पूरा आधिकारिक पाठ जारी किया। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत न केवल लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की घोषणा की गई है, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के आर्थिक पुनरुद्धार के लिए $300 अरब का फंड बनाने पर भी सहमति बनी है। इसे भी पढ़ें: India vs Afghanistan ODI | &#039;भारत की जर्सी पहनते ही बदल जाते हैं अर्शदीप...&#039;, आईपीएल के खराब फॉर्म को भुलाकर चमके बाएं हाथ के पेसर, मनोज तिवारी ने की तारीफअमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षरित 14-सूत्रीय MoU (समझौता ज्ञापन) का पूरा पाठ इस प्रकार है:1. संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान तथा मौजूदा युद्ध में उनके सहयोगी, इस MoU पर हस्ताक्षर करके लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने की घोषणा करते हैं। वे यह वचन देते हैं कि अब से वे एक-दूसरे के खिलाफ कोई युद्ध या सैन्य अभियान शुरू नहीं करेंगे, एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग या धमकी देने से बचेंगे, और लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता सुनिश्चित करेंगे।अंतिम समझौता लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध की स्थायी समाप्ति और इस पैराग्राफ के अन्य प्रावधानों की पुष्टि करेगा।2. संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने तथा एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का वचन देते हैं।3. संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान बातचीत करने और अधिकतम 60 दिनों (जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है) के भीतर अंतिम समझौता करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।4. इस MoU पर हस्ताक्षर होते ही, संयुक्त राज्य अमेरिका इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकेबंदी और किसी भी प्रकार की बाधा या रुकावट को हटाना शुरू कर देगा और 30 दिनों के भीतर नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से समाप्त कर देगा।इस अवधि के दौरान, जहाजों की आवाजाही उस अनुपात में होगी जिस अनुपात में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान द्वारा युद्ध-पूर्व आवाजाही को बहाल किया जा रहा है।संयुक्त राज्य अमेरिका अंतिम समझौते के बाद 30 दिनों के भीतर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के निकटवर्ती क्षेत्रों से अपनी सेनाओं को हटाने का भी वचन देता है।5. इस MoU पर हस्ताक्षर होने पर, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान अपनी सर्वोत्तम कोशिशों से फारस की खाड़ी से ओमान सागर तक और इसके विपरीत दिशा में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए व्यवस्था करेगा, जिसके लिए केवल 60 दिनों तक कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही तुरंत शुरू हो जाएगी और तकनीकी व सैन्य बाधाओं को दूर करने तथा बारूदी सुरंगों को हटाने (demining) की इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, इसे 30 दिनों के भीतर पूरी तरह से बहाल कर दिया जाएगा।इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान, फारस की खाड़ी के अन्य तटीय देशों के साथ चर्चा करके होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं को परिभाषित करने के लिए ओमान सल्तनत के साथ बातचीत करेगा। यह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के तटीय देशों के संप्रभु अधिकारों और लागू अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप है।6. संयुक्त राज्य अमेरिका, क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब अमेरिकी डॉलर की एक निश्चित और आपसी सहमति वाली योजना तैयार करने का काम करेगा।इस योजना को लागू करने की प्रक्रिया को 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते के हिस्से के तौर पर तय किया जाएगा।संबंधित वित्तीय लेन-देन के लिए ज़रूरी सभी लाइसेंस, छूट और अनुमतियाँ संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा दी जाएँगी।7. अमेरिका, अंतिम समझौते के हिस्से के तौर पर, एक तय समय-सीमा में ईरान के खिलाफ सभी तरह के प्रतिबंधों को खत्म करने का वादा करता है। इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव, IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्ताव और अमेरिका के सभी एकतरफा प्रतिबंध (प्राथमिक और माध्यमिक) शामिल हैं।ईरान और अमेरिका ऊपर बताए गए प्रतिबंधों को खत्म करने के मुद्दे के महत्व को मानते हैं और इन पर आपसी सहमति बनाने के लिए बातचीत में तुरंत इन मुद्दों पर चर्चा करने की इच्छा जताते हैं।8. ईरान फिर से पुष्टि करता है कि वह परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा और न ही उनका विकास करेगा।अमेरिका और ईरान, पैराग्राफ 7 में बताए गए समय-सीमा के अनुसार, आपसी सहमति से तय किए गए तरीके से जमा किए गए संवर्धित (enriched) मटीरियल के निपटारे पर सहमत हुए हैं। इसमें IAEA की देखरेख में साइट पर ही &#039;डाउनब्लेंडिंग&#039; (संवर्धन स्तर को कम करना) की न्यूनतम प्रक्रिया अपनाई जाएगी।दोनों पक्ष ईरान की परमाणु जरूरतों से जुड़े संवर्धन और अन्य आपसी सहमति वाले मामलों पर चर्चा करने के लिए भी सहमत हुए हैं, बशर्ते अंतिम समझौते में एक संतोषजनक ढांचा तय हो जाए।अंतिम समझौता इस पैराग्राफ के प्रावधानों की पुष्टि करेगा। अमेरिका और ईरान ऊपर बताए गए परमाणु मुद्दों के महत्व को मानते हैं और इन पर आपसी सहमति बनाने के लिए बातचीत में तुरंत इन मुद्दों पर चर्चा करने की इच्छा जताते हैं।9. अंतिम समझौता होने तक, अमेरिका और ईरान यथास्थिति (status quo) बनाए रखने पर सहमत हैं। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति बनाए रखेगा और  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Middle East Ceasefire | अमेरिका और ईरान ने डिजिटल रूप से किए ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर, होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगा</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में तीन महीने से अधिक समय से जारी भीषण संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बेहद ऐतिहासिक और अप्रत्याशित सफलता मिली है। कई दिनों की गहन और गोपनीय वार्ताओं के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका (US) और ईरान ने डिजिटल रूप से एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके ईरानी समकक्ष मसूद पेज़ेशकियन द्वारा हस्ताक्षरित यह समझौता क्षेत्र में तनाव कम करने और वैश्विक तेल आपूर्ति को बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने वर्साय से निकलते हुए पत्रकारों से इस बात की पुष्टि करते हुए कहा: &quot;इस पर हस्ताक्षर हो गए हैं। मैंने वर्साय में इस पर हस्ताक्षर किए। अभी-अभी हस्ताक्षर किए हैं।&quot;ईरान ने पुष्टि की कि समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हैं, साथ ही इस बात पर जोर दिया कि यह US की &#039;विफलता&#039; को उजागर करता है। हालांकि, उसने आगाह किया कि असली परीक्षा अब शुरू होती है क्योंकि समझौते को अब लागू करने की आवश्यकता है। यह उल्लेखनीय है कि यह समझौता दोनों पक्षों को समझौते की अंतिम शर्तों पर बातचीत करने के लिए 60 दिन का समय देगा।सरकारी प्रसारक इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (IRNA) ने ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई के हवाले से कहा, &quot;इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) के पाठ को राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के साथ अंतिम रूप दिया गया था - अब समझौते के कार्यान्वयन का परीक्षण करने का समय है।&quot;होर्मुज, पुनर्निर्माण कोष और संवर्धित यूरेनियमयह समझौता होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने का मार्ग प्रशस्त करेगा, जो एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है जिसके माध्यम से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है। समझौते के तहत, US उन तेल प्रतिबंधों को भी हटा देगा जिन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है।यह समझौता US को क्षेत्रीय देशों द्वारा समर्थित 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर के पुनर्निर्माण कोष की रिहाई की सुविधा प्रदान करने की भी अनुमति देगा, एक बार अंतिम समझौते पर सहमति बन जाने के बाद।हालांकि, ईरान का परमाणु कार्यक्रम एक विवादास्पद मुद्दा बना रहेगा। समझौते में कहा गया है कि इस्लामिक गणराज्य अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम करेगा, संभवतः अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की &quot;निगरानी में साइट पर डाउन-ब्लेंडिंग&quot; द्वारा।क्या शुक्रवार की बैठक रद्द हो गई?इससे पहले, US के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल को शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद-बाघेर घलीबाफ से मिलना था, जिसे एक शीर्ष अमेरिकी अधिकारी ने &quot;परमाणु वार्ता की ओर बढ़ने&quot; के लिए महत्वपूर्ण बताया था। हालांकि, समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर के बाद, बकाई ने कहा है कि शुक्रवार की वार्ता की पुष्टि नहीं हुई है। गौरतलब है कि Axios ने एक बड़े अधिकारी के हवाले से बताया है कि वॉशिंगटन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अभी भी शक में है, लेकिन उसे &quot;कुछ दिनों या हफ़्तों में&quot; पता चल जाएगा कि क्या मध्य पूर्व का यह देश उस समझौते को लागू करने को लेकर गंभीर है, जिसे &quot;जेंटलमैन एग्रीमेंट&quot; (आपसी सहमति वाला समझौता) कहा गया है।बघाई ने कहा, &quot;शुक्रवार की बैठक कुछ घंटे पहले तक तय थी, लेकिन जब यह तय हुआ कि दोनों पक्षों (ईरान और अमेरिका) के राष्ट्रपति समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, तो फ़िलहाल शुक्रवार की बैठक पर विचार-विमर्श रोकने का फ़ैसला किया गया।&quot; Stay updated with International
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:37 +0530</pubDate>
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<title>Prabhasakshi NewsRoom: Peace Deal से America, Iran और Israel ने क्या खोया? क्या हासिल किया?</title>
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<description><![CDATA[ वर्षों से टकराव, प्रतिबंध, समुद्री तनाव और परमाणु विवाद में उलझे अमेरिका और ईरान ने अब युद्धविराम, आर्थिक सहयोग, होरमुज जलडमरूमध्य को खोलने, प्रतिबंध हटाने और परमाणु वार्ता के लिए साठ दिन की समयसीमा तय करने वाला चौदह सूत्रीय समझौता किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस समझौते पर हस्ताक्षर कर दिये हैं। समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि अमेरिका ईरान पर लगे लगभग सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने, फ्रीज किये हुए धन को जारी करने और तीन सौ अरब डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज पर काम करने के लिए तैयार हो गया है। दूसरी ओर ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने, समृद्ध यूरेनियम पर निगरानी स्वीकार करने और होरमुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का वादा किया है।अमेरिका को क्या मिला?लेकिन इस समझौते की सबसे बड़ी कहानी उसके राजनीतिक और सामरिक निहितार्थों में छिपी है। अगर अमेरिका के नजरिए से देखें तो उसे इस समझौते से कई तात्कालिक लाभ मिले हैं। सबसे पहला लाभ यह है कि वॉशिंगटन ने एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का खतरा टाल दिया। पिछले महीनों में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ती सैन्य झड़पें पश्चिम एशिया को व्यापक युद्ध की ओर धकेल रही थीं। अब अमेरिका ने सैन्य टकराव की जगह कूटनीतिक रास्ता चुनकर खुद को लंबी और महंगी लड़ाई से बचा लिया है। दूसरा बड़ा लाभ यह है कि ईरान ने औपचारिक रूप से दोबारा यह स्वीकार किया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में समृद्ध यूरेनियम के निस्तारण पर सहमति भी अमेरिका के लिए कूटनीतिक जीत मानी जा रही है। तीसरा लाभ होरमुज जलडमरूमध्य का खुलना है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित होगी और तेल कीमतों में स्थिरता आएगी, जिसका सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।इसे भी पढ़ें: Middle East Ceasefire | अमेरिका और ईरान ने डिजिटल रूप से किए ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर, होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगालेकिन अमेरिका को इस समझौते से भारी राजनीतिक और सामरिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। अमेरिकी विपक्ष और कई रिपब्लिकन नेताओं ने इसे आत्मसमर्पण जैसा करार दिया है। आलोचकों का कहना है कि ईरान को प्रतिबंधों से राहत, तेल निर्यात की अनुमति, फ्रीज किये हुए धन की वापसी और विशाल पुनर्निर्माण पैकेज मिल गया, जबकि बदले में अमेरिका को केवल ईरान का अस्पष्ट वादा मिला है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। यह भी आशंका जताई जा रही है कि ईरान भविष्य में फिर होरमुज जलडमरूमध्य को दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है। कई अमेरिकी रणनीतिक विशेषज्ञ इसे दशकों की सबसे बड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा भूल बता रहे हैं। सबसे बड़ा खतरा यह है कि अमेरिका की कठोर शक्ति की छवि कमजोर हुई है और उसके पारंपरिक सहयोगियों में अविश्वास बढ़ा है।ईरान को क्या मिला?वहीं ईरान के लिए यह समझौता आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से किसी जीवनदान से कम नहीं है। वर्षों के प्रतिबंधों ने उसकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह तोड़ दिया था। अब यदि प्रतिबंध हटते हैं तो ईरान को वैश्विक व्यापार, विदेशी निवेश और तेल निर्यात के रास्ते दोबारा मिल जाएंगे। अमेरिका ने फ्रीज किये हुए ईरानी धन और संपत्तियों को लौटाने की बात भी स्वीकार की है। साथ ही तीन सौ अरब डॉलर का पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास पैकेज ईरान की टूटी हुई अर्थव्यवस्था को नई सांस दे सकता है। इसके साथ ही अमेरिका ने नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और अंतिम समझौते के बाद अपने सैन्य बलों को ईरान के आसपास से हटाने का भी आश्वासन दिया है। इससे तेहरान पर वर्षों से बना सैन्य दबाव कम होगा।रणनीतिक स्तर पर ईरान की सबसे बड़ी जीत यह है कि उसने बिना शासन परिवर्तन के अमेरिकी दबाव को झुकने पर मजबूर किया। पश्चिम एशिया में अब ईरान केवल एक अलग थलग देश नहीं, बल्कि बातचीत की मेज पर बराबरी से बैठा शक्ति केंद्र बनकर उभरा है। होरमुज जलडमरूमध्य पर उसका प्रभाव पहले से ज्यादा मजबूत हो गया है। साथ ही लेबनान में हिजबुल्लाह और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर भी उसे अप्रत्यक्ष बढ़त मिली है।हालांकि ईरान के लिए खतरे भी कम नहीं हैं। उसे अपने परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी स्वीकार करनी होगी। समृद्ध यूरेनियम के भंडार को नियंत्रित करने का दबाव रहेगा। यदि अंतिम समझौता नहीं हुआ तो प्रतिबंध दोबारा लौट सकते हैं। साथ ही अमेरिका और उसके सहयोगी भविष्य में किसी भी उल्लंघन को बहाना बनाकर फिर कठोर कार्रवाई कर सकते हैं। इसलिए तेहरान के लिए यह अवसर जितना बड़ा है, जोखिम भी उतना ही गहरा है।इजराइल को क्या मिला?इस पूरे समझौते में सबसे बड़ा झटका इजराइल को लगा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पूरी राजनीतिक छवि ईरान विरोधी कठोर नीति और अमेरिका पर प्रभाव रखने वाले नेता की रही है। लेकिन यह समझौता उस छवि को तोड़ता दिख रहा है। इजराइल के विपक्षी नेता याएर लापिद ने कहा है कि नेतन्याहू ने ऐतिहासिक जीत का वादा किया था, लेकिन परिणाम में अमेरिका के साथ संकट, ईरान के लिए खुला होरमुज, रिवोल्यूशनरी गॉर्ड्स के लिए धन और इजराइल पर तनी बैलिस्टिक मिसाइलें मिलीं।दरअसल, इजराइल की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब अमेरिका ईरान के साथ टकराव नहीं बल्कि समझौते के रास्ते पर है। इससे इजराइल की स्वतंत्र सैन्य कार्रवाई की गुंजाइश सीमित हो सकती है। लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान पर भी दबाव बढ़ा है। इजराइली सुरक्षा प्रतिष्ठान को डर है कि यह समझौता ईरान को क्षेत्रीय प्रभाव मजबूत करने का समय देगा। इस तरह नेतन्याहू अब ऐसी स्थिति में फंस गए हैं जहां उन्हें या तो अपने सबसे बड़े सहयोगी अमेरिका से टकराना होगा या फिर समझौते को स्वीकार कर राजनीतिक नुकसान उठाना होगा। खासतौर पर इजराइल में जल्द ही चुनाव होने हैं ऐसे में यह समझौता उनके लिए बड़ी राजनीतिक मुसीबत बन सकता है।इजराइल के भीतर सबसे गहरी बेचैनी इस बात को लेकर भी है क ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:36 +0530</pubDate>
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<title>हेती में यूएन समर्थित ‘गिरोह दमन बल’ से सुरक्षा बहाली की नई उम्मीद</title>
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<description><![CDATA[ गिरोह हिंसा और गहराते सुरक्षा संकट से जूझ रहे हेती में यूएन समर्थित ‘गिरोह दमन बल’ की तैनाती से हालात सुधरने की नई उम्मीद जागी है. यह मिशन देश में सुरक्षा बहाल करने के लिए हेती के अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेगा. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:39:06 +0530</pubDate>
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<title>यमन में भूख संकट कम करने व शान्ति स्थापना के लिए तेज़ कार्रवाई की अपील</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों ने यमन में बढ़ती भूख और संकट को रोकने व स्थाई शान्ति की दिशा में प्रयास तेज़ करने की अपील की है. यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद को बताया कि हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच 2022 का युद्धविराम अब भी लागू है, लेकिन युद्ध अब तक सुलझा नहीं है और इस अनिश्चितता की क़ीमत यमन की जनता चुका रही है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:14:32 +0530</pubDate>
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<title>अब Europe में भी &amp;apos;Make in India&amp;apos; की गूंज, Slovakia के साथ Joint Defence Production पर बनी सहमति</title>
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<description><![CDATA[ भारत और स्लोवाकिया ने सोमवार को रक्षा सहयोग पर एक &#039;लेटर ऑफ़ इंटेंट&#039; (LoI) पर हस्ताक्षर किए। इसका मकसद दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और सहयोग को बढ़ावा देना है, जो दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। इस बात की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रातिस्लावा में स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की। दोनों देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का ज़िक्र करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में सहयोग, आपसी भरोसे और साझा रणनीतिक सोच के ऊँचे स्तर का सबूत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा रक्षा सहयोग हमारे गहरे आपसी भरोसे और रणनीतिक तालमेल का सबूत है। मुझे खुशी है कि हमने आज इस अहम क्षेत्र में &#039;लेटर ऑफ़ इंटेंट&#039; पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे रक्षा उद्योगों के बीच संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और सहयोग को नई गति मिलेगी।इसे भी पढ़ें: G7 Summit के लिए PM Modi रवाना, President Macron के साथ होगी बड़ी बैठक, कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चाफिको ने भी अपनी बात रखते हुए रक्षा क्षेत्र में सहयोग करने में दिलचस्पी दिखाई। स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं भी रक्षा उद्योग के क्षेत्र में सहयोग करने में दिलचस्पी रखता हूँ। दोनों नेताओं ने कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की और मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच बातचीत और कूटनीति के ज़रिए शांति और स्थिरता बनाए रखने के अपने संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत और स्लोवाकिया वैश्विक मंच पर भी करीबी तालमेल के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हम इस बात पर सहमत हैं कि सभी विवादों और तनावों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया जाना चाहिए। एक और अहम घटनाक्रम में, पीएम मोदी ने लेबर माइग्रेशन (कामगारों के आवागमन) पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) की घोषणा की, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच पेशेवरों और कुशल कामगारों की आवाजाही को आसान बनाना है।इसे भी पढ़ें:  Slovakia पहुंचते ही PM मोदी का हुआ जोरदार स्वागत, सामने आया वीडियोप्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आज हमने अपने दोनों देशों के बीच पेशेवरों और कुशल कामगारों की आवाजाही को बढ़ाने के लिए लेबर माइग्रेशन पर एक MoU की घोषणा की। हम जल्द ही सोशल सिक्योरिटी (सामाजिक सुरक्षा) पर भी एक MoU को अंतिम रूप देंगे। प्रधानमंत्री ने अपने स्लोवाक समकक्ष को भारत आने का न्योता भी दिया। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की ओर से, मैं आपको भारत आने का निमंत्रण देता हूँ, और मुझे खुशी है कि आपने सार्वजनिक रूप से इस निमंत्रण को स्वीकार किया है।&quot;दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत से भारत-स्लोवाकिया संबंधों में बढ़ती गतिशीलता का पता चला; दोनों पक्षों ने रक्षा, व्यापार, वर्कफोर्स मोबिलिटी (कामगारों की आवाजाही) और अंतरराष्ट्रीय मामलों में सहयोग को और गहरा करने की इच्छा जताई। रक्षा सहयोग पर &#039;लेटर ऑफ़ इंटेंट&#039; (इरादा पत्र) पर हस्ताक्षर से रक्षा निर्माण और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है, जिससे भारत और स्लोवाकिया के बीच रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी।इसे भी पढ़ें: PM Modi बोले- Slovakia संग संबंधों को मिलेगी नई गति, Green Tech पर होगा बड़ा फोकसपीएम मोदी ने अपने संबोधन में भारत-स्लोवाकिया संबंधों को &quot;व्यापक साझेदारी&quot; (Comprehensive Partnership) के स्तर तक ले जाने की घोषणा की। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री फिको का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें अनुभवी नेता और भारत का सच्चा दोस्त बताया। पीएम मोदी ने कहा कि मुझे खुशी है कि आज मुझे उनसे मिलने और हमारे संबंधों में एक ऐतिहासिक पल का गवाह बनने का मौका मिला। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया की पहली यात्रा है। मुझे खुशी है कि इस ऐतिहासिक मौके पर हमने अपने संबंधों को &#039;व्यापक साझेदारी&#039; के स्तर तक ले जाने का फैसला किया है। यह हमारे आपसी भरोसे, साझा प्राथमिकताओं और भविष्य के लिए एक साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है। इससे पहले, ऐतिहासिक ब्रातिस्लावा कैसल के सामने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी का औपचारिक स्वागत किया। कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा करने से पहले, प्रधानमंत्री फिको ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>3 महीने बाद Strait of Hormuz से निकला पहला तिरंगा लगा जहाज, LNG Carrier &amp;apos;Disha&amp;apos; ने बढ़ाया देश का मान</title>
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<description><![CDATA[ शिपिंग मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम द्वारा संचालित भारतीय एलएनजी कैरियर &#039;दिशा&#039; ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर लिया है। 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी कार्गो ले जा रहा &#039;दिशा&#039;, पिछले तीन महीनों से ज़्यादा समय में युद्ध क्षेत्र से बाहर निकलने वाला भारत का झंडा लगा पहला एलएनजी वाहक जहाज़ है। इसे भी पढ़ें: US-Iran डील ने Dalal Street पर मचाई धूम, Sensex में 736 अंकों का ज़बरदस्त उछालएलएनजी कैरियर &#039;दिशा&#039; 18 जून तक भारत पहुंचेगा। पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के डायरेक्टर ओपेश कुमार शर्मा ने पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह जहाज़ 18 जून को गुजरात के दहेज पोर्ट पर पहुंचेगा।शर्मा ने कहा कि अभी की बात करें तो, शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम द्वारा संचालित एलएनजी कैरियर दिशा ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर लिया है और यह 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी कार्गो लेकर आ रहा है। भारत आने पर इस जहाज़ के दहेज पहुंचने की उम्मीद है, जो संभवतः 18 तारीख को होगा। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने और उन्हें ज़रूरी मदद देने के लिए &#039;डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ शिपिंग&#039; विदेश मंत्रालय, विदेशों में भारतीय मिशनों, शिपिंग कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।इसे भी पढ़ें: UN ने किया US-Iran Peace Deal का स्वागत, Europe बोला- यह शांति का बड़ा मौकाकंट्रोल रूम ने 12,700 से ज़्यादा कॉल संभालेशर्मा ने आगे बताया कि मंत्रालय द्वारा बनाए गए कंट्रोल रूम ने शुरू होने के बाद से 12,700 से ज़्यादा कॉल और 28,000 से ज़्यादा ईमेल संभाले हैं। उन्होंने कहा, &quot;कंट्रोल रूम ने शुरू होने के बाद से 12,737 कॉल और 28,299 से ज़्यादा ईमेल संभाले हैं। पिछले 96 घंटों में समुद्री कर्मचारियों, उनके परिवारों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों से कुल 406 कॉल और 784 ईमेल मिले हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने अब तक 3,587 से ज़्यादा भारतीय समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षित वापसी में मदद की है, जिनमें पिछले 96 घंटों में वापस आए 50 लोग भी शामिल हैं। शर्मा ने कहा कि मंत्रालय ने &#039;डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ शिपिंग&#039; के ज़रिए अब तक 3,587 से ज़्यादा भारतीय समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षित वापसी में मदद की है, जिनमें पिछले 96 घंटों में वापस आए 50 लोग भी शामिल हैं। पूरे भारत में बंदरगाहों का कामकाज सामान्य है और कहीं भी भीड़-भाड़ या जाम की कोई खबर नहीं है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:38 +0530</pubDate>
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<title>आतंक के खिलाफ Europe में भारत को मिला बड़ा साथ, Slovakia संग बनेगा Joint Counter&#45;Terrorism ग्रुप</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री मोदी की स्लोवाकिया की ऐतिहासिक राजकीय यात्रा के दौरान, भारत और स्लोवाकिया ने सोमवार को &#039;आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह&#039; (Joint-Working Group on Counter-Terrorism) बनाने की घोषणा की। साथ ही, उन्होंने सीमा-पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों की कड़ी निंदा की। अपने संयुक्त बयान में दोनों नेताओं (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको) ने &quot;22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भयानक आतंकवादी हमले&quot; की स्पष्ट रूप से निंदा की और &#039;आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह&#039; के गठन के माध्यम से आतंकवाद से निपटने में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई।इसे भी पढ़ें: अब Europe में भी &#039;Make in India&#039; की गूंज, Slovakia के साथ Joint Defence Production पर बनी सहमति।एकजुट वैश्विक प्रतिक्रिया का आह्वान करते हुए, नेताओं ने &quot;व्यापक और निरंतर तरीके से आतंकवाद से निपटने के लिए ठोस अंतरराष्ट्रीय प्रयासों&quot; की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) के ढांचे सहित आतंकवाद-रोधी प्रयासों में द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। बयान में आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कड़ी और निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसमें वे संगठन और व्यक्ति भी शामिल हैं जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति ने नामित किया है, साथ ही उनके सहयोगी, प्रॉक्सी, प्रायोजक, फाइनेंसर और समर्थक भी शामिल हैं। दोनों पक्षों ने &quot;आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वालों, उन्हें आयोजित करने वालों और उन्हें प्रायोजित करने वालों&quot; को जवाबदेह ठहराने के महत्व पर भी ज़ोर दिया और संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के भीतर &#039;अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक कन्वेंशन&#039; (CCIT) को जल्द अंतिम रूप देने और अपनाने की दिशा में मिलकर काम करने पर सहमति जताई।इसे भी पढ़ें: PM Modi बोले- Slovakia संग संबंधों को मिलेगी नई गति, Green Tech पर होगा बड़ा फोकसपहलगाम आतंकवादी हमले पर विशेष ध्यान 22 अप्रैल, 2025 के उस गहरे सदमे की याद दिलाता है, जब आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के पर्यटन स्थल पहलगाम में हमला किया था; वे एक गांव में घुसे और 26 नागरिकों की हत्या कर दी। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर पर्यटन स्थल पहलगाम खून से लथपथ हो गया था, क्योंकि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने कई निर्दोष लोगों की जान ले ली थी। पहलगाम में सीमा-पार सांप्रदायिक हमले के दौरान, हमलावरों ने कथित तौर पर पीड़ितों को मारने से पहले उनके धर्म के बारे में पूछा था; इस घटना ने परिवारों को एक साल बाद भी गहरे दुख और सदमे में छोड़ दिया है।इसे भी पढ़ें: G7 Summit के लिए PM Modi रवाना, President Macron के साथ होगी बड़ी बैठक, कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चाजब भारत इस नुकसान का शोक मना रहा था, तब भारतीय सशस्त्र बलों ने &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; के रूप में निर्णायक कार्रवाई की। भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में मौजूद आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया। आतंकवादी हमले के बाद, भारत ने 7 मई 2025 को &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में मौजूद आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारतीय सशस्त्र बलों ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े नौ प्रमुख आतंकवादी लॉन्चपैड नष्ट कर दिए और ऑपरेशन के दौरान 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:37 +0530</pubDate>
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<title>Delhi Airport की Watchlist में था PM के सलाहकार का नाम? ढाई घंटे पूछताछ के बाद वापस लौटे</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर पवन बाधे को आधिकारिक तौर पर तलब किया। यह कदम नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सलाहकार जाहेद उर रहमान के साथ हुई एक घटना को लेकर औपचारिक विरोध दर्ज कराने के लिए उठाया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जाहेद उर रहमान &#039;इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन&#039; (IORA) की &#039;सीनियर अधिकारियों की समिति&#039; (CSO) की 28वीं बैठक में शामिल होने के लिए नई दिल्ली जा रहे थे, लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें काफी देरी का सामना करना पड़ा।इसे भी पढ़ें: Bangladeshi Infiltrators के खिलाफ Suvendu Adhikari का महाएक्शन, Border Areas से लेकर शहरों तक मचा हड़कंपआरोप है कि रूटीन सिक्योरिटी चेक के दौरान रहमान का नाम वॉचलिस्ट में होने की वजह से उन्हें रोका गया और उनसे लगभग ढाई घंटे तक पूछताछ की गई। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय अधिकारियों ने बाद में उन्हें आगे जाने की इजाज़त दे दी थी, लेकिन रहमान ने तय बैठकों में शामिल होने के बजाय सोमवार को बांग्लादेश वापस लौटने का फैसला किया। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने इस घटना को &quot;अप्रत्याशित और खेदजनक&quot; बताया। डिप्टी हाई कमिश्नर पवन बाधे को इसलिए तलब किया गया क्योंकि वे अभी कार्यवाहक हाई कमिश्नर के तौर पर काम कर रहे हैं; भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने अभी तक बांग्लादेश के राष्ट्रपति को अपने क्रेडेंशियल्स (आधिकारिक परिचय पत्र) औपचारिक रूप से नहीं सौंपे हैं।इसे भी पढ़ें: Delhi Airport से लौटे Bangladesh PM के सलाहकार, क्या India ने दिया BNP सरकार को कड़ा संदेश?यह राजनयिक तनाव दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक नाजुक समय पर हुआ है। इस घटना से कुछ दिन पहले ही, बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने दोनों देशों के बीच एक रचनात्मक और &quot;कामकाजी रिश्ते&quot; की ज़रूरत पर ज़ोर दिया था। उन्होंने भूगोल की अपरिहार्य सच्चाइयों और क्षेत्रीय सहयोग की साझा ज़रूरत का ज़िक्र किया था।उन्होंने एएनआई से कहा कि अपने पड़ोस और क्षेत्र में सामान्य राजनयिक संबंध और कामकाजी रिश्ते होना अच्छी बात है। भारत हमारा पड़ोसी है न उन्होंने हमें चुना, न हमने उन्हें, लेकिन हम पड़ोसी हैं। हमें साथ रहना है, इस क्षेत्र में साथ काम करना है और सहयोग करना है। यह घटना ढाका में भारतीय उच्चायोग में नेतृत्व में बदलाव के समय हुई है। नामित उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी 12 जून को बेनापोल लैंड पोर्ट के ज़रिए आधिकारिक तौर पर बांग्लादेश पहुंचे। वे निवर्तमान उच्चायुक्त प्रणय वर्मा से मिशन का कामकाज संभालने के लिए तैयार हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:37 +0530</pubDate>
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<title>G&#45;7 की मीटिंग से पहले Geneva में हिंसा, PM Modi भी लेने वाले हैं बैठक में हिस्सा</title>
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<description><![CDATA[ फ्रांस में आयोजित होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन से पहले स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में हजारों लोगों के विरोध प्रदर्शन ने पूरी व्यवस्था को हिला कर रख दिया। तकरीबन 20,000 से अधिक लोग इस मार्च में शामिल हुए और शुरुआत ही कुछ ऐसी हुई जिससे पूरा सिस्टम हिल गया। देखते ही देखते हालात तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें शुरू हो गई और फिर प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने संयुक्त राष्ट्र भवन और दूसरे संस्थानों के बाहर अपना आक्रोश व्यक्त किया। कई लोगों ने उन संस्थाओं को वैश्विक पूंजीवाद और बहुपक्षीय सत्ता संरचनाओं के प्रतीक के रूप में चरित्रित करते हुए उन पर हमला शुरू कर दिया। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क से ईंटें उखाड़कर पुलिस की ओर फेंकनी शुरू कर दी। जवाब में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। ताकत का इस्तेमाल किया गया और देखते ही देखते शहर की सड़कों पर फैली आंसू गैस के कारण अफरातफरी का माहौल बन गया।इसे भी पढ़ें: US-Iran शांति समझौते पर PM Modi का बयान, बोले- West Asia में स्थिरता के लिए भारत प्रतिबद्धइसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया। बताया जा रहा है कि जब यह प्रदर्शन हो रहा था, कई परिवार आसपास के इलाके में मौजूद थे जिन्हें इस गहमागहमी का भी सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का कहना था वह G7 को दुनिया की राजनीति और आर्थिक शक्ति के अत्याधिक केंद्रीकरण का प्रतीक मानते हैं। उनके मुताबिक कुछ विकसित देशों द्वारा वैश्विक नीतियों पर प्रभाव स्थापित करना लोकतांत्रिक मूल्य और सामाजिक न्याय के खिलाफ चुनौती है और इसी कारण वह जी7 शिखर सम्मेलन के विरोध में सड़कों पर उतरे हैं। G7 शिखर सम्मेलन में ही हिस्सा लेने के लिए पीएम मोदी भी पहुंचे हैं। ऐसे में उनकी कई मुलाकातें तय हैं। 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियन ले बेंस में आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका के नेता हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में शामिल होंगे। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा रूस, यूक्रेन युद्ध, ईरान, अमेरिका, इजराइल युद्ध की भी चर्चा हो सकती है।इसे भी पढ़ें: UN ने किया US-Iran Peace Deal का स्वागत, Europe बोला- यह शांति का बड़ा मौकाजिनेवा की घटनाओं ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि किस तरह से लगातार वहां G7 जैसे सम्मेलनों का विरोध होता रहा है क्योंकि वहां मौजूद लोगों को लगता है कि यह लोग दुनिया भर में असंतोष पैदा करने की कोशिश करते हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि अधिकांश प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण विरोध के पक्षधर थे। लेकिन देखते ही देखते कुछ समूहों की हिंसक गतिविधियों ने आंदोलन को लगातार विवादित बना दिया और फिर जबरदस्त हिंसा देखने को मिली। जिसके कारण इस प्रदर्शन पर कई तरह के सवाल खड़े हो गए और आने वाले दिनों में माना जा रहा है कि G7 सम्मेलन के दौरान भी कई और विरोध प्रदर्शन देखने को मिलेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>मोदी ने पकड़ी अमेरिका के कई खतरनाक लोगों की गर्दन! दुनिया हैरान</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका भारत के खिलाफ जो एक्शन ले रहा है वह दरअसल एक्शन नहीं रिएक्शन है। असली एक्शन तो भारत ले रहा है जिसके बारे में कोई बात ही नहीं कर रहा। भारत पर टेरिफ लगाना, एच1 बी वीजा के खिलाफ बयान देना, भारतीय नाविकों को मारना, अमेरिका यह सब कुछ बेवजह कर रहा है? दरअसल सच यह है कि भारत ने अमेरिका के खिलाफ एक इतना बड़ा एक्शन लिया है जिसका रिएक्शन अमेरिका अपनी बौखलाहट में दिखा रहा है। अमेरिका नाराज है कि भारत अभी तक ट्रेड डील फाइनल नहीं कर रहा। एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में घुसने नहीं दे रहा लेकिन भारत सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने अमेरिका की जड़े हिला दी हैं। इस एक फैसले से पीएम मोदी ने अमेरिकी डीप स्टेट के कई खतरनाक लोगों की गर्दन पकड़ ली है। जिसके बाद इन सभी लोगों ने ट्रंप पर भारत के खिलाफ कदम उठाने का दबाव बनाया। इसे भी पढ़ें: US-Iran शांति समझौते पर PM Modi का बयान, बोले- West Asia में स्थिरता के लिए भारत प्रतिबद्धआपने देखा होगा कि पीएम मोदी की सरकार गिराने की कई बार कोशिशें हुई। अमेरिकी डीप स्टेट के एक बड़े खिलाड़ी जॉर्ज सोरोस ने कहा था कि मैं पीएम मोदी को हटाने के लिए 1 बिलियन डॉलर तक खर्च कर दूंगा। अमेरिका में ऐसे कई जॉर्ज सोरोस बैठे हैं जो भारत को अस्थिर करना चाहते हैं। भारत की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करना चाहते हैं। अमेरिकी डीप स्टेट जिस विदेशी फंडिंग और एनजीओस का इस्तेमाल करके भारत को अस्थिर करना चाहते थे। अब पहली बार पीएम मोदी ने अमेरिका के उसी हथियार पर हमला कर दिया है। अमेरिका की इसी बौखलाहट का सबसे बड़ा सबूत कुछ दिन पहले देखने को मिला जब पहली बार अमेरिका की डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों ही पार्टियों ने भारत के फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट यानी एफसीआरए कानून में प्रस्तावित बदलावों की आलोचना शुरू कर दी है। इसी एफसीआरए कानून की कमजोरियों का फायदा उठाकर अमेरिका और यूरोपीय देश भारत में काम कर रहे एनजीओस को फंडिंग भेजते थे। इसे भी पढ़ें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल गया! किन 14 शर्तों पर माना ईरान?क्रिश्चियन मिशनरीज को फंडिंग देते थे। लेकिन अब यह सब कुछ रुक जाएगा क्योंकि भारत ने एफसीआरए कानून में बहुत बड़े बदलावों का ऐलान कर दिया है। पहली बार अमेरिका भारत के किसी घरेलू कानून को रुकवाने के लिए इतना पागल हो गया है। इससे साफ होता है कि भारत ने अमेरिका पर बहुत बड़ी स्ट्राइक की है। अमेरिका के दोनों बड़े राजनीतिक दलों ने डोनाल्ड ट्रंप से कहा है कि भारत एफसीआरए कानूनों में जो बदलाव ला रहा है उसे किसी भी तरह से रोकना होगा। दरअसल खबर है कि मोदी सरकार 2010 के फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट में जो बदलाव कर रही है, उससे अमेरिका का भारत में फंडिंग भेजना बेहद मुश्किल हो जाएगा। यह कानून अगर पास हो गया, तो अमेरिका और यूरोपीय देश भारत में बैठे क्रिश्चियन मिशनरीज और एनजीओस को आसानी से पैसा नहीं दे पाएंगे। यह बात किसी से नहीं छुपी कि अमेरिका से आने वाले पैसे का इस्तेमाल भारत में किस तरह से होता है। भारत एफसीआरए कानूनों में जो बदलाव कर रहा है उससे अमेरिकी डोनेशन से चलने वाली संस्थाएं और एनजीओस अब गलत काम नहीं कर पाएंगे। अगर यह गलत काम करते पकड़े गए तो इनकी प्रॉपर्टीज जब्त की जा सकती हैं। इनके अकाउंट्स को फ्रीज किया जा सकता है। इसे भी पढ़ें: 3 महीने बाद Strait of Hormuz से निकला पहला तिरंगा लगा जहाज, LNG Carrier &#039;Disha&#039; ने बढ़ाया देश का मानसरकार का ऐसे एनजीओस और संस्थाओं पर नियंत्रण और भी ज्यादा बढ़ जाएगा। अमेरिका जिस पैसे से भारत में सरकार गिराने की कोशिशें करता है, समाज में अस्थिरता लाने की कोशिश करता है, कॉकरोच जैसे प्रदर्शनों और किसान आंदोलन जैसे प्रदर्शनों में जो फंडिंग होती है, वो सब बंद हो जाएगी। इसीलिए अमेरिका बौखला गया है। 2010 का एफसीआरए कानून इतना कमजोर और इतने लूप होल वाला था जिसकी वजह से हजारों एनजीओस ने धर्मांतरण और लव जिहाद जैसे कामों के लिए विदेशी चंदा जुटाना शुरू कर दिया। इस कमजोर कानून की आड़ में अलगाववादियों, आतंकवादियों, जिहादियों, नक्सलियों और ईसाई मिशनरियों को फंडिंग मिलनी आसान हो गई थी। भारत विरोधी ताकतों ने इस कानून का इस्तेमाल भारत के खिलाफ ही कर दिया था। यह नेशनल सिक्योरिटी का इशू बन गया था। लेकिन अब यह सब कुछ रुक जाएगा। अमेरिका इस कानून से इतना डर रहा है कि कुछ समय पहले उसने अपने विदेश मंत्री मार्को रूबियो को सीधे कोलकाता भेज दिया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:35 +0530</pubDate>
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<title>Putin को बड़ा झटका,रूस के तेल टैंकर पर ब्रिट‍िश कमांडो ने बोला धावा</title>
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<description><![CDATA[ समंदर के बीचों-बीच एक फिल्मी ऑपरेशन चल रहा था। हेलीकॉप्टर से ब्रिटिश कमांडो नीचे उतर रहे थे। निशाने पर था रूस की कथित शैडो फ्लट से जुड़ा एक विशाल तेल टैंकर और उसी जहाज पर मौजूद थे 22 भारतीय नाविक।  समंदर से इस वक्त एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है। जहां ब्रिटेन ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसे रूस के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। ब्रिटिश रॉयल नेवी और सुरक्षा एजेंसियों ने रूस की कथित शैडो फ्लट से जुड़े तेल टैंकर सिमट्रोस को इंग्लिश चैनल में रोक लिया है और उसे निगरानी में इंग्लैंड के दक्षिणी तट की ओर ले जाया जा रहा है। करीब 6 घंटे तक चले इस ऑपरेशन में ब्रिटेन के रॉयल मरीन कमांडो, नेशनल क्राइम एजेंसी और रॉयल एयरफोर्स शामिल रहे। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी फुटेज में हथियार बंद कमांडो हेलीकॉप्टर से रस्सियों के सहारे सीधे जहाज पर उतरते हुए दिखाई दिए। कुछ ही मिनटों में पूरे जहाज को सुरक्षा बलों ने अपने नियंत्रण में ले लिया। इसे भी पढ़ें: भारत को किस बड़े जंग के लिए तैयार कर रहा रूस? किसी का चैन गया, किसी का गला सूखाब्रिटिश प्रधानमंत्री की स्ट्रामर ने इस ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए यह कहा है कि यह रूस की युद्ध मशीन पर सीधा प्रहार है। उनके मुताबिक रूस तेल बेचकर जो पैसा कमा रहा है उसी का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध को जारी रखने के लिए किया जा रहा है। लेकिन ऐसे में सवाल यह है कि आखिर यह शैडो फ्लट है क्या? यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए। इन प्रतिबंधों से बचने के लिए रूस ने कथित तौर पर सैकड़ों जहाजों का एक नेटवर्क तैयार किया है। यह रिपोर्ट्स में कहा गया जिसे शैडो फीट कहा जाता है। यह जहाज अक्सर अपना नाम या फिर झंडा और मालिकाना रिकॉर्ड बदलते रहते हैं। जिससे कि इनकी पहचान और ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है। अब ब्रिटेन का दावा है कि रूस के प्रतिबंधित तेल की लगभग 75% धुलाई इसी नेटवर्क के जरिए होती है। यही वजह है कि पश्चिमी देश इसे क्रेमलिन की आर्थिक लाइफ लाइन मानते हैं। इसे भी पढ़ें: 2 देशों ने हिंदी में मोदी पर किया बड़ा ऐलान, पूरी दुनिया हैरान!रिपोर्ट्स के मुताबिक इस नेटवर्क में 700 से ज्यादा जहाज शामिल है और ब्रिटेन पहले ही इनमें से 500 से अधिक जहाजों पर प्रतिबंध लगा चुका है। दिलचस्प बात यह है कि जिस सिमट्रोस टैंकर को रोका गया है, उस पर 22 भारतीय नाविक भी मौजूद थे। फिलहाल जहाज को इंग्लैंड के दक्षिणी तट के पास निगरानी में रखा गया है और उसके दस्तावेजों और गतिविधियों तथा मालिकाना नेटवर्क की जांच की जा रही है। पड़ताल जारी है। ब्रिटेन के रक्षा अधिकारियों का यह कहना है कि यह सिर्फ एक जहाज को रोकने की कारवाही नहीं है बल्कि रूस की कथित शैडो फ्लट के खिलाफ व्यापक अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस ऑपरेशन में फ्रांस के साथ भी समन्वय किया गया और दोनों देश पिछले कई महीनों से इस नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। ऑपरेशन चला रहे हैं।इसे भी पढ़ें: जिसका पाकिस्तान को डर था, रूस ने भारत के लिए वही कर डाला!अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि इस कारवाही पर रूस की प्रतिक्रिया रिएशंस क्या कुछ सामने आते हैं। क्योंकि अगर पश्चिमी देशों ने शैडो फ्लड के खिलाफ इसी तरह की कारवाही जारी रखी तो इसका असर सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि सीधे रूस की तेल कमाई और यूक्रेन युद्ध की फंडिंग पर भी पड़ सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:35 +0530</pubDate>
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<title>Modi Trump Meeting In France | G7 Summit में प्रधानमंत्री मोदी की एंट्री! क्या ट्रंप के साथ होने वाली इस &amp;apos;महाबैठक&amp;apos; से बदलेगा दुनिया का समीकरण?</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस के एवियन पहुंचेंगे। वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्षों के बीच हो रही यह समिट बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरे में दुनिया भर की नज़रें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय बैठक पर टिकी हुई हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों प्रधानमंत्री मोदी के आगमन पर उनका औपचारिक स्वागत करेंगे। इसके बाद, PM मोदी G7 देशों के राष्ट्राध्यक्षों, आमंत्रित भागीदार देशों और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ &quot;नई पार्टनरशिप बनाना और इंटरनेशनल एकजुटता को फिर से कायम करना&quot; थीम वाले वर्किंग सेशन में शामिल होंगे। इसे भी पढ़ें: US Military Aircraft Accident | कैलिफ़ोर्निया में US Air Force बेस पर B-52 Bomber क्रैश, 8 लोगों की मौत, जानिए इस शक्तिशाली विमान के बारे में सब कुछट्रंप-मोदी मीटिंग पर सबकी नज़रेंहालांकि प्रधानमंत्री का डिप्लोमैटिक शेड्यूल काफी व्यस्त है, लेकिन सबसे ज़्यादा ध्यान 17 जून को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली उनकी द्विपक्षीय मीटिंग पर रहेगा। यह मीटिंग दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने की पहली बातचीत होगी, जो ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद इस साल की शुरुआत में PM मोदी के वाशिंगटन दौरे के बाद हो रही है।यह बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल के महीनों में भारत-अमेरिका संबंधों में कई चुनौतियां आई हैं। व्यापार, टैरिफ, क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों और रूस के साथ भारत के एनर्जी संबंधों को लेकर मतभेदों ने मज़बूत स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में कुछ खटास पैदा की है।द्विपक्षीय बातचीत के दौरान भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। इस डील पर बातचीत कई महीनों से चल रही है और दोनों पक्ष मार्केट तक पहुंच बढ़ाने और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं। वाशिंगटन को एनर्जी, इंडस्ट्रियल सामान और कुछ खास एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स जैसे सेक्टर में भारत को एक्सपोर्ट बढ़ाने के बड़े मौके दिख रहे हैं।हालांकि, दोनों देशों के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि भले ही कुछ प्रगति हुई है, लेकिन समिट के दौरान समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना कम है। नई दिल्ली के लिए एक संतुलित व्यापार व्यवस्था हासिल करना महत्वपूर्ण है, खासकर इसलिए क्योंकि हाल ही में अमेरिका के टैरिफ उपायों से भारतीय एक्सपोर्ट पर असर पड़ा है।ईरान विवादमोदी-ट्रंप की मीटिंग ईरान विवाद से जुड़े बढ़ते तनाव के माहौल में भी होगी, एक ऐसा मुद्दा जिसका भारत पर सीधा असर पड़ता है। नई दिल्ली ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास चलने वाले कमर्शियल ऑयल टैंकरों पर हालिया हमलों पर चिंता जताई है, जो ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के लिए एक अहम रास्ता है। हाल ही में इस इलाके में हुए मिलिट्री ऑपरेशन के दौरान भारतीय नाविकों वाले कई जहाज़ प्रभावित हुए, जिससे भारतीय क्रू मेंबर हताहत हुए। इसे भी पढ़ें: US Iran Peace Treaty | 300 अरब डॉलर का वो &#039;सीक्रेट&#039; पन्ना, जिसने अमेरिका-ईरान की महाडील पर लगाया ब्रेक! ट्रंप बोले- &#039;यह झूठ है!&#039;इन घटनाओं के बाद भारत ने वॉशिंगटन के सामने कड़ा डिप्लोमैटिक विरोध दर्ज कराया और संयम बरतने, बातचीत करने और विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की अपनी मांग दोहराई। उम्मीद है कि इस मुद्दे पर बातचीत होगी क्योंकि दोनों देश व्यापक रणनीतिक सहयोग बनाए रखते हुए अपने मतभेदों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।G7 में भारत की भूमिकाइस साल का समिट G7 में भारत की 13वीं भागीदारी है और प्रधानमंत्री मोदी लगातार सातवीं बार इसमें शामिल हो रहे हैं। हालांकि भारत G7 समूह का सदस्य नहीं है, लेकिन इसकी नियमित मौजूदगी वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया में इसके बढ़ते प्रभाव और आर्थिक विकास व जलवायु परिवर्तन से लेकर टेक्नोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों को हल करने में इसके महत्व को दर्शाती है।इनोवेशन, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, मैन्युफैक्चरिंग और मज़बूत सप्लाई चेन में अपनी बढ़ती भूमिका के कारण भी भारत का कद बढ़ा है। G7 की फ्रांसीसी अध्यक्षता द्वारा तय की गई कई प्राथमिकताएं - जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और वैश्विक असंतुलन को कम करना शामिल है - भारत की खूबियों और नीतिगत लक्ष्यों से काफी हद तक मेल खाती हैं।ट्रंप के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी समिट के दौरान कई विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इनमें कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बातचीत शामिल है।इन बैठकों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा सहयोग, टेक्नोलॉजी साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रमों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके बाद, प्रधानमंत्री हिस्सा लेने वाले नेताओं के लिए राष्ट्रपति मैक्रों द्वारा आयोजित गाला डिनर में शामिल होंगे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:34 +0530</pubDate>
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<title>US Military Aircraft Accident | कैलिफ़ोर्निया में US Air Force बेस पर B&#45;52 Bomber क्रैश, 8 लोगों की मौत, जानिए इस शक्तिशाली विमान के बारे में सब कुछ</title>
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<description><![CDATA[ कैलिफ़ोर्निया के मोजावे रेगिस्तान में स्थित एडवर्ड्स एयर फ़ोर्स बेस से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अमेरिकी वायु सेना (US Air Force) का एक दिग्गज B-52 स्ट्रैटोफ़ोर्ट्रेस बॉम्बर उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। एक रूटीन टेस्ट मिशन के दौरान हुए इस भीषण हादसे में विमान में सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई है। यह घटना सोमवार सुबह लगभग 11:20 बजे की है, जब लॉस एंजिल्स के उत्तर में स्थित इस मिलिट्री बेस पर रनवे से निकलने के तुरंत बाद एयरक्राफ़्ट क्रैश हो गया। हवाई तस्वीरों और शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, टक्कर और उसके बाद लगी भीषण आग के कारण यह विशाल बॉम्बर लगभग पूरी तरह नष्ट हो गया। इसे भी पढ़ें: Mercedes S-Class Hybrid की भारत में धमाकेदार एंट्री, कीमत 2.20 करोड़, जानें दमदार Features रनवे के पास रेगिस्तान की झुलसी हुई ज़मीन के एक बड़े हिस्से पर काला धुआँ उठ रहा था, जबकि फ़ायरफ़ाइटर और इमरजेंसी कर्मचारी दुर्घटनास्थल पर काम कर रहे थे। विमान में सवार लोगों में मिलिट्री कर्मचारी और सरकारी कॉन्ट्रैक्टर दोनों शामिल थे।दुर्घटना में कोई नहीं बचामिलिट्री अधिकारियों ने पुष्टि की कि दुर्घटना में विमान में सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई। एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बोलते हुए, 412वें टेस्ट विंग के डिप्टी कमांडर कर्नल जेम्स हेस ने कहा कि जाँचकर्ताओं ने दुर्घटना के फ़ुटेज की समीक्षा की है और इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि किसी के बचने की कोई संभावना नहीं थी। हेस ने कहा, &quot;हमने आठ बेहतरीन अमेरिकियों को खो दिया,&quot; और साथ ही बताया कि अधिकारी उनके परिवारों को सूचित करने के लिए काम कर रहे थे।दुर्घटना का कारण अभी पता नहीं चल पाया है। हेस ने कहा कि पूरी जाँच शुरू हो गई है और इसे पूरा होने में छह महीने तक का समय लग सकता है। उन्होंने बताया कि दुर्घटना के समय यह एयरक्राफ़्ट &quot;रडार आधुनिकीकरण कार्यक्रम&quot; में सहायता कर रहा था।सोमवार को ज़्यादातर समय एयरफ़ील्ड बंद रहा क्योंकि इमरजेंसी टीमें दुर्घटना के बाद की स्थिति से निपट रही थीं। आने वाले विमानों को दूसरी जगह भेजा गया, जबकि बेस में जाने के लिए नॉन-कमर्शियल विज़िटर पास अस्थायी रूप से रोक दिए गए।एयरक्राफ़्ट रडार अपग्रेड टेस्टिंग का हिस्सा थादुर्घटना का शिकार हुआ B-52 बॉम्बर की रडार क्षमताओं को अपग्रेड करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे एक कार्यक्रम में सहायता कर रहा था। 2025 में, नए एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) रडार सिस्टम से लैस एक B-52 को टेस्टिंग के लिए एडवर्ड्स एयर फ़ोर्स बेस भेजा गया था।इस एडवांस्ड रडार को एयरक्राफ़्ट के पुराने सिस्टम को बदलने और उसकी क्षमता और ऑपरेशनल परफ़ॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।B-52 स्ट्रैटोफ़ोर्ट्रेस के बारे मेंबोइंग B-52 स्ट्रैटोफ़ोर्ट्रेस दुनिया के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मिलिट्री एयरक्राफ़्ट में से एक है। 1955 में सेवा में शामिल किए गए इस लंबी दूरी के स्ट्रैटेजिक बॉम्बर को पारंपरिक और परमाणु, दोनों तरह के हथियार ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया था। इसे भी पढ़ें: England vs New Zealand: जोफ्रा आर्चर की वापसी से मजबूत हुई टीम, दो खिलाड़ी करेंगे Test डेब्यूपिछले सात दशकों में, इस विमान ने वियतनाम से लेकर मध्य पूर्व तक के संघर्षों सहित अमेरिका से जुड़े कई सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभाई है। पुराना होने के बावजूद, इस बॉम्बर में लगातार अपग्रेड किए जाते रहे हैं, जिससे यह अमेरिकी वायु सेना की भविष्य की योजनाओं का हिस्सा बना हुआ है।इस विमान को आमतौर पर पांच लोगों का क्रू उड़ाता है और यह बिना ईंधन भरे 14,000 किलोमीटर से ज़्यादा की दूरी तय कर सकता है। आठ जेट इंजनों से चलने वाला यह विमान 32 टन तक हथियार ले जाने और लगभग 1,000 किमी/घंटा की गति तक पहुँचने में सक्षम है।अमेरिकी वायु सेना के आंकड़ों के अनुसार, 2012 के वित्तीय वर्ष के स्थिर मूल्यों के आधार पर इस विमान की एक यूनिट की कीमत 84 मिलियन डॉलर आंकी गई थी। मौजूदा डॉलर मूल्यों के हिसाब से इसकी अपडेटेड कीमत अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।  Stay updated with International
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:34 +0530</pubDate>
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<title>Siberia में आसमान से गिरा Russia का Tu&#45;22M3 बॉम्बर, Live Crash का खौफनाक वीडियो आया सामने</title>
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<description><![CDATA[ रूसी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सोमवार को साइबेरिया के इरकुत्स्क इलाके में ट्रेनिंग उड़ान के दौरान रूस का Tu-22M3 स्ट्रैटेजिक बॉम्बर क्रैश हो गया। विमान का अगला हिस्सा सीधे ज़मीन से टकराया और हवा में धुएं का गुबार उठने लगा। क्रू के चारों सदस्य सुरक्षित बाहर निकल आए और बच गए। देश की सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े रूसी मीडिया आउटलेट्स द्वारा शेयर किए गए वीडियो में टुपोलेव Tu-22M3 को क्रैश होने से पहले तेज़ी से नीचे आते हुए देखा गया। सोशल मीडिया पर चल रहे बिना पुष्टि वाले फुटेज में भी विमान को अंगारा नदी के पास जंगल वाले इलाके में नीचे गिरते हुए और उसके बाद धुएं का बड़ा गुबार उठते हुए देखा गया। इंटरफैक्स समाचार एजेंसी ने रक्षा मंत्रालय के हवाले से कहा, &quot;क्रू सुरक्षित बाहर निकल आया। पायलटों की जान या सेहत को कोई खतरा नहीं है।&quot; अधिकारियों ने बताया कि बॉम्बर पर कोई हथियार या गोला-बारूद नहीं था और ज़मीन पर भी कोई नुकसान नहीं हुआ।इसे भी पढ़ें: Putin को बड़ा झटका,रूस के तेल टैंकर पर ब्रिट‍िश कमांडो ने बोला धावाइरकुत्स्क के गवर्नर इगोर कोब्ज़ेव ने बताया कि विमान कामेंका गाँव के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ। दुर्घटना वाली जगह पर लगी आग बुझाने के लिए इमरजेंसी टीमें भेजी गईं, जबकि क्रू के चारों सदस्यों को अस्पताल ले जाया गया; उन्हें जो चोटें आईं, उनसे उनकी जान को कोई खतरा नहीं है। कोब्ज़ेव के अनुसार, शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि दुर्घटना का संभावित कारण इंजन का खराब होना था। T-22M3 एयरक्राफ्ट के बारे मेंTupolev Tu-22M3 एक लंबी दूरी का सुपरसोनिक बॉम्बर है जिसे सोवियत संघ ने बनाया था और अभी इसे रूस ऑपरेट करता है। यह Tu-22 &quot;बैकफायर&quot; फ़ैमिली का सबसे एडवांस्ड ऑपरेशनल वर्शन है और इसे ज़मीन और समुद्र में मौजूद टारगेट पर लंबी दूरी से हमला करने के मिशन के लिए डिज़ाइन किया गया है। खास तौर पर लंबी दूरी के हमले वाले मिशन के लिए डिज़ाइन किया गया यह एयरक्राफ्ट, ज़मीन और समुद्र में मौजूद टारगेट पर तेज़ रफ़्तार से और काफी दूरी से हमला करने में सक्षम है। Tu-22M3 की एक खास खूबी इसका &#039;वेरिएबल-स्वीप विंग डिज़ाइन&#039; है, जो उड़ान के अलग-अलग चरणों के दौरान विंग्स के एंगल को बदलने की सुविधा देता है। इससे टेक-ऑफ और लैंडिंग के दौरान परफॉर्मेंस बेहतर होती है और एयरक्राफ्ट सुपरसोनिक रफ़्तार से उड़ भी पाता है। दो NK-25 आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन से चलने वाला यह बॉम्बर लगभग Mach 1.9 या 2,000 km प्रति घंटे की रफ़्तार तक पहुँच सकता है और इसे चार लोगों की क्रू टीम ऑपरेट करती है। यह एयरक्राफ्ट कई तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है, जिनमें पारंपरिक बम और लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइलें शामिल हैं।Very closeup video of the highly expensive Russian Tu-22M3 strategic bomber crashing today. https://t.co/ds1Oa1ehAD pic.twitter.com/RrVg7eO6H2— WarMonitor???????????????? (@WarMonitor3) June 15, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:33 +0530</pubDate>
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<title>US Iran Peace Treaty पर अमेरिका की ओर से कौन करेगा स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर? Donald Trump ने आखिरकार साफ की स्थिति</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच होने जा रहे ऐतिहासिक शांति समझौते को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहे सस्पेंस को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरकार खत्म कर दिया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। फ्रांस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे खुद इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में शामिल होने स्विट्जरलैंड जाएंगे, तो उन्होंने सस्पेंस बरकरार रखते हुए बेहद संक्षिप्त जवाब दिया: &quot;मैं शामिल हो भी सकता हूं, और नहीं भी।&quot;&#039;द न्यूयॉर्क टाइम्स&#039; के अनुसार, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रंप, वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेरी घालीबाफ पहले ही फ्रेमवर्क समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर कर चुके हैं। अधिकारी ने कहा कि हस्ताक्षर समारोह के बाद पूरा समझौता ज्ञापन (MoU) जारी किए जाने की उम्मीद है।ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि समझौते का मसौदा जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने कहा, &quot;बहुत जल्द... शुक्रवार के बाद किसी समय।&quot; मीडिया के साथ अलग-अलग बातचीत में, वेंस ने पुष्टि की कि समझौते पर रविवार को डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए गए थे और संकेत दिया कि पूरा दस्तावेज़ संभवतः इस सप्ताह के अंत में प्रकाशित किया जाएगा। वेंस ने एबीसी न्यूज के &#039;गुड मॉर्निंग अमेरिका&#039; कार्यक्रम में कहा, &quot;हमने कल (रविवार) ही डिजिटल रूप से समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।&quot;होर्मुज में सामान्य शिपिंग बहाल करने की कोशिशेंवरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से सामान्य शिपिंग बहाल करने के प्रयास चल रहे हैं। समझौते की शर्तों के तहत, जलमार्ग के शुक्रवार तक पूरी तरह से फिर से खुलने की उम्मीद है, जिसमें ऊर्जा आपूर्ति की आवाजाही को तेज करने के लिए बड़े तेल और गैस टैंकरों को प्राथमिकता दी जाएगी।अधिकारी ने कहा, &quot;यहां स्पष्ट कर दूं कि इसमें थोड़ा समय लगता है, क्योंकि आप जानते हैं कि जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें (माइंस) हैं। लेकिन आप देखेंगे कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ट्रैफिक में काफी वृद्धि पहले ही शुरू हो चुकी है, और समय के साथ इसमें धीरे-धीरे बढ़ोतरी होगी। मुझे लगता है कि एक या दो सप्ताह में - शायद हम दो सप्ताह में पूरी तरह सामान्य स्थिति में न लौटें - लेकिन हम जलडमरूमध्य में ट्रैफिक में काफी वृद्धि देखेंगे।&quot;अधिकारी ने कहा कि समझौता ज्ञापन 60 दिनों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से टोल-मुक्त आवाजाही की गारंटी देता है, और इस प्रावधान के अंतिम समझौते का हिस्सा बने रहने की उम्मीद है।ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया भर में तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस के निर्यात का एक बड़ा हिस्सा इस संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा व्यापार में एक अहम कड़ी बनाता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:33 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump का बड़ा बयान&#45; ईरान को नहीं देंगे 300 अरब डॉलर, Peace Deal की खबर &amp;apos;Fake News&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से चल रहा टकराव जब कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ता दिख रहा था, तभी एक नया विवाद खड़ा हो गया है जिससे पूरी प्रक्रिया के बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है। इस विवाद के केंद्र में पुनर्निर्माण से जुड़ा 300 अरब डॉलर का पैकेज है, जिसे ईरान किसी भी स्थायी समझौते का अहम हिस्सा मानता है। तेहरान का कहना है कि अगर उस टकराव को औपचारिक रूप से खत्म करना है तो यह पैकेज ज़रूरी है; इस टकराव ने मध्य पूर्व को हिलाकर रख दिया था, ग्लोबल ऑयल मार्केट को बाधित किया था और इस क्षेत्र को एक बड़े युद्ध के खतरनाक कगार पर पहुंचा दिया था। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि वॉशिंगटन ऐसी फंडिंग करेगा। इससे 19 जून को प्रस्तावित समझौते पर हस्ताक्षर की तारीख से कुछ दिन पहले ही दोनों पक्षों के बीच बड़ा मतभेद पैदा हो गया है।ट्रंप ने &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर पोस्ट किया, ईरान कभी भी परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो गया है! साथ ही, यह खबर कि अमेरिका ईरान को 300 मिलियन डॉलर दे रहा है, डेमोक्रेट्स&#039; द्वारा फैलाई गई फेक न्यूज़ है!!! राष्ट्रपति DJT इस मतभेद ने शांति के पूरे ढांचे के सबसे कमजोर हिस्से को उजागर कर दिया है और यह वह मुद्दा हो सकता है जो दोनों देशों को फिर से टकराव की ओर धकेल सकता है।इसे भी पढ़ें: US Iran Peace Treaty पर अमेरिका की ओर से कौन करेगा स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर? Donald Trump ने आखिरकार साफ की स्थितिआखिर 300 अरब डॉलर का यह पैकेज क्या है?खबरों में आया यह पैकेज सिर्फ़ एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है। ईरान के लिए, यह आर्थिक गारंटियों का एक बड़ा सेट है, जिसे महीनों की लड़ाई से हुए नुकसान और आर्थिक दबाव से उबरने में देश की मदद करने के लिए तैयार किया गया है। खबरों के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने इस पैकेज को युद्ध से हुए नुकसान के लिए &quot;मुआवजे&quot; और लंबे समय तक स्थिरता के लिए एक ज़रूरी आधार के तौर पर पेश किया है। तेहरान का तर्क है कि ठोस आर्थिक राहत और पुनर्निर्माण में मदद के बिना शांति कायम नहीं रह सकती। ईरान के लिए, इन उपायों को वैकल्पिक फ़ायदों के तौर पर नहीं, बल्कि एक स्थायी समझौते को स्वीकार करने की मुख्य शर्तों के तौर पर देखा जा रहा है।इसे भी पढ़ें: US-Iran Peace Deal: India की भूमिका नदारद, Supriya Shrinate का Modi सरकार पर हमलाट्रम्प का स्पष्ट खंडनसबसे बड़ी चुनौती यह है कि वाशिंगटन और तेहरान एक ही मुद्दे को पूरी तरह से अलग-अलग तरीके से पेश कर रहे हैं। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने किसी भी भुगतान समझौते की खबरों को खारिज करते हुए लिखा कि ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार न रखने पर सहमति जताई है और अमेरिका द्वारा ईरान को भुगतान करने के दावों को फर्जी खबर बताया। उनका यह बयान ईरान के इस रुख से सीधा विरोधाभास रखता है कि पुनर्निर्माण पैकेज समझौते का एक अनिवार्य हिस्सा बना हुआ है। इससे एक अहम सवाल अनुत्तरित रह जाता है: अगर ईरान मानता है कि आर्थिक गारंटी समझौते का हिस्सा है, और अमेरिकी राष्ट्रपति इस बात पर जोर देते हैं कि ऐसा कोई भुगतान नहीं किया जाएगा, तो आखिर किस बात पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं? इस अनिश्चितता ने इस बारे में नई चिंताएं पैदा कर दी हैं कि क्या दोनों पक्ष अलग-अलग अपेक्षाओं के तहत काम कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:32 +0530</pubDate>
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<title>France पहुंचे PM Modi, G7 Summit में वैश्विक चुनौतियों पर दुनिया को दिखाएंगे रास्ता</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के न्योते पर फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स में हो रहे 52वें G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। वे G7 देशों और सहयोगी देशों के नेताओं के साथ मिलकर आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस गवर्नेंस और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसी अहम वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। शिखर सम्मेलन के व्यापक एजेंडे के बीच, सबकी नज़रें बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मोदी की होने वाली द्विपक्षीय बैठक पर टिकी हैं, जिसमें दोनों नेताओं के बीच व्यापार, वीज़ा, ऊर्जा सहयोग और व्यापक रणनीतिक संबंधों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसे भी पढ़ें: राजनाथ सिंह के घर आधी रात तक BJP-RSS नेताओं ने किया मंथन, पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई सूची तैयारG7 समिट के लिए प्रधानमंत्री एवियन पहुंचेप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G7 समिट में शामिल होने के लिए फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स पहुंचे। बैठक से पहले उन्होंने कहा दुनिया के नेताओं से बातचीत करने और अहम वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का बेसब्री से इंतज़ार है। भारत एक ज़्यादा टिकाऊ और समृद्ध दुनिया के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। G7 समिट के लिए फ्रांस के एवियन पहुंचा। दुनिया के नेताओं से बातचीत करने और अहम वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का बेसब्री से इंतज़ार है। भारत एक ज़्यादा टिकाऊ और समृद्ध दुनिया के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Hormuz में ईरान का &amp;apos;माइन&amp;apos; गेम, US Peace Deal के बावजूद Global Oil Supply पर मंडराया संकट</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खुल सकता है; इस समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने हैं। हालांकि इस समझौते ने दुनिया के सबसे अहम शिपिंग रूट में से एक के लंबे समय तक बाधित रहने की तत्काल चिंताओं को कम कर दिया है, लेकिन समुद्री मामलों के जानकारों का कहना है कि कामकाज के पूरी तरह सामान्य होने में काफी समय लग सकता है। इंडस्ट्री के अधिकारियों और समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना ​​है कि दुनिया के सबसे अहम एनर्जी कॉरिडोर में से एक से होने वाला कमर्शियल ट्रैफिक कई हफ़्तों तक सीमित रह सकता है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें इस बात की चिंता है कि इस जलमार्ग और इसके आस-पास नेवल माइन्स (समुद्री बारूदी सुरंगें) हो सकती हैं; यह एक ऐसा खतरा है जो लड़ाई खत्म होने के बाद भी शिपिंग पर असर डाल सकता है। इसे भी पढ़ें: US-Iran Deal से इजरायल बाहर! क्या समझौते का होगा पालन, ट्रंप vs नेतन्याहू अब होने वाला है?पश्चिमी समुद्री सुरक्षा सूत्रों के अनुमान के मुताबिक, जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) को साफ़ करने और सुरक्षित नेविगेशन रूट बनाने में 40 से 50 दिन लग सकते हैं। इस दौरान, शिपिंग कंपनियों, बीमा कंपनियों और एनर्जी फर्मों का इस रूट पर भरोसा फिर से बहाल होने से पहले, इलाके की जांच और सुरक्षा के लिए माइनस्वीपर और अंडरवाटर ड्रोन तैनात किए जा सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Donald Trump का बड़ा बयान- ईरान को नहीं देंगे 300 अरब डॉलर, Peace Deal की खबर &#039;Fake News&#039;माइन्स (बारूदी सुरंगें) क्यों एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं?संघर्ष से पहले, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से दुनिया की रोज़ाना की तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुज़रता था। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, माइन्स की थोड़ी सी संख्या भी कीमती सामान ले जा रहे बड़े कमर्शियल जहाज़ों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। ईरान ने इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण जमाने की कोशिशों के तहत, संघर्ष के दौरान नेवल माइन्स (समुद्री बारूदी सुरंगों) का इस्तेमाल करने की बार-बार धमकी दी थी। हालांकि तेहरान ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि असल में माइन्स तैनात की गई थीं या नहीं, लेकिन अमेरिका का कहना है कि यह खतरा वास्तविक है और उसने माइन्स बिछाने के काम में शामिल ईरानी जहाजों को निशाना बनाया है। 2 जून को, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सीनेट की विदेश संबंध समिति की सुनवाई में बताया कि ईरान ने &quot;होर्मुज़ के बड़े हिस्से जो अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है में बारूदी सुरंगें (माइन्स) बिछाई थीं&quot;, हालांकि उन्होंने इस बारे में और जानकारी नहीं दी। बाद में जर्मनी की नौसेना ने कहा कि अमेरिकी और ब्रिटिश नौसेनाओं से मिली जानकारी से पता चला है कि जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) के आसपास चार जगहों पर बारूदी सुरंगें देखी गई थीं; हालांकि बर्लिन ने यह भी कहा कि उसने इन रिपोर्टों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:31 +0530</pubDate>
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<title>Imran Khan की बहन Aleema Khanum ने PIMS के इलाज पर उठाए गंभीर सवाल, मांगी स्वतंत्र जांच</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रमुख इमरान खान की बहन अलीमा खानम ने जेल में बंद नेता की स्वतंत्र मेडिकल जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि खान को फिर से इस्लामाबाद के पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया था और कहा कि परिवार उनकी सेहत या आंखों की रोशनी के बारे में अस्पताल की ओर से जारी किसी भी मेडिकल रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करेगा। एक्स पर पोस्ट किए गए एक बयान में अलीमा ने कहा कि परिवार को खबर मिली थी कि खान को 15 जून की सुबह अदियाला जेल से PIMS ले जाया गया था, और उन्हें इस बात का पता उसी दिन सुबह बाद में PTI चेयरमैन बैरिस्टर गोहर की सोशल मीडिया पोस्ट से चला। उन्होंने एक्स पर लिखा कि हमें खबर मिली है कि इमरान खान को 15 जून की सुबह फिर से PIMS ले जाया गया। हमें यह जानकारी 15 जून की सुबह बैरिस्टर गोहर के एक ट्वीट से मिली। अलीमा ने लिखा हम इमरान खान की हालत के बारे में PIMS की ओर से जारी किसी भी मेडिकल रिपोर्ट को नहीं मानते।&quot; उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थान के पहले के दावों पर बाद में सवाल उठाए गए थे। उन्होंने पहले किए गए उन दावों का ज़िक्र किया जिनमें कहा गया था कि खान की 90 प्रतिशत नज़र वापस आ गई है; उन्होंने बताया कि जब बाद में उनके वकील ने अदियाला जेल में उनसे मुलाक़ात की, तो ख़ुद इमरान खान ने इस दावे को खारिज कर दिया था। इसे भी पढ़ें: Patna Coaching War: रौशन आनंद का Khan Sir पर सनसनीखेज आरोप, &#039;भाई की हत्या की साज़िश रची&#039;खान के इलाज के आधिकारिक विवरण पर सवाल उठाते हुए अलीमा ने पूछा, &quot;इमरान खान को पांचवें इंजेक्शन की क्या ज़रूरत है? उन्होंने कहा कि परिवार सरकार के स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है और मांग करता है कि क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान की जांच और इलाज इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में स्वतंत्र, योग्य विशेषज्ञों द्वारा किया जाए।इसे भी पढ़ें: Patna Police सवालों के घेरे में! Roshan Anand का आरोप - किसके दबाव में Khan Sir को बचाया जा रहा है?इमरान खान की दृष्टि हानि के दावेअलीमा की ये टिप्पणियां 73 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य, विशेष रूप से उनकी बिगड़ती दृष्टि को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आई हैं। फरवरी में खान को रावलपिंडी की अडियाला जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच दृष्टि हानि से संबंधित आगे के इलाज के लिए पीआईएमएस ले जाया गया था। पिछली मुलाकातों के बाद जारी किए गए अस्पताल के आधिकारिक बयानों के अनुसार, खान को इंट्राविट्रियल एंटी-वीईजीएफ इंजेक्शन दिए गए थे - यह रेटिना रोग के इलाज और दृष्टि को संरक्षित करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक विशेष प्रक्रिया है। एक मेडिकल बोर्ड ने उनका आकलन किया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:30 +0530</pubDate>
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<title>IAF का गेम चेंजर Kamikaze Drone: China को सीधी चुनौती, बनेगा आत्मनिर्भर भारत का &amp;apos;ब्रह्मास्त्र&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ भारतीय वायु सेना (IAF) ने घरेलू इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ मिलकर स्वदेशी लंबी दूरी वाले कामिकेज़ ड्रोन विकसित करने का एक प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसका मकसद आत्मनिर्भरता बढ़ाना और भविष्य में होने वाले अपग्रेड और बदलावों पर बेहतर कंट्रोल हासिल करना है। IAF ने फिक्स्ड-विंग, वन-वे अटैक अनमैन्ड एरियल सिस्टम (OWA-UAS) – जिन्हें आम तौर पर कामिकेज़ ड्रोन कहा जाता है। उसके विकास के लिए भारतीय कंपनियों को चुनने के वास्ते एक लिमिटेड टेंडर इन्क्वायरी जारी की है। इस प्रोजेक्ट का कोऑर्डिनेशन कोयंबटूर के सुलूर में मौजूद वायु सेना के 5 बेस रिपेयर डिपो (BRD) द्वारा किया जाएगा, जो नोडल एजेंसी के तौर पर काम करेगा। खरीद के आम प्रोग्राम के उलट, जिनमें सेना ज़रूरतें बताती है और इंडस्ट्री प्रोडक्ट बनाती है, IAF डिज़ाइन और डेवलपमेंट प्रोसेस में सीधे तौर पर शामिल होगी। उम्मीद है कि इस कदम से सर्विस को बदलते ऑपरेशनल ज़रूरतों के हिसाब से प्लेटफ़ॉर्म को ढालने में ज़्यादा फ़्लेक्सिबिलिटी मिलेगी। इसे भी पढ़ें: US Iran Peace Treaty | 300 अरब डॉलर का वो &#039;सीक्रेट&#039; पन्ना, जिसने अमेरिका-ईरान की महाडील पर लगाया ब्रेक! ट्रंप बोले- &#039;यह झूठ है!&#039;तकनीकी ज़रूरतों के अनुसार, ड्रोन 16,000 फ़ीट तक की ऊंचाई पर काम करने, दिन और रात दोनों स्थितियों में चलने और कम से कम 30 किलोग्राम का मॉड्यूलर पेलोड ले जाने में सक्षम होना चाहिए। इस प्लेटफ़ॉर्म से कई तरह के मिशन कॉन्फ़िगरेशन को सपोर्ट करने की उम्मीद है, जिनमें सटीक हमले (precision-strike), हवाई डेटा रिले और सेंसर-आधारित मिशन शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट में एक ऐसे अत्यधिक ऑटोनॉमस सिस्टम की भी परिकल्पना की गई है जो बहुत कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ लॉन्च, वे-पॉइंट नेविगेशन, लोइटरिंग (हवा में चक्कर लगाना) और मिशन को पूरा करने में सक्षम हो। ऑपरेशनल ज़रूरतों के आधार पर, ड्रोन में &#039;रिटर्न-टू-बेस&#039; (बेस पर वापस लौटने) की सुविधा भी शामिल की जा सकती है। इसे भी पढ़ें: Air India Express की Jeddah फ्लाइट में हवा में आई खराबी, Kannur में हुई Emergency Landingइस प्रोग्राम की एक खास बात यह है कि IAF इससे जुड़े इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) अपने पास रखना चाहती है। डिफेंस सूत्रों का कहना है कि इससे लंबे समय तक ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी बनी रहेगी और भविष्य में सुधारों के लिए बाहरी वेंडर्स पर निर्भरता कम होगी। प्रोजेक्ट से जुड़े एक सूत्र ने कहा, डिज़ाइन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी का मालिकाना हक अपने पास रखने से एयर फ़ोर्स को ऑपरेशनल ज़रूरतों के हिसाब से सिस्टम में बदलाव, अपग्रेड और कस्टमाइज़ेशन करने की क्षमता मिलेगी। इससे वेंडर-कंट्रोल्ड टेक्नोलॉजी की पाबंदियों के बिना तेज़ी से क्षमता बढ़ाई जा सकेगी, जिससे एक निर्णायक बढ़त मिलेगी। IAF ने यह भी अनिवार्य किया है कि प्रोजेक्ट का डिज़ाइन, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग भारत में ही हो और इसमें स्वदेशी कंपोनेंट्स और सिस्टम को प्राथमिकता दी जाए। ड्रोन में चीन की टेक्नोलॉजी, कंपोनेंट्स और मटीरियल का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए; यह सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन के लिए सेना की लगातार कोशिशों को दिखाता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:30 +0530</pubDate>
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<title>डील हो या ना हो, मैं ईरान को...ट्रंप पर फूटा नेतन्याहू का गुस्सा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते को लेकर जहां वाशिंगटन इसी बड़ी कूटनीतिक सफलता बता रहा। वहीं इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेहू इस डील से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे। नेतन्याहू ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना इजराइल की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इस मुद्दे पर उनकी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सोच हमेशा एक जैसी नहीं होती। अमेरिका और ईरान समझौते के सार्वजनिक होने के बाद नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान से पैदा हुए परमाणु खतरे को काफी हद तक कमजोर किया है। लेकिन लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई। समझौता हो या ना हो ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा। इसे भी पढ़ें: Donald Trump की &#039;शांति डील&#039; को Israel का बड़ा झटका, कहा- ये समझौता हम पर लागू नहीं होतानेतन्याहू ने कहा कि ट्रंप और उनके बीच मजबूत साझेदारी लेकिन कई बार दोनों नेताओं की राय अलग भी हो सकती है। उनके मुताबिक इजराइल अपनी सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि दशकों से ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनका मिशन रहा है और वह भविष्य में भी इसी नीति पर कायम रहेंगे। इजराइली प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान और उसके सहयोगी संगठन के खिलाफ अभियान अभी जारी रहेगा। उन्होंने लेबनान का जिक्र करते हुए कहा कि इजराइली सेना जरूरत पड़ने तक सुरक्षा क्षेत्रों में मौजूद रहेगी और किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए कारवाई की पूरी स्वतंत्रता बनाए रखेगी। नेतन्याहू के मुताबिक हाल के सैन अभियानों में इजराइल ने ऐसे कई इलाकों पर नियंत्रण हासिल किया जिनका इस्तेमाल पहले उसके खिलाफ किया जाता था। दरअसल नेतन्याहू का यह बयान ऐसे वक्त पर सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद एक समझौते की रूपरेखा सामने आई। इसे भी पढ़ें: US-Iran Deal से इजरायल बाहर! क्या समझौते का होगा पालन, ट्रंप vs नेतन्याहू अब होने वाला है?वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने यह वादा किया है कि वो किसी परमाणु हथियार को नहीं बनाएगा। ट्रंप ने उन खबरों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान को $300 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता देगा। उन्होंने इसे पूरी तरह फर्जी बताया। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वांस ने भी इस समझौते का समर्थन करते हुए कहा कि ट्रंप की कूटनीति एक बार फिर सफल रही और इस डील का सबसे बड़ा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित ना करें। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह समझौता भविष्य की बातचीत का ढांचा तैयार करता है जिसमें परमाणु निरीक्षण, यूरेनियम एनरचमेंट की निगरानी और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल थे। वहीं सूत्रों के मुताबिक समझौते के तहत ईरान को कुछ आर्थिक राहत मिल सकती है। लेकिन यह राहत तभी मिलेगी जब तेहरान परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी और सत्यापन की शर्तों का पालन करें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:29 +0530</pubDate>
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<title>G7 Summit में Japan ने खींची &amp;apos;रेड लाइन&amp;apos;, China की चुनौतियों से निपटने के लिए बनाया खास प्लान!</title>
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<description><![CDATA[ जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने मंगलवार को बताया कि G7 देशों के बीच वर्किंग डिनर के दौरान रूस-यूक्रेन संकट, पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात और चीन से जुड़ी चुनौतियों जैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा हुई। तकाइची ने बताया कि G7 के अपने समकक्षों के साथ बैठक के दौरान उन्होंने अहम खनिजों (critical minerals) को लेकर G7 की &#039;जॉइंट स्टॉकपाइलिंग कोलैबोरेशन इनिशिएटिव&#039; (संयुक्त भंडारण सहयोग पहल) का प्रस्ताव रखा। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि कल रात वर्किंग डिनर में हमने कई अहम मुद्दों पर खुलकर चर्चा की, जिनमें मध्य पूर्व के हालात, यूक्रेन की स्थिति, इंडो-पैसिफिक के हालात और अहम खनिजों सहित सप्लाई चेन की मज़बूती शामिल है।तकाइची ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से बिना किसी रुकावट के समुद्री व्यापार की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और कहा कि मैंने फ़ारस की खाड़ी में फँसे सभी जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने देने के महत्व पर ज़ोर दिया। साथ ही, युद्ध में परमाणु बमबारी झेलने वाले एकमात्र देश के तौर पर, मैंने IAEA के सहयोग से ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने का आह्वान किया। उन्होंने आगे कहा इसी क्रम में, होर्मुज़ संकट का ज़िक्र करते हुए, मैंने ज़रूरी खनिजों (critical minerals) के लिए G7 की &#039;संयुक्त स्टॉकपाइलिंग सहयोग पहल&#039; (Joint Stockpiling Collaboration Initiative) का प्रस्ताव रखा। यह पहला G7 शिखर सम्मेलन है जिसमें तकाइची शामिल हो रही हैं।इसे भी पढ़ें: France पहुंचे PM Modi, G7 Summit में वैश्विक चुनौतियों पर दुनिया को दिखाएंगे रास्ताजापानी प्रधानमंत्री ने उत्तर कोरिया के पूरी तरह परमाणु-मुक्त होने के सिद्धांत के महत्व पर ज़ोर दिया। साथ ही, उन्होंने उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल विकास से निपटने और क्रिप्टोकरेंसी की चोरी – जो उसके लिए फंड का ज़रिया है – के ख़िलाफ़ जवाबी उपाय करने की ज़रूरत पर भी बात की। तकाइची ने एक्स पर लिखा, मैंने अपनी तरफ़ से इंडो-पैसिफ़िक क्षेत्र की स्थिति और चीन सहित वहाँ मौजूद विभिन्न चुनौतियों पर जापान की सोच और रुख़ के बारे में बताया। साथ ही, यह भी साफ़ किया कि G7 देश आपसी तालमेल के साथ इस पर प्रतिक्रिया देंगे।इसे भी पढ़ें: Iran Deal पर बोले Trump: दूसरा दौर आसान होगा, तेहरान को पैसा देने की बात &#039;बकवास&#039;इस बीच, फ्रांस के एक रिसॉर्ट शहर में दुनिया भर के नेताओं के जमा होने के साथ ही, मंगलवार को G7 समिट के पहले सेशन में यूक्रेन में शांति बहाल करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। रॉयटर्स के अनुसार, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने दिन के पहले सेशन में हिस्सा लिया, जो यूक्रेन में शांति कायम करने पर केंद्रित था। इस बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मौजूद थे। रॉयटर्स के मुताबिक, ज़ेलेंस्की ट्रंप से अलग से बातचीत कर सकते हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति अन्य G7 नेताओं से भी अलग-अलग मुलाकात करेंगे। नेताओं के बीच यह बैठक कीव और मॉस्को के बीच बढ़ते तनाव के बीच हो रही है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:28 +0530</pubDate>
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<title>Iran Deal पर बोले Trump: दूसरा दौर आसान होगा, तेहरान को पैसा देने की बात &amp;apos;बकवास&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत के अगले चरण को लेकर उम्मीद जताई। उन्होंने पश्चिम एशिया में तनाव खत्म करने के लिए इस्लामिक रिपब्लिक के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद कहा कि बातचीत का दूसरा चरण असल में आसान&quot; होगा। साथ ही, उन्होंने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि समझौते के तहत वॉशिंगटन तेहरान को आर्थिक मदद देगा। फ्रांस के एवियन में G7 समिट के दौरान कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ द्विपक्षीय बैठक में ट्रंप ने दोहराया कि ईरान के साथ समझौता हो चुका है और इसे निष्पक्ष और अच्छा समझौता बताया।इसे भी पढ़ें: Hormuz में ईरान का &#039;माइन&#039; गेम, US Peace Deal के बावजूद Global Oil Supply पर मंडराया संकटट्रंप ने कहा, ईरान के साथ हमारा समझौता हो गया है और यह सफल होना चाहिए। अब यह दूसरे चरण में जा रहा है, जो मुझे लगता है कि असल में आसान होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बातचीत के पहले चरण के दौरान ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हालांकि वे हमले करने से बचना चाहते थे, लेकिन हालात ने उनके प्रशासन के सामने सीमित विकल्प ही छोड़े थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि मैं पिछले हफ़्ते उन पर हमला नहीं करना चाहता था, लेकिन हमारे पास कोई चारा नहीं था, और असल में हमने दो बार ऐसा किया। हम तीसरी बार ऐसा कर रहे हैं, और हम ऐसा न करने की स्थिति में भी हो सकते थे, लेकिन हमारे पास एक उचित समझौता है। यह एक अच्छा समझौता है।ट्रंप ने उन अटकलों को भी खारिज कर दिया कि वॉशिंगटन किसी समझौते के तहत ईरान में पैसा निवेश करेगा। उन्होंने ऐसी खबरों को बेतुका बताया। उन्होंने कहा कि वैसे, हम ईरान में कोई पैसा निवेश नहीं कर रहे हैं; कल यह अफवाह उड़ी थी, जो बेतुकी थी। अमेरिका का रुख दोहराते हुए ट्रंप ने कहा कि हम कोई पैसा निवेश नहीं कर रहे हैं। ईरान में पैसा निवेश करने की हमारी कोई बाध्यता नहीं है।इसे भी पढ़ें: डील हो या ना हो, मैं ईरान को...ट्रंप पर फूटा नेतन्याहू का गुस्साCNN के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि बातचीत के अगले चरण में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के तकनीकी पहलुओं, तेहरान को आर्थिक राहत देने से जुड़े मुद्दों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। साथ ही, खाड़ी देशों द्वारा वित्तपोषित 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर के प्रस्तावित पुनर्निर्माण कोष पर भी चर्चा होगी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने CBS के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि ईरान को पुनर्निर्माण कोष तक &quot;पहुंच मिल सकती है&quot;, बशर्ते वह समझौते में उल्लिखित कुछ शर्तों और दायित्वों को पूरा करे। यह देखते हुए कि संयुक्त राज्य अमेरिका मेज पर मौजूद कई विकल्पों के लिए खुला है, वेंस ने उन दावों को खारिज कर दिया कि प्रस्तावित समझौते में ईरान की 24 बिलियन अमेरिकी डॉलर की फ्रीज की गई संपत्ति को जारी करना शामिल है। ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो गया है और शुक्रवार को समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद रणनीतिक जलमार्ग फिर से खुल जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि इस &quot;शानदार समझौते&quot; का उद्देश्य पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लाना है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>France में G7 Summit से PM Modi का दुनिया को बड़ा संदेश, Sustainable Planet के लिए भारत प्रतिबद्ध</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि वह फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स शहर में G7 शिखर सम्मेलन में दुनिया के नेताओं के साथ बातचीत करने के लिए उत्सुक हैं। दुनिया के सात प्रमुख औद्योगिक देशों (G7) के नेता शिखर सम्मेलन में बातचीत के अपने पहले पूरे दिन की बैठक कर रहे हैं, जिसकी शुरुआत आधिकारिक तौर पर सोमवार को हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि वह G7 शिखर सम्मेलन के लिए फ्रांस के एवियन पहुँच गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत &quot;एक ज़्यादा टिकाऊ और समृद्ध ग्रह के लिए सामूहिक प्रयासों&quot; को आगे बढ़ाने के लिए &quot;पूरी तरह प्रतिबद्ध&quot; है। इससे पहले मंगलवार (स्थानीय समय) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि स्लोवाकिया की अपनी यात्रा पूरी करने के बाद वे स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा पहुँच गए हैं।इसे भी पढ़ें: रिकॉर्ड के मोर्चे पर कौन भारी, कौन कमजोरफ्रांस 15 से 17 जून तक होने वाले 52वें G7 शिखर सम्मेलन का मेज़बान देश है। दुनिया के सात प्रमुख औद्योगिक देशों के समूह &#039;G7&#039; में फ्रांस, अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, जापान, इटली और कनाडा शामिल हैं। भारत भी एक सहयोगी देश के तौर पर 13वीं बार G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहा है और यह सम्मेलन प्रधानमंत्री मोदी की इस बैठक में लगातार सातवीं भागीदारी होगी। स्लोवाकिया की अपनी यात्रा के समापन पर प्रधानमंत्री ने इसे &quot;ऐतिहासिक और फलदायी&quot; बताया और कहा कि इस यात्रा के नतीजे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूत करेंगे। भारत-स्लोवाकिया संबंधों की गर्मजोशी को दर्शाते हुए, स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने यात्रा पूरी होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी को व्यक्तिगत रूप से विदा किया।इसे भी पढ़ें: France पहुंचे PM Modi, G7 Summit में वैश्विक चुनौतियों पर दुनिया को दिखाएंगे रास्ताअपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी को स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान &#039;द ऑर्डर ऑफ़ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास)&#039; से सम्मानित किया। यह सम्मान किसी विदेशी देश द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को दिया गया 33वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान था। पीएम मोदी की यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने शिक्षा, रिसर्च, टैलेंट मोबिलिटी और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कई समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिससे उनके संबंध और मजबूत हुए। स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत के बाद, ब्रातिस्लावा में प्रधानमंत्री मोदी की राजकीय यात्रा के दौरान जारी एक संयुक्त बयान में इन समझौतों को औपचारिक रूप दिया गया। इन पहलों में मुख्य रूप से टैलेंट मोबिलिटी, प्रोफेशनल सुरक्षा और उच्च शिक्षा व सांस्कृतिक क्षेत्रों में संस्थागत साझेदारी पर ध्यान दिया गया है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:27 +0530</pubDate>
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<title>EU&#45;US Trade Deal को European Parliament की हरी झंडी, कई अमेरिकी सामानों पर खत्म होगा टैरिफ</title>
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<description><![CDATA[ यूरोपीय संसद ने उन दो कानूनों को अंतिम मंज़ूरी दे दी, जिनका मकसद अगस्त 2025 के EU-US संयुक्त बयान के तहत अमेरिका के साथ यूरोपीय संघ के व्यापार समझौते को लागू करना है। इन कानूनों में टैरिफ में कटौती के साथ-साथ यूरोपीय उद्योगों और कृषि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए उपाय भी शामिल हैं। यूरोपीय संसद की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यूरोपीय संसद के सदस्यों (MEPs) ने औद्योगिक और कृषि-खाद्य आयात से जुड़े मुख्य नियम का समर्थन किया। इसके पक्ष में 440 और विपक्ष में 151 वोट पड़े, जबकि 50 सदस्य वोटिंग से दूर रहे। यह कानून अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों पर टैरिफ खत्म करता है और अमेरिका के कई तरह के सीफ़ूड और कृषि उत्पादों को बाज़ार में प्राथमिकता के साथ पहुँच प्रदान करता है। एक दूसरे नियम को 444 वोटों के समर्थन और 152 वोटों के विरोध के साथ मंज़ूरी मिली (54 सदस्य वोटिंग से दूर रहे)। यह नियम अमेरिका से लॉबस्टर के टैरिफ-मुक्त आयात की सुविधा को बढ़ाता है और इसमें प्रोसेस्ड लॉबस्टर उत्पादों को भी शामिल करता है।इसे भी पढ़ें: पहले हंसे, फिर पिया पानी और ऐसे अमेरिका-यूरोप को डुबो आए जयशंकर, हिले सारे पत्रकारसंसद ने कहा कि दोनों प्रस्तावों पर पहले ही संसद और काउंसिल के वार्ताकारों के बीच सहमति बन चुकी थी, और यूरोपीय आयोग के मूल प्रस्तावों को और मज़बूत करने के लिए उनमें कई संशोधन भी किए गए थे। इस कानून में शामिल मुख्य प्रावधानों में से एक &quot;सनसेट क्लॉज़&quot; है, जिसके तहत इंडस्ट्रियल और एग्री-फूड इंपोर्ट से जुड़े नियम 31 दिसंबर, 2029 को खत्म हो जाएंगे, जब तक कि उन्हें रिन्यू न किया जाए। यूरोपीय आयोग को 30 जून, 2029 तक EU के उद्योगों, खेती, छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों और तीसरे देशों के साथ व्यापार के तरीकों पर इस नियम के असर का व्यापक मूल्यांकन करना होगा। अगर सही समझा जाए, तो इस समीक्षा के साथ नियम को आगे बढ़ाने का कानूनी प्रस्ताव भी लाया जा सकता है।इसे भी पढ़ें: 2 देशों ने हिंदी में मोदी पर किया बड़ा ऐलान, पूरी दुनिया हैरान!यह कानून स्टील और एल्युमीनियम से बनी चीज़ों पर US के टैरिफ से जुड़ी चिंताओं को भी दूर करता है। यूरोपीय संसद ने ध्यान दिलाया कि अमेरिका ने अगस्त 2025 में टैरिफ के दायरे में आने वाले स्टील और एल्युमीनियम से बनी चीज़ों की लिस्ट में 407 प्रोडक्ट कैटेगरी जोड़ी थीं, जिससे व्यापार में अनिश्चितता पैदा हुई। हाल ही में मंज़ूर किए गए उपायों के तहत, अगर अमेरिका 31 दिसंबर, 2026 तक EU के स्टील और एल्युमीनियम से बनी चीज़ों पर 15 प्रतिशत से ज़्यादा टैरिफ दरें लागू रखता है, तो आयोग के पास टैरिफ में दी गई रियायतों को रोकने का अधिकार होगा।इसे भी पढ़ें: मोदी ने पकड़ी अमेरिका के कई खतरनाक लोगों की गर्दन! दुनिया हैरानआयोग 1 दिसंबर, 2026 तक इन प्रोडक्ट्स पर टैरिफ के तौर-तरीकों के बारे में यूरोपीय संसद और काउंसिल को एक रिपोर्ट भी सौंपेगा। इसके अलावा, अगर अमेरिका उन EU एक्सपोर्ट्स पर टैरिफ से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में नाकाम रहता है, जिन्हें 24 फरवरी, 2026 तक 15 प्रतिशत की ऑल-इनक्लूसिव टैरिफ सीमा का फ़ायदा मिल रहा था, तो आयोग टैरिफ रियायतों को रोक सकता है। रिलीज़ में कहा गया है, अगर अमेरिका उन EU एक्सपोर्ट्स पर टैरिफ से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में नाकाम रहता है, जिन्हें 24 फरवरी, 2026 तक 15% की ऑल-इनक्लूसिव टैरिफ सीमा का फ़ायदा मिल रहा था, तो आयोग टैरिफ रियायतों को रोक सकेगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:26 +0530</pubDate>
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<title>G7 Summit से पहले Mark Carney का बड़ा बयान, बोले&#45; दुनिया में बजा India का डंका</title>
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<description><![CDATA[ कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते महत्व पर ज़ोर दिया है। उन्होंने कहा कि G7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी तेज़ी से बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को दर्शाती है, जहाँ अब बड़े फ़ैसले केवल कुछ ही देश नहीं ले सकते। अपनी छह-दिवसीय यूरोपीय यात्रा के दौरान ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन में बातचीत करते हुए कार्नी ने कहा कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच चर्चा में भारत जैसे देशों को शामिल करना यह दिखाता है कि जटिल अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक वैश्विक सहयोग की ज़रूरत है। फ्रांस में होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले कार्नी ने कहा कि यह इस बात की मान्यता है कि G7, अगर कभी दुनिया को चलाता भी था, तो अब वह दुनिया को नहीं चलाता और न ही ऐसा होने का दिखावा करता है। इसे भी पढ़ें: जी-7 शिखर सम्मेलन में अमेरिका दिखा अलग थलग, दुनिया जता रही मोदी पर भरोसाभारत की मौजूदगी बदलती ग्लोबल स्थितियों का संकेत हैकार्नी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ग्लोबल हालात काफ़ी बदल गए हैं, इसलिए G7 के लिए ज़रूरी है कि वह अपने पारंपरिक सदस्यों के अलावा प्रभावशाली देशों के साथ भी जुड़े। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश ऐसे मुद्दों पर अनोखे नज़रिए और व्यावहारिक समाधान लाते हैं जिनका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। कनाडा के प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समिट में न सिर्फ़ G7 के सदस्य बल्कि कई सहयोगी देश भी शामिल होंगे। यह ग्लोबल चर्चाओं को ज़्यादा समावेशी और असरदार बनाने की एक बड़ी कोशिश है।इसे भी पढ़ें: France में G7 Summit से PM Modi का दुनिया को बड़ा संदेश, Sustainable Planet के लिए भारत प्रतिबद्धसमिट में कई उभरती ताक़तों को बुलाया गया हैमंगलवार को एवियन में शुरू होने वाले 52वें G7 समिट में बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के साथ-साथ भारत, ब्राज़ील, मिस्र, केन्या और कई खाड़ी देशों जैसे आमंत्रित देशों के नेता भी शामिल होंगे। कार्नी के मुताबिक, इन देशों की भागीदारी से ग्लोबल प्राथमिकताओं पर चर्चा का दायरा बढ़ेगा और राष्ट्रीय सीमाओं से परे की चुनौतियों का समाधान खोजने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह बैठक एक उभरती हुई विश्व व्यवस्था को आकार देने में भूमिका निभा सकती है। उन्होंने इस साल की शुरुआत में दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम में भी ऐसी ही बात कही थी, जहाँ उन्होंने बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच मध्यम दर्जे की ताक़तों के बीच ज़्यादा सहयोग का आह्वान किया था। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:25 +0530</pubDate>
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<title>डील से पलटा ईरान? फिर आने वाली है तबाही!</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ईरान समझौते के बारे में यह कहा जा रहा है कि कहीं दस्तखत से पहले यह समझौता टूट तो नहीं जाएगा। डॉनल्ड ट्रंप यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने ईरान के साथ एक बड़ी डील कर ली है। लेकिन एमओयू पर डिजिटल साइन करने के 24 घंटे बाद इस डील के पेच सामने आ रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बयानों में भी विरोधाभास साफ-साफ झलक रहा है। ट्रंप यह दावा कर रहे हैं कि शुक्रवार से हॉर्मोस खुलने वाला है। जबकि ईरान का कहना है कि पहले अमेरिका की नियत को परखा जाएगा और उसके बाद ही हॉर्मोस ट्रेड खोला जाएगा। ईरान को 28 अरब के पुनर्निर्माण फंड पर भी मतभेद पैदा हो गए हैं। एमओयू में यह बात लिखी है कि अमेरिका ईरान को 28 अरब का फंड देगा। लेकिन ट्रंप ने इसे निराधार बताया है।इसे भी पढ़ें: डील हो या ना हो, मैं ईरान को...ट्रंप पर फूटा नेतन्याहू का गुस्साट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर यह साफ-साफ लिखा है कि यह फेक न्यूज़ है। अमेरिका 28 अरब का फंड नहीं देने वाला। इसके अलावा परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी कंफ्यूजन है। ट्रंप यह कह रहे हैं कि ईरान के पास कोई परमाणु बम नहीं होगा। जबकि ईरान का कहना है कि इस पर 60 दिन की वार्ता के दौरान सहमति बनाई जाएगी। मतलब अभी इस पर कुछ हुआ नहीं है।  अमेरिका ईरान डील से आईडीएफ मोसाद नाराज है। आईडीएफ और मोसाद ट्रंप की डील को कमजोर मानते हैं। न्यूक्लियर डील से खतरा कम नहीं होगा। द जेरुशसलेलम पोस्ट के हवाले से यह खबर सामने आ रही है। तो देखिए इजराइली डिफेंस फोर्सेस हो या फिर इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद। इसके अफसर मान रहे हैं कि यह डील इजराइल के पक्ष में नहीं है। इसका कहीं ना कहीं फायदा ईरान को होगा। इसे भी पढ़ें: जी-7 शिखर सम्मेलन में अमेरिका दिखा अलग थलग, दुनिया जता रही मोदी पर भरोसान्यूक्लियर डील से खतरा कम नहीं होगा। यूरेनियम फ्रेमवर्क में कई कमियां हैं। प्रॉक्सी फंडिंग के मुद्दे पर इजराइल दरअसल भड़का हुआ है। हिजबुल्लाह का खात्मा चाहती है आईडीएफ। कमजोर डील से और मजबूत होगी ईरानी रिजीम। यह मानना है लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम है ट्रंप की डील। द जेरुसलम पोस्ट के हवाले से यह अहम खबर सामने आ रही है। लेबनान बारूद से दहलाए। ट्रंप गुस्से से आग बबूला। ट्रंप ने साफ कह दिया कि नेतन्याहू को बिल्कुल भी विवेक नहीं है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:25 +0530</pubDate>
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<title>Delhi Airport पर &amp;apos;अपमान&amp;apos; के बाद बढ़ा Diplomatic विवाद, Zahid Rahman बोले&#45; &amp;apos;यह तत्काल विरोध था&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान के एक वरिष्ठ सलाहकार ज़ाहिद उर रहमान ने कहा कि IGI एयरपोर्ट पर ढाई घंटे तक रोके जाने के बाद वे नई दिल्ली से वापस लौट आए, क्योंकि उन्हें लगा कि &quot;तुरंत विरोध&quot; करने की ज़रूरत है। ज़ाहिद ने मंगलवार को ढाका में पत्रकारों से कहा कि वे यह दिखाना चाहते थे कि उन्हें लगा कि देश के अंदर और बाहर यह संदेश भेजा जाना चाहिए कि यह शेख़ हसीना की सरकार नहीं है। हालांकि बाद में ज़ाहिद को एंट्री मिल गई, लेकिन वह ढाका लौट आए और बांग्लादेश ने सोमवार को भारत के एक सीनियर डिप्लोमैट को तलब किया। बांग्लादेशी न्यूज़ आउटलेट &#039;प्रोथोम आलो&#039; के मुताबिक, उन्होंने इस घटना को भारतीय अधिकारियों द्वारा परेशान किया जाना बताया।इसे भी पढ़ें: Delhi Airport की Watchlist में था PM के सलाहकार का नाम? ढाई घंटे पूछताछ के बाद वापस लौटेजैसे-जैसे यह विवाद बढ़ता गया, ज़ाहिद ने कहा कि वह अपने फ़ैसले की वजह से कोई दुश्मनी या नकारात्मक स्थिति पैदा नहीं करना चाहते। ढाका के अख़बार डेली स्टार ने उनके हवाले से कहा कि हम किसी भी हाल में किसी भी देश के साथ खराब स्थिति नहीं चाहते। मुझे उम्मीद है कि इस घटना का दोनों देशों के बीच भविष्य के रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, तात्कालिक नुकसान हो चुका था। खबरों के मुताबिक, नीति एवं रणनीति मामलों के सलाहकार ज़ाहिद भारत में निगरानी सूची में थे और राजनयिक पासपोर्ट के बजाय साधारण पासपोर्ट पर यात्रा कर रहे थे।इसे भी पढ़ें: Bangladesh PM Adviser को Delhi Air Port पर ढाई घंटे रोक कर Dhaka को सख्त संदेश दे दिया गया हैनुकसान को कम करने की कोशिश में डेली स्टार ने ज़ाहिद के हवाले से कहा कि अगर उचित प्रक्रियाओं का पालन किया जाए तो उन्हें भविष्य में भारत आने में कोई आपत्ति नहीं होगी। ज़ाहेद ने अक्सर भारत की आलोचना की है। एक बार बांग्लादेशी टेलीविज़न डिबेट में ज़ाहेद ने भारत को बेवकूफ़ पड़ोसी कहा था। उन्होंने बीजेपी और उसके नेताओं - जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हैं - की भी आलोचना की है। उन्होंने इन पर बांग्लादेश की राजनीति में दखल देने, सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा देने और ढाका पर अपना प्रभाव जमाने का आरोप लगाया है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:22 +0530</pubDate>
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<title>G7 Summit में PM Modi का ग्रैंड वेलकम, President Macron ने गर्मजोशी से किया स्वागत</title>
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<description><![CDATA[ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार को G7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया। भारत, जो विकासशील देशों के हितों का प्रतिनिधित्व करता है और &#039;ग्लोबल साउथ&#039; की एक अहम आवाज़ है, उसे लगातार आठवें साल इस शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है। इस यात्रा की मुख्य बातों में अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ तय बैठक और अन्य वैश्विक नेताओं के साथ मुलाकातें शामिल हैं।इसे भी पढ़ें: जी-7 शिखर सम्मेलन में अमेरिका दिखा अलग थलग, दुनिया जता रही मोदी पर भरोसाशुक्रवार को होर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगाअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य शुक्रवार तक पूरी तरह से फिर से खुल जाएगा और घोषणा की कि ईरान के साथ हाल ही में हुए समझौते (MoU) का विवरण आने वाले दिनों में जारी किया जाएगा। समझौते को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ट्रंप ने कहा कि वह इस समझौते के बारे में बताने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और उन्हें उम्मीद है कि दूसरे चरण की बातचीत तेज़ी से आगे बढ़ेगी। ट्रंप ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह समझौता एक ही मकसद पर केंद्रित था: ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना। उन्होंने कहा, &quot;यह समझौता एक ही बात के बारे में है — कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होंगे।&quot; उन्होंने आगे कहा कि MoU में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तेहरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और न ही अपने पास रखेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह समीक्षा के लिए समझौते को कांग्रेस के पास भेजने के पक्ष में हैं और इसे एक ऐसा कदम बताया जिसका वह समर्थन करते हैं। इसे भी पढ़ें: G7 Summit से पहले Mark Carney का बड़ा बयान, बोले- दुनिया में बजा India का डंकाG7 नेता यूक्रेन का समर्थन करेंगेरॉयटर्स को फ्रांस के एक राजनयिक सूत्र ने बताया कि मंगलवार को यूक्रेन पर हुई बहुत सार्थक बातचीत के दौरान G7 देशों के नेता यूक्रेन के समर्थन में एकजुट रहने और रूस पर और दबाव बनाने पर सहमत हुए। राजनयिक ने कहा कि G7 नेता रूस के तेल और गैस पर प्रतिबंध लगाकर उस पर दबाव बढ़ाने पर सहमत हुए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:21 +0530</pubDate>
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<title>20 प्रधानमंत्री देने वाले Eton College में पढ़ेंगे Prince George, पिता William की विरासत संभालेंगे</title>
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<description><![CDATA[ केन्सिंगटन पैलेस ने मंगलवार को बताया कि किंग चार्ल्स के 12 साल के पोते, ब्रिटेन के प्रिंस जॉर्ज, अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए इस साल के आखिर में मशहूर ईटन कॉलेज में पढ़ाई शुरू करेंगे। जॉर्ज के पिता और गद्दी के वारिस प्रिंस विलियम, और उनके चाचा प्रिंस हैरी भी ईटन में पढ़े थे। यह ब्रिटेन के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक है और लंदन के पश्चिम में राजा के विंडसर कैसल के पास स्थित है। विलियम के ऑफ़िस ने एक बयान में कहा कि केन्सिंगटन पैलेस पुष्टि कर सकता है कि प्रिंस जॉर्ज इस सितंबर से ईटन कॉलेज में पढ़ाई करेंगे। लड़कों के इस बोर्डिंग स्कूल की फ़ीस सालाना लगभग £63,000 ($84,552) है। अभी, जॉर्ज - जो शाही गद्दी के उत्तराधिकार की कतार में दूसरे नंबर पर हैं - अपनी बहन शार्लेट और भाई लुइस के साथ विंडसर के पास प्राइवेट लैंब्रुक स्कूल में पढ़ते हैं; विंडसर में ही उनके परिवार का घर भी है।इसे भी पढ़ें: Patna Police सवालों के घेरे में! Roshan Anand का आरोप - किसके दबाव में Khan Sir को बचाया जा रहा है?विलियम ईटन स्कूल जाने वाले पहले शाही सदस्य थे, जबकि चार्ल्स स्कॉटलैंड के उत्तरी तट पर स्थित प्राइवेट स्कूल &#039;गॉर्डनस्टाउन&#039; गए थे। वही स्कूल जहाँ उनके पिता प्रिंस फ़िलिप भी पढ़े थे, लेकिन उन्हें वहाँ की ज़िंदगी मुश्किल लगी थी। विलियम ने कहा है कि उन्हें स्कूल में बिताया अपना समय बहुत पसंद आया और हाल ही में उन्होंने बताया कि वे अक्सर वीकेंड पर विंडसर कैसल जाकर अपनी दिवंगत दादी, महारानी एलिज़ाबेथ के साथ चाय पीते थे। 1440 में स्थापित ईटन लंबे समय से देश के कई रसूखदार लोगों का शिक्षण संस्थान रहा है। यहाँ बोरिस जॉनसन और डेविड कैमरन जैसे 20 ब्रिटिश प्रधानमंत्रियों के साथ-साथ ह्यू लॉरी, डेमियन लुईस और टॉम हिडलस्टन जैसे अभिनेताओं ने भी शिक्षा प्राप्त की है। यहाँ कई परंपराएँ आज भी कायम हैं; छात्र टेलकोट, वेस्टकोट और गाउन पहनते हैं और शिक्षकों को बीक्स कहकर बुलाते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:21 +0530</pubDate>
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<title>France में G7 Summit: PM Modi&#45;Trump की मुलाकात, इस बार गले नहीं मिले, सिर्फ मिलाया हाथ</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के एवियन में G7 समिट के दौरान गर्मजोशी से हाथ मिलाया; यह 16 महीनों में उनकी पहली आमने-सामने की मुलाकात थी। यह मुलाकात तब हुई जब नेता फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मेज़बानी में हो रहे समिट के लिए इकट्ठा हुए थे। कार्यक्रम स्थल से आई तस्वीरों में पीएम मोदी को ट्रंप का मुस्कुराते हुए अभिवादन करते देखा गया, जिसके बाद दोनों नेता दुनिया के अन्य नेताओं के साथ अपनी-अपनी जगह पर बैठे। हालांकि, मोदी-ट्रंप की मशहूर गले मिलने वाली तस्वीर इस बार देखने को नहीं मिली। पीएम मोदी और ट्रंप के बीच यह मुलाकात, फरवरी 2025 में पीएम की वॉशिंगटन यात्रा के बाद आमने-सामने की पहली बातचीत थी। यह यात्रा ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने के कुछ ही समय बाद हुई थी। दोनों नेताओं की यह मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों में हालिया तनाव के माहौल में हुई; यह तनाव &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; से जुड़ी घटनाओं और भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ के कारण बढ़ा था। इसे भी पढ़ें: जी-7 शिखर सम्मेलन में अमेरिका दिखा अलग थलग, दुनिया जता रही मोदी पर भरोसासमिट के दौरान अहम कूटनीतिक गतिविधियांप्रधानमंत्री मोदी समिट में हिस्सा लेने के लिए दो दिन के दौरे पर एवियन पहुंचे। यह G7 समिट में प्रधानमंत्री मोदी की लगातार सातवीं मौजूदगी है, जो वैश्विक चर्चाओं में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम उच्च-स्तरीय कूटनीतिक मुलाकातों से भरा हुआ है। वह कई द्विपक्षीय बैठकें करेंगे, जिनमें कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बातचीत शामिल है। इन मुलाकातों में संबंधों को मजबूत करने और अहम क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। शाम को वह फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित गाला डिनर में अन्य विश्व नेताओं के साथ शामिल होंगे। इसे भी पढ़ें: G7 Summit से पहले Mark Carney का बड़ा बयान, बोले- दुनिया में बजा India का डंकाइस समिट के एजेंडे में ग्लोबल इकोनॉमिक स्टेबिलिटी, एनर्जी सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्षों और व्यापक जियोपॉलिटिकल घटनाक्रमों पर फोकस किए जाने की उम्मीद है। हालांकि भारत G7 का सदस्य नहीं है, फिर भी वह इस फोरम में नियमित रूप से शामिल होता रहा है। उम्मीद है कि नई दिल्ली इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल &#039;ग्लोबल साउथ&#039; की चिंताओं को उजागर करने और विकासशील देशों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर ज़्यादा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए करेगी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:20 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan की मदद Turkey को पड़ी भारी, Celebi Aviation को India में लगा 500 मिलियन डॉलर का झटका</title>
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<description><![CDATA[ &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; के दौरान पाकिस्तान को तुर्की से मिली सैन्य मदद की वजह से भारतीय एयरपोर्ट्स से हटाए जाने के एक साल से ज़्यादा समय बाद, तुर्की की एविएशन सर्विस कंपनी &#039;सेलेबी एविएशन&#039; के चेयरमैन ने कहा है कि अचानक सिक्योरिटी क्लीयरेंस रद्द होने और उसके नतीजतन इक्विपमेंट ज़ब्त होने, कर्मचारियों के ट्रांसफर और कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने से रातों-रात लगभग 500 मिलियन डॉलर की वैल्यू खत्म हो गई। ब्लूमबर्ग के साथ एक इंटरव्यू में, कंपनी की चेयरपर्सन कैनन सेलेबिओग्लू ने कहा कि भारत सरकार के फ़ैसले ने असल में उस बाज़ार में उनकी मौजूदगी को खत्म कर दिया, जिसे 2000 से &quot;बहुत मेहनत और बारीकी से&quot; बनाया गया था। सेलेबी एविएशन को हटाए जाने की घटना &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; के बाद हुई। यह भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक चला एक सशस्त्र टकराव था, जिसमें अंकारा ने हथियारों और सैनिकों की तैनाती के ज़रिए खुले तौर पर इस्लामाबाद का साथ दिया था। तुर्की में बने 350 से ज़्यादा बायराक्टर TB2 और असिसगार्ड सोंगर ड्रोन पाकिस्तान भेजे गए थे।इसे भी पढ़ें: आतंक के खिलाफ Europe में भारत को मिला बड़ा साथ, Slovakia संग बनेगा Joint Counter-Terrorism ग्रुपमई 2025 में भारत सरकार की कार्रवाई (&#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; के एक हफ़्ते बाद) से पहले, सेलेबी एक बड़ी कंपनी थी जो नई दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु समेत नौ बड़े हब पर ग्राउंड-हैंडलिंग ऑपरेशन संभालती थी। हालांकि, 15 मई 2025 को भारत के हवाई हमलों में पाकिस्तानी आतंकी कैंपों और एयरबेस को निशाना बनाए जाने के ठीक एक हफ़्ते बाद भारत के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उस कंपनी की सुरक्षा मंज़ूरी तुरंत प्रभाव से रद्द कर दी। यह कदम भारत के साथ सशस्त्र संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को तुर्की की सैन्य मदद मिलने की खबरों पर मचे हंगामे के बाद उठाया गया। केंद्र सरकार ने सेलेबी एविएशन का लाइसेंस रद्द करते हुए सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया और कहा कि यह कदम &quot;मामले की गंभीरता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा की ज़रूरत को देखते हुए उठाया गया है।इसे भी पढ़ें: अमरनाथ यात्रा 2026: सुरक्षा का अभेद्य घेरा, पहलगाम-अनंतनाग में High-Tech इंतज़ामसेलेबी एविएशन की भारतीय शाखा का ऑपरेटिंग लाइसेंस रद्द करने के केंद्र सरकार के फ़ैसले को दिल्ली हाई कोर्ट ने जुलाई में सही ठहराया था। भारत द्वारा सुरक्षा मंज़ूरी रद्द किए जाने से पहले, सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज़ इंडिया देश की सबसे बड़ी ग्राउंड-हैंडलिंग ऑपरेटर बन गई थी। यह कंपनी नई दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु समेत नौ बड़े एविएशन हब पर एयरपोर्ट के ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का कामकाज संभालती थी। कंपनी भारत के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर हर साल लगभग 58,000 उड़ानों और 5,40,000 टन कार्गो का कामकाज संभालती थी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:20 +0530</pubDate>
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<title>भारत ने ट्रक पर लादी क्रूज मिसाइल, बटन दबाते ही जो हुआ...</title>
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<description><![CDATA[ मिलिट्री ट्रक पर लाद कर भारत ने ऐसी मिसाइल दागी है जिसने दुश्मन देशों में इस वक्त हड़कंप मचा कर रख दिया है। भारत ने ऐसा जोरदार धमाका किया है जिसने भारत के खिलाफ साजिश रचने वालों और दिल्ली को आंख दिखाने वालों के पैरों तले से जमीन खिसका के रख दी। आपको बता दें कि ओडिशा के तट से भारत ने अपनी नई लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल यानी कि एलआरएलएसएम का सफल परीक्षण यानी कि टेस्ट किया है। यह सिर्फ एक मिसाइल नहीं है बल्कि भारत की उस नई ताकत का ऐलान है जो दुश्मन की सीमा के सैकड़ों किलोमीटर अंदर मौजूद सैन्य ठिकानों तक सटीक वार कर सकती है। उड़ीसा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से जैसे ही मिसाइल लॉन्च हुई, कुछ ही पलों में उसने अपने तय रास्ते पर उड़ान भरनी शुरू कर दी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक टेस्ट पूरी तरह से सफल रहा है और मिसाइल ने अपने सभी मिशन उद्देश्यों को हासिल कर लिया है। लेकिन आखिर इस मिसाइल को लेकर इतनी चर्चा क्यों हो रही है? इसे भी पढ़ें: Project Kusha भारत की सुरक्षा में गेम-चेंजर: Rajnath Singh ने नए Air Defense System को सराहादरअसल आपको बता दें कि एलआरएलएसीएम एक क्रूज मिसाइल है। क्रूज मिसाइलें जो हैं यह बैलस्टिक मिसाइलों की तरह आसमान में बहुत ऊंचाई तक नहीं जाती बल्कि जमीन से बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हुए अपने लक्ष्य यानी कि टारगेट तक पहुंचती उन्हें नेहस्तनाबूद कर देती है। और यही वजह है कि दुश्मन के रडार इन्हें आसानी से ट्रैक नहीं कर पाते। इतना ही नहीं यह रास्ते में अपना मार्ग भी यानी कि रास्ता भी बदल सकती है। जिससे एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना और भी ज्यादा मुश्किल हो जाता है। अब हम ग्राफिक्स के जरिए समझते हैं कि रास्ता बदल सकती है कैसे यह लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल। सबसे पहले लंबी दूरी तक यह मार कर सकती है। जमीन पर बने टारगेट को यह निशाना बनाती है। जीपीएस, आईएएस और दूसरे नेविगेशन सिस्टम से डायरेक्शन यह लेती है। दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने के लिए कम ऊंचाई पर यह उड़ सकती है। अब आप यह समझिए कि इस टेस्ट की सबसे बड़ी अहमियत क्या है?इसे भी पढ़ें: France ने सौंपा राफेल का राज, चीन-पाकिस्तान में मचा हड़कंपरक्षा एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह मिसाइल भारत की डीप स्ट्राइक क्षमता को एक बहुत बड़ी मजबूती देने वाली है। डीप स्ट्राइक यानी दुश्मन की सीमा के काफी अंदर मौजूद एयरबेस, रडार स्टेशन, मिसाइल लॉन्च साइट, कमान सेंटर और सैन्य मुख्यालय जैसे अहम ठिकानों पर दूर से ही सटीक हमला करने की इसकी क्षमता है। मान लीजिए किसी दुश्मन देश का एयरबेस उसकी सीमा के सैकड़ों किलोमीटर अंदर मौजूद है। सामान्य परिस्थितियों में वहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो सकता है। लेकिन एलआरएलएसीएम यानी कि क्रूज मिसाइलें बिना सीमा पार किए भी ऐसे ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता रखती है। उन्हें नस्तनाबूद कर सकती है और यही वजह है कि आधुनिक युद्ध में डीप स्ट्राइक क्षमता को निर्णायक माना जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई है। इसके विभिन्न सिस्टम जो है यह डीआरडीओ की लैब और भारतीय उद्योगों ने मिलकर इसे तैयार किए हैं। यानी भारत अब इस तरह की रणनीतिक क्षमता के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर नहीं रहेगा और यही वजह है कि एलआरएलएसीएम का यह सफल परीक्षण सिर्फ एक मिसाइल टेस्ट नहीं माना जा रहा है। इसे भी पढ़ें: DRDO की LRLACM Cruise Missile का सफल Test, आत्मनिर्भर भारत की एक और बड़ी छलांगयह भारत की बढ़ती डीप स्ट्राइक क्षमता, रक्षा, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक ताकत का एक बहुत बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है। ऐसी क्षमता जो किसी भी संभावित दुश्मन को यह संदेश देती है कि अब भारत सिर्फ अपनी सीमाओं की रक्षा करने तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर दुश्मन की सीमा के काफी अंदर मौजूद उसके सबसे अहम सैन्य [संगीत] ठिकाने भी भारतीय पहुंच से बाहर नहीं है। और आधुनिक युद्ध के दौर में यही तकनीक किसी भी देश की सबसे बड़ी रणनीतिक बढ़त मानी जाती है। और यह काम, यह टेस्ट, यह सफल परीक्षण अब भारत ने कर लिया है। जिसने भारत के दुश्मन देशों की टेंशन इस वक्त बढ़ा दी है। और लगातार सिर्फ यह एक मिसाइल टेस्ट नहीं डीआरडीओ ने लगातार ऐसे कई धमाके किए हैं पिछले कुछ दिनों में जिसने दुश्मन देशों की चिंता को बढ़ा कर रख दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:18 +0530</pubDate>
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<title>G7 Summit 2026 In France | पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच महाबैठक! व्यापार, ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा पर बड़ा कूटनीतिक रोडमैप तैयार</title>
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<description><![CDATA[ वैश्विक कूटनीति के केंद्र बने फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन-लेस-बेन्स में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के इतर एक बेहद महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित घटनाक्रम सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। लगभग 18 महीनों के लंबे अंतराल के बाद दोनों वैश्विक नेताओं के बीच यह पहली आमने-सामने की मुलाकात थी, जिसने भारत-अमेरिका के रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को एक नई दिशा देने का काम किया है। औपचारिक बातचीत शुरू होने से पहले ही दोनों नेताओं के बीच गजब की गर्मजोशी देखी गई। समिट स्थल से सामने आईं तस्वीरों में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप को बेहद गर्मजोशी से हाथ मिलाते और अनौपचारिक रूप से बातचीत करते देखा गया, जो दोनों देशों के मजबूत होते निजी और कूटनीतिक संबंधों को बयां करता है। इसे भी पढ़ें: India-Canada Relations Free Trade Agreement | पीएम मोदी और कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी के बीच रक्षा, मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पूरीमोदी-ट्रंप बातचीत के मुख्य विषयसूत्रों के मुताबिक, क्षेत्रीय सुरक्षा घटनाक्रम, खासकर पश्चिम एशिया के हालात और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़ी चिंताएं चर्चा में प्रमुखता से शामिल हो सकती हैं। दोनों पक्षों के ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर भी विचार करने की संभावना है।भारत और अमेरिका लंबे समय की ऊर्जा साझेदारी बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं, और बातचीत के दौरान अमेरिका से ऊर्जा आयात एक अहम विषय हो सकता है।व्यापारिक संबंध भी एजेंडे में शामिल होने की उम्मीद है। सूत्रों ने संकेत दिया है कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है, और समझौते पर काम अगले कुछ हफ्तों में पूरा होने की संभावना है।इस बैठक से दोनों नेताओं को सहयोग के अहम क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा करने और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का मौका मिलने की उम्मीद है। इसे भी पढ़ें: सेंसेक्स-निफ्टी में फिर लौटी रौनक, Sensex 544 अंक मजबूत, Rupee में भी दिखी शानदार बढ़तG7 में PM मोदी ने समुद्री यात्रियों की सुरक्षा पर जोर दियाPM मोदी ने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच सभी देशों से समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और यह पक्का करने का आह्वान किया कि समुद्री यात्री सुरक्षित रूप से अपना काम कर सकें। मंगलवार को G7 समिट में एक आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए, मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया के नेताओं से कहा कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन की सुरक्षा वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिरता के लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नाविकों को अपनी जान को खतरे में डाले बिना अपने कर्तव्यों का पालन करने में सक्षम होना चाहिए।प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री आवाजाही में रुकावट का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण कई भारतीय नागरिकों की जान चली गई है। उनके ये बयान ओमान के तट के पास एक कमर्शियल जहाज़ पर अमेरिकी सेना के हमले में तीन भारतीय क्रू सदस्यों की मौत के कुछ दिनों बाद आए हैं। इस घटना ने भारत में चिंता और गुस्सा पैदा कर दिया है, और संघर्ष वाले इलाकों में काम करने वाले आम समुद्री कर्मचारियों की बेहतर सुरक्षा की मांग बढ़ रही है। Stay updated with International
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:18 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन: दीगर रूसी हमलों में आम लोग हताहत, यूनेस्को धरोहर स्थलों को भी हानि</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र ने रूस द्वारा ख़ारकीव और कीव पर किए गए बड़े पैमाने के हमलों की कड़ी निन्दा की है. यूक्रेन में संयुक्त राष्ट्र के मानवीय समन्वयक मथियास श्माले ने बताया है कि रातभर रूसी सशस्त्र बलों के हमलों ने एक बार फिर यूक्रेन के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों यानि ख़ारकीव और कीव में जान-माल का भारी नुक़सान किया है और बड़े पैमाने पर भय फैला है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:08:35 +0530</pubDate>
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<title>सूडान: भय, दुर्व्यवहार, हिंसा, हिरासत में लिए जाने की आशंकाओं में घिरे हैं आम नागरिक</title>
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<description><![CDATA[ सूडान में परस्पर विरोधी सैन्य बलों के बीच हिंसक टकराव अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है, और वहाँ आम नागरिक भय, हिरासत में लिए जाने या ग़ायब होने की आशंका में अपना जीवन गुज़ारने के लिए मजबूर हैं. सूडान के लिए स्वतंत्र, अन्तरराष्ट्रीय तथ्य-खोजी मिशन ने सोमवार को मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र के लिए अपने नए अपडेट में यह जानकारी दी है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:08:32 +0530</pubDate>
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<title>WHO: युगांडा की इबोला कार्रवाई की सराहना, सतर्कता और क्षेत्रीय सहयोग पर ज़ोर</title>
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<description><![CDATA[ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुखिया डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने युगांडा में इबोला के प्रकोप से निपटने के प्रयासों की सराहना की है, जो पड़ोसी काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) से फैलकर वहाँ पहुँचा है. हालांकि, उन्होंने आगाह भी किया कि संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए लगातार सतर्कता और सीमा-पार सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होगा. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:08:32 +0530</pubDate>
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<title>DRC: इबोला से लड़ाई के लिए समुदाय का भरोसा जीतना सबसे अहम</title>
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<description><![CDATA[ मानवीय संगठनों ने कहा है कि इबोला प्रभावित काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इस बीमारी के विरुद्ध लड़ाई जीतने के लिए सबसे पहले स्थानीय समुदायों का विश्वास हासिल करना आवश्यक है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:08:31 +0530</pubDate>
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<title>एशिया में सिंथेटिक नशीले पदार्थों का बाज़ार रिकॉर्ड उच्च स्तर पर</title>
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<description><![CDATA[ वर्ष 2025 में पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया में सिंथेटिक मादक पदार्थों का बाज़ार वर्ष तेज़ी से बढ़ा. संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि मेथामफ़ेटामाइन और केटामाइन की रिकॉर्ड मात्रा की बरामदगी के साथ-साथ, मादक पदार्थों के उत्पादन, अन्तरराष्ट्रीय तस्करी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और अन्य संगठित अपराधों के बीच सम्बन्ध भी और गहरे हुए हैं. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:08:28 +0530</pubDate>
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<title>भारत: आदिवासी इलाक़ों में लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ते UN स्वयंसेवक</title>
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<description><![CDATA[ भारत के मध्य प्रदेश और राजस्थान के दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में, आदि कर्मयोगी परियोजना के तहत 82 यूएन स्वयंसेवकों ने 260 गाँवों में लगभग 56 हज़ार लोगों तक पहुँच बनाई है. इस पहल के ज़रिए, परिवारों को सरकारी योजनाओं, ज़रूरी सेवाओं और सहायता के साथ जोड़ने में मदद मिली है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:08:28 +0530</pubDate>
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<title>भारत: आवासीय स्कूलों में ख़सरे से बच्चों की सुरक्षा</title>
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<description><![CDATA[ भारत के छत्तीसगढ़ प्रदेश के चार आदिवासी ज़िलों में त्वरित निगरानी और स्कूल-आधारित टीकाकरण अभियान से, 51 हज़ार से अधिक बच्चों को ख़सरे से सुरक्षा मिली है. इससे उन इलाक़ों में ख़सरे के प्रकोपों पर क़ाबू पाने में मदद मिली, जहाँ बच्चों के लिए जोखिम सबसे अधिक था. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:08:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>ईरान&#45;अमेरिका सहमति पर ब्यौरे की प्रतीक्षा, होर्मुज़ जलमार्ग में सहायता गलियारे का आग्रह</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच हिंसक टकराव को समाप्त करने पर सहमति बन गई है और इस सप्ताह के अन्त तक एक नए शान्ति समझौते पर हस्तारक्षर होने की सम्भावना है. इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने ज़ोर देकर कहा है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़ों की आवाजाही को जल्द से जल्द फिर शुरू किए जाने की आवश्यकता है, और वैश्विक भूख संकट को टालने के लिए एक सहायता गलियारे को भी स्थापित किया जाना होगा.    ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:08:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>ईरान-अमेरिका, सहमति, पर, ब्यौरे, की, प्रतीक्षा, होर्मुज़, जलमार्ग, में, सहायता, गलियारे, का, आग्रह</media:keywords>
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<title>संक्षेप में: लेबनान में घर लौटने में जोखिम, ग़ाज़ा में नए सिरे से विस्थापन</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच शान्ति समझौते पर सहमति की घोषणा के बावजूद, लेबनान में हिंसा के कारण विस्थापित हुए नागरिक अब भी अपने घरों व समुदायों में वापिस जाने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं. यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) ने सोमवार को इस विषय में चिन्ता व्यक्त की है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:08:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>यूरोप की छाती पर चढ़कर जयशंकर ने कही ऐसी बात, फिनलैंड भी बोला&#45; भारत ने सही किया</title>
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<description><![CDATA[ रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत को फ़िनलैंड से अप्रत्याशित समर्थन मिला। फ़िनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनन ने कहा कि नई दिल्ली ने यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों द्वारा तय की गई तेल की कीमत की सीमा (प्राइस कैप) के दायरे में रहकर ही काम किया है। फ़िनलैंड में &#039;कुलतारंता टॉक्स&#039; के दौरान एक पैनल चर्चा में बोलते हुए फ़िनिश मंत्री ने कहा कि पश्चिमी देशों की प्राइस कैप व्यवस्था का मकसद कभी भी देशों को रूस से कच्चा तेल खरीदने से पूरी तरह रोकना नहीं था। इस चर्चा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वाल्टोनन और यूएई की सहायक विदेश मंत्री लाना नुसेबेह के साथ हिस्सा लिया था। वाल्टोनन ने कहा कि भारत के बचाव में यह कहा जा सकता है कि उसने प्राइस कैप के तहत तेल खरीदा है। यही मकसद था।इसे भी पढ़ें: ईरान का बूढ़ा शिकारी तो जिंदा है, नहीं माना अमेरिका तो हो जाएगा तबाहउन्होंने आगे कहा कि जब हमने तेल की कीमतों पर सीमा (प्राइस कैप) तय की, तो हमने दुनिया को रूसी तेल खरीदने से नहीं रोका। इसका मकसद तेल बाज़ार में रुकावट डालना नहीं था, बल्कि यह पक्का करना था कि तेल की सप्लाई जारी रहे और रूस इससे बहुत ज़्यादा मुनाफ़ा न कमा सके। यह बयान तब आया जब जयशंकर ने भारत की ऊर्जा नीति का मज़बूती से बचाव किया और यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से नई दिल्ली द्वारा लगातार रूसी तेल खरीदने पर हो रही आलोचना को खारिज कर दिया। इसे भी पढ़ें: Gulf of Oman में भारतीयों की मौत पर भड़का India, Modi और Jaishankar का गुस्सा देखकर Trump व Marco Rubio सकते मेंजयशंकर ने तेल के मामले में भारत के फैसलों का बचाव कियारूस से भारत के तेल आयात के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि ऊर्जा की खरीद राजनीतिक गठजोड़ के बजाय व्यावहारिक बातों पर आधारित थी। उन्होंने कहा कि मैं कीमत और उपलब्धता के आधार पर तेल खरीदता हूं। विदेश मंत्री ने याद दिलाया कि 2022 में रूस पर प्रतिबंध लगने के बाद ग्लोबल एनर्जी मार्केट में बड़ा बदलाव आया, जिससे देशों को दूसरे सप्लायर खोजने पड़े। उन्होंने कहा कि उस समय, मार्केट में उपलब्ध ज़्यादातर तेल रूस से आ रहा था क्योंकि यूरोपीय देश मिडिल ईस्ट से तेल खरीद रहे थे, जो हमारा पारंपरिक सप्लायर था। हालात ने हमें एक खास दिशा में आगे बढ़ने के लिए मजबूर किया। जयशंकर ने रूसी ऊर्जा पर पश्चिमी देशों के रुख में विरोधाभास की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा, उस समय, अमेरिका ने खास तौर पर भारत से तेल मार्केट को स्थिर करने के लिए रूसी तेल खरीदने को कहा था। उन्होंने आगे कहा आइए ऐसा दिखावा न करें कि इसमें कोई बड़ा सिद्धांत शामिल है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:19:44 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan में Doctors की बड़ी चेतावनी, Salary Hike नहीं तो पूरे KP में कामकाज ठप करेंगे</title>
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<description><![CDATA[ खैबर पख्तूनख्वा के यंग डॉक्टर्स एसोसिएशन (YDA) ने प्रांतीय सरकार को चेतावनी दी है कि अगर आने वाले प्रांतीय बजट में डॉक्टरों की सैलरी में अच्छी-खासी बढ़ोतरी नहीं की गई, तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। &#039;डॉन&#039; के अनुसार, पेशावर प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में YDA के प्रतिनिधियों ने कहा कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद सरकार कई सालों से मेडिकल प्रोफेशनल्स की आर्थिक चिंताओं को दूर करने में नाकाम रही है। YDA नेता अदनान ने कहा कि अगर उनकी मांगों को नज़रअंदाज़ किया गया, तो डॉक्टर पूरे प्रांत में प्रदर्शन शुरू कर देंगे और अस्पताल के रोज़मर्रा के कामकाज को भी रोक सकते हैं। हयाताबाद मेडिकल कॉम्प्लेक्स के YDA चैप्टर के अध्यक्ष अदनान ने बताया कि प्रांतीय स्वास्थ्य सचिव द्वारा तैयार किए गए एक प्रस्ताव में डॉक्टरों की सैलरी में 40-50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की सिफारिश की गई थी। यह सिफारिश इस महीने की शुरुआत में स्वास्थ्य सचिवालय के बाहर हज़ारों डॉक्टरों द्वारा की गई बातचीत और धरने के बाद सामने आई थी। हालांकि, उन्होंने चिंता जताई कि हो सकता है सरकार नए बजट में इस प्रस्ताव को शामिल न करे।इसे भी पढ़ें: PoK की जनता को पाकिस्तानी जुल्मों से निजात दिलाने के लिए क्या भारत को सीधे दखल देना चाहिए?एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर, स्वास्थ्य मंत्री और वित्त अधिकारियों से सैलरी पैकेज को तुरंत लागू करने की अपील की है। डॉक्टरों का कहना है कि महंगाई और काम का बोझ बढ़ने के बावजूद, उनकी सैलरी में लगभग एक दशक से कोई खास बदलाव नहीं हुआ है और 2016 के बाद से इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। प्रांतीय प्रशासन की आलोचना करते हुए अदनान ने कहा कि अलग-अलग सरकारों ने समय-समय पर दूसरे सरकारी कर्मचारियों के लिए तो इंसेंटिव और आर्थिक राहत की घोषणाएं की हैं, लेकिन हेल्थकेयर वर्कर्स को नज़रअंदाज़ किया है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर कोई खास सुविधा नहीं, बल्कि उचित वेतन की मांग कर रहे हैं, जैसा कि &#039;डॉन&#039; ने बताया है।इसे भी पढ़ें: US-Iran के बीच 24 घंटे में Peace Deal? Pakistani PM शहबाज़ शरीफ का सबसे बड़ा दावा!YDA नेता ने आगे कहा कि भविष्य में होने वाला कोई भी आंदोलन अस्पताल परिसर तक ही सीमित नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री सचिवालय, स्वास्थ्य विभाग और वित्त विभाग जैसे अहम सरकारी दफ्तरों के बाहर और मुख्य सड़कों पर प्रदर्शन किए जा सकते हैं। YDA प्रतिनिधि बाबर ने फिर से कहा कि मरीज़ों की इमरजेंसी सेवाओं में कोई रुकावट नहीं आएगी, जैसा कि &#039;डॉन&#039; ने रिपोर्ट किया है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:19:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>9 जुलाई को अयातुल्लाह खामेनेई...ईरान के अचानक किया ऐसा ऐलान, हिली दुनिया</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों में मारे गए ईरान के सबसे लंबे समय तक सुप्रीम लीडर रहे अली खामेनेई को 4 जुलाई से शुरू होने वाले कई दिनों के अंतिम संस्कार के बाद 9 जुलाई को दफ़नाया जाएगा। उन्हें उनके गृहनगर मशहद में दफ़नाया जाएगा, जो उत्तर-पूर्वी ईरान का एक पवित्र शहर है। पहले यह कार्यक्रम मार्च में होना था, लेकिन युद्ध के कारण इसे टाल दिया गया था। AFP की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले 4 जुलाई से तेहरान में तीन दिनों तक अंतिम संस्कार की रस्में होंगी और फिर 7 जुलाई को पवित्र शहर कोम में एक और कार्यक्रम होगा।इसे भी पढ़ें: Iran-Israel War: क्या &#039;Ghost&#039; खामेनेई बदलेंगे मिडिल ईस्ट का गेम? ट्रंप vs नेतन्याहू की असली कहानी | No Filterईरानी अधिकारियों ने घोषणा की है कि पूर्व सुप्रीम लीडर को उनके गृहनगर मशहद में 9 जुलाई को दफ़नाया जाएगा। अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले में उनकी मौत के 132 दिन बाद यह होगा। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब उनकी मौत के 100 दिन से ज़्यादा समय बीतने के बाद भी उनके अंतिम संस्कार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। मूल रूप से मार्च में होने वाला अंतिम संस्कार संघर्ष और सुरक्षा चिंताओं, उनके अवशेषों की स्थिति और उनके बेटे और उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई को सत्ता हस्तांतरण को लेकर महीनों की अटकलों के बीच टल गया था। ईरानी मीडिया की खबरों के मुताबिक, अंतिम संस्कार की प्रक्रिया 4 जुलाई से तेहरान में तीन दिनों के कार्यक्रमों के साथ शुरू होगी।इसे भी पढ़ें: ईरान-हिजबुल्लाह मिलकर टूट पड़े, इजरायल से रातभर इंतकाम, तबाही! इसके बाद 7 जुलाई को पवित्र शहर कोम में एक और कार्यक्रम होगा और अंत में मशहद में दफ़नाने की प्रक्रिया होगी। इस घोषणा के साथ ही महीनों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हो गई है; इस दौरान अधिकारियों ने बार-बार एक ऐतिहासिक विदाई का वादा तो किया था, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए कोई समय-सीमा नहीं बताई थी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:19:43 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिका की नाकेबंदी का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, भारत के विरोध के बाद रूबियो ने किया साफ</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कल भारतीय विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से बात की। दोनों अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरू मध्य  में हाल ही में हुई घटनाओं पर चर्चा की। विदेश मंत्री रुबियो ने इस बात पर जोर दिया कि सभी वाणिज्यिक जहाजों को अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए, क्योंकि अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरू मध्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखने का प्रयास कर रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि अमेरिका द्वारा लगाई गई नाकेबंदी (blockade) का उल्लंघन और ईरानी तेल का अवैध परिवहन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।इसे भी पढ़ें: टूट गया भारत के सब्र का बांध, आधी रात फोन घुमाकर जयशंकर ने अमेरिका को डांटागौरतलब है कि होर्मुज के समंदर में अमेरिका ने वो कायराना हरकत की जिसने भारत के सब्र का बांध तोड़ दिया। भारत के तीन जांबाज नाविकों की जान चली गई और वजह महाशक्ति होने का अहंकार। ये  दिन इतिहास में अमेरिका की उस सशस्त्र डकैती के नाम पर दर्ज होगा जिसने तीन भारतीय परिवारों को उम्र भर का दर्द दे दिया। लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती है। अमेरिका ने सोचा था कि वह झूठ बोलेगा और भारत मान लेगा। इसे भी पढ़ें: यूरोप की छाती पर चढ़कर जयशंकर ने कही ऐसी बात, फिनलैंड भी बोला- भारत ने सही कियाट्रंप ने ईरान पर उंगली उठाई। लेकिन भारत ने उसी उंगली को मरोड़कर अमेरिका को आईना दिखा दिया और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आधी रात को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को फोन पर जो सुनाया उसे सुनकर वाशिंगटन के गलियारों में सन्नाटा पसर गया। ओमान की खाड़ी तेल टैंकर एम्प्टी सिट्टे बेलो शांति से अपने गंतव्य की ओर आगे बढ़ रहा था। इस जहाज पर कोई लड़ाकू विमान नहीं था। कोई मिसाइलें नहीं थी। इस पर सवार थे 24 भारतीय नागरिक जो अपने घर बार से दूर समंदर के सीने पर मेहनत कर रहे थे। तभी अचानक अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों ने इस कमर्शियल जहाज को घेर लिया। बिना किसी चेतावनी के, बिना किसी ठोस वजह के अमेरिका ने इस शांतिपूर्ण जहाज पर हमला कर दिया। गोलों की उस बरसात में जहाज दहल उठा और हमारे 21 भारतीय भाइयों ने मौत को करीब से देखा और किसी तरह अपनी जान बचाई। लेकिन तीन भारतीयों की जान इस अमेरिकी सनक में भेंट चढ़ गई।   ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:19:41 +0530</pubDate>
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<title>Oman के पास भारतीय जहाज संकट में, 14 क्रू मेंबर्स की जिंदगी दांव पर, मदद को आगे आई US Navy</title>
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<description><![CDATA[ खाड़ी इलाके में बढ़ते तनाव के बीच ओमान के तट के पास एक भारतीय कमर्शियल जहाज हादसे का शिकार हो गया है। मस्कट में मौजूद भारतीय दूतावास ने रविवार को बताया कि भारतीय झंडे वाले मैकेनाइज्ड सेलिंग वेसल &#039;विराट 1&#039; के साथ समुद्र में एक गंभीर घटना हुई है। इस जहाज पर कुल 14 भारतीय क्रू मेंबर्स सवार थे, जिनकी सुरक्षा को लेकर लगातार कोशिशें की जा रही हैं।इंजन फेल होने के बाद डूबने लगा जहाजशुरुआती जानकारी के मुताबिक, समुद्र में अचानक इस जहाज का इंजन फेल हो गया था, जिसके बाद यह पानी में डूबने लगा। खतरे को भांपते हुए जहाज पर मौजूद सभी 14 भारतीय क्रू मेंबर्स समझदारी दिखाते हुए तुरंत लाइफ-राफ्ट पर चले गए। यह पूरी घटना ओमान के रास अल हद्द से लगभग 80 समुद्री मील दूर समुद्र में हुई। इसे भी पढ़ें: Russia से भारत की तेल दोस्ती गहरी, US की पाबंदी के बावजूद Crude Oil आयात 21% बढ़ाअमेरिकी नौसेना ने बढ़ाया मदद का हाथ, भेजा लाइफ-राफ्टइस एमरजेंसी की जानकारी मिलते ही अमेरिकी नौसेना ने तुरंत मदद के लिए कदम बढ़ाया। अमेरिकी नौसेना के पी-8 मैरीटाइम पेट्रोलिंग एयरक्राफ्ट ने संकट में फंसे भारतीयों के पास एक लाइफ-राफ्ट गिराया और उनकी सुरक्षित निकासी पर नजर रखी। इसके अलावा, पास से गुजर रहे सेंट किट्स एंड नेविस के एक मर्चेंट शिप &#039;एमवी जबल अली 9&#039; को भी मदद के लिए उस लोकेशन की तरफ मोड़ दिया गया है। इसे भी पढ़ें: Commander in Chief वाली AI Photo, फिर Iran Deal पर बड़ा बयान, क्या हैं Donald Trump के इरादे?ओमान प्रशासन और भारतीय नौसेना मिलकर चला रही रेस्क्यू ऑपरेशनभारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि ओमान के अधिकारियों और घटना स्थल के आस-पास मौजूद दूसरे जहाजों के साथ तालमेल बिठाकर एक बड़ा सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। भारतीय नौसेना के जहाजों को भी तुरंत इस लोकेशन की तरफ रवाना कर दिया गया है। दूतावास लगातार लोकल अथॉरिटीज के संपर्क में है ताकि सभी 14 भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द सुरक्षित किनारे पर लाया जा सके।




It has emerged that the vessel experienced an engine failure, and the crew eventually transferred safely to a liferaft. Rescue operation is presently underway through ships in vicinity, under coordination of Omani authorities.— India in Oman (Embassy of India, Muscat) (@Indemb_Muscat) June 14, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:19:40 +0530</pubDate>
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<title>Commander in Chief वाली AI Photo, फिर Iran Deal पर बड़ा बयान, क्या हैं Donald Trump के इरादे?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनी एक बेहद नाटकीय मिलिट्री फोटो शेयर की है। इस तस्वीर में ट्रंप एक नौसैनिक जहाज के डेक पर &#039;कमांडर इन चीफ&#039; के रूप में खड़े नजर आ रहे हैं और दूरबीन से समुद्र की ओर देख रहे हैं।बैकग्राउंड में अमेरिकी युद्धपोतों का एक बड़ा बेड़ा उबड़-खाबड़ पानी में आगे बढ़ता दिख रहा है और आसमान में लड़ाकू विमान सफेद धुआं छोड़ते हुए उड़ रहे हैं। डूबते सूरज की रोशनी और जहाजों पर लहराते अमेरिकी झंडे इस फोटो को और भी ज्यादा सिनेमाई बना रहे हैं। ट्रंप ने इस तस्वीर के साथ कैप्शन में लिखा, &quot;आप भ्रमित हो रहे हैं।&quot;ईरान के साथ आज ऐतिहासिक शांति समझौते का दावाट्रंप ने यह पोस्ट ऐसे समय पर की है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में सफलता मिलने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। ट्रंप ने दावा किया कि रविवार को एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए एक मजबूत दीवार की तरह काम करेगा। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा कि अगर यह डील कामयाब नहीं होती है, तो अमेरिका के पास एक आखिरी और बड़ा विकल्प हमेशा तैयार है।







इसे भी पढ़ें: अमेरिका की नाकेबंदी का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, भारत के विरोध के बाद रूबियो ने किया साफपूर्व राष्ट्रपति ओबामा की डील पर साधा निशानाडोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की ईरान न्यूक्लियर डील की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा, &quot;ओबामा की वो डील ईरान के लिए परमाणु हथियार हासिल करने का एक बेहद आसान और सुगम रास्ता थी। अगर वो डील रहती, तो ईरान को छह साल पहले ही परमाणु हथियार मिल गए होते और वह कब का इसका इस्तेमाल भी कर चुका होता।&quot;ट्रंप ने दावा किया कि उनकी नई डील इसके ठीक उलट है। इस समझौते के बाद ईरान किसी भी कीमत पर न्यूक्लियर वेपन नहीं बना पाएगा और डील साइन होते ही होर्मुज जलडमरूमध्य का समुद्री रास्ता भी पूरी दुनिया के लिए खुल जाएगा। इसे भी पढ़ें: Pakistan में Doctors की बड़ी चेतावनी, Salary Hike नहीं तो पूरे KP में कामकाज ठप करेंगेईरान ने किया रविवार को साइन करने से इनकारएक तरफ जहां ट्रंप रविवार को ही समझौते पर मुहर लगाने की बात कह रहे हैं, वहीं ईरान ने रविवार को किसी भी तरह के हस्ताक्षर समारोह की खबरों को खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच समझौता जरूर हो सकता है, लेकिन इस समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर नहीं किए जा रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:19:40 +0530</pubDate>
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<title>भारत: दुर्गम रास्तों से होकर अरुणाचल की जनजातीय बस्ती तक पहुँचे टीके</title>
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<description><![CDATA[ भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य की एक दूरस्थ जनजातीय बस्ती, जो भौगोलिक अलगाव के कारण नियमित टीकाकरण योजनाओं से छूट गई थी, अब पूरी तरह टीकाकरण के दायरे में आ गई है. सावधानीपूर्वक सूक्ष्म स्तर पर योजना बनाने, समुदाय का भरोसा जीतने और मज़बूत स्थानीय नेतृत्व की मदद से स्वास्थ्य सेवाएँ अब लोगों के दरवाज़े तक पहुँच रही हैं. ]]></description>
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<title>अब इस युद्ध को खत्म करने का समय आ गया है&amp;apos;: ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा कि ईरान के साथ शांति समझौते पर &amp;apos;कुछ ही दिनों में&amp;apos; हस्ताक्षर हो सकते हैं</title>
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<description><![CDATA[ एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से कहा है कि ईरान के साथ कुछ ही दिनों में शांति समझौता हो सकता है। ट्रंप ने नेतन्याहू से फ़ोन पर बातचीत के दौरान कहा, यह डील है। यह एक बहुत अच्छी डील है और अब इस युद्ध को खत्म करने का समय आ गया है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब वॉशिंगटन और तेहरान, दोनों जगहों के अधिकारियों का कहना है कि समझौता होने के करीब है, हालांकि इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, नेतन्याहू को यह एहसास हो गया था कि वे ट्रंप को इस डील को आगे बढ़ाने से नहीं रोक सकते। बताया जाता है कि बातचीत के दौरान इज़राइली नेता ने ट्रंप से कहा कि उन्हें भरोसा है कि अंतिम समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चिंताओं का समाधान किया जाएगा। इसे भी पढ़ें: टूट गया भारत के सब्र का बांध, आधी रात फोन घुमाकर जयशंकर ने अमेरिका को डांटाक्या नेतन्याहू पर दबाव है?यह घटनाक्रम नेतन्याहू के पहले के रुख़ में एक बड़ा बदलाव दिखाता है। संघर्ष की शुरुआत से ही उनका तर्क था कि युद्ध से तेहरान में सत्ता परिवर्तन हो सकता है। अब, जब कुछ ही महीनों में चुनाव होने वाले हैं, उनके राजनीतिक विरोधियों ने उन पर आरोप लगाया है कि ट्रंप की शांति शर्तों को मानकर उन्होंने इज़राइल को एक &quot;आश्रित देश&quot; (vassal state) बना दिया है। अधिकारियों ने बताया कि नेतन्याहू ने इस हफ़्ते की शुरुआत में ईरान के ऊर्जा और बुनियादी ढाँचे के ठिकानों पर बड़े हमले करने की योजना बनाई थी, लेकिन ट्रंप ने आखिरी समय में इस कदम को रोक दिया। ट्रंप की इस सार्वजनिक घोषणा से नेतन्याहू हैरान रह गए कि एक समझौता हो चुका है। इसे भी पढ़ें: Gulf of Oman में भारतीयों की मौत पर भड़का India, Modi और Jaishankar का गुस्सा देखकर Trump व Marco Rubio सकते मेंइज़राइल की चिंताएँ क्या हैं?हालांकि इज़राइली नेताओं ने सार्वजनिक रूप से ट्रंप की आलोचना करने से परहेज किया है, लेकिन अधिकारी प्रस्तावित समझौते को लेकर संशय में हैं। एक चिंता यह है कि ईरान इस समझौते का इस्तेमाल तेल बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए कर सकता है, जबकि अपने परमाणु कार्यक्रम पर ठोस रियायतें देने में देरी कर सकता है। इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने कहा कि ट्रंप अमेरिकी हितों पर आधारित समझौता कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इज़राइल को उम्मीद है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइलों और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों के संबंध में साझा सिद्धांतों की रक्षा की जाएगी।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:17:08 +0530</pubDate>
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<media:keywords>अब, इस, युद्ध, को, खत्म, करने, का, समय, आ, गया, है:, ट्रंप, ने, नेतन्याहू, से, कहा, कि, ईरान, के, साथ, शांति, समझौते, पर, कुछ, ही, दिनों, में, हस्ताक्षर, हो, सकते, हैं</media:keywords>
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<title>Russia से भारत की तेल दोस्ती गहरी, US की पाबंदी के बावजूद Crude Oil आयात 21% बढ़ा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख और दबाव का भारत पर कोई असर नहीं दिख रहा है। अमेरिका की लाख कोशिशों और सख्ती के बावजूद भारत और रूस के व्यापारिक रिश्ते दिन-प्रतिदिन और मजबूत होते जा रहे हैं। अमेरिकी पाबंदियों की परवाह न करते हुए भारत ने रूस से रिकॉर्ड मात्रा में कच्चे तेल का आयात किया है। नए आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में भी भारत दुनिया भर में रूसी ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा।मई में भारत ने खरीदा 6.7 अरब डॉलर का ईंधनयूरोपीय रिसर्च इंस्टीट्यूट &#039;सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर&#039; की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों द्वारा खरीदारी बढ़ाए जाने से रूस से कुल कच्चे तेल और अन्य ईंधन का आयात बढ़ गया है। मई महीने में यह आंकड़ा अनुमानित 5.8 अरब यूरो (यानी करीब 6.7 अरब डॉलर) पर पहुंच गया है। इसे भी पढ़ें: Commander in Chief वाली AI Photo, फिर Iran Deal पर बड़ा बयान, क्या हैं Donald Trump के इरादे?कुल आयात में 83% हिस्सेदारी सिर्फ कच्चे तेल कीCREA की रिपोर्ट के मुताबिक, मई में रूस से भारत आए कुल आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा यानी लगभग 83 प्रतिशत रही, जिसकी कीमत 4.8 अरब यूरो थी। इसके अलावा भारत ने रूस से 55 करोड़ यूरो के अन्य तेल प्रोडक्ट्स और 42.9 करोड़ यूरो के कोयले का भी आयात किया है।रूसी तेल के आयात में 21% की भारी बढ़ोतरीरिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल महीने के मुकाबले मई में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में 8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस तेजी की सबसे बड़ी वजह रूस से होने वाले आयात में आया 21% का भारी उछाल है। गुजरात में स्थित देश के बड़े रिफाइनिंग केंद्रों में रूसी कच्चे तेल की सप्लाई में जबरदस्त तेजी देखी गई। अप्रैल की तुलना में मई में वाडिनार रिफाइनरी में 36% और जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में 14% अधिक रूसी तेल पहुंचा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:17:04 +0530</pubDate>
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<title>Emmanuel Macron ने माना भारत का लोहा, बोले&#45; Indian Startups अब दुनिया पर छाएंगे</title>
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<description><![CDATA[ फ्रांस के नीस शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मिलकर &#039;भारत इनोवेट्स&#039; (Bharat Innovates) कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन किया। इस खास इवेंट में भारत, फ्रांस और दुनिया के कई अन्य देशों के बड़े-बड़े स्टार्टअप्स, इनोवेटर्स और वेंचर कैपिटल फंड्स एक मंच पर एक साथ आए हैं। इसका मकसद ग्लोबल लेवल पर नई तकनीकों और बिजनेस आइडियाज को मिलकर बढ़ावा देना है।राष्ट्रपति मैक्रों बोले- सवाल यह था कि भारत के साथ कौन पार्टनरशिप करेगाकार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। मैक्रों ने अपने भाषण में कहा, &quot;आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीस में आपका स्वागत करना हमारे लिए बेहद सम्मान की बात है। कुछ महीने पहले, हमने मुंबई में मिलकर &#039;फ्रांस-भारत इनोवेशन वर्ष&#039; की शुरुआत की थी। दुनिया में सवाल यह नहीं था कि क्या भारत इनोवेशन कर रहा है, बल्कि सवाल यह था कि भारत के साथ मिलकर इस पार्टनरशिप में कौन इनोवेशन करेगा।&quot; इसे भी पढ़ें: France में Bharat Innovates का भव्य आगाज, PM Modi बोले- हमारी Startup क्रांति को मिला ग्लोबल मंचपीएम मोदी के नाम दर्ज हुए रिकॉर्ड पर दी बधाईराष्ट्रपति मैक्रों ने हाल ही में देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री बनने पर पीएम मोदी को विशेष बधाई दी। उन्होंने कहा, &quot;आजादी के बाद से आप भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं। यह एक बहुत लंबा सफर रहा है, जो आपके दृढ़ संकल्प, अटूट संकल्प और आपके देश की ताकत को दिखाता है। यह वाकई में एक शानदार और उल्लेखनीय उपलब्धि है; इसलिए हमारे बीच आपकी मौजूदगी पर हमें बहुत गर्व है।&quot; इसे भी पढ़ें: Bharat Innovates in France: Piyush Goyal ने फ्रांस में गिनाईं न्यू इंडिया की उपलब्धियां, बोले- Innovation हमारी संस्कृति&#039;चंद्रयान-3&#039; की सफलता और भारत के स्पेस पावर की तारीफफ्रांस के राष्ट्रपति ने भारत की वैज्ञानिक ताकत का लोहा मानते हुए &#039;चंद्रयान-3&#039; का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत आज रिसर्च और इनोवेशन के दम पर ग्लोबल इनोवेशन में सबसे आगे खड़ा है। अगर भारत की ताकत का कोई सबसे अच्छा उदाहरण देना हो, तो वह उसका स्पेस सेक्टर है। चंद्रयान-3 मिशन के साथ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की ऐतिहासिक उपलब्धि भारत ने रिकॉर्ड समय में हासिल की, जो पूरी दुनिया के सामने भारत की ताकत और उसकी इनोवेशन क्षमता की मिसाल है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:17:03 +0530</pubDate>
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<title>G7 Summit से पहले France में हलचल तेज, क्या होगी PM Modi और Donald Trump की मुलाकात? इन मुद्दों पर नजर।</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने महत्वपूर्ण यूरोपीय दौरे के तहत फ्रांस पहुंच चुके हैं, जहां वह कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेने के साथ-साथ भारत की नवाचार क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने वाले एक बड़े कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे। इस दौरे को भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों के साथ-साथ वैश्विक कूटनीति के नजरिए से भी काफी अहम माना जा रहा है।नाइस पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आगमन की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि उनकी यात्रा केवल नाइस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एवियां और पेरिस भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान कई महत्वपूर्ण बैठकों और कार्यक्रमों में भाग लिया जाएगा, जिनका उद्देश्य भारत और उसके प्रमुख विकास सहयोगी देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करना है।बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाइस पहुंचने के बाद वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। मौजूद जानकारी के अनुसार यात्रा के दौरान वह कई वैश्विक नेताओं के साथ अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा करेंगे।इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठक को माना जा रहा है। दोनों नेता भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक, आर्थिक, रक्षा, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा करेंगे। गौरतलब है कि इसी वर्ष दोनों देशों के संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाया गया था।राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नाइस में आयोजित होने वाले “भारत इनोवेट्स 2026” कार्यक्रम का संयुक्त उद्घाटन भी करेंगे। यह कार्यक्रम भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष के तहत आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन में भारत के 120 नवोन्मेषक, 15 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थान और 500 से ज्यादा निवेशक हिस्सा लेंगे। इसके अलावा दुनिया की कई बड़ी कंपनियों के प्रमुख और उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी इसमें मौजूद रहेंगे। यह आयोजन भारतीय गहन प्रौद्योगिकी आधारित नवाचारों और नवोद्यमों को वैश्विक निवेशकों से जोड़ने का एक बड़ा मंच माना जा रहा है।मौजूद जानकारी के अनुसार इस कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी प्रधानमंत्री के साथ मौजूद रह सकते हैं।गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 और 17 जून को एवियां में आयोजित होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे। फ्रांस ने भारत सहित ब्राजील, मिस्र, केन्या और दक्षिण कोरिया को विशेष आमंत्रित देशों के रूप में बुलाया है। इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री विभिन्न देशों के नेताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ वैश्विक चुनौतियों, आर्थिक सहयोग और भू-राजनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित मुलाकात पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। यदि यह बैठक होती है तो फरवरी 2025 में वाशिंगटन यात्रा के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी। हाल के महीनों में ओमान के पास हुए एक हमले में भारतीय नाविकों की मौत और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों को देखते हुए इस मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेरिस में आयोजित होने वाले “वीवा टेक 2026” सम्मेलन में भी भाग लेंगे। यह यूरोप का सबसे बड़ा प्रौद्योगिकी और नवोद्यम आयोजन माना जाता है। यहां वह भारतीय समुदाय को भी संबोधित कर सकते हैं।बता दें कि फ्रांस यात्रा के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्लोवाक गणराज्य की भी यात्रा करेंगे। 1993 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद यह पहली बार होगा जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री स्लोवाक गणराज्य का दौरा करेगा। वहां प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी के साथ उनकी बैठकें निर्धारित हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:17:02 +0530</pubDate>
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<title>Bharat Innovates in France: Piyush Goyal ने फ्रांस में गिनाईं न्यू इंडिया की उपलब्धियां, बोले&#45; Innovation हमारी संस्कृति</title>
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<description><![CDATA[ फ्रांस के नीस शहर में &#039;भारत इनोवेट्स&#039; इवेंट के लॉन्च के दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, &quot;इस साल हमारे रिश्ते एक खास ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के लेवल तक पहुंच गए हैं। फरवरी 2025 में, पीएम मोदी ने पेरिस में AI एक्शन समिट की को-चेयरमैनशिप की थी। इसके बाद फरवरी 2026 में, जब भारत ने AI इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की, तो राष्ट्रपति मैक्रों हमारे साथ खड़े थे। आज, दोनों महान नेता नीस के इस खूबसूरत शहर में फिर से मिलकर एक ज्यादा इनोवेटिव दुनिया के लिए अपनी साझा सोच को दोहरा रहे हैं।&quot; उन्होंने बताया कि साल 2026 को &#039;भारत-फ्रांस इनोवेशन वर्ष&#039; के तौर पर मनाया जा रहा है, जो इस पहल को एकदम सही माहौल देता है।बदलते दौर में भारत है दुनिया का सबसे भरोसेमंद साथीजियोपॉलिटिक्स का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, &quot;हम एक ऐसे अनिश्चित समय में मिल रहे हैं जब दुनिया की राजनीति में बड़े बदलाव हो रहे हैं और नई टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है। ऐसे समय में, पूरी दुनिया हमेशा एक भरोसेमंद और विश्वसनीय पार्टनर की तलाश करती है। भारत आज दुनिया के सामने वही भरोसेमंद भूमिका निभा रहा है। हम दुनिया के सबसे युवा बड़े देश की एनर्जी, बेहतरीन टैलेंट पूल और एक ऐसा बड़ा पैमाना लेकर आते हैं, जिसका मुकाबला शायद ही कोई दूसरा देश कर सके।&quot; इसे भी पढ़ें: France में Bharat Innovates का भव्य आगाज, PM Modi बोले- हमारी Startup क्रांति को मिला ग्लोबल मंचनए भारत में 2.3 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स, इनोवेशन बना कल्चरपीयूष गोयल ने भारत की स्टार्टअप ताकत का लोहा मनवाते हुए कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले नए भारत में इनोवेशन अब सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति बन चुका है। आज भारत में 2.3 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स इस क्रांति को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस के इस इवेंट में शामिल हुए भारत के 120 चैंपियन स्टार्टअप्स तो हमारी क्षमताओं की महज एक छोटी सी झलक हैं। इसे भी पढ़ें: Emmanuel Macron ने माना भारत का लोहा, बोले- Indian Startups अब दुनिया पर छाएंगेफ्रांसीसी दोस्तों को भारत में मेक इन इंडिया का न्योताकेंद्रीय मंत्री ने फ्रांसीसी कंपनियों और निवेशकों से इस मौके का पूरा फायदा उठाने की अपील की। उन्होंने कहा, &quot;मैं अपने फ्रांसीसी पार्टनर्स से आग्रह करता हूं कि वे भारत के साथ मिलकर एक मजबूत और सार्थक पार्टनरशिप बनाएं। मैं अपने फ्रांसीसी दोस्तों को भारत आने, निवेश करने, डिजाइन करने, इनोवेशन करने और मैन्युफैक्चरिंग करने के लिए आमंत्रित करता हूं। वे भारत के इस बहुत बड़े घरेलू बाजार का फायदा उठाने के साथ-साथ यहां सामान बनाकर बाकी की पूरी दुनिया में भी एक्सपोर्ट कर सकते हैं।&quot; ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:17:02 +0530</pubDate>
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<title>France में Bharat Innovates का भव्य आगाज, PM Modi बोले&#45; हमारी Startup क्रांति को मिला ग्लोबल मंच</title>
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<description><![CDATA[ फ्रांस के नीस शहर में &#039;भारत इनोवेट्स&#039; कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और फ्रांस के मजबूत रिश्तों पर खुलकर बात की। पीएम मोदी ने कहा, &quot;दुनिया भर के अलग-अलग देश एक-दूसरे के साथ व्यापार करते हैं और रणनीतिक साझेदारी भी करते हैं। लेकिन बहुत कम रिश्ते ऐसे होते हैं जो केवल आपसी हितों के लिए नहीं, बल्कि एक साझा विज़न से प्रेरित होते हैं। भारत और फ्रांस का संबंध ऐसा ही एक अटूट रिश्ता है।&quot;सुरक्षा से लेकर सस्टेनेबिलिटी तक दोनों देशों ने मिलकर किया कामपीएम मोदी ने आगे कहा कि इस रिश्ते की सबसे बड़ी खूबी इसका जुड़ाव, भरोसा, इनोवेशन, प्रेरणा और साझा मूल्य हैं। इसी मजबूत नींव पर दोनों देशों ने पिछले कुछ सालों में मिलकर कई नई पहल शुरू की हैं। उन्होंने कहा, &quot;चाहे इंटरनेशनल सोलर अलायंस हो, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बातचीत हो, या फिर सुरक्षा से लेकर सस्टेनेबिलिटी तक का क्षेत्र हो दोनों देशों ने हमेशा मानवता से जुड़ी बड़ी वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए एक साथ मिलकर काम किया है।&quot; उन्होंने इस बात पर भी खुशी जताई कि इसी साल फरवरी में शुरू हुए &#039;भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर&#039; के बाद अब &#039;भारत इनोवेट्स&#039; का उद्घाटन हो रहा है।



#WATCH | Nice, France: Prime Minister Narendra Modi and French President Emmanuel Macron to jointly inaugurate the &#039;Bharat Innovates&#039; event shortly. The event brings together top innovation startups and Venture Capital funds from India, France, and other countries, shortly.… pic.twitter.com/69fGZ99l0C— ANI (@ANI) June 14, 2026





इसे भी पढ़ें: Emmanuel Macron ने माना भारत का लोहा, बोले- Indian Startups अब दुनिया पर छाएंगेभारतीय टैलेंट और यूरोपीय कैपिटल के बीच पुल बनेगा यह प्लेटफॉर्मप्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा का जिक्र करते हुए कहा, &quot;मैक्रों ने कहा था कि इस सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और फ्रांस को मिलकर आगे बढ़ना होगा। आज मुझे गर्व है कि हमारी यह पहल उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। &#039;भारत इनोवेट्स&#039; का यह प्लेटफॉर्म असल में भारतीय टैलेंट और यूरोपीय कैपिटल के बीच एक मजबूत पुल का काम कर रहा है। इसके जरिए भारत के युवा दिमागों को यूरोप की विशेषज्ञता और अनुभव से जुड़ने का सीधा मौका मिल रहा है।&quot; इसे भी पढ़ें: Bharat Innovates in France: Piyush Goyal ने फ्रांस में गिनाईं न्यू इंडिया की उपलब्धियां, बोले- Innovation हमारी संस्कृतिभारत की स्टार्टअप क्रांति को मिलेगा ग्लोबल मंच21वीं सदी के बदलते भारत का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज देश बदलाव के एक बहुत बड़े और ऐतिहासिक दौर से गुजर रहा है। भारत के कोने-कोने में इस समय एक &#039;स्टार्टअप क्रांति&#039; चल रही है। उन्होंने भारतीय युवाओं की तारीफ करते हुए कहा कि नई सोच के साथ हमारे युवा पूरी मानवता के भले के लिए मुश्किल समस्याओं के समाधान ढूंढ रहे हैं। &#039;भारत इनोवेट्स&#039; जैसा बड़ा मंच हमारे युवाओं के इन वर्ल्ड-क्लास आइडियाज और सॉल्यूशंस को पूरी दुनिया के सामने ले जाने का एक बेहतरीन माध्यम बनेगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:17:02 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन: मई महीने में हताहत आम नागरिकों की संख्या, बीते चार वर्षों में सबसे अधिक</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार जाँचकर्ताओं ने बताया है कि यूक्रेन में इस वर्ष मई महीने में, रूसी सैन्य बलों के हमलों में कम से कम 274 आम नागरिक मारे गए हैं और 1,763 घायल हुए हैं, जोकि मई 2025 की तुलना में 93 प्रतिशत अधिक संख्या है. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:16:11 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन: मई में हताहत आम नागरिकों की संख्या, बीते चार वर्षों में सबसे अधिक</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार जाँचकर्ताओं ने बताया है कि यूक्रेन में इस वर्ष मई में, रूसी सैन्य बलों के हमलों में कम से कम 274 आम नागरिक मारे गए हैं और 1 हज़ार 763 लोग घायल हुए हैं, जोकि मई 2025 की तुलना में 93 प्रतिशत अधिक संख्या है. ]]></description>
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<title>अमेरिका&#45;ईरान शान्ति समझौते का स्वागत, &amp;apos;टकराव पर विराम की दिशा में अहम क़दम&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच रविवार को एक नए शान्ति समझौते पर सहमति की घोषणा का स्वागत किया है और इसे हिंसक टकराव की समाप्ति और आपसी सुलह की राह में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:15:59 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिका&#45;ईरान के बीच समझौते की सम्भावना, &amp;apos;एक उत्साहजनक संकेत&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता ने कहा है कि ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सम्भावित युद्धविराम समझौते पर शुक्रवार को अस्पष्ट ख़बरों व चर्चाओं के बीच फ़िलहाल घटनाक्रम पर नज़र रखी जा रही है. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:15:59 +0530</pubDate>
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<title>हमसे खेलो मत...जयशंकर ने अमेरिका को दिखाया अपना अजब&#45;गजब अंदाज</title>
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<description><![CDATA[ भारत के विदेश मंत्री एल जयशंकर ने एक बार फिर पश्चिमी देश खासकर अमेरिका के दोहरे मापदंडों पर खुलकर हमला बोला। फिनलैंड में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय चर्चा के दौरान रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर पूछे गए इस सवाल का जवाब देते हुए जयशंकर ने साफ कर दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेता है ना कि किसी देश के दबाव या इशारे पर। रूस यूक्रेन युद्ध के बाद भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने को लेकर लगातार सवाल उठाए जाते हैं। लेकिन इस बार जयशंकर ने अमेरिका को उसी के पुराने रुख की याद दिला दी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों के बीच &#039;संवाद और कूटनीति&#039; को ही एकमात्र समाधान बताया और भारत के इस रुख को दोहराया कि &#039;यह युद्ध का युग नहीं है।&#039; बुल्गारिया की राजधानी सोफिया में जयशंकर ने जहाजों पर हमले के मामले में कहा कि समुद्री व्यापार सुरक्षित करना जरूरी है। दुनिया में बड़े संघर्ष जारी हैं, आर्थिक सुरक्षा को लेकर चिंताएं हैं।इसे भी पढ़ें: New Delhi में S Jaishankar की इंडोनेशियाई विदेश मंत्री Sugiono से वार्ता, Defence-Trade समेत कई क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोगजयशंकर ने कहा हमने 2022 तक ज्यादा रूसी तेल नहीं खरीदा था। हालात ने हमें उस बाजार में जाने के लिए मजबूर किया। रूस लगातार सप्लाई देने वाला देश साबित हुआ। लेकिन मैं चाहता हूं कि लोग यह भी याद रखें कि उसी समय अमेरिका ने विशेष रूप से भारत से कहा था कि वो रूसी तेल खरीदें ताकि वैश्विक तेल बाजार स्थिर रह सके। विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिका की कथित नीति पर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा अगर आप देखें तो पहले रूसी तेल खरीदने पर हमारे खिलाफ टेररिफ लगाए। फिर जब जरूरत पड़ी तो रूस से जुड़े प्रतिबंधों में ढील दे दी गई ताकि तेल की कीमतें नीचे लाई जा सके। इसलिए यह दिखावा मत कीजिए कि इसमें कोई बहुत बड़ा सिद्धांत शामिल नहीं है। अगर कभी ऑन, कभी ऑफ, कभी करो, कभी मत करो वाली नीति अपनाई जाएगी तो हम सब समझदार लोग हैं। हम जानते हैं कि खेल क्या है। विदेश मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि भारत तेल खरीदते समय केवल दो चीजें देखता है। कीमत और उपलब्धता। उन्होंने कहा, हम तेल खरीदते हैं। हम तेल उसकी लागत और उपलब्धता के आधार पर खरीदते हैं। उस समय बाजार में उपलब्ध अधिकांश तेल रूसी था क्योंकि यूरोप देश बड़े पैमाने पर मिडिल ईस्ट का तेल खरीद रहे थे जो भारत का पारंपरिक सप्लायर रहा। इसे भी पढ़ें: GenZ प्रोटेस्ट पर सवाल टाल गए Shishir Khanal, बोले- मेरा Focus सिर्फ India-Nepal संबंधों परइस दौरान चर्चा के दौरान जब भारत पर रूस के प्रति नरम रुख रखने और मोरल इक्विवेलेंस बनाने का आरोप लगाया गया तब भी विदेश मंत्री जयशंकर ने बेहद तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा किसी भी यूरोपीय देश पर कभी भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ। काश मैं यही बात भारत के संदर्भ में यूरोपीय हथियारों के बारे में कह पाता। यूरोप के कई देशों ने ऐसे हथियार बेचे हैं जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ हुआ। दरअसल यह पहला मौका नहीं है जब जयशंकर ने पश्चिमी देशों के नजरिए को चुनौती दी। कुछ साल पहले भी उन्होंने यूरोप को आईना दिखाते हुए कहा था कि यूरोप को यह मानसिकता बदलनी होगी कि उसकी समस्याएं दुनिया की समस्याएं हैं। यूरोप की समस्याएं नहीं। फिनलैंड से दिया गया यह ताजा बयान उसी सोच का विस्तार माना जा रहा है। संदेश बिल्कुल साफ है। भारत अब वैश्विक मंच पर किसी के दबाव में नहीं झुकेगा। फिर चाहे तेल का मामला हो, विदेश नीति हो या राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल। भारत अपने हितों को सर्वोपरि रखकर फैसले करेगा। जयशंकर के शब्दों में कहें तो दुनिया के इस खेल को भारत भी अच्छी तरह समझता है और अब अपने फैसले खुद लेने की स्थिति में है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:21 +0530</pubDate>
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<title>Ayatollah Ali Khamenei Funeral Postponed | 28 फरवरी को हत्या,  जून&#45;जुलाई में अंतिम संस्कार! जानें खामेनेई को दफनाने में क्यों हो रही है इतनी बड़ी देरी?</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ईरान सरकार ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि उसके दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार (State Funeral) अब जून के आखिर या जुलाई की शुरुआत तक के लिए टाल दिया गया है। गौरतलब है कि 28 फरवरी को मध्य तेहरान स्थित उनके आवास पर अली खामेनेई की हत्या कर दी गई थी, जिसने अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध की शुरुआत की थी। इसे भी पढ़ें: अमेरिकी हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत पर भड़के Asaduddin Owaisi, बोले- &#039;PM के पास उत्सवों का समय है, निंदा का नहीं!ईरान ने मुहर्रम की शुरुआत में अंतिम संस्कार करने की योजना बनाई थी, जो इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है और आमतौर पर जून की शुरुआत में आता है। तीन दिन के कार्यक्रम की भी योजना थी, जिसमें लाखों लोग शामिल हो सकते थे।हालांकि, तेहरान के मेयर अलीरेज़ा ज़कानी ने कहा है कि अंतिम संस्कार को इसलिए टाला गया है ताकि लोग इमाम हुसैन का सालाना शोक पूरा कर सकें। इमाम हुसैन शिया समुदाय के सम्मानित शुरुआती नेता थे, जिनकी हत्या 680 ईस्वी में कर्बला की लड़ाई के दौरान हुई थी।इसका मतलब है कि अब अंतिम संस्कार मुहर्रम के दूसरे 10 दिनों में होगा, जो संभवतः 26 जून से 5 जुलाई के बीच होगा। अधिकारियों का मानना ​​है कि उनके अंतिम संस्कार में लगभग 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Manu Bhaker को ओलिंपिक मेडल दिलाने वाले महागुरु Jaspal Rana का आकस्मिक निधन, 49 की उम्र में छोड़ी दुनियाअली खामेनेई को कहाँ दफनाया जाएगा, इस पर भी कोई स्पष्टता नहीं है। इससे पहले, ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने खबर दी थी कि उन्हें मशहद में इमाम रज़ा की दरगाह पर दफनाया जाएगा, जो उनका गृहनगर था। हालांकि, आस्तान कुद्स रज़ावी फाउंडेशन ने अप्रैल में इससे इनकार किया और कहा कि दफनाने की जगह अभी तय नहीं हुई है।क्या US-ईरान युद्ध खत्म होने वाला है?चल रहे संघर्ष की बात करें तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि US और ईरान ने शांति समझौते को अंतिम रूप दे दिया है, जिस पर इस सप्ताहांत यूरोप में हस्ताक्षर किए जाएंगे। मध्य पूर्व के देश पर नए हमले रोकने के कुछ घंटों बाद पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि यूरोप में US का प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे।उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ देगा, परमाणु हथियार बनाने की कोशिश बंद कर देगा और समझौता होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खुल जाएगा। हालांकि, ईरान ने इससे इनकार किया है और कहा है कि समझौते को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। ट्रंप ने कहा, &quot;मुझे नहीं पता कि आपने सुना या नहीं, लेकिन हमने आज (गुरुवार) ईरान के साथ युद्ध खत्म कर दिया है, और वे कभी भी परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो गए हैं - जिस बात पर हमने ज़ोर दिया था। यही तो हमारा मकसद था।&quot;ट्रंप ने कहा, &quot;वे किसी भी तरह से परमाणु हथियार नहीं खरीदेंगे और न ही बनाएंगे। उनके पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।&quot; &quot;उन्हें इतनी ज़बरदस्त मार पड़ी है जितनी शायद ही कोई और झेल पाता, और वे इस डील को मुझसे भी ज़्यादा चाहते हैं।&quot; ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:21 +0530</pubDate>
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<title>चीन&#45;पाकिस्तान की उड़ी रातों की नींद! भारत आ रहे हैं AI से लैस 114 सुपर राफेल, फ्रांस भारत को देगा &amp;apos;ब्रह्मास्त्र&amp;apos; बनाने की सीक्रेट तकनीक</title>
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<description><![CDATA[ भारत की &#039;मेक इन इंडिया&#039; (Make in India) पहल और भारत-फ्रांस रणनीतिक रक्षा साझेदारी को एक ऐतिहासिक मजबूती मिलने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस की आगामी आधिकारिक यात्रा से ठीक पहले पेरिस ने संकेत दिया है कि वह भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए 114 राफेल फाइटर जेट की मेगा-डीक के तहत शत-प्रतिशत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) और इन विमानों में भारतीय स्वदेशी हथियारों के एकीकरण (Integration) के लिए पूरी तरह तैयार है। फ्रांसीसी कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, फ्रांस अब भारत के साथ अपने रक्षा संबंधों को केवल एक &quot;ग्राहक-आपूर्तिकर्ता&quot; (Buyer-Seller) के रूप में नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक और तकनीकी सहयोगी के रूप में देखता है। इसे भी पढ़ें: Iran-US Ceasefire Confirmed | अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम समझौता तय, सप्ताहांत पर यूरोप में होंगे हस्ताक्षर, Donald Trump ने जारी किया बयान  फ्रांसीसी सूत्रों ने संकेत दिया कि &quot;मेक इन इंडिया&quot; इस डील का एक अहम हिस्सा होगा। यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस की आगामी यात्रा से पहले हुआ है, जिसमें रक्षा सहयोग मुख्य एजेंडा में शामिल होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि PM मोदी शनिवार से फ्रांस और स्लोवाकिया की एक हफ्ते की यात्रा पर जाएंगे। फ्रांस में, वह G7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्रों में भाग लेंगे और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्वदेशी इंटीग्रेशनखबरों के अनुसार, फ्रांस ने कहा है कि राफेल प्रोग्राम के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) पूरी तरह स्वीकार्य है और राफेल जेट में भारत में बने हथियारों, मिसाइलों और गोला-बारूद को जोड़ना भी समझौते का एक अहम हिस्सा है।फ्रांस ने दोहराया है कि वह भारत के साथ अपने रक्षा संबंधों को केवल &quot;ग्राहक-आपूर्तिकर्ता&quot; के रिश्ते के तौर पर नहीं, बल्कि एक लंबी अवधि की रणनीतिक साझेदारी के तौर पर देखता है।114 राफेल की खरीद प्रक्रिया जारी114 नए राफेल जेट खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भारत ने 114 और राफेल फाइटर जेट खरीदने के लिए फ्रांस को एक औपचारिक &#039;लेटर ऑफ रिक्वेस्ट&#039; (LoR) भेजा है; यह सरकार-से-सरकार रक्षा खरीद प्रक्रिया शुरू करने के लिए ज़रूरी औपचारिक दस्तावेज़ है।ये नए विमान भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए हैं और &quot;मेक इन इंडिया&quot; पहल के तहत डसॉल्ट एविएशन और एक भारतीय कंपनी के बीच साझेदारी के ज़रिए भारत में बनाए जाने का प्रस्ताव है। इसे भी पढ़ें: बॉम्बे हाई कोर्ट की Salman Khan के पड़ोसी को नसीहत! &#039;सोशल मीडिया पर होने का मतलब यह नहीं कि किसी की मानहानि की जाए&#039;भारत ने इस डील के लिए कुछ ऐसी शर्तें रखी हैं जिन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता, जिनमें स्वदेशी हथियार, भारतीय डेटा लिंक सिस्टम और डिजिटल नेटवर्किंग क्षमताएं शामिल हैं।प्रस्तावित समझौते में इंजन, एयरफ्रेम और एवियोनिक्स से जुड़ी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी शामिल होने की उम्मीद है।इसके अलावा, सभी 114 विमान भारतीय हथियार और मिसाइलें ले जाने में सक्षम होंगे। डसॉल्ट सुरक्षित डेटा लिंक भी देगा, जिससे राफेल जेट भारतीय रडार, सेंसर और ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम के साथ पूरी तरह से जुड़ सकेंगे।AI क्षमताओं वाले एडवांस्ड राफेल वेरिएंटभारतीय वायु सेना अभी 2015 की डील के तहत मिले 36 राफेल जेट के F3R वर्शन का इस्तेमाल कर रही है। डसॉल्ट ने इसके बाद F4 स्टैंडर्ड विकसित किया है, जबकि अगली पीढ़ी का F5 वेरिएंट अभी बन रहा है।भारत नई डील में F-4 और आने वाले F-5 वेरिएंट का मिश्रण चाहता है। इन नए वर्शन में अत्याधुनिक AESA रडार, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताएं, एडवांस्ड सेल्फ-प्रोटेक्शन सिस्टम, लंबी दूरी की मिसाइलें और बेहतर सैटेलाइट कम्युनिकेशन सुविधाएं होंगी।नई पीढ़ी के राफेल जेट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-आधारित एल्गोरिदम भी होंगे जो पायलटों को बेहतर सिचुएशनल अवेयरनेस (हालात की समझ) और निर्णय लेने में मदद करेंगे। इससे युद्ध के मैदान में विमान की प्रभावशीलता और जीवित रहने की क्षमता बढ़ेगी।55-60% स्वदेशी कंटेंटइस प्रोग्राम में 55-60 प्रतिशत स्वदेशी कंटेंट हासिल होने की उम्मीद है, जिसमें डसॉल्ट एविएशन, इंजन बनाने वाली कंपनी सैफरन और एवियोनिक्स कंपनी थेल्स टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में हिस्सा ले रही हैं।एक बार जब भारत में एयरफ्रेम, इंजन और एवियोनिक्स के लिए मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी स्थापित हो जाएगी, तो प्रोजेक्ट में स्वदेशी कंटेंट 55 से 60 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे भारतीय वायु सेना की ताकत काफी बढ़ेगी। भारतीय वायु सेना पहले से ही 36 राफेल जेट का संचालन कर रही है, जबकि भारतीय नौसेना ने 26 नेवल राफेल वेरिएंट का ऑर्डर दिया है। अगर 114 नए विमानों की डील फाइनल हो जाती है, तो भारत के पास कुल 176 राफेल जेट होंगे।अंबाला एयर फोर्स स्टेशन पर राफेल के लिए ट्रेनिंग के साथ-साथ मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधाएं पहले से ही चालू हैं। भारतीय वायु सेना के पास जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेयर पार्ट्स और ट्रेंड कर्मचारी हैं ताकि तुरंत दो अतिरिक्त स्क्वाड्रन (जिनमें लगभग 36 से 38 विमान होंगे) को ऑपरेशनल सर्विस में शामिल किया जा सके। Stay updated with International
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:21 +0530</pubDate>
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<title>बहुत बड़ा परीक्षण कर रहा भारत? अचानक कहां जा रहे 11000 लोग</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने पिछले 3 सालों में 26 परमाणु हथियार बढ़ा लिए हैं। अब भारत के परमाणु हथियारों का जखीरा 190 तक पहुंच गया है। इनमें से 178 हथियार शस्त्रागार में रखे गए हैं। लेकिन इतिहास में पहली बार भारत ने 12 न्यूक्लियर बम मिसाइल में लोड करके तैनात कर दिए हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। लेकिन इसी बीच एक ऐसी खबर आ रही है जो बहुत अजीब है और बहुत बड़ी भी। भारत एक बहुत बड़ा टेस्ट करने जा रहा है। इतना बड़ा टेस्ट कि 11,000 लोगों को कुछ समय के लिए उस इलाके से हटाकर सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है। एक ऐसा टेस्ट होने जा रहा है जिसके चलते कुछ समय के लिए 11,000 लोग अपने घरों से निकलकर सुरक्षित जगह पर चले जाएंगे। इसे भी पढ़ें:  इधर PoK में उतरे लाखों लोग! उधर पाकिस्तान पर टूट पड़ा भारत!न्यूज़ रिपोर्ट्स में किए गए दावों के मुताबिक ओडिशा के बालासोर जिले में चांदीपुर में स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में होने वाले एक अहम मिसाइल टेस्ट से पहले 11,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। न्यूज़ रिपोर्ट्स और दावों को अगर सच मान लें तो भारत शायद अगली पीढ़ी की अग्नि-ि6-6 बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण कर सकता है। अगर भारत ने अग्नि-6 मिसाइल का परीक्षण कर लिया तो पूरी दुनिया में तहलका मच जाएगा। वैसे आपको बता दें कि भारत सरकार ने इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। लेकिन इस टेस्ट से पहले जिस तरह की तैयारियां हो रही हैं वो असाधारण है। प्रोटोकॉल के तहत मिसाइल लॉन्च साइट के एक से 3.5 कि.मी. के दायरे में आने वाले सभी गांवों को खाली कराया जा रहा है। इसे भी पढ़ें: हमसे खेलो मत...जयशंकर ने अमेरिका को दिखाया अपना अजब-गजब अंदाजयह टेस्ट पूरा होने तक निवासी और उनके पालतू जानवर कुछ समय के लिए दूसरी जगह पर रहेंगे। सबको रहने की सुविधाएं दी जा रही हैं। अगर यह मिसाइल टेस्ट अग्नि-6 का ही है तो चीन पागल हो जाएगा। आपको बता दें कि अग्नि-6 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल की रेंज 12,000 कि.मी. से भी ज्यादा हो सकती है। जिससे यह मिसाइल दुनिया के लगभग हर लक्ष्य तक पहुंच सकती है। जाहिर सी बात है कि अग्नि-6 चीन के हर कोने तक भी पहुंच सकती है। जिसमें बीजिंग और शघाई जैसे शहर भी शामिल हैं। अग्नि-6 में एमआईआरवी टेक्नोलॉजी यानी मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल्स की सुविधा है।   ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:20 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान जा रहे 60 ट्रकों को लगा दी आग, अंदर जो निकला, मचा हड़कंप!</title>
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<description><![CDATA[ पीओके के बाद पाकिस्तान का दूसरा इलाका भी आग में जल उठा है। जैसे ही यह खुलासा सामने आया लाहौर से लेकर इस्लामाबाद में भूकंप आ गया। जो धमाकों की खबरें इस वक्त सामने आई है, उसने पूरे 25 करोड़ पाकिस्तानियों को हिला कर रख दिया है। पाकिस्तान चारों तरफ से घिर गया है। एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं बल्कि पूरे 60 पाकिस्तानी ट्रकों को आग लगा दी गई। इन 60 ट्रकों में जो सामान लथ कर जा रहा था वह जानकर आपके होश उड़ जाएंगे क्योंकि बदहाल पाकिस्तान को रोटी के लाले पड़े हैं और अब उसी गरीबी में आटा गीला कर दिया है बलूचिस्तान ने। पीओके के बाद अब बलूचिस्तान के लड़ाके भी पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा खोलकर मैदान में जमकर कूद पड़े हैं। आपको बता दें कि बलूचिस्तान के नुक्सकी इलाके में पाकिस्तान के 60 ट्रकों को आग लगा दी गई है। इसे भी पढ़ें: चीन के एक दांव से Oil Market में मचेगी खलबली? Import बढ़ने से Supply पर बड़ा खतराजानकारी के मुताबिक इन ट्रकों में पाकिस्तान बलूचिस्तान से मिनरल्स और एलपीजी गैस लेकर जा रहा था। मगर पाकिस्तान अपने मिशन में कामयाब नहीं हो पाया। इन सभी ट्रकों को उड़ा दिया गया। आग के हवाले कर दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक बलूचिस्तान में पाकिस्तान के 60 ट्रकों को जलाकर राख कर दिया है। बलूच एक्टिविस्ट मीर यार बलूच ने अपने ऑफिशियल एक्स हैंडल पर इसका वीडियो शेयर किया है। पोस्ट करते हुए उन्होंने यह लिखा है कि पाकिस्तान जल्द ही अगला सोमालिया बनने वाला है। बलूचिस्तान के संसाधनों के बिना पाकिस्तान एक महीने भी टिक नहीं पाएगा और हम पाकिस्तान को अपने नेचुरल रिसोर्सेज नहीं लूटने देंगे। वहीं आपको यह भी बता दें कि पाकिस्तान ने 10 जून को अफगानिस्तान पर हमला कर दिया। जिसके बाद एयर स्ट्राइक की और जिसके बाद तालीबान भी बहुत बुरी तरह से भड़क गया है और सीमा पर भारी तनातनी दिख रही है। बॉर्डर पर हलचल बढ़ गई है। वहीं वजिस्तान के विद्रोहियों ने भी मोर्चा खोल कर रख दिया है पाकिस्तान के खिलाफ। यानी एक तरफ पीओके में बवाल मचा हुआ है। दूसरी तरफ बलूचिस्तान में ट्रकों को आग लगा दी गई है। तीसरी तरफ अफगान सीमा पर तनाव लगातार बढ़ रहा है। और चौथी तरफ वजरिस्तान में विद्रोही सक्रिय हो गए हैं। Breaking News , According to latest reports from Nushki, around 60 vehicles loaded with minerals and LP-Gas have been torched.The sixty million people of the #RepublicOfBalochistan have stood to stop the loot and plunder of their resources form foreign troops of Pakistan.… pic.twitter.com/ye8F6VxJyj— Mir Yar Baloch (@miryar_baloch) June 10, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:16 +0530</pubDate>
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<title>अगर भारत ने ये कर दिया! तो PoK में कूद पड़ेगा इजरायल</title>
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<description><![CDATA[ पीओके इस वक्त पाकिस्तान की सबसे बड़ी कमजोरी बन गया है। पीओके में अगर बड़ी चिंगारी लगा दी जाए तो आग पूरे पाकिस्तान में फैल सकती है। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि अगर भारत इजराइल की एक बात मान जाए तो इजराइल ही पीओके में तांडव मचा सकता है। एक खास कारण है जिसकी वजह से इजराइल की नजर इस वक्त पीओके पर है। इजराइल पीओके से आई तस्वीरों को देखकर परेशान है। दरअसल इजराइल पिछले कुछ सालों से भारत से एक मांग कर रहा है। इजराइल चाहता है कि भारत हमास को एक आतंकी संगठन घोषित कर दे। आपको बता दें कि भारत अभी तक हमास को एक आतंकी संगठन नहीं मानता है। इजराइल ने  भारत से कहा है कि हमास को आतंकी संगठन घोषित करने का समय आ गया है। इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान जा रहे 60 ट्रकों को लगा दी आग, अंदर जो निकला, मचा हड़कंप!दरअसल  तस्वीर पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर से आई है। इस तस्वीर में हमास के आतंकी पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर में बैठे पाकिस्तानी आतंकियों से मिल रहे हैं। यानी हमास ने अब भारत के दुश्मनों से हाथ मिला लिया है। हमास पीओके तक पहुंच गया है। ऐसे में इजराइल ने भारत से कहा है कि अगर हमास जैसा आतंकी संगठन पीओके में बैठकर जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर से दोस्ती करता है तो यह भारत के लिए भी खतरा है। ऐसे में भारत तुरंत हमास को एक आतंकी संगठन घोषित कर दे। इजराइल को डर है कि अगर हमास ने पीओके को अपना नया अड्डा बना लिया तो उसे खत्म करना मुश्किल हो जाएगा। इसे भी पढ़ें:  इधर PoK में उतरे लाखों लोग! उधर पाकिस्तान पर टूट पड़ा भारत!ऐसे में इजराइल सिर्फ इतना चाहता है कि भारत कागज पर हमास को आतंकी संगठन घोषित कर दे। उसके बाद का काम इजराइल खुद कर लेगा। अगर भारत इजराइल की बात मान जाता है तो इजराइल चुपचाप भारत आकर पीओके में ऑपरेशन चला सकता है। पीओके के पास अपने इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करके इजराइल पीओके के अंदर घुसकर अपने और भारत दोनों के दुश्मनों को मार सकता है। इजराइल यह सब कुछ करने के लिए तैयार है। सोचिए अगर इजराइल ने पीओके में ऑपरेशन चला दिया तो पीओके में आतंकियों का क्या हाल होगा? पीओ के ऑपरेशन में भारत की ताकत 100 गुना ज्यादा बढ़ जाएगी। हमें भी लगता है कि अब वो समय आ गया है जब भारत हमास को आतंकी संगठन घोषित कर दे। हालांकि इसमें कुछ अड़चनें अभी भी हैं। इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान ने इन 60 ट्रकों ने मचाया हड़कंप, 21 सैनिक गायब!सबसे पहली अड़चन तो यह है कि खुद संयुक्त राष्ट्र ने हमास को आतंकी संगठन घोषित नहीं किया है। इसके अलावा हमास ने भी अभी तक सीधे भारत पर कोई हमला नहीं किया है। हालांकि अब हमास ने पाकिस्तान के साथ हाथ मिला लिया है। बहरहाल कई मुस्लिम देश हैं जो सीधे-सीधे हमास को मदद देते हैं। इनमें सबसे आगे क़तर है। अगर भारत हमास को आतंकी संगठन घोषित करता है तो कई खाड़ी देश भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए पैसा पानी की तरह बहाना शुरू कर देंगे।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:15 +0530</pubDate>
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<title>Indian Navy का धांसू ऑपरेशन, जहाज से जिंदा मिसाइल निकाल लाई</title>
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<description><![CDATA[ समुद्री इलाकों में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय नौसेना ने एक ऐसे ऑपरेशन को अंजाम दिया है जिसने एक बड़े समुद्री हादसे को टाल दिया। ओमान के तट के पास संदिग्ध हमले का शिकार हुए एक विशाल क्रूड ऑयल टैंकर के भीतर फंसे जिंदा मिसाइल वॉरहेड को भारतीय नौसेना ने सुरक्षित तरीके से निकाल लिया है। अगर यह वॉरहेड फट जाता तो ना सिर्फ जहाज तबाह होता बल्कि सैकड़ों करोड़ रुपए का नुकसान और बड़े पैमाने पर संकट भी पैदा हो सकता था। दरअसल मामला मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाली क्रूड ऑयल टैंकर एम्प्टी ओलंपिक लाइफ का है। यह जहाज यूएई के पुजेरा से कोची की ओर जा रहा था। 26 मई को ओमान के तट के पास जहाज के ढांचे में धमाका हुआ। शुरुआती जांच में पता चला कि कोई प्रोजेक्टाइल या मिसाइल जहाज से टकराई थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि मिसाइल का एक हिस्सा जहाज के अंदर घुसने के बाद फटा ही नहीं था और वह फ्यूल टैंक के भीतर फंस गया था। इसे भी पढ़ें: गहरा असर पड़ा है...भारतीय जहाज पर हमले के बीच UN में भयंकर भड़का भारतजैसे ही इसकी जानकारी मिली भारतीय नौसेना हरकत में आ गई। इंडियन ओशियन रीजन के इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर के जरिए सूचना मिलने के बाद कोची स्थित सदर्न नेवल कमांड ने अपनी विशेष टीम को ऑपरेशन पर लगाया और जांच में सामने आया कि मिसाइल का हिस्सा जहाज की बाहरी दीवार को चीरते हुए कई कंपार्टमेंट पार कर सीधे ईंधन भंडारण टैंक तक पहुंच गया। यानी जहाज के सबसे संवेदनशील हिस्से में एक जिंदा वॉरहेड मौजूद था और किसी भी छोटी गलती से भीषण विस्फोट हो सकता था। इसके बाद नौसेना के बम निरोधक टीम ने बेहद सावधानी के साथ चरणबद्ध ऑपरेशन शुरू किया। आधुनिक तकनीकों की मदद से पहले वॉरहेड के डिटोनेशन सिस्टम की पहचान की गई। फिर उसे निष्क्रिय किया गया।  इसे भी पढ़ें: आज रात ईरान पर होगा बहुत बड़ा हमला? ट्रंप की सीधी धमकी, तेल भंडारों पर भी कब्ज़े का ऐलानआखिरकार पूरे वॉरहेड को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल लिया गया। वहीं इस ऑपरेशन के दौरान जहाज, चालक दल और बंदरगाह से जुड़े सभी ढांचों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। इसके बाद भारतीय नौसेना ने बरामद बोरहेड को अब एक सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। जहां उसकी विस्तृत जांच की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक हाल के सालों में यह सबसे जटिल और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण समुद्री बम निरोधक अभियानों में से एक। यह ऑपरेशन ऐसे वक्त में हुआ जब हुरमुस और ओमान की खाड़ी के आसपास समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई। यह इलाका दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में शामिल है और हाल के महीनों में यहां कई जहाज संदिग्ध हमलों, ड्रोन गतिविधियों और सुरक्षा खतरों का सामना कर चुके हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:14 +0530</pubDate>
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<title>PM मोदी ने ट्रंप को कहा धन्यवाद, केजरीवाल क्यों हो गए गुस्से से लाल?</title>
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<description><![CDATA[ भारत की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफों के पुल बांध रहे हैं तो दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल गुस्से से लाल हैं। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी से सीधा और चुभता हुआ सवाल पूछा है। आखिर किस बात का थैंक यू? दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। इस मौके पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को बधाई दी। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लिखा मेरे मित्र और प्रधानमंत्री मोदी को भारत के सबसे लंबे वक्त तक प्रधानमंत्री बनने पर बधाई। वह महान है, वह मजबूत, स्वस्थ और बुद्धिमान है। इसके जवाब में पीएम मोदी ने ट्रंप को थैंक यू कहा और दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने की बातें कही। इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान जा रहे 60 ट्रकों को लगा दी आग, अंदर जो निकला, मचा हड़कंप!लेकिन इसी थैंक्यू पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भड़क गए। केजरीवाल के गुस्से की वजह एक बेहद दर्दनाक घटना। हाल ही में ओमान के तट के पास एक पलाऊ के झंडे वाले तिल टैंकर एमटी सेटबोले पर अमेरिकी हमला हुआ। इस हमले में तीन भारतीय नागरिकों की जान चली गई। केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने भी इन मौकों की पुष्टि की है। अमेरिका का कहना है कि जहाज ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था। अपने ही नागरिकों की मौत के बीच पीएम मोदी के अमेरिका को थैंक यू कहने पर केजरीवाल ने जोरदार हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा पीएम मोदी ट्रंप को थैंक यू कह रहे हैं। असल में किस बात के लिए?इसे भी पढ़ें: अगर भारत ने ये कर दिया! तो PoK में कूद पड़ेगा इजरायल भारतीयों की मौजूदगी वाले जहाज पर हमले और भारतीय नागरिकों की हत्या के लिए। केजरीवाल यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि स्थिति बेहद शर्मनाक है। मोदी जी ने भारतीय संप्रभुता, गौरव और नागरिकों की जिंदगी श्रम के सामने गिरवी रख दी है। केजरीवाल ने दो टुक कहा कि भारत को एक मजबूत प्रधानमंत्री की जरूरत है। श्रम को हमारे लोगों के साथ मनमानी करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। एक तरफ कूटनीतिक शिष्टाचार है तो दूसरी तरफ भारतीय नागरिकों की जान का संवेदनशील मुद्दा। अमेरिका के इस हमले और केजरीवाल के इन तीखे सवालों ने देश की राजनीति का पारा चढ़ा दिया है।   ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:14 +0530</pubDate>
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<title>ईरान ने US के उड़ाए होश! खैबर मिसाइल ने 5 ठिकानों पर मचा दी तबाही</title>
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<description><![CDATA[ ओमान से जो खबरें आ रही हैं, वो भारतीयों के लिए बेहद चिंता करने वाली है। तीन दिन के अंदर हॉररमूस में और ओमान में तीन टैंकर्स पर अमेरिका ने हमला किया है। जिसमें कई भारतीय सवार थे। और देखिए मैं इन तीनों हमलों की बात करूंगा। सेटबेलो जो टैंकर है इस पे हमला हुआ। उसके पहले मैरी वैक्स पर हमला हुआ और इस समय एमटी जलवीर ये तीन टैंकर्स हैं जिन पर भारतीय सवार थे। इन पर अमेरिका की तरफ से हमले किए गए हैं। सेटेबेलो टैंकर है जिसके ऊपर अमेरिका की नेवी की तरफ से हमला हमला किया गया।इसे भी पढ़ें: बहुत बड़ा परीक्षण कर रहा भारत? अचानक कहां जा रहे 11000 लोग अमेरिकी वॉरशिप के ऊपर से एक फाइटर जेट ने टेक ऑफ किया और इस जहाज को ओमान के तट के पास नुकसान पहुंचाया गया। इसमें 21 भारतीय सवार थे जिसमें तीन भारतीयों की मौत हो गई है। देखिए यह बेहद दुखद खबर आई है। तीन भारतीयों की अमेरिका के जेट के हमले में मौत हुई है। अमेरिका ने अपने फाइटर जेट से इस टैंकर के ऊपर हमला किया। इसमें 11 इसमें 21 भारतीय थे और उसमें से तीन की अब मौत हो गई। ये तीनों लापता थे और अब इन तीनों की मौत हो गई है। देखिए सेटोबेलो जो जहाज है इसको लेकर जो जानकारियां सामने आई है अमेरिकी सेंट्रल कमान की तरफ से यह कहा गया है कि यह इस पे पलाऊ का झंडा लगा हुआ था और इस टैंकर यह टैंकर जो है वो ईरान से ऑयल लेकर वापस आ रहा था। ईरान से तेल लेकर यह ओमान के करीब जब पहुंचा तब इस पर हमला किया गया और बताया यह जा रहा है जो अमेरिकी सेंट कॉम का कहना है कि अमेरिका ने जो नाकेबंदी कर रखी है अमेरिका की तरफ से वार्निंग दी गई लेकिन जहाज ने उसका पालन नहीं किया इसलिए हमने हमला किया यह कहना है अमेरिका का और देखिए इस टैंकर के ऊपर जो है वह काफी समय से अमेरिका की नेवी की नजर थी ऐसा बताया जा रहा है। यह टैंकर जो है इसमें जो ऑपरेट कर रहे थे 21 भारतीय इसमें सवार थे जिसमें तीन लोगों की इस हमले में मौत हो गई है। भारत की सरकार ने इस पर आपत्ति जताई है और अमेरिकी दूतावास के उप प्रमुख जो हैं जसन मिक्स को उनको तलब किया गया और उनसे सख्त आपत्ति जताई गई है। इसे भी पढ़ें: PM मोदी ने ट्रंप को कहा धन्यवाद, केजरीवाल क्यों हो गए गुस्से से लाल?ईरान ने  कल 21 बेसिस पर 21 ठिकानों पर हमले किए थे। ईरान ने कल और आज फिर 20 जगहों पर निशाने साथ दिए हैं ईरान ने और इस हमले में जो है वो टारगेट पर कुवैत बहरीन और इराक रहे और बताया ये जा रहा है देखिए लगातार इस तरह की खबरें आ रही हैं। अभी इस पे कोई नंबर्स का दावा नहीं हो सकता। जॉर्डन के बाद जॉर्डन में जो हमले हुए हैं उसमें बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में F35 जेट्स के हैंगर के ऊपर चुपकर मिसाइल गिरी है तो वहां पर नुकसान की खबरें हैं। इसी तरह की खबरें अब कुवैत से भी आ रही हैं कि कुवैत में भी अमेरिका के बेस को खासा नुकसान पहुंचा है। बहरीन के नेवल बेस पर मिसाइल्स गिरी है। कमांड सेंटर तबाह हुआ है। उसकी तस्वीरें सेटेलाइट से सामने आ गई हैं। इसको कोई डिनाई नहीं कर सकता। बहरीन में तो बड़ा नुकसान हुआ है अमेरिका का।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:13 +0530</pubDate>
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<title>Iran पर Attack से Trump को किसने रोका? UAE, कतर और Pakistan की एक फोन कॉल ने बदला खेल</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (स्थानीय समय) को कहा कि ईरान के साथ शांति समझौता तय हो गया है और इस वीकेंड यूरोप में इस पर साइन किए जाएंगे। उन्होंने आगे बताया कि समझौते के तहत ईरान परमाणु हथियार बनाना छोड़ देगा और होर्मुज जलडमरूमध्य जल्द ही खोल दिया जाएगा। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि हमने अभी-अभी ईरान के साथ युद्ध को लेकर एक शानदार समझौता किया है।&quot; अमेरिका और ईरान के बीच &quot;दस्तावेज़ों को अंतिम रूप देने के बाद - जो अगले कुछ दिनों में हो जाना चाहिए शायद यूरोप में साइनिंग होगी। यह बहुत अच्छी बात है। ट्रंप ने यह घोषणा तब की, जब कुछ ही घंटे पहले उन्होंने कहा था कि उन्होंने मध्य पूर्व के देश पर नए हमले रोकने का फैसला किया है। खबरों के अनुसार, UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने ट्रंप को ईरान पर दोबारा हमला न करने के लिए मना लिया।इसे भी पढ़ें: PM मोदी ने ट्रंप को कहा धन्यवाद, केजरीवाल क्यों हो गए गुस्से से लाल?अधिकारियों और एक राजनयिक का हवाला देते हुए, &#039;पोलिटिको&#039; ने रिपोर्ट दी कि ऊपर बताए गए नेताओं ने ट्रंप से संपर्क किया और उन्हें ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई न करने के लिए मनाने की कोशिश की, क्योंकि ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि ईरान पर &quot;आज रात बहुत ज़ोरदार हमला&quot; हो सकता है। ईरान के राजनीतिक नेतृत्व पर अपने रणनीतिक प्रभाव के कारण, उन्होंने ट्रंप को भरोसा दिलाया कि आगे जवाबी कार्रवाई करने से युद्धविराम के लिए होने वाले आगामी समझौतों में बाधा आ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती समझौतों से परमाणु कार्यक्रमों के बारे में और गंभीर बातचीत का रास्ता खुल सकता है। &#039;पोलिटिको&#039; द्वारा उद्धृत एक अधिकारी ने बताया कि तीनों नेताओं के संदेशों ने ट्रंप को ईरान पर दोबारा हमला न करने के लिए मना लिया। इसके तुरंत बाद, ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान के साथ शांति समझौता होने वाला है।इसे भी पढ़ें: ईरान ने US के उड़ाए होश! खैबर मिसाइल ने 5 ठिकानों पर मचा दी तबाहीईरान-अमेरिका शांति समझौताट्रंप ने गुरुवार को &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर घोषणा की कि &quot;इसी सप्ताहांत&quot; तक एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। बाद में उन्होंने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा, हमने ईरान में युद्ध को लेकर एक बेहतरीन समझौता किया है और अब बस दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। अगले कुछ दिनों में यह काम पूरा हो जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने युद्ध समाप्त करने के समझौते को व्यक्तिगत रूप से मंजूरी दे दी है और वे कभी भी परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इससे अलग बात कही। उन्होंने कहा कि तेहरान अभी किसी ऐसे नतीजे पर नहीं पहुंचा है। तस्नीम समाचार एजेंसी ने चेतावनी दी: &quot;जब तक ईरान किसी संभावित समझौते की घोषणा नहीं करता, तब तक ट्रंप की ओर से इस विषय पर आने वाली किसी भी खबर को उनके पिछले बयानों जैसा ही माना जाना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:12 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran Tension: भारतीय जहाजों पर हमले से नाराज भारत, अमेरिकी Diplomat को फिर भेजा समन</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच ओमान के तट पर भारतीय जहाजों पर हुए हमलों के विरोध में भारत ने शुक्रवार को अमेरिकी चार्ज डी अफेयर्स जेसन मीक्स को तलब किया। 48 घंटों में यह दूसरी बार है जब नई दिल्ली ने मीक्स को तलब किया है। मीक्स, जो नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास में डिप्टी चीफ ऑफ मिशन हैं, उन्हें विदेश मंत्रालय (MEA) में अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) ने बुलाया था। यह घटनाक्रम गुरुवार को ओमान के शिनास बंदरगाह के पास 20 भारतीय क्रू सदस्यों वाले एक मर्चेंट जहाज, MT जलवीर, को निशाना बनाए जाने के एक दिन बाद हुआ है। जहाज की निगरानी करने वाली वेबसाइट &#039;मरीनट्रैफिक&#039; के अनुसार, जलवीर गिनी के झंडे वाला जहाज है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी वायरल हुए थे जिनमें जहाज से धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा था। बाद में, ओमान में भारतीय दूतावास ने कहा कि वह स्थिति पर नज़र रख रहा है और स्थानीय अधिकारियों के साथ तालमेल बिठा रहा है। इसे भी पढ़ें: ईरान ने US के उड़ाए होश! खैबर मिसाइल ने 5 ठिकानों पर मचा दी तबाहीजलवीर पर हुआ हमला किसी जहाज़ पर हमले का तीसरा मामला था। पहली घटना 8 जून को हुई थी, जब हमले के बाद MT मैरिवेक्स में आग लग गई थी। टैंकर पर 24 भारतीय सवार थे, जिन्हें अधिकारियों ने सुरक्षित बचा लिया था। 10 जून को ओमान की खाड़ी में MT सेटेबेलो नाम के एक और टैंकर पर हमला हुआ। यह पलाऊ के झंडे वाला टैंकर था। जहाज़ पर 24 क्रू मेंबर थे, जिनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन तीन लोगों की मौत हो गई। केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को X पर एक पोस्ट में कहा, पलाऊ के झंडे वाले MT सेटेबेलो पर हुई दुखद घटना के बारे में जानकर बहुत अफ़सोस हुआ। दुख की बात है कि शुरू में लापता बताए गए तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हो गई है; उनके शव मिल गए हैं और उनकी पहचान कर ली गई है। उन्होंने आगे कहा कि यह हमारे समुद्री समुदाय के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। मोदी सरकार इस मुश्किल घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है और उनके परिजनों की मदद के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।इसे भी पढ़ें: अगर भारत ने ये कर दिया! तो PoK में कूद पड़ेगा इजरायल10 जून की घटना के बाद, भारत ने मीक्स को तलब किया और हमलों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत का कहना है कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के बीच कमर्शियल जहाज़ों और आम लोगों के बुनियादी ढांचे पर हमले स्वीकार्य नहीं हैं और सभी जहाज़ों के लिए शिपिंग लेन आज़ाद और खुली रहनी चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:12 +0530</pubDate>
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<title>Vishwakhabram: US&#45;Israel ने पूरी ताकत लगा ली, मगर फिर भी मैदान में कैसे सीना तान कर डटा हुआ है Iran?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और इजरायल की लगातार सौ दिन से अधिक चली भीषण बमबारी, शीर्ष सैन्य कमांडरों की मौत, तेल आय पर चोट और ढांचागत तबाही के बावजूद ईरान आखिरकार कैसे अब भी घुटनों पर नहीं आया है। यही वह सवाल है जिसने पूरी दुनिया को चौंका रखा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर वह कौन-सी ताकत है जो तेहरान को अब भी टिकाए हुए है? दुनिया जानना चाहती है कि कैसे एक ऐसा देश, जिसकी अर्थव्यवस्था वर्षों से प्रतिबंधों और अलगाव का बोझ झेल रही थी, वह युद्ध के इतने गहरे घावों के बाद भी अपने नागरिकों और सैनिकों की जरूरतें पूरी कर पा रहा है?हम आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक युद्ध ने ईरान को करीब तीन सौ सैंतालीस अरब डॉलर का नुकसान पहुंचाया है और इस वर्ष उसकी अर्थव्यवस्था छह प्रतिशत से अधिक सिकुड़ सकती है। अस्पताल, विद्यालय, गैस क्षेत्र, इस्पात संयंत्र और रिहायशी इलाके तक हमलों में तबाह हो चुके हैं। हजारों लोगों की मौत हुई और लाखों परिवारों की जिंदगी बिखर गई है। इसके बावजूद ईरान की व्यवस्था पूरी तरह ढही नहीं है। यही बात पश्चिमी देशों के लिए सबसे बड़ी चिंता बन चुकी है।इसे भी पढ़ें: भारत में तो कई बार देखी होगी, अब अमेरिकी सांसदों की भिड़ंत देखिये, Ilhan Omar को Nancy Mace का करारा जवाब छा गयादरअसल ईरान कोई साधारण अर्थव्यवस्था नहीं है। उसने दशकों तक युद्ध, आर्थिक नाकेबंदी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच जीना सीखा है। अमेरिका द्वारा परमाणु समझौते से बाहर निकलने के बाद लगाए गए कठोर प्रतिबंधों ने ईरान को पहले ही आत्मनिर्भर बनने की दिशा में धकेल दिया था। यही वजह है कि आज जब तेल व्यापार पर हमला हुआ, तब भी ईरान पूरी तरह से टूट नहीं पाया।सबसे बड़ा झटका तब लगा जब फरवरी में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया। माना जा रहा था कि इससे वैश्विक तेल बाजार के साथ-साथ खुद ईरान की कमर भी टूट जाएगी, क्योंकि दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल कारोबार इसी रास्ते से गुजरता है। लेकिन यहां ईरान की वर्षों पुरानी तैयारी काम आई। युद्ध से ठीक पहले तेहरान ने तेजी से तेल निर्यात बढ़ाकर भारी राजस्व जमा कर लिया था। यही भंडार अब उसके लिए सुरक्षा कवच बना हुआ है।ईरान ने केवल तेल पर भरोसा नहीं रखा। उसने छद्म कंपनियों और गुप्त समुद्री बेड़ों का ऐसा जाल तैयार किया था जिसके जरिए उसका तेल निर्यात जारी रहा। कई जहाज समुद्र में अपने संकेतक बंद कर देते हैं और बीच समुद्र में दूसरे जहाजों में तेल स्थानांतरित कर देते हैं ताकि उन पर नजर नहीं रखी जा सके। यह पूरी रणनीति वर्षों से प्रतिबंधों से लड़ते लड़ते विकसित हुई है।तेहरान ने एक और बड़ा दांव खेला। ईरान सरकार ने कृषि, इस्पात और पेट्रोरसायन जैसे कई जरूरी उत्पादों के आयात पर कड़ी रोक लगाई, लेकिन साथ ही उन क्षेत्रों के निर्यात को बढ़ाया जो होर्मुज मार्ग पर निर्भर नहीं थे। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के साथ रेल व्यापार में अचानक तेजी आई। उत्तरी बंदरगाहों को भी सक्रिय किया गया, जिनका पहले मुख्य उपयोग रूस के साथ व्यापार के लिए होता था। इस रणनीति ने ईरान को पूरी तरह अलग थलग पड़ने से बचा लिया।देखा जाये तो इन सबके पीछे एक पुरानी आर्थिक सोच भी काम कर रही है। वर्ष 2013 में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने आर्थिक प्रतिरोध की नीति लागू की थी। इसका उद्देश्य विदेशी आयात पर निर्भरता घटाकर घरेलू उत्पादन को मजबूत करना था। भारी शुल्कों के कारण विदेशी सामान बाजार से गायब होने लगे और स्थानीय उद्योगों को जगह मिली। आज वही नीति युद्ध के दौर में ईरान के लिए ढाल साबित हो रही है।हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि ईरानी जनता आराम से जीवन जी रही है। हालात बेहद कठिन हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक इस वर्ष ईरानी अर्थव्यवस्था दशकों की सबसे खराब गिरावट का सामना कर सकती है। मुद्रास्फीति 77 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुकी है और ईरानी मुद्रा रियाल लगातार ऐतिहासिक गिरावट दर्ज कर रही है। रोजमर्रा की वस्तुएं आम लोगों की पहुंच से बाहर हो चुकी हैं। अंडे, चावल और आलू तक महंगे हो गए हैं। लोग मांस और चिकन छोड़कर सोयाबीन जैसे सस्ते विकल्प अपनाने को मजबूर हैं।रिपोर्टों के मुताबिक, स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि अब किताबें और टैक्सी यात्रा जैसी सामान्य सेवाओं के लिए भुगतान कठिन हो रहा है। नकदी संकट के कारण परिवार उधार पर निर्भर हो गए हैं। बेरोजगारी भी तेजी से बढ़ी है। ईरान के श्रम और सामाजिक कल्याण मंत्रालय के अनुसार अमेरिका ईरान तनाव शुरू होने के बाद से कम से कम दस लाख नौकरियां खत्म हो चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम का अनुमान है कि करीब 41 लाख लोग अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे जा सकते हैं।यही नहीं, युद्ध से पहले भी ईरान की हालत बहुत अच्छी नहीं थी। अमेरिकी प्रतिबंधों ने विदेशी मुद्रा की आपूर्ति लगभग खत्म कर दी थी। डॉलर की कमी के कारण आयात महंगे होते गए और जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ता गया। रियाल की गिरावट के खिलाफ देश में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जिन पर कठोर कार्रवाई भी हुई। ईरान सरकार ने केंद्रीय बैंक प्रमुख को बदला, नकद सहायता योजनाएं शुरू कीं और सरकारी कर्मचारियों के वेतन बढ़ाए, लेकिन जनता को राहत नहीं मिल सकी।उधर, इस तरह की खबरों के बीच एक और दिलचस्प मोड़ तब आया जब भारत स्थित ईरानी दूतावास ने मीडिया में चल रही उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान में आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी हो गई है। दूतावास ने दावा किया कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के नेतृत्व में सरकार ने आपूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह स्थिर बनाए रखा है और देश में किसी जरूरी वस्तु का संकट नहीं है। साथ ही कुछ विदेशी माध्यमों पर पक्षपातपूर्ण खबरें फैलाने का आरोप भी लगाया गया।यहां सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि क्या आर्थिक संकट ईरान में सत्ता परिवर्तन का कारण बन सकता है? विश्लेषकों का मानना है कि जन असंतोष ज ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:11 +0530</pubDate>
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<title>Hormuz के तनाव पर भारत का बड़ा कदम: 18,000 Sailors के लिए DGS ने जारी किया High Alert</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच कमर्शियल जहाजों पर लगातार हुए हमलों से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसे देखते हुए भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) के आस-पास काम कर रहे लगभग 18,000 भारतीय नाविकों के लिए समुद्री सुरक्षा से जुड़ी एक नई एडवाइजरी जारी की है। अपनी एडवाइजरी में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ शिपिंग (DGS) ने ईरानी जलक्षेत्र, होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में काम कर रहे जहाजों और उनके क्रू को बढ़ते खतरों के बीच ज़्यादा सतर्क रहने का निर्देश दिया है। यह एडवाइज़री भारतीय क्रू सदस्यों वाले कमर्शियल जहाज़ों पर हाल ही में हुए तीन हमलों के बाद जारी की गई है; इनमें ओमान के तट के पास हुई एक जानलेवा घटना भी शामिल है, जिसमें तीन नाविक मारे गए थे। इसे भी पढ़ें: चीन के एक दांव से Oil Market में मचेगी खलबली? Import बढ़ने से Supply पर बड़ा खतराटैंकर पर हमले के बाद नाविकों के लापता होने की खबर मिली। अमेरिका का कहना था कि इस टैंकर में ईरान का तेल था और इसने अमेरिकी सेना के निर्देशों का पालन नहीं किया था। सरकारी अनुमानों के मुताबिक, भारत के झंडे वाले 13 जहाजों पर 622 भारतीय नाविक अभी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पश्चिम और पूर्व के समुद्री इलाकों में काम कर रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र में दूसरे देशों के झंडे वाले सैकड़ों कमर्शियल जहाजों पर लगभग 18,000 भारतीय नागरिक काम करते हैं। इस वजह से बिगड़ती समुद्री सुरक्षा स्थिति से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले देशों में भारत भी शामिल है। नई एडवाइज़री के तहत, जहाज चलाने वालों, मालिकों और कैप्टन को निर्देश दिया गया है कि वे पूरी सुरक्षा ड्रिल करें, &#039;शिप सिक्योरिटी अलर्ट सिस्टम&#039; (SSAS) की जांच करें, कड़ी निगरानी रखें, नेविगेशन से जुड़ी चेतावनियों पर बारीकी से नज़र रखें और रिपोर्टिंग व बातचीत के नियमों का सख्ती से पालन करें। इसे भी पढ़ें: गहरा असर पड़ा है...भारतीय जहाज पर हमले के बीच UN में भयंकर भड़का भारतएडवाइज़री में ड्रोन, मिसाइल, लॉइटरिंग म्यूनिशन और बिना चालक वाले समुद्री जहाजों जैसे उभरते खतरों के प्रति लगातार सतर्क रहने को भी कहा गया है। DGS ने जहाजों और उनके क्रू को निर्देश दिया है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि, सुरक्षा खतरे या समुद्री घटना की तुरंत संबंधित भारतीय अधिकारियों को सूचना दें, जिनमें DGComm सेंटर और इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) शामिल हैं। दुनिया में समुद्री कामकाज से जुड़े लोगों (सीफेयरर्स) की संख्या के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है; दुनिया भर में जहाजों पर लगभग 3.2 लाख भारतीय सीफेयरर्स काम करते हैं, जिससे मर्चेंट शिपिंग की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय चिंता का विषय बन जाती है। इस बीच, हालिया हमलों के बाद नई दिल्ली ने एक सख्त कूटनीतिक रुख अपनाया है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:11 +0530</pubDate>
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<title>Kerala High Court का बड़ा फैसला, Mental Healthcare Act के तहत बच्चे की हत्या की दोषी मां हुई बरी</title>
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<description><![CDATA[ &#039;मेंटल हेल्थकेयर एक्ट&#039; (मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम) एक व्यक्ति को आत्महत्या की कोशिश करने पर आईपीसी के तहत सज़ा से बचाता है। इसी कानून ने एक महिला की मदद की है, जिसे 2016 में अपने 15 महीने के बच्चे का दम घोंटकर मारने के लिए दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी, क्योंकि उस समय उसने खुद भी अपनी जान लेने की कोशिश की थी। इस कानून के प्रावधानों का हवाला देते हुए, केरल हाई कोर्ट ने उस महिला को बरी कर दिया, जिसे 2023 में सेशंस कोर्ट ने दोषी ठहराया था। कोर्ट ने कहा कि घटना के समय वह बहुत ज़्यादा मानसिक तनाव में थी और उसने आत्महत्या की कोशिश की थी। 2018 में लागू हुए इस कानून के बारे में केरल हाई कोर्ट ने पहले कहा था कि यह पिछली तारीख से लागू होगा।इसे भी पढ़ें: इलेक्शन प्रोसेस में हस्तक्षेप नहीं...SC ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द करने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कीवर्तमान मामले में उच्च न्यायालय ने कहा कि जब 2021 में मुकदमा शुरू हुआ था तब यह अधिनियम लागू था, इसलिए सत्र न्यायालय को इसे ध्यान में रखना चाहिए था। न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और के वी जयकुमार की पीठ ने कहा कि महिला ने पैरासिटामोल की काफी मात्रा में गोलियां खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया, अपनी कलाई पर किसी नुकीली वस्तु से घाव किए और इन कृत्यों को अंजाम देने से पहले एक आत्महत्या नोट भी लिखा, जिससे पता चलता है कि वह गंभीर मानसिक तनाव में थी। न्यायालय ने कहा कि ये परिस्थितियां, प्रथम दृष्टया, आत्महत्या के प्रयास के आरोप से संबंधित ठोस सबूत हैं। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने भारतीय दंड संहिता की धारा 309 (आत्महत्या का प्रयास) के तहत आरोप को साबित करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया।इसे भी पढ़ें: SC से झटका मिलने के बाद Meenakshi Natarajan बोलीं, यह लोकतंत्र और संविधान के लिए एक आघात हैबेंच ने 8 जून के अपने फ़ैसले में कहा कि इन हालात में, हमारी यह राय है कि मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 की धारा 115 (आत्महत्या की कोशिश के मामले में गंभीर तनाव की धारणा) के प्रावधान इस मामले के तथ्यों पर पूरी तरह लागू होंगे। अपीलकर्ता (आरोपी) को मानसिक तनाव में माना जाएगा और उसे IPC के तहत किसी भी अपराध के लिए सज़ा नहीं दी जा सकती थी। अभियोजन पक्ष का तर्क था कि चूंकि आरोपी को IPC की धारा 309 के तहत अपराध से बरी कर दिया गया था, इसलिए मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 की धारा 115 के तहत मानी जाने वाली कानूनी धारणा इस मामले के तथ्यों पर लागू नहीं होगी। हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि ट्रायल कोर्ट के सामने बहस के दौरान, अभियोजन पक्ष ने खुद ही IPC की धारा 309 के तहत लगे आरोप पर गंभीरता से जोर नहीं दिया था। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:11 +0530</pubDate>
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<title>Tibet में China का खतरनाक खेल, भारत सीमा के पास बच्चों को दे रहा Military Training</title>
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<description><![CDATA[ &#039;इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत&#039; (ICT) ने चीनी अधिकारियों की कड़ी आलोचना की है। हाल ही में जारी तस्वीरों में तिब्बत के किंडरगार्टन के बच्चों को मिलिट्री-स्टाइल की गतिविधियों में हिस्सा लेते हुए देखा गया। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के &#039;यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट&#039; द्वारा जारी इन तस्वीरों में तिब्बत के छोटे बच्चों को कैमोफ्लाज यूनिफॉर्म पहने, चीनी झंडे के नीचे मार्च करते और नकली राइफलें लेकर नकली लड़ाई की ड्रिल (mock combat drills) में हिस्सा लेते हुए दिखाया गया है। ये तस्वीरें दक्षिणी तिब्बत के सोना (Tsona) शहर में ली गई थीं, जो भारत के करीब है। इन्हें 26 मई, 2026 को जारी एक रिपोर्ट में दिखाया गया था। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, ये गतिविधियां &quot;राष्ट्रीय रक्षा और जातीय एकता&quot; से जुड़े शैक्षिक कार्यक्रमों के तौर पर आयोजित की गई थीं। इनका मकसद छोटे बच्चों में देशभक्ति और सीमा सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करना था।इसे भी पढ़ें: आखिर भारत की बढ़ती परमाणु ताकत से चौकन्ना क्यों होने लगा अंतरराष्ट्रीय जगत?ICT ने इस पहल की निंदा करते हुए कहा कि ये दृश्य बहुत परेशान करने वाले हैं और किंडरगार्टन की उम्र के बच्चों के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं। संगठन का कहना है कि किसी भी बच्चे को पढ़ाई-लिखाई के माहौल में मिलिट्री जैसी ट्रेनिंग नहीं दी जानी चाहिए और न ही उन्हें लड़ाई-झगड़े या युद्ध जैसी गतिविधियों में शामिल होने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोग्राम का मकसद कम्युनिस्ट पार्टी, चीनी सरकार और स्थानीय समुदायों के प्रति वफादारी बढ़ाना है, साथ ही सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदारी की भावना पैदा करना है। चीनी अधिकारियों ने इन गतिविधियों को जातीय एकता को मज़बूत करने और कम उम्र से ही राष्ट्रीय रक्षा शिक्षा को बढ़ावा देने की बड़ी कोशिशों का हिस्सा बताया है।इसे भी पढ़ें: अगर भारत ने ये कर दिया! तो PoK में कूद पड़ेगा इजरायलहालांकि, ICT का कहना है कि यह मामला सिर्फ़ मिलिट्रीकरण तक ही सीमित नहीं है। संगठन ने कहा कि तिब्बती बच्चों को लगातार ऐसे वैचारिक अभियानों का हिस्सा बनाया जा रहा है जो सरकारी नैरेटिव को बढ़ावा देते हैं और साथ ही तिब्बती सांस्कृतिक पहचान और विरासत को कमज़ोर करते हैं। संगठन ने यह भी कहा कि ऐसी गतिविधियाँ खास तौर पर सोना (Tsona) जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में चिंता का विषय हैं, जहाँ पूरे क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है।इसे भी पढ़ें: बहुत बड़ा परीक्षण कर रहा भारत? अचानक कहां जा रहे 11000 लोगइन घटनाओं को तिब्बत में बीजिंग की नीतियों का एक स्पष्ट उदाहरण बताते हुए, ICT ने दुनिया भर की सरकारों, व्यवसायों और नागरिक समाज समूहों से अपील की कि वे चीनी अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठाएँ और तिब्बती बच्चों व संस्कृति की बेहतर सुरक्षा के लिए दबाव बनाएँ। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:10 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;US Peace Deal में बड़ा Breakthrough! Geneva में होर्मुज खोलने, परमाणु वार्ता पर बन सकती है सहमति।</title>
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<description><![CDATA[ ईरानी अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ किसी समझौते की खबरें &quot;सिर्फ अटकलें&quot; हैं, लेकिन उम्मीद है कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच जिनेवा, स्विट्जरलैंड में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। CNN ने कई राजनयिक सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस प्रस्तावित समझौते में संघर्ष-विराम को बढ़ाना, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और इस्लामिक गणराज्य के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत के लिए एक रूपरेखा तैयार करना शामिल हो सकता है। सीएनएन के अनुसार, राजनयिक बातचीत से जुड़े दो सूत्रों ने बताया कि समझौते पर हस्ताक्षर समारोह के लिए जिनेवा पर विचार किया जा रहा है। एक सूत्र ने कहा कि यह कार्यक्रम राजनयिक बातचीत के &quot;दूसरे चरण&quot; की शुरुआत का प्रतीक होगा, जिसमें समझौता ज्ञापन को लागू करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।इसे भी पढ़ें: Share Market में लौटे अच्छे दिन! Sensex 1695 अंक उछला, Nifty 23600 के पारयह घटनाक्रम तब सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ईरान के साथ संघर्ष को खत्म करने वाले एक बड़े समझौते की बात कही थी, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है।इसे भी पढ़ें: US-Iran टेंशन खत्म होने से बाजार में बहार, Share Market रॉकेट, Sensex 1,695 अंक उछलकर बंदट्रंप ने यह भी संकेत दिया था कि यूरोप में जल्द ही हस्ताक्षर समारोह हो सकता है और इसमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल हो सकते हैं। ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा कि हमने ईरान के साथ युद्ध को लेकर एक बढ़िया समझौता किया है और अब बस कागज़ात को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। अगले कुछ दिनों में यह काम पूरा हो जाना चाहिए। शायद यूरोप में इस समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। उन्होंने आगे कहा कि हस्ताक्षर होते ही जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) आधिकारिक तौर पर खुल जाएगा। यह जल्द ही, बहुत जल्द हो सकता है - शायद वीकेंड पर यूरोप में। मैं वहां नहीं जा पाऊंगा, लेकिन जेडी (उपराष्ट्रपति) और कुछ अन्य लोग वहां मौजूद रहेंगे। स्टीव विटकॉफ ने बहुत अच्छा काम किया है।CNN की रिपोर्ट के अनुसार, कई सूत्रों ने इस प्रस्तावित समझौते को &quot;इस्लामाबाद समझौता&quot; या &quot;इस्लामाबाद घोषणा&quot; का नाम दिया है। यह नाम बातचीत को आगे बढ़ाने में पाकिस्तान की भूमिका को मान्यता देता है, भले ही वह पहले दोनों पक्षों के बीच कोई डील नहीं करवा पाया था। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि समझौते के नाम के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जबकि ईरान के एक सूत्र ने संकेत दिया कि वियना (ऑस्ट्रिया) पर भी संभावित स्थान के तौर पर विचार किया जा रहा था।इस मामले की जानकारी रखने वाले एक राजनयिक का हवाला देते हुए CNN ने बताया कि अंतरिम समझौते के तहत मौजूदा युद्धविराम को बढ़ाया जाएगा, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बातचीत के लिए एक रूपरेखा तैयार की जाएगी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:10 +0530</pubDate>
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<title>Taiwan की घेराबंदी! China के 14 PLA फाइटर जेट और 9 Navy जहाजों से बढ़ा संकट</title>
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<description><![CDATA[ ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने अपने समुद्री इलाके के आस-पास चीनी सेना के 14 विमानों की उड़ान (सॉर्टि), नौ नौसैनिक जहाजों और चार सरकारी जहाजों की मौजूदगी का पता लगाया। इन 14 उड़ानों में से 13 ने &#039;मीडियन लाइन&#039; (सीमा रेखा) को पार किया और ताइवान के उत्तरी और दक्षिण-पश्चिमी हिस्से के &#039;एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन ज़ोन&#039; (ADIZ) में प्रवेश किया। एक्स पर एक पोस्ट में MND ने कहा कि आज सुबह 6 बजे (UTC+8) तक ताइवान के आस-पास PLA के 14 विमानों की उड़ान, PLAN के 9 नौसैनिक जहाजों और 4 सरकारी जहाजों की मौजूदगी का पता चला। 14 में से 13 उड़ानों ने &#039;मीडियन लाइन&#039; को पार किया और ताइवान के उत्तरी और दक्षिण-पश्चिमी हिस्से के ADIZ में प्रवेश किया। ROC सशस्त्र बलों ने स्थिति पर नज़र रखी और जवाबी कार्रवाई की। इससे पहले गुरुवार को ताइवान के MND ने अपने आस-पास PLA के 11 एयरक्राफ्ट सॉर्टीज़, छह नेवल जहाज़ और तीन सरकारी जहाज़ देखे। इनमें से 11 में से नौ ने मीडियन लाइन पार की और ताइवान के ADIZ में प्रवेश किया।इसे भी पढ़ें: चीन के सामने ताइवान ने पहली बार दागे दनादन रॉकेट, चौंक गई दुनियाएक्स पर एक पोस्ट में MND ने कहा आज सुबह 6 बजे (UTC+8) तक ताइवान के आस-पास PLA के 11 एयरक्राफ्ट सॉर्टीज़, 6 PLAN जहाज़ और 3 सरकारी जहाज़ देखे गए। 11 सॉर्टीज़ में से 9 ने मीडियन लाइन पार की और ताइवान के उत्तरी और दक्षिण-पश्चिमी हिस्से के ADIZ में प्रवेश किया। ROC आर्म्ड फोर्सेज़ ने स्थिति पर नज़र रखी और जवाब दिया। ताइवान पर चीन का दावा एक जटिल मुद्दा है जो ऐतिहासिक, राजनीतिक और कानूनी तर्कों पर आधारित है। बीजिंग का कहना है कि ताइवान चीन का एक अभिन्न अंग है; यह बात उसकी राष्ट्रीय नीति में शामिल है और इसे घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय बयानों का समर्थन भी प्राप्त है।इसे भी पढ़ें: SpaceX IPO के बाद दुनिया के पहले &#039;ट्रिलियनेयर&#039; बने एलन मस्क, ताइवान से भी बड़े आर्थिक साम्राज्य के मालिकवहीं दूसरी ओर, ताइवान अपनी अलग पहचान बनाए हुए है और अपनी सरकार, सेना व अर्थव्यवस्था के साथ स्वतंत्र रूप से काम करता है। &#039;यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंडिया&#039; के अनुसार, ताइवान की स्थिति अंतरराष्ट्रीय बहस का एक अहम मुद्दा बनी हुई है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत संप्रभुता, आत्म-निर्णय और गैर-हस्तक्षेप के सिद्धांतों की परीक्षा लेती है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:09 +0530</pubDate>
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<title>मंदिर पर हमला करने वाले को पहली बार फांसी, पूरा भारत चौंका!</title>
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<description><![CDATA[ भारत के करोड़ों लोग यह खबर सुनकर हैरान हो जाएंगे। आपने सुना होगा कि चीन उईगर मुसलमानों पर कितने अत्याचार कर रहा है। लेकिन इन्हीं उईगर मुसलमानों ने ऐसा कांड कर दिया जो आपके होश उड़ा देगा। दरअसल थाईलैंड की अदालत ने दो उईगर मुसलमानों को मंदिर पर हमला करने के लिए फांसी की सजा सुना दी है। थाईलैंड की एक अदालत ने साल 2015 में बैंकॉक के प्रसिद्ध एरावान मंदिर में हुए बम धमाके के मामले में दो चीनी उईगर मुसलमानों को मौत की सजा सुनाई है। इस धमाके में 20 लोगों की मौत हुई थी जबकि 120 लोग घायल हो गए थे। आपको बता दें कि थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में स्थित एरोन मंदिर हिंदू देवता ब्रह्मा को समर्पित है। यहां पर थाईलैंड के हिंदू भगवान ब्रह्मा की पूजा करते थे। लेकिन इसी मंदिर में दो ईगर मुसलमानों ने आतंकी हमला कर दिया। इसी अपराध के चलते अब इन दोनों ईगर मुसलमानों को फांसी पर लटकाया जा रहा है।इसे भी पढ़ें: Taiwan की घेराबंदी! China के 14 PLA फाइटर जेट और 9 Navy जहाजों से बढ़ा संकट दोषी ठहराए गए दोनों आरोपियों की पहचान यूसुफ मिराइल और बिलाल मोहम्मद के रूप में हुई है। ऐसा शायद पहली बार हो रहा है कि मंदिर पर हमले के लिए दो मुस्लिम अपराधियों को फांसी की सजा दी जा रही है। बताइए चीन के डर से उईगर मुसलमान चीन के अंदर अपने मन से दाढ़ी नहीं रख सकते। रोजा नहीं रख पाते। महिलाएं बुर्का नहीं पहन पाती। मस्जिदों को चीनी कानून के हिसाब से बनाया जाता है। चीन ने तो उईगर मुसलमानों के लिए 29 नामों की एक लिस्ट तक जारी कर रखी है। जिसमें कहा गया है कि उईगर मुसलमान चीन में अपने बच्चों के नाम मोहम्मद जिहाद, इस्लाम, इमाम, अजहर और सद्दाम नहीं रख सकते। ऐसे 29 नाम बताए गए हैं। लेकिन जब यही हुई मुसलमान चीन से बाहर निकलते हैं तो दूसरे देशों में जाकर हिंदू मंदिरों पर हमला करते हैं। बहरहाल आपको बता दें कि थाईलैंड में कई मशहूर हिंदू मंदिर और तीर्थ स्थल हैं जिनमें भारतीय और थाई वास्तुकला शैलियों का मिलाजुला स्वरूप देखने को मिलता है। थाईलैंड के बौद्ध भी हिंदू देवी देवताओं की पूजा करते हैं।  इसे भी पढ़ें: Travel Tips: थाईलैंड में लंबी छुट्टियों का सपना टूटा? 60 दिन की Visa-Free Entry खत्म, अब सिर्फ 15 दिन का Stayदोनों संस्कृतियों के बीच गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव है। हैरानी की बात देखिए कि एक शिव मंदिर को लेकर भी थाईलैंड और उसके पड़ोसी देश कंबोडिया के बीच दशकों से संघर्ष चल रहा है। यह दोनों देश एक शिव मंदिर के लिए आपस में लड़ रहे हैं। दोनों देशों का दावा है कि मंदिर उनके क्षेत्र में है। वैसे 1962 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने प्रीह वेहियर नाम के इस मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा माना था। लेकिन इसके बावजूद थाईलैंड इस शिव मंदिर को अपने पास लाना चाहता है। इसी को लेकर कई बार दोनों देशों के बीच हमले हो चुके हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:08 +0530</pubDate>
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<title>South Korea: पूर्व राष्ट्रपति Yoon Suk Yeol को 30 साल जेल, Martial Law के लिए रची थी Drone की साजिश</title>
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<description><![CDATA[ योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, सियोल की एक अदालत ने शुक्रवार को दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यूं सुक येओल को 30 साल की जेल की सज़ा सुनाई। उन्हें उत्तर कोरिया में ड्रोन घुसपैठ का आदेश देने का दोषी पाया गया; आरोप है कि यह कदम दोनों कोरियाई देशों के बीच तनाव बढ़ाने और दिसंबर 2024 में मार्शल लॉ लागू करने को सही ठहराने की कोशिश के तहत उठाया गया था। योनहाप समाचार एजेंसी के मुताबिक, सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के फ़ैसले में यूं को दुश्मन को फ़ायदा पहुँचाने और सत्ता के दुरुपयोग का दोषी ठहराया गया। यह सज़ा स्पेशल काउंसेल चो यून-सुक द्वारा माँगी गई सज़ा के अनुरूप ही थी। अदालत ने माना कि यूं ने अक्टूबर 2024 में उत्तर कोरिया को उकसाने और उससे पैदा हुए तनाव का इस्तेमाल करके 3 दिसंबर 2024 को मार्शल लॉ लगाने के मकसद से ड्रोन ऑपरेशन का निर्देश दिया था। फैसला आने के कुछ ही घंटों के भीतर यूं की कानूनी टीम ने इसके खिलाफ अपील दायर कर दी।इसे भी पढ़ें: Kerala High Court का बड़ा फैसला, Mental Healthcare Act के तहत बच्चे की हत्या की दोषी मां हुई बरीयोनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने दक्षिण कोरिया के पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून को भी इस ऑपरेशन में शामिल होने के लिए 30 साल की जेल की सजा सुनाई, जो विशेष वकील द्वारा मांगी गई 25 साल की सजा से अधिक थी।दक्षिण कोरिया के पूर्व डिफेंस काउंटरइंटेलिजेंस कमांड प्रमुख येओ इन-ह्युंग को 15 साल की जेल की सजा सुनाई गई, जबकि ड्रोन ऑपरेशन्स कमांड के पूर्व प्रमुख किम योंग-डे को तीन साल की जेल की सजा मिली, जिसे पांच साल के लिए निलंबित (सस्पेंडेड) कर दिया गया। योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, अपने फैसले को समझाते हुए अदालत ने कहा, &quot;मार्शल लॉ के लिए हालात बनाने के मकसद से, आरोपियों ने उत्तर कोरिया को उकसाने और भड़काने के लिए मनोवैज्ञानिक युद्ध की सैन्य रणनीति का इस्तेमाल करने का फैसला किया, ताकि इसके जरिए सशस्त्र उकसावे (जैसे स्थानीय संघर्ष) को बढ़ावा दिया जा सके या सैन्य तनाव बढ़ने से राष्ट्रीय सुरक्षा संकट की स्थिति पैदा की जा सके।इसे भी पढ़ें: KALA HIRAN फिल्म पर भड़के Salman Khan, रिलीज पर रोक लगाने के लिए पहुंचे Delhi High Courtअदालत ने आगे कहा कि ये हरकतें जनता के उस भरोसे के साथ &quot;धोखा&quot; थीं कि राष्ट्रपति और रक्षा मंत्री केवल कानूनी उद्देश्यों के लिए ही सैन्य बल का इस्तेमाल करेंगे; साथ ही यह भी कहा कि ऐसा लगता है कि यह ऑपरेशन निजी कारणों से प्रेरित था।यूं की बचाव पक्ष की टीम ने तर्क दिया था कि ड्रोन की तैनाती 2024 में उत्तर कोरिया द्वारा दक्षिण कोरिया में कचरा ले जाने वाले गुब्बारे भेजने के जवाब में एक वैध सैन्य कार्रवाई थी।हालांकि, योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने फैसला सुनाया कि इस ऑपरेशन ने प्योंगयांग के सामने अपनी सैन्य क्षमताओं को उजागर करके और अनजाने में उत्तर कोरिया की सैन्य तैयारियों को बेहतर बनाकर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को खतरे में डाला। अक्टूबर 2024 में, उत्तर कोरिया ने सियोल पर ड्रोन घुसपैठ करने और प्योंगयांग पर प्रोपेगैंडा पर्चे गिराने का आरोप लगाया था। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:08 +0530</pubDate>
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<title>जहाज पर थे भारतीय नागरिक, तभी अमेरिका ने किया हमला,  एक्शन में नौसेना, घेरा समुद्र!</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने अपनी नौसेना को अलर्ट कर दिया है। जिसके बाद अरब सागर से लेकर स्टेट ऑफ होर्मुज तक खतरनाक हलचल मची हुई है। भारत ने अपने लोगों की रक्षा के लिए ताबड़तोड़ एक्शन शुरू कर दिए हैं और यह सब कुछ ऐसे समय में हो रहा है जब लगातार भारतीय क्रू वाले जहाजों पर हमलों की खबरें जो है वो सामने आ रही है। दरअसल पिछले एक हफ्ते के भीतर तीन अलग-अलग कमर्शियल जहाजों पर हमले हुए हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि तीनों जहाजों पर भारतीय क्रू मौजूद था। पहले हमले में 24 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया। इसके बाद दूसरे हमले में 24 भारतीय क्रू मौजूद थे लेकिन तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। इसके बाद बता दें कि तीसरे जहाज पर भी हमला हो जाता है। हालांकि इस बार सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। लगातार हो रहे इन हमलों के बाद भारत सरकार ने अमेरिका के वरिष्ठ राजनिक को तलब किया और अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। विदेश मंत्रालय ने यह साफ कहा है कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे हमले तुरंत रुकने चाहिए। इसे भी पढ़ें: Hormuz के तनाव पर भारत का बड़ा कदम: 18,000 Sailors के लिए DGS ने जारी किया High Alertक्या है भारत का एक्शन प्लान? दरअसल दुनिया भर के कमर्शियल जहाजों पर लगभग 3 लाख भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। ऑयल टैंकर, गैस कैरियर, कार्गो शिप और दूसरे बड़े जहाजों में भारतीय क्रू की संख्या बहुत ज्यादा है। और यही वजह है कि फारस की खाड़ी गल्फ ऑफ ओमान, अरब सागर और रेड सी में बढ़ता तनाव सीधे भारत के हजारों नागरिकों को प्रभावित कर सकता है। अब बात करते हैं हाईएस्ट अलर्ट की। क्या है एक्शन प्लान? इसका मतलब यह है कि भारत सरकार अपनी एजेंसियों को 24 घंटे निगरानी मोड में रखेगी। भारतीय जहाजों की लगातार यहां पर ट्रैकिंग की जाएगी। किसी भी हमले की स्थिति में तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया जाएगा। मेडिकल इवाकुएशन, डिप्लोमेटिक हस्तक्षेप और नौसैनिक सहायता के लिए एजेंसियों को तैयार रहने के लिए कहा गया है। यानी कि अलर्ट पूरा है। इसे भी पढ़ें: गहरा असर पड़ा है...भारतीय जहाज पर हमले के बीच UN में भयंकर भड़का भारतअब भारतीय नौसेना क्या कर सकती है? भारतीय नौसेना समुद्री निगरानी बढ़ा सकती है। वॉरशिप, ड्रोन, सेटेलाइट और मैरिटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट के जरिए संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर भारतीय जहाजों को एक्सक भी किया जा सकता है। पहले भी आपको बता दें कि ऑपरेशन संकल्प और एंटी पाइरेसी मिशनों के दौरान भारतीय नौसेना इसी तरह के भारतीय हितों की सुरक्षा पहले भी कर चुकी है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कमर्शियल जहाजों के पास खुद की कोई सैन्य सुरक्षा नहीं होती। यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों पर भरोसा करके चलते हैं। ऐसे में किसी भी मिसाइल हमले का सबसे बड़ा खतरा जहाज पर मौजूद नागरिक क्रू होता है। फिलहाल भारत ने यह साफ कर दिया है कि उसके नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई भी और किसी भी तरीके का समझौता नहीं होगा। इसलिए समुद्र में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय नौसेना और सरकार दोनों हाई अलर्ट मोड में आ चुके हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:07 +0530</pubDate>
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<title>France ने सौंपा राफेल का राज, चीन&#45;पाकिस्तान में मचा हड़कंप</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर कहा जाता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ना कोई स्थाई दोस्त होता है ना ही कोई स्थाई दुश्मन। लेकिन भारत और फ्रांस ने इस परिभाषा को पूरी तरह से बदल दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 13 जून से शुरू होने वाले फ्रांस दौरे से ठीक पहले पेरिस से एक ऐसी खबर आई जिसने पूरी दुनिया के डिफेंस कॉरिडोर को हिला दिया। यह खबर केवल 114 लड़ाकू विमानों की खरीद की नहीं है बल्कि यह खबर है उस भरोसे की जिसे फ्रांस ने सोर्स कोड और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के रूप में भारत की झोली में डाल दिया। दरअसल द ट्रिब्यून की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार फ्रांस के शीर्ष राजनायिकों ने पुष्टि की कि वे भारत को राफेल का सबसे गुप्त हिस्सा यानी कि सोर्स कोड सौंपने को तैयार हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि यह सोर्स कोड क्या भला है? देखिए आसान भाषा में कहें तो यह किसी विमान का वो दिमाग है जिसके जरिए इसकी पूरी कार्यप्रणाली नियंत्रित होती है। इसे भी पढ़ें: भारतीय जहाजों पर हमले के बीच Trump से आमने सामने बात करेंगे PM ! Modi की France और Slovak यात्रा पर दुनियाभर की नजरेंआमतौर पर कोई देश अपना सोर्स कोड किसी को नहीं देता है क्योंकि इसका मतलब है अपनी सबसे गुप्त तकनीक दूसरों को सौंप देना। लेकिन फ्रांस ने साफ कर दिया कि मेक इन इंडिया इस डील की आत्मा है और फ्रांस अब भारत को सिर्फ एक ग्राहक नहीं बल्कि एक साझा निर्माता सह निर्माता के रूप में देख रहा है। इस डील की सबसे क्रांतिकारी शर्त यह है कि अब राफेल में भारतीय हथियार लगाए जा सकेंगे। अभी तक की स्थिति यह थी कि अगर आपको राफेल में कोई मिसाइल लगानी है तो आपको फ्रांस से इजाजत यानी परमिशन लेनी होती थी और उन्हीं के सॉफ्टवेयर के हिसाब से चलना पड़ता था। लेकिन अब सोर्स कोड मिलने के बाद भारत अपनी स्वदेशी अस्त्र जैसी मिसाइलें, स्मार्ट एंटी एयर फील्ड वेपंस और भविष्य में ब्रह्मोस एनजी को सीधे राफेल में इंटीग्रेट कर सकता है। यह ना केवल भारत की मारक क्षमता को बढ़ा देगा बल्कि युद्ध की स्थिति में भारत को विदेशी सप्लायर्स पर निर्भर होने की जरूरत नहीं देगा। इसे भी पढ़ें: चीन-पाकिस्तान की उड़ी रातों की नींद! भारत आ रहे हैं AI से लैस 114 सुपर राफेल, फ्रांस भारत को देगा &#039;ब्रह्मास्त्र&#039; बनाने की सीक्रेट तकनीकयह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सबसे बड़ा और सबसे मजबूत कदम है। भारत ने 114 मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट यानी कि एमआरएफए के लिए जो लेटर ऑफ रिक्वेस्ट भेजा है उसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सबसे अहम है। अब फ्रांस ने क्या भरोसा दिलाया वो जान लीजिए। दरअसल फ्रांस ने भरोसा दिलाया कि लड़ाकू विमान का सबसे जटिल हिस्सा जो उसका इंजन होता है उसके लिए फ्रांस निर्माण की तकनीक भारत को देगा। विमान को रडार की नजर से बचाने वाले खास मटेरियल और उसके ढांचे की बनावट की तकनीक अब भारत में होगी। राफेल के हाथ-पांव और आंखें यानी उसके सेंसर, रडार सिस्टम का निर्माण भी अब भारतीय धरती पर ही होगा। इतना ही नहीं डिसॉल्ट एिएशन एक भारतीय पार्टनर के साथ मिलकर भारत में ही पूरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाएगी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:07 +0530</pubDate>
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<title>Indian Vessel Attacked In Gulf | ट्रंप ने ईरान पर भारतीय जहाजों पर हमले करने का आरोप लगाया, तेहरान ने इसे ‘निराधार’ बताया</title>
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<description><![CDATA[ ओमान तट के पास भारतीय चालक दल वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हुए घातक हमलों के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सीधे तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया है और इसे &quot;पूरी तरह अस्वीकार्य&quot; बताया है। दूसरी तरफ, ईरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उल्टा अमेरिका पर ही जहाजों पर हमला करने और भारतीय नाविकों की जान लेने का गंभीर आरोप मढ़ दिया है।इसे भी पढ़ें: अभिषेक बनर्जी की हुंकार: CID या ED, कोई हमें झुका नहीं सकता, हम नहीं डरते इनमें से एक हमले में बुधवार को तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी।
 ट्रंप ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में दावा किया, ‘‘भारतीय जहाजों के होर्मुज जलडमरूमध्य से निकलते समय उन पर कल रात किया गया (ईरान का) ड्रोन हमला बिल्कुल अस्वीकार्य है।’’
 इसी पोस्ट में ट्रंप ने ईरान पर उस शांति समझौते की शर्तें मीडिया को लीक करने का भी आरोप लगाया, जिनका वार्ता में चर्चा किए जा रहे मुद्दों से कोई संबंध नहीं है।
 ईरान ने ट्रंप के आरोपों को सख्ती से खारिज कर दिया।
 भारत में ईरानी दूतावास ने शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य में एक भारतीय जहाज को लेकर ईरान पर लगाया गया अमेरिकी राष्ट्रपति का आरोप पूरी तरह निराधार है।’’
 दूतावास ने कहा, ‘‘यह जनता का ध्यान इस क्रूर तथ्य से भटकाने की कोशिश है कि अमेरिका ने एक सप्ताह से भी कम समय में तीन भारतीय जहाजों पर हमला किया है और तीन निर्दोष भारतीय नाविकों की जान ली है।इसे भी पढ़ें: पंजाब में समय से पहले हो सकते हैं विधानसभा चुनाव, भगवंत मान ही होंगे &#039;AAP&#039; का CM चेहरा: अरविंद केजरीवाल यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।’’
 ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत ने ओमान तट के निकट भारतीय चालक दल वाले वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी हमलों के विरोध में नयी दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी को तलब किया है।
 भारत ने वाणिज्यिक जहाजों पर हुए इन हमलों को ‘‘बेहद चिंताजनक’’ बताया है और इस मुद्दे को अमेरिका के समक्ष सख्ती से उठाया है।Stay updated with International
News in Hindi on Prabhasakshi  ]]></description>
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<title>बिल्कुल बर्दाश्त नहीं...ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे भारतीय जहाजों पर हमले को लेकर किसे दी सीधी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान पर आरोप लगाया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन से हमला करने की नाकाम कोशिश की। इस कथित घटना का ज़िक्र करते हुए ट्रंप ने कहा ल रात होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर उनका ड्रोन हमला पूरी तरह नाकाम रहा और यह हरकत बिल्कुल भी मंज़ूर नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया और न ही यह बताया कि वे किन जहाजों की बात कर रहे थे। खबर लिखे जाने तक ईरानी अधिकारियों ने इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इस इलाके में हाल ही में हुए अमेरिकी सैन्य अभियानों में दर्जनों भारतीय नाविकों वाले 3 तेल टैंकर फंस गए हैं। 8 जून को अमेरिकी सेना ने पलाऊ के झंडे वाले टैंकर &#039;मैरीवेक्स&#039; को बेकार कर दिया, जिस पर 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। उन सभी को सुरक्षित बचा लिया गया।इसे भी पढ़ें: US-Iran Tension: भारतीय जहाजों पर हमले से नाराज भारत, अमेरिकी Diplomat को फिर भेजा समनदो दिन बाद, पलाऊ के झंडे वाले एक और टैंकर, &#039;सेटेबेलो&#039; पर अमेरिकी हमला हुआ। इस जहाज़ पर 24 भारतीय नाविक सवार थे, जिनमें से तीन की हमले में मौत हो गई। एक तीसरे टैंकर, &#039;जलवीर&#039; पर भी हमला हुआ, जो गिनी-बिसाऊ के झंडे के साथ चल रहा था और जिस पर 20 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। ट्रुथ सोशल&#039; पर एक पोस्ट में उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान ने चल रही बातचीत के बारे में गलत जानकारी लीक की है और कहा कि तेहरान के सार्वजनिक बयानों में उन शर्तों का ज़िक्र नहीं है जिन पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी थी। ट्रंप ने लिखा, ईरान ने &#039;फेक न्यूज़&#039; को जो शर्तें बताई हैं, उनका लिखित रूप में तय हुई शर्तों से कोई लेना-देना नहीं है।इसे भी पढ़ें: जहाज पर थे भारतीय नागरिक, तभी अमेरिका ने किया हमला,  एक्शन में नौसेना, घेरा समुद्र!उन्होंने संभावित समझौते के बारे में ईरान की टिप्पणियों की भी आलोचना की और कहा कि उनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है और तेहरान पर ईमानदारी से बातचीत न करने का आरोप लगाया। ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी देते हुए अपना संदेश खत्म किया और कहा, &quot;उन्हें जल्द से जल्द अपनी हरकतें सुधार लेनी चाहिए! ]]></description>
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<title>Jaishankar Calls Rubio | भारतीय नाविकों की मौत पर भारत का डबल एक्शन! अमेरिकी राजनयिक को किया तलब, जयशंकर ने रुबियो को चेताया</title>
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<description><![CDATA[ ओमान तट के पास भारतीय चालक दल वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बात की और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के हमलों के खिलाफ भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया। इन हमलों में बुधवार को तीन निर्दोष भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी।जयशंकर ने ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में रुबियो के साथ हुई बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ इस तरह की घातक कार्रवाई उचित नहीं है।’’ इस सप्ताह ओमान तट के पास भारतीय चालक दल वाले तीन जहाजों पर हमले हुए। इनमें से एक हमले में बुधवार को तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई।
 जयशंकर ने कहा, ‘‘आज शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात की। मैंने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के उन हमलों के खिलाफ भारत का कड़ा विरोध दोहराया, जिनमें तीन भारतीय नाविकों की जान गई है।’’
 भारत ने इस मामले में अपना विरोध दर्ज कराने के लिए नयी दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी को भी तलब किया था।
 इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया था और कहा था कि यह ‘‘पूरी तरह अस्वीकार्य’’ है।
 ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए दावा किया, ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों के खिलाफ बीती रात उनका (ईरान का) पूरी तरह विफल ड्रोन हमला पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्हें तुरंत अपने तौर-तरीके सुधारने होंगे।क्या है पूरा विवाद और क्यों बढ़ा तनाव?इस सप्ताह ओमान तट के पास भारतीय चालक दल वाले तीन वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया गया था। इन हमलों में बुधवार को तीन भारतीय नाविकों की दुखद मौत हो गई थी, जिसके बाद से क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ गई हैं।इस घटनाक्रम के बीच भारत सरकार ने भी कड़ा रुख अख्तियार किया है। नई दिल्ली ने वाणिज्यिक जहाजों पर हुए इन हमलों को &quot;बेहद चिंताजनक&quot; बताया है।भारत ने अमेरिकी राजनयिक को किया तलबदिलचस्प बात यह है कि ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने इन हमलों के विरोध में नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी (Charge d&#039;Affaires) को तलब किया है। भारत ने इस गंभीर मुद्दे को अमेरिका के समक्ष बेहद सख्ती से उठाया है और जहाजों की सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की है।भू-राजनीतिक मायनों में क्यों अहम है यह टकराव?होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में भारतीय जहाजों को निशाना बनाए जाने और उसके बाद अमेरिका-ईरान के बीच शुरू हुए इस &#039;ब्लेम गेम&#039; (आरोप-प्रत्यारोप) ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। भारत के लिए अपने नागरिकों (नाविकों) की सुरक्षा और समुद्री व्यापार मार्ग को सुरक्षित रखना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। Stay updated with International
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:05 +0530</pubDate>
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<title>2 देशों ने हिंदी में मोदी पर किया बड़ा ऐलान, पूरी दुनिया हैरान!</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया में किसी देश की ताकत को नापने का एक तरीका उस देश की भाषा भी होती है। अगर आप कमजोर देश है तो कोई आपकी भाषा क्यों बोलेगा? लेकिन अगर  एक ताकतवर, आर्थिक और सैन्य शक्ति हैं तो दुनिया आपको खुश करने के लिए आपकी ही भाषा में बात करेगी। भाषा एक सॉफ्ट पावर है। अगर टैंक और तोपों से जंग जीती जाती है तो भाषा से दिमाग पर कब्जा किया जाता है। अगर पूरी दुनिया भारत और पीएम मोदी को लेकर हिंदी में बयान दे रही है तो समझ लीजिए कि भारत का भविष्य कितना उज्जवल है। नहीं तो किसी देश को क्या ही पड़ा है कि वह हिंदी में बयान दें। वैसे तो अब कई देश भारत और पीएम मोदी के लिए हिंदी में ट्वीट करते हैं। लेकिन रूस और स्लोवाकिया ने पीएम मोदी को लेकर हिंदी में जो बयान दिया है उसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे। इसे भी पढ़ें: America ने बदला Energy का पूरा खेल, Gulf देशों को पछाड़कर बना भारत का टॉप गैस सप्लायरभारत में हिंदी के नाम पर नॉर्थ को साउथ से लड़ाया जाता है। लेकिन उसी हिंदी भाषा में अब रूस और स्लोवाकिया के राजदूतों ने जो बयान दिया है उसे सुनकर आपका सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। वैसे हम आपको बता दें कि पीएम मोदी स्लोवाकिया की यात्रा पर जाने वाले हैं। रूसी राजदूत डेनिस एलिपोव ने कहा कि माननीय विदेश सचिव श्री विक्रम मिश्री जी एक्सीलेंसी गणमान्य गणमान्य अतिथि गण देवियों और सज्जनों रूस के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर आप सभी का मैं हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करता हूं। मुझे यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि इन दिनों  नरेंद्र मोदी जी ने इतिहास रचते हुए भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री पद पर रखने वाले नेता बनने का गौरव हासिल किया है। राष्ट्रपति  व्लादिमीर पुतिन रूस के सरकार और रूसी जनता की ओर से मैं माननीय प्रधान प्रधानमंत्री जी तथा समस्त भारत वासियों को इस विशेष उपलब्धि के लिए हृदय से हार्दिक बधाई देता हूं। इसे भी पढ़ें: जहाज पर थे भारतीय नागरिक, तभी अमेरिका ने किया हमला,  एक्शन में नौसेना, घेरा समुद्र!उसके बाद स्लोवाकिया के राजदूत रॉबर्ट मैक्सियन ने कहा कि प्रिय भारतवासियों हम भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का स्वागत करते हैं। प्रधानमंत्री जी की स्लोवाकिया यात्रा भारत और स्लोवाकिया के संबंधों में एक ऐतिहासिक अवसर है। आशा है हूं कि यह यात्रा भारत और स्लोवाकिया के रिश्तों को और मजबूत करेगी।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:04 +0530</pubDate>
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<title>ईरान का बूढ़ा शिकारी तो जिंदा है, नहीं माना अमेरिका तो हो जाएगा तबाह</title>
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<description><![CDATA[ 40 दिनों की जंग हो या उससे पहले 12 दिनों की जंग या उससे पहले भी हुई झड़पें हो। दुनिया ने अमेरिका ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन का जलवा देखा ही है और पूरी दुनिया इनका लोहा भी मानती है।  ईरान के पास एयरफोर्स भी है और एयरफोर्स ने अब एक ऐसा शिकारी निकाला है जो इस जंग का रुख पलट कर रख देगा। ईरान में पहाड़ों के नीचे बनी खंदकें और खंदकों में मौजूद उनके एयरबेस में से ईरान का वह शिकारी निकला है जो कि 50 सालों से से छिपा कर रखा गया था अमेरिका और दुनिया की नजर से इसमें वो ताकत है जो अमेरिकन मिसाइल टॉम हॉक को तो चूरा बनाकर रख देगा हवा में ही भस्म कर देगा। इसे भी पढ़ें: बहुत बड़ा परीक्षण कर रहा भारत? अचानक कहां जा रहे 11000 लोग1970 से 80 के बीच का दौर उस वक्त भी अमेरिका रूस के साथ कोल्ड वॉर में था। समंदर में अमेरिकी जंगी बीड़े पर यह खूंखार अमेरिकी फाइटर जेट जो उस दौर में दुनिया में अमेरिकी धमक की अलामत हुआ करता था। नाम था F14 टॉम कैट यह विमान दुनिया का पहला ऐसा फाइटर जेट था जिसे खासकर एंटी मिसाइल कैपेबिलिटी के साथ डिजाइन किया गया था। कोल्ड वॉर के दौरान अमेरिका ने इसे इसी मकसद से बनाया था कि अगर दुश्मन सोवियत यूनियन की तरफ से अमेरिकी नेवी के बेड़ों पर मिसाइलें दागी जाती हैं तो उस वक्त F14 टॉम कैट उन्हें उड़ते हुए खुद ही ढूंढ लेता था और हवा में भस्म कर देता था। समय बदलता गया। अमेरिका ने F35 और F22 जैसे फिफ्थ जनरेशन के स्टिल फाइटर जेट बना लिए। लेकिन टॉमट वाली तकनीक फिर नहीं बना पाया। तो अमेरिका टॉमट वाली तकनीक फिर नहीं बना पाया। इसे भी पढ़ें: बिल्कुल बर्दाश्त नहीं...ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे भारतीय जहाजों पर हमले को लेकर किसे दी सीधी चेतावनीट्रंप और पेंटागन के जनरलों की रातों की नींद उड़ जाएगी। जिसमें पहली बार F14 टॉम कैट लड़ाकू तैयारे को एक बेहद ही सीक्रेट और लाइव कॉम्बैट मिशन को अंजाम देकर शान से रनवे पर लैंड करते हुए दिखाया गया है। यह वीडियो ईरान की तरफ से जारी किया गया है।अब 50 साल बाद फिर वही टॉम कैट निकला है अमेरिका के खिलाफ। आप सोचते होंगे कि टॉम कैट F14 तो अमेरिका ने बनाया था। फिर अमेरिका के खिलाफ कैसे? तो टॉम कैट इस बार निकला है ईरान की खंदकों से आसमान को नापने के लिए। दरअसल अब टॉम कैट ईरान का है। तकनीक भले ही अमेरिका की हो लेकिन ईरान का यह ब्रह्मास्त्र अमेरिका की मिडिल ईस्ट में हालत खराब करके रख देगा। तो ईरान ने अपने सबसे बड़े और सबसे खतरनाक इके को दुनिया के सामने रख दिया है। F14 टॉम कैट को अब तक दुनिया की नजरों से छिपा कर रखा गया था। पूरी दुनिया में ईरान ही एकमात्र ऐसा देश है जो आज भी इस खूंखार विमान को उड़ाने का दम रखता है। इसे भी पढ़ें: Iran पर Attack से Trump को किसने रोका? UAE, कतर और Pakistan की एक फोन कॉल ने बदला खेलयह इस्लामिक रेवोल्यूशन की तकनीक और इंजीनियरिंग का ही कमाल है कि उन्होंने 50 सालों तक इस तकनीक को अमेरिका और दुनिया की नजर से उनकी खुफिया एजेंसियों से इसराइल की खुफिया एजेंसियों से छिपा कर रखा। एक दौर में अमेरिका के बेहद करीबी और आज भी अमेरिका की शरण में रह रहे ईरान के शाही परिवार ने शाह राजशाही के दौर में यानी 1970 में अमेरिका से पूरे 79 F14 टॉम कैट सुपरसोनिक फाइटर जेट ईरानी एयरफोर्स के लिए खरीदे थे। 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई और अमेरिका और ईरान के संबंध खराब हो गए। अमेरिका ने ईरान पर भारी सेंशन लगा दिए। उस वक्त अमेरिका ने टॉम हॉक फाइटर जेट के पार्ट्स ही बेचना बंद कर दिए ताकि वह ईरान तक पहुंच ही ना सके। अमेरिका को लगा था कि यह खतरनाक जेट ईरान के पास रखे रखे कबाड़ में तब्दील हो जाएगा। लेकिन उनका अंदाजा गलत निकला। ईरान मामलों के जानकार कहते हैं कि जहां से अमेरिका की सोच खत्म होती है वहीं से ईरान सोचना शुरू करता है। इस्लामिक रेवोल्यूशन ने साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और नए आविष्कारों पर पूरी ताकत लगा दी। ईरान के तकनीशियंस ने F14 टॉम कैट पर और काम किया और उसे अपने हिसाब से ढाल लिया। सोचिए 50 सालों तक इस फाइटर जेट को अमेरिकी और इसरली खुफिया एजेंसियों से छिपा कर रखना कितना मुश्किल रहा होगा। लेकिन ईरान ने यह साबित किया।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:03 +0530</pubDate>
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<title>टूट गया भारत के सब्र का बांध, आधी रात फोन घुमाकर जयशंकर ने अमेरिका को डांटा</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया आज उस ज्वालामुखी की तरह है जो फट चुका है। चारों तरफ बारूद की गंध है। आसमान से बम बरस रहे हैं और समंदर की लहरें अब लाल हो रही हैं। लेकिन इस युद्ध की आग में जब बेगुनाह भारतीयों की जान चली जाती है तो दिल्ली का सिंहासन डोल जाता है। होर्मुज के समंदर में अमेरिका ने वो कायराना हरकत की जिसने भारत के सब्र का बांध तोड़ दिया। भारत के तीन जांबाज नाविकों की जान चली गई और वजह महाशक्ति होने का अहंकार। ये  दिन इतिहास में अमेरिका की उस सशस्त्र डकैती के नाम पर दर्ज होगा जिसने तीन भारतीय परिवारों को उम्र भर का दर्द दे दिया। लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती है। अमेरिका ने सोचा था कि वह झूठ बोलेगा और भारत मान लेगा। इसे भी पढ़ें: GenZ प्रोटेस्ट पर सवाल टाल गए Shishir Khanal, बोले- मेरा Focus सिर्फ India-Nepal संबंधों परट्रंप ने ईरान पर उंगली उठाई। लेकिन भारत ने उसी उंगली को मरोड़कर अमेरिका को आईना दिखा दिया और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आधी रात को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को फोन पर जो सुनाया उसे सुनकर वाशिंगटन के गलियारों में सन्नाटा पसर गया। ओमान की खाड़ी तेल टैंकर एम्प्टी सिट्टे बेलो शांति से अपने गंतव्य की ओर आगे बढ़ रहा था। इस जहाज पर कोई लड़ाकू विमान नहीं था। कोई मिसाइलें नहीं थी। इस पर सवार थे 24 भारतीय नागरिक जो अपने घर बार से दूर समंदर के सीने पर मेहनत कर रहे थे। तभी अचानक अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों ने इस कमर्शियल जहाज को घेर लिया। बिना किसी चेतावनी के, बिना किसी ठोस वजह के अमेरिका ने इस शांतिपूर्ण जहाज पर हमला कर दिया। गोलों की उस बरसात में जहाज दहल उठा और हमारे 21 भारतीय भाइयों ने मौत को करीब से देखा और किसी तरह अपनी जान बचाई। लेकिन तीन भारतीयों की जान इस अमेरिकी सनक में भेंट चढ़ गई। इसे भी पढ़ें:  मंदिर पर हमला करने वाले को पहली बार फांसी, पूरा भारत चौंका!डेक कैडेड आदित्य शर्मा इंजन फिटर शिवंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश यह सिर्फ नाम नहीं यह भारत के वह बेटे हैं जिनके प्राण अमेरिका की गलतफहमी और अहंकार ने छीन लिए। इन तीन भारतीयों की जान जाने की खबर जैसे ही भारत पहुंची, देश का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। अब देखिए अमेरिका की चालाकी। हमला खुद किया, भारतीयों की जान खुद ली लेकिन दुनिया के सामने आकर क्या बोले। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा कर दिया कि यह हमला ईरान के ड्रोंस ने किया है। ट्रंप ने कोशिश की कि वह भारत को बरगला लिया जाए और इस पूरे कांड का ठीकरा ईरान पर फोड़ दिया जाए। अमेरिका चाहता था कि भारत इस पर ईरान से लड़ने लगे और अमेरिका पर्दे के पीछे अपनी इस बड़ी गलती को छिपा ले। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप शायद भूल गए कि सामने मोदी का भारत है। भारत ने उनकी बातों पर भरोसा करने की बजाय अपनी खुद की हाई लेवल जांच शुरू की। इसे भी पढ़ें: 2 देशों ने हिंदी में मोदी पर किया बड़ा ऐलान, पूरी दुनिया हैरान!सेटेलाइट डाटा खंगाले गए। बचे हुए नाविकों के बयान लिए गए और वह सच सामने आया जिसने अमेरिका की पूरी प्लानिंग को मिट्टी में मिला दिया। भारत ने कंफर्म किया कि हमला किसी ईरानी ड्रोन ने नहीं बल्कि अमेरिकी नौसेना के जहाज से हुआ है। अमेरिका की चाल पकड़ी गई और अब भारत का स्टैंड क्लियर एंड लाउड था। हमला तुमने किया है और हिसाब भी तुम ही दोगे। जब पानी सिर से ऊपर चला गया तब हरकत में आए भारत के चाणक्यनी एस जयशंकर उन्होंने ना केवल अमेरिकी राजदूत को दिल्ली में तलब किया बल्कि सीधे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो को फोन लगाया। अब बताया जा रहा है कि यह बातचीत किसी कूटनीतिक मुलाकात जैसी बिल्कुल नहीं थी। जयशंकर साहब ने रूबियो को फोन पर बुरी तरह हड़काया।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:02 +0530</pubDate>
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<title>पहले हंसे, फिर पिया पानी और ऐसे अमेरिका&#45;यूरोप को डुबो आए जयशंकर, हिले सारे पत्रकार</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिमी देशों को जिस तरह से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर आईना दिखाते हैं, उसकी तारीफ तो पाकिस्तान जैसा दुश्मन देश भी करता है। एक बार फिर विदेशी षड्यंत्र भारत के खिलाफ रचा गया। लेकिन जब विदेशी लोग यही षड्यंत्र भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर के सामने चलाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें तर्क के साथ जोरदार तमाचा भी मिलता है। कोई भी कार्यक्रम में अगर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से किसी देश के बारे में पूछ लिया जाए और विदेश मंत्री ऐसे हंसे तो यह समझ लीजिए कि उस देश की शामत आने वाली है। इस बार बारी यूरोप की थी। यूरोपीय देशों और उनकी मीडिया के पाखंड को भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कुछ ही सेकंड के अंदर बहुत बुरी तरह से धराशाई कर दिया। जिसके बाद यूरोप अपनी यह गलती शायद ही फिर कभी दोहराने की हिम्मत दिखा पाए। इसे भी पढ़ें: GenZ प्रोटेस्ट पर सवाल टाल गए Shishir Khanal, बोले- मेरा Focus सिर्फ India-Nepal संबंधों परदरअसल बता दें यह पूरा मामला जो है यह फिनलैंड से सामने आया। आदत से मजबूर फिनलैंड में एक विदेशी पत्रकार ने डॉ. एस जयशंकर के सामने फिर वही सवाल पूछ लिया। पत्रकार ने सवाल पूछते हुए यह कहा कि यूरोप के लोग यह मानते हैं कि भारत आज भी रूस के प्रति बहुत ज्यादा सहानुभूति रखता है। हमारे हिसाब से यह दुखद भी है और नैतिक रूप से गलत भी क्योंकि भारत लगातार रूस से तेल खरीद रहा है। अब पत्रकार को यह लगा होगा कि भारत की तरफ से वही पुरानी सफाई सामने आएगी। लेकिन उसे यह नहीं पता था कि सामने जो उनके सामने बैठे हैं वह भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर हैं। सवाल सुनते ही भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर मुस्कुराए। थोड़ा सा पानी उन्होंने पिया और फिर एक ऐसा जवाब दिया जिसने पूरे हॉल का माहौल ही बदल कर रख दिया। डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि पहली बात तो आप यह सुन लीजिए और यह समझ लीजिए कि भारत तेल किसी देश को खुश करने के लिए नहीं खरीदता है। भारत तेल खरीदता है कीमत और उपलब्धता के आधार पर। इसे भी पढ़ें: दुनिया में तेल संकट के बीच Modi ने Venezuela से कर ली बड़ी डील, Delcy Rodríguez India Visit के दौरान हुए कई अहम ऐलानउन्होंने कहा कि वर्षों तक भारत मिडिल ईस्ट से तेल खरीदता रहा। लेकिन रूस यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप ने खुद मिडिल ईस्ट का तेल खरीदना शुरू कर दिया। जिसकी वजह से बाजार में बता दें कि रूसी तेल बड़ी मात्रा में उपलब्ध होने लगा। यानी जिस बात के लिए यहां पर यूरोप भारत को घेरने की कोशिश में लगा हुआ था। भारत को घेरना चाह रहा था, उसकी वजह खुद यूरोप ही निकला। लेकिन असली कहानी और असली झटका भी बाकी था। क्योंकि इसके बाद बता दें कि पत्रकार ने नैतिकता की बात यहां पर डॉ. एस जयशंकर के सामने छेड़ दी। और यहीं पर भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने एक ऐसा जवाब दिया जिसने यूरोप की पूरी नैतिकता को ही सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया। जयशंकर ने कहा कि किसी भी यूरोपीय देश पर भारतीय हथियारों से हमला कभी भी नहीं हुआ है। काश मैं यह कह पाता कि यूरोपीय हथियारों से भारत पर कभी हमला नहीं हुआ। लेकिन सच्चाई जो है वो ठीक इससे उलट है। दशकों से ऐसे हथियार भारत के खिलाफ इस्तेमाल होते रहे हैं जिन्हें यूरोपीय देशों ने बेचा था। डॉ. एस जयशंकर ने बिना पाकिस्तान का नाम लिए पाकिस्तान को यहां पर लताड़ भी लगा दी, घेर लिया। इसे भी पढ़ें: 2 देशों ने हिंदी में मोदी पर किया बड़ा ऐलान, पूरी दुनिया हैरान!यहां बता दें कि जैसे ही विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने यह याद दिलाया कि यूरोप से कौन-कौन से देश हथियार लेते हैं और वह भारत के खिलाफ किस तरीके से इस्तेमाल होते हैं तो यह सुनते ही पत्रकार ने बीच में टोकना शुरू कर दिया और यह कहा कि आप आखिर कहना क्या चाहते हैं? साफ शब्दों में कहिए। तब एस जयशंकर ने और भी ज्यादा साफ शब्दों में यह कहा कि भारत पर हमला करने वाले देशों के पास यूरोपीय हथियार रहे हैं और वह भी वर्षों से। लेकिन भारत ने कभी ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे यूरोप की सुरक्षा को खतरा पहुंचे। बस इतना ही कहा डॉ. एस जयशंकर ने और पूरा खेल पलट गया। जो लोग भारत से जवाब मांगने आए थे अचानक खुद ही जवाब देने की स्थिति में आ गए और यही वजह है कि फिनलैंड की धरती पर कुछ ही सेकंड के अंदर यूरोप का यह जो पूरा नरेटिव गड़ा गया वो डहता हुआ दिखाई दिया।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:02 +0530</pubDate>
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<title>कोई बात नहीं, सिर्फ हमला...Iran ने ठुकराया ट्रंप का ऑफर</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने अमेरिका की डील को ठुकरा दिया है। ट्रंप एक तरफ व्हाइट हाउस में मीटिंग कर रहे हैं और पत्रकारों से कह रहे हैं कि उनकी ईरान के साथ डील हो गई है। ईरान अमेरिका की सारी शर्तों को मानने पर राजी भी हो गया है। दूसरी तरफ ईरान ने साफ कह दिया है कि उसने अमेरिका की ना तो कोई शर्त मानी है और ना ही अमेरिका और ईरान की कोई डील हुई है। यानी कि हमले जरूर थम चुके हैं लेकिन युद्ध अभी तक थमा है या नहीं। इसको लेकर अभी भी कंफ्यूजन बाकी है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी सैनिकों का एक छोटा समूह कल ही ईरान में घुसकर पूरे ईरान पर कब्जा कर सकता है। साथ में यहां पर यह भी कहा गया है कि अगर मैं चाहूं तो यानी कि यह बात डॉनल्ड ट्रंप कह रहे हैं। एक और ईरान इंटरनेशनल इंग्लिश की खबर है।  इसमें ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका आज रात ईरान पर और भी बड़े हमले और शक्तिशाली बम हमले करेगा और कहा कि अमेरिका अभी भी तेहरान से बातचीत कर रहा है। लेकिन उनकी प्राथमिकता ईरान के तेल व्यापार केंद्र खर्ग द्वीप पर कब्जा करना है। यानी कि ईरान में कब्जा करने और ईरान में जमीन पर सैनिक उतारने, बड़ा हमला करने की धमकी ट्रंप ने ईरान को एक रात पहले दे दी थी। कुछ ही घंटों के बाद भारत के समय के मुताबिक कहें तो रात से दिन हुआ और खबर ये आ गई कि डॉनल्ड ट्रंप ने अब हमला करने का जो अपना प्लान था वो टाल दिया है। इसे भी पढ़ें: सिर्फ 60 KM दूर थी दुश्मन की फौज! असली गद्दार तो अजरबैजान निकलाव्हाइट हाउस ने बयान जारी किया और कहा कि डॉन्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिका ने ईरान पर अपने हमलों को रोक दिया है क्योंकि ईरान ने अमेरिका की डील को मान लिया है। स्वीकार कर लिया है। अमेरिका का दावा है और डॉनल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान ने अमेरिका की सारी शर्तों को मान लिया है जो ईरान के आगे उन्होंने रखी थी। इसमें ईरान के न्यूक्लियर हथियार एनरिच यूरेनियम से जुड़ी हुई शर्तें हैं जो ईरान ने मान ली है। ये अमेरिका का दावा है। लेकिन इसी दावे पर इसी खबर पर अब ईरान की ओर से जवाब आ चुका है। द हॉर्मोज लेटर के हवाले से खबर है जिसमें यह लिखा है कि ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के इस नए दावे को सिरे से खारिज कर दिया है कि ईरान में सर्वोच्च नेता समेत सभी ने समझौते को मंजूरी दे दी है। द होर्मुज लेटर के हवाले से एक खबर है जिसमें लिखा है कि मंत्रालय का कहना है कि किसी ने भी इस समझौते को स्वीकार नहीं किया है और कोई समझौता हुआ ही नहीं है। आगे कहा गया है कि किसी भी समझौते के लिए अमेरिका को ईरान की सभी मांगों को मानना होगा जिसमें यह शर्त भी शामिल है कि वह समृद्ध यूरेनियम नहीं सौंपेगा या परमाणु रियायतें नहीं देगा। स्टेट ऑफ हॉर्मोस स्थाई रूप से ईरानी प्रबंधन के अधीन रहेगा और 24 अरब डॉलर जो उनकी रुकी हुई धनराशि है वह भी ईरान को दे दी जाएगी। इसे भी पढ़ें: अपनी चीजें अपने पास रखिए, मैं किसी और को बेच दूंगा...चीन का मिला साथ तो लूला ने ट्रंप को दिया करारा जवाबईरान का कहना है कि अगर वह दबाव में झुकता तो वह एक साल पहले ही झुक गया होता ना कि लगातार अमेरिका की बमबारी के बाद। साथ ही ईरानी प्रवक्ता ने ट्रंप के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि समझौते पर साइन होने पर स्टेट ऑफ फॉर्मस फिर से खुल जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि यह ईरानी प्राधिकरण के अधीन आता है और बंद है और सुरक्षित आवागमन संभव नहीं है। आगे ईरान ने ट्रंप के इस नए दावे को भी खारिज किया है कि उन्होंने ईरान पर आज रात के हमलों को रद्द करने के लिए समझौता किया है। ईरान ने इसको बेबुनियाद बताते हुए कहा कि ऐसा कोई समझौता हुआ ही नहीं है और ट्रंप के सभी शब्दों को उसी तरीके से नजरअंदाज किया जाना चाहिए जैसे कि उन्होंने पिछले दो महीनों में 38 बार समझौते की घोषणा करी थी। तस्नीम न्यूज़ के मुताबिक एक वरिष्ठ इजरयली अधिकारी ने चैनल 12 को बताया कि उन्हें किसी भी समझौते के होने की जानकारी नहीं है। यह बात यह खबर अब ईरान की ओर से कही जा रही है कि उनके और अमेरिका के बीच कोई समझौता हुआ नहीं है और ना ही अमेरिका की जो डील है उस पर ईरान राजी हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:01 +0530</pubDate>
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<title>ब्रिटेन में हिंसक घटनाओं की निन्दा, नफ़रत को उकसावा देने से बचने का आग्रह</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने ब्रिटेन के विभिन्न हिस्सों में हुई हिंसक घटनाओं पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया है. साथ ही, उन्होंने ध्यान दिलाया है कि नाज़ुक स्थिति में तनाव भड़काने या समुदायों को कलंकित करने वाली बयानबाज़ी से दूरी बरतनी होगी और सोशल मीडिया कम्पनियों को भी अपने मानवाधिकार दायित्व समझने होंगे.  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:17:22 +0530</pubDate>
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<title>डीआर काँगो: इबोला वायरस का प्रकोप जारी, बच्चों में भी संक्रमण मामलों की आशंका</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने आगाह किया है कि काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में घातक इबोला वायरस के फैलाव के बीच, आने वाले दिनों में बच्चों में भी संक्रमण मामलों में उछाल दर्ज किए जाने की आशंका बढ़ रही है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:17:19 +0530</pubDate>
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<title>भारत: तम्बाकू छोड़ने में सहारा बन रही नि:शुल्क हैल्पलाइन</title>
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<description><![CDATA[ भारत में तम्बाकू सेवन की लत से मुक्ति पाने की इच्छा रखने वालो लोगों को, नि:शुल्क राष्ट्रीय परामर्श सेवा सही मार्गदर्शन और सहारा दे रही है. यह सेवा, विशेषज्ञों की सलाह, नियमित सम्पर्क और कई भारतीय भाषाओं में सहायता के ज़रिए, लोगों को तम्बाकू सेवन की लत से बाहर आने में मदद करती है.  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:17:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>होर्मुज़ जलक्षेत्र में तेल टैंकर पर हमला, 3 नाविकों की मौत, बिगड़ते हालात पर चिन्ता</title>
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<description><![CDATA[ समुद्री व्यापार के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के निकट एक तेल टैंकर पर हुए हमले में 3 नाविकों की मौत हो गई है. इस क्षेत्र में फिर से बढ़ रहे तनाव ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा, ईंधन की क़ीमतों और अन्तरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर होने वाले प्रभाव के प्रति चिन्ताएँ बढ़ा दी हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:17:13 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान संकट के बीच यूनेस्को ने बढ़ाया सहयोग का हाथ</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र की शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संस्था (UNESCO) ने लेबनान में जारी संकट के बीच राष्ट्रीय प्राधिकरणों और साझीदारों के साथ मिलकर शिक्षा व्यवस्था को बनाए रखने, सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा करने और विश्वसनीय सूचना तक पहुँच सुनिश्चित करने के प्रयास तेज़ किए हैं. संगठन के मुताबिक़ ये व्यवस्थाएँ देशभर के समुदायों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:17:12 +0530</pubDate>
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<title>Prabhasakshi NewsRoom: Balochistan बना महाशक्तियों की जंग का मैदान, BLA को आतंकी संगठन घोषित करवाने के China&#45;Pak के प्रस्ताव पर अमेरिका ने लगाया Veto</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका ने पाकिस्तान और चीन की उस साझा चाल पर ऐसा झटका मारा है, जिसने इस्लामाबाद और बीजिंग दोनों की बेचैनी बढ़ा दी है। पाकिस्तान और चीन ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानि बीएलए और उसकी मजीद ब्रिगेड को वैश्विक आतंकी सूची में डालने की जोरदार कोशिश की थी, लेकिन अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने इस प्रस्ताव को रोक कर पूरी बाजी पलट दी।सबसे दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका खुद बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को पहले से विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर चुका है। वाशिंगटन ने साल 2019 में इस संगठन को विशेष वैश्विक आतंकी घोषित किया था और बाद में मजीद ब्रिगेड को भी उसी श्रेणी में जोड़ा गया। इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका ने पाकिस्तान और चीन की मांग का समर्थन नहीं किया। यही वह बिंदु है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। सवाल उठ रहा है कि आखिर अमेरिका ने ऐसा क्यों किया?इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में बर्बर सैन्य-पुलिस हिंसा के अंतरराष्ट्रीय निहितार्थदरअसल यह केवल आतंकवाद का मामला नहीं, बल्कि भू-रणनीतिक दबाव की खतरनाक शतरंज है। बलूचिस्तान इस समय चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का सबसे संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। ग्वादर बंदरगाह से लेकर खनिज परियोजनाओं तक चीन ने अरबों की पूंजी झोंक रखी है। लेकिन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी लगातार इन परियोजनाओं पर हमले कर रही है। कराची हवाई अड्डे के पास हमला, ग्वादर पोर्ट परिसर पर हमला और जाफर एक्सप्रेस अपहरण जैसी घटनाओं ने चीन की नींद उड़ा रखी है। यही वजह है कि बीजिंग बलूच विद्रोह को अपने सामरिक विस्तार के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा मानता है।उधर, पाकिस्तान की हालत इससे भी ज्यादा खराब है। इस्लामाबाद बलूचिस्तान में वर्षों से सैन्य अभियान चला रहा है, लेकिन विद्रोह खत्म होने की बजाय और उग्र होता जा रहा है। बलूच संगठनों का आरोप है कि पाकिस्तान वहां संसाधनों की लूट कर रहा है जबकि स्थानीय जनता को दमन, गायब किए जाने और सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे माहौल में अगर संयुक्त राष्ट्र बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित कर देता, तो पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कठोर कार्रवाई का नैतिक आधार मिल जाता। लेकिन अमेरिका और पश्चिमी देशों ने फिलहाल यह रास्ता बंद कर दिया।यह फैसला चीन के लिए सीधा रणनीतिक झटका माना जा रहा है। चीन वर्षों से संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान आधारित आतंकी सरगनाओं को बचाता रहा है। भारत और अमेरिका जब भी जैश-ए-मोहम्मद या लश्कर जैसे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते थे, तब बीजिंग तकनीकी रोक लगाकर उन्हें बचाने में जुट जाता था। अब वही चीन अपने हितों की रक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र पहुंचा, लेकिन इस बार अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने उसकी चाल रोक दी। यह वैश्विक कूटनीति का बेहद तीखा पलटवार माना जा रहा है।सामरिक नजरिए से देखें तो यह फैसला चीन पाकिस्तान गठजोड़ के खिलाफ दबाव की नई रणनीति का हिस्सा दिखता है। अमेरिका शायद यह संदेश देना चाहता है कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन का विस्तार बिना चुनौती के नहीं चलने दिया जाएगा। बलूचिस्तान में अस्थिरता जितनी बढ़ेगी, चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे पर उतना ही दबाव बढ़ेगा। यही वजह है कि इस फैसले को केवल आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के नजरिए से नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे महाशक्तियों के टकराव की नई परत माना जा रहा है।देखा जाये तो बलूचिस्तान की राजनीति पर इसका असर बेहद गहरा हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान और चीन की मांग रुकने से बलूच अलगाववादी गुटों का मनोबल बढ़ेगा। उन्हें यह संदेश जाएगा कि वैश्विक ताकतें पूरी तरह पाकिस्तान के पक्ष में नहीं खड़ी हैं। इससे बलूच राष्ट्रवादी आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय चर्चा में जगह मिलने की संभावना बढ़ सकती है। पाकिस्तान के लिए यह बेहद खतरनाक संकेत है क्योंकि वहां पहले ही सेना और विद्रोही गुटों के बीच टकराव तेजी से बढ़ रहा है।साथ ही चीन के लिए भी खतरा कम नहीं है। ग्वादर और बलूचिस्तान में चल रही परियोजनाओं की सुरक्षा पर अब और भारी खर्च करना पड़ेगा। चीनी इंजीनियर और कर्मचारी पहले ही हमलों के डर में काम कर रहे हैं। अगर बलूच विद्रोह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह आतंकवाद की श्रेणी में नहीं धकेला जाता, तो चीन की रणनीतिक परियोजनाओं पर हमलों का जोखिम लगातार बना रहेगा।बहरहाल, संयुक्त राष्ट्र में हुआ यह घटनाक्रम साफ बता रहा है कि दुनिया की राजनीति अब केवल आतंकवाद विरोध तक सीमित नहीं रही। अब हर फैसला सामरिक दबाव, आर्थिक गलियारों और वैश्विक शक्ति संघर्ष से तय हो रहा है। पाकिस्तान और चीन ने जिस प्रस्ताव को अपनी कूटनीतिक जीत समझा था, वही उनके लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर करारा झटका बन गया। बलूचिस्तान अब केवल पाकिस्तान का आंतरिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि वह एशिया की सबसे विस्फोटक भू-राजनीतिक जंग का केंद्र बन चुका है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:17 +0530</pubDate>
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<title>Middle East Tension | दावों और खंडन का दौर! डोनाल्ड ट्रंप बोले&#45; &amp;apos;हमलों के बाद ईरान ने किया सीधा फोन&amp;apos;, तेहरान ने कहा&#45; &amp;apos;सरासर झूठ&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व (Middle East) में तीन महीने से अधिक समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्ते चरम सीमा पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य हमलों के बाद ईरानी नेताओं ने उन्हें &#039;सीधे&#039; फोन किया था और इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ हमलों को रोकने की अपील की थी। ट्रंप का यह दावा ऐसे समय में आया है जब वह लगातार कह रहे हैं कि दोनों देश संघर्ष को खत्म करने के लिए &quot;समझौते के बेहद करीब&quot; हैं। हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान को &quot;सरासर झूठ&quot; करार देते हुए कहा है कि दोनों पक्षों के बीच ऐसा कोई संपर्क नहीं हुआ है।फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान पर 49 टॉमहॉक मिसाइलें दागी गईं। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका की शर्तें नहीं मानता है, तो &quot;हम कल रात उन पर ज़बरदस्त बमबारी करेंगे।&quot;हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया कि तेहरान ने ट्रंप से बमबारी रोकने के लिए कहा था। इसे &quot;सरासर झूठ&quot; बताते हुए ईरानियों ने कहा कि ट्रंप और तेहरान के नेतृत्व के बीच &quot;कोई संपर्क नहीं&quot; हुआ था, और साथ ही कहा कि ईरान &quot;अमेरिकी आक्रामकता का सैन्य जवाब देगा।&quot;ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक बयान में कहा, &quot;ट्रंप का यह दावा कि ईरानी अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया है, पूरी तरह गलत है और यह युद्ध से बचने का एक बहाना है।&quot;मध्य पूर्व में बिगड़ते हालातये हमले गुरुवार तड़के किए गए, जिसमें ईरान का दावा है कि बंदर अब्बास, मिनाब, सिरिक, करगन और केशम द्वीप सहित कई शहरों में धमाकों की आवाज़ सुनी गई। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करने की कसम खाई है और कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है।ईरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है और अमेरिकी पांचवें बेड़े (Fifth Fleet) को निशाना बनाया है, लेकिन अमेरिकी सेना ने इन दावों का खंडन किया है। एक बयान में, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने यह भी कहा कि उसने &quot;ईरान में कई ठिकानों के ख़िलाफ़ अतिरिक्त आत्मरक्षा हमले&quot; पूरे कर लिए हैं।इसे भी पढ़ें: Mukesh Ambani का एक फैसला और बाजार में हरियाली, Reliance की तेजी ने निवेशकों को किया खुश। बयान में कहा गया, &quot;CENTCOM बलों ने पूरे ईरान में ईरानी सैन्य निगरानी क्षमताओं, संचार प्रणालियों और वायु रक्षा स्थलों पर हमले किए। अमेरिकी मरीन कॉर्प्स, वायु सेना और नौसेना ने उन ईरानी ठिकानों पर सटीक हथियार दागे जो अमेरिकी बलों और क्षेत्रीय जलक्षेत्र से गुज़रने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर रहे थे।&quot;इसे भी पढ़ें: Bihar में बैंकों की मनमानी पर Samrat सरकार का अल्टीमेटम, खराब Performance पर बंद होगा Govt Depositइन हमलों से बातचीत पटरी से उतरने की आशंका है; संयुक्त राष्ट्र में ईरान के दूत का कहना है कि अगर अमेरिका समझौता चाहता है तो उसे बल प्रयोग की धमकियों से बचना चाहिए। राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा, &quot;ईरान ने कभी भी धमकियों और दबाव में बातचीत नहीं की है और वह कभी भी दबाव या सवाल के आगे नहीं झुकेगा।&quot; Stay updated with International
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:17 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran War के बीच Israel की एंट्री, PM Netanyahu के इरादों ने बढ़ाई Middle East में टेंशन</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को बातचीत रोकने के लिए ‘‘कीमत चुकाने’’ की धमकी दिए जाने के बाद अमेरिका ने बृहस्पतिवार सुबह तेहरान पर नए सिरे से हवाई हमले किए, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन, कुवैत और जॉर्डन को निशाना बनाकर हमले किए।
 ईरान के कई शहरों में हुए इन नए हमलों के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत की कोशिशें फिर से ठप पड़ती दिखाई दीं। ईरान ने इस बात पर जोर दिया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है और तेल की कीमतों में उछाल आया है।
 यह इस सप्ताह तीसरी बार था जब दोनों पक्षों के बीच जवाबी हमलों ने दो महीने पुराने युद्धविराम की परीक्षा ली।
 ट्रंप ने ईरान से युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया है और इस सप्ताह की शुरुआत में संकेत दिया था कि कुछ ही दिनों में समझौता हो सकता है।
 हालांकि, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा कि यदि अमेरिका समझौता चाहता है तो उसे बल प्रयोग की धमकियों से बचना चाहिए।
 उन्होंने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा, ‘‘ईरान ने कभी धमकियों और दबाव में बातचीत नहीं की है और न ही भविष्य में दबाव के आगे झुकेगा।’’
 इसके बावजूद दोनों देश संघर्ष समाप्त करने का रास्ता तलाशते दिख रहे हैं और इसे अपने-अपने देशों में राजनीतिक जीत के रूप में पेश करना चाहते हैं।
 भारी बमबारी के बावजूद ईरान ने अपनी मजबूती दिखाई है। उसका मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद करने की उसकी क्षमता उसे सौदेबाजी करने का रास्ता देती है। यह जलडमरूमध्य तेल और प्राकृतिक गैस का एक महत्वपूर्ण मार्ग है।
 वहीं, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ऐसे लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के पक्षधर दिखाई देते हैं, जिनसे समझौता और कठिन हो सकता है। इनमें ईरान की धर्मतांत्रिक सरकार का पतन, उसके परमाणु कार्यक्रम का अंत और लेबनान स्थित ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्ला का विनाश शामिल है। सोमवार को ईरान और इजराइल ने एक-दूसरे पर हमले किए थे।
 अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने ईरान में सूर्योदय से ठीक पहले अपने ताजा हवाई हमलों का दौर ‘‘पूरा’’ कर लिया। कमांड के अनुसार, ये हमले ‘‘ईरान की अनुचित और लगातार आक्रामकता के जवाब में’’ किए गए और इनमें ईरानी सैन्य निगरानी क्षमताओं, संचार प्रणालियों तथा वायु रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया गया। 
 हमलों से हुए नुकसान का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया। बताया गया कि ये कार्रवाई अमेरिकी वायुसेना, मरीन कोर और नौसेना ने मिलकर की।
 इन हमलों के दौरान ईरान की राजधानी तेहरान, बंदरगाह शहर बंदर अब्बास और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के दक्षिणी इलाकों में विस्फोटों की आवाजें गूंजती रहीं।
 ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर हमले किए, जिसके बाद कुवैत की वायु रक्षा प्रणालियों ने हमले को विफल करने के लिए कार्रवाई की और कुवैत ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। कुवैत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने बताया कि उड़ानों का मार्ग परिवर्तित कर उन्हें अन्य हवाई अड्डों की ओर भेजा जा रहा है, हालांकि इस बारे में अधिक जानकारी नहीं दी गई।
 कुवैत ने कहा, ‘‘यह कदम कुवैत पर ईरान के निंदनीय हमलों और उनसे क्षेत्र में नागरिक विमानन यातायात को उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों को देखते हुए उठाया गया है।’’
हाल के दिनों में कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी ईरान के हमले की चपेट में आया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे। बुधवार को ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर हमले किए थे। इन तीनों देशों में अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
 इजराइल ने भी बृहस्पतिवार तड़के उत्तरी क्षेत्रों के निवासियों को संभावित हमले की आशंका के चलते सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी। वहीं, जॉर्डन स्थित अमेरिकी दूतावास ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि ‘‘सूचनाओं के अनुसार जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में मिसाइलें, ड्रोन या रॉकेट मौजूद हैं।’’
 हालांकि, जॉर्डन के सरकारी मीडिया की ओर से मिसाइल हमलों की इन रिपोर्टों की तत्काल पुष्टि नहीं की गई। दूसरी ओर, ईरान ने दावा किया कि उसने बृहस्पतिवार को एक बार फिर जॉर्डन स्थित मुवफ्फक सल्ती एयर बेस को निशाना बनाया है।
 अमेरिकी सेना ने बुधवार को कहा कि उसने पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर एम/टी सेटेबेलो के इंजन कक्ष पर सटीक हथियारों से हमला किया। अमेरिकी सेना का दावा है कि यह जहाज ईरानी तेल लेकर नौसैनिक नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था। यह ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी कार्रवाई से निष्क्रिय किया गया आठवां व्यापारी जहाज था।
 इस बीच समझौते के प्रयास जारी हैं। अमेरिका से परामर्श के बाद कतर का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को वार्ता के लिए तेहरान पहुंचा। एक अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर यह जानकारी दी।
 दोनों देशों के बीच यह तनाव अमेरिकी सेना के एक हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के एक दिन बाद बढ़ा, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के पास गश्त कर रहा था। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार हेलीकॉप्टर की टक्कर एक ईरानी ड्रोन से हुई थी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि टक्कर जानबूझकर कराई गई थी या नहीं।
नवंबर में होने वाले संसदीय चुनावों से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंतित ट्रंप शीघ्र समाधान चाहते हैं। लेकिन उनकी कुछ मांगें ऐसी हैं जिन्हें स्वीकार करना ईरान के लिए कठिन होगा।
 अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को छोड़ दे। 
ईरान इस यूरेनियम को छोड़ने से इनकार कर रहा है और प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है। साथ ही वह अंतिम समझौते से पहले ही अपनी कुर्क विदेशी संपत्तियों को मुक्त कराने की भी मांग कर रहा है, जिसे ट्रंप ने खारिज कर दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:16 +0530</pubDate>
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<media:keywords>US-Iran, War, के, बीच, Israel, की, एंट्री, Netanyahu, के, इरादों, ने, बढ़ाई, Middle, East, में, टेंशन</media:keywords>
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<title>US के हमलों के बाद Iran का बड़ा पलटवार, अमेरिकी Airbase पर दागीं 12 बैलिस्टिक मिसाइलें</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के कई इलाकों में धमाकों की खबर मिली, जिनमें सिरिक और मिनाब भी शामिल हैं। अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर नए सिरे से सैन्य हमले किए, जिससे वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। ईरानी मीडिया और स्थानीय सूत्रों ने भी कई इलाकों में एयर डिफेंस एक्टिविटी की जानकारी दी, क्योंकि अधिकारी हालात को संभालने की कोशिश कर रहे थे। इसके जवाब में, ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया कि जॉर्डन के अल-अज़राक एयरबेस पर ज़बरदस्त धमाके हुए। यह एयरबेस अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी और इलाके में अमेरिकी सैन्य अभियानों में मदद के लिए जाना जाता है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने यह भी कहा कि उसने 12 बैलिस्टिक मिसाइलों से अल-अज़राक एयरबेस को निशाना बनाया और वहाँ मौजूद अमेरिकी विमानों पर हमला किया।इसे भी पढ़ें: Middle East Tension | दावों और खंडन का दौर! डोनाल्ड ट्रंप बोले- &#039;हमलों के बाद ईरान ने किया सीधा फोन&#039;, तेहरान ने कहा- &#039;सरासर झूठ&#039;IRGC ने गुरुवार सुबह दावा किया कि उसने कुवैत और बहरीन के एयरबेस पर मौजूद 18 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बहरीन के गृह मंत्रालय ने बताया कि सायरन बजाए गए, जबकि कुवैत ने ईरानी मिसाइलों और ड्रोन के आने की खबरों के बीच कुछ समय के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। हालांकि, US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के उन दावों को खारिज कर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में US के एक युद्धपोत पर हमला हुआ था; उन्होंने इन दावों को झूठा बताया और कहा कि US के किसी भी नौसैनिक पोत पर हमला नहीं हुआ था। CENTCOM ने रात भर में क्रूज़ मिसाइल लॉन्च किए जाने का फ़ुटेज जारी किया। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया था कि ईरान के अंदर गहराई में मौजूद ठिकानों पर हमला करने के लिए 49 टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था। इसे भी पढ़ें: US-Iran War के बीच Israel की एंट्री, PM Netanyahu के इरादों ने बढ़ाई Middle East में टेंशनये हमले तब हुए जब ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी थी कि अगर तेहरान ने अपना रवैया नहीं बदला, तो वॉशिंगटन ईरान के अहम ठिकानों को निशाना बनाने और सैन्य कार्रवाई तेज करने के लिए तैयार है। बाद में CENTCOM ने बताया कि कमांडर-इन-चीफ के आदेश पर अमेरिकी सेना ने शाम 5:15 बजे ET (सुबह 3:45 बजे) ईरान में कई ठिकानों पर अतिरिक्त &#039;आत्मरक्षा&#039; हमले शुरू कर दिए हैं। CENTCOM ने कहा, &quot;ये हमले ईरान की बिना वजह और लगातार जारी आक्रामकता के जवाब में किए जा रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:16 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिकी Attack में 3 भारतीय नाविकों की मौत, New Delhi ने US डिप्लोमैट को बुलाकर दी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को बताया कि ओमान की खाड़ी में एक टैंकर पर अमेरिकी सेना के हमले के बाद लापता हुए तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है। ओमान के पास टैंकर पर अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हमले के बाद ये नाविक लापता हो गए थे। अमेरिका के अनुसार, निर्देशों का पालन न करने पर उसकी सेना ने जहाज पर सटीक हमला किया। अमेरिका ने यह भी कहा कि टैंकर ईरान से तेल ले जा रहा था। इस बीच, जानलेवा हमले के बाद नई दिल्ली ने अमेरिकी डिप्टी चीफ़ ऑफ़ मिशन को तलब किया और हमले पर कड़ा विरोध जताया। विदेश मंत्रालय (MEA) में अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने टैंकर &#039;सेटेबेल्लो&#039; पर हमले के बाद अमेरिका के चार्ज डी&#039;अफेयर्स जेसन मीक्स को तलब किया।इसे भी पढ़ें: Gold Price पर दोहरी मार: Profit Booking और US संकेतों से 1.50 लाख के नीचे फिसला सोनाइस घटना के बाद, भारत ने हमले की कड़ी निंदा की और जहाज़ पर मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक आधिकारिक बयान में कहा, &quot;हम आज ओमान के तट के पास कमर्शियल जहाज़ &#039;सेटेबेल्लो&#039; पर हुए हमले की निंदा करते हैं। मंत्रालय ने बताया कि हमले के समय जहाज़ पर 24 भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे। मंत्रालय ने कहा कि 21 भारतीयों को बचा लिया गया है। अमेरिका ने कहा कि अमेरिकी सेना के निर्देशों का पालन न करने पर उसके सैनिकों ने जहाज़ पर &quot;सटीक&quot; हमला किया। अमेरिका ने यह भी कहा कि टैंकर ईरान से तेल ले जा रहा था। इसे भी पढ़ें: US के हमलों के बाद Iran का बड़ा पलटवार, अमेरिकी Airbase पर दागीं 12 बैलिस्टिक मिसाइलेंबाद में US सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की कि उसने ईरान के खिलाफ जारी समुद्री नाकेबंदी के तहत 9 जून की रात 11:14 बजे &#039;सेटेबेलो&#039; (Settebello) को निशाना बनाया। बयान के अनुसार, &quot;US सेंट्रल कमांड ने पलाऊ के झंडे वाले M/T सेटेबेलो को ओमान की खाड़ी से गुजरते समय बेकार कर दिया।&quot; इसमें आगे कहा गया कि अमेरिकी सेना के निर्देशों का बार-बार पालन न करने पर &quot;एक अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन रूम में सटीक निशाना साधने वाले हथियार (precision munitions) दागे। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:15 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान ने इन 60 ट्रकों ने मचाया हड़कंप, 21 सैनिक गायब!</title>
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<description><![CDATA[ ईरान और अमेरिका के बीच मीडिएशन का ड्रामा कर रहे पाकिस्तान के अंदर ही जंग शुरू हो गई है। पाकिस्तान ऑक्यूपाइड जम्मू कश्मीर और बलूचिस्तान से एक साथ ऐसी दो खबरें आई हैं जिन्होंने पाकिस्तान को हिलाकर रख दिया है। एक तरफ पाकिस्तान ऑक्यूपाइड जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान का ही मिलिट्री एयरक्राफ्ट पहाड़ों में गिर गया तो वहीं बलूचिस्तान भी मौके का फायदा उठाकर मैदान में कूद पड़ा है। खबर है कि बलूचिस्तान में पाकिस्तान के 60 ट्रकों को जला दिया गया है। इन ट्रकों के अंदर जो निकला है वो आपको हैरान कर देगा। मुजफराबाद में पाकिस्तानी सेना का Mi-17 हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है। Mi-17 हेलीकॉप्टर बेहद ही महंगा और हाई एंड हेलीकॉप्टर है। इस हादसे में 21 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गई है। मुजफराबाद के पहाड़ों से जो धुआं निकल रहा है वो Mi-17 हेलीकॉप्टर का ही है। बताया जा रहा है कि यह हेलीकॉप्टर पाकिस्तान से आजादी मांग रहे कश्मीरियों के खिलाफ ऑपरेशन के लिए उतारा गया था। लेकिन या तो यह हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है या इसे मार गिराया गया है। बहरहाल इसी बीच बलूचिस्तान के नुष्की इलाके से मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान के 60 ट्रकों में आग लगा दी गई है। इन ट्रकों में पाकिस्तान बलूचिस्तान से मिनरल्स और एलपीजी गैस लूट कर ले जा रहा था। इसे भी पढ़ें: मुज़फ़्फ़राबाद के पास पाकिस्तानी सेना का Mi-17 हेलीकॉप्टर क्रैश, 21 सैनिकों की मौतहो सकता है कि पाकिस्तान इन ट्रकों में भरे मिनरल्स और एलपीजी गैस को अमेरिका या चीन तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा हो। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इन 60 ट्रकों को उड़ा दिया गया है। बलूच एक्टिविस्ट मीरिया बलोच ने कहा है कि पाकिस्तान जल्द ही अगला सोमालिया बनने वाला है। बलूचिस्तान के संसाधनों के बिना पाकिस्तान एक महीने भी नहीं टिक पाएगा और हम पाकिस्तान को अपने नेचुरल रिसोर्सेज नहीं लूटने देंगे। बहरहाल बता दें कि बलूचों ने पाकिस्तान के खिलाफ पीओके के लोगों का साथ देने का ऐलान कर दिया है। पीओके की जनता इतनी उग्र हो गई है कि वह पाकिस्तान की आर्मी को दौड़ा दौड़ा कर मार रही है। पाकिस्तानी सैनिकों की पेंटें उतार कर आसमान में उछाल रही है। आपको बताते हैं कि पीओके के हजारों कश्मीरी पाकिस्तानी सेना पर अचानक क्यों टूट पड़े हैं। दरअसल पाकिस्तान पीओके में गैरकानूनी इलेक्शन करवा रहा है। जिसका विरोध भारत सरकार के साथ-साथ पीओके की जनता कर रही है। इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में बर्बर सैन्य-पुलिस हिंसा के अंतरराष्ट्रीय निहितार्थबता दें कि पीओके के हजारों लोग पिछले दो हफ्तों से पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि हमारी आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। पाकिस्तान ने हमारे सारे राजनैतिक अधिकार छीन लिए हैं। यहां तक कि पाकिस्तानी सेना हम पर भयंकर अत्याचार कर रही है। पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर के हजारों लोगों ने बोलना शुरू कर दिया कि हुक्मरानों देख लो हम तुम्हारी मौत हैं। बवाल बढ़ता देख पाकिस्तान की सेना ने प्रदर्शन कर रहे पीओके के लोगों पर गोलीबारी शुरू कर दी। प्रदर्शन कर रहे कश्मीरियों पर गोलीबारी कर दी। खबर है कि पीओके में 200 से ज्यादा कश्मीरियों को मार दिया गया है। सबसे ज्यादा हिंसा रावलकोट में देखने को मिली है। पाकिस्तानी सेना के हमले के बाद पीओके के लोगों का गुस्सा भी फूट पड़ा। पीओके के हजारों लोगों ने पाकिस्तानी सेना को सड़कों पर दौड़ा-दौड़ा कर मारा। कई जगहों पर पाकिस्तानी सैनिकों को पकड़ कर उनकी पैंट उतरवा ली गई। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:14 +0530</pubDate>
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<title>भारत विरोधी यूरोप का एक्शन, तभी रूस ने बंपर डिस्काउंट देकर पलट दी पूरी बाजी</title>
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<description><![CDATA[ भारत के खिलाफ कारवाई के बीच जो खबर रूस से आई है वो काफी उत्साहित करने वाली है। यूरोप ने कदम उठाया और दूसरी तरफ रूस ने भी एक कदम उठाया। यूरोप ने कुछ फैसले किए। फैसले यह कि रूस की सेना के साथ जो लोग डायरेक्टली काम कर रहे हैं, जो कंपनियां काम कर रही हैं, उसके खिलाफ कुछ कदम उठाए गए। और इधर रूस ने क्या किया? तेल पर डिस्काउंट देने का खेल शुरू कर दिया और भारत के साथ उसका सप्लाई चेन लगातार लगातार लगातार बढ़ता चला जा रहा है। ईयू ने भारत, चीन और दुनिया के कई ऐसे देश उनकी 50 कंपनियों को झटका दिया। इन्होंने यूक्रेन पर हमले के चलते रूस पर 21वें प्रतिबंध पैकेज की घोषणा की। इन प्रतिबंधों ने अचानक इस इन आधा सैकड़ा कंपनियों के सामने संकट खड़ा किया। इसे भी पढ़ें: जिनपिंग को देखते ही उछल पड़े किम जोंग, प्योंगयांग में वार्ताईयू की ओर से ऐलान हुआ कि वह भारत और अन्य देशों की उन 50 कंपनियों पर एक्सपोर्ट कंट्रोल का उपाय लागू करेगा जो रूस की सेना के साथ सीधे कारोबार करती है। यूरोपीय यूनियन के इस ऐलान का असर भारत और चीन के साथी किरगिस्तान, कजाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात में स्थित कंपनियों पर पड़ेगा और इन पर निर्यात प्रतिबंध लगाए जाएंगे। ईयू ने यह फैसला रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए किया है। लेकिन इससे सिर्फ रूस ही नहीं तमाम देश प्रभावित होंगे। इस लिस्ट में ड्रोन निर्माण से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं।ईयू की ओर से ऐलान हुआ कि वह भारत और अन्य देशों की उन 50 कंपनियों पर एक्सपोर्ट कंट्रोल का उपाय लागू करेगा जो रूस की सेना के साथ सीधे कारोबार करती है। यूरोपीय यूनियन के इस ऐलान का असर भारत और चीन के साथी किरगिस्तान, कजाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात में स्थित कंपनियों पर पड़ेगा और इन पर निर्यात प्रतिबंध लगाए जाएंगे। ईयू ने यह फैसला रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए किया है। लेकिन इससे सिर्फ रूस ही नहीं तमाम देश प्रभावित होंगे। इस लिस्ट में ड्रोन निर्माण से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। जिन पर निर्यात प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। प्रस्तावित 21वें प्रतिबंध पैकेज की घोषणा करते हुए यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति के उच्च प्रतिनिधि काजा क्लास ने कहा कि यह उपाय यूक्रेन में मॉस्को के सैन्य अभियानों को वित्त पोषित करने और बनाए रखने की क्षमता पर लगाम लगाने के लिए किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम धीरे-धीरे रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था की नींव को ध्वस्त करते जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: रूसी मिलिट्री बेस का सर्वे करने पहुंचा चीन, भारत को झटका!अब ब्रूसेल्स 2 साल से अधिक समय में रूस पर प्रतिबंधों की सबसे बड़ी लिस्ट तैयार कर रहा है। वहीं ईयू के प्रस्तावित पैकेज में उन बैंकों, हथियार निर्माताओं, तेल व्यापारियों, रिफाइनरियों, क्रिप्टो ऑपरेटर्स को टारगेट किया गया है जो तीसरे देशों में स्थित हैं। उन पर रूस की मौजूदा प्रतिबंधों से बचने की मदद करने का आरोप है। क्लास के मुताबिक करीब 90 बैंकों की संपत्ति जब्त की जा सकती है। जबकि रूस और अन्य देशों के 30 से अधिक बैंकों के साथ लेनदेन पर और प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा 11 क्रिप्टो करेंसी प्लेटफार्म पर भी ट्रांजैक्शन बैन लगाने की तैयारी है। इस बीच उन्होंने यह भी कहा है कि यूरोपीय संघ रूसी एनर्जी एक्सपोर्ट से होने वाले राजस्व को कम करने के लिए रूसी तेल की कीमत सीमा पर अस्थाई रोक लगाने की कोशिश कर रहा है। कजाक क्लास ने सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया और इन प्रतिबंधों से जुड़ी जानकारी शेयर की। उन्होंने कहा कि हम रूस के सैन्य औद्योगिक तंत्र को समर्थन देने वाली तमाम कंपनियों को भी निशाना बना रहे हैं। नई सूची में ड्रोन निर्माण क्षेत्र से जुड़ी 30 से अधिक संस्थाओं का शामिल किया गया है। इसे भी पढ़ें: भारत ने पहली बार तैनात किए 12 परमाणु बम, खुलासे से हिली दुनिया!इसके साथ ही 50 कंपनियों पर नए एक्सपोर्ट कंट्रोल उपाय लागू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हम रूस की उत्पादन क्षमता को और बाधित करने के लिए अतिरिक्त निर्यात प्रतिबंध भी लगाएंगे। इसमें निकेल पाउडर, धातुएं, हाई परफॉर्मेंस मिश्र धातुएं शामिल हैं। इसके अलावा कुछ नई वस्तुओं के आयात पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा जिसमें ऑटो पार्ट्स, कई कीमती धातुओं के अयस्क और रसायन शामिल होंगे। एक तरफ यह है रशिया ने के खिलाफ कदम उठाया ईयू ने और एक के बाद एक उसने इस तरीके के प्रतिबंधों की घोषणा की। नए पैकेज की घोषणा की। इसके चपेट में भारत की कंपनियों पर असर पड़ेगा। चीन की कंपनियों पर असर पड़ेगा। कई और देशों की कंपनियों पर असर पड़ेगा जो बताया हमने आपको।  रूस अपनी फॉरवर्ड प्लानिंग के साथ आगे बढ़ गया। कच्चा तेल मार्च से ही काफी महंगा अपना क्रूड ऑयल बेच रहा था वो क्योंकि ईरान के साथ जो युद्ध शुरू हुआ सबको मालूम है कि मजबूरी में लोग आएंगे तो उसने महल महंगा तेल बेचना शुरू कर दिया लेकिन अब उसमें बंपर डिस्काउंट दे दिया है उसने ये खेल है फॉरवर्ड प्लानिंग कि अच्छा उधर से चोट पहुंच रही है तो इधर से कंपनसेशन ले लो। ऐसे रूस के प्रमुख कच्चे तेल ग्रेड यूराल्स का दाम मार्च से भारत और चीन जैसे उसके सबसे बड़े खरीदार देशों में ब्रांड क्रूड के मुकाबले महंगा बिक रहा था। इसकी वजह मध्य पूर्व में किस तरीके से संघर्ष हो रहा था। वैश्विक तेल आपूर्ति में आई रुकावट मानी जा रही थी। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:13 +0530</pubDate>
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<title>Tejas Mk1A प्रोजेक्ट को बड़ा झटका, HAL ने &amp;apos;फ़र्ज़ी&amp;apos; रिपोर्ट देने वाली कंपनी पर FIR की</title>
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<description><![CDATA[ हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने हैदराबाद की कंपनी टेक एयरो डिवाइस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि कंपनी ने भारत के स्वदेशी तेजस Mk1A फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के लिए सप्लाई किए गए पार्ट्स की 199 नकली टेस्ट रिपोर्ट जमा की थीं। शिकायत के अनुसार, HAL के बेंगलुरु स्थित एयरक्राफ्ट डिवीजन ने तेजस Mk1A प्रोग्राम के लिए अलग-अलग पार्ट्स की सप्लाई के लिए मार्च 2022 से TEC Aero Devices को 18 परचेज ऑर्डर जारी किए थे। सैंपल, टेस्ट रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज़ जमा करने के बाद कंपनी को 35 कैटेगरी के पार्ट्स बनाने की मंज़ूरी मिल गई। क्वालिटी की जांच के दौरान HAL ने टेन्साइल स्ट्रेंथ, हार्डनेस, ब्रेक लोड, शियर, NDT, माइक्रोस्ट्रक्चर और सॉल्ट स्प्रे टेस्ट से जुड़ी ओरिजिनल रिपोर्ट मांगीं।इसे भी पढ़ें: Su-57 Fighter Jet | पुतिन ने भारत को दिया पांचवीं पीढ़ी की तकनीक और सोर्स कोड का ऑफर, जानें क्यों FGFA से पीछे हटा था भारतआरोप है कि कंपनी ओरिजिनल रिपोर्ट देने में नाकाम रही और बाद में उसने एक माफ़ीनामा जमा किया, जिसमें माना गया कि हैदराबाद की कंपनी &#039;एक्सिस इंस्पेक्शन सॉल्यूशंस&#039; के नाम से गलत रिपोर्ट दी गई थीं। खबरों के मुताबिक, 29 नवंबर 2023 को HAL ने &#039;एक्सिस इंस्पेक्शन सॉल्यूशंस&#039; में एक ऑडिट किया, जिसमें पता चला कि TEC एयरो डिवाइसेस द्वारा जमा की गई 199 टेस्ट रिपोर्ट में से कोई भी रिपोर्ट टेस्टिंग एजेंसी ने जारी नहीं की थी। HAL का आरोप है कि फरवरी और सितंबर 2023 के बीच जमा की गई सभी 199 रिपोर्ट नकली थीं। &#039;एक्सिस इंस्पेक्शन सॉल्यूशंस&#039; ने HAL को बताया कि नकली रिपोर्ट बनाने के लिए उसके नाम और सिग्नेचर का गलत इस्तेमाल किया गया था। इसे भी पढ़ें: HAL के इंटरनल ऑडिट में बड़ा खुलासा! Tejas Mk1A फाइटर जेट के पार्ट्स की 199 टेस्ट रिपोर्ट निकलीं फर्जी, हैदराबाद की कंपनी पर FIRजांच के नतीजों के बाद, HAL ने TEC Aero Devices को 10 मार्च 2027 तक, यानी तीन साल के लिए कंपनी के साथ कारोबार करने से रोक दिया। HAL ने बताया कि सप्लायर को कोई पेमेंट नहीं किया गया था। अंदरूनी बातचीत के बाद, HAL ने आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया है। अब HAL ने तेजस Mk1A फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम से जुड़े कथित तौर पर जाली दस्तावेज़ जमा करने के लिए TEC Aero Devices के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का कदम उठाया है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:13 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर की एयरस्ट्राइक, तालिबान ने निकाला बाहुबलि, जंग शुरू!</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान ने अपनी कब्र खुद खोद दी है। पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। पीओके में दहशत और लाशें बिछाकर पाकिस्तानी सेना का मन नहीं भरा तो अब उसने अफगानिस्तान पर एयर स्ट्राइक कर दी। जिसके बाद तालिबान भयंकर भड़क चुका है। अफगानिस्तान ने अब यह कसम खा ली है कि पाकिस्तान को भूगोल से मिटा के ही दम लेंगे। पाकिस्तान अब ऐसा फंस गया है कि उसका नक्शे से गायब होना तय माना जा रहा है। दुनिया भर में पाकिस्तान बड़ी-बड़ी बातें करता है। खुद को आतंकवाद का शिकार बताता है। लेकिन जब सच सामने आता है तो तस्वीर बिल्कुल ही उल्टी दिखाई देती है। बेगुनाहों की जान लेना, पड़ोसियों पर हमला करना, पूरे इलाके में दहशत फैलाना, आतंकियों को पालना और फिर खुद विक्टिम कार्ड खेलना। यही है पाकिस्तान का असली चेहरा। जो ताजा मामला सामने आया है वो अफगानिस्तान का है। मंगलवार रात पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के कुनार और कई प्रांतों में हवाई हमले किए। इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान ने इन 60 ट्रकों ने मचाया हड़कंप, 21 सैनिक गायब!तालिबान सरकार का यह दावा है कि इन हमलों में 13 लोगों की मौत हुई है। जिनमें से 11 मासूम बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग शामिल है। दर्जनों लोग घायल हुए हैं और कई घर जो हैं यहां पर मलबे में बदल गए। सबसे बड़ी बात यह है कि पाकिस्तान ने अभी तक इन हमलों की जिम्मेदारी तक नहीं ली। मुंह फेर दिया। लेकिन अफगानिस्तान ने सीधे यह आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना ने उनके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन कर नागरिक इलाकों को निशाना बनाया। यहां पर जानि हुई है और यही पाकिस्तान का दोहरा चेहरा इसी से सामने आता है। पाकिस्तान दुनिया भर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की बातें करता है। लेकिन जब बम गिरते हैं तो निशाने पर आतंकी नहीं बल्कि मासूम बच्चों के घर होते हैं। सवाल यह है कि आखिर पाकिस्तान किससे लड़ रहा है? आतंकवाद से या फिर बेगुनाहों से? तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने इसे अमानवीय अपराध बताया है। वहीं अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद ने भी पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई है।इसे भी पढ़ें: मुज़फ़्फ़राबाद के पास पाकिस्तानी सेना का Mi-17 हेलीकॉप्टर क्रैश, 21 सैनिकों की मौत उनका यह कहना है कि पाकिस्तान अपनी गलत नीतियों और दुनिया भर और दुश्मनी भरे रवय का परिणाम खुद भुगत रहा है। दरअसल बता दें कि यह पाकिस्तान और अफगानिस्तान का यह जो तनाव है यह आज का नहीं है। पिछले चार महीनों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच में लगातार संघर्ष चल रहा है। पाकिस्तान यह दावा करता है कि टीटीपी यानी कि तहरीक तालिबान पाकिस्तान के लड़ाके अफगानिस्तान में छिपे हुए हैं। लेकिन सवाल यह है कि अगर आतंकियों को निशाना बनाना था पाकिस्तान को तो फिर मासूम बच्चों की लाशें क्यों बिछी? यही सवाल अब पूरी दुनिया पाकिस्तान से पूछ रही है। पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी इसलिए भी बज चुकी है क्योंकि तालीबान अब खुलकर जवाब देने के मूड में दिखाई दे रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:13 +0530</pubDate>
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<title>Oman में Indian Ship पर फिर हमला: भारतीय क्रू वाले जहाज़ को बनाया निशाना, तीसरी घटना</title>
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<description><![CDATA[ सरकार ने बताया कि गुरुवार सुबह ओमान के शिनास पोर्ट के पास भारतीय क्रू वाले एक कमर्शियल जहाज़ को निशाना बनाया गया। अमेरिका (US) और ईरान के बीच एक-दूसरे पर हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव फिर से बढ़ने के बाद हाल के दिनों में यह इस तरह की तीसरी घटना है। इस जहाज़ की पहचान MT जलवीर के तौर पर हुई है, जो गिनी के झंडे वाला जहाज़ है। शिप मॉनिटरिंग वेबसाइट &#039;मरीनट्रैफिक&#039; के अनुसार, MT जलवीर पर 20 भारतीय क्रू मेंबर थे और यह 119.95 मीटर लंबा और 16.84 मीटर चौड़ा &quot;एस्फाल्ट/बिटुमेन&quot; टैंकर है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें जहाज़ से धुआं निकलता दिख रहा है। हालांकि, इंडिया टीवी डिजिटल इस वीडियो की सच्चाई की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकता। इस बीच, ओमान में भारतीय दूतावास ने कहा है कि उसे घटना की जानकारी है और वह स्थिति पर नज़र रखे हुए है।इसे भी पढ़ें: अमेरिकी Attack में 3 भारतीय नाविकों की मौत, New Delhi ने US डिप्लोमैट को बुलाकर दी चेतावनीदूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि हमें आज ओमान के शिनास पोर्ट के पास एक जहाज़ से जुड़ी घटना के बारे में पता चला है। हम स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं और आगे की जानकारी के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ तालमेल बिठा रहे हैं। हाल ही में हुई ऐसी तीसरी घटनायह हाल ही में हुई ऐसी तीसरी घटना है। पहली घटना 8 जून को हुई थी, जब MT मैरिवेक्स (MT Marivex) में संभवतः हमले के कारण आग लग गई थी। इस टैंकर पर कुल 24 क्रू मेंबर थे, जो सभी भारतीय थे और उन्हें सुरक्षित बचा लिया गया था। दूसरी घटना 10 जून को हुई, जब ओमान की खाड़ी में पलाऊ के झंडे वाले टैंकर MT सेटेबेलो (MT Settebello) पर हमला हुआ। इस जहाज पर 24 क्रू मेंबर थे। सरकार ने पुष्टि की कि उनमें से 21 को बचा लिया गया, लेकिन हमले के कारण तीन लोगों की मौत हो गई। केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को कहा, &quot;दुख की बात है कि शुरुआत में लापता बताए गए तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हो गई है, क्योंकि दो शव बरामद कर लिए गए हैं।इसे भी पढ़ें: Oman-Gujarat Pipeline: भारत की Energy Security के लिए कैसे &#039;Game Changer&#039; साबित होगा यह प्रोजेक्ट? उन्होंने कहा कि सरकार मृतकों के परिवारों के साथ खड़ी है। भारत ने इस हमले को लेकर अमेरिकी चार्ज डी&#039;अफेयर्स जेसन मीक्स को भी तलब किया और कहा कि कमर्शियल शिपिंग और आम लोगों के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और समुद्र में आवाजाही स्वतंत्र रहनी चाहिए, भले ही मध्य पूर्व में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:12 +0530</pubDate>
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<title>US Airstrike के बाद Iran का बड़ा पलटवार, Strait of Hormuz बंद, अमेरिकी बेस पर दागीं मिसाइलें</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के लगातार दूसरी रात हवाई हमले करने के बाद, दोनों देशों के बीच दो महीने से चल रहा तनावपूर्ण संघर्ष-विराम तेज़ी से कमज़ोर पड़ रहा है। गुरुवार को ईरान के विदेश मंत्रालय ने अब तक की सबसे कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वॉशिंगटन की सैन्य कार्रवाइयों ने बड़ी मुश्किल से हुए संघर्ष-विराम को &quot;लगभग बेमतलब&quot; बना दिया है। तनाव में यह हालिया बढ़ोतरी वॉशिंगटन के उन आरोपों के बाद हुई है जिनमें कहा गया है कि ईरान ने इस हफ़्ते की शुरुआत में होर्मुज़ जलडमरूमध्य के ऊपर अमेरिकी सेना का अपाचे हेलीकॉप्टर मार गिराया था। इसके बाद US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने होर्मोज़गन जैसे दक्षिणी प्रांतों में ईरानी एयर डिफेंस नेटवर्क, रडार साइटों और ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों को निशाना बनाते हुए &quot;आत्मरक्षा में हमले&quot; किए। इसे भी पढ़ें: US के हमलों के बाद Iran का बड़ा पलटवार, अमेरिकी Airbase पर दागीं 12 बैलिस्टिक मिसाइलेंहोर्मुज़ जलडमरूमध्य &#039;बंद&#039; रहेगाईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान के पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने उन जहाज़ों को, जिन्हें पहले ही गुज़रने की मंज़ूरी मिल चुकी है, सब्र रखने को कहा है। अथॉरिटी का कहना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अगली सूचना तक बंद रहेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस चेतावनी के बाद कि बातचीत में देरी के लिए तेहरान को &quot;कीमत चुकानी होगी&quot;, अमेरिका ने गुरुवार सुबह ईरान पर हवाई हमलों का दूसरा दौर शुरू किया। इन नए हमलों से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है और नाज़ुक युद्धविराम को बनाए रखने की कोशिशों पर खतरा मंडराने लगा है।इसे भी पढ़ें: America-Israel दोस्ती में दरार? US VP JD Vance के &#039;America First&#039; बयान से मची हलचलईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने गुरुवार को कहा कि उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद एयरबेस पर स्थित 18 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं। बहरीन के गृह मंत्रालय ने कहा कि चेतावनी देने वाले सायरन बजा दिए गए हैं। ये हमले दोनों पक्षों के बीच बढ़ते सैन्य टकराव में एक नया मोड़ हैं, जिससे पूर्ण पैमाने पर संघर्ष के फिर से शुरू होने का डर पैदा हो गया है। अप्रैल की शुरुआत में दोनों देशों के बीच एक नाज़ुक युद्धविराम पर सहमति बनने के बाद यह संघर्ष रुक गया था।अमेरिका ने ईरान में कई ठिकानों पर हमले किएअमेरिकी सेना ने कहा कि उसने लगातार दूसरे दिन ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान पर आरोप लगाया था कि वह अस्थायी शांति समझौते पर बातचीत में देरी कर रहा है। CENTCOM ने एक्स पर पोस्ट किए गए एक अपडेट में कहा कि CENTCOM की सेनाओं ने पूरे ईरान में ईरानी सेना की निगरानी क्षमताओं, संचार प्रणालियों और हवाई सुरक्षा ठिकानों पर हमले किए। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:11 +0530</pubDate>
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<title>America&#45;Israel दोस्ती में दरार? US VP JD Vance के &amp;apos;America First&amp;apos; बयान से मची हलचल</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि अमेरिका और इज़राइल के हित हमेशा एक जैसे नहीं होते, भले ही वे करीबी सहयोगी बने हुए हैं। उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और ईरान से जुड़े संघर्ष को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। CBS को दिए एक इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि इज़राइल अमेरिका का एक अहम सहयोगी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हालात के आधार पर कभी-कभी दोनों देशों की प्राथमिकताएं अलग-अलग हो सकती हैं।इसे भी पढ़ें: Britain में छात्र Henry Novak की हत्या पर सियासी भूचाल, JD Vance के बयान पर भड़का UKवेंस का कहना है कि अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही कदम उठाएगा।वेंस ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भले ही वॉशिंगटन और यरूशलेम के बीच मज़बूत सहयोग है, लेकिन कई बार उनके लक्ष्य पूरी तरह से मेल नहीं खाते। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में, अमेरिका हमेशा उसी चीज़ पर ध्यान देगा जिससे उसके लोगों का सबसे ज़्यादा भला हो। उन्होंने यह भी कहा कि इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एक ऐसे नेता हैं जो अपने देश के हितों को मज़बूती से आगे बढ़ाते हैं। साथ ही, वेंस ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह साफ़ कर दिया है कि अमेरिकी राष्ट्रीय हित सबसे पहले आते हैं।इसे भी पढ़ें: JD Vance ने नई Book &#039;Communion&#039; में खोला राज़, दोस्त की हत्या के बाद Usha ने क्यों लिया चौथा बच्चा करने का फैसला?ट्रंप और नेतन्याहू की बातचीत में तनाव की खबरेंयह इंटरव्यू ऐसे समय में हुआ है जब वेस्ट एशिया के संघर्ष को संभालने के तरीके, जिसमें इस क्षेत्र में इज़राइल की सैन्य कार्रवाई भी शामिल है, को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच मतभेद बढ़ने की खबरें आ रही हैं। वेंस ने कहा कि हालांकि अमेरिका और इज़राइल अक्सर मिलकर काम करते हैं, लेकिन असहमति होना मुमकिन है और कभी-कभी इससे बचा नहीं जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि जब हित अलग-अलग होंगे, तो वॉशिंगटन ऐसी नीतियां चुनना जारी रखेगा जिनसे अमेरिका का सबसे ज़्यादा भला हो, और साथ ही इज़राइल के साथ सहयोग भी बनाए रखेगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:11 +0530</pubDate>
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<title>पहले ठुकराया, फिर माना! No Man&amp;apos;s Land में 20 घंटे फंसा रहा बांग्लादेशी, BSF के दबाव में झुका BGB</title>
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<description><![CDATA[ मेघालय के महेंद्रगंज में नंदिरचर के पास भारत-बांग्लादेश सीमा पर लगभग 20 घंटे तक चले तनावपूर्ण गतिरोध के बाद स्थिति सामान्य हो गई, क्योंकि बांग्लादेश आखिरकार अपने नागरिक को स्वीकार करने के लिए सहमत हो गया। सूत्रों के अनुसार, भारतीय अधिकारियों ने उस व्यक्ति को बांग्लादेश को सौंपने का प्रयास किया था, जब वह कथित तौर पर अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते हुए पाया गया था। हालांकि, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के जवानों और बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों ने शुरू में उसे अपना नागरिक मानने से इनकार कर दिया। इस गतिरोध के बीच, 55 वर्षीय व्यक्ति अनिश्चित हालात में कई घंटों तक सीमावर्ती इलाके के &#039;नो-मैनज़-लैंड&#039; (दो देशों के बीच की खाली ज़मीन) में फंसा रहा। इसे भी पढ़ें: India Bangladesh Border पर BSF और BGB के बीच तीखी बहस, बांग्लादेश को आखिरकार वापस लेना पड़ा घुसपैठिया55 साल का व्यक्ति कौन?बांग्लादेश के जिस नागरिक को बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने वापस भेज दिया था, उसकी पहचान बांग्लादेश के राजशाही ज़िले के गोदागारी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले चंदलाई गाँव के निवासी के तौर पर हुई है। इस घटना ने इस बात पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि बांग्लादेश ने इस मामले को कैसे संभाला। देश द्वारा अपने ही नागरिक को पहचानने और स्वीकार करने से इनकार करने के कारण अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लंबे समय तक तनाव बना रहा। हिंदू समुदाय से ताल्लुक रखने वाले उस व्यक्ति के साथ किए गए व्यवहार की भी कई लोगों ने आलोचना की है। उन्होंने इसे अमानवीय और गैर-जिम्मेदाराना बताया है कि उसे अपने देश लौटने की अनुमति देने से पहले लगभग 20 घंटे तक सीमा पर इंतजार करना पड़ा। यह घटनाक्रम असम में बिना वैध दस्तावेजों वाले बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ तेज किए गए अभियान के बीच सामने आया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बार-बार कहा है कि राज्य 2026 में अवैध घुसपैठ के खिलाफ और भी कड़े कदम उठाएगा, जबकि अधिकारी देश में गैर-कानूनी रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने के प्रयास जारी रखे हुए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:10 +0530</pubDate>
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<title>Wayanad में Shigella का कहर, स्कूल के 8 बच्चे Positive, इलाके में मचा हड़कंप</title>
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<description><![CDATA[ केरल के वायनाड ज़िले में शिगेला संक्रमण के दो और मामलों की पुष्टि हुई है; दोनों मरीज़ कोलियाडी के मार बेसेलियस यूपी स्कूल के छात्र हैं। पिछले हफ़्ते स्कूल के कई छात्र शिगेला संक्रमण जैसे लक्षणों के कारण बीमार पड़ गए थे। स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं और इलाके में बीमारी को रोकने के उपाय कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में बुधवार को स्कूल के छात्रों में शिगेला संक्रमण के पाँच और मामलों की पुष्टि हुई, जिससे प्रभावित बच्चों की कुल संख्या आठ हो गई है। ताज़ा पॉज़िटिव नतीजे 7 जून को जाँच के लिए भेजे गए सैंपल से मिले हैं। हाल ही में संक्रमित हुए बच्चे पाँच, सात, आठ, नौ और 11 साल की लड़कियाँ हैं। इसे भी पढ़ें: Kerala ATS का बड़ा Crackdown: अवैध Bangladeshi नागरिकों पर शिकंजा, फर्जी दस्तावेज बरामदअधिकारियों ने बताया कि संक्रमित सभी आठ बच्चों की सेहत ठीक है। पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट की एडिशनल डायरेक्टर डॉ. केपी रीथा की अगुवाई में राज्य-स्तरीय एक्सपर्ट टीम ने हालात का जायजा लेने के लिए कोलियाडी और आस-पास के इलाकों का दौरा किया। टीम ने बीमारी को और फैलने से रोकने के लिए निर्देश जारी किए। हेल्थ डिपार्टमेंट ने स्थानीय निकायों के साथ मिलकर बीमारी की रोकथाम और उसे फैलने से रोकने के उपाय शुरू किए हैं और इलाके में बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चला रहा है। अधिकारियों ने पीने के पानी के स्रोतों को कीटाणु-मुक्त करने के लिए एक खास क्लोरीनेशन अभियान भी शुरू किया है। हेल्थ मिनिस्टर के. मुरलीधरन ने बुधवार को कहा कि हालात काबू में हैं। कोझिकोड में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि शक है कि संक्रमण संपर्क से फैला हो सकता है, हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इसे भी पढ़ें: Kerala के Wayanad में रहस्यमयी बीमारी का कहर, 150 स्कूली बच्चे बीमार, Health Department अलर्ट परमंत्री ने कहा कि अभी स्थिति नियंत्रण में है। जब मैंने मंगलवार को वायनाड का दौरा किया, तो 38 बच्चों का इलाज चल रहा था। उनमें से 12 को सरकारी अस्पतालों में और बाकी को प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। मुरलीधरन ने कहा कि अधिकारियों ने प्रभावित बच्चों के माता-पिता को आइसोलेशन वार्ड में भेज दिया है, क्योंकि उन्हें डर है कि वे भी संक्रमित हो सकते हैं। टेस्ट के नतीजों का इंतज़ार है और उम्मीद है कि इनसे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि क्या संक्रमण संपर्क से फैल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि अधिकारी प्रभावित स्कूल को फिर से खोलने का फ़ैसला तभी करेंगे, जब कैंपस में मौजूद कुएं से लिए गए पानी के सैंपल के नतीजे आ जाएंगे। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:09 +0530</pubDate>
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<title>Settebello जहाज़ पर US Attack: भारत ने अमेरिकी डिप्लोमैट को किया तलब, दी कड़ी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने अमेरिका के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया। यह विरोध US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के एक मिलिट्री ऑपरेशन के बाद जताया गया, जिसमें भारतीय नाविकों को नुकसान पहुँचा था। यह घटना ओमान के तट के पास हुई, जब अमेरिकी सेना ने पलाऊ के झंडे वाले ऑयल टैंकर M/T सेटेबेलो (M/T Settebello) को रोक दिया। CENTCOM के अनुसार, ईरान से तेल ले जाने की कोशिश करके चल रही नाकेबंदी का उल्लंघन करने के आरोप में इस जहाज के इंजन रूम को सटीक निशाना साधने वाले हथियारों (precision munitions) से निशाना बनाया गया। इस हमले के बाद, विदेश मंत्रालय (MEA) ने बुधवार को अमेरिकी चार्ज डी&#039;अफेयर्स (Charge d&#039;Affaires) जेसन मीक्स को तलब किया। अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने भारत की गहरी चिंताएं जाहिर कीं और इस बात पर जोर दिया कि देश के बड़ी संख्या में मौजूद नाविक समुदाय की सुरक्षा और भलाई भारत की सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता है। इसे भी पढ़ें: भारत ने पहली बार तैनात किए 12 परमाणु बम, खुलासे से हिली दुनिया!विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंत्रालयों के बीच हुई एक ब्रीफिंग में सरकार का पक्ष रखा। जायसवाल ने कहा कि हम समुद्री यात्रा करने वाले समुदाय की भलाई और सुरक्षा को बहुत महत्व देते हैं। जैसा कि आप जानते हैं, हमारा एक बड़ा समुदाय है जो समुद्र में काम करता है और दुनिया भर में फैला हुआ है। हमारे बहुत से नाविक फारस की खाड़ी और पश्चिम एशिया में भी हैं। उनकी भलाई सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी एम्बेसी और शिपिंग मंत्रालय के ज़रिए उनके संपर्क में हैं। जहाज़ पर हुए हमले का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, &quot;जब &#039;सेटेबेलो&#039; (Settebello) जहाज़ पर यह हमला हुआ, तो हमने अमेरिकी पक्ष के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया और अमेरिकी &#039;चार्ज डी अफेयर्स&#039; (Charge d&#039;Affaires) को तलब किया। उन्होंने आगे कहा हमने अमेरिकी &#039;चार्ज डी अफेयर्स&#039; को बुलाया और उन्हें हमलों की लगातार हो रही घटनाओं पर अपनी गहरी चिंता से अवगत कराया। साथ ही, हमने उनके सामने कड़ा विरोध भी दर्ज कराया।इसे भी पढ़ें: अमेरिकी Attack में 3 भारतीय नाविकों की मौत, New Delhi ने US डिप्लोमैट को बुलाकर दी चेतावनीजायसवाल ने कहा कि भारत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, &quot;हमने बताया कि हमारे समुद्री समुदाय की भलाई बहुत महत्वपूर्ण है और जो हमले हो रहे हैं, उन्हें बंद होना चाहिए। क्षेत्र की व्यापक स्थिति पर भारत का रुख दोहराते हुए जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली ने कूटनीति और नेविगेशन की आज़ादी पर ज़ोर दिया है। उन्होंने कहा, &quot;हमने यह भी कहा कि बातचीत और कूटनीति ही संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से बिना किसी रुकावट के आवाजाही होनी चाहिए। हमने इन सभी बिंदुओं पर अपना रुख बहुत स्पष्ट कर दिया है। भारत ने बुधवार को तनाव कम करने, कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित नेविगेशन बहाल करने की अपनी मांग दोहराई।इसे भी पढ़ें: Oman में Indian Ship पर फिर हमला: भारतीय क्रू वाले जहाज़ को बनाया निशाना, तीसरी घटनाविदेश मंत्रालय के एक बयान में कहा गया, &quot;हम आज ओमान के तट के पास कमर्शियल जहाज़ &#039;सेटेबेलो&#039; पर हुए हमले की निंदा करते हैं। जहाज़ पर मौजूद 24 भारतीय क्रू सदस्यों में से अब तक 21 भारतीयों को बचा लिया गया है और तीन भारतीय लापता बताए जा रहे हैं। ओमान में हमारी एम्बेसी स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रही है और चल रहे खोज और बचाव अभियान में ओमान के अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से तालमेल बिठा रही है।&quot;बयान में कहा गया कि इस क्षेत्र में जहाज़ों पर लगातार हो रहे हमले बहुत चिंताजनक हैं और ये क्षेत्र में चल रहे संघर्ष का सीधा नतीजा हैं। बयान में कहा गया, &quot;हम तनाव को तुरंत कम करने और कूटनीतिक समाधान के लिए चल रही बातचीत को पूरा करने की अपनी मांग दोहराते हैं, ताकि इलाके में शांति और स्थिरता लौट सके। इलाके में कमर्शियल शिपिंग और आम लोगों के लिए ज़रूरी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना बंद होना चाहिए। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक, इलाके के अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से आज़ाद और बिना किसी रुकावट के आवाजाही और व्यापार को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:08 +0530</pubDate>
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<title>MEA का बड़ा बयान: Settebello Attack में 3 भारतीय नाविकों की मौत, शव लाने की कोशिशें तेज</title>
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<description><![CDATA[ विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को कहा कि MT सेटेबेल्लो (MT Settebello) जहाज़ पर हुए हमले में मारे गए तीन भारतीय नाविकों की पहचान कर ली गई है और उनके शवों को जल्द से जल्द भारत लाने की कोशिशें की जा रही हैं। पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं पर अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान सवालों का जवाब देते हुए, MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की कि MT जलवीर (MT Jalveer) पर हमला उस इलाके में तैनात अमेरिकी नौसेना ने किया था। जायसवाल ने कहा कि ये हमले वहां तैनात अमेरिकी नौसेना की ओर से किए गए। जैसा कि आपने अलग-अलग रिपोर्टों में देखा होगा, और जैसा कि हमारे बयानों और इस मंच से भी स्पष्ट किया गया है, इन घटनाओं में शामिल तीनों जहाज़ विदेशी झंडे वाले हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से दो जहाज़ पलाऊ (Palau) के झंडे के तहत रजिस्टर्ड थे, जबकि गुरुवार को जिस जहाज़ पर हमला हुआ, वह गिनी (Guinea) के झंडे वाला था। उन्होंने कहा, &quot;इनमें से दो पलाऊ के झंडे वाले हैं, और तीसरा, जिस पर आज हमला हुआ, वह गिनी के झंडे वाला है। यानी, ये भारतीय मालिकाना हक वाले जहाज़ नहीं हैं; ये सभी विदेशी झंडे वाले जहाज़ हैं।इसे भी पढ़ें: America-Israel दोस्ती में दरार? US VP JD Vance के &#039;America First&#039; बयान से मची हलचलजयसवाल ने आगे बताया कि दो जहाज़ों पर US के &#039;ऑफ़िस ऑफ़ फ़ॉरेन एसेट्स कंट्रोल&#039; (OFAC) ने प्रतिबंध लगाए थे, जबकि एक जहाज़ &#039;नॉन-कम्प्लायंट&#039; (नियमों का पालन न करने वाले) जहाज़ों की श्रेणी में आता था। उन्होंने कहा, &quot;मुझे यह भी पता है कि उनमें से दो जहाज़ OFAC-प्रतिबंधित हैं और एक &#039;नॉन-कम्प्लायंट&#039; जहाज़ की श्रेणी में आता है। MT सेटेबेलो (MT Settebello) जहाज़ पर हुए हमले में मारे गए भारतीय क्रू सदस्यों के बारे में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि पहचान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जयसवाल ने कहा, तो, मारे गए तीनों लोगों की पहचान हो चुकी है और अभी हमारी कोशिश है कि उनके शवों को जल्द से जल्द भारत भेजा जाए।इसे भी पढ़ें: भारतीय जहाजों पर हमले के बीच Trump से आमने सामने बात करेंगे PM ! Modi की France और Slovakia यात्रा पर दुनियाभर की नजरेंइस बीच, बंदरगाह, जहाज़रानी और जलमार्ग मंत्रालय ने कहा कि बिटुमेन टैंकर MT जलवीर (MT Jalveer) से जुड़ी समुद्री सुरक्षा घटना में अब तक किसी के हताहत होने या घायल होने की खबर नहीं है। ओमान के तट पर शिनास बंदरगाह के पास इंजन रूम में आग लगने के कारण धुआं देखा गया था; अभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम चल रहा है और छह और क्रू सदस्यों को बाहर निकाला जाना बाकी है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:08 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;Israel War: क्या &amp;apos;Ghost&amp;apos; खामेनेई बदलेंगे मिडिल ईस्ट का गेम? ट्रंप vs नेतन्याहू की असली कहानी | No Filter</title>
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<description><![CDATA[ ईरान पर बमबारी कर देते हैं। बनी बनाई बात बिगाड़ देते हैं। तो अमेरिका और इजराइल के बीच चल क्या रहा है? ट्रंप हर मोड़ पर लाचार नजर आ रहे हैं। इजरायल ने सीजफायर का उल्लंघन कर लेबनान पर हमला क्यों किया? और ईरान ने जवाब क्यों दिया? इजराइल क्यों यह सब कर रहा है? इन सवालों के जवाब खोजे जा रहे हैं। इस सवाल का भी कि क्या ईरान पर हमला कर नेतन्याहू ने ट्रंप को चैलेंज कर दिया है या नेतन्याहू को पर्दे के पीछे से ट्रंप ही सपोर्ट कर रहे हैं। तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए हमने मीडिल ईस्ट मामलों की जानकार डॉ. शुभदा चौधरी जी से खास बातचीत की। जहां हमने पूछा कि क्या ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष सिर्फ न्यूक्लियर मुद्दा है, या इसके पीछे क्षेत्रीय नेतृत्व की लड़ाई भी है?इसे भी पढ़ें: US Airstrike के बाद Iran का बड़ा पलटवार, Strait of Hormuz बंद, अमेरिकी बेस पर दागीं मिसाइलेंईरान-इजराइल संघर्ष के बीच एक ऐसा नाम है जो कभी कैमरे के सामने नहीं आता, कभी कोई सार्वजनिक भाषण नहीं देता, लेकिन उसे ईरान का सबसे पावरफुल चेहरा माना जा रहा है। वह हैं ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई। डॉक्टर शुभदा चौधरी ने प्रभासाक्षी के खास शो नो फिल्टर के इंटरव्यू में खुलासा किया कि मोजतबा खामेनेई ईरान में एक &#039;घोस्ट&#039; (परछाई) की तरह काम करते हैं। वे जनता के सामने बिल्कुल नहीं आते, लेकिन पर्दे के पीछे से ईरान की सबसे खतरनाक सेना आईआऱजीसी (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) और अपने पिता अयातुल्ला खामेनेई के बीच के सबसे बड़े मध्यस्थ रहे हैं। इसे भी पढ़ें: America-Israel दोस्ती में दरार? US VP JD Vance के &#039;America First&#039; बयान से मची हलचलपर्दे के पीछे का असली मास्टरमाइंडमुस्तबा खामेनेई साल 1987 से ही आईआऱजीसी से जुड़े हुए हैं, जब ईरान-इराक युद्ध चल रहा था। ईरान में होने वाले इंटरनेट ब्लैकआउट, साइबर सर्विलांस और पूरी सुरक्षा व्यवस्था का कंट्रोल उन्हीं के हाथों में माना जाता है। अक्सर पश्चिमी देश यह दावा करते हैं कि ईरान में वे &#039;रिजीम चेंज&#039; (सत्ता परिवर्तन) कर देंगे, लेकिन जानकारों का मानना है कि मुस्तबा खामेनेई की वजह से IRGC अब पहले से कहीं ज्यादा कट्टर और मजबूत हो चुकी है। ऐसे में अगर इस जंग के बाद कोई पीस डील होती भी है, तो उसका सबसे बड़ा फायदा ईरान और मुस्तबा खामेनेई को ही मिलेगा, क्योंकि जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ को हिला पाना नामुमकिन है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>इधर PoK में उतरे लाखों लोग! उधर पाकिस्तान पर टूट पड़ा भारत!</title>
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<description><![CDATA[ भारत के जिस हिस्से पर पाकिस्तान दशकों से कब्जा करके बैठा हुआ है। अब वहां विद्रोह की ऐसी आग भड़की है कि चारों तरफ मारकाट मची हुई है। और यह सब शुरू हुआ है पीओके में विधानसभा चुनाव कराए जाने को लेकर। पीओके की जनता पाकिस्तानी सरकार और वहां की सेना के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरी हुई है। लाखों की तादाद में सड़कों पर उतर प्रदर्शनकारियों ने ऐलान कर दिया है कि जब तक पाकिस्तानी सरकार अपना फैसला वापस नहीं ले लेती तब तक वो सड़कों पर ही अड़े रहेंगे। चाहे उसके लिए उन्हें अपनी कुर्बानी ही देनी क्यों ना पड़े और ऐसा हो भी रहा है। जितना पाकिस्तानी सेना यहां के लोगों पर अटैक कर रही है उतना ही यहां प्रदर्शन और ज्यादा उग्र हो रहा है। पीओके से लगातार आंदोलनकारियों के जोश और पाकिस्तानी सेना की कायरतापूर्ण हरकतों की तस्वीरें आ रही हैं। इसे भी पढ़ें: आखिर भारत की बढ़ती परमाणु ताकत से चौकन्ना क्यों होने लगा अंतरराष्ट्रीय जगत?पाकिस्तान के रावलकोट में जहां पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों से हजारों लोग इकट्ठा हुए और इन सब लोगों ने पाकिस्तान की स्कायर सेना के खिलाफ हुंकार भरी। जिसने प्रदर्शन कर रहे निहत्त लोगों पर गोलियां चलाकर उन्हें भून डाला। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रही जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी के लोगों ने खुला ऐलान किया है कि पाकिस्तानी सेना और उसकी सरकार का मजबूती के साथ सामना करते रहेंगे। एक बार आप भी सुनिए प्रदर्शनकारियों ने क्या कुछ कहा। एक एक बंदा नजर में है जो जो सहूलतकार इस टाइम इनके साथ मिलके हम पर जुल्म कर रहा है ख्वा वो डीसी है एसपी है एसी है वो बाकी कोई है वो समाज सियासतदान है इनको मैं कहना चाहता हूं सारे पुत्र लग जाओ पुत्रों और ये ख्याल रखें एक-एक गांव में एक एक मोहल्ले में इनका मुकाबला करेंगे एक-एक गांव मोहल्ले में इनका मुकाबला करेंगे इंशा्लाह और साथियों दोस्तों एक अजम के साथ एक हौसले के साथ आगे बढ़ेंगे। कोई भी अम्ल से वापस नहीं जाएगा। कोई भी मुजफराबाद हर सूरत मुजफराबाद जाएंगे। इंशा्लाह जाएंगे 10 दिन लगते हैं। 20 दिन लगते हैं। आसार तोड़ते तोड़ते आगे बढ़ते जाएंगे। इंशा्लाह ताला। तो सुना आपने किस तरह से पीओके की जनता पाकिस्तानी फौज और सुरक्षा बलों के खिलाफ ताल ठोक रही है कि हम पीछे हटने वाले नहीं है। दरअसल पाकिस्तानी सेना और पुलिस की अंधाधुंध गोलीबारी में अब तक सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है। कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। ज्यादातर इलाकों में बिजली, पानी, इंटरनेट सब कुछ काट दिया गया है। इसे भी पढ़ें: Iran-Israel War: क्या &#039;Ghost&#039; खामेनेई बदलेंगे मिडिल ईस्ट का गेम? ट्रंप vs नेतन्याहू की असली कहानी | No Filter यह नहीं बल्कि पाकिस्तानी सेना किस तरह से अत्याचार कर रही है, उसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि वह सबसे ज्यादा महिला और बच्चों को निशाना बनाकर उन्हें मौत के घाट उतार रही है। इसके पीछे की वजह बताई जा रही है कि पाकिस्तान की सरकार और वहां की सेना पीओके के लोगों की नस्लों को खत्म करना चाहती है। इसीलिए वो ऐसा कर रही है।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:06 +0530</pubDate>
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<title>गहरा असर पड़ा है...भारतीय जहाज पर हमले के बीच UN में भयंकर भड़का भारत</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मीडिल ईस्ट में चल रही जंग को लेकर भारत का बड़ा बयान सामने आया है। भारत ने कहा कि इस महीने सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभालने के लिए मैं कोलंबिया को बधाई देता हूँ और आज की इस खुली चर्चा को आयोजित करने के लिए आपको धन्यवाद देता हूँ। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चल रहे संघर्षों की पृष्ठभूमि में आज की यह खुली चर्चा बेहद महत्वपूर्ण है। इस संघर्ष के कारण जान-माल का भारी मानवीय नुकसान हुआ है, लोग घायल हुए हैं, और बड़ी संख्या में संवेदनशील नागरिक आबादी का बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ है। इसके साथ ही, नौवहन की स्वतंत्रता (freedom of navigation) में बाधाएँ आई हैं, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक व्यापार के प्रवाह पर असर पड़ा है। इसने स्थापित आपूर्ति श्रृंखलाओं (supply chains) और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बड़े पैमाने पर बाधित किया है।इसे भी पढ़ें: MEA का बड़ा बयान: Settebello Attack में 3 भारतीय नाविकों की मौत, शव लाने की कोशिशें तेजभारत मध्य पूर्व में हाल के घटनाक्रमों पर अपने रुख को फिर से दोहराना चाहता है। सबसे पहले, हमने ईरान और खाड़ी क्षेत्र में छिड़े इस संघर्ष पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है, जो दुर्भाग्य से रमजान के पवित्र महीने में शुरू हुआ था। हमने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव को बढ़ाने से बचने और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। संघर्ष के और तीव्र होने तथा अन्य देशों में इसके फैलने से गहरी चिंता पैदा हो गई है। बढ़ती तबाही, मौतों, सामान्य जीवन के ठप होने और आर्थिक गतिविधियों के रुकने से भारत पर गहरा असर पड़ा है, जो कि इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखने वाला एक निकटतम पड़ोसी देश है। खाड़ी क्षेत्र में लगभग 1 करोड़ (10 मिलियन) भारतीय नागरिक रहते हैं और काम करते हैं। उनकी सुरक्षा और भलाई हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारी व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाएं इस क्षेत्र की स्थिरता पर निर्भर हैं, और इसमें कोई भी बड़ा व्यवधान हमारे हितों को प्रभावित करता है।इसे भी पढ़ें: भारतीय जहाजों पर हमले के बीच Trump से आमने सामने बात करेंगे PM ! Modi की France और Slovakia यात्रा पर दुनियाभर की नजरेंभारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर परिणाम लेकर आता है। इसके अलावा, भारत व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों का भी कड़ा विरोध करता है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर इन जहाजों को चलाने वाले कार्यबल में हमारे नागरिकों की बहुत बड़ी और प्रमुख हिस्सेदारी है। इस क्षेत्र के देशों, व्यापारिक जहाजों और समुद्री संचार मार्गों पर हुए हमलों के कारण कई भारतीय नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है या वे लापता हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:06 +0530</pubDate>
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<title>आज रात ईरान पर होगा बहुत बड़ा हमला? ट्रंप की सीधी धमकी, तेल भंडारों पर भी कब्ज़े का ऐलान</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को फिर से चेतावनी दी कि ईरान के साथ शांति समझौता करने की कूटनीतिक कोशिशों के बीच अमेरिका ईरान पर &quot;बहुत ज़ोरदार&quot; हमला करेगा। उन्होंने कहा कि ये हमले आज रात किए जाने की योजना है। &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर एक पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वॉशिंगटन, बहुत जल्द ही, ईरान के खार्ग द्वीप पर कब्ज़ा कर लेगा। यह द्वीप ईरान के लगभग सभी तेल निर्यात और अन्य तेल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मुख्य टर्मिनल का काम करता है। इस कदम का मकसद तेहरान के तेल और गैस बाज़ार पर अपना दबदबा बनाना है। उन्होंने वेनेज़ुएला का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के तेल संसाधनों पर अमेरिकी नियंत्रण &quot;वेनेज़ुएला और अमेरिका, दोनों के लिए बहुत फायदेमंद&quot; रहा है।इसे भी पढ़ें: America-Israel दोस्ती में दरार? US VP JD Vance के &#039;America First&#039; बयान से मची हलचलउन्होंने अपनी इस बात को भी दोहराया कि ईरान की नौसेना, वायु सेना, रडार, एंटी-एयरक्राफ्ट और ज़्यादातर आक्रामक क्षमताएं खत्म हो चुकी हैं। पोस्ट में लिखा था, अमेरिका आज रात ईरान पर ज़ोरदार हमला करेगा (जिसकी नेवी, एयर फ़ोर्स, रडार, एंटी-एयरक्राफ्ट और बाकी सभी तरह की सुरक्षा व्यवस्था, साथ ही ज़्यादातर हमला करने की क्षमता भी खत्म हो चुकी है!)। भविष्य में कभी न कभी हम खार्ग आइलैंड और तेल से जुड़े दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर ठिकानों पर कब्ज़ा कर लेंगे और उनके तेल और गैस बाज़ार पर पूरी तरह कंट्रोल कर लेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने वेनेज़ुएला के मामले में किया है, जो वेनेज़ुएला और अमेरिका दोनों के लिए बहुत फ़ायदेमंद साबित हो रहा है।इसे भी पढ़ें: भारतीय जहाजों पर हमले के बीच Trump से आमने सामने बात करेंगे PM ! Modi की France और Slovakia यात्रा पर दुनियाभर की नजरेंट्रंप ने बुधवार को कहा था कि अमेरिका ईरान पर फिर से हमले शुरू करेगा, क्योंकि उन्होंने वॉशिंगटन के साथ डील पूरी करने में तेहरान की देरी पर नाराज़गी ज़ाहिर की थी। ओवल ऑफ़िस में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि हम उन पर हमला करने जा रहे हैं, बहुत ज़ोरदार हमला करेंगे। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा अमेरिकी अपाचे हेलिकॉप्टर को मार गिराए जाने से दोबारा मिलिट्री एक्शन लेने का आधार मिला है। उन्होंने पत्रकारों से कहाकि हेलीकॉप्टर वाली घटना को देखते हुए, मुझे लगता है कि हमारे पास ऐसा करने का अधिकार है। उन्होंने आगे कहा कि हमने कल उन पर ज़ोरदार हमला किया था। आज हम फिर से उन पर ज़ोरदार हमला करेंगे ताकि अगर आपने कल का हमला नहीं देखा हो या टीवी न चलाया हो, तो भी आपको पता चल जाए - और फिर देखेंगे कि डील का क्या होता है।इसे भी पढ़ें: Iran-Israel War: क्या &#039;Ghost&#039; खामेनेई बदलेंगे मिडिल ईस्ट का गेम? ट्रंप vs नेतन्याहू की असली कहानी | No Filterबुधवार को US सेंट्रल कमांड ने बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान में कई ठिकानों पर अतिरिक्त आत्मरक्षा हमले (self-defence strikes) किए। इन हमलों में तेहरान की सैन्य निगरानी क्षमताओं, संचार प्रणालियों और देश भर में मौजूद एयर डिफेंस साइट्स को निशाना बनाया गया। सेंटकॉम के अनुसार, US मरीन कॉर्प्स, एयर फ़ोर्स और नेवी की टुकड़ियों ने ईरान के उन ठिकानों पर सटीक हमले किए जिनसे इस इलाके में अमेरिकी सेना और अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल जहाजों को खतरा था। ये हमले ईरान की लगातार और बिना वजह की आक्रामकता का जवाब हैं, और अमेरिकी सेना पूरी तरह सतर्क, सक्षम और तैयार है। इस बीच, CNN ने खबर दी है कि रात भर चली बातचीत के बाद भी US-ईरान के बीच बातचीत जारी है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>आज, रात, ईरान, पर, होगा, बहुत, बड़ा, हमला, ट्रंप, की, सीधी, धमकी, तेल, भंडारों, पर, भी, कब्ज़े, का, ऐलान</media:keywords>
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<title>Iran&#45;US Ceasefire Confirmed | अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम समझौता तय, सप्ताहांत पर यूरोप में होंगे हस्ताक्षर, Donald Trump ने जारी किया बयान</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाले और बड़े घटनाक्रम में घोषणा की है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने का समझौता लगभग तय हो चुका है। इस ऐतिहासिक समझौते पर इसी सप्ताहांत (Weekend) यूरोप में हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। यह घोषणा ट्रंप द्वारा ईरान के तेल उद्योग पर कब्जा करने की धमकी देने और उसके कुछ ही घंटों बाद इस्लामिक गणराज्य पर सैन्य हमले रोकने के फैसले के बाद सामने आई है।बृहस्पतिवार दोपहर को व्हाइट हाउस के &#039;ओवल ऑफिस&#039; में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात के संकेत दिए कि इस हाई-प्रोफाइल हस्ताक्षर समारोह में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस भी शामिल हो सकते हैं। ट्रंप ने बृहस्पतिवार दोपहर ‘ओवल ऑफिस’ (अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय) में संवाददाताओं से कहा कि उपराष्ट्रपति जे डी वेंस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं, जो संभवतः इस सप्ताहांत यूरोप में आयोजित होगा।अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने वार्ता के नए दौर को लेकर कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और पाकिस्तान समेत पश्चिम एशिया के कई देशों के नेताओं से बातचीत की है।
 बाद में जॉर्जिया के लेफ्टिनेंट गवर्नर बर्ट जोन्स के समर्थन में आयोजित एक डिजिटल रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध समाप्त कर दिया है।
 उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि आपने सुना या नहीं, लेकिन आज (बृहस्पतिवार को) हमने ईरान के साथ युद्ध समाप्त कर दिया है और उन्होंने कभी परमाणु हथियार न रखने पर सहमति जताई है। यही हमारी प्रमुख शर्त थी और इसी उद्देश्य से यह सब किया गया था।’’
 इससे पहले ‘ओवल ऑफिस’ में ट्रंप ने कहा कि शेयर बाजार इस समझौते का स्वागत कर रहा है और जल्द इस पर हस्ताक्षर होंगे। उन्होंने कहा कि समझौता अंतिम रूप लेने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोल दिया जाएगा।
 ट्रंप ने कहा, “यह एक बहुत मजबूत समझौता ज्ञापन है। यह थोड़ा वैचारिक लग सकता है, लेकिन इसे लागू किया जाएगा। यह बेहद विस्तृत समझौता ज्ञापन है।”
 उन्होंने दावा किया कि ईरान ने स्थायी रूप से परमाणु हथियार हासिल करने के किसी भी प्रयास को छोड़ने का वचन दिया है।
 ट्रंप ने कहा, ‘‘वे किसी भी रूप में परमाणु हथियार न खरीदेंगे, न विकसित करेंगे और न ही उनके पास परमाणु हथियार होगा।’’
 ईरान के समझौते पर सहमत होने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें इतनी भारी मार झेलनी पड़ी है, जितनी बहुत कम लोग झेल सकते हैं। मुझसे भी ज्यादा उन्हें इस समझौते को करने की इच्छा थी।’’
 ट्रंप ने बृहस्पतिवार सुबह ईरान को ‘‘बहुत कड़ी’’ कार्रवाई की चेतावनी दी थी और उसके प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर नियंत्रण करने की धमकी दी थी।
 हालांकि, कुछ ही घंटों बाद उन्होंने अचानक सैन्य हमले रद्द कर दिए और दावा किया कि शांति वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
 ईरान के साथ सप्ताहांत में शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने संबंधी टिप्पणी ट्रंप ने उस कार्यक्रम के दौरान की, जिसमें उन्होंने प्रशांत महासागर के संरक्षित क्षेत्रों में वाणिज्यिक मछली पकड़ने की गतिविधियों को बहाल करने की घोषणा की।
 पिछले कुछ सप्ताहों से ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि अमेरिका और ईरान किसी समझौते के करीब हैं, लेकिन अब तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हो सका है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>भारत: ओडिशा में बदलते मौसम में किसानों की ढाल बना मोबाइल ऐप</title>
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<description><![CDATA[ भारत के पूर्वी प्रदेश ओडिशा के गंजम ज़िले में, विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की RIISE परियोजना, छोटे और महिला किसानों को मौसम, फ़सल व बाज़ार से जुड़ी ताज़ा जानकारी उपलब्ध करा रही है. इससे उन्हें बदलती जलवायु के अनुरूप बेहतर तैयारी करने और अपनी आजीविका सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:12:23 +0530</pubDate>
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<title>जिस सामान पर नेपाल&#45;जापान ने लगाया बैन, उस पर अमेरिका&#45;ब्रिटेन ने कर डाला मालामाल</title>
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<description><![CDATA[ अंतरराष्ट्रीय बाजार में चल रही मौजूदा व्यापारिक खींचतान ने वैश्विक मार्केट एक्सपर्ट्स को हैरान कर दिया है। भारत के एक बेहद खास और दुनिया भर में पसंद किए जाने वाले रसीले उत्पाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर भारी तनाव की स्थिति है। एक तरफ क्वालिटी मानकों को सर्वोपरि रखने वाले जापान ने अचानक कड़े नियम लागू कर इस भारतीय सामान के आयात पर रोक लगा दी है। वहीं दूसरी ओर, जापान की राह पर चलते हुए पड़ोसी देश नेपाल ने भी रातों-रात अपनी सीमाओं पर पहरा सख्त कर दिया। स्थिति यह है कि नेपाल बॉर्डर पर सामान से लदे ट्रकों की लंबी कतारें लग गई हैं और कई ट्रकों को सीज कर दिया गया है। नेपाली प्रशासन का साफ कहना है कि वे इस खेप को अपनी सीमा के अंदर दाखिल नहीं होने देंगे।इसे भी पढ़ें: Market Opening Bell: ग्लोबल संकेतों की कमजोरी के बीच सेंसेक्स बढ़त के साथ खुला, निफ्टी सपाट, रिलायंस में 1.20% की तेजीइसे कहते हैं वक्त बदलते देर नहीं लगती! जिस भारतीय सामान को नेपाल और जापान ने कमतर आंककर अपने यहां एंट्री देने से मना कर दिया था, उसी सामान ने दुनिया के सबसे अमीर देश अमेरिका में तहलका मचा दिया है। अमेरिका के सबसे महंगे मॉल्स और सुपरमार्केट्स में जब यह सामान पहुंचा, तो बिक्री की ऐसी सुनामी आई कि पुराने सारे रिकॉर्ड ताश के पत्तों की तरह बिखर गए। सिर्फ दो घंटे के अंदर सारा स्टॉक &#039;आउट ऑफ स्टॉक&#039; हो गया। अमेरिकी अधिकारी भी इस क्रेज को देखकर अपना सिर खुजलाने पर मजबूर हैं कि आखिर इस सामान में ऐसा क्या जादू है, जिसने अमेरिकी नागरिकों को दीवाना बना दिया है। उधर दुनिया भर पर कभी राज करने वाले ब्रिटेन ने तो नेपाल और जापान की बैन को सीधा ठेंगा दिखाते हुए सीधे भारत के एक छोटे से गांव की महिलाओं के साथ में डील पक्की कर डाली और पूरी की पूरी खेप ही समुंदर पार मंगवा ली। भारत का यह सामान रातों-रात ग्लोबल मार्केट का सुपरस्टार बन गया है और विदेशी डॉलर्स की ऐसी बारिश हुई है कि आज भारत तगड़ा मालामाल हो रहा है। जापान और नेपाल के इस अचानक लगाए गए बैन के पीछे क्या वास्तव में सिर्फ फूड सेफ्टी का बहाना है या इंटरनेशनल मार्केट में भारत की बढ़ती रफ्तार को रोकने की कोई बहुत गहरी साजिश चल रही है।इसे भी पढ़ें: 439 दिन, Nehru का Record ध्वस्त! PM Modi के काम का America भी हुआ कायल, सांसद ने की तारीफजिस सामान की हम बात कर रहे हैं वह कोई हाईटेक गैजेट या फिर कोई कार या कोई भारी मशीनरी नहीं है बल्कि वो है हमारे खेतों की शान और फसलों का राजा भारतीय आम यानी कि मैंगो। वही मैंगो जो हमारे और आपके घरों में गर्मियों की पहचान होता है। लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में इस मैंगो ने जो तहलका मचाया है उसकी कहानी किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म से बिल्कुल कम नहीं है। दुनिया भर के भारतीय आम सिर्फ एक फल नहीं बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर का सबसे तगड़ा हथियार बन चुके हैं। लेकिन इससे पहले कि  जापान और नेपाल की साजिश पर आए।  यह समझना होगा कि आखिर भारत के पास में ऐसा क्या है जिसके लिए दुनिया के बड़े-बड़े देश पागलों की तरह लाइन लगाए हुए खड़े हैं। भारत कोई एक तरह का आम नहीं उगाता बल्कि हमारे यहां आमों की एक पूरी की पूरी फौज और हर एक आम अपने आप में एक अलग ब्रांड है। शुरुआत करते हैं अल्फांसो से जिसे आमों का राजा कहा जाता है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी और देवगढ़ की लाल मिट्टी में पैदा होने वाला यह हाफूस जब इंटरनेशनल मार्केट के अंदर उतरता है तो उसके कीमत और डिमांड देखकर के अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं। इसके बाद में नंबर आता है  गुजरात की शान केसर आम का। 1.5 टन आम्रपाली आम की खेप ब्रिटेन रवानावाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाली कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने झारखंड से ब्रिटेन के लिए ताजा आमों की पहली व्यावसायिक खेप को रवाना किया है। यह खेप 4 जून को कोलकाता से लंदन के लिए भेजी गई। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करके जानकारी दी। उन्होंने लिखा- &quot;Local Goes Global का सशक्त उदाहरण...झारखंड के सिमडेगा की महिला किसान उत्पादक कंपनी द्वारा उगाए गए आम्रपाली आम यूनाइटेड किंगडम पहुंचने वाले हैं। APEDADOC के निरंतर प्रयासों से किसानों को बेहतर मूल्य, महिलाओं को नई पहचान और भारत के कृषि निर्यात को नई गति मिल रही है।&quot;  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:54:27 +0530</pubDate>
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<title>सड़क पर चलते लोगों पर पीछे से बरसी गोलियां... दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में अंधाधुंध फायरिंग से 12 की मौत</title>
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<description><![CDATA[ पुलिस ने बुधवार को बताया कि मंगलवार शाम जोहान्सबर्ग के पूर्व में क्लीवलैंड की एक अनौपचारिक बस्ती में बंदूकधारियों की गोलीबारी में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और नौ लोग घायल हो गए। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने एक बयान में कहा कि &#039;जंपर्स&#039; अनौपचारिक बस्ती में हुए हमले के बाद 10 से ज़्यादा संदिग्धों की तलाश शुरू कर दी गई है। दक्षिण अफ्रीका में अनौपचारिक बस्तियां बिना योजना के बनी रिहायशी इलाके होते हैं, जो मुख्य रूप से झुग्गियों या वैसी ही संरचनाओं से बने होते हैं। हमले का मकसद अभी तक पता नहीं चल पाया है और जांच शुरू कर दी गई है।इसे भी पढ़ें: West Bengal: जबरन वसूली के आरोपी TMC नेता Jahangir Khan गिरफ्तार, कोर्ट ने 5 दिन की रिमांड दीरॉयटर्स के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध एक सफ़ेद टोयोटा क्वांटम गाड़ी में आए, बस्ती में दो रास्तों से दाखिल हुए और कई जगहों पर गोलीबारी करने के बाद उसी गाड़ी में भाग गए। स्काई न्यूज़ के मुताबिक, अधिकारियों को घटनास्थल पर कई लोग मिले जिन्हें कई गोलियां लगी थीं। वहां आठ पुरुषों और तीन महिलाओं को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि एक अन्य व्यक्ति की बाद में अस्पताल में चोटों के कारण मौत हो गई। दक्षिण अफ़्रीका में बड़े पैमाने पर गोलीबारी की समस्यादक्षिण अफ़्रीका में हत्या की दर दुनिया में सबसे ज़्यादा है, जहाँ हर दिन औसतन 60 हत्याएँ होती हैं। हाल ही में दक्षिण अफ़्रीका में बड़े पैमाने पर गोलीबारी की कई हाई-प्रोफ़ाइल घटनाएँ हुई हैं, जिनमें दिसंबर की दो घटनाएँ भी शामिल हैं; इनमें कुल मिलाकर 20 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई। इनमें से एक घटना में कई हमलावर शामिल थे। गोलीबारी की इन घटनाओं का संबंध कभी-कभी अवैध माइनिंग करने वाले गिरोहों से जोड़ा जाता है, जो जोहान्सबर्ग और उसके आस-पास सक्रिय हैं। क्लीवलैंड एक ऐसा इलाका है जो अवैध माइनिंग की गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:54:27 +0530</pubDate>
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<title>नेतन्याहू से हर कोई काट रहा कन्नी, ट्रंप के बाद अब इन देशों ने छोड़ा साथ?</title>
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<description><![CDATA[ ईरान को पूरी तरह से कुचलने या फिर वहां सत्ता परिवर्तन करने की बेंजामिन नेतन्याहू की जो ज़िद है, वह अब खुद इजराइल की सुरक्षा और उसकी कूटनीतिक साख के लिए सबसे बड़ा जोखिम बन गई है। खाड़ी देशों से लेकर उसके सबसे बड़े मददगार अमेरिका तक हर कोई अब इजराइल के इस आक्रामक रवैया से तंग आकर दूरी बनाता दिख रहा है। हालिया घटनाक्रमों ने यह साफ कर दिया है कि मध्यपूर्व की राजनीति में इज़राइल इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। इस कूटनीतिक संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू से फोन पर तीखी बहस के दौरान कहा कि आप मेरी वजह से अब तक जेल में नहीं गए। आप मेरी शांति योजना में दखल देकर उसे बिगाड़ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक ट्रंप ने फोन पर नेतन्या को साफ लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि संभल जाओ नहीं तो बहुत जल्दी तुम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिल्कुल अकेले पड़ जाओगे। इसे भी पढ़ें: Ebola Outbreak: Trump प्रशासन का Europe पर दबाव, Congo-Uganda से आने वालों पर लगे रोकट्रंप ने साफ कर दिया कि वाशिंगटन और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता होने जा रहा है और वे इजराइल की ज़िद के कारण इस पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतरने नहीं देंगे। ट्रंप ने कड़े लहजे में कहा कि वैश्विक नीतियां अमेरिका तय करता है इजराइल नहीं। नेतन्याहू सरकार की ईरान नीति का सबसे बड़ा नुकसान इजराइल को खाड़ी देशों के मोर्चे पर हुआ है। साल 2020 में जिस अब्राहम अकॉर्ड के जरिए यूएई और बहरीन ने इजराइल के साथ ऐतिहासिक दोस्ती की शुरुआत की थी, वह अब टूट की कगार पर है। लगातार बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय युद्ध के खतरे को देखते हुए यूएई और बहरीन ने खुद को इजराइल के सैन्य आक्रामक रुख से पूरी तरह से दूर कर लिया है। हाल ही में इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने दावा किया था कि युद्ध के बीच पीएम नित नेतन्याहू ने यूएई का सीक्रेट दौरा किया और वहां के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहान से मुलाकात की है। लेकिन यूएई के विदेश मंत्रालय ने चंद घंटों के भीतर इस दावे का बेहद कड़े लहजे में आधिकारिक खंडन कर दिया। यूएई ने स्पष्ट किया कि वह इजराइल के साथ किसी भी तरह के गुप्त सैन्य या फिर सुरक्षा समझौते का हिस्सा नहीं है। जानकारों के मुताबिक ईरान की सीधी सैन्य धमकियों और मुस्लिम जगत में अपनी छवि खराब होने के डर से खाड़ी देश अब इजराइल से कड़ा पल्ला झाड़ रहे हैं। दूसरी ओर बहरीन भी गजा और लेबनान में चल रही इजराइली सैन्य कारवाइयों के कारण असहज महसूस कर रहा है और उसने भी आपत्तियां दर्ज करवाई हैं। इसे भी पढ़ें: जिस सामान पर नेपाल-जापान ने लगाया बैन, उस पर अमेरिका-ब्रिटेन ने कर डाला मालामालसाल 2023 में गजा में सैनिक कार्रवाई शुरू करने के बाद से ही बहरीन ने अपने राजनिक को इजराइल से वापस बुला लिया था। क्यों उल्टा पड़ा नेतन्याहू का राजनीतिक दांव? बेंजामिन नेतन्याहू का पूरा राजनीतिक करियर और उनकी घरेलू साख इस बात पर टिकी थी कि वे इजराइल को अभैद्य सुरक्षा देंगे और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए नेस्तनाबूद कर देंगे। लेकिन उनकी ज़िद अब उन्हीं पर भारी पड़ रही है। ट्रंप जहां जल्द से जल्द इस युद्ध को खत्म कर वैश्विक तेल की कीमतों को स्थिर करना चाहते हैं, वहीं नेतनया अपने ऊपर चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों और घरेलू राजनीतिक दबाव के कारण युद्ध को खींचना चाहते हैं। गाजा, लेबनान और अब ईरान के साथ त्रिकोणीय मोर्चे पर लड़ते-लड़ते इजराइली सेना और वहां की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई है। इजराइल के अपने रक्षा विशेषज्ञ मान रहे हैं कि नेतन्याहू की ज़िद ने देश को दुनिया की नजरों में एक परिया स्टेट यानी कि अलग-थलग देश बनाकर खड़ा कर दिया है। डॉनल्ड ट्रंप के बाहरी आर्थिक और कूटनीतिक दबाव के बाद फिलहाल इजराइल और ईरान दोनों ने ही अपने हमलों को रोकने के संकेत दिए हैं। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक दौर में युद्ध केवल सैन्य ताकत से नहीं बल्कि कूटनीति से जीते जाते हैं। अमेरिका जैसी महाशक्ति के पीछे हटने और अरब देशों की बेरुखी के बाद इजराइल को अब यह समझ आ गया है कि ईरान को पूरी तरह से मिटाने की उसकी ज़िद खुद उसके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:54:26 +0530</pubDate>
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<title>अपाचे पर हमले का अमेरिका ने लिया बदला, Iran के एयर डिफेंस को किया तबाह!</title>
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<description><![CDATA[ 9 जून की रात जब पूरी दुनिया सो रही थी, तभी खाड़ी के देशों में आसमान आग उगल रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति के एक आदेश ने मिडिल ईस्ट की पूरी तस्वीर बदल कर रख दी। अमेरिका ने सीधे ईरान के सैन्य ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की है और यह हमला इतना सटीक और इतना घातक था कि ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम ताश की पत्तों की तरह ढह गए। लेकिन आखिर अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया? दरअसल अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि उनकी सेनाओं ने ईरान के खिलाफ सेल्फ डिफेंस स्ट्राइक पूरी कर ली है। यह कोई मामूली झड़प नहीं थी। इसे भी पढ़ें: होर्मुज में गिरा अमेरिकी हेलीकॉप्टर, ट्रंप ने दिया बड़ा बयानअमेरिकी वायुसेना और नौसेना के सबसे आधुनिक फाइटर जेट्स ने ईरान के उन ठिकानों को निशाना बनाया जो सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण थे। अब निशाने पर क्या था यह जान लीजिए। दरअसल सबसे पहला था एयर डिफेंस साइट्स ताकि ईरानी जवाबी हमला ना कर सके। इसके अलावा ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन जहां से ड्रोन और मिसाइलें ऑपरेट की जाती है। इसके अलावा सर्िलांस रडार स्टेट ऑफ हॉर्मोज के पास स्थित वो रडार जो हर समुद्री हलचल पर नजर रखते थे। अब इस भीषण हमले के पीछे की कहानी शुरू होती है 8 जून से। उस दिन अमेरिकी सेना का एक अपाचे हेलीकॉप्टर मार गिराया गया था। इसे भी पढ़ें: भारत ने पहली बार तैनात किए 12 परमाणु बम, खुलासे से हिली दुनिया!अमेरिका का दावा था कि इसके पीछे ईरान समर्थित ताकतों या खुद ईरान का हाथ था। अमेरिका में एक नियम बहुत साफ है। अगर आप किसी अमेरिकी सैनिक या संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं तो उसका अंजाम बुरा होगा और राष्ट्रपति ट्रंप ने तुरंत जवाबी कार्रवाई के आदेश दिए और अगले ही दिन ईरान को इसकी कीमत चुकानी पड़ी। ईरान पर यह हमले स्टेट ऑफ हॉर्मुज के पास किए गए हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि यह जगह क्यों? देखिए दुनिया का करीब 20 से 30% कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।इसे भी पढ़ें: Court पर लौटेगा Roger Federer का जादू! US Open में फैंस को मिलेगा खास तोहफाईरान अक्सर इस रास्ते को बंद करने की धमकी देता रहता है। अमेरिका का कहना है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर हमले कर रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरे में डाल रहा है। और यह हमला ईरान को एक कड़ा संदेश है कि समुद्र पर उसकी दादागिरी नहीं चलेगी। पेंटागन ने इसे एक प्रपोशनल रिस्पांस यानी आुपातिक प्रतिक्रिया कहा है। इसका मतलब है जितना नुकसान अमेरिका का हुआ उतना ही सटीक जवाब उन्होंने दिया। पिछले कुछ महीनों में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले बढ़ रहे हैं। लाल सागर से लेकर ओमान की खाड़ी तनाव चरम पर है। अमेरिका का कहना है कि वह युद्ध नहीं चाहते हैं। लेकिन अगर उनकी सुरक्षा पर आंच आई तो वह चुप नहीं बैठेंगे।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:54:26 +0530</pubDate>
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<title>Afghanistan में Pakistan की एयरफोर्स ने किया हमला, भड़का तालिबान!</title>
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<description><![CDATA[ अपनी जनता को आटा तक नहीं खिला पा रहे और दुनिया के सामने कटोरा लेकर खड़े हैं।  लेकिन इसके साथ ही पड़ोसियों के घर में घुसकर बमबारी कर रहे हैं। जिस पाकिस्तान की अपनी जमीन आतंकियों की फैक्ट्री बनी हुई है, उसी की बुजदिल सेना ने आधी रात के अंधेरे में अफगानिस्तान के मासूम लोगों पर हवाई हमले कर दिए। 11 मासूम बच्चे, वो बच्चे जिन्होंने अभी दुनिया देखी तक नहीं थी, उन्हें पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों ने मलबे में दफन कर दिया। पाकिस्तान समझ रहा है कि वो ताकतवर है। नहीं, यह उसकी ताकत नहीं बल्कि हार की बौखलाहट है। दरअसल, बीती रात पाकिस्तानी एयरफोर्स के विमानों ने अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर को पार किया। जैसा कि अफगानिस्तान का दावा है और तालिबान ने इसकी पुष्टि भी की। निशाना कोई छावनी नहीं थी। निशाना थे कुनार खोस और पकिका के वो रिहाइशी इलाके जहां आम अफगानी नागरिक सुकून से रहते थे। इसे भी पढ़ें: भारत ने पहली बार तैनात किए 12 परमाणु बम, खुलासे से हिली दुनिया!जबीहुल्लाह मुजाहिद ने साफ कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की संप्रभुता को चुनौती दी है। पाकिस्तान ने उन घरों पर बम गिराए जहां परिवार सो रहे थे। यह हमला नहीं यह सरेआम कत्लेआम है।  पाकिस्तान जो कल तक मुस्लिम उमा की दुआही देता था आज उसी ने बच्चों की जान ले ली। अब दुनिया पूछ रही है जिस देश के पास अपने जहाजों में तेल डलवाने के पैसे नहीं है वो युद्ध का नाटक क्यों कर रहा है? दरअसल यह पाकिस्तान की पुरानी फितरत है। जब घर में आग लगी हो तो पड़ोसी पर पत्थर फेंको। पाकिस्तान के अंदर गृह युद्ध जैसा माहौल है और अर्थव्यवस्था वेंटिलेटर पर है। लेकिन अपनी जनता को बेवकूफ बनाने के लिए उसने अफगानिस्तान के निर्दोष लोगों की जान ले ली। लेकिन पाकिस्तान भूल गया कि 1971 वाला दौर नहीं है। अफगानिस्तान के लड़ाके वो हैं जिन्होंने महाशक्तियों को घुटने पर टेकने को मजबूर कर दिया। अगर तालीबान ने अपनी डूरंड लाइन वाली तोप खोल दी तो लाहौर और इस्लामाबाद तक भागने की जगह भी पाकिस्तानी सेना और वायु सेना को नहीं मिलेगी। इसे भी पढ़ें: POJK में Pakistan Army का खूनी खेल! तस्लीमा अख्तर ने दुनिया से लगाई न्याय की गुहारअब सवाल यह है कि क्या ये 11 मासूम पाकिस्तान के लिए खतरा थे? नहीं बिल्कुल नहीं। अफगानिस्तान की धरती पर आज मातम जरूर है। 13 लोगों ने अपनी जान गवाई और जान लेने वाला पाकिस्तान है जिसमें महिला और बुजुर्ग भी शामिल है। 14 लोग अस्पतालों में तड़प रहे हैं। जब उल्ला मुजाहिद का गुस्सा अब बारूद बन चुका है। अफगानिस्तान ने इसे अमानवीय अपराध कहा है और जानकारों का कहना है कि यह पाकिस्तान का आखिरी दांव है। वो अफगानिस्तान को उकसा रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति मिल सके।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:54:25 +0530</pubDate>
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<title>Project 18 Destroyer आखिर है क्या? जिसने चीन&#45;पाकिस्तान दोनों की उड़ा दी नींद</title>
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<description><![CDATA[ प्रोजेक्ट 18 एक ऐसा प्रोजेक्ट जो भारतीय नौसेना की तस्वीर बदल देगी। समंदर में इंडियन नेवी को सिकंदर बना देगा। चीन पाकिस्तान जैसे देश समंदर में भारत की ताकत का मुकाबला भी नहीं कर पाएंगे। इस प्रोजेक्ट के तहत भारत अब सिर्फ सामान्य युद्धपोत यानी डिस्ट्रयर नहीं बल्कि उससे कहीं बड़ा और दुनिया का सबसे शक्तिशाली क्रूजर क्लास युद्धपोत बनाने की तैयारी में है। यह नया जहाज भारतीय नौसेना का अब तक का सबसे बड़ा और घातक सरफेस वॉरशिप होगा जो समंदर में दुश्मनों के होश उड़ा देगा। ग्रीक सिटी टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि इस जहाज का वजन करीब 11,000 से 13,000 टन के बीच होगा और इसकी लंबाई लगभग 180 मीटर तक हो सकती है। यानी यह समंदर में तैरते हुए एक किले की तरह दिखाई देगा। इस महाविशाल जहाज को चलाने के लिए इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन यानी आईईपी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसे भी पढ़ें: Bengal में अब नहीं बचेगा कोई घुसपैठिया, Suvendu Adhikari सरकार ने Bangladeshi Infiltrators के खिलाफ छेड़ दिया आर-पार का अभियानयह एक ऐसी एडवांस तकनीक है जो जहाज को बहुत ज्यादा बिजली देगी। सबसे बड़ी बात यह समंदर के अंदर बिल्कुल भी आवाज नहीं करेगा। इससे दुश्मन की पनडुब्बियां इसे ढूंढ नहीं पाएंगी और यह चुपके से अपना काम कर सकेगा। इस जहाज को मिलने वाली भारी भरकम बिजली का इस्तेमाल भविष्य के खतरनाक हथियारों को चलाने में होगा। इसमें बेहद एडवांस रडार सिस्टम और डायरेक्टेड एनर्जी पर लगाए जाएंगे। जो पलक झपकते ही दुश्मन के मिसाइलों और विमानों को हवा में ही भस्म कर देंगे। यह जहाज पूरी तरह से डिजिटल और ऑटोमेटिक होगा। हाईटेक मशीनों के कारण इस जहाज को चलाने के लिए मौजूदा जहाजों के मुकाबले 25 से 30% कम क्रूड की जरूरत पड़ेगी। इससे नौसेना का खत भी बचेगा और काम भी तेजी से होगा। यह युद्धपोत सिर्फ खुद लड़ाई नहीं लड़ेगा बल्कि समंदर का बॉस बनकर काम करेगा। इसे भी पढ़ें: Zoji La Tunnel ने रचा इतिहास, बर्फ और तूफान नहीं रोक पाएंगे रास्ता, हर मौसम में Kashmir से जुड़ा रहेगा Ladakhयह एक मल्टीडोमेन कमांड हब होगा जो आसमान में उड़ने वाले ड्रोन समंदर की सतह पर तैरने वाले बिना इंसानों की नाभव और पानी के नीचे चलने वाले ड्रोन को एक साथ कंट्रोल और गाइड कर सकेगा। इस युप्पोध की सबसे हैरान करने वाली बात इसका घातक वेपन सिस्टम है। प्रोजेक्ट 18 के तहत इस जहाज में 144 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम सेल्स होने की उम्मीद है। इसके अलावा इस जहाज के बीच के हिस्से में स्लंट लांचर भी लगाए जा सकते हैं। हथियारों का यह महाविनाशक कॉम्बिनेशन इसे पूरे एशिया का सबसे भारी और खतरनाक हथियारों वाला युद्धपोत बना देगा। दुश्मनों के लिए इस जहाज को छू पाना भी नामुमकिन होगा। यह युद्धपोत एक मजबूत और कई परतों वाले एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम से पूरी तरह से लैस होगा। इतना ही नहीं इस जहाज में खास एंटीबलेस्टिक मिसाइल सिस्टम भी होगा जो 250 से 350 किलोमीटर की दूरी से ही दुश्मन की बैलेस्टिक मिसाइलों को पहचान कर उन्हें हवा में ही मलबे में तब्दील कर देगा।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:54:24 +0530</pubDate>
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<title>PM मोदी ने रचा इतिहास, बधाई देने टूट पड़े मित्र देश,  Italy से लेकर पूरी दुनिया ने जानें क्या कहा?</title>
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<description><![CDATA[ आज नरेंद्र दामोदर दास मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए। 4399 दिन आज उन्होंने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के 4398 दिनों के लगातार शासन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। यह महज एक संख्या नहीं है बल्कि 140 अरब भारतीयों के उस अटूट विश्वास की जीत है जिसने लगातार तीन बार एक ही नेता को पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता की कमान सौंपी। आज वाशिंगटन से लेकर टोक्यो तक और मॉस्को से लेकर अबू धाबी तक दुनिया के ताकतवर देशों के नेता भारत की इस स्थिरता को सलाम कर रहे हैं। दरअसल साल 2014 में जब सत्ता परिवर्तन हुआ तब भारत की अर्थव्यवस्था फ्रिजाइल फाइव में थी। प्रधानमंत्री मोदी ने सबका साथ सबका विकास का विज़न दिया। जनधन योजना के तहत 50 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खोले गए जिससे लीकेज खत्म हुई। हाईवे निर्माण की गति 12 कि.मी. प्रतिदिन से बढ़ाकर 37 कि.मी. प्रतिदिन हुई। करोड़ों महिलाओं को धुआ मुक्त रसोई और 55 करोड़ लोगों को 5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिला। 2019 में जनता ने और भी बड़ा जनादेश दिया। जिसके बाद भारत ने अपनी आंतरिक और बाहरी नीतियों में बदलाव किए। इसे भी पढ़ें: मोदी ने नेहरु का रिकॉर्ड तोड़ने के साथ ही कांग्रेस का घमंड भी चकनाचूर कर दिया हैअनुच्छेद 370 का निष्प्रभावी होना और कश्मीर में रिकॉर्ड पर्यटन शांति का आना इसी का परिणाम है। भारत दुनिया की 10वीं अर्थव्यवस्था से छलांग लगाकर पांचवी सबसे बड़ी शक्ति बन गया। यूपीआई के जरिए भारत आज दुनिया का 46% डिजिटल ट्रांजैक्शन अकेले कर रहा है। भव्य राम मंदिर का निर्माण और काशी महाकाल कॉरिडोर ने भारत की सांस्कृतिक चेतना को पुनर्जीवित कर दिया। 10 जून 2026 तक यह समय भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने और साल 2047 के विकसित भारत के रोड मैप को जमीन पर उतारने का रहा है। सेमीकंडक्टर हब, एआई मशीन और गगनयान इस नए भारत की पहचान है। आज दुनिया भारत की ओर हाथ फैलाकर खड़ी है। पीएम मोदी की कूटनीति ने गुटनिरपेक्षता से आगे बढ़कर सर्वमित्र की नीति अपनाई है और इसी का परिणाम यह है कि आज दुनिया का हर कोना पीएम मोदी को बधाई दे रहा है। सबसे पहले बात इटली की तो इटली के प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी को टैग करते हुए लिखा कि भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर नरेंद्र मोदी को ढेर सारी शुभकामनाएं। मेलोनी ने रोम में हुई अपनी द्विपक्षी मुलाकात को याद करते हुए कहा कि दोनों देशों ने मिलकर एक विशेष रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की है जो भविष्य के नागरिकों के लिए प्रगति के नए अवसर पैदा करेगी। तो वहीं श्रीलंका की बात करें तो श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुराग कुमारा ने याद दिलाया कि साल 2022 के आर्थिक संकट में जब दुनिया ने मुंह मोड़ लिया था तब भारत ने $4 अरब डॉलर की सहायता भेजकर श्रीलंका को डूबने से बचा लिया था। ऐसे में आज श्रीलंका का भारत की स्थिरता पर बधाई देना सिद्ध करता है और बताता है कि पीएम मोदी दक्षिण एशिया में एक बड़े भाई और भरोसेमंद साथी के रूप में स्थापित हैं। इसे भी पढ़ें: NDA नेताओं ने PM मोदी को दी बधाई, भारत मंडपम में झालमुड़ी का आनंद लियातो वहीं इथियोपिया की बात करें तो इथियोपिया के प्रधानमंत्री अभी अहमद अली ने भावुक होते हुए लिखा कि मैं अपने बड़े भाई और प्रिय मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देता हूं। उनकी सरकार ने करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए आर्थिक प्रगति तेज की। तो वहीं नाइजीरिया भी पीछे नहीं रहा। नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला अहमद ने पीएम मोदी को अपना व्यक्तिगत मित्र और भरोसेमंद सहयोगी बताया। अपने ट्वीट के जरिए उन्होंने लिखा उन्होंने नाइजीरिया के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द नाइजर का जिक्र करते हुए पीएम मोदी के प्रभावशाली नेतृत्व की सराहना की जमकर सराहना की। तो वहीं पपुआ न्यूगिनी के पीएम जेम्स का व्यक्तिगत वीडियो संदेश उस सम्मान की याद दिला रहा है जब उन्होंने पीएम मोदी के पैर छुए थे। इतना ही नहीं प्रशांत द्वीपीय देशों के लिए भारत ने क्लाइमेट चेंज और स्वास्थ्य क्षेत्र में जो मदद की है उसने पश्चिमी देशों को भी पीछे छोड़ दिया है। मरापे ने पीएम मोदी को गरीबों का मसीहा कहा क्योंकि 25 करोड़ भारतीयों का गरीबी से बाहर निकलना दुनिया के लिए एक चमत्कार सा है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:54:23 +0530</pubDate>
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<title>मुज़फ़्फ़राबाद के पास पाकिस्तानी सेना का Mi&#45;17 हेलीकॉप्टर क्रैश, 21 सैनिकों की मौत</title>
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<description><![CDATA[ मुज़फ़्फ़राबाद के पास पाकिस्तान आर्मी एविएशन का Mi-17 हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया, जिसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई। पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के बयान के अनुसार, यह हादसा हेलिकॉप्टर के उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद हुआ। सेना ने पुष्टि की कि इस हादसे में कोई भी जीवित नहीं बचा। बताया जा रहा है कि हेलिकॉप्टर तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हुआ, हालांकि अधिकारियों ने हादसे के सही कारण का पता लगाने के लिए औपचारिक जांच शुरू कर दी है। &#039;डॉन&#039; के अनुसार, ISPR ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि हेलिकॉप्टर में सवार सभी लोग शहीद हो गए। कोई भी जीवित नहीं बचा। सेना ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद बचाव और रिकवरी टीमों को तुरंत दुर्घटनास्थल पर भेजा गया। अधिकारियों ने जब इस दुखद घटना से जुड़ी परिस्थितियों का आकलन करना शुरू किया, तो आपातकालीन कर्मियों ने इलाके में रिकवरी ऑपरेशन चलाया।इसे भी पढ़ें: Pakistan के खिलाफ PoK में बड़ा Protest, Joint Awami Action Committee के आह्वान पर पूर्ण बंदहादसे की वजह का पता लगाने के लिए जांच के आदेशपाकिस्तान की सेना ने यह पता लगाने के लिए एक जांच बोर्ड बनाया है कि क्रैश की वजह क्या थी। हालांकि शुरुआती जानकारी से तकनीकी खराबी का संकेत मिलता है, लेकिन जांचकर्ता किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचने से पहले सभी संभावित कारणों की जांच करेंगे। सेना के मीडिया मामलों के विभाग ने कहा कि हादसे की सटीक तकनीकी वजह का पता लगाने के लिए एक जांच बोर्ड बनाने का आदेश दिया गया है।&quot; उम्मीद है कि जांच के नतीजों से उन घटनाओं के बारे में और स्पष्टता मिलेगी जिनकी वजह से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।इसे भी पढ़ें: PoK में बवाल के बीच एक्शन मोड में Indian Army, सेनाध्यक्ष General Upendra Dwivedi पहुँचे Northern Commandसेना प्रमुख और सैन्य नेतृत्व ने दुख जतायासेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ-साथ पाकिस्तान सेना के अधिकारियों और जवानों ने क्रैश में जान गंवाने वालों के प्रति गहरा दुख जताया। सैन्य नेतृत्व ने मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले जवानों को श्रद्धांजलि दी। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:54:23 +0530</pubDate>
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<title>चीन के सामने ताइवान ने पहली बार दागे दनादन रॉकेट, चौंक गई दुनिया</title>
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<description><![CDATA[ ताइवान की सेना इस बात की तैयारी कर रही है कि अगर उसके ऊपर दो तरफ़ा हमले हुए तो वह कैसे जवाब देगी।अलग-अलग हथियारों के साथ हमला करने के लिए तैयार ताइवान की सेना किस तरह से अपने आप को युद्ध के लिए तैयार कर रही है। युद्ध में परखे जा चुके हिमरस रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल ताइवान की सेना कर रही है और इस अभ्यास में चीन की हमलावर सेना पर हमले का सिमुलेशन किया गया और यह दिखाया गया कि कैसे शूट एंड स्कूट यानी कि हमला करने के बाद तुरंत जगह बदल लेने की तकनीक के जवाबी हमले से भी बचा जा सकता है और युद्ध में टिके रहने की क्षमता बढ़ाई जा सकती है। ताइवान ने बीते साल पहली बार अपने पूर्वी तट पर लॉकेट मार्टिन द्वारा बनाए गए सटीक निशाना लगाने वाले हथियार हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम यानी कि हेमरस का परीक्षण किया और पहली बार इसे चीन के बिल्कुल सामने वाले पश्चिमी तट यानी मध्य ताइवान के ताईच से फायर किया गया। ताइवान की सरकार अपनी सेना को आधुनिक बना रही है और इसमें नए और आसानी से कहीं भी ले जाए जाने वाले हथियारों को शामिल किया जा रहा है। इसे भी पढ़ें: Indo-Pacific में चीन को झटका! Palau के President Whipps बोले- Taiwan की संप्रभुता से समझौता नहींसाथ ही ट्रेनिंग को ऐसा बनाया जा रहा है जिसका पहले से अंदाजा ना लगाया जा सके और असल लड़ाई के हालात जैसे लगे। एचआईएमआरएस यूक्रेन के मुख्य हमलावरों सिस्टम में से एक है और रूस के साथ युद्ध के दौरान इसका कई बार इस्तेमाल हुआ है। लगभग 300 कि.मी. की रेंज वाला यह हथियार ताइवान जलडमरू मध्य के दूसरी और चीन के दक्षिणी प्रांत फूजियान में तटीय ठिकानों पर हमला कर सकता है। ताइवान के पश्चिमी तट पर मौजूद समुद्री तट और कीचड़ वाले इलाके जो ताइवान स्ट्रीट के पार सीधे चीन के सामने हैं उन्हें किसी भी हमले की स्थिति में चीनी सेना के उतरने की सबसे संभावित जगह मानी जाती है।इसे भी पढ़ें: Philippines Strong Earthquake | मिंडानाओ में 7.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, तटीय इलाकों में उठीं सुनामी की लहरें इस हथियार का इस्तेमाल ताइवान में ही बने थंडरब्ट 2000 लांचर से किया जाएगा। ताकि चीनी सेना को तब निशाना बनाया जा सके जब वह बंदरगाह से निकले या ताइवान के तट पर उतरने की कोशिश करें। जो ताइवान की सेना ने अभ्यास के पहले दिन थंडरब्ट फायर ही किया था और अपनी ताकत दुनिया को दिखाई कि किस तरह से वो चीन से मुकाबले के लिए तैयार है। चीन जो लोकतांत्रिक रूप से शासित ताइवान को अपना इलाका मानता है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:54:22 +0530</pubDate>
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<title>भारत कोष की मदद से डोमिनिका में जलवायु सहनक्षमता और सतत विकास में मदद</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और भारत सरकार के सहयोग से कैरीबियाई क्षेत्र में स्थित देश, डोमिनिका के कलिनागो क्षेत्र में जलवायु सहनक्षमता बढ़ाने और सतत विकास के लिए चलाई जा रही कुछ परियोजनाएँ स्थानीय समुदायों के लिए ठोस मददगार साबित हो रही हैं. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:53:44 +0530</pubDate>
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<media:keywords>भारत, कोष, की, मदद, से, डोमिनिका, में, जलवायु, सहनक्षमता, और, सतत, विकास, में, मदद</media:keywords>
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<title>अफ़ग़ानिस्तान: महिलाओं की गिरफ़्तारियों और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग पर चिन्ता</title>
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<description><![CDATA[ अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने हेरात शहर में महिलाओं की गिरफ़्तारियों और प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने की घटनाओं पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:53:41 +0530</pubDate>
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<title>भारत: सौर ऊर्जा और सामुदायिक नेतृत्व से गाँवों में जल सुरक्षा को मिली नई दिशा</title>
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<description><![CDATA[ भारत के पूर्वी प्रदेश छत्तीसगढ़ के दूरदराज़ आदिवासी गाँवों में सौर ऊर्जा से चलने वाले पम्प अब सुरक्षित पेयजल सीधे घरों तक पहुँचा रहे हैं. इससे महिलाओं और लड़कियों का बोझ कम तो हो ही रहा है साथ ही, ग्रामीण समुदाय जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक मज़बूत बन रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:53:40 +0530</pubDate>
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<title>इसराइली बाशिन्दों और हमास के बीच पिस रहे हैं फ़लस्तीनी जन</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा नियुक्त जाँचकर्ताओं ने नई रिपोर्ट में कहा है कि फ़लस्तीनी नागरिक इस समय इसराइल द्वारा क़ाबिज़ पश्चिमी तट में बढ़ती यहूदी बस्तियों के गम्भीर परिणामों और यहूदी बाशिन्दों की हिंसा के शिकार होने के साथ-साथ, ग़ाज़ा पट्टी में हमास के भय-आधारित शासन के बीच फँसे हुए हैं. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:53:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>मध्य पूर्व में व्यापक टकराव फिर से भड़कने का जोखिम, महासचिव की चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र के शीर्षतम अधिकारी एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व को फिर से गहरे संकट की ओर खींचा जा रहा है और यदि ऐसा हुआ तो इसके दुष्परिणाम व्यापक क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकते हैं. उन्होंने इस सप्ताह वहाँ हुए हमलों और निरन्तर बिगड़ती स्थिति से उपजी चिन्ताओं के बीच, सुरक्षा परिषद की बैठक को सम्बोधित करते हुए यह बात कही है. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:53:37 +0530</pubDate>
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<title>US Iran Military Clash | मिडिल ईस्ट महासंकट! अमेरिकी हमलों में ईरान का वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह, तटीय शहर सिरिक में पीने का पानी बंद</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा छद्म युद्ध (Proxy War) अब एक बेहद खतरनाक और सीधे सैन्य टकराव में बदल चुका है। बुधवार तड़के अमेरिकी वायुसेना ने दक्षिणी ईरान और रणनीतिक रूप से संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास भीषण हवाई हमले किए। ईरान का दावा है कि इन हमलों में तटीय शहर सिरिक (Sirik) में पानी जमा करने वाले दो बड़े टैंक और एक टेलीकम्युनिकेशन टावर पूरी तरह तबाह हो गए हैं, जिससे पूरे शहर की जलापूर्ति (Water Supply) ठप हो गई है। इस घटना ने मिडिल ईस्ट में एक बड़े मानवीय संकट और वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका को जन्म दे दिया है।इस हमले को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए मुंबई में ईरानी वाणिज्य दूतावास ने लिखा, &quot;सिरिक पर अमेरिकी आतंकवादी हमलों में पानी जमा करने वाले दो टैंकों को नुकसान पहुंचा है, जिससे स्थानीय निवासियों के लिए पीने का पानी मिलना बंद हो गया है। नागरिकों के लिए पानी के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना गंभीर मानवीय चिंताएं पैदा करता है।&quot; ईरानी सरकारी मीडिया ने भी खबर दी कि सिरिक में अमेरिकी हमलों में पानी के दो टैंकों को नुकसान पहुंचा, जिससे शहर में पीने के पानी की सप्लाई बाधित हो गई।ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, &quot;आज रात सिरिक पर दुश्मन के हमले में बमानी जिले में पानी के दो टैंकों को नुकसान पहुंचा और पीने का पानी मिलना बंद हो गया है।&quot;ईरानी मीडिया की खबरों के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बुधवार को कहा कि उन्होंने जॉर्डन में अमेरिकी अल-अजराक बेस के अंदर चार जगहों पर लंबी दूरी की मिसाइलें दागीं। गार्ड्स ने कहा कि जिन जगहों को निशाना बनाया गया, उनमें F-35 फाइटर जेट के लिए इस्तेमाल होने वाले हैंगर और एक कमांड-एंड-कंट्रोल सुविधा शामिल थी, और उन्होंने कहा कि वे किसी भी नए अमेरिकी हमले का &quot;करारा और निर्णायक&quot; जवाब देने के लिए तैयार हैं। यह बयान तब आया जब अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर हमले किए, और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराने का आरोप लगाया। हालिया घटनाक्रम ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव में भारी बढ़ोतरी का संकेत दिया।अमेरिकी सेना ने अपने ऑपरेशन को &quot;ईरान की अनुचित आक्रामकता का उचित जवाब&quot; बताया।एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अपाचे को ईरान के एकतरफा हमले वाले ड्रोन ने मार गिराया था। ट्रंप ने कहा कि उसमें सवार दोनों पायलट बिना किसी चोट के बच गए और कहा कि वाशिंगटन इसका जवाब देगा।जैसे-जैसे ऑपरेशन जारी रहा, एक अमेरिकी अधिकारी ने एक्सियोस को बताया कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरान के कई एयर डिफेंस और रडार ठिकानों पर हमले किए।अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के बाद यह कार्रवाई &quot;आत्मरक्षा&quot; में की गई। अमेरिकी सेना ने बाद में कहा कि CENTCOM ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और सर्विलांस रडार ठिकानों पर हमले किए, और कहा कि ईरान के खिलाफ हमले पूरे हो चुके हैं।बुधवार तड़के दक्षिणी ईरान के कई हिस्सों से धमाकों की खबरें आईं। ईरान की फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने कहा कि होर्मोज़गन प्रांत के पूर्वी हिस्सों में धमाकों की आवाज़ सुनी गई, जबकि मेहर न्यूज़ एजेंसी ने बंदर अब्बास बंदरगाह शहर में धमाकों की खबर दी। ईरान के सरकारी मीडिया ने यह भी कहा कि सिरिक में किसी चीज़ के गिरने की पुष्टि हुई है और खबर दी कि केशम द्वीप पर हमला हुआ है।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हेलिकॉप्टर वाली घटना पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन कहा कि ईरान के पास काम कर रही विदेशी सैन्य ताकतों को हमेशा दुर्घटनाओं, गलत अनुमान या गोलीबारी की चपेट में आने का खतरा रहता है। अराघची ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, &quot;खतरा कम करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि वे यहां से चले जाएं।&quot;सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने यह भी कहा कि उन्होंने दिन में पहले दक्षिणी ईरान में ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन में अमेरिकी पांचवें बेड़े (US Fifth Fleet) पर ड्रोन भेजे। गार्ड्स ने कहा कि लड़ाई जारी है और चेतावनी दी कि अगर अमेरिका की आक्रामकता जारी रही तो &quot;और भी कड़ा जवाब&quot; दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी हमलों से ईरान के सिरिक बंदरगाह शहर में एक टेलीकम्युनिकेशन टावर और पानी की दो टंकियों को नुकसान पहुंचा है।अमेरिकी हमलों से पहले, ईरान के सरकारी मीडिया ने एक सैन्य सूत्र के हवाले से कहा था कि ईरान ने पिछले 24 घंटों में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कोई आक्रामक हवाई कार्रवाई नहीं की है।उसी सूत्र ने चेतावनी दी कि अगर हेलिकॉप्टर वाली घटना से जुड़ी कोई नई दुश्मनी सामने आती है, तो ईरान &quot;निर्णायक जवाब&quot; देगा। यह घटनाक्रम हाल के वर्षों में अमेरिका और ईरान के बीच सबसे गंभीर सीधी टकरावों में से एक था, जिससे खाड़ी में सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। Stay updated with International
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:10:41 +0530</pubDate>
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<title>Ukraine Targets Russian Fuel | रूस की &amp;apos;इकोनॉमिक लाइफलाइन&amp;apos; पर यूक्रेन का प्रहार! क्रीमिया के तेल प्रतिष्ठानों में आग लगी | Ukraine Russia War</title>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन और रूस के बीच चल रहा युद्ध अब एक नए और बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां यूक्रेन ने रूस के भीतर और कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों में मौजूद तेल प्रतिष्ठानों (Oil Facilities) पर ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे चल रही कूटनीति का भी बड़ा खुलासा हुआ है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पहली बार आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि रूसी अरबपति और प्रीमियर लीग टीम चेल्सी के पूर्व मालिक रोमन अब्रामोविच दोनों देशों के बीच मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहे हैं। जेलेंस्की ने ‘स्काई न्यूज’ को बताया कि प्रीमियर लीग टीम चेल्सी के पूर्व मालिक अब्रामोविच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का संदेश लेकर कीव गए थे।
 जेलेंस्की ने कहा कि अब्रामोविच यह संदेश लेकर आए थे कि रूसी पक्ष ‘‘यह समझना चाहता है कि हम क्या करने के लिए तैयार हैं’’। उन्होंने यह भी कहा कि अब्रामोविच ने पुतिन तक उनका जवाब पहुंचाने का प्रस्ताव दिया था।
 इस बीच, यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने कहा कि रूस के खिलाफ प्रस्तावित नए प्रतिबंधों में रूस के ‘‘सैन्य औद्योगिक परिसर, मानवाधिकार उल्लंघनकर्ताओं और प्रचारकों’’ को लक्ष्य कर बनाए गए 80 बिंदु शामिल हैं।
 यूरोपीय संघ के रक्षा मंत्रियों की सोमवार को हुई बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में काजा कल्लास ने कहा कि पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से रूस को अब तक अनुमानित 1.2 से 1.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान हो चुका है।
 रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी सेनाओं ने सोमवार तड़के 310 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए, जिनमें मॉस्को क्षेत्र, पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी रूस, रूसी-अधिकृत क्रीमिया और काला सागर और आजोव सागर के ऊपर से गुजरने वाले ड्रोन भी शामिल हैं।
 रूसी वायु सेना के अनुसार, रूस ने 155 ड्रोन का इस्तेमाल कर यूक्रेन को निशाना बनाया जिनमें से यूक्रेनी वायु रक्षा ने 124 ड्रोन को मार गिराया या निष्क्रिय कर दिया।
 यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने कहा कि यूक्रेनी सेना ने रात भर रूस के क्रास्नोदार क्राई क्षेत्र पर हमला किया, जिसमें नोवोरोस्सियस्क के पास स्थित ग्रुशोवाया तेल ट्रांसशिपमेंट बेस को निशाना बनाया गया।
 रूसी क्षेत्रीय अधिकारियों ने पुष्टि की कि एक यूक्रेनी ड्रोन के कारण केंद्र में आग लगी और कहा कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है। उन्होंने नुकसान की सीमा पर कोई टिप्पणी नहीं की लेकिन उन्होंने कहा कि आग बुझाने में 130 बचावकर्मी लगे हुए थे।इसे भी पढ़ें: Ranthambore National Park में सफारी के दौरान कैंटर के ब्रेक फेल, बाल-बाल बचे पर्यटक, चालक और वाहन पर लगा प्रतिबंध 
 क्रीमिया में ईंधन संकट को लेकर ‘क्रेमलिन’ (रूसी राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) की चिंता के बारे में पूछे जाने पर क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि ऊर्जा मंत्रालय और अन्य एजेंसियां ​​स्थिति से निपटने के लिए उपायों पर काम कर रही हैं।
 जनरल स्टाफ ने कहा कि वोल्गोग्राद क्षेत्र में स्थित क्रास्नी यार का एक संयंत्र भी प्रभावित हुआ। बयान के अनुसार, केंद्र पर आग लग गई। रूसी गवर्नर आंद्रेई बोचारोव ने यह स्पष्ट नहीं किया कि संयंत्र में क्या उत्पादन होता है, लेकिन उन्होंने कहा कि कोई घायल नहीं हुआ है।इसे भी पढ़ें: Patna Coaching Firing Controversy | मशहूर शिक्षक Khan Sir को कोर्ट से बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक 
 यूक्रेन ने रविवार रात को रूस के कब्जे वाले क्रीमिया प्रायद्वीप में स्थित सेमिकोलोडेजकाया के एक तेल संयंत्र पर भी हमले किए जिससे संयंत्र में आग लग गई। ‘टेलीग्राम’ पर जारी बयान के अनुसार, इस संयंत्र का उपयोग रूसी सेना को ईंधन की आपूर्ति के लिए किया जाता है।
 जनरल स्टाफ ने बताया कि यूक्रेनी सेना ने क्रीमिया के फियोडोसिया के पास एक तेल डिपो पर भी हमला किया।
 जेलेंस्की ने कहा कि उनका संदेश यही है कि पह पुतिन से रूस या बेलारूस को छोड़कर किसी भी स्थान पर ‘‘कभी भी’’ मुलाकात कर सकते हैं चाहे यह मुलाकात द्विपक्षीय रूप से हो या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय नेताओं की भागीदारी के साथ हो।
 उन्होंने कहा कि यूक्रेन डोनबास क्षेत्र को नहीं छोड़ेगा, जिसका कुछ हिस्सा वर्तमान में रूस के कब्जे में है।
 पुतिन ने पिछले सप्ताह कहा था कि एक रूसी व्यवसायी (जिसका उन्होंने नाम नहीं बताया) पिछले महीने कीव गए थे, जिसमें दोनों नेताओं के बीच मुलाकात का प्रस्ताव रखा गया था, हालांकि रूसी नेता ने मुलाकात के प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उन्हें इसमें कोई फायदा नहीं दिखता।Stay updated with International
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:09 +0530</pubDate>
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<title>एक ही युद्ध, अलग&#45;अलग नतीजे! ईरान, लेबनान और हिज़्बुल्लाह से निपटने के तरीके पर अमेरिका और इज़राइल में बढ़े मतभेद</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण संघर्ष के बीच दुनिया के दो सबसे करीबी सहयोगियों—अमेरिका और इज़राइल—के बीच रणनीतिक दरारें अब खुलकर सामने आने लगी हैं। लेबनान और ईरान में हाल ही में हुए हमलों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच प्राथमिकताओं के गंभीर मतभेदों को उजागर कर दिया है। शुरुआत में भले ही दोनों नेताओं का नज़रिया एक जैसा लग रहा था, लेकिन अब युद्ध को खत्म करने और दुश्मनों से निपटने के तरीकों को लेकर दोनों के रास्ते अलग होते दिख रहे हैं। ट्रंप ने हिज़्बुल्लाह के साथ युद्ध से जुड़े अभियानों के दौरान बेरूत पर हमले बढ़ाने के खिलाफ़ इज़राइल को चेतावनी दी थी। इसके बावजूद, इज़राइल ने हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने हालिया युद्धविराम के बाद पहली बार इज़राइल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इज़राइल ने भी ईरान पर जवाबी हमला किया, जबकि वाशिंगटन तेहरान के साथ नाजुक बातचीत जारी रखे हुए था।लेबनान में हमलों को लेकर बढ़ता तनावयुद्धविराम की घोषणाओं के बावजूद, इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच लेबनान में फिर से लड़ाई शुरू होने के बाद स्थिति बिगड़ गई। ईरान का कहना है कि किसी भी बड़े क्षेत्रीय समझौते में लेबनान में हमलों को पूरी तरह रोकना शामिल होना चाहिए, जबकि इज़राइल का तर्क है कि हिज़्बुल्लाह से खतरा पूरी तरह खत्म होने तक वहां अभियान जारी रहने चाहिए।खबरों के अनुसार, ट्रंप ने संयम बरतने पर ज़ोर दिया है, क्योंकि उन्हें चिंता है कि तनाव बढ़ने से ईरान के साथ बातचीत बाधित हो सकती है और वैश्विक ईंधन की कीमतों पर असर पड़ सकता है। आगामी चुनावों से पहले मध्य पूर्व में एक और लंबे संघर्ष से बचने का उन पर घरेलू दबाव भी है। इसके विपरीत, नेतन्याहू पर घरेलू स्तर पर इज़राइल के दुश्मनों के खिलाफ़ सैन्य सफलता दिखाने का दबाव है, साथ ही उन्हें वाशिंगटन में अपने प्रमुख सहयोगी के साथ संबंधों को भी संभालना है।आपसी राजनीतिक दबावयह असहमति दोनों देशों की घरेलू राजनीतिक चिंताओं को भी दर्शाती है। ट्रंप को ईंधन की बढ़ती कीमतों और लंबे समय तक चलने वाले क्षेत्रीय युद्ध में अमेरिका के और अधिक उलझने के डर को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। उनकी प्राथमिकता बाजारों को स्थिर करना और ईरान के साथ जल्द ही कोई राजनयिक समाधान निकालना रही है।वहीं, नेतन्याहू पर इज़राइली मतदाताओं का दबाव है जो हमास द्वारा 7 अक्टूबर को किए गए हमलों के बाद सालों से चल रहे संघर्ष के बाद निर्णायक कार्रवाई चाहते हैं। भारी सैन्य अभियानों के बावजूद, हिज़्बुल्लाह और ईरान के सरकारी ढांचे बरकरार हैं, जिससे इज़राइल में घरेलू निराशा बढ़ रही है।दबाव में कमज़ोर होता गठबंधनहालांकि दोनों पक्षों के अधिकारियों ने मतभेदों को कम करके दिखाने की कोशिश की है, लेकिन तनाव अधिक स्पष्ट हो गया है। ट्रंप ने निजी तौर पर इज़राइली हमलों को लेकर निराशा जताई है, जिनसे राजनयिक बातचीत के पटरी से उतरने का खतरा है, जबकि वे हमलों का जवाब देने के इज़राइल के अधिकार को भी मानते हैं। हालांकि, नेतन्याहू का कहना है कि वाशिंगटन के साथ तालमेल मजबूत बना हुआ है और इज़राइल आत्मरक्षा में कार्रवाई कर रहा है।विशेषज्ञों का कहना है कि करीबी सहयोगियों के बीच इस तरह की असहमति असामान्य नहीं है, लेकिन जो बात इस पल को अलग बनाती है, वह यह है कि अब मतभेदों को कितनी खुलकर जाहिर किया जा रहा है। हालांकि दोनों नेता सहयोग पर ज़ोर देते रहे हैं, लेकिन ईरान, लेबनान और हिज़्बुल्लाह से निपटने की उनकी रणनीतियां साफ़ तौर पर पूरी तरह एक जैसी नहीं हैं। Stay updated with International
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:08 +0530</pubDate>
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<title>JD Vance ने नई Book &amp;apos;Communion&amp;apos; में खोला राज़, दोस्त की हत्या के बाद Usha ने क्यों लिया चौथा बच्चा करने का फैसला?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया है कि अमेरिकी पॉडकास्टर चार्ली कर्क की हत्या और उसी साल बाद में उनकी पत्नी एरिका कर्क से हुई बातचीत के बाद, चौथे बच्चे को लेकर उनकी पत्नी उषा वेंस की सोच बदल गई थी। वेंस की आने वाली किताब &#039;कम्युनियन&#039; में इस बारे में विस्तार से बताया गया है। यह जानकारी उनके पहले दिए गए उस बयान से अलग है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने और उषा ने चौथे बच्चे का फ़ैसला इसलिए किया था क्योंकि वह बहुत मनाने में माहिर थे। 29 अक्टूबर, 2025 को जेडी वेंस और एरिका कर्क ने एक साथ मंच साझा किया और गर्मजोशी से गले मिले। उनके काफी देर तक गले मिलने का वीडियो जल्द ही ऑनलाइन वायरल हो गया। हालाँकि, जैसा कि वेंस ने अपनी किताब में बताया है, इसी मुलाकात के बाद एरिका ने उषा को चौथा बच्चा पैदा करने के बारे में सोचने के लिए मनाया। वेंस परिवार ने 20 जनवरी को प्रेग्नेंसी की घोषणा की और बताया कि वे इस साल के आखिर में बच्चे के आने की उम्मीद कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Britain में छात्र Henry Novak की हत्या पर सियासी भूचाल, JD Vance के बयान पर भड़का UKहालांकि, उषा ने कहा है कि उन्होंने चौथे बच्चे के लिए कभी भी दरवाज़ा बंद नहीं किया। उन्होंने कहा कि भले ही एक समय पर तीन बच्चों के साथ उनका परिवार&quot;काफी पूरा लगता था, लेकिन बाद में परिवार को और बढ़ाने की संभावना को लेकर वह &quot;और ज़्यादा उत्साहित हो गईं। कम्युनियन&#039; में लिखते हुए, जेडी वेंस ने बताया कि वे कई सालों से उषा से एक और बच्चा करने के लिए कह रहे थे, जबकि उषा का कहना था कि अब और बच्चे नहीं चाहिए, &quot;खासकर तब, जब पब्लिक सर्विस की वजह से हम नेशनल लेवल पर चर्चा में आ गए थे। उनके मुताबिक, चार्ली कर्क की मौत के बाद कुछ बदल गया। रडारऑनलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, किताब के एक हिस्से में उन्होंने लिखा है कि जब मेरी पत्नी ने चार्ली कर्क की पत्नी को उनके गहरे दुख के पहले दिन गले लगाया, तो एरिका ने रोते हुए उषा से कहा कि उन्हें अफ़सोस है कि चार्ली के साथ उनके सिर्फ़ दो ही बच्चे थे। इसे भी पढ़ें: Donald Trump की चेतावनी की उड़ाई नेतन्याहू ने धज्जियां! इज़राइल- ईरान का युद्ध चरम पर पहुंचा, रात भर हुए हवाई हमले | Israel-Iran Conflictउन्होंने आगे कहा कि उनके दोस्त की मौत के कुछ ही समय बाद उषा का नज़रिया बदल गया। उन्होंने लिखा कि लेकिन उषा के मन में कुछ बदलाव आया, और मेरे दोस्त को दफ़नाने के कुछ ही समय बाद वह हमारे चौथे बच्चे एक लड़के की माँ बनने वाली थीं। एरिका कर्क ने अलग से कहा है कि उन्होंने भगवान से प्रार्थना की थी कि जब उनके पति की मौत हुई, तब वह गर्भवती हों। मेगिन केली से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने और चार्ली ने मिलकर चार बच्चे पैदा करने का प्लान बनाया था और वह अब युवा जोड़ों, खासकर युवा महिलाओं को सलाह देती हैं कि वे इसे टालें नहीं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:08 +0530</pubDate>
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<title>ये बदला हुआ ईरान है! जानिए इस बार इजरायल को पहले घुसकर क्यों मारा?</title>
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<description><![CDATA[ ईरान का सीधा इजरायल पर मिसाइलों का रेला चल पड़ा है। कहा जा रहा है कि यह इजरायल की उन गुस्ताखियों की सजा है जो वह मना करने के बावजूद लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ कर रहा था। लेकिन 7 और 8 जून की दरमियानी रात ईरान ने जिस तरह से इजरायल पर पहले और सीधे हमला किया है वो कई इशारे दे रहा है। ईरान के इस अंदाज और आक्रामकता ने दिखा दिया है कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई  ने पूरी तरह टेकओवर ले लिया है और इस वक्त एक बार फिर आईआरजीसी में बेहद ताकतवर हो गई है। अब तक ज्यादातर देखा गया था कि ईरान ने खुद पर हुए अमेरिका और इजरायल के हमलों पर पलटवार ही किया है। लेकिन इस बार ईरान ने पहला हमला किया सीधा इजरायल पर। इससे यह भी साफ हो गया है कि ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन की रिजीम अपने रेजिस्टेंस को जिन्हें वह प्रतिरोध की दूरी बताते हैं कोलैप्स नहीं होने देगी। इसे भी पढ़ें: एक ही युद्ध, अलग-अलग नतीजे! ईरान, लेबनान और हिज़्बुल्लाह से निपटने के तरीके पर अमेरिका और इज़राइल में बढ़े मतभेदईरान पहले तो अपने प्रोक्सी या समर्थक संगठनों को अपने दम पर इजरायल से लड़ने देता है लेकिन उन्हें खत्म नहीं होने देगा। यही वजह है कि इस बार हिजबुल्लाह के लिए ईरान ने इजरायल पर मार दिया। लेबनान में ईरान समर्थक हिजबुल्ला के सर्वोच्च नेता सैयद हसन नसरुल्लाह की इसराइल के जरिए की गई हत्या या फिर गाजा में हमास के खिलाफ इजरायल की आक्रामकता सब पर ईरान उतना एक्शन में नहीं आया। लेकिन अब आयतुल्लाह मोजतबा खामनेई के ईरान के सुप्रीम लीडर बनने के बाद वहां अंदरूनी सियासत में भी तेजी से बदलाव आया है और एक बार फिर सरकार पर रिजीम हावी हो चुकी है। यानी सुप्रीम लीडर और उनकी आईआरजीसी जो सिर्फ अपने सुप्रीम लीडर के प्रति जवाबदेह है। ऐसा लग रहा है कि अब खुद आयतुल्ला मोजतबा खामनेई  फ्रंट पर आकर लीड कर रहे हैं। पहली बार ईरान ने लड़ाई शुरू की है। इसे भी पढ़ें: शेयर बाजार में लौटी रौनक! वैश्विक संकेतों और क्रूड में नरमी से सेंसेक्स 350 अंक उछला, निफ्टी 23,200 के पारईरान अपने अलायंस यानी प्रतिरोध की धुरी के साथ खुलकर खड़ा हो गया है और इजरायल को यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि अगर तुम करोगे तो हम भी करेंगे। यही वजह भी रही कि इधर हिजबुल्ला के लिए ईरान ने इसराइल पर हमला कर दिया। उधर ईरान के समर्थन में उसके दूसरे प्रॉक्सी हूती ने लाल सागर पर पहरा बैठा दिया और इस समुंदरी रास्ते को ब्लॉक करने का ऐलान कर दिया। यह इस बात की अलामत है कि ईरान में मौजूदा नेतृत्व पूरी रणनीति के साथ लंबी और आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। अब इसराइल की आक्रामकता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकेगा। जिसका डर था वही हो रहा है। मिडिल ईस्ट में अब इसराइल की मनमानी की कीमत सऊदी, यूएई, क़तर सबको चुकानी पड़ेगी और पूरी दुनिया को भी।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:07 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan Border पर अचानक क्यों पहुंचे 8 IPS अधिकारी, क्या करने वाला है भारत?</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान को शायद अंदाजा भी नहीं था कि भारत अब बॉर्डर पर खतरनाक चाल चलने जा रहा है। आठ आईपीएस अधिकारी 16 गांव और दो रातें। बांग्लादेश बॉर्डर पर सख्ती के बाद अब भारत का फोकस पूरी ताकत के साथ पाकिस्तान सीमा पर आ गया है। दरअसल भारत अच्छी तरह से यह जानता है कि सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और आतंकवाद की चुनौती दशकों पुरानी है और यही वजह है कि अब सिर्फ चौकियों की ही नहीं बल्कि पूरे बॉर्डर इकोसिस्टम की जांच की जा रही है। लेकिन समय के साथ बता दें कि चुनौतियां भी बदल गई है। अब सिर्फ घुसपैठ ही नहीं बल्कि ड्रोन गतिविधियां, तस्करी, संदिग्ध मूवमेंट और सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो चुकी है। उतना ही इंपॉर्टेंट है और इसके लिए ही चुना गया है भारतपाकि सीमा का सबसे ज्यादा संवेदनशील बेल्ट कच्छ सरकरीक और वाव थराद का इलाका भारत पाकिस्तान सीमा का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जाता है। इसे भी पढ़ें: ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ गया भारत का परमाणु जखीरा, SIPRI Report ने बढ़ाई पाकिस्तान की धड़कनविशाल रेगिस्तान दलदली क्षेत्र और कम आबादी वाले इलाकों की वजह से सुरक्षा एजेंसियां इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानती है। गुजरात की पाकिस्तान के साथ 500 कि.मी. से अधिक लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है और यही वजह है कि यहां की जमीनी हकीकत को समझना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। लेकिन कहानी यहां पर बदल जाती है। क्योंकि इन अधिकारियों को सिर्फ बॉर्डर नहीं देखना है बल्कि उन गांवों की नब्ज़ टटोलनी है जहां दुश्मन की हर हरकत सबसे पहले महसूस होती है। इन अधिकारियों को किसी गेस्ट हाउस में नहीं रुकना है। किसी सरकारी कैंप में नहीं ठहरना है बल्कि स्थाई लोगों के घरों में रात बितानी है। उन्हें गांवों के लोगों से सीधे बातचीत करनी है। उनकी चिंताएं समझनी है। दूरदराज के इलाकों में तैनात पुलिसकर्मियों से मिलना है और यह पता लगाना है कि कहीं कोई ऐसी कमजोरी तो नहीं जो कागजी रिपोर्ट में दिखाई नहीं देती। यानी भारत सिर्फ सीमा नहीं देख रहा। भारत सीमा के पीछे मौजूद पूरे सुरक्षा और सामाजिक नेटवर्क को समझने निकला है और यही इस मिशन को बेहद खास बनाता है। अब जरा सोचिए अगर किसी अधिकारी को सिर्फ औपचारिक दौरा करना हो तो क्या वो एक गांव में रात बिताएगा? बिल्कुल भी नहीं।इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान से PoK में हुई सबसे बड़ी गलती, सैनिकों के उड़े चिथड़े, अब भारत करेगा खेल! यही वजह है कि यह मिशन सामान्य सरकारी कार्यक्रम से कई गुना ज्यादा बड़ा दिखाई देता है। लेकिन अभी भी एक सवाल बाकी है। यह ऑपरेशन चला कौन रहा है? केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय, रॉ या फिर बीएसएफ। आखिर इस पूरे मिशन के पीछे कौन है? और अब सबसे बड़ा ट्विस्ट आता है। यह मिशन दिल्ली से नहीं बल्कि आपको बता दें कि गुजरात सरकार चला रही है। उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री हर्ष संघवी की निगरानी में शुरू किए गए इस विशेष अभियान के तहत आठ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी 11 और 12 जून को पाकिस्तानी सीमा से लगे 16 गांवों में पहुंचेंगे और वहीं पर रात्रि प्रवास करेंगे। सरकार का लक्ष्य साफ है। सीमा सुरक्षा को सिर्फ चौकियों और हथियारों तक सीमित नहीं रखना है। बल्कि गांवों, स्थाई नागरिकों और सुरक्षा एजेंसियों को एक मजबूत सुरक्षा नेटवर्क में बदलना है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:06 +0530</pubDate>
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<title>बॉर्डर पर बवाल के बीच भारत पहुंचे BGB चीफ, BSF के साथ बड़ी बैठक</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के बीच सीमा पर लगातार बढ़ते तनाव और घुसपैठ को लेकर सवाल उठ रहे हैं और इन सबके बीच बेहद अहम बैठक दिल्ली में शुरू होने जा रही है और यह बैठक है बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश यानी बीजेपी के महानिदेशक मेजर जनरल मोहम्मद अशरफ उजुमान सिद्दीकी जो कि अपने 15 सदस्य प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत पहुंच चुके हैं। सबसे खास बात यह रही कि उन्हें रिसीव करने के लिए खुद बीएसएफ के महानिदेशक प्रवीण कुमार इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे और यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब दोनों ही देशों के बीच सीमा पर घुसपैठ, तस्करी और अवैध प्रवासियों की वापसी को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। दिल्ली में 8 जून से 11 जून तक चलने वाली 97वीं डीजी लेवल बॉर्डर कोऑर्डिनेशन कॉन्फ्रेंस में दोनों देशों की सीमा सुरक्षा एजेंसियां यानी बीएसएफ और बीजेपी आमने-सामने बैठकर तमाम विवादित और संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा करेगी। इसे भी पढ़ें: Sangar Bari Border से भारत में घुस रहे थे Bangladeshi Infiltrators, BSF ने हाथोंहाथ सिखा दिया करारा सबकबीएसएफ की ओर से सीमा पार से हो रही अवैध घुसपैठ, मवेशी तस्करी, फेंसिंग में बाधाएं और भारतीय जवानों पर होने वाले हमलों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। लेकिन इस बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की वापसी है। यानी कि पुशबैक वाली नीति। भारत लगातार उन लोगों को बांग्लादेश भेज रहा है जिनकी पहचान बांग्लादेशी नागरिक के रूप में हो रही है और वह अवैध तरीके से भारत में घुसे हैं। हालांकि कई मामलों में बांग्लादेश की तरफ से उन्हें वापस लेने से भी इंकार कर दिया जा रहा है। हाल ही में पश्चिम बंगाल के बॉर्डर पे एक ऐसा मामला सामने आया जब 17 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस लेने से बीजेपी ने मना कर दिया था। जिसके बाद सीमा पर गतिरोध की स्थिति बन गई थी और बीएसएफ और बीजीबी आमने-सामने आ गए थे। इसे भी पढ़ें: BSF जवानों के सामने आ गये Bangladesh Border Guards, तीखे गतिरोध के बाद जो कुछ हुआ वो देखने लायक था!हालांकि बाद में अचानक वह सभी घुसपैठिए वहां से गायब हो गए थे। जिस पर बीएसएफ ने बताया था कि वह सभी बांग्लादेश लौट गए। बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहाउद्दीन अहमद भी पहले संकेत दे चुके हैं कि उनकी तरफ से इस बैठक में पुशीन और सीमा से जुड़े अन्य विवादित मुद्दे उठाए जाएंगे। यानी कि साफ है कि इस बातचीत में दोनों ही देशों के बीच कई अहम मुद्दे उठाए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में जब से नई सरकार का गठन हुआ है तब से बेहद तेजी के साथ बीएसएफ बॉर्डर पर फेंसिंग के काम को आगे बढ़ा रही है और इसके साथ ही घुसपैठियों पर भी एक्शन लगातार जारी है। अवैध घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए बीएसएफ बेहद सतर्क है। जबकि बांग्लादेश की ओर से कई बार भारत की कारवाही पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में यह बैठक सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:06 +0530</pubDate>
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<title>POJK में Pakistan Army के खिलाफ बगावत, सड़कों पर उतरे लोग, दुनिया से कटा इलाका</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के एक नेता ने दावा किया है कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नरसंहार किया है और देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए हैं। सीएनएन-न्यूज़18 द्वारा प्राप्त एक संदेश में, जेएएसी नेता शौकत मीर ने सुरक्षा बलों पर रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर सीधी गोलीबारी करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्होंने कार्यकर्ताओं के खिलाफ नरसंहार किया है। मीर ने आगे कहा कि उनका आंदोलन &quot;बुनियादी अधिकारों के लिए एक शांतिपूर्ण, अहिंसक और निहत्था आंदोलन&quot; था, फिर भी पाकिस्तान ने उन्हें आतंकवादी करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार उन्हें आतंकवादी मानती है तो उसने उनसे बातचीत क्यों की। मीर ने आगे कहा कि हम शांतिप्रिय लोग हैं। हमने सिर्फ अपने बुनियादी अधिकारों की मांग की है। हमने न तो पाकिस्तानी सत्ता के खिलाफ कुछ बोला है और न ही पाकिस्तान राज्य के खिलाफ… हम मरने को तैयार हैं। हम इस संतोष के साथ मरेंगे कि हमने शांतिपूर्ण संघर्ष किया और कभी अराजकता नहीं फैलाई।इसे भी पढ़ें: Pakistan Border पर अचानक क्यों पहुंचे 8 IPS अधिकारी, क्या करने वाला है भारत?ये बयान ऐसे समय आए हैं जब दक्षिण अफ्रीका के कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों पर व्यापक दमन हो रहा है। अधिकारियों ने बताया है कि इस दमन में कम से कम 11 लोग - सात नागरिक और चार पुलिसकर्मी - मारे गए हैं और दर्जनों घायल हुए हैं। अधिकारियों ने पूरे क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी हैं, जिससे यह क्षेत्र दुनिया के बाकी हिस्सों से लगभग कट गया है। दमन को अंजाम देने के लिए दक्षिण अफ्रीका के कश्मीर प्रशासन ने संघीय सरकार से 14,000 तक कर्मियों की मांग की है। लेकिन मरने वालों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है। जेएएसी ने सीएनएन-न्यूज़ 18 को बताया कि कम से कम 27 प्रदर्शनकारी मारे गए, जबकि कई अन्य घायल हुए। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्थानीय लोगों का दावा है कि 100 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे गए हैं। पाकिस्तानी मीडिया ने बताया है कि लगभग 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान से PoK में हुई सबसे बड़ी गलती, सैनिकों के उड़े चिथड़े, अब भारत करेगा खेल!जम्मू-कश्मीर में संयुक्त सेना कार्रवाई समिति (जेएएसी) 1947 के बाद मुख्य भूमि पाकिस्तान में बसे जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को समाप्त करने की मांग को लेकर पूरे पाकिस्तान राज्य में विरोध प्रदर्शन कर रही है। समूह का दावा है कि इन सीटों का इस्तेमाल मुख्यधारा की पाकिस्तानी पार्टियां क्षेत्र में सरकार गठन को प्रभावित करने के लिए करती हैं। संक्षेप में, इन सीटों को समाप्त करना क्षेत्र के लिए अधिक स्वायत्तता प्राप्त करने का एक तरीका माना जा रहा है। मंगलवार को जारी कार्रवाई और तेज हो सकती है क्योंकि JAAC ने आज पूरे क्षेत्र में हड़ताल का आह्वान किया है। यह हड़ताल आगामी 27 जुलाई को होने वाले चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही हो रही है। इस कार्रवाई के तहत, सरकार ने इस महीने की शुरुआत में आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया था। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:05 +0530</pubDate>
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<title>West Asia संकट के बीच PM Modi को Kuwait में भारतीयों की फिक्र, अमीर से की सीधी बात</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कुवैत के अमीर शेख मेशाल अल-अहमद अल-जाबेर अल सबाह से टेलीफोन पर बातचीत की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में यह जानकारी दी। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में बदलती सुरक्षा स्थिति पर विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री मोदी ने तनाव बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की और कुवैत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमलों की भारत की ओर से कड़ी निंदा की। उन्होंने शांति और स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति का आह्वान दोहराया। बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने कुवैत में रहने वाले बड़े भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कुशलक्षेम के लिए अमीर द्वारा व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।इसे भी पढ़ें: इतिहास में पहली बार सऊदी में तहलका मचा आया भारत, दुनिया हैरानयह फोन कॉल ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया है कि तेहरान के साथ कोई निर्णायक समझौता होने तक होर्मुज जलडमरूमध्य की नौसैनिक नाकाबंदी सख्ती से लागू रहेगी। न्यूयॉर्क निक्स और सैन एंटोनियो स्पर्स के बीच एनबीए फाइनल मैच देखने के बाद न्यूयॉर्क से रवाना होते समय पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये आकलन पेश किए। उन्होंने कहा कि तेहरान के साथ सक्रिय बातचीत आगे बढ़ रही है और जल्द ही इससे कोई स्पष्ट निष्कर्ष निकल सकता है।उन्होंने आगे कहा कि हम एक बहुत अच्छे समझौते के अंतिम चरण में हैं जो किसी भी रूप में परमाणु हथियारों की अनुमति नहीं देगा। और जलडमरूमध्य तुरंत खुल जाएगा।इसे भी पढ़ें: Kuwait Airport पर Iranian Drone Attack, एक भारतीय की मौत, सामने आया तबाही का खौफनाक Video समझौते पर हस्ताक्षर होते ही यह तुरंत खुल जाएगा, जो शायद दो या तीन दिनों में हो सकता है। इस रणनीति के माध्यम से शासन पर अधिकतम आर्थिक दबाव बनाए रखने का वादा करते हुए, ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अंतिम समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने तक इस महत्वपूर्ण समुद्री गलियारे से &quot;कोई तेल, कोई आय, कुछ भी&quot; पारगमन की अनुमति नहीं दी जाएगी। चल रही गुप्त वार्ता की प्रगति के बारे में दृढ़ आशावाद व्यक्त करते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि कुछ ही दिनों में एक बड़ी राजनयिक सफलता मिल सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:04 +0530</pubDate>
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<title>Oman&#45;Gujarat Pipeline: भारत की Energy Security के लिए कैसे &amp;apos;Game Changer&amp;apos; साबित होगा यह प्रोजेक्ट?</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में चल रहे संकट से उत्पन्न ऊर्जा अनिश्चितताओं के बीच अरब सागर के पार ओमान और गुजरात को जोड़ने वाली लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित गहरे समुद्र में बिछाई जाने वाली गैस पाइपलाइन को गेंम चेंजर मूव बताया जा रहा है। पिछले तीन दशकों में इस परियोजना की कई बार समीक्षा की गई है, लेकिन उच्च लागत, तकनीकी बाधाओं और व्यावसायिक व्यवहार्यता पर उठे सवालों के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई। नीति निर्माता भारत की भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के विकल्पों पर पुनर्विचार कर रहे हैं, ऐसे में यह प्रस्ताव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वर्षों से इस परियोजना को बढ़ावा देने वाली सेज (साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज) का कहना है कि उसने प्रस्तावित मार्ग के लिए पहले तकनीकी और वित्तीय आकलन के साथ-साथ समुद्र तल सर्वेक्षण भी किए हैं।इसे भी पढ़ें: भारतीय सवार जहाज पर हमला, भारी एक्शन शुरूलगभग 40,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली ओमान-गुजरात डीप-सी गैस पाइपलाइन के माध्यम से प्राकृतिक गैस को सीधे ओमान से भारत के पश्चिमी तट तक पहुंचाया जाएगा। यह पाइपलाइन अब तक के सबसे गहरे समुद्री मार्गों में से एक होगी। यदि इसका निर्माण हो जाता है, तो यह खाड़ी देशों और भारत के बीच एक सीधा ऊर्जा गलियारा स्थापित कर सकती है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर देश की निर्भरता कम हो जाएगी। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की तलाश और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भू-राजनीतिक तनावों के लगातार बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, दशकों पुराने इस प्रस्ताव का महत्व फिर से बढ़ गया है। इसे भी पढ़ें: Oman के पास US Navy पर हमले का आरोप, 24 Indian Sailors को लेकर डूब रहे जहाज में हड़कंपयह परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है?भारत आयातित ऊर्जा पर अत्यधिक निर्भर है। देश अपनी अधिकांश कच्चे तेल की जरूरतों का आयात करता है और प्राकृतिक गैस, विशेष रूप से एलएनजी की विदेशी आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर है। इन आयातों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है और फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाले संकरे जलमार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारत पहुँचता है। इस मार्ग पर किसी भी प्रकार की रुकावट का वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर तत्काल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे शिपिंग लागत, ईंधन की कीमतें और आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हो सकती हैं। पश्चिम एशिया में हाल के तनावों ने एक बार फिर एकल समुद्री गलियारे पर निर्भरता की असुरक्षा को उजागर किया है। एलएनजी की कीमतों में तीव्र उतार-चढ़ाव और शिपिंग सुरक्षा को लेकर चिंताओं ने आपूर्ति स्थिरता बढ़ाने वाले विकल्पों में नए सिरे से रुचि पैदा की है। ओमान-गुजरात पाइपलाइन को ऐसे ही एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। एलएनजी आयात के विपरीत, जिसमें गैस को द्रवीकृत करना, टैंकरों द्वारा परिवहन करना और पहुँचने पर पुनः गैसीकृत करना आवश्यक होता है, एक पाइपलाइन प्राकृतिक गैस को स्रोत से गंतव्य तक सीधे प्रवाहित होने देगी। समर्थकों का तर्क है कि इससे अधिक विश्वसनीयता प्राप्त हो सकती है और समुद्री व्यापार मार्गों को प्रभावित करने वाली रुकावटों का जोखिम कम हो सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:04 +0530</pubDate>
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<title>POJK में Pakistan के खिलाफ बगावत, Communication Blackout पर British MPs ने जताई चिंता</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) में तनाव लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के कार्यकर्ताओं के साथ ताजा झड़पों के बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे। बिगड़ती स्थिति के बीच, रावलकोट और मुजफ्फरबाद में प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच हुई घातक झड़पों के बाद लागू संचार ब्लैकआउट के चलते शटर-डाउन हड़ताल जारी है। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों में स्थिति गंभीर बनी हुई है, क्योंकि पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शनों में सैकड़ों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं, और भीमबर और कोटली जैसे शहरों में बंद जारी है।इसे भी पढ़ें: ये बदला हुआ ईरान है! जानिए इस बार इजरायल को पहले घुसकर क्यों मारा?डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार रात हुई झड़पों में सात नागरिकों की मौत के बाद ये हालिया घटनाक्रम सामने आया है। पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा नागरिकों पर की गई कार्रवाई की वैश्विक स्तर पर निंदा की जा रही है। ब्रिटिश संसद के 50 से अधिक सदस्यों ने ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर को पत्र लिखकर जम्मू-कश्मीर में संचार व्यवस्था ठप होने, गिरफ्तारियों और बढ़ते तनाव की खबरों पर चिंता व्यक्त की है। 6 जून को ब्रिटेन के विदेश कार्यालय को भेजे गए पत्र में, ब्रैडफोर्ड ईस्ट के सांसद इमरान हुसैन, जो कश्मीर पर सर्वदलीय संसदीय समूह (एपीपीजी) के अध्यक्ष भी हैं, ने क्षेत्र से इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं में व्यवधान, संचार पर प्रतिबंध और बढ़ती अशांति की खबरों पर प्रकाश डाला।इसे भी पढ़ें: शेयर बाजार में लौटी रौनक! वैश्विक संकेतों और क्रूड में नरमी से सेंसेक्स 350 अंक उछला, निफ्टी 23,200 के पारपत्र में, सांसदों ने कहा कि कई ब्रिटिश कश्मीरी नागरिकों ने उनसे संपर्क किया है जो जम्मू-कश्मीर में अपने रिश्तेदारों से संपर्क स्थापित करने में असमर्थ हैं। पत्र लिखने वालों ने गिरफ्तारियों की खबरों पर चिंता व्यक्त की, जिनमें ब्रिटिश नागरिक भी शामिल हैं, और अधिकारियों और संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति के प्रतिनिधियों के बीच संवाद टूटने की खबरों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले से ही संवेदनशील राजनीतिक माहौल में संचार पर प्रतिबंध लगाने से अनिश्चितता बढ़ने और तनाव और अधिक बढ़ने का खतरा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:03 +0530</pubDate>
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<title>Japan के Utsunomiya शहर में Black Bear की दहशत, सड़कों पर सन्नाटा और 94 स्कूल बंद</title>
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<description><![CDATA[ जापान के उट्सुनोमिया शहर में एक काले भालू को एक दर्जन से अधिक बार देखे जाने के बाद मंगलवार को भी उसकी तलाश जारी रही। शहर के सभी 94 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय लगातार दूसरे दिन बंद रहे। शहर के अनुसार, लगभग 100 किलोग्राम (220 पाउंड) वजन वाले इस वयस्क भालू को आखिरी बार मंगलवार सुबह एक विश्वविद्यालय परिसर से लगभग 700 मीटर (765 गज) दूर देखा गया था। माना जाता है कि इसी भालू को शनिवार शाम को भी देखा गया था, जो टोक्यो से लगभग 100 किलोमीटर (60 मील) उत्तर में स्थित इस शहर में भालू के पहली बार देखे जाने का मामला है। जापान में शहरी क्षेत्रों सहित भालू के हमलों में वृद्धि हुई है, जिसके चलते सरकार ने इस वर्ष हताहतों की संख्या कम करने के लिए एक कार्य बल का गठन किया है। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025 में देश में रिकॉर्ड 238 पीड़ित दर्ज किए गए, जिनमें 13 मौतें शामिल हैं।इसे भी पढ़ें: China-North Korea Relations: 7 साल बाद  उत्तर कोरिया पहुंचे, दुनिया में बढ़ी हलचल... क्या बदलेगा एशिया का पावर गेम?एशियाई काले भालू को विश्व स्तर पर संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, लेकिन अनुमान है कि 2012 के बाद से जापान में इनकी संख्या तीन गुना हो गई है, जिसका कारण शिकार में कमी आना है। उट्सुनोमिया शहर के एक अधिकारी ने बताया कि नगर पालिका और प्रांतीय कर्मचारियों, अग्निशमन विभाग और शिकारी संघ के सदस्यों सहित एक समूह भालू की तलाश जारी रखे हुए है। अधिकारी ने कहा कि जानवर जहां भी मिलेगा, उसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि उसे बेहोश किया जाए, गोली मारी जाए या पकड़कर छोड़ दिया जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भालुओं के प्राकृतिक भोजन जैसे बलूत और मेवे की पैदावार कम हो गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या में कमी और परित्यक्त कृषि भूमि के विस्तार ने उन्हें मानव बस्तियों के पास भोजन की तलाश करने के लिए प्रोत्साहित किया है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:02 +0530</pubDate>
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<title>West Asia में महायुद्ध का खतरा? UN Chief Guterres ने दी बड़ी चेतावनी, तत्काल हमले रोकने की अपील।</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सोमवार को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की और सभी संबंधित पक्षों से तत्काल हमले रोकने, अधिकतम संयम बरतने और किसी भी ऐसे कदम से बचने का आह्वान किया जिससे पहले से ही अस्थिर स्थिति और बिगड़ सकती है। महासचिव के प्रवक्ता फरहान हक द्वारा जारी एक बयान में, संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने सभी पक्षों से लेबनान, ईरान और गाजा में युद्धविराम का पूरी तरह से पालन करने और चल रहे राजनयिक प्रयासों को कमजोर करने वाले किसी भी कदम से बचने का आह्वान किया।उन्होंने गाजा में प्रवेश करने वाले रास्तों को इजरायल द्वारा बंद करने के फैसले पर चिंता व्यक्त की और गाजा में बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता के त्वरित, सुरक्षित और निर्बाध आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए सभी रास्तों को तत्काल फिर से खोलने की आवश्यकता पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार नौवहन के अधिकारों और स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी पक्षों से अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का पालन करने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव सावधानी बरतने का आह्वान किया।पश्चिम एशिया में संघर्षों का कोई सैन्य समाधान नहीं है, यह दोहराते हुए उन्होंने कहा, &quot;आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता संवाद और बातचीत है।&quot; इसलिए उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने वाले राजनयिक समाधानों की दिशा में काम करने का आग्रह किया।इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Taliban के समर्थन में खुलकर उतरा India ! Afghanistan पर लगे UNSC प्रतिबंधों में राहत देने का दिया सुझावइस बीच, सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका अगले दो हफ्तों के भीतर ईरान पर &quot;पूर्ण विजय&quot; प्राप्त कर लेगा और उन्हें पूरा विश्वास है कि एक नया परमाणु समझौता जल्द ही हो जाएगा। यह आशावादी अनुमान ऐसे समय आया है जब ईरान और इज़राइल ने सप्ताहांत में हुई जवाबी सैन्य हमलों की तनावपूर्ण स्थिति से पीछे हट गए हैं।इसे भी पढ़ें:  Pakistan Fitna Al Hindustan New Propaganda | संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार! &#039;फितना अल-हिंदुस्तान&#039; है नफरत की सरकारी फैक्टरीअमेरिकी राष्ट्रपति ने ये दावे एक चुनावी रैली के दौरान किए, जो दूर से ही समर्थकों के बड़े समूहों को संबोधित करने के लिए आयोजित एक वर्चुअल फोन कार्यक्रम है। ट्रम्प ने इस राजनीतिक मंच का उपयोग सीनेटर लिंडसे ग्राहम के लिए समर्थन जुटाने के लिए किया, जो वर्तमान में आगामी रिपब्लिकन प्राइमरी चुनाव में कड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:01 +0530</pubDate>
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<title>PoJK में पाकिस्तान के जुल्मों पर भारत का तीखा वार, फेक न्यूज छिपा नहीं पाएगी सच</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने मंगलवार को पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) में जारी अशांति को लेकर पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला और इस्लामाबाद पर अपनी व्यवस्थागत विफलताओं और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों को छिपाने के लिए फर्जी खबरों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान सवालों के जवाब देते हुए पाकिस्तान से फैल रही गलत सूचनाओं के बार-बार दोहराए जाने वाले पैटर्न पर प्रकाश डाला। एएनआई के एक प्रश्न के उत्तर में जायसवाल ने कहा कि हम इस संदर्भ में पाकिस्तान से लगातार फर्जी खबरें और वीडियो देख रहे हैं। यह पाकिस्तान द्वारा अपनी विफलताओं को छुपाने और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान हटाने का एक हताश प्रयास है।इसे भी पढ़ें: भारत की न्यूक्लियर डॉक्टरेन में बड़ा बदलाव, SIPRI की रिपोर्ट देख कांप उठेगा पाकिस्तान!जायसवाल ने कब्जे वाले क्षेत्र में आर्थिक कठिनाइयों और बुनियादी अधिकारों के अभाव के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही कठोर कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आगे कहा, &quot;पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पुलिस की बर्बरता की खबरें हैं, जिनमें कई प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं। जयसवाल ने कहा कि दुनिया को इस क्षेत्र में बिगड़ती स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, &quot;हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके कुकर्मों और दुर्व्यवहारों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।इसे भी पढ़ें: Terror-Gangster गठजोड़ पर NIA का बड़ा एक्शन, Punjab-Haryana में 18 ठिकानों पर एक साथ रेडये टिप्पणियां जम्मू-कश्मीर में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच आई हैं, जहां निवासी शासन, आर्थिक कठिनाई और आरक्षित विधायी सीटों के आवंटन सहित विभिन्न मुद्दों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। बढ़ती महंगाई, बिजली के ऊंचे बिल और आवश्यक वस्तुओं की कमी कुछ अन्य मुद्दे हैं जिन पर प्रदर्शनकारी विरोध कर रहे हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि पाकिस्तानी प्रशासन ने असंतोष को दबाने के लिए अर्धसैनिक बलों को तैनात किया है, जिससे हिंसक झड़पें और जानमाल का नुकसान हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:01 +0530</pubDate>
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<title>Britain में एक हत्या से सिख समुदाय निशाने पर, जानें Kirpan पर क्यों छिड़ा है विवाद</title>
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<description><![CDATA[ ब्रिटेन में सिख समुदाय को कृपाण धारण करने को लेकर बढ़ती शत्रुता और जांच का सामना करना पड़ रहा है। कृपाण सिख धर्म के पांच धार्मिक प्रतीकों में से एक है। यह विवाद दिसंबर 2025 में 23 वर्षीय विक्रम दिगवा द्वारा ब्रिटिश-पोलिश किशोर हेनरी नोवाक की चाकू मारकर हत्या किए जाने के बाद और भी तीव्र हो गया है। मई में सिख युवक दिगवा को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद यह बहस और भी बढ़ गई। ब्रिटेन में सिख नेता, राजनेता और सामुदायिक संगठन इस बात पर जोर देते हैं कि जनता का गुस्सा गलत व्यक्ति पर निर्देशित किया जा रहा है और वे अपने धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विवाद का मुख्य बिंदु कृपाण है, जो दीक्षा प्राप्त सिखों द्वारा पाँच क या पाँच काकरों में से एक के रूप में धारण किया जाने वाला एक औपचारिक हथियार है। जहाँ देश के कुछ कार्यकर्ताओं ने नोवाक की हत्या के बाद कृपाण पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है, वहीं सिख समूहों का तर्क है कि किशोर की हत्या औपचारिक कृपाण से नहीं, बल्कि एक अलग, बड़े खंजर से की गई थी, जिसे दिगवा धारण किए हुए था।इसे भी पढ़ें: Britain में छात्र Henry Novak की हत्या पर सियासी भूचाल, JD Vance के बयान पर भड़का UKयह अंतर धार्मिक स्वतंत्रता, सार्वजनिक सुरक्षा, चाकू से होने वाले अपराध और ब्रिटिश कानून के तहत सिखों को दी गई कानूनी छूटों पर व्यापक बहस का केंद्र बन गया है। मई में दिगवा को दोषी ठहराए जाने के बाद के दिनों में, सिख संगठनों ने पूरे ब्रिटेन में समुदाय के सदस्यों के प्रति शत्रुता में तीव्र वृद्धि की सूचना दी। समुदाय के नेताओं का कहना है कि कम से कम 15 सिखों को सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे समूहों का सामना करना पड़ा, जो उनसे यह जानना चाहते थे कि क्या वे कृपाण लेकर चल रहे थे। द गार्जियन अखबार के अनुसार, ब्रिटेन के एक शिक्षक अमनदीप सिंह ने कहा कई सिखों से ऐसे समूहों ने संपर्क किया है जो कृपाण के बारे में पूछकर तनाव भड़काने की कोशिश करते हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि माहौल लगातार शत्रुतापूर्ण होता जा रहा है और लोगों को याद दिलाया कि सिख पहले भी नस्लवादी हमलों का शिकार हो चुके हैं, जिनमें ऐसी घटनाएं भी शामिल हैं जिनमें बुजुर्ग सिख पुरुषों की पगड़ी जबरन उतार दी गई थी।इसे भी पढ़ें: Dawoodi Bohra केस पर फैसले के बाद Justice Gautam Patel का परिवार निशाने पर, London तक पीछाएसेक्स की रहने वाली सोफी कोरकोरन ने एक्स पर कृपाण की तस्वीर के साथ पोस्ट किया, &quot;यह बेतुका है कि मैं कानूनी तौर पर पेपर स्प्रे नहीं रख सकती, लेकिन सिख इसे कानूनी तौर पर रख सकते हैं। एक संयुक्त बयान में सिख संगठनों ने हत्या की निंदा की और इसे एक व्यक्ति द्वारा &quot;पागलपन का क्षण&quot; बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक व्यक्ति के कार्यों के आधार पर पूरे समुदाय को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:00 +0530</pubDate>
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<title>Afghanistan पर बदला नहीं India का स्टैंड, MEA ने कहा&#45; शांति और विकास पहली प्राथमिकता</title>
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<description><![CDATA[ विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार को अफगानिस्तान के लोगों के कल्याण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि नई दिल्ली निरंतर मानवीय सहायता, विकास सहयोग और क्षमता निर्माण पहलों के माध्यम से अफगानिस्तान में शांति, स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। अफगानिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि परवथानेनी हरीश द्वारा दिए गए बयान के बारे में पूछे जाने पर, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का रुख अपरिवर्तित है और अफगान लोगों के समर्थन पर केंद्रित है। जायसवाल ने कहा, “कल न्यूयॉर्क में हमारी एक बैठक हुई थी, जहां आप स्थायी प्रतिनिधि को देख सकते हैं; उन्होंने UNAMA की बैठक पर एक बयान दिया, जिसमें हमने दोहराया है कि भारत और अफगानिस्तान पड़ोसी देश और सभ्यताओं से संपन्न देश हैं। हमारे संबंध सदियों पुराने हैं।उन्होंने आगे कहा कि भारत खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और दवा सहायता से संबंधित पहलों के माध्यम से अफगानिस्तान का समर्थन करना जारी रखे हुए है, साथ ही छात्रवृत्ति और क्षमता निर्माण के अवसर भी प्रदान कर रहा है। हम अफगानिस्तान और पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता के पक्षधर हैं ताकि विकास और स्थिरता को बढ़ावा मिल सके। हमने अपने विकास सहयोग, अपनी दीर्घकालिक मित्रता और अफगानिस्तान में खाद्य सुरक्षा, दवा, फार्मा सहायता और स्वास्थ्य के क्षेत्र में जारी विकास सहयोग के बारे में बात की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि भारत के विकास कार्यक्रमों से अफगान समाज के सभी वर्गों, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, को लाभ मिलता है।इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Taliban के समर्थन में खुलकर उतरा India ! Afghanistan पर लगे UNSC प्रतिबंधों में राहत देने का दिया सुझावउन्होंने आगे कहा हमारे कई विकास सहयोग कार्यक्रमों में लैंगिक भेदभाव नहीं होता; इनसे सभी लोगों को लाभ मिलता है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हमने अफगानिस्तान के लोगों को छात्रवृत्तियां और क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी प्रदान किए हैं और ये जारी रहेंगे। जयसवाल ने यह भी कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र की ब्रीफिंग के दौरान उजागर की गई शांति और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर भी विचार किया और अफगानिस्तान के विकास के प्रति नई दिल्ली की प्रतिबद्धता को दोहराया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:06:59 +0530</pubDate>
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<title>Dubai में भीषण Road Accident, रुके ट्रक से टकराई बस, कई भारतीय कामगारों की दर्दनाक मौत</title>
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<description><![CDATA[ दुबई में एक दुखद सड़क दुर्घटना में कई भारतीय श्रमिकों की मौत हो गई, जब उन्हें ले जा रही एक मिनीबस सड़क के बीच में रुके एक ट्रक से टकरा गई। दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने शोक व्यक्त किया। दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जानमाल के नुकसान से उन्हें गहरा दुख हुआ है और प्रभावित लोगों की सहायता के लिए वे स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। वाणिज्य दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, &quot;दुबई में हुई दुखद सड़क दुर्घटना में कई भारतीय कामगारों की जान जाने से हम बेहद दुखी हैं।इसे भी पढ़ें: West Asia में बढ़ा तनाव! Iran के ड्रोन हमले के बाद Kuwait Airport खुला, US ने दी चेतावनीवाणिज्य दूतावास ने आगे कहा कि वह पीड़ितों और उनके परिवारों को हर संभव सहायता और समर्थन प्रदान करने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। हमारे अधिकारियों ने अस्पताल का दौरा किया, घायल भारतीयों से मुलाकात की और हर संभव सहायता और समर्थन प्रदान करने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस कठिन समय में हमारी हार्दिक संवेदनाएं और प्रार्थनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। इसे भी पढ़ें: खामेनेई से किसी भी समय हो सकती है मुलाकात, ट्रंप ने ईरान वॉर पर सबसे बड़ा अपडेट दे दियाबस चालक ने पीछे से आ रहे ट्रक को टक्कर मारीदुबई पुलिस के यातायात विभाग के निदेशक ब्रिगेडियर जुमा सलेम बिन सुवैदान ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि तकनीकी खराबी के कारण ट्रक अमीरात रोड के बीचोंबीच अचानक रुक गया था। उन्होंने एक बयान में कहा, बस चालक ने कथित तौर पर ध्यान नहीं दिया और सुरक्षित दूरी नहीं रखी, जिसके चलते उसने पीछे से आ रहे ट्रक को टक्कर मार दी। उन्होंने आगे कहा इस दुर्घटना में सात लोगों की मौत हो गई और नौ लोग घायल हो गए, जिनमें पांच गंभीर और चार मामूली रूप से घायल हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। ब्रिगेडियर जुमा सलेम ने बताया कि दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए यातायात दुर्घटना जांच अनुभाग के विशेषज्ञों को घटनास्थल पर भेजा गया है ताकि वे जांच कर सटीक सबूत जुटा सकें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:06:59 +0530</pubDate>
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<title>Indo&#45;Pacific में चीन को झटका! Palau के President Whipps बोले&#45; Taiwan की संप्रभुता से समझौता नहीं</title>
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<description><![CDATA[ ताइवान की उपराष्ट्रपति शियाओ बि-खिम की प्रशांत द्वीप राष्ट्र पलाऊ यात्रा के दौरान, पलाऊ के राष्ट्रपति सुरंगेल एस व्हिप्स जूनियर ने ताइवान के प्रति अपने देश के समर्थन को दृढ़ता से दोहराया और इस बात पर जोर दिया कि ताइवान की संप्रभुता अंतरराष्ट्रीय मान्यता की हकदार है। यह जानकारी ताइवान की सेंट्रल न्यूज एजेंसी (CNA) के अंग्रेजी भाषा के समाचार मंच फोकस ताइवान ने दी है। कोरोर में आयोजित स्वागत भोज में बोलते हुए, व्हिप्स ने तर्क दिया कि ताइवान की संप्रभुता को नकारना दुनिया भर के छोटे देशों की प्रतिष्ठा को कमजोर करेगा। फोकस ताइवान के अनुसार, उन्होंने कहा, &quot;यदि ताइवान की संप्रभुता को मान्यता नहीं दी जाती है, तो हम कौन होते हैं यह कहने वाले कि हम संप्रभु हैं? इससे बेहतर तो सभी छोटे देशों को ही खत्म कर देना होगा।इसे भी पढ़ें: Indian Share Market को डबल झटका, Taiwan के बाद अब South Korea भी Ranking में निकला आगेव्हिप्स ने लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों की रक्षा के महत्व पर भी बल दिया। फोकस ताइवान के अनुसार, उन्होंने कहा कि हमें स्वतंत्रता के लिए खड़ा होना होगा। हमें लोकतंत्र के लिए खड़ा होना होगा और हमें कानून के शासन के लिए खड़ा होना होगा। पलाऊ ताइवान के 12 राजनयिक सहयोगियों में से एक है और प्रशांत क्षेत्र में केवल तीन सहयोगियों में से एक है। पलाऊ के नेता ने ताइवान की विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए इसे एक समृद्ध और विकासशील राष्ट्र&quot; बताया, जिसने स्वास्थ्य सेवा, प्रौद्योगिकी, विमानन और अन्य क्षेत्रों में नेतृत्व का प्रदर्शन किया है, जैसा कि फोकस ताइवान ने रिपोर्ट किया है। उन्होंने तर्क दिया कि ताइवान को प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मंचों में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए।इसे भी पढ़ें: Philippines Strong Earthquake | मिंडानाओ में 7.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, तटीय इलाकों में उठीं सुनामी की लहरेंफोकस ताइवान के अनुसार, व्हिप्स ने कहा कि ताइवान को इन चर्चाओं का हिस्सा बनने की जरूरत है। उन्हें संयुक्त राष्ट्र का हिस्सा बनना चाहिए, उन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन का हिस्सा बनना चाहिए, उन्हें आईसीएओ का हिस्सा बनना चाहिए। जापान की हालिया यात्रा का जिक्र करते हुए, व्हिप्स ने कहा कि उनसे ताइवान के बारे में पूछा गया था और उन्होंने दोहराया कि ताइपे के साथ पलाऊ के संबंध मजबूत बने हुए हैं। उन्होंने जापानी मीडिया को बताया कि ताइवान के साथ पलाऊ के संबंध &quot;मजबूत हैं और और मजबूत हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, व्हिप्स ने कहा कि दोनों देशों के बीच साझेदारी साझा हितों, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के समर्थन और एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के प्रति प्रतिबद्धता पर आधारित है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:06:58 +0530</pubDate>
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<title>होर्मुज में गिरा अमेरिकी हेलीकॉप्टर, ट्रंप ने दिया बड़ा बयान</title>
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<description><![CDATA[ एक तरफ अमेरिका ईरान से सीजफायर डील को पूरा करने में लगा है और दूसरी तरफ ईरान और इजराइल लड़ पड़े। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐसे परेशान हुए कि वह दोनों ही पक्षों पर चीखने चिल्लाने तक लगे और अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी है कि ईरान के साथ अब भी बातचीत जारी है। यह बातचीत रुकी नहीं है और उनका यह भी दावा है कि एक से दो दिन में इस बारे में कुछ बड़ा हो सकता है। यानी कि पूरी तरह से अमेरिका और ईरान किसी कंक्रीट डील पर पहुंच सकते हैं। इसके साथ ही साथ आने वाले दिनों में हारमूज भी पूरी तरह से खुल जाएगा। इसे भी पढ़ें: West Asia संकट के बीच PM Modi को Kuwait में भारतीयों की फिक्र, अमीर से की सीधी बातऐसा दावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं। वहीं इस दौरान एक खबर यह भी आई कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका का एक हेलीकॉप्टर क्रैश कर गया। क्या ईरान ने निशाना लगाकर इस हेलीकॉप्टर को मार गिराया? या फिर यह खुद ब खुद अपनी गलतियों से क्रैश हो गया या किसी तकनीकी खामी के चक्कर में यह क्रैश हो गया। इसे लेकर रिपोर्ट का इंतजार है। लेकिन जब यह सवाल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से हुआ तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि पायलट ठीक है और कोई घायल नहीं हुआ है। लेकिन जिस तरह से इजराइल और ईरान में तरनी हुई और दोनों ने एक दूसरे पर एक-एक करके हमला किया, उससे लगा कि अब आने वाले वक्त में यह युद्ध और भीषण हो जाएगा। लेकिन कुछ देर के हमले के बाद दोनों ही पक्ष रुक गए। यानी कि कोई भी पक्ष इस युद्ध को आगे नहीं बढ़ाना चाहता या फिर अमेरिका का दबाव काम कर गया। कुल मिलाकर अमेरिका को उम्मीद है कि ईरान के साथ डील हो जाएगी जिसमें वो अपने न्यूक्लियर हथियार बनाने की जिद छोड़ देंगे और परमाणु डस्ट अमेरिका को सौंप देंगे।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:06:57 +0530</pubDate>
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<title>POJK में Pakistan Army का खूनी खेल! तस्लीमा अख्तर ने दुनिया से लगाई न्याय की गुहार</title>
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<description><![CDATA[ जम्मू-कश्मीर की मानवाधिकार रक्षक और कश्मीर आतंकी पीड़ितों के संगठन (एटीवीके) की अध्यक्ष तस्लीमा अख्तर ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों द्वारा नागरिकों के खिलाफ कथित हिंसा और बल प्रयोग की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि मैं उस हिंसा की कड़ी निंदा करती हूं जिसने पीओजेके में निर्दोष नागरिकों के जीवन को रक्तपात में बदल दिया है। दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों को इन गंभीर उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और प्रभावित लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए।इसे भी पढ़ें: PoJK में पाकिस्तान के जुल्मों पर भारत का तीखा वार, फेक न्यूज छिपा नहीं पाएगी सचअख्तर ने आरोप लगाया कि स्थानीय निवासियों की आवाज को दबाने और सूचना को बाहरी दुनिया तक पहुंचने से रोकने के प्रयास में पीओजेके में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि, पाकिस्तान को यह समझना चाहिए कि पीओजेके के लोग वैश्विक स्तर पर जुड़े हुए हैं। आज के तकनीकी युग में सच्चाई को छिपाया नहीं जा सकता और समाचार और सूचना को दबाने के प्रयास अंततः विफल होंगे।इसे भी पढ़ें: Terror-Gangster गठजोड़ पर NIA का बड़ा एक्शन, Punjab-Haryana में 18 ठिकानों पर एक साथ रेडजम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि निवासी केवल बुनियादी अधिकारों और स्वास्थ्य सेवा, खाद्य सुरक्षा और बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं जैसी आवश्यक सेवाओं की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग अपने मौलिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं, फिर भी उन्हें दमन का सामना करना पड़ रहा है। हम उनके साथ मजबूती से खड़े हैं और हर पीड़ित के लिए न्याय की मांग करते हैं। अख्तर ने क्षेत्र में पत्रकारों और राजनीतिक प्रक्रियाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सच बोलने वालों को कथित तौर पर चुप कराया जा रहा है, पत्रकारों को हिरासत में लिया जा रहा है और चुनाव सहित लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं अनिश्चितता का सामना कर रही हैं। ऐसे कृत्य अस्वीकार्य हैं और इनका तुरंत समाधान किया जाना चाहिए। प्रत्यक्षदर्शियों से प्राप्त रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि हत्याओं के परेशान करने वाले वीडियो सामने आए हैं और स्थिति पर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंता को उजागर किया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:06:57 +0530</pubDate>
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<title>भारत की पीठ पर नेपाल ने छुरा घोंपा! बालने शाह ने लगाया बैन</title>
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<description><![CDATA[ एक तरफ भारत ने हमेशा नेपाल के लिए अपने दरवाजे और दिल खोल कर रखे। लेकिन दूसरी तरफ नेपाल ने एनन सीजन के वक्त भारतीय किसानों और व्यापारियों की पीठ में छुरा घोप दिया। दरअसल नेपाल सरकार ने यानी बालेन शाह की सरकार ने अचानक एक ऐसा फरमान सुनाया जिससे ना केवल भारत के फल निर्यातक सदमे में है बल्कि खुद नेपाल की जनता अब सड़कों पर उतरने को मजबूर है। नेपाल ने भारतीय आम और कई प्रमुख फलों के आयात पर अघोषित और अचानक प्रतिबंध लगा दिया। ऐसे में सवाल है आखिर क्यों नेपाल अपनी ही जनता को भूखा रखने और महंगी कीमतों की आग में झोंकने पर तुला है? क्या यह सिर्फ एक व्यापारिक फैसला है या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक साजिश।इसे भी पढ़ें: एक ही नदियों की संतान, भारत पर नेपाली विदेश मंत्री ने ऐसा क्यों कहा?नेपाल के प्रतिष्ठित समाचार पत्र राइजिंग नेपाल डेली की रिपोर्ट ने वहां की सरकार की पोल खोल कर रख दी। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि नेपाल में गर्मियों के दौरान आम की डिमांड इतनी ज्यादा होती है कि स्थानीय उत्पादन उसका 10% भी पूरा नहीं कर सकता। नेपाल में आम का उत्पादन बेहद सीमित है और वह भी केवल कुछ खास इलाकों में। ऐसे में सालों से नेपाल की मैंगो डिप्लोमेसी और वहां के लोगों की थाली भारत के रसीले आमों से सस्ती रही है। लेकिन इस बार नेपाल सरकार ने बिना किसी तैयारी के आयात पर कैंची चला दी और नेपाल की मीडिया रिपोर्ट बताती है कि इस फैसले से नेपाल के बड़े व्यापारी अब बर्बादी की कगार पर हैं क्योंकि उनके पास स्टॉक खत्म हो चुका है और सप्लाई के सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं। काठमांडू, पोखरा, विराट नगर जैसी बड़ी मंडियों में इस वक्त मातम पसरा है। भारत से आमों की खेप ना पहुंचने के कारण स्थानीय आमों के दाम अब आसमान छू गए हैं। हैरानी की बात यह है कि वहां वर्तमान में नेपाली बाजारों में जो स्थानीय आम मौजूद हैं, उनकी गुणवत्ता भारतीय, दशहरी, लंगड़ा और चौसा के मुकाबले कहीं नहीं ठहरती है। इसे भी पढ़ें: West Bengal: नेपाल बॉर्डर के पास से TMC नेता जहांगीर खान गिरफ्तार, कलकत्ता HC से झटका लगने के बाद थे फरारगुणवत्ता कम और कीमत चार गुना। नेपाली जनता का कहना है कि जो फल पहले आम आदमी खरीद सकता था अब वह सिर्फ रईसों की मेज की शोभा बढ़ा रहा है। सिर्फ आम ही नहीं केले और अन्य भारतीय फलों की कमी से पूरा मार्केट क्रैश होने की स्थिति में आ गया है। नेपाल के फल और सब्जी व्यापारियों ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि घरेलू कृषि को बढ़ावा देना सुनने में अच्छा लगता है। लेकिन क्या नेपाल के पास इसके लिए बुनियादी ढांचा है। व्यापारियों का तर्क है कि नेपाली आम का सीजन महज 2 महीने का होता है। बाकी के 10 महीने नेपाल क्या खाएगा? बिना किसी कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था किए और बिना किसी पैदावार को बढ़ाए भारत से आयात रोकना अपने ही नाक काटने जैसा है। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि अगर यह प्रतिबंध एक हफ्ते और जारी रहा तो नेपाल में फलों की ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो जाएगी और आम जनता का गुस्सा सरकार के लिए संभालना मुश्किल हो जाएगा। कई व्यापारियों ने तो यहां तक कह दिया कि उन्हें करोड़ों का आर्थिक नुकसान हो चुका है जिसकी भरपाई नामुमकिन है। अब बात करते हैं उस छुरे की जो भारत की पीठ में नेपाल या फिर यूं कह लें कि बाल शाह ने घोपा है। भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के हजारों किसान नेपाल को होने वाले निर्यात पर निर्भर रहते हैं। जब फसल तैयार है, मंडियों में माल लदा है, तब नेपाल का यह फैसला भारतीय किसानों की मेहनत पर पानी फेरने जैसा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:06:56 +0530</pubDate>
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<title>छत्रपति शिवाजी पर इजरायल का दुनिया हिलाने वाला ऐलान, इस्लामिक देशों की उड़ी नींद!</title>
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<description><![CDATA[ छत्रपति शिवाजी महाराज इजराइल ने अपने और भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा ऐलान किया है जिसे सुनकर कुछ मुस्लिम देश बौखला जाएंगे। कई कन्व्टेड मुस्लिम तो समझ ही नहीं पाएंगे कि क्या तहलका मचा है। इजराइल ने ऐलान किया है कि वह मराठा साम्राज्य के महान शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की एक भव्य मूर्ति अपने देश में लगाने जा रहा है। आप जानते ही हैं कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने औरंगजेब की सत्ता को चुनौती दी थी। औरंगजेब को तड़पने और मरने के लिए छोड़ दिया था। अब इजराइल उन्हीं महान छत्रपति शिवाजी महाराज को पहली बार अपने देश में लाना चाहता है। इजराइल चाहता है कि उसके देश के लोगों को भी पता चले कि छत्रपति शिवाजी महाराज की ताकत क्या थी। इसे भी पढ़ें: ये बदला हुआ ईरान है! जानिए इस बार इजरायल को पहले घुसकर क्यों मारा?इजराइल अपने देश के लोगों को यह भी बताना चाहता है कि कैसे यहूदी लोगों ने छत्रपति शिवाजी की सेना में मुगलों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। मुंबई में इजराइल के काउंसिल जनरल यानीव रेवाच ने ऐलान किया है कि हम छत्रपति शिवाजी की एक भव्य मूर्ति बनवा रहे हैं। यह सब कुछ हम भारत या दुनिया के किसी देश को खुश करने के लिए नहीं कर रहे बल्कि हम एक सांस्कृतिक बदलाव लाना चाहते हैं ताकि इजराइल के लोगों को भी भारत के इतिहास के बारे में पता चले। हम छत्रपति शिवाजी पर छपी किताबों को हिब्रू भाषा में ट्रांसलेट करवा रहे हैं ताकि शिवाजी महाराज की महानता और शौर्य की गाथाएं यहूदियों को भी पढ़ने को मिले। जिन शिवाजी महाराज ने मुगलों को विलुप्ति की कगार पर लाकर छोड़ दिया। उनके बारे में वामपंथियों ने कुछ नहीं बताया। बहरहाल आपको बता दें कि जब लगभग पूरी दुनिया में यहूदियों पर अत्याचार हो रहे थे तब भारत ही वह देश था जिसने यहूदियों को संरक्षण दिया। भारत वो इकलौता देश है जहां पर यहूदियों के खिलाफ कभी अत्याचार नहीं हुए। उनसे नफरत नहीं की गई। बताया जाता है कि 175 ईसा पूर्व में प्रताड़ना झेल रहे बेने इजराइल समुदाय के कुछ लोग महाराष्ट्र वाले इलाके में पहुंच गए।इसे भी पढ़ें: इतिहास में पहली बार सऊदी में तहलका मचा आया भारत, दुनिया हैरानअपनी युद्ध कला की परंपराओं और सैन्य कौशल के लिए पहचाने जाने वाले बेने इजराइल समुदाय के लोगों ने क्षेत्रीय सेनाओं में सेवा की। जिनमें मराठा राज्य से जुड़ी सेनाएं भी शामिल थी। छत्रपति शिवाजी महाराज ने बेने इजराइली लोगों की सैन्य क्षमताओं को पहचाना और उनमें से कुछ को अपनी सेना में शामिल भी कर लिया। जब मराठा शासक मुगलों को चुनौती दे रहे थे। उस समय यहूदी सैनिकों ने भी छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना में पूरा योगदान दिया।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:06:56 +0530</pubDate>
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<title>हेलीकॉप्टर गिराने पर भड़का America, ईरान पर की बमबारी, Tehran ने Missile Attack से लिया बदला</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने बुधवार को कहा कि उसने जॉर्डन में स्थित उस हवाई अड्डे पर मिसाइल हमला किया है, जहां अमेरिकी सैन्य बल तैनात हैं।
 हालांकि, जॉर्डन और अमेरिका दोनों ने जॉर्डन को निशाना बनाकर किए गए किसी भी हमले की अभी पुष्टि नहीं की।
 ईरान के अर्धसैन्य बल रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि उसने मुवाफ्फक सल्ती एयर बेस पर मिसाइलें दागी हैं।
 इस एयर बेस पर अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमान और अन्य सैन्य विमान तैनात रहे हैं।
 होर्मुज जलडमरूमध्य के समीप अमेरिकी सेना का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद अमेरिका ने बुधवार को ईरान पर हमले किए, जिसके बाद तेहरान ने इनका जवाब देने की चेतावनी दी है।
 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दुर्घटना के लिए ईरान को दोषी ठहराया है।
 ईरान ने जवाबी कार्रवाई की कसम खाई, जिससे ईरान युद्ध में स्थायी युद्धविराम की संभावनाओं पर फिर सवाल खड़े हो गए। इस युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग अवरुद्ध हो गया है और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया है।
 इस बीच बहरीन में मिसाइल हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजने लगे, जहां अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है। तेहरान ने कहा कि उसने जवाबी कार्रवाई के तहत इस ठिकाने को निशाना बनाया है।
 अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने कहा कि अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के लड़ाकू विमानों ने ईरान में ‘‘वायु रक्षा प्रणालियों, जमीनी नियंत्रण स्टेशन और निगरानी रडार ठिकानों’’ को निशाना बनाकर हमले किए। ईरान ने बंदर अब्बास और केश्म द्वीप के आसपास हमलों की पुष्टि की, लेकिन नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
 सेंट्रल कमांड ने कहा, ‘‘यह अभियान अमेरिकी बलों और क्षेत्रीय समुद्री मार्गों से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों पर हालिया हमलों के उसी तरह जवाब के रूप में चलाया गया।’’
 इसके बाद ईरान ने दावा किया कि उसने बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय और कुवैत में अमेरिकी सैनिकों वाले सैन्य अड्डे को ड्रोन से निशाना बनाया। हालांकि, बहरीन और कुवैत दोनों ने ऐसे किसी हमले को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की।
 ट्रंप ने इससे पहले सोशल मीडिया पर लिखा था कि ईरान ने जलडमरूमध्य के ऊपर गश्त कर रहे अमेरिकी विमान को मार गिराया। राष्ट्रपति ने कहा था कि अमेरिका को ‘‘इस हमले का जवाब देना ही होगा।’’
 ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान के क्षेत्र के पास मौजूद विदेशी सैन्य बल ‘‘लगातार खतरे मे’’ हैं और बाद में उन्होंने अमेरिकी हमलों का जवाब देने की भी चेतावनी दी।
 अराघची ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘ईरानी बल किसी भी हमले या खतरे को बिना जवाब दिए नहीं छोड़ेंगे। यदि सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो हमारे क्षेत्र से दूर चले जाएं।’’
 अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को गिराए जाने और उसके बाद किए गए अमेरिकी हमलों ने दो महीने से लागू युद्धविराम को और कमजोर कर दिया। इससे एक दिन पहले ही युद्धविराम लागू होने के बाद पहली बार ईरान और इजराइल के बीच गोलेबारी हुई थी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:06:55 +0530</pubDate>
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<title>भारत ने पहली बार तैनात किए 12 परमाणु बम, खुलासे से हिली दुनिया!</title>
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<description><![CDATA[ ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार भारत के परमाणु हथियारों को लेकर एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार मोर्चे पर तैनात कर दिए हैं। दरअसल ऑपरेशन सिंदूर 2 की तैयारी और दुनिया में जंग जैसे हालातों के बीच भारत के परमाणु हथियारों को लेकर एक बेहद ही चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। रक्षा क्षेत्र पर नजर रखने वाले एक ग्लोबल रिसर्च इंस्टट्यूट सिपरी ने अपनी सालाना रिपोर्ट में बताया है कि भारत तेजी से अपने न्यूक्लियर हथियारों की संख्या बढ़ा रहा है। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि 2014 तक भारत परमाणु हथियारों की संख्या में पाकिस्तान से पीछे था। सोचिए उस वक्त भारत के पास 90 से 110 परमाणु हथियार थे। जबकि पाकिस्तान के पास 100 से 120 परमाणु हथियार थे।  इसे भी पढ़ें: West Asia संकट के बीच PM Modi को Kuwait में भारतीयों की फिक्र, अमीर से की सीधी बातसिप्री की सबसे लेटेस्ट रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के पास अब 190 परमाणु हथियार हैं। जबकि पाकिस्तान के पास 170 न्यूक्लियर हथियार हैं। 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास 172 न्यूक्लियर हथियार थे। 2025 में इनकी संख्या 180 पहुंच गई। इसी बीच ऑपरेशन सिंदूर हुआ, जिसके बाद अब भारत के न्यूक्लियर हथियारों की संख्या 190 पहुंच गई है। यह एक बहुत बड़ी छलांग है। जबकि इसी सिपरी रिपोर्ट के मुताबिक 2024, 25 और 26 में पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों की संख्या 170 ही रही। इसी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने पहली बार 12 न्यूक्लियर हथियारों को डिप्लॉय कर दिया है। न्यूक्लियर हथियारों को डिप्लॉय करने का क्या मतलब होता है वो अब हम आपको बताते हैं। इसे भी पढ़ें: ये बदला हुआ ईरान है! जानिए इस बार इजरायल को पहले घुसकर क्यों मारा?दरअसल एक न्यूक्लियर हथियार के दो सबसे महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं। पहला न्यूक्लियर वॉर हेड और दूसरा वेक्टर। वेक्टर अमूमन एक मिसाइल होती है जो न्यूक्लियर वॉर हेड को लेकर दुश्मन के टारगेट पर हमला करती है। न्यूक्लियर वॉर हेड्स और मिसाइलों को अलग-अलग जगह पर स्टोर किया जाता है। जरूरत पड़ने पर ही दोनों को अटैच किया जाता है। जब हमले की नौबत आती है तो मिसाइल पर न्यूक्लियर वॉर हेड को लगा दिया जाता है। मिसाइल पर न्यूक्लियर वॉर हेड लगने के बाद इसे तभी लॉन्च किया जा सकता है जब किसी के पास इसका सीक्रेट कोड हो। दरअसल इसका मतलब यह है कि भारत ने 12 मिसाइलों में न्यूक्लियर वॉर हेड्स को अटैच कर दिया है और इन मिसाइलों को दुश्मन की तरफ मुंह करके बैठा दिया गया है यानी तैनात कर दिया गया है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:06:55 +0530</pubDate>
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<title>Ebola Outbreak: Trump प्रशासन का Europe पर दबाव, Congo&#45;Uganda से आने वालों पर लगे रोक</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन यूरोपीय देशों को अफ्रीका के इबोला प्रभावित देशों से यूरोप में आने वाले लोगों के लिए यात्रा पाबंदियां बढ़ाने की सलाह दे रहा हैं।
 ट्रंप प्रशासन ने यह संकेत भी दिया है कि ऐसा न करने पर विश्व कप फुटबॉल टूर्नामेंट समेत अन्य मौकों के लिए यूरोप से लोगों की यात्रा को लेकर अमेरिका के नियमों में सख्ती बरती जा सकती है।
 विदेश विभाग ने एक बयान में कहा कि विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन को फोन करके अपनी चिंताएं व्यक्त कीं और कांगो तथा युगांडा में इबोला फैलने पर अमेरिका और यूरोप के तालमेल एवं जवाबी प्रयासों पर चर्चा की।
 इसमें कहा गया, ‘‘विदेश विभाग की सबसे बड़ी प्राथमिकता और ध्यान अमेरिकी लोगों की सेहत की रक्षा करना और इबोला का प्रकोप हमारे नजदीक तक पहुंचने से रोकने पर है।’’
 विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘अमेरिका ने इस संक्रमण को फैलने से निपटने के लिए कदम बढ़ाया है और अब दुनिया को भी और कदम उठाने होंगे।’’ 
 अधिकारी ने रूबियो और वॉन डेर लेयेन के बीच फोन पर हुई बातचीत के बारे में नाम जाहिर नहीं होने की की शर्त पर जानकारी दी।
 उन्होंने कहा कि अब कार्रवाई का समय है और ऐसा नहीं होने पर यात्राओं पर असर पड़ सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:06:54 +0530</pubDate>
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<title>PoK सुलग रहा, Afghanistan भड़क रहा, दो मोर्चों पर घिर चुके Pakistan की उलटी गिनती शुरू</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान का दुस्साहस अब हर सीमा पार करता जा रहा है। एक तरफ वह पीओके में आम जनता पर जुल्म और दमन की सारी हदें पार कर रहा है, दूसरी तरफ अफगानिस्तान की जमीन पर लगातार बम बरसाकर मासूमों की जान ले रहा है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि पाकिस्तान के खिलाफ दो तरफ से मोर्चा खुलने की आशंका गहराने लगी है। पीओके में जनता खुलकर इस्लामाबाद के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है, जबकि अफगानिस्तान भी पाक हमलों पर आगबबूला है। इसी बीच सामने आई एक रिपोर्ट ने पूरी दुनिया के सामने पाक सेना की असलियत खोल कर रख दी है। हम आपको बता दें कि जिस सेना को इस्लामाबाद अपनी सबसे बड़ी ताकत बताता फिरता है, वही सेना भारत की जवाबी कार्रवाई के सामने बुरी तरह पस्त नजर आई थी। भारत ने जिस सटीकता और ताकत के साथ पाकिस्तान को जवाब दिया था उसने यह साबित कर दिया कि पाकिस्तानी फौज केवल बयानबाजी में बहादुर है, मैदान में नहीं। पाकिस्तानी फौज सिर्फ कमजोर और निर्दोषों पर जुल्म ढाने में ही अपनी बहादुरी दिखा पाती है।हम आपको बता दें कि सबसे भयावह तस्वीर इस समय पीओके से सामने आ रही है। वहां पाकिस्तान के खिलाफ जनता का गुस्सा अब खुली बगावत में बदलता दिख रहा है। मुजफ्फराबाद, भीमबर, कोटली और मीरपुर जैसे इलाकों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। लोग इस्लामाबाद की नीतियों के खिलाफ खुलकर नारे लगा रहे हैं। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन ने पाकिस्तान सरकार की नींद उड़ा दी है। हालात इतने बिगड़ गए कि पाक सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले बरसाए, लाठियां चलाईं और कई जगह गोलियां तक चलीं। इन झड़पों में कम से कम 21 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि दर्जनों घायल बताए जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: PoK में भुखमरी और तनाव, भारत में ज़ोजिला टनल का जश्न... LoC से बंटे दो कश्मीर की बदलती हकीकत | Explained Zojila Tunnelसोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो पाकिस्तान के उस चेहरे को उजागर कर रहे हैं जिसे वह दुनिया से छिपाने की कोशिश करता रहा है। बाजार बंद हैं, सड़कों पर सन्नाटा है और जगह जगह सुरक्षाबलों की तैनाती कर दी गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान ने पीओके में संचार सेवाओं पर भी रोक लगाने की कोशिश की है ताकि वहां हो रहे अत्याचार दुनिया तक न पहुंच सकें। कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां लगातार जारी हैं। लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार पीओके को एक उपनिवेश की तरह चला रही है और वहां के नागरिकों को बुनियादी अधिकार तक नहीं दिए जा रहे हैं।उधर, पाकिस्तान की इस दमनकारी कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। ब्रिटेन की संसद के पचास से ज्यादा सांसदों ने खुलकर पीओके की स्थिति पर चिंता जताई है। ब्रिटिश सांसद इमरान हुसैन ने कहा कि पीओके में लगातार बंदी, संचार अवरोध और गिरफ्तारियों की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। सांसदों ने ब्रिटिश सरकार से मांग की है कि वह राजनयिक माध्यमों से पाकिस्तान पर दबाव बनाए ताकि नाकाबंदी हटे, संचार बहाल हो और कश्मीरियों के मानवाधिकारों का सम्मान किया जाए।दूसरी ओर, अफगानिस्तान में भी पाकिस्तान का आक्रामक चेहरा सामने आया है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान पर नए हवाई हमलों का आरोप लगाया है। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के अनुसार पाक सेना ने खोस्त, कुनार और पक्तिका प्रांतों में नागरिक ठिकानों पर बमबारी की। इन हमलों में ग्यारह बच्चों, एक महिला और एक बुजुर्ग की मौत हो गई जबकि चौदह लोग घायल हुए हैं। तालिबान ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया है। यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान पर अफगान सीमा में घुसकर हमला करने का आरोप लगा हो। दोनों देशों के बीच महीनों से संघर्ष जारी है और सीमा पर लगातार तनाव बना हुआ है।हम आपको बता दें कि पाकिस्तान अफगानिस्तान पर आतंकियों को शरण देने का आरोप लगाता है, जबकि काबुल इन आरोपों को खारिज करता रहा है। लेकिन सच्चाई यह है कि पाकिस्तान अब अपने ही बनाए जाल में फंसता जा रहा है। एक तरफ पीओके में जनता का गुस्सा फूट रहा है, दूसरी तरफ अफगानिस्तान में उसकी सैन्य कार्रवाई उसके खिलाफ माहौल बना रही है।इसी बीच, भारत को लेकर सामने आई जानकारी ने पाकिस्तान की बेचैनी और बढ़ा दी है। पाकिस्तान सरकार के एक दस्तावेज में दावा किया गया है कि भारत ने सात से ज्यादा अतिरिक्त स्थानों पर हमले किए थे, जिनका खुलासा आधिकारिक तौर पर नहीं किया गया। इसमें अटक, बहावलनगर, गुजरात, झंग, पेशावर, छोर और हैदराबाद जैसे इलाकों का जिक्र किया गया है। पाकिस्तान का कहना है कि इन हमलों में भारी नुकसान हुआ।असल में यह पूरा घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ जब पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले में छब्बीस निर्दोष लोगों की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद भारत ने &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; के तहत सात मई को आतंक के ढांचों पर सटीक प्रहार किए थे। पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, लेकिन किसी नागरिक क्षेत्र या सैन्य अड्डे पर हमला नहीं किया गया। भारत ने साफ कर दिया कि उसका लक्ष्य केवल आतंकवाद है। इसके बावजूद पाकिस्तान ने जब भारतीय सैन्य ठिकानों और नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने की कोशिश की, तब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई हवाई अड्डों और रडार ठिकानों को तबाह कर दिया था। यही वह क्षण था जिसने पाक सेना की पोल खोल दी। दुनिया ने देखा कि भारत ने बिना शोर मचाए पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को गहरी चोट पहुंचाई, जबकि पाकिस्तान केवल दावे करता रह गया।बहरहाल, आज हालात यह हैं कि पीओके में जनता विद्रोह पर उतारू है, अफगानिस्तान पाकिस्तान पर युद्ध जैसे आरोप लगा रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस्लामाबाद की नीतियों पर सवाल उठा रहा है। यही नहीं, आर्थिक हालात विकट होने के चलते पाकिस्तान के अन्य शहरों से भी सरकार और सेना विरोधी आवाजें मुखर होने लगी हैं। इस तरह पाकिस्तान अब चारों तरफ से घिरता दिखाई दे रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:06:53 +0530</pubDate>
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<title>Prabhasakshi NewsRoom: Trump के हमले से बौखलाये Iran ने Bahrain से Jordan तक कर दी मिसाइलों की बारिश</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया की धरती पर बारूद का ऐसा तूफान उठा है जिसने पूरी दुनिया की सांसें रोक दी हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिडी यह आग अब उस महाविस्फोट की चेतावनी बन चुकी है जो पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकता है। होरमुज जलडमरूमध्य से लेकर बहरीन, जॉर्डन और दक्षिणी लेबनान तक मिसाइलों, ड्रोन और हवाई हमलों की गूंज ने यह साफ कर दिया है कि अब हालात नियंत्रण से बाहर जाने की कगार पर पहुंच चुके हैं।इस भड़कते संकट की शुरुआत उस वक्त हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने होरमुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी अपाचे हेलिकाप्टर को मार गिराया। ट्रंप ने इसे अमेरिका की सैन्य ताकत पर सीधी चोट बताते हुए तुरंत जवाबी कार्रवाई का एलान कर दिया। अमेरिकी सेना ने कुछ ही घंटों बाद ईरान के दक्षिणी इलाकों पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। बंदर अब्बास, किश्म, सिरिक, मिनाब और जास्क जैसे रणनीतिक इलाकों में जोरदार धमाके सुनाई दिए। अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरानी राडार और संचार ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों में जल ढांचा और नागरिक सुविधाएं तबाह हुई हैं।इसे भी पढ़ें: भारत ने पहली बार तैनात किए 12 परमाणु बम, खुलासे से हिली दुनिया!ईरान ने भी पीछे हटने की बजाय सीधी चुनौती देने का रास्ता चुना। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने बहरीन में मौजूद अमेरिकी पांचवें बेडे को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमले किए। बहरीन में मिसाइल चेतावनी सायरन बज उठे और पूरा इलाका दहशत में डूब गया। ईरान ने साफ शब्दों में कहा कि अगर अमेरिका ने एक और हमला किया तो जवाब “कुचल देने वाला और निर्णायक” होगा। ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमानों के हैंगर और कमांड सेंटर को निशाना बनाया है।इतना ही नहीं, ईरान ने जॉर्डन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर भी हमला बोल दिया। जॉर्डन ने दावा किया कि उसने अमेरिकी ठिकानों की ओर बढ़ रही पांच मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। वहीं कुवैत में भी हवाई सुरक्षा तंत्र सक्रिय करना पड़ा। इन हमलों ने यह साफ कर दिया कि अब यह संघर्ष केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरा पश्चिम एशिया युद्ध के मुहाने पर खड़ा है।दूसरी ओर इजरायल ने भी मोर्चा संभाल लिया है। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के टायर क्षेत्र समेत कई इलाकों में हिजबुल्लाह के ड्रोन और मिसाइल लांच ठिकानों पर जबरदस्त हवाई हमले किए। इजरायल का दावा है कि उसने छह महत्वपूर्ण ठिकानों को तबाह कर दिया है। सेना ने धुंधले हवाई वीडियो जारी कर यह दिखाने की कोशिश की कि कैसे लेबनान के गांवों और घरों पर बम बरसाए गए। लेकिन इसके जवाब में हिजबुल्लाह ने भी हमला तेज कर दिया।हिजबुल्लाह ने दावा किया कि उसने दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैनिकों, बख्तरबंद वाहनों और सैन्य कमांड ठिकानों पर चौदह हमले किए हैं। बिय्यादा, रशफ, अल कवजा और कंतारा जैसे इलाकों में रॉकेट और ड्रोन हमलों की खबरों ने इजरायल की चिंता बढ़ा दी है। हिजबुल्लाह ने यह भी दावा किया कि उसने इजरायली हर्मीस-450 ड्रोन को मार भगाया और समुद्री ठिकानों पर विस्फोटक ड्रोन दागे।हालांकि इस भीषण तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि उसकी हालिया सैन्य कार्रवाई फिलहाल पूरी हो चुकी है और वह आगे तत्काल युद्ध नहीं चाहता। दूसरी तरफ ईरान ने भी औपचारिक रूप से युद्धविराम की घोषणा नहीं की, लेकिन उसके बयानों में यह संकेत जरूर मिला कि वह फिलहाल पूर्ण युद्ध से बचना चाहता है। इसके बावजूद जमीन पर जारी हमले और जवाबी हमले यह बता रहे हैं कि हालात किसी भी क्षण विस्फोटक मोड़ में जा सकते हैं।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस संकट को और भड़का दिया जब उन्होंने कहा कि होरमुज जलडमरूमध्य कोई अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह ईरान और ओमान की साझा संप्रभुता के तहत आता है। उनका यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका को चुनौती माना जा रहा है, क्योंकि दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यहां तनाव और बढ़ा तो पूरी दुनिया में तेल संकट और आर्थिक भूचाल आ सकता है।इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका ईरान के ताजा हमलों को सहकर पीछे हटेगा या फिर एक और विनाशकारी जवाब देगा। देखा जाये तो पश्चिम एशिया की धरती पर फैल चुकी यह आग अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रही, बल्कि यह तीसरे विश्व युद्ध की दस्तक जैसी दिखाई देने लगी है। मिसाइलों की गूंज, ड्रोन की तबाही और युद्ध के खुले ऐलान ने दुनिया को उस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां एक गलत फैसला पूरी मानवता को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:06:53 +0530</pubDate>
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<title>इबोला वायरस का दुर्लभ और उपचार &#45; विहीन रूप’: DRC में संकट गहराया</title>
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<description><![CDATA[ काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ मानवीय सहायता अधिकारी, इबोला प्रकोप के केन्द्र इतूरी प्रान्त के तीन दिवसीय आकलन दौरे पर हैं. इस बीच, डीआरसी के तीन पूर्वी प्रान्तों में इबोला के पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 515 हो गई है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:00:27 +0530</pubDate>
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<title>एशिया प्रशान्त: व्यापार को आधुनिक बना रही AI, मगर अपनाने की रफ़्तार धीमी</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र एशिया और प्रशान्त आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (ESCAP) और एशियाई विकास बैंक (ADB) के एक नए अध्ययन में बताया गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एशिया और प्रशान्त क्षेत्र में व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाओं को बदल तो रही है, मगर बढ़ती दिलचस्पी के बावजूद, अधिकाँश अर्थव्यवस्थाएँ अभी इस तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल नहीं कर रही हैं. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:00:23 +0530</pubDate>
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<title>भारत: तटीय इलाक़ों में जलवायु सहनसक्षमता की अगुवाई करती महिलाएँ</title>
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<description><![CDATA[ भारत की साढ़े 7 हज़ार किलोमीटर लम्बी तटरेखा पर महिलाएँ, जलवायु परिवर्तन से प्रभावित समुदायों को नए तरीक़ों से सहारा दे रही हैं. कहीं वे मैन्ग्रोव बहाल कर रही हैं, कहीं धान की खेती को अधिक टिकाऊ बना रही हैं, और कहीं समुद्र से नई आजीविका के अवसर पैदा कर रही हैं. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:00:23 +0530</pubDate>
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<title>WFP ने 15 हज़ार किलोमीटर की यात्रा करके, अफ़ग़ान स्कूली बच्चों तक पहुँचाया भोजन</title>
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<description><![CDATA[ अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के बाहरी क्षेत्र में स्थित विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के एक गोदाम में, कई सप्ताह की यात्रा के बाद पोषक तत्वों से समृद्ध बिस्कुटों की खेप पहुँची है. इस खेप को 15 हज़ार किलोमीटर लम्बी यात्रा पूरी करके काबुल पहुँचाया गया. यात्रा के दौरान इसे दो बार व्यवधानों का सामना करना पड़ा, जबकि अन्तिम चरण में सड़क मार्ग से 9 देशों की सीमाओं को पार करना पड़ा. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:00:23 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान: टायर में हमला, 8 लोगों की मौत, अभी तक $36.5 करोड़ का नुक़सान</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में जारी एक नए आकलन में बताया गया है कि लेबनान की राजधानी बेरूत और माउंट लेबनान क्षेत्र में हालिया युद्ध बढ़ने के बाद इमारतों को साढ़े 36 करोड़ डॉलर से अधिक का नुक़सान हुआ है. इस बीच, टायर शहर में हुए कुछ और हमलों ने युद्धविराम की नाज़ुक स्थिति को उजागर किया है, जो अब तक हिंसा और संघर्ष को पूरी तरह रोकने में विफल रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:00:18 +0530</pubDate>
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<title>Israel Retaliatory Strike Iran | ईरान पर इजराइल का भीषण हवाई हमला, सऊदी अरब में बजे सायरन, यमन से भी दागी गई मिसाइल</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) एक बार फिर विनाशकारी युद्ध की कगार पर आकर खड़ा हो गया है। ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमले के जवाब में इजराइल ने सोमवार तड़के ईरान के मध्य और पश्चिमी हिस्सों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। इस जवाबी कार्रवाई के बाद से पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है और एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका गहरा गई है।ईरान के कई शहर धमाकों से दहले, बंद किया गया हवाई क्षेत्रईरान के सरकारी टेलीविजन की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार तड़के देश के कई महत्वपूर्ण हिस्सों में एक के बाद एक कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं।निशाने पर रहे प्रमुख शहर: धमाकों की गूंज राजधानी तेहरान, इस्फहान, करज और तबरीज में सुनी गई। तेहरान के एक प्रत्यक्षदर्शी ने पुष्टि की कि राजधानी के पश्चिमी हिस्से में कम से कम एक बहुत बड़ा और भीषण धमाका हुआ।हवाई क्षेत्र सील: इजराइली लड़ाकू विमानों के हमलों के तुरंत बाद, ईरान सरकार ने एहतियात के तौर पर तेहरान के इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास के पूरे हवाई क्षेत्र (Airspace) को नागरिक उड़ानों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया।ईरानी अर्धसैनिक बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि इजराइल ने इस हमले में &#039;हवा से छोड़ी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों&#039; का इस्तेमाल किया है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने अभी तक नुकसान या सटीक सैन्य ठिकानों की जानकारी साझा नहीं की है।इसे भी पढ़ें: Vaibhav Sooryavanshi और यकीन न कर पाने वाला वो यादगार समय, जब मुख्य चयनकर्ता Ajit Agarkar भी रह गए हैरान इजराइल की बचाव सेवाओं के अनुसार, इस घटना में किसी के हताहत होने या कहीं मिसाइल गिरने की कोई सूचना नहीं मिली है।
यमन के बड़े हिस्से पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का नियंत्रण है। इससे पहले भी इजराइल-हमास युद्ध के दौरान और उसके बाद हूती विद्रोहियों ने इजराइल की ओर मिसाइलें दागी थीं, लेकिन वे ईरान-इजराइल के मौजूदा संघर्ष में पूरी तरह शामिल नहीं हुए हैं।
हूतियों ने अभी तक इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।हालांकि, अतीत में कई बार उन्होंने हमलों की जिम्मेदारी देर से स्वीकार की है।
ईरान के अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि किन ठिकानों को निशाना बनाया गया और न ही किसी संभावित नुकसान के बारे में जानकारी दी।
ईरान के अर्धसैनिक बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने कहा कि इजराइल ने सोमवार सुबह के हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया, लेकिन इससे अधिक विवरण नहीं दिया।
ईरान में हमले शुरू करने के बाद इजराइल ने एक संक्षिप्त बयान में कहा, ‘‘कुछ देर पहले इजराइल की वायुसेना ने पश्चिमी और मध्य ईरान में सैन्य ठिकानों पर हमला किया है।’’
हालांकि, इजराइल ने भी इससे अधिक कोई जानकारी साझा नहीं की।
इस बीच, सऊदी अरब में सोमवार सुबह उस क्षेत्र में मिसाइल हमले की चेतावनी को लेकर सायरन बज उठे, जहां अमेरिकी सैनिकों की तैनाती वाला एक महत्वपूर्ण एयरबेस स्थित है।
सऊदी सरकारी मीडिया के अनुसार, अल-खार्ज प्रांत में यह चेतावनी जारी की गई।इसे भी पढ़ें: Donald Trump की चेतावनी की उड़ाई नेतन्याहू ने धज्जियां! इज़राइल- ईरान का युद्ध चरम पर पहुंचा, रात भर हुए हवाई हमले | Israel-Iran Conflict इसी क्षेत्र में प्रिंस सुल्तान एयर बेस स्थित है, जहां अमेरिकी बल तैनात हैं।
यह अलर्ट इजराइल के ईरान पर हमलों के बाद जारी किया गया। हालांकि, कुछ देर बाद सऊदी अरब ने कहा कि इलाके में मिसाइल का खतरा टल गया है। अधिकारियों ने इस संबंध में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।
उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास सह कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ ने इन हमलों और अमेरिका के साथ किसी संभावित समन्वय से जुड़े सवालों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।Stay updated with International
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:57:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Donald Trump की चेतावनी की उड़ाई नेतन्याहू ने धज्जियां! इज़राइल&#45; ईरान का युद्ध चरम पर पहुंचा, रात भर हुए हवाई हमले | Israel&#45;Iran Conflict</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की आग में झुलस गया है। ईरान के कई शहरों में, जिसमें राजधानी तेहरान भी शामिल है, ज़ोरदार धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं। इज़राइल ने कहा कि उसने सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। ये हमले तब हुए जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा था कि इस क्षेत्र में &quot;सारे फ़ैसले वही लेते हैं&quot; और उन्होंने इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को तेहरान के मिसाइल हमलों का जवाब न देने का निर्देश दिया था।ईरान के शहरों में ये हमले तब हुए जब तेहरान और तेल अवीव के बीच धमकियों का दौर चल रहा था। यह सब रविवार रात इज़राइल पर ईरान के मिसाइल हमले के बाद हुआ, जो 8 अप्रैल को हुए संघर्ष-विराम के बाद दोनों पक्षों के बीच पहला सीधा टकराव था। ईरान ने बेरूत पर इज़राइली हमलों के जवाब में इज़राइल पर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार की थी। ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, इज़राइल ने ईरानी ठिकानों को निशाना बनाकर टारगेटेड हवाई हमले किए हैं, जिसके बाद ईरान के कई महत्वपूर्ण शहरों में बड़े पैमाने पर धमाके हुए हैं। यह सैन्य कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इज़राइल को जवाबी कार्रवाई न करने की सख्त हिदायत दी थी।ईरान के तीन अहम शहरों में धमाके, IRGC का दावाईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के हवाले से सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि सोमवार तड़के ईरान के तीन प्रमुख शहरों में धमाकों की गूंज सुनी गई:तेहरान (राजधानी)तबरीज़इस्फ़हानIRGC ने आरोप लगाया है कि इज़राइली वायुसेना ने इस हमले में अत्याधुनिक &quot;हवा से छोड़ी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों&quot; (Air-Launched Ballistic Missiles) का इस्तेमाल किया है। दूसरी ओर, इस सैन्य ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए इज़राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने सोमवार तड़के एक संक्षिप्त बयान जारी किया। IDF के मुताबिक, उसने ईरान के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में स्थित सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। हालांकि, नुकसान और हमलों के सटीक ठिकानों के बारे में विस्तृत जानकारी अभी आना बाकी है।  स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान में कई धमाकों की आवाज़ सुनी गई, जिसमें मेहराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास और इस्फ़हान और तबरीज़ शहरों में हुए धमाके भी शामिल हैं।लेबनान में इज़राइल की आक्रामकता - खासकर बेरूत पर हालिया हमलों - के जवाब में तेहरान ने उत्तरी इज़राइल के शहरों की ओर 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिससे एयर-रेड सायरन बजने लगे। यह घटनाक्रम रात भर में तेज़ी से बढ़ा।हालिया तनाव के केंद्र में लेबनान है। तेहरान का बार-बार कहना रहा है कि देश पर इज़राइल के सभी हमले बंद होने चाहिए और अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी युद्धविराम या व्यापक समझौते के लिए लेबनान अहम है।हालिया तनाव से तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं, जिसमें तेल की कीमतें $2 प्रति बैरल से ज़्यादा बढ़ गई हैं, साथ ही वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही शांति वार्ता भी मुश्किल में पड़ गई है।अमेरिकी राष्ट्रपति ने इज़राइल पर दबाव डाला है कि वह लेबनान में हमले बंद करे ताकि ईरान के साथ व्यापक युद्ध को खत्म करने के लिए किसी समझौते की गुंजाइश बन सके, और पिछले हफ़्ते उन्होंने फ़ोन पर बेंजामिन नेतन्याहू को अपशब्द भी कहे।इसके बावजूद, इज़राइल ने रविवार को बेरूत इलाके में हमले किए, जो पिछले हफ़्ते अमेरिका द्वारा लेबनान के लिए युद्धविराम योजना की घोषणा के बाद से ऐसे पहले हमले थे। इसके जवाब में ईरान ने इज़राइली ठिकानों पर मिसाइलों की बौछार की, जिससे अमेरिका-ईरान शांति वार्ता खतरे में पड़ गई, हालांकि ट्रम्प ने कहा कि समझौता अभी भी संभव है।कुछ घंटों बाद, इज़राइल की रक्षा सेनाओं ने कहा कि उन्होंने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि इज़राइल ने हवा से छोड़ी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल करके ईरान के अंदर ठिकानों पर हमला किया है। इस ताज़ा तनाव के कारण सोमवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतें 3% से ज़्यादा बढ़ गईं, और बेंचमार्क ब्रेंट फ़्यूचर्स की कीमत फिर से $96 प्रति बैरल से ऊपर चली गई।फाइनेंशियल टाइम्स के साथ एक इंटरव्यू में, ट्रम्प ने कहा कि ताज़ा तनाव कूटनीति को पटरी से नहीं उतारेगा। उन्होंने कहा, &quot;इसका समझौते पर कोई असर नहीं पड़ेगा।&quot; &quot;फ़ैसले मैं लेता हूँ। सारे फ़ैसले मैं लेता हूँ। वह फ़ैसले नहीं लेता।&quot;अंतर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक इज़राइली अधिकारी के हवाले से बताया कि ट्रम्प, जो न्यू जर्सी के बेडमिंस्टर में अपने गोल्फ़ क्लब में सप्ताहांत बिता रहे थे, ने रविवार को नेतन्याहू से फ़ोन पर आधे घंटे से भी कम समय तक बात की। एक्सियोस ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि ट्रंप ने कॉल के दौरान नेतन्याहू से कहा कि वे और हमले न करें क्योंकि &quot;हम एक डील के ज़रिए कुछ अच्छा करने के करीब हैं।&quot;युद्ध रोकने के मकसद से अमेरिका-ईरान बातचीत शुरू होने के बाद से ही इज़राइल ने हिज़्बुल्लाह के साथ संघर्ष में लेबनान पर हमले जारी रखे हैं। इज़राइली अधिकारियों का कहना है कि इस लड़ाई को ईरान के साथ किसी भी सीज़फायर (युद्धविराम) से अलग देखा जाना चाहिए।तेहरान लंबे समय से कहता आ रहा है कि अमेरिका के साथ कोई भी शांति समझौता इस बात पर निर्भर करेगा कि लेबनान में भी सीज़फायर लागू हो। इज़राइल ने मार्च में ईरान-समर्थित हिज़्बुल्लाह लड़ाकों का पीछा करते हुए लेबनान पर हमला किया था, क्योंकि उन्होंने तेहरान के समर्थन में सीमा पार से रॉकेट और ड्रोन दागे थे।ईरान के मुख्य शांति वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ ने कहा कि अमेरिकी ठिकाने और इज़राइली संपत्तियां दुश्मन जैसी हरकतों, जिनमें &quot;लेबनान को लेकर समझौतों का उल्लंघन&quot; भी शामिल है, के कारण वैध निशाने हैं।रविवार से पहले, अप्रैल में व्यापक युद्ध में सीज़फायर शुरू होने के बाद से ईरान ने इज़राइल पर हमला नहीं किया था, हालांकि हिज़्बुल्लाह ने ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:57:05 +0530</pubDate>
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<title>Philippines Strong Earthquake | मिंडानाओ में 7.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, तटीय इलाकों में उठीं सुनामी की लहरें</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिणी फिलीपींस का मिंडानाओ क्षेत्र सोमवार सुबह भीषण भूकंप के झटकों से दहल उठा। रिक्टर स्केल पर 7.8 तीव्रता वाले इस शक्तिशाली भूकंप के तुरंत बाद समुद्र में सुनामी की तीन फुट ऊंची लहरें उठने की पुष्टि हुई है। भूकंप के कारण कई इलाकों में बिजली गुल हो गई है और पूरे देश में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति बोंगबोंग मार्कोस ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।जनरल सैंटोस शहर के पास था भूकंप का केंद्रफिलीपीन ज्वालामुखी एवं भूकंप विज्ञान संस्थान (Phivolcs) के अनुसार, यह शक्तिशाली भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 7 बजकर 37 मिनट पर आया।केंद्र और गहराई: भूकंप का केंद्र मिंडानाओ द्वीप पर स्थित जनरल सैंटोस शहर से महज 13 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था। जमीन के भीतर इसकी गहराई केवल 10 किलोमीटर दर्ज की गई, जिसके कारण झटके बेहद विनाशकारी और दूर तक महसूस किए गए।पड़ोसी देशों में भी असर: फिलीपींस के अलावा इंडोनेशिया के उत्तरी सुलावेसी और उत्तरी मलुकु प्रांतों में भी लोगों ने भूकंप के तेज झटके महसूस किए, जिससे वहां भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया।संस्थान के प्रमुख टेरेसिटो बाकोलकोल ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘हम लोगों को सलाह देते हैं कि वे ऊंचाई वाले स्थानों पर चले जाएं या अंदरूनी इलाकों में सुरक्षित पहुंच जाएं।’’
 ताइवान, जापान, गुआम, पापुआ न्यू गिनी और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र के कई द्वीपीय देशों और क्षेत्रों में सुनामी की कुछ लहरें आ सकती हैं।
 इंडोनेशिया के उत्तरी सुलावेसी और उत्तरी मलुकु प्रांतों में भी लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए।फिलीपींस &#039;पैसिफिक रिंग ऑफ फायर&#039; (Pacific Ring of Fire) पर स्थित होने के कारण भूकंप और ज्वालामुखी के प्रति बेहद संवेदनशील है। 7.8 तीव्रता का यह भूकंप एक बड़ी तबाही का कारण बन सकता था, लेकिन समय रहते जारी की गई सुनामी की चेतावनी और प्रशासन की मुस्तैदी से एक बड़े हादसे को टालने की कोशिश की जा रही है। अगले कुछ घंटे तटीय इलाकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बने हुए हैं। Stay updated with International
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:57:04 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan North Waziristan Military Operation! उत्तरी वज़ीरिस्तान में 72 घंटे में 27 आतंकवादी ढेर, भारी मात्रा में गोला&#45;बारूद बरामद</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने पिछले 72 घंटों में उत्तरी वज़ीरिस्तान में कई अभियानों में फ़ितना अल-ख्वारिज से जुड़े 27 आतंकवादियों को मार गिराया। सेना की मीडिया शाखा ने रविवार को यह जानकारी दी।
 अंतर-सेवा जनसंपर्क (आईएसपीआर) के अनुसार, सुरक्षा बलों ने उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के मीर अली और मीरानशाह क्षेत्रों में कई आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया।
आईएसपीआर ने बताया कि सुरक्षाकर्मियों के साथ भीषण गोलीबारी में 27 आतंकवादी मारे गए। एक बयान में कहा गया कि घटनास्थल से हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए।
 सेना ने कहा कि इस अभियान के जरिए मीरानशाह के प्रमुख स्थानीय व्यक्ति शहीद मलिक सैफुल्लाह दावर की लक्षित हत्या का बदला भी लिया गया। आईएसपीआर ने कहा कि इलाके में छिपे आतंकवादियों को ढेर करने के लिए तलाश अभियान जारी है।इसे भी पढ़ें: World Oceans Day 2026: Plastic Pollution से घुट रहा है समुद्र का दम, जानें इसका पूरा History और महत्व &#039;अज्म-ए-इस्तेहकाम&#039; अभियान के तहत कार्रवाई जारीसेना की मीडिया शाखा ने साफ किया है कि वज़ीरिस्तान के इन इलाकों में अभी भी कुछ आतंकवादियों के छिपे होने की आशंका है, जिन्हें पूरी तरह खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर &#039;क्लियरेंस और सर्च ऑपरेशन&#039; (तलाश अभियान) चलाया जा रहा है।बयान में आगे कहा गया: &quot;सुरक्षा बल और देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियां ​​&#039;अज्म-ए-इस्तेहकाम&#039; (Operation Azm-e-Istehkam) अभियान के तहत अपनी सख्त कार्रवाई जारी रखेंगी। यह अभियान पाकिस्तान की धरती पर विदेशी ताकतों द्वारा प्रायोजित आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के देश के अटूट संकल्प की पुष्टि करता है।&quot; इसे भी पढ़ें: Israel Retaliatory Strike Iran | ईरान पर इजराइल का भीषण हवाई हमला, सऊदी अरब में बजे सायरन, यमन से भी दागी गई मिसाइल उत्तरी वज़ीरिस्तान का यह इलाका लंबे समय से सीमा पार और आंतरिक आतंकवाद का केंद्र रहा है। 72 घंटों के भीतर 27 आतंकवादियों का खात्मा सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी रणनीतिक कामयाबी माना जा रहा है, लेकिन क्षेत्र में पूर्ण शांति बहाल करने के लिए सेना को अभी लंबे समय तक इन दुर्गम इलाकों में अपनी मुस्तैदी बनाए रखनी होगी। Stay updated with International
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:57:04 +0530</pubDate>
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<title>Video | &amp;apos;थैंक यू, डार्लिंग&amp;apos;, जब एंकर के सवाल पर भड़के Donald Trump, लाइव इंटरव्यू के बीच से माइक निकालकर बाहर चले गए</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर मीडिया के साथ अपने तल्ख रिश्तों को लेकर सुर्खियों में हैं। NBC न्यूज़ के मशहूर शो &#039;मीट द प्रेस&#039; (Meet the Press) के लिए दिए जा रहे एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप इस कदर भड़क गए कि वे बीच में ही एंकर को &quot;थैंक यू, डार्लिंग&quot; कहकर और अपना माइक निकालकर बाहर चले गए। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के दौरान ट्रंप ने न सिर्फ अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया को &#039;तीसरी दुनिया का देश&#039; जैसा बताया, बल्कि बड़े मीडिया नेटवर्क्स को &#039;बेईमान और गंदी प्रेस&#039; तक कह डाला।कैसे शुरू हुआ विवाद? 1.8 बिलियन डॉलर के फंड पर चर्चायह पूरा टकराव उस समय शुरू हुआ जब एंकर क्रिस्टन वेल्कर ने ट्रंप से ईरान के साथ युद्ध खत्म करने की बातचीत और उनके प्रस्तावित 1.8 बिलियन डॉलर के &#039;एंटी-वेपनाइज़ेशन&#039; (Anti-Weaponization) पहल पर सवाल पूछा। इस फंड का मकसद उन लोगों को मुआवजा देना था, जिन्हें लगता था कि पिछली जो बाइडेन सरकार ने उन्हें गलत तरीके से निशाना बनाया था।इस मुद्दे पर बोलते हुए ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन और अमेरिकी मीडिया पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने आरोप लगाया कि बाइडेन के आस-पास ओवल ऑफिस में रहने वाले लोगों ने कई बेगुनाहों को जेल भेजकर उनकी जिंदगियां बर्बाद कर दीं। इसे भी पढ़ें: वैश्विक बाजार में Adani Group का बड़ा धमाका! अर्जेंटीना में मिला 10 साल का समुद्री सेवा ठेका, दक्षिण अमेरिका में पहली एंट्री2020 चुनाव और कैलिफोर्निया की वोटिंग पर तीखी बहसविवाद तब और बढ़ गया जब एंकर क्रिस्टन वेल्कर ने ट्रंप से 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली और कैलिफ़ोर्निया में जारी वोटों की गिनती को लेकर उनके दावों के &#039;सबूत&#039; मांग लिए। ट्रंप का पलटवार: &quot;मेरी बात सुनिए: बहुत सारे सबूत हैं। सबूत ही सबूत हैं। चुनाव में धांधली हुई थी। यह एक गंदा चुनाव था, और कैलिफ़ोर्निया में अभी भी ऐसा ही हो रहा है।&quot;ट्रंप ने दावा किया कि कैलिफ़ोर्निया में वोटिंग खत्म होने के कई दिनों बाद भी सीटों के नतीजे न आना इस बात का सबूत है कि वहां चुनाव में धांधली हो रही है। जब वेल्कर ने तर्क दिया कि चुनाव के दिन तक पोस्ट किए गए बैलेट्स को देर से पहुंचने पर भी गिनने का नियम है, इसलिए समय लगता है, तो ट्रंप ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।जब वेल्कर ने दोबारा सबूत के बारे में पूछा, तो ट्रंप ने कहा, &quot;मुझे बस देखना है और सुनना है, मैं लोगों की बात सुनता हूँ और देखते हैं क्या होता है।&quot;&quot;या तो आप बेईमान हैं या बेवकूफ&quot; — एंकर से सीधी भिड़ंतजैसे-जैसे इंटरव्यू आगे बढ़ा, दोनों के बीच बहस व्यक्तिगत स्तर पर पहुंच गई। ट्रंप ने मीडिया की आलोचना करते हुए कहा:ट्रंप: &quot;ये सब बेईमान हैं, ठीक वैसे ही जैसे आप बेईमान हैं। आपकी प्रेस बेईमान है और &#039;मीट द प्रेस&#039; बेईमान है।&quot;वेल्कर: &quot;सच कहूँ तो, मैं बेईमान नहीं हूँ, लेकिन चलिए...&quot;ट्रंप (बीच में टोकते हुए): &quot;सच में? तो फिर आप उनके हाथों की कठपुतली बनी हुई हैं। या तो आप बेईमान हैं या फिर बेवकूफ।&quot;ट्रंप यहीं नहीं रुके, उन्होंने अमेरिका की चुनाव व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए देश की तुलना एक &quot;तीसरी दुनिया के देश&quot; (Third World Country) से कर दी। उन्होंने ABC, CBS, CNN और NBC जैसे बड़े टीवी नेटवर्क्स को एकतरफा और बेईमान करार दिया।&quot;अब बहुत हो गया...&quot; और अचानक खत्म हुआ इंटरव्यूतनाव चरम पर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने अचानक इंटरव्यू को वहीं रोकने का फैसला किया। उन्होंने कहा: &quot;चलिए, यहीं खत्म करते हैं। क्योंकि अब बहुत हो गया। थैंक यू, डार्लिंग&quot; इतना कहते ही ट्रंप ने अपना माइक्रोफ़ोन (माइक) शरीर से निकाला और उठ खड़े हुए। एंकर क्रिस्टन वेल्कर ने उनसे रुकने और इंटरव्यू जारी रखने का आग्रह किया और याद दिलाया कि वे इस इंटरव्यू के लिए विशेष रूप से विस्कॉन्सिन से आई थीं।लेकिन ट्रंप नहीं रुके और बाहर जाते-जाते बोले, &quot;मैंने आपको काफी समय दे दिया है। आपको अपनी प्रेस को ठीक करना चाहिए क्योंकि आप जानती हैं, बेईमान प्रेस के साथ कोई देश कभी महान नहीं बन सकता।&quot; इसे भी पढ़ें: Philippines Strong Earthquake | मिंडानाओ में 7.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, तटीय इलाकों में उठीं सुनामी की लहरेंडोनाल्ड ट्रंप का इस तरह इंटरव्यू बीच में छोड़कर जाना अमेरिकी राजनीति और राष्ट्रपति की मीडिया नीति पर एक नई बहस को जन्म दे चुका है। जहां ट्रंप समर्थक इसे मीडिया के पक्षपात के खिलाफ एक आक्रामक और सही कदम बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे इस बात का प्रमाण मान रहे हैं कि जब भी राष्ट्रपति से उनके दावों के पक्ष में सबूत मांगे जाते हैं, तो उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं होता।????BREAKING: TRUMP JUST HAD HIS WORST MELTDOWN EVER.Trump completely unravels when Kristen Welker challenged him on his California election claims.Instead of providing evidence, he called her &quot;crooked&quot; and &quot;stupid,&quot; attacked the press, and abruptly WALKS OUT in the middle of… pic.twitter.com/Ouom3DoalX— CALL TO ACTIVISM (@CalltoActivism) June 7, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:57:03 +0530</pubDate>
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<title>PoK में यहां घुसा भारत तो होगा असली धमाका, बदल जाएगा नक्शा</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर यानी पीओके में एक ऐसा इलाका है जो अगर भारत के पास होता तो आज दुनिया वैसी नहीं होती जैसी है। यह दुख की बात है कि 1947 में उस समय की भारत सरकार ने इस इलाके को अपने हाथों से जाने दिया। पीओके में आने वाले इस जादुई इलाके के बारे में जब हम आपको बताएंगे तो यह सोचकर आपका दिल बैठ जाएगा कि हमने कितना बड़ा हीरा खो दिया है। जिस इलाके की हम बात कर रहे हैं वो गिलगिट बाल्तिस्तान और उससे लगने वाला वखान कॉरिडोर है। गिलगिट बाल्तिस्तान पीओके में पड़ता है और गिलगिट बाल्तिस्तान जिस वखान कॉरिडोर से टच होता है, वह भारत के लिए बेशकीमती है। यह इलाका लद्दाख से सिर्फ 200 कि.मी. दूर है। लेकिन भारत की गलती की वजह से पाकिस्तान के कब्ज़े में है। आज हम गिलगिट बाल्तिस्तान और इस जादुई जगह वखान कॉरिडोर की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान की सरकार पीओके और गिलगिट बाल्तिस्तान में गैरकानूनी चुनाव करवाने जा रही है।इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश से रक्षा संबंध बना रहा तुर्किये, भारत को दो तरफ से घेरने की रणनीति!भारत ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए पाकिस्तान से इस इलाके को तुरंत खाली करने को कहा है। अब हम आपको बताएंगे कि अगर भारत के पास पीओके और गिलगिट बाल्तिस्तान होता, तो किस तरह से वखान कॉरिडोर पूरे भारत की किस्मत को पलट कर रख देता। दरअसल भारत और अफगानिस्तान आधिकारिक तौर पर एक दूसरे के साथ बॉर्डर शेयर करते हैं। भारत-अफगानिस्तान के वखान कॉरिडोर के साथ ही बॉर्डर शेयर करता है। भारत का जो इलाका अफगानिस्तान के वखान कॉरिडोर से लगता है वो पीओके का गिलगिट बाल्तिस्तान है। भारत के आधिकारिक मैप में आपको दिखेगा कि भारत की सीमा वखान कॉरिडोर से टच होती है। हालांकि असलियत में यह इलाका फिलहाल पाकिस्तान के कब्जे में है। अगर वखान कॉरिडोर से टच होने वाला गिलगिट बाल्तिस्तान भारत के पास होता तो ये एक बड़ा कूटनीतिक खजाना होता। वखान कॉरिडोर एक 300 से 350 किलोमीटर लंबी जमीन की पट्टी है। इसकी चौड़ाई कहीं-कहीं 10 किलोमीटर तो कहीं 65 कि.मी. तक है।इसे भी पढ़ें: जिसका पाकिस्तान को डर था, रूस ने भारत के लिए वही कर डाला! वखान कॉरिडोर के उत्तर में आता है सेंट्रल एशिया का देश तजाकिस्तान। इसके पूर्व में 92 कि.मी. लंबा बॉर्डर चीन से लगता है। दक्षिण में वखान कॉरिडोर पाकिस्तान और पीओके के गिलगिट बाल्तिस्तान से मिलता है। अगर यह हिस्सा भारत के पास होता तो भारत पूरे सेंट्रल एशिया का हब बन जाता। आज हमें सेंट्रल एशिया तक पहुंचने के लिए ईरान का चक्कर लगाना पड़ता। लेकिन अगर हमारी सीमा सीधे तौर पर अफगानिस्तान से जुड़ी होती तो भारत का व्यापार दुगुनी रफ्तार से बढ़ जाता। अगर भारत का सीधा एक्सेस बखान कॉरिडोर तक होता तो भारत के प्रोडक्ट जमीन के रास्ते रूस तक पहुंच जाते। दूसरा सबसे बड़ा फायदा होता तापी गैस पाइपलाइन। तापी गैस पाइपलाइन 1814 कि.मी. लंबा एक पाइपलाइन प्रोजेक्ट है जो तुर्कमेनिस्तान से शुरू होकर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और फिर भारत तक पहुंचना है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:57:03 +0530</pubDate>
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<title>रूसी मिलिट्री बेस का सर्वे करने पहुंचा चीन, भारत को झटका!</title>
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<description><![CDATA[ रूस  और चाइना के बीच सैन्य सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है और यही बात भारत के लिए चिंता का कारण बनती दिखाई भी दे रही थी। अभी हाल ही में खबर आई थी कि भारत में रूस का चौथा S400 रेजीमेंट का पहला खेप पहुंचा है कि उधर रशियन मीडिया में भी एक रिपोर्ट छपी कि इस हफ्ते चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी की एक निरीक्षण टीम ने रूस के पूर्वी सैन्य जिले का दौरा किया। इस दौरान टीम ने कई सैन्य ठिकानों का निरीक्षण किया। जिनमें एयर डिफेंस मिसाइल यूनिट भी शामिल थी। यही इलाका रूस के पूर्वी क्षेत्र में आता है जो रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। यह दौरा किसी अचानक घटना का हिस्सा नहीं था बल्कि 1990 के दशक में बने बॉर्डर ट्रस्ट बिल्डिंग मैकेनिज्म के तहत किया गया था। इसे भी पढ़ें: विदेश दौरों से परहेज करने वाले Xi Jinping अचानक North Korea क्यों जा रहे?रूस और चाइना समेत कुछ मध्य एशियाई देशों के बीच 1996 और 97 में हुए समझौते के तहत यह निरीक्षण प्रणाली लागू है। जिसका उद्देश्य सैन्य पारदर्शिता और सीमा पर भरोसा बढ़ाना था। बाद में यही ढांचा शघाई फाइव और फिर शघाई सहयोग संगठन के रूप में विकसित हुआ। रूसी समाचार एजेंसी टास्क के अनुसार इस निरीक्षण के दौरान चीनी प्रतिनिधियों ने माना कि रूस ने सभी अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन किया है और पारदर्शिता के मानकों को बनाए रखा है। वहीं चीनी सैन्य अधिकारियों ने भी रशिया की लॉजिस्टिक्स और सिस्टम की सराहना की। इसे भी पढ़ें: India-China Tension के बीच Beijing से संदेश, Ambassador Doraiswami ने याद दिलाई 2000 साल की दोस्तीवहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी टीम के अधिकारियों ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग आपसी समझ और भरोसे पर आधारित है और इसे और आगे बढ़ाया जाएगा। इस दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने भी चीन को रूस का स्वाभाविक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश पड़ोसी हैं और उनका सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है बल्कि आपसी हितों पर आधारित है। हालांकि इस दौरे में सबसे बड़ी बात यह रही कि रूस ने जिस एयर डिफेंस यूनिट का निरीक्षण कराया उसके बारे में ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। इससे यह सवाल भी उठने लगा कि क्या दोनों देश धीरे-धीरे अपने सैन्य सिस्टम को और करीब ला रहे हैं। पिछले कुछ सालों में रूस और चीन के बीच सैन्य सहयोग काफी तेजी से बढ़ा। दोनों देशों के बीच कई बार संयुक्त सैन्य अभ्यास भी देखने को मिला और रूसी राष्ट्रपति पहले भी यह कह चुके हैं कि रूस और चीन के रिश्ते अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुके हैं। भारत लंबे समय से अपनी रक्षा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर रहा है। आज भी भारतीय सेना के बड़े हिस्से में इस्तेमाल होने वाले हथियार और सिस्टम रूस या पूर्व सोवियत संघ से आए हैं। अनुमान के मुताबिक भारत के लगभग आधे से ज्यादा सैनी प्लेटफार्म किसी ना किसी रूप में रूसी तकनीक से जुड़े हैं। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम सबसे महत्वपूर्ण है। भारत के पास मौजूद S400 मिसाइल सिस्टम इग्ला एस मैनपड्स और पुराने पैचोरा जैसे सिस्टम रूस की तकनीक पर आधारित है। ऐसे में अगर रूस और चीन के बीच सैन्य तकनीक और सिस्टम का आदान-प्रदान बढ़ता है तो भारत के लिए चिंता बढ़ सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:57:02 +0530</pubDate>
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<title>Pacific Ring of Fire में स्थित है Philippines, यहां आते हैं दुनिया के 90 प्रतिशत भूकंप</title>
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<description><![CDATA[ फिलीपींस में आज आए भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचा दी है। शक्तिशाली झटकों के कारण कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। भूकंप के बाद कई इलाकों में सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। बचाव और राहत अभियान लगातार जारी हैं तथा प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने में जुटा हुआ है।समाचार एजेंसियों के अनुसार भूकंप की तीव्रता अलग अलग एजेंसियों ने अलग अलग दर्ज की। कुछ एजेंसियों ने इसकी तीव्रता 8.1 बताई, जबकि जर्मन भूविज्ञान अनुसंधान केंद्र ने पहले इसे 8.2 मापा और बाद में संशोधित कर 7.8 कर दिया। अन्य निगरानी संस्थानों ने इसकी तीव्रता 7.0 से 7.8 के बीच बताई। भूकंप का केंद्र फिलीपींस के दक्षिणी द्वीप मिंडानाओ के पास समुद्र में लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर बताया गया।इसे भी पढ़ें: Philippines Strong Earthquake | मिंडानाओ में 7.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, तटीय इलाकों में उठीं सुनामी की लहरेंभूकंप के झटके इतने तेज थे कि कई इमारतें देखते ही देखते मलबे में बदल गईं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में भयावह दृश्य दिखाई दिए, जिनमें बहुमंजिला ढांचे धराशायी होते नजर आए। लोग घबराकर घरों और कार्यालयों से बाहर भागते दिखे। एक वीडियो में विद्यालय परिसर के बाहर खुले मैदान में छात्रों को एकत्र किया गया था, तभी पास की इमारत गिरती दिखाई दी। कई विद्यालयों और विश्वविद्यालयों की इमारतों को भी नुकसान पहुंचने की खबर है।प्रशासन के अनुसार भूकंप के बाद करीब एक मीटर ऊंची सुनामी लहरें तटीय इलाकों तक पहुंचीं। अधिकारियों ने आशंका जताई कि कई घंटों तक समुद्र में असामान्य हलचल बनी रह सकती है। फिलीपींस के साथ साथ पड़ोसी इंडोनेशिया में भी सुनामी की चेतावनी जारी की गई। अमेरिका की सुनामी चेतावनी प्रणाली ने भी प्रशांत महासागर क्षेत्र के कई हिस्सों में संभावित खतरे को लेकर सतर्क किया।सबसे अधिक असर दक्षिणी शहर जनरल सैंटोस और सरंगानी प्रांत के इलाकों में देखा गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कई मकान और इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। जनरल सैंटोस शहर पुलिस के मास्टर सार्जेंट रोबर्ट डागोन ने कहा कि अनेक भवन प्रभावित हुए हैं और कई मकान पूरी तरह ढह गए हैं। उन्होंने बताया कि राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं, इसलिए अभी सभी क्षतिग्रस्त इमारतों का पूरा ब्यौरा देना संभव नहीं है।सरंगानी प्रांत के अलाबेल कस्बे के पुलिस प्रमुख बेंजि आंचेता ने बताया कि भूकंप के तुरंत बाद पुलिस स्टेशन की दीवारों में दरारें आ गईं। उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे शक्तिशाली भूकंप था। अस्पतालों में भी अफरातफरी का माहौल देखा गया। मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया, जबकि कई क्षेत्रों में कक्षाओं के पहले ही दिन विद्यालयों से छात्रों को बाहर निकालकर सुरक्षित जगह पहुंचाया गया।भूकंप के कुछ घंटों बाद दक्षिणी फिलीपींस में 6.1 तीव्रता का जोरदार झटका भी महसूस किया गया। इससे लोगों में डर और बढ़ गया तथा कई लोग पूरी रात खुले स्थानों पर रहने को मजबूर हुए। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और समुद्र तटों से दूर रहने की अपील की है।हम आपको बता दें कि फिलीपींस प्रशांत महासागर के उस क्षेत्र में स्थित है जिसे &quot;पैसिफिक रिंग ऑफ फायर&quot; कहा जाता है। यह घोड़े की नाल के आकार का विशाल भूगर्भीय क्षेत्र है, जो प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला हुआ है। इस क्षेत्र में सक्रिय ज्वालामुखी, समुद्र की गहरी खाइयां और विशाल भूगर्भीय दरारें मौजूद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया में आने वाले लगभग 90 प्रतिशत भूकंप इसी क्षेत्र में दर्ज किए जाते हैं। फिलीपींस की स्थिति फिलीपीन सागर प्लेट और यूरेशियन प्लेट समेत कई टेक्टोनिक प्लेटों के संगम पर है। इन प्लेटों की लगातार टकराहट और हलचल के कारण यहां अक्सर भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं। द्वीप समूह के आसपास समुद्र के भीतर मौजूद गहरी खाइयां भी इस क्षेत्र को अधिक संवेदनशील बनाती हैं। यही कारण है कि फिलीपींस में हर वर्ष हजारों भूकंप दर्ज किए जाते हैं, हालांकि उनमें से कई इतने हल्के होते हैं कि लोगों को उनका एहसास तक नहीं होता। फिलहाल ताजा भूकंप ने एक बार फिर इस क्षेत्र की संवेदनशीलता और आपदा प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर कर दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:57:01 +0530</pubDate>
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<title>एक ही नदियों की संतान, भारत पर नेपाली विदेश मंत्री ने ऐसा क्यों कहा?</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल के प्रधानमंत्री बालन शाह के भारत के साथ सीमा विवाद को लेकर दिए एक बयान के बाद से अब नेपाल के विदेश मंत्री ने इस पर उठे विवाद को लेकर सफाई दी। भारत दौरे पर आए शिशिर खनाल से दिल्ली में जब इस मुद्दे पर सवाल किया गया तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मंत्रालय पहले ही इस पर आधिकारिक बयान दे चुका है। उन्होंने यह बातें नेपाल दूतावास में कही। भारत, नेपाल के रिश्ते और सीमा विवाद को लेकर उन्होंने साफ किया कि हम एक ही नदियों की संतान हैं। जब हम खुले मन से बैठते हैं तो कोई भी समस्या बहुत बड़ी नहीं होती और कोई भी सीमा बहुत जटिल नहीं होती। हम भारत की ओर खुले दिल से स्पष्ट दृष्टि से और एक पारदर्शी एजेंडे के साथ नेपाल और भारत का मुद्दा सुलझा लेंगे। नेपाल भारत रिश्तों पर दिल्ली में विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि हम भारत के साथ सीमा विवाद को राजनयिक वार्ता के माध्यम से हल करना चाहते हैं। हम भारत के साथ सीमा मुद्दे को खुले मन से और द्विपक्षीय ढांचे के आधार पर हल करेंगे। इसे भी पढ़ें: West Bengal: नेपाल बॉर्डर के पास से TMC नेता जहांगीर खान गिरफ्तार, कलकत्ता HC से झटका लगने के बाद थे फरारशिशिर खनाल ने कहा कि हम 21वीं सदी की भू राजनीति के विकृत अति संवेदनशील नजरिए से भारत को नहीं देखते। हम अतीत की चिंताओं से बंधे नहीं रहना चाहते। भारत एक उभरती हुई आर्थिक शक्ति है और हम परस्पर लाभकारी संबंध चाहते हैं। वो भी बिना किसी विवाद के। भारत नेपाल संबंधों पर उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से हमारे संबंध बहुत अच्छे रहे हैं और यह रिश्ता बहुत गतिशील है। इसलिए हमने सभी मुद्दों को सामने रखा। हमने उन पर चर्चा की और संयोग की भावना बहुत मजबूत है। खनाल ने कहा कि मैं बहुत सकारात्मक सोच और उम्मीद के साथ वापस जा रहा हूं कि कल शुरू हुई इन चर्चाओं का नतीजा अगले कुछ महीनों में जल्द ही हमारे सामने आ जाएगा। वहीं कैलाश मानसरोवर यात्रा अलग-अलग बॉर्डर चेक पॉइंट से होती है। कई लोग नेपाल के रास्ते यात्रा करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी चिंता कालापानी और लिपु लेख इलाके को लेकर भारत और चीन के बीच समझौते के नवीनीकरण को लेकर है। इसे भी पढ़ें: TMC नेता Jahangir Khan नेपाल सीमा से अरेस्ट, Extortion और चुनाव हिंसा के गंभीर आरोपशिशिर खनाल ने कहा किहमने दोनों देशों को डिप्लोमेटिक नोट समेत अन्य माध्यमों से यह बात बहुत साफ तौर पे बता दी है। शिशिर खनाल ने रविवार को भारत के साथ विकास केंद्रित साझेदारी पर बात की। उन्होंने कहा कि काठमांडू एक उभरते हुए भारत के साथ मिलकर काम करने को इच्छुक है। जिसने खुद को एक बड़ी आर्थिक और तकनीकी ताकत के रूप में स्थापित किया है। इतना ही नहीं विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत नेपाल संबंधों को भी काफी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि हमारे बीच सच में बहुत अच्छे रिश्ते हैं। यह एक ऐतिहासिक रिश्ता है। यह टूरिज्म से लेकर हमारी नदियों, हमारे पानी, हमारी एनर्जी और हमारे परिवारों से जुड़ा है। भारत के तीन दिवसीय दौरे पर आए खनाल ने बाले शाह की भारत यात्रा को लेकर कहा कि फिलहाल इसकी कोई तारीख तय नहीं की गई है। लेकिन मेरे आने से उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले महीनों में दोनों ओर से कई उच्च स्तरीय दौरे हो सकते हैं। जिसमें इन समस्याओं का समाधान तेजी से होगा। नेपाली विदेश मंत्री ने साफ किया कि हम भारत को खुले दिल, साफ नजरों और एक ही पारदर्शी एजेंडे नेपाल के आर्थिक बदलाव से देखते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:57:01 +0530</pubDate>
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<title>ईरान&#45;हिजबुल्लाह मिलकर टूट पड़े, इजरायल से रातभर इंतकाम, तबाही!</title>
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<description><![CDATA[ रात भर इजराइल के आसमान में धमाकों की आवाज गूंजती रही। मिसाइल और ड्रोन लगातार इजराइल की तरफ बढ़ते रहे। जबकि एयर डिफेंस सिस्टम उन्हें रोकने में जुटा रहा और नाकाम साबित हुआ। कई शहरों में सायरन बजते रहे और लाखों लोगों को बंकरों में शरण लेनी पड़ी। जिस बात का डर था आखिरकार वही होता नजर आ रहा है। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बड़े युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है और इस बार ईरान ने सीधे मोर्चा खोल दिया है। रविवार देर रात ईरान ने इजराइल की तरफ बैलेस्टिक मिसाइलें दागी। लगभग उसी समय लेबदनान से भी हिजबुल्ला ने भी ड्रोन और मिसाइलों के जरिए हमला शुरू कर दिया। दो दिशाओं से शुरू हुए हमलों ने इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था को हाईलाइट पर ला दिया। इजराइली सेना के मुताबिक देश के उत्तरी हिस्सों की ओर कई मिसाइलें दागी गई। जिनमें हाइफा और नाजरेथ जैसे इलाके भी निशाने पर थे। अप्रैल में हुए संघर्ष विराम के बाद यह पहली बार है जब ईरान ने सीधे-सीधे इजराइल पर मिसाइल हमला किया है। यही वजह है कि इस हमले को बेहद गंभीर माना जा रहा है। इजराइल का दावा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ज्यादातर मिसाइलों को रास्ते में नष्ट कर दिया और किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है। लेकिन पूरे देश में तनाव चरम पर पहुंच चुका है और माना जा रहा है कि इजराइल में बड़ी तबाही मची है। ईरान का कहना है कि यह हमला लेबनान पर हो रहे इजराइली हमलों का जवाब है। पिछले कुछ दिनों से इजरायली सेना लगातार बेरूत और दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमले कर रही है। ईरान ने कई बार चेतावनी दी थी कि अगर लेबनान पर हमले नहीं रुके तो वह सीधे-सीधे हस्तक्षेप करेगा। अब ऐसा लगता है कि तेरान ने अपनी चेतावनी को कारवाई में बदल दिया है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump की चेतावनी की उड़ाई नेतन्याहू ने धज्जियां! इज़राइल- ईरान का युद्ध चरम पर पहुंचा, रात भर हुए हवाई हमले | Israel-Iran Conflictईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने ईरान और लेबनान के झंडों की तस्वीर साझा करते हुए दोनों देशों की एकजुटता का संदेश दिया। वहीं सर्वोच्च नेता मुस्तबा खामीन के सलाहकार मोहसेन रिजाई ने कहा कि ईरान ने पहले स्पष्ट कर दिया था कि युद्ध विराम का उल्लंघन और लेबनान पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इजराइल को उसकी कारवाई का जवाब मिल गया है। उधर ईरान की रिवोशनरी गार्ड यानी कि आईआरजीसी ने आरोप लगाया है कि इजराइल अमेरिका की मदद और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की चुप्पी का फायदा उठाकर लेबनान में युद्ध अपराध कर रहा है। आईआरजीसी ने दावा किया है कि इजराइल ने फास्फोरस बमों समेत प्रतिबंधित हथियारों का इस्तेमाल किया और इसी वजह से जवाबी कारवाई जरूरी हो गई थी। दूसरी तरफ हिजबुल्ला ने भी दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने ड्रोन और मिसाइलों के जरिए इजराइली सैनिकों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। यानी अब संघर्ष सिर्फ ईरान और इजराइल तक सीमित नहीं रह गया बल्कि पूरे क्षेत्र में फैले ईरान समर्थित समूह भी अब सक्रिय हो गए हैं। सबसे बड़ा खतरा अब इजराइल की जवाबी कारवाई को लेकर है। इसे भी पढ़ें:  जब हमला हुआ खामनेई के साथ थे! वो आखिरी वक्त तक...अरागची ने अब बताई उस रात की पूरी कहानीइजराइली सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस हमले का जवाब देगी। वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर इजराइल ने कोई सैन्य कारवाई की तो उसका जवाब पहले से कहीं ज्यादा विनाशकारी होगा। ईरान ने यह भी कहा कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी उसके लिए वैध निशाने बन सकते हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हालात की पूरी जानकारी दी गई है। वाशिंगटन लगातार घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और दोनों पक्षों को संयम बरतने की सलाह दे रहा है। फिलहाल इतना तय है कि युद्ध विराम की दीवार टूट चुकी है क्योंकि जिस तरीके से इजराइल के शहरों के ऊपर ड्रोन और मिसाइल नजर आए हैं उनसे साफ है कि अब जंग रुकने वाली नहीं है बल्कि जंग अब और तेज होने वाली है। रात भर मिसाइल और ड्रोन की बरसात ने संकेत दे दिया है कि मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अगर इजराइल और ईरान में से किसी ने भी पीछे हटने के बजाय हमले तेज किए तो पूरा मिडिल ईस्ट एक ऐसे युद्ध की आग में झुलस सकता है जिसकी कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ सकती है। लेकिन जिस तरीके से अचानक ईरान ने लेबनान का बदला लेना शुरू कर दिया उससे साफ है कि अब युद्ध हमने वाला नहीं है बल्कि युद्ध अब और तेज होगा और दोनों देश एक दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले करेंगे और इन हमलों का नुकसान सीधे-सीधे अब पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:57:00 +0530</pubDate>
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<title>UN में भारत को फंसा रहे थे चीन&#45;पाक, ट्रंप ने पलटी बाजी!</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में कैसे खुलेआम आतंकी फैक्ट्रियां चलती है और इन्हें पालने पोसने का काम कैसे वहां की सरकार और सेना करती है। यह बात भी जगजाहिर है। जिनका इस्तेमाल खासकर भारत के खिलाफ किया जाता है। लेकिन फिर भी पाकिस्तान इस बात को छुपाने के लिए आए दिन नए-नए प्रोपेगेंडा लेकर सामने आता रहता है। हालांकि वह अपने इस प्रोपेगेंडा में खुद ही फंस जाता है। एक बार फिर जब पाकिस्तान ने यूएन में अपने सदाबहार दोस्त चीन का सहारा लेकर भारत को फंसाने की कोशिश की, तो अमेरिका ने ऐसी पटकी मारी कि पाकिस्तान को चारों खाने चित कर दिया और पाकिस्तान की वो साजिश फेल हो गई जिसके लिए वो कई सालों से कोशिशें कर रहा था। यह कहावत तो आपने सुनी होगी कि 100 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। वैसा ही कुछ हाल पाकिस्तान का है। जो पाकिस्तान आतंकी मंडियों के चलाने के लिए मशहूर है, वह अब आतंकवाद को लेकर भारत को घेरने की कोशिशें कर रहा है और उसकी ये कोशिश इस बार उस अमेरिका ने ही फेल कर दी जिस पर वो कुछ समय से कुछ ज्यादा ही उछल रहा था। इसे भी पढ़ें:  इजराइल ने UN में अचानक निकाल लिया ड्रोन, पूरी दुनिया में तहलका!दरअसल पाकिस्तान और चीन को संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन में बड़ा झटका लगा है। आमिर खान ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी बीएएलए और उसकी मजीद ब्रिगेड को यूएन की 10,267 प्रतिबंधन लिस्ट में शामिल करने के चीन पाकिस्तान के प्रस्ताव को रोक दिया है। अमेरिका का साफ कहना है कि इन संगठनों के अलकायदा या आईएसआईएस से जुड़े होने का कोई ठोस सबूत नहीं है। अमेरिका का यह दाव पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की रणनीति के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। मुनी लगातार बलूच संगठनों को भारत से जोड़ने की कोशिश करता रहा है। बीएलए जिस तरह से पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतार रही है, उसका दोष भी पाकिस्तान लगातार भारत पर ही मरता रहा है। हालांकि भारत उसके इन आरोपों की हवा भी निकाल रहा है। इसे भी पढ़ें: इजरायल में Burner Phone का इस्तेमाल, Pentagon को शक- दोस्त ही कर रहा अमेरिकी Officials की जासूसीदरअसल पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 आतंकवाद प्रतिबंध व्यवस्था के तहत बीएएलए और मस्जिद ब्रिगेड को प्रतिबंधित लिस्ट में डालने का प्रस्ताव रखा था। यह वही व्यवस्था है जिसका इस्तेमाल अलकायदा और आईएसआईएस से जुड़े संगठनों और व्यक्तियों पर वैश्विक प्रतिबंध लगाने के लिए किया जाता है। पाकिस्तान ने सोचा था कि बीएएलए और मस्जिद ब्रिगेड को प्रतिबंध लिस्ट में डाल दिया गया तो ये संगठन आतंकी घोषित हो जाएंगे और फिर भारत को आतंकवाद के मुद्दे पर घेरने का प्रोपेगेंडा शुरू हो जाएगा। भारत ने इस मामले में सक्रिय कूटनीतिक का दमदार प्रदर्शन किया। फ्रांस ने भी भारत के रूप का खुलकर सपोर्ट किया। ठीक उसी तरह जैसे भारत के प्रस्तावों को चीन की मदद से पाकिस्तान रोकता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:57:00 +0530</pubDate>
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<title>अकेले भारत...होर्मुज संकट के बीच रूसी CEO का बड़ा बयान</title>
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<description><![CDATA[ भारत की आर्थिक ताकत का लोहा अब पूरी दुनिया मानने लगी है। वैश्विक स्तर पर युद्ध, ऊर्जा संकट, होरमुज स्टेट में बढ़ता तनाव और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। हाल ही में जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.7% रही जो अनुमान से बेहतर है। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी आर्थिक संस्थाएं और उद्योग जगत भी भारत को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्थाओं में गिन रहे हैं। इस बीच रूस की प्रमुख तेल कंपनी रोसनेफ्ट की सीईओ इगोर सेचीन ने भारत को लेकर बड़ा अनुमान जताया है। ईगोर से चीन ने कहा है कि साल 2035 तक वैश्विक तेल मांग में होने वाली वृद्धि का करीब 50% हिस्सा अकेले भारत से आएगा। यानी आने वाले सालों में दुनिया के ऊर्जा बाजार में भारत की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने जा रही है। बता दें कि रोस नेफ्ट के सीईओ इगोर सेचीन ने यह बयान रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए दिया है। इसे भी पढ़ें: रूसी मिलिट्री बेस का सर्वे करने पहुंचा चीन, भारत को झटका!दरअसल सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में हाल ही में रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने भी भारत की तारीफ की थी। इस दौरान पुतिन ने कहा था कि भारत एक महान देश और लोकतंत्र है। रूस उसे अपना भरोसेमंद पार्टनर मानता है। भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। अमेरिका से उसके बढ़ते संबंधों से भारत रूस की पार्टनरशिप पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रूस के साथ उसके रिश्ते पहले की तरह मजबूत रहेंगे। हमें खुशी है कि भारत उन सभी देशों के साथ संबंध बढ़ा रहा है जिन्हें वह अपने राष्ट्रीय हितों के लिए आवश्यक मानता है। भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और सबसे तेज विकास दर वाले देशों में भारत की गिनती होती है। यह उपलब्धि अचानक नहीं मिली बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार की लगातार मेहनत और नीतियों का परिणाम है। कुछ पश्चिमी देशों ने भारत पर रूस के साथ सहयोग कम करने का दबाव बनाने की कोशिश की थी। लेकिन अब सभी को यह समझ आ गया है कि प्रधानमंत्री मोदी और भारत पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए नुकसानदायक साबित होगा। जब दुनिया की राजनीति लगातार बदल रही हो, देशों के गठबंधन बनते बिगड़ते हो और वैश्विक शक्ति संतुलन नए सिरे से तय हो रहा हो, तब भारत और रूस के रिश्ते एक ऐसी मिसाल पेश करते हैं जो दशकों की कसौटी पर खरे उतरे हैं। भारत और रूस के संबंध केवल कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं बल्कि इनके पीछे विश्वास, रणनीतिक सहयोग और साझा हितों का मजबूत आधार है। इसे भी पढ़ें: ये भारत है,  प्रतिबंध लगाने की कोई भी कोशिश तुरंत उलटी पड़ सकती है. ...अमेरिका-यूरोप को पुतिन की दो टूकदोनों देशों की दोस्ती कई दशकों पुरानी है। भारत और रूस मुश्किल समय में भी एक दूसरे की किसी ना किसी तरह से मदद करते रहे हैं। भारत और रूस के रिश्तों की शुरुआत उस दौर में हुई थी जब रूस सोवियत संघ का हिस्सा था। शीत युद्ध के समय सोवियत संघ ने कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत का साथ दिया था। साल 1971 में बांग्लादेश मुक्तिसंग्राम के दौरान सोवियत संघ का समर्थन भारत के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हुआ था। दरअसल यही वह समय था जब दोनों देशों के बीच विश्वास की नींव और मजबूत हुई। सोवियत संघ के विघटन के बाद दुनिया की राजनीति में बड़ा बदलाव आया लेकिन भारत और रूस के रिश्तों पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ा। दोनों देशों ने नए वैश्विक माहौल के अनुसार अपने संबंधों को फिर से परिभाषित किया और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया। पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग में इसका जिक्र करते हुए कहा था कि यह ऐसा रिश्ता है जिस पर हम दशकों से काम कर रहे हैं। 1947 में जब सोवियत संघ ने भारत के साथ कूटनीतिक संबंध स्थापित किए थे तब से हम एक नए स्वतंत्र राष्ट्र की स्थापना में हर संभव सहयोग करते रहे हैं। पुतिन का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा था। बता दें कि पुतिन इसी साल 12 13 सितंबर को नई दिल्ली में हो रही ब्रिक्स की बैठक में शामिल होने के लिए भारत दौरे पर आने वाले हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>China&#45;North Korea Relations: 7 साल बाद  उत्तर कोरिया पहुंचे, दुनिया में बढ़ी हलचल... क्या बदलेगा एशिया का पावर गेम?</title>
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<description><![CDATA[ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार को उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन से बातचीत करने के लिए प्योंगयांग पहुंचे। चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि दोनों नेता पड़ोसी देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता की पुष्टि करेंगे और द्विपक्षीय संबंधों को और विकसित करने का संकल्प लेंगे। शी जिनपिंग का यह दौरा प्योंगयांग और मॉस्को के बीच बढ़ते सैन्य संबंधों के बीच हो रहा है। उत्तर कोरिया और रूस ने 2024 में पुतिन की प्योंगयांग यात्रा के दौरान एक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। चीनी राष्ट्रपति का उत्तर कोरिया दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बीजिंग यात्रा और उसके बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की चीनी राजधानी की यात्रा के बाद हो रहा है। यह ऐसे समय में भी हो रहा है जब चीन जापान पर &quot;नए सैन्यवाद&quot; की नीति अपनाने का आरोप लगा रहा है, जिसे टोक्यो ने खारिज कर दिया है।इसे भी पढ़ें: विदेश दौरों से परहेज करने वाले Xi Jinping अचानक North Korea क्यों जा रहे?शिन्हुआ के अनुसार, उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन, जो कोरिया वर्कर्स पार्टी के महासचिव और डीपीआरके के राज्य मामलों के अध्यक्ष हैं, और उनकी पत्नी री सोल जू ने आज हवाई अड्डे पर शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का स्वागत किया। हवाई सीढ़ी से उतरने के बाद, शी जिनपिंग और किम ने हाथ मिलाया। शी जिनपिंग किम जोंग-उन के निमंत्रण पर दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर हैं। इस यात्रा को किम की उस यात्रा का प्रतिउत्तर माना जा रहा है, जो सितंबर 2025 में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित सैन्य परेड में भाग लेने के लिए बीजिंग में थीं। उस कार्यक्रम में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी उपस्थित थे। इस बीच, शी जिनपिंग और उनकी पत्नी के साथ उत्तर कोरिया की यात्रा पर पेंग लियुआन, कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के जनरल कार्यालय के निदेशक काई क्यूई और विदेश मंत्री वांग यी भी हैं।इसे भी पढ़ें: China के फुल कंट्रोल में है पाकिस्तान? पुतिन ने कुछ ऐसा जवाबउत्तर कोरियाई नेताओं के साथ आज होने वाली अपनी बैठक से पहले, उत्तर कोरिया के आधिकारिक समाचार पत्र रोडोंग सिनमुन में प्रकाशित एक लेख में शी जिनपिंग ने कहा कि वर्तमान में, चीन और उत्तर कोरिया के बीच संबंध एक नए ऐतिहासिक मोड़ पर हैं, जहां विकास के नए अवसर मौजूद हैं और समय की नई चुनौतियां हैं। शी जिनपिंग, जो चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के महासचिव हैं, ने कहा कि &quot;चीन उत्तर कोरिया के साथ मिलकर द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक परिप्रेक्ष्य से आगे बढ़ाने, समय के साथ तालमेल बनाए रखने और संबंधों के और अधिक विकास को प्राप्त करने के लिए तत्पर है। उत्तर कोरिया का आधिकारिक नाम डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) है। शी जिनपिंग ने लिखा, &quot;दोनों पक्षों को रणनीतिक संचार को गहरा करना चाहिए और चीन-डीपीआरके संबंधों को दृढ़ता से सही दिशा में ले जाना चाहिए। इस वर्ष चीन-उत्तर कोरिया मैत्री, सहयोग और पारस्परिक सहायता संधि की 65वीं वर्षगांठ भी है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:58 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;Israel War का साया: भारतीय दूतावास का बड़ा अलर्ट, तुरंत ईरान छोड़ें</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति में तीव्र और तेजी से हो रही गिरावट के बीच, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को एक नई, उच्च प्राथमिकता वाली यात्रा सलाह जारी की है, जिसमें सभी भारतीय नागरिकों से ईरान की यात्रा से पूरी तरह बचने का आग्रह किया गया है और देश में मौजूद लोगों को तत्काल देश छोड़ने की सलाह दी गई है। यह आपातकालीन सूचना पिछले 24 घंटों में हुई प्रमुख सैन्य झड़पों के बाद आई है, जिनमें कई शहरों में सैन्य झड़पें, रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले और पूरे क्षेत्र में भारी गोलाबारी शामिल हैं। क्षेत्र में हुए नवीनतम घटनाक्रमों को देखते हुए, दूतावास सभी भारतीय नागरिकों को ईरान की यात्रा से बचने की अपनी पूर्व सलाह को दोहराता है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को कहा कि ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को भी उपलब्ध परिवहन साधनों से देश छोड़ने की सलाह दी जाती है।इसे भी पढ़ें: ईरान-हिजबुल्लाह मिलकर टूट पड़े, इजरायल से रातभर इंतकाम, तबाही!पश्चिम एशिया में तनाव में तीव्र वृद्धि का संकेत देते हुए, इज़राइल और ईरान ने सोमवार को, युद्ध के 100वें दिन, एक-दूसरे पर गोलीबारी की, जिससे पहले से ही नाजुक युद्धविराम गंभीर खतरे में पड़ गया और क्षेत्रीय युद्ध के फिर से भड़कने का खतरा पैदा हो गया। यरूशलेम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को और जटिल बनाते हुए, ईरान समर्थित हौथियों ने घोषणा की कि वे लाल सागर, जो एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, पर इज़राइली जहाजों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा रहे हैं।ईरान के एक पेट्रोकेमिकल परिसर पर हमले और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा दो इज़राइली ठिकानों को निशाना बनाने सहित सैन्य कार्रवाई के इस नवीनतम दौर की घटनाएँ राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा इज़राइल से तेहरान की मिसाइलों का जवाबी कार्रवाई न करने का आह्वान करने के कुछ घंटों बाद हुईं।इसे भी पढ़ें: PoK में यहां घुसा भारत तो होगा असली धमाका, बदल जाएगा नक्शारविवार को इज़राइल द्वारा बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर हवाई हमले शुरू करने के बाद सीमा पार युद्धविराम की बुनियादी संरचना में आई दरार और बढ़ गई, जिसके जवाब में ईरान ने भी हमला किया। पहले इजराइल पर, फिर सोमवार के हमलों और जवाबी हमलों पर। शत्रुता के इस अचानक पुन: भड़कने से युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के राजनयिक प्रयासों पर एक अशुभ छाया पड़ गई है, जो मूल रूप से 28 फरवरी को शुरू हुआ था। सैन्य तनाव में इस वृद्धि से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के तेहरान के साथ एक व्यापक परमाणु समझौते पर बातचीत करके युद्ध से बाहर निकलने के अंतिम प्रयास बुरी तरह प्रभावित होने का खतरा है। तीव्र सैन्य तनाव ट्रम्प के लिए एक सीधी चुनौती है, जो इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर अधिकतम सैन्य संयम बरतने के लिए सक्रिय रूप से दबाव डाल रहे थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा कि वे सभी निर्णय लेते हैं और उन्होंने चल रही अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पर अपने सर्वोच्च अधिकार की पुष्टि की। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:58 +0530</pubDate>
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<title>जंग में बेकाबू हुआ ईरान, इजरायल पर कर दिया भयंकर हमला</title>
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<description><![CDATA[ बेरुत और लेबनान पर हुए हमलों के जवाब में ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए अब तक के सबसे बड़े मिसाइल हमलों में से एक के बाद सोमवार को मध्य पूर्व में स्थिति एक बार फिर तनावपूर्ण हो गई। इन हमलों से मध्य पूर्व में 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष को समाप्त करने के मध्यस्थता प्रयासों में और अधिक जटिलता आने की आशंका है। इस संघर्ष में ईरान के अधिकांश शीर्ष नेता, जिनमें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल हैं, मारे गए थे। इजरायली सेना के अनुसार, कम से कम तीन हमलों में दागी गई मिसाइलों को इजरायली सेना ने रोक दिया। तेल अवीव ने कहा है कि तेहरान ने गंभीर गलती की है और हमलों का कठोर जवाब देने की कसम खाई है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से जवाबी कार्रवाई न करने का अनुरोध किया है।उन्होंने एक्सियोस को दिए एक टेलीफोन साक्षात्कार में कहा मैं अभी बीबी को फोन करके उनसे जवाबी कार्रवाई न करने के लिए कहूंगा। इजरायल ने अपना हमला कर दिया है और ईरान ने अपना हमला कर दिया है। हमें एक और हमले की जरूरत नहीं है। ईरान द्वारा किए गए ये हमले इजरायल द्वारा बेरूत पर किए गए हमलों के जवाब में थे, जिनमें दो लोग मारे गए और 20 घायल हुए। इजरायल की ओर से संभावित जवाबी कार्रवाई के डर से ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने एक बयान में कहा, &quot;यदि इस प्रकार की आक्रामकता दोहराई जाती है, तो जवाबी कार्रवाई व्यापक होगी और इसमें पूरे क्षेत्र में सभी अमेरिकी और ज़ायोनी लक्ष्य शामिल होंगे।इसे भी पढ़ें: Iran-Israel War का साया: भारतीय दूतावास का बड़ा अलर्ट, तुरंत ईरान छोड़ेंइज़राइल से जुड़े जहाजों पर व्यापक प्रतिबंध लगाकर हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में तनाव बढ़ा दिया है। दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में से एक पर सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ाते हुए, यमन के ईरान समर्थित हौथी आंदोलन ने सोमवार को घोषणा की कि उसने इज़राइल की ओर एक मिसाइल दागी है और लाल सागर में इज़राइल से जुड़े जहाजों पर व्यापक प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम संभावित तनाव बढ़ने का संकेत है जिससे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से होकर गुजरने वाले वाणिज्यिक यातायात में बाधा उत्पन्न हो सकती है। ईरान की हवाई रक्षा प्रणालियों को बड़े पैमाने पर हमले में ध्वस्त कर दिया गयाइजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने घोषणा की है कि उन्होंने ईरान के रणनीतिक वायु रक्षा प्रणालियों पर एक बड़ा हमला किया है। आईडीएफ के अनुसार, इन प्रणालियों को हाल ही में ईरान भर में तैनात किया गया था ताकि &quot;द रोरिंग लायन&quot; ऑपरेशन के दौरान कमजोर हुई सैन्य क्षमताओं को बहाल किया जा सके। इसे भी पढ़ें: PoK में यहां घुसा भारत तो होगा असली धमाका, बदल जाएगा नक्शाईरान मिसाइल दागना बंद करेअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज चैनल के एक रिपोर्टर से कहा कि वह चाहते हैं कि ईरानी मिसाइल दागना बंद करें और बातचीत की मेज पर लौट आएं। उन्होंने यह भी कहा कि रविवार को लेबनान में इजरायल के हमले अमेरिका के समन्वय के बिना किए गए थे और मैं इससे खुश नहीं हूं। ईरान पर इजरायली हमलों से पहले फाइनेंशियल टाइम्स से बात करते हुए ट्रंप ने जोर देकर कहा कि उन्होंने नेतन्याहू को युद्ध की रणनीति बताई थी। ट्रंप ने अखबार को टेलीफोन पर दिए एक इंटरव्यू में कहा, &quot;उनके पास कोई विकल्प नहीं होगा। मैं ही सब कुछ तय करता हूं। वह (नेतन्याहू) कुछ नहीं तय करते। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ गया भारत का परमाणु जखीरा, SIPRI Report ने बढ़ाई पाकिस्तान की धड़कन</title>
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<description><![CDATA[ स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) ने सोमवार को कहा कि भारत ने पाकिस्तान से अधिक परमाणु शस्त्रागार का विस्तार किया है और जनवरी 2026 तक उसके पास लगभग 190 परमाणु हथियार होंगे। वहीं, पाकिस्तान के पास लगभग 170 परमाणु हथियार मौजूद हैं। एसआईपीआरआई ने अपनी 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि भारत के परमाणु भंडार में 10 की वृद्धि हुई है, क्योंकि 2025 में यह 180 था। इनमें से 12 अभी भी तैनात हैं। इसके विपरीत, पाकिस्तान का भंडार 2025 में 170 था और उसने इसमें कोई वृद्धि नहीं की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अपने परमाणु शस्त्रागार में मामूली विस्तार किया है और नए प्रकार के परमाणु वितरण प्रणालियों का विकास जारी रखा है। इसमें भारत के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया है, जिसके बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि यह चीन भर में लक्ष्यों को भेदने में सक्षम लंबी दूरी के हथियारों के विकास&quot; पर केंद्रित है।इसे भी पढ़ें: अकेले भारत...होर्मुज संकट के बीच रूसी CEO का बड़ा बयानहालांकि, एसआईपीआरआई की 2026 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत पाकिस्तान के साथ अपनी &quot;दीर्घकालिक प्रतिद्वंद्विता&quot; पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखे हुए है। रिपोर्ट में पाकिस्तान के बारे में कहा गया है कि इस्लामाबाद ने 2025 में &quot;नई वितरण प्रणालियाँ विकसित कीं और विखंडनीय सामग्री का संचय किया, जिससे संकेत मिलता है कि वह आने वाले दशक में अपने शस्त्रागार का विस्तार करने की संभावना रखता है। एसआईपीआरआई की रिपोर्ट में ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया गया है और कहा गया है कि भारत ने पाकिस्तान के उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जिनमें परमाणु हथियार होने की संभावना थी। रिपोर्ट में कहा गया है, मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संक्षिप्त सशस्त्र संघर्ष में भारत ने पाकिस्तान के उन हवाई और मिसाइल ठिकानों पर हमला किया जिनमें परमाणु संबंधी भूमिका होने की संभावना थी, लेकिन दोनों पक्षों ने तनाव बढ़ने से रोकने के लिए कदम उठाए।इसे भी पढ़ें: PoK में यहां घुसा भारत तो होगा असली धमाका, बदल जाएगा नक्शाचीन और रूस ने अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार किया; अमेरिका का भंडार अपरिवर्तित रहा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन का परमाणु शस्त्रागार 2025 में 600 से बढ़कर 2026 में 620 हो गया है। इनमें से 34 तैनात किए जा चुके हैं। इसी तरह, रूस का शस्त्रागार 2025 में 4,309 से बढ़कर 2026 में 4,400 हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने 2026 में 1,796 परमाणु हथियार तैनात किए हैं। दूसरी ओर, संयुक्त राज्य अमेरिका (अमेरिका) का परमाणु शस्त्रागार 3,700 पर अपरिवर्तित रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका के पास 1,770 तैनात परमाणु हथियार हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि नौ परमाणु-सशस्त्र देशों ने अपने परमाणु शस्त्रागारों के आधुनिकीकरण और संवर्धन के कार्यक्रम जारी रखे हैं। जनवरी 2026 में अनुमानित 12,187 परमाणु हथियारों के कुल वैश्विक भंडार में से लगभग 9745 संभावित उपयोग के लिए सैन्य भंडारों में रखे गए थे। एसआईपीआरआई के निदेशक करीम हग्गाग ने कहा, &quot;कुछ विश्व नेताओं सहित प्रभावशाली लोग शत्रुतापूर्ण देश के हमले से बचाव के लिए परमाणु हथियारों की वकालत कर रहे हैं। लेकिन राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा रणनीतियों को परमाणु हथियारों पर निर्भर बनाना या अधिक निर्भर बनाना परमाणु जोखिमों को काफी हद तक बढ़ा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:57 +0530</pubDate>
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<title>West Asia में बढ़ा तनाव, Iran&#45;Israel संघर्ष पर भारत की दो टूक&#45; कूटनीति ही एकमात्र रास्ता</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद, भारत ने सोमवार को संघर्ष को तुरंत कम करने की अपील दोहराई और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए कूटनीतिक समाधान को एकमात्र रास्ता बताया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि 100 दिनों से अधिक समय से चल रहे इस संघर्ष के कारण भारी जन पीड़ा हुई है और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। बयान में कहा गया कि पश्चिम एशिया में हुए नए हमलों पर भारत को गहरा खेद है। ये घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अत्यंत चिंता का विषय हैं। यह संघर्ष 100 दिनों से अधिक समय से चल रहा है और इससे भारी जन पीड़ा हुई है। इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है।इसे भी पढ़ें: America में फिर भारतीय निशाने पर, Philadelphia में हैदराबाद के Anshul की गोली मारकर हत्या।बयान में इस बात पर जोर दिया गया, “हम सभी पक्षों से तत्काल तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कूटनीतिक समाधान के लिए चल रही बातचीत को पूरा करने का आह्वान करते हैं ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता लौट सके। नई दिल्ली की शांति की बहाली की अपील पिछले 24 घंटों में हुई भीषण सैन्य झड़पों के बीच आई है, जिनमें कई शहरों में गोलीबारी, रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले और पूरे क्षेत्र में भारी गोलाबारी शामिल हैं। पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ाते हुए, इज़राइल और ईरान ने सोमवार को, अपने युद्ध के 100वें दिन, एक-दूसरे पर गोलीबारी की, जिससे पहले से ही नाजुक युद्धविराम गंभीर खतरे में पड़ गया और क्षेत्रीय युद्ध के फिर से भड़कने का खतरा पैदा हो गया।इसे भी पढ़ें: Indian Embassy ने भारतीयों को तुरंत Iran छोड़ने की दी सलाह, West Asia Situation पर MEA का भी आया बयानयरूशलेम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्थिति को और जटिल बनाते हुए, ईरान समर्थित हौथियों ने घोषणा की कि वे लाल सागर, जो एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, पर इज़राइली जहाजों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा रहे हैं। ईरान के एक पेट्रोकेमिकल परिसर पर हमले और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा दो इजरायली ठिकानों को निशाना बनाए जाने सहित सैन्य कार्रवाई के नवीनतम दौर की शुरुआत राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा इजरायल से तेहरान की मिसाइलों का जवाबी कार्रवाई से परहेज करने के आह्वान के कुछ घंटों बाद हुई। रविवार को इजरायल द्वारा बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर हवाई हमले शुरू करने के बाद सीमा पार युद्धविराम की बुनियादी संरचना में आई दरार और बढ़ गई, जिसके परिणामस्वरूप ईरान ने इजरायल पर अपना जवाबी हमला किया और फिर सोमवार को हमले और जवाबी हमले हुए। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:56 +0530</pubDate>
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<title>Jaipur Masjid Demolition: JDA ने बताया अवैध अतिक्रमण, कमेटी का दावा&#45; 1981 से है मस्जिद</title>
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<description><![CDATA[ जयपुर प्रशासन ने सोमवार को अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत एक मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। विध्वंस से पहले, पुलिस ने पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। ससे पहले दिन में, जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने जयपुर के मालवीय नगर और जगतपुरा को जोड़ने वाली सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत नूरानी मस्जिद को ध्वस्त करने से पहले उसे सील कर दिया। अधिकारियों ने मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए कहा था कि यह सड़क की सीमा के भीतर आती है और इसे अभियान के तहत हटाया गया है। हालांकि, मस्जिद प्रबंधन ने इस बात से इनकार किया कि संरचना का निर्माण अवैध रूप से किया गया था, और दावा किया कि भूमि को वन आवास सोसायटी से पट्टे पर खरीदा गया था और मस्जिद का निर्माण 1981 में किया गया था। इसे भी पढ़ें: Dhar Bhojshala का 700 साल पुराना इंतजार खत्म, ASI रिपोर्ट के बाद अब गूंजेंगे स्तुति मंत्रकानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम के तौर पर जिला प्रशासन ने जयपुर के कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी थीं। सांप्रदायिक तनाव की आशंकाओं के मद्देनजर जयपुर पुलिस ने मुस्लिम बहुल इलाकों में फ्लैग मार्च भी किया था। नून व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर भर में लगभग 50 पुलिस अधिकारियों और 3,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। ई दिनों से सड़क विस्तार का काम चल रहा था, लेकिन मस्जिद को छुआ तक नहीं गया था, जिसके चलते सोशल मीडिया पर भाजपा की आलोचना हो रही थी। मस्जिद को सील किए जाने और विध्वंस की कार्यवाही शुरू होने की खबरों ने तब से लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। ध्वंस से एक दिन पहले, जयपुर पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल ने अभियान के दौरान अफवाहें, गलत सूचना या धार्मिक अशांति फैलाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसे भी पढ़ें: जापान ने तोड़ी पाक की बनाई नई मस्जिद? एक्शन से मुस्लिम देशों में हड़कंपउन्होंने चेतावनी दी थी कि असामाजिक तत्व सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भड़काऊ वीडियो, भ्रामक पोस्ट या अन्य उत्तेजक सामग्री फैलाकर सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। मित्तल ने कहा था कि जानबूझकर झूठी या भड़काऊ सामग्री बनाने या साझा करने, या धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आयुक्त ने आगे कहा कि जयपुर पुलिस की साइबर और कानून व्यवस्था इकाइयों को सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने वाली किसी भी गतिविधि के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:55 +0530</pubDate>
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<title>Middle East में तनाव बढ़ा! Iran ने IAEA प्रमुख Grossi को घेरा, कहा&#45; जानबूझकर कर रहे बदनाम</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी निकाय के शीर्ष नेतृत्व पर तीखी राजनयिक प्रतिक्रिया देते हुए एजेंसी के प्रमुख पर देश के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते तनाव के बीच संस्थागत निष्पक्षता से समझौता करने का आरोप लगाया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ये टिप्पणियां कीं, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय निगरानी निकाय की निष्पक्षता पर सीधा सवाल उठाया। तेहरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी पर बढ़ते तनाव के बीच तेहरान के खिलाफ &quot;जानबूझकर पक्षपात&quot; करने का आरोप लगाया है। एजेंसी के हालिया आकलन के व्यापक राजनयिक परिणामों को संबोधित करते हुए, मंत्रालय ने जोर दिया कि महानिदेशक का परिचालन रवैया सत्यापन प्राधिकरण की मूलभूत स्थिति को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचाने की धमकी देता है।इसे भी पढ़ें: Iran-Israel War का साया: भारतीय दूतावास का बड़ा अलर्ट, तुरंत ईरान छोड़ेंविदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि संघर्ष और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ग्रॉसी का रुख संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी निकाय की विश्वसनीयता और वैधता को कमजोर कर रहा है। तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर बढ़ता यह राजनयिक गतिरोध एक बेहद अस्थिर समय में सामने आया है, जो पश्चिम एशिया में तीव्र सैन्य तनाव के साथ-साथ घटित हो रहा है। युद्ध के 100वें दिन, इज़राइल और ईरान ने आधिकारिक तौर पर एक-दूसरे पर सीधी गोलीबारी की, जिससे क्षेत्र में पहले से ही नाजुक शांति भंग हो गई और एक पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध के फिर से भड़कने का खतरा पैदा हो गया। क्षेत्रीय महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर इस समुद्री और सैन्य तनाव को और बढ़ाते हुए, ईरान समर्थित हौथियों ने घोषणा की कि वे लाल सागर, जो एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, पर इज़राइली जहाजों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा रहे हैं, जैसा कि द जेरूसलम पोस्ट ने रिपोर्ट किया है। इस नवीनतम बहु-मोर्चे वाली सैन्य कार्रवाइयों में एक ईरानी पेट्रोकेमिकल परिसर पर हमला और दो इज़राइली ठिकानों को निशाना बनाना शामिल था, जिसकी पुष्टि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने की है।इसे भी पढ़ें: जंग में बेकाबू हुआ ईरान, इजरायल पर कर दिया भयंकर हमलाये गंभीर शत्रुता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा इज़राइल से तेहरान की मिसाइलों का जवाबी कार्रवाई न करने का आह्वान करने के कुछ ही घंटों बाद भड़की। सीमा पार युद्धविराम की बुनियादी संरचना में आई दरार रविवार को इजरायल द्वारा बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर हवाई हमले शुरू करने के बाद और बढ़ गई। इस प्रारंभिक कार्रवाई के जवाब में ईरान ने इजरायल पर अपना हमला किया, जिसके परिणामस्वरूप सोमवार को हमलों और जवाबी हमलों का एक तीव्र दौर शुरू हुआ। शत्रुता के इस अचानक पुन: भड़कने से युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के राजनयिक प्रयासों पर एक चिंताजनक छाया पड़ गई है, जो मूल रूप से 28 फरवरी को शुरू हुआ था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस तीव्र सैन्य कार्रवाई से राष्ट्रपति ट्रम्प के तेहरान के साथ एक व्यापक परमाणु समझौते पर बातचीत करके युद्ध से बाहर निकलने के अंतिम प्रयास बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:55 +0530</pubDate>
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<title>West Asia संकट: Israel&#45;Iran में फंसे भारतीयों के लिए MEA का अलर्ट, जारी की गई Travel Advisory</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति में तेज़ी से बिगड़ती स्थिति के बीच, इज़राइल स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को देश में रहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए एक सलाह जारी की, जिसमें उनसे क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए &quot;अत्यंत सावधानी&quot; बरतने और सतर्क रहने का आग्रह किया गया। तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में भारतीय नागरिकों को इज़राइली अधिकारियों और गृह मोर्चा कमान द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी। दूतावास ने कहा कि क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए, इज़राइल में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने और हर समय सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। सलाह में आगे कहा गया है, भारतीय नागरिकों को इज़राइली अधिकारियों और गृह मोर्चा कमान द्वारा जारी सुरक्षा दिशा-निर्देशों और निर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी जाती है।इसे भी पढ़ें: जंग में बेकाबू हुआ ईरान, इजरायल पर कर दिया भयंकर हमलादूतावास ने भारतीय नागरिकों से आधिकारिक माध्यमों से जानकारी प्राप्त करते रहने का आग्रह किया और उन्हें गृह मोर्चा कमान की वेबसाइट (http://oref.org.il/eng) के माध्यम से अद्यतन सुरक्षा निर्देश प्राप्त करने का निर्देश दिया। इसने भारतीय नागरिकों से निर्दिष्ट आश्रय स्थलों के पास रहने और अपने घरों और कार्यस्थलों के आसपास निकटतम सुरक्षित स्थानों की पहचान करने का भी आग्रह किया। इसे भी पढ़ें: Indian Embassy ने भारतीयों को तुरंत Iran छोड़ने की दी सलाह, West Asia Situation पर MEA का भी आया बयानतेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को एक उच्च प्राथमिकता वाली यात्रा सलाह जारी की, जिसमें सभी भारतीय नागरिकों से ईरान की यात्रा से पूरी तरह बचने का आग्रह किया गया और देश में मौजूद लोगों को तुरंत देश छोड़ने की सलाह दी गई।यह आपातकालीन सूचना पिछले 24 घंटों में हुई भीषण सैन्य झड़पों के मद्देनजर जारी की गई है, जिनमें कई शहरों में सैन्य संघर्ष, रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले और पूरे क्षेत्र में भारी गोलाबारी शामिल हैं।तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को कहा, &quot;क्षेत्र में हुए नवीनतम घटनाक्रमों को देखते हुए, दूतावास सभी भारतीय नागरिकों को ईरान की यात्रा से बचने की अपनी पूर्व सलाह को दोहराता है। ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को भी उपलब्ध परिवहन साधनों से देश छोड़ने की सलाह दी जाती है।  ]]></description>
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<title>जिनपिंग को देखते ही उछल पड़े किम जोंग, प्योंगयांग में वार्ता</title>
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<description><![CDATA[ नॉर्थ कोरिया की राजधानी पियंगयांग में आज एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। दरअसल चीन के राष्ट्रपति शी जिमपिंग के स्वागत में उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंगुन खुद एयरपोर्ट पहुंचे। उनके साथ वहां उनकी पत्नी भी मौजूद थी। जैसे ही जिमपिंग का विमान रनवे पर पहुंचता है। किम जोंग उन मुस्कुराते हुए उनका इंतजार करते नजर आते हैं। विमान से उतरने के बाद दोनों नेताओं ने गर्मजशी से हाथ मिलाया और फिर एक साथ स्वागत समारोह में हिस्सा लिया। उत्तर कोरिया की ओर से किया गया यह स्वागत साफ संकेत देता है कि पोंगयांग अभी बीजिंग को अपना सबसे बड़ा रणनीतिक साझेदार मानता है। इसे भी पढ़ें: विदेश दौरों से परहेज करने वाले Xi Jinping अचानक North Korea क्यों जा रहे?दरअसल पिछले 7 साल में यह पहला मौका है जब कोई चीनी राष्ट्रपति उत्तर कोरिया पहुंचा हो। इसलिए यह यात्रा सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति के बीच एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। एयरपोर्ट समारोह के बाद शी जिमपिंग को पंग्यांग के मुख्य चौक पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच शिखर वार्ता शुरू हुई। माना जा रहा है कि बातचीत में आर्थिक सहयोग, रक्षा संबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। इस मुलाकात की टाइमिंग भी काफी बड़ी मानी जा रही है। हाल के सालों में उत्तर कोरिया ने रूस के साथ अपने रिश्ते काफी मजबूत किए। यूक्रेन युद्ध के दौरान पियोयांग ने मॉस्को को सैनिक और हथियार उपलब्ध कराए। जिसके बदले रूस से आर्थिक और सैन्य सहयोग मिला। इसके बाद ही यह चर्चा शुरू हो गई थी कि कहीं उत्तर कोरिया धीरे-धीरे चीन से ज्यादा रूस के करीब तो नहीं जा रहा। ऐसे में जिनपिंग की यह यात्रा एक तरह से चीन की शक्ति और प्रभाव का प्रदर्शन भी मानी जा रही है। इसे भी पढ़ें: China-North Korea Relations: 7 साल बाद  उत्तर कोरिया पहुंचे, दुनिया में बढ़ी हलचल... क्या बदलेगा एशिया का पावर गेम?बीजिंग यह दिखाना चाहता है कि उत्तर कोरिया पर उसका प्रभाव अभी भी बरकरार है और क्षेत्रीय राजनीति में उसकी भूमिका सबसे अहम बनी हुई है। चीन इस दौरे के दौरान उत्तर कोरिया को आर्थिक राहत देने के लिए बड़े पैकेज का ऐलान कर सकता है। इसमें खाद्य सहायता, पर्यटन और कई संयुक्त विकास परियोजनाएं शामिल हो सकती। लंबे समय से प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे उत्तर कोरिया के लिए यह मदद बेहद बड़ी हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ इस यात्रा को अमेरिका के नजरिए से भी देखा जा रहा है। हाल ही में शेज जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन से मुलाकात की थी। ऐसे में पोंगयांग पहुंचकर उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की है कि एशिया की राजनीति में चीन की पकड़ मजबूत है और उत्तर कोरिया उसके सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक बना हुआ है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:54 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan के PM Shahbaz Sharif का बड़ा बयान, Iran&#45;Israel में Ceasefire अंतिम लक्ष्य के करीब</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार को कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता का अंतिम लक्ष्य &quot;लगभग हासिल होने वाला है और उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने का आह्वान किया। एक सूत्र ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया कि इजरायल ने ईरान पर अपने हमले रोकने का फैसला किया है। रॉयटर्स समाचार एजेंसी ने तसनीम के हवाले से बताया कि ईरान के हवाई अड्डों से आने-जाने वाली सभी उड़ानें अगली सूचना तक रद्द कर दी गई हैं। इसे भी पढ़ें: जंग में बेकाबू हुआ ईरान, इजरायल पर कर दिया भयंकर हमलाइजरायली सेना ने लेबनान से दागे गए तीन मिसाइलों को रोकासीमा के पास मौजूद एएफपी संवाददाता ने बताया कि इजरायल की सेना ने सोमवार को लेबनान से दागे गए तीन मिसाइलों को रोका। सेना का कहना है कि इन मिसाइलों का निशाना लेबनान के दक्षिणी हिस्से में तैनात इजरायली सेना थी। एएफपी के अनुसार, सेना ने कहा कि कुछ मिसाइलों को इजरायली क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही रोक लिया गया, और एक अन्य मिसाइल इजरायली रक्षा कर्मियों के पास गिरी। किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है। इसे भी पढ़ें: Oman के पास US Navy पर हमले का आरोप, 24 Indian Sailors को लेकर डूब रहे जहाज में हड़कंपईरान की सेना ने इजरायल पर हमले रोकने की घोषणा कीएएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सेना द्वारा इजरायल पर हमले रोकने की घोषणा के बाद इराक ने अपना हवाई क्षेत्र फिर से खोल दिया है। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की सेना ने इजरायल पर हमलों को रोकने की घोषणा की है, जो दोनों देशों के बीच कई दिनों से जारी शत्रुता के बाद तनाव कम करने की दिशा में एक संभावित महत्वपूर्ण कदम है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:54 +0530</pubDate>
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<title>भारत बनेगा नया Manufacturing Hub, लगेंगी 250 नई फैक्ट्रियां, Minister Ashwini Vaishnaw का ऐलान</title>
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<description><![CDATA[ केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि भारत ने पिछले वर्ष चीन को 35,000 करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्यात किए और घरेलू स्तर पर अपने घटक निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का तेजी से विस्तार कर रहा है। अगले दो से तीन वर्षों में लगभग 250 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कारखानों की स्थापना होने की उम्मीद है। एएनआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में मंत्री ने कहा कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में लगातार आगे बढ़ रहा है।इसे भी पढ़ें: China-North Korea Relations: 7 साल बाद  उत्तर कोरिया पहुंचे, दुनिया में बढ़ी हलचल... क्या बदलेगा एशिया का पावर गेम?वैष्णव ने कहा कि पिछले वर्ष हमने चीन को 35,000 करोड़ रुपये के उपकरण निर्यात किए। हम उपकरणों का निर्माण कर रहे हैं, वर्तमान में 75 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कारखाने निर्माणाधीन हैं और अगले दो से तीन वर्षों में लगभग 250 घटक निर्माण कारखाने स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत उसी विनिर्माण यात्रा पर आगे बढ़ रहा है जिसका अनुसरण अतीत में कई सफल विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं ने किया है। उन्होंने कहा कि इसलिए हम मूल्य श्रृंखला में ठीक उसी तरह आगे बढ़ रहे हैं जैसे कई अन्य देशों ने प्रगति की है। हमने तैयार उत्पादों के निर्माण से शुरुआत की। चीन, वियतनाम, ताइवान, इन सभी देशों ने इसी तरह से शुरुआत की थी। फिर मॉड्यूल निर्माण की ओर बढ़ते हैं। हम पहले ही मॉड्यूल निर्माण के स्तर तक पहुँच चुके हैं। और अब हम पुर्जों के निर्माण की ओर बढ़ रहे हैं। वैष्णव ने वंदे भारत ट्रेन का उदाहरण देते हुए भारतीय इंजीनियरों और श्रमिकों की क्षमताओं पर भी प्रकाश डाला।इसे भी पढ़ें: ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ गया भारत का परमाणु जखीरा, SIPRI Report ने बढ़ाई पाकिस्तान की धड़कनउन्होंने कहा कि पूरी तरह से भारतीय इंजीनियरों द्वारा डिजाइन की गई। भारतीय वेल्डर, भारतीय फिटर और भारतीय तकनीशियनों द्वारा निर्मित। भारत की व्यापक विनिर्माण यात्रा पर मंत्री ने कहा कि चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने 1980 के दशक की शुरुआत में अपना विनिर्माण अभियान शुरू किया था, जबकि भारत का प्रमुख विनिर्माण अभियान लगभग एक दशक पहले ही शुरू हुआ। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:54 +0530</pubDate>
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<title>भारतीय सवार जहाज पर हमला, भारी एक्शन शुरू</title>
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<description><![CDATA[ स्टेट ऑफ होर्मुज से जहां पर इस वक्त भारतीय क्रू मेंबर वाले एक जहाज पर हमला हो गया है। ईरान और इजराइल के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंचा है। जहां ईरान ने मिसाइल से हमले किए हैं इजराइल के ऊपर। तो इजराइल भी ईरान पर लगातार जवाबी कारवाई कर रहा है। दोनों ही देशों के बीच भयंकर माहौल हो गया है। जमकर मिसाइलें दागी जा रही हैं और इन सबके बीच यह बड़ी खबर सामने आई जो कि भारत के लिए चिंता की खबर है। ओमान के तट के पास स्ट्रेट ऑफ फोरमूस में एक कारगो जहाज पर हमला हुआ और इस जहाज पर 24 भारतीय क्रू मेंबर सवार हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जहाज पलाऊ के झंडे के तहत चल रहा था और ओमान के तट से करीब 15 नॉटिकल मील की दूरी पर सफर कर रहा था। तभी अचानक इस जहाज पर जोरदार धमाका होता है। शुरुआती जानकारी के अनुसार यह हमला ड्रोन या मिसाइल से किया गया हो सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि यह हमला कैसे किया गया है। लेकिन धमाका इतना जबरदस्त था कि जहाज के इंजन रूम में बड़ा सा छेद हो गया और वहां पर भीषण आग लग गई। इसे भी पढ़ें: Israel Retaliatory Strike Iran | ईरान पर इजराइल का भीषण हवाई हमला, सऊदी अरब में बजे सायरन, यमन से भी दागी गई मिसाइलआग लगने के बाद जहाज में अफरातफरी मच गई। इंजन रूम में पानी भरने लगा और जहाज का संतुलन बिगड़ने लगा। हालात को खराब होता देख जहाज पर मौजूद भारतीय नाविकों ने तुरंत एसओएस यानी कि इमरजेंसी मदद का संदेश भेजा। अब बताया जा रहा है कि कई नाविक बेहद घबराहट भरे संदेश भेज रहे हैं और तत्काल मदद की गुहार लगा रहे हैं। फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया यानी एफएसयूआई ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि इस जहाज पर भारतीय नागरिक मौजूद हैं और कुछ क्रू मेंबर्स प्रभावित भी हुए हैं। यूनियन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए भारतीय नौसेना विदेश मंत्रालय और भारत सरकार से तत्काल मदद की भी अपील की। यूनियन के मुताबिक जहाज ट्रेड ऑफ फार्मूस के पास मौजूद था और भारतीय नाविकों को तुरंत सहायता की जरूरत। स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि जहाज की लाइट बोट्स कथित तौर पर क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। यानी कि अगर जहाज को छोड़ने की नौबत आती है तो बचाव अभियान मुश्किल हो सकता है। जिसके कुछ देर बाद एफएसयूआई ने एक और पोस्ट साझा किया और उस पोस्ट में धन्यवाद किया क्योंकि एक हेलीकॉप्टर इन नाविकों को बचाने के लिए वहां पर पहुंच चुका है जो कि एक-एक कर नाविकों को एयरलिफ्ट करता हुआ दिखाई दे सकता है।इसे भी पढ़ें: Iran-Israel Clash से सहमा बाजार, Crude Oil में भारी उछाल, Global Economy पर संकट के बादल। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब ईरान और इजराइल के बीच तनाव एक बार फिर से उठने लगा है। स्टेट ऑफ फॉरमोस दुनिया का बेहद अहम समुद्री मार्ग है और इस रास्ते पर कार्गो शिप पर हमला होना एक बड़ी घटना है जो कि पूरी दुनिया के लिए चिंता की खबर है लेकिन भारत के लिए कुछ ज्यादा चिंता की खबर इसलिए है क्योंकि इस जहाज पर 24 भारतीय नागरिक सवार हैं जिनकी सुरक्षा बेहद जरूरी हो जाती है। फिलहाल इन नागरिकों की मदद के लिए हेलीकॉप्टर वहां पहुंच चुका है जो उन्हें रेस्क्यू कर रहा है। लेकिन सवाल यह है कि स्ट्रेट फार्मूस में कारगो जहाज को निशाना क्यों बनाया जा रहा है? वो भी उन जहाजों पर जिनमें भारतीय नाविक सवार हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:53 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान से PoK में हुई सबसे बड़ी गलती, सैनिकों के उड़े चिथड़े, अब भारत करेगा खेल!</title>
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<description><![CDATA[ पीओके से ऐसी खबर सामने आई है जिसके इंतजार में भारत 79 सालों से था। 79 साल पहले पाकिस्तान ने भारत के इस इलाके पर कब्जा कर लिया था अवैध कब्जा। लेकिन इस इलाके को पाकिस्तान से छुड़वाने के लिए खुद पीओके की जनता ने ही अब सबसे बड़ी जंग छेड़ दी है। मजे की बात देखिए कि कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित बलूचिस्तान में चुनाव का ऐलान किया गया था जिसके बाद भारत ने जमकर लताड़ लगाई थी और भारत की फटकार लगते ही पीओके ने पाकिस्तान का दहन शुरू कर दिया है। मैदान में जख्मी पड़े पाकिस्तानी फोर्सेस के ये जवान जो हैं ये अपने जख्मों को ही चाट रहे हैं। पीओके की पिटाई के बाद सदमे से निकलने की ये पूरी कोशिश कर रहे हैं। जान की भीख मांग रहे हैं। देखिए कैसे पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई उसका खुलासा करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोग खुद पाकिस्तान के खिलाफ खड़े हो गए और जो तस्वीरें सामने आई हैं उन्होंने इस्लामाबाद की नींद कैसे उड़ा दी है। इसे भी पढ़ें: &#039;जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और रहेगा&#039;, UN में नई दिल्ली ने पाकिस्तान को दिया करारा जवाबदरअसल बता दें कि पीओके में लंबे समय से जनता कई मुद्दों को लेकर नाराज बताई जा रही है। लोगों का यह आरोप है कि उनके राजनीतिक अधिकार सीमित है। आर्थिक समस्याएं बढ़ रही हैं और फैसले स्थाई जनता की बजाय इस्लामाबाद से तय किए जाते हैं। इसी नाराजगी को लेकर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी यानी कि जैक लगातार आंदोलन चला रही है। अब इस आंदोलन को और भी ज्यादा हवा तब मिली जब पाकिस्तान ने चुनावी [संगीत] प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू की। जैक का यह कहना है कि विधानसभा में आरक्षित सीटों की व्यवस्था स्थाई राजनीति को प्रभावित करती है और इससे बाहरी राजनीतिक दलों का दबदबा भी बना रहता है और यही वजह है कि हजारों लोग सड़कों पर उतरने लगे। लेकिन फिर हुआ वो जिसकी पाकिस्तान को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक प्रदर्शनकारी की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार यानी कि जनाजे में बड़ी संख्या में लोग जुट गए। इसी दौरान हालात अचानक पीओके में बिगड़ने लगे। सुरक्षा बलों और स्थाई लोगों के बीच यहां पर झड़प हो गई और देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया। कई लोगों के घायल होने और कई मौतों की खबरें सामने आई हैं। जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया और यहीं से पाकिस्तान के लिए मुश्किलें और भी ज्यादा बढ़ गई। इसके बाद बता दें कि पाकिस्तान ने सबसे पुराना हथियार निकाला। यानी कि इंटरनेट बंद कर दिया। सेना को पीओके में उतार दिया और विरोध को दबाने की कोशिश की। इसे भी पढ़ें: PoK में यहां घुसा भारत तो होगा असली धमाका, बदल जाएगा नक्शाकई इलाके रावलकोट और कई अन्य इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया। इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर भी इसका असर पड़ा। प्रशासन ने हालात को कंट्रोल करने की कोशिश तो की लेकिन हालात कंट्रोल हुए नहीं। इंटरनेट बंद होने से गुस्सा नहीं रुका बल्कि और भी ज्यादा बढ़ गया। जैक ने बड़े आंदोलन और मार्च का ऐलान भी कर दिया है। दूसरी तरफ बता दें कि पाकिस्तान सरकार संगठन पर गंभीर आरोप लगा रही है। जबकि संगठन इन आरोपों को खारिज कर रहा है। यानी टकराव खत्म होने की बजाय और भी ज्यादा तेज होता हुआ दिखाई दे रहा है। 79 साल पहले जिस जमीन पर पाकिस्तान ने कब्जा किया था आज उसी जमीन पर पाकिस्तान को अपनी पकड़ बचाने के लिए सेना उतारनी पड़ रही है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:52 +0530</pubDate>
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<title>इतिहास में पहली बार सऊदी में तहलका मचा आया भारत, दुनिया हैरान</title>
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<description><![CDATA[ मोदी सरकार ने भारत के इतिहास में पहली बार सऊदी अरब में एक ऐसा कदम उठाया है जो आज तक नहीं उठाया गया। पीएम मोदी के लिए खाड़ी देश हमेशा से अहम रहे हैं। लेकिन ईरान अमेरिका जंग ने खाड़ी देशों में जो अस्थिरता और ऊर्जा संकट पैदा किया है उसे देखते हुए भारत ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। भारत ने आजादी के बाद पहली बार सऊदी अरब में किसी गैर मुस्लिम राजदूत की तैनाती की है। अभी तक भारत हमेशा सऊदी अरब में मुस्लिम राजदूत भेजता आया है। लेकिन अब एक बड़े मकसद की वजह से 2 जून 2026 को विदेश मंत्रालय ने विपुल को सऊदी अरब का अगला राजदूत नियुक्त कर दिया है। आपको बता दें कि विपुल अपना नाम सिर्फ विपुल ही लिखते हैं। इसे भी पढ़ें: Iran-Israel Clash से सहमा बाजार, Crude Oil में भारी उछाल, Global Economy पर संकट के बादल।विपुल के नाम से उनका धर्म तो साफ नहीं होता लेकिन सभी रिपोर्ट्स में उन्हें नॉन मुस्लिम और फर्स्ट हिंदू एंबेसडर के संदर्भ में बताया गया है। सऊदी अरब में किसी गैर मुस्लिम राजदूत को भेजना भारत और सऊदी संबंधों में नए दौर का संकेत माना जा रहा है। ऐसा क्यों कहा जा रहा है वह हम आपको बताएंगे। लेकिन उससे पहले बता दें कि विपुल की नियुक्ति दशकों पुरानी उस परंपरा में एक बड़ा बदलाव है जिसके तहत भारत पारंपरिक रूप से सऊदी अरब में मुस्लिम राजनयों को और जेधा में मुस्लिम काउंसिल जनरल्स की नियुक्ति करता आया है। ऐसा इसलिए किया जाता रहा है क्योंकि भारत से लाखों मुस्लिम हर साल हज के लिए जाते हैं। जिसके चलते सऊदी अरब में मुस्लिम राजदूत का होना उन हज यात्रियों के लिए थोड़ा आसान हो जाता है। सऊदी अरब में भारत के मुस्लिम राजदूत हज तीर्थ यात्रा के इंतजामों में अहम भूमिका निभाते आए हैं। लेकिन पहली बार किसी मुस्लिम राजदूत की जगह विपुल को भेजा गया है। इसे भी पढ़ें: Indian Embassy ने भारतीयों को तुरंत Iran छोड़ने की दी सलाह, West Asia Situation पर MEA का भी आया बयानयह बड़ा बदलाव भारत और सऊदी अरब के रिश्तों के विकास को दिखाता है। यह रिश्ते अब सिर्फ हज तीर्थ यात्रा और तेल तक सीमित नहीं रहे हैं। बल्कि व्यापार, निवेश, रक्षा, सहयोग, टेक्नोलॉजी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों को शामिल करते हुए एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल गए हैं। भारत ने देखा कि सिर्फ ईरान जंग की वजह से खाड़ी देश आपस में भिड़ गए, लेकिन शायद भारत चाहता है कि खाड़ी देश आपस में ना लड़े। अगर वह आपस में लड़ते हैं तो उसका असर दुनिया पर पड़ता है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत अब संयुक्त अरब अमीरात की तरह सऊदी अरब को भी टेक्नोलॉजी और हथियार बेचना चाहता है जिसके लिए शायद विपुल को भेजा जा रहा है। आपको बता दें कि विपुल मिस्र में काम कर चुके हैं। उससे पहले वो 2017 से 20 तक दुबई में भारत के काउंसिल जनरल रहे हैं। उन्होंने विदेश मंत्रालय में खाड़ी देशों के लिए संयुक्त सचिव के तौर पर भी काम किया है। 2023 से विपुल कतर में भारत के राजदूत हैं। यानी उन्हें खाड़ी देशों की रणनीति और राजनीति दोनों पता है। एक्सपर्ट्स की मानें तो भारत का यह कदम सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच दूरी को कम करने के लिए भी हो सकता है। विपुल दुबई और रियाद के बीच एक ब्रिज का काम कर सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:52 +0530</pubDate>
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<title>क्यूबा: अमेरिकी प्रतिबन्धों के कारण संकट गहराया, बच्चों की मौतें</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने कड़े शब्दों में आगाह करते हुए कहा है कि क्यूबा में डॉक्टर आवश्यक दवाओं तक पहुँच नहीं होने के कारण बच्चों की जान नहीं बचा पा रहे हैं. उन्होंने इस कैरीबियाई देश के ख़िलाफ़ संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिबन्धों को तुरन्त हटाए जाने की मांग भी की है, जो देश में &quot;व्यापक नुक़सान&quot; पहुँचा रहे हैं. ]]></description>
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<title>शक्तिशाली भूकम्प से दहले फ़िलीपींस में, जान&#45;माल की बड़ी हानि</title>
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<description><![CDATA[ फ़िलीपींस के दक्षिणी द्वीप मिंडानाओ में सोमवार सुबह आए शक्तिशाली भूकम्प में कम से कम 19 लोग मारे गए हैं, अनेक घायल हुए हैं और अस्पतालों, घरों व स्कूलों को नुक़सान पहुँचने की ख़बर है. यह आपदा ऐसे दिन घटी है जब ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद लाखों बच्चे स्कूल लौट रहे थे. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:16 +0530</pubDate>
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<title>&amp;apos;सैन्य लैंगिक पैरोकार&amp;apos; से सम्मानित मेजर अभिलाषा बराक के कुछ अनुभव</title>
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<description><![CDATA[ भारतीय शान्तिरक्षक मेजर अभिलाषा बराक को वर्ष 2025 के &#039;सैन्य लैंगिक पैरोकार&#039; पुरस्कार सम्मानित किया गया है. मेजर अभिलाषा बराक, लेबनान के दक्षिणी इलाक़े में यूएन मिशन (UNIFIL) में तैनात भारतीय बटालियन में सामुदायिक सम्पर्क टीम की कमांडर और लैंगिक समन्वय अधिकारी के रूप में सेवारत हैं. यूएन न्यूज़ के साथ ख़ास बातचीत में उन्होंने बताया कि इस ज़िम्मेदारी के तहत उन्होंने क्या कार्य व बदलाव किए...(वीडियो) ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:16 +0530</pubDate>
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<title>स्थिरता के आभास के बावजूद, अफ़ग़ानिस्तान &amp;apos;मानवीय व आर्थिक चुनौतियों की चपेट में&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र की वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि तालेबान प्रशासन के दौरान देश में सुरक्षा हालात अपेक्षाकृत बेहतर हुए हैं, लेकिन मानवीय स्थिति अब भी निरन्तर बिगड़ रही है, महिलाओं व लड़कियों पर पाबन्दियों से उनका जीवन दूभर है और आर्थिक दबावों की वजह से भविष्य अनिश्चित नज़र आ रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:16 +0530</pubDate>
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<title>भारत: सिन्धुदुर्ग में प्रवाल भित्तियों की रक्षा में जुटे युवा ग़ोताख़ोर</title>
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<description><![CDATA[ महाराष्ट्र के सिन्धुदुर्ग ज़िले में, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के समर्थन वाली परियोजनाओं ने स्थानीय युवाओं को समुद्री संरक्षण, ज़िम्मेदार ग़ोताख़ोरी और प्रवाल भित्तियों की बहाली से जोड़ा है. इन्हीं प्रयासों के तहत, भूषण जुवाटकर जैसे युवा ग़ोताख़ोर अब अपने समुद्र, आजीविका और अगली पीढ़ी के भविष्य की रक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:56:15 +0530</pubDate>
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<title>India&#45;Pakistan Dispute | UNSC की कुर्सी जिम्मेदारी है, झूठ का लाउडस्पीकर नहीं, भारत ने पाकिस्तान को दी गंभीर नसीहत&amp;quot;</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की संकीर्ण और विभाजनकारी राजनीति को बेनकाब किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर का ‘‘अनुचित उल्लेख’’ किए जाने पर नई दिल्ली ने इस्लामाबाद की कड़ी निंदा की। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के वर्तमान अस्थायी सदस्य पाकिस्तान को उसकी औकात याद दिलाते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है, न कि यह ‘‘पक्षपातपूर्ण और झूठे विमर्श’’ को फैलाने का कोई मंच है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद की वार्षिक रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया। यह तीखी प्रतिक्रिया तब आई जब पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने अपने संबोधन में कश्मीर का रोना रोया।
 हरीश की यह तीखी प्रतिक्रिया तब आई जब संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘सुरक्षा परिषद की वार्षिक रिपोर्ट’ पर अपने संबोधन में जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाया।इसे भी पढ़ें: CJP Jantar Mantar Protest | जंतर-मंतर पर &#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; का महाजुटाव! धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
 पाकिस्तान लगातार जम्मू कश्मीर के मुद्दे के साथ-साथ भारत के आंतरिक मामलों को भी संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मंचों पर उठाता रहता है। पाकिस्तान वर्तमान में सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है और उसका कार्यकाल इस वर्ष समाप्त हो रहा है।
 हरीश ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के हॉल में कहा कि पाकिस्तान ने अपने विभाजनकारी राजनीतिक हितों के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठित मंचों का दुरुपयोग करने की अपनी आदत को बरकरार रखने का फैसला कर लिया है।
 हरीश ने कहा, ‘‘पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद में अपनी उपस्थिति का दुरुपयोग किया जिसमें कई गलत सूचनाओं और भ्रामक संदेशों का प्रसार भी शामिल है जो उसके इसी प्रतिकूल दृष्टिकोण का प्रमाण है। मैं पाकिस्तान को याद दिलाना चाहता हूं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य होना एक बड़ी जिम्मेदारी है। यह पक्षपातपूर्ण और झूठे बयान फैलाने का मंच नहीं है।’’
 हरीश ने स्पष्ट किया कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग था, है और हमेशा रहेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसके विपरीत कोई भी दावा निराधार, ऐतिहासिक तथ्यों से रहित और उनसे मेल नहीं खाता।इसे भी पढ़ें: Sukhoi Su-57 | India-Russia defense Deal | पुतिन ने भारत को फिर दिया 5वीं पीढ़ी के Su-57 फाइटर जेट का ऑफर, अमेरिका को दी खुली चुनौती
 उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान के खोखले वादों और बयानबाजी से यह मूलभूत वास्तविकता नहीं बदलेगी। संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की बड़ी संख्या और उनके समय को ध्यान में रखते हुए मैं इस विषय पर और अधिक चर्चा नहीं करूंगा।’’
 भारतीय राजदूत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय सुरक्षा परिषद में सुधार के महत्व को समझता है ताकि यह समकालीन और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए उपयुक्त बन सके।
 उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान संरचना 1945 की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाती है। यथास्थिति बनाए रखने से अब तक सुरक्षा परिषद का प्रभावी कामकाज संभव नहीं हो पाया है और न ही भविष्य में ऐसा हो सकता है।’’
 उन्होंने कहा कि 1960 के दशक में किए गए ‘‘मामूली’’ सुधार से केवल अस्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार हुआ। सुधार से सुरक्षा परिषद के कामकाज के मूल स्वरूप में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ है।
 उन्होंने कहा, ‘‘स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों का विस्तार वास्तविक और सार्थक सुधारों को लागू करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।’’
 जी4 देशों के सदस्य भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान ने प्रस्ताव दिया है कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता वर्तमान 15 से बढ़ाकर 25 या 26 की जानी चाहिए जिसमें सुधार के बाद परिषद में 11 स्थायी सदस्य और 14 या 15 अस्थायी सदस्य हों।
 वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के इस शक्तिशाली निकाय में वीटो शक्ति वाले पांच स्थायी सदस्य हैं - चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका।
 शेष 10 सदस्य दो साल के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्य के रूप में चुने जाते हैं। भारत आखिरी बार 2021-22 में अस्थायी सदस्य के रूप में परिषद का हिस्सा बना था। Stay updated with International
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:25 +0530</pubDate>
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<title>Sukhoi Su&#45;57 | India&#45;Russia defense Deal | पुतिन ने भारत को फिर दिया 5वीं पीढ़ी के Su&#45;57 फाइटर जेट का ऑफर, अमेरिका को दी खुली चुनौती</title>
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<description><![CDATA[ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शनिवार को एक बार फिर भारत के प्रति अपनी गहरी दोस्ती का इजहार करते हुए 5वीं पीढ़ी के सुखोई Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट (Sukhoi Su-57 Stealth Fighter Jet) को मिलकर विकसित करने और बनाने के रूस के बड़े ऑफर को दोहराया है। पुतिन का यह बयान साफ संकेत देता है कि मॉस्को अब नई दिल्ली के साथ महज &#039;खरीदार और विक्रेता&#039; (Buyer-Seller) के पारंपरिक रिश्ते से आगे बढ़कर रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहता है। सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) के दौरान &#039;इंडिया टुडे&#039; की ग्रुप एडिटर गीता मोहन से खास बातचीत में पुतिन ने कहा कि रूस इस अत्याधुनिक फाइटर जेट पर भारत के साथ हर तरह के सहयोग के लिए पूरी तरह तैयार है।इसे भी पढ़ें: अस्थियां विसर्जित करने जा रहा था परिवार, रास्ते में हुई 8 लोगों की मौत, चारों तरफ मची अफरा-तफरी इस सवाल के जवाब में कि क्या Su-57 पर सहयोग का रूस का ऑफर अभी भी है, पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के बीच सोवियत काल से ही करीबी सैन्य-तकनीकी सहयोग का इतिहास रहा है और भारतीय सशस्त्र बलों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी रूसी मूल के उपकरणों का इस्तेमाल कर रहा है।उन्होंने ज़ोर दिया कि द्विपक्षीय रक्षा संबंध अब सिर्फ़ खरीद-फरोख्त से आगे बढ़कर संयुक्त रिसर्च और डेवलपमेंट पर केंद्रित हो गए हैं। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल का सफल उदाहरण देते हुए पुतिन ने बताया कि भारतीय और रूसी विशेषज्ञों ने इस प्रोजेक्ट पर शुरुआत से ही मिलकर काम किया है। इसे भी पढ़ें: CJP Jantar Mantar Protest | जंतर-मंतर पर &#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; का महाजुटाव! धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, सुरक्षा के कड़े इंतजामपुतिन ने कहा, &quot;भारत पारंपरिक रूप से हमसे विमान - यानी प्लेन और हेलीकॉप्टर - खरीदता रहा है। Su-57 एक बहुत अच्छा विमान है, शायद दुनिया का सबसे आधुनिक और अप-टू-डेट विमान है, और यह सबसे कुशल भी है।&quot;रूसी राष्ट्रपति ने बताया कि मॉस्को ने पहले भी इस फाइटर जेट के लिए एक संयुक्त कार्यक्रम का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा, &quot;हमने ऑफर दिया था, और मैंने कल ही अपने भारतीय दोस्तों से यह बात कही। हमने प्रस्ताव दिया था कि हमें मिलकर यह काम करना चाहिए। खैर, पहले ऐसा नहीं हो पाया, लेकिन हमने इसे खुद ही बनाया, और हम अब भी Su-57 बेचने के लिए तैयार हैं।&quot;पुतिन ने विमान की क्षमताओं पर भी प्रकाश डाला और कहा, &quot;Su-57 को दो पायलटों के साथ कॉन्फ़िगर किया जा सकता है और यह एक कमांड सेंटर के तौर पर भी काम कर सकता है। रूस न केवल मिलिट्री एविएशन में, बल्कि नेवल प्लेटफॉर्म - जिसमें पनडुब्बियां और सतह पर चलने वाले जहाज़ शामिल हैं - में भी एक प्रमुख खिलाड़ी बना हुआ है।&quot; जब पुतिन से पूछा गया कि क्या भारत को Su-57 फाइटर या S-500 एयर डिफेंस सिस्टम जैसे रूसी डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए अमेरिका से छूट की ज़रूरत होगी, तो उन्होंने कहा कि भारत हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए एक आज़ाद देश की तरह काम करता रहा है।रूसी प्रधानमंत्री ने कहा, &quot;भारत हमेशा एक आज़ाद देश की तरह काम करता है।&quot; उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लीडरशिप में, &quot;अगर प्रतिबंध लगाने की कोई भी कोशिश होती है, तो उसका उल्टा असर तुरंत होगा।&quot;उस समय को याद करते हुए जब मोदी के अमेरिका में घुसने पर रोक लगी थी, पुतिन ने कहा कि प्रधानमंत्री उन अनुभवों को भूले नहीं हैं। उन्होंने कहा, &quot;आज, वे सभी प्रतिबंध हटा दिए गए हैं और भारत-अमेरिका संबंध सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं।&quot;भारत के अपने डिफेंस पार्टनर चुनने के अधिकार का बचाव करते हुए, पुतिन ने कहा कि नई दिल्ली ऐसे मिलिट्री इक्विपमेंट खरीदने के लिए आज़ाद है जिन्हें वह सबसे एडवांस्ड, सही और किफायती मानती है। उन्होंने कहा, &quot;भारत हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखता है।&quot;पुतिन ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत के साथ रूस के डिफेंस संबंध राजनीतिक दबाव से अलग हैं। उन्होंने कहा, &quot;भारत के साथ हमारा सहयोग राजनीतिक माहौल पर निर्भर नहीं है। कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें भारत को क्या देना चाहिए या क्या नहीं। हम हमेशा अपने पार्टनर, खासकर भारत जैसे पार्टनर के साथ किए गए वादों को पूरा करेंगे।&quot;रूसी राष्ट्रपति ने आगे कहा, &quot;हम उसी भावना और उन्हीं सिद्धांतों के आधार पर भारत के साथ काम जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।&quot;यह ऑफ़र क्यों अहम है?पुतिन की ये बातें ऐसे समय में सामने आई हैं जब भारत इंडियन एयर फ़ोर्स की पांचवीं पीढ़ी के फाइटर की क्षमताओं को मज़बूत करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। IAF के पास अभी पांचवीं पीढ़ी का कोई कॉम्बैट एयरक्राफ्ट नहीं है, जबकि ऐसी रिपोर्टों से चिंता बढ़ गई है कि पाकिस्तान चीन का J-35AE स्टील्थ फाइटर खरीद सकता है।भारत का अपना पांचवीं पीढ़ी का फाइटर प्रोग्राम, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA), अभी भी डेवलपमेंट के दौर में है और इसके 2030 के दशक के मध्य में ही सर्विस में आने की उम्मीद है।इस हफ़्ते की शुरुआत में, पुतिन ने इंटरनेशनल मीडिया से कहा था कि रूस न केवल भारत को Su-57 सप्लाई करने के लिए तैयार है, बल्कि अहम टेक्नोलॉजी शेयर करते हुए इस एयरक्राफ्ट को मिलकर डेवलप और प्रोड्यूस करने के लिए भी तैयार है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि &quot;मॉस्को को नई दिल्ली के साथ डिफेंस सहयोग बढ़ाने में कोई रुकावट नहीं दिखती&quot;।रूस का मुख्य स्टील्थ फाइटर, Su-57, हवा, ज़मीन और समुद्र में मौजूद टारगेट के ख़िलाफ़ मल्टी-रोल कॉम्बैट मिशन के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस एयरक्राफ्ट में स्टील्थ क्षमताएं, तेज़ी से मुड़ने की क्षमता और एडवांस्ड एवियोनिक्स का मेल है, जो इसे अमेरिका के F-35 और चीन के J-35 के साथ ऑपरेशनल पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के चुनिंदा ग्रुप में शामिल करता है। Stay updated with International
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:25 +0530</pubDate>
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<title>ये भारत है,  प्रतिबंध लगाने की कोई भी कोशिश तुरंत उलटी पड़ सकती है. ...अमेरिका&#45;यूरोप को पुतिन की दो टूक</title>
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<description><![CDATA[ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रतिबंधों के माध्यम से भारत पर दबाव डालने का कोई भी प्रयास उल्टा पड़ेगा। उन्होंने नई दिल्ली की रणनीतिक स्वायत्तता का समर्थन किया और इस बात पर जोर दिया कि संप्रभु देशों को अपने रक्षा और आर्थिक साझेदारों को चुनने की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए। सेंट पीटर्सबर्ग अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक मंच (एसपीआईईएफ) में पुतिन ने कहा कि भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों से निर्देशित नीतियों का पालन किया है और रूस के साथ अपने संबंधों को लेकर बाहरी दबाव के बावजूद ऐसा करना जारी रखेगा। पुतिन ने कहा भारत हमेशा एक संप्रभु देश के रूप में कार्य करता है, और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, प्रतिबंधों की कोई भी संभावित धमकी तुरंत ही उलटी पड़ जाएगी। इसे भी पढ़ें: BRICS की पावर पर President Putin की मुहर, कहा- G7 का दौर खत्म, यह Global South का युग हैपुतिन ने Su-57 जेट पर टिप्पणी कीपुतिन ने खुलासा किया कि रूस ने पहले भारत के साथ Su-57 लड़ाकू विमान से संबंधित एक संयुक्त कार्यक्रम का प्रस्ताव रखा था, लेकिन सहयोग न हो पाने के कारण अंततः रूस ने इस विमान को स्वतंत्र रूप से विकसित किया। पुतिन ने कहा Su-57 एक बहुत अच्छा विमान है, संभवतः दुनिया का सबसे आधुनिक और उन्नत विमान है।&quot; उन्होंने आगे कहा, &quot;हमने इसे संयुक्त रूप से विकसित करने का प्रस्ताव रखा था। खैर, यह संभव नहीं हो पाया, लेकिन हमने इसे अपने दम पर विकसित किया है और हम Su-57 बेचने के लिए तैयार हैं। रूसी नेता ने कहा कि यह विमान सेवा में मौजूद सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक है और यह कमान और नियंत्रण सहित कई तरह की भूमिकाओं में काम कर सकता है। इसे भी पढ़ें: मोदी पर दबाव डालना...भारत का जिक्र कर अमेरिका को पुतिन ने क्या सुना दियारक्षा संबंध &#039;विश्वास पर आधारित&#039;पुतिन ने भारत-रूस रक्षा सहयोग को अद्वितीय बताया क्योंकि यह केवल खरीद-बिक्री के लेन-देन से कहीं अधिक व्यापक है। उन्होंने कहा, &quot;भारतीय मित्रों के साथ हमारे संबंध इस मायने में विशिष्ट हैं कि आपसी विश्वास के बल पर हम केवल व्यापार या खरीद-बिक्री पर ही ध्यान केंद्रित नहीं करते। उन्होंने आगे कहा कि हम संयुक्त अनुसंधान और विकास पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, पुतिन ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम का जिक्र किया, जिसे भारतीय और रूसी विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से विकसित किया है और यह दोनों देशों के बीच सबसे सफल रक्षा सहयोगों में से एक बन गया है। उन्होंने कहा कि इस मिसाइल के डिजाइन में भारतीय विशेषज्ञों के साथ-साथ रूसी विशेषज्ञों ने भी शुरुआत से ही भाग लिया और इसका परिणाम शानदार रहा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:24 +0530</pubDate>
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<title>CPEC फेल, 4 देशों वाला भारत का पहला 1300 KM सुपर कॉरिडोर</title>
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<description><![CDATA[ बीजिंग के दफ्तरों में इस वक्त सन्नाटा पसरा है। वजह है भारत का वो साइलेंट मास्टर स्ट्रोक जिसने साउथ एशिया के नक्शे से चीन के दबदबे को मिटाने की पटकथा लिख दी है। दरअसल साउथ एशिया के सीने पर भारत एक ऐसी 1300 किमी लंबी आर्थिक तलवार चला रहा है जिससे चीन केत्वाकांक्षी सीपीईसी के गुब्बारे की हवा निकल चुकी है। यह सिर्फ एक सड़क नहीं है। यह भारत का वो ब्रह्मास्त्र है जो नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की किस्मत को हमेशा हमेशा के लिए दिल्ली से जोड़ देगा और डिफेंस एक्सपर्ट भी हैरान है कि इतनी खामोशी से बिना किसी शोर के भारत ने चीन की घेराबंदी आखिर कैसे कर दी। भारत के उत्तरपूर्वी राज्य यानी नॉर्थ ईस्ट दशकों से कनेक्टिविटी की समस्या से जूझ रहे थे। इसे भी पढ़ें: &#039;जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और रहेगा&#039;, UN में नई दिल्ली ने पाकिस्तान को दिया करारा जवाबसिलीगुड़ी कॉरिडोर जिसे चिकन नेक कहा गया वहां का सारा बोझ संभालना मुश्किल हो रहा था। लेकिन अब भारत सरकार ने गेम पलट दिया है। यह 1300 कि.मी. का लंबा हाईवे सीधे तौर पर कोलकाता पोर्ट से शुरू होकर सिलिगुड़ी होते हुए नेपाल और भूटान की सीमाओं से छू जाएगा। यह कोई साधारण सड़क नहीं है बल्कि एक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की तरह काम करेगा। कल्पना कीजिए जो ट्रक पहले पहाड़ों के टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर हफ्तों फंसे रहते थे, वे अब 100 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से अपना माल पहुंचाएंगे बॉर्डर्स पर। इससे ना केवल समय बचेगा बल्कि ट्रांसपोर्टेशन की लागत 30% तक कम हो जाएगी। यह भारत के नॉर्थ ईस्ट को लैंड लॉक से लैंड लिंक बना देगा। अब बात करते हैं उन दो देशों की जिन्हें चीन हमेशा अपने कर्ज के जाल में फंसाने की फिराक में रहता है। नेपाल और भूटान। इन दोनों देशों की सबसे बड़ी मजबूरी है कि इनके पास अपना कोई समंदर नहीं है। इसे भी पढ़ें: &#039;भारत कभी किसी विदेशी ताकत के आदेश नहीं मानता&#039;, पीएम मोदी पर दबाव बनाना बेकार, ट्रंप को पुतिन का कड़ा जवाबचीन इन्हें तिब्बत के रास्ते वोट देने का लालच देता रहा है। लेकिन हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों के कारण वो रास्ता बेहद महंगा और मुश्किल है। भारत ने इस 1300 किमी लंबे हाईवे के जरिए उन्हें एक ऐसा विकल्प दे दिया है जिसे ठुकराना उनके लिए नामुमकिन है। नेपाल और भूटान के व्यापारियों के लिए अब कोलकाता और हदिया फोर्ट तक पहुंचना मक्खन जैसा हो जाएगा। जब इन देशों का व्यापार भारत के रास्ते सस्ता होगा तो वे चीन के महंगे और एहसान भरे रास्तों की तरफ नहीं देखेंगे। यह भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी की सबसे बड़ी जीत है और चीन की सबसे बड़ी हार है। लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे दिलचस्प मोड़ आता है बांग्लादेश पर। इस प्रोजेक्ट को बीबीआईए कहा गया जिसमें बांग्लादेश एक प्रमुख भागीदार था।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:23 +0530</pubDate>
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<title>सिर्फ 60 KM दूर थी दुश्मन की फौज! असली गद्दार तो अजरबैजान निकला</title>
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<description><![CDATA[ जब अमेरिका 40 दिनों की जंग में ईरान पर समंदर और आसमान से हमले कर रहा था। उस वक्त इजरायल ने ईरान की जमीन पर उतरने की एक साजिश रची थी और उसमें ईरान के एक करीबी पड़ोसी ने इजराइल का साथ दिया था। जंग के दो माह बाद अब धीरे-धीरे रिपोर्ट्स के जरिए साजिश की परतें खुलती जा रही हैं। ईरान के खिलाफ इजरायल के इस प्लान में साथ देने वाला कोई अरब देश नहीं बल्कि उससे बॉर्डर शेयर करने वाला अजरबैजान था। अमेरिकी न्यूज़ चैनल सीएनएन के मुताबिक अजरबैजान के भीतर इजरायल ने युद्ध के दौरान कई सैन्य ठिकाने बनाए थे। इनमें से एक ठिकाना ईरान के शहर तबरीज से महज 60 किमी की दूरी पर था। क्योंकि ईरान और काकेशस मुल्क अज़रबैजान के बीच 689 किमी की सरहद है। अब मीडिया रिपोर्ट्स दावा कर रही हैं कि अजरबैजान में बनाए गए अपने मिलिट्री बेस से इसराइल ने ना सिर्फ ईरान पर हमले अंजाम दिए बल्कि यहीं से आईआरजीसी के खुफिया चीफ को मारने के लिए प्लेन भी उड़े थे। इसे भी पढ़ें: एक गलती और इजरायल में भीषण तबाही, इस बार फोड़ने को तैयार बैठा ईरान?रिपोर्ट तो यह भी कहती है कि इसराइल ने इस बेस से ईरान पर कई हमले अंजाम दिए। कहा जा रहा है कि इसराइल को उम्मीद थी कि ईरान के सुप्रीम लीडर, आईआरजीसी कमांडरों और इस्लामिक रेवोल्यूशन के बड़े लीडर्स की हत्या के बाद लोग सड़कों पर उतरेंगे। दरअसल अज़र-बैजान से इसराइल ने इसके बाद की तैयारी भी कर रखी थी और वो यह थी कि अपने सैनिकों को अज़र-बैजान में तैनात किया जाए। जैसे ही ईरान की जनता रिजीम के खिलाफ बगावत के लिए बाहर निकले, वो अपने फौजी ईरान से 60 कि.मी. दूर अज़र-बैजान के बेस से ईरान में भेज दे। क्योंकि जमीनी सरहद का इसराइल फायदा उठाना चाहता था इसलिए उसने यह सारा प्लान बनाकर रखा था। लेकिन इसराइल की चालों पर ईरान की आवाम ने पानी फेर दिया। सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामिनई और सुप्रीम सिक्योरिटी काउंसिल के चीफ अली लारानी की हत्या के बावजूद ईरान की जनता सड़कों पर नहीं आई। उल्टा इस्लामिक रेवोल्यूशन के सपोर्ट में उतरने लगी। इसे भी पढ़ें: Iran के Supreme Leader Khamenei का बड़ा ऐलान, एकजुट होकर दुश्मन की साजिश को करें फेलइजराइल का सारा प्लान फेल हो गया। सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से की गई इस रिपोर्ट में दावा किया है कि अज़रबैजान से ईरान के खिलाफ ऑपरेट किए जाने वाले इस अभियान में इजरायल के कई दर्जन सैनिक शामिल थे। जिनमें इसराइल के हेलीकॉप्टर यूनिट और मोसाद के लोग भी तैयार थे। हालांकि अज़रबैजान ने अपनी जमीन ईरान के खिलाफ इस्तेमाल होने के दावों से साफ इंकार कर दिया है। लेकिन यह भी सच है कि अज़रबैजान ने ईरान के दुश्मन से पक्की दोस्ती तो गांठ रखी है। इजरायल का बेहद करीबी दोस्त है अज़रबैजान। यहां तक कि इजराइल की मदद से चलने वाला मुस्लिम बहुल मुल्क है अज़रबैजान। शिया मुस्लिम बहुल मुल्क होने के बावजूद अज़रबैजान ने फिलिस्तीन इसराइल के विवाद पर कभी खुलकर कुछ नहीं कहा। इजरायल अज़रबैजान को फौज और खेती को मजबूत करने में मदद करता है। क्योंकि अज़रबैजान का इन क्षेत्रों में कुछ खास एक्सपीरियंस नहीं है। इसलिए अज़रबैजान अपना तेल इजरायल को बेचता है और कहा जाता है कि अज़रबैजान का तेल तुर्की के रास्ते इजरायल पहुंचता है जो उसकी खपत का 40% है। खास बात यह है कि इसमें वो ऑयल भी है जो टैंकों और फाइटर जेट में इस्तेमाल किया जाता है और उन्हीं से इजरायल ने गाजा पर भी जबरदस्त तबाही मचाई है। अब देखना होगा कि किसी फाइनल डील पर पहुंचने के बाद बनी नई कंडीशन में ईरान के नए सुप्रीम लीडर आयतुल्ला मोजतबा खामनेई अपने पड़ोसी देश अज़र-बैजान के धोखे से कैसे निपटते हैं? ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:22 +0530</pubDate>
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<title>रियल वर्ल्ड में जियो...ट्रंप के खामनेई से मिलने की बात पर बोला ईरान</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के साथ संभावित बैठक के बारे में की गई टिप्पणियों को खारिज करते हुए कहा कि इस मुद्दे को यथार्थवादी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, अरघची ने कहा कि मैंने एक रिपोर्ट देखी जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि ट्रंप ने कहा कि वह बैठक के लिए तैयार हैं या बैठक करना चाहते हैं। लेकिन मुझे लगता है कि हमें यथार्थवादी होना चाहिए और वास्तविक दुनिया में सोचना और जीना चाहिए। इसे भी पढ़ें: सिर्फ 60 KM दूर थी दुश्मन की फौज! असली गद्दार तो अजरबैजान निकलामोजतबा खामेनेई से मुलाकात पर ट्रंप का रुखईरान इंटरनेशनल के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि अगर तेहरान के साथ समझौता हो पाता है तो वे ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई से मिलने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे &quot;सम्मानित&quot; और &quot;आदरपूर्ण&quot; महसूस करेंगे, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे उनके पसंदीदा व्यक्ति नहीं हैं। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि मैं उनसे मिलना नहीं चाहता, लेकिन अगर मुलाकात हुई तो मुझे उनसे मिलकर गर्व होगा। मैं देखना चाहूंगा कि क्या कोई समझौता हो पाता है, लेकिन अगर समझौता हो जाता है तो संभव है कि मैं उनसे मिलूं। मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं होगी। मैंने इसके बारे में ज़्यादा कुछ नहीं सुना है। मैंने (बैठक का) सुझाव नहीं दिया था, लेकिन कुछ लोगों ने दिया है। अगर ऐसा हुआ तो हो जाएगा। मैं सम्मानपूर्वक व्यवहार करूँगा। मैं यह कहूँगा कि मैं उनका पसंदीदा व्यक्ति नहीं हूँ, लेकिन फिर भी, वे शायद एक पेशेवर हैं। दरअसल, कुछ हलकों में उनकी बहुत अच्छी प्रतिष्ठा है।इसे भी पढ़ें: &#039;भारत कभी किसी विदेशी ताकत के आदेश नहीं मानता&#039;, पीएम मोदी पर दबाव बनाना बेकार, ट्रंप को पुतिन का कड़ा जवाबअमेरिका-ईरान युद्ध में क्या हो रहा है?ट्रंप ने शुक्रवार को एक बार फिर तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को कम करके आंका, जिसके चलते 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से पेट्रोल की कीमतें बढ़ गई हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि लोगों को लग रहा था कि हालात और भी बदतर होंगे। आज मैंने 96 डॉलर प्रति बैरल देखा, लोगों को लग रहा था कि यह 300 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएगा। अराघची ने शुक्रवार को कहा कि बातचीत में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है, हालांकि दोनों पक्ष मध्यस्थों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान जारी रखे हुए हैं। इस बीच, ब्लूमबर्ग द्वारा संकलित जहाज-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, गुरुवार को प्रत्येक दिशा में तीन-तीन जहाजों के गुजरने के बाद, शुक्रवार की सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य से कोई वाणिज्यिक आवागमन नहीं देखा गया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:21 +0530</pubDate>
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<title>Britain में छात्र Henry Novak की हत्या पर सियासी भूचाल, JD Vance के बयान पर भड़का UK</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने 18 वर्षीय छात्र की हत्या को सामूहिक प्रवासन के परिणामों से जोड़कर ब्रिटेन के साथ विवाद खड़ा कर दिया है, जिसके चलते ब्रिटेन सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। हाल के दिनों में इस मामले ने काफी ध्यान आकर्षित किया है, खासकर आप्रवासन विरोधी कार्यकर्ताओं और दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों के बीच। वेंस ने एक्स पर लिखा कि हेनरी नोवाक की मृत्यु उसी तरह हुई जैसे एक सभ्यता का अंत होता है: परित्यक्त, उन अधिकारियों द्वारा हथकड़ी पहनाई गई जिन्होंने न तो उस पर भरोसा किया और न ही उसकी परवाह की, और उस पर ऐसे घृणास्पद अपराधों का आरोप लगाया गया जो उसने नहीं किए थे। उन्होंने आगे कहा कि उनकी हत्या जितनी दुखद है, उतनी ही आक्रोशजनक भी है।इसे भी पढ़ें: US-Iran Nuclear Deal पर फिर लगा ब्रेक, तेहरान बोला- अपने हितों से समझौता नहीं करेंगे।अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने आगे तर्क दिया कि इस मामले से जुड़े हालात व्यापक सामाजिक विफलताओं को दर्शाते हैं और उन्होंने इसके जवाब में &quot;न्यायपूर्ण आक्रोश&quot; का आह्वान किया। 23 वर्षीय डिगवा को इस सप्ताह हत्या का दोषी ठहराया गया और उसे कम से कम 21 वर्ष की कैद के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। हमले के बाद, डिगवा ने पुलिस को झूठा बताया कि उसके साथ नस्लीय दुर्व्यवहार हुआ था और वह इस घटना का शिकार था। अधिकारियों ने शुरू में घायल नोवाक को संदिग्ध मानकर उसका इलाज किया, लेकिन बाद में पता चला कि उसे जानलेवा चाकू का घाव लगा था और उन्होंने उसकी जान बचाने की कोशिश की। दिगवा ने हमले में आठ इंच के सिख खंजर का इस्तेमाल किया था। कुछ समूहों द्वारा इस मामले को नस्ल और प्रवासन के नजरिए से पेश करने के प्रयासों के बावजूद, नोवाक और दिगवा दोनों ब्रिटिश नागरिक थे। वेंस ने फिर भी इस हत्या को आप्रवासन से जोड़ा और लिखा कि हेनरी आज भी जीवित होना चाहिए था, और वह होता अगर यूरोपीय अभिजात वर्ग की पिछली कुछ पीढ़ियों ने आत्म-घृणा की राजनीति और प्रवासियों के बड़े पैमाने पर आक्रमण के खिलाफ अपना रुख बनाए रखा होता, जिनमें से कई पश्चिम और उससे प्यार करने वाले लोगों से नफरत करते हैं। इसे भी पढ़ें: Iran पर भड़के Donald Trump, बोले- हमारी शर्तों पर Deal करो या War के लिए तैयार रहोहेनरी पहले ऐसे व्यक्ति नहीं थे जिन्होंने इतनी बेवजह अपनी जान गंवाई, और मुझे डर है कि वह आखिरी भी नहीं होंगे। उनके इस बयान पर डाउनिंग स्ट्रीट ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए बाहरी ताकतों पर एक बेहद संवेदनशील मामले को लेकर तनाव भड़काने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के प्रवक्ता ने कहा, “हमने देखा है कि लोग हमारे लोकतंत्र में दखलंदाजी करने और हमारी सड़कों पर फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं। प्रवक्ता ने बताया कि हेनरी की मौत के बाद पीड़ित परिवार ने संयम और एकता बनाए रखने की अपील की है। बयान में कहा गया है कि परिवार नहीं चाहता कि इस हत्या का इस्तेमाल “और अधिक फूट, नफरत या तनाव पैदा करने के लिए किया जाए। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:21 +0530</pubDate>
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<title>Strait of Hormuz में सीधी टक्कर! US Navy ने तबाह किए ईरानी ड्रोन, जवाबी हमले में Radar स्टेशन ढेर</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने शुक्रवार को होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर लॉन्च किए गए चार ईरानी ड्रोन को मार गिराया और फिर जवाबी कार्रवाई में इस्लामिक गणराज्य के कुछ तटीय निगरानी रडार स्थलों पर हमला किया, जिससे ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान पर दबाव बढ़ाने के बीच अस्थिर युद्धविराम के लिए खतरा बढ़ गया है। तेहरान द्वारा वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति के महत्वपूर्ण गलियारे पर अपना नियंत्रण स्थापित करने के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी लागू कर दी है। इस नाकाबंदी के कारण ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं और मध्यावधि कांग्रेस चुनावों से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने कहा कि उसने जलडमरूमध्य में स्थित एक द्वीप सहित रडार ठिकानों पर आगे के हमलों से बचाव के लिए हमला किया। यह हमलों की एक श्रृंखला में नवीनतम घटना थी जिसने युद्ध में नाजुक संघर्ष विराम को तनावपूर्ण बना दिया है और इसे बढ़ाने के लिए चल रहे समझौते के प्रयासों को बाधित कर दिया है। इस सप्ताह की शुरुआत में ईरानी ड्रोनों ने कुवैत के मुख्य हवाई अड्डे पर एक यात्री टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचाया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई, दर्जनों घायल हो गए और हवाई अड्डा कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया। इसे भी पढ़ें: रियल वर्ल्ड में जियो...ट्रंप के खामनेई से मिलने की बात पर बोला ईरानअमेरिका-ईरान शांति समझौताहमलों के बाद युद्धविराम टूटने की नई आशंकाओं के बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा कि ईरान के साथ स्थिति काफी अच्छी लग रही है। विस्कॉन्सिन में किसानों के साथ एक कार्यक्रम में ट्रम्प ने कहा, &quot;हम बहुत जल्द ईरान से बाहर निकलेंगे, और यह बहुत ही मजबूत तरीके से होगा, चाहे वह कागजी समझौता हो या कड़ा रुख।&quot; उन्होंने आगे कहा, &quot;कड़ा रुख शायद आसान रास्ता है, लेकिन हम बाहर निकलेंगे, और उर्वरक की कीमतें चार महीने पहले की तरह ही बहुत कम हो जाएंगी। ट्रम्प एक ऐसे संघर्ष में घिरते हुए दिखाई दे रहे हैं जो अब स्थिर स्थिति में आ गया है। अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों ने एक सप्ताह पहले युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत का एक नया दौर शुरू करने के लिए एक अस्थायी समझौता किया था। लेकिन ट्रम्प ने कुछ अज्ञात बदलावों की मांग की है, और ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से समझौते को मंजूरी देने का कोई संकेत नहीं दिया है।इसे भी पढ़ें: &#039;भारत कभी किसी विदेशी ताकत के आदेश नहीं मानता&#039;, पीएम मोदी पर दबाव बनाना बेकार, ट्रंप को पुतिन का कड़ा जवाबजब ट्रंप से पूछा गया कि इसमें इतना समय क्यों लग रहा है, तो उन्होंने एनबीसी के &quot;मीट द प्रेस&quot; कार्यक्रम में कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि &quot;यह उनके लिए बहुत मुश्किल काम है और उन्होंने उनकी &quot;महान स्वतंत्रता&quot; और इस तथ्य का हवाला दिया कि &quot;वे मजबूत हैं, वे गर्वित हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:20 +0530</pubDate>
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<title>इजरायल में Burner Phone का इस्तेमाल, Pentagon को शक&#45; दोस्त ही कर रहा अमेरिकी Officials की जासूसी</title>
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<description><![CDATA[ क्या इज़राइल अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी कर रहा है? ईरान विवाद को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में पेंटागन ने इज़राइली खुफिया गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है और चेतावनी दी है कि वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी कड़ी निगरानी के निशाने पर हो सकते हैं। एनबीसी न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार, दो मौजूदा अमेरिकी अधिकारियों और एक पूर्व अधिकारी ने खुलासा किया है कि पेंटागन की रक्षा खुफिया एजेंसी (डीआईए) ने हाल ही में इज़राइल के खुफिया-विरोधी खतरे के स्तर को &#039;गंभीर&#039; कर दिया है, जो उसका उच्चतम आंतरिक मूल्यांकन स्तर है। एक मौजूदा अधिकारी ने अमेरिकी प्रसारक को बताया कि अमेरिका इजराइल की यात्रा के दौरान पहले से ही अतिरिक्त सावधानी बरतता है, उन्होंने यह भी कहा कि इजरायली खुफिया एजेंसियों को लंबे समय से सूचना के विशेष रूप से आक्रामक संग्राहक के रूप में देखा जाता रहा है।इसे भी पढ़ें: Israel और Lebanon युद्धविराम बढ़ाने पर सहमत, हिजबुल्ला के प्रवेश पर लगेगा बैन, अमेरिका की मध्यस्थता में बनी बातखबरों के मुताबिक, इन सावधानियों में बर्नर फोन, अस्थायी कंप्यूटर और सख्त संचार प्रोटोकॉल का इस्तेमाल शामिल है, खासकर उच्च स्तरीय दौरों के दौरान। पूर्व राजनयिकों, खुफिया अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी अक्सर इजरायल में रहते हुए होटल के कमरों और अन्य संभावित रूप से असुरक्षित स्थानों पर संवेदनशील मामलों पर चर्चा करने से बचते हैं। यह कदम अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान के कुछ वर्गों में बढ़ती चिंता को दर्शाता है कि इजरायल मध्य पूर्व के संघर्षों पर ट्रंप प्रशासन की आंतरिक चर्चाओं के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए आक्रामक रूप से प्रयास कर रहा है। ईरान के साथ युद्ध की भावी दिशा को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच बढ़ते मतभेदों के मद्देनजर हाल के हफ्तों में यह आकलन जारी किया गया था। मामले से परिचित अधिकारियों ने एनबीसी न्यूज को बताया कि डीआईए ने एक आंतरिक नोटिस जारी किया, जिसके साथ सात पृष्ठों का एक आकलन दस्तावेज भी था, जिसमें इजरायल की खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमताओं के बारे में चिंताएं व्यक्त की गई थीं।इसे भी पढ़ें: एक गलती और इजरायल में भीषण तबाही, इस बार फोड़ने को तैयार बैठा ईरान?एक अधिकारी के अनुसार, रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि इज़राइल की मानव जासूसी और तकनीकी खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमता गंभीर स्तर पर है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस दस्तावेज़ में कई ऐसी घटनाओं का विवरण है जिनसे चिंता और बढ़ गई है, हालांकि अधिकारियों ने कहा कि उन्हें किसी ऐसी घटना की जानकारी नहीं है जिसने सीधे तौर पर इस निर्णय को प्रभावित किया हो। इस आकलन का व्यावहारिक प्रभाव सबसे पहले इज़राइल की यात्रा करने वाले या इज़राइली समकक्षों के साथ बातचीत करने वाले अमेरिकी कर्मियों पर पड़ने की संभावना है। वर्तमान और पूर्व अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी अधिकारी अतिरिक्त सुरक्षा सावधानियां बरत सकते हैं, हालांकि दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करना अप्रभावित रहेगा।इसे भी पढ़ें: सिर्फ 60 KM दूर थी दुश्मन की फौज! असली गद्दार तो अजरबैजान निकलासेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ के रक्षा और सुरक्षा विभाग की उपाध्यक्ष एमिली हार्डिंग ने इज़राइल के खुफिया तंत्र को &quot;अत्यधिक आक्रामक&quot; बताया। एनबीसी न्यूज़ ने हार्डिंग के हवाले से कहा कि वे हमारी गतिविधियों में बेहद दिलचस्पी रखते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Jammu and Kashmir हमारा आंतरिक मामला, UN में Pakistan के झूठे नैरेटिव को भारत ने दिखाया आईना</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र में जम्मू और कश्मीर का जिक्र करने के लिए पाकिस्तान पर निशाना साधा और उसे याद दिलाया कि वैश्विक निकाय का हिस्सा होना एक बड़ी जिम्मेदारी है और यह पक्षपातपूर्ण और झूठे आख्यानों को फैलाने का मंच नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथानेनी हरीश ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें पाकिस्तान को जवाब देने के लिए विवश होना पड़ा क्योंकि देश ने &quot;भारत के विशुद्ध रूप से आंतरिक मामले का अनुचित संदर्भ दिया था। हरीश ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा भारत के विशुद्ध आंतरिक मामले, जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश का अनावश्यक उल्लेख करने से मुझे जवाब देने के लिए विवश होना पड़ा है। पाकिस्तान ने अपने विभाजनकारी राजनीतिक हितों के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रतिष्ठित मंचों का दुरुपयोग करने की अपनी विशिष्ट प्रवृत्ति को जारी रखने का निर्णय लिया है। इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश से रक्षा संबंध बना रहा तुर्किये, भारत को दो तरफ से घेरने की रणनीति!सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान की उपस्थिति का दुरुपयोग, जिसमें कई गलत और भ्रामक संदेशों का प्रसार भी शामिल है, इस प्रति-उत्पादक दृष्टिकोण का प्रमाण है। मैं पाकिस्तान को याद दिलाना चाहता हूं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य होना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। यह पक्षपातपूर्ण और झूठे बयान फैलाने का मंच नहीं है। हरीश की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद द्वारा शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में &#039;सुरक्षा परिषद की वार्षिक रिपोर्ट&#039; पर अपने संबोधन के दौरान जम्मू और कश्मीर का मुद्दा उठाने के बाद आई। अपने संबोधन के दौरान भारतीय राजदूत ने यह स्पष्ट किया कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। &quot;पाकिस्तान के खोखले वादों और बयानबाजी से यह मूलभूत वास्तविकता नहीं बदलेगी। संयुक्त राष्ट्र के व्यापक सदस्य देशों के समय को ध्यान में रखते हुए, मैं इस विषय पर और अधिक चर्चा नहीं करूंगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:18 +0530</pubDate>
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<title>भारत आकर ब्रिटेन ने की सबसे बड़ी डील, चौंक गया चीन</title>
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<description><![CDATA[ यूके की फॉरेन सेक्रेटरी येविड कूपर भारत के दौरे पर थी। जहां पर भारत और यूएई के बीच आपसी सहयोग के कई मुद्दों पर सहमति बनी है और कई सारे समझौते हुए हैं और इन सब समझौतों में सबसे बड़ा समझौता जो है वो हुआ है क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर। क्रिटिकल मिनरल्स जो आपकी जेब में रखे स्मार्टफोन से लेकर सरहद पर तैनात सैनिकों की मिसाइलों तक में इस्तेमाल होती है। इसी को लेकर अब भारत और ब्रिटेन ने बड़ा कदम उठाया है जो कि चीन जैसे देश को चुनौती दे सकता है। दरअसल 4 जून 2026 को नई दिल्ली में भारत यूके क्रिटिकल मिनरल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जरवेटरी यानी कि जीएससीओ का औपचारिक आगाज हो गया है।  इस मौके पर भारत के केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी और ब्रिटेन के विदेश सचिव यवेट कूपर मौजूद रहे। इसे भी पढ़ें: Sangar Bari Border से भारत में घुस रहे थे Bangladeshi Infiltrators, BSF ने हाथोंहाथ सिखा दिया करारा सबकआपको बता दें कि ब्रिटेन की फॉरेन सेक्रेटरी भारत दौरे पर आई हुई थी और यह उनका आधिकारिक दौरा था। इस दौरे के दौरान भारत और यूके के बीच कई समझौते हुए हैं। जिनमें ब्रिटेन के फॉरेन सेक्रेटरी के दौरे का मुख्य मकसद इंडिया यूके विज़न 2035 की पहली सालाना समीक्षा करना था। यह एक ऐसा व्यापक रोड मैप है जिसमें जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंदन यात्रा के दौरान इसे बनाया गया था और अब इसी कड़ी में कूपर ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बड़ी बातचीत की है और अलग से उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात भी की है। इस दौरे के दौरान इस फ्रेमवर्क पर चर्चा हुई और पांच मुख्य स्तंभ यानी कि विकास, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, रक्षा सुरक्षा और जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा पर इसके साथ ही शिक्षा पर विशेष रूप से चर्चा की गई है। अब आप यह देखिए कि ब्रिटेन के फॉरेन सेक्रेटरी ने इविट कूपर के भारत दौरे से जो सबसे बड़ी बात निकल कर सामने आ रही है, वह है यूके और भारत के बीच तय हुआ क्रिटिकल मिनरल को लेकर बड़ा समझौता। इसे भी पढ़ें: Delhi-Siliguri अब 6 घंटे में! Ashwini Vaishnaw ने Bullet Train प्रोजेक्ट का किया ऐलानक्रिटिकल मिनरल वो जरूरी खनिज होता है जो कि स्वच्छ ऊर्जा यानी क्लीन एनर्जी के लिए बेहद जरूरी है। इलेक्ट्रिक वाहनों में इसकी बेहद जरूरत देखने को मिलती है। इसके साथ ही एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस सेक्टर में इसकी बड़ी मांग है। लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट जैसे इन खनिजों को क्रिटिकल मिनरल्स कहा जाता है जो कि भविष्य की तकनीक के लिए बिल्कुल जरूरी है। इनके बिना आगे की टेक्नोलॉजी अधूरी है। और अब भारत और ब्रिटेन का ऑब्जरवेटरी बनने का मकसद यही है कि इन खनिजों की सप्लाई चेन सुरक्षित रखी जाए। यानी कल को अगर कोई देश अपनी मनमानी करना चाहता हो तो उसे रोका जा सके और दुनिया के इन संसाधनों के लिए जोखिम ना उठाना पड़े। क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को सही तरीके से बरकरार रखने के लिए भारत और यूके ने समझौता किया है। इसके साथ ही भारत और ब्रिटेन के रिश्ते अब कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप और 2030 रोड मैप पर टिके हुए हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:17 +0530</pubDate>
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<media:keywords>भारत, आकर, ब्रिटेन, ने, की, सबसे, बड़ी, डील, चौंक, गया, चीन</media:keywords>
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<title>जिनपिंग की बड़ी साजिश एक्सपोज! जहां भारत ने तानी ब्रह्मोस, वहीं भूतिया चीज बना रहा था चीन</title>
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<description><![CDATA[ आसमान से गुजरते लड़ाकू विमान, समंदर का सीना चीरते मिसाइलें। ये उस दहशत की हकीकत है जिसे चीन ने अपने पड़ोसियों के लिए रूस का ढर्रा बना दिया है। ड्रैगन की फितरत बन चुकी है। अपने पड़ोसियों को डराना, 24 घंटे युद्ध का माहौल बनाए रखना। जब दुनिया सो रही होती है तब समंदर की लहरों के बीच चुपचाप साजिशों के नए ढांचे खड़े कर देना। कभी ताइवान को घेर कर लाइफ फायर ड्रिल करना तो कभी वियतनाम और फिलीपींस की सीमा में जबरन घुसपैठ। चीन का मकसद साफ है। इतना खौफ पैदा कर दो कि सामने वाला बिना लड़े ही घुटने टेक दे। और अब इसी खौफनाक स्क्रिप्ट का नया चैप्टर साउथ चाइना सी में खुला है। जहां चीन की एक और बहुत बड़ी चोरी रंगे हाथों पकड़ी गई है। सेटेलाइट से ली गई तस्वीरों में चीन की उस करतूत की जो दहशत फैलाने के लिए चोरी छिपे समंदर के सीने पर रच रहा था।इसे भी पढ़ें: भारत आकर ब्रिटेन ने की सबसे बड़ी डील, चौंक गया चीनअमेरिका के मरीन मॉनिटरिंग ग्रुप सिलाइ ने स्कारबोरो शोल की जो ताजा तस्वीरें जारी की उसने ड्रैगन की विस्तारवादी नीति को एक बार फिर एक्सपोज कर दिया। 27, 29 और 30 मई की तस्वीरों में स्कारो शोल के मुहाने पर एक चमकीला तैरता हुआ बैरियर यानी इनफिटेबल बेड़ा साफ देखा जा सकता है। यह कोई ऑप्टिकल भ्रम नहीं बल्कि चीन का लगाया गया एक पक्का ढांचा था ताकि दूसरों का रास्ता रोका जा सके। साल 2012 से ही चीन ने इस इलाके पर अवैध कब्जा कर रखा है। और जब इस बार उसकी तस्वीरें दुनिया के सामने आई और पोल खुली तो हड़बड़ाहट में 1 जून को चीन ने इसे वहां से गायब कर दिया। लेकिन फिलीपींस और अमेरिका अब चीन की इस नई चाल को लेकर पूरी तरह अलर्ट पर हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिर चीन इस छोटे से समंदर के टुकड़े के लिए इतनी गुंडागर्दी क्यों कर रहा है? इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश से रक्षा संबंध बना रहा तुर्किये, भारत को दो तरफ से घेरने की रणनीति!दरअसल साउथ चाइना सी के लिए सुपर पावर बनने का शॉर्टकट है। दुनिया का लगभग 1/3 यानी 33% समुद्री व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है। हर साल करीब 5 ट्रिलियन डॉलर का बिजनेस इसी रूट से होता है। सिर्फ व्यापार ही नहीं इस समंदर के नीचे अरबों बैरल तेल और ट्रिलियन क्यूबिक फिट प्राकृतिक गैस का अटूट भंडार छिपा है। जिस पर चीन अकेले डाका डालना चाहता है। इसके अलावा दुनिया की कुल पकड़ी जाने वाली मछलियों का 10% हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है जो चीन की फूड सिक्योरिटी के लिए बेहद जरूरी है। इस पूरे इलाके पर कब्जा करके चीन अमेरिकी नौसेना को एशिया प्रशांत क्षेत्र में सीधी चुनौती देना चाहता है। अगर चीन अपनी इस विस्तारवादी चाल और दहशत फैलाने के एजेंडे में कामयाब हो जाता है तो एशिया के कई देशों का दम घुट जाएगा। चीन का कथित नाइन डैश लाइन का दावा इन देशों के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन यानी समुद्री सीमा को सीधे तौर पर निगल रहा है। वर्तमान में चीन का सबसे तीखा टकराव फिलीपींस के साथ चल रहा है। जहां चीनी कोस्टगार्ड आए दिन फिलीपींस के जहाजों पर वाटर कैनन और मिलिट्री गेट लेजर का इस्तेमाल कर उन्हें धमकाते हैं। इसे भी पढ़ें: रस्सी में घेरकर दबोचे बांग्लादेशी, सबके हाथों से निकाली गई जानकारी!दक्षिण चीन सागर में अपनी मजबूत सैन्य उपस्थिति और इन अस्थाई ढांचों के जरिए चीन असल में ताइवान की समुद्री घेराबंदी यानी नेवल ब्लॉकेट करने की ताकत जुटा रहा है। अगर चीन ने इस पूरे समंदर पर कंट्रोल कर लिया तो ताइवान की ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह कट जाएगी। ताइवान को बाहरी दुनिया से मिलने वाली मदद और हथियार बंद हो जाएंगे और चीन के लिए ताइवान पर हमला करना या उसे घुटनों पर लाना बेहद आसान हो जाएगा।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:16 +0530</pubDate>
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<title>India&#45;China Tension के बीच Beijing से संदेश, Ambassador Doraiswami ने याद दिलाई 2000 साल की दोस्ती</title>
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<description><![CDATA[ ( चीन में भारतीय राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने कहा है कि दो सहस्राब्दियों से अधिक समय से भाषाओं का पारस्परिक ज्ञानवर्धन और विचारों का आदान-प्रदान दोनों देशों के बीच संबंधों की एक परिभाषित विशेषता रहा है।
 पिछले महीने चीन में भारत के राजदूत के रूप में पदभार संभालने वाले दुरईस्वामी ने शुक्रवार को ‘बीजिंग फॉरेन स्टडीज यूनिवर्सिटी’ (बीएफएसयू) का दौरा किया, जहां उन्होंने व्याख्यान दिया तथा छात्रों और संकाय सदस्यों के साथ बातचीत की।
 चीन में विदेशी भाषाओं के प्रमुख संस्थान ‘बीएफएसयू’ में तमिल, हिंदी, बंगाली, संस्कृत और उर्दू सहित 102 भाषाओं के पाठ्यक्रम हैं। इसने हाल ही में अपने पाठ्यक्रमों की सूची में पंजाबी को भी शामिल किया है।
 ये भाषाएं मुख्य रूप से चीनी छात्रों के साथ-साथ राजनयिकों और अधिकारियों को सिखाई जाती हैं।
 धाराप्रवाह मंदारिन बोलने वाले दुरईस्वामी ने अपने व्याख्यान के दौरान इस बात पर प्रकाश डाला कि का पारस्परिक ज्ञानवर्धन और विचारों का आदान-प्रदान दो सहस्राब्दियों से अधिक समय से भारत-चीन संबंधों की एक परिभाषित विशेषता रहा है।
 बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मौर्य काल से लेकर आधुनिक युग तक के उदाहरणों का हवाला देते हुए, दुरईस्वामी ने बताया कि कैसे दुनिया की दो सबसे पुरानी सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान ने ज्ञान, दर्शन, कलात्मक परंपराओं, प्रौद्योगिकी और नवाचार को साझा करने के माध्यम से दोनों समाजों को समृद्ध किया।’’
 इसमें कहा गया, ‘‘राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि ऐतिहासिक रूप से इस तरह की बातचीत से पारस्परिक लाभ प्राप्त हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:14 +0530</pubDate>
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<title>जिसका पाकिस्तान को डर था, रूस ने भारत के लिए वही कर डाला!</title>
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<description><![CDATA[ भारत के आसमान के इस बॉडीगार्ड ने ऑपरेशन संदूर में पाकिस्तान को धूल चटा दी थी। बॉर्डर पार से पाकिस्तान का एक ड्रोन घुस नहीं पाया था। S400 सुदर्शन चक्र ने मुनीर की ड्रोन वाली साजिश को पूरी तरह नाकाम कर दिया था।  अब इसी एयर डिफेंस सिस्टम का चौथा सेट रूस ने भारत भेज दिया है और पाकिस्तान के पसीने छूट गए हैं। रूस पहले ही S400 के तीन स्क्वाड्रन 2 साल पहले भारत को पहुंचा चुका है। जबकि बाकी दो स्क्वाड्रन रूस और यूक्रेन युद्ध के चलते देर से आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि S400 एयर डिफेंस सिस्टम का पांचवा स्क्वाड्रन अगले कुछ महीनों में भारत पहुंचने की उम्मीद है। डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल यानी डीएसी ने S400 के पांच और स्क्वाडों की खरीद को पहले ही मंजूरी दे दी है। बताया जा रहा है कि चौथे S400 को उत्तरी क्षेत्र में तैनात किया जाना था। लेकिन बदले सुरक्षा हालात के बीच इसकी तैनाती पश्चिमी मोर्चे पर किए जाने की चर्चा है। इसे भी पढ़ें: Jammu and Kashmir हमारा आंतरिक मामला, UN में Pakistan के झूठे नैरेटिव को भारत ने दिखाया आईनारक्षा अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान सीमा से जुड़े कुछ इलाकों में अतिरिक्त एयर डिफेंस कवरेज की जरूरत है। अगर ऐसा होता है तो पश्चिमी क्षेत्र में भारत का हवाई सुरक्षा कवच और मजबूत हो जाएगा। S400 सुदर्शन इतना खास क्यों है? यह भी जान लीजिए। S400 रूस का बनाया गया एक अत्याधुनिक लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है। भारत में इसे सुदर्शन नाम दिया गया है। यह लड़ाकू विमान ड्रोन क्रूज मिसाइल, बैलस्टिक मिसाइल और कुछ स्टिल्थ लक्ष्यों को भी निशाना बना सकता है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी लंबी दूरी और तेज प्रतिक्रिया क्षमता है। यह दुनिया का सबसे आधुनिक और खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस डिफेंस सिस्टम ने 350 किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी से एक पाकिस्तानी विमान को मार गिराया था। इसका मतलब है कि दुश्मन का विमान अपने देश की सीमा के अंदर ही होगा। तभी यह भारत में बैठे-बैठे उसे वहीं ढेर कर सकता है। यह डिफेंस सिस्टम एक साथ दर्जनों दुश्मनों पर नजर रख सकता है। उन पर मिसाइलें दाग सकता है।इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश से रक्षा संबंध बना रहा तुर्किये, भारत को दो तरफ से घेरने की रणनीति! विदेशी एयर डिफेंस के साथ-साथ भारत अपने स्वदेशी प्रोजेक्ट कुशा पर भी तेजी से काम कर रहा है। ताकि वैश्विक स्तर पर इंटरसेप्शन क्षमता को विकसित किया जा सके। इस प्रोजेक्ट के निर्माण और विकास में सोलर इंडस्ट्रीज जैसी रक्षा क्षेत्र की कंपनियां अपना योगदान दे रही है। हमारा मुख्य उद्देश्य भारत की हवाई सुरक्षा को आत्मनिर्भर बनाना और भविष्य के किसी भी खतरे से निपटने के लिए अभैद्य मिसाइल शील्ड तैयार करना है। लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने भी सुरक्षा को पूरी तरह अचूक बनाने के विज़न की बात कही थी। पीएम ने ऐलान किया था कि देश का सुरक्षा चक्र भारत पर दुश्मन के हर हमले को नाकाम करेगा और 10 गुना ज्यादा ताकत से पलटवार करेगा। पीएम के मुताबिक भारत का मॉडर्न एयर डिफेंस सिस्टम इतना मजबूत और अभेद्य होगा कि दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल या कोई भी अत्याधुनिक हथियार इसे भेद नहीं पाएंगे।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:14 +0530</pubDate>
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<title>इजराइल ने UN में अचानक निकाल लिया ड्रोन, पूरी दुनिया में तहलका!</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक में इजराइल ने ऐसा तहलका मचा दिया जैसा पहले कभी नहीं देखा गयै होगा। संयुक्त राष्ट्र में इजराइल के राजदूत डेनी डेनन ने अचानक एक ड्रोन निकाल लिया और उसके बाद कई देशों की ऐसी धज्जियां उड़ाई ऐसे बेनकाब किया जो पहले कभी नहीं हुआ। दरअसल आजकल इजराइल बिना रुके, बिना डरे लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला के इलाकों में सफाई अभियान चला रहा है। लेबनान के मामले में इजराइल किसी की नहीं सुन रहा। यहां तक कि डॉनल्ड ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू को धमकी दी कि लेबनान पर हमले ना करो। उस फोन कॉल के बाद ही नेतन्याहू अपने सैनिकों के पास पहुंच गए और कहा कि लेबनान को जबरदस्त तरीके से ठोको। इसे भी पढ़ें: इजरायल में Burner Phone का इस्तेमाल, Pentagon को शक- दोस्त ही कर रहा अमेरिकी Officials की जासूसीइजराइल का कहना है कि लेबनान से मुझे खतरा है तो मैं उसे क्यों ना मारूं। यह बात सुनते ही कई देशों ने इजराइल की निंदा शुरू कर दी। इतना सुनते ही इजराइल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में ही इन देशों को घेर लिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इजराइल के राजदूत डेनी डेनन ने अचानक एक ड्रोन निकाला और कहा कि हिजबुल्ला के आतंकी हम पर इस नए तरह के छोटे ड्रोन से हमला कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह ड्रोन रेडियो सिग्नल के बजाय पतले फाइबर ऑप्टिकल केबलों का इस्तेमाल करता है। जिसकी वजह से इस ड्रोन को पारंपरिक जैमिंग तरीके से रोकना असंभव है। यह ड्रोंस बेहद ही कम ऊंचाई पर उड़ते हैं। जिससे टक्कर से ठीक पहले उनका पता लगाना अत्यंत कठिन हो जाता है। इतना बोलते ही डेनी डेनन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फ्रांस और स्पेन को रगड़ दिया। फ्रांस और स्पेन वो देश हैं जो लगातार इजराइल की निंदा करते हैं। इसे भी पढ़ें: सिर्फ 60 KM दूर थी दुश्मन की फौज! असली गद्दार तो अजरबैजान निकलाडेनी डेनन ने कहा कि मैं फ्रांस के डिप्लोमेट से पूछना चाहता हूं कि अगर कभी फ्रांस पर स्पेन ने हमला कर दिया तो क्या फ्रांस एक्शन नहीं लेगा? क्या फ्रांस तब तक इंतजार करेगा जब तक ड्रोंस पेरिस के ऊपर से ना गुजरने लगे? क्या आप तब तक उन ड्रोंस की आवाज सुनते रहेंगे जब तक वह फटे ना? मुझे लगता है कि आप भी वही करेंगे जो इजराइल ने किया है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:12 +0530</pubDate>
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<title>जब हमला हुआ खामनेई के साथ थे! वो आखिरी वक्त तक...अरागची ने अब बताई उस रात की पूरी कहानी</title>
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<description><![CDATA[ जब आसमान से मौत बरस रही थी और इमारतें मलबे में तब्दील हो रही थी उस वक्त ईरान के सुप्रीम लीडर के दफ्तर में क्या चल रहा था? अमेरिका और इजराइल के विनाशकारी हमलों के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची बाल-बाल कैसे बचे? 48 घंटों तक सुप्रीम लीडर का कोई अता-पता क्यों नहीं था? लेबनान के एक टीवी चैनल पर ईरान के विदेश मंत्री ने उस खौफनाक रात का जो आंखों देखा हाल सुनाया वो पूरी दुनिया को हैरान कर देने वाला है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अलमयादीन टेलीविजन को दिए इंटरव्यू में एक ऐसा सच बताया जिसने सबको चौंका दिया। अरागची ने बताया कि 28 फरवरी को संघर्ष के शुरुआती घंटों में जब दिग्ब सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामनेई के दफ्तर पर हमला हुआ तो वह खुद उसी इमारत में मौजूद थे। इसे भी पढ़ें: इजरायल में Burner Phone का इस्तेमाल, Pentagon को शक- दोस्त ही कर रहा अमेरिकी Officials की जासूसीअरागची ने उस पल को याद करते हुए कहा जिस दफ्तर पर हमला हुआ मैं उसी समय वहीं था। जब मैं मलबे से बाहर निकल रहा था तो मेरा पहला ख्याल और सबसे बड़ी चिंता हमारे लीडर की सलामती को लेकर थी। हमले के 48 घंटों तक अरागची खुद इसी अनिश्चितता में रही कि आखिर सुप्रीम लीडर किस हाल में है। हमले के बाद सिक्योरिटी गार्ड्स और कमांडरों ने सुप्रीम लीडर को बार-बार बंकर या किसी सुरक्षित जगह पर जाने की मिन्नतें की। लेकिन दिग्वंत खामनेई ने ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया। विदेश मंत्री के मुताबिक खामनेई ने दो टूक शब्दों में कहा, मैं तब तक किसी शेल्टर या सुरक्षित जगह पर नहीं जाऊंगा जब तक ईरान के हर नागरिक के पास सुरक्षित जगह ना हो। मेरे लोगों के साथ जो भी होगा वही मेरे साथ भी होगा। सीधी धमकी और मौत के साए के बीच खामनेई वहीं डटे रहे और कामकाज की देखरेख करते रहे। इस खौफनाक मंजर के अलावा अरागची ने एक बड़ा भू राजनीतिक खुलासा भी किया। उन्होंने बताया कि संघर्ष से पहले ही ईरान ने फारस की खाड़ी पर अपने पड़ोसी देशों को साफ चेतावनी दे दी थी। इसे भी पढ़ें:  इजराइल ने UN में अचानक निकाल लिया ड्रोन, पूरी दुनिया में तहलका!अरागची ने कहा कि अगर ईरान पर हमले के लिए किसी भी पड़ोसी देश के अमेरिकी बेस का इस्तेमाल हुआ तो ईरान उसका विनाशकारी जवाब देगा। उनका कहना था कि क्षेत्रीय सरकारों ने अपनी जमीन के इस्तेमाल का विरोध किया था। लेकिन वाशिंगटन ने उनकी एक ना सुनी और ईरान पर हमले कर दिए। ईरान के विदेश मंत्री का यह सनसनीखेज खुलासा बताता है कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच यह संघर्ष कितना भयानक था और कैसे ईरान का शीर्ष नेतृत्व मौत के मुंह से वापस लौटा है। खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर ईरान की ये चेतावनी क्या मिडिल ईस्ट के एक नए युद्ध की नींव रख रही है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:11 +0530</pubDate>
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<title>नेपाल के विदेश मंत्री Shishir Khanal ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया पर Kalapani&#45;Lipulekh पर चेताया भी</title>
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<description><![CDATA[ भारत के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर आए नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने रविवार को नई दिल्ली में एक बेहद महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि नेपाल, भारत के साथ अपने सीमा विवाद को केवल कूटनीतिक बातचीत के जरिए ही हल करना चाहता है। खनाल ने जोर देकर कहा कि अगर दोनों देश खुले दिल से चर्चा की मेज पर बैठें, तो कोई भी ऐसी चुनौती नहीं है जिसे हल न किया जा सके।नेपाल के शीर्ष राजनयिक ने यह भी साफ किया कि काठमांडू की नई सरकार भारत को किसी संकीर्ण या अति-संवेदनशील नजरिए से नहीं देखती। इसके बजाय, उनका मकसद एक ऐसी साझेदारी को आगे बढ़ाना है जो दोनों देशों की तरक्की और समृद्धि के लिए फायदेमंद साबित हो।कालापानी और लिपुलेख पर जताई चिंतापत्रकारों के एक सवाल का जवाब देते हुए नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा, &quot;कैलाश मानसरोवर यात्रा कई अलग-अलग सीमा रास्तों से होकर गुजरती है, और बहुत से लोग नेपाल के रास्ते यात्रा करते हैं। हमारी चिंता भारत और चीन के बीच कालापानी और लिपुलेख क्षेत्र को लेकर हुए समझौते के रिन्यूअल को लेकर है। हम बहुत लंबे समय से कह रहे हैं कि यह जमीन हमारी है और नेपाल की मर्जी के बिना दोनों देश आपस में ऐसा कोई समझौता नहीं कर सकते। हमने दोनों देशों को डिप्लोमैटिक लेटर भेजकर अपनी यह बात साफ तौर पर कह दी है।&quot;



#WATCH | Delhi: Nepal&#039;s Foreign Minister Shisir Khanal says, &quot;Kailash Mansarovar Yatra happens through very different border points. Many travel through Nepal. Our concerns are with the renewal of the agreement between India and China through the Kalapani and Lipulekh area, where… pic.twitter.com/4OgWcpRGnW— ANI (@ANI) June 7, 2026



इसे भी पढ़ें: JMM की धमकी और CPM के कड़े Letter ने बढ़ाई INDIA गठबंधन की टेंशन, क्या करेगी Congress? एस जयशंकर से मुलाकात के बाद की बातनेपाल के विदेश मंत्री शुक्रवार को भारत पहुंचे थे। शनिवार को उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ कई अहम मुद्दों पर बेहद सकारात्मक बातचीत की। इसके अगले दिन रविवार को उन्होंने मीडिया से बात की।उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब हाल ही में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह द्वारा सीमा विवाद को लेकर दिए गए बयानों की वजह से दोनों देशों के बीच थोड़ी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई थी। इस माहौल के बीच शिशिर खनाल का यह दौरा और बयान दोनों देशों के रिश्तों को एक नई और सकारात्मक दिशा देने वाला माना जा रहा है। इसे भी पढ़ें: Malviya Nagar Fire: शेफ की एक गलती बनी 21 लोगों का काल, Main Power Cut होते ही कमरे बने &#039;मौत का चैंबर&#039;भारत की तरक्की के कायल हुए खनालखनाल ने कहा, &quot;हम भारत की तरफ बिल्कुल साफ नजर और पारदर्शी एजेंडे के साथ देख रहे हैं, और हमारा इकलौता एजेंडा नेपाल का आर्थिक विकास है। किसी भी मुद्दे पर उग्र-राष्ट्रवाद की बयानबाजी करने के बजाय, हम एक शांतिपूर्ण और डेटा-आधारित रास्ता अपना रहे हैं।&quot;इसके साथ ही नेपाल के विदेश मंत्री ने भारत की ग्लोबल प्रोग्रेस और आर्थिक विकास की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि आज का भारत दुनिया के मंच पर एक हाई-टेक और आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरा है। नेपाल भारत की इस विकास यात्रा और आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक उभरता हुआ भारत और आगे बढ़ने की चाह रखने वाला नेपाल मिलकर दोनों देशों के भविष्य को और बेहतर बनाएंगे। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Ohio Festival में गोलियों की तड़तड़ाहट से जश्न बना मातम, Gun Violence में 12 लोग बुरी तरह घायल</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में ओहायो के टोलेडो शहर से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां चल रहे एक कम्युनिटी फेस्टिवल के पास अचानक हुई गोलीबारी में कम से कम 12 लोग घायल हो गए हैं। पुलिस ने बताया कि इस घटना के बाद वहां मौजूद भीड़ में भगदड़ और अफरा-तफरी मच गई। फिलहाल पुलिस हमलावरों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।टोलेडो के डिप्टी पुलिस चीफ जो हेफरनन ने बताया कि घायलों में से दो लोगों की हालत काफी गंभीर बनी हुई है। शुरुआती जांच में ऐसा लग रहा है कि कम से कम दो लोग हथियार चला रहे थे और वे दोनों संभवतः एक-दूसरे पर ही गोलियां बरसा रहे थे।गवर्नर ने जताई गहरी चिंताटोलेडो पुलिस विभाग के अनुसार, यह घटना &#039;ओल्ड वेस्ट एंड फेस्टिवल&#039; के पास हुई। यह शहर के एक ऐतिहासिक इलाके में हर साल होने वाला एक बड़ा प्रोग्राम है, जिसमें लाइव म्यूजिक और होम टूर जैसे कई आयोजन होते हैं।इस घटना पर ओहायो के गवर्नर माइक डेवाइन ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने अपने बयान में कहा, &quot;आज रात टोलेडो की स्थिति को लेकर मैं बहुत चिंतित हूं। गर्मियों के ये त्योहार परिवारों के लिए सुरक्षित जगह होने चाहिए, जहां लोग बिना किसी डर के एंजॉय कर सकें, न कि हिंसा का शिकार हों।&quot; सोशल मीडिया पर भी इस घटना के कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें लोग गोलियों की आवाज सुनकर जान बचाकर भागते दिख रहे हैं। इसे भी पढ़ें:  जब हमला हुआ खामनेई के साथ थे! वो आखिरी वक्त तक...अरागची ने अब बताई उस रात की पूरी कहानीअब तक साफ नहीं हुई गोलीबारी की वजहपुलिस ने अभी तक गोलीबारी की वजहों का खुलासा नहीं किया है। कई घायलों को इलाज के लिए पास के मेडिकल सेंटर्स में भर्ती कराया गया है। घटना के वक्त वहां मौजूद केविन बेरी नाम के एक शख्स ने बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ पार्क में बैठकर लाइव म्यूजिक सुन रहे थे, तभी अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी।चश्मदीदों ने बयां किया आंखों देखा हालकेविन के मुताबिक, आवाज सुनते ही सब लोग जमीन पर लेट गए। जब उन्होंने उठकर देखा, तो उनसे करीब 50 फीट की दूरी पर एक बंदूक जमीन पर गिरी हुई थी। फेस्टिवल की सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। अमेरिकी नौसेना में रह चुके केविन ने मेडिकल ट्रेनिंग ली हुई थी, इसलिए उन्होंने तुरंत आगे बढ़कर पीड़ितों की मदद की। उन्होंने अपनी आंखों से कम से कम पांच लोगों को गोली से जख्मी हालत में पार्क के आसपास बिखरे देखा। इसे भी पढ़ें:  इजराइल ने UN में अचानक निकाल लिया ड्रोन, पूरी दुनिया में तहलका!क्या है &#039;ओल्ड वेस्ट एंड फेस्टिवल&#039;?टोलेडो के ऐतिहासिक इलाके में होने वाला यह दो दिनों का एक बेहद लोकप्रिय उत्सव है। इसमें लाइव म्यूजिक के साथ-साथ खाने-पीने के स्टॉल्स, शॉपिंग और पुराने घरों के टूर शामिल होते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस फेस्टिवल को टोलेडो में गर्मियों के त्योहारी सीजन की शुरुआत माना जाता है, लेकिन इस बार की शुरुआत इस दर्दनाक हादसे के साथ हुई है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:09 +0530</pubDate>
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<title>विदेश दौरों से परहेज करने वाले Xi Jinping अचानक North Korea क्यों जा रहे?</title>
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<description><![CDATA[ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 8 और 9 जून को उत्तर कोरिया के दौरे पर रहने वाले हैं। जिनपिंग के इस दौरे और प्योंगयांग में उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन से उनकी होने वाली मुलाकात पर इस समय पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। ये दोनों नेता पिछले साल ही बीजिंग में मिले थे, जब चीनी सेना ने एक बहुत बड़ी परेड का आयोजन किया था। लेकिन इस बार खास बात यह है कि खुद शी जिनपिंग उत्तर कोरिया जा रहे हैं, जबकि पिछले कुछ सालों में उन्होंने अपने विदेशी दौरे बहुत कम कर दिए हैं। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जैसे बड़े नेता खुद उनसे मिलने बीजिंग आए थे, लेकिन 2019 के बाद यह पहली बार है जब चीनी राष्ट्रपति खुद प्योंगयांग जा रहे हैं।क्यों बेहद खास है जिनपिंग का यह दौरा?&#039;अल जजीरा&#039; की एक रिपोर्ट के मुताबिक, क्राइसिस ग्रुप के सीनियर एनालिस्ट विलियम यांग का कहना है कि जिनपिंग अब ज्यादा विदेश यात्राएं नहीं करते हैं। आज के समय में यह एक ट्रेंड बन गया है कि दुनिया भर के बड़े नेता खुद उनसे मिलने बीजिंग आते हैं। ऐसे में शी जिनपिंग का खुद चलकर उत्तर कोरिया जाना यह दिखाता है कि चीन इस यात्रा को कितनी ज्यादा अहमियत दे रहा है। आंकड़ों की मानें तो साल 2013 से 2019 के बीच जिनपिंग हर साल औसतन 14 विदेशी दौरे करते थे, लेकिन 2022 से 2025 के बीच यह संख्या घटकर हर साल सिर्फ छह रह गई है। इसे भी पढ़ें: नेपाल के विदेश मंत्री Shishir Khanal ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया पर Kalapani-Lipulekh पर चेताया भीचीन और उत्तर कोरिया के रिश्तेअगर पारंपरिक रूप से देखें, तो चीन और उत्तर कोरिया के रिश्तों में हमेशा से चीन का पलड़ा भारी रहा है। अमेरिका की एक संस्था &#039;नेशनल कमिटी ऑन नॉर्थ कोरिया&#039; के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर कोरिया अपने बिजनेस और व्यापार के लिए 95 परसेंट तक अकेले चीन पर निर्भर था। लेकिन साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से अब इस पूरे इलाके के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Ohio Festival में गोलियों की तड़तड़ाहट से जश्न बना मातम, Gun Violence में 12 लोग बुरी तरह घायलरूस के करीब आ रहा है उत्तर कोरियायूक्रेन युद्ध के दौरान उत्तर कोरिया ने रूस की खुलकर मदद की है। उसने रूस को बड़े पैमाने पर खतरनाक हथियार, तोपें और अपने सैनिक तक उपलब्ध कराए हैं, जिससे रूस को इस युद्ध में काफी मदद मिली है। साल 2023 के बाद से मॉस्को ने सैनिकों की तैनाती, तोपखाने, गोले और बैलिस्टिक मिसाइलें खरीदने के बदले उत्तर कोरिया को करीब 14.4 अरब डॉलर का भारी-भरकम भुगतान किया है। यही वजह है कि अब इस क्षेत्र की राजनीति में नए बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:08 +0530</pubDate>
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<title>US में Hyderabad के अंशुल को सिर में मारी 3 गोलियां, परिवार ने MEA से लगाई शव लाने की गुहार</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। हैदराबाद के रहने वाले एक 28 वर्षीय युवक की अमेरिका के फिलाडेल्फिया में पिज्जा डिलीवरी करने के दौरान कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई है। यह दुखद घटना 5 जून को हुई, जिसकी जानकारी युवक के परिजनों ने दी है। मृतक का परिवार हैदराबाद के पास गुंडलापोचमपल्ली इलाके में रहता है।इस घटना पर न्यूयॉर्क में मौजूद भारतीय वाणिज्य दूतावास ने गहरा दुख जताया है। दूतावास ने शनिवार देर रात &#039;एक्स&#039; पर पोस्ट कर कहा, &quot;फिलाडेल्फिया में भारतीय नागरिक अंशुल कुंचा की अचानक हुई मौत से हमें बेहद दुख हुआ है। इस मुश्किल घड़ी में हमारी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं। हम परिवार के लगातार संपर्क में हैं और उन्हें हर संभव मदद दे रहे हैं।&quot; इसे भी पढ़ें: विदेश दौरों से परहेज करने वाले Xi Jinping अचानक North Korea क्यों जा रहे?पार्ट-टाइम काम के दौरान जाल में फंसायामृतक अंशुल की बहन तन्वी ने रोते हुए मीडिया को बताया कि उनके भाई उत्तरी फिलाडेल्फिया की एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते थे। वीकेंड पर कुछ अतिरिक्त कमाई के लिए वह पिज्जा डिलीवरी का पार्ट-टाइम काम भी करते थे।तन्वी ने बताया, &quot;हमें जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक अंशुल के सिर में तीन गोलियां मारी गईं और उन्हें सड़क पर तड़पने के लिए छोड़ दिया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि उनके पास से कोई लूटपाट नहीं की गई। अंशुल को पिज्जा पहुंचाने के लिए एक बिल्कुल सुनसान इलाके में भेजा गया था, जो कि एक सोची-समझी साजिश थी। उन्हें जानबूझकर मारने के लिए ही वहां बुलाया गया था। मुझे नहीं पता कि कातिलों को इससे क्या मिला, लेकिन उन्होंने हमारा भाई हमसे हमेशा के लिए छीन लिया।&quot;विदेश मंत्रालय से शव भारत लाने की गुहारअंशुल की बहन तन्वी ने इस मामले में अमेरिकी प्रशासन से सख्त न्याय की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने भारत के विदेश मंत्रालय से भावुक अपील करते हुए कहा कि उनके भाई के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने का इंतजाम किया जाए। तन्वी ने कहा, &quot;हमें बताया गया है कि सोमवार को शव सौंप दिया जाएगा, बस हम यही चाहते हैं कि वह जल्द घर आ जाए। अमेरिकी मीडिया की खबरों की मानें तो दो बंदूकधारी काले रंग का नकाब पहने और पीठ पर बैग लटकाए हुए दिखे थे, जिन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया।&quot; इसे भी पढ़ें: नेपाल के विदेश मंत्री Shishir Khanal ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया पर Kalapani-Lipulekh पर चेताया भीचार साल पहले पढ़ाई के लिए गए थे अमेरिकापारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, अंशुल करीब चार साल पहले अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए अमेरिका गए थे। वहां पढ़ाई खत्म होने के बाद वह नौकरी कर रहे थे। तन्वी ने एक और चौंकाने वाली बात बताई कि इससे पहले भी अमेरिका में कुछ बदमाशों ने अंशुल को निशाना बनाया था और उनसे सोने की चेन, फोन और कैश लूट लिया था। इस घटना के बाद से पूरे गुंडलापोचमपल्ली इलाके में शोक की लहर है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>America में फिर भारतीय निशाने पर, Philadelphia में हैदराबाद के Anshul की गोली मारकर हत्या।</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका से एक दुखद खबर सामने आई है, जहां भारत के रहने वाले एक युवा की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। मृतक की पहचान 28 वर्षीय अंशुल कुंचा के रूप में हुई है, जो मूल रूप से हैदराबाद के रहने वाले थे। इस घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है और परिजन लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।मौजूद जानकारी के अनुसार अंशुल कुंचा अमेरिका के फिलाडेल्फिया शहर में कार्यरत थे। वह एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी करते थे और सप्ताहांत में अतिरिक्त आय के लिए भोजन वितरण का कार्य भी करते थे। घटना के समय वह एक ऑर्डर पहुंचाने गए थे, जिसके बाद उन पर हमला कर दिया गया।परिवार का आरोप है कि अंशुल को जानबूझकर एक सुनसान स्थान पर बुलाया गया था। उनकी बहन तन्वी कुंचा ने दावा किया है कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं बल्कि पहले से रची गई साजिश थी। उनके अनुसार अंशुल को एक ऐसे इलाके में भोजन पहुंचाने के लिए कहा गया, जहां कोई गतिविधि नहीं थी और बाद में उन पर गोलियां चला दी गई।तन्वी ने कहा है कि परिवार को जानकारी मिली कि अंशुल के सिर में कई गोलियां मारी गई थीं और उन्हें सड़क पर छोड़ दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि अंशुल के पास मौजूद कोई सामान नहीं छीना गया था। यही वजह है कि परिवार इस घटना को लूटपाट से जुड़ा मामला नहीं मान रहा है।गौरतलब है कि परिवार के अनुसार अंशुल ने हमले से कुछ समय पहले ही एक अन्य ऑर्डर सफलतापूर्वक पूरा किया था। इसके बाद वह अगले स्थान पर पहुंचे, जहां उन पर हमला हुआ है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमलावर कितने थे और उनका उद्देश्य क्या था।मौजूद जानकारी के अनुसार अमेरिकी जांच एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं। स्थानीय मीडिया की कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि घटना में दो हमलावर शामिल हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि दोनों संदिग्ध काले रंग के मुखौटे और बैग पहने हुए थे। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम पुष्टि नहीं की है।बता दें कि न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। वाणिज्य दूतावास ने एक आधिकारिक संदेश में कहा है कि अंशुल कुंचा के असामयिक निधन से वह बेहद दुखी हैं और इस कठिन समय में उनकी संवेदनाएं परिवार के साथ हैं। दूतावास ने यह भी बताया है कि वह लगातार परिवार के संपर्क में है और हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।इस बीच तन्वी कुंचा ने भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से अपने भाई का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाने में मदद की अपील की है। उन्होंने कहा है कि परिवार को जानकारी दी गई है कि पार्थिव शरीर सोमवार को सौंपा जा सकता है। परिवार की सबसे बड़ी इच्छा है कि अंशुल को अंतिम बार घर लाया जाए और मामले में दोषियों को सजा मिले।गौरतलब है कि हाल के वर्षों में विदेशों में रहने वाले भारतीयों से जुड़ी कई दुखद घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें सुरक्षा और प्रवासी भारतीयों की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है। अंशुल कुंचा की मौत ने एक बार फिर ऐसे सवालों को चर्चा में ला दिया है। फिलहाल परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:06 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान: युद्ध और व्यापक विनाश के बीच वित्तीय सहायता अपील</title>
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<description><![CDATA[ लेबनान में संयुक्त राष्ट्र की मानवीय एजेंसियों ने, संकट से प्रभावित 14 लाख लोगों तक मदद पहुँचाने के उद्देश्य से, 33 करोड़ 15 लाख डॉलर की अतिरिक्त सहायता राशि की अपील की है. इसराइली सेना और हिज़बुल्लाह लड़ाकों के बीच घातक हिंसा भड़कने के 3 महीने बाद भी देश में मानवीय ज़रूरतें लगातार बढ़ रही हैं. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:50:26 +0530</pubDate>
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<title>India&#45;US Trade Deal | भारत&#45;अमेरिका व्यापार समझौता होगा? पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती से सुलझेगी टैरिफ की उलझन!</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और भारत के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव के बीच एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अपने मजबूत व्यक्तिगत संबंधों का हवाला देते हुए भरोसा जताया है कि दोनों देश जल्द ही एक बड़े व्यापार समझौते पर आम सहमति बना लेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने कार्यालय &#039;ओवल ऑफिस&#039; में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, &quot;हम समझौते तक पहुंच जाएंगे क्योंकि मैं प्रधानमंत्री मोदी को बहुत पसंद करता हूं। वह मेरे अच्छे मित्र हैं। हमारे संबंध बेहद शानदार हैं और हम एक बेहतरीन समझौता करने जा रहे हैं।&quot; दोनों देशों के बीच जारी व्यापार वार्ताओं से जुड़े एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि भारत ने वर्षों तक अमेरिकी नीतियों का फायदा उठाया और अमेरिकी कंपनियों पर भारी शुल्क (टैरिफ) लगाया। ट्रंप ने कहा, ‘‘उन्होंने हमारी कंपनियों पर बहुत अधिक शुल्क लगाया, जबकि हमने उन पर कुछ भी शुल्क नहीं लगाया।’’
 इस सप्ताह की शुरुआत में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत गया था और दोनों देशों के बीच अंतरिम द्विपक्षीय समझौते पर चार दिनों तक चली वार्ता बृहस्पतिवार को समाप्त हुई।
 भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि ये व्यापार वार्ताएं सहयोग और व्यावहारिकता की भावना से हुईं तथा दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने वाले पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते को अंतिम रूप देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
 ट्रंप ने हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिल का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ऊंचे आयात शुल्क के कारण इस प्रतिष्ठित अमेरिकी कंपनी के लिए भारत में अपनी मोटरसाइकिलें बेचना मुश्किल हो गया था।
 उन्होंने कहा, ‘‘पहले वे हार्ले-डेविडसन को अपनी मोटरसाइकिलें बेचने नहीं देते थे। उस पर 200 प्रतिशत शुल्क लगाया गया था, जिससे हार्ले-डेविडसन का कारोबार बाधित हो गया। आखिरकार कंपनी को भारत जाकर अपने संयंत्र स्थापित करने पड़े। यह दुर्भाग्यपूर्ण था, लेकिन ऐसा हुआ। यह मेरे कार्यकाल से पहले की बात है।’’
 ट्रंप ने इसकी तुलना अमेरिकी शुल्क नीति से करते हुए कहा कि भारतीय मोटरसाइकिल ब्रांड्स को अमेरिकी बाजार में ऐसी कोई बाधा नहीं झेलनी पड़ी।
 अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘वे यहां भी मोटरसाइकिलें बेचते थे। जानते हैं हमने उन पर कितना शुल्क लगाया? कुछ भी नहीं। अब स्थिति बिल्कुल उलट है। हम भारत के साथ व्यापार से काफी पैसा कमा रहे हैं।’’इसे भी पढ़ें: Titan और BlueStone का 2030 Vision, दोगुना Revenue के ऐलान से शेयर बाजार में आई बहार
 ट्रंप ने सात फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी के साथ फोन पर हुई वार्ता का भी जिक्र किया। उस बातचीत के बाद भारत और अमेरिका ने संयुक्त बयान जारी कर द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) या अंतरिम व्यापार समझौते के पहले चरण की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया था।
 उस रूपरेखा के अनुसार अमेरिका ने भारत पर लगाए गए शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई थी। रूस से तेल खरीदने के कारण भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क को भी हटाने पर सहमति बनी थी और शेष 25 प्रतिशत शुल्क को समझौते के तहत घटाकर 18 प्रतिशत किया जाना था।इसे भी पढ़ें: मानसून की दस्तक: Kerala में हुई Entry, पर Normal से कम बारिश के Alert ने बढ़ाई टेंशन 
 हालांकि, 20 फरवरी को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक शक्ति अधिनियम (आईईईपीए) के तहत ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक पारस्परिक शुल्क के खिलाफ फैसला सुनाया।
 इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की। उच्चतम न्यायालय के फैसले और उसके बाद हुए घटनाक्रमों के मद्देनजर भारत और अमेरिका व्यापार समझौते पर फिर से बातचीत कर रहे हैं। Stay updated with International
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:52:12 +0530</pubDate>
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<title>Su&#45;57 Fighter Jet | पुतिन ने भारत को दिया पांचवीं पीढ़ी की तकनीक और सोर्स कोड का ऑफर, जानें क्यों FGFA से पीछे हटा था भारत</title>
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<description><![CDATA[ भारतीय वायु सेना (IAF) जब अपनी युद्धक क्षमता को मजबूत करने के लिए पांचवीं पीढ़ी के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की तलाश कर रही है, ठीक उसी समय रूस ने एक बड़ा दांव खेला है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को सेंट पीटर्सबर्ग में वैश्विक समाचार एजेंसियों से बातचीत के दौरान कहा कि मॉस्को अपने सबसे आधुनिक पांचवीं पीढ़ी के मल्टी-रोल लड़ाकू विमान सुखोई Su-57 (Sukhoi Su-57) प्रोग्राम पर नई दिल्ली के साथ मिलकर काम करने को पूरी तरह तैयार है। राष्ट्रपति पुतिन ने Su-57 की तारीफ करते हुए कहा, &quot;यह अभी दुनिया का सबसे बेहतरीन विमान है। हमने अपने भारतीय मित्रों के सामने जो प्रस्ताव रखे थे, हम उस पांचवीं पीढ़ी की तकनीक पर साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं। यह विमान हमारा संयुक्त प्रोजेक्ट हो सकता था। भले ही हमने इसे अकेले विकसित किया है, लेकिन अब भारत के साथ काम करने में हमें कोई समस्या या सीमा नहीं है। यही बात एयर डिफेंस सिस्टम पर भी लागू होती है।&quot;इसे भी पढ़ें: World Environment Day | पीएम मोदी ने गिनाईं भारत की उपलब्धियां, हरित क्षेत्र और वन्यजीवों की आबादी में हुआ रिकॉर्ड इजाफाभारत FGFA से क्यों पीछे हट गया था?भारत 2018 में रूस के साथ पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (FGFA) प्रोजेक्ट से पीछे हट गया था, क्योंकि भारतीय वायु सेना (IAF) ने पाया कि विमान उसकी ज़रूरतों को पूरा नहीं करता है। खबरों के अनुसार, भारतीय अधिकारियों का मानना ​​था कि विमान में स्टील्थ लड़ाकू विमान की खूबियां नहीं थीं, और वे इसकी स्टील्थ खूबियों, एवियोनिक्स और कई अन्य विशेषताओं से संतुष्ट नहीं थे।इसे भी पढ़ें: सूरत और दमन को बड़ी सौगात! प्रधानमंत्री मोदी करेंगे ₹22,000 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यासलेकिन हाल ही में, भारत इस विमान को फिर से खरीदने पर विचार कर रहा है और कई अपुष्ट रिपोर्टों में दावा किया गया है कि नई दिल्ली 40 से 50 Su-57 विमान खरीदने की सक्रिय रूप से कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि रूस ने बार-बार कहा है कि वह इस प्रोजेक्ट पर काम करने को तैयार है। पिछले संयुक्त-विकास प्रयासों के विपरीत, रूस ने कहा है कि वह भारत के साथ Su-57 का सोर्स कोड भी पूरी तरह से साझा करने को तैयार है।रूस भारत की सभी मांगें मानने को तैयार हैरूसी अधिकारियों ने इस बात पर भी ज़ोर दिया है कि लड़ाकू विमान के संबंध में भारत की सभी मांगें &quot;पूरी तरह से स्वीकार्य&quot; हैं, जिसमें स्वदेशी उत्पादन के लिए तकनीक का पूरा हस्तांतरण भी शामिल है। समाचार एजेंसी ANI की पिछले साल की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी पक्ष इस बात का भी विश्लेषण कर रहा है कि भारत में Su-57 के निर्माण के लिए कितने निवेश की आवश्यकता हो सकती है। ANI के हवाले से सूत्रों ने बताया कि Su-57 के प्रोडक्शन के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है।रूसी डिफेंस कंपनी रोस्टेक (Rostec) के CEO सर्गेई चेमेज़ोव ने ANI को बताया, &quot;भारत और रूस कई सालों से पार्टनर रहे हैं। जब भारत पर प्रतिबंध लगे थे, तब भी हमने उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसे हथियार सप्लाई किए थे।&quot; उन्होंने कहा, &quot;आज भी हम पहले की तरह ही काम कर रहे हैं; भारत को जो भी मिलिट्री इक्विपमेंट चाहिए, हम उसे सप्लाई कर रहे हैं और सहयोग बढ़ाने में अपने आपसी हितों का भी ध्यान रख रहे हैं।&quot; Stay updated with International
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:52:12 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;India Relations | भारत&#45;अमेरिका रणनीतिक साझेदारी मजबूत! राष्ट्रपति ट्रंप का पीएम मोदी को वाशिंगटन आने का निमंत्रण दोनों देशों के बढ़ते रिश्तों का &amp;apos;प्रमाण&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने एक बार फिर भारत के साथ अपने कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों की मजबूती को दोहराया है। अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) ने कहा है कि भारत के साथ अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी बेहद सुदृढ़ बनी हुई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को वाशिंगटन आने का दिया गया व्यक्तिगत निमंत्रण दोनों वैश्विक नेताओं के बीच ‘‘बेहतरीन संबंधों’’ और दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ते प्रगाढ़ रिश्तों का एक प्रत्यक्ष ‘‘प्रमाण’’ है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने ‘न्यूयॉर्क फॉरेन प्रेस सेंटर’ द्वारा आयोजित एक गोलमेज चर्चा के दौरान यह बात कही।
 अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बृहस्पतिवार को कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध हाल में विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान स्पष्ट रूप से देखने को मिले।  उन्होंने कहा, ‘‘भारत के साथ हमारी एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी है... यह उस यात्रा के दौरान पूरी तरह दिखाई दी और वहां कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर चर्चा हुई, जिनमें महत्वपूर्ण खनिज और प्रौद्योगिकी सहयोग शामिल हैं।’’
 पिगॉट ‘न्यूयॉर्क फॉरेन प्रेस सेंटर’ द्वारा चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के साथ आयोजित एक गोलमेज चर्चा के दौरान ‘पीटीआई’ के एक सवाल का जवाब दे रहे थे।
 रुबियो ने 23 से 26 मई के बीच कोलकाता, आगरा, जयपुर और नयी दिल्ली का दौरा किया था तथा विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मेजबानी में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लिया था।
 क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन और मोदी-ट्रंप मुलाकात के संभावित समय को लेकर पूछे गए सवाल पर पिगॉट ने कहा कि इस संबंध में किसी भी घोषणा के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस से संपर्क किया जाना चाहिए।
 हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि रुबियो ने अपनी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से व्यक्तिगत रूप से निमंत्रण दिया था।
 पिगॉट ने कहा, ‘‘यात्रा के दौरान विदेश मंत्री (रुबियो) ने प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से वाशिंगटन आने का निमंत्रण व्यक्तिगत रूप से दिया।’’
 उन्होंने कहा, ‘‘यह राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बेहतरीन संबंधों का प्रमाण है, साथ ही हमारे दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी को भी दर्शाता है।’’
 भारत-अमेरिका संबंधों में क्वाड की भूमिका को ‘‘महत्वपूर्ण’’ बताते हुए पिगॉट ने याद दिलाया कि जनवरी 2025 में पद संभालने के बाद रुबियो ने वाशिंगटन में जिस पहली बैठक की मेजबानी की थी, वह क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक थी।इसे भी पढ़ें: Karnataka कांग्रेस में बड़ा भूचाल! मंत्री Ramalinga Reddy का इस्तीफा, जानें सिद्धारमैया और DK Shivakumar के बीच कैसे बदलेगा सत्ता का समीकरण 
 उन्होंने कहा कि अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान वाला यह समूह अब एक ‘‘कार्योन्मुखी मंच’’ के रूप में विकसित हो रहा है और रुबियो की भारत यात्रा के दौरान भी इससे जुड़े कई ठोस परिणाम सामने आए।
 पिगॉट ने यात्रा के दौरान घोषित पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत बनाने और समुद्री डकैती तथा अन्य अवैध गतिविधियों के खिलाफ समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं।इसे भी पढ़ें: कांग्रेस में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट! राजस्थान, दिल्ली और पंजाब सहित कई राज्यों में संगठन बदलने की तैयारी, Sachin Pilot पर टिकी नजरें
 उन्होंने कहा, ‘‘यह द्विपक्षीय संबंधों का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमने हाल के समय में ऐसे कई कदम देखे हैं जो भारत के साथ हमारी बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दर्शाते हैं, खासकर अंतरराष्ट्रीय अपराधी नेटवर्क और अवैध संगठनों से निपटने के क्षेत्र में।’’
 रुबियो की भारत यात्रा का जिक्र करते हुए पिगॉट ने कहा कि विदेश मंत्री ने इस यात्रा का ‘‘भरपूर आनंद’’ लिया और इससे कई ठोस परिणाम प्राप्त हुए।Stay updated with International
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:52:03 +0530</pubDate>
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<media:keywords>US-India, Relations, भारत-अमेरिका, रणनीतिक, साझेदारी, मजबूत, राष्ट्रपति, ट्रंप, का, पीएम, मोदी, को, वाशिंगटन, आने, का, निमंत्रण, दोनों, देशों, के, बढ़ते, रिश्तों, का, प्रमाण</media:keywords>
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<title>भारत ने हमारा फायदा उठाया...ठोके गए टैरिफ को लेकर चीख पड़े ट्रंप</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान जहां वो भारत के साथ व्यापार को लेकर अपना दुख सुनाते दिख रहे हैं। लेकिन उसके बाद वह कहते हैं कि अब पासा पलट चुका है। ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा कि पहले भारत ने फायदा उठाया लेकिन अब पासा पलट चुका है और अमेरिका भारत के साथ व्यापार में अच्छा पैसा कमा रहा है। इस बयान में ट्रंप हले डेविल्सन जैसी अमेरिकी कंपनियों पर भारत की ओर से लगाए गए 200% की तारीफ पर शिकायत करते दिख रहे हैं। लेकिन इसके लिए वह खुद अमेरिका को दोषी बता रहे हैं और फिर पीएम मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें अपना अच्छा दोस्त बताया और यह भी कहा कि भारत के साथ अच्छी ट्रेड डील करने जा रहे हैं। दरअसल व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप का ये बड़ा बयान सामने आया। जहां पर ट्रंप ने कहा कि कई सालों तक भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर बहुत ज्यादा टेरिफ यानी कि आयात शुल्क लगाया। ट्रंप ने उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय था जब भारत में अमेरिकी कंपनी हर्ली डेविडसन की मोटरसाइकिलों पर 200% तक का टेरिफ लगता था। जिसकी वजह से कंपनी को भारत में ही अपना प्लांट लगाना पड़ा। इसे भी पढ़ें: Donald Trump को बड़ा झटका! अमेरिकी संसद में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव पास, अपनों ने ही बदला पालापहले भारत अमेरिकी सामान पर भारी टैक्स लगाता था। लेकिन जबकि अमेरिका भारत के सामानों पर ज्यादा शुल्क नहीं लगाता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और अमेरिका को भारत के साथ व्यापार में फायदा हो रहा है और जल्द भारत के साथ एक अच्छी ट्रेड डील होने जा रही है। आप पहले खुद देखिए कि डोन्ड ट्रंप ने क्या कुछ कहा है। इंडिया एडवांटेज दिस कंट्री देथिंग दे इन द पास्ट दे वुड ले डेविड सेस दे चार्ज 200% सो डेविड वाल दे व्हिच अनफॉर्चूनेट हैप वा बिफोर मी बट दे चार्ज अमाउंट चार्जिंग देथिंग मनी इंडिया बट आई लाइक आई लाइक प्राइम मिनिस्टर मेक वी हैव गुड रिलेशनशिप आपको बता दें कि इसके साथ ही दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हाल ही में नई दिल्ली में चार दिनों तक व्यापार वार्ता भी हो चुकी है। बताया जा रहा है कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्ष व्यापार समझौता यानी बटरल ट्रेड एग्रीमेंट के पहले चरण की अधिकांश शर्तें पूरी हो चुकी हैं। उस पर दोनों देशों की सहमति बन चुकी है और अब सिर्फ कुछ छोटे-मोटे मुद्दे बचे हैं जिन पर चर्चा बाकी है और इसी बीच ट्रंप का यह बड़ा बयान सामने आना साफ संकेत देता है कि दोनों देश व्यापारिक मतभेद को पीछे छोड़कर एक अच्छे समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसे भी पढ़ें: अपनी चीजें अपने पास रखिए, मैं किसी और को बेच दूंगा...चीन का मिला साथ तो लूला ने ट्रंप को दिया करारा जवाबअगर यह डील पूरी होती है तो इससे भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंध और भी ज्यादा मजबूत हो जाएंगे। निवेश बढ़ेगा और दोनों देशों के कारोबार को और बड़ा फायदा मिल सकता है। कुल मिलाकर बात करें तो एक तरफ ट्रंप भारत की तरफ से लिए जा रहे टेरिफ पर दुखड़ा रो रहे हैं। तो वहीं अब वह कहते हुए दिख रहे हैं कि पासा भी पलट गया है और अब एक अच्छे समझौते की उम्मीद जता रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:52:03 +0530</pubDate>
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<title>जापान ने तोड़ी पाक की बनाई नई मस्जिद? एक्शन से मुस्लिम देशों में हड़कंप</title>
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<description><![CDATA[ जापान ने पाकिस्तान की ऐसी धज्जियां उड़ा दी है जिसके बाद 25 करोड़ पाकिस्तानी इस वक्त अपना सिर पीट रहे हैं। पाकिस्तानी समुदाय द्वारा बनाई गई एक मस्जिद पर जापान ने अब एक ऐसा फैसला सुना दिया है जिसके बाद पाकिस्तान को लोग सिर्फ एक ही सलाह दे रहे हैं। अगर इतनी बेइज्जती हो तो चुल्लू भर पानी में डूब मरना ही सही है। सबसे मजेदार बात तो यह है कि जिस मस्जिद का उद्घाटन पाकिस्तान के राजदूत ने बड़े गर्व के साथ किया था उसी मस्जिद को अब किसी भी वक्त जापान में गिराया जा सकता है। यानी पहले फीता काटा गया। फोटो खिंचवाई गई, खूब ढोंग किया गया, जश्न मनाया गया और बड़ी-बड़ी ढींगे हाकी गई। लेकिन जब जांच हुई तो ऐसा खुलासा सामने आया जिसके बाद अब पूरा पाकिस्तान सफाई देता फिर रहा है। इतना ही नहीं आपको यह भी बता दें कि मामला सामने आते ही पाकिस्तान का दूतावास भी इस मस्जिद से खुद को किनारा करते हुए दिखाई दे रहा है। लेकिन कहानी सिर्फ एक मस्जिद के बनने की या उस पर कारवाही की नहीं है।  इसे भी पढ़ें: जापान में पाकिस्तान शर्मसार! बिना परमिट के बना डाली मस्जिद, जापानी प्रशासन ने लिया सख्त एक्शनबता दें कि जापान में मस्जिद को लेकर विवाद का यह मामला पहला नहीं है। इसके पहले भी मस्जिद निर्माण को लेकर हजारों जापानी नागरिक सड़कों पर उतर चुके हैं और बड़े पैमाने पर इन्होंने विरोध प्रदर्शन भी किया था। दरअसल बता दें कि मामला जापान के सेतामा प्रांत के कावोई शहर का है। यही पाकिस्तानी समुदाय की तरफ से एक यहां पर मस्जिद का निर्माण किया गया था। इसी इलाके में 3 अप्रैल 2026 को इसका उद्घाटन भी बहुत जोर शोर से किया गया और उद्घाटन समारोह में जापान में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद भी शामिल हुए थे। उन्होंने फीता काटा था। उस समय सब कुछ सामान्य दिख रहा था। पाकिस्तान ने बड़े गर्व से इसे दिखाया। लेकिन कुछ ही समय बाद स्थाई प्रशासन की जांच में ऐसा कुछ खुलासा सामने आया जिसने पूरे मामले को विवादों में ला दिया। काबगोई सिटी हॉल ने यह पाया कि जिस जमीन पर यह पाकिस्तानी मस्जिद बनाई गई है वो अर्बन डेवलपमेंट कंट्रोल एरिया के अंतर्गत आती है और यह मस्जिद अवैध है। यानी ऐसा क्षेत्र जहां विशेष सरकारी अनुमति के बिना निर्माण कार्य बिल्कुल भी नहीं किया जा सकता। प्रशासन का यह आरोप है कि निर्माण के लिए जरूरी परमिशन नहीं ली गई थी और सिटी हॉल ने अपने आधिकारिक बयान में यह साफ कहा है कि यह निर्माण नगर नियोजन कानून के तहत आवश्यक अनुमति प्राप्त किए बिना ही ले लिया गया और इसे बना दिया गया। इतना ही नहीं प्रशासन का यह भी कहना है कि संबंधित लोगों को लंबे समय तक नियमों और कानूनी प्रक्रिया के बारे में समझाया गया। लेकिन उसके बावजूद भी नियमों का पालन नहीं किया गया। इस मस्जिद को बनाने के लिए। अब स्थाई स्तर पर इस मस्जिद को गिराने की मांग लगातार उठ रही है और प्रशासन उस मांग की समीक्षा भी कर रहा है। यानी जिस इमारत का उद्घाटन कुछ सप्ताह पहले हुआ था वही अब ध्वस्तकरण के खतरे का सामना कर रही है। लेकिन पाकिस्तान की मुश्किल आपको बता दें कि यहीं खत्म नहीं हुई। जैसे ही यह विवाद बढ़ा जापान से टोक्यो स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने खुद को इस पूरे प्रोजेक्ट से अलग ही कर दिया और यह पाकिस्तान की फितरत है। पाकिस्तानी दूतावास ने बयान जारी करते हुए यह कहा कि जापानी कानूनों का उल्लंघन करने वाली किसी भी परियोजना से उसका कोई भी संबंध नहीं है। साथ ही जापान में रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय से यह अपील भी की गई कि वो धार्मिक स्थलों के निर्माण समेत हर मामले में जापानी कानूनों का पूरी तरह से पालन करें। यानी कि दोहरा चरित्र दूतावास को यह तक सफाई देनी पड़ी कि राजदूत अब्दुल हमीद उद्घाटन समारोह में इसलिए शामिल हुए क्योंकि उन्हें यह बताया गया था कि सभी जरूरी कानूनी मंजूरियां पहले ही ली जा चुकी है।  इसे भी पढ़ें: जापान को कराची समझ बना दी मस्जिद, अब चलेगा बुलडोजर?उद्घाटन के समय जो जानकारी दी गई थी बाद में वो सवालों के घेरे में आ गए। वैसे आपको बता दें कि जापान में मस्जिद को लेकर विवाद का यह मामला पहला नहीं है और नया नहीं था। कुछ समय पहले फूजी सावा शहर में भी एक विशाल मस्जिद के निर्माण को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे। हजारों स्थाई नागरिक उस समय आपको बता दें कि सड़कों पर उतर आए थे क्योंकि प्रस्तावित मस्जिद एक प्राचीन शिंो मंदिर के बेहद करीब बनाई जा रही थी। स्थाई लोगों का यह कहना था कि यह उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को प्रभावित करेगी। खतरे में लाकर रख देगी। यानी जापान में मस्जिद निर्माण का मुद्दा पहले भी बहस और विवाद का कारण बन रहा है। अब कावागोई का यह नया मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है और यह बता दिया है कि जापान में नियम का पालन करना होगा। फिलहाल अंतिम फैसला जापान से आना बाकी है। लेकिन इतना पूरा मामले को देखकर यह तय है कि जिस मस्जिद को पाकिस्तान अपनी उपलब्धि की तरह देख रहा था वही अब उसके लिए अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगीगी का कारण बन गई है। और जापान ने एक बार फिर से यह दिखा दिया है कि उसके यहां किसी की पहचान नहीं। सिर्फ कानून चलता है और जापान के जो रूल्स हैं वो बिल्कुल साफ है कि आपकी जो भी धार्मिक आस्था है उसको ठेस नहीं पहुंचाई जाएगी। लेकिन जो जापान की संस्कृति है जो जापान में जो चलता है और जापान के जो कानून है उनका पालन आपको करना पड़ेगा।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:52:02 +0530</pubDate>
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<title>जिसका पाकिस्तान को डर था, रूस ने भारत के लिए वही किया</title>
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<description><![CDATA[ भारत और रूस की दोस्ती कितनी गहरी और विश्वास से भरी है। इसका इतिहास काफी लंबा है। इस दोस्ती को तोड़ने के लिए न जाने कितनी कोशिशें की गई। दबाव और धमकी वाली राजनीति अपनाई गई। लेकिन फिर भी रूस और भारत की मजबूत दोस्ती में कोई भी दरार नहीं डाल पाया। जब-जब भारत पर कोई भी संकट आया तब-तब रूस भारत के साथ चट्टान की तरह ढाल बनकर खड़ा दिखाई दिया। एक बार फिर जब बॉर्डर पर तनाव जैसी स्थिति बनी हुई है तो रूस ने भारत को ऐसा बाहुबली भेजा है कि जिसने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है। रूस ने जैसे ही ये खतरनाक हथियार भेजा है तो पाकिस्तान में इस बात की चर्चा जमकर हो रही है कि कहीं भारत फिर से कुछ बड़ा करने वाला तो नहीं है। क्योंकि जिस सुदर्शन चक्र को रूस ने भारत भेजा है, वह कुछ महीनों पहले ही पाकिस्तान को धुआधुआ करते हुए भीषण तबाही मचा चुका है। इसे भी पढ़ें: भारत के जिगरी दोस्त पर पहले किया हमला, फिर जारी किया वीडियो, यूक्रेन के एक्शन से हिली दुनियादरअसल भारत के दोस्त रूस ने अपना वादा निभाते हुए चौथा S400 सुदर्शन एयर डिफेंस सिस्टम पहुंचा दिया है। यह सुदर्शन चक्र भारत के एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत करेगा क्योंकि सुदर्शन चक्र ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की नींद उड़ा दी थी। रूस से भेजा गया चौथा S400 एयर डिफेंस सिस्टम भारत पहुंच चुका है। माना जा रहा है कि इसे जल्द ही पाकिस्तान से लगती पश्चिमी सीमा पर तैनात किया जा सकता है। ये सिस्टम भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करेगा। यह वही सिस्टम है जिसने 350 कि.मी. से भी ज्यादा दूरी से पाकिस्तान के विमान को मार गिराया था जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। दरअसल भारत और रूस के बीच 2018 में S400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने का समझौता हुआ था। इस सौदे के तहत भारत को कुल पांच स्क्वाडन मिलने हैं। अब तीन सिस्टम भारत को मिल चुके थे। चौथा सिस्टम भी पहुंच गया है। पांच और अंतिम सिस्टम के इस साल के अंत तक मिलने की उम्मीद है। पाकिस्तान सीमा से जुड़े कुछ इलाकों में अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम कवरेज की जरूरत है। अगर ऐसा होता है तो पश्चिमी क्षेत्र में भारत का हवाई सुरक्षा कवच और मजबूत हो जाएगा। S400 रोज का बनाया गया। इसे भी पढ़ें: दोस्त हो तो Russia जैसा हो, India को सौंपी S-400 की 4th Squadron, आसमान में अभेद्य रक्षा कवच तैयार, दुश्मन मिसाइलें हवा में होंगी तबाहएक आधुनिक लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है। भारत में इसे सुदर्शन नाम दिया गया है। यह लड़ाकू विमान ड्रोन, क्रूज मिसाइल, बैलस्टिक मिसाइल और कुछ स्टेल्थ लक्ष्यों को भी निशाना बना सकता है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी लंबी दूरी और तेज प्रतिक्रिया क्षमता है। S400 के साथ शक्तिशाली रडार लगे होते हैं। यह करीब 600 कि.मी. दूर तक हवा में ही हो रही गतिविधियों का पता लगा सकते हैं। यह सिस्टम एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है। इसके बाद अलग-अलग प्रकार की मिसाइलों के जरिए उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। हवाई हमले की सूरत में एयर डिफेंस सिस्टम कितना जरूरी है? इसका उदाहरण ऑपरेशन सिंदूर से लेकर ईरान की जंग में देखने को मिला है। यही वजह है कि भारत लगातार अपनी हवाई रक्षा को मजबूत करने में लगा है। जहां रूस ने चौथा S400 एयर डिफेंस सिस्टम भारत भेजकर पाकिस्तान जैसे दुश्मनों की नींद उड़ा दी है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:52:02 +0530</pubDate>
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<title>सरेआम मंच पर कांपने लगा भारत का दुश्मन! ये है ताकत</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया में चल रही बड़ी-बड़ी घटनाओं के बीच एक ऐसी जबरदस्त तस्वीर आई है जिस पर शायद ही किसी का ध्यान गया हो। भारत के दुश्मन देश के विदेश मंत्री जो अभी तक  अकड़ में घूम रहे थे, लेकिन अब डर के मारे भारत का नाम लेकर बड़े-बड़े बयान दे रहे हैं। दरअसल यह हैं तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान। हकान फिदान अचानक एक कार्यक्रम में आए और भारत पर बयान देना शुरू कर दिया। इनके चेहरे पर डर और बेचैनी साफ देखी जा रही थी। इन्होंने बयान दिया कि अगर भारत को इस बात से नाराजगी है कि किसी देश के पाकिस्तान से अच्छे संबंध हैं तो ऐसे कई देश हैं तुर्की अकेला नहीं है तो क्या भारत किसी भी देश से अच्छे संबंध नहीं रखेगा। भारत तुर्की के बारे में क्या सोचता है मैं उस पे क्या बोल सकता हूं। मैं तो बस इतना कहूंगा कि द्विपक्षीय स्तर पर भारत के साथ हमें कोई समस्या नहीं है। यह बयान आपको सुनने में साधारण और नॉर्मल रूटीन जैसा लग रहा होगा। लेकिन यहां पर बहुत बड़ा खेल हुआ है।  इसे भी पढ़ें: भारत की मिसाइल से साइप्रस मचाएगा धमाका, तुर्की की मीडिया में मची खलबलीतुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान सवाल कर रहे हैं कि दुनिया के कई देश हैं जिनके पाकिस्तान से अच्छे रिश्ते हैं तो क्या भारत सभी से नाराज हो जाएगा? इसका जवाब यह है कि भले ही दुनिया के कई देशों के पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध होंगे, लेकिन उनमें से कितने देशों ने पाकिस्तान को भारत पर हमला करने के लिए हथियार दिए हैं। तुर्की ने तो भारत पर हमला करने के लिए पाकिस्तान को ड्रोन दिए। वो भी तब जब भारत ने इस एहसान फरामोश देश की उस समय मदद की जब यहां पर भयंकर भूकंप आया था। भारतीय सेना ने यहां पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। हॉस्पिटल बनवाए। लेकिन इसी तुर्की ने पाकिस्तान के साथ मिलकर भारतीय सेना पर हमला किया। वैसे तुर्की के साथ चीन ने भी पाकिस्तान का साथ दिया था। बहरहाल अब सवाल यह है कि हकान फिदान को अचानक यह बयान देने की जरूरत क्या पड़ी? दरअसल तुर्की ने तो पाकिस्तान को ड्रोन दिए थे, लेकिन भारत ने तुर्की के सबसे बड़े दुश्मन और पड़ोसी साइप्रेस को ब्रह्मोस मिसाइल देने का मन बना लिया है। बातचीत फाइनल स्टेज पर पहुंच रही है। भारत ने साइप्रेस के साथ एक बहुत बड़ी डिफेंस डील भी साइन कर ली है। भारत साइप्रेस के अलावा तुर्की के एक और पड़ोसी और दुश्मन ग्रीस को भी ब्रह्मोस मिसाइल बेच सकता है। यानी जरूरत पड़ी तो तुर्की पर दो देश ब्रह्मोस मिसाइल दाग सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Turkey के दुश्मन के घर में शेर की तरह दहाड़ने लगे भारत के खूंखार हथियार, हिले कई देश!भारत ने तो तुर्की को चार तरफ से घेर लिया है। भारत साइप्रेस को हथियार दे रहा है। ग्रीस को हथियार दे रहा है। अर्मेनिया को हथियार दे चुका है और तुर्की का एक और बड़ा दुश्मन इजराइल तो पहले से ही भारत के साथ है। वैसे हकान फिदान ने पूछा था कि भारत क्या उन सभी देशों से नाराज रहेगा? जिनके पाकिस्तान से संबंध हैं तो आप इसे भी गौर से देख लीजिए कि चीन ने भी पाकिस्तान का साथ दिया था। ऐसे में भारत ने चीन के पड़ोसी फिलीपींस और वियतनाम को भी ब्रह्मोस मिसाइल दे दी। अमेरिका ने भी एक तरीके से पाकिस्तान का साथ दिया तो उसके विदेश मंत्री मार्को रूबियो को ना तो कोई लेने पहुंचा और ना कोई छोड़ने पहुंचा। चलिए अब आपको तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान का बयान सुनवाते हैं। इस बयान में उनका डर, उनकी बेचैनी और उनकी छटपटाहट देखी।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:52:01 +0530</pubDate>
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<title>Putin ने 30 साल बाद जगाया रूस का &amp;apos;दैत्य&amp;apos;, अमेरिका के 3 डिस्ट्रायर निगलने में सक्षम</title>
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<description><![CDATA[ समंदर में रूस का वो सुपर पावर  जिसने यूरोप में नाटो से लेकर अमेरिका तक की सेनाओं की नींद उड़ा दी है। समंदर में इसका 30 साल बाद उतरना रूस के दुश्मनों के लिए किसी खौफनाक खबर से कम नहीं। यह ऐसा महादानव है जो अकेले ही किसी भी देश के पूरे नौसैनिक बेड़े को तबाह कर सकता है। समंदर का यह सुल्तान इतना खतरनाक है कि इसके सामने आने के बाद दुश्मन देश के जहाजों को संभलने या भागने के लिए सिर्फ एक सेकंड का वक्त मिलेगा और फिर सब कुछ खाक हो जाएगा। 30 साल बाद रूस का महादानव सी ट्रायल में उतरा। सोवियत संघ के जमाने का यह दैत्य पिछले 30 सालों से अपग्रेड होने के लिए रुका था। लेकिन अगस्त 2025 में इसने पहली बार अपनी खुद की ताकत से समंदर की लहरों को चीरना शुरू किया और अब 2026 में यह अपनी अंतिम परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। इसे भी पढ़ें: जिसका पाकिस्तान को डर था, रूस ने भारत के लिए वही कियाकिरो क्लास क्रूज़र कोई आम युद्धपोत नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा क्लियर पावर्ड कॉम्बैटशिप है। इसका वजन करीब 28,000 टन है। इसके आकार का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि अकेला जहाज अमेरिका के तीन सबसे मॉडर्न अर्ली बर्ग क्लास डिस्ट्रॉय जहाजों से भी बड़ा और भारी है। न्यूक्लियर प्लांट से चलने वाले युद्धपोत का वजन 28,000 टन है। अंदर हथियारों का ऐसा गोदाम है कि कोई दुश्मन इसके करीब आने की सोच भी नहीं सकता। इस जहाज में कुल 176 मिसाइल लॉन्च सेल्स लगाए गए हैं। इनमें से करीब 100 सेल्स में रूस के सबसे खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम S400 का नेवल वर्जन तैनात है। जो जमीन पर मौजूद S400 की तीन पूरी बटालियन के बराबर आसमान से आने वाली हर आफत को रोक सकता है। इसके अलावा बाकी सेल्स में रूस की सबसे घातक ज़रकॉन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें भरी गई हैं। यह मिसाइल साउंड की रफ्तार से नौ गुना तेजी से उड़ती हैं और 1000 किमी दूर बैठे दुश्मन को संभलने का 1 सेकंड का भी मौका नहीं देती। इसे भी पढ़ें: भारत के जिगरी दोस्त पर पहले किया हमला, फिर जारी किया वीडियो, यूक्रेन के एक्शन से हिली दुनियाजहाज को इस तरह अपग्रेड किया गया है कि आज की तारीख में दुनिया का सबसे ताकतवर कॉम्बैट शिप बन चुका है। हालांकि रूस के लिए इस दैत्य को जिंदा करना आसान नहीं था। यूक्रेन के साथ जारी भीषण युद्ध के कारण लगे प्रतिबंधों और भारी बजट संकट की वजह से रूस को इसके जुड़वा जहाज पियोत्र वेलिकी को समय से पहले रिटायर करना पड़ा। क्योंकि दोनों जहाजों को मेंटेन रखना रूस की इकॉनमी पर भारी पड़ रहा था। सोवियत संघ के टूटने के बाद से रूस से कोई नया बड़ा जहाज नहीं बनाया। इसलिए अपनी धाग जमाए रखने के लिए उसने अपनी पूरी ताकत एडमिरल नाखिमो को चमकाने में झोंक दी। दरअसल अमेरिका और नाटो देश लगातार आर्कटिक क्षेत्र में रूस के व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:52:00 +0530</pubDate>
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<title>एक गलती और इजरायल में भीषण तबाही, इस बार फोड़ने को तैयार बैठा ईरान?</title>
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<description><![CDATA[ अगर अब इजरायल ने हिजबुल्लाह को निशाना बनाकर लेबनान पर अटैक किया तो ईरान सीधे इजरायल पर हमला कर देगा। यह धमकी नहीं बल्कि अगली जंग का खुला ऐलान है। दरअसल, यह ऐलान किसी छोटे-मोटे लीडर की तरफ से नहीं बल्कि ईरान के फॉरेन मिनिस्टर सैयद अब्बास अरागची की तरफ से आया है। वो अब्बास अरागची जो पूरी दुनिया में ईरान की नुमाइंदगी करते हैं और ईरान अमेरिका डील के लिए चल रही बातचीत का हिस्सा भी हैं। देखा जाए तो फॉरेन मिनिस्टर सैयद अब्बास अरागची ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह मुजतबा खामनेई की बात को ही दोहरा रहे होंगे और ये इसराइल और अमेरिका के लिए सीधी और अंतिम धमकी है कि अगर अब लेबनान पर अटैक हुआ तो ईरान इसराइल को नहीं छोड़ेगा। ईरान के इरादे भांप कर ही हो सकता है। ट्रंप ने नेतन्याहू को बाकायदा फोन पर फटकार लगाई थी और पागल तक कह दिया था। क्योंकि अमेरिका जानता है कि हिजबुल्ला के लिए ईरान कुछ भी कर गुजरेगा। इसे भी पढ़ें: भारत ने हमारा फायदा उठाया...ठोके गए टैरिफ को लेकर चीख पड़े ट्रंपएक इंटरव्यू में ट्रंप ने यह तक कह दिया है कि इसराइल का वजूद ही अमेरिका की वजह से बचा हुआ है। वह ना होते तो इसराइल का नामोनिशान ही मिट जाता। ऐसे में अब इसराइल पर सीधे हमले की धमकी के मायने को समझा जा सकता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि दरअसल ईरान अब इस मोड़ में आ गया है कि तुम अगर एक थप्पड़ मारोगे तो मैं दो मारूंगा। पिछली बार थोपी गई जंग में उसने भयंकर पलटवार किया था। लेकिन इस बार इजरायल की लेबनान में किसी भी जुर्रत पर सीधा हमला कर सकता है। हाल ही में कुवैत में अमेरिका की पांचवी फ्लट के हेड क्वार्टर और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमला करके ईरान ने अपने इरादे जता दिए हैं। फिलहाल तो प्रेसिडेंट ट्रंप के कहने पर इजरायल ने लेबनान पर हमले रोक दिए हैं। लेकिन ईरान की यह ताजा धमकी बता रही है कि वह किसी भी सूरत में अब इजरायल की किसी भी हरकत को माफ नहीं करेगा। इसे भी पढ़ें: सरेआम मंच पर कांपने लगा भारत का दुश्मन! ये है ताकतगौरतलब है कि ईरान, अमेरिका, इसराइल जंग में सीज फायर के बावजूद इसराइल, साउथ लेबनान पर हमले जारी रखे हुए था। वहीं हिजबुल्ला भी उसे लगातार जवाब दे रहा था। हालांकि पाकिस्तान में हुई सीजफायर टॉक से पहले ही ईरान ने कहा था कि जंगबंदी में लेबनान पर इजरायल के हमले भी बंद होने चाहिए। बावजूद इसके इजरायल नहीं मान रहा था। और अब ईरान का नया ऐलान कि लेबनान पर एक भी हमला इसराइल पर सीधे अटैक की वजह बनेगा। देखना होगा कि इजरायल और हिजबुल्ला के बीच कब तक यह जंगबंदी रहती है और अगर यह जरा भी टूटी तो इजरायल पर ईरान का कहर बरपेगा और अमेरिका और अरब देश इसे अच्छी तरह से समझ रहे हैं। मिडिल ईस्ट में अमेरिका हिमायती अरब देशों जिन्होंने अमेरिका की खातिर ईरान से पंगा लिया अपनी इज्जत वकार सब दांव पर लगा दिया। अब उन्हें अमेरिका ने अधर में छोड़ दिया है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:51:59 +0530</pubDate>
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<title>सीजफायर को लेकर शहबाज शरीफ ने भी की ट्रंप को खुश करने की कोशिश, जताया आभार</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को कहा कि भारत के साथ युद्धविराम में हस्तक्षेप के लिए इस्लामाबाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का सदा आभारी रहेगा।  शरीफ ने ट्रम्प को “शांति का प्रतीक” बताते हुए उनकी प्रशंसा की और दावा किया कि उनके समय पर और निर्णायक हस्तक्षेप” के कारण ही 10 मई, 2025 को युद्धविराम संभव हो पाया। शरीफ ने इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास द्वारा अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित एक स्वागत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के समयोचित और निर्णायक हस्तक्षेप के कारण ही पिछले साल 10 मई को पाकिस्तान और भारत के बीच युद्धविराम संभव हो पाया। इसे भी पढ़ें: सरेआम मंच पर कांपने लगा भारत का दुश्मन! ये है ताकतशरीफ ने आगे कहा कि दक्षिण एशिया में शांति बहाल करने और लाखों लोगों की जान बचाने के लिए हम राष्ट्रपति ट्रंप के सदा आभारी रहेंगे। इस संदर्भ में, उन्हें हमेशा शांति के प्रतीक के रूप में याद किया जाएगा। शरीफ ने वाशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच संबंधों को सच्चा और विशेष संबंध बताया। ट्रंप ने अतीत में कई मौकों पर दावा किया है कि उन्होंने पिछले साल मई में दोनों देशों के बीच हुए संघर्ष के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने में मदद की थी। हालांकि, नई दिल्ली का कहना है कि इस मामले में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं थी और दोनों देशों के बीच सीधे तौर पर समझौता हुआ था। इसे भी पढ़ें: जापान ने तोड़ी पाक की बनाई नई मस्जिद? एक्शन से मुस्लिम देशों में हड़कंपपिछले साल अप्रैल में जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद, भारत ने 7 मई, 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसका निशाना पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकी ठिकाने थे। शुक्रवार को ट्रंप ने भी आठ युद्ध समाप्त करने का दावा किया। उन्होंने कहा कि मैंने आठ युद्ध समाप्त कर दिए हैं, नौवां जल्द ही समाप्त होगा, मुझे उम्मीद है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष भी सुलझ जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:51:58 +0530</pubDate>
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<title>China के फुल कंट्रोल में है पाकिस्तान? पुतिन ने कुछ ऐसा जवाब</title>
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<description><![CDATA[ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को कहा कि मॉस्को भारत और चीन के बीच &quot;नाजुक&quot; संबंधों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद सहित आपसी हित के लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए काम कर रहे हैं। सेंट पीटर्सबर्ग में मीडिया से बातचीत के दौरान पुतिन ने कहा कि रूस के नई दिल्ली और बीजिंग दोनों के साथ मजबूत संबंध हैं और उन्हें इन देशों के द्विपक्षीय मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता। पुतिन ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत और चीन के बीच संबंध नाजुक और बहुआयामी हैं, और इनमें हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। बेशक, हम भारत और चीन दोनों में अपने मित्रों के साथ बातचीत करते हैं। इसे भी पढ़ें: भारत के जिगरी दोस्त पर पहले किया हमला, फिर जारी किया वीडियो, यूक्रेन के एक्शन से हिली दुनियाउन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी दोनों ही सीमा संबंधों सहित आपसी हित के सभी मुद्दों को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। पुतिन की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत और चीन ने 2020 के गलवान घाटी संघर्ष और चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद संबंधों में आए गंभीर तनाव को दूर करने के लिए पिछले एक साल में संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। दोनों देशों के साथ रूस के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए पुतिन ने कहा कि भारत के साथ मॉस्को के संबंध चीन के साथ उसके संबंधों को प्रभावित नहीं करते हैं, ठीक उसी तरह जैसे बीजिंग के साथ उसकी बढ़ती साझेदारी नई दिल्ली के साथ संबंधों को कमजोर नहीं करती है।इसे भी पढ़ें: Putin ने 30 साल बाद जगाया रूस का &#039;दैत्य&#039;, अमेरिका के 3 डिस्ट्रायर निगलने में सक्षमरूस के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि चीन और भारत के साथ हमारे अपने संबंध हैं... रूस और भारत के बीच संबंध चीन को प्रभावित नहीं करते, चीन के साथ हमारे संबंध भारत को प्रभावित नहीं करते। रूसी राष्ट्रपति ने रूस-भारत-चीन ढांचे की उत्पत्ति का भी जिक्र करते हुए कहा, &quot;एक समय मैंने सुझाव दिया था कि भारत और चीन के नेता यहां मिलें, इसी तरह रूस-भारत-चीन ढांचे की स्थापना हुई। पाकिस्तान से जुड़े संबंधों पर पुतिन ने इस सुझाव को खारिज कर दिया कि इस्लामाबाद बीजिंग के नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा नहीं लगता। सबसे पहले तो, पाकिस्तान एक बड़ा देश है, इसके विभिन्न देशों के साथ बहुआयामी संबंध हैं। पुतिन ने आगे कहा कि निश्चित रूप से, पाकिस्तान के लिए चीन गणराज्य के साथ सहयोग को ध्यान में रखना बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन हर कोई चीन के साथ संबंध विकसित कर रहा है। रक्षा सहयोग पर पुतिन ने ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम पर प्रकाश डाला और कहा कि रूस ने पांचवीं पीढ़ी की लड़ाकू विमान प्रौद्योगिकी पर भारत के साथ सहयोग का प्रस्ताव रखा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:51:55 +0530</pubDate>
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<title>आतंकवाद पर रोक के बिना नहीं मिलेगा एक बूंद पानी, सिंधु जल संधि पर MEA का क्लीयर मैसेज</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद के जवाब में भारत ने साफ कर दिया है कि सिंधु जल संधि (IWT) तब तक निलंबित रहेगी, जब तक पड़ोसी देश आतंकवाद को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त नहीं कर देता। &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; की पहली वर्षगांठ पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत के दृढ़ रुख को दोहराते हुए कहा कि देश को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है, क्योंकि आतंकवाद लंबे समय से पाकिस्तान की राज्य नीति का हथियार रहा है। गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को निलंबित करने जैसा कड़ा रणनीतिक कदम उठाया था। विश्व बैंक की मध्यस्थता में 1960 में हुई यह ऐतिहासिक जल-बंटवारा संधि अब पाकिस्तान के आतंकवादी रवैये के कारण पूरी तरह गतिरोध की स्थिति में है।इसे भी पढ़ें: सरेआम मंच पर कांपने लगा भारत का दुश्मन! ये है ताकतविदेश मंत्रालय (MEA) ने दोहराया है कि पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के जवाब में सिंधु जल संधि निलंबित रहेगी। परेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर आयोजित एक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत को सीमा पार से समर्थित आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। सवाल ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ रुख की पुष्टि करते हुए कहा, &quot;दुनिया जानती है कि सीमा पार आतंकवाद लंबे समय से पाकिस्तान की राज्य नीति का एक हथियार रहा है। देश मंत्रालय ने यह भी कहा कि सिंधु जल संधि तब तक लागू रहेगी जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को अपना समर्थन विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त नहीं कर देता। प्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को निलंबित कर दिया था, जिसमें कई नागरिक मारे गए थे और जिसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई राजनयिक और रणनीतिक कदम उठाए गए थे। विश्व बैंक की मध्यस्थता से 1960 में हुई यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे को नियंत्रित करती है। इसे भी पढ़ें: इस बड़े कमरे में बैठ पुतिन ने लिया मोदी का नाम, अचानक सब हैरान!भारत और पाकिस्तान के बीच जल-बंटवारे के समझौते सिंधु जल संधि (IWT) पर 19 सितंबर, 1960 को हस्ताक्षर किए गए थे। सिंधु नदी प्रणाली में तीन पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास और सतलुज और उनकी सहायक नदियाँ) और तीन पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम और चिनाब और उनकी सहायक नदियाँ) शामिल हैं। संधि के अनुसार, भारत सिंधु प्रणाली के कुल जल का लगभग 20% नियंत्रित करता है, जबकि पाकिस्तान को लगभग 80% मिलता रहा था। 23 अप्रैल को विदेश मंत्रालय (एमईए) ने प्रतिक्रिया में कई सख्त उपायों की घोषणा की, जिसमें सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित करना भी शामिल है। दरअसल, 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ल्ड बैंक की मौजूदगी में सिंधु जल संधि हुई थी। इस संधि के तहत पाकिस्तान को 6 बेसिन नदियों में से 3 का पानी मिला। सिंधु, झेलम और चिनाब जबकि भारत को रावी, व्यास और सतलुज का पानी मिला। लेकिन अब जब भारत ने पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने का फैसला किया तो सबसे पहला कदम सिंधु जल संधि को सस्पेंड करना। पाकिस्तान की 80 प्रतिशत खेती और 30 प्रतिशत पावर प्रोजेक्ट सिंधु जल पर टिके हैं। पानी रुकने पर पाकिस्तान की कमर टूट गई।   ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:51:53 +0530</pubDate>
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<title>इस बड़े कमरे में बैठ पुतिन ने लिया मोदी का नाम, अचानक सब हैरान!</title>
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<description><![CDATA[ रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने इस बड़े हॉल में बैठकर भारत और पीएम मोदी को लेकर जो बयान दिया है वो अपने आप में बहुत कुछ कहता है। यह बयान भले ही इस हॉल में दिया गया हो लेकिन इसकी आवाज अब पूरी दुनिया में गूंज रही है। भारत में कांग्रेस पार्टी और विपक्षी दल ये बयान सुनकर बेचैन हो जाएंगे। कुछ घंटों पहले ही राहुल गांधी ने कहा था कि भारत में एक बड़ी आर्थिक सुनामी आने वाली है। अब आप इसे संयोग ही कहिए कि रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने ही राहुल गांधी के दावों को मिट्टी में मिला दिया है।  हॉल में बैठी दुनिया की बड़ी-बड़ी न्यूज़ एजेंसियां जिनमें भारत की पीटीआई भी शामिल थी। इन सभी को जवाब देते हुए पुतिन ने कहा कि यहां आए सभी लोगों को एक बात पता होनी चाहिए। वो बात यह है कि भारत इस वक्त दुनिया की लीडिंग इकॉनमीज में से एक है। इसे भी पढ़ें: China के फुल कंट्रोल में है पाकिस्तान? पुतिन ने कुछ ऐसा जवाबभारत दुनिया में सबसे ज्यादा इकोनॉमिक ग्रोथ रेट दिखा रहा है। यह कोई अचानक से होने वाली बात नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की कड़ी मेहनत का नतीजा है। पुतिन ने आगे कहा कि इस वक्त दुनिया में सिर्फ चार टॉप देश हैं। इनमें चीन, अमेरिका, भारत और रूस शामिल हैं। पुतिन ने कहा कि हम चारों ने सभी यूरोपीय देशों और जापान तक को पीछे छोड़ दिया है। इसके बाद पुतिन ने कहा कि अमेरिका कुछ मामलों में भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। खासतौर पर रूस के मामले में। लेकिन अब सब यह समझ चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। यानी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि पीएम मोदी पर दबाव बनाना दुनिया के लिए खतरनाक हो सकता है। पुतिन ने कहा कि पीएम मोदी पर दबाव डालने का कोई फायदा नहीं होगा। भारत हमारा एक रिलायबल पार्टनर है।  इसे भी पढ़ें: Putin ने 30 साल बाद जगाया रूस का &#039;दैत्य&#039;, अमेरिका के 3 डिस्ट्रायर निगलने में सक्षमभारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इस समय प्रभावशाली आर्थिक वृद्धि दर प्रदर्शित कर रहा है।’’ उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर तक पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि रूस को भारत पर पश्चिमी देशों के उस दबाव का कोई नकारात्मक प्रभाव दिखाई नहीं दिया है, जिसके तहत नयी दिल्ली से रूस के साथ अपने संबंध सीमित करने को कहा जा रहा है। उनका मानना है कि ऐसी रणनीतियां अंततः उल्टा असर डालेंगी। पुतिन ने कहा कि सभी को समझ आ गया है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय संबंधों के लिए हानिकारक है। यह दबाव कहीं से भी आए, इससे फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि हमें इसका कोई नकारात्मक परिणाम नहीं दिखा।’’ रूसी राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कुछ पश्चिमी देशों में भारत-रूस संबंधों को लेकर असहजता बढ़ी है। अमेरिका लगातार भारत से रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने का आग्रह करता रहा है।   ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:51:53 +0530</pubDate>
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<title>Vishwakhabram: Linkedin समेत कई Jobs Website पर China ने फैलाया जासूसी का जाल, Five Eyes Alliance ने दुनिया को किया आगाह</title>
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<description><![CDATA[ पांच आंखों वाले खुफिया गठबंधन जिसे फाइव आईज के नाम से पहचाना जाता है, उसकी ताजा चेतावनी ने दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के इस संयुक्त गठबंधन ने पहली बार इतने तीखे और समन्वित तरीके से दावा किया है कि चीन की सैन्य खुफिया एजेंसियां अब पारंपरिक जासूसी से आगे बढ़कर डिजिटल भर्ती अभियान चला रही हैं। इस अभियान का निशाना वे लोग हैं जिनके पास सैन्य, राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सूचनाओं तक सीधी या परोक्ष पहुंच है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह पूरा खेल पेशेवर नौकरी मंचों और ऑनलाइन भर्ती सेवाओं के जरिये खेला जा रहा है।संयुक्त सुरक्षा बुलेटिन &quot;सेफगार्डिंग ऑवर सीक्रेट्स&quot; के अनुसार चीनी एजेंट अब नौकरी देने वाले सलाहकार, मानव संसाधन विशेषज्ञ, शोध संस्थान प्रतिनिधि और विदेशी नीति विश्लेषक बनकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। लिंक्डइन, इंडीड और अपवर्क जैसे मंचों पर फर्जी नौकरियों के विज्ञापन डाले जा रहे हैं। इन विज्ञापनों में रक्षा विश्लेषक, विदेश नीति सलाहकार और रणनीतिक शोधकर्ता जैसे आकर्षक पद दिखाए जाते हैं ताकि सरकारी कर्मचारियों, सैन्य अधिकारियों, शोधकर्ताओं और पत्रकारों को लुभाया जा सके।इसे भी पढ़ें: China के फुल कंट्रोल में है पाकिस्तान? पुतिन ने कुछ ऐसा जवाबफाइव आईज के गठबंधन का कहना है कि चीन की सैन्य खुफिया सेवाओं का अंतिम लक्ष्य उन संवेदनशील सूचनाओं तक पहुंच बनाना है जो उसे सामरिक और रणनैतिक बढ़त दे सकें। देखा जाये तो यह केवल सैन्य रहस्यों की चोरी भर नहीं है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की व्यापक कोशिश है। यही कारण है कि इस चेतावनी को सामान्य सुरक्षा सलाह नहीं बल्कि डिजिटल युग के सबसे संगठित जासूसी अभियानों में से एक माना जा रहा है।रिपोर्ट के अनुसार भर्ती प्रक्रिया बेहद चालाकी से संचालित की जाती है। पहले उम्मीदवारों के जीवनवृत्त और पेशेवर प्रोफाइल खंगाले जाते हैं। ऐसे लोगों की पहचान की जाती है जिनके पास सरकारी तंत्र, सैन्य अभियानों, विदेश नीति या रणनीतिक संस्थानों से जुड़ी जानकारी हो सकती है। इसके बाद ऑनलाइन साक्षात्कार लिए जाते हैं जिनमें उम्मीदवारों की जानकारी, संपर्क और पहुंच का आकलन किया जाता है। कई मामलों में उनसे परीक्षण रिपोर्ट तैयार करने को कहा जाता है। ये रिपोर्ट चीन की विदेश नीति, रक्षा मामलों या व्यापार रणनीति जैसे विषयों पर मांगी जाती हैं। धीरे धीरे बातचीत सुरक्षित संदेश मंचों पर पहुंच जाती है और फिर संवेदनशील जानकारियां मांगने का दबाव बढ़ाया जाता है।इस पूरे अभियान का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि शुरुआत में साधारण और गैर गोपनीय जानकारी मांगी जाती है। बदले में कुछ सौ डॉलर तक दिए जाते हैं। लेकिन जैसे जैसे व्यक्ति भरोसे में आता है, उससे ज्यादा संवेदनशील सूचनाएं मांगी जाती हैं और भुगतान भी हजारों डॉलर तक पहुंच जाता है। यही वह चरण है जहां एक सामान्य पेशेवर व्यक्ति अनजाने में विदेशी जासूसी तंत्र का हिस्सा बन सकता है।फाइव आईज गठबंधन ने साफ कहा है कि इस जाल में केवल सैन्य अधिकारी ही नहीं बल्कि पत्रकार, शिक्षाविद, शोध संस्थानों के कर्मचारी और यहां तक कि वे लोग भी फंस सकते हैं जिनकी सरकारी आंकड़ों तक सीमित पहुंच हो। पश्चिमी एजेंसियों का मानना है कि गैर गोपनीय दिखने वाली सूचनाएं भी मिलाकर बेहद खतरनाक खुफिया चित्र तैयार किया जा सकता है। उदाहरण के लिए सैनिकों की तैनाती, रक्षा खरीद, व्यापार नीति, राजनयिक गतिविधियों और राजनीतिक रुझानों से जुड़ी छोटी छोटी जानकारियां मिलकर किसी भी देश की रणनीतिक कमजोरियों को उजागर कर सकती हैं।हम आपको बता दें कि ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसी पहले भी चेतावनी दे चुकी है कि हजारों ब्रिटिश नागरिकों तक इस तरह पहुंच बनाई गई। अब पहली बार पांचों देशों ने संयुक्त रूप से यह संदेश दिया है कि खतरा केवल एक देश तक सीमित नहीं बल्कि पूरे पश्चिमी सुरक्षा ढांचे के लिए चुनौती बन चुका है। ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस ने सरकारी और सैन्य कर्मचारियों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि ऑनलाइन संपर्कों को लेकर जरा सी लापरवाही राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता बन सकती है।हालांकि चीन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। लंदन स्थित चीनी दूतावास ने इन्हें मनगढंत और दुर्भावनापूर्ण आरोप बताया है। चीन का कहना है कि फाइव आईज गठबंधन स्वयं दुनिया का सबसे बड़ा जासूसी संगठन है और वही शांतिप्रिय देशों के लिए वास्तविक खतरा है। लेकिन पश्चिमी देशों की लगातार आती चेतावनियां संकेत देती हैं कि डिजिटल जासूसी अब महाशक्तियों के बीच छिड़े नए शीत युद्ध का प्रमुख हथियार बन चुकी है।इस घटनाक्रम के सामरिक महत्व को समझना बेहद जरूरी है। दरअसल दुनिया तेजी से सूचना युद्ध के दौर में प्रवेश कर चुकी है। अब युद्ध केवल सीमा पर टैंकों और मिसाइलों से नहीं लड़े जाते, बल्कि आंकड़ों, नेटवर्क और मानव स्रोतों के जरिये लड़े जा रहे हैं। चीन यदि पश्चिमी देशों की सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक रणनीतियों तक पहले से पहुंच बना लेता है तो उसे किसी भी संकट या टकराव की स्थिति में भारी बढ़त मिल सकती है। खासकर हिंद प्रशांत क्षेत्र में जहां अमेरिका और उसके सहयोगी चीन की बढ़ती सैन्य ताकत को चुनौती देने की तैयारी में हैं, वहां इस तरह की जासूसी बेहद संवेदनशील मानी जा रही है।रणनीतिक दृष्टि से यह चेतावनी कई संकेत देती है। एक तो आने वाले समय में पेशेवर ऑनलाइन मंच राष्ट्रीय सुरक्षा के नए रणक्षेत्र बनेंगे। साथ ही सरकारी और रक्षा संस्थानों में काम करने वाले लोगों की डिजिटल गतिविधियां अब सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेंगी। इसके अलावा, पश्चिमी देशों और चीन के बीच अविश्वास और गहराएगा, जिसका असर व्यापार, तकनीक और कूटनीति तक दिखाई देगा।देखा जाये तो भारत के लिए भी यह घटनाक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था और रक्षा आधुनिकीकरण की ओर बढ़ रहा है। ऐ ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:51:52 +0530</pubDate>
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<title>रस्सी में घेरकर दबोचे बांग्लादेशी, सबके हाथों से निकाली गई जानकारी!</title>
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<description><![CDATA[ पूरे देश की नजर पश्चिम बंगाल से भाग रहे बांग्लादेशियों पर थी। लेकिन ये अवैध बांग्लादेशी सिर्फ बंगाल ही नहीं बल्कि भारत के अलग-अलग इलाकों में छिपे हैं। ऐसे ही कई बांग्लादेशियों को आधी रात एक बड़े ऑपरेशन में दबोच लिया गया है। इन बांग्लादेशियों को रस्सियों के बीच घेर कर लाया गया है। इसी बीच एक और तस्वीर आई है जिसमें भारत से भाग रहे बांग्लादेशियों के हाथों को देखा जा रहा है। इन बांग्लादेशियों के हाथों में ऐसा क्या है?  दरअसल यह एक्शन हुआ है गुजरात में। सोचिए यह बांग्लादेशी कहां-कहां जाकर बस चुके हैं। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और राजकोट पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन में 322 से ज्यादा संदिग्ध लोगों को दबोचा। जिनमें से 131 बांग्लादेशी घुसपैठिए निकले। पुलिस ने जब इन 322 संदिग्ध लोगों के दस्तावेजों, भाषा और पारिवारिक बैकग्राउंड की कड़ाई से जांच की, तो इनमें से 131 लोग पक्के तौर पर बांग्लादेशी घुसपैठिए निकले। इसे भी पढ़ें: Bangladesh में Press Freedom पर संकट! CPJ ने सरकार को दिए 10 सुझाव, पत्रकारों पर &#039;FIR राज&#039; खत्म करने की मांगअब इन सभी को बांग्लादेश धक्के मारकर निकाला जाएगा। बहरहाल इन बांग्लादेशियों समेत भारत सरकार उन सभी बांग्लादेशियों के हाथों को देख रही है जिन्हें अब बांग्लादेश भेजा जा रहा है। दरअसल बांग्लादेश वापस भाग रहे बांग्लादेशियों की बायोमेट्रिक डिटेल्स जमा की जा रही हैं। इनके फिंगरप्रिंट्स लिए जा रहे हैं। इनकी तस्वीरें भी खींची जा रही हैं। दरअसल इन बांग्लादेशियों के फिंगरप्रिंट्स इसलिए लिए जा रहे हैं ताकि भविष्य में यह कभी भारत वापस ना आए। भारत आकर नकली आधार कार्ड ना बनवा पाएं। आप ही देखिए कि ममता बनर्जी सरकार के दौरान जो घुसपैठिए बांग्लादेश से भारत आकर आईडी कार्ड बनवा रहे थे, वही घुसपैठिए आज बीजेपी सरकार में अपने फिंगरप्रिंट्स देकर कभी ना वापस आने वाली प्रक्रिया का हिस्सा बन रहे हैं। इसे भी पढ़ें: घुसपैठियों की अब खैर नहीं, Amit Shah Bengal Border जा रहे हैं, Bangladeshi अधिकारी भागे भागे भारत आ रहे हैंउपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के कार्यालय ने गुरुवार को पुष्टि की कि यह कार्रवाई बुधवार तड़के शुरू हुई। कार्यालय ने बताया कि इस अभियान के तहत अब तक राज्य के विभिन्न हिस्सों से कुल 501 अवैध बांग्लादेशियों को हिरासत में लिया गया है। गृह मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे संघवी ने गुरुवार को एक पोस्ट में कहा कि गुजरात पुलिस का संदेश स्पष्ट है: अवैध घुसपैठ का एकमात्र जवाब सख्त कार्रवाई है।&quot; बुधवार को गांधीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए संघवी ने बताया कि &#039;ऑपरेशन डेल्टा हंट&#039; के तहत की गई कार्रवाई सुनियोजित तरीके से की गई थी और इसमें राज्य के सभी हिस्से शामिल थे।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:51:52 +0530</pubDate>
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<title>मोदी पर दबाव डालना...भारत का जिक्र कर अमेरिका को पुतिन ने क्या सुना दिया</title>
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<description><![CDATA[ रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन का वो बड़ा बयान जहां उन्होंने साफ कर दिया कि भारत और रूस की दोस्ती इतनी गहरी है जो कभी नहीं टूट सकती और ना ही किसी के दबाव में आ सकती है। पुतिन ने सीधे-सीधे अमेरिका का नाम लेते हुए कह दिया कि अमेरिका कितने भी नजदीकी भारत के साथ बढ़ा ले भारत और रूस का संबंध हमेशा बेहतर रहेगा। इतना ही नहीं पुतिन ने यह भी साफ कह दिया कि अमेरिका चाहे कितनी भी कोशिश कर ले वो प्रधानमंत्री मोदी पर दबाव नहीं बना सकता। पुतिन का इशारा उन कोशिशों की तरफ था जहां अमेरिका और पश्चिमी देश भारत को रूस से तेल ना खरीदने पर दबाव बनाते हुए देखते हैं। पुतिन ने इसे बेकार कोशिश बताया है और कहा कि पीएम मोदी हमेशा भारत के नेशनल इंटरेस्ट को ऊपर रखते हैं। दरअसल सेंट पीटर्सबर्ग में दुनिया की प्रमुख समाचार एजेंसियों के साथ बातचीत के दौरान राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन का यह बड़ा बयान सामने आया है। जहां पर उन्होंने भारत की विदेश नीति की खुलकर तारीफ की है। इसे भी पढ़ें: China के फुल कंट्रोल में है पाकिस्तान? पुतिन ने कुछ ऐसा जवाबउन्होंने कहा कि भारत एक महान देश है जिसकी आबादी 1.5 अरब के करीब है। दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था है और तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था भी। पुतिन ने कहा कि रूस को भारत के अमेरिका या किसी भी अन्य देश के साथ बढ़ते हुए सहयोग से कोई समस्या नहीं है। भारत और रूस की दोस्ती गहरी थी है और आगे भी रहेगी। आप खुद सुनिए कि राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने क्या कुछ कहा है। इंडिया डेवलपिंग इट्स रिलेशंस विथ ऑल द कंट्री इट्स अ ग्रेट कंट्री वनफ बिलियन पीपल लार्ज इकॉनमी द लार्जेस्ट डेमोक्रेसी मेनी पीपल से ऑफकोर्स इट इट इज़ ओनली नेचुरल इट डेवलप्स इट्स इकॉनमी इनकर्ड विथ इट्स इंटरेस्ट दोज़ कंट्रीज दैट इट डी नेसेसरीद थिंग इज़ द यूएस आर ट्राइंग टू पुट प्रेशर ऑन इंडिया इन समट फॉर एक्स व्हेन इट कम्स टू कोपरेशन विशा ऑन सम ट्रैक्स बट एवरीवन है अंडरस्टुड प्रेशर पुटिंग प्रेशर ऑन नरेंद्र मोदी दैट हैड्स द लार्जेस्ट पपुलेशन इन द वर्ल्ड इज़ डेटमेंटल फॉर इंटरनेशनल रिलेशंस। इतना ही नहीं आर्थिक मोर्चे पर भी पुतिन ने बड़ा दावा किया। इसे भी पढ़ें: इस बड़े कमरे में बैठ पुतिन ने लिया मोदी का नाम, अचानक सब हैरान!उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत और रूस के बीच द्विपक्ष व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह दिखाता है कि दोनों देश सिर्फ रक्षा ही नहीं बल्कि व्यापार और ऊर्जा के भी क्षेत्र में काफी तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं। कुल मिलाकर राष्ट्रपति पुतिन का यह बयान एक साफ और स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि भारत और रूस की दोस्ती आज भी उतनी ही मजबूत है जितनी वह पहले थी। साथ ही में पुतिन ने यह भी संकेत दिया कि दुनिया की बदलती हुई राजनीति के बीच भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के साथ आगे बढ़ रहा है और रूस उसके इस रुख का सम्मान करता है। भारत पहले भी पूरी दुनिया को साफ कर चुका है कि भारत अपने फैसले भारत के हित में लेता है ना कि किसी देश के दबाव में और दोस्ती किससे करनी है, किससे नहीं करनी है, इसका फैसला भारत करता है।   ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:51:52 +0530</pubDate>
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<title>BRICS की पावर पर President Putin की मुहर, कहा&#45; G7 का दौर खत्म, यह Global South का युग है</title>
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<description><![CDATA[ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को कहा कि ब्रिक्स समूह आर्थिक आकार के मामले में जी7 को पहले ही पीछे छोड़ चुका है और आने वाले वर्षों में और भी आगे बढ़ने की संभावना है। इंडिया टुडे द्वारा संचालित सेंट पीटर्सबर्ग अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक मंच (एसपीआईईएफ) में बोलते हुए पुतिन ने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि विकास की संरचना धीरे-धीरे वैश्विक दक्षिण की ओर स्थानांतरित हो रही है। पुतिन का ब्रिक्स समूह को कड़ा समर्थन ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस समूह के खिलाफ जमकर बोल रहे हैं। इस समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। बाद में मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात भी इस समूह में शामिल हो गए। पिछले साल, ट्रम्प ने ब्रिक्स को अमेरिकी डॉलर के लिए खतरा बताया था और इस पर 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। इसे भी पढ़ें: मोदी पर दबाव डालना...भारत का जिक्र कर अमेरिका को पुतिन ने क्या सुना दियाअपने संबोधन में रूसी राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि विकास की संरचना नए विकास केंद्रों और वैश्विक दक्षिण के देशों के पक्ष में बदल रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ब्रिक्स देश नए विकास केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं। पुतिन ने कहा कि अगर आप पिछले पांच वर्षों के वैश्विक जीडीपी पर नजर डालें, तो आप पाएंगे कि इसकी वार्षिक वृद्धि का लगभग आधा हिस्सा - 49% - ब्रिक्स देशों का है। तथाकथित जी7 का योगदान लगभग 18% अनुमानित है। उन्होंने विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में ब्रिक्स देशों के लिए काफी तेज विकास दर का भी अनुमान लगाया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:51:51 +0530</pubDate>
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<title>&amp;apos;भारत कभी किसी विदेशी ताकत के आदेश नहीं मानता&amp;apos;, पीएम मोदी पर दबाव बनाना बेकार, ट्रंप को पुतिन का कड़ा जवाब</title>
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<description><![CDATA[ रूस के साथ सहयोग कम करने के लिए भारत पर लगातार दबाव बनाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बेहद कड़ा संदेश दिया है। पुतिन ने शुक्रवार को साफ शब्दों में कहा कि नई दिल्ली कभी भी किसी विदेशी ताकत के &#039;आदेश&#039; नहीं मानेगी और एक स्वतंत्र व संप्रभु देश के तौर पर ही काम करती रहेगी। सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) में बोलते हुए पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जमकर तारीफ की। उन्होंने ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों का ज़िक्र करते हुए कहा कि ऐसी पाबंदियां अंत में &#039;उल्टा असर&#039; (boomerang effect) ही करेंगी। भारत हमेशा &quot;राष्ट्रीय हित, कीमत और टेक्नोलॉजी के फायदे&quot; के आधार पर अपने वैश्विक पार्टनर चुनता रहेगा।इसे भी पढ़ें: संकरी गलियां और नियमों की अनदेखी बनती रही काल! दिल्ली में पिछले 6 सालों में आग से जुड़ी घटनाओं में 543 लोगों की जान गयी  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफसेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) में बोलते हुए, पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की और कहा कि प्रतिबंध - ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए प्रतिबंधों का ज़िक्र करते हुए - अंत में &#039;उल्टा असर&#039; ही करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत &quot;राष्ट्रीय हित, कीमत और टेक्नोलॉजी के फायदे&quot; के आधार पर अपने पार्टनर चुनना जारी रखेगा।रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, पुतिन ने कहा, &quot;अमेरिका कुछ मुद्दों पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसमें रूस के साथ सहयोग के कुछ पहलू भी शामिल हैं। लेकिन अब तक यह सभी को साफ हो जाना चाहिए: 1.5 अरब लोगों के देश का नेतृत्व करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव बनाना बेकार की कोशिश है।&quot; इसे भी पढ़ें: Delhi Hotel Fire Update | दिल्ली में अवैध निर्माण पर चला एमसीडी का हथौड़ा! 82 संपत्तियां ध्वस्त, 43 सील, हौज रानी अग्निकांड के बाद प्रशासन सख्तपुतिन की ये कड़ी बातें ट्रंप द्वारा रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में आई हैं। ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और आरोप लगाया था कि रूस से तेल खरीदने से यूक्रेन में युद्ध को बढ़ावा मिल रहा है - एक ऐसा आरोप जिसे नई दिल्ली ने बार-बार नकारा है। गौरतलब है कि पश्चिमी देश खुद रूस से गैस और तेल खरीद रहे हैं, जिसका ज़िक्र भारत लगातार करता रहा है।ट्रंप के टैरिफ की बात करें तो, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के तहत इस साल की शुरुआत में 25 प्रतिशत का शुल्क हटा लिया गया था। पुतिन ने कहा कि भारत रूस का एक भरोसेमंद पार्टनर बना हुआ है, और मॉस्को को अलग-थलग करने की पश्चिमी देशों की कोशिशें पूरी तरह नाकाम रही हैं। उन्होंने भारत और रूस के बीच सैन्य सहयोग के बारे में भी बात की और कहा कि यह सोवियत काल से चला आ रहा है, साथ ही कहा कि भविष्य में ये संबंध और बढ़ेंगे।स्पुतनिक इंडिया के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति ने कहा, &quot;भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग बाहरी दबाव के बिना जारी रहेगा और पूरी तरह से आपसी प्रतिबद्धताओं और राष्ट्रीय हितों से निर्देशित होगा। भारत के साथ रूस का रक्षा सहयोग किसी तीसरे देश के राजनीतिक दबाव से प्रभावित नहीं होगा।&quot;गौरतलब है कि सैन्य सहयोग बढ़ाने की कोशिश के तौर पर, पुतिन पहले ही कह चुके हैं कि रूस पांचवीं पीढ़ी के सुखोई Su-57 प्रोग्राम पर भारत के साथ काम करने के लिए तैयार है। उनके अनुसार, Su-57 दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में से एक है और रूस भारत को Su-57 की टेक्नोलॉजी और सोर्स कोड देने के लिए तैयार है। Stay updated with International
News in Hindi on Prabhasakshi ???? President #Putin: The US is trying to pressure India on certain issues, including some aspects of cooperation with Russia. But it should be clear to everyone by now: pressuring Prime Minister @narendramodi, who leads a country of 1.5 billion people, is ????a futile exercise. pic.twitter.com/v2MlhpV34Z— MFA Russia ???????? (@mfa_russia) June 5, 2026 ???????????????????? India acts as a sovereign nation, sanctions would boomerang Under the leadership of PM Modi: PutinDefence cooperation between India and Russia will continue without external pressure and remain guided strictly by mutual commitments and national interests, President Putin… pic.twitter.com/HTX2FnPFwI— Sputnik India (@Sputnik_India) June 5, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:51:50 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran Tensions | विनाश की शुरुआत! अमेरिकी ड्रोन एक्शन से थर्राया ईरान, आधी दुनिया को लील जाएगी ये जंग!</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व (Middle East) में शांति वार्ताओं के तमाम दावों और कोशिशों के बीच एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने फारस की खाड़ी में नया तनाव पैदा कर दिया है। अमेरिकी सेना ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उसने &#039;ड्रोन हमलों&#039; से अपना बचाव करने के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास स्थित गोरुक (Goruk) और केशम द्वीप (Qeshm Island) पर ईरानी सैन्य बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर जारी एक आधिकारिक बयान में, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि यह कार्रवाई अमेरिकी सेना द्वारा ईरान की ओर से लॉन्च किए गए चार ड्रोनों के जवाब में की गई थी। CENTCOM ने इन्हें घातक &quot;वन-वे अटैक&quot; (आत्मघाती) ड्रोन बताया, जिन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर भेजा गया था। इसे भी पढ़ें: संकरी गलियां और नियमों की अनदेखी बनती रही काल! दिल्ली में पिछले 6 सालों में आग से जुड़ी घटनाओं में 543 लोगों की जान गयी CENTCOM ने कहा, &quot;हमलावर ड्रोन क्षेत्रीय समुद्री यातायात के लिए तत्काल खतरा पैदा कर रहे थे।&quot; &quot;इसके बाद अमेरिकी सेना ने आगे के हमलों से बचाव के लिए गोरुक और केशम द्वीप पर ईरानी तटीय निगरानी रडार साइटों पर हमला किया।&quot;इसमें आगे कहा गया, &quot;अमेरिकी सेना सतर्क है और आत्मरक्षा में ईरान की अनुचित आक्रामकता का जवाब देने के लिए तैयार है।&quot; इसे भी पढ़ें: &#039;जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और रहेगा&#039;, UN में नई दिल्ली ने पाकिस्तान को दिया करारा जवाबये हमले क्यों अहम हैं?जहां गोरुक ईरान के होर्मोज़गन प्रांत का एक तटीय शहर है, वहीं केशम फारस की खाड़ी का सबसे बड़ा द्वीप है और यह होर्मुज जलडमरूमध्य के ठीक बगल में स्थित है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री चौकियों में से एक है। गोरुक और केशम द्वीप पर हमले इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ईरान ने वहां अपने महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र और रडार सिस्टम स्थापित किए हैं।ईरान होर्मुज के पास समुद्री मार्गों पर नज़र रखने और फारस की खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाजों को ट्रैक करने के लिए गोरुक और केशम द्वीप का उपयोग करता है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के पास गोरुक और केशम द्वीप में कई सैन्य संपत्तियां हैं, जिनमें नौसैनिक संपत्तियां, ड्रोन बुनियादी ढांचा और एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। अमेरिका ने बार-बार दावा किया है कि ईरान ने फारस की खाड़ी में जहाजों को निशाना बनाने के लिए गोरुक और केशम द्वीप में अपनी सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल किया है।इसका शांति वार्ता पर क्या असर पड़ सकता है?ये हमले हालिया जवाबी हमलों की कड़ी में हैं, जिन्होंने रिश्तों में तनाव पैदा किया है और शांति वार्ता को प्रभावित किया है। क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना ​​है कि ऐसे हमलों से अंततः युद्धविराम और शांति वार्ता विफल हो सकती है।लेकिन इसके बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के साथ स्थिति काफी अच्छी चल रही है। विस्कॉन्सिन में किसानों के साथ एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा, &quot;हम बहुत जल्द ईरान के मामले से बाहर निकलने वाले हैं और यह किसी भी तरह से बहुत मज़बूत कदम होगा - चाहे वह कागज़ पर कोई समझौता हो या फिर बहुत कड़ा रास्ता अपनाना पड़े।&quot;उन्होंने आगे कहा, &quot;हो सकता है कि कड़ा रास्ता अपनाना ही आसान हो, लेकिन हम इससे बाहर निकलेंगे और आपकी खाद की कीमतें बहुत कम हो जाएंगी, ठीक वैसी ही जैसी चार महीने पहले थीं।&quot; Stay updated with International
News in Hindi on Prabhasakshi  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:51:49 +0530</pubDate>
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<title>भारत: सोमाली शरणार्थी बच्चों का सहारा बना दिल्ली का एक शिक्षण केन्द्र</title>
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<description><![CDATA[ दिल्ली के सम्पुष्टि सामुदायिक शिक्षण केन्द्र में,  शरणार्थी बच्चे और युवजन, अंग्रेज़ी, कला और डिजिटल कौशल सीख रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के सहयोग से संचालित यह सुरक्षित एवं समावेशी जगह, उन्हें शिक्षा प्राप्ति में मदद देने के साथ-साथ आत्मविश्वास, उद्देश्य और एक-दूसरे का साथ देने की भावना भी विकसित कर रही है.   ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:50:50 +0530</pubDate>
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<media:keywords>भारत:, सोमाली, शरणार्थी, बच्चों, का, सहारा, बना, दिल्ली, का, एक, शिक्षण, केन्द्र</media:keywords>
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<title>‘मैं भारत में रहता हूँ, जहाँ 45°C तापमान अब आम बात है, कल ये सबकी वास्तविकता हो सकती है’</title>
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<description><![CDATA[ भारत के चेन्नई शहर के स्कूलों से लेकर दुनिया के बड़े महानगरों तक, भीषण गर्मी अब लोगों की सेहत, पढ़ाई, कामकाज और दैनिक जीवन को गम्भीर रूप से प्रभावित कर रही है. भारत में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के प्रमुख बालकृष्ण पिसुपति का कहना है कि अगर शहरों ने समय रहते टिकाऊ शीतलन उपाय नहीं अपनाए, तो भीषण गर्मी से दुनिया भर के कई शहर रहने योग्य नहीं रह जाएँगे. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 10:50:50 +0530</pubDate>
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<title>G7 Summit France | क्या मोदी&#45;ट्रंप की मुलाक़ात होने वाली है? अमेरिकी राष्ट्रपति ने फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि की</title>
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<description><![CDATA[ इस महीने फ्रांस में होने जा रहा G7 शिखर सम्मेलन वैश्विक कूटनीति का सबसे बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सम्मेलन में शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। इसके साथ ही, इस वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय (Bilateral) मुलाकात की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। यह शिखर सम्मेलन 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस (Évian-les-Bains) में आयोजित किया जाएगा। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्षों के बीच ट्रंप के लिए वैश्विक नेताओं से आमने-सामने बातचीत करने का यह पहला बड़ा अवसर होगा। इसे भी पढ़ें: India Russia S-400 Deal | भारत का हवाई रक्षा कवच हुआ मज़बूत! रूस से मिला चौथा S-400 &#039;सुदर्शन&#039; स्क्वाड्रन, जानें कैसे बढ़ेगी ताकत  ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए अपनी भागीदारी की घोषणा करते हुए कहा कि वह 14 जून को व्हाइट हाउस में UFC कार्यक्रम में शामिल होने के तुरंत बाद फ्रांस के लिए रवाना होंगे। ट्रंप ने &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर पोस्ट किया, &quot;मैं G7 शिखर सम्मेलन के लिए फ्रांस जाऊंगा। यह यात्रा व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में होने वाली UFC विश्व चैंपियनशिप फाइट्स के ठीक बाद होगी, जो अमेरिकी इतिहास की सबसे मनोरंजक रातों में से एक होगी।&quot;उन्होंने आगे कहा, &quot;रिकॉर्ड बताते हैं कि व्हाइट हाउस के लंबे और गौरवशाली इतिहास में पहले भी कई बार काफ़ी निचले स्तर की फाइट्स हुई हैं, लेकिन &#039;जनता के घर&#039; (People’s House) में दुनिया के सबसे महान फाइटर्स—जो सभी चैंपियन हैं—के बीच होने वाली इस तरह की फाइट के बारे में पहले कभी सोचा भी नहीं गया था!&quot;यह बेहद अहम G7 शिखर सम्मेलन 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में आयोजित किया जाएगा। यह शिखर सम्मेलन ट्रंप को मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार कई वैश्विक नेताओं के साथ आमने-सामने बातचीत करने का अवसर प्रदान करेगा। इसे भी पढ़ें: Delhi Hotel Fire Tragedy | मालवीय नगर की आग ने ली एक ही परिवार के 8 लोगों की जान, मासूम पोतियाँ भी सोई मौत की नींदमोदी-ट्रंप की संभावित मुलाक़ातफ्रांस ने भारत को एक सहयोगी राष्ट्र के तौर पर आमंत्रित किया है। विदेश मंत्री (EAM) डॉ. एस. जयशंकर और फ्रांस के यूरोप और विदेश मामलों के मंत्री जीन-नोएल बैरो के बीच हुई मुलाक़ात के दौरान पेरिस ने G7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी की पुष्टि की। हालाँकि, भारत की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।फ्रांस के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, &quot;दोनों मंत्रियों ने इस बात का स्वागत किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने एवियन शिखर सम्मेलन (15-17 जून) में अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है। इसे ध्यान में रखते हुए, दोनों मंत्रियों ने G7 के कार्यों में भारत के योगदान पर ज़ोर दिया, विशेष रूप से प्रमुख व्यापक आर्थिक असंतुलन, अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी और एकजुटता से जुड़े मुद्दों पर।&quot;प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की पिछली मुलाक़ात पिछले साल फरवरी में हुई थी, जब प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के दौरे पर थे। लेकिन उसके बाद से, ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ़ (शुल्क), व्यापार समझौते और नई दिल्ली द्वारा रूसी तेल की खरीद को लेकर वॉशिंगटन की लगातार आलोचनाओं के कारण भारत और अमेरिका के संबंधों में कुछ खटास आ गई थी। हालांकि, PM मोदी और ट्रंप फ़ोन पर बातचीत के ज़रिए एक-दूसरे के संपर्क में रहे हैं।जानकारों का मानना ​​है कि यह मुलाक़ात वॉशिंगटन और नई दिल्ली को अपने रिश्तों को फिर से ठीक करने का मौका दे सकती है, और व्यापार समझौते को लेकर कोई बड़ी सफलता मिल सकती है; उनका मानना ​​है कि यह समझौता अभी &quot;अटका हुआ&quot; है। विदेश मामलों के जानकार रॉबिंदर सचदेव ने कहा, &quot;लेकिन यह अमेरिकी पेचीदगियों की वजह से अटका हुआ है। ट्रंप ने प्रतिबंधों के लिए जो टैरिफ लगाए थे... अदालतों ने उन्हें हटा दिया है। अब वह किसी और तरह के टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे हैं।&quot; उन्होंने आगे कहा कि एक अलग से बातचीत से &quot;आपसी समझ को बेहतर बनाने&quot; में मदद मिलेगी। Stay updated with International
News in Hindi on Prabhasakshi  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:00:40 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump को बड़ा झटका! अमेरिकी संसद में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव पास, अपनों ने ही बदला पाला</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी संसद के निचले सदन &#039;प्रतिनिधि सभा&#039; (House of Representatives) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध शक्तियों पर लगाम लगाने वाले एक ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को रोकना है। इस मतदान की सबसे खास बात यह रही कि राष्ट्रपति ट्रंप की अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसदों ने पाला बदलते हुए विपक्षी डेमोक्रेट्स का साथ दिया और अपनी ही सरकार के रुख का कड़ा विरोध किया। युद्ध ने देश-विदेश की राजनीति को प्रभावित किया है।
सदन के अध्यक्ष माइक जॉनसन ने दो सप्ताह पहले सदन की कार्यवाही अचानक स्थगित कर दी थी और इस प्रस्ताव को पारित होने से रोकने की कोशिश की थी जिसे उस समय मंजूरी मिलने की संभावना बन रही थी।हालांकि, जैसे-जैसे संघर्ष लंबा खिंचता गया और राष्ट्रपति ट्रंप त्वरित समाधान निकालने के लिए जूझते दिखायी दिखे, तो युद्ध के प्रति असंतोष बढ़ता गया।
 बुधवार को मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 215 और विरोध में 208 वोट पड़े। परिणाम घोषित होते ही सांसदों ने खुशियां मनायीं।
 न्यूयॉर्क से डेमोक्रेटिक नेता हकीम जेफ्रीज ने कहा, ‘‘यह बिना सोचा-समझा और महंगा युद्ध आज ही समाप्त होना चाहिए। हमें केवल कुछ रिपब्लिकन सांसदों के समर्थन की जरूरत है। यह युद्ध अमेरिकी करदाताओं पर 100 अरब डॉलर से अधिक का बोझ डाल चुका है और इसने अमेरिका की स्थिति को कमजोर किया है।’’
ईरान के खिलाफ अमेरिकी युद्ध की रोकथाम की दिशा में प्रतिनिधि सभा में यह चौथा प्रयास था और पहली बार यह प्रस्ताव पारित हुआ है। पिछले महीने सीनेट ने भी इसी तरह के एक प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था, जब कुछ रिपब्लिकन सीनेटरों ने अपनी पार्टी के राष्ट्रपति के खिलाफ जाकर उसका समर्थन किया था।
 हर बार जब डेमोक्रेट्स यह प्रस्ताव लेकर आए तो समर्थन बढ़ता गया। ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिका को विदेशी संघर्षों से दूर रखने और घरेलू मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का वादा किया था, लेकिन इस युद्ध ने फिर से पश्चिम एशिया को अमेरिकी राजनीति के केंद्र में ला दिया है।
 हालांकि, जॉनसन ने कहा कि ट्रंप खासकर मध्यावधि चुनावों को देखते हुए अब भी घरेलू मुद्दों पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। ये चुनाव इस बात का फैसला करेंगे कि संसद में किस पार्टी का नियंत्रण होगा।
 उन्होंने बताया कि ट्रंप अपने सहयोगी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक गतिविधियों, विशेष रूप से तेल आपूर्ति के लिए फिर से पूरी तरह खोलने में सहयोग की अपील कर रहे हैं।
 अमेरिका द्वारा इजराइल के साथ मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू करने के बाद से अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ गया है।
 हालांकि, अप्रैल में युद्धविराम की घोषणा की गई थी, लेकिन स्थिति अब भी अस्थिर और अनिश्चित बनी हुई है। स्थायी शांति के लिए बातचीत लंबी खिंच रही है।इसे भी पढ़ें: मोदी सरकार ने लगाया बड़ा दांव! सरकारी बॉन्ड पर कैपिटल गेन्स टैक्स खत्म, विदेशी निवेशकों को बड़ी राहत | Capital Gains Tax Removed इस बीच, ईरान समर्थित हिजबुल्ला के साथ इजराइल के संघर्ष ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमले समय-समय पर जारी हैं।
प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित यह प्रस्ताव युद्ध को तुरंत नहीं रोकेगा, लेकिन इसे आगे की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है।
 अब यह प्रस्ताव सीनेट में जाएगा। पिछले महीने चार रिपब्लिकन सीनेटरों ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर इसी तरह के प्रस्ताव का समर्थन किया था। हालांकि सीनेट ने अभी तक इस पर अंतिम फैसला नहीं किया है।
 अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के समक्ष कहा कि यदि कांग्रेस यह प्रस्ताव पारित करती है तो ईरान यह समझेगा कि प्रशासन के ‘‘हाथ बंध गए हैं।’’ उन्होंने कहा कि वे सोचेंगे कि ‘‘हम उनके खिलाफ कुछ नहीं कर पाएंगे, तो फिर समझौता क्यों करें?’’
 ईरान से जुड़े युद्ध के अलावा कांग्रेस (संसद) राष्ट्रीय सुरक्षा के अन्य मुद्दों पर भी सक्रिय है। इसे भी पढ़ें: Delhi Hotel Fire Tragedy | मालवीय नगर की आग ने ली एक ही परिवार के 8 लोगों की जान, मासूम पोतियाँ भी सोई मौत की नींद जिसके तहत रूस के खिलाफ युद्ध लड़ रहे यूक्रेन को अमेरिकी समर्थन और युद्धग्रस्त देश के पुनर्निर्माण में सहायता देने का प्रावधान है।
 इसके अलावा इस सप्ताह लेबनान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को रोकने संबंधी एक अन्य युद्ध शक्ति प्रस्ताव पर भी विचार किए जाने की संभावना है।इसे भी पढ़ें: दिल्ली के मालवीय नगर होटल में भीषण अग्निकांड! 12 विदेशियों समेत 21 की मौत, सीएम रेखा गुप्ता ने दिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
 अमेरिकी संविधान के अनुसार युद्ध घोषित करने का अधिकार संसद के पास है, लेकिन राष्ट्रपति सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होने के नाते सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं। इसी वजह से युद्ध और शांति से जुड़े मामलों में अंतिम अधिकार को लेकर लंबे समय से संवैधानिक बहस जारी है।
 युद्ध शक्तियां अधिनियम के तहत किसी सैन्य कार्रवाई के 60 दिन के भीतर अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस को कांग्रेस से मंजूरी लेनी होती है।
 हालांकि प्रशासन का कहना है कि ईरान संघर्ष में युद्धविराम घोषित हो चुका है, इसलिए अब शत्रुता समाप्त मानी जानी चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:00:38 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Donald, Trump, को, बड़ा, झटका, अमेरिकी, संसद, में, ईरान, के, खिलाफ, सैन्य, कार्रवाई, रोकने, का, प्रस्ताव, पास, अपनों, ने, ही, बदला, पाला</media:keywords>
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<title>Video | कैमरे में कैद कयामत का मंजर! कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बरसी ईरानी मिसाइल, मलबे में तब्दील हुआ T1, मची भारी चीख&#45;पुकार</title>
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<description><![CDATA[ खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच 3 जून 2026 को कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल 1 (T1) पर एक भीषण ड्रोन हमला हुआ। इस आत्मघाती हमले में एक भारतीय नागरिक की दर्दनाक मौत हो गई और कम से कम 63 अन्य लोग घायल हो गए हैं। कुवैत सरकार द्वारा जारी सर्विलांस फुटेज में हमले के वक्त हवाई अड्डे पर मची अफरा-तफरी और तबाही का खौफनाक मंजर साफ देखा जा सकता है। इस हमले ने अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को हुए नाजुक युद्धविराम (Ceasefire) को पूरी तरह खतरे में डाल दिया है। हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को पहुंचे भारी नुकसान के कारण देश के इस मुख्य हवाई मार्ग पर परिचालन को कुछ समय के लिए पूरी तरह रोकना पड़ा। कुवैत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा &#039;X&#039; (ट्विटर) पर जारी किए गए इस फुटेज में हमले के प्रभाव और उसके तुरंत बाद की स्थिति को दिखाया गया है। वीडियो में ऐसा प्रतीत होता है कि कोई मिसाइल या वस्तु टर्मिनल की इमारत से टकराती है, जिससे एक ज़ोरदार धमाका होता है और छत का एक हिस्सा ढह जाता है।इस फुटेज के साथ जारी एक बयान में, DGCA ने इस घटना को &quot;ईरान की क्रूर आक्रामकता&quot; करार दिया। बयान में कहा गया है कि 3 जून को टर्मिनल 1 पर हुए इस हमले के परिणामस्वरूप लोगों की जान गई, कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए और संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा।अधिकारियों ने कहा, &quot;यह वीडियो ईरान की उस क्रूर आक्रामकता के शुरुआती पलों को दिखाता है, जिसका शिकार 3 जून 2026 को कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट का टर्मिनल 1 (T1) बना। इस हमले में लोगों की जान गई, कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए और संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा।&quot;ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया कि उसने जानबूझकर एयरपोर्ट को निशाना बनाया था। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि यह नुकसान अमेरिका निर्मित &#039;पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइल&#039; में आई तकनीकी खराबी के कारण हुआ। अधिकारियों के अनुसार, यह मिसाइल ईरान की ओर से आ रही मिसाइलों को रोकने में नाकाम रही और खुद ही नीचे गिर गई, जिससे यह नुकसान हुआ।हालांकि, कुवैती अधिकारियों ने अपनी बात पर कायम रहते हुए कहा है कि यह नुकसान ईरान के एक ड्रोन हमले के कारण ही हुआ है। कुवैत की सेना ने इस घटना को &quot;ईरान की एक आपराधिक आक्रामकता&quot; करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है और इस हमले की पूरी जांच कराने का संकल्प लिया है।कुवैत एयरपोर्ट पर हमलाअधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 63 लोग घायल हुए हैं। आपातकालीन बचाव दल तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और यात्रियों तथा एयरपोर्ट कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। अधिकारियों ने नुकसान का जायज़ा लेने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुछ समय के लिए एयरपोर्ट पर सभी तरह के परिचालन को रोक दिया था।भारत के विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि वह कुवैती अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और हमले में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार तथा घायल हुए लोगों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है। &quot;दूतावास, भारत में पीड़ित परिवार को सभी ज़रूरी मदद देने और घायलों की सहायता करने के लिए कुवैती अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है,&quot; बयान में कहा गया।इस हमले ने खाड़ी देशों के सामने बढ़ते खतरों को उजागर किया है; ये देश लंबे समय से खुद को क्षेत्रीय संघर्षों के सीधे असर से काफी हद तक सुरक्षित मानते रहे थे। कुवैत, अपने कई पड़ोसी देशों की तरह, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और विदेशी सैन्य संपत्तियों का केंद्र है, जिससे यह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की चपेट में आ जाता है।इस बीच, ईरान ने अमेरिकी सेना पर केशम द्वीप पर एक टैंकर और एक संचार टावर को निशाना बनाकर हालिया टकराव को भड़काने का आरोप लगाया है। इन विरोधी बयानों ने ऐसे समय में तनाव और बढ़ा दिया है, जब क्षेत्रीय मध्यस्थ उस संघर्ष-विराम को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, जिस पर अब काफी दबाव पड़ रहा है।हवाई अड्डे पर हुआ यह हमला 8 अप्रैल के संघर्ष-विराम के बाद से हुई सबसे गंभीर घटनाओं में से एक है; इस संघर्ष-विराम ने ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों के कारण एक महीने से भी ज़्यादा समय तक चले संघर्ष को रोक दिया था। Stay updated with International
News in Hindi on Prabhasakshi اللحظات الأولى للاعتداء الإيراني الغاشم من قبل المسيرات الذي تعرض له مبنى الركاب T1 في مطار الكويت الدولي بتاريخ 3 يونيو 2026 وتسبب بخسائر بالأرواح وإصابات بشرية بليغة وأضرار مادية جسيمةThe first moments following the brutal Iranian drone attack on Terminal 1 (T1) at Kuwait… pic.twitter.com/eTzQoVXB4K— الطيران المدني (@Kuwait_DGCA) June 3, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:00:37 +0530</pubDate>
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<title>Kuwait Airport पर Iranian Drone Attack, एक भारतीय की मौत, सामने आया तबाही का खौफनाक Video</title>
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<description><![CDATA[ कुवैत ने निगरानी फुटेज जारी किया है जिसमें कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 1 पर ड्रोन हमले का दृश्य दिखाया गया है। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। इस हमले ने ईरान और अमेरिका के बीच नाजुक युद्धविराम को और भी तनावपूर्ण बना दिया है। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, मृतक भारतीय नागरिक था। हमले से हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे को भी व्यापक क्षति पहुंची और देश के मुख्य हवाई अड्डे पर परिचालन कुछ समय के लिए निलंबित करना पड़ा।इसे भी पढ़ें: Donald Trump को बड़ा झटका! अमेरिकी संसद में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव पास, अपनों ने ही बदला पालाकुवैत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा एक्स पर प्रकाशित फुटेज में हमले का प्रभाव और उसके तुरंत बाद की स्थिति कैद है। वीडियो में ऐसा प्रतीत होता है कि एक प्रक्षेपास्त्र टर्मिनल भवन से टकराया, जिससे विस्फोट हुआ और छत का एक हिस्सा ढह गया। फुटेज के साथ जारी बयान में डीजीसीए ने इस घटना को &quot;क्रूर ईरानी आक्रमण&quot; बताया और कहा कि 3 जून को टर्मिनल 1 पर हुए हमले में कई लोगों की मौत हुई, कई गंभीर रूप से घायल हुए और भारी भौतिक क्षति हुई। प्राधिकरण ने कहा कि 3 जून 2026 को कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 1 (टी1) पर ड्रोन के जरिए किए गए क्रूर ईरानी आक्रमण के पहले क्षण, जिसमें कई लोगों की जान गई, कई गंभीर रूप से घायल हुए और व्यापक भौतिक क्षति हुई ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने जानबूझकर हवाई अड्डे को निशाना बनाने के आरोप को खारिज कर दिया। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि यह क्षति अमेरिकी निर्मित पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइल की खराबी के कारण हुई, जो ईरानी मिसाइलों को रोकने में विफल रहने के बाद गिर गई। हालांकि, कुवैती अधिकारियों का कहना है कि यह क्षति ईरानी ड्रोन हमले के कारण हुई। कुवैत की सेना ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे आपराधिक ईरानी आक्रमण बताया और हमले की जांच करने का वादा किया। इसे भी पढ़ें: Donald Trump को बड़ा झटका! अमेरिकी संसद में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव पास, अपनों ने ही बदला पालाकुवैत हवाई अड्डे पर हमलाअधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 63 लोग घायल हो गए। आपातकालीन बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचे और यात्रियों और हवाई अड्डे के कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला। अधिकारियों ने नुकसान का आकलन करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी रूप से परिचालन बंद कर दिया। भारत के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मृत्यु हो गई और कई अन्य घायल हो गए। कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि वह कुवैती अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और मृतक के परिवार और घायलों को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है। दूतावास ने कहा कि दूतावास भारत में शोक संतप्त परिवार को सभी आवश्यक सहायता और घायलों की सहायता प्रदान करने के लिए कुवैती अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। इस हमले ने खाड़ी देशों के सामने बढ़ते जोखिमों को उजागर किया है, जो लंबे समय से खुद को क्षेत्रीय संघर्षों के प्रत्यक्ष प्रभावों से अपेक्षाकृत सुरक्षित मानते रहे हैं। कुवैत, अपने कई पड़ोसी देशों की तरह, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और विदेशी सैन्य संपत्तियों का मेजबान है, जो इसे ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के प्रति संवेदनशील बनाता है।اللحظات الأولى للاعتداء الإيراني الغاشم من قبل المسيرات الذي تعرض له مبنى الركاب T1 في مطار الكويت الدولي بتاريخ 3 يونيو 2026 وتسبب بخسائر بالأرواح وإصابات بشرية بليغة وأضرار مادية جسيمةThe first moments following the brutal Iranian drone attack on Terminal 1 (T1) at Kuwait… pic.twitter.com/eTzQoVXB4K— الطيران المدني (@Kuwait_DGCA) June 3, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:00:36 +0530</pubDate>
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<title>जापान को कराची समझ बना दी मस्जिद, अब चलेगा बुलडोजर?</title>
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<description><![CDATA[ दो महीने पहले जापान में हजारों की संख्या में लोगों ने इसलिए प्रदर्शन किया था क्योंकि उन्हें डर था कि मस्जिद यहां पर बन रही है। लेकिन जापान के एक दूसरे शहर में पाकिस्तान ने अवैध तरीके से मस्जिद खड़ी कर दी। उसके राजदूत की मौजूदगी में मस्जिद का उद्घाटन भी हो गया। अब जापान में इस मस्जिद के खिलाफ माहौल गमाया हुआ है। बुलडोजर भी यहां चल सकता है। पाकिस्तान की फिर हुई इंटरनेशनल बेइज्जती। इस बार यह बेइज्जती खाली कटोरा फैलाने के लिए नहीं बल्कि जापान को कराची समझकर अवैध मस्जिद खड़ी करने के लिए हुई है। जापान  में बनी एक मस्जिद ने पाकिस्तान की नियत उसके कब्जाधारी इरादों को एक बार फिर एक्सपोज किया है। बता दिया है कि आतंकिस्तान की नियत में खोट है। आतंकिस्तान की नीति अवैध कब्जे की है। क्योंकि जिस मस्जिद को लेकर जापान में गुस्सा फूटा है, उसका उद्घाटन अप्रैल में ही पाकिस्तानी राजदूत अब्दुल हमीद ने किया था। इसी साल अप्रैल में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद की मौजूदगी में इस मस्जिद का उद्घाटन किया गया था।इसे भी पढ़ें: Shaurya Path: आकाश पर राज करेगी Indian Air Force, South Asia में ताकत के सारे समीकरण बदलकर रख देंगे 114 Rafale Jetsयह मस्जिद जापान के कुआगोई शहर में बनाई गई थी। लेकिन अब इस पर गिराए जाने का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद को गैरकानूनी तरीके से बनाया गया है और इसके लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी। इसलिए अब सवाल उठने लगा है कि क्या जापान में पाकिस्तान के अवैध कब्जे का बुलडोजर चलेगा? पाकिस्तान के वक्तव पर बोले गए झूठों से पर्दा उठता रहा है। भारत के ऑपरेशन सिंदूर से घबराए पाकिस्तान ने सीजफायर को लेकर झूठ बोला वो दुनिया के सामने आ गया। अब जापान में अवैध मस्जिद ने पाकिस्तान की थू थू कर दी है। जापान के कुआगोए प्रशासन ने एक आधिकारिक बयान में साफ कहा है कि यह इमारत एक शहरी विकास नियंत्रण क्षेत्र में बनाई गई है। जहां आमतौर पर निर्माण कार्य की मनाही होती है।इसे भी पढ़ें: Pakistan सीमा पर बाहुबलि लेकर अचानक पहुंचा भारत, एक्शन से मचा हड़कंप मस्जिद को शहर के प्रशासन की अनुमति के बिना बनाया गया। अब वहां के प्रशासन से इस अवैध मस्जिद को गिराने का अनुरोध किया गया है और इस प्रस्ताव को समीक्षा के लिए स्वीकार भी कर लिया गया है। बहुत संभव है कि 2 महीने पहले बनी यह मस्जिद मलबा हो जाए। जिस तरह जापानी फिजिसवा शहर की सड़कों पर 2 महीने पहले मस्जिद बनने के खौफ में उतर आए थे। अब एक बार फिर उन्होंने जापान में पनपते इस्लाम के खिलाफ हल्ला बोल दिया। विवाद बढ़ता देख पाकिस्तानी दूतावास ने तुरंत खुद को इस प्रोजेक्ट से अलग कर लिया है और कहा कि अब्दुल हमीद 3 अप्रैल को उद्घाटन कार्यक्रम में तब गए थे जब उन्हें आश्वासन दिया गया था कि सभी कानूनी मंजूरियां ली जा चुकी है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:00:35 +0530</pubDate>
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<title>भारत को ऑफर देकर रूस भरेगा Su&#45;57 की पहली सफल उड़ान, पेंटागन से लेकर बीजिंग तक सब हैरान!</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया के हथियारों के बाजार में इस वक्त खलबली मची है। रूस जो पहले से ही यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। उसने एक ऐसा दांव चला है जिसने पेंटागन से लेकर बीजिंग तक सबके कान खड़े कर दिए हैं। रूस की दिग्गज कंपनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन यानी यूएसी के सीईओ वादिम बड़े खान ने आधिकारिक पुष्टि कर दी है कि रूस के दूसरे स्टील फाइटर जेट एसयू 75 चेकमेट के पहले उड़ान प्रोटोटाइप का काम शुरू हो चुका है। यह सिर्फ एक विमान नहीं बल्कि पुतिन का वो चेकमेट है जिसे खासतौर पर अमेरिका के F35 और चीन के J20 को टक्कर देने के लिए डिजाइन किया गया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह विमान वाकई तय समय पर आसमान में उड़ान भरेगा और सबसे बड़ी बात भारत के लिए इसमें क्या छिपा है? इसे भी पढ़ें: भारत के जिगरी दोस्त पर पहले किया हमला, फिर जारी किया वीडियो, यूक्रेन के एक्शन से हिली दुनियादरअसल जुलाई 2021 में जब पहली बार मॉस्को एयर शो में एक ढके हुए विमान से पर्दा उठा तो दुनिया दंग रह गई। रूस ने एक ऐसा फाइटर जेट पेश किया था जो सिंगल इंजन का था। बेहद आधुनिक था और जिसका नाम रखा गया चेकमेट। रूस के पास पहले से ही एसयू 57 जैसा भारी और दोहरे इंजन वाला पांचवी पीढ़ी का विमान मौजूद है। लेकिन एसयू 75 को रूस ने लाइट टैक्टिकल एयरक्राफ्ट के तौर पर पेश किया। हालांकि साल 2021 के बाद से यह प्रोजेक्ट कई मुश्किलों में फंस गया। पहले इसकी उड़ान 2023 में होनी थी, लेकिन अब इसके 2027 तक आसमान में पहुंचने की उम्मीद है। ताजा रिपोर्ट बताती है कि साल 2021 में जो मॉडल हमने देखा था असली प्रोटोटाइप उससे काफी अलग होने वाला है। रूस ने एसयू 57 को बनाने के दौरान जो कड़वे सबक सीखे और जो तकनीक विकसित की उसे अब एसयू 75 में डाल दिया जा रहा है। इसके विंग डिजाइन और टेल यानी पूंछ के हिस्से में बड़े बदलाव किए गए हैं ताकि इसकी स्टील क्षमता यानी रडार से बचने की ताकत को और बेहतर बनाया जा सके।इसे भी पढ़ें: ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट कासल पर इजरायली झंडा देख ईरान ने ऐसा धमकाया, ट्रंप-नेतन्याहू के बीच गाली-गलौच तक हो गई? एसयू 75 की सबसे बड़ी खासियत इसका ओपन आर्किटेक्चर है। इसका मतलब है कि खरीदार देश अपनी जरूरत के हिसाब से इसमें बदलाव कर सकता है। इसमें एक एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पायलट असिस्टेंट सिस्टम दिया गया है। यह युद्ध के दौरान पायलट के तनाव को कम करता है और एक को पायलट की तरह काम करता है। जैसे अमेरिका के पास भारी F2 और हल्का F35 है, वैसे ही रूस अब SU 57 और SU 75 की जोड़ी बना रहा है। यह इंजन हथियार और एवियनिक्स के मामले में एसयू 57 का ही छोटा लेकिन फुर्तीला वर्जन है। यह विमान अपने अंदरूनी वेपन बे में कई तरह की मिसाइलें ले जा सकता है। जिससे रडार पर इसकी पहचान करना लगभग नामुमकिन हो जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:00:34 +0530</pubDate>
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<title>Delcy Rodriguez India Visit: तेल पर खेल, भारत&#45;वेनेजुएला की बड़ी बैठक</title>
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<description><![CDATA[ विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को नई दिल्ली में वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से मुलाकात की और भारत और वेनेजुएला के बीच साझेदारी को मजबूत करने के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता की सराहना की। विदेश मंत्री ने आशा व्यक्त की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रोड्रिगेज़ की मुलाकात से द्विपक्षीय सहयोग में और अधिक वृद्धि होगी। मुलाकात के बाद, विदेश मंत्री जयशंकर ने प्रस्थान किया। रोड्रिगेज़ प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक करेंगे, जिसमें भारत-वेनेजुएला संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा होगी और ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और निवेश, फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में आगे सहयोग के रास्ते तलाशे जाएंगे।इसे भी पढ़ें: मोदी सरकार का बड़ा फैसला, भारत में बदले विदेशियों के वीजा नियमरोड्रिगेज़ दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहरा करने के उद्देश्य से पांच दिवसीय भारत दौरे पर बुधवार को नई दिल्ली पहुंचे। विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक्स पर पोस्ट किया कि यह यात्रा भारत-वेनेजुएला संबंधों को और गहरा करेगी और द्विपक्षीय साझेदारी में मिली गति को मजबूत करेगी। नई दिल्ली पहुंचने पर वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज का हार्दिक स्वागत है। अपनी यात्रा के दौरान, कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, रोड्रिग्ज के साथ आए वेनेजुएला के प्रतिनिधिमंडल ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटो क्षेत्रों से जुड़े कई स्थलों का दौरा करेंगे ताकि भारत की तकनीकी और औद्योगिक क्षमताओं की जानकारी प्राप्त कर सकें और सहयोग के अवसरों का पता लगा सकें।इसे भी पढ़ें: मोदी सरकार ने लगाया बड़ा दांव! सरकारी बॉन्ड पर कैपिटल गेन्स टैक्स खत्म, विदेशी निवेशकों को बड़ी राहत | Capital Gains Tax Removedविदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ऊर्जा और निवेश के क्षेत्रों में वेनेजुएला का एक महत्वपूर्ण भागीदार रहा है। भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने ऊर्जा क्षेत्र में वेनेजुएला में महत्वपूर्ण निवेश किया है, और वे अपनी उपस्थिति को और बढ़ाने के अवसरों का पता लगाने के लिए उत्सुक हैं। भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा क्षेत्र, व्यापार और वैश्विक दक्षिण के प्रति साझा प्रतिबद्धता के सहयोग से घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलेगी और विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच जुड़ाव गहरा होगा। अमेरिका द्वारा दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला पर हमला करने और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार करने के बाद, रोड्रिगेज ने 5 जनवरी को वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:00:32 +0530</pubDate>
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<title>अपनी चीजें अपने पास रखिए, मैं किसी और को बेच दूंगा...चीन का मिला साथ तो लूला ने ट्रंप को दिया करारा जवाब</title>
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<description><![CDATA[ लैटिन अमेरिका से लेकर वॉशिंगटन और बीजिंग तक फैली वैश्विक कूटनीति के बीच एक नया और बेहद तीखा मोड़ आ गया है। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डी सिल्वा ने अमेरिका के सख्त रवैये के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलते हुए बीजिंग (चीन) के साथ अपने नए व्यापारिक गठबंधन का खुलकर जश्न मनाया है। हाल ही में चीन ने ब्राजील को &#039;फुट-एंड-माउथ&#039; रोग से मुक्त देश के रूप में आधिकारिक मान्यता दे दी है। चीन के इस फैसले की सराहना करते हुए राष्ट्रपति लूला ने इसे सीधे तौर पर अमेरिका की मनमानी का करारा जवाब बताया है।  गोइयास राज्य में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान वामपंथी नेता लूला का अंदाज बेहद आक्रामक और बेबाक नजर आया। अमेरिकी व्यापारिक दबाव को पूरी तरह खारिज करते हुए लूला ने मंच से दो टूक कहा कि अगर आप (अमेरिका) हमसे सामान नहीं खरीदना चाहते, तो कोई बात नहीं। मैं इसे किसी और को बेच दूंगा।इसे भी पढ़ें: भारत को ऑफर देकर रूस भरेगा Su-57 की पहली सफल उड़ान, पेंटागन से लेकर बीजिंग तक सब हैरान!लूला ने खुलासा किया कि हाल ही में अमेरिका और ब्राजील के व्यापार वार्ताकारों के बीच तीन बार उच्च स्तरीय मुलाकातें हुईं, लेकिन अमेरिकी टैरिफ (आयात शुल्क) के कड़े प्रस्तावों के चलते दोनों देश किसी भी समझौते पर नहीं पहुंच सके। लूला के इस बयान से साफ है कि ब्राजील अब आर्थिक मोर्चे पर सुपरपावर अमेरिका के सामने झुकने को तैयार नहीं है।अमेरिकी विदेश मंत्री पर फूटा गुस्साअपनी इस कहानी में राष्ट्रपति लूला ने न सिर्फ बाहरी बल्कि घरेलू विरोधियों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने ब्राजील के दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। लूला ने कहा कि बोल्सोनारो ने खुद वाशिंगटन पर इस बात का दबाव बनाया कि वे ब्राजील पर भारी टैरिफ लागू करें। इसके साथ ही लूला के निशाने पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी रहे। रुबियो की तीखी आलोचना करते हुए लूला ने उन्हें सीधे तौर पर &#039;लैटिन अमेरिका विरोधी&#039; करार दिया और कहा कि वे ब्राजील को बिल्कुल पसंद नहीं करते हैं।बोल्सोनारो की सफाई और दूतावास का सन्नाटादूसरी तरफ, आरोपों से घिरे फ्लेवियो बोल्सोनारो ने इस पूरे विवाद पर अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर यह आग्रह किया था कि वे ब्राजील की कंपनियों पर किसी भी तरह का दंडात्मक टैरिफ न लगाएं। हालांकि, लूला के इस तीखे और कड़े बयानों के बाद कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज है, लेकिन ब्राजील स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस पूरे मामले और टिप्पणी के अनुरोध पर फिलहाल पूरी तरह चुप्पी साध रखी है।  चीन की इस नई मान्यता ने ब्राजील को एक बड़ा बाजार और अमेरिका के खिलाफ मजबूत कूटनीतिक ढाल दे दी है, जिसने ग्लोबल ट्रेड वॉर को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:00:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Ohio में भारतीय की रफ़्तार का कहर, High&#45;Speed Chase में गर्भवती प्रेमिका की मौत, Deportation तय!</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में एक भारतीय नागरिक पर ओहायो में एक घातक तेज़ रफ़्तार कार दुर्घटना के सिलसिले में आरोप लगाया गया है, जिसमें उसकी गर्भवती किशोरी साथी और उसके अजन्मे बच्चे की मौत हो गई थी। पीड़ित परिवार ने उसके निर्वासन की मांग की है। अधिकारियों के अनुसार, 16 फरवरी को 17 वर्षीय ऐशली होम्स रेंज रोवर वेलार में यात्री थी, जब वाहन ने पुलिस के आदेश पर रुकने से इनकार कर दिया और पीछा करना शुरू हो गया। ओहायो स्टेट हाईवे पेट्रोल की दुर्घटना रिपोर्ट में कहा गया है कि एसयूवी पहले 55 मील प्रति घंटे की गति सीमा वाले क्षेत्र में 79 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी, जिसके बाद पीछा करने के दौरान इसकी रफ्तार 120 मील प्रति घंटे से अधिक हो गई। अधिकारियों ने बताया कि चालक ने मोड़ पर नियंत्रण खो दिया, जिससे गाड़ी सामने से आ रही गाड़ियों के बीच घुस गई, एक जीप से टकरा गई और कई बार पलट गई। होम्स गाड़ी से बाहर गिर गईं और उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिनकी वजह से उनकी मृत्यु हो गई। उनके गर्भ में पल रहे बच्चे की भी जान नहीं बची।इसे भी पढ़ें: भारत को ऑफर देकर रूस भरेगा Su-57 की पहली सफल उड़ान, पेंटागन से लेकर बीजिंग तक सब हैरान!आरोपी, 33 वर्षीय भारतीय नागरिक तरसेम सिंह पर डार्क काउंटी की ग्रैंड जूरी ने गैर इरादतन हत्या, लापरवाही से हत्या और गंभीर वाहन दुर्घटना में हत्या सहित कई आरोपों में अभियोग लगाया है। उन्हें 10 लाख अमेरिकी डॉलर के बॉन्ड पर हिरासत में रखा गया है और दोषी साबित होने तक उन्हें निर्दोष माना जा रहा है। इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट ने सिंह के खिलाफ हिरासत आदेश जारी किया है, जिससे आपराधिक मामला समाप्त होने के बाद निर्वासन की कार्यवाही का रास्ता खुल सकता है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने कहा है कि वह फरवरी 2017 में कैलिफोर्निया में दक्षिणी सीमा के रास्ते अवैध रूप से अमेरिका में दाखिल हुए थे और बाद में एक न्यायाधीश द्वारा उन्हें बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया था। इस मामले में जूरी ट्रायल 17 से 21 अगस्त तक निर्धारित है। सिंह के वकील एलेक्स पेंडल ने लंबित कार्यवाही पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।इसे भी पढ़ें: अब अमेरिका पर चलेगा भारतीय ब्रांड्स का सिक्का! ओयो के रितेश अग्रवाल का बड़ा दावा- बॉलीवुड-आईटी से आगे बढ़ेगी भारत की &#039;सॉफ्ट पावर&#039;इस बीच, होम्स के परिवार ने कहा है कि सिंह अजन्मे बच्चे के पिता थे और आरोप लगाया है कि ऐशली ने कई बार रिश्ता तोड़ने की कोशिश की थी। उनकी मां, एनेट होम्स ने सिंह के निर्वासन का समर्थन करते हुए कहा है कि कोई भी परिणाम इस नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता। न्यूज़वीक से बात करते हुए उन्होंने कहा कि किसी को भी अपने पहले बच्चे के साथ गर्भवती होने पर मरने का हक नहीं होना चाहिए। मुझे उसके देश से स्थायी रूप से निकाले जाने से कोई आपत्ति नहीं है। मैं उसे अब अमेरिका में नहीं देखना चाहती। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:00:30 +0530</pubDate>
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<title>UNSC की पावर टेबल से Pakistan बाहर, 5 नए देशों की एंट्री, जानें पूरी List</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान का कार्यकाल इस वर्ष समाप्त होने वाला है, क्योंकि पांच नए देशों को विश्व की सबसे शक्तिशाली राजनयिक संस्था के अस्थायी सदस्य के रूप में चुना गया है। 3 जून को हुए UNSC चुनावों के एक महत्वपूर्ण परिणाम के रूप में, किर्गिस्तान ने अपने इतिहास में पहली बार सुरक्षा परिषद में सीट हासिल की। ​​ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल, त्रिनिदाद और टोबैगो तथा जिम्बाब्वे को भी दो साल के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्य के रूप में चुना गया है। नव निर्वाचित देश पाकिस्तान, पनामा, डेनमार्क, ग्रीस और सोमालिया का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 2026 के अंत में समाप्त हो रहा है। नए सदस्य आधिकारिक तौर पर 1 जनवरी, 2027 को अपना पदभार ग्रहण करेंगे और 31 दिसंबर, 2028 तक अपने कार्यकाल को जारी रखेंगे।इसे भी पढ़ें: Israel-Russia Blacklisted: UN रिपोर्ट में यौन हिंसा के गंभीर आरोप, Hamas को लेकर क्या दावा किया गया?किर्गिस्तान ने इतिहास रचाइस वर्ष के चुनावों की सबसे बड़ी उपलब्धि किर्गिस्तान का सुरक्षा परिषद में ऐतिहासिक प्रवेश था। रिपोर्टों के अनुसार, पाँच उपलब्ध सीटों के लिए सात देशों ने चुनाव लड़ा। ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल, त्रिनिदाद और टोबैगो तथा जिम्बाब्वे ने पहले दौर के मतदान में जीत हासिल की। ​​अंतिम सीट के लिए किर्गिस्तान और फिलीपींस के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। तीन अतिरिक्त दौर के मतदान के बाद, किर्गिस्तान विजयी हुआ और सुरक्षा परिषद में अपनी पहली सदस्यता प्राप्त की।संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के चुनाव कैसे होते हैं?संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सीट जीतने के लिए, उम्मीदवार देश को संयुक्त राष्ट्र महासभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्य देशों के दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने होंगे। यदि सभी 193 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश मतदान में भाग लेते हैं, तो चुनाव के लिए कम से कम 129 वोटों की आवश्यकता होती है। मतदान से अनुपस्थित रहने वाले देशों को कुल वोटों की गिनती में शामिल नहीं किया जाता है। चुनाव प्रक्रिया क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है, जिसमें दुनिया भर के विभिन्न भौगोलिक समूहों के बीच सीटें आवंटित की जाती हैं।इसे भी पढ़ें: यौन हिंसा पर UN की Blacklist से भड़का Israel, Guterres से तोड़े संबंध, कहा- यह शर्मनाक हैसंयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचनासंयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं।पांच देशों को स्थायी सदस्यता प्राप्त है:संयुक्त राज्य अमेरिकारूसचीनयूनाइटेड किंगडमफ्रांस  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:00:27 +0530</pubDate>
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<title>अभी से तुम्हारा सब काम खत्म... IPL पर कब्जा करना चाहती थी D&#45;कंपनी? ललित मोदी ने खोला Dawood के उस एक फोन कॉल का राज</title>
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<description><![CDATA[ इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के संस्थापक और पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने एक ऐसा सनसनीखेज दावा किया है, जिसने क्रिकेट जगत से लेकर अंडरवर्ल्ड के गलियारों तक हड़कंप मचा दिया है। ललित मोदी के मुताबिक, अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसके &#039;डी-कंपनी&#039; सिंडिकेट से लगातार मिल रही जान से मारने की धमकियां ही वो सबसे बड़ी वजह थीं, जिसके चलते उन्होंने हमेशा के लिए क्रिकेट प्रशासन से दूरी बना ली। समाचार एजेंसी ANI को दिए एक विस्फोटक इंटरव्यू में, भारत के अरबों डॉलर के टी20 टूर्नामेंट (IPL) के सूत्रधार रहे ललित मोदी ने वसूली की कोशिशों, हत्या की साजिशों और एक खौफनाक रात की उस कहानी का पर्दाफाश किया है, जब सैटेलाइट फोन के जरिए उनका सामना सीधे भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम से हुआ था। इसे भी पढ़ें: मैं तो बस एक पाला-पोसा बॉयफ्रेंड था..., ललित मोदी ने सुष्मिता सेन संग अपने रिश्ते पर किया अब तक का सबसे हैरान करने वाला खुलासा!सट्टेबाजी का &#039;सिंडिकेट&#039; और आधी रात का वो फोन कॉलवित्तीय और प्रशासनिक जांचों के बीच साल 2010 में भारत छोड़ने के बाद से लंदन में रह रहे ललित मोदी ने बताया कि आईपीएल की शुरुआत के साथ ही अंडरवर्ल्ड उन पर हावी होना चाहता था। ललित मोदी के अनुसार मैंने डी-कंपनी के अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क को आईपीएल में एंट्री देने और उनके हिसाब से चीजें चलाने से साफ इनकार कर दिया था। बस इसी इनकार ने मुझे डी-कंपनी के निशाने पर ला खड़ा किया। मोदी ने खुलासा किया कि उन्हें झुकने के लिए मजबूर करने के मकसद से लगातार जबरन वसूली के फोन आ रहे थे और उनकी जान लेने की साजिशें रची जा रही थीं। बात इतनी बढ़ गई थी कि एक रात सीधे सैटेलाइट फोन के जरिए दाऊद इब्राहिम से उनका आमना-सामना कराया गया, ताकि उन्हें डराया जा सके।इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | Sushmita Sen के बचाव में उतरे Lalit Modi, &#039;काला हिरण&#039; फिल्म पर सलमान खान का तगड़ा एक्शन!सुरक्षा के साये में कटे दिन और भारत छोड़ने का फैसलाललित मोदी ने साफ किया कि यह कोई मामूली धमकी नहीं थी, बल्कि एक ऐसा खौफ था जो उनके और उनके परिवार के सिर पर चौबीसों घंटे मंडराता रहता था। हालांकि भारतीय क्रिकेट को दुनिया का सबसे बड़ा ब्रांड बनाने के पीछे उनका दिमाग था, लेकिन अंडरवर्ल्ड के इस लगातार बढ़ते दबाव और जान के खतरे ने उन्हें अंदर तक हिला दिया था। क्रिकेट के इस पूर्व &#039;बॉस&#039; का यह बयान अब सोशल मीडिया से लेकर खेल जगत में तेजी से वायरल हो रहा है। इस खुलासे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि क्रिकेट के सबसे चकाचौंध भरे फॉर्मेट यानी आईपीएल के पीछे की दुनिया कितनी खतरनाक और खौफनाक रही है।अभी से तुम्हारा सब काम खत्म...ललित मोदी के अनुसार, सबसे सीधा टकराव 2012 में लंदन में हुआ था। उन्होंने दावा किया कि लंदन स्थित एक दलाल ने उनसे सुबह 3:30 बजे संपर्क किया और उन पर बाबा के नाम से जाने जाने वाले एक प्रभावशाली मध्यस्थ के पेंटहाउस अपार्टमेंट में जाने का दबाव डाला।  वहाँ पहुँचते ही, मध्यस्थ कथित तौर पर छत पर गया, सैटेलाइट फोन से दाऊद इब्राहिम को फोन किया और भगोड़े को स्पीकरफोन पर डालकर मोदी से बात करवाई। ललित मोदी ने एएनआई को बताया, मैं डर के मारे कांप गया था, मैं आपको बता रहा हूँ। इसमें कोई शक नहीं। ठीक उसी समय। उन्होंने आगे बताया कि उस समय ब्रिटिश एमआई5 की सुरक्षा नीचे तैनात थी। वह बस इतना कहता है, अभी से तुम्हारा सब काम खत्म&#039; और फोन रख देता है। मोदी ने आरोप लगाया कि इसके बाद बिचौलिए के साप्ताहिक फोन आने शुरू हो गए, जो वित्तीय मुआवजे की मांग करता था और दावा करता था कि अंडरवर्ल्ड आईपीएल फ्रेंचाइजी पर नियंत्रण चाहता है। सिंडिकेट ने कथित तौर पर तर्क दिया कि मोदी पर उनका कर्ज है क्योंकि उनके प्रशासनिक फैसलों के कारण उन्हें सट्टा बाजार में भारी नुकसान हुआ था। क्रिकेट छोड़ने का फैसलाजब मोदी से पूछा गया कि उन्हें अंडरवर्ल्ड की सक्रिय हिट लिस्ट से आखिरकार कैसे हटाया गया, तो उन्होंने खुलासा किया कि खेल से उनका बाहर निकलना ही अंतिम सौदेबाजी का हथियार था। उन्होंने दावा किया कि सिंडिकेट ने अंततः एक लाइव बयान प्रसारित किया जिसमें घोषणा की गई कि उनके साथ उनके मुद्दे सुलझ गए हैं। मोदी ने स्पष्ट किया, मैंने इसे सुलझाया नहीं। मैंने बस कहा कि मैं क्रिकेट से संन्यास ले रहा हूँ। मैंने अपना वचन दिया। मैं संन्यास ले रहा हूँ। जब उनसे स्पष्ट रूप से पूछा गया कि क्या दाऊद इब्राहिम क्रिकेट जगत से उनके पूर्ण अलगाव के पीछे मुख्य कारण था, तो मोदी ने जवाब दिया: यह सबसे बड़े कारणों में से एक है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:00:26 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan Motorway Gang&#45;Rape Case: लाहौर हाईकोर्ट ने लगाई मुहर, दोनों दरिंदों को मिलेगी फांसी</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान की एक उच्च अदालत ने 2020 में पाकिस्तानी मूल की एक फ्रांसीसी महिला के साथ बलात्कार के दो दोषियों को दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा है। यह मामला, जिसे मोटरवे गैंगरेप कांड के नाम से जाना जाता है, ने पूरे देश में सनसनी फैला दी और पाकिस्तान में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए। आतंकवाद विरोधी अदालत ने 20 मार्च, 2021 को दो दोषियों, आबिद अली उर्फ ​​मल्ही और शफकत अली उर्फ ​​बग्गा को आजीवन कारावास और कई अन्य कारावास की सजा के साथ-साथ मौत की सजा भी सुनाई थी। हालांकि, दोनों ने पांच दिन बाद अदालत में अपनी सजा को चुनौती दी। एक अदालत अधिकारी ने बताया, लाहौर उच्च न्यायालय (एलएचसी) ने आज लाहौर में 2020 में पाकिस्तानी मूल की फ्रांसीसी महिला के साथ हुए कुख्यात बलात्कार मामले में दोषी ठहराए गए दोनों व्यक्तियों की अपील खारिज कर दी और निचली अदालत के मौत की सजा के फैसले को बरकरार रखा।इसे भी पढ़ें: UNSC की पावर टेबल से Pakistan बाहर, 5 नए देशों की एंट्री, जानें पूरी Listलाहौर उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति सैयद शाहबाज अली रिजवी और न्यायमूर्ति तारिक महमूद बाजवा शामिल थे, ने बुधवार, 3 जून को फैसला सुनाया, जब अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष दोनों ने दोषियों की याचिका के संबंध में अपनी दलीलें पूरी कर लीं। अपील में दावा किया गया कि मामले में कई खामियों के कारण अभियोजन पक्ष के घटनाक्रम पर संदेह पैदा होता है और निचली अदालत का फैसला बहुत कठोर और कानून के स्थापित सिद्धांतों के विरुद्ध है। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने दोषियों के खिलाफ सजा को बरकरार रखने के लिए पुख्ता सबूत पेश किए। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में आतंकवाद विरोधी अदालत के फैसले को बरकरार रखा और बचाव पक्ष के वकीलों द्वारा अपनी दलीलें पूरी करने के बाद अपनी अंतिम दलीलें शुरू कीं। इसे भी पढ़ें: Operation Sheruwali के तहत Rajouri के जंगलों में सेना का सबसे बड़ा ऑपरेशन और गहराया, LoC पर घिर गए आतंकी!2020 का मोटरवे सामूहिक बलात्कार का मामलासितंबर 2020 में एक भयावह सामूहिक बलात्कार की घटना का खुलासा हुआ, जिसमें 32 वर्षीय महिला अपने तीन बच्चों के साथ लाहौर के पास सियालकोट-लाहौर मोटरवे पर फंस गई थी, जब उनकी कार का ईंधन खत्म हो गया। दो हथियारबंद लोगों ने कार में घुसकर महिला को लूट लिया और उसे पास के एक खाली खेत में घसीटकर ले गए, जहां दोनों ने उसके बच्चों के सामने बंदूक की नोक पर उसके साथ बलात्कार किया। इस मामले में 9 सितंबर, 2020 को गुज्जरपुरा पुलिस द्वारा पाकिस्तान दंड संहिता और आतंकवाद विरोधी अधिनियम, 1947 की कई धाराओं के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई थी। सामूहिक बलात्कार के इस मामले ने व्यापक आक्रोश और त्वरित न्याय की मांग को लेकर सार्वजनिक प्रदर्शनों को जन्म दिया। आंदोलन ने तत्कालीन पंजाब पुलिस प्रमुख की उन टिप्पणियों की भी आलोचना की, जिनमें उन्होंने घटना के लिए कुछ हद तक पीड़िता को दोषी ठहराया था। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:00:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Iran के Supreme Leader Khamenei का बड़ा ऐलान, एकजुट होकर दुश्मन की साजिश को करें फेल</title>
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<description><![CDATA[ इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का एक संदेश इमाम खुमैनी के पवित्र मकबरे पर उनकी पुण्यतिथि की 37वीं बरसी के अवसर पर पढ़ा गया। तसनीम समाचार एजेंसी के मुताबिक, इस संदेश में सर्वोच्च नेता ने कहा, &quot;सभी को दृढ़ता, दूरदर्शिता, एकता और आपसी विश्वास को बनाए रखते हुए और शत्रु की बातों का समर्थन न करते हुए शत्रु की साजिशों को नाकाम करना चाहिए। इस बयान में वार्षिक स्मरणोत्सव के महत्व पर प्रकाश डाला गया और इसे इमाम खुमैनी की विचारधारा के प्रति राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के नवीनीकरण के रूप में वर्णित किया गया। उन्होंने कहा कि खुर्दाद के चौदहवें दिन के शहीद नेता ने इसे इमाम खुमैनी (रह.) के साथ राष्ट्र की प्रतिज्ञा के लिए एक वार्षिक अवसर में बदल दिया है।संदेश में ईरान के क्रांतिकारी नेतृत्व के साथ वैचारिक निरंतरता पर भी बल दिया गया।इसे भी पढ़ें: Israel और Lebanon युद्धविराम बढ़ाने पर सहमत, हिजबुल्ला के प्रवेश पर लगेगा बैन, अमेरिका की मध्यस्थता में बनी बात उन्होंने कहा, &quot;ईरानी राष्ट्र, अपने नवीकृत मिशन के साथ, प्रतिरोध मोर्चे के साथ-साथ स्वतंत्र राष्ट्रों के लिए गौरव का स्रोत बन गया है। इस संदेश में इज़राइल के साथ क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनावों का भी स्पष्ट उल्लेख किया गया था। इसमें कहा गया, अस्थिर ज़ायोनी शासन और इज़राइल का घातक ट्यूमर अपने भयावह जीवनकाल के अंतिम चरण में पहुँच चुके हैं, और ईश्वर की कृपा से और दस साल पहले शहीद हुए नेता के दृढ़ और दूरदर्शी शब्दों के अनुसार, ईश्वर की इच्छा से वे उस तारीख के बाद 25 वर्ष नहीं देख पाएंगे। इमाम खुमैनी दरगाह पर आयोजित समारोह के दौरान, यह संदेश अधिकारियों और वार्षिक कार्यक्रम में एकत्रित प्रतिभागियों की उपस्थिति में पढ़ा गया, जो दिवंगत ईरानी नेता के निधन की स्मृति में आयोजित किया गया था, जिन्हें व्यापक रूप से इस्लामी गणराज्य का संस्थापक माना जाता है।इसे भी पढ़ें: Donald Trump को बड़ा झटका! अमेरिकी संसद में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव पास, अपनों ने ही बदला पालाइससे पहले, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने निजी तौर पर अपने सहयोगियों से कहा है कि अगर तेहरान अमेरिकी सैनिकों की मौत के लिए जिम्मेदार होता है तो वह ईरान के साथ युद्धविराम समाप्त करने पर विचार करेंगे। समाचार रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति का रुख ईरान के साथ व्यापक सैन्य संघर्ष को फिर से शुरू करने की अनिच्छा दर्शाता है, भले ही झड़पें जारी हों। अधिकारियों ने संकेत दिया कि ट्रंप पश्चिम एशिया में व्यापक युद्ध का जोखिम उठाने के बजाय &quot;कुछ हफ्तों या महीनों तक छोटी-मोटी झड़पों&quot; को बर्दाश्त करने के लिए तैयार हो सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Kuwait Airport पर Iranian Drone Attack, एक भारतीय की मौत, सामने आया तबाही का खौफनाक Videoइस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही राजनयिक बातचीत गंभीर गतिरोध में फंस गई है, क्योंकि तेहरान ने प्रक्रिया की शुरुआत में ही पूंजी को तुरंत मुक्त करने की कठोर मांग रखी है। द जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, राजनयिक गतिरोध ईरान के इस जिद से उत्पन्न हुआ है कि समझौते के पहले चरण में ही अरबों डॉलर की फ्रीज की गई संपत्तियों में से &quot;नकदी&quot; जारी की जाए। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:00:23 +0530</pubDate>
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<title>डीआर काँगो: इबोला से निपटने के लिए, यूएन एजेंसियों ने बढ़ाया अपने प्रयासों का दायरा</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र ने अपने साझीदार संगठनों के साथ मिलकर, इबोला वायरस के प्रकोप से जूझ रहे काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) और युगांडा में बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए अपने प्रयास तेज़ किए हैं.  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 08:59:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>UNIFIL: लेबनान में हमले में एक और शान्तिरक्षक की मौत</title>
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<description><![CDATA[ लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अन्तरिम बल (UNIFIL) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, देश के दक्षिण-पूर्व में मरजायून के पास एक चौकी पर मोर्टार हमले में गुरुवार सुबह, संयुक्त राष्ट्र के एक शान्तिरक्षक की मौत हो गई. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 08:59:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>UNIFIL में तैनात भारतीय मेजर अभिलाषा बराक को सैन्य लैंगिक पैरोकार सम्मान</title>
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<description><![CDATA[ भारत की एक शान्तिरक्षक मेजर अभिलाषा बराक को वर्ष 2025 के &#039;सैन्य लैंगिक पैरोकार&#039; पुरस्कार के लिए चुना गया है. मेजर अभिलाषा बराक, लेबनान के दक्षिणी इलाक़े में यूएन मिशन (UNIFIL) में तैनात भारतीय बटालियन में सामुदायिक सम्पर्क टीम की कमांडर और लैंगिक समन्वय अधिकारी के रूप में सेवारत हैं. मेजर अभिलाषा ने यूनीफ़िल में सैन्य अभियानों, गश्त और नागरिक-सैन्य गतिविधियों में लैंगिक दृष्टिकोण को शामिल करने में अहम भूमिका निभाई हैं...(वीडियो) ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 08:59:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>मध्य पूर्व: लेबनान में युद्धविराम की घोषणा, महासचिव ने किया स्वागत</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इसराइल और लेबनान के प्रतिनिधियों के बीच, 2-3 जून को संयुक्त राज्य अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में हुई चौथी उच्चस्तरीय बैठक के बाद युद्धविराम की घोषणा का स्वागत किया है.   ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 08:59:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>शांति वार्ता हुई भंग! ईरान ने कुवैत&#45;बहरीन पर दागीं मिसाइलें, जवाब में अमेरिका ने किश्म द्वीप पर बोला हमला | Middle East War</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने पुष्टि की है कि ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन की ओर दागी गई कई मिसाइलें या तो तकनीकी खराबी के कारण लक्ष्य तक पहुंचने में विफल रहीं या उन्हें हवा में ही मार गिराया गया। इस हिमाकत के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने पर हवाई हमला कर दिया है।अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बयान जारी कर बताया कि ईरान के मिसाइल हमलों के तुरंत बाद अमेरिकी वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई की।अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने बताया कि उसकी ओर से हमला होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित किश्म द्वीप पर ईरान के एक सैन्य स्टेशन पर किया गया, जहां एक जल-शोधन संयंत्र भी है।
अमेरिका के अनुसार, ईरान ने कुवैत और बहरीन की ओर मिसाइलें दागीं, लेकिन वे अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं। कुवैत की ओर दागी गई दो मिसाइलें रास्ते में ही विफल हो गईं, जबकि बहरीन की ओर दागी गई मिसाइलों को अमेरिका व बहरीन की सेना ने मिलकर नष्ट कर दिया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान ने अमेरिका और इजराइल के साथ जारी युद्ध में संघर्षविराम बढ़ाने के लिए मध्यस्थों से बातचीत रोक दी है।
ईरान की दो अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसियों की खबर में मंगलवार को कहा गया कि ईरान समर्थित लेबनानी मिलिशिया हिजबुल्ला के साथ जारी लड़ाई के दौरान बेरूत पर बमबारी की इजराइल की धमकी के बाद तेहरान ने मध्यस्थों से बातचीत रोक दी।
ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड की करीबी माने जाने वाली समाचार एजेंसियों, फार्स और तसनीम की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब ईरान इस बात पर जोर दे रहा है कि लेबनान में हो रही लड़ाई अमेरिका के साथ युद्ध को लेकर जारी व्यापक युद्धविराम वार्ता का हिस्सा है।
मध्यस्थता में शामिल एक क्षेत्रीय अधिकारी ने कहा कि ईरान ने मंगलवार को लेबनान में युद्धविराम लागू करने की बात कहने के बाद से कोई संपर्क नहीं किया है।
 उन्होंने कहा कि इससे पहले ईरान ने संकेत दिया था कि जब तक लेबनान में संघर्षविराम लागू नहीं होता, तब तक वार्ता आगे नहीं बढ़ सकती।
हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता में गतिरोध की खबरों को ‘‘झूठा और गलत’’ बताया।इसे भी पढ़ें: आजमगढ़ से पाक समर्थित संदिग्ध की गिरफ्तारी पर सियासत तेज: ओम प्रकाश राजभर का सपा पर तीखा हमला
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा, ‘‘हमारे बीच बातचीत लगातार जारी है, जिसमें चार दिन पहले, तीन दिन पहले, दो दिन पहले, एक दिन पहले और आज भी बातचीत हुई है। ये बातचीत किस दिशा में जाएगी, यह कोई नहीं जानता, लेकिन मैंने ईरान से कहा है कि अब समय आ गया है कि किसी भी तरह आपको एक समझौता करना होगा।’’
 अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने वाशिंगटन (अमेरिकी राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में कांग्रेस के समक्ष सुनवाई के दौरान किसी रुकावट पर सीधे टिप्पणी नहीं की। उन्होंने वार्ता के परमाणु पहलू को लेकर आशावादी रुख अपनाया, लेकिन साथ ही चेताया कि ‘‘एक ऐसा समझौता हो जो स्वीकार्य हो, इसकी कोई गारंटी नहीं है।’’इसे भी पढ़ें: Quetta Train Blast के बाद पाकिस्तान सेना का एक्शन, Balochistan में किया बड़ा एनकाउंटर, 17 आतंकवादी ढेर 
इसी बीच, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने एक तेल टैंकर को रोकने के लिए मिसाइल दागी, जो अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन करते हुए ईरानी बंदरगाह की ओर जा रहा था।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश में रोका गया सातवां जहाज है।
पोस्ट में कहा गया कि बोत्सवाना के झंडे वाले मालवाहक जहाज़ एम/टी लेक्सी को बार-बार चेतावनी देने के बाद भी चालक दल के न रुकने पर एक विमान ने ‘हेलफायर’ मिसाइल दागकर उसके इंजन रूम को निशाना बनाया।Stay updated with International
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:37 +0530</pubDate>
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<title>Quetta Train Blast के बाद पाकिस्तान सेना का एक्शन, Balochistan में किया बड़ा एनकाउंटर, 17 आतंकवादी ढेर</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में एक यात्री ट्रेन पर हुए भीषण आत्मघाती हमले के बाद सुरक्षा बलों ने चौतरफा कार्रवाई शुरू कर दी है। पाकिस्तान सेना ने बलूचिस्तान के विभिन्न जिलों में एक बड़ा साझा सैन्य अभियान चलाते हुए कम से कम 17 संदिग्ध आतंकवादियों को मार गिराया है। सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई हाल ही में हुए रेलवे स्टेशन हमले के जवाब में की गई है।
 क्वेटा के एक रेलवे स्टेशन के पास 24 मई को यात्री ट्रेन पर किए गए आत्मघाती हमले में तीन सुरक्षाकर्मियों समेत कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए थे।
 पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर के अनुसार, हमले के बाद सुरक्षा बलों ने बलूचिस्तान के कई जिलों में एक साथ अभियान चलाए।इसे भी पढ़ें: World No.1 Aryna Sabalenka ने दिखाया दम, Naomi Osaka को सीधे सेटों में हराकर French Open से किया बाहर मस्तुंग, नुश्की, ज़ेहरी, खुज़दार और केच में चलाए गए इन अभियानों के दौरान आतंकियों के कई ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया।
 आईएसपीआर ने बताया कि सुरक्षा बलों की ‘फितना-ए-हिंदुस्तान’ संगठन से जुड़े आतंकियों के साथ मुठभेड़ हुई, जिसमें 17 आतंकवादी मारे गए। ये सभी इस क्षेत्र में कई आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे।
 सुरक्षा बलों ने इनके पास से हथियार, गोला-बारूद, भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और आईईडी बरामद किए।
 आईएसपीआर ने कहा कि अन्य आतंकियों के खिलाफ तलाशी अभियान अब भी जारी है।भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामदठिकानों को नेस्तनाबूद करने के बाद सुरक्षा बलों ने मौके से भारी मात्रा में सैन्य सामग्री जब्त की है, जिसमें शामिल हैं:अत्याधुनिक हथियार और स्वचालित बंदूकेंसैकड़ों की संख्या में गोला-बारूद (Ammunition)भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्रीतैयार आईईडी (Improvised Explosive Devices)इसे भी पढ़ें: IPL 2026 Final में &#039;King&#039; Kohli का कमाल, फुटबॉल स्टार Harry Kane भी हुए फैन, बोले- &#039;आप बेहतरीन हैं&#039; अभियान अभी भी जारीसेना के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि बलूचिस्तान से आतंकवादियों के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए तलाशी अभियान (Search Operation) अभी भी जारी है। फरार चल रहे अन्य आतंकियों और उनके मददगारों की तलाश में सुरक्षा बल लगातार जंगलों और पहाड़ी इलाकों में छापेमारी कर रहे हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:37 +0530</pubDate>
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<title>Explained Qeshm Island | अमेरिका ने ईरान के क़ेशम द्वीप पर क्यों किए नए हमले? जानें होर्मुज़ चोकपॉइंट और IRGC के &amp;apos;मिसाइल शहर&amp;apos; की पूरी कहानी</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी नाजुक संघर्षविराम (Ceasefire) उस समय खतरे में पड़ गया, जब अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क़ेशम द्वीप (Qeshm Island) पर जोरदार हमले किए। इस अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोनों से जवाबी हमले किए गए। हालांकि दोनों पक्षों के अधिकारी कूटनीतिक बातचीत के जरिए संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन इस नई शत्रुता ने पूरी वार्ता को पटरी से उतारने का जोखिम पैदा कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना ने शनिवार और रविवार को ईरान के गेरुक शहर के पास और क़ेशम द्वीप पर खुफिया सूचनाओं के आधार पर हवाई हमले किए। इसे भी पढ़ें: शांति वार्ता हुई भंग! ईरान ने कुवैत-बहरीन पर दागीं मिसाइलें, जवाब में अमेरिका ने किश्म द्वीप पर बोला हमला | Middle East Warकेशम द्वीप पर अमेरिकी हमलाअमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने शनिवार और रविवार को ईरान में गेरुक शहर के पास और केशम द्वीप पर हमले किए। इन हमलों में हवाई रक्षा प्रणालियों, एक ड्रोन ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और दो हमलावर ड्रोन को निशाना बनाया गया, जिनके बारे में कहा गया था कि वे इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही के लिए खतरा पैदा कर रहे थे।CENTCOM के अनुसार, इस ऑपरेशन में एक सक्रिय रडार इंस्टॉलेशन और एक ड्रोन कमांड सुविधा को निष्क्रिय कर दिया गया। आरोप था कि इन सुविधाओं का इस्तेमाल खाड़ी देशों और व्यापारिक जहाजों के खिलाफ मिसाइल हमलों को समन्वित करने के लिए किया जाता था।केशम द्वीप रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्यों है?केशम द्वीप होर्मुज़ जलडमरूमध्य के मुहाने पर स्थित है, जो दुनिया के सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट्स (तंग रास्तों) में से एक है। इस जलडमरूमध्य से वैश्विक LNG व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत और समुद्री मार्ग से होने वाले तेल शिपमेंट का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है। इसे भी पढ़ें: Quetta Train Blast के बाद पाकिस्तान सेना का एक्शन, Balochistan में किया बड़ा एनकाउंटर, 17 आतंकवादी ढेरअपनी भौगोलिक स्थिति के कारण, ईरान केशम पर तैनात सैन्य संपत्तियों का उपयोग करके इस जलमार्ग से होने वाली जहाजों की आवाजाही पर काफी प्रभाव डाल सकता है। यह जलमार्ग इराक, कुवैत, बहरीन और कतर जैसे देशों के लिए प्राथमिक समुद्री निर्यात मार्ग का काम करता है, और साथ ही UAE के ऊर्जा निर्यात का भी एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।IRGC का सैन्य किलासैन्य विश्लेषक अक्सर केशम को ईरान का &quot;न डूबने वाला विमानवाहक पोत&quot; बताते हैं, क्योंकि यहाँ व्यापक सैन्य बुनियादी ढांचा मौजूद है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पूरे द्वीप पर भूमिगत मिसाइल सुविधाओं और रक्षात्मक ठिकानों का एक नेटवर्क तैयार किया है, जिसके कारण इसे ईरान का &quot;मिसाइल शहर&quot; नाम दिया गया है। इनमें भूमिगत सुरंग प्रणालियाँ शामिल हैं, जिनके बारे में माना जाता है कि इनमें मिसाइल भंडारण और प्रक्षेपण स्थल हैं जो जहाज-रोधी बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों को तैनात करने में सक्षम हैं। द्वीप पर नौसैनिक सुविधाएँ भी हैं जिनका उपयोग रॉकेट और नौसैनिक खदानों से लैस तीव्र-हमला नौकाओं द्वारा किया जाता है, जो खाड़ी में संचालित बड़ी पारंपरिक नौसैनिक सेनाओं को चुनौती देने के लिए डिज़ाइन की गई झुंड-शैली की रणनीति को सक्षम बनाती हैं।क़ेशम के सैन्यीकरण के नागरिकों पर भी गंभीर परिणाम हुए हैंसंघर्ष के शुरुआती चरणों में, हवाई हमलों ने द्वीप पर एक प्रमुख विलवणीकरण संयंत्र को नष्ट कर दिया, जिससे लगभग 30 गांवों में ताजे पानी की आपूर्ति बाधित हो गई और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लड़ाई की मानवीय लागत उजागर हुई। Stay updated with International
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<title>जापान में पाकिस्तान शर्मसार! बिना परमिट के बना डाली मस्जिद, जापानी प्रशासन ने लिया सख्त एक्शन</title>
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<description><![CDATA[ जापान में रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय के लिए एक बड़ी और असहज करने वाली स्थिति पैदा हो गई है। सैतामा प्रांत के कावागोए (Kawagoe) शहर में अवैध रूप से बनाई गई एक मस्जिद अब कानूनी विवादों में घिर गई है। इस मस्जिद का उद्घाटन इसी साल अप्रैल में जापान में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद की मौजूदगी में बड़े पैमाने पर हुआ था। लेकिन अब जापानी प्रशासन इस अवैध निर्माण को ढहाने (Demolish) की तैयारी कर रहा है। स्थानीय नगरपालिका और प्रशासनिक केंद्र (कावागोए सिटी हॉल) ने इस मामले पर अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि इमारत का निर्माण जापानी कानूनों का उल्लंघन करके किया गया है। कावागोए सिटी हॉल, जो शहर का नगरपालिका प्रशासनिक केंद्र है, ने इस अवैध रूप से बनी मस्जिद के बारे में अपना रुख साफ कर दिया है। सिटी हॉल के एक आधिकारिक बयान में कहा गया, &quot;यह इमारत (मस्जिद) एक शहरी विकास नियंत्रण क्षेत्र में बनाई गई थी, जहाँ आमतौर पर निर्माण की मनाही होती है, जब तक कि &#039;सिटी प्लानिंग एक्ट&#039; के तहत खास अनुमतियाँ न ले ली जाएँ।&quot;बयान में आगे कहा गया, &quot;जिस इमारत की बात हो रही है, उसे शहर की अनुमति के बिना बनाया गया था।&quot; इसमें यह भी बताया गया कि सिटी हॉल के अधिकारियों ने इसमें शामिल लोगों को सुधार के कदम उठाने के लिए मार्गदर्शन देने में काफी समय लगाया। सिटी हॉल के बयान के अनुसार, अधिकारियों को संबंधित पक्षों से मस्जिद को गिराने के अनुरोध भी मिले हैं, और इस प्रस्ताव को समीक्षा के लिए स्वीकार कर लिया गया है।जब यह पता चला कि मस्जिद अवैध रूप से बनाई गई थी, तो टोक्यो में पाकिस्तानी दूतावास खुद को एक अजीब स्थिति में पाया। उसने साफ किया कि जापानी कानूनों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं से उसका कोई लेना-देना नहीं है। दो सावधानीपूर्वक तैयार किए गए बयानों में, पाकिस्तानी दूतावास ने पाकिस्तानी समुदाय के सदस्यों से आग्रह किया कि वे जापानी नियमों का पूरी तरह से पालन करें, खासकर जब वे पूजा स्थलों का निर्माण कर रहे हों।1 जून को X (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए पाकिस्तानी दूतावास ने कहा, &quot;जापान में रहने वाले पाकिस्तानी समुदाय से दूतावास पूरी विनम्रता से अनुरोध करता है और इस बात पर ज़ोर देता है कि वे सभी मामलों में, विशेष रूप से पूजा स्थलों के निर्माण के संबंध में, जापानी कानूनों का पूरी तरह से पालन करें। स्थानीय सरकारों से ज़रूरी परमिट लिए बिना कोई भी निर्माण परियोजना शुरू नहीं की जानी चाहिए।&quot;खास बात यह है कि दूतावास ने बताया कि राजदूत अब्दुल हमीद 3 अप्रैल को मस्जिद के उद्घाटन में इसलिए शामिल हुए थे, क्योंकि उन्हें बताया गया था कि जापानी कानून के तहत ज़रूरी सभी स्वीकृतियाँ प्राप्त कर ली गई हैं। इसे भी पढ़ें: Karnataka  में शिवकुमार राज! आज शाम मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे DK Shivakumar, कैबिनेट में शामिल हो सकते हैं 12-14 मंत्री31 मई को एक अलग बयान में, जापान में पाकिस्तानी मिशन ने कहा कि स्थानीय अधिकारियों से ज़रूरी परमिट लिए बिना कोई भी निर्माण परियोजना शुरू नहीं की जानी चाहिए। &quot;पाकिस्तानी दूतावास का ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट से कोई लेना-देना नहीं है, खासकर उन प्रोजेक्ट्स से जो स्थानीय सरकारों के कानूनों का पालन नहीं करते। इसमें 3 अप्रैल, 2026 को कावागोए में हुआ वह कार्यक्रम भी शामिल है, जिसके लिए पाकिस्तान के राजदूत ने इस जानकारी के आधार पर निमंत्रण स्वीकार किया था कि जापानी कानून के अनुसार सभी ज़रूरी परमिट ले लिए गए हैं।&quot;ऐसे सभी प्रोजेक्ट्स के कानूनी पहलुओं के बारे में जानकारी समुदाय के सभी सदस्यों और उस इलाके के निवासियों तक भी पहुंचाई जानी चाहिए। पाकिस्तानी दूतावास समुदाय के सभी संबंधित सदस्यों से तुरंत अनुरोध करता है कि वे जापानी अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करें और हर हाल में जापानी कानूनों का पालन करें, खासकर इस तरह के प्रोजेक्ट्स के संबंध में,&quot; दूतावास ने आगे कहा। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Mamata Banerjee के राज में जनता से वसूली गयी Cut Money वापस लौटाने लगे TMC नेताइस बीच, कावागोए के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं और आगे की कार्रवाई पर फैसला लेने से पहले संबंधित एजेंसियों के साथ तालमेल बिठा रहे हैं। शहर प्रशासन ने यह भी माना है कि चूंकि यह ढांचा बिना किसी आधिकारिक अनुमति के बनाया गया था, इसलिए वे इस बात की पुष्टि नहीं कर सकते कि निर्माण शुरू होने से पहले आस-पास के निवासियों को पर्याप्त स्पष्टीकरण दिया गया था या नहीं।इस जानकारी ने मस्जिद विवाद में एक और पहलू जोड़ दिया है। जापान में, समुदाय से परामर्श को अक्सर विकास परियोजनाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, खासकर तब जब नए ढांचे स्थानीय इलाकों को प्रभावित कर सकते हों।पाकिस्तान के राजदूत द्वारा उद्घाटन की गई एक मस्जिद पर अब ढहाए जाने का खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि अधिकारियों ने इसकी मंज़ूरी में हुई अनियमितताओं को उजागर किया है। फिलहाल, शहर के अधिकारी मस्जिद के भविष्य पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। यह ढांचा अभी भी खड़ा है, लेकिन यह रहेगा या इसे ढहा दिया जाएगा, यह शहर परिषद के फैसले पर निर्भर करेगा। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:35 +0530</pubDate>
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<title>US Section 301 Tariffs | अमेरिका का बड़ा कदम! ट्रेड एक्ट &amp;apos;सेक्शन 301&amp;apos; के तहत भारत और चीन पर 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव</title>
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<description><![CDATA[ वैश्विक व्यापार युद्ध (Global Trade War) की सुगबुगाहट एक बार फिर तेज हो गई है। अमेरिकी सरकार ने भारत और चीन सहित दुनिया की 60 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से होने वाले आयात पर 12.5% तक का अतिरिक्त सीमा शुल्क (टैरिफ) लगाने का एक बेहद कड़ा प्रस्ताव पेश किया है। वॉशिंगटन का आरोप है कि ये देश अपने यहाँ &#039;ज़बरदस्ती मज़दूरी&#039; (Forced Labour) से बनने वाले सामानों के आयात और व्यापार को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) कार्यालय द्वारा घोषित यह प्रस्तावित कार्रवाई, यूएस ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 की धारा 301 (Section 301) के तहत की जा रही है। यह वही कानून है जिसका इस्तेमाल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान चीन से होने वाले आयात पर टैरिफ लगाने के लिए किया गया था। इसे भी पढ़ें: Praggnanandhaa का डबल धमाका! कार्लसन को दूसरी बार धूल चटाकर रचा इतिहास, विश्वनाथन आनंद के 19 साल पुराने रिकॉर्ड की बराबरीइस कदम की अभी भी समीक्षा चल रही है और कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। हालाँकि, अगर इसे लागू किया जाता है, तो यह अमेरिका में होने वाले आयात की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता की एक और परत जोड़ सकता है।US क्या प्रस्ताव दे रहा है?USTR ने भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों सहित 60 अर्थव्यवस्थाओं से होने वाले आयात पर 12.5% ​​तक के अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव दिया है। इसे भी पढ़ें: Explained Qeshm Island | अमेरिका ने ईरान के क़ेशम द्वीप पर क्यों किए नए हमले? जानें होर्मुज़ चोकपॉइंट और IRGC के &#039;मिसाइल शहर&#039; की पूरी कहानीUSTR के अनुसार, प्रभावित अर्थव्यवस्थाएँ या तो ज़बरदस्ती मज़दूरी का उपयोग करके बनाए गए सामानों पर प्रतिबंध लगाने में विफल रहीं, या मौजूदा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में नाकाम रहीं। इस प्रस्ताव के तहत, जिन देशों ने ज़बरदस्ती मज़दूरी से जुड़े आयात पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध अपनाया है, उन्हें 10% टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।जिन देशों ने ऐसे प्रतिबंध लागू नहीं किए हैं, उन्हें 12.5% ​​का उच्च टैरिफ देना पड़ सकता है। US व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि प्रमुख व्यापारिक भागीदारों द्वारा ज़बरदस्ती मज़दूरी से जुड़े आयात के मुद्दे को हल करने में विफलता ने अमेरिकी श्रमिकों के लिए एक असमान प्रतिस्पर्धा का माहौल (uneven playing field) बना दिया है।ग्रीर ने एक बयान में कहा, &quot;ज़बरदस्ती मज़दूरी से बने सामानों के आयात को रोकने में हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदारों की विफलता अस्वीकार्य है।&quot;भारत और चीन को क्यों निशाना बनाया गया है?USTR के निष्कर्षों के अनुसार, भारत और चीन उन 54 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल थे, जो ज़बरदस्ती मज़दूरी से जुड़े सामानों पर कानूनी प्रतिबंध लगाने और उन प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करने, दोनों ही मामलों में विफल पाई गईं।भारत पर अपने निष्कर्षों में, USTR ने कहा कि देश &quot;ज़बरदस्ती मज़दूरी से जुड़े आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहा है&quot; और यह निष्कर्ष निकाला कि भारत की नीतियाँ और प्रथाएँ अमेरिकी वाणिज्य पर बोझ डालती हैं या उसे प्रतिबंधित करती हैं। USTR का तर्क है कि ज़बरदस्ती मज़दूरी से बनी चीज़ें कम कीमत पर ग्लोबल सप्लाई चेन में आ सकती हैं, जिससे उन देशों के बिज़नेस और मज़दूरों के लिए गलत मुकाबला पैदा होता है, जहाँ मज़दूरी के सख्त नियम लागू हैं।चीन को भी इसी कैटेगरी में रखा गया है, जबकि वह पहले से ही व्यापार और मज़दूरी से जुड़े कई मौजूदा उपायों के तहत अमेरिका की जांच का सामना कर रहा है।सेक्शन 301 क्या है?US ट्रेड एक्ट, 1974 का सेक्शन 301 अमेरिकी सरकार को विदेशी व्यापार के तरीकों की जांच करने और अगर उसे लगता है कि वे तरीके गलत हैं या अमेरिकी व्यापार के लिए नुकसानदायक हैं, तो जवाबी कदम उठाने की इजाज़त देता है। इस कानून पर दुनिया का ध्यान तब गया जब डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में इसे चीन की अरबों डॉलर की चीज़ों पर टैरिफ लगाने का आधार बनाया गया।ताज़ा जांच 12 मार्च, 2026 को शुरू हुई और इसमें वे अर्थव्यवस्थाएं शामिल थीं जिनसे अमेरिका के कुल इंपोर्ट का लगभग 99.4% हिस्सा आता है। जांच में यह देखा गया कि क्या सरकारें उन चीज़ों के इंपोर्ट पर रोक लगाने या उन्हें असरदार तरीके से रोकने में नाकाम रही हैं, जो पूरी तरह या कुछ हद तक ज़बरदस्ती मज़दूरी से बनाई गई हैं।इस लिस्ट में कौन से देश शामिल हैं?भारत और चीन के अलावा, इस लिस्ट में यूरोपियन यूनियन, जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम, वियतनाम, बांग्लादेश, थाईलैंड, कनाडा, मेक्सिको और खाड़ी के कई देश शामिल हैं।USTR ने कहा कि कनाडा, मेक्सिको, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, इक्वाडोर और यूरोपियन यूनियन समेत छह अर्थव्यवस्थाओं में पहले से ही कानूनी रोक लगी हुई है, लेकिन उन्हें लागू करने में वे असरदार नहीं पाई गईं। यह प्रस्ताव अभी पक्का नहीं हुआ है। USTR ने कहा कि कोई भी टैरिफ औपचारिक रूप से लागू होने से पहले, इन सुझावों की और समीक्षा और बातचीत की जाएगी।इस प्रस्ताव में कपड़ा और कपड़ों के इंपोर्ट के लिए एक अलग व्यवस्था भी शामिल है, जिसके तहत कुछ खास चीज़ों की सीमित मात्रा कम टैरिफ दरों पर अमेरिका में आ सकेगी। किन देशों को यह छूट मिल सकती है, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है।यह ताज़ा कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका मज़दूरी के नियम, सप्लाई चेन में पारदर्शिता और ज़बरदस्ती मज़दूरी से जुड़ी चिंताओं को लेकर व्यापार से जुड़े उपायों को बढ़ा रहा है।वॉशिंगटन पहले ही &#039;उइघुर ज़बरदस्ती मज़दूरी रोकथाम कानून&#039; लागू कर चुका है, जो चीन के शिनजियांग इलाके से आने वाली चीज़ों के इंपोर्ट पर रोक लगाता है, जब तक कि इंपोर्ट करने वाले यह साबित न कर दें कि वे चीज़ें ज़बरदस्ती मज़दूरी से नहीं बनाई गई हैं।प्रस्तावित सेक्श ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:35 +0530</pubDate>
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<title>कुवैत से बहरीन तक...बम बमा बम! अमेरिका ने केशम द्वीप के जरिए छेड़ा, अब ईरान एक&#45;एक कर दहला रहा US के ठिकाने</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने बुधवार को कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ईरान ने इन हमलों को ईरान के क़ेशम द्वीप पर अमेरिकी हमले का प्रतिशोध बताया। ईरान के सशस्त्र बलों ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी पांचवें बेड़े और क्षेत्र में स्थित एक अमेरिकी हवाई अड्डे को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई ईरान के दूरसंचार एंटीना और तेल टैंकर पर अमेरिकी हमलों के जवाब में की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई पहले जारी की गई अधिक गंभीर प्रतिक्रिया की चेतावनी को पूरा करती है। बुधवार तड़के कुवैत की सेना ने कहा कि उसके हवाई रक्षा तंत्र शत्रुतापूर्ण मिसाइलों और ड्रोन हमलों को सक्रिय रूप से रोक रहे हैं। यह बयान खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच देश भर के निवासियों द्वारा तेज धमाकों की आवाजें सुनने की सूचना के बाद जारी किया गया।इसे भी पढ़ें: शांति वार्ता हुई भंग! ईरान ने कुवैत-बहरीन पर दागीं मिसाइलें, जवाब में अमेरिका ने किश्म द्वीप पर बोला हमला | Middle East Warएक प्रारंभिक बयान में कुवैती सेना के जनरल स्टाफ ने कहा कि हवाई रक्षा तंत्र वर्तमान में शत्रुतापूर्ण मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहे हैं और स्पष्ट किया कि जनता द्वारा सुनी गई कोई भी धमाके की आवाज देश के रक्षा तंत्रों द्वारा किए गए अवरोधन अभियानों का परिणाम थी। स्थिति के स्पष्ट होते ही, सेना ने दूसरी बार सार्वजनिक चेतावनी जारी करते हुए नागरिकों और निवासियों से आग्रह किया कि वे शत्रुतापूर्ण हवाई हमलों को रोकने के परिणामस्वरूप गिरे किसी भी मलबे, छर्रे या अज्ञात वस्तु के पास न जाएं और न ही उन्हें छुएं। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि ऐसे अवशेष सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता कर्नल सऊद अब्दुलअज़ीज़ अल-ओतैबी द्वारा जारी बयान में जनता से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध मलबे की सूचना तुरंत आपातकालीन सेवाओं को 112 हेल्पलाइन के माध्यम से या संबंधित अधिकारियों को दें। सेना ने लोगों से यह भी आग्रह किया कि वे जानकारी के लिए अधिकृत आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करें। इसे भी पढ़ें: शांति वार्ता हुई भंग! ईरान ने कुवैत-बहरीन पर दागीं मिसाइलें, जवाब में अमेरिका ने किश्म द्वीप पर बोला हमला | Middle East Warबयान में कहा गया कि सेना के जनरल स्टाफ सभी से सहयोग करने और सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जारी दिशानिर्देशों का पालन करने का आह्वान करता है। ये घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए सैन्य संघर्षों के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बीच सामने आए हैं। इस बीच, ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने दावा किया कि फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और क़ेशम द्वीप पर अमेरिका द्वारा की गई &quot;शत्रुतापूर्ण कार्रवाई&quot; के बाद कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है। प्रसारक ने आरोप लगाया कि कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया, हालांकि इस दावे की तत्काल कोई स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं थी। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:34 +0530</pubDate>
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<title>कबूल किया ईरान का सबसे बड़ा सच, US मीडिया का पूरा प्रोपेगेंडा ध्वस्त! Mojtaba Khamenei का होश उड़ाने वाला सच?</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच रिश्ते पहले से बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार टकराव बना हुआ है। ऐसे माहौल में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने पहली बार सार्वजनिक रूप से कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई नहीं जिंदा है और लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के सामने गवाही देते हुए रूबियों ने कहा कि अमेरिका को ऐसे स्पष्ट संकेत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि मौज तबाह खामी नहीं ईरान के महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल है और देश की राजनीतिक दिशा तय करने में उनकी अहम भूमिका बनी हुई है। यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कई महीनों से मोजतबा खामनेई को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थी। उनकी सार्वजनिक मौजूदगी बेहद कम हो गई थी। जिसके चलते उनकी स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे थे।  इसे भी पढ़ें: कुवैत से बहरीन तक...बम बमा बम! अमेरिका ने केशव द्वीप के जरिए छेड़ा, अब ईरान एक-एक कर दहला रहा US के ठिकानेअब अमेरिका की ओर से आए इस बयान ने साफ संकेत दिया है कि ईरान का शीर्ष नेतृत्व सक्रिय है और हालातों पर नजर बनाए हुए हैं। रूबियों का यह बयान ऐसे समय में आया जब मिडिल ईस्ट में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। क्षेत्र में जारी तनाव का असर वैश्विक राजनीति से लेकर तेल बाजार तक दिखाई दे रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। जबकि ईरान भी अपने क्षेत्रीय प्रभाव को बनाए रखने की कोशिशें कर रहा है। इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री ने एक और अहम जानकारी दी। उनका कहना है कि ईरान अब अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कुछ ऐसे मुद्दों पर बातचीत करने के लिए तैयार दिखाई दे रहा है जिन पर वह पहले चर्चा करने से भी इंकार करता था। रूबियों के मुताबिक यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है और इससे भविष्य में कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं बढ़ सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि बातचीत की संभावना का मतलब यह नहीं कि दोनों देशों के बीच जल्द कोई समझौता होने वाला है। रूबियों ने कहा कि ईरान के अंदर मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां और क्षेत्रीय तनाव वार्ता को जटिल बना रहे हैं। ऐसे में किसी भी समझौते तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं होगा। इसे भी पढ़ें: शांति वार्ता हुई भंग! ईरान ने कुवैत-बहरीन पर दागीं मिसाइलें, जवाब में अमेरिका ने किश्म द्वीप पर बोला हमला | Middle East Warविशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता दोबारा शुरू होती है तो इससे मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम उठ सकता है। लेकिन दूसरी ओर दोनों देशों के बीच सालों से चला आ रहा अविश्वास क्षेत्र संघर्ष और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा अभी भी बड़ी बाधा बने हुए हैं। यही वजह है कि मार्को रूबियो का यह बयान सिर्फ मोजतबा खामनेई की मौजूदगी की पुष्टि भर नहीं माना जा रहा बल्कि इसे मिडिल ईस्ट की बदलती रणनीतिक तस्वीर के एक अहम संकेत के रूप में देखा जा रहा है। एक तरफ तनाव और टकराव की आशंकाएं बनी हुई है तो दूसरी तरफ बातचीत और कूटनीति की उम्मीदें भी दिखाई दे रही हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:33 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan सीमा पर बाहुबलि लेकर अचानक पहुंचा भारत, एक्शन से मचा हड़कंप</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने पाकिस्तान बॉर्डर पर एक ऐसा धमाका किया है जिसने आपको बता दें कि इस्लामाबाद को पूरी तरह से हिला कर रख दिया है। बॉर्डर के ठीक पास भारत ने वो तहलका मचा दिया है जिसके बारे में पाकिस्तान ने कभी अपने सपने में भी नहीं सोचा होगा। 25 करोड़ पाकिस्तानी इस वक्त खौफ में है और इसकी वजह सिर्फ एक नया ड्रोन नहीं है। यह सिर्फ भारत की एक ताकत नहीं है। असल वजह है भारतीय इस ड्रोन की क्षमता, उसकी मारक, ताकत और युद्ध के मैदान में दुश्मन को खोज कर खत्म करने की उसकी काबिलियत। दुनिया ने हाल के वर्षों में बता दें कि यह देखा है कि कैसे ईरान ने अपने यूएवी ड्रोन की ताकत के दम पर बड़े-बड़े देशों की चिंता बढ़ा दी। यह ड्रोन सैकड़ों किलोमीटर दूर तक जाकर निगरानी करते हैं। लक्ष्य की पहचान करते हैं। टारगेट सेट करते हैं और सही समय आने पर हमला भी कर देते हैं। बता दें कि भारत ने भी उसी दिशा में एक बहुत बड़ा कदम बढ़ा दिया है। इसे भी पढ़ें: Karnataka  में शिवकुमार राज! आज शाम मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे DK Shivakumar, कैबिनेट में शामिल हो सकते हैं 12-14 मंत्रीराजस्थान के जोधपुर में भारत की स्वदेशी रक्षा कंपनी ने अपने अत्याधुनिक टेिकल लोइटरिंग म्यूनेशन प्लेटफार्म दिव्यास्त्र एमके वन का सफल प्रदर्शन कर दिया है। भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुए इस प्रदर्शन ने एक बात बिल्कुल साफ़ कर दी है कि भारत अब आधुनिक ड्रोन युद्ध की तैयारी में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दिव्यास्त्र एमके वन एक टेक्टिकल लोइटिंग म्यनिशन प्लेटफार्म है। यानी यह सिर्फ दुश्मन को देखता नहीं है बल्कि जरूरत पड़ने पर उसे निशाना भी बना सकता है, ध्वस्त कर सकता है। यह दुश्मन के इलाके में पहुंचकर लंबे समय तक मंडरा सकता है। टारगेट को सेट कर सकता है, पहचान कर सकता है लक्ष्य की और सभी सही समय आने पर सटीक हमला भी यह कर सकता है। यही क्षमता इसे पारंपरिक ड्रोन से अलग बना देगी। अब बात करते हैं इसकी सबसे बड़ी ताकत की। दिव्या एमके1 की ऑपरेशनल रेंज करीब 500 कि.मी. बताई जा रही है। यानी यह दुश्मन की सीमा के काफी अंदर तक जाकर अपने मिशन को पूरा करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा यह लगभग आपको बता दें कि 5 घंटे तक लगातार हवा में भी रह सकता है। इसे भी पढ़ें: केंद्रीय बैंक ने अफवाहों पर लगाया ब्रेक: RBI ने $12 Billion Gold बेचने की खबर को नकाराआधुनिक युद्ध में यही सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। क्योंकि दुश्मन की गतिविधियों पर जितनी देर नजर रखी जा सके लक्ष्य की पहचान उतनी ही सटीक होती है। सटीक जानकारी का मतलब यह होता है कि सटीक कारवाही, सटीक हमला, सटीक टारगेट। दिव्यास एमके1 को ईओआईआर यानी कि इलेक्ट्रॉनिकल ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सेंसर सिस्टम से लेस किया जा सकता है। सरल शब्दों में कहें तो दिन हो या रात यह लक्ष्य की पहचान करने और उसकी निगरानी करने में सक्षम है। यानी दुश्मन के लिए छिपना पहले से बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। लेकिन इसकी एक और खासियत अभी बाकी है। खासियत यह है कि भारतीय सेना के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है और यह खासियत यह है कि इसका मोबाइल लांचर सिस्टम है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:33 +0530</pubDate>
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<title>समाप्त...भारत के रूसी तेल खरीद पर बोला अमेरिका</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के इस बयान को देखकर समझा जा सकता है कि एक बार फिर रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत अमेरिका के बीच तनाव बढ़ सकता है। अमेरिकन सीनेट की फॉरेन रिलेशंस कमेटी में सुनवाई के वक्त जब रूबियों से रूसी तेल पर मिली छूट पर सवाल पूछा गया तो उस दौरान रूबियो ने साफ कहा कि अमेरिका की मूल नीति रूस के तेल कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की रही है और मौजूदा छूट सिर्फ एक अस्थाई व्यवस्था है। उन्होंने कहा हम इसे जितनी जल्दी संभव हो खत्म करना चाहते हैं क्योंकि हमारी नीति रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने की है। यह समय सीमा वाली छूट है जिन्हें वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बनाए रखने के लिए दिया गया था। दरअसल यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए। लेकिन दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित ना हो और कीमतें बेकाबू ना हो इसके लिए अमेरिका ने कुछ मामलों में सीमित छूट दी। इसी व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा भारत को मिला। इसे भी पढ़ें: Russia की तस्वीर ने हिलाई दुनिया, रातों-रात पलटी भारत की किस्मत! रूस ने भारी डिस्काउंट पर कच्चा तेल बेचना शुरू किया और भारत दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हो गया। रूसी तेल की वजह से भारत को सस्ती ऊर्जा मिली। रिफाइनिंग सेक्टर को फायदा हुआ और घरेलू बाजार में ईंधन कीमतों पर दबाव भी कम रहा। हालांकि ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में आने के बाद भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगातार दबाव बनाना शुरू किया। लेकिन भारत ने भी अपने हितों को ऊपर रखा और अमेरिकी दबाव में नहीं आया। हाल ही में जब मार्को रूबियो भारत दौरे पर भी आए थे तब भी विदेश मंत्री जयशंकर ने साफ कहा था कि जैसे अमेरिका के लिए अमेरिका फर्स्ट है वैसे ही भारत के लिए इंडिया फर्स्ट है। यानी भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले करेगा। हालांकि अब सवाल यह है कि अगर 17 जून को समाप्त हो रही यह छूट आगे नहीं बढ़ाई जाती है तो भारत पर इसका असर क्या पड़ेगा? इसे भी पढ़ें: Russia में NSA डोभाल, यूरोप में एस जयशंकर, भारत बड़ा गेम कर गया!जाहिर सी बात है पहले से ही ईरान युद्ध ने ऊर्जा क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। ऐसे में अमेरिकी दबाव इससे जरूर भारत के लिए रूसी तेल खरीदना ज्यादा जटिल हो सकता है। भुगतान व्यवस्था, शिपिंग और बीमा जैसी सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। हालांकि भारत के पास विकल्प भी मौजूद है। जरूरत पड़ने पर वह पश्चिम एशिया, अफ्रीका और वेनेजुला जैसे देशों से आयात बढ़ा सकता है। बड़ी बात यह है कि खुद रूबियों ने माना कि इस छूट का फायदा सिर्फ भारत को नहीं बल्कि दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं को मिला। उनके मुताबिक रूसी तेल की उपलब्धता ने वैश्विक बाजार में कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद की। इस पूरे विवाद के पीछे एक बड़ा मकसद यह भी है कि अमेरिका चाहता है कि भारत समेत बड़े आयातक देश धीरे-धीरे रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम करें।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:32 +0530</pubDate>
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<title>जिसे पागलों की तरह डरा रहा चीन, वो अचानक मोदी से मिलने आया!</title>
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<description><![CDATA[ चीन ने जिस व्यक्ति को दुनिया से दूर रखने के लिए पूरी ताकत लगा रखी है, वही व्यक्ति पीएम मोदी से मिलने पहुंच गया। इस व्यक्ति के पास वो खजाना है जिसे पाने के लिए दुनिया की महाशक्तियां पागल हैं। इसीलिए चीन नहीं चाहता कि यह व्यक्ति दुनिया के किसी नेता से मिले। लेकिन अब यह पीएम मोदी के साथ खड़े हैं। पीएम मोदी ने एक बहुत बड़ा दांव खेल दिया है। यह हैं म्यांमार के राष्ट्रपति मिन ओंग हलाइन। यह छोटा सा देश चीन को आधा निगल सकता है। अब इसी खेल में भारत जुट गया है। बता दें कि मिनोंग हलाइंग एक पेशेवर सैन्य कमांडर हैं जो 2011 में म्यांमार की आर्मी के चीफ रह चुके हैं। उन्होंने फरवरी 2021 में एक सैन्य तख्ता पलट के जरिए सत्ता पर कब्जा कर लिया था तभी से वह म्यांमार पर शासन कर रहे हैं। अप्रैल 2026 में संसद द्वारा उन्हें राष्ट्रपति चुन लिया गया। 2021 से म्यांमार गृह युद्ध से गुजर रहा है। म्यांमार के अलग-अलग इलाकों में जातीय उग्रवादी संगठन मिनंग हाइंग के खिलाफ खड़े हो गए हैं। इन उग्रवादी संगठनों को चीन हथियार देता है ताकि चीन मिनंग हयांग पर दबाव बनाए रखे। चीन मिनऑंग हयांग पर दबाव इसलिए बनाना चाहता है क्योंकि म्यांमार के पास दुनिया के हैवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स का तीसरा सबसे बड़ा भंडार है। इन एलिमेंट्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, विंड, टरबाइन, फाइटर, जेट्स और स्मार्टफोन जैसी चीजों में होता है। इसे भी पढ़ें: Myanmar President Min Aung Hlaing India Visit Analysis: PM Modi की बड़ी रणनीतिक जीत! China को मिला करारा जवाबचीन दुनिया भर में रेयर अर्थ रिफाइनिंग के लगभग 90% हिस्से को नियंत्रित करता है। 2017 से 2024 के बीच म्यांमार ने चीन को 2900 टन से ज्यादा रेयर अर्थ एक्सपोर्ट किया था। जिसकी कीमत 4.2 बिलियन थी। सिर्फ 2023 में ही चीन ने जितना हैवी रेयर अर्थ एलिमेंट इंपोर्ट किया है, उसमें से लगभग 98% म्यांमार ने ही सप्लाई किया था। यह वो खनिज है जो चीन के पूरे ईवी और रक्षा उद्योग को ऊर्जा देता है। कच्चे माल के लिए चीन म्यांमार पर बहुत ज्यादा निर्भर है। लेकिन चीन म्यांमार के लिए एक क्रूर पार्टनर साबित हो रहा है। चीन सिर्फ खनिज से प्यार करता है। म्यांमार से नहीं। यह बात म्यांमार के राष्ट्रपति को भी पता चल गई है। यहीं पर कहानी में असली ट्विस्ट आता है। म्यांमार का राष्ट्रपति आमतौर पर अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए चीन जाता है। लेकिन म्यांमार के राष्ट्रपति मिनंग हाइंग भारत पहुंच गए। यह एक जानबूझकर दिया गया और सोचा समझा संकेत है। म्यांमार अब चीन पर अपनी अत्यधिक निर्भरता को कम करना चाहता है। भारत म्यांमार के लिए एक स्वाभाविक संतुलन है। यह बात म्यांमार भी जानता है और भारत भी। इसी कड़ी में म्यांमार के राष्ट्रपति पीएम मोदी से मिल रहे हैं। यह कोई आम बैठक नहीं है। इस बैठक पर भारत का भविष्य निर्भर है। भारत तीन चीजों के लिए म्यांमार पर निर्भर है। पहला है सिक्योरिटी। इसे भी पढ़ें: India-Myanmar Talks: साइबर घोटालों पर PM Modi का सख्त रुख, फंसे भारतीयों की वापसी पर बनी सहमतिभारत म्यांमार के साथ 1643 कि.मी. लंबा बॉर्डर शेयर करता है। म्यांमार में जो गृह युद्ध चल रहा है उसका फायदा चीन और अमेरिका लगातार उठाते हैं। म्यांमार के जरिए ही चीन मणिपुर को जला रहा है और म्यांमार में ही अमेरिकी एजेंट मैथ्यू वेंडाइक आतंकियों को ट्रेनिंग दे रहा था। यह वही सीआईए एजेंट है जिसे भारत ने हाल ही में गिरफ्तार किया था। भारत और म्यांमार की सरकार के बीच अगर रिश्ते और भी ज्यादा मजबूत हो गए तो इन उग्रवादी संगठनों को खत्म किया जा सकता है। म्यांमार पर भारत की निर्भरता का दूसरा सबसे बड़ा कारण रेयर अर्थ एलिमेंट्स ही है। हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि म्यांमार के पास दुनिया के रेयर अर्थ एलिमेंट्स के तीसरे सबसे बड़े भंडार मौजूद हैं। रेयर अर्थ एलिमेंट्स भारत की सबसे बड़ी जरूरत है। म्यांमार पर भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्भरता है कनेक्टिविटी। भारत म्यांमार के रास्ते थाईलैंड तक एक 1360 कि.मी. का हाईवे बना रहा है जो पिछले कई सालों से अटका है। इस हाईवे का काम पूरा हो गया तो भारत चीन के नजदीक तक पहुंच सकता है। इस हाईवे के अलावा भारत कलादान मल्टी मॉडल प्रोजेक्ट भी बना रहा है। जो पूर्वोत्तर भारत को म्यांमार के रास्ते सितवे बंदरगाह से जोड़ता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:31 +0530</pubDate>
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<title>ब्रिटिश संसद में पाकिस्तानी मुस्लिमों पर बड़ा खुलासा, हिल जाएगा भारत!</title>
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<description><![CDATA[ ब्रिटेन की संसद में एक सांसद ने अचानक कागज पर लिखे कुछ बयान पढ़ने शुरू कर दिए। इन बयानों को सुनकर पूरे ब्रिटेन की रूह कांप गई। इन बयानों में पाकिस्तान के मुस्लिम अपराधियों के काले चिट्ठे खोले गए हैं। ब्रिटेन की संसद में पहली बार कुछ ऐसा हुआ है। दरअसल एक ब्रिटिश सांसद रूप लॉ ने संसद में पाकिस्तान के मुस्लिम रेप गिरोह से बची पीड़ित बच्चियों की गवाहियां पढ़नी शुरू कर दी। सांसद रूपड़ ने बताया कि किस तरह से ब्रिटेन की पुलिस भी इन अपराधों में शामिल है। दरअसल ब्रिटेन के लाखों लोगों ने एक पिटीशन साइन की ताकि सांसद रूपड़ पाकिस्तान के अपराधियों के कारनामे पूरी दुनिया को पढ़कर सुनाएं। जिस समय संसद में पाकिस्तान के ग्रूमिंग गैंग्स के बारे में बताया जा रहा था, उस समय सभी पीड़ित वहीं पीछे मौजूद थे। आपको बता दें कि ब्रिटेन में चल रहे पाकिस्तान के ग्रूमिंग गैंग्स ने पिछले एक दशक में हजारों ब्रिटिश बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया है। उनका धर्म परिवर्तन करवाया है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump का बड़ा दावा, मेरे कहने पर Netanyahu ने Lebanon पर हमले से सेना वापस बुलाईइन पाकिस्तानियों को अभी तक सजा नहीं मिली है। मगर पहली बार एक ब्रिटिश सांसद ने हिम्मत जुटाकर पाकिस्तान के इन ग्रूमिंग गैंग्स को रगड़ दिया है। इन बयानों में जिस क्रूरता का वर्णन किया गया है, वह रुला देगी। पाकिस्तानी मुस्लिमों ने बच्चियों के साथ ऐसी भयंकर हिंसा की जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। ब्रिटेन के सांसद ने कई बच्चियों की गवाहियां सुनाई। पहली गवाही में बच्ची ने बताया कि मेरे साथ दुष्कर्म किया गया। एक शराब की बोतल मेरे अंदर डाल दी गई और उसे अंदर ही तोड़ दिया गया। दूसरी लड़की ने बयान में बताया कि रेप से पहले मुझे बताया गया कि ईसाई लड़कियों को कम नैतिक और कम मूल्यों वाली माना जाता है। जबकि इन बच्चियों का रेप करने वाले पाकिस्तानियों ने यह बता दिया कि मुस्लिम लड़कियां ज्यादा गरिमा और उच्च नैतिक स्तर वाली होती हैं। एक और बच्ची ने बताया कि ईद की छुट्टियों के आसपास हालत और बिगड़ जाती थी। पार्टियां और भी बड़ी हो जाती थी और भी ज्यादा खतरनाक और खराब हो जाती थी। इनमें और भी ज्यादा पाकिस्तानी शामिल होते थे। ज्यादा लड़कियां फंसाई जाती थी। जिसके बाद ईद की पार्टियों में इन बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया जाता था।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:31 +0530</pubDate>
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<title>नेपाली PM का बड़बोलापन, भारत की जमीन हड़पने का दावा, अब बुरे फंस गए?</title>
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<description><![CDATA[ सरहद पर खींची गई एक लकीर कभी-कभी सर्दियों तक देशों का पीछा नहीं छोड़ती। भारत और नेपाल की कहानी भी  कुछ ऐसी ही है और करीब 200 साल पहले खींची गई एक सीमा रेखा आज भी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा कर देती है। इसी विवाद ने एक बार फिर से सुर्खियां बटोली है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में एक ऐसा दावा कर दिया जिसके बाद खुद उनकी सरकार को सफाई देनी पड़ गई। वह भी दुनिया के सामने। बालेन शाह ने यह कहा कि सिर्फ भारत ने ही नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण नहीं किया बल्कि नेपाल ने भी कुछ जगहों पर भारतीय जमीन पर कब्जा किया है। अब जैसे ही इनका यह बयान सामने आया, नेपाल में राजनीतिक हंगामा मच गया। विपक्ष ने सबूत मांग लिए। पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप ने तो सवाल तक उठा दिए और पूर्व राजदूतों ने भी इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। मामला बता दें कि इतना ज्यादा बढ़ गया कि कुछ ही घंटों के अंदर नेपाल के विदेश मंत्रालय को सफाई जारी करनी पड़ गई। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने यह कहा कि प्रधानमंत्री बालेन का मतलब भारत की जमीन पर नेपाल के आधिकारिक कोई भी कब्जे से नहीं था। असल में वह 10 गजा की बात कर रहे थे। इसे भी पढ़ें: Balendra Shah के विवादित बयान के बाद Rabi Lamichhane पहुँचे India, BJP Headquarter में भव्य स्वागत, बदल गये South Asia के समीकरणइसका मतलब क्या होता है? 10 गजा यानी सीमा पर मौजूद वो नो मैनस लैंड जहां सालों के दौरान कुछ लोगों ने खेती शुरू कर दी। कुछ जगह मकान बन गए और कई इलाकों में दोनों तरफ के लोग एक दूसरे की जमीन इस्तेमाल करने लगे। नेपाल सरकार का यह कहना है कि प्रधानमंत्री बालन शाह इसी तरह के क्रॉस बॉर्डर अतिक्रमण की बात कर रहे थे जो उन्होंने संसद में की। लेकिन असली कहानी इससे कहीं पुरानी है। दरअसल बता दें कि इस विवाद की जड़े 1816 की सुगोली संधि तक जाती है। नेपाल और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुए इस समझौते ने आधुनिक भारत नेपाल सीमा उस वक्त तय की थी। समस्या यह थी कि सीमा का जो बड़ा हिस्सा नदियों के आधार पर उस वक्त तय किया गया था और सबसे बड़ा विवाद काली नदी को लेकर पैदा हुआ। समय के साथ नदी का रास्ता बदलता गया। लेकिन नक्शे और दावे अब भी नहीं बदले और यहीं से काला पानी, लिपुलेख और सुस्ता जैसे इलाकों पर विवाद शुरू हुआ। नेपाल का यह दावा है कि काली नदी का वास्तविक स्रोत जो उसका इलाका है वहां से निकलती है। इसलिए यह इलाका उसके पास है और यह नदी पर उसका राइट है। वहीं भारत अपने ऐतिहासिक और प्रशासनिक रिकॉर्ड के आधार पर इन इलाकों को अपने आधिकारिक क्षेत्र का हिस्सा मानता है। और फिर बता दें कि इसके बाद आता है साल 2020 का। नेपाल ने नया राजनीतिक नक्शा जारी कर दिया। जिसमें काला पानी, लिपु लेख और जो कई इलाके हैं उसको नेपाल का हिस्सा दिखाया गया उस मैप में जिसने विवाद को और भी ज्यादा बढ़ा दिया। जब यह नक्शा सामने आया तो भारत ने इस कदम को तुरंत खारिज कर दिया और इसे एक तरफ़ा कारवाही बताया। वहीं बता दें कि हाल के वर्षों में लिपु लेख को लेकर विवाद और भी ज्यादा बढ़ा है। इसे भी पढ़ें: विदेश मंत्रालय का सीधा जवाब: India-Nepal सीमा विवाद में किसी Third-Party की भूमिका नहींखासतौर पर कैलाश मानसरोवर यात्रा की रूट को लेकर नेपाल कई बार अपनी आपत्ति दर्ज करा चुका है। वहीं बता दें कि भारत ने भी अपना रुख इस पूरे मामले पर साफ रखा है। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि बालन शाह के हालिया बयान पर भारत ने कोई भी तीखी सार्वजनिक प्रतिक्रियाएं नहीं दी है। एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि भारत का यह कदम यह दिखाता है कि नई दिल्ली इस पूरे मुद्दे को कोई बड़ा कूटनीतिक विवाद बनाने के बजाय बातचीत के जरिए सुलझाने की अपनी पुरानी नीति पर अब भी कायम है और शायद इसकी एक वजह दोनों देशों के गहरे रिश्ते भी है। भारत ने कई बार नेपाल की मदद की है। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। लाखों नेपाली नागरिक भारत काम करने के लिए आते हैं। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है। दुनिया की चुनिंदा सीमाओं में से एक ऐसी सीमा जहां दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा के आ जा सकते हैं। भूकंप जैसे मुश्किल समय में भी लगातार भारत नेपाल की मदद की है। चाहे वो कोई भी क्षेत्र क्यों ना हो। लेकिन अब सुनिए आप सबसे दिलचस्प तथ्य। इसे भी पढ़ें: India MEA Briefing: Delcy Rodriguez India Visit, India-Nepal, India-Bangladesh, Pakistan-EU Joint Statement संबंधी मुद्दों पर आया भारत का बयानभारत और नेपाल की सीमा लगभग 1880 कि.मी. लंबी है। और सीमा एक्सपर्ट्स के मुताबिक 97% सीमा पहले से ही तय और स्वीकार की जा चुकी है। यानी पूरा विवाद पूरी सीमा को लेकर नहीं है। जो 97% हिस्सा पहले ही सुलझा हुआ है। झगड़ा सिर्फ कुछ छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इलाकों को लेकर अब भी है और शायद यही वजह है कि 200 साल बाद भी यह विवाद जो है वो पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया क्योंकि आखिर में सवाल सिर्फ जमीन का नहीं होता है। सवाल इतिहास का भी होता है। नक्शे का भी होता है और राष्ट्रीय दावों का भी होता है। और इसलिए बता दें कि आज भी एक सवाल अब भी बाकी है और बार-बार पूछा जाता है कि अगर भारत और नेपाल की जो 97% सीमा विवाद सुलझ चुका है तो फिर बाकी का जो 3% रह गया है उसमें ऐसा क्या है जो आज भी भारत और नेपाल के रिश्तों में यह 3% जो है वो तनाव पैदा कर देता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:30 +0530</pubDate>
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<title>Kuwait और Bahrain में ईरानी हमले के बाद अमेरिका ने किया पलटवार, युद्ध की आग में झुलस रहा West Asia, शांति वार्ता पर भी संकट</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार तड़के ईरान ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिसके बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए। अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया, जबकि कुछ अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही टूटकर गिर गईं। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप स्थित एक सैन्य ठिकाने पर हमला किया।हमले के दौरान खाड़ी क्षेत्र का आसमान चमक उठा। कुवैत सिटी के पास अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय हो गई और उसने अली अल सलेम वायुसेना अड्डे की ओर बढ़ रहे खतरों को रोक लिया। बहरीन की दिशा में दागी गई मिसाइलों को भी अमेरिकी और बहरीनी सेनाओं ने संयुक्त रूप से नष्ट कर दिया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरान का कोई भी हमला अपने लक्ष्य को भेद नहीं सका। इस तरह की भी खबरें हैं कि कुवैत में हवाई अड्डे पर ड्रोन हमले के चलते कुछ लोग घायल हुए हैं और फ्लाइटों का संचालन रोका गया है।देखा जाये तो इस ताजा सैन्य टकराव ने उस संघर्ष को और गंभीर बना दिया है जो इस वर्ष की शुरुआत में अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान शुरू करने के बाद से लगातार बढ़ता जा रहा है। दोनों देशों के बीच जवाबी हमलों का सिलसिला जारी है और इससे पूरे क्षेत्र में व्यापक युद्ध की आशंका गहरा गई है। कई दौर की मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद अब तक तनाव कम करने में कोई ठोस सफलता नहीं मिली है।इसी बीच ईरान की अर्ध सरकारी समाचार एजेंसियों ने दावा किया कि तेहरान ने संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने को लेकर मध्यस्थ देशों से बातचीत रोक दी है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि वार्ता अभी भी जारी है। ईरान समर्थित हिजबुल्लाह और इस्राइल के बीच लेबनान सीमा पर बढ़ते तनाव ने भी हालात को और संवेदनशील बना दिया है।मध्यस्थता से जुड़े एक क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि लेबनान में संघर्ष विराम लागू होने के बाद ही आगे की वार्ता संभव होगी। दूसरी ओर अमेरिका का कहना है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता करने से पहले सख्त शर्तें लागू करना चाहता है।तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान की ओर जा रहे एक तेल टैंकर को भी रोक दिया। बोत्सवाना के ध्वज वाले इस जहाज ने कथित रूप से चौबीस घंटे तक अमेरिकी चेतावनियों की अनदेखी की। इसके बाद अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन कक्ष पर हेलफायर मिसाइल दाग दी, जिससे वह निष्क्रिय हो गया। अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार यह सातवां जहाज था जिसे अमेरिकी नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश में रोका गया।अमेरिका का आरोप है कि यह जहाज ईरान के खार्ग द्वीप की ओर जा रहा था, जहां से ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूल रहा है। अप्रैल में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों और तटों तक पहुंचने वाले जहाजों पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी थी। इसके जवाब में ईरान ने फारस खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण बनाकर शुल्क वसूली को औपचारिक रूप दिया। ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य उसके और ओमान के क्षेत्रीय जल से होकर गुजरता है, इसलिए वहां उसकी संप्रभुता मान्य होनी चाहिए।उधर, संघर्ष का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। कुवैत ने ईरानी हमले के बाद अपने हवाई अड्डे पर उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया। वहीं जापान ने ऊर्जा कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी से नागरिकों को राहत देने के लिए उन्नीस अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट को मंजूरी दी है। जापानी सरकार ने माना कि पश्चिम एशिया की अनिश्चित स्थिति के कारण पेट्रोल, गैस और बिजली की कीमतों पर भारी दबाव बन रहा है।वहीं ईरान के भीतर आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। मई में वहां महंगाई दर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। अमेरिकी प्रतिबंधों और सैन्य दबाव के कारण ईरान की तेल आधारित अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। बढ़ती महंगाई और मुद्रा के अवमूल्यन से आम जनता परेशान है। पिछले वर्षों में खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में वृद्धि को लेकर हुए प्रदर्शनों में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। इस वर्ष भी मुद्रा संकट के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिन्हें इस्लामी गणराज्य के लिए सबसे गंभीर चुनौतियों में माना जा रहा है।बहरहाल, विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द कोई औपचारिक शांति समझौता नहीं हुआ तो आर्थिक और सामाजिक अस्थिरता ईरान में एक बार फिर व्यापक जनआंदोलन को जन्म दे सकती है। ऐसे समय में पश्चिम एशिया का यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और विश्व अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:29 +0530</pubDate>
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<title>West Asia में बढ़ा तनाव! Iran के ड्रोन हमले के बाद Kuwait Airport खुला, US ने दी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हवाई अड्डे की टी1 इमारत पर ईरान द्वारा ड्रोन और मिसाइल हमलों का हवाला देते हुए उड़ानें निलंबित कर दी गईं। कुवैत अधिकारियों ने हवाई अड्डे की सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचने और हमलों में कई लोगों के घायल होने का भी दावा किया। आज सुबह, अमेरिका ने कहा कि ईरान ने कुवैत पर दो मिसाइलें दागीं जो लक्ष्य से चूक गईं या टूट गईं, और बहरीन पर तीन मिसाइलें दागीं जिन्हें तुरंत रोक दिया गया। एएफपी की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के क़ेशम द्वीप पर आत्मरक्षा में हमले किए, जिसके बाद ईरान ने एक बयान जारी कर अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया। इस बीच, इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने एमएससी सरिस्का नामक एक मालवाहक जहाज पर जवाबी मिसाइल हमले का दावा किया और आरोप लगाया कि अमेरिका ने पहले ओमान सागर में एक ईरानी वाणिज्यिक जहाज पर हमला किया था। इसे भी पढ़ें: Kuwait और Bahrain में ईरानी हमले के बाद अमेरिका ने किया पलटवार, युद्ध की आग में झुलस रहा West Asia, शांति वार्ता पर भी संकटईरान द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर गोलीबारीअमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को वाशिंगटन में एक संसदीय सुनवाई में गवाही देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य की अमेरिकी नाकाबंदी का बचाव किया और कहा कि ईरान द्वारा &quot;वाणिज्यिक जहाजों पर गोलीबारी&quot; ही इस कदम का मुख्य कारण थी। रुबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने का जिक्र करते हुए कहा, &quot;धारणा यह है कि अगर किसी के जहाज बाहर नहीं निकल पाएंगे, तो ईरान के जहाज भी बाहर नहीं निकल पाएंगे... अगर ईरान ने युद्धविराम लागू होने पर अपने वादे पूरे कर दिए होते, तो नाकाबंदी नहीं होती। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरानी नौसेना पूरी तरह से खत्म हो चुकी है और देश की अर्थव्यवस्था भी बेहद खराब स्थिति में है। इसे भी पढ़ें: ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट कासल पर इजरायली झंडा देख ईरान ने ऐसा धमकाया, ट्रंप-नेतन्याहू के बीच गाली-गलौच तक हो गई?खाड़ी में मालवाहक पोत पर हमलाकुवैत और बहरीन में कथित हमलों से कुछ घंटे पहले, खाड़ी में इराक के बंदरगाह से निकलते समय एक मालवाहक पोत पर दो मिसाइलें दागी गईं। मंगलवार को रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने दावा किया कि उसने पनामा ध्वज वाले एमएससी सारिस्का वी नामक पोत को, जिसे अमेरिकी-ज़ायोनी दुश्मन का बताया जा रहा है, एक क्रूज मिसाइल से निशाना बनाया था। प्रेस टीवी की एक रिपोर्ट में आईआरजीसी के हवाले से कहा गया है कि ओमान सागर में ईरानी पोत पर अमेरिकी हमले के प्रतिशोध में इस मालवाहक पोत को निशाना बनाया गया था। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े और एक अन्य देश को निशाना बनाने का दावा करने के बाद (कुवैत का नाम लिए बिना), आईआरजीसी ने अपनी पिछली चेतावनी का हवाला देते हुए कहा कि वह &quot;और भी कड़ी&quot; प्रतिक्रिया देगा। एपी के अनुसार, गार्ड ने अपने बयान में कहा, &quot;हमने पहले ही चेतावनी दी थी कि आक्रामकता की स्थिति में, प्रतिक्रिया अलग और अधिक कड़ी होगी, और हमने उसी के अनुसार कार्रवाई की। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:29 +0530</pubDate>
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<title>Laos में भारतीय कंपनियों के लिए Investment का सुनहरा मौका, Deputy PM ने गिनाए बड़े फायदे</title>
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<description><![CDATA[ लाओस के उप प्रधानमंत्री थोंगसावन फोमविहाने ने बुधवार को भारतीय व्यवसायों को लाओस में निवेश के अवसरों का पता लगाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने निवेशकों के लिए देश की राजनीतिक स्थिरता, रणनीतिक स्थिति और हरित विकास व डिजिटल बदलाव के प्रति प्रतिबद्धता को मुख्य लाभ के तौर पर रेखांकित किया। रत-लाओस व्यापार मंच में बोलते हुए, फोमविहाने ने कहा कि यह आयोजन दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और व्यापार व निवेश संबंधों का विस्तार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि आज का यह मंच हमारी स्वतंत्रता की ऐतिहासिक वर्षगांठ को मनाने का एक मील का पत्थर जैसा अवसर है। उन्होंने आगे कहा कि भारत और लाओस ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान और आधिकारिक दौरों के माध्यम से कई क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग को देखा है।इसे भी पढ़ें: PM Modi ने Karnataka CM DK Shivakumar को दी बधाई, बोले- &#039;केंद्र करेगा पूरा सहयोग&#039;विदेशी निवेश के प्रति लाओस के दृष्टिकोण पर ज़ोर देते हुए, उप प्रधानमंत्री ने कहा कि देश केवल पूंजी प्रवाह से आगे देख रहा है और ऐसी दीर्घकालिक साझेदारियाँ चाहता है जो सतत विकास में योगदान दें। उन्होंने आगे कहा कि लाओस में हम केवल निवेशकों की तलाश नहीं करते; हम रणनीतिक साझेदारों की तलाश करते हैं। हम आपके साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं ताकि हम सतत समाधानों का सह-निर्माण कर सकें, अपने बढ़ते डिजिटल बुनियादी ढांचे का लाभ उठा सकें, लचीली क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाएँ बना सकें, और साझा समृद्धि को बढ़ावा दे सकें। उप प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच मज़बूत राजनीतिक संबंध &quot;ठोस आर्थिक साझेदारियों&quot; में बदल गए हैं, और उन्होंने बताया कि भारत और लाओस के बीच द्विपक्षीय व्यापार 82 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है।इसे भी पढ़ें: &#039;Dark Patterns&#039; का जाल बिछाना पड़ा महंगा, PhysicsWallah और McAfee पर CCPA का बड़ा एक्शनफोमविहाने के अनुसार, देश का भारत को निर्यात 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा, जबकि भारत से आयात का मूल्य लगभग 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। उन्होंने कहा कि हमारे मज़बूत राजनीतिक संबंध कई रूपों में ठोस आर्थिक साझेदारियों में सफलतापूर्वक बदल गए हैं। हमारा कुल द्विपक्षीय व्यापार 82 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया, जिसमें से लाओ पीडीआर का भारत को निर्यात 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक था, जबकि भारत से आयात कुल मिलाकर लगभग 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। उन्होंने भारत को लाओस के बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, कृषि उत्पादों और निर्मित वस्तुओं के निर्यात पर प्रकाश डाला, जबकि भारतीय बाज़ार से वाहन, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल उत्पाद, वस्त्र और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री का आयात किया जाता है। इससे व्यापार का और विस्तार हुआ है, नए अवसर पैदा हुए हैं, और हमारे दोनों देशों के बीच सद्भावना मज़बूत हुई है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:28 +0530</pubDate>
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<title>खामेनेई से किसी भी समय हो सकती है मुलाकात, ट्रंप ने ईरान वॉर पर सबसे बड़ा अपडेट दे दिया</title>
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<description><![CDATA[  कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हवाई अड्डे की टी1 इमारत पर ईरान द्वारा ड्रोन और मिसाइल हमलों का हवाला देते हुए उड़ानें निलंबित कर दी गईं। कुवैत अधिकारियों ने हवाई अड्डे की सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचने और हमलों में कई लोगों के घायल होने का भी दावा किया। इससे पहले आज, अमेरिका ने कहा कि ईरान ने कुवैत पर दो मिसाइलें दागीं जो लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाईं या टूट गईं, और बहरीन पर तीन मिसाइलें दागीं जिन्हें तुरंत रोक दिया गया।इसे भी पढ़ें: ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट कासल पर इजरायली झंडा देख ईरान ने ऐसा धमकाया, ट्रंप-नेतन्याहू के बीच गाली-गलौच तक हो गई?ट्रंप का कहना है कि ईरान के सर्वोच्च नेता वार्ता को मंजूरी दे रहे हैंअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई अमेरिका के साथ बातचीत में शामिल हैं और वार्ता को मंजूरी दे रहे हैं। रॉयटर्स समाचार एजेंसी के अनुसार, ट्रंप ने खामेनेई से मुलाकात की संभावना का भी संकेत दिया और कहा कि यह मुलाकात &quot;किसी समय&quot; हो सकती है। ट्रंप ने नेतन्याहू के साथ तीखी बहस स्वीकार कीअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में स्वीकार किया कि उनकी इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से &quot;गुस्से भरे लहजे&quot; में बातचीत हुई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि वे लेबनान के खिलाफ नेतन्याहू के हमले से &quot;परेशान&quot; थे। यह ऐसे समय में हो रहा है जब वाशिंगटन इज़राइल और लेबनान के प्रतिनिधियों के बीच सीधी बातचीत की मेजबानी कर रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:28 +0530</pubDate>
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<title>भारत की Energy Security पर नजर, Venezuela की राष्ट्रपति Delcy Rodriguez का अहम दौरा, PM Modi से होगी वार्ता</title>
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<description><![CDATA[ वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज बुधवार को पाँच दिन की कामकाजी यात्रा पर भारत पहुँचने वाली हैं। इस दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित भारत के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ कई मुद्दों पर द्विपक्षीय चर्चा करेंगी। एक प्रेस रिलीज़ के अनुसार, विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि यह यात्रा 3 जून से 7 जून तक चलेगी। रोड्रिगेज पहले 1 जून को होने वाले &#039;इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस समिट&#039; में हिस्सा लेने के लिए भारत आने वाली थीं, लेकिन बाद में उस कार्यक्रम को टाल दिया गया था। अब वे एक औपचारिक कामकाजी यात्रा पर भारत आ रही हैं। उनके साथ एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी होगा, जिसमें वेनेज़ुएला के विदेश, अर्थव्यवस्था और वित्त, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, संचार और सूचना, तथा परिवहन मंत्रालयों के मंत्री शामिल होंगे।इसे भी पढ़ें: मॉस्को में गरजे NSA अजीत डोभाल, &#039;आतंकवाद पर दोहरा मापदंड मंजूर नहीं, अब देशों को चुनना होगा अपना पक्ष&#039;कार्यवाहक राष्ट्रपति आज राष्ट्रीय राजधानी में AFS पालम पहुंचेंगी। 4 जून को वे भारतीय पक्ष के साथ अपनी मुलाकातों का सिलसिला शुरू करेंगी; इस दिन विदेश मंत्री जयशंकर के साथ उनकी बैठक तय है, जिसके बाद हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री के साथ आधिकारिक वार्ता होगी। अपने कार्यक्रम के तहत वे राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित करेंगी। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, इन उच्च-स्तरीय चर्चाओं के दौरान, दोनों पक्षों द्वारा भारत-वेनेज़ुएला संबंधों के संपूर्ण दायरे की समीक्षा करने और ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार व निवेश, फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने के अवसरों की तलाश करने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूती मिलने तथा आपसी जुड़ाव बढ़ने की उम्मीद है। इन दोनों देशों के बीच पारंपरिक रूप से सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं, जिनकी जड़ें ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग और &#039;ग्लोबल साउथ&#039; (वैश्विक दक्षिण) के प्रति साझा प्रतिबद्धता में निहित हैं।रोड्रिगेज पहले भी भारत आ चुकी हैं - 2015 में विदेश मंत्री के तौर पर, और 2019, 2023, 2024 और 2025 में उपराष्ट्रपति के तौर पर। इस तरह, अपनी मौजूदा भूमिका में यह उनकी भारत की छठी यात्रा है।इसे भी पढ़ें: Myanmar President Min Aung Hlaing India Visit Analysis: PM Modi की बड़ी रणनीतिक जीत! China को मिला करारा जवाबविदेश मंत्रालय (MEA) ने आगे बताया कि वेनेजुएला का प्रतिनिधिमंडल भारत के ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल और ऑटोमोटिव क्षेत्रों से जुड़े स्थलों का दौरा भी करेगा, ताकि औद्योगिक क्षमताओं को बेहतर ढंग से समझा जा सके और सहयोग के नए अवसरों की पहचान की जा सके। आर्थिक जुड़ाव के संबंध में विदेश मंत्रालय ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और वेनेजुएला के बीच द्विपक्षीय व्यापार 678.94 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। मंत्रालय ने ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का भी उल्लेख किया, जिसके तहत मई 2026 में वेनेजुएला भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया। विदेश मंत्रालय ने मौजूदा साझेदारियों पर भी ज़ोर दिया, जिनमें ONGC विदेश लिमिटेड का &#039;कॉरपोरेशियन वेनेज़ोलाना डेल पेट्रोलेओ&#039; के साथ संयुक्त उद्यम शामिल है; इसके अलावा फार्मास्यूटिकल्स, आयुष, डिजिटल समाधान और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की पहलों में हाल ही में हुए सहयोग का भी ज़िक्र किया गया। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:27 +0530</pubDate>
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<title>Bangladesh में Press Freedom पर संकट! CPJ ने सरकार को दिए 10 सुझाव, पत्रकारों पर &amp;apos;FIR राज&amp;apos; खत्म करने की मांग</title>
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<description><![CDATA[ पत्रकारों की सुरक्षा समिति (सीपीजे) ने बांग्लादेश में प्रेस की स्वतंत्रता बहाल करने के लिए 10 प्रमुख कदम बताए हैं और सरकार से पत्रकारों के खिलाफ आपराधिक मुकदमों का इस्तेमाल बंद करने, प्रतिबंधात्मक कानूनों में सुधार करने और मीडिया पर हमलों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। सीपीजे ने कहा कि अगस्त 2024 में पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद से उनके समर्थक माने जाने वाले दर्जनों पत्रकारों को हिरासत में लिया गया है या उन पर आरोप लगाए गए हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने अक्सर सैकड़ों लोगों या अज्ञात व्यक्तियों के नाम वाली प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) का इस्तेमाल किया है, जिनका बाद में पत्रकारों को फंसाने के लिए उपयोग किया जाता है।सीपीजे ने एकत्तर टीवी के फरज़ाना रूपा, शकील अहमद और मोज़म्मेल बाबू, साथ ही भोरर कागोज के श्याममल दत्ता के मामलों पर प्रकाश डाला, जो सभी अगस्त या सितंबर 2024 से हिरासत में हैं। संगठन ने बताया कि हालांकि बांग्लादेश के उच्च न्यायालय ने 11 मई को रूपा और अहमद को अधिकांश मामलों में जमानत दे दी थी, लेकिन वे अन्य मामलों के संबंध में अभी भी हिरासत में हैं।इसे भी पढ़ें: Bangladeshi Infiltrators को बाहर निकालने का अभियान तेज, अपने अभियान में तेजी से सफल हो रही Suvendu Adhikari सरकारप्रेस की स्वतंत्रता पर नज़र रखने वाली संस्था ने कहा कि सरकार को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप पत्रकारों के खिलाफ दायर सभी मामलों की समीक्षा करनी चाहिए, पत्रकारिता से जुड़े मामलों में अभियोजकों को जमानत का विरोध करने से रोकना चाहिए, &quot;केस-स्टैकिंग&quot; और सामूहिक एफआईआर की प्रथा को समाप्त करना चाहिए, और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पत्रकारों पर उनकी कथित राजनीतिक संबद्धता के आधार पर मुकदमा न चलाया जाए।सीपीजे ने बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) द्वारा पत्रकारों के खिलाफ इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 25 पत्रकार वर्तमान में आईसीटी की जांच के दायरे में हैं, जिनमें हसीना सरकार के दौरान उनकी कवरेज से जुड़े नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप शामिल हैं। संगठन ने रूपा और बाबू के मामलों का हवाला दिया, जिन्हें मई 2013 में शापला चट्टार में हुई हेफ़ाज़त-ए-इस्लाम की रैली पर हुई कार्रवाई पर उनकी रिपोर्टिंग के लिए न्यायाधिकरण के समक्ष पेश होने का आदेश दिया गया था। आरोप था कि इस रिपोर्टिंग ने मानवता के विरुद्ध अपराधों में योगदान दिया।इसे भी पढ़ें: इस तरह सीमा पार धकेले जा रहे Bangladeshi Infiltrators, बंगाल की धरती से तेजी से कम होते जा रहे हैं घुसपैठियेसीपीजे ने तर्क दिया कि मीडिया की जवाबदेही से संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानूनी मिसालें संपादकीय निर्णयों के बजाय हिंसा के लिए सीधे उकसाने पर केंद्रित हैं और अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) का इस्तेमाल पत्रकारिता कार्यों को दंडित करने के लिए न किया जाए। रिपोर्ट में आगे हसीना प्रशासन और वर्तमान सरकार दोनों के शासनकाल में पत्रकारों के विरुद्ध किए गए अपराधों के लिए जवाबदेही की मांग की गई, और इस बात पर जोर दिया गया कि न्याय राजनीतिक विचारों पर निर्भर नहीं होना चाहिए। इसने सरकार से पत्रकारों और मीडिया संगठनों को भीड़ हिंसा से बचाने का आग्रह किया, और बताया कि दिसंबर 2025 में हुई अशांति के दौरान कई मीडिया संस्थानों पर हमले हुए थे। सीपीजे ने कहा कि प्रमुख समाचार पत्रों प्रोथोम आलो और द डेली स्टार के कार्यालयों पर हमला किया गया और आग लगा दी गई, जिससे दोनों संगठनों को अस्थायी रूप से प्रकाशन बंद करना पड़ा।इसे भी पढ़ें: घुसपैठियों की अब खैर नहीं, Amit Shah Bengal Border जा रहे हैं, Bangladeshi अधिकारी भागे भागे भारत आ रहे हैंरिपोर्ट में आगे कहा गया कि हसीना प्रशासन और वर्तमान सरकार दोनों के तहत पत्रकारों के विरुद्ध किए गए अपराधों के लिए जवाबदेही तय की गई और न्याय पर राजनीतिक विचार निर्भर नहीं होने चाहिए। निगरानी संस्था ने 2025 में राजनीतिक घटनाओं को कवर करने वाले पत्रकारों के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न की कम से कम 10 घटनाओं का भी दस्तावेजीकरण किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि इनमें से अधिकांश में बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) और उसके छात्र विंग, छात्र दल के सदस्य या सहयोगी शामिल थे। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Karachi University में Teachers का बवाल, सरकारी प्रस्ताव ठुकराया, Exam Boycott जारी</title>
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<description><![CDATA[ कराची विश्वविद्यालय में चल रहे परीक्षा बहिष्कार को समाप्त करने के उद्देश्य से सरकार समर्थित प्रस्ताव को शिक्षकों द्वारा भारी बहुमत से खारिज किए जाने के बाद उथल-पुथल और गहरी हो गई है। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, इससे संस्थान के प्रशासन और कर्मचारियों की वित्तीय शिकायतों के निपटान के प्रति बढ़ती असंतोष की भावना उजागर होती है। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, कराची विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (केयूटीएस) ने एक आम सभा की बैठक में प्रांतीय अधिकारियों के हस्तक्षेप के बावजूद अपना विरोध जारी रखने और सेमेस्टर परीक्षाओं का बहिष्कार बनाए रखने का निर्णय लिया। यह निर्णय शिक्षकों द्वारा किसी भी ऐसे समझौते का कड़ा विरोध करने के बाद आया है जो उनके लंबे समय से लंबित बकाया के तत्काल भुगतान की गारंटी नहीं देता है।इसे भी पढ़ें: Shaurya Path: आकाश पर राज करेगी Indian Air Force, South Asia में ताकत के सारे समीकरण बदलकर रख देंगे 114 Rafale Jetsयह विवाद सिंध उच्च शिक्षा आयोग (एसएचईसी) द्वारा केयूटीएस, अधिकारी कल्याण संघ (ओडब्ल्यूए) और कर्मचारी कल्याण संघ (ईडब्ल्यूए) के प्रतिनिधियों के साथ 1 जून को हुई बैठक के बाद अधिसूचना जारी करने के बाद और बढ़ गया। अधिसूचना में विश्वविद्यालय कर्मचारियों को प्रभावित करने वाले वित्तीय और प्रशासनिक मुद्दों की समीक्षा करने के लिए छह सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की गई। एसएचईसी के अध्यक्ष की अध्यक्षता में गठित समिति, जिसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और कर्मचारी प्रतिनिधि शामिल हैं, को शिकायतों की जांच करने, वित्तीय प्रभावों का आकलन करने, हितधारकों से परामर्श करने और 40 दिनों के भीतर सिफारिशें प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि कर्मचारी प्रतिनिधियों ने परीक्षा बहिष्कार को तुरंत वापस लेने और विश्वविद्यालय को प्रभावित परीक्षाओं को पुनर्निर्धारित करने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की है।इसे भी पढ़ें: ब्रिटिश संसद में पाकिस्तानी मुस्लिमों पर बड़ा खुलासा, हिल जाएगा भारत!हालांकि, शिक्षकों की आम सभा ने इस व्यवस्था का समर्थन करने से इनकार कर दिया, यह तर्क देते हुए कि केवल उस सामूहिक निकाय को ही इसे समाप्त करने का अधिकार है जिसने विरोध शुरू किया था। कुट्स के अध्यक्ष डॉ. सैयद गुफरान आलम ने कहा कि जहां यूनियन प्रतिनिधियों ने एसएचईसी के साथ चर्चा के दौरान संवाद का स्वागत किया और आशावाद व्यक्त किया, वहीं व्यापक शिक्षण समुदाय आश्वस्त नहीं हुआ। डॉन द्वारा उजागर की गई जानकारी के अनुसार, संकाय सदस्यों ने कथित तौर पर विश्वविद्यालय प्रशासन पर अविश्वास का माहौल बनाने का आरोप लगाया और जोर देकर कहा कि बकाया भुगतान का भुगतान होने तक कोई समझौता संभव नहीं होगा। कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय के कुलपति की वार्ता में भागीदारी का विरोध किया। यह विरोध शाम की कक्षाओं, परीक्षा संबंधी कार्यों, प्रश्नपत्र तैयार करने, नकल जांचने, अवकाश नकदीकरण और अन्य लाभों के लिए अवैतनिक मुआवजे को लेकर है। गैर-शिक्षण कर्मचारियों के समर्थन से शिक्षकों ने विश्वविद्यालय के बिगड़ते वित्तीय संकट की गहन जांच की मांग की है और डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, अपनी मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रखने का संकल्प लिया है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Japan में बच्चों की Online Safety पर एक्शन, Social Media के लिए सख्त Age Verification की मांग</title>
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<description><![CDATA[ जापान में एक सरकारी पैनल ने मंगलवार को नाबालिग सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए प्रस्तावित उपायों की सूची में सोशल मीडिया संचालकों की जिम्मेदारियों को मजबूत करने का आह्वान किया, जिसमें उन्हें सख्त आयु सत्यापन लागू करने और कुछ सुविधाओं पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता शामिल है। क्योटो न्यूज़ के मुताबिक, संचार मंत्रालय के पैनल ने कहा कि अन्य देशों में देखे जाने वाले आयु-आधारित पूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं हो सकते हैं, क्योंकि सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण संचार उपकरण है। रिपोर्ट के मसौदे में युवाओं की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए ऐसी सेवाओं पर उनकी निर्भरता कम करने के उद्देश्य से उठाए गए उपायों पर प्रकाश डाला गया है। यह घटनाक्रम स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के व्यापक उपयोग के बीच आया है, जिससे इनके हानिकारक प्रभावों, जिनमें नाबालिगों का आपराधिक गतिविधियों में शामिल होना भी शामिल है, को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।इसे भी पढ़ें: Bangladesh में Press Freedom पर संकट! CPJ ने सरकार को दिए 10 सुझाव, पत्रकारों पर &#039;FIR राज&#039; खत्म करने की मांगक्योटो न्यूज़ के अनुसार, मौजूदा उपाय ज्यादातर मोबाइल कंपनियों द्वारा हानिकारक वेबसाइटों तक पहुंच को रोकने के लिए फ़िल्टरिंग सेवाओं और घर पर माता-पिता की निगरानी तक ही सीमित रहे हैं। पिछले साल से, जापान का आंतरिक मामलों और संचार मंत्रालय युवा उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम प्रदाताओं की भूमिका बढ़ाने पर चर्चा कर रहा है। क्योटो न्यूज़ ने बताया कि देश की बाल एवं परिवार एजेंसी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत होने पर विशिष्ट उपायों का निर्धारण करेगी और यह भी देखेगी कि क्या कानूनी संशोधनों की आवश्यकता है। अंतिम रिपोर्ट गर्मियों तक प्रस्तुत होने की उम्मीद है। जापान उन देशों की सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने हाल ही में नाबालिगों के बीच सोशल मीडिया के उपयोग से संबंधित कानूनों का प्रस्ताव रखा है और उनमें से कई ने उन्हें लागू भी किया है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:25 +0530</pubDate>
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<title>भारत के जिगरी दोस्त पर पहले किया हमला, फिर जारी किया वीडियो, यूक्रेन के एक्शन से हिली दुनिया</title>
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<description><![CDATA[ रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव समेत कई शहरों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया। इसमें 15 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हो गए। हमले में कई रिहायशी इमारतें तबाह हो गई और लोग मलबे में दब गए। मध्य यूक्रेन के दूनीप्रो शहर में राहतकर्मियों ने मलबे से 3 साल के एक बच्चे, उनकी मां और 8 साल के भाई के शव निकाले। नीप्रो में 12 और कीव में 6 लोगों की मौत हुई है। यूक्रेन ने रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पर हमला किया है। तस्वीरें इसकी जारी कर दी गई हैं और बताया गया है कि हम चुप नहीं बैठने वाले। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में तनाव बढ़ता चला जा रहा है। अब यूक्रेन ने रूस के सेंट पीटर्सबर्ग स्थित महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमला किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमीर जेलेंस्की ने पुष्टि भी की है कि यूक्रेनी ड्रोन ने सेंट पीटर्सबर्ग के स्थित क्रोशियन टाट के एक नौसेसिक अड्डे और तेल टर्मिनल को निशाना बनाया। इसकी तस्वीरें जारी कर दी गई और जेलस्की ने अपने संदेश में कहा है कि हमलों का लक्ष्य पूरी तरह से सैन्य प्रतिष्ठान थे। उन्होंने बताया कि क्रोनस्टार्ट द्वीप पर स्थित उन ससैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया जहां रूस के बाल्टिक बेड़े के तत्व तैनात थे। जहाज निर्माण और मरम्मत से जुड़ी प्रमुख सुविधाएं मौजूद थी। इसके अलावा यूक्रेनी सेना ने रूस के तांबोश क्षेत्र में स्थित एक औद्योगिक प्रतिष्ठान पर भी हमला किया है जो कथित रूप से हथियारों के उत्पादन में शामिल था। इसे भी पढ़ें: भारत के लिए रूस का बड़ा ऑफर, बड़े-बड़े देश हुए परेशान!यह क्षेत्र यूक्रेन से लगभग 600 कि.मी. दूर है। यूक्रेन ने जिस तरीके से इस हमले को अंजाम दिया, इससे रूस भड़का हुआ है। रूस ने साफ तौर पर यह कह दिया है कि जिस तरह से यह हमला हुआ है, उसे लेकर अब रूस की तरफ से तीव्र कारवाई जारी रहेगी। सिस्टम सिस्टम इनको मिनिस्टर खुदा यह हमला ऐसे वक्त में हुआ है जब रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन के प्रमुख आर्थिक कार्यक्रम सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम की शुरुआत होने वाली थी। ऐसे में सेंट पीटर्सबर्ग पर हुआ ड्रोन हमला ना केवल सैन्य बल्कि प्रतीकात्मक रूप से और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह इकोनॉमिक फोरम रूस के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। विश्लेषकों का मानना है कि यूक्रेन द्वारा रूस के भीतर इतने अंदर जाकर हमला करना और तमाम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना बताता है कि अब युद्ध किस तरीके से बदलता चला जा रहा है और खतरा इस बात का भी बढ़ गया है कि यूक्रेन पर होने वाले हमले अब और भी ज्यादा भीषण होंगे।इसे भी पढ़ें: Russia की तस्वीर ने हिलाई दुनिया, रातों-रात पलटी भारत की किस्मत!रूस ने रातभर में 656 ड्रोन और 73 मिसाइलें दागीं। यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक, एयर डिफेंस सिस्टम ने 602 ड्रोन और 40 मिसाइलों को मार गिराया या निष्क्रिय कर दिया, लेकिन कई मिसाइलें और ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे। कीव, नीप्रो, पोल्टावा, खार्किव और जापोरिज्जिया प्रमुख निशाने रहे। कई इलाकों में रिहायशी भवनों, वाहनों और अन्य नागरिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। राजधानी की रहने वाली इरीना सालिकोवा ने बताया कि वह अपनी तीन साल की बेटी के साथ पूरी रात बाथटब में छिपकर बैठी रहीं। विस्फोट की वजह से उनके घर की खिड़कियां टूट गईं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमले के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों से सैन्य सहायता की अपील की।Our long-range sanctions carried out by the warriors of the Security Service of Ukraine, the Unmanned Systems Forces, the Special Operations Forces, the Defense Intelligence of Ukraine, and the State Border Guard Service of Ukraine have yielded good results. Important facilities… pic.twitter.com/esxYMexU8d— Volodymyr Zelenskyy / Володимир Зеленський (@ZelenskyyUa) June 3, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:24 +0530</pubDate>
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<title>मोदी सरकार का बड़ा फैसला, भारत में बदले विदेशियों के वीजा नियम</title>
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<description><![CDATA[ भारत में रहने वाले विदेशियों के लिए अब घड़ी की सुइयां बदल चुकी है। अगर कोई जानने वाला एक दिन भी बिना जानकारी के भारत में रुका तो उसे भारी कानूनी कारवाई का सामना करना पड़ सकता है। केंद्र सरकार ने रातोंरात इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स रूल्स 2025 लागू कर दिया है। अब 180 दिन वाला वो पुराना ग्रेस पीरियड खत्म हो चुका है। दरअसल भारत हमेशा से अपनी अतिथि देवो भव की परंपरा के लिए जाना जाता है। लेकिन बदलती सुरक्षा चुनौतियों और प्रशासनिक व्यवस्था को डिजिटल बनाने के लक्ष्य के साथ गृह मंत्रालय ने इमीग्रेशन नियमों में बड़े संशोधन किए हैं। इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य देश में रह रहे विदेशी नागरिकों का सटीक डाटा रखना और किसी भी प्रकार के अवैध प्रवास को रोकना है। देखिए अब तक नियम यह था कि अगर कोई विदेशी 180 दिन से ज्यादा रुकता था तो उसे अतिरिक्त 14 दिन मिलते थे। लेकिन अब इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स रूल्स 2025 के तहत प्री रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। इसे भी पढ़ें: West Bengal में Mamata Banerjee को बड़ा झटका, Ritabrata Banerjee बने विपक्ष के नेता!अगर आपका वीजा 180 दिन का है और आपको लगता है कि आपको 181वें दिन भी भारत में रहना है तो आपको वो 180 दिन खत्म होने से पहले ही रजिस्ट्रेशन कराना होगा। सबसे बड़ी बात है कोई ग्रेस पीरियड नहीं। जी हां, अब आप यह नहीं कह सकते हैं कि समय खत्म होने के बाद हम फॉर्म भर देंगे। सरकार ने साफ कर दिया है कि समय सीमा के भीतर सूचना देना अब आपकी कानूनी जिम्मेदारी है। तीसरा मुख्य बिंदु है लंबी अवधि के वीजा पर भी लगाम। जिनके पास 1 साल या 5 साल का वीजा है उनके लिए भी नियम काफी सख्त हैं। अगर वे 1 साल में 180 दिन से ज्यादा भारत में बिता रहे हैं तो उन्हें हर हाल में रजिस्ट्रेशन ऑफिसर को रिपोर्ट करना होगा। वैसे इस कानून में एक बहुत ही भावुक और तकनीकी पहलू भी जुड़ा हुआ है जो उन बच्चों से जुड़ा है जिनका जन्म भारत में हुआ है लेकिन माता-पिता में कोई एक विदेशी है। इतना नहीं भारतीय माता-पिता को राहत है। अगर माता-पिता में से एक भारतीय है और वे चाहते हैं कि बच्चा भारतीय नागरिक ही बना रहे, तो उन्हें जन्म के 30 दिनों के भीतर वीजा या एग्जिट परमिट के लिए भागदौड़ करने की जरूरत नहीं होगी। और यह एक बहुत बड़ी राहत है। इसके अलावा एक और अन्य बिंदु है दोहरी नागरिकता की स्थिति। लेकिन अगर वो बच्चा बड़ा होकर या किसी भी समय किसी दूसरे देश की नागरिकता को ले लेता है तो इसकी जानकारी 30 दिनों के भीतर सरकार को देनी होगी और ऐसा ना करना कानून का उल्लंघन माना जाएगा। इसे भी पढ़ें: अब नहीं बढ़ेगा हवाई किराया? Modi Govt का बड़ा फैसला, ATF Price कंट्रोल के लिए 10,000 करोड़ मंजूरयह नियम केवल विदेशियों पर ही नहीं बल्कि उन्हें सेवाएं देने वाले संस्थाओं पर भी लागू होता है। भारत में इलाज कराने आने वाले विदेशियों की संख्या बहुत ज्यादा है। अब अस्पतालों और नर्सिंग होम के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपने यहां भर्ती हर विदेशी नागरिक की सटीक जानकारी सरकार को दें। अगर कोई संस्थान अगर यह जानकारी छुपाता है तो उनका लाइसेंस रद्द हो सकता है। सरकार अब हर उस जगह का रिकॉर्ड चाहती है जहां कोई विदेशी नागरिक ठहरा है या खुद को दिखाने जा रहा है? लेकिन सवाल यह भी है कि क्या यह कदम सुरक्षा के लिए है? एक्सपर्टों का साफ कहना है कि इन नियमों से ना केवल आंतरिक सुरक्षा काफी मजबूत हो जाएगी बल्कि इमीग्रेशन की प्रक्रिया भी पारदर्शी हो जाएगी। गृह मंत्रालय अब एक क्लिक पर जान सकेगा कि किस राज्य में कितने विदेशी अपनी वीजा अवधि से ज्यादा समय से रह रहे हैं और इन सख्त नियमों से उन लोगों की पहचान करना काफी आसान हो जाएगा जो टूरिस्ट वीजा पर आकर यहां अवैध रूप से बस जाते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:23 +0530</pubDate>
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<title>Kuwait Drone Attack में भारतीय की मौत, US&#45;Iran तनाव के बीच Middle East में बढ़ा खतरा</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कुवैत से एक दुखद खबर सामने आई है। कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए ड्रोन हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है। घटना के बाद कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतक के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की है।मौजूद जानकारी के अनुसार यह हमला बुधवार को हुआ, जिसमें हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल को भी भारी नुकसान पहुंचा है। भारतीय दूतावास ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वह मृतक के परिवार के संपर्क में है और कुवैती अधिकारियों के साथ मिलकर हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। साथ ही हमले में घायल हुए लोगों की मदद के लिए भी समन्वय किया जा रहा है।बता दें कि यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच टकराव की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। हालांकि संघर्ष विराम बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।गौरतलब है कि कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा क्षेत्र के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक माना जाता है। ऐसे में वहां हुए हमले ने न केवल कुवैत बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ड्रोन हमले से यात्री टर्मिनल के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है, जिससे हवाई अड्डे के संचालन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।वहीं अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने कुवैत में तैनात अपने सैनिकों को निशाना बनाकर भेजे गए कई ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया। सेना के अनुसार कुवैत की ओर दागी गई कुछ मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही टूट गईं। इसके अलावा बहरीन की ओर बढ़ रहे ड्रोन और मिसाइलों को भी अमेरिकी तथा बहरीनी सुरक्षा बलों ने मिलकर रोक दिया है।बता दें कि बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है, जिसके कारण वहां की सुरक्षा को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र में किसी भी सैन्य गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।मौजूद जानकारी के अनुसार घटनाओं के बाद अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई की है। बताया जा रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित क़ेश्म द्वीप पर एक सैन्य नियंत्रण केंद्र को निशाना बनाकर हमला किया गया। अमेरिका और ईरान दोनों ने अपनी-अपनी कार्रवाई को जवाबी कदम बताया है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका प्रभाव पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता उन हजारों विदेशी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर है जो कुवैत और आसपास के देशों में काम कर रहे हैं। भारतीय दूतावास भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:23 +0530</pubDate>
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<title>Israel और Lebanon युद्धविराम बढ़ाने पर सहमत, हिजबुल्ला के प्रवेश पर लगेगा बैन, अमेरिका की मध्यस्थता में बनी बात</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। इजराइल और लेबनान अपने युद्धविराम (Ceasefire) को आगे बढ़ाने के लिए सहमत हो गए हैं। इस समझौते के तहत लेबनान के भीतर प्रायोगिक तौर पर कुछ विशेष &#039;सुरक्षा क्षेत्र&#039; (Security Zones) बनाए जाएंगे, जहाँ हिजबुल्ला के लड़ाकों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा।इसे भी पढ़ें: Muzaffarpur Hospital Fire | मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल के आईसीयू में भीषण आग लगने से तीन मरीजों की मौत
अमेरिका की मध्यस्थता में विदेश मंत्रालय में हुई चौथे दौर की वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने कहा कि यह युद्धविराम तभी प्रभावी रहेगा ‘‘जब हिजबुल्ला पूरी तरह हमले बंद करे और लितानी नदी के दक्षिण के इलाकों से अपने सभी लड़ाकों को हटा ले।’’
अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि ये सुरक्षा क्षेत्र किस तरह स्थापित किए जाएंगे। हालांकि, समझौते में कहा गया है कि उन क्षेत्रों की पूरी जिम्मेदारी लेबनान की सेना को सौंपी जाएगी।
बयान में यह भी कहा गया, ‘‘ये कदम व्यापक शांति और सुरक्षा समझौते का मार्ग प्रशस्त करेंगे।’’
इसमें कहा गया, ‘‘सभी देशों ने इस बात पर जोर दिया कि इजराइल और लेबनान के बीच संबंधों का भविष्य दोनों की संप्रभु सरकारें ही तय करेंगी और किसी भी देश या गैर-राज्यीय समूह को लेबनान का भविष्य बंधक बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।’’
दरअसल, यह ईरान की ओर संकेत था जो हिजबुल्ला का समर्थन करता है और इस बात पर जोर देता रहा है कि ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ होने वाले किसी संभावित समझौते के तहत लेबनान पर इजराइली हमले रोके जाएं।
इजराइल-लेबनान वार्ता में हिजबुल्ला शामिल नहीं है।इसे भी पढ़ें: Crude Oil संकट से बढ़ेगी महंगाई? Petrol-Diesel की मांग घटी, देश की Economy पर मंडराया बड़ा खतरा। इस समझौते को मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि लेबनान की सेना इन सुरक्षा क्षेत्रों को हिजबुल्ला से मुक्त रखने में सफल रहती है, तो यह आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच एक मजबूत और सुरक्षित सीमा रेखा का आधार बन सकता है।  Stay updated with International
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:07:22 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन में रूसी सैन्य बलों के हवाई हमलों की एक और लहर, यूएन ने की निन्दा</title>
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<description><![CDATA[ रूसी सैन्य बलों ने बीती रात, यूक्रेन के तीन शहरों पर ड्रोन व मिसाइल हमले किए हैं, जिनमें अनेक आम नागरिक मारे गए हैं, बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं और घरों, अस्पतालों व दुकानों को क्षति पहुँची है. संयुक्त राष्ट्र मानवतावादी कार्यालय (OCHA) ने क्षोभ व्यक्त किया है कि आम नागरिक इस युद्ध की एक विशाल क़ीमत चुका रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:06:45 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान: संकट से ज़िन्दगियों पर जोखिम, गर्भवती महिलाओं व लड़कियों के लिए बढ़ी मुश्किलें</title>
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<description><![CDATA[ लेबनान के दक्षिणी हिस्से में इसराइली सैन्य बलों के हमलों और राजधानी बेरूत में व्याप्त तनाव की वजह से स्थानीय परिवार भय और अनिश्चितता में जीवन गुज़ार रहे हैं. बड़ी संख्या में लोग सुरक्षा की तलाश में बेघर होने के लिए मजबूर हैं और महिलाएँ व लड़कियाँ विकट परिस्थितियों से जूझ रही हैं. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:06:37 +0530</pubDate>
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<title>India&#45;Australia Relations | भारत&#45;ऑस्ट्रेलिया रक्षा संबंध होंगे मजबूत! पीएम मोदी के दौरे में रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर रहेगा मुख्य फोकस</title>
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<description><![CDATA[ भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक और सैन्य साझेदारी आने वाले दिनों में एक नई ऊंचाई छूने जा रही है। ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने सोमवार को कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने साफ किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आगामी ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा संबंध सबसे प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगे। यह बात रिचर्ड मार्लेस ने नई दिल्ली में आयोजित &#039;भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों के संवाद&#039; (India-Australia Defence Ministers&#039; Dialogue) के दूसरे संस्करण की सह-अध्यक्षता करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कही। इस उच्च स्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष रिचर्ड मार्लेस ने की।पीएम मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा और शिखर वार्ता पर नजरऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज की आगामी शिखर वार्ता में रक्षा एवं समुद्री सुरक्षा सहयोग पर विशेष जोर रहेगा। हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच दोनों देशों का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिचर्ड मार्लेस, उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री, ऑस्ट्रेलिया के बयान के अनुसार &quot;भारत और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा संबंध लगातार गहरे हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की आगामी ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग हमारी चर्चाओं का एक मुख्य स्तंभ होगा।&quot;&#039;पिच ब्लैक&#039; अभ्यास में दहाड़ेंगे भारतीय &#039;राफेल&#039;इस संवाद के दौरान रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी घोषणा की गई। रिचर्ड मार्लेस ने जानकारी दी कि भारतीय वायुसेना (IAF) अगले महीने ऑस्ट्रेलिया में आयोजित होने वाले बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास ‘पिच ब्लैक’ (Exercise Pitch Black) में हिस्सा लेगी।इस बार भारतीय वायुसेना अपने अत्याधुनिक राफेल (Rafale) लड़ाकू विमानों के साथ इस युद्धाभ्यास में शामिल होगी, जो दोनों देशों की वायुसेनाओं के बीच बढ़ते अंतर-संचालनीयता (Interoperability) और तालमेल को दर्शाता है।बैठक की मुख्य बातें (Key Highlights)द्विपक्षीय संवाद: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रिचर्ड मार्लेस ने नई दिल्ली में रक्षा मंत्रियों के संवाद के दूसरे संस्करण की सह-अध्यक्षता की।समुद्री सुरक्षा पर जोर: आगामी द्विपक्षीय शिखर वार्ता में समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता पर विशेष फोकस रहेगा।सैन्य अभ्यास: भारतीय राफेल विमान ऑस्ट्रेलिया में होने वाले प्रतिष्ठित &#039;पिच ब्लैक&#039; अभ्यास में अपनी ताकत दिखाएंगे। Stay updated with International
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<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 08:01:55 +0530</pubDate>
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<media:keywords>India-Australia, Relations, भारत-ऑस्ट्रेलिया, रक्षा, संबंध, होंगे, मजबूत, पीएम, मोदी, के, दौरे, में, रक्षा, और, समुद्री, सुरक्षा, पर, रहेगा, मुख्य, फोकस</media:keywords>
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<title>US Operation Checkmate | अमेरिका में &amp;apos;ऑपरेशन चेकमेट&amp;apos; के तहत 30 अवैध भारतीय ट्रक चालक गिरफ्तार, जल्द होंगे निर्वासित</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे और वाणिज्यिक ट्रक चालक (Commercial Truck Driver) के तौर पर काम कर रहे करीब 30 भारतीय नागरिकों को एक बड़े संघीय अभियान के तहत गिरफ्तार किया गया है। इन सभी को जल्द ही अमेरिका से निर्वासित (Deport) किया जाएगा। यह कार्रवाई अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन चेकमेट’ (Operation Checkmate) के तहत की गई है। CBP द्वारा सोमवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, एरिजोना में युमा सेक्टर के सीमा गश्त एजेंटों ने 11 से 15 मई के दौरान इस विशेष अभियान को अंजाम दिया। क्या है &#039;ऑपरेशन चेकमेट&#039; और कैसे हुई गिरफ्तारी?
अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (सीबीपी) ने सोमवार को एक बयान में बताया कि एरिजोना में युमा सेक्टर के सीमा गश्त एजेंटों ने 11 से 15 मई के दौरान अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे 52 लोगों को ‘ऑपरेशन चेकमेट’ के तहत गिरफ्तार किया जिनमें से 36 ट्रक चलाते पाए गए।
गिरफ्तार किए गए इन अवैध ट्रक चालकों में 30 भारत से हैं जबकि बाकी छह मेक्सिको, अल सल्वाडोर और रूस से हैं। उनके पास कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, वाशिंगटन और वर्जीनिया जैसे राज्यों के वाणिज्यिक चालक लाइसेंस थे जबकि कुछ के पास किसी भी तरह का चालक लाइसेंस नहीं था। इनमें से अधिकतर लोगों के पास ऐसे रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज थे जो अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के नेतृत्व वाले प्रशासन के दौरान हासिल किए गए थे और अब वैध नहीं हैं। सभी लोगों के खिलाफ संघीय कानून के तहत कार्रवाई की गई है और उन्हें निर्वासित किया जाएगा।
‘ऑपरेशन चेकमेट’ का उद्देश्य देश में अवैध रूप से रह रहे और वाणिज्यिक मोटर वाहन चला रहे लोगों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार करना और आव्रजन कानूनों को लागू कर सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करना है।
अमेरिकी सीमा गश्त के युमा सेक्टर के कार्यवाहक मुख्य गश्त एजेंट डस्टिन कॉडल ने कहा, ‘‘ऑपरेशन चेकमेट समुदायों और सड़कों को ऐसे चालकों से सुरक्षित रखने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है जो गैरकानूनी रूप से रहकर वाहन चलाते हैं और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम पैदा करते हैं।’’
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन के तहत परिवहन विभाग ने अयोग्य विदेशी चालकों को वाणिज्यिक ट्रक और बस चलाने के लिए लाइसेंस प्राप्त करने से रोकने का आदेश जारी किया है।
पिछले कई महीनों में अमेरिका में वाणिज्यिक वाहन चलाते समय घातक हादसे करने के आरोप में भारतीय मूल के ट्रक चालकों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ आरोप तय किए जाने के मामले सामने आए हैं। Stay updated with International
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<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 08:01:54 +0530</pubDate>
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<title>फोन पर Donald Trump ने की Netanyahu से की गालियां देकर बात! धमकी दी और कहा&#45; &amp;apos;अगर मैं न होता तो तुम जेल में होते&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर हुई एक बेहद असाधारण और तीखी बातचीत का खुलासा हुआ है। Axios की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के अनुसार, लेबनान में इजरायल के बढ़ते सैन्य अभियान से नाराज राष्ट्रपति ट्रंप ने नेतन्याहू पर जमकर गुस्सा निकाला और बातचीत के दौरान अपशब्दों (गालियों) का भी इस्तेमाल किया। यह टकराव तब हुआ जब वाशिंगटन, ईरान के साथ चल रही अपनी बेहद संवेदनशील कूटनीतिक बातचीत को बचाने की कोशिश कर रहा था, जिसमें इजरायली हमले लगातार बाधा बन रहे थे।  दो अमेरिकी अधिकारियों और इस बातचीत से जुड़े सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप, नेतन्याहू की कार्यप्रणाली से इस कदर नाराज थे कि एक समय वह चिल्ला पड़े— &quot;तुम आखिर कर क्या रहे हो?&quot; एक अमेरिकी अधिकारी ने ट्रंप के कड़े शब्दों का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने नेतन्याहू से कहा: &quot;तुम साले पागल हो। अगर मैं न होता तो तुम जेल में होते। मैं तुम्हारी जान बचा रहा हूँ। अब हर कोई तुमसे नफरत करता है। इसी वजह से हर कोई इजरायल से नफरत करता है।&quot; इसे भी पढ़ें: वाराणसी एयरपोर्ट पर कस्टम की बड़ी कार्रवाई! 19 करोड़ रुपये के &#039;हाइड्रोपोनिक&#039; गांजे के साथ थाईलैंड के 6 नागरिक गिरफ्तारयह टकराव सोमवार को तब और बढ़ गया जब नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने बेरूत के दाहिये जिले में हिजबुल्लाह के नियंत्रण वाले इलाकों पर हमले का आदेश दिया। उन्होंने इसके पीछे हिजबुल्लाह द्वारा संघर्ष विराम के बार-बार उल्लंघन और इजरायली क्षेत्र पर हमलों का हवाला दिया। इस घोषणा के बाद लेबनान की राजधानी के दक्षिणी इलाकों में रहने वाले लोग बड़े हवाई हमलों के डर से वहां से भागने लगे। ईरान, जो हिजबुल्लाह का समर्थन करता है, ने चेतावनी दी कि लेबनान में इजरायल के लगातार हमले वॉशिंगटन के साथ चल रही उन बातचीत को पटरी से उतार सकते हैं, जिनका मकसद महीनों के संघर्ष के बाद तनाव कम करना है। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार जोर देकर कहा है कि लेबनान में संघर्ष विराम अमेरिका के साथ किसी भी व्यापक समझौते का एक अहम हिस्सा है। इसे भी पढ़ें: US Operation Checkmate | अमेरिका में &#039;ऑपरेशन चेकमेट&#039; के तहत 30 अवैध भारतीय ट्रक चालक गिरफ्तार, जल्द होंगे निर्वासितअमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप इजरायल की इस दलील को समझते थे कि वह हिजबुल्लाह के रॉकेट और ड्रोन हमलों का जवाब दे रहा है, लेकिन उनका मानना ​​था कि नेतन्याहू इस संघर्ष को जरूरत से ज्यादा बढ़ा रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि ट्रंप लेबनान में आम नागरिकों की मौत की संख्या से खास तौर पर परेशान थे और उन्होंने हिजबुल्लाह के किसी एक कमांडर को निशाना बनाने के लिए बड़े पैमाने पर किए जा रहे हमलों पर आपत्ति जताई।इस बातचीत का तुरंत असर होता दिखा। एक इजरायली अधिकारी ने Axios को बताया कि इजरायल का अब बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है। बाद में, ट्रंप ने कहा कि उन्होंने नेतन्याहू से बात की है और बेरूत की ओर बढ़ रहे इजरायली सैनिकों को वापस बुला लिया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि हिज़्बुल्लाह ने बिचौलियों के ज़रिए, इज़रायल पर हमले रोकने पर सहमति जताई है। ट्रंप ने Truth Social पर लिखा, &quot;मेरी प्रधानमंत्री बीबी नेतन्याहू के साथ बहुत ही सार्थक बातचीत हुई,&quot; और साथ ही यह भी जोड़ा कि &quot;बेरूत में कोई भी सैनिक नहीं भेजा जाएगा।&quot;हालाँकि, नेतन्याहू ने इज़रायल की व्यापक सैन्य स्थिति में किसी भी बदलाव का कोई संकेत नहीं दिया। बातचीत के बाद जारी एक बयान में, उन्होंने कहा कि इज़रायल दक्षिणी लेबनान में अपना अभियान जारी रखेगा और चेतावनी दी कि अगर हिज़्बुल्लाह ने इज़रायल पर गोलीबारी बंद नहीं की, तो बेरूत पर हमला करना अभी भी एक विकल्प बना हुआ है।नेतन्याहू ने कहा, &quot;हमारी स्थिति वही बनी हुई है।इस टकराव ने ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर घनिष्ठ तालमेल के बावजूद, दोनों नेताओं के बीच बढ़ते तनाव को उजागर किया। एक अमेरिकी अधिकारी ने इसे ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद से ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई सबसे ज़्यादा विवादित बातचीत में से एक बताया। अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप की नाराज़गी मुख्य रूप से इस चिंता से उपजी थी कि लेबनान का संघर्ष, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को खत्म कर सकता है; हालाँकि बाद में उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह बातचीत &quot;तेज़ गति से जारी है।&quot; Stay updated with International
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<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 08:01:53 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump का बड़ा दावा, मेरे कहने पर Netanyahu ने Lebanon पर हमले से सेना वापस बुलाई</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेबनान के खिलाफ हमले को रोकने के लिए राजी कर लिया है, जिसके बाद उन्होंने अपने सैनिकों को वापस बुला लिया।
 ट्रंप ने सोमवार शाम को ‘ट्रुथ सोशल’ पर यह घोषणा की। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों नेताओं के बीच ‘‘तीखी’’ बातचीत की खबरें सामने आ रही थीं। खबरों के अनुसार ट्रंप ने नेतन्याहू से यह भी कहा कि अगर उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो इजराइल के प्रधानमंत्री आज जेल में होते।
 उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री को उनके लोकप्रिय उपनाम से संबोधित करते हुए कहा, ‘‘आज (सोमवार) मेरी बीबी नेतन्याहू से बातचीत हुई। मैंने उनसे लेबनान के बेरूत में कोई बड़ा हमला न करने का अनुरोध किया। उन्होंने अपनी सेना को वापस बुला लिया। धन्यवाद बीबी।’’
 ईरान द्वारा लेबनान पर इजराइल के हमलों को लेकर अमेरिका के साथ जारी बातचीत को खत्म करने की धमकी के बाद ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत हुई। नेतन्याहू ने कहा था कि अगर हिजबुल्ला इजराइल पर हमले बंद नहीं करता है तो इजराइल बेरूत में ‘‘आतंकी ठिकानों’’ पर हमला करेगा।
ट्रंप ने कहा कि उनकी हिजबुल्ला के नेताओं के प्रतिनिधियों से भी बातचीत हुई, जो ‘‘इजराइल और उसके सैनिकों पर गोलीबारी बंद करने’’ पर सहमत हुए।
 उन्होंने कहा, ‘‘मेरी हिजबुल्ला के नेताओं के प्रतिनिधियों से भी बातचीत हुई और वे इजराइल तथा उसके सैनिकों पर गोलीबारी बंद करने पर सहमत हुए। इसी तरह, इजराइल भी उन पर गोलीबारी बंद करने पर सहमत हो गया। देखते हैं यह कब तक चलता है - उम्मीद है कि यह हमेशा के लिए चलेगा।’’
 अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘एक्सियोस’ ने बताया कि ट्रंप और नेतन्याहू की फोन कॉल के दौरान तीखी बहस हुई। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 08:01:52 +0530</pubDate>
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<title>Iran आत्मसमर्पण करेगा, तब भी Media उसे जीत बताएगा..., ऐसा क्यों बोले Donald Trump</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार (स्थानीय समय) को एक काल्पनिक परिदृश्य का वर्णन किया, जिसमें अगर ईरान आत्मसमर्पण कर देता है और उसे पूर्ण सैन्य आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया जाता है, तब भी राजनीतिक विरोधी और मीडिया परिणाम को तोड़-मरोड़ कर पेश करेंगे। अपने पोस्ट में, ट्रम्प ने दावा किया कि अगर ईरान की नौसेना और वायु सेना नष्ट हो जाती है और उसकी सेना तेहरान से पीछे हट जाती है, हथियार डाल दिए जाते हैं और हाथ ऊपर उठा लिए जाते हैं, और यहां तक ​​कि अगर ईरान का नेतृत्व आत्मसमर्पण के सभी आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर देता है और शानदार अमेरिका की महान शक्ति और सामर्थ्य के सामने हार स्वीकार कर लेता है, तब भी आलोचक परिणाम को गलत तरीके से पेश करेंगे। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: इधर Trump बोले, &#039;&#039;दुनिया तुसमे नफरत कर रही है&#039;&#039;, उधर इजराइली बोले, &#039;&#039;अमेरिका के आगे झुको मत&#039;&#039;, दोनों तरफ से घिर गये Netanyahuट्रम्प ने कहा कि यदि ईरान आत्मसमर्पण कर देता है, यह स्वीकार कर लेता है कि उसकी नौसेना नष्ट हो चुकी है और समुद्र की तलहटी में पड़ी है, और उसकी वायु सेना अब हमारे साथ नहीं है, और यदि उसकी पूरी सेना तेहरान से हथियार डालकर और हाथ ऊपर उठाकर, प्रत्येक मैं आत्मसमर्पण करता हूँ, मैं आत्मसमर्पण करता हूँ चिल्लाते हुए, प्रतीक सफेद झंडा लहराते हुए बाहर निकल आती है, और यदि उसका शेष पूरा नेतृत्व सभी आवश्यक &quot;आत्मसमर्पण दस्तावेजों&quot; पर हस्ताक्षर कर देता है, और महान शक्ति और शानदार संयुक्त राज्य अमेरिका के सामने अपनी हार स्वीकार कर लेता है। ट्रम्प ने कहा कि वर्णित काल्पनिक स्थितियों के पूरा होने के बावजूद, कई अमेरिकी मीडिया आउटलेट ईरान को &quot;संयुक्त राज्य अमेरिका पर एक शानदार और विजयी जीत&quot; हासिल करने वाले के रूप में चित्रित करेंगे।उन्होंने डेमोक्रेट्स की आलोचना करते हुए उन्हें ड्यूमाक्रेट्स कहा और बताया कि वे और मीडिया दोनों ही पूरी तरह से भटक गए हैं और संघर्ष के परिणाम की व्याख्या करने में बिल्कुल पागल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि असफल न्यूयॉर्क टाइम्स, चाइना स्ट्रीट जर्नल (डब्ल्यूएसजे!), भ्रष्ट और अब अप्रासंगिक सीएनएन, और फर्जी समाचार मीडिया के अन्य सभी सदस्य यह सुर्खियां बटोरेंगे कि ईरान ने संयुक्त राज्य अमेरिका पर एक शानदार और निर्णायक जीत हासिल की है, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था। ड्यूमाक्रेट्स और मीडिया पूरी तरह से भटक गए हैं। वे बिल्कुल पागल हो गए हैं!!! इसे भी पढ़ें: फोन पर Donald Trump ने की Netanyahu से की गालियां देकर बात! धमकी दी और कहा- &#039;अगर मैं न होता तो तुम जेल में होते&#039;इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मध्य पूर्व में एक सफलता की संभावना जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले सप्ताह तक तेहरान के साथ युद्धविराम को बढ़ाने और रणनीतिक समुद्री मार्ग से आवागमन बहाल करने के लिए एक समझौता हो जाएगा। उन्होंने एबीसी न्यूज को बताया कि उन्होंने महत्वपूर्ण शिपिंग लेन को अवरुद्ध करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर अंतिम मंजूरी अभी तक रोक रखी है, और समझाया, &quot;मुझे अभी भी कुछ और बिंदुओं को प्राप्त करना है।&quot; ]]></description>
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<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 08:01:51 +0530</pubDate>
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<title>Balochistan में फिर दहला Pakistan, मई में 71 आतंकी हमले, रिपोर्ट ने खोली Security की पोल</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में पिछले महीने आतंकवाद से प्रेरित हिंसा में अप्रैल की तुलना में 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे देश में आतंकवाद से जुड़े खतरों की व्यापकता का पता चलता है। यह जानकारी एक ‘थिंक टैंक’ की रिपोर्ट में दी गई है।
‘पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज’ (पीआईसीएसएस) द्वारा सोमवार को जारी मासिक सुरक्षा आकलन रिपोर्ट के अनुसार, सापेक्ष गिरावट की संक्षिप्त अवधि के बाद मई में उग्रवादी और आतंकी समूहों की सक्रियता फिर से बढ़ गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मई में पाकिस्तान में 128 आतंकवादी हमले दर्ज किए गए, जबकि अप्रैल में यह संख्या 101 थी, जो 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
इसके अनुसार, मई में 71 नागरिक, 68 सुरक्षाकर्मी और शांति समितियों के छह सदस्य मारे गए, जबकि 147 नागरिक, 35 सुरक्षाकर्मी और शांति समितियों के तीन सदस्य घायल हुए।
अप्रैल की तुलना में नागरिकों की मौतों की संख्या 37 से बढ़कर 71 हो गई, जबकि सुरक्षाकर्मियों की मौतों की संख्या 28 से बढ़कर 68 हो गईं।
रिपोर्ट में आत्मघाती हमलों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। मई में देश में छह आत्मघाती हमले हुए, जिनमें चार वाहन-आधारित आत्मघाती विस्फोट शामिल थे। इन हमलों में अकेले 34 सुरक्षाकर्मी और नौ नागरिक मारे गए।
इसके विपरीत, मार्च और अप्रैल में केवल एक-एक आत्मघाती हमला दर्ज किया गया था, जो आत्मघाती हमलों के उपयोग में बढ़ोतरी का संकेत देता है।
रिपोर्ट के अनुसार, मई में सबसे अधिक प्रभावित प्रांत बलूचिस्तान रहा, जहां 71 आतंकवादी हमले दर्ज किए गए, जबकि अप्रैल में यह संख्या 34 थी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 08:01:51 +0530</pubDate>
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<title>रोमानियाई वायु क्षेत्र के उल्लंघन पर गहरी चिन्ता, यूक्रेन में टकराव रोकने का आग्रह</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र की एक वरिष्ठ अधिकारी ने यूक्रेन युद्ध में बढ़ते हमलों और रोमानिया के एक शहर की रिहायशी इमारत के रूसी ड्रोन हमले की चपेट में आने गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए, शान्ति स्थापना के लिए सम्वाद व कूटनैतिक प्रयासों पर बल दिया है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 08:01:08 +0530</pubDate>
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<title>रोहिंग्या शरणार्थियों को नहीं भुला देने का आग्रह, धन कटौती से मदद पर संकट</title>
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<description><![CDATA[ म्याँमार में रहने वाले रोहिंग्या लोगों को वहाँ हिंसक उत्पीड़न और जानलेवा दमन का सामना करने के बाद बड़े पैमाने पर बांग्लादेश में शरण लेने के लिए पहुँचे हुए नौ वर्ष होने वाले हैं. इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी UNHCR ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से, बांग्लादेश में रह रहे 12 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों को बेसहारा नहीं छोड़ देने का आग्रह किया है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 08:01:01 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान: अस्पताल पर हमला, स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को लेकर गम्भीर चिन्ता</title>
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<description><![CDATA[ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), लेबनान के दक्षिणी शहर टायर (tyre) के एक अस्पताल पर सोमवार को हुए हमले की ख़बरों की जाँच कर रहा है. यह घटना ऐसे समय हुई है, जब देश में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा प्रतिष्ठानों पर बढ़ते हमलों को लेकर चिन्ता गहरा रही है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 08:00:57 +0530</pubDate>
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<title>Nepal India Border Dispute | सीमा विवाद पर मचे बवाल के बीच नेपाल की सफाई! &amp;apos;पीएम बालेंद्र शाह का बयान केवल &amp;apos;नो&#45;मैन्स लैंड&amp;apos; और अवैध कब्जे को लेकर था</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल और भारत के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद ने रविवार को उस समय नया मोड़ ले लिया जब नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के एक बयान पर भारी राजनीतिक बवाल मच गया। दरअसल, पीएम शाह ने संसद में भारत-नेपाल सीमा मुद्दे पर बोलते हुए कहा था कि नेपाल द्वारा भी कुछ भारतीय क्षेत्रों पर &quot;अतिक्रमण&quot; किया गया है। इस टिप्पणी के बाद नेपाल भर में उपजे जन-आक्रोश और चौतरफा घिरने के बाद, नेपाल के विदेश मंत्रालय को रविवार देर रात इस मामले पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा। मंत्रालय ने साफ किया कि प्रधानमंत्री शाह की टिप्पणियां किसी रणनीतिक क्षेत्र पर कब्जे को लेकर नहीं, बल्कि सीमा पर स्थित &#039;नो-मैन्स लैंड&#039; (दसगजा) और स्थानीय स्तर पर हुए सीमा पार कब्जे से संबंधित थीं।
शाह ने यह भी कहा कि भारत और नेपाल इस मामले का समाधान निकालने के लिए इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और विशेषज्ञों की मदद लेने पर सहमत हुए हैं, और उन्होंने यह भी कहा कि काठमांडू ने इस मामले को चीन और ब्रिटेन के साथ भी उठाया है।
नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर पुराना सीमा विवाद है, जिसमें दोनों देश अपना दावा करते हैं। भारत का कहना है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं और उसने कहा है कि इस मुद्दे को द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। नयी दिल्ली ने रविवार को नेपाल के प्रधानमंत्री की टिप्पणियों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। लेकिन इस महीने की शुरुआत में, भारत ने लिपुलेख दर्रे से होकर गुजरने वाली आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल की आपत्ति को खारिज करते हुए इस क्षेत्र पर काठमांडू के क्षेत्रीय दावों को “एकतरफा कृत्रिम विस्तार” करार दिया था, जिसे नयी दिल्ली “अस्वीकार्य” मानती है।
रविवार को नेपाल के विदेश कार्यालय ने कहा कि नेपाल की वर्तमान सीमा (भारत के साथ) 1816 की सुगौली संधि पर आधारित है।इसे भी पढ़ें: Commercial Cylinders Price Hike | वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर 42 रुपये महंगा, घरेलू रसोई गैस की दरों में बदलाव नहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “नेपाल-भारत सीमा क्षेत्र में स्थित लिम्पियाधुरा, लिपुलेख, कालापानी और सुस्ता ऐसे क्षेत्र हैं जिनका सीमांकन अभी बाकी है।”
उसने कहा, “नेपाल और भारत दोनों ने राजनयिक माध्यमों और आपसी बातचीत से सीमा संबंधी मुद्दों को हल करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। भारत ने मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्रा मार्ग को खोलने से संबंधित मुद्दे पर नेपाल द्वारा भेजे गए राजनयिक नोट का जवाब पहले ही दे दिया है।”
बयान के मुताबिक, “इनके अलावा कुछ अन्य क्षेत्रों में भी सीमा पार कब्जे और ‘दसगजा’ (नो मैन्स लैंड) अतिक्रमण से संबंधित समस्याएं हैं। प्रधानमंत्री ने संसद में जिन मुद्दों का जिक्र किया, वे मुख्य रूप से दसगजा अतिक्रमण और सीमा पार कब्जे से संबंधित थे।” 
इसमें आगे कहा गया है कि दोनों देशों की तकनीकी टीमें और सीमा तंत्र सीमा स्तंभों के निर्माण और मरम्मत, दसगजा (10 गज की चौड़ाई वाला क्षेत्र) अतिक्रमण से संबंधित तथ्यों के संग्रह और लंबे समय से चल रहे सीमा पार कब्जे के संबंध में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Iran-US Peace Talks | ईरान-अमेरिका शांति वार्ता पर अटकलें खारिज, विदेश मंत्री अब्बास अराघची बोले- &#039;बातचीत जारी है, लेकिन अंतिम फैसला अभी दूर&#039; 
प्रवक्ता ने यह भी कहा कि ऐसी संभावना है कि “भारतीय सीमा में लोगों द्वारा उपयोग की जा रही भूमि नेपाली क्षेत्र में हो सकती है” और इसके विपरीत भी। बयान में कहा गया, “प्रधानमंत्री ने भारतीय भूमि के नेपाली क्षेत्र में होने के बारे में जो कहा है, वह सीमा पार कब्जे से संबंधित है।”
इसमें कहा गया, “नेपाल सरकार दोनों देशों के बीच मौजूद घनिष्ठ संबंधों, ऐतिहासिक तथ्यों, मानचित्रों और समझौतों की भावना के आधार पर संवाद और राजनयिक माध्यमों से नेपाल और भारत के बीच सीमा से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।”
शाह की टिप्पणियों से मचे बवाल और नेपाल भर में आक्रोश के बाद, मीडिया के सवालों के घेरे में आने पर विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करने के लिए बयान जारी किया।Stay updated with International
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<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 07:47:02 +0530</pubDate>
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<title>&amp;apos;मेहंदी का रंग भी नहीं उतरा था और उजड़ गया सुहाग&amp;apos;... शादी के चंद घंटों बाद दूल्हे की दर्दनाक मौत, लाश के साथ 5 घंटे तक तड़पती रही दुल्हन!</title>
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<description><![CDATA[ कहते हैं कि मौत कब और किस रूप में सामने आ खड़ी होगी, इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता। अमेरिका के जॉर्जिया से एक ऐसी ही रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने दो भारतीय मूल के परिवारों की हंसती-खेलती दुनिया को पल भर में उजाड़ दिया। सात फेरे लेने और शादी का जश्न मनाने के महज कुछ ही घंटों बाद एक नवविवाहित जोड़ा विमान हादसे का शिकार हो गया। इस भयानक हेलीकॉप्टर क्रैश में भारतीय मूल के सह-यात्री और पेशे से कमर्शियल पायलट डेव फिजी (25 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी दुल्हन चमत्कारिक रूप से जिंदा बच गई। इसे भी पढ़ें: Karnataka CM पद के बाद अब दिल्ली में कैबिनेट पर महामंथन, High Command का अंतिम फैसला!विदाई के वक्त काल बना घने कोहरे और बारिश का मौसमअटलांटा के रहने वाले डेव फिजी डेल्टा एयर लाइंस (Delta Air Lines) में एक होनहार पायलट थे। शुक्रवार को डॉसन काउंटी के डॉसनविले में स्थित एक आलीशान वेडिंग वेन्यू &#039;द रिवियर&#039; में डेव और जेसनी की शादी का भव्य आयोजन हुआ था। इस समारोह में दोनों परिवारों के सैकड़ों मेहमान शामिल हुए थे। रिसेप्शन खत्म होने के बाद, रात करीब 9:30 बजे इस नवविवाहित जोड़े को हेलीकॉप्टर से पीचट्री-डेकाल्ब एयरपोर्ट जाना था, जहां से वे अटलांटा शहर के एक होटल के लिए रवाना होने वाले थे। लेकिन विदाई के वक्त मौसम अचानक बेहद खराब हो गया। चारों तरफ घना कोहरा छा गया और तेज बारिश होने लगी, जिससे विजिबिलिटी (दृश्यता) न के बराबर रह गई।डेव के पिता जॉर्ज फिजी ने रोते हुए उस पल को याद किया:&quot;डेव खुद एक अनुभवी कमर्शियल पायलट था, इसलिए वह इस खराब मौसम में उड़ान भरने को लेकर असहज था। उसने मुझसे साफ कहा था— &#039;पापा, मैं उड़ान नहीं भरूंगा, हम इतनी कम विजिबिलिटी में रिस्क नहीं लेंगे।&#039; लेकिन इसके बावजूद मुख्य पायलट ने ज्यादा ऊंचाई पर उड़ने का फैसला किया और हेलीकॉप्टर ने टेकऑफ कर लिया।&quot; इसे भी पढ़ें: UPI Big Update: अब QR Code Scams को कहें Bye-Bye, Payment करते ही दिखेगा असली नाममनोरमा ऑनलाइन के अनुसार, डेव के माता-पिता, जॉर्ज और फीबा फिजी, कई साल पहले केरल के एर्नाकुलम जिले के मुवत्तुपुझा से US आकर बस गए थे। जेसनी के परिवार की जड़ें भी केरल के अलाप्पुझा जिले से जुड़ी हुई हैं। जॉर्ज फिजी ने &#039;अटलांटा न्यूज़ फर्स्ट&#039; को बताया, &quot;वह हमारा बहुत प्यारा बच्चा था, वह हमारे लिए भगवान का दिया हुआ एक तोहफ़ा था... वह बहुत ही सुंदर और आकर्षक था।&quot; उन्होंने कहा, &quot;हम कह सकते हैं कि यह एक एकदम सही शादी थी। हम इससे ज़्यादा और कुछ नहीं माँग सकते थे।&quot; लेकिन फिर अचानक सब कुछ बहुत बुरा हो गया।नवविवाहित जोड़े को हेलीकॉप्टर से वेन्यू से निकलकर पीचट्री-डेकाल्ब एयरपोर्ट जाना था, और फिर रात अटलांटा शहर के एक होटल में बितानी थी। लेकिन रिसेप्शन खत्म होते-होते मौसम काफ़ी खराब हो चुका था।जॉर्ज फिजी ने बताया कि शादी का जश्न रात करीब 9:30 बजे खत्म हुआ, और तब तक कोहरे और बारिश की वजह से विज़िबिलिटी (देखने की क्षमता) काफ़ी कम हो गई थी। डेव, जो एक अनुभवी कमर्शियल पायलट थे, ऐसे मौसम में उड़ान भरने को लेकर थोड़ा असहज महसूस कर रहे थे।उनके पिता ने याद करते हुए बताया, &quot;उसने कहा था कि मैं उड़ान नहीं भरूँगा, हम ऐसी कम विज़िबिलिटी में उड़ान नहीं भरेंगे।&quot;इन चिंताओं के बावजूद, हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी; बताया जाता है कि पायलट ने ज़्यादा ऊँचाई पर उड़ने का फ़ैसला किया था। बाद में, यह विमान डॉसनविले के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक ऊबड़-खाबड़, घने जंगलों और पहाड़ों वाले इलाके में क्रैश हो गया।जॉर्ज फिजी ने बताया कि जेसनी करीब पाँच घंटे तक हेलीकॉप्टर के मलबे और गिरे हुए पेड़ों के नीचे फँसी रही, जिसके बाद बचाव दल वहाँ पहुँचा और उसे बाहर निकाला। उन्होंने बताया, &quot;जेसनी ने हमें बताया कि जब उसे होश आया, तो वह मलबे के नीचे दबी हुई थी।&quot; वह जागी और देखा कि वह उसकी छाती पर लेटा हुआ है। वह खुद एक नर्स है। जब उसने उसे छुआ, तो उसने उसे आवाज़ दी। तब तक उसका शरीर ठंडा पड़ चुका था।जेसनी को शरीर पर कई जगह गहरे कट और चोटें आईं, लेकिन उसकी कोई हड्डी नहीं टूटी। जॉर्ज फिजी ने बताया कि डेव को खोने से वह &quot;पूरी तरह टूट गई है।&quot;WALB न्यूज़ के अनुसार, डॉसन काउंटी शेरिफ कार्यालय ने बताया कि शुक्रवार देर रात उन्हें एक हेलीकॉप्टर के संभावित रूप से क्रैश होने की सूचना मिली थी। फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने बाद में पुष्टि की कि रात लगभग 10:30 बजे डॉसनविले के पास एक रॉबिन्सन R66 हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया, जिसमें तीन लोग सवार थे।क्रैश वाली जगह के पास रहने वाले एक निवासी ने अटलांटा न्यूज़ फ़र्स्ट को बताया कि बचाव दल को बेहद मुश्किल इलाके का सामना करना पड़ा।उन्होंने कहा, &quot;बचे हुए व्यक्ति को निकालने में उन्हें लगभग छह घंटे लगे,&quot; और यह भी बताया कि बचाव दल को मलबे तक पहुँचने के लिए ऑफ़-रोड गाड़ियों का इस्तेमाल करना पड़ा और घनी झाड़ियों को काटकर रास्ता बनाना पड़ा।इस हेलीकॉप्टर की मालिक कंपनी, प्रेस्टीज हेलीकॉप्टर्स के ऑपरेशंस डायरेक्टर, एंडी व्हिटेकर ने इस दुर्घटना को कंपनी के इतिहास में अपनी तरह की पहली घटना बताया। उन्होंने कहा कि कंपनी का सुरक्षा रिकॉर्ड पिछले चार दशकों से बेदाग रहा है और पायलट भी उस रास्ते से अच्छी तरह परिचित था।नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ़्टी बोर्ड इस क्रैश की जाँच का नेतृत्व कर रहा है। 30 दिनों के भीतर एक शुरुआती रिपोर्ट आने की उम्मीद है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 07:47:01 +0530</pubDate>
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<title>तीसरे विश्वयुद्ध&amp;apos; का काउंटडाउन शुरू? अमेरिका ने ईरान के रडार और ड्रोन ठिकानों को बमों से उड़ाया, दहल उठा कुवैत, आसमान से बरसीं मिसाइलें!</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व (Middle East) में कई हफ़्तों से लागू नाजुक युद्धविराम के बीच एक बार फिर बारूद की गूंज सुनाई दी है। अमेरिकी सेना ने सोमवार को जानकारी दी कि सप्ताहांत में ईरान द्वारा एक अमेरिकी &#039;एमक्यू-1 प्रीडेटर&#039; (MQ-1 Predator) ड्रोन को मार गिराए जाने के जवाब में अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के रडार और ड्रोन नियंत्रण केंद्रों पर भारी बमबारी की है। इस हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी सैन्य कार्रवाई की बात स्वीकार की है। वहीं, पड़ोसी देश कुवैत ने भी सोमवार तड़के खुद पर ड्रोन और मिसाइल हमले होने का दावा किया है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस बीच कुवैत ने कहा कि उस पर ड्रोन एवं मिसाइल हमले किए गए जिन्हें उनके लक्ष्य तक पहुंचने से रोकने के लिए उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने कार्रवाई शुरू कर दी।
 ये हमले ईरान युद्ध में कई सप्ताह से लागू युद्धविराम की नाजुक स्थिति को दर्शाते हैं।इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: युद्धविराम के बीच बढ़ा सैन्य टकराव, Iran ने अपने बर्बाद मिसाइल नेटवर्क को फिर सक्रिय कर दुनिया को किया हैरान अमेरिकी और ईरानी अधिकारी इस युद्धविराम की अवधि को बढ़ाने के लिए समझौते पर बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद हमले लगातार जारी हैं।
 ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ बनाए हुए है जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है। कभी फारस की खाड़ी के इस संकरे मुहाने से तेल और प्राकृतिक गैस के वैश्विक कारोबार का पांचवां हिस्सा गुजरता था।
इस बीच, स्थिति लगातार और चिंताजनक हो रही है।इसे भी पढ़ें: Greater Noida में Godrej Properties का बड़ा धमाका! ई-नीलामी में जीती 23.2 एकड़ जमीन, विकसित करेगी ₹7,000 करोड़ की आवासीय परियोजना इजराइल ने लेबनान में लितानी नदी से आगे भी कब्जा कर लिया है, जबकि उग्रवादी समूह हिजबुल्ला इजराइल में ड्रोन हमले जारी रखे हुए है।
 अमेरिकी सेना की ‘सेंट्रल कमांड’ ने कहा कि उसने शनिवार और रविवार को ईरान में गेरुक शहर और केशम द्वीप के आसपास हमले किए।
‘सेंट्रल कमांड’ ने कहा, ‘‘सीमित और सोच-समझकर किए गए ये हमले ईरान की आक्रामक कार्रवाइयों के जवाब में किए गए जिनमें अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के ऊपर उड़ान भर रहे ‘अमेरिकी एमक्यू-1’ ड्रोन को मार गिराना शामिल है।’
 उसने कहा, ‘‘अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ईरानी वायु रक्षा प्रणालियों, एक जमीनी नियंत्रण केंद्र और दो ऐसे ड्रोन को नष्ट कर दिया जो क्षेत्रीय जलक्षेत्र से गुजर रहे पोतों के लिए स्पष्ट खतरा पैदा कर रहे थे।’’
प्रीडेटर ड्रोन को अमेरिकी वायुसेना सेवा से हटा चुकी है और अब वह ‘एमक्यू-9 रीपर’ ड्रोन का इस्तेमाल करती है लेकिन अमेरिकी थल सेना अब भी प्रीडेटर ड्रोन का उपयोग करती है। अमेरिकी सेना ने कहा कि इन हमलों में कोई अमेरिकी सैनिक हताहत नहीं हुआ।
इस बीच कुवैत ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकने के लिए सोमवार तड़के कार्रवाई शुरू कर दी।
ईरान के सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए की खबर के अनुसार, ईरानी अर्द्धसैन्य बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने एक बयान में बताया कि अमेरिकी बलों ने एक द्वीप पर दूरसंचार टावर को निशाना बनाया।
 ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने कहा कि उसने जवाबी हमला किया लेकिन यह नहीं बताया कि हमला कहां किया गया।
इससे पहले, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सलाहकारों से शुक्रवार को मुलाकात की थी लेकिन उन्होंने अभी यह तय नहीं किया है कि युद्धविराम की अवधि बढ़ाने और जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के समझौते पर आगे बढ़ना है या नहीं। ईरान ने कहा है कि समझौते को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
ट्रंप ने सोमवार तड़के अपने ‘ट्रुथ सोशल’ मंच पर एक पोस्ट में लिखा, ‘‘ईरान सचमुच समझौता करना चाहता है और यह अमेरिका एवं हमारे साथ खड़े देशों के लिए अच्छा समझौता होगा। Stay updated with International
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<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 07:47:01 +0530</pubDate>
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<title>Prabhasakshi NewsRoom: युद्धविराम के बीच बढ़ा सैन्य टकराव, Iran ने अपने बर्बाद मिसाइल नेटवर्क को फिर सक्रिय कर दुनिया को किया हैरान</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। युद्धविराम लागू होने के बावजूद क्षेत्र में सैन्य टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा। अमेरिकी हवाई हमलों, ईरानी जवाबी कार्रवाई, इजरायल में बजते सायरनों और होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने पूरे क्षेत्र को नई अस्थिरता की ओर धकेल दिया है। इसी बीच ईरान ने अमेरिकी और इजरायली हमलों से प्रभावित अपने भूमिगत मिसाइल नेटवर्क के बड़े हिस्से को फिर से सक्रिय कर लिया है, जिससे उसकी सैन्य क्षमता को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। देखा जाये तो एक ओर वाशिंगटन और तेहरान के बीच समझौते की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियां संकेत दे रही हैं कि हालात किसी भी समय और अधिक विस्फोटक रूप ले सकते हैं।हम आपको बता दें कि अमेरिकी केंद्रीय कमान ने दावा किया है कि उसने आत्मरक्षा के तहत दक्षिणी ईरान में स्थित रडार और ड्रोन नियंत्रण केंद्रों पर लक्षित हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई उस घटना के बाद की गई जिसमें ईरान ने एक अमेरिकी मानवरहित विमान को मार गिराया था। अमेरिका का कहना है कि यह विमान अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के ऊपर उड़ान भर रहा था, जबकि ईरान ने आरोप लगाया कि विमान ने उसके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया था।इसे भी पढ़ें: Fact Check: क्या IRGC के बढ़ते दखल के कारण ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने इस्तीफा दे दिया? जानें वायरल दावे का सचअमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार गोरुक और केश्म द्वीप क्षेत्र में संचालित कार्रवाई के दौरान ईरानी वायु रक्षा प्रणालियों, ड्रोन नियंत्रण केंद्रों तथा दो हमलावर ड्रोन को नष्ट किया गया। अमेरिका ने इन हमलों को संतुलित और आत्मरक्षात्मक कदम बताते हुए कहा कि उसका उद्देश्य क्षेत्र में अपने हितों और सैन्य संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।इसके जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने दावा किया कि उसने उस वायुसेना अड्डे को निशाना बनाया जहां से कथित रूप से ईरान के संचार प्रतिष्ठान पर अमेरिकी हमला किया गया था। ईरानी पक्ष ने कहा कि उसकी एयरोस्पेस इकाई ने जवाबी कार्रवाई में निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। हालांकि संबंधित वायुसेना अड्डे का स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया।इस बीच उत्तरी इजरायल में भी खतरे की घंटियां सुनाई दीं। लेबनान सीमा से लगे कई इलाकों, पश्चिमी गैलीली क्षेत्र और किरयात शमोना नगर में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाए गए। इससे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं।उधर, तनावपूर्ण हालात के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का सिलसिला जारी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान अभी भी जारी है, लेकिन किसी समझौते को अंतिम रूप मिलने तक कुछ भी निश्चित नहीं माना जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपने अधिकारों की गारंटी के बिना किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा।दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच एक बहुत अच्छा समझौता होने के करीब है। हालांकि विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार वाशिंगटन समझौते में और कड़े प्रावधान चाहता है। इनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अतिरिक्त प्रतिबंध तथा होरमुज जलडमरूमध्य से संबंधित शर्तें शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ट्रंप ने प्रस्तावित समझौते के मसौदे में कई संशोधन सुझाए हैं और अभी अंतिम सहमति बनने में समय लग सकता है।इसके अलावा, सैन्य मोर्चे पर एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में यह सामने आया है कि अमेरिकी और इजरायली हमलों से प्रभावित ईरान के भूमिगत मिसाइल नेटवर्क का बड़ा हिस्सा फिर से सक्रिय हो गया है। उपग्रह चित्रों के आधार पर सामने आई जानकारी के अनुसार जिन अनेक सुरंग प्रवेश मार्गों को पहले निशाना बनाया गया था, उनमें से अधिकांश को ईरान ने दोबारा खोल लिया है। मलबा हटाने और मरम्मत कार्य के बाद मिसाइल प्रतिष्ठानों तक पहुंच बहाल कर दी गई है।विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम ईरान की मिसाइल संरचना की मजबूती को दर्शाता है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि प्रक्षेपण यंत्र और प्रशिक्षित दल उपलब्ध हों तो ईरान अपने मौजूदा भंडार से मिसाइल संचालन जारी रख सकता है। इससे यह संकेत मिलता है कि केवल बमबारी के जरिए दीर्घकालिक रणनीतिक प्रभाव हासिल करना कठिन हो सकता है।उधर, कुवैत की सेना ने भी जानकारी दी है कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियां देश के हवाई क्षेत्र की ओर आने वाले मिसाइल और ड्रोन खतरों को रोकने में लगी हुई हैं। सेना ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि सुनाई देने वाले धमाके वायु रक्षा कार्रवाई का परिणाम हैं इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।इस बीच, आर्थिक स्तर पर भी इस संघर्ष का प्रभाव दिखाई देने लगा है। उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के कारण अफ्रीकी देशों के किसानों को वैकल्पिक उपायों जैसे खाद और गोबर आधारित जैविक विकल्पों की ओर रुख करना पड़ रहा है। इससे स्पष्ट है कि मध्य पूर्व का यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक प्रभाव भी पैदा कर रहा है।कुल मिलाकर युद्धविराम के बावजूद सैन्य तनाव, परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद, होरमुज जलडमरूमध्य का भविष्य और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां अमेरिका तथा ईरान के बीच समझौते की राह को जटिल बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में जारी वार्ताएं यह तय करेंगी कि क्षेत्र स्थिरता की ओर बढ़ेगा या फिर एक नए टकराव का सामना करेगा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 07:47:01 +0530</pubDate>
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<title>बच्चों को Online खतरों से बचाने के लिए Malaysia का सख्त कानून, 16 साल से कम उम्र के लिए Social Media बैन</title>
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<description><![CDATA[ कुआलालंपुर। मलेशिया ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट रखने पर रोक लगाने वाले नियमों को सोमवार से लागू कर दिया। इसके साथ ही मलेशिया सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले बच्चों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के वैश्विक प्रयास में शामिल हो गया है। इन नियमों के तहत सोशल मीडिया मंचों को आयु सत्यापन प्रणाली लागू करनी होगी और 16 वर्ष से कम उम्र के सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को ‘अकाउंट’ बनाने से रोकना होगा।ये नियम कम से कम 80 लाख उपयोगकर्ताओं वाले मंचों पर लागू होंगे जिनमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब शामिल हैं। नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों पर एक करोड़ रिंगिट (25 लाख अमेरिकी डॉलर) तक का जुर्माना लग सकता है। हालांकि, अगर बच्चे इस कानून को किसी तरह दरकिनार कर सोशल मीडिया अकाउंट बना लेते हैं तो उनके माता-पिता पर कोई दंड नहीं लगाया जाएगा। इसे भी पढ़ें: &#039;मेहंदी का रंग भी नहीं उतरा था और उजड़ गया सुहाग&#039;... शादी के चंद घंटों बाद दूल्हे की दर्दनाक मौत, लाश के साथ 5 घंटे तक तड़पती रही दुल्हन!सरकार ने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य बच्चों को हानिकारक सामग्री, ऑनलाइन उत्पीड़न और मंचों की उन विशेषताओं से बचाना है जो अत्यधिक इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई हैं। ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और इंडोनेशिया सहित अन्य देशों ने भी बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को सीमित करने के लिए आयु आधारित प्रतिबंध या शर्तें लागू की हैं या उनकी घोषणा की है। ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, डेनमार्क, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी इसी तरह के उपायों का अध्ययन कर रहे हैं या उन्हें विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: तीसरे विश्वयुद्ध&#039; का काउंटडाउन शुरू? अमेरिका ने ईरान के रडार और ड्रोन ठिकानों को बमों से उड़ाया, दहल उठा कुवैत, आसमान से बरसीं मिसाइलें!मलेशिया के संचार एवं मल्टीमीडिया आयोग ने कहा कि इन नियमों का उद्देश्य बच्चों को इंटरनेट या डिजिटल प्रौद्योगिकी तक पहुंच बनाने से रोकना नहीं है, बल्कि इनके जरिये सेवा प्रदाताओं से ऑनलाइन खतरों से निपटने और आयु के अनुरूप सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की अपेक्षा की गई है। प्रौद्योगिकी कंपनियों ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे मलेशिया की नयी अनिवार्यताओं का अनुपालन कैसे करेंगी।मलेशियाई नियामक ने कहा कि आयु सत्यापन प्रणाली को लागू करने के लिए मंचों को कुछ समय की मोहलत दी जाएगी। दक्षिणपूर्व एशिया के लिए ‘मेटा’ की सार्वजनिक नीति निदेशक क्लारा कोह ने अप्रैल में चेतावनी दी थी कि मलेशिया का 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर पूर्ण प्रतिबंध उल्टा पड़ सकता है और इसके कारण किशोर सुरक्षित ऐप से दूर होकर इंटरनेट के अनियंत्रित क्षेत्रों की ओर जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ‘मेटा’ ने 18 साल से कम उम्र के लोगों के लिए ‘टीन अकाउंट’ (किशोरों के लिए खाते) शुरू किए हैं जो संपर्क, ‘स्क्रीन’ के सामने बिताए जाने वाले समय और अनुचित सामग्री तक पहुंच को सीमित करते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 07:47:00 +0530</pubDate>
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<title>Kenya में US नागरिकों के लिए Ebola Center पर बवाल, हजारों युवा सड़कों पर उतरे</title>
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<description><![CDATA[ नैरोबी। केन्या के नानयुकी कस्बे में सोमवार को हजारों युवाओं ने इबोला वायरस संक्रमण की चपेट में आए अमेरिकी नागरिकों के लिए लाइकीपिया वायुसैनिक अड्डे पर पृथकवास केंद्र की स्थापना के खिलाफ प्रदर्शन किया। ये विरोध-प्रदर्शन ऐसे समय हुए, जब केन्या के उच्च न्यायालय ने दो दिन पहले लॉ सोसायटी ऑफ केन्या और एक संवैधानिक निगरानी संस्था की ओर से दायर मामले की सुनवाई लंबित रहने तक इस पृथकवास केंद्र की स्थापना और किसी भी विदेशी मरीज के आगमन पर रोक लगा दी थी।दोनों संस्थाओं ने इबोला से संक्रमित विदेशी नागरिकों को केन्या में पृथकवास में रखने का यह कहते हुए विरोध किया है कि देश की स्वास्थ्य प्रणाली बेहद कमजोर है। अमेरिकी अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया था कि वाशिंगटन विदेश में इबोला वायरस संक्रमण की चपेट में आए अमेरिकी नागरिकों को स्वदेश लाने के बजाय केन्या में एक पृथकवास केंद्र में भेजने की योजना बना रहा है।अधिकारियों ने बताया था कि लाइकीपिया वायुसैनिक अड्डे पर स्थापित इस केंद्र में 50 बिस्तर होंगे और यह शुक्रवार से मरीजों के लिए उपलब्ध होगा। सोमवार को हजारों युवाओं ने नारे लगाते हुए वायुसैनिक अड्डे के द्वार तक मार्च किया।स्वास्थ्य मंत्री एडेन डुएल ने रविवार को सफाई दी थी कि यह पृथकवास केंद्र “सभी के लिए” है, न कि सिर्फ अमेरिकी नागरिकों के लिए। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक बयान में कहा कि ट्रंप प्रशासन का इरादा इबोला वायरस के प्रकोप से निपटने की तैयारियों के लिए केन्या को 1.35 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता देने का है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 07:46:59 +0530</pubDate>
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<title>Sri Lanka में त्योहार का जश्न मातम में बदला, नशे में धुत Driver ने 6 लोगों को रौंदा</title>
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<description><![CDATA[ श्रीलंका की राजधानी के बाहरी इलाके में कथित तौर पर नशे में धुत एक पिकअप वाहन चालक ने बौद्ध पर्व वेसाक मना रहे लोगों को टक्कर मार दी जिससे कम से कम छह लोगों की मौत हो गई और 13 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। यह हादसा रविवार रात कोलंबो के उपनगर मीगोडा में उस समय हुआ, जब वाहन वार्षिक वेसाक समारोह के तहत सड़क के किनारे लगीं खाने की दुकानों पर इंतजार कर रहे लोगों के बीच जा घुसा।पुलिस ने बताया कि हादसे में 35 से 38 वर्ष की आयु के तीन पुरुषों और 15 से 56 वर्ष की आयु की तीन महिलाओं की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, एक शिशु समेत 13 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसे भी पढ़ें: बच्चों को Online खतरों से बचाने के लिए Malaysia का सख्त कानून, 16 साल से कम उम्र के लिए Social Media बैनपुलिस ने बताया कि 42 वर्षीय चालक हादसे के बाद मौके से फरार हो गया था लेकिन उसे बाद में घटनास्थल से कई मील दूर गिरफ्तार कर लिया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि उसने शराब पी रखी थी और वाहन चलाते समय वह नशे में था। वेसाक बौद्ध अनुयायियों का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है। यह भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण की स्मृति में मनाया जाता है। यह हर साल मई में पहली पूर्णिमा को मनाया जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 07:46:59 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिका&#45;ईरान शांति वार्ता पर ब्रेक! Israel के Lebanon अभियान से भड़का Tehran</title>
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<description><![CDATA[ खबरों के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के साथ शांति वार्ता स्थगित कर दी है। यह कदम वाशिंगटन और तेहरान के बीच पहले से ही नाजुक युद्धविराम ढांचे पर और अधिक दबाव डाल सकता है। यह घटनाक्रम लेबनान में इजरायल के चल रहे सैन्य अभियान के कारण बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच आया है। ईरान की समाचार एजेंसी तसनीम, जिसे ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के करीबी माना जाता है, के अनुसार, तेहरान ने फिलहाल बातचीत रोकने का फैसला किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह विराम तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान की चिंताओं और क्षेत्र में सहयोगी समूहों के हितों पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता। इसे भी पढ़ें: Stock Market में फिर बड़ी गिरावट, Sensex-Nifty धड़ाम, जानिए बिकवाली के 5 बड़े कारणइससे पहले ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने चेतावनी दी थी कि ईरान और अमेरिका के बीच हुआ युद्धविराम समझौता लेबनान समेत सभी मोर्चों पर लागू होता है, और कहा कि किसी भी क्षेत्र में उल्लंघन को पूरे युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा। X पर एक पोस्ट में, अराघची ने कहा कि युद्धविराम की शर्तें स्पष्ट हैं और उन्होंने उल्लंघन से उत्पन्न होने वाले किसी भी परिणाम के लिए अमेरिका और इज़राइल को जिम्मेदार ठहराया।अराघची ने लिखा कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम स्पष्ट रूप से लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्धविराम है। उन्होंने आगे कहा कि एक मोर्चे पर इसका उल्लंघन सभी मोर्चों पर युद्धविराम का उल्लंघन है। किसी भी उल्लंघन के परिणामों के लिए अमेरिका और इज़राइल ज़िम्मेदार हैं। ये टिप्पणियाँ इस बात पर जारी असहमति के बीच आई हैं कि क्या लेबनान को औपचारिक रूप से अमेरिका-ईरान युद्धविराम ढांचे में शामिल किया जाना चाहिए। इसे भी पढ़ें: तीसरे विश्वयुद्ध&#039; का काउंटडाउन शुरू? अमेरिका ने ईरान के रडार और ड्रोन ठिकानों को बमों से उड़ाया, दहल उठा कुवैत, आसमान से बरसीं मिसाइलें!ईरान ने बार-बार यह तर्क दिया है कि किसी भी समझौते में लेबनान को भी शामिल किया जाना चाहिए और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह समूह के खिलाफ इजरायली सैन्य अभियानों को रोकना भी अनिवार्य होना चाहिए। हालांकि, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने पहले ही संकेत दिया है कि युद्धविराम मुख्य रूप से ईरान से जुड़े प्रत्यक्ष संघर्षों पर लागू होता है और लेबनान में चल रहे अभियानों पर स्वतः लागू नहीं होता।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 07:46:58 +0530</pubDate>
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<title>Iran की चेतावनी: Lebanon में Israel के हमले Ceasefire का उल्लंघन, America को भी भुगतने होंगे परिणाम</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि ईरान और अमेरिका के बीच हुआ युद्धविराम समझौता लेबनान समेत सभी मोर्चों पर लागू होता है, और कहा कि किसी भी क्षेत्र में उल्लंघन को पूरे युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा। X पर एक पोस्ट में, अराघची ने कहा कि युद्धविराम की शर्तें स्पष्ट हैं और उन्होंने उल्लंघन से उत्पन्न होने वाले किसी भी परिणाम के लिए अमेरिका और इज़राइल को जिम्मेदार ठहराया। इसे भी पढ़ें: तीसरे विश्वयुद्ध&#039; का काउंटडाउन शुरू? अमेरिका ने ईरान के रडार और ड्रोन ठिकानों को बमों से उड़ाया, दहल उठा कुवैत, आसमान से बरसीं मिसाइलें!अराघची ने लिखा कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम स्पष्ट रूप से लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्धविराम है। उन्होंने आगे कहा कि एक मोर्चे पर इसका उल्लंघन सभी मोर्चों पर युद्धविराम का उल्लंघन है। किसी भी उल्लंघन के परिणामों के लिए अमेरिका और इज़राइल ज़िम्मेदार हैं। ये टिप्पणियाँ इस बात पर जारी असहमति के बीच आई हैं कि क्या लेबनान को औपचारिक रूप से अमेरिका-ईरान युद्धविराम ढांचे में शामिल किया जाना चाहिए।ईरान ने बार-बार यह तर्क दिया है कि किसी भी समझौते में लेबनान को भी शामिल किया जाना चाहिए और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह समूह के खिलाफ इजरायली सैन्य अभियानों को रोकना भी अनिवार्य होना चाहिए। हालांकि, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने पहले ही संकेत दिया है कि युद्धविराम मुख्य रूप से ईरान से जुड़े प्रत्यक्ष संघर्षों पर लागू होता है और लेबनान में चल रहे अभियानों पर स्वतः लागू नहीं होता। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: युद्धविराम के बीच बढ़ा सैन्य टकराव, Iran ने अपने बर्बाद मिसाइल नेटवर्क को फिर सक्रिय कर दुनिया को किया हैरानईरान, इज़राइल, हिज़्बुल्लाह और अमेरिकी सेनाओं के बीच हफ्तों से जारी बढ़ते संघर्ष के बाद, यह विवाद क्षेत्र में स्थिरता लाने के प्रयासों में एक प्रमुख अड़चन बनकर उभरा है। हाल के हफ्तों में, तनाव कम करने के उद्देश्य से किए गए व्यापक राजनयिक प्रयासों के बावजूद, लेबनान में इज़राइली हमले और इज़राइली ठिकानों पर हिज़्बुल्लाह के हमले जारी रहे हैं। अराघची की चेतावनी से चल रही वार्ताओं पर दबाव बढ़ने की संभावना है, क्योंकि मध्यस्थ इस नाजुक युद्धविराम को टूटने से बचाने और एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध को टालने का प्रयास कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 07:46:58 +0530</pubDate>
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<title>Lebanon में इज़राइली हमलों से ईरान वार्ता में बाधा! Donald Trump ने नेतन्याहू को फटकारा, कहा&#45; &amp;apos;तुम तो बिल्कुल पागल हो&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच सोमवार को फोन पर तीखी बहस होने की खबर सामने आई है। Axios की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने लेबनान में इज़राइल के लगातार हो रहे सैन्य हमलों पर कड़ी आपत्ति जताई और नेतन्याहू पर जमकर गुस्सा निकाला। अमेरिकी अधिकारियों और मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि ट्रंप ने नेतन्याहू से बेहद सख्त लहजे में कहा, &quot;तुम तो बिल्कुल पागल हो।&quot;अंतरराष्ट्रीय साख और राजनीतिक अस्तित्व पर उठे सवालरिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयों पर गहरी नाराज़गी ज़ाहिर की। उन्होंने चेतावनी दी कि लेबनान और विशेष रूप से बेरूत पर लगातार हो रही बमबारी से इज़राइल की अंतरराष्ट्रीय साख को भारी नुकसान पहुँच रहा है और देश दुनिया भर में अकेला पड़ता जा रहा है। बातचीत के दौरान ट्रंप का रुख बेहद आक्रामक था। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया: &quot;ट्रंप ने नेतन्याहू पर &#039;एहसानफ़रामोश&#039; होने का आरोप लगाया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नेतन्याहू का राजनीतिक अस्तित्व केवल और केवल अमेरिकी समर्थन की वजह से ही बचा हुआ है।&quot; इस प्रकाशन द्वारा उद्धृत एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रंप ने नेतन्याहू पर एहसानफ़रामोश होने का आरोप लगाया और तर्क दिया कि उनका राजनीतिक अस्तित्व अमेरिकी समर्थन की वजह से ही बचा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने यह चेतावनी भी दी कि बेरूत पर हमले की लगातार धमकियों से इज़राइल दुनिया भर में और भी ज़्यादा अलग-थलग पड़ जाएगा।इस बातचीत से परिचित एक दूसरे सूत्र ने Axios को बताया कि ट्रंप ने लेबनान में इज़राइल की कार्रवाइयों के लिए स्पष्टीकरण माँगा, जिससे इस बढ़ते तनाव को लेकर उनका गुस्सा साफ़ झलक रहा था।यह बातचीत तब हुई जब दिन की शुरुआत में ईरान ने चेतावनी दी थी कि लेबनान में इज़राइल के सैन्य अभियानों के जवाब में वह संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ चल रही वार्ताओं से पीछे हट सकता है। Axios के अनुसार, ट्रंप की चिंताओं की एक वजह नागरिकों की मौतें और हिज़्बुल्लाह के गुर्गों से जुड़ी इमारतों पर इज़राइल के हमले थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अब इज़राइल बेरूत में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले की योजना नहीं बना रहा है।&#039;बीबी नेतन्याहू के साथ सार्थक बातचीत&#039;: ट्रंपरिपोर्ट के बिल्कुल विपरीत, ट्रंप ने &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी नेतन्याहू के साथ बहुत ही सार्थक बातचीत हुई, और अब इज़राइल लेबनान में अपने सैनिक नहीं भेजेगा, बल्कि वहाँ पहले से मौजूद सैनिकों को भी वापस बुला लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हिज़्बुल्लाह के साथ भी उनकी इसी तरह की बातचीत हुई है।उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, &quot;मेरी इज़राइल के प्रधानमंत्री बीबी नेतन्याहू के साथ बहुत ही सार्थक बातचीत हुई, और अब बेरूत में कोई भी सैनिक नहीं जाएगा; जो सैनिक रास्ते में थे, उन्हें भी वापस बुला लिया गया है।&quot;उन्होंने आगे कहा, &quot;इसी तरह, उच्च-स्तरीय प्रतिनिधियों के माध्यम से, मेरी हिज़्बुल्लाह के साथ भी बहुत अच्छी बातचीत हुई, और वे इस बात पर सहमत हुए कि गोलीबारी पूरी तरह से बंद कर दी जाएगी — यानी इज़राइल उन पर हमला नहीं करेगा, और वे इज़राइल पर हमला नहीं करेंगे।&quot;  Stay updated with International
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<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 07:46:57 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन: हमलों से जूझ रहा ख़ारकीव शहर, बेहतर भविष्य के निर्माण में भी जुटा है</title>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन के ख़ारकीव शहर में हर एक दिन अनिश्चितता के साथ शुरू होता है. हवाई हमलों के सायरन लोगों को नींद से जगा देते हैं, और ड्रोन व मिसाइलें रिहायशी इलाक़ों, औद्योगिक स्थलों व सड़कों को निशाना बनाते हैं. बमबारी के दौरान लोग घबराकर मेट्रो स्टेशनों में शरण लेते हैं, जबकि बच्चे भूमिगत स्थानों में शरण लेकर पढ़ाई करते हैं. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 07:46:31 +0530</pubDate>
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<title>डीआर काँगो: इबोला संक्रमण से उबरे चार स्वास्थ्यकर्मी, बेहतर स्वास्थ्य देखभाल अहम</title>
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<description><![CDATA[ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया है कि काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में घातक इबोला बीमारी की चपेट में आई चार नर्स, इस संक्रमण से ठीक हो गई हैं और उन्हें अब अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. यूएन एजेंसी के अनुसार, पर्याप्त चिकित्सा देखभाल के ज़रिए इस संक्रमण से उबरा जा सकता और इसलिए आशाहीन होने की कोई वजह नहीं है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 07:46:28 +0530</pubDate>
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<title>अफ़ग़ानिस्तान: बाल विवाह को वैध ठहराने वाले तालेबानी फ़रमान की निन्दा</title>
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<description><![CDATA[ बाल अधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र समिति ने, अफ़ग़ानिस्तान में सत्तारूढ़ तालेबान द्वारा बाल विवाह को वैध क़रार जाने वाले नए आधिकारिक आदेश की कठोर निन्दा करते हुए उसे अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून का गम्भीर उल्लंघन बताया है. इस फ़रमान के तहत लड़की की चुप्पी को विवाह के लिए उसकी सहमति मान लिया गया है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 07:46:25 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान: हिज़बुल्लाह को निशाना बनाने की इसराइली धमकी के बाद, बेरूत में मची अफ़रा&#45;तफ़री</title>
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<description><![CDATA[ इसराइल ने लेबनान में हिज़बुल्लाह लड़ाकों को फिर से निशाना बनाकर हमले किए जाने की घोषणा की है, जिसके बाद  एक बार फिर राजधानी बेरूत के दक्षिणी हिस्सों से हज़ारों लोगों के सुरक्षित स्थान की तलाश में घर छोड़कर जाने की ख़बर है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 07:46:23 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की मेडिकल रिपोर्ट जारी, डॉक्टरों ने बताया पूरी तरह फिट</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वार्षिक मेडिकल रिपोर्ट सामने आई है। व्हाइट हाउस के फिजिशियन डॉ. सीन बारबाबेला ने 79 वर्षीय राष्ट्रपति ट्रंप की स्वास्थ्य रिपोर्ट जारी करते हुए उन्हें पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया है। डॉक्टरों का कहना है कि ट्रंप देश के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारियां संभालने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह फिट हैं।दिल की उम्र वास्तविक उम्र से 14 साल कमइस रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाला पहलू राष्ट्रपति ट्रंप के दिल की सेहत से जुड़ा है। डॉक्टरों ने बताया कि एआई-एनहान्स्ड इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम जांच के आधार पर पाया गया है कि ट्रंप के दिल की उम्र उनकी असली उम्र से करीब 14 साल कम है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह उनके मजबूत कार्डियोवास्कुलर सिस्टम को दिखाता है। इसे भी पढ़ें: Russia की तस्वीर ने हिलाई दुनिया, रातों-रात पलटी भारत की किस्मत!वजन बढ़ने पर डॉक्टरों ने दी सलाहफिट घोषित होने के बावजूद रिपोर्ट में उनके वजन बढ़ने की बात भी सामने आई है। इस समय उनका वजन 238 पाउंड (लगभग 108 किलोग्राम) दर्ज किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 14 पाउंड ज्यादा है। ट्रंप का बॉडी मास इंडेक्स 29.7 है, जिसकी वजह से डॉक्टरों ने उन्हें &#039;ओवरवेट&#039; की श्रेणी में रखा है। डॉक्टरों ने उन्हें अपने खान-पान में सुधार करने, फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाने और वजन घटाने की सलाह दी है।याददाश्त के टेस्ट में मिले पूरे नंबरअगले महीने 80 वर्ष के होने जा रहे राष्ट्रपति ट्रंप का दिमाग बेहतरीन तरीके से काम कर रहा है। मानसिक सतर्कता और याददाश्त को परखने वाले &#039;मॉन्ट्रियल कॉग्निटिव असेसमेंट&#039; टेस्ट में ट्रंप ने 30 में से 30 अंक हासिल किए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह उनकी मजबूत निर्णय क्षमता और मानसिक मजबूती को साबित करता है। इसे भी पढ़ें: भारत ताकतवर...अग्नि-6 पर पाकिस्तानी पत्रकार को अमेरिका ने सुना डालाहाथों के नीले निशान और सूजन पर सफाईइस मेडिकल रिपोर्ट ने सोशल मीडिया पर उनके स्वास्थ्य को लेकर चल रहे कई कयासों और अफवाहों पर भी विराम लगा दिया है। डॉक्टरों ने साफ किया कि उनके हाथों पर दिखने वाले नीले निशान दरअसल खून पतला करने वाली दवा लेने और लोगों से लगातार हाथ मिलाने के कारण उभरते हैं, जो कि पूरी तरह सामान्य बात है।इसके अलावा, उनके पैरों में रहने वाली हल्की सूजन की वजह &#039;क्रोनिक वेनस इनसफीशिएंसी&#039; (नसों में खून के बहाव की समस्या) बताई गई है, जिसमें पिछले साल की तुलना में काफी सुधार हुआ है।कान के निशान और सक्रिय दिनचर्या का जिक्ररिपोर्ट में जुलाई 2024 में हुए जानलेवा हमले का भी जिक्र है, जिसके कारण उनके दाहिने कान पर निशान आ गया था। डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट के अंत में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का व्यस्त कार्यक्रम, हाई-लेवल बैठकें, सार्वजनिक कार्यक्रम और गोल्फ खेलने की आदत उन्हें इस उम्र में भी एक्टिव और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद कर रही है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:04:09 +0530</pubDate>
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<title>India&#45;Nepal Border Dispute पर PM Balen Shah का नया रुख, कहा&#45; बातचीत से ही सुलझेगा विवाद</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने मार्च में हुए आम चुनाव के बाद सत्ता संभालने के बाद पहली बार देश की संसद को संबोधित किया। संसद के सामने अपनी बात रखते हुए उन्होंने साफ किया कि भारत के साथ चल रहे सीमा विवाद को बातचीत, चर्चा और राजनयिक प्रयासों के माध्यम से हल किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों पड़ोसी देश मिलकर इस मसले का सही रास्ता निकाल लेंगे।लिपुलेख और कालापानी पर कूटनीतिक रुखप्रधानमंत्री बालेन शाह ने सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे क्षेत्रों को लेकर भारत के साथ जो क्षेत्रीय विवाद चल रहे हैं, उनका समाधान केवल टेबल टॉक से ही संभव है। उन्होंने जानकारी दी कि इस व्यापारिक मार्ग को लेकर नेपाल द्वारा भेजे गए कूटनीतिक नोट का नई दिल्ली ने जवाब भी दिया है। इसे भी पढ़ें: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की मेडिकल रिपोर्ट जारी, डॉक्टरों ने बताया पूरी तरह फिटनेपाल की तरफ से भी अतिक्रमण का दावाइस संबोधन के दौरान पीएम शाह ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा भी किया। उन्होंने कहा कि मामले की समीक्षा से पता चला है कि केवल भारत ने ही नेपाल की जमीन पर कब्जा नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की भूमि पर अतिक्रमण किया है। उन्होंने दोनों देशों के सर्वेक्षकों, इतिहासकारों और क्षेत्र विशेषज्ञों को एक साथ मिलकर इस दिशा में काम करने की सलाह दी। इसे भी पढ़ें: Russia की तस्वीर ने हिलाई दुनिया, रातों-रात पलटी भारत की किस्मत!संसद के पहले संबोधन पर टिकी थीं नजरेंबता दें कि नेपाल में हुए &#039;जेन-जी विद्रोह&#039; के बाद हुए चुनावों में बालेन शाह की पार्टी ने एकतरफा और बड़ी जीत दर्ज की थी। इसके बाद इस साल 27 मार्च को उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। पद संभालने के बाद से वे न तो किसी विदेश यात्रा पर गए और न ही मीडिया से ज्यादा बातचीत की। ऐसे में उनके इस पहले संसदीय संबोधन से भारत को लेकर उनकी सरकार की विदेश नीति का रुख साफ हो गया है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:04:08 +0530</pubDate>
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<title>Iran पर भड़के Donald Trump, बोले&#45; हमारी शर्तों पर Deal करो या War के लिए तैयार रहो</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के साथ चल रही बातचीत को लेकर ट्रंप ने ईरान को सीधे तौर पर चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान एक &#039;बहुत अच्छे समझौते&#039; के करीब पहुंच चुके हैं, लेकिन अगर वाशिंगटन को वह नहीं मिलता जो वह चाहता है, तो वह इस मामले को किसी और तरीके से खत्म करेगा।बहू लारा ट्रंप को दिए इंटरव्यू में किया खुलासाराष्ट्रपति ट्रंप ने यह टिप्पणियां &#039;फॉक्स न्यूज&#039; के लिए अपनी बहू लारा ट्रंप के साथ हुए एक विशेष इंटरव्यू के दौरान कीं। ट्रंप ने कहा, &quot;हम एक बहुत अच्छे समझौते के बेहद करीब हैं। अगर आप ज्यादा जल्दबाजी करेंगे तो आपको बेहतर डील नहीं मिल पाएगी। धीरे-धीरे ही सही, लेकिन निश्चित रूप से हमें वह सब मिल रहा है जो हम चाहते हैं। अगर हमें वह नहीं मिला, तो हम इसे किसी और रास्ते से खत्म करेंगे।&quot; इसे भी पढ़ें: India-Nepal Border Dispute पर PM Balen Shah का नया रुख, कहा- बातचीत से ही सुलझेगा विवादवरना सीधे &#039;युद्ध विभाग&#039; से करेंगे संपर्कईरान के रुख पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरानी लोग &#039;अच्छे वार्ताकार&#039; हैं, लेकिन इस समय सारे पत्ते अमेरिका के हाथ में हैं क्योंकि ईरान सैन्य रूप से कमजोर हो चुका है। ट्रंप ने आगे कहा, &quot;इसके बावजूद हम एक बहुत अच्छे समझौते के करीब हैं। अगर हम इसे शांति से कर लेते हैं, तो बहुत अच्छा है। अन्यथा, हम सीधे युद्ध विभाग से संपर्क करेंगे।&quot;परमाणु हथियार न बनाने का मिला भरोसाअमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान ने अमेरिका को पूरी तरह भरोसा दिलाया है कि वह न तो परमाणु हथियार विकसित करेगा और न ही उन्हें खरीदेगा। ट्रंप के मुताबिक, यह ईरान के पहले के कड़े रुख से बहुत बड़ा बदलाव है और दोनों देशों के बीच चल रही वार्ताओं में इसे एक बेहद महत्वपूर्ण और सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।उन्होंने आगे बताया कि जब उन्होंने ईरानी पक्ष से परमाणु हथियार हासिल करने के नतीजों पर पूछा, तो ईरान ने साफ कर दिया कि वह इस दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा। इसे भी पढ़ें: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की मेडिकल रिपोर्ट जारी, डॉक्टरों ने बताया पूरी तरह फिटईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसानडोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस समय ईरान पर अमेरिका का पूरा दबदबा है, क्योंकि अमेरिकी कार्रवाइयों से उसकी नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के कट्टरपंथी तत्वों और शीर्ष नेतृत्व को सीधे तौर पर निशाना बनाया है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ अमेरिकी नेताओं के बेहद उदार रुख के कारण इस सैन्य कार्रवाई को और आगे नहीं बढ़ाया गया था।रणनीति को लेकर कैबिनेट सहयोगियों संग बड़ी बैठकइस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने कैबिनेट सहयोगियों और बड़े सैन्य अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल बैठक की है। हालांकि, इस बैठक के बाद भविष्य की रणनीति को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने अपने दूतों और ईरानी अधिकारियों के बीच तैयार हुए मसौदा समझौते में कई बड़े बदलाव सुझाए हैं। वे खास तौर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और सामग्री से जुड़े नियमों को और ज्यादा सख्त बनाना चाहते हैं। ट्रंप चाहते हैं कि इस समझौते में अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं का पूरा ध्यान रखा जाए, जिसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत का एक और नया दौर शुरू हो गया है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:04:08 +0530</pubDate>
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<title>Fact Check: क्या IRGC के बढ़ते दखल के कारण ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने इस्तीफा दे दिया? जानें वायरल दावे का सच</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के राजनीतिक गलियारों से आ रही एक खबर ने इस समय पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सोशल मीडिया और कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने अपने पद से इस्तीफ़ा देने की पेशकश की है। इन दावों के पीछे वजह बताई जा रही है— इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का सरकार में अत्यधिक दखल। आइए इस वायरल दावे की तह तक जाते हैं और जानते हैं कि इस खबर के पीछे की सच्चाई आखिर क्या है।  इसे भी पढ़ें: &#039;अक्सर सोचता था कि विनिंग शॉट मैं ही लगाऊँ&#039;, RCB को लगातार दूसरा खिताब दिलाकर भावुक हुए &#039;चेज मास्टर&#039; Virat Kohli फ़ॉक्स न्यूज़ ने कई रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया है कि पेज़ेश्कियन ने सुप्रीम लीडर के कार्यालय को सूचित किया है कि उन्हें और उनके प्रशासन को अहम फ़ैसले लेने की प्रक्रियाओं से बाहर रखा गया है। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि इसकी वजह से उनके लिए अपने पद की ज़िम्मेदारियों को निभाना मुश्किल हो गया है।इस्तीफ़े की यह ख़बर ऐसे समय में आई है जब ईरान के नेतृत्व के भीतर आंतरिक तनाव के संकेत बढ़ रहे हैं। यह ख़बर ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत के समय ही सामने आई है। ग़ौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले भी ईरान के नेतृत्व के भीतर मतभेदों का ज़िक्र किया था और कहा था कि वहाँ की सत्ता &quot;बुरी तरह से बँटी हुई&quot; है।ईरान ने पेज़ेश्कियन के इस्तीफ़े की ख़बरों को ख़ारिज कियाइस बीच, ईरान ने पेज़ेश्kian के इस्तीफ़े की ख़बरों को साफ़ तौर पर ग़लत बताया है। सरकार के एक जानकार सूत्र का हवाला देते हुए, IRGC से जुड़ी समाचार एजेंसी &#039;तस्नीम&#039; ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चल रही ख़बरें सच नहीं हैं और पेज़ेश्kian अभी भी अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं।इसके अलावा, राष्ट्रपति कार्यालय में संचार और सूचना विभाग के उप-प्रमुख सैयद मेहदी तबातबाई ने &#039;X&#039; (ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिए इस रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पेज़ेश्kian जनता की सेवा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं और उनका अपनी ज़िम्मेदारियों से पीछे हटने का कोई इरादा नहीं है।क्या ईरान में IRGC का ही राज चल रहा है?रिपोर्टों के अनुसार, पेज़ेश्kian ने आरोप लगाया है कि ईरान की प्रशासनिक व्यवस्था और शासन का ढाँचा अब पूरी तरह से &#039;इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स&#039; (IRGC) के कमांडरों के नियंत्रण में आ गया है, जिसकी वजह से सरकार ठीक से काम नहीं कर पा रही है।इन आरोपों के मुताबिक, राष्ट्रपति और उनकी चुनी हुई सरकार को बड़े और बेहद अहम नीतिगत फ़ैसलों से पूरी तरह से अलग-थलग कर दिया गया है। इसके बजाय, कहा जा रहा है कि IRGC के भीतर मौजूद कट्टरपंथी गुटों ने देश के लगभग सभी अहम मामलों पर अपना नियंत्रण जमा लिया है, जिससे नागरिक संस्थाओं का अधिकार और भी कमज़ोर हो गया है। इसे भी पढ़ें: IPL 2026 Final Match Hightlights | RCB ने रचा इतिहास, Gujarat Titans को हराकर लगातार दूसरी बार जीता खिताब, विराट कोहली बने जीत के महानायकइससे पहले, डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम को आगे बढ़ाने की घोषणा करते हुए ईरान के नेतृत्व की स्थिति को &quot;अस्त-व्यस्त&quot; बताया था। Stay updated with International
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<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:04:07 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran Nuclear Deal पर फिर लगा ब्रेक, तेहरान बोला&#45; अपने हितों से समझौता नहीं करेंगे।</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। दोनों देशों के बीच संभावित समझौते को लेकर चर्चा जारी है, लेकिन कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं।मौजूद जानकारी के अनुसार ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने स्पष्ट कहा है कि तेहरान किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें ईरानी जनता के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित न हों। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक बयान में उन्होंने कहा कि ईरान तब तक किसी समझौते को मंजूरी नहीं देगा, जब तक उसे यह विश्वास न हो जाए कि देश के हितों और अधिकारों की पूरी तरह रक्षा की गई है।गौरतलब है कि हाल के दिनों में ऐसी खबरें सामने आई हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक नया और पहले से अधिक कड़ा प्रस्ताव भेजा है। हालांकि इस प्रस्ताव की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई सख्त प्रावधान शामिल हो सकते हैं।बता दें कि अमेरिका की प्राथमिकताओं में ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह रोकना और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सामान्य समुद्री यातायात बहाल करना शामिल है। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ईरान ने परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की सहमति दी है, लेकिन तेहरान ने पहले भी ऐसे दावों पर सवाल उठाए हैं।मौजूद जानकारी के अनुसार ईरान ने वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए लगभग 12 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करने की मांग की है। ईरानी पक्ष का कहना है कि आर्थिक प्रतिबंधों और वित्तीय दबावों के बीच किसी बड़े समझौते पर आगे बढ़ना मुश्किल है।इस बीच लेबनान का मुद्दा भी बातचीत में अहम बनता जा रहा है। ईरान चाहता है कि लेबनान को भी किसी व्यापक क्षेत्रीय समझौते का हिस्सा बनाया जाए। वहीं लेबनान ने इज़राइल पर क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई बढ़ाने का आरोप लगाया है।गौरतलब है कि अप्रैल में दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम लागू होने के बाद बड़े पैमाने पर सैन्य हमले रुके थे, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हाल ही में ईरान ने दावा किया कि उसकी सुरक्षा बलों ने एक अमेरिकी सैन्य ड्रोन को मार गिराया, जो उसके समुद्री क्षेत्र के करीब पहुंच गया था। हालांकि अमेरिका की ओर से इस दावे की पुष्टि नहीं की गई है।वहीं कुछ दिन पहले बंदर अब्बास बंदरगाह के आसपास हुई सैन्य गतिविधियों ने भी दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ा दिया था। इसके बावजूद वार्ता प्रक्रिया जारी है और दोनों पक्ष किसी स्थायी समाधान की तलाश में लगे हुए हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर समझौता वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से में तेल आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली किसी भी प्रगति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों के नियंत्रण जैसे मुद्दों पर सहमति बनने में अभी समय लग सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह वार्ता पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:04:07 +0530</pubDate>
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<title>Malaysia का बड़ा कदम! 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध</title>
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<description><![CDATA[ बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाने और ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के वैश्विक प्रयासों के बीच मलेशिया ने सोमवार से एक कड़ा और ऐतिहासिक कानून लागू कर दिया है। नए नियमों के तहत अब मलेशिया में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट रखने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इस कदम के साथ ही मलेशिया दुनिया के उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जो किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपना रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Fact Check: क्या IRGC के बढ़ते दखल के कारण ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने इस्तीफा दे दिया? जानें वायरल दावे का सच
 इन नियमों के तहत सोशल मीडिया मंचों को आयु सत्यापन प्रणाली लागू करनी होगी और 16 वर्ष से कम उम्र के सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को ‘अकाउंट’ बनाने से रोकना होगा। ये नियम कम से कम 80 लाख उपयोगकर्ताओं वाले मंचों पर लागू होंगे जिनमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब शामिल हैं।
 नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों पर एक करोड़ रिंगिट (25 लाख अमेरिकी डॉलर) तक का जुर्माना लग सकता है। हालांकि, अगर बच्चे इस कानून को किसी तरह दरकिनार कर सोशल मीडिया अकाउंट बना लेते हैं तो उनके माता-पिता पर कोई दंड नहीं लगाया जाएगा।
 सरकार ने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य बच्चों को हानिकारक सामग्री, ऑनलाइन उत्पीड़न और मंचों की उन विशेषताओं से बचाना है जो अत्यधिक इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई हैं।
 ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और इंडोनेशिया सहित अन्य देशों ने भी बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को सीमित करने के लिए आयु आधारित प्रतिबंध या शर्तें लागू की हैं या उनकी घोषणा की है।इसे भी पढ़ें: RCB की &#039;डबल धमाका&#039; जीत पर हेजलवुड का बड़ा दावा- &#039;इस बार हम ज्यादा शांत थे, क्योंकि कोर टीम हमारे साथ थी&#039; ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, डेनमार्क, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी इसी तरह के उपायों का अध्ययन कर रहे हैं या उन्हें विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
 मलेशिया के संचार एवं मल्टीमीडिया आयोग ने कहा कि इन नियमों का उद्देश्य बच्चों को इंटरनेट या डिजिटल प्रौद्योगिकी तक पहुंच बनाने से रोकना नहीं है, बल्कि इनके जरिये सेवा प्रदाताओं से ऑनलाइन खतरों से निपटने और आयु के अनुरूप सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की अपेक्षा की गई है। प्रौद्योगिकी कंपनियों ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे मलेशिया की नयी अनिवार्यताओं का अनुपालन कैसे करेंगी।
 मलेशियाई नियामक ने कहा कि आयु सत्यापन प्रणाली को लागू करने के लिए मंचों को कुछ समय की मोहलत दी जाएगी।
 दक्षिणपूर्व एशिया के लिए ‘मेटा’ की सार्वजनिक नीति निदेशक क्लारा कोह ने अप्रैल में चेतावनी दी थी कि मलेशिया का 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर पूर्ण प्रतिबंध उल्टा पड़ सकता है और इसके कारण किशोर सुरक्षित ऐप से दूर होकर इंटरनेट के अनियंत्रित क्षेत्रों की ओर जा सकते हैं।
 उन्होंने कहा कि ‘मेटा’ ने 18 साल से कम उम्र के लोगों के लिए ‘टीन अकाउंट’ (किशोरों के लिए खाते) शुरू किए हैं जो संपर्क, ‘स्क्रीन’ के सामने बिताए जाने वाले समय और अनुचित सामग्री तक पहुंच को सीमित करते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:04:06 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;US Peace Talks | ईरान&#45;अमेरिका शांति वार्ता पर अटकलें खारिज, विदेश मंत्री अब्बास अराघची बोले&#45; &amp;apos;बातचीत जारी है, लेकिन अंतिम फैसला अभी दूर&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व (Middle East) में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक कोशिशों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही बैक-चैनल (अप्रत्यक्ष) वार्ताओं को लेकर आ रही कई तरह की मीडिया रिपोर्ट्स और अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। अराघची ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान (ओमान या अन्य माध्यमों से) अभी भी जारी है, लेकिन किसी भी अंतिम नतीजे पर पहुंचने से पहले आ रही खबरें महज अफवाहें हैं। इसे भी पढ़ें: RCB की &#039;डबल धमाका&#039; जीत पर हेजलवुड का बड़ा दावा- &#039;इस बार हम ज्यादा शांत थे, क्योंकि कोर टीम हमारे साथ थी&#039;ईरानी सरकारी मीडिया से बात करते हुए, अराघची ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। हालांकि, उन्होंने इस चरण में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के प्रति आगाह किया, और इस बात पर जोर दिया कि बातचीत के नतीजों के बारे में चल रही खबरें तब तक केवल अटकलें ही रहेंगी, जब तक कोई अंतिम फैसला नहीं हो जाता।बातचीत में नई अनिश्चितता का सामनाये ताज़ा टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब वाशिंगटन में नई राजनीतिक बाधाओं के कारण किसी बड़ी सफलता की उम्मीदें कम हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने हाल ही में संकेत दिया था कि ईरान के साथ समझौता पूरा होने के करीब है, ने कथित तौर पर अपनी मंजूरी देने से पहले मसौदा प्रस्ताव में बदलाव करने को कहा है। इसे भी पढ़ें: Fact Check: क्या IRGC के बढ़ते दखल के कारण ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने इस्तीफा दे दिया? जानें वायरल दावे का सचइस कदम ने बातचीत को और लंबा खींच दिया है, और तनाव कम करने तथा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक चर्चा के लिए दरवाज़ा खोलने के प्रयासों के इर्द-गिर्द नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।कई रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने ईरान के परमाणु वादों से संबंधित कड़े प्रावधानों और होर्मुज जलडमरूमध्य (जो एक प्रमुख वैश्विक शिपिंग मार्ग है) को फिर से खोलने के संबंध में गारंटी की मांग की है। उन्होंने कथित तौर पर इस बात पर भी चिंता जताई है कि किसी भी भविष्य के समझौते के तहत ईरान को कितने आर्थिक लाभ मिल सकते हैं।व्हाइट हाउस की बैठक बिना किसी फैसले के समाप्तसमझौते को &quot;काफी हद तक अंतिम रूप दिया गया&quot; बताने के सिर्फ़ एक हफ़्ते बाद, ट्रंप ने कथित तौर पर वरिष्ठ सलाहकारों के साथ व्हाइट हाउस में एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान मसौदे की समीक्षा की। इस उम्मीद के बावजूद कि चर्चाओं से कोई अंतिम फैसला निकल सकता है, बैठक बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई।अमेरिकी अधिकारियों ने पहले क्षेत्रीय तनाव कम करने, होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से शिपिंग के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने और ईरान की परमाणु गतिविधियों पर व्यापक बातचीत के लिए आधार तैयार करने पर केंद्रित बातचीत में प्रगति की ओर इशारा किया था। हालांकि, ताज़ा घटनाक्रम संकेत देते हैं कि दोनों पक्षों के बीच अभी भी महत्वपूर्ण मतभेद बने हुए हैं।विवाद का मुख्य मुद्दा: परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक राहतसबसे बड़े मतभेद अभी भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम और किसी भी समझौते की आर्थिक शर्तों पर केंद्रित हैं। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि अमेरिका, ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार पर नियंत्रण चाहता है, और उन्होंने सुझाव दिया है कि इस सामग्री को वहाँ से हटाकर नष्ट कर दिया जाना चाहिए। हालाँकि, ईरान का कहना है कि उसके परमाणु ढाँचे के विवरण पर चर्चा, मौजूदा बातचीत का हिस्सा नहीं है।आर्थिक मुद्दे भी उतने ही मुश्किल साबित हो रहे हैं। तेहरान इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि किसी भी समझौते में प्रतिबंधों में राहत और आर्थिक गारंटी को ज़रूर शामिल किया जाना चाहिए। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि बातचीत के हिस्से के तौर पर किसी भी वित्तीय पैकेज या आर्थिक लेन-देन पर कोई सहमति नहीं बनी है।एक और अड़चन &#039;होरमुज़ जलडमरूमध्य&#039; (Strait of Hormuz) है। वाशिंगटन इस रणनीतिक जलमार्ग से बिना किसी रुकावट के आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए और अधिक मज़बूत प्रतिबद्धताएँ चाहता है, जबकि इस बात पर चर्चा जारी है कि ऐसी गारंटियों को समझौते में किस तरह शामिल किया जाए। Stay updated with International
News in Hindi on Prabhasakshi  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:04:06 +0530</pubDate>
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<title>WHO इबोला प्रकोप से निपटने में डीआरसी का साथ देने के लिए संकल्पबद्ध</title>
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<description><![CDATA[ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में तेज़ी से फैल रहे इबोला के प्रकोप को नियंत्रित करने में सामुदायिक विश्वास निर्णायक साबित होगा. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने इबोला प्रकोप से निपटने में डीआरसी के साथ खड़े रहने का संकल्प व्यक्त किया है. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:03:45 +0530</pubDate>
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<title>ग़ाज़ा के शिविरों में फ़ुटबॉल के खेल से फैलती ख़ुशियाँ और उम्मीदें</title>
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<description><![CDATA[ पिछले लगभग ढाई वर्षों के दौरान भीषण युद्ध में बुरी तरह तबाह हो चुके क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा में, उधार के जूतों और उधार की ख़ुशियों के सहारे आयोजित किए जा रहे फ़ुटबॉल मैच, भीड़भाड़ वाले तम्बुओं, स्कूलों या क्षतिग्रस्त इमारतों में रह रहे हज़ारों लोगों को, ज़िन्दगी की कड़वी सच्चाई से कुछ देर के लिए राहत दे रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:03:40 +0530</pubDate>
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<title>ग़ाज़ा: ईद के त्योहार के दौरान इसराइली हमलों में 26 लोगों की मौत</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने बताया है कि ग़ाज़ा में इस्लाम के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक – ईद-अल-अदहा की पूर्व सन्ध्या मंगलार से लेकर शुक्रवार तक इसराइली हमलों में कम से कम 26 फ़लस्तीनी मारे गए हैं. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:03:40 +0530</pubDate>
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<title>Prabhasakshi NewsRoom: India से बैर रखना Pakistan को पड़ रहा भारी, Karachi में जल संकट गहराया, सिंधु के पानी के लिए किसान भी तरस रहे</title>
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<description><![CDATA[ भारत से लगातार टकराव और आतंकवाद को संरक्षण देने की नीति अब पाकिस्तान पर कई मोर्चों पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। एक तरफ पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची भीषण जल संकट से जूझ रही है, तो दूसरी तरफ सिंधु नदी तंत्र पर निर्भर उसकी कृषि व्यवस्था भी गंभीर दबाव में आ गई है। सिंधु जल संधि के स्थगित रहने के बाद पाकिस्तान में जल सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है और इसका असर अब आम नागरिकों से लेकर किसानों तक महसूस किया जाने लगा है।गर्मी के चरम मौसम में कराची के लाखों लोग पानी की एक एक बूंद के लिए परेशान हैं। शहर के लगभग सत्तर प्रतिशत हिस्से में जलापूर्ति बुरी तरह प्रभावित बताई जा रही है। गुलिस्तान ए जौहर, गुलशन ए इकबाल, अजीजाबाद, लियाकताबाद, नार्थ नाजिमाबाद, नाजिमाबाद और नार्थ कराची जैसे इलाकों में कई सप्ताह से पानी का संकट बना हुआ है। हालात इतने खराब हैं कि लोगों को महंगे निजी टैंकरों से पानी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।इसे भी पढ़ें: India के साथ खड़ा हो गया China! Pakistan हैरान, Shehbaz Sharif, Asim Munir के लौटते ही Jinping ने किया बड़ा खेलयह संकट ऐसे समय सामने आया है जब पूरे पाकिस्तान में बकरीद का त्योहार मनाया जा रहा है। त्योहार के दौरान पानी की मांग सामान्य दिनों से कहीं अधिक रहती है, लेकिन कराची में प्रशासन की नाकामी ने नागरिकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। बढ़ती गर्मी और घटती जलापूर्ति ने लोगों के सामने रोजमर्रा के जीवन का संकट खड़ा कर दिया है।इस मुद्दे को लेकर जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान के प्रमुख हाफिज नईम उर रहमान ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंध में लगभग अठारह वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी कराची को पानी जैसी मूलभूत सुविधा तक उपलब्ध नहीं करा सकी। उनका कहना है कि सरकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन ने हालात को विस्फोटक बना दिया है।हाफिज नईम उर रहमान ने यह भी आरोप लगाया कि सिंध ठोस अपशिष्ट प्रबंधन बोर्ड को अरबों रुपये का बजट मिलने के बावजूद कुर्बानी के जानवरों के अवशेषों और कचरे के निपटान की व्यवस्था तक सही ढंग से नहीं हो सकी है। उन्होंने सरकार पर सार्वजनिक धन की बर्बादी और प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कराची के महापौर मुर्तजा वहाब के उस दावे को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि शहर में पानी की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि पूरा शहर जल संकट की मार झेल रहा है।लेकिन पाकिस्तान की परेशानी केवल कराची तक सीमित नहीं है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने के फैसले ने पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था की कमजोरियों को भी उजागर कर दिया है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और सामरिक अध्ययनों के अनुसार पाकिस्तान की लगभग अस्सी प्रतिशत कृषि सिंधु नदी तंत्र के जल पर निर्भर है। यही नदी तंत्र वहां की खाद्य सुरक्षा, सिंचाई व्यवस्था और जल विद्युत उत्पादन की रीढ़ माना जाता है।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल प्रवाह और जल प्रबंधन को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है तो इसका सबसे बड़ा असर पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांत के किसानों पर पड़ेगा। कई रिपोर्टों में चेतावनी दी गई है कि सिंचाई जल की कमी के कारण फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है, खाद्यान्न संकट गहरा सकता है और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है।अंतरराष्ट्रीय विश्लेषणों में यह भी कहा गया है कि सिंधु नदी तंत्र पाकिस्तान के लिए केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि जीवन रेखा है। तीन सौ मिलियन से अधिक लोगों की आजीविका, खेती और ऊर्जा व्यवस्था प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसी पर निर्भर है। ऐसे में भारत के साथ लगातार तनाव और आतंकवाद को लेकर बने विवादों ने पाकिस्तान की जल सुरक्षा को नए संकट में डाल दिया है।कई विदेशी रिपोर्टों में पाकिस्तान के किसानों की चिंता भी सामने आई है। किसानों का कहना है कि जल आपूर्ति में किसी भी प्रकार की अनिश्चितता सीधे उनकी फसलों, आय और भविष्य को प्रभावित करती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान ने अपने जल संसाधनों के प्रबंधन, भंडारण क्षमता और सिंचाई ढांचे को मजबूत नहीं किया तो आने वाले वर्षों में संकट और गहरा सकता है।आज स्थिति यह है कि एक तरफ कराची के लोग बूंद बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं, दूसरी तरफ सिंधु के जल पर आश्रित किसान भविष्य को लेकर चिंतित हैं। भारत विरोध और आतंकवाद पर नरम रुख की कीमत अब पाकिस्तान को जल, कृषि और अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर चुकानी पड़ रही है। जल संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक जिद और कुप्रबंधन का सबसे बड़ा बोझ अंततः आम जनता और किसानों को ही उठाना पड़ता है।बहरहाल, भारत का रुख अब पहले की तुलना में कहीं अधिक स्पष्ट और कठोर दिखाई दे रहा है। नई दिल्ली लगातार यह संदेश देती रही है कि &quot;खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते।&quot; भारत का मानना है कि सीमा पार आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय संबंध एक साथ नहीं चल सकते। ऐसे में पाकिस्तान चाहे द्विपक्षीय माध्यम से सिंधु जल के मुद्दे पर राहत मांगने का प्रयास करे या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी चिंता उठाए, भारत की प्राथमिकता आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई बनी रहेगी। जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से संचालित आतंकवादी ढांचे पर निर्णायक प्रहार नहीं करता, आतंकवाद को संरक्षण देने वाले तत्वों के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाता और भारत विरोधी गतिविधियों पर प्रभावी रोक नहीं लगाता, तब तक दोनों देशों के संबंधों में सामान्य स्थिति की वापसी संभव नहीं है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:28 +0530</pubDate>
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<title>Iran Deal पर Donald Trump की दो टूक, बोले&#45; मेरी शर्तों के बिना कोई समझौता नहीं</title>
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<description><![CDATA[ व्हाइट हाउस में दो घंटे की बैठक के बावजूद अमेरिका ईरान के साथ बातचीत में कोई सफलता हासिल नहीं कर पाया है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तेहरान के साथ तब तक किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे जब तक कि वह अमेरिका के हित में न हो और उनकी तय शर्तों को पूरा न करे। ये टिप्पणियां ऐसे समय में आईं जब ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि वे संघर्ष को समाप्त करने के लिए संभावित समझौते पर अंतिम निर्णय लेंगे, जबकि ईरानी अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ईरान के साथ किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि वह अमेरिका को स्वीकार्य हो। अधिकारी ने आगे कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं रख सकता।इसे भी पढ़ें: ईरान को Nuclear Bomb नहीं रखने देंगे, Donald Trump की फाइनल मीटिंग, डील पर होगा आखिरी फैसलाट्रम्प ने कहा कि वे विचाराधीन शर्तों की समीक्षा करने के बाद संभावित समझौते पर अंतिम निर्णय लेंगे। ये टिप्पणियां वाशिंगटन और तेहरान के बीच संभावित समझौते के ढांचे को लेकर जारी बातचीत की खबरों के बीच आई हैं। ट्रम्प की सिचुएशन रूम में हुई बैठक लगभग दो घंटे तक चली और ईरान के साथ नए समझौते को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। पेंटागन ने कहा कि सुरक्षा बैठकों के परिणाम अगले सप्ताह लेबनान और इज़राइल के बीच होने वाली राजनीतिक वार्ता की दिशा भी निर्धारित करेंगे। इसे भी पढ़ें: भारत दौरे के तुरंत बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्री से क्यों मिले रहे मार्को रुबियो? इशाक डार के न्यूयॉर्क दौरे की Inside Storyअभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बनी ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। बगाई ने कहा कि संदेशों का आदान-प्रदान जारी है और साथ ही यह भी कहा कि अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है।” ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने भी सतर्कता बरती। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते का मूल्यांकन वादों के बजाय कार्यों के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केवल कार्य ही मापदंड हैं। दूसरे पक्ष द्वारा कार्रवाई किए बिना कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:28 +0530</pubDate>
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<title>Iran Attack on Kuwait: ईरान ने अमेरिकी एयरबेस Ali al Salem पर दागीं मिलाइलें, मची तबाही</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा। हर गुजरते दिन के साथ हालात और ज्यादा गंभीर होते जा रहे हैं। अब खबर है कि ईरान ने कुवैत स्थित अली अल सलीम एयरबेस को निशाना बनाते हुए बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। इस घटना ने पूरे खाली क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है और आशंका जताई जा रही है कि क्षेत्रीय संघर्ष का दायरा और फैल सकता है। जानकारी के मुताबिक हमले से कुछ समय पहले ईरान के खोजे स्तान प्रांत के आसमान में बैलस्टिक मिसाइलों की लकीरें देखी गई। इसके बाद कुवैत में मौजूद अली अल सलीम एयरबेस की ओर मिसाइलें बढ़ने की खबर सामने आई। शुरुआती रिपोर्टों में दावा किया गया कि एयरबेस पर तैनात पेट्रियर्ड एयर डिफेंस सिस्टम ने कम से कम एक मिसाइल को हवा में ही रोक लिया। हालांकि हमले से हुए नुकसान और हताहतों को लेकर आधिकारिक जानकारी सीमित है। इस घटनाक्रम के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोशनरी गार्ड कॉप्स यानी कि आईआईजीसी ने कड़ा संदेश दिया। आईआईजीसी का कहना है कि यदि ईरान पर किसी भी प्रकार का हमला किया गया तो उसका जवाब निर्णायक और पहले से कहीं ज्यादा सख्त होगा। यह बयान ऐसे समय में आया जब पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं। दरअसल पिछले कई महीनों से मिडिल ईस्ट लगातार तनाव और संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। इसे भी पढ़ें: Iran Deal पर Donald Trump की दो टूक, बोले- मेरी शर्तों के बिना कोई समझौता नहींईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ती तनातनी ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। खाली देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी भी इस संघर्ष को और ज्यादा संवेदनशील बना रही है। ईरान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों का इस्तेमाल उसके खिलाफ किया जा रहा है। जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का कहना है कि उनकी सैन्य मौजूदगी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुवैत स्थित एयरबेस पर हुआ यह हमला केवल एक सैन्य कारवाई नहीं बल्कि एक राजनीतिक और रणनीतिक संदेश भी है। ईरान यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि अगर उसके हितों या उसकी सुरक्षा को चुनौती दी गई तो वह सीधे-सीधे जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा। इस पूरे संघर्ष का असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। तेल उत्पादन और समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव से वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हो रहे हैं। इसे भी पढ़ें: &#039;दबाव की भाषा हमें मंज़ूर नहीं&#039;, ईरान ने ट्रंप के सीज़फ़ायर के दावे को किया ख़ारिजतेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है और कई देशों को आशंका है कि अगर हालात और ज्यादा बिगड़े तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका पूरा और बुरा असर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट पर टिकी हुई है। सवाल यही है कि क्या यह है हमला? सिर्फ एक चेतावनी है या फिर क्षेत्र में किसी बड़े संघर्ष की शुरुआत। आने वाले दिनों में अमेरिका, कुवैत और अन्य खाली देशों की प्रतिक्रिया यह करेगी तय कि यह तनाव बातचीत की मेज पर पहुंचेगा या फिर जंग का दायरा और ज्यादा बढ़ेगा। बड़ी खबर आ रही है कि ईरान ने इसराइल के खिलाफ ऐलान जंग कर दिया है। ईरान की सबसे ताकतवर और एलट फोर्स पासदाराने इस्लाम यानी आईआरजीसी ने इसराइल को दुनिया के नक्शे से मिटाने की कसम खा ली है। जी हां, मीडिया रिपोर्ट बता रही है कि गजा में इसराइल की आक्रामकता और सीज फायर के बावजूद जारी हमलों के बाद इस्लामिक रेवोलशरी गार्ड कॉप्स ने साफ कह दिया है कि सारी दिक्कतों की जड़ इसराइल है। इसलिए अब इससे ही निपटना होगा। ईरान की आईआरजीसी ने ट्रंप के सारे शांति प्रस्ताव चाहे वो गजा के लिए हो या ईरान के लिए उन्हें सिर्फ कत्लेआम, मर्डर और आतंक का एजेंडा करार दिया है। आईआरजीसी ने ख्ते में अमन लाने के ट्रंप के सारे प्रस्तावों को खारिज कर दिया है। गजा में हमास कमांडरों पर अटैक को ईरान ने पूरे इस्लामिक रेजिस्टेंस पर हमला माना है। दरअसल हमाज़ भी ईरान के एक्सेस ऑफ रेजिस्टेंस का हिस्सा है और फिलिस्तीन की आजादी ईरान की फॉरेन पॉलिसी का हिस्सा है। जिसको लेकर वो इसराइल को अपना नंबर वन दुश्मन मानता है और इसराइल भी यही चाहता है कि ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन की रिजीम का वजूद किसी भी तरह से खत्म कर दिया जाए। ईरान का मानना है कि अमेरिका और इसराइल मिलकर इस इलाके में शांति के नाम पर सिर्फ बेगुनाहों का खून बहा रहे हैं। इसराइल तो गजा से लेकर लेबनान तक सीज फायर की खुली धज्जियां उड़ाता है और जब मर्जी चाहे तब हमले अंजाम देता है। ईरान के मुताबिक इसराइल को अपनी तकनीक और अमेरिका के साथ पर बड़ा घमंड है। अब उसी इसराइल को धरती से मिटाने का वक्त आ गया है। अमेरिका और इसराइल बस शांति के नाम पर ख्ते में अपनी मनमर्जी थोपने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान ने साफ किया कि वह पश्चिमी देशों के ऐसे किसी भी शांति प्रस्ताव के झांसे में आने वाला नहीं है और अब इसराइल को सबक सिखाकर ही दम लेगा। ईरान के रेवोलशनरी गार्ड्स ने अपने बयान में इसराइल और अमेरिका को चुनौती देते हुए कहा है कि हमास के टॉप कमांडरों को मार देने से फिलिस्तीनी रेजिस्टेंस कमजोर पड़ने वाला नहीं है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:27 +0530</pubDate>
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<title>होर्मुज स्ट्रेट और यूरेनियम पर ट्रंप ने क्या ऐसा दावा किया, ईरान असहमत, वार्ता पर बना सस्पेंस</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान पश्चिम एशिया में संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक शांति समझौते के करीब हैं, हालांकि दोनों पक्ष समझौते की बारीकियों पर बातचीत और मोलभाव कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाकाबंदी हटाई जा रही है और ईरान के साथ समझौते पर जल्द ही फैसला लिया जाएगा। हालांकि, ईरान ने अमेरिका के इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि युद्धविराम समझौते के लिए बातचीत जारी है और अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है। दोनों देशों ने युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए बातचीत जारी रखते हुए, युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाने के लिए एक प्रारंभिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।इसे भी पढ़ें: ईरान को Nuclear Bomb नहीं रखने देंगे, Donald Trump की फाइनल मीटिंग, डील पर होगा आखिरी फैसलाईरान के परमाणु संयंत्रों और होर्मुज पर ट्रंप का बड़ा दावाशुक्रवार को ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने के प्रस्तावित समझौते पर जल्द ही फैसला लेंगे और इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेने के लिए व्हाइट हाउस में बैठक करेंगे। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि बैठक लगभग दो घंटे चली, लेकिन उन्होंने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी कि ट्रंप ने कोई निर्णय लिया है या नहीं। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण समाप्त करना होगा और परमाणु हथियार बनाने की अपनी क्षमता को खत्म करना होगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान को यह स्वीकार करना होगा कि उसके पास कभी भी परमाणु हथियार या बम नहीं होगा। होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोला जाना चाहिए, बिना किसी शुल्क के, दोनों दिशाओं में निर्बाध जहाज यातायात के लिए। यदि कोई जलमग्न खदानें हैं, तो उन्हें हटा दिया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि हमारी अद्भुत और अभूतपूर्व नौसैनिक नाकाबंदी के कारण जलडमरूमध्य में फंसे जहाज, जिसे अब हटाया जा रहा है, &#039;घर लौटने&#039; की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं! अपने प्रिय राष्ट्रपति की ओर से अपनी पत्नियों, पतियों, माता-पिता और परिवारों को नमस्कार कहें! व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने एएफपी को बताया कि ट्रंप ईरान के साथ शांति समझौता तभी करेंगे जब वह उनकी सभी शर्तों को पूरा करेगा। यह घोषणा व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में दो घंटे की बैठक के बाद हुई। हालांकि, खबरों के अनुसार, अमेरिकी पक्ष किसी निर्णय पर नहीं पहुंचा। इसे भी पढ़ें: Iran Attack on Kuwait: ईरान ने अमेरिकी एयरबेस Ali al Salem पर दागीं मिलाइलें, मची तबाहीईरान ने ट्रंप के बयान को खारिज कियाईरानी पक्ष ने ट्रंप के बयानों को तुरंत खारिज कर दिया। ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा कि युद्धविराम समझौते पर बातचीत अभी जारी है और अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने प्रेस टीवी को बताया तेहरान ने 47 साल पहले ही &#039;जरूरी&#039; की भाषा को अलविदा कह दिया है। पश्चिमी देशों में से कोई भी पक्ष ईरान के बारे में बात करते समय &#039;जरूरी&#039; की भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकता। हम ईरानी राष्ट्र के हितों और अधिकारों के आधार पर अपने फैसले खुद लेते हैं। बगाई ने अमेरिकी समुद्री कार्रवाई को &quot;शुरू से ही अवैध&quot; बताया और कहा कि इसने 8 अप्रैल को लागू हुए युद्धविराम का उल्लंघन किया है। ]]></description>
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<title>रेगिस्तान में किला, मिसाइल सिटी, ईरान जैसा हथियारों का पाताल लोक तैयार कर रहा चीन, ड्रैगन के प्लान से अमेरिका के उड़े होश!</title>
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<description><![CDATA[ चीन अपने दूरदराज के उत्तर-पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके में लॉन्च पैड (लॉन्चिंग साइट्स), मजबूत किलेबंद सुविधाओं और संचार बुनियादी ढांचे का एक बहुत बड़ा नेटवर्क बना रहा है। एक अमेरिकी शोधकर्ता  ने इसे बीजिंग के परमाणु बलों की सुरक्षा और उनके बचे रहने की क्षमता को मजबूत करने का एक ऐसा प्रयास बताया है जो &quot;पहले कभी नहीं देखा गया। बताया जा रहा है कि चीन रेगिस्तान में परमाणु चक्रव्यूह बिछा रहा है। चीन ने अमेरिका को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। ऐसा तीन लेयर का न्यूक्लियर चक्रव्यूह जिसे अमेरिका के लिए भेदना नामुमकिन हो जाए। सेटेलाइट से आई कुछ नई और बेहद चौंकाने वाली तस्वीरों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। इन तस्वीरों में चीन के उत्तर पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके में बड़े पैमाने पर सैन्य निर्माण गतिविधियां दिखाई दी हैं। यह कोई साधारण निर्माण नहीं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन यहां अपने परमाणु हथियारों और लंबी दूरी की मिसाइलों के लिए ऐसा सुरक्षा कवच तैयार कर रहा है जो युद्ध की स्थिति में उसकी सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकता है। चीन की एक पुरानी रणनीति रही है कि वह सुनसान और दूरदराज के इलाकों में अपनी सबसे गोपनीय सैन्य परियोजना को अंजाम देता है। जहां आम लोगों की पहुंच नहीं होती। जहां विदेशी निगरानी सीमित होती है और जहां दुश्मन के लिए गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल होता है।  इसे भी पढ़ें: युद्धपोत देख भड़का चीन, लड़ाकू जहाज से नेवी को घेराउसी रणनीति के तहत चीन के हामी न्यूक्लियर साइलो फील्ड के आसपास तेजी से सैन्य ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां 80 से ज्यादा विशाल कंक्रीट लॉन्च पैड बनाए गए हैं। इनके अलावा बंकर, सैन्य गोदाम, कम्युनिकेशन सेंटर और अत्याधुनिक रक्षा संरचनाएं भी खड़ी की गई। इन लॉन्च पैंट्स का आकार इतना बड़ा है कि यहां आसानी से मोबाइल मिसाइल लांचर, एयर डिफेंस सिस्टम और भारी सैन्य वाहन तैनात किए जा सकते हैं। सबसे ज्यादा चर्चा उस रहस्यमई ऑक्टागन बेस की हो रही है जिसे सुरक्षा विशेषज्ञों ने न्यूक्लियर चक्रव्यूह का नाम दिया है। यह बेस साधारण सैन्य अड्डे जैसा नहीं दिखता। इसकी पूरी बनावट एक बहुस्तरीय [संगीत] सुरक्षा ढांचे जैसी है। सबसे ज्यादा अंदर मौजूद है मुख्य कमान सेंटर। यही वो जगह हो सकती है जहां युद्ध की स्थिति में सभी फैसले लिए जाएं और जहां से मिसाइल नेटवर्क को नियंत्रित किया जाए। इसके बाहर दूसरी परत बनाई गई है जहां सैनिकों, अधिकारियों और तकनीकी स्टाफ के रहने और संचालन की सुविधाएं मौजूद हैं। यानी अगर युद्ध की स्थिति बने तो यह बेस लंबे समय तक स्वतंत्र रूप से काम कर सकता है। फिर आती है तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण परत। यह परत भारी सैन्य वाहनों, ट्रंक, माउंटेड, मिसाइल लांचरों और युद्ध सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए तैयार की गई बताई जा रही है। यदि दुश्मन किसी एक हिस्से को निशाना बनाता है तो भी बाकी सिस्टम सक्रिय रह सके। इसके लिए पूरे ढांचे को कई स्तरों में बांटा गया है। इस पूरे क्षेत्र को चारों तरफ से बख्तरबंद बंकरों, सुरक्षित हथियार डिपो, एयर स्ट्रिप और रेलवे लाइनों से जोड़ा गया है। यह रेलवे लाइनें सीधे परमाणु मिसाइलों क्षेत्रों तक पहुंचती हैं। जिससे मिसाइलों और सैन्य उपकरणों की तेज आवाजाही संभव हो सके। इसे भी पढ़ें: Turkey के दुश्मन के घर में शेर की तरह दहाड़ने लगे भारत के खूंखार हथियार, हिले कई देश!हाल ही में अप्रैल और मई के दौरान इस इलाके में चीनी सेना की बड़े सैन्य गतिविधि भी देखी गई। सेटेलाइट तस्वीरों में मिसाइल बैट्रियां, भारी सैन्य ट्रक और बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास के संकेत दिखाई दिए। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई कि चीन केवल निर्माण नहीं कर रहा बल्कि इस नेटवर्क को सक्रिय रूप से ऑपरेशनल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार चीन की असली चिंता अमेरिका की तथाकथित फर्स्ट स्ट्राइक क्षमता है। यानी अगर कभी युद्ध की स्थिति में अमेरिका पहले हमला करे तो चीन के परमाणु हथियार नष्ट हो जाए। इसी खतरे से बचने के लिए चीन अपनी सेकंड स्ट्राइक क्षमता को मजबूत कर रहा है। सेकंड स्ट्राइक का मतलब है पहला हमला झेलने के बाद भी दुश्मन पर विनाशकारी जवाबी हमले करने की क्षमता बनाए रखना। इस रणनीति का एक और अहम हिस्सा है चीन का अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम। वायन वन नामक सेटेलाइट नेटवर्क सिस्टम दुश्मन की मिसाइल लॉन्च होने के कुछ ही सेकंड बाद उसका पता लगा सकता है और कुछ मिनटों के भीतर सैन्य कमांड को अलर्ट भेज सकता है। यानी अगर किसी देश ने चीन पर अचानक हमला करने की कोशिश की तो चीन को जवाबी कारवाई के लिए महत्वपूर्ण समय मिल सकता है। हालांकि चीन आधिकारिक तौर पर नो फर्स्ट यूज़ नीति की बात करता रहा है और कहता है कि वह पहले परमाणु हमला नहीं करेगा। लेकिन पश्चिमी देशों और कई सुरक्षा विशेषज्ञों को डर है कि ताइवान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच यह परमाणु ढांचा रणनीतिक दबाव बनाने का बड़ा हथियार बन सकता है। पेंटागन पहले ही चेतावनी दे चुका है कि चीन दुनिया में सबसे तेजी से अपना न्यूक्लियर शस्त्रगार बढ़ा रहा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले सालों में चीन के पास 1000 से ज्यादा परमाणु वॉर हेड हो सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:26 +0530</pubDate>
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<title>Iran से बातचीत के बीच America की खुली चेतावनी, Pete Hegseth बोले&#45; जंग के लिए पूरी तरह तैयार</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर बातचीत में अभी तक कोई सफलता न मिलने के कारण, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने शनिवार को कहा कि अगर परिस्थितियाँ ऐसी हुईं तो वाशिंगटन ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। सिंगापुर में शांगरी-ला संवाद में बोलते हुए, हेगसेथ ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के पास एक ही समय में कई क्षेत्रों में अभियान चलाने के लिए आवश्यक सैन्य क्षमता और हथियारों का भंडार है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर पुनः आरंभ करने की हमारी क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि हम इसके लिए पूरी तरह से सक्षम हैं, हमारे भंडार इसके लिए पर्याप्त हैं, चाहे वह वहां हो या दुनिया भर में, क्योंकि हम उत्कृष्ट और प्रचुर मात्रा में गोला-बारूद को संतुलित करते हैं। मध्य पूर्व में महीनों से चल रहे संघर्ष और बढ़ते तनाव के बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच संभावित राजनयिक समझौते को लेकर जारी चर्चाओं के बीच उन्होंने ये टिप्पणियां कीं। इसे भी पढ़ें: रेगिस्तान में किला, मिसाइल सिटी, ईरान जैसा हथियारों का पाताल लोक तैयार कर रहा चीन, ड्रैगन के प्लान से अमेरिका के उड़े होश!ईरान के परमाणु हथियारों का विरोधहेगसेथ ने वाशिंगटन के उस पुराने रुख को दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, &quot;ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए हमारी वैश्विक जिम्मेदारियां अभी भी बनी हुई हैं। यह बयान तेहरान के साथ चल रही बातचीत के बीच आया है। इंडो-पैसिफिक एक रणनीतिक प्राथमिकतामध्य पूर्व के साथ-साथ, हेगसेथ ने अपने संबोधन में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में व्यापक अमेरिकी रणनीतिक लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंताओं के बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका एशिया में स्थिरता बनाए रखने और शक्ति संतुलन को बरकरार रखने के लिए प्रतिबद्ध है। हेगसेथ ने कहा कि हम एक ऐसा वास्तविक स्थिर संतुलन चाहते हैं जो अमेरिकियों के साथ-साथ हमारे सहयोगियों के लिए भी लाभकारी हो। एक ऐसा अनुकूल लेकिन टिकाऊ शक्ति संतुलन जिसमें चीन सहित कोई भी देश अपना वर्चस्व स्थापित न कर सके और हमारे राष्ट्र और हमारे सहयोगियों की सुरक्षा या समृद्धि को खतरे में न डाल सके। इसे भी पढ़ें: होर्मुज स्ट्रेट और यूरेनियम पर ट्रंप ने क्या ऐसा दावा किया, ईरान असहमत, वार्ता पर बना सस्पेंससहयोगी देशों से अधिक जिम्मेदारी साझा करने की अपेक्षाहेगसेथ ने यह भी संकेत दिया कि वाशिंगटन को उम्मीद है कि भविष्य में उसके सहयोगी देश सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा संभालेंगे। उन्होंने कहा कि धनी देशों को अमेरिकी सब्सिडी देने का युग समाप्त हो गया है। रक्षा सचिव ने तर्क दिया कि दीर्घकालिक स्थिरता और समृद्धि इस बात पर निर्भर करती है कि कोई भी एक शक्ति हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर प्रभुत्व न जमाए। उन्होंने एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के रूप में वर्णित क्षेत्र का समर्थन करने के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:26 +0530</pubDate>
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<title>लाखों भारतीयों को बड़ी राहत! Green Card के लिए US में रहकर ही कर सकेंगे Apply, नहीं लौटना होगा घर</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने हाल ही में जारी आव्रजन निर्देश को लेकर बनी चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया है और स्पष्ट किया है कि ग्रीन कार्ड के अधिकांश आवेदकों को स्थायी निवास आवेदन की समीक्षा के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका छोड़ने की आवश्यकता नहीं होगी। यह स्पष्टीकरण अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) के उस बयान के ठीक एक सप्ताह बाद आया है, जिसने अप्रवासियों, नियोक्ताओं और आव्रजन वकीलों के बीच चिंता पैदा कर दी थी। यूएससीआईएस ने संकेत दिया था कि स्थायी निवास चाहने वाले व्यक्तियों को असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर, प्रक्रिया अवधि के दौरान अपने गृह देशों में लौटना होगा। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, डीएचएस ने अब कहा है कि नीति में कोई व्यापक बदलाव नहीं हुआ है। विभाग ने बताया कि आव्रजन अधिकारियों के पास लंबे समय से यह विवेकाधिकार रहा है कि वे प्रत्येक मामले के आधार पर यह तय करें कि आवेदक को अमेरिका के बाहर से ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए या नहीं। इसे भी पढ़ें:  वेटर नहीं PLA की कमांडर, बीजिंग में एलन मस्क की जासूसी करा रहे थे जिनपिंग?पिछले सप्ताह की घोषणा में दिए गए संदेश में महत्वपूर्ण नरमी ला दी है, जिसे कई लोगों ने मौजूदा प्रक्रियाओं से एक बड़ा बदलाव माना था। वर्तमान प्रणाली के तहत, पात्र आप्रवासी &quot;स्थिति समायोजन&quot; नामक प्रक्रिया के माध्यम से स्थायी निवास के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिससे उन्हें अपने आवेदन की प्रक्रिया के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका में रहने की अनुमति मिलती है। आवेदकों को आमतौर पर उनके नियोक्ता या करीबी परिवार के सदस्य द्वारा प्रायोजित किया जाता है। विवाद तब शुरू हुआ जब यूएससीआईएस के प्रवक्ता ज़ैक काहलर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आव्रजन संबंधी सख्त नीतियों के तहत, स्थायी निवास चाहने वाले व्यक्तियों को अनुमोदन प्रक्रिया के दौरान अपने मूल देशों में लौटना होगा। इसे भी पढ़ें: सामान भी नहीं बांध पाए, UAE ने पाकिस्तानियों को रातों-रात धक्के मार कर बाहर निकालाब्लूमबर्ग के अनुसार, कहलर ने कहा कि अमेरिका में अस्थायी रूप से रह रहे और ग्रीन कार्ड चाहने वाले किसी भी विदेशी को आवेदन करने के लिए अपने गृह देश लौटना होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह नीति हमारी आव्रजन प्रणाली को कानून के अनुरूप कार्य करने की अनुमति देती है, न कि खामियों को बढ़ावा देती है। जब विदेशी अपने गृह देश से आवेदन करते हैं, तो इससे उन लोगों को ढूंढने और निकालने की आवश्यकता कम हो जाती है जो निवास की अनुमति न मिलने के बाद छिपकर अमेरिका में अवैध रूप से रहने का फैसला करते हैं। इस बयान ने आप्रवासी समुदायों और विदेशी श्रमिकों पर निर्भर व्यवसायों के बीच व्यापक चिंता पैदा कर दी। 2024 में लगभग 14 लाख ग्रीन कार्ड जारी किए गए, जिनमें से एक बड़ी संख्या में कार्ड अमेरिका के भीतर से दायर किए गए स्टेटस एडजस्टमेंट आवेदनों के माध्यम से दिए गए थे। पिछले सप्ताह के निर्देश ने इस लंबे समय से चली आ रही प्रथा को चुनौती दी, जिसमें संकेत दिया गया कि आवेदकों को आम तौर पर प्रक्रिया विदेश में पूरी करनी होगी, जब तक कि वे दुर्लभ अपवादों के लिए पात्र न हों। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:25 +0530</pubDate>
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<title>वे हमारे बीच चल रहे हैं...White House ने &amp;apos;एलियन&amp;apos; के लिए नई वेबसाइट बनाई, टारगेट पर कोई और</title>
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<description><![CDATA[ व्हाइट हाउस ने आव्रजन प्रवर्तन पर केंद्रित एक नई अंतरिक्ष-थीम वाली वेबसाइट का अनावरण किया है, जिसमें अमेरिका में बिना कानूनी अनुमति के रह रहे लोगों की गिरफ्तारी को उजागर करने के लिए अलौकिक प्राणियों से जुड़े चित्रों और भाषा का उपयोग किया गया है। लॉन्च की गई इस वेबसाइट का डिज़ाइन विज्ञान-कथा फिल्मों की याद दिलाता है, जिसमें तारों और आकाशगंगाओं की पृष्ठभूमि पर चमकीले हरे रंग का स्क्रॉलिंग टेक्स्ट दिखाई देता है। पेज खोलने पर आगंतुकों को यह संदेश मिलता है: &quot;वे हमारे बीच घूमते हैं&quot;, जो अवैध अप्रवासियों का संदर्भ है, जिन्हें प्रशासन बार-बार &#039;एलियंस&#039; कहता है। एलियंस डॉट गोव डोमेन के तहत होस्ट की गई यह वेबसाइट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्यापक आव्रजन अभियान का हिस्सा है और इसका उद्देश्य अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) द्वारा की गई प्रवर्तन कार्रवाइयों को प्रदर्शित करना है। वेबसाइट पर लिखा है कि 60 वर्षों से अमेरिकी सरकार ने एक गहरा राज़ छुपा रखा है। विदेशी हमारे बीच घूम रहे हैं, हमारे मोहल्लों में रह रहे हैं और हमारे दैनिक जीवन में हमसे बातचीत कर रहे हैं।इसे भी पढ़ें: ईरान को Nuclear Bomb नहीं रखने देंगे, Donald Trump की फाइनल मीटिंग, डील पर होगा आखिरी फैसलाइस प्लेटफॉर्म में एक लाइव डैशबोर्ड है जो पूरे देश में आव्रजन संबंधी मुठभेड़ों और गिरफ्तारियों पर नज़र रखता है। गुरुवार शाम को, काउंटर ने 31 लाख से अधिक मुठभेड़ों को प्रदर्शित किया, हालांकि वेबसाइट इस आंकड़े में शामिल सटीक समयावधि का उल्लेख नहीं करती है। व्हाइट हाउस इस मंच का उपयोग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आव्रजन एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए भी करता है, उन्हें पहले ऐसे नेता के रूप में वर्णित करता है जिन्होंने अमेरिकियों को अवैध प्रवासियों से उत्पन्न होने वाले खतरों के बारे में चेतावनी दी थी। वेबसाइट पर लिखा है कि राष्ट्रपति ट्रम्प पहले व्यक्ति थे जिन्होंने हर अमेरिकी परिवार, हर समुदाय और हमारे राष्ट्र के भविष्य के लिए विदेशियों से उत्पन्न होने वाले वास्तविक खतरे को उजागर किया।इसे भी पढ़ें: Iran Deal पर Donald Trump की दो टूक, बोले- मेरी शर्तों के बिना कोई समझौता नहींइंटरैक्टिव मानचित्र गिरफ्तारियों को ट्रैक करता हैवेबसाइट की प्रमुख विशेषताओं में से एक संयुक्त राज्य अमेरिका में आव्रजन प्रवर्तन गतिविधियों को प्रदर्शित करने वाला एक इंटरैक्टिव मानचित्र है। आईसीई से प्राप्त डेटा का उपयोग करने वाला यह मानचित्र उपयोगकर्ताओं को अलग-अलग राज्यों और शहरों में गिरफ्तारियों की जानकारी देखने की अनुमति देता है, जिसमें बंदियों के मूल देश और कथित आपराधिक आरोप या गिरोह से संबंध शामिल हैं। आगंतुक एक रिपोर्टिंग फॉर्म का भी उपयोग कर सकते हैं जो जनता को प्रशासन द्वारा &#039;संदिग्ध विदेशियों&#039; के रूप में वर्णित लोगों के बारे में जानकारी प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:25 +0530</pubDate>
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<title>Iran के सर्वोच्च नेता के सलाहकार का Donald Trump पर बड़ा हमला, कहा&#45; Diplomacy को धोखा दिया</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहसेन रेज़ाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर &quot;तीसरी बार कूटनीति के साथ विश्वासघात&quot; करने का आरोप लगाया है, क्योंकि ईरान-अमेरिका युद्धविराम के प्रस्तावित विस्तार को लेकर तनाव बना हुआ है। ट्रम्प ने कहा कि वह जल्द ही युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाने पर फैसला करेंगे, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर प्रमुख मतभेद अभी भी बने हुए हैं। तेहरान ने परमाणु हथियारों को स्थायी रूप से त्यागने और रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण छोड़ने की अमेरिकी मांगों को खारिज कर दिया है, जबकि रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष एक ऐसे समझौते के करीब हैं जिसमें जमे हुए ईरानी परिसंपत्तियों की रिहाई और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी में चरणबद्ध ढील शामिल हो सकती है। इसे भी पढ़ें:  America-Iran Conflict: &#039;डील&#039; का चैप्टर क्लोज.... अब ईरान से बदला लेंगे ट्रंप!ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के सलाहकार मोहसेन रेज़ाई ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखकर और वार्ता के दौरान अत्यधिक मांगें रखकर &quot;तीसरी बार कूटनीति के साथ विश्वासघात&quot; कर रहे हैं। रेज़ाई ने वाशिंगटन के इस रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि इन उपायों से दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक प्रयासों को नुकसान पहुंच रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:24 +0530</pubDate>
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<title>America&#45;Iran Conflict: &amp;apos;डील&amp;apos; का चैप्टर क्लोज.... अब ईरान से बदला लेंगे ट्रंप!</title>
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<description><![CDATA[ पिछले 40 दिनों तक दुनिया ने अमेरिका और ईरान के बीच का खौफनाक मंजर देखा। दोनों देशों ने एक दूसरे पर इतने घातक हमले किए कि खाड़ी का इलाका बारूद के ढेर पर बैठ गया। ट्रंप की सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों को टारगेट किया तो ईरान ने भी अपने मिसाइलों का मुंह अमेरिका के सहयोगियों की तरफ खोल दिया। जब तबाही हदों को पार करने लगी तो पिछले महीने इस्लामाबाद में शांति वार्ता की मेज सजी थी। लेकिन ये शांति वार्ता नाकाम हो गई। तब से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस के सिचुएशन रूम में 2 घंटे तक हाई लेवल मीटिंग की। लेकिन कोई नई डील नहीं उठाई। ट्रंप की शर्तें बिल्कुल साफ हैं। ईरान को परमाणु हथियार का सपना छोड़ना होगा। साथ ही हॉर्मोन स्टेट को बिना किसी फीस और बिना रोक-टोक के खोलना होगा। हालांकि अंदरखाने चर्चा है कि अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन के सीज फायर को लेकर समझौता हुआ है। साथ ही अमेरिका ने ₹300 अरब डॉलर यानी करीब ₹25 लाख करोड़ के रिकंस्ट्रक्शन फंड और निवेश का पासा भी फेंका है। लेकिन ईरान झुकने को तैयार नहीं। इसे भी पढ़ें: Iran की America को खुली धमकी, IRGC बोला- हमला हुआ तो तट बनेगा कब्रगाहईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिवाफ ने दो टूक कह दिया है कि तेहरान सिर्फ एक्शन पर भरोसा करता है। जब तक अमेरिका कदम पीछे नहीं खींचेगा ईरान कोई रियायत नहीं देगा। डील फेल होने के बाद अब अमेरिकी नौसेना ने अरब सागर में ईरान की कपकफी छुड़ाने वाली नाकेबंदी कर दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के बंदरगाहों को घेरने के लिए 20 से ज्यादा खतरनाक युद्धपत तैनात कर दिए हैं। इस नेवल ब्लॉकेट की ताकत का अंदाजा इसी से लगाइए कि अब तक 111 व्यापारिक जहाजों को अपना रास्ता बदलने पर मजबूर किया जा चुका है। इस पूरे चक्रव्यूह का सबसे बड़ा सिकंदर है MS6 सीहॉक हेलीकॉप्टर। समंदर के ऊपर इसकी रैपलिंग ट्रेनिंग से ईरान सहमा हुआ है। 270 किमी/ घंटे की रफ्तार से उड़ने वाला यह हेलीकॉप्टर समंदर की गहराई में छिपी पनडुब्बियों का काल है। एंटीशिप मिसाइलों, टॉर्पिडो और हैवी मशीन गन से लैस सीहॉक, घने कोहरे, भारी बारिश या रात के अंधेरे में भी दुश्मन को नेस्तनाबूत करने की ताकत रखता है। अगर अमेरिका के पास सीहॉक का हंटर है तो ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। इसे भी पढ़ें: Iran Attack on Kuwait: ईरान ने अमेरिकी एयरबेस Ali al Salem पर दागीं मिलाइलें, मची तबाहीसमंदर की घेराबंदी के बीच ईरान ने अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए अपने सबसे घातक और अचूक एयर डिफेंस सिस्टम आराश एक कामगीर को मोर्चे पर तैनात कर दिया है। आराश कामगीर ईरान का नया स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे ड्रोन और हवाई लक्ष्यों को पहचानने और मार गिराने के लिए विकसित किया गया है। इसी की मदद से अमेरिका के MQ9 रिपर ड्रोन को मार गिराने का दावा किया गया था। ईरान का दावा है कि उसका एनआर डिफेंस सिस्टम आसमान में उड़ने वाली किसी भी आफत को राख करने की ताकत रखता है। तेहरान ने साफ चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी रिपर ड्रोन ने उसकी सीमा लाघने की हिमाकत की तो अनावश्यक कामगीर उसे पल भर में मार गिराएगा। फिलहाल खाड़ी के इलाके में एक बेहद नाजुक संघर्ष विराम तो लागू है लेकिन बारूद के इस ढेर को सुलगाने के लिए महज एक चिंगारी की जरूरत है। एक तरफ अमेरिका की कड़क नाकेबंदी है तो दूसरी तरफ ईरान के घातक या डिफेंस सिस्टम का पहरा। यह तनाव किसी शांति की तरफ बढ़ेगा या फिर महाविनाश के नए दौर की शुरुआत करेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:24 +0530</pubDate>
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<title>Myanmar राष्ट्रपति Hlaing का भारत दौरा, Border Security और कनेक्टिविटी पर PM Modi से होगी बड़ी चर्चा।</title>
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<description><![CDATA[ म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग शनिवार को बिहार के बोधगया पहुंचे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस यात्रा का स्वागत किया और म्यांमार के साथ भारत के सभ्यतागत और आध्यात्मिक संबंधों पर प्रकाश डाला। हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति का स्वागत बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने किया। आंग ह्लाइंग की भारत यात्रा म्यांमार में संसदीय चुनावों के बाद राष्ट्रपति बनने के दो महीने से भी कम समय में हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक पोस्ट में बताया कि बौद्ध बहुल भारत पहुंचने पर म्यांमार के राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जहां बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने उनका अभिनंदन किया। पोस्ट में कहा गया कि म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग का बोधगया पहुंचने पर हार्दिक स्वागत है। हवाई अड्डे पर माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) (@GovernorBihar) ने उनका स्वागत किया। पोस्ट में आगे कहा गया कि यह यात्रा &quot;हमारे दोनों देशों को जोड़ने वाले मजबूत आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और जन-संबंधों और हमारे निरंतर सहयोग की गहराई को दर्शाती है। इसे भी पढ़ें: India MEA Briefing: India Reaction on Netanyahu Statement के अलावा Myanmar से लेकर China तक, विदेश मंत्रालय ने कई अहम मुद्दों पर रखा भारत का पक्षम्यांमार के राष्ट्रपति गया पहुंचेपहुंचने के तुरंत बाद, राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने पवित्र महाबोधि मंदिर का दौरा किया, जो एक प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थल और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। म्यांमार के राष्ट्रपति की यह यात्रा, जो 30 मई से 2 जून तक चलेगी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही है और राष्ट्रपति के रूप में उनकी भारत की यह पहली यात्रा है।इसे भी पढ़ें: हिंद महासागर में China पर नकेल! Navy Chief त्रिपाठी के Myanmar दौरे के जानें क्या हैं मायने?म्यांमार के राष्ट्रपति ह्लाइंग की यह यात्रा भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?इससे पहले, विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आगामी द्विपक्षीय चर्चाओं के व्यापक दायरे की रूपरेखा प्रस्तुत की। जायसवाल ने कहा, &quot;सीमा सुरक्षा, संपर्क और अन्य मुद्दों के संबंध में, म्यांमार और भारत के बीच संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा होगी। हमारा उद्देश्य अपने मैत्रीपूर्ण, सभ्यतागत संबंधों को आगे बढ़ाना है। जयसवाल ने इस बात पर जोर दिया कि पड़ोसी देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए यात्रा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण &quot;व्यापारिक घटक&quot; को शामिल किया गया है। राष्ट्रपति की इस बहुप्रमुख यात्रा में भारत भर में कई पड़ाव शामिल होंगे, जिनमें राजनयिक बैठकों के साथ-साथ वाणिज्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी संतुलन बना रहेगा।म्यांमार के राष्ट्रपति 1 जून को प्रधानमंत्री मोदी से मिलेंगेराष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग 1 जून को प्रधानमंत्री मोदी के साथ औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें ऐतिहासिक संबंधों की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद वे नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष व्यापार मंच में भाग लेंगे। यह यात्रा 2 जून को भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई में समाप्त होगी, जहां भारी उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत, व्यापारिक बैठकें और स्थलों का दौरा किया जाएगा। म्यांमार भारत के रणनीतिक पड़ोसियों में से एक है और इसकी 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा पूर्वोत्तर के कई राज्यों से लगती है, जिनमें उग्रवाद प्रभावित नागालैंड और मणिपुर भी शामिल हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:23 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Myanmar, राष्ट्रपति, Hlaing, का, भारत, दौरा, Border, Security, और, कनेक्टिविटी, पर, Modi, से, होगी, बड़ी, चर्चा।</media:keywords>
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<title>अपराध पर एक्शन या Geopolitics? Brazil के Gangs को Terrorist घोषित करने के पीछे America का असली मकसद क्या?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका द्वारा ब्राजील के दो सबसे बड़े आपराधिक संगठनों, प्राइमिरो कमांडो दा कैपिटल (पीसीसी) और कमांडो वर्मेलो (सीवी) को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित करने के फैसले ने ब्राजील में राजनीतिक बहस छेड़ दी है। आलोचकों का कहना है कि इस कदम से देश के आंतरिक मामलों और चुनावी परिदृश्य पर वाशिंगटन का प्रभाव बढ़ सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा घोषित और 5 जून से प्रभावी होने की उम्मीद वाले इस फैसले के तहत पीसीसी और सीवी को &quot;विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादियों&quot; की सूची में डाल दिया जाएगा, जिससे अमेरिकी सरकार को इन समूहों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने और अंतरराष्ट्रीय प्रवर्तन उपायों को मजबूत करने का अधिकार मिल जाएगा।इसे भी पढ़ें: Operation Sheruwali के तहत राजौरी के घने जंगलों में घिरे पाक आतंकी, खून के धब्बों से हुआ गुप्त ठिकाने का खुलासाबोआ नोइट 247 कार्यक्रम के दौरान इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए, पत्रकार और ब्रासीलिया में ब्रासिल 247 के विशेष संपादक रिकार्डो अमरल ने इस कदम को &quot;टैरिफ बढ़ोतरी 2.0&quot; बताया और इसकी तुलना ब्राजील के खिलाफ हाल ही में की गई अमेरिकी व्यापारिक कार्रवाइयों से की। अमरल के अनुसार, यह पहल अपराध से निपटने पर कम और व्यापक भू-राजनीतिक और राजनीतिक उद्देश्यों के साथ अधिक जुड़ी हुई प्रतीत होती है। ब्राज़ील 247 के अनुसार, अमरल ने तर्क दिया कि इस पदनाम का ब्राज़ील के भीतर संगठित अपराध गतिविधियों पर व्यावहारिक रूप से बहुत कम प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ लड़ाई मुख्य रूप से ब्राज़ीलियाई संस्थानों पर निर्भर करती है, जिनमें कानून प्रवर्तन एजेंसियां, वित्तीय खुफिया प्रणालियां और आपराधिक संरचनाओं को ध्वस्त करने और गिरोहों के प्रभाव वाले क्षेत्रों को पुनः प्राप्त करने के उद्देश्य से समन्वित सार्वजनिक नीतियां शामिल हैं।इसे भी पढ़ें: Rajouri के घने जंगलों में Operation Sheruwali निर्णायक दौर में पहुँचा, आतंकियों पर सुरक्षा बलों का कड़ा शिकंजाउन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संगठित अपराध के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए एक व्यापक रणनीति की आवश्यकता है जो पुलिस अभियानों को सामाजिक विकास कार्यक्रमों और कमजोर समुदायों में मजबूत सरकारी उपस्थिति के साथ जोड़ती है। अमरल के अनुसार, आपराधिक गतिविधियों की जड़ों को संबोधित करने के लिए बाहरी वर्गीकरण के बजाय दीर्घकालिक संस्थागत प्रयासों की आवश्यकता है। पत्रकार ने ऑपरेशन लावा जाटो से भी तुलना की, जिसमें ब्राज़ीलियाई कंपनियों से जुड़े मामलों की जांच में अमेरिकी विदेशी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (एफसीपीए) के प्रयोग का हवाला दिया गया। उन्होंने तर्क दिया कि पिछले अमेरिकी कानूनी हस्तक्षेपों के महत्वपूर्ण आर्थिक और राजनीतिक परिणाम हुए हैं, जिनमें रणनीतिक ब्राज़ीलियाई उद्यमों का कमजोर होना भी शामिल है।इसे भी पढ़ें: Opation Sheruwali: 10 हजार फीट पर सेना तैनात, मुल्ला मुनीर परेशानअमरल ने आगे चेतावनी दी कि आतंकवादी पदनाम भविष्य के चुनावों से पहले एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के सहयोगी सुरक्षा और अपराध से संबंधित कथनों को मजबूत करने के लिए इस निर्णय का उपयोग कर सकते हैं। अपने संबोधन का समापन करते हुए, अमरल ने राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा और प्रगतिशील राजनीतिक ताकतों से रणनीतिक रूप से जवाब देने का आह्वान किया, और चुनावी लाभ के लिए ब्राज़ीलियाई वामपंथ को संगठित अपराध से जोड़ने के प्रयासों के खिलाफ चेतावनी दी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:22 +0530</pubDate>
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<title>Balochistan के Mashkay में मुनीर की सेना का &amp;apos;कर्फ्यू टॉर्चर&amp;apos;, खाने&#45;दवा को तरस रहे लोग</title>
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<description><![CDATA[ बलूचिस्तान के अवारान जिले के मश्कय कस्बे के निवासियों की मानवीय स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, क्योंकि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर लागू कर्फ्यू और सख्त आवागमन प्रतिबंध दूसरे सप्ताह भी जारी हैं। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय से चल रहे लॉकडाउन ने दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है और कई परिवारों को भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की प्राप्ति के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।बलूचिस्तान पोस्ट के मुताबिक, निवासियों ने बताया कि पूरे क्षेत्र में आवागमन पर भारी प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप आवश्यक वस्तुओं की कमी हो गई है और स्थानीय आबादी के लिए गंभीर कठिनाइयाँ पैदा हो गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रतिबंधों ने बाजारों, परिवहन और नियमित आर्थिक गतिविधियों तक पहुंच को प्रभावित किया है, जिससे पहले से ही चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना कर रहे निवासियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को लेकर भी चिंताएं जताई गई हैं।इसे भी पढ़ें: Balochistan में बुद्धिजीवियों को धमकी? एक्टिविस्ट Sammi Deen ने CM Sarfaraz Bugti को घेरनिवासियों का दावा है कि तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता वाले व्यक्तियों को जारी कर्फ्यू के कारण अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। परिवारों ने स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि उपचार में देरी से बीमार और चिकित्सा आपात स्थिति से पीड़ित रोगियों के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं। जारी प्रतिबंधों ने समुदायों को अलग-थलग कर दिया है, जबकि दैनिक दिनचर्या और आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुई है। निवासियों ने अनिश्चितता के माहौल का वर्णन किया क्योंकि लोग आवागमन पर जारी प्रतिबंधों के बीच आवश्यक वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।इसे भी पढ़ें: मौज से ट्रक में जा रहे थे पाक सैनिक तभी हुआ धमाका, उड़े चिथड़े, दहला इस्लामाबादमश्काय की स्थिति बलूचिस्तान के अन्य हिस्सों, जिनमें नोश्की और ज़हरी शामिल हैं, से मिली इसी तरह की रिपोर्टों के बाद सामने आई है, जहां निवासियों ने पहले आरोप लगाया था कि लॉकडाउन और सुरक्षा संबंधी प्रतिबंधों ने व्यापार, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बाधित किया है। बलूचिस्तान पोस्ट द्वारा उजागर किए गए अनुसार, पाकिस्तानी अधिकारियों ने अभी तक कथित कर्फ्यू उपायों के संबंध में या मश्काय में प्रतिबंधों के पीछे के कारणों को स्पष्ट करने वाला कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। निवासियों ने आगे बताया कि हाल ही में ईद के उत्सव के दौरान स्थानीय बाजार लगभग सुनसान रहे। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पहले की रिपोर्टों में ऐसे मामलों का उल्लेख किया गया था जिनमें कर्फ्यू संबंधी बाधाओं के कारण मरीजों को समय पर चिकित्सा उपचार नहीं मिल पाया था।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:22 +0530</pubDate>
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<title>White House के Situation Room में दो घंटे मंथन, बिना फैसले के उठे ट्रंप, ईरान पर सस्पेंस बढ़ा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की शुक्रवार को सिचुएशन रूम में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ हुई बैठक के बाद व्हाइट हाउस ने अभी तक कोई निर्णय नहीं सुनाया है, हालांकि राष्ट्रपति ने पहले संकेत दिया था कि यह चर्चा उन्हें ईरान से संबंधित मुद्दों पर &quot;अंतिम निर्णय&quot; लेने में मदद करेगी। बैठक के बाद जारी एक बयान में, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि लगभग दो घंटे की चर्चा समाप्त हो गई है। अधिकारी ने कहा कि सिचुएशन रूम की बैठक समाप्त हो गई है और लगभग दो घंटे तक चली। राष्ट्रपति ट्रम्प केवल वही समझौता करेंगे जो अमेरिका के लिए अच्छा हो और उनकी निर्धारित शर्तों को पूरा करता हो। ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं रख सकता। ट्रम्प ने बैठक की घोषणा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य अंतिम निर्णय लेना है। उन्होंने कई शर्तें भी रखीं, जिन्हें वे संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से संभावित समझौते के तहत ईरान से स्वीकार करने की अपेक्षा करते हैं।इसे भी पढ़ें: Iran Deal पर Donald Trump की दो टूक, बोले- मेरी शर्तों के बिना कोई समझौता नहींट्रम्प ने कहा कि ईरान को यह स्वीकार करना होगा कि उसके पास कभी भी परमाणु हथियार या बम नहीं होगा। होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोला जाना चाहिए, बिना किसी शुल्क के, दोनों दिशाओं में निर्बाध जहाज यातायात के लिए। यदि कोई जलमग्न खदानें (बम) हैं, तो उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा (हमने अपने शक्तिशाली जलमग्न खदान सफाई यंत्रों से विस्फोट करके ऐसी कई खदानों को हटा दिया है। ईरान को बची हुई सभी खदानों को तुरंत हटाना और/या नष्ट करना होगा, जो कि बहुत कम होंगी)!ईरान ने कहा कि कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और उसने इस बात को खारिज कर दिया कि तेहरान बाहरी दबाव में काम करेगा। ईरानी सरकारी मीडिया प्रेस टीवी ने यह जानकारी दी।इसे भी पढ़ें: वे हमारे बीच चल रहे हैं...White House ने &#039;एलियन&#039; के लिए नई वेबसाइट बनाई, टारगेट पर कोई औरईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने सरकारी टेलीविजन को बताया, तेहरान ने 47 साल पहले &#039;अनिवार्य&#039; की भाषा को अलविदा कह दिया है। पश्चिमी देशों में से कोई भी ईरान के बारे में बात करते समय &#039;अनिवार्य&#039; की भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकता। हम ईरानी राष्ट्र के हितों और अधिकारों के आधार पर अपने फैसले खुद लेते हैं। यह गतिरोध अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम को बढ़ाने के उद्देश्य से कथित तौर पर 60 दिनों के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर आया है। इसमें कथित तौर पर ईरान की परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता शामिल है और यह भी कहा गया है कि 60 दिनों के दौरान शुरुआती बातचीत ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के निपटान और संवर्धन गतिविधियों पर सीमाएं लगाने पर केंद्रित होगी।हालांकि, बगाई ने इस दावे को खारिज कर दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर कोई बातचीत हुई है। ]]></description>
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<title>NATO में घुसे पुतिन? अब क्या होने वाली है पूरे यूरोप से सीधी जंग</title>
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<description><![CDATA[ लड़ाई रूस की यूक्रेन से ना होते हुए अब वो यूरोप से सीधे तौर पर छिड़ जाए क्योंकि यूक्रेन को लगातार फ्यूल करता रहा है यूरोप और यूक्रेन अमेरिका यूरोप के बिहाफ पर रूस से लड़ाई लड़ता रहा। लेकिन कुछ ऐसे घटनाक्रम घटित हो गए हैं जिससे रूस और यूरोप सीधा-सीधी टक्कर की स्थिति में हैं। रूस यूक्रेन युद्ध चल रहा था। तमाम तरह के बयानात आ रहे थे, धमकियां आ रही थी और इन सबके बीच आरोप है कि रूस का एक ड्रोन उड़ता है और वो उड़ते-उड़ते यूरोपीय देश में चला जाता है और कहां पहुंचता है? रोमानिया में। वहां जाकर एक बिल्डिंग से टकराता है। धमाका होता है। बवाल पूरी दुनिया में छिड़ जाता है। इस पूरे तनाव के बीच में नाटो देश तक यह जो युद्ध पहुंचता दिख रहा है वो इसलिए क्योंकि रोमानिया में एक अपार्टमेंट बिल्डिंग पर रूसी ड्रोन गिरने की घटना ने पूरे यूरोप को आग बबूला कर दिया है। यह हमला यूक्रेन सीमा से लगे यू रोमानिया में गलाती इलाके में हुआ है। बताया जाता है कि इससे दो लोग घायल भी हुए। इसे भी पढ़ें: भारत ने रूस के साथ कर ली ऐसे &#039;खजाने&#039; की डील, चौंक जाएगा चीन!रोमानिया नाटो का सदस्य है। लेकिन इस घटना को केवल सीमा विवाद नहीं बल्कि यूरोपीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है। रोमानिया सरकार ने इस घटना को बेहद गंभीर गैर जिम्मेदाराना कारवाई बताया है। रोमानिया के विदेश मंत्रालय का आरोप है कि रूस लगातार यूरोपीय सीमाओं के पास तनाव बढ़ा रहा है। घटना के बाद रोमानिया ने रूस के राजदूत को तलब किया। नाटो से अतिरिक्त एंटी ड्रोन सुरक्षा प्रणाली भेजने की मांग की और रूस के खिलाफ कारवाई कर रहा है। यूरोप की प्रतिक्रिया भी बहुत तलखा आई और यूरोप के नाटो महासचिव मार्क रूटे ने कहा कि गठबंधन अपने सभी सदस्य देशों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्षा उर्सला वन डेरलेन ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। कई यूरोपीय नेताओं ने कहा है कि ऐसे हमले जारी रहे तो रूस के खिलाफ और सख्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Russia में NSA डोभाल, यूरोप में एस जयशंकर, भारत बड़ा गेम कर गया!एक नए सेक्ट ऑफ सेंशंस की तैयारी है। नाटो प्रवक्ता ने साफ तौर पर कहा है कि संगठन अब ड्रोन खतरों के खिलाफ अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगा। रोमानिया के राष्ट्रपति निकुशेर डेन ने इसे अब तक की सबसे गंभीर घटना बताया है और कहा है कि रूस को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी। इस घटना के बाद रोमेनिया ने अपनी वायु संरक्षा प्रणाली को हाई अलर्ट पर कर दिया है। लड़ाकू विमानों को भी तैनात किया है। हालांकि रूस ने इन आरोपों को सीधे तौर पर स्वीकारा नहीं है। रूसी अधिकारियों का कहना है कि युद्ध के कार्य दौरान जो है कई बार ड्रोन रास्ता भी भटक जाते हैं और सीमा पार हो जाता है। रूस समर्थक नेताओं ने यह भी कहा है कि पश्चिम देश इस घटना को बढ़ा चढ़ाकर पेश कर रहे हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:21 +0530</pubDate>
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<title>ताइवान ने चीनी विमानों की 16 उड़ानें, 8 पोत और 3 जहाज देखे</title>
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<description><![CDATA[ ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को अपने क्षेत्रीय जलक्षेत्र के आसपास चीनी सैन्य विमानों के 16 विमानों, आठ नौसैनिक जहाजों और तीन सरकारी जहाजों की मौजूदगी का पता लगाया। सभी 16 विमानों ने मध्य रेखा को पार कर ताइवान के उत्तरी, दक्षिण-पश्चिमी और पूर्वी भाग के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (एडीआईजेड) में प्रवेश किया। एक्स पर एक पोस्ट में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि आज सुबह 6 बजे (यूटीसी+8) तक ताइवान के आसपास पीएलए के 16 विमानों, 8 पीएलए जहाजों और 3 सरकारी जहाजों का पता चला। इनमें से 16 में से 16 विमानों ने मध्य रेखा को पार कर ताइवान के उत्तरी, दक्षिण-पश्चिमी और पूर्वी भाग के एडीआईजेड में प्रवेश किया। आरओसी सशस्त्र बलों ने स्थिति पर नजर रखी और जवाबी कार्रवाई की।इसे भी पढ़ें: Taiwan Strait में नहीं थम रही चीनी ड्रैगन की दादागिरी, 24 घंटे में दर्जनों Warships-Jets Active29 मई को ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने अपने आसपास पीएलए विमानों के 10 बेड़े, आठ नौसैनिक पोतों और चार सरकारी जहाजों की मौजूदगी का पता लगाया। एक्स पर एक पोस्ट में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि आज सुबह 6 बजे (UTC+8) तक ताइवान के आसपास पीएलए विमानों के 10 बेड़े, 8 पीएलए पोत और 4 सरकारी जहाजों की मौजूदगी देखी गई। इनमें से 10 बेड़े मध्य रेखा पार करके ताइवान के उत्तरी, मध्य, दक्षिण-पश्चिमी और पूर्वी भाग में रक्षा रक्षा क्षेत्र (ADIZ) में प्रवेश कर गए। आरओसी सशस्त्र बलों ने स्थिति पर नजर रखी और जवाबी कार्रवाई की। इससे पहले 21 मई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनेक्टिकट के ग्रोटन जाते समय जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अमेरिका &#039;ताइवान समस्या&#039; पर काम करेगा।इसे भी पढ़ें: Stock Market में भारत को बड़ा झटका, Semiconductor की ताकत से Taiwan ने छीनी 5वीं रैंकउन्होंने कहा कि ताइवान के मुद्दे पर मैं सभी से बात करूंगा। हमने इस स्थिति को बहुत अच्छे से संभाल रखा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हमारी एक शानदार बैठक हुई; यह वास्तव में अद्भुत थी। हम ताइवान समस्या पर काम करेंगे।&quot;ताइवान पर चीन का दावा एक जटिल मुद्दा है जिसकी जड़ें ऐतिहासिक, राजनीतिक और कानूनी तर्कों में निहित हैं। बीजिंग का दावा है कि ताइवान चीन का अभिन्न अंग है, यह दृष्टिकोण राष्ट्रीय नीति में निहित है और घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय बयानों द्वारा समर्थित है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:21 +0530</pubDate>
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<title>Iran का America पर पलटवार&#45; जंग से जो न मिला, वो Sanctions से भी हासिल नहीं होगा</title>
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<description><![CDATA[ ईरान की नई संस्था, फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण (पीजीएसए), जो होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन का प्रबंधन करती है, ने अपने ऊपर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों की निंदा की और अपने कार्यों को &quot;बिना किसी रुकावट के&quot; जारी रखने का संकल्प लिया। अमेरिका पर पलटवार करते हुए पीजीएसए ने कहा कि वाशिंगटन युद्ध के माध्यम से होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण &quot;हासिल करने में विफल&quot; रहा है और प्रतिबंधों के माध्यम से भी यही परिणाम प्राप्त करेगा।इसे भी पढ़ें:  America-Iran Conflict: &#039;डील&#039; का चैप्टर क्लोज.... अब ईरान से बदला लेंगे ट्रंप!पीजीएसए ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिकी वित्त विभाग ने हाल ही में पीजीएसए पर प्रतिबंधों की घोषणा की है। पीजीएसए इस कार्रवाई की निंदा करते हुए, एक ऐसे देश द्वारा प्रतिबंधित किए जाने को अपनी सकारात्मक उपलब्धि का संकेत मानता है, जिसका नेता समुद्री डकैती पर गर्व करता है। आप होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण हासिल नहीं कर पाएंगे, जिसे आप युद्ध और कूटनीति के माध्यम से हासिल करने में विफल रहे हैं, न ही प्रतिबंधों के माध्यम से। संस्था ने कहा कि वह नौवहन को सुगम बनाने के लिए &quot;गैर-शत्रुतापूर्ण&quot; जहाजों को आवागमन परमिट की समीक्षा और मंजूरी देना जारी रखेगी। फारस की खाड़ी और ओमान सागर के जलक्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका की उकसाने वाली कार्रवाइयों के बावजूद, यह संस्था बिना किसी रुकावट के गैर-शत्रुतापूर्ण जहाजों को आवागमन की अनुमति देने और समीक्षा करने का काम जारी रखे हुए है ताकि नौवहन सुगम हो सके। पीजीएसए की गतिविधियों के पहले महीने के आंकड़े जल्द ही प्रकाशित किए जाएंगे। यह तब हुआ जब अमेरिका ने पीजीएसए पर प्रतिबंध लगा दिए, जिसमें तेहरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों से जबरन वसूली करने और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) को राजस्व &quot;भेजने&quot; के लिए संस्था का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया था।इसे भी पढ़ें: Iran के सर्वोच्च नेता के सलाहकार का Donald Trump पर बड़ा हमला, कहा- Diplomacy को धोखा दियाअमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) द्वारा घोषित इस कदम के तहत, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन द्वारा ईरान पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे &quot;आर्थिक आक्रोश&quot; अभियान के तहत, क्षेत्रीय तनावों के बीच, पीजीएसए को वित्त मंत्रालय की विशेष रूप से नामित नागरिकों (एसडीएन) की सूची में शामिल किया गया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, पीजीएसए की स्थापना ईरान द्वारा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की इच्छा रखने वाले जहाजों के अनुरोधों के प्रबंधन के लिए की गई थी। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यह प्राधिकरण आईआरजीसी और आईआरजीसी नौसेना के साथ मिलकर जहाजों के आवागमन को नियंत्रित करता है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर अवैध शुल्क लगाता है। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने एक बयान में कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार से जबरन वसूली करने का ईरानी सेना का नवीनतम प्रयास इस बात का प्रमाण है कि आर्थिक आक्रोश अभियान ने शासन को नकदी के लिए बेताब कर दिया है।इसे भी पढ़ें: White House के Situation Room में दो घंटे मंथन, बिना फैसले के उठे ट्रंप, ईरान पर सस्पेंस बढ़ाआर्थिक दबाव के ज़रिए, संयुक्त राज्य अमेरिका ने दुनिया के सबसे बड़े आतंकवाद समर्थक देश पर वित्तीय शिकंजा कस दिया है। अमेरिकी राजकोष ने ईरानी शासन को उसके हथियार कार्यक्रमों, आतंकवादी संगठनों और परमाणु महत्वाकांक्षाओं के लिए राजस्व से वंचित कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रम्प के नेतृत्व में, हम उन जहाजों, बिचौलियों और खरीदारों के नेटवर्क को संकुचित करने के अपने प्रयास में निरंतर बने रहेंगे जिनके माध्यम से ईरान अपना तेल और आतंकवाद दोनों का निर्यात करता है। पिछले सप्ताह, पीजीएसए ने होर्मुज जलडमरूमध्य प्रबंधन पर्यवेक्षण क्षेत्र की सीमाओं को परिभाषित किया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:20 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिकी अधिकारी Hegseth ने की Pakistan की तारीफ, कहा&#45; PM शरीफ&#45;मुनीर से अप्रत्याशित दोस्ती</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने शनिवार को कहा कि पिछले साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने का श्रेय डोनाल्ड ट्रम्प को दिया जाता है और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ-साथ देश के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ एक अप्रत्याशित सच्ची दोस्ती विकसित हो रही है। सिंगापुर में शांग्री-ला संवाद में बोलते हुए, हेगसेथ ने पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के बाद बनी सहमति का जिक्र किया और तनाव कम करने में ट्रंप की भूमिका की सराहना की। हेगसेथ ने कहा कि आपने देखा कि राष्ट्रपति ने भारत और पाकिस्तान, दो परमाणु सक्षम देशों के बीच शांति समझौता कराने में कितनी कुशलता दिखाई।इसे भी पढ़ें: Rajnath Singh का दावा, &#039;Operation Sindoor&#039; में Indian Navy ने Pakistan को बंदरगाहों में दुबका दिया!हेगसेथ ने भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति में एक महत्वपूर्ण भागीदार बताया और दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग पर प्रकाश डाला। ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि उन्होंने पिछले साल जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, के बाद चार दिनों तक चले सैन्य संघर्ष के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने में मदद की। हालांकि, भारत लगातार यह कहता रहा है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच सीधे तौर पर हुआ था और उसने किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावों को खारिज किया है। हेगसेथ ने कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों एक-दूसरे को सुरक्षा संबंधी चिंताओं के नजरिए से देखते रहेंगे।इसे भी पढ़ें: Balochistan के Mashkay में मुनीर की सेना का &#039;कर्फ्यू टॉर्चर&#039;, खाने-दवा को तरस रहे लोगअमेरिकी विदेश मंत्री ने शनिवार को कहा कि उनका मानना ​​है कि भारत और पाकिस्तान दोनों एक-दूसरे से स्वाभाविक खतरे देखेंगे, हो सकता है कि कुछ खतरों को हम अलग तरह से देखें, और देश अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) विकसित करना चाहेंगे।&quot; लेकिन फिलहाल, हम किसी भी देश पर उंगली नहीं उठा रहे हैं और न ही उन्हें अपने लिए खतरा बता रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:19 +0530</pubDate>
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<title>Bodh Gaya से Myanmar President का आध्यात्मिक शंखनाद, पांच दिवसीय India दौरे का हुआ आगाज</title>
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<description><![CDATA[ म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने शनिवार को बिहार के गयाजी जिले में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और बौद्ध तीर्थस्थल बोधगया के पवित्र महाबोधि मंदिर में प्रार्थना के साथ अपनी पांच दिवसीय भारत यात्रा की शुरुआत की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ह्लाइंग की यात्रा की सराहना करते हुए दोनों देशों के बीच साझा बौद्ध विरासत को रेखांकित किया। एक्स पर एक पोस्ट में जायसवाल ने कहा कि म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने आज बोधगया का दौरा किया और पवित्र महाबोधि मंदिर में प्रार्थना की। यह यात्रा भारत और म्यांमार के बीच गहरे आध्यात्मिक और सभ्यतागत संबंधों को दर्शाती है, जो साझा बौद्ध विरासत में निहित हैं और पीढ़ियों से हमारे लोगों को जोड़ती आ रही हैं। जयसवाल ने म्यांमार के साथ भारत के सभ्यतागत और आध्यात्मिक संबंधों पर प्रकाश डाला।इसे भी पढ़ें: Ebola संकट से जूझ रहे Africa की मदद को आया भारत, भेजी Medical Aid की पहली खेपउन्होंने बौद्ध बहुल देश म्यांमार पहुंचने पर राष्ट्रपति के गर्मजोशी से स्वागत का जिक्र किया, जहां बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने उनका अभिनंदन किया। पोस्ट में लिखा था, बोधगया पहुंचने पर म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग का हार्दिक स्वागत है। हवाई अड्डे पर माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) (@GovernorBihar) ने उनका स्वागत किया। पोस्ट में आगे कहा गया कि यह यात्रा &quot;हमारे दोनों देशों को जोड़ने वाले मजबूत आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और जन-संबंधों को दर्शाती है और हमारे निरंतर सहयोग की गहराई को उजागर करती है। आगमन के तुरंत बाद, राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने पवित्र महाबोधि मंदिर का दौरा किया, जो एक प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थल और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।इसे भी पढ़ें: बर्दाश्त नहीं! US में भारतीयों के साथ हो रहे नस्लवाद पर भारत ने क्या चेतावनी दी?म्यांमार के राष्ट्रपति की यह यात्रा, जो 30 मई से 2 जून तक चली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर आयोजित की गई है और राष्ट्रपति के रूप में उनकी भारत की यह पहली यात्रा है। उनके साथ कैबिनेट मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रमुख व्यापारिक नेताओं का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:19 +0530</pubDate>
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<title>Russia की तस्वीर ने हिलाई दुनिया, रातों&#45;रात पलटी भारत की किस्मत!</title>
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<description><![CDATA[ भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल रूस के दौरे पर हैं। अजीत डोभाल ने रूस के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर सरगेई शोइगू से मुलाकात की। पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को खूब धोया। शुरुआत में सबको लगा कि यह एक नॉर्मल रूटीन मीटिंग है। लेकिन इस मीटिंग के बाद जो हुआ उसकी कल्पना ना तो अमेरिका को थी और ना ही पाकिस्तान को। अजीत डोभाल से मिलने के बाद रूस के एनएसए सरगई शोइगू ने अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री मौलवी मोहम्मद याकूब को अपने पास बुला लिया। रूसी एनएसए और अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री ने मिलकर एक फाइल पर साइन कर दिया। असली खबर यह है कि रूस ने अफगानिस्तान के साथ एक बहुत बड़ी डिफेंस डील साइन कर ली है। वो भी अजीत डोभाल से मिलने के बाद। इसे भी पढ़ें: Russia में NSA डोभाल, यूरोप में एस जयशंकर, भारत बड़ा गेम कर गयाइस बड़ी डिफेंस डील के तहत रूस अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को खतरनाक हथियार देगा। मॉडर्न एयर डिफेंस सिस्टम देगा। इन हथियारों को चलाने के लिए टेक्निकल ट्रेनिंग भी देगा। यानी पाकिस्तान से जंग लड़ रहे तालिबान के पास अब रूसी हथियारों की अनलिमिटेड सप्लाई रहेगी। यह बताने की जरूरत नहीं है कि अफगानिस्तान का तालिबान इन हथियारों का इस्तेमाल किस देश पर करेगा। इस डील के बाद पाकिस्तान में भयंकर भूचाल आ गया है। पाकिस्तान ने अचानक अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात की है। याद दिला दें कि कुछ महीनों पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एक भयंकर एयर स्ट्राइक की थी। यह एयर स्ट्राइक एक हॉस्पिटल पर की गई थी जिसमें 400 मरीजों की मौत हो गई थी। उस समय अफगानिस्तान ने पाकिस्तान से कहा था कि थोड़ा इंतजार करो। हमारा पलटवार और भी तगड़ा होगा। अब अफगानिस्तान रूसी हथियारों से पाकिस्तान पर पलटवार करेगा। पाकिस्तानी एयर स्ट्राइक्स को रोकने के लिए रूसी एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करेगा। इस खबर के आते ही पाकिस्तान के पत्रकार, रिटायर्ड फौजियों और डिप्लोमेट्स ने रूस को गालियां देनी शुरू कर दी हैं। यह सभी बोल रहे हैं कि रूस पाकिस्तान से कभी दोस्ती नहीं कर सकता। रूस तो भारत का दोस्त है।इसे भी पढ़ें: NATO में घुसे पुतिन? अब क्या होने वाली है पूरे यूरोप से सीधी जंग पुतिन ने अफगानिस्तान के साथ डील करके पीएम मोदी की मदद की है। लगभग यही हाल अमेरिका का भी है। अमेरिकी बोल रहे हैं कि रूस इतनी स्ट्रेटेजिक लोकेशन में घुस गया है। तालिबान के साथ डिफेंस डील कर ली है। अफगानिस्तान पर तो हमारा राज होना चाहिए था। बहरहाल अमेरिका और पाकिस्तान यह नहीं जानते कि रूस में डोबाल बैठे हैं। पिछले कुछ महीनों में अजीत डोबाल कई बार रूस से मिल चुके हैं। हाल ही में भारत के दौरे पर आए रूस के फर्स्ट डेपुटी प्राइम मिनिस्टर डेनिस मॉनटुरोव तो अजीत डोबाल से मिलने उनके ऑफिस तक पहुंच गए थे। यह सारी मीटिंग्स मौज मस्ती के लिए नहीं थी। इनका जो मकसद था वो अब दुनिया को पता चला है। पाकिस्तान की नस नस को जानने वाले अजीत डोभाल के सामने ही रूस ने अफगानिस्तान के साथ ऐतिहासिक डिफेंस डील कर ली है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:18 +0530</pubDate>
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<title>भारत ताकतवर...अग्नि&#45;6 पर पाकिस्तानी पत्रकार को अमेरिका ने सुना डाला</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिण एशिया की भू राजनीति में मिसाइल क्षमताएं हमेशा चर्चा का विषय रही हैं। हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तानी पत्रकार तंजीला खलील और अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के बीच हुआ संवाद वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में है। यह चर्चा ना केवल पाकिस्तान की मिसाइल क्षमताओं पर केंद्रित थी बल्कि इसमें भारत की उभरती हुई अग्नि-6 मिसाइल और अमेरिका के प्रति उसके संभावित प्रभाव पर तीखे सवाल पूछे गए। दरअसल प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में पाकिस्तानी पत्रकार तंजिला खलील ने एक बेहद रणनीतिक सवाल उठाया। उन्होंने राष्ट्रीय खुफिया निर्देशक तुलसी गबाट के उस बयान का हवाला दिया जिसमें पाकिस्तान की संभावित इंटरकॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल यानी कि आईसीवीएम क्षमता को भविष्य में अमेरिका के लिए एक खतरा बताया गया था। तंजिला खलील ने सीधे तौर पर भारत सैन्य प्रकृति को निशाने पर लेते हुए अग्नि-6 पर सवाल पूछा। सवाल स्पष्ट रूप से भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति और उसकी वैश्विक पहुंच को एक खतरे के रूप में पेश करने की पाकिस्तान की कोशिश थी। लेकिन अमेरिकी रक्षा सचिव पीट ने इस सवाल का जवाब बहुत ही सधे हुए और रणनीतिक अंदाज में दिया।  इसे भी पढ़ें: Bodh Gaya से Myanmar President का आध्यात्मिक शंखनाद, पांच दिवसीय India दौरे का हुआ आगाजपाकिस्तानी पत्रकार द्वारा भारत की अग्नि-6 को खतरा बनाने की कोशिश को पूरी तरह खारिज कर देता है। अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया कि वह देशों द्वारा अपनी सुरक्षा के लिए मिसाइल विकसित करने को उनका अधिकार मानता है और वह भारत की प्रगति को वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए सकारात्मक मानता है। खैर इस पूरे संवाद में यह साफ हो गया कि दुनिया अब भारत को एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति और एक नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर के रूप में देखती है। जहां पाकिस्तान की मिसाइल क्षमताओं पर सवाल उठते हैं। वहीं भारत की मिसाइल शक्ति को अमेरिका जैसे देश क्षेत्रीय संतुलन के लिए जरूरी मानते हैं। भारत की अग्नि-6 मिसाइल जिसकी मारक क्षमता उसके वैश्विक शक्तियों की श्रेणी में खड़ा करती है। अमेरिका के लिए चिंता का विषय नहीं बल्कि एक मजबूत साझेदार की ताकत है। पीट हेक्कसेथ का जवाब ना केवल भारत के लिए सम्मानजनक था बल्कि इसने उन ताकतों को भी कड़ा संदेश दिया जो भारत की सैन्य प्रति को दुनिया के सामने गलत तरीके से पेश करना चाहते हैं।On the same forum, Pakistani analyst cried foul over India testing the AGNI-6 with a 12,000 km range. https://t.co/YruD1PzPto pic.twitter.com/2cq06mdfX2— DesiEsco???????? (@DesiEsco7) May 30, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 11:13:18 +0530</pubDate>
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<title>ईरान को Nuclear Bomb नहीं रखने देंगे, Donald Trump की फाइनल मीटिंग, डील पर होगा आखिरी फैसला</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वह ईरान के साथ युद्धविराम को बढ़ाने के समझौते पर आगे बढ़ने के संबंध में ‘‘अंतिम निर्णय’’ लेने के लिए व्हाइट हाउस में अपने सलाहकारों के साथ बैठक कर रहे हैं।
ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में हुई उच्च स्तरीय वार्ता की पुष्टि की।
‘एसोसिएटेड प्रेस’ और अन्य समाचार आउटलेट्स ने बृहस्पतिवार को अपनी खबर में बताया था कि अमेरिकी और ईरानी वार्ताकार एक अस्थायी समझौते पर सहमत हो गए हैं।
इस समझौते से युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा। वहीं नयी वार्ता ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर होने की बात है।
 ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा, “ ईरान को यह मानना ​​होगा कि वे कभी परमाणु हथियार या बम नहीं रखेंगे।”
उन्होंने कहा कि जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए फिर से खोला जाना चाहिए और सभी समुद्री बारूदी सुरंगों को नष्ट किया जाना चाहिए।
ईरान के मुख्य वार्ताकार ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें ‘गारंटी या शब्दों’ पर भरोसा नहीं, केवल कदम उठाये जाने पर भरोसा है।
उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि अमेरिका और इजराइल ने परमाणु वार्ता के दौरान पिछले एक साल में दो बार ईरान पर हमला किया है, जिस कारण यह अविश्वास बना हुआ है।
मोहम्मद बघेर कालिबाफ ने ‘एक्स’ पर कहा, “दूसरी तरफ से कार्रवाई किये जाने से पहले कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। हमें बातचीत से नहीं बल्कि मिसाइलों से जवाब मिलता है।”
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बाद में एक सरकारी प्रसारक को बताया कि समझौते को ‘अब तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है’। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 30 May 2026 10:03:41 +0530</pubDate>
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<title>America&#45;Iran में बड़ी सफलता! 60 दिन के Ceasefire पर बनी सहमति, नई Nuclear Deal की राह खुली।</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के वार्ताकार बृहस्पतिवार को तीन महीने पुराने युद्ध में युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नयी दौर की वार्ता शुरू करने के लिए एक अस्थायी समझौते पर सहमत हुए हैं। मामले से परिचित एक अमेरिकी अधिकारी ने यह जानकारी दी।
 ईरान ने तत्काल किसी समझौते की पुष्टि नहीं की। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने बृहस्पतिवार शाम अस्थायी समझौते की पुष्टि की, लेकिन कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे मंजूरी देंगे या नहीं।
 वेंस ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह कहना मुश्किल है कि क्या राष्ट्रपति इस पर हस्ताक्षर करेंगे या फिर कब हस्ताक्षर करेंगे। हम कुछ बिंदुओं को लेकर चर्चा कर रहे हैं।’’
 यह समझौता ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध में नाजुक युद्धविराम डगमगाता दिखाई दे रहा है। ताजा तनाव एक दिन पहले तब पैदा हुआ जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार कुवैत ने ईरान से दागी गई मिसाइलों को मार गिराया।
 अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि समझौता ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर कोई शुल्क नहीं लगा सकेगा और उसे 30 दिनों के भीतर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सभी बारूदी सुरंगें हटानी होंगी। 
 युद्ध के दौरान ईरान ने प्रभावी रूप से इस जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था, जिससे दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल और प्राकृतिक गैस का व्यापार प्रभावित हुआ। इसके बंद होने से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बृहस्पतिवार को कहा कि समझौता अंतिम रूप लेने के बाद तेल की कीमतें ‘‘बहुत तेजी से नीचे आ सकती हैं।’’
 अस्थायी समझौते के तहत अमेरिका धीरे-धीरे ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा और प्रतिबंधों में ढील देगा, जिससे ईरान अधिक तेल बेच सकेगा।
 हालांकि संभावित समझौते की खबर आने के बावजूद अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरानी सेना की तेल बिक्री शाखा पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए। ये नए प्रतिबंध ट्रंप प्रशासन के आर्थिक दबाव अभियान को और आगे बढ़ाते हैं।
इस 60 दिन के युद्धविराम के दौरान जिन प्रमुख मुद्दों पर बातचीत होगी, उनमें ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम का भविष्य शामिल है। 
 वेंस ने कहा कि वार्ताकार उच्च संवर्धित यूरेनियम पर सामान्य शर्तों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं और विस्तृत मुद्दों पर बाद की वार्ताओं में निर्णय होगा।
 उन्होंने कहा कि बातचीत ‘‘परमाणु मुद्दों, उच्च संवर्धित भंडार और संवर्धन के सवाल’’ पर अटकी हुई है।
 ईरान ने सार्वजनिक रूप से इस भंडार को छोड़ने की प्रतिबद्धता नहीं जताई है। माना जाता है कि यह भंडार तीन परमाणु स्थलों के नीचे दबा है, जिन्हें पिछले वर्ष अमेरिकी हवाई हमलों में भारी नुकसान पहुंचा था।
 परमाणु विश्लेषकों का मानना है कि ईरान चीन या रूस को संवर्धित यूरेनियम की जिम्मेदारी सौंपने के लिए स्वीकार्य तीसरे पक्ष के रूप में देख सकता है। हालांकि ट्रंप ने बुधवार को कहा कि वह ‘‘ऐसी योजना से सहज नहीं होंगे।’’
 वहीं ईरान ने कहा है कि किसी भी समझौते में लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्ला के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई का अंत शामिल होना चाहिए।
 बृहस्पतिवार को लेबनान में तनाव और बढ़ गया जब इजराइल ने राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगर और दक्षिणी तटीय शहर टायर में हवाई हमले किए। देश के दक्षिणी हिस्से में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 30 May 2026 08:49:29 +0530</pubDate>
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<title>President Zelenskyy की USA से बड़ी मांग, Russia से लड़ने के लिए और चाहिए Patriot Missile</title>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह उनके देश को रूस के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों का मुकाबला करने में सक्षम पैट्रियट वायु रक्षा मिसाइल मुहैया कराने का अमेरिका से लगातार आग्रह कर रहे हैं।
 जेलेंस्की ने कहा कि उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कांग्रेस (अमेरिकी संसद) को अमेरिका निर्मित गोला-बारूद की अधिक आपूर्ति के लिए पत्र भेजा था, जिसका उन्हें अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होंने आगाह किया कि ईरान युद्ध के कारण अमेरिकी युद्धक सामग्री कम होने से यूक्रेन को आपूर्ति खतरनाक रूप से कम हो रही है।
 स्वीडन दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में जेलेंस्की ने कहा, ‘‘मेरा मानना ​​है कि अमेरिका को जल्द कार्रवाई करनी चाहिए। हम लगातार आग्रह कर रहे हैं।’’
 इससे पहले, जेलेंस्की ने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के साथ द्विपक्षीय रक्षा सहयोग पर बातचीत की।
 स्वीडन के दौरे पर गए जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा कि दोनों देश ‘‘एक बड़ा रक्षा पैकेज’’ तैयार कर रहे हैं और यूक्रेन को ग्रिपेन लड़ाकू विमान प्रदान करने के लिए एक समझौते पर काम कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 30 May 2026 08:49:28 +0530</pubDate>
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<title>70% हिस्से पर कब्जा...गाजा को लेकर नेतन्याहू ने बता दिया अपना स्टेप बाई स्टेप प्लान</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व के युद्धक्षेत्र से इस वक्त की बड़ी खबर आ रही है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाज़ा पट्टी के 70 प्रतिशत भूभाग पर सीधे सैन्य नियंत्रण की योजना की घोषणा कर दी है। इस विनाशकारी युद्ध के कारण गाज़ा की लगभग पूरी आबादी पहले ही बेघर हो चुकी है, और इस नए एलान ने पूरे क्षेत्र में बारूद की गर्मी और बढ़ा दी है।  वेस्ट बैंक में एक जनसभा के दौरान नेतन्याहू ने साफ किया कि इजरायली सेना गाज़ा में लगातार आगे बढ़ रही है। उन्होंने हमास को चेतावनी देते हुए कहा कि इजरायल के कदम अब रुकने वाले नहीं हैं और आने वाले दिनों में ऑपरेशन्स का विस्तार और आक्रामक तरीके से किया जाएगा। जार्डन में आयोजित एक सम्मेलन में इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि हम वर्तमान में हमास पर दबाव बना रहे हैं। अब हम गाजा पट्टी के 60 प्रतिशत क्षेत्र पर नियंत्रण रखते हैं। आप जानते हैं, हम 50 प्रतिशत पर थे, फिर 60 प्रतिशत पर पहुंच गए। मेरा निर्देश है कि हम 70 प्रतिशत तक पहुंचें। सम्मेलन में मौजूद एक व्यक्ति ने चिल्लाकर कहा कि इजरायल को गाजा के 100 प्रतिशत क्षेत्र पर कब्जा कर लेना चाहिए, जिस पर नेतन्याहू ने जवाब देते हुए कहा कि हम क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ेंगे। पहले 70 प्रतिशत हिस्से से शुरुआत करेंगे।इसे भी पढ़ें: मौज से ट्रक में जा रहे थे पाक सैनिक तभी हुआ धमाका, उड़े चिथड़े, दहला इस्लामाबादगाजा क्षेत्र पर नियंत्रण सिमटता जा रहा हैअप्रैल के अंत में इजरायली सेना द्वारा अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों के साथ साझा किए गए नक्शों में पहले से ही गाजा के लगभग 64 प्रतिशत हिस्से पर इजरायली सेना का नियंत्रण दिखाया गया था। यदि इजरायल इस नियंत्रण को और बढ़ाता है, तो लगभग 20 लाख फिलिस्तीनियों को इस तबाह तटीय क्षेत्र के और भी छोटे से हिस्से में रहने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। महीनों तक चले संघर्ष, बार-बार किए गए हवाई हमलों और जमीनी हमलों के बाद गाजा के बड़े हिस्से पहले ही नष्ट हो चुके हैं। इजरायल और हमास के बीच अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम समझौते के तहत, इजरायली सेना &quot;पीली रेखा&quot; के नाम से जानी जाने वाली सैन्य सीमा तक पीछे हट गई थी, जो गाजा के लगभग 53 प्रतिशत हिस्से को कवर करती थी। लेकिन हमास ने इस सप्ताह की शुरुआत में इजरायल पर आरोप लगाया कि वह चुपचाप इस रेखा को गाजा के भीतर और गहराई तक ले जा रहा है। फिलिस्तीनी समूह ने कहा कि यह कदम युद्धविराम समझौते को स्पष्ट और लगातार कमजोर करने का प्रतिनिधित्व करता है और इजरायल पर बलपूर्वक जमीन पर नए तथ्य थोपने का आरोप लगाया।इसे भी पढ़ें: West Asia संकट का असर, Air India ने Israel Flights पर लगाई रोक, अब July तक No Entryदक्षिणी लेबनान पर नया दबावइस बीच, इज़राइल ने हिज़्बुल्लाह के खिलाफ दक्षिणी लेबनान में सैन्य अभियान भी तेज कर दिए हैं। बुधवार को, इज़राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के एक बड़े नए हिस्से को &quot;युद्ध क्षेत्र&quot; घोषित कर दिया और निवासियों को ज़हरानी नदी के उत्तर में स्थित क्षेत्र को खाली करने का आदेश दिया। यह चेतावनी इजरायली सीमा से लगभग 40 किलोमीटर उत्तर में स्थित एक बड़े भूभाग के लिए जारी की गई थी। इजरायली सैन्य अधिकारियों ने कहा कि सैनिक इस क्षेत्र में हिजबुल्लाह लड़ाकों और उनके बुनियादी ढांचे के खिलाफ कड़ी ताकत से कार्रवाई करेंगे। अप्रैल में घोषित युद्धविराम के बावजूद, एक दिन पहले दक्षिणी और पूर्वी लेबनान में इजरायल द्वारा 120 से अधिक हमले किए गए थे, जिसके बाद निकासी का आदेश जारी किया गया। समाचार एजेंसी रॉयटर्स द्वारा उद्धृत लेबनानी सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, निवासी तटीय शहर सिडोन की ओर भागने लगे। यह ताजा विस्थापन लेबनान में ईद अल-अधा के उत्सव के दौरान हुआ। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 30 May 2026 08:49:27 +0530</pubDate>
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