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<title>Prime News Studio &#45; : विदेश</title>
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<title>Hormuz पर हमारा कब्ज़ा, Donald Trump की Iran को खुली चेतावनी&#45; समझौता करो या तबाह हो जाओ</title>
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<description><![CDATA[ कुवैत ने ईरान पर इस महीने की शुरुआत में उस द्वीप पर हमला करने का आरोप लगाया है, जहां चीन एक बंदरगाह निर्माण परियोजना में सहयोग कर रहा है। हालांकि यह हमला विफल कर दिया गया।
यह आरोप ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन रवाना होने वाले हैं, जहां उनकी चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से युद्ध और अन्य मुद्दों पर महत्वपूर्ण वार्ता होनी है।
 ट्रंप ने कहा कि वह शी चिनफिंग के साथ ईरान पर ‘‘लंबी बातचीत’’ करेंगे, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापार उनका बड़ा मुद्दा रहेगा। चीन रवाना होने से पहले ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को चेतावनी दी कि यदि उसके नेता परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं करते, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
 ट्रंप ने कहा, ‘‘ईरान पूरी तरह हमारे नियंत्रण में है। या तो समझौता होगा या फिर वे पूरी तरह तबाह कर दिए जाएंगे। किसी भी स्थिति में जीत हमारी होगी।’’
 ईरान ने कुवैत के आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। कुवैत पहले भी युद्ध और संघर्षविराम के दौरान ईरानी हमलों का सामना कर चुका है। लेकिन यह नया आरोप और क्षेत्र में जारी हमले फिर से युद्ध का खतरा बढ़ा रहे हैं।
 होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी ईरान के मजबूत नियंत्रण में है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नाकेबंदी बनाए रखी है और दोनों देशों के बीच वार्ता ठप पड़ती दिख रही है।
 ईरानी राजनयिक काजिम गरीबाबादी ने मंगलवार को ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘अपमान, धमकियों और जोर-जबरदस्ती वाली से वास्तविक शांति स्थापित नहीं की जा सकती।’’
 संघर्ष दोबारा भड़कने की आशंका के बीच इजराइल ने संयुक्त अरब अमीरात में आयरन डोम हवाई रक्षा प्रणाली और उसे संचालित करने वाले कर्मियों को भेजा है। इजराइल में अमेरिका के एक राजदूत ने यह जानकारी दी।
 यह पहली बार है जब सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया कि इजराइली सेना संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में तैनात की गई है। इससे इजराइल और यूएई के बीच बढ़ते संबंध भी उजागर हुए हैं।
 कुवैत ने कहा कि एक मई को ईरान की अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड की एक टीम ने फारस की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित बुबियान द्वीप में घुसपैठ की कोशिश की। यह इलाका इराक और ईरान के करीब है।
 कुवैत के अनुसार, सुरक्षा बलों ने हमले को विफल कर दिया और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया जबकि दो फरार हो गए।
 बुबियान द्वीप पर मुबारक अल कबीर बंदरगाह का निर्माण हो रहा है, जो चीन की वैश्विक बुनियादी ढांचा परियोजना का हिस्सा है। युद्ध के दौरान इस क्षेत्र पर पहले भी ईरानी हमला हो चुका है।
 वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हथियारों के भंडार को लेकर जतायी जा रही चिंताओं के बीच कांग्रेस को बताया कि अमेरिकी सेना के पास पर्याप्त बम और मिसाइलें हैं।
 उन्होंने कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए हुए है, भले ही ईरानी हमलों और धमकियों से तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही हो।
 हेगसेथ ने कहा, ‘‘अंततः जलडमरूमध्य हमारे नियंत्रण में है, क्योंकि हमारी अनुमति के बिना वहां से कुछ भी नहीं गुजर सकता। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:34:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>पाकिस्तान ने ईरानी विमानों को दी गुप्त पनाह? अमेरिका से की गद्दारी! खबर पक्की निकली तो ट्रंप उड़ा देंगे इस्लामाबाद!</title>
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<description><![CDATA[ हालिया मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के दौरान पाकिस्तान ने ईरान को गुप्त रूप से सैन्य सहयोग दिया है। &#039;सीबीएस न्यूज&#039; की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने ईरानी सैन्य विमानों को अपने &#039;नूर खान एयरबेस&#039; पर पनाह दी, ताकि उन्हें संभावित अमेरिकी हमलों से बचाया जा सके। इस खबर ने वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है, क्योंकि एक तरफ पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका का दावा कर रहा था, वहीं दूसरी ओर उस पर अमेरिका के साथ &#039;दोहरी चाल&#039; चलने के आरोप लग रहे हैं। अमेरिकी सीनेटरों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के कड़े रुख को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि इन दावों की पूरी तरह पुष्टि हो जाती है, तो पाकिस्तान को इसके गंभीर रणनीतिक और कूटनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।  CBS News ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि पाकिस्तान ने तेहरान के सैन्य विमानों को अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए अपने एक प्रमुख एयरबेस पर सुरक्षित पार्क करने की अनुमति दी थी। यह खुलासा तब हुआ है जब पाकिस्तान सार्वजनिक रूप से खुद को दोनों देशों के बीच एक &#039;तटस्थ मध्यस्थ&#039; के रूप में पेश कर रहा था। इस मामले से परिचित अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम की घोषणा किए जाने के तुरंत बाद, ईरान ने कई विमानों—जिनमें सैन्य संपत्तियां भी शामिल थीं—को रावलपिंडी के पास स्थित पाकिस्तान एयर फ़ोर्स बेस नूर खान में भेज दिया। कथित तौर पर वहां तैनात विमानों में ईरानी वायु सेना का एक RC-130 टोही विमान भी शामिल था, जो Lockheed C-130 Hercules परिवहन विमान का ही एक निगरानी (surveillance) संस्करण है।इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu की राजनीति में बड़ा फेरबदल! CV शनमुगम के नेतृत्व वाले AIADMK गुट ने CM विजय को दिया समर्थनराष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं के चलते नाम न छापने की शर्त पर बात करते हुए अधिकारियों ने बताया कि विमानों की यह आवाजाही, क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बीच, ईरान की शेष विमानन और सैन्य संपत्तियों को संभावित अमेरिकी हमलों से बचाने के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है।इसे भी पढ़ें: Chandranath Rath Murder | Suvendu Adhikari के PA की हत्या की जांच अब CBI के हाथ! DIG की अगुवाई में 7-सदस्यीय SIT गठितइस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने X (पूर्व में Twitter) पर लिखा, &quot;यदि यह रिपोर्टिंग सही है, तो पाकिस्तान द्वारा ईरान, अमेरिका और अन्य पक्षों के बीच मध्यस्थ के रूप में निभाई जा रही भूमिका का पूरी तरह से पुनर्मूल्यांकन करना आवश्यक होगा।&quot; ग्राहम ने आगे कहा, &quot;इजरायल के प्रति पाकिस्तानी रक्षा अधिकारियों के कुछ पिछले बयानों को देखते हुए, यदि यह बात सच निकलती है तो मुझे कोई हैरानी नहीं होगी।&quot;कथित तौर पर ईरान ने अपने कुछ नागरिक विमानों को पड़ोसी देश अफगानिस्तान में भी भेज दिया था। दो अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि उन उड़ानों में सैन्य विमान भी शामिल थे या नहीं।हालांकि, एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने नूर खान एयरबेस से जुड़े इन आरोपों का खंडन करते हुए CBS News को बताया कि इस तरह की गतिविधियां छिपी नहीं रह सकतीं, क्योंकि यह एयरबेस एक घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र में स्थित है।अफगानिस्तान के एक नागरिक उड्डयन अधिकारी ने CBS News को बताया कि शत्रुता शुरू होने से कुछ ही समय पहले Mahan Air का एक विमान काबुल में उतरा था और ईरानी हवाई क्षेत्र बंद होने के बाद भी वह वहीं रुका रहा। बाद में, उस विमान को ईरानी सीमा के पास स्थित हेरात हवाई अड्डे पर स्थानांतरित कर दिया गया; ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों के बाद यह आशंका बढ़ गई थी कि काबुल हवाई अड्डा भी किसी हमले का निशाना बन सकता है। तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्ला मुजाहिद ने अफगानिस्तान में ईरानी विमानों की मौजूदगी से जुड़ी रिपोर्टों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि तेहरान को अपने विमानों को वहां स्थानांतरित करने की कोई आवश्यकता नहीं थी।इन घटनाक्रमों ने ईरान-अमेरिका संकट के दौरान पाकिस्तान द्वारा अपनाई गई नाजुक संतुलन साधने की नीति को उजागर किया है। इस्लामाबाद ने वाशिंगटन के साथ अपने घनिष्ठ संबंध बनाए रखे हैं, और साथ ही उन कदमों से भी परहेज किया है जिनसे तेहरान या चीन—जो ईरान का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सहयोगी और पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा देश है—नाराज़ हो सकते थे। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, 2020 और 2024 के बीच पाकिस्तान के बड़े हथियारों के आयात में चीन का हिस्सा लगभग 80 प्रतिशत रहा। बीजिंग ने तेहरान और वॉशिंगटन के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत को आसान बनाने में पाकिस्तान की भूमिका की सार्वजनिक रूप से तारीफ़ भी की है।इस बीच, सीज़फ़ायर की घोषणा के बावजूद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बना रहा। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, संघर्ष को खत्म करने के एक प्रस्ताव के तहत ईरान ने कथित तौर पर अमेरिका से युद्ध के हर्जाने, होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता की मान्यता और अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने की मांग की।ट्रंप ने तेहरान के इस जवाबी प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया और इसे &quot;पूरी तरह से अस्वीकार्य&quot; बताया, हालाँकि उन्होंने यह साफ़ नहीं किया कि किन मांगों को खारिज किया गया है।रविवार को होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास ताज़ा झड़पों की ख़बरें आईं, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान पर अपने क्षेत्र की ओर ड्रोन भेजने का आरोप लगाया। रॉयटर्स ने बताया कि इस हफ़्ते की शुरुआत में हुए कई हमलों के बाद ईरानी ड्रोन हमलों ने UAE को निशाना बनाया। पिछले हफ़्ते, CBS न्यूज़ ने बताया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़र रहे अमेरिकी नौसेना के तीन विध्वंसक जहाज़ों पर हमला हुआ, जिसके जवाब में अमेरिका ने  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:12:13 +0530</pubDate>
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<title>कैसे गुपचुप तरीके से ईरान के साथ युद्ध में शामिल हो गया UAE? तेल रिफाइनरी को बनाया था निशाना</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान पर सैन्य हमले किए हैं, जिससे खाड़ी राजशाही ईरान के उस युद्ध में एक सक्रिय लड़ाकू के रूप में उभर रही है जिसमें ईरान का सबसे बड़ा निशाना वही देश रहा है। उसकी सेना पश्चिमी देशों में निर्मित लड़ाकू विमानों और निगरानी नेटवर्क से सुसज्जित है। और ये हमले संकेत देते हैं कि देश अब अपनी आर्थिक शक्ति और मध्य पूर्व में बढ़ते प्रभाव की रक्षा के लिए इनका उपयोग करने को अधिक इच्छुक है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में दावा किया है कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अप्रैल की शुरुआत में ईरान पर गुप्त रूप से सीधे हमले किए। रिपोर्ट के अनुसार, यूएई ने ईरानी क्षेत्र में हमले करके मध्य पूर्व के चल रहे संघर्ष में प्रवेश किया। रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात ने फारस की खाड़ी में लावन द्वीप पर स्थित ईरान की रिफाइनरी को निशाना बनाया। 2020 तक यह ईरान की 10वीं सबसे बड़ी रिफाइनरी थी और प्रतिदिन लगभग 60,000 बैरल कच्चे तेल का प्रसंस्करण कर रही थी।इसे भी पढ़ें: ये किस देश के विदेश मंत्री बने एस जयशंकर! हैरान कर देगा ये Videoकथित हमले की घटना उसी समय घटी जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पांच सप्ताह के हवाई अभियान के बाद अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में युद्धविराम की घोषणा की। कथित हमलों के कारण, ईरान को कथित तौर पर कई महीनों तक सुविधा के कुछ हिस्सों को बंद करना पड़ा। उस दौरान, ईरान ने सार्वजनिक रूप से संयुक्त अरब अमीरात का नाम नहीं लिया और घटना को शत्रुतापूर्ण हमला बताया। हालांकि, खबरों के अनुसार, उसने संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत से जुड़े क्षेत्रों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इसे भी पढ़ें: Petrol-Diesel की कोई कमी नहीं, PM Modi की Fuel बचाने की अपील के बाद सरकार का बड़ा बयानयूएई ने ईरान पर हमला किया: अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहींअब तक, यूएई की ओर से इन कथित हमलों के संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यूएई के विदेश मंत्रालय ने पहले ही कहा था कि देश शत्रुतापूर्ण कृत्यों का सैन्य जवाब देगा। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने क्षेत्रीय गतिविधियों में यूएई की भागीदारी का स्वागत किया, यह देखते हुए कि उस समय तक युद्धविराम लागू नहीं हुआ था।इसे भी पढ़ें: Pakistan ने अमेरिका से की गद्दारी! ट्रंप के सांसद ने भयंकर बवाल काट दियाईरान के साथ युद्धविराम नाजुक स्थिति में है: ट्रंपअमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम ‘‘बेहद कमजोर और नाजुक’’ स्थिति में है। ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध पर उसके शांति प्रस्ताव को एक दिन पहले ‘‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’’ बताते हुए खारिज कर दिया था। शांति प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद ईरान के साथ युद्धविराम पर एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने ‘ओवल ऑफिस’ (राष्ट्रपति के कार्यालय) में पत्रकारों से कहा, ‘‘यह अपनी सबसे कमजोर स्थिति में है... उन्होंने जो बकवास हमें भेजा, उसे पढ़ने के बाद... तो यह गंभीर नाजुक स्थिति में है।’’ ट्रंप ने कहा, ‘‘उन्हें लगता है कि मैं इससे थक जाऊंगा, या ऊब जाऊंगा, या मुझ पर कुछ दबाव आ जाएगा, लेकिन कोई दबाव नहीं है, बिल्कुल भी दबाव नहीं है। हमें पूरी जीत मिलेगी।’’ ट्रंप को रविवार को ईरान का प्रस्ताव मिला, जिससे उम्मीद जगी थी कि इससे ईरान के साथ 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को समाप्त करने में कोई सफलता मिल सकती है। इस युद्ध ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को अवरुद्ध कर दिया है, जिससे कई देशों में ईंधन की कमी हो गई है। उन्होंने रविवार को अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, ‘‘मैंने अभी ईरान के तथाकथित ‘प्रतिनिधियों’ की प्रतिक्रिया पढ़ी है। मुझे यह पसंद नहीं आया, यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।’’ अमेरिका और इजराइल के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद आठ अप्रैल से हमले रोक दिए गए हैं, जब युद्धरत पक्षों ने युद्धविराम पर सहमति जताई थी। अमेरिका और ईरान स्थायी रूप से शत्रुता समाप्त करने के लिए एक समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। अमेरिका इस बात पर जोर दे रहा है कि ईरान अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों को हटाने और अरबों डॉलर की जब्त ईरानी संपत्ति को जारी करने के बदले में अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को समाप्त करने के संबंध में स्पष्ट और ठोस वादा करे। इन वार्ताओं में ईरान और अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी हटाने का भी प्रावधान भी शामिल है, जो वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति के पांचवें हिस्से के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:12:12 +0530</pubDate>
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<title>China का गेम ओवर, जापान और भारत ने कर ली कौन सी महाडील?</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली के गलियारों से लेकर टोक्यो के सत्ता केंद्रों तक एक ऐसी हलचल शुरू हुई है जिसने बीजिंग की रातों की नींद उड़ा दी है। भारत और जापान ने आधिकारिक तौर पर एक ऐसे समझौते पर मुर लगा दी है जो ना केवल इन दो देशों का भविष्य बदलेगा बल्कि पूरे इंडोपेसिफिक क्षेत्र में शक्ति के संतुलन को नई दिशा देगा। भारत जापान इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग के दूसरे दौरे में वह बड़ा फैसला लिया गया जिसकी धमक आने वाले कई दशकों तक महसूस की जाएगी। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री और जापान के वरिष्ठ मंत्रियों के बीच हुई इस बैठक का सीधा लक्ष्य है ग्लोबल सप्लाई चेन से चीन के वर्चस्व को उखाड़ फेंकना। दोनों देशों ने तय किया कि वे रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्रों में अपने सहयोग को उस स्तर पर ले जाएंगे जहां कोई बाहरी ताकत या भू राजनीतिक तनाव भारत की प्रगति की रफ्तार को रोक ना सके। यह समझौता मुख्य रूप से उन सेक्टर्स पर केंद्रित है जिन्हें भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीड माना जाता है। इसे भी पढ़ें: ट्रेड, व्यापार और रेयर अर्थ मिनिरल्स... चीन के दौरे पर जाएंगे ट्रंप, जिनपिंग से मुलाकात बढ़ाएगी भारत की टेंशन?गौर करने वाली बात यह है कि भारत और जापान अब सिर्फ व्यापारिक साझेदार नहीं रहे बल्कि यह एक ऐसी सुरक्षा दीवार खड़ी करने जा रहे हैं जो सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और उभरती हुई तकनीकों को सुरक्षित करेगी। आज के दौर में जब दुनिया सप्लाई चेन के टूटने और युद्धों के कारण पैदा हुई अनिश्चितता से जूझ रही है तब भारत और जापान ने विश्वसनीय सप्लाई चेन यानी कि ट्रस्टेड सप्लाई चेन का नया नारा बुलंद किया है। इसका मतलब साफ है तकनीक जापान की होगी। जमीन और हुनर भारत का होगा और यह गठबंधन दुनिया को एक सुरक्षित विकल्प देगा। भारत और जापान की यह दोस्ती दशकों पुरानी है। जापान आज भारत में निवेश करने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है। लेकिन अब यह साझेदारी बुनियादी ढांचे और ट्रेन प्रोजेक्ट से आगे बढ़कर रक्षा और उच्च तकनीक के मोर्चे पर आ गई है। टोक्यो और नई दिल्ली का यह बढ़ता तालमेल इस बात का सबूत है कि एशिया की यह दो बड़ी ताकतें अब किसी भी तीसरे देश की मनमानी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। इसे भी पढ़ें: ये किस देश के विदेश मंत्री बने एस जयशंकर! हैरान कर देगा ये Videoइन प्रशांत क्षेत्र को खुला, स्वतंत्र और सुरक्षित रखने के लिए भारत का मजबूत होना बहुत जरूरी है और जापान इस हकीकत को बखूबी समझता है। यानी यह डायलॉग सिर्फ कागजी कारवाही नहीं है बल्कि एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अब दुनिया की फैक्ट्री बनने के लिए तैयार है और चीन पर निर्भरता कम करने के लिए जापान अपनी फैक्ट्रियों और तकनीक को भारत में शिफ्ट करने के लिए बड़े कदम उठाने जा रहा है। जिससे भारत की औद्योगिक शक्ति में जबरदस्त इजाफा होगा। खैर राजशित में लिए गए इस फैसले ने साफ कर दिया कि कि आने वाला समय भारत का है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:12:12 +0530</pubDate>
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<title>सबसे कमजोर और बेवकूफ...जंग के बीच ओबामा पर क्यों भड़क गए ट्रंप?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच टकराव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है और इस बार मामला सिर्फ बयानबाजी तक नहीं रुका है। तेल के दाम ऊपर चढ़ गए हैं। खाड़ी देशों में ड्रोन दिख रहे हैं और दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइन स्ट्रीट ऑफ हॉर्मोस पर तनाव बना हुआ है। इन सबके बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान पिछले 47 साल से अमेरिका और दुनिया को घुमाता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी बयानबाजी तेज करते हुए उस पर 47 वर्षों तक टालमटोल की रणनीति अपनाकर अमेरिका को धोखा देने का आरोप लगाया। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि ओबामा प्रशासन ने 2015 के परमाणु समझौते से जुड़ी पाबंदियों में ढील और नकद भुगतान के जरिए ईरान को आर्थिक रूप से मजबूत किया। ट्रंप ने कहा कि ईरान कभी अमेरिका को सबसे बड़ा मूर्ख समझता था, लेकिन अब तेहरान हंस नहीं पाएगा।इसे भी पढ़ें: कैसे गुपचुप तरीके से ईरान के साथ युद्ध में शामिल हो गया UAE? तेल रिफाइनरी को बनाया था निशानाउन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ओबामा सिर्फ ईरान को लेकर सॉफ्ट नहीं थे बल्कि पूरी तरह उनके पक्ष में चले गए। उन्होंने इजराइल और दूसरे सहयोगियों को किनारे कर दिया। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ओबामा ने ईरान को सैकड़ों अरब डॉलर दिए। 1.7 अरब डॉलर कैश में तेहरान भेजे और इससे ईरान को नई ताकत मिल गई। उनके पास इतना पैसा पहले कभी नहीं था। सूटकेस और बैग में भरकर पैसा उतारा गया और उन्हें अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हुआ। उन्हें लगा कि उन्हें सबसे कमजोर और बेवकूफ अमेरिकी राष्ट्रपति मिल गया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने सालों तक अमेरिका को इंतजार करवाया। अमेरिकी सैनिकों को रोडसाइड बमों से मारा, प्रदर्शनकारियों को कुचला और अब तक अमेरिका का मजाक उड़ाता रहा। लेकिन अब वो हंसना बंद करेंगे। दरअसल अमेरिका ने ईरान को एक पीस प्रपोजल भेजा था। लेकिन ट्रंप ने ईरान के जवाब को पूरी तरह अस्वीकार्य बता दिया। अमेरिकी मीडिया आउटलेट एग्जिओस से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि मुझे उनका जवाब पसंद नहीं आया। उनका जवाब गलत है। इसे भी पढ़ें:  यह युद्ध का युग नहीं ...यूक्रेन को लेकर मोदी की पुतिन से सीक्रेट बातचीत?हालांकि ट्रंप ने यह नहीं बताया कि ईरान ने अपने जवाब में क्या लिखा था। उधर ईरानी मीडिया के मुताबिक ईरान ने अमेरिका से जंग में हुए नुकसान का मुआवजा मांगा है। साथ ही आर्थिक प्रतिबंध हटाने और स्टेट ऑफ हॉर्मोस पर अपने अधिकार की बात दोहराई है। ईरान ने अपने प्रस्तावों में यह भी कहा कि जंग सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि लेबनान समेत पूरे इलाके में लड़ाई खत्म होनी चाहिए। साथ ही हॉर्मोस से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा की भी बात कही गई है। लेकिन ट्रंप ने कुछ ही घंटों बाद सोशल मीडिया पर ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसी बीच वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अपने हाईली इनरड्ड यूरेनियम का कुछ हिस्सा कम डाइल्यूट करने और बाकी किसी तीसरे देश को सौंपने पर विचार कर रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। डाइल्यूट करने का मतलब होता है कि किसी गाढ़े चीज को पतला करना। इधर बेंजामिन नेतन याहू ने अमेरिकी मीडिया से कहा कि ईरान के खिलाफ जंग अभी खत्म नहीं हुई है। उनका कहना है कि ईरान के पास जमा एनरिचड यूरेनियम हटाना जरूरी है। नेतन्याऊ ने कहा कि सबसे अच्छा रास्ता डिप्लोमेसी है लेकिन जरूरत पड़ी तो कठोर कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उधर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजस्कियान ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हम दुश्मन के सामने कभी भी सिर नहीं झुकाएंगे और अगर बातचीत या समझौते की बात होती है तो इसका मतलब आत्मसमर्पण या पीछे हटना नहीं है बल्कि इसका मकसद ईरानी जनता के अधिकारों को बनाए रखना और राष्ट्रीय हितों की मजबूती से रक्षा करना है। इसी बीच अमेरिकी रिपब्लिकन सेनेटर लिंजी ग्राहम ने कहा है कि अब ट्रंप को सैन्य कारवाई पर विचार करना चाहिए। तनाव सिर्फ बयानों तक नहीं है। खाड़ी देशों में ड्रोन एक्टिविटी भी बढ़ गई है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:12:11 +0530</pubDate>
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<title>ईरान ने फिर उछाली ट्रंप की इज्जत! एक और F&#45;35 जेट डाउन?</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व के आसमान में एक बार फिर तनाव की बिजली कौंध गई है। 11 मई की सुबह दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक अमेरिका के F35 लाइटनिंग टू ने संयुक्त अरब अमीरात में अत्यंत तनावपूर्ण परिस्थितियों में एक आपातकालीन लैंडिंग की। इस घटना ने ना केवल क्षेत्र में सैन्य हलचल को बढ़ा दिया है बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी कूटनीतिक युद्ध में नया मोड़ ला दिया है। खबरों के मुताबिक अमेरिकी वायुसेना का यह स्टील फाइटर जेट थोरमस जलडम मध्य के पास रणनीतिक उड़ान भर रहा था। अचानक इसके बाद अचानक विमान ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन ट्रांसफॉर्डर कोड 7700 प्रसारित करना शुरू कर दिया। यह कोड एिएशन सेक्टर में तब इस्तेमाल किया जाता है जब पायलट किसी गंभीर खतरे या फिर तकनीकी खराबी का सामना कर रहा हो। यह विमान ओमान की खाड़ी के ऊपर था जब उसने अचानक अपना रास्ता बदला और यूएई की ओर रुख किया। सबसे रहस्यमई बात यह रही कि जैसे ही विमान यूएई के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ, पायलट ने अपना ट्रांसपॉडर बंद कर दिया और रडार से ओझल होकर सीधे अलधाफरा एयरबेस पर आपातकालीन लैंडिंग की। इसे भी पढ़ें: कैसे गुपचुप तरीके से ईरान के साथ युद्ध में शामिल हो गया UAE? तेल रिफाइनरी को बनाया था निशानारक्षा विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि पिछले 24 घंटों के भीतर इसी इकाई के विमान ने दूसरी बार कोड 7700 प्रसारित किया। एक अत्याधुनिक फिफ्थ जनरेशन विमान का बार-बार इस तरह के संकट में आना यांत्रिक विफलता की ओर इशारा करता है। इस घटना के बाद से ही ईरान के सरकारी मीडिया और रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल्स पर दावों की बाढ़ आ गई है। ईरानी सूत्रों का कहना है कि उनके रक्षा तंत्र ने अमेरिकी विमानों को अपनी सीमा के पास ट्रैक किया था और उसे निशाना बनाया गया। ईरान का दावा है कि विमान को नुकसान पहुंचा है और इसी कारण उसे अपनी उड़ान बीच में छोड़कर भागना पड़ा। हालांकि स्वतंत्र सैन्य विश्लेषक इन दावों पर सवाल उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर F-35 किसी मिसाइल या एंटी एयरक्राफ्ट गन से हिट हुआ होता तो उसका सैकड़ों मील दूर स्थित अलधाफरा तक सुरक्षित पहुंचवाना लगभग नामुमकिन था। इसे भी पढ़ें: Pakistan ने अमेरिका से की गद्दारी! ट्रंप के सांसद ने भयंकर बवाल काट दियादूसरी ओर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यानी उसने चुप्पी साध रखी है। अमेरिकी अधिकारियों की यह चुप्पी कई अटकलों को जन्म दे रही है। क्या यह वास्तव में इंजन की कोई तकनीकी खराबी थी या फिर ईरान ने आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का उपयोग करके विमान के नेविगेशन सिस्टम को जाम कर दिया था। होमोज्डम दुनिया के तेज व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। यहां अमेरिकी विमानों की लगातार मौजूदगी ईरान को अखरती रही है। हाल के हफ्तों में ईरान द्वारा यूएई पर किए गए हमलों और उसके बाद के तनाव ने इस क्षेत्र को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है। फिलहाल अलदाफरा बेस पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और विमान की जांच की जा रही है। अगर यह साबित होता है कि विमान किसी हमले का शिकार हुआ था तो यह क्षेत्र में एक बड़े सैन्य टकराव की शुरुआत हो सकती है और अगर यह केवल तकनीकी खराबी है तो अरबों डॉलर के एफ35 कार्यक्रम की विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवालिया या निशान खड़ा हो सकता है। 40 दिनों की जंग में दुनिया ने ईरान की मिसाइल ताकत का जलवा देख लिया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:12:10 +0530</pubDate>
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<media:keywords>ईरान, ने, फिर, उछाली, ट्रंप, की, इज्जत, एक, और, F-35, जेट, डाउन</media:keywords>
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<title>ट्रंप से नफरत अब &amp;apos;मानसिक बीमारी&amp;apos;! इसका इलाज&#45; प्रेसिडेंट पर भरोसा रखें और राष्ट्रगान सुनें, वायरल हुआ अनोखा प्रिस्क्रिप्शन</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस इवेंट में ट्रंप डिरेंजमेंट सिंड्रोम की बात की और कहा कि यह सच में एक बीमारी है और यह मेरे लिए एक सम्मान है। इसके बाद वाइट हाउस ने ट्रंप डिरेंजमेंट सिंड्रोम&#039; से पीड़ित लोगों के लिए इलाज की सूची शेयर की है। इसमें ट्रंप में भरोसा रखना, राष्ट्रगान सुनना और अन्य शामिल हैं। बात यहीं नहीं रुकी, इसके जवाब में एक डॉक्टर के पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) की तस्वीर शेयर की गई और लिखा गया कि इसे उसे भेजें जिसे इसकी जरूरत है। इस अनोखे पर्चे में बीमारी के इलाज के तौर पर ट्रंप पर भरोसा रखने, राष्ट्रगान सुनने, झूठी खबरों से बचने और न घबराने की सलाह दी गई थी। देखते ही देखते यह पोस्ट इंटरनेट पर छा गई और लोग मज़े लेते हुए इस &#039;प्रिस्क्रिप्शन&#039; को अपने-अपने मज़ाकिया अंदाज़ में बदलकर शेयर करने लगे।इसे भी पढ़ें: सबसे कमजोर और बेवकूफ...जंग के बीच ओबामा पर क्यों भड़क गए ट्रंप?देखते ही देखते वायरल हो गया पोस्टइस पोस्ट पर कई टिप्पणियां आईं। एक एक्स यूजर ने लिखा कि ये फालतू मीम्स बनाना बंद करो और काम पर लग जाओ। पेट्रोल की कीमत 5 डॉलर है, किराने का सामान खरीदना विलासिता है और घरेलू खर्चे बेतहाशा बढ़ गए हैं। जब ये सरकार क्लिक्स के लिए चुटकुले पोस्ट कर रही है, तब अमेरिकी जनता मुसीबतों में डूब रही है। सर्वेक्षण झूठ नहीं बोलते - अमेरिकी जाग रहे हैं। नवंबर में उन्हें हकीकत का सामना करना पड़ेगा।” एक अन्य यूजर ने कहा, “हमारे शानदार राष्ट्रपति ट्रंप एक चलते-फिरते कॉमेडी शो की तरह हैं। डेमोक्रेट और उदारवादी ये समझ ही नहीं पा रहे कि वो असल में कितने मजाकिया हैं। एक तीसरे व्यक्ति ने लिखा कि रोगी की जानकारी वाले अनुभाग में निदान क्यों होगा? आप ठीक से मीम भी नहीं बना सकते।” एक चौथे व्यक्ति ने कहा, “हम एपस्टीन की फाइलें देखना चाहते हैं, और ट्रंप अपने अतीत को छुपाने के लिए यह बेवकूफी भरा नुस्खा भेज रहे हैं। धन्यवाद नहीं। इसे भी पढ़ें: Pakistan ने अमेरिका से की गद्दारी! ट्रंप के सांसद ने भयंकर बवाल काट दियाआखिर यह &#039;ट्रंप डिरेंजमेंट सिंड्रोम&#039; है क्या? असल में यह कोई असली बीमारी नहीं है, बल्कि ट्रंप का समर्थन करने वाले मीडिया द्वारा गढ़ा गया एक शब्द है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि साल 2025 में मिनेसोटा के रिपब्लिकन नेताओं ने एक नया बिल लाकर इस &#039;सिंड्रोम&#039; को सच में एक मानसिक बीमारी घोषित करने की कोशिश की थी, जिस पर काफी विवाद भी हुआ। इस बिल में टीडीएस (TDS) को परिभाषित करते हुए कहा गया था कि जब कोई सामान्य इंसान डोनाल्ड ट्रंप या उनकी नीतियों को देखकर अचानक बहुत ज्यादा घबराने लगे या शक (पैरानोइया) करने लगे, तो वह इसका शिकार है। इसके लक्षणों में ट्रंप के खिलाफ बहुत ज्यादा गुस्सा जताना, उन्हें बुरा-भला कहना और ट्रंप समर्थकों के खिलाफ आक्रामक व्यवहार करना शामिल बताया गया था।Send to someone who needs https://t.co/768e43RBSz pic.twitter.com/bL0gBmHUYy— The White House (@WhiteHouse) May 11, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:12:09 +0530</pubDate>
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<title>हथियार नहीं डालेंगे, इजरायल को नर्क बना देंगे, Hezbollah की नई धमकी के बाद मीडिल ईस्ट में टेंशन हाई</title>
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<description><![CDATA[ हिज़्बुल्लाह नेता नईम कासिम ने घोषणा की है कि समूह की सैन्य क्षमताएं पूरी तरह से लेबनान का आंतरिक मामला हैं और इज़राइल के साथ चल रहे संघर्ष के दौरान इन्हें सौदेबाजी की मेज पर नहीं रखा जाएगा। अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिज़्बुल्लाह प्रमुख ने इज़राइली सैन्य दबाव के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उनके लड़ाके लंबे समय तक चलने वाले टकराव के लिए तैयार हैं। कासिम ने टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में कहा कि हम मैदान नहीं छोड़ेंगे। हम इज़राइल के लिए इसे नरक बना देंगे। समूह के नेता ने लेबनानी सरकार के साथ भविष्य में सहयोग के लिए एक रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें पांच प्रमुख उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन लक्ष्यों में इज़राइली आक्रामकता को समाप्त करके लेबनान की संप्रभुता को सुरक्षित करना, कब्जे वाले क्षेत्रों से इज़राइली सेनाओं की पूर्ण वापसी सुनिश्चित करना, बंदियों की रिहाई, विस्थापित नागरिकों की दक्षिणी लेबनान में सुगम वापसी और व्यापक पुनर्निर्माण प्रयास शामिल हैंइसे भी पढ़ें: Iran में फटा अमेरिकी बम, मारे गए IRGC के 14 सैनिककासिम विदेशी हस्तक्षेप के मुद्दे पर विशेष रूप से दृढ़ थे, उन्होंने जोर देकर कहा कि &quot;लेबनान के बाहर किसी को भी लेबनान के हथियारों, प्रतिरोध या आंतरिक मामलों के संगठन में कोई दखल नहीं देना चाहिए। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, हिज़्बुल्लाह प्रमुख ने स्पष्ट किया कि प्रतिरोध आंदोलन के हथियार फिलहाल अंतरराष्ट्रीय वार्ताकारों के लिए वर्जित हैं। कासिम ने कहा कि यह लेबनान का आंतरिक मामला है और दुश्मन के साथ बातचीत का हिस्सा नहीं है। लेबनान द्वारा पांच बिंदुओं को हासिल करने के बाद, वह राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के तहत अपने आंतरिक मामलों को व्यवस्थित करेगा और प्रतिरोध आंदोलन सहित अपनी ताकतों का इस्तेमाल करेगा। आंतरिक संप्रभुता पर यह कठोर रुख ऐसे समय में सामने आया है जब लेबनान और इज़राइल के बीच अस्थिर स्थिति लगातार हिंसक संघर्षों से घिरी हुई है। मई 2026 के मध्य तक, अमेरिका की मध्यस्थता से हुआ युद्धविराम, जो मूल रूप से 17 अप्रैल को शुरू हुआ था और बाद में बढ़ाया गया था, अब केवल कागजों पर ही मौजूद है।इसे भी पढ़ें: शर्तें नहीं माने तो ऐसी बमबारी करेंगे...होर्मुज खोलने को लेकर ट्रंप की ईरान को नई धमकीइस नाममात्र के संघर्ष विराम की विफलता ज़मीनी हकीकत में स्पष्ट है, जहां इज़राइल दक्षिणी लेबनानी बफर ज़ोन में सैन्य उपस्थिति बनाए हुए है और रोज़ाना लड़ाई जारी है। रिपोर्टों से पता चलता है कि मार्च से इज़राइली सेना लेबनान के लगभग 6% क्षेत्र पर नियंत्रण कर रही है। 2 मार्च को संघर्ष बढ़ने के बाद से इस क्षेत्रीय संघर्ष के मानवीय परिणाम विनाशकारी रहे हैं। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, लेबनान में इजरायली अभियानों के कारण 2,840 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 8,700 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जबकि हिंसा के कारण दस लाख से अधिक लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:12:08 +0530</pubDate>
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<title>अपनी ही Labour Party में घिरे UK PM Keir Starmer, 80 सांसदों ने मांगा इस्तीफा, कुर्सी पर संकट</title>
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<description><![CDATA[ ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने मंगलवार को इस्तीफे की मांगों को खारिज करते हुए मंत्रियों से कहा कि वे अपना शासन जारी रखेंगे, हालांकि चुनाव में मिली करारी हार के बाद पिछले 48 घंटों में उनके पद छोड़ने की समय-सीमा तय करने की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे माहौल अस्थिर हो गया है। अपने मंत्रिमंडल की बैठक में दो साल से भी कम समय से प्रधानमंत्री पद पर रहे स्टारमर ने दोहराया कि हालांकि वे अपनी लेबर पार्टी की सबसे बुरी चुनावी हार में से एक की जिम्मेदारी लेते हैं, लेकिन नेतृत्व के लिए कोई आधिकारिक कदम नहीं उठाया गया है। स्टारमर ने अपने डाउनिंग स्ट्रीट कार्यालय के अनुसार, मंत्रियों से कहा पिछले 48 घंटे सरकार के लिए अस्थिरता भरे रहे हैं और इसका हमारे देश और परिवारों के लिए वास्तविक आर्थिक नुकसान हुआ है। देश हमसे शासन चलाने की उम्मीद करता है। मैं यही कर रहा हूँ और कैबिनेट के तौर पर हमें यही करना चाहिए।इसे भी पढ़ें: 18 मर्द और एक खौफनाक रात... सनकी प्रेमी ने एक्स से बदला लेने के लिए पार की नफरत की सारी हदेंस्टारमर की टिप्पणियों पर ब्रिटिश सरकारी बॉन्ड में मामूली उछाल आया, लेकिन दिन भर वे गिरावट में ही रहे। उनका यह रुख उनकी लेबर पार्टी के कई सदस्यों की भावनाओं के बिल्कुल विपरीत था। कुछ मंत्री सहायकों के सरकार छोड़ने के बाद एक कनिष्ठ मंत्री ने इस्तीफा दे दिया। 80 ​​से अधिक लेबर सांसदों ने सार्वजनिक रूप से उनसे इस्तीफे की तारीख तय करने का आग्रह किया है, ताकि पार्टी व्यवस्थित तरीके से एक नए नेता का चयन कर सके। स्टारमर की टिप्पणियों के बाद ब्रिटिश सरकारी बॉन्डों में मामूली उछाल आया, लेकिन दिन भर उनमें गिरावट बनी रही। उनका यह रुख उनकी लेबर पार्टी के कई सदस्यों की भावनाओं के बिल्कुल विपरीत था।इसे भी पढ़ें:  बंगाल के लिए सड़क पर क्यों नाचा ब्रिटिश नेता, सच जानकर रह जाएंगे हैरान!कुछ मंत्री सहायकों के सरकार छोड़ने के बाद एक कनिष्ठ मंत्री ने भी इस्तीफा दे दिया। 80 ​​से अधिक लेबर सांसदों ने सार्वजनिक रूप से उनसे इस्तीफे की तारीख तय करने का आग्रह किया है, ताकि पार्टी व्यवस्थित तरीके से एक नए नेता का चयन कर सके। स्टारमर ने सोमवार को ब्रिटेन की कई समस्याओं से निपटने के लिए अधिक साहस और तत्परता से कार्रवाई करने का वादा करके अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की थी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:12:07 +0530</pubDate>
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<title>बड़ा हादसा टला! Chennai में Etihad Flight में उड़ान से ठीक पहले तकनीकी खराबी, 280 यात्री सुरक्षित</title>
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<description><![CDATA[ चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हाइड्रोलिक रिसाव के कारण एतिहाद एयरवेज की एक फ्लाइट, जिसमें लगभग 280 यात्री सवार थे, मंगलवार को अबू धाबी जा रही थी, लेकिन इंजीनियरिंग टीम ने उसे रोक दिया। उड़ान भरने की तैयारी कर रही चेन्नई-अबू धाबी फ्लाइट के यात्रियों को बाद में विमान से उतार दिया गया और एयरबस ए320 (ए6-ईआईटी) विमान को वापस स्टैंड पर लाया गया। एयरलाइन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि न तो मार्ग परिवर्तन हुआ और न ही आग लगने की कोई घटना हुई। कुछ शुरुआती समाचार रिपोर्टों में बताया गया था कि विमान के उड़ान भरने की तैयारी के दौरान उसके बाएं पंख में आग लग गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि दमकल कर्मियों ने तुरंत स्थिति पर काबू पा लिया, जिसके बाद उड़ान रद्द कर दी गई।इसे भी पढ़ें: CM पद की शपथ लेते ही Joseph Vijay को मिली PM Modi की बधाई, कहा- मिलकर करेंगे विकासएक आधिकारिक बयान में एतिहाद ने कहा कि EY343 उड़ान का टेक-ऑफ एक &quot;तकनीकी समस्या&quot; के कारण रद्द कर दिया गया था, हालांकि उसने इसके बारे में कोई विशिष्ट जानकारी नहीं दी। एयरलाइन ने कहा, उड़ान लगभग तीन घंटे देरी से रवाना होने की उम्मीद है। चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (MAA) के सुरक्षा प्रोटोकॉल के आधार पर एहतियात के तौर पर आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय कर दिया गया था। एतिहाद ने कहा कि वह प्रभावित यात्रियों को उनकी आगे की यात्रा में सहायता कर रहा है। उसने यात्रियों से आग्रह किया कि वे सुनिश्चित करें कि उनके अद्यतन संपर्क विवरण एयरलाइन के पास उपलब्ध हों ताकि उन्हें उड़ान से संबंधित सभी नवीनतम जानकारी प्राप्त हो सके। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:12:06 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिकन मेयर निकली चीन की जासूस, मचा भयंकर बवाल!</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका को एक और तगड़ा झटका लगा क्योंकि अमेरिकी मेयर पर अब चीन के लिए जासूसी करने का आरोप लगा। कैलिफोर्निया की एक मेयर पर चीन के लिए गुप्त तरीके से काम करने का आरोप लगा है। अमेरिकी न्याय विभाग की कारवाई के बाद इस मामले ने अमेरिका की राजनीति और सुरक्षा तंत्र में हलचल मचा दी। आरोप है कि चीन अमेरिकी लोकतांत्रिक संस्थाओं में अपने प्रभाव का जाल बिछाने की कोशिश कर रहा था और इसके लिए स्थानीय नेताओं तक को इस्तेमाल किया गया। दरअसल दक्षिणी कैलिफोर्निया के आकेडिया शहर की मेयर एललीन बांग ने अचानक इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा उस समय आया जब अमेरिकी न्याय विभाग ने खुलासा किया कि उन पर चीन के लिए अवैध विदेशी एजेंट के तौर पर काम करने का आरोप तय किया गया। 58 साल की वांग ने मामले में दोष स्वीकार करने पर सहमति भी जताई। इसे भी पढ़ें: US हमले के डर से Iran ने खुफिया विमान Pakistan भेजे? Islamabad ने आरोपों पर दी ये सफाईइस आरोप में उन्हें 10 साल तक की जेल हो सकती है और देखा जाए तो यह अमेरिका के लिए इसलिए भी बड़ा झटका है क्योंकि आज अगर अमेरिका के लिए कोई सबसे बड़ी चुनौती है तो वो चीन ही है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यनिंग माइक सन नाम के एक अन्य व्यक्ति ने चीन के हितों को बढ़ावा देने के लिए काम किया। दोनों पर ही आरोप है कि उन्होंने अमेरिका में रह रहे चीनी मूल के लोगों को प्रभावित करने के लिए प्रोपोगेंडा चलाया। इसलिए उन्होंने यूएस न्यूज़ सेंटर नाम की वेबसाइट का इस्तेमाल भी किया। जिसे स्थानीय चीनी अमेरिकी समुदाय के समाचार मंच के तौर पर पेश किया जाता है। जून 2021 में चीन के एक अधिकारी ने एनक्रिप्टेड रिचार्ज ग्रुप में पहले से तैयार लेख भेजे। इनमें शिनजियांग मुद्दे पर चीन का पक्ष रखा गया था। लेख में कहा गया था कि शिनजियांग में नरसंहार या जबरन मजदूरी जैसी बातें सिर्फ अफवाह हैं। इसे भी पढ़ें: US की नजर अब Northeast पर, Assam संग नई Partnership को तैयार, राजदूत Sergio Gor का बड़ा बयानआरोप है कि एललीन बांग ने कुछ ही मिनटों में इस आर्टिकल को अपनी वेबसाइट पर पोस्ट कर दिया और लिंक वापस चीनी अधिकारी को भेज दिया गया। जवाब में अधिकारी ने लिखा बहुत तेजी से काम हुआ। धन्यवाद। अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि यह सिर्फ मीडिया प्रचार का मामला नहीं था। बल्कि चीन की ओर से अमेरिकी संस्थाओं में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा था। जांच में सामने आया कि चीन के सरकारी अधिकारियों से आर्टिकल और तमाम संदेश पोस्ट किए जाते। हालांकि जांच में यह भी सामने आया कि बांग की बातचीत चीन के खुफिया नेटवर्क से जुड़े लोगों से भी हुई थी। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक 2021 में उन्होंने चीन के प्रभावशाली व्यक्ति जॉन चेन से संपर्क किया। चैन पर आरोप है कि उसके संबंध सीधे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेटवर्क तक थे। अमेरिकी न्याय विभाग ने साफ कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है क्योंकि किसी विदेशी सरकार के लिए गुप्त रूप से काम करना या जासूसी करना अमेरिकी लोकतंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को सिर्फ अमेरिकी लोगों के हित में काम करना चाहिए किसी विदेशी ताकत के लिए नहीं। इसे भी पढ़ें: वैश्विक संकट के दौर में दूरगामी सोच का परिणाम है प्रधानमंत्री की अपीलवहीं आरकेडिया प्रशासन ने भी इस मामले को चिंताजनक बताया है। हालांकि शहर प्रशासन का कहना है कि जिन गतिविधियों की जांच हो रही है वो वांग के मेयर बनने से पहले की है और शहर की सरकारी व्यवस्था या फंड का इस्तेमाल इसमें नहीं किया गया। वहीं इस पूरे मामले ने अमेरिका में चीन की बढ़ती घुसपैठ और प्रभाव अभियान को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अमेरिकी एजेंसियां लगातार आरोप लगाती रही हैं कि चीन सिर्फ आर्थिक और सैन्य स्तर पर नहीं बल्कि राजनीतिक और सूचना तंत्र में भी प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:12:05 +0530</pubDate>
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<title>अब हमला किया तो परमाणु बम...ईरान की अमेरिका को खुली धमकी</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका उसके क्षेत्र पर एक और हमला करता है, तो वह परमाणु सीमा पार कर जाएगा और यूरेनियम संवर्धन को हथियार-योग्य स्तर तक बढ़ा देगा। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कुछ सहयोगियों ने कहा है कि वह अब ईरान में सैन्य अभियान फिर से शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ईरान की संसदीय राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के प्रवक्ता इब्राहिम रेज़ाई ने कहा कि तेहरान 90 प्रतिशत शुद्धता तक यूरेनियम का संवर्धन कर सकता है, जो परमाणु हथियारों के लिए उपयुक्त स्तर माना जाता है। रेज़ाई ने एक्स पर लिखा कि ईरान के पास एक और हमले की स्थिति में 90 प्रतिशत संवर्धन का विकल्प हो सकता है। हम संसद में इसकी समीक्षा करेंगे। यह टिप्पणी ट्रंप द्वारा वाशिंगटन और तेहरान के बीच नाजुक युद्धविराम पर सवाल उठाने के 24 घंटे से भी कम समय बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान द्वारा महीनों से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिका समर्थित प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद युद्धविराम &quot;जीवन रक्षक यंत्र&quot; पर है।परमाणु गतिरोध ने युद्धविराम को खतरे में डाल दिया हैईरान का परमाणु कार्यक्रम विवाद का मूल कारण है, विशेष रूप से लगभग 400 किलोग्राम यूरेनियम का भविष्य, जिसे पहले ही 60 प्रतिशत शुद्धता तक संवर्धित किया जा चुका है, जो हथियार-स्तर से थोड़ा ही नीचे है। पिछले जून में ट्रंप ने घोषणा की थी कि 12 दिनों के युद्ध के दौरान अमेरिका और इज़राइल के हमलों ने ईरान की परमाणु सुविधाओं को &quot;नष्ट&quot; कर दिया था। लेकिन अमेरिकी खुफिया आकलन से पता चला है कि तेहरान का परमाणु कार्यक्रम तब तक जीवित रह सकता है जब तक कि अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को या तो नष्ट नहीं कर दिया जाता या देश से बाहर नहीं ले जाया जाता। इसे भी पढ़ें: IRGC की सहायता का आरोप, बहरीन ने  3 लोगों को सुनाई आजीवन कारावास की सजाट्रम्प चाहते हैं कि ईरान संवर्धित यूरेनियम सौंप दे और अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ दे। हालांकि, तेहरान का कहना है कि परमाणु मुद्दों पर बातचीत के बाद के चरणों में ही चर्चा होनी चाहिए और उसने अपने संप्रभु अधिकार माने जाने वाले इस अधिकार को छोड़ने की मांग को खारिज कर दिया है। ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करने, युद्ध से संबंधित नुकसान के लिए मुआवजे और लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह से जुड़े सैन्य अभियानों को रोकने की भी मांग की है। दोनों पक्षों के बीच विश्वास का टूटना तब और स्पष्ट हो गया जब ट्रम्प ने अमेरिकी प्रस्ताव पर तेहरान की नवीनतम प्रतिक्रिया की कड़ी आलोचना की। ट्रम्प ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि उन्होंने हमें जो बकवास भेजा है, उसे पढ़ने के बाद मैं इसे अभी का सबसे कमजोर प्रस्ताव कहूंगा। मैंने इसे पूरा पढ़ा भी नहीं।&quot; अमेरिकी प्रस्ताव का उद्देश्य ईरान की परमाणु गतिविधियों सहित अधिक विवादास्पद मुद्दों पर बातचीत शुरू करने से पहले लड़ाई को रोकना था।दबाव बढ़ने के साथ ईरान का रुख और कड़ा होता जा रहा हैमंगलवार को ईरानी अधिकारियों ने समझौता करने के बजाय कड़ा रुख अपनाते हुए अपना विरोध जताया। सरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर नेवी के उप राजनीतिक निदेशक मोहम्मद अकबरज़ादेह के हवाले से बताया कि तेहरान ने नई सैन्य रणनीति के तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य की अपनी परिचालन परिभाषा का विस्तार किया है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अब जास्क से लेकर सिरी द्वीप तक फैले एक विस्तृत समुद्री क्षेत्र को अपने परिचालन क्षेत्र का हिस्सा मानता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:12:04 +0530</pubDate>
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<title>Thailand Holiday पर मातम! Phuket कैफे में 4 भारतीय पर्यटक बेहोश, एक की मौत से मचा हड़कंप</title>
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<description><![CDATA[ थाईलैंड के फुकेत में एक कैफे में रहस्यमय तरीके से बेहोश होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए चार पर्यटकों में से एक भारतीय नागरिक की मंगलवार को मौत हो गई। यह जानकारी यहां स्थित भारतीय दूतावास ने दी। नकी मृत्यु के कारणों का तत्काल पता नहीं चल पाया है। दूतावास ने कहा कि वह थाई अधिकारियों के संपर्क में है और 9 मई को फुकेत में चार भारतीय पर्यटकों के बेहोश होने और बाद में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराए जाने की घटना पर कड़ी नजर रख रहा है। भारतीय दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि इनमें से एक युवा भारतीय पर्यटक की मृत्यु पर हम अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। दूतावास के अधिकारी मृतक के परिवार के संपर्क में हैं और इस दुख की घड़ी में उन्हें हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं। दूतावास ने आगे कहा कि हम घटना की जांच कर रहे संबंधित थाई अधिकारियों के संपर्क में हैं और अन्य लोगों के स्वास्थ्य की स्थिति पर भी नजर रख रहे हैं।इसे भी पढ़ें: विज्ञापनों में AI के इस्तेमाल पर ASCI सख्त, Deepfake रोकने को जारी किए नए Draft Guidelinesदूतावास ने घटना के बारे में और कोई जानकारी नहीं दी।थाई मीडिया के अनुसार, स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि यह घटना शनिवार तड़के काठू जिले के कमला बीच इलाके में हुई। कैफे के सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि शुक्रवार रात करीब 11 बजे पांच भारतीय एक साथ कैफे पहुंचे। लगभग 1:54 बजे, उनमें से चार एक-एक करके बेहोश हो गए। बैंकॉक पोस्ट के अनुसार, उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। शनिवार दोपहर करीब 2 बजे पुलिस को सूचना मिली कि एक व्यक्ति की मौत हो गई है। अखबार ने आगे बताया कि बाकी तीन लोगों की हालत स्थिर है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:12:04 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान में युद्धविराम के बावजूद हमले जारी, भीषण होते मानवीय हालात</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र ने आगाह किया कि इसराइल और लेबनान के बीच 17 अप्रैल को घोषित युद्धविराम के बावजूद, लेबनान में मानवीय स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. पिछले 24 घंटों के दौरान ही 100 से अधिक हमले होने की ख़बरें मिली हैं जिनमें कम से कम 87 लोग मारे गए हैं. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:11:21 +0530</pubDate>
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<title>क़ाबिज़ पश्चिमी तट: &amp;apos;बच्चों के स्कूलों, घरों व बचपन को ढहाया जा रहा है&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने आगाह किया है कि क़ाबिज़ पश्चिमी तट में इसराइल की सैन्य कार्रवाई और इसराइली बस्तियों के निवासियों के बढ़ते हमलों में अपनी जान गँवाने वाले व घायल फ़लस्तीनी बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है और उनके जीवन के लिए आवश्यक सेवाओं को ध्वस्त किया जा रहा है. उधर, ग़ाज़ा में हिंसा में घायल होने वाले हज़ारों बच्चों का जीवन पूरी तरह से बदल गया है लेकिन उनकी उपचार व पुनर्वास सेवाओं तक पहुँच नहीं है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:11:20 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan ने अमेरिका से की गद्दारी! ट्रंप के सांसद ने भयंकर बवाल काट दिया</title>
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<description><![CDATA[ जो पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता करवाने का ढोंग कर रहा था और खुद को एक मध्यस्थ की तरह पेश कर रहा था। अब उसकी पोल पूरी दुनिया के सामने एक बार फिर से खुल गई है और अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप की पीठ में छुरा घोंपा है? रिपोर्ट सामने आई है कि पाकिस्तान चोरी छिपे ईरान के जासूसी विमानों को पनाह दे रहा था और पाकिस्तान की इस हरकत पर अब ट्रंप के करीबी सांसद का बड़ा बयान सामने आया है। दरअसल अमेरिकी मीडिया सीबीएस न्यूज़ में छपी रिपोर्ट में दावा किया गया कि ईरान ने अपने कुछ सैन्य और निगरानी विमान पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर खड़े किए थे। जिनमें ईरान का RC130 जासूसी विमान भी शामिल था। खुफिया जानकारी जुटाने के काम आता है। और इस रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने ऐसा इसलिए किया ताकि अमेरिकी एयर स्ट्राइक से वो अपने विमानों को बचा सके। पाकिस्तान ने इन ईरानी जहाजों को अपने एयरबेस पर चुपचाप जगह दे दी।  इसे भी पढ़ें: ये किस देश के विदेश मंत्री बने एस जयशंकर! हैरान कर देगा ये Videoइस पूरे मामले पर ट्रंप के करीबी और अमेरिकी सेनेटर लिंस से ग्राहम का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अगर यह रिपोर्ट सच है तो पाकिस्तान की भूमिका का अमेरिका को पूरी तरीके से मूल्यांकन दोबारा से करना पड़ेगा। ग्राहम ने तो यहां तक कह दिया कि पाकिस्तान के कुछ नेताओं के पुराने बयान को देखते हुए उन्हें इस रिपोर्ट के सच होने पर भी कोई हैरानी नहीं होगी। यानी उन्हें पहले से भरोसा है कि पाकिस्तान ऐसे डबल गेम को अंजाम दे सकता है। पाकिस्तान पूरी दुनिया के सामने पिछले कुछ महीनों से खुद को शांति दूत की तरह दिखा रहा है और एक मध्यस्थ बनने का ढोंग कर रहा है और इसलिए उसने अप्रैल के महीने में इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच मीटिंग भी रखवाई जो कि बेनतीजा रही। लेकिन पाकिस्तान ने इस पूरे घटना का फायदा अपनी छवि को बेहतर करने के लिए उठाया और शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की तारीफ जमकर ट्रंप की ओर से भी सामने आई।  इसे भी पढ़ें: Pakistan का नया Victory Day? Shehbaz Sharif का ऐलान- भारत से संघर्ष को &#039;मरका-ए-हक&#039; के रूप में मनाएंगेअब पाकिस्तान का सच एक बार फिर सामने आ गया है। जहां उसने अमेरिका के साथ डबल गेम कर दिया है और उसके नाक के नीचे ही ईरानी जासूसी जहाजों को अपने एयरबेस पर जगह दे दी। इस रिपोर्ट पर ट्रंप के करीबी सांसद लिंसे ग्राम का रिएक्शन भी इसी ओर इशारा करता है कि पाकिस्तान पर उन्हें भरोसा नहीं है। जिस तरह से उन्होंने अपने बयान में कहा कि मुझे कोई हैरानी नहीं होगी। अगर यह रिपोर्ट सही साबित होती है। कुछ समय पहले भी अमेरिका से एक रिपोर्ट बाहर आई थी। जिसमें पाकिस्तान के आर्मी प्रमुख आसिम मुनीर को अमेरिका के लिए खतरा बताया गया था और उस रिपोर्ट में भी आसिम मुनीर की ईरानी सैनी लीडरों के साथ करीबी को एक भारी चिंता बताया गया था। हालांकि पाकिस्तान ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। पाक अधिकारियों का कहना है कि नूरखान एयरबेस शहर के बीचोंबीच है। वहां पर इतने बड़े सैन्य विमान छुपाना संभव ही नहीं है। लेकिन सवाल तो यह उठता है कि अगर सब कुछ गलत है तो अमेरिकी अधिकारियों की ओर से इतनी गंभीर जानकारी मीडिया तक आखिर कैसे पहुंचाई गई है। इस पूरे मामले में चीन का भी नाम सामने आ रहा है क्योंकि पाकिस्तान की सेना काफी हद तक चीनी हथियारों और चीनी तकनीक पर ही आजकल निर्भर करती है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:09:00 +0530</pubDate>
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<title>US हमले के डर से Iran ने खुफिया विमान Pakistan भेजे? Islamabad ने आरोपों पर दी ये सफाई</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के दौरान ईरान ने कथित तौर पर संभावित अमेरिकी हवाई हमलों से बचाव के लिए कई सैन्य विमानों को पाकिस्तान भेजा है। खबरों के मुताबिक, एहतियात के तौर पर कुछ ईरानी नागरिक विमानों को भी पड़ोसी देश अफगानिस्तान भेजा गया है। सीबीएस न्यूज़ की एक रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा अप्रैल की शुरुआत में युद्धविराम की घोषणा के तुरंत बाद कई ईरानी विमान पाकिस्तान के नूर खान हवाई अड्डे पर पहुंचे। अधिकारियों ने कथित तौर पर दावा किया कि इन विमानों में सैन्य और खुफिया साजो-सामान शामिल थे।इसे भी पढ़ें: ट्रंप से नफरत अब &#039;मानसिक बीमारी&#039;! इसका इलाज- प्रेसिडेंट पर भरोसा रखें और राष्ट्रगान सुनें, वायरल हुआ अनोखा प्रिस्क्रिप्शन उल्लेखित विमानों में ईरानी वायु सेना का एक आरसी-130 टोही विमान भी शामिल था, जो लॉकहीड सी-130 हरक्यूलिस परिवहन विमान का खुफिया जानकारी जुटाने वाला संस्करण है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि यह कदम क्षेत्रीय अशांति के दौरान ईरान के महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों को असुरक्षित होने से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया था। पाकिस्तान ने आरोपों को खारिज कियापाकिस्तान ने इन दावों का पुरजोर खंडन करते हुए रिपोर्टों को गलत और भ्रामक बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस्लामाबाद द्वारा ईरानी सैन्य या निगरानी विमानों को गुपचुप तरीके से पनाह देने के आरोप पूरी तरह झूठे हैं। इस्लामाबाद के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ईरान से जुड़ी किसी भी विमान गतिविधि का संबंध केवल इस्लामाबाद में चल रही वार्ता के लिए किए गए राजनयिक और रसद संबंधी इंतज़ामों से था। पाकिस्तानी अधिकारियों ने ज़ोर देकर कहा कि तेहरान को किसी भी प्रकार की सैन्य सुरक्षा या गुप्त सहायता प्रदान नहीं की गई है।राजनयिक संतुलनइस विवाद ने एक बार फिर पाकिस्तान को एक संवेदनशील राजनयिक स्थिति में डाल दिया है, क्योंकि वह क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। जहां इस्लामाबाद ने मौजूदा तनाव के दौरान खुद को मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की है, वहीं नवीनतम आरोपों ने मध्य पूर्व की व्यापक स्थिति में उसकी भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:08:53 +0530</pubDate>
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<title>Operation सिंदूर में Pakistan की मदद पर भड़का भारत, China को दी चेतावनी&#45; साख पर पड़ेगा असर</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने मंगलवार को उन रिपोर्टों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी जिनमें दावा किया गया था कि चीन ने पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की मदद की थी। भारत ने कहा कि जो देश खुद को जिम्मेदार मानते हैं, उन्हें इस बात पर विचार करना चाहिए कि ऐसे कार्यों का उनकी वैश्विक प्रतिष्ठा पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह प्रतिक्रिया तब आई जब एक चीनी अधिकारी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों पड़ोसी देशों के बीच बढ़े तनाव के बाद, बीजिंग ने भारत के साथ संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को मौके पर तकनीकी सहायता प्रदान की थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि हमने ये रिपोर्टें देखी हैं जो पहले से ज्ञात बातों की पुष्टि करती हैं। ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम में हुए आतंकी हमलों का एक सटीक, लक्षित और सुनियोजित जवाब था, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान से संचालित और उसके इशारे पर काम कर रहे राज्य प्रायोजित आतंकी ढांचे को नष्ट करना था।उन्होंने आगे कहा, जो देश खुद को जिम्मेदार मानते हैं, उन्हें इस बात पर विचार करना चाहिए कि आतंकी ढांचे की रक्षा के प्रयासों का समर्थन करना उनकी प्रतिष्ठा और वैश्विक प्रतिष्ठा को प्रभावित करता है या नहीं।इसे भी पढ़ें: ऑपरेशन सिंदूर में Pakistan की मदद पर भारत की China को दो टूक, &#039;आतंक का साथ साख खराब करेगा&#039;ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान को चीन की मदद22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में लश्कर से जुड़े आतंकवादियों द्वारा 26 पर्यटकों की गोली मारकर हत्या करने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया। इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए सैन्य हमले शुरू किए। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह चीनी मीडिया द्वारा प्रसारित एक साक्षात्कार में, चीन के विमानन उद्योग निगम के चेंगदू विमान डिजाइन और अनुसंधान संस्थान के इंजीनियर झांग हेंग ने पाकिस्तानी अभियानों में चीन की प्रत्यक्ष भागीदारी के बारे में बात की। हेंग उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को तकनीकी सहायता प्रदान की थी। उन्होंने कहा कि सहायता केंद्र पर, हम अक्सर लड़ाकू विमानों के उड़ान भरने की गर्जना और हवाई हमले के सायरन की लगातार आवाज सुनते थे। मई में देर सुबह तक तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच जाता था। यह हमारे लिए मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से एक कठिन परीक्षा थी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:08:51 +0530</pubDate>
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<title>IRGC की सहायता का आरोप, बहरीन ने  3 लोगों को सुनाई आजीवन कारावास की सजा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम टूटने के नए संकेत दे रहा है, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने युद्ध समाप्त करने के लिए तेहरान के नवीनतम जवाबी प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसमें ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं का समाधान नहीं किया गया है। ट्रम्प ने युद्धविराम को जीवन रक्षक यंत्र पर बताया, जबकि उनके कुछ सहयोगी अब ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान फिर से शुरू करने की संभावना पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, ट्रम्प के चीन रवाना होने से पहले कोई बड़ा फैसला आने की उम्मीद नहीं है, जहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत में ईरान का दबदबा रहने की भी संभावना है। इसे भी पढ़ें: अनकहा लॉकडाउन? कितना बड़ा है आने वाला संकट, इससे निकलने का क्या है फॉर्मूला, आंकड़ों से समझें पूरा जियोपॉलिटिकल अर्थशास्त्रतनाव के उच्च स्तर पर बने रहने के बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता के एक सलाहकार ने ट्रम्प को चेतावनी दी कि वे लड़ाई में मौजूदा विराम को जीत न समझें। इस बीच, ईरान में लगभग पूरी तरह से इंटरनेट बंद 74वें दिन में प्रवेश कर चुका है, निगरानी समूह नेटब्लॉक्स का कहना है कि यह बंद 1,752 घंटे से अधिक समय तक चला है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि युद्ध समाप्त होने के बाद ही इंटरनेट पूरी तरह से बहाल होगा। लेबनान में, स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल में युद्धविराम लागू होने के बाद से इजरायली हवाई हमलों और तोपखाने की गोलीबारी में कम से कम 380 लोग मारे गए हैं। हिज़्बुल्लाह नेता नईम कासिम ने ज़ोर देकर कहा है कि समूह के हथियारों पर इज़राइल के साथ कोई बातचीत नहीं होगी। इस संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएँ भी बढ़ रही हैं। कतर ने तेहरान को चेतावनी दी है कि वह खाड़ी देशों के खिलाफ होर्मुज़ जलडमरूमध्य का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए न करे, वहीं सऊदी ऊर्जा अधिकारियों ने आगाह किया है कि अगर यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग जल्द ही नहीं खुलता है तो इस साल तेल बाज़ार स्थिर नहीं हो पाएंगे। इसे भी पढ़ें: US हमले के डर से Iran ने खुफिया विमान Pakistan भेजे? Islamabad ने आरोपों पर दी ये सफाईईरान युद्ध में अब तक वाशिंगटन को 29 अरब डॉलर का खर्च आयापेंटागन के अद्यतन अनुमानों के अनुसार, ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियान में अब तक वाशिंगटन को 29 अरब डॉलर का खर्च आ चुका है। यह आंकड़ा पिछले महीने के अंत में जारी अनुमानों से 4 अरब डॉलर अधिक है। पेंटागन के नियंत्रक के रूप में कार्यरत जूल्स हर्स्ट ने सांसदों को बताया कि अद्यतन कुल राशि में सैन्य संपत्तियों की मरम्मत और प्रतिस्थापन लागत के साथ-साथ युद्ध प्रयासों से संबंधित चल रहे परिचालन खर्च भी शामिल हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:08:47 +0530</pubDate>
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<title>PM Modi के पहुंचने से पहले भारत से खूंखार हथियार लेकर निकला UAE!  वैश्विक कूटनीति में सनसनी</title>
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<description><![CDATA[ बीती रात जब दिल्ली सो रही थी तब इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे पर एक ऐसी हलचल हुई जिसने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में सनसनी मचा दी। दिल्ली एयरपोर्ट की रैंप पर खड़ा था यूएई वायुसेना का महाबली बोइंग C17 ग्लोब मास्टर 3। चार धधकते हुए इंजन, 51 मीटर से ज्यादा चौड़े पंख और 77 टन पेलोड ले जाने की क्षमता रखने वाला यह विमान भारत की धरती पर उतरा। यह कोई सामान्य लैंडिंग नहीं थी। यह लैंडिंग ठीक उस वक्त हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने यूएई दौरे पर निकलने वाले हैं। दरअसल मित्रता की असली परीक्षा संकट के समय होती है। पिछले कुछ हफ्तों में मिडिल ईस्ट का माहौल गमाया हुआ है। ईरान ने यूएई के फुजेरा पेट्रोलियम जोन पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।  जिसमें ना केवल संपत्ति का नुकसान हुआ बल्कि तीन भारतीय नागरिकों के घायल होने की खबर भी सामने आई जिसने भारत की चिंता बढ़ा दी। अब यूएई को अपनी डिफेंस इन्वेंटरी को तुरंत रिफिल करने की जरूरत थी और ऐसे समय में उसने दुनिया के किसी और देश की तरफ नहीं बल्कि भारत की तरफ देखा। आधिकारिक पुष्टि भले ही नहीं हो लेकिन रणनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दिल्ली में उतरे इस विमान में भारत की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोट भारत डायनामिक्स और एलएटी द्वारा निर्मित घातक डिफेंस सप्लाई लोड की गई है और यह संदेश साफ दे दिया गया है कि अगर यूएई की सुरक्षा पर आंच आएगी तो भारत हाथ पर हाथ रखे नहीं बैठेगा। इसे भी पढ़ें: कैसे गुपचुप तरीके से ईरान के साथ युद्ध में शामिल हो गया UAE? तेल रिफाइनरी को बनाया था निशानाभारत और यूएई दोनों ही C17 ग्लोब मास्टर उड़ाते हैं। भारत के पास 11 और यूएई के पास 18 विमानों का बेड़ा है। एक ही तरह का प्लेटफार्म होने की वजह से दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक और मेंटेनेंस शेयरिंग बेहद आसान हो गई है। जब यूएई का विमान दिल्ली आता है तो हमारे ग्राउंड रूट उसे अपने विमान की तरह हैंडल करते हैं। यही वो इंटर ऑपरेटिबिलिटी है जो भारत और यूएई के स्ट्रेटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप का असली आधार है। असली नीव है। अब सबसे बड़ी बात प्रधानमंत्री मोदी अपनी यूरोप यात्रा के दौरान यूएई में रुकेंगे और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात भी करेंगे। जनवरी 2026 में जो लेटर ऑफ इवेंट साइन हुआ था अब उसे एक पूर्ण रक्षा समझौते में बदलने का वक्त आ गया है। इस पार्टनरशिप के छह प्रमुख स्तंभ है। पहला है मिसाइल और ड्रोन का साझा उत्पादन। अब केवल खरीदफरोख्त नहीं बल्कि मिलकर हथियार बनाए जाएंगे। दूसरा है जॉइंट आरएडी। भविष्य की तकनीक पर दोनों देशों के वैज्ञानिक साथ में काम करेंगे। तीसरा है स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग। रेगिस्तानी युद्ध और काउंटर टेररिज्म में महारत साझा करेंगे। चौथा है लॉजिस्टिक सपोर्ट। एक दूसरे के बेस और संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। पांचवा है साइबर सुरक्षा यानी कि डिजिटल खतरों से मिलकर लड़ना। आतंकवाद पर कड़ा प्रहार। कट्टरपंथ के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बनाया जाएगा। अब दोस्तों इस पूरी कहानी के पीछे एक मास्टरमाइंड भी है भारत के एनएसए अजीत डोबाल। हाल ही में डोभाल साहब ने यूएई और सऊदी अरब की गुप्त यात्राएं की। मकसद साफ था ईरान इजराइल तनाव के बीच भारत के हितों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना कि पश्चिमी एशिया में भारत का स्ट्रेटेजिक फुटप्रिंट इतना गहरा हो जाए कि कोई भी ताकत हमें नजरअंदाज ना कर सके। इसे भी पढ़ें: वैश्विक संकट के बीच सबसे बड़े कूटनीतिक मिशन पर निकल रहे हैं मोदी, विश्व राजनीति में होगा बड़ा उलटफेरभारत और यूएई के बीच का रिश्ता आज 100 बिलियन डॉलर के व्यापार को पार कर चुका है। 35 लाख भारतीय भाई-बहन यूएई की तरक्की में पसीना बहा रहे हैं। मेहनत कर रहे हैं। भारत की ऊर्जा सुरक्षा का 25% हिस्सा यूएई से आता है। लेकिन अब यह रिश्ता संबंध सिर्फ तेल और रेमिटेंस तक सीमित नहीं है। अब यह रिश्ता टैंक, मिसाइल और रणनीतिक सुरक्षा का बन चुका है। वैसे आपको बता दें कि भारत और यूएई के बीच पनप रही यह नई डिफेंस केमिस्ट्री केवल कूटनीति नहीं बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों का एक बड़ा संकेत है क्योंकि भारत के हथियारों की धमक पूरी दुनिया में है और यूएई भी भारत से हथियार मांग रहा है। ऐसे में क्या भारत अपने तीन सबसे घातक हथियार ब्रह्मोस आकाश और पिनाका यूएई को सौंप सकता है? यह भी समझ लेते हैं। देखिए सबसे पहले बात समंदर के सिकंदर ब्रह्मोस की। दोस्तों, ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल है। इसकी 2.8 मैग की रफ्तार इसे किसी भी रडार की पकड़ से बाहर और किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए अजय बनाती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:08:45 +0530</pubDate>
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<title>WHO: डॉक्टर टैड्रॉस हंटावायरस प्रभावित जहाज़ के लिए टेनेरीफ़ पहुँचे</title>
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<description><![CDATA[ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने, हंटावारयस के संक्रमण वाले मरीज़ों को ले जा रहे MV Hondius जहाज़ के रविवार को टेनेरीफ़ द्वीप पर पहुँचने के अवसर पर, वहाँ के निवासियों से शान्ति बनाए रखने की अपील की है.  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:07:53 +0530</pubDate>
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<title>&amp;apos;अफ़्रीका बढ़त सम्मेलन&amp;apos;: गुटेरेश ने दिया अफ़्रीकी नेतृत्व पर ज़ोर</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि अफ़्रीका अपनी बढ़त लगातार जारी रखे हुए और विशाल पैमाने पर निवेश, वैश्विक प्रणालियों में न्याय व परस्पर सम्मान पर आधारित साझीदारियों की मांग कर रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:07:49 +0530</pubDate>
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<title>भारत: एक छोटा टीका, हर बच्चे के लिए बड़ा वादा</title>
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<description><![CDATA[ भारत का सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम हर वर्ष करोड़ों लोगों तक पहुँचता है. स्वास्थ्यकर्मियों, वैक्सीन आपूर्ति प्रणालियों और डिजिटल मंचों की मदद से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि देश के हर हिस्से में बच्चों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिल सके. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:07:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Turkish Airlines Fire | काठमांडू एयरपोर्ट पर टर्किश एयरलाइंस के विमान में लगी आग, बाल&#45;बाल बचे 277 यात्री</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (TIA) पर सोमवार सुबह उस समय बड़ा हादसा टल गया, जब इस्तांबुल से आ रहे टर्किश एयरलाइंस के एक विमान में लैंडिंग के दौरान आग लग गई। विमान में सवार सभी 277 यात्री और चालक दल सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना के कारण हवाई अड्डे को उड़ानों के लिए अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। हवाई अड्डे के अधिकारियों के अनुसार इस्तांबुल से आ रहा एक विमान काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा, जहां उसके दाहिने लैंडिंग गियर पर आग और धुआं दिखाई दे रहा था।इसे भी पढ़ें: Numerology 11 May: किन मूलांक वालों को मिलेगा Money और बंपर Success? जन्मतिथि से जानें अपना भविष्यफल 
 उन्होंने बताया कि आपात दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पाया और यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया।
घटना के बाद सोमवार सुबह हवाई अड्डा बंद कर दिया गया। एयरबस 330 विमान में 277 यात्री सवार थे।
 अधिकारियों द्वारा जांच किए जाने और हवाई अड्डे पर उपलब्ध एकमात्र रनवे को खाली कराने के प्रयास के दौरान यहां आने वाले कई विमानों को रोक दिया गया।
 नेपाल में पर्वतीय क्षेत्र होने और परिवर्तनशील मौसम से उड़ान परिस्थितियां कठिन होती हैं और अपेक्षाकृत अधिक विमान दुर्घटनाएं होती हैं। पुरानी यादें हुई ताज़ा:यह पहली बार नहीं है जब टर्किश एयरलाइंस के साथ काठमांडू में ऐसा हुआ हो।साल 2015 की घटना: घने कोहरे के बीच लैंडिंग करते समय टर्किश एयरलाइंस का एक विमान रनवे से फिसल गया था। उस हादसे के कारण हवाई अड्डा कई दिनों तक बंद रहा था।विमान बना संग्रहालय: 2015 की उस दुर्घटना में भी कोई हताहत नहीं हुआ था, और बाद में उस विमान को हटाकर काठमांडू में ही एक विमान संग्रहालय (Aviation Museum) में तब्दील कर दिया गया था।इसे भी पढ़ें: Somnath Amrit Mahotsav LIVE: सोमनाथ मंदिर के 75 साल; PM Modi की मौजूदगी में 11 तीर्थों के जल से होगा महा-कुंभाभिषेक फिलहाल तकनीकी टीम विमान की जांच कर रही है ताकि आग लगने के सही कारणों का पता लगाया जा सके। यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है और रनवे को जल्द ही सामान्य परिचालन के लिए खोलने की उम्मीद है। Stay updated with International
News in Hindi on Prabhasakshi  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:28:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>बंगाल में BJP की जीत पर शेख हसीना ने जो कहा, हिले कट्टरपंथी!</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक ऐसा भूचाल आया है जिसकी गूंज सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं रही है बल्कि बांग्लादेश तक भी वह सुनाई देने लगी है। कोलकाता के परेड ग्राउंड में बीजेपी की पहली सरकार ने शपथ ली और शुभेंदु अधिकारी अब आधिकारिक तौर पर पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री बन चुके हैं। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की हो रही है वो है बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खास बयान की। जैसे ही शेख हसीना ने शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी की जीत पर बधाई दी, सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस और तीखी प्रतिक्रियाएं का तूफान आ गया था। बता दें कि शपथ ग्रहण समारोह के बेहद भव्य तरीके से आयोजित किया गया था। परेड ग्राउंड में हजारों समर्थकों की मौजूदगी रही और साथ ही साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मंच पर मौजूद रहे। समारोह खत्म होने के बाद पीएम मोदी ने घुटनों के बल बैठकर जनता को प्रणाम किया जिसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। लेकिन इसी बीच असली हलचल तब शुरू हुई जब शेख हसीना का बयान सामने आया। दरअसल कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने यह कहा है कि वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत पर बधाई देती हैं और खासतौर पर शुभेंदु अधिकारी को शुभकामनाएं देती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के नतीजे दिखाते हैं कि जनता ने शुभेंदु अधिकारी पर भरोसा जताया है और भारत और बांग्लादेश रिश्तों में भी बंगाल की भूमिका हमेशा अहम रही है। इसे भी पढ़ें: West Bengal में Suvendu Adhikari के CM बनने पर Sheikh Hasina ने दी बधाई, बोलीं- रिश्ते और मजबूत होंगेसबसे ज़्यादा चर्चा उस लाइन की हो रही है यहां पर कि जिसमें शेख हसीना ने जय बंगला लिखा और यही नारा लंबे समय से बंगाल और बांग्लादेश दोनों की राजनीति में बड़ा प्रतीक माना जाता रहा है। बता दें कि बंगाल की राजनीति में इस नारे को लेकर पहले भी कई बार विवाद और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप रहते रहे हैं। अब जब यही नारा शेख हसीना के बयान में सामने आया तो सोशल मीडिया पर इसे लेकर नई बहस शुरू हो चुकी है। बता दें कि बीजेपी समर्थक इसे बड़ा राजनीतिक संदेश मान रहे हैं। जबकि विरोधी इसे अलग नजरिए से देख रहे हैं। इधर सोशल मीडिया पर बांग्लादेश के कुछ कट्टरपंथी समूहों और उग्र अकाउंट्स की तरफ से गुस्से भरे प्रतिक्रिया यानी कमेंट्स भी सामने आए हैं। कई पोस्ट में शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी गई। तो वहीं भारत को लेकर भी भड़काऊ टिप्पणियां नजर आई। हालांकि इन वायरल दावों और कथित धमकियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। लेकिन इंटरनेट पर माहौल लगातार यहां पर गमाया हुआ है। शायद यही वजह है कि अब बंगाल का यह सत्ता परिवर्तन सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं रहा है। बल्कि अब यह क्षेत्रीय राजनीति का मुद्दा भी बन चुका है। अगर शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा को अगर हम देखते हैं तो यह अपने आप में बेहद दिलचस्प कहानी है। कभी वह ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में से एक गिने जाते थे।इसे भी पढ़ें: Bengal में BJP की जीत से TMC में बिखराव का डर, अब क्या करेंगी Mamata Banerjee? नंदीग्राम आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका ने उन्हें बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा बताया था। टीएमसी सरकार में उन्होंने परिवहन और सिंचाई जैसे अहम मंत्रालय भी संवारे थे। लेकिन 2020 में उन्होंने टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था और उसके बाद बंगाल की राजनीति पूरी तरह से बदल गई थी। अब वहीं शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के पहले बंगाल मुख्यमंत्री बन चुके हैं और इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से बंगाल और बांग्लादेश के रिश्तों को चर्चा के केंद्र में लाकर फिर से खड़ा कर दिया है। सीमा, घुसपैठ, अल्पसंख्यक राजनीति चुनावी ध्रुवीकरण और बंगाल की बदलती राजनीतिक दिशा अब आने वाले समय में और बड़े तूफान ला सकती है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:28:45 +0530</pubDate>
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<title>Iran War पर घिरे Netanyahu, बोले&#45; USA को &amp;apos;आसान जीत&amp;apos; का भरोसा कभी नहीं दिलाया</title>
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<description><![CDATA[ ईरान युद्ध के दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद, बार-बार युद्धविराम के प्रयास विफल होने और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव वैश्विक चिंताओं पर हावी रहने के बीच, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक रिपोर्ट पर स्पष्टीकरण जारी किया जिसमें दावा किया गया था कि उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका को यह विश्वास दिलाया था कि ईरान के साथ युद्ध आसान होगा और तेहरान में सत्ता परिवर्तन को गति दे सकता है। एक टेलीविज़न साक्षात्कार में नेतन्याहू ने ज़ोर देकर कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही जोखिमों के बारे में चेतावनी दी थी। मेजर गैरेट के साथ बातचीत के दौरान सीबीएस के &#039;60 मिनट्स&#039; कार्यक्रम में, नेतन्याहू से न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के बारे में पूछा गया, जिसमें ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों से कुछ दिन पहले, 11 फरवरी को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई चर्चाओं का वर्णन किया गया था। इसे भी पढ़ें: Iran के खतरे के बीच &#039;घोस्ट मोड&#039; में तेल टैंकर! Strait of Hormuz पार करने के लिए अपनाई जा रही नई रणनीतिसिचुएशन रूम में हुई चर्चा पर नेतन्याहू का बयानन्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने यह जताते हुए ज़ोरदार प्रचार किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की अपार संभावना है और अमेरिका-इजरायल के समन्वित अभियान से अंततः इस्लामी गणराज्य का पतन हो सकता है। इस दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए नेतन्याहू ने कहा कि नहीं। यह वास्तव में गलत है... यह इस मायने में गलत है कि मैंने कहा, ओह, ठीक है, यह निश्चित है कि हम ऐसा कर सकते हैं,&#039; इत्यादि।  इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई चर्चा में अनिश्चितता हमेशा से एक अहम मुद्दा रही है। नेतन्याहू ने कहा कि मैंने तो इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया, बल्कि हम दोनों इस बात पर सहमत भी हुए कि इसमें अनिश्चितता और जोखिम दोनों शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई में खतरे तो होते हैं, लेकिन निष्क्रियता उससे भी बड़ा खतरा है। उन्होंने सीबीएस को बताया, “कार्रवाई करने में खतरा है, लेकिन कार्रवाई न करने में उससे भी बड़ा खतरा है।इसे भी पढ़ें: किसी बड़े संकट के संकेत! PM Modi का &#039;राष्ट्रव्यापी अपील&#039;: एक साल तक सोना न खरीदें, वर्क-फ्रॉम-होम को फिर अपनाएंहोर्मुज रणनीति पर सवालसंचालक ने फिर न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के उस हिस्से का जिक्र किया जो होर्मुज जलडमरूमध्य से संबंधित था, जो वैश्विक तेल परिवहन का एक महत्वपूर्ण मार्ग है और संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू और उनकी टीम ने निश्चित जीत” की ओर इशारा करते हुए तर्क दिया था कि ईरानी शासन इतना कमजोर हो जाएगा कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने में सक्षम नहीं रहेगा। नेतन्याहू ने अधिक सतर्क लहजा अपनाते हुए कहा, मुझे नहीं लगता कि हम इसका सटीक आकलन कर सकते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि जैसे-जैसे लड़ाई आगे बढ़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य की समस्या समझ में आने लगी… यह समझ में आ गई। जब उनसे सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक उपयोग को शुरुआत में गलत समझा गया था”, तो नेतन्याहू ने किसी भी खुफिया विफलता को स्वीकार करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि मुझे यकीन नहीं है कि इसे गलत समझा गया था। लेकिन आप जानते हैं, ईरान के लिए ऐसा करना बहुत बड़ा जोखिम है… मैं पूर्ण दूरदर्शिता का दावा नहीं करता, और किसी के पास भी पूर्ण दूरदर्शिता नहीं होती। न ही ईरानियों के पास थी। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:28:44 +0530</pubDate>
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<title>तथ्यों पर आधारित नहीं...फुजैराह पोर्ट के जरिए भारतीयों के निकासी के दावे को MEA ने गलत बताया</title>
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<description><![CDATA[ विदेश मंत्रालय (MEA) ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि भारत और यूएई फुजैराह बंदरगाह के माध्यम से अमीरात से भारतीय नागरिकों को &quot;निकालने&quot; के लिए एक समझौते पर काम कर रहे हैं, और कहा कि ऐसी कहानी का कोई आधार नहीं है। यह दावा पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच आया है, जिसके चलते संयुक्त अरब अमीरात को मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया है और हवाई यातायात बाधित हुआ है। विदेश मंत्रालय की तथ्य-जांच इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में नागरिकों से ऐसे झूठे और निराधार दावों के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया है। पोस्ट में लिखा था, फर्जी खबर! ऐसी किसी भी खबर का कोई आधार नहीं है। किसी भी प्रकार की निकासी की योजना नहीं बनाई जा रही है। कृपया ऐसे झूठे और निराधार दावों के प्रति सतर्क रहें। इसके साथ ही खबर के स्क्रीनशॉट भी साझा किए गए। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अपनी तरह की पहली संधि के तहत, हवाई यातायात में किसी भी तरह की समस्या होने पर संयुक्त अरब अमीरात में फंसे भारतीयों को जहाज द्वारा निकाला जाएगा। रिपोर्ट में इस समझौते पर हस्ताक्षर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस सप्ताह के अंत में यूरोप जाते समय संयुक्त अरब अमीरात में होने वाले नियोजित ठहराव से भी अप्रत्यक्ष रूप से जोड़ा गया है।इसे भी पढ़ें: Pakistan के शिया कर्मचारियों को धक्के मारकर देश से बाहर निकाल रहा है UAE, दोनों देशों के रिश्ते और बिगड़ेअमेरिका-ईरान युद्ध की स्थितिईरान ने रविवार को पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से ईरान युद्ध समाप्त करने के अमेरिकी प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया भेजी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में इसे तुरंत &quot;पूरी तरह अस्वीकार्य!&quot; बताकर खारिज कर दिया। यह फारस की खाड़ी में गतिरोध को सुलझाने के प्रयासों के लिए एक और झटका है, जिसके कारण जहाजरानी ठप हो गई है और ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने बताया कि तेहरान ने इस प्रस्ताव को आत्मसमर्पण के समान बताते हुए खारिज कर दिया और इसके बजाय अमेरिका द्वारा युद्ध क्षतिपूर्ति, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पूर्ण संप्रभुता, प्रतिबंधों की समाप्ति और जब्त की गई ईरानी संपत्तियों की रिहाई की मांग की। अमेरिका और ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम की तब परीक्षा हुई जब कतर और संयुक्त अरब अमीरात के तट पर एक जहाज पर ड्रोन से मामूली आग लग गई और कुवैत ने अपने हवाई क्षेत्र में ड्रोन के प्रवेश की सूचना दी। संयुक्त अरब अमीरात ने दो ड्रोन को मार गिराने का दावा किया और इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और किसी ने भी तत्काल जिम्मेदारी नहीं ली है। कतर के विदेश मंत्रालय ने जहाज पर हुए हमले को एक खतरनाक और अस्वीकार्य घटना बताया जो क्षेत्र में समुद्री व्यापार मार्गों और महत्वपूर्ण आपूर्ति की सुरक्षा को खतरे में डालती है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने जहाज के मालिक या उसके मूल स्थान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:28:44 +0530</pubDate>
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<title>Trump की बैकिंग,  वाशिंगटन का इनविटेशन,अली अल&#45;जैदी को ही इराक का PM क्यों बनाना चाहता है अमेरिका?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प उन नेताओं का समर्थन करने के लिए जाने जाते हैं जिन्हें वे अपने देशों का नेतृत्व करने के योग्य मानते हैं। इस बार, उनका समर्थन इराक के लिए प्रतीत होता है, जहां वे कम प्रसिद्ध इराकी उद्योगपति अली अल जैदी का समर्थन कर रहे हैं, जो इराक के अगले प्रधानमंत्री पद के लिए एक संभावित दावेदार के रूप में उभरे हैं। हाल ही में ट्रंप ने उन्हें वाशिंगटन आमंत्रित किया और कहा कि अमेरिका हर तरह से उनके साथ है। हालांकि, इस समर्थन के साथ एक शर्त भी जुड़ी है कि जैदी इराक की अगली सरकार में ईरान समर्थित मिलिशिया को शामिल न करें और बगदाद में तेहरान के प्रभाव को कम करें। यह सब ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध के बीच हो रहा है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार तेहरान के नेतृत्व की आलोचना कर रहे हैं। संघर्ष के शुरुआती चरण में, अमेरिका और इज़राइल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। ट्रंप का यह भी मानना ​​है कि उनके उत्तराधिकारी, मुजतबा अली खामेनेई, हमलों में बुरी तरह घायल हो गए हैं। यह पहली बार नहीं है जब जैदी को वाशिंगटन के दबाव का सामना करना पड़ा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि 2024 में, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने जैदी के स्वामित्व वाले एक बैंक के साथ डॉलर के लेनदेन पर प्रतिबंध लगा दिया था, इस संदेह पर कि वह ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर से जुड़े एक मिलिशिया नेता के साथ व्यापार कर रहा था।इसे भी पढ़ें: Donald Trump ने ठुकराया Iran का शांति प्रस्ताव: &#039;पूरी तरह अस्वीकार्य&#039; करार देते हुए दी गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनीजैदी  ट्रंप की मजबूरी में लिया गया फैसलाखबरों के मुताबिक, अली अल जैदी शुरुआत में इराक के सर्वोच्च पद के लिए ट्रंप की पहली पसंद नहीं थे। उनका नाम तब सामने आया जब ट्रंप ने कथित तौर पर इराक को दी जाने वाली अमेरिकी सहायता बंद करने की धमकी दी थी, क्योंकि इस साल की शुरुआत में पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी (जिन्हें ईरान के करीबी माना जाता है) का नाम उम्मीदवार के तौर पर सामने आया था। ट्रंप की धमकी के बाद, ईरान समर्थक शिया राजनीतिक गुटों के प्रभुत्व वाले इराकी गठबंधन, कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क ने पिछले महीने के अंत में जैदी की ओर रुख किया। एक इराकी अधिकारी ने वाशिंगटन जर्नल को बताया कि उनकी उम्मीदवारी सार्वजनिक किए जाने से पहले अमेरिका और ईरान दोनों द्वारा इसकी जांच की गई थी। जैदी ने तब से ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन से बात की है और संसद में एक गठबंधन बनाने पर काम कर रहे हैं जो अंततः उन्हें और अन्य इराकी अधिकारियों को सत्ता में लाएगा।इसे भी पढ़ें: Ukraine War खत्म होने वाला है? Putin का बड़ा बयान, Peace Talks की उम्मीदें बढ़ींईरान ने मिलिशिया नेताओं को बाहर रखने का विरोध कियाएक वरिष्ठ इराकी अधिकारी ने बताया कि ईरान के आईआरजीसी के शीर्ष अधिकारी इस्माइल क़ानी ने मांग की है कि इराक, ट्रंप के उस आदेश को रद्द करे जिसमें मिलिशिया नेताओं को सरकार से बाहर रखने का निर्देश दिया गया है या फिर इन समूहों को निरस्त्र करने की कोशिश करे। इस बीच, विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वह मिलिशियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तलाश में है। अमेरिका का कहना है कि ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से इन मिलिशियाओं ने इराक में अमेरिकी राजनयिक और सैन्य ठिकानों पर 600 हमले किए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि जैदी के लिए, वाशिंगटन की यह मांग कि उन्हें मिलिशियाओं का सामना करना चाहिए, बड़े राजनीतिक जोखिम पैदा करती है। उनका यह भी कहना है कि उन्हें निरस्त्र करने या उनकी शक्ति और प्रभाव को कम करने का कोई भी प्रयास हिंसक प्रतिक्रिया को जन्म दे सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:28:43 +0530</pubDate>
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<title>Tamil Nadu में AIADMK का सियासी संकट, हार के बाद EPS के इस्तीफे पर अड़ा Shanmugam गुट</title>
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<description><![CDATA[ तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में एआईएडीएमके की करारी हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष के नए संकेत उभर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, विधायकों और पूर्व मंत्रियों का एक वर्ग पार्टी प्रमुख एडप्पाडी के पलानीस्वामी से पद छोड़ने की मांग कर रहा है। हालांकि, सूत्रों ने यह भी बताया कि पार्टी के कुछ वर्गों के बढ़ते दबाव के बावजूद ईपीएस इस्तीफा देने को तैयार नहीं हैं। एआईएडीएमके के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, वरिष्ठ पार्टी नेता सीवी शनमुगम से जुड़े विधायकों और कई पूर्व मंत्रियों ने ईपीएस को यह संदेश दिया है कि लगातार चार चुनावी हार के बाद वे अब उनका नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों में एआईएडीएमके को 234 सीटों में से केवल 47 सीटें ही जीतने का मौका मिला। 2021 के चुनाव में, डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन ने एक दशक बाद एआईएडीएमके को सत्ता से बेदखल कर दिया और उसे केवल 75 सीटें ही मिलीं। 2019 के लोकसभा चुनावों में उसे 39 सीटों में से केवल एक सीट मिली और 2024 के संसदीय चुनावों में उसे एक भी सीट नहीं मिली।इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu AIADMK Crisis | चुनावी हार के बाद AIADMK में &#039;बगावत&#039;, शनमुगम गुट ने EPS से मांगा इस्तीफासूत्रों के अनुसार, लगातार चुनावी हार ने एआईएडीएमके कार्यकर्ताओं के मनोबल को बुरी तरह प्रभावित किया है और नेतृत्व की राजनीतिक रणनीति को लेकर आंतरिक आक्रोश को और बढ़ा दिया है। उन्होंने आगे कहा कि ईपीएस खेमे और शनमुगम से जुड़े नेताओं के बीच बढ़ती दरार ने एआईएडीएमके के भीतर संभावित विभाजन की आशंकाओं को बल दिया है। इससे पहले, ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि शनमुगम के नेतृत्व वाला गुट अभिनेता-राजनेता विजय की तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) के साथ गठबंधन कर सकता है, जिसे उस समय सरकार बनाने के लिए आवश्यक संख्या मिल रही थी। टीवीके ने विधानसभा चुनावों में शानदार शुरुआत करते हुए 108 सीटें जीतीं, लेकिन बहुमत से 10 सीटें कम रह गईं। सीपीआई, सीपीआई (एम), विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के साथ कई दिनों तक चली गहन बातचीत के बाद, टीवीके बहुमत का आंकड़ा पार करने में सफल रही। इसके बाद, विजय ने रविवार को सितारों से सजे एक भव्य समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।इसे भी पढ़ें: 5+2+2+2-2 के सियासी गणित में कैसे उलझे &#039;थलापति&#039;, विजय के लिए क्यों मैथ नहीं कर रहा Mathing?टीवीके के बहुमत का आंकड़ा पार करने की कोशिशों के बीच, पिछले हफ्ते शनमुगम समेत 30 से अधिक विधायक पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में डेरा डाले हुए थे। विजय के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ गठबंधन की अटकलें तेज हो रही थीं। बाद में ईपीएस भी अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए रिसॉर्ट गए। ऐसी भी खबरें थीं कि डीएमके ने एआईएडीएमके के साथ गुप्त बातचीत शुरू कर दी थी, जिससे कथित तौर पर शनमुगम नाराज हो गए और उन्होंने टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार के साथ हाथ मिलाने का फैसला किया। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:28:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Pakistan का नया Victory Day? Shehbaz Sharif का ऐलान&#45; भारत से संघर्ष को &amp;apos;मरका&#45;ए&#45;हक&amp;apos; के रूप में मनाएंगे</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हर साल 10 मई को ‘मरका-ए-हक दिवस’ के रूप में मनाए जाने की घोषणा की।
भारत के साथ पिछले साल हुए चार दिवसीय संघर्ष को इस्लामाबाद ने ‘मरका-ए-हक’ नाम दिया और इसके एक साल पूरे होने पर रविवार को समारोह आयोजित किया गया।
समारोह में शहबाज ने दावा किया कि पाकिस्तानी सशस्त्र बलों ने दुश्मन को ‘‘ऐतिहासिक और उचित जवाब’’ दिया।
पहलगाम आतंकी हमले में अधिकतर पर्यटकों समेत 26 लोगों की हत्या के बाद भारत ने पिछले साल सात मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए गए। इन हमलों में कम से कम 100 आतंकवादियों को ढेर किया गया।
 इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए, हालांकि उनमें से अधिकतर हमलों को भारतीय सेना ने विफल कर दिया।
दोनों पक्षों के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के बाद पिछले साल 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति के साथ शत्रुता समाप्त हो गई।
प्रधानमंत्री शहबाज़ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए युद्ध रोकने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की सराहना की। उन्होंने संघर्ष के दौरान राजनयिक और राजनीतिक समर्थन देने के लिए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को धन्यवाद भी दिया।
 भारत का कहना है कि सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति दोनों पक्षों के बीच सीधे तौर पर हुई थी।
 कार्यक्रम में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि इस लड़ाई ने यह दिखाया है कि जब पूरा देश एकजुट होकर पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के साथ खड़ा होता है तो वे क्या करने में सक्षम होते हैं।
 प्रधानमंत्री के संबोधन की शुरुआत में एक मिनट का मौन रखकर संघर्ष के दौरान मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:28:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Iran के President Pezeshkian का बड़ा बयान, बोले&#45; गरिमापूर्ण वार्ता के लिए तेहरान तैयार</title>
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<description><![CDATA[ ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने सोमवार को कहा कि क्षेत्रीय तनावों से निपटने के लिए ईरान के सामने कई संभावित रास्ते हैं, जिनमें गरिमा और अधिकार के साथ की गई बातचीत भी शामिल है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कूटनीति के माध्यम से देश की सैन्य उपलब्धियों को और मजबूत किया जाना चाहिए। यह जानकारी ईरानी छात्र समाचार एजेंसी (आईएसएनए) ने दी है। आईएसएनए के अनुसार, पेज़ेश्कियन ने ये टिप्पणियां फ़राज पुलिस बल के कमांडर-इन-चीफ और वरिष्ठ कमांडरों के एक समूह के साथ बैठक के दौरान कीं, जहां उन्हें उस बल के प्रदर्शन पर एक रिपोर्ट मिली, जिसे ईरानी अधिकारियों ने हालिया थोपा गया युद्ध बताया है। बैठक के दौरान, ईरानी राष्ट्रपति ने देश के आंतरिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। आईएसएनए के अनुसार, पेज़ेश्कियन ने देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में फ़राज पुलिस बल की संरचना, उपकरणों को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर उनकी भूमिका विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।इसे भी पढ़ें: Petrol-Diesel की कोई कमी नहीं, PM Modi की Fuel बचाने की अपील के बाद सरकार का बड़ा बयानईरान के भावी मार्ग के बारे में बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि तेहरान के सामने कई विकल्प हैं। पेज़ेश्कियन ने कहा कि हमारे सामने अब कई विकल्प हैं; या तो हम गरिमा, अधिकार और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए बातचीत में प्रवेश करें और ईरानी राष्ट्र के अधिकारों को साकार करें, या हम न तो युद्ध और न ही शांति की स्थिति में रहें, या हम युद्ध और टकराव के मार्ग पर चलते रहें। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि तेहरान की प्राथमिकता सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय हितों द्वारा समर्थित कूटनीति है। उन्होंने कहा कि तर्कसंगत, तार्किक और राष्ट्रीय हित पर आधारित प्राथमिकता यह है कि युद्ध के मैदान में सशस्त्र बलों द्वारा प्राप्त विजय कूटनीति के क्षेत्र में भी पूरी हो और ईरानी राष्ट्र के अधिकार गरिमा और अधिकार की स्थिति से स्थापित हों। इस बीच, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि ईरान के प्रस्तावों का उद्देश्य न केवल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित करना भी है।इसे भी पढ़ें: ये किस देश के विदेश मंत्री बने एस जयशंकर! हैरान कर देगा ये Videoईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, बग़ाई ने कहा, हमारे प्रस्ताव में हमने केवल ईरान के वैध अधिकारों का मुद्दा उठाया था। हमने जो भी प्रस्ताव रखा था, वह तर्कसंगत और उदार था। उन्होंने आगे कहा, यह न केवल ईरान के राष्ट्रीय हितों के लिए, बल्कि क्षेत्र और दुनिया की भलाई और कल्याण के लिए भी ज़रूरी है। अमेरिकी पक्ष अपनी अनुचित मांगों पर अड़े हुए हैं। बग़ाई ने कहा कि तेहरान खुद को एक ज़िम्मेदार क्षेत्रीय शक्ति मानता है और ज़बरदस्ती के आरोपों को खारिज करता है। उन्होंने कहा ईरान ने क्षेत्र में खुद को एक ज़िम्मेदार शक्ति साबित किया है। हम दादागिरी नहीं करते; हम दादागिरी के विरोधी हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:28:40 +0530</pubDate>
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<title>ये किस देश के विदेश मंत्री बने एस जयशंकर! हैरान कर देगा ये Video</title>
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<description><![CDATA[ विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर भारत के अलावा एक और देश के विदेश मंत्री बन गए हैं। आप यह सुनकर चौंक गए होंगे। लेकिन यह दिलचस्प किस्सा सही में हुआ है। भारत से 14,000 कि.मी. दूर वेनेजुएला के पड़ोस में बैठे एक छोटे से देश ने गलती से विदेश मंत्री एस जयशंकर को अपना विदेश मंत्री बोल दिया है। इस देश की संसद के स्पीकर ने गलती से एस जयशंकर को अपना विदेश मंत्री बोल दिया। हालांकि उन्होंने अपनी गलती को जल्दी से सुधार लिया लेकिन उसके बाद इस देश की प्रधानमंत्री ने जो किया वह आपको हैरान कर देगा। इस देश की प्रधानमंत्री ने अपने ही स्पीकर से कहा कि आपसे एक चूक हो गई है। लेकिन एक तरीके से देखा जाए तो मैं भी डॉक्टर एस जयशंकर को अपने ही देश से आया हुआ ही मानना चाहूंगी। यह सुनकर विदेश मंत्री एस जयशंकर हंसने लगे। इसे भी पढ़ें: जंग के बीच मोदी का बड़ा खेल! अचानक दिल्ली क्यों आ रहे ईरान के विदेश मंत्री?मामला और दिलचस्प तब हो गया जब इसी देश की प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल में चुनाव जीतने वाली बीजेपी की जमकर तारीफ की। इस देश की प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का विश्वास अब पीएम मोदी और बीजेपी पर ही है। यह पूरा वीडियो हम आपको दिखाएंगे। लेकिन जल्दी से इस देश के बारे में जान लीजिए। भारत से 14,000 किमी दूर बेहद ही रणनीतिक जगह पर स्थित इस छोटे से कैरेबियन देश का नाम त्रिनीड एंड टोबैगो है। आपको बता दें कि त्रिनीड एंड टोबैगो के पास तेल के भंडार हैं। यह देश कैरेबियन क्षेत्र में तेल और प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा उत्पादक है। आपको बता दें कि ईरान, अमेरिका जंग की वजह से पहले ही दुनिया ऊर्जा संकट से गुजर रही है। ऐसे में त्रिनिडा एंड टोबैको भारत के लिए बेहद अहम हो जाता है। इसी वजह से कई अहम मुद्दों पर बात करने के लिए विदेश मंत्री त्रिनिडार्ड और टोबैगो पहुंचे हुए थे। दिलचस्प बात देखिए कि त्रिनिडार्ड एंड टोबैगो की 40 से 45% आबादी भारतीय मूल की है। यहां ज्यादातर लोग भोजपुरी बोलते हैं। प्रधानमंत्री का नाम कमला प्रसाद बिसेसर है। यह देश भारत से इतना प्यार करता है कि गलती से जयशंकर को अपना विदेश मंत्री ही कह दिया। इसे भी पढ़ें: विदेश मंत्री Jaishankar की &#039;क्रिकेट डिप्लोमेसी&#039;, Trinidad में दिग्गज Brian Lara से हुई खास मुलाकातट्रिनीड एंड टोबैको की संसद के स्पीकर ने एस जयशंकर का स्वागत करते हुए उन्हें अपने देश का विदेश मंत्री बोल दिया। हालांकि इसके बाद उन्होंने कहा कि मुझे माफ कीजिए आप भारत के विदेश मंत्री हैं। स्पीकर के इतना कहने के बाद संसद में मौजूद भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर मुस्कुराते दिखे। लेकिन मजा तो तब आया जब त्रिनीड एंड टोबैको की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बसेसर ने मुस्कुराते हुए कहा कि स्पीकर महोदय आपसे एक दिलचस्प चूक हो गई है। वैसे मैं भी डॉक्टर एस जयशंकर को त्रिनिड से आया हुआ ही मानना चाहूंगी। चलिए अब आपको दिखाते हैं कि त्रिनिडार्ड एंड टोबैको की संसद में एस जयशंकर और पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत पर क्या हो गया। TRINIDAD SPEAKER : &quot;Please welcome Dr. S Jaishankar, the Foreign Minister of Trinidad… sorry, the Foreign Minister of India&quot; ????TRINIDAD PM ⚡⚡ : &quot;Mr. Speaker, You made an important slip. I would like to also recognise Dr. Jaishankar as coming from Trinidad&quot; ???? pic.twitter.com/SUxtIfSrnm— News Algebra (@NewsAlgebraIND) May 10, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:28:40 +0530</pubDate>
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<title>Iran से 2500 से ज्यादा भारतीयों का सफल Evacuation, West Asia में बढ़ते तनाव पर सरकार की पैनी नजर</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के साथ ही, विदेश मंत्रालय (MEA) ने खाड़ी देशों में फंसे लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। सोमवार को हुई अंतर-मंत्रालयी बैठक में अधिकारियों ने पुष्टि की कि हालांकि स्थिति अभी भी अस्थिर है, लेकिन स्वदेश वापसी को सुगम बनाने और समुद्री व्यापार की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए समन्वित प्रयास जारी हैं। अतिरिक्त सचिव असीम आर महाजन ने बताया कि विदेश मंत्रालय घटनाक्रम पर नजर रखने और चिंतित परिवारों के लिए सूचना साझाकरण को सुव्यवस्थित करने के लिए राज्य सरकारों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहा है।इसे भी पढ़ें: US का KC-135 &#039;फ्लाइंग गैस स्टेशन&#039; कतर के पास लापता, रडार से गायब होने से पहले दिया था इमरजेंसी सिग्नलमहाजन ने उड़ान संचालन का विस्तृत विवरण देते हुए कहा कि हालांकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी प्रतिबंध हैं, लेकिन समग्र कनेक्टिविटी में सुधार हो रहा है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भूमि सीमा मार्गों के माध्यम से ईरान से 2,549 भारतीय नागरिकों की सफलतापूर्वक आवाजाही सुनिश्चित की है। भारतीयों को फिलहाल ईरान की यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।उड़ानों की स्थिति के संबंध में, समग्र रूप से स्थिति में सुधार जारी है। संयुक्त अरब अमीरात का हवाई क्षेत्र खुला है; भारतीय और संयुक्त अरब अमीरात की एयरलाइंस भारत में विभिन्न गंतव्यों के लिए उड़ानें संचालित कर रही हैं। सऊदी अरब और ओमान के हवाई अड्डों से भी उड़ानें संचालित हो रही हैं। कतर का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुला है, जहां एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, इंडिगो और कतर एयरवेज उड़ानें संचालित कर रही हैं। कुवैत और बहरीन का हवाई क्षेत्र खुला है। इराक का हवाई क्षेत्र सीमित उड़ान संचालन के साथ खुला है। ईरान का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुला है; हमने भारतीय नागरिकों को ईरान की यात्रा से बचने की सलाह दी है और वहां पहले से मौजूद लोगों से हमारे दूतावास के सहयोग से वहां से निकलने का आग्रह किया है। अब तक, तेहरान स्थित हमारे दूतावास ने भूमि सीमा मार्गों के माध्यम से 2,549 भारतीय नागरिकों को ईरान से बाहर निकालने में सहायता की है। इज़राइल का हवाई क्षेत्र खुला है, और सीमित उड़ान संचालन फिर से शुरू हो गया है।इसे भी पढ़ें: अब परमाणु युद्ध के साये में दुनिया! ट्रंप ने ठुकराई शांति की आखिरी गुहार, अमेरिका ने अरब सहयोगियों को थमाए महाविनाशक हथियारसमुद्री संघर्ष के खतरे के बावजूद, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने भारतीय जहाजों के लिए अपेक्षाकृत शांत स्थिति की सूचना दी है। बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने कहा कि पिछले तीन दिनों में भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों या विदेशी ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों पर सवार भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई घटना नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय नाविकों के कल्याण और निर्बाध समुद्री संचालन सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, विदेशों में स्थित हमारे दूतावासों और सभी समुद्री हितधारकों के साथ समन्वय कर रहा है। क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। पिछले तीन दिनों में भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों या विदेशी ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों पर सवार भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई घटना नहीं हुई है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:28:39 +0530</pubDate>
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<title>बॉर्डर पर भारत का बड़ा एक्शन देख बोला बांग्लादेश, दुश्मनी नहीं दोस्ती</title>
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<description><![CDATA[ भारत बांग्लादेश बॉर्डर पर बीएसएफ लगातार एक्शन मोड में नजर आ रही है। जहां घुसपैठ और तस्करी को रोकने के लिए कई सारे सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। बीते दिनों ही त्रिपुरा के सिपाही जाला जिले में जब आधी रात को तस्करी की कोशिश की गई तो बीएसएफ ने एक्शन लिया जिसके बाद बीएसएफ और संदिग्ध घुसपैठियों के बीच मुठभेड़ हुई जिसमें दो बांग्लादेशी तस्कर मारे गए और अब इस घटना के बाद बांग्लादेश की ओर से इस पर बड़ा बयान सामने आया है। बांग्लादेशी सरकार के वरिष्ठ सलाहकार रूहल कबीर रिज़वी ने कहा है कि बांग्लादेश भारत से दोस्ती चाहता है। लेकिन अगर बॉर्डर पर बार-बार खून बहेगा तो अच्छे रिश्ते बनाए रखना मुश्किल होगा। दरअसल ये पूरा मामला त्रिपुरा के कमाल सागर बॉर्डर आउटपोस्ट का है। जहां 8 मई की देर रात बीएसएफ की गश्ती टीम सीमा पर निगरानी कर रही थी। तभी बीएसएफ के जवानों को 10 से 15 लोगों का एक संदिग्ध समूह दिखाई देता है और ये लोग अंधेरे का फायदा उठाकर भारतीय सीमा में घुसपैठ और तस्करी की कोशिश कर रहे थे। तभी बीएसएफ के जवान एक्शन में आए। पहले उन्होंने चेतावनी दी। लेकिन चेतावनी के बाद इन घुसपैठियों ने जमाने के ऊपर पत्थरबाजी शुरू कर दी। जिसके बाद स्थिति को बिगड़ता देख बीएसएफ ने फायरिंग शुरू कर दी और इस गोलीबारी में अफरातफरी मच गई और जब बाद में तलाशी ली गई तो वहां पर दो लोग गंभीर रूप से घायल मिले। जिन्हें बाद में अस्पताल ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया और उनकी पहचान बांग्लादेशी नागरिक नवीन हुसैन और मोहम्मद मूरसालीन के रूप में हुई है।  इसे भी पढ़ें: Bengal में घुसपैठियों पर गिरेगी गाज! Suvendu Adhikari का BSF को Green Signal, 45 दिन में लगेगी बाड़बांग्लादेशी नागरिक है और यही तस्करी की कोशिश कर रहे थे। घटना के बाद बांग्लादेश में हलचल तेज हो गई। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के वरिष्ठ सलाहकार रूहुल कबीर रिवी ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। रिवी ने रविवार को डिप्लोमा इंजीनियरों के एक राष्ट्रीय सम्मेलन में इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि ब्राह्मण बरिया सीमा पर दो लोगों को गोली मार दी गई है। जिसके साथ उन्होंने आगे यह कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अच्छे संबंध चाहता है और दोस्ताना रिश्ते चाहता है। लेकिन सीमा पर लगातार हो रही मौत दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की जनता भी सीमा पर शांति चाहती है और हिंसा नहीं देखना चाहती। रिवी ने उम्मीद जताई है कि दोनों देश मिलकर इस मुद्दे का समाधान निकालेंगे ताकि सीमा पर शांति बने और द्विपक्ष रिश्ते और भी ज्यादा मजबूत हो। दरअसल भारत बांग्लादेश सीमा करीब 4000 किमी लंबी है और इस सीमा के कई इलाके ऐसे हैं जहां जंगल, पहाड़ और नदियां बहती हैं। इसे भी पढ़ें: ये किस देश के विदेश मंत्री बने एस जयशंकर! हैरान कर देगा ये Videoजिसकी वजह से निगरानी करना बेहद मुश्किल हो जाता है और इसी का फायदा उठाकर अक्सर तस्करी, अवैध घुसपैठ और ड्रग नेटवर्क सक्रिय हो जाते हैं। भारतीय सुरक्षा बल बीएसएफ लगातार इन गतिविधियों पर नजर बनाए रखती है और कई बार ऐसे ऑपरेशंस को अंजाम देती है जिनमें उन घुसपैठियों को मारना पड़ता है। इस हालिया घटना के बाद सीमा पर सुरक्षा और भी ज्यादा बढ़ा दी गई है। बीएसएफ और बीजीबी यानी बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के बीच फ्लैग मीटिंग हुई जिसमें मारे गए इन दोनों बांग्लादेशी तस्करों के शव को बांग्लादेश को सौंप दिया गया। वहीं भारतीय एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या सीमा के अंदर कोई लोकल नेटवर्क है जो इन घुसपैठियों की मदद कर रहा है ताकि उन पर भी कार्रवाई तेज की जा सके।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:28:38 +0530</pubDate>
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<title>यह युद्ध का युग नहीं ...यूक्रेन को लेकर मोदी की पुतिन से सीक्रेट बातचीत?</title>
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<description><![CDATA[ रूस यूक्रेन युद्ध के मोर्चे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही। दरअसल यह एक ऐसी खबर है जिसने वाशिंगटन से लेकर दिल्ली और बीजिंग तक खलबली मचा दी और सवाल खड़े कर दिए कि क्या पुतिन ने युद्ध रोकने का मन बना लिया? क्या यूक्रेन की जिद में आगे रूस ने शांति का रास्ता चुन लिया? लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर पुतिन ने अचानक भारत और चीन का नाम इतनी प्रमुखता से क्यों लिया? दरअसल राष्ट्रपति पुतिन का एक बयान जिसमें उन्होंने कहा कि हमने अपने दोस्तों भारत और चीन के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया है। इसे भी पढ़ें: Ukraine War खत्म होने वाला है? Putin का बड़ा बयान, Peace Talks की उम्मीदें बढ़ींयह महज शब्द नहीं बल्कि बदलती हुई दुनिया का नया नक्शा है। रूस में विक्ट्री डे मनाया जा रहा है। यह वो दिन है जब रूस सोवियत संघ की नाजी जर्मनी पर जीत का जश्न मनाता है। लेकिन इस बार की जीत का जश्न शोरशराबे और टैंकों की गड़गड़ाहट से ज्यादा कूटनीति की मेज पर लड़ा जा रहा है। मॉस्को में परेड के बाद राष्ट्रपति पुतिन ने मीडिया के सामने आकर जो खुलासा किया उसने दुनिया को हैरान कर दिया। पुतिन ने ऐलान किया कि रूस यूक्रेन के साथ तीन दिनों के युद्ध विराम के लिए तैयार हो गया है। लेकिन यह युद्ध विराम रूस ने अकेले तय नहीं किया है। पुतिन ने स्पष्ट किया कि इस स्थिति पर भारत, चीन और अमेरिका के साथ व्यापक चर्चा की। पुतिन का इशारा साफ था कि दुनिया की बड़ी ताकतें अब इस युद्ध को खत्म करने के लिए एक मेज पर आ रही हैं। पुतिन ने अपने संबोधन में बार-बार भारत और चीन का जिक्र किया। पुतिन के शब्द थे कि हमने अपने प्रमुख साझेदारों और दोस्तों के साथ काम करना शुरू कर दिया है। विशेष रूप से पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना और भारत के दोस्तों के साथ। बयान भारत की वैश्विक स्थिति को एक नई ऊंचाई देता है। जब पूरी दुनिया दो धड़ों में बंटी हुई है तब रूस खुलकर यह कह रहा है कि वह शांति के लिए भारत की सलाह मान रहा है।इसे भी पढ़ें:  Russia-Ukraine Ceasefire | जंग के बीच राहत की खबर, Donald Trump के प्रयास लाए रंग, रूस-यूक्रेन में 3 दिन थमेंगी बंदूकें, घर लौटेंगे 2000 सैनिकप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा कहा है कि यह युद्ध का युग नहीं है और ऐसा लगता है कि पुतिन ने अब इस बात को स्वीकार करना शुरू कर दिया है। चीन और भारत दो ऐसी महाशक्तियां हैं जो रूस के साथ सीधे संवाद में है और पुतिन ने इन्हें अपना मुकम्मल दोष बताकर पश्चिम को कड़ा संदेश भी दे दिया है। अब इस कहानी में एक और बड़ा ट्विस्ट आता है डोनाल्ड ट्रंप के नाम का। पुतिन ने बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन दिनों के युद्ध विराम का प्रस्ताव रखा था। पुतिन ने ना केवल इस प्रस्ताव को स्वीकार किया बल्कि ट्रंप की तारीफ भी की। ट्रंप ने युद्ध विराम के साथ-साथ एक बड़ा कैदी विनियम प्रोग्राम भी प्रस्तावित किया है। जिसमें दोनों तरफ से एक 1000 कैदियों को रिहा किया जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:28:37 +0530</pubDate>
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<media:keywords>यह, युद्ध, का, युग, नहीं, ...यूक्रेन, को, लेकर, मोदी, की, पुतिन, से, सीक्रेट, बातचीत</media:keywords>
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<title>सूडान: सशस्त्र ड्रोन बने मौत का बड़ा हथियार, मानवाधिकार प्रमुख ने किया आगाह</title>
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<description><![CDATA[ सूडान में जारी हिंसक टकराव में इस वर्ष के पहले 4 महीने, आम नागरिकों के लिए बहुत घातक साबित हुए हैं और ड्रोन हमलों में कम से कम 880 लोगों की जान गई है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने सोमवार को चेतावनी दी है कि लड़ाई में ड्रोन का बढ़ता इस्तेमाल मौजूदा टकराव को और जानलेवा बना रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:27:55 +0530</pubDate>
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<media:keywords>सूडान: सशस्त्र, ड्रोन, बने, मौत, का, बड़ा, हथियार, मानवाधिकार, प्रमुख, ने, किया, आगाह</media:keywords>
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<title>थाईलैंड में मौत की सज़ा के इन्तज़ार में जीवित रहने की दास्तान</title>
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<description><![CDATA[ थाईलैंड की एक महिला को नशीले पदार्थों की तस्करी के जुर्म में दोषी पाए जाने के बाद मृत्युदंड की सज़ा सुनाई गई थी. उसने आठ साल तक मृत्युदंड की प्रतीक्षा करते हुए, अपना हौसला बनाए रखा. उसका भाग्य बदला, मृत्युदंड की सज़ा आजीवन कारावस में बदली और फिर उसे क़ैद से रिहाई भी देखने को मिली. इस दौरान उसे सलाख़ों के पीछे रहकर ही, कपड़ों की सिलाई सीखकर, जीवन का अर्थ खोजने व रिहाई के बाद रोज़गार पाने में मदद मिली. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:27:52 +0530</pubDate>
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<title>Prabhasakshi NewsRoom: नफरत की राजनीति या युद्ध की तैयारी? “दो विचारधाराओं की लड़ाई” कहकर क्या संदेश दे रहे हैं आसिम मुनीर?</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के हालिया बयान ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की राजनीति और सुरक्षा माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि मुनीर के भाषण लगातार ऐसी विभाजनकारी और नफरत फैलाने वाली सोच को बढ़ावा दे रहे हैं, जो भारत और पाकिस्तान के बीच दुश्मनी को और गहरा करती है। खास बात यह है कि पहलगाम आतंकी हमले से ठीक पहले मुनीर ने जो भाषण दिया था और अब भारत-पाक संघर्ष के एक साल पूरा होने के अवसर पर जो भाषण दिया है, उनमें एक समान विचारधारा साफ दिखाई देती है।रविवार को रावलपिंडी स्थित जनरल मुख्यालय में आयोजित समारोह में आसिम मुनीर ने पिछले वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष को “दो विचारधाराओं की लड़ाई” बताया। मुनीर ने दावा किया कि यह केवल दो सेनाओं या देशों के बीच पारंपरिक युद्ध नहीं था, बल्कि “सच्चाई और झूठ” के बीच निर्णायक संघर्ष था, जिसमें पाकिस्तान विजयी रहा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की रणनीति भारत से बेहतर थी और पाकिस्तान ने संघर्ष के दौरान भारत के 26 ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि उन्होंने इन दावों के समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।इसे भी पढ़ें: Asim Munir के हवाई दावे, बोले- भारत के खिलाफ हमारी रणनीति बेहतर, India ने की थी सीज़फायर की मांगमुनीर का यह बयान उस समय आया है जब भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक साल पूरा होने पर सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ अपने सख्त रुख को दोहराया है। भारत ने स्पष्ट कहा है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी ढांचे उसकी पहुंच से बाहर नहीं हैं और देश अपनी सुरक्षा तथा आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के अधिकार का इस्तेमाल करता रहेगा।हम आपको बता दें कि विशेषज्ञों और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पहलगाम हमले से कुछ दिन पहले आसिम मुनीर द्वारा दिया गया भाषण इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि तैयार करने वाला साबित हुआ था। 17 अप्रैल 2025 को इस्लामाबाद में प्रवासी पाकिस्तानियों को संबोधित करते हुए मुनीर ने खुलकर कहा था कि मुसलमान और हिंदू “दो अलग राष्ट्र” हैं। उन्होंने कहा था कि दोनों समुदाय धर्म, परंपराओं, रीति रिवाजों और सोच के स्तर पर पूरी तरह अलग हैं और यही “दो राष्ट्र सिद्धांत” की बुनियाद है।अपने उसी भाषण में मुनीर ने कश्मीर को पाकिस्तान की “शहरग” यानि गले की नस बताया था और कहा था कि पाकिस्तान कभी भी कश्मीरियों को “भारतीय कब्जे” के खिलाफ उनके संघर्ष में अकेला नहीं छोड़ेगा। उनके इस बयान को कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने भी अत्यंत भड़काऊ और हिंदू विरोधी बताया था। भारतीय विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की उत्तेजक भाषा ने आतंकवादी संगठनों को वैचारिक आधार और मनोबल दिया, जिसके बाद पहलगाम में पर्यटकों को निशाना बनाकर हमला किया गया।अब यदि अप्रैल 2025 के भाषण और रविवार को दिए गए भाषण की तुलना की जाए तो दोनों में एक स्पष्ट समानता दिखाई देती है। अप्रैल वाले भाषण में मुनीर ने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच स्थायी वैचारिक विभाजन को रेखांकित किया था, जबकि अब उन्होंने भारत और पाकिस्तान के संघर्ष को “दो विचारधाराओं की लड़ाई” बताया है। दोनों ही मौकों पर उन्होंने धार्मिक और वैचारिक पहचान को संघर्ष का आधार बनाने की कोशिश की। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार की भाषा शांति और संवाद की संभावनाओं को कमजोर करती है तथा कट्टरता और नफरत को बढ़ावा देती है।विश्लेषकों के अनुसार मुनीर की बयानबाजी केवल सैन्य या राजनीतिक संदेश नहीं है, बल्कि वह पाकिस्तान में एक ऐसी सोच को मजबूत कर रही है जिसमें भारत विरोध और धार्मिक विभाजन को राष्ट्रीय पहचान के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यही कारण है कि उनके भाषणों को लेकर पाकिस्तान के भीतर और बाहर दोनों जगह चिंता जताई जा रही है।इस बीच, पाकिस्तान में सेना के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री अली परवेज मलिक ने कहा है कि वह “प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अगुवाई वाली टीम के एक साधारण कार्यकर्ता” हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं और लोगों ने इसे पाकिस्तान की नागरिक सरकार पर सेना के बढ़ते प्रभुत्व का संकेत बताया।हम आपको यह भी बता दें कि अपने भाषण में आसिम मुनीर ने यह भी कहा कि भविष्य के युद्ध बहु आयामी होंगे और पाकिस्तान तकनीक, हथियारों तथा प्रशिक्षण के स्तर पर अपनी तैयारियां मजबूत कर रहा है। उन्होंने नई पनडुब्बियों, रॉकेट सेना और लड़ाकू विमानों की खरीद का भी उल्लेख किया। हालांकि साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि पाकिस्तान शांति चाहता है और अपनी प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखेगा।उधर, भारत का कहना है कि उसकी सभी कार्रवाइयां केवल सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ हैं और उसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लेकिन जिस तरह पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व की ओर से लगातार धार्मिक और वैचारिक विभाजन पर आधारित बयान दिए जा रहे हैं, उससे क्षेत्र में तनाव कम होने की बजाय और बढ़ता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इस तरह की नफरत फैलाने वाली भाषा जारी रही तो दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और भरोसे का वातावरण बनाना और कठिन हो जाएगा।बहरहाल, पाकिस्तान की ओर से किसी भी प्रकार की सैन्य हिमाकत, आतंकवादी दुस्साहस या भारत की संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश की गई, तो भारत उसका मुंहतोड़ जवाब देने में कोई संकोच नहीं करेगा। पिछले वर्षों में भारत ने यह दिखाया है कि वह अपनी सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम है और भविष्य में भी किसी भी खतरे को मिट्टी में मिलाने की पूरी ताकत और इच्छाशक्ति रखता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:25:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Iran के खतरे के बीच &amp;apos;घोस्ट मोड&amp;apos; में तेल टैंकर! Strait of Hormuz पार करने के लिए अपनाई जा रही नई रणनीति</title>
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<description><![CDATA[ मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव और ईरानी हमलों की आशंका के बीच तेल निर्यात को सुरक्षित रखने के लिए शिपिंग कंपनियां अब &#039;ट्रैकर बंद&#039; करने की रणनीति अपना रही हैं। ताज़ा शिपिंग डेटा के अनुसार, पिछले एक हफ्ते में कच्चे तेल से लदे दो विशाल टैंकरों (VLCC) ने अपनी पहचान छिपाने के लिए ट्रांसपोंडर बंद किए और सफलतापूर्वक होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार किया। शिपिंग एनालिटिक्स फर्म Kpler के आंकड़ों ने इस उभरते हुए चलन की पुष्टि की है, जिसे समुद्री सुरक्षा की भाषा में &#039;डार्क सेल&#039; या &#039;घोस्ट शिपिंग&#039; कहा जाता है। जारी डेटा के अनुसारसोमवार को जारी डेटा के अनुसार, बहुत बड़े कच्चे तेल के वाहक (VLCC) &#039;बसरा एनर्जी&#039; ने 1 मई को अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के ज़िरकू टर्मिनल से 2 मिलियन बैरल &#039;अपर ज़ाकुम&#039; कच्चा तेल लादा और 6 मई को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से बाहर निकल गया। डेटा के मुताबिक, पनामा का झंडा लगे इस जहाज़ ने 8 मई को फ़ुजैरा ऑयल टैंकर टर्मिनलों पर अपना माल उतारा।यह तुरंत साफ़ नहीं हो पाया कि शिपिंग कंपनी &#039;सिनोकोर&#039; के स्वामित्व और प्रबंधन वाले इस टैंकर को किस कंपनी ने चार्टर किया था। दफ़्तर के समय के बाद टिप्पणी के लिए किए गए अनुरोध पर सिनोकोर ने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।ADNOC और उसके खरीदारों ने हाल ही में मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र में फँसे तेल को बाहर निकालने के प्रयास में, कच्चे तेल से लदे कई टैंकरों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़ारा है।इसके अलावा, डेटा से पता चला कि एक और VLCC, &#039;कियारा M&#039;, रविवार को अपना ट्रांसपोंडर बंद करके खाड़ी से बाहर निकला। यह तुरंत साफ़ नहीं हो पाया कि सैन मैरिनो का झंडा लगे इस टैंकर पर लदे 2 मिलियन बैरल इराकी कच्चे तेल को कहाँ उतारा जाएगा। वैश्विक तेल बाजार पर असरकच्चे तेल की कीमतें वर्तमान में $126 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। यदि टैंकरों की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो बीमा प्रीमियम और शिपिंग लागत में भारी बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका सीधा असर दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में &#039;ट्रैकर बंद&#039; करके जहाज़ों का निकलना यह दर्शाता है कि वैश्विक तेल निर्यात अब एक &#039;वॉर ज़ोन&#039; जैसी परिस्थितियों में काम कर रहा है, जहाँ सुरक्षा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है।  Stay updated with International
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:25:30 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Iran, के, खतरे, के, बीच, घोस्ट, मोड, में, तेल, टैंकर, Strait, Hormuz, पार, करने, के, लिए, अपनाई, जा, रही, नई, रणनीति</media:keywords>
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<title>भारतीय सेना ने घर में घुसकर बहुत तगड़ा मारा, बोला जैश का आतंकी</title>
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<description><![CDATA[ एक साल पहले भारत ने जो जख्म दिया था उसकी टीस आज भी पाकिस्तान के आतंकियों को सोने नहीं दे रही है। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी आज खुद रो-रो कर दुनिया को बता रहे हैं कि उस रात भारत ने उन्हें कैसे धूल चटाई थी। बहावलपुर में भारत के वार से मस्जिद सुभान अल्लाह की दीवारें ठह रही थी, तब मसूद अजहर और उसके पालतू आतंकी चूहे किस तरह बिल में छिपे थे। यह ऑपरेशन सिंदूर का वो खौफ है जिसे पाकिस्तान के आतंकी किले को खंडहर बना दिया। जैश-ए-मोहम्मद ने खुद कबूल किया कि भारत की स्ट्राइक ने उनकी कमर तोड़ दी। उनकी सोशल मीडिया पोस्ट उनकी हार का सबसे बड़ा सबूत है। जैश के आतंकियों ने लिखा कि उस रात आसमान से आग नहीं बल्कि उनका काल बरस रहा था। धमाके इतने जोरदार थे कि पाकिस्तान की जमीन दहल गई। खुद को बहादुर बताने वाले आतंकी आज स्वीकार कर रहे हैं कि उस रात उनके पास सिर्फ चीखने और अल्लाहू अकबर के नारे लगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। यह भारत का वो प्रहार था जिसने आतंकियों के गुरूर को मिट्टी में मिला दिया था। इसे भी पढ़ें: नफरत की राजनीति या युद्ध की तैयारी? “दो विचारधाराओं की लड़ाई” कहकर क्या संदेश दे रहे हैं आसिम मुनीर?भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सीधा प्रहार किया जैश के सबसे सुरक्षित गढ़ बहावलपुर पर। यहां की मस्जिद सुभान अल्लाह कोई इबादत की जगह नहीं बल्कि भारत के खिलाफ जहर उगलने वाली आतंक की फैक्ट्री थी। भारतीय सेना ने चुन-चकर इस ठिकाने को नस्तेनाबूत किया। मसूद अजहर का परिवार और उसके सबसे खूंखार कमांडर जो भारत में बेगुनाहों के खिलाफ साजिश रचते थे। उसी मलबे में दफन हो गए। भारत ने उस वक्त साफ कर दिया कि अब सीमा पार कोई भी ठिकाना सुरक्षित नहीं है और खासकर पाकिस्तान के पालतू आतंकियों का। अब जब भारत आतंकियों को मिटा रहा था, धो रहा था, तब पाकिस्तान की फौज अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बुनियान अल मरसूस यानी शीशे जैसी मजबूत दीवार का ढोंग कर रही थी। लेकिन भारत के शूरवीों ने साबित कर दिखाया कि पाकिस्तान की यह दीवार कागज से ज्यादा कुछ नहीं है। पाकिस्तान दुनिया को अपनी ताकत दिखाने का नाटक करता है। जबकि हकीकत में भारत ने उसके घर में घुसकर उसके आतंकियों की धज्जियां उड़ा दी। इसे भी पढ़ें: Asim Munir के हवाई दावे, बोले- भारत के खिलाफ हमारी रणनीति बेहतर, India ने की थी सीज़फायर की मांगनाम मजबूत दीवार रखा लेकिन काम एक कांच के घर जैसा भी नहीं निकला। आज जयश की महिला विंग जमात के जरिए नई भर्ती का दावा किया जा रहा है। यह कह रहे हैं कि तीन मरकज शहीद हुए तो क्या हम नई मस्जिद बनाएंगे? लेकिन यह आतंकियों की छटपटाहट है कि उनकी ताकत नहीं। लगभग 2200 महिलाओं को जोड़ने का दावा सिर्फ अपनी हार को छिपाने का एक प्रोपोगेंडा है जैश के आतंकियों का। और भारत ने जो ऑपरेशन सिंदूर के जरिए संदेश दिया वह साफ दिया कि अगर दोबारा सिर उठाया तो अंजाम बहावलपुर से भी भयानक होगा। खैर ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिखा दिया कि नया भारत अब सहता नहीं बल्कि घर में घुसकर जवाब देता है। पाकिस्तान के पालतू आतंकियों को यह समझ लेना चाहिए कि अब उनकी हर साजिश का अंत बहावलपुर जैसा ही होने वाला है या फिर उससे ज्यादा खतरनाक। भारत की वायु सेना और सेना के जांबाज अब रुकने वाले नहीं है। मसूद अजहर या कोई और आतंकी आका अब सबका हिसाब होगा और वह भी उनके ही अपने गढ़ में घुसकर।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:25:28 +0530</pubDate>
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<title>ट्रेड, व्यापार और रेयर अर्थ मिनिरल्स... चीन के दौरे पर जाएंगे ट्रंप, जिनपिंग से मुलाकात बढ़ाएगी भारत की टेंशन?</title>
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<description><![CDATA[ ईरान से इस वक्त अमेरिका की खूब तनातनी चल रही है। युद्ध विराम हुआ लेकिन शांति नहीं। लेकिन इस बीच अब खबर यह है कि अमेरिका अब नई जगह पर फोकस करने वाला है। खबर है अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप अगले हफ्ते चीन यात्रा पर जा रहे हैं और वहां जब उनसे चीनी राष्ट्रपति शी जिंपिंग की मुलाकात होगी तो ताइवान का मुद्दा इस मुलाकात में उठ सकता है। यह जानकारी अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने खुद दी। वाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान मार्को रूबियो ने यह कहा कि ताइवान हमेशा अमेरिका और चीन के बीच बातचीत का हिस्सा रहता है। उन्होंने यह भी बताया दोनों देश समझते हैं कि इस क्षेत्र में कोई भी अस्थिरता उनके हित में नहीं है। रूबियो ने साफ कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि ताइवान या इंडोपेसिफिक रीजन में कोई भी ऐसा घटनाक्रम बने जिससे तनाव बढ़े या फिर हालात बिगड़ जाए। अब ट्रंप 14 और 15 मई को बीजिंग का दौरा करने वाले हैं। इस दौरान उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी होगी। जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा होना संभव माना जा रहा है और ताइवान भी इस चर्चा में एक हिस्सा होगा। ऐसा कहा जा रहा है। अब यह ऐसा इसलिए भी क्योंकि यह मुद्दा लंबे वक्त से अमेरिका और चीन के बीच एक तनाव की वजह बना हुआ है। इसे भी पढ़ें: शी जिनपिंग की गद्दारी से बुरी तरह चिढ़ा अमेरिका, Donald Trump उठाया बड़ा China के खिलाफ बड़ा कदमताइवान पर चीन लगातार दबाव बना रहा है और चीन उसे अपना एक हिस्सा ही मानता है। जबकि ताइवान खुद को पूरी तरह एक लोकतांत्रिक और अलग प्रशासन वाला क्षेत्र बताता है। व अमेरिका ताइवान का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय समर्थक और हथियार सप्लायर भी है जिससे चीन बहुत ज्यादा चिढ़ता है। चीन अक्सर खुलकर अमेरिका की नीतियों का विरोध करता है और ताइवान और उसके बीच में आने पर अमेरिका को चुनौती भी देता रहता है। अब वैसे ही ईरान से चल रही तनातनी के बीच ट्रंप का चीन दौरे पर जाना एक बड़ी बात मानी जा रही है। अहम दौरा यह होने वाला है। लेकिन इस बीच अगर ताइवान के मुद्दे पर इसमें बातचीत होगी। इसे भी पढ़ें:  China के 2 पूर्व रक्षा मंत्री को जिनपिंग ने सुनाई मौत की सजा, वजह जानकर चौंकी दुनियाअमेरिका के विदेश मंत्री के द्वारा जानकारी दी गई कि चीन की यात्रा पर प्रेसिडेंट ट्रंप नेक्स्ट वीक जाने वाले हैं और बड़े मुद्दे उठने की पूरी आशंका है कि यह मुद्दे उठेंगे। जिसमें एक बहुत बड़ा मुद्दा जो है वो ताइवान को लेकर बात चल रही है कि ताइवान का मुद्दा उठेगा।  पिछले दिनों से जब से अमेरिका ईरान वॉर में उलझा हुआ था तब से लगातार चीन की जो आक्रामकता है वो ताइवान की ओर बढ़ गई थी और ताइवान की सिक्योरिटी का जो जिम्मा है वो अमेरिका ने अपने जिम्मे लिया हुआ है कि ताइवान के लिए हम कुछ भी करेंगे लेकिन ताइवान को हम सिक्योरिटी देंगे। तो अब ऐसा लगता है कि चीन की उस बढ़ती आक्रामकता के बीच अमेरिका की चीन यात्रा प्रेसिडेंट ट्रंप की कहीं ना कहीं ताइवान के मुद्दे को केंद्र विषय रखेगी। चीन मानता है कि ताइवान जो है वह हमारा हिस्सा है। रिपब्लिक ऑफ चाइना 1949 में जब क्रांति हुई थी तो काफी बड़ी मात्रा में जो कोमेतांग के जो सिविल वॉर में शामिल थे एक तरफ कम्युनिस्ट और एक तरफ कोमेतांग यानी नेशनलिस्ट ग्रुप था। वो बड़ी संख्या में भाग कर चले गए थे इसी ताइवान आइलैंड के ऊपर। तब से चीन ये कहता है कि हम उस समय उस द्वीप पर ताइवान पर कब्जा नहीं कर पाए थे।इसे भी पढ़ें: India को घेरने के लिए Bangladesh ने मिलाया China से हाथ, Siliguri Corridor के पास ड्रैगन देगा दस्तक लेकिन अब हम कब्जा करेंगे और यह हमारा वन चाइना पॉलिसी का हिस्सा है। ताइवान को भी अगर आप देखेंगे तो ताइवान में भी दो पार्टी है जो एक पार्टी कहीं ना कहीं चीन के समर्थन में या चीन के विलय का समर्थन करती है और एक पार्टी जो है वो चीन से दूर रहने का कि हम चीन में शामिल नहीं होंगे। दुनिया आज भी ताइवान को लेकर एक इंडिपेंडेंटली एक स्टेट की तरह कंसीडर नहीं करती है। ताइवान को एक कंट्री की तरह कंसीडर किया जाता है। कोई भी कंट्री स्टेट तब बनता है जब उसको इंटरनेशनल रिकॉग्नाइजेशन मिल जाता है। ताइवान के साथ में भारत की कोई एंबेसी नहीं है बल्कि काउंसिलेट है और ताइवान जो है वह यूएओ का भी मेंबर नहीं है। क्योंकि ताइवान को कहीं ना कहीं वन चाइना पॉलिसी के तहत ही माना जाता है कि वह चाइना का हिस्सा है। ताइवान कहता है कि हम एक संप्रभु राष्ट्र हैं और हम अपनी संप्रभुता को बरकरार रखेंगे और अमेरिका ताइवान की संप्रभुता को बरकरार रखने की जो मांग है उसका समर्थन करता है। लेकिन वही अमेरिका वन चाइना पॉलिसी का भी समर्थन करता है। रेयर अर्थ और व्यापार पर ट्रंप-जिनपिंग की संभावित चर्चाशी जिनपिंग के साथ अपनी आगामी बैठक में डोनाल्ड ट्रंप व्यापार के साथ-साथ दुर्लभ मृदा खनिजों (रेयर अर्थ) का अहम मुद्दा उठा सकते हैं। अमेरिकी तकनीकी उद्योग के लिए ये खनिज बेहद जरूरी हैं, और इन पर चीन के बढ़ते एकाधिकार ने अमेरिका की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ट्रंप पहले भी इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट राय रख चुके हैं।भारत के लिए इस बैठक के मायनेबीजिंग में होने वाली इस शीर्ष वार्ता पर भारत की भी पैनी नजर रहेगी। अमेरिका और चीन, दोनों ही वैश्विक शक्तियां भारत की विदेश नीति का अहम हिस्सा हैं, इसलिए इस बैठक में लिए गए किसी भी फैसले का सीधा असर नई दिल्ली पर पड़ना तय है। हाल के समय में भारत के इन दोनों ही देशों के साथ रिश्ते काफी उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं, फिर भी दोनों का महत्व कम नहीं हुआ है। भारत के नजरिए से देखा जाए तो चीन हमेशा से एक बड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती और रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहा है। इसके अलावा, वह पाकिस्तान जैसे भारत के विरोधी देश का करीबी मित्र भी है। हालांकि चीन अक्सर कूटनीतिक मंचों पर भारत के साथ शांति और सौहार्दपूर्ण संबंधों की बात करता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वह हर दिशा से भारत की घेराबंदी करने और उस पर दबाव बनाने की  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:25:26 +0530</pubDate>
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<title>Kathmandu Airport पर लैंडिंग के वक्त Turkish Airlines के विमान में लगी भीषण आग, 277 यात्री बाल&#45;बाल बचे</title>
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<description><![CDATA[ काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते समय तुर्की एयरलाइंस के एक विमान के टायर में आग लग गई, जिससे नेपाल के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे पर अंतरराष्ट्रीय उड़ान संचालन कुछ समय के लिए बाधित हो गया। अधिकारियों ने बताया कि दमकल गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पा लिया गया और सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। नेपाल के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के सूचना अधिकारी ज्ञानेंद्र भुल के अनुसार, लैंडिंग के दौरान आग लगने के बाद यात्रियों को विमान से बाहर निकालने के लिए आपातकालीन दरवाजे खोले गए। तुर्की एयरलाइंस की फ्लाइट TK726 इस्तांबुल से काठमांडू पहुंची थी। अधिकारियों ने बताया कि यह घटना सुबह करीब 6.45 बजे हुई जब विमान के रनवे पर उतरते समय उसके पहियों में आग लग गई। विमान में चालक दल के सदस्यों सहित चार बच्चों समेत 277 यात्री सवार थे। अधिकारियों ने बताया कि बचाव अभियान के दौरान कुछ यात्रियों को मामूली चोटें आईं। अधिकारियों ने यह भी पुष्टि की कि विमान में कुछ माल और मानव अवशेष भी थे।इसे भी पढ़ें: Noida Airport से 15 जून को उड़ेगी पहली Flight, IndiGo जोड़ेगी Delhi-NCR को सीधा Mumbai सेइससे पहले, हवाई अड्डे के सुरक्षा अधिकारी एसपी राजकुमार सिलावल ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है और सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। उन्होंने कहा, “तुर्की एयरलाइंस का TK 726 विमान इस्तांबुल से काठमांडू जा रहा था और लैंडिंग के दौरान टायर में आग लग गई। दमकल की मदद से आग पर काबू पा लिया गया है। सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। घटना के बाद विमान रनवे पर ही फंसा रह गया, जिससे हवाई अड्डे पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की आवाजाही प्रभावित हुई। रनवे के अस्थायी रूप से बंद रहने के कारण काठमांडू हवाई क्षेत्र में कई आने वाली उड़ानों को रोक दिया गया। इनमें दिल्ली से आ रही एयर इंडिया की उड़ान AI 215 और शारजाह से आ रही एयर अरबिया की उड़ान G9 536 शामिल थीं। पारो से ड्रुकएयर, दुबई से फ्लाईदुबई और कुआलालंपुर और ग्वांगझू से आ रही नेपाल एयरलाइंस की उड़ानें भी कथित तौर पर बीच हवा में ही रोक दी गईं।इसे भी पढ़ें: Ahmedabad Air India हादसे पर मंत्री नायडू का बड़ा बयान, बोले- एक महीने में आ जाएगी Final Reportसोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में लैंडिंग के दौरान विमान के पास धुआं और आग की लपटें दिखाई दे रही थीं, जबकि आपातकालीन दल रनवे की ओर दौड़ रहे थे। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:25:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Iran&#45;America युद्ध खत्म नहीं हुआ, Netanyahu की चेतावनी&#45; Nuclear Material निकालना बाकी है</title>
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<description><![CDATA[ जैसे-जैसे अमेरिका और ईरान युद्ध को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए एक समझौते पर पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो 11वें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, इजरायली राष्ट्रपति बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि युद्ध अभी खत्म होने से बहुत दूर है क्योंकि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। नेतन्याहू ने कहा कि हालांकि युद्ध में काफी कुछ हासिल हो चुका है, लेकिन यह अभी खत्म नहीं हुआ है। 10 मई, रविवार को सीबीएस को दिए एक साक्षात्कार में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान से अभी भी परमाणु सामग्री संवर्धित यूरेनियम - को निकालना बाकी है।इसे भी पढ़ें: ट्रेड, व्यापार और रेयर अर्थ मिनिरल्स... चीन के दौरे पर जाएंगे ट्रंप, जिनपिंग से मुलाकात बढ़ाएगी भारत की टेंशन?इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी भी संवर्धन केंद्र हैं जिन्हें नष्ट करना होगा। अभी भी ईरान द्वारा समर्थित प्रॉक्सी संगठन हैं। अभी भी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जिनका वे उत्पादन करना चाहते हैं। हमने इनमें से काफी हद तक इसे नष्ट कर दिया है। लेकिन यह सब अभी भी मौजूद है, और अभी भी काम करना बाकी है। जब उनसे पूछा गया कि इस संवर्धित यूरेनियम को ईरान से कैसे निकाला जाएगा, तो उन्होंने जवाब दिया, आप अंदर जाइए, और इसे बाहर निकालिए। हालांकि, नेतन्याहू ने उस ऑपरेशन से संबंधित सैन्य योजनाओं और समय-सीमा के बारे में बताने से परहेज किया, लेकिन इसे बेहद महत्वपूर्ण मिशन बताया। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने उनसे कहा कि मैं वहां जाना चाहता हूं, जिसे वे शारीरिक रूप से संभव मानते हैं और अगर कोई समझौता होता है तो यह सबसे अच्छा तरीका है। हालांकि, नेतन्याहू ने यह बताने से इनकार कर दिया कि अगर ऐसा कोई समझौता होता है तो क्या होगा।इसे भी पढ़ें: Iran के खतरे के बीच &#039;घोस्ट मोड&#039; में तेल टैंकर! Strait of Hormuz पार करने के लिए अपनाई जा रही नई रणनीतिनेतन्याहू की ये टिप्पणियां अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई शांति वार्ता के बीच आईं, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव पर तेहरान की प्रतिक्रिया को &quot;पूरी तरह अस्वीकार्य&quot; बताया था। ईरान ने रविवार सुबह पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका के नवीनतम प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया भेजी, जो दोनों देशों के बीच मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:25:24 +0530</pubDate>
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<title>PM मोदी का मेगा दौरा: Europe से टेक्नोलॉजी, UAE से एनर्जी, भारत के लिए डबल मिशन!</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसी हफ्ते स्वीडन, नॉर्वे, नीदरलैंड और इटली के दौरे पर जा सकते हैं। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया संकट के कारण ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना भारत की विदेश नीति की अहम जरूरत बन गया है। पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री की प्रस्तावित यूरोप यात्रा रद्द कर दी गई थी। अब नए कार्यक्रम में यूएई को भी शामिल किया गया है, जो भारतीय डायस्पोरा और ऊर्जा सुरक्षा दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीदरलैंड में मोदी अपने समकक्ष रॉब रॉब जेटन से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार, ग्रीन इकॉनमी और हाई-टेक सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, ग्रीन एनर्जी, स्वास्थ्य और जल प्रबंधन के अलावा सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी नई साझेदारी पर फोकस रहेगा। नीदरलैंड भारत का 11वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान निवेश, सप्लाई चेन, नई तकनीकों में सहयोग बढ़ाने को लेकर भी अहम समझौते हो सकते हैं। साथ ही, यूरोपीय देशों के साथ रणनीतिक और व्यापारिक सहयोग को नई गति मिलने की भी उम्मीद है।इसे भी पढ़ें: PM Modi की 7 अपीलों पर Karti Chidambaram का हमला, पूछा- क्या Government कड़वी सच्चाई छिपा रही है?तकनीक और निवेश पर रहेगा जोरप्रधानमंत्री की स्वीडन और नॉर्वे यात्रा का मुख्य उद्देश्य इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और निवेश सहयोग को मजबूत करना है। पीएम मोदी नॉर्वे में तीसरी भारत-नॉर्डिक समिट में हिस्सा लेंगे। नॉर्डिक देशों को रिन्यूएबल एनर्जी और एडवास टेक्नोलॉजी में अग्रणी माना जाता है। इटली दौरे के दौरान MSME और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल में हुए फ्री ट्रेड करार के बाद पीएम का यह पहला यूरोप दौरा होगा।इसे भी पढ़ें: PM Modi का Route, जिलेटिन स्टिक और NIA की जांच, Bengaluru में क्या थी बड़ी Security Planning?इससे पहले, अप्रैल के आखिरी सप्ताह में, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा की और अबू धाबी में संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति से मुलाकात की। यह सऊदी अरब की उनकी यात्रा के एक सप्ताह बाद हुआ था। डोभाल की यह यात्रा एक महत्वपूर्ण पहल थी, क्योंकि वे सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों, विशेष रूप से आतंकवाद विरोधी सहयोग पर, संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहे हैं। इस यात्रा ने मोदी की यात्रा की नींव भी रखी। ऊर्जा से समृद्ध संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ व्यापार पिछले दो महीनों में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के कारण बाधित हुआ है - केवल 11 भारतीय जहाज ही जलडमरूमध्य से गुजर पाए हैं। मोदी ने पिछले दो महीनों में यूएई, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी राजतंत्रों के नेताओं से बात की है, और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इन देशों के अपने समकक्षों के संपर्क में रहे हैं। अप्रैल में जयशंकर ने यूएई के राष्ट्रपति से भी मुलाकात की। भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी की मजबूती पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जटिल क्षेत्रीय माहौल के बावजूद दोनों देशों के बीच चल रहा संवाद मजबूत और पारदर्शी बना हुआ है। यूएई लगभग 47 लाख भारतीयों का घर है, और UAE में रहने वाले बड़े भारतीय समुदाय द्वारा भेजी जाने वाली वार्षिक धनराशि दुनिया में सबसे अधिक है। भारतीय प्रवासी समुदाय UAE का सबसे बड़ा जातीय समुदाय है, जो देश की आबादी का लगभग 35 प्रतिशत है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:25:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Made in India शक्ति! Indian Army को मिले घातक Kamikaze Drones, दुश्मन का काल बनेंगे</title>
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<description><![CDATA[ भारतीय सेना को आपातकालीन खरीद (ईपी-6) के तहत दो नए स्वदेशी युद्धक तंत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें यूएवी-लॉन्च्ड प्रिसिजन गाइडेड मुनिशन (यूएलपीजीएम) और अग्निका वीटीओएल-1 फर्स्ट-पर्सन व्यू (एफपीवी) कामिकेज़ ड्रोन शामिल हैं। रक्षा सूत्रों ने बताया कि सफल उच्च-ऊंचाई, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (ईडब्ल्यू) और प्रिसिजन गाइडेड मुनिशन फायरिंग परीक्षणों के बाद, सेना की पश्चिमी कमान के अधिकारियों की उपस्थिति में हैदराबाद में इन तंत्रों को सौंपा गया। यूएलपीजीएम और अग्निका वीटीओएल-1, दोनों तंत्रों को स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित किया गया है।इसे भी पढ़ें: भारतीय सेना ने घर में घुसकर बहुत तगड़ा मारा, बोला जैश का आतंकीरक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और अदानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित यूएलपीजीएम, अपनी श्रेणी में भारत का पहला स्वदेशी लोइटरिंग मुनिशन (एलएलपीजीएम) है। यह प्रणाली इमेजिंग इन्फ्रारेड (आईआईआर) सीकर से लैस है और इसे यूएवी से स्थिर और गतिशील दोनों लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए लॉन्च किया जा सकता है। यूएवी की परिचालन सीमा 20 किलोमीटर तक है, जबकि स्वयं गोला-बारूद की मारक क्षमता 2.5 किलोमीटर है।इसे भी पढ़ें: Asim Munir के हवाई दावे, बोले- भारत के खिलाफ हमारी रणनीति बेहतर, India ने की थी सीज़फायर की मांगयह प्रणाली दिन और रात दोनों समय, सभी मौसम स्थितियों में काम करने के लिए डिज़ाइन की गई है। यह अपनी एंटी-जैमिंग और एंटी-स्पूफिंग क्षमताओं के कारण जीपीएस-बाधित और संचार-जाम वाले वातावरण में भी कार्य करने में सक्षम है।यूएलपीजीएम में दो किलोग्राम का वारहेड होता है जो नरम और कठोर दोनों लक्ष्यों को निष्क्रिय करने में सक्षम है और इसकी सटीकता एक मीटर सीईपी (वृत्ताकार त्रुटि संभाव्यता) है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:25:18 +0530</pubDate>
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<title>भारत: उपग्रह से धान के खेतों में नज़र आता जलवायु समाधान</title>
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<description><![CDATA[ भारत में युवजन के नेतृत्व वाली एक जलवायु तकनीक पहल, धान किसानों को, खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद कर रही है. यह पहल, उपग्रह डेटा के ज़रिए मीथेन गैस का उत्सर्जन घटाने, पानी की बचत करने और किसानों को जलवायु वित्त से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:24:01 +0530</pubDate>
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<title>WHO: डॉक्टर टैड्रॉस हंटावायरस प्रभावित जहाज़ के लिए टेनेरीफ़े पहुँचे</title>
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<description><![CDATA[ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने, हंटावारयस के संक्रमण वाले मरीज़ों को ले जा रहे MV Hondius जहाज़ के रविवार को टेनेरीफ़े द्वीप पर पहुँचने के अवसर पर, वहाँ के निवासियों से शान्ति बनाए रखने की अपील की है.  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 11 May 2026 09:36:44 +0530</pubDate>
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<title>Hormuz में तनाव चरम पर, Iran ने दी Warning&#45; हमारे जहाजों को छुआ तो होगा बड़ा हमला</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने शनिवार को फारस की खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी तेल टैंकरों या वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ किसी भी प्रकार की आक्रामकता क्षेत्र में अमेरिकी केंद्रों और सैन्य जहाजों पर &quot;भारी हमला&quot; को जन्म देगी। आईआरजीसी नौसेना कमान ने X पर एक पोस्ट में यह चेतावनी जारी की, जिसमें कहा गया है कि चेतावनी! ईरान के तेल टैंकरों और वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ किसी भी प्रकार की आक्रामकता के परिणामस्वरूप क्षेत्र में स्थित अमेरिकी केंद्रों में से एक और दुश्मन के जहाजों पर भारी हमला होगा। इसे भी पढ़ें: US-Iran के बीच New Deal की पेशकश, क्या प्रतिबंधों के बदले परमाणु कार्यक्रम रोकेगा तेहरान?इसके बाद, आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स ने एक अलग पोस्ट में कहा कि उसकी मिसाइलें और ड्रोन पहले ही क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और शत्रु हमलावर जहाजों पर निशाना साध चुके हैं, और वे फायरिंग के आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं।  पोस्ट में लिखा था कि आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स की मिसाइलों और ड्रोनों ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और शत्रु हमलावर जहाजों पर निशाना साध लिया है। हम फायरिंग के आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ये टिप्पणियां होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी नौसेना और ईरानी सेना के बीच हुई गोलीबारी के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बीच आई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण वैश्विक ऊर्जा पारगमन मार्ग है। इसे भी पढ़ें: Russia ने ईरान को थमा दिया ब्रह्मास्त्र, पुतिन के चक्रव्यूह में कैसे फंस गए ट्रंप?गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दोनों पक्षों के बीच हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी और ईरानी नौसेना बलों के बीच हुई गोलीबारी की पुष्टि की। उन्होंने दावा किया कि हमले के बावजूद तीन अमेरिकी विध्वंसक पोत रणनीतिक जलमार्ग से सफलतापूर्वक गुजर गए। ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना के तीन विध्वंसक पोत होर्मुज जलडमरूमध्य से &quot;बहुत सफलतापूर्वक&quot; निकल गए, हालांकि इस दौरान ईरानी बलों ने उन पर गोलीबारी की। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 11 May 2026 09:31:31 +0530</pubDate>
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<title>West Bengal में Suvendu Adhikari के CM बनने पर Sheikh Hasina ने दी बधाई, बोलीं&#45; रिश्ते और मजबूत होंगे</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले सुवेंदु अधिकारी को बधाई दी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के बाद बांग्लादेश अवामी लीग ने भी एक पत्र साझा कर अधिकारी को बधाई दी। पत्र में पार्टी ने कहा कि अपने संदेश में, उन्होंने पश्चिम बंगाल के नव निर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और उनके मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की कामना की। शेख हसीना ने आशा व्यक्त की कि उनके सक्षम नेतृत्व में पश्चिम बंगाल का विकास और भी तीव्र होगा और बांग्लादेश और भारत के बीच लंबे समय से चले आ रहे मित्रता और सहयोग के संबंध और भी मजबूत होंगे। इसे भी पढ़ें: CM Vijay की &#039;Super Team&#039; तैयार, Aathav Arjun समेत इन 9 दिग्गजों को मिली Cabinet में जगहपत्र में आगे कहा गया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल के सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों और जनता के निरंतर समृद्धि और खुशहाली की भी कामना की। भाबानीपुर में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी को हराने वाले &#039;दिग्गजों के हत्यारे&#039; सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में पहली बार भाजपा को शानदार जीत दिलाने के बाद मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक - दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, क्षुदिराम टुडू और निशित प्रमाणिक - ने कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाले पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल में मंत्री पद की शपथ ली। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu के CM बनते ही Action में &#039;Thalapathy&#039; Vijay, 200 यूनिट बिजली Free समेत 3 Files पर किए Signसुवेंदु अधिकारी का शपथ ग्रहण समारोह नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के साथ हुआ। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर शानदार जीत हासिल की और टीएमसी के 15 साल के शासन का अंत किया। वहीं तृणमूल ने 80 सीटें जीतीं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 11 May 2026 09:31:30 +0530</pubDate>
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<title>Shehbaz Sharif के तीखे तेवर, कहा&#45; Pakistan अब ‘‘एक जिम्मेदार राष्ट्र’’, हर हमले का देंगे जवाब</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि पाकिस्तान अब एक ‘‘जिम्मेदार’’ राष्ट्र के रूप में पहचाना जाता है, जो न केवल अपनी रक्षा करना जानता है, बल्कि “वैश्विक शांति और स्थिरता की गारंटी देने वाला’’ बनकर भी उभरा है।
 ‘मारका-ए-हक’ के एक साल पूरे होने पर शनिवार देर रात प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी संदेश में शहबाज शरीफ ने शत्रुता के दौरान सशस्त्र बलों द्वारा निभायी गयी भूमिका की सराहना की।
पाकिस्तान ने पिछले वर्ष भारत के साथ हुए चार दिन के संघर्ष को ‘मारका-ए-हक’ नामक दिया था।
 पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों के मारे जाने के बाद भारत ने पिछले वर्ष छह-सात मई की दरमियानी रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। इसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचों के नौ ठिकानों पर हवाई हमले किए गए थे, जिनमें कम से कम 100 आतंकवादी मारे गए थे।
 इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया था। पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए थे। हालांकि भारतीय सेना ने उनमें से अधिकांश को विफल कर दिया था।
 दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हॉटलाइन पर हुई बातचीत के बाद 10 मई को सैन्य कार्रवाइयों को रोकने पर सहमति बनने के साथ संघर्ष समाप्त हुआ था।
 शहबाज शरीफ ने कहा कि थल, जल, वायु और साइबर क्षेत्रों में पाकिस्तान की सेनाओं के समन्वित जवाब ने देश की रक्षा क्षमताओं और राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत किया।
 उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी आक्रामकता का ‘‘तत्काल, उचित और हर स्तर पर जवाब’’ दिया जाएगा।
 प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान अब ‘‘एक जिम्मेदार राष्ट्र’’ के रूप में पहचाना जाता है, जो न केवल अपनी रक्षा करना जानता है, बल्कि ‘‘वैश्विक शांति और स्थिरता की गारंटी देने वाला’’ भी बनकर उभरा है।
 उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका और हिंसा समाप्त कराने में उसके प्रयासों की दुनिया भर में सराहना की गयी है।
 शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपने प्रयास जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
 सुरक्षा स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगा और अपनी सीमाओं पर सतर्कता बनाए रखेगा।
 कश्मीर का जिक्र करते हुए शहबाज शरीफ ने कहा कि यह मुद्दा दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता से जुड़ा हुआ है।
 सोशल मीडिया पर एक अलग पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मारका-ए-हक’ पाकिस्तान की संप्रभुता और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के सामूहिक संकल्प, राष्ट्रीय एकता और दृढ़ता का प्रतीक बना रहेगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 11 May 2026 09:31:30 +0530</pubDate>
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<title>Asim Munir के हवाई दावे, बोले&#45; भारत के खिलाफ हमारी रणनीति बेहतर, India ने की थी सीज़फायर की मांग</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने रविवार को भारत के साथ पिछले साल हुए संघर्ष को ‘‘दो विचारधाराओं के बीच की लड़ाई’’ करार दिया।
 मुनीर ने रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय में ‘मारका-ए-हक’ की पहली सालगिरह के अवसर पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए दावा किया कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की रणनीति भारत की रणनीति से ‘श्रेष्ठ’ थी।
पिछले साल 22 अप्रैल को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा26 लोगों की हत्या किये जाने के जवाब में भारत ने छह-सात मई 2025 की दरमियानी रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया और इसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके)में स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए गए, जिसमें कम से कम 100 आतंकवादी मारे गए। 
 इस कार्रवाई से तनाव में तेजी से वृद्धि हुई और पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए, हालांकि उनमें से अधिकांश को भारतीय सेना ने विफल कर दिया।
दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच ‘हॉटलाइन’ पर हुई बातचीत के बाद 10 मई, 2025 को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी। 
मुनीर ने रविवार के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि भारत ने पिछले साल 6-7 मई की रात और 10 मई के बीच पाकिस्तान की ‘संप्रभुता और क्षेत्र का उल्लंघन’ किया और कहा कि पाकिस्तान ने ‘‘पूर्ण राष्ट्रीय एकता और सैन्य बल’’ के साथ जवाब दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘मारका-ए-हक केवल दो देशों या सेनाओं के बीच लड़ा गया एक पारंपरिक युद्ध नहीं था, बल्कि वास्तव में यह दो विचारधाराओं के बीच एक निर्णायक मरका (लड़ाई) थी।’’
 मुनीर ने दावा किया कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने 26 ठिकानों पर हमले किए थे। हालांकि, उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया।
पाकिस्तानी सेना के प्रमुख ने दावा किया कि भारत ने अमेरिका के माध्यम से युद्धविराम की मांग की थी और पाकिस्तान ने ‘‘शांति के हित में’’ इस पर सहमति जताई थी।
भारत पहले ही अमेरिका के किसी भी हस्तक्षेप का खंडन कर चुका है और उसका कहना है कि सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत में बनी थी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 11 May 2026 09:31:29 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump to Visit China | ऐतिहासिक बीजिंग दौरा, ट्रंप और शी चिनफिंग की मुलाकात पर टिकी दुनिया की नजरें</title>
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<description><![CDATA[ वैश्विक राजनीति के लिहाज से एक बड़े घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को पुष्टि की कि यह यात्रा राष्ट्रपति शी चिनफिंग के विशेष निमंत्रण पर हो रही है। उल्लेखनीय है कि लगभग नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कोई अमेरिकी राष्ट्रपति चीन की धरती पर कदम रख रहा है। ट्रंप की यह यात्रा अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट और ताइवान समेत कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बढ़ते तवाव के दौरान हो रही है।इसे भी पढ़ें: Donald Trump ने ठुकराया Iran का शांति प्रस्ताव: &#039;पूरी तरह अस्वीकार्य&#039; करार देते हुए दी गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी 
 अमेरिकी प्रधान उप प्रेस सचिव अन्ना केली ने रविवार को कहा कि ट्रंप बुधवार शाम बीजिंग पहुंचेंगे।
 हांगकांग के ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की खबर में केली के हवाले से कहा गया है कि अमेरिकी नेता बृहस्पतिवार को एक स्वागत समारोह और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों नेता शुक्रवार को फिर मुलाकात करेंगे और चाय के दौरान द्विपक्षीय चर्चा करेंगे और फिर दोपहर के भोजन के दौरान भी विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका इस साल के अंत में चीनी नेता की यात्रा की मेजबानी करने की योजना बना रहा है।इसे भी पढ़ें: पंजाब की साझा संस्कृति के सामने विफल होगी भाजपा की &#039;फूट डालो और राज करो&#039; की नीति: मुख्यमंत्री भगवंत मानएजेंडे में व्यापार, निवेश और उद्योग समझौतेबातचीत में प्रस्तावित US-चीन व्यापार बोर्ड और निवेश बोर्ड पर हुई प्रगति भी शामिल होगी। दोनों देशों का लक्ष्य व्यापार के क्षेत्र में साझा प्राथमिकताओं की पहचान करना है। एयरोस्पेस, कृषि और ऊर्जा से जुड़े समझौतों पर चर्चा प्रमुखता से होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि इस दौरे के बाद, ट्रंप की योजना इस साल के आखिर में वाशिंगटन DC में शी और मैडम पेंग की वापसी यात्रा की मेज़बानी करने की है।अटकलों के बीच ताइवान नीति स्पष्ट की गईताइवान पर वाशिंगटन के रुख से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए, US अधिकारियों ने कहा कि नेता इस मामले पर नियमित रूप से चर्चा करते हैं, लेकिन उन्होंने नीति में किसी भी बदलाव की पुष्टि नहीं की। उन्होंने कहा, &quot;राष्ट्रपति ट्रंप और जनरल सेक्रेटरी शी जिनपिंग के बीच ताइवान को लेकर लगातार बातचीत चल रही है। निश्चित रूप से, पिछली कुछ बार जब भी उन्होंने बातचीत की है, तो यह चर्चा का एक मुख्य बिंदु रहा है। इन चर्चाओं के परिणामस्वरूप US नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हमें भविष्य में भी US नीति में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं है।&quot;ईरान पर US के नए प्रतिबंधों से तनाव बढ़ायह आगामी बैठक पिछले हफ़्ते घोषित US के नए प्रतिबंधों के बाद हो रही है, जिनका निशाना ईरान के वित्तीय और ऊर्जा क्षेत्र हैं; इससे तेहरान और चीन के साथ उसके व्यापारिक नेटवर्क पर दबाव और बढ़ गया है। US के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने X पर पोस्ट किया कि ईरान &quot;वैश्विक आतंकवाद का सरगना&quot; है और ट्रेजरी विभाग &quot;Economic Fury&quot; (आर्थिक रोष) नामक पहल के ज़रिए &quot;आक्रामक&quot; तरीके से कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने आगे कहा, &quot;हम इस शासन की धन जुटाने, उसे स्थानांतरित करने और वापस लाने की क्षमता को लगातार निशाना बनाते रहेंगे, और जो कोई भी तेहरान को प्रतिबंधों से बचने में मदद करेगा, हम उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।&quot; Stay updated with International
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<pubDate>Mon, 11 May 2026 09:31:28 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump ने ठुकराया Iran का शांति प्रस्ताव: &amp;apos;पूरी तरह अस्वीकार्य&amp;apos; करार देते हुए दी गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए युद्ध विराम के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। रविवार को &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर जारी एक कड़े संदेश में ट्रंप ने इस प्रस्ताव को &quot;पूरी तरह से अस्वीकार्य&quot; बताया। 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति को संकट में डाल दिया है। इस युद्ध ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम, समुद्री मार्ग को अवरुद्ध कर दिया है जिससे कई देश ईंधन की कमी का सामना कर रहे हैं।
 ट्रंप ने रविवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट किया, ‘‘मैंने अभी-अभी ईरान के तथाकथित ‘प्रतिनिधियों’ का जवाब पढ़ा। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया - यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।’’इसे भी पढ़ें: पंजाब की साझा संस्कृति के सामने विफल होगी भाजपा की &#039;फूट डालो और राज करो&#039; की नीति: मुख्यमंत्री भगवंत मान
 इससे पहले ट्रंप ने ईरान पर लगभग 50 वर्षों से अमेरिका के साथ खेल खेलने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा, ‘‘अब वे ज्यादा समय तक खुश नहीं रह पाएंगे।’’
 ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘एक्सियोस’ से कहा, ‘‘मुझे उनका पत्र पसंद नहीं आया। यह ठीक नहीं है। मुझे उनकी प्रतिक्रिया पसंद नहीं आई।”
 हालांकि उन्होंने ईरान के जवाब के बारे में और अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया।
 इसी बीच, रिपब्लिकन पार्टी से सांसद लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप को अब सैन्य कार्रवाई करने पर विचार करना चाहिए।
 उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं राष्ट्रपति ट्रंप के ईमानदार प्रयासों की सराहना करता हूं, जो ईरानी आतंकवादी शासन के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए कूटनीतिक समाधान तलाश रहे हैं।’’इसे भी पढ़ें: WFI का बड़ा एक्शन: WADA नियमों के उल्लंघन पर Vinesh Phogat की वापसी पर लगी रोक 
ग्राहम ने कहा, ‘‘ हालांकि, अंतरराष्ट्रीय नौवहन पर उनके लगातार हमलों, हमारेसहयोगियों पर निरंतर हमलों और अब अमेरिका के कूटनीतिक प्रस्ताव पर पूरी तरह अस्वीकार्य प्रतिक्रिया को देखते हुए, मेरी राय में अब दिशा बदलने पर विचार करने का समय आ गया है।राष्ट्रपति ट्रंप की इस टिप्पणी के बाद पश्चिम एशिया में स्थिति और भी विस्फोटक होने की आशंका है। जहाँ एक ओर ट्रंप ने शांति प्रस्ताव को ठुकरा कर अपने इरादे साफ कर दिए हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य विकल्प मेज पर होने से वैश्विक समुदाय की चिंताएं बढ़ गई हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि व्हाइट हाउस का अगला कदम क्या होगा। Stay updated with International
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<pubDate>Mon, 11 May 2026 09:31:28 +0530</pubDate>
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<title>Nepal को भारत ने दिया 440 वोल्ट का झटका, रद्द किया Foreign Secretary दौरा</title>
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<description><![CDATA[ पिछले कुछ दिनों में भारत और नेपाल के रिश्तों में हल्का तनाव देखने को मिला। पहले लिपुलेख को लेकर विवाद जहां दोनों देशों की ओर से बयानबाजी हुई और अब खबर आ रही है कि भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री का प्रस्तावित नेपाल दौरा फिलहाल टाल दिया गया। बताया जा रहा है कि यह दौरा 11 मई से शुरू होना था। लेकिन अचानक इसे स्थगित कर दिया गया और भारत की ओर से लिए गए इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई। दरअसल विदेश सचिव विक्रम मिश्री दो दिन के दौरे पर काठमांडू जाने वाले नेपाल और भारत दोनों तरफ से इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई थी। लेकिन अब अचानक इस दौरे को टाल दिया गया। नेपाल के विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों के मुताबिक भारतीय पक्ष की तरफ से अचानक जानकारी ली गई कि यह दौरा फिलहाल टाल दिया गया है। इसे भी पढ़ें: लिपुलेख पर घिरे बालेन शाह, अब नेपाली सांसदों ने काटा बवाल!हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई कारण नहीं बताया गया। भारतीय विदेश सचिव के इस दौरे को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि नेपाल में हाल ही में नई सरकार बनी और बालन शाह नेपाल के नए प्रधानमंत्री बने हैं और वह पहली बार भारत के साथ प्रधानमंत्री बनने के बाद उच्च स्तरीय बातचीत करने वाले थे। भारत की योजना थी कि विदेश सचिव विक्रम मिश्री नेपाल जाकर प्रधानमंत्री बालेन शाह को भारत आने का औपचारिक निमंत्रण दें। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ की तरफ से इस बैठक को लेकर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिली और यही वजह बताई जा रही है कि भारत ने दौरा आगे बढ़ाने का फैसला लिया। सूत्रों का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री स्तर की मुलाकात ही नहीं हो पाती तो फिर इस दौरे का राजनीतिक महत्व कम हो जाता। हालांकि नेपाल सरकार ने इस मामले को ज्यादा बड़ा मुद्दा मानने से इंकार किया।इसे भी पढ़ें: Neapl ठोकेगा भारत पर भारी जुर्माना? नए फरमान से मचा बवाल नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौल क्षेत्री ने कहा कि भारत और नेपाल के रिश्ते बहुत गहरे हैं और किसी एक मुद्दे से दोनों देशों के संबंध प्रभावित नहीं होंगे। हालांकि एक बात और यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब लिपुलेख को लेकर भी तनाव बढ़ा हुआ है। नेपाल की सरकार और विपक्ष दोनों ने लिपुलेख को लेकर बयानबाजी तेज कर दी है। आपको बता दें लिपुलेख वो इलाका है जो भारत का है और नेपाल इसे लेकर उल्टे सीधे दावे करता है और पिछले कुछ दिनों में नेपाल में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी काफी तेज हो गई। ऐसे में विदेश सचिव का दौरा टलना इन घटनाओं का भी प्रभाव हो सकता है। हालांकि इसकी पुष्टि भारत तक नहीं करता। आपको बता दें भारत और नेपाल के संबंध सिर्फ पड़ोसी देशों वाले नहीं है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है। सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव है और आर्थिक सहयोग भी दोनों के बीच काफी बड़ा रोटी बेटी का रिश्ता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 10 May 2026 10:58:17 +0530</pubDate>
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<title>Trump ने बताया &amp;apos;प्रभावशाली&amp;apos;, फिर क्यों White House से चुपचाप निकले Lula? मीटिंग पर सस्पेंस गहराया</title>
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<description><![CDATA[ ब्राजील के राष्ट्रपति लुला दा सिल्वा ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की ताकि दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव को कम किया जा सके। हालांकि, विश्व नेताओं के लिए प्रचलित प्रथा के विपरीत, उन्होंने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग नहीं लिया। व्हाइट हाउस में मौजूद लोगों ने ब्राज़ीलियाई पत्रकारों की व्हाइट हाउस से निकलते हुए तस्वीरें शेयर की। लूला संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं हुए थे। MAGA समर्थकों के एक समूह ने अटकलें लगाईं कि लूला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसलिए हिस्सा नहीं लिया क्योंकि ट्रंप के साथ उनकी मुलाकात गहमा-गहमी भरी रही होगी। लोकप्रिय धुर दक्षिणपंथी टिप्पणीकार निक सॉर्टर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने बंद दरवाजों के पीछे वामपंथी लूला की जमकर धज्जियां उड़ाई होंगी। सॉर्टर ने ब्राज़ीलियाई पत्रकारों के व्हाइट हाउस से निकलते हुए एक वीडियो भी साझा किया। एक अन्य यूजर ने एक्स पर लिखा कि पुष्टि हो गई है। ट्रंप और लूला की मुलाकात का कोई भी हिस्सा प्रेस के लिए खुला नहीं रहेगा। लूला व्हाइट हाउस से रवाना हो रहे हैं। एक अप्रत्याशित बदलाव, एक अपेक्षित बैठक के बाद जो अब ब्राज़ीलियाई प्रतिनिधिमंडल के अनुरोध पर गुप्त रखी गई है। इसे भी पढ़ें: क्या असली में होते हैं एलियंस? Trump ने खोलीं America की Secret UFO Files, जानिए क्या दिखाट्रंप ने सोशल मीडिया पर लूला को प्रभावशाली शख्स बताया तो लूला ने लिखा कि 3 घंटे चली इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों की बेहतरी की दिशा में काम हुआ। दोनों नेताओं की इस मीटिंग पर सबकी निगाहें थीं। वामपंथी लूला और दक्षिणपंथी ट्रंप के बीच तनातनी देखने को मिली थी। खासतौर पर पिछले साल अमेरिका ने ब्राजील पर टैरिफ लगाया तो रिश्ते असहज हुए थे।एक्सपर्ट मान रहे हैं कि अक्टूबर में ब्राजील में चुनाव हैं और लूला के सामने उसे लेकर चुनौतियां हैं। वह पिछले साल की तरह अमेरिकी की टैरिफ नीति के खिलाफ ग्लोबल साउथ देशों को लेकर चलाए गए अभियान से भी बचना चाहेंगे। पश्चिम एशिया के संकट की वजह से जियो पॉलिटिक्स के हालात अलग है और लूला इस वक्त ट्रंप से सीधे तौर पर टकराना नहीं चाहेंगे। ट्रंप ने पिछले साल जब टैरिफ लगाया था तब लूला ने कहा था कि ट्रंप दुनिया के शंहशाह नहीं हैं।ब्रिक्स लीडर्स समिट में भारत आ सकते है लूलासितंबर में भारत में ब्रिक्स लीडर्स समिट होनी है। बतौर ब्रिक्स सदस्य ब्राजील के राष्ट्रपति नई दिल्ली आ सकते है। ब्रिक्स देशों के इस बार के एजेंडे को लेकर अभी भी शेरपा स्तर की बैठके हो रही है। दरअसल इन राजनयिक वार्ताओ में सदस्य देशों के सीनियर प्रतिनिधि मिलते है और समिट का एजेंडा तैयार करने और उस पर सहमति बनाने की कोशिशे की जाती है। पिछली समिट में साझा ब्रिक्स करेंसी को लेकर चर्चाए हुई थी, लेकिन इसमें कई तरह की दिक्कतें और विरोध सामने पेश आए थे। भारत ने हमेशा ही डि-डॉलराइ‌जेशन का विरोध किया है। नई दिल्ली की हमेशा ही ये कोशिशें रही कि वह G-7 और ब्रिक्स के बीच एक संतुलन बनाए रखे। इस बार भी इस तरह के मुद्दो पर चर्चा होगी, इसकी संभावना ताजा हालातों में कम ही लगती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 10 May 2026 10:58:16 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran के बीच New Deal की पेशकश, क्या प्रतिबंधों के बदले परमाणु कार्यक्रम रोकेगा तेहरान?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से वाशिंगटन द्वारा प्रस्तावित नवीनतम प्रस्ताव पर ईरान से आज रात तक जवाब मिल जाएगा, हालांकि तेहरान ने संकेत दिया कि वह अभी भी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है और उसने अभी तक अपनी प्रतिक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से कहा कि मुझे आज रात एक पत्र मिलने की उम्मीद है। तो देखते हैं आगे क्या होता है। इससे पहले कि वह स्टर्लिंग, वर्जीनिया में अपने गोल्फ कोर्स के लिए रवाना हों। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान जानबूझकर प्रक्रिया में देरी कर रहा है, तो ट्रंप ने जवाब दिया हमें जल्द ही पता चल जाएगा। सीएनएन ने ईरानी मीडिया का हवाला देते हुए बताया कि ईरान अभी भी पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा भेजे गए &quot;संदेशों&quot; की समीक्षा कर रहा है और उसने अभी तक प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। इसे भी पढ़ें: शी जिनपिंग की गद्दारी से बुरी तरह चिढ़ा अमेरिका, Donald Trump उठाया बड़ा China के खिलाफ बड़ा कदमप्रस्तावित समझौता एक पृष्ठ का 14 सूत्रीय ज्ञापन है जिसका उद्देश्य संघर्ष को रोकना और वाशिंगटन और तेहरान के बीच औपचारिक वार्ता शुरू करना है। इस योजना के तहत, ईरान परमाणु संवर्धन गतिविधियों को रोक सकता है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका प्रतिबंधों में ढील दे सकता है और अरबों डॉलर की ईरानी संपत्तियों को जारी कर सकता है जो रोकी गई हैं। प्रस्ताव में कथित तौर पर दोनों पक्षों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रतिबंधों को कम करने के कदम भी शामिल हैं, जो एक महत्वपूर्ण वैश्विक तेल पारगमन मार्ग है और हाल के सैन्य तनावों का केंद्र बना हुआ है। यह समझौता 30 दिनों की वार्ता अवधि के साथ शुरू होगा जिसका उद्देश्य एक व्यापक दीर्घकालिक समझौते का मार्ग प्रशस्त करना है।इसे भी पढ़ें: Trump ने बताया &#039;प्रभावशाली&#039;, फिर क्यों White House से चुपचाप निकले Lula? मीटिंग पर सस्पेंस गहरायाहोर्मुज में नया तनावहोर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास जारी सैन्य तनाव के बीच राजनयिक प्रयास किए जा रहे हैं। एक ईरानी सैन्य सूत्र ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने इस क्षेत्र में ईरानी जहाजों के साथ फिर से हस्तक्षेप किया तो झड़पें दोबारा शुरू हो सकती हैं। ईरान की तसनीम समाचार एजेंसी के अनुसार, सूत्र ने मौजूदा स्थिति को &quot;शांत&quot; बताते हुए कहा कि अगर अमेरिकी सेना ईरानी जहाजों को बाधित करने का प्रयास करती है तो &quot;इस तरह के संघर्षों के फिर से शुरू होने की संभावना&quot; बनी हुई है। ईरान की फ़ार्स समाचार एजेंसी ने इससे पहले रणनीतिक जलमार्ग में ईरानी सेना और अमेरिकी नौसेना के जहाजों के बीच &quot;छिटपुट झड़पों&quot; की सूचना दी थी। यह तनाव अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के बयानों के बाद बढ़ा, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी सेना ने दो खाली ईरानी ध्वज वाले तेल टैंकरों पर हमला किया, जो कथित तौर पर ओमान की खाड़ी के रास्ते एक ईरानी बंदरगाह में प्रवेश करके चल रही अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने का प्रयास कर रहे थे। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 10 May 2026 10:58:15 +0530</pubDate>
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<title>Hungary Election का सबसे बड़ा उलटफेर, Viktor Orbán का 16 साल पुराना किला ध्वस्त, Tisza Party की जीत</title>
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<description><![CDATA[ हंगरी के प्रधानमंत्री के रूप में शनिवार को पीटर मग्यार ने शपथ ली। इसी के साथ विक्टर ओर्बन के 16 वर्षों के निरंकुश शासन का अंत हो गया।
 मग्यार की मध्य-दक्षिणपंथी टिस्ज़ा पार्टी ने एक आश्चर्यजनक उलटफेर में पिछले महीने ओर्बन की राष्ट्रवादी-लोकप्रिय फिडेज पार्टी को हराया था। हंगरी में साम्यवादी शासन के समाप्त होने के बाद किसी भी अन्य पार्टी की तुलना में मग्यार की पार्टी ने सबसे अधिक मत प्राप्त किये और संसद की सीटें जीतीं। 
 इस चुनाव में टिस्जा को संसद में दो-तिहाई बहुमत मिला, जिससे वह उन कई नीतियों को वापस ले सकेगी, जिनके कारण ओर्बन को उनके आलोचक धुर दक्षिणपंथी सत्तावादी करार देते थे। 
 हंगरी की संसद में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद मग्यार ने सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि वह अपने पद का इस्तेमाल हंगरी पर ‘‘शासन’’ करने के लिए नहीं, बल्कि ‘‘अपने देश की सेवा करने’’ के लिए करेंगे।
मग्यार ने कहा, ‘‘मैं यहां इसलिए नहीं खड़ा हूं क्योंकि मैं देश में किसी और से अलग हूं। मैं यहां इसलिए खड़ा हूं क्योंकि लाखों हंगरीवासियों ने बदलाव लाने का फैसला किया है। हमें जो विश्वास मिला है, वह हमारे लिए सम्मान और नैतिक दायित्व दोनों है, लेकिन साथ ही एक अद्भुत एहसास भी है।’’
 माना जा रहा है कि मग्यार की सरकार आने से हंगरी के यूरोपीय संघ के साथ राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आएगा। पूर्व प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण निर्णयों पर बार-बार वीटो किया है, जिनमें हाल में पड़ोसी यूक्रेन को समर्थन देने से संबंधित निर्णय को वीटो करना शामिल है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 10 May 2026 10:58:14 +0530</pubDate>
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<title>Ukraine War खत्म होने वाला है? Putin का बड़ा बयान, Peace Talks की उम्मीदें बढ़ीं</title>
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<description><![CDATA[ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि यूक्रेन युद्ध अंततः समाप्त होने के करीब है, जिससे चार साल से अधिक समय तक चले भीषण संघर्ष के बाद शांति वार्ता की नई उम्मीदें जगी हैं। शनिवार को मॉस्को में रूस के विजय दिवस समारोह के दौरान बोलते हुए पुतिन ने कहा कि मुझे लगता है कि यह मामला अब समाप्त होने वाला है। इसे कई लोग संघर्ष के वार्ता-प्रक्रिया चरण के लिए रूस के तैयार होने का अब तक का सबसे मजबूत संकेत मान रहे हैं। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब रूस और यूक्रेन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा प्रस्तावित तीन दिवसीय युद्धविराम की शुरुआत की। दोनों देशों ने 1,000 कैदियों के आदान-प्रदान पर भी सहमति जताई, जो युद्ध शुरू होने के बाद से सबसे बड़े कैदी आदान-प्रदानों में से एक है। इसे भी पढ़ें: Russia ने ईरान को थमा दिया ब्रह्मास्त्र, पुतिन के चक्रव्यूह में कैसे फंस गए ट्रंप?रूस का वार्षिक विजय दिवस परेड इस वर्ष मॉस्को में पिछले वर्षों की तुलना में काफी छोटा था। इस आयोजन के दौरान रेड स्क्वायर से कोई टैंक नहीं गुजरा। इसके बजाय, विशाल स्क्रीन पर मिसाइलें, ड्रोन और लड़ाकू विमान दिखाए गए, जबकि यूक्रेन युद्ध में शामिल सैनिकों सहित रूसी सैनिक राजधानी में मार्च करते हुए निकले। अपने भाषण में पुतिन ने रूसी सैनिकों की प्रशंसा की और नाटो देशों पर रूस के खिलाफ आक्रामक कार्रवाइयों का समर्थन करने का आरोप लगाया। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि उत्तर कोरियाई सैनिक, जिन्होंने कथित तौर पर कुर्स्क क्षेत्र में रूसी सेना के साथ मिलकर लड़ाई लड़ी थी, परेड में शामिल हुए।पुतिन ने यह भी संकेत दिया कि रूस यूरोपीय नेताओं के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए तैयार हो सकता है। जब उनसे पूछा गया कि वे किस यूरोपीय नेता के साथ बातचीत करना पसंद करेंगे, तो पुतिन ने पूर्व जर्मन चांसलर गेरहार्ड श्रोएडर का नाम लिया, जिनके मॉस्को के साथ लंबे समय से संबंध रहे हैं। उनसे यह भी पूछा गया कि क्या वे यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की से सीधे मुलाकात करेंगे। पुतिन ने कहा कि ऐसी मुलाकात तभी होगी जब दोनों पक्ष पहले एक दीर्घकालिक शांति योजना पर सहमत हो जाएंगे। इसे भी पढ़ें:  Russia-Ukraine Ceasefire | जंग के बीच राहत की खबर, Donald Trump के प्रयास लाए रंग, रूस-यूक्रेन में 3 दिन थमेंगी बंदूकें, घर लौटेंगे 2000 सैनिकइस बीच, ट्रंप ने दोनों देशों से अस्थायी युद्धविराम को बढ़ाने और युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाने का आग्रह किया। ट्रंप ने वाशिंगटन में पत्रकारों से कहा कि मैं इसे रुकते देखना चाहता हूं। रूस-यूक्रेन युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से जीवन के लिहाज से सबसे भयानक स्थिति है। अब तक युद्धविराम उल्लंघन की कोई बड़ी रिपोर्ट नहीं आई है, हालांकि हाल के दिनों में रूस और यूक्रेन दोनों ने एक-दूसरे पर हमले का आरोप लगाया है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 10 May 2026 10:58:13 +0530</pubDate>
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<title>जंग की आहट? China ने Taiwan की तरफ भेजे दर्जनों फाइटर जेट्स&#45;Warships, मचा हड़कंप</title>
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<description><![CDATA[ ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रविवार को ताइवान के क्षेत्रीय जलक्षेत्र के आसपास चीनी सैन्य विमानों की बारह उड़ानें, पांच जहाज और एक सरकारी जहाज देखे गए। X पर एक पोस्ट में मंत्रालय ने कहा कि आज सुबह 6 बजे (UTC+8) तक ताइवान के आसपास PLA विमानों के 12 समूह, PLAN के 5 पोत और 1 आधिकारिक पोत देखे गए। इनमें से 9 समूह मध्य रेखा पार करके ताइवान के उत्तरी और दक्षिण-पश्चिमी भाग में रक्षा रक्षा क्षेत्र (ADIZ) में प्रवेश कर गए। ROC सशस्त्र बलों ने स्थिति पर नजर रखी और जवाबी कार्रवाई की। इसे भी पढ़ें: Archery World Cup Final: भारतीय महिला टीम का शानदार प्रदर्शन, Shoot-Off में China को हराकर जीता खिताबशनिवार को ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने अपने आसपास आठ चीनी सैन्य विमानों, छह नौसैनिक जहाजों और दो सरकारी जहाजों की मौजूदगी का पता लगाया। इन आठों में से सभी ने मध्य रेखा पार कर ताइवान के मध्य, दक्षिण-पश्चिमी और पूर्वी भाग में रक्षा सीमा (एडीआईजेड) में प्रवेश किया। रक्षा मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट में कहा कि आज सुबह 6 बजे (UTC+8) तक ताइवान के आसपास PLA विमानों के 8 समूह, PLAN के 6 पोत और 2 सरकारी जहाज देखे गए। इनमें से 8 समूह मध्य रेखा पार करके ताइवान के मध्य, दक्षिण-पश्चिमी और पूर्वी भाग में रक्षा रक्षा क्षेत्र (ADIZ) में प्रवेश कर गए। #ROCArmedForces ने स्थिति पर नजर रखी और जवाबी कार्रवाई की। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: हाँ Operation Sindoor के दौरान दी थी Pakistan को मदद, China ने पहली बार खुलकर स्वीकाराताइवान पर चीन का दावा एक जटिल मुद्दा है, जिसकी जड़ें ऐतिहासिक, राजनीतिक और कानूनी तर्कों में निहित हैं। बीजिंग का दावा है कि ताइवान चीन का अभिन्न अंग है, यह दृष्टिकोण राष्ट्रीय नीति में निहित है और घरेलू कानूनों तथा अंतरराष्ट्रीय बयानों द्वारा समर्थित है। हालांकि, ताइवान अपनी एक अलग पहचान बनाए रखता है और अपनी सरकार, सेना और अर्थव्यवस्था के साथ स्वतंत्र रूप से कार्य करता है। ताइवान की स्थिति अंतरराष्ट्रीय बहस का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है, जो संप्रभुता, आत्मनिर्णय और अंतरराष्ट्रीय कानून में गैर-हस्तक्षेप के सिद्धांतों की परीक्षा लेती है, जैसा कि यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के अनुसार है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 10 May 2026 10:58:12 +0530</pubDate>
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<title>America के Miami में टूरिस्ट बोट में धमाका, 11 यात्री घायल, Gas Leak की आशंका</title>
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<description><![CDATA[ शनिवार को फ्लोरिडा के मियामी स्थित प्रसिद्ध हाउलोवर सैंडबार के पास एक नाव में संदिग्ध विस्फोट के बाद कम से कम 11 लोग घायल हो गए, जिससे शहर के सबसे व्यस्त पर्यटन स्थलों में से एक में दहशत फैल गई। यह घटना लोकप्रिय हाउलोवर सैंडबार के पास बिस्केन खाड़ी में हुई, जो पर्यटकों, नाव चालकों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ को आकर्षित करने के लिए जाना जाता है, खासकर सप्ताहांत में। अधिकारियों के अनुसार, विस्फोट कई यात्रियों को ले जा रही एक चार्टर नाव में हुआ। दोपहर के आसपास संभावित विस्फोट की सूचना मिलने के बाद मियामी-डेड फायर रेस्क्यू की आपातकालीन टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। इसे भी पढ़ें: Punjab बम धमाकों पर बढ़ा सियासी घमासान, BJP ने CM Bhagwant Mann को भेजा Defamation नोटिसबचाव अधिकारियों ने बताया कि स्थिति से निपटने के लिए दो दर्जन से अधिक आपातकालीन इकाइयों को तैनात किया गया था। बचाव दल को कई घायल यात्री मिले जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी। अधिकारियों ने पुष्टि की कि 11 लोगों को पास के अस्पतालों में ले जाया गया। हालांकि अधिकारियों ने चोटों की गंभीरता के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी है, लेकिन बचाव कर्मियों ने बताया कि विस्फोट के दौरान कुछ पीड़ितों को जलने और गंभीर चोटें आईं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, विस्फोट के समय जहाज पर लगभग 14 लोग सवार थे। इसे भी पढ़ें: Punjab में धमाकों की जिम्मेदारी खालिस्तान लिबरेशन आर्मी लेने का दावा कर रही, मगर भगवंत मान को यह BJP की हरकत लग रहीघटना के सटीक कारण की अभी भी जांच चल रही है। हालांकि, एक यात्री ने स्थानीय मीडिया को बताया कि विस्फोट नाव में गैस रिसाव के कारण हुआ होगा। फ्लोरिडा मत्स्य एवं वन्यजीव संरक्षण आयोग ने कहा कि जांचकर्ता नाव की जांच कर रहे हैं और विस्फोट के कारणों का पता लगाने के लिए सबूत जुटा रहे हैं। अमेरिकी तटरक्षक बल भी जांच और बचाव अभियान में शामिल हो गया है। आस-पास के लोगों ने विस्फोट के तुरंत बाद अफरा-तफरी का माहौल देखा। इलाके में एक अन्य नाव चला रहे एक स्थानीय व्यवसायी ने बताया कि उन्होंने विस्फोट के बाद यात्रियों को पानी में गिरते देखा। उन्होंने उस भयावह क्षण को याद करते हुए स्थानीय मीडिया को बताया, &quot;जब हमने पीछे मुड़कर देखा, तो हमने लोगों को धुएं में नाव से उड़ते हुए देखा।&quot; ]]></description>
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<pubDate>Sun, 10 May 2026 10:58:11 +0530</pubDate>
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<title>WHO: डॉक्टर टैड्रॉस हंटावायरस प्रभावित जहाज़ के लिए टैनेरिफ़ रवाना</title>
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<description><![CDATA[ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने, हंटावारयस के संक्रमण वाले मरीज़ों को ले जा रहे MV Hondius जहाज़ के रविवार को टैनेरिफ़ द्वीप पर पहुँचने के अवसर पर, वहाँ के निवासियों से शान्ति बनाए रखने की अपील की है.  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 10 May 2026 10:57:40 +0530</pubDate>
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<title>Russia ने ईरान को थमा दिया ब्रह्मास्त्र, पुतिन के चक्रव्यूह में कैसे फंस गए ट्रंप?</title>
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<description><![CDATA[ समंदर में अमेरिका और ईरान के बीच बीती रात जो टकराव हुआ उसने पूरी दुनिया को फिर से तीसरे विश्व युद्ध जैसे डर की तरफ धकेल दिया है। लेकिन अब इस जंग में सबसे बड़ा और सबसे खतरनाक मोड़ रूस की एंट्री मानी जा रही है।  खबर है कि व्लादमीर पुतिन ने ईरान के लिए अपना ऐसा रूसी चक्रव्यूह खोल दिया जिसे तोड़ना अमेरिका जैसी महाशक्ति के लिए भी आसान नहीं होगा। द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट ने पूरी दुनिया में हलचल पैदा कर दी है। दावा किया गया है कि रूस की खुफिया एजेंसी जीआरयू ने ईरान के लिए एक सीक्रेट मास्टर प्लान तैयार किया है। इस प्लान के तहत तेहरान को 5000 ऐसे फाइबर ऑप्टिक ड्रोन दिए जा रहे हैं जिन्हें दुनिया का कोई इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम ट्रैक नहीं कर पाएगा। यानी अब जंग सिर्फ मिसाइलों और जहाजों की नहीं रही बल्कि टेक्नोलॉजी की ऐसी लड़ाई बन चुकी है जहां दुश्मन को हमला दिखेगा भी नहीं। सबसे खतरनाक बात यह बताई जा रही है कि यह ड्रोन किसी रेडियो सिग्नल पर नहीं चलते। इन्हें एक बेहद पतली फाइबर ऑप्टिक केबल के जरिए कंट्रोल किया जाता है। इसका सीधा मतलब है कि अमेरिका के सबसे महंगे जैमर्स भी इन्हें रोक नहीं पाएंगे। यानी नो सिग्नल, नो जैमी। इन ड्रोंस में ऑपरेटर को बेहद क्लियर लाइव वीडियो मिलता है जिससे 40 किमी दूर बैठे दुश्मन पर भी सटीक हमला किया जा सकता है। इसे भी पढ़ें: Ukraine का भीषण Drone Attack, Russia के तेल बंदरगाह पर बरसाए 60 ड्रोन, मॉस्को तक हड़कंपरिपोर्ट में दावा किया गया कि इनकी वजह से युद्ध के मैदान में एक ग्रे जोन बन जाएगा जहां अमेरिकी सैनिकों को समझ ही नहीं आएगा कि हमला आखिर कहां से हो रहा है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। रूस अब ईरान को लंबी दूरी वाले सेटेलाइट ड्रोन देने की तैयारी में भी बताया जा रहा है। और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन ड्रोंस में कथित तौर पर स्टार्लिंग टर्मिनल्स का इस्तेमाल हो सकता है। यानी वही स्टारलिंग जिसे एलन मस्क की कंपनी चलाती। दावा यह भी किया गया कि यूक्रेन में रूस के लिए स्टारलिंग सेवाएं सीमित थी। लेकिन मिडिल ईस्ट में ऐसी पाबंदियां फिलहाल नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो ईरानी ड्रोन हजारों किलोमीटर दूर तक अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक रूस सिर्फ हथियार नहीं दे रहा बल्कि ईरान की पूरी ड्रोन आर्मी तैयार करने में जुटा हुआ है। इसके लिए तीन लेयर वाला सिक्योरिटी नेटवर्क बनाया जा रहा है। पहली लेयर में रूस की यूनिवर्सिटीज में पढ़ रहे करीब 10,000 ईरानी छात्रों को ड्रोन ऑपरेशंस की ट्रेनिंग देने की बात कही गई। दूसरी लेयर में ताजिक लोगों को शामिल किया जा रहा है क्योंकि वे रूसी और फारसी दोनों भाषाएं समझते हैं। और तीसरी लेयर में सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशरल असद के वफादार लड़ाकों को जोड़ने का दावा किया गया। माना जा रहा है कि यह पूरा प्लान तब तेज हुआ जब खबर आई कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान के सबसे अहम तेल केंद्र खारग द्वीप पर कब्जे की तैयारी कर रहा था। खार्क वही जगह है जहां से ईरान के तीर निर्यात का बड़ा हिस्सा निकलता है। अगर यहां हमला होता तो ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। अब रूस की इस कथित मदद के बाद तस्वीर बदलती दिख रही है। कहा जा रहा है कि पुतिन ने ईरान को ऐसी तकनीकी ढाल दे दी है जिससे अमेरिका का मिशन मुश्किल में पड़ सकता है। इसे भी पढ़ें: भारत के दोस्त रूस पर हमला, अब होगा US के 19 जहाजों का हिसाब!लेबनान में हिज्ला पहले ही ऐसे रूसी डन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके इसरली सेना को चुनौती देता दिखाई दे चुका है। और अब अगर यही सिस्टम ईरान के हाथों में बड़े स्तर पर पहुंचता है तो मिडिल ईस्ट की जंग और ज्यादा खतरनाक मोड़ ले सकती है। अब दुनिया की नजर सिर्फ एक सवाल पर टिकी है। क्या ट्रंप रूसी चक्रव्यूह को तोड़ पाएंगे या फिर ईरान की ये नई किलर मशीनें अमेरिका के लिए ऐसा डरावना सपना बन जाएंगी जिससे बाहर निकलना बेहद मुश्किल होगा। कल तक अमेरिका को ना कर रहे सऊदी अरब ने आखिरकार हां कर दी है। जी हां, ईरान, अमेरिका, इसराइल टेंशन के बीच मीडिया रिपोर्ट के हवाले से बड़ी खबर आ रही है। जिसमें कहा जा रहा है कि सऊदी अरब ने अमेरिकी फर्सेस को अपने यहां मौजूद एयरबेस और अपना एयर स्पेस इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जनरल की ये रिपोर्ट छपी है। यह खबर इसलिए भी अहम है कि इससे पहले सऊदी ने हॉर्मोस छुड़वाने के लिए ईरान के खिलाफ किसी भी कारवाई के लिए अपने एयरबेस देने से मना कर दिया था। जिसके चलते अमेरिका को अपना प्रोजेक्ट फ्रीडम ऑपरेशन ही रोकना पड़ गया था।  इसे भी पढ़ें: Kim Jong Un और Vladimir Putin आ गये साथ, दुनिया में मचा हड़कंप, ट्रंप की भी सास फूली...बड़ा सवाल यह है कि कल तक अमेरिका को साफ मना कर चुका सऊदी अचानक कुछ ही घंटों में ईरान के खिलाफ कैसे हो गया? इस पर एक्सपर्ट कहते हैं कि दरअसल अमेरिकी और पश्चिमी मीडिया में इस तरह की खबरें जानबूझकर भी प्लांट करवाई जाती हैं। मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट तो यह भी कयास लगाते हैं कि यूएई जो कि सीधे तौर पर अमेरिका और इसराइल के खेमे में है, अपने दो दुश्मनों को निपटाना चाह रहा है। एक है ईरान और दूसरा है सऊदी। यूएई भी अपने दोस्तों के साथ मिलकर इस तरह की खबरें चलवाता है जिससे सऊदी और ईरान के बीच इख्तलाफ पैदा हो और ईरान गुस्से में सऊदी पर एक आध बड़ा हमला कर दे जिससे माहौल बन जाए।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 16:20:27 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan के शिया कर्मचारियों को धक्के मारकर देश से बाहर निकाल रहा है UAE, दोनों देशों के रिश्ते और बिगड़े</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात के रिश्तों में गहरी दरार दिखाई देने लगी है। हाल के दिनों में संयुक्त अरब अमीरात द्वारा हजारों पाकिस्तानी शिया कामगारों को बाहर निकाले जाने की खबरों ने इस तनाव को और गंभीर बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्रों की रिपोर्टों के अनुसार, अमीरात सरकार ने अप्रैल के मध्य से पाकिस्तानी शिया समुदाय के लोगों पर कार्रवाई तेज कर दी है। इस पूरे घटनाक्रम को पाकिस्तान की विदेश नीति, ईरान और सऊदी अरब के साथ उसके रिश्तों तथा खाड़ी क्षेत्र की बदलती राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।एक प्रमुख अमेरिकी समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात पाकिस्तान से इस बात से नाराज है कि उसने ईरान के हमलों की खुलकर निंदा नहीं की। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान ईरान ने अमीरात पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे। अमीरात चाहता था कि पाकिस्तान खुलकर उसका समर्थन करे, लेकिन इस्लामाबाद ने खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश की। पाकिस्तान ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत कराने का प्रयास किया, जिसे अबू धाबी ने अपने हितों के खिलाफ माना।इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: हाँ Operation Sindoor के दौरान दी थी Pakistan को मदद, China ने पहली बार खुलकर स्वीकाराविशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यही संतुलनकारी नीति अब उसके लिए परेशानी बन गई है। पाकिस्तान एक ओर सऊदी अरब के साथ अपने पुराने और घनिष्ठ रिश्ते बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ भी संबंध खराब नहीं करना चाहता। लेकिन अमीरात को लगने लगा है कि पाकिस्तान ईरान के प्रति नरम रुख अपना रहा है। इसी वजह से अबू धाबी और इस्लामाबाद के बीच अविश्वास बढ़ता जा रहा है।रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमीरात में काम कर रहे कई पाकिस्तानी शिया कर्मचारियों को बिना स्पष्ट कारण हिरासत में लिया गया और बाद में उन्हें देश से बाहर भेज दिया गया। पाकिस्तान के भीतर शिया संगठनों का कहना है कि अब तक हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं। उत्तर पश्चिम पाकिस्तान के शिया बहुल गांवों में भी सैकड़ों लोगों के वापस लौटने की जानकारी सामने आई है। कई कामगारों ने आरोप लगाया कि उन्हें कुछ दिनों तक हिरासत में रखने के बाद आपात यात्रा दस्तावेज देकर पाकिस्तान भेज दिया गया।कुछ निर्वासित कामगारों ने कहा कि उन्हें कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया। उनका कहना था कि केवल शिया होने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया। वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों से इंकार किया है। मंत्रालय का कहना है कि जिन लोगों को बाहर निकाला गया, वे आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे। पाकिस्तान सरकार ने इस मुद्दे पर अमीरात के खिलाफ खुलकर कोई कड़ा बयान नहीं दिया है। इसकी सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान की आर्थिक मजबूरी मानी जा रही है।संयुक्त अरब अमीरात पाकिस्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है। करीब बीस लाख पाकिस्तानी वहां रहकर काम करते हैं और हर साल अरबों डॉलर की रकम अपने देश भेजते हैं। पिछले वर्ष पाकिस्तान को अमीरात से लगभग आठ अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई थी। ऐसे में यदि अमीरात ने वीजा प्रतिबंध, निर्वासन और रोजगार में कटौती जैसे कदम आगे भी जारी रखे, तो पाकिस्तान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ सकता है।देखा जाये तो हाल के महीनों में अमीरात का रुख लगातार सख्त होता दिखाई दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, हजारों पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजा गया है और कई लोगों के वीजा नवीनीकरण रोके गए हैं। कुछ विमानन और दूरसंचार कंपनियों ने भी पाकिस्तानी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। अमीरात की प्रमुख दूरसंचार कंपनी द्वारा पाकिस्तान से कारोबार समेटने की संभावना की खबरों ने भी चिंता बढ़ा दी है।हम आपको यह भी याद दिला दें कि हाल ही में अमीरात ने पाकिस्तान से अपने साढ़े तीन अरब डॉलर के कर्ज की वापसी की मांग कर दी थी। यह रकम पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग पांचवें हिस्से के बराबर है। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह झटका बेहद गंभीर माना गया। इसी बीच, सऊदी अरब ने पाकिस्तान को तीन अरब डॉलर की सहायता दी और पहले से दिए गए पांच अरब डॉलर के कर्ज की अवधि बढ़ाकर इस्लामाबाद को राहत पहुंचाई। इससे यह भी संकेत मिला कि खाड़ी क्षेत्र में पाकिस्तान अब दो प्रमुख शक्तियों के बीच संतुलन बनाने की कठिन चुनौती का सामना कर रहा है।दूसरी ओर, विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद केवल सांप्रदायिक मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यापक भू राजनीतिक कारण भी हैं। पाकिस्तान की शिया आबादी के ईरान के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, जिससे खाड़ी देशों में संदेह का माहौल पैदा होता है। उधर, सऊदी अरब और अमीरात के रिश्तों में आई दूरी ने भी पाकिस्तान की स्थिति को कठिन बना दिया है। अमीरात को यह भी चिंता है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब की बढ़ती नजदीकी उसके हितों को प्रभावित कर सकती है।बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान की विदेश नीति के सामने एक गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ उसे अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए खाड़ी देशों की मदद चाहिए, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय संघर्षों में तटस्थ बने रहना भी उसके लिए जरूरी है। लेकिन मौजूदा हालात में पाकिस्तान का यह संतुलनकारी प्रयास उलटा पड़ता दिखाई दे रहा है। आने वाले महीनों में यदि अमीरात और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, रोजगार और सामाजिक स्थिति पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 16:20:26 +0530</pubDate>
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<title>लिपुलेख पर घिरे बालेन शाह, अब नेपाली सांसदों ने काटा बवाल!</title>
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<description><![CDATA[ भारत और नेपाल के बीच का विवाद अभी थमता हुआ नहीं दिख रहा है। जहां पहले नेपाल की बालेन सरकार ने मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख दर्रे के इस्तेमाल पर प्रोटेस्ट नोट जारी किया था। जिसके जवाब में भारत ने भी कड़ा जवाब नेपाल को दिया था और इन सबके बीच एक बार फिर नेपाल के भीतर से लिपुलेख को लेकर मांग उठने लगी है। दरअसल नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाली विपक्ष ने प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार पर सीधा दबाव बनाया है कि वह भारत और चीन के साथ सिर्फ डिप्लोमेटिक नोट्स यानी कि प्रोटेस्ट नोट जैसी कूटनीतिक चिट्ठियों का आदानप्रदान बंद करें और सीधे टेबल टॉक यानी उच्च स्तरीय बातचीत करें लिपुलेख के मुद्दे पर। यानी अब नेपाल का विपक्ष भी लिपुलेख के मुद्दे पर ऐसे सवाल उठा रहा है। इस विवाद की ताजा वजह है कैलाश मानसरोवर यात्रा और उसको लेकर नेपाल के द्वारा उठाया गया विरोध। हाल ही में भारत और चीन ने लिपुलेख दर्रे के रास्ते इस पवित्र यात्रा की घोषणा की थी। जिसके बाद नेपाल सरकार ने इस पर आपत्ति जताते हुए भारत और चीन दोनों को ही राजनीयिक नोट भेज दिया था। जिसमें नेपाल का दावा था कि बिना उसकी सहमति के इस रास्ते का उपयोग नहीं किया जा सकता।  इसे भी पढ़ें: Kailash Mansarovar Yatra से फिर गरमाया India-Nepal Border Dispute, लिपुलेख पर दावे को भारत ने बताया &#039;मनगढ़ंत&#039;इसी नोट को लेकर नेपाल की संसद की अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति में विपक्षी सांसदों ने बालेन शाह सरकार को जमकर कोसा है। नेपाली कांग्रेस के सांसद संदीप राणा ने कहा लिपुलेख, लिंपियाधूरा और काला पानी नेपाल की जमीन है और भारत इसे अपनी मर्जी से इस्तेमाल कर रहा है। वहीं केपी शर्मा ओली की पार्टी सीपीएन यूएमएल की सांसद भूमिका लिंबू सुबा ने तो भारत की प्रतिक्रिया को गैर जिम्मेदाराना तक करार दे दिया। नेपाली विपक्ष की मांग है कि नेपाल सरकार को और कड़ा रुख अपनाना चाहिए और इन इलाकों को वापस लेने के लिए सीधे तौर पर बातचीत करना चाहिए। वहीं हम बात करें नेपाल के दावों पर भारत के रुख की तो भारत का रुख हमेशा से ही क्रिस्टल क्लियर रहा है यानी बिल्कुल साफ। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि लिपुलेख के राष्ट्रीय कैलाश मानसरोवर यात्रा दशकों से होती आ रही है और इसमें कुछ भी नया नहीं है। इसे भी पढ़ें: Neapl ठोकेगा भारत पर भारी जुर्माना? नए फरमान से मचा बवालभारत ने नेपाल के नक्शे के विस्तार को कृत्रिम और एकतरफ़ा बताया है यानी बनावटी। भारत ने साफ कहा है कि वह बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन किसी भी तरह के अनुचित दबाव या ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ को स्वीकार नहीं किया जाएगा। लिपुलेखक, लिंपियादुरा और कालापानी ये तीनों इलाके भारत, नेपाल और चीन के ट्रांजैक्शन पर स्थित हैं। भारत के लिए लिपुलेख सामरिक यानी कि स्ट्रेटेजिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है और नेपाल में सत्ता परिवर्तन होने के बाद अक्सर ही इस मुद्दे को उछाला जाता है। लेकिन इस बार बालचाल सरकार पर विपक्ष का यह दबाव संबंधों में नई कड़वाहट पैदा कर सकता है। एक तरफ भारत और नेपाल के बीच रोटी बेटी का रिश्ता है। तो वहीं दूसरी तरफ यह सीमा विवाद और अब नेपाल सरकार के साथ वहां की विपक्ष की ओर से भी ऐसे बयान सामने आना दोनों देशों के रिश्तों में असर डाल सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 16:20:25 +0530</pubDate>
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<title>क्या असली में होते हैं एलियंस? Trump ने खोलीं America की Secret UFO Files, जानिए क्या दिखा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन ने अज्ञात असामान्य घटनाओं से जुड़ी &#039;पहले कभी न देखी गई&#039; फाइलों को जारी करना शुरू किया है। पहले इन घटनाओं को अज्ञात उड़ने वाली वस्तुओं (UFO) के रूप में जाना जाता था। फाइलें पीढ़ियों से अमेरिकियों के लिए जिज्ञासा का स्रोत रही हैं जो यह सोचते हैं कि क्या हम ब्रह्मांड में अकेले हैं। न्यू यॉर्क टाइम्स के मुताबिक, शुरुआती तस्वीरें धुंधली हैं और उनमें कुछ भी दिख सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा- &#039;आप खुद तय करें कि ये क्या है।&#039; दुनिया भर की 400 से अधिक घटनाओं का जिक्र है। कई विडियो में US सेना द्वारा इन्फ्रारेड सेंसर से ली गई धुंधली फुटेज हैं। कई अमेरिकी खुफिया और रक्षा एजेंसियों के समन्वय से चलाया जा रहा है। इनमें युद्ध विभाग, राष्ट्रीय खुफिया निदेशक का कार्यालय, नासा, एफबीआई, ऊर्जा विभाग और पेंटागन का सर्व-क्षेत्रीय विसंगति समाधान कार्यालय (जिसे आमतौर पर AARO के नाम से जाना जाता है) शामिल हैं।इसे भी पढ़ें: Taliban के हमले से पहले पेशावर से भागा अमेरिका, मुनीर के उड़े होश!अंतरिक्ष यात्री ने केबिन से क्या देखा?अमेरिका की ओर से जारी 160 से अधिक फाइलों में अपोलो 11, अपोलो 12 और अपोलो 17 मून मिशन से जुड़ी घटनाएं शामिल है। अपोलो 11 उडान के बाद 1969 में हुई एक ब्रीफिंग में अंतरिक्ष यात्री बज एल्ड्रिन ने सोने की कोशिश करते समय केबिन के अंदर कुछ मिनटों के अंतराल पर हल्की-हल्की चमक दिखाई देने की बात कही थी।इसे भी पढ़ें: शी जिनपिंग की गद्दारी से बुरी तरह चिढ़ा अमेरिका, Donald Trump उठाया बड़ा China के खिलाफ बड़ा कदमफ़ुटबॉल के आकार की वस्तुएँ और क्षणिक गायब होनाजारी की गई सामग्री में अंडाकार धातु की वस्तुओं, अस्पष्ट अवरक्त संकेतों और कथित तौर पर &quot;क्षणिक रूप से&quot; गायब होने वाले हवाई जहाजों से संबंधित रिपोर्टें शामिल हैं। युद्ध विभाग द्वारा जारी एक तस्वीर में कथित तौर पर 130 से 195 फीट लंबी एक कांस्य धातु की वस्तु आकाश में कुछ क्षणों के लिए दिखाई देने के बाद गायब हो जाती है। एक अन्य फ़ाइल में जापान के पास देखे गए फ़ुटबॉल के आकार के एक पिंड का ज़िक्र है, जिसे अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड ने दस्तावेज़ित किया था। इस संग्रह में 2025 में पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका के ऊपर ली गई इन्फ्रारेड तस्वीरें भी शामिल हैं, साथ ही अपोलो युग की पुरानी सामग्री भी है जिसमें अपोलो 17 चंद्र मिशन के दौरान खींची गई अज्ञात रोशनी की तस्वीरों का पुन: विश्लेषण किया गया है। इनमें से कुछ रिपोर्टें कई साल पुरानी हैं, जबकि कुछ हाल की हैं। ये सभी रिपोर्टें वाशिंगटन द्वारा सैन्य कर्मियों से जुड़े अज्ञात हवाई मुठभेड़ों के बारे में अधिक जानकारी सार्वजनिक करने के बढ़ते जन और संसदीय दबाव को संबोधित करने के प्रयास का हिस्सा हैं।इसे भी पढ़ें: Russia ने ईरान को थमा दिया ब्रह्मास्त्र, पुतिन के चक्रव्यूह में कैसे फंस गए ट्रंप?वाशिंगटन ने यूएफओ पर अपना रुख क्यों बदला?दशकों तक, अमेरिकी सरकार यूएफओ संबंधी चर्चाओं को लगभग हाशिए का विषय मानती रही। पिछले कुछ वर्षों में इस रुख में काफी बदलाव आया है। इसका एक कारण यह है कि सैन्य पायलटों ने असामान्य उड़ान विशेषताओं वाले अज्ञात हवाई पिंडों के साथ मुठभेड़ों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा करना शुरू कर दिया। दूसरा कारण यह है कि आधुनिक लड़ाकू विमानों, उपग्रहों और नौसैनिक प्लेटफार्मों में उन्नत सेंसर प्रणालियों के कारण ऐसी घटनाओं की अधिक रिपोर्टें आने लगीं जिन्हें तुरंत वर्गीकृत नहीं किया जा सकता था। पेंटागन ने स्वयं हाल के वर्षों में स्वीकार किया है कि कुछ घटनाएं जांच के बाद भी अनसुलझी रह गई हैं। फिर भी, अनसुलझी होने का मतलब यह नहीं है कि वे अलौकिक हैं। यह अंतर पेंटागन के संदेश का मुख्य बिंदु बना हुआ है। नए खुलासों की घोषणा करते हुए, युद्ध विभाग ने कहा कि पिछली सरकारों ने अक्सर अमेरिकियों को ऐसी घटनाओं पर चर्चा करने से &quot;बदनाम&quot; किया या हतोत्साहित किया था। इसके विपरीत, ट्रम्प प्रशासन ने इस खुलासे के प्रयास को &quot;अधिकतम पारदर्शिता&quot; की दिशा में एक व्यापक प्रयास के हिस्से के रूप में प्रस्तुत किया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 16:20:24 +0530</pubDate>
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<title>शी जिनपिंग की गद्दारी से बुरी तरह चिढ़ा अमेरिका, Donald Trump उठाया बड़ा China के खिलाफ बड़ा कदम</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन ने ईरान के सैन्य-औद्योगिक परिसर को मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय मदद की कमर तोड़ने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 10 व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंधों की घोषणा की। इन कंपनियों पर ईरान को घातक शाहेद (Shahed) ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों के निर्माण के लिए जरूरी पुर्जे और कच्चा माल मुहैया कराने का गंभीर आरोप है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा से ठीक पहले चीन पर दबाव बढ़ाने की रणनीति के रूप में इसे देखा जा रहा है।एक बयान में, ट्रेजरी विभाग ने कहा कि वह ईरान के सैन्य-औद्योगिक आधार के खिलाफ और आर्थिक कार्रवाई करने के लिए तैयार है, ताकि तेहरान को अपनी उत्पादन क्षमताएं फिर से बनाने से रोका जा सके।विभाग ने यह भी चेतावनी दी कि वह उन विदेशी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को निशाना बना सकता है जो ईरान के अवैध व्यापार में मदद कर रहे हैं। इनमें चीन की स्वतंत्र &quot;टीपॉट&quot; तेल रिफाइनरियों से जुड़ी कंपनियाँ और ईरान की गतिविधियों में मदद करने वाली एयरलाइंस भी शामिल हैं। इसे भी पढ़ें: Mother&#039;s Day Gift Ideas: ये शानदार Cotton Sarees हैं Best Option, मां हो जाएंगी बेहद खुशजिन संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए गए, उनमें चीन की Yushita Shanghai International Trade Co Ltd शामिल है। इस पर आरोप है कि इसने ईरान को चीन से हथियार खरीदने की कोशिशों में मदद की। दूसरी कंपनी दुबई की Elite Energy FZCO है, जिस पर आरोप है कि इसने खरीद-फरोख्त के कामों में शामिल हांगकांग की एक कंपनी को लाखों डॉलर ट्रांसफर किए।हांगकांग की HK Hesin Industry Co Ltd और बेलारूस की Armory Alliance LLC पर खरीद नेटवर्क में बिचौलिए के तौर पर काम करने का आरोप लगाया गया, जबकि हांगकांग की Mustad Ltd पर आरोप है कि इसने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के लिए हथियार खरीदने में मदद की। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu का सियासी दंगल! TTV दिनाकरन ने विजय की TVK के खिलाफ दर्ज कराई FIR, &#039;फर्जी&#039; पत्र और &#039;वीडियो&#039; वॉर शुरूईरान की Pishgam Electronic Safeh Co पर ड्रोन में इस्तेमाल होने वाली मोटरें खरीदने के लिए प्रतिबंध लगाया गया, जबकि चीन की Hitex Insulation Ningbo Co Ltd पर बैलिस्टिक मिसाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान सप्लाई करने का आरोप लगाया गया।Obsidian Risk Advisors के मैनेजिंग प्रिंसिपल ब्रेट एरिक्सन ने कहा कि इन प्रतिबंधों का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और क्षेत्रीय सहयोगियों को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को सीमित करना है।28 फरवरी को ईरानी ठिकानों पर US और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। इस बंदी से इस रणनीतिक जलमार्ग से होने वाली जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस जलमार्ग से दुनिया के कुल कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस की सप्लाई का लगभग पाँचवाँ हिस्सा गुज़रता है, जिससे ऊर्जा की कीमतें तेज़ी से बढ़ गई हैं।ब्रिटिश सरकार द्वारा वित्तपोषित Centre for Information Resilience के अनुसार, ईरान के पास हर महीने लगभग 10,000 ड्रोन बनाने की औद्योगिक क्षमता है।एरिक्सन ने कहा कि ये ताज़ा प्रतिबंध बहुत ही सीमित दायरे में लगाए गए हैं, जिससे ईरान को अपने खरीद के रास्ते बदलने का समय मिल गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन ने अभी तक उन चीनी बैंकों को निशाना नहीं बनाया है जो ईरान की अर्थव्यवस्था को लगातार मदद दे रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 12:29:42 +0530</pubDate>
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<title>Prabhasakshi NewsRoom: हाँ Operation Sindoor के दौरान दी थी Pakistan को मदद, China ने पहली बार खुलकर स्वीकारा</title>
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<description><![CDATA[ वैसे तो यह बात पूरी दुनिया जानती है कि पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच चले सैन्य संघर्ष के दौरान चीन ने खुलकर इस्लामाबाद की मदद की थी लेकिन यह पहली बार है कि बीजिंग ने इस बात को अब स्वीकार भी कर लिया है। हम आपको बता दें कि चीन ने पहली बार कहा है कि उसने भारत के खिलाफ पाकिस्तान को जमीनी स्तर पर तकनीकी सहायता प्रदान की थी। दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार चीन के सरकारी प्रसारक ने एक साक्षात्कार प्रसारित किया, जिसमें चीन की विमानन उद्योग संस्था के अभियंताओं ने पाकिस्तान में अपनी प्रत्यक्ष भूमिका का खुलासा किया।रिपोर्ट के अनुसार चीन की विमान निर्माण संस्था के अभियंता झांग हेंग ने स्वीकार किया कि वह उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने पाकिस्तान को तकनीकी सहायता दी। उन्होंने बताया कि सहायता केंद्र पर लगातार लड़ाकू विमानों की आवाज सुनाई देती थी और हवाई हमले के सायरन बजते रहते थे। मई की भीषण गर्मी में तापमान लगभग पचास डिग्री तक पहुंच जाता था, जिससे वहां काम करना मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कठिन था।इसे भी पढ़ें: Vishwakhabram: China में कृषि मंत्री के बाद अब दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मिला मृत्युदंड, भ्रष्टाचारियों को कतई नहीं बख्शते Xi Jinpingझांग हेंग ने कहा कि उनकी टीम का उद्देश्य पाकिस्तान को ऐसा तकनीकी सहयोग देना था जिससे चीन निर्मित हथियार अपनी पूरी युद्ध क्षमता के साथ काम कर सकें। उन्होंने कहा कि यह केवल जे-10सीई विमान की सफलता नहीं थी, बल्कि दोनों देशों के बीच बने गहरे सहयोग का भी प्रमाण था। एक अन्य अभियंता शु दा ने जे-10सीई विमान की तुलना अपने बच्चे से करते हुए कहा कि उन्होंने इस विमान को तैयार किया, संवारा और उपयोगकर्ता को सौंपा। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान मिले परिणाम उनके लिए आश्चर्यजनक नहीं थे, क्योंकि उन्हें पहले से विश्वास था कि सही अवसर मिलने पर यह विमान अपनी क्षमता साबित करेगा।हम आपको बता दें कि जे-10सीई चीन के आधुनिक लड़ाकू विमानों में गिना जाता है और पाकिस्तान इस विमान का चीन के बाहर एकमात्र उपयोगकर्ता है। पाकिस्तान ने वर्ष 2020 में ऐसे 36 विमानों और ढाई सौ PL15 मिसाइलों का आदेश दिया था। इसके अलावा पाकिस्तान की वायु सेना में JF-17 जैसे विमान भी शामिल हैं, जिन्हें चीन के सहयोग से विकसित किया गया है। अब ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं कि पाकिस्तान चीन से 40 शेनयांग J-35 स्टेल्थ विमान खरीदने की तैयारी कर रहा है।हम आपको यह भी बता दें कि भारतीय सेना पहले ही यह आशंका जता चुकी है कि चीन पाकिस्तान को केवल हथियार नहीं दे रहा, बल्कि उसे एक लाइव प्रयोगशाला की तरह उपयोग कर रहा है। जुलाई 2025 में सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने कहा था कि पाकिस्तान के सैन्य उपकरणों का 81 प्रतिशत हिस्सा चीनी मूल का है। उन्होंने कहा था कि चीन पाकिस्तान के माध्यम से अपने हथियारों और निगरानी प्रणालियों का वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में परीक्षण कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि संघर्ष के दौरान चीन पाकिस्तान को भारत की सैन्य गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध करा रहा था।लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने ‘आपरेशन सिंदूर’ की रणनीति पर भी विस्तार से जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि भारत ने तकनीक और मानव खुफिया जानकारी के आधार पर कुल 21 लक्ष्यों की पहचान की थी, जिनमें से नौ को कार्रवाई के लिए चुना गया। अंतिम समय में इन लक्ष्यों पर हमले का निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा था कि भारत अब आतंकवादी हमलों को पहले की तरह सहन करने की नीति पर नहीं चल सकता और इसलिए सुरक्षा के प्रति अधिक आक्रामक दृष्टिकोण अपनाया गया।हम आपको यह भी बता दें कि रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2015 से अब तक चीन पाकिस्तान को आठ अरब डॉलर से अधिक के हथियार बेच चुका है। स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020 से 2024 के बीच चीन दुनिया का चौथा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक रहा और उसके कुल हथियार निर्यात का 63 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान को गया। इस प्रकार पाकिस्तान चीन का सबसे बड़ा हथियार ग्राहक बन चुका है।हम आपको यह भी बता दें कि अमेरिका की रक्षा खुफिया एजेंसी की हालिया रिपोर्ट में भी कहा गया है कि भारत चीन को अपना प्रमुख प्रतिद्वंद्वी मानता है, जबकि पाकिस्तान को एक ऐसी सुरक्षा चुनौती के रूप में देखता है जिसे नियंत्रित करना आवश्यक है। बहरहाल, चीन और पाकिस्तान के बढ़ते सैन्य सहयोग तथा आधुनिक हथियारों की आपूर्ति ने दक्षिण एशिया की सामरिक स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 12:29:41 +0530</pubDate>
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<title>10 % टैरिफ को कोर्ट ने किया रद्द, ईरान से तनातनी के बीच ट्रंप के साथ बड़ा खेल हो गया</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ को लेकर एक और झटका लगा है। अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत और दुनिया भर के अन्य देशों से आयात पर लगाया गया 10% सार्वभौमिक टैरिफ अवैध है। इस फैसले से दुनिया भर की कंपनियों में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। यह फैसला अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा फरवरी में अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के माध्यम से वैश्विक पारस्परिक टैरिफ लागू करने के ट्रंप के प्रयासों को खारिज करने के ठीक बाद आया है। फरवरी में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद, ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत आर्थिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए सभी वैश्विक आयातों पर 10% &quot;सार्वभौमिक&quot; शुल्क लगा दिया। यह कानूनी प्रावधान अमेरिकी राष्ट्रपति को संयुक्त राज्य अमेरिका के बड़े और गंभीर भुगतान संतुलन घाटे को दूर करने के लिए शुल्क लगाने का अधिकार देता है।इसे भी पढ़ें: ट्रंप को बड़ा कानूनी झटका! अमेरिका की कोर्ट ने 10% ग्लोबल टैरिफ को किया रद्द, बताया &#039;गैर-कानूनी&#039;न्यूयॉर्क स्थित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने आज अपने फैसले में 2-1 के बहुमत से पाया कि ट्रंप प्रशासन ने ऐसा नहीं किया था। न्यायालय के फैसले में कहा गया है यह मामला धारा 122 के अर्थ और इस बात पर आधारित है कि क्या राष्ट्रपति ने आयात अधिभार को वैध रूप से घोषित करने के लिए अधिनियम द्वारा आवश्यक शर्तों के अस्तित्व का दावा किया था। जैसा कि आगे चर्चा की गई है, राष्ट्रपति की घोषणा यह दावा करने में विफल रही है कि वे आवश्यक शर्तें पूरी हुई हैं। अमेरिका के पूर्व व्यापार वार्ताकारों का मानना ​​है कि यह फैसला राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए भले ही एक झटका हो, लेकिन इससे उनका प्रशासन अन्य तरीकों से वैश्विक शुल्क लागू करने से पीछे नहीं हटेगा। वाशिंगटन ने पहले ही 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत नए वैश्विक शुल्क लगाने की योजना शुरू कर दी है, जो उन देशों पर शुल्क लगाने की अनुमति देता है जो संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ अनुचित व्यापार प्रथाओं का इस्तेमाल करते हैं। इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz पर Trump का Iran को अल्टीमेटम, कहा- शर्तें नहीं मानीं तो होगी बमबारीयूएस इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम में व्यापार नीति के वरिष्ठ सलाहकार मार्क लिन्स्कॉट का कहना है कि ट्रंप प्रशासन के लिए एक स्पष्ट झटका है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इससे धारा 301 की जांच का इस्तेमाल आईईईपीए टैरिफ के स्थान पर करने की योजना में कोई बदलाव आएगा। प्रशासन धारा 301 टैरिफ को लेकर भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना करने में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में होगा, और यह स्पष्ट रूप से इन टैरिफ का लाभ उठाकर अपने द्वारा पहले से किए गए सभी समझौतों को बनाए रखने और भारत के साथ अंतरिम समझौते जैसे लंबित समझौतों को पूरा करने की योजना बना रहा है। Stay updated with International News in Hindi (https://www.prabhasakshi.com/international) on Prabhasakshi   ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Tesla जैसी गाड़ी में फंसे Donald Trump, Iran ने AI Video में लाचारी का उड़ाया मजाक</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है, ऐसे में दुनिया भर में फैले ईरानी दूतावासों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का मज़ाक उड़ाने के लिए सोशल मीडिया पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित मीम्स और पैरोडी वीडियो पोस्ट किए हैं। हाल ही में, हंगरी स्थित ईरानी दूतावास ने एक वायरल कृत्रिम रूप से निर्मित पैरोडी क्लिप साझा की है, जिसमें ट्रम्प को एक संकरे मार्ग से टेस्ला साइबरट्रक जैसी छोटी गाड़ी चलाने की कोशिश करते और असफल होते हुए दिखाया गया है। यह संकरा मार्ग इस महत्वपूर्ण जलमार्ग का प्रतीक है। लगभग 34 सेकंड का यह छोटा सा वीडियो क्लिप ऑस्टिन पॉवर्स: इंटरनेशनल मैन ऑफ मिस्ट्री के सबसे प्रसिद्ध दृश्यों में से एक से प्रेरित है, जहां ऑस्टिन पॉवर्स एक तंग गलियारे में एक छोटी सी सामान ढोने वाली गाड़ी को बुरी तरह फंसा देता है और उससे निकलने की असफल कोशिश में अजीब तरह से पीछे और आगे बढ़ने में अनंत समय बिताता है। इसे भी पढ़ें: बंगाल में BJP की प्रचंड जीत पर गदगद ट्रंप, हैरान हुआ बांग्लादेश!ईरानी दूतावास द्वारा साझा किए गए एआई संस्करण में, ट्रंप आत्मविश्वास से होर्मुज जलडमरूमध्य से मिलते-जुलते संकरे मार्ग में गाड़ी चलाते हुए दिखाई देते हैं। कुछ ही सेकंड में उनकी छोटी इलेक्ट्रिक गाड़ी मार्ग में फंस जाती है, जिससे ट्रंप को कई बार गाड़ी को पीछे और पीछे मोड़ने के बेतुके प्रयास करने पड़ते हैं, जिनका कोई नतीजा नहीं निकलता। वीडियो के कैप्शन में लिखा है ट्रंप का होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का प्रयास! इसके बाद एक व्यंग्यात्मक इमोजी है। टेस्ला जैसी दिखने वाली इस गाड़ी को अरबपति एलन मस्क और भविष्यवादी साइबरट्रक की डिज़ाइन की ओर इशारा माना जा रहा है, जिससे इस ट्रोलिंग वीडियो में इंटरनेट पर हास्य का एक और पहलू जुड़ जाता है। यह वीडियो ऑनलाइन वायरल हो गया है और शुक्रवार सुबह तक इसे 8 लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है। इसे भी पढ़ें: IndiGo Flight में Mahua Moitra के खिलाफ नारेबाजी, &#039;चोर TMC चोर&#039; और &#039;जय श्री राम&#039; के नारों से मची खलबलीएक सोशल मीडिया यूज़र ने एक्स पर लिखा कि ट्रंप इतनी तेज़ी से चल भी नहीं सकते, सोचना तो दूर की बात है! और आप उनके हाथों पर लगे मेकअप को भूल गए! बहुत मज़ेदार, हँसी दिलाने के लिए धन्यवाद। एक अन्य ने कहा कि मेरे पसंदीदा हीरो ऑस्टिन पॉवर्स से उस छिपकली को शामिल करने के लिए माफ़ी चाहता हूँ, लेकिन यह बिल्कुल सच और दुखद है। ट्रंप की &#039;बड़ी खूबसूरत&#039; स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ रणनीति: एक छोटी सी टेस्ला कार में पूरी रफ़्तार से आगे बढ़ना। फिर तुरंत फंस जाना, पीछे हटना और पापा एलन को बचाने के लिए गुहार लगाना। यहाँ तक कि सुरंग पर भी लिखा था &#039;प्रवेश निषेध, ऑरेंज मैन!&#039;Stay updated with International News in Hindi (https://www.prabhasakshi.com/international) on Prabhasakshi Trump’s attempt to pass through the Strait of Hormu!????#StraitOfHormuz#PersianGulf pic.twitter.com/ycRF78vywV— Iran Embassy Hungary (@IRANinHUNGARY) May 7, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:57 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिका ने ईरान के पोर्ट उड़ाए, बदले में तेहरान ने US वॉरशिप्स को पहुंचाया नुकसान!</title>
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<description><![CDATA[ जहां अमेरिका और ईरान के बीच भले ही सीजफायर लागू हो लेकिन जंग की आग एक बार फिर से भड़कते हुए दिखाई दे रही है। 7 मई को होर्मुज स्ट्रीट में कुछ ऐसा हुआ जिसने जंग किया को फिर से भड़का दिया है। ईरान ने अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाया तो जवाब में डोनाल्ड ट्रंप की सेना ने ईरान की बंदरगाहों पर जोरदार स्ट्राइक कर दी है और ईरान में भारी बमबारी अमेरिका के द्वारा की गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंट कॉम के मुताबिक उनके तीन गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस राफेल पराल्टा और यूएसएस मसोन अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान ईरान ने उकसाने वाली कारवाई करते हुए मिसाइलें, ड्रोन और छोटी नावें बेचकर हमला करने की कोशिश की। हालांकि अमेरिकी सेना ने इन सभी खतरों को हवा में ही नाकाम कर दिया और हमले के तुरंत बाद अमेरिका ने जवाबी कारवाई करते हुए अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के काशम और बंदर अब्बास जैसे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। इसे भी पढ़ें: ट्रंप को बड़ा कानूनी झटका! अमेरिका की कोर्ट ने 10% ग्लोबल टैरिफ को किया रद्द, बताया &#039;गैर-कानूनी&#039;इन हमलों में उन साइट्स को तबाह कर दिया गया है। जहां से ड्रोन और मिसाइल ल्च की जा रही थी ईरान की ओर से। साथ ही में ईरान के कमांड सेंटर और खुफिया निगरानी केंद्रों को भी अमेरिका की ओर से भारी नुकसान पहुंचाया गया है। ईरान के मिनाप शहर और हॉर्मोसगान प्रांत में भी धमाकों की आवाज सुनाई दी है। इस पूरी कारवाही पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी सामने आया है। ट्रंप ने इसे एक लव टैप करार दिया है। यानी प्यार से दी गई थपकी। उन्होंने टूट सोशल पर लिखा कि ईरानी हमलों में अमेरिकी जहाज को कोई भी नुकसान नहीं हुआ है। जबकि ईरानी हमलावरों को भारी तबाही झेलनी पड़ी है। ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि ईरानी ड्रोन हवा में वैसे ही गिर रहे थे जैसे कोई तितली अपने कब्र की ओर गिर रही हो। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल जो उठकर आ रहा है वो यही है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच का सीज फायर इस हमले के बाद खत्म हो गया है? तो इसका जवाब भी राष्ट्रपति ट्रंप ने ही दिया है। जब मीडिया ने ट्रंप से सवाल पूछा कि क्या अब भी सीज फायर बरकरार है? तो ट्रंप ने स्पष्ट लहजे में कहा अभी सीज फायर है लेकिन उन्होंने हमारे साथ खिलवाड़ किया और हमने उन्हें उड़ा दिया। अगर सीज फायर खत्म हुआ तो आपको पूछना नहीं पड़ेगा। बस ईरान से निकलता हुआ एक बड़ा आग का गोला दिखाई देगा। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि वो जल्द से जल्द समझौते पर दस्तखत कर ले। इसे भी पढ़ें: Hormuz Crisis | होर्मुज़ संकट का असर! रुपया 45 पैसे लुढ़का, कच्चा तेल $101 के पार- बाज़ारों में हाहाकारअमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, तेहरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन अमेरिकी युद्धपोतों पर जवाबी हमला किया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने खुलासा किया कि ईरान द्वारा किए गए इस हमले में जहाज-रोधी बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन शामिल थे। यह हमला ईरान के जास्क में एक ईरानी तेल टैंकर पर अमेरिका द्वारा किए गए जवाबी हमले का हिस्सा था। ईरान ने दावा किया कि यह हमला युद्धविराम के उल्लंघन के परिणामस्वरूप उकसाया गया था और इससे अमेरिकी सेना और अमेरिकी युद्धपोतों को भारी नुकसान पहुंचा है। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने बाद में पुष्टि की कि यूएसएस ट्रक्सटन, यूएसएस राफेल पेराल्टा और यूएसएस मेसन को ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों द्वारा निशाना बनाया गया था, लेकिन अमेरिकी युद्धपोत ने सफलतापूर्वक जवाबी हमला किया और आईआरजीसी के दावे के विपरीत अमेरिकी जहाजों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया।Stay updated with International News in Hindi (https://www.prabhasakshi.com/international) on Prabhasakshi   ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:56 +0530</pubDate>
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<title>India&#45;Pak संघर्ष पर बढ़ा&#45;चढ़ाकर दावा करने वाले Trump, Iran ने क्या हाल किया वो क्यों छुपा रहे हैं?</title>
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<description><![CDATA[ दूसरों के जख्मों को कुरेदना, ट्रंप को खूब आता है, भारत के विमान गिरे कितने, ये किस्सा वो सुनाते हैं। &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; के नाम पर, झूठ का जाल बुनते जाते हैं। हर रोज अपनी बातों में वो नए आंकड़े बताते हैं।  गिनती शुरू करते हुए 11 तक ले आए। जितनी बार भी उन्होंने इस बारे में बात की, विमानों के नुकसान का आंकड़ा बढ़ता ही गया, और पिछली बार तो उन्होंने इसे 11 तक पहुँचा दिया। एक ऐसा राष्ट्रपति, जो दूसरे देशों का हिसाब-किताब रखने के लिए इतना उत्सुक रहता है, उसका अपने खुद के &#039;बही-खाते&#039; (टैक्स या बिजनेस रिकॉर्ड) दिखाने से बचना वाकई हैरान करने वाला है। ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका बुरी तरह घायल हो गया है। उसकी संपत्ति का नुकसान भारत के कथित नुकसान से लगभग 20 गुना अधिक है। इसमें दुनिया के कुछ सबसे महंगे रडार और एक अजेय माने जाने वाला एफ-35 विमान भी शामिल है। अमेरिका को हुए ये नुकसान दुनिया की सबसे बड़ी युद्ध शक्ति का अपमान हैं। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर एक शब्द भी नहीं कहा है। या तो राष्ट्रपति चुप हो गए हैं, या फिर उन्होंने गिनना बंद कर दिया है, या फिर वे ग्यारह से आगे गिन ही नहीं सकते।ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद, एक बात जो भुला पाना नामुमकिन है, वह है डोनाल्ड ट्रम्प की उस संघर्ष में दखल देने की असाधारण इच्छा, जिसका उनसे कोई लेना-देना नहीं था। हजारों किलोमीटर दूर बैठे अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऐसा व्यवहार किया मानो उन्हें पूरा यकीन हो कि भारत और पाकिस्तान उनके दखल के बिना काम नहीं कर सकते। भारत द्वारा सिर्फ चार दिनों में बुरी तरह हराए जाने के बाद पाकिस्तान ही ट्रम्प के पास भागा। कई महीनों से ट्रंप दावा करते आ रहे हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान को एक-दूसरे पर बम गिराने से रोका है। हर बार कहानी और भी नाटकीय होती जा रही थी। पाँच जेट। सात। दस। ग्यारह बेहद महंगे जेट। आंकड़े मौके के हिसाब से बदलते रहते थे, या शायद उनकी याददाश्त के हिसाब से। दरअसल, ट्रंप की चुनिंदा याददाश्त ही असली कहानी है जिसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा है। इसे भी पढ़ें: Operation Sindoor की पहली वर्षगाँठ पर Indian Armed Forces ने कही बड़ी बात, &#039;&#039;लंबे युद्ध की बजाय कम समय में लक्ष्य हासिल किये&#039;&#039;परमाणु तबाही को बचाने के रूप में दिखाने की कोशिशऑपरेशन सिंदूर को देखें तो, तीव्र संघर्ष होने के बावजूद यह बहुत संक्षिप्त था। भारत का पाकिस्तान पर हमला 22 मिनट तक चला और यह छोटा युद्ध चार दिनों में समाप्त हो गया। फिर भी, ट्रंप खुद को उस व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करते रहे जिसने व्यक्तिगत रूप से परमाणु तबाही को रोका, लाखों लोगों की जान बचाई और व्यापारिक दबाव के माध्यम से दोनों देशों को युद्धविराम के लिए मजबूर किया। पाकिस्तान ने, जैसा कि अपेक्षित था, इस कहानी का स्वागत किया। भारत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। अंतर्राष्ट्रीय संकटों में अपनी भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की ट्रंप की प्रवृत्ति नई नहीं है। अफगानिस्तान से लेकर उत्तर कोरिया और रूस-यूक्रेन संघर्ष तक, उन्होंने जटिल भू-राजनीतिक घटनाओं को बार-बार अपने हस्तक्षेप से हासिल की गई व्यक्तिगत जीत के रूप में प्रस्तुत किया है। ऑपरेशन सिंदूर इसी प्रदर्शन का एक और मंच बन गया। महीनों बाद, जब युद्ध अमेरिका में उसी तरह लौट आया जैसे फेंकने वाले के हाथ में लौटता है, तो ट्रंप चुप हो गए। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी, या कहें तो ऑपरेशन बफूनरी, ऑपरेशन सिंदूर से बिल्कुल अलग था। यह न तो सिर्फ दंडात्मक हमलों तक सीमित था, न ही इसके कोई स्पष्ट उद्देश्य थे। यह एक लंबे क्षेत्रीय टकराव में बदल गया और कई वर्षों तक चल सकता है, भले ही अमेरिका को ईरान के परमाणु संकट से कोई लाभ न हो। ईरान कभी झुका नहीं, और शायद झुकेगा भी नहीं। कुछ समय की शांति के बाद एक बार फिर सक्रिय लड़ाई छिड़ गई है। 7 अप्रैल को हुए युद्धविराम के बाद से यह सबसे तीव्र तनाव है, जब अमेरिका और ईरान ने होर्मुज में गोलीबारी की। युद्धविराम की घोषणा ट्रंप ने एकतरफा तौर पर की थी क्योंकि इससे कोई खास प्रगति नहीं हो रही थी। मध्य पूर्व में अमेरिकी हताहतों की संख्या बढ़ने पर ट्रंप चुप रहे। कुछ ही हफ्तों में अरबों डॉलर गायब हो गए, फिर भी ट्रंप चुप रहे। क्षतिग्रस्त विमानों, नष्ट ड्रोनों, घायल सैनिकों और वायु रक्षा प्रणालियों की चरमराती स्थिति की खबरें सामने आईं, लेकिन ट्रंप फिर भी चुप रहे। इसे भी पढ़ें: India MEA Briefing: Pakistan, Canada, Nepal, BRICS संबंधी मुद्दों पर आया विदेश मंत्रालय का बड़ा बयानईरान युद्ध में अमेरिका को हुआ नुकसान अनुमान से कहीं अधिक थाउपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण से बाद में पता चला कि अमेरिकी सैन्य बुनियादी ढांचे को ट्रंप प्रशासन द्वारा शुरू में स्वीकार किए गए नुकसान से कहीं अधिक क्षति हुई थी। वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, ईरानी हमलों में खाड़ी में स्थित 15 अमेरिकी ठिकानों पर कम से कम 228 संरचनाएं और संपत्तियां नष्ट हुईं, जिनमें हैंगर, ईंधन डिपो, रडार सिस्टम, संचार उपकरण और वायु रक्षा बुनियादी ढांचा शामिल थे। खबरों के मुताबिक, कुछ सुविधाएं पूरी तरह से अनुपयोगी हो गईं। नष्ट हुए लोगों में पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, थाड रडार, ड्रोन और कई विमान शामिल थे। वाशिंगटन के लिए इस क्षति की सबसे बड़ी चिंता इसकी सटीकता थी। ईरान युद्ध ने ट्रंप की असलियत कैसे उजागर की?और अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के जुनून में डूबे राष्ट्रपति के लिए यह चुप्पी बेतुकी थी। ट्रंप की राजनीतिक शैली हमेशा से ही ताकत का प्रदर्शन करने पर आधारित रही है। जीत का श्रेय वे खुद लेते हैं। हार का दोष वे दूसरों पर मढ़ देते हैं, कभी-कभी तो अपने ही सहयोगियों पर। भारत-पाकिस्तान युद्धविराम की कहानी ने उन्हें संघर्ष के किसी भी सैन्य, राजनीतिक या आर्थिक बोझ को उठाए बिना वैश्विक शांतिदूत की भूमिका निभाने का मौका दिया। लेकिन युद्ध हमेशा अमेरिका तक वापस पहुँचने का रास्ता खोज लेते हैं।Hindi me international news (https://www.prabhasakshi.c ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:56 +0530</pubDate>
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<title>जंग के बीच मोदी का बड़ा खेल! अचानक दिल्ली क्यों आ रहे ईरान के विदेश मंत्री?</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट जल रहा है। अमेरिका और ईरान आमने-सामने खड़े हैं। इजराइल लगातार हमले कर रहा है। इसी बीच बता दें कि एक ऐसा कदम उठा है। एक ऐसा फैसला सामने आया है जिसने पाकिस्तान से लेकर वाशिंगटन तक बेचैनी को बढ़ाकर हलचल मचा दी है। ईरान के विदेश मंत्री और ईरान के उप विदेश मंत्री यह दोनों ही बता दें कि दिल्ली आने की तैयारी कर रहे हैं। यह जल्द ही दिल्ली आने वाले हैं। जंग के बीच में, बारूद के ढेर के बीच में और लगातार सामने आ रही धमकियों के बीच तेहरान ने जिस राजधानी की तरफ अपना रुख किया है, उसका नाम है नई दिल्ली। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिरकार ऐसा क्या है दिल्ली के पास जो पाकिस्तान के पास नहीं है? क्यों पाकिस्तान में अमेरिका, ईरान बातचीत ठंडी पड़ गई, फेल हो गई।  सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ब्रिक्स के जरिए अमेरिका के दबदबे को चुनौती देने की नई पटकथा दिल्ली से लिखी जाए।  यह याद रखिए कि जंग के वक्त देश सिर्फ दोस्त नहीं चुनता बल्कि वो चुनते हैं कि भविष्य किसके साथ दिखना है और इसी वक्त बता दें कि तेहरान का जो कंपास है यह बार-बार दिल्ली की तरफ घूमता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 14-15 मई को नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में ईरान के विदेश मंत्री और उप विदेश मंत्री यह दोनों ही शामिल हो सकते हैं। भारत इस समय ब्रिक्स का चेयरमैन है और सितंबर में होने वाले बड़े ब्रिक्स समिट की तैयारी की जा रही है। लेकिन यह सिर्फ एक मीटिंग नहीं होने वाली। असल में बता दें कि मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और सभी की नजरें मिडिल ईस्ट पर हैं। एक तरफ अमेरिका दबाव बना रहा है, धमकियां दे रहा है। लेकिन दूसरी तरफ इजराइल और ईरान के बीच लगातार तनाव जो है वो बढ़ता जा रहा है। और तीसरा रुख हम देखें तो चीन इस पूरे संकट में अपना फायदा ठोक रहा है। ऐसे में ईरान उन देशों के साथ रणनीतिक संपर्क बढ़ाना चाहता है जो पश्चिमी दबाव से पूरी तरह नियंत्रित ना हो। भारत आज उसी भूमिका में दिखाई दे रहा है। अब यहां कहानी बेहद दिलचस्प हो जाती है। हाल के दिनों में बता दें कि पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच बैक चैनल बातचीत की खबरें सामने आई थी। इस्लामाबाद चाहता था कि वो खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के तौर पर पेश करें। लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ी। फेल हो गई। इसे भी पढ़ें: India-Pak संघर्ष पर बढ़ा-चढ़ाकर दावा करने वाले Trump, Iran ने क्या हाल किया वो क्यों छुपा रहे हैं?रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच कई बड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। यानी पाकिस्तान पुल बनना चाहता था लेकिन भरोसा हासिल नहीं कर पाया फेल हो गया और तभी ईरान ने भारत के साथ हाई लेवल संपर्क बढ़ा दिया। यही वजह है कि पाकिस्तान को सबसे ज्यादा मिर्ची इस वक्त लगी हुई है। क्योंकि जो रोल इस्लामाबाद अपने लिए देख रहा था वो धीरे-धीरे दिल्ली की तरफ जाता हुआ दिखाई दे रहा है। यह बहुत अहम बात है क्योंकि पश्चिम एशिया संकट के दौरान ईरान ने कई बार भारत से संपर्क बनाए। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हाई लेवल बातचीत लगातार हुई। मार्च में हुई बातचीत में ईरान ने यह साफ कहा था कि ब्रिक्स जैसे मंच मौजूदा हालात में वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यानी ईरान सिर्फ सैन्य जवाब नहीं चाहता। वो कूटनीतिक सुरक्षा कवच भी इस वक्त इन हालातों में तलाश रहा है और उसे यह लगता है कि भारत इस पूरे संकट में बैलेंसिंग पावर बन सकता है। अब बैठक में किन-किन मुद्दों पर बातचीत होगी? पहली ब्रिक्स बनाम पश्चिमी दबाव। ईरान यह चाहता है कि ब्रिक्स सिर्फ व्यापारिक मंच ना रहे बल्कि पश्चिमी दबाव के खिलाफ एक रणनीतिक समूह बने। इसे भी पढ़ें: Hormuz Crisis | होर्मुज़ संकट का असर! रुपया 45 पैसे लुढ़का, कच्चा तेल $101 के पार- बाज़ारों में हाहाकारअमेरिकी प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी असर डाला है और अब तेहरान डॉलर सिस्टम के विकल्प तलाश रहा है और ब्रिक्स उसके लिए सबसे बड़ा प्लेटफार्म बनता जा रहा है। दूसरा चाबहर बनाम गदर। यहां भारतपाकि असली टक्कर छिपी हुई है। एक तरफ चीन पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट है और दूसरी तरफ भारत ईरान का चाबहार पोर्ट। चाबार भारत को पाकिस्तान को बाईपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच देता है। यानी अगर चाबभार मजबूत होता है तो पाकिस्तान का रणनीतिक महत्व बेहद कम हो सकता है। और यही बात इस्लामाबाद को सबसे ज्यादा खटकती है, परेशान करती है। तीसरा मुद्दा तेल, हॉर्मोज और समुद्री सुरक्षा। हॉर्मोज स्ट्रेट दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की धड़कन है। अगर यहां युद्ध बढ़ता है तो पूरी दुनिया में तेल संकट पैदा हो सकता है। भारत दुनिया का बड़ा तेल आयातक है और इसीलिए ऊर्जा सुरक्षा इस बैठक का बड़ा एजेंडा हो सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल वाशिंगटन इस पूरे घटनाक्रम को इतनी गंभीरता से क्यों देख रहा है? क्यों अमेरिका में हलचल है? क्योंकि अमेरिका यह जानता है कि भारत अब सिर्फ क्षेत्रीय शक्ति नहीं रहा है। अगर भारत ईरान के साथ संवाद बनाए रखता है तो तेहरान पूरी तरह से अलग-थलग नहीं पड़ेगा। दूसरी बात अगर भविष्य में कोई बैक चैनल बातचीत होती है तो भारत एक अहम पावर ब्रोकर बन सकता है। यानी अमेरिका यह समझ रहा है कि दिल्ली की भूमिका अब सिर्फ दर्शक वाली नहीं रही। Stay updated with International News in Hindi (https://www.prabhasakshi.com/international) on Prabhasakshi   ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:55 +0530</pubDate>
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<title>Taliban के हमले से पहले पेशावर से भागा अमेरिका, मुनीर के उड़े होश!</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका की गोद में बैठकर भारत को आग दिखाने की कोशिश करने वाले पाकिस्तान की ट्रंप ने अब एक ऐसे तरीके से हेकड़ी निकाल दी है कि सब हैरान हो गए। तेजी से बर्बादी की तरफ बढ़ रहे पाकिस्तान को ट्रंप ने ऐसा झटका दिया है कि 25 करोड़ पाकिस्तानी इस वक्त खौफ में हैं। दरअसल अमेरिका ने पाकिस्तान को मरने के लिए अकेला छोड़ दिया है। तालिबान के हमलों के खबर के बीच में बता दें कि अमेरिका ने पाकिस्तान पर ऐसा बड़ा फैसला ले लिया है जिसने इस्लामाबाद से लेकर लाहौर तक हड़कंप मचा दिया है। तालिबान का यह कहना है कि पेशावर हमारा है इसी बीच अमेरिका ने अपना बहुत बड़ा कदम उठाते हुए पेशावर से अपना दूतावास बंद करने का ऐलान कर दिया है। अमेरिका ने यह एकदम साफ कर दिया है कि वो अब पाकिस्तान के पेशावर स्थित अपने कंसोलेट को बंद कर देगा। यानी खेबर पख्तूनख्वा से जुड़े सारे राजनिक काम अब इस्लामाबाद से ही संभाले जाएंगे। यह पूरी तरीके से दूतावास बंद हो जाएगा। यह सिर्फ एक दूतावास बंद करना नहीं यह एक साफ संकेत है। एक मैसेज है कि अमेरिका अब जमीन पर पाकिस्तान की जमीन पर अपनी मौजूदगी घटा रहा है। इसे भी पढ़ें: India-Pak संघर्ष पर बढ़ा-चढ़ाकर दावा करने वाले Trump, Iran ने क्या हाल किया वो क्यों छुपा रहे हैं?इसका सबसे बड़ा असर सुरक्षा पर पड़ेगा। पेशावर कोई साधारण शहर नहीं है। यह इलाका सालों से उग्रवाद, आतंकवाद और सीमा पार तनाव का बड़ा केंद्र रहा है। और यही वो जगह है जहां अमेरिका की मौजूदगी पाकिस्तान के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह इस समय तक अब तक काम कर रही थी। लेकिन अब जैसे ही अमेरिका ने यहां से अपने कदम पीछे हटा लिए हैं। अमेरिका पीछे हट रहा है। अफगानिस्तान की तरफ से खतरा बढ़ जाएगा। तहरीक तालिबान पाकिस्तान यानी कि टीटीपी जैसे आतंकी संगठन और भी ज्यादा एक्टिव होंगे और खेबर पखुनखवा पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द भी बन सकता है। और हाल ही के दिनों में कई ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं। याद रखिए खेबर पखुनवा पाकिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा प्रांत है और इसकी सीमा सीधे अफगानिस्तान से लगती है। यहां रहने वाले पश्तून अफगानिस्तान के पश्तूनों से गहराई से जुड़े हुए हैं। यानी सीमा सिर्फ नक्शे में है। जमीन पर सीमा पार रिश्ते बहुत गहरे हैं। इसी वजह से जब अफगानिस्तान में तालीबान मजबूत होता है तो उसका सीधा-सीधा असर इस इलाके पर भी पड़ता है। पाकिस्तान के इस इलाके पर भी देखने को मिलता है।इसे भी पढ़ें: Operation Sindoor की पहली वर्षगाँठ पर Indian Armed Forces ने कही बड़ी बात, &#039;&#039;लंबे युद्ध की बजाय कम समय में लक्ष्य हासिल किये&#039;&#039;यहां से अपने कदम हटा रहा है, पीछे हट रहा है तो यह खतरा पाकिस्तान के लिए अब और भी ज्यादा बढ़ने वाला है। एक तरफ अमेरिका पाकिस्तान से दूरी बना रहा है। लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका क्या कर रहा है? अमेरिका भारत की तरफ तेजी से अपने कदम बढ़ाता हुआ नजर आ रहा है। ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को पश्चिम बंगाल की जीत पर बधाई दी है। यह सिर्फ एक औपचारिक संदेश या एक फॉर्मल फोन कॉल नहीं था बल्कि यह एक स्पष्ट संकेत था, एक मैसेज था कि अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्ते और भी ज्यादा मजबूत करना चाहता है और यह सिर्फ एक राजनीतिक मैसेज नहीं है। आर्थिक स्तर पर भी इसका असर साफ दिख रहा है। भारत की कंपनियां टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग और फार्मा सेक्टर में बता दें कि $.5 बिलियन से ज्यादा निवेश की तैयारी अमेरिका कर रहा है और यह निवेश अमेरिका में नौकरियां पैदा करेगा। सप्लाई चेन को यह कई गुना ज्यादा मजबूत करेगा। यानी एक बात बिल्कुल साफ है इन चीजों से इन घटनाओं से कि एक तरफ पाकिस्तान अस्थिरता और खतरे में घिरता जा रहा है। फंसता जा रहा है इस दलदल में और दूसरी तरफ भारत ग्लोबल पार्टनर बनता जा रहा है। याद कीजिए कुछ समय पहले बता दें कि अमेरिका ने पाकिस्तान को महत्व देने की कोशिश की थी। Hindi me international news (https://www.prabhasakshi.com/international) के लिए जुड़ें प्रभासाक्षी से   ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:54 +0530</pubDate>
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<title>Vishwakhabram: China में कृषि मंत्री के बाद अब दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मिला मृत्युदंड, भ्रष्टाचारियों को कतई नहीं बख्शते Xi Jinping</title>
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<description><![CDATA[ चीन में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। चीन की सैन्य अदालत ने पूर्व रक्षा मंत्रियों ली शांगफू और वेई फेंघे को रिश्वतखोरी और सत्ता के दुरुपयोग के मामलों में दो वर्ष की मोहलत के साथ मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस व्यापक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत सेना, प्रशासन, न्याय व्यवस्था और सरकारी कंपनियों में फैले भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई की जा रही है।चीनी सरकारी समाचार संस्था शिन्हुआ के अनुसार दोनों पूर्व रक्षा मंत्रियों को आजीवन राजनीतिक अधिकारों से वंचित कर दिया गया है और उनकी सारी निजी संपत्ति जब्त कर ली गई है। दो वर्ष की मोहलत वाली मौत की सजा का अर्थ यह है कि यदि दोषी जेल में अच्छा व्यवहार करते हैं तो उनकी सजा बाद में बिना पैरोल वाली उम्रकैद में बदली जा सकती है। चीन में यह व्यवस्था लंबे समय से लागू है और विशेष रूप से बड़े भ्रष्टाचार मामलों में इसका उपयोग किया जाता है।इसे भी पढ़ें: Teesta River Project पर Bangladesh का बड़ा दांव, China से मांगी मदद, India की बढ़ी टेंशन?हम आपको याद दिला दें कि ली शांगफू वर्ष 2023 में केवल सात महीने तक रक्षा मंत्री रहे थे। इससे पहले वह सेना के उपकरण खरीद विभाग के प्रमुख थे, जहां उनके पास विशाल सैन्य बजट और हथियार खरीद से जुड़ी संवेदनशील जिम्मेदारियां थीं। जांच में उन पर आरोप लगा कि उन्होंने नियुक्तियों और रक्षा सौदों में अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले भारी रिश्वत ली। वहीं उनके पूर्ववर्ती वेई फेंघे ने पांच वर्षों तक रक्षा मंत्री के रूप में काम किया और इससे पहले वह चीन की रॉकेट फोर्स के प्रमुख रह चुके थे, जो चीन के परमाणु हथियारों की जिम्मेदारी संभालती है। उन पर भी बड़े पैमाने पर रिश्वत लेने और अधिकारियों की नियुक्तियों में पक्षपात करने के आरोप सिद्ध हुए।विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों शीर्ष सैन्य नेताओं को इतनी कठोर सजा दिया जाना केवल भ्रष्टाचार विरोधी कदम नहीं, बल्कि सेना पर राजनीतिक नियंत्रण मजबूत करने की रणनीति भी है। पिछले कुछ वर्षों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से जुड़े सौ से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया गया है या उनके खिलाफ जांच शुरू हुई है। इनमें कई अधिकारी अचानक सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए और बाद में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले सामने आए।हम आपको बता दें कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वर्ष 2012 में सत्ता संभालने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को अपनी राजनीति का मुख्य आधार बनाया। उन्होंने बार बार कहा कि भ्रष्टाचार कम्युनिस्ट पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इस अभियान के तहत मंत्री, सैन्य अधिकारी, न्यायपालिका से जुड़े लोग और सरकारी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी तक कार्रवाई की जद में आए हैं। चीन के सरकारी आंकड़ों के अनुसार लाखों अधिकारियों की जांच हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोगों को सजा दी गई है।हाल के वर्षों में कई चर्चित मामलों ने चीन की सख्त न्याय व्यवस्था को दुनिया के सामने रखा है। वर्ष 2024 में भीतरी मंगोलिया के पूर्व अधिकारी ली जियानपिंग को 421 मिलियन डॉलर से अधिक के भ्रष्टाचार मामले में फांसी दे दी गई थी। इसे चीन के इतिहास का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार मामला बताया गया। इसी तरह सरकारी वित्तीय कंपनी के पूर्व अधिकारी बाई थ्येनहुई को 157 मिलियन डॉलर की रिश्वत लेने के मामले में मौत की सजा पर अमल करते हुए फांसी दी गई।कृषि मंत्री रह चुके तांग रेनजियान को भी लगभग 38 मिलियन डॉलर की रिश्वत लेने के मामले में दो वर्ष की मोहलत के साथ मौत की सजा सुनाई गई। जांच में सामने आया कि उन्होंने सरकारी परियोजनाओं, ठेकों और नियुक्तियों में अनुचित लाभ पहुंचाकर भारी संपत्ति अर्जित की। इसी तरह पूर्व न्याय मंत्री तांग यीचुन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। अदालत ने कहा कि उन्होंने जमीन सौदों, कंपनियों की सूचीबद्धता और न्यायिक मामलों में हस्तक्षेप के बदले करोड़ों युआन की रिश्वत ली।इन कार्रवाइयों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस छेड़ दी है। कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की सेना के शीर्ष स्तर पर फैला भ्रष्टाचार उसके सैन्य ढांचे, हथियार खरीद प्रणाली और परमाणु कमान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। विशेष रूप से उस समय जब हिंद प्रशांत क्षेत्र में सामरिक प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है, चीन के सैन्य नेतृत्व में लगातार हो रही उथल पुथल को गंभीर संकेत माना जा रहा है।दूसरी ओर आलोचकों का कहना है कि भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का उपयोग राजनीतिक विरोधियों को हटाने और सत्ता केंद्रीकरण के लिए भी किया जा रहा है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शी जिनपिंग अपने विरोधी गुटों को कमजोर करने के लिए भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रभावी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि चीन की सरकार इस आरोप को खारिज करती रही है और उसका कहना है कि कानून के सामने सभी समान हैं।हम आपको बता दें कि चीन में मौत की सजा की परंपरा बहुत पुरानी है। वहां हत्या, मादक पदार्थों की तस्करी और बड़े भ्रष्टाचार जैसे अपराधों में आज भी मौत की सजा दी जाती है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार दुनिया में सबसे अधिक फांसियां चीन में ही दी जाती हैं, हालांकि वास्तविक आंकड़े सरकारी गोपनीयता के कारण सार्वजनिक नहीं किए जाते। एमनेस्टी इंटरनेशनल का मानना है कि हर वर्ष हजारों लोगों को चीन में फांसी दी जाती है।हाल ही में एक और मामला दुनिया भर में चर्चा का विषय बना था जिसमें हैकोउ शहर के पूर्व मेयर के यहां से कथित रूप से सोने की ईंटों और नकदी का विशाल भंडार मिलने की खबरें सामने आईं थीं। सोशल मीडिया पर फैली तस्वीरों और वीडियो में भारी मात्रा में सोना और नकदी दिखाई गई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी, लेकिन अदालत ने यह जरूर माना कि अधिकारी ने सरकारी परियोजनाओं और जमीन सौदों में भारी भ्रष्टाचार किया था तथा अरबों डॉलर की संपत्ति जब्त की गई।बहरहाल, विशेषज्ञों क ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:53 +0530</pubDate>
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<title>Assam&#45;Bengal में BJP की Power का असर, Bangladesh ने सीमा पर BGB को किया अलर्ट</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली ने कहा कि वह ढाका से भारत से अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की वापसी के लिए सत्यापन प्रक्रिया में तेजी लाने की उम्मीद करती है। वहीं, बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि बांग्लादेश सीमा रक्षक बल (बीजीबी) को भारत से किसी भी संभावित घुसपैठ को रोकने के लिए सीमाओं पर सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। भारत-बांग्लादेश सीमा पर ढाका द्वारा अलर्ट जारी करने का यह कदम भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा बांग्लादेशी विदेश मंत्री खलीलुर रहमान के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया देने के कुछ घंटों बाद आया है। यह पश्चिम बंगाल और असम में विधानसभा चुनावों में भाजपा की शानदार जीत के बाद हुआ है। ये दोनों भारतीय राज्य बांग्लादेश की सीमा से लगते हैं, और अवैध अप्रवासन का मुद्दा हाल के चुनावों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया था। इसे भी पढ़ें: Teesta River Project पर Bangladesh का बड़ा दांव, China से मांगी मदद, India की बढ़ी टेंशन?भारत में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों पर ढाका का बयान5 मई को, विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के एक दिन बाद, बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने कहा कि ढाका भारत की ओर से घुसपैठ की घटनाओं के खिलाफ उचित कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अगर किसी भी तरह की घुसपैठ की घटना होती है, तो बांग्लादेश उचित कार्रवाई करेगा। घुसपैठ से रहमान का तात्पर्य उन खबरों से था जिनमें भारत में घुसपैठ करने वाले बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस भेजा जा रहा था। ऐसी खबरें आई हैं कि कई राज्यों से अवैध प्रवासियों को पकड़ा गया और असम और त्रिपुरा से सीमा पार धकेल दिया गया, जहां विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सत्ता में थी। पश्चिम बंगाल अब भाजपा शासित राज्य बनने जा रहा है। रहमान की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि ढाका बंगाल को भी पुश-इन के लिए इस्तेमाल होते हुए देख रहा है। फरवरी 2025 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने असम सरकार को विदेशी घोषित किए गए व्यक्तियों के निर्वासन में तेजी लाने का निर्देश दिया था।इसे भी पढ़ें: India को घेरने के लिए Bangladesh ने मिलाया China से हाथ, Siliguri Corridor के पास ड्रैगन देगा दस्तकभारत का मुख्य मुद्दा है अवैध बांग्लादेशियों की वापसी: भारतीय सरकारगुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत से अवैध बांग्लादेशियों की वापसी के मुद्दे को भारत का मुख्य मुद्दा बताया। रहमान की टिप्पणियों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में जायसवाल ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि बांग्लादेश भारत में रह रहे अवैध बांग्लादेशियों के सत्यापन की प्रक्रिया में तेजी लाएगा। ग्यालस ने गुरुवार को अपनी साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, &quot;पिछले कुछ दिनों से इस तरह की टिप्पणियां सुनने को मिल रही हैं। इन टिप्पणियों को भारत से अवैध बांग्लादेशियों की वापसी के मुख्य मुद्दे के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इसमें स्पष्ट रूप से बांग्लादेश के सहयोग की आवश्यकता है। हमें उम्मीद है कि बांग्लादेश राष्ट्रीयता सत्यापन में तेजी लाएगा ताकि अवैध प्रवासियों की वापसी सुचारू रूप से हो सके। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:53 +0530</pubDate>
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<title>Tamil Nadu में सियासी संकट: Stalin ने Governor से कहा&#45; नई सरकार बनाने में देरी ठीक नहीं।</title>
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<description><![CDATA[ तमिलनाडु के निवर्तमान मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने शुक्रवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से संविधान के अनुसार नई सरकार के गठन के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों के बाद इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी लोकतांत्रिक आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं होगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्टालिन ने कहा कि मौजूदा विधानसभा भंग हो चुकी है और निर्वाचित विधानसभा सदस्यों के लिए नई सरकार का गठन लोकतंत्र का कर्तव्य है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित हो चुके हैं और चुनाव आयोग ने जनता द्वारा चुने गए विधानसभा सदस्यों की सूची जारी कर दी है। मौजूदा विधानसभा भंग कर दी गई है और महामहिम राज्यपाल ने इस संबंध में घोषणा जारी कर दी है। ऐसी स्थिति में, यह न केवल समय की बाध्यता है बल्कि लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य भी है कि निर्वाचित विधानसभा सदस्यों के लिए नई सरकार का गठन किया जाए ताकि वे अपने पद की शपथ ले सकें और राज्य के कल्याण को आगे बढ़ा सकें! इस संदर्भ में, द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (डीएमके) की ओर से, मैं महामहिम राज्यपाल से अनुरोध करता हूं कि वे संविधान के अनुसार नई सरकार के गठन के लिए तत्काल कार्रवाई करें, ताकि सरकार के गठन में कोई देरी न होस्टालिन का यह बयान तमिलनाडु में खंडित जनादेश के बाद बढ़ी राजनीतिक गतिविधियों के बीच आया है, जहां विभिन्न राजनीतिक दल 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार गठन के लिए आवश्यक संख्या जुटाने और बातचीत में लगे हुए हैं।इसे भी पढ़ें: केरल से आउट हुई लेफ्ट Tamil Nadu में कैसे बनी Kingmaker, समर्थन मिलते ही Joseph Vijay ने सरकार बनाने का दावा पेश कियाइस बीच, विजय की टीवीके (टीवीके) तमिलनाडु में खंडित जनादेश के बाद से सरकार बनाने के लिए अन्य दलों से समर्थन जुटाने का प्रयास कर रही है। टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन सरकार बनाने के लिए आवश्यक 118 सीटों के बहुमत से पीछे रह गई है। इस अंतर को पाटने के लिए विजय कांग्रेस से सक्रिय रूप से संपर्क साध रहे हैं, जिसने पहले ही समर्थन देकर टीवीके के बहुमत के करीब पहुंचने में मदद की है।कांग्रेस ने तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए टीवीके के विजय को सशर्त समर्थन दिया है और डीएमके से अपने संबंध तोड़ लिए हैं। पांच कांग्रेस विधायकों के समर्थन से गठबंधन के पास 112 सीटें हैं, जो 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के 118 के आंकड़े से अभी भी छह कम हैं। इसी बीच, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) ने भी विजय को समर्थन देने या न देने पर चर्चा करने के लिए एक कार्यकारी बैठक की। दोनों पार्टियों के पास दो-दो सीटें हैं।इसे भी पढ़ें: अधीर रंजन का Governor पर निशाना, लोकतांत्रिक परंपरा के तहत TVK को मिले पहला मौका विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) के अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन ने भी टीवीके को समर्थन देने या न देने पर निर्णय लेने के लिए पार्टी की &quot;उच्च स्तरीय समिति&quot; की बैठक बुलाई है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:52 +0530</pubDate>
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<title>UFO Files पर Pentagon का बड़ा खुलासा, कहा&#45; एलियंस का सच अब जनता खुद तय करे।</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन ने UFO (दूसरे ग्रहों के यान) से संबंधित गुप्त दस्तावेजों को सार्वजनिक करना शुरू कर दिया है। सरकार का कहना है कि अब समय आ गया है कि आम जनता इन अनजान हवाई घटनाओं (UAP) के बारे में खुद अपनी राय कायम करे। इन फाइलों में ऐसी कई हैरान करने वाली घटनाओं का जिक्र है, जैसे एक ड्रोन पायलट का अनुभव जिसने आसमान में एक अत्यंत चमकदार रोशनी देखी जो पलक झपकते ही गायब हो गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जहाँ पिछली सरकारों ने इन खबरों को दबाने या लोगों को गुमराह करने की कोशिश की थी, वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जोर पूरी तरह से &#039;पारदर्शिता&#039; पर है। उनका मानना है कि इन फाइलों में मौजूद जानकारी पर जनता का पूरा अधिकार है ताकि वे खुद सच और झूठ का फैसला कर सकें। यह कदम किसी एक विभाग का नहीं, बल्कि एक बड़ी संयुक्त कोशिश है। इसमें व्हाइट हाउस के साथ-साथ अमेरिकी खुफिया विभाग, नासा (NASA), ऊर्जा विभाग और एफबीआई (FBI) भी शामिल हैं। आने वाले समय में ऐसी और भी फाइलें सिलसिलेवार ढंग से जारी की जाएंगी, जिससे ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठने की उम्मीद है।इसे भी पढ़ें: Taliban के हमले से पहले पेशावर से भागा अमेरिका, मुनीर के उड़े होश!अज्ञात असामान्य घटनाओं (यूएपी) से संबंधित दस्तावेज़ों वाली एक नई वेबसाइट का अनावरण किया गया है, जिसका स्वरूप काफी पुराना है। पृष्ठ पर उड़ने वाली वस्तुओं की काले-सफेद सैन्य तस्वीरें प्रमुखता से प्रदर्शित हैं, और कथन टाइपराइटर जैसी फ़ॉन्ट में लिखे गए हैं। पहले संस्करण में 162 फ़ाइलें शामिल हैं, जिनमें विदेश विभाग के पुराने संदेश, एफबीआई के दस्तावेज़ और अंतरिक्ष में मानवयुक्त उड़ानों के नासा के प्रतिलेख शामिल हैं। एक दस्तावेज़ में एफबीआई द्वारा एक ऐसे व्यक्ति के साथ किए गए साक्षात्कार का विवरण दिया गया है, जिसकी पहचान ड्रोन पायलट के रूप में की गई है, जिसने सितंबर 2023 में आकाश में एक रेखीय वस्तु को देखने की सूचना दी थी, जिसकी रोशनी इतनी तेज थी कि &quot;प्रकाश के भीतर पट्टियाँ दिखाई दे रही थीं।इसे भी पढ़ें: जंग के बीच मोदी का बड़ा खेल! अचानक दिल्ली क्यों आ रहे ईरान के विदेश मंत्री?  एफबीआई के साक्षात्कार के अनुसार, वह वस्तु पांच से दस सेकंड तक दिखाई दी और फिर रोशनी बुझ गई और वस्तु गायब हो गई। पेंटागन द्वारा जारी की गई इन नई फाइलों में 1972 के अपोलो 17 मिशन की एक बेहद दिलचस्प तस्वीर भी शामिल है। इस तस्वीर में तीन बिंदु एक त्रिकोण (Triangle) के आकार में नजर आ रहे हैं। इस पर पेंटागन का कहना है कि हालांकि अभी तक इस &quot;अजीब आकृति&quot; के असली स्वरूप को लेकर कोई एक राय नहीं बनी है, लेकिन शुरुआती जांच यह इशारा करती है कि यह कोई &#039;भौतिक वस्तु&#039; (Physical Object) हो सकती है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फरवरी से ही इस तरह के बड़े खुलासे के संकेत दे रहे थे। यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने गुप्त फाइलें सार्वजनिक की हों; इससे पहले वे जॉन एफ. कैनेडी, रॉबर्ट एफ. कैनेडी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर की हत्याओं से जुड़े रिकॉर्ड भी जारी कर चुके हैं। हालांकि, उन दस्तावेजों में कुछ ऐसा नया नहीं निकला था जो पहले से पता न हो, लेकिन UFO से जुड़ी इन नई फाइलों ने लोगों में काफी उत्सुकता पैदा कर दी है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:51 +0530</pubDate>
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<title>Russia&#45;Ukraine Ceasefire | जंग के बीच राहत की खबर, Donald Trump के प्रयास लाए रंग, रूस&#45;यूक्रेन में 3 दिन थमेंगी बंदूकें, घर लौटेंगे 2000 सैनिक</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया को दहला देने वाले रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि रूस और यूक्रेन 9 मई से 11 मई तक तीन दिनों के अस्थायी युद्धविराम (सीज़फ़ायर) पर सहमत हो गए हैं। यह कदम पिछले कई वर्षों से जारी भीषण संघर्ष में हिंसा कम करने की दिशा में अब तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर एक पोस्ट के ज़रिए इस बात की जानकारी दी और इस समझौते को चल रहे संघर्ष में हिंसा कम करने की दिशा में एक अहम कदम बताया। उनके मुताबिक, इस तीन दिन के दौरान सीज़फ़ायर के तहत सभी तरह के सक्रिय सैन्य अभियान पूरी तरह से रोक दिए जाएंगे।कैदियों की बड़े पैमाने पर अदला-बदली की भी पुष्टि हुईसीज़फ़ायर के साथ-साथ, दोनों देशों से उम्मीद है कि वे युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक की सबसे बड़ी कैदियों की अदला-बदली करेंगे। ट्रंप ने बताया कि इस व्यवस्था के तहत रूस और यूक्रेन 1,000-1,000 कैदियों की अदला-बदली करने पर सहमत हो गए हैं। इस कदम को एक अहम मानवीय पहल बताते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने खुद इस अस्थायी सीज़फ़ायर का अनुरोध किया था और इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की का शुक्रिया अदा किया।अपने बयान में ट्रंप ने उम्मीद जताई कि यह सफलता युद्ध खत्म करने के लिए एक बड़े समझौते का रास्ता खोल सकती है। ट्रंप ने कहा कि सीज़फ़ायर की तारीखें रूस के &#039;विक्ट्री डे&#039; (विजय दिवस) समारोह के साथ मेल खाती हैं, जो दूसरे विश्व युद्ध में सोवियत संघ की भूमिका की याद दिलाता है।इसे भी पढ़ें: IPL 2026, KKR vs DC Highlight | फिन एलेन के तूफानी शतक से कोलकाता की &#039;विराट&#039; जीत, दिल्ली कैपिटल्स प्लेऑफ की दौड़ से लगभग बाहर उन्होंने युद्ध के दौरान यूक्रेन के ऐतिहासिक योगदान को भी सराहा और कहा कि यह मौका दोनों देशों के लिए अहमियत रखता है। उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष को दूसरे विश्व युद्ध के बाद से दुनिया का सबसे गंभीर टकराव बताया और कहा कि चल रही बातचीत किसी संभावित समाधान की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है। ट्रंप ने अपने संदेश में कहा, &quot;उम्मीद है कि यह एक लंबे और विनाशकारी युद्ध के अंत की शुरुआत है।&quot;ज़ेलेंस्की ने सीज़फ़ायर को पूरी तरह से लागू करने की मांग कीट्रंप के ऐलान के बाद, ज़ेलेंस्की ने पुष्टि की कि यूक्रेन को कैदियों की बड़े पैमाने पर अदला-बदली के लिए रूस की मंज़ूरी मिल गई है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सीज़फ़ायर को तीनों दिन ठीक से लागू किया जाना चाहिए और उसका सम्मान किया जाना चाहिए।इसे भी पढ़ें: West Bengal CM Oath Ceremony LIVE: TMC राज का अंत, Suvendu Adhikari लेंगे पहले BJP CM पद की शपथ, देखें समारोह से जुड़े अपडेट्स ज़ेलेंस्की ने कहा, &quot;हमें 1,000 के बदले 1,000 कैदियों की अदला-बदली करने के लिए रूस की सहमति मिल गई है। 9, 10 और 11 मई को सीज़फ़ायर की व्यवस्था भी पूरी तरह से लागू होनी चाहिए।&quot; प्रस्तावित संघर्ष-विराम को एक ऐसे संघर्ष में कूटनीतिक प्रगति के एक दुर्लभ अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जिसने पिछले कई वर्षों के दौरान भारी तबाही मचाई है और जान-माल का भारी नुकसान किया है। हालाँकि, इस बात को लेकर अभी भी सवाल बने हुए हैं कि ज़मीनी स्तर पर यह संघर्ष-विराम कितनी प्रभावी ढंग से कायम रह पाएगा। Stay updated with International
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:50 +0530</pubDate>
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<title>China के 2 पूर्व रक्षा मंत्री को जिनपिंग ने सुनाई मौत की सजा, वजह जानकर चौंकी दुनिया</title>
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<description><![CDATA[ चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्रपति जिमपिंग का सबसे बड़ा और सबसे सख्त एक्शन सामने आया है। चीन ने अपने दो पूर्व रक्षा मंत्री वे फेंग और ली शंगफों को मौत की सजा सुनाकर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। बड़ी बात यह है कि दोनों नेता कभी राष्ट्रपति जिमपिंग के बेहद करीबी माने जाते थे और चीन की सबसे ताकतवर सैन्य संस्था सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का हिस्सा भी रह चुके थे। अब भ्रष्टाचार के साथ-साथ उन पर बेवफाई जैसे गंभीर आरोपों का भी खुलासा हुआ है। चीनी सरकारी मीडिया सिंह के मुताबिक पूर्व रक्षा मंत्री भी फेंग और ली शंगू को भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए जाने के बाद मौत की सजा सुनाई गई। यानी कि अगर 2 साल तक दोनों कोई नया अपराध नहीं करते तो उनकी सजा को उम्र कैद में बदला जा सकता है। इसे भी पढ़ें: India को घेरने के लिए Bangladesh ने मिलाया China से हाथ, Siliguri Corridor के पास ड्रैगन देगा दस्तकअदालत ने रीफेंगे को रिश्वत लेने का दोषी ठहराया और आपको बता दें दोनों नेताओं को 2024 में चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। चीन में डिसिप्लिन के गंभीर उल्लंघन शब्द का इस्तेमाल अक्सर बड़े भ्रष्टाचार मामलों के लिए किया जाता है। इस पूरे मामले ने इसलिए भी हलचल मचा दी क्योंकि वी फेंगे और ली शंगपु दोनों कभी जिमपिंग के भरोसेमंद माने जाते थे। वी फेंगे 2018 से 2023 तक चीन के रक्षा मंत्री रहे। जबकि उनके हटने के बाद ली शंगपू को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन कुछ ही महीनों में वो भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गए। दोनों नेता चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी की बेहद अहम रॉकेट फोर्स का नेतृत्व कर चुके थे। यह वो यूनिट है जो चीन की मिसाइल और परमाणु ताकत की रीड मानी जाती। ऐसे में इन सैन्य अधिकारियों पर इतनी बड़ी कारवाई को चीन के अंदर सत्ता और सेना में चल रही अंदरूनी उठापटक से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इसे भी पढ़ें: Teesta River Project पर Bangladesh का बड़ा दांव, China से मांगी मदद, India की बढ़ी टेंशन?चीन के सरकारी अखबार पीएलए डेली में जो खुलासा हुआ उसने इस मामले को और गंभीर बना दिया। अखबार ने सिर्फ भ्रष्टाचार ही नहीं बल्कि वफादारी की कमी और विश्वासघात जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों नेताओं ने पार्टी सिद्धांतों से विश्वासघात किया और अपनी जिम्मेदारियों के प्रति निष्ठा नहीं दिखाई। चीन में पहली बार किसी आधिकारिक रिपोर्ट में पूर्व रक्षा मंत्रियों के खिलाफ बेवफा बेवफाई का जिक्र हुआ है। इसके बाद ये अटकलें तेज हो गई कि क्या 2023 में जिमपिंग के खिलाफ सत्ता के भीतर कोई साजिश या अंदरूनी खेल चल रहा था। हालांकि चीन सरकार ने इस पर खुलकर कुछ नहीं कहा लेकिन सरकारी मीडिया की भाषा कई सवाल खड़े कर रही है। जिनपिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया था। इस अभियान के तहत लाखों अधिकारियों और कई सैन्य जनरल्स पर कारवाई हो चुकी है। लेकिन पहली बार चीन के रक्षा मंत्रियों को इतनी कठोर सजा दी गई है। यह फैसला सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ कारवाई नहीं बल्कि सेना और कम्युनिस्ट पार्टी को सख्त संदेश भी है कि शी जिमपिंग के शासन में वफादारी और अनुशासन से समझौता बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:50 +0530</pubDate>
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<title>Kim Jong Un और Vladimir Putin आ गये साथ, दुनिया में मचा हड़कंप, ट्रंप की भी सास फूली...</title>
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<description><![CDATA[ उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बढ़ती नजदीकियों ने वैश्विक राजनीति में हलचल तेज कर दी है। दोनों देशों के बीच हुए ऐतिहासिक सैन्य समझौते और आपसी रक्षा संधि ने पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पुतिन की प्योंगयांग यात्रा और यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरियाई सैनिकों की भागीदारी की खबरों ने इस गठबंधन को और भी आक्रामक बना दिया है। इस बदलती भू-राजनीतिक स्थिति ने न केवल मौजूदा बाइडन प्रशासन बल्कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी एक नई चुनौती पेश कर दी है, जिससे वैश्विक सुरक्षा समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं। इस &#039;शक्तिशाली धुरी&#039; के उदय को दुनिया भर में एक बड़े रणनीतिक खतरे के रूप में देखा जा रहा है।इसे भी पढ़ें:  Russia-Ukraine Ceasefire | जंग के बीच राहत की खबर, Donald Trump के प्रयास लाए रंग, रूस-यूक्रेन में 3 दिन थमेंगी बंदूकें, घर लौटेंगे 2000 सैनिक ताजा अपडेट के अनुसार उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने रूस के &#039;विजय दिवस&#039; (Victory Day) के अवसर पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक विशेष संदेश भेजकर दोनों देशों के बीच गहराते सैन्य और रणनीतिक रिश्तों को नई ऊंचाई दी है। किम ने स्पष्ट किया कि रूस के साथ साझेदारी उत्तर कोरिया की विदेश नीति में &quot;सर्वोच्च प्राथमिकता&quot; पर है।रक्षा संधि के प्रति प्रतिबद्धताद्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की वर्षगांठ के मौके पर भेजे गए इस संदेश में किम ने 2024 में हुए &quot;व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि&quot; का जिक्र किया।आपसी रक्षा प्रावधान: किम ने इस संधि के तहत &quot;अंतर-राज्यीय दायित्वों&quot; को पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस समझौते में एक प्रमुख प्रावधान यह है कि यदि किसी भी देश पर हमला होता है, तो दूसरा देश उसकी सैन्य सहायता करेगा।रणनीतिक एकजुटता: उत्तर कोरियाई समाचार एजेंसी KCNA के अनुसार, किम ने पुतिन को आश्वासन दिया कि प्योंगयांग हर परिस्थिति में मॉस्को के साथ मजबूती से खड़ा है।युद्ध के मैदान में उत्तर कोरियाई सैनिकयह संदेश ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरिया की भूमिका चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पश्चिमी और यूक्रेनी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार: उत्तर कोरिया ने रूस की सहायता के लिए कुर्स्क क्षेत्र में लगभग 14,000 सैनिक भेजे थे। इन सैनिकों को युद्ध के मैदान में भारी कीमत चुकानी पड़ी है। रिपोर्टों के अनुसार, लड़ाई के दौरान 6,000 से अधिक उत्तर कोरियाई सैनिक मारे गए हैं।इसे भी पढ़ें: झांसी में ऑनलाइन सट्टे के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़! करोड़ों का सोना-चांदी और नकदी बरामद, दो महिलाएं गिरफ्तार, सिपाही बर्खास्त रूस में सादगीपूर्ण &#039;विजय दिवस&#039; और सीज़फ़ायर की आहटयूक्रेन से बढ़ते ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे के बीच, रूस ने इस साल अपनी सबसे छोटी &#039;विजय दिवस&#039; परेड आयोजित की। सुरक्षा कारणों से समारोह को काफी सीमित रखा गया।ट्रंप की मध्यस्थता का असर:लेख में यह भी महत्वपूर्ण है कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे इस भीषण संघर्ष में एक अस्थायी राहत की उम्मीद जागी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद, दोनों देश 9 मई से 11 मई तक तीन दिवसीय संघर्ष विराम (Ceasefire) पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, किम का संदेश यह संकेत देता है कि इस अस्थायी शांति के बावजूद, उत्तर कोरिया और रूस का सैन्य गठबंधन भविष्य के लिए और अधिक मजबूत हो रहा है।एक नई वैश्विक धुरीकिम जोंग उन का यह संदेश केवल एक बधाई पत्र नहीं, बल्कि पश्चिम को एक स्पष्ट संकेत है। रूस की सैन्य शक्ति और उत्तर कोरिया के जनशक्ति सहयोग ने दुनिया के सामने एक नई सैन्य धुरी पेश की है, जो आने वाले समय में वैश्विक राजनीति के समीकरण बदल सकती है। Stay updated with International
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:49 +0530</pubDate>
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<title>&amp;apos;चैम्पियन ऑफ द अर्थ&amp;apos; सर डेविड ऐटेनबरा को 100वें जन्मदिन पर बधाई</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया ने शुक्रवार को अपने जीवन की शताब्दी पूरी करने वाले प्रसिद्ध प्रकृतिवादी सर डेविड ऐटेनबरा को, जन्म दिन की बधाई दी है.  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:13 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन: स्वास्थ्य सेवाओं पर अभी तक 3,000 से अधिक हमले</title>
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<description><![CDATA[ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि यूक्रेन में फ़रवरी 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर हुए आक्रमण के बाद से देश की स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पर 3,000 से अधिक हमले किए गए हैं. इन हमलों में प्रसूति अस्पतालों और दवाख़ानों से लेकर एम्बुलेंस टीमों तक सभी को निशाना बनाया गया है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:13 +0530</pubDate>
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<title>मलेरिया वैक्सीन से लाखों बच्चों की जान बची, मगर घटती रक़म से चुनौतियाँ</title>
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<description><![CDATA[ मलेरिया से हर साल लाखों बच्चों की ज़िन्दगी प्रभावित होती है, लेकिन अब अफ़्रीका से एक उम्मीद भरी ख़बर सामने आई है. प्रतिष्ठित मैडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित एक नई रिपोर्ट में पाया गया है कि RTS,S मलेरिया वैक्सीन के इस्तेमाल से बच्चों की मौतों में ख़ासी कमी आई है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:10 +0530</pubDate>
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<title>भारत: मध्य प्रदेश में भरोसे और त्वरित कार्रवाई से ख़सरे पर नियंत्रण</title>
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<description><![CDATA[ भारत के मध्य प्रदेश राज्य में स्वास्थ्यकर्मियों, ज़िला अधिकारियों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साझा प्रयासों की बदौलत, ख़सरे के प्रकोप को नियंत्रित करने में मदद मिली है. इससे ख़सरा-रूबेला टीकाकरण को बढ़ावा मिला और समुदायों में टीकाकरण के प्रति भरोसा भी मज़बूत हुआ है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:05 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान में युद्धविराम के बावजूद, लोग भोजन की तलाश में भटकने को मजबूर</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता टीमों ने बताया है कि लेबनान में नाज़ुक युद्धविराम लागू रहने के बावजूद, लोगों की हत्याओं व विस्थापन का सिलसिला रुका नहीं है और दक्षिणी इलाक़े में इसराइली हमलों के कारण गाँव के गाँव इतनी बुरी तरह तबाह हो गए हैं कि उन्हें पहचाना मुश्किल हो रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:01 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान में फिर इसराइल के हवाई हमले, विस्थापन की नई लहर</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र ने आगाह किया कि लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर रात भर हुए इसराइली हवाई हमले ने, वहाँ से विस्थापन की एक नई लहर उत्पन्न कर दी है जबकि वहाँ रहने वाले लोग, पहले ही महीनों से युद्ध के साए में जी रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:48:01 +0530</pubDate>
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<title>ट्रंप को बड़ा कानूनी झटका! अमेरिका की कोर्ट ने 10% ग्लोबल टैरिफ को किया रद्द, बताया &amp;apos;गैर&#45;कानूनी&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ US की एक फ़ेडरल कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए नए ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में पहले मिली हार के बाद, ट्रंप प्रशासन को यह एक और बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की &quot;अमेरिका फर्स्ट&quot; व्यापार नीति को एक और बड़ी कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ा है। न्यूयॉर्क की कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 10% ग्लोबल टैरिफ (आयात शुल्क) को अमान्य घोषित कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में पहले मिली हार के बाद, इसे ट्रंप की आर्थिक नीतियों के लिए एक गंभीर झटका माना जा रहा है। कोर्ट ने इन टैरिफ को &quot;अमान्य&quot; और &quot;कानून द्वारा अधिकृत नहीं&quot; घोषित किया। कोर्ट ने उन छोटे व्यवसायों का पक्ष लिया जिन्होंने इन उपायों को चुनौती दी थी। हालाँकि, एक जज ने असहमति जताते हुए तर्क दिया कि कानून राष्ट्रपति को टैरिफ के मामले में ज़्यादा व्यापक शक्तियाँ देता है।इसका क्या मतलब है?उम्मीद है कि ट्रंप प्रशासन इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेगा। यह मामला सबसे पहले वॉशिंगटन में US कोर्ट ऑफ़ अपील्स फ़ॉर द फ़ेडरल सर्किट में जाएगा और अंततः फिर से सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच सकता है।यह विवाद 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत लागू किए गए 10% के अस्थायी ग्लोबल टैरिफ पर केंद्रित है। यह तब हुआ जब फ़रवरी में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा पिछले साल लगभग हर देश पर लगाए गए और भी ज़्यादा कड़े टैरिफ को रद्द कर दिया था। मौजूदा टैरिफ 24 जुलाई को खत्म होने वाले थे।यह ताज़ा फ़ैसला सीधे तौर पर केवल तीन वादियों पर लागू होता है: वॉशिंगटन राज्य, मसाला कंपनी &#039;बर्लैप एंड बैरल&#039;, और खिलौना निर्माता कंपनी &#039;बेसिक फ़न!&#039;। कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह अभी भी साफ़ नहीं है कि क्या अन्य व्यवसायों को अभी भी ये टैरिफ देने होंगे।फ़ैसले के बाद &#039;बेसिक फ़न!&#039; के CEO जे फ़ोरमैन ने कहा, &quot;आज हमने लड़ाई लड़ी, और हम जीते, और हम बहुत उत्साहित हैं।&quot;ट्रंप प्रशासन को झटकायह फ़ैसला बड़े पैमाने पर आयात करों के ज़रिए US अर्थव्यवस्था की रक्षा करने के ट्रंप के प्रयासों को लगा एक और कानूनी झटका है। पिछले साल, ट्रंप ने 1977 के &#039;इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट&#039; (IEEPA) का हवाला देते हुए, अमेरिका के लंबे समय से चले आ रहे व्यापार घाटे को एक राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया था, ताकि व्यापक टैरिफ को सही ठहराया जा सके। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने 28 फ़रवरी को फ़ैसला दिया कि यह कानून ऐसे उपायों को अधिकृत नहीं करता है। US संविधान के तहत, कर और टैरिफ लगाने की शक्ति कांग्रेस के पास है, हालाँकि वह राष्ट्रपति को सीमित अधिकार सौंप सकती है। इसे भी पढ़ें: US-Iran conflict | होरमुज़ में बारूद की गूँज! अमेरिका और ईरान के बीच हुई गोलीबारी, 7 अप्रैल की शांति-समझौते के बाद सबसे बड़ा तनावइन झटकों के बावजूद, व्यापक रूप से यह उम्मीद की जा रही है कि ट्रंप टैरिफ को फिर से लागू करने के लिए वैकल्पिक तरीकों की तलाश करेंगे। प्रशासन अभी व्यापार से जुड़ी दो जांचें कर रहा है, जिनसे नए इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का रास्ता खुल सकता है।US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के ऑफिस की एक जांच में यह देखा जा रहा है कि क्या चीन, यूरोपियन यूनियन और जापान समेत 16 व्यापारिक साझेदार ज़रूरत से ज़्यादा सामान बना रहे हैं और अमेरिकी निर्माताओं को गलत तरीके से नुकसान पहुंचा रहे हैं।एक और जांच में यह देखा जा रहा है कि क्या नाइजीरिया से लेकर नॉर्वे तक के 60 देश—जिनसे अमेरिका का 99 प्रतिशत इंपोर्ट होता है—ज़बरदस्ती मज़दूरी से बने सामान के व्यापार को रोकने के लिए काफी कदम उठा रहे हैं। Hindi me International News Hindi me international news के लिए जुड़ें प्रभासाक्षी से  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 08 May 2026 10:12:58 +0530</pubDate>
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<title>Cuba&#45;US Relations | ईरान के बाद क्यूबा पर मिसाइल दागेने वाला है अमेरिका? ट्रंप की तीखी बयानबाज़ी से मचा दुनिया में हड़कंप</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और क्यूबा के बीच बढ़ते तनाव के बीच वॉशिंगटन से एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बार-बार मिल रही धमकियों के बावजूद, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन फिलहाल क्यूबा के खिलाफ किसी तात्कालिक सैन्य कार्रवाई पर विचार नहीं कर रहा है। यह स्पष्टीकरण ट्रंप के उस विवादास्पद बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि &quot;अगला नंबर क्यूबा का है&quot;। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि ईरान के साथ तनाव के मद्देनजर पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी युद्धपोत लौटते समय क्यूबा का रुख कर सकते हैं।क्यूबा के अधिकारियों के साथ प्रारंभिक बातचीत में शामिल अधिकारियों ने बताया कि उन्हें इस बात की ज्यादा उम्मीद नहीं है कि साम्यवादी सरकार मानवीय सहायता के रूप में करोड़ों डॉलर, सभी क्यूबाई नागरिकों के लिए दो वर्षों तक स्टार्लिंक की मुफ्त इंटरनेट सेवा, कृषि सहायता और बुनियादी ढांचे के समर्थन के प्रस्ताव को स्वीकार करेगी।
 लेकिन उनका कहना है कि क्यूबा ने अभी तक इस प्रस्ताव को पूरी तरह ठुकराया नहीं है, जबकि इसके साथ ऐसी शर्तें जुड़ी हैं जिनका सरकार लंबे समय से विरोध करती रही है, यहां तक कि ट्रंप प्रशासन द्वारा बृहस्पतिवार को हवाना पर नए प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी यह प्रस्ताव ठुकराया नहीं गया। अधिकारियों ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि सरकार के पास अब भी इस प्रस्ताव को स्वीकार करने का समय है। उन्होंने हालांकि इस बात को लेकर आगाह किया कि ट्रंप किसी भी वक्त अपना फैसला बदल सकते हैं और सैन्य विकल्प अब भी खुले हुए हैं।
 अमेरिका के वित्त मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने इन प्रतिबंधों की घोषणा तब की, जब ट्रंप ने पिछले सप्ताह एक शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर किए। इस शासकीय आदेश से प्रशासन की क्यूबा पर दंडात्मक कार्रवाई लागू करने की शक्ति का विस्तार हो गया।
 क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्स ने इन कदमों को ‘सामूहिक दंड’ बताया और क्यूबा के खिलाफ अमेरिका सरकार की ‘‘नरसंहार करने की मंशा’’ की निंदा की।
 उन्होंन ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, ‘‘ये कदम इस धारणा पर आधारित हैं कि अमेरिका विदेशी नागरिकों और व्यवसायों को धमका कर दुनिया पर अपनी इच्छा थोप सकता है।अनिश्चितता का माहौलफिलहाल युद्ध के बादल टले हुए दिख रहे हैं, लेकिन कूटनीतिक गलियारों में भारी अनिश्चितता बनी हुई है। ट्रंप प्रशासन की रणनीति स्पष्ट है—भारी दबाव और आकर्षक सहायता के जरिए क्यूबा में राजनीतिक बदलाव की कोशिश करना। अब गेंद क्यूबा की सरकार के पाले में है कि वह अपनी संप्रभुता और आर्थिक संकट के बीच क्या रास्ता चुनती है।  International News in Hindi Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 08 May 2026 10:12:57 +0530</pubDate>
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<title>Missile Attack UAE | खाड़ी में फिर मंडराए युद्ध के बादल! यूएई पर मिसाइल और ड्रोन हमला, होर्मुज़ में अमेरिकी जहाजों पर गोलाबारी</title>
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<description><![CDATA[ खाड़ी क्षेत्र में जारी अस्थायी युद्धविराम एक बार फिर गहरे संकट में है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार तड़के घोषणा की कि उसकी हवाई रक्षा प्रणाली (Air Defense System) देश की ओर दागी गई मिसाइलों और ड्रोनों का &quot;सक्रिय रूप से मुकाबला&quot; कर रही है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब कुछ ही घंटों पहले होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना और ईरानी बलों के बीच सीधी झड़प हुई थी।इसे भी पढ़ें: ट्रंप को बड़ा कानूनी झटका! अमेरिका की कोर्ट ने 10% ग्लोबल टैरिफ को किया रद्द, बताया &#039;गैर-कानूनी&#039; मंत्रालय ने निवासियों को सलाह दी कि वे हवाई हमलों में गिराए गए प्रक्षेपास्त्रों के किसी भी मलबे या टुकड़ों के पास न जाएं, उनकी तस्वीरें न लें या उन्हें छुएं नहीं।
 इससे कुछ घंटे पहले, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने बृहस्पतिवार रात होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसेना के तीन जहाजों पर ईरानी हमलों को रोका और  अमेरिकी सेना पर हमला करने के लिए जिम्मेदार ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।  
 ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य बलों ने ‘‘बिना किसी उकसावे के बावजूद किए गए ईरानी हमलों’’ को रोका और आत्मरक्षा में जवाबी हमले किए।
 अमेरिकी सेना ने कहा कि किसी भी पोत को नुकसान नहीं पहुंचा है। उसने कहा कि वह तनाव बढ़ाना नहीं चाहती लेकिन ‘‘अमेरिकी बलों की रक्षा के लिए तैनात और तैयार है।’’ इसे भी पढ़ें: IndiGo Flight में Mahua Moitra के खिलाफ नारेबाजी, &#039;चोर TMC चोर&#039; और &#039;जय श्री राम&#039; के नारों से मची खलबली  
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन में संवाददाताओं से कहा कि हिंसा के बावजूद युद्धविराम कायम है।
 अमेरिका और ईरान के बीच आठ अप्रैल से युद्धविराम काफी हद तक कायम है। पिछले महीने पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच वार्ता युद्ध को समाप्त कराने के लिए किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रही। यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमले किए थे। यूएई जैसे व्यापारिक केंद्र पर हमला और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग (होर्मुज़) में सैन्य सक्रियता ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। यदि यह हिंसा नहीं रुकी, तो 8 अप्रैल का नाज़ुक शांति समझौता पूरी तरह टूट सकता है।  International News in Hindi Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 08 May 2026 10:12:56 +0530</pubDate>
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<title>India को घेरने के लिए Bangladesh ने मिलाया China से हाथ, Siliguri Corridor के पास ड्रैगन देगा दस्तक</title>
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<description><![CDATA[ भारत और बांग्लादेश के संबंधों में इस समय नई जटिलताएं उभरती दिखाई दे रही हैं। एक ओर अवैध घुसपैठ और सीमा से लोगों को वापस भेजने का मुद्दा दोनों देशों के बीच तनाव का कारण बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर तीस्ता नदी परियोजना को लेकर बांग्लादेश का चीन की ओर बढ़ता झुकाव दक्षिण एशिया की सामरिक राजनीति में नए संकेत दे रहा है। हाल के घटनाक्रम यह स्पष्ट करते हैं कि ढाका, बीजिंग और नई दिल्ली के बीच कूटनीतिक संतुलन तेजी से बदल रहा है।हम आपको बता दें कि बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने भारत में असम और पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की चुनावी सफलता के बाद इस आशंका पर चिंता जताई कि कहीं सीमा पर संदिग्ध अवैध प्रवासियों को जबरन वापस भेजने की घटनाएं न बढ़ जाएं। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसा कोई घटनाक्रम नहीं होगा। इससे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने भी संकेत दिया था कि यदि ऐसी घटनाएं बढती हैं तो ढाका प्रतिक्रिया देगा। देखा जाये तो अवैध प्रवासन और सीमा से लोगों को वापस भेजने का प्रश्न लंबे समय से भारत-बांग्लादेश संबंधों में संवेदनशील विषय रहा है।इसे भी पढ़ें: India-Vietnam के बीच 13 बड़े समझौते हुए, South China Sea में अब नहीं चल पाएगी चीन की दादागिरी, Modi और To Lam ने Jinping की टेंशन बढ़ा दीइसी बीच, सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और पुनरुद्धार परियोजना को लेकर सामने आया है। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार ने औपचारिक रूप से इस परियोजना के लिए चीन का सहयोग मांगा है। बीजिंग में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई वार्ता में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। चीन ने न केवल परियोजना में सहयोग की इच्छा जताई, बल्कि बेल्ट एंड रोड पहल के अंतर्गत बांग्लादेश के साथ आर्थिक, आधारभूत ढांचा, जल प्रबंधन और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का भी भरोसा दिया।हम आपको बता दें कि तीस्ता नदी का सामरिक महत्व अत्यंत संवेदनशील है। यह नदी सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है और लाखों लोगों की सिंचाई तथा आजीविका का आधार है। यह क्षेत्र भारत के अत्यंत महत्वपूर्ण सिलीगुडी गलियारे के निकट स्थित है, जो पूर्वोत्तर भारत को देश के शेष भाग से जोड़ने वाली जीवनरेखा माना जाता है। ऐसे में चीन की संभावित भागीदारी भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा सकती है। यदि चीन को तीस्ता क्षेत्र में आधारभूत ढांचा या जल प्रबंधन परियोजनाओं के माध्यम से दीर्घकालिक उपस्थिति मिलती है, तो यह भारत की सामरिक निगरानी और पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है।हम आपको याद दिला दें कि भारत ने भी वर्ष 2024 में तीस्ता बेसिन के संरक्षण और तकनीकी सहयोग का प्रस्ताव देकर बांग्लादेश के साथ जल प्रबंधन सहयोग मजबूत करने की कोशिश की थी। हालांकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध के कारण वर्ष 2011 का तीस्ता जल बंटवारा समझौता अब तक लागू नहीं हो पाया है। यही कारण है कि ढाका में लंबे समय से यह भावना बनी हुई है कि भारत ने जल बंटवारे के प्रश्न पर अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई। चीन अब इसी असंतोष का लाभ उठाने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है।रिपोर्टों के मुताबिक, चीन ने वार्ता के दौरान यह भी कहा कि दक्षिण एशियाई देशों के साथ उसके संबंध किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं हैं और उन्हें किसी अन्य देश के प्रभाव से नहीं देखा जाना चाहिए। लेकिन रणनीतिक दृष्टि से यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल के महीनों में बांग्लादेश की व्यवस्था चीन और पाकिस्तान के अधिक निकट दिखाई दी है। बीजिंग ने बांग्लादेश को राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में समर्थन देने की बात कही, जबकि ढाका ने ताइवान के प्रश्न पर चीन के एक चीन सिद्धांत के प्रति खुला समर्थन दोहराया है।इसके साथ ही आर्थिक दृष्टि से भी चीन का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार चीन जापान, विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक के बाद बांग्लादेश का चौथा सबसे बड़ा ऋणदाता है। वर्ष 1975 से अब तक चीन लगभग साढ़े सात अरब अमेरिकी डॉलर का ऋण दे चुका है। इससे स्पष्ट है कि बांग्लादेश अपनी विकास आवश्यकताओं के लिए चीन पर अधिक निर्भर होता जा रहा है।बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम का व्यापक रणनीतिक निहितार्थ देखें तो सामने आता है कि दक्षिण एशिया में प्रभाव संतुलन तेजी से बदल रहा है। भारत के लिए चुनौती केवल सीमा सुरक्षा या जल बंटवारा नहीं है, बल्कि अपने पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति भी है। यदि नई दिल्ली बांग्लादेश के साथ राजनीतिक विश्वास और आर्थिक साझेदारी को मजबूत नहीं कर पाती, तो चीन को क्षेत्रीय रणनीतिक बढ़त मिल सकती है। दूसरी ओर बांग्लादेश अपने आर्थिक हितों और सामरिक विकल्पों को संतुलित करने की नीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में तीस्ता परियोजना और सीमा संबंधी मुद्दे भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 08 May 2026 09:13:42 +0530</pubDate>
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<title>Strait of Hormuz पर Trump का Iran को अल्टीमेटम, कहा&#45; शर्तें नहीं मानीं तो होगी बमबारी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरुमध्य नहीं खोलने की स्थिति में ईरान पर और ज्यादा बमबारी करने की बुधवार को चेतावनी दी।
 इस बीच, युद्ध खत्म करने के लिए दोनों पक्षों के समझौते के करीब पहुंचने की खबर भी सामने आई है।
 अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियस की खबर में अमेरिकी अधिकारियों और दो अन्य सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका और ईरान युद्ध खत्म करने को लेकर एक पृष्ठ के सहमति पत्र को मंजूरी देने और विस्तृत परमाणु वार्ताओं के लिए एक रूपरेखा तय करने के करीब पहुंच गए हैं।
 खबर के अनुसार अमेरिका को उम्मीद है कि ईरान अगले 48 घंटे के अंदर विभिन्न प्रमुख बिंदुओं पर अपनी प्रतिक्रिया देगा। हालांकि खबर में यह भी कहा गया है कि अभी कुछ तय नहीं है।
 खबर में कहा गया है कि युद्ध शुरू होने के बाद से पहली बार दोनों पक्ष किसी समझौते के इतनी ज्यादा करीब पहुंचे हैं।
 ट्रंप ने ‘‘ट्रुथ सोशल’’ पर एक पोस्ट में कहा, “अगर ईरान पहले से तय शर्तों को मान ले तो इस समय जारी बड़ा सैन्य अभियान “एपिक फ्यूरी” खत्म हो जाएगा। समुद्री नाकाबंदी हट जाएगी और होर्मुज जलडमरुमध्य ईरान समेत सभी के लिए खुल जाएगा।”
 ट्रंप ने कहा, “अगर ईरान ने सहमति नहीं जताई, तो बमबारी शुरू होगी। यह बमबारी दुर्भाग्य से पहले की तुलना में बहुत बड़े स्तर पर और बहुत तेज होगी।”
 एक्सियस की खबर के अनुसार, इस समझौते में ईरान परमाणु संवर्धन को अस्थायी रूप से रोकने पर सहमत होगा, जबकि अमेरिका उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधहटा देगा, साथ ही ईरान के अरबों डॉलर के ‘फ्रीज’ किए गए धन के इस्तेमाल की अनुमति देगा।
 खबर के अनुसार दोनों देश होर्मुज जलडमरुमध्य से गुजरने वाले जहाजों और व्यापार पर लगी पाबंदियों को भी कम या खत्म करने पर सहमत हो सकते हैं।
 खबर में कहा गया है कि इस सहमति पत्र में बताई कई शर्तें तभी लागू होंगी जब दोनों पक्षों के बीच अंतिम समझौता हो जाएगा।
 खबर के अनुसार अगर ऐसा नहीं होता, तो फिर से युद्ध शुरू होने की आशंका बनी रहेगी, या स्थिति लंबे समय तक अनिश्चित बनी रह सकती है।
 इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात के बाद चीन ने ईरान युद्ध में समग्र संघर्ष विराम की अपील की। अराघची 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमला किए जाने के बाद से पहली बार चीन की यात्रा पर है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 08 May 2026 09:13:42 +0530</pubDate>
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<title>Hantavirus का कहर: Cruise Ship पर मौत, इंसान से इंसान फैलने वाले वायरस से दुनिया में दहशत</title>
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<description><![CDATA[ एमवी होंडियस से जुड़ा हंतावायरस का प्रकोप कई देशों में चिंता का विषय बना हुआ है। स्वास्थ्य अधिकारी अभी भी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यात्रा के दौरान कितने यात्री इसके संपर्क में आए होंगे। नवीनतम घटनाक्रम अब दक्षिण अटलांटिक महासागर के सुदूर द्वीप सेंट हेलेना पर उतरे यात्रियों के एक समूह के इर्द-गिर्द केंद्रित है। डच अधिकारियों के अनुसार, सेंट हेलेना में रुकने के दौरान लगभग 40 यात्रियों ने क्रूज जहाज छोड़ दिया। बताया जाता है कि इस समूह में एक डच यात्री की पत्नी भी शामिल है, जिसकी बाद में इस प्रकोप के दौरान मृत्यु हो गई। अधिकारियों ने यह भी बताया कि जहाज से उतरी एक डच महिला और एक स्विस पुरुष का वर्तमान में दक्षिण अफ्रीका में चिकित्सा उपचार चल रहा है। इसे भी पढ़ें: Cruise Ship पर Hantavirus का कहर, 3 मौत के बाद WHO ने जारी किया Global Alertडच विदेश मंत्री टॉम बेरेंडसेन ने बुधवार देर शाम संसद को भेजे गए एक पत्र में यह जानकारी साझा की। अधिकारियों ने बताया कि जब जहाज पर संक्रमण फैल रहा था, तभी यात्री उतर गए। विभिन्न देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां ​​अब उन यात्रियों का पता लगाने के प्रयास जारी रखे हुए हैं, जो व्यापक स्वास्थ्य चेतावनी जारी होने से पहले संक्रमित हो सकते थे। एमवी होंडियस से जुड़े इस संक्रमण के कारण अब तक कई मौतें हो चुकी हैं और कई लोगों में संक्रमण की पुष्टि या संदेह है। जांचकर्ता विशेष रूप से चिंतित हैं क्योंकि माना जा रहा है कि यह वायरस एंडीज हंतावायरस स्ट्रेन है, जो एक दुर्लभ प्रकार का वायरस है और सीमित मात्रा में ही एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।बुधवार देर शाम संसद को भेजे गए एक पत्र में डच विदेश मंत्री टॉम बेरेंडसेन ने यह जानकारी साझा की। अधिकारियों ने बताया कि जब जहाज पर संक्रमण फैल रहा था, तभी यात्रियों को जहाज से उतार दिया गया। विभिन्न देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां ​​अब उन यात्रियों से संपर्क करने के प्रयास जारी रखे हुए हैं, जो व्यापक स्वास्थ्य चेतावनी जारी होने से पहले संक्रमित हो सकते थे। एक अन्य घटनाक्रम ने यूरोप के स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। डच एयरलाइन केएलएम ने पुष्टि की है कि एक यात्री, जिसकी बाद में हंतावायरस से मृत्यु हो गई, 25 अप्रैल को जोहान्सबर्ग से एम्स्टर्डम जाने वाली उड़ान केएल592 में कुछ समय के लिए सवार हुआ था।एयरलाइन के अनुसार, यात्री को उड़ान भरने से पहले उसकी स्वास्थ्य स्थिति के कारण विमान से उतार दिया गया था। केएलएम ने एक बयान में कहा कि उस समय यात्री की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए, चालक दल ने उसे उड़ान में यात्रा करने की अनुमति नहीं देने का फैसला किया। एयरलाइन ने आगे कहा कि यात्री को विमान से उतारने के बाद, उड़ान सामान्य रूप से नीदरलैंड के लिए रवाना हुई। एयरलाइन के अनुसार, डच स्वास्थ्य अधिकारी अब एहतियात के तौर पर उस उड़ान में सवार यात्रियों से संपर्क कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Polar Cruise पर Hantavirus का खौफ, Cape Verde के पास 3 लोगों की मौत, WHO हुआ अलर्टएमवी होंडियस से जुड़े इस प्रकोप के कारण पहले ही कई मौतें हो चुकी हैं और कई लोगों में संक्रमण की पुष्टि या संदेह है। जांचकर्ता विशेष रूप से चिंतित हैं क्योंकि इसमें शामिल वायरस एंडीज हंतावायरस स्ट्रेन होने का संदेह है, जो एक दुर्लभ प्रकार का वायरस है और सीमित मानव-से-मानव संचरण से जुड़ा है। अब ध्यान अर्जेंटीना की ओर भी केंद्रित हो गया है, जहां से अंटार्कटिका क्रूज मूल रूप से रवाना हुआ था। खबरों के मुताबिक, वहां के स्वास्थ्य अधिकारी और विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या अर्जेंटीना इस प्रकोप के उद्गम स्थल से जुड़ा हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अर्जेंटीना में लैटिन अमेरिका में हंतावायरस संक्रमण की दर लगातार सबसे अधिक दर्ज की जाती है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 08 May 2026 09:13:41 +0530</pubDate>
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<title>Bihar के मखाना से Maharashtra के आम तक, Vietnam President To Lam ने भारत के &amp;apos;GI Tag&amp;apos; वाले व्यंजनों का लिया जायका</title>
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<description><![CDATA[ वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की राजकीय यात्रा के दौरान उन्हें गया अनरसा, मिथिला मखाना, हाजीपुर मालभोग केला और रत्नागिरी आम जैसे विशेष व्यंजन परोसे गए।
रत्नागिरी आम को अल्फांसो या हापुस के नाम से जाना जाता है।
वियतनाम के राष्ट्रपति पांच मई से भारत की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर हैं।
तो लाम को परोसे गए व्यंजनों में बिहार के नालंदा जिले के सिलाव की प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाई ‘सिलाव खाजा’ भी शामिल थी, जिसे उसकी अनूठी पहचान और विरासत के लिए जीआई टैग प्राप्त है।
खस्ता और अपने कुरकुरेपन के लिए प्रसिद्ध यह व्यंजन मैदा, चीनी और घी का उपयोग करके सदियों पुरानी तकनीकों से तैयार किया जाता है।
गया अनरसा, बिहार के गया का एक पारंपरिक व्यंजन है, जो अपने विशिष्ट स्वाद और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
गया (बिहार) का प्रसिद्ध अनरसा चावल के आटे, गुड़, मावा (खोया) और घी से बनी एक पारंपरिक, खस्ता मिठाई है जिसे खसखस या तिल लगाकर तलते हैं।
वियतनाम के राष्ट्रपति को परोसा गया एक अन्य व्यंजन था मिथिला मखाना, जिसे कमल गट्टे के नाम से भी जाना जाता है।
यह बिहार के मिथिला क्षेत्र का एक उत्कृष्ट कृषि उत्पाद है, जिसे इसकी अनूठी उत्पत्ति और गुणवत्ता के लिए जीआई टैग प्राप्त है।
प्रोटीन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह उत्पाद बिहार की कृषि विरासत और स्थानीय किसानों की कुशलता का प्रतीक है।
वियतनाम के नेता को परोसा गया हाजीपुर मालभोग केला, बिहार के हाजीपुर में उगाई जाने वाली एक उत्कृष्ट किस्म है। यह अपनी सुगंध, प्राकृतिक मिठास व मुलायम बनावट के लिए जाना जाता है।
महाराष्ट्र के रत्नागिरी के आम भी वियतनाम के राष्ट्रपति को परोसे गए। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 08 May 2026 09:13:40 +0530</pubDate>
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<title>Teesta River Project पर Bangladesh का बड़ा दांव, China से मांगी मदद, India की बढ़ी टेंशन?</title>
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<description><![CDATA[ तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार ने तीस्ता नदी पुनर्स्थापन परियोजना के लिए औपचारिक रूप से चीन से समर्थन मांगा है। यह कदम भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर असर डाल सकता है।
 बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी ‘बांग्लादेश संगबाद संस्था’ (बीएसएस) के अनुसार, बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान और चीन के उनके समकक्ष वांग यी के बीच बुधवार को बीजिंग में हुई बैठक में तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन एवं पुनर्स्थापन परियोजना (टीआरसीएमआरपी) से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
 तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जहां यह सिंचाई एवं लाखों लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है।
 बीएसएस के अनुसार, वांग ने नई बांग्लादेश सरकार का समर्थन करते हुए कहा कि चीन उच्च गुणवत्ता वाली ‘बेल्ट एंड रोड’ सहयोग परियोजना को बांग्लादेश की राष्ट्रीय विकास रणनीतियों के साथ जोड़ने और अर्थव्यवस्था, अवसंरचना एवं लोगों के बीच संपर्क जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के लिए तैयार है।
 उन्होंने कहा कि सरकार चीन की कंपनियों को बांग्लादेश में निवेश के लिए भी प्रोत्साहित करेगी।
 चीन के आधिकारिक बयान के अनुसार, वांग ने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश और अन्य दक्षिण एशियाई देशों के साथ चीन के संबंधों का विकास किसी तीसरे पक्ष को लक्ष्य नहीं बनाता और न ही किसी तीसरे पक्ष से प्रभावित होना चाहिए।
 तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार के फरवरी में सत्ता संभालने के बाद यह रहमान की चीन की पहली यात्रा है। वह पांच मई को यहां पहुंचे और बृहस्पतिवार को यहां से रवाना होंगे।
 रहमान पिछले महीने भारत आए थे। भारतीय नेताओं के साथ उनकी वार्ता पर बीजिंग में करीबी नजर रखी गई, क्योंकि शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद मुहम्मद यूनुस के नीत अंतरिम प्रशासन के चीन और पाकिस्तान के करीब आने से ढाका और भारत के बीच संबंधों में तनाव आ गया था।
 चीन कई वर्ष से टीआरसीएमआरपी के विकास में रुचि दिखाता रहा है, जो भारत के संवेदनशील सिलीगुड़ी गलियारे के पास स्थित है। यह इसकी मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है।
 इस पृष्ठभूमि में भारत ने 2024 में तीस्ता बेसिन के लिए तकनीकी और संरक्षण सहायता की पेशकश की थी जो सीमा-पार नदी प्रबंधन पर ढाका के साथ सहयोग बढ़ाने के नयी दिल्ली के प्रयासों को दर्शाता है।
 जल बंटवारा द्विपक्षीय संबंधों में एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है और गंगा नदी के शुष्क मौसम में जल बंटवारे को नियंत्रित करने के लिए 1996 में 30 वर्ष के लिए हस्ताक्षरित भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि को यदि नवीनीकृत नहीं किया गया तो यह इस वर्ष समाप्त होने वाली है।
 यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब हाल के वर्षों में चीन ने बांग्लादेश में अपनी आर्थिक एवं कूटनीतिक उपस्थिति का विस्तार किया है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 08 May 2026 09:13:39 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran conflict | होरमुज़ में बारूद की गूँज! अमेरिका और ईरान के बीच हुई गोलीबारी, 7 अप्रैल की शांति&#45;समझौते के बाद सबसे बड़ा तनाव</title>
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<description><![CDATA[ जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है, एक बार फिर युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया है। 7 अप्रैल को हुए नाज़ुक शांति-समझौते के बाद यह अब तक का सबसे गंभीर सैन्य टकराव है। जहाँ एक ओर कूटनीतिक रास्तों से शांति की उम्मीद की जा रही थी, वहीं दूसरी ओर समुद्र में गरजती तोपों और मिसाइलों ने स्थिति को बेहद तनावपूर्ण बना दिया है। गुरुवार को हुई इस सैन्य झड़प के बाद दोनों देशों के बीच दावों और जवाबी दावों का दौर शुरू हो गया है।  इसे भी पढ़ें: West Bengal: अब ममता बनर्जी नहीं रहीं मुख्यमंत्री, राज्यपाल आरएन रवि ने भंग की विधानसभाअमेरिकी पक्ष: US सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ईरान की उन सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया है, जो अमेरिकी युद्धपोतों के लिए खतरा पैदा कर रही थीं। अमेरिका ने इन हमलों को &quot;रक्षात्मक&quot; करार देते हुए कहा कि यह केवल ईरानी उकसावे का जवाब था।ईरानी पक्ष: तेहरान ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन हवाई हमलों में नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया। ईरानी सेना के प्रवक्ता के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन किया और दो जहाज़ों पर भी हमला किया। तनाव इतना बढ़ गया कि तेहरान में हवाई रक्षा प्रणालियों (Air Defense Systems) को सक्रिय करना पड़ा, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध की आशंका गहरा गई है। पत्रकारों से बात करते हुए, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरानी हमलावरों को नष्ट कर दिया है और तेहरान को आगे किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी दी है।ट्रम्प ने कहा, &quot;अगर ईरान जल्द ही किसी समझौते पर राज़ी नहीं होता है, तो हम उन्हें और भी ज़ोरदार और हिंसक तरीके से मार गिराएँगे,&quot; साथ ही उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि शांति-समझौता अभी भी लागू है। उन्होंने ईरान पर &quot;हमारे साथ खिलवाड़ करने&quot; का आरोप लगाया।गोलीबारी के बावजूद, वाशिंगटन और तेहरान दोनों ने संकेत दिया कि वे कोई बड़ा संघर्ष नहीं चाहते। ईरान के अधिकारियों ने बाद में कहा कि स्थिति सामान्य हो गई है, जबकि US ने दोहराया कि वह इस क्षेत्र में तनाव बढ़ाना नहीं चाहता।ABC के एक रिपोर्टर के साथ बातचीत के दौरान ट्रम्प ने इस टकराव को कम करके दिखाने की कोशिश भी की। उन्होंने कहा, &quot;यह तो बस प्यार से किया गया एक हल्का सा वार है।&quot;यह ताज़ा हिंसा तब हुई जब वाशिंगटन, युद्ध को औपचारिक रूप से समाप्त करने और खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता लाने के उद्देश्य से प्रस्तावित एक रूपरेखा पर तेहरान की प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहा था।रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रस्ताव में तीन चरणों वाली एक प्रक्रिया की रूपरेखा दी गई है, जिसमें एक औपचारिक शांति-समझौता, होरमुज़ जलडमरूमध्य में तनाव कम करने के उपाय और एक व्यापक दीर्घकालिक समझौते के लिए 30 दिनों की बातचीत की अवधि शामिल है।हालाँकि, रिपोर्टों के मुताबिक, यह प्रस्ताव कई विवादित मुद्दों को नज़रअंदाज़ करता है, जिनमें US की कुछ प्रमुख माँगें भी शामिल हैं, जैसे कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों पर रोक लगाए और होरमुज़ जलडमरूमध्य से बिना किसी रोक-टोक के जहाज़ों के गुज़रने की गारंटी दे। यह जलमार्ग पहले दुनिया की तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पाँचवाँ हिस्सा संभालता था, इसलिए यहाँ किसी भी तरह की अस्थिरता अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन जाती है।  इस तनाव के बढ़ने से क्षेत्रीय सहयोगियों और वैश्विक बाजारों में भी चिंताएँ बढ़ गई हैं, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास जारी तनाव अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और ऊर्जा आपूर्ति के लिए लगातार खतरा बना हुआ है। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि तेहरान ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है, जिससे इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या कूटनीति आगे के संघर्ष को रोक पाएगी।International News in Hindi Stay updated with International News in Hindi on Prabhasakshi ]]></description>
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<title>&amp;apos;शांति नहीं तो विनाश&amp;apos;: होरमुज़ झड़प पर Donald Trump की ईरान को अंतिम चेतावनी, कहा&#45; &amp;apos;अगला हमला और भी हिंसक होगा&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ होरमुज़ जलडमरूमध्य की लहरों में एक बार फिर बारूद की गंध फैल गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तेहरान ने प्रस्तावित शांति समझौते पर जल्द हस्ताक्षर नहीं किए, तो अमेरिका &quot;और भी ज़ोरदार और हिंसक&quot; सैन्य कार्रवाई करेगा। यह बयान उस समय आया है जब पिछले 24 घंटों में दोनों देशों के बीच समुद्र में भारी गोलाबारी की खबरें सामने आई हैं। यह तनाव तब बढ़ा, जब ट्रंप ने ईरान के साथ पिछले 24 घंटों में हुई &quot;बहुत अच्छी बातचीत&quot; पर संतोष ज़ाहिर किया था। लेकिन अगले ही दिन, तनाव फिर से बढ़ता दिखा, जब दोनों देशों के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य में झड़प हो गई। इसे भी पढ़ें: सचिन तेंदुलकर के साथ Debut करने वाले Salil Ankola डिप्रेशन में, Pune के सेंटर में भर्ती हुए   तेहरान ने वॉशिंगटन पर सीज़फ़ायर (युद्धविराम) तोड़ने का आरोप लगाया, जबकि अमेरिका ने कहा कि उसकी सेना ने जवाबी कार्रवाई में गोलियां चलाईं। समुद्र में यह झड़प तब हुई, जब ईरान ने कहा था कि वह युद्ध खत्म करने के लिए एक छोटे समय के समझौते पर विचार कर रहा है।गुरुवार को एक तीखे बयान में, ट्रंप ने कहा कि डिस्ट्रॉयर, ईरान द्वारा कथित तौर पर किए गए मिसाइल, ड्रोन और छोटी नावों के हमलों के बावजूद, उस अहम जलमार्ग से &quot;बहुत ही कामयाबी से&quot; गुज़र गए। उनके मुताबिक, अमेरिकी जंगी जहाज़ों को &quot;कोई नुकसान नहीं हुआ&quot;, जबकि हमला करने वाले ईरानी &quot;पूरी तरह से तबाह हो गए&quot;। इसे भी पढ़ें: Cooper Connolly का तूफानी शतक पड़ा फीका, Sunrisers Hyderabad ने जीता रोमांचक मैचट्रंप ने लिखा, &quot;अगर उन्होंने अपना समझौता जल्दी से साइन नहीं किया, तो भविष्य में हम उन्हें और भी ज़्यादा ज़ोरदार और हिंसक तरीके से खत्म कर देंगे!&quot; उन्होंने ईरान के नेताओं पर &quot;पागल&quot; होने का आरोप लगाया, जो मौका मिलने पर &quot;बिना सोचे-समझे&quot; परमाणु हथियार का इस्तेमाल कर लेंगे।ट्रंप ने आगे दावा किया कि डिस्ट्रॉयर पर दागी गई मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया गया, ड्रोन &quot;हवा में ही जलाकर राख कर दिए गए&quot;, और इस टकराव के दौरान ईरान की कई हमलावर नावें डूब गईं। उन्होंने कहा कि अब ये तीनों डिस्ट्रॉयर उस चीज़ में फिर से शामिल हो जाएंगे, जिसे उन्होंने अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी — यानी &quot;स्टील की दीवार&quot; — बताया।हालांकि, ट्रंप ने ABC के एक रिपोर्टर के सामने इस झड़प को ज़्यादा तवज्जो नहीं दी और कहा कि यह बस एक &quot;प्यार भरा थपकी&quot; (love tap) थी, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ सीज़फ़ायर अभी भी लागू है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 08 May 2026 09:13:38 +0530</pubDate>
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<title>CNN के संस्थापक और प्रबल यूएन समर्थक टैड टर्नर का निधन, शोक व श्रद्धांजलि</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने संयुक्त राज्य अमेरिका के एक बड़े व्यवसायी, मीडिया दिग्गज और परोपकारी टैड टर्नर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है. टैड टर्नर का बुधवार को 87 वर्ष की आयु में फ़्लोरिडा स्थित उनके घर में निधन हो गया. यूएन प्रमुख ने टैड टर्नर को, “एक दूरदर्शी व्यक्ति” बताते हुए कहा कि उनकी दृढ़ता, उदारता और साहसिक सोच ने संयुक्त राष्ट्र और दुनिया पर स्थाई छाप छोड़ी है. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 08 May 2026 08:34:59 +0530</pubDate>
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<title>भारत: वैक्सीन से छूट गए बच्चों तक टीके पहुँचाने में मददगार TrackVac</title>
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<description><![CDATA[ भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा विकसित एक डिजिटल मंच, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों को उन बच्चों तक पहुँचने में मदद कर रहा है, जो नियमित टीकाकरण से छूट जाते थे. वैक्सीन के टीके तभी जीवन बचाते हैं, जब वे हर बच्चे तक पहुँचते हैं. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 08 May 2026 08:34:52 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान में फिर इसराइल के हवाई हमले, विस्थापन की एक नई लहर</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र ने आगाह किया कि लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर रात भर हुए इसराइली हवाई हमले ने, वहाँ से विस्थापन की एक नई लहर उत्पन्न कर दी है जबकि वहाँ रहने वाले लोग, पहले ही महीनों से युद्ध के साए में जी रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 08 May 2026 08:34:49 +0530</pubDate>
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<title>Israel&#45;Beirut strike | बेरुत में इजराइल का बड़ा हमला: हिज़्बुल्लाह की रिज़वान फ़ोर्स के कमांडर मालेक बालू को मार गिराने का दावा</title>
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<description><![CDATA[ इजराइल और हिजबुल्ला समूह के बीच 17 अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा के बाद बुधवार को इजराइल ने पहली बार बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर हमला किया।इज़रायली सेना ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों पर बमबारी की है और दावा किया है कि उन्होंने हिज़्बुल्लाह की रिज़वान फ़ोर्स के कमांडर मालेक बालू को मार गिराया है। इससे पहले, बेरुत में आखिरी हमले आठ अप्रैल को हुए थे, जब मध्य बेरुत समेत कई जगहों पर इजराइल के हमलों में 350 से अधिक लोग मारे गए थे।
 प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि बुधवार के हमले में हिजबुल्ला के रादवान बल के एक कमांडर को निशाना बनाया गया था। हिजबुल्ला ने इस पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की।इसे भी पढ़ें: शादी के बाद अब Shikhar Dhawan ने कराया रजिस्ट्रेशन, Gurugram में पत्नी Sophie के साथ आए नजर हमले का विवरण: &#039;घोबेरी&#039; में भारी तबाहीलेबनान की नेशनल न्यूज़ एजेंसी (NNA) के अनुसार, इज़रायली लड़ाकू विमानों ने बेरूत के दक्षिणी हिस्से में स्थित &#039;घोबेरी&#039; इलाके को निशाना बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाका इतना ज़ोरदार था कि इसकी आवाज़ पूरी राजधानी में सुनी गई और हमले वाली जगह से भारी धुएं का गुबार उठता देखा गया।बेंजामिन नेतन्याहू: &quot;किसी भी आतंकवादी को छूट नहीं मिलेगी&quot;इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस हमले की आधिकारिक पुष्टि की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह ऑपरेशन उनके और रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ के सीधे निर्देशों पर सेना द्वारा अंजाम दिया गया। नेतन्याहू ने टेलीग्राम पर संदेश साझा करते हुए कहा:&quot;रिज़वान के आतंकवादी इज़रायली बस्तियों पर गोलीबारी करने के ज़िम्मेदार हैं। इज़रायल का लंबा हाथ हर दुश्मन को पकड़ लेगा। हमने उत्तर के निवासियों को सुरक्षा देने का वादा किया था और हम उसे निभा रहे हैं।&quot;इसे भी पढ़ें: Murudeshwar Temple History: Karnataka का वो अद्भुत मंदिर जिसका है Ramayana से नाता, दर्शन देती है Lord Shiva की 123 फीट ऊंची प्रतिमा युद्धविराम के बाद बेरूत पर पहला हमलायह हमला रणनीतिक और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है क्योंकि:समझौते का उल्लंघन: 17 अप्रैल को इज़रायल-हिज़्बुल्लाह के बीच हुए युद्धविराम के बाद यह बेरूत पर किया गया पहला बड़ा हमला हैअलिखित समझौता टूटा: विश्लेषकों का मानना था कि बेरूत को निशाना न बनाने का एक अलिखित समझौता था, लेकिन इज़रायल ने &#039;राष्ट्रीय सुरक्षा&#039; का हवाला देकर इसे तोड़ दिया है।आम नागरिकों की वापसी: युद्धविराम के बाद से कई लेबनानी नागरिक दक्षिणी इलाकों में अपने घरों को लौट आए थे। हमले के समय सड़कें लोगों से भरी हुई थीं, जिससे जान-माल के नुकसान का खतरा और बढ़ गया है।युद्धविराम के बावजूद, इज़रायली सेना ने लेबनान के दक्षिण और पूर्व में हमले जारी रखे हैं, और बुधवार को कम से कम 13 लोगों को मार गिराया। लेबनान की पूर्वी बेका घाटी में इज़रायल के एक हमले में चार लोग मारे गए, जबकि इज़रायली सेना ने कहा कि उसने दक्षिण में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हमला किया; इससे पहले उसने एक दर्जन कस्बों के निवासियों को इलाका खाली करने की चेतावनी दी थी। इस बीच, हिज़्बुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में इज़राइली सेना को निशाना बनाने वाले कई ऑपरेशनों, साथ ही उत्तरी इज़राइल पर हमलों की ज़िम्मेदारी ली है।लेबनान में इज़राइली हमलों में 2 मार्च से अब तक 2,700 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं; इनमें 17 अप्रैल को इज़राइली और लेबनानी प्रतिनिधियों के बीच वॉशिंगटन की मध्यस्थता से हुए संघर्ष-विराम के बाद मारे गए दर्जनों लोग भी शामिल हैं। इज़राइली सेना का कहना है कि इस लड़ाई में उसके 17 सैनिक और एक नागरिक ठेकेदार भी मारे गए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 13:59:32 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan Marca&#45;e&#45;Haque | &amp;apos;मारका&#45;ए&#45;हक&amp;apos; की बरसी पर पाकिस्तानी सेना की हुंकार: भविष्य की आक्रामकता का देंगे निर्णायक जवाब</title>
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<description><![CDATA[ पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष की पहली वर्षगांठ पर पाकिस्तानी सेना ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है। पाकिस्तानी सेना ने इस संघर्ष को ‘मारका-ए-हक’ का नाम देते हुए इसे अपने सैन्य इतिहास का एक &quot;निर्णायक अध्याय&quot; करार दिया है। सेना ने स्पष्ट किया है कि वह भविष्य की चुनौतियों और किसी भी प्रकार की आक्रामकता से निपटने के लिए अपनी युद्धक क्षमताओं को लगातार उन्नत कर रही है। पाकिस्तानी सेना ने पिछले साल भारत के साथ चार दिन तक चले सैन्य संघर्ष को ‘मारका-ए-हक’ नाम दिया है।
 जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत होने के बाद भारत ने पिछले साल सात मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। इसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादियों के नौ ठिकानों पर हमले किए गए थे। इन हमलों में कम से कम 100 आतंकवादी मारे गए थे।
इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बहुत बढ़ गया था और पाकिस्तान ने भारत की कार्रवाई के जवाब में हमले किए थे, हालांकि उनमें से ज्यादातर को भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया था।इसे भी पढ़ें: Explained Story | ईरान-इजरायल युद्ध से मिले भारत को ये 5 सबक, अब पाकिस्तान के बचने का रास्ता बंद! जानें क्या है Operation Sindoor 2.0
दोनों पक्षों के सैन्य अधिकारियों के बीच ‘हॉटलाइन’ पर हुई बातचीत के बाद 10 मई को सैन्य संघर्ष को रोकने पर बनी सहमति के साथ संघर्ष विराम हुआ था।
पाकिस्तानी सेना ने ‘रावलपिंडी, 6/7 मई 2026 की मध्यरात्रि’ की तिथि वाले एक बयान में कहा कि सशस्त्र बल बदलते भू-राजनीतिक एवं क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल के साथ-साथ शत्रु ताकतों की आक्रामक क्षमता बढ़ाने की कोशिशों से पूरी तरह वाकिफ हैं।
बयान में कहा गया, ‘‘सामरिक माहौल लगातार बदल रहा है लेकिन राष्ट्र की रक्षा के लिए पाकिस्तानी सशस्त्र बलों का संकल्प, सतर्कता और प्रतिबद्धता अटूट है।’’इसे भी पढ़ें: Operation Sindoor | एकजुटता का नया प्रतीक, पीएम मोदी की प्रोफाइल फोटो में &#039;सिंदूर&#039; 
इसमें कहा गया, ‘‘पाकिस्तान सशस्त्र बल भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी अहम क्षमताओं, उन्नत प्रौद्योगिकियों और पेशेवर उत्कृष्टता में निवेश करना जारी रखे हुए हैं। वे पहले से कहीं अधिक केंद्रित हैं, भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए तैयार हैं और देश पर थोपी गई किसी भी आक्रामकता का निर्णायक जवाब देने के लिए तत्पर हैं।’’
सेना ने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ हर शत्रुतापूर्ण मंसूबे का उससे कहीं अधिक ताकत, सटीकता और दृढ़ संकल्प के साथ जवाब दिया जाएगा जो पिछले साल चार दिन के संघर्ष के दौरान शत्रु ने देखा था।
उसने पाकिस्तान वायु सेना (पीएएफ) की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक पड़ाव ‘‘अत्याधुनिक प्रणालियों को समझदारी से शामिल करने और विशिष्ट एवं बड़े बदलाव लाने वाली प्रौद्योगिकियों के त्वरित संचालन के जरिए भविष्य के लिए तैयार वायु शक्ति बनने की पीएएफ की दृढ़ यात्रा को दर्शाता है...।’’
बयान में कहा गया, ‘‘बहु-क्षेत्रीय अभियानों के कुशल इस्तेमाल में महारत हासिल कर पाकिस्तान वायु सेना खुद को भविष्य केंद्रित और सक्षम वायु शक्ति के रूप में लगातार मजबूत कर रही है और आधुनिक हवाई युद्ध की बदलती प्रकृति और मानकों के बीच पाकिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।’’
इसमें कहा गया कि ‘‘अभूतपूर्व दायरे वाले एवं हवाई युद्ध के इतिहास में इन नए अभियानों के सफल संचालन ने न केवल पाकिस्तान वायु सेना की पेशेवर उत्कृष्टता को रेखांकित किया बल्कि पाकिस्तानी राष्ट्र के गौरव, विश्वास और भावना को भी फिर से मजबूत किया।’’
सेना ने कहा कि पाकिस्तान शांति प्रिय देश है और उसके सशस्त्र बल परिपक्व एवं जिम्मेदार रणनीतिक संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं। उसने कहा कि पाकिस्तानी सशस्त्र बलों का हर प्रयास, तैयारी और पहल क्षेत्र में शांति बनाए रखने, स्थिरता को बढ़ावा देने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 13:59:32 +0530</pubDate>
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<title>Hormuz Strait पर तनाव खत्म? सूत्रों का दावा&#45; America&#45;Iran में नौसैनिक नाकाबंदी हटाने पर बनी ऐतिहासिक सहमति</title>
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<description><![CDATA[ खबरों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को धीरे-धीरे हटाने और इसके बदले में इसे धीरे-धीरे फिर से खोलने पर सहमति बन गई है। अल अरबिया के अनुसार, दोनों पक्षों ने गुरुवार को इस समझौते पर सहमति जताई। अमेरिका-ईरान युद्ध की शुरुआत में, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई थी। इसे भी पढ़ें: West Asia में टल जाएगा महायुद्ध? अमेरिका-ईरान के बीच 14-सूत्रीय पीस डील लगभग तयअल अरबिया से बात करते हुए सूत्रों ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को धीरे-धीरे फिर से खोलने के बदले में नाकाबंदी में ढील देने के संबंध में समझौते हो गए हैं। आने वाले घंटों में जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को मुक्त कर दिया जाएगा। इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरुमध्य नहीं खोलने की स्थिति में ईरान पर और ज्यादा बमबारी करने की बुधवार को चेतावनी दी। इस बीच, युद्ध खत्म करने के लिए दोनों पक्षों के समझौते के करीब पहुंचने की खबर भी सामने आई है। अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियस की खबर में अमेरिकी अधिकारियों और दो अन्य सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका और ईरान युद्ध खत्म करने को लेकर एक पृष्ठ के सहमति पत्र को मंजूरी देने और विस्तृत परमाणु वार्ताओं के लिए एक रूपरेखा तय करने के करीब पहुंच गए हैं। खबर के अनुसार अमेरिका को उम्मीद है कि ईरान अगले 48 घंटे के अंदर विभिन्न प्रमुख बिंदुओं पर अपनी प्रतिक्रिया देगा। हालांकि खबर में यह भी कहा गया है कि अभी कुछ तय नहीं है। खबर में कहा गया है कि युद्ध शुरू होने के बाद से पहली बार दोनों पक्ष किसी समझौते के इतनी ज्यादा करीब पहुंचे हैं।  इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Trump के China दौरे से पहले बीजिंग पहुँचे ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi, दुनिया हुई सतर्कट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि अगर ईरान पहले से तय शर्तों को मान ले तो इस समय जारी बड़ा सैन्य अभियान एपिक फ्यूरी खत्म हो जाएगा। समुद्री नाकाबंदी हट जाएगी और होर्मुज जलडमरुमध्य ईरान समेत सभी के लिए खुल जाएगा। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने सहमति नहीं जताई, तो बमबारी शुरू होगी। यह बमबारी दुर्भाग्य से पहले की तुलना में बहुत बड़े स्तर पर और बहुत तेज होगी। एक्सियस की खबर के अनुसार, इस समझौते में ईरान परमाणु संवर्धन को अस्थायी रूप से रोकने पर सहमत होगा, जबकि अमेरिका उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधहटा देगा, साथ ही ईरान के अरबों डॉलर के ‘फ्रीज’ किए गए धन के इस्तेमाल की अनुमति देगा।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 13:59:31 +0530</pubDate>
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<title>बंगाल में सत्ता परिवर्तन: तीस्ता समझौते को लेकर Bangladesh की BNP को जगी उम्मीद, Mamata Baneejee की भूमिका पर उठाए सवाल</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ऐतिहासिक जीत और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार का असर अब पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी महसूस किया जा रहा है। बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बंगाल में हुए इस सत्ता परिवर्तन का स्वागत किया है। BNP का मानना है कि ममता बनर्जी का सत्ता से बाहर होना दशकों से लंबित तीस्ता जल-बंटवारा समझौते के लिए एक नई उम्मीद की किरण है।  बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण रिश्तों के जारी रहने की भी उम्मीद जताई है। BNP के सूचना सचिव अज़ीज़ुल बारी हेलाल ने शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में BJP के प्रदर्शन की तारीफ़ की और कहा कि इस नतीजे से पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच रिश्ते मज़बूत हो सकते हैं। इसे भी पढ़ें: संवैधानिक टकराव! Mamata Banerjee का इस्तीफ़े से इनकार, चुनाव आयोग ने जारी की नई विधानसभा की अधिसूचनाBJP के राज में तीस्ता समझौते में प्रगति हो सकती है: BNPहेलाल के मुताबिक, शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली BJP सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के साथ तालमेल बिठाकर इस समझौते को आगे बढ़ा सकती है।उन्होंने यह भी कहा कि BJP की जीत से बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल के बीच रिश्ते और बेहतर हो सकते हैं; भारतीय राज्यों में पश्चिम बंगाल की सीमा बांग्लादेश से सबसे लंबी लगती है। हेलाल ने इस घटनाक्रम को ढाका और कोलकाता के बीच सीमा-पार के पुराने मुद्दों को सुलझाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें विश्वास है कि तृणमूल कांग्रेस की जगह पश्चिम बंगाल में BJP सरकार आने के बाद अब तीस्ता बैराज परियोजना पर काम आगे बढ़ सकता है।भारत-बांग्लादेश तीस्ता समझौते के बारे मेंतीस्ता जल-बंटवारा समझौता भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे को लेकर एक लंबे समय से लंबित समझौता है; यह नदी सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है।2011 में एक अंतरिम समझौते का मसौदा तैयार किया गया था, जिसके तहत दिसंबर से मार्च तक (जब नदी में पानी कम होता है) भारत को तीस्ता का 42.5% पानी और बांग्लादेश को 37.5% पानी मिलना था, जबकि 20% पानी पर्यावरण के लिए सुरक्षित रखा जाना था। हालाँकि, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा उत्तर बंगाल में पानी की कमी का हवाला देते हुए इस समझौते का विरोध करने के बाद इस पर हस्ताक्षर नहीं हो पाए। इसे भी पढ़ें: Punjab High Alert | जालंधर और अमृतसर में सैन्य ठिकानों के पास हुए जोरदार धमाके, IED के इस्तेमाल की आशंका, उच्च-स्तरीय जांच शुरूबांग्लादेश लंबे समय से इस समझौते की मांग करता रहा है, उसका तर्क है कि उसके उत्तरी ज़िलों में सिंचाई और लोगों की आजीविका के लिए तीस्ता का पानी बेहद ज़रूरी है। भारत की केंद्र सरकार ने भी इस मुद्दे पर आगे बढ़ने का समर्थन किया है, लेकिन पानी का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि किसी भी कारगर समझौते के लिए पश्चिम बंगाल की सहमति को अनिवार्य माना जाता है। ममता बनर्जी का हमेशा से यही कहना रहा है कि तीस्ता के पानी का बंटवारा करने से उत्तर बंगाल में पीने के पानी और सिंचाई की ज़रूरतों पर बुरा असर पड़ सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:37 +0530</pubDate>
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<title>America का बड़ा फैसला, Pakistan के Peshawar में बंद होगा अमेरिकी वाणिज्य दूतावास, बताई ये वजह</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने अपने राजनयिक कर्मियों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का हवाला देते हुए पाकिस्तान के पेशावर में स्थित अपने वाणिज्य दूतावास को चरणबद्ध तरीके से बंद करने की घोषणा की है।
 अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ‘‘अमेरिकी विदेश मंत्रालय पेशावर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को चरणबद्ध तरीके से बंद करने की घोषणा कर रहा है। खैबर पख्तूनख्वा से राजनयिक संपर्क की जिम्मेदारी अब इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास को सौंप दी जाएगी।’’
 बयान में कहा गया है, ‘‘यह निर्णय हमारे राजनयिक कर्मियों की सुरक्षा और संसाधनों के कुशल प्रबंधन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।’’ इसमें यह भी कहा गया है कि पेशावर में प्रत्यक्ष उपस्थिति में बदलाव के बावजूद पाकिस्तान में अमेरिकी प्रशासन की नीतिगत प्राथमिकताएं कायम रहेंगी।
 विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका खैबर पख्तूनख्वा के लोगों और अधिकारियों के साथ आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और अमेरिकी जनता के हितों को आगे बढ़ाने के लिए सार्थक रूप से बातचीत जारी रखेगा।
 प्रवक्ता ने कहा, ‘‘विदेश विभाग पाकिस्तान में अमेरिकी दूतावास के माध्यम से इस्लामाबाद, कराची और लाहौर में अपने शेष राजनयिक पदों के जरिए अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>US&#45;Iran तनाव के बीच Trump का बड़ा कदम, &amp;apos;Project Freedom&amp;apos; रोककर समझौते का दावा किया</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए जारी ‘‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’’ को रोक दिया है और दावा किया कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते की दिशा में बातचीत में प्रगति हुई है।
 ट्रंप ने मंगलवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ईरान के प्रतिनिधियों के साथ एक पूर्ण और अंतिम समझौते की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है।’’
 ट्रंप ने कहा, ‘‘पाकिस्तान और अन्य देशों के अनुरोध, ईरान के खिलाफ अभियान के दौरान मिली जबरदस्त सैन्य सफलता और ईरान के प्रतिनिधियों के साथ पूर्ण एवं अंतिम समझौते की दिशा में हुई महत्वपूर्ण प्रगति के आधार पर हमने आपसी सहमति से यह तय किया है कि नाकाबंदी पूरी तरह से लागू रहेगी लेकिन ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ (होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही) को थोड़े समय के लिए रोक दिया जाएगा...।’’
 होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए सोमवार को ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ शुरू किया गया। ट्रंप ने रविवार को इस अभियान की घोषणा की थी और यूएस सेंट्रल कमांड ने अगले दिन से इस पर अमल शुरू कर दिया था।
 हालांकि, इस प्रोजेक्ट के कारण संकरे समुद्री मार्ग के आसपास तनाव पैदा हो गया जो वैश्विक तेल आपूर्ति के पांचवें हिस्से के परिवहन का एक प्रमुख मार्ग है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने दावा किया कि उसके जहाजों पर ईरान ने हमला किया था। अमेरिका ने भी कई ईरानी छोटी नौकाओं को नष्ट करने का दावा किया।
 ‘ट्रूथ सोशल’ पर ट्रंप का यह बयान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा 28 फरवरी को शुरू किए गए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के समाप्त होने और इसके उद्देश्यों की प्राप्ति की घोषणा के कुछ घंटों बाद आया।
 मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ में संवाददाता सम्मेलन में रुबियो ने कहा, ‘‘ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ समाप्त हो गया है। हमने इस अभियान के उद्देश्यों को प्राप्त कर लिया है। हम किसी और तरह की स्थिति उत्पन्न होने की कामना नहीं कर रहे। हम शांति का मार्ग अपनाना चाहते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति एक समझौते को प्राथमिकता देंगे... जो कि अब तक ईरान ने नहीं चुना है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:36 +0530</pubDate>
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<title>Operation Epic Fury | अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान खत्म करने का किया ऐलान</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक और सैन्य खबर सामने आई है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपना आक्रामक सैन्य अभियान &#039;ऑपरेशन एपिक फ्यूरी&#039; (Operation Epic Fury) समाप्त कर दिया है। रूबियो के अनुसार, इस मिशन के रणनीतिक लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया गया है। रूबियो ने साफ किया कि हालांकि बड़े पैमाने के ऑपरेशन खत्म हो गए हैं, फिर भी हालात अभी भी संवेदनशील हैं और ईरान की हरकतों के आधार पर बदल सकते हैं। रूबियो के मुताबिक, 28 फरवरी को US और इज़राइल द्वारा शुरू किए गए इस ऑपरेशन का मकसद रणनीतिक मिलिट्री लक्ष्य हासिल करना था, जो उनके मुताबिक अब पूरे हो चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस इलाके में US की हालिया मिलिट्री गतिविधियां रक्षात्मक थीं, आक्रामक नहीं। इसे भी पढ़ें: Palash Muchhal की बढ़ीं मुश्किलें! Smriti Mandhana के दोस्त ने दर्ज कराई FIR, जातिगत दुर्व्यवहार और धोखाधड़ी का आरोपउन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि वॉशिंगटन आगे कोई टकराव नहीं चाहता, बल्कि इस इलाके में स्थिरता चाहता है।ध्यान अब होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर केंद्रितUS, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़े प्रयासों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है; यह दुनिया का एक अहम तेल शिपिंग मार्ग है। रूबियो ने कहा कि US चाहता है कि ईरान इस जलडमरूमध्य को पूरी तरह से फिर से खोल दे, और चेतावनी दी कि लगातार लगी पाबंदियों से दुनिया के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन की कार्रवाइयों का मकसद आम नागरिकों के जहाज़ों की सुरक्षा करना और फंसे हुए जहाज़ों की मदद करना है।हालांकि करीब एक महीने पहले ही संघर्ष-विराम का ऐलान कर दिया गया था, फिर भी इस इलाके में अनिश्चितता बनी हुई है। US का कहना है कि वह सिर्फ़ खतरों के जवाब में कार्रवाई कर रहा है, जबकि ईरान ने खाड़ी इलाके में हाल ही में हुए हमलों के आरोपों से इनकार किया है। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Alliance The End! DMK ने कांग्रेस को कहा &#039;पीठ में छुरा घोंपने वाला&#039;, विजय की TVK के साथ गठबंधन तयअब तक, US की निगरानी वाले इस मार्ग से बहुत कम संख्या में ही व्यापारिक जहाज़ सुरक्षित गुज़र पाए हैं, जबकि सुरक्षा चिंताओं के चलते कई अन्य जहाज़ फ़ारसी खाड़ी में ही फंसे हुए हैं। रूबियो ने कहा कि US अब भी कूटनीति को ही प्राथमिकता देता है और चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगी पाबंदियों को स्वीकार करे, साथ ही जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही को भी बिना किसी रोक-टोक के जारी रहने दे।उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि चीन जैसे देशों को अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके ईरान पर दबाव डालना चाहिए, और यह तर्क दिया कि दुनिया का व्यापार काफी हद तक इस इलाके की स्थिरता पर ही निर्भर करता है।तनाव खत्म होने के अभी कोई साफ संकेत नहींहालांकि &quot;ऑपरेशन एपिक फ्यूरी&quot; के खत्म होने का ऐलान कर दिया गया है, फिर भी US के अधिकारियों ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो वे आगे भी कार्रवाई कर सकते हैं। फिलहाल, यह इलाका हाई अलर्ट पर है, और यहां मिलिट्री तैयारियां तथा कूटनीतिक प्रयास, दोनों ही साथ-साथ जारी हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:35 +0530</pubDate>
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<title>Prabhasakshi NewsRoom: Trump के China दौरे से पहले बीजिंग पहुँचे ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi, दुनिया हुई सतर्क</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट के बीच चीन तेजी से वैश्विक कूटनीति का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित बीजिंग यात्रा से पहले ही ईरान ने वहां अपनी सक्रिय मौजूदगी दर्ज करा दी है। इसी क्रम में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को बीजिंग में चीन के शीर्ष राजनयिक से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है तथा पूरी दुनिया की नजर चीन की भूमिका पर टिक गई है। ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और मध्य पूर्व की स्थिरता से जुड़े इस संकट में बीजिंग अब एक महत्वपूर्ण शक्ति केंद्र के रूप में उभर रहा है।देखा जाये तो ईरानी विदेश मंत्री अराघची की यह चीन यात्रा विशेष महत्व रखती है क्योंकि हाल ही में अमेरिका और इजराइल के साथ हुए संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति को गहरे संकट में डाल दिया था। इस युद्ध के कारण दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातक चीन की ऊर्जा सुरक्षा भी प्रभावित हुई। चीन लंबे समय से ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है और विश्लेषण संस्थान क्लेपर के अनुसार वर्ष 2025 में चीन ने ईरान से भेजे गए तेल का अस्सी प्रतिशत से अधिक हिस्सा खरीदा। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरानी तेल के खरीदार सीमित रहे हैं, क्योंकि वाशिंगटन का उद्देश्य तेहरान के परमाणु कार्यक्रम की वित्तीय आपूर्ति को रोकना है।इसे भी पढ़ें: US-Iran तनाव के बीच Trump का बड़ा कदम, &#039;Project Freedom&#039; रोककर समझौते का दावा कियाइस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्काट बेसेंट ने चीन से अपील की है कि वह ईरान पर दबाव डाले ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए खोला जा सके। उन्होंने कहा कि ट्रंप और शी जिनपिंग आगामी चौदह और पंद्रह मई को बीजिंग में होने वाली बैठक में ईरान के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि व्यापारिक संघर्षविराम के बाद अमेरिका और चीन अपने संबंधों को स्थिर बनाए रखना चाहते हैं।बेसेंट ने चीन से अंतरराष्ट्रीय अभियान में शामिल होने का आह्वान किया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि बीजिंग से किस प्रकार की कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है। उन्होंने चीन और रूस पर संयुक्त राष्ट्र में उन प्रस्तावों को रोकने का आरोप भी लगाया जिनका उद्देश्य जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।उधर फारस की खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। दोनों पक्ष जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर समुद्री नाकेबंदी और सैन्य गतिविधियों में उलझे हुए हैं। हाल के दिनों में नए हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने संघर्षविराम को बेहद कमजोर बना दिया है। अमेरिकी नौसेना ने दावा किया है कि उसने जहाजों को सुरक्षा प्रदान करते हुए ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को रोका तथा तेज हमला करने वाली नौकाओं को नष्ट किया। दूसरी ओर तेहरान का कहना है कि अमेरिकी कार्रवाइयों से नागरिक जहाजों और आम लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक हजार पांच सौ से अधिक जहाज और 22 हजार नाविक अब भी समुद्री मार्गों में फंसे हुए हैं। वैश्विक तेल बाजारों में भारी उतार चढ़ाव देखा जा रहा है और आशंका जताई जा रही है कि यदि संकट गहराया तो पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान “जीवित रहने की कोशिश” कर रहा है और वह समझौता करना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को पता है कि उसे क्या नहीं करना चाहिए। ट्रंप ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” नामक उस अभियान को अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा भी की जिसके तहत अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को सुरक्षित निकालने वाली थी। ट्रंप के अनुसार ईरान के साथ व्यापक समझौते की दिशा में “बहुत अच्छी प्रगति” हुई है, इसलिए इस अभियान को फिलहाल रोक दिया गया है।हालांकि तेहरान की ओर से इस पर तत्काल कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका की चेतावनियों और दबाव की राजनीति को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी शक्ति तेहरान को झुका नहीं सकती और शिया समुदाय को बल प्रयोग के जरिये मजबूर नहीं किया जा सकता। सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में पेजेशकियन ने बताया कि उन्होंने इराक के प्रधानमंत्री से बातचीत की है और अमेरिका से मध्य पूर्व से सैन्य धमकियां हटाने का आग्रह किया है।ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने भी कहा है कि तेहरान बातचीत के रास्ते पर विचार कर रहा था, लेकिन उसके बाद हुए हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस संकट का कोई सैन्य समाधान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि युद्ध और दबाव की नीति से केवल अस्थिरता बढ़ेगी।देखा जाये तो इस पूरे घटनाक्रम में चीन की भूमिका बेहद अहम बन गई है। बीजिंग ने एक ओर संघर्षविराम बनाए रखने और जलडमरूमध्य से प्रतिबंध हटाने की अपील की है, वहीं दूसरी ओर उसने अमेरिका की नीतियों की खुली आलोचना से भी दूरी बनाए रखी है। माना जा रहा है कि चीन नहीं चाहता कि ईरान संकट के कारण अमेरिका के साथ उसकी प्रस्तावित शिखर वार्ता प्रभावित हो। हम आपको बता दें कि पिछले सप्ताह चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए अपने वाणिज्य मंत्रालय के माध्यम से कंपनियों को निर्देश दिया कि वह ईरानी तेल खरीदने वाले चीनी रिफाइनरियों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन न करें। इनमें हेंगली पेट्रोकेमिकल समेत पांच स्वतंत्र रिफाइनरियां शामिल हैं। चीन ने पहली बार ऐसे कानून का इस्तेमाल किया है जिसके तहत वह उन विदेशी संस्थाओं के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर सकता है जिन्हें वह अवैध प्रतिबंध लागू करने वाला मानता है।बहरहाल, विशेषज्ञों का मानना है कि फारस की खाड़ी का यह संकट अब केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं रह गया है। यह वैश्विक शक्ति संतुलन, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और कूटनीतिक प्रभा ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:34 +0530</pubDate>
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<title>AI पर Trump का बड़ा एक्शन, लॉन्च से पहले Google&#45;Microsoft के मॉडल्स की होगी कड़ी जांच</title>
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<description><![CDATA[ ट्रंप प्रशासन कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर एक कार्यकारी आदेश जारी करने पर विचार कर रहा है, जिसके तहत उभरती हुई इस तकनीक पर निगरानी बढ़ाने के प्रयास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर एक कार्य समूह का गठन किया जाएगा। टाइम्स अखबार ने अमेरिकी अधिकारियों और वार्ता से जुड़े लोगों के हवाले से बताया कि एक प्रस्ताव में नए मॉडलों के लिए सरकारी समीक्षा प्रक्रिया शामिल होगी। अखबार के अनुसार, व्हाइट हाउस (WH) के अधिकारियों ने पिछले सप्ताह हुई बैठकों के दौरान एंथ्रोपिक पीबीसी, अल्फाबेट इंक की गूगल और ओपनएआई के अधिकारियों को विचाराधीन कुछ योजनाओं के बारे में बताया।इसे भी पढ़ें: US-Iran तनाव के बीच Trump का बड़ा कदम, &#039;Project Freedom&#039; रोककर समझौते का दावा कियायह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एआई के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव का संकेत देगा। ट्रम्प ने एआई को बढ़ावा देने के लिए नियामक बोझ कम करने के प्रयास किए हैं ताकि डेटा केंद्रों के निर्माण को गति मिल सके और उन्हें बिजली मिल सके। इसी बीच, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और एलोन मस्क की xAI ने अमेरिकी सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा परीक्षण के लिए नए कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल तक शीघ्र पहुंच प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की है, क्योंकि अमेरिकी अधिकारी एंथ्रोपिक के हाल ही में अनावरण किए गए मिथोस की हैकिंग क्षमताओं से चिंतित हो रहे हैं।सुरक्षा जोखिमों के लिए एआई मॉडल की जांच की जाएगीवाणिज्य विभाग के एआई मानक और नवाचार केंद्र (सीएआईएसआई) ने मंगलवार को कहा कि इस समझौते से उसे तैनाती से पहले मॉडलों का मूल्यांकन करने और उनकी क्षमताओं और सुरक्षा जोखिमों का आकलन करने के लिए अनुसंधान करने की अनुमति मिलेगी। यह समझौता ट्रंप प्रशासन द्वारा जुलाई 2025 में प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ साझेदारी करके उनके एआई मॉडलों की राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों के लिए जांच करने के वादे को पूरा करता है। माइक्रोसॉफ्ट ने एक बयान में कहा कि वह अमेरिकी सरकार के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एआई सिस्टम का परीक्षण ऐसे तरीकों से करेगी जो अप्रत्याशित व्यवहारों की जांच कर सकें। कंपनी ने बताया कि वे मिलकर कंपनी के मॉडलों के परीक्षण के लिए साझा डेटासेट और वर्कफ़्लो विकसित करेंगे। बयान के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट ने ब्रिटेन के एआई सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट के साथ भी इसी तरह का समझौता किया है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:33 +0530</pubDate>
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<title>ईरान के खिलाफ युद्ध खत्म, लेकिन शांति अभी दूर, Operation Epic Fury पर US विदेश मंत्री का एलान</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार तड़के घोषणा की कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी समाप्त हो गया है। इसके साथ ही दो महीने से अधिक समय से चल रही अशांति का अंत हो गया है, जो अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए एक बड़े सैन्य संघर्ष के कारण उत्पन्न हुई थी। अली खामेनेई की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने के उद्देश्य से शुरू हुए इस संघर्ष ने तेहरान में भी भारी राजनीतिक उथल-पुथल मचा दी थी। खामेनेई की हत्या के बाद, उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया, जो सत्ता में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का प्रतीक था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में इज़राइल की साझेदारी में शुरू किया गया व्यापक सैन्य अभियान, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी, 28 फरवरी को शुरू हुआ और खाड़ी क्षेत्र और व्यापक मध्य पूर्व को तीव्र अस्थिरता और संघर्ष के दौर में धकेल दिया।इसे भी पढ़ें: AI पर Trump का बड़ा एक्शन, लॉन्च से पहले Google-Microsoft के मॉडल्स की होगी कड़ी जांचऑपरेशन की समाप्ति की घोषणा करते हुए रुबियो ने कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी समाप्त हो गया है। हमने इस अभियान के उद्देश्यों को प्राप्त कर लिया है। हम ऐसी किसी और स्थिति की कामना नहीं करते। हम शांति का मार्ग अपनाना चाहेंगे। ट्रम्प एक समझौते को प्राथमिकता देंगे... जो कि अब तक ईरान ने नहीं चुना है। रुबियो ने क्षेत्र में विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में, जो एक महत्वपूर्ण वैश्विक तेल पारगमन मार्ग है, समुद्री स्थिरता को बहाल करने के रणनीतिक महत्व पर भी जोर दिया। कई देशों ने - कुछ ने निजी तौर पर और कुछ ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका से अपने जहाजों को मुक्त कराने और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने में मदद करने का अनुरोध किया... और इसलिए राष्ट्रपति ट्रम्प ने आगे बढ़कर उनकी मदद की गुहार सुनी और अमेरिकी सेना को इन फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का निर्देश दिया और यह जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और इस शासन के आर्थिक विनाश के कृत्य को समाप्त करने की दिशा में पहला कदम है। हम यह सिर्फ इसलिए नहीं कर रहे हैं क्योंकि हमसे अनुरोध किया गया था, बल्कि इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हम ही एकमात्र ऐसे हैं जो ऐसा कर सकते हैं... राष्ट्रपति ट्रम्प के नेतृत्व में, संयुक्त राज्य अमेरिका अपने मित्रों की मदद करेगा।इसे भी पढ़ें: US-Iran तनाव के बीच Trump का बड़ा कदम, &#039;Project Freedom&#039; रोककर समझौते का दावा किया हम तेहरान जैसे दुष्ट शासनों का डटकर सामना करेंगे और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करने में संकोच नहीं करेंगे।तेहरान को कड़ी चेतावनी देते हुए रुबियो ने कहा, “उनके लिए यह समझना बेहद ज़रूरी है कि उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका की इच्छाशक्ति को परखने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, कम से कम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शासनकाल में तो बिल्कुल नहीं। उन्होंने बार-बार साबित किया है कि वे अपने कहे पर खरे उतरते हैं। और अगर वे उन्हें चुनौती देंगे, तो अंततः उन्हें हार का सामना करना पड़ेगा। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:32 +0530</pubDate>
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<title>जिनपिंग से मेरी अच्छी पटती है, Trump ने China पहुंचने से पहले खेला दांव!</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच क्या दोस्ती की नई इबारत लिखी जाने वाली है। क्योंकि बीजिंग में होने वाली हाई प्रोफाइल मुलाकात से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर बदले हुए नजर आ रहे हैं। ट्रंप ने ना केवल चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जमकर तारीफ की बल्कि उन्हें एक बेहतरीन इंसान करा दिया। ओवल ऑफिस में बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मेरे रिश्ते बहुत गहरे हैं। वो एक शानदार इंसान हैं और हमारी आपस में बहुत अच्छी पड़ती। आप देख ही सकते हैं कि हम कैसे मिलकर काम कर रहे हैं। हम चीन के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार कर रहे हैं और सच कहूं तो हम बहुत पैसा कमा रहे हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब 14 और 15 मई को दोनों नेताओं के बीच बीजिंग में मुलाकात होनी है। लेकिन बात सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं। ट्रंप ने इस बार चीन के सम्मानजनक रवैया की भी तारीफ की। इसे भी पढ़ें: ईरान के खिलाफ युद्ध खत्म, लेकिन शांति अभी दूर, Operation Epic Fury पर US विदेश मंत्री का एलानट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय तनाव खासकर ईरान और तेल सप्लाई के मुद्दे पर चीन की भूमिका को सराहा है। उन्होंने कहा कि चीन अपनी जरूरत का 60% तेल स्टेट ऑफ होर्मुज से लेता है। लेकिन इसके बावजूद चीन ने कभी अमेरिका को चुनौती देने की कोशिश नहीं की। ट्रंप ने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा चीन हमें चुनौती नहीं देता। वो जानते हैं कि जब तक मैं यहां हूं करेंगे। उन्होंने हमेशा अमेरिका के प्रति सम्मान दिखाया। हैरानी की बात यह है कि ट्रंप ने चीन को एक अनोखा सुझाव भी दे डाला। उन्होंने कहा कि चीन को अपनी तेल की सप्लाई के लिए सिर्फ पुराने रास्तों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं। ट्रंप के मुताबिक चीनी जहाजों को अमेरिका के टेक्साज आना चाहिए। उन्हें लुईसियाना और अलास्का के बंदरगाहों का इस्तेमाल करना चाहिए।इसे भी पढ़ें: AI पर Trump का बड़ा एक्शन, लॉन्च से पहले Google-Microsoft के मॉडल्स की होगी कड़ी जांच ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अलास्का असल में एशियाई देशों के बहुत करीब है जिसे अक्सर लोग समझ नहीं पाते। ट्रंप का यह नरम रुख बीजिंग वार्ता से पहले एक मास्टर स्ट्रोक हो सकता है। जहां एक तरफ ट्रेड वॉर की तलवार लटकती रहती है। वहीं ट्रंप ने जिनपिंग की तारीफ कर बातचीत के लिए एक सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:31 +0530</pubDate>
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<title>800 साल बाद भारत में वो हुआ जिसने हिलाई दुनिया, ये होती है ताकत!</title>
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<description><![CDATA[ भारत में 800 सालों बाद वो हुआ है जो दुनिया हिलाने के लिए काफी है। पूरी दुनिया के मुस्लिम, ईसाई और वामपंथी अब सालों तक इस बात पर अध्ययन करेंगे कि 800 सालों बाद भारत में यह ऐतिहासिक चीज कैसे हो गई। बंगाल में करीब 800 सालों बाद सनातन धर्म को मानने वाली सरकार आई है। आपको याद दिला दें कि 1204 ईसवी में बख्तियार खिलजी ने बंगाल पर हमला किया था। तब बंगाल के राजा लक्ष्मण सेन थे। बख्तियार खिलजी ने लक्ष्मण सेन को हराकर बंगाल पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 1204 से 1576 तक बंगाल पर तुर्क और अफगानों का क्रूर कब्जा रहा। इसके बाद 1576 से लेकर 1757 तक डकैत और लुटेरे मुगलों ने बंगाल समेत पूरे भारत को लूटा। भारत पर अत्याचार किए। भारत पर यह इस्लामिक कब्जा था।इसे भी पढ़ें: हिंदू अस्मिता की बातें, विवेकानंद सा पहनावा, बंगाल के &#039;योगी&#039; को CM बनाएगी BJP?1757 से 1947 तक बंगाल समेत पूरे भारत पर अंग्रेज आकर बैठ गए। अंग्रेजों ने बंगाल में भयंकर अत्याचार किए। इस दौरान यहां पर ईसाई राज रहा। इसके बाद बंगाल वामपंथी सरकारों के शिकंजे में आ गया। अब 800 साल बाद 2026 में सनातन धर्म को मानने वाले बंगाल की सत्ता में आकर बैठे हैं। आरएसएस का मानना है कि बंगाल सिर्फ एक राजनैतिक लड़ाई नहीं बल्कि एक सिविलाइजेशनल बैटल रहा है। इसे भी पढ़ें: INDIA ब्लॉक को कागजी बताया, राहुल को बात-बात पर नीचा दिखाया, फिर भी क्या अखिलेश-पवार-कांग्रेस देंगे ममता का साथ?आपको बता दें कि अगर ऐसा नहीं होता तो बंगाल तेजी से बांग्लादेश बनने की तरफ बढ़ रहा था। लेकिन बंगाल बाल-बाल बच गया। यह सत्य ममता बनर्जी के तीन सबसे मशहूर नारों से साबित होता है। ममता बनर्जी ने पिछले 15 सालों में जमकर तीन नारों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया। पहला था मां माटी मानुष, दूसरा था जय बांग्ला और तीसरा था खेला होबे। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि ममता बनर्जी ने ये तीनों नारे बांग्लादेश से चुराए थे। जय बांग्ला 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान शेख मुजीबुर रहमान और मुक्ति वाहिनी का युद्ध नाद था। 1991 में बांग्लादेश चुनाव में बेगम खालिदा जिया की बीएनपी पार्टी ने मां माटी मानुष का नारा लगाया था जिसे ममता बनर्जी ने कॉपी कर लिया। तीसरा नारा खेला होबे 2013 का है। जिसे बांग्लादेश की आवामी लीग के नेता शमीम उस्मान ने दिया था। ममता बनर्जी ने 2021 में बंगाल चुनावों के दौरान इस नारे को भी चुरा लिया। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:30 +0530</pubDate>
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<title>बंगाल में BJP की प्रचंड जीत पर गदगद ट्रंप, हैरान हुआ बांग्लादेश!</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने इस बार सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हलचल मचा दी। हर तरफ एक ही चर्चा है बीजेपी की ऐतिहासिक जीत। क्योंकि बीजेपी ने ममता बनर्जी की 15 साल पुरानी सरकार को हटाकर सत्ता पर कब्जा किया है और इस जीत को बड़े राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। इस चुनाव पर अमेरिका से लेकर बांग्लादेश तक की नजरें बनी हुई थी और जैसे ही नतीजे आए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को उनकी ऐतिहासिक चुनाव जीत पर बधाई दी। वाइट हाउस के प्रवक्ता ने इस बात की जानकारी दी। वाइट हाउस के प्रवक्ता ने यह भी बताया कि हाल ही में फोन पर बात करते हुए ट्रंप ने मोदी से कहा था कि भारत खुशकिस्मत है कि उन्हें ऐसा नेता मिला।इसे भी पढ़ें: INDIA ब्लॉक को कागजी बताया, राहुल को बात-बात पर नीचा दिखाया, फिर भी क्या अखिलेश-पवार-कांग्रेस देंगे ममता का साथ?आपको बता दें पिछले महीने फोन कॉल के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपनी प्रशंसा जताई थी और कहा था कि भारत उनके जैसा नेता पाकर भाग्यशाली। ट्रंप का यह बयान अपने आप में बताता है कि आखिर क्यों पश्चिम बंगाल का यह चुनाव इतना ज्यादा चर्चा में था। वहीं पश्चिम बंगाल में बीजेपी की इस जीत को एक बड़ी राजनीतिक दीवार टूटने जैसा माना जा रहा है। लंबे समय तक ममता बनर्जी और उनकी पार्टी का दबदबा रहा। लेकिन इस बार जनता ने बदलाव का फैसला किया। खुद पीएम मोदी ने दिल्ली में समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि बंगाल के भाग्य में एक नया अध्याय जुड़ गया है और यह जनता की ताकत की जीत है। इस बीच बांग्लादेश से भी इस चुनाव पर बड़ा बयान सामने आया।इसे भी पढ़ें: बंगाल में निर्ममता की हार, तुष्टिकरण पर प्रहार और विकास की बयार बांग्लादेश की सत्तारूढ़ पार्टी बीएनपी के नेता एस के अजीजुल बारी हिलाल ने बीजेपी की जीत पर हैरानी जताई लेकिन साथ ही साथ जीत की बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद तृणमूल कांग्रेस की हार चौंकाने वाली है। उन्होंने खासतौर पर शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व की तारीफ की और कहा कि उनके नेतृत्व में बीजेपी ने शानदार जीत हासिल की। हलाल ने यह भी उम्मीद जताई कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पहले की तरह अच्छे और शांतिपूर्ण बने रहेंगे। कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल का यह चुनाव सिर्फ एक राज्य का चुनाव नहीं रहा बल्कि इसने भारतीय राजनीतिक की दिशा और दशा दोनों को बदलने का संकेत दिया है और यही वजह है कि इस चुनाव की चर्चा इस वक्त पूरी दुनिया में देखने को मिल रही है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:30 +0530</pubDate>
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<title>India&#45;Vietnam का 2030 तक $25 Billion व्यापार का लक्ष्य, PM Modi बोले&#45; सप्लाई चेन होगी मजबूत</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को घोषणा की कि भारत और वियतनाम ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप को औपचारिक रूप दिया है, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक और क्षेत्र-विशिष्ट सहयोग में एक महत्वपूर्ण विस्तार का संकेत है। यह घोषणा तब हुई जब प्रधानमंत्री मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने दिल्ली के हैदराबाद हाउस में कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) के आदान-प्रदान को देखा। एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए, प्रधानमंत्री ने बाजार पहुंच और व्यापार की मात्रा बढ़ाने के लिए उठाए गए विशिष्ट उपायों पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमने आज 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब डॉलर तक ले जाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। हमारे औषधि प्राधिकरणों के बीच समझौता ज्ञापन से अब वियतनाम में भारतीय दवाओं की पहुंच बढ़ेगी। वियतनाम को भारतीय कृषि, मत्स्य और पशु उत्पादों का निर्यात भी आसान होने जा रहा है।इसे भी पढ़ें: Nepal के नए नियम के बाद बॉर्डर पर फंस गए 1000 से ज्याजा कंटेनर, मचा बवाल!प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि कृषि आदान-प्रदान से जल्द ही दोनों देशों के उपभोक्ताओं को ठोस लाभ मिलने लगेंगे। उन्होंने कहा, बहुत जल्द वियतनाम भारत के अंगूर और अनार का स्वाद चखेगा, और हम वियतनाम के पोमेलो का स्वाद चखेंगे। इतना ही नहीं, हमने साल के अंत तक भारत-आसियान व्यापार समझौते को अद्यतन करने पर भी सहमति जताई है। इससे भारत और सभी आसियान देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी। भविष्य के लिए तैयार क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि साझेदारी आपूर्ति श्रृंखला स्थिरता और बुनियादी ढांचे पर अधिक केंद्रित है। उन्होंने कहा, &quot;महत्वपूर्ण खनिजों, दुर्लभ धातुओं और ऊर्जा सहयोग में नई पहल हमारे दोनों देशों की आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती सुनिश्चित करेगी। कनेक्टिविटी और क्षमता निर्माण हमारी साझेदारी के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।इसे भी पढ़ें: US का China पर Terror Funding का बड़ा आरोप, Iran को पैसा देना बंद करने की चेतावनी हमें खुशी है कि दोनों देशों के बीच हवाई कनेक्टिविटी लगातार बढ़ रही है।सुचारू आर्थिक लेन-देन को सुगम बनाने के लिए, दोनों नेताओं ने अपने-अपने वित्तीय संस्थानों के बीच घनिष्ठ संबंधों को प्राथमिकता दी। प्रधानमंत्री ने पुष्टि करते हुए कहा, वित्तीय संपर्क को बढ़ावा देने के लिए, आज हमने अपने केंद्रीय बैंकों के बीच सहयोग बढ़ाने की पहल की है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:29 +0530</pubDate>
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<title>West Asia में टल जाएगा महायुद्ध? अमेरिका&#45;ईरान के बीच 14&#45;सूत्रीय पीस डील लगभग तय</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत मौजूदा संघर्ष को रोकने और व्यापक परमाणु वार्ता के लिए एक ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से प्रारंभिक समझौते की ओर बढ़ रही है। एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिसमें बातचीत से परिचित कई अमेरिकी अधिकारियों और सूत्रों का हवाला दिया गया है, इस प्रगति को संघर्ष की शुरुआत के बाद से सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, हालांकि अभी तक कोई अंतिम समाधान नहीं निकला है। रिपोर्ट के अनुसार, इस ढांचे में एक पृष्ठ का 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन शामिल है, जिसका उद्देश्य तत्काल युद्धविराम लागू करना और व्यापक समझौते पर पहुंचने के लिए 30 दिन की वार्ता अवधि शुरू करना है।इसे भी पढ़ें: जिनपिंग से मेरी अच्छी पटती है, Trump ने China पहुंचने से पहले खेला दांव!इन शर्तों के तहत, ईरान कथित तौर पर परमाणु संवर्धन में अल्पकालिक विराम के लिए सहमत होगा। इसके बदले में, संयुक्त राज्य अमेरिका प्रतिबंधों को हटाने और अरबों डॉलर की ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने की पहल करेगा। इसके अलावा, दोनों देश होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम करने और पारगमन संबंधी बाधाओं को कम करने के लिए काम करेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई शर्तें &quot;आगे की बातचीत के परिणाम पर निर्भर हैं&quot;, जिससे पता चलता है कि आगे का रास्ता &quot;पुनः संघर्ष या अनिश्चितता की लंबी अवधि&quot; के जोखिम से भरा हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों ने एक्सियोस को बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य गतिविधियों को कम करने का हालिया निर्णय इन्हीं राजनयिक प्रयासों से प्रेरित था। इस कूटनीति का नेतृत्व अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर कर रहे हैं, जो कथित तौर पर तेहरान से सीधे चैनलों और तीसरे पक्ष के मध्यस्थों के माध्यम से संवाद कर रहे हैं। यदि यह समझौता ज्ञापन औपचारिक रूप से लागू हो जाता है, तो यह आधिकारिक तौर पर युद्ध की समाप्ति की घोषणा&quot; करेगा और तकनीकी चर्चाओं का स्थान इस्लामाबाद या जिनेवा में स्थानांतरित कर देगा। विवाद का एक प्रमुख मुद्दा ईरान के यूरेनियम संवर्धन पर रोक की समय सीमा है।इसे भी पढ़ें: PM Modi और शेख MBZ की दोस्ती का असर, Defence Pact से West Asia में बदलेगा Power Balanceजहां वाशिंगटन कथित तौर पर 20 वर्षों तक&quot; की अवधि की वकालत कर रहा है, वहीं तेहरान ने पांच वर्षों का सुझाव दिया है। सूत्रों का कहना है कि संभावित समझौता 12 से 15 वर्षों के बीच हो सकता है। अमेरिका &quot;ईरान द्वारा शर्तों का उल्लंघन करने पर रोक को बढ़ाने&quot; के लिए एक तंत्र की भी तलाश कर रहा है। इस अवधि के बाद, प्रस्ताव के तहत ईरान को &quot;3.67 प्रतिशत तक सीमित संवर्धन फिर से शुरू करने&quot; की अनुमति दी जाएगी। तेहरान को परमाणु हथियार बनाने के प्रयास के खिलाफ प्रतिज्ञा भी करनी होगी। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:28 +0530</pubDate>
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<title>शर्तें नहीं माने तो ऐसी बमबारी करेंगे...होर्मुज खोलने को लेकर ट्रंप की ईरान को नई धमकी</title>
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<description><![CDATA[ राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि अगर ईरान मौजूदा बातचीत की शर्तों पर सहमत हो जाता है तो ऑपरेशन एपिक फ्यूरी &#039;समाप्त&#039; हो जाएगा और होर्मुज जलडमरूमध्य &#039;सभी के लिए खुल जाएगा। अगर वे सहमत नहीं होते हैं, तो बमबारी शुरू हो जाएगी, और दुख की बात है कि यह पहले की तुलना में कहीं अधिक उच्च स्तर और तीव्रता की होगी।इसे भी पढ़ें: Dollar हुआ पस्त, रुपया 61 पैसे चढ़कर मजबूत! Trump के Iran Deal से मिलेगी महंगाई से राहतअमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी है कि अगर तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के समझौते का पालन नहीं करता है, तो ईरान पर अमेरिकी बमबारी कहीं अधिक उच्च स्तर और तीव्रता से फिर से शुरू हो जाएगी। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पोस्ट में लिखा, यह मानते हुए कि ईरान समझौते के अनुसार काम करने के लिए सहमत हो जाता है, जो शायद एक बड़ी धारणा है, तो पहले से ही चर्चित &#039;एपिक फ्यूरी&#039; का अंत हो जाएगा, और अत्यधिक प्रभावी नाकाबंदी के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान सहित सभी के लिए खुल जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर वे सहमत नहीं होते हैं, तो बमबारी शुरू हो जाएगी, और दुर्भाग्य से, यह पहले की तुलना में कहीं अधिक उच्च स्तर और तीव्रता से होगी।इसे भी पढ़ें: Trump के एक बयान से गिरा कच्चा तेल, Share Market में आया 941 अंकों का तूफानी उछालपूर्वी लेबनान में इजरायली हमले में चार लोगों की मौत: स्वास्थ्य मंत्रालयलेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने घोषणा की है कि पश्चिमी बेका के ज़लाया कस्बे पर हुए इजरायली हवाई हमले में दो महिलाओं और एक बुजुर्ग सहित चार लोगों की मौत हो गई। इस हमले में तीन बच्चों सहित पांच अन्य लोग घायल हो गए। इसके अलावा, लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी ने बताया कि इजरायली सेना ने टायर जिले के अलमा अल-शाब और तायर हरफा इलाकों में बमबारी की। एजेंसी ने यह भी बताया कि इजरायली गोलाबारी में मजदल ज़ौन, बेत अल-सय्याद और टायर के दक्षिण में स्थित अल-मंसूरी के बाहरी इलाकों को निशाना बनाया गया।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>लाडला है पाकिस्तान, फिर भी ट्रंप प्रशासन ने दे दिया झटका, अमेरिका ने क्यों बंद किया पेशावर दूतावास?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने पेशावर स्थित अपने वाणिज्य दूतावास को चरणबद्ध तरीके से बंद करने की घोषणा की। उसने राजनयिक कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता और संसाधनों के बेहतर आवंटन की आवश्यकता का हवाला दिया। अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान में कहा कि अमेरिकी विदेश विभाग पेशावर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को चरणबद्ध तरीके से बंद करने की घोषणा कर रहा है। खैबर पख्तूनख्वा के साथ राजनयिक संबंधों की जिम्मेदारी इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास को हस्तांतरित कर दी जाएगी। यह निर्णय हमारे राजनयिक कर्मियों की सुरक्षा और संसाधनों के कुशल प्रबंधन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।इसे भी पढ़ें: 800 साल बाद भारत में वो हुआ जिसने हिलाई दुनिया, ये होती है ताकत!पेशावर में अपनी भौतिक उपस्थिति कम होने के बावजूद, वाशिंगटन ने कहा कि वह पाकिस्तान में हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा रहेगा। पेशावर में हमारी भौतिक उपस्थिति में बदलाव हो रहा है, लेकिन पाकिस्तान में प्रशासन की नीतिगत प्राथमिकताएं अटल हैं। हम खैबर पख्तूनख्वा के लोगों और अधिकारियों के साथ सार्थक रूप से जुड़ना जारी रखेंगे ताकि आर्थिक संबंधों को बढ़ावा दिया जा सके, क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रोत्साहित किया जा सके और अमेरिकी जनता के हितों को आगे बढ़ाया जा सके। विदेश विभाग ने यह भी कहा कि इस्लामाबाद में उसका दूतावास और लाहौर और कराची में उसके वाणिज्य दूतावास पहले की तरह काम करते रहेंगे।इसे भी पढ़ें: America का बड़ा फैसला, Pakistan के Peshawar में बंद होगा अमेरिकी वाणिज्य दूतावास, बताई ये वजहयह निर्णय 1 मार्च को इजरायल-अमेरिका द्वारा किए गए हमलों के बाद पाकिस्तान में फैली अशांति के बाद लिया गया है, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी गई थी। डॉन न्यूज के अनुसार, कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कम से कम नौ लोग मारे गए। इसके तुरंत बाद, 3 मार्च को, अमेरिकी विदेश विभाग ने बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के कारण लाहौर और कराची स्थित अपने वाणिज्य दूतावासों में गैर-जरूरी अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को प्रवेश रद्द करने का निर्देश दिया। 28 फरवरी से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, विभाग ने ईरान से संभावित ड्रोन और मिसाइल हमलों के साथ-साथ वाणिज्यिक हवाई यात्रा में संभावित व्यवधानों के बारे में भी चेतावनी दी थी।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:26 +0530</pubDate>
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<title>Israel Army Chief का बड़ा कबूलनामा, West Bank में यहूदियों&#45;फिलिस्तीनियों के लिए फायरिंग के अलग नियम!</title>
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<description><![CDATA[ इजरायली सेना प्रमुख मेजर जनरल एवी ब्लुथ ने कहा कि उनकी सेनाएं &quot;इतनी बेरहमी से हत्याएं कर रही हैं जितनी 1967 के बाद से नहीं की हैं र कथित तौर पर यह स्वीकार किया कि इजरायल की सेनाएं यहूदियों और फिलिस्तीनियों के बीच भेदभाव करती हैं। इजरायली अखबार हारेत्ज़ के अनुसार, ब्लुथ ने हाल ही में एक बंद मंच पर ये टिप्पणियां कीं। इजरायल रक्षा बलों के केंद्रीय कमान प्रमुख ने कहा कि इजरायली सैनिकों ने कई फिलिस्तीनी पत्थरबाजों को गोली मारकर मार डाला। उन्होंने अभी तक हारेत्ज़ द्वारा प्रकाशित इन टिप्पणियों की पुष्टि नहीं की है।इसे भी पढ़ें: शर्तें नहीं माने तो ऐसी बमबारी करेंगे...होर्मुज खोलने को लेकर ट्रंप की ईरान को नई धमकीब्लुथ ने कहा कि इजरायली बलों ने 2025 में 42 फिलिस्तीनी पत्थरबाजों को मार गिराया। उन्होंने यह स्वीकार किया कि वे वाहनों पर पत्थर फेंकने वाले यहूदी बस्तियों पर गोली चलाने का समर्थन नहीं करते हैं। पिछले साल की एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दो नकाबपोश यहूदियों पर वाहन चालकों पर पत्थर फेंकने के लिए गोली चलाई गई थी, और इस घटना से हंगामा मच गया था। उन्होंने दो और उदाहरण दिए जिनमें एक अधिकारी ने आधी रात को सेना की जीप पर पत्थर फेंकने के आरोप में बेत शीआन के 15 वर्षीय अराजकतावादी को गोली मार दी, जिससे वह घायल हो गया। ब्लुथ ने आगे कहा कि अधिकारी को तब तक पता नहीं चला कि वे यहूदी हैं, जब तक उसने उन्हें हिब्रू बोलते हुए नहीं सुना। एक अन्य मामले में, इजरायली सेना प्रमुख ने एक ऐसे मामले का जिक्र किया जिसमें एक पुलिस अधिकारी ने दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं पर गोली चलाई और उनमें से एक को गंभीर रूप से घायल कर दिया। उन्होंने बताया कि कथित तौर पर पुलिस ने उस पर मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल किया था।इसे भी पढ़ें: Iran में फटा अमेरिकी बम, मारे गए IRGC के 14 सैनिकब्लूथ ने स्वीकार किया कि यहूदी प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने और ऐसे किसी भी मामले में संदिग्धों को हिरासत में लेने के लिए वे अहिंसक तरीकों का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। ऐसी किसी भी घटना के सामाजिक दृष्टिकोण से गंभीर परिणाम होते हैं। मुझे नहीं लगता कि हमें उस ओर जाने की ज़रूरत है; हमें गोलीबारी करने की ज़रूरत नहीं है, और हाँ, इसमें भेदभाव शामिल है। फिलिस्तीनियों और यहूदियों के लिए मुकदमों और गिरफ्तारियों के नियम भी अलग-अलग हैं। जहाँ फिलिस्तीनियों को वेस्ट बैंक में सैन्य कानून के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ता है और बिना मुकदमे के लंबी अवधि तक हिरासत में रखा जाता है, वहीं यहूदियों और इजरायलियों पर नागरिक अदालतों द्वारा मुकदमा चलाया जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Israel, Army, Chief, का, बड़ा, कबूलनामा, West, Bank, में, यहूदियों-फिलिस्तीनियों, के, लिए, फायरिंग, के, अलग, नियम</media:keywords>
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<title>Vietnam में बजेगा India का डंका! Digital Payments और UPI पर बड़ा समझौता, 13 MoU पर साइन</title>
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<description><![CDATA[ वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत की राजकीय यात्रा के परिणामस्वरूप 18 निष्कर्ष निकले, जिनमें 13 समझौता ज्ञापन (एमओयू) और द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से पांच घोषणाएं शामिल हैं। देश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, इन घोषणाओं में द्विपक्षीय संबंधों को उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाना भी शामिल है। रत की भारतीय रिजर्व बैंक (आईआरईएल) लिमिटेड और वियतनाम के रेडियोधर्मी और दुर्लभ तत्व प्रौद्योगिकी संस्थान (आईटीआरआरई) के बीच पारस्परिक सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह समझौता दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और अन्य नई तकनीकों के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को औपचारिक रूप देता है। रत के संस्कृति मंत्रालय और वियतनाम के संस्कृति, खेल और पर्यटन मंत्रालय के बीच 2026-30 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम पर हस्ताक्षर किए गए। भारत और वियतनाम के बीच 1976 में एक सांस्कृतिक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत की जाने वाली विशिष्ट गतिविधियों और आदान-प्रदान पर पांच साल (2026-2030) की अवधि के लिए वैध सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (सीईपी) के ढांचे के भीतर सहमति बनी है।इसे भी पढ़ें: China के बड़े दुश्मन को मिलेगा भारत का Brahmos, ड्रैगन के उड़े होश!भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और वियतनाम के स्टेट बैंक (एसबीवी) के बीच भुगतान प्रणाली और डिजिटल भुगतान में नवाचार के क्षेत्र में सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य वित्तीय नवाचार और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक ढांचा स्थापित करना है।इसे भी पढ़ें: Bodh Gaya से दिल्ली तक दोस्ती की झलक, President To Lam की यात्रा में रिश्ते हुए अपग्रेडमुंबई स्थित बृहन्मुंबई नगर निगम और हो ची मिन्ह सिटी पीपुल्स कमेटी के बीच मैत्री और सहयोग स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। बयान के अनुसार, इस समझौते का उद्देश्य दोनों महानगरों को शहरी प्रबंधन और आर्थिक विकास में विशेषज्ञता साझा करने में सक्षम बनाने के लिए एक औपचारिक ढांचा स्थापित करना है। ईसीसीआर और दा नांग विश्वविद्यालय के विज्ञान और शिक्षा विश्वविद्यालय के बीच आईसीसीआर चेयर ऑफ इंडिया स्टडीज की स्थापना के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौता ज्ञापन के तहत वियतनाम के दा नांग विश्वविद्यालय में आईसीसीआर चेयर की स्थापना की गई है। जगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय और हनोई स्थित हो ची मिन्ह नेशनल एकेडमी ऑफ पॉलिटिक्स (एचसीएमए) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता ज्ञापन वियतनाम में क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण को सुगम बनाने के लिए भारत की दीर्घकालिक पहलों को मजबूत करता है। जिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और वियतनाम के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता ज्ञापन डिजिटल प्रौद्योगिकी और आईटी क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए द्विपक्षीय प्रतिबद्धता को और गहरा करता है।नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ वियतनाम (एनएपीएएस) और नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ वियतनाम (एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड) के बीच एक और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता ज्ञापन भारत की एनआईपीएल और वियतनाम की एनएपीएएस के बीच सीमा पार क्यूआर कोड इंटरऑपरेबिलिटी के लिए संस्थागत संबंध स्थापित करता है, जिससे भुगतान सुगम हो सकेंगे। र्वजनिक क्षेत्र के लेखापरीक्षा के क्षेत्र में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कार्यालय और वियतनाम के राज्य लेखापरीक्षा कार्यालय के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता ज्ञापन भारत और वियतनाम के दो लेखापरीक्षा संस्थानों के बीच 2010 के समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण करता है और इसे अधिक लचीला और गतिशील बनाता है। र्यटन के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत के पर्यटन मंत्रालय और वियतनाम के खेल, संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता ज्ञापन दोनों देशों के बीच जन-जन संबंधों को बढ़ावा देता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Hormuz में तनाव कम! Shehbaz Sharif ने Donald Trump को कहा शुक्रिया, बोले&#45; साहसिक फैसला</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को सुरक्षित निकालने के उद्देश्य से चलाए जा रहे प्रोजेक्ट फ्रीडम अभियान को स्थगित करने की घोषणा के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आभार व्यक्त किया। ह कदम ऐसे समय आया है जब वाशिंगटन और तेहरान कथित तौर पर तनाव कम करने और चल रही शत्रुता को समाप्त करने के लिए संभावित समझौते की दिशा में प्रगति कर रहे हैं। बयान में शरीफ ने ट्रंप के साहसी नेतृत्व की प्रशंसा की और इस निर्णय को समयोचित बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता में योगदान मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह स्थगन पाकिस्तान और सऊदी अरब सहित अन्य देशों के अनुरोधों के बाद किया गया है। किस्तानी प्रधानमंत्री ने संवाद के माध्यम से संघर्षों के समाधान के उद्देश्य से किए जा रहे राजनयिक प्रयासों का समर्थन करने के लिए अपने देश की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत से एक स्थायी शांति समझौता होगा। इसे भी पढ़ें: शर्तें नहीं माने तो ऐसी बमबारी करेंगे...होर्मुज खोलने को लेकर ट्रंप की ईरान को नई धमकीशहबाज ने कहा कि पाकिस्तान संयम को बढ़ावा देने और संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के सभी प्रयासों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा स्थिति में एक स्थायी समझौता होगा, जो क्षेत्र और उससे परे, स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करेगा। इसके अलावा, शहबाज ने उम्मीद जताई कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता से स्थायी शांति स्थापित होगी। उन्होंने ये बातें इस्लामाबाद में आयोजित छठे अंतरराष्ट्रीय पैगाम-ए-इस्लाम सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहीं। शहबाज ने पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ‘‘इन्हीं प्रयासों से दोनों पक्षों के बीच वार्ता के द्वार खुले।इसे भी पढ़ें: जिनपिंग से मेरी अच्छी पटती है, Trump ने China पहुंचने से पहले खेला दांव!उन्होंने विश्वास जताया कि यह वार्ता जल्द ही क्षेत्र में जानमाल के किसी और नुकसान के बिना स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करेगी। अपने संबोधन में शहबाज ने पाकिस्तान आने के लिए अमेरिका और ईरान का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में भूमिका निभाने के लिए सऊदी अरब, चीन और तुर्किये का भी आभार जताया। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:24 +0530</pubDate>
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<title>West Asia संकट के बीच बड़ी राहत, खाड़ी में भारतीय नाविक सुरक्षित, 48 घंटे में कोई घटना नहीं</title>
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<description><![CDATA[ बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय में जहाजरानी निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने बुधवार को कहा कि क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछली ब्रीफिंग के बाद से पिछले 48 घंटों में भारतीय ध्वज वाले किसी भी जहाज से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है। पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बोलते हुए शर्मा ने कहा कि मंत्रालय ने 2,999 से अधिक नाविकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी में सहायता की है, जिनमें से 23 नाविक पिछले 48 घंटों में खाड़ी क्षेत्र से लौटे हैं। बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय नाविकों के कल्याण और निर्बाध समुद्री संचालन सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों और समुद्री हितधारकों के साथ समन्वय जारी रखे हुए है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछली ब्रीफिंग के बाद से पिछले 48 घंटों में किसी भी भारतीय ध्वज वाले जहाज से जुड़ी कोई घटना दर्ज नहीं की गई है। भारतीय नाविकों को ले जा रहे किसी भी विदेशी ध्वज वाले जहाज पर भी कोई घटना दर्ज नहीं की गई है।इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Hormuz में जंग का बिगुल! Iran का UAE पर बड़ा हमला, America ने किया पलटवारडीजी शिपिंग में स्थापित नियंत्रण कक्ष ने 8,570 कॉल और 18,732 से अधिक ईमेल संभाले हैं। पिछले 48 घंटों में कुल 156 कॉल और 668 ईमेल प्राप्त हुए हैं। मंत्रालय ने जहाजरानी महानिदेशालय के माध्यम से खाड़ी क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से 2,999 से अधिक नाविकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी में सहायता की है, जिनमें पिछले 48 घंटों में 23 नाविक शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत में बंदरगाहों का संचालन सामान्य रूप से जारी है और किसी प्रकार की भीड़भाड़ की सूचना नहीं मिली है। शर्मा से अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की उस टिप्पणी पर भारत के विचारों के बारे में पूछा गया, जिसमें उन्होंने ऑपरेशन के आक्रामक हिस्से, यानी &#039;एपिक फ्यूरी&#039;, और इस तथ्य का जिक्र किया था कि वे एक तरह के नाजुक युद्धविराम का परीक्षण कर रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Iran का भीषण हमला, 3 भारतीय घायल, अब होगा तगड़ा एक्शन!शर्मा ने जवाब दिया, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी मुझे नहीं लगता कि मैं अमेरिका या इसके हम पर पड़ने वाले प्रभाव पर कोई टिप्पणी कर सकता हूँ, लेकिन हम विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर स्थिति पर लगातार नज़र रख रहे हैं और विदेशों में स्थित अपने भारतीय दूतावासों के संपर्क में हैं। स्वतंत्रता से संबंधित दूसरे प्रश्न के बारे में मेरा जवाब वही रहेगा। मैं अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर कोई अनुमान नहीं लगाऊंगा; यह मेरा काम नहीं है। भारत सरकार समग्र दृष्टिकोण अपनाते हुए स्थिति पर नज़र रख रही है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:23 +0530</pubDate>
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<title>Iran ने UAE के Missile Attack के दावे खारिज किए, दुश्मनों से दूर रहने की दी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त अरब अमीरात द्वारा ईरान पर ड्रोन और मिसाइल हमलों का आरोप लगाने के बाद जारी एक कड़े बयान में ईरान ने बुधवार को इन आरोपों की निंदा की और संयुक्त अरब अमीरात से अमेरिकी और इजरायली शत्रुओं के साथ मिलीभगत न करने का आग्रह किया। ईरान के विदेश मंत्रालय का यह बयान भारत में ईरान के दूतावास द्वारा X पर एक पोस्ट में साझा किया गया। मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय कानून के मूलभूत नियमों के प्रति ईरान की प्रतिबद्धता और क्षेत्र के सभी देशों के साथ अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांत पर जोर दिया। बयान में कहा गया है यह अबू धाबी से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने वाली कार्रवाइयों को अंजाम देने में शत्रुतापूर्ण पक्षों (संयुक्त राज्य अमेरिका और ज़ायोनी शासन) के साथ निरंतर मिलीभगत और सहयोग से बचने का पुरजोर आह्वान करता है।इसे भी पढ़ें: Vietnam में बजेगा India का डंका! Digital Payments और UPI पर बड़ा समझौता, 13 MoU पर साइन।अबू धाबी पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का उल्लंघन करने और &quot;सद्भावनापूर्ण पड़ोसी&quot; के सिद्धांत के विपरीत दृष्टिकोण अपनाने का आरोप लगाते हुए बयान में कहा गया है, &quot;पिछले दो दिनों में, क्षेत्र में अमेरिकी आतंकवादी बलों द्वारा गैरकानूनी और उकसावे वाली कार्रवाइयों में वृद्धि और &#039;पूर्वाग्रही&quot; उपायों के भ्रामक बहाने के तहत उनकी नौसैनिक गतिविधियों के साथ-साथ, अबू धाबी के अधिकारियों ने भी सद्भावनापूर्ण पड़ोसी के सिद्धांत के विपरीत और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने आक्रमणकारी संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ स्पष्ट सहयोग किया है, जिससे ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों को खतरा पैदा हो गया है। इसके बावजूद, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने अधिकतम संयम का प्रदर्शन किया है, जिम्मेदारी से काम किया है और क्षेत्र और इस्लामी समुदाय के सामूहिक हित का पूरा ध्यान रखा है।इसे भी पढ़ें: Hormuz में तनाव कम! Shehbaz Sharif ने Donald Trump को कहा शुक्रिया, बोले- साहसिक फैसलाविदेश मंत्रालय, अबू धाबी द्वारा ईरान से संयुक्त अरब अमीरात की ओर मिसाइल और ड्रोन लॉन्च करने के निराधार दावों को खारिज करते हुए, इस बात पर जोर देता है कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के सशस्त्र बलों द्वारा इस समय उठाए गए रक्षात्मक उपाय पूरी तरह से अमेरिकी आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए निर्देशित हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:22 +0530</pubDate>
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<title>बंगाल के लिए सड़क पर क्यों नाचा ब्रिटिश नेता, सच जानकर रह जाएंगे हैरान!</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद एक ब्रिटिश नेता ब्रिटेन की सड़कों पर खड़े होकर नाचने लगे। इस तस्वीर ने ब्रिटेन में हलचल मचा दी है। पश्चिम बंगाल में हिंदुओं को जश्न मनाता देख  पाकिस्तान और बांग्लादेश छाती पीट कर रो रहे हैं। विदेशी मीडिया भी यह नहीं पचा पा रही कि बीजेपी बंगाल में कैसे जीत सकती है। कैसे पीएम मोदी और ताकतवर हो सकते हैं। बंगाल तो बांग्लादेश बनने से बाल-बाल बच गया, लेकिन इंग्लैंड में लगे इस पोस्टर ने बता दिया है कि ब्रिटेन को अब इस्लामिक देश बनने से कोई नहीं रोक सकता। दरअसल एक ब्रिटिश नेता बॉब ब्लैकमैन ब्रिटेन में रहने वाले हिंदुओं के साथ बंगाल में बीजेपी की जीत का जश्न मनाते दिखे। पश्चिम बंगाल के नतीजे आते ही बॉब ब्लैकमैन ब्रिटेन में रहने वाले हिंदुओं के साथ नाचने लगे। ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन ने खुशी जताई कि बंगाल में बीजेपी आ गई है। इसे भी पढ़ें: West Bengal में BJP की प्रचंड जीत के बाद खुलने लगे वर्षों से बंद पड़े मंदिर, हर ओर गूंज रहा जय श्री रामआपको बता दें कि बॉब ब्लैकमैन लगातार ब्रिटेन में रहने वाले हिंदुओं के अधिकारों की बात करते आए हैं। बॉब ब्लैकमैन ने बांग्लादेश में मारे जा रहे हिंदुओं की भी आवाज उठाई थी। लेकिन जिस वक्त बॉब ब्लैकमैन हिंदुओं के साथ नाच रहे थे, ठीक उसी वक्त इंग्लैंड की सड़कों पर कुछ पोस्टर लगे दिखे। बंगाल के चुनावों में तो सनातन की जीत हो गई। लेकिन इंग्लैंड देखिए किस तरफ जा रहा है। 7 मई को लंदन में 5000 से ज्यादा काउंसिल सीटों पर वोटिंग होनी है। यह लंदन में लोकल बॉडी के इलेक्शंस हैं। ब्रिटेन में कट्टर इस्लाम और पाकिस्तानियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे टॉमी रॉबिंसन ने एक तस्वीर डालते हुए लिखा कि मॉडर्न इंग्लैंड में ऐसे चुनाव हो रहे हैं। दरअसल टॉमी रॉबिनसन दिखा रहे हैं कि लोकल बॉडी के चुनावों में पाकिस्तान और दूसरे देशों से आए मुस्लिम कैंडिडेट हावी हो चुके हैं।इसे भी पढ़ें: SC/ST Vote Bank में BJP की बड़ी सेंध, Bengal-Assam की जीत ने दिया बड़ा Political संदेश चुनाव लंदन में है लेकिन लड़ने वाले ज्यादातर शायद पाकिस्तानी मुस्लिम है। कई इलाकों में तो आमने-सामने मुस्लिम कैंडिडेट्स ही हैं। यानी कोई भी जीते लेकिन उस इलाके को मिलेगा मुस्लिम कैंडिडेट ही।  अंग्रेजों का तो नामोनिशान तक नहीं है। टॉमी रॉबिनसन से लेकर डॉनल्ड ट्रंप तक बोल चुके हैं कि इस्लाम ब्रिटेन पर हावी हो चुका है। ब्रिटेन में कहीं भी चुनाव हो वहां अब मुस्लिम कैंडिडेट्स ही खड़े होते हैं। ब्रिटेन के कई शहरों में अब मुस्लिम मेयर बन चुके हैं। अब तो ब्रिटेन में शरिया अदालतें तक शुरू हो चुकी हैं। History made! ✌️ The Lotus finally blooms in West Bengal. Honoured to join the celebration today with @BobBlackman MP, our OFBJP advisor @Sureshkm27 and the team. Seeing this incredible result for Bengal and Assam is truly special. Forward with development! ????????✨ pic.twitter.com/46eruWIyt2— Ashwin ( Modi Ka Parivar) (@Ashwin191919) May 5, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:21 +0530</pubDate>
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<title>Neapl ठोकेगा भारत पर भारी जुर्माना? नए फरमान से मचा बवाल</title>
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<description><![CDATA[ भारत नेपाल सीमा पर इन दिनों तनाव बढ़ता जा रहा है। जो रिश्ता हमेशा बेटी रोटी का माना जाता रहा है। वहीं अब कुछ फैसलों की वजह से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ रहा है। नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालन शाह की सरकार लगातार ऐसे कदम उठा रही है जिन्हें भारत के हितों के खिलाफ या कम से कम असहज करने वाला माना जा रहा है। ताजा मामला भारतीय गाड़ियों पर सख्ती का है। अब नेपाल में कोई भी भारतीय वाहन एक साल में सिर्फ 30 दिन ही रह सकती है। चाहे वह लगातार हो या अलग-अलग हिस्सों में। अगर इससे ज्यादा दिन गाड़ी नेपाल में पाई गई तो भारी जुर्माना देना पड़ेगा। बाइक पर रोजाना करीब ₹100 नेपाली रुपए और चार पहिया वाहन पर ₹100 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं अब नेपाल में घुसने से पहले भारतीय वाहनों को भंसार यानी कस्टम परमिट लेना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना अनुमति के अगर कोई गाड़ी चलती मिली तो उसे ज्त भी किया जा सकता है। साथ ही साथ रोजाना शुल्क भी तय किया गया है। इसे भी पढ़ें: Kailash Mansarovar Yatra से फिर गरमाया India-Nepal Border Dispute, लिपुलेख पर दावे को भारत ने बताया &#039;मनगढ़ंत&#039;दो पहिया के लिए 100, तीन पहिया के लिए 400 और चार पहिया के लिए 600 नेपाली रुपए। हालांकि नेपाल सरकार का कहना है कि यह कोई नए नियम नहीं है बल्कि पुराने कानूनों को ही सख्ती से लागू किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक बिना इजाजत वाहनों की आवाजाही बढ़ने से टैक्स चोरी और सुरक्षा से जुड़े खतरे बढ़ रहे थे। इसलिए यह कदम उठाया गया है। लेकिन जमीनी हकीकत को देखा जाए तो कहानी कुछ और ही बता रही है। सीमा से जुड़े इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह नियम आफत बन गए हैं। यहां के लोग रोजमर्रा के काम, रिशेदारी, शादी ब्याह और छोटे व्यापार के लिए आसानी से एक दूसरे के देश में आते जाते रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Nepal के नए नियम के बाद बॉर्डर पर फंस गए 1000 से ज्याजा कंटेनर, मचा बवाल!पहले ही नेपाल में ₹100 से ज़्यादा की खरीददारी, और 6 कि.मी. से ज़्यादा अंदर जाने पर सख्ती लागू की जा चुकी है। और अब वाहन को लेकर नए नियम, इसने हालात को और कठिन बना दिया है। शादी विवाह जैसे आयोजन में बारात ले जाना मुश्किल हो रहा है क्योंकि ज्यादातर बारातें किराए की गाड़ियों से जाती हैं। 30 दिन की सीमा के कारण ऐसी गाड़ियों का मिलना मुश्किल हो सकता है और अगर मिल भी जाए तो खर्च काफी बढ़ जाएगा। सीमा पर छोटे व्यापारियों की हालत भी खराब हो रही है और कई दुकानदारों को अपना धंधा बदलने तक की नौबत आ गई है। लोगों का कहना है कि इन फैसलों का सीधा असर दोनों देशों के पारंपरिक रिश्तों पर पड़ रहा है। नेपाल सरकार के ये लगातार फैसले एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हैं। भले ही इसे प्रशासनिक शक्ति कहा जा रहा हो, लेकिन इसका असर भारत, नेपाल के सामाजिक और आर्थिक संबंधों पर साफ दिखने लगा है। कुल मिलाकर नेपाल की ओर से बढ़ती शक्ति ने सीमा पर रहने वाले आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि दोनों देशों के बीच इस मुद्दे को लेकर कोई संतुलन बनता है या नहीं ताकि पुराने रिश्तों की मिठास बनी रह सके। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:56:21 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन: 1 मई से अब तक रूसी हमलों में, 70 लोगों की मौत, 500 से अधिक घायल</title>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निगरानी मिशन (HRMMU) ने बताया है कि 5 मई को रूसी सैन्य बलों के सिलसिलेवार हमलों में 28 लोगों की जान गई थी और 194 घायल हुए थे. 1 मई से 5 मई के दौरान, ड्रोन व मिसाइल हमलों में कम से कम 70 लोग मारे गए हैं और 500 से अधिक घायल हुए हैं.  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:55:44 +0530</pubDate>
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<title>मिस्र में सूडानी शरणार्थियों पर मंडरा रहा धन कटौती का ख़तरा</title>
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<description><![CDATA[ सूडान में युद्ध से सुरक्षा की ख़ातिर भागकर पड़ोसी देश मिस्र में शरण लेने वाले लोगों को अब एक नई चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. सहायता धन की कटौती के कारण, लोगों के लिए जीवन रक्षक सेवाओं के खो जाने का ख़तरा उत्पन्न हो गया है. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:55:42 +0530</pubDate>
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<title>भारत: मध्य प्रदेश में घर&#45;घर स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के लिए अथक प्रयास</title>
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<description><![CDATA[ भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त में दूर-दराज़ गाँवों से लेकर व्यस्त अस्पतालों तक, स्वास्थ्यकर्मी यह सुनिश्चित करने के प्रयास कर रहे हैं कि टीके, मातृ स्वास्थ्य सेवाएँ और ज़रूरी देखभाल उन परिवारों तक पहुँचे, जो अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं से छूट जाते हैं. स्वास्थ्यकर्मी कठिन रास्तों पर चलकर अतिरिक्त दूरियाँ तय करके, स्वास्थ्य सेवाएँ, घर-घर पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:55:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>इसराइल को मानवाधिकार सन्देश &#45; ग़ाज़ा के लिए सहायता पहुँचाना ‘कोई अपराध नहीं’</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने इसराइल से ग़ाज़ा के लिए सहायता सामग्री पहुँचाने के लिए निकले वैश्विक सुमुद समुद्री सहायता क़ाफ़िले (Flotilla) के उन दो सदस्यों को तत्काल रिहा करने की अपील की है जिन्हें अन्तरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से रिहासत में लिया गया है. मानवाधिकार कार्यालय ने कहा है कि फ़लस्तीनी लोगों के साथ एकजुटता दिखाना और ग़ाज़ा तक मानवीय सहायता पहुँचाने का प्रयास करना “कोई अपराध नहीं है.” ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:55:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>इसराइल, को, मानवाधिकार, सन्देश, ग़ाज़ा, के, लिए, सहायता, पहुँचाना, ‘कोई, अपराध, नहीं’</media:keywords>
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<title>संयुक्त अरब अमीरात पर हमलों की पृष्ठभूमि में, सुरक्षा परिषद की &amp;apos;बन्द&#45;कक्ष&amp;apos; बैठक</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी संकट और संयुक्त अरब अमीरात में हाल ही में हुए मिसाइल व ड्रोन हमलों से उपजी चिन्ताओं के बीच, मध्य पूर्व क्षेत्र में शान्ति प्रयासों के लिए अपना समर्थन फिर दोहराया है.  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:55:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>US का KC&#45;135 &amp;apos;फ्लाइंग गैस स्टेशन&amp;apos; कतर के पास लापता, रडार से गायब होने से पहले दिया था इमरजेंसी सिग्नल</title>
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<description><![CDATA[ खाड़ी क्षेत्र से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अमेरिकी वायुसेना का एक KC-135 स्ट्रैटोटैंकर (KC-135 Stratotanker) विमान, जिसे अपनी अनूठी क्षमता के कारण &#039;फ्लाइंग गैस स्टेशन&#039; कहा जाता है, कतर के पास उड़ान भरते समय रडार से गायब हो गया है। लापता होने से ठीक पहले पायलट ने &#039;7700&#039; इमरजेंसी कोड भेजा था, जो विमान में किसी गंभीर संकट का वैश्विक संकेत है। यह एक वैश्विक संकेत है जिसका उपयोग पायलट किसी गंभीर समस्या का संकेत देने के लिए करते हैं। इसके तुरंत बाद, विमान कतर के पास सार्वजनिक रडार से गायब हो गया।लापता होने से पहले क्या हुआ था?रिपोर्ट्स बताती हैं कि जब इमरजेंसी अलर्ट भेजा गया, तब विमान हवा में ही ईंधन भरने का काम कर रहा था। इसके बाद उसने अपनी दिशा बदली और नीचे उतरना शुरू कर दिया, संभवतः वह किसी सैन्य अड्डे की ओर जा रहा था। इमरजेंसी सिग्नल पहली बार देखे जाने के लगभग एक घंटे बाद, विमान का ट्रैकिंग सिग्नल पूरी तरह से गायब हो गया। हालाँकि, अधिकारियों ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि आखिर समस्या किस वजह से हुई थी।कारण अभी भी अज्ञात7700 इमरजेंसी कोड का उपयोग कई स्थितियों में किया जा सकता है, जिनमें शामिल हैं:-तकनीकी या यांत्रिक खराबीविमान में आग लगनाचिकित्सा संबंधी आपातकालसंभावित बाहरी खतराअब तक, इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है कि इमरजेंसी किस वजह से हुई। उस क्षेत्र में किसी विमान दुर्घटना, मलबे या बचाव अभियान की भी कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है, भले ही हाल ही में इस क्षेत्र में संघर्ष विराम हुआ हो। इसे भी पढ़ें: Explained | क्या ममता बनर्जी इस्तीफ़ा दिए बिना सत्ता में रह सकती हैं? जानें संवैधानिक नियम | West Bengal Election Resultsपहले की रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ईरान समर्थित समूहों ने अतीत में US सेना की संपत्तियों को निशाना बनाया था, जिससे यह चिंता बढ़ गई है कि क्या यह ताज़ा घटना भी उससे जुड़ी हो सकती है। हालाँकि, इस मामले में किसी भी हमले की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।न तो US सेना और न ही ईरानी अधिकारियों ने विमान की स्थिति के बारे में कोई बयान जारी किया है। फिलहाल, फ्लाइट-ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म पर आधारित रिपोर्ट्स ही जानकारी का मुख्य स्रोत बनी हुई हैं। इसे भी पढ़ें: IPL 2026 CSK vs DC | संजू सैमसन की तूफानी पारी, चेन्नई सुपरकिंग्स ने दिल्ली कैपिटल्स को 8 विकेट से हरायाKC-135 स्ट्रैटोटैंकर के बारे मेंKC-135 US वायु सेना द्वारा हवा में ही ईंधन भरने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक प्रमुख विमान है। यह लड़ाकू विमानों, बमवर्षकों और अन्य विमानों को हवा में अधिक समय तक रहने और लंबी दूरी तय करने में सक्षम बनाता है। बोइंग 707 के शुरुआती डिज़ाइन पर आधारित यह विमान 60 वर्षों से भी अधिक समय से सेवा में है। यह ज़रूरत पड़ने पर माल, यात्रियों को भी ले जा सकता है और चिकित्सा निकासी अभियानों में भी सहायता कर सकता है।???? یک فروند هواپیمای سوخت‌رسان KC-135R نیروی هوایی ایالات متحده آمریکا که از پایگاه هوایی الظفره امارات برخاسته بود، در حین پرواز بر فراز خلیج فارس، کد اضطراری ۷۷۰۰ را مخابره کرد. ????ارسال این کد به معنای وجود یک وضعیت اضطراری و فوری است که نیاز به فرود دارد. pic.twitter.com/o3HBB660hs— خبرگزاری فارس (@FarsNews_Agency) May 5, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:13:55 +0530</pubDate>
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<title>PM Modi और शेख MBZ की दोस्ती का असर, Defence Pact से West Asia में बदलेगा Power Balance</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की शानदार जीत के एक दिन बाद, भारतीय नेता ने फारस की खाड़ी के पार ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह बंदरगाह पर किए गए बैलिस्टिक मिसाइल, ड्रोन और क्रूज मिसाइल हमले की निंदा करते हुए एक अभूतपूर्व कदम उठाया। प्रधानमंत्री ने न केवल संयुक्त अरब अमीरात के साथ एकजुटता दिखाई, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता का भी आह्वान किया। ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद से, संयुक्त अरब अमीरात ने अपने क्षेत्र पर ईरान द्वारा दागे गए 549 बैलिस्टिक मिसाइल, 29 क्रूज मिसाइल और 2260 ड्रोन हमलों का जवाब दिया है। ये हमले संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी हवाई अड्डों और इजरायल के साथ उसके संबंधों के कारण हुए हैं। ईरान द्वारा फुजैराह बंदरगाह पर किया गया हमला सुनियोजित था, क्योंकि यह बंदरगाह और खोर फक्कन बंदरगाह दोनों होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर और ओमान की खाड़ी में स्थित हैं। इसे भी पढ़ें: चुनाव परिणामों ने दिखाया नया राजनीतिक ट्रेंड, हिंदू भाजपा के साथ, मुस्लिम कांग्रेस की ओर!सऊदी अरब के प्रभुत्व वाले ओपेक से संयुक्त अरब अमीरात के बाहर निकलने के बाद, ये दोनों बंदरगाह वैश्विक ऊर्जा की कमी को पूरा करने में सक्षम होंगे, जिसे ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य का उपयोग करके बंधक बनाए हुए है। पश्चिम एशिया में संयुक्त अरब अमीरात उन देशों में से एक है जिन पर इज़राइल से भी अधिक ईरानी मिसाइलों से हमला हुआ है, क्योंकि तेहरान इज़राइल के साथ अपने बढ़ते संबंधों और मध्य-पूर्व के आर्थिक विकास के प्रतीक के रूप में संयुक्त अरब अमीरात की स्थिति को स्वीकार नहीं कर पा रहा है। सऊदी अरब और कतर ने आपसी रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान के साथ रक्षा संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, वहीं प्रधानमंत्री मोदी और उनके करीबी मित्र, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद, दोनों देशों के बीच एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी स्थापित करना चाहते हैं। यह साझेदारी तब शुरू हुई जब 19 जनवरी को एमबीजे अपने पूरे मंत्रिमंडल के साथ तीन घंटे के लिए भारत आए थे और दोनों देशों ने एक आशय पत्र (एलओआई) पर हस्ताक्षर किए थे। दोनों पक्षों ने एलओआई पर हस्ताक्षर के छह महीने के भीतर एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी समझौता स्थापित करने और रक्षा औद्योगिक सहयोग, रक्षा नवाचार, विशेष अभियान और अंतरसंचालनीयता, साइबर स्पेस और आतंकवाद विरोधी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई है। हाल ही में, संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान के 3.45 अरब अमेरिकी डॉलर के कर्ज को आगे न बढ़ाने का फैसला किया, जिसके परिणामस्वरूप इस्लामाबाद को अबू धाबी को भुगतान करने के लिए रियाद से कर्ज लेना पड़ा। प्रधानमंत्री मोदी 18 मई को नीदरलैंड्स जाते समय अबू धाबी में उतरने वाले हैं, ऐसे में दोनों देशों पर सबकी निगाहें टिकी हैं क्योंकि मुंद्रा-फुजैराह-अकाबा को नए व्यापारिक केंद्र के रूप में देखा जा रहा है और ये दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत कर रहे हैं। पिछले महीने, यूएई ने जॉर्डन की रॉक-फॉस्फेट और पोटाश खदानों को लाल सागर में स्थित अकाबा बंदरगाह से जोड़ने के लिए 360 किलोमीटर लंबी रेलमार्ग के निर्माण हेतु 23 लाख अमेरिकी डॉलर के समझौते को औपचारिक रूप दिया। रॉक-फॉस्फेट और पोटाश दोनों का उपयोग उर्वरक बनाने में होता है, जिसकी भारत में भारी मांग है।इसे भी पढ़ें: West Bengal में विपक्ष की नई आवाज? MLA Humayun Kabir ने BJP को दी सीधी चुनौती, कहा- मैं चुप नहीं बैठूंगायूएई भारत का करीबी सहयोगी होने के साथ-साथ नई दिल्ली को ऊर्जा आपूर्ति करने वाले शीर्ष पांच देशों में से एक है। 2024-2025 में, भारत ने यूएई से 13.6 अरब अमेरिकी डॉलर (देश के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 10 प्रतिशत, जो लगभग 23 मिलियन टन है) का एलएनजी और 7.51 अरब अमेरिकी डॉलर का एलपीजी आयात किया। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:13:45 +0530</pubDate>
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<title>Cruise Ship पर Hantavirus का कहर, 3 मौत के बाद WHO ने जारी किया Global Alert</title>
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<description><![CDATA[ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार को कहा कि एमवी होंडियस क्रूज जहाज पर हंतावायरस के प्रकोप से जुड़े आठ मामले सामने आए हैं, जिनमें तीन प्रयोगशाला-पुष्टि संक्रमण शामिल हैं। वैश्विक स्वास्थ्य अधिकारी इस दुर्लभ एंडीज स्ट्रेन के वायरस के प्रसार को रोकने और इसके संपर्क में आए लोगों का पता लगाने के लिए तेजी से प्रयास कर रहे हैं। इस प्रकोप से अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कम से कम चार अन्य लोग बीमार पड़ गए हैं। जहाज अर्जेंटीना से रवाना हुआ और बाद में पश्चिम अफ्रीका के तटवर्ती जलक्षेत्र में पहुंचा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि स्विस अधिकारियों ने क्रूज जहाज के एक यात्री में हंतावायरस के मामले की पुष्टि की है, जब उस व्यक्ति ने जहाज के संचालक द्वारा भेजे गए स्वास्थ्य चेतावनी का जवाब दिया और ज्यूरिख के एक अस्पताल में इलाज कराया।इसे भी पढ़ें: Covid के बाद नए Virus की दस्तक? Cruise Ship पर 3 मौतें, जानें भारत के लिए क्या हैं संकेतएजेंसी ने बताया कि यात्री का वर्तमान में स्विट्जरलैंड में चिकित्सा उपचार चल रहा है और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (IHR) के तहत संबंधित देशों के समन्वय से अंतर्राष्ट्रीय संपर्क ट्रेसिंग प्रयास जारी हैं। WHO ने पुष्टि की कि इस प्रकोप में शामिल वायरस हंतावायरस का एंडीज स्ट्रेन है, जो एक दुर्लभ प्रकार है और सीमित रूप से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। इस स्ट्रेन की पहचान दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान और स्विट्जरलैंड के जिनेवा विश्वविद्यालय अस्पतालों द्वारा की गई थी। WHO ने प्रकोप की जांच और प्रतिक्रिया में सेनेगल के इंस्टीट्यूट पाश्चर डी डकार और अर्जेंटीना के एडमिनिस्ट्रेशन नैशनल डी लेबोरेटोरियोस ई इंस्टिट्यूटोस डी सैलुड द्वारा दी गई सहायता को भी स्वीकार किया। दक्षिण अफ़्रीकी स्वास्थ्य अधिकारियों ने पहले पुष्टि की थी कि जहाज से उतारे गए दो यात्रियों में एंडीज़ स्ट्रेन का संक्रमण पाया गया है। इनमें से एक, एक ब्रिटिश नागरिक, दक्षिण अफ़्रीका के एक अस्पताल में गहन चिकित्सा में भर्ती है। इसे भी पढ़ें: गर्मी में Heat Stroke का रामबाण इलाज है कच्चा प्याज, ये Desi Nuskha आपको रखेगा Coolदूसरा पुष्ट मामला एक डच महिला का था, जिसकी दक्षिण अफ्रीका में मृत्यु हो गई और प्रयोगशाला परीक्षण के बाद उसकी मृत्यु के बाद ही इस वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, हंतावायरस मुख्य रूप से कृन्तकों, उनके मूत्र, लार या मल के संपर्क से फैलता है। हालांकि, एंडीज क्षेत्र का यह प्रकार - जो आमतौर पर अर्जेंटीना और चिली में पाया जाता है - असामान्य है क्योंकि यह मनुष्यों के बीच भी निकट और लंबे समय तक संपर्क के माध्यम से फैल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का संचरण अपेक्षाकृत दुर्लभ है और आमतौर पर निकट संपर्क से संबंधित स्थितियों में होता है, जैसे कि किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ भोजन या सोने की व्यवस्था साझा करना। एमवी होंडियस क्रूज जहाज वर्तमान में पश्चिम अफ्रीका के केप वर्डे तट के पास है। कम से कम तीन संक्रमित यात्री अभी भी जहाज पर सवार हैं, हालांकि निकासी की योजना बनाई जा रही है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:13:44 +0530</pubDate>
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<title>China के बड़े दुश्मन को मिलेगा भारत का Brahmos, ड्रैगन के उड़े होश!</title>
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<description><![CDATA[ राष्ट्रपति के रूप में भारत की अपनी पहली यात्रा पर आए लैम ने कहा कि दोनों देश रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देंगे और शांति और स्थिरता के माहौल को मजबूत करने&quot; में योगदान देंगे। मोदी के अनुसार, दोनों पक्षों ने कहा कि चर्चा शिक्षा, दुर्लभ खनिज और डिजिटल भुगतान प्रणालियों जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित थी, जो भारत और वियतनाम के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी में वृद्धि को दर्शाती है। राष्ट्रपति भवन में लाम का लाल कालीन पर स्वागत किया गया, जहां सैनिकों की परेड के दौरान मोदी उनके साथ खड़े रहे। वियतनामी राष्ट्रपति ने एक दिन पहले बिहार राज्य में स्थित बौद्ध तीर्थस्थल बोधगया की यात्रा के साथ अपनी भारत यात्रा की शुरुआत की, जहां माना जाता है कि बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। लाम के साथ एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल है और वे भारत के वित्तीय केंद्र मुंबई का भी दौरा करने वाले हैं।इसे भी पढ़ें: India-Vietnam का 2030 तक $25 Billion व्यापार का लक्ष्य, PM Modi बोले- सप्लाई चेन होगी मजबूतवियतनाम भारत के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी विनफास्ट जैसी कंपनियां दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश में अपनी पैठ बनाने का प्रयास कर रही हैं। भारतीय मीडिया ने अनुमान लगाया था कि आज की चर्चा में भारत की लंबी दूरी की ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों के लिए संभावित 700 मिलियन अमेरिकी डॉलर के सौदे पर चर्चा हो सकती है, लेकिन दोनों नेताओं में से किसी ने भी ऐसी कोई घोषणा नहीं की। दिल्ली के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि लैम ने कल भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की। कोलंबो ने एक बयान में कहा कि लैम कल दो दिवसीय श्रीलंका यात्रा पर रवाना होंगी, जहां उनका ध्यान व्यापार, निवेश और पर्यटन पर केंद्रित होगा। इसे भी पढ़ें: India और Vietnam के बीच गहराएंगे रक्षा और आर्थिक संबंध, Indo-Pacific क्षेत्र में बदलेगा खेलआपको बता दें कि यह एक सुपर सोनिक क्रूज़ मिसाइल है। यानी कि आवाज की गति से कई गुना तेज उड़ती हैं और दुश्मनों को संभलने तक का मौका नहीं देती। जमीन, समुद्र और हवा तीनों ही जगहों से इस ब्रह्मोस मिसाइल को लॉन्च किया जा सकता है। और यही वजह है कि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों के लिए यह एक बेहद अहम हथियार है। और इस मिसाइल ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के होश फाकता कर दिए थे। पहले ब्रह्मोस मिसाइलों का उत्पादन मुख्य रूप से हैदराबाद और कुछ अन्य जगहों पर होता था। लेकिन अब लखनऊ में नया प्लांट होने से उत्पादन क्षमता और बढ़ गई है।   ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:13:40 +0530</pubDate>
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<title>मध्य एशिया में &amp;apos;परमाणु &#45; शस्त्र &#45; मुक्त क्षेत्र&amp;apos; के 20 साल का जश्न</title>
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<description><![CDATA[ कज़ाख़स्तान का सेमिपालातिंस्क (Semipalatinsk) इलाक़ा कभी सोवियत संघ का प्रमुख परमाणु परीक्षण स्थल हुआ करता था. आज, जब दुनिया में परमाणु ख़तरों में फिर से बढ़ोत्तरी देखी जा रही है, ऐसे समय में वर्ष 2006 में मध्य एशियाई देशों द्वारा परमाणु हथियारों का परित्याग करते हुए किए गए सेमिपालातिंस्क समझौते की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ गई है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 10:00:17 +0530</pubDate>
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<title>भारत: शहरी बस्तियों में छूट गए बच्चों को वैक्सीन के दायरे में लाने की कोशिश</title>
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<description><![CDATA[ भारत के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में स्थित गौतम बुद्ध नगर ज़िले में, स्वास्थ्य अधिकारी, नर्सिंग कॉलेज और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) मिलकर उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं की पहचान कर रहे हैं, जो अब तक टीकाकरण रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 10:00:16 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान में युद्धविराम के बावजूद मौतें, डर और ख़तरे बरक़रार</title>
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<description><![CDATA[ लेबनान में 17 अप्रैल को लेबनान और इसराइल के दरम्यान युद्धविराम लागू होने के बावजूद, मौत और विनाश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, और ऐसे ख़तरनाक हालात में लोग अपने घरों को वापिस में लौटने में असमर्थ हैं. युद्धविराम लागू होने के बावजूद, 17 अप्रैल के बाद से भी 380 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 10:00:13 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान में लड़ाई व विस्थापन का दंश; ग़ाज़ा में सहायता मार्ग तक पहुँच की अपील</title>
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<description><![CDATA[ लेबनान में नए सिरे से भड़की हिंसा और बढ़ती मानवीय सहायता आवश्यकताओं के कारण नाज़ुक परिस्थितियों के बीच लागू युद्धविराम पर दबाव बढ़ रहा है. वहीं, आम नागरिक विस्थापित होने के लिए अब भी मजबूर हैं, बुनियादी सेवाओं पर बोझ है और सहायता में कटौती की जा रही है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 10:00:13 +0530</pubDate>
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<title>UAE Missile Alert: सोमवार को दो बार बजे आपातकालीन सायरन, तनाव के बीच अधिकारी मौन</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में संभावित मिसाइल हमले का एक और आपातकालीन सायरन बजाया गया, हालांकि इसकी वजह नहीं बताई गई।
 सोमवार को इस तरह का सायरन दूसरी बार बजाया गया।
 अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद हाल के हफ्तों में इस तरह की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई थी।
 अधिकारियों ने दो बार बजाये गए सायरन के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी है।
 पहली चेतावनी के कुछ मिनट बाद ही स्थिति सामान्य घोषित कर दी गई थी।किसी के हताहत होने की तत्काल कोई सूचना नहीं है।इसे भी पढ़ें: माकपा ने चुनावी नतीजों को बताया &#039;बड़ा झटका&#039;, भाजपा की बढ़त को धर्मनिरपेक्षता के लिए चुनौती करार दिया दुबई और शारजाह में लोगों को सुरक्षित जगह ढूंढने की चेतावनी जारी करने के कुछ ही मिनट बाद, गृह मंत्रालय ने एक और नोटिस जारी कर लोगों को भरोसा दिलाया कि स्थिति अब सामान्य हो गई है।नए संदेश में कहा गया, &quot;आपके सहयोग के लिए धन्यवाद। हम आपको भरोसा दिलाते हैं कि स्थिति अभी सुरक्षित है। आप अपनी सामान्य गतिविधियां फिर से शुरू कर सकते हैं, लेकिन सावधानी बरतते रहें, ज़रूरी एहतियात अपनाएं और आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।&quot; शाम करीब 5 बजे, UAE के गृह मंत्रालय ने दुबई और शारजाह में लोगों के फोन पर एक अलर्ट जारी किया, जिसमें कहा गया था: &quot;मौजूदा हालात और संभावित मिसाइल खतरों को देखते हुए, तुरंत किसी नज़दीकी सुरक्षित इमारत में पनाह लें; खिड़कियों, दरवाज़ों और खुले इलाकों से दूर रहें। अगले निर्देशों का इंतज़ार करें।&quot; fइसके अवाला सोमवार को ही, UAE ने अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) से जुड़े कमर्शियल जहाज़ों पर हुए &quot;ईरानी ड्रोन हमले&quot; की निंदा की; ये जहाज़ उस समय होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़र रहे थे।इसे भी पढ़ें: Delhi Fire Incidents | दिल्ली में आग का तांडव! अप्रैल में घटनाओं में 73% का भारी उछाल, चार महीनों में 32 ने गंवाई जान एक बयान में, UAE के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को UN सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का &quot;खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन&quot; बताया। ये प्रस्ताव नौवहन की स्वतंत्रता पर ज़ोर देते हैं और कमर्शियल जहाज़ों पर हमले या अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में रुकावट डालने पर रोक लगाते हैं। मंत्रालय ने बताया कि इस हमले में दो ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। इस हमले में किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:28 +0530</pubDate>
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<title>Lipulekh Pass | India&#45;Nepal Border Dispute | नेपाल ने क्षेत्रीय दावे को फिर दोहराया, भारत ने &amp;apos;एकतरफा कृत्रिम विस्तार&amp;apos; को किया खारिज</title>
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<description><![CDATA[ भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद एक बार फिर गहरा गया है। सोमवार को नेपाल सरकार ने उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे पर अपने क्षेत्रीय दावे को दोहराते हुए भारत के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने की वकालत की। यह प्रतिक्रिया भारत द्वारा नेपाल के रुख को कड़े शब्दों में खारिज किए जाने के ठीक एक दिन बाद आई है। भारत ने उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से दशकों से आयोजित होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल की आपत्ति को रविवार को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि क्षेत्रीय दावों का ऐसा ‘‘एकतरफा कृत्रिम विस्तार’’ अस्वीकार्य है।इसे भी पढ़ें: आज बरसों की साधना सिद्धि में बदल गई, बंगाल में जीत के बाद बोले PM मोदी- जनता ने इतिहास रच दिया
 भारत की इस प्रतिक्रिया के पहले नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे के रास्ते आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित करने की योजना पर आपत्ति जताई और दावा किया कि यह उसका क्षेत्र है।
 नेपाल सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘‘नेपाल का अपनी सीमा बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है; यह क्षेत्र नेपाल का है, और सरकार का इस बारे में स्पष्ट दृष्टिकोण है और वह अपने रुख के प्रति प्रतिबद्ध है।’’
 शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री पोखरेल ने कहा, ‘‘इस मुद्दे को दोनों देशों के बीच सहयोग और राजनयिक बातचीत के माध्यम से हल करने की आवश्यकता है।’’
 उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय ने इस मामले की जानकारी भारत को औपचारिकपत्र के माध्यम से पहले ही दे दी है।
 चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की तीर्थयात्रा हिंदुओं, जैनियों और बौद्धों के लिए धार्मिक महत्व रखती है। भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों के तहत लगभग पांच साल के अंतराल के बाद पिछले साल यह यात्रा फिर से शुरू हुई। इसे भी पढ़ें: TVK की जीत Karur पीड़ितों को समर्पित, Aadav Arjun बोले- यह जनता का असली फैसला है  विदेश मंत्रालय ने 30 अप्रैल को घोषणा की थी कि वार्षिक कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष जून से अगस्त तक दो मार्गों उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रा और सिक्किम में नाथू ला दर्रा के रास्ते होगी।कूटनीतिक जटिलतालिपुलेख का मुद्दा 2020 में तब और अधिक गरमा गया था जब नेपाल ने अपना नया राजनीतिक मानचित्र जारी किया था, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र के रूप में दिखाया था। भारत इसे हमेशा से नकारता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी के संबंधों और सांस्कृतिक समानता के बावजूद, सीमा विवाद का यह &quot;एकतरफा&quot; नैरेटिव द्विपक्षीय संबंधों के लिए चुनौती बना हुआ है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:28 +0530</pubDate>
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<title>भीषण विस्फोट, चीन में 21 की मौत! तपती गर्मी में कौन बना China का नया दुश्मन?</title>
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<description><![CDATA[ मध्य चीन के हुनान प्रांत में मंगलवार को एक बड़ा हादसा हो गया, जहां एक पटाखा फैक्ट्री में हुए शक्तिशाली विस्फोट ने 21 लोगों की जान ले ली। इस घटना में लगभग 60 अन्य लोग घायल हुए हैं, जिसके बाद प्रशासन ने युद्ध स्तर पर बचाव अभियान शुरू कर दिया है। विस्फोट लियुयांग शहर स्थित &#039;हुआशेंग फायरवर्क्स मैन्युफैक्चरिंग एंड डिस्प्ले कंपनी&#039; की एक वर्कशॉप में हुआ। लियुयांग को दुनिया भर में पटाखों के उत्पादन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। इसे भी पढ़ें: &#039;गंगोत्री से गंगासागर तक खिला कमल&#039;, बंगाल की जीत पर पीएम मोदी का &#039;बदले के बजाय बदलाव&#039; का संदेश | PM Narendra Modi Full Speech घटनास्थल पर लगभग 500 बचाव कर्मियों को तैनात किया गया और खतरे वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। अधिकारी फैक्ट्री के 3 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को भी वहां से हटा रहे थे, क्योंकि वहां दो गोदामों में रखा काला बारूद अभी भी एक बड़ा खतरा बना हुआ है। शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, यह धमाका लियुयांग में &#039;हुआशेंग फायरवर्क्स मैन्युफैक्चरिंग एंड डिस्प्ले कंपनी&#039; की एक वर्कशॉप में हुआ। लियुयांग पटाखों के उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र है। चीनी सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो फुटेज में घटनास्थल से सफेद धुएं के घने बादल उठते हुए दिखाई दे रहे थे।इसे भी पढ़ें: जामनगर टाडा कोर्ट का बड़ा फैसला: 1993 हथियार तस्करी कांड में 12 दोषी करार, दाऊद इब्राहिम की साजिश का हुआ पर्दाफाश धमाके के असर से आस-पास के गांवों में घरों के दरवाज़े और खिड़कियां टूट गईं; लोगों ने बताया कि सड़कों पर बड़े-बड़े पत्थरों समेत मलबा बिखरा पड़ा था। सुरक्षा चिंताओं के चलते कुछ गांव वाले उस इलाके को छोड़कर चले गए। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने इस घटना की तत्काल और पूरी जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे लापता लोगों को ढूंढने और घायलों का इलाज करने के प्रयासों को तेज़ करें।&#039;साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट&#039; की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने प्रमुख उद्योगों में जोखिम की जांच और खतरों को नियंत्रित करने के लिए और भी सख्त कदम उठाने की अपील की है, साथ ही लोगों की जान और माल की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक सुरक्षा प्रबंधन को बेहतर बनाने पर भी ज़ोर दिया है।चीन के आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय ने बचाव और राहत कार्यों की देखरेख के लिए एक टीम को घटनास्थल पर भेजा है।इस बीच, लियुयांग पुलिस ने धमाके के कारणों की चल रही जांच के सिलसिले में कंपनी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को हिरासत में ले लिया है। बचाव अभियान के दौरान किसी और धमाके को रोकने के लिए, दमकलकर्मी घटनास्थल पर पानी की बौछारें (वॉटर कैनन) मार रहे हैं, जबकि तलाशी अभियान में मदद के लिए तीन बचाव रोबोट भी तैनात किए गए हैं। यह घटना चीन के हुबेई प्रांत में पटाखों की एक दुकान में हुए एक अलग धमाके के तीन महीने से भी कम समय बाद हुई है, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई थी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:27 +0530</pubDate>
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<title>UAE पर ईरान का मिसाइल हमला, तेल रिफाइनरी में लगी भीषण आग, स्कूल&#45;कॉलेज हुए ऑनलाइन</title>
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<description><![CDATA[ खाड़ी क्षेत्र में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर ईरान की ओर से बड़ा मिसाइल और ड्रोन हमला किया गया। यह हमला 8 अप्रैल को हुए नाजुक युद्धविराम के बाद पहली बार हुआ है, जिसने क्षेत्र में &#039;अघोषित युद्ध&#039; की आहट दे दी है। सुरक्षा और एहतियात के मद्देनजर UAE सरकार ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों को अस्थायी रूप से ऑनलाइन मोड पर स्थानांतरित कर दिया है।  ताजा अपडेट- UAE ने कहा कि उस पर ईरान की तरफ से मिसाइलों और ड्रोनों की बौछार की गईUAE के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, &quot;ये हमले एक खतरनाक बढ़ोतरी और एक अस्वीकार्य उल्लंघन हैं, जो देश की सुरक्षा, स्थिरता और उसके इलाकों की हिफाज़त के लिए सीधा खतरा पैदा करते हैं।&quot; ईरान की तरफ से किए गए एक ड्रोन हमले के बाद UAE के एक बड़े तेल उद्योग क्षेत्र में आग लग गई, जिससे तीन भारतीय घायल हो गए।रक्षा प्रणाली ने रोके 12 बैलिस्टिक मिसाइलUAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उनकी उन्नत हवाई रक्षा प्रणालियों ने ईरान की ओर से दागी गई 12 बैलिस्टिक मिसाइलों, तीन क्रूज मिसाइलों और चार ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया। हालांकि, इस हमले के मलबे और कुछ हमलों के कारण फुजैराह स्थित &#039;फुजैराह पेट्रोलियम इंडस्ट्रीज ज़ोन&#039; में भीषण आग लग गई। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस घटना में तीन भारतीय नागरिक मामूली रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसे भी पढ़ें: &#039;गंगोत्री से गंगासागर तक खिला कमल&#039;, बंगाल की जीत पर पीएम मोदी का &#039;बदले के बजाय बदलाव&#039; का संदेश | PM Narendra Modi Full Speechमुख्य घटनाक्रम: क्या हुआ सोमवार को?तनाव की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने का प्रयास किया। यह जलमार्ग 28 फरवरी से अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के कारण बंद पड़ा है।समुद्री संघर्ष: अमेरिकी सेना ने ईरानी सेना की छह छोटी नावों को डुबो दिया, जो कथित तौर पर नागरिक जहाजों को निशाना बना रही थीं।टैंकर पर हमला: UAE की कंपनी ADNOC के &#039;बराका&#039; तेल टैंकर पर दो ड्रोन से हमला किया गया। UAE ने इसे &quot;समुद्री डकैती&quot; करार दिया है।ईरान की चेतावनी: ईरान की सैन्य कमान ने स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करती है, तो उन पर हमला किया जाएगा।कूटनीतिक तकरार और आरोप-प्रत्यारोपUAE के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे &quot;आतंकवादी और बिना उकसावे का हमला&quot; बताया है। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए &quot;वैध रूप से जवाब देने का अधिकार&quot; सुरक्षित रखता है। दूसरी ओर, ईरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार: &quot;ईरान का तेल सुविधाओं पर हमला करने का कोई इरादा नहीं था। यह घटना अमेरिकी सेना की मनमानी और अवैध आवाजाही का परिणाम है।&quot; अर्ध-सरकारी एजेंसी तस्नीम ने यहाँ तक चेतावनी दी कि यदि UAE ने कोई जवाबी कार्रवाई की, तो उसके सभी आर्थिक और रणनीतिक हित ईरान के निशाने पर होंगे। इसे भी पढ़ें: भीषण विस्फोट, चीन में 21 की मौत! तपती गर्मी में कौन बना China का नया दुश्मन?आम जनजीवन पर असरमिसाइल हमलों की खबरों के बाद पूरे UAE में मोबाइल फोन पर आपातकालीन अलर्ट बजने लगे। दुबई में रह रही पत्रकार नताशा तुराक के अनुसार, &quot;लोग इस घटना से निराश और क्रोधित हैं। युद्धविराम के बाद शांति की उम्मीद थी, लेकिन बुनियादी विवाद (परमाणु कार्यक्रम और जलडमरूमध्य पर वर्चस्व) अभी भी अनसुलझे हैं।&quot;शिक्षा क्षेत्र में बदलावसुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, सरकार ने तत्काल प्रभाव से शिक्षण संस्थानों को भौतिक रूप से बंद कर दिया है। अब छात्र घर बैठे ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए पढ़ाई करेंगे।पृष्ठभूमि: क्यों विफल हो रहा है युद्धविराम?पाकिस्तान की मध्यस्थता से 8 अप्रैल को हुआ युद्धविराम काफी कमजोर साबित हो रहा है। 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई सीधी बातचीत में किसी भी स्थायी शांति समझौते पर सहमति नहीं बन पाई थी। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा संघर्ष-विराम को आगे बढ़ाने के बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं।फुजैराह की तेल रिफाइनरी में लगी आग बुझाने के प्रयास जारी हैं, लेकिन खाड़ी देशों में इस हमले ने युद्ध के नए मोर्चे खुलने का डर पैदा कर दिया है। विश्व की नजरें अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:26 +0530</pubDate>
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<title>UAE Fujairah Attack | 3 भारतीयों के घायल होने पर भारत सख्त, विदेश मंत्रालय ने कहा&#45; &amp;apos;यह कतई स्वीकार्य नहीं&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह में हुए संदिग्ध ड्रोन हमले पर भारत ने कड़ी कूटनीतिक प्रतिक्रिया दी है। इस हमले में तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए हैं, जिसे भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने &#039;अस्वीकार्य&#039; और &#039;बेहद चिंताजनक&#039; करार दिया है। भारत ने क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए तत्काल शत्रुता रोकने और कूटनीति का रास्ता अपनाने पर जोर दिया है। विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे और निर्दोष लोगों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के खिलाफ है। इसे भी पढ़ें: &#039;गुंडे घुसे, मुझे पीटा&#039;, भवानीपुर में हार पर ममता बनर्जी का सनसनीखेज दावा, फोन कॉल वायरल MEA ने एक बयान में कहा, &quot;फुजैराह पर हुआ हमला, जिसके परिणामस्वरूप तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं, अस्वीकार्य है। हम इन शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को तुरंत रोकने और नागरिक बुनियादी ढांचे तथा निर्दोष नागरिकों को निशाना न बनाने की अपील करते हैं। भारत इस स्थिति से निपटने के लिए बातचीत और कूटनीति का समर्थन करता रहेगा, ताकि पूरे पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाल हो सके। हम अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर स्वतंत्र और बिना किसी रुकावट के आवागमन और व्यापार की भी अपील करते हैं। भारत मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करने के लिए तैयार है।&quot;सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात में एक तेल भंडारण केंद्र पर आग लगने से तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए। यह घटना फुजैराह पेट्रोलियम इंडस्ट्रीज ज़ोन (FOIZ) में हुई और माना जा रहा है कि यह एक ड्रोन हमले के कारण हुई थी।UAE में भारतीय दूतावास ने घटना की पुष्टि कीX (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किए गए एक बयान में, UAE में भारतीय दूतावास ने घायलों की पुष्टि की और कहा कि वह स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रभावित व्यक्तियों को उचित चिकित्सा उपचार और सहायता मिले। पोस्ट में लिखा था, &quot;फुजैराह में आज हुए हमलों में तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए हैं। हम प्रभावित भारतीय नागरिकों की उचित चिकित्सा देखभाल और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं।&quot; इसे भी पढ़ें: मीडिया गुरु प्रो. (डॉ.) केजी सुरेश पर शोध, राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने अंकित पांडेय को प्रदान की पीएचडी उपाधिUAE की सरकारी समाचार एजेंसी WAM ने बताया कि फुजैराह के अधिकारियों ने कहा कि आग एक ड्रोन हमले के बाद लगी, जिसके ईरान से आने का संदेह है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फुजैराह सिविल डिफेंस की आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों को तुरंत तैनात किया गया।खलीज टाइम्स सहित विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, घायल हुए तीनों भारतीय नागरिकों को मध्यम चोटें आई हैं। उन्हें पास के एक अस्पताल में ले जाया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:26 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान ने दिखाई मानवता? Pakistan Navy ने अरब सागर में फंसे भारतीय पोत को दी आपात सहायता</title>
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<description><![CDATA[ समुद्र की लहरों के बीच तनाव को किनारे रखकर मानवता की एक नई मिसाल देखने को मिली है। पाकिस्तानी नौसेना ने अरब सागर में तकनीकी खराबी के कारण फंसे एक भारतीय व्यापारिक पोत के चालक दल को महत्वपूर्ण मानवीय और तकनीकी सहायता प्रदान की है। इस अभियान में पाकिस्तानी नौसेना के साथ पाकिस्तान समुद्री सुरक्षा एजेंसी (PMSA) ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। समाचारपत्र ‘डॉन’ ने सोमवार को प्रकाशित अपनी एक खबर में सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया गया कि बचाव और सहायता अभियान में नौसेना की सहायता पाकिस्तान समुद्री सुरक्षा एजेंसी (पीएमएसए) ने की।इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Government Formation | बहुमत से 10 कदम दूर विजय की TVK, सरकार बनाने के लिए गवर्नर से मांगा समय  खबर में कहा गया कि मुंबई स्थित समुद्री बचाव एवं समन्वय केंद्र ने पाकिस्तानी प्राधिकारियों से संपर्क कर सहायता का अनुरोध किया था जिसके बाद चालक दल की सहायता के लिए अभियान शुरू किया गया।
 इस चालक दल में छह भारतीय और एक इंडोनेशियाई नागरिक शामिल थे।
 सूत्रों ने बताया कि ओमान से भारत जा रहे एम.वी. गौतम नामक पोत के चालक दल ने तकनीकी खराबी की सूचना दी।इसे भी पढ़ें: &#039;गुंडे घुसे, मुझे पीटा&#039;, भवानीपुर में हार पर ममता बनर्जी का सनसनीखेज दावा, फोन कॉल वायरल
 खबर में कहा गया है कि फंसे हुए चालक दल को भोजन, चिकित्सा और तकनीकी सहित आपात सहायता प्रदान की गई। यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तानी नौसेना ने इस तरह का बचाव अभियान चलाया हो। पिछले महीने भी अरब सागर में संकट की सूचना मिलने के बाद, पाकिस्तानी नौसेना ने एक व्यापारिक पोत से विदेशी नागरिकों सहित चालक दल के 18 सदस्यों को सुरक्षित बचाया था। समुद्री कानून और मानवीय आधार पर किए गए इस बचाव कार्य की सराहना की जा रही है, क्योंकि यह समुद्र में सुरक्षा और सहयोग के अंतरराष्ट्रीय मानदंडों को मजबूती प्रदान करता है।   ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Prabhasakshi NewsRoom: Hormuz में जंग का बिगुल! Iran का UAE पर बड़ा हमला, America ने किया पलटवार</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्र में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है, जब ईरान ने संघर्ष विराम लागू होने के बाद पहली बार संयुक्त अरब अमीरात पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। इस घटनाक्रम ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को चुनौती दी है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी गहरा प्रभाव डाला है। सोमवार को हुए इस हमले में ईरान ने कई मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिनमें से अधिकांश को संयुक्त अरब अमीरात की वायु रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया। हालांकि कुछ हमले सफल रहे, जिनमें फुजैरा के एक महत्वपूर्ण तेल प्रतिष्ठान पर ड्रोन गिरा, जिससे आग लग गई और तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए। इन घायलों की स्थिति गंभीर बताई गई है और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई।यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब जलडमरूमध्य हरमुज को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि विश्व के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग पर नियंत्रण और अमेरिका द्वारा इसे खोलने के प्रयास ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।इसे भी पढ़ें: UAE पर ईरान का मिसाइल हमला, तेल रिफाइनरी में लगी भीषण आग, स्कूल-कॉलेज हुए ऑनलाइनइस बीच, अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरानी हमलों को नाकाम करते हुए कई ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराया और छह ईरानी नौकाओं को नष्ट कर दिया, जो नागरिक जहाजों को निशाना बना रही थीं। अमेरिकी कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, उनकी सेना ने हर खतरे को सफलतापूर्वक विफल किया और समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाया।साथ ही अमेरिका ने &quot;प्रोजेक्ट फ्रीडम&quot; नामक अभियान के तहत फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे मानवीय पहल बताया है, जिसका उद्देश्य उन जहाजों और नाविकों की सहायता करना है जो कई दिनों से खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं। हालांकि, ईरान ने इस कदम को संघर्ष विराम का उल्लंघन बताते हुए इसका विरोध किया है। ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी भी जहाज की आवाजाही उसकी अनुमति के बिना संभव नहीं है। ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि किसी भी विदेशी सैन्य बल द्वारा इस क्षेत्र में प्रवेश करने पर उसे निशाना बनाया जाएगा। इसके साथ ही ईरान ने अपने नियंत्रण क्षेत्र का विस्तार दिखाते हुए एक नक्शा भी जारी किया है, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात के तटों तक उसका प्रभाव बताया गया है।दूसरी ओर, संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के इस हमले की कड़ी निंदा की है। वहां के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना और समुद्री मार्ग को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करना समुद्री डकैती के समान है। उधर, ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया ने भी अपने जहाजों पर हमलों की पुष्टि की है। कुछ जहाजों में आग लगने और विस्फोट की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने फिलहाल इस मार्ग से गुजरने से इंकार कर दिया है, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है।इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतों में पांच प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे कई देशों में ईंधन महंगा हो गया है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे वहां की आंतरिक राजनीति पर भी दबाव बढ़ रहा है।भारत ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है, खासकर इसलिए क्योंकि हमले में उसके तीन नागरिक घायल हुए हैं। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, हिंसा रोकने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। साथ ही उसने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार जलमार्ग में निर्बाध व्यापार और आवागमन सुनिश्चित करने की मांग की है।इस बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव केवल सैन्य शक्ति का नहीं बल्कि रणनीतिक नियंत्रण का भी है। जहां अमेरिका अपनी नौसैनिक ताकत के बल पर समुद्री मार्ग खोलना चाहता है, वहीं ईरान अपनी भौगोलिक स्थिति और सैन्य संसाधनों के जरिए इस क्षेत्र में प्रभाव बनाए रखना चाहता है। हालांकि दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की कोशिशें जारी हैं, लेकिन ताजा घटनाओं ने इन प्रयासों को कमजोर कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि इस संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है और केवल बातचीत ही इसका रास्ता है। कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया का यह संकट एक बार फिर वैश्विक चिंता का कारण बन गया है। यदि जल्द ही कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका प्रभाव न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर गंभीर हो सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Iran का भीषण हमला, 3 भारतीय घायल, अब होगा तगड़ा एक्शन!</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे जिस सीजफायर को लेकर दुनिया ने राहत की सांस ली थी वो अब टूटने की कगार पर है क्योंकि ईरान ने संयुक्त अरब अमरात पर हमले शुरू कर दिए। इस ड्रोन हमले ने ना केवल क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है बल्कि भारत की चिंता भी बढ़ा दी क्योंकि इस हमले में तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए हैं। खबरों के मुताबिक ईरान का यह हमला यूएई के पुजेरा पेट्रोलियम इंडस्ट्रीज जोन को निशाना बनाकर किया गया था। ड्रोन के टकराते ही वहां एक ऑयल प्लांट में भीषण आग लग गई। आसमान में धुएं के गुब्बार देखे गए और चारों तरफ अफरातफरी मच गई। वहीं यूएई के रक्षा मंत्रालय ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि ईरान के हमले के बाद स्थिति काफी गंभीर थी। उनकी एयर डिफेंस ने 12 बैलेस्टिक मिसाइलों, चार ड्रोन और तीन क्रूज मिसाइलों को रास्ते में ही रोक दिया। लेकिन इसके बावजूद तेल क्षेत्र में नुकसान हुआ। इस हमले की सबसे दुखद खबर यह रही कि इसमें काम कर रहे तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए। इसे भी पढ़ें: UAE Fujairah Attack | 3 भारतीयों के घायल होने पर भारत सख्त, विदेश मंत्रालय ने कहा- &#039;यह कतई स्वीकार्य नहीं&#039;अबू धाबी में स्थित भारतीय दूतावास ने इस हमले पर तुरंत सक्रियता दिखाई। दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा पुजारा में हुए हमलों में तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं। हम प्रभावित भारतीयों की उचित मेडिकल देखभाल और उनके वेलफेयर के लिए स्थानीय अधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं। गनीमत यह रही कि इन तीन भारतीयों को मामूली चोटें आई हैं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। अब एक सवाल कि ईरान ने फुलेरा को निशाना क्यों बनाया? तो आपको बता दें दरअसल पुलेरा यूएई के लिए रणनीतिक रूप से बहुत अहम है। यह उस पाइपलाइन का अंतिम छोर है जिसका इस्तेमाल यूएई तब करता है जब उसे हुरमुस स्टेट के रास्ते से बचना होता है। पुराने युद्धों के दौरान भी ईरान ने जबजब हुरमुस के समुद्री रास्तों को रोकने की कोशिश की। तब इसी फजेरा पाइपलाइन ने यूएई के तेल व्यापार को जिंदा रखा। इसलिए इस पर हमला करना सीधे तौर पर यूएई की आर्थिक कमर पर वार करने जैसा है। इसे भी पढ़ें: UAE Missile Alert: सोमवार को दो बार बजे आपातकालीन सायरन, तनाव के बीच अधिकारी मौनहालांकि कल का दिन यूएई के निवासियों के लिए काफी खौफनाक भी रहा। युद्ध विराम लागू होने के बाद पहली बार देश भर में आपातकालीन सायरन गूंजे। लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की चेतावनी दी गई। हालांकि बाद में स्थिति को नियंत्रण में बताकर सायरन बंद कर दिए गए। लेकिन इस घटना ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया। और अगर देखा जाए तो जब से ईरान और यूएई के बीच यह टकराव शुरू हुआ तब से अब तक यूएई की एयर डिफेंस सिस्टम ने कुल 549 बैलेस्टिक मिसाइलें और लगभग 2000 से ज्यादा ड्रोंस मार गिराए। कुल मिलाकर जंग यह भले ही ईरान और अमेरिका के बीच की दिख रही है। लेकिन इस जंग में पूरा मिडिल ईस्ट सुलग रहा है और कहीं ना कहीं इससे भारत भी अछूता नहीं। यह पहली बार नहीं है जब इस जंग में भारत किसी भी तरह से प्रभावित हुआ। इससे पहले स्टेट ऑफ होर्मस में भारतीय व्यापारिक जहाजों पर गोलीबारी की घटनाएं हो चुकी हैं। इतना ही नहीं पहले भी ईरानी हमलों की चपेट में आने से भारतीय नागरिकों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं। क्योंकि खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:23 +0530</pubDate>
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<title>भारत के खजाने में 800 अरब डॉलर कौन डालेगा? Morgan Stanley का होश उड़ाने वाला खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया युद्ध की आग में हर रोज जल रही है। चाहे पश्चिम एशिया की धक हो या फिर रूस यूक्रेन की भयंकर तबाही। लेकिन अब इन महासंकटों के बीच भारत ने एक ऐसा आर्थिक ब्रह्मास्त्र चला है जिससे पूरी दुनिया हैरान हो गई। दरअसल आज भारत केवल एक मुखदर्शक नहीं है बल्कि विश्व मित्र की भूमिका में है। जहां एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शांति का संदेश देते हैं। वहीं दूसरी तरफ हमारे यानी भारत के प्रवासी भारतीय अपनी मेहनत से देश की नींव मजबूत कर रहे हैं। यही वजह है कि मॉ्गन स्टैनली की ताजा रिपोर्ट भारत की इसी बढ़ती साख की गवाही दे रही है। बिल्कुल विदेश से पैसा घर भेजने के मामले में भारतीय प्रवासियों ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। भारत को मिलने वाली रेमिटेंस यानी प्रवासियों द्वारा भेजा गया धन 138 बिलियन पहुंचने का अनुमान है। यह पिछले साल से 15% अधिक हैं। यह विशाल धनराशि हमारे व्यापार घाटे का 40 से 45% हिस्सा अकेले संभाल लेती है।  इसे भी पढ़ें: Iran का भीषण हमला, 3 भारतीय घायल, अब होगा तगड़ा एक्शन!भारत जो बाहर से खरीदता है उसका आधा भुगतान हमारे विदेशों में बैठे वीर सिपाही या फिर आप इन्हें श्रमिक कह सकते हैं वो कर देते हैं। वैसे अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। जीसीसी देशों यानी कि यूएई, सऊदी अरब, क़तर में काम कर रहे लाखों भारतीयों के रोजगार पर खतरा मंडराता दिख रहा है। पर्यटन, लॉजिस्टिक और निर्माण जैसे क्षेत्रों में सुस्ती दिखाई दे रही है और एक समय था जब भारत पूरी तरह खाड़ी देशों पर निर्भर था। लेकिन अब खेल पलट चुका है। यूएसए और विकसित देशों से अब कुल रेमिटेंस का 42% हिस्सा आ रहा है और भारतीय अब सिर्फ मजदूरी नहीं बल्कि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों और अर्थव्यवस्थाओं को चला रहे हैं। लेकिन केरल जैसे राज्यों के लिए यह खबर चिंताजनक है जहां की 20% रेमिटेंस सीधे खाड़ी देशों से आती है। अगर युद्ध लंबा खिसता है तो हमें एक होम कमिंग पॉलिसी की जरूरत होगी ताकि लौटने वाले हुनरमन भारतीयों को देश के निर्माण में लगाया जा सके। इसे भी पढ़ें: अब परमाणु युद्ध के साये में दुनिया! ट्रंप ने ठुकराई शांति की आखिरी गुहार, अमेरिका ने अरब सहयोगियों को थमाए महाविनाशक हथियारवैसे रेमिटेंस पर आरबीआई के पुराने सर्वे के मुताबिक कुल रकम में से ज्यादातर इस्तेमाल पारिवारिक जरूरतों के लिए किया जाता है। कुछ रकम को डिपॉजिट और निवेश के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है और इस तिमाही में रेमिटेंस बढ़ने की एक वजह यह भी है कि त्योहारों और शादियों की वजह से इस दौरान प्रवासी भारतीय काफी रकम अपने घर भेज रहे हैं। खैर भारत की असली ताकत उसकी सेना के साथ-साथ उसकी आर्थिक रीड भी है और मॉर्गन स्टैनली की ये रिपोर्ट हमें सचेत करती है और गौरवान्वित भी करती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Balochistan में पड़ गई चीन को लात, तगड़ी फिल्डिंग लगा घुस गया अमेरिका</title>
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<description><![CDATA[ बलूचिस्तान को लेकर एक बार फिर जबरदस्त बवाल मचा हुआ और इस बार यह मामला सिर्फ स्थानीय शांति तक सीमित नहीं बल्कि इसमें चीन, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच चल रहा खेल खुलकर सामने आ गया। बलूचिस्तान पहले से अस्थिर रहा है, लेकिन अब यहां की शांति और भी विस्फोटक होती जा रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने अपने खनन क्षेत्र में अमेरिका को बड़ी हिस्सेदारी देने का फैसला कर लिया है। यानी साफ अब वो चीन के साथ-साथ अमेरिका को भी मैदान में उतार कर खेल बदलना चाहता है। रिपोर्ट के मुताबिक इस नई डील की शुरुआत एक बेहद दिलचस्प तरीके से हुई। पिछले साल पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को रत्नों से भरा एक खास तोहफा दिया था। हालांकि इसकी तस्वीर भी सोशल मीडिया पर बड़ी वायरल हुई। यह सिर्फ एक गिफ्ट नहीं था बल्कि एक संकेत था कि बलूचिस्तान की जमीन में छुपे सोने और तांबे के भंडार से अमेरिका अरबों डॉलर कमा सकता है। इसे भी पढ़ें: Middle East संकट का हल निकालने की कवायद, Pakistan के जरिए Iran-US में पर्दे के पीछे बातचीतइसके बाद करीब 1.3 बिलियन डॉलर के निवेश की राह खुली। हालांकि आपको बता दें बलूचिस्तान में चीन लंबे वक्त से कई बड़े प्रोजेक्ट चला रहा है। कई सालों तक पाकिस्तान और चीन ने मिलकर इस इलाके में विकास के नाम पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट चलाए। चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के जरिए चीन ने यहां भारी निवेश भी किया और इसे अपने वैश्विक नेटवर्क का अहम हिस्सा बनाने की कोशिश की। लेकिन चीन ने जो गलती की थी शायद अब अमेरिका भी वही गलती करने जा रहा है। चीन बलूचिस्तान में तो घुस गया लेकिन बलोच लोगों से ना तो उसका प्रोजेक्ट सुरक्षित रहा और ना ही उसके इंजीनियर्स। लंबे समय से वहां की बलोच लिबरेशन आर्मी चीन के इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रही है और इस विरोध में कई चीनी इंजीनियर्स और पाकिस्तानी सैनिक मारे जा चुके हैं। और वहीं अमेरिका से जिस डील को पाकिस्तान गेम चेंजर मान रहा था अब वो भी हिंसा की आग में फंस चुका है। क्योंकि पिछले एक साल में बलोच लिबरेशन आर्मी ने वहां पर कई बड़े हमले किए हैं। हाल ही में बीएलए ने 12 इलाकों में 18 जगहों को निशाना बनाया था। जिसमें 58 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। ये हमले खासतौर पर उन रास्तों पर हुए जो रिकोडक खदान की तरफ जाते हैं। यानी सीधे-सीधे पाकिस्तान के इस बड़े प्रोजेक्ट को चुनौती। इसे भी पढ़ें: Pakistan पर चीन का होश उड़ाने वाला दावा, बैठे-बिठाए जीत गया भारतअब हालात यह है कि जिन विदेशी ताकतों को पाकिस्तान यहां लाकर ताकत दिखाना चाहता था। वही अब डरने लगी हैं। बैरिक गोल्ड जैसी कंपनियों ने भी सुरक्षा हालात खराब होने के चलते अपने प्रोजेक्ट धीमे कर दिए हैं। इस पूरे विवाद का एक और खतरनाक पहलू है बदलता हुआ विद्रोह। पहले यह आंदोलन सीमित था लेकिन अब पढ़े लिखे बलोच युवा भी इसमें शामिल हो रहे हैं। उन्हें लगता है कि उनकी जमीन से संसाधन निकालकर बाहरी ताकतों को बेचा जा रहा है। ऊपर से मानवाधिकार उल्लंघन और जबरन गायब किए गए लोगों के आरोप इस आग में और घी डाल रहे हैं। कुल मिलाकर पहले तो पाकिस्तान ने चीन को झटका दिया। अमेरिका को एक तरह से बलूचिस्तान में घुसाने का फैसला लिया और अब बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के कई हमलों ने एक तरह से चीन और अमेरिका की गर्दन यहां पर फंसा दी है। कुल मिलाकर बलूचिस्तान अब सिर्फ एक खनिज क्षेत्र नहीं रहा। यह एक जंग का मैदान बन चुका है। चीन, अमेरिका और पाकिस्तान तीनों अपनी जगह अपनी चाल चल रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:21 +0530</pubDate>
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<title>UAE पर हमले के बाद PM Modi का संदेश, कहा&#45; भारत पूरी एकजुटता से आपके साथ है</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में एक तेल उद्योग परिसर पर ईरानी हमलों की निंदा की, जिसमें तीन भारतीय घायल हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने को अस्वीकार्य बताया। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह पेट्रोलियम इंडस्ट्रीज जोन को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाया गया। यह हमला अमेरिकी प्रशासन द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए शुरू की गई परियोजना &#039;प्रोजेक्ट फ्रीडम&#039; के तुरंत बाद हुआ। ईरान ने पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर रखा है। मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा यूएई पर हुए हमलों की मैं कड़ी निंदा करता हूं, जिनमें तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं। नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना अस्वीकार्य है। उन्होंने आगे कहा कि भारत यूएई के साथ पूरी तरह एकजुट है और संवाद और कूटनीति के माध्यम से सभी मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपना समर्थन दोहराता है। इसे भी पढ़ें: UAE पर ईरान का मिसाइल हमला, तेल रिफाइनरी में लगी भीषण आग, स्कूल-कॉलेज हुए ऑनलाइनमोदी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। इससे पहले, विदेश मंत्रालय के एक बयान में भी फुजैराह पर हुए हमले को अस्वीकार्य बताया गया था। बयान में कहा गया, हम इन शत्रुताओं को तत्काल समाप्त करने और नागरिक बुनियादी ढांचे और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने को रोकने का आह्वान करते हैं। मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाल करने और स्थिति से निपटने के लिए संवाद और कूटनीति के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया। इसने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध नौवहन और व्यापार का आह्वान किया और कहा कि भारत समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान के सभी प्रयासों का समर्थन करने के लिए तत्पर है।इसे भी पढ़ें: भारत के खजाने में 800 अरब डॉलर कौन डालेगा? Morgan Stanley का होश उड़ाने वाला खुलासाप्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट और विदेश मंत्रालय के बयान दोनों में ईरान का सीधा जिक्र नहीं किया गया। संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान पर सोमवार को मिसाइलों और ड्रोन हमलों का आरोप लगाया है, जिसमें पूर्वी अमीरात फुजैराह में तेल उद्योग परिसर पर हमला भी शामिल है। फुजैराह पेट्रोलियम इंडस्ट्रीज जोन में लगी भीषण आग में तीन भारतीय मामूली रूप से घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:21 +0530</pubDate>
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<title>UAE की नई रणनीति: Global Talent और Investors को लुभाने के लिए Golden Visa में बड़े बदलाव</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त अरब अमीरात ने वैश्विक निवेशकों और उद्यमियों को आकर्षित करने के उद्देश्य से अपने गोल्डन वीज़ा सिस्टम में बड़े बदलाव किए हैं। एक नए निवेशक पोर्टल के साथ, यूएई ने आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया है और साथ ही स्टार्टअप और छोटे व्यवसायों के लिए नए प्रोत्साहन भी पेश किए हैं। दीर्घकालिक निवास कार्यक्रम विदेशी नागरिकों को स्थानीय प्रायोजक के बिना यूएई में रहने और काम करने की अनुमति देता है। इस बदलाव का एक प्रमुख आकर्षण लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) पर ध्यान केंद्रित करना है, जिसमें निवेश से जुड़े रास्ते और तेज़ प्रक्रिया शामिल हैं, जो व्यापार वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। यह कदम यूएई की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह खुद को नवाचार, प्रतिभा और पूंजी के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहता है।इसे भी पढ़ें: UAE Missile Alert: सोमवार को दो बार बजे आपातकालीन सायरन, तनाव के बीच अधिकारी मौनदुबई ने अपने 2 वर्षीय संपत्ति-आधारित निवास वीज़ा को अब और भी सुलभ बना दिया है। पहले, खरीदारों को कम से कम 7.5 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का निवेश करना पड़ता था। अब, एकल संपत्ति मालिकों के लिए यह नियम हटा दिया गया है, जिससे कम निवेश के साथ भी अधिक निवेशक निवास के लिए पात्र हो सकेंगे।एकल खरीदारों के लिए बड़ी राहतयदि आप दुबई में किसी संपत्ति के एकमात्र मालिक हैं, तो अब न्यूनतम मूल्य की कोई आवश्यकता नहीं है। इस महत्वपूर्ण बदलाव से प्रवेश की बाधा कम हो गई है और निवेशक कम बजट में भी घर खरीद सकते हैं और फिर भी 2 वर्षीय यूएई निवास वीज़ा के लिए पात्र हो सकते हैं।दुबई संयुक्त संपत्ति वीजा नियमसंयुक्त स्वामित्व वाली संपत्तियों के लिए, प्रत्येक निवेशक के पास कम से कम 4 लाख एईडी का हिस्सा होना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होता है कि नियमों में ढील दिए जाने के बावजूद, सह-मालिक निवास लाभ प्राप्त करने के लिए एक सार्थक निवेश हिस्सेदारी बनाए रखें।भारतीयों के लिए दुबई रियल एस्टेटभारतीय निवेशक अक्सर उभरते क्षेत्रों में स्टूडियो और 1BHK जैसे किफायती घरों को प्राथमिकता देते हैं। पहले, संपत्ति के कम मूल्यों के कारण ये खरीदार वीजा पात्रता से वंचित रह जाते थे। अब, वे दुबई में किफायती निवेश को निवास लाभ के साथ जोड़ सकते हैं।केवल कम कीमतों पर नहीं, प्रतिफल पर ध्यान देंविशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशकों को अंधाधुंध सस्ती संपत्तियां खरीदने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। समझदार खरीदार किराये से होने वाली आय, कनेक्टिविटी और दीर्घकालिक विकास का मूल्यांकन कर रहे हैं। ध्यान केवल सामर्थ्य से हटकर समग्र निवेश गुणवत्ता और जीवनशैली मूल्य पर केंद्रित हो रहा है।दुबई संपत्ति निवेशक वीजा कैसे प्राप्त करें: चरण-दर-चरण प्रक्रियाइस प्रक्रिया में संपत्ति सत्यापन, आवेदन स्वीकृति, चिकित्सा परीक्षण, अमीरात आईडी जारी करना और वीजा स्टैंपिंग शामिल है। इसे यूएई में रियल एस्टेट निवेश के माध्यम से निवास प्राप्त करने के सबसे सरल और तेज तरीकों में से एक माना जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:20 +0530</pubDate>
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<title>पाक सेना ने हाफिज सईद&#45;मसूद अजहर के लिए लड़ी लड़ाई, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पड़ोसी देश का सबसे बड़ा कबूलनामा सुना आपने?</title>
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<description><![CDATA[ ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी से कुछ दिन पहले, लश्कर-ए-तैबा से जुड़े एक कार्यक्रम में एक पाकिस्तानी नेता की कथित टिप्पणियों ने आतंकी समूहों के साथ पाकिस्तान के संबंधों की फिर से जांच शुरू कर दी है। नेता ने दावा किया कि पिछले साल भारत द्वारा हाफ़िज़ सईद और मसूद अज़हर जैसे नामित आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद पाकिस्तानी सेना ने उनके लिए लड़ाई लड़ी। पाकिस्तानी नेता शाहिर सियालवी ने कथित तौर पर लश्कर-ए-तैबा से जुड़े एक कार्यक्रम में ये टिप्पणियां कीं, जहां उन्होंने कहा कि &quot;पहली बार पाकिस्तानी सेना ने हाफ़िज़ सईद और मसूद अज़हर के लिए लड़ाई लड़ी। लश्कर-ए-तैबा के संस्थापक हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी हैं। खबरों के अनुसार, इस कार्यक्रम में मुज़म्मिल इकबाल हाशमी भी शामिल थे, जिन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका ने आतंकवादी घोषित किया है। सियालवी ने कथित तौर पर यह भी कहा कि भारत ने मुरीदके और बहावलपुर में उन ठिकानों पर हमले किए थे, जहां कई आतंकवादी मारे गए थे। उन्होंने दावा किया कि हमलों के बाद, पाकिस्तान ने अपने संदेश में बदलाव करते हुए मारे गए लोगों को आतंकवादी के बजाय &quot;स्वतंत्रता सेनानी&quot; के रूप में पेश किया।इसे भी पढ़ें: Balochistan में पड़ गई चीन को लात, तगड़ी फिल्डिंग लगा घुस गया अमेरिकाहमलों के बाद अंतिम संस्कार को लेकर दावेरिपोर्ट किए गए बयानों के अनुसार, मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार मौलवियों द्वारा नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना के धार्मिक अधिकारियों द्वारा किए गए थे। सियालवी ने आगे दावा किया कि वर्दीधारी कर्मियों ने शवों को कंधा दिया, जिसे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संकेत देने का प्रयास बताया कि मृतक आतंकवादी नहीं बल्कि एक उद्देश्य के लिए लड़ने वाले &quot;योद्धा&quot; थे। यदि ये बयान सत्यापित होते हैं, तो इससे भारत के उस पुराने आरोप को और बल मिलने की संभावना है कि पाकिस्तान का सैन्य प्रतिष्ठान अपनी धरती से संचालित आतंकी संगठनों का समर्थन करता है। ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमलाभारत ने पिछले साल 7 मई को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें 22 अप्रैल को 26 नागरिक मारे गए थे। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया था, जिसमें लश्कर-ए-तैबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े ठिकाने भी शामिल थे। इन हमलों के कारण चार दिनों तक भीषण सैन्य झड़पें हुईं, जो 10 मई को आगे की कार्रवाई रोकने के समझौते के साथ समाप्त हुईं। इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान ने दिखाई मानवता? Pakistan Navy ने अरब सागर में फंसे भारतीय पोत को दी आपात सहायताराजनाथ सिंह ने सैन्य कार्रवाई की सराहना कीइस बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर को आतंकी समूहों और उनके संरक्षकों को करारा प्रहार देने के लिए भारत द्वारा उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी के उपयोग का एक अद्वितीय उदाहरण बताया। नॉर्थ टेक संगोष्ठी के उद्घाटन के अवसर पर बोलते हुए सिंह ने कहा कि इस ऑपरेशन ने संयम और सटीकता दोनों का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों ने आतंकवादियों और उनके संरक्षकों को जो करारा जवाब दिया, उससे पूरा देश गौरवान्वित हुआ। यह अच्छी बात थी कि हमने धैर्य दिखाया और केवल आतंकवादियों को ही नष्ट किया; अन्यथा, पूरी दुनिया जानती है कि हमारी सशस्त्र सेनाएं क्या कर सकती हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस ऑपरेशन ने आतंकी ढांचे को निष्क्रिय करने के लिए उन्नत प्रणालियों और आधुनिक उपकरणों के उपयोग को प्रदर्शित किया।“LeT commander publicly praises Pakistan Army for giving military funerals to terrorists after India’s Operation Sindoor. US-designated terrorist on camera. The nexus is no longer hidden. #OperationSindoor pic.twitter.com/NoynfQM0Kd— South Asia Compass (@SouthAsiaComp) May 5, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:19 +0530</pubDate>
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<title>US का China पर Terror Funding का बड़ा आरोप, Iran को पैसा देना बंद करने की चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान के साथ ऊर्जा संबंध बनाए रखने के लिए चीन पर आतंकवाद के सबसे बड़े प्रायोजक देश को वित्त पोषण&quot; करने का आरोप लगाया है और जोर देकर कहा है कि बीजिंग को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने&quot; के लिए वाशिंगटन की पहलों का समर्थन करना चाहिए। वित्त मंत्री की बीजिंग-तेहरान संबंधों पर यह तीखी आलोचना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के लिए बीजिंग यात्रा से कुछ ही दिन पहले आई है। बेसेंट ने तर्क दिया कि चीन का भारी मात्रा में ऊर्जा आयात सीधे तौर पर ईरानी शासन को मजबूत कर रहा है। बेसेंट ने सोमवार को समाचार चैनल से कहा, ईरान आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक देश है, और चीन उनकी 90 प्रतिशत ऊर्जा खरीद रहा है, इसलिए वे आतंकवाद के सबसे बड़े प्रायोजक देश को वित्त पोषण कर रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Middle East में बढ़ा तनाव, Iran की US को सीधी धमकी- ये तो बस शुरुआत हैबढ़ती बयानबाजी के बावजूद, अमेरिकी अधिकारी ने बीजिंग से अपना रुख बदलने और रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित करने के लिए वाशिंगटन के नेतृत्व वाले अभियान में भाग लेने का आग्रह किया, जो वर्तमान में ईरान द्वारा अवरुद्ध है। क्षेत्रीय अशांति पर प्रकाश डालते हुए बेसेंट ने कहा कि ईरान के हमलों ने जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। हम इसे फिर से खोल रहे हैं। इसलिए मैं चीन से आग्रह करूंगा कि वह इस अंतरराष्ट्रीय अभियान में हमारा साथ दे। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हाल ही में घोषित &quot;प्रोजेक्ट फ्रीडम&quot; के बाद यह आह्वान किया गया है, जिसका उद्देश्य जलमार्ग में फंसे जहाजों को &quot;मार्गदर्शन&quot; देना है। ट्रंप ने पहले ही तेहरान को इस मिशन में किसी भी प्रकार की बाधा डालने के प्रयास के खिलाफ चेतावनी दी है।इसे भी पढ़ें: Balochistan में पड़ गई चीन को लात, तगड़ी फिल्डिंग लगा घुस गया अमेरिकाबेसेन्ट ने आगे कहा कि अमेरिका स्पष्ट संदेश दे रहा है कि ईरानियों का इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर &quot;कोई नियंत्रण नहीं&quot; है। उन्होंने कहा, &quot;जलडमरूमध्य पर हमारा पूर्ण नियंत्रण है। वित्तीय सचिव ने सुझाव दिया कि चीन को कूटनीतिक सफलता प्राप्त करने के लिए तेहरान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा, &quot;देखते हैं कि वे कूटनीति के माध्यम से आगे बढ़कर ईरानियों को जलडमरूमध्य खोलने के लिए राजी करते हैं या नहीं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:18 +0530</pubDate>
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<title>Balochistan में BLF का बड़ा हमला, 10 ठिकानों को बनाया निशाना, Pakistani सेना को भारी नुकसान का दावा</title>
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<description><![CDATA[ बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) ने रविवार को बलूचिस्तान भर में 10 हमलों की जिम्मेदारी ली है। बलूचिस्तान पोस्ट (टीबीपी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीएफएलएफ ने दावा किया है कि खारान, वाशुक, अवारान, केच और मस्तुंग में हुए हमलों में 10 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी और चार ऐसे व्यक्ति मारे गए हैं जिन्हें उसने राज्य एजेंट बताया है। एक बयान में बीएफएलएफ के प्रवक्ता मेजर ग्वाहरम बलूच ने कहा कि समूह के लड़ाकों ने फ्रंटियर कोर की चौकियों, सैन्य शिविरों, एक काफिले, सड़क निर्माण कंपनी की सुरक्षा में तैनात कर्मियों और उन व्यक्तियों को निशाना बनाया जिन्हें उसने डेथ स्क्वाड एजेंट और राज्य एजेंट करार दिया। टीबीपी की रिपोर्ट के अनुसार, समूह ने यह भी दावा किया कि इन अभियानों के दौरान हथियार जब्त किए गए और निगरानी कैमरे नष्ट कर दिए गए।बीएलएफ ने कहा कि 3 मई को, उसके लड़ाकों ने खारान शहर में गाजी रोड पर स्थित एक एफसी चौकी पर रॉकेट और ग्रेनेड लॉन्चर से हमला किया। उनका दावा है कि मिसाइलें चौकी के अंदर गिरीं, जिसके परिणामस्वरूप हताहत और क्षति हुई। बयान में आगे आरोप लगाया गया कि पाकिस्तानी सेना ने पास के नागरिकों पर अंधाधुंध गोलीबारी करके जवाबी कार्रवाई की और क्वाडकॉप्टरों का इस्तेमाल करके हमलावरों का पीछा करने की कोशिश की। बीएलएफ ने दावा किया कि उसके लड़ाके सुरक्षित स्थानों पर पीछे हटने में कामयाब रहे। समूह ने कहा कि उसने 2 मई को नाग-ग्रारी क्षेत्र में खुफिया जानकारी के आधार पर एक अभियान चलाया, जिसमें दो व्यक्तियों को मार गिराया गया, जिन्हें उसने &quot;सशस्त्र डेथ स्क्वाड एजेंट&quot; बताया। बीएलएफ के अनुसार, उसके लड़ाकों ने उनसे दो कलाश्निकोव राइफलें और एक मोटरसाइकिल जब्त की। समूह ने कहा कि यह थोड़े समय के भीतर इस क्षेत्र में दूसरा ऐसा अभियान था, जिसमें 17 मार्च के हमले का जिक्र किया गया, जिसमें उसने दावा किया कि तीन कथित ऑपरेटिव मारे गए और एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया।इसे भी पढ़ें: Balochistan में पड़ गई चीन को लात, तगड़ी फिल्डिंग लगा घुस गया अमेरिकाबीएलएफ ने बताया कि उसके लड़ाकों ने 29 अप्रैल को तिरतीज में मुख्य पाकिस्तानी सैन्य शिविर को निशाना बनाया। टीबीपी की रिपोर्ट के अनुसार, बीएलएफ ने दावा किया कि हमले की शुरुआत एक स्नाइपर शॉट से हुई जिसमें ड्यूटी पर तैनात एक सैनिक मारा गया, जिसके बाद हल्की मशीनगनों और अन्य भारी हथियारों से गोलीबारी की गई, जिससे शिविर के अंदर अतिरिक्त हताहत और क्षति हुई।इसे भी पढ़ें: पाक सेना ने हाफिज सईद-मसूद अजहर के लिए लड़ी लड़ाई, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पड़ोसी देश का सबसे बड़ा कबूलनामा सुना आपने?इस समूह ने तिरतीज कोटूरी में एक पाकिस्तानी सैन्य काफिले और सड़क निर्माण कंपनी की सुरक्षा कर रहे कर्मियों पर हमले की जिम्मेदारी भी ली। समूह ने कहा कि हमले की शुरुआत एक स्नाइपर हमले से हुई जिसमें एक सैनिक मारा गया, जिसके बाद शेष कर्मियों को भारी हथियारों से निशाना बनाया गया। टीबीपी की रिपोर्ट के अनुसार, बीएलएफ ने दावा किया कि एक और सैनिक मारा गया और कई अन्य घायल हो गए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:18 +0530</pubDate>
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<title>चंडीगढ़ हवाई अड्डे पर एक यात्री के पावर बैंक में आग लगने के बाद इंडिगो की फ्लाइट को खाली कराया गया</title>
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<description><![CDATA[ चंडीगढ़ हवाई अड्डे पर एक यात्री के पावर बैंक में आग लगने के बाद आपातकालीन निकासी अभियान चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना हैदराबाद से चंडीगढ़ जा रही इंडिगो की फ्लाइट में हुई। इंडिगो एयरलाइंस ने प्रेस को दिए एक बयान में पुष्टि की 5 मई 2026 को, हैदराबाद से चंडीगढ़ जाने वाली इंडिगो की उड़ान 6E 108 लैंडिंग के बाद स्थिर थी, तभी एक यात्री के व्यक्तिगत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में आग लगने की घटना की सूचना मिली। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, तत्काल निकासी की गई और सभी संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचित किया गया। सभी यात्रियों को सुरक्षित रूप से टर्मिनल तक पहुँचा दिया गया है और उनकी देखभाल के लिए टीम तैनात है। परिचालन फिर से शुरू करने से पहले विमान की आवश्यक जाँच की जाएगी। इंडिगो ने आगे कहा हमारे यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सहयात्रियों द्वारा साझा किए गए दृश्यों के आधार पर, विमान में सवार यात्रियों को रनवे पर विमान से बाहर निकलते हुए देखा गया। यात्रियों ने आगे बताया कि आग लगने के कारण विमान का केबिन धुएं से भर गया था। लगभग पांच यात्रियों के घायल होने की आशंका है और उन्हें अस्पताल ले जाया गया है।इसे भी पढ़ें: Delhi-NCR को बड़ी सौगात, Noida International Airport से 15 जून से Commercial Flights शुरू, सफर होगा आसाननागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के विमान में पावर बैंक ले जाने संबंधी नए नियमपावर बैंक केवल हैंड लगेज में ले जाने की अनुमति है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा 2026 में जारी किए गए नए नियमों के अनुसार, यात्रियों को विमान में फोन और अन्य उपकरणों को चार्ज करने के लिए पावर बैंक का उपयोग करने की अनुमति नहीं है। डीजीसीए के नियमों में यह भी कहा गया है कि पावर बैंक और अतिरिक्त बैटरी जैसी वस्तुओं को उड़ानों में ओवरहेड कंपार्टमेंट में नहीं रखा जा सकता है, क्योंकि ऐसे स्थानों पर आग का पता लगाना और उसे नियंत्रित करना अधिक कठिन होता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:17 +0530</pubDate>
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<title>वियतनाम संग दोस्ती के 10 साल, President To Lam की Delhi यात्रा से मजबूत होगी Strategic Partnership</title>
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<description><![CDATA[ वियतनाम के राष्ट्रपति के महासचिव तो लाम मंगलवार दोपहर को भारत की राजधानी में पहुंचे। यह उनकी भारत की पहली राजकीय यात्रा है। नई दिल्ली पहुंचने पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया और मंत्री नित्यानंद राय ने उनसे मुलाकात की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में उनके आगमन की जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस वर्ष हम भारत-वियतनाम व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। यह यात्रा हमारे बहुआयामी और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगी। आज सुबह बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम का गयाजी पहुंचने पर हार्दिक स्वागत किया। वे भारत की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर आए हैं।इसे भी पढ़ें: RBI Building Fire: दिल्ली में टला बड़ा हादसा, सोलर पैनल में लगी आग पर पाया गया काबूमुख्यमंत्री ने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में सहायक होगी। चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि हमने वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम का गयाजी पहुंचने पर हार्दिक स्वागत किया। गयाजी आध्यात्मिकता, संस्कृति और विरासत से समृद्ध नगर है। वियतनाम कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव राष्ट्रपति तो लाम 7 मई तक भारत में रहेंगे। राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से यह उनकी भारत की पहली यात्रा है।इसे भी पढ़ें: &#039;मोदी लहर&#039; में नहीं जीती, तो अब कैसे? Arvind Kejriwal ने BJP की जीत पर उठाए बड़े सवाल आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, 6 मई को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में वियतनामी नेता का औपचारिक स्वागत किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्च स्तरीय वार्ता होगी, जिसमें दोनों नेता राष्ट्रपति तो लाम के साथ द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा करेंगे और साथ ही पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श करेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगी, जबकि कई अन्य वरिष्ठ नेताओं के भी उनसे मिलने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति तो लाम के कार्यक्रम में बोधगया और मुंबई की यात्राएं शामिल हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:16 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan में एक साल में सैकड़ों लोग &amp;apos;गायब&amp;apos;, HRCP Report ने खोली पोल, मानवाधिकार बदतर</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति में उल्लेखनीय गिरावट आई है, जिसके मुख्य कारण नागरिक स्वतंत्रता में कमी, न्यायिक स्वतंत्रता पर बढ़ता दबाव और बिगड़ता सुरक्षा वातावरण हैं। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, &#039;स्टेट ऑफ ह्यूमन राइट्स इन 2025&#039; नामक यह रिपोर्ट संस्थागत क्षरण और बढ़ते अधिनायकवादी रुझानों का चिंताजनक विवरण प्रस्तुत करती है। इस्लामाबाद में प्रकाशित द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, यह रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि असहमति पर कड़े प्रतिबंध, राज्य के बढ़ते अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कानूनी सीमाओं ने सामूहिक रूप से लोकतांत्रिक मानदंडों को कैसे कमजोर किया है।इसे भी पढ़ें: Balochistan में पड़ गई चीन को लात, तगड़ी फिल्डिंग लगा घुस गया अमेरिका एचआरसीपी के वरिष्ठ नेतृत्व, जिनमें अध्यक्ष असद इकबाल बट, पूर्व अध्यक्ष हिना जिलानी, सह-अध्यक्ष मुनिजे जहांगीर, उपाध्यक्ष नसरीन अजहर और महासचिव हैरिस खालिक शामिल थे, लॉन्च के अवसर पर उपस्थित थे।मीडिया को संबोधित करते हुए, बट ने निष्कर्षों को बेहद चिंताजनक बताया और दस्तावेज़ को एक सामान्य मूल्यांकन के बजाय &quot;आर्पशीट&quot; कहा। उन्होंने खुलासा किया कि वर्ष के दौरान 273 व्यक्तियों को जबरन गायब कर दिया गया।हालांकि 13 लोगों को अंततः राज्य एजेंसियों की हिरासत में पाया गया, लेकिन कई अन्य लोगों का पता अभी भी अज्ञात है, जिससे जवाबदेही और उचित प्रक्रिया के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। उन्होंने कहा कि संदिग्धों को गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखने के बजाय अदालतों के समक्ष पेश किया जाना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Balochistan में BLF का बड़ा हमला, 10 ठिकानों को बनाया निशाना, Pakistani सेना को भारी नुकसान का दावाखालिक ने इस बात पर जोर दिया कि रिपोर्ट में संवैधानिक उल्लंघनों और व्यवस्थागत दुर्व्यवहारों के व्यापक साक्ष्य संकलित किए गए हैं, जो सभी दस्तावेजी और सत्यापन योग्य हैं। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, निष्कर्ष अधिकारों के उल्लंघन के एक निरंतर पैटर्न का संकेत देते हैं, जो संस्थागत सुरक्षा उपायों के व्यापक पतन को दर्शाता है। रिपोर्ट में उजागर की गई एक प्रमुख चिंता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ते प्रतिबंध हैं। सत्ता पर सवाल उठाने और जवाबदेही मांगने की क्षमता लगातार कम होती जा रही है, जिसका कानून के शासन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, रिपोर्ट चेतावनी देती है कि दमन का यह माहौल मौलिक स्वतंत्रता को कमजोर करता है और लोकतांत्रिक लचीलेपन को नुकसान पहुंचाता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Nepal के नए नियम के बाद बॉर्डर पर फंस गए 1000 से ज्याजा कंटेनर, मचा बवाल!</title>
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<description><![CDATA[ जब नियम अचानक बदल जाते हैं तो बाजार सबसे पहले हिलता है। नेपाल में इस समय कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। भारत से आने वाले सामान पर नए कस्टम नियमों ने पूर्ण व्यापार तंत्र को झटका दे दिया है। बॉर्डर पर ट्रकों की लंबी कतारें, कंटेनरों का जाम और बाजार में संभावित महंगाई। यह सब मिलकर एक बड़ा आर्थिक संकट बनने की ओर इशारा कर रहे हैं। दरअसल, नेपाल सरकार ने 28 अप्रैल से एक नया आदेश लागू किया। इस आदेश के मुताबिक भारत से आने वाले हर सामान पर कस्टम क्लीयरेंस से पहले एमआरपी यानी कि मैक्सिमम रिटेल प्राइस का लेवल होना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार कहना है कि अगर किसी सामान की कीमत 100 नेपाली रुपए से ज्यादा है तो उस पर कस्टम ड्यूटी लगेगी और यह ड्यूटी तभी लगेगी जब उस सामान पर पहले से एमआरपी लिखा हो। मतलब अब हर एक प्रोडक्ट पर पहले से कीमत लिखना जरूरी है। तभी वह नेपाल में एंट्री ले पाएगा। इस नियम के लागू होते ही व्यापारियों ने विरोध शुरू कर दिया। इसे भी पढ़ें: Lipulekh Pass | India-Nepal Border Dispute | नेपाल ने क्षेत्रीय दावे को फिर दोहराया, भारत ने &#039;एकतरफा कृत्रिम विस्तार&#039; को किया खारिजपिछले चार दिनों से बड़े पैमाने पर आयात रोक दिया गया। 1000 से ज्यादा कंटेनर बॉर्डर पर फंसे हुए हैं। भारतनेपाल बॉर्डर पर ट्रकों की लंबी लाइनें लग चुकी हैं। विराट नगर जैसे बड़े कस्टम पॉइंट्स पर हालात और भी खराब हैं। तो वहीं कस्टम अधिकारियों का साफ कहना है कि सिर्फ वही सामान वापस हो रहा है जिसमें पहले से एमआरपी लिखा हुआ है। बाकी सब रुका हुआ है। अब जरा व्यापारियों का पक्ष भी समझ लीजिए। उनका कहना है कि यह नियम व्यवहारिक नहीं है क्योंकि एक कंटेनर में हजारों अलग-अलग प्रोडक्ट होते हैं। हर एक पर अलग से एमआरपी लगाना आसान नहीं है। अगर बॉर्डर पर पैकेट खोलकर लेवल लगाना पड़े तो सामान खराब हो सकता है। पैकेजिंग टूट सकती है। लागत बढ़ जाएगी और सबसे बड़ी बात डैमज और डिटेंशन चार्ज भी लगने लगेंगे। यानी हर दिन का अतिरिक्त खर्च। अब अगर यही हालात रहे तो नेपाल के बाजार में सामान की कमी हो सकती है। कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसे भी पढ़ें: Kailash Mansarovar Yatra से फिर गरमाया India-Nepal Border Dispute, लिपुलेख पर दावे को भारत ने बताया &#039;मनगढ़ंत&#039;महंगाई बढ़ने का खतरा है और सोचिए रोजमर्रा का सामान ही नहीं पहुंचेगा तो क्या होगा? हालांकि नेपाल सरकार ने हालिया फजीहत के बाद भंसार यानी कस्टम नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए यात्रियों के निजी सामान पर शुल्क छूट की नई व्यवस्था लागू कर दी है। यह प्रावधान नेपाल राज्य पत्र के तहत जारी अधिसूचना के अनुसार प्रभावी हो गया है। अब चलिए जान लीजिए किन चीजों को मिली है राहत सबसे बड़ी पेट्रोलियम उत्पाद पर और दूसरा औद्योगिक कच्चा माल। जल्दी खराब होने वाले सामान, फल, सब्जी इनकी क्लीयरेंस जारी है। अब आप सोच रहे होंगे कि सरकार ने ऐसा नियम ही क्यों बनाया? यानी कि नेपाली सरकार ने। दरअसल नेपाल सरकार पिछले 10 साल से एमआरपी सिस्टम लागू करना चाहती थी। साल 2012 में भी इस पर नोटिस जारी हुआ था। मकसद था उपभोक्ताओं को सही कीमत मिले, ओवरचार्जिंग रुके, मार्केट में पारदर्शिता आए। लेकिन इस बार इसे अचानक लागू कर दिया गया और यहीं से विवाद शुरू हो गया। यह सिर्फ एक टैक्स का मामला नहीं है। यह है नीति बनाम व्यवहारिकता। क्योंकि सरकार कह रही है कि नियम जरूरी है। व्यापारी कह रहे हैं कि नियम लागू करने का तरीका ही गलत है। खैर, अगर जल समाधान नहीं निकाला गया तो इसका असर सिर्फ व्यापारियों पर नहीं बल्कि आम जनता की जेब पर भी पड़ेगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:14 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Nepal, के, नए, नियम, के, बाद, बॉर्डर, पर, फंस, गए, 1000, से, ज्याजा, कंटेनर, मचा, बवाल</media:keywords>
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<title>मिसाइल से मारेंगे और मानेंगे भी नहीं! UAE पर ईरान ने क्यों बदली चाल?</title>
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<description><![CDATA[ एक बार फिर से किसी भी वक्त जंग बहुत ज्यादा भड़क सकती है क्योंकि यूएई पर बीती रात जिस तरीके से हमले हुए जिस तरीके से फुजेरा पोर्ट की बात की जाए या फिर अबू धाबी शारजाह या फिर दुबई की क्यों ना बात की जाए वहां पर धड़ाधड़ मिसाइलें ड्रोन अटैक की खबरें आई थी। इस बीच ईरान की तरफ से भी प्रतिक्रिया। जब यूएई पर हमले हो रहे हैं और यूएई की तरफ से बकायदा अपने लोगों को ये संदेश जारी किया गया कि अलर्ट रहिए सुरक्षित स्थानों पर रहिए मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं। हमारे यहां डिफेंस सिस्टम उनका जवाब दे रहे हैं। लेकिन ईरान की तरफ से जिस प्रतिक्रिया की उम्मीद थी वो नहीं दिखाई दे रही। हमले दुबई में फजरा में शारजहां तक पर हुए हैं। यूएई के इन बड़े शहरों पर हुए हैं।  ईरान ने दुबई से कह दिया है क 40 दिनों की जो जंग हुई उसमें जो पहले हमले हुए थे या जहां से स्टार्ट हुई थी वो कहां से हुई थी और वो यूएई से हुई थी। इसीलिए उन्होंने इसके जरिए ये बताने की कोशिश की है कि अगर अब भी आपने अमेरिका और इसराइल का साथ देने से परहेज नहीं किया तो हम दुबई जैसे शहर को भी उड़ा देंगे। इसे भी पढ़ें: Kailash Mansarovar Yatra से फिर गरमाया India-Nepal Border Dispute, लिपुलेख पर दावे को भारत ने बताया &#039;मनगढ़ंत&#039;इसके साथ ही कहा जा रहा है कि अमेरिका जो एक प्रोजेक्ट फ्रीडम चला रहा है होर्मुज को खुलवाने के लिए। मानो होर्मुज अमेरिका के लिए इज्जत का सवाल बन गया हो। प्रेसिडेंट ट्रंप से पत्रकार मीडिया पूछ रहा है कि क्या आपकी रणनीति क्या आप कर रहे हैं? वो बिना सवाल का जवाब दिए हुए निकल गए। अमेरिका होर्मुज में फंस गया है। अपने तरफ से तो ब्लॉकेट लगा रखा है। लेकिन ईरान ने जिस तरह से वहां पर कंट्रोल हासिल कर रखा है उसको नहीं छुड़ा पा रहा। और ईरान का एकदम स्पष्ट संदेश है कि हम हॉर्मुज को तो नहीं छोड़ेंगे। जो भी तय होगा हमारी शर्तों पर तय होगा। तो ये अमेरिका के लिए भारी बेइज्जती की बात है।  हालांकि बार-बार कहा जा रहा था यूएई की तरफ से उनके एयर डिफेंस सिस्टम जवाब दे रहे हैं। लोगों को कहा जा रहा था सुरक्षित स्थानों पर रहिए। और इसके अलावा अगर  ट्रंप की तरफ से एक बयान आया था। इसी बयान के बाद ये सब कुछ शुरू हुआ था।इसे भी पढ़ें: Lipulekh Pass | India-Nepal Border Dispute | नेपाल ने क्षेत्रीय दावे को फिर दोहराया, भारत ने &#039;एकतरफा कृत्रिम विस्तार&#039; को किया खारिजईरान की तरफ से जवाब आया कि जिस जिन सात जहाजों की बात की जा रही है असल में वो आम लोगों की थी यानी सेना से जुड़ी हुई नहीं थी उसमें उन्होंने उनको निशाना बना दिया। भारत की तरफ से इसको लेकर बार-बार ये कहा जा रहा है कि डायलॉग से बात कीजिए। डिप्लोमेसी से समाधान होगा।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:13 +0530</pubDate>
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<title>Hormuz Strait में फिर भड़की आग, Donald Trump के &amp;apos;Project Freedom&amp;apos; से बढ़ा युद्ध का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच हालात एक बार फिर तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में युद्धविराम की स्थिति कमजोर पड़ती दिख रही है, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप के नए सैन्य अभियान और ईरान की प्रतिक्रिया ने स्थिति को और मुश्किल बना दिया है।मौजूद जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” नाम से एक अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में फंसे अंतरराष्ट्रीय जहाजों के आवागमन को सुरक्षित करना है। बता दें कि यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम रास्ता है और यहां किसी भी तरह की बाधा से दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराता है।गौरतलब है कि ईरान ने इस क्षेत्र पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए अमेरिकी जहाजों और सहयोगी देशों के ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि युद्धविराम अभी समाप्त नहीं हुआ है, हालांकि झड़पें जारी हैं। वहीं अमेरिकी सेना प्रमुख जनरल डैन केन के मुताबिक, युद्धविराम के बाद से ईरान ने अमेरिकी बलों पर दस से अधिक बार हमले किए हैं, लेकिन ये अभी बड़े युद्ध की सीमा से नीचे हैं।अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान ने क्रूज मिसाइल, ड्रोन और छोटे नौकाओं के जरिए हमला किया, हालांकि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि उसने ईरान की कई नौकाओं को नष्ट कर दिया है, जबकि ईरान ने इन दावों को खारिज किया है।इसी बीच, एक दक्षिण कोरियाई संचालित जहाज में विस्फोट और आग लगने की घटना भी सामने आई है। ट्रंप ने इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए दक्षिण कोरिया से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है। हालांकि सियोल सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है।बताया जा रहा है कि संयुक्त अरब अमीरात ने भी ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन को रोका है, जिससे एक तेल संयंत्र में आग लग गई और तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए हैं। इस घटना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है।ईरान के शीर्ष नेताओं ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि यह केवल शुरुआत है और इस संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे “गतिरोध की स्थिति” बताया है और चेतावनी दी है कि क्षेत्र को दोबारा युद्ध में नहीं धकेला जाना चाहिए।दूसरी ओर, पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि शांति बनाए रखना बेहद जरूरी है ताकि बातचीत का रास्ता खुला रह सके।आर्थिक मोर्चे पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं और अमेरिका में ईंधन की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि कुछ गिरावट देखी गई है, लेकिन बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।शिपींग क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अभी हालात पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां जोखिम को देखते हुए अपने जहाजों को रोककर रख रही हैं। उनका मानना है कि जब तक दोनों पक्षों के बीच भरोसा कायम नहीं होता, तब तक सामान्य स्थिति बहाल होना मुश्किल है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:12 +0530</pubDate>
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<title>London में Synagogue पर आगजनी की कोशिश, जांच में जुटी Anti&#45;Terror Unit, हाई अलर्ट जारी</title>
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<description><![CDATA[ लंदन से एक चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां एक पुराने यहूदी उपासना स्थल को आग लगाने की कोशिश की गई है। यह घटना मंगलवार सुबह की बताई जा रही है, जिसे संदिग्ध आगजनी माना जा रहा है।मौजूद जानकारी के अनुसार, मेट्रोपोलिटन पुलिस ने बताया कि इस घटना में भवन के गेट को हल्का नुकसान पहुंचा है, लेकिन किसी के घायल होने की खबर नहीं है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आग तड़के सुबह लगाई गई थी, जिसका पता सुरक्षा कैमरों की फुटेज से चला है।गौरतलब है कि यह भवन कई वर्षों से उपासना स्थल के रूप में उपयोग में नहीं था, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय यहूदी समुदाय में चिंता का माहौल है। पुलिस अधिकारी ब्रिटनी क्लार्क ने कहा कि इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है और जांच में आतंकवाद निरोधक इकाई की मदद ली जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इलाके में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई जाएगी।इस मामले की जांच का नेतृत्व कर रहीं हेलेन फ्लानागन ने बताया कि हाल के दिनों में यहूदी, इजरायली और ईरानी असंतुष्ट समूहों से जुड़े ठिकानों पर लगातार हमले हुए हैं, इसलिए इस घटना के पुराने मामलों से जुड़े होने की संभावना बताई जा रही है।बता दें कि लंदन में पिछले कुछ हफ्तों से यहूदी समुदाय को निशाना बनाकर कई घटनाएं सामने आई हैं। 23 मार्च को गोल्डर्स ग्रीन इलाके में चार एंबुलेंस को आग के हवाले कर दिया गया था। इसी दिन एक अन्य उपासना स्थल पर बोतलों में ज्वलनशील पदार्थ रखकर हमला करने की कोशिश की गई थी।इसके बाद 17 अप्रैल को एक ऐसे भवन को निशाना बनाया गया, जहां पहले यहूदी संगठन काम करता था। वहां भी आग लगाने की कोशिश की गई, हालांकि ज्यादा नुकसान की खबर नही है। उसी दिन एक अन्य घटना में ईरानी मीडिया कार्यालय के पार्किंग क्षेत्र में जलता हुआ कंटेनर फेंका गया था।मौजूद जानकारी के अनुसार, 19 अप्रैल को केंटन इलाके के एक उपासना स्थल पर आगजनी की गई, जिससे एक कमरे में धुआं भर गया, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। इसके अलावा गोल्डर्स ग्रीन में ईरानी प्रदर्शनकारियों की याद में बनाए गए स्मारक स्थल पर भी आग लगाने की घटना सामने आई थी।गौरतलब है कि इन घटनाओं के बीच सबसे गंभीर मामला चाकूबाजी का रहा, जिसमें एक हमलावर ने दो लोगों को घायल कर दिया था। बाद में पुलिस और स्थानीय सुरक्षा स्वयंसेवकों ने उसे काबू में कर लिया था।लगातार हो रही इन घटनाओं ने लंदन में यहूदी समुदाय और अन्य संबंधित समूहों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि सभी मामलों की गहन जांच की जा रही है और दोषियों को पकड़ने के प्रयास जारी हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:11 +0530</pubDate>
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<title>India&#45;Jamaica Relations: साझा इतिहास से उज्ज्वल भविष्य की ओर &amp;apos;निरंतरता और बदलाव&amp;apos; का सफर</title>
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<description><![CDATA[ विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत और जमैका के बीच के ऐतिहासिक रिश्तों को &quot;निरंतरता और बदलाव&quot; की एक अनूठी कहानी करार दिया है। अपनी पहली कैरेबियाई यात्रा के दौरान जमैका पहुंचे जयशंकर ने रविवार को &#039;जमैकन ग्लीनर&#039; अखबार में प्रकाशित एक लेख के जरिए दोनों देशों के गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह संबंध केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि साझा इतिहास और जीवंत जन-संपर्क की नींव पर खड़ा है।इसे भी पढ़ें: Lipulekh Pass | India-Nepal Border Dispute | नेपाल ने क्षेत्रीय दावे को फिर दोहराया, भारत ने &#039;एकतरफा कृत्रिम विस्तार&#039; को किया खारिज 
 ‘जमैकन ग्लीनर’ अखबार में रविवार को प्रकाशित एक लेख में जयशंकर ने यह भी कहा कि दोनों देशों को ‘‘एक गहरी और अधिक लचीली साझेदारी बनाने के लिए मिलकर काम करना जारी रखना चाहिए जो दोनों देशों के लोगों के लिए काम करे और एक अधिक न्यायपूर्ण विश्व के निर्माण में योगदान दे’’।
 भारत और जमैका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जयशंकर शनिवार को कैरेबियाई देश की अपनी पहली यात्रा पर पहुंचे।
 उन्होंने कहा कि भारतीय प्रवासी समुदाय का जमैका के साथ 180 वर्षों से संबंध है। उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय प्रवासी समुदाय का यही रिश्ता हमारे संबंधों को एक विशेष रंग प्रदान करता है’’इसे भी पढ़ें: Kerala में UDF की शानदार जीत पर बोले Rahul Gandhi, राज्य की प्रतिभा और क्षमता का करेंगे सदुपयोग
 उन्होंने बताया कि कई भारतीयों के लिए जमैका का नाम सुनते ही माइकल होल्डिंग और क्रिस गेल का क्रिकेट, बॉब मार्ले और जिमी क्लिफ का संगीत, उसेन बोल्ट और एलेन थॉम्पसन-हेराह का एथलेटिक्स तथा सांस्कृतिक हस्ती मिस लू के लेखन की याद आ जाती है।
 जयशंकर ने कहा कि ये संबंध ‘‘दोनों देशों के बीच गहरे जुड़ाव को दर्शाते हैं, जिसमें ‘ग्लोबल साउथ’ और राष्ट्रमंडल की सदस्यता शामिल है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारत और जमैका दोनों बहुलवादी समाज, राजनीतिक लोकतंत्र और बाजार आधारित अर्थव्यवस्थाएं हैं।’’
 उन्होंने कहा, ‘‘यह रिश्ता अंततः निरंतरता और परिवर्तन की एक कहानी है, जो एक साझा अतीत में निहित है, वर्तमान सहयोग से प्रगाढ़ हो रहा है और भविष्य में अधिक संभावनाओं की ओर उन्मुख है।’’
 भारत और जमैका के संबंधों की कहानी 19वीं और 20वीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में भारतीय गिरमिटिया श्रमिकों की इस भूमि की यात्रा से शुरू हुई।
 उन्होंने कहा कि 1845 में ‘ब्लंडेल हंटर’ जहाज पर सवार होकर भारतीयों का पहली बार ‘ओल्ड हार्बर बे’ में उतरना इस यात्रा की शुरुआत थी।
 उन्होंने कहा, ‘‘आज, लगभग 70,000 भारतीय मूल के लोगों का एक समुदाय दोनों देशों के बीच एक जीवंत सेतु का काम करता है।’’
 जयशंकर ने कहा, ‘‘भारतीय-जमैका समुदाय एक सक्रिय और गतिशील शक्ति है जो दोनों देशों के संबंधों को आधार प्रदान करती है और आगे बढ़ाती है। जब दोनों देशों के बीच 1962 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए तो हमने उस चीज को औपचारिक रूप दिया जिसकी नींव दोनों देशों के लोग पहले ही डाल चुके थे।’’
 रविवार को उन्होंने ओल्ड हार्बर का दौरा किया, जहां 180 साल से भी पहले भारतीय पहली बार जमैका पहुंचे थे। उन्होंने कहा, ‘‘उनका (भारतीयों का) योगदान जमैका के सामाजिक और आर्थिक जीवन को लगातार आकार दे रहा है, हमारे समाजों को उस तरह से जोड़ रहा है जो केवल कूटनीति से संभव नहीं है। इसी कारण मैंने ‘ओल्ड हार्बर बे’ का दौरा करने और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों से बातचीत का निश्चय किया।’’
 उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘180 साल पहले जमैका में पहली बार भारतीयों के आगमन के ऐतिहासिक स्थल ‘ओल्ड हार्बर’ का दौरा करके बहुत खुशी हुई। भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों से बातचीत की और देखा कि उन्होंने अपनी संस्कृति, परंपराओं और पहचान को कैसे संरक्षित रखा है। मंत्रियों ओलिविया अटाविया बेब्सी ग्रेंज और एडमंड बार्टलेट की गरिमामय उपस्थिति के लिए धन्यवाद।’’
 मंत्री ने इस बात का भी जिक्र किया कि किस प्रकार भारतीय प्रभाव जमैका के जीवन में समाहित हो गया है, जिसमें करी और रोटी से लेकर दिवाली, फगवा और होसे जैसे त्योहारों को मनाना शामिल है।
 मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि फार्मास्यूटिकल्स, परिधान, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और डिजिटल प्रौद्योगिकियों में भारत की क्षमता कैरिबियाई देश में साजो सामान और संपर्क केंद्र के रूप में उभरने की जमैका की आकांक्षाओं को पूरा करती है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 05 May 2026 09:26:44 +0530</pubDate>
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<title>होर्मुज़ जलमार्ग में जहाज़ों की सुरक्षा के प्रति अनिश्चितता बरक़रार</title>
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<description><![CDATA[ अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान और अमेरिकी नौसेना के बीच जारी तनातनी और हमलों के दावों व प्रतिदावों के बीच वहाँ से गुज़रने की कोशिश कर रहे जहाज़ों से अधिकतम सतर्कता बरतने का आग्रह किया है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 05 May 2026 09:26:08 +0530</pubDate>
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<title>तुर्कीये&#45;सीरिया सहायता मार्ग पर, 65 हज़ार जीवनरक्षक यात्राओं के बाद लगा विराम</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र ने तुर्कीये के रास्ते के ज़रिए सीरिया तक मानवीय सहायता पहुँचाने के अपने राहत अभियान को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया है. 11 वर्षों तक जारी रहे इस मिशन के ज़रिए, सीरिया में ज़रूरतमन्दों के लिए एक बहुत जटिल आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से मदद सुनिश्चित की गई ]]></description>
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<pubDate>Tue, 05 May 2026 09:26:08 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;US तनाव के बीच शांति की नई पहल, 14 सूत्रीय प्रस्ताव से क्या बनेगी बात?</title>
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<description><![CDATA[ ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच अब एक नई कूटनीतिक पहल सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उम्मीद और अनिश्चितता दोनों को बढ़ा दिया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान ने युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिका के सामने 14 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, जिसे पाकिस्तान के माध्यम से भेजा गया।बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव उस समय आया है जब दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल से लागू युद्धविराम के बावजूद कोई ठोस शांति समझौता नहीं हो सका है। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नए प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह इसे देख रहे हैं, लेकिन फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि इससे कोई समझौता हो पाएगा या नहीं।मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान का यह नया प्रस्ताव अमेरिका की पहले पेश की गई नौ सूत्रीय योजना के जवाब में तैयार किया गया है। जहां अमेरिकी योजना में सीमित समय के युद्धविराम पर जोर था, वहीं ईरान ने अब सीधे युद्ध खत्म करने और सभी मुद्दों को 30 दिनों के भीतर सुलझाने की बात कही है।ईरान की मांगों में भविष्य में किसी भी तरह के हमले से सुरक्षा की गारंटी, उसके आसपास तैनात अमेरिकी बलों की वापसी, आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना, रुके हुए अरबों डॉलर के फंड को जारी करना और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई शामिल है। इसके अलावा, होरमुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही के लिए एक नया सिस्टम बनाने की बात भी कही गई है।गौरतलब है कि होरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और गैस गुजरता है। हाल के महीनों में यहां बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी असर पड़ा है।बताया जा रहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अपने अधिकारों की सुरक्षा चाहता है, जबकि अमेरिका ने इसे अपनी प्रमुख शर्त बताया है। इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा मतभेद बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही कारण है कि अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आ पाया है।मौजूद जानकारी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री क्षेत्र में तनाव अभी भी जारी है और दोनों पक्ष एक-दूसरे के जहाजों को रोकने और कार्रवाई करने में लगे हुए हैं। इससे साफ है कि युद्धविराम के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है।बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी भी दी है कि यदि ईरान की ओर से कोई आक्रामक कदम उठाया गया तो सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है। वहीं दूसरी ओर, विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की स्थिति भी शांति वार्ता में बड़ी बाधा बनी हुई है।गौरतलब है कि इससे पहले भी दोनों देशों के बीच कई प्रस्ताव सामने आ चुके हैं, लेकिन किसी पर सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में यह नया प्रस्ताव कितना प्रभावी साबित होगा, यह आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगा। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रहने की संभावना जताई जा रही है, जिससे समाधान की उम्मीद बनी हुई है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:58 +0530</pubDate>
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<title>अब बॉडीगार्ड बनकर होर्मुज पार कराएगी अमेरिकी सेना, क्या है ट्रंप का प्रोजेक्ट फ्रीडम?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे विदेशी जहाजों को सुरक्षित निकालने के उद्देश्य से एक नई समुद्री पहल, प्रोजेक्ट फ्रीडम की घोषणा की है। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में, ट्रम्प ने कहा कि कई देशों ने, जिनमें से अधिकांश क्षेत्रीय संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं, अपने जहाजों को निकालने में मदद के लिए अमेरिका से सहायता का अनुरोध किया है, जो इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में फंसे हुए हैं। उन्होंने जहाजों और उनके चालक दल को एक अस्थिर स्थिति में फंसे &quot;तटस्थ और निर्दोष दर्शक&quot; बताया। ट्रम्प ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका इन जहाजों को प्रतिबंधित जलक्षेत्र से बाहर निकालने में मार्गदर्शन करेगा ताकि वे &quot;स्वतंत्र रूप से और कुशलतापूर्वक अपना काम कर सकें&quot;। यह अभियान मध्य पूर्व के समयानुसार सोमवार सुबह शुरू होने वाला है। इसे भी पढ़ें: Iran-US तनाव के बीच शांति की नई पहल, 14 सूत्रीय प्रस्ताव से क्या बनेगी बात?अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस कदम को मानवीय प्रयास बताते हुए कहा कि कई जहाजों में भोजन और आवश्यक आपूर्ति की कमी हो रही है, जो जहाज पर सवार बड़े दल के सदस्यों के लिए सुरक्षित जीवन स्थितियों को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि इस पहल का उद्देश्य ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों सहित सभी पक्षों को लाभ पहुंचाना है। ट्रंप ने कहा कि मैंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि वे उन्हें सूचित करें कि हम उनके जहाजों और चालक दल को जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकालने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि कई जहाज तब तक वापस लौटने की योजना नहीं बना रहे हैं जब तक कि यह क्षेत्र नौवहन के लिए सुरक्षित नहीं हो जाता। इसे भी पढ़ें: Iran के Peace Proposal पर भड़के Donald Trump, दे डाली फिर से हमले की धमकीट्रम्प ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी अधिकारी ईरान के साथ बहुत सकारात्मक बातचीत कर रहे हैं, जिससे व्यापक राजनयिक प्रगति की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इस अभियान में किसी भी तरह की दखलअंदाजी का कड़ा जवाब दिया जाएगा, जो दुनिया के सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक पर इस मिशन की गंभीरता को रेखांकित करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, और इस क्षेत्र में किसी भी तरह की रुकावट का अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इससे पहले, मध्य पूर्व की जटिल स्थिति के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के नवीनतम शांति प्रस्ताव को &quot;अस्वीकार्य&quot; बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने तेहरान के 14 सूत्री ढांचे को अस्वीकार कर दिया, जिसका उद्देश्य मौजूदा युद्धविराम को अधिक स्थायी समझौते में बदलना है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:57 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;US Proposal | परमाणु लचीलापन और आर्थिक राहत... गतिरोध के बीच ईरान का अमेरिका को नया &amp;apos;मल्टी&#45;लेयर&amp;apos; प्रस्ताव</title>
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<description><![CDATA[ महीनों से जारी सैन्य तनाव और रुकी हुई शांति वार्ताओं के बीच, ईरान ने संयुक्त राज्य अमेरिका के सामने एक नया कूटनीतिक प्रस्ताव रखा है। पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस योजना को एक &quot;बहु-स्तरीय&quot; (multi-layered) रूपरेखा बताया है, जिसका उद्देश्य संघर्ष को समाप्त करना और बातचीत की मेज पर वापसी करना है। चल रहा युद्ध, जो 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा सैन्य कार्रवाई के साथ शुरू हुआ था, 8 अप्रैल से रुका हुआ है। अब तक बातचीत का केवल एक दौर हुआ है, जो इस्लामाबाद में आयोजित किया गया था, लेकिन इससे कोई सफलता नहीं मिली।ईरान का नया प्रस्ताव शत्रुता में धीरे-धीरे कमी लाने पर केंद्रित है। इसके प्रमुख तत्वों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास तनाव कम करना शामिल है, जो एक महत्वपूर्ण वैश्विक तेल मार्ग है। तेहरान ने संकेत दिया है कि यदि वाशिंगटन अपनी सैन्य उपस्थिति कम करने और आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देने पर सहमत होता है - विशेष रूप से वे प्रतिबंध जो ईरान के तेल निर्यात को प्रभावित करते हैं - तो वह इस क्षेत्र में सुरक्षित शिपिंग बहाल करने में मदद कर सकता है।आर्थिक सामान्यीकरण को प्राथमिकताईरान यह भी मांग कर रहा है कि आर्थिक सामान्यीकरण को उसके परमाणु कार्यक्रम से अलग माना जाए। अधिकारियों का तर्क है कि व्यापार और तेल के प्रवाह को बहाल करना पहले होना चाहिए, इससे पहले कि परमाणु गतिविधियों के संबंध में कोई सख्त प्रतिबद्धताएं की जाएं।शर्तों के साथ परमाणु लचीलापनपरमाणु मुद्दे पर, ईरान ने कुछ लचीलेपन का संकेत दिया है। शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के अपने अधिकार को बनाए रखते हुए, उसने यूरेनियम संवर्धन पर सीमाएं लगाने और कड़ी निगरानी उपायों के प्रति खुलापन दिखाया है। हालांकि, ऐसे कदम एक व्यापक समझौते के हिस्से के रूप में प्रतिबंधों में राहत की ठोस गारंटी पर निर्भर करेंगे।इसके अतिरिक्त, तेहरान अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अपने परमाणु अधिकारों की औपचारिक मान्यता चाहता है, साथ ही इस बात का आश्वासन भी चाहता है कि कोई भी समझौता लंबे समय तक चलने वाला हो और उसे एकतरफा रूप से न छोड़ा जाए। सुरक्षा गारंटी एक और प्रमुख मांग है, जो अमेरिका या उसके सहयोगियों द्वारा भविष्य की सैन्य कार्रवाई के बारे में चिंताओं को दर्शाती है।ईरान की शर्तें अस्वीकार्य हैं, ट्रंप ने कहाडोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि ईरान ऐसी शर्तें मांग रहा है जिन्हें वह स्वीकार नहीं कर सकते। हालांकि उन्होंने बातचीत में कुछ प्रगति को स्वीकार किया, लेकिन उन्होंने ईरान के नेतृत्व के भीतर मतभेदों की ओर इशारा किया और सवाल उठाया कि क्या कोई अंतिम समझौता हो सकता है।ट्रंप ने यह स्पष्ट करने से इनकार कर दिया कि यदि बातचीत विफल हो जाती है तो क्या सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू होगी, लेकिन कहा कि वह बड़े पैमाने पर हमले के बजाय बातचीत से निकले परिणाम को प्राथमिकता देंगे।ईरानी अधिकारियों ने, जिनमें उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी भी शामिल हैं, जवाब देते हुए कहा कि अब यह अमेरिका पर निर्भर करता है कि वह कूटनीति और टकराव के बीच किसका चुनाव करता है। उन्होंने आगे कहा कि ईरान दोनों ही संभावनाओं के लिए तैयार है।पिछले हफ़्ते, ट्रंप ने बातचीत के लिए और समय देने के मकसद से संघर्ष-विराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया; इससे यह संकेत मिलता है कि जारी मतभेदों के बावजूद कूटनीति का विकल्प अभी भी खुला है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:56 +0530</pubDate>
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<title>Ukraine का भीषण Drone Attack, Russia के तेल बंदरगाह पर बरसाए 60 ड्रोन, मॉस्को तक हड़कंप</title>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन ने रूस भर में कई ठिकानों पर ड्रोन हमले किए, जिनमें बाल्टिक सागर में स्थित प्रिमोर्स्क बंदरगाह को निशाना बनाकर आग लगा दी और कई जहाजों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। यूक्रेन ऊर्जा अवसंरचना और अन्य लक्ष्यों पर अपने हमले तेज कर रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि इन हमलों से तेल टर्मिनल बंदरगाह को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने टेलीग्राम पर बताया कि इन हमलों में बाल्टिक सागर में एक तेल टैंकर, एक छोटा रूसी कराकुर्ट श्रेणी का मिसाइल पोत और एक गश्ती नौका भी शामिल थी। इस तरह के प्रत्येक परिणाम से रूस की युद्ध क्षमता और भी सीमित हो जाती है। बंदरगाह वाले उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के गवर्नर अलेक्जेंडर ड्रोज़डेन्को ने बताया कि रात भर में 60 से अधिक ड्रोन मार गिराए गए। उन्होंने कहा कि प्रमुख तेल निर्यात केंद्र प्रिमोर्स्क में लगी आग को तुरंत बुझा दिया गया और हमले के बाद कोई तेल रिसाव नहीं हुआ। रूस के अन्य हिस्सों में हुए कई हमलों की खबरों के बीच, यूक्रेन की सीमा से लगे बेलगोरोड क्षेत्र के गवर्नर व्याचेस्लाव ग्लाडकोव ने बताया कि एक ड्रोन ने एक कार को निशाना बनाया, जिसमें 21 वर्षीय युवक और उसके पिता की मौके पर ही मौत हो गई।इसे भी पढ़ें: भारत के दोस्त रूस पर हमला, अब होगा US के 19 जहाजों का हिसाब!यूक्रेन लंबी दूरी की क्षमताओं का विकास जारी रखे हुए प्रिमॉर्स्क, रूस के सबसे बड़े निर्यात केंद्रों में से एक है, जिसकी प्रतिदिन 10 लाख बैरल तेल आपूर्ति संभालने की क्षमता है। यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता से चल रही वार्ता के ठप होने के बाद हाल के महीनों में इस पर कई बार हमले हुए हैं। ज़ेलेंस्की ने पहले कहा था कि यूक्रेनी सेना ने रूस के काला सागर बंदरगाह नोवोरोस्सियस्क के प्रवेश द्वार के पास के समुद्री क्षेत्र में दो टैंकरों पर भी हमला किया। ज़ेलेंस्की ने टेलीग्राम पर कहा कि इन टैंकरों का इस्तेमाल तेल परिवहन के लिए किया जाता था - अब नहीं।&quot; &quot;समुद्र, वायु और भूमि पर यूक्रेन की दीर्घकालिक क्षमताओं का व्यापक विकास जारी रहेगा। इसे भी पढ़ें: Vishwakhabram: Trump ने अब जर्मन चांसलर Friedrich Merz पर हमला बोला, US-Germany संबंधों में आई दरारहमलों से रूस बेफिक्ररूसी टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि अगर यूक्रेन रूस के तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना जारी रखता है, तो वैश्विक तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। पेस्कोव ने कहा कि अगर हमारे तेल की अतिरिक्त मात्रा बाजार से बाहर हो जाती है, तो कीमतें मौजूदा स्तर से और बढ़ जाएंगी, जो पहले से ही 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हैं। इसका मतलब यह होगा कि निर्यात की मात्रा कम होने पर भी, हमारी कंपनियां अधिक मुनाफा कमाएंगी और सरकार को अधिक राजस्व प्राप्त होगा। मॉस्को के क्षेत्रीय गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने शनिवार शाम को बताया कि ड्रोन हमले में एक गांव में 77 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं, मॉस्को शहर के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने कहा कि रूसी राजधानी की ओर जा रहे चार ड्रोनों को मार गिराया गया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:55 +0530</pubDate>
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<title>Polar Cruise पर Hantavirus का खौफ, Cape Verde के पास 3 लोगों की मौत, WHO हुआ अलर्ट</title>
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<description><![CDATA[ नीदरलैंड स्थित एक क्रूज जहाज पर संदिग्ध हंतावायरस संक्रमण फैलने से तीन लोगों की मौत हो गई है और तीन लोग बीमार हैं। यह वायरस चूहों में फैलता है और इससे जानलेवा श्वसन संबंधी बीमारी हो सकती है। नीदरलैंड स्थित ओशनवाइड एक्सपेडिशन्स ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि वह अफ्रीका के पश्चिम में अटलांटिक महासागर में स्थित द्वीप देश केप वर्डे के तट पर मौजूद अपने ध्रुवीय अभियान जहाज, एमवी होंडियस पर &quot;एक गंभीर चिकित्सा स्थिति का प्रबंधन&quot; कर रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह क्रूज लगभग तीन सप्ताह पहले लगभग 150 यात्रियों के साथ अर्जेंटीना से रवाना हुआ था और केप वर्डे के रास्ते में अंटार्कटिका और अन्य स्थानों पर रुका था। डच विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि दो डच यात्रियों की मौत हो गई है, लेकिन उन्होंने इसके बारे में और कोई जानकारी नहीं दी।इसे भी पढ़ें: सुरक्षा अलर्ट! Thermos ने वापस मंगाए 8.2 मिलियन कंटेनर, खराब स्टॉपर से आँखों की रोशनी जाने का खतराविश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक पोस्ट में बताया कि बीमार यात्रियों में से एक दक्षिण अफ्रीका में गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में भर्ती है। स्काई न्यूज़ ने दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य विभाग के हवाले से बताया कि यात्री ब्रिटिश नागरिक है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि वह इस प्रकोप की जांच कर रहा है। एजेंसी ने बताया कि प्रयोगशाला परीक्षणों में छह लोगों में से एक में हंतावायरस की पुष्टि हुई है। ओशनवाइड एक्सपेडिशन्स ने कहा कि केप वर्डे के अधिकारियों ने चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता वाले यात्रियों को जहाज से उतरने की अनुमति नहीं दी है, और डच अधिकारी दो लक्षण वाले यात्रियों और एक मृत यात्री के शव को स्वदेश वापस लाने की व्यवस्था करने का प्रयास कर रहे हैं। हंतावायरस तब फैलता है जब चूहों के मल-मूत्र हवा में फैल जाते हैं, जैसे कि जब लोग उन शेडों की सफाई करते हैं जहाँ चूहे रहते थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा कि दुर्लभ मामलों में यह वायरस लोगों के बीच भी फैल सकता है।इसे भी पढ़ें: Iran-US तनाव के बीच शांति की नई पहल, 14 सूत्रीय प्रस्ताव से क्या बनेगी बात?यह बीमारी फ्लू जैसे लक्षणों से शुरू होती है और हृदय और फेफड़ों की विफलता का कारण बन सकती है, जिसमें लगभग 40% मामलों में मृत्यु हो जाती है, ऐसा अमेरिकी रोग नियंत्रण केंद्र (CDC) के अनुसार है। हंतावायरस के इलाज के लिए कोई विशिष्ट दवा नहीं है, इसलिए उपचार सहायक देखभाल पर केंद्रित होता है, जिसमें गंभीर मामलों में रोगियों को वेंटिलेटर पर रखना शामिल है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि डब्ल्यूएचओ दो लक्षण वाले यात्रियों को चिकित्सकीय रूप से निकालने के लिए सदस्य देशों और जहाज के संचालकों के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद कर रहा है, साथ ही जहाज पर सवार बाकी यात्रियों के लिए पूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम मूल्यांकन और सहायता प्रदान कर रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:55 +0530</pubDate>
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<title>Kenya Floods | केन्या में कुदरत का कहर! भारी बारिश और बाढ़ से एक हफ्ते में 18 की मौत, हजारों बेघर</title>
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<description><![CDATA[ पूर्वी अफ्रीकी देश केन्या में कुदरत का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले एक सप्ताह से जारी मूसलाधार बारिश और उसके बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने देश के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है। केन्याई पुलिस और गृह मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात दिनों में 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश की मृत्यु डूबने के कारण हुई है।इसे भी पढ़ें: Ukraine का भीषण Drone Attack, Russia के तेल बंदरगाह पर बरसाए 60 ड्रोन, मॉस्को तक हड़कंप 
देश के गृह मंत्रालय के अनुसार, देशभर में बाढ़ से पिछले एक सप्ताह में 18 लोगों की मौत हुई है और 54,000 से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं जिनमें से 6,000 परिवार देश की राजधानी नैरोबी के हैं।
देशभर में कई विद्यालयों और अस्पतालों में पानी भर गया है तथा 17 सड़कों पर आवागमन बाधित हो गया है।इसे भी पढ़ें: Vote Counting से पहले BJP का बड़ा दावा, प्रद्युत बोरदोलोई बोले- Assam में हमारी सरकार बनना तय
भूस्खलन के कारण पश्चिमी रिफ्ट वैली क्षेत्र में हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। देश के जलविद्युत बांधों में जलस्तर बढ़ने के कारण ताना और अथी नदियों के किनारे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की गई है।
केन्या मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी दी है कि मई के पहले दो सप्ताह में सामान्य से अधिक बारिश जारी रह सकती है।
देश में बारिश का मौसम शुरू होने पर मार्च में भारी बारिश हुई थी, जिससे व्यापक पैमाने पर तबाही हुई। मार्च के अंत तक वर्षा जनित हादसों में 100 से अधिक लोग मारे गए। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:54 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Kenya, Floods, केन्या, में, कुदरत, का, कहर, भारी, बारिश, और, बाढ़, से, एक, हफ्ते, में, की, मौत, हजारों, बेघर</media:keywords>
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<title>Pakistan पर चीन का होश उड़ाने वाला दावा, बैठे&#45;बिठाए जीत गया भारत</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका की गोद में बैठे पाकिस्तान को चीन ने एक ऐसा झटका दिया है कि पूरा इस्लामाबाद इस वक्त हिल गया है। अमेरिका को बॉस बनाने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान की अब चीन ने एक ऐसे तरीके से हेकड़ी निकाली है कि उसकी कमर टूटती हुई नजर आ रही है। कहावत आपने सुनी होगी कि गरीबी में आटा गीला और इस वक्त यह कहावत पाकिस्तान पर एकदम फिट बैठती नजर आ रही है। पहले से ही कंगाली ऊपर से कर्ज का पहाड़ और अब सबसे बड़ा झटका। खुद चीन की कंपनी ने पाकिस्तान में काम बंद कर दिया है।  दरअसल बता दें कि चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी कि सीपीईसी जिसे पाकिस्तान अपनी लाइफ लाइन बताता रहा उसी सीपीईसी के सबसे अहम प्रोजेक्ट गदर पोर्ट से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई। इसे भी पढ़ें: US Sanctions पर China का पलटवार, Blocking Law से अपनी कंपनियों को दिया सुरक्षा कवचग्वादर फ्री जोन में काम कर रही चीनी कंपनी अपनी फैक्ट्री बंद कर चुकी है। सिर्फ बंद ही नहीं बल्कि सभी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता यहां से दिखा दिया गया। कारण क्या बताया गया? कंपनी ने यह साफ कहा है कि खराब कारोबारी यहां पर माहौल है। ऑपरेशनल दिक्कतें हैं। शिपमेंट अटक गई है। एक्सपोर्ट पूरी तरीके से रुक गया है और यहां पर लगातार घाटा हो रहा है। यानी जिस पाकिस्तान को चीन अरबों डॉलर देकर खड़ा करना चाहता था वही पाकिस्तान अपने ही सिस्टम से विदेशी निवेशकों को भगाने में लगा हुआ है। अब जरा सीपीईसी का पूरा खेल समझिए। साल 2015 में करीब 60 अरब डॉलर के इस प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई। मकसद था चीन को ग्वादर के जरिए अरब सागर तक सीधी पहुंच देना। लेकिन आज हालात क्या है उसे देखिए। प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही है। कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। सुरक्षा खतरे में है। जहां चीनी नागरिक भी सुरक्षित नहीं है और अब कंपनियों को पीछे हटना पड़ रहा है।इसे भी पढ़ें: भारत के दोस्त रूस पर हमला, अब होगा US के 19 जहाजों का हिसाब!भारत को इससे क्या फायदा? सबसे बड़ा फायदा स्ट्रेटेजिक राहत। ग्वादर पोर्ट को चीन गेम चेंजर बताता था जो भारत के लिए समुद्री घेराबंदी का हिस्सा था। लेकिन अगर वहीं प्रोजेक्ट अटकने लगे तो भारत पर दबाव अपने आप कम हो जाता है। दूसरा फायदा इंडिया की ग्लोबल इमेज मजबूत। जब विदेशी कंपनियां पाकिस्तान से निकलतीहैं तो वह स्टेबल और सुरक्षित मार्केट ढूंढती है और यहां भारत एक भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आता है। मजबूत कानून, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बहुत बड़ा बाजार और सुरक्षा बहुत ज्यादा। तीसरा फायदा ट्रेड और पोर्ट्स में भड़कत। भारत पहले ही चबहार पोर्ट जहां पर ईरान काम कर रहा है और जो अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक पहुंच का एक बड़ा रास्ता है अगर ग्वादर कमजोर पड़ता है तो चबाहार की अहमियत और भी ज्यादा बढ़ जाएगी। चौथा फायदा चीन की रणनीति को झटका। चीन का स्ट्रिंग ऑफ पल्स प्लांट जिसमें हिंद महासागर के चारों तरफ अपने पोर्ट्स बनाना शामिल है। उसमें ग्वादर एक अहम कड़ी था और अगर वही कड़ी कमजोर हो जाए तो पूरा नेटवर्क प्रभावित हो सकता है। धराशाई हो सकता है। पांचवा फायदा निवेश का डायवर्जन। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:53 +0530</pubDate>
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<title>अब बातचीत का समय बीत चुका है...Brahmos लेकर चीनी जहाज खदेड़ने उतरा दोस्त फिलीपींस,</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिण चीन सागर की लहरें इस वक्त बारूद की गन से भरी हुई है। एक तरफ दुनिया का सबसे बड़ा विस्तारवादी देश चीन है जो समुद्र को अपनी जागीर समझता है और दूसरी तरफ भारत का वो जांबाज दोस्त जिसने हाल ही में भारत से ब्रह्मोस जैसी घातक मिसाइलें खरीद ली हैं। फिलीपींस ने चीन की चालबाजियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा सैन्य और रणनीतिक ऐलान कर दिया है। फिलीपींस ने साफ कह दिया कि अब बातचीत का समय बीत चुका है और कार्रवाई का वक्त शुरू हो चुका है। चीन के जिस ड्रोन, मदरशिप और जासूसी जहाजों से पूरी दुनिया खौफ खाती है, उन्हें खदेड़ने के लिए फिलीपींस ने अपने विमान और जंगी जहाज तैनात कर दिए हैं। चीन ने फिलीपींस के समुद्री जल क्षेत्र जिसे हम वेस्ट फिलीपींस सी कहते हैं वहां अपना सबसे आधुनिक और खतरनाक हथियार भेज दिया है और इसका नाम है जुआईयन। यह कोई साधारण जहाज नहीं है। इसे दुनिया का पहला इंटेलिजेंट ड्रोन मदरशिप कहा जाता है। यह समुंदर में चलता फिरता एक ऐसा रोबोटिक अड्डा है जो एक साथ 50 से ज्यादा मानव रहित ड्रोंस यानी कि यूएवीस, समुद्री ड्रोंस और पानी के नीचे रहने वाले ड्रोंस यानी कि यूवीस को कंट्रोल कर सकता है। इसे भी पढ़ें: Pakistan पर चीन का होश उड़ाने वाला दावा, बैठे-बिठाए जीत गया भारतचीन का दावा है कि यह समुद्री रिसर्च के लिए है। लेकिन हकीकत यह है कि यह ड्रोन समुंदर की गहराई में जासूसी करते हैं। नक्शे बनाते हैं और दुश्मन की पनडुब्बियों का रास्ता खोजते हैं। इसे फिलीपींस के बोली नाव और विवादित स्पिरेटली आइसलैंड के पास देखा गया है। चीन को लगा था कि वह चुपके से फिलीपींस के इलाके में घुस जाएगा। लेकिन वह भूल गया कि फिलीपींस के पास अब दुनिया भर के दोस्तों का साथ है। खासतौर से भारत का और फिलीपींस कोस्ट गार्ड के प्रवक्ता कोमोडोर जे टारिएला ने खुलासा किया कि कनाडा के डार्क वेसल डिटेक्शन यानी डीवीडी सिस्टम की मदद से उन्होंने चीन की इस चोरी को पकड़ ली है। चीन ने सिर्फ एक नहीं बल्कि चार खतरनाक जहाज भेजे थे। पहला है जुहायन। यह वो महाशक्तिशाली ड्रोन मदरशिप है जिसके बारे में हमने अभी बात की। दूसरा है शियांग यान होंग 33। एक ऐसा जहाज जो गहरे समुद्र की मैपिंग करता है ताकि चीनी नौसेना को भविष्य के युद्ध के लिए रास्ते मिल सके। तीसरा है शियान वन। इसमें बहुत ही एडवांस एककोस्टिक सेंसर लगे होते हैं जो पानी के नीचे होने वाली छोटी से छोटी हलचल को सुन सकते हैं। इसे भी पढ़ें: भारत ने अचानक इतना बड़ा फैसला क्यों लिया? 51000 करोड़ में नए जहाज खरीदे जाएंगेचौथा है जिया गैंग। यह जहाज भी अंडर वाटर ड्रोनस तैनात करने में माहिर है। अब बात आती है उस मुद्दे की जो भारत के लिए गर्व की बात है। फिलीपींस की इस नई हिम्मत के पीछे एक सबसे बड़ा कारण है भारत के साथ उसकी बढ़ती सैन्य ताकत। फिलीपींस अब वो देश नहीं रहा जिसे चीन डरार धमका कर पीछे हटा दे। फिलीपींस अब ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का मालिक है। यही वजह है कि फिलीपींस के कोस्ट गार्ड कमांडेंट एडमिरल रोनी गिल गावन ने गरजते हुए कहा कि हम अपनी संप्रभुता के साथ समझौता नहीं करेंगे। चीन के यह जहाज बिना हमारी अनुमति के हमारे घर में घुस आए हैं। हमने अपने विमानों और जहाजों को आदेश दे दिया है। जाओ और इन घुसपैठियों को हमारे समुंदर के बाहर खदेड़ दो। यह सीधा संदेश है कि भारत का दोस्त अब बीजिंग की आंखों में आंखें डालकर बात कर रहा है और यह ताकत उसने भारत की ब्रह्मोस से पाई है। सिर्फ सेना ही नहीं फिलीपींस के आम नागरिक भी चीन के खिलाफ खड़े हो चुके हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:52 +0530</pubDate>
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<title>भारत ने अचानक इतना बड़ा फैसला क्यों लिया? 51000 करोड़ में नए जहाज खरीदे जाएंगे</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने एक ऐसा फैसला लिया जिसकी गूंज सिर्फ दिल्ली या मुंबई तक नहीं बल्कि पूरी दुनिया के समुद्री व्यापार में सुनाई देने वाली है। ₹51,000 करोड़ का मेगा प्लान, 62 नए जहाज, विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता कम करने का मिशन और सबसे बड़ी बात भारत अब साफ कह चुका है कि हमारे व्यापार, हमारी ऊर्जा सुरक्षा और हमारी सप्लाई चेन किसी दूसरे देश के भरोसे नहीं चलेगी। दोस्तों, यह सिर्फ जहाज खरीदने का मसला नहीं है। यह भारत की संप्रभुता, इकोनॉमिक सिक्योरिटी और ग्लोबल पावर बनने की तैयारी है। तो आज की इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे भारत ने अचानक इतना बड़ा फैसला क्यों लिया? कौन-कौन से जहाज खरीदे जाएंगे? किन-किन कंपनियों को फायदा होगा?  क्यों यह कदम चीन, यूरोप और दुनिया की बड़ी शिपिंग कंपनियों के लिए चेतावनी मानी जा रही है। दरअसल, भारत सरकार ने ₹51,383 करोड़ का मेगा टेंडर तैयार किया। जिसके तहत कुल 62 शिपिंग वेसल्स खरीदी या बनाई जाएंगी। इन जहाजों में शामिल होंगे क्रूड ऑयल टैंकर, एलपीजी कैरियर, एलएनजी कैरियर, कंटेनरशिप, बल्क कारगो वेसल्स, ग्रीन टक बोट्स और ड्रेजर्स। इसे भी पढ़ें: Iran-US तनाव के बीच शांति की नई पहल, 14 सूत्रीय प्रस्ताव से क्या बनेगी बात?भारत अब सिर्फ एक सेक्टर पर नहीं बल्कि पूरे समुद्री इकोसिस्टम पर काम कर रहा है। सबसे बड़ी बात दोस्तों कि 34 जहाजों का टेंडर पहले ही जारी किया जा चुका है। बाकी जहाजों के लिए जल्द प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस पूरी योजना से भारत की समुद्री क्षमता में लगभग 2.85 मिलियन ग्रॉस टनेज का इजाफा हो जाएगा जो अपने आप में बहुत बड़ा आंकड़ा है। लेकिन सवाल तो उठेगा ही और सवाल है भारत को अचानक यह फैसला क्यों लेना पड़ा? तो इसका सीधा जवाब है दुनिया का बदलता माहौल। पिछले कुछ समय से वेस्ट एशिया में तनाव बढ़ा। रेड सी, हॉर्मज और कई समुद्री रास्तों पर खतरे बढ़े। जहाजों का बीमा महंगा हो गया। फ्रेट कॉस्ट बढ़ गई और दुनिया को समझ में आया कि अगर समुद्री रास्ते रुक जाए तो अर्थव्यवस्था डगमगा जाएगी। भारत ने इसी खतरे को समय रहते पहचान लिया। आज भारत की स्थिति यह है कि भारत का 90% से ज्यादा व्यापार समुद्री रास्ते से होता है। लेकिन जहाजों के मामले में भारत अभी भी बड़ी मात्रा में विदेशी कंपनियों पर निर्भर है। जहाज किराए पर लिए जाते हैं ग्रीस से, चीन से, सिंगापुर से, जापान से, दक्षिण कोरिया से यानी भारत का व्यापार चलता है। लेकिन जहाज किसी और के और यही निर्भरता अब भारत खत्म करना चाहता है। इसे भी पढ़ें: अब बॉडीगार्ड बनकर होर्मुज पार कराएगी अमेरिकी सेना, क्या है ट्रंप का प्रोजेक्ट फ्रीडम?यह सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं है। सोचिए अगर कल युद्ध और भड़क जाए ईरान और अमेरिका के बीच या फिर किसी देश ने जहाज देना बंद कर दिया या किराया दोगुना कर दिया तो भारत के तेल, गैस, कोयला, उर्वरक, कंटेनर, सप्लाई सब कुछ प्रभावित हो जाएगी। इसलिए भारत ने कहा अब अपने जहाज होंगे, अपनी शर्तें होंगी और अपना कंट्रोल होगा। अब बात करते हैं कौन-कौन कंपनियां इसमें शामिल होगी। सबसे बड़ा रोल रहेगा शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का भारत की सरकारी शिपिंग दिग्गज कंपनी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:52 +0530</pubDate>
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<title>Middle East संकट का हल निकालने की कवायद, Pakistan के जरिए Iran&#45;US में पर्दे के पीछे बातचीत</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने कथित तौर पर अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करने के लिए टेलीफोन पर बातचीत की। अल अरबिया के अनुसार, बातचीत में क्षेत्रीय माहौल और इस्लामाबाद द्वारा अपनाई जा रही राजनयिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (स्थानीय समय) को कहा कि उनके प्रतिनिधि &quot;बहुत सकारात्मक&quot; बातचीत कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने क्षेत्रीय तनावों पर दोनों पक्षों के बीच प्रतिस्पर्धी प्रस्तावों के आदान-प्रदान के बावजूद निरंतर राजनयिक जुड़ाव का संकेत दिया। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने कहा कि उनके प्रतिनिधि तेहरान के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं और सुझाव दिया कि वार्ता सभी के लिए कुछ बहुत सकारात्मक&quot; परिणाम ला सकती है। उन्होंने कहा, मुझे पूरी तरह से पता है कि मेरे प्रतिनिधि ईरान देश के साथ बहुत सकारात्मक बातचीत कर रहे हैं, और ये चर्चाएं सभी के लिए कुछ बहुत सकारात्मक परिणाम ला सकती हैं।इसे भी पढ़ें: Pakistan पर चीन का होश उड़ाने वाला दावा, बैठे-बिठाए जीत गया भारतअमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने भी सीएनएन को बताया कि वाशिंगटन तेहरान के साथ लगातार संपर्क में है। संघर्ष को समाप्त करने के लिए संभावित वार्ताओं का पता लगाने के उद्देश्य से चल रहे राजनयिक संपर्कों का जिक्र करते हुए विटकॉफ ने कहा कि हम बातचीत कर रहे हैं। विटकॉफ पीजीए कैडिलैक चैंपियनशिप के दौरान ट्रंप के डोरल गोल्फ क्लब से बोल रहे थे, जहां उन्हें राष्ट्रपति के साथ देखा गया था।ट्रंप का यह ताजा रुख उनके एक दिन पहले दिए गए बयान से बिल्कुल उलट था, जब उन्होंने ईरान के प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की थी। इससे पहले उन्होंने कहा था कि वे तेहरान के इस नए प्रस्ताव को &quot;स्वीकार्य&quot; नहीं मान सकते, क्योंकि उन्होंने मानवता के साथ जो किया है, उसके लिए उन्होंने अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है।इसे भी पढ़ें: भारत के दोस्त रूस पर हमला, अब होगा US के 19 जहाजों का हिसाब!द टाइम्स ऑफ इज़राइल की रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रम्प ने क्षेत्रीय संघर्ष को सुलझाने के उद्देश्य से ईरान के नवीनतम प्रस्ताव को शुरू में ही खारिज कर दिया था और इसे अस्वीकार्य बताया था। इज़राइली समाचार प्लेटफॉर्म के मुताबिक, ट्रम्प ने कान न्यूज़ के संवाददाता नाथन गुटमैन के साथ एक संक्षिप्त फोन कॉल के दौरान भी ऐसा ही बयान दिया। एक्स पर एक पोस्ट में गुटमैन ने ट्रम्प के हवाले से कहा कि यह मुझे स्वीकार्य नहीं है। मैंने इसका अध्ययन किया है, मैंने हर चीज का अध्ययन किया है - यह स्वीकार्य नहीं है। कान न्यूज़ द्वारा प्रकाशित अतिरिक्त टिप्पणियों में, ट्रम्प ने कहा कि क्षेत्रीय सैन्य अभियान सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है, और कहा कि अभियान बहुत अच्छा चल रहा है। राष्ट्रपति ने आगे कहा कि ईरानी समझौता करना चाहते हैं, लेकिन मैं उनके प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हूं।&quot; उन्होंने कहा कि &quot;कुछ ऐसी बातें हैं जिनसे मैं सहमत नहीं हो सकता,&quot; हालांकि उन्होंने तेहरान के ढांचे पर अपनी विशिष्ट आपत्तियों का विस्तार से उल्लेख नहीं किया।इसे भी पढ़ें: माओवाद के बाद अब Counter-Intelligence पर Modi सरकार का पूरा Focus, निशाने पर विदेशी Spy Agenciesइस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने रविवार को पुष्टि की कि तेहरान को पाकिस्तान के माध्यम से ईरान के प्रस्ताव पर वाशिंगटन की प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। ईरान के सरकारी प्रसारक एसएनएन टीवी को दिए एक साक्षात्कार में बघाई ने कहा कि पाकिस्तान के माध्यम से तेहरान के प्रस्ताव पर अमेरिका का दृष्टिकोण ईरान तक पहुँच गया है। उन्होंने आगे कहा कि इस दृष्टिकोण की वर्तमान में समीक्षा की जा रही है और अंतिम रूप दिए जाने के बाद ईरान की प्रतिक्रिया दी जाएगी। बघाई ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान का 14 सूत्री प्रस्ताव पूरी तरह से क्षेत्रीय संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से है और इसमें परमाणु मुद्दों का कोई जिक्र नहीं है। बघाई ने टेलीविजन पर प्रसारित साक्षात्कार के दौरान कहा, हमारी 14 सूत्री योजना पूरी तरह से युद्ध को समाप्त करने पर केंद्रित है और इसमें परमाणु क्षेत्र से संबंधित कोई मुद्दा शामिल नहीं है।&quot; उन्होंने कहा कि इस चरण में, लेबनान सहित क्षेत्रीय युद्ध को समाप्त करने के विशिष्ट पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:51 +0530</pubDate>
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<title>US Navy को फिर मिला चकमा, Iran का दूसरा Supertanker DERYA भी इंडोनेशिया पहुंचा</title>
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<description><![CDATA[ तेल परिवहन निगरानी फर्म ने बताया है कि ईरान का दूसरा विशाल कच्चा तेल वाहक पोत (VLCC) अमेरिकी नौसेना को सफलतापूर्वक चकमा देकर इंडोनेशिया के जलक्षेत्र से होते हुए रियाउ द्वीपसमूह की ओर बढ़ रहा है। एक्स पर साझा किए गए एक पोस्ट में कहा गया कि TankerTrackers.com ने बताया कि DERYA नामक यह पोत इंडोनेशिया के लोम्बोक जलडमरूमध्य से गुजर रहा है। यह गतिविधि अप्रैल के मध्य में भारत को 1.88 मिलियन बैरल ईरानी कच्चे तेल की आपूर्ति करने के असफल प्रयास के बाद हुई है। टैंकर की गतिविधियों का विवरण देते हुए, TankerTrackers.com ने कहा कि हमने इसके बाद उसे दक्षिण की ओर बढ़ते हुए देखा, उस समय जब क्षेत्र में मौजूद उसके साथी जहाजों को अमेरिकी नौसेना द्वारा वापस ईरान भेजा जा रहा था। निगरानी समूह ने आगे बताया कि यह पोत वर्तमान में रियाउ द्वीपसमूह में अपने निर्धारित गंतव्य की ओर अग्रसर है।इसे भी पढ़ें: Iran-US Proposal | परमाणु लचीलापन और आर्थिक राहत... गतिरोध के बीच ईरान का अमेरिका को नया &#039;मल्टी-लेयर&#039; प्रस्तावयह घटनाक्रम ट्रैकिंग फर्म द्वारा पहले किए गए खुलासे के बाद आया है कि एक अन्य ईरानी सुपरटैंकर, HUGE, भी अमेरिकी नौसेना को चकमा देने में सफल रहा था। 19 लाख बैरल तेल ले जा रहे उस जहाज को भी इसी तरह लोम्बोक जलडमरूमध्य में रियाउ क्षेत्र की ओर जाते हुए देखा गया था। निगरानी फर्म द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने के दौरान लगभग 25 टैंकर कच्चे तेल के साथ ईरान से रवाना हुए। इस बेड़े में से, अमेरिकी नौसेना ने सफलतापूर्वक सात जहाजों को ईरानी बंदरगाहों की ओर वापस मोड़ दिया, जबकि अमेरिकी सेना ने दो अन्य टैंकरों को जब्त कर लिया। TankerTrackers.com की रिपोर्ट से पता चलता है कि अप्रैल में रवाना हुए शेष जहाज या तो अपने गंतव्य तक पहुंच चुके हैं या अपने निर्धारित मिलन स्थलों पर पहुंच गए हैं। इनमें नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी का जहाज ह्यूज भी शामिल है, जो अमेरिकी नौसेना को चकमा देकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र तक पहुंचने में सफल रहा।इसे भी पढ़ें: Middle East संकट का हल निकालने की कवायद, Pakistan के जरिए Iran-US में पर्दे के पीछे बातचीतलगभग 22 करोड़ अमेरिकी डॉलर के अनुमानित मूल्य वाले 19 लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल का परिवहन कर रहे ह्यूज नामक जहाज को एक सप्ताह से अधिक समय पहले श्रीलंका के तट पर अंतिम बार देखा गया था। निगरानी फर्म ने बताया कि मलक्का जलडमरूमध्य से ईरान के लिए रवाना होने के बाद से इस जहाज ने स्वचालित पहचान प्रणाली (एआईएस) पर कोई संचार नहीं किया है। ये निष्कर्ष 29 अप्रैल को ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा किए गए उन दावों से मेल खाते हैं कि कम से कम 52 जहाजों ने अमेरिकी नाकाबंदी को सफलतापूर्वक तोड़ दिया था। इन कथित उल्लंघनों के बावजूद, अल जज़ीरा की रिपोर्ट है कि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि नाकाबंदी प्रभावी साबित हो रही है और इसके परिणामस्वरूप तेहरान को अरबों डॉलर के राजस्व का नुकसान हुआ है। वाशिंगटन का दावा है कि देश वर्तमान में तेल निर्यात करने में असमर्थ है और भंडारण क्षमता समाप्त होने और उत्पादन बंद होने तक अपने भंडार को जमा करने के लिए मजबूर होगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:50 +0530</pubDate>
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<title>Pope से तकरार, Italy से नाराजगी! Trump के फैलाए रायते को समेटने Vatican पहुंचे Marco Rubio</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस सप्ताह वेटिकन और इटली की एक महत्वपूर्ण राजनयिक यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पोप लियो और इतालवी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के बीच सार्वजनिक तौर पर हुए कई मतभेदों के बाद संबंधों को स्थिर करना है। अमेरिकी विदेश मंत्री के वेटिकन के प्रमुख राजनयिक अधिकारी पिएत्रो पारोलिन से बातचीत करने की उम्मीद है। इसके अलावा, फॉक्स न्यूज ने बताया कि रुबियो इटली के विदेश और रक्षा मंत्रियों से भी दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को दूर करने के लिए बातचीत करेंगे। यह राजनयिक प्रयास अमेरिका-यूरोपीय संबंधों के लिए एक अस्थिर दौर में हो रहा है। शुक्रवार को पेंटागन ने जर्मनी से 5,000 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की योजना का खुलासा किया। ईरान से संबंधित नीतियों और टैरिफ को लेकर कई यूरोपीय राजधानियों के साथ बढ़ते मतभेदों के कारण तनाव और बढ़ गया है।इसे भी पढ़ें: Puducherry Election Results: N. Rangasamy का डबल धमाका, NDA की सत्ता में वापसी तयराष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को संकेत दिया कि उन्हें इटली में नाटो में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या में कमी करने पर भी विचार करना चाहिए। ओवल ऑफिस से बोलते हुए, ट्रंप ने रोम के सहयोग के स्तर पर सवाल उठाते हुए कहा कि मैं क्यों न पूछूं? इटली ने हमारी कोई मदद नहीं की है, और स्पेन का रवैया तो बेहद खराब रहा है। राष्ट्रपति ने समुद्री सुरक्षा में यूरोपीय हस्तक्षेप पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे मदद की ज़रूरत नहीं थी, लेकिन मैंने कहा, &#039;हाँ, हमें आपकी मदद पाकर खुशी होगी,&#039; क्योंकि मैं देखना चाहता था कि क्या वे ऐसा करेंगे। और उन्होंने हर बार कहा, &#039;हम इसमें शामिल नहीं होना चाहते।&#039; और आपको पता ही होगा कि आश्चर्यजनक बात यह है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य का उपयोग करते हैं, और हम नहीं। हम इसका उपयोग नहीं करते। हमें इसकी ज़रूरत नहीं है। हमारे पास बहुत सारा तेल है।इसे भी पढ़ें: US Navy को फिर मिला चकमा, Iran का दूसरा Supertanker DERYA भी इंडोनेशिया पहुंचायूरोपीय नेताओं के साथ मतभेदों के बावजूद, ट्रंप ने रूबियो के कूटनीतिक कौशल की सराहना की है। इस साल की शुरुआत में अपने स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण में ट्रंप ने रूबियो से कहा कि लोग आपको पसंद करते हैं। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के बाद उन्होंने विदेश मंत्री की कार्यकुशलता पर मज़ाक करते हुए कहा, &quot;आपने बहुत अच्छा काम किया है, आप एक महान विदेश मंत्री हैं। मुझे लगता है कि उन्हें अब तक के सर्वश्रेष्ठ विदेश मंत्री के रूप में याद किया जाएगा। इटली अमेरिकी सेना का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां 2025 के अंत तक छह ठिकानों पर लगभग 13,000 सक्रिय अमेरिकी सैनिक तैनात थे। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि रूबियो पोप लियो से मुलाकात कर पाएंगे या नहीं, जो प्रशासन की मध्य पूर्व नीतियों के खुले आलोचक रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:49 +0530</pubDate>
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<title>US Peace Proposal की समीक्षा कर रहा ईरान, कहा&#45; America की अनुचित मांगें स्वीकार नहीं</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने पुष्टि की है कि अधिकारी वर्तमान में अमेरिका द्वारा जारी एक जवाबी प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य चल रहे संघर्ष को रोकना है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, बग़ाई ने कहा कि अमेरिका का संदेश पाकिस्तान के माध्यम से प्राप्त हुआ है और उन्होंने आगे कहा कि &quot;इस समय उठाए गए मुद्दों के विवरण पर चर्चा नहीं की जाएगी, क्योंकि ये मुद्दे अभी भी समीक्षाधीन हैं। प्रवक्ता ने वार्ता प्रक्रिया में आने वाली कठिनाइयों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि &quot;अत्यधिक और अनुचित मांगें&quot; रखने का अमेरिकी दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि प्रस्ताव की समीक्षा करना आसान नहीं है। तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं के बारे में हालिया मीडिया कवरेज पर प्रतिक्रिया देते हुए, बग़ाई ने उसके परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता से संबंधित रिपोर्टों को अधिकांशतः अटकलें&quot; कहकर खारिज कर दिया।अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि संवर्धन या परमाणु सामग्री के बारे में उठाए गए मुद्दे पूरी तरह से अटकलें हैं&quot; और इस बात पर जोर दिया कि इस स्तर पर, हम युद्ध को पूरी तरह से रोकने के अलावा किसी और बात पर चर्चा नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि आगे का रास्ता अभी तय नहीं है, और यह भी कहा कि भविष्य में हम किस दिशा में आगे बढ़ेंगे, यह भविष्य में ही निर्धारित होगा। अल जज़ीरा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस्लामाबाद द्वारा सुगम बनाई गई यह राजनयिक बातचीत ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका को लेकर उच्च सतर्कता बरती जा रही है। यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयानों से मेल खाता है, जिन्होंने रविवार (स्थानीय समय) को कहा था कि उनके प्रतिनिधि &quot;बहुत सकारात्मक&quot; चर्चा कर रहे हैं। क्षेत्रीय तनावों पर दोनों पक्षों के बीच परस्पर विरोधी प्रस्तावों के आदान-प्रदान के बावजूद, ट्रम्प ने निरंतर राजनयिक जुड़ाव का संकेत दिया। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में, ट्रम्प ने कहा कि उनके प्रतिनिधि तेहरान के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं और सुझाव दिया कि वार्ता से &quot;सभी के लिए कुछ बहुत सकारात्मक&quot; परिणाम निकल सकते हैं।इसे भी पढ़ें: US Navy को फिर मिला चकमा, Iran का दूसरा Supertanker DERYA भी इंडोनेशिया पहुंचाउन्होंने कहा कि मुझे पूरी तरह से पता है कि मेरे प्रतिनिधि ईरान के साथ बहुत सकारात्मक बातचीत कर रहे हैं और ये बातचीत सभी के लिए बहुत सकारात्मक परिणाम ला सकती है। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने भी इन्हीं भावनाओं को दोहराते हुए सीएनएन को बताया कि वाशिंगटन तेहरान के साथ बातचीत जारी रखे हुए है। विटकॉफ ने संघर्ष को समाप्त करने के लिए संभावित वार्ताओं का पता लगाने के उद्देश्य से चल रहे राजनयिक संपर्कों का जिक्र करते हुए कहा, &quot;हम बातचीत कर रहे हैं।&quot;विटकॉफ पीजीए कैडिलैक चैंपियनशिप के दौरान ट्रंप के डोराल गोल्फ क्लब से बोल रहे थे, जहां उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ देखा गया था। ट्रंप का यह ताजा रुख उनके एक दिन पहले दिए गए बयान से बिल्कुल उलट था, जब उन्होंने ईरान के प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने पहले कहा था कि वे ईरान के इस नए प्रस्ताव को &quot;स्वीकार्य&quot; नहीं मान सकते, क्योंकि उन्होंने मानवता के साथ जो किया है, उसके लिए उन्होंने अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है।इसे भी पढ़ें: Pope से तकरार, Italy से नाराजगी! Trump के फैलाए रायते को समेटने Vatican पहुंचे Marco Rubioइस बीच, द टाइम्स ऑफ इज़राइल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्षेत्रीय संघर्ष को सुलझाने के उद्देश्य से ईरान के नवीनतम प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं है। इजरायली समाचार प्लेटफॉर्म के अनुसार, ट्रंप ने कान न्यूज के संवाददाता नाथन गुटमैन के साथ एक संक्षिप्त फोन कॉल के दौरान भी इसी तरह का बयान दिया था। एक्स पर एक पोस्ट में, गुटमैन ने ट्रंप के हवाले से कहा, यह मुझे स्वीकार्य नहीं है। मैंने इसका अध्ययन किया है, मैंने हर चीज का अध्ययन किया है यह स्वीकार्य नहीं है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:48 +0530</pubDate>
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<title>Russia के खिलाफ Ukraine का नया दांव, EU के साथ मिलकर बनाएगा &amp;apos;घातक&amp;apos; Drones</title>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने सोमवार को यूरोपीय संघ आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ यूरोपीय सहायता ऋण पर बातचीत की। वॉन डेर लेयेन और ज़ेलेंस्की ने यूरोपीय संघ के साथ ड्रोन समझौते पर सक्रिय रूप से आगे बढ़ने पर भी सहमति व्यक्त की और संभावित सुरक्षा सहयोग के विवरणों की समीक्षा की। एक पोस्ट में उन्होंने बताया कि आज मेरी यूरोपीय संघ आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से एक महत्वपूर्ण बातचीत हुई। हमने यूरोपीय सहायता ऋण पर चर्चा की, जिसमें ड्रोन के सह-उत्पादन के लिए आवंटित की जाने वाली पहली किश्त की समयसीमा भी शामिल थी। हमने यूरोपीय संघ के साथ ड्रोन समझौते पर सक्रिय रूप से आगे बढ़ने पर भी सहमति व्यक्त की और इस संभावित सुरक्षा सहयोग के विवरण की समीक्षा की। उन्होंने आगे कहा कि हम आवश्यक सुरक्षा बुनियादी ढांचे के निर्माण को सक्षम बनाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की योजना तैयार कर रहे हैं। मैंने संबंधित कार्य जनरल स्टाफ के प्रमुख एंड्री ह्नातोव, राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव और कार्यालय की राजनयिक टीम को सौंप दिए हैं। इसे भी पढ़ें: Ukraine का भीषण Drone Attack, Russia के तेल बंदरगाह पर बरसाए 60 ड्रोन, मॉस्को तक हड़कंपरूसी वायु रक्षा ने मॉस्को की ओर जा रहे दो ड्रोनों के हमले को नाकाम कर दिया, शहर के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने तास के हवाले से बताया। उन्होंने मैक्स पर लिखा कि रक्षा मंत्रालय के वायु रक्षा बलों ने मॉस्को की ओर जा रहे दो ड्रोनों के हमले को विफल कर दिया। प्राथमिक बचाव दल दुर्घटनास्थल पर काम कर रहे हैं। इससे पहले, सोब्यानिन ने बताया था कि पश्चिमी मॉस्को में एक ड्रोन एक आवासीय इमारत से टकरा गया था। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।इसे भी पढ़ें: भारत के दोस्त रूस पर हमला, अब होगा US के 19 जहाजों का हिसाब!इस बीच, येरेवन में यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ बैठक की। आपने गुप्त नौसेना के संबंध में अन्य देशों के लिए एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुझे लगता है कि रूसी अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव पड़ रहा है, विशेष रूप से इस वर्ष। हम अपने सैनिकों के लिए आपके सभी प्रशिक्षण अभियानों के लिए भी आभारी हैं। ज़ेलेंस्की ने कहा कि आर्मेनिया में बैठकों के पहले दिन का केंद्र बिंदु सोमवार के शिखर सम्मेलन से पहले यूरोपीय भागीदारों के साथ समन्वय था। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:47 +0530</pubDate>
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<title>इजरायली Air Force का Hezbollah पर बड़ा एक्शन, दक्षिणी लेबनान में आतंकी ठिकानों पर की बमबारी</title>
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<description><![CDATA[ इजरायली वायु सेना ने सोमवार को हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला किया और कहा कि आतंकवादी उसी स्थान से अपनी गतिविधियाँ संचालित कर रहे थे। वायु सेना ने बताया कि 91वीं डिवीजन के बलों ने उस प्रक्षेपण स्थल पर हमला किया जहाँ से मिसाइल दागी गई थी। एक्स पर एक पोस्ट में वायु सेना ने कहा कि रात के दौरान, दक्षिणी लेबनान में हमारी सेनाओं की ओर एक टैंक-रोधी मिसाइल दागे जाने के बाद, वायु सेना ने आतंकवादी संगठन हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला किया, जहाँ से संगठन के आतंकवादी गतिविधियाँ संचालित कर रहे थे। हमले में कोई हताहत नहीं हुआ। कुछ ही समय के भीतर, 91वीं डिवीजन के बलों ने उस प्रक्षेपण स्थल पर हमला किया जहाँ से मिसाइल दागी गई थी।इसे भी पढ़ें: धर्म शासित ईरान की सामरिक-आक्रामक तैयारी व बढ़ती सैन्य क्षमता गैर इस्लामिक देशों के लिए नसीहत है, कैसे?अल जज़ीरा के अनुसार, इज़राइल ने देबाल, क़ाना, श्रीफ़ा और क़लाउइया के साथ-साथ ज़ावतार अल-शरकिया, तोउलिन, शेहूर और ब्राशित पर हमला किया। 16 अप्रैल को हुए युद्धविराम के बावजूद, इज़राइल और हिज़्बुल्लाह दक्षिणी लेबनान में लगातार एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं, जहाँ इज़राइल की सेना तैनात है। अल जज़ीरा के अनुसार, दक्षिणी लेबनान के शहर शेहूर पर इज़राइली हवाई हमलों में कम से कम दो लोग मारे गए हैं।इज़राइली सेना ने कहा कि उसने शनिवार को दक्षिणी लेबनान में कई ठिकानों पर हमले किए।इसे भी पढ़ें: Iran में फटा अमेरिकी बम, मारे गए IRGC के 14 सैनिकइजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) ने कहा कि पिछले दिन दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े कई ठिकानों पर उनके बलों ने हमले किए, जिनमें उन ठिकानों को निशाना बनाया गया जिन्हें उन्होंने &#039;आतंकवादी ढांचा&#039; बताया, जिनका इस्तेमाल हमलों की योजना बनाने और उन्हें समर्थन देने के लिए किया जाता था। सेना ने कहा कि पिछले दिन (शनिवार) आईडीएफ ने दक्षिणी लेबनान में आईडीएफ सैनिकों के पास सक्रिय कई आतंकवादी ढांचे वाले ठिकानों पर हमले किए और आतंकवादियों को मार गिराया। इसमें आगे कहा गया कि कई क्षेत्रों में लगभग 70 सैन्य संरचनाएं और हिजबुल्लाह से जुड़े लगभग 50 बुनियादी ढांचे वाले ठिकाने नष्ट कर दिए गए। आईडीएफ के अनुसार, लक्ष्यों में कमान केंद्र, हथियार भंडारण सुविधाएं, सैन्य भवन और अन्य ठिकाने शामिल थे जिनका कथित तौर पर इजरायली बलों के खिलाफ हमलों को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>रूस ने यूक्रेन के 2 ड्रोन को रोका, कोई हताहत नहीं हुआ</title>
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<description><![CDATA[ रूसी वायु रक्षा बलों ने मॉस्को की ओर आ रहे दो ड्रोनों के हमले को नाकाम कर दिया। शहर के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने तास के हवाले से यह जानकारी दी। उन्होंने मैक्स पर लिखा कि रक्षा मंत्रालय के वायु रक्षा बलों ने मॉस्को की ओर आ रहे दो ड्रोनों के हमले को नाकाम कर दिया।&quot; तास के अनुसार, &quot;प्राथमिक बचाव दल दुर्घटनास्थल पर काम कर रहे हैं। इससे पहले, सोबयानिन ने बताया था कि पश्चिमी मॉस्को में एक ड्रोन एक आवासीय इमारत से टकरा गया था। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। इस बीच, येरेवन में यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर से मुलाकात की।इसे भी पढ़ें: Vishwakhabram: Trump ने अब जर्मन चांसलर Friedrich Merz पर हमला बोला, US-Germany संबंधों में आई दरारराष्ट्रपति ने कहा कि आपने हवाई बेड़े के संबंध में अन्य देशों के लिए एक मजबूत उदाहरण पेश किया है। मुझे लगता है कि रूसी अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ रहा है, खासकर इस साल। हम अपने सैनिकों के लिए आपके सभी प्रशिक्षण अभियानों के लिए भी आभारी हैं। एक एक्स पोस्ट में ज़ेलेंस्की ने कहा कि आर्मेनिया में बैठकों के पहले दिन सोमवार के शिखर सम्मेलन से पहले यूरोपीय साझेदारों के साथ समन्वय पर ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने कहा कि तीन प्रमुख उद्देश्य हैं। पहला: हम युद्ध को सम्मानजनक तरीके से समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि यूक्रेन रूस पर मजबूत राजनयिक प्रयास और निरंतर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।इसे भी पढ़ें: Ukraine का भीषण Drone Attack, Russia के तेल बंदरगाह पर बरसाए 60 ड्रोन, मॉस्को तक हड़कंपरूस को यह युद्ध समाप्त करना होगा। यूक्रेन के साथ खड़े सभी लोगों का मैं धन्यवाद करता हूँ! ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन के लिए 90 अरब यूरो के यूरोपीय सहायता पैकेज को लागू करने के प्रयासों और आगामी शीत ऋतु की तैयारियों पर भी प्रकाश डाला। तीसरा: यूक्रेन की वायु रक्षा को मजबूत करना, यूक्रेन को ऊर्जा सहायता प्रदान करना और ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारों के साथ सहयोग करना। उन्होंने कहा कि हम पहले से ही आगामी ताप ऋतु के लिए सक्रिय रूप से तैयारी कर रहे हैं और संबंधित सहायता में विविधता ला रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:16 +0530</pubDate>
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<title>योगी ने अकेले कैसे पलट कर रख दिया पूरा चुनाव, ये जानकर ममता भी हैरान!</title>
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<description><![CDATA[ आज पांच राज्यों के चुनाव के नतीजे आ रहे हैं। जिसमें से सबसे ज्यादा इंटरेस्टिंग है बंगाल चुनाव के नतीजे। यह पहली बार हो रहा है जब बीजेपी टीएमसी से कई सीटों से आगे चल रही है। अगर बीजेपी जीत हासिल करती है तो यह इतिहास में पहली बार होगा जब बीजेपी बंगाल चुनाव जीतेगी। इसकी कई वजह हैं।लेकिन एक वजह ऐसी है जिसकी काफी ज्यादा चर्चा हो रही है। वह है योगी आदित्यनाथ। कहा जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ वहां पे कई रैलियां की जिसकी वजह से बीजेपी जीत की ओर बढ़ रही है। बंगाल चुनाव जो भाजपा इतनी बड़ी बढ़त के साथ आगे दिख रही है लेकिन सीएम योगी की जो जो वहां बंगाल में जाकर उन्होंने जो रैलियां की उस परकाफी कम बात हो रही है। योगी फैक्टर जो हमने बिहार में भी देखा, महाराष्ट्र में भी देखा और अब बंगाल में भी देखने को मिल रहा है। सीएम योगी ने लगभग 20 से ज्यादा रैलियां  बंगाल में की है और इन सभी रैलियों में इतना क्रेज था लोगों का जो वहां के आम पब्लिक थे उनका जमावड़ा था। कई बार तो ऐसा हुआ कि कुछ रैलियों में लोग बुलडोजर पर चढ़ के सीएम योगी को देखने आ गए थे। वैसे तो सीएम योगी की कि जहां भी जाते हैं लोग इस तरह की बातें करते हैं लेकिन जो कुछ जो नारे वहां पर दिए गए और नारे का इफेक्ट भी देखने को मिलता है।इसे भी पढ़ें: Cabinet बैठक से पहले CM Yogi ने बांटी मिठाई, BJP की Grand Victory का लखनऊ में Celebrationआपको महाराष्ट्र का चुनाव याद होगा जब सीएम योगी वहां गए थे तो उन्होंने एक नारा दिया था बटोगे तो कटोगे ये नारा इतना ज्यादा पॉपुलर हुआ और उसके बाद जो आरएसएस और जो भाजपा के जो जो करीबी संगठन है जो आंतरिक संगठन है ये लोग ऐसा रिपोर्ट्स थी ऐसी कि ये लोग घर-घर जाके सीएम योगी के इस नारे को लोगों तक पहुंचा रहे थे। अलग-अलग उन्हें पोस्टर्स दे रहे थे। उन्हें कुछ सामान दे रहे थे जिन पर नारा लिखा हुआ था। तो ये इस तरह की रिपोर्ट्स आई थी। ऐसा ही इस बार भी हमें देखने को मिला बंगाल में जब सीएम योगी वहां रैली कर रहे थे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने  बंगाल में जो नारा दिया उनमें से एक  टीएमसी मुक्तो बांग्ला यानी बंगाल में जो टीएमसी की सरकार है वहां से टीएमसी को हटाइए। अब जो है हमारी बारी है। हमें आपने आज तक मौका नहीं दिया। तो इसलिए भाजपा को इस बार मौका दीजिए। इसे भी पढ़ें: Lucknow के KGMU का Video दिखाकर भड़के Akhilesh Yadav, कहा- यह AI नहीं, असली हकीकत हैउन्होंने नारा दिया गौ माता को कटने नहीं देंगे। हिंदुओं को बटने नहीं देंगे। इसका मतलब साफ है कि जो जो बंगाल में जो एक भाजपा बहुत लंबे समय से मुद्दा चलाती रही है बांग्लादेशी घुसपैठियों का। उनका भाजपा लगातार ये आरोप लगाती है कि ममता बनर्जी की सरकार जो है उन घुसपैठियों को संरक्षण देती है। उनको बचाव करती है उनका। इसीलिए उन्होंने देख लिया कि जो हिंदू कोर वोटर बैंक है। इन पर अभी तक किसी का शिकंजा नहीं पड़ा बंगाल में। ये एक बहुत बड़ा फैक्टर है जो सीएम योगी ने वहां जाके उस वहां पे जो है उस पे लागू किया और उसके बाद देखिए नतीजा सबके सामने है।  सीएम योगी का असर देखिए उन्होंने एक जय श्री राम का भी नारा लगाया और उसके बाद इतना ज्यादा क्रेज लोगों के बीच सीएम योगी को लेके तो ये दिखाता है कि सीएम योगी की ताकत कितनी ज्यादा है सिर्फ यूपी में नहीं आसपास के राज्यों में भी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:15 +0530</pubDate>
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<title>PoJK एक्टिविस्ट Amjad Mirza का बड़ा खुलासा, कहा&#45; Pakistan Army के इशारे पर चलता है वहां का मीडिया</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर (PoJK) के कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्ज़ा ने विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) और जम्मू-कश्मीर में मीडिया स्वतंत्रता की स्थिति पर प्रकाश डाला और वहां के लोगों के चल रहे संघर्ष की ओर ध्यान आकर्षित किया। अपने संदेश में मिर्ज़ा ने कहा कि इन क्षेत्रों के लोगों की आवाज़ और चिंताओं को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उन्हें न केवल विश्वसनीय और स्वतंत्र जानकारी तक पहुंच से वंचित रखा जाता है, बल्कि स्थानीय मीडिया में विविध दृष्टिकोणों से भी वंचित रखा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राय पृष्ठों और संपादकीय क्षेत्रों में जम्मू-कश्मीर से संबंधित ऐतिहासिक और राजनीतिक घटनाक्रमों पर सवाल उठाने वाले दृष्टिकोणों को जगह नहीं दी जाती है।इसे भी पढ़ें: US Peace Proposal की समीक्षा कर रहा ईरान, कहा- America की अनुचित मांगें स्वीकार नहींमिर्ज़ा ने आगे दावा किया कि इन क्षेत्रों में मीडिया परिदृश्य पर इस्लामाबाद स्थित संघीय निकाय, पाकिस्तान के प्रेस और सूचना विभाग (PID) का कड़ा नियंत्रण है, जो उनके अनुसार सेना के मीडिया विंग, अंतर-सेवा जनसंपर्क (ISPR) के प्रभाव में काम करता है। उनके अनुसार, इस नियंत्रण के परिणामस्वरूप ऐसी सामग्री प्रकाशित होती है जो बड़े पैमाने पर पाकिस्तान समर्थक विचारों को दर्शाती है, जबकि वैकल्पिक या असहमति वाली आवाजों को बाहर रखा जाता है। इसे भी पढ़ें: Middle East संकट का हल निकालने की कवायद, Pakistan के जरिए Iran-US में पर्दे के पीछे बातचीतउन्होंने अप्रत्यक्ष सेंसरशिप पर भी चिंता जताई और कहा कि सरकारी विज्ञापनों पर प्रिंट मीडिया की निर्भरता अनुरूपता का दबाव पैदा करती है। मिर्ज़ा ने कहा कि इन क्षेत्रों में समाचार पत्रों की आय का प्राथमिक स्रोत विज्ञापन राजस्व खोने का डर मीडिया संस्थानों में स्व-सेंसरशिप को जन्म देता है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की सीमित उपस्थिति की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय टेलीविजन चैनलों की अनुपस्थिति के कारण प्रिंट मीडिया सूचना का प्रमुख स्रोत बन गया है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रभुत्व का उपयोग विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर से संबंधित मुद्दों पर विचारों को गढ़ने और प्रतिवादों को दबाने के लिए किया जा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:15 +0530</pubDate>
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<title>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में Iran का बड़ा दांव, IRGC ने घोषित किया नया समुद्री कंट्रोल जोन</title>
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<description><![CDATA[ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक नए समुद्री नियंत्रण क्षेत्र की घोषणा की है। ईरानी सरकारी प्रसारक के अनुसार, आईआरजीसी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक नए समुद्री नियंत्रण क्षेत्र की घोषणा की है। स्मार्ट कंट्रोल के इस नए क्षेत्र में दक्षिण में ईरान के माउंट मुबारक और संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह के दक्षिण के बीच की रेखा, और पश्चिम में ईरान के क़ेशम द्वीप के अंतिम छोर और संयुक्त अरब अमीरात के उम अल कुवैन के बीच की रेखा शामिल है। इस बीच, अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने पुष्टि की है कि अधिकारी वर्तमान में अमेरिका द्वारा जारी संघर्ष को रोकने के उद्देश्य से दिए गए एक जवाबी प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रहे हैं।इसे भी पढ़ें: US Peace Proposal की समीक्षा कर रहा ईरान, कहा- America की अनुचित मांगें स्वीकार नहीं एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, बग़ाई ने कहा कि अमेरिका का संदेश पाकिस्तान के माध्यम से प्राप्त हुआ है और उन्होंने आगे कहा कि मैं इस समय उठाए गए मुद्दों के विवरण पर चर्चा नहीं करूंगा, क्योंकि इन मुद्दों की अभी समीक्षा की जा रही है। प्रवक्ता ने वार्ता प्रक्रिया में आने वाली कठिनाइयों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि &quot;अत्यधिक और अनुचित मांगें&quot; रखने का अमेरिकी दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि प्रस्ताव की समीक्षा करना आसान नहीं है। तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं से संबंधित हालिया मीडिया कवरेज पर प्रतिक्रिया देते हुए, बगाई ने उसके परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता से संबंधित रिपोर्टों को ज्यादातर अटकलें कहकर खारिज कर दिया।इसे भी पढ़ें: US Navy को फिर मिला चकमा, Iran का दूसरा Supertanker DERYA भी इंडोनेशिया पहुंचा अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि &quot;संवर्धन या परमाणु सामग्री के बारे में उठाए गए मुद्दे पूरी तरह से अटकलें हैं&quot; और इस बात पर जोर दिया कि &quot;इस स्तर पर, हम युद्ध को पूरी तरह से रोकने के अलावा किसी और चीज पर चर्चा नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि आगे का रास्ता अभी तय नहीं है, और कहा कि &quot;भविष्य में हम किस दिशा में आगे बढ़ेंगे, यह भविष्य में ही निर्धारित होगा। अल जज़ीरा ने बताया कि इस्लामाबाद द्वारा सुगम बनाया गया यह राजनयिक आदान-प्रदान ऐसे समय में हो रहा है जब क्षेत्र में आगे और तनाव बढ़ने की संभावना को लेकर उच्च सतर्कता बनी हुई है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:14 +0530</pubDate>
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<title>Strait of Hormuz में Trump के प्लान पर Iran की धमकी, US सेना पर होगा सीधा हमला</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने कहा कि उसने एक अमेरिकी युद्धपोत को होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने से रोक दिया था, लेकिन एक्सियोस के एक पत्रकार के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने इस रिपोर्ट का खंडन किया कि उस पर ईरानी मिसाइलों से हमला किया गया था। ईरान की नौसेना ने कहा कि उसने &quot;त्वरित और निर्णायक चेतावनी&quot; जारी करके &quot;अमेरिकी-ज़ायोनी&quot; युद्धपोतों को होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका था। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स ने कहा कि जलडमरूमध्य के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर स्थित जास्क बंदरगाह के पास युद्धपोत पर दो मिसाइलें दागी गईं, जहां ईरान की नौसेना का एक अड्डा है, लेकिन एक्सियोस के बराक रविद के अनुसार, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने तुरंत इस रिपोर्ट का खंडन किया।इसे भी पढ़ें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में Iran का बड़ा दांव, IRGC ने घोषित किया नया समुद्री कंट्रोल जोनअमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे अन्य देशों के पोतों को सुरक्षित निकालने में सोमवार से मदद करेगी। इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि इस प्रक्रिया में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से सख्ती से निपटा जाएगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ का उद्देश्य उन विदेशी पोतों की मदद करना है जो पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम से किसी भी तरह जुड़े नहीं हैं। ट्रंप ने कहा कि इनमें से कई पोतों में भोजन, पेयजल और अन्य उन सभी आवश्यक चीजों की कमी हो रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने साथ ही कहा कि उनके प्रतिनिधियों की ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत जारी है जिससे ‘‘सभी के लिए सकारात्मक’’ परिणाम निकल सकता है। ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ (सेंटकॉम) ने एक बयान में कहा, ‘‘राष्ट्रपति के निर्देश पर शुरू किए गए इस अभियान के तहत उन वाणिज्यिक पोतों की मदद की जाएगी जो इस अहम अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग से स्वतंत्र रूप से गुजरना चाहते हैं। दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का एक-चौथाई हिस्सा और ईंधन एवं उर्वरक उत्पादों की बड़ी मात्रा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है।’’इसे भी पढ़ें: Pope से तकरार, Italy से नाराजगी! Trump के फैलाए रायते को समेटने Vatican पहुंचे Marco Rubioसेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा, ‘‘क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए इस रक्षात्मक अभियान में हमारा सहयोग जरूरी है। इसके साथ ही हम नौसैनिक नाकेबंदी भी बनाए हुए हैं।’’ ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ में अमेरिका की सैन्य सहायता के तहत निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पोत, जमीन एवं समुद्र से संचालित हो सकने वाले 100 से अधिक विमान और 15,000 सैन्यकर्मी शामिल होंगे। ओमान और ईरान के बीच स्थित संकरा समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य 28 फरवरी से बंद है। इसी दिन अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया था जिसके बाद युद्ध शुरू हुआ। ट्रंप ने कहा, ‘‘पोतों की आवाजाही का मकसद केवल उन लोगों, कंपनियों और देशों को राहत देना है जिन्होंने कुछ गलत नहीं किया है। वे परिस्थितियों के शिकार हैं। यह अमेरिका, पश्चिम एशियाई देशों और खासकर ईरान की ओर से एक मानवीय पहल है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:13 +0530</pubDate>
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<title>भविष्य संकट में है...पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों से बांग्लादेश के मीडिया में क्यों मची खलबली?</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बांग्लादेश की सीमा से लगे कई जिलों में शानदार जीत हासिल की है। यह परिणाम राज्य में आई भाजपा की व्यापक लहर का हिस्सा है, लेकिन इसमें &#039;बांग्लादेश फैक्टर&#039; की भी भूमिका रही है। बांग्लादेश में हफ्तों तक चली हिंसक घटनाओं के बाद शेख हसीना की सत्ता से बेदखल होने के बाद, इस्लामी ताकतों ने देश पर कब्जा कर लिया और मुहम्मद यूनुस के 18 महीने के शासनकाल में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का सिलसिला जारी रहा। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस्लामी अभियान के सीमा पार पश्चिम बंगाल में फैलने की आशंकाओं ने हिंदुओं को एक चुनावी गुट के रूप में एकजुट होने में मदद की। पश्चिम बंगाल में हिंदू कभी भी एक गुट के रूप में मतदान नहीं करते आए हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश पर ध्यान केंद्रित करने वाले लेखक और राजनीतिक विश्लेषक दीप हल्दर के अनुसार, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) इस बार उन्हें एक गुट में बदलने में कामयाब रहे हैं।पश्चिम बंगाल में हो रहे घटनाक्रम पर बांग्लादेश में बारीकी से नज़र रखी जा रही है, जहां मीडिया संस्थान मतगणना प्रक्रिया को व्यापक कवरेज दे रहे हैं। बांग्लादेश के प्रमुख प्रकाशन ढाका ट्रिब्यून ने बताया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा (293 सीटें) सहित पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुए चुनावों के लिए मतगणना जारी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन चुनावों के नतीजे जिनमें देशभर की कुल 823 सीटें शामिल हैं। भारत के राजनीतिक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। बांग्लादेश के स्थानीय अखबार, प्रथम आलो में एक विश्लेषणात्मक लेख प्रकाशित किया गया है जिसका शीर्षक है- पश्चिम बंगाल चुनाव: सिर्फ राज्य का नहीं बल्कि भारतीय गणतंत्र का भविष्य भी संकट में है।इसे भी पढ़ें: Nandigram Election Result 2026: नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी जीते, भवानीपुर में क्या होगाबंगाल के चुनावी घमासान और उस पर उठते सवालों की आंच अब पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश के मीडिया तक भी पहुंच गई है। &#039;द डेली स्टार&#039; में छपे एक हालिया लेख ने भारतीय चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। अखबार का मानना है कि भारत के चुनाव आयोग का जो एक गौरवशाली और निष्पक्ष इतिहास रहा है, वह अब कहीं धुंधला पड़ गया है। लेख में मुख्य रूप से मतदाता सूची संशोधन की &#039;SIR&#039; (स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू) प्रक्रिया की आलोचना की गई है। इसमें कहा गया है कि कागज़ों पर यह नीति कितनी भी दुरुस्त क्यों न हो, लेकिन बंगाल में इसके क्रियान्वयन के तरीके ने भारी तादाद में वोटरों को सिर्फ और सिर्फ निराश और क्षुब्ध करने का काम किया है। इसे भी पढ़ें: West Bengal चुनाव में BJP की बढ़त पर Lalan Singh बोले- लंबे समय बाद जनशासन स्थापित हुआबांग्लादेशी अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बीजेपी के &#039;मुस्लिम नैरेटिव&#039; पर भी तीखे सवाल उठाए हैं। लेख में बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के उन बयानों का ज़िक्र है, जिनमें अक्सर दावा किया जाता है कि बंगाल में करीब एक करोड़ बांग्लादेशी मुसलमान और रोहिंग्या रह रहे हैं। &#039;द डेली स्टार&#039; ने इस दावे की तार्किकता पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि इतनी बड़ी आबादी आखिर राज्य में है कहां? सबसे बड़ा सवाल यह कि कोई घुसपैठिया ऐसे राज्य में क्यों पनाह लेगा, जहां से खुद स्थानीय लोग रोज़गार की तलाश में पलायन कर रहे हों? अखबार ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों और इतनी लंबी-चौड़ी चुनावी कवायद के बावजूद, चुनाव आयोग ज़मीन पर एक भी तथाकथित घुसपैठिए की पहचान नहीं कर सका है। हालांकि, अखबार का नज़रिया पूरी तरह से एकतरफा नहीं है; उसने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को भी आड़े हाथों लिया है। लेख में साफ़ तौर पर कहा गया है कि टीएमसी का अपना दामन भी दागदार है, और पार्टी लगातार &#039;सिंडिकेट राज&#039; (वसूली), बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और गहरी राजनीतिक साज़िशों जैसे गंभीर आरोपों से घिरी हुई है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:51:12 +0530</pubDate>
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<title>अफ़ग़ानिस्तान: तालेबान से पत्रकारों की तत्काल व बिना शर्त रिहाई की अपील</title>
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<description><![CDATA[ अफ़ग़ानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र विशेषज्ञ रिचर्ड बैनेट ने, तालेबान शासन से, हिरासत में लिए गए सभी पत्रकारों को तुरन्त और बिना शर्त रिहा करने की अपील की है. यह अपील विशेष रूप से विश्व प्रैस स्वतंत्रता दिवस (3 मई) के अवसर पर विशेष अहमियत रखती है.  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:49:58 +0530</pubDate>
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<title>अपने मंसूबे में कामयाब हो गया अमेरिका? मिडिल ईस्ट में 8.6 अरब+ डॉलर के हथियार बेचने को मंजूरी</title>
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<description><![CDATA[ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन ने आपातकाल का हवाला देते हुए कांग्रेस की समीक्षा को दरकिनार करते हुए मध्य पूर्व के देशों को हथियारों के हस्तांतरण को मंजूरी दे दी। 8.6 अरब डॉलर से अधिक के सैन्य सौदों में वायु रक्षा मिसाइलों से लेकर लेजर मार्गदर्शन प्रणालियों तक शामिल हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की, जबकि अमेरिका और इज़राइल के बीच ईरान को लेकर चल रहे युद्ध को नौ सप्ताह हो चुके हैं और एक नाजुक युद्धविराम के बावजूद संघर्ष को समाप्त करने पर अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है।इसे भी पढ़ें: Donald Trump का Europe को बड़ा झटका, Import होने वाली गाड़ियों पर लगेगा 25% Tariffस्वीकृत देशों और हथियारों की सूचीइज़राइल - विभाग ने इज़राइल को बीएई सिस्टम्स द्वारा निर्मित 10,000 एडवांस्ड प्रेसिजन किल वेपन सिस्टम-II ऑल-अप राउंड्स और संबंधित उपकरण बेचने की मंजूरी दी, जिनकी कीमत 992.4 मिलियन डॉलर है।कतर - अमेरिका ने कतर को 10,000 एडवांस्ड प्रेसिजन किल वेपन सिस्टम-II ऑल-अप राउंड्स (एकल संस्करण) सिस्टम बेचने की मंजूरी दी, जिनकी कीमत 992.4 मिलियन डॉलर है। इस संभावित बिक्री के लिए प्रमुख ठेकेदार बीएई सिस्टम्स होगा। कतर ने 200 पैट्रियट एडवांस्ड कैपेबिलिटी-2 (PAC-2) गाइडेंस एनहैंस्ड मिसाइल-टैक्टिकल (GEM-T) इंटरसेप्टर और 300 PAC-3 मिसाइल सेगमेंट एनहैंसमेंट इंटरसेप्टर और संबंधित उपकरण भी खरीदे, जिनकी कीमत 4.01 अरब डॉलर है। लॉकहीड और आरटीएक्स इन शस्त्र प्रणालियों के प्रमुख ठेकेदार हैं।यूएई - एडवांस्ड प्रेसिजन किल वेपन सिस्टम-II के 1,500 गाइडेंस सेक्शन (सिंगल वेरिएंट, एयर-टू-एयर) की बिक्री को 147.6 मिलियन डॉलर की कुल लागत पर मंजूरी दी गई।कुवैत - इंटीग्रेटेड बैटल कमांड सिस्टम और संबंधित उपकरणों की 2.5 अरब डॉलर की एक और खरीद को भी मंजूरी दी गई। रॉयटर्स समाचार एजेंसी के अनुसार, नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन कॉर्प, आरटीएक्स कॉर्प और लॉकहीड मार्टिन कॉर्प संभावित बिक्री के लिए प्रमुख ठेकेदार होंगे।इसे भी पढ़ें: Donald Trump का Europe को बड़ा झटका, Import होने वाली गाड़ियों पर लगेगा 25% Tariffरुबियो ने कहा कि तत्काल बिक्री की आवश्यकता वाली आपात स्थिति मौजूद है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इन सभी हथियार पैकेजों की मंजूरी को यह कहते हुए सही ठहराया है कि &quot;इन हथियारों की तत्काल बिक्री की आवश्यकता वाली आपात स्थिति मौजूद है। संभावित हथियार बिक्री आमतौर पर कांग्रेस की समीक्षा अवधि के अधीन होती है, और हथियार की मात्रा और कीमत विक्रेता और उपभोक्ता के बीच बातचीत के बाद तय की जाती है। हालांकि, विदेश विभाग के बयान में कहा गया है कि यह त्वरित हस्तांतरण &quot;संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों में है&quot;। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 03 May 2026 18:27:45 +0530</pubDate>
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<title>एक तीर से दो निशाने? Iran के बाद अब Cuba पर Donald Trump की नज़र, कही कब्ज़े की बात</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मजाक में कहा है कि अमेरिकी नौसेना ईरान से लौटते समय क्यूबा को अपने कब्जे में ले लेगी।
 गैर-लाभकारी संगठन ‘फोरम क्लब ऑफ पाम बीचेज’ के समक्ष शुक्रवार शाम अपने संबोधन में कई बार विषय से इतर बात करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘‘क्यूबा में समस्याएं हैं।’’
 उन्होंने कहा, ‘‘ईरान से लौटते समय, हमारे पास हमारा एक बड़ा विमानवाहक पोत होगा, शायद यूएसएस अब्राहम लिंकन - जो दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत है - वह आएगा, तट से लगभग 100 गज की दूरी पर रुकेगा, और वे कहेंगे, ‘बहुत-बहुत धन्यवाद। हम आत्मसमर्पण करते हैं’। 
 क्यूबा में व्यापक सुधार के वास्ते वहां की सरकार पर दबाव बनाने के लिए ट्रंप प्रशासन महीनों से अभियान चला रहा है।
 इस दौरान, ट्रंप ने बार-बार धमकी दी है कि अमेरिका जो चाहता है उसे हासिल करने के लिए वह क्यूबा के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 03 May 2026 18:27:44 +0530</pubDate>
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<title>भारत के स्टैंड पर लगी मुहर! Canada की खुफिया Report ने माना&#45; खालिस्तानी हैं बड़ा खतरा</title>
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<description><![CDATA[ कनाडा की खुफिया सेवा की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खालिस्तानी तत्व देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं और उनकी गतिविधियां चरमपंथी एजेंडा को बढ़ावा देती रहती हैं। यह रिपोर्ट कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (सीएसआईएस) द्वारा 2025 के खुफिया आकलन के आधार पर तैयार की गई थी और शुक्रवार को संसद में पेश की गई। रिपोर्ट में एयर इंडिया फ्लाइट 182 पर हुए बम हमले की 40वीं वर्षगांठ का भी जिक्र किया गया है, जिसमें 329 लोगों की जान गई थी और इसे कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला&quot; बताया गया है। हालांकि, इसमें कहा गया है कि 2025 में देश में कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों (सीबीकेई) से संबंधित कोई हमला नहीं हुआ।इसे भी पढ़ें: Diljit Dosanjh के Vancouver Concert में खालिस्तानियों का हंगामा, लगे भारत विरोधी नारे, सुरक्षाकर्मियों से हुई झड़पसमाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, रिपोर्ट में कहा गया है, सीबीकेई द्वारा हिंसक चरमपंथी गतिविधियों में निरंतर संलिप्तता कनाडा और कनाडाई हितों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा बनी हुई है। कुछ सीबीकेई कनाडाई नागरिकों से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं जो अपने हिंसक चरमपंथी एजेंडा को बढ़ावा देने के लिए कनाडाई संस्थानों का लाभ उठाते हैं और भोले-भाले समुदाय के सदस्यों से धन इकट्ठा करते हैं जिसे बाद में हिंसक गतिविधियों में लगाया जाता है। एक साल में यह दूसरी बार है जब सीएसआईएस ने कनाडा में खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ चेतावनी जारी की है। पिछले साल जून में अपनी रिपोर्ट में सीएसआईएस ने कहा था कि खालिस्तानी चरमपंथी अपने प्रचार के लिए कनाडा की धरती का इस्तेमाल करते आ रहे हैं और देश को &quot;मुख्य रूप से भारत में हिंसा को बढ़ावा देने, उसके लिए धन जुटाने या उसकी योजना बनाने के अड्डे&quot; के रूप में उपयोग कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Canada में बजा भारत का डंका, Dr. Reddy&#039;s की सस्ती Ozempic दवा को मिली मंजूरीभारत ने कनाडा की धरती पर खालिस्तानी तत्वों की मौजूदगी को बार-बार उजागर किया है और ओटावा से उनके खिलाफ कड़े और तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है। इसी वजह से भारत-कनाडा संबंध बेहद खराब हो गए थे, खासकर जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री रहते हुए। हालांकि, मार्क कार्नी के कनाडा में सत्ता में आने के बाद से दोनों देश अपने संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। इसी साल मार्च में कार्नी से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संकेत दिया था कि कनाडा को अपनी धरती पर मौजूद खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि आतंकवाद, कट्टरवाद और अतिवाद पूरी मानवता के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उस समय कार्नी की भारत यात्रा के दौरान एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, &quot;हम इस बात से सहमत हैं कि आतंकवाद, अतिवाद और कट्टरवाद न केवल हमारे दोनों देशों के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौतियां हैं। इन खतरों से निपटने में हमारा घनिष्ठ सहयोग वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए आवश्यक है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 03 May 2026 18:27:44 +0530</pubDate>
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<title>Iran में नहीं थम रही फांसी, Israel से जुड़े 2 और लोगों को लटकाया, UN ने जताई चिंता</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने शनिवार को दो लोगों को फांसी दे दी, जिन पर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप था। इनमें से एक पर मध्य इस्फ़हान प्रांत के नतान्ज़ परमाणु स्थल के पास खुफिया जानकारी जुटाने का आरोप था। ईरानी मीडिया ने यह जानकारी दी। न्यायपालिका ने कहा कि यागुब करीमपुर और नासिर बकरज़ादेह को इजरायल और उसकी जासूसी एजेंसी मोसाद के साथ खुफिया सहयोग करने का दोषी पाए जाने के बाद फांसी दी गई। करीमपुर पर मोसाद के एक अधिकारी को संवेदनशील जानकारी देने का आरोप था, जबकि बकरज़ादेह पर सरकारी और धार्मिक हस्तियों के साथ-साथ नतान्ज़ क्षेत्र सहित महत्वपूर्ण स्थलों के बारे में जानकारी जुटाने का आरोप था।इसे भी पढ़ें: यात्रियों को बड़ा झटका! Air India ने जुलाई तक कई International Flights कीं Cancel, जानें वजहदो सप्ताह से भी कम समय में यह दूसरी ऐसी फांसी है। 20 अप्रैल को ईरान ने दो लोगों को फांसी दी, जिन्हें इजरायल की मोसाद खुफिया सेवा के साथ सहयोग करने और देश के भीतर हमले की योजना बनाने के आरोप में दोषी ठहराया गया था। मोहम्मद मासूम शाही और हामेद वलीदी के रूप में पहचाने गए इन दोनों पर मोसाद से जुड़े एक जासूसी नेटवर्क का हिस्सा होने और इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र सहित विदेशों में प्रशिक्षण प्राप्त करने का आरोप था। हालांकि, ईरान के पीपुल्स मुजाहिदीन संगठन, जिससे वे कथित तौर पर जुड़े थे, ने इन आरोपों से इनकार किया। पेरिस स्थित ईरान के राष्ट्रीय प्रतिरोध परिषद की निर्वाचित अध्यक्ष मरियम रजावी ने एक्स पर कहा कि उनका एकमात्र &quot;अपराध स्वतंत्रता और अपने लोगों की मुक्ति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता थी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निकाय ने बुधवार को कहा कि ईरान ने 28 फरवरी से, जब अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध शुरू हुआ, तब से कम से कम 21 लोगों को फांसी दी है और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित आरोपों में 4,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।इसे भी पढ़ें: एक तीर से दो निशाने? Iran के बाद अब Cuba पर Donald Trump की नज़र, कही कब्ज़े की बातसंयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा कि मैं अधिकारियों से सभी आगे की फाँसी की सजाओं को रोकने, मृत्युदंड के प्रयोग पर रोक लगाने, उचित कानूनी प्रक्रिया और निष्पक्ष सुनवाई की गारंटी पूरी तरह सुनिश्चित करने और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा करने का आह्वान करता हूँ। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि ईरानी अधिकारियों ने विरोधियों पर दमन जारी रखा है, जिसमें इस वर्ष की शुरुआत में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन भी शामिल हैं, जिन्हें 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद देश की सबसे भीषण अशांति बताया गया है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 03 May 2026 18:27:43 +0530</pubDate>
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<title>UNSC की अध्यक्षता मिलते ही China का बड़ा कदम, Lebanon से UNIFIL मिशन वापसी पर पुनर्विचार की मांग</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के स्थायी प्रतिनिधि फू कोंग ने शनिवार को कहा कि मई महीने के लिए सुरक्षा परिषद की घूर्णनशील अध्यक्षता ग्रहण करना उनके लिए बहुत सम्मान की बात है। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, फू ने कहा कि चीन जिन मुद्दों पर विचार कर रहा है, उनमें से एक दक्षिणी लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षा मिशन का भविष्य है। पिछले साल अगस्त में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पारित एक प्रस्ताव का जिक्र करते हुए फू ने कहा हमारा मानना ​​है कि हमें यूएनआईएफआईएल को वापस बुलाने के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। अल जज़ीरा के अनुसार, 1978 में इज़राइल के आक्रमण के बाद से संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षक दक्षिणी लेबनान में तैनात हैं, लेकिन पिछले साल परिषद के 15 सदस्यों ने 2026 के अंत से मिशन को समाप्त करने के लिए मतदान किया था।इसे भी पढ़ें: Iran में नहीं थम रही फांसी, Israel से जुड़े 2 और लोगों को लटकाया, UN ने जताई चिंताफू ने कहा मुझे लगता है कि सुरक्षा परिषद के अधिकांश सदस्यों का यही मत है कि अभी यूएनआईएफआईएल को देश के उस हिस्से से वापस बुलाने का समय नहीं है। अल जज़ीरा के अनुसार, चीन जून में संयुक्त राष्ट्र सचिवालय से आने वाली रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहा है, उसके बाद ही हम अपना रुख स्पष्ट करेंगे। एक्स पर एक पोस्ट में फू ने कहा मई माह के लिए सुरक्षा परिषद की घूर्णनशील अध्यक्षता ग्रहण करना चीन के लिए बहुत सम्मान की बात है। हम पिछले माह अध्यक्ष के रूप में बहरीन द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हैं। अब जब कमान हमारे हाथों में है, तो हम परिषद के कार्यों में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखेंगे, और दृढ़ जिम्मेदारी की भावना और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे, परिषद की एकजुटता और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे, ताकि यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की रक्षा में सकारात्मक भूमिका निभा सके।इसे भी पढ़ें: ईरान के लिए खड़े हो गए 121 देश! UN में कैसे पिटा अमेरिका?1978 के आक्रमण के बाद इजरायली सैनिकों की वापसी की निगरानी के लिए गठित यूनिफिल (UNIFIL) के अधिकार क्षेत्र को 2006 में इजरायल और लेबनानी समूह हिजबुल्लाह के बीच हुए युद्ध के बाद विस्तारित किया गया और अल जज़ीरा के अनुसार, इसे विरोधी पक्षों के बीच एक विसैन्यीकृत बफर क्षेत्र के लिए जिम्मेदार बनाया गया था। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 03 May 2026 18:27:42 +0530</pubDate>
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<title>US की शिपिंग कंपनियों को सीधी चेतावनी, Hormuz Strait में ईरान को पेमेंट पर लगेंगे कड़े प्रतिबंध</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरने के लिए ईरान को भुगतान करने पर उन्हें प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) द्वारा शुक्रवार को दी गई चेतावनी ने दबाव और बढ़ा दिया है। 
 आम तौर पर शांति के समय दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
 ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा युद्ध शुरू किए जाने के बाद जहाज़ों पर हमले की धमकियां देकर और हमले करते हुएजलडमरूमध्य को सामान्य यातायात के लिए लगभग बंद कर दिया। 
 बाद में उसने कुछ जहाजों को अपनी तटरेखा के करीब वैकल्पिक मार्गों से मोड़कर सुरक्षित मार्ग प्रदान करना शुरू किया, और कई बार इस सेवा के लिए शुल्क भी वसूला।
अमेरिका की प्रतिबंध चेतावनी का मुख्य केंद्र यह “टोलबूथ” जैसी व्यवस्थाहै।
 ओएएफसी के अनुसार, भुगतान की मांगों में केवल नकद ही नहीं, बल्कि  डिजिटल परिसंपत्तियां, समायोजन (ऑफसेट), अनौपचारिक अदला-बदली, या अन्य प्रकार के वस्तु-आधारित भुगतान  भी शामिल हो सकते हैं, जिनमें परमार्थ दान और ईरानी दूतावासों में किए जाने वाले भुगतान भी शामिल हैं।
ओएफएसी ने कहा कि वह यह चेतावनी इसलिए जारी कर रहा है ताकि अमेरिकी और गैर-अमेरिकी व्यक्तियों को इस बात से अवगत कराया जा सके कि ईरानी शासन को सुरक्षित मार्ग के लिए भुगतान करने या उससे गारंटी की मांग करने पर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। उसने यह भी स्पष्ट किया कि ये जोखिम भुगतान के किसी भी तरीके पर लागू होते हैं।
अमेरिका ने 13 अप्रैल को ईरान द्वारा जलडमरूमध्य बंद किए जाने के जवाब में अपनी ओर से एक नौसैनिक नाकाबंदी लागू की, जिससे किसी भी ईरानी तेल टैंकर को बाहर जाने से रोका गया और ईरान को उसकी कमजोर अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए आवश्यक तेल राजस्व से वंचित कर दिया गया।
 अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि नाकाबंदी शुरू होने के बाद से 45 वाणिज्यिक जहाजों को वापस जाने को कहा गया है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 03 May 2026 18:27:42 +0530</pubDate>
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<title>China बना Journalists के लिए सबसे बड़ी जेल, कैद पत्रकारों में आधे Uyghur, Report में खुलासा।</title>
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<description><![CDATA[ उइघुर मानवाधिकार परियोजना (यूएचआरपी) ने पूर्वी तुर्किस्तान, जिसे उइघुर क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है, में प्रेस पर हो रहे भीषण दमन पर चिंता व्यक्त की है। संगठन के एक विज्ञप्ति के अनुसार, विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस से पहले, यूएचआरपी का तर्क है कि यह क्षेत्र चीन के पहले से ही कड़े नियंत्रण वाले सूचना वातावरण में मीडिया दमन के सबसे चरम उदाहरणों में से एक है। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के 2025 प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक का हवाला देते हुए, यूएचआरपी ने बताया कि चीन 180 देशों में 178वें स्थान पर है, जो स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए लगातार खराब परिस्थितियों को दर्शाता है। यूएचआरपी की विज्ञप्ति के अनुसार, पूर्वी तुर्किस्तान इस राष्ट्रीय परिदृश्य के सबसे कठिन छोर पर है, जहां विदेशी संवाददाताओं और स्थानीय उइघुर पत्रकारों दोनों को व्यवस्थित प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है।इसे भी पढ़ें: UNSC की अध्यक्षता मिलते ही China का बड़ा कदम, Lebanon से UNIFIL मिशन वापसी पर पुनर्विचार की मांगविदेशी संवाददाता क्लब ऑफ चाइना (एफसीसीसी) के निष्कर्षों का हवाला देते हुए, यूएचआरपी ने कहा कि 2024 में उइघुर क्षेत्र से रिपोर्टिंग करने का प्रयास करने वाले विदेशी पत्रकारों पर सादे कपड़ों में पुलिस द्वारा निगरानी रखी गई, जबकि संभावित साक्षात्कारकर्ताओं को बोलने से पहले नियमित रूप से डराया-धमकाया गया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एफसीसीसी द्वारा किए गए सर्वेक्षण में शामिल क्षेत्र की यात्रा करने वाले तीन-चौथाई से अधिक पत्रकारों को अपनी रिपोर्टिंग में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ा। उइघुर मानवाधिकार संगठन (यूएचआरपी) ने कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि चीन दुनिया में पत्रकारों को जेल में डालने वाला सबसे बड़ा देश है, जहां कम से कम 50 मीडियाकर्मी वर्तमान में कैद हैं। यूएचआरपी के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों में से लगभग आधे उइघुर हैं, जबकि चीन की कुल जनसंख्या में उइघुर लोगों की संख्या एक प्रतिशत से भी कम है।इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Donald Trump के China दौरे से पहले Beijing ने दी सीधी चेतावनी, &#039;Taiwan मुद्दे से दूर रहे America&#039;संगठन ने कहा कि उइघुर भाषा के मीडिया को नष्ट करने की प्रक्रिया सुनियोजित और दीर्घकालिक रही है। 2009 के उरुमची विरोध प्रदर्शनों के बाद, यूएचआरपी ने कहा कि दस महीने के इंटरनेट ब्लैकआउट ने लगभग 80 प्रतिशत उइघुर-संचालित वेबसाइटों को नष्ट कर दिया, जिनमें राजनीति, अर्थशास्त्र, संस्कृति और दैनिक जीवन पर केंद्रित प्लेटफॉर्म शामिल थे। यूएचआरपी ने तर्क दिया कि इन साइटों के वेबमास्टरों को बाद में जेल में डालना, उसके द्वारा वर्णित डिजिटल पुस्तक जलाने के समान था। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 03 May 2026 18:27:41 +0530</pubDate>
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<title>Iran में फटा अमेरिकी बम, मारे गए IRGC के 14 सैनिक</title>
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<description><![CDATA[ ईरान में हुए एक जबरदस्त धमाके से हाहाकार मच गया। यह धमाका एक शक्तिशाली बम के फटने का था। इस धमाके में आईआरजीसी यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्डकोर के 14 सैनिकों की मौत हो गई। यह जानकारी ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी फोर्स न्यूज़ ने जारी की है। यह बम धमाका शुक्रवार को उत्तर पश्चिमी प्रांत झंझन में हुआ। यहां आईआरजीसी के सैनिक सफाई अभियान चला रहे थे। ईरानी मीडिया के मुताबिक उत्तर पश्चिमी ईरान में बम निष्क्रिय करने के अभियान के दौरान यह धमाका हुआ है। इसमें आईआरजीसी के 14 सदस्य मारे गए जबकि दो अन्य घायल हो गए हैं। इसे भी पढ़ें: US की शिपिंग कंपनियों को सीधी चेतावनी, Hormuz Strait में ईरान को पेमेंट पर लगेंगे कड़े प्रतिबंधफर्स्ट न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि यह हादसा जांजन प्रांत में हुआ। जब एक खास क्लीयरेंस मिशन के दौरान अचानक बम फट गया। मारे गए लोग उस यूनिट का हिस्सा थे जिसे इलाके में बचे हुए बमों को हटाने और बेअसर करने का काम सौंपा गया था। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इससे ईरानी आवाम और खेती की जमीन को लगातार खतरा बना हुआ है। जिंदा बमों की मौजूदगी की वजह से इलाके में लगभग 1200 हेक्टेयर खेती की जमीन खतरे में है। आईआरजीसी की अंसार अल महदी यूनिट ने इस बारे में एक बयान जारी किया है। इस बयान के मुताबिक यह बम धमाका युद्ध के समय फैले अज्ञात गोला बारूद की वजह से हुआ। इस धमाके में मारे गए 14 सैनिक यूनिट के सबसे अनुभवी और विशेषज्ञ सैनिक माने जाते थे। माना जा रहा है कि इलाके में मिला गोला बारूद युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए क्लस्टर बम और फाइटर जेट से गिराए गए बारूदी माइंस की वजह से वहां मौजूद था। इस धमाके में घायल हुए दोनों सैनिकों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां दोनों का इलाज चल रहा है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 03 May 2026 18:27:40 +0530</pubDate>
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<title>भारत के दोस्त रूस पर हमला, अब होगा US के 19 जहाजों का हिसाब!</title>
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<description><![CDATA[ राजनीति और कूटनीति की दुनिया में एक कहावत है कि पुराना दोस्त हमेशा सबसे अच्छा होता है। भारत के लिए रूस वही पुराना और सबसे भरोसेमंद दोस्त है जिसने हर मुश्किल में भारत का साथ दिया। लेकिन 2 मई को जब दुनिया की नजरें ईरान और अमेरिका के तनाव पर है तब हमारे दोस्त रूस से एक परेशान करने वाली खबर आई। रूस की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनियों में से एक को यूक्रेन के ड्रोंस ने निशाना बनाया है। पिछले कुछ दिनों में यह उसका यानी यूक्रेन का चौथा हमला है। यह सिर्फ यूक्रेन के ड्रोन नहीं है बल्कि इसके पीछे की सोच वाशिंगटन की है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या डोनाल्ड ट्रंप के इशारे पर रूस की अर्थव्यवस्था की रीड कहे जाने वाले तेल ठिकानों को बर्बाद किया जा रहा है। पुतिन और ट्रंप के बीच 90 मिनट की बातचीत हुई जिसमें तनाव साफ दिखा और फिर रूस के 10 बड़े तेल ठिकानों को निशाना बनाया गया। लेकिन अमेरिका को याद रखना चाहिए कि अगर रूस का तेल जला तो इसकी तपिश पूरी दुनिया महसूस करेगी और भारत का दोस्त रूस अकेला नहीं है। इसे भी पढ़ें: China बना Journalists के लिए सबसे बड़ी जेल, कैद पत्रकारों में आधे Uyghur, Report में खुलासा।होर्मुज की खाड़ी यहां अमेरिका के 19 घातक युद्धपोत तैनात है। जिन्होंने ईरान का रास्ता रोकने की कोशिश की। लेकिन ईरान ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। सूत्रों का दावा है कि ईरान ने अमेरिका के इस ब्लॉकेट को तोड़ने के लिए एक खुफिया रणनीति बनाई है। इस रणनीति में ईरान के साथ रूस के युद्ध एक्सपर्ट और चीन के जासूस सेटेलाइट शामिल है। ईरान ने यह साफ कर दिया है कि अगर यह घेराबंदी नहीं हटी तो अमेरिका के यह 19 जहाज समंदर की गहराई में होंगे। अब अमेरिका डरा हुआ है। क्यों? क्योंकि इसकी वजह है ईरान की मिसाइल तकनीक। हाल ही में अमेरिकी वाइट हाउस में एक हाई लेवल मीटिंग होती है। सेंट कॉम के चीफ ब्रैट कूपर ने डोनाल्ड ट्रंप को ब्रीफ किया कि ईरान की मिसाइलें साधारण नहीं है। वे एमआईआरवी यानी मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल तकनीक से लैस है। यानी एक मिसाइल जो हवा में अपना रास्ता बदल सकती है और जिसे कोई भी डिफेंस सिस्टम नहीं रोक सकता है। इसे भी पढ़ें: UNSC की अध्यक्षता मिलते ही China का बड़ा कदम, Lebanon से UNIFIL मिशन वापसी पर पुनर्विचार की मांगइसी वजह से अमेरिका अब डार्क ईगल जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें मांग रहा है जिसकी रफ्तार 6000 किमी/ घंटे से ज्यादा है। इस युद्ध का असर अब पड़ोसियों पर भी दिखने लगा। पाकिस्तान में तेल का हाहाकार मचा हुआ है। इसी बीच ईरान ने एक मास्टर स्ट्रोक खेला। अमेरिका के समुद्री प्रतिबंधों को धता बताते हुए ईरान ने कजाकिस्तान और उज़्बेकिस्तान के रास्ते रेल मार्ग से चीन को तेल भेजना शुरू कर दिया है। यह वही रूट है जिसे अमेरिका कभी ब्लॉक नहीं कर पाएगा। अब साल 2006 में शुरू हुआ यह सपना हकीकत बनता दिख रहा है जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था को नई ऑक्सीजन मिल चुकी है। अब तनाव सिर्फ मिडिल ईस्ट में नहीं है। अमेरिका के विदेश मंत्री मोको रूबियो और चीन के वोंग ई के बीच फोन पर जो बातचीत हुई उसने आग में घी डालने का काम किया। चीन ने अमेरिका को दो टूक शब्द ने कहा कि ट्रंप बीजिंग आए उनका स्वागत है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 03 May 2026 18:27:39 +0530</pubDate>
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<title>ईरान की धमकियों से बौखलाए तुर्की ने बनाया दुनिया का सबसे खतरनाक ड्रोन, बिना GPS नेविगेट करेगा, वीआईपी लोगों के लिए बड़ा थ्रेट</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया की जंग अब सिर्फ मिसाइलों और टैंकों तक सीमित नहीं रही। अब लड़ाई का मैदान आसमान है। जहां एआई और स्मार्ट टेक्नोलॉजी गेम बदल रही हैं। तुर्की की मशहूर ड्रोन कंपनी बायकर ने एक ऐसा ड्रोन पेश किया है जो बिना जीपीएस की दुश्मन को ढूंढकर मार सकता है। घंटों आसमान में मंडरा सकता है और सही वक्त आने पर घातक हमला कर सकता है। इसका नाम है मिजराक जिसका मतलब है तीर या भाला। दरअसल बायकर का मिजराक एक एआई पावर्ड कैमिकाजे ड्रोन है जिसे लाइटनिंग मुनिशन कहा जाता है। यानी यह पहले हवा में घूमकर अपने लक्ष्य की तलाश करता है और फिर हमला करता है। इसकी रेंज 1000 किमी से ज्यादा है और यह करीब 7 घंटे तक हवा में रह सकता है। करीब 200 किलो वजनी यह ड्रोन 185 किमी घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है और 10,000 फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। इसमें 40 किलो तक का वॉर हेड लगाया जा सकता है जो बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने में सक्षम है।इसे भी पढ़ें: Labour Day पर नोएडा में &#039;हाई अलर्ट&#039;! भारी सुरक्षा बल तैनात और धारा 163 लागू, हिंसा के बाद पुलिस सख्त इसे रनवे या रॉकेट असिस्ट दोनों तरीके से लॉन्च किया जा सकता है। मिजरक के दो वेरिएंट है। एक हैवी डैमेज के लिए 40 किलो डबल वॉर हेड के साथ और दूसरा 20 किलो वॉर हेड के साथ रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर जो रडार वाले टारगेट को आसानी से पहचान सकता है। इसमें ईओ और आईआर कैमरे लगे हैं जो निगरानी और टारगेट पहचानने में मदद करते हैं। लेकिन इसकी सबसे खतरनाक ताकत जीपीएस के बिना काम करने की क्षमता है। आमतौर पर ड्रोन जीपीएस पर निर्भर होते हैं। जिन्हें दुश्मन जैम कर सकता है। लेकिन मिज़क में एi पावर्ड ऑटो पायलट इनशियल नेविगेशन सिस्टम है और कंप्यूटर विज़न टेक्नोलॉजी लगी है। यह ड्रोन कैमरे से मिलने वाली तस्वीरों को रियल टाइम में प्रोसेस करता है। आसपास के लैंडमार्क्स में अपनी पोजीशन मिलाता है और स्लैम जैसी तकनीक के जरिए खुद अपना नक्शा बनाकर आगे बढ़ता है। यानी जीपीएस जैमिंग भी इसे रोक नहीं सकती। यही वजह है कि वीआईपीस और हाई वैल्यूस टारगेट के लिए यह एक बड़ा खतरा बन सकता है। यह 1000 किमी.दूर से आकर घंटों तक किसी इलाके में घूम सकता है। खुद टारगेट पहचान सकता है और सही समय पर हमला कर सकता है। वह भी बिना किसी इंसानी कंट्रोल के। जहां कई ड्रोन मिलकर एक साथ हमला करते हैं जिससे बचाव और भी मुश्किल हो जाता है। मिजरक सिर्फ एक ड्रोन नहीं बल्कि आने वाले युद्ध की नई सोच का संकेत है। बकर ने एआई और ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी के जरिए यह दिखा दिया है कि भविष्य की जंग कितनी स्मार्ट और खतरनाक हो सकती है। लंबी दूरी, भारी पैलोड, जीपीएस फ्री ऑपरेशन और खुद टारगेट पहचानने की क्षमता यह सभी खूबियां इसे एक गेम चेंजर बना सकती हैं। ऐसे में अब सवाल यही है क्या दुनिया इसके खिलाफ नई सुरक्षा तकनीक विकसित कर पाएगी या फिर यह एआई ड्रोन आने वाले समय में युद्ध के नियम ही बदल देंगे। फिलहाल तो तय है आसमान अब सिर्फ निगरानी ही नहीं बल्कि खामोश और सटीक हमलों का दौर शुरू हो चुका है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 03 May 2026 18:27:39 +0530</pubDate>
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<media:keywords>ईरान, की, धमकियों, से, बौखलाए, तुर्की, ने, बनाया, दुनिया, का, सबसे, खतरनाक, ड्रोन, बिना, GPS, नेविगेट, करेगा, वीआईपी, लोगों, के, लिए, बड़ा, थ्रेट</media:keywords>
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<title>अफ्रीका में भारत ने खोद निकाला तेल का सबसे बड़ा कुआं, पूरी दुनिया को चौंका दिया</title>
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<description><![CDATA[ जहां चाह वहां राह और जब इरादे भारत जैसे मजबूत हो तो राह सिर्फ बनती नहीं इतिहास भी लिखती है। जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। तेल बाजार में हड़कंप मचा हुआ है। पूरी दुनिया महंगाई के डर से कांप रही है। उसी समय भारत ने चुपचाप ऐसा कदम उठाया जिसने खेल बदल दिया। खबर आई उत्तर अफ्रीका के देश लीबिया से वही लीबिया जिसे अस्थिरता, गृह युद्ध और खतरे का इलाका माना जाता है। लेकिन इसी धरती पर भारत की सरकारी कंपनियों ने वो कर दिखाया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। भारत की कंपनियां ऑयल इंडिया लिमिटेड और इंडियन ऑयल ने लीबिया के गदा मिस बेसिन में बड़ी सफलता हासिल की। रिपोर्ट्स के मुताबिक वहां छठे कुएं की ड्रिलिंग के दौरान बड़े तेल भंडार मिलने के संकेत हैं। अब जरा आप सोचिए जब दुनिया तेल के लिए परेशान थी तब भारत रेगिस्तान के नीचे अपना भविष्य तलाश रहा था। भारत आज अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से तेल खरीदता है। इसका मतलब साफ है कि अगर दुनिया में युद्ध हो, सप्लाई रुके तो सीधा असर भारत की जेब पर पड़ता है। पेट्रोल महंगा, डीजल महंगा और महंगाई तेजी से बढ़ जाती है। लेकिन इस बार भारत ने पहले से तैयारी कर रखी थी। इसे भी पढ़ें: US की शिपिंग कंपनियों को सीधी चेतावनी, Hormuz Strait में ईरान को पेमेंट पर लगेंगे कड़े प्रतिबंधलीबिया का गदा मिस बेसिन तेल के लिए मशहूर माना जाता है। यहां का क्रूड ऑयल अच्छी क्वालिटी का बताया जाता है जिसे रिफाइन करना आसान होता है। अगर भारत को यहां स्थाई उत्पादन मिल गया तो यह सिर्फ व्यापार नहीं रणनीतिक जीत होगी क्योंकि इसका सीधा मतलब होगा भारत अब सिर्फ खरीददार नहीं रहेगा सबसे बड़ा खिलाड़ी बनेगा। दोस्तों, सबसे बड़ी बात यह है कि लीबिया जैसा देश आसान नहीं है। वहां राजनीतिक अस्थिरता है। अलग-अलग गुट सक्रिय हैं। सुरक्षा चुनौतियां हैं। ऐसे माहौल में जाकर काम करना कोई साधारण बात नहीं है। लेकिन भारत ने वहां भरोसे का रिश्ता बनाया। भारत ने सिर्फ संसाधन नहीं देखे बल्कि साझेदारी का मॉडल अपनाया। यही वजह है कि भारतीय कंपनियों को वहां स्वीकारिता मिल गई। ऐसे में सवाल उठता है क्या इससे भारत में पेट्रोल सस्ता हो जाएगा? देखिए सीधा जवाब तो तुरंत नहीं है लेकिन लंबे समय में फायदा जरूर हो सकता है क्योंकि जब किसी देश के पास खुद के स्रोत बढ़ते हैं तो वैश्विक संकटों से कम प्रभावित होता है। सरकार के पास कीमतों को संभालने की ताकत बढ़ जाती है। यानी आज लीबिया में जो हो रहा है उसका असर कल आपकी जेब पर दिख सकता है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती है। इसे भी पढ़ें: भारत के दोस्त रूस पर हमला, अब होगा US के 19 जहाजों का हिसाब!भारत सिर्फ लीबिया तक सीमित नहीं है। रूस के सखालिन और साइबेरिया क्षेत्रों में भारतीय निवेश पहले से मौजूद हैं। मुंजाबिक के गैस प्रोजेक्ट हैं। ब्राजील और लैटिन अमेरिका में भी भारत मौके तलाश रहा है। यह एक बड़ी रणनीति है एनर्जी डायवर्सिफिकेशन की। मतलब अगर एक जगह संकट आ जाए तो दूसरे स्रोत चालू रहे। यही समझदार देशों की सबसे बड़ी पहचान होती है। आज दुनिया समझ रही है कि भारत सिर्फ बाजार नहीं है बल्कि भविष्य की ताकत है। और सोचिए अगर भारत तेल, गैस और रेयर अर्थ जैसे संसाधनों में मजबूत हो गया तो इसका असर सिर्फ अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ेगा। राजनीति पर भी पड़ेगा। क्योंकि दुनिया में ताकत सिर्फ सेना से नहीं काम आती। ताकत आती है ऊर्जा से, ताकत आती है सप्लाई चेन से, ताकत आती है आत्मनिर्भरता से। कुछ रिपोर्ट में यह भी चर्चा हो रही कि लीबिया के कुछ इलाके में गैस और दुर्लभ खनिजों की संभावना भी हो सकती है। अगर भविष्य में ऐसा सच साबित हुआ तो भारत के लिए यह डबल जीत होगी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 03 May 2026 18:27:38 +0530</pubDate>
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<title>Iran के Peace Proposal पर भड़के Donald Trump, दे डाली फिर से हमले की धमकी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि उसके खिलाफ सैन्य हमले दोबारा शुरू किए जा सकते हैं। फ्लोरिडा में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने साफ किया कि अगर ईरान ने कोई गलती की या दुर्व्यवहार किया, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प पूरी तरह खुला है।ट्रंप ने कहा, ईरान बर्बाद हो चुका हैट्रंप ने दावा किया कि ईरान की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति बेहद खराब है और वे अब समझौता करने के लिए मजबूर हैं। ट्रंप के मुताबिक, &#039;ईरान तबाह हो चुका है, उन्हें तो यह भी नहीं पता कि उनका नेता कौन है क्योंकि उनका पुराना नेतृत्व जा चुका है।&#039; ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह ईरान की मिसाइल बनाने की क्षमता को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं ताकि वे भविष्य में फिर से ताकत न जुटा सकें। इसे भी पढ़ें: अफ्रीका में भारत ने खोद निकाला तेल का सबसे बड़ा कुआं, पूरी दुनिया को चौंका दियाईरान का 14 सूत्रीय प्रस्तावईरान ने अमेरिका को 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है, जिसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने की बात कही गई है। इस पर ट्रंप ने कहा कि वह जल्द ही इस प्रस्ताव को देखेंगे, लेकिन उन्हें इसके स्वीकार होने की उम्मीद कम है। ट्रंप ने &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर लिखा कि ईरान ने पिछले 47 वर्षों में दुनिया के साथ जो किया है, उसके लिए उसने अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है। इसे भी पढ़ें: भारत के दोस्त रूस पर हमला, अब होगा US के 19 जहाजों का हिसाब! स्थायी समाधान पर जोरईरान चाहता है कि 30 दिनों के भीतर एक ऐसा समझौता हो जो युद्ध को हमेशा के लिए खत्म कर दे, न कि केवल कुछ समय के लिए युद्धविराम हो। वहीं, ट्रंप का कहना है कि वे ऐसा समझौता चाहते हैं जिससे मामला पूरी तरह सुलझ जाए और कुछ साल बाद फिर से उसी स्थिति में न लौटना पड़े। ट्रंप ने इस बात से इनकार किया कि वे बातचीत से भाग रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि वे ईरान को फिर से खड़े होने का मौका नहीं देंगे। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 03 May 2026 18:27:37 +0530</pubDate>
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<title>US Sanctions पर China का पलटवार, Blocking Law से अपनी कंपनियों को दिया सुरक्षा कवच</title>
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<description><![CDATA[ चीन सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका द्वारा पांच घरेलू तेल रिफाइनरियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को मानने से इनकार कर दिया है। बीजिंग ने एक औपचारिक आदेश जारी कर अपनी कंपनियों को इन अमेरिकी पाबंदियों को नजरअंदाज करने का निर्देश दिया है। अमेरिका ने इन रिफाइनरियों पर ईरान से तेल खरीदने का आरोप लगाया था।बीजिंग का कड़ा रुखचीन के सरकारी समाचार पत्र &#039;चाइना डेली&#039; ने सरकार के इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के खिलाफ एक &#039;रक्षात्मक कदम&#039; बताया है। बीजिंग का तर्क है कि अमेरिका बिना संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के एकतरफा प्रतिबंध लगाकर दो संप्रभु देशों के बीच होने वाले व्यापार में दखल दे रहा है। चीन के अनुसार, अमेरिका अपनी घरेलू नीतियों और डॉलर के प्रभुत्व का इस्तेमाल दूसरे देशों को दबाने के लिए कर रहा है। इसे भी पढ़ें: Iran के Peace Proposal पर भड़के Donald Trump, दे डाली फिर से हमले की धमकीपहली बार &#039;अवरोधक कानून&#039; का इस्तेमालचीन के वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को &#039;अवरोधक उपाय&#039; जारी किया है। यह पहली बार है जब बीजिंग ने आधिकारिक तौर पर अपने &#039;अवरोधक कानून&#039; का इस्तेमाल किया है। यह एक ऐसा कानूनी तंत्र है जो विदेशी कानूनों के असर को चीन की सीमा के भीतर बेअसर कर देता है। इस कदम से चीन ने संकेत दिया है कि वह अब केवल राजनयिक विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानूनी तौर पर भी जवाबी कार्रवाई करेगा।किन कंपनियों को मिला सुरक्षा कवच?चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने जिन पांच प्रमुख रिफाइनरियों को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचाने के लिए आदेश जारी किया है, वे हैं, हेंगली पेट्रोकेमिकल रिफाइनिंग कंपनी, शेडोंग शौगुआंग लुकिंग पेट्रोकेमिकल, शेडोंग जिनचेंग पेट्रोकेमिकल ग्रुप, हेबेई शिन्हाई केमिकल ग्रुप और शेडोंग शेंगशिंग केमिकल कंपनी। इसे भी पढ़ें: अफ्रीका में भारत ने खोद निकाला तेल का सबसे बड़ा कुआं, पूरी दुनिया को चौंका दियाक्या है विवाद की जड़?अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के कार्यालय ने इन स्वतंत्र चीनी रिफाइनरियों को ईरान की तेल अर्थव्यवस्था का समर्थन करने वाला मुख्य खरीदार बताया है। अमेरिका का दावा है कि इन कंपनियों ने 2026 के दौरान अरबों डॉलर का ईरानी तेल खरीदा है, जिसके चलते उन्हें &#039;ब्लैकलिस्ट&#039; किया गया और उनकी संपत्तियां फ्रीज करने के आदेश दिए गए। चीन ने इन दावों को गलत बताते हुए कहा है कि यह सामान्य आर्थिक लेन-देन है जिसे अमेरिका अवैध रूप से रोकना चाहता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 03 May 2026 18:27:37 +0530</pubDate>
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<title>Iran की US को सीधी धमकी, Hormuz बनेगा अमेरिकी सेना की कब्रगाह, बढ़ा War का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के वरिष्ठ अधिकारी और रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर मोहसिन रजाई ने अमेरिका को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने कोई हिमाकत की, तो होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी सेना की कब्रगाह बना दिया जाएगा।अमेरिकी सेना को बताया &#039;समुद्री लुटेरा&#039;मोहसिन रजाई ने अमेरिकी सेना पर तीखा हमला करते हुए उन्हें &#039;पाइरेट&#039; करार दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया का एकमात्र ऐसा लुटेरा है जिसके पास एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। रजाई ने पिछले महीने गिराए गए अमेरिकी F-15E विमान का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह उस विमान का मलबा बिखरा था, वही अंजाम अमेरिकी जहाजों और सैनिकों का भी हो सकता है। इसे भी पढ़ें: US Sanctions पर China का पलटवार, Blocking Law से अपनी कंपनियों को दिया सुरक्षा कवचडोनाल्ड ट्रंप की जवाबी चेतावनीदूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इजरायल और मिडिल ईस्ट के हालातों के बीच ईरान को चेताया है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने कोई भी गलत कदम उठाया, तो उस पर फिर से हमले शुरू कर दिए जाएंगे। ट्रंप का दावा है कि फिलहाल तेहरान भारी दबाव में है और वह समझौता करने की कोशिश कर रहा है।पाकिस्तान की मध्यस्थता और 14 सूत्रीय प्रस्तावट्रंप ने &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर जानकारी दी कि पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए ईरान की ओर से एक 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव मिला है। अमेरिकी प्रशासन फिलहाल इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। ईरान के अधिकारियों का कहना है कि उनके प्रस्ताव में सबसे पहले होर्मुज के रास्ते को खोलने और अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करने की शर्त रखी गई है, जबकि परमाणु मुद्दे पर बाद में बात होगी। इसे भी पढ़ें: Iran के Peace Proposal पर भड़के Donald Trump, दे डाली फिर से हमले की धमकीताजा घटनाक्रम पर एक नजरजंग की तैयारी: ईरानी अधिकारी मोहम्मद जाफर असदी ने कहा है कि उनकी सेना अमेरिका के साथ दोबारा युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है।अमेरिकी ठिकानों को नुकसान: एक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया संघर्ष के दौरान ईरान ने मिडिल ईस्ट के 8 देशों में 16 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है।जहाजों ने बदला रास्ता: अमेरिका का दावा है कि उसके दबाव के कारण पिछले 20 दिनों में 48 जहाजों ने ईरान के बंदरगाहों पर जाने के बजाय अपना रास्ता बदल लिया है।क्यूबा पर कब्जे का संकेत: ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ चल रहे विवाद के बाद अमेरिका क्यूबा पर नियंत्रण करने के बारे में सोच सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 03 May 2026 18:27:36 +0530</pubDate>
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<title>Rich Dad Poor Dad के लेखक ने Pakistan को दिखाया आईना, तेल संकट पर Robert Kiyosaki का बयान&#45; भारत एक &amp;apos;स्थिर चट्टान&amp;apos; की तरह खड़ा है</title>
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<description><![CDATA[ विश्व प्रसिद्ध वित्तीय सलाहकार और &#039;रिच डैड पुअर डैड&#039; के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने एक हालिया फेसबुक पोस्ट के जरिए दक्षिण एशिया के दो पड़ोसियों—भारत और पाकिस्तान—की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति के बीच के गहरे अंतर को उजागर किया है। कियोसाकी ने बताया कि कैसे एक तरफ पाकिस्तान अपने दावों के विपरीत ऊर्जा सुरक्षा के मामले में घुटनों पर है, वहीं दूसरी तरफ भारत वैश्विक संकटों के बीच एक &#039;स्थिर चट्टान&#039; की तरह खड़ा है। रॉबर्ट कियोसाकी ने पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज़ मलिक की उन टिप्पणियों की ओर ध्यान दिलाया, जिनमें उन्होंने स्वीकार किया था कि देश के पास एक दिन के लिए भी रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद नहीं है।इस बयान को और भी ज़्यादा चुभने वाला बनाने वाली बात यह थी कि कुछ ही दिन पहले उनका लहजा कितना अलग था। पिछली एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, इसी मंत्री ने कहा था कि पाकिस्तान की ईंधन आपूर्ति &quot;सुरक्षित और स्थिर&quot; है। उन्होंने दावा किया था कि देश की स्थिति भारत सहित कई अन्य देशों की तुलना में कहीं ज़्यादा मज़बूत है; उनके अनुसार, भारत में पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लगी थीं और हर जगह ईंधन की भारी किल्लत थी। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए &quot;सक्रिय कदमों&quot; की तारीफ़ की थी और ज़ोर देकर कहा था कि सब कुछ पूरी तरह नियंत्रण में है।लेकिन रॉबर्ट कियोसाकी ने उन्हें सचमुच आईना दिखा दियाईरान संघर्ष के कारण &#039;स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़&#039; में पैदा हुई बाधा के बाद, पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगीं। अप्रैल 2026 की शुरुआत में, पेट्रोल की कीमत लगभग 321 PKR से बढ़कर 458 PKR प्रति लीटर हो गई, जो कि एक महीने के भीतर 43 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी थी। डीज़ल की कीमतों में तो और भी तेज़ी से उछाल आया; यह 335 PKR से बढ़कर 520 PKR हो गया, जो कि 55 प्रतिशत की बढ़ोतरी थी। पूरे देश में ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। कारोबारियों ने आपूर्ति श्रृंखला (supply chains) के पूरी तरह ठप हो जाने की चेतावनी दी, और विपक्षी दलों ने इसे &#039;राष्ट्रीय आपातकाल&#039; घोषित कर दिया।भारत की शांत और स्थिर स्थितिसीमा के दूसरी ओर, तस्वीर बिल्कुल अलग थी। वैश्विक स्तर पर तेल का वही संकट और कच्चे तेल की कीमतों के 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुँच जाने के बावजूद, भारत के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें लगभग जस की तस बनी रहीं।रॉबर्ट कियोसाकी के अनुसार, भारत ने COVID महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और अब ईरान संघर्ष -- इन सभी संकटों का सामना बिना कीमतों में कोई भारी-भरकम बढ़ोतरी किए, और बिना किसी बड़े झटके के, सफलतापूर्वक किया। उन्होंने तर्क दिया कि भारत ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाए हैं, जिन्हें पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी माना है कि &quot;सिर्फ़ एक दस्तखत&quot; से आपातकालीन आपूर्ति जारी की जा सकती है -- जो कमर्शियल स्टॉक के साथ मिलाकर 60-70 दिनों के लिए काफ़ी है। भारत ने अपने तेल आपूर्ति नेटवर्क का भी विस्तार किया है, रूस को एक मुख्य स्रोत के रूप में इस्तेमाल करते हुए, और 2026 में वेनेज़ुएला से भी शिपमेंट वापस ला रहा है।दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग हब में से एक होने के नाते, भारत ने इस झटके को अपने अंदर ही संभाल लिया। उसने घरेलू आपूर्ति को बचाने के लिए ईंधन पर निर्यात शुल्क में भी बदलाव किया।रॉबर्ट कियोसाकी ने पाकिस्तान को आईना दिखायाजब मलिक ने कहा, &quot;हम भारत नहीं हैं,&quot; तो लेखक कहते हैं कि वे सही थे -- लेकिन उस तरह से नहीं जैसा उन्होंने सोचा होगा। पाकिस्तान लगभग कोई घरेलू तेल उत्पादन नहीं करता और पूरी तरह से आयात पर निर्भर रहता है, जो खाड़ी के उन समुद्री रास्तों से आता है जो सुरक्षित नहीं हैं। उसके पास विदेशी मुद्रा भंडार भी सीमित है और वह IMF की कड़ी शर्तों के तहत काम करता है। जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य में रुकावट आई, तो उसके पास कोई सहारा नहीं था।इस बीच, सरकार ने 22 अप्रैल को चुपचाप एक टास्क फ़ोर्स का गठन किया ताकि रणनीतिक भंडार बनाने की संभावनाओं का पता लगाया जा सके -- जिसकी सिफ़ारिशें 8 मई तक आनी थीं -- यह एक ऐसा कदम था जो कई साल पहले ही उठा लिया जाना चाहिए था।रॉबर्ट कियोसाकी की पोस्ट ने शोर-शराबे को दरकिनार करते हुए वही दिखाया जो आंकड़े पहले से ही बता रहे थे। एक मंत्री ने उसी हफ़्ते दो बिल्कुल अलग-अलग बातें कहीं। आंकड़ों के एक सेट ने ज़्यादा साफ़ तस्वीर दिखाई: पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें 50 प्रतिशत से भी ज़्यादा बढ़ गईं, जबकि भारत ने कीमतों को स्थिर बनाए रखा। इस युद्ध ने यह अंतर पैदा नहीं किया। इसने तो बस इसे सबके सामने ला दिया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:34:03 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump की नई &amp;apos;लीगल चाल&amp;apos;? ईरान युद्ध को बताया खत्म, कांग्रेस की मंजूरी से बचने के लिए निकाला अनोखा रास्ता</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव में एक नया मोड़ आ गया है। ट्रंप प्रशासन ने आधिकारिक रूप से तर्क दिया है कि मध्य पूर्व में उसका युद्ध अब &#039;खत्म&#039; हो चुका है, क्योंकि पिछले एक महीने से युद्धविराम (Ceasefire) लागू है। इस दावे के पीछे एक बड़ी कानूनी रणनीति मानी जा रही है, जिसके जरिए राष्ट्रपति ट्रंप युद्ध शक्तियों (War Powers) पर कांग्रेस की अनिवार्य मंजूरी से बचना चाहते हैं। अब उसका तर्क है कि उसे कांग्रेस की मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं है; यह मंज़ूरी राष्ट्रपति को सेना का इस्तेमाल शुरू करने के 60 दिनों के भीतर सैन्य अभियानों को मंज़ूरी देने या खत्म करने के लिए ज़रूरी होती है।इसे भी पढ़ें: West Bengal | भवानीपुर में &#039;आधी रात&#039; का संग्राम: स्ट्रांग रूम पहुंचे ममता और शुभेंदु के समर्थक, EVM छेड़छाड़ के आरोपों पर भारी बवाल ट्रंप प्रशासन के कई अधिकारियों, जिनमें युद्ध सचिव पीट हेगसेथ भी शामिल हैं, ने तर्क दिया है कि 7 अप्रैल के बाद से अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच &quot;गोलीबारी का कोई आदान-प्रदान नहीं हुआ है,&quot; जिससे व्हाइट हाउस को कांग्रेस की मंज़ूरी लेने से बचने का मौका मिल जाता है।CNN के अनुसार, वर्जीनिया के डेमोक्रेटिक सीनेटर टिम केन के साथ एक बहस के दौरान हेगसेथ ने कहा, &quot;आखिरकार, इस मामले में मैं व्हाइट हाउस और व्हाइट हाउस के वकील की बात मानूंगा; हालांकि, अभी हम युद्धविराम की स्थिति में हैं, जिसका हमारी समझ के अनुसार मतलब है कि युद्धविराम के दौरान 60 दिनों की समय सीमा रुक जाती है या थम जाती है।&quot;डेमोक्रेट्स ने इस व्याख्या को खारिज कर दियाडेमोक्रेट्स ने व्हाइट हाउस की इस व्याख्या को खारिज कर दिया है। केन ने कहा कि कानून शायद ही इसका समर्थन करेगा, और साथ ही चेतावनी दी कि इससे ट्रंप प्रशासन के लिए युद्ध को लेकर एक कानूनी सवाल खड़ा हो जाता है, जिसके बारे में कई लोगों का दावा है कि इसे अमेरिकी लोगों पर थोपा गया है।इसे भी पढ़ें: Buddh Purnima 2026: Lord Vishnu के 9वें अवतार Gautam Buddha का महासंयोग, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि हालांकि, हेगसेथ ने युद्ध और उसकी व्याख्या पर ट्रंप प्रशासन के रुख का बचाव किया, और इस बात पर ज़ोर दिया कि पेंटागन नागरिकों के लिए सख्त सुरक्षा उपाय बनाए रखता है। उन्होंने डेमोक्रेट्स से कहा, &quot;मेरा मानना ​​है कि हमें अमेरिकी लोगों का समर्थन प्राप्त है।&quot;ट्रंप सैन्य विकल्पों पर चर्चा करेंगेCNN के अनुसार, ट्रंप - जो एक रिपब्लिकन नेता हैं और जिन्होंने अक्सर ईरान युद्ध के संबंध में अपनी शक्तियों को सीमित करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की है - जल्द ही शीर्ष अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे ताकि वे उपलब्ध विकल्पों के बारे में जान सकें। ट्रंप ने यह बात दोहराई है कि ईरान के साथ बातचीत चल रही है, लेकिन वास्तव में क्या हो रहा है, इस बारे में केवल कुछ ही लोगों को जानकारी है।उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिकी सेना द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। रिपब्लिकन नेता ने कहा, &quot;उनकी अर्थव्यवस्था ढह रही है। यह प्रतिबंध अविश्वसनीय है। इस प्रतिबंध की शक्ति ज़बरदस्त है।&quot;  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:34:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Pakistan का खेल और तेल दोनों खत्म! Petroleum Minister Malik बोले&#45; हमारे पास भारत की तरह Strategic Oil Reserves नहीं</title>
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<description><![CDATA[ कल तक ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कराने को आतुर पाकिस्तान दुनिया को अपनी कूटनीति की क्षमता दिखाने निकला था, लेकिन उसे पहले अपने घर की हालत सुधारनी चाहिए थी। न तो ईरान और अमेरिका के बीच तनाव थमा और न ही पाकिस्तान अपनी साख बचा पाया। उल्टा हाल यह हो गया है कि उसकी अर्थव्यवस्था ढहने के कगार पर पहुंच गई है। पाकिस्तान में तेल की भारी कमी है और जो उपलब्ध है वह इतना महंगा हो चुका है कि आम जनता त्राहि त्राहि कर रही है।देखा जाये तो इस्लामाबाद की चमकदार कूटनीति का मुखौटा उस वक्त पूरी तरह उतर गया जब ईरान ने आखिरी समय पर ऐसा कदम उठाया जिसने पाकिस्तान की सारी रणनीति ध्वस्त कर दी। जिस मंच को उसने खुद को वैश्विक मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने के लिए तैयार किया था, वही मंच उसकी दोहरी नीति और कमजोर रणनीतिक समझ को उजागर कर गया। पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका और चीन के बीच संतुलन साधने वाला देश दिखाने की कोशिश की, लेकिन यह संतुलन अब बिखरता नजर आ रहा है। इसे भी पढ़ें: Rich Dad Poor Dad के लेखक ने Pakistan को दिखाया आईना, तेल संकट पर Robert Kiyosaki का बयान- भारत एक &#039;स्थिर चट्टान&#039; की तरह खड़ा हैईरान-अमेरिका संघर्ष को शांत करने के उद्देश्य से आयोजित इस्लामाबाद वार्ता को ऐतिहासिक पहल बताया गया था, लेकिन शुरुआती दौर में ही यह नाकाम हो गई। लगभग 21 घंटे चली बातचीत के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद कम नहीं हुए। इसके बाद भी पाकिस्तान ने दूसरे दौर की वार्ता के जरिए अपनी प्रतिष्ठा बचाने की कोशिश की, लेकिन ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी प्रतिनिधियों से मिलने से साफ इंकार कर दिया। यह केवल एक कूटनीतिक मतभेद नहीं था, बल्कि पाकिस्तान की उस महत्वाकांक्षा पर सीधा प्रहार था जिसमें वह खुद को अनिवार्य मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत कर रहा था।ईरान का यह रुख अचानक नहीं था। पहले से संकेत मिल रहे थे कि तेहरान प्रत्यक्ष बातचीत से बचना चाहता है और केवल अप्रत्यक्ष संपर्क को ही स्वीकार करेगा। इसके बावजूद पाकिस्तान ने इन संकेतों को नजरअंदाज किया और अपने कूटनीतिक प्रयासों को जरूरत से ज्यादा बढ़ा चढ़ाकर पेश किया। परिणामस्वरूप, जैसे ही ईरान पीछे हटा, पूरी प्रक्रिया ध्वस्त हो गई और पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे।यह घटनाक्रम पाकिस्तान की विदेश नीति के उस जोखिम भरे खेल को भी सामने लाता है जिसमें वह एक साथ कई दिशाओं में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक ओर वह अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है, तो दूसरी ओर चीन के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना चाहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे मामले में चीन की भूमिका भले ही प्रत्यक्ष रूप से सामने न आई हो, लेकिन उसका प्रभाव स्पष्ट रूप से महसूस किया गया, जिससे स्थिति और जटिल हो गई।इस कूटनीतिक असफलता के साथ-साथ पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति भी तेजी से बिगड़ रही है। इस्लामाबाद में कड़े सुरक्षा इंतजाम, बार-बार का लॉकडाउन और आर्थिक गतिविधियों का ठप होना यह दिखाता है कि यह पूरा प्रयोग देश पर भारी पड़ रहा है। खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्वीकार किया है कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का सीधा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है और देश को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump की नई &#039;लीगल चाल&#039;? ईरान युद्ध को बताया खत्म, कांग्रेस की मंजूरी से बचने के लिए निकाला अनोखा रास्तावैश्विक स्तर पर तेल संकट ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है। मध्य पूर्व में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। यह मार्ग विश्व की ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा वहन करता है और इसमें आई रुकावट ने पाकिस्तान जैसे आयात निर्भर देशों को गहरे संकट में डाल दिया है।इस बीच, पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री मलिक ने स्वीकार किया है कि देश के पास केवल पांच से सात दिनों का कच्चे तेल का भंडार है, जबकि परिष्कृत उत्पाद अधिकतम 21 दिनों तक ही चल सकते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पाकिस्तान के पास एक दिन के लिए भी रणनीतिक पेट्रोल भंडार उपलब्ध नहीं है। इसके विपरीत भारत के पास साठ से सत्तर दिनों का भंडार है और मजबूत विदेशी मुद्रा स्थिति के कारण वह इस संकट का सामना अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से कर पा रहा है।इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष पर निर्भरता के कारण पाकिस्तान के पास नीतिगत लचीलापन भी सीमित है। पाकिस्तान सरकार को पेट्रोल और डीजल पर कर लगाने पड़े हैं, हालांकि बढ़ती कीमतों के दबाव में डीजल पर कर शून्य कर दिया गया और उसका बोझ पेट्रोल पर डाल दिया गया। साथ ही मोटरसाइकिल चालकों को लक्षित सब्सिडी देने की कोशिश भी की गई। इसके बावजूद हालात इतने बिगड़ गए हैं कि पेट्रोल की कीमतें चार सौ पचासी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गईं हैं जिसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। बाद में सरकार को कीमतों में अस्सी रुपये प्रति लीटर की कटौती करनी पड़ी, लेकिन इससे जनता की परेशानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई।यह पूरा घटनाक्रम एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि क्या पाकिस्तान अपनी क्षमता से अधिक बड़ा खेल खेलने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ वह खुद को शांति का दूत बताता है, तो दूसरी तरफ उसकी आंतरिक कमजोरियां और असफल कूटनीतिक प्रयास उसकी साख को लगातार कमजोर कर रहे हैं। यह स्थिति एक कड़वी सच्चाई सामने लाती है कि वैश्विक मंच पर दिखावा ज्यादा देर तक नहीं टिकता। जब हकीकत सामने आती है तो सबसे पहले मुखौटा ही गिरता है। इस्लामाबाद में जो हुआ, वह इसी सच्चाई का ताजा उदाहरण है, जहां कूटनीतिक महत्वाकांक्षा और आर्थिक वास्तविकता के बीच का अंतर साफ तौर पर उजागर हो गया है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:34:02 +0530</pubDate>
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<title>Iran में आंतरिक संकट गहराया, विदेश मंत्री पद से Abbas Araghchi को हटा सकते हैं राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian</title>
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<description><![CDATA[ ईरान की सत्ता व्यवस्था इन दिनों गंभीर आंतरिक खींचतान से गुजर रही है, जहां राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में विदेश मंत्री अब्बास अराघची हैं, जिन पर राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ का भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा है। दोनों शीर्ष नेताओं द्वारा उन्हें पद से हटाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे देश के भीतर सत्ता संतुलन को लेकर नई बहस छिड़ गई है।सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति और संसद अध्यक्ष का मानना है कि अराघची ने हाल के सप्ताहों में सरकार की नीतियों को लागू करने वाले मंत्री की बजाय इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के कमांडर अहमद वाहिदी के सहयोगी की तरह काम किया है। आरोप है कि उन्होंने संवेदनशील परमाणु वार्ताओं के दौरान वाहिदी के निर्देशों का पालन किया और राष्ट्रपति को इस बारे में पूरी जानकारी नहीं दी। इससे कार्यपालिका के भीतर असंतोष बढ़ा है और राष्ट्रपति ने अपने करीबी सहयोगियों को संकेत दिया है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो वह कड़ा कदम उठा सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Pakistan का खेल और तेल दोनों खत्म! Petroleum Minister Malik बोले- हमारे पास भारत की तरह Strategic Oil Reserves नहींयह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान पहले से ही राजनीतिक और सैन्य संस्थानों के बीच गहरे मतभेदों से जूझ रहा है। जारी संघर्ष और उसके आर्थिक प्रभावों ने इन मतभेदों को और तीखा कर दिया है। पहले की रिपोर्टों में भी यह सामने आया था कि राष्ट्रपति पेजेशकियन और कमांडर अहमद वाहिदी के बीच युद्ध प्रबंधन और उसके आर्थिक असर को लेकर गंभीर असहमति है। राष्ट्रपति का मानना है कि युद्ध के कारण आम लोगों की आजीविका और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ रहा है, जबकि सैन्य नेतृत्व सुरक्षा प्राथमिकताओं को सर्वोपरि मानता है।सूत्रों ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति खुद को एक तरह के राजनीतिक गतिरोध में फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें महत्वपूर्ण सरकारी नियुक्तियों पर भी पूरा अधिकार नहीं मिल पा रहा है। दूसरी ओर, वाहिदी का तर्क है कि युद्धकालीन परिस्थितियों में संवेदनशील पदों का नियंत्रण सीधे रिवोल्यूशनरी गार्ड के हाथ में होना चाहिए। इस टकराव ने सरकार के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।इन आंतरिक मतभेदों का असर ईरान की विदेश नीति और विशेष रूप से अमेरिका के साथ चल रही वार्ताओं पर भी पड़ा है। जानकारी के मुताबिक, वार्ता टीम के भीतर मतभेदों के कारण अप्रैल के मध्य में बातचीत से पीछे हटना पड़ा। बताया जाता है कि अराघची ने वार्ता के दौरान कुछ मुद्दों पर लचीलापन दिखाया, जैसे क्षेत्रीय सहयोगियों, विशेषकर हिज्बुल्लाह को मिलने वाली वित्तीय और सैन्य सहायता में कमी। इस रुख का वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों, जिनमें मोहम्मद बाघेर जुलघदर भी शामिल हैं, उन्होंने कड़ा विरोध किया। इसे भी पढ़ें: Donald Trump की नई &#039;लीगल चाल&#039;? ईरान युद्ध को बताया खत्म, कांग्रेस की मंजूरी से बचने के लिए निकाला अनोखा रास्ताअमेरिका की ओर से भी इस स्थिति पर प्रतिक्रिया आई। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को लगा कि ईरानी टीम के पास अंतिम समझौता करने का अधिकार नहीं है और उन्हें तेहरान के उच्च नेतृत्व की मंजूरी का इंतजार करना पड़ता है। इससे वार्ता प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे। साथ ही वार्ता टीम के नेतृत्व को लेकर भी असहमति सामने आई है। पहले दौर की बातचीत में ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था, जिसमें इस्लामाबाद में हुई बैठकें भी शामिल थीं। हालांकि, कुछ कट्टरपंथी सांसदों ने टीम का खुलकर समर्थन नहीं किया, भले ही संसद में व्यापक समर्थन मौजूद था। बाद में परमाणु ऊर्जा से जुड़े मुद्दों को बातचीत में शामिल करने की कोशिश को लेकर गालिबाफ की आलोचना हुई, जिसके बाद उन्होंने पीछे हटने का निर्णय लिया।इसके बाद अब्बास अराघची ने वार्ता में अधिक प्रमुख भूमिका निभाने की कोशिश की और 24 अप्रैल को इस्लामाबाद जाकर तेहरान का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। हालांकि, मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया, जिससे कूटनीतिक प्रयासों को झटका लगा। हालांकि अराघची को हटाने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह के संकेत सामने आ रहे हैं, वे ईरान के नेतृत्व के भीतर गहराते संकट की ओर इशारा करते हैं। एक ओर आंतरिक सत्ता संघर्ष है, तो दूसरी ओर बाहरी दबाव और ठप पड़ी कूटनीति। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान अपनी राजनीतिक एकजुटता को कैसे बनाए रखता है और वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को कैसे संभालता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:34:02 +0530</pubDate>
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<title>Iran से तनाव के बीच America का बड़ा दांव, तैनात होगी सबसे घातक Hypersonic Missile Dark Eagle</title>
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<description><![CDATA[ एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ अपनी सबसे आधुनिक और शक्तिशाली मिसाइल डार्क ईगल तैनात करने पर विचार कर रही है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस मिसाइल प्रणाली को क्षेत्र में भेजने के लिए औपचारिक मंजूरी मांगी है। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान के उन अंदरूनी इलाकों में हमला करना है, जहां उनके बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर छिपे हैं और जो अभी अमेरिकी सेना की मौजूदा मिसाइलों की पहुंच से बाहर हैं।पहली बार होगा हाइपरसोनिक हथियार का उपयोगअगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह इतिहास में पहली बार होगा जब अमेरिका अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल को युद्ध के लिए तैनात करेगा। हालांकि रूस और चीन पहले ही ऐसी तकनीक विकसित कर चुके हैं, लेकिन अमेरिका के लिए यह पहला मौका होगा। खास बात यह है कि यह तैयारी ऐसे समय में चल रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच 9 अप्रैल से संघर्ष-विराम (सीजफायर) लागू है। यह संकेत है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भविष्य में होने वाली किसी भी बड़ी लड़ाई के लिए खुद को तैयार रख रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Iran में आंतरिक संकट गहराया, विदेश मंत्री पद से Abbas Araghchi को हटा सकते हैं राष्ट्रपति Masoud Pezeshkianकितनी खतरनाक है डार्क ईगल मिसाइल?इसे लॉन्ग-रेंज हाइपरसोनिक वेपन कहा जाता है। यह आवाज की गति से 5 गुना ज्यादा तेजी से उड़ सकती है। यह उड़ान के दौरान अपनी दिशा बदल सकती है, जिससे दुश्मन के डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना लगभग नामुमकिन हो जाता है। इस मिसाइल की मारक क्षमता 1,725 मील से भी ज्यादा है। सबसे चौंकाने वाली बात इस मिसाइल की कीमत है। एक मिसाइल की कीमत करीब 15 मिलियन डॉलर (लगभग 125 करोड़ रुपये) है। फिलहाल अमेरिका के पास ऐसी केवल 8 मिसाइलें ही उपलब्ध हैं। इसे भी पढ़ें: Pakistan का खेल और तेल दोनों खत्म! Petroleum Minister Malik बोले- हमारे पास भारत की तरह Strategic Oil Reserves नहींखतरे में अमेरिकी विमान और ड्रोनरिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान के कुछ इलाकों में अमेरिका को बढ़त हासिल है, लेकिन कई हिस्से अभी भी बहुत खतरनाक हैं। ईरान ने अमेरिका के कई आधुनिक ड्रोन (MQ-9) और विमानों को मार गिराया है। इसी जोखिम को कम करने के लिए अमेरिका अब बिना पायलट वाले और बेहद तेज रफ्तार वाले डार्क ईगल जैसे हथियारों पर दांव लगा रहा है, ताकि भविष्य की लड़ाई और भी घातक और सटीक हो सके। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:34:01 +0530</pubDate>
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<title>JPMorgan Harassment Case । मैं वहां थी ही नहीं, Lorna Hajdini के दावों से केस में आया नया मोड़</title>
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<description><![CDATA[ जेपी मॉर्गन की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर लोर्ना हजदिनी ने अपने एक पूर्व सहकर्मी द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। न्यूयॉर्क की अदालत में &#039;जॉन डो&#039; (बदलना हुआ नाम) द्वारा दायर इस मुकदमे में लोर्ना पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए थे। लोर्ना के वकीलों का कहना है कि उन्होंने कभी कोई गलत व्यवहार नहीं किया और वे उस जगह पर कभी गई ही नहीं, जिसका जिक्र शिकायत में किया गया है।क्या हैं आरोप और बैंक की जांच?शिकायतकर्ता (जो भारतीय मूल का बताया जा रहा है) ने आरोप लगाया कि लोर्ना ने उसे नशीली दवाएं दीं, उसका यौन शोषण किया और मांगें न मानने पर करियर बर्बाद करने या बोनस रोकने की धमकी दी। हालांकि, जेपी मॉर्गन बैंक ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है। बैंक के प्रवक्ता ने बताया कि एक विस्तृत आंतरिक जांच में ईमेल और फोन रिकॉर्ड खंगाले गए, लेकिन आरोपों का कोई सबूत नहीं मिला। बैंक के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने खुद जांच में सहयोग करने से मना कर दिया था। इसे भी पढ़ें: Iran से तनाव के बीच America का बड़ा दांव, तैनात होगी सबसे घातक Hypersonic Missile Dark Eagleमुकदमे के दावों पर उठते सवालजांच में कुछ ऐसी बातें सामने आई हैं जो शिकायतकर्ता के दावों को कमजोर करती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता सीधे तौर पर लोर्ना को रिपोर्ट नहीं करता था। दोनों की टीमें अलग थीं, जिसका मतलब है कि लोर्ना के पास उसका बोनस रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।सूत्रों का कहना है कि शिकायतकर्ता ने कंपनी छोड़ने के बदले लाखों पाउंड के मुआवजे की मांग की थी, जिसे बैंक ने &#039;ब्लैकमेल&#039; जैसा प्रयास माना है। जहां सहकर्मियों ने लोर्ना को &#039;टॉप परफॉर्मर&#039; और सामाजिक कार्यों से जुड़ी महिला बताया है, वहीं शिकायतकर्ता को काम में ठीक लेकिन स्वभाव में थोड़ा अलग बताया गया है। इसे भी पढ़ें: Iran में आंतरिक संकट गहराया, विदेश मंत्री पद से Abbas Araghchi को हटा सकते हैं राष्ट्रपति Masoud Pezeshkianदोनों पक्षों का करियर बैकग्राउंडलोर्ना हजदिनी न्यूयॉर्क स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस से ग्रेजुएट हैं और एक एनजीओ में वॉलंटियर भी हैं। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता ने मॉर्गन स्टेनली और क्रेडिट सुइस जैसी बड़ी कंपनियों में काम किया है और फिलहाल न्यूयॉर्क की एक निवेश फर्म से जुड़ा है। फिलहाल कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए कोई तारीख तय नहीं की है, लेकिन अमेरिकी कानून के तहत मीडिया इस मामले की रिपोर्टिंग कर रहा है क्योंकि अदालती दस्तावेजों को विशेषाधिकार प्राप्त होता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:34:00 +0530</pubDate>
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<title>Iran से जंग पर Trump का बड़ा दांव, Ceasefire की आड़ में US Congress को किया बाईपास</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। सरकार का कहना है कि ईरान के साथ जारी युद्ध 60 दिनों की कानूनी समयसीमा पूरी होने से पहले ही तकनीकी रूप से खत्म हो चुका है। ट्रंप प्रशासन के मुताबिक, अप्रैल की शुरुआत में हुए युद्धविराम की वजह से यह सैन्य संघर्ष अब खत्म माना जाना चाहिए।संसद की मंजूरी का पेंचअमेरिका के &#039;वॉर पावर्स रिजोल्यूशन&#039; कानून के अनुसार, राष्ट्रपति किसी भी सैन्य कार्रवाई को 60 दिनों से ज्यादा समय तक कांग्रेस (संसद) की अनुमति के बिना जारी नहीं रख सकते। यह 60 दिनों की मोहलत शुक्रवार को खत्म हो गई है। विपक्ष का कहना था कि ट्रंप को अब आगे की कार्रवाई के लिए संसद से मंजूरी लेनी होगी, लेकिन व्हाइट हाउस ने दलील दी है कि युद्ध पहले ही रुक चुका है, इसलिए किसी नई मंजूरी की जरूरत नहीं है। इसे भी पढ़ें: JPMorgan Harassment Case । मैं वहां थी ही नहीं, Lorna Hajdini के दावों से केस में आया नया मोड़सीजफायर और जमीनी हकीकतवरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि 7 अप्रैल से लागू हुए दो हफ्ते के युद्धविराम के बाद से अमेरिकी सेना और ईरान के बीच कोई सीधी गोलीबारी नहीं हुई है। हालांकि, स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। ईरान ने अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना कब्जा जमाया हुआ है। अमेरिका ने ईरान के तेल टैंकरों को रोकने के लिए अपनी सैन्य घेराबंदी कम नहीं की है।अधिकारियों के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष अब आधिकारिक रूप से खत्म हो गया है, क्योंकि युद्धविराम की अवधि को बढ़ा दिया गया है। इसे भी पढ़ें: Iran से तनाव के बीच America का बड़ा दांव, तैनात होगी सबसे घातक Hypersonic Missile Dark Eagleमुश्किल में सरकारट्रंप प्रशासन इस दावे के जरिए घरेलू राजनीति और कानूनी बाधाओं से बचने की कोशिश कर रहा है। यदि अमेरिकी संसद इस दलील को नहीं मानती है, तो राष्ट्रपति के लिए सैन्य अभियानों को जारी रखना मुश्किल हो सकता है। फिलहाल, व्हाइट हाउस का रुख साफ है कि ईरान के खिलाफ उनकी रणनीति अब युद्ध के बजाय नियंत्रण और दबाव पर टिकी है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:33:59 +0530</pubDate>
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<title>Iran का पलटवार: Supreme Leader खामेनेई की गंभीर हालत की खबरें झूठी, बताया Western साजिश</title>
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<description><![CDATA[ ईरान से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसमें देश के सर्वोच्च नेता की सेहत को लेकर फैल रही अफवाहों पर सरकार ने साफ प्रतिक्रिया दी है। ईरान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका और पश्चिमी मीडिया में चल रही उन खबरों को खारिज कर दिया है, जिनमें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद मोजतबा खामेनेई की हालत गंभीर बताई जा रही थी।मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान के विशेषज्ञों की सभा के सदस्य और सर्वोच्च नेता के कार्यालय में अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप प्रमुख अयातुल्ला मोहसिन कोमी ने कहा कि यह सब एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। उनका कहना है कि पश्चिमी देश जानबूझकर इस तरह की अफवाहें फैलाते हैं ताकि ईरान की प्रतिक्रिया को भांपा जा सके और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव में लाया जा सके।बता दें कि अयातुल्ला मोहसिन कोमी ने यह भी स्पष्ट किया कि अयातुल्ला सैय्यद मोजतबा खामेनेई पूरी तरह स्वस्थ हैं और देश के महत्वपूर्ण मामलों की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह बातचीत और सैन्य स्थिति से जुड़े फैसलों में सीधे तौर पर शामिल हैं और लगातार दिशा-निर्देश दे रहे हैं।गौरतलब है कि हाल ही में हुए हमले को लेकर भी कई तरह की खबरें सामने आई थीं। कोमी ने पुष्टि की कि जिस इमारत पर हमला हुआ था, उसमें मोजतबा खामेनेई मौजूद थे, लेकिन विस्फोट से कुछ मिनट पहले ही वह वहां से बाहर निकल गए थे, जिससे उनकी जान बच गई। उन्होंने इसे ईश्वर की कृपा बताते हुए कहा कि देश के लिए उनका सुरक्षित रहना बेहद महत्वपूर्ण है।वहीं दूसरी ओर, कुछ अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि हमले के बाद खामेनेई को गंभीर चोटें आई हैं, जिनमें हाथ की सर्जरी, चेहरे पर जलने के निशान और कृत्रिम पैर की जरूरत जैसी बातें शामिल थीं। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार बताया है।मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान का नेतृत्व इस समय सबसे ज्यादा ध्यान सर्वोच्च नेता की सुरक्षा पर दे रहा है, क्योंकि वर्तमान हालात में उनका नेतृत्व देश के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। कोमी ने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद खामेनेई स्थिति पर पूरी पकड़ बनाए हुए हैं और देश का संचालन प्रभावी तरीके से कर रहे हैं।इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह भी सामने आया है कि हाल के हमलों के बाद से खामेनेई सार्वजनिक रूप से कम दिखाई दे रहे हैं, जिससे अटकलों को और बल मिला है। हालांकि ईरानी सरकार ने इसे सुरक्षा कारणों से उठाया गया कदम बताया है और अफवाहों को सिरे से खारिज किया है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:33:58 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;US संकट से तेल की कीमतों में आग! Hormuz पर बढ़ा तनाव, Pakistan लाया नया प्रस्ताव</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच हालात एक बार फिर नाजुक मोड़ पर नजर आ रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को संशोधित शांति प्रस्ताव भेजा है, जिससे बातचीत की संभावना फिर से जगी है। बता दें कि इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के पुराने प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।मौजूद जानकारी के अनुसार अमेरिका ने ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी बनाए रखी है, जिससे उसके तेल निर्यात पर बड़ा असर पड़ा है। ट्रंप का कहना है कि इस दबाव से ईरान को बातचीत की मेज पर वापस आने के लिए मजबूर किया जा सकता है। गौरतलब है कि इसी बीच अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने संभावित नए हमलों को लेकर भी राष्ट्रपति को जानकारी दी है, जिससे संघर्ष दोबारा बढ़ने की आशंका बनी हुई है।दूसरी ओर ईरान के अंदर भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। खबरें हैं कि देश के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को उनके पद से हटाने की मांग उठ रही है। आरोप है कि उन्होंने परमाणु वार्ता के दौरान राष्ट्रपति को पूरी जानकारी दिए बिना सैन्य नेतृत्व के निर्देशों का पालन किया। इस मुद्दे पर राष्ट्रपति मसू्द पेज़ेश्कियन और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने नाराजगी जताई है।गौरतलब है कि 8 अप्रैल से दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम लागू है, लेकिन यह काफी नाजुक स्थिति में है। अमेरिका की ओर से संभावित सैन्य कार्रवाई और ईरान की चेतावनियों ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है। ईरान ने साफ कहा है कि अगर उस पर दोबारा हमला हुआ तो वह लंबा और कड़ा जवाब देगा।इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है। बता दें कि होरमुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के तेल और गैस आपूर्ति का अहम मार्ग है, वहां तनाव के कारण तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मार्ग से करीब 20 प्रतिशत वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है।अमेरिका की सैन्य मौजूदगी भी क्षेत्र में बनी हुई है। एक विमानवाहक पोत की वापसी के बावजूद करीब 20 नौसैनिक जहाज अब भी तैनात हैं, जो इस बात का संकेत है कि वॉशिंगटन फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं है।वहीं पाकिस्तान की भूमिका इस मामले में मध्यस्थ के रूप में अहम बनती जा रही है। सूत्रों के अनुसार नए प्रस्ताव के जरिए दोनों देशों के बीच गतिरोध को खत्म करने की कोशिश की जा रही है, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वाशिंगटन ने इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाया है।जानकारों का मानना है कि अगर बातचीत सफल होती है तो यह क्षेत्र में स्थिरता ला सकती है, लेकिन अगर सैन्य टकराव फिर शुरू हुआ तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा। ऐसे में आने वाले कुछ दिन इस संघर्ष के भविष्य को तय करने में बेहद अहम साबित हो सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:33:58 +0530</pubDate>
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<title>Iran Peace Proposal | पश्चिम एशिया संकट पर ईरान का नया शांति प्रस्ताव, पाकिस्तान बना मध्यस्थ, ट्रंप बोले&#45;&amp;apos;मैं संतुष्ट नहीं हूँ&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज़ हो गई है। ईरान ने क्षेत्र में संघर्ष को समाप्त करने और अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर लौटने के लिए एक नया &#039;शांति प्रस्ताव&#039; पेश किया है। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है। ईरान की सरकारी एजेंसी IRNA के मुताबिक, तेहरान ने गुरुवार शाम को अपना यह नया दस्तावेज़ औपचारिक रूप से पाकिस्तान को सौंप दिया। गौरतलब है कि इस्लामाबाद, तेहरान और वॉशिंगटन के बीच चल रही बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इसे भी पढ़ें: आम आदमी को लगेगा बड़ा झटका! Petrol-Diesel Price में ₹28 तक की बढ़ोतरी के बने आसारयह घटनाक्रम तब सामने आया है, जब कुछ ही दिन पहले ईरान ने क्षेत्रीय मध्यस्थों के ज़रिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अपने सैन्य अभियान रोकने का एक अलग प्रस्ताव पेश किया था। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्ताव को अमेरिका द्वारा ठुकराए जाने की पूरी संभावना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वे ईरान के इस नए प्रस्ताव को स्वीकार करने के इच्छुक नहीं हैं। इस हफ़्ते की शुरुआत में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान, ट्रंप ने अपने सलाहकारों से कहा था कि वे &quot;इस योजना को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं,&quot; जिसे हाल ही में वॉशिंगटन भेजा गया था।ईरान की नई योजना में क्या प्रस्ताव है?ईरान का यह नया प्रस्ताव, रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते समुद्री मार्गों को फिर से खोलने पर केंद्रित है। हालाँकि, यह अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी सभी चर्चाओं को बाद के चरण के लिए टाल देता है। वॉशिंगटन के अधिकारियों को इस बात की चिंता है कि ईरान के यूरेनियम संवर्धन और उसके पास मौजूद &quot;बम बनाने लायक यूरेनियम के भंडार&quot; के मुद्दे को सुलझाए बिना समुद्री मार्गों को फिर से खोलने से, चल रहे कूटनीतिक प्रयासों में अमेरिका की सौदेबाज़ी की ताकत (leverage) कमज़ोर पड़ सकती है।अमेरिका की आपत्तियों के बावजूद, अमेरिकी विशेषज्ञ इस बात को मानते हैं कि इस जलडमरूमध्य को बंद रखने के अपने ही खतरे और चुनौतियाँ हैं। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, समुद्री यातायात में लंबे समय से आई रुकावट के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें ऊँची बनी हुई हैं, जिससे पूरे अमेरिका में ईंधन की लागत में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है। इसे भी पढ़ें: तरबूज खूनी नहीं! एक ही परिवार के चार सदस्यों की रहस्यमयी मौत, जांच में बिरयानी और तरबूज सुरक्षित, अब &#039;ज़हर&#039; पर गहराया शकट्रंप ने ईरान के नए प्रस्ताव पर क्या प्रतिक्रिया दी?इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रही बातचीत में ईरान के नए प्रस्ताव से वे &quot;संतुष्ट नहीं हैं।&quot; उन्होंने इस योजना को मिलते ही लगभग तुरंत ही ठुकरा दिया। AP की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, &quot;वे एक समझौता करना चाहते हैं, लेकिन मैं उससे संतुष्ट नहीं हूँ, इसलिए अब देखते हैं कि आगे क्या होता है।&quot; ट्रंप ने इस बात का विस्तार से ज़िक्र नहीं किया कि उन्हें इस नए प्रस्ताव में क्या कमियाँ नज़र आईं। उन्होंने बस इतना कहा, &quot;वे ऐसी चीज़ों की माँग कर रहे हैं, जिन पर मैं अपनी सहमति नहीं दे सकता।&quot;राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि पिछले हफ़्ते जब उन्होंने अपने दूतों का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया था, उसके बाद से दोनों पक्षों के बीच फ़ोन पर बातचीत का सिलसिला जारी है। उन्होंने ईरान के नेतृत्व के प्रति निराशा व्यक्त की और उसे &#039;बिखरा हुआ&#039; बताया। इस हफ़्ते की शुरुआत में, ट्रंप ने एक नई योजना पेश की थी, जिसका मकसद उस अहम रास्ते को फिर से खोलना था, जिसका इस्तेमाल अमेरिका के खाड़ी सहयोगी अपने तेल और गैस के निर्यात के लिए करते हैं।इस्लामाबाद में बातचीत, भारी हंगामे के बीच टूटीइस्लामाबाद में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच होने वाली बातचीत का ताज़ा दौर तब टूट गया, जब विदेश मंत्री अब्बास अराघची के नेतृत्व में आया ईरानी प्रतिनिधिमंडल शनिवार शाम अचानक पाकिस्तान से चला गया। पाकिस्तान से रवाना होने से पहले, इस समूह ने पाकिस्तानी नेताओं के साथ दिन भर कई उच्च-स्तरीय बैठकें की थीं। अल जज़ीरा ने बताया कि बातचीत से हटने से पहले, ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के लिए &quot;मांगों की एक आधिकारिक सूची&quot; सौंपी थी।ईरान के अचानक चले जाने के बाद, ट्रंप ने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर के नेतृत्व में आने वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का दौरा रद्द कर दिया। इन बातचीत का मकसद पश्चिम एशिया में एक व्यापक शांति समझौते के प्रयासों को फिर से शुरू करना था।पहले की कूटनीतिक असफलताओं की पुनरावृत्तियह झटका इस्लामाबाद में आयोजित शांति वार्ता के पहले दौर की ही तरह है; उस दौर में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के स्पीकर एमबी ग़ालिबफ़ के बीच 21 घंटे तक लंबी बातचीत चली थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था। अब जब दूसरा दौर भी गड़बड़ा गया है, तो शांति स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभाने की पाकिस्तान की उम्मीदें और भी ज़्यादा अनिश्चित नज़र आ रही हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:33:57 +0530</pubDate>
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<title>अब परमाणु युद्ध के साये में दुनिया! ट्रंप ने ठुकराई शांति की आखिरी गुहार, अमेरिका ने अरब सहयोगियों को थमाए महाविनाशक हथियार</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया की धरती अब बारूद के उस ढेर पर खड़ी है, जहाँ एक छोटी सी चिंगारी भी वैश्विक महाविनाश का सबब बन सकती है। ईरान द्वारा भेजी गई शांति की आखिरी गुहार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस बेरुखी से ठुकराया है, उसने कूटनीति के सभी दरवाजे बंद कर दिए हैं। अमेरिका द्वारा अपने अरब सहयोगियों और इज़रायल को दिए गए $8.6 अरब के महाविनाशक हथियार इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि अब बातचीत का समय बीत चुका है और निर्णायक युद्ध की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। ट्रंप के &#039;शर्तें मानो या तबाह हो जाओ&#039; वाले अल्टीमेटम ने दुनिया को परमाणु युद्ध के साये में धकेल दिया है, जहाँ ईरान की सैन्य शक्ति को शून्य बताने का दावा किसी बड़े सैन्य प्रहार की भूमिका लगता है। यह महज़ दो देशों की जंग नहीं, बल्कि एक ऐसी वैश्विक तबाही की आहट है, जो पेट्रोल की कीमतों से लेकर मानवीय वजूद तक, सब कुछ भस्म करने की ताकत रखती है। अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार को यह घोषणा की। इस घोषणा के अनुसार, इज़रायल को $992.4 मिलियन की लागत वाले &#039;एडवांस्ड प्रिसिजन किल वेपन सिस्टम्स&#039; (APKWS) बेचने की मंज़ूरी दी गई है। दूसरी ओर, कुवैत को $2.5 अरब का &#039;इंटीग्रेटेड बैटल कमांड सिस्टम&#039; मिलेगा। अमेरिकी विदेश विभाग ने कतर को भी $4.01 अरब की &#039;पैट्रियट एयर एंड मिसाइल डिफेंस रिप्लेनिशमेंट सर्विसेज़&#039; और APKWS बेचने की मंज़ूरी दी है। वहीं, UAE को भी $147.6 मिलियन में APKWS मिलेगा।ईरान के प्रस्ताव से ट्रंप &#039;संतुष्ट नहीं&#039;अमेरिकी विदेश विभाग की यह मंज़ूरी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का नौवां हफ़्ता शुरू हो चुका है, और इसके जल्द खत्म होने की कोई संभावना नहीं दिख रही है। ईरान ने हाल ही में अमेरिका को एक शांति संधि का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कहते हुए उसे खारिज कर दिया कि वह इस प्रस्ताव से &quot;संतुष्ट नहीं&quot; हैं।ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के पास अब सिर्फ़ दो ही विकल्प बचे हैं: या तो वह अमेरिका की शर्तें मान ले, या फिर नए हमलों का सामना करने के लिए तैयार रहे। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की सेना पूरी तरह से तबाह हो चुकी है; उसके पास अब न तो नौसेना बची है, न वायुसेना, न ही विमान-रोधी उपकरण और न ही कोई रडार। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, ईरान के पास अब कोई नेता भी नहीं बचा है।उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अमेरिका इस &quot;समस्या&quot; को इसलिए खत्म नहीं करेगा, ताकि तीन साल बाद यह फिर से खड़ी न हो जाए। उन्होंने इस समस्या को दुनिया में चल रहे कच्चे तेल के संकट से भी जोड़ा। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, &quot;अगर आप ईरान को परमाणु हथियार रखने की इजाज़त देते हैं, तो पूरी दुनिया बहुत बड़े ख़तरे में पड़ जाएगी। इसलिए ऐसा बिल्कुल नहीं होगा। जैसे ही यह युद्ध खत्म होगा, पेट्रोल की कीमतें अपने आप नीचे आ जाएंगी।&quot; &quot;वे एक डील करना चाहते हैं, लेकिन मैं उससे संतुष्ट नहीं हूँ, इसलिए देखते हैं कि क्या होता है,&quot; उन्होंने कहा, और आगे जोड़ा, &quot;उन्होंने कुछ प्रगति की है, लेकिन मुझे पक्का नहीं पता कि वे कभी वहाँ तक पहुँच भी पाएँगे या नहीं।&quot; ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:33:56 +0530</pubDate>
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<title>पागलों के हाथ में नहीं दे सकते एटम बम... ट्रंप बोले&#45; अभी और लंबा चलेगा ईरान युद्ध</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध में है क्योंकि पागलों को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं है, जबकि उन्होंने दावा किया कि युद्धविराम के बाद शत्रुता समाप्त हो गई है। ट्रम्प ने एक कार्यक्रम में उत्साहित भीड़ से कहा आप जानते हैं, हम युद्ध में हैं क्योंकि मुझे लगता है कि आप सहमत होंगे कि हम पागलों को परमाणु हथियार रखने नहीं दे सकते। क्या आप सहमत हैं?इसे भी पढ़ें: Iran से जंग पर Trump का बड़ा दांव, Ceasefire की आड़ में US Congress को किया बाईपासईरान ने नया प्रस्ताव पेश कियाईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान में मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका को बातचीत के लिए एक नया प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। ट्रंप ने कहा कि वह इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने कहा कि तेहरान ऐसी रियायतें मांग रहा है जिन्हें वह स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन... मैं इससे संतुष्ट नहीं हूं और ईरान के नेतृत्व को बहुत बिखरा हुआ बताया। लगातार चल रही बातचीत और तीन सप्ताह से जारी युद्धविराम के बावजूद, ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध समाप्त हो गया है। व्हाइट हाउस ने कांग्रेस को भी सूचित किया कि ईरान के साथ शत्रुता समाप्त हो गई है, जबकि अमेरिकी सशस्त्र बल अभी भी क्षेत्र में तैनात हैं।लगातार चल रही बातचीत और तीन सप्ताह से जारी युद्धविराम के बावजूद, ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध समाप्त हो गया है। व्हाइट हाउस ने कांग्रेस को भी सूचित किया कि ईरान के साथ शत्रुता समाप्त हो गई है, जबकि अमेरिकी सशस्त्र बल अभी भी क्षेत्र में तैनात हैं।इसे भी पढ़ें: Iran Peace Proposal | पश्चिम एशिया संकट पर ईरान का नया शांति प्रस्ताव, पाकिस्तान बना मध्यस्थ, ट्रंप बोले-&#039;मैं संतुष्ट नहीं हूँ&#039;यह दावा ऐसे समय आया है जब युद्ध शक्ति संकल्प के तहत 1 मई की समय सीमा, जिसके अनुसार सैन्य कार्रवाई के लिए 60 दिनों के भीतर कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक है, बिना किसी कार्रवाई के बीत गई। ट्रंप ने इस कानून को असंवैधानिक करार दिया, जबकि सीनेट द्वारा छठी बार युद्ध रोकने के डेमोक्रेटिक प्रयास को खारिज किए जाने के बाद सांसद वाशिंगटन से चले गए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:33:55 +0530</pubDate>
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<title>Prabhasakshi NewsRoom: Donald Trump के China दौरे से पहले Beijing ने दी सीधी चेतावनी, &amp;apos;Taiwan मुद्दे से दूर रहे America&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ वैश्विक राजनीति के वर्तमान परिदृश्य में अमेरिका और चीन के बीच संबंध एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। हाल ही में चीन के विदेश मंत्री वांग यी और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई बातचीत ने यह संकेत दिया है कि दोनों देशों के रिश्ते भले ही सतह पर स्थिर दिखाई दें, लेकिन उनके भीतर कई जटिल मुद्दे अभी भी मौजूद हैं। हम आपको बता दें कि इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य आगामी उच्च स्तरीय बैठकों की तैयारी करना था, खासकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस महीने होने वाली चीन यात्रा के संदर्भ में।चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने इस बातचीत के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों में बनी हुई स्थिरता को बनाए रखना चाहिए और इसे और मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि दोनों देशों को सहयोग के नए क्षेत्रों को विकसित करना चाहिए और मतभेदों को संतुलित ढंग से संभालना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Vishwakhabram: Trump ने अब जर्मन चांसलर Friedrich Merz पर हमला बोला, US-Germany संबंधों में आई दरारहालांकि इस पूरी चर्चा में सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा ताइवान का रहा। वांग यी ने ताइवान को चीन के मूल हितों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि यही वह सबसे बड़ा जोखिम बिंदु है जो अमेरिका और चीन के संबंधों को प्रभावित कर सकता है। हम आपको बता दें कि चीन लंबे समय से ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसे अपने साथ मिलाने की बात करता रहा है। वहीं अमेरिका ताइवान को सैन्य सहायता देता है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसका समर्थन करता है, जिससे चीन लगातार नाराज रहता है।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ताइवान का मुद्दा दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है। लगभग दो करोड़ तीस लाख की आबादी वाले ताइवान के लिए यह कूटनीतिक घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका और चीन के बीच होने वाली उच्च स्तरीय वार्ताओं में उसका भविष्य तय हो सकता है, जबकि उसे इन वार्ताओं में सीधे तौर पर शामिल नहीं किया जाता।हम आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा 14 और 15 मई को निर्धारित है, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी। यह यात्रा ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उनकी पहली चीन यात्रा होगी। इससे पहले दोनों नेताओं के बीच दक्षिण कोरिया में मुलाकात हुई थी, जहां व्यापार और शुल्क विवाद को लेकर एक अस्थायी समझौता हुआ था।ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव काफी बढ़ गया था, लेकिन पिछले वर्ष अक्टूबर में दोनों देशों ने एक तरह की युद्ध विराम स्थिति बनाई थी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बीजिंग में होने वाली बैठक में इन मुद्दों को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है।इस बीच, मध्य पूर्व की स्थिति भी चर्चा का हिस्सा रही। चीन जहां ईरान का प्रमुख साझेदार रहा है, वहीं अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद चीन ने अपेक्षाकृत दूरी बनाए रखी है। इन घटनाओं के कारण वैश्विक तेल की कीमतों में भी भारी उतार चढ़ाव देखने को मिला है। हालांकि इस विषय पर बातचीत के विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। ताइवान को लेकर अमेरिका की नीति भी काफी महत्वपूर्ण है। अमेरिका आधिकारिक रूप से एक चीन नीति का पालन करता है, जिसके तहत वह ताइवान की संप्रभुता को मान्यता नहीं देता, लेकिन चीन के दावे को भी पूरी तरह स्वीकार नहीं करता। साथ ही अमेरिका ताइवान को आत्मरक्षा के लिए समर्थन देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका अपनी भाषा या नीति में थोड़ा भी बदलाव करता है, तो इसका प्रभाव पूरे एशिया क्षेत्र में शक्ति संतुलन पर पड़ सकता है। ताइवान न केवल सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सेमीकंडक्टर उत्पादन के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी उसकी अहम भूमिका है।हम आपको यह भी बता दें कि चीन ने ताइवान पर दबाव बनाने के लिए कूटनीतिक और आर्थिक दोनों प्रकार के उपाय अपनाए हैं। एक ओर उसने व्यापार और पर्यटन के माध्यम से लाभ देने की बात की है, वहीं दूसरी ओर उसने ताइवान के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों को सीमित करने की कोशिश भी की है। उधर, अमेरिका के भीतर भी इस मुद्दे पर स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि ताइवान को लेकर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया है कि ट्रंप प्रशासन ने अपने पिछले कार्यकाल की तुलना में ताइवान को अधिक सैन्य सहायता दी है।बहरहाल, अमेरिका और चीन के बीच संबंध फिलहाल संतुलन की स्थिति में हैं, लेकिन ताइवान का मुद्दा एक ऐसा केंद्र बिंदु बना हुआ है, जो किसी भी समय इस संतुलन को बिगाड़ सकता है। आने वाली ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक न केवल इन दोनों देशों के रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण होगी, बल्कि पूरे विश्व की राजनीतिक और आर्थिक दिशा को भी प्रभावित कर सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:33:54 +0530</pubDate>
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<title>केरल में जन्म, Harvard से पढ़ाई, जोहरान ममदानी के बाद अब अमेरिका में क्यों है नित्या रामन की चर्चा?</title>
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<description><![CDATA[ स्थानीय राजनीति में नई होने के बावजूद, निथ्या रमन बहुत तेज़ी से एक प्रभावशाली नेता बन गई हैं। वह 2026 के लॉस एंजिल्स के मेयर (महापौर) चुनाव में एक मुख्य दावेदार के रूप में सामने आई हैं। लोग उनकी प्रगतिशील (आगे बढ़ने वाली) सोच, ज़मीनी स्तर से उनकी शुरुआत, और घर (आवास) तथा प्रशासन को सुधारने की उनकी नीतियों से काफी प्रभावित हैं। 44 साल की निथ्या रमन लॉस एंजिल्स के चौथे जिले की सिटी काउंसिल मेंबर हैं। उन्होंने अचानक आखिरी समय में इस चुनाव में उतरने का फैसला किया, जिससे वहां की मौजूदा मेयर करेन बास के सामने एक सीधी और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। यह शुरुआती चुनाव (प्राइमरी) 2 जून को होने वाला है। शुरुआती सर्वे बताते हैं कि दोनों के बीच कड़ी टक्कर है, हालांकि करेन बास अभी थोड़ी आगे चल रही हैं। फिर भी, 30 अप्रैल तक &#039;पॉलीमार्केट&#039; के अनुमान के अनुसार, निथ्या रमन के लॉस एंजिल्स का मेयर बनने की 60 प्रतिशत (60%) संभावना है।इसे भी पढ़ें: Fadnavis सरकार का &#039;मराठी&#039; दांव, Maharashtra से Bihar-UP तक सियासी बवाल खड़ा हुआनित्या रमन कौन हैं?28 जुलाई, 1981 को भारत के केरल में एक तमिल परिवार में जन्मीं रमन ने अपना प्रारंभिक बचपन वहीं बिताया और छह वर्ष की आयु में संयुक्त राज्य अमेरिका चली गईं। उनका परिवार लुइसियाना में बस गया, जहाँ से उस देश के साथ उनका लंबा जुड़ाव शुरू हुआ जहाँ उन्होंने अंततः अपना करियर बनाया। कई वर्षों बाद, 22 वर्ष की आयु में उन्हें अमेरिकी नागरिकता प्राप्त हुई। रमन की शैक्षणिक योग्यताएँ संयुक्त राज्य अमेरिका के कुछ सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़ी हैं। उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में राजनीति सिद्धांत में स्नातक की पढ़ाई की, जिसके बाद उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में दाखिला लिया, जहाँ से उन्होंने शहरी नियोजन में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। इन अकादमिक अनुभवों ने शहरों, शासन प्रणालियों और सार्वजनिक नीति पर उनके ध्यान को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ये वे क्षेत्र थे जिन्होंने बाद में उनके पेशेवर और राजनीतिक कार्यों को परिभाषित किया। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों के साथ उनके शुरुआती संपर्क ने भी उनके विश्वदृष्टिकोण को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमेरिका में काफी समय बिताने के बाद, रमन कुछ समय के लिए भारत लौट आईं, जहाँ उन्होंने चेन्नई में स्वच्छता में सुधार लाने के उद्देश्य से एक शोध संगठन की स्थापना की।लॉस एंजिल्स की राजनीति में आने से पहले रमन ने क्या काम किया है?चुनावी राजनीति में आने से पहले, रमन का काम मुख्य रूप से शहरी मुद्दों, सामाजिक न्याय और वकालत पर केंद्रित था। 2013 में लॉस एंजिल्स आने के बाद, उन्होंने शहर की प्रशासनिक व्यवस्था में काम किया, जिससे उन्हें नगरपालिका शासन और नौकरशाही प्रक्रियाओं की गहरी समझ मिली। 2017 में जमीनी स्तर पर सक्रियता में उनकी भागीदारी विशेष रूप से तब प्रमुख हो गई, जब उन्होंने SELAH नेबरहुड होमलेस कोएलिशन की स्थापना की। यह संगठन प्रत्यक्ष संपर्क, सामुदायिक लामबंदी और स्थानीय भागीदारी के माध्यम से बेघरता की समस्या का समाधान करने पर केंद्रित था। SELAH के साथ रमन के काम में यह विश्वास झलकता था कि पड़ोस के स्तर पर नागरिक भागीदारी व्यवस्थागत चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।रमन ने लॉस एंजिल्स की राजनीति में कैसे प्रवेश किया?रमन ने 2020 में चुनावी राजनीति में कदम रखा, जब उन्होंने लॉस एंजिल्स नगर परिषद की सीट के लिए चुनाव लड़ने का फैसला किया। उस समय, उन्हें व्यापक रूप से एक बाहरी व्यक्ति माना जाता था, क्योंकि उनके पास राजनीतिक संस्थानों या स्थापित नेटवर्कों का पारंपरिक समर्थन नहीं था। हालांकि, उनका अभियान व्यापक जमीनी प्रयासों पर आधारित था। हजारों स्वयंसेवकों ने जनसंपर्क प्रयासों में भाग लिया और पूरे जिले में मतदाताओं से सीधे संपर्क किया। इस अभियान का पैमाना उल्लेखनीय था, जिसमें स्वयंसेवकों ने हजारों घरों के दरवाजे खटखटाए और एक व्यापक समर्थन नेटवर्क बनाया। इसका परिणाम एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उलटफेर था। रमन ने मौजूदा पार्षद डेविड रियू को हराया, जिन्हें हिलेरी क्लिंटन और नैन्सी पेलोसी जैसी प्रमुख राष्ट्रीय हस्तियों का समर्थन प्राप्त था। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:33:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>ईरान की तारीफ, टूट जाएगा NATO, जर्मनी पर ऐसे भड़ास निकालेंगे ट्रंप</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के एक ताजा सोशल मीडिया पोस्ट ने अटलांटिक के दोनों किनारों पर राजनीतिक भूकंप ला दिया। ट्रंप ने जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों को कम करने या उन्हें पूरी तरह वापस बुलाने की संभावना जताकर पेंटागन और नाटो सहयोगियों को गहरे संकट में डाल दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष ने वैश्विक शक्तियों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संभावित फैसले की जानकारी स्वयं पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों को भी नहीं थी। रिपोर्ट्स के अनुसार सैन्य अधिकारियों को ट्रंप के ट्रुथ सोशल पोस्ट के बाद ही इस योजना का पता चला। हाल ही में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने दुनिया भर में तैनात अमेरिकी बलों की व्यापक समीक्षा की थी। जिसमें यूरोप से सैनिकों को हटाने का कोई उल्लेख नहीं था। पेंटागन के एक सूत्र ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि हमारा ध्यान ईरान के मोर्चे पर केंद्रित था। जर्मनी से पीछे हटना हमारी रणनीतिक गणना का हिस्सा नहीं था। इस कूटनीतिक दरार की शुरुआत जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिस मे्स के एक कड़े बयान से हुई। इसे भी पढ़ें: केरल में जन्म, Harvard से पढ़ाई, जोहरान ममदानी के बाद अब अमेरिका में क्यों है नित्या रामन की चर्चा?मैट्स ने ईरान के साथ अमेरिका के युद्ध की आलोचना करते हुए कहा कि वाशिंगटन के पास कोई एग्जिट स्ट्रेटेजी नहीं है और अमेरिकी सेना वहां अपमानित हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जर्मनी इस संघर्ष में अमेरिका का आंख मूंद कर साथ नहीं देगा और ना ही अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की खुली अनुमति देगा। ट्रंप ने इस आलोचना को व्यक्तिगत अपमान के तौर पर लिया। उन्होंने जवाबी हमला करते हुए कहा कि जर्मनी अपनी रक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर है। लेकिन जब सहयोग की बात आती है तो वह पीछे हट जाता है। ट्रंप ने चांसलर को सलाह दी कि वे अमेरिका को सिखाने के बजाय जर्मनी के ऊर्जा संकट और आर्थिक गिरावट पर ध्यान केंद्रित करें। अब सवाल यह है कि अमेरिका अगर जर्मनी में तैनात अपने सभी सैनिकों को वापस बुला लेता है तो इससे क्या फर्क पड़ेगा? आपको बता दें कि इसके परिणाम केवल सैन्य नहीं बल्कि ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण होंगे। जर्मनी स्थित रमस्टीन एयरबेस अमेरिका के वैश्विक सैन्य संचालन का हृदय है।इसे भी पढ़ें: पागलों के हाथ में नहीं दे सकते एटम बम... ट्रंप बोले- अभी और लंबा चलेगा ईरान युद्ध इसकी अनुपस्थिति में नेटो की त्वरित कार्रवाही की क्षमता आधी रह जाएगी। इसके अलावा पोलैंड और बाल्टिक देशों जैसे पूर्वी यूरोपीय देश जो रूस को एक बड़े खतरे के रूप में देखते हैं वे खुद को असुरक्षित महसूस करेंगे। यूरोप की रणनीतिक स्वायता खतरे में पड़ सकती है और अगर अमेरिका ने 38,000 सैनिक वापस बुलाए तो इससे नाटो का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। अमेरिका के पीछे हटने से नेटो की प्रासंगिकता पर सवाल उठेंगे। अगर गठबंधन का सबसे बड़ा साझेदार ही अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हटता है तो सामूहिक सुरक्षा का सिद्धांत यानी आर्टिकल फाइव कमजोर पड़ जाएगा। जर्मनी के कई शहर जैसे स्टगार्ड और कैसलॉटन अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर आर्थिक रूप से निर्भर है। सैनिकों की वापसी से वहां के स्थानीय व्यवसायों को अरबों डॉलर का नुकसान होगा। दूसरी ओर विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की अनुपस्थिति रूस और चीन जैसे देशों को यूरोप में अपना प्रभाव बढ़ाने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगी। विश्लेषकों का एक वर्ग इसे ट्रंप की पुरानी प्रेशर टैक्टिक्स मान रहा है। जिसका उद्देश्य यूरोपीय देशों को रक्षा बजट बढ़ाने और ईरान के मुद्दे पर अमेरिका का साथ देने के लिए मजबूर करना है। हालांकि जिस तरह से ट्रंप ने पेंटागन को दरकिनार कर यह बयान दिया है उससे यह साफ है कि वे इस बार केवल चेतावनी नहीं दे रहे बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को बदलने का मन बना चुके हैं। देखना यह होगा कि जर्मनी से सैनिकों को कम करने या वापस बुलाने के फैसले पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आगे क्या बयान देते हैं और आगे क्या फैसला लेते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:33:53 +0530</pubDate>
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<title>Washington की वादाखिलाफी से भड़का ईरान, कहा&#45; America से War की पूरी संभावना है</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के सशस्त्र बलों ने चेतावनी दी है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के साथ शत्रुता फिर से शुरू हो सकती है, यह कहते हुए कि संघर्ष के फिर से भड़कने की &quot;संभावना&quot; है और वाशिंगटन पर समझौतों का सम्मान करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। ये टिप्पणियां ईरान के सैन्य मुख्यालय के उप प्रमुख मोहम्मद जाफर असदी ने फार्स समाचार एजेंसी द्वारा जारी एक बयान में कीं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी अधिकारियों की हालिया कार्रवाइयां और बयान राजनयिक प्रयासों के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता की कमी दर्शाते हैं।इसे भी पढ़ें: ईरान की तारीफ, टूट जाएगा NATO, जर्मनी पर ऐसे भड़ास निकालेंगे ट्रंपअसदी ने कहा कि अमेरिकी संदेश काफी हद तक मीडिया की मांगों से प्रेरित प्रतीत होते हैं, जिनका उद्देश्य तेल की कीमतों में गिरावट को रोकना और खुद को उस स्थिति से दूर रखना है जो उसने खुद पैदा की है। उन्होंने आगे कहा कि ईरान की सेना हाई अलर्ट पर है और किसी भी तरह के तनाव बढ़ने का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है और उन्होंने अमेरिका द्वारा संभावित नए दुस्साहस के प्रति चेतावनी दी। ईरान के सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा पाकिस्तान में मध्यस्थों के माध्यम से भेजे गए वार्ता के नवीनतम प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद उनका यह बयान आया है। ट्रम्प ने बाद में कहा कि वे प्रस्ताव से &quot;संतुष्ट नहीं&quot; थे, लेकिन उन्होंने इस बारे में और कोई जानकारी नहीं दी। पिछले तीन हफ्तों से अमेरिका और ईरान के बीच जारी नाजुक युद्धविराम के बावजूद तनाव बना हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:33:52 +0530</pubDate>
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<title>भाई से शादी, डार्लिंग आई लव यू&#45;गुडनाइट, चलो सोने चलते हैं...Ilhan Omar पर ऐसे बरसे Donald Trump, दुनिया हैरान</title>
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<description><![CDATA[ फ्लोरिडा में अपने चुनावी भाषण में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सांसद इल्हान उमर के खिलाफ एक लंबा-चौड़ा भाषण दिया। उन्होंने प्रगतिशील डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी की नकल करते हुए एक अजीब लहजे का इस्तेमाल किया और फिर रूढ़िवादी हलकों में फैले उस अप्रमाणित दावे से जुड़ी कहानी सुनाना शुरू कर दिया कि उमर ने अपने भाई से शादी की है। उन्होंने पहले उमर की नकल करते हुए यह दावा किया कि वह अमेरिका विरोधी हैं। ट्रंप ने इल्हान उमर की आवाज़ से ज़्यादा पॉल मैककार्टनी की खराब आवाज़ में नकल की उन्होंने आगे कहा वह सोमालिया से यहां आती हैं और हमें यह बताने की कोशिश करती हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका को कैसे चलाया जाए। वह कहती हैं संविधान मुझे कुछ अधिकार देता है, मुझे कुछ अधिकार देता है,और मैं मांग करती हूं कि मुझे ये अधिकार दिए जाएं दफा हो जाओ, कितनी पाखंडी है!इसे भी पढ़ें: Chabahar Port India Strategy | &#039;प्लान-बी&#039; तैयार! अमेरिकी पाबंदियों के बीच भारत ने बदला चाबहार का गेम, अब इस नए पैंतरे से हैरान होगी दुनियाट्रंप ने दोनों के बीच एक हास्यास्पद काल्पनिक संवाद शुरू करने से पहले कहा कि मुझे लगता है कि उसने अपने भाई से शादी की है, जो पूरी तरह से गैरकानूनी है। दरअसल, वे एक प्यारा जोड़ा हैं, लेकिन यह थोड़ा गैरकानूनी सा है। ट्रंप ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि उन्होंने अपने भाई से शादी की है, जो पूरी तरह से गैर-कानूनी है. हालांकि ये एक लवली कपल है लेकिन ये गैर-कानूनी है. डार्लिंग मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं. गुडनाइट, ब्रदर. चलो बिस्तर पर चलते हैं। क्या वह घिनौनी बात नहीं है?इसे भी पढ़ें: ईरान की तारीफ, टूट जाएगा NATO, जर्मनी पर ऐसे भड़ास निकालेंगे ट्रंपभारत विरोधी एजेंडा चलाने वाले इलहान उमर के लिए ट्रंप के यह शब्द किसी सर्जिकल स्ट्राइक से कम नहीं है। ट्रंप का साफ कहना है कि जो देश के संविधान का इस्तेमाल सिर्फ अपने हक के लिए करते हैं और अंदर ही अंदर धोखाधड़ी का जाल बुनते हैं उनके लिए अमेरिका में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इल्हान उमर ने एक्स पर जवाब देते हुए ट्रंप की टिप्पणियों को खारिज कर दिया और उनके कानूनी रिकॉर्ड और विश्वसनीयता पर हमला किया। उन्होंने कहा कि यह बेतुकी बकवास गुस्सा दिलाती, अगर यह किसी ऐसे अपराधी की तरफ से न आती, जिस पर 34 गंभीर अपराधों के आरोप हैं, जिस पर बलात्कार का आरोप है और जिस पर बच्चों का यौन शोषण करने का आरोप है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:33:52 +0530</pubDate>
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<media:keywords>भाई, से, शादी, डार्लिंग, आई, लव, यू-गुडनाइट, चलो, सोने, चलते, हैं...Ilhan, Omar, पर, ऐसे, बरसे, Donald, Trump, दुनिया, हैरान</media:keywords>
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<title>भारत&#45;बांग्लादेश भिड़ गए! कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलब कर ढाका ने किस बात का विरोध जताया?</title>
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<description><![CDATA[ अभी-अभी भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में गर्मजशी लौटी थी। अभी-अभी भारत और बांग्लादेश एक दूसरे के साथ मिलकर काम करने में दिलचस्पी दिखा रहे थे और यही वजह है कि भारत की सरकार ने अपने बेहद विश्वसनीय व्यक्ति को बांग्लादेश में उच्चायुक्त के तौर पर भेजा। लेकिन ऐसा लगता है कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिसे लेकर बांग्लादेश और भारत के बीच में टकराव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। तभी तो खबर यह आई है कि बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बधे को तलब करके कुछ मामलों पर अपना औपचारिक विरोध दर्ज किया है। दरअसल यह विरोध असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के कुछ टिप्पणियों को लेकर है जिसे लेकर बांग्लादेश ने आपत्ति जताई थी। इसे भी पढ़ें: India-Bangladesh रिश्तों में तल्खी! असम CM के बयान पर Dhaka ने जताई कड़ी आपत्ति, भेजा समन।विदेश मंत्रालय की दक्षिण एशिया महानिदेशक ईश्वरत जहां ने बताया कि भारतीय राजनयिक को बांग्लादेश का रुख स्पष्ट किया गया है। यूएनबी न्यूज़ सेवा के हवाले से एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है कि भारत के सामने बांग्लादेश ने अपना विरोध दर्ज कराया है। बताया जाता है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बीते हफ्ते सोशल मीडिया पर यह पोस्ट किया कि असम में 20 विदेशी नागरिकों को पकड़ा गया और बांग्लादेश वापस भेज दिया गया। बताया जाता है कि यह अवैध बांग्लादेशी थे जिन्हें पुशबैक किया गया। ईश्वर जहां ने भारतीय राजनिक से यह कहा है कि ऐसी टिप्पणियां दोनों देशों के बीच जो मैत्रीपूर्ण संबंध हैं उसकी भावना को कमजोर कर देती हैं। सूत्र कहते हैं क्राधिकारी ने शर्मा की टिप्पणी को बांग्लादेश भारत संबंधों के लिए अपमानजनक बताया और ढाका की नाराजगी व्यक्त की है। इसे भी पढ़ें: Pakistan के नए Test Coach बने Sarfaraz Ahmed, कहा- तकनीक बाद में, पहले भरोसा जरूरीबताया गया है कि बांग्लादेश ने भारत से यह गुजारिश की है कि संवेदनशील द्विपक्षीय मुद्दों पर संयम बरता जाए और बेहद चौकन्ना होकर टिप्पणी की जाए। कुल मिलाकर देखा जाए तो अवैध घुसपैठियों का मामला हमेशा से ही भारत और बांग्लादेश के बीच में गरमाया रहा है। और ऐसे में जब बांग्लादेश में अब नई सरकार है वो भी चाहती है कि बांग्लादेश के घुसपैठ का मुद्दा बिल्कुल सार्वजनिक टेबल पर ना रखकर अंदर खाने बातचीत की जाए। यही वजह है कि असम के मुख्यमंत्री ने जब इस मुद्दे को लेकर जानकारी दी तो बांग्लादेश ने अपनी आपत्ति व्यक्त की है। कुल मिलाकर देखा जाए तो शेख हसीना के तख्तापलट के बाद यूनुस ने भरपूर तरीके से भारत के साथ रिश्ते खराब करने में अपनी भूमिका निभाई और भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को न्यूनतम स्तर पर पहुंचा दिया।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:33:51 +0530</pubDate>
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<title>भूटान का विकास और ख़ुशहाली मॉडल, वैश्विक दक्षिण के लिए एक प्रेरणा</title>
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<description><![CDATA[ लोगों की ख़ुशहाली की बात होती है तो भूटान का नाम सुर्ख़ियाँ बटोरता है. आख़िर क्या है भूटान का विकास और ख़ुशहाली मॉडल जिसे, कम से कम वैश्विक दक्षिण क्षेत्र के देशों के लिए तो प्रेरणा कहा जा रहा है. भूटान की सकल राष्ट्रीय ख़ुशहाली की अवधारणा वाले देश के रूप में उसकी पहचान, और सन्तुलित व जन-केन्द्रित विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता, अन्य देशों के लिए महत्वपूर्ण सबक़ पेश करती है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:33:13 +0530</pubDate>
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<title>सऊदी अरब में &amp;apos;शोषणकारी कफ़ाला&amp;apos; व्यवस्था को समाप्त करने की अपील</title>
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<description><![CDATA[ सऊदी अरब में, अन्य देशों से कामकाज व रोज़गार पाने के लिए आने वाले लोगों को प्रायोजित करने (Sponsorship) की प्रक्रिया को समाप्त करने की अपील की गई है जिसे &#039;कफ़ाला&#039; व्यवस्था कहा जाता है. संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने सऊदी अरब से यह अपील, वर्ष 2034 में देश में आयोजित होने वाले फ़ीफ़ा फ़ुटबॉल विश्व कप की तैयारियों के सम्बन्ध में की है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:33:11 +0530</pubDate>
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<title>Nepal Airlines Map Controversy | नेपाल एयरलाइंस ने मानचित्र में जम्मू&#45;कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया, विरोध के बाद माफी मांगी</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल की सरकारी विमानन सेवा, नेपाल एयरलाइंस (Nepal Airlines), अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण बड़े विवाद में फंस गई है। एयरलाइन ने अपने &#039;नेटवर्क रूट मैप&#039; में पूरे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को पाकिस्तान के हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया, जिसके बाद भारत में तीव्र आक्रोश देखने को मिला। हालांकि, चौतरफा दबाव और विरोध के बाद एयरलाइन ने 24 घंटे के भीतर माफी मांगते हुए इसे &quot;तकनीकी चूक&quot; करार दिया है। इसे भी पढ़ें: Rohit Sharma Birthday: Records के &#039;हिटमैन&#039; Rohit Sharma का Birthday, ये कीर्तिमान तोड़ पाना है लगभग Impossibleयह विवाद बुधवार को उस समय खड़ा हो गया जब एयरलाइन के सोशल मीडिया हैंडल पर एक रूट मैप साझा किया गया, जिसमें पूरे केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को पाकिस्तान के हिस्से के रूप में दिखाया गया था। इस तस्वीर को एक्स और फेसबुक पर वायरल होने में देर नहीं लगी, जिसकी भारतीय यूजर्स ने आलोचना की। जल्द ही, हैशटैग #BoycottNepalAirlines ट्रेंड करने लगा, उपयोगकर्ताओं ने विदेश मंत्रालय (MEA) और विमानन मंत्रालय से नेपाल के साथ राजनयिक विरोध दर्ज कराने का आग्रह किया।कई उपयोगकर्ताओं ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे भारत ने दशकों से लाखों नेपालियों को नौकरियां देकर, व्यापार पहुंच, ईंधन, बिजली परियोजनाओं को वित्तपोषित और आपदा राहत प्रदान करके नेपाल की अर्थव्यवस्था को सांसत में रखा है। हिमालयी देश, जहां हाल ही में चुनाव हुए, काठमांडू के पूर्व मेयर बालेंद्र शाह ने नेपाल के अब तक के सबसे युवा प्रधान मंत्री के रूप में पदभार संभाला।नेपाल एयरलाइंस को विरोध का सामना करना पड़ रहा हैएयरलाइन की आलोचना करने वाले कई भारतीय उपयोगकर्ताओं में भोजपुरी अभिनेता-गायक खेसारीलाल यादव भी शामिल थे, जिन्होंने संकेत दिया कि यह उकसाने के इरादे से किया गया जानबूझकर किया गया कृत्य हो सकता है।यादव ने ट्वीट किया, &quot;क्या कोई मुझे बता सकता है कि नेपाल एयरलाइंस ने भारत के नक्शे के साथ इस तरह की छेड़छाड़ क्यों की, वह भी जम्मू-कश्मीर को लेकर? यह कोई मामूली बात नहीं है; यह जानबूझकर की गई कार्रवाई लगती है। वे इस तरह की बात को उकसावे की कार्रवाई कहते हैं।&quot;जैसे ही प्रतिक्रिया तेज हुई, नेपाल एयरलाइंस ने पोस्ट हटा दी और माफी जारी की, जिसमें जोर दिया गया कि यह नेपाल या वाहक के आधिकारिक रुख को प्रतिबिंबित नहीं करता है। इसे भी पढ़ें: Delhi NCR Weather Update: उमस भरी गर्मी के बीच राहत की खबर, IMD ने जताई बारिश की संभावनाइसमें कहा गया है, &quot;हम नेटवर्क मानचित्र में त्रुटि के लिए ईमानदारी से माफी मांगते हैं... मानचित्र में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के संबंध में महत्वपूर्ण कार्टोग्राफिक अशुद्धियां थीं।&quot;वाहक ने कहा कि आंतरिक समीक्षा का आदेश दिया गया है। एयरलाइन ने आगे कहा, &quot;हम क्षेत्र में अपने पड़ोसियों और दोस्तों के साथ अपने मजबूत रिश्तों को बहुत महत्व देते हैं और पोस्ट के कारण हुई किसी भी ठेस के लिए खेद व्यक्त करते हैं।&quot;यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब नेपाल एयरलाइंस भारत में अपनी उड़ानें बढ़ाने पर विचार कर रही है। मार्च में, इसने काठमांडू-दिल्ली मार्ग पर अपनी उड़ान सेवाओं के विस्तार की घोषणा की। वर्तमान में, एक दैनिक उड़ान चालू है। नेपाल एयरलाइंस इसे हर हफ्ते 10 उड़ानों तक विस्तारित करने पर विचार कर रही है।We sincerely apologize for error in the network map recently shared on our social media channels. The map contained significant cartographic inaccuracies regarding international boundaries that do not reflect the official stance of Nepal or Nepal Airlines. pic.twitter.com/E5MZSS8CjQ— Nepal Airlines???????? (@NepalAirlinesRA) April 30, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:24:55 +0530</pubDate>
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<title>60 साल बाद इस देश का बड़ा ऐलान, रातों&#45;रात बदली भारत की किस्मत!</title>
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<description><![CDATA[ करीब 60 साल बाद एक देश ने ऐसा फैसला लिया है जिसने पूरी दुनिया में हलचल पैदा कर दी है। यह फैसला कई देशों की गुंडागर्दी खत्म कर देगा लेकिन भारत के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा क्योंकि जिस देश ने यह ऐतिहासिक फैसला लिया है, वह भारत का बहुत बड़ा स्ट्रेटेजिक पार्टनर है। संयुक्त अरब अमीरात की जहां कुछ दिन पहले भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल मौजूद थे और अब इसी मुलाकात के कुछ घंटों बाद ही संयुक्त अरब अमीरात ने ऐलान किया है कि वह तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक और ओपेक प्लस से बाहर निकल रहा है। 1 मई 2026 से संयुक्त अरब अमीरात दुनिया भर में तेल के दामों और प्रोडक्शन को निर्धारित करने वाले ओपेक का सदस्य नहीं रहेगा। यहां सबसे दिलचस्प बात यह है कि जनवरी में संयुक्त अरब अमीरात की पूरी कैबिनेट 2 घंटों के लिए पीएम मोदी से मिलने आई थी।इसे भी पढ़ें: UAE का मास्टरस्ट्रोक: अब Hormuz Strait को बायपास कर Fujairah से आएगा तेल, भारत की टेंशन खत्मअगले महीने अपनी यूरोप यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 घंटों के लिए अबू धाबी में रुकेंगे और हाई प्रोफाइल मीटिंग करेंगे। संयुक्त अरब अमीरात ने जो ऐलान किया है वो रातोंरात भारत की किस्मत बदल सकता है। यह जानने के लिए आप वीडियो को देखिए। दरअसल ईरान अमेरिका जंग की वजह से मुस्लिम देश बिखर गए हैं। सऊदी अरब पाकिस्तान की तरफ झुक गया तो संयुक्त अरब अमीरात भारत के और नजदीक आ गया। संयुक्त अरब अमीरात वो देश है जिस पर ईरान ने सबसे ज्यादा हमले किए। लेकिन कोई भी आसपड़ोस का मुस्लिम देश संयुक्त अरब अमीरात के साथ नहीं खड़ा हुआ। संयुक्त अरब अमीरात नाराज़ था कि किसी भी मुस्लिम देश ने ईरान को मुंहत जवाब नहीं दिया। इन देशों ने जमकर अमेरिकी हथियार और लड़ाकू विमान खरीदे लेकिन उनका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं किया बल्कि पाकिस्तान, तुर्की, क़तर और सऊदी अरब जैसे देशों ने मौके का फायदा उठाकर संयुक्त अरब अमीरात की तरक्की को चोट पहुंचाने के लिए अबू धाबी और दुबई जैसे बड़े शहरों की छवि खराब करनी शुरू कर दी। ऐसे में संयुक्त अरब अमीरात ने ऐलान कर दिया कि वह ओपेक से बाहर जा रहा है। इसे भी पढ़ें: UAE का मास्टरस्ट्रोक: अब Hormuz Strait को बायपास कर Fujairah से आएगा तेल, भारत की टेंशन खत्मजानकारी के लिए बता दें कि ओपेक में सऊदी अरब के बाद संयुक्त अरब अमीरात ही सबसे ताकतवर सदस्य था। बहरहाल अब आपको बताते हैं कि संयुक्त अरब अमीरात के इस फैसले का फायदा किसे मिलने वाला है। दशकों तक ओपेक ने ऐसे कार्टेल की तरह काम किया जो एक कमरे में बैठकर तेल की सप्लाई को कंट्रोल करता रहा। कीमतों को मैनेज करता रहा और दुनिया को अपने हिसाब से ढलने पर मजबूर करता रहा। ओपेक ही यह तय करता था कि संयुक्त अरब अमीरात समेत बाकी सदस्य देश कितना तेल उत्पादन करेंगे और कितने में बेचेंगे। सब कुछ ऐसे ही चलता रहा। संयुक्त अरब अमीरात मुनाफा कमाने के लिए अपनी मर्जी से तेल प्रोडक्शन नहीं बढ़ा पा रहा था। लेकिन जब ईरान अमेरिका जंग में साथी मुस्लिम देशों ने धोखा दिया तो संयुक्त अरब अमीरात ने खुद को ओपेक की जंजीरों से आजाद करवा लिया। अब संयुक्त अरब अमीरात मन मुताबिक तेल प्रोडक्शन कर सकता है और बेच भी सकता है। जाहिर सी बात है कि भारत संयुक्त अरब अमीरात का सबसे बड़ा तेल इंपोर्टर बन सकता है। आपको बता दें कि संयुक्त अरब अमीरात अपनी हबशान फुजेराह तेल पाइपलाइन के जरिए भारत तक जमकर तेल पहुंचा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:24:53 +0530</pubDate>
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<title>Iran को अमेरिका की अब तक की सबसे हिला देने वाली धमकी, चौंक गई दुनिया!</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ फिर से सख्त रुख दिखाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी। एक तस्वीर पोस्ट की जिसे ईरान के लिए फाइनल वार्निंग माना जा रहा है। जब कूटनीति से समाधान नहीं निकला तो अब अमेरिका ने अपना रुख खड़ा कर लिया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट टूथ पर एक पोस्ट किया जिसमें वह हाथ में M4 ऑटोमेटिक असॉल्ट राइफल के साथ दिख रहे हैं और लिखा है नो मोर मिस्टर नाइस गाय। ट्रंप ने बातचीत की धीमी गति पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि ईरान अपने मामलों को ठीक से संभाल नहीं पा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पहले से ही मिडिल ईस्ट में तनाव है। इसे भी पढ़ें: Share Market Crash | शेयर बाजार में कोहराम! कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी पूंजी की निकासी से सेंसेक्स-निफ्टी धड़ामअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सहयोगी जर्मनी को चेतावनी देते हुए संकेत दिया कि वह वहां तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम कर सकते हैं। यह बयान ईरान और अमेरिका-इजराइल युद्ध को लेकर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ बढ़ते तनाव के बीच आया है। मर्ज ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि ईरानी नेतृत्व के सामने अमेरिका ‘‘अपमानित’’ हो रहा है और उन्होंने युद्ध में वाशिंगटन की रणनीति पर सवाल उठाए थे। इसके बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका जर्मनी में सैनिकों की तैनाती में कटौती की संभावना की समीक्षा कर रहा है और इस पर जल्द फैसला लिया जाएगा।इसे भी पढ़ें: अमेरिकी सेना में हड़कंप! ईरानी साइबर ग्रुप &#039;Handala&#039; ने लीक किए 2,000 से अधिक सैनिकों के नाम और पतेअपने पहले कार्यकाल में भी ट्रंप ने अमेरिकी रक्षा खर्च को कम बताते हुए जर्मनी से सैनिक घटाने की घोषणा की थी। 2020 में उन्होंने लगभग 34,500 में से 9,500 सैनिक वापस बुलाने की बात कही थी, लेकिन यह योजना लागू नहीं हो सकी। बाद में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2021 में इस निर्णय को रद्द कर दिया था। जर्मनी में अमेरिका के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने हैं, जिनमें यूरोपीय और अफ्रीकी कमान मुख्यालय, रामस्टीन एयर बेस और एक क्षेत्रीय मेडिकल सेंटर शामिल हैं। मर्ज ने कहा कि ट्रंप के साथ उनके संबंध अच्छे हैं, लेकिन ईरान युद्ध को लेकर उन्हें शुरुआत से ही संदेह था। उन्होंने चेतावनी दी कि इस संघर्ष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से, जहां से विश्व का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:24:53 +0530</pubDate>
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<title>भारत को वापस करो...किंग चार्ल्स से कोहिनूर वापस मांगने लगे अमेरिका के मेयर ममदानी</title>
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<description><![CDATA[ किंग चार्ल्स का अमेरिका दौरा इस वक्त खूब चर्चा में है। कभी अपने बयानों की वजह से तो कभी उन पर होने वाले तंज की वजह से। पहले किंग चार्ल्स का वो बयान जहां उन्होंने अमेरिकनंस को फ्रेंच बोलने की याद दिलाई थी। अब न्यूयॉर्क के मेयर ने कोहिनूर हीरा वापस मांगकर उनके इस अमेरिका दौरे को और दिलचस्प बना दिया। दरअसल न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने किंग चार्ल्स से मुलाकात की लेकिन इस मुलाकात से कुछ घंटे पहले ममदानी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में धमाका कर दिया था। दरअसल जब उनसे पूछा गया कि वह किंग चार्ल्स से मिलेंगे तो क्या कहेंगे? तो मेयर साहब ने मजाकिया और बेबाक अंदाज में कहा अगर मुझे किंग से अकेले में बात करने का मौका मिला तो मैं उन्हें कोहिनूर वापस लौटाने के लिए प्रोत्साहित करूंगा। अबाउट एनीथिंग सेफ आई वाली टू रिटर्न द कोहिनूर डायमंड। यानी कोहिनूर की गूंज अब लंदन से निकलकर न्यूयॉर्क की गलियों तक पहुंच गई।इसे भी पढ़ें: हमारा हिसाब अलग है, एक के बदले 4 उड़ाएंगे...ईरान ने ट्रंप को समझा दिया गणितहालांकि इस बयान के बाद 91 मेमोरियल पर किंग चार्ल्स और मेयर ममदानी की मुलाकात भी हुई। इस मुलाकात में दोनों मुस्कुराते हुए हाथ मिलाते दिखे। अब एक सवाल यह है कि क्या मेयर साहब ने हीरे की बात दबी जुबान में कही या नहीं कही। खैर, यह तो राज है, लेकिन चर्चा पूरे न्यूयॉर्क में हो रही थी। अच्छा यहां भारत का भी एक एंगल है। आपको बता दें कि यह कोहिनूर हीरा भारत के गौरव से जुड़ा है। 1849 में महाराजा दिलीप सिंह ने इसे महारानी विक्टोरिया को सौंपा था। जिसके बाद यह ब्रिटिश मुकुट से जुड़ गया। हालांकि भारत में इसे बार-बार वापस लाने की मांग उठती रही और अब न्यूयॉर्क के मेयर ने भी इस मांग को हवा दे दी। इसे भी पढ़ें: नहीं लेने तुम्हारे फोकट के हेलीकॉप्टर, बालेन शाह ने ट्रंप के ऑफर को मारी लात!कहानी सिर्फ कोहिनूर पर खत्म नहीं होती। इस दौरे पर कोहिनूर वाक्य से पहले किंग शाल ने भी राष्ट्रपति ट्रंप को उन्हीं के अंदाज में ऐसा रोस्ट किया था कि ट्रंप का चेहरा भी देखने लायक था। हुआ यह था कि कुछ समय पहले ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर तंज कसा था कि अगर अमेरिका ने वर्ल्ड वॉर में मदद ना की होती तो आज आधा यूरोप जर्मन बोल रहा होता। हालांकि वाइट हाउस के स्टेट डिनर में किंग चार्ल्स ने सही मौका देखा और मुस्कुराते हुए बड़े शांत लहजे में कहा मिस्टर प्रेसिडेंट आपने कहा था कि अमेरिका ना होता तो यूरोप जर्मन बोल रहा होता। तो क्या मैं यह कहने की हिम्मत कर सकता हूं कि अगर हम ब्रिटिश ना होते तो आज आप लोग फ्रेंच बोल रहे होते।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:24:52 +0530</pubDate>
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<title>Hormuz में अब यूं दिखी ईरान&#45;रूस की दोस्ती, बस देखता ही रह गया US!</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के लिए अब जंग में रूस कूद चुका है। पुतिन ने तो खुल्ला ऐलान भी कर रखा है कि ईरान के लिए रूस हर जगह मौजूद है और उस शक्ति के खिलाफ है जो उसे खत्म करने की सोच रखती है। और यही बयान अब सीधे अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता हुआ दिख रहा है क्योंकि जिस वक्त वाशिंगटन ईरान को घेरने में लगा है उसी वक्त मौस को खुलकर उसके साथ खड़ा नजर आ रहा है। हालिया घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि यह सिर्फ कूटनीति नहीं बल्कि खुला पावर गेम है। जहां दो बड़े ब्लॉक आमने-सामने दिख रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास जरा का रूस पहुंचना और वहां व्लादमीर पुतिन से मुलाकात करना महज एक औपचारिक बैठक नहीं थी बल्कि एक रणनीतिक संकेत था कि ईरान अब अकेला नहीं है और उसके पीछे एक बड़ी ताकत खड़ी है। इसे भी पढ़ें: मैं और मिस्टर नाइस नहीं बनूंगा, हाथों में बंदूक थामे ट्रंप ने ईरान को हड़काया, बेहतर है समझ जाओपुतिन ने साफ कहा कि रूस पश्चिम एशिया में शांति के लिए हर संभव प्रयास करेगा। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने ईरान के प्रति समर्थन का जो संदेश दिया वह बहुत स्पष्ट था। साफ था कि मॉस्को इस टकराव में किनारे नहीं रहने वाला। इस बीच जो घटना सामने आई उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। जब स्टेट ऑफ होमस जैसे हाई टेंशन जोन से एक विशालकाय रूसी सुपरयाट यानी बिना किसी रुकावट के गुजर गई। यह वही इलाका है जहां अमेरिका और ईरान दोनों सख्ती से निगरानी और नियंत्रण की बात करते हैं। जहां जहाजों की आवाजाही पर सवाल खड़े होते हैं और जहां हर मूवमेंट को लेकर वैश्विक चिंता बनी हुई है। लेकिन इसी रास्ते से नार्ड नाम की सुपर याट निकल जाती है जो दुनिया की सबसे लग्जरी या्स में गिनी जाती है। करीब 142 मीटर लंबी इस याट में 20 स्टेट रूम, स्विमिंग पूल, हेलपैड और यहां तक कि एक सबमरीन भी मौजूद है।  इसकी कीमत करीब 500 मिलियन से ज्यादा बताई जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह याठ रूसी अरबपति अलेक्सी मॉर्द शो से जुड़ी हुई है जो पुतिन के बेहद करीबी माने जाते हैं। अब सवाल यही उठता है कि जब आम जहाजों पर सख्ती है जब अमेरिकी नाकेबंदी की बात कर रहा है तब ईरान भी इसी रास्ते को नियंत्रित करने का दावा करता है। फिर आखिर यह यार कैसे निकल गया? इसे भी पढ़ें: Doval-MBZ की हुई मीटिंग, ठीक 2 दिन बाद UAE ने लिया ऑयल मार्केट को हिलाने वाला फैसला, भारत के लिए सस्ते तेल का रास्ता कैसे खुल रहा है?यहीं से यह पूरा मामला सिर्फ एक समुद्री घटना नहीं बल्कि एक बड़ा संकेत बन जाता है कि रूस और ईरान के बीच बढ़ती नजदीकियां जमीन पर भी असर दिखाने लगी हैं। दरअसल ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि जब तक अमेरिका का दबाव जारी रहेगा वह इस रास्ते पर नियंत्रण बनाए रखेगा और अमेरिका ने भी यहां अपनी मौजूदगी बढ़ा ली है। लेकिन इसके बावजूद इस तरीके का मूवमेंट यह दिखाता है कि पूरी तस्वीर उतनी सरल नहीं है जितनी दिखाई जा रही है। रूस और ईरान के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में यह साझेदारी और गहरी हो गई। साल 2025 में दोनों देशों के बीच सुरक्षा और खुफिया सहयोग को लेकर बड़ा समझौता हुआ और अब युद्ध के बाद यह संबंध खुलकर सामने आ रहे हैं। पुतिन ने अरासी से मुलाकात के दौरान यह भी कहा कि उन्हें ईरान के सुप्रीम लीडर मुस्तबा खामनई का संदेश मिला है और उन्होंने उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:24:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>America हमें पीड़ित से हमलावर बना रहा है, UN में फूटा Iran का गुस्सा, लगाए गंभीर आरोप</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी मिशन ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की समीक्षा बैठक का इस्तेमाल तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को गलत तरीके से पेश करने और वॉशिंगटन द्वारा किए गए उल्लंघनों से ध्यान भटकाने के लिए कर रहा है; यह आरोप ऐसे समय में लगाया गया है जब संयुक्त राष्ट्र में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा किए गए एक बयान में, मिशन ने कहा कि ईरान का सारा एनरिच्ड यूरेनियम (समृद्ध यूरेनियम) अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की पूरी निगरानी में है, और ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है कि ईरान का एक ग्राम भी परमाणु सामग्री कहीं और इस्तेमाल के लिए भेजी गई हो।इसे भी पढ़ें: Hormuz में अब यूं दिखी ईरान-रूस की दोस्ती, बस देखता ही रह गया US!इस बयान में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भी आलोचना की गई, जिसमें कहा गया कि UN सुरक्षा परिषद, IAEA के डायरेक्टर-जनरल और बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स ने न केवल इन गैर-कानूनी हमलों की निंदा करने में असफलता दिखाई, बल्कि सबसे ज़्यादा अफ़सोस की बात यह है कि उन्होंने ऐसे कदम उठाए जिनसे पीड़ित और हमलावर की भूमिकाएँ ही उलट गईं। इस बयान में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भी आलोचना की गई, जिसमें कहा गया कि UN सुरक्षा परिषद, IAEA के डायरेक्टर-जनरल और बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स ने न केवल &quot;इन गैर-कानूनी हमलों की निंदा करने में असफलता दिखाई, बल्कि सबसे ज़्यादा अफ़सोस की बात यह है कि उन्होंने ऐसे कदम उठाए जिनसे पीड़ित और हमलावर की भूमिकाएँ ही उलट गईं।ईरान ने कहा कि अमेरिका उसकी परमाणु गतिविधियों को एक खतरे के तौर पर पेश कर रहा है, जबकि NPT मंच का इस्तेमाल करके वह एक ऐसे राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है जिसे उसने &#039;राजनीतिक रंग दिया गया&#039; बताया, और साथ ही व्यापक निरस्त्रीकरण की अपनी ज़िम्मेदारियों को नज़रअंदाज़ कर रहा है।इसे भी पढ़ें: Share Market Crash | शेयर बाजार में कोहराम! कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी पूंजी की निकासी से सेंसेक्स-निफ्टी धड़ामन्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में, ईरान के दूत अमीर सईद इरवानी ने चेतावनी दी कि खाड़ी क्षेत्र में स्थायी स्थिरता के लिए, ईरान के खिलाफ़ चल रहे हमलों को खत्म करना ज़रूरी होगा, जिसे उन्होंने &#039;लगातार जारी आक्रामकता&#039; बताया और इसके साथ ही इस बात की गारंटी भी ज़रूरी होगी कि भविष्य में ऐसे कदम दोबारा नहीं उठाए जाएँगे, और ईरान की संप्रभुता का सम्मान किया जाएगा।इसे भी पढ़ें: अरागची के मॉस्को से लौटते ही आधी रात ट्रंप को आया पुतिन का फोन, जानें क्या कहाकॉन्फ्रेंस में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ईरान, होर्मुज़ जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी जैसे अहम जलमार्गों में नेविगेशन की आज़ादी का समर्थन करता है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार बढ़ता सैन्य तनाव क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को कमज़ोर कर सकता है। उन्होंने UN सुरक्षा परिषद से इस स्थिति पर ध्यान देने का आग्रह किया।इरवानी ने आरोप लगाया कि 28 फरवरी से, अमेरिका और इज़राइल अंतरराष्ट्रीय कानून और UN चार्टर, खासकर अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन करते हुए, ईरान के खिलाफ़ एक &quot;व्यापक और अनुचित आक्रामक युद्ध&quot; में लगे हुए हैं; उन्होंने आगे कहा कि इन कार्रवाइयों ने समुद्री सुरक्षा को बाधित किया है। ये घटनाक्रम न्यूयॉर्क में NPT समीक्षा कॉन्फ्रेंस में वाशिंगटन और तेहरान के बीच तीखी नोक-झोंक के बीच सामने आए हैं, जहाँ ईरान को इस एक महीने तक चलने वाली बैठक के उपाध्यक्षों में से एक के तौर पर चुना गया था।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:24:49 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump ने Putin को फोन पर सुनाई खरी खरी! Iran मामले में दखल देने की बजाय Ukraine War खत्म करने पर ध्यान देने की दी सलाह</title>
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<description><![CDATA[ वैश्विक राजनीति के इस उबलते हुए दौर में एक दिलचस्प लेकिन खतरनाक विरोधाभास सामने आ गया है। एक ओर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन खुद को ईरान संकट का समाधानकर्ता बनाकर शांति की पहल कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ तौर पर पुतिन को आईना दिखाते हुए कहा है कि अगर सच में कुछ करना है तो यूक्रेन युद्ध खत्म करो। यानी एक तरफ शांति की पेशकश, दूसरी तरफ प्राथमिकताओं की टक्कर।हम आपको बता दें कि रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुई बैठक में पुतिन और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच बातचीत ने साफ कर दिया कि रूस खुद को इस संकट में निर्णायक भूमिका में देखना चाहता है। अराघची ने पुतिन का शुक्रिया अदा किया, क्योंकि रूस ने ईरान को समर्थन देने का वादा किया। पुतिन ने खुलकर कहा कि वह क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उनका यह संदेश पश्चिमी देशों के लिए सीधी चुनौती है कि मास्को ईरान के साथ मजबूती से खड़ा है, ठीक वैसे ही जैसे चीन और अन्य क्षेत्रीय सहयोगी।इसे भी पढ़ें: Hormuz में अब यूं दिखी ईरान-रूस की दोस्ती, बस देखता ही रह गया US!लेकिन इस पूरी कूटनीतिक तस्वीर में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब ट्रम्प और पुतिन के बीच फोन पर बातचीत हुई। पुतिन ने न केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम में मध्यस्थ बनने की पेशकश की, बल्कि यह भी कहा कि रूस ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को संभाल सकता है। करीब नौ सौ सत्तर पाउंड यूरेनियम को लेकर यह प्रस्ताव वैश्विक शक्ति संतुलन को बदलने की क्षमता रखता है। ट्रम्प ने इस पर ठंडा लेकिन तीखा जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें ज्यादा खुशी होगी अगर पुतिन यूक्रेन युद्ध खत्म करने में अपनी ऊर्जा लगाएं। यह बयान महज सुझाव नहीं बल्कि एक सख्त संदेश है कि अमेरिका रूस को उसकी सीमाएं याद दिला रहा है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि पुतिन नहीं चाहते कि ईरान परमाणु हथियार बनाए, लेकिन उनकी प्राथमिकता यूक्रेन है।हम आपको बता दें कि यूक्रेन को लेकर ट्रम्प का रुख बेहद आक्रामक रहा। ईरान के मुद्दे पर भी ट्रम्प ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने साफ कहा कि ईरान को झुकना ही होगा। उन्होंने कहा कि ईरान बस यह कह दे कि वह हार मानता है। हम आपको बता दें कि अमेरिका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी नाकेबंदी जारी रखी है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर जबरदस्त दबाव बना हुआ है। ट्रम्प ने इसे बमबारी से ज्यादा प्रभावी हथियार बताया और कहा कि ईरान की हालत बेहद खराब हो चुकी है।दूसरी ओर, ईरान ने भी अपनी रणनीति तेज कर दी है। उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का प्रस्ताव दिया, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि उसे अमेरिका और इजराइल से लिखित गारंटी चाहिए कि भविष्य में उस पर कोई हमला नहीं होगा। यह मांग ट्रम्प ने ठुकरा दी है, जिससे वार्ता की राह और कठिन हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की रणनीति दोहरी है। एक तरफ बातचीत का दिखावा, दूसरी तरफ लगातार दबाव और हमले। ईरान के जीवाश्म ईंधन निर्यात पर नाकेबंदी इसी रणनीति का हिस्सा है, जिससे तेहरान को आर्थिक रूप से कमजोर किया जा सके।इस पूरे घटनाक्रम में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी के साथ भी रूस की भूमिका पर चर्चा हुई है, खासकर ईरान से अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम हटाने को लेकर। यह दिखाता है कि पर्दे के पीछे बड़े स्तर पर सौदेबाजी चल रही है। रूस ने भी साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान की जमीन पर कोई सैन्य कार्रवाई हुई तो यह बेहद खतरनाक होगा। यह बयान अमेरिका को सीधे तौर पर रोकने की कोशिश है। इस पूरी तस्वीर में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुतिन सच में शांति के दूत बन सकते हैं, या यह भी शक्ति विस्तार की रणनीति है। और उससे भी बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रम्प की प्राथमिकताएं दुनिया को और बड़े टकराव की ओर धकेल रही हैं?बहरहाल, दुनिया इस समय दो रास्तों के बीच खड़ी है। एक रास्ता बातचीत और संतुलन का है, दूसरा टकराव और युद्ध का। पुतिन पहला रास्ता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ट्रम्प की सख्त प्राथमिकताएं उस रास्ते को और कठिन बना रही हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:24:49 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Donald, Trump, ने, Putin, को, फोन, पर, सुनाई, खरी, खरी, Iran, मामले, में, दखल, देने, की, बजाय, Ukraine, War, खत्म, करने, पर, ध्यान, देने, की, दी, सलाह</media:keywords>
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<title>Iran War से हर American परिवार पर पड़ेगा $5,000 का बोझ? भरी संसद में भारतवंशी ने ट्रंप के मंत्री की कर दी बोलती बंद</title>
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<description><![CDATA[ पीट हेगसेथ की कांग्रेस में गवाही के दौरान, बुधवार को डेमोक्रेट रो खन्ना ने रक्षा सचिव से ईरान के साथ युद्ध के लिए एक औसत अमेरिकी परिवार को चुकानी पड़ रही कीमत के बारे में सवाल किया। जब हेगसेथ ने जवाब देने से इनकार कर दिया और पलटकर पूछा कि &quot;एक ईरानी परमाणु बम की क्या कीमत है, तो खन्ना ने उनकी इस बात के लिए आलोचना की कि वे गवाही के दौरान सिर्फ़ सुर्खियाँ बटोरने वाले पल तलाश रहे थे, जबकि अपनी अक्षमता के कारण वे और उनका प्रशासन युद्ध की लागत का हिसाब लगाने में नाकाम रहे थे। खन्ना ने कहा कि उनके पास मौजूद एक अनुमान के मुताबिक, युद्ध के कारण पेट्रोल, भोजन और अन्य ज़रूरी चीज़ों की बढ़ती कीमतों की वजह से एक औसत परिवार को हर साल $5,000 ज़्यादा चुकाने पड़ेंगे। कुल मिलाकर, उन्होंने कहा कि इस युद्ध की वजह से संयुक्त राज्य अमेरिका को $631 अरब का नुकसान हुआ है।इसे भी पढ़ें: Donald Trump ने Putin को फोन पर सुनाई खरी खरी! Iran मामले में दखल देने की बजाय Ukraine War खत्म करने पर ध्यान देने की दी सलाहखन्ना ने आगे कहा क्या आप जानते हैं कि मुझे सबसे ज़्यादा परेशान करने वाली बात क्या है? यह बात अविश्वसनीय है कि आपने इस बात का विश्लेषण भी नहीं किया कि इसका अमेरिकी लोगों को कितना ख़र्च उठाना पड़ रहा है। एक बात तो यह होती कि आप कहते, ‘ठीक है, इसका अमेरिकी लोगों को $5,000 का ख़र्च आया, लेकिन हमें लगता है कि यह इसके लायक है। हमने दूसरे विश्व युद्ध और अन्य युद्धों में भी यही किया है। इसका ख़र्च यह है, और आपको ही इसका भुगतान करना होगा।’ लेकिन आपको तो यह भी नहीं पता कि एक आम अमेरिकी को इसके लिए कितना भुगतान करना पड़ रहा है! आपको यह भी नहीं पता कि ईरानी स्कूल पर गिरी मिसाइलों के लिए हमने कितना भुगतान किया है! आपको यह भी नहीं पता कि गैस के लिए हम कितना भुगतान कर रहे हैं! आपको यह भी नहीं पता कि खाने-पीने की चीज़ों के लिए हम कितना भुगतान कर रहे हैं! आपका $25 बिलियन का आँकड़ा तो पूरी तरह से ही ग़लत है!खन्ना ने आगे यह भी बताया कि हफ़्तों तक चले युद्ध के बावजूद, प्रशासन अपने घोषित लक्ष्यों यानी ईरान के लगभग हथियार-ग्रेड यूरेनियम को हासिल करने और वहाँ की सरकार के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने—के आस-पास भी नहीं पहुँच पाया है। खन्ना और हेगसेथ के बीच पहले भी कई बार तीखी बहस हो चुकी है। अपनी जानी-पहचानी आक्रामक शैली में, हेगसेथ ने अक्सर सुनवाई के दौरान नीति-संबंधी सवाल पूछे जाने पर सिर्फ़ बयानबाज़ी और निजी हमले करके जवाब दिया है। एक प्रगतिशील नेता के तौर पर खन्ना ने घोषणा की है कि वे 2028 के चुनावों में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं।इसे भी पढ़ें: America हमें पीड़ित से हमलावर बना रहा है, UN में फूटा Iran का गुस्सा, लगाए गंभीर आरोप28 फरवरी को शुरू हुए ईरान युद्ध के बाद पहली बार हेगसेथ कांग्रेस के सामने पेश हुए। अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने युद्ध की लागत 25 अरब डॉलर बताई, लेकिन कई डेमोक्रेट सांसदों ने इस पर संदेह जताया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मानसिक स्वास्थ्य तक पर सवाल उठाए। इस पर हेगसेथ ने पलटवार करते हुए कहा कि ट्रंप विभिन्न पीढ़ियों में सबसे तेज और सूझबूझ वाले कमांडर-इन-चीफ हैं। उन्होंने डेमोक्रेट सदस्यों से पूछा कि क्या उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की क्षमता पर कभी सवाल उठाया था। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन भी सुनवाई में मौजूद थे। हेगसेथ ने कहा कि इस समय सबसे बड़ा खतरा विपक्षी नेताओं के गैर-जिम्मेदार और निराशावादी बयान हैं, जो मिशन की सफलता को नजरअंदाज कर रहे हैं। युद्ध के बीच वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि नया नेतृत्व लाने के लिए यह जरूरी था। रिपब्लिकन सांसद नैन्सी मेस ने उनके फैसलों का समर्थन किया। वहीं, कैलिफोर्निया के डेमोक्रेट सांसद जॉन गरामेंडी ने ट्रंप प्रशासन की कड़ी आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक और आर्थिक आपदा बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका पश्चिम एशिया में एक और युद्ध में फंस गया है। हेगसेथ ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह दुश्मनों को बढ़ावा देने जैसा है। हेगसेथ बृहस्पतिवार को सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के सामने भी पेश होंगे। If you have 3 minutes to watch Pete Hegseth get schooled by @RoKhanna, you need to watch this! Listen through the end. It’s EPIC!Congressman Ro Khanna: “How much did it cost American taxpayers in terms of the strike on the school?”Pete Hegseth: “I wouldn’t tie a cost to it.”… pic.twitter.com/6VaMm1nt59— Ed Krassenstein (@EdKrassen) April 29, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:24:48 +0530</pubDate>
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<title>Nepal Airlines का India Map विवाद: भारी बवाल के बाद मांगी माफी, पोस्ट डिलीट की</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल एयरलाइंस ने गुरुवार को अपने नक्शे में भारतीय इलाकों को गलत तरीके से दिखाने के लिए माफ़ी मांगी। एयरलाइंस ने कहा कि यह नक्शा नेपाल या एयरलाइंस के आधिकारिक रुख को नहीं दिखाता है।एयरलाइंस ने कहा कि उन्होंने वह पोस्ट हटा दी है, क्योंकि उसमें &#039;नक्शे से जुड़ी गलतियां&#039; थीं, जो नेपाल या एयरलाइंस के आधिकारिक रुख को नहीं दिखाती थीं। एक्स पर एक पोस्ट में एयरलाइंस ने कहा, &quot;हाल ही में हमारे सोशल मीडिया चैनलों पर शेयर किए गए नेटवर्क मैप में हुई गलती के लिए हम तहे दिल से माफ़ी मांगते हैं। इस मैप में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लेकर नक्शे से जुड़ी कई बड़ी गलतियां थीं, जो नेपाल या नेपाल एयरलाइंस के आधिकारिक रुख को नहीं दिखाती हैं। हमने तुरंत वह पोस्ट हटा दी है और यह पक्का करने के लिए एक अंदरूनी जांच कर रहे हैं कि हमारी सामग्री सबसे ऊंचे स्तर की सटीकता वाली हो। हम इस इलाके में अपने पड़ोसियों और दोस्तों के साथ अपने मज़बूत रिश्तों को बहुत अहमियत देते हैं और इस पोस्ट से किसी को भी ठेस पहुंचने पर हमें गहरा अफसोस है।15 मई, 2020 को भी इसी तरह का एक विवाद खड़ा हुआ था, जब उस समय की देश की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने कहा था कि नेपाल एक नया नक्शा जारी करेगा, जिसमें लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख सहित &quot;उसके सभी क्षेत्र&quot; शामिल होंगे। ये क्षेत्र भारत और नेपाल के बीच विवादित हैं। पिछले साल, नई दिल्ली ने एक नया नक्शा प्रकाशित किया था, जिसमें कालापानी को अपनी सीमाओं के भीतर दिखाया गया था; काठमांडू ने इस कदम का विरोध किया था।इसे भी पढ़ें: Nepal Airlines Map Controversy | नेपाल एयरलाइंस ने मानचित्र में जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया, विरोध के बाद माफी मांगीभारत और नेपाल के बीच 1,800 किलोमीटर (1,118 मील) की खुली सीमा है। नेपाल ने कहा कि उसने &quot;लगातार यह रुख बनाए रखा है&quot; कि सुगौली संधि (1816) के अनुसार, &quot;काली (महाकाली) नदी के पूर्व के सभी क्षेत्र, जिनमें लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख शामिल हैं, नेपाल के हैं।नेपाल, 1816 की सुगौली संधि के आधार पर लिपुलेख दर्रे पर अपना दावा करता है। यह संधि ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों के साथ हुई थी और इसके तहत भारत के साथ नेपाल की पश्चिमी सीमा तय की गई थी।काठमांडू, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे बेहद रणनीतिक इलाकों पर भी अपना दावा करता है, हालाँकि 1962 में चीन के साथ युद्ध के बाद से ही इन इलाकों में भारतीय सेना तैनात है।इसे भी पढ़ें: भारत ने 48 घंटे में दी नेपाल को गद्दारी की सजा, गिर जाएगी सरकार?8 मई, 2020 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक नई सड़क का उद्घाटन किया। यह सड़क उत्तराखंड में स्थित लिपुलेख दर्रे को चीन में मौजूद कैलाश मानसरोवर मार्ग से जोड़ती है। इस सड़क के उद्घाटन के बाद नेपाल ने इसका विरोध किया है और अब वह इस इलाके में एक सुरक्षा चौकी स्थापित करने पर भी विचार कर रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:24:46 +0530</pubDate>
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<title>Trump&#45;Putin की Ceasefire डील पर Zelenskyy को शक, पूछा&#45; ये Moscow की कोई नई चाल तो नहीं?</title>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने गुरुवार को रूस के अल्पकालिक संघर्ष-विराम के प्रस्ताव का ब्योरा मांगा। ज़ेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई पिछली टेलीफ़ोन बातचीत का ज़िक्र करते हुए कहा कि यूक्रेन एक लंबे संघर्ष-विराम की इच्छा रखता है। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि मैंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि वे संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति की टीम से संपर्क करें और रूस के अल्पकालिक संघर्ष-विराम के प्रस्ताव का ब्योरा स्पष्ट करें। यूक्रेन शांति चाहता है और इस युद्ध को वास्तव में समाप्त करने के लिए ज़रूरी कूटनीतिक काम कर रहा है। हम यह स्पष्ट करेंगे कि यह असल में किस बारे में है - मॉस्को में परेड के लिए कुछ घंटों की सुरक्षा, या कुछ और। हमारा प्रस्ताव एक दीर्घकालिक संघर्ष-विराम, लोगों के लिए विश्वसनीय और गारंटीशुदा सुरक्षा, और एक स्थायी शांति है। यूक्रेन किसी भी गरिमापूर्ण और प्रभावी प्रारूप में इस दिशा में काम करने के लिए तैयार है।इसे भी पढ़ें: Donald Trump ने Putin को फोन पर सुनाई खरी खरी! Iran मामले में दखल देने की बजाय Ukraine War खत्म करने पर ध्यान देने की दी सलाहट्रंप ने अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के साथ टेलीफ़ोन पर बातचीत के बाद यूक्रेन संघर्ष में संभावित युद्धविराम का संकेत दिया, जबकि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अपना कड़ा रुख़ बनाए रखा। राष्ट्रपति की टिप्पणियाँ एक ऐसे रूस की तस्वीर पेश करती हैं जो किसी समझौते की ओर बढ़ने के लिए उत्सुक है—बशर्ते सही शर्तें पूरी हों—और एक ऐसे अमेरिकी प्रशासन की, जो वैश्विक सुरक्षा को नया आकार देने के लिए अपने सैन्य और कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर रहा है।राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि रूसी नेता शायद शत्रुता को रोकने की तैयारी कर रहे हैं। हालाँकि यूक्रेन में युद्ध अभी भी तनाव का मुख्य बिंदु बना हुआ है, ट्रंप ने क्रेमलिन के रुख़ में आए बदलाव का ज़िक्र किया।इसे भी पढ़ें: Putin का चौंकाने वाला फैसला, Red Square की Victory Day Parade में क्यों नहीं दिखेंगे रूसी टैंक?ट्रंप ने कहा कि पुतिन ने &quot;थोड़े समय के लिए युद्धविराम का सुझाव दिया&quot; और संकेत दिया कि मॉस्को की ओर से जल्द ही कोई आधिकारिक घोषणा हो सकती है। ट्रंप ने अपना यह विश्वास व्यक्त किया कि पुतिन &quot;कुछ समय पहले ही समझौता करने के लिए तैयार थे,&quot; लेकिन उन्होंने दावा किया कि बाहरी प्रभावों ने पहले रूसी राष्ट्रपति के लिए बातचीत की मेज़ पर आना &quot;मुश्किल बना दिया था। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:24:45 +0530</pubDate>
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<title>Persian Gulf विदेशी ताकतों का अखाड़ा नहीं, Iran के President की America को सीधी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने गुरुवार को इस बात पर ज़ोर दिया कि फ़ारसी खाड़ी विदेशी ताकतों की मर्ज़ी थोपने का अखाड़ा नहीं है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच उन्होंने अमेरिका पर तंज कसा। फ़ारसी खाड़ी राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर पेज़ेश्कियन ने कहा कि ईरान के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की नाकेबंदी या समुद्री पाबंदियाँ लगाने की कोई भी कोशिश नाकाम ही होगी।एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, फ़ारसी खाड़ी - विदेशी ताकतों की मर्ज़ी थोपने का अखाड़ा नहीं; होर्मुज़ जलडमरूमध्य - राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा में ईरान की भूमिका का प्रतीक; ईरान फ़ारसी खाड़ी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा का रक्षक है; ईरान पर समुद्री नाकेबंदी लगाने की कोई भी कोशिश नाकाम ही होगी।इसे भी पढ़ें: Donald Trump ने Putin को फोन पर सुनाई खरी खरी! Iran मामले में दखल देने की बजाय Ukraine War खत्म करने पर ध्यान देने की दी सलाहअपने बयान में पेज़ेश्कियन ने देश की नौसेना की बहादुरी को क्षेत्रीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों की रक्षा में ईरान की निर्णायक भूमिका का प्रतीक बताया। उन्होंने दुश्मनों द्वारा दबाव को आर्थिक और समुद्री क्षेत्रों की ओर मोड़ने का भी ज़िक्र किया, और ईरान के समुद्री व्यापार पर नौसैनिक नाकेबंदी और प्रतिबंधों की रणनीति को &quot;अंतर्राष्ट्रीय कानून के विपरीत&quot; बताया; साथ ही चेतावनी दी कि फ़ारसी खाड़ी में किसी भी तरह की अशांति की ज़िम्मेदारी संयुक्त राज्य अमेरिका और ज़ायोनी शासन पर होगी। इससे पहले 26 अप्रैल को, उन्होंने कहा था कि ईरान दबाव, धमकियों और घेराबंदी के तहत बातचीत में शामिल नहीं होगा, जैसा कि मेहर न्यूज़ एजेंसी ने रिपोर्ट किया। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:24:45 +0530</pubDate>
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<title>IRGC का बड़ा आरोप, दुनिया में अशांति फैला रहा America, फेल हुई Trump की रणनीति</title>
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<description><![CDATA[ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने दुनिया की ऊर्जा का प्रबंधन करने की रणनीति से हटकर अवरोध (disruption) पैदा करने की रणनीति अपना ली है, और अब ईरान &quot;अवरोध के खिलाफ गठबंधन&quot; का केंद्र बन गया है। IRGC ने कहा कि अवरोध पैदा करने की यह परियोजना अमेरिका ने चीन, रूस और यूरोप को नियंत्रित करने के उद्देश्य से शुरू की थी। एक्स पर एक पोस्ट में IRGC ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने &#039;दुनिया की ऊर्जा का प्रबंधन&#039; करने की रणनीति से हटकर &#039;अवरोध&#039; पैदा करने की रणनीति अपना ली; और चीन, रूस तथा यूरोप को नियंत्रित करने की इस बड़ी अवरोध परियोजना के हिस्से के तौर पर एक समुद्री नाकेबंदी शुरू की गई। लेकिन 20 दिनों के बाद, व्हाइट हाउस में यह धारणा और भी गहरी होती जा रही है कि यह परियोजना विफल हो चुकी है और तेहरान अब &#039;अवरोध के खिलाफ गठबंधन&#039; का केंद्र बन गया है। इसे भी पढ़ें: Iran War से हर American परिवार पर पड़ेगा $5,000 का बोझ? भरी संसद में भारतवंशी ने ट्रंप के मंत्री की कर दी बोलती बंदइससे पहले, न्यूज़ आउटलेट Axios ने बताया था कि CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ब्रीफ करने वाले हैं, क्योंकि सेना ईरान में ऑपरेशन्स की एक नई लहर पर विचार कर रही है। इस बीच, वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों को ईरान की लंबी नाकेबंदी की तैयारी करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह एक बहुत ज़्यादा जोखिम भरा कदम है, जिसका मकसद ईरान को परमाणु हथियार छोड़ने पर मजबूर करना है—एक ऐसी मांग जिसे ईरान लंबे समय से ठुकराता आ रहा है।इसे भी पढ़ें: Persian Gulf विदेशी ताकतों का अखाड़ा नहीं, Iran के President की America को सीधी चेतावनीईरान की अर्थव्यवस्था को तबाह करने के मकसद से, ट्रंप ने उसके बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही रोककर उसके तेल निर्यात को बाधित करना जारी रखने का फैसला किया। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का आकलन था कि उनके पास मौजूद अन्य विकल्प—जैसे कि फिर से बमबारी शुरू करना या इस संघर्ष से पूरी तरह पीछे हट जाना—नाकेबंदी जारी रखने के मुकाबले कहीं ज़्यादा जोखिम भरे थे।संभावना है कि ट्रंप को इस बात का डर सता रहा है कि जैसे-जैसे मध्यावधि चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, उनका जनसमर्थन कमज़ोर पड़ सकता है; क्योंकि इस नाकेबंदी के चलते हाल ही में गैस की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, जिससे ट्रंप की लोकप्रियता (अप्रूवल रेटिंग्स) को भी काफी नुकसान पहुंचा है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:24:44 +0530</pubDate>
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<title>Mojtaba Khamenei का जोश हाई, अमेरिकियों को धमकी सुनाई, Iran को आर्थिक रूप से बर्बाद करने पर तुला America</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने अब वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार को गहराई से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। हाल के घटनाक्रमों में ईरान और अमेरिका के बीच टकराव लगातार तेज होता दिख रहा है, जिसमें समुद्री मार्ग, सैन्य रणनीति, आर्थिक प्रतिबंध और कूटनीतिक गतिरोध सभी शामिल हैं। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि फारस की खाड़ी में अमेरिकियों के लिए कोई जगह नहीं है और उनका स्थान केवल पानी के नीचे है। यह बयान उस समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव चरम पर है। खामेनेई ने अपने संदेश में यह भी कहा कि इस क्षेत्र का भविष्य अमेरिका के बिना होगा और यह क्षेत्र के लोगों की समृद्धि के लिए कार्य करेगा।इस बीच, अमेरिका द्वारा लगाए गए नौसैनिक अवरोध का असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। ईरानी मुद्रा रियाल ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई है और एक डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत काफी कम हो गई है। यह गिरावट केवल एक सप्ताह में लगभग बारह प्रतिशत बताई जा रही है, जो इस बात का संकेत है कि तेल निर्यात पर लगी रोक ने अर्थव्यवस्था पर गहरा दबाव डाला है।इसे भी पढ़ें: IRGC का बड़ा आरोप, दुनिया में अशांति फैला रहा America, फेल हुई Trump की रणनीतिवहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिकी कदम को विफल बताते हुए कहा कि यह न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करेगा बल्कि तनाव को और बढ़ाएगा। उनका कहना है कि इस प्रकार की नीतियां शांति स्थापित करने की बजाय अव्यवस्था को बढ़ावा देती हैं।दूसरी ओर, अमेरिका की सैन्य गतिविधियों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार एक प्रमुख अमेरिकी विमानवाहक पोत जल्द ही पश्चिम एशिया क्षेत्र से वापस लौट सकता है। यह पोत पिछले दस महीनों से अधिक समय से तैनात था और इसके लौटने से अमेरिकी नौसैनिक शक्ति में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि अन्य दो पोत अभी भी अरब सागर में सक्रिय हैं और ईरानी जहाजों पर नजर बनाए हुए हैं।उधर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने वैश्विक ऊर्जा प्रबंधन की नीति से हटकर अब व्यवधान पैदा करने की रणनीति अपनाई है। उसका कहना है कि यह नीति चीन, रूस और यूरोप को नियंत्रित करने के लिए बनाई गई है, लेकिन अब यह प्रयास विफल होता नजर आ रहा है और ईरान इसके खिलाफ एक केंद्र के रूप में उभर रहा है।इस बीच, अमेरिका ने आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए ईरान की क्रिप्टो संपत्तियों पर भी कार्रवाई की है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार लगभग पांच सौ मिलियन डॉलर के बराबर डिजिटल संपत्ति जब्त की गई है। इसके साथ ही विभिन्न देशों और कंपनियों पर दबाव डाला जा रहा है कि वह ईरान के साथ व्यापारिक संबंध समाप्त करें, विशेषकर तेल खरीद के मामले में। हालांकि ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि इस तरह के कदम वैश्विक तेल कीमतों को और बढ़ा सकते हैं। ईरानी संसद के अध्यक्ष ने अमेरिकी सलाह को बेकार बताते हुए इसकी आलोचना की है।उधर, विश्लेषणों के अनुसार ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। वहां की नेतृत्व व्यवस्था इस मुद्दे पर सख्त रुख अपना रही है और अमेरिका द्वारा लगाए गए अवरोध को हटाए बिना किसी प्रकार की वार्ता के लिए तैयार नहीं है। कुछ रिपोर्टों में यह भी संकेत मिला है कि ईरान ओमान के साथ मिलकर जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है।इसके साथ ही क्षेत्र में अन्य रणनीतिक गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। यमन में हूती समूहों के जरिए दबाव बनाने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है, जिससे बाब अल मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित हो सकते हैं।दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर इस संघर्ष का असर साफ दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर एक सौ बीस डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे यूरोप में मुद्रास्फीति तीन प्रतिशत तक बढ़ गई है। ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल ने वहां की अर्थव्यवस्था को धीमा कर दिया है और विकास दर लगभग शून्य के करीब पहुंच गई है। अमेरिका ने इस बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से अपील की है कि वह एक गठबंधन बनाकर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करें। अमेरिका का मानना है कि सामूहिक प्रयास से ईरान पर दबाव बढ़ाया जा सकता है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे अभियान का बचाव करते हुए कहा है कि नौसैनिक अवरोध पूरी तरह प्रभावी है और जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को समाप्त नहीं करता, तब तक कोई समझौता संभव नहीं है। साथ ही उन्होंने जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने की संभावना भी जताई है, जिससे नाटो सहयोगियों के साथ तनाव बढ़ सकता है।समग्र रूप से देखा जाए तो इस संघर्ष का प्रभाव वैश्विक राजनीति, ऊर्जा आपूर्ति, आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर व्यापक रूप से पड़ रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाते हैं या स्थिति और अधिक जटिल होती जाती है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:24:42 +0530</pubDate>
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<title>पिता की मौत के बाद एक्शन में Mojtaba, बोले&#45; Hormuz का नया प्रबंधन दुश्मन की मनमानी खत्म करेगा</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का नया प्रबंधन शांति लाएगा और दुश्मन की मनमानियों को खत्म करेगा। एक बयान में उन्होंने कहा कि इस्लामिक गणराज्य अपनी &quot;परमाणु और मिसाइल क्षमताओं&quot; को एक राष्ट्रीय संपत्ति के तौर पर सुरक्षित रखेगा, भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन मुद्दों पर कोई समझौता करने की कोशिश कर रहे हों। मोजतबा खामेनेई ने ईरानी सरकारी टेलीविज़न पर पढ़े गए एक लिखित बयान में यह बात कही; वह 28 फरवरी के हवाई हमले के बाद से ऐसा ही करते आ रहे हैं, जिस हमले में उनके 86 वर्षीय पिता, अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी।इसे भी पढ़ें: Mojtaba Khamenei का जोश हाई, अमेरिकियों को धमकी सुनाई, Iran को आर्थिक रूप से बर्बाद करने पर तुला Americaखामेनेई ने कहा कि देश के अंदर और बाहर रहने वाले नौ करोड़ गर्वित और सम्मानित ईरानी, ​​ईरान की पहचान से जुड़ी सभी आध्यात्मिक, मानवीय, वैज्ञानिक, औद्योगिक और तकनीकी क्षमताओं को - नैनोटेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी से लेकर परमाणु और मिसाइल क्षमताओं तक - राष्ट्रीय संपत्ति मानते हैं, और वे इनकी रक्षा ठीक वैसे ही करेंगे जैसे वे देश के जल, थल और वायुक्षेत्र की रक्षा करते हैं। सर्वोच्च नेता ने कहा कि फ़ारसी खाड़ी में अमेरिकियों की एकमात्र जगह &quot;इसके पानी की गहराइयों में&quot; है, क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर तेहरान की पूरी पकड़ बनी हुई है।इसे भी पढ़ें: Iran-US Talks: ईरानी विदेश मंत्री ने Asim Munir से की मुलाकात, America के आगे झुकने से और सीधी बातचीत से तेहरान का साफ इंकारखामनेई ने अपने बयान में कहा कि मदद और शक्ति से, फ़ारसी खाड़ी क्षेत्र का उज्ज्वल भविष्य एक ऐसा भविष्य होगा जिसमें अमेरिका नहीं होगा; एक ऐसा भविष्य जो यहाँ के लोगों की प्रगति, सुख-सुविधा और समृद्धि को समर्पित होगा। फ़ारसी खाड़ी और ओमान की खाड़ी के जल-क्षेत्र के उस पार रहने वाले हमारे पड़ोसी और हम, एक साझा नियति से जुड़े हैं। हज़ारों किलोमीटर दूर से यहाँ आकर लालच और द्वेष के साथ काम करने वाले विदेशियों के लिए इस भविष्य में कोई जगह नहीं है—सिवाय इस खाड़ी के गहरे पानी की तलहटी के। इससे पहले, मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने &quot;अभी-अभी&quot; अमेरिका को बताया है कि वह &quot;पतन की स्थिति&quot; में है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, &quot;वे चाहते हैं कि हम &#039;होरमुज़ जलडमरूमध्य खोल दें&#039;, जितनी जल्दी हो सके, क्योंकि वे अपनी नेतृत्व की स्थिति को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:24:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Israel ने भारत को दिया बहुत बड़ा सीक्रेट, बदल जाएगा कश्मीर!</title>
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<description><![CDATA[ इजराइल ने जाने अनजाने में भारत को एक ऐसा सीक्रेट बता दिया है जिसे अगर भारत भी शुरू कर दे तो देश की तस्वीर बदल सकती है। खासतौर पर कश्मीर की। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा करने पर कश्मीर की सुरक्षा भी बढ़ जाएगी और आकार भी। इजराइल के बॉर्डर पर भी दुश्मन बैठा है और भारत के बॉर्डर पर भी। इजरायल के बॉर्डर पर अचानक यहूदियों की संख्या कम होने लगी है। जैसे एक समय पर कश्मीर से कश्मीरी पंडितों की हुई थी। लेकिन इजराइल ने अपने बॉर्डर के पास एक इलाके में ऐसा जबरदस्त ऑपरेशन शुरू किया है जिसे अगर भारत भी करने की सोच ले तो चौंकाने वाले नतीजे आ सकते हैं। इजराइल का एक इलाका है अपर गिलीली जो लेबनान से बॉर्डर शेयर करता है। लेबनान की तरफ से इजराइल को हमेशा हिजबुल्ला का खतरा रहता है। लेकिन यह खतरा हाल फिलहाल में इतना बढ़ गया कि हिजबुल्ला के हमलों की वजह से इजराइल के इस सीमावर्ती अपर गिली इलाके से यहूदी पलायन कर गए और धीरे-धीरे यहां पर फिलिस्तीनियों की संख्या बढ़ गई। इसका असर यह हुआ कि अपर गिली में रहने वाले फिलिस्तीनी बॉर्डर पार हिजबुल्ला की मदद करने लगे। ऐसा ही कुछ कश्मीर के बारे में भी आपको देखने को मिलता होगा। कश्मीर के कई लोग पाकिस्तानी आतंकियों की मदद करते हैं। उन्हें छुपने की जगह देते हैं। बहरहाल इजराइल ने इस समस्या से निपटने का एक नायाब तरीका निकाला।इसे भी पढ़ें: Pakistan को मिला Qatar का खुला Support, बोला- &#039;संघर्ष खत्म करने को हम साथ हैं&#039; इजराइल ने विदेशों में बसे यहूदियों की घर वापसी शुरू करवा दी और इसकी शुरुआत भारत से ही कर दी। इजराइल अगले 5 सालों में भारत के नॉर्थ ईस्ट में रहने वाले बनेई मनाशे समुदाय के करीब 6000 यहूदियों को अपर गिलीली इलाके में बसाने का प्लान बना रहा है। इसका फायदा यह होगा कि इजराइल के बॉर्डर के पास जनसंख्या एक तरफ़ा होने से बच जाएगी। अब सोचिए कि अगर भारत भी कुछ ऐसा करे तो क्या होगा? यह कैसे होगा और कितना मुश्किल होगा यह अलग विषय है लेकिन ऐसा करना असंभव तो नहीं है। अगर भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले हिंदुओं को भारत लाकर सीमा के पास बसाना शुरू कर दे तो इसका फायदा मिल सकता है।इसे भी पढ़ें: अमेरिकी सेना में हड़कंप! ईरानी साइबर ग्रुप &#039;Handala&#039; ने लीक किए 2,000 से अधिक सैनिकों के नाम और पतेइजराइल में एक कानून है लॉ ऑफ रिटर्न जिसके तहत दुनिया में कहीं भी रहने वाला यहूदी कभी भी इजराइल की नागरिकता हासिल कर सकता है। भारत सीएए कानून के जरिए इस दिशा में कदम बढ़ा चुका है। अगर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले हिंदू लोग भारत में आकर बॉर्डर के इलाकों में बस जाए, तो इसके तीन फायदे मिल सकते हैं। पहला तो यह कि अगर पाकिस्तानी हिंदू कश्मीर के बॉर्डर पर आकर बस जाएं, तो उन्हें पाकिस्तान की एक-एक चीज का पता होगा। यह हिंदू पाकिस्तान की फितरत जानते होंगे। इन हिंदुओं को बॉर्डर पर बसने में डर नहीं लगेगा क्योंकि यह लोग तो पाकिस्तानी जिहादियों के साथ रहते आए हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:24:41 +0530</pubDate>
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<title>अरागची के मॉस्को से लौटते ही आधी रात ट्रंप को आया पुतिन का फोन, जानें क्या कहा</title>
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<description><![CDATA[ 28 फरवरी 2026 को अमेरिका इजराइल ईरान वॉर की शुरुआत हुई थी और ठीक 2 महीने बाद यानी कि 29 अप्रैल को इसमें रशिया के जो प्रेसिडेंट है वलादमीर पुतिन और अमेरिकन प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप के बीच बातचीत हुई है। डेढ़ घंटे तक के बातचीत चली है और चकि आपने जिक्र किया ईरान, यूएस और इजराइल वाली वॉर का तो बेशक उसके बारे में भी चर्चा हुई। लेकिन ज्यादातर चर्चा जो थी वो कीव के साथ यानी रूस ने यूक्रेन के साथ उसकी जो जंग चल रही है उसको टेंपरेरी रूप से रोकने के लिए बात की है और डॉनल्ड ट्रंप और पुतिन की जो बातचीत हुई वो उनके एक एड हैं यानी उनके करीबी हैं सलाहकार हैं। उनके हवाले से  पता चली है और पुतिन के सलाहकार यूरी ने बताया है कि क्या बातचीत हुई डॉनल्ड ट्रंप और प्रेसिडेंट पुतिन के बीच में। तो उससे जो जानकारी आई है यूरी युषाकू नाम है उनका। तो यूरी यशाकू जो बताते हैं उनके पुतिन के एड वो मैं आपको बता रहा हूं। सबसे पहली चीज कि एक तरह से टेंपरेरी सीज फायर के लिए यहां पे पुतिन ने बात की डोन्ड ट्रंप से जो यूक्रेन और रशिया के बीच होना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Hormuz में अब यूं दिखी ईरान-रूस की दोस्ती, बस देखता ही रह गया US!9 मई को सीजफायर होने वाला है। और ये उस वजह से होने वाला है क्योंकि उस दिन 9 मई को एक विक्ट्री डे सेलिब्रेशन होता है रशिया में। विक्ट्री डे किस लिए? क्योंकि वर्ल्ड वॉर सेकंड में जब सोवियत यूनियन जीता था तब रशिया तो नहीं बना था। सोवियत यूनियन था। तो जब सोवियत यूनियन जीता था उसको तो कोमेबोरेट करने के लिए उसको याद में विक्ट्री डे सेलिब्रेशन होता है 9 मई को। और इसमें बड़ी दिलचस्प बात ये है ऋतू कि उसमें यूएस भी उनके साथ ही था। मतलब यूएस की भी विक्ट्री उसमें साथ-साथ हुई थी। तो इसलिए यहां पर सो रशिया के साथ ट्रंप ने भी उसमें हामी भरी कि बिल्कुल उन्होंने एग्री किया कि उस दिन शांत रह सकते हैं जैसा कि हमें क्रमन से पता चल रहा है। रूस से पता चल रहा है।इसे भी पढ़ें: Iran को अमेरिका की अब तक की सबसे हिला देने वाली धमकी, चौंक गई दुनिया!मेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को फोन पर हुई बातचीत के दौरान रूस की उस पेशकश को दोहराया, जिसमें वह तीसरे देश के रूप में ईरान के 970 पाउंड समृद्ध यूरेनियम के भंडार को संभालने के लिए तैयार है। अमेरिकी नेता ईरान से यूरेनियम के इस भंडार को अमेरिका को सौंपने की मांग कर रहे हैं। ट्रंप ने बताया कि पुतिन ने उनसे कहा, ‘‘वह इसमें हमारी मदद करना चाहते हैं और वह संवर्धन में शामिल होने के इच्छुक हैं।’’ इस पर मैंने कहा मैं चाहूंगा कि आप यूक्रेन के साथ युद्ध समाप्त करने में शामिल हों। मेरे लिए, यह अधिक महत्वपूर्ण होगा।’’ इस बीच, रूस के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘क्रेमलिन’ ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान के खिलाफ शत्रुता फिर से शुरू होती है तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत में ईरान युद्ध पर चर्चा की और ‘क्रेमलिन’ ने चेतावनी दी कि अगर लड़ाई फिर से शुरू होती है तो इसके ‘‘गंभीर परिणाम’’ हो सकते हैं। राष्ट्रपति पुतिन के सलाहकार यूरी उशाकोव ने पत्रकारों से कहा कि पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति से कहा था कि ईरान की धरती पर जमीनी अभियान पूरी तरह से ‘‘अस्वीकार्य और खतरनाक’’ होगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:22:06 +0530</pubDate>
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<title>अंधेरी कोठरी, बीमारी और 16 महीने का इंतजार... Pakistani जेल में इमरान खान की दयनीय हालत, मांग रहे रिहाई की भीख</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान ने एक बार फिर न्यायपालिका से राहत की गुहार लगाई है। गुरुवार को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (IHC) में सुनवाई के दौरान, खान के वकील ने उनकी गिरती सेहत और लंबे समय से जारी &#039;एकांत कैद&#039; का हवाला देते हुए मानवीय आधार पर रिहाई की अपील की।
 यह अपील उनके वकील सलमान सफदर ने की, जब अदालत खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की 19 करोड़ पाउंड के भ्रष्टाचार मामले में उनकी सज़ा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी।स्वास्थ्य और सुरक्षा का हवाला इमरान खान के वकील सलमान सफदर ने अदालत को बताया कि 73 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री वर्तमान में आंख के संक्रमण से जूझ रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि खान लंबे समय से एकांत कारावास में हैं, जिसका उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सफदर ने मुख्य न्यायाधीश सरफराज डोगर और न्यायमूर्ति मुहम्मद आसिफ की खंडपीठ से आग्रह किया कि 19 करोड़ पाउंड के भ्रष्टाचार मामले (अल-कादिर ट्रस्ट केस) में उनकी सजा को निलंबित किया जाए।सलमान सफदर, इमरान खान के वकील  ने कहा &quot;यह मामला पिछले 16 महीनों से लंबित है और अब तक 17 सुनवाइयां हो चुकी हैं। अब समय आ गया है कि अदालत मानवीयता और अनुकंपा के आधार पर निर्णय ले।&quot; 
 पिछले साल जनवरी में इस्लामाबाद की एक जवाबदेही अदालत ने 73 साल के खान को नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) की जांच वाले भ्रष्टाचार के मामले में 14 साल और बुशरा बीबी को सात साल जेल की सज़ा सुनाई थी।
सुनवाई के दौरान, सफदर ने अदालत से सज़ा निलंबित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि मामला 16 महीने से ज़्यादा समय से लंबित है और अपील में पहले ही 17 सुनवाई हो चुकी हैं। द डॉन अखबार ने यह खबर प्रकाशित की।क्या है 190 मिलियन पाउंड (अल-कादिर ट्रस्ट) मामला?यह मामला पाकिस्तान की राजनीति के सबसे हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार मामलों में से एक है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:ब्रिटेन से आई राशि: 2019 में ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) ने पाकिस्तान सरकार को लगभग 190 मिलियन पाउंड (करीब 50 अरब रुपये) लौटाए थे।आरोप: आरोप है कि इमरान खान सरकार ने इस पैसे को राष्ट्रीय खजाने में जमा करने के बजाय, एक प्रमुख रियल एस्टेट टाइकून की कानूनी देनदारियों को निपटाने के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी।क्विड प्रो क्वो (बदले में लाभ): जांचकर्ताओं का दावा है कि इसके बदले में इमरान खान और बुशरा बीबी के &#039;अल-कादिर ट्रस्ट&#039; को विश्वविद्यालय बनाने के नाम पर सैकड़ों कनाल की कीमती जमीन दान में दी गई।सजा: जनवरी 2025 में जवाबदेही अदालत ने इस मामले में इमरान खान को 14 साल और बुशरा बीबी को 7 साल की जेल की सजा सुनाई थी।अदालती कार्यवाही और देरीगुरुवार को हुई सुनवाई में खान और बुशरा बीबी की सजा के खिलाफ अपील पर बहस शुरू हुई, लेकिन फिलहाल उन्हें कोई तत्काल राहत नहीं मिली है।सुरक्षा कारणों से देरी: यह सुनवाई पहले 22 अप्रैल को होनी थी, लेकिन इस्लामाबाद के &#039;रेड जोन&#039; में सख्त सुरक्षा पाबंदियों के कारण इसे टालना पड़ा था।अदालत की सख्ती: इस्लामाबाद हाई कोर्ट पहले ही इस मामले में हो रही देरी पर नाराजगी जता चुका है। अदालत ने मामले को लटकाने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी (NAB) के अभियोजकों पर जुर्माना भी लगाया था।बचाव पक्ष का तर्क: इमरान खान लगातार इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं। उनका कहना है कि ट्रस्ट एक जनहितकारी संस्था है और इससे उन्हें कोई व्यक्तिगत वित्तीय लाभ नहीं हुआ है।आगे क्या?फिलहाल यह जोड़ा रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद है। हालांकि इमरान खान की टीम सजा के निलंबन के लिए जोर दे रही है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि खंडपीठ दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलों की जांच करने के बाद ही कोई फैसला सुनाएगी। आने वाले दिनों में यह मामला पाकिस्तान की राजनीति और न्यायपालिका के बीच चल रहे तनाव का केंद्र बना रहेगा।      इसके अलावा  गुरुवार को एक पाकिस्तानी हाई कोर्ट ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी द्वारा हाई-प्रोफाइल अल-कादिर ट्रस्ट मामले में अपनी सज़ा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई शुरू की। सुनवाई अभी भी जारी है और उन्हें तत्काल कोई राहत नहीं मिली है।जनवरी 2025 में एक जवाबदेही अदालत द्वारा भ्रष्टाचार के एक मामले में क्रमशः 14 साल और 7 साल की जेल की सज़ा सुनाए जाने के बाद इस जोड़े ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट का रुख किया था। इस मामले की जांच नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो ने की थी। वे फिलहाल अदियाला जेल में बंद हैं, जहां खान 2023 से ही कई मामलों में कैद हैं।यह सुनवाई पहले 22 अप्रैल के लिए तय की गई थी, लेकिन इस्लामाबाद के &#039;रेड ज़ोन&#039; में सुरक्षा पाबंदियों के चलते इसे टाल दिया गया था। अब मुख्य न्यायाधीश सरफराज डोगर और न्यायमूर्ति मुहम्मद आसिफ की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।इस मामले को &#039;190 मिलियन पाउंड&#039; वाले मामले के नाम से भी जाना जाता है। यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है कि 2019 में ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी द्वारा पाकिस्तान को लौटाए गए लगभग 50 अरब रुपये (जो 190 मिलियन पाउंड के बराबर थे) का गलत तरीके से निपटारा किया गया। राष्ट्रीय खजाने में जमा करने के बजाय, कथित तौर पर इन पैसों का इस्तेमाल एक रियल एस्टेट कारोबारी की देनदारियों को चुकाने के लिए किया गया।जांचकर्ताओं का आरोप है कि इसके बदले में, अल-कादिर ट्रस्ट के फायदे के लिए ज़मीन के बड़े-बड़े टुकड़े (जिनमें सैकड़ों कनाल ज़मीन शामिल है) हस्तांतरित किए गए। अल-कादिर ट्रस्ट एक कल्याणकारी संस्था है, जिसे खान और उनके सहयोगियों ने इस्लामाबाद के पास एक विश्वविद्यालय चलाने के उद्देश्य से स्थापित किया था। 2019 में स्थापित अल-कादिर ट्रस्ट को शिक्षा और सामाजिक कल्याण पर केंद्रित एक परोपकारी पहल के रूप में पेश किया गया था।अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह पूरी व्यवस्था सत्ता के द ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:21:57 +0530</pubDate>
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<title>&amp;apos;टैरिफ की धमकी दी और युद्ध रुक गया&amp;apos;, Donald Trump ने फिर दोहराया भारत&#45;पाकिस्तान संघर्ष सुलझाने का दावा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने चिर-परिचित अंदाज में एक बार फिर चर्चा में हैं। गुरुवार को व्हाइट हाउस में एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर करने के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध को सिर्फ &#039;टैरिफ&#039; (आयात शुल्क) की धमकी देकर रोक दिया था। अपने ऑफ़िस में एक एग्ज़ीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तख़त करने के कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए, ट्रंप ने एक बार फिर आठ युद्ध सुलझाने का दावा किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, &quot;लगभग हर मामले में, उन्होंने मुझे धन्यवाद देते हुए और नोबेल समिति को चिट्ठियाँ भेजीं। इसे भी पढ़ें: महंगाई का बड़ा झटका! कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹993 महंगा, दिल्ली में कीमत ₹3000 के पार | Commercial LPG Price Hike  भारत के मामले में, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि मैंने 3 से 5 करोड़ लोगों की जान बचाई। लेकिन यह संख्या इससे भी ज़्यादा हो सकती थी। दो परमाणु ताक़तें आपस में भिड़ने वाली थीं। 11 विमान मार गिराए गए थे। मैंने टैरिफ़ का इस्तेमाल करके इसे सुलझाया। मैंने कहा कि अगर तुम लड़ते रहोगे तो मैं तुम पर टैरिफ़ लगा दूँगा।&quot; उन्होंने आगे कहा, &quot;उन्होंने कहा, &#039;ओह प्लीज़, ऐसा मत करो।&#039;&quot;ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम करवाया। पिछले साल 10 मई से, जिस दिन उन्होंने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि भारत और पाकिस्तान &quot;पूरी तरह और तुरंत&quot; युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं, ट्रंप ने दुश्मनी ख़त्म करने का श्रेय 80 से ज़्यादा बार लिया है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया है कि व्हाइट हाउस में अपने पहले साल के दौरान उन्होंने &quot;आठ युद्ध रोके&quot; हैं। इसे भी पढ़ें: Jabalpur Cruise Accident | मध्य प्रदेश के जबलपुर में क्रूज़ बोट पलटने से छह की मौत, 15 को बचाया गया, बचाव अभियान जारी   एरिज़ोना के फ़ीनिक्स में &#039;टर्निंग पॉइंट USA&#039; कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर बोलते हुए, ट्रंप ने कहा था, &quot;मैं शांतिदूत हूँ। मैं ही वह व्यक्ति हूँ जिसने आठ युद्ध सुलझाए। मैंने एक ऐसा युद्ध सुलझाया जिसमें 3 से 5 करोड़ लोग मारे जा सकते थे - भारत-पाकिस्तान युद्ध।&quot; 20 फ़रवरी को &quot;बोर्ड ऑफ़ पीस&quot; कार्यक्रम के दौरान, ट्रंप ने &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; के दौरान इन दोनों दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच मध्यस्थता करने के अपने दावे को फिर दोहराया।  ट्रंप ने कहा कि उन्होंने लड़ाई को रोकने के लिए एक आर्थिक उपाय के तौर पर &quot;दो परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों&quot; पर &quot;200 प्रतिशत टैरिफ़&quot; लगाने की धमकी दी थी। घटनाओं के इस ब्योरे के विपरीत, भारत ने कहा है कि &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; के दौरान युद्धविराम तब हुआ जब पाकिस्तान के DGMO ने अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क किया।भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और PoJK में मौजूद आतंकी ढाँचे पर &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; को अंजाम दिया था। (ANI) ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:21:56 +0530</pubDate>
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<title>डीपीआर कोरिया: परमाणु हथियार, बैलेस्टिक मिसाइल विकसित करने की कोशिशों पर गहरी चिन्ता</title>
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<description><![CDATA[ राजनैतिक एवं शान्तिनिर्माण मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अधिकारी ने आगाह किया है कि कोरिया लोकतांत्रिक जन गणराज्य (उत्तर कोरिया) द्वारा परमाणु हथियारों और बैलेस्टिक मिसाइल को विकसित किए जाने की निरन्तर कोशिशें, गम्भीर चिन्ता का विषय हैं. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:21:05 +0530</pubDate>
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<title>मध्य एशिया में “परमाणु &#45; शस्त्र &#45; मुक्त क्षेत्र&amp;quot; के 20 साल का जश्न</title>
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<description><![CDATA[ कज़ाख़स्तान का सेमिपालातिंस्क (Semipalatinsk) इलाक़ा कभी सोवियत संघ का प्रमुख परमाणु परीक्षण स्थल हुआ करता था. आज, जब दुनिया में परमाणु ख़तरों में फिर से बढ़ोत्तरी देखी जा रही है, ऐसे समय में वर्ष 2006 में मध्य एशियाई देशों द्वारा परमाणु हथियारों का परित्याग करते हुए किए गए सेमिपालातिंस्क समझौते की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ गई है. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:21:04 +0530</pubDate>
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<media:keywords>मध्य, एशिया, में, “परमाणु, शस्त्र, मुक्त, क्षेत्र, के, साल, का, जश्न</media:keywords>
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<title>सऊदी अरब में &amp;apos;शोषणकारी कफ़ाला&amp;apos; व्यवस्था को समाप्त करने की अपील,</title>
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<description><![CDATA[ सऊदी अरब में, अन्य देशों से कामकाज व रोज़गार पाने के लिए आने वाले लोगों को प्रायोजित करने (Sponsorship) की प्रक्रिया को समाप्त करने की अपील की गई है जिसे &#039;कफ़ाला&#039; व्यवस्था कहा जाता है. संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने सऊदी अरब से यह अपील, वर्ष 2034 में देश में आयोजित होने वाले फ़ीफ़ा फ़ुटबॉल विश्व कप की तैयारियों के सम्बन्ध में की है. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:21:02 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान: 12 लाख से अधिक लोगों पर भूख संकट की चपेट में आने का जोखिम</title>
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<description><![CDATA[ लेबनान में हाल के दिनों में हिंसक टकराव में आई तेज़ी ने खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर हुई प्रगति को गहरी ठेस पहुँचाई है और देश की लगभग 25 प्रतिशत आबादी को आगामी महीनों में एक गहरे भूख संकट का सामना करना पड़ सकता है. यूएन एजेंसियों ने अपने एक नए विश्लेषण में कृषि के लिए आपात समर्थन देने, निर्बल आबादी को समय पर मानवीय राहत मुहैया कराने, और आजीविका सम्बन्धी सहायता प्रदान करने पर बल दिया है, ताकि इस विशाल चुनौती से बचा जा सके. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:21:02 +0530</pubDate>
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<title>NASA का Artemis II &amp;apos;मूनशिप&amp;apos; चांद की परिक्रमा कर सुरक्षित घर लौटा, अंतरिक्ष की गहराइयों का बना गवाह</title>
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<description><![CDATA[ मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए, नासा का Artemis II अंतरिक्ष यान अपनी ऐतिहासिक चांद यात्रा पूरी कर फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर वापस आ गया है। लगभग एक महीने पहले जिस स्थान से इस मिशन ने उड़ान भरी थी, वहीं इस &#039;मूनशिप&#039; की सुरक्षित वापसी अंतरिक्ष विज्ञान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह कैप्सूल, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री चांद के चारों ओर घूमे थे, अब Kennedy Space Center पर वापस आ गया है - ठीक उसी जगह जहाँ से इसकी ऐतिहासिक यात्रा लगभग एक महीने पहले शुरू हुई थी। यह मिशन इंसानी अंतरिक्ष खोज के लिए एक बड़ा कदम है, क्योंकि 50 से ज़्यादा सालों में यह पहली बार था जब अंतरिक्ष यात्री चांद पर गए और वापस आए।पानी में उतरने से लेकर होम बेस तकOrion कैप्सूल 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में उतरा, जिससे अंतरिक्ष में उसका लगभग 10 दिन का मिशन खत्म हो गया। उसके बाद, इसे San Diego से Cape Canaveral तक ट्रक से बहुत सावधानी से पहुँचाया गया।अब जब यह वापस आ गया है, तो इंजीनियर इसकी बारीकी से जाँच करेंगे। खास तौर पर हीट शील्ड पर ध्यान दिया जाएगा, जिसने पृथ्वी के वायुमंडल से गुज़रते समय कैप्सूल को जलने से बचाया था। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और रिसर्च के सामान समेत दूसरे हिस्सों की भी जाँच की जाएगी, उनकी मरम्मत की जाएगी, या उन्हें भविष्य के मिशनों के लिए दोबारा इस्तेमाल किया जाएगा।इस कैप्सूल को इसके क्रू ने &#039;Integrity&#039; नाम दिया था। यह अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में इतनी दूर तक ले गया, जहाँ तक कोई भी इंसान पहले कभी नहीं गया था। NASA के अधिकारियों के मुताबिक, ऑनबोर्ड टॉयलेट में एक छोटी सी दिक्कत के बावजूद, अंतरिक्ष यान ने पूरे मिशन के दौरान बहुत अच्छा काम किया।इस यात्रा की सफलता से पता चलता है कि गहरे अंतरिक्ष की यात्रा के लिए बनाए गए सिस्टम ठीक वैसे ही काम कर रहे हैं, जैसा सोचा गया था।क्रू से मिलिएArtemis II मिशन की कमान कमांडर Reid Wiseman ने संभाली थी। उनके साथ पायलट Victor Glover, मिशन स्पेशलिस्ट Christina Koch और कनाडाई अंतरिक्ष यात्री Jeremy Hansen भी थे।पृथ्वी पर लौटने के बाद, क्रू का मेडिकल चेकअप और टेस्ट हुए। अब, वे आखिरकार थोड़ा आराम कर रहे हैं, जिसके वे हकदार हैं। Wiseman ने तो ऑनलाइन एक निजी पल भी शेयर किया। उन्होंने बताया कि मिशन के बाद आराम करते हुए उन्हें मन में बहुत शांति महसूस हुई।Artemis III की ओर देखते हुएभले ही Artemis II खत्म हो गया है, लेकिन अगले मिशन की तैयारी पहले से ही चल रही है। Artemis III में एक नया कैप्सूल और एक अलग क्रू होगा। सीधे चांद पर जाने के बजाय, इस मिशन का मकसद पृथ्वी की कक्षा में डॉकिंग के तरीकों का अभ्यास करना होगा। इन टेस्ट में वे लूनर लैंडर शामिल होंगे, जिन्हें अभी निजी कंपनियाँ बना रही हैं। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो यह NASA को भविष्य में चांद पर उतरने वाले मिशन के लिए तैयार करेगा - शायद 2028 तक। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:54:06 +0530</pubDate>
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<title>मंगल ग्रह पर जो दिखा, चौंक गए वैज्ञानिक, आंखों पर नहीं हो रहा था भरोसा!</title>
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<description><![CDATA[ नासा के सबसे भरोसेमंद मिशन में से एक क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल ग्रह पर कुछ ऐसा खोज दिया है जो सीधे-सीधे जिंदगी की कहानी से जुड़ा है। मंगल ग्रह जिसे हम एक सूखा, ठंडा और बंजर ग्रह मानते हैं। वहीं से अब मिले हैं ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स। अब ये ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स क्या होते हैं वोबता देते हैं। दरअसल सीधी भाषा में ये वही केमिकल कंपाउंड्स हैं जिनसे धरती पर जीवन की शुरुआत हुई थी। यानी यह लाइफ के बिल्डिंग ब्लॉक्स माने जाते हैं। क्यूरियोसिटी रोअ ने मंगल के इक्वेटर के पास मौजूद एक सूखी झील यानी कि गेल क्रेटर में सात अलग-अलग ऑर्गेनिक कंपाउंड्स डिटेक्ट किए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यहां यह है कि इनमें से पांच कंपाउंड्स पहले भी कभी मंगल पर देखे ही नहीं गए। इसे भी पढ़ें: PM Modi in Varanasi Live: Varanasi में Mega Roadshow, फूलों की बारिश और &#039;हर हर महादेव&#039; के नारों से गूंजी काशीअब यहीं से शुरू होता है असली सस्पेंस। बता दें कि क्या यह मॉलिक्यूल्स इस बात का सबूत है कि मंगल पर कभी जिंदगी थी? साइंटिस्ट का जवाब है शायद। लेकिन अभी पक्का नहीं है क्योंकि यह मॉलिक्यूल्स तीन तरीके से आते हैं। प्राचीन माइक्रोस्कोपिक लाइफ से, मेट्रॉइड से या फिर जियोलॉजिकल प्रोसेससेस से। लेकिन एक बात साफ है कि अगर मंगल पर कभी जिंदगी थी तो उसके केमिकल निशान आज भी मौजूद है। आज मंगल का टेंपरेचर 100° सेल्सियस तक पहुंच चुका है और बहुत ही पतला एटमॉस्फियर है। खतरनाक सोलर रेडिएशंस हैं। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था। बिलियंस पहले वहां पानी बहता था। झीलें थी और एटमॉस्फयर भी थिक था। यानी बिल्कुल वैसा जैसा अर्थ पे होता है। इसलिए साइंटिस्ट मानते हैं कि मंगल पर जीवन की शुरुआत होना पूरी तरह से पॉसिबल हो सकता है। इसे भी पढ़ें: RCB की तूफानी जीत ने Delhi Capitals को रौंदा, IPL इतिहास में दर्ज हुआ दूसरा सबसे बड़ा Recordअब सबसे बड़ा सवाल यहां ये उठता है क्या इतने पुराने केमिकल ट्रेसेस आज तक सर्वाइव कर सकते हैं? और यहीं पर यह डिस्कवरी बनती है गेम चेंजर। बता दें कि क्यूरियोसिटी रोवर ने ऐसे मॉलिक्यूल्स डिटेक्ट किए हैं जैसे कि बेंजोथियोफीन यानी कि सल्फर कंटेनिंग कंपाउंड और इसके साथ ही नाइट्रोजन बेस्ड कंपाउंड्स और इनका स्ट्रक्चर बिल्कुल डीएनए से जुड़ा हुआ है। यानी डीएनए से जुड़े मॉलिक्यूल्स जैसा मिलताजुलता है। ध्यान रखें कि ये डीएनए नहीं है लेकिन डीएनए बनाने वाली बिल्डिंग ब्लॉक जरूर हो सकते हैं। क्यूरियोसिटी मिशन से जुड़ी जेनफर जैसी वैज्ञानिक यानी कि साइंटिस्ट का मानना है कि हम शायद 3 बिलियन साल पुराने ऑर्गेनिक मैटर को देख रहे हैं। अब जरा सोचिए 3.5 अरब साल पुराना केमिकल एविडेंस आज भी मौजूद है। यूरोपियन स्पेस एजेंसी का रोजलैंड फ्रैंकलिन रोअ 2028 में लॉन्च होगा और यह रोअ मंगल की सरफेस के 2 मीटर नीचे तक ड्रिल करेगा क्योंकि सरफेस के नीचे रेडिएशन कम होता है और ऑर्गेनिक मटेरियल ज्यादा सुरक्षित रहते हैं। तो अब सवाल यह है कि क्या मंगल पर कभी भी जिंदगी थी या यह सब सिर्फ केमिकल कोइंसिडेंस है और अगर मंगल पर जिंदगी थी तो क्या वो कहीं और भी हो सकती है। बता दें कि मंगल अब सिर्फ एक रेड प्लनेट नहीं रहा है यह हमारी सबसे बड़ी डिस्कवरी का दरवाजा बन चुका है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:54:05 +0530</pubDate>
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<title>&amp;apos;हमारे बिना आप फ्रेंच बोल रहे होते&amp;apos;, King Charles III ने इतिहास के बहाने Donald Trump को मजेदार अंदाज में घेरा</title>
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<description><![CDATA[ व्हाइट हाउस में आयोजित एक राजकीय भोज (State Dinner) के दौरान मंगलवार को एक ऐसा पल आया जब सदियों पुराने इतिहास और आधुनिक कूटनीति का अनोखा संगम देखने को मिला। ब्रिटेन के सम्राट किंग चार्ल्स III ने अपने चिरपरिचित ब्रिटिश हास्य (British Wit) का इस्तेमाल करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर एक तीखा लेकिन मजेदार तंज कसा। उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को छेड़ा और कहा कि अगर उत्तरी अमेरिका में ब्रिटेन का दखल न होता, तो शायद अमेरिकी लोग फ्रेंच बोल रहे होते। यह बातचीत तब हुई जब दोनों नेताओं ने ब्रिटेन और अमेरिका के बीच &quot;विशेष संबंधों&quot; को लेकर गर्मजोशी भरा रवैया अपनाया, भले ही ईरान युद्ध को लेकर दोनों के बीच कुछ अंदरूनी तनाव मौजूद था। ब्रिटिश सम्राट ने इस मौके का इस्तेमाल ट्रंप की उन पुरानी टिप्पणियों का ज़िक्र करने के लिए किया, जो उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों और रक्षा खर्च को लेकर की थीं। किंग चार्ल्स ने कहा, &quot;मिस्टर प्रेसिडेंट, आपने हाल ही में टिप्पणी की थी कि अगर अमेरिका न होता, तो यूरोपीय देश जर्मन बोल रहे होते। क्या मैं यह कहने की हिम्मत कर सकता हूँ कि अगर हम न होते, तो आप फ्रेंच बोल रहे होते?&quot; उनकी इस बात पर दर्शकों में ज़ोरदार ठहाके गूंज उठे।वह उत्तरी अमेरिका में ब्रिटेन और फ्रांस के बीच औपनिवेशिक काल की उस पुरानी प्रतिद्वंद्विता का ज़िक्र कर रहे थे, जो अमेरिका की आज़ादी से बहुत पहले की बात है। उस समय ये दोनों ताकतें पूरे महाद्वीप में अपने इलाके पर कब्ज़ा जमाने के लिए आपस में लड़ती रहती थीं। इसे भी पढ़ें: Explained UAE Exits OPEC | ग्लोबल ऑयल मार्केट में बड़ा धमाका: UAE का OPEC से बाहर निकलना- क्या तेल की कीमतों में आएगी सुनामी?यह मज़ाकिया टिप्पणी ट्रंप की उन बातों की ओर भी इशारा करती थी, जो उन्होंने जनवरी में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सालाना बैठक में कही थीं। उस बैठक में उन्होंने कहा था कि अगर दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका दखल न देता, तो यूरोपीय लोग &quot;जर्मन और थोड़ी-बहुत जापानी भाषा बोल रहे होते।&quot;चार्ल्स ने खुद पर ही मज़ाक करते हुए कई और चुटकुले सुनाए। इनमें 1814 में &#039;बर्निंग ऑफ़ वॉशिंगटन&#039; (वॉशिंगटन को जलाए जाने की घटना) के दौरान ब्रिटिश सैनिकों द्वारा व्हाइट हाउस के कुछ हिस्सों को जलाए जाने का ज़िक्र भी शामिल था। उन्होंने कहा, &quot;हम ब्रिटिश लोगों ने, ज़ाहिर है, व्हाइट हाउस के &#039;रियल एस्टेट रीडेवलपमेंट&#039; (पुनर्विकास) की अपनी तरफ से एक कोशिश की थी,&quot; उनकी इस बात पर मेहमानों के बीच हंसी की लहर दौड़ गई। इसे भी पढ़ें: भवानीपुर महासंग्राम: ममता बनर्जी ने BJP पर बंगाल चुनावों में धांधली का आरोप लगाया, शुभेंदु अधिकारी ने पलटवार कियाउन्होंने यह भी मज़ाक में कहा कि आज की शाम &quot;बोस्टन टी पार्टी&quot; से कहीं ज़्यादा बेहतर है। इसके ज़रिए वह ब्रिटिश टैक्स के खिलाफ हुए उस ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन की ओर इशारा कर रहे थे।ट्रंप, जो ब्रिटिश शाही परिवार के प्रति अपने सम्मान के लिए जाने जाते हैं, ने भी अपने ही अंदाज़ में मज़ाकिया जवाब दिया। उनका मज़ाक ज़्यादातर घरेलू राजनीति पर केंद्रित था। उन्होंने कांग्रेस में दिए गए किंग के भाषण के लिए उन्हें बधाई दी और मज़ाक में कहा, &quot;उन्होंने डेमोक्रेट्स को भी खड़े होने पर मजबूर कर दिया — ऐसा तो मैं कभी नहीं कर पाया।&quot;ब्रिटिश सम्राट ने ब्रिटेन से अमेरिका की आज़ादी की 250वीं वर्षगांठ के मौके पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश एकजुट होकर &quot;मानव इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण गठबंधनों में से एक&quot; बनाने में सफल रहे हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी आग्रह किया कि &quot;हमें उन ज़ोरदार आवाज़ों को नज़रअंदाज़ करना चाहिए, जो हमें और भी ज़्यादा अपने में सिमटकर रहने (inward-looking) के लिए उकसाती हैं।&quot; अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए, चार्ल्स ने बार-बार उन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर ज़ोर दिया, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम के बीच एक स्थायी बंधन को मज़बूत किया है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:54:04 +0530</pubDate>
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<title>Explained UAE Exits OPEC | ग्लोबल ऑयल मार्केट में बड़ा धमाका: UAE का OPEC से बाहर निकलना&#45; क्या तेल की कीमतों में आएगी सुनामी?</title>
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<description><![CDATA[ वैश्विक ऊर्जा राजनीति (Energy Politics) में 1 मई, 2026 की तारीख एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होने जा रही है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने तेल निर्यातक देशों के शक्तिशाली संगठन OPEC (ओपेक) और OPEC+ गठबंधन से बाहर निकलने का आधिकारिक फैसला किया है। यह कदम न केवल आधी सदी से चले आ रहे तेल गठबंधनों को चुनौती दे रहा है, बल्कि ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व (West Asia) में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड पहले ही $110.74 प्रति बैरल के स्तर को छू रहा है।यह फैसला ऐसे समय आया है जब तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड $110.74 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जबकि WTI क्रूड सुबह 8 बजे तक $99.13 पर था। यह सप्लाई में रुकावटों को लेकर लगातार बनी चिंताओं को दिखाता है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास के तनाव से जुड़ी चिंताओं को। पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) प्रमुख तेल उत्पादक देशों का एक समूह है, जिसकी स्थापना 1960 में ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला ने मिलकर की थी।इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच तेल उत्पादन नीतियों में तालमेल बिठाना है, ताकि ग्लोबल तेल की कीमतों को स्थिर रखा जा सके और सप्लाई की निरंतरता सुनिश्चित की जा सके।इन वर्षों में, इस समूह का विस्तार हुआ है और इसमें अब सऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत, UAE, नाइजीरिया, अंगोला, अल्जीरिया और अन्य जैसे देश शामिल हैं। OPEC+, जो एक व्यापक गठबंधन है, में रूस जैसे गैर-सदस्य देश भी शामिल हैं, ताकि मिलकर उत्पादन का प्रबंधन किया जा सके और ग्लोबल तेल बाजारों को प्रभावित किया जा सके।UAE का बाहर निकलना क्यों महत्वपूर्ण है?UAE इस समूह को छोड़ने वाला कोई आम सदस्य नहीं है। यह OPEC के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है और इस गुट के कुल उत्पादन में इसका हिस्सा लगभग 12% है, जो इसे इस गठबंधन का एक प्रमुख स्तंभ बनाता है।इसका बाहर निकलना OPEC और उसके वास्तविक नेता सऊदी अरब के लिए एक झटका है, खासकर ऐसे समय में जब ग्लोबल तेल बाजार अस्थिर हैं और उत्पादकों के बीच तालमेल बिठाना बेहद ज़रूरी है।सालों से, OPEC सप्लाई का प्रबंधन करने और कीमतों को सहारा देने के लिए उत्पादन कोटा पर निर्भर रहा है। सदस्य देश तेल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए उत्पादन को सीमित करने पर सहमत होते हैं। UAE के बाहर निकलने से यह ढांचा कमजोर होता है, क्योंकि सबसे महत्वपूर्ण उत्पादकों में से एक अब इन नियमों से बंधा नहीं रहेगा।इस कदम की वजह क्या है?UAE ने कहा है कि यह फैसला उसकी दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति और बाजार के बुनियादी सिद्धांतों पर आधारित है। ऊर्जा मंत्री सुहैल अल मजरूई ने कहा कि इस कदम से देश को उत्पादन संबंधी फैसलों में अधिक लचीलापन मिलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला स्वतंत्र रूप से लिया गया था और इस पर सऊदी अरब सहित अन्य सदस्यों के साथ कोई चर्चा नहीं की गई थी। उन्होंने कहा, “यह उत्पादन के स्तर से जुड़ी मौजूदा और भविष्य की नीतियों पर ध्यान से विचार करने के बाद लिया गया एक नीतिगत फ़ैसला है।”यह कदम OPEC के भीतर लंबे समय से चले आ रहे तनाव को दिखाता है। UAE अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार कर रहा है और अपने तेल क्षेत्र में भारी निवेश कर रहा है, लेकिन OPEC की उत्पादन कटौती ने इस बात को सीमित कर दिया है कि वह वास्तव में कितना उत्पादन और निर्यात कर सकता है।लगभग 4.85 मिलियन बैरल प्रति दिन की क्षमता और 2027 तक इसे बढ़ाकर 5 मिलियन बैरल प्रति दिन करने की योजनाओं के साथ, UAE को ये प्रतिबंध सही ठहराना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।पृष्ठभूमि: वैश्विक आपूर्ति पर दबावइस फ़ैसले का समय बहुत महत्वपूर्ण है। वैश्विक तेल बाज़ार पहले से ही ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष के कारण रुकावटों का सामना कर रहे हैं। सबसे बड़ी चिंताओं में से एक होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) रहा है, जो एक प्रमुख शिपिंग मार्ग है जिससे दुनिया की लगभग पाँचवाँ हिस्सा तेल और LNG की आपूर्ति गुज़रती है।फ़रवरी के अंत से, इस क्षेत्र में रुकावटों ने आपूर्ति के प्रवाह को सीमित कर दिया है और कीमतों को बढ़ा दिया है। इससे बाज़ार में एक तंग माहौल बन गया है, जहाँ प्रमुख उत्पादकों द्वारा उत्पादन या नीति में कोई भी बदलाव और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।अब तेल की आपूर्ति का क्या होगा?निकट भविष्य में, UAE के बाहर निकलने का असर सीमित रहने की उम्मीद है। ऐसा इसलिए है क्योंकि शिपिंग मार्गों में चल रही रुकावटों के कारण आपूर्ति संबंधी बाधाएँ अभी भी बनी हुई हैं। भले ही UAE उत्पादन बढ़ाना चाहे, लेकिन हो सकता है कि वह तुरंत काफी ज़्यादा मात्रा में निर्यात न कर पाए। हालाँकि, एक बार जब आपूर्ति मार्ग स्थिर हो जाएँगे, तो स्थिति बदल सकती है।OPEC के कोटे के बिना, UAE अपनी क्षमता और बाज़ार की माँग के अनुसार उत्पादन बढ़ाने के लिए स्वतंत्र होगा। इससे धीरे-धीरे वैश्विक आपूर्ति में और अधिक तेल जुड़ सकता है।अनुमानों के अनुसार, अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी उत्पादन को बढ़ाकर 4.5 मिलियन बैरल प्रति दिन से ज़्यादा कर सकती है, जबकि मई 2026 की अवधि के लिए OPEC+ का कोटा लगभग 3.4 मिलियन बैरल प्रति दिन है।हालाँकि, कोई भी बढ़ोतरी धीरे-धीरे होने की संभावना है, जो 12 से 18 महीनों में फैली होगी, और यह माँग की स्थितियों और बाज़ार की स्थिरता के अनुरूप होगी।बड़ी चिंता तत्काल आपूर्ति की नहीं है, बल्कि यह है कि इसका OPEC के भविष्य के लिए क्या मतलब है।UAE के बाहर निकलने से, बाकी बचे सदस्यों के बीच उत्पादन अनुशासन लागू करने की समूह की क्षमता कमज़ोर हो सकती है। अगर दूसरे देश तय सीमाओं के बजाय अपने खुद के उत्पादन को ज़्यादा अहमियत देने लगें, तो कीमतों को नियंत्रित करने वाली संस्था के तौर पर OPEC की असरदारता कम हो सकती है।इससे तेल बाज़ारों में तालमेल कमज़ोर होने और ज़्यादा उतार-चढ़ाव का खतरा बढ़ जाता है।इस बात की भी संभावना है कि अगर दूसरे सदस्यों को उत्पादन सीमाओं से बंध ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:54:04 +0530</pubDate>
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<title>Tukey के पड़ोस में घुसा भारत, ग्रीस पोर्ट पर कब्जा</title>
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<description><![CDATA[ ग्रीस से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ग्रीस का वो बंदरगाह जो पूरे यूरोप की धड़कन माना जाता है। अब भारत की मुट्ठी में आने वाला है। खबर है कि ग्रीस का एलेक्जेंड्रो पोलीपोट अब एक भारतीय कंपनी के नाम पर होने जा रहा है। भारत की एक दिग्गज कंपनी इसे खरीदने या इसमें बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए ग्रीस सरकार के साथ बातचीत के आखिरी दौर में है। यह डील सिर्फ बिजनेस के लिहाज से नहीं बल्कि भारत की रणनीतिक ताकत को सात समंदर पार स्थापित करने के लिहाज से सबसे बड़ी खबर मानी जा रही है। एलेक्जेंड्रो पोली पोर्ट की अहमियत को समझने के लिए इसकी लोकेशन को देखना जरूरी। यह बंदरगाह बुल्गारिया, रोमानिया और यूक्रेन जैसे देशों के बिल्कुल करीब है। जब से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ है। तब से यह पोर्ट पूरे यूरोप के लिए एक लाइफ लाइन बन गया है। इसे भी पढ़ें: PM Modi का Varanasi में 14 KM का Mega Roadshow, सड़कों पर उमड़ा आस्था का महासैलाबनाटो देशों के टैंक हो, हथियार हो या फिर अनाज और गैस की सप्लाई हो सब कुछ इसी रास्ते से यूरोप के अंदर जा रहा है। और यही वजह है कि कल तक जिस बंदरगाह को ग्रीस सरकार ने देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताकर बेचने से रोक दिया था। आज वही चाबी भारत को सौंपने की तैयारी की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सबसे बड़ा एंगल चीन और तुर्की का भी। ग्रीस का सबसे प्रमुख बंदरगाह पीरियस इस समय पूरी तरह चीन की कंपनी कॉस्को के नियंत्रण में है। ग्रीस और बाकी यूरोपीय देश इस बात को लेकर परेशान है कि अगर उनके सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर चीन का कब्जा रहा तो भविष्य में उनकी स्वायता खतरे में पड़ सकती है। भारत की एंट्री ने ग्रीस को एक भरोसेमंद विकल्प दे दिया है। भारत की छवि एक ऐसे देश की है जो बिजनेस तो करता है लेकिन दूसरे देशों की जमीन या संप्रभुता पर कब्जा नहीं करता। और रही बात तुर्की की तो ग्रीस और तुर्की की दुश्मनी किसी से नहीं छुपी और ऐसे वक्त में जब तुर्की पाकिस्तान का समर्थन कर रहा है। भारत के खिलाफ आए दिन बयानबाजी कर रहा है। भारत का ग्रीस में होना उसको बहुत खटकने वाला। भारत के लिए यह बंदरगाह एक गोल्डन गेट की तरह है क्योंकि भारत काफी समय से इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर आईएमसी पर काम कर रहा है। इस प्रोजेक्ट का मकसद भारत के सामान को अरब देशों के रास्ते सीधे यूरोप पहुंचाना है। इसे भी पढ़ें: Rajnath Singh के बयान पर बवाल, Congress बोली- America को खुश करने की Modi Policyएलेक्जेंड्रो पोलीपोट इस कॉरिडोर का वो आखिरी पड़ाव हो सकता है जहां से भारतीय माल पूरे यूरोप के बाजारों में फैल जाएगा। इससे ना सिर्फ भारत का निर्यात बढ़ेगा बल्कि स्वेज नहर जैसे रास्तों पर भारत की निर्भरता भी कम हो जाएगी। वहीं इस पोर्ट पर भारत का होना मतलब यूरोप की सप्लाई चेन और सुरक्षा के समीकरणों में भारत की परमानेंट सीट पक्की हो जाएगी। ग्रीस कैन रिपोर्ट्स पर जहां रूस और अमेरिका जैसे देशों की नजरें टिकी हैं। वहीं एलेक्जेंड्रो पोली में भारत की दावेदारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। यह डील भारत की उस विदेश नीति का हिस्सा है जिसमें हम सिर्फ अपने पड़ोस तक सीमित नहीं है बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। अगर यह बातचीत फाइनल होती है तो यह भारत के लिए एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत होगी। यह भारत को ना सिर्फ एक आर्थिक शक्ति के रूप में उभारेगा बल्कि चीन के बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट को भी तगड़ी चुनौती देगा। साथ ही साथ टर्की को भी तगड़ा झटका देगा। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:54:03 +0530</pubDate>
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<title>क्या है America का 50 साल पुराना &amp;apos;War Powers Resolution&amp;apos; कानून, जिसने Iran से जंग पर बढ़ाईं Trump की मुश्किलें?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने ईरान के खिलाफ जारी युद्ध को समाप्त करने की समयसीमा तेजी से नजदीक आ रही है। इस समयसीमा के उल्लंघन का मतलब अमेरिकी कानून का उल्लंघन होगा।
1973 के ‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन’ के तहत, अमेरिकी राष्ट्रपति कांग्रेस की अनुमति के बिना केवल 60 दिनों तक ही युद्ध छेड़ सकते हैं। इसके बाद या तो कांग्रेस को युद्ध की घोषणा या उसे मंजूरी देनी होती है, या राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई समाप्त करनी पड़ती है।
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम लागू है, लेकिन ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी बनाए रखने के लिए तैनात अमेरिकी नौसैनिक बलों और जहाजों पर यह कानून लागू होगा। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि 60 दिनों की समयसीमा समाप्त हो जाती है और ट्रंप पीछे हटने से इनकार करते हैं, तो क्या होगा?

‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन‘ क्या है?
‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन’ नवंबर 1973 में तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के वीटो के बावजूद कांग्रेस द्वारा पारित किया गया था। इसका उद्देश्य युद्ध घोषित करने के कांग्रेस के अधिकार में राष्ट्रपति के अतिक्रमण को सीमित करना था।इसे भी पढ़ें: &#039;हमारे बिना आप फ्रेंच बोल रहे होते&#039;, King Charles III ने इतिहास के बहाने Donald Trump को मजेदार अंदाज में घेरा यह कानून वियतनाम युद्ध से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के तुरंत बाद लाया गया था, जिसे कांग्रेस की मंजूरी नहीं मिली थी।
यह कानून, इसके प्रावधानों में अस्पष्टता, कई अपवादों और खामियों के कारण प्रभावी साबित नहीं हुआ है। निक्सन के बाद किसी भी राष्ट्रपति पर इसका खास असर नहीं पड़ा और कई बार बिना कांग्रेस की अनुमति के युद्ध शुरू करने वाले राष्ट्रपतियों ने इसके प्रावधानों का औपचारिक पालन भर किया।
कांग्रेस ने भी युद्ध घोषित करने के अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा में अनिच्छा दिखाकर इस कानून की प्रभावशीलता को कमजोर किया है।
इसके बावजूद मौजूदा ईरान संघर्ष में इसे पूरी तरह अप्रासंगिक मानना जल्दबाजी हो सकती है, क्योंकि यह सतर्क रिपब्लिकन सांसदों को अलोकप्रिय युद्ध समाप्त करने का एक माध्यम प्रदान करता है।

कानून क्या कहता है?
इस कानून की दो धाराओं के तहत युद्ध समाप्त करने की समयसीमा लागू होती है। धारा चार के अनुसार, राष्ट्रपति को अमेरिकी सैनिकों को “युद्ध” में शामिल करने के 48 घंटे के भीतर कांग्रेस को रिपोर्ट देना अनिवार्य है, जिसमें कार्रवाई का संवैधानिक और कानूनी आधार, उसका औचित्य तथा अमेरिकी भागीदारी की अवधि और दायरा बताया जाता है।
 इसके बाद धारा पांच के तहत 60 दिनों की समयसीमा शुरू होती है। यदि इस अवधि तक कांग्रेस युद्ध को मंजूरी नहीं देती या समयसीमा नहीं बढ़ाती, तो राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई समाप्त करनी होती है।
 इस प्रावधान की खासियत यह है कि यह स्वतः लागू होता है और सांसदों को इसे लागू करने के लिए अलग से कोई कदम नहीं उठाना पड़ता। उन्हें राष्ट्रपति की सैन्य नीति के खिलाफ मतदान का रिकॉर्ड भी दर्ज नहीं करना पड़ता।इसे भी पढ़ें: Trump का बड़ा दावा: &#039;तबाही की कगार पर Iran, Hormuz खोलने के लिए गिड़गिड़ाया&#039;ट्रंप ने दो मार्च को ईरान युद्ध पर अपनी रिपोर्ट कांग्रेस को सौंपी थी, जिसके अनुसार 60 दिनों की समयसीमा एक मई को समाप्त हो रही है। अब तक कांग्रेस ने युद्ध को मंजूरी नहीं दी है, हालांकि रिपब्लिकन सदस्यों ने डेमोक्रेट्स के कई प्रस्तावों को रोक दिया है, जिनका उद्देश्य युद्ध समाप्त करना या ट्रंप की शक्तियों को सीमित करना था।
कांग्रेस के पास 60 दिन की अवधि को अधिकतम 30 दिन तक बढ़ाने का विकल्प भी है, जिसके लिए प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में मतदान आवश्यक होगा।

रिपब्लिकन सांसदों में बढ़ती असहजता
ईरान के खिलाफ यह युद्ध हाल के अन्य अमेरिकी युद्धों से अलग है, क्योंकि यह ट्रंप के लिए बेहद प्रतिकूल साबित हो रहा है। रॉयटर्स-इप्सोस के एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, केवल 34 प्रतिशत अमेरिकी इस युद्ध का समर्थन करते हैं।
 इस बार राष्ट्रपति के सैन्य अभियान के समर्थन में आमतौर पर दिखने वाला “रैली-अराउंड-द-फ्लैग” प्रभाव भी नहीं दिख रहा है।कई सांसद अपने मतदाताओं की राय को लेकर संवेदनशील हैं और इस मुद्दे पर ट्रंप का विरोध करने से हिचक नहीं रहे हैं।
 यूटा से रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कर्टिस ने एक लेख में कहा है कि यदि 60 दिनों के भीतर कांग्रेस की मंजूरी नहीं मिलती, तो वे इस युद्ध का समर्थन नहीं करेंगे। अन्य रिपब्लिकन नेताओं ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त किए हैं।
संभावना है कि ट्रंप अमेरिकी सैनिकों की वापसी के कानूनी निर्देश को नजरअंदाज कर सकते हैं। वे यह भी दावा कर सकते हैं कि ‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन’ असंवैधानिक है, जैसा कि निक्सन ने 1973 में कहा था और इस मामले को अदालत में चुनौती दे सकते हैं।
 यदि ट्रंप समयसीमा की अनदेखी करते हैं, तो आगे की स्थिति काफी हद तक कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।इसे भी पढ़ें: Iran US War Updates | Donald Trump की नई चाल: होर्मुज़ जलडमरूमध्य की लंबी घेराबंदी कर ईरान को आर्थिक रूप से तोड़ने की रणनीति डेमोक्रेट्स प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर करने पर विचार कर रहे हैं। वैसे अतीत में ऐसा करना कठिन साबित हुआ है।
 ट्रंप यह तर्क भी दे सकते हैं कि यह कानून लागू नहीं होता, क्योंकि अमेरिकी बल फिलहाल ईरान में प्रत्यक्ष लड़ाई में शामिल नहीं हैं, जैसा कि 2011 में लीबिया में सैन्य कार्रवाई के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने किया था।
 ट्रंप ने मार्च में कांग्रेस को भेजी गई सूचना में कहा था कि वे ‘‘कमांडर-इन-चीफ और मुख्य कार्यकारी’’ के रूप में अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत कार्रवाई कर रहे हैं, हालांकि इनमें से कोई भी अधिकार उन्हें कांग्रेस की अनुमति के बिना युद्ध छेड़ने की शक्ति नहीं देता।
 उन्होंने ‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन’ का सीधे उल्लेख नहीं किया, बल्कि केवल इतना कहा कि उनकी रिपोर्ट इसके अनुरूप है—यह एक सामान्य है जिसका उपयोग ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:54:02 +0530</pubDate>
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<title>Russia&#45;China से इतना डरा अमेरिका? पेंटागन का कैसा बड़ा कबूलनामा</title>
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<description><![CDATA[ ईरान और अमेरिका के बीच भीषण टकराव का खतरा बढ़ता जा रहा है। मिडिल ईस्ट में जंग जैसे हालात बन रहे हैं और स्टेट ऑफ होर्मुज में तनाव एकदम चरम पर है। ऐसे हालात में दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश जिसे अपनी ताकत पर बड़ा गुमान है। जिसकी मिसाइलें दुनिया के किसी भी कोने में सटीक वार कर मिनटों में तबाही मचा सकती हैं। वह अमेरिका आज खुद को बचाने में असमर्थ है। अपनी खुद की रक्षा करने में असमर्थ है। यह किसी का विश्लेषण नहीं बल्कि यह खुद अमेरिकी सेना के हेड क्वार्टर पेंटागन का कबूलनामा है जिसमें उसने खुद मान लिया कि अगर दुश्मन ने एडवांस्ड मिसाइलें दाग दी तो अमेरिका के पास उसे रोकने का कोई ठोस तरीका नहीं है। सवाल यह है कि क्या सुपर पावर की चमक अब फीकी पड़ रही है? या फिर दुनिया हथियारों की दौड़ के सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। जहां सबसे पावरफुल देश भी खुद को असुरक्षित महसूस करने लगा है। इसे भी पढ़ें: UAE OPEC Exit Impact India: यूएई क्यों हो रहा OPEC से बाहर, क्‍या हमें खुश होना चाह‍िए?पेंटागन ने यह बात वाशिंगटन में हुई कांग्रेसल हियरिंग के दौरान कबूल की है। अमेरिका की घटती सैन्य क्षमता को स्वीकार करने वाले अधिकारी का नाम है मार्क बेकोविड्स जो स्पेस पॉलिसी के लिए असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ वॉर है। उन्होंने यूएस सीनेट को यह भी बताया कि दुश्मन अब नॉन बैलेस्टिक खतरे को विकसित कर रहे हैं। जिनसे निपटना मुश्किल है। उन्होंने साफ-साफ कहा कि अमेरिका के पास हाइपरसोनिक हथियारों, एडवांस्ड क्रूज मिसाइलों और स्टीलथ ड्रोन जैसे खतरों से बचने का कोई पुख्ता डिफेंस सिस्टम नहीं है। यानी अगर यह हथियार इस्तेमाल होते हैं तो अमेरिका खुद को पूरी तरह सुरक्षित नहीं मान सकता।  दूसरी तरफ स्टील ड्रोन और लो फ्लाइंग क्रूज मिसाइलें रडार से बचकर सीधे टारगेट पर हमला कर सकती हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिका का मौजूदा डिफेंस सिस्टम अभी भी पुराने खतरों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यानी यह सिस्टम मुख्य रूप से बैलेस्टिक मिसाइलों के खिलाफ डिजाइन किया गया था और वह भी छोटे पैमाने के हमलों के लिए लेकिन आज का युद्ध बदल चुका है और अमेरिका का डिफेंस सिस्टम उस बदलाव के साथ कदम नहीं मिला पा रहा। इसे भी पढ़ें: Iran-America टेंशन के बीच तेज हुई कूटनीति, Putin से मिलकर Pakistan पहुंचे ईरानी विदेश मंत्रीअब यहीं से शुरू होता है अमेरिका का नया मास्टर प्लान गोल्डन डोम। एक ऐसा मेगा प्रोजेक्ट जिसे भविष्य का सबसे बड़ा मिसाइल डिफेंस सिस्टम माना जा रहा है। इसका मकसद है जमीन, समुद्र, हवा और अंतरिक्ष। चारों लेयर में एक ऐसा नेटवर्क बनाना जो हर तरह के खतरे को पहचान सके और उसे खत्म कर सके। इस सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल होगा। स्पेस बेस्ड सेंसर होंगे और ऐसे इंटरसेप्टर होंगे जो दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही खत्म कर दें। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सब इतना आसान है? इस प्रोजेक्ट की लागत सुनकर आप चौंक जाएंगे। करीब 175 से 185 बिलियन डॉलर यानी लाखों करोड़ रुपए और यह सिर्फ शुरुआत है। इसे पूरी तरह तैयार होने में 2030 तक का समय लग सकता है। तब तक क्या होगा? क्या अमेरिका इस डिफेंस गैप के साथ ही रहेगा? ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:54:00 +0530</pubDate>
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<title>King Charles की मौजूदगी में ट्रंप का &amp;apos;पासपोर्ट&amp;apos; दांव, Limited Edition पर अपनी तस्वीर लगवाई</title>
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<description><![CDATA[ व्हाइट हाउस ने मंगलवार (स्थानीय समय) को सीमित संस्करण का &#039;पैट्रियट पासपोर्ट&#039; जारी किया, जिसके भीतरी कवर पर संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का चित्र छपा है। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा ट्रंप प्रशासन के तहत जारी किया गया नया पासपोर्ट डिज़ाइन देश की 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ के उपलक्ष्य में पेश किया गया है। व्हाइट हाउस ने पासपोर्ट की पहली झलक साझा करते हुए लिखा, “देशभक्त पासपोर्ट अनलॉक। सीमित संस्करण। अमेरिका 250 की मुहर के साथ। व्हाइट हाउस ने पासपोर्ट के संभावित स्वरूप की एक छोटी सी झलक भी साझा की, जिसमें बाहरी कवर गहरे नीले रंग का है, लेकिन अंदरूनी कवर पर ट्रंप का चित्र है। व्हाइट हाउस ने वीडियो के कैप्शन में सिर्फ अमेरिका का झंडा लगाया है।इसे भी पढ़ें: Iran US War Updates | Donald Trump की नई चाल: होर्मुज़ जलडमरूमध्य की लंबी घेराबंदी कर ईरान को आर्थिक रूप से तोड़ने की रणनीतिव्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स के अनुसार, &quot;देशभक्ति से प्रेरित पासपोर्ट का नया डिज़ाइन अमेरिकियों को अमेरिका के 250वें जन्मदिन के शानदार समारोह में शामिल होने का एक और बेहतरीन तरीका प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप हमारे ऐतिहासिक पंचशताब्दी समारोह के दौरान राष्ट्रीय गौरव और देशभक्ति के नवीनीकरण का गर्वपूर्वक नेतृत्व करना जारी रखे हुए हैं। विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने एनबीसी न्यूज़ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, &quot;जुलाई में अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में, विदेश विभाग इस ऐतिहासिक अवसर के उपलक्ष्य में विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए सीमित संख्या में अमेरिकी पासपोर्ट जारी करने की तैयारी कर रहा है।इसे भी पढ़ें: &#039;हमारे बिना आप फ्रेंच बोल रहे होते&#039;, King Charles III ने इतिहास के बहाने Donald Trump को मजेदार अंदाज में घेरा&#039;आप फ्रेंच बोल रहे होंगे&#039;संयुक्त राज्य अमेरिका के राजा चार्ल्स तृतीय और महारानी कैमिला की अमेरिका यात्रा के दौरान नए सीमित संस्करण वाले अमेरिकी &#039;देशभक्त पासपोर्ट&#039; का अनावरण किया गया। व्हाइट हाउस में राजकीय भोज के दौरान, राजा चार्ल्स ने मज़ाक में कहा कि अगर ब्रिटिश न होते, तो अमेरिकी फ्रेंच बोल रहे होते। राष्ट्रपति महोदय, आपने हाल ही में टिप्पणी की थी कि अगर संयुक्त राज्य अमेरिका न होता, तो यूरोपीय देश जर्मन बोल रहे होते।  राजा चार्ल्स ने कहा क्या मैं यह कहसकता हूँ कि अगर हम न होते, तो आप फ्रेंच बोल रहे होते? वह जनवरी में दावोस शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप की टिप्पणी का जिक्र कर रहे थे, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका की मदद के बिना, आप जर्मन और थोड़ी-बहुत जापानी बोल रहे होते। राजकीय भोज में राजा चार्ल्स का भाषण चुटकुलों और ऐतिहासिक संदर्भों से भरा था, जिसमें उन्होंने एक मौके पर कहा कि उन्होंने व्हाइट हाउस के पूर्वी विंग में &quot;पुनर्निर्माण&quot; देखा है, जहाँ ट्रंप एक बॉलरूम बनवा रहे हैं।Patriot passport unlocked. ????Limited edition. Stamped for America 250. ???????? pic.twitter.com/86uxPS1FEk— The White House (@WhiteHouse) April 28, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:53:59 +0530</pubDate>
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<title>ईरान के लिए खड़े हो गए 121 देश! UN में कैसे पिटा अमेरिका?</title>
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<description><![CDATA[ ईरान से युद्ध के बाद से अमेरिका को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग होने का डर अब साफ तौर पर दिखने लगा है। दुनिया भर के जो देश अमेरिका की दादागिरी के कारण उसके साथ खड़े रहा करते थे, अब वो देश वैश्विक मंच पर उसके खिलाफ वोटिंग तक करने लगे हैं। इसकी सबसे बड़ी तस्वीर संयुक्त राष्ट्र के मंच पर देखने को मिली। जहां एक तरफ समुद्री सुरक्षा और होमू जलडमरू मध्य को लेकर तीखी बहस चल रही थी तो दूसरी तरफ परमाणु अप्रसार संधि यानी एनपीटी की बैठक में ऐसा फैसला हो गया जिसने वाशिंगटन को झटका दे दिया। न्यूयॉर्क में हुई यूएनएससी बैठक के दौरान अमेरिका के प्रतिनिधि माइकल व्ट्स ने खुले तौर पर सहयोगी देशों से मदद की अपील की। उन्होंने कहा कि समुद्री स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए एक गठबंधन खड़ा होना होगा। जिसमें सैन्य ताकत के साथ-साथ व्यापार, बीमा और मानवीय एजेंसियों को भी शामिल होना चाहिए। साफ था कि अमेरिका अब अकेले इस टकराव को संभालने की स्थिति में नहीं दिख रहा है। खासकर तब जब होरमुज में उसकी रणनीति लगातार चुनौती का सामना कर रही है।  इसे भी पढ़ें: Russia-China से इतना डरा अमेरिका? पेंटागन का कैसा बड़ा कबूलनामादूसरी तरफ ईरान के प्रतिनिधि अमीर सैद इरावानी ने उसी मंच से सीधा पलटवार किया और कहा कि स्थाई शांति तभी संभव होगी जब ईरान के खिलाफ आक्रामकता पूरी तरीके से खत्म हो जाएगी और उसके संप्रभु अधिकारों का सम्मान किया जाएगा। यानी संदेश साफ था कि ईरान खुद को रक्षात्मक नहीं बल्कि बराबरी की स्थिति में देख रहा है और दबाव में झुकने को कतई तैयार नहीं। इस बीच जमीन पर हालात भी अमेरिका के लिए आसान नहीं दिख रहे। रिपोर्ट्स के मुताबिक होमज में 30 से ज्यादा ईरान से जुड़े जहाज अमेरिकी दबाव के बावजूद गुजर चुके हैं। हालांकि अमेरिकी सेना ने कुछ जहाजों को रोका और दो को जब्त करने का दावा भी किया। लेकिन तस्वीर यह बताती है कि पूरी तरीके से नियंत्रण स्थापित करना अब भी अमेरिका के लिए चुनौती बना है और इसी कूटनीति और सैन्य दबाव के बीच आया एनपीटी का बड़ा फैसला जहां अमेरिका ने आखिरी वक्त तक कोशिश तो बहुत की कि ईरान को कोई अहम जिम्मेदारी ना मिले लेकिन 121 देशों के समर्थन से ईरान को उपाध्यक्ष बना दिया गया। यही वह मंच है जिसका मकसद परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है और अब उसी मंच पर ईरान की मौजूदगी और मजबूत हो गई। इसे भी पढ़ें: UAE OPEC Exit Impact India: यूएई क्यों हो रहा OPEC से बाहर, क्‍या हमें खुश होना चाह‍िए?अमेरिका ने इस फैसले को एनपीटी की विश्वसनीयता पर सवाल बताते हुए कड़ा विरोध जताया। उसके अधिकारियों ने कहा कि ईरान पर ऐसे आरोप हैं कि वह अप्रसार प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं करता। इसलिए उसे पद पर चुनना गलत संदेश देता है। लेकिन दूसरी तरफ ईरान ने भी पलटवार करते हुए अमेरिका के नियत पर सवाल खड़े कर दिए और याद दिलाया कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने वाला दुनिया का एकमात्र देश अमेरिका ही रहा है। दरअसल इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम भूमिका रही गुटनिरपेक्ष और ग्लोबल साउथ देशों की जिन्होंने बड़ी संख्या में ईरान के पक्ष में वोट कर दिया। चीन और रूस पहले से ही ईरान के साथ खड़े थे। लेकिन इस बार अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के देशों ने भी हॉल का समर्थन दिया। जिससे अमेरिका का विरोध कमजोर पड़ गया। यानी यह सिर्फ एक कूटनीतिक घटना नहीं बल्कि बदलते वैश्विक संतुलन की साफ झलक है। जहां हर मुद्दे पर अमेरिका की बात मान लेना जरूरी नहीं रह गया और कई देश खुलकर अलग रुख अपनाने लगे। अब सवाल यही है क्या यह बदलाव अस्थाई है या फिर एक नए वैश्विक शक्ति संतुलन की शुरुआत। क्योंकि अगर इसी तरीके से अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन कम मिलता गया तो उसका दबदबा धीरे-धीरे चुनौती में तब्दील हो सकता है और ईरान जैसे देश इसी मौके को अपने पक्ष में बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका कमजोर पड़ गया है। यह कहना आसान है, लेकिन हकीकत इससे ज्यादा पेचीदा है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:53:58 +0530</pubDate>
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<title>हम न होते तो आप फ्रेंच बोल रहे होते, ट्रंप के बड़बोलापन पर किंग चार्ल्स ने दिलाई 250 साल पुराने इतिहास की याद</title>
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<description><![CDATA[ ब्रिटेन के किंग चार्ल्स ने कुछ ऐसा कह दिया जिसकी वजह से अमेरिका और ट्रंप के लोगों को उनका इतिहास याद आ गया है। दरअसल, किंग चार्ल्स यूएस के दौरे पर गए हुए हैं। किंग चार्ल्स ने पूरी तरह से रोस्ट कर दिया। ट्रंप को स्टेट डिनर के दौरान कहा कि यू वुड बी स्पीकिंग फ्रेंच मतलब आज जो आप अंग्रेजी में बात कर रहे हो इंग्लिश में बातचीत कर रहे हो इसके बजाय आप फ्रेंच में बातचीत कर रहे होते। मतलब ऐसा अगर हो जाता इतिहास बदल जाता। आपको याद होगा ट्रंप ने  यूके को लेकर काफी कुछ बोला। फिर यूके की तरफ से डायरेक्ट कोई पलटवार नहीं किया गया। इसे भी पढ़ें: King Charles की मौजूदगी में ट्रंप का &#039;पासपोर्ट&#039; दांव, Limited Edition पर अपनी तस्वीर लगवाईकिंग चार्ल्स अमेरिका के दौरे पर आए। ऑफिशियल स्टेट जो विजिट होता है और यहां पर जब भी इस तरह के बड़े विजिट होते हैं तो वाइट हाउस में होस्ट किया जाता है। एक डिनर रखा जाता है। लेकिन यहां पर अक्सर जो वर्ल्ड लीडर्स हैं वो टोस्ट दिया करते हैं। टोस्ट मतलब एक छोटा सा स्पीच हो गया जिसमें ह्यूमर भी होता है, डिप्लोमेसी भी होती है। किंग चार्ल्स टोस्ट दे रहे थे। मतलब यहां पर एक छोटी सी स्पीच दे रहे थे और उन्होंने बहुत ही लाइट हार्टेड लेकिन एक पॉइंटेड जोक ट्रंप की तरफ कहा। उन्होंने कहा अमेरिकनंस वुड बी स्पीकिंग फ्रेंच इफ नॉट फॉर ब्रिटेन। उन्होंने जो कहा है ना वो दो पार्ट में डिवाइडेड है। यू रिसेंटली कमेंटेड मिस्टर प्रेसिडेंट। मतलब किंग चार्ल्स डोनल्ड ट्रंप को कह रहे हैं कि हाल ही में आपने कुछ कमेंट पास किया था। ट्रंप ने दावोस समिट में कहा था कि अगर अमेरिका ने मदद की और यहां पर जो अलाइड फोर्सेस हैं उनकी जीत हुई वर्ल्ड वॉर टू में और जर्मनी  हार गई थी। यहां पर उसी को दोहराया गया था ट्रंप के द्वारा कि इफ इट वेर नॉट फॉर यूएस अगर यूएस आपकी मदद नहीं करता तो यूरोपियन कंट्रीज वुड बी स्पीकिंग जर्मन क्योंकि जर्मनी की जीत हो जाती। यहां पर किंग चार्ल्स उसी उसी कमेंट को दोहरा रहे थे। लेकिन साथ ही साथ उन्होंने यह कह दिया आई से दैट इफ इट वाज़ंट फॉर अस यू वुड बी स्पीकिंग फ्रेंच। मतलब कि अगर हम नहीं होते तो आज के डेट में आप फ्रेंच बोल रहे होते।इसे भी पढ़ें: क्या है America का 50 साल पुराना &#039;War Powers Resolution&#039; कानून, जिसने Iran से जंग पर बढ़ाईं Trump की मुश्किलें?ब्रिटेन के महाराजा चार्ल्स तृतीय ने अमेरिका की ब्रिटेन से स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर दोनों देशों के रिश्तों को ऐतिहासिक बताया और साथ ही नेताओं से ‘आत्म-केंद्रित’ न होने की अपील की। उन्होंने मंगलवार को अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन ने मिलकर ‘‘मानव इतिहास के सबसे प्रभावशाली गठबंधनों में से एक’’ का निर्माण किया है। चार्ल्स ने अपने संबोधन में अमेरिका-ब्रिटेन के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन केवल पुरानी उपलब्धियों पर टिक नहीं सकता और इसे वर्तमान चुनौतियों के अनुसार मजबूत करना होगा। उन्होंने रूस के खिलाफ यूक्रेन के समर्थन में दृढ़ता दिखाने और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के गठबंधन को मजबूत बनाए रखने की जरूरत बतायी। जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भी उन्होंने अप्रत्यक्ष संदेश देते हुए कहा कि नेताओं को प्रकृति की रक्षा की साझा जिम्मेदारी पर विचार करना चाहिए। उन्होंने धार्मिक विविधता और अंतरधार्मिक संवाद की भी सराहना की। ब्रिटेन के महाराजा चार्ल्स अमेरिका की चार दिवसीय यात्रा पर हैं, जिसका उद्देश्य अमेरिकी स्वतंत्रता समारोह में शामिल होना और दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करना है। उनके साथ महारानी कैमिला भी हैं। इससे पहले उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप से मुलाकात की। ट्रंप ने बैठक को ‘‘बेहद अच्छी’’ बताते हुए चार्ल्स को ‘‘शानदार व्यक्ति’’ कहा। कुछ ब्रिटिश टिप्पणीकारों ने महाराजा चार्ल्स के 20 मिनट के संबोधन को उनकी अपेक्षा से अधिक राजनीतिक बताया। चार्ल्स ब्रिटेन के दूसरे सम्राट हैं जिन्होंने अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। इससे पहले उनकी मां महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने 1991 में ऐसा किया था। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया उनकी मां के समय की तुलना में अधिक अस्थिर और खतरनाक है। हाल में व्हाइट हाउस संवाददाता रात्रिभोज के दौरान ट्रंप पर कथित हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “हिंसा के ऐसे कृत्य कभी सफल नहीं होंगे। ]]></description>
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<title>Putin का चौंकाने वाला फैसला, Red Square की Victory Day Parade में क्यों नहीं दिखेंगे रूसी टैंक?</title>
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<description><![CDATA[ नाजी जर्मनी की हार की 81वीं वर्षगांठ पर रूस में होने वाली पारंपरिक विजय परेड में इस साल सैन्य साजो सामान का प्रदर्शन नहीं होगा। रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी दी।
 यह 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण शुरू करने के बाद पहली बार होगा जब नौ मई को मास्को के रेड स्क्वायर पर सैन्य साजो सामान का प्रदर्शन नहीं होगा। यह दिन रूस के लिए उत्सव के समान होता है, जब वह अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करता है।
 मंत्रालय के बयान में सैन्य साजो सामान के काफिले और कैडेट को परेड से बाहर रखने का कारण ‘‘वर्तमान अभियानगत स्थिति’’ बताया गया है। बयान में इसका विस्तृत विवरण नहीं दिया गया।
 मंत्रालय ने बताया कि परेड में ‘‘विभिन्न उच्च सैन्य शिक्षण संस्थानों के कैडेट और रूसी सशस्त्र बलों की विभिन्न शाखाओं के कुछ सैनिक’’ शामिल होंगे। इसके साथ ही पारंपरिक सैन्य विमानों की उड़ानें भी होंगी।
 पिछले साल की परेड रूस द्वारा यूक्रेन में सेना भेजे जाने के बाद से अब तक की सबसे बड़ी परेड थी, जिसमें कई देशों के नेता मास्को पहुंचे थे। इनमें चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको जैसे प्रमुख अतिथि शामिल थे।
 पिछले साल की परेड में 11,500 से अधिक सैनिक शामिल थे और 180 से ज्यादा सैन्य वाहन प्रदर्शित किए गए थे। इनमें टैंक, बख्तरबंद सैन्य वाहन और तोपखाने शामिल थे, जिनका यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा यार्स परमाणु-सक्षम अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर और ड्रोन भी प्रदर्शित किए गए थे। रेड स्क्वायर के ऊपर लड़ाकू विमानों ने भी उड़ान भरी थी।
 पुतिन ने सात मई से 72 घंटे के एकतरफा युद्धविराम की घोषणा की है। यूक्रेनी ड्रोन हमलों को रोकने के प्रयास में अधिकारियों ने कई दिनों तक मास्को में सेलफोन इंटरनेट को अवरुद्ध कर दिया।
 वर्ष 2023 में यह परेड अपेक्षाकृत सीमित स्तर पर आयोजित की गई थी, जिसमें कम संख्या में सैनिक और सैन्य उपकरण प्रदर्शित किए गए थे। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:53:57 +0530</pubDate>
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<title>मैं और मिस्टर नाइस नहीं बनूंगा, हाथों में बंदूक थामे ट्रंप ने ईरान को हड़काया, बेहतर है समझ जाओ</title>
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<description><![CDATA[ इस्लामाबाद में दूसरे दौर की बातचीत अचानक रद्द होने के कारण युद्धविराम वार्ता अभी भी अटकी हुई है। इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर चेतावनी देते हुए अपने &quot;नो मोर मिस्टर नाइस गाई&quot; (अब कोई शराफत नहीं) वाले सख्त रुख को दोहराया है। इस बार उन्होंने ईरान पर तीखा प्रहार किया है और उस पर परमाणु समझौते को अंतिम रूप देने में विफल रहने का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर लिखते हुए उन्होंने कहा, &quot;ईरान चीजें ठीक से नहीं संभाल पा रहा है। उन्हें नहीं पता कि गैर-परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर कैसे किए जाते हैं। उनके लिए यही बेहतर होगा कि वे जल्द ही समझदारी से काम लें! राष्ट्रपति डीजेटी।इसे भी पढ़ें: क्या है America का 50 साल पुराना &#039;War Powers Resolution&#039; कानून, जिसने Iran से जंग पर बढ़ाईं Trump की मुश्किलें?गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में भी ट्रंप ने ईरान को ऐसी ही चेतावनी दी थी। दरअसल, अमेरिका द्वारा अपने प्रतिबंध नहीं हटाने के फैसले के जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर फिर से नाकेबंदी लगा दी थी, जिसके बाद ट्रंप का यह बयान आया था। उस समय उन्होंने कहा था कि अगर ईरान &quot;बहुत ही निष्पक्ष और तर्कसंगत समझौते&quot; पर सहमत नहीं होता है, तो &quot;अब और विनम्र व्यक्ति&quot; नहीं रह जाएगा। यह संदेश इस्लामाबाद में वार्ता के दूसरे दौर से ठीक पहले आया था, जिसे बाद में ट्रंप ने रद्द कर दिया था। यह उन घटनाओं के साथ भी मेल खाता है जिनमें कथित तौर पर गोलीबारी की घटनाएं हुईं, जिनमें उनके अनुसार एक फ्रांसीसी जहाज और एक ब्रिटिश मालवाहक जहाज शामिल थे। ईरान पर ट्रंप की ये नवीनतम टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब अमेरिका तेहरान पर एक सख्त &quot;परमाणु-रहित समझौते&quot; को स्वीकार करने के लिए दबाव डाल रहा है, जो यूरेनियम संवर्धन पर अंकुश लगाएगा और उसे परमाणु हथियार विकसित करने से रोकेगा। ये टिप्पणियां अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के बीच कथित तौर पर ठप पड़ी वार्ता की पृष्ठभूमि में भी आई हैं, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर रुख बदलने का आरोप लगा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: King Charles की मौजूदगी में ट्रंप का &#039;पासपोर्ट&#039; दांव, Limited Edition पर अपनी तस्वीर लगवाईपिछले हफ्ते, ट्रंप ने कहा कि ईरान के लिए समय कम होता जा रहा है और इस बात पर जोर दिया कि कोई भी समझौता पूरी तरह से वाशिंगटन की शर्तों पर ही होगा। संघर्ष को जल्द खत्म करने की जल्दबाजी के आरोपों को खारिज करते हुए, उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा, &quot;मेरे पास दुनिया का सारा समय है, लेकिन ईरान के पास नहीं - समय बीतता जा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:53:57 +0530</pubDate>
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<title>UAE का मास्टरस्ट्रोक: अब Hormuz Strait को बायपास कर Fujairah से आएगा तेल, भारत की टेंशन खत्म</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) से बाहर निकलने से मध्य पूर्व के ऊर्जा परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है और वैश्विक तेल व्यापार के लिए नए अवसर खुल गए हैं। 1 मई से अबू धाबी सऊदी अरब द्वारा निर्धारित तेल कार्टेल की उत्पादन सीमाओं से मुक्त हो जाएगा और अपनी पूरी क्षमता के अनुसार कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ा सकता है। इससे रणनीतिक फुजैरा पाइपलाइन के माध्यम से भारत को निर्यात बढ़ाने का रास्ता खुल गया है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बाईपास करती है। चूंकि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) तत्काल अपने तेल उत्पादन को प्रतिदिन दस लाख बैरल तक बढ़ा सकता है, इसलिए भारत के लिए यह अच्छी खबर है। भारत और UAE के बीच ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा पर आधारित गहरे रणनीतिक संबंध हैं। UAE पहले से ही भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक है, और फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण नई दिल्ली फुजैराह के रास्ते शिपमेंट को पुनर्निर्देशित कर रही थी।इसे भी पढ़ें: UAE OPEC Exit Impact India: यूएई क्यों हो रहा OPEC से बाहर, क्‍या हमें खुश होना चाह‍िए?अब, OPEC कोटा की बाधा न होने के कारण, UAE भारत को अधिक तेल, संभवतः किफायती कच्चा तेल भेजने की बेहतर स्थिति में है, जो पेट्रोल, डीजल और पेट्रोकेमिकल्स की जरूरतों के लिए इन आयातों पर बहुत अधिक निर्भर है। मंगलवार को घोषित अबू धाबी के इस फैसले के साथ, ओपेक में संयुक्त अरब अमीरात की लगभग 60 वर्षों की सदस्यता समाप्त हो गई। संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी समाचार एजेंसी WAM ने बताया कि उत्पादन नीति और राष्ट्रीय हित की सावधानीपूर्वक समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया है। ऊर्जा मंत्री सुहैल मोहम्मद अल मजरूई ने इसे &quot;दीर्घकालिक बाजार मूलभूत सिद्धांतों के अनुरूप नीति-प्रेरित परिवर्तन&quot; बताया। अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के प्रमुख सुल्तान अल जाबेर ने इसे देश की वास्तविक उत्पादन क्षमता और वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के अनुरूप &quot;संप्रभु निर्णय&quot; बताया।इसे भी पढ़ें: Doval-MBZ की हुई मीटिंग, ठीक 2 दिन बाद UAE ने लिया ऑयल मार्केट को हिलाने वाला फैसला, भारत के लिए सस्ते तेल का रास्ता कैसे खुल रहा है?ओपेक ने संयुक्त अरब अमीरात के उत्पादन को लगभग 3.4 मिलियन बैरल प्रति दिन तक सीमित कर रखा था, जबकि देश के तेल भंडार और बुनियादी ढांचा इससे कहीं अधिक उत्पादन कर सकते हैं। सऊदी अरब के नेतृत्व वाला यह समूह तेल की मात्रा सीमित करने का निर्णय लेता है ताकि बाजार में अत्यधिक तेल की आपूर्ति न हो और सभी सदस्य देशों के लिए कीमतें गिर न जाएं। ओपेक सदस्य देश कीमतों को स्थिर रखने और राजस्व की रक्षा के लिए कम उत्पादन करने पर सहमत होते हैं। संयुक्त अरब अमीरात को लगता है कि उसकी बढ़ती उत्पादन क्षमता (जो अब लगभग 48-5 मिलियन बैरल प्रति दिन है) के लिए यह कोटा बहुत कम है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:53:56 +0530</pubDate>
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<title>European Union History Part 1 | 1945 के बाद बर्बाद यूरोप कैसे बना दुनिया का इकोनॉमिक पावरहाउस|Teh Tak</title>
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<description><![CDATA[ साल 1945 पिछले 6 साल से चल रहा वर्ल्ड वॉर खत्म होता है। लेकिन अपने पीछे छोड़ जाता है तबाही का मंजर। यूरोप का ज्यादातर हिस्सा खंडहर बन चुका था। हां कुछ देशों की जीत जरूर हुई थी लेकिन उनकी भी इंडस्ट्रीज इंफ्रास्ट्रक्चर और इकॉनमी कमजोर हालत में थे। इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन से अमीर हुए इंग्लैंड जैसे देश के भी ज्यादातर ट्रेजरीज वॉर लड़ने में खाली हो चुकी थी। यूरोप के सामने फूड शॉर्टेज और हजारों डिस्प्लेस रिफ्यूजीस का संकट था। इसके अलावा बहुत से देशों ने वॉर टाइम एफर्ट्स को जारी रखने के लिए पैसा उधार लिया हुआ था, खासकर यूनाइटेड स्टेट्स अमेरिका से और अब जब उनकी इकॉनमी एकदम खस्ता हालत में थी तब इस स्थिति से निकलना असंभव सा लग रहा था। लेकिन इतिहास गवाह है कि यूरोप एक बार फिर उठ खड़ा हुआ और दुनिया का इकोनॉमिक सेंटर बनकर उभरा पर इतनी खराब सिचुएशन में आखिर यूरोप कैसे खुद को रिबिल्ड करता है।इसे भी पढ़ें: Tukey के पड़ोस में घुसा भारत, ग्रीस पोर्ट पर कब्जाअमेरिका का मार्शल प्लान1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के समाप्त होने पर यूरोप तो बहुत खराब हालत में था। पावरफुल देश जैसे जर्मनी और जापान युद्ध हार चुके थे। ऐसे में वर्ल्ड को दो नई सुपर पावर्स मिलती हैं अमेरिका और सोवियत के रूप में। वॉर के दौरान यूएसएसआर ने ईस्टर्न यूरोप के कुछ देशों जैसे पोलैंड लिथुआनिया, अल्बेनिया रोमे निया एटस पर अपना अधिकार कर लिया था और इन देशों में कम्युनिस्ट गवर्नमेंट फॉर्म कर दी गई थी वहीं वेस्टर्न यूरोप के ज्यादातर देश डेमोक्रेसी को फॉलो करते थे और अमेरिका के इन्फ्लुएंस में थे ब्रिटिश पीएम चर्चिल यूरोप के इस डिवीजन को डिस्क्राइब करने के लिए आयन कर्टन शब्द का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि यूरोप दो भाग में बट गया था साथ ही यूएस और यूएसएसआर के बीच कोल्ड वॉर की शुरुआत हो चुकी थी ऐसे में यूरोप का रिकंस्ट्रक्शन भी इसी डिवीजन के बेसिस पर होता है। वेस्टर्न यूरोप अलग तरीके से खुद को रिबिल्ड करता है और ईस्टर्न यूरोप अलग तरीके से वेस्टर्न यूरोप की मदद के लिए अमेरिका सामने आया और इस काम के लिए उसने जो प्रोग्राम शुरू किया उसे मार्शल प्लान कहा जाता है। यह काम अमेरिका ने सेल्फलेसनेस के तहत नहीं किया था बल्कि अपने जिओ पॉलिटिकल इंटरेस्ट के लिए किया। वो नहीं चाहता था कि ईस्ट यूरोप की तरह वेस्ट यूरोप में भी सोवियत लेड कम्युनिज्म हावी हो जाए। ऐसे में अमेरिका के मार्शल प्लान ने ही पोस्ट वॉर वेस्टर्न यूरोप की रिकवरी को मुमकिन बनाया।यूरोप को रिबिल्ड करना मकसदयूएसए को डर था कि वर्ल्ड वॉर ट के बाद पॉवर्टी अनइंप्लॉयमेंट और डिसलोकेशन जैसी प्रॉब्लम्स वेस्टर्न यूरोप के वोटर्स को कम्युनिस्ट आईडियोलॉजी की तरफ आकर्षित कर सकती हैं। इसलिए 5 जून 1947 को अपनी स्पीच में यूएस सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जॉर्ज मार्शल यूरोपियन रिकवरी प्रोग्राम की अनाउंसमेंट करते हैं, जिसे पॉपुलर मार्शल प्लान के नाम से जाना जाता है इस प्लान का मकसद यूरोप को रिबिल्ड करना था। इसके तहत करीब 13.3 बिलियन डॉलर्स की असिस्टेंसिया नेशंस को दी जाती है और यह 1947 से लेकर 1951 तक चलता है यानी कि 4 साल के लिए इनिशियली मार्शल प्लान सभी यूरोपियन नेशंस के लिए ओपन था। यहां तक कि यूएसएसआर के लिए भी। मार्शल प्लान के कंप्लीट होने के समय यूरोप का एग्रीकल्चरल और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन दोनों ही पहले से काफी बढ़ चुका था। बैलेंस ऑफ ट्रेड में इंप्रूवमेंट आया था साथ ही ट्रेड लिबरलाइजेशन और इकोनॉमिक इंटीग्रेशन की दिशा में कदम उठाए जा चुके थे।इसे भी पढ़ें: NATO को सजा, यूरोप को तोड़ देंगे ट्रंप? अमेरिका का प्लान लीकसोवियत का मोलोटोव  प्लानईस्टर्न ब्लॉक की इकोनॉमिक यूनिटी की तरफ यूएसएसआर कुछ कदम उठाता है। इस दिशा में पहला स्टेप मलोटो प्लान के रूप में आता है। इसे अमेरिका के मार्शल प्लान के जवाब में रूसी फॉरेन मिनिस्टर मलोटो ने प्रपोज किया था। यह  यूएसएसआर और ईस्टर्न यूरोप के देशों के बीच ट्रेड एग्रीमेंट की तरह था। इसे 1947 में नेगोशिएट किया जाता है जिसका एम ईस्टर्न यूरोप में ट्रेड को बूस्ट करना था। मोलोटोव  प्लान के बाद यूएसएसआर 1949 में कॉमकॉन यानी कि काउंसिल फॉर म्यूचुअल इकोनॉमिक असिस्टेंसिया जाता है और एग्रीकल्चर का कलेक्टिवाइजेशन होता है यानी कि उसे बड़े और स्टेट द्वारा ओन फार्म्स में बदल दिया जाता है एक तरह से ईस्टर्न यूरोप में सोवियत इकोनॉमिक प्रिंसिपल्स को अप्लाई कर दिया जाता है इन सभी एफर्ट्स की वजह से ईस्टन यूरोप इकोनॉमिकली कुछ सक्सेस जरूर हासिल करता है उसकी प्रोडक्शन स्टेटली इंक्रीज करती है हालांकि इनकी एवरेज जीडीपी और जनरल एफिशिएंसी यूरोपियन कम्युनिटी यानी ईसी से काफी कम रहती है। ईस्टर्न यूरोप का एक देश अल्बेनिया तो पूरे यूरोप का सबसे बैकवर्ड देश कहलाता है। इसके बाद 1980 में ईस्टर्न स्टेट्स के इकॉनमी को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यहां जरूरी चीजों की शॉर्टेजेस होने लगती हैं। इंफ्लेशन बढ़ता ही जाता है और लोगों का लिविंग स्टैंडर्ड बहुत नीचे गिरने लगता है। इसका इफेक्ट 1990 में देखने को मिलता है जब ईस्टर्न यूरोप के देश एक-एक करके यूएसएसआर से अलग होना शुरू कर देते हैं। 1991 में बर्लिन वॉल के फॉल के साथ यूरोप का आयन कर्टन भी गिर जाता है और यूरोप का दो ब्लॉक्स में डिवीजन खत्म हो जाता है।सोवियत का विघटनईस्टर्न यूरोप के देश वेस्टर्न यूरोप की तुल में काफी पीछे रह गए जिसका इफेक्ट हमें आज तक देखने को मिलता है और यह फर्क सिर्फ मार्शल प्लान और सोवियत प्लांस की वजह से नहीं आया था बल्कि वेस्टर्न यूरोप के नेशंस द्वारा अपने स्तर पर भी कुछ एफर्ट्स किए गए थे जो रिकवरी को और स्ट्रांग बनाते हैं आइए इन एफर्ट्स की भी चर्चा करते हैं यूरोपियन एफर्ट्स फॉर द रिकवरी यूरोपियन नेशंस समझ चुके थे कि जल्द ही अगर उन्होंने खुद को रिबिल्ड नहीं किया तो यूरोप हमेशा के लिए पावरलेस हो जाएगा। यूएस और यूएसएसआर दुनिया की सुपर पावर्स बन चुके थे। ऐसे में बैलेंस ऑफ पावर को बन ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:53:55 +0530</pubDate>
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<title>क्यों खास है King Charles का दिया Royal Gift? Trump को भेंट की उनके ही नाम वाली पनडुब्बी की घंटी</title>
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<description><![CDATA[ द्वितीय विश्वयुद्ध के समय की ब्रिटेन में बनी पनडुब्बी ‘एचएमएस ट्रंप’ से संबंधित मूल घंटी इस सप्ताह राजकीय यात्रा के दौरान महाराजा चार्ल्स तृतीय द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भेंट किए गए उपहारों का मुख्य आकर्षण रही।
 मंगलवार को व्हाइट हाउस में आयोजित राजकीय रात्रिभोज में 77 वर्षीय महाराजा ने ‘‘निजी उपहार’’ के रूप में यह घंटी भेंट की और इस दौरान मजाकिया अंदाज में बात की।
 ट्रंप उपहार से स्पष्ट रूप से प्रभावित दिखे और उन्होंने कार्यक्रम में चार्ल्स की ‘‘शानदार’’ कहकर प्रशंसा की।
 चार्ल्स ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘आज, नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) और एयूक्यूस (ऑस्ट्रेलिया-ब्रिटेन-अमेरिका गठबंधन) में हमारी साझेदारी हमारे प्रौद्योगिकी और सैन्य सहयोग को गहरा करती है तथा यह सुनिश्चित करती है कि हम मिलकर तेजी से जटिल और प्रतिस्पर्धी दुनिया की चुनौतियों का सामना कर सकें।’’
उन्होंने संबंधित घंटी का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘...तो आज रात, राष्ट्रपति महोदय, मुझे आपको व्यक्तिगत उपहार के रूप में वह मूल घंटी भेंट करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है जो आपके साहसी नामधारी (एचएमएस ट्रंप) के युद्धक टॉवर पर लगी थी। यह हमारे राष्ट्रों के साझा इतिहास और उज्ज्वल भविष्य की गवाही देती रहे। और यदि कभी आपको हमसे संपर्क करने की आवश्यकता हो, तो बस घंटी बजा दीजिएगा।’’
 इस दौरान हंसी के ठहाके गूंजने लगे।
 सार्वजनिक रूप से उपहार देने की यह घटना इससे पूर्व बंद कमरे में हुए आदान-प्रदान के बाद हुई, जब बकिंघम पैलेस ने कहा कि ब्रिटेन के महाराजा ने अमेरिकी राष्ट्रपति को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में स्थित प्रतिष्ठित डेस्क के 1879 के ‘डिजाइन प्लान’ की एक फ्रेम की हुई प्रतिकृति भेंट की - जिसकी मूल प्रतियां लंदन के ग्रीनविच में स्थित राष्ट्रीय समुद्री संग्रहालय में रखी हैं।
 लंदन में जारी किए गए ऐतिहासिक विवरण के अनुसार, ‘रेसोल्यूट डेस्क’ का निर्माण ब्रिटिश अन्वेषण पोत ‘एचएमएस रेसोल्यूट’ की लकड़ियों से किया गया था।
 बकिंघम पैलेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति और प्रथम महिला से बदले में प्राप्त उपहारों का विवरण भी दिया। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:53:55 +0530</pubDate>
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<title>European Union History Part 2 | कोल से करेंसी तक: ईयू बनने का सफर|Teh Tak</title>
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<description><![CDATA[ आपने यूरोप या  फिर यूरोपियन यूनियन सुन तो रखा होगा। लेकिन ये यूरोपियन  यूनियन है क्या, समझते हैं की यह यूरोपियन  यूनियन के पीछे की हिस्ट्री क्या है और यह क्यों बनाया गया। उसके बारे में बताते हैं। उसे सिंपल टर्म्स में यूरोप एक कॉन्टिनेंट है, जिसमें र्मनी, नीदरलैंड्स, स्वीटजरलैंड, बेल्जियम जैसे 44 कंट्रीज हैं। द्वितीय विश्व युद्ध की तबाही के बाद यूरोप के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि भविष्य में ऐसे विनाशकारी संघर्ष को रोकना। इसी लक्ष्य के साथ 9 मई 1950 को फ्रांस के विदेश मंत्री रॉबर्ट शूमन ने एक अहम प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने सुझाव दिया कि फ्रांस और पश्चिम जर्मनी अपने कोयला और इस्पात उद्योग को एक साझा प्राधिकरण के तहत लाएं। चूंकि ये संसाधन युद्ध के लिए बुनियादी थे, इसलिए इस कदम का उद्देश्य दोनों देशों के बीच युद्ध को न सिर्फ अकल्पनीय, बल्कि व्यावहारिक रूप से असंभव बनाना था।इसे भी पढ़ें: Tukey के पड़ोस में घुसा भारत, ग्रीस पोर्ट पर कब्जायूरोपीय कोल और स्टील कम्युनिटीशूमन योजना को 1951 में ट्रीटी ऑफ पेरिस के माध्यम से लागू किया गया, जिससे यूरोपीयन कोल एंड स्टील कम्युनिटी (ईसीएससी) की स्थापना हुई। इस समझौते पर बेल्जियम, फ्रांस, पश्चिम जर्मनी, इटली, लक्ज़मबर्ग और नीदरलैंड जैसे छह देशों ने हस्ताक्षर किए। इन देशों को सामूहिक रूप से “इनर सिक्स” कहा गया। ईसीएससी को यूरोप में आर्थिक सहयोग और शांति स्थापना की दिशा में पहला ठोस कदम माना जाता है।ट्रीटी ऑफ रोम और ईसीएससीईसीएससी की सफलता के बाद सदस्य देशों ने सहयोग को अन्य क्षेत्रों तक विस्तारित करने का निर्णय लिया। 1957 में Treaties of Rome पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत दो प्रमुख संस्थाएं स्थापित हुईं। पहली, यूरोपीयन यूनियन कम्युनिटी (ईईसी), जिसका उद्देश्य एक कॉमन मार्केट बनाना था, जहां वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और लोगों की आवाजाही बिना बाधा के हो सके। दूसरी, Euratom, जिसे परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया।  आने वाले दशकों में ईईसी ने व्यापार बाधाओं को कम करते हुए अपने दायरे का विस्तार किया और नए सदस्य देशों को शामिल किया। 1973 में डेनमार्क, आयरलैंड और यूनाइटेड किंगडम इसमें शामिल हुए, जबकि 1981 में ग्रीस और 1986 में स्पेन व पुर्तगाल सदस्य बने। इसी वर्ष Single European Act (1986) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका लक्ष्य 1992 तक एक पूर्ण सिंगल मार्केट स्थापित करना और सदस्य देशों के बीच राजनीतिक एकीकरण को और मजबूत करना था।मास्ट्रिच ट्रीटी और ईयू का जन्मसाल 1992 में साइन हुई मास्ट्रिच ट्रीटी (ट्रीटी ऑन यूरोपीयन यूनियन) ने यूरोप की दिशा ही बदल दी। यह सिर्फ एक आर्थिक समझौता नहीं था, बल्कि इसने यूरोप को एक पॉलिटिकल यूनियन में बदलने की नींव रखी। इस संधि के बाद यूरोपीयन कम्युनिटी  का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से यूरोपीयन यूनियन (ईयू) कर दिया गया। मास्ट्रिच ट्रीटी के तहत एक सिंगल करेंसी – यूरो की नींव रखी गई। 1999 में इसे इलेक्ट्रॉनिक फर्म में लॉन्च किया गया। 2002 में यह कैश के रूप में लागू हुआ। इससे यूरोप की इकोनॉमी को एक यूनिफाइड डायरेक्शन मिली। इस संधि की एक और बड़ी उपलब्धि ईयू सीटिजनशिप थी।लिस्बन की संधि2000 के दशक में यूरोपीय संघ (ईयू) ने तेज़ी से विस्तार किया और 2004 में मुख्यतः सेंट्रल और ईस्टर्न यूरोप  के 10 नए देशों को शामिल किया, जो सोवियत यूनियन के पतन के बाद संभव हुआ। इस बड़े विस्तार के साथ EU की संस्थाओं और नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस हुई। इसी दिशा में 2007 में Treaty of Lisbon पर हस्ताक्षर किए गए, जो 2009 में लागू हुआ। इस संधि का उद्देश्य ईयू को अधिक efficient, democratic और वैश्विक स्तर पर एक मजबूत collective voice के रूप में स्थापित करना था। इसके तहत European Council के President का स्थायी पद बनाया गया और European Parliament की शक्तियों को बढ़ाया गया। वर्तमान में, 2020 में United Kingdom के अलग होने के बाद, EU में कुल 27 सदस्य देश हैं और यह एक unique economic और political partnership के रूप में यूरोप के बड़े हिस्से के governance को प्रभावित करता है।इसे भी पढ़ें: European Union History Part 3 | Brexit के बाद अब क्या टूटेगा EU |Teh Tak ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:53:54 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिकी सेना में हड़कंप! ईरानी साइबर ग्रुप &amp;apos;Handala&amp;apos; ने लीक किए 2,000 से अधिक सैनिकों के नाम और पते</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब युद्ध के मैदान से निकलकर &#039;डिजिटल वॉरफेयर&#039; में तब्दील हो गया है। एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, &#039;हंडाला&#039; (Handala) नामक ईरानी साइबर समूह ने मध्य पूर्व में तैनात 2,000 से अधिक अमेरिकी सैन्य कर्मियों के संवेदनशील व्यक्तिगत विवरण लीक कर दिए हैं। इस डेटा ब्रीच ने पेंटागन की रातों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि इसमें सैनिकों के नाम के साथ-साथ उनके घर के पते और अन्य निजी जानकारी सार्वजनिक की गई है।इसे भी पढ़ें: Narasimha Jayanti 2026: Lord Narasimha का पर्व, जानें अधर्म पर धर्म की जीत का सही Puja Time और पूजन विधि द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह काम &#039;हंडाला&#039; नाम के ईरानी साइबर ग्रुप ने किया है, जिसे &#039;हंजला&#039; भी कहा जाता है. टेलीग्राम पर, समूह ने यह भी दावा किया है कि लगभग 2,379 अमेरिकी सैनिकों के व्यक्तिगत विवरण लीक हो गए थे, जिसके बारे में उसने कहा कि यह समूह की &quot;निगरानी क्षमताओं&quot; का प्रमाण है।गौरतलब है कि यह वही समूह है जिसने पिछले महीने संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) के निदेशक काश पटेल का निजी ईमेल हैक किया था। समूह ने तब अपनी वेबसाइट पर अपने संदेश में कहा था, &quot;पूरी दुनिया के लिए, हम घोषित करते हैं: एफबीआई सिर्फ एक नाम है, और इस नाम के पीछे कोई वास्तविक सुरक्षा नहीं है।&quot;इसे भी पढ़ें: Infosys Job Opportunities | इंफोसिस का बड़ा ऐलान! CEO Salil Parekh बोले- &#039;AI के कारण नहीं होगी कोई छंटनी, 20,000 फ्रेशर्स की होगी भर्ती&#039; पेंटागन ने अब एक जांच शुरू कर दी है, क्योंकि इस घटना ने अमेरिकी सेना के बीच चिंता पैदा कर दी है और अमेरिकी सिस्टम को बार-बार हैक करने की समूह की क्षमता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। अधिकारी इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि समूह ने अमेरिकी सिस्टम को कैसे हैक किया और डेटा से छेड़छाड़ की गई।अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ रहा हैयह घटना तब हुई है जब अमेरिका ने इस्लामिक गणराज्य को शांति संधि स्वीकार करने के लिए मजबूर करने के प्रयास के तहत सभी ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी रखी है। इससे पहले तेहरान ने एक प्रस्ताव भेजा था लेकिन अमेरिका ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि परमाणु समझौते पर कोई समझौता नहीं होगा.अमेरिका ने कहा है कि ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ना होगा, ट्रम्प ने इस बात पर जोर दिया कि इस्लामिक गणराज्य के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते। उन्होंने नौसैनिक नाकाबंदी का भी समर्थन किया और कहा कि ईरानी अब &quot;भरे सुअर की तरह घुट रहे हैं&quot;। उन्होंने बुधवार को एक साक्षात्कार में कहा, &quot;नाकाबंदी बमबारी से कुछ हद तक अधिक प्रभावी है।&quot;एक्सियोस की एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका ने सैन्य विकल्प से इनकार नहीं किया है और वह ईरान पर &quot;छोटे और शक्तिशाली&quot; हमलों की तैयारी कर रहा है। मध्य पूर्व राष्ट्र ने अमेरिका को किसी भी हमले के खिलाफ चेतावनी दी है और कहा है कि अमेरिकी हमलों का &quot;अभूतपूर्व&quot; जवाब दिया जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:53:52 +0530</pubDate>
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<title>European Union History Part 3 | Brexit के बाद अब क्या टूटेगा EU |Teh Tak</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया में कभी आपसी एकता, खुली सीमाओं और मजबूत अर्थव्यवस्था की मिसाल माना जाने वाला यूरोपियन यूनियन (EU) आज एक बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है। हालात ऐसे हैं कि अर्थव्यवस्था से लेकर राजनीति तक, ईयू चौतरफा घिर चुका है। अमेरिका और चीन के मुकाबले यूरोप अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी नई तकनीकों और आर्थिक विकास में काफी पिछड़ रहा है। वहां लगातार बढ़ती महंगाई और सुस्त विकास दर ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसके अलावा, पर्यावरण को बचाने के लिए EU ने &#039;ग्रीन ट्रांजिशन&#039; के नाम पर जो सख्त नियम बनाए हैं, उनसे खेती और जनजीवन इतना महंगा हो गया है कि पूरे यूरोप में किसान सड़कों पर उतर कर विरोध कर रहे हैं। वहीं, रूस-यूक्रेन युद्ध के लंबा खिंचने से यूरोप का खजाना खाली हो रहा है और अब खुद सदस्य देशों के बीच इस बात पर मतभेद गहराने लगे हैं कि यूक्रेन को और कितनी आर्थिक और सैन्य मदद दी जाए।इन आर्थिक और बाहरी चुनौतियों के बीच, यूरोप की राजनीति में भी एक बड़ा भूचाल आ गया है। फ्रांस, जर्मनी, इटली और नीदरलैंड्स जैसे देशों में दक्षिणपंथी यानी राष्ट्रवादी और प्रवासी विरोधी पार्टियां तेजी से हावी हो रही हैं, जो सीधे तौर पर ईयू के सिस्टम और उसकी एकता को चुनौती दे रही हैं।इसे भी पढ़ें: NATO को सजा, यूरोप को तोड़ देंगे ट्रंप? अमेरिका का प्लान लीकलेकिन, यूरोप की इस राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल की शुरुआत अचानक नहीं हुई है। विशेषज्ञों की मानें तो इसकी सबसे गहरी जड़ें 2015 के &#039;सीरियाई शरणार्थी संकट&#039; में छिपी हैं। आइए समझते हैं कि सीरिया ने यूरोप को हमेशा के लिए कैसे बदल दिया। 2015-16 के दौरान सीरियाई गृहयुद्ध के कारण करीब 10 लाख से ज्यादा लोग जान बचाकर अचानक यूरोप की सीमाओं पर पहुंच गए। यूरोप का पूरा सिस्टम इतने बड़े शरणार्थी संकट को एक साथ संभालने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था। जब इन शरणार्थियों को 27 देशों के बीच &#039;कोटा सिस्टम&#039; से बांटने की बात आई, तो देशों के बीच भारी विवाद शुरू हो गया। कई देशों ने अपनी सीमाएं सील कर दीं। इससे बिना पासपोर्ट पूरे यूरोप में घूमने की आज़ादी देने वाला मशहूर &#039;शेंगेन एग्रीमेंट&#039; ही खटाई में पड़ गया। प्रवासियों के अचानक आने से जो डर का माहौल बना, उसका सीधा फायदा दक्षिणपंथी (Right-Wing) नेताओं को मिला। उन्होंने इसे &#039;राष्ट्रीय सुरक्षा&#039;, &#039;संस्कृति&#039; और &#039;नौकरियों&#039; पर खतरा बताकर वोट बटोरे। आज यही पार्टियां सत्ता की चाबी बन गई हैं और इन्होंने यूरोप की मुख्यधारा की राजनीति को पूरी तरह पलट दिया है। आपको याद होगा कि ब्रिटेन ने ईयू छोड़ दिया था। इस &#039;ब्रेग्जिट&#039; के पीछे भी सबसे बड़ा कार्ड प्रवासियों का डर ही था। वहां के नेताओं ने सीरियाई संकट का हवाला देकर ही जनता से EU छोड़ने के पक्ष में वोट करवाया था। जो लिबरल (उदारवादी) पार्टियां पहले मानवाधिकारों की बात करते हुए शरणार्थियों का स्वागत कर रही थीं, उन्हें भी चुनाव जीतने और जनता का गुस्सा शांत करने के लिए अपने नियम कड़े करने पड़े। आज यूरोप की सीमाएं पहले से कहीं ज्यादा सख्त हैं।इसे भी पढ़ें: European Union History Part 1 | 1945 के बाद बर्बाद यूरोप कैसे बना दुनिया का इकोनॉमिक पावरहाउस|Teh Takकुल मिलाकर कहें तो, 2015 के सीरिया संकट ने यूरोपियन यूनियन की उस &#039;एकता&#039; और &#039;उदारवाद&#039; वाली छवि को तोड़ दिया, जिस पर वह खड़ा था। उसी दरार से आज की राजनीतिक अस्थिरता पैदा हुई है। अब देखना यह होगा कि क्या EU इस चक्रव्यूह से बाहर निकल पाता है, या फिर आपसी मतभेदों में और उलझता चला जाएगा। संक्षेप में कहें तो, 2015 के सीरियन संकट ने यूरोपियन यूनियन की उस &#039;एकता&#039; और &#039;उदारवाद&#039; की नींव हिला दी, जिस पर वह खड़ा था। उसी दरार से जो राजनीतिक अस्थिरता पैदा हुई, वह आज यूरोप की सबसे बड़ी कमजोरी बन गई है।इसे भी पढ़ें: European Union History Part 4 | आज के समय में NATO का रोल |Teh Tak  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:48:20 +0530</pubDate>
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<title>European Union History Part 4 | आज के समय में NATO का रोल |Teh Tak</title>
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<description><![CDATA[ इंग्लिश में NATO और हिंदी में नॉटो बोले या फिर नाटो भी कह सकते हैं। लेकिन इसका फुल फॉर्म जरूर याद कर लीजिए शायद किसी परीक्षा में पूछ लिया जाए। नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन हिंदी में कहे तो उत्तरी अटलांटिक सन्धि संगठन।  क्या है नाटो जिससे रूस को इतनी नफरत है। कहानी की शुरुआत इतिहास से करते हैं। साल 1945 की बात है दूसरा विश्व युद्ध खत्म हो चुका था। सोवियत संघ और अमेरिकी दुनिया की दो महाशक्तियों के बीच प्रभुत्व की लड़ाई जिसके बारे में आपने पढ़ा भी होगा और हम भी आपको कई दफा बता चुके हैं। फुल्टन भाषण व टू्रमैन सिद्धांत के तहत जब साम्यवादी प्रसार को रोकने की बात कही गई तो प्रत्युत्तर में सोवियत संघ ने अंतर्राष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन कर 1948 में बर्लिन की नाकेबंदी करते हुए और स्टालिन की रेड आर्मी ने बर्लिन में झंडा फहरा दिया था। अमेरिका को डर लगा कि स्टालिन के साम्यवाद की ये लहर ऐसी ही चली तो ये पश्चिमी यूरोप में भी पहुंच जाएगी। 1948 में बर्लिन की नाकेबंदी की घटना ने अमेरिका के डर को और भी पुख्ता कर दिया। उसे लगा कि सोवियत संघ से निपटने के लिए एकजुट होने का वक्त आ गया है। इसी क्रम में यह विचार किया जाने लगा कि एक ऐसा संगठन बनाया जाए जिसकी संयुक्त सेनाएं अपने सदस्य देशों की रक्षा कर सके।  4 अप्रैल 1949 को ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम, नीदरलैण्ड तथा लक्सेमबर्ग ने बूसेल्स की संधि पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य सामूहिक सैनिक सहायता व सामाजिक-आर्थिक सहयोग था। ये पूंजीवादी देशों की सोवियत विस्तार को चुनौती देने के लिए बना सैन्य संगठन था। इन देशों ने एक दूसरे को एक वादा किया है। कैसा वादा- एक दूसरे को खतरे की स्थिति में सहायता देने का वादा यानी सामूहिक सुरक्षा का वादा। किसी एक देश पर हमला तो माना जाएगा सबके सब देशों पर हमला।इसे भी पढ़ें: NATO को सजा, यूरोप को तोड़ देंगे ट्रंप? अमेरिका का प्लान लीकउत्तर अटलांटिक संधि पर 12 देशों ने हस्ताक्षर किएसंयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर के अनुच्छेद 15 में क्षेत्रीय संगठनों के प्रावधानों के अधीन उत्तर अटलांटिक संधि पर 12 देशों ने हस्ताक्षर किए थे। ये देश थे- फ्रांस, बेल्जियम, लक्जमर्ग, ब्रिटेन, नीदरलैंड, कनाडा, डेनमार्क, आइसलैण्ड, इटली, नार्वे, पुर्तगाल और संयुक्त राज्य अमेरिका। शीत युद्ध की समाप्ति से पूर्व यूनान, टर्की, पश्चिम जर्मनी, स्पेन भी सदस्य बने और शीत युद्ध के बाद भी नाटों की सदस्य संख्या का विस्तार हो रहा। इस गुट में अमेरिका सबसे ताकतवर था इसलिए उसे इसका मुखिया मान लिया गया। 18 फरवरी 1952 और 6 मई 1955 के बीच तीन और देशों को नाटो में शामिल किया गया। इनमें पश्चिम जर्मनी भी शामिल था। इससे सोवियत यूनियन की चिंता और बढ़ी, क्योंकि पूर्वी जर्मनी सोवियत समर्थक था।इसे भी पढ़ें: Donald Trump की Nasty या Nice लिस्ट! ईरान युद्ध में साथ न देने वाले NATO सहयोगियों पर गिर सकती है गाजनाटो के 30 सदस्य देशों की सूची:अलबानिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, कनाडा, क्रोएशिया, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्तोनिया, फ़्रान्स, जर्मनी, यूनान, हंगरी, आइसलैण्ड, इटली, लातविया, लिथुआनिया, लक्ज़मबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, मॉन्टिनीग्रोनाटो और रूस की ताकतआंकड़ों से पता चलता है कि रूस की सेना अमेरिका के बाद दूसरी बड़ी सेना है। सशस्त्र बलों के आंकड़े बताते हैं कि देश में लगभग 1,154,000 सक्रिय सैनिक हैं। सेना को रिजर्व में रखे गए लगभग 250,000 और सैनिकों का समर्थन प्राप्त है। रूस के पास लगभग 6,400 वॉरहेड की आपूर्ति के साथ, परमाणु हथियारों का दुनिया का सबसे विशाल संग्रह है। नाटो सदस्यों के पास लगभग 1,346,400 कर्मियों की सेना है। उनमें से मोटे तौर पर 165000 सैनिक तैनात हैं, जबकि 799,500 रिजर्व सैनिक हैं। नाटो 30 देशों का एक ग्रुप है। लेकिन जो सैनिक सक्रिय हैं, वही युद्ध की स्थिति में सबसे पहले उतारे जाएंगे।इसे भी पढ़ें: European Union History Part 5 | यूरोप में किसकी चमकी किस्मत? EU के सफल देश|Teh Tak ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:48:19 +0530</pubDate>
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<title>US Iran War | &amp;apos;ठूंस&#45;ठूंसकर भरे सूअर की तरह दम घुट रहा है&amp;apos;, Donald Trump ने परमाणु समझौते तक ईरान की नाकेबंदी जारी रखने की धमकी दी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपना सख्त रुख बरकरार रखते हुए एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि जब तक इस्लामिक गणराज्य अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक उसके खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी और आर्थिक प्रतिबंध जारी रहेंगे। ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर उसे परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। बुधवार को Axios के साथ एक इंटरव्यू में, रिपब्लिकन नेता ने यह भी दावा किया कि ईरान नाकेबंदी हटाने के लिए अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है, जिसे उन्होंने &quot;बमबारी से कहीं ज़्यादा असरदार&quot; बताया। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के तेल भंडार और पाइपलाइनें &quot;फटने के कगार पर पहुँच रही हैं,&quot; क्योंकि अमेरिकी नाकेबंदी के कारण यह मध्य पूर्वी देश अपने कच्चे तेल का निर्यात करने में असमर्थ है। इसे भी पढ़ें: Bengaluru Wall Collapse Accident | बेंगलुरु में कुदरत का कहर! भारी बारिश और दीवार गिरने से 7 की मौत, PM मोदी और CM सिद्धरमैया ने जताया दुखट्रंप ने कहा &quot;नाकेबंदी बमबारी से कुछ ज़्यादा ही असरदार है। उनका दम ठूंस-ठूंसकर भरे सूअर की तरह घुट रहा है। और उनके लिए हालात और भी बदतर होने वाले हैं। वे परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकते। ट्रंप ने कहा &quot;वे समझौता करना चाहते हैं। वे नहीं चाहते कि मैं नाकेबंदी जारी रखूँ। मैं [नाकेबंदी हटाना] नहीं चाहता, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि उनके पास परमाणु हथियार हों।&quot;ट्रंप, जो 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में अपनी जीत के बाद दोबारा पदभार संभालने लौटे हैं, ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत हालांकि जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अब इस मध्य पूर्वी देश के लिए &quot;हार मान लेने&quot; और यह कहने का समय आ गया है कि &quot;हम हार मानते हैं।&quot; इसे भी पढ़ें: India-Ecuador Relations | भारत-इक्वाडोर संबंधों में नई ऊर्जा! विदेश मंत्री एस जयशंकर और गैब्रिएला सोमरफेल्ड के बीच अहम द्विपक्षीय वार्ता ट्रंप ने इंटरव्यू में Axios को बताया &quot;सवाल यह है कि क्या वे इस हद तक आगे बढ़ेंगे या नहीं। इस समय, तब तक कोई समझौता नहीं होगा जब तक वे इस बात पर सहमत नहीं हो जाते कि वे कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेंगे।ईरान ने अभूतपूर्व जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दीजहाँ एक ओर ट्रंप शांति समझौते को स्वीकार करने के लिए ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश में उसे लगातार धमकियाँ दे रहे हैं, वहीं इस्लामिक गणराज्य ने नाकेबंदी को लेकर अमेरिका को चेतावनी दी है; उसका दावा है कि यह नाकेबंदी ईरानी शासन को अस्थिर करने की एक साज़िश का हिस्सा है। एक ईरानी मीडिया आउटलेट ने यह भी कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी का &quot;जल्द ही व्यावहारिक और अभूतपूर्व कार्रवाई के साथ जवाब दिया जाएगा।&quot;ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका की &quot;धोखेबाज़ योजना&quot; को नाकाम कर दिया जाएगा और नाकेबंदी के ज़रिए देश के भीतर &quot;आपसी फूट&quot; डालने की ट्रंप की योजना कभी सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा &quot;दुश्मन एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है और नौसैनिक नाकाबंदी तथा मीडिया के शोर-शराबे के ज़रिए आर्थिक दबाव और आंतरिक फूट को सक्रिय करके हमें कमज़ोर करना चाहता है, या यहाँ तक कि हमें भीतर से ही ढहा देना चाहता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:48:18 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Iran, War, ठूंस-ठूंसकर, भरे, सूअर, की, तरह, दम, घुट, रहा, है, Donald, Trump, ने, परमाणु, समझौते, तक, ईरान, की, नाकेबंदी, जारी, रखने, की, धमकी, दी</media:keywords>
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<title>European Union History Part 5 | यूरोप में किसकी चमकी किस्मत? EU के सफल देश|Teh Tak</title>
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<description><![CDATA[ यूरोपियन यूनियन (ईयू) को समझने के लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इसका मूल “दांव” क्या था। दरअसल, EU ने देशों से उनकी राष्ट्रीय  संप्रभुता यानी पूरी आर्थिक और राजनीतिक स्वतंत्रता का एक हिस्सा लेकर बदले में collective economic power, peace और जियोपॉलिटिकल इंफ्यूएंस देने का वादा किया। अगर कुल मिलाकर देखा जाए, तो यह दांव काफी हद तक सफल रहा है। ईयू का सबसे बड़ा लक्ष्य यूरोप में बड़े देशों के बीच दोबारा युद्ध रोकना। पूरी तरह हासिल हुआ। इसके अलावा सिंगल मार्केट (जहां goods, services, capital और people की free movement होती है) ने यूरोप को दुनिया के सबसे समृद्ध क्षेत्रों में शामिल कर दिया, जहां high living standards और strong social security systems मौजूद हैं। हालांकि, इस सफलता के साथ कुछ बड़ी कमजोरियां भी सामने आईं। खासतौर पर यूरो (single currency) को अपनाना, लेकिन उसके साथ common fiscal policy (shared tax system या treasury) का अभाव, EU की सबसे बड़ी स्ट्रक्चल कमजोरी बन गया। 2008 के फाइनेंशियल क्राइसिस के दौरान कई देशों के पास अपनी करेंसी डीवैल्यू करने का विकल्प नहीं था, जिससे कई अर्थव्यवस्थाएं लंबे समय तक stagnation में फंस गईं। इसके अलावा, EU की हेवी रेगुलेशन के कारण वह अमेरिका और चीन के मुकाबले टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में पीछे रह गया।इसे भी पढ़ें: भारत को गाली देने वाली मुस्लिम MP को संसद से ऐसे उठाकर फेंका, चौंक गए सभीसंघर्ष कर रहे ये देशइटली, ग्रीस, स्पेन, पुर्तगाल इन देशों को यूरोज़ोन संकट के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। अपनी मुद्रा और ब्याज दरों पर नियंत्रण न होने के कारण इन्हें कड़े खर्च कटौती उपाय (मितव्ययिता नीतियां) अपनानी पड़ीं, जिससे अर्थव्यवस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा। ग्रीस की अर्थव्यवस्था तो लगभग 25% तक गिर गई थी, जबकि इटली आज भी धीमी आर्थिक वृद्धि और ऊंचे कर्ज से जूझ रहा है।इसे भी पढ़ें: वैश्विक तनाव के बीच भारत की सधी हुई चाल, ऑस्ट्रिया के साथ सहयोग बढ़ाकर मोदी ने किया कमालफ्रांस (मध्य स्थिति)फ्रांस यूरोपीय संघ में राजनीतिक रूप से मजबूत स्थिति में है और जर्मनी के साथ मिलकर नीतियां तय करता है। लेकिन आर्थिक रूप से यह मिला-जुला प्रदर्शन दिखाता है—यहां उच्च सरकारी खर्च, बेरोजगारी और बढ़ता कर्ज जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।विन-विन सिचुएशन में कौनजर्मनी और नीदरलैंड, ऑस्ट्रिया, स्वीडन, डेनमार्कजर्मनी को यूरोपीय संघ और यूरोज़ोन का सबसे बड़ा आर्थिक लाभार्थी माना जाता है। यूरो की कीमत सभी सदस्य देशों के औसत पर आधारित होती है, जिससे यह जर्मनी के लिए अपेक्षाकृत कम आंकी गई रहती है। इसका फायदा यह होता है कि जर्मनी के निर्यात वैश्विक बाजार में सस्ते पड़ते हैं, जिससे उसे लगातार व्यापार अधिशेष मिलता है। 2004 के बाद यूरोपीय संघ में शामिल हुए इन देशों को सबसे ज्यादा फायदा संरचनात्मक फंड (विकास के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता) से मिला। इन पैसों से बुनियादी ढांचे का विकास हुआ और अर्थव्यवस्थाएं तेजी से बढ़ीं। पोलैंड इसका बड़ा उदाहरण है, जहां आर्थिक वृद्धि दर तेजी से पश्चिमी यूरोप के करीब पहुंची।इसे भी पढ़ें: European Union History Part 1 | 1945 के बाद बर्बाद यूरोप कैसे बना दुनिया का इकोनॉमिक पावरहाउस|Teh Tak ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:48:18 +0530</pubDate>
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<title>Iran का गुप्त हथियार! &amp;apos;दुश्मनों को पड़ सकता है दिल का दौरा&amp;apos;, Donald Trump के कांपने वाले हैं हाड़</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में तनाव एक नए चरम पर पहुँच गया है। ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए एक ऐसे &quot;गुप्त हथियार&quot; का संकेत दिया है, जो उसके दावों के अनुसार अमेरिका और इज़राइल जैसे दुश्मनों को &quot;दिल का दौरा&quot; (Heart Attack) दे सकता है। यह बयान तब आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकराते हुए उसकी तेल संपदा को नष्ट करने की चेतावनी दी है।  यह चेतावनी तब आई जब अमेरिका ने ईरान द्वारा दिए गए तीन सूत्री प्रस्ताव को खारिज कर दिया और कहा कि मध्य पूर्व देश की तेल पाइपलाइनें जल्द ही &quot;विस्फोट&quot; हो सकती हैं। ईरान के नौसेना कमांडर रियर एडमिरल शाहराम ईरानी ने कहा कि मध्य पूर्व का देश &quot;बहुत जल्द&quot; अपने दुश्मनों का सामना एक ऐसे हथियार से करेगा जिससे &quot;वह बहुत डरता है&quot;। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान की सेना को पूरी तरह से नष्ट करने के उनके बार-बार के दावों का मजाक उड़ाते हुए, ईरानी ने कहा कि तेहरान के दुश्मन गलत हैं अगर वे सोचते हैं कि वे संघर्ष में वांछित परिणाम प्राप्त करेंगे।ईरानी मीडिया ने ईरानी के हवाले से कहा, &quot;उन्होंने कम से कम समय में ईरान के खिलाफ अकारण आक्रामकता के अपने नवीनतम मुकाबले के माध्यम से अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने की कोशिश की थी। यही धारणा अब सैन्य अकादमियों में एक मजाक बन गई है।&quot;ट्रंप बार-बार जीत के दावे कर रहे हैंईरानी कमांडर की टिप्पणी तब आई है जब ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि मध्य पूर्व देश की सेना पूरी तरह से नष्ट हो गई है। ट्रंप ने ईरान की ओर से भेजे गए तीन सूत्री प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया है और कहा है कि इस्लामिक रिपब्लिक को कभी भी परमाणु हथियार रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती.इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया था कि अमेरिकी सेना की नाकाबंदी के कारण ईरान की गैस पाइपलाइन और तेल बुनियादी ढांचे में जल्द ही विस्फोट हो जाएगा। बुधवार को उन्होंने दोहराया कि जब तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं हो जाता, तब तक नाकाबंदी जारी रहेगी।ईरान ने तेल के दामों में बढ़ोतरी की चेतावनी दी हैहालाँकि, ईरान ने ट्रम्प की &#039;विस्फोट&#039; चेतावनी का मज़ाक उड़ाया है और बताया है कि उनकी चेतावनी के बावजूद किसी भी तेल कुएं में विस्फोट नहीं हुआ। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में, ईरान संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर ग़ालिबफ ने यह भी चेतावनी दी कि ट्रम्प प्रशासन को ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट से मिल रही &quot;कचरा सलाह&quot; के कारण कच्चे तेल की दरें जल्द ही 140 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।उन्होंने पोस्ट किया, &quot;3 दिन हो गए, किसी भी कुएं में विस्फोट नहीं हुआ। हम 30 तक विस्तार कर सकते हैं और यहां कुएं का लाइवस्ट्रीम कर सकते हैं। अमेरिकी प्रशासन को बेसेंट जैसे लोगों से इस तरह की बेकार सलाह मिलती है, जो नाकाबंदी सिद्धांत और क्रैंक ऑयल को 120 डॉलर से अधिक तक बढ़ा देते हैं। अगला पड़ाव: 140। मुद्दा सिद्धांत नहीं है, यह मानसिकता है।&quot; ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:48:17 +0530</pubDate>
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<title>उधारी का &amp;apos;NATO&amp;apos; और खाली कटोरा, अमेरिका&#45;ईरान संघर्ष की तपिश Pakistan को खा रही हैं, आयात बिल ने बढ़ाई Shehbaz Sharif की चिंता</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो महीनों से जारी संघर्ष ने पाकिस्तान के &#039;आर्थिक सुधार&#039; के पहियों को धीमा कर दिया है। संघीय कैबिनेट की बैठक को संबोधित करते हुए प्रधान मंत्री ने देश की खस्ताहाल माली हालत और अंतरराष्ट्रीय दबावों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सऊदी अरब के समर्थन से प्रभाव झेलने में सक्षम था, जिसके साथ उनके देश का नाटो जैसा रक्षा समझौता है। इसे भी पढ़ें: India-Ecuador Relations | भारत-इक्वाडोर संबंधों में नई ऊर्जा! विदेश मंत्री एस जयशंकर और गैब्रिएला सोमरफेल्ड के बीच अहम द्विपक्षीय वार्ताबुधवार को संघीय कैबिनेट की बैठक में बोलते हुए, पाकिस्तानी प्रधान मंत्री ने कहा कि वह प्रार्थना करते हैं कि संघर्ष समाप्त हो, क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता आए। शरीफ ने कहा कि रोजमर्रा की स्थिति पर भी एक टास्क फोर्स द्वारा नजर रखी जा रही है और इस चुनौती से निपटने और सभी शत्रुताओं को समाप्त करने के लिए सभी प्रयासों की जरूरत है।अरब न्यूज़ के हवाले से शरीफ ने कहा, &quot;अल्लाह सर्वशक्तिमान ने हमारी अर्थव्यवस्था को व्यापक स्तर पर रखा था, और हम संख्या में बढ़ रहे थे, लेकिन इस अचानक युद्ध के परिणामस्वरूप, पिछले दो वर्षों में किए गए हमारे प्रयास कम हो गए हैं। आपका और मेरा इसमें कोई योगदान नहीं है।&quot;पाकिस्तान का बढ़ा आयात बिलशरीफ ने बुधवार को कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष के परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे पाकिस्तान का आयात बिल 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले के 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है। स्थिति को पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण बताते हुए शरीफ ने कहा कि उनकी सरकार ने देश में ईंधन की कमी से बचने के लिए कदम उठाए हैं। इसे भी पढ़ें: US Iran War | &#039;ठूंस-ठूंसकर भरे सूअर की तरह दम घुट रहा है&#039;, Donald Trump ने परमाणु समझौते तक ईरान की नाकेबंदी जारी रखने की धमकी दीअरब न्यूज़ ने पाकिस्तानी प्रधान मंत्री के हवाले से कहा, &quot;हमारे 3.5 अरब डॉलर के द्विपक्षीय बकाया ऋण का भुगतान कर दिया गया है।&quot; &quot;हमारे संघीय भंडार भी उसी स्तर पर हैं... इसके लिए, हम अपने सम्मानित भाई, [क्राउन प्रिंस] मोहम्मद बिन सलमान और सऊदी अरब के राजा के बहुत आभारी हैं।&quot;शांति संधि के लिए पाकिस्तान का प्रयासयुद्ध की शुरुआत के बाद से, पाकिस्तान दोनों पक्षों पर सभी शत्रुताएं बंद करने के लिए दबाव डाल रहा है। इसने मध्यस्थ के रूप में कार्य करते हुए दोनों पक्षों के नेताओं, विशेष रूप से ईरानियों के साथ भी काम किया है। पहले दौर की बातचीत भी इस्लामाबाद में हुई थी और दूसरे दौर की बातचीत भी वहीं होने की संभावना है.हालाँकि, एक अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि वाशिंगटन को मध्यस्थों के रूप में पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं करना चाहिए क्योंकि उसके सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर शायद ईरान के हितों की रक्षा कर रहे हैं। इसी तरह, एक ईरानी सांसद ने भी कहा है कि पाकिस्तान अमेरिका-ईरान वार्ता के लिए &quot;उपयुक्त मध्यस्थ&quot; नहीं है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:48:17 +0530</pubDate>
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<title>दक्षिण सूडान: आधी से अधिक आबादी गम्भीर भूख संकट की चपेट में</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिण सूडान में टकराव और विस्थापन के कारण भूख संकट और गहरा रहा है. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने मंगलवार को जारी एक संयुक्त वक्तव्य में कहा कि देश में 78 लाख लोग गम्भीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, जबकि 22 लाख बच्चे तीव्र कुपोषण से पीड़ित हैं. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:47:39 +0530</pubDate>
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<title>तीन पीढ़ियाँ, एक बदलाव: परिवार नियोजन और अधिकार</title>
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<description><![CDATA[ तकनीक और नवाचार ने दुनिया भर में लोगों के जीवन को गहराई से बदला है. सूचना प्रौद्योगिकी ने अभिव्यक्ति, कामकाज और विचारों के आदान-प्रदान के नए रास्ते खोले हैं, जबकि स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रगति ने जीवन बचाए हैं व लोगों की उम्र बढ़ाई है. लेकिन मानवाधिकारों, विकास और आबादी पर सबसे गहरा असर डालने वाले साधनों में से एक, कोई नई तकनीक नहीं बल्कि - वह परिवार नियोजन है, जो लोगों को अपने शरीर, स्वास्थ्य एवं भविष्य के बारे में निर्णय लेने का अधिकार और विकल्प देता है. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:47:36 +0530</pubDate>
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<title>ईरान: असहमति के कड़े दमन की निन्दा, मानवाधिकारों के सम्मान का आग्रह</title>
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<description><![CDATA[ मानवाधिकार मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी ने चेतावनी दी है कि ईरान में आम नागरिकों के अधिकारों को कठोर, बर्बर ढंग से कुचला जा रहा है, और असहमति के स्वरों को दबाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क़ानूनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने देश में हज़ारों लोगों की गिरफ़्तारियों और कम से कम 21 लोगों को मृत्युदंड दिए जाने की निन्दा की है. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:47:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Iran US War Updates | Donald Trump की नई चाल: होर्मुज़ जलडमरूमध्य की लंबी घेराबंदी कर ईरान को आर्थिक रूप से तोड़ने की रणनीति</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक नए और बेहद संवेदनशील स्तर पर पहुँच गया है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को घुटनों पर लाने के लिए एक नई और आक्रामक समुद्री रणनीति पर विचार कर रहे हैं। इस रणनीति का मुख्य केंद्र दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) है। खबर है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ लंबे समय तक समुद्री दबाव बनाने की मुहिम की तैयारी कर रहा है, जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में लंबी घेराबंदी की संभावना भी शामिल है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों से ईरान के समुद्री व्यापार मार्गों को निशाना बनाने वाली एक लंबी अवधि की रणनीति के लिए तैयार रहने को कहा है।इसे भी पढ़ें: West Bengal Election 2026 | Mahua Moitra की बढ़ी मुश्किलें, IPS अजय पाल शर्मा की &#039;मानहानि&#039; और AI वीडियो मामले में FIR दर्ज इस योजना को, कम समय के उपायों से हटकर, एक ज़्यादा टिकाऊ और लगातार चलने वाले तरीके की ओर एक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। उम्मीद है कि इससे तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा, क्योंकि उसके लिए ज़रूरी समुद्री मार्गों तक पहुंच सीमित हो जाएगी और ईरान के मुख्य बंदरगाहों से जुड़ा व्यापार भी बाधित होगा।खास बात यह है कि कहा जा रहा है कि ईरान ने पाकिस्तान के ज़रिए अमेरिका को एक प्रस्ताव भेजा है। Axios की रिपोर्ट के अनुसार, जिसमें एक अमेरिकी अधिकारी का हवाला दिया गया है, इस प्रस्ताव में सुझाव दिया गया था कि पहले समुद्री गतिविधियों पर लगी पाबंदियों में ढील दी जाए और सामान्य समुद्री जहाज़ों का आवागमन फिर से शुरू किया जाए; इसके बाद ही परमाणु हथियारों से जुड़ी बातचीत समेत अन्य बड़े मुद्दों पर चर्चा की जाए। हालांकि, वॉशिंगटन इस समय इस सुझाव को मानने के लिए तैयार नहीं है।किंग चार्ल्स III से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे विवाद का ज़िक्र कियाट्रंप ने किंग चार्ल्स III से अपनी मुलाकात के दौरान ईरान के साथ चल रहे विवाद का भी ज़िक्र किया। किंग चार्ल्स III ने व्हाइट हाउस में ट्रंप और उनकी पत्नी, फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप द्वारा आयोजित राजकीय भोज में हिस्सा लिया था। भोज के दौरान दिए जा रहे अपने भाषण को बीच में रोकते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान को &quot;सैन्य रूप से हरा दिया है।&quot; उन्होंने आगे कहा कि किंग चार्ल्स III भी इस बात से &quot;मुझसे भी ज़्यादा सहमत हैं&quot; कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए।इसे भी पढ़ें: West Bengal Elections 2026 | TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने IPS अजय पाल शर्मा को दी खुली धमकी- तू सिंघम है तो मैं पुष्पा... ट्रंप का दावा: ईरान ने कहा है कि वह &quot;पूरी तरह से ढहने की कगार पर है&quot;ट्रंप ने कहा है कि हाल ही में ईरान ने अमेरिका को बताया है कि वह &quot;पूरी तरह से ढहने की कगार पर है।&quot; उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए यह बात कही। अपने बयान में ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को &quot;जितनी जल्दी हो सके&quot; खोलने की गुज़ारिश की है। उन्होंने कहा कि यह गुज़ारिश ऐसे समय में आई है, जब ईरान अपने नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता को संभालने की कोशिश कर रहा है।ट्रंप ने आगे कहा कि ऐसा लगता है कि ईरान, अमेरिका के साथ संभावित बातचीत को लेकर अपने अंदरूनी मतभेदों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि ईरान के नेतृत्व के बीच मौजूद ये मतभेद आखिरकार सुलझ जाएंगे।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:29:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>होकर रहेगा महायुद्ध!! Donald Trump ने ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव, होर्मुज़ में नाकेबंदी से थम सकती है दुनिया की रफ्तार</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक &#039;तीन-सूत्रीय&#039; शांति योजना का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि जब तक तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर पहले बात करने को तैयार नहीं होता, तब तक किसी भी समझौते की संभावना कम है। इसे भी पढ़ें: Bank-School Holiday Calendar: मई में छुट्टियों की भरमार, अभी से कर लें अपने काम की Planning, जानें बैंक और स्कूलों कितने दिन बंद रहेंगे अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि यह योजना वाशिंगटन की उस मुख्य मांग को पूरा नहीं करती, जिसमें तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर सबसे पहले बात करने की बात कही गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप तेहरान के इस प्रस्ताव से असंतुष्ट हैं। इस प्रस्ताव में ईरान की परमाणु गतिविधियों पर बातचीत को तब तक के लिए टालने की मांग की गई है, जब तक कि युद्धविराम हासिल न हो जाए और समुद्री सुरक्षा, विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े विवाद सुलझ न जाएं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन परमाणु मुद्दे को किसी भी स्थायी समाधान का मुख्य आधार मानता है और इसे व्यापक बातचीत से अलग करने को तैयार नहीं है।शांति वार्ता में आए गतिरोध के बीच, ईरान के तीन-सूत्रीय प्रस्ताव में एक चरणबद्ध दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है: सबसे पहले, ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के युद्ध को समाप्त करना और फिर से शत्रुता न होने की गारंटी हासिल करना; उसके बाद, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना और प्रमुख शिपिंग मार्गों को फिर से खोलना; और अंत में, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन के अधिकारों जैसे विवादास्पद मुद्दों पर चर्चा करना। इसे भी पढ़ें: &#039;कांग्रेस है महिला-विरोधी&#039;, केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू का दावा- Shashi Tharoor ने निजी बातचीत में स्वीकारी पार्टी की सच्चाईट्रंप और उनके सलाहकारों के बीच हुई बैठक से अवगत एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ने इस क्रम को अस्वीकार कर दिया और इस बात पर जोर दिया कि परमाणु चिंताओं को शुरुआत से ही हल किया जाना चाहिए। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी इसी रुख का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी समझौते में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके।सोमवार को फॉक्स न्यूज़ को दिए एक साक्षात्कार में रूबियो ने कहा, &quot;हम उन्हें ऐसा करने की छूट नहीं दे सकते।&quot; उन्होंने कहा, &quot;हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जो भी सौदा या समझौता हो, वह उन्हें किसी भी समय परमाणु हथियार बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने से पूरी तरह रोके।&quot;डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, ईरान के साथ युद्ध छेड़ने का एक मुख्य कारण उसे परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता से वंचित करना था।इस नवीनतम गतिरोध ने कूटनीति की संभावनाओं को और भी धूमिल कर दिया है। इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता को तब रद्द कर दिया गया, जब डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जेरेड कुशनर की यात्रा को रद्द कर दिया। इसके बाद, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची पाकिस्तान, ओमान और रूस की यात्रा पर गए, जहाँ उन्होंने तेहरान के लंबे समय से सहयोगी रहे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। चर्चाओं के बीच, संयुक्त राष्ट्र परमाणु अप्रसार संधि (NPT) समीक्षा सम्मेलन की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर तीखी बहस हुई। यह विवाद ईरान के 34 उपाध्यक्षों में से एक के तौर पर चुने जाने पर केंद्रित था, जिसे गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) का समर्थन प्राप्त था।ऑस्ट्रेलिया, UAE, UK, फ्रांस और जर्मनी के समर्थन से अमेरिका ने इस कदम का विरोध किया। वाशिंगटन ने कहा कि वह &quot;गहराई से स्तब्ध&quot; है कि जिस देश पर उसने संधि के प्रति &quot;अवमानना&quot; दिखाने का आरोप लगाया था, उसे इतने ऊंचे पद पर बिठाया गया। रूस ने ईरान को अलग-थलग करने के कदम का विरोध किया, जबकि ईरान के दूत रज़ा नजाफ़ी ने इस आलोचना को &quot;बेबुनियाद और राजनीतिक रूप से प्रेरित&quot; बताकर खारिज कर दिया।इस बीच, बहरीन के नेतृत्व में जारी एक संयुक्त बयान में दर्जनों देशों ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खोलने की अपनी मांग दोहराई। ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिका द्वारा अपने तेल शिपमेंट को ज़ब्त करने की कार्रवाई को &quot;समुद्री डकैती&quot; करार देते हुए उसकी निंदा की है। साथ ही, उसने संकेत दिया है कि यदि वाशिंगटन नाकाबंदी हटा लेता है और युद्ध समाप्त कर देता है, तो वह इस जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ ढीली कर सकता है।खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव वैश्विक बाजारों को लगातार प्रभावित कर रहा है। तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं; ब्रेंट क्रूड में भारी उछाल आया है, क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य—जिससे होकर दुनिया के कुल तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुज़रता है—में टैंकरों की आवाजाही बुरी तरह बाधित है। जहाज़ों की आवाजाही पर नज़र रखने वाले आंकड़ों से पता चलता है कि हाल के दिनों में इस जलडमरूमध्य से होकर केवल मुट्ठी भर जहाज़ ही गुज़र पाए हैं, जबकि संघर्ष शुरू होने से पहले यहां रोज़ाना 100 से अधिक जहाज़ गुज़रते थे। अमेरिका द्वारा लगाई गई नाकाबंदी के कारण ईरान से जुड़े कई टैंकरों को वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:49 +0530</pubDate>
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<title>Strait of Hormuz पर US की नाकेबंदी के बावजूद मुंबई पहुँच रहे हैं तेल टैंकर: जानिए क्या है वो &amp;apos;सीक्रेट&amp;apos; रास्ता</title>
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<description><![CDATA[ ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), को रणक्षेत्र में बदल दिया है। अमेरिका ने इस रास्ते की पूरी तरह नाकेबंदी करने का दावा किया था, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अमेरिकी नौसेना की तैनाती के बावजूद, दर्जनों तेल और एलपीजी (LPG) टैंकर चुपके से मुंबई और भारत के अन्य बंदरगाहों तक पहुँचने में सफल रहे हैं।नौसेना की ताकत बनाम समुद्री भूगोलईरान के झुकने से इनकार के बाद अमेरिकी नौसेना को ओमान की खाड़ी में तैनात किया गया था। उनका उद्देश्य इस रणनीतिक रास्ते से होने वाले ईरानी व्यापार को पूरी तरह रोकना था। हालाँकि, जानकारों का कहना है कि नौसेना की शक्ति की भी अपनी सीमाएं हैं। हाल ही में कतर से 97,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आया भारतीय टैंकर &#039;देश गरिमा&#039; इसका जीता-जागता उदाहरण है। ईरानी हमलों के खतरे के बावजूद यह जहाज सुरक्षित मुंबई पहुँचा। खबरों के मुताबिक, 13 अप्रैल को नाकेबंदी शुरू होने के बाद से अब तक 30 से ज्यादा टैंकर इस रास्ते को पार कर चुके हैं। &#039;द फाइनेंशियल टाइम्स&#039; की रिपोर्ट कहती है कि कम से कम 34 टैंकरों ने अमेरिका की नजरों से बचकर नाकेबंदी को चकमा दिया है।कैसे बच रहे हैं ये जहाज? दो संभावित रास्तों का विश्लेषणमैक्रो रणनीतिकार जिम बियांको और मारियो नौफल जैसे विशेषज्ञों ने उन संभावित रास्तों की ओर इशारा किया है, जिनका उपयोग भारतीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय जहाज कर रहे हैं: मकरान तट और पाकिस्तान का समुद्री क्षेत्रजहाज ईरान के क्षेत्रीय जल (Territorial Waters) से सटकर चलते हुए सीधे पाकिस्तान के समुद्री क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं। तकनीकी लाभ: अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, अमेरिकी नौसेना किसी दूसरे देश (जैसे पाकिस्तान) के समुद्री क्षेत्र के भीतर जहाजों को नहीं रोक सकती। UNCLOS का नियम: &#039;समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय&#039; (UNCLOS) के तहत हर तटीय देश का नियंत्रण 12 नॉटिकल मील (22 किमी) तक होता है। व्यापारिक जहाजों को यहाँ से &quot;निर्दोष मार्ग&quot; (Innocent Passage) का अधिकार प्राप्त है।चाबहार और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र का सीधा मार्गदूसरा रास्ता ईरान के तट के साथ-साथ चाबहार बंदरगाह तक जाने का है।सीधी रेखा का सफर: चाबहार पहुँचने के बाद जहाज दक्षिण की ओर मुड़कर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में प्रवेश करते हैं और वहां से एक सीधी रेखा में महाराष्ट्र, गुजरात या कर्नाटक के तटों तक पहुँच जाते हैं। कानूनी पेच: अमेरिका की नाकेबंदी मुख्य रूप से ईरान से जुड़े विवादित अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र तक सीमित है। जब तक कोई जहाज वैध व्यापार कर रहा है, तब तक उसे शांतिपूर्ण आवागमन से रोकना अंतरराष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध है।क्या भारत के लिए पाकिस्तान का रास्ता सुरक्षित है?रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद समुद्री व्यापार के नियम थोड़े अलग हैं। रक्षा विशेषज्ञ संदीप उन्नीथन के अनुसार: शांतिपूर्ण पारगमन: भारतीय व्यापारिक जहाजों को पाकिस्तानी जलक्षेत्र से शांतिपूर्वक गुजरने में तकनीकी रूप से कोई रोक नहीं है, बशर्ते वे वहां रुकें नहीं या कोई मछली पकड़ने जैसी गतिविधि न करें।अदृश्य ढाल: अमेरिकी नाकेबंदी अंतरराष्ट्रीय जल में सक्रिय है, ऐसे में किसी देश के क्षेत्रीय जल का उपयोग करना जहाजों के लिए एक &#039;सुरक्षा कवच&#039; की तरह काम कर रहा है।वर्तमान स्थितिविदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, वर्तमान में होरमुज़ जलडमरूमध्य क्षेत्र में 14 भारतीय जहाज मौजूद हैं। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी राजनयिक और तकनीकी विकल्पों का उपयोग कर रहा है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि कैसे कूटनीति और समुद्री कानूनों की समझ, युद्ध जैसी स्थितियों में भी व्यापार की जीवन रेखा को बनाए रख सकती है।क्या भारत के लिए पाकिस्तानी जलक्षेत्र से गुज़रना संभव है?हालांकि फ़ारसी खाड़ी से भारत तक पहुँचने के लिए कम से कम दो रास्ते हैं, लेकिन यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या भारतीय जहाज़ों को पाकिस्तानी जलक्षेत्र में प्रवेश की अनुमति भी है या नहीं।समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCLOS) के तहत, हर तटीय देश का अपने 12 नॉटिकल मील (22 किमी) तक के जलक्षेत्र पर नियंत्रण होता है। विदेशी व्यापारिक जहाज़ों को इन जलक्षेत्रों से &quot;निर्दोष मार्ग&quot; (innocent passage) का अधिकार प्राप्त होता है। इसका अर्थ है कि वे बिना रुके, व्यापार किए, मछली पकड़े या तटीय देश के लिए कोई खतरा पैदा किए बिना शांतिपूर्वक यात्रा कर सकते हैं। जब तक जहाज़ केवल वहाँ से गुज़र रहा होता है, तब तक तटीय देश को आमतौर पर उसे रोकने की अनुमति नहीं होती है। इसे भी पढ़ें: Stock Market Opening | Sensex 200 से ज़्यादा अंक गिरा, Nifty 24,050 के करीब, SBIN सबसे ज़्यादा नुकसान मेंरक्षा विशेषज्ञ और वरिष्ठ पत्रकार संदीप उन्नीथन ने समझाया, &quot;पाकिस्तानी व्यापारिक जहाज़ों के लिए भारतीय जलक्षेत्र से गुज़रने में कोई समस्या नहीं है, और इसी तरह भारतीय जहाज़ों के लिए भी पाकिस्तानी जलक्षेत्र से गुज़रने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। यहाँ तक कि युद्धपोत भी इन जलक्षेत्रों से गुज़र सकते हैं, लेकिन उन्हें संबंधित देश से अनुमति लेनी पड़ती है, जो उन्हें शायद न मिले।&quot;भारतीय नौसेना के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात पर एक तकनीकी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया कि भारतीय जहाज़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकेबंदी से किस प्रकार बचते हुए आगे बढ़ सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Punjab Railway Track Blast | पटियाला में रेलवे ट्रैक पर धमाका, ट्रैक क्षतिग्रस्त और एक अज्ञात शव बरामदपूर्व कमोडोर के अनुसार, अमेरिकी नाकेबंदी मुख्य रूप से उन जहाज़ों को निशाना बनाती है जो ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश कर रहे होते हैं या वहाँ से बाहर निकल रहे होते हैं। भारतीय ध्वज वाले टैंकरों या भारत के लिए माल ले जाने वाले जहाज़ों सहित तटस्थ जहाज़, इस न ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:49 +0530</pubDate>
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<title>अफगानी छात्रों पर पाकिस्तान ने गिराए बम, भयंकर भड़का तालिबान</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच फिर से तनाव की खबर है। पाकिस्तान ने एक बार फिर से अफगानिस्तान के भीतर हमलों को अंजाम दिया है। आम लोगों को पाकिस्तान तो निशाना बनाता ही था। लेकिन इस बार पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर एक यूनिवर्सिटी पर हमला किया है। दरअसल अफगानिस्तान की ओर से यह बड़ा आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान की सेना ने कुनार प्रांत में मिसाइल और मोटार से हमले किए हैं। जिसमें कम से कम अफगानी दावे के अनुसार सात लोगों की मौत हो गई है और 80 से ज्यादा लोग घायल हैं। इन घायलों में महिलाएं, बच्चे और यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे छात्र और साथ ही में प्रोफेसर्स तक शामिल बताए जा रहे हैं। इस घटना ने पूरे इलाके में डर और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया। अफगान अधिकारियों के मुताबिक यह हमला कुनार प्रांत की राजधानी असदाबाद में हुआ है। जहां पर सैयद जमालुद्दीन अफगानी यूनिवर्सिटी को निशाना बनाया गया। हमले में यूनिवर्सिटी परिसर को भारी नुकसान पहुंचा है और करीब 30 छात्र और प्रोफेसर्स घायल बताए जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz पर US की नाकेबंदी के बावजूद मुंबई पहुँच रहे हैं तेल टैंकर: जानिए क्या है वो &#039;सीक्रेट&#039; रास्ताअफगान सरकार ने इस हमले को युद्ध अपराध बताया है और इसे पाकिस्तान की बर्बर कारवाई करार दिया है। उनका कहना है कि आम नागरिकों और शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाना किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस हमले को लेकर अफगानिस्तान सरकार के डेपुटी स्पोक्सपर्सन ने पोस्ट साझा करते हुए पाकिस्तान पर आरोप लगाते हुए लिखा आज 27 अप्रैल 2024 को पाकिस्तान की सैन्य सरकार ने एक बार फिर कुनारपांत की राजधानी असफाबाद और मनगोई जिले के कई इलाकों में मोटार और रॉकेट की गोलेबारी की है। इन हमलों की शुरुआत दोपहर 2:00 बजे हुई। इस दौरान आम लोगों के घरों को जिनमें सैयद जमालुद्दीन अफगान यूनिवर्सिटी भी शामिल है। जानबूझकर निशाना बनाया गया। इस हमले में 70 आम नागरिक घायल हुए हैं। जिनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। घायलों में 30 छात्र भी हैं। जबकि चार लोगों की मौत हो गई है। हम पाकिस्तान की सैन्य सरकार की इन कारवाइयों की कड़ी शब्दों में निंदा करते हैं। आम लोगों और शैक्षणिक संस्थान को जानबूझकर निशाना बनाना एक गंभीर और माफ ना करने वाला योद्धा अपराध है। इसे भी पढ़ें: UAE में बैठे थे अजीत डोभाल, इजराइल पर होश उड़ाने वाला ऐलान!यह एक बेहद क्रूर और उकसाने वाली कारवाई है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के इन सभी आरोपों को पूरी तरीके से खारिज कर दिया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय का कहना है कि उनकी सेना केवल आतंकी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई करती है और किसी यूनिवर्सिटी या नागरिक क्षेत्र को निशाना नहीं बनाया गया। इस्लामाबाद ने उल्टा अफगानी मीडिया को फेक न्यूज़ फैलाने का आरोप लगाते हुए कई सारी बातें कह दी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह सब आतंकी संगठनों को बचाने के लिए किया जा रहा है। पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान पर आरोप लगाता आ रहा है कि अफगानिस्तान में तहरीक तालिबान जैसे आतंकी संगठन को शरण मिलती है जो पाकिस्तान में हमले करते हैं। वहीं अफगानिस्तान ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए हर बार यही कहा है कि पाकिस्तान अपने अंदरूनी मामलों को ना सुलझा पाने का ठीकड़ा अफगानिस्तान के ऊपर फोड़ता है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:48 +0530</pubDate>
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<title>हिज्जबुल्ला अड़ गया, बड़ा हमला कभी भी, दे दिया अल्टीमेटम</title>
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<description><![CDATA[ हिजबुल्ला ने लेबनान और इजराइल के बीच होने वाले डायरेक्ट नेगोशिएशंस को पूरी तरह ठुकरा दिया है। इसे लेकर 27 अप्रैल को हिजबुल्ला चीफ नईम कासिम ने एक रिटन मैसेज जारी किया। कहा इजराइल का सामना करना जारी रहेगा। इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसी एफपी की रिपोर्ट के मुताबिक हिजबुल्ला के लीडर नईम कासिम ने लेबन और इजराइल के बीच के प्रपोज्ड सीधी बातचीत यानी डायरेक्ट नेगोशिएशंस को खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे एक गंभीर पाप बताया। साथ ही कहा कि इससे लेबन डीस्टेबलाइज़ हो जाएगा, अस्थिर हो जाएगा। दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों में लेबन और इजराइल के अमेरिका में तैनात राजदूतों के बीच वाशिंगटन में दो मीटिंग्स हुई। यानी लेबनान के राजदूत और इजराइल के राजदूत के बीच अमेरिका के वाशिंगटन में मीटिंग हुई। ये कई दशकों में इस तरह की पहली बातचीत थी। पहली मीटिंग के बाद इज़राइल हिजबुल्ला वॉर में एक अस्थाई युद्ध विराम यानी टेंपरेरी ट्रूस हुआ। इसे भी पढ़ें: America दबाव बनाने से बाज नहीं आ रहा, Iran को Donald Trump के बयानों पर पलटवार करने में मजा आ रहाबेरूत जो लेबनान की राजधानी है, वह इसके बाद इजराइल के साथ पीस डील के लिए डायरेक्ट नेगोशिएशंस की तैयारी कर रहा था। यह बड़ा कदम इसलिए हो जाता है क्योंकि इजराइल और लेबनान दोनों ही देशों के बीच 1948 से लगातार संघर्ष चल रहा है। ऑफिशियली देखें तो तभी से दोनों में दुश्मनी बरकरार है। अभी भी इजराइल और यूएस ने मिलकर जब ईरान के सुप्रीम लीडर और शिया धर्म गुरु आयतुल्लाह अली खमनेई की हत्या की तो इसी के बदले में हिजबुल्लाह ने इजराइल पर स्ट्र्राइक्स कर दी। क्योंकि हिज़बुल्ला भी एक शिया मेजॉरिटी वाला संगठन है। जिसके बाद 2 मार्च से इज़राइल और हिज़बुल्ला के बीच लगातार जंग जारी है। 27 अप्रैल को भी इज़राइल ने लेबनॉन में मौजूद हिजबुल्ला इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए हैं। हिज़बुल्लाह अपना मिशन यही बताता है कि वो लेबनॉन में इजराइली इन्वज़न के खिलाफ रेजिस्टेंस कर रहा है।  हिज़बुल्लाह का जन्म भी 1982 में लेबनान पर हुए बड़े लेवल के इजराइली इन्वज़ के खिलाफ ही हुआ था। लेकिन इजराइल के साथ हिजबुल्ला की इस जंग को रोकने के लिए लेबन सरकार ने हिजबुल्लाह को डिसआर्म करने का फैसला लिया।  हिजबुल्ला के हथियार और उसकी मिलिट्री ताकत को खत्म करने का फैसला लिया। इसी कॉन्टेक्स्ट में हिजबुल्ला के लीडर नईम कासिम ने एक मैसेज जारी किया और इस तरह के डायरेक्ट नेगोशिएशंस का विरोध किया। इसे भी पढ़ें: UAE में बैठे थे अजीत डोभाल, इजराइल पर होश उड़ाने वाला ऐलान!नईम कासिम ने कहा कि कुर्बानी, इज्जत और दुश्मन की हार के इस माहौल में लेबनान की हुकूमत ने एक ऐसा फैसला लिया है जो अपमानजनक है। मुफ्त में दिया गया है और जिसकी कोई जरूरत ही नहीं थी। इसकी इकलौती वजह है बिना किसी बदले के सरेंडर। ऐसा सरेंडर जो बकरी की छींक के बराबर भी कीमत नहीं रखता। हम लेबनान हुकूमत और इजराइल के बीच हो रही आमने-सामने की सीधी बातचीत को पूरी तरह और साफ तौर पर खारिज करते हैं। लेबनान की सत्ता में बैठे लोग यह अच्छी तरह समझ लें। उनका यह रवैया ना लेबनान के काम आएगा ना उनके खुद के काम आएगा। ये उनकी जिम्मेदारी है कि वो अपनी इन गंभीर गलतियों से पीछे हटे जो लेबनान को लगातार अस्थिरता के चक्र में धकेल रही हैं। उनकी जिम्मेदारी है कि वो इजराइली दुश्मन के साथ डायरेक्ट बातचीत को रोके और इनडायरेक्ट बातचीत का तरीका अपनाएं। उनकी जिम्मेदारी है कि वह 2 मार्च के उस सरकारी फैसले को रद्द करें जिसने रेजिस्टेंस को और रेजिस्टेंस करने वालों को अपराधी घोषित कर दिया था। इस फैसले ने लेबनान के आधे से ज्यादा आबादी को ही मुजरिम बना दिया। हम लेबनान और उसके लोगों के डिफेंस के लिए अपना रेजिस्टेंस जारी रखेंगे। हम 2 मार्च से पहले की स्थिति में वापस नहीं आएंगे। हम इजराइली आक्रामकता और हमलों का जवाब देंगे और उसका डटकर सामना करेंगे। दुश्मन चाहे कितनी भी धमकियां दें, हम पीछे नहीं हटेंगे। हम झुकेंगे नहीं और हम हारेंगे नहीं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:47 +0530</pubDate>
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<title>Prabhasakshi NewsRoom: एक तरफ शांति वार्ता की &amp;apos;दलाली&amp;apos; दूसरी तरफ Afghanistan पर हमला, Pakistan का दोहरा चरित्र फिर बेनकाब</title>
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<description><![CDATA[ ईरान और अमेरिका के बीच शांति कराने का दिखावा कर रहे और मध्यस्थता के नाम पर दलाली कर रहे पाकिस्तान की असलियत अब खुलकर सामने आ गई है। पाकिस्तान शांति का कितना बड़ा समर्थक है, यह अफगानिस्तान पर किए गए उसके ताजा हमले से साबित हो गया है। देखा जाये तो दोनों देशों के बीच जो नाजुक युद्धविराम किसी तरह टिका हुआ था, वह अब टूटने की कगार पर है। सोमवार को कुनर प्रांत में हुए भीषण हमलों ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है, जहां तालिबान अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि इस्लामाबाद ने मोर्टार और राकेट दागकर नागरिक इलाकों और सैयद जमालुद्दीन अफगानी विश्वविद्यालय तक को निशाना बनाया, जिसमें कई लोग मारे गए और दर्जनों घायल हो गए। दूसरी ओर पाकिस्तान इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है।तालिबान के उप प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने आरोप लगाया है कि दोपहर करीब दो बजे शुरू हुए हमलों में असदाबाद और मनोगई जिले के कई हिस्सों को निशाना बनाया गया। उनके मुताबिक करीब सत्तर लोग घायल हुए, जिनमें तीस छात्र और कई बच्चे शामिल हैं। देखा जाये तो यह केवल सीमा पार गोलाबारी नहीं बल्कि सीधे नागरिक ढांचे और शिक्षा संस्थानों पर हमला है, जिसे तालिबान ने युद्ध अपराध तक करार दिया है।इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz पर US की नाकेबंदी के बावजूद मुंबई पहुँच रहे हैं तेल टैंकर: जानिए क्या है वो &#039;सीक्रेट&#039; रास्तायह घटनाक्रम इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि यह हमला उस समय हुआ है जब हाल ही में चीन की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता हुई थी। मार्च में ईद के मौके पर सऊदी अरब, तुर्की और कतर की पहल पर एक अस्थायी युद्धविराम लागू किया गया था, जिसने कुछ समय के लिए हिंसा पर लगाम लगाई थी। लेकिन अब यह साफ दिख रहा है कि वह युद्धविराम केवल कागजी साबित हो रहा है। हम आपको याद दिला दें कि पिछले साल अक्टूबर से ही दोनों देशों के रिश्ते लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। फरवरी में हालात तब और विस्फोटक हो गए थे जब पाकिस्तान वायु सेना ने नंगरहार, पक्तिका और खोस्त में हवाई हमले किए थे। पाकिस्तान का दावा था कि उसने तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान और इस्लामिक स्टेट खुरासान के ठिकानों को निशाना बनाया। जवाब में अफगान बलों ने सीमा चौकियों पर बड़े हमले किए और इसके बाद पाकिस्तान ने गजब लिल हक नामक अभियान छेड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि डूरंड रेखा पर लगातार झड़पें और गोलीबारी आम हो गईं।अब ताजा घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास चरम पर है। पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा मुद्दा तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान है, जो अफगान जमीन से हमले करता है। इस्लामाबाद लगातार काबुल पर आरोप लगाता है कि वह इन उग्रवादियों को पनाह देता है। वहीं अफगानिस्तान पलटवार करते हुए कहता है कि पाकिस्तान खुद उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करता है और शत्रुतापूर्ण तत्वों को बढ़ावा देता है।रणनीतिक नजरिए से देखें तो यह टकराव केवल सीमा विवाद नहीं है, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया और मध्य एशिया की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा है। डूरंड रेखा पर बढ़ती हिंसा व्यापार मार्गों को प्रभावित कर रही है, जिससे आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ रही हैं। सीमा लंबे समय से बंद जैसी स्थिति में है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग खत्म हो चुका है। सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह संघर्ष धीरे धीरे पूर्ण युद्ध का रूप ले सकता है। फरवरी में पाकिस्तान ने काबुल तक हवाई हमले कर यह संकेत दे दिया था कि वह सीमित कार्रवाई तक बंधा नहीं है। दूसरी ओर तालिबान भी अब पहले जैसा कमजोर नहीं है और सीधे जवाब देने की स्थिति में है।इस पूरे घटनाक्रम में बाहरी शक्तियों की भूमिका भी अहम है। चीन, तुर्की, कतर और सऊदी अरब जैसे देश लगातार मध्यस्थता कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोशिशें जमीन पर असर डालने में नाकाम दिख रही हैं। अगर यह तनाव और बढ़ता है तो क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है और यह संघर्ष अंतरराष्ट्रीय दखल को भी आमंत्रित कर सकता है।बहरहाल, अब वक्त आ गया है कि विश्व समुदाय इस पूरे घटनाक्रम को केवल बयानबाजी तक सीमित न रखे बल्कि ठोस दबाव बनाए। पाकिस्तान को यह साफ संदेश दिया जाना चाहिए कि वह अमेरिका और ईरान के बीच शांति कराने का नाटक बंद करे और अपने दोहरे आचरण पर लगाम लगाए। अगर वह सच में क्षेत्रीय स्थिरता चाहता है तो उसे पहले अपने पड़ोसी अफगानिस्तान समेत अन्य देशों के साथ रिश्तों को सुधारना होगा, वरना उसकी यह दोहरी नीति पूरे क्षेत्र को अस्थिरता और संघर्ष की आग में झोंकती रहेगी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:47 +0530</pubDate>
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<title>नहीं लेने तुम्हारे फोकट के हेलीकॉप्टर, बालेन शाह ने ट्रंप के ऑफर को मारी लात!</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेपाल की आर्मी के लिए छह एकदम नए लड़ाकू हेलीकॉप्टर देने का बड़ा ऑफर दिया। लेकिन काठमांडू के गलियारों से खबर आ रही है कि नेपाल इस तोहफे को लेने के मूड में नहीं है। बालेन शाह की बढ़ती लोकप्रियता और वहां की वर्तमान सरकार के रुख ने अमेरिका को सोच में डाल दिया है। इसके पीछे चीन का हाथ है या नेपाल वाकई अब किसी के इशारों पर नाचना नहीं चाहता। किसी की कठपुतली, किसी का मोहरा, किसी का टूल नहीं बनना चाहता। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने नेपाली सेनाएं नेपाली आर्मी को छह बेल हेलीकॉप्टर देने का प्रस्ताव भेजा है। इसे भी पढ़ें: Kathmandu में &#039;जहरीली&#039; हुई हवा, AQI 247 के साथ दुनिया का दूसरा सबसे Polluted शहर बनाअमेरिका का कहना है कि वो नेपाल की आपदा, राहत और सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करना चाहता है। जहां पर यह हेलीकॉप्टर काम में आएंगे जब कभी आपदा आती है तो। लेकिनअंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुछ भी फ्री में नहीं होता है। कोई भी फ्री में नहीं देता है। जानकारों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन इस ऑफर के जरिए नेपाल की सेना पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। नेपाल वो देश है जो चीन और भारत के बीच में आता है। अमेरिका चाहता है कि नेपाल की सेना के पास अमेरिकी साजो सामान हो ताकि भविष्य में उसकी निर्भरता चीन पर कम हो सके। दखल अंदाजी अमेरिके की बढ़ जाए। लेकिन नेपाल इस चुंबकीय ऑफर के पीछे छिपे भू-राजनीतिक यानी जिओपॉलिटिकल खेल को पूरी तरह से समझ चुका है। इसे भी पढ़ें: कोल्ड ड्रिंक से केला तक No Entry, भारत से सामान लाने से अब नेपाल की बालेन शाह सरकार को क्या परेशानी?नेपाल का कहना और मानना है कि हेलीकॉप्टर तो फ्री में मिल जाएंगे। अमेरिका दे देगा लेकिन उनका रखरखाव मेंटेनेंस करेगा। नेपाल की अर्थव्यवस्था पर ये बोझ ना मन जाए। सफेद हाथी ना साबित हो जाए। नेपाल को डर है कि इन हेलीकॉप्टर्स को चलाने का खर्च इतना ज्यादा होगा कि वो सेना का बजट बिगाड़ कर रख देगा। दूसरा यह है कि बालेन शाह और राष्ट्रवादी लहर इस वक्त नेपाल में चरम पर है। काठमांडू के काठमांडू के मेयर बालन शाह की नेपाल फर्स्ट वाली राजनीति ने जो कि अब प्रधानमंत्री बन चुके हैं। वहां के युवाओं में एक अलग राष्ट्रवादी लहर पैदा कर दी है। जनता अब किसी भी देश चाहे वो भारत हो, चीन हो, अमेरिका हो, कोई भी हो। उनके अंधे समर्थन के खिलाफ है। सरकार को डर है कि अमेरिका से सैन्य मदद लेने पर जनता इसे संप्रभुता यानी सोवरनिटी पर खतरा बांध सकती है। नेपाल के काम में अड़ंगा बांध सकती है। दखल अंदाजी बांध सकती है। रिपोर्ट में एक बहुत ही दिलचस्प मोड़ तब आया जब नेपाल ने सिर्फ मना नहीं किया अमेरिका को बल्कि अमेरिका को एक काउंटर प्रपोजल भेजने की तैयारी भी कर दी।इसे भी पढ़ें: भारत के लिए अपने PM पर टूट पड़ा नेपाल! बालेन शाह के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा नेपाल का कहना है कि हमें छोटे हेलीकॉप्टर या इस तरह के हेलीकॉप्टर मत दो। अगर देना ही है तो भारी परिवहन विमान यानी हैवी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जैसे C130 हरकुलिस दो। नेपाल का तर्क बिल्कुल सीधा है। नेपाल एक पहाड़ी देश है जहां अक्सर भूकंप और भूस्खलन जैसी आपदाएं आती हैं। वहां सामान पहुंचाने के लिए छोटे हेलीकॉप्टर पहले से ही काफी हैं। लेकिन बड़े पैमाने पर राहत सामग्री ढोने के लिए बड़े जहाजों की हवाई जहाजों की हेलीकॉप्टर्स की कमी है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:46 +0530</pubDate>
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<title>हमारा हिसाब अलग है, एक के बदले 4 उड़ाएंगे...ईरान ने ट्रंप को समझा दिया गणित</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम लागू होने के बावजूद तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा। हालात ऐसे हैं कि दोनों देशों के बीच अब सीधी सैन्य टकराव के बजाय तीखी जुबानी जंग तेज हो चली है। जिसने पूरे मिडिल ईस्ट खासतौर पर खाली देशों की चिंता बढ़ा दी है। ताजा घटनाक्रम में डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद ईरान ने भी आक्रमक रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाला नहीं है। ईरान के उपराष्ट्रपति इस्माइल साघाव एस फाहानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तीखा संदेश जारी करते हुए खाली देशों को सीधी-सीधी धमकी दे डाली है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगियों द्वारा ईरान के तेल कुओं या बुनियादी ढांचे पर नुकसान पहुंचाया गया तो उसका जवाब कई गुना ज्यादा ताकत से दिया जाएगा। हमारा गणित अलग है। एक तेल कुआ = चार तेल कुएं। इस बयान ने यह संकेत दे दिया है कि ईरान अब केवल बचाव की नहीं बल्कि आक्रामक जवाबी कारवाई की रणनीति पर काम कर रहा है। इसे भी पढ़ें: UAE में बैठे थे अजीत डोभाल, इजराइल पर होश उड़ाने वाला ऐलान!इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने भी तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ईरान युद्ध विराम समझौते को स्वीकार नहीं करता तो अमेरिका उसकी तेल पाइप लाइनों को निशाना बना सकता है। उन्होंने यह तक कहा कि ईरान की तेल व्यवस्था प्राकृतिक और तकनीकी कारणों से भी ध्वस्त हो सकती है। जिसे कई विशेषज्ञों ने परोक्ष धमकी के रूप में देखा। राजनायक मोर्चे पर भी स्थिति ठहरी हुई नजर आ रही है। अब्बास अरागची रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पहुंच चुके हैं। जहां उनकी मुलाकात व्लादमीर पुतिन से प्रस्तावित है। इससे पहले वे पाकिस्तान और ओमान का दौरा कर चुके हैं। लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। इसी बीच ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरानी संसद के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने कहा कि पाकिस्तान निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाने में सक्षम नहीं है और वह अक्सर अमेरिकी हितों के अनुरूप काम करता है। ईरान को ऐसे मध्यस्थ की जरूरत है जो दोनों पक्षों के सामने सच्चाई रखने का साहस रखता हो। दूसरी तरफ क्षेत्रीय तनाव सिर्फ अमेरिका ईरान तक सीमित नहीं है। इजराइल और हिजबुल्ला के बीच भी हालात बिगड़ते दिख रहे हैं। दोनों पक्ष एक दूसरे पर युद्ध विराम उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं। इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में अपने एक सैनिक की मौत की पुष्टि की। जबकि हिजबुल्ला का कहना है कि उसकी कारवाई इजराइल के लगातार हमलों का जवाब थी। इसे भी पढ़ें: America दबाव बनाने से बाज नहीं आ रहा, Iran को Donald Trump के बयानों पर पलटवार करने में मजा आ रहाकुल मिलाकर भले ही युद्ध विराम कागजों पर लागू हो लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि तनाव चरम पर बना हुआ है। ईरान ने साफ संदेश दिया है कि जो भी देश अमेरिका का साथ देगा वह उसका दुश्मन माना जाएगा। ऐसे में खाली क्षेत्र में अस्थिरता और बड़े संघर्ष की आशंका फिर से गहराती हुई नजर आ रही है। [संगीत] धुआंधार और सस्ती ईरानी मिसाइलें जिन्हें बड़े ही प्यार से सोशल मीडिया पर लोग मछली, सांप और न जाने कौन-कौन से नामों से बुलाते हैं। अब उसे लेकर बड़ा कबूलनामा आया है जिसने दुनिया भर को हैरान करके रख दिया है। क्योंकि जिस हथियार को कई लोग हल्के में ले रहे थे वही अब एक बड़े देश की सबसे बड़ी कमजोरी बनता हुआ नजर आ रहा है। एज अ रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि ईरान के मिसाइल ताकत ने इजराइल की रक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है और यह कोई सामान्य दावा नहीं बल्कि इजराइल के ही रक्षा तंत्र से जुड़े अधिकारियों के हवाले से सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि इजराइल के पास इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी कमी हो चुकी है। यानी जितनी तेजी से ईरान मिसाइलें बना रहा है, उतनी तेजी से इजराइल उन्हें रोक नहीं पा रहा। दावा यह भी है कि जहां इजराइल एक इंटरसेप्टर तैयार करता है, वहीं ईरान करीब 10 बैलस्टिक मिसाइलें बना देता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:45 +0530</pubDate>
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<title>ईरान के लिए हर कदम उठाएंगे...Russia पहुंचे अरागची से पुतिन ने क्या वादा कर दिया</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-ईरान सीजफायर के बीच ईरान के फॉरेन मिनिस्टर अब्बास अरागची फिलहाल रूस जा पहुंचे हैं। उसके पहले वह पाकिस्तान और ओमान का भी दौरा कर चुके हैं। रूस जाकर उन्होंने पाकिस्तान के साथ मीटिंग की है।  यहां पर उनका जो मेन मकसद था वो था वहां के प्रेसिडेंट व्लादमीर पुतिन से मुलाकात का और वो मुलाकात हो चुकी है। सैयद अब्बास अराची ने जब रूस पहुंचे तो उन्होंने बताया कि इस्लामाबाद में यानी पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद वहां पर उनकी जो भी बातचीत हुई वो काफी प्रोडक्टिव रही और इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गुड कंसल्टेशंस यानी काफी अच्छा सलाह मशवरा उन्हें वहां से मिला। अमूमन डिप्लोमेटिक एरियाज में इस तरह की भाषा का उपयोग किया जाता है ताकि एक पॉजिटिव संदेश जाए। लेकिन अभी भी अनसर्टेनिटी बनी हुई है क्योंकि इस्लामाबाद टॉक्स का पहला राउंड फेल हो चुका है। सेकंड राउंड होने की बात चल रही थी। बीच में काफी जोर शोर से कयास लगने लगे थे जब डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टीम का अनाउंसमेंट किया था। ये भी खबर आ गई थी कि जेडी वेंस भी एक और दौर की बातचीत के लिए इस्लामाबाद जाएंगे। स्टीव विटकॉफ जेड कुशनर के भी जाने की लगभग खबर तय थी। लेकिन फिर भी सेकंड राउंड की जो बातचीत है वो क्लियर नहीं हो पाई है।इसे भी पढ़ें: Russia ने बेचा 22000 किलोग्राम का बंपर सोना, क्या करेगा भारतलेकर अमेरिका और ईरान में बातचीत का था लेकिन ये हुआ नहीं। इसके बाद पाकिस्तान में ईरान को शायद कुछ क्लियर समझ में नहीं आया कि यहां से हम एक प्रॉपर नेगोशिएशन पा सकते हैं या नहीं पा सकते हैं। तो इस वजह से इसके बाद रूस का जोर शोर से नाम चल रहा था कि मॉस्को हो सकता है कि इस बातचीत को मीडिएट करें। जिसके बाद सही में ये खबर आई कि वो वहां जाने वाले हैं और अब पहुंच भी गए है।  इस मुलाकात के दौरान सबसे दिलचस्प बात यह रही कि पुतिन ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामनेई के लिए विशेष संदेश भेजा और उनके अच्छे स्वास्थ्य और कुशलता की कामना भी की। यह सिर्फ एक शिष्टाचार नहीं बल्कि एक मजबूत कूटनीतिक संकेत है कि मॉस्को और तेहरान के बीच भरोसा और तालमेल लगातार गहराता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ऐसे संदेश अक्सर बड़े रणनीतिक रिश्तों की नींव को दर्शाते हैं। पुतिन ने इस बैठक में साफ तौर पर कहा कि मौजूदा मुश्किल हालात में ईरान के लोग मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में हालात बेहतर होंगे और क्षेत्र में शांति स्थापित होगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। चाहे बात मिडिल ईस्ट की हो या वैश्विक शक्ति संतुलन की। रूस ने यह भी संकेत दिया कि वह केवल अपने हितों तक सीमित नहीं है बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। अगर पिछले कुछ वर्षों पर नजर डालें तो रूस और ईरान के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। चाहे वो ऊर्जा सहयोग हो, सैन्य तालमेल हो या फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक दूसरे का समर्थन हो। दोनों देशों ने कई बार यह दिखाया कि वे एक दूसरे के रणनीतिक साझेदार हैं। खासकर अमेरिका जैसे मंचों पर भी दोनों देशों की सोच कई मुद्दों पर मिलती रही है जो उनके रिश्तों को और मजबूत बनाते हैं। बैठक के दौरान पुतिन ने जिस तरह से ईरान के लोगों की मजबूती और धैर्य की बात की वो भी बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि कठिन हालात में भी ईरान के लोग मजबूती से खड़े रहेंगे और आने वाले समय में हालात बेहतर होंगे। इसे भी पढ़ें: भारत को पृथ्वी की सबसे जादुई जगह ले गया रूस, दुनिया में हड़कंपपाकिस्तान से और यकीनन इसका जो मकसद था वो यही था कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच में कोई बैलेंस बन सके कोई शर्तें जो है समझौता किया जा सके और कोलैप्स ना हो जो भी बातचीत चल रही है ये सारी चीजें थी और उसके बाद जैसा आपने एक और जिक्र किया ओमान का तो रशिया जाने से पहले पाकिस्तान से ओमान पहुंचे वो यानी अब्बास आराची पहले इस्लामाबाद गए देन वो ओमान गए देन वो रशिया गए तो ओमान में हो सकता है बहुत मुमकिन है क्योंकि स्टेट ऑफ़ हॉर्मोस जो है वो सिर्फ ईरान के करीब नहीं है। दूसरी तरफ हां दूसरी तरफ ओमान भी है। तो ओमान और जब स्टेट ऑफ हॉर्मोस को लेकर ईरान ने घोषणा भी की थी कि हम यहां से टोल वसूलेंगे तो उसने वहां पे ओमान को भी इंक्लूड किया था कि हम यानी ईरान और ओमान मिलकर आपस में बांटेंगे इस टोल को दोनों मिलकर लेंगे। हालांकि ओमान ने इससे डिनाई किया था।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:44 +0530</pubDate>
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<title>250 साल की दोस्ती के बीच ईरान विवाद की दरार, वाशिंगटन में शाही मेहमान, क्या King Charles करा पाएंगे स्टार्मर&#45;ट्रंप के रिश्तों में ‘सीजफायर’?</title>
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<description><![CDATA[ करीब ढाई सदियाँ पहले, अमेरिकी उपनिवेशों ने किंग जॉर्ज तृतीय के शासन से नाता तोड़कर आज़ादी की मशाल जलाई थी। अब इतिहास एक रोचक करवट ले रहा है। उसी राजवंश के उत्तराधिकारी, किंग चार्ल्स तृतीय, सोमवार को चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर अमेरिका पहुंचे हैं। यह दौरा एक ओर अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ और दोनों देशों के विशेष संबंध का जश्न मनाने का अवसर है, तो दूसरी ओर ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में उभरते तनाव और कड़ी सुरक्षा के बीच इसकी गंभीरता भी साफ झलकती है। महाराजा चार्ल्स और महारानी कैमिला अपने दिन की शुरुआत अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास व्हाइट हाउस  में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। जब ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला राजकीय यात्रा पर व्हाइट हाउस पहुंचे, तो राष्ट्रपति ट्रम्प ने उस बड़े गड्ढे की ओर इशारा किया जहां कभी &#039;ईस्ट विंग&#039; हुआ करता था। इसके बाद वे अपने मेहमानों को चाय और व्हाइट हाउस के मधुमक्खियों के छत्ते (बीहाइव) के साथ एक निजी मुलाकात के लिए अंदर ले गए। राष्ट्रपति आम तौर पर राजकीय यात्राओं को अमेरिका की संस्कृति और उसकी खासियतें दुनिया के सामने दिखाने के मौके के रूप में इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इस बार बात सिर्फ इतनी नहीं है। यह दौरा उन लोगों के जज़्बे की भी याद दिलाता है, जिन्होंने करीब 250 साल पहले एक राजा के शासन को ठुकराकर अपनी आज़ादी खुद हासिल की थी। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका एवं ब्रिटेन के संबंध चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर के साथ ट्रंप के संबंध उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं।इसे भी पढ़ें: हमारा हिसाब अलग है, एक के बदले 4 उड़ाएंगे...ईरान ने ट्रंप को समझा दिया गणितयह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका एवं ब्रिटेन के संबंध चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर के साथ ट्रंप के संबंध उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। बीते दिनों ही व्हाइट हाउस में पत्रकारों के लिए रखी गई डिनर पार्टी के दौरान हुई गोलीबारी ने देश-दुनिया का ध्यान इस ओर खींच लिया। अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था और राजनेताओं पर होते हिंसक हमले की पुरानी घटनाएं फिर से चर्चा में आने लगी। कुछ समय के लिए यह भी साफ नहीं था कि किंग चार्ल्स वाशिंगटन का दौरा करेंगे या नहीं, लेकिन हालात का जायजा लेने के बाद उन्होंने वाशिंगटन, न्यूयॉर्क और वर्जीनि की अपनी चार दिवसीय यात्रा को जारी रखने का फैसला किया। इधर, अमेरिका में सार्वजनिक हस्तियों के खिलाफ हिंसा की धमकियां तेजी से बढ़ रही हैं। हालात ऐसे हैं कि कई अधिकारी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित होकर सैन्य ठिकानों में रहने लगे हैं। इस बीच, यह यात्रा एक ऐसे राष्ट्रपति की कार्यशैली को भी सामने लाती है, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर कई बार कूटनीति से ज्यादा आक्रामक रुख अपनाते नजर आते हैं।इसे भी पढ़ें: UAE में बैठे थे अजीत डोभाल, इजराइल पर होश उड़ाने वाला ऐलान!राजा और रानी के पहुंचने से कुछ देर पहले, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने ब्रीफिंग रूम में मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रम्प के विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि यह वामपंथी नफरत का माहौल बनाया जा रहा है। सवालों के जवाब देते हुए लेविट ने शनिवार रात की उस घटना पर भी बात की, जब एक बंदूकधारी उस बॉलरूम की ओर बढ़ा, जहां ट्रम्प मीडिया को संबोधित करने वाले थे। उन्होंने इस घटना के लिए पैदा हुई परिस्थितियों पर विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही, उन्होंने इस मामले को लेकर फैल रही शंकाओं और साजिश के दावों पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि उम्मीद है लोग अफवाहों के बजाय सच पर भरोसा करेंगे। शनिवार शाम की गोलीबारी के बाद भी डोनाल्ड ट्रम्प अपेक्षाकृत बेपरवाह नजर आए। सोमवार को वे फिर अपने पुराने अंदाज़ में दिखे। उन्होंने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ अकाउंट पर एक लेट-नाइट टीवी होस्ट पर निशाना साधा और अपने नए प्रोजेक्ट की तस्वीरें साझा कीं, जिसमें लिंकन मेमोरियल के सामने बने रिफ्लेक्टिंग पूल से हंसों की गंदगी साफ कराई जा रही है।इधर, किंग चार्ल्स के सामने एक मुश्किल कूटनीतिक चुनौती भी खड़ी है। उन्हें ट्रम्प और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच बिगड़ते रिश्तों को संभालने की कोशिश करनी है, जो पिछले कुछ महीनों में काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में स्टार्मर ने राष्ट्रपति के साथ तालमेल बनाने की पूरी कोशिश की थी। लेकिन हाल ही में ईरान में अमेरिका-इज़राइल संघर्ष में शामिल न होने के उनके फैसले से ट्रम्प नाराज़ हो गए। राष्ट्रपति ने स्टार्मर को कायर तक कह दिया और ब्रिटिश नौसेना पर भी तंज कसा। वहीं, पेंटागन के एक ताज़ा मेमो ने हालात को और उलझा दिया है। इसमें संकेत दिया गया है कि ट्रम्प प्रशासन फ़ॉकलैंड द्वीप समूह पर ब्रिटेन की संप्रभुता के समर्थन से पीछे हट सकता है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में और तनाव बढ़ने की आशंका है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Iran के Hormuz प्रस्ताव पर अमेरिका का कड़ा रुख, Marco Rubio बोले&#45; Nuclear Deal पर कोई समझौता नहीं</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना अभी भी सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। 
  फॉक्स न्यूज  को दिए एक साक्षात्कार में रुबियो ने ईरान के नये प्रस्ताव पर अपनी राय रखी।
ईरान के प्रस्ताव के अनुसार, वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा टालने को तैयार है। इसके बदले उसने मांग की है कि यदि अमेरिका अपनी नाकाबंदी हटा ले और युद्ध खत्म कर दे, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य से अपना नियंत्रण हटा लेगा।
इस पर रुबियो ने कहा,  मुझे पूरा यकीन है कि यदि ईरान में वर्तमान कट्टरपंथी शासन बना रहता है तो वे भविष्य में परमाणु हथियार जरूर हासिल करना चाहेंगे। 
उन्होंने कहा कि असली समस्या का समाधान अभी भी बाकी है और यही मुख्य मुद्दा है।
जब रुबियो से पूछा गया कि क्या ईरान बातचीत को लेकर गंभीर है, तो उन्होंने कहा कि ईरानी पक्ष माहिर वार्ताकार हैं और केवल समय हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
रुबियो ने कहा,  हम उन्हें ऐसा करने की छूट नहीं दे सकते। 
उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी समझौता ऐसा होना चाहिए जो ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार की ओर निश्चित बढ़त हासिल करने से रोके। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>सभी चीन के Atlas की चर्चा में लगे थे, इधर दोस्त रूस ने चुपचाप किया कुछ ऐसा, भारत को मिली ऑपरेशन सिंदूर वाली खुशखबरी</title>
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<description><![CDATA[ भारत को मई के मध्य तक रूस से अपना चौथा S-400 एयर डिफेंस सिस्टम मिलने वाला है। यह सिस्टम, जिसे पिछले हफ़्ते भारतीय वायु सेना (IAF) के अधिकारियों द्वारा प्री-डिस्पैच निरीक्षण के बाद भेजा गया था, उम्मीद है कि पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत की मिसाइल रक्षा स्थिति को मज़बूत करने के लिए राजस्थान सेक्टर में तैनात किया जाएगा। हिंदुस्तान टाइम्स ने विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यह डिलीवरी &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; की बरसी की पूर्व संध्या पर हुई है, जिसके दौरान S-400 सिस्टम का सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया गया था। मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट के तहत पांचवां और आखिरी सिस्टम इस साल नवंबर में भेजे जाने की उम्मीद है।इसे भी पढ़ें: Rajnath Singh ने SCO मंच से Pakistan को चेताया, &#039;State-Sponsored Terrorism&#039; बर्दाश्त नहींरिपोर्ट के मुताबिक, इस सिस्टम ने संघर्ष के दौरान ज़बरदस्त ऑपरेशनल क्षमता दिखाई; बताया जाता है कि भारत ने 11 लंबी दूरी की S-400 मिसाइलें दागीं, जिन्होंने कई हवाई खतरों को बेअसर कर दिया, जिनमें लड़ाकू विमान, हवाई चेतावनी प्रणाली और परिवहन विमान शामिल थे। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि भारत सरकार ने पहले ही पाँच अतिरिक्त S-400 प्रणालियों के अधिग्रहण को मंज़ूरी दे दी है। ये सिस्टम 400 किलोमीटर तक की रेंज में हवाई खतरों को निशाना बनाने में सक्षम हैं, जिसमें पाकिस्तान में सिंधु नदी के पूर्व के इलाके भी शामिल हैं। इसके साथ ही, भारत &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; के दौरान इस्तेमाल हुए हथियारों के स्टॉक को फिर से भरने और एक रिज़र्व इन्वेंट्री बनाने के लिए 280 छोटी और लंबी दूरी की मिसाइलें खरीदने की योजना बना रहा है।इसे भी पढ़ें: अफगानी छात्रों पर पाकिस्तान ने गिराए बम, भयंकर भड़का तालिबानअपने S-400 बेड़े का विस्तार करने के अलावा, भारत निजी क्षेत्र की भागीदारी के ज़रिए एक रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) सुविधा स्थापित करने पर भी विचार कर रहा है, जिसमें टेक्नोलॉजी के हस्तांतरण की संभावना पर भी गौर किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत सरकार-से-सरकार (G2G) सौदे के ज़रिए रूस से कम से कम 12 &#039;पैनत्सिर&#039; (Pantsir) हवाई रक्षा सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है, जबकि ड्रोन-रोधी और &#039;लॉइटरिंग म्यूनिशन&#039; (loitering munition) सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए &#039;मेक इन इंडिया&#039; पहल के तहत 40 अन्य सिस्टम देश के भीतर ही बनाए जा सकते हैं।इसे भी पढ़ें: अफगानी छात्रों पर पाकिस्तान ने गिराए बम, भयंकर भड़का तालिबानDAC ने रक्षा खरीद के प्रमुख प्रस्तावों को मंज़ूरी दीइस साल मार्च में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने लगभग 2.38 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों के लिए &#039;आवश्यकता की स्वीकृति&#039; (AoN) प्रदान की। इन मंज़ूरियों में भारतीय वायु सेना के लिए S-400 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली की खरीद, साथ ही मध्यम परिवहन विमान और रिमोट से चलने वाले स्ट्राइक विमान शामिल थे। समाचार एजेंसी ANI की एक रिपोर्ट में बताया गया, S-400 प्रणाली उन दुश्मन के लंबी दूरी के हवाई साधनों का मुकाबला करेगी जो महत्वपूर्ण क्षेत्रों को निशाना बनाते हैं,&quot; जो भारत की हवाई रक्षा संरचना में इसके रणनीतिक महत्व को उजागर करता है। इसमें यह भी बताया गया कि मध्यम परिवहन विमानों को शामिल करने से AN-32 और IL-76 जैसे पुराने बेड़ों की जगह ली जाएगी, ताकि ऑपरेशनल एयरलिफ्ट की ज़रूरतों को पूरा किया जा सके। सेना के लिए, DAC ने धनुष गन प्रणाली, हवाई रक्षा ट्रैक प्रणाली और रनवे-स्वतंत्र हवाई निगरानी प्रणाली सहित कई प्रणालियों को मंज़ूरी दी; इनका उद्देश्य युद्धक्षेत्र की क्षमता, निगरानी और संचार को बढ़ाना है।रिकॉर्ड AoN मंज़ूरियों के साथ रक्षा आधुनिकीकरण को बढ़ावाइसी दौरान आई एक और रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया कि यह सिस्टम &quot;दुश्मन के उन लंबी दूरी के हवाई साधनों से निपटेगा जो अहम इलाकों को निशाना बनाते हैं,&quot; और साथ ही रिमोट से चलने वाले स्ट्राइक विमानों और अपग्रेड किए गए Su-30 इंजनों जैसे पूरक प्लेटफॉर्मों के ज़रिए व्यापक ऑपरेशनल तैयारी को भी मुमकिन बनाएगा।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>सभी, चीन, के, Atlas, की, चर्चा, में, लगे, थे, इधर, दोस्त, रूस, ने, चुपचाप, किया, कुछ, ऐसा, भारत, को, मिली, ऑपरेशन, सिंदूर, वाली, खुशखबरी</media:keywords>
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<title>West Asia में बदल रहे समीकरण? Moscow में Putin से मिले Abbas Araghchi, बोले&#45; हमारी पार्टनरशिप हुई गहरी</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मंगलवार को कहा कि  क्षेत्र में भारी उथल-पुथल  के बीच रूसी नेतृत्व के साथ बातचीत करके उन्हें खुशी हुई।
 पश्चिमी एशिया में युद्ध के मसले को सुलझाने के उद्देश्य से आयोजित शांति वार्ता के दूसरे दौर को लेकर अनिश्चितता के बीच वह सोमवार को रूस पहुंचे थे। 
यह बयान अराघची के सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचने और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के एक दिन आया है। पुतिन ने अपनी संप्रभुता के लिए बहादुरी और वीरता से लड़ने के लिए ईरानियों की सराहना की।
शीर्ष ईरानी राजनयिक अराघची ने मंगलवार को एक्स पर कहा,  क्षेत्र में भारी उथल-पुथल के बीच रूस के साथ शीर्ष स्तर पर बातचीत करके मुझे खुशी हुई। 
उन्होंने कहा,  हाल की घटनाओं ने हमारी रणनीतिक साझेदारी की गहराई और मजबूती को प्रमाणित किया है।  
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि मॉस्को पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द शांति लाने में मदद करने के लिए हरसंभव प्रयास करने को तैयार है।
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा, “हमारे संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, ऐसे में हम एकजुटता के लिए आभारी हैं और कूटनीति में रूस के समर्थन का स्वागत करते हैं।” 
अराघची इस्लामाबाद की यात्रा के बाद रूस पहुंचे। उन्होंने इस्लामाबाद की यात्रा को  अत्यंत सार्थक  बताते हुए कहा कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ उनकी  अच्छी बातचीत’  हुई। 
 ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता का पहला दौर वांछित परिणाम लाने में विफल रहा था।
ईरान के मंत्री रविवार को ओमान की संक्षिप्त यात्रा के बाद दूसरी बार इस्लामाबाद पहुंचे। ओमान में उन्होंने सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सैद के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा और ईरान-अमेरिका संघर्ष को समाप्त करने के राजनयिक प्रयासों पर बातचीत की।
अराघची के शनिवार को पाकिस्तान से ओमान रवाना होने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर अब ईरान के साथ वार्ता के लिए इस्लामाबाद नहीं जाएंगे।
ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी और ईरानी अधिकारी संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए फोन पर बातचीत कर सकते हैं।
उन्होंने पिछले मंगलवार को ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया ताकि तेहरान को युद्ध समाप्त करने के लिए एक एकीकृत प्रस्ताव तैयार करने के लिए और समय मिल सके। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:41 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;US Tension: अमेरिकी Warship का एक्शन, ईरानी तेल टैंकर को रोका, बढ़ा समुद्री तनाव</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने घोषणा की है कि गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस राफेल पेराल्टा ने रविवार को M/T स्ट्रीम को रोका, जिससे वह जहाज़ अपने तय मंज़िल तक नहीं पहुँच पाया।CENTCOM द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, अमेरिकी युद्धपोत ने टैंकर को ईरानी बंदरगाह की ओर जाने की कोशिश करने के बाद&quot; रोका। दोनों जहाज़ों की तस्वीरों वाली एक सोशल मीडिया पोस्ट में, अधिकारियों ने साफ़ किया कि यह कार्रवाई ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी&quot; के तहत की गई थी। M/T स्ट्रीम की पहचान एक कच्चे तेल के टैंकर के रूप में हुई है जो ईरानी झंडे के तहत काम करता है, और समुद्री एनालिटिक्स प्रदाता MarineTraffic ने, जैसा कि अल जज़ीरा ने बताया है, संकेत दिया कि इस जहाज़ को आखिरी बार लगभग 13 दिन पहले दक्षिण-पूर्व एशिया के मलक्का जलडमरूमध्य में ट्रैक किया गया था।इसे भी पढ़ें: Iran के Hormuz प्रस्ताव पर अमेरिका का कड़ा रुख, Marco Rubio बोले- Nuclear Deal पर कोई समझौता नहींइस ताज़ा घटना ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच समुद्री तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने पहले अमेरिका पर तीखा हमला बोलते हुए, बाइडेन प्रशासन पर दो अन्य ईरान-संबंधी टैंकरों Majestic X और Tifani - को पहले ज़ब्त करने के बाद &quot;खुले समुद्र में समुद्री डकैती और सशस्त्र लूट&quot; का आरोप लगाया था। M/T स्ट्रीम को ऐसे समय में रोका गया है जब अमेरिकी सेनाएँ इस क्षेत्र में एक सख़्त समुद्री प्रतिबंध अभियान चला रही हैं। कल जारी आधिकारिक बयानों के अनुसार, ये सेनाएँ रणनीतिक तटीय केंद्रों में आवाजाही की निगरानी और नियंत्रण के लगातार प्रयासों के तहत, जहाज़ों को ईरानी जलक्षेत्र में प्रवेश करने या बाहर निकलने से सक्रिय रूप से रोक रही हैं। सेना चल रहे प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करने के लिए समुद्री यातायात पर कड़ी नज़र रख रही है।इसे भी पढ़ें: West Asia में बदल रहे समीकरण? Moscow में Putin से मिले Abbas Araghchi, बोले- हमारी पार्टनरशिप हुई गहरीइस अभियान के पैमाने को उजागर करते हुए, X पर एक पोस्ट ने पुष्टि की कि &quot;प्रतिबंध लागू होने के बाद से अमेरिकी सेनाओं ने 38 जहाज़ों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।इन नौसैनिक प्रतिबंधों के समानांतर, कूटनीतिक तनाव भी ऊँचे स्तर पर बना हुआ है, क्योंकि CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को संकेत दिया कि वे चल रहे संघर्ष को सुलझाने के उद्देश्य से तेहरान के सबसे हालिया प्रस्ताव को अस्वीकार करने के पक्ष में हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:40 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan में Financial Crisis गहराया, Peshawar University के कर्मचारी वेतन&#45;पेंशन के लिए सड़क पर उतरे</title>
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<description><![CDATA[ डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेशावर विश्वविद्यालय (UoP) के कर्मचारियों ने सोमवार को मार्च महीने की सैलरी और पेंशन न मिलने के विरोध में प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय परिसर के बाहर व्यस्त जमरुद रोड को भी जाम कर दिया और प्रांतीय सरकार तथा विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। सड़क जाम होने के कारण, इस भीषण गर्मी में वाहन चालकों और यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, क्लास-III एसोसिएशन के अध्यक्ष इम्तियाज खान ने कहा कि ऐतिहासिक UoP गंभीर वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, जबकि प्रशासन और प्रांतीय सरकार, दोनों ही इन चुनौतियों से निपटने के लिए कोई ठोस कदम उठाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।इसे भी पढ़ें: सभी चीन के Atlas की चर्चा में लगे थे, इधर दोस्त रूस ने चुपचाप किया कुछ ऐसा, भारत को मिली ऑपरेशन सिंदूर वाली खुशखबरीउन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी ने निचले दर्जे के कर्मचारियों को मार्च की सैलरी किस्तों में दी है। उनके मुताबिक, फैकल्टी सदस्यों को उनकी सैलरी का सिर्फ़ 40 परसेंट हिस्सा मिला, जबकि रिटायर हो चुके कर्मचारियों को अभी तक उनकी पेंशन नहीं मिली है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सैलरी और पेंशन का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सही इंतज़ाम नहीं किए गए, तो विरोध प्रदर्शन और तेज़ हो जाएगा। इस बीच, पेशावर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री सोहेल अफ़रीदी को एक चिट्ठी भेजकर यूनिवर्सिटी के लिए आर्थिक मदद मांगी है। चिट्ठी में कहा गया है, &quot;हम आपको पेशावर यूनिवर्सिटी की मौजूदा स्थिति के बारे में गहरी चिंता और फौरी ज़रूरत के एहसास के साथ लिख रहे हैं। यह एक ऐसा संस्थान है जिसने 75 साल से भी ज़्यादा समय से खैबर पख्तूनख्वा के लोगों की ज़िंदगी, करियर और सपनों को संवारा है।&quot;इसमें आगे कहा गया है कि पीढ़ियों से, यह यूनिवर्सिटी सिर्फ़ एक शिक्षण संस्थान से कहीं ज़्यादा रही है। यह हज़ारों परिवारों के लिए मौकों का दरवाज़ा, प्रांत के शिक्षकों, सरकारी कर्मचारियों और पेशेवरों के लिए ट्रेनिंग का मैदान, और इस इलाके के सामाजिक और आर्थिक विकास में एक शांत लेकिन मज़बूत योगदान देने वाला संस्थान रहा है। चिट्ठी में ज़िक्र किया गया है कि यूनिवर्सिटी की ताकत हमेशा न सिर्फ़ इसकी विरासत पर, बल्कि उन लोगों की लगन पर भी निर्भर रही है जो इसकी सेवा करते हैं।इसे भी पढ़ें: Rajnath Singh ने SCO मंच से Pakistan को चेताया, &#039;State-Sponsored Terrorism&#039; बर्दाश्त नहीं &#039;डॉन&#039; के हवाले से इसमें कहा गया है, &quot;आज, वही लोग बहुत ज़्यादा मुश्किल में हैं। मार्च महीने की आधी सैलरी अभी भी बकाया है, और उसी महीने की पेंशन तो बिल्कुल भी जारी नहीं की गई है। चिट्ठी के मुताबिक, कई कर्मचारी और पेंशन पाने वाले लोग अब घर के ज़रूरी खर्च, जैसे किराया, बिजली-पानी के बिल, दवाइयां और अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:39 +0530</pubDate>
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<title>Putin को मिला Kim का साथ, Russia&#45;Ukraine War में North Korea की &amp;apos;Explosion&amp;apos; नीति से आएगा बड़ा मोड़?</title>
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<description><![CDATA[ उत्तरी कोरिया ने यूक्रेन में रूस के युद्ध में मदद के लिए हज़ारों हथियार और सैनिक भेजे हैं; इनके बीच, उसके सैनिकों द्वारा पकड़े जाने से बचने के लिए अपनी जान देने की खबरें विशेष रूप से चौंकाने वाली हैं। ब्लूमबर्ग ने सरकारी मीडिया के हवाले से बताया कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने रविवार को उन सैनिकों की तारीफ़ की, जिन्होंने कथित तौर पर युद्ध की रणनीति के तहत, यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस की लड़ाई में पकड़े जाने से बचने के लिए आत्महत्या कर ली थी। किम ने कहा कि उन्होंने &quot;महान सम्मान की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक मौत&quot; पाई। यह रणनीति, जिसमें सैनिक पकड़े जाने के बजाय युद्ध के मैदान में अपनी जान दे देते हैं, किम की टिप्पणियों के बाद चर्चा में आ गई है। ये टिप्पणियाँ उन पिछली रिपोर्टों के बाद आई हैं जिनमें कहा गया था कि यूक्रेन में मौजूद उत्तर कोरियाई सैनिकों को हर हाल में पकड़े जाने से बचने का निर्देश दिया गया था, जिसमें अपनी जान देना भी शामिल था। ये दावे यूक्रेनी ख़ुफ़िया एजेंसियों की रिपोर्टों और पकड़े गए एक उत्तर कोरियाई सैनिक की गवाही पर आधारित थे। किम ने एक भाषण में कहा कि वे नायक जिन्होंने महान सम्मान की रक्षा के लिए बिना किसी हिचकिचाहट के खुद को उड़ाने या आत्मघाती हमले का रास्ता चुना।&quot; उन्होंने आगे कहा, &quot;उन्होंने किसी भी तरह के मुआवज़े की उम्मीद नहीं की, हालाँकि उन्होंने असाधारण वीरता दिखाई।  उन्होंने एक वीरगति पाई। इसे भी पढ़ें: West Asia में बदल रहे समीकरण? Moscow में Putin से मिले Abbas Araghchi, बोले- हमारी पार्टनरशिप हुई गहरीउत्तर कोरियाई सैनिकों के लिए स्मारकरूस के युद्ध में लड़ते हुए अपनी जान गंवाने वाले सैनिकों को सम्मान देने के लिए, उत्तर कोरियाई नेता और रूसी रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव ने प्योंगयांग में एक स्मारक संग्रहालय का उद्घाटन किया। इस मौके पर उत्तर कोरिया और रूस के शीर्ष नेताओं ने आपसी सहयोग को और बढ़ाने का संकल्प लिया। BBC की रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम के दौरान आसमान में सफेद गुब्बारे छोड़े गए और ऊपर से सैन्य जेट विमानों ने उड़ान भरी। इस कार्यक्रम में एक प्रतिमा का अनावरण और संग्रहालय का उद्घाटन भी शामिल था। AP द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने बताया कि किम के साथ रूस से आए अधिकारी भी मौजूद थे, जिनमें स्टेट ड्यूमा के स्पीकर व्याचेस्लाव वोलोडिन और रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव शामिल थे।इसे भी पढ़ें: SCO बैठक के बीच Rajnath Singh की China को दो टूक, LAC पर तनाव को लेकर हुई सीधी बातउत्तर कोरिया-रूस समझौताउत्तर कोरिया और रूस, इन दोनों देशों ने 2024 में एक सैन्य समझौता किया, जिसमें आपसी रक्षा का एक प्रावधान शामिल है। 2025 में, दोनों देशों ने घोषणा की कि उनके सैनिकों ने मिलकर रूस के कुर्स्क सीमा क्षेत्र में यूक्रेन के घुसपैठ के प्रयास को विफल करने के लिए लड़ाई लड़ी। हालांकि तैनात सैनिकों की सटीक संख्या की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी ने पिछले साल अनुमान लगाया था कि लगभग 15,000 उत्तर कोरियाई सैनिक भेजे गए थे, जिनमें से लगभग 2,000 के मारे जाने की खबर है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:38 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan को मिला Qatar का खुला Support, बोला&#45; &amp;apos;संघर्ष खत्म करने को हम साथ हैं&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ईरान के एक प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है, जिसमें युद्ध रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात कही गई है, जबकि परमाणु वार्ता को टालने का प्रस्ताव है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सेंट पीटर्सबर्ग में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की और कहा कि तेहरान बातचीत फिर से शुरू करने के अमेरिकी अनुरोध पर विचार कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र में, दर्जनों देशों ने जलडमरूमध्य को &quot;तत्काल और बिना किसी रुकावट के फिर से खोलने&quot; का आग्रह किया; वहीं महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी कि इस गतिरोध से वैश्विक खाद्य आपातकाल का खतरा पैदा हो सकता है। इस बीच, इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच गोलीबारी जारी रही, जिससे 17 अप्रैल के &quot;संघर्ष-विराम&quot; के बाद से लेबनान में मरने वालों की संख्या 40 के पार हो गई है। साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान, उन रिपोर्टों के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में, जिनमें कहा गया था कि ईरान होर्मुज़ वार्ता को अपने परमाणु कार्यक्रम की चर्चाओं से अलग करना चाहता है, कतर के प्रवक्ता ने कहा कि दोहा इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक &quot;व्यापक समझौते&quot; के पक्ष में होगा। माजेद अल-अंसारी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोहा की मुख्य चिंता क्षेत्रीय सुरक्षा है, क्योंकि ईरान के हमलों ने क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।इसे भी पढ़ें: Iran के Hormuz प्रस्ताव पर अमेरिका का कड़ा रुख, Marco Rubio बोले- Nuclear Deal पर कोई समझौता नहींईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, इससे पहले अराघची ने कहा था कि अमेरिका की &quot;अत्यधिक&quot; मांगों के कारण, प्रगति होने के बावजूद, दोनों देशों के बीच हालिया बातचीत विफल रही। अराघची ने कहा, &quot;अमेरिका के रवैये के कारण बातचीत का पिछला दौर, प्रगति होने के बावजूद, अत्यधिक मांगों के चलते अपने लक्ष्यों को हासिल करने में विफल रहा।&quot; उन्होंने यह भी कहा कि &quot;होरमुज़ जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग एक महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दा है।&quot; कई मोर्चों पर लड़ाई और राजनीतिक संकेत देने का सिलसिला जारी है; नए सिरे से कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद, तनाव कम होने के कोई तत्काल संकेत नहीं दिख रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Iran-US Tension: अमेरिकी Warship का एक्शन, ईरानी तेल टैंकर को रोका, बढ़ा समुद्री तनावईरान वॉर से जुड़े 5 बड़े अपडेटअमेरिका ने ईरान के प्रस्ताव की समीक्षा की: ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम युद्ध समाप्त करने, होरमुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और परमाणु वार्ता को स्थगित करने की ईरान की योजना पर विचार कर रही है।रूस में अराघची: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सेंट पीटर्सबर्ग में पुतिन से मुलाकात की और कहा कि तेहरान बातचीत फिर से शुरू करने के अमेरिका के अनुरोध पर विचार कर रहा है।होरमुज़ पर संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: दर्जनों देशों ने जलडमरूमध्य को &quot;तत्काल और बिना किसी बाधा के फिर से खोलने&quot; की मांग की, वहीं संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरेस ने संभावित वैश्विक खाद्य आपातकाल की चेतावनी दी।लेबनान में मरने वालों की संख्या बढ़ी: 17 अप्रैल को हुए &quot;संघर्ष-विराम&quot; के बाद से, हिज़्बुल्लाह के साथ लड़ाई जारी रहने के बीच, लेबनान पर इज़रायल के हमलों में कम से कम 40 लोग मारे गए हैं।कूटनीतिक प्रयास तेज़ हो रहे हैं; ईरान इस संघर्ष को नियंत्रित करने के प्रयास में रूस सहित क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पक्षों के साथ संपर्क साध रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:37 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;Israel War के बीच OPEC को UAE का बड़ा झटका, तेल संगठन से बाहर होने का ऐलान किया</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने 1 मई से तेल उत्पादक देशों के प्रमुख समूहों OPEC और OPEC+ से बाहर निकलने की घोषणा की है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने पहले ही एक बड़ा ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है, जिसने वैश्विक बाजारों को और भी गहरी अनिश्चितता में धकेल दिया है। UAE ने अपनी सरकारी समाचार एजेंसी WAM के ज़रिए यह घोषणा की। UAE ने कहा, &quot;यह फैसला UAE के दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण और उसकी बदलती ऊर्जा प्रोफ़ाइल को दर्शाता है - जिसमें घरेलू ऊर्जा उत्पादन में तेज़ी से निवेश शामिल है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक ज़िम्मेदार, भरोसेमंद और भविष्योन्मुखी भूमिका निभाने की उसकी प्रतिबद्धता को मज़बूत करता है।इसे भी पढ़ें: UAE में बैठे थे अजीत डोभाल, इजराइल पर होश उड़ाने वाला ऐलान!यह कदम ऐसे समय में भी आया है जब UAE का सऊदी अरब के साथ टकराव बढ़ता जा रहा है, खासकर आर्थिक मुद्दों और यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों के खिलाफ चल रहे युद्ध को लेकर। OPEC के सबसे प्रभावशाली और लंबे समय से जुड़े सदस्यों में से एक होने के नाते, UAE ने पारंपरिक रूप से इस गुट की रणनीतियाँ तय करने में अहम भूमिका निभाई है। उसका अचानक बाहर निकलना इस समूह के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था आपूर्ति में गंभीर रुकावटों और अस्थिरता से जूझ रही है।इसे भी पढ़ें: Iran के खिलाफ संयुक्त अरब अमीरात का &#039;सुरक्षा कवच&#039;: कैसे Israeli Iron Dome ने हमलों के दौरान UAE की रक्षा कीUAE के बाहर निकलने से OPEC की एकता खतरे मेंरिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात के बाहर निकलने से इस समूह में हलचल मचने और इसकी सामूहिक ताकत कमज़ोर पड़ने की संभावना है। यह समूह, जिसने भू-राजनीतिक मुद्दों और उत्पादन सीमाओं को लेकर मतभेदों के बावजूद ऐतिहासिक रूप से एकता बनाए रखी है, अब बढ़ते आंतरिक तनाव के जोखिम का सामना कर रहा है। साथ ही, OPEC के भीतर मौजूद खाड़ी देशों के तेल उत्पादक गंभीर लॉजिस्टिकल चुनौतियों से जूझ रहे हैं। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से होने वाली तेल की शिपमेंट—जो ईरान और ओमान के बीच एक अहम वैश्विक पारगमन मार्ग है और जिससे दुनिया की लगभग पाँच में से एक हिस्से की कच्चा तेल और LNG की आपूर्ति होती है। ईरान की धमकियों और जहाज़ों पर हमलों के कारण बाधित हुई है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:36 +0530</pubDate>
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<title>Trump का बड़ा दावा: &amp;apos;तबाही की कगार पर Iran, Hormuz खोलने के लिए गिड़गिड़ाया&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान &quot;पतन की स्थिति&quot; में है, और साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि तेहरान ने व्हाइट हाउस से होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का अनुरोध किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बारे में ज़्यादा कुछ नहीं बताया कि ईरान ने यह संदेश किस तरह भेजा था। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि तेहरान नेतृत्व संकट से जूझ रहा है। ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि ईरान ने अभी-अभी हमें बताया है कि वे ‘पूरी तरह से ढहने की स्थिति’ में हैं। वे चाहते हैं कि हम ‘होर्मुज जलडमरूमध्य खोल दें,’ जितनी जल्दी हो सके, क्योंकि वे अपनी नेतृत्व की स्थिति को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।इसे भी पढ़ें: भारत ने 48 घंटे में दी नेपाल को गद्दारी की सजा, गिर जाएगी सरकार?सोशल मीडिया पर यह ताज़ा पोस्ट उन कई दावों में से एक है जो ट्रंप ने पिछले दो महीनों में होरमुज़ जलडमरूमध्य को लेकर किए हैं, जबकि नाकाबंदी खत्म करने की कोशिशों के नतीजे बहुत कम निकले हैं। अमेरिका और इज़रायल के बीच हफ़्तों तक चली लड़ाई के बाद भी, होर्मुज जलडमरूमध्य जो वैश्विक व्यापार का एक अहम और संकरा रास्ता है। समुद्री यातायात के लिए बंद ही है।इसे भी पढ़ें: Pakistan को मिला Qatar का खुला Support, बोला- &#039;संघर्ष खत्म करने को हम साथ हैं&#039;होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से कब खुलेगा?ईरान ने अपनी नौसेना के ज़रिए नाकेबंदी कर दी है और इस संकरे रास्ते में 6,000 बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं। अमेरिका ने भी इस जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ों पर नाकेबंदी लगाने का दावा किया है। ईरान ने एक अंतरिम समझौते का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत वाशिंगटन द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करने के बदले में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को फिर से खोल दिया जाएगा। हालाँकि, दोनों देशों के बीच नाकेबंदी और इस क्षेत्र में चल रहे बड़े संघर्ष को खत्म करने के लिए किसी अंतरिम समझौते पर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। इस क्षेत्र में लगभग 2,000 जहाज़ फँसे हुए हैं, जो इस जलमार्ग से सुरक्षित गुज़रने का इंतज़ार कर रहे हैं। लेकिन अगर स्ट्रेट को फिर से खोल भी दिया जाता है, तो भी समुद्री यातायात को प्रभावित करने वाली कई बाधाएँ मौजूद हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:35 +0530</pubDate>
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<title>भारत ने 48 घंटे में दी नेपाल को गद्दारी की सजा, गिर जाएगी सरकार?</title>
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<description><![CDATA[ ठीक एक महीने पहले नेपाल की जिस जेन जेड ने बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनाया था। वही जेन जेड अब बालेन शाह के खिलाफ उतर आई है। सिर्फ एक महीने में ही नेपाल के कुछ लोग बालेन शाह को प्रधानमंत्री पद से हटाने की बातें शुरू कर चुके हैं। कुछ दिन पहले नेपाल की बालेन शाह सरकार ने भारत को अकड़ दिखाने की कोशिश की थी। लेकिन भारत ने 48 घंटों में नेपाल का इलाज कर दिया है। भारत कभी नहीं चाहेगा कि नेपाल के साथ उसके रिश्तों पर कभी आंच आए लेकिन अगर नेपाल की सरकार अकड़ दिखाएगी तो गद्दारी का बदला लिया जाएगा और इस बार भारत ने 48 घंटों के अंदर ही नेपाल की सरकार को गद्दारी की सजा दे भी दी है। आपको याद होगा कि कुछ दिन पहले नेपाल की बालेन शाह सरकार ने एक ऐलान किया था। इस ऐलान के तहत नेपाल के लोग अगर भारत से ₹100 से ज्यादा का सामान खरीद कर लाते हैं तो इन नेपाली लोगों को कस्टम ड्यूटी देनी होगी। यानी कोई भी नेपाली अगर भारत से ₹100 से ज्यादा का सामान खरीद कर नेपाल लाता है तो उसे नेपाल के बॉर्डर पर कस्टम ड्यूटी भरनी होगी। इसे भी पढ़ें: SCO Defence Ministers Meeting में Terrorism के खिलाफ India ने दिखाया बेहद सख्त रुख, राजनाथ सिंह की द्विपक्षीय वार्ताओं से सुलझे कई मुद्दे!यह सामान नेपाल के लोगों के लिए ही महंगा हो जाएगा। नेपाल के रैपर प्रधानमंत्री बालेन शाह के इस फैसले पर नेपाल की जनता तो उन पर टूट ही पड़ी है। लेकिन भारत ने भी नेपाल को बहुत बड़ा झटका दे दिया है। दरअसल नेपाल में ईंधन संकट और फ्यूल लॉकडाउन के बीच बिहार के कई जिलों में बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। अब नेपाल बॉर्डर के पास भारत के पेट्रोल पंपों पर नेपाली नंबर प्लेट वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जाएगा। यानी जिस तरह से नेपाल के लोग बिहार आकर सामान खरीदते थे, ऐसे ही कई लोग नेपाल की जगह बिहार में आकर पेट्रोल और डीजल भरवाते थे। नेपाल के तराई क्षेत्रों के लोग ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उनके इलाके में पेट्रोल भारत से करीब ₹28 महंगा है और डीजल भारत के मुकाबले ₹31 प्रति लीटर महंगा है। लेकिन नई गाइडलाइंस के मुताबिक बिहार के अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, सुपौल, कटिहार में नेपाल के वाहनों को अब पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जाएगा।इसे भी पढ़ें: China, Bangladesh, Nepal, Sri Lanka के साथ सहयोग बढ़ाकर मोदी ने बदल डाले South Asia के समीकरणनेपाल की गाड़ियां अब बिहार आकर सस्ता पेट्रोल या डीजल नहीं भरवा पाएंगी। हम यह नहीं बोल रहे कि भारत ने यह फैसला नेपाल के फैसले को चुनौती देने के लिए लिया है। लेकिन भारत ने फैसला तो ले ही लिया है। संयोग देखिए कि बिहार के जिन इलाकों में नेपाल नंबर प्लेट वाली गाड़ियों को पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जाएगा। उन्हीं इलाकों से नेपाल के लोग सामान भी खरीद कर जाते थे। जिन पर नेपाल की सेना ने अब कस्टम ड्यूटी लगा दी है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:35 +0530</pubDate>
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<title>दुनिया के मंच पर RIC की वापसी, Arunachal में बवाल के बीच भारत&#45;चीन ने की बड़ी बैठक</title>
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<description><![CDATA[ भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस वक्त किरगिस्तान की राजधानी बिकेक पहुंचे हुए हैं। जहां वो एससीओ की रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे। लेकिन उनके इस दौरे से एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के रक्षा मंत्री डोंग जोन से मुलाकात की है। इस मुलाकात की जानकारी खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए दी। जिस पोस्ट में उन्होंने लिखा बिस्केक में एसइओ रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल जोंग जून के साथ बातचीत करके मुझे खुशी हुई। इस मुलाकात में दोनों रक्षा मंत्रियों के बीच आखिर क्या बातचीत हुई इस पर कोई भी आधिकारिक सूचना तो सामने नहीं आई है। हालांकि कुछ मीडिया सूत्रों के मुताबिक इस बातचीत में भारत और चीन के बीच संवेदनशील मुद्दा यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई है। इसे भी पढ़ें: SCO बैठक के बीच Rajnath Singh की China को दो टूक, LAC पर तनाव को लेकर हुई सीधी बातभारत और चीन के बीच एलएसी को लेकर विवाद बेहद पुराना है। लेकिन पिछले कुछ सालों में एलएसी को लेकर विवाद दोनों देशों के बीच कुछ बढ़ सा गया है। जहां पर कई बार तनाव जैसी स्थिति देखने को मिली। जिसके बाद जब पिछली एसइओ की मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन पहुंचे थे। उसके बाद दोनों देशों ने डिसंगेजमेंट का फैसला किया। लेकिन दोनों देशों की तरफ से अभी भी सतर्कता बरती जा रही है। ऐसे में यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है जो भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों के बीच हुई है। इतना ही नहीं इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस के रक्षा मंत्री एंड्राई बेलेसफ से भी मुलाकात की है। जिसके जानकारी भी उन्होंने पोस्ट करते हुए दी। इसे भी पढ़ें: भारत ने 48 घंटे में दी नेपाल को गद्दारी की सजा, गिर जाएगी सरकार?भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग हमेशा से ही मजबूत रहा है और इस बैठक में दोनों देशों के बीच राजनीतिक साझेदारी को लेकर चर्चा हुई। अपने पोस्ट में राजनाथ सिंह ने इस मुलाकात को शानदार बातचीत बताया जिससे साफ है कि भारत अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ रिश्ते मजबूत कर रहा है। बिकेक में हो रही यह बैठक सिर्फ औपचारिक नहीं है बल्कि एक ऐसे समय में हो रही बैठक है जब दुनिया के कई हिस्सों में तनाव बढ़ रहा है। खास करके वेस्ट एशिया में जहां संघर्ष जारी है और वैश्विक सुरक्षा को लेकर एक चिंता बनी हुई है। ऐसे में एसइओ जैसे बड़े मंच पर एक साथ इतने देशों का बैठना और बातचीत करना बेहद अहम हो जाता है। रक्षा मंत्री ने इस बैठक में भारत की नीति को साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और आतंकवाद और कतरवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>UAE OPEC Exit Impact India: यूएई क्यों हो रहा OPEC से बाहर, क्‍या हमें खुश होना चाह‍िए?</title>
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<description><![CDATA[ ओपेक टूट गया। यूएई ने ओपेक से बाहर निकलने का फैसला लिया। इसको आप यूएस ईरान युद्ध की पहली कैजुअल्टी मान सकते हैं। जी हां, यह ताकत थी जो पूरी दुनिया में दरअसल तेल के बाजार को कंट्रोल करती थी और यह ताकत, यह परिवार बिखरने लगा है। क्या कुछ इसके मायने हैं? क्या कुछ इसकी वजह हैं? 1 मई से आधिकारिक रूप से यूएई ओपेक संगठन का हिस्सा नहीं रहेगा। करीब 10% उत्पादन पर तेल के यूएई का कब्जा था। यूएई का कुल आपूर्ति में योगदान था। लेकिन उससे बड़ी यूएई की पोजीशनिंग, पोशंगिंग इस पूरे ग्रुप में थी। इसे भी पढ़ें: Iran-Israel War के बीच OPEC को UAE का बड़ा झटका, तेल संगठन से बाहर होने का ऐलान कियाओपेक प्लस (OPEC+) गठबंधन क्या है?साल 2016 में तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक (OPEC) ने 10 ऐसे अन्य देशों के साथ साझेदारी की जो तेल का उत्पादन तो करते हैं, लेकिन ओपेक के सदस्य नहीं थे (इनमें रूस सबसे प्रमुख है)। इन सभी देशों के मिलकर बने इस नए और बड़े समूह को ही &#039;ओपेक प्लस&#039; (OPEC+) कहा जाता है। पूरी दुनिया में जितना भी तेल निकाला जाता है, उसका लगभग 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा इसी गठबंधन के नियंत्रण में है। इतनी बड़ी मात्रा में तेल पर नियंत्रण होने के कारण, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल (ऊर्जा) की कीमतें तय करने या उन पर असर डालने में इस समूह की ताकत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।इसे भी पढ़ें: UAE में बैठे थे अजीत डोभाल, इजराइल पर होश उड़ाने वाला ऐलान!कौन-कौन से देश शामिल हैंवर्तमान में इस संगठन के सदस्यों की संख्या में कुछ बदलाव हुए हैं। वैसे तो इस समूह में पहले 13 या उससे ज्यादा सदस्य होते थे, लेकिन हाल की घटनाओं के कारण इसकी संरचना बदल गई है। सक्रिय सदस्य (12 देश): अल्जीरिया, कांगो, इक्वेटोरियल गिनी, गैबॉन, ईरान, इराक, कुवैत, लीबिया, नाइजीरिया, सऊदी अरब (जो इस समूह का मुख्य नेता माना जाता है), संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और वेनेजुएला। हाल ही में बाहर होने वाले देश: अंगोला 1 जनवरी 2024 से इस समूह से बाहर हो गया है। ओपेक (OPEC) दुनिया भर में तेल की कीमतों को कैसे नियंत्रित करता है?ओपेक मुख्य रूप से कच्चे तेल के उत्पादन का एक &#039;कोटा&#039; (लिमिट) तय करता है। इसी के जरिए वह पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई को मैनेज करता है और कीमतों को कंट्रोल करता है। कीमतें बढ़ाना या स्थिर रखना: जब ओपेक चाहता है कि तेल की कीमतें बढ़ें या बाजार में स्थिर रहें, तो सभी सदस्य देश आपसी सहमति से तेल का उत्पादन (निकालना) कम कर देते हैं। (सप्लाई कम होने से कीमतें बढ़ जाती हैं)। जब उन्हें कीमतें कम करनी होती हैं, तो वे तेल का उत्पादन बढ़ा देते हैं।ओपेक एक &#039;कार्टेल&#039; (व्यापारियों या देशों का ऐसा गुट जो बाजार पर अपना दबदबा बनाए रखता है) की तरह काम करता है। दुनिया में अब तक जितना भी तेल का भंडार खोजा गया है, उसका लगभग 80% हिस्सा ओपेक देशों के ही पास है। इतने बड़े हिस्से पर कब्ज़ा होने के कारण यह समूह आसानी से अंतरराष्ट्रीय बाजार के &quot;संतुलन&quot; को अपने हिसाब से प्रभावित कर लेता है।अब क्या हुआसंयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मंगलवार को घोषणा की है कि वह एक मई से पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (ओपेक) से अलग हो जाएगा। यूएई ने अपनी सरकारी समाचार एजेंसी ‘डब्ल्यूएएम’ के माध्यम से यह घोषणा की। यूएई ने कहा कि यह निर्णय संयुक्त अरब अमीरात के दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण तथा बदलते ऊर्जा समीकरणों को दर्शाता है। साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक जिम्मेदार, विश्वसनीय और दूरदर्शी भूमिका निभाने की उसकी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब यूएई का सऊदी अरब के साथ तनाव बढ़ता जा रहा है, खासकर आर्थिक मुद्दों और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ यमन में जारी युद्ध को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव की स्थित है।यूएई  ने ओपेक क्यों छोड़ा?यूएई ने अपनी तेल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश किया है, लेकिन उसे लंबे समय से यह शिकायत थी कि ओपेक के सख्त नियमों और कोटे की वजह से वह अपनी क्षमता के मुताबिक तेल का निर्यात नहीं कर पा रहा है (यानी तेल नहीं बेच पा रहा है)। ओपेक छोड़ने का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में ईरान के हमलों के दौरान बाकी अरब देशों ने यूएई को सैन्य और राजनीतिक समर्थन नहीं दिया था, जिसकी यूएई ने कड़ी आलोचना भी की थी। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि समूह से बाहर निकलने का यह फैसला उनकी &quot;लंबी अवधि की रणनीतिक और आर्थिक सोच&quot; का हिस्सा है। इससे उन्हें बाजार के बदलते हालात के हिसाब से तुरंत और स्वतंत्र रूप से फैसले लेने में ज्यादा आज़ादी मिलेगी।इसे भी पढ़ें: Iran के खिलाफ संयुक्त अरब अमीरात का &#039;सुरक्षा कवच&#039;: कैसे Israeli Iron Dome ने हमलों के दौरान UAE की रक्षा कीभारत के लिए कैसे खुलेगा फायदे का रास्ता?भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में यूएई का ओपेक से बाहर आना भारत के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है। अब यूएई पर ओपेक के उत्पादन कोटे की कोई रोक-टोक नहीं है। उसने तेल उत्पादन बढ़ाने में जो भारी निवेश किया है, अब उसका इस्तेमाल करते हुए वह अपनी पूरी क्षमता से तेल बाजार में उतारेगा। सीधा सा गणित है कि जब बाजार में तेल की सप्लाई ज्यादा होगी, तो उसकी कीमतें गिरेंगी। अगर कच्चे तेल के दाम में 5 से 10 डॉलर प्रति बैरल की भी कमी आती है, तो भारत के अरबों रुपये बचेंगे। अब तक तेल खरीदने के मामले में भारत को काफी हद तक ओपेक के कड़े नियमों और सऊदी अरब की नीतियों के हिसाब से चलना पड़ता था। लेकिन यूएई का यह कदम भारत के लिए एक शानदार रणनीतिक मौका लेकर आया है। अब भारत बिना किसी संगठन की बंदिश के, सीधे तौर पर यूएई से बात करके लंबे समय के लिए और रियायती दरों पर (सस्ते) तेल के सौदे पक्के कर सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत को तेल के लिए सिर्फ रूस या अन्य देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। हमारे पास अपन ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:33 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;America टेंशन के बीच तेज हुई कूटनीति, Putin से मिलकर Pakistan पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं और इसी क्रम में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की लगातार यात्राएं चर्चा में हैं। ताजा घटनाक्रम में वह एक बार फिर पाकिस्तान पहुंचे हैं, जो बीते 48 घंटों में उनकी तीसरी इस्लामाबाद यात्रा बताई जा रही है।मौजूद जानकारी के अनुसार, यह दौरा रूस यात्रा के तुरंत बाद हुआ है, जहां उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि अराघची की यह सक्रियता अमेरिका के साथ जारी तनाव को कम करने और क्षेत्र में स्थिरता लाने के व्यापक कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा है।गौरतलब है कि पाकिस्तान इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम भूमिका निभाता नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस्लामाबाद ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष संवाद को सुगम बनाने की कोशिश कर रहा है। बार-बार की यात्राएं इस बात का संकेत देती हैं कि पाकिस्तान शांति दूत के रूप में मध्यस्थता करने की स्थिति में है।रूस में हुई मुलाकात को लेकर अब्बास अराघची ने कहा कि व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी बातचीत काफी सकारात्मक रही। बता दें कि इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय हालात और अमेरिका तथा इस्राइल के साथ चल रहे तनाव पर भी विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान और रूस के संबंध एक रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित हो रहे हैं और मौजूदा हालात में रूस का समर्थन महत्वपूर्ण है।ईरानी सरकारी सूत्रों के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति ने भी पश्चिम एशिया में शांति बहाली के प्रयासों का समर्थन करने की बात कही है और उम्मीद जताई है कि क्षेत्र में जल्द स्थिरता लौटेगी।इस बीच अमेरिका की ओर से भी संकेत मिले हैं कि ईरान के एक प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा की है। बता दें कि इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और संघर्ष को खत्म करने की रूपरेखा शामिल बताई जा रही है, जबकि परमाणु वार्ता को बाद के चरण के लिए रखा गया है।विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और यहां किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर सीधा असर डाल सकता है। ऐसे में इस क्षेत्र में शांति बहाली की कोशिशें वैश्विक स्तर पर भी अहम मानी जा रही हैं।ईरान, रूस, पाकिस्तान और अमेरिका के बीच चल रही यह कूटनीतिक गतिविधियां आने वाले दिनों में क्षेत्रीय हालात को नई दिशा दे सकती हैं। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि ये प्रयास कितने सफल होंगे, लेकिन लगातार हो रही बातचीत से यह जरूर संकेत मिल रहा है कि तनाव कम करने की दिशा में गंभीर कोशिशें जारी हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:10:32 +0530</pubDate>
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<title>सूडान: दारफ़ूर में 20 वर्ष बाद, बच्चे एक बार फिर से भयावह हिंसा की चपेट में</title>
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<description><![CDATA[ सूडान के दारफ़ूर क्षेत्र में क़रीब दो दशक पहले के घटनाक्रम ने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया था, जब जले हुए गाँवों, मौतों और सामूहिक विस्थापन ने बच्चों की एक पूरी पीढ़ी को अपनी चपेट में ले लिया था. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने आगाह किया है कि इस क्षेत्र में बच्चे एक बार फिर से हिंसा, भूख, और विस्थापन की चपेट में हैं और दुनिया उन पर ध्यान देने में विफल साबित हो रही है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:09:43 +0530</pubDate>
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<title>म्याँमार में हिंसा और दमन का चक्र जारी, मगर जबावदेही अब भी दूर</title>
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<description><![CDATA[ म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर स्वतंत्र विशेषज्ञ टॉम ऐंड्रयूज़ ने, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से म्याँमार में जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयासों को तेज़ करने की अपील की है और कहा है कि दशकों से जारी दंडमुक्ति (impunity) ने देश को मानवाधिकार संकट की भयावह स्थिति में धकेल दिया है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:09:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>अफ़ग़ानिस्तान में महिला शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी होने की आशंका</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने आगाह किया है कि अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियों की शिक्षा एवं महिलाओं के रोज़गार पर लगी पाबन्दियों के कारण, वर्ष 2030 तक देश में देश में 25 हज़ार से अधिक महिला शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी हो सकती है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:09:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>सुरक्षा परिषद: क्षेत्रीय तनाव के बीच, ग़ाज़ा में युद्धविराम के लिए &amp;apos;नाज़ुक स्थिति&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ ग़ाज़ा पट्टी में इसराइली कार्रवाई और हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों की गतिविधियों के कारण, वहाँ पिछले वर्ष अक्टूबर में लागू हुए युद्धविराम के लिए स्थिति नाज़ुक होती जा रही है. राजनैतिक एवं शान्तिनिर्माण मामलों के लिए यूएन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मध्य पूर्व संकट पर सुरक्षा परिषद की एक बैठक में सदस्य देशों को सम्बोधित करते हुए यह चेतावनी जारी की है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:09:37 +0530</pubDate>
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<media:keywords>सुरक्षा, परिषद:, क्षेत्रीय, तनाव, के, बीच, ग़ाज़ा, में, युद्धविराम, के, लिए, नाज़ुक, स्थिति</media:keywords>
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<title>दुनिया में मची हलचल! Putin से मिलेंगे ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi, शांति वार्ता के पीछे सीक्रेट डील?</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका के साथ रुकी हुई शांति वार्ता के बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे। रूसी सरकारी मीडिया और क्रेमलिन ने इस हाई-प्रोफाइल बैठक की पुष्टि की है, जिसे वैश्विक राजनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने TASS न्यूज़ एजेंसी के माध्यम से पुष्टि की कि राष्ट्रपति पुतिन और अराघची के बीच बातचीत की योजना तय है। हालांकि रूस के विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा की पुष्टि पहले ही कर दी थी, लेकिन पुतिन के साथ सीधी मुलाकात यह संकेत देती है कि ईरान इस संकट में रूस की सक्रिय भूमिका चाहता है। रूस और तेहरान, जो दोनों ही पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के अधीन हैं, हाल के सालों में उनके बीच तेज़ी से करीबी रिश्ते बने हैं। मॉस्को की TASS न्यूज़ एजेंसी ने क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव का हवाला देते हुए रूसी नेता की योजनाओं की पुष्टि की। रूस के विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि अराघची बातचीत के लिए मॉस्को जाएंगे। मंत्रालय ने ज़्यादा जानकारी दिए बिना RIA नोवोस्ती न्यूज़ एजेंसी को बताया, &quot;हम बातचीत करने के मकसद से अराघची के रूस दौरे की पुष्टि करते हैं।&quot;ईरान की ISNA न्यूज़ एजेंसी ने रूस में तेहरान के एम्बेसडर काज़म जलाली के हवाले से कहा कि अराघची पुतिन से मिलेंगे और &quot;बातचीत, सीज़फ़ायर और आस-पास के डेवलपमेंट के लेटेस्ट स्टेटस पर रूसी अधिकारियों से सलाह लेंगे&quot;। ईरानी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अराघची रविवार को ही इस्लामाबाद से रूस के लिए निकल चुके थे।यह तब हुआ जब अराघची 24 घंटे से भी कम समय में दूसरी बार रूस जाते समय पाकिस्तानी राजधानी में रुके, इससे पहले वे ओमान भी गए थे, क्योंकि बिचौलिए 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ शांति वार्ता को जारी रखने पर ज़ोर दे रहे थे। ईरान के साथ अमेरिका-इज़राइल युद्ध में दो हफ़्ते से ज़्यादा समय पहले सीज़फ़ायर शुरू होने के बावजूद, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच सीधी बातचीत का दूसरा दौर नहीं हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:48:25 +0530</pubDate>
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<title>ईरान ने अमेरिका को भेजा नया &amp;apos;शांति प्रस्ताव&amp;apos;, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की पेशकश</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य और आर्थिक गतिरोध के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को एक नया शांति प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य परमाणु विवाद पर उलझने के बजाय पहले तत्काल तनाव कम करना और वैश्विक तेल मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना है।  इसे भी पढ़ें: Noapada Assembly Seat: Noapada में चतुष्कोणीय संग्राम, BJP-TMC के बीच Left-Congress ने बिगाड़ा खेलईरान के प्रस्ताव का एक अहम हिस्सा कथित तौर पर स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को फिर से खोलना है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। ईरान चाहता है कि परमाणु वार्ताओं जैसे ज़्यादा मुश्किल विषयों पर आगे बढ़ने से पहले नाकाबंदी हटा दी जाए और सामान्य जहाज़रानी फिर से शुरू हो जाए।ईरान के भीतर कोई स्पष्ट सहमति नहींईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मध्यस्थों को बताया कि अमेरिका की मांगों पर कैसे प्रतिक्रिया दी जाए, इस पर ईरान के भीतर अभी भी कोई स्पष्ट सहमति नहीं है। इस आंतरिक मतभेद ने वार्ताओं में प्रगति को धीमा कर दिया है।US ने अभी तक स्पष्ट जवाब नहीं दिया हैव्हाइट हाउस को प्रस्ताव मिल गया है, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वह इसे स्वीकार करेगा या अस्वीकार। US कई सालों से ईरान से यूरेनियम संवर्धन रोकने और देश से अपने भंडार को हटाने के लिए कह रहा है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से उम्मीद की जा रही है कि वे स्थिति पर चर्चा करने के लिए अपनी सुरक्षा टीम के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक करेंगे। हालांकि उन्होंने कड़ा रुख अपनाया है, लेकिन उन्होंने बातचीत का विकल्प भी खुला रखा है। इसे भी पढ़ें: West Bengal Government Schemes: क्या है West Bengal की Sabooj Sathi Scheme, जिससे Students को स्कूल जाने में मिली मददप्रस्ताव के अनुसार, दोनों पक्ष लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष-विराम या यहां तक ​​कि संघर्ष को स्थायी रूप से खत्म करने पर सहमत हो सकते हैं। परमाणु वार्ता तभी शुरू होगी जब स्थिति में सुधार होगा और नाकाबंदी हटा दी जाएगी। ईरान मिस्र, तुर्की और कतर सहित कई देशों के साथ इस योजना पर चर्चा कर रहा है, क्योंकि शांतिपूर्ण समाधान खोजने के प्रयास जारी हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:48:24 +0530</pubDate>
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<title>हमले से भड़का अमेरिका, दे डाली ईरान के ऑयल इंफ्रा को उड़ाने की धमकी</title>
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<description><![CDATA[ ईरान को ट्रंप की नई धमकी मिली है। ईरान के ऑल इंफ्रा पर हमले की धमकी दी गई है। ट्रंप ने ईरान की लीडरशिप को बहुत अजीब बताया है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने दूतों को इस्लामाबाद की यात्रा न करने के लिए कहा था। उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के बारे में पूछे जाने पर, ट्रंप ने कहा कि वह इस सैन्य गठबंधन से ‘‘बहुत, बहुत निराश’’ हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका इस गठबंधन से अलग होने पर विचार कर सकता है, क्योंकि सदस्य देशों ने ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद करने के बाद उनकी मदद की अपील को नजरअंदाज कर दिया। ट्रंप ने कहा हम कई वर्षों से उनकी मदद कर रहे हैं, खरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं, और जब हमें उनकी मदद चाहिए थी तो वे मौजूद नहीं थे, इसलिए हमें यह बात याद रखनी होगी।इसे भी पढ़ें: ईरान ने अमेरिका को भेजा नया &#039;शांति प्रस्ताव&#039;, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की पेशकशअमेरिका के साथ वार्ता के दूसरे दौर को लेकर अनिश्चितता के बीच तीन दिन में दूसरी बार पाकिस्तान पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल मुनीर और अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद अराघची शनिवार को इस्लामाबाद से रवाना हुए थे। वह ओमान गए थे, जहां उन्होंने सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सैद के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा और ईरान-अमेरिका संघर्ष को समाप्त करने के लिए राजनयिक प्रयासों पर बातचीत की। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ के अनुसार, इस्लामाबाद में संक्षिप्त प्रवास के बाद ईरानी नेता मॉस्को के लिए रवाना होंगे। पाकिस्तान की ओर से इस बैठक को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। बताया जा रहा है कि यह बैठक पाकिस्तान द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता के दूसरे दौर की व्यवस्था करने के लिए जारी शांति प्रयासों पर केंद्रित है। इसे भी पढ़ें: आखिर दुनिया का “थानेदार” ट्रंप और उनका अमेरिका खुद इतना असुरक्षित क्यों है?ग्यारह और बारह अप्रैल को आयोजित शांति वार्ता का पहला दौर संघर्ष में शामिल पक्षों के लिए वांछित परिणाम लाने में विफल रहा। ‘डॉन’ अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरानी नेता ओमान की एक दिवसीय यात्रा पूरी करने के बाद रावलपिंडी के नूर खान हवाई अड्डे पर पहुंचे। अखबार के मुताबिक, इस्लामाबाद में अपने संक्षिप्त प्रवास के दौरान वह पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और उसके बाद मॉस्को के लिए रवाना होंगे। पाकिस्तान ने अराघची के आगमन के बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन ‘जियो न्यूज’ सहित निजी मीडिया ने राजनयिक सूत्रों के हवाले से पूर्व में ही खबर दी थी कि ईरानी विदेश मंत्री मॉस्को जाने से पहले एक संक्षिप्त यात्रा पर पाकिस्तान पहुंचेंगे। शनिवार को अराघची के ओमान रवाना होने के बाद, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर अब ईरान के साथ वार्ता के लिए इस्लामाबाद नहीं जाएंगे। रविवार को ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिकी और ईरानी अधिकारी संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए फोन पर बातचीत कर सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:48:22 +0530</pubDate>
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<title>BRICS पर खेल, भारत&#45;चीन ने मिलकर किया बड़ा ऐलान</title>
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<description><![CDATA[ इस साल होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की कमान भारत के हाथों में। दुनिया भर में बढ़ते तनाव के बीच इस बार के ब्रिक्स पर वैसे ही कई देशों की नजर है और इसी बीच चीन की ओर से भी एक बड़ा बयान सामने आया जो इस आयोजन की अहमियत को और बढ़ाने का काम कर रहा है। दरअसल चीनी विदेश मंत्रालय के विशेष दूत  ने हाल ही में नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का सम्मान करता है और भारत की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना करता है। साथ ही साथ चीन ने उम्मीद जताई कि भारत के नेतृत्व में ब्रिक्स देश मिडिल ईस्ट के तनाव को कम करने और वैश्विक शांति के लिए एक मजबूत संदेश देंगे। चीन का मानना है कि भारत और चीन जैसे बड़े विकासशील देशों का साथ आना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। इसे भी पढ़ें: BRICS Summit के लिए Putin आएंगे India, Modi जाएँगे Russia, दोनों पक्के दोस्त मिलकर बदलेंगे वैश्विक समीकरण!चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक 23 अप्रैल 2026 को मध्यपूर्व मुद्दे पर चीनी सरकार के विशेष दूत झाई जून ने नई दिल्ली में भारत की विदेश मंत्रालय की सचिव नीना मल्होत्रा से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने ब्रिक्स तंत्र के तहत सहयोग को मजबूत करने पर विचारों का आदान प्रदान किया। भारत में चीन के राजदूत ज फहोंग भी इस बैठक में उपस्थित रहे। जाई जून ने कहा कि प्रमुख विकासशील देशों के रूप में चीन और भारत ने हमेशा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर संवाद बनाए रखा। चीन ब्रिक्स की रोटेटिंग प्रेसिडेंसी के रूप में भारत द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को महत्व देता है और उम्मीद करता है कि मध्य पूर्व पर होने वाली यह ब्रिक्स परामर्श बैठक क्षेत्रीय स्थिति पर एक मजबूत आवाज उठाएगी और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता प्राप्त करने में रचनात्मक भूमिका भी निभाएगी। वहीं भारत की ओर से नीना मल्होत्रा ने कहा कि भारत ब्रिक्स तंत्र के भीतर चीन द्वारा निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका को महत्व देता है और इस तंत्र के तहत प्रासंगिक गतिविधियों की मेजबानी में भारत को चीन के समर्थन की सराहना करता है। भारत क्षेत्रीय तनाव को जल्द से जल्द कम करने के लिए चीन सहित अन्य ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। आपको बता दें भारत 2026 में Bricks का मेजबान है और इस बार की थीम रेलियंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी रखी गई है। भारत का लक्ष्य है केवल आर्थिक चर्चा करना नहीं बल्कि डिजिटल तकनीक, ग्रीन एनर्जी और विकासशील देशों की आवाज को दुनिया के सामने मजबूती से रखना। और सबसे बड़ी बात bricks अब सिर्फ पांच देशों का समूह नहीं रहा। 2026 तक ये 11 शक्तिशाली देशों का एक कुबा बन चुका है। इसमें संस्थापक सदस्य ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका हैं। और नए सदस्य सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान, मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया। इन देशों के पास दुनिया की बड़ी आबादी, विशाल बाजार और तेल व गैस के असीमित संसाधन। वहीं ब्रिक्स की बढ़ती ताकत अमेरिका और पश्चिम देशों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इसके कुछ प्रमुख कारण हैं। पहला डीडोलराइजेशन। ब्रिक्स देश अब अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने पर जोर दे रहे हैं और अगर डॉलर का दबदबा कम हो जाता है तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उसकी वैश्विक पकड़ कमजोर हो सकती है। अमेरिका को डर है कि भारत चीन इस मंच का इस्तेमाल अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। कुल मिलाकर जहां पश्चिमी देशों में पहले से ही ब्रिक्स का विरोध हो रहा है। वहीं ब्रिक्स 2026 भारत के लिए एक सुनहरा अवसर है। जहां एक ओर चीन के साथ मिलकर क्षेत्रीय शांति पर बात हो रही है। वहीं दूसरी ओर भारत को अमेरिका और रूस चीन के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:48:21 +0530</pubDate>
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<title>Iran ने भेजा 3 स्टेप प्लान, मानेंगे ट्रंप? शक के घेरे में पाकिस्तान</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने अमेरिका के सामने ऐसा तीन स्टेप प्लान रख दिया है जो ट्रंप की टेंशन बढ़ा सकता है। इस बीच खबर यह भी है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता पर ईरान को शक है कि वो निष्पक्ष नहीं है और अमेरिका के पक्ष में झुका हुआ है। ईरान ने अमेरिका के सामने एक नया और चौंकाने वाला प्रस्ताव रख दिया है। एक्सओस की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने पाकिस्तान के जरिए वाशिंगटन को संदेश भेजा है कि पहले हॉर्मोज स्ट्रेट को फिर से खोलने और युद्ध खत्म करने पर समझौता किया जाए। जबकि परमाणु मुद्दे पर बातचीत बाद में भी की जा सकती है। ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका बातचीत को सफल बनाना चाहता है तो उसे इन तीन चरणों से गुजरना होगा। सबसे पहले युद्ध को पूरी तरह खत्म करना होगा। साथ ही अमेरिका को यह गारंटी देनी होगी कि भविष्य में ईरान और लेबनान के खिलाफ दोबारा ऐसी जंग शुरू नहीं की जाएगी। इसे भी पढ़ें: BRICS पर खेल, भारत-चीन ने मिलकर किया बड़ा ऐलानपहला चरण: युद्ध पूरी तरह से खत्म होना चाहिए और इस बात की पक्की गारंटी मिलनी चाहिए कि ईरान और लेबनान के खिलाफ दोबारा कोई जंग नहीं छेड़ी जाएगी।दूसरा चरण: अगर पहले चरण की मांगें मान ली जाती हैं, तो दूसरे चरण में सभी पक्ष होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के कामकाज और देखरेख पर चर्चा करेंगे। यह दुनिया के लिए एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है।तीसरा चरण: ऊपर के दोनों चरण पूरे होने के बाद ही ईरान परमाणु मुद्दे पर बातचीत करेगा। यह सबसे अहम बात है क्योंकि अमेरिका लंबे समय से यह मांग कर रहा है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन (uranium enrichment) बंद करे और अपने परमाणु भंडार को देश से बाहर भेजे।इसे भी पढ़ें: ईरान ने अमेरिका को भेजा नया &#039;शांति प्रस्ताव&#039;, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की पेशकशइस प्रस्ताव पर जवाब देते हुए व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने एक्सियोस को बताया, ये बहुत ही संवेदनशील कूटनीतिक बातचीत है और अमेरिका मीडिया के ज़रिए कोई मोलभाव नहीं करेगा। जैसा कि राष्ट्रपति ने कहा है, अमेरिका का पलड़ा भारी है और वह सिर्फ वही समझौता करेगा जो अमेरिकी लोगों के हित में हो। अमेरिका कभी भी ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:48:19 +0530</pubDate>
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<title>300 सेकेंड में 96 ड्रोन, China के Atlas ने क्यों बढ़ाई भारत समते दुनिया की चिंता?</title>
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<description><![CDATA[ भविष्य में जंग कैसे लड़ी जाएगी इसके कई जवाब हो सकते हैं। मिसाइल से फाइटर जेट से या जंगी जहाजों से ये सभी चीजें अपनी-अपनी जगह बेहतर हैं। लेकिन हालिया युद्धों ने हमें जो सिखाया है उसे देखकर तो यही लगता है कि भविष्य की जंगों की दिशा ड्रोन्स तय कर सकते हैं। कम खर्चे में ज्यादा तबाही, दुश्मन के खेमे में ज्यादा कंफ्यूजन और एयर डिफेंस को चकमा। इन सभी कामों में ड्रोन से बेहतर फिलहाल कुछ नहीं है। अब चीन ने एक नया ड्रोन सिस्टम लॉन्च किया है जो भारत समेत पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन सकता है। इस सिस्टम का नाम एटलस है। एटलस ड्रोन स्वार्म  सिस्टम। पहले आपको बताते हैं कि स्वार्म ड्रोनस क्या होते हैं? स्वार्म शब्द का मतलब होता है एक झुंड। मधुमक्खी के झुंडों के लिए स्वार्म  शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह के ड्रोंस एक साथ बड़ी संख्या में हमला करते हैं। इससे फायदा यह होता है कि दुश्मन का एयर डिफेंस कंफ्यूज हो जाता है। वो समझ नहीं पाता कि ड्रोन को पहले रोके। जब तक वह अपना टारगेट चुनता है तब तक और भी ड्रोंस आ जाते हैं। इससे एयर डिफेंस को पहले ही नाकाम करने में मदद मिलती है जिससे मिसाइल्स और फाइटर जेट्स के लिए कोई रुकावट नहीं रह जाती। इसे भी पढ़ें: BRICS पर खेल, भारत-चीन ने मिलकर किया बड़ा ऐलानअब आपको बताते हैं कि चाइना का नया एटलस फॉर्म ड्रोन सिस्टम क्या है? चीन का एटलस सिस्टम पहियों पर चलने वाले एक छोटे बैटल फील्ड नेटवर्क जैसा है जिसमें ड्रोन को एक ट्रक से लॉन्च किया जाता है। इन ड्रोंस और उनके लॉन्च को एक ही ऑपरेटर दूर से कंट्रोल करते हैं। यह एक बड़े इलाके में जासूसी, कम्युनिकेशन और एयर डिफेंस के लिए भ्रम पैदा करने का काम करते हैं। इससे भी ज्यादा जरूरी बात यह है कि यह एक बहुत ही छोटी यूनिट होती है जिसे छिपाना, कैमोफ्लाज में रखना और दूरदराज से ऑपरेट करना आसान है। एटलस सिस्टम एक साथ 96 छोटे-छोटे और मीडियम साइज के तेज ड्रोन लॉन्च कर सकता है। यह ड्रोन जो बचाव और हमला दोनों में बहुत काम आते हैं। एक ड्रोन के बीच लॉन्च का समय 3 सेकंड से भी कम का होता है। इसलिए 300 सेकंड के अंदर यह सिस्टम हमला करने, जासूसी करने या दुश्मन को कंफ्यूज करने के लिए सभी 96 ड्रोंस लॉन्च कर सकता है। हाल के युद्धों में ही देख लें तो ईरान अमेरिका युद्ध के दौरान सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर मौजूद अमेरिका के E3 सेंट्री एडब्ल्यूएसीएस विमान को 29 ड्रोंस के एक झुंड और कुछ बैलस्टिक मिसाइलों ने तबाह कर दिया था। पूरे एटलस सिस्टम को देखें तो इनमें तीन यूनिट्स होती हैं। इनमें एक स्वम टू ग्राउंड कॉम्बैट व्हीकल, एक कमांड व्हीकल और एक सपोर्ट व्हीकल होता है। एक अकेला स्वम टू ग्राउंड कॉम्बैट व्हीकल 48 फिक्स्ड विंग ड्रोन लॉन्च कर सकता है। एक अकेला कमांड व्हीकल एक ही समय में एक झुंड में 96 ड्रोंस को कंट्रोल कर सकता है। इसका आकार और इसकी स्पीड इसे जासूसी करने, इंटरसेप्शन करने और जरूरी टारगेट्स पर हमला करने के लिए बेहद उपयोगी बनाती है। इसे भी पढ़ें: चीनी हथियार वाले जहाज पर अमेरिका का कब्जा, मचा बवाल !इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ऑपरेशनल जरूरतों के आधार पर एटलस को अपने हिसाब से कंफिगर भी किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए पहले जासूसी ड्रोन तैनात किए जा सकते हैं। जबकि दुश्मनों को दबाने के लिए हमलावर ड्रोन से पहले इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर वाले ड्रोन भेजे जा सकते हैं। इससे अलग-अलग स्थितियों के अनुसार खास तरह से जवाब देना संभव हो जाता है। स्वर्म इंटेलिजेंस से लैस लगभग 100 हाई स्पीड ड्रोन मिशन के दौरान बहुत कम समय में सटीक इंफॉर्मेशन बना सकते हैं। वो हवा के बहाव में गड़बड़ी जैसी स्थिति में भी खुद को संभालने में सक्षम होते हैं। अब आपको यह भी बताते हैं कि यह एटलस वर्म ड्रोंस इंडिया और ताइवान के लिए टेंशन की बात क्यों है। एटलस सिस्टम ताइवान और भारत के एयर डिफेंस को कंफ्यूज कर सकता है। इसे नष्ट करने के लिए भारत और ताइवान को इसके कई हिस्सों को बर्बाद करना पड़ेगा जो इसकी स्पीड और कैमोफ्लैश क्षमता को देखते हुए मुश्किल जान पड़ता है। इसके अलावा सिस्टम की एल्गोरिदम से ऑपरेट होने वाली किल चेन और खुद से टारगेट की पहचान करने की क्षमता इसे और घातक बनाती है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:48:18 +0530</pubDate>
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<title>भरोसे के लायक नहीं...ईरानी सांसद ने पाकिस्तान को बुरी तरह ठोका</title>
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<description><![CDATA[ ईरान अमेरिका के टकराव और उसके बीच नाम बटोरने की कोशिश में लगा हुआ पाकिस्तान एक बार फिर से ही पूरी दुनिया के सामने एक्सपोज हो गया है और इस बार पाकिस्तान को एक्सपोज किया है ईरान ने जहां ईरान की तरफ से अब साफ तौर पर कह दिया गया है कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो भरोसे के लायक नहीं है और शांति समझौता करवाने के नाम पर पाकिस्तान खुद की जो ब्रांडिंग में लगा हुआ है। उसको भी अब ईरान ने तार-तार कर दिया है। ईरानी सांसद ने ही पाकिस्तान की पोल खोल कर रख दी है। दरअसल ईरान के सांसद इब्राहिम रियाजी ने खुलकर कह दिया है कि पाकिस्तान शांति वार्ता के लिए भरोसेमंद मध्यस्थ नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान खुद को ईरान और अमेरिका के बीच एक पुल के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है और लगातार खुद को पीसमेकर जैसी उपाधि देने की कोशिश में लगा है। इसे भी पढ़ें: हमले से भड़का अमेरिका, दे डाली ईरान के ऑयल इंफ्रा को उड़ाने की धमकीईरानी सांसद रिजाई ने साफ़ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान एक अच्छा पड़ोसी हो सकता है। लेकिन जब बात निष्पक्ष मध्यस्थ बनने की आती है, तो पाकिस्तान उस कसौटी पर खड़ा नहीं उतरता है। ईरानी सांसद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अक्सर डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के इशारों पर चलता है और उनके फायदे को ध्यान में रखकर फैसले करता है। यानी सीधे तौर पर ईरान का मानना है कि पाकिस्तान बातचीत में बैलेंस नहीं रखता है और वह एक तरफ यानी अमेरिका की ओर झुका रहता है। इतना ही नहीं रिजाई ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान कई सारी अहम सच्चाइयों को दुनिया के सामने लाने से बचता है। उनके मुताबिक ऐसे मौके आए जब अमेरिका ने पाकिस्तान के प्रस्तावों को पहले स्वीकार किया लेकिन बाद में पीछे हट गया। इसके बावजूद कि पाकिस्तान इन बातों को जानता था।इसे भी पढ़ें: ईरान ने अमेरिका को भेजा नया &#039;शांति प्रस्ताव&#039;, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की पेशकश उसने कभी खुलकर उजागर नहीं किया। उन्होंने लेबनान और ब्लॉकेड एसेट जैसे मुद्दों का भी जिक्र करते हुए अमेरिका के कई कमिटमेंट पूरे नहीं करने पर पाकिस्तान की चुप्पी को भी साधा है। ये सारी बातें इब्राहिम रियाजी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट एक्स हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखी। पाकिस्तान हमेशा से ही डबल गेम के लिए बदनाम रहा है। कुछ दिन पहले अमेरिकी मीडिया में भी एक रिपोर्ट सामने आई थी। जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि पाकिस्तान अमेरिका के लिए खतरा है। खासतौर पर पाकिस्तान का आर्मी चीफ आसिम मुनीर और अब ईरान भी सामने से खुलकर कह रहा है कि पाकिस्तान भरोसे के लायक नहीं है। पाकिस्तान ने पहले भी कई बार कई मौकों पर अपने फायदे और लालच के लिए कई देशों को धोखा दिया है। जिसमें सबसे पहला शिकार बनते हैं उसके मुस्लिम ब्रदरहुड के देश जहां वो पहले तो मुस्लिम उम्मा की बात करता है। लेकिन जैसे ही उसके फायदे या लालच की बात सामने आती है। वो मुस्लिम ब्रदरहुड को भी बेच देता है। ऐसे में ईरानी सांसद की तरफ से आया यह बयान सिर्फ पाकिस्तान की आलोचना नहीं है बल्कि एक बड़ा संकेत भी है कि आने वाले समय में हो सकता है कि ईरान और अमेरिका की बातचीत मुश्किल हो जाए क्योंकि पाकिस्तान जैसा मध्यस्थ किसी काम का नहीं। जहां रिपोर्ट्स में अमेरिका के लिए भी वो खतरा है तो वहीं अब ईरान को भी उसके ऊपर भरोसा नहीं है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:48:18 +0530</pubDate>
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<title>White House के बाहर Shooting पर बोले Donald Trump&#45; मैं घबराया नहीं, देखना चाहता था क्या हो रहा है</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि शनिवार रात ‘व्हाइट हाउस करेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन’ के रात्रिभोज के दौरान होटल के बॉलरूम के बाहर हुई गोलीबारी के बाद जब सुरक्षाकर्मी उन्हें बाहर ले जा रहे थे, तब वह खुद देखना चाहते थे कि आखिर क्या हो रहा है।
सीबीएस के ‘60 मिनट्स’ कार्यक्रम में एक साक्षात्कार में ट्रंप ने वाशिंगटन हिल्टन होटल में गोलीबारी के बाद फैली अफरातफरी का पूरा घटनाक्रम बताया।
जब उनसे पूछा गया कि क्या गोलियों की आवाज सुनकर वह चिंतित थे, तो ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं घबराया नहीं था। मैं जिंदगी को समझता हूं। आजकल की दुनिया में कुछ भी हो सकता है।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि वह खुद घटनाक्रम को देखना चाहते थे, संभवतः इसी वजह से ‘सीक्रेट सर्विस’ के कर्मियों को उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने में समय लग गया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं देखना चाहता था कि क्या हो रहा है। मैं उनके (सीक्रेट सर्विस के) साथ सहयोग नहीं कर रहा था। मैं जानना चाहता था कि क्या चल रहा है। धीरे-धीरे जब बात समझ में आई, तो लगा कि यह बॉलरूम का शोर नहीं, कुछ और ही मामला है, और गंभीर है।’’
ट्रंप ने घटना को याद करते हुए कहा, ‘‘मैं एक सजग टीम के मजबूत घेरे में था, लेकिन सच कहूं तो मैंने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं। मैं कहता रहा, ठहरो, एक मिनट ठहरो।’’
उन्होंने कहा कि जब वह मंच से बाहर निकल रहे थे, तब सुरक्षाकर्मी बार-बार उनसे नीचे झुकने की गुजारिश कर रहे थे।
ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं चलने लगा और उन्होंने कहा, कृपया नीचे झुकिए, कृपया फर्श की ओर झुकिए। तो मैं झुक गया और मेलानिया भी झुक गईं।’’
साक्षात्कार के दौरान कुछ तीखे पल भी आए, जब ट्रंप से हमले से पहले संदिग्ध द्वारा अपने परिवार को भेजे गए एक संदेश में उनके बारे में लिखी बातों पर सवाल किया गया।
ट्रंप ने कहा, ‘‘मुझे पहले से पता था कि आप यह पढ़ेंगे, क्योंकि आप लोग ऐसे ही हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हां, उसने यह लिखा, लेकिन मैं बलात्कारी नहीं हूं। मैंने वह संदेश पढ़ा है, वह एक बीमार आदमी है। ‘60 मिनट्स’ जैसे कार्यक्रम में ऐसी बातें पढ़ना शोभा नहीं देता, लेकिन चलिए साक्षात्कार जारी रखते हैं।’’
जब साक्षात्कारकर्ता ने पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि हमलावर विशेष रूप से उन्हें निशाना बना रहा था, तो ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं कोई बच्चों का शोषण करने वाला व्यक्ति नहीं हूं…आप किसी दिमागी रूप से बीमार इंसान की बकवास पढ़ रहे हैं? मुझे ऐसी चीजों से जोड़ा जा रहा है, जिनका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है। मुझे पूरी तरह बेदाग साबित किया जा चुका है।’’
अंत में राष्ट्रपति ने ‘व्हाइट हाउस करेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन’ से अपील की कि वे अगले 30 दिन के भीतर यह रात्रिभोज दोबारा आयोजित करें।
ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं नहीं चाहता कि यह रद्द हो। मुझे लगता है कि किसी कम अक्ल इंसान द्वारा इस तरह के आयोजन को रद्द करवा देना बेहद बुरी बात है।’’
उन्होंने यह भी कहा, ‘‘ऐसा नहीं है कि मैं वहां जाना चाहता हूं। मैं बहुत व्यस्त हूं। मुझे इसकी जरूरत नहीं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:48:17 +0530</pubDate>
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<title>White House Shooting पर बोले Obama&#45; लोकतंत्र में हिंसा की जगह नहीं, Trump पर साधी चुप्पी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर में हाल ही में हुई गोलीबारी की घटना की निंदा करते हुए कहा है कि एक लोकतांत्रिक समाज में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने इस कार्यक्रम में मौजूद सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई और बहादुरी की भी सराहना की। यह घटना एक हाई-प्रोफाइल सालाना कार्यक्रम के दौरान हुई, जिसमें अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और कई सीनियर अधिकारी शामिल थे। अधिकारियों ने पुष्टि की कि सभी खास मेहमान सुरक्षित हैं। हालांकि, हालात को संभालने की कोशिश में एक सीक्रेट सर्विस अधिकारी घायल हो गया।इसे भी पढ़ें: White House के बाहर Shooting पर बोले Donald Trump- मैं घबराया नहीं, देखना चाहता था क्या हो रहा हैओबामा ने एक्स पर पोस्ट किया हालांकि, व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर में कल रात हुई गोलीबारी के पीछे के मकसद के बारे में हमारे पास अभी पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन हम सभी की यह ज़िम्मेदारी है कि हम इस सोच को सिरे से खारिज कर दें कि हमारे लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह है। यह हमें US सीक्रेट सर्विस एजेंट्स की उस हिम्मत और कुर्बानी की भी याद दिलाता है, जो वे हर दिन दिखाते हैं। मैं उनका शुक्रगुज़ार हूँ और इस बात के लिए भी आभारी हूँ कि जिस एजेंट को गोली लगी थी, वह अब ठीक हो जाएगा। कई दूसरे ग्लोबल नेताओं के उलट, जिन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के सुरक्षित होने पर सार्वजनिक तौर पर राहत ज़ाहिर की थी, ओबामा ने अपनी पोस्ट में US राष्ट्रपति का ज़िक्र नहीं किया।इसे भी पढ़ें: Kash Patel को छोड़कर ट्रंप के सारे अफसर निशाने पर थे, व्हाइट हाउस प्रेस डिनर के शूटर की टारगेट लिस्ट से खुलासासंदिग्ध पकड़ा गयागोलीबारी के मामले में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान कैलिफ़ोर्निया के 31 वर्षीय कोल टॉमस एलन के रूप में हुई है। जांचकर्ताओं का कहना है कि घटना से कुछ ही समय पहले उसने अपने परिवार को कुछ परेशान करने वाले संदेश भेजे थे, जिससे उसके इरादों को लेकर चिंताएं पैदा हो गई थीं। एपी द्वारा उद्धृत एक कानून प्रवर्तन अधिकारी के अनुसार, एलन ने अपने लिखे हुए संदेशों में खुद को एक &quot;मिलनसार संघीय हत्यारा&quot; बताया था। ये संदेश गोलीबारी शुरू होने से कुछ ही मिनट पहले भेजे गए थे, और अब जांच के हिस्से के तौर पर इनकी बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना ​​है कि इन संदेशों की सामग्री किसी राजनीतिक मकसद की ओर इशारा करती है। बताया जाता है कि संदिग्ध ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी कई नीतियों पर गुस्सा ज़ाहिर किया था, हालांकि उसने उनका नाम लेकर ज़िक्र नहीं किया था। इन संदेशों में हालिया सरकारी कार्रवाइयों और प्रशासन से जुड़ी व्यापक शिकायतों का भी ज़िक्र था। इन संदेशों में पूर्वी प्रशांत महासागर में नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाली नावों के खिलाफ अमेरिका के अभियानों जैसे मुद्दों का भी ज़िक्र किया गया था। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:48:15 +0530</pubDate>
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<title>टोगो फ्लैग वाले टैंकर पर ईरान का हमला, जहाज पर सवार थे 12 भारतीय</title>
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<description><![CDATA[ बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि ओमान के तट के पास ईरान ने टोगो का झंडा लगे एक केमिकल टैंकर पर हमला किया, जिसमें भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे। यह घटना 25 अप्रैल को हुई थी, जिसमें शिनास के बाहरी बंदरगाह क्षेत्र के पास MT Siron नामक जहाज़ शामिल था। इसे भी पढ़ें: BRICS पर खेल, भारत-चीन ने मिलकर किया बड़ा ऐलानईरानी कोस्ट गार्ड ने भारतीय क्रू वाले टैंकर पर हमला कियापश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बोलते हुए, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक मनदीप सिंह रंधावा ने कहा कि 25 अप्रैल, 2026 को, टोगो के झंडे वाले एक केमिकल टैंकर, MT Siron से जुड़ी एक घटना की सूचना मिली, जिस पर भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। यह घटना ओमान के शिनास के बाहरी बंदरगाह क्षेत्र के पास हुई। रंधावा ने आगे कहा कि यह जहाज़ अन्य जहाजों के साथ चल रहा था, तभी ईरानी कोस्ट गार्ड ने इसे रोक लिया और चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं; उन्होंने यह भी बताया कि जहाज़ पर सवार सभी भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित हैं।इसे भी पढ़ें: भरोसे के लायक नहीं...ईरानी सांसद ने पाकिस्तान को बुरी तरह ठोकाशिपिंग मंत्रालय MEA और अन्य से संपर्क मेंमंत्रालय ने कहा कि वह स्थिति पर नज़र रखने और इस क्षेत्र में नाविकों तथा शिपिंग कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय (MEA), भारतीय मिशनों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े अन्य पक्षों के साथ लगातार तालमेल बनाए हुए है। उन्होंने आगे कहा कि बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, भारतीय मिशनों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े अन्य पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है, और वह चालक दल तथा समुद्री कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं।भारतीय झंडे वाले जहाज़ों पर गोलीबारीयह ध्यान रखना ज़रूरी है कि IRGC ने पहले भी दो अन्य भारतीय जहाज़ों VLCC Sanmar Herald और बल्क कैरियर Jag Arnav पर गोलीबारी की थी, जब वे Strait of Hormuz को पार करने की कोशिश कर रहे थे; इस वजह से दोनों जहाज़ों को वापस लौटना पड़ा था। भारत ने इस घटना को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। हालाँकि, जहाज़ों पर सवार किसी भी क्रू सदस्य को कोई चोट नहीं आई थी। यह पहला ऐसा मामला था जिसमें ईरानी सुरक्षा बलों ने 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद भड़के संघर्ष के बीच किसी भारतीय जहाज़ को निशाना बनाया था। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:48:14 +0530</pubDate>
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<title>America दबाव बनाने से बाज नहीं आ रहा, Iran को Donald Trump के बयानों पर पलटवार करने में मजा आ रहा</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच कूटनीति और टकराव दोनों समानांतर चल रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इन दिनों लगातार सक्रिय कूटनीतिक दौरों पर हैं। पाकिस्तान और ओमान की यात्राओं के बाद वह रूस पहुंचे, जहां उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि हालिया बातचीत बेनतीजा रहने के लिए अमेरिका जिम्मेदार है। अराघची ने साफ कहा कि वाशिंगटन की अत्यधिक मांगों ने वार्ता को पटरी से उतार दिया, जबकि प्रगति की गुंजाइश मौजूद थी। उन्होंने यह भी दो टूक कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि पूरी दुनिया का अहम मुद्दा है। देखा जाये तो अराघची की यह कूटनीतिक सक्रियता रणनीतिक संदेशों से भरी हुई है। पाकिस्तान में उन्होंने शीर्ष नेतृत्व और सेना प्रमुख से मुलाकात कर अमेरिका तक ईरान की तथाकथित ‘रेड लाइन’ पहुंचाई, जिसमें परमाणु मुद्दा और होर्मुज जलडमरूमध्य प्रमुख हैं। ओमान में भी उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा की। रूस पहुंचकर उन्होंने यह संकेत दिया कि ईरान अब बहुपक्षीय समर्थन के साथ आगे बढ़ना चाहता है।दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख पूरी तरह दबाव की राजनीति पर आधारित नजर आ रहा है। उन्होंने खुले तौर पर कहा कि ईरान चाहे तो खुद संपर्क करे, लेकिन अमेरिका झुकने वाला नहीं है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों और आर्थिक नाकेबंदी ने ईरान की सैन्य और औद्योगिक क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग खत्म हो चुकी हैं और उसकी मिसाइल फैक्ट्रियों को भारी नुकसान हुआ है। देखा जाये तो ट्रंप के बयान मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति हैं। उन्होंने कहा कि अगर ईरान “समझदारी” नहीं दिखाता तो अमेरिका किसी भी स्थिति में जीत हासिल करेगा। लेकिन इसी के साथ उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के भीतर मतभेद हैं और यही स्थिति आगे के घटनाक्रम को प्रभावित कर सकती है।हालांकि ईरान ने भी उसी तीखे अंदाज में जवाब दिया है। उपराष्ट्रपति इस्माइल सघाब इस्फहानी ने साफ चेतावनी दी कि अगर ईरान के तेल ढांचे को नुकसान पहुंचा तो चार गुना जवाब दिया जाएगा। यह बयान इस पूरे टकराव को सीधे आर्थिक युद्ध से जोड़ देता है।इसे भी पढ़ें: White House Shooting पर बोले Obama- लोकतंत्र में हिंसा की जगह नहीं, Trump पर साधी चुप्पीइस बीच, ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भी भेजा है। रिपोर्टों के अनुसार यह दो चरणों की योजना है, जिसमें पहले युद्ध समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की बात है, जबकि परमाणु मुद्दे को बाद में उठाने का संकेत दिया गया है। इसके बदले में ईरान चाहता है कि अमेरिका उसकी नाकेबंदी खत्म करे।लेकिन यह कूटनीतिक कोशिशें जमीनी हालात से मेल नहीं खा रहीं। दक्षिणी लेबनान में इजरायल के हमले लगातार जारी हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हो चुकी है। संघर्ष विराम के बावजूद हो रहे ये हमले स्थिति की गंभीरता को उजागर करते हैं। हिजबुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायली सैनिकों को निशाना बनाने का दावा किया है।होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे संकट का सबसे संवेदनशील केंद्र बन चुका है। ईरानी नेताओं ने साफ कहा है कि अब युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापसी संभव नहीं है। यह सीधा संकेत है कि तेहरान इस रणनीतिक मार्ग को अपने प्रभाव के दायरे में रखना चाहता है।ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अल बुसैदी ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई और कहा कि समुद्री सुरक्षा और फंसे हुए नाविकों की रिहाई बेहद जरूरी है। इससे साफ है कि यह संकट अब मानवीय पहलुओं को भी प्रभावित कर रहा है।ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने भी अमेरिका को जवाब देते हुए कहा कि केवल अमेरिका के पास ही ताकत नहीं है। उन्होंने एक प्रतीकात्मक गणितीय उदाहरण के जरिए बताया कि दोनों पक्षों के बीच शक्ति संतुलन बना हुआ है। यह बयान संकेत देता है कि ईरान खुद को कमजोर मानने को तैयार नहीं है।हालांकि पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल भी उठ रहे हैं। एक ईरानी सांसद ने कहा कि पाकिस्तान पूरी तरह निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं है और वह अमेरिका के प्रभाव में है। इसके बावजूद तेहरान इस्लामाबाद के जरिए संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, जो उसकी कूटनीतिक मजबूरी को दर्शाता है।उधर, समुद्री क्षेत्र में भी तनाव बढ़ता दिख रहा है। ओमान के पास समुद्री क्षेत्र में तनाव उस समय और बढ़ गया जब टोगो के झंडे वाले एक रासायनिक टैंकर को ईरानी तटरक्षक बल ने रोक लिया। यह घटना शिनास बंदरगाह की बाहरी सीमा के पास हुई, जहां यह जहाज अन्य जहाजों के साथ सामान्य रूप से आगे बढ़ रहा था। इसी दौरान ईरानी बलों ने उसे घेर लिया और चेतावनी के तौर पर फायरिंग की। भारत के शिपिंग मंत्रालय के अनुसार जहाज पर मौजूद सभी 12 भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं, हालांकि इस घटना ने क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। इस पूरे संकट का असर वैश्विक राजनीति पर भी दिख रहा है। अमेरिका द्वारा एक चीनी रिफाइनरी पर लगाए गए प्रतिबंधों का चीन ने कड़ा विरोध किया है और इसे अवैध करार दिया है। चीन ने स्पष्ट कहा कि वह अपनी कंपनियों के हितों की रक्षा करेगा।कुल मिलाकर देखें तो स्थिति बेहद विस्फोटक बनी हुई है। एक तरफ ईरान कूटनीतिक मोर्चे पर सक्रिय होकर अपनी शर्तें तय करना चाहता है, तो दूसरी तरफ अमेरिका दबाव और प्रतिबंधों के जरिए उसे झुकाने की कोशिश कर रहा है। जमीनी स्तर पर जारी हमले, समुद्री तनाव और राजनीतिक बयानबाजी इस संकट को और जटिल बना रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या कूटनीति इस आग को बुझा पाएगी या फिर यह संघर्ष और व्यापक रूप लेगा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:48:13 +0530</pubDate>
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<title>समुंदर में चीन को तोड़ने उतरा भारत का जिगरी दोस्त, हुई फील्डिंग सेट!</title>
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<description><![CDATA[ भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर एक ऐसा कदम उठाने जा रहे हैं जो इंडोपेसिफिक क्षेत्र में इनकी ताकत को और बढ़ाने का काम करेगा। दरअसल खबर यह है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया इस साल एक नया समुद्री सहयोग समझौता यानी कि मेरिटाइम कोऑपरेशन पैक साइन करने की तैयारी में है। यह समझौता हिंद महासागर में सुरक्षा निगरानी और सैन्य सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने साफ कहा कि भारत उनके लिए इंडोपेसिफिक में एक सबसे अहम रणनीतिक साझेदार बन चुका है। यानी अब दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़े स्तर पर पहुंच चुके हैं। और अगर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मेरिटाइम कोऑपरेशन पैक साइन हो जाता है तो इस क्षेत्र में दोनों ही देशों को बढ़त मिलेगी, फायदा मिलेगा और यह दोनों देश साथ मिलकर इस क्षेत्र की निगरानी कर पाएंगे। इसे भी पढ़ें: 300 सेकेंड में 96 ड्रोन, China के Atlas ने क्यों बढ़ाई भारत समते दुनिया की चिंता?दरअसल खबर यह है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया इस साल एक नया समुद्री सहयोग समझौता यानी कि मेरिटाइम कोऑपरेशन पैक साइन करने की तैयारी में है। यह समझौता हिंद महासागर में सुरक्षा निगरानी और सैन्य सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने साफ कहा कि भारत उनके लिए इंडोपेसिफिक में एक सबसे अहम रणनीतिक साझेदार बन चुका है। यानी अब दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़े स्तर पर पहुंच चुके हैं। और अगर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मेरिटाइम कोऑपरेशन पैक साइन हो जाता है तो इस क्षेत्र में दोनों ही देशों को बढ़त मिलेगी, फायदा मिलेगा और यह दोनों देश साथ मिलकर इस क्षेत्र की निगरानी कर पाएंगे। दरअसल देखा जाए तो पिछले कुछ वक्त में चीन की बढ़ती दादागिरी के चलते ऑस्ट्रेलिया भारत का सहयोग चाहता है।इसे भी पढ़ें: America दबाव बनाने से बाज नहीं आ रहा, Iran को Donald Trump के बयानों पर पलटवार करने में मजा आ रहाऑस्ट्रेलिया चाहता है कि भारत इस क्षेत्र में उसका सहयोग करें ताकि किसी एक देश की दादागिरी ना चलने पाए और यह जो खबर सामने आई कि भारत और ऑस्ट्रेलिया इस साल एक नया समुद्री सहयोग समझौता साइन करने की तैयारी में है। इसे अगर आसान भाषा में समझा जाए तो भारत और ऑस्ट्रेलिया अब हिंद महासागर में मिलकर काम करेंगे। दोनों देश अपने संसाधन तकनीक और सैन्य क्षमताएं साझा करेंगे।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:48:12 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump की हत्या करने White House में घुसा था आरोपी? आजीवन कारावास की संभावना</title>
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<description><![CDATA[ व्हाइट हाउस प्रेस डिनर के दौरान हुई सनसनीखेज गोलीबारी के मामले में न्याय विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। कैलिफ़ोर्निया के 31 वर्षीय संदिग्ध, कोल थॉमस एलन, पर अब औपचारिक रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की &#039;हत्या के प्रयास&#039; का आरोप लगाया गया है। यदि एलन इन आरोपों में दोषी पाया जाता है, तो उसे अपना शेष जीवन जेल की सलाखों के पीछे (आजीवन कारावास) बिताना पड़ सकता है।एलन, जिसके पास शनिवार की गोलीबारी के दौरान &#039;कई हथियार&#039; थे, सोमवार को वाशिंगटन की एक संघीय अदालत में पेश हुआ। उसका प्रतिनिधित्व संघीय बचाव कार्यालय के वकीलों ने किया। एलन ने कोई दलील पेश नहीं की, और उस पर &quot;अंतर-राज्यीय व्यापार में हथियार और गोला-बारूद ले जाने&quot; और &quot;हिंसक अपराध के दौरान हथियार चलाने&quot; का आरोप लगाया गया। फिलहाल उस पर निम्नलिखित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं: हथियारों की तस्करी: अंतर-राज्यीय व्यापार में अवैध रूप से हथियार और गोला-बारूद ले जाना। हिंसक अपराध: किसी हिंसक कृत्य को अंजाम देने के दौरान हथियार चलाना। सुनवाई के दौरान संघीय बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि एलन का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है और कानूनन उसे फिलहाल निर्दोष माना जाना चाहिए। एलन का प्रतिनिधित्व दो सहायक सरकारी वकीलों ने किया, जिनमें तेज़ीरा अबे भी शामिल थीं। उन्होंने अदालत को बताया कि एलन का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और &quot;इस समय उसे निर्दोष माना जा रहा है&quot;।मकसद का खुलासा अभी बाकीसोमवार की सुनवाई के दौरान, अभियोजकों ने एलन के मकसद का खुलासा नहीं किया। लेकिन हमले को अंजाम देने से ठीक पहले एलन ने अपने परिवार वालों को एक घोषणापत्र (manifesto) भेजा था, जिसमें उसने खुद को &#039;फ्रेंडली फ़ेडरल असैसिन&#039; (Friendly Federal Assassin) बताया था। माना जा रहा है कि इसके ज़रिए उसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की थी।एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जांचकर्ता उसके घोषणापत्र और सोशल मीडिया पर लिखी बातों को उसकी मानसिकता और संभावित मकसद के सबूत के तौर पर देख रहे हैं।एलन होटल में मेहमान के तौर पर रुका थाकार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच के अनुसार, एलन ट्रेन से कैलिफ़ोर्निया से शिकागो गया और फिर वाशिंगटन के हिल्टन होटल में जाकर रुका, जहाँ उसने एक मेहमान के तौर पर चेक-इन किया। इसके बाद एलन का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह सुरक्षा बैरिकेड को पार करते हुए और कई राउंड गोलियां चलाते हुए दिखाई दिया। बाद में कानून प्रवर्तन से जुड़े एक अधिकारी ने उसे काबू कर लिया।अधिकारियों का कहना है कि एलन—जिसे ट्रंप ने &quot;काफी दुष्ट&quot; बताया था—कैलिफ़ोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से ग्रेजुएट है। उसने कैलिफ़ोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी-डोमिंगुएज़ हिल्स से कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री भी हासिल की है। इसके अलावा, कई रिपोर्टों में उसे एक शौकिया वीडियो गेम डेवलपर भी बताया गया है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:48:11 +0530</pubDate>
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<title>श्रीलंका: भूस्खलनों के बीच सीखने की जद्दोजहद जारी रखने का जोश</title>
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<description><![CDATA[ श्रीलंका के बदुल्ला ज़िले में चक्रवात दित्वाह के बाद, शिक्षकों और छात्रों के लिए, स्कूल तक रोज़ का सफ़र एक कठिन परीक्षा बन गया है. इसके बावजूद, वे तमाम मुश्किलों के बीच शिक्षा जारी रखने के लिए डटे हुए हैं. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:47:32 +0530</pubDate>
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<title>Kash Patel को छोड़कर ट्रंप के सारे अफसर निशाने पर थे, व्हाइट हाउस प्रेस डिनर के शूटर की टारगेट लिस्ट से खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आखिरकार व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन डिनर में लौट रहे थे। ट्रंप ने बाद में खुद माना कि वह मीडिया के साथ खास तौर पर तीखे अंदाज़ में पेश आने की तैयारी कर रहे थे। फिर गोलियां चलीं। सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने राष्ट्रपति, फर्स्ट लेडी और उपराष्ट्रपति को कैबिनेट के दूसरे सदस्यों के साथ सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया। हमलावर, 31 साल के कोल थॉमस एलन, तीन हथियार लेकर वॉशिंगटन हिल्टन पहुंचे थे - दो हैंडगन और एक शॉटगन। उनके पास एक प्लान भी था, और उन्होंने यह सब लिख रखा था। गोलीबारी शुरू करने से करीब दस मिनट पहले परिवार वालों को भेजे गए एक मैनिफेस्टो में, एलन ने साफ-साफ बताया था कि वह किसे निशाना बनाना चाहते थे। न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस लिस्ट में सबसे ऊपर ट्रंप प्रशासन के सबसे सीनियर अधिकारी थे, और लिस्ट नीचे की तरफ जाती थी। लेकिन एक नाम इस लिस्ट में नहीं था।इसे भी पढ़ें: US में बढ़ती राजनीतिक हिंसा ने सबको चौंकाया, Trump से पहले भी कई अमेरिकी राष्ट्रपति बन चुके हैं बंदूक का निशानाएलन ने लिखा कि प्रशासन के अधिकारी पटेल को छोड़कर वे निशाने पर हैं, उन्हें सबसे ऊंचे पद से लेकर सबसे नीचे पद तक के क्रम में रखा गया है। एलन ने अपनी लिस्ट से एफबीआई डायरेक्टर काश पटेल को क्यों बाहर रखा, इसकी वजह अभी तक साफ नहीं हो पाई है। घोषणापत्र में एलन द्वारा हमले का औचित्य भी शामिल था। उन्होंने लिखा कि दूसरा गाल आगे करना तब उचित होता है जब आप स्वयं उत्पीड़ित हों। मैं वह व्यक्ति नहीं हूँ जिसका बलात्कार किसी नजरबंदी शिविर में हुआ। मैं वह मछुआरा नहीं हूँ जिसे बिना मुकदमे के फाँसी दे दी गई। मैं वह स्कूली बच्चा नहीं हूँ जिसे बम से उड़ा दिया गया, न ही वह बच्चा हूँ जिसे भूखा रखा गया, न ही वह किशोरी हूँ जिसका इस प्रशासन के कई अपराधियों द्वारा शोषण किया गया। जब कोई और उत्पीड़ित हो तो दूसरा गाल आगे करना ईसाई आचरण नहीं है; यह उत्पीड़क के अपराधों में सहभागिता है। एलन ने अपनी योजना का भी विस्तार से वर्णन किया, जिसमें उनके द्वारा चुने गए गोला-बारूद का प्रकार और कारण भी शामिल था।इसे भी पढ़ें: हमले से भड़का अमेरिका, दे डाली ईरान के ऑयल इंफ्रा को उड़ाने की धमकीउन्होंने लिखा कि हताहतों को कम करने के लिए, मैं छर्रों के बजाय बकशॉट का उपयोग करूँगा (दीवारों में कम पैठ)। यदि यह बिल्कुल आवश्यक हुआ तो मैं यहाँ मौजूद लगभग सभी लोगों को मार डालूँगा (इस आधार पर कि अधिकांश लोगों ने एक बाल यौन शोषण करने वाले, बलात्कारी और देशद्रोही का भाषण सुनने का विकल्प चुना है, और इस प्रकार वे सहभागी हैं), लेकिन मुझे वास्तव में उम्मीद है कि ऐसी नौबत नहीं आएगी। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:44:25 +0530</pubDate>
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<title>Mali में बड़ा Terror Attack: रक्षा मंत्री Sadio Camara की कार बम धमाके में मौत, राजधानी Bamako में तनाव।</title>
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<description><![CDATA[ अफ्रीका के देश माली से इस समय गंभीर और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। जहां माली के रक्षा मंत्री सादियो कामारा की उनके घर पर हुए कार बम हमले में मौत हो गई है। इस हमले में उनकी दूसरी पत्नी और दो पोते-पोतियों की भी जान चली गई है, जिससे पूरे देश में शोक और तनाव का माहौल बन गया है।बता दें कि यह हमला राजधानी बामाको के पास स्थित काती इलाके में हुआ, जो सैन्य शासन का मजबूत गढ़ माना जाता है। गौरतलब है कि पिछले दो दिनों से माली की सेना और उग्रवादी तथा अलगाववादी गुटों के बीच भीषण संघर्ष जारी है, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है।मौजूद जानकारी के अनुसार, तुआरेग विद्रोही गुट और इस्लामिक उग्रवादी संगठनों ने शनिवार सुबह कई रणनीतिक इलाकों पर हमला किया। इनमें राजधानी के आसपास के क्षेत्र भी शामिल हैं, जिससे सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया है।इस बीच, सैन्य शासन के प्रमुख असीमी गोइता सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, जिससे राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ गई है। हालांकि सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि वह सुरक्षित स्थान पर हैं।गौरतलब है कि माली पिछले एक दशक से हिंसा और अस्थिरता का सामना कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के हमले 2012 के बाद सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं। उस समय भी देश के उत्तरी हिस्सों में विद्रोह हुआ था, जिसे बाद में विदेशी मदद से काबू में किया गया था।जानकारी के मुताबिक, उत्तरी शहर किदाल पर विद्रोही गुटों ने कब्जा करने का दावा किया है, जो सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वहीं स्थानीय लोगों ने भी सेना और उनके विदेशी सहयोगियों को इलाके से हटते हुए देखा है।राजधानी बामाको और आसपास के इलाकों में फिलहाल स्थिति थोड़ी शांत बताई जा रही है, लेकिन सुरक्षा बलों की भारी तैनाती जारी है। जगह-जगह जांच अभियान चलाए जा रहे हैं और लोगों से संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने की अपील की गई है।सरकार ने रक्षा मंत्री के निधन पर दो दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। बताया जा रहा है कि हमले के दौरान सादियो कामारा ने हमलावरों का मुकाबला भी किया, लेकिन बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई है।वहीं विपक्षी दलों ने सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि देश इस समय गंभीर खतरे में है। उनका कहना है कि सरकार ने स्थिरता और सुरक्षा का जो वादा किया था, वह अभी तक पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:44:17 +0530</pubDate>
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<title>Nigerian में इस्लामिक स्टेट का खूनी तांडव, गुयाकू गांव पर हमले में 29 ग्रामीणों की मौत</title>
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<description><![CDATA[ नाइजीरिया के एक गांव पर इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले में कम से कम 29 लोगों की मौत हो गई। प्राधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अदमावा राज्य के गवर्नर ने बताया कि यह हमला राज्य के गोम्बी स्थानीय प्रशासनिक क्षेत्र के गुयाकू गांव में रविवार देर रात हुआ।
इस्लामिक स्टेट ने टेलीग्राम पर एक संदेश जारी कर इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
गांव का सोमवार को दौरा करने पहुंचे अदमावा के गवर्नर अहमदू उमरू फिंतिरी ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे दुखद और अस्वीकार्य बताया।इसे भी पढ़ें: हिंदुस्तान पहले से ही &#039;हिंदू राष्ट्र&#039;, घोषणा की आवश्यकता नहीं: मोहन भागवत का बयान रविवार की रात बनी कालप्राधिकारियों के अनुसार, यह हमला अदमावा राज्य के गोम्बी स्थानीय प्रशासनिक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गुयाकू गांव में हुआ। रविवार देर रात जब ग्रामीण सो रहे थे, तब भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने गांव को घेर लिया और अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। हमले के दौरान कई घरों को भी आग के हवाले कर दिया गया।इसे भी पढ़ें: West Bengal | चुनाव प्रचार खत्म होने पर PM मोदी ने बंगाल के वोटरों को पत्र लिखा, कहा- &#039;BJP CM के शपथ ग्रहण का जश्न साथ मिलकर मनाएंगे&#039; इस्लामिक स्टेट ने ली जिम्मेदारीआतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर एक संदेश जारी कर आधिकारिक तौर पर इस हमले की जिम्मेदारी ली है। इस क्षेत्र में &#039;इस्लामिक स्टेट इन वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस&#039; (ISWAP) सक्रिय है, जो लगातार नागरिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाता रहा है।गवर्नर का दौरा और कड़ी निंदासोमवार को अदमावा राज्य के गवर्नर अहमदू उमरू फिंतिरी ने स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रभावित गुयाकू गांव का दौरा किया। उन्होंने पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की और इस कृत्य की कड़ी निंदा की।गवर्नर का बयान: &quot;यह हमला पूरी तरह से दुखद और अस्वीकार्य है। निर्दोष नागरिकों को इस तरह निशाना बनाना कायरता की पराकाष्ठा है।&quot;सुरक्षा का आश्वासन: उन्होंने क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाने और आतंकवादियों को न्याय के कटघरे में लाने का आश्वासन दिया है।नाइजीरिया में सुरक्षा संकटनाइजीरिया का पूर्वोत्तर क्षेत्र पिछले एक दशक से अधिक समय से उग्रवाद और आतंकी हमलों का सामना कर रहा है। बोको हरम और अब इस्लामिक स्टेट जैसे संगठन इस क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं, जिसके कारण अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों विस्थापित हुए हैं। गुयाकू में हुआ यह ताजा हमला सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से गंभीर सवाल खड़े करता है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:44:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>माली में व्यापक हमलों की निन्दा, हिंसक चरमपंथ से निपटने के लिए समर्थन का आग्रह</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने माली के विभिन्न हिस्सों में अलगाववादी लड़ाकों और चरमपंथी गुटों द्वारा किए गए हमलों पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है. साथ ही, उन्होंने हिंसक चरमपंथ और आतंकवाद के उभरते ख़तरे से निपटने के लिए अन्तरराष्ट्रीय समर्थन मुहैया कराए जाने का आग्रह किया है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:43:14 +0530</pubDate>
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<title>मध्य सहेल: मदद की आस में लाखों बच्चे, नहीं मिल रहा दुनिया का ध्यान</title>
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<description><![CDATA[ अफ़्रीका के मध्य सहेल क्षेत्र में, लगभग 75 लाख बच्चों को तत्काल मानवीय सहायता की आवश्यकता है, और यह एक ऐसी आपात स्थिति है जो अब भी वैश्विक समुदाय के ध्यान से बहुत दूर बनी हुई है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:43:13 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान: बाढ़ के बाद ज़िन्दगी फिर से बसाने की जद्दोजहद</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में, सितम्बर 2025 की विनाशकारी बाढ़ ने, पंजाब प्रान्त में अनेक परिवारों के घर व आजीविकाएँ छीन लीं. ये परिवार, कड़ाके की सर्दी और अनिश्चित भविष्य के बीच, अब फिर से जीवन शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं. अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IMO), संयुक्त राष्ट्र केन्द्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया कोष के सहयोग से, पाँच ज़िलों में विस्थापित परिवारों तक आपात राहत पहुँचा रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:43:10 +0530</pubDate>
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<title>वैश्विक जलमार्गो के संरक्षण पर सुरक्षा परिषद की बैठक, लेबनान में हालात अब भी नाज़ुक</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में 16 अप्रैल से प्रभावी और हाल ही में बढ़ाए गए इसराइल व लेबनान के बीच युद्धविराम के बावजूद, ज़मीनी स्तर पर हिंसा जारी रहने से, स्थिति अब भी नाज़ुक बनी हुई है. इस बीच, यूएन सुरक्षा परिषद ने अन्तरराष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा के एजेंडे के तहत, वैश्विक जलमार्गों की सुरक्षा और संरक्षण पर एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:43:07 +0530</pubDate>
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<title>White House Dinner में Security में बड़ी चूक, हथियार लेकर घुसा शख्स, Washington में हड़कंप</title>
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<description><![CDATA[ शनिवार शाम अमेरिका की राजधानी में आयोजित एक प्रतिष्ठित कार्यक्रम के दौरान अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रेस की स्वतंत्रता के प्रतीक माने जाने वाले व्हाइट हाउस संवाददाता संघ डिनर में उस समय हड़कंप मच गया जब एक हथियारबंद व्यक्ति सुरक्षा घेरा पार कर भीतर पहुंच गया और सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ हो गई हैं।मौजूद जानकारी के अनुसार यह घटना वॉशिंगटन हिल्टन में हुई, जहां यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी होटल में ठहरा हुआ था, जिसकी वजह से वह शुरुआती सुरक्षा जांच को पार करने में सफल रहा है। बता दें कि कार्यक्रम से पहले होटल को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया था और केवल आमंत्रित लोगों तथा होटल में ठहरे मेहमानों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई थी।गौरतलब है कि होटल के मुख्य प्रवेश द्वारों पर धातु जांच उपकरण नहीं लगाए गए थे और कड़ा सुरक्षा घेरा केवल कार्यक्रम स्थल के अंदर के हिस्से में ही बनाया गया था। इसी खामी का फायदा उठाकर आरोपी अंदर तक पहुंच गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरोपी ने होटल के एक कम सुरक्षित हिस्से में खुद को तैयार किया और फिर अचानक कार्यक्रम की ओर बढ़ गया है।पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी के पास एक बंदूक, एक छोटी बंदूक और कई धारदार हथियार थे। जब वह सुरक्षा जांच बिंदु की ओर बढ़ा तो सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोकने की कोशिश की, जिसके बाद हल्की मुठभेड़ हुई और अंततः उसे काबू कर लिया गया है।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आरोपी की पहचान कोल टोमस एलन के रूप में हुई है, जिसकी उम्र 31 वर्ष बताई जा रही है। उस पर हथियार रखने और हमला करने से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि वह अकेले ही इस घटना को अंजाम देने आया था और फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है।बता दें कि यह कार्यक्रम हर साल आयोजित किया जाता है और इसमें देश के शीर्ष नेता, पत्रकार और कई प्रमुख हस्तियां शामिल होती हैं। ऐसे आयोजनों में आमतौर पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था होती है, खासकर जब राष्ट्रपति की मौजूदगी होती है। अंदर के हिस्से में भी एक अलग सुरक्षा घेरा बनाया गया था, जहां विशेष एजेंसियां तैनात रहती हैं।हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अंदर की सुरक्षा व्यवस्था ने सही तरीके से काम किया और किसी बड़े नुकसान को टाल दिया गया, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा में शुरुआती स्तर पर मौजूद कमियों को उजागर कर दिया है।इस बीच पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि उच्च स्तरीय सुरक्षा सुविधाओं से लैस स्थायी सभागार की आवश्यकता है। उन्होंने व्हाइट हाउस परिसर में एक आधुनिक भवन बनाने की अपनी योजना का भी जिक्र किया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 09:40:30 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran Tensions | ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने Pakistan लौटने के बाद सेना प्रमुख मुनीर से मुलाकात की</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य और कूटनीतिक संकट के बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची तीन दिनों के भीतर दूसरी बार पाकिस्तान पहुंचे। उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता के दूसरे दौर को लेकर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। रविवार को इस्लामाबाद पहुंचे अराघची ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक का मुख्य केंद्र पाकिस्तान द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के जरिए शांति स्थापित करने के प्रयास थे।इसे भी पढ़ें: बाजार में बिकवाली का Tsunami, निवेशकों के पैसे डूबे, Expert ने बताए ये 3 Winning Stocks  पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल मुनीर और अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद अराघची शनिवार को इस्लामाबाद से रवाना हुए थे। वह ओमान गए थे, जहां उन्होंने सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सैद के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा और ईरान-अमेरिका संघर्ष को समाप्त करने के लिए राजनयिक प्रयासों पर बातचीत की।
 ‘जियो न्यूज’ ने सूत्रों के हवाले से बताया कि यात्रा के बाद अराघची रूस के मॉस्को के लिए रवाना हो गए।
 पाकिस्तान की ओर से इस बैठक को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। बताया जा रहा है कि यह बैठक पाकिस्तान द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता के दूसरे दौर की व्यवस्था करने के लिए जारी शांति प्रयासों पर केंद्रित है।
‘जियो टीवी’ ने ईरानी समाचार एजेंसी ‘आईएसएनए’ के हवाले से बताया कि अराघची ‘‘युद्ध को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए किसी भी समझौते के ढांचे पर ईरान के रुख और विचारों’’ से अवगत कराएंगे।इसे भी पढ़ें: Bengaluru की चिलचिलाती धूप में मिली ठंडी राहत, Ice Cream मिलते ही खिल उठे मजदूरों के चेहरेग्यारह और बारह अप्रैल को आयोजित शांति वार्ता का पहला दौर संघर्ष में शामिल पक्षों के लिए वांछित परिणाम लाने में विफल रहा।
 शनिवार को अराघची के ओमान रवाना होने के बाद, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर अब ईरान के साथ वार्ता के लिए इस्लामाबाद नहीं जाएंगे।
 रविवार को ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिकी और ईरानी अधिकारी संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए फोन पर बातचीत कर सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 09:40:29 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump की Iran को &amp;apos;विनाशकारी&amp;apos; चेतावनी, &amp;apos;3 दिन में फट सकता है ईरान का तेल इंफ्रास्ट्रक्चर&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और तकनीकी चेतावनी जारी की है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी नाकेबंदी के कारण यदि ईरान कच्चे तेल का निर्यात नहीं कर पाता है, तो अगले तीन दिनों के भीतर उसका पूरा तेल नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर &quot;अंदरूनी दबाव&quot; के कारण ध्वस्त हो सकता है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ईरान के सभी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखे हुए है, जिसका मकसद ईरान पर शांति समझौते को स्वीकार करने का दबाव बनाना है। इसे भी पढ़ें: West Bengal | PM Modi की रैली से पहले बंगाल के North 24 Parganas में भारी हिंसा, बमबाजी और गोलीबारी में BJP नेता व CISF जवान घायलरविवार को फॉक्स न्यूज़ के साथ एक इंटरव्यू में, 79 वर्षीय रिपब्लिकन नेता ने समझाया कि अगर ईरान अपने तेल का निर्यात करने में विफल रहता है, तो यह &quot;अंदर से ही फट जाएगा—यांत्रिक रूप से भी और ज़मीन के अंदर भी।&quot; ट्रंप ने कहा कि इसका नतीजा अंततः &quot;बहुत, बहुत शक्तिशाली&quot; होगा।उन्होंने कहा, &quot;जब आपके सिस्टम से भारी मात्रा में तेल की लाइनें गुज़र रही होती हैं, और अगर किसी भी कारण से वह लाइन बंद हो जाती है—क्योंकि आप उसे कंटेनरों या जहाज़ों में भरना जारी नहीं रख पाते—जैसा कि उनके साथ हुआ है (नाकेबंदी के कारण उनके पास कोई जहाज़ नहीं हैं)—तो होता यह है कि वह लाइन अंदर से ही फट जाती है; यांत्रिक रूप से भी और ज़मीन के अंदर भी।&quot; इसे भी पढ़ें: Air India Emergency Landing | भोपाल हवाईअड्डे पर एअर इंडिया विमान की इमरजेंसी लैंडिंग: तकनीकी खराबी के बाद 175 यात्री सुरक्षितअमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा, &quot;यह कुछ ऐसा है जिसमें बस धमाका हो जाता है। और उनका कहना है कि ऐसा होने से पहले उनके पास सिर्फ़ तीन दिन बचे हैं। और जब यह फट जाता है, तो आप इसे कभी भी—चाहे कुछ भी हो जाए—पहले जैसा दोबारा नहीं बना सकते।&quot;ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि ईरानी नेतृत्व बातचीत करने के लिए उनसे संपर्क कर सकता है। उन्होंने फॉक्स न्यूज़ से कहा, &quot;अगर वे बात करना चाहते हैं, तो वे हमारे पास आ सकते हैं, या हमें फ़ोन कर सकते हैं। आप जानते हैं, फ़ोन मौजूद है। हमारे पास सुरक्षित लाइनें हैं।&quot;ट्रंप की यह टिप्पणी उस घटना के कुछ दिनों बाद आई है जब उन्होंने एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को वापस बुला लिया था। इस प्रतिनिधिमंडल में उनके दामाद जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ शामिल थे, जो ईरान के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान जा रहे थे। उनकी यात्रा तब रद्द कर दी गई थी, जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान का अपना दौरा पूरा किया था। इस दौरे के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, उप-प्रधानमंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ बैठकें की थीं।शांति समझौते के हिस्से के तौर पर, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम बंद कर दे और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोल दे; यह जलडमरूमध्य दुनिया के कुल तेल के पाँचवें हिस्से के परिवहन के लिए ज़िम्मेदार है। ईरान ने इन मांगों को &quot;अतार्किक&quot; बताया है और दावा किया है कि अमेरिका उस पर शांति संधि थोपने की कोशिश कर रहा है। ईरान ने होर्मुज़ पर अपना नियंत्रण भी और कड़ा कर दिया है, जिसके जवाब में ट्रंप ने इस मध्य-पूर्वी देश की नाकेबंदी की घोषणा की है। ईरान वर्तमान में रूस और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ संपर्क में है, जबकि अमेरिका अपनी &#039;मैक्सिमम प्रेशर&#039; (अधिकतम दबाव) की नीति पर कायम है। यदि ट्रंप की चेतावनी के अनुसार ईरान का तेल इंफ्रास्ट्रक्चर वास्तव में संकट में है, तो आने वाले तीन दिन वैश्विक ऊर्जा बाजार और मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए निर्णायक साबित होंगे।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 09:40:26 +0530</pubDate>
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<title>Iran के खिलाफ संयुक्त अरब अमीरात का &amp;apos;सुरक्षा कवच&amp;apos;: कैसे Israeli Iron Dome ने हमलों के दौरान UAE की रक्षा की</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच एक ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आया है। ईरान द्वारा किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के दौरान, इजरायल ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सुरक्षा के लिए अपना विश्व प्रसिद्ध &#039;आयरन डोम&#039; (Iron Dome) एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किया। यह न केवल सैन्य सहयोग का उदाहरण है, बल्कि दोनों देशों के बीच गहराते कूटनीतिक रिश्तों की एक नई इबारत भी है। Axios की रिपोर्ट के अनुसार, जब ईरान ने UAE के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर, सैन्य ठिकानों और नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाकर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे, तब अबू धाबी ने तुरंत इजरायल और अमेरिका से संपर्क किया।इसे भी पढ़ें: West Bengal | PM Modi की रैली से पहले बंगाल के North 24 Parganas में भारी हिंसा, बमबाजी और गोलीबारी में BJP नेता व CISF जवान घायल   इस सिस्टम के साथ-साथ, इसे ज़मीन पर ऑपरेट करने के लिए इज़रायली सैनिक भी भेजे गए। यह फ़ैसला प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान के बीच सीधी बातचीत के बाद लिया गया।हमलों को रोकने से बड़ा नुकसान टलारिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले कई खतरों को रोकने में आयरन डोम ने अहम भूमिका निभाई। UAE के अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे थे, लेकिन उनमें से कई को समय रहते रोक लिया गया, जिससे कुल नुकसान कम हुआ।इसे भी पढ़ें: Donald Trump की Iran को &#039;विनाशकारी&#039; चेतावनी, &#039;3 दिन में फट सकता है ईरान का तेल इंफ्रास्ट्रक्चर&#039; यह पहली बार है जब इज़रायल ने अपना आयरन डोम सिस्टम किसी दूसरे देश में भेजा है। अब तक, सिर्फ़ इज़रायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ही इसका इस्तेमाल करते थे। अब UAE संकट के समय इस सिस्टम को ऑपरेट करने वाला तीसरा देश बन गया है।UAE और इज़रायल के बीच मज़बूत होते रिश्तेइस कदम से UAE और इज़रायल और करीब आ गए हैं, और दोनों देश इस संघर्ष के दौरान मिलकर काम कर रहे हैं। अबू धाबी के अधिकारियों ने कहा है कि वे इस मुश्किल समय में मिली मदद को कभी नहीं भूलेंगे।इज़रायल के अलावा, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ़्रांस, इटली और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया। अधिकारियों ने इस स्थिति को एक ऐसा पल बताया, जिसने साफ़ तौर पर दिखा दिया कि उनके असली दोस्त कौन हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 09:40:25 +0530</pubDate>
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<title>White House Dinner Shooting | &amp;apos;30 दिन में दोबारा कराएं व्हाइट हाउस डिनर, आयोजन रद्द होना गलत&amp;apos;, Donald Trump की चुनौती</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में &#039;व्हाइट हाउस करेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन&#039; (WHCA) के रात्रिभोज के दौरान हुई गोलीबारी की घटना पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। सीबीएस के प्रसिद्ध कार्यक्रम ‘60 मिनट्स’ को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने उस रात की अफरातफरी और सुरक्षा घेरे के बीच हुई जद्दोजहद का पूरा ब्यौरा साझा किया। ट्रंप ने स्वीकार किया कि जब गोलियों की आवाज सुनाई दी, तो उनके सुरक्षाकर्मियों (सीक्रेट सर्विस) को उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने में मशक्कत करनी पड़ी। ट्रंप के अनुसार, उनकी उत्सुकता ने सुरक्षा प्रोटोकॉल को और चुनौतीपूर्ण बना दिया था।इसे भी पढ़ें: Iran के खिलाफ संयुक्त अरब अमीरात का &#039;सुरक्षा कवच&#039;: कैसे Israeli Iron Dome ने हमलों के दौरान UAE की रक्षा की उनसे पूछा गया कि क्या गोलियों की आवाज सुनकर वह चिंतित थे, तो ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं घबराया नहीं था। मैं जिंदगी को समझता हूं। आजकल की दुनिया में कुछ भी हो सकता है।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि वह खुद घटनाक्रम को देखना चाहते थे, संभवतः इसी वजह से ‘सीक्रेट सर्विस’ के कर्मियों को उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने में समय लग गया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं देखना चाहता था कि क्या हो रहा है। मैं उनके (सीक्रेट सर्विस के) साथ सहयोग नहीं कर रहा था। मैं जानना चाहता था कि क्या चल रहा है। धीरे-धीरे जब बात समझ में आई, तो लगा कि यह बॉलरूम का शोर नहीं, कुछ और ही मामला है, और गंभीर है।’’इसे भी पढ़ें: Donald Trump की Iran को &#039;विनाशकारी&#039; चेतावनी, &#039;3 दिन में फट सकता है ईरान का तेल इंफ्रास्ट्रक्चर&#039;
ट्रंप ने घटना को याद करते हुए कहा, ‘‘मैं एक सजग टीम के मजबूत घेरे में था, लेकिन सच कहूं तो मैंने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं। मैं कहता रहा, ठहरो, एक मिनट ठहरो।’’
उन्होंने कहा कि जब वह मंच से बाहर निकल रहे थे, तब सुरक्षाकर्मी बार-बार उनसे नीचे झुकने की गुजारिश कर रहे थे।
ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं चलने लगा और उन्होंने कहा, कृपया नीचे झुकिए, कृपया फर्श की ओर झुकिए। तो मैं झुक गया और मेलानिया भी झुक गईं।’’
साक्षात्कार के दौरान कुछ तीखे पल भी आए, जब ट्रंप से हमले से पहले संदिग्ध द्वारा अपने परिवार को भेजे गए एक संदेश में उनके बारे में लिखी बातों पर सवाल किया गया।
ट्रंप ने कहा, ‘‘मुझे पहले से पता था कि आप यह पढ़ेंगे, क्योंकि आप लोग ऐसे ही हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हां, उसने यह लिखा, लेकिन मैं बलात्कारी नहीं हूं। मैंने वह संदेश पढ़ा है, वह एक बीमार आदमी है। ‘60 मिनट्स’ जैसे कार्यक्रम में ऐसी बातें पढ़ना शोभा नहीं देता, लेकिन चलिए साक्षात्कार जारी रखते हैं।’’
जब साक्षात्कारकर्ता ने पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि हमलावर विशेष रूप से उन्हें निशाना बना रहा था, तो ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं कोई बच्चों का शोषण करने वाला व्यक्ति नहीं हूं…आप किसी दिमागी रूप से बीमार इंसान की बकवास पढ़ रहे हैं? मुझे ऐसी चीजों से जोड़ा जा रहा है, जिनका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है। मुझे पूरी तरह बेदाग साबित किया जा चुका है।’’
अंत में राष्ट्रपति ने ‘व्हाइट हाउस करेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन’ से अपील की कि वे अगले 30 दिन के भीतर यह रात्रिभोज दोबारा आयोजित करें।
ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं नहीं चाहता कि यह रद्द हो। मुझे लगता है कि किसी कम अक्ल इंसान द्वारा इस तरह के आयोजन को रद्द करवा देना बेहद बुरी बात है।’’
उन्होंने यह भी कहा, ‘‘ऐसा नहीं है कि मैं वहां जाना चाहता हूं। मैं बहुत व्यस्त हूं। मुझे इसकी जरूरत नहीं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 09:40:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>NATO को सजा, यूरोप को तोड़ देंगे ट्रंप? अमेरिका का प्लान लीक</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ईरान से जंग में है और अब अमेरिका से जुड़ी जो जानकारी सामने आ रही है वह आपको हैरान कर देगी क्योंकि ईरान के खिलाफ तो अमेरिका जो कारवाई कर रहा है वो कर ही रहा है। इसके अतिरिक्त जो ईरान के साथ करेगा वो तो करेगा ही लेकिन अब वो अपने निशाने पर किसी और को नहीं बल्कि नाटो देशों को लेने की तैयारी कर रहा है।  दरअसल अमेरिका और स्पेन का टकराव जगजाहिर हो चुका है। स्पेन ने अपने एयर स्पेस का इस्तेमाल नहीं होने दिया। स्पेन ने अपने लड़ाकू बेसिस का इस्तेमाल नहीं होने दिया। कहा कि हमारी धरती से कोई हमला नहीं होगा। हम युद्ध के खिलाफ हैं। अमेरिका चिढ़ गया। इसके बाद अब नाटो की गर्दन अमेरिका जो है वो पकड़ रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी ने रटर्स को बताया कि पेंटागन के एक आंतरिक ईमेल में उन विकल्पों की रूप रेखा दी गई है जिसके तहत संयुक्त राज्य अमेरिका उन नाटो सहयोगियों को दंडित कर सकता है जिनके बारे में उनका मानना है कि उन्होंने ईरान के साथ युद्ध में अमेरिकी अभियानों का समर्थन करने में विफल रहे हैं। जिसमें स्पेन को गठबंधन से निलंबित करना, फॉकलैंड द्वीप समूह पर ब्रिटेन के दावे पर अमेरिकी स्थिति की समीक्षा करना शामिल है। नाम ना छापने की शर्त पर ईमेल का जानकारी देने वाले अधिकारी ने बताया कि नीतिगत विकल्पों का विस्तृत विवरण एक नोट में दिया गया है। जिसमें ईरान युद्ध के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका को पहुंच सैन्य अड्डे, हवाई उड़ान के अधिकार जो है वो देने के लिए कुछ सहयोगियों की कथित इच्छा और इनकार पर निराशा व्यक्त की गई है। इसे भी पढ़ें: ईरान-अमेरिका के बीच टूटा सीजफायर, होर्मुज को लेकर कुछ बड़ा हो सकता है?अधिकारी कहते हैं कि ईमेल में कहा गया है कि एबीओ नाटो के लिए बिल्कुल बुनियादी मानक है और यह भी कहा गया है कि पेंटागन में उच्च स्तर पर इन विकल्पों पर बात हो रहा है। अधिकारी ने बताया कि ईमेल में एक विकल्प यह है कि मुश्किल देशों को नाटो में महत्वपूर्ण या प्रतिष्ठित पदों से निलंबित कर दिया जाए। इसके अलावा अधिकारी ने बताया कि ईमेल में एक विकल्प यह भी है कि मुश्किल देशों को जो कारवाई है उनके खिलाफ सख्त होनी चाहिए ताकि दूसरे देश भी यह बात समझ पाए कि भैया ऐसे तो काम नहीं चल सकता। ऐसे सहयोग नहीं होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगियों की इस बात के लिए भी एक कड़ी आलोचना पहले भी की है कि उन्होंने हारमूद जलडमरू मध्य को खोलने में मदद करने में अपनी नौसेनाएं नहीं भेजी। 28 फरवरी को हवाई युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक जहाज रानी के लिए बंद कर दिया गया था वो। उन्होंने यह भी घोषणा की है कि वह गठबंधन से हटने पर विचार कर सकते हैं जो कि एक जाहिर बयान है। उन्होंने ट्रंप ने जो है 1 अप्रैल को एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर आप मेरी जगह होते तो क्या करते? यानी कि आप नाटो को छोड़ते नहीं अगर नाटो इस तरह का व्यवहार कर रहा होता तो। इसी को लेकर माना यह जा रहा है कि अमेरिका उस विकल्प पर विचार कर रहा है। हालांकि बार-बार बात स्पेन की आ रही है।  इसे भी पढ़ें: America में H-1B वीज़ा का बड़ा &#039;Ghost Jobs&#039; स्कैम, तेलुगू जोड़ी को होगी 5 साल की जेलऐसे में स्पेन की तरफ से भी जवाब आया है। स्पेन का कहना है कि नाटो से हमें निकाल देना कोई मजाक बात नहीं है। इतना आसान नहीं है। क्या कहा गया है स्पेन की तरफ से? आपको पहले सुनवाते हैं। को तो एक तरफ अमेरिका की तैयारी है। दूसरी तरफ स्पेन का पलटवार है और भी बताएंगे कि कैसे नाटो दूसरे देश भी जो है अमेरिका की तरफ शक की सुई घुमा रहे हैं। लेकिन यह जो पेंटागन का मेल था एक जो हाई प्रोफाइल मेल था उसमें जो है बताया जा रहा है जो अधिकारी सूत्रों के हवाले से कह रहे हैं कि किस तरह का एक्शन हो यह कोई सुझाव नहीं दिया गया है और साथ ही यूरोप में सैन्य अड्डे क्या बंद कर देने चाहिए अमेरिका को इसका भी कोई प्रस्ताव नहीं है। अधिकारी ने हालांकि यह बताने से इंकार कर दिया कि विकल्पों में यूरोप से कुछ अमेरिकी सैनिक सेनाओं की व्यापक रूप से अपेक्षित वापसी शामिल है या नहीं। यानी कि अमेरिकी सेना जो यूरोप में मौजूद है वह वापस आ सकती है क्या? तो ऐसे में भी बड़ा मुश्किल स्थिति हो सकता है। ऐसे में ईमेल पर जो कई लोग हैं जिन्होंने पेंटागन को लेकर एक सवाल पूछा पेंटागन से तो उसके जवाब में पेंटागन ने कहा है कि जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने हमारे नाटो सहयोगियों के लिए जो कुछ भी किया है उसके बावजूद वह हमारे लिए मौजूद नहीं थे। यह भी कहा गया है पेंटागन की तरफ से कि युद्ध विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि राष्ट्रपति के पास ऐसे विश्वसनीय विकल्प हो जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि हमारे सहयोगी अब केवल कागजी शेर बनकर ना रह जाए बल्कि अपनी भूमिका निभाएं। इस संबंध में चल रही किसी भी आंतरिक चर्चा पर हमारी कोई टिप्पणी नहीं है। इसे भी पढ़ें: जर्मनी ने भारत को दिया बाहुबली..मोदी-राजनाथ का तगड़ा खेल, चीन-अमेरिका हैरानट्रंप प्रशासन को यूरोपीय लोगों में अधिकार की भावना जो है वो कहा जा रहा है कि दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों और राजनीयिकों का कहना है कि ईरान के साथ अमेरिका इजराइली युद्ध ने 76 साल पुराने गुट के भविष्य के बारे में गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस बात को लेकर अभूतपूर्व चिंता पैदा हो रही है कि अगर यूरोपीय सहयोगियों पर हमला होता है तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे नहीं आएगा। ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य देशों का कहना है कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी में शामिल होना युद्ध में प्रवेश करने के बराबर होगा। लेकिन एक स्थाई युद्ध विराम होने या संघर्ष समाप्त होने तक वो जलडमरू मध्य को खुला रखने में मदद करने के लिए तैयार होंगे। लेकिन कुल मिलाकर अमेरिका की तरफ से जो है साफ तौर पर कहा गया कि ये लोग साथ नहीं दे रहे हैं। इधर-उधर की बात कर रहे हैं और यही वजह है कि ये नाराजगी है। वहीं स्पेन कह रहा है कि बॉस हम पे खीज निकालने का कोई मतलब नहीं क्योंकि हमको तो तुम नाइट्रो से निकाल नहीं सकते हो क्यों ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:56 +0530</pubDate>
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<title>Russia ने बेचा 22000 किलोग्राम का बंपर सोना, क्या करेगा भारत</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया की सबसे बड़ी जियोपॉलिटिकल टेंशन रूस, यूक्रेन वॉर अब अपने पांचवें साल में पहुंचने वाली है और इसका असर सिर्फ युद्ध भूमि तक सीमित नहीं है। इसका असर सीधा अब रूस की अर्थव्यवस्था और खासकर उसके खजाने पर साफ दिखने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सेंट्रल बैंक ऑफ रशिया ने साल 2026 की शुरुआत में अब तक करीब 22,000 किलोग्राम यानी कि 21.8 टन सोना बाजार में बेच दिया है। इसकी कीमत करीब ₹33,440 करोड़ बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है आखिर पुतिन को इतना बड़ा कदम क्यों उठाना पड़ा? बता दें रूस का बजट घाटा मार्च 2026 तक 61.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। इसका मतलब है कि सरकार जितना कमा रही है उससे कहीं ज्यादा खर्च कर रही है और खर्चा कहां हो रहा है? सबसे बड़ा हिस्सा जा रहा है युद्ध पर हथियार पर। सैनिक, लॉजिस्टिक और टेक्नोलॉजी पर। युद्ध जितना लंबा खिसता जा रहा है उतना ही महंगा होता जा रहा है। इसके अलावा पश्चिम देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने रूस की अर्थव्यवस्था को झटका दिया है। हालांकि भारत ने उसे संभालने की कोशिश की है। इंटरनेशनल ट्रेड सीमित हो गया है। विदेशी निवेश कम हो गया है और रूसी करेंसी रूबल पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में सरकार के पास दो ही बड़े रास्ते बचते हैं। या तो कर्ज ले या फिर अपने रिजर्व का इस्तेमाल करें और रूस ने चुना है दूसरा रास्ता सोना बेचना। अब किटको की रिपोर्ट के अनुसार 1 अप्रैल 2026 तक रूस का कुल गोल्ड रिजर्व घटकर 2304.76 टन रह गया है। सिर्फ मार्च महीने में ही इसमें 6.22 टन की गिरावट आई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि रूस दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड होल्डर्स में से एक रहा है।इसे भी पढ़ें: Tehran की सड़कों पर Iran ने कराई अपनी खतरनाक मिसाइलों की परेड, खाड़ी देश सहमे, अमेरिका को आया पसीना!लेकिन धीरे-धीरे यह रिजर्व कम हो रहा है जो कि बड़ा संकेत है कि आर्थिक दबाव बढ़ रहा है रूस पर। अब सवाल है कि क्या यह रूस के लिए खतरे की घंटी है? सीधा जवाब है हां, लेकिन पूरी कहानी इससे थोड़ी ज्यादा जटिल है। सोना किसी भी देश के लिए इमरजेंसी फंड जैसा होता है। जब स्थिति खराब होती है तो देश इसे बेचकर कैश फ्लो बढ़ाते हैं। लेकिन लगातार सोना बेचना इस बात का संकेत भी देता है कि नकदी की समस्या गंभीर होती जा रही है। अगर यही ट्रेंड रहता है तो भविष्य में रूस के पास आर्थिक संकट से निपटने के लिए कम विकल्प बचेंगे। लेकिन आम लोग क्यों खरीद रहे हैं सोना? यह जान लीजिए। यही कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है कि जहां एक तरफ सरकार सोना बेच रही है, वहीं दूसरी तरफ रूस के आम नागरिक इसे खरीदने के लिए टूट पड़े हैं। मॉस्को एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 में गोल्ड ट्रेंडिंग में 350% का उछाल आया है। इसे भी पढ़ें: F-22 से खतरनाक रूस का SU-57 M1, खरीदेगा भारत?क्योंकि जब देश की करेंसी कमजोर होती है तो लोग अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए सोना खरीदते हैं। रूबल की वैल्यू गिर रही है इसलिए लोग कैश की बजाय गोल्ड में निवेश कर रहे हैं। युद्ध और अनिश्चितता के समय में सोना हमेशा सेफ हेवन माना जाता है। यानी सरकार बेच रही है मजबूरी में और जनता खरीद रही है डर के कारण। अब भारत के लिए इसका क्या मतलब है? देखिए भारत के लिए इसका बहुत बड़ा मतलब है? देखिए इसको हम कई पॉइंट्स में बताएंगे। पहला गोल्ड प्राइस पर असर। भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ताओं में से एक है। अगर रूस जैसे बड़े देश मार्केट में सोना बेचते हैं तो ग्लोबल सप्लाई बढ़ती है जिससे कीमतों पर दबाव आ सकता है। दूसरी तरफ अगर दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है तो गोल्ड की डिमांड बढ़ती है जो कीमतों को ऊपर ले जाती है। यानी भारत में सोने की कीमतें आने वाले समय में वलाटाइल रह सकती हैं। इसके अलावा रुपया और ट्रेड देखिए रूस और भारत के बीच ट्रेड में पिछले कुछ सालों में तेजी आई है। खासकर तेल और डिफेंस सेक्टर में अगर रूस की अर्थव्यवस्था कमजोर होती है तो इसका असर भारत रूस व्यापार पर पड़ सकता है। साथ ही रुपए रूबल ट्रेंडिंग मैकेनिज्म पर भी दबाव आ सकता है। इसके अलावा ऊर्जा कीमतों की बात करें तो रूस अमेरिका के सबसे बड़े तेल और गैस सप्लायर्स में से एक है। अगर उसकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती है तो वह ज्यादा रेवेन्यू के लिए ऊर्जा निर्यात बढ़ा सकता है या कीमतों में बदलाव कर सकता है। यानी इसका सीधा असर भारत के पेट्रोल डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि भारत हमेशा एक बैलेंसिंग एक्ट करता आया है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:55 +0530</pubDate>
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<title>मोदी के लिए जिद पर अड़े थे बाइडेन, अमेरिका नहीं, भारत था QUAD की अहम ताकत, पूर्व उप विदेश मंत्री का खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका का समूह क्वाड फिर चर्चा में है। अमेरिका के उप विदेश सचिव कर्ट एम कैंपबेल ने कहा है कि क्वाड की अहम ताकत भारत है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन ने पीएम मोदी को एक घंटे से ज्यादा समय तक मनाया था। कैंपबेल ने खुलासा किया, क्वाड में पर्दे के पीछे से अगुवाई करने वाला देश अमेरिका नहीं था। वह ऑस्ट्रेलिया भी नहीं था। वह जापान भी नहीं था। वह भारत था। पूर्व राष्ट्रपति बाइडन को पीएम मोदी को राष्ट्राध्यक्ष स्तर पर इस समूह में शामिल होने के लिए एक घंटे तक मनाया। पीएम मोदी हिचकिचा रहे थे। बाइडन के मनाने पर पीएम मोदी ने कहा कि ठीक है, लेकिन आप इस बारे में बार-बार समझाना बंद करें। बतौर मेजबान भारत को बीते साल ही क्वाड समिट की मेजबानी करनी थी। इस साल भी बैठक पर अभी संशय है।इसे भी पढ़ें: NATO को सजा, यूरोप को तोड़ देंगे ट्रंप? अमेरिका का प्लान लीकअमेरिका ने चीन के खिलाफ भारत को गुप्त समर्थन दियाइस खुलासे से एक और अहम बात सामने आई है: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान जब भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव बढ़ गया था—अमेरिका ने भारत को बेहद संवेदनशील खुफिया जानकारी मुहैया कराई थी। अमेरिका द्वारा दी गई यह रणनीतिक मदद, जिसका मकसद भारत को चीन की गतिविधियों पर करीब से नज़र रखने में सक्षम बनाना था, दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे का प्रतीक मानी जाती है। भारत की इसी सक्रिय भागीदारी की बदौलत आज &#039;क्वाड&#039; एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे बड़ी ताकत के तौर पर उभरा है।इसे भी पढ़ें: White House के दावे से Iran का इनकार, कहा- US से सीधी बैठक नहीं, Pakistan करेगा मध्यस्थता।आपसी सम्मान और बदलती राजनीति की आवश्यकताकैंपबेल ने भारत-अमेरिका संबंधों की मौजूदा स्थिति को लेकर कुछ चिंताजनक विचार भी व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दो प्रमुख लोकतंत्रों के बीच संबंध &quot;आपसी सम्मान&quot; के सिद्धांत पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने अफ़सोस जताते हुए कहा कि कभी-कभी हमें इस बुनियादी सिद्धांत की याद दिलाने की ज़रूरत पड़ती है। मौजूदा माहौल में—जब ऐसा लग रहा है कि ट्रंप &#039;क्वाड&#039; (Quad) से कुछ दूरी बना रहे हैं। इस समूह के भीतर भारत का महत्व और भी ज़्यादा ज़ोरदार ढंग से उभरकर सामने आ रहा है। कैंपबेल की टिप्पणियों से यह साफ़ हो गया कि भारत के बिना, यह समूह महज़ नाम का ही समूह बनकर रह जाता। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:55 +0530</pubDate>
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<title>ईरान युद्ध 2.0...खौफनाक प्लान, US का बचना मुश्किल</title>
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<description><![CDATA[ युद्ध किसी भी वक्त छिड़ सकता है। ऐसी खबरें साफ तौर पर अब सामने आने लगी है। ईरान की तरफ लगातार अमेरिका के तीन एयरक्राफ्ट करियर बढ़ रहे हैं। हालांकि एयरक्राफ्ट करियर वही है जो पिछले युद्ध के दौरान यानी करीब 40 दिन की जो जंग अभी चल रही थी उसमें लौट गए थे। इनको काफी हद तक नुकसान ईरान ने पहुंचाया था। लेकिन इस बार जो दो युद्धपोत थे अब्राहम लिंकन इसके साथ-साथ जो दूसरा युद्धपोत था। तीसरा युद्ध को जॉर्ज बुश भी पहुंच चुका है। तीनों न्यूक्लियर पावर्ड है, एडवांस्ड है। लेकिन इस बीच एक और खबर निकल के सामने आती है कि जो चीन है, भारत है। इसके अलावा यूनाइटेड किंगडम, रूस, तुर्की और पाकिस्तान इन सभी देशों ने अपने नागरिकों को या फिर जो भी लोग अभी ईरान पहुंचे थे उन सभी को अर्जेंट वार्निंग दी है कि जल्द से जल्द आप लोग छोड़ के हट जाइए। इसे भी पढ़ें: तेल की राजनीति या विनाश की साजिश? Donald Trump की China यात्रा से पहले ड्रैगन पर सबसे बड़ा प्रहारकहीं भी मौजूद है वापस लौटिए तुरंत लौटिए तो क्या वो वो दौर फिर से एक बार पास आने लगा है क्योंकि अमेरिका पर ईरान पहले से कह रहा था हमें भरोसा किसी तरीके से नहीं है और इस बीच एक और खबर निकल के सामने आती है कि अब्बास सराकची इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं। उन्होंने ट्वीट भी किया इसके बाद मस्कट मॉस्को इन जगहों पे भी जाने वाले हैं। अभी जो 40 दिनों की जंग में जो कुछ हुआ वो अमेरिका के मुताबिक उसकी एक बड़ी हार है एक तरह की और एक तरह से उसे कुछ बढ़त नहीं मिल पाई बल्कि नुकसान हुआ। ऐसे में अमेरिका कुछ बड़ा नुकसान करके जाना चाहता है और यही वजह है कि वो एक कोशिश और कर सकते हैं। अब इसमें दो तरीके हैं। तो अमेरिका इजराइल फिर से हमला कर सकते हैं। बहुत तगड़ा हमला कर सकते हैं इस बार और एडवांस हथियारों के साथ या फिर ईरान इसको भांपते हुए प्रिवेंटिव स्ट्राइक कर सकता है।इसे भी पढ़ें: Donald Trump प्रशासन का बड़ा फैसला! ईरान और रूस के तेल पर &#039;छूट&#039; खत्म, होर्मुज़ की नाकाबंदी रहेगी जारीईरान की तरफ से तो ये सीज फायर हुआ नहीं है। ऐसे में हो सकता है कि ईरान ही पहले हमला कर दे क्योंकि अभी भी इमाम आयतुल्ला अली खाम साहब का बदला पूरा नहीं हुआ है। उनके पास तो इस बात का का तर्क है। इस बात की दलील है हमला करने के पीछे का कारण है क्योंकि उनके सुप्रीम लीडर को मारा है 28 फरवरी को। तो ऐसे में ईरान के पास फिर हमला करने का कारण है तो वही हो सकता है पहले कर दे और उसकी तैयारियां चल रही है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:54 +0530</pubDate>
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<title>Iran के Supreme Leader Mojtaba Khamenei का &amp;apos;Human Chain&amp;apos; वाला राज, Tracking से बचने की अनोखी तरकीब</title>
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<description><![CDATA[ न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर, अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले में अपने पिता, अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद नेतृत्व संभालने के बाद से ही सार्वजनिक नज़र से काफी हद तक दूर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जिसमें एक ईरानी अधिकारी का हवाला दिया गया है, नए नेता की कोई भी वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी नहीं की गई है। इसके बजाय, उनके निर्देश विशेष रूप से सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से साझा किए जाते हैं या सरकारी टेलीविज़न पर पढ़कर सुनाए जाते हैं। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि मोजतबा जानबूझकर ऐसा कर रहे हैं, क्योंकि वह अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में कमज़ोर या असहाय नहीं दिखना चाहते।इसे भी पढ़ें: Trump ने काट दी मोजतबा खामनेई की एक टांग? न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासासुप्रीम लीडर की सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर तक पहुँच गई है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि रिवोल्यूशनरी गार्ड के वरिष्ठ कमांडर और सरकार के उच्च-रैंकिंग अधिकारी उनसे मिलने से परहेज़ करते हैं, इस डर से कि इज़राइल उनकी गतिविधियों के ज़रिए उनके ठिकाने का पता लगा सकता है और उनकी हत्या की साज़िश रच सकता है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा की जाने वाली अत्याधुनिक ट्रैकिंग से बचने के लिए, रिपोर्ट में एक साधारण लेकिन सुरक्षित संचार प्रणाली का विस्तृत विवरण दिया गया है। मोजतबा के लिए भेजे जाने वाले संदेश हाथ से लिखे जाते हैं, लिफाफों में बंद किए जाते हैं और भरोसेमंद संदेशवाहकों की एक &#039;मानव श्रृंखला&#039; के ज़रिए आगे बढ़ाए जाते हैं। बताया जाता है कि ये संदेशवाहक उनकी &quot;छिपी हुई जगह&quot; तक पहुँचने के लिए मोटरसाइकिलों और कारों में राजमार्गों और ग्रामीण इलाकों की पिछली सड़कों से गुज़रते हैं, और उनके जवाब भी उसी सुरक्षित मार्ग से वापस आते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा उद्धृत अधिकारी ने आगे बताया कि, हालांकि शीर्ष नेता इन हमलों में &quot;गंभीर रूप से&quot; घायल हो गए थे, फिर भी वे &quot;मानसिक रूप से पूरी तरह सचेत और सक्रिय&quot; बने हुए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन हमलों से &quot;उनके चेहरे को नुकसान पहुंचा है&quot; और उन्हें &quot;प्लास्टिक सर्जरी&quot; की आवश्यकता पड़ गई है।इसे भी पढ़ें: चेहरा जल गया, बाल उड़ गये, मुंह खुल नहीं रहा... ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई बहुत बुरी स्थिति,  प्लास्टिक सर्जरी की तैयारीरिपोर्ट में दिए गए मेडिकल विवरणों से संकेत मिलता है कि मोजतबा की चोटें काफी गंभीर और व्यापक हैं। बताया गया है कि उनके एक पैर की तीन बार सर्जरी हो चुकी है और अब वह कृत्रिम पैर लगने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि उनके घायल हाथ के बारे में कहा जा रहा है कि वह &quot;धीरे-धीरे अपनी कार्यक्षमता वापस पा रहा है।&quot; इसके अलावा, उनके &quot;चेहरे और होठों&quot; पर लगी चोटों के कारण कथित तौर पर &quot;उन्हें बोलने में भी कठिनाई हो रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने आगे बताया कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान जो स्वयं एक प्रशिक्षित हृदय सर्जन हैं—और देश के स्वास्थ्य मंत्री, दोनों ही सीधे तौर पर &quot;उनकी देखभाल में शामिल रहे हैं।&quot; बताया गया है कि यह नेता अपने किसी अज्ञात स्थान पर &quot;ज्यादातर डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों से घिरे रहते हैं।इसे भी पढ़ें: Iran में &#039;साइलेंट तख्तापलट&#039;? कूटनीति पर IRGC का कब्जा, मोजतबा खामेनेई और अहमद वाहिदी बने नए पावर सेंटरउनके स्वास्थ्य से जुड़े इन दावों के जवाब में सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के एक्स अकाउंट पर की गई एक पोस्ट में दुश्मन के मीडिया अभियानों की कड़ी आलोचना की गई। इस पोस्ट में ऐसे रिपोर्टों पर आरोप लगाया गया कि वे, उन हमलों में लगी चोटों के विवरण सामने आने के बाद जिनमें अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई थी देश की एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। यह रिपोर्ट अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे एक अस्थिर संघर्ष-विराम के दौरान सामने आई है; यह संघर्ष-विराम मध्य-पूर्व में हुई भीषण लड़ाई के एक दौर के बाद लागू हुआ था। शत्रुता में आई इस रुकावट के बावजूद, होरमुज़ जलडमरूमध्य को लेकर एक बड़ा गतिरोध अभी भी बना हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:53 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran तनाव के बीच Pakistan बना नया &amp;apos;अखाड़ा&amp;apos;? Army Chief मुनीर से मिले ईरानी विदेश मंत्री</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। यह मुलाकात तब हुई जब अमेरिका के साथ गहरे होते कूटनीतिक गतिरोध के बीच एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तानी राजधानी पहुंचा। यह उच्च-स्तरीय बैठक ऐसे समय में हुई जब शहर में सुरक्षा के चलते कड़ा लॉकडाउन लगा हुआ है; अधिकारियों ने मुख्य सड़कों को सील कर दिया है और अत्यधिक सुरक्षा वाले &#039;रेड ज़ोन&#039; को सख्त घेरे में ले लिया है। एक अलग कूटनीतिक कार्यक्रम में उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्हें इस्लामाबाद में अपने भाई, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का स्वागत करके और उनसे मिलकर खुशी हुई। उन्होंने आगे कहा कि वह &quot;क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हमारी सार्थक चर्चाओं का बेसब्री से इंतजार करेंगे। इस यात्रा का समय विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि व्हाइट हाउस ने हाल ही में घोषणा की थी कि दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी ईरान के साथ संभावित बातचीत के लिए इस क्षेत्र का दौरा करेंगे।हालांकि, तेहरान अपने विरोध पर अडिग रहा है, और उसने साफ कहा है कि वह अमेरिका के साथ कोई बैठक नहीं करेगा। इस कूटनीतिक गतिरोध ने इस्लामाबाद की &quot;व्यापारिक रफ्तार&quot; को लगभग ठप कर दिया है; &#039;ब्लू एरिया&#039; के बाज़ार लगभग खाली पड़े हैं और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। खबरों के अनुसार, स्थानीय निवासियों को ज़रूरी चीज़ों की बढ़ती कमी और लंबे समय से बनी अनिश्चितता के कारण हो रहे मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिबंधों की यह मौजूदा लहर 11-12 अप्रैल को हुई चर्चाओं के शुरुआती सत्र के दौरान लगाए गए इसी तरह के लॉकडाउन के बाद आई है, जो बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गया था। इस्लामाबाद में चल रहा यह कूटनीतिक तनाव तीन मुख्य मुद्दों पर पूरी तरह से बने गतिरोध के कारण पैदा हुआ है: तेहरान का अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (HEU) और उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं का भविष्य, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना, और लेबनान में इज़राइल के सैन्य अभियान।हालांकि व्हाइट हाउस ने इशारा किया है कि दूत आमने-सामने बातचीत के लिए तैयार हैं, तेहरान के सरकारी मीडिया ने इस दावे को खारिज कर दिया है, और ज़ोर देकर कहा है कि सीधी बातचीत &quot;होने की उम्मीद नहीं है।&quot;इसके बावजूद, व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कन्फर्म किया कि दो दूत अराघची के साथ बातचीत करने वाले हैं, उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि यह एक फायदेमंद बातचीत होगी और उम्मीद है कि यह डील की ओर आगे बढ़ेगी। उन्होंने आगे साफ किया कि हालांकि वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस साइट पर नहीं जाएंगे, लेकिन वह पूरी तरह से शामिल हैं। प्रोग्रेस की कमी पर बात करते हुए, US वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने कहा कि 21 घंटे की गहरी बातचीत&quot; से पहले कोई कामयाबी नहीं मिली थी।वेंस ने कहा कि उनका न्यूक्लियर प्रोग्राम और उनके पास पहले जो एनरिचमेंट फैसिलिटी थीं, उन्हें खत्म कर दिया गया है। लेकिन हमें और न्यूक्लियर हथियार न बनाने का कोई कमिटमेंट नहीं दिख रहा है। ये चर्चाएं 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद देखी गई कुछ सबसे बड़ी डिप्लोमैटिक बातचीत हैं। लेकिन, बातचीत फिर से शुरू करने की कोशिशें रुक गई हैं क्योंकि तेहरान बातचीत की टेबल पर लौटने से मना कर रहा है, जबकि US नेवल ब्लॉकेड उसके पोर्ट्स पर एक्टिव है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर &quot;असल में ब्लॉकेड&quot; लगा दिया है, जिससे ज़रूरी एनर्जी कॉरिडोर से समुद्री ट्रैफिक बहुत कम हो गया है और ग्लोबल मार्केट में अफरा-तफरी मच गई है। इस रुकावट के बीच, वॉशिंगटन मिडिल ईस्ट में अपनी मिलिट्री बिल्ड-अप जारी रखे हुए है, जिसमें USS जॉर्ज HW बुश भी शामिल है, जो इस इलाके में तैनात तीसरा US एयरक्राफ्ट कैरियर है। साथ ही, US ने इकोनॉमिक प्रेशर बढ़ा दिया है, एक बड़ी चीनी ऑयल रिफाइनरी और ईरानी क्रूड ऑयल के ट्रांसपोर्ट से जुड़ी लगभग 40 शिपिंग फर्मों और टैंकरों पर नए बैन लगाए हैं।फॉरेन ऑफिस के मुताबिक, &quot;इस दौरे के दौरान, ईरानी फॉरेन मिनिस्टर पाकिस्तान के सीनियर लीडरशिप के साथ मीटिंग करेंगे ताकि लेटेस्ट रीजनल डेवलपमेंट्स के साथ-साथ रीजनल शांति और स्टेबिलिटी के लिए चल रही कोशिशों पर चर्चा की जा सके,&quot; जबकि कैपिटल अभी भी &quot;सस्पेंडेड एनिमेशन&quot; की हालत में है और अभी तक इस बात की कोई कन्फर्मेशन नहीं है कि नई बातचीत होगी या नहीं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:53 +0530</pubDate>
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<media:keywords>US-Iran, तनाव, के, बीच, Pakistan, बना, नया, अखाड़ा, Army, Chief, मुनीर, से, मिले, ईरानी, विदेश, मंत्री</media:keywords>
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<title>Pakistan पर Climate Change और महंगाई की दोहरी मार, लाखों लोग गंभीर Food Crisis से जूझ रहे</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान दुनिया के उन देशों में से एक बना हुआ है जहाँ खाने की सबसे ज़्यादा कमी है; यहाँ लाखों लोग बुनियादी पोषण पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, &#039;खाद्य संकट पर 2026 की वैश्विक रिपोर्ट&#039; में पाकिस्तान को उन दस देशों में शामिल किया गया है जहाँ भुखमरी सबसे ज़्यादा गंभीर है। इस सूची में अफगानिस्तान, सूडान और यमन जैसे देश भी शामिल हैं। डॉन के मुताबिक, 2025 में पाकिस्तान में लगभग 1.1 करोड़ लोगों को खाने की गंभीर कमी का सामना करना पड़ा। इनमें से लगभग 93 लाख लोगों को &quot;संकट&quot; (crisis) की स्थिति में रखा गया था। वहीं, 17 लाख लोग और भी ज़्यादा गंभीर आपातकाल श्रेणी में आ गए थे, जो &#039;एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण&#039; पैमाने पर अकाल से ठीक एक स्तर नीचे है। रिपोर्ट में बताया गया है कि आर्थिक कमज़ोरी और लगातार बढ़ रही जलवायु घटनाओं के मेल से पाकिस्तान में खाने की कमी की समस्या बढ़ रही है। पिछले साल मॉनसून की भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ ने 60 लाख से ज़्यादा लोगों को प्रभावित किया; इससे कमज़ोर इलाकों में फसलें बर्बाद हो गईं और बुनियादी ढांचा भी तबाह हो गया।हालांकि देश में सबसे गंभीर भूख की श्रेणी में आने वाले लोगों की संख्या में कमी आने से थोड़ी सुधार देखने को मिला है, लेकिन यह सुधार अभी भी पक्का नहीं है। बढ़ती महंगाई, जिसके 6 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, और लगातार बढ़ रहे पर्यावरणीय दबाव के कारण अब तक हुई प्रगति के उलट जाने का खतरा बना हुआ है।रिपोर्ट में पोषण से जुड़ी गंभीर चिंताओं की ओर भी इशारा किया गया है, खासकर बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध में। हालांकि, पाकिस्तान के पास कुपोषण की गंभीरता का औपचारिक रूप से आकलन करने के लिए ताज़ा डेटा उपलब्ध नहीं है, जिससे यह उन देशों की श्रेणी में आ जाता है जहां पोषण का वर्गीकरण अधूरा है।इसके बावजूद, खराब स्वास्थ्य सेवाओं, असुरक्षित पानी और अपर्याप्त भोजन से जुड़े ढांचागत जोखिम अभी भी बने हुए हैं। पाकिस्तान विस्थापित लोगों, खासकर अफगान शरणार्थियों को पनाह देने वाले प्रमुख देशों में से एक है; जैसा कि &#039;डॉन&#039; अखबार ने बताया है, इससे पहले से ही सीमित संसाधनों पर और भी ज़्यादा दबाव पड़ रहा है। खास बात यह है कि रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि खाद्य असुरक्षा में जो बढ़ोतरी दिख रही है, उसकी एक वजह डेटा कवरेज का बढ़ना भी है। इस आकलन में अब 68 ज़िले शामिल हैं, जबकि पिछले साल यह संख्या 43 थी; इससे आबादी का कवरेज 16 प्रतिशत से बढ़कर 21 प्रतिशत हो गया है। इस व्यापक दायरे की वजह से विश्लेषण में ज़्यादा प्रभावित आबादी शामिल हो गई है, जिससे साल-दर-साल तुलना करना मुश्किल हो गया है, जैसा कि &#039;डॉन&#039; ने रिपोर्ट किया है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:52 +0530</pubDate>
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<title>भारत&#45;चीन को नरक बताना ट्रंप को पड़ा भारी! गुस्से में आए बड़े देश!</title>
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<description><![CDATA[  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भारत को लेकर विवादित बयान दिया और भारत विरोधी अपनी मानसिकता और अपनी सोच का सबूत पेश किया। 22 अप्रैल 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट शेयर किया जिसमें अमेरिका के एक रेडियो होस्ट माइकल सैवेज के पडकास्ट की टिप्पणियां थी। इस पोस्ट में भारत और चीन को हेलहोल यानी नरक बताया गया। भारतीय और चीनी मूल के प्रवासियों को लैपटॉप वाले गैंगस्टर कहकर संबोधित किया गया। इस पोस्ट में दावा किया गया है कि भारत और चीन जैसे देशों से आए प्रवासियों ने अमेरिका को माफिया परिवारों से भी ज्यादा नुकसान पहुंचाया। इसे भी पढ़ें: Donald Trump प्रशासन का बड़ा फैसला! ईरान और रूस के तेल पर &#039;छूट&#039; खत्म, होर्मुज़ की नाकाबंदी रहेगी जारीअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भारत ने दो टूक जवाब दिया। विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा ट्रंप की टिप्पणियां स्पष्ट रूप से अज्ञानतापूर्ण अनुचित अस्वीकार हैं। तथ्य और वास्तविकता से परे हैं। लेकिन अपनी मूर्खता का परिचय देने वाले ट्रंप को सबसे तगड़ा जवाब ईरान ने दिया। ईरान ने भारत की तारीफ की और कहा कि शायद किसी को ट्रंप के लिए एक वन वे कल्चरल डिटॉक्स बुक कर देना चाहिए जिससे उनकी बिना मतलब की बयानबाजी कम हो सके। साथ ही लिखा गया कि कभी भारत आकर देखो। फिर बोलना भारत को नर्क बताने वाले ट्रंप को हैदराबाद में ईरानी कंसुलेट ने भी आईना दिखाया। इसे भी पढ़ें: ईरान युद्ध 2.0...खौफनाक प्लान, US का बचना मुश्किलसोशल मीडिया पर लिखा कि हम रोटी और रेस्पेक्ट में भरोसा करते हैं। लेकिन जैसे ही साउथ इंडिया में कदम रखा भाई वो तो एकदम अलग ही लीक है। जैसे भारत ने अपना हेवन मूड अनलॉक कर लिया हो। यकीन मानो वो और भी खूबसूरत [संगीत] है। ईरान ना सिर्फ भारत की तारीफ कर रहा है बल्कि ट्रंप के मुंह पर तमाचा भी जड़ रहा है। दुनिया भर में जब ट्रंप की आलोचना होने लगी तब ट्रंप को होश आया। तुरंत उन्होंने अपनी गलती सुधारी। भारत को लेकर दिए विवादित बयान पर सफाई दी। गलती का एहसास करते हुए ट्रंप ने लिखा भारत एक महान देश है जिसके शीर्ष पर मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त है। अच्छा हुआ ट्रंप को अपनी गलती का एहसास हो गया लेकिन ट्रंप को भूलना नहीं चाहिए। जिस भारत को वह नर्क बता रहे हैं, उसी देश के नागरिक अमेरिका की समृद्धि में अपना योगदान दे रहे हैं। अमेरिका की जीडीपी का सबसे ज्यादा हिस्सा यानी लगभग 10% टैक्स सेक्टर से आता है। इसे भी पढ़ें: 3 करोड़ 34 लाख लोग बाहर निकले, बंगाल में एक फैसले ने कैसे सब बदल दिया?सत्य नडेला माइक्रोसॉफ्ट चलाते हैं। सुंदर पिचई Google को लीड करते हैं। अरविंद कृष्णा आईबीएम के चेयरमैन और सीईओ हैं। आज अमेरिका की 500 सबसे बड़ी कंपनियों में करीब 20 कंपनियां भारतीय मूल के सीईओ चला रहे हैं। लेकिन लगता है कि डोन्ड ट्रंप की सोच दूषित हो गई है। उनको यह तक समझ में नहीं आ रहा क्या अमेरिका के हित में है और किस चीज से अमेरिका की तरक्की रुक सकती है।   ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:52 +0530</pubDate>
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<title>Australia का बड़ा बयान: India से दोस्ती &amp;apos;सर्वोच्च स्तर&amp;apos; पर, क्वाड ने दी नई मजबूती</title>
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<description><![CDATA[ भारत में ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर फिलिप ग्रीन ने कहा कि दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों के सबसे ऊंचे मुकाम पर हैं। एएनआई से बात करते हुए ग्रीन ने कहा कि दोनों देश QUAD के ज़रिए रणनीतिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और द्विपक्षीय स्तर पर इंडो-पैसिफिक के लिए उनका एक साझा विज़न है। हम अपने द्विपक्षीय संबंधों के सबसे ऊंचे मुकाम पर हैं... हम QUAD के ज़रिए रणनीतिक रूप से एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं और द्विपक्षीय स्तर पर इंडो-पैसिफिक के लिए हमारा एक साझा विज़न है। हमारी अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और बहुत मज़बूत हैं... हमारे संबंधों का दूसरा पहलू वह है जिसे हम &#039;ह्यूमन ब्रिज&#039; (मानवीय सेतु) कहते हैं। दस लाख से ज़्यादा लोग, जो ऑस्ट्रेलिया को अपना घर मानते हैं, हमारे द्विपक्षीय संबंधों में बहुत बड़ा योगदान दे रहे हैं।भारत में ऑस्ट्रेलियाई डिफेंस स्टाफ के प्रमुख ब्रिगेडियर डेमियन हिल ने भी ग्रीन की बात का समर्थन करते हुए कहा कि हमारे संबंध बहुत पुराने हैं।इसे भी पढ़ें: होर्मुज की उथल-पुथल के बीच अचानक मोदी से मिले कोरियाई राष्ट्रपति, चीन की उल्टी गिनती शुरू? हमारी &#039;व्यापक रणनीतिक साझेदारी&#039; (Comprehensive Strategic Partnership) को करीब 4 साल हो चुके हैं, लेकिन हमारे संबंध उससे कहीं ज़्यादा गहरे और पुराने हैं। जैसे-जैसे मध्य पूर्व की स्थिति दुनिया की अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव ला रही है, ग्रीन ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने तनाव कम करने की अपील की है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार होर्मुज़ जलडमरूमध्य और पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव कम करने की अपील कर रही है। इससे पूरी दुनिया में हलचल और झटके महसूस हो रहे हैं। इसका असर ऑस्ट्रेलिया में भी महसूस हो रहा है; और यहाँ भारत में भी। हमारे लिए बातचीत की प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण है, और जितनी जल्दी संबंधित पक्ष किसी नतीजे पर पहुँचकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सामान्य आवाजाही फिर से शुरू कर पाएंगे, उतना ही हम सभी के लिए बेहतर होगा।इसे भी पढ़ें: मोदी के लिए जिद पर अड़े थे बाइडेन, अमेरिका नहीं, भारत था QUAD की अहम ताकत, पूर्व उप विदेश मंत्री का खुलासाहिल ने एएनआई को बताया कि हम तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं। हम एक ऐसे शांतिपूर्ण और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के पक्षधर हैं, जो हम सभी को शांति से रहने में सक्षम बनाए... हम इस क्षेत्र में स्थिरता चाहते हैं, क्योंकि यह पूरी दुनिया के सर्वोत्तम हित में है कि हम एक शांतिपूर्ण समुदाय के रूप में रहें; और वास्तव में इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। इसका असर केवल एशिया या मध्य पूर्व में रहने वाले लोगों पर ही नहीं पड़ता, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर हर किसी को प्रभावित करता है। इससे पहले 18 अप्रैल को ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की अपील की थी; उन्होंने मौजूदा संघर्ष के बीच इस समुद्री मार्ग को टोल-मुक्त और निजीकरण से मुक्त रखने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया था। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:51 +0530</pubDate>
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<title>Iran का World Record! 57 दिन से Internet Blackout, US&#45;Israel हमले के बाद दुनिया से कटा देश</title>
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<description><![CDATA[ इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था NetBlocks के अनुसार, ईरान के नागरिकों को पिछले 57 दिनों से लगातार इंटरनेट ब्लैकआउट का सामना करना पड़ रहा है। यह ठीक आठ हफ़्ते पूरे होने का संकेत है, जब से ईरानी शासन ने देश की डिजिटल पहुँच पूरी तरह से काट दी थी। इस शनिवार को स्थिति पर रिपोर्ट करते हुए, संस्था ने इस पाबंदी के गंभीर असर को उजागर किया। उसने कहा कि यह रुकावट, जो अब 1344 घंटों के बाद अपने 57वें दिन में प्रवेश कर रही है, ईरानियों की आवाज़ को दबा देती है, दोस्तों और परिवार को एक-दूसरे से संपर्क से काट देती है, और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाती है।इसे भी पढ़ें: US-Iran तनाव के बीच Pakistan बना नया &#039;अखाड़ा&#039;? Army Chief मुनीर से मिले ईरानी विदेश मंत्रीयह पूरी तरह से ब्लैकआउट 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों के तुरंत बाद लागू किया गया था। इस लंबे समय तक चले शटडाउन ने क्षेत्रीय अस्थिरता के एक महत्वपूर्ण दौर में ईरानी आबादी को वैश्विक समुदाय से अलग-थलग कर दिया है।इस महीने की शुरुआत में NetBlocks ने इस चल रहे संकट को &quot;किसी भी देश में अब तक का सबसे लंबा, पूरे देश के स्तर पर इंटरनेट शटडाउन&quot; बताया था। इस रुकावट का पैमाना, जानकारी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए राज्य द्वारा पहले किए गए प्रयासों से कहीं अधिक बड़ा है। यह मौजूदा पाबंदी, जनवरी में ईरानी सरकार द्वारा लगाए गए एक अलग इंटरनेट और संचार ब्लैकआउट के बाद आई है। आरोप है कि इस ब्लैकआउट का इस्तेमाल, लगभग 47 साल पहले इस्लामिक गणराज्य की स्थापना के बाद से अपने ही नागरिकों पर राज्य की सबसे घातक कार्रवाई के सबूतों को छिपाने के लिए किया गया था।इसे भी पढ़ें: भारत-चीन को नरक बताना ट्रंप को पड़ा भारी! गुस्से में आए बड़े देश!इस घरेलू अलगाव के बीच, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से मुलाकात की। यह मुलाकात तब हुई जब अमेरिका के साथ &quot;गहरे होते कूटनीतिक गतिरोध&quot; के बीच एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तानी राजधानी पहुंचा था। यह उच्च-स्तरीय बैठक ऐसे समय में हुई जब शहर अभी भी &quot;दम घोंटने वाले सुरक्षा लॉकडाउन&quot; के घेरे में है; अधिकारियों ने शहर की मुख्य सड़कों को सील कर दिया है और अत्यधिक सुरक्षा वाले &#039;रेड ज़ोन&#039; को &quot;सख्त घेराबंदी&quot; के तहत रखा है।इसे भी पढ़ें: US के War Secretary का विवादित बयान, Iran संघर्ष को बताया &#039;दुनिया के लिए Gift&#039;एक अलग कूटनीतिक कार्यक्रम में उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्हें &quot;इस्लामाबाद में अपने भाई, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का स्वागत और सत्कार करके&quot; खुशी हुई। उन्होंने आगे कहा कि वह &quot;क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हमारी सार्थक वार्ताओं की प्रतीक्षा करेंगे। इस यात्रा का समय विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि व्हाइट हाउस ने हाल ही में घोषणा की थी कि दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी ईरान के साथ संभावित बातचीत के लिए इस क्षेत्र का दौरा करेंगे। हालांकि, तेहरान अपने विरोध पर अडिग रहा है, और उसने साफ तौर पर कहा है कि वह अमेरिका के साथ कोई बैठक नहीं करेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:50 +0530</pubDate>
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<title>Turkey में भारतीय एजेंसियों की बड़ी कामयाबी, Dawood का करीबी Salim Dola इस्तांबुल से अरेस्ट</title>
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<description><![CDATA[ एक अहम अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन में, तुर्की के अधिकारियों ने इस्तांबुल में भारतीय ड्रग माफिया के कथित सरगना सलीम डोला को गिरफ्तार कर लिया है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए इसे वैश्विक ड्रग तस्करी के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी सफलता बताया है। माना जा रहा है कि डोला एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों के नेटवर्क का अहम खिलाड़ी है जो कई देशों में फैला हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, डोला कई सालों से एक विशाल ड्रग सिंडिकेट चला रहा था, और बताया जाता है कि वह विदेशों से ही अपने ऑपरेशन्स को कंट्रोल करता था। कहा जाता है कि उसका नेटवर्क वैश्विक सिंथेटिक ड्रग्स के व्यापार से जुड़ा है, जिसकी सप्लाई चेन भारत समेत कई क्षेत्रों तक फैली हुई है।जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि देश से बाहर रहते हुए भी वह भारत में ड्रग्स की सप्लाई के लिए एक बड़े चैनल को मैनेज करता था।इसे भी पढ़ें: Turkey ने अचानक क्यों तान दी मिसाइलें? इजरायल के खिलाफ बड़ी लामबंदी, क्या करेंगे एर्दोगानअंडरवर्ल्ड से संबंधों को लेकर गंभीर चिंताएँइस मामले का सबसे गंभीर पहलू डोला का दाऊद इब्राहिम से जुड़े अंडरवर्ल्ड नेटवर्क के साथ कथित संबंध है। अधिकारियों का कहना है कि ये संबंध संगठित अपराध और अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों की तस्करी के बीच एक गहरे गठजोड़ की ओर इशारा कर सकते हैं, जिस पर एजेंसियाँ पिछले कई सालों से नज़र रख रही हैं।मुंबई से दुबई तक का ऑपरेशनडोला मूल रूप से मुंबई में सक्रिय था, जिसके बाद उसने कथित तौर पर अपना ठिकाना दुबई में बना लिया और वहीं से अपने ऑपरेशन चलाता रहा। पिछले कुछ महीनों में, भारतीय एजेंसियों ने उसके नेटवर्क के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू कर दिया था। साल 2025 में मुंबई पुलिस ने इस कार्रवाई के तहत उसके कई करीबी सहयोगियों को गिरफ्तार किया और उसके परिवार के कुछ सदस्यों को भी हिरासत में लिया।इसे भी पढ़ें: Trump की पत्नी को प्रपोज करने वाले को टर्किश दुल्हन क्यों चाहिए? मेलोनी को भी भेजा शादी का ऑफररेड कॉर्नर नोटिस और इनाम जारीनारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने पहले डोला के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था और उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने पर इनाम की घोषणा की थी। अब उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी से जांचकर्ताओं को इस बड़े नेटवर्क के बारे में अहम जानकारियां जुटाने में मदद मिलेगी। गिरफ्तारी के बावजूद, डोला को भारत वापस लाना आसान नहीं हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि तुर्की से उसका प्रत्यर्पण कानूनी रूप से पेचीदा हो सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:49 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan Economic Crisis: पेट्रोल&#45;डीजल के दाम बढ़े, सफर हुआ महंगा, अब जनता की जेब पर डाका</title>
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<description><![CDATA[ पेट्रोलियम की कीमतों में ताज़ा बढ़ोतरी ने पूरे पाकिस्तान में ट्रांसपोर्ट के किराए बढ़ा दिए हैं, जिससे उन यात्रियों पर और बोझ पड़ गया है जो पहले से ही महंगाई के दबाव से जूझ रहे हैं। समा टीवी के मुताबिक, लाहौर में रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (RTA) और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों के बीच हुई बातचीत के बाद किराए में 3 से 4 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी की गई है। ट्रांसपोर्ट हाउस में हुई इस बैठक में RTA के सेक्रेटरी राणा मोहसिन ने ट्रांसपोर्टरों के साथ बातचीत की; ट्रांसपोर्टरों ने ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण शुरू में किराए में ज़्यादा बढ़ोतरी की मांग की थी। अधिकारियों ने किराए में सिर्फ़ सीमित बढ़ोतरी की अनुमति दी और बिना अनुमति के किराया बढ़ाने वालों को चेतावनी भी दी।इसे भी पढ़ें: US के War Secretary का विवादित बयान, Iran संघर्ष को बताया &#039;दुनिया के लिए Gift&#039;राणा मोहसिन ने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी ट्रांसपोर्टर को तय सीमा से ज़्यादा किराया वसूलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और इस बात की पुष्टि की कि किराए की नई सूची तुरंत लागू की जाएगी। उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम की कीमतों में 7 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जिसकी वजह से यह बदलाव करना पड़ा। रेगुलेटरी सीमाओं के बावजूद, यात्रियों को अभी भी इसका बोझ उठाना पड़ रहा है। खबरों के मुताबिक, पब्लिक ट्रांसपोर्ट चलाने वालों ने कुछ मामलों में किराया करीब 5 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है, जिससे रोज़ाना और शहरों के बीच (इंटर-सिटी) सफ़र का खर्च और बढ़ गया है। यात्रियों ने अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि बार-बार किराया बढ़ने से सफ़र करना अब और भी ज़्यादा महंगा होता जा रहा है।इसे भी पढ़ें: Pakistan पर Climate Change और महंगाई की दोहरी मार, लाखों लोग गंभीर Food Crisis से जूझ रहे।शहरों के बीच चलने वाले रूटों पर किराए में काफ़ी बढ़ोतरी देखने को मिली है। लाहौर से रावलपिंडी का किराया बढ़कर PKR 2,340 हो गया है, जबकि पेशावर तक सफ़र करने का खर्च अब PKR 3,100 हो गया है। इसी तरह, फ़ैसलाबाद और सरगोधा का किराया बढ़कर PKR 1,260 हो गया है, और लाहौर-कराची रूट का किराया भी काफ़ी बढ़ोतरी के बाद अब PKR 9,720 हो गया है। इस बढ़ोतरी का असर सिर्फ़ यात्री ट्रांसपोर्ट तक ही सीमित नहीं है। माल ढोने वाले वाहनों और मिनी मज़्दा चलाने वालों ने भी डीज़ल की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए अपने किराए में लगभग 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। समा टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, कराची में पाकिस्तान गुड्स ट्रांसपोर्ट अलायंस ने किराए में 10 प्रतिशत की और भी बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। अलायंस के प्रेसिडेंट मलिक शहज़ाद अवान ने सरकार की ईंधन मूल्य निर्धारण नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि मौजूदा PKR 80,000 की सब्सिडी काफ़ी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशनल खर्चों में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है, और हर ट्रिप पर खर्च PKR 200,000 तक बढ़ गया है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:49 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Israel से &amp;apos;War&amp;apos; के दो महीने बाद Iran में नरमी, Tehran से Commercial Flights शुरू</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने शनिवार को तेहरान के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से वाणिज्यिक उड़ानें फिर से शुरू कर दीं; अमेरिका और इज़राइल के साथ संघर्ष शुरू होने के लगभग दो महीने बाद यह पहली बार हुआ है। सरकारी टेलीविज़न ने बताया कि इमाम खुमैनी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इस्तांबुल, मस्कट और मदीना के लिए उड़ानें रवाना हुईं। फ़्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफ़ॉर्म Flightradar24 ने बताया कि शनिवार सुबह इस्तांबुल के लिए कम से कम 3 उड़ानें रवाना हुईं। अमेरिका के साथ संघर्ष विराम के बाद, इस महीने की शुरुआत में ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से फिर से खोल दिया था, जिससे दोनों देशों के बीच दुश्मनी खत्म हो गई थी।इसे भी पढ़ें: Iran का World Record! 57 दिन से Internet Blackout, US-Israel हमले के बाद दुनिया से कटा देशयह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंचने के बाद पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के साथ बातचीत के 2 दौर किए। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत जारी रखेगा, जबकि अमेरिकी दूतों के शनिवार को इस्लामाबाद पहुंचने की उम्मीद थी। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की कि डोनाल्ड ट्रम्प तेहरान के साथ युद्धविराम वार्ता को फिर से शुरू करने के प्रयासों के तहत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को पाकिस्तान भेजेंगे। हालांकि, अरघची के आगमन के तुरंत बाद, ईरान ने संकेत दिया कि अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ कोई भी बातचीत अप्रत्यक्ष रहेगी, जिसमें पाकिस्तानी अधिकारी मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे।इसे भी पढ़ें: US के War Secretary का विवादित बयान, Iran संघर्ष को बताया &#039;दुनिया के लिए Gift&#039;यह राजनयिक प्रयास अनिश्चितकालीन युद्धविराम के बाद किया जा रहा है, जिसने अधिकांश लड़ाई को रोक दिया है, लेकिन वैश्विक बाजारों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से प्रभावित ऊर्जा शिपमेंट को बाधित करना जारी रखा है। ट्रम्प द्वारा इस सप्ताह की शुरुआत में युद्धविराम को बढ़ाने की घोषणा के बाद, पाकिस्तान वाशिंगटन और तेहरान को बातचीत की मेज पर वापस लाने के लिए प्रयासरत है, जो इस्लामाबाद के कूटनीति के लिए अधिक समय के अनुरोध का जवाब था।पाकिस्तान में ईरानी प्रतिनिधिमंडलईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को इस्लामाबाद में आसिम मुनीर से मुलाक़ात की। इस दौरान पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को बढ़ावा देने की अपनी कोशिशें जारी रखे हुए है। ईरानी दूतावास द्वारा शेयर किए गए एक छोटे से वीडियो में दिखाया गया कि इस बैठक में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई और ईरान के राजदूत रज़ा अमीरी मोघद्दम भी मौजूद थे। दूतावास ने एक छोटे से कैप्शन में इस बैठक की पुष्टि की, लेकिन बातचीत के विवरण का खुलासा नहीं किया। अराघची शुक्रवार देर रात इस्लामाबाद पहुंचे थे, जहाँ उन्होंने पाकिस्तान के नेतृत्व के साथ बातचीत की। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया, जिनमें मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार और गृह मंत्री मोहसिन नकवी शामिल थे। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:48 +0530</pubDate>
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<title>Iran के &amp;apos;झूठे नैरेटिव&amp;apos; से बचने के लिए PM Netanyahu ने छिपाई Cancer की बात, अब किया खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को बताया कि हाल ही में उनका प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती चरण का इलाज हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने सालाना मेडिकल रिकॉर्ड जारी करने में दो महीने की देरी इसलिए की, ताकि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान ईरान उन बातों को न फैला सके, जिन्हें उन्होंने &#039;झूठा नैरेटिव&#039; बताया। एक्स पर यह जानकारी साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सेहत अब बहुत अच्छी है और प्रोस्टेट से जुड़ी एक छोटी-सी समस्या पूरी तरह से ठीक हो गई है। नेतान्याहू के अनुसार, एक साल से भी ज़्यादा समय पहले बढ़े हुए बिनाइन प्रोस्टेट की सफल सर्जरी करवाने के बाद से वे लगातार मेडिकल देखरेख में थे। हाल ही में हुए एक चेकअप के दौरान, डॉक्टरों ने एक बहुत छोटा सा धब्बा देखा, जिसका आकार एक सेंटीमीटर से भी कम था। आगे की जाँचों में पता चला कि यह बहुत ही शुरुआती स्टेज का मैलिग्नेंट ट्यूमर था, जो न तो फैला था और न ही उसमें मेटास्टेसिस के कोई लक्षण दिखे थे।इज़रायली पीएम ने एक्स पर बताया, मैंने एक खास इलाज करवाया, जिससे यह समस्या पूरी तरह खत्म हो गई और इसका कोई निशान भी नहीं बचा। मैंने कुछ छोटे-मोटे इलाज करवाए, एक किताब पढ़ी और अपना काम जारी रखा। वह धब्बा पूरी तरह से गायब हो गया।इसे भी पढ़ें: सीजफायर के बीच अमेरिका ने ईरान का तेल टैंकर जब्त किया, पेंटागन ने किया खुलासाडॉक्टरों ने विकल्प दिए, नेतन्याहू ने इलाज चुनामेडिकल विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि उनकी उम्र के पुरुषों में यह समस्या काफी आम है। उनके सामने दो विकल्प रखे गए। पहला विकल्प था ट्यूमर का इलाज न करवाना और नियमित निगरानी रखना, क्योंकि बहुत से लोग बिना किसी दखल के ऐसी समस्याओं को संभाल लेते हैं। दूसरा विकल्प था, इस समस्या को पूरी तरह खत्म करने के लिए खास इलाज करवाना। इजरायली नेता ने कहा कि उन्होंने इलाज का विकल्प चुना ताकि यह पक्का हो सके कि ट्यूमर पूरी तरह से निकल जाए। आभार जताते हुए, उन्होंने यरुशलम के हदासाह अस्पताल के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को उनकी देखभाल के लिए धन्यवाद दिया।इसे भी पढ़ें: ईरान युद्ध 2.0...खौफनाक प्लान, US का बचना मुश्किल3 अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने नेतन्याहू के ईरान युद्ध के प्रस्ताव को ठुकरा दियाअमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी ने खुलासा किया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले कई अमेरिकी नेताओं के सामने ईरान के साथ सैन्य संघर्ष का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उन सभी ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। &#039;द लेट शो विद स्टीफन कोलबर्ट&#039; में शामिल होने के दौरान, केरी ने विस्तार से बताया कि पिछली सरकारों ने युद्ध के इस दबाव का विरोध कैसे किया। आंतरिक चर्चाओं के बारे में बात करते हुए, केरी ने कहा, &quot;ओबामा ने मना कर दिया। बुश ने मना कर दिया। राष्ट्रपति बाइडेन ने मना कर दिया। मेरा मतलब है, मैं उन बातचीत का हिस्सा था।&quot; पूर्व अधिकारी ने समझाया कि पिछले राष्ट्रपतियों ने तेहरान के साथ युद्ध में शामिल होने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उन्होंने &quot;शांतिपूर्ण प्रक्रिया के सभी उपायों को पूरी तरह से आज़माया नहीं था। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:47 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;US Talks: ईरानी विदेश मंत्री ने Asim Munir से की मुलाकात, America के आगे झुकने से और सीधी बातचीत से तेहरान का साफ इंकार</title>
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<description><![CDATA[ ईरान, अमेरिका और उनके सहयोगी देशों के बीच बातचीत की नई कोशिशें शुरू हुई हैं, जिनमें पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद पहुंचकर पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की और तेहरान की मांगों तथा अमेरिका की शर्तों पर अपनी आपत्तियां स्पष्ट रूप से रखीं। सूत्रों के अनुसार, ईरान ने साफ किया है कि वह अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है और किसी भी समझौते में उसकी सुरक्षा और संप्रभुता सर्वोपरि रहेगी।इसी बीच, अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर भी पाकिस्तान पहुंच रहे हैं, जहां वह ईरान के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता में हिस्सा लेंगे। हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह सीधे तौर पर अमेरिका के साथ आमने सामने बातचीत नहीं करेगा और अपनी बात पाकिस्तान के माध्यम से ही रखेगा। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अब भी गहरा है।इसे भी पढ़ें: Iran के &#039;झूठे नैरेटिव&#039; से बचने के लिए PM Netanyahu ने छिपाई Cancer की बात, अब किया खुलासाउधर, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में इन वार्ताओं को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शहर के कई हिस्सों में लॉकडाउन जैसी स्थिति है, प्रमुख मार्ग बंद हैं और आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। पहले दौर की वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी, ऐसे में इस बार भी अनिश्चितता बनी हुई है। इस्लामाबाद की ओर जाने वाली मुख्य सड़कों को बंद कर दिया गया है तथा उस ‘रेड जोन’ को कड़े सुरक्षा घेरे में रखा गया है जहां प्रमुख सरकारी भवन एवं राजनयिक मिशन स्थित हैं। पास के वाणिज्यिक क्षेत्र ‘ब्लू एरिया’ में बाजार सुनसान हैं, कैफे में आपूर्ति कम हो रही है और बस अड्डों की सेवाएं बंद होने के कारण सार्वजनिक परिवहन बाधित है जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। लोगों के लिए अनिश्चितता सबसे कठिन स्थिति है। हाल के सप्ताहों में यह दूसरा ‘लॉकडाउन’ है। अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच वार्ता के लिए इस्लामाबाद में पहले 11 अप्रैल को ‘लॉकडाउन’ किया गया था। वह वार्ता कोई समझौता हुए बिना समाप्त हो गई थी। इसके बाद शहर कुछ समय के लिए खुला, लेकिन पाकिस्तान द्वारा एक और दौर की बातचीत की मेजबानी की तैयारियां किए जाने के बीच पाबंदियां फिर लागू कर दी गईं। हालांकि, वार्ता को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। हम आपको याद दिला दें कि ट्रंप ने ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम को मंगलवार को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया था ताकि तेहरान को युद्ध समाप्त करने के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार करने का और समय मिल सके। यह फैसला युद्धविराम की अवधि समाप्त होने से कुछ घंटे पहले किया गया।दूसरी ओर ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने देश के भीतर एकता की सराहना की है और कहा है कि दुश्मनों को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है। सुरक्षा कारणों से वह सार्वजनिक रूप से बहुत कम नजर आ रहे हैं और उनके निर्देश विशेष माध्यमों से जारी किए जा रहे हैं।उधर, मैदान में स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने अपनी नौसेना को होरमुज जलडमरूमध्य में ईरानी गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह जलमार्ग विश्व के तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालता है, लेकिन युद्ध के कारण यहां जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है। इसके अलावा, लेबनान में भी संघर्ष जारी है, जहां हिजबुल्लाह ने युद्धविराम बढ़ाने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और एक इजराइल ड्रोन को मार गिराया। इसके जवाब में इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के खियाम शहर में बमबारी की, जिसमें रिहायशी इलाके भी प्रभावित हुए। इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।इसी बीच, खाड़ी क्षेत्र में भी अस्थिरता देखने को मिली है। कतर ने कुवैत पर हुए ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की है और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। कतर ने इराक से ऐसे हमलों को रोकने की जिम्मेदारी निभाने की अपील की है। वहीं ईरान ने आंतरिक स्तर पर भी सख्त कदम उठाए हैं। उसने एक व्यक्ति को इस्राइल के लिए जासूसी करने के आरोप में फांसी दे दी है। यह कार्रवाई उन कई मामलों में से एक है, जिनमें हाल के महीनों में सख्ती बढ़ाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि देश की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।युद्ध के बीच एक सकारात्मक संकेत यह भी है कि ईरान ने लगभग दो महीने बाद तेहरान के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से वाणिज्यिक उड़ानों को फिर से शुरू कर दिया है। इससे यह उम्मीद जगी है कि स्थिति धीरे धीरे सामान्य हो सकती है, हालांकि पूरी तरह स्थिरता अभी दूर है। तुर्की ने भी संकेत दिया है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच समझौता होता है तो वह होरमुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग हटाने के काम में भाग ले सकता है। तुर्की ने इसे मानवीय जिम्मेदारी बताया है और बहुपक्षीय सहयोग की वकालत की है।वहीं, ईरान के रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह इस युद्ध से सम्मानजनक तरीके से बाहर निकलने का रास्ता खोज रहा है। ईरान का दावा है कि उसकी सैन्य ताकत ने अमेरिका को कठिन स्थिति में डाल दिया है।कुल मिलाकर स्थिति बेहद जटिल बनी हुई है। एक ओर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य गतिविधियां भी थमने का नाम नहीं ले रही हैं। आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि बातचीत के जरिए समाधान निकलता है या यह संघर्ष और गहराता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान में होने वाली इन महत्वपूर्ण वार्ताओं पर टिकी हुई हैं, जो इस संकट के भविष्य को दिशा दे सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:46 +0530</pubDate>
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<title>America Plane Crash: North Dakota की प्रतिनिधि Liz Conmy की मौत, उड़ान भरते ही आग का गोला बना विमान</title>
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<description><![CDATA[ मिनियापोलिस के उत्तर में स्थित क्रिस्टल हवाई अड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद एक छोटा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें नॉर्थ डकोटा की प्रांत प्रतिनिधि और विमान के पायलट की मौके पर ही मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
सीनेटर टिम मैथर्न ने स्थानीय अखबार ‘स्टार ट्रिब्यून’ से इस विमान हादसे में फार्गो निवासी प्रांत प्रतिनिधि लिज कॉन्मी की मौत की पुष्टि की।
नॉर्थ डकोटा डेमोक्रेटिक–नॉनपार्टिजन लीग पार्टी ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उनकी मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि कॉन्मी सार्वजनिक शिक्षा, पर्यावरण और पारदर्शिता की सशक्त पैरोकार थीं।
पार्टी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, “यह बेहद दुखद घटना है। प्रतिनिधि लिज कॉन्मी का जाना हमारे प्रांत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”
ब्रुकलिन पार्क पुलिस निरीक्षक मैट राबे के अनुसार, शनिवार पूर्वाह्न 11 बजकर 51 मिनट पर विमान दुर्घटना की सूचना मिली। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने पाया कि मिनेसोटा के ब्रुकलिन पार्क शहर के एक पार्क में विमान गिरकर आग की लपटों में घिर गया था।
राबे ने बताया कि विमान उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि विमान में कितने लोग सवार थे।
संघीय विमानन प्राधिकरण (एफएए) के अनुसार, विमान में कुल दो लोग सवार थे।
राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (एनटीएसबी) ने पुष्टि की है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान बीच एफ33ए मॉडल का था। जांच दल जल्द घटनास्थल पर पहुंचेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:45 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran Peace Talks पर संकट के बादल, Tehran ने अमेरिकी दल से मिलने का प्रस्ताव ठुकराया</title>
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<description><![CDATA[ इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिशें नाकाम होती दिख रही हैं; नई रिपोर्टों से पता चलता है कि तेहरान अभी भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मिलने को तैयार नहीं है। पाकिस्तान स्थित मीडिया संस्थान ARY News के चेयरमैन कामरान खान के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के उद्देश्य से होने वाली इस निर्धारित बैठक को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। एक्स पर साझा की गई एक पोस्ट में, खान ने बताया कि विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि बातचीत के दूसरे दौर की संभावनाएँ अब काफी कम हो गई हैं। उन्होंने कहा, &quot;इस्लामाबाद में आज अमेरिका-ईरान बातचीत के दूसरे दौर के फिर से शुरू होने की संभावनाएँ तेज़ी से खत्म होती जा रही हैं, क्योंकि तेहरान अभी भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मिलने को तैयार नहीं है; इस प्रतिनिधिमंडल के आज देर रात वॉशिंगटन से यहाँ पहुँचने की उम्मीद थी।खान ने आगे बताया कि ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण &#039;स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़&#039; से जुड़ी एक कड़ी शर्त रखी है, जिसमें उसने ज़ोर देकर कहा है कि वाशिंगटन को सबसे पहले ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी हटानी होगी। उनके पोस्ट में कहा गया है, ईरान लगातार इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि बातचीत का दूसरा दौर शुरू करने की शर्त के तौर पर अमेरिकी &#039;स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़&#039; पर अपनी नाकेबंदी खत्म करें।इसे भी पढ़ें: Iran-US Talks: ईरानी विदेश मंत्री ने Asim Munir से की मुलाकात, America के आगे झुकने से और सीधी बातचीत से तेहरान का साफ इंकारअमेरिका का उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल हरी झंडी का इंतज़ार कर रहा हैअमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ की अगुवाई में, जिसमें वरिष्ठ सलाहकार और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं, अमेरिकी टीम बातचीत के लिए पाकिस्तान जाने वाली है। यह घटनाक्रम ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुँचने के बाद सामने आया है, जिससे शुरू में तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत को फिर से आगे बढ़ाने की उम्मीदें जगी थीं।इसे भी पढ़ें: अब US में भारतीयों की होगी No Entry?  H1B वीजा पर आए नए बिल ने बढ़ाई चिंताइस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्थायहाँ यह ध्यान देने वाली बात है कि पाकिस्तान की राजधानी में इस समय ऐसी सुरक्षा व्यवस्था लागू है जिसे &#039;दम घोंटने वाली&#039; सुरक्षा व्यवस्था बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, मुख्य सड़कों को सील कर दिया गया है और अति-सुरक्षित &#039;रेड ज़ोन&#039; को सुरक्षा के कड़े घेरे से घेर दिया गया है। बातचीत का पिछला दौर, जो 21 घंटे तक चला था, बिना किसी ठोस प्रगति के समाप्त हो गया था। उस बैठक की अगुवाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसदीय अध्यक्ष एम.बी. ग़ालिबफ़ ने की थी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:45 +0530</pubDate>
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<title>White House Shooting: हमलावर Cole Allen ने घटना को अकेले दिया अंजाम, Washington मेयर ने किया खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन की मेयर मुरियल बाउजर ने शनिवार रात कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास ‘व्हाइट हाउस’ में संवाददाताओं के रात्रिभोज के दौरान गोलीबारी करने वाला संदिग्ध बंदूकों और चाकुओं से लैस था और माना जा रहा है कि उसने अकेले ही घटना को अंजाम दिया।
 ‘व्हाइट हाउस’ में शनिवार शाम रात्रिभोज के दौरान हुई गोलीबारी की घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के अन्य शीर्ष नेताओं को वहां से निकाला गया।
 अधिकारियों के अनुसार, यह घटना उस बॉलरूम के बाहर हुई जहां ट्रंप और अन्य अतिथि मौजूद थे। हालांकि, घटना के सटीक कारणों का तत्काल पता नहीं चल सका। कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है और इसे बाद में आयोजित किया जाएगा।
 एक संवाददाता सम्मेलन में मेयर ने कहा, ‘‘अब तक की जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता का कोई सुराग नहीं मिला है। सभी संकेत यही इशारा करते हैं कि हमलावर ने अकेले इस घटना को अंजाम दिया।’’
 उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आम जनता को किसी खतरे की आशंका नहीं है।
 दो कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) को बताया कि संदिग्ध की पहचान कैलिफोर्निया के टॉरेंस निवासी 31 वर्षीय कोल टॉमस एलन के रूप में हुई है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:44 +0530</pubDate>
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<title>ट्रंप पर हमला, तड़ातड़ चली गोलियां, CIA एजेंट ने कैसे बचाई जान?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति पर हमले का प्रयास किया गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टारगेट करने की कोशिश की गई है। ट्रंप पर हमले की कोशिश कैसे हुई? डिनर पार्टी में उपराष्ट्रपति जे डीवन समेत और कौन-कौन से प्रमुख लोग वहां पर मौजूद थे? दुनिया की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली इमारत के अंदर गोलियां कैसे चल गई? सब कुछ आपको विस्तार से बताते हैं। अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में उस वक्त हड़कंप मच गया जब दुनिया के सबसे हाई प्रोफाइल आयोजनों में से एक वाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान अचानक तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दी। यह वही इवेंट है जहां अमेरिका का राजनीतिक और मीडिया जगत एक ही छत के नीचे होता है। लेकिन इस बार माहौल हंसीज़ाक से सीधे डर और अफरातफरी में तब्दील हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक जैसे ही यह आवाजें गूंजी यूनाइटेड स्टेट सीक्रेट सर्विसेज तुरंत हरकत में आ गई। एजेंट्स ने बिना एक सेकंड गवाए डोनाल्ड ट्रंप को स्टेट से हटाया और उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। उस समय उनके साथ जे डीवेंस और कई वरिष्ठ कैबिनेट के सदस्य भी मौजूद थे जिन्हें तुरंत कवर किया गया। इसे भी पढ़ें: Trump पर हमला, एक पकड़ा गया और कितने शामिल? खुलासे होश उड़ा देंगे!घटना के दौरान वहां मौजूद लोगों के मुताबिक अचानक आई इन आवाजों ने पूरे हॉल में भगदड़ जैसा माहौल बना दिया था। कुछ वीडियो क्लिप्स में देखा जा सकता है कि कैसे लोग अपनी सीटें छोड़कर इधर-उधर भागने लगे और सुरक्षा एजेंसियां भीड़ को नियंत्रित करने में तुरंत जुट गई। हालांकि इन वीडियोस की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है लेकिन माहौल की गंभीरता इससे साफ झलकती है। इस बीच अधिकारियों के रेडियो कम्युनिकेशन से यह जानकारी सामने आई कि एक संदिग्ध शख्स को हिरासत में लिया गया है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया कि वास्तव में गोली चली थी या आवाज किसी और कारण से आई थी। लेकिन जिस तरह से सुरक्षा एजेंसियों ने रिएक्ट किया उसने पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया। घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डीसी में आज की शाम काफी हलचल भरी रही। सीक्रेट सर्विसेज और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने शानदार काम किया है। उन्होंने यह भी बताया कि संदिग्ध को पकड़ लिया गया है और उन्होंने सुझाव दिया कि कार्यक्रम जारी रखा जा सकता है। इसे भी पढ़ें: White House फायरिंग पर Donald Trump का बड़ा खुलासा, &#039;हमलावर के पास थे कई घातक हथियार&#039;हालांकि अंतिम फैसला सुरक्षा एजेंसियों के हाथों में ही था। ट्रंप ने इसके साथ-साथ अमेरिकी सीक्रेट सर्विज की भी तारीफ की जिन्होंने सब कुछ अच्छे से संभाल लिया। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़े करती है कि क्या दुनिया के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सिस्टम में भी सेंध लग सकती है? और अगर हां, तो इसके पीछे की असली वजह क्या है? क्या यह वाकई हमला था या फिर सिर्फ अफवाहों ने माहौल को खतरनाक बना दिया। फिलहाल प्रशासन की ओर से यही कहा गया है कि राष्ट्रपति और सभी वरिष्ठ नेता पूरी तरह सुरक्षित हैं। लेकिन इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों, खुफिया तंत्र और बड़े आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या यह सिर्फ एक फर्जी अलार्म था जिसके जरिए हमलावर या इसके पीछे का प्रॉक्सी समूह यह दिखाना चाह रहा था कि उसकी पहुंच कहां तक हो सकती है और वह कहां तक घुसकर हमला कर सकते हैं या फिर यह अमेरिका के दिल पर हमला करने की असली साजिश थी जो पूरी नहीं हो सकी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:43 +0530</pubDate>
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<title>Trump पर हमला, एक पकड़ा गया और कितने शामिल? खुलासे होश उड़ा देंगे!</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास ‘व्हाइट हाउस’ में शनिवार रात को संवाददाताओं के रात्रिभोज के दौरान हुई गोलीबारी की घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि संदिग्ध के पास कई घातक हथियार थे। अधिकारियों ने बताया कि हमलावर की पहचान कैलिफोर्निया के टोरेंस निवासी 31 वर्षीय कोल टॉमस एलन के रूप में हुई है, जिसे सीक्रेट सर्विस ने पकड़ लिया है। जिस तरीके से डोनाल्ड ट्रंप को एक  डिनर पार्टी के दौरान निशाना बनाया गया। सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स वगैरह भी मौजूद थे और वहां पर उनके सुरक्षा कर्मियों ने अह पूरी स्थिति को संभाल लिया है। लेकिन और उसको बाहर से बाहर निकाला है। अब जो है इसमें किसी पकड़े भी गए हैं जो लोग थे और उसप एक हमला उसके ऊपर अटैक भी हुआ है। अब इसके बारे में जानकारी जुटाई जाएगी जब इन्वेस्टिगेशन की जाएगी कि आखिर ये कहां था? कौन है? किस रास्ते से ये वहां पर आया था। तमाम जो एरिया की जो सीसीटीवी होटल की सीसीटीवी है उसको एनालाइज किया जाएगा। जो होटल का सीसीटीवी फुटेज है वो खंगाला जाएगा। इतना बड़ा सिक्योरिटी लैब्स कैसे हो गया? इन तमाम विषयों पर जांच होगी। हमलावर एक था या उससे ज्यादा थे इसको लेकर कुछ डिटेल्स मिल पा रही है। इसे भी पढ़ें: White House Shooting: हमलावर Cole Allen ने घटना को अकेले दिया अंजाम, Washington मेयर ने किया खुलासाएक हमलावर मार गिराया गया। पहले तो वो आता कैसे हाई सिक्योरिटी जोन में और इस तरीके से फायरिंग करता है वो तो बहुत बड़ा सवाल है। लेकिन क्या उसके साथ इस पूरे इस पूरे घटनाक्रम में और लोग शामिल थे इस पर भी सवाल उठ रहा है। क्योंकि अभी तक की जांच में यही सामने आया है कि ये सिर्फ एक आदमी की खुद की प्लानिंग नहीं है कि वो वेपन लेकर जो है उस सिक्योर एरिया में आ गया था। उस होटल में पहुंच गया था। जहां पर डोनाल्ड ट्रंप अपने साथियों के साथ पत्रकारों के साथ एक डिनर पार्टी कर रहे थे। वहां पे उनसे मिल रहे थे और इसको इस पूरी प्रोग्राम के बारे में कैसे पता चला था और पूरी सिक्योरिटी को क्योंकि पूरा एरिया जो है वो सेनेटाइज कर दिया जाता है। काफी एक थ्रेट जो है वो डोनाल्ड ट्रंप को लेकर है क्योंकि इससे पहले भी 2000 देश पर हमला 24 का हमला हो चुका है। उसको उसके बाद इस तरीके के हमला हुआ है। दरअसल मीडिया के साथ ये डिनर का आयोजन था। भारी संख्या में जर्नलिस्ट यहां पर आए हुए थे और तुरंत यहां पर एक हमलावर अचानक से आता है। मेजर सिक्योरिटी लैब्स तो है ही लेकिन ये हमलावर अंदर आता है होटल हिल्टन में जो कि हाई सिक्योरिटी ज़ोन में तब्दील था। प्रेसिडेंट वहां पर थे। उपराष्ट्रपति जेडी वंस वहां पर थे और वहां पर कई राउंड फायरिंग होती है और इस फायरिंग के दौरान तुरंत प्रभाव के साथ डायस से हटाया गया। भारी सुरक्षा के बीचोंबीच राष्ट्रपति ट्रंप को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को हटाया गया। पांच से आठ राउंड फायरिंग हुई है होटल हिल्टन के इस हॉल में। हालांकि ये कोई पहली दफे नहीं हुई। इससे पहले भी जब वो कंपेन के दौरान भी उनके एक बार हो चुकी थी। उनके कान में चोट लगी थी। अब बात दरअसल ये है कि प्रेसिडेंट ट्रंप जो है बहुत रेडिकल चेंजेस अमेरिकन पॉलिसी में ला रहे हैं। उसकी वजह से एक टेंशन क्रिएट हो गया है और उनके उनके विरुद्ध बहुत से ग्रुप और लोग इस तरह के हो गए हैं। फिर दूसरी बात ये भी है कि जो उनके मागा (मेर अमेरिका ग्रेट अगेन) मूवमेंट है जिसकी मदद से वो आए सत्ता के अंदर वो भी उनसे खुश नहीं है। ये बहुत फॉर राइट ग्रुप्स हैं। ट्रंप अपने को स्वयं जीसस क्राइस्ट के रूप में प्रेजेंट किया और पोस्टर निकाला जिसमें दिखाया कि वो एक जो है उनके अवतार हैं या खुद स्वयं जीसस बन के आए हैं। लोगों की मदद कर रहे हैं। अब अभी तो पता नहीं ज्यादा डिटेल रिपोर्ट्स है नहीं। कौन लोग हैं इनके पीछे क्या है? अच्छी बात ये है कि उसमें से कुछ अरेस्ट हो गए हैं तो जल्दी ही पूरी डिटेल का पता चल जाएगा और उसमें फिर दूसरी बात ये कि यूरोप भी इनसे खुश नहीं है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:43 +0530</pubDate>
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<title>हमले को ट्रंप ने ईरान युद्ध से जोड़ा, कहा&#45; ये घटना मुझे जीतने से नहीं रोक सकती</title>
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<description><![CDATA[ फायरिंग को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान आया है। वो यह कह रहे हैं कि यह घटना मुझे ईरान युद्ध रोकने से नहीं रोक सकती। यह घटना मुझे रोक नहीं पाएगी। ईरान युद्ध जीतने से नहीं रोक पाएगी मुझे यह घटना। कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर चल रही थी। वहां पर जैसे ही ये गोली की आवाजें हुई एक तो पूरे डोनल्ड ट्रंप उनके कैबिनेट उनकी पत्नी मिलानिया ट्रंप को लेकर जिसमें जितने भी लोग वहां पर मौजूद थे। पीट हेगसेथ से लेकर कैश पटेल सबको वहां से निकाला गया। अमेरिका के अंदर एक अटैक होता है और डॉनल्ड ट्रंप इसको ईरान युद्ध से जोड़ रहे हैं। वो कह रहे हैं कि यह घटना मुझे ईरान युद्ध रोकने से नहीं जीतने से नहीं रोक सकती।इसे भी पढ़ें: White House Shooting पर PM Modi की कड़ी प्रतिक्रिया, कहा- लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहींअधिकारियों ने बताया कि 31 वर्षीय हमलावर कैलिफोर्निया से था, जिसे सीक्रेट सर्विस ने पकड़ लिया है। घटना के बाद ट्रंप ने ‘व्हाइट हाउस’ में संवाददाताओं को संबोधित किया और बताया कि संदिग्ध के पास कई हथियार थे। एक अधिकारी को गोली लगी, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट के कारण उनकी जान बच गई। ट्रंप ने कहा कि सीक्रेट सर्विस के अधिकारी को बहुत करीब से एक घातक हथियार से निशाना बनाया गया था। उन्हें गोली लगी लेकिन जैकेट ने अपना काम कर दिया।’’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक वीडियो भी जारी किया है जिसमें संदिग्ध को सुरक्षा अवरोधक के पास भागते हुए और सीक्रेट सर्विस के एजेंट को उसकी ओर दौड़ते हुए देखा जा सकता है।इसे भी पढ़ें: ट्रंप पर हमला, तड़ातड़ चली गोलियां, CIA एजेंट ने कैसे बचाई जान?घटना के बाद वॉशिंगटन हिल्टन के बैंक्वेट हॉल में सीक्रेट सर्विस और अन्य एजेंसियों के अधिकारी बड़ी संख्या में पंहुचे, जहां सैकड़ों अतिथि स्प्रिंग पी और बुराटा सलाद का आनंद ले रहे थे। उन्हें अचानक टेबलों के नीचे छिपने को मजबूर होना पड़ा। जैसे ही लोगों को स्थिति का एहसास हुआ, बॉलरूम में दहशत फैल गई। सैकड़ों पत्रकार सूचनाएं साझा करने के लिए फोन पर जुट गए। किसी को चिल्लाते हुए सुना गया हट जाइए, सर! जबकि कुछ लोग निर्देश दे रहे थे कि झुक जाइए।’ एक कोने से गॉड ब्लेस अमेरिका की आवाजें भी सुनाई दीं। इसी बीच ट्रंप को मंच से सुरक्षित बाहर ले जाया गया। इस दौरान वह क्षण भर के लिए, संभवतः ठोकर लगने से, लड़खड़ाए और सीक्रेट सर्विस एजेंटों ने उन्हें तुरंत संभाल लिया। एक कानून-प्रवर्तन अधिकारी ने गोलीबारी की पुष्टि की। हालांकि विस्तृत जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकी। सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा में रहने वाले सभी अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। एक अधिकारी ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि एक कानून-प्रवर्तन कर्मी को बुलेट-प्रूफ जैकेट पर गोली लगी, लेकिन उसके सुरक्षित रहने की उम्मीद है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:42 +0530</pubDate>
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<title>व्हाइट हाउस डिनर में जब हुआ शूटआउट, सबसे फिट, स्मार्ट और तेज यूएस सीक्रेट सर्विस काउंटर असॉल्ट टीम ने कैसे पलभर में मोर्चा संभाला</title>
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<description><![CDATA[ वॉशिंगटन डीसी की चमकती रोशनी और हाई-प्रोफाइल डिनर पार्टी का माहौल चल रहा था। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन कुछ ही पलों में यह सन्नाटा अफरा-तफरी में बदल गया। पत्रकारों के लिए आयोजित इस खास डिनर के दौरान अचानक एक हथियारबंद शख्स सुरक्षा घेरा तोड़कर उस क्षेत्र में घुस आया, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई बड़े अमेरिकी नेता मौजूद थे। घटना ने माहौल को पल भर में दहशत में बदल दिया। मेहमान अपनी जान बचाने के लिए टेबल के नीचे छिपने लगे। हालांकि, सतर्क सीक्रेट सर्विस एजेंटों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हमलावर को काबू में कर लिया। राहत की बात यह रही कि राष्ट्रपति ट्रंप पूरी तरह सुरक्षित रहे और उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया।  सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स वगैरह भी मौजूद थे और वहां पर उनके सुरक्षा कर्मियों ने अह पूरी स्थिति को संभाल लिया है। दरअसल, इस खास यूनिट को &#039;कैट&#039; (CAT) के नाम से जाना जाता है, जिसमें शामिल होना इतना मुश्किल है कि टेस्ट देने वालों में से सिर्फ कुछ चुनिंदा एजेंट्स को ही इसमें जगह मिल पाती है। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस की &#039;काउंटर असॉल्ट टीम&#039; राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा के लिए खास टैक्टिकल यूनिट है। आइए आपको सीक्रेट सर्विस के इन सबसे खतरनाक और जांबाज एजेंट्स के बारे में बताते हैं।इसे भी पढ़ें: हमले को ट्रंप ने ईरान युद्ध से जोड़ा, कहा- ये घटना मुझे जीतने से नहीं रोक सकतीकैसे काम करती है &#039;कैट&#039;?कैट का काम हमेशा फ्रंटफुट पर रहकर जवाबी कार्रवाई करने का होता है। जब भी राष्ट्रपति का काफिला निकलता है या वो किसी कार्यक्रम में होते हैं, तो कैट के कमांडो आस-पास चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद रहते हैं। अगर राष्ट्रपति पर कोई भी हमला होता है, तो ये टीम पलक झपकते ही हमलावरों पर टूट पड़ती है और उन्हें घेर लेती है। ये टीम भारी गोलीबारी करके दुश्मनों को उसी जगह रोक देती है, ताकि इस बीच राष्ट्रपति की सुरक्षा में लगी मुख्य टीम उन्हें सुरक्षित वहां से निकाल सके। ये खास टीम मोटरकेड (काफिले) और बड़े आयोजनों में सुरक्षा का जिम्मा संभालती है। कैट के कमांडो हर वक्त इस बात के लिए तैयार रहते हैं कि किसी भी खतरे को उसी वक्त कुचल दिया जाए। इनकी ट्रेनिंग इतनी कड़ी और एडवांस होती है कि ये भारी दबाव और तनाव के बीच भी पल भर में एकदम सही फैसला ले सकते हैं। सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसलिए कैट बाकी सुरक्षा टीमों के साथ भी बेहतरीन तालमेल बनाकर काम करती है।इसे भी पढ़ें: ट्रंप पर हमला, तड़ातड़ चली गोलियां, CIA एजेंट ने कैसे बचाई जान?किन हथियारों से लैस होते हैं &#039;कैट&#039; के कमांडो?कैट के कमांडो बेहद आधुनिक और घातक हथियारों से लैस होते हैं। आमतौर पर हर कमांडो के पास &#039;नाइट्स आर्मामेंट कंपनी&#039; (KAC) की SR-16 CQB राइफल होती है। ये 11.5 इंच की बैरल वाली ऐसी राइफल है जिसमें साइलेंसर लगा होता है। निशाना अचूक लगाने के लिए इस राइफल में रेड डॉट साइट, लेजर, खास लाइट और स्टॉक जैसी चीजें लगी होती हैं। इसके साथ ही, इनके पास बैकअप के लिए SIG Sauer P229 या ग्लॉक 19 जेन 5 (Glock 19 Gen 5 MOS) जैसी दमदार पिस्तौल भी होती है, जिसमें रेड डॉट साइट लगा होता है। हालात के हिसाब से कुछ जवानों के पास भारी हथियार भी होते हैं। इसके अलावा ये कमांडो फ्लैश-बैंग ग्रेनेड, बुलेटप्रूफ जैकेट, हेलमेट और बाकी जरूरी टेक्टिकल गियर से भी पूरी तरह लैस होते हैं। इन्हीं अत्याधुनिक हथियारों के दम पर कैट की टीम किसी भी हमले का पल भर में मुंहतोड़ जवाब देने की ताकत रखती है।हमलावर के पास थे घातक हथियार हमलावर की पहचान कैलिफोर्निया के टोरेंस निवासी 31 वर्षीय कोल टॉमस एलन के रूप में हुई है, जिसे सीक्रेट सर्विस ने पकड़ लिया है। अमेरिकी अटॉर्नी ने कहा कि संदिग्ध पर हथियार रखने और हमले के आरोप लगाए गए हैं। गोलीबारी की घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि संदिग्ध के पास कई घातक हथियार थे। सीक्रेट सर्विस के अधिकारी को बहुत करीब से एक घातक हथियार से निशाना बनाया गया था। उन्हें गोली लगी लेकिन जैकेट ने अपना काम कर दिया।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:41 +0530</pubDate>
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<title>White House Party में गोली चलाने वाले की पूरी कुंडली, जिसे ट्रंप ने बताया Lone Wolf</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका की सियासत को हिला देने वाले हमले में एक चौंकाने वाला नाम कोल थॉमस एलेन का सामने आया है। एलेन को डोनाल्ड ट्रंप ने “लोन वुल्फ” बताया।आखिर कौन है ये शख्स, जिसने अकेले ही इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देने की कोशिश की? जांच में अब तक किसी आतंकी संगठन से कनेक्शन नहीं मिला, लेकिन उसके इरादे बेहद खतरनाक थे। इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स करने वाला ये युवक, दिखने में जितना साधारण था, कहानी उतनी ही रहस्यमयी। क्या एक “लोन वुल्फ” सच में अकेला होता है, या इसके पीछे छिपी है कोई बड़ी साजिश? दरअसल, लोन वुल्फ उस व्यक्ति को कहते हैं जो अकेले अपना काम करने में सक्षम हो। जैसे कि यह व्यक्ति अकेले ही सारे अटैक्स किया। यहां पर अभी तक जो भी जांच में हमें पता चला है कोई भी इसके पीछे आतंकी संगठन नहीं था या किसी का भी हाथ अभी तक नहीं पता चला है। कंप्यूटर साइंस में मास्टर्सहमलावर का नाम कोल थॉमस एलेन है।सीबीएस न्यूज़ के मुताबिक कोल थॉमस एलेन पेशे से एक पार्ट टाइम टीचर है और उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उन्होंने सबसे पहले 2017 में ग्रेजुएशन किया है मैकेनिकल इंजीनियरिंग में और पिछले साल उन्होंने मास्टर्स डिग्री कंप्यूटर साइंस में की है। सी2 एजुकेशन एक कंपनी है जिसमें वह पार्ट टाइम ट्यूटर थे और उन्हें गेमिंग का बहुत शौक था। वह इंड गेम डेवलपर भी हैं। ट्रंप के अधिकारियों पर अटैक की प्लानिंगजब उनसे सिक्योरिटी एजेंसी ने पूछा कि आप यहां पर किस पर हमला करने आए थे? तो उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के अधिकारियों पर वो हमला करने आए हैं। साथ ही साथ कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी डोमिंगस हिल्स से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स की डिग्री ली है।कमला हैरिस के अभियान में $25 का योगदानजब इनके राजनीतिक जुड़ाव की ओर देखते हैं तो पता चलता है कि साल 2024 में फेडरल इलेक्शन का जो रिकॉर्ड है उसमें इन्होंने $25 कमला हैरिस का जो राष्ट्रपति अभियान था उसमें योगदान भी दिया। इन सारी जानकारी से यह पता चलता है कि एलन काफी ब्राइट रहे हैं। उनका बहुत ही एक अच्छा खासा एजुकेशनल बैकग्राउंड रहा है और दिसंबर 2024 में उन्हें टीचर ऑफ द मंथ का भी खिताब मिला है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:16:40 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump प्रशासन का बड़ा फैसला! ईरान और रूस के तेल पर &amp;apos;छूट&amp;apos; खत्म, होर्मुज़ की नाकाबंदी रहेगी जारी</title>
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<description><![CDATA[ वैश्विक ऊर्जा बाजार में मचे हड़कंप के बीच अमेरिका ने एक बार फिर अपने सख्त इरादे साफ कर दिए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका अब ईरानी और रूसी तेल की खरीद पर दी गई किसी भी तरह की छूट (Waivers) को दोबारा लागू नहीं करेगा। यह फैसला वॉशिंगटन की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह प्रतिबंधों के जरिए दुश्मन देशों की आर्थिक कमर तोड़ना चाहता है। इसे भी पढ़ें: AAP का राज्यसभा में अस्तित्व संकट! Raghav Chadha के साथ 7 सांसदों का दावा, मगर BJP के &#039;लड्डू&#039; में अभी सिर्फ तीन?व्हाइट हाउस में हुई एक ब्रीफिंग के दौरान बोलते हुए, बेसेंट ने इस बात की पुष्टि की कि प्रशासन इन दोनों ही तरह की छूट को खत्म कर देगा। उन्होंने कहा, &quot;हम रूसी तेल के लिए जारी सामान्य लाइसेंस को दोबारा लागू नहीं करेंगे, और न ही हम ईरानी तेल के लिए जारी सामान्य लाइसेंस को दोबारा लागू करेंगे। यह वह तेल था जो 11 मार्च से पहले ही समुद्र में (जहाजों में) आ चुका था। इसलिए, उस सारे तेल का इस्तेमाल अब तक हो चुका है।&quot;यह फैसला उन पहले मिले संकेतों के बाद आया है, जिनके अनुसार अमेरिका इस सप्ताह ईरानी तेल की खेप पर दी गई 30-दिन की छूट को खत्म होने देगा, और उसने पिछले सप्ताहांत ही रूसी तेल पर दी गई इसी तरह की छूट को भी खत्म होने दिया था। इन छूटों के तहत, समुद्र में पहले से मौजूद तेल की खेपों से जुड़े सीमित लेन-देन करने की अनुमति दी गई थी, जिससे वैश्विक बाजारों को कुछ समय के लिए राहत मिली थी। इसे भी पढ़ें: Reliance-Disney Merger का बड़ा असर, JioStar ने कमाया ₹419 करोड़ का Net Profit, रेवेन्यू 36,000 करोड़ पारइस कदम के साथ ही, ट्रंप प्रशासन द्वारा वैश्विक आपूर्ति में आ रही बाधाओं को दूर करने और ऊर्जा की आसमान छूती कीमतों को कम करने के लिए इस तरह की छूट का इस्तेमाल करने के प्रयासों का भी अंत हो गया है। 20 मार्च को जारी की गई ईरानी तेल पर छूट के कारण, लगभग 140 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंच पाया था, जिससे मौजूदा संघर्ष के दौरान आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद मिली थी। यह छूट 19 अप्रैल को खत्म होने वाली है।बेसेंट ने इस बात को फिर से दोहराया कि अब आगे किसी भी तरह की राहत देने पर विचार नहीं किया जा रहा है। उन्होंने &#039;द एसोसिएटेड प्रेस&#039; से बात करते हुए कहा, &quot;ईरानियों के लिए तो बिल्कुल भी नहीं।&quot; उन्होंने कहा, &quot;हमने नाकाबंदी कर रखी है, और अब वहां से किसी भी तरह का तेल बाहर नहीं आ रहा है।&quot; उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को जल्द ही तेल उत्पादन बंद करने की नौबत का सामना करना पड़ सकता है, &quot;अगले दो-तीन दिनों के भीतर, उन्हें अपना उत्पादन बंद करना शुरू करना पड़ेगा, जो उनके तेल के कुओं के लिए बहुत ही नुकसानदायक साबित होगा।&quot;यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब ईरान में US-इजरायल युद्ध के कारण वैश्विक तनाव अपने चरम पर है, और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल मची हुई है। इससे पहले, तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के भी पार चली गई थीं, जिसके चलते बाजारों को स्थिर करने के उद्देश्य से मार्च महीने में पहली बार इन छूटों को जारी किया गया था।हालांकि, ट्रेजरी विभाग ने इससे पहले कुछ समय के लिए रूसी तेल पर दी गई छूट को दोबारा लागू किया था, लेकिन बेसेंट ने स्पष्ट किया कि वह फैसला, आर्थिक रूप से कमजोर देशों द्वारा की गई अपीलों से प्रभावित होकर लिया गया था। वर्ल्ड बैंक और इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड में हुई मीटिंग्स के दौरान उन्होंने कहा, &quot;10 से ज़्यादा सबसे कमज़ोर और सबसे गरीब देश मेरे पास आए और बोले, &#039;क्या आप हमारी मदद कर सकते हैं?&#039;&quot;उन्होंने साफ़ किया कि यह छूट सिर्फ़ एक बार के लिए थी। बेसेंट ने कहा &quot;यह उन कमज़ोर और गरीब देशों के लिए थी। लेकिन मुझे नहीं लगता कि हमें दोबारा ऐसी कोई छूट मिलेगी। मुझे लगता है कि समुद्र में मौजूद ज़्यादातर रूसी तेल अब तक बिक चुका है। अब जब ये दोनों छूट खत्म हो रही हैं, तो अमेरिका ईरानी और रूसी तेल पर अपने प्रतिबंधों को और कड़ा कर रहा है, जबकि ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर अभी भी दबाव बना हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:06:02 +0530</pubDate>
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<title>Nepal politics crisis: बालेन शाह का खेल खत्म, नेपाल में तख्तापलट?</title>
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<description><![CDATA[ क्या नेपाल में एक बार फिर से सत्ता परिवर्तन होगा? क्या नेपाल में लोगों का प्रदर्शन यह कह रहा है कि हाल ही में बने बालेन शाह की सरकार मुश्किलों में है। मार्च 2026 में ही बालेन शाह की सरकार बनी लेकिन एक महीना भी पूरी तरह से नहीं बीता कि उनके खिलाफ देश भर में जन आक्रोश देखने को मिल रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौर शुरू हो चुके हैं और विरोध के कई कारण हैं। छात्र संघ भी नाराज हैं। छात्र नाराज है। जिस जेन जेड आंदोलन के बाद बालेन शाह सत्ता में आए अब वही जेन जेड एक बार फिर आंदोलन के मूड में है। इसकी कई वजह हैं। विरोध के मुख्य कारणों में छात्र संघों का भंग कर देना एक बड़ा फैसला है। हाल ही में बालशाह ने एक और बड़ा फैसला लिया कि भारत से ₹100 से ज्यादा का सामान जो भी खरीद कर नेपाल के लोग ले जाएंगे तो उन्हें कड़े कस्टम नियमों का पालन करना होगा और साथ ही कस्टम ड्यूटी भी देनी होगी। इसे भी पढ़ें: Kathmandu में &#039;जहरीली&#039; हुई हवा, AQI 247 के साथ दुनिया का दूसरा सबसे Polluted शहर बनागृह मंत्री पर करप्शन के भी आरोप लगे हैं। नेपाल में सरकार के खिलाफ गुस्से में हैं लोग। कई वजह हैं। सीमा पार व्यापार पर सख्ती को लेकर सरकार को नाराजगी झेलनी पड़ रही है। बालेन शाह की सरकार ने यह फैसला लिया है कि भारत से 100 नेपाली रुपए से अधिक की कोई वस्तु अगर कोई व्यक्ति ले जाता है तो उसे कड़े टैक्स नियमों का पालन करना होगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी रोष है। छात्र संघों को भंग कर दिया उन्होंने। सरकार द्वारा छात्र संगठनों को खारिज करने के फैसले से छात्र और युवा सड़कों पर उतर आए हैं। वहीं गृह मंत्री पर भी उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए। गृह मंत्री सुदन गुरंग पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे हैं। अवैध संपत्ति के गंभीर आरोप लगे हैं। जिससे सरकार की ईमानदारी पर सवाल उठ रहे हैं। यह छात्रों की ओर से नेपाल के नागरिकों की ओर से विरोध किया जा रहा है इस मसले पर। इसे भी पढ़ें: Kathmandu में &#039;जहरीली&#039; हुई हवा, AQI 247 के साथ दुनिया का दूसरा सबसे Polluted शहर बनाआखिर नेपाल के लोग सड़कों पर क्यों उतर आए हैंउस सरकार के खिलाफ जो 1 महीने पहले ही लगभग बनी है। एक बड़े आंदोलन के बाद बालन शाह सत्ता में आए हैं। नेपाल की जनता ने उन्हें सत्ता सौंपी है। लेकिन उन्हीं बालन शाह के फैसलों से अब नेपाल की जनता नाराज दिख रही है। खासकर जेंस जिस आंदोलन की वजह से उनकी सरकार बनी वही आंदोलन एक बार फिर से उभरता हुआ दिख रहा है नेपाल की सड़कों पर। नेपाल में राजधानी से लेकर दूसरे शहरों में सड़क के अंदर प्रदर्शन हो रहा है तो सदन के अंदर भी प्रदर्शन हो रहा है। सड़क से लेकर सदन तक मौजूदा सरकार का विरोध हो रहा है। कौन-कौन से बड़े फैसले हैं जिसकी वजह से सरकार को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:05:59 +0530</pubDate>
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<title>चीनी हथियार वाले जहाज पर अमेरिका का कब्जा, मचा बवाल !</title>
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<description><![CDATA[ खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अब एक और नया मोड़ सामने आया। अमेरिका द्वारा जब्त किए गए एक ईरानी मालवाहक जहाज को लेकर अब चीन ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। सवाल यह है कि क्या वाकई चीन इस पूरे मामले में शामिल है या फिर यह सिर्फ एक भू राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का खेल है। दरअसल, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना ने एक मालवाहक जहाज को अपने कब्जे में ले लिया। अमेरिका का दावा है कि इस जहाज पर मिसाइल निर्माण से जुड़ी खतरनाक रासायनिक सामग्री लदी हुई थी और यह जहाज ईरान जा रहा था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक जब जहाज को रोकने के लिए कहा गया तो उसने आदेश मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद अमेरिकी नौसैनिक जहाज ने फायरिंग की और फिर मरीन कमांडो ने उस जहाज को कब्जे में ले लिया। अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा बयान आया है अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली की तरफ से। इसे भी पढ़ें: NATO को सजा, यूरोप को तोड़ देंगे ट्रंप? अमेरिका का प्लान लीकउन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि यह जहाज चीन से ईरान जा रहा था और इसमें मिसाइल वाली सामग्री थी। यह साफ सबूत है कि चीन ईरान की मदद कर रहा है। हेली का कहना है कि चीन लगातार ईरान के शासन को मजबूत करने में लगा हुआ है जो वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है। अब इन आरोपों के बाद चीन ने आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गो जियाकुन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि हमारी जानकारी के अनुसार यह एक विदेशी ध्वज वाला मालवाहक जहाज है। चीन का इससे कोई संबंध नहीं है। चीन ऐसे किसी भी निराधार आरोप का कड़ा विरोध करता है। यानी साफ है चीन इस मामले में खुद को पूरी तरह अलग बता रहा है। अब बात करें ईरान की तो उसने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। इसे भी पढ़ें: जर्मनी ने भारत को दिया बाहुबली..मोदी-राजनाथ का तगड़ा खेल, चीन-अमेरिका हैरानईरानी सेना ने अमेरिका की इस कारवाई को समुद्री डकैती करार दिया। ईरान ने चेतावनी दी कि अमेरिका की इस कारवाई का जवाब दिया जाएगा। इतना ही नहीं सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी सेना का कहना है कि अमेरिका ने ना केवल जहाज पर हमला किया बल्कि उसके नेविगेशन सिस्टम को भी नष्ट कर दिया। ईरान का साफ कहना है कि अमेरिका ने इस कारवाही के जरिए सीज फायर का उल्लंघन किया। ओमान सागर के जल क्षेत्र में हुई इस घटना को लेकर ईरान ने अंतरराष्ट्रीय नियमों की बात उठाई। इस पूरे विवाद के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चीन को लेकर सख्त अपनाया। अगर चीन ईरान को हथियार या सैन्य सहायता देता है तो उस पर भारी टेरिफ यानी कि शुल्क लगाया जाएगा। इससे साफ है कि मामला सिर्फ एक जहाज का नहीं बल्कि अमेरिका, चीन, ईरान के बीच बढ़ती राजनीतिक टकराव का हिस्सा है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:05:57 +0530</pubDate>
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<title>US के War Secretary का विवादित बयान, Iran संघर्ष को बताया &amp;apos;दुनिया के लिए Gift&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने ईरान में चल रहे संघर्ष को &quot;दुनिया के लिए एक तोहफ़ा&quot; बताया है, और ज़ोर देकर कहा है कि ईरान के समुद्री यातायात पर अमेरिकी नाकेबंदी &quot;जब तक ज़रूरी होगी, तब तक&quot; जारी रहेगी। पेंटागन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए, हेगसेथ ने कहा कि नौसैनिक प्रतिबंध उस &quot;साहसी और खतरनाक&quot; मिशन को पूरा करने के लिए ज़रूरी हैं, जिसका मकसद अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए ईरान से होने वाले कथित खतरे को खत्म करना है। जहाँ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि नाकेबंदी के ज़रिए 34 जहाज़ों को सफलतापूर्वक रोका गया है, वहीं समुद्री निगरानी डेटा से पता चलता है कि तेहरान प्रतिबंधित तेल का निर्यात करने के लिए इन उपायों से बचने के तरीके लगातार ढूँढ़ रहा है।इसे भी पढ़ें: Iran के Supreme Leader Mojtaba Khamenei का &#039;Human Chain&#039; वाला राज, Tracking से बचने की अनोखी तरकीबLloyd&#039;s List Intelligence के अनुसार, फ़ारस की खाड़ी से गुज़रते हुए &quot;छाया बेड़े (shadow fleet) के यातायात का एक लगातार प्रवाह&quot; देखा गया है। इसमें ईरान का माल ले जाने वाले 11 टैंकर शामिल हैं, जिनके बारे में बताया गया है कि वे 13 अप्रैल से अब तक जलडमरूमध्य के बाहर, ओमान की खाड़ी से रवाना हुए हैं। अमेरिकी रुख के जवाब में, ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर &#039;प्रेस टीवी&#039; ने रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल रेज़ा तलाई-निक के हवाले से कहा कि उन्होंने चेतावनी दी है कि &quot;हमारी मिसाइल क्षमता का एक बड़ा हिस्सा अभी तक इस्तेमाल नहीं किया गया है। जनरल ने आगे दावा किया कि संघर्ष विराम से ठीक पहले तक &quot;सशस्त्र बलों का कब्ज़े वाले इलाकों के आसमान पर पूरा नियंत्रण था। तलाई-निक ने देश के भीतर की मज़बूती पर भी ज़ोर दिया और लड़ाई खत्म होने के बाद भी लोगों के लगातार मिल रहे समर्थन को एक सामाजिक चमत्कार बताया। उन्होंने कहा कि 3 करोड़ से ज़्यादा लोगों ने &#039;बलिदान&#039; अभियान में अपना नाम दर्ज कराया और इसे दुनिया में लोगों को एकजुट करने का एक बेमिसाल उदाहरण बताया।इसे भी पढ़ें: भारत-चीन को नरक बताना ट्रंप को पड़ा भारी! गुस्से में आए बड़े देश!अमेरिकी रणनीति को सीधे चुनौती देते हुए, प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि दुश्मन का इरादा देश के भीतर अराजकता फैलाना था। हालाँकि, उन्होंने कहा कि लोगों की सतर्कता और सुरक्षा एजेंसियों के आपसी तालमेल की वजह से देश &quot;सुरक्षित, स्थिर और एकजुट स्थिति&quot; में बना हुआ है।ब्रिगेडियर जनरल ने आगे कहा कि &quot;होरमुज़ जलडमरूमध्य ईरान के समझदार और मज़बूत प्रबंधन के तहत है&quot; और यह &quot;ईरानी राष्ट्र की मांगों को पूरा करने के लिए एक नियंत्रण का ज़रिया&quot; बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि ओमान सागर में मौजूद पश्चिमी ताकतों को &quot;सशस्त्र बलों के निर्णायक जवाब के सामने बार-बार पीछे हटना पड़ा है। ईरानी सेना का यह चुनौती भरा संदेश ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका स्थित थिंक टैंक &#039;इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ़ वॉर&#039; (ISW) के एक नए आकलन से ईरानी नेतृत्व के भीतर मतभेद होने का पता चला है। ISW की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी और उनके &quot;करीबी लोगों&quot; ने संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ और अन्य &quot;व्यावहारिक&quot; अधिकारियों की उन कोशिशों को &quot;बार-बार रोका है,&quot; जिनका मकसद ईरानी शासन को &quot;बातचीत के लिए ज़्यादा लचीला रुख अपनाने&quot; की दिशा में आगे बढ़ाना था। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:05:54 +0530</pubDate>
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<title>अब US में भारतीयों की होगी No Entry?  H1B वीजा पर आए नए बिल ने बढ़ाई चिंता</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में एक ऐसा बिल पेश हुआ है जो लाखों विदेशी प्रोफेशनल्स खासतौर पर भारतीयों के सपनों पर सीधा वार कर सकता है। डोनाल्ड ट्रंप के दौर में इमीग्रेशन को लेकर सख्ती के बीच अब एच वन बी वीजा सिस्टम को पूरी तरह बदलने की तैयारी हो चुकी है। रिपब्लिकन नेता एलिक क्रेन ने एंड एच1 वीजा अब्यूज एक्ट 2026 पेश कर ऐसा प्रस्ताव रखा है जिससे अगर मंजूरी मिलती है तो अमेरिका में नौकरी करने का रास्ता पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। जो एच वन वीजा सिस्टम को जड़ से बदल सकते हैं। सबसे बड़ा झटका हर साल जारी होने वाले वीजा की संख्या 65,000 से घटाकर सिर्फ 25,000 करने का प्रस्ताव है। इतना ही नहीं अब तक चल रही लॉटरी सिस्टम को भी खत्म कर हाई सैलरी के आधार पर चयन की बात कही गई है। कंपनियों के लिए भी नियम बेहद सख्त होंगे। उन्हें साबित करना होगा कि उन्हें कोई अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिला और उन्होंने हाल ही में किसी को नौकरी से नहीं निकाला। एच1वी कर्मचारियों के एक से ज्यादा नौकरी करने की अनुमति नहीं होगी और थर्ड पार्टी एजेंसियों के जरिए हायरिंग पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव है। सबसे चौंकाने वाला प्रस्ताव एच1 बी वीजा धारकों को अपने परिवार को अमेरिका लाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसे भी पढ़ें: Iran का World Record! 57 दिन से Internet Blackout, US-Israel हमले के बाद दुनिया से कटा देशसाथ ही इस वीजा को ग्रीन कार्ड में बदलने का रास्ता भी बंद करने की बात कही गई है। यानी यह वीजा पूरी तरह अस्थाई बन जाएगा। इमीग्रेशन एक्सपर्ट रोजमरी जेनेक्स का कहना है कि अगर एच वन वीजा कर्मचारियों को 3 साल बाद वापस भेजा जाएगा तो कंपनियों की लागत बढ़ेगी और वह मजबूर होकर अमेरिकी नागरिकों को ही नौकरी देंगे। इस विल को ब्रैंडन ग्रिल समेत कई रिपब्लिकन नेताओं का समर्थन मिला है। जिन्होंने साफ कहा है कि अमेरिकी नौकरियों पर पहला हक अमेरिकियों का होना चाहिए ना कि विदेशी कर्मचारियों का। अगर यह विल पास होता है तो यह सिर्फ एक पॉलिसी बदलाव नहीं बल्कि अमेरिका में काम करने वाले सपने देखने वाले लाखों युवाओं के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। H-1B वीज़ा प्रोग्राम का इस्तेमाल अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियाँ विदेशी प्रोफेशनल्स को नौकरी पर रखने के लिए बड़े पैमाने पर करती हैं; इसमें भारतीय कर्मचारी—खास तौर पर टेक्नोलॉजी और मेडिकल के क्षेत्र में सबसे बड़े लाभार्थी समूहों में से एक हैं। प्रस्तावित सुधारों में मौजूदा लॉटरी सिस्टम की जगह वेतन-आधारित चयन प्रक्रिया लाना शामिल है। इसके तहत, एम्प्लॉयर्स को यह प्रमाणित करना होगा कि कोई भी योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है और हाल ही में कोई छँटनी नहीं हुई है। साथ ही, H-1B कर्मचारियों के एक से ज़्यादा नौकरियाँ करने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा और थर्ड-पार्टी स्टाफिंग फर्मों द्वारा उन्हें नौकरी पर रखने पर रोक लगाई जाएगी। अतिरिक्त प्रावधानों के तहत, संघीय एजेंसियों को गैर-प्रवासी कर्मचारियों को प्रायोजित करने या नौकरी पर रखने से रोका जाएगा, &#039;ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग&#039; प्रोग्राम को समाप्त कर दिया जाएगा, और H-1B वीज़ा धारकों को स्थायी निवास (परमानेंट रेजिडेंसी) में बदलने से रोका जाएगा—जिससे इन वीज़ाओं का अस्थायी स्वरूप और भी मज़बूत होगा।इसे भी पढ़ें: US-Israel से &#039;War&#039; के दो महीने बाद Iran में नरमी, Tehran से Commercial Flights शुरूइस बिल में यह भी अनिवार्य किया गया है कि गैर-प्रवासी कर्मचारी किसी दूसरी वीज़ा श्रेणी में जाने से पहले संयुक्त राज्य अमेरिका छोड़ दें। क्रेन ने कहा कि इस उपाय से अमेरिकियों के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे, वीज़ा नियमों को और मज़बूत किया जाएगा, और घरेलू कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा, &quot;संघीय सरकार को मेहनती नागरिकों के लिए काम करना चाहिए, न कि बड़ी-बड़ी कंपनियों के मुनाफ़े के लिए। अमेरिकी लोगों के प्रति हमारी यह ज़िम्मेदारी है कि हम इस दोषपूर्ण H-1B सिस्टम को उन्हें उन नौकरियों से वंचित करने से रोकें, जिनके लिए वे पूरी तरह योग्य हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:05:48 +0530</pubDate>
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<title>White House डिनर में चली गोलियां, मंच से निकाले गए President Trump; कार्यक्रम हुआ रद्द</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास ‘व्हाइट हाउस’ में संवाददाताओं के वार्षिक रात्रिभोज के दौरान गोलीबारी की घटना से मची अफ़रातफ़री के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य प्रमुख नेताओं को कार्यक्रम स्थल से बाहर निकाला गया।
 प्रारंभिक तौर पर किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। एक कानून-प्रवर्तन अधिकारी ने बताया कि एक अज्ञात हमलावर ने गोलीबारी की।
 अधिकारियों के अनुसार, यह घटना उस बॉलरूम के बाहर हुई जहां ट्रंप और अन्य अतिथि मौजूद थे। हालांकि, घटना के सटीक कारणों का तत्काल पता नहीं चल सका। कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है और इसे बाद में आयोजित किया जाएगा।
 ‘व्हाइट हाउस’ संवाददाताओं के संघ की अध्यक्ष वेइजिया जियांग ने कहा, ‘‘हम इसे फिर से आयोजित करेंगे।’’
 घटना के तुरंत बाद कर्मचारियों ने टेबल साज-सज्जा और राष्ट्रपति के भाषण मंच को हटाना शुरू कर दिया।
 कथित घटना के बाद वॉशिंगटन हिल्टन के बैंक्वेट हॉल में सीक्रेट सर्विस और अन्य एजेंसियों के अधिकारी बड़ी संख्या में पंहुचे, जहां सैकड़ों अतिथि “स्प्रिंग पी” और “बुराटा सलाद” का आनंद ले रहे थे। उन्हें अचानक टेबलों के नीचे छिपने को मजबूर होना पड़ा।
 जैसे ही लोगों को स्थिति का एहसास हुआ, बॉलरूम में दहशत फैल गई। सैकड़ों पत्रकार सूचनाएं साझा करने के लिए फोन पर जुट गए।
 किसी को चिल्लाते हुए सुना गया “हट जाइए, सर!” जबकि कुछ लोग निर्देश दे रहे थे कि “झुक जाइए।’’ एक कोने से “गॉड ब्लेस अमेरिका” की आवाजें भी सुनाई दीं। इसी बीच ट्रंप को मंच से सुरक्षित बाहर ले जाया गया। इस दौरान वह क्षण भर के लिए, संभवतः ठोकर लगने से, लड़खड़ाए और सीक्रेट सर्विस एजेंटों ने उन्हें तुरंत संभाल लिया।
 एक कानून-प्रवर्तन अधिकारी ने गोलीबारी की पुष्टि की। हालांकि विस्तृत जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकी। सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा में रहने वाले सभी अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
 एक अधिकारी ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि एक कानून-प्रवर्तन कर्मी को बुलेट-प्रूफ जैकेट पर गोली लगी, लेकिन उसके सुरक्षित रहने की उम्मीद है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:05:45 +0530</pubDate>
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<title>White House फायरिंग पर Donald Trump का बड़ा खुलासा, &amp;apos;हमलावर के पास थे कई घातक हथियार&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास ‘व्हाइट हाउस’ में शनिवार रात को संवाददाताओं के रात्रिभोज के दौरान हुई गोलीबारी की घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि संदिग्ध के पास कई घातक हथियार थे।
 ‘व्हाइट हाउस’ में रात्रिभोज के दौरान हुई गोलीबारी की घटना के बाद ट्रंप और अमेरिका के अन्य शीर्ष नेताओं को वहां से निकाला गया।
अधिकारियों के अनुसार, यह घटना उस बॉलरूम के बाहर हुई जहां ट्रंप और अन्य अतिथि मौजूद थे। हालांकि, घटना के सटीक कारणों का तत्काल पता नहीं चल सका। कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है और इसे बाद में आयोजित किया जाएगा।
 अधिकारियों ने बताया कि 31 वर्षीय हमलावर कैलिफोर्निया से था, जिसे सीक्रेट सर्विस ने पकड़ लिया है।
 घटना के बाद ट्रंप ने ‘व्हाइट हाउस’ में संवाददाताओं को संबोधित किया और बताया कि संदिग्ध के पास कई हथियार थे। एक अधिकारी को गोली लगी, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट के कारण उनकी जान बच गई।
ट्रंप ने कहा, ‘‘सीक्रेट सर्विस के अधिकारी को बहुत करीब से एक घातक हथियार से निशाना बनाया गया था। उन्हें गोली लगी लेकिन जैकेट ने अपना काम कर दिया।’’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक वीडियो भी जारी किया है जिसमें संदिग्ध को सुरक्षा अवरोधक के पास भागते हुए और सीक्रेट सर्विस के एजेंट को उसकी ओर दौड़ते हुए देखा जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:05:44 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान: हिंसक टकराव के दौरान, मानवाधिकारों के गम्भीर उल्लंघन मामलों पर चिन्ता</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की एक नई रिपोर्ट में इसराइली सेना और लेबनान में हिज़बुल्लाह लड़ाकों के बीच हाल ही में भड़के हिंसक टकराव में आम नागरिकों के मानवाधिकारों के उल्लंघन मामलों पर जानकारी साझा की गई है. यूएन कार्यालय के अनुसार, लड़ाई के दौरान जीवन, स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन, आवास, कामकाज, स्वतंत्र आवाजाही समेत अन्य अधिकारों पर गहरा असर हुआ है. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:04:42 +0530</pubDate>
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<title>भारत समेत 6 देशों के तेल रिफाइनरी में कौन लगा रहा है आग...साजिश किसकी?</title>
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<description><![CDATA[ राजस्थान के पचपद्रा रिफाइनरी को लेकर बड़ा विवाद और चर्चा का माहौल बन गया है। यह वही परियोजना है जिसका उद्घाटन पीएम मोदी करने वाले थे। लेकिन उससे करीब 20 घंटे पहले यहां अचानक भीषण आग लग गई। इस घटना ने ना सिर्फ प्रशासन को सतर्क कर दिया बल्कि पूरे प्रोजेक्ट की सुरक्षा और समय पर संचालन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 13 वर्षों से चल रही यह परियोजना लगभग ₹3 करोड़ की लागत से तैयार की गई थी और इसे क्षेत्र के बड़े तकनीकी विकास के रूप में [संगीत] देखा जा रहा था। आग लगने की घटना के बाद से ही सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं और दावे सामने आ रहे हैं। कुछ लोग इसे एक सामान्य तकनीकी दुर्घटना बता रहे हैं। जबकि कुछ इसे बड़े पैटर्न से जोड़कर देख रहे हैं। खास बात यह है कि हाल के महीनों में दुनिया के अलग-अलग देशों में रिफाइनरियों में आग, विस्फोट और तकनीकी खराबी की घटनाएं लगातार सामने आई हैं। जिसके चलते इस मामले ने और अधिक सुर्खियां बटोरी हैं। इसे भी पढ़ें: सीजफायर के बीच अमेरिका ने ईरान का तेल टैंकर जब्त किया, पेंटागन ने किया खुलासासूत्रों और कुछ रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ महीनों से भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस, पाकिस्तान और इक्वेटर जैसी जगहों पर रिफाइनरी से जुड़ी घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें कहीं आग लगने की खबर है, कहीं विस्फोट हुआ है तो कहीं गैस या केमिकल लीक की घटनाएं सामने आई हैं। इसी क्रम में भारत में मुंबई हाई ऑयल फील्ड और अब राजस्थान की पचपद्रा रिफाइनरी का नाम भी सामने आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच इन घटनाओं की संख्या बढ़ी है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाएं अलग-अलग देशों में हो रही हैं। लेकिन इनकी टाइमिंग और पैटर्न को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी घटनाओं के पीछे कोई बड़ा वैश्विक बदलाव या दबाव का संकेत हो सकता है। हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई और इन्हें सिर्फ चर्चाओं और विश्लेषण के रूप में देखा जा रहा है। इसे भी पढ़ें: भारत आने वाले जहाज पर कब्जा, ईरान पर एक्शन तेज!पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका की कुछ रिफाइनरियों में भी हाल ही में आग या तकनीकी गड़बड़ी की घटनाएं सामने आई थी। इसके अलावा रूस और अन्य देशों में भी इसी तरह की घटनाओं का जिक्र किया जा रहा है। इन घटनाओं को जोड़कर कुछ लोग इसे एक बड़े एनर्जी क्राइसिस पैटर्न के रूप में देख रहे हैं। जबकि विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग इसे संयोग और पुरानी संरचनाओं की वजह से होने वाली तकनीकी समस्याएं बता रही है। भारत की बात करें तो पचपद्रा रिफाइनरी को राज्य की सबसे बड़ी तकनीकी परियोजनाओं में से एक माना जाता है। ऐसे में यहां हुई आग की घटना ने ना सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं बल्कि समय पर प्रोजेक्ट पूरा होने की उम्मीदों को भी झटका दिया है। प्रशासन ने फिलहाल जांच शुरू कर दी है और आग लगने के कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल पचपदरा रिफाइनरी में लगी आग के पीछे का असली कारण जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:23 +0530</pubDate>
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<title>Iran ने Donald Trump को दिखाया भारत का आईना: कहा&#45; &amp;apos;बकवास छोड़ें, महाराष्ट्र आएं और भारत से सीखें संस्कार</title>
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<description><![CDATA[ जब पूरी दुनिया इस आशंका में है कि ईरान और अमेरिका के बीच क्या कभी शांति समझौता हो पाएगा, तब ईरान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया है। ईरान ने ट्रंप को सलाह दी है कि उन्हें भारत आकर यहाँ की समृद्ध संस्कृति देखनी चाहिए ताकि उनकी &quot;बकवास&quot; बंद हो सके। मुंबई में ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर महाराष्ट्र की भौगोलिक और सांस्कृतिक विरासत का एक वीडियो साझा करते हुए ट्रंप पर सीधा हमला बोला।  इस संबंध में, मुंबई में ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने X (पहले Twitter) पर एक पोस्ट किया, जिसमें महाराष्ट्र का एक वीडियो शेयर किया गया था, जिसमें राज्य की भौगोलिक विरासत दिखाई गई थी। इसमें कहा गया कि अगर ट्रंप इस राज्य का दौरा करने का फ़ैसला करते हैं, तो यह उनके लिए एक &quot;सांस्कृतिक डिटॉक्स&quot; होगा और शायद उन्हें &quot;बकवास&quot; करने से भी रोक देगा।&quot;शायद किसी को मिस्टर #Trump के लिए एक तरफ़ा सांस्कृतिक डिटॉक्स बुक कर देना चाहिए, इससे शायद उनकी बेमतलब की बकवास कम हो जाए। कभी #India आकर देखो, फिर बोलना,&quot; मुंबई में ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने कहा।ट्रंप का बार-बार मज़ाक उड़ानाट्रंप के इस दावे के बावजूद कि इस संघर्ष में अमेरिका का ईरान पर पलड़ा भारी है और उनके बार-बार यह दोहराने के बावजूद कि मध्य-पूर्व के इस देश की सेना पूरी तरह से खत्म हो चुकी है, इस्लामिक रिपब्लिक ने दुनिया भर में अपने दूतावासों और कॉन्सुलेट जनरल के ज़रिए X पर शेयर किए जाने वाले विभिन्न AI-जनरेटेड पोस्ट के माध्यम से अमेरिकी नेता का मज़ाक उड़ाना जारी रखा है।बुधवार को, हैदराबाद में ईरान के कॉन्सुलेट ने ट्रंप का एक छोटा सा 45-सेकंड का वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्हें उपराष्ट्रपति JD Vance और अन्य अधिकारियों के साथ बैठे हुए देखा जा सकता था, जब वे शांति वार्ता पर चर्चा करने के लिए एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल का इंतज़ार कर रहे थे। वीडियो में, ट्रंप ने पूछा &quot;ईरानी कहाँ हैं?&quot; जिस पर एक अधिकारी ने उन्हें एक नोट थमाया, जिस पर लिखा था &quot;ट्रंप, चुप रहो&quot;।इसे भी पढ़ें: India-Nepal Border | भारत-नेपाल सीमा पर यात्रियों के सामान पर लगेगा शुल्क? विदेश मंत्रालय ने स्थिति की स्पष्ट ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी पर ट्रंप का दावाभले ही ईरान ट्रंप का मज़ाक उड़ाना जारी रखे हुए है, लेकिन रिपब्लिकन राष्ट्रपति ने दावा किया है कि तेहरान के ख़िलाफ़ नौसैनिक नाकेबंदी &quot;100 प्रतिशत प्रभावी&quot; रही है। उनकी यह टिप्पणी तब आई जब तीसरा विमानवाहक पोत, USS HW Bush, ईरानी जलक्षेत्र के पास पहुँचा, जिससे इस क्षेत्र में अमेरिकी मौजूदगी बढ़ गई। हालाँकि, Bush के उद्देश्य अभी तक स्पष्ट नहीं हैं। इसे भी पढ़ें: Sonam Kapoor ने दिखाई अपने &#039;कंप्लीट&#039; परिवार की झलक: दूसरे बेटे और वायु के साथ बिताए लम्हों को बताया &#039;एक सपना&#039;इस बीच, ट्रंप ने ईरान के ख़िलाफ़ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना से इनकार कर दिया है, भले ही उन्होंने दावा किया कि इस क्षेत्र में संघर्ष को समाप्त करने के लिए उन पर &quot;कोई दबाव नहीं&quot; है। &quot;ईरान की नौसेना समुद्र की तलहटी में पड़ी है, उनकी वायुसेना तबाह हो चुकी है, उनके विमान-रोधी और रडार हथियार खत्म हो गए हैं, उनके नेता अब हमारे बीच नहीं रहे, नाकाबंदी पूरी तरह से अभेद्य और मज़बूत है, और अब हालात यहाँ से सिर्फ़ और बदतर ही होंगे — समय उनके पक्ष में नहीं है!&quot; ट्रंप ने गुरुवार को &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर यह पोस्ट किया।Maybe someone should book a one-way cultural detox for Mr. #Trump, it might just reduce the random bakwaas ????Kabhi #India aa ke dekho, phir bolna. pic.twitter.com/kkocLZ31XX— Iran in Mumbai (@IRANinMumbai) April 23, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:22 +0530</pubDate>
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<title>Trump ने काट दी मोजतबा खामनेई की एक टांग? न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई की हालत गंभीर है, वो एक सीक्रेट ठिकाने पर इलाज करवा रहे हैं और सुरक्षा कारणों से उन से जो संपर्क है उसको सीमित रखा गया है। रिपोर्ट में ये तक दावा किया गया है कि एक पैर का तीन बार अब तक ऑपरेशन हो चुका है और बकाइदा प्रोस्थेटिकल लेग का इंतजाम यहां पर किया जा रहा है। चेहरे और होठ बुरी तरह झुलस चुके हैं, उनको बोलने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, और उस बीच, ईरान में असली ताकत, अब इस्लामिक रेविल्यूशनरी गाड कॉप्स के जनरल के हाथ में जाने का दावा किया जा रहा है। IRGC का बढ़ता दबदबा&#039;द न्यूयॉर्क टाइम्स&#039; (NYT) के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले चार अधिकारियों ने बताया कि हालिया बातचीत के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई का अपने जनरलों (सैन्य अधिकारियों) के साथ बहुत कम संपर्क रहा है। जानकारों का मानना है कि इससे सत्ता में जो खालीपन आया है, उस पर अब &#039;इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स&#039; (IRGC ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य फोर्स) अपना कब्ज़ा जमा रही है। &#039;चैटम हाउस&#039; की विशेषज्ञ सनम वकील ने NYT को बताया कि खामेनेई के बेटे और संभावित उत्तराधिकारी &#039;मोजतबा&#039; के हाथों में अभी पूरी तरह से कमान या नियंत्रण नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार तो फैसले पहले ही ले लिए जाते हैं और मोजतबा को सिर्फ इसके बारे में बता दिया जाता है। &#039;इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप&#039; के अली वाएज ने भी इसी बात से सहमति जताई है। उन्होंने कहा, &quot;मोजतबा &#039;सर्वोच्च&#039; नहीं हैं; वह नाम के नेता तो हो सकते हैं, लेकिन अपने पिता की तरह ताकतवर नहीं हैं... असल में मोजतबा &#039;रिवोल्यूशनरी गार्ड्स&#039; (IRGC) के अधीन काम कर रहे हैं।&quot; (यानी सेना उन पर हावी है)।इसे भी पढ़ें: कभी भारत आकर देखो...ट्रंप को ईरान का खुला चैलेंजशासन में बदलाव&#039;द न्यूयॉर्क टाइम्स&#039; (NYT) के अनुसार, अमेरिका के साथ इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत को रोकने में ईरान की सेना (IRGC) ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने ईरान की चुनी हुई नागरिक सरकार को दरकिनार कर दिया, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अरागची भी शामिल हैं। अमेरिका-इजरायल के हमलों में अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे (मोजतबा) खामेनेई ने सर्वोच्च नेता की गद्दी संभाली है। लेकिन पद संभालने के बाद से वह न तो कभी जनता के सामने आए हैं और न ही कोई बयान दिया है। कहा जा रहा है कि वह खुद को &#039;कमज़ोर&#039; दिखने से बचाना चाहते हैं। उनसे सीधा संपर्क नहीं हो रहा है, बल्कि उन तक सीलबंद चिट्ठियाँ हाथों-हाथ पहुँचाई जा रही हैं।इसे भी पढ़ें: Turkey ने अचानक क्यों तान दी मिसाइलें? इजरायल के खिलाफ बड़ी लामबंदी, क्या करेंगे एर्दोगान&#039;बोर्ड-स्टाइल&#039; में चल रही है सरकारईरान में सत्ता के इस बदलते रूप के बारे में एक पूर्व सलाहकार अब्दोलरेज़ा दावरी ने NYT को बताया, &quot;मोजतबा देश को ऐसे चला रहे हैं जैसे वह किसी कंपनी के बोर्ड के &#039;डायरेक्टर&#039; हों... और सेना के जनरल उस बोर्ड के सदस्य हों। यह स्थिति मोजतबा के पिता (अली खामेनेई) के शासन से बिल्कुल अलग है। पहले सारी ताकत और फैसले लेने का अधिकार सर्वोच्च नेता के हाथ में होता था, लेकिन अब फैसले लेने में सैन्य कमांडरों का दबदबा ज्यादा हो गया है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान और अमेरिका के बीच अनिश्चित काल के लिए युद्धविराम लागू है। दोनों देश फिर से बातचीत शुरू करने और व्यापार के लिए अहम समुद्री रास्ते &#039;होर्मुज जलडमरूमध्य&#039; (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के रास्ते तलाश रहे हैं। हालांकि, ईरान के अंदर सत्ता को लेकर जो उथल-पुथल मची है और जिस तरह से IRGC (सेना) अपना नियंत्रण बढ़ा रही है, उसे देखते हुए अमेरिका के साथ बातचीत और कूटनीति सफल होने की उम्मीदें अभी भी धुंधली हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>चीन की बढ़ी टेंशन, India&#45;Japan ने बढ़ाया Defence सहयोग, अब होगी हथियारों की डील</title>
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<description><![CDATA[ जापान ने अपने हथियारों के एक्सपोर्ट पर लगी पाबंदियों में ढील दी, भारत ने गुरुवार को इस कदम का स्वागत किया और कहा कि दोनों पक्ष अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने&quot; के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो जाता है जब भारत और जापान दोनों ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आक्रामक चीन की चुनौती का सामना कर रहे हैं। दोनों देश रणनीतिक रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में, जिसमें क्वाड समूह भी शामिल है, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर सहयोग करते हैं।इसे भी पढ़ें: Japan Earthquake: 7.5 तीव्रता के भूकंप से कांपी धरती, Tsunami Alert के बीच रोकी गईं Bullet Trainsजापान ने अपने हथियारों के एक्सपोर्ट पर दशकों पुरानी पाबंदियों में ढील दी है, और इसे उस शांतिवादी नीति से एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से उसकी रक्षा नीति की पहचान बनाई है। वे पाबंदियां जो हथियारों के एक्सपोर्ट को केवल पाँच श्रेणियों – बचाव, परिवहन, चेतावनी, निगरानी और बारूदी सुरंग हटाने (minesweeping) तक सीमित रखती थीं, अब हटा दी जाएंगी। इसका मतलब है कि जापान अब उन 17 देशों को घातक हथियार बेच सकता है जिनके साथ उसके रक्षा समझौते हैं, जिनमें अमेरिका और ब्रिटेन भी शामिल हैं। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने एक्स पर लिखा कि तेजी से गंभीर होते सुरक्षा माहौल में, अब कोई भी अकेला देश अपनी शांति और सुरक्षा की रक्षा अकेले नहीं कर सकता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत रक्षा उपकरणों और प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण से जुड़े तीन सिद्धांतों की जापान द्वारा की गई समीक्षा का स्वागत करता है। रक्षा और सुरक्षा सहयोग, भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।इसे भी पढ़ें: India MEA Briefing: Trump के नर्क वाले बयान पर India ने दी प्रतिक्रिया, Nepal Customs Duty विवाद पर भी आया भारत का जवाबभारत और जापान के बीच सिक्योरिटी कोऑपरेशन पर जॉइंट डिक्लेरेशन के हिस्से के तौर पर, दोनों पक्षों ने अपनी नेशनल सिक्योरिटी और लगातार इकोनॉमिक डायनामिक्स के हित में प्रैक्टिकल कोऑपरेशन बढ़ाने का वादा किया है। इसमें नेशनल सिक्योरिटी के लिए ज़रूरी सेक्टर्स में रेजिलिएंस के लिए सरकारी एंटिटीज़ और प्राइवेट सेक्टर स्टेकहोल्डर्स के बीच टेक्नोलॉजिकल और इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन को बढ़ावा देना और आसान बनाना शामिल है। जापान के प्रधानमंत्री ताकाइची ने यह भी कहा कि, युद्ध के बाद से 80 से अधिक वर्षों तक एक शांति-प्रिय राष्ट्र के रूप में हमने जिस मार्ग और बुनियादी सिद्धांतों का पालन किया है, उन्हें बनाए रखने की हमारी प्रतिबद्धता में &#039;बिल्कुल भी कोई बदलाव नहीं आया है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:21 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिका&#45;ईरान संघर्ष के बीच अजित डोभाल ने की ब्रिटेन के NSA से मुलाकात, किन मुद्दों पर हुई बातचीत?</title>
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<description><![CDATA[ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने गुरुवार को अपने ब्रिटिश समकक्ष जोनाथन पॉवेल के साथ विस्तार से बातचीत की। इस बातचीत का मुख्य ज़ोर आतंकवाद, उग्रवाद और यूके से सक्रिय खालिस्तान समर्थक तत्वों से जुड़ी नई दिल्ली की चिंताओं को दूर करने पर था। अधिकारियों ने बताया कि अस्थिर भू-राजनीतिक माहौल को देखते हुए, दोनों पक्ष भारत-यूके व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने पर सहमत हुए। एनएसए डोभाल और पॉवेल ने पश्चिम एशिया की अस्थिर स्थिति और समुद्री सुरक्षा तथा व्यापार पर इसके प्रभाव को लेकर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। अधिकारियों के अनुसार, डोभाल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस संघर्ष को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र आगे का रास्ता है। यह बातचीत वार्षिक भारत-यूके रणनीतिक संवाद के तहत हुई। ऊपर बताए गए अधिकारियों ने कहा कि दोनों एनएसए ने भारत-यूके विज़न 2035 दस्तावेज़ में तय किए गए लक्ष्यों पर आगे बढ़ने के महत्व को दोहराया; इन लक्ष्यों में दीर्घकालिक द्विपक्षीय रणनीतिक सहयोग को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी, रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र शामिल हैं।इसे भी पढ़ें: UK का सीधा इनकार! Hormuz में Trump की सैन्य कार्रवाई का समर्थन नहीं करेंगे Keir Starmerउन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने आतंकवाद, उग्रवाद और खालिस्तान समर्थक तत्वों से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं से निपटने के लिए सहयोग को और गहरा करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने आगे कहा कि डोभाल ने इन मामलों पर लगातार समर्थन के लिए यूके सरकार का धन्यवाद किया और दोनों पक्षों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग को और गहरा करके इस गति को बनाए रखने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। डोभाल और पॉवेल ने भारत-यूके टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी इनिशिएटिव (TSI) के तहत हुई प्रगति की भी समीक्षा की, और टेलीकॉम, महत्वपूर्ण खनिज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हासिल किए गए &quot;कुछ महत्वपूर्ण परिणामों&quot; का ज़िक्र किया।इसे भी पढ़ें: भारत को गाली देने वाली मुस्लिम MP को संसद से ऐसे उठाकर फेंका, चौंक गए सभीअधिकारियों ने बताया कि एनएसए डोभाल ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि TSI के तहत सहयोग से भुवनेश्वर, ओडिशा में Clas-SiC Wafer Fab Ltd, UK और भारत की SiCSem Pvt. Ltd द्वारा सिलिकॉन कार्बाइड-आधारित कंपाउंड सेमीकंडक्टर सुविधा स्थापित करना संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी और उन्नत सामग्री के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए। उन्होंने आगे कहा कि दोनों पक्षों ने इस बात पर गौर किया कि द्विपक्षीय रक्षा सहयोग ने अच्छी गति पकड़ी है, और यह महत्वपूर्ण है कि भारत-यूके रक्षा औद्योगिक रोडमैप के व्यापक ढांचे के तहत रक्षा औद्योगिक सहयोग को और गहरा किया जाए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:20 +0530</pubDate>
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<title>गोलियों से दहला Pakistan का Khyber, सेना का दावा&#45; मारे 22 आतंकी, एक बच्चे की भी गई जान</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाके में एक बड़े सुरक्षा अभियान के दौरान इस हफ़्ते हुई ज़बरदस्त गोलीबारी में 22 संदिग्ध आतंकवादी मारे गए। सेना के अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह झड़प मंगलवार को हुई, जब सुरक्षा बलों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने अफ़गानिस्तान के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास एक संयुक्त रणनीतिक अभियान शुरू किया।खैबर ज़िले में सैन्य अभियानयह मुठभेड़ तब शुरू हुई जब सुरक्षा कर्मियों ने सीमावर्ती ज़िले खैबर में एक अभियान शुरू किया। सेना की मीडिया विंग द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को सशस्त्र विरोध का सामना करना पड़ा, जिसके चलते &quot;ज़ोरदार गोलीबारी&quot; हुई। इस मुठभेड़ में 22 कथित आतंकवादी मारे गए, जो इस अशांत सीमावर्ती इलाके में शांति और स्थिरता लाने के चल रहे प्रयासों की दिशा में एक अहम कामयाबी है।इसे भी पढ़ें: भारत समेत 6 देशों के तेल रिफाइनरी में कौन लगा रहा है आग...साजिश किसकी?नागरिक के हताहत होने की खबरइस ऑपरेशन का एक स्थानीय परिवार के लिए बेहद दुखद अंत हुआ। भीषण लड़ाई के दौरान, एक दस साल का बच्चा गोलीबारी की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। इस बच्चे की मौत ने लोगों का ध्यान उन खतरों की ओर खींचा है, जिनका सामना उन इलाकों में रहने वाले नागरिकों को करना पड़ता है, जहाँ सुरक्षा बल और उग्रवादी अक्सर एक-दूसरे से भिड़ते रहते हैं। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने औपचारिक रूप से इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी और अपने कार्यालय के माध्यम से हुए नुकसान को स्वीकार किया। प्रधानमंत्री ने आतंकवादियों द्वारा की गई बिना किसी उकसावे वाली गोलीबारी में 10 साल के एक बच्चे की शहादत पर दुख व्यक्त किया।इसे भी पढ़ें: Trump ने काट दी मोजतबा खामनेई की एक टांग? न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासासीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा का संदर्भखैबर ज़िला, अफ़गानिस्तान के साथ लगी सीमा पर एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र बना हुआ है। वर्षों से, पाकिस्तानी सरकार ने उन सशस्त्र गुटों के प्रभाव को कम करने के लिए सैन्य अभियान चलाने की रणनीति अपनाई है, जो इस क्षेत्र की ऊबड़-खाबड़ भौगोलिक बनावट का लाभ उठाना चाहते हैं। जहाँ एक ओर अधिकारी यह मानते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाए रखने के लिए ये अभियान अत्यंत आवश्यक हैं, वहीं दूसरी ओर हाल ही में एक नाबालिग की मृत्यु ने इस क्षेत्र में व्याप्त सुरक्षा माहौल की अस्थिर प्रकृति को उजागर कर दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:19 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;US में बढ़ा तनाव, तीसरा अमेरिकी Warship पहुंचा, Trump बोले&#45; हम पूरी तरह तैयार</title>
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<description><![CDATA[ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ज़ोर देकर कहना है कि ईरान की सेना पर पूरी तरह से बढ़त हासिल कर ली गई है, फिर भी अमेरिका (US) ने ईरानी जलक्षेत्र के पास अपना तीसरा विमानवाहक पोत भेजा है, क्योंकि मध्य पूर्व में संघर्ष अभी भी जारी है। यह विमानवाहक पोत, USS जॉर्ज H.W. बुश (CVN 77), निमिट्ज़-क्लास का जहाज़ है, और इस पर दर्जनों लड़ाकू विमान और सैन्यकर्मी मौजूद हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स पर एक बयान में कहा कि निमिट्ज़-क्लास विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज HW बुश (CVN 77) 23 अप्रैल को US सेंट्रल कमांड के ज़िम्मेदारी वाले क्षेत्र में, हिंद महासागर में आगे बढ़ रहा है और साथ ही यह भी बताया कि यह विमानवाहक पोत अफ्रीका के पूर्वी तट के पास से गुज़र रहा था।इसे भी पढ़ें: Trump ने काट दी मोजतबा खामनेई की एक टांग? न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासायूएसएस जॉर्ज HW बुश इस क्षेत्र में USS जेराल्ड R. फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ शामिल होगा। यह अभी साफ़ नहीं है कि बुश के क्या उद्देश्य होंगे, लेकिन एक अधिकारी के हवाले से, द वॉशिंगटन पोस्ट ने बताया कि अमेरिकी सेना ईरान पर अपने हमले फिर से शुरू करने के लिए तैयार है। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ईरान के साथ हुए संघर्ष-विराम ने सेना को मध्य पूर्व में &quot;जहाज़ों और विमानों को फिर से तैनात करने और उनमें साज़ो-सामान भरने&quot; का समय दिया है।इसे भी पढ़ें: कभी भारत आकर देखो...ट्रंप को ईरान का खुला चैलेंजईरान की नौसैनिक घेराबंदीहालांकि, इस क्षेत्र में बुश का आना अमेरिका की उस चाल के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे वह ईरान की घेराबंदी को और मज़बूत कर सके। ट्रंप के मुताबिक, इस घेराबंदी का मकसद ईरान को आर्थिक रूप से कमज़ोर करना और उसकी अर्थव्यवस्था पर इतना दबाव डालना है कि वह शांति समझौते को मानने पर मजबूर हो जाए। लेकिन ईरान ने अमेरिका की &quot;बेतुकी&quot; मांगों को मानने से इनकार कर दिया है और इस घेराबंदी को गैर-कानूनी बताया है। इसके बावजूद, ट्रंप ने दावा किया है कि यह घेराबंदी 100 प्रतिशत असरदार है, और साथ ही यह भी कहा कि ईरान के साथ इस टकराव को खत्म करने के लिए उन पर &quot;कोई दबाव नहीं&quot; है। उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान के साथ कोई भी समझौता तभी किया जाएगा, जब वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के सबसे अच्छे हित में हो।इसे भी पढ़ें: Turkey ने अचानक क्यों तान दी मिसाइलें? इजरायल के खिलाफ बड़ी लामबंदी, क्या करेंगे एर्दोगानयह बहुत ही टॉप सीक्रेट है... घेराबंदी के ज़रिए हमने जो किया है, वह कमाल का है, और कोई भी इसे पार नहीं कर पा रहा है। कोई पार करना भी नहीं चाहता; कोई कोशिश भी नहीं कर रहा... हमारा इस पर पूरा कंट्रोल है... ईरान ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, बहरीन और ऐसे ही कई अलग-अलग जगहों पर हमले किए, किसी को भी इसकी उम्मीद नहीं थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने गुरुवार को वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ये बातें कहीं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:19 +0530</pubDate>
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<title>Washington में India&#45;US के बीच BTA पर मंथन, Market Access से Digital Trade तक इन मुद्दों पर बनी सहमति</title>
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<description><![CDATA[ वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि 20 अप्रैल से 23 अप्रैल, 2026 तक वाशिंगटन DC की यात्रा पर गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर अमेरिका के साथ रचनात्मक और भविष्योन्मुखी चर्चा की। मंत्रालय ने कहा कि ये बैठकें सकारात्मक और रचनात्मक भावना के साथ हुईं, जिसमें दोनों पक्षों ने कई क्षेत्रों पर सार्थक चर्चा की। इनमें बाज़ार पहुंच, गैर-टैरिफ उपाय, व्यापार में तकनीकी बाधाएं, सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा, निवेश प्रोत्साहन, आर्थिक सुरक्षा तालमेल और डिजिटल व्यापार शामिल थे। बयान के अनुसार, इन चर्चाओं से कई अहम मामलों पर प्रगति हुई, और दोनों पक्ष इस गति को बनाए रखने के लिए लगातार संपर्क में रहने पर सहमत हुए, ताकि बातचीत आगे बढ़ सके।इसे भी पढ़ें: Trump ने काट दी मोजतबा खामनेई की एक टांग? न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासामंत्रालय ने कहा कि ये बैठकें रचनात्मक और सकारात्मक भावना के साथ हुईं, जिसमें सार्थक और भविष्योन्मुखी चर्चाओं के ज़रिए अहम मामलों पर प्रगति हुई। दोनों पक्ष इस गति को बनाए रखने के लिए लगातार संपर्क में रहने पर सहमत हुए, ताकि वे आगे बढ़ सकें। यह दौरा 7 फरवरी, 2026 को भारत और अमेरिका द्वारा जारी एक संयुक्त बयान के बाद हुआ है, जिसमें दोनों देशों ने आपसी और परस्पर लाभकारी व्यापार के उद्देश्य से एक अंतरिम समझौते के लिए एक रूपरेखा पर सहमति जताई थी। इस रूपरेखा में एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के लिए बातचीत को आगे बढ़ाने की उनकी प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की गई।इस प्रक्रिया के हिस्से के रूप में, भारतीय प्रतिनिधिमंडल अंतरिम समझौते के विवरण को अंतिम रूप देने और व्यापक BTA रूपरेखा के तहत चर्चाओं को आगे बढ़ाने के लिए अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ आमने-सामने की बैठकों के लिए वाशिंगटन डी.सी. गया।इसे भी पढ़ें: भारत नरक नहीं, स्वर्ग का अहसास है, मानवता का वैभव, सभ्यता का प्रकाश है!भारत और अमेरिका ने इससे पहले 7 फरवरी को घोषणा की थी कि वे अंतरिम समझौते के लिए एक रूपरेखा पर पहुँच गए हैं; उम्मीद है कि इसमें अतिरिक्त बाज़ार पहुँच संबंधी प्रतिबद्धताएँ शामिल होंगी और यह दोनों देशों के बीच अधिक सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकास में सहायता करेगा। व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए बातचीत की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी, 2025 को की थी।इसे भी पढ़ें: किस देवता के नाम पर बना है हॉर्मुज? हवा के &#039;जिन्न&#039; से बचने के लिए महिलाएं मूंछों जैसा पहनती नकाबमंत्रालय ने बताया कि प्रस्तावित अंतरिम समझौता भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है, जो आपसी हितों और ठोस परिणामों पर आधारित संतुलित और पारस्परिक व्यापार के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:18 +0530</pubDate>
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<title>Norway का बड़ा फैसला: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Social Media होगा बैन!</title>
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<description><![CDATA[ नॉर्वे ने शुक्रवार को कहा कि वह साल के आखिर तक संसद में एक बिल पेश करेगा, जिसके तहत 16 साल की उम्र तक बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगा दी जाएगी। इस काम के लिए उम्र की पुष्टि करने की ज़िम्मेदारी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर डाली जाएगी। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले दिसंबर में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर रोक लगाकर दुनिया में सबसे पहले इस दिशा में कदम उठाया था। इसके बाद कई यूरोपीय देश भी बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने एक बयान में कहा, &quot;हम यह कानून इसलिए ला रहे हैं, क्योंकि हम ऐसा बचपन चाहते हैं जिसमें बच्चे सचमुच बच्चे बनकर रह सकें। इसे भी पढ़ें: Iran ने Donald Trump को दिखाया भारत का आईना: कहा- &#039;बकवास छोड़ें, महाराष्ट्र आएं और भारत से सीखें संस्कारखेल-कूद, दोस्ती और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर एल्गोरिदम और स्क्रीन का कब्ज़ा नहीं होना चाहिए। बच्चों की डिजिटल ज़िंदगी को सुरक्षित रखने के लिए यह एक अहम कदम है। सरकार ने यह नहीं बताया कि किन ऐप्स को टारगेट किया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के बैन में मेटा के ऐप्स जैसे इंस्टाग्राम और फेसबुक के साथ-साथ टिकटॉक, Snapchat, Google का YouTube और Elon Musk का X (पहले Twitter) भी शामिल हैं। नॉर्वे की अल्पसंख्यक लेबर सरकार ने कहा कि वह 2026 के आखिर तक संसद में अपना बिल पेश करेगी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:17 +0530</pubDate>
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<title>West Asia से भारतीयों के लिए बड़ी राहत, Kuwait और Israel ने खोला Airspace, जल्द शुरू होंगी उड़ानें</title>
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<description><![CDATA[ जैसे-जैसे पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में उड़ानों की स्थिति बेहतर होती जा रही है, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि इज़रायल और कुवैत का हवाई क्षेत्र अब खुल गया है और दो एयरलाइंस जल्द ही कुवैत से भारत के लिए सीमित उड़ानें फिर से शुरू करेंगी। ये जानकारी विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (खाड़ी), असीम आर. महाजन ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में हुई एक अंतर-मंत्रालयी प्रेस ब्रीफिंग के दौरान दी। महाजन ने कहा कि उड़ानों की कुल स्थिति लगातार बेहतर हो रही है, और इस क्षेत्र से भारत के अलग-अलग हिस्सों के लिए अतिरिक्त उड़ानें चल रही हैं। 28 फरवरी से अब तक, इस क्षेत्र से 12,38,000 यात्री भारत आ चुके हैं।इसे भी पढ़ें: अब Internet पर मंडरा रहा खतरा? Iran की समुद्री केबल और क्लाउड नेटवर्क को निशाना बनाने की चेतावनीउन्होंने आगे कहा कि कुवैत का एयरस्पेस अब खुल गया है। जज़ीरा एयरवेज़ और कुवैत एयरवेज़ ने घोषणा की है कि वे जल्द ही कुवैत से भारत के लिए सीमित उड़ानें फिर से शुरू करेंगे। वे सऊदी अरब के दम्मम हवाई अड्डे से भारत के अलग-अलग शहरों के लिए नॉन-शेड्यूल्ड कमर्शियल उड़ानें जारी रखे हुए हैं। इज़राइल का एयरस् पेस खुला है, और इस क्षेत्र के शहरों के लिए सीमित उड़ानें फिर से शुरू हो गई हैं, जिनका इस्तेमाल भारत जाने के लिए किया जा सकता है। अतिरिक्त सचिव ने बताया कि एयरलाइंस यूएई और भारत के बीच ऑपरेशनल और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए सीमित कमर्शियल उड़ानें जारी रखे हुए हैं। आज, यूएई से भारत के लिए लगभग 110 उड़ानें चलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और ओमान के अलग-अलग हवाई अड्डों से भारत के अलग-अलग शहरों के लिए उड़ानें चल रही हैं।इसे भी पढ़ें: भारत आने वाले जहाज पर कब्जा, ईरान पर एक्शन तेज!महाजन ने आगे बताया कि कतर का एयरस् पेस आंशिक रूप से खुला है। कतर एयरवेज़ भारत के अलग-अलग शहरों के लिए उड़ानें चला रही है। बहरीन का एयरस् पेस खुला है। गल्फ एयरवेज़ बहरीन से भारत के अलग-अलग शहरों के लिए उड़ानें चला रही है। इराक का एयरस् पेस खुला है, और इस क्षेत्र के शहरों के लिए सीमित उड़ानें चल रही हैं, जिनका इस्तेमाल भारत जाने के लिए किया जा सकता है। ईरान का एयरस् पेस कार्गो और चार्टर्ड उड़ानों के लिए आंशिक रूप से खुला है। तेहरान में हमारे दूतावास ने कल भारतीय नागरिकों को ईरान न जाने की अपनी पिछली सलाह दोहराई, और जो भारतीय ईरान में हैं, उन्हें ज़मीनी सीमा मार्गों से निकलने की सलाह दी, जिसमें दूतावास लगातार मदद कर रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:17 +0530</pubDate>
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<title>न्यूजीलैंड बोला&#45; आ रहे हैं भारत, करेंगे धाकड़ डील</title>
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<description><![CDATA[ भारत और न्यूजीलैंड के व्यापारिक रिश्तों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लग्जन ने ऐलान किया है कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने जा रही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 27 अप्रैल को आधिकारिक तौर पर साइन की जाएगी। यह घोषणा उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए दी है। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को एक नए स्तर पर ले जाने वाला माना जा रहा है। यह सिर्फ एक ट्रेड डील नहीं बल्कि एक व्यापक साझेदारी की शुरुआत है। जिसमें सर्विस, निवेश, मोबिलिटी और टेक्नोलॉजी जैसे कई अहम सेक्टर्स शामिल हैं। अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2025 में भारत ने न्यूजीलैंड को करीब 711.1 बिलियन का निर्यात किया था। जिसमें एविएशन, फ्यूल, टेक्सटाइल और फार्मा उत्पाद शामिल थे। वहीं न्यूजीलैंड से भारत ने करीब 587.1 मिलियन डॉलर का आयात किया था। जिसमें कच्चा माल, स्क्रैप मेटल और कोयला जैसे प्रमुख उत्पाद रहे। यानी दोनों देशों के बीच पहले से ही बेहद मजबूत व्यापारिक संबंध है। जिन्हें अब इस एफटीए के बाद और भी ज्यादा मजबूती मिलेगी। इसे भी पढ़ें: PM Modi का &#039;SIR&#039; दांव West Bengal में हुआ फेल? रिकॉर्ड वोटिंग पर Arvind Kejriwal ने कसा तीखा तंजदोनों देशों के बीच हो रहे इस समझौते की सबसे खास बात यह है कि यह करीब 20 अलग-अलग सेक्टरों को कवर करेगी। इसमें बौद्धिक संपदा अधिकार यानी कि इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स, निवेश, स्थिरता, छोटे और मध्यम उद्योग और पारंपरिक ज्ञान जैसे अहम मुद्दे भी शामिल हैं। भारत और न्यूजीलैंड के बीच हो रही सेफ्टी डील की एक और खासियत यह भी है कि इस डील को करने के लिए ना सिर्फ न्यूजीलैंड की सरकार अग्रसर है बल्कि वहां की विपक्षी पार्टी भी इस डील का पूरी तरीके से समर्थन कर रही है। वहां के विपक्षी नेताओं को भी साफ तौर पर देखा गया कि वह भारत के साथ इस सेफ्टी डील को लेकर बेहद उत्सुक हैं और पॉजिटिवली इसको देख रहे हैं। टेरिफ यानी आयात निर्यात शुल्क की बात करें तो न्यूजीलैंड 100% टेरिफ लाइनों पर शुल्क खत्म करेगा। जबकि भारत ने अपने संवेदनशील कृषि सेक्टर जैसे डेयरी को बचाने के लिए सावधानी बरतते हुए करीब 70% टेरिफ लाइनों को ही खोला है। इसे भी पढ़ें: कौन हैं वो सात सांसद जो राघव चड्ढा के साथ BJP में होंगे शामिल, सामने आए सभी नामभारत के उत्पादों पर 0% टेरिफ लगेगा। लेकिन न्यूजीलैंड के ऊपर कम है पर कुछ टेरिफ जरूर लगेगा। इस डील की शुरुआत 16 मार्च 2025 को हुई थी जब भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टैडी मैक के बीच बातचीत शुरू हुई थी। इसके बाद दोनों देशों ने तेजी से बातचीत को आगे बढ़ाया और अब यह समझौता साइन होने की कगार पर है। अगर बात करें बाकी एफटीए की तो भारत पहले ही श्रीलंका, भूटान, सिंगापुर, जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूएई जैसे देशों के साथ एफटीए कर चुका है। इसके अलावा एसियान और एएफटीए जैसे समूह के साथ भी भारत के समझौते हैं और ईयू के साथ भारत ने मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील की ही है। जो कि दिखाता है कि भारत लगातार अपने व्यापारिक संबंधों को बेहद बेहतर करता जा रहा है बाकी देशों के साथ और अब इस नए समझौते के बाद भारत की वैश्विक व्यापार नीति और भी ज्यादा मजबूत हो जाएगी। साथ ही में न्यूजीलैंड के लिए भी एक एशियाई बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने का बेहतर मौका है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:16 +0530</pubDate>
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<title>Hormuz के बाद मलक्का  में लगेगा टोल? इंडोनेशिया ने दे दिया बड़ा जवाब!</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक को लेकर अचानक बड़ा सवाल खड़ा हो गया कि क्या अब जहाजों से टोल वसूला जाएगा और अगर हां तो इसका असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। जहां एक तरफ स्टेट ऑफ हॉर्मोज को लेकर पहले से ही तनाव चरम पर है। वहीं अब स्टेट ऑफ मलक्का का नाम भी इस बहस में सामने आ गया। स्टेट ऑफ हॉर्मोज वो जगह है जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है। हाल ही में ईरान की तरफ से यह चर्चा तेज हुई कि यहां से गुजरने वाले जहाजों पर फीस यानी कि टोल लगाया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो सोचिए तेल महंगा होगा, शिपिंग कॉस्ट पड़ेगी और सीधे असर पड़ेगा आम आदमी की जेब पर। यही वजह है कि पूरी दुनिया इस मुद्दे को लेकर सतर्क है। हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से साफ कह दिया गया है कि ऐसी कोई खबर नहीं है। यह फेक न्यूज़ है।  इसे भी पढ़ें: General Naravane के खुलासे से &#039;झूठ&#039; का पर्दाफाश? BJP ने Rahul Gandhi से पूछे तीखे सवालस्टेट ऑफ मलक्का  इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर के बीच से गुजरता है और इसे एशिया की लाइफ लाइन कहा जाता है। करीब 40% ग्लोबल ट्रेड यहीं से गुजरता है जिसमें तेल, गैस और जरूरी सामान शामिल हैं। अब जब हॉरर्मज में टोल की बात उठी तो इंडोनेशिया के फाइनेंस मिनिस्टर पुरब्या युधी सदेवा ने एक सवाल उठाया। क्या यह सही है कि हम इतने अहम रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से कोई चार्ज नहीं लेते? इस सवाल ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी। लेकिन अब इंडोनेशिया के विदेश मंत्री ने साफ कर दिया इंडोनेशिया ऐसा कोई टोल लगाने की योजना नहीं बना रहा है। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया एक ट्रेंडिंग नेशन है और वो फ्रीडम ऑफ नेविगेशन यानी समुद्री रास्तों की आजादी का समर्थन करता है। सीधे शब्दों में मलक्का स्टेट में टोल लगाने का कोई प्लान नहीं है। अब इस मुद्दे पर सिंगापुर ने भी अपनी स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। इसे भी पढ़ें: कभी भारत आकर देखो...ट्रंप को ईरान का खुला चैलेंजस्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। सिंगापुर के विदेश मंत्री वीविए ने साफ कह दिया है कि मलक्का और सिंगापुर स्टेट खुले हैं और फ्री रहने चाहिए। यानी इस पूरे इलाके के बड़े देश यह नहीं चाहते कि यहां से गुजरने वाले जहाजों पर कोई अतिरिक्त बोझ डाल दिया जाए। अब सबसे बड़ा सवाल कि क्या कोई देश ऐसा कर सकता है? यहां आता है अंतरराष्ट्रीय कानून यूनाइटेड नेशन कन्वेंशन ऑफ द लॉ ऑफ द सी। इस कानून के तहत दुनिया के सभी देशों के जहाजों को ट्रांजिट पैसेज का अधिकार है। खासकर समुद्री रास्तों पर बिना रुकावट गुजरने की छूट है। किनारे पर मौजूद देश आसानी से टोल या रोक नहीं लगा सकते हैं। यानी नियम साफ है। मलक्का जैसे इंटरनेशनल चेक पॉइंट पर टोल लगाना आसान नहीं है। अब जरा कल्पना कीजिए अगर मलक्का स्टेट में टोल लग जाता है तो क्या होगा? पहला शिपिंग कॉस्ट बढ़ जाएगी। दूसरा तेल और गैस महंगे हो जाएंगे। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:16 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran की मध्यस्थता पाकिस्तान को पड़ी भारी, Islamabad में Lockdown जैसे हालात, अवाम में गुस्सा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में शांतिदूत की भूमिका निभाने की पाकिस्तान की चाहत का एक अनचाहा नतीजा सामने आया है। राजधानी इस्लामाबाद के साथ-साथ देश के सैन्य तंत्र का केंद्र माने जाने वाले रावलपिंडी को भी एक तरह से पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जबकि दूसरी ओर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत का भविष्य अभी भी अधर में लटका हुआ है। यह स्थिति कोविड-काल के लॉकडाउन की यादें ताज़ा कर रही है और कारोबार व आमदनी के नुकसान के चलते लोगों के गुस्से को और भड़का रही है। ब्रिटेन के न्यूज़ आउटलेट द गार्डियन ने बताया कि पाकिस्तानी राजधानी की सड़कें कई दिनों से खाली पड़ी हैं। सड़कों पर सिर्फ़ सेना और पुलिस की वर्दी पहने लोग ही नज़र आ रहे हैं। रिपोर्ट में शहर भर में बंद दुकानों, ठप पड़े पब्लिक ट्रांसपोर्ट और &#039;वर्क-फ़्रॉम-होम&#039; के आदेशों का ज़िक्र किया गया है। कई लोगों को ऐसा लग रहा है, जैसे वे फिर से महामारी के दौर में लौट आए हों। फ़र्क बस इतना है कि &quot;इस बार वजह कोई वायरस नहीं है,&quot; बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली संभावित बातचीत है, जो अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।इसे भी पढ़ें: Washington में India-US के बीच BTA पर मंथन, Market Access से Digital Trade तक इन मुद्दों पर बनी सहमतिइस्लामाबाद और पाकिस्तान के अधिकारियों ने VVIP ज़ोन में मुख्य सड़कों और बाज़ारों को सील कर दिया है, और 10,000 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं। लेकिन प्रतिनिधिमंडलों के लिए कोई पक्का कार्यक्रम न होने के कारण, ये पाबंदियाँ अनिश्चित काल तक खिंच गई हैं। नूर खान एयरबेस और इस्लामाबाद के रेड ज़ोन के आस-पास के मुख्य इलाके बंद हैं, और दफ़्तरों का काम रिमोटली चल रहा है। शहरों को जोड़ने वाला पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोक दिया गया है, जबकि सामान का ट्रांसपोर्ट 19 अप्रैल से रुका हुआ है। हालाँकि रावलपिंडी में कुछ भारी ट्रैफिक को थोड़ी-बहुत इजाज़त दी गई है, लेकिन इस्लामाबाद में ज़्यादातर जगहों पर आने-जाने की मनाही है। स्कूल कागज़ों पर तो खुले हैं, लेकिन कई यूनिवर्सिटी ऑनलाइन हो गई हैं।इसे भी पढ़ें: Hormuz के बाद मलक्का  में लगेगा टोल? इंडोनेशिया ने दे दिया बड़ा जवाब!लॉकडाउन का सबसे ज़्यादा बुरा असर दोनों शहरों के मज़दूर वर्ग पर पड़ा है। &#039;द गार्डियन&#039; ने बताया, &quot;इस्लामाबाद और पास के रावलपिंडी में कई मज़दूर, जो फ़्लैट का किराया नहीं दे पा रहे थे, उन्हें शनिवार को एक सरकारी आदेश के बाद, बिना किसी सूचना के उनके हॉस्टल से निकाल दिया गया; और हज़ारों लोगों को जल्दबाज़ी में रहने के लिए कोई जगह ढूँढ़नी पड़ी। जैसे-जैसे वे बातचीत बार-बार नाकाम होती गई, गुस्सा और गहराता गया। एक हेल्थ ऑफिसर, अरीज अख्तर ने &#039;द गार्डियन&#039; को बताया, &quot;ऐसा लगता है जैसे हम किसी पिंजरे में रह रहे हैं ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:15 +0530</pubDate>
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<title>इसकी टोपी उसके सिर वाले फॉर्मूले पर चल रहा पाकिस्तान, भीख मांग कर चुका रहा UAE का कर्जा</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का हाल इन दिनों कुछ ऐसा है कि वह इसकी टोपी उसके सर वाली रणनीति पर काम कर रहा है और उधार लेकर उधार चुकाने का कारनामा पाकिस्तान इन दिनों करता दिख रहा है और यह कोई मजाक नहीं बल्कि आधिकारिक जानकारी है। हाल ही में पाकिस्तान ने यूनाइटेड अरब एमिरेट्स यानी यूएई को लगभग 2 बिलियन का कर्ज वापस लौटा दिया है। सुनने में कितना अच्छा लगता है कि पाकिस्तान ने कर्ज चुका दिया। लेकिन इसकी असली कहानी यहीं शुरू होती है। दरअसल पाकिस्तान के पास कर्ज चुकाने के लिए इतने पैसे थे ही नहीं। कर्ज चुकाने के लिए उसे कुछ दिन पहले ही सऊदी अरब से 2 बिलियन का नया कर्ज लेना पड़ा है। यानी एक जेब से पैसा आया और दूसरी जेब में चला गया। इस नए कर्ज को मांगने के लिए खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपना कटोरा लेकर सऊदी अरब पहुंचे और वहां पर मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की। इसके साथ ही इस मुलाकात में पाकिस्तान ने ना सिर्फ पैसे मांगे बल्कि इससे पहले जो कर्ज ले रखा है सऊदी अरब से उसको चुकाने के लिए मोहलत बढ़ाने की भी मांग कर दी। यानी कि नया कर्ज तो मांगा ही मांगा। पुराना चुकाने के लिए वक्त भी मांगा है शबाज शरीफ। इसे भी पढ़ें: गोलियों से दहला Pakistan का Khyber, सेना का दावा- मारे 22 आतंकी, एक बच्चे की भी गई जानपहले सऊदी अरब से पाकिस्तान को पैसे मिले। फिर पाकिस्तान ने उसी पैसे से यूएई का कर्ज चुका है और इन सब की जानकारी स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने खुद दी है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने बताया कि कुल $3.45 बिलियन डॉलर यूएई को वापस कर दिए गए हैं। इसमें से 1 बिलियन 23 अप्रैल को और बाकी पिछले हफ्ते चुका दिया गया था। पाकिस्तान के पास इस वक्त पैसों की इतनी कमी है कि पाकिस्तान ने $500 मिलियन यूरो बॉन्ड जारी करके भी कुछ पैसे जुटाए हैं। यानी हालात ऐसे हैं कि जहां से अभी मौका बन पा रहा है पाकिस्तान वहां से पैसे उठाए जा रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो पाकिस्तान इस वक्त कर्ज घुमाओ योजना पर चल रहा है और इसी की वजह से वो इसकी टोपी उसके सर वाली स्कीम को लागू कर रहा है। यानी एक तरफ उसने सऊदी अरब से कर्ज मांगा और कर्ज मांगते ही उसे तुरंत यूएई को लौटा दिया। यह ठीक क्रेडिट कार्ड वाले स्कैम की तरह नजर आता है। जहां कुछ लोग क्रेडिट कार्ड तो ले लेते हैं, लेकिन उसका पैसा दे नहीं पाते, तो वह क्या करते हैं? वह एक नया क्रेडिट कार्ड लेते हैं और क्रेडिट कार्ड के इस लूप में ही घूमते रहते हैं। इसे भी पढ़ें: US-Iran की मध्यस्थता पाकिस्तान को पड़ी भारी, Islamabad में Lockdown जैसे हालात, अवाम में गुस्सापुराने क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाने के लिए नए क्रेडिट कार्ड से लोन लेंगे। फिर उसका कर्ज चुकाएंगे और यह लूप जारी रहेगा और पाकिस्तान इस लूप का अंतरराष्ट्रीय लेवल पर इस्तेमाल कर रहा है। आपको बता दें कि पाकिस्तान में इस वक्त विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दबाव देखने को मिल रहा है और ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय दायित्व पूरा करने के लिए पाकिस्तान को बार-बार बाकी देशों से मदद मांगनी पड़ती है। मदद क्या इसे भीख ही कहिए। अब देखना यह होगा कि पाकिस्तान आखिर कब तक ऐसे ही उधार लेकर सिस्टम को चलाता चलेगा। क्या वो कभी अपने दम पर भी अपने आप को आर्थिक स्थिरता दिला पाएगा? खैर ऐसा होता तो दिख नहीं रहा है। पर क्या यह एक फाइनेंशियल मैनेजमेंट है? आप पाकिस्तान के इस इसकी टोपी उसके सर वाली स्कीम को लेकर क्या राय रखते हैं? हमें अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:14 +0530</pubDate>
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<title>NASA वैज्ञानिक की रहस्मयी मौत, अमेरिका से चीन तक में मचा हड़कंप</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया के दो सबसे ताकतवर देश अमेरिका और चाइना इन दिनों एक बेहद रहस्यमई और चिंताजनक ट्रेंड से जूझ रहे हैं। पिछले कुछ सालों में करीब 20 टॉप वैज्ञानिक जो अचानक गायब हो गए या तो किसी संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी जान चली गई। ये कोई आम वैज्ञानिक नहीं थे। ये वो लोग थे जो एआई, हाइपरसोनिक मिसाइल, न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी और स्पेस डिफेंस जैसे हाई प्रोफाइल और संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रहे थे। ऐसे में सवाल उठता है ना कि क्या यह महज संयोग है या इसके पीछे कोई बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश छिपी है? सबसे पहले बात करते हैं अमेरिका की। तो रिपोर्ट जो आ रही हैं वह बता रही हैं कि अमेरिका में कम से कम 11 ऐसे मामले सामने आए जहां वैज्ञानिक या तो रहस्यमई तरीके से गायब हुए या फिर उनकी संदिग्ध हालात में जान चली गई। इस मामले की जांच खुद फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी कि एफबीआई कर रही है। इसे भी पढ़ें: F-22 से खतरनाक रूस का SU-57 M1, खरीदेगा भारत?एफबीआई ऊर्जा विभाग, रक्षा विभाग और लोकल एजेंसियों के साथ मिलकर इन केसों के बीच कोई कड़ी तलाशने की कोशिश कर रही है। अब कुछ बड़े केस देख लीजिए। विलियम नील मैकसलैंड रिटायर्ड मेजर जनरल न्यू मेक्सिको से अचानक गायब। मोनिका रेजा एरोस्पेस इंजीनियर ट्रैकिंग के दौरान लापता मेलिसा केसियास लॉस एलामोस से जुड़ी कर्मचारी साल 2025 से गायब। इसके अलावा कुछ और भी मामले हैं जिनमें साइंटिस्टों की जान चली गई। जैसे कि नूनो लुरेरो एमआईटी प्रोफेसर घर के बाहर गोली मारकर उनकी जान ले ली गई। कार्ल ग्रिल मायर कैलटेक के वैज्ञानिक संदिग्ध हालात में उनकी जान चली गई। इसके अलावा इन घटनाओं ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे गंभीर मामला बताया। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह महज संयोग हो सकता है। इसे भी पढ़ें: Kathmandu में &#039;जहरीली&#039; हुई हवा, AQI 247 के साथ दुनिया का दूसरा सबसे Polluted शहर बनावहीं रिपब्लिकन नेता एरिक ने इसे संभावित विदेशी ऑपरेशन करार दिया है। तो अभी तक आपने सुना कि कुल कितने वैज्ञानिक या तो रहस्यमई हालात में गायब हुए या फिर उनकी जान चली गई। लेकिन अब जो सबसे बड़ी खबर वो यह है कि 29 वर्षीय नासा के एरोस्पेस टेक्नोलॉजीस जोशुआ लेबल के मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। जिसके बाद एफबीआई के होश उड़ गए। और यह रिपोर्ट हम आपको न्यूयॉर्क पोस्ट के हवाले से बता रहे हैं। जिसमें बताया गया है कि जोशुआ की कार स्थानीय समय अनुसार दोपहर लगभग 2:45 पर रेलिंग और कई पेड़ों से टकराने के बाद बुरी तरह जलकर पहचान से परे हो गई और इससे पहले सुबह उनके परिवार ने उनके लापता होने की सूचना दी थी क्योंकि वह अपने काम पर नहीं पहुंचे थे। परिवार ने उस समय दावा किया था कि जोशुआ का अपहरण हो गया होगा क्योंकि वह अपना फोन और बटुआ घर पर छोड़कर गए थे।  ]]></description>
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<title>240 भारतीयों को हवा में कहां ले गया इजरायल, चौंक जाएगी दुनिया</title>
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<description><![CDATA[  इजराइली लोगों ने 240 भारतीयों के लिए गाना गाया। इजरायली झंडों को लहराया क्योंकि इन 240 भारतीय लोगों का इजराइल के साथ एक बेहद ही खास और रहस्यमई रिश्ता है। जब यह लोग विमान में बैठकर भारत से इजराइल पहुंचे तो उस वक्त भी विमान के अंदर इजराइल के अधिकारियों ने इन भारतीय लोगों के लिए गाने गाए, झंडे लहराए और जश्न मनाया।दरअसल भारत में रहने वाले यह लोग यहूदियों के एक खास और रहस्यमई समुदाय से जुड़े हैं। इस समुदाय का नाम बनेई मिनाशे है। बनेई मिनाशे समुदाय के यहूदी सदियों पहले भारत आकर बस गए थे। बिनेई मिनाशे यहूदियों के वंशजों का जिक्र बाइबल में मिलता है। आपको बता दें कि यहूदियों के इस खास समुदाय के लोग भारत के नॉर्थ ईस्ट में आकर रहने लगे। इसे भी पढ़ें: Iran-US में बढ़ा तनाव, तीसरा अमेरिकी Warship पहुंचा, Trump बोले- हम पूरी तरह तैयारवहां भी खासतौर पर मणिपुर में कुछ महीनों पहले इजराइल ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में रहने वाले इन बनेई मेनाशे समुदाय के बचे हुए 5800 यहूदियों को अपने देश वापस लाकर बसाने का फैसला किया था। इजराइल ने खास मकसद से भारत की मदद से इन यहूदियों की घर वापसी की है। इजराइल ने कहा है कि वह अगले 5 सालों में इन 5800 यहूदियों को इजराइल लेकर जाएगा। अब इन्हीं में से पहले 240 बिनेई मिनाशे समुदाय के यहूदी इजराइल पहुंच चुके हैं। यहां आपको सबसे दिलचस्प बात बता दें कि दुनिया में कहीं भी रहने वाला एक यहूदी इजराइल का नागरिक बन सकता है। इजराइल का लॉ ऑफ रिटर्न हर यहूदी को इजराइल आने और इजराइली नागरिक बनने का अधिकार देता है। आपको बता दें कि 2005 में इजराइल के धार्मिक गुरु ने बिनेई मिनाशे समुदाय को इजराइली मूल के लोगों की मान्यता दे दी थी। इसी के बाद इजराइल ने फैसला किया कि वह इन यहूदियों को अपने देश लेकर आएगा। लेकिन इजराइल ऐसा कर क्यों रहा है? उसकी दो होश उड़ा देने वाली वजह हैं। सबसे पहले तो इजराइल भारत में रहने वाले इन यहूदियों को फिलिस्तीनियों की जगह नौकरी देना चाहता है। यह लोग अपनी-अपनी योग्यता के मुताबिक अलग-अलग कामों में लगाए जाएंगे। इजराइल को अपने देश की सुरक्षा के लिए फिलिस्तीनियों की जगह यहूदियों पर विश्वास है। इन लोगों को इजराइल वापस लाने की दूसरी सबसे बड़ी वजह इजराइल की सुरक्षा ही है। इसे भी पढ़ें: Hormuz के बाद मलक्का  में लगेगा टोल? इंडोनेशिया ने दे दिया बड़ा जवाब! दरअसल इजराइल इन बिनई मिनाशे लोगों को अपने खास इलाके में बसाना चाहता है। इस इलाके का नाम अपरगिली है। अपरगिली इलाका इजराइल के नॉर्थ में है जो लेबनान से बॉर्डर शेयर करता है। इस इलाके में 53% आबादी फिलिस्तीनी नागरिकों और अरबों की है। यहां मूल इजराइलियों की पॉपुलेशन माइनॉरिटी में आ गई है। ऐसे में इजराइल को डर है कि लेबनान से लगते हुए अपर गिली इलाके में अगर यहूदी कम हो गए तो इजराइल के इस इलाके में लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्ला की पकड़ मजबूत हो जाएगी क्योंकि यहां रहने वाले फिलिस्तीनी हिजबुल्लाह का साथ देंगे। इस इलाके में यहूदियों की घटती आबादी के चलते यहां घर, स्कूल, दुकानें सब खाली पड़ी हैं। ]]></description>
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<title>Iran&#45;US War Ceasefire News  | इस्लामाबाद बना मध्यस्थ, Abbas Araghchi के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुँचा</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में जारी तनाव और अमेरिका के साथ चल रहे कड़े संघर्ष के बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ शनिवार सुबह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुँचे। हालाँकि इस दौरे का मुख्य केंद्र अमेरिका के साथ संभावित बातचीत है, लेकिन तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह वाशिंगटन के साथ कोई सीधी बातचीत (Direct Talks) नहीं करेगा।पाकिस्तान की मेजबानी और स्वागतइस्लामाबाद पहुँचने पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल का जोरदार स्वागत किया गया। स्वागत दल में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी शामिल थे। इशाक डार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;X&#039; पर इस मुलाकात की पुष्टि करते हुए कहा कि वे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सार्थक बातचीत की उम्मीद कर रहे हैं।इसे भी पढ़ें: भारत की संप्रभुता का अमेरिका को &#039;आत्मसमर्पण&#039;: राम माधव के बयान पर कांग्रेस का मोदी सरकार पर तीखा हमला 
 अधिकारी ने कहा, ‘‘पाकिस्तानी मध्यस्थता टीम के साथ महत्वपूर्ण चर्चाओं के बाद, अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का दूसरा दौर इस्लामाबाद में होने की उम्मीद है।’’
 उन्होंने कहा कि वार्ता प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए एक अमेरिकी सुरक्षा दल पहले से ही इस्लामाबाद में मौजूद है।इसे भी पढ़ें: Tech कंपनियों का नया Formula: AI पर बड़ा दांव, Meta-Oracle में हजारों कर्मचारियों की छुट्टी
 इस बीच, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम एशिया मामलों के लिए अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार जेरेड कुशनर ईरान के साथ वार्ता के दूसरे दौर के लिए शनिवार को पाकिस्तान रवाना होंगे।
अमेरिका और ईरान के बीच गत 11 और 12 अप्रैल को हुई पहली दौर की वार्ता बेनतीजा रही थी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:12 +0530</pubDate>
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<title>जंग के बीच PM Benjamin Netanyahu ने Cancer को दी मात, खुद किया अपनी बीमारी का बड़ा खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को घोषणा की कि उनका प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती चरण का इलाज हुआ था, लेकिन उन्होंने अपनी सालाना मेडिकल रिपोर्ट जारी करने में दो महीने की देरी की, ताकि चल रहे युद्ध के बीच ईरान को इजरायल के खिलाफ झूठा प्रोपेगैंडा फैलाने से रोका जा सके। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया कि वे स्वस्थ हैं और बेहतरीन शारीरिक स्थिति में हैं। उन्होंने आगे बताया कि उनके प्रोस्टेट में एक छोटी सी मेडिकल समस्या थी, जिसका पूरी तरह से इलाज हो चुका है। प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआत प्रोस्टेट ग्रंथि से होती है। यह मूत्राशय के ठीक नीचे स्थित अखरोट के आकार का एक छोटा अंग है और यह एक आम कैंसर है जिसका अक्सर इलाज संभव होता है, विशेष रूप से तब जब इसका पता शुरुआती चरण में चल जाए।इसे भी पढ़ें: सीजफायर के बीच अमेरिका ने ईरान का तेल टैंकर जब्त किया, पेंटागन ने किया खुलासानेतन्याहू ने बताया कि एक साल से भी ज़्यादा समय पहले, बढ़े हुए बिनाइन प्रोस्टेट की सफल सर्जरी के बाद से वे रेगुलर मेडिकल निगरानी में थे। हालाँकि, उन्होंने यह भी बताया कि पिछली जाँच के दौरान डॉक्टरों को उनके प्रोस्टेट में एक सेंटीमीटर से भी छोटा एक धब्बा मिला था। उन्होंने एक्स पर कहा कि जाँच करने पर पता चला कि यह एक मैलिग्नेंट ट्यूमर का बहुत शुरुआती चरण था, जो बिल्कुल भी फैला नहीं था और न ही उसके मेटास्टेसिस हुए थे। नेतन्याहू ने बताया कि डॉक्टरों ने उन्हें दो विकल्प दिए: इसे रेगुलर निगरानी के ज़रिए मैनेज करना, जैसा कि बहुत से लोग करते हैं, या इसे पूरी तरह से खत्म करने के लिए टारगेटेड इलाज करवाना। उन्होंने दूसरा विकल्प चुना। इसे भी पढ़ें: भारत के लिए शेर की तरह दहाड़ा इजरायल, हिल गई दुनिया!जेरूसलम के हदासाह अस्पताल के डॉक्टरों और मेडिकल टीमों को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा, &quot;मैंने कुछ छोटे-मोटे इलाज करवाए, एक किताब पढ़ी और अपना काम जारी रखा। वह धब्बा पूरी तरह से गायब हो गया। उन्होंने अपने संदेश का समापन मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना के साथ किया; यह युद्ध अब अपने आठवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>तेल की राजनीति या विनाश की साजिश? Donald Trump की China यात्रा से पहले ड्रैगन पर सबसे बड़ा प्रहार</title>
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<description><![CDATA[ वैश्विक कूटनीति से लेकर घरेलू राजनीति तक, वर्तमान परिदृश्य एक बड़े ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बन रहा है। एक तरफ जहाँ अमेरिका ने चीनी रिफाइनरियों और जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगाकर ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने की कोशिश की है, वहीं दूसरी तरफ इस्लामाबाद में होने वाली परोक्ष &#039;ईरान-यूएस वार्ता&#039; भविष्य के नए समीकरणों की ओर इशारा कर रही है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता के बादल अभी भी छाए हुए हैं, ऐसे में US ने एक चीन-स्थित तेल रिफाइनरी और 40 अन्य शिपिंग कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इन पर ईरानी तेल के ट्रांसपोर्ट में कथित तौर पर शामिल होने का आरोप है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा से कुछ ही हफ़्ते पहले उठाया गया है, जहाँ वे अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग से मुलाक़ात करेंगे। इसे भी पढ़ें: Rashmirathi Mahotsav | सीएम योगी ने जातिवाद के विरुद्ध किया आगाह, कहा- &#039;राष्ट्रकवि दिनकर का साहित्य आज भी राष्ट्र का मार्गदर्शक&#039;एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिस चीनी रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगाया गया है, वह हेंगली पेट्रोकेमिकल है, जो बंदरगाह शहर डालियान में स्थित है। इस सुविधा की क्षमता प्रतिदिन 400,000 बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की है, जो इसे चीन की सबसे बड़ी स्वतंत्र रिफाइनरियों में से एक बनाती है।हेंगली 2023 से ईरानी तेल को प्रोसेस कर रही है, जिससे उसे लाखों डॉलर का राजस्व कमाने में मदद मिली है। एडवोकेसी ग्रुप &#039;यूनाइटेड अगेंस्ट न्यूक्लियर ईरान&#039; ने पिछले साल फरवरी में कहा था कि यह फर्म ईरानी तेल के दर्जनों चीनी खरीदारों में से एक है।चीन ने अभी तक US के इस कदम पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन वह ईरानी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। 28 फरवरी को मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने से पहले, चीन जहाजों के एक &#039;शैडो फ्लीट&#039; (गुपचुप बेड़े) के ज़रिए 80 से 90 प्रतिशत ईरानी तेल का आयात करता था। इन जहाजों का मूल स्रोत अस्पष्ट बना हुआ है, लेकिन एसोसिएटेड प्रेस ने कहा कि ये संभवतः मलेशिया जैसे देशों से चीन आते हैं।ईरान के खिलाफ US के प्रतिबंधUS ने पहले भी देशों को ईरानी तेल खरीदने के खिलाफ चेतावनी दी थी। इस महीने की शुरुआत में एक मीडिया ब्रीफिंग में, US के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने देशों से कहा था, &quot;अगर आप ईरानी तेल खरीद रहे हैं, अगर ईरानी पैसा आपके बैंकों में जमा है, तो हम अब आप पर &#039;सेकेंडरी सैंक्शन&#039; (द्वितीयक प्रतिबंध) लगाने को तैयार हैं, जो एक बहुत ही कड़ा कदम है।&quot;बाद में, ट्रेजरी विभाग ने चीन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान और हांगकांग को भी एक पत्र भेजा, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि ईरान के साथ व्यापार करने के लिए US उन पर सेकेंडरी सैंक्शन लगा सकता है। उसने उन पर ईरानी अवैध गतिविधियों को अपने वित्तीय संस्थानों के ज़रिए चलने देने का भी आरोप लगाया था। इसे भी पढ़ें: AAP में महाविस्फोट! Swati Maliwal विवाद से Raghav Chadha के विद्रोह तक, कैसे बिखर गया केजरीवाल का कुनबा?इसके जवाब में, ईरान ने इन प्रतिबंधों की आलोचना की और उन्हें हटाने की मांग की। ईरान को चीन का भी समर्थन मिला, भले ही बीजिंग की बड़ी कंपनियाँ और बैंक अमेरिका के प्रतिबंधों का पालन करते हैं; इस बारे में वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंग्यू ने कहा कि &quot;इससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था और नियमों को कमज़ोर किया जाता है, सामान्य आर्थिक और व्यापारिक आदान-प्रदान में बाधा आती है, और चीनी कंपनियों तथा व्यक्तियों के वैध अधिकारों और हितों का उल्लंघन होता है।&quot; ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:57:11 +0530</pubDate>
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<title>White House के दावे से Iran का इनकार, कहा&#45; US से सीधी बैठक नहीं, Pakistan करेगा मध्यस्थता।</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के पाकिस्तान पहुंचने के कुछ ही देर बाद उनकी सरकार ने स्पष्ट किया कि इस यात्रा के दौरान अमेरिका सरकार के प्रतिनिधियों के साथ उनकी कोई सीधी बातचीत नहीं होगी।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘ईरान और अमेरिका के बीच कोई बैठक होने की योजना नहीं है।’’
बाकाई ने कहा कि इसके बजाय पाकिस्तानी अधिकारी दोनों प्रतिनिधिमंडलों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान कराएंगे।
बाकाई ने ‘‘अमेरिका द्वारा थोपे गए आक्रामक युद्ध को समाप्त कराने के लिए’’ पाकिस्तान सरकार की ‘‘लगातार मध्यस्थता और सद्भावनापूर्ण प्रयासों’’ के लिए उसे धन्यवाद दिया।
अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ ने शुक्रवार को इससे पहले कहा था कि उसके दूत अराघची से मुलाकात करेंगे। ]]></description>
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<title>एशिया&#45;प्रशान्त: सभी उम्र के लोगों के लिए समावेशी समाजों पर सहमति</title>
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<description><![CDATA[ एशिया और प्रशान्त के देशों की सरकारों ने सामाजिक विकास को मज़बूत करने, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करने और अधिक समावेशी विकास को बढ़ावा देने का संकल्प लिया है. यह क़दम ऐसे समय उठाया गया है, जब क्षेत्र असमानता, जनसांख्यिकीय बदलावों और सामाजिक सुरक्षा की कमियों जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:56:31 +0530</pubDate>
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<title>भारत: प्लास्टिक का प्रयोग घटाने पर ज़ोर, हर व्यक्ति की है अहम भूमिका</title>
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<description><![CDATA[ प्लास्टिक से फैल रहे प्रदूषण की समस्या किसी एक देश तक सीमित नहीं है और इसका सामना करने के लिए विशाल पैमाने पर हर व्यक्ति के शामिल होने की ज़रूरत महसूस की जाती है. इस समस्या की गम्भीरता को देखते हुए, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम - UNEP ने, प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए ठोस सामूहिक कार्रवाई की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा है कि केवल रीसायकलिंग से समस्या का समाधान नहीं होगा. अब ज़रूरत है कि उत्पादों और पैकेजिंग में प्लास्टिक का उपयोग घटाया जाए, उन्हें नए सिरे से तैयार किया जाए, और पुनः उपयोग को बढ़ावा दिया जाए. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:56:31 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान&#45;इसराइल युद्धविराम की अवधि बढ़ी, ईरान में चिकित्सा सामग्री की कमी</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राज्य अमेरिका ने वॉशिंगटन डीसी में हुई वार्ता के बाद, इसराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम की अवधि को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा की है. वहीं, ईरान में कई सप्ताह तक जारी रहे हिंसक टकराव के बाद नाज़ुक परिस्थितियों में युद्धविराम लागू है लेकिन वहाँ अति-आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा और ज़रूरी चिकित्सा सामग्री की क़िल्लत होने की आशंका है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:56:28 +0530</pubDate>
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<title>लेबनान: यूएन सहायता मिशन का दौरा, हर क़दम पर तबाही के चिन्ह</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के एक मानवीय राहत मिशन ने हिंसक टकराव से ग्रस्त लेबनान के दक्षिणी इलाक़े का दौरा करने के बाद बताया है कि वहाँ विशाल पैमाने पर बर्बादी और विशाल आवश्यकताएँ नज़र आई हैं.  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:56:28 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump का बड़ा बयान: Iran के खिलाफ &amp;apos;परमाणु विकल्प&amp;apos; खारिज, बोले&#45; नौसैनिक नाकाबंदी 100% सफल</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि परमाणु हथियार का इस्तेमाल &quot;किसी के भी खिलाफ कभी नहीं&quot; किया जाना चाहिए। उनका यह स्पष्टीकरण उन कई अटकलों के बीच आया है कि अमेरिका, इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर विचार कर रहा है, क्योंकि मध्य पूर्व में युद्ध लगातार खिंचता जा रहा है। इसे भी पढ़ें: चेहरा जल गया, बाल उड़ गये, मुंह खुल नहीं रहा... ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई बहुत बुरी स्थिति,  प्लास्टिक सर्जरी की तैयारीव्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए, 79 वर्षीय अमेरिकी नेता ने यह भी दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अमेरिका का &quot;पूर्ण नियंत्रण&quot; है, जहाँ से दुनिया के कच्चे तेल का लगभग पाँचवाँ हिस्सा गुजरता है; हालाँकि उन्होंने कहा कि वाशिंगटन ने जानबूझकर इसे बंद कर दिया है ताकि ईरान पर दबाव बढ़ाया जा सके और वह बातचीत की मेज पर आए और शांति समझौते को स्वीकार करे। इसे भी पढ़ें: जब तक मुसलमानों को न्याय नहीं मिल जाता, भारत विश्वगुरु नहीं बन सकता: असदुद्दीन ओवैसी का बड़ा बयान&quot;ऐसा बेवकूफी भरा सवाल क्यों पूछा जाएगा?... नहीं, मैं इसका इस्तेमाल नहीं करूँगा। किसी को भी परमाणु हथियार का इस्तेमाल करने की इजाज़त कभी नहीं दी जानी चाहिए,&quot; अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, और एक बार फिर इस बात पर ज़ोर दिया कि इस्लामिक गणराज्य के पास परमाणु बम नहीं हो सकता।अपनी टिप्पणियों में, ट्रंप ने यह भी दोहराया कि ईरानी सेना पूरी तरह से हार चुकी है और उनके खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी &quot;100 प्रतिशत असरदार&quot; है, साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी अर्थव्यवस्था &quot;ठीक नहीं चल रही है&quot;। ट्रंप ने कहा कि ईरान शांति समझौता करना चाहता है, लेकिन उन्हें यकीन नहीं है कि उनका नेतृत्व कौन कर रहा है, क्योंकि उनका नेतृत्व पूरी तरह से खत्म हो चुका है।जब उनसे पूछा गया कि युद्ध कब तक जारी रहने की संभावना है, तो ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पहले चार हफ़्तों में ही ईरान को सैन्य रूप से पस्त कर दिया था। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान समझौता करने में नाकाम रहता है, तो वह बाकी बचे 25 प्रतिशत लक्ष्यों को भी सैन्य रूप से खत्म कर देंगे। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ने पहले ही उन 78 प्रतिशत लक्ष्यों को हासिल कर लिया है जिन पर वह हमला करना चाहता था।उन्होंने कहा &quot;मैंने उन्हें एक मौका दिया। मैं सबसे अच्छा समझौता करना चाहता हूँ। मैं अभी भी समझौता कर सकता हूँ। क्या आप जानते हैं कि अगर मैं अभी पीछे हट जाऊँ, तो भी हमें ज़बरदस्त सफलता मिली है। उन्हें दोबारा खड़ा होने में 20 साल लग जाएँगे, लेकिन मैं ऐसा नहीं करना चाहता। मैं चाहता हूँ कि यह समझौता हमेशा कायम रहे। उन्होंने आगे कहा &quot;हम जलडमरूमध्य को खुलवा देंगे। अभी हमने इसे बंद रखा है। जलडमरूमध्य पर हमारा पूरा नियंत्रण है... वे इसे 3 दिन पहले ही खोल देते। वे हमारे पास आए और कहा, &#039;हम जलडमरूमध्य खोलने पर सहमत हैं&#039;। मेरे अलावा मेरे सभी लोग खुश थे। मैंने कहा, &#039;एक मिनट, अगर हम जलडमरूमध्य खोलते हैं, तो इसका मतलब है कि वे हर दिन 500 मिलियन डॉलर कमाएँगे&#039;। मैं नहीं चाहता कि वे हर दिन 500 मिलियन डॉलर कमाएँ, जब तक कि वे इस मामले को सुलझा न लें। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 11:48:00 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Donald, Trump, का, बड़ा, बयान:, Iran, के, खिलाफ, परमाणु, विकल्प, खारिज, बोले-, नौसैनिक, नाकाबंदी, 100, सफल</media:keywords>
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<title>सीजफायर के बीच अमेरिका ने ईरान का तेल टैंकर जब्त किया, पेंटागन ने किया खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ इधर अमेरिकी सेना ने हिंद महासागर में ईरानी तेल की तस्करी से जुड़े एक और टैंकर मैजेस्टिक एक्स को जब्त किया। पेंटागन ने इस बात की पुष्टि भी कर दी। अमेरिकी सेना ने ईरानी तेल की तस्करी से जुड़े एक और टैंकर को ज्त कर लिया है। जिससे ईरान के साथ तनाव और बढ़ गया। यह घटना ईरान के अर्धसैनिक बल रिवोलशनरी गार्ड्स की ओर से हॉर्मोज स्टेट में दो जहाजों पर नियंत्रण करने के एक दिन बाद हुई। अमेरिकी रक्षा विभाग ने हिंद महासागर में ज्त किए गए टैंकर मैजेस्टिक एक्स के डेक पर अमेरिकी सेना का वीडियो फुटेज जारी किया है। जहाज ट्रैकिंग डाटा से पता चला कि मैजेस्टिक एक्स हिंद महासागर में श्रीलंका और इंडोनेशिया के बीच स्थित है। लगभग उसी स्थान पर जहां अमेरिकी सेना द्वारा पहले ज्त किया गया तेल टैंकर टिफानी था। ईरानी राष्ट्रपति ने बताया कि दोनों देशों के बीच इसलिए बातचीत नहीं हो पा रही क्योंकि अमेरिका की कथनी और करनी में अंतर है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump का बड़ा बयान: Iran के खिलाफ &#039;परमाणु विकल्प&#039; खारिज, बोले- नौसैनिक नाकाबंदी 100% सफलईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेसियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की ओर से ईरानी नेतृत्व में कट्टरपंथियों और मध्यम मार्गी के बीच आंतरिक कलह के दावों को खारिज करते हुए बड़ा बयान दिया है। पेजेशियन ने ईरान की जनता को एकजुट बताया और कहा कि ईरान क्रांतिकारी है। उधर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराची ने कहा है कि इजराइल की आतंकी हत्याएं ईरान को कमजोर करने में पूरी तरह विफल रही हैं। देश के सैन्य और कूटनीतिक प्रयास एक दूसरे के साथ पूरी तरह से तालमेल से काम कर रहे हैं और ईरानी जनता पहले से ज्यादा एकजुट है। तो भारत ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइज़री जारी की है। खासकर वो लोग जो ईरान जाने का प्लान कर रहे हैं। ईरान ना जाने की सलाह दी गई है। ईरान की यात्रा नहीं करने की सलाह दी गई है। हवाई और जमीनी दोनों ही रास्तों से जाने से बचने के लिए कहा गयाहै और जो लोग वहां रह रहे हैं उनसे अपील की गई है कि जल्द से जल्द ईरान छोड़ दें भारतीय दूतावास से समन्वय बनाकर रखें। इसे भी पढ़ें: 1 मिनट में 450000 राउंड फायर, चीन की नई मशीनगन पूरा बवाल है!मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा समय में युद्ध विराम लागू होने के बावजूद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। ऐसे में ईरान और भारत के बीच कुछ उड़ाने शुरू होने की रिपोर्ट के बीच तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइज़री जारी की है। भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि वह हवाई या सड़क मार्ग से ईरान की यात्रा नहीं करें। जमीनी मार्गों के जरिए देश छोड़ें। तनाव के कारण हवाई क्षेत्र में प्रतिबंध और परिचालन संबंधी अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। जिससे ईरान के लिए और वहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन प्रभावित हो रहा है। रूस के समारा शहर में ड्रोन अटैक में एक शख्स की मौत हो गई।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 11:47:59 +0530</pubDate>
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<title>Turkey ने अचानक क्यों तान दी मिसाइलें? इजरायल के खिलाफ बड़ी लामबंदी, क्या करेंगे एर्दोगान</title>
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<description><![CDATA[ तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान का दो साल पुराना एक भाषण हाल ही में इंटरनेट पर फिर से वायरल हो गया। इस भाषण में उन्होंने कहा था कि तुर्की को इजरायल के खिलाफ सख्त रुख अपनाना चाहिए। लेकिन अब इसे इंटरनेट पर ऐसे फैलाया गया जैसे उन्होंने इजरायल पर सैन्य हमले की कोई नई धमकी दी हो। इजरायल का समर्थन करने वाले कुछ एक्स अकाउंट्स ने इसका गलत अनुवाद करके इस दावे को फैलाया। देखते ही देखते इजरायल और अमेरिका के कई मशहूर लोगों ने भी इसे सच मान लिया और शेयर करने लगे। जल्द ही यह झूठी खबर बड़े न्यूज़ चैनलों और अखबारों तक भी पहुँच गई। &#039;द टेलीग्राफ&#039; जैसी बड़ी न्यूज़ एजेंसी ने भी इस खबर को छापा, हालांकि बाद में सच्चाई पता चलने पर उन्होंने इसे हटा लिया। जब यह साबित हो गया कि यह दावा पूरी तरह झूठा है, तब भी इजरायल की कुछ मीडिया ने इस पर बात करना बंद नहीं किया। कुछ खबरों में तो यहाँ तक कह दिया गया कि तुर्की &quot;अगला ईरान&quot; बन रहा है और भविष्य में तुर्की इजरायल के लिए एक बड़ा सैन्य खतरा बन सकता है।इसे भी पढ़ें: भारत के दुश्मन पर टूट पड़ा दुनिया का सबसे सनकी शख्स, हिली दुनिया!दरअसल, जब युद्ध का दौर शुरू हुआ था ईरान के साथ तब भी इजराइल से कुछ ऐसे ही मैसेज आए थे कि अगला टारगेट उनका अगला निशाना जो है वो तुर्की होगा। तो उसके बाद ये वैश्विक सुर्खियां भी बनी थी कि क्या इजराइल आगे जाकर कुछ ऐसा करने वाला है? क्योंकि लगातार जिस तरीके से ईरान पर हमने देखा या फिर आसपोस के वो तमाम कंट्रीज हो चाहे सीरिया की बात करें या फिर लेबनान की बात करें या तमाम दूसरे देशों की बात करें। ऐसे में इजराइल और तुर्की के बीच भी आने वाले समय में कुछ इस तरीके का देखा जा सकता है। इसे भी पढ़ें: सीजफायर के बीच अमेरिका ने ईरान का तेल टैंकर जब्त किया, पेंटागन ने किया खुलासातुर्की के जानकार इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट जैसे नेताओं के बयानों पर कड़ी नजर रख रहे हैं। बेनेट ने खुले तौर पर तुर्की को एक &#039;बड़ा खतरा&#039; बताया है और इशारा किया है कि तुर्की &quot;अगला ईरान&quot; बन सकता है। तुर्की में इन बातों को सिर्फ राजनीतिक जुमलेबाजी नहीं माना जा रहा है। इसे इजरायल की सोच में आ रहे एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, जिसकी चर्चा इजरायली मीडिया में भी हो रही है। 7 अक्टूबर से पहले, गाजा का मुद्दा तुर्की में सबके लिए एक जैसा नहीं था। सरकार के समर्थकों के लिए यह भावनाओं से जुड़ा था, लेकिन विपक्ष इसे सिर्फ राष्ट्रपति एर्दोगान की विदेश नीति का एक हिस्सा मानता था, न कि पूरे देश का मुद्दा। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। हाल के सर्वे बताते हैं कि तुर्की के लगभग एक-तिहाई लोग अब इजरायल को अपने लिए एक सीधा खतरा मानते हैं। यह डर सिर्फ इजरायल की बयानबाजी से नहीं, बल्कि ईरान और लेबनान में उनके आक्रामक सैन्य हमलों को देखकर पैदा हुआ है। इसका नतीजा यह हुआ है कि तुर्की की आम जनता (विपक्ष के समर्थकों सहित) में इजरायल के खिलाफ भारी गुस्सा भर गया है। आज 93% तुर्की नागरिक इजरायल को नापसंद करते हैं। कई लोगों को तो यह भी डर है कि अगर ईरान हार गया, तो अगला निशाना तुर्की हो सकता है।इसे भी पढ़ें: भारत आने वाले जहाज पर कब्जा, ईरान पर एक्शन तेज!लोगों की इस सोच ने तुर्की की राजनीति को भी बदल दिया है। पिछले एक साल में तुर्की का पूरा फोकस अपने देश को अंदर से मजबूत करने और बाहरी दबावों से बचने पर रहा है। हालांकि खुले तौर पर इसे &#039;इजरायल से लड़ाई की तैयारी&#039; नहीं कहा गया है, लेकिन इस नीति के पीछे यह डर साफ है कि इजरायल में तुर्की के खिलाफ नफरत अब काफी गहरी और पक्की होती जा रही है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 11:47:58 +0530</pubDate>
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<title>भारत आने वाले जहाज पर कब्जा, ईरान पर एक्शन तेज!</title>
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<description><![CDATA[ भारत आ रहे एक जहाज एपामिस को ईरान ने अपने कब्जे में ले लिया। उसे अपने कब्जे में लेकर वो ईरान चला गया। इसको लेकर गरमा गर्मी बढ़ गई है। एपामिंडोस को ईरान ले जाए जाने पर और उस पर हुई गोलीबारी को लेकर भारत का जवाब अब सामने आया है। भारत ने इस मामले में इतनी जानकारी दी है कि इन जहाजों में जो भारतीय क्रू मेंबर सवार थे वो पूरी तरह से सुरक्षित हैं। भारत का कहना है कि यह जहाज विदेशी मूल के थे। ऐसे में इस पर अभी ज्यादा रिपोर्ट भारत के पास मौजूद नहीं है। दो विदेशी जहाज पर फायरिंग हुई थी। उस पे कुछ हमारे भारतीय क्रू मेंबर्स नाविक थे। वो लोग सुरक्षित हैं। और यह दो जो जिस पे फायरिंग हुई है, विदेशी जहाज हैं। विदेशी जहाज है और लेकिन मैं यह कहना चाहूंगा कि ईरान की सरकार से हमारा हमारा लगातार बातचीत चल रही है ताकि जो हमारे वहां पर शेष जहाज हैं वो सुरक्षित भारत आए। दरअसल ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया था कि तीन कंटेनर जहाज ईरान ने कब्जा कर लिए हैं।इसे भी पढ़ें: Donald Trump के Pentagon में बड़ी उथल-पुथल, नौसेना सचिव के इस्तीफे पर Iran ने ली चुटकीइसमें लाइबेरिया के झंडे वाले एपांडोस भी शामिल था। इसके अलावा पवानामा के झंडे वाले एमएससी फ्रांसका और यूफोरिया के रूप में तीसरे जहाज की पहचान सामने आई थी। और इन सबके बीच आईआरजीसी के जवान इन जहाजों को अपने कब्जे में लेते हुए देखे गए थे। इसके बाद भारत ने प्रतिक्रिया दी है कि भारतीय क्रू मेंबर जो इस जहाज में हैं वो सुरक्षित हैं और भारत और ईरान में लगातार बातचीत चल रही है। वहीं इससे इधर अगर बात करें तो नई दिल्ली में भी इसको लेकर एक्शन तेज है। ब्रिक्स को लेकर होने वाली बैठकों से इधर अब भारत और ईरान की एक और बड़ी मुलाकात दिल्ली में हुई है। जो भारत की साउथ सेक्रेटरी डॉ. नीना मल्होत्रा हैं। उन्होंने ईरान के राजदूत से मुलाकात की है और मौजूदा हालात को लेकर उनसे एक गहन चर्चा की गई है। दोनों पक्ष इस बात पर राजी हुए हैं कि द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने के लिए लगातार संपर्क में रहना जरूरी है। वहीं इन सबके बीच मौजूदा परिस्थितियों को लेकर भी दोनों देशों के बीच एक गहन चर्चा हुई है। कुल मिलाकर जिस तरह से स्ट्रेट ऑफ हार्मोस में हालात बने हुए हैं उन सबके बीच भारत की कोशिश यह है कि जो जहाज भारत आ रहे हैं उन्हें सुरक्षित निकाला जा सके। इसे भी पढ़ें: जर्मनी ने भारत को दिया बाहुबली..मोदी-राजनाथ का तगड़ा खेल, चीन-अमेरिका हैरानअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब यह भी आदेश दे दिया है कि ईरान के तमाम ऐसे जहाज जो हारमूस में घूम रहे हैं और माइंस बिछाने का काम कर रहे हैं या फिर दूसरे जहाजों पर हमला करने की कोशिश कर रहे हैं उनको चुन-च कर अमेरिका खत्म करे। कुल मिलाकर हारमूस पर जहां एक तरफ तनातनी बरकरार है। वहीं दूसरी तरफ भारत और ईरान लगातार अपने-अपने मामलों को सुलटाने में लगे हुए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 11:47:58 +0530</pubDate>
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<title>Siege of Iran | अमेरिका ने भेजा तीसरा विमानवाहक पोत, ट्रंप बोले&#45; &amp;apos;हमारी नाकाबंदी को पार करना नामुमकिन&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर &quot;पूर्ण सैन्य वर्चस्व&quot; का दावा करते हुए क्षेत्र में तीसरे विमानवाहक पोत की तैनाती की पुष्टि की है। USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (CVN 77) अब हिंद महासागर और मध्य-पूर्व के रणनीतिक जलक्षेत्र में पहुंच चुका है, जिससे ईरान पर दबाव अपने चरम पर पहुंच गया है।USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश की तैनातीअमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, निमिट्ज़-श्रेणी का यह विशालकाय पोत 23 अप्रैल को अफ्रीका के पूर्वी तट से गुजरते हुए हिंद महासागर में दाखिल हुआ।सैन्य शक्ति: इस पोत पर दर्जनों आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल सिस्टम और हजारों सैन्यकर्मी तैनात हैं।त्रिकोणीय घेराबंदी: यह पोत पहले से तैनात USS जेराल्ड आर. फोर्ड और USS अब्राहम लिंकन के साथ मिलकर ईरान के समुद्री रास्तों की निगरानी करेगा।रणनीतिक उद्देश्य: &#039;द वॉशिंगटन पोस्ट&#039; की रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष-विराम के समय का उपयोग अमेरिकी सेना ने अपने हथियारों को फिर से लोड करने और जहाजों की स्थिति बदलने के लिए किया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर फिर से हमले शुरू किए जा सकें।अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने X (पहले Twitter) पर एक बयान में कहा, &quot;निमिट्ज़-श्रेणी का विमानवाहक पोत USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (CVN 77) 23 अप्रैल को अमेरिकी सेंट्रल कमांड के ज़िम्मेदारी वाले क्षेत्र में, हिंद महासागर में गश्त कर रहा है।&quot; बयान में यह भी जोड़ा गया कि यह विमानवाहक पोत अफ्रीका के पूर्वी तट के पास से गुज़र रहा था। इसे भी पढ़ें: Turkey ने अचानक क्यों तान दी मिसाइलें? इजरायल के खिलाफ बड़ी लामबंदी, क्या करेंगे एर्दोगानUSS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश इस क्षेत्र में USS जेराल्ड आर. फोर्ड और USS अब्राहम लिंकन के साथ शामिल होगा। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि बुश के उद्देश्य क्या होंगे, लेकिन एक अधिकारी के हवाले से &#039;द वॉशिंगटन पोस्ट&#039; ने बताया कि अमेरिकी सेना ईरान पर अपने हमले फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी ज़िक्र किया गया है कि ईरान के साथ हुए संघर्ष-विराम ने सेना को मध्य-पूर्व में &quot;जहाज़ों और विमानों की स्थिति बदलने और उन्हें फिर से हथियारों से लैस करने&quot; का समय दिया है।ईरान की नौसैनिक नाकाबंदीहालांकि, इस क्षेत्र में बुश का आगमन अमेरिका द्वारा ईरान की नाकाबंदी को और मज़बूत करने की एक चाल के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रंप के अनुसार, इस नाकाबंदी का मकसद ईरान को आर्थिक रूप से कमज़ोर करना और उसकी अर्थव्यवस्था पर इतना दबाव डालना है कि वह शांति समझौते को स्वीकार करने के लिए मजबूर हो जाए। लेकिन ईरान ने अमेरिका की &quot;मनमानी&quot; मांगों को मानने से साफ इनकार कर दिया है और इस नाकाबंदी को पूरी तरह से गैर-कानूनी करार दिया है। इसे भी पढ़ें: ममता को जिताने के लिए घरों से निकले मुस्लिम, लेकिन पलट गया खेल!इसके बावजूद, ट्रंप ने दावा किया है कि यह नाकाबंदी &quot;100 प्रतिशत असरदार&quot; है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ चल रहे इस संघर्ष को खत्म करने के लिए उन पर &quot;किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं&quot; है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि ईरान के साथ कोई भी समझौता तभी किया जाएगा, जब वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के सर्वोत्तम हितों के अनुरूप होगा। &quot;यह बहुत ही टॉप सीक्रेट है... हमने नाकेबंदी के साथ जो किया है, वह कमाल का है, और कोई भी इसे पार नहीं कर पाता। कोई भी इसे पार करना नहीं चाहता; कोई कोशिश भी नहीं कर रहा... हमारा इस पर पूरा नियंत्रण है... ईरान ने सऊदी अरब, UAE, कतर, कुवैत, बहरीन और अन्य कई जगहों पर हमला किया—किसी को भी इसकी उम्मीद नहीं थी,&quot; अमेरिकी राष्ट्रपति ने गुरुवार को वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 11:47:57 +0530</pubDate>
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<title>Explained Weak Pentagon | वर्चस्व खत्म! कमजोर हो गया अमेरिका! आधुनिक हथियारों का भंडार समाप्त, चीन&#45;रूस से लड़ने के काबिल नहीं बचा?</title>
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<description><![CDATA[ न्यूयॉर्क टाइम्स और पेंटागन के अंदरूनी आकलन एक डरावनी तस्वीर पेश कर रहे हैं। फरवरी 2026 के अंत से शुरू हुए ईरान विरोधी अभियान की तीव्रता इतनी अधिक है कि अमेरिका जिस गति से हथियार खर्च कर रहा है, उस गति से उनका उत्पादन संभव नहीं हो पा रहा है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिका की वैश्विक रक्षा क्षमता में &#039;रणनीतिक छेद&#039; हो सकते हैं। अमेरिकी सेना ने उन स्टील्थ हथियारों का उपयोग किया है जिन्हें &#039;ग्रेट पावर कॉम्पिटिशन&#039; (चीन के साथ युद्ध) के लिए बचाकर रखा गया था:JASSM-ER क्रूज मिसाइलें: अमेरिका ने अपने कुल भंडार से लगभग 1,100 मिसाइलें दाग दी हैं। अब केवल 1,500 शेष हैं। यह चीन के साथ संभावित संघर्ष के लिए सबसे अहम हथियार माना जाता है। टोमाहॉक मिसाइलें: 1,000 से ज्यादा मिसाइलें दागी जा चुकी हैं। एक मिसाइल की कीमत 34 करोड़ रुपये ($3.6M) है। यह खपत अमेरिका की वार्षिक खरीद क्षमता से 10 गुना ज्यादा है। पैट्रियट इंटरसेप्टर: 1,200 से अधिक मिसाइलों का उपयोग हुआ है, जबकि अमेरिका एक साल में केवल 600 ऐसी मिसाइलें बना पाता है।पेंटागन के दस्तावेज़ों का हवाला देते हुए न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि गोपनीय अनुमानों से परिचित अधिकारियों के अनुसार, यह अमेरिका के कुल भंडार का एक बड़ा हिस्सा है, जिसके बाद अब लगभग 1,500 मिसाइलें ही बची हैं।इसके अलावा, सेना ने 1,000 से ज़्यादा &#039;टोमाहॉक&#039; क्रूज़ मिसाइलें दागी हैं, जो सालाना खरीदी जाने वाली मिसाइलों की संख्या से लगभग दस गुना ज़्यादा है। हर टोमाहॉक मिसाइल की कीमत लगभग 3.6 मिलियन डॉलर (लगभग 34 करोड़ रुपये) है, जो लगातार चल रहे सैन्य अभियानों से पड़ने वाले आर्थिक दबाव को दिखाता है। पेंटागन ने 1,200 से ज़्यादा &#039;पैट्रियट इंटरसेप्टर&#039; मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया है, जिनकी कीमत लगभग 4 मिलियन डॉलर (37.6 करोड़ रुपये) प्रति मिसाइल है। यह संख्या 2025 में पूरे साल में उत्पादित होने वाली लगभग 600 मिसाइलों से भी ज़्यादा है। ज़मीन से मार करने वाले सिस्टम, जिनमें &#039;प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइलें&#039; और ATACMS शामिल हैं, उन्हें भी बड़ी संख्या में तैनात किया गया है, जिससे हथियारों का भंडार और भी कम हो गया है।हथियारों के इस्तेमाल की गति सालाना उत्पादन स्तर से कहीं ज़्यादा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इन आधुनिक और महंगे सिस्टम को फिर से भरने में कई साल लग सकते हैं, जिससे अमेरिका की वैश्विक रक्षा तैयारियों में गंभीर कमियाँ रह सकती हैं।बढ़ती लागत और सैन्य अभियानों का दबावइस संघर्ष की आर्थिक लागत चौंकाने वाली रही है। &#039;अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट&#039; जैसे समूहों के स्वतंत्र अनुमानों के अनुसार, इस पर कुल खर्च 28 बिलियन डॉलर (2.6 लाख करोड़ रुपये) से लेकर 35 बिलियन डॉलर (3.30 लाख करोड़ रुपये) के बीच रहा है, जो लगभग 1 बिलियन डॉलर (9,424 करोड़ रुपये) प्रतिदिन के बराबर है। लड़ाई के शुरुआती दो दिनों में ही, अमेरिकी सेना ने कथित तौर पर $5.6 बिलियन (5.6 अरब डॉलर) के गोला-बारूद का इस्तेमाल किया।इतना ज़्यादा खर्च होने के बावजूद, पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर कुल इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद की जानकारी नहीं दी है। उसने सिर्फ़ इतना बताया है कि 38 दिनों तक चले इस संघर्ष के दौरान 13,000 से ज़्यादा ठिकानों पर हमले किए गए। विश्लेषकों का कहना है कि यह आँकड़ा इस्तेमाल किए गए हथियारों की असल संख्या से काफ़ी कम है, क्योंकि कई ठिकानों पर एक से ज़्यादा बार हमले करने पड़े थे।इस युद्ध की वजह से सेना को अपने साज़ो-सामान का भी अप्रत्याशित नुकसान उठाना पड़ा है। नेवी सील टीम 6 के एक बचाव अभियान के दौरान, सेना ने दो MC-130 मालवाहक विमानों और कम से कम तीन MH-6 हेलीकॉप्टरों को नष्ट कर दिया, ताकि कोई भी संवेदनशील तकनीक ईरान के हाथों में न पड़ जाए। इस नुकसान का अनुमान USD 275 मिलियन (2,591 करोड़ रुपये) लगाया गया है।  JASSM-ER (जॉइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल – एक्सटेंडेड रेंज)— गहरी मार करने वाली स्टील्थ क्रूज़ मिसाइल— इस्तेमाल की गईं: 1,100 मिसाइलेंटोमाहॉक क्रूज़ मिसाइलें— समुद्र से लॉन्च किया जाने वाला लंबी दूरी का सटीक मार करने वाला हथियार— इस्तेमाल की गईं: 1,000 से ज़्यादा मिसाइलेंप्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल (PrSM)— नई पीढ़ी की लंबी दूरी की ज़मीनी मिसाइल— HIMARS सिस्टम के ज़रिए दागी जाती हैATACMS (आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम)— छोटी से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल— बड़ी संख्या में इस्तेमाल की गईं (सटीक आंकड़े नहीं बताए गए)पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें (PAC-3)— आने वाली मिसाइलों/ड्रोन को मार गिराने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं— इस्तेमाल की गईं: 1,200 से ज़्यादाTHAAD इंटरसेप्टर— उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली— यूनिटों को दक्षिण कोरिया से मध्य पूर्व भेजा गयानौसेना की हवाई रक्षा मिसाइलें (SM-2, SM-6 आदि)— जहाज़ों और ठिकानों की रक्षा के लिए इस्तेमाल की जाती हैं— पैट्रियट और THAAD के साथ बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की गईंHIMARS (हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम)— PrSM और दूसरे रॉकेट लॉन्च करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला प्लेटफॉर्महवा से गिराए जाने वाले बम और सटीक मार करने वाले गोला-बारूद— 13,000 से ज़्यादा लक्ष्यों पर हमला करने के लिए हज़ारों की संख्या में इस्तेमाल किए गएहमलावर ड्रोन और निगरानी ड्रोनऑपरेशन के दौरान नष्ट किए गए विमान:— 2 MC-130 मालवाहक विमान— 3 MH-6 हेलीकॉप्टर— ईरान द्वारा कब्ज़ा किए जाने से रोकने के लिए नष्ट किए गएवैश्विक तत्परता संबंधी चिंताएंन्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, गोला-बारूद के तेज़ी से खत्म होने के कारण अमेरिका को दूसरे क्षेत्रों से हथियार और उपकरण मंगाने पड़े हैं, जिससे उसकी वैश्विक सैन्य स्थिति कमज़ोर हुई है। US सेंट्रल कमांड के तहत चल रहे ऑपरेशनों में मदद के लिए यूरोप और एशिया, दोनों जगहों से आपूर्ति को दूसरी तरफ भेजा गया है।यूरोप में, अधिकारी चेतावनी दे रहे हैं कि गोला-बारूद के कम होते भंडार रूस के खिलाफ NATO ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 11:47:56 +0530</pubDate>
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<title>कभी भारत आकर देखो...ट्रंप को ईरान का खुला चैलेंज</title>
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<description><![CDATA[ भारत को नर्क बताने वाले ट्रंप कभी इंडिया आकर देखो फिर बोलना ट्रंप पर यह डिप्लोमेटिक सर्किज्म ईरान ने किया है। ट्रंप ने सोचा था कि उन्होंने एक बयान देकर बहस छेड़ दी है। लेकिन ईरान ने वाइल्ड कार्ड एंट्री लेकर पूरा गेम ही पलट दिया। ऐसा मालूम दे रहा है कि दुनिया की कूटनीति में कोई हाई वोल्टेज रियलिटी शो चल रहा हो जिसका टाइटल है हेलहोल्ड डिप्लोमेसी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत चीन को नर्क बताने वाला पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर किया। भारत ने पहले तो संयम दिखाया। चीन ने दूरी बनाए रखी और तभी ईरान ने मंच पर आते ही ऐसा जवाब दिया कि पूरा नैरेटिव पलट गया। यह सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं थी बल्कि नहले पर दहला था। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इस विवाद में भारत के समर्थन में सबसे तीखी प्रतिक्रिया जो आई है वो ईरान से आई है। वही ईरान जिसके साथ अमेरिका के रिश्ते वैसे ही हैं जैसे कढ़ाई में उबलती चाय है। भारत विरोधी बयान देखकर अब ट्रंप भी मियार रहे हैं। इसे भी पढ़ें: सीजफायर के बीच अमेरिका ने ईरान का तेल टैंकर जब्त किया, पेंटागन ने किया खुलासा23 अप्रैल को ट्रंप की एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। यह पोस्ट अमेरिकी रेडियो होस्ट माइकल सेवेज के कार्यक्रम से जुड़ा था। विषय था अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता यानी बर्थ राइट सिटीजनशिप। इसमें कहा गया था कि यहां एक बच्चा यानी अमेरिका में एक बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है। फिर वे पूरे परिवार को चीन या भारत जैसे नर्क जैसे देश से नर्क जैसे देश से ले आते हैं। पोस्ट में भारतीय और चीनी इमीग्रेंट्स को लैपटॉप वाले गैंगस्टर तक कहा गया। यहां तक कि यह भी आरोप लगाए गए कि यह लोग टेक इंडस्ट्री में अमेरिकियों की नौकरियां खाए ले रहे हैं। यानी अमेरिका की घरेलू बहस में भारत और चीन को यूं घसीटा गया जैसे घर की अंदरूनी बहस का ठीकरा पड़ोसी के सिर फोड़ दिया जाए। इसके बाद कहानी में एंट्री होती है ईरान की। ईरान ने सिर्फ भारत और चीन का बचाव ही नहीं किया बल्कि ट्रंप पर सीधा और बेहद तीखा हमला बोला। हैदराबाद स्थित ईरानी रूतावास ने सोशल मीडिया पर लिखा भारत और चीन सभ्यता की जन्मस्थली है। इसे भी पढ़ें: ममता को जिताने के लिए घरों से निकले मुस्लिम, लेकिन पलट गया खेल!ईरान ने साफ कर दिया कि भारत और चीन को अपमानित करना सिर्फ कूटनीति का सभ्यता नहीं बल्कि ऐतिहासिक अज्ञानता भी है। आखिर भारत और चीन वो सभ्यताएं हैं जिन्होंने दुनिया को दर्शन योग, आयुर्वेद और ना जाने क्या-क्या दिया है। इन्हें हेल होल कहना ठीक वैसा ही है जैसे ताजमहल को बस एक पुरानी बिल्डिंग बोल देना। इन सबके बाद अमेरिका बैकफुट पर भी आता दिखा। अमेरिका दूता अमेरिकी दूतावास ने तुरंत सफाई जारी की। दूतावास के प्रवक्ता क्रिस्टोफर एलेम्स ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को महान देश करार दिया है और कहा है कि भारत एक महान देश है और वहां मेरे बहुत अच्छे दोस्त शीर्ष यानी टॉप पर हैं। यह बयान ट्रंप की पिछली पोस्ट से काफी अलग था। इससे यह साफ हुआ कि अमेरिका भारत जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार को खोना नहीं चाहता।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 11:47:56 +0530</pubDate>
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<title>India&#45;Nepal Border | भारत&#45;नेपाल सीमा पर यात्रियों के सामान पर लगेगा शुल्क? विदेश मंत्रालय ने स्थिति की स्पष्ट</title>
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<description><![CDATA[ भारत से नेपाल जाने वाले यात्रियों द्वारा ले जाए जाने वाले सामान पर नेपाल सरकार द्वारा सीमा शुल्क लगाए जाने की खबरों के बीच, भारत के विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि वह इस पूरे घटनाक्रम पर काठमांडू के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘मंत्रालय ने उन खबरों पर ध्यान दिया है जिनमें नेपाल के अधिकारियों द्वारा सीमा पार करने वाले यात्रियों से शुल्क वसूलने की बात कही जा रही है।’’इसे भी पढ़ें: Pawan Khera की मुश्किलें बढ़ीं! Guwahati High Court ने अग्रिम ज़मानत याचिका की खारिज, असम CM की पत्नी ने दर्ज कराया है केस जायसवाल ने कहा, ‘‘हम समझते हैं कि नेपाल सरकार ने यह कदम मुख्य रूप से अनौपचारिक व्यापार और तस्करी पर अंकुश लगाने के इरादे से उठाया है। हमने नेपाल के एक वरिष्ठ अधिकारी का बयान भी देखा है, जिसमें कहा गया है कि व्यक्तिगत या घरेलू उपयोग के लिए सामान ले जाने वाले आम नागरिकों को कोई परेशानी नहीं होगी। हम इन घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए हैं और संपर्क में हैं।’’
भारत से नेपाल जाने वाले यात्रियों के सामान पर जल्द सीमा शुल्क लगने के दावों संबंधी सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के बारे में पूछे जाने पर, प्रवक्ता ने कहा कि यह प्रावधान नया नहीं है, बल्कि नेपाल इसे अब लागू कर रहा है।इसे भी पढ़ें: Goa CM Pramod Sawant का 53वां जन्मदिन, उपचुनाव में हार से दूसरी बार CM बनने तक का Political सफरभारत-नेपाल संबंधों पर प्रभावभारत और नेपाल के बीच खुली सीमा (Open Border) होने के कारण रोज़ाना हज़ारों लोग रोटी-बेटी के संबंधों और व्यापार के लिए सीमा पार करते हैं। ऐसे में किसी भी नए शुल्क का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय ने यह सुनिश्चित करने की बात कही है कि दोनों देशों के बीच होने वाली सामान्य आवाजाही और द्विपक्षीय संबंधों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 11:47:55 +0530</pubDate>
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<title>Vishwakhabram: Japan ने 75 साल पुरानी परम्परा तोड़ डाली, दुनिया के लिए खोल दिया अपने हथियारों का बाजार</title>
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<description><![CDATA[ जापान ने अपनी परंपरागत शांति आधारित नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाते हुए अब अन्य देशों को घातक हथियार बेचने की अनुमति दे दी है। प्रधानमंत्री साने ताकाइची के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय न केवल जापान की सुरक्षा नीति में बड़े बदलाव का संकेत देता है, बल्कि एशिया प्रशांत क्षेत्र की सामरिक संरचना को भी गहराई से प्रभावित कर सकता है। हम आपको बता दें कि यह कदम द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने उस संवैधानिक ढांचे से स्पष्ट विचलन है, जिसमें जापान ने युद्ध और सैन्य आक्रामकता से दूरी बनाने की प्रतिज्ञा की थी।द्वितीय विश्व युद्ध में पराजय के बाद जापान ने 1947 में एक नया संविधान अपनाया था, जिसे मुख्य रूप से अमेरिका के मार्गदर्शन में तैयार किया गया था। इस संविधान के अनुच्छेद 9 के तहत जापान ने युद्ध करने के अधिकार का त्याग कर दिया और स्वयं को एक शांतिवादी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। इससे पहले जापान बीसवीं सदी के पहले हिस्से में कई संघर्षों में उलझा रहा था, जिनमें 1905 का रूस जापान युद्ध और 1931 से 1945 तक चीन के साथ चला लंबा युद्ध शामिल है। हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिरने तथा टोक्यो पर भीषण बमबारी के बाद जापान ने आत्मसमर्पण किया और इसके बाद उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर हो गई थी।इसे भी पढ़ें: North Korea Cluster Bomb Test | किम जोंग उन ने दागीं ऐसी मिसाइलें जो आसमान से बरसाएंगी तबाही! थर्राए अमेरिका और जापान!1951 में जापान और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग संधि हुई और 1954 में जापान ने आत्म रक्षा बल की स्थापना की, जिसका उद्देश्य केवल देश की रक्षा तक सीमित था। इन बलों पर हथियारों और सैन्य गतिविधियों को लेकर कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे।हालांकि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय हालात ने जापान को अपनी सुरक्षा नीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया। 2009 में सामूहिक आत्म रक्षा के अधिकार की पुनर्व्याख्या की गई, जिससे जापान को अपने सहयोगी देशों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने की अनुमति मिली। 2015 में विदेशी सैन्य अभ्यासों में भागीदारी के नियमों को आसान किया गया। 2022 में जापान ने लंबी दूरी की मिसाइलों की खरीद कर प्रतिआक्रमण क्षमता विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया।इसके साथ ही जापान ने रक्षा व्यय को भी तेजी से बढ़ाया है। 2024 में उसने जीडीपी के एक प्रतिशत की सीमा को समाप्त कर दिया और 2027 तक इसे दो प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। 2026 के बजट में जापान का रक्षा खर्च लगभग 52 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में बहुत बड़ी वृद्धि दर्शाता है। 2016 से 2025 के बीच जापान के रक्षा व्यय में लगभग 76 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण चीन की बढ़ती आक्रामकता और उत्तर कोरिया की उग्र सैन्य गतिविधियां मानी जा रही हैं। इन चुनौतियों ने जापान को अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने और अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया है।हम आपको बता दें कि जापान के पास अत्याधुनिक रक्षा तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाले हथियार प्रणालियां हैं। उसकी पनडुब्बियां, जैसे सोरयू और तैगेई वर्ग, दुनिया की सबसे उन्नत पनडुब्बियों में गिनी जाती हैं। माया वर्ग के युद्धपोत अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं, जबकि इजुमो वर्ग के हेलीकाप्टर विध्वंसक छोटे विमान वाहक के रूप में कार्य करते हैं। इसके अलावा जापान वायु रक्षा मिसाइल, तोप प्रणाली, जमीनी युद्ध वाहन और समुद्री गश्ती विमान भी बनाता है।अब जब जापान ने हथियार निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटा दिया है, तो वह वैश्विक रक्षा बाजार में एक बड़ा खिलाड़ी बन सकता है। इससे उसके रक्षा उद्योग को नया बाजार मिलेगा और वह अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगा। इस संदर्भ में भारत और जापान के संबंध विशेष महत्व रखते हैं। दोनों देश क्वॉड समूह के सदस्य हैं, जिसमें अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं। यह समूह हिंद प्रशांत क्षेत्र को मुक्त, खुला और सुरक्षित बनाए रखने के उद्देश्य से कार्य करता है। भारत और जापान के बीच पहले से ही मजबूत सैन्य सहयोग है और दोनों देशों की तीनों सेनाएं नियमित अभ्यास करती हैं।हाल के वर्षों में दोनों देशों ने रक्षा तकनीक के सह विकास और सह उत्पादन पर भी जोर दिया है। 2024 में भारत ने जापान के साथ यूनिकॉर्न नामक उन्नत रेडार और संचार प्रणाली के लिए समझौता किया, जो युद्धपोतों की पहचान क्षमता को कम करती है। इसके अलावा छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान परियोजना में भारत की भागीदारी पर भी चर्चा चल रही है। इसके अलावा, भारत जापान के साथ मिलकर जेट इंजन विकसित करने की संभावना भी तलाश रहा है। भारतीय नौसेना जापान के यूएस 2 उभयचर विमान में भी रुचि दिखा चुकी है। दोनों देशों के बीच अगस्त 2025 में सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा भी हुई, जिसमें रक्षा उत्पादन और क्षमता निर्माण में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।भारत की तेजी से बढ़ती रक्षा निर्माण क्षमता भी जापान के लिए अवसर लेकर आई है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों के तहत भारत ने रक्षा उत्पादन में महत्वपूर्ण प्रगति की है। भारत अब चिनूक, अपाचे, एफ 18, एफ 16 और सी 130 जैसे विमानों के लिए संरचनात्मक भाग बना रहा है। निजी क्षेत्र भी सक्रिय रूप से हथियार प्रणाली बना रहा है, जिनका उपयोग वास्तविक संघर्षों में हो रहा है। इस स्थिति में जापानी कंपनियां भारत में उत्पादन कर वैश्विक बाजार में अपने उत्पाद बेच सकती हैं। इससे दोनों देशों को आर्थिक और सामरिक लाभ मिलेगा।सामरिक दृष्टि से देखा जाये तो जापान का यह कदम एशिया प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगा। इससे चीन के प्रभाव को चुनौती मिल सकती है और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में नई प्रतिस्पर्धा उत्पन्न हो सकती है। साथ ही, यह कदम अमेरिका के साथ जापान के सुरक्षा संबंधों को भी और मजबूत करेगा। वहीं भारत के लिए यह अवसर है कि वह जापान के साथ अपने रक्षा सहयोग को और गहरा करे और नई तकनीकों तक पहुंच बनाए। इससे ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 11:47:54 +0530</pubDate>
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<title>चेहरा जल गया, बाल उड़ गये, मुंह खुल नहीं रहा... ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई बहुत बुरी स्थिति,  प्लास्टिक सर्जरी की तैयारी</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरें दुनिया को चौंका रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई जीवित और सचेत तो हैं, लेकिन वे हवाई हमलों में लगी गंभीर चोटों के कारण पूरी तरह बिस्तर पर हैं। उनके चेहरे और शरीर पर आए जख्म इतने गहरे हैं कि वे न तो सार्वजनिक रूप से सामने आ पा रहे हैं और न ही बोल पा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक बड़े हवाई हमले में पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों की मृत्यु हो गई थी। इस हमले के करीब छह हफ्ते बाद मोजतबा खामेनेई ने सर्वोच्च नेता का पद संभाला, लेकिन वे खुद भी इस हमले में बाल-बाल बचे और बुरी तरह घायल हो गए।चेहरे पर प्लास्टिक सर्जरी की ज़रूरत&#039;द न्यूयॉर्क टाइम्स&#039; की एक रिपोर्ट के अनुसार, वे इस समय डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ़ से घिरे हुए हैं, जो हवाई हमलों में लगी गंभीर चोटों का इलाज कर रहे हैं। उनकी हालत से परिचित ईरान के चार वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि उनके एक पैर की तीन सर्जरी हो चुकी हैं और वे अब प्रोस्थेटिक (कृत्रिम अंग) का इंतज़ार कर रहे हैं। उनके एक हाथ की भी सर्जरी हुई है और धीरे-धीरे उनके हाथ में जान वापस आ रही है। चेहरे और होठों पर गंभीर रूप से जलने के कारण उन्हें बोलने में दिक्कत हो रही है, और उम्मीद है कि उन्हें प्लास्टिक सर्जरी की ज़रूरत पड़ेगी।इसे भी पढ़ें: AI की दुनिया में हड़कंप! Anthropic के &#039;सीक्रेट मॉडल&#039; में बड़ी सेंध, Security पर उठे गंभीर सवाल मोजतबा खामेनेई कैसे बातचीत करते हैंअपने पद पर होने के बावजूद, IRGC के वरिष्ठ कमांडर और सरकार के शीर्ष अधिकारी उनसे मिलने नहीं जाते हैं। हालाँकि, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन, जो खुद एक हार्ट सर्जन हैं, स्वास्थ्य मंत्री के साथ मिलकर उनके इलाज में शामिल रहे हैं।रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि मोजतबा खामेनेई के साथ बातचीत हाथ से लिखे और सीलबंद संदेशों के ज़रिए होती है। ये संदेश भरोसेमंद संदेशवाहकों की एक कड़ी के ज़रिए पहुँचाए जाते हैं, जो चुपके से सड़क के रास्ते यात्रा करते हैं। जवाब भी इसी तरीके से भेजे जाते हैं।चैथम हाउस की सनम वकील ने कहा कि अभी उनका पूरी तरह से नियंत्रण नहीं है। उन्होंने बताया कि हालाँकि वे औपचारिक रूप से फ़ैसलों पर दस्तखत करते हैं, लेकिन उन्हें इस समय ऐसे नतीजे दिखाए जाते हैं जो पहले ही तय हो चुके होते हैं।इसे भी पढ़ें: France का भारतीयों को तोहफा, Airport Transit Visa खत्म, Europe की यात्रा हुई और आसान हाल ही में, संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ ने एक टीवी संबोधन में कहा कि वाशिंगटन के परमाणु प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया खामेनेई के साथ साझा की गई थी, और उनके विचारों पर भी गौर किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी सुरक्षा, उनकी शारीरिक स्थिति और उन तक पहुँचने में होने वाली मुश्किलों को देखते हुए, फ़िलहाल कुछ अहम फ़ैसले सैन्य नेताओं को सौंप दिए गए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:11:21 +0530</pubDate>
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<title>सुरक्षा परिषद: आपराधिक गुटों की हिंसा से त्रस्त हेती, ‘एक अहम मोड़ पर खड़ा है’</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि कैरीबियाई क्षेत्र में स्थित देश, हेती में आपराधिक गुटों की हिंसा पर लगाम कसने, मानवीय संकट से निपटने और राष्ट्रीय चुनावों के लिए रास्ता तैयार करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें कुछ हद तक प्रगति के संकेत मिल रहे हैं, मगर स्थिति अब भी नाज़ुक बनी हुई है. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:11:08 +0530</pubDate>
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<title>मध्य पूर्व में तेल व गैस संकट के बाद अब खनिजों की कमी पर बढ़ी चिन्ता</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में युद्ध के कारण होर्मुज़ जलक्षेत्र (Strait of Hormuz) में उत्पन्न हुए नौवहन संकट ने एक नए ख़तरे को जन्म दिया है और वो है - रणनैतिक खनिजों की औचक कमी जिनकी, दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को चलाने में अहम भूमिका है. अब इन खनिजों को हासिल करने करने के लिए देशों के बीच होड़ मची हुई है. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:10:58 +0530</pubDate>
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<title>युद्ध के बीच भारत का बड़ा धमाका, चीन&#45;पाकिस्तान रह गए हैरान!</title>
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<description><![CDATA[ आसमान से आने वाले खतरे चाहे वो फाइटर जेट हो, मिसाइल हो या स्टिल्ट तकनीक से लैस दुश्मन के हथियार। इन सबका जवाब अब भारत ने अपने ही घर में तैयार कर लिया है और दिलचस्प बात यह है कि यह सिस्टम ना सिर्फ ताकतवर है बल्कि लागत के मामले में भी चौंकाने वाला है। जिस सिस्टम को दुनिया S400 एयर डिफेंस सिस्टम के नाम से जानती है उसी के मुकाबले भारत ने अब अपना स्वदेशी विकल्प तैयार कर लिया है जिसका नाम है प्रोजेक्ट कुश। दावा है कि यह सिस्टम लगभग आधी लागत में तैयार हुआ है और कई मामलों में ज्यादा लचीला और प्रभावी भी है। सबसे बड़ी बात यह कि भारतीय वायुसेना ने इस पर भरोसा जताते हुए एक साथ पांच स्क्वाडन का आर्डर दे दिया है। इस पूरे ऑर्डर की कीमत करीब ₹21,700 करोड़ है। अगर तुलना करें तो S400 के पांच स्क्वाडन के लिए भारत को करीब ₹45,000 करोड़ खर्च करने पड़े थे। यानी कीमत आधी लेकिन क्षमता में कोई समझौता नहीं। इसे भी पढ़ें: भारत-चीन रिश्तों में नई उड़ान? Air China ने शुरू की Beijing-Delhi डायरेक्ट फ्लाइट्सप्रोजेक्ट कुछ आखिर है क्या?यह एक मल्टीलेयर एयर डिफेंस सिस्टम है। यानी अलग-अलग दूरी पर आने वाले खतरों को रोकने के लिए इसमें तीन तरह की मिसाइलें शामिल है। M1, M2 और M3। M1 इंटरसेप्टर करीब 150 कि.मी. तक और M2 इंटरसेप्टर करीब 250 कि.मी. तक। M3 इंटरसेप्टर 350 से 400 कि.मी. तक यानी दुश्मन चाहे दूर हो या नजदीक हो। यह हर दूरी पर उसे रोकने की तैयारी कर लेता है। इन मिसाइलों की कीमत में भी एक बड़ा फैक्टर है। जहां S400 की एक मिसाइल करीब ₹100 करोड़ तक की पड़ती है, तो वहीं प्रोजेक्ट कुश की मिसाइलें लगभग 40 से ₹50 करोड़ के बीच है। लेकिन असली ताकत सिर्फ लागत में नहीं बल्कि नियंत्रण में है। इसका मिशन एल्गोरिदम भारत के पास है। कोर सॉफ्टवेयर भी भारत के पास है और बाहरी किल स्विच का खतरा नहीं है। यानी अगर कभी हालात बदलते हैं तो भारत को किसी दूसरे देश की तरफ देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी और यही वो अंतर है जो इसे S400 से थोड़ा अलग बनाता है। S400 जैसे सिस्टम में सोर्स कोड पूरी तरह सप्लायर देश के पास रहता है। इसे भी पढ़ें: जानलेवा Heatwave में AC बना आग का गोला, Greater Noida में फटा कंप्रेसर, ये 5 गलतियां कभी न दोहराएंयह इतना खास क्यों माना जा रहा है?अपडेट मेंटेनेंस और बदलाव सबके लिए उसी पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन प्रोजेक्ट कुछ में पूरा नियंत्रण भारत के पास है और यही आधुनिक युद्ध की सबसे बड़ी जरूरत है। इसमें स्मार्ट अपडेट सिस्टम है। यानी सिस्टम समय के साथ खुद को अपडेट कर सकता है। अब बात करते हैं इसके नेटवर्क और इंटीग्रेशन की। प्रोजेक्ट कुश को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि यह भारतीय वायुसेना के मौजूदा और भविष्य के सिस्टम के साथ आसानी से काम कर सके। अगर इसके नेटवर्क इंटीग्रेशन इंटीग्रेटेड एयर कमांड कंट्रोल की बात करें तो मेने अबक भविष्य के अबवॉक प्लेटफार्म Tejas MK2 ग्राउंड रडार नेटवर्क यानी पूरा सिस्टम एक नेटवर्क से जुड़ा होगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:03:46 +0530</pubDate>
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<media:keywords>युद्ध, के, बीच, भारत, का, बड़ा, धमाका, चीन-पाकिस्तान, रह, गए, हैरान</media:keywords>
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<title>1 मिनट में 450000 राउंड फायर, चीन की नई मशीनगन पूरा बवाल है!</title>
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<description><![CDATA[ युद्ध की दुनिया में एक कहावत है जिसके पास आग सबसे ज्यादा उसी का दबदबा सबसे ज्यादा होता है और अब चीन ने वही आग तैयार कर ली है जो आसमान से आती तबाही को भी बीच रास्ते में रोक सके। दावा है कि इंसानी इतिहास के सबसे ताकतवर मशीन गन अब चीन के हाथ लग चुकी है और कांसेप्ट जुड़ा है मेटल स्टॉर्म से। 1 मिनट में 45 लाख गोलियां, हर सेकंड 7500 राउंड और स्पीड इतनी कि सात मैग से तेज हाइपरसोनिक मिसाइल भी बुलेट वॉल में फंस सकती है। यानी अब हमला सिर्फ ऊपर से नहीं नीचे से जवाब भी उतना ही घातक मिलेगा। अमेरिका का फायरिंग सीआईडब्ल्यूएस 4500 राउंड प्रति मिनट फायर करता है। तो वहीं दूसरी तरफ चीन सीधा 100 गुना ज्यादा फायर पावर का दावा करता है। लेकिन इतनी ताकत के साथ आती है सबसे बड़ी चुनौती गोला और बारूद की। लाखों गोलियां हर मिनट भरना और लगभग नामुमकिन होता है। यही चीन ने सबसे बड़ा खेल कर दिया है।इसे भी पढ़ें: भारत रिकॉर्ड तोड़ चीन-यूरोप को बनाया दीवाना, यूरोप भी बमबम, अमेरिका की निकाली काट!बता दें कि डिस्पोजेबल बैरल सिस्टम उसने लगा दिया है और हर बैरल से पहले फायर करो और पूरा बैरल ही बदल दो। सबसे खतरनाक अपडेट है इलेक्ट्रॉनिक कांटेक्टस ट्रिगर ना कोई मैकेनिकल लिमिट है ना कोई स्पीड की रुकावट है। 17.5 माइक्रो सेकंड में फायरिंग यानी कि पलक झपकने से भी ज्यादा तेज। 1990 में ऑस्ट्रेलिया के माइक ओडव ने मेटल स्टॉम का सपना देखा था। 36 बैरल 10 लाख राउंड प्रति मिनट का टेस्ट और 2006 में चीन ने इसे टेक के लिए 100 बिलियन डॉलर का ऑफर भी दिया था। लेकिन अमेरिका इस बीच में कूद पड़ा था।इसे भी पढ़ें: भारत-चीन रिश्तों में नई उड़ान? Air China ने शुरू की Beijing-Delhi डायरेक्ट फ्लाइट्सलेकिन टेक्निकल दिक्कतों की वजह से 2012 में प्रोजेक्ट खत्म हो गया था। लेकिन चीन फिर भी रुका नहीं। ताइवान के रिसर्चर्स, नई टेक्नोलॉजी, बॉक्स टाइप रोटरी सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक ट्रिगर और हाई स्पीड फायरिंग। अभी कांसेप्ट फिर से जिंदा हो चुका है। अब जरा सोचिए जब युद्ध में मिसाइलें आएंगी और सामने से गोलियों की दीवार खड़ी हो जाएगी तो लड़ाई सिर्फ ताकत की नहीं होगी, टेक्नोलॉजी की भी होगी।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:03:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>जंग हो या मंदी नहीं रुकेगी भारत की इकोनॉमी, UN रिपोर्ट ने कर दिया बड़ा खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया जल रही है, कहीं युद्ध है तो कहीं आर्थिक संकट। लेकिन इसी बीच एक देश है जो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा और उस देश का नाम है भारत और अब इस पर मुर खुद यूएन ने लगाई है। आज हम बात करेंगे उस रिपोर्ट की जिसने पूरी दुनिया को चौंका कर रख दिया। यूएन की नई रिपोर्ट कहती है कि भारत साल 2026-27 में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। लेकिन सवाल यह है दोस्तों कि जब दुनिया मंदी से जूझ रही है तब भारत आगे कैसे निकल गया है? दरअसल आज दुनिया के हालात देखिए। इजराइल और अमेरिका का ईरान के साथ तनाव, रशिया का यूक्रेन के साथ युद्ध और अमेरिका चीन ट्रेड टेंशन। यानी हर तरफ अनिश्चितता लेकिन इन सबके बीच भारत की ग्रोथ रफ्तार धीमी नहीं पड़ी है। यूनाइटेड नेशन इकोनॉमिक एंड सोशल कमीशन फॉर एशिया एंड द पेसिफिक की रिपोर्ट के अनुसार साल 2026 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.4% रहेगी। साल 2027 में 6.6% रहेगी और इससे भी बड़ा आंकड़ा साल 2026 में भारत ने हासिल की 7.4 ग्रोथ यानी कि लगातार मजबूत प्रदर्शन। इसे भी पढ़ें: PM Modi पर विवादित बयान, EC Notice के बाद Kharge का तल्ख तेवर- शाम तक जवाब मिल जाएगादरअसल इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण है मजबूत घरेलू खपत। खासकर ग्रामीण इलाकों में यह डिमांड बढ़ी है। लोगों की खरीददारी बढ़ी है। इतना ही नहीं गुड एंड सर्विस टैक्स यानी कि जीएसटी में बड़ा सुधार हुआ है। बदलाव हुआ है। बिजनेस करना आसान हो गया है। इसके अलावा अमेरिका के टेरिफ लागू होने से पहले भारत के निर्यात में तेजी आई। इसके अलावा आईटी डिजिटल सर्विज भारत का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन रहा। अब आते हैं उस मुद्दे पर यानी कि डोनाल्ड ट्रंप ने साल 2025 में भारत पर 50% तक टेरिफ लगाया। अमेरिका को एक्सपोर्ट में आई 25% गिरावट। लेकिन इसके बावजूद भारत की इकॉनमी नहीं डगमगाई।  भारत का घरेलू बाजार बहुत मजबूत है। अब यूएन की रिपोर्ट में एक और बड़ा पॉइंट है। भारत में महंगाई कंट्रोल में रहेगी। साल 2026 में 4.4% साल 2027 में 4.3% लेकिन एफडीआई में गिरावट देखी गई है। एशिया प्रशांत में साल 2025 में 2% गिरावट दर्ज की गई फिर भी भारत बना रहा निवेश का बड़ा केंद्र। इसे भी पढ़ें: नकाब लगाकर हमला, कैसे होर्मुज में भारतीय जहाज ईरान ने किया कब्जा, देखें Videoभारत में आया लगभग 50 बिलियन का निवेश। साथ ही भारत दुनिया का सबसे बड़ा रेमिटेंस रिसीवर है। साल 2024 की बात करें तो 137 बिलियन भारत आया। लेकिन अमेरिका 1% टैक्स लगाने की योजना बना रहा है। जिससे थोड़ा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में 1.3 बिलियन ग्रीन जॉब्स है। इतना नहीं इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी के डाटा के मुताबिक सरकार की प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव स्कीम जो सोलर बैटरी और ग्रीन हाइड्रोजन इन सबको बढ़ावा दे रही है। खैर कुल मिलाकर तस्वीर बता रही है कि दुनिया संकट में घिरी हुई है लेकिन भारत स्थिर है। एक्सपोर्ट झटका खाता है लेकिन घरेलू बाजार समला रहता है। निवेश घटता है लेकिन नए सेक्टर उभरते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:03:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Israel&#45;Lebanon Ceasefire |  ट्रंप का सीज़फ़ायर ऐलान और हिज़्बुल्लाह की चुनौती! इज़राइल&#45;लेबनान का युद्धविराम 3 हफ्ते के लिए बढ़ा</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में दशकों पुराने संघर्ष को विराम देने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि इज़राइल और लेबनान ने मौजूदा सीज़फ़ायर (युद्धविराम) को तीन और हफ़्तों के लिए बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। व्हाइट हाउस के ओवल ऑफ़िस में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद ट्रंप ने इस कदम को &quot;अहम और ऐतिहासिक&quot; करार दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि यह फ़ैसला वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के ओवल ऑफ़िस में दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई एक बैठक के बाद लिया गया।इसे भी पढ़ें: AI की दुनिया में हड़कंप! Anthropic के &#039;सीक्रेट मॉडल&#039; में बड़ी सेंध, Security पर उठे गंभीर सवाल व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए, 79 वर्षीय रिपब्लिकन नेता ने यह भी संकेत दिया कि इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ़ आउन अगले कुछ हफ़्तों में वाशिंगटन में एक-दूसरे से मुलाक़ात कर सकते हैं। उन्हें &quot;महान लोग&quot; बताते हुए, ट्रंप ने कहा कि दोनों नेता एक-दूसरे के पड़ोसी हैं, लेकिन वे कभी एक-दूसरे से मिले नहीं हैं।उन्होंने कहा, &quot;हमारी लेबनान के बहुत बड़े अधिकारियों और इज़राइल के बहुत बड़े अधिकारियों के साथ एक शानदार बैठक हुई, और मुझे लगता है कि लेबनान के राष्ट्रपति और इज़राइल के प्रधानमंत्री, अगले कुछ हफ़्तों में यहाँ आएँगे।&quot;इसे भी पढ़ें: France का भारतीयों को तोहफा, Airport Transit Visa खत्म, Europe की यात्रा हुई और आसान ट्रंप, जिनके आस-पास उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो मौजूद थे, ने कहा, &quot;उन्होंने तीन और हफ़्तों के लिए, मेरा अंदाज़ा है, गोलीबारी न करने — यानी सीज़फ़ायर — पर सहमति जताई है। चलिए देखते हैं। हमें उम्मीद है कि ऐसा होगा। यह उनके बीच तो नहीं होगा, लेकिन हमें अभी भी हिज़्बुल्लाह के बारे में सोचना होगा।&quot;इज़राइल, लेबनान ने ट्रंप का शुक्रिया अदा कियाइज़राइल और लेबनान ने सीज़फ़ायर करवाने के लिए ट्रंप का शुक्रिया अदा किया है। अमेरिका में इज़राइल के राजदूत येचिएल लीटर ने कहा कि ये दोनों मध्य-पूर्वी देश अब भविष्य में अपने बीच शांति को औपचारिक रूप दे सकते हैं।इसी तरह, लेबनान की राजदूत नाडा हमादेह मोअवाद ने भी ट्रंप का शुक्रिया अदा किया और कहा कि उनकी मदद से, वे लेबनान को फिर से महान बना सकते हैं। वह शायद ट्रंप के &#039;मेक अमेरिका ग्रेट अगेन&#039; (अमेरिका को फिर से महान बनाओ) नारे का ज़िक्र कर रही थीं।इज़राइल ने लेबनान से हिज़्बुल्लाह को निहत्था करने की अपील कीहालाँकि सीज़फ़ायर को तीन और हफ़्तों के लिए बढ़ा दिया गया है, लेकिन इज़राइल ने लेबनान से हिज़्बुल्लाह को निहत्था करने की अपील की है, और इसे दोनों देशों के बीच शांति में एक &quot;बाधा&quot; बताया है। इज़राइल ने यह भी कहा कि लेबनान का &quot;भविष्य संप्रभुता, स्वतंत्रता और ईरानी कब्ज़े से आज़ादी वाला&quot; हो सकता है।इसी तरह, ट्रंप ने कहा है कि ईरान को हिज़्बुल्लाह को दी जाने वाली अपनी फंडिंग बंद करनी होगी, जिसे उन्होंने इस क्षेत्र में शांति के लिए &quot;ज़रूरी&quot; बताया है।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:03:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>दक्षिणी लेबनान में यूएन सहायता मिशन का दौरा, हर क़दम पर तबाही के चिन्ह</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के एक मानवीय राहत मिशन ने हिंसक टकराव से ग्रस्त दक्षिणी लेबनान का दौरा करने के बाद बताया है कि वहाँ विशाल पैमाने पर बर्बादी और विशाल आवश्यकताएँ नज़र आई हैं.  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:03:07 +0530</pubDate>
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<title>सुरक्षा परिषद: लीबिया में चुनाव व एकजुट संस्थाओं की दिशा में सुस्त प्रगति</title>
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<description><![CDATA[ लीबिया में कुछ पक्ष, राजनैतिक प्रक्रिया में भागेदारी या राजनैतिक वैधता पर आधारित नेतृत्व के विषय में जनता की आशाओं के प्रति अब भी बेपरवाही बरत रहे हैं. यूएन महाचसिव की विशेष प्रतिनिधि हैना टेटेह ने लीबिया में हालात पर चर्चा के लिए बुधवार को सुरक्षा परिषद की बैठक को सम्बोधित करते हुए यह बात कही है.  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:33:57 +0530</pubDate>
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<title>भारत रिकॉर्ड तोड़ चीन&#45;यूरोप को बनाया दीवाना, यूरोप भी बमबम, अमेरिका की निकाली काट!</title>
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<description><![CDATA[ अपना देश किस तरह से अलग-अलग सेक्टर्स में ऐसे काम कर रहा है जिसकी जानकारी आप तक कम आ पाती है। लेकिन दुनिया भर में उन सेक्टर्स में भारत का दबदबा साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। भारत इस मामले में अमेरिका, चाइना, यूरोप हर जगह अपना दम दिखा रहा है और जबरदस्त लाभ कमा रहा है और उस उद्योग का उस सेक्टर का विस्तार कर रहा है। आज भारत के सी फूड सेक्टर की जहां भारत ने इस फाइनेंसियल ईयर में जबरदस्त दबदबा दिखाने का काम किया है। ये जो रिकॉर्ड तोड़ सफलता मिली है। वैश्विक चुनौतियों का सामना जिस तरह से भारत ने किया है। इसको जरा समझाते हैं आपको। वित्त वर्ष जो है एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है। समुद्री उत्पाद निकास निर्यात विकास प्राधिकरण ने हालिया आंकड़ों में यह स्पष्ट किया है कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और व्यापारिक बाधाओं के बावजूद भारतीय समुद्री भोजन यानी कि सी फूड दुनिया भर में अपनी दम दिखा रहा है। भारत ने साल में 72325.82 करोड़ यानी कि 8.28 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निर्यात कर अपनी ताकत दिखाई है। इसे भी पढ़ें: भारत-चीन रिश्तों में नई उड़ान? Air China ने शुरू की Beijing-Delhi डायरेक्ट फ्लाइट्सबीते 5 वर्षों में लगातार भारत इसमें बढ़ने की दिशा में है। कोविड काल ने कैसे हिट किया था पूरी दुनिया को। 2020-21 के दौरान जो है वैश्विक लॉकडाउन लगा। लॉजिस्टिक की समस्याएं आई तो निर्यात में थोड़ी सुस्ती आई और उस समय यह निर्यात तकरीबन ₹43,000 करोड़ का रहा। तेजी से वापसी होती है 21-22 में। 22-23 में वैश्विक बाजार खुल जाते हैं। भारत ने जबरदस्त वापसी की। 22-23 में भारत ने पहली बार 8 अरब डॉलर के करीब पहुंचने का प्रयास किया और बीते 5 वर्षों में भारत ने पारंपरिक मछली पकड़ने के बजाय एक्वाकल्चर यानी कि झिंगा पालन पर ध्यान केंद्रित किया है। आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके। 2020 में जहां निर्यात करीब 12 से 13 लाख मेट्रिक टन था वो आज बढ़कर तकरीबन 20 लाख मेट्रिक टन है। यानी कि मात्रा के हिसाब से देखा जाए तो तकरीबन तकरीबन 50% का ग्रोथ दिखाई पड़ता है।  एक तो अमेरिकी टेरिफ भी लगा। तमाम तरह के दबाव बने। लेकिन उसके बावजूद भी भारत रुका नहीं और भारत ने जो है अमेरिका जो है भारत के झींगे का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। इसे भी पढ़ें: भारत के लिए अपने PM पर टूट पड़ा नेपाल! बालेन शाह के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहाइस साल के आंकड़े और टेरिफ का असर जो है वो दिख रहा है थोड़ा लेकिन उसके बावजूद भी जो है अमेरिका के बाजार में भारत के निर्यात की मात्रा जो है अह 19.8% रही और मूल्य 14.5% का जो है इसमें गिरावट आया। भारतीय वित्तीय निर्यातकों के लिए टेरिफ के कारण एक थोड़ा ये झटका रहा क्योंकि अमेरिका जो है भारत के कुल निर्यात का एक बड़ा सेक्टर है लेकिन भारत ने इसके बावजूद भी अपनी ग्रोथ बनाए रखी। मार्केट का डायवर्सिफिकेशन जिस तरीके से भारत ने किया उसने भारत को एक बड़ी सफलता दिलाई। इसके आंकड़े अगर हम आपको बताएं तो देखिए अमेरिका के अलावा भारत ने चीन और यूरोप पर बड़ा जोर दिया। अमेरिका की गिरावट को भारत ने अन्य क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन करके तब्दील कर लिया। कैसे? तो चाइना में इसकी भारतीय उत्पाद समुद्री उत्पाद की मांग जो है वो जबरदस्त उछाल देखने को मिली। 22.7% की वृद्धि हुई। चीन अब अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा ठिकाना बना। यूरोपीय संघ की अगर बात करें तो भारतीय गुणवत्ता मानकों पर भरोसा इन्होंने जताया है। वहां के निर्यात में 37.9% भारी बढ़त हुई है भारत की तरफ से। वहीं वियतना, थाईलैंड जैसे देश जो हैं वो भारत देशों को भी भारत ने 36.1% अधिक माल बेचा है। और सबसे बड़ी बात है कि भारत की इस सफलता का जो असली हीरो है वो फ्रोजन झिंगा रहा है। कुल 72335 325 करोड़ की कमाई में 47973 करोड़ सिर्फ झीगा से आए हैं। जो आंकड़े हैं। भारत का वन्नामाई झीगा अपनी गुणवत्ता के लिए दुनिया दुनिया भर में जाना जाता है और अब भारत जो है फ्रोजन मछली स्क्विड और कटल फिश के क्षेत्र में भी अपनी पकड़ लगातार मजबूत कर रहा है। वैश्विक रैंकिंग और कंपटीशन देखें तो समुद्री खाद्य निर्यात में भारत दुनिया के टॉप पांच देशों में बड़ी मजबूती से खड़ा है। भारत जो है झिंगा निर्यात में दुनिया में दूसरे या तीसरे स्थान पर रहता है क्योंकि इसके ऊपर इक्वाडोर और वियतनाम से उसे कड़ी टक्कर मिलती है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:32:13 +0530</pubDate>
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<title>अब Internet पर मंडरा रहा खतरा? Iran की समुद्री केबल और क्लाउड नेटवर्क को निशाना बनाने की चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव अब एक नए और अधिक खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने संकेत दिया है कि यदि तनाव बढ़ता है, तो फारस की खाड़ी में स्थित महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचा, विशेष रूप से समुद्री इंटरनेट केबल और क्लाउड नेटवर्क, उनके अगले निशाने पर हो सकते हैं। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पहले से ही बाधित है और वैश्विक ऊर्जा बाजार दबाव में है। आईआरजीसी से जुड़े मीडिया की रिपोर्टें क्षेत्र के डिजिटल ढांचे के रणनीतिक महत्व और संवेदनशीलता दोनों को रेखांकित करती हैं, जिससे संकेत मिलता है कि वैश्विक कनेक्टिविटी को सहारा देने वाली प्रणालियां भी संघर्ष की चपेट में आ सकती हैं।इंटरनेट और संचार के लिए होर्मुज का महत्वहोर्मुज जलडमरूमध्य न केवल एक महत्वपूर्ण वैश्विक तेल मार्ग है, बल्कि महाद्वीपों में इंटरनेट और डेटा यातायात ले जाने वाले पनडुब्बी संचार केबलों के लिए एक प्रमुख गलियारा भी है। आईआरजीसी से जुड़ी रिपोर्टों ने संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन और सऊदी अरब जैसे देशों में इन समुद्री केबलों और संबंधित क्लाउड बुनियादी ढांचे की पहचान की है, जिससे प्रभावी रूप से उन्हें संभावित दबाव बिंदु के रूप में चिह्नित किया गया है। किसी भी व्यवधान से व्यापक इंटरनेट बंद हो सकता है और कई क्षेत्रों में वित्तीय प्रणालियों, व्यवसायों और सरकारी कार्यों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।एक नाजुक युद्धविरामईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम के बावजूद तनाव बरकरार है, और संघर्ष पारंपरिक सैन्य लक्ष्यों से आगे बढ़कर डेटा केंद्रों और डिजिटल बुनियादी ढांचे तक फैल रहा है। ऐसे में यह चेतावनी जारी की गई है। समुद्री केबल, जो वैश्विक संचार की रीढ़ हैं, होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संकरे समुद्री मार्गों से गुजरने के कारण विशेष रूप से जोखिम में हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ महत्वपूर्ण केबलों को मामूली नुकसान भी मध्य पूर्व और उससे आगे के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को गंभीर रूप से बाधित कर सकता है, क्योंकि यह क्षेत्र इन मार्गों पर बहुत अधिक निर्भर है।नाकाबंदी जारी रहने के बीच होर्मुज में जहाजों पर हमलेईरान ने बुधवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन जहाजों पर गोलीबारी की और उनमें से दो को जब्त कर लिया, जिससे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में जहाजों के खिलाफ उसका अभियान और तेज हो गया। ये हमले डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम की अवधि बढ़ाने और ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी जारी रखने के एक दिन बाद हुए।अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध ने जलडमरूमध्य से होने वाले अधिकांश निर्यात को लगभग ठप कर दिया है। सामान्य परिस्थितियों में यह मार्ग विश्व के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा संभालता है, और इस गतिरोध का कोई स्पष्ट समाधान नजर नहीं आ रहा है। ईरानी मीडिया ने बताया कि रिवोल्यूशनरी गार्ड दोनों जहाजों को ईरान ले जा रहा है, जो तनाव बढ़ने का संकेत है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने कहा कि इन जहाजों को जब्त करने से युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन नहीं हुआ है।इस संघर्ष के कारण गैस की कीमतें इस क्षेत्र से बाहर भी काफी बढ़ गई हैं, और भोजन तथा अन्य कई तरह के सामानों की कीमतें भी बढ़ गई हैं। वैश्विक मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड की कीमत $100 प्रति बैरल के पार पहुँच गई है—जो संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तरों की तुलना में 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है—जबकि शेयर बाज़ार इस सबसे काफी हद तक अप्रभावित ही नज़र आए। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:32:12 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump का कड़ा रुख: Iran के साथ युद्ध खत्म करने की कोई &amp;apos;डेडलाइन&amp;apos; नहीं, नौसैनिक नाकेबंदी रहेगी जारी</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में गहराते संकट और अनिश्चितता के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए वे किसी जल्दबाजी में नहीं हैं। फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि उन पर शांति समझौते के लिए समय का कोई दबाव नहीं है, जिससे यह साफ हो गया है कि क्षेत्र में तनाव अभी लंबे समय तक बना रह सकता है। ट्रंप ने उन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि वे आगामी मध्यावधि चुनाव (midterms) को देखते हुए युद्ध को जल्द खत्म करना चाहते हैं। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Assembly Elections 2026 | तमिलनाडु का रण तैयार! सत्ता बरकरार रखने और बदलाव के बीच &#039;त्रिकोणीय&#039; मुकाबला, मतदान जारीफॉक्स न्यूज़ की मार्था मैककैलम के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, &quot;कोई &#039;समय सीमा&#039; तय नहीं थी और न ही कोई जल्दबाजी थी।&quot; &quot;लोग कहते हैं कि मैं मध्यावधि चुनावों (midterms) की वजह से इसे जल्द खत्म करना चाहता हूँ, लेकिन यह सच नहीं है।&quot;ट्रंप का यह स्पष्टीकरण उन कई रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें दावा किया गया था कि युद्धविराम सिर्फ एक अल्पकालिक विस्तार है। हालाँकि, व्हाइट हाउस ने यह स्पष्ट किया था कि कोई ऐसी समय सीमा तय नहीं की गई है जिसके भीतर ईरान को शांति प्रस्ताव पेश करना ही हो।व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने बुधवार को कहा, &quot;राष्ट्रपति ने ईरान का प्रस्ताव प्राप्त करने के लिए कोई पक्की समय सीमा तय नहीं की है, जैसा कि मैंने आज कुछ रिपोर्टों में देखा है। आखिरकार, समय सीमा कमांडर-इन-चीफ ही तय करेंगे।&quot; इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Assembly Elections 2026 | तमिलनाडु का रण तैयार! सत्ता बरकरार रखने और बदलाव के बीच &#039;त्रिकोणीय&#039; मुकाबला, मतदान जारी ईरान की नौसैनिक नाकेबंदीभले ही ट्रंप ने युद्धविराम को आगे बढ़ा दिया हो, लेकिन अमेरिकी सेना ने ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी है; इस कदम की तेहरान ने बार-बार आलोचना की है। अमेरिका होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों को साफ करने की भी तैयारी कर रहा है, लेकिन एसोसिएटेड प्रेस (AP) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को साफ करने में संभवतः कई महीने लग जाएँगे, जिससे दुनिया का लगभग पाँचवाँ हिस्सा कच्चा तेल गुज़रता है।इस घटनाक्रम से परिचित एक व्यक्ति का हवाला देते हुए AP ने कहा कि अमेरिकी सेना को बारूदी सुरंगों को साफ करने में कम से कम छह महीने लगेंगे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मंगलवार को हाउस आर्म्ड सर्विसेज़ कमेटी में हुई एक गोपनीय ब्रीफिंग के दौरान सांसदों को भी इस बारे में जानकारी दी गई थी।ईरान ने दो जहाज़ ज़ब्त किएइसी बीच, ईरान ने दो जहाज़ भी ज़ब्त कर लिए हैं, लेकिन व्हाइट हाउस ने कहा है कि इससे युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन नहीं होता, क्योंकि ये जहाज़ न तो अमेरिकी थे और न ही इज़राइली। फॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए, लेविट ने इस बात को भी दोहराया कि ईरान की नौसेना &#039;पूरी तरह से तबाह&#039; हो चुकी है और इस्लामिक रिपब्लिक ने &#039;तेज़ रफ़्तार गनबोट&#039; की मदद से इन जहाज़ों को ज़ब्त किया है।ईरान की तुलना &quot;डाकुओं के एक झुंड&quot; से करते हुए, व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी ने कहा कि ट्रंप द्वारा लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी उन जहाज़ों पर जारी है जो ईरान के बंदरगाहों पर आ रहे हैं और वहाँ से जा रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:32:11 +0530</pubDate>
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<title>Hormuz में हो गया बड़ा खेल, ईरान ने भारत आ रहे जहाज को रोका</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट से एक बड़ी खबर है जहां एक बार फिर से तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड यानी कि आईआरजीसी ने हॉर्मुज स्टेट में भारत आ रहे एक कंटेनरशिप को रोक कर अपने कब्जे में ले लिया है। यह वही हॉर्मोच स्टेट है जिसे दुनिया की सबसे अहम ऑयल सप्लाई लाइफलाइन माना जाता है और यहीं पर इस कारवाही ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। जिस जहाज को जब्त किया गया है, उसका नाम है एपामिनोस। यह जहाज लाइबेरिया के फ्लैग के तहत रजिस्टर्ड था। गुजरात के मुंद्रा पोर्ट की ओर जा रहा था। ईरानी नौसेना का दावा है कि इस जहाज के नेविगेशन सिस्टम से छेड़छाड़ की गई थी जिससे समुद्री सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता था और इसी आधार पर आईआरजीसी ने जहाज को इंटरसेप्ट किया और उसे अपने नियंत्रण में लेकर तट की ओर ले गई। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। खबर यह भी है कि इजराइल से जुड़े फ्रांसिस्का नाम के एक दूसरे जहाज को भी ईरान ने जब्त कर लिया है। इसके अलावा यूफोरिया नाम के जहाज पर हमला भी किया है। जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। पिछले 24 घंटे में घटनाओं की रफ्तार इतनी तेज हो रही है कि पूरा मिडिल ईस्ट इस बार फिर संभावित टकराव के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है।इसे भी पढ़ें: अब Internet पर मंडरा रहा खतरा? Iran की समुद्री केबल और क्लाउड नेटवर्क को निशाना बनाने की चेतावनी इससे पहले भी खबरें आई थी कि एक जहाज पर ईरान की ओर से फायरिंग हुई है। जबकि दूसरा जहाज ओमान के तट के पास हमले में क्षतिग्रस्त हो गया है। अब सवाल उठता है कि आखिर ईरान ऐसा क्यों कर रहा है? दरअसल स्टेट ऑफ हॉर्मुज स्टेट सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं बल्कि दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की धड़कन है। दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है और ऐसे में यहां कोई भी तनाव सीधे ग्लोबल इकॉनमी को प्रभावित करता है। ईरान लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश करता रहा है और जब भी उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता है वह हॉर्मोन स्टेट को अपने दबाव के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता है। अब इस पूरे घटनाक्रम में एक और बड़ा मोड़ आ गया है और वह जुड़ा है अमेरिका से। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका पाकिस्तान की अपील पर ईरान के साथ चल रहे सीज फायर को आगे बढ़ा रहा है। इसे भी पढ़ें: Iran ने Hormuz में रोकी भारत की राह! Gujarat आ रहे पोत समेत दो Ship जब्त, तेल सप्लाई पर खतराहालांकि ट्रंप ने यह साफ नहीं किया है कि ये सीज फायर कितने समय के लिए बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि ईरान में एक समय नेतृत्व और सरकार के भीतर एकजुटता की कमी है। ऐसे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने उनसे अपील की थी कि ईरान को कुछ समय दिया जाए ताकि वह एक साझा प्रस्ताव तैयार कर सकें। ट्रंप ने कहा कि इसी अपील को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अमेरिकी सेना को फिलहाल हमले रोकने के आदेश दिए हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि अमेरिकी सेना पूरी तरह अलर्ट पर है। किसी भी आदेश के लिए तैयार है। यानी एक तरफ सीज फायर है तो दूसरी तरफ युद्ध की पूरी तैयारी भी जारी है। इतना ही नहीं अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए नाकेबंदी यानी कि ब्लॉकेट जारी रखने का फैसला लिया। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान की ओर से कोई ठोस और एकजूट प्रस्ताव नहीं आता तो यह सीजफायर ज्यादा समय तक नहीं चलेगा। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:32:11 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan में नहीं अब भारत में होगी ईरान पीस डील? आसिम मुनीर हैरान</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच अब भारत की भूमिका को लेकर भी नई चर्चा शुरू हो गई है। जिस समय अमेरिका और ईरान के बीच टकराव कम होने के बजाय और जटिल होता दिखाई दे रहा है। उसी बीच जर्मनी से भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का एक अहम बयान सामने आया है। रक्षा मंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि फिलहाल भारत सीधे तौर पर मध्यस्थता की भूमिका में नहीं है। लेकिन आने वाले समय में परिस्थितियां बदल सकती हैं। तो भारत इस दिशा में अपनी भूमिका निभा सकता है। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की संभवित भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जर्मनी में बातचीत के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत ने अपनी ओर से शांति की कोशिशें पहले भी की है। उन्होंने बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों पक्षों से युद्ध समाप्त करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। इसे भी पढ़ें: भारत रिकॉर्ड तोड़ चीन-यूरोप को बनाया दीवाना, यूरोप भी बमबम, अमेरिका की निकाली काट!उन्होंने आगे कहा कि हर अंतरराष्ट्रीय संकट में हस्तक्षेप का एक सही समय होता है और फिलहाल भारत स्थिति पर नजर बनाए हुए है। उनका यह भी कहना है कि संभव है कि भविष्य में ऐसा समय आए जब भारत को सक्रिय भूमिका निभानी पड़े और भारत उस भूमिका में सफल भी हो सकता है। रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिशें अपेक्षित नतीजे नहीं दे सकी। पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच संवाद की कोशिश जरूर की, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। ऐसे में अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या भारत एक ऐसे देश के रूप में सामने आ सकता है जिस पर दोनों पक्ष भरोसा कर सके। राजनाथ सिंह ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत का रुख शुरू से संतुलित रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भारत किसी एक पक्ष के साथ खड़े होने के बजाय हमेशा शांति, संवाद और स्थिति की बात करता है। इसे भी पढ़ें: Trump का बड़ा ऐलान, Iran संग Peace Talks पर बोले- Friday तक मिलेगी Good Newsउन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति का आधार टकराव नहीं बल्कि बातचीत है और भारत यही चाहता है कि युद्ध जल्द समाप्त हो और क्षेत्र में स्थाई शांति स्थापित हो सके। रक्षा मंत्री ने हॉर्मोज स्ट्रेट की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा होता है और ऐसे में उस क्षेत्र में पैदा होने वाला कोई भी संकट भारत पर सीधा असर डाल सकता है। उन्होंने आगे कहा आज दुनिया इतनी जुड़ी हुई है कि किसी भी क्षेत्रीय संकट को सिर्फ उसी इलाके तक सीमित नहीं माना जा सकता। पश्चिम एशिया का तनाव सिर्फ एक तेल की कमियां तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसका असर वैश्विक आर्थिक स्थिति, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:32:10 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिका&#45;ईरान तनाव के बीच पेंटागन में बड़ा बदलाव, नौसेना सचिव जॉन फेलन ने दिया इस्तीफा</title>
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<description><![CDATA[ ईरान संग सीजफायर के कयासों के बीच ट्रंप सरकार से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी नौसेना के सेक्रेटरी जॉन सी. फेलन ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। उनका यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। इस बड़े बदलाव की जानकारी रक्षा विभाग के अधिकारी शॉन पार्नेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी है।  सरकार ने उन्हें सम्मान के साथ विदाई देते हुए एक बयान जारी किया है। इसमें रक्षा विभाग और अमेरिकी नौसेना के लिए फेलन के शानदार काम को सराहा गया है और उन्हें उनके सुनहरे भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं दी गई हैं। पेंटागन के अधिकारियों ने बताया कि इस अचानक विदाई का कोई कारण नहीं बताया गया है। यह घटना ऐसे नाजुक मोड़ पर हुई है, जब नौसेना चल रहे युद्ध के दौरान एक अस्थिर संघर्ष-विराम के बीच ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर रही है और तेहरान से जुड़े जहाजों को निशाना बना रही है।अचानक से क्यों हुआ इस्तीफाजॉन फेलन का इस्तीफा ईरान युद्ध के एक बेहद नाजुक दौर में हुआ है। यह कदम पेंटागन के भीतर मची अंदरूनी उथल-पुथल और कई अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को पद से हटाए जाने के बाद सामने आया है। उनकी यह विदाई राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान सैन्य नेतृत्व में चल रही लगातार अस्थिरता को उजागर करती है, और वो भी ठीक ऐसे समय में जब अमेरिकी नौसेना ईरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंध (नाकेबंदी) लागू कर रही है। यह पूरा घटनाक्रम उन बड़ी चुनौतियों को दर्शाता है, जिनका सामना सैन्य नेतृत्व इस जटिल भू-राजनीतिक तनाव के बीच कर रहा है।पेंटागन के भीतर फेरबदलयह कदम पेंटागन के भीतर चल रहे एक बड़े फेरबदल को दिखाता है। फीलन का जाना पहली बार है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान किसी सैन्य सेवा प्रमुख ने पद छोड़ा है, लेकिन यह नेतृत्व में बदलावों के एक व्यापक पैटर्न का हिस्सा है। उनके जाने से ठीक पहले, पिछले महीने आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटाया गया था, जिससे रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के नेतृत्व में रक्षा विभाग के भीतर आंतरिक उथल-पुथल और एक-दूसरे पर दोष मढ़ने का सिलसिला और तेज़ हो गया है। खास बात यह है कि यह घोषणा फ़ेलन के वॉशिंगटन में नौसेना के सालाना सम्मेलन में नाविकों और उद्योग जगत के पेशेवरों की एक बड़ी सभा को संबोधित करने के ठीक एक दिन बाद हुई; जहाँ उन्होंने पत्रकारों से अपने एजेंडे पर भी बात की और इस बात पर ज़ोर दिया कि यह फ़ैसला कितना अचानक लिया गया था।जॉन फ़ेलन कौन हैं?जॉन फ़ेलन को 2024 के आखिर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नामित किए जाने के बाद, पिछले साल मार्च में सीनेट द्वारा मंज़ूरी दी गई थी। इस पद पर रहे कई अन्य लोगों के विपरीत, उन्होंने पहले कभी सेना में सेवा नहीं दी थी, न ही नौसेना के भीतर कोई नागरिक नेतृत्व वाला पद संभाला था। फ़ेलन ट्रंप के चुनावी अभियान के एक बड़े दानदाता हैं और निजी निवेश फ़र्म &#039;रगर मैनेजमेंट LLC&#039; के संस्थापक हैं। सैन्य मामलों से उनका मुख्य जुड़ाव &#039;स्पिरिट ऑफ़ अमेरिका&#039; के साथ एक सलाहकार की भूमिका के ज़रिए हुआ; यह एक गैर-लाभकारी संस्था है जो यूक्रेन और ताइवान से जुड़े रक्षा प्रयासों में सहायता करती है। इस बीच, उनके उत्तराधिकारी हंग काओ नौसेना के 25 साल के अनुभवी सैनिक हैं, जिन्होंने युद्ध क्षेत्रों में सेवा दी है और इससे पहले 2024 में वर्जीनिया में ट्रंप के समर्थन से अमेरिकी सीनेट का चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें सफलता नहीं मिली थी।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:32:09 +0530</pubDate>
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<media:keywords>अमेरिका-ईरान, तनाव, के, बीच, पेंटागन, में, बड़ा, बदलाव, नौसेना, सचिव, जॉन, फेलन, ने, दिया, इस्तीफा</media:keywords>
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<title>Donald Trump की Nasty या Nice लिस्ट! ईरान युद्ध में साथ न देने वाले NATO सहयोगियों पर गिर सकती है गाज</title>
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<description><![CDATA[ ट्रंप प्रशासन ने गठबंधन की राजनीति को एक नया और कड़ा मोड़ देते हुए नाटो (NATO) सहयोगियों के लिए एक विशेष सूची तैयार की है। खबरों के मुताबिक, इस सूची को &quot;शरारती (Nasty) और अच्छे (Nice)&quot; सहयोगियों की लिस्ट का नाम दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य उन देशों को पुरस्कृत करना है जिन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों का समर्थन किया है, और उन्हें दंडित करना है जिन्होंने इससे दूरी बनाए रखी। पॉलिटिको (Politico) की रिपोर्ट के अनुसार, यह सूची इस महीने की शुरुआत में नाटो महासचिव मार्क रुटे के वाशिंगटन दौरे से पहले तैयार की गई थी। एक यूरोपीय राजनयिक ने इस मीडिया आउटलेट को बताया कि यह सूची पिछले साल दिसंबर में अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ द्वारा पेश किए गए एक विचार का ही विस्तार प्रतीत होती है। एक रक्षा मंच पर उन्होंने कहा था कि &quot;आदर्श सहयोगियों&quot; को अमेरिका से &quot;विशेष रियायतें&quot; मिलेंगी, जबकि सामूहिक रक्षा में विफल रहने वाले सहयोगियों को इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इसे भी पढ़ें: West Bengal Murshidabad Violence | मुर्शिदाबाद में पहले चरण के दौरान देसी बमों से हमला, कई लोग घायल, मतदान केंद्रों पर दहशतइस सूची के आधार पर अमेरिका गठबंधन के सदस्यों के खिलाफ प्रतिकूल कदम उठा सकता है, जैसे कि अमेरिकी सैनिकों को वहां से हटाना या अमेरिकी रक्षा तकनीक की बिक्री पर रोक लगाना। हालांकि, पर्यवेक्षकों ने पॉलिटिको को बताया कि ऐसे कदमों से उन देशों को दंडित करने के बजाय, खुद अमेरिका को ही अधिक नुकसान पहुंच सकता है।एक यूरोपीय अधिकारी ने पॉलिटिको से कहा, &quot;जब बुरे सहयोगियों को दंडित करने की बात आती है, तो उनके पास कोई बहुत ठोस विचार नहीं दिखाई देते। सैनिकों को वहां से हटाना एक विकल्प तो है, लेकिन इससे मुख्य रूप से अमेरिका को ही नुकसान होता है, है ना?&quot;हालांकि व्हाइट हाउस ने इस सूची के अस्तित्व की पुष्टि नहीं की है, फिर भी पोलैंड और रोमानिया जैसे देशों को इसमें सकारात्मक मूल्यांकन मिल सकता है। नाटो सदस्यों के बीच पोलैंड अपने महत्वपूर्ण रक्षा योगदानों के लिए जाना जाता है, जबकि रोमानिया ने अमेरिकी सेनाओं को ईरान युद्ध से संबंधित अभियानों के लिए अपने हवाई अड्डों का उपयोग करने की अनुमति दी है। इसे भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पेंटागन में बड़ा बदलाव, नौसेना सचिव जॉन फेलन ने दिया इस्तीफानाटो के अधिकांश अन्य देशों ने खाड़ी संघर्ष में शामिल होने से इनकार कर दिया है, जिस रुख से ट्रंप काफी नाराज़ हैं। हाल ही में दिए गए एक भाषण में, ट्रंप ने कहा कि नाटो ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने में मदद करने का प्रस्ताव बहुत देर से दिया।एरिज़ोना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा, &quot;मैंने उनसे कहा कि मुझे आपकी मदद दो महीने पहले चाहिए थी, लेकिन अब मुझे वास्तव में आपकी मदद की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि जब हमें आपकी ज़रूरत थी, तब आप बिल्कुल ही बेकार साबित हुए।&quot; उन्होंने आगे कहा, &quot;लेकिन असल में, हमें कभी उनकी ज़रूरत पड़ी ही नहीं। उन्हें हमारी ज़रूरत थी।&quot;ट्रंप ने आगे कहा कि इस स्थिति ने इस बात को रेखांकित किया है कि अमेरिका को बाहरी देशों और स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय, खुद पर ही निर्भर रहना चाहिए। नाटो को लेकर उनकी हताशा इस पूरे संघर्ष के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई दी है। रुटे के साथ मुलाक़ात के बाद, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा, &#039;जब हमें NATO की ज़रूरत थी, तब वे वहाँ नहीं थे; और अगर हमें फिर से उनकी ज़रूरत पड़ी, तो भी वे वहाँ नहीं होंगे।&#039;फ़रवरी में ईरान संकट शुरू होने से पहले ही, व्हाइट हाउस और NATO के बीच तनाव काफ़ी बढ़ चुका था। ट्रंप इससे पहले ग्रीनलैंड को हासिल करने की अपनी इच्छा को लेकर NATO से उलझ चुके हैं, और उन्होंने रक्षा पर पर्याप्त खर्च न करने के लिए यूरोपीय सहयोगियों की बार-बार आलोचना की है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:32:08 +0530</pubDate>
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<title>भारत और चीन &amp;apos;नरक&amp;apos; है, Donald Trump का विवादित बयान, अमेरिकी नौकरियों पर कब्जा करने का लगाया आरोप</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य के सबसे चर्चित चेहरे डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयानों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर एक बेहद कड़ा और विवादित पत्र पोस्ट करते हुए ट्रंप ने भारत, चीन और कई अन्य देशों को &#039;नरक&#039; (hellholes) करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका की दशकों पुरानी &#039;जन्मसिद्ध नागरिकता&#039; (Birthright Citizenship) की नीति पर तीखा प्रहार किया है। इसमें उन्होंने भारत, चीन और दूसरे देशों को &#039;नरक&#039; (hellholes) कहा है, और साथ ही अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता की कड़ी आलोचना की है।इसे भी पढ़ें: Vishnu Chalisa Path: Vishnu Chalisa का Powerful पाठ देगा Success, Life की हर Problem होगी दूर इस पत्र में कैलिफ़ोर्निया के टेक सेक्टर में भर्ती के तरीकों को लेकर कुछ दावे किए गए हैं। इसमें आरोप लगाया गया है कि ज़्यादातर नौकरियाँ भारत और चीन के लोगों के पास हैं। पत्र में कहा गया है कि दूसरों के लिए मौके बहुत कम हैं, हालाँकि इस दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया गया है। यह पत्र जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर चल रही बहस पर केंद्रित है। यह एक अहम मुद्दा है जो अमेरिका में राजनीतिक और कानूनी चर्चाओं में फिर से उठ खड़ा हुआ है। पत्र में दावा किया गया है कि इस नीति की वजह से अप्रवासी अपने बच्चों के लिए नागरिकता हासिल कर लेते हैं, और बाद में अपने परिवार के दूसरे सदस्यों को भी देश में बुला लेते हैं।पत्र में यह तर्क दिया गया है कि जन्मसिद्ध नागरिकता के मुद्दे पर फ़ैसला अदालतों या वकीलों को नहीं, बल्कि पूरे देश की जनता को वोट के ज़रिए करना चाहिए। इसमें सोशल मीडिया पर हुए एक पोल का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि ज़्यादातर लोग इस नीति पर रोक लगाने के पक्ष में हैं। साथ ही, इस मामले को देख रही कानूनी संस्थाओं पर भी अविश्वास जताया गया है।इसे भी पढ़ें:  IRS Officer Daughter Murder | अमर कॉलोनी का &#039;हैवान&#039;! रेप के बाद बेदम हुई बेटी, फिर तिजोरी खोलने के लिए लाश को सीढ़ियों से घसीटा! इस पत्र में &#039;अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन&#039; (ACLU) की भी आलोचना की गई है। इस पर आरोप लगाया गया है कि यह ऐसी नीतियों का समर्थन करता है जिनसे अमेरिकी नागरिकों के बजाय अवैध अप्रवासियों को फ़ायदा होता है। पत्र में इस संगठन को एक &#039;अपराधी&#039; संस्था बताया गया है। यहाँ तक कि यह भी सुझाव दिया गया है कि इस पर &#039;RICO&#039; कानूनों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। ये गंभीर कानूनी प्रावधान हैं जिनका इस्तेमाल आम तौर पर संगठित अपराधों के ख़िलाफ़ किया जाता है।पत्र में आलोचना का दायरा और भी बढ़ाया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि अप्रवासी स्वास्थ्य सेवा जैसी सार्वजनिक सुविधाओं का गलत फ़ायदा उठाते हैं। इसमें इमरजेंसी रूम में इलाज के लिए जाने का ज़िक्र करते हुए दावा किया गया है कि बिना दस्तावेज़ वाले लोगों के इलाज का खर्च टैक्स देने वाले लोगों को उठाना पड़ता है। इसके अलावा, कैलिफ़ोर्निया जैसे राज्यों में कल्याणकारी योजनाओं में कथित धोखाधड़ी को लेकर भी चिंता जताई गई है। साथ ही, यह भी दावा किया गया है कि अप्रवासन की वजह से सांस्कृतिक और भाषाई पहचान पर बुरा असर पड़ रहा है।पत्र में जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का भी ज़िक्र किया गया है। इसमें अदालत में पेश किए गए कानूनी तर्कों पर असंतोष जताया गया है। पत्र में यह तर्क दिया गया है कि संविधान की व्याख्या अब आज की असलियत से पूरी तरह कट चुकी है। यह बात आज के ज़माने में यात्रा और अप्रवासन के बदलते तरीकों के संदर्भ में खास तौर पर कही गई है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:32:07 +0530</pubDate>
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<title>Netanyahu का Iran War प्लान: Obama, Bush और Biden तीनों ने क्यों कर दिया था रिजेक्ट? जॉन केरी का बड़ा खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले भी कई अमेरिकी नेताओं के सामने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का सुझाव दिया था, लेकिन हर बार इस विचार को खारिज कर दिया गया था। स्टीफन कोलबर्ट के लेट शो में बोलते हुए केरी ने कहा कि कई अमेरिकी प्रशासनों ने ऐसी योजनाओं पर आगे न बढ़ने का विकल्प चुना। उन्होंने आगे कहा कि यह मामला पिछले कई वर्षों में आंतरिक चर्चाओं में उठा था। ओबामा ने मना कर दिया। बुश ने मना कर दिया। राष्ट्रपति बिडेन ने मना कर दिया। मतलब, मैं उन सभी बातचीत का हिस्सा था।इसे भी पढ़ें: Donald Trump की Nasty या Nice लिस्ट! ईरान युद्ध में साथ न देने वाले NATO सहयोगियों पर गिर सकती है गाजपूर्व राष्ट्रपतियों का मानना ​​था कि कूटनीति का पूरी तरह से उपयोग नहीं किया गया था। केरी ने स्पष्ट किया कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान के साथ युद्ध पर विचार करने के लिए अनिच्छुक थे क्योंकि उनका मानना ​​था कि कूटनीतिक विकल्पों का पूरी तरह से उपयोग नहीं किया गया था। उन्होंने वियतनाम युद्ध में अपने अनुभव का भी हवाला दिया और सैन्य कार्रवाई से पहले जनता के प्रति ईमानदारी के महत्व पर बल दिया। केरी ने कहा कि वियतनाम युद्ध के एक अनुभवी सैनिक के रूप में बोलते हुए, जहां इस तरह के निर्णय इतने महत्वपूर्ण थे, हमें उस युद्ध के बारे में झूठ बोला गया था, और उस युद्ध और इराक युद्ध से सबक यह है कि अमेरिकी जनता से झूठ मत बोलो और फिर उनसे अपने बेटों और बेटियों को लड़ने के लिए भेजने को कहो।इसे भी पढ़ें: Pakistan में नहीं अब भारत में होगी ईरान पीस डील? आसिम मुनीर हैरानकेरी ने आगे कहा कि ईरान में आंतरिक अशांति और नेतृत्व परिवर्तन सहित संभावित परिणामों के बारे में नेतन्याहू के तर्क वास्तविकता से मेल नहीं खाते। उन्होंने इन अपेक्षाओं को एक भविष्यवाणी बताया और कहा कि अपेक्षित सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ। गौरतलब है कि न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने ट्रंप के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की अपार संभावनाएं हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी इस विचार के प्रति अपना समर्थन जताया। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:32:06 +0530</pubDate>
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<title>बटर चिकन सुनामी आ जाएगी, भारत पर न्यूजीलैंड के मंत्री का विवादित बयान</title>
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<description><![CDATA[ भारत और न्यूजीलैंड के बीच अगले हफ्ते फ्री ट्रेड डील साइन होने वाली है। न्यूजीलैंड सरकार के मंत्री भारत के साथ डील साइन करने के लिए नई दिल्ली आने वाले हैं।इससे पहले न्यूजीलैंड के एक वरिष्ठ मंत्री ने इस डील का मजाक उड़ाते हुए विवादित बयान दिया है, जिसकी न्यूजीलैंड में रह रहे भारतीय समुदाय के लोग भी निंदा कर रहे हैं। न्यूजीलैंड के सांसद शेन जोन्स ने एक रेडियो साक्षात्कार में आगामी समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि मुझे इस बात की परवाह नहीं है कि हमें कितनी आलोचना झेलनी पड़े, मैं न्यूजीलैंड में आने वाली &#039;बटर चिकन सुनामी&#039; से कभी सहमत नहीं होऊंगा।प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इन टिप्पणियों को अनुपयोगी बताया, लेकिन उन्हें नस्लवादी कहने से परहेज किया। भारत के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को विधायी बाधा का भी सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टी की सहयोगी पार्टी न्यूजीलैंड फर्स्ट (जिसके जोन्स उपनेता हैं) ने इस समझौते का विरोध किया है।इसे भी पढ़ें: कोल्ड ड्रिंक से केला तक No Entry, भारत से सामान लाने से अब नेपाल की बालेन शाह सरकार को क्या परेशानी? इसका मतलब है कि नेशनल पार्टी को संसद में समझौते को पारित कराने के लिए लेबर पार्टी के समर्थन की आवश्यकता होगी। जोन्स ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी मुक्त व्यापार समझौते को कभी स्वीकार नहीं करेगी, क्योंकि उन्हें चिंता है कि अनियंत्रित आप्रवासन से कम मजदूरी, यातायात जाम और स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बढ़ेगा।यह पहली बार नहीं है जब जोन्स को न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय की आलोचना का सामना करना पड़ा है। 2019 में साझेदारी वीज़ा नियमों में बदलाव के विरोध के दौरान, उन्होंने समुदाय के सदस्यों से कहा था कि वे अगली उड़ान से घर लौट जाएं। इन बदलावों के कारण कई प्रवासियों विशेषकर भारतीयों के लिए अपने जीवनसाथी को न्यूजीलैंड लाना अधिक कठिन हो गया था। 2025 में न्यूजीलैंड फर्स्ट की वार्षिक बैठक के दौरान आम भारतीय उपनामों पर टिप्पणी करके जोन्स ने तनाव को और बढ़ा दिया। सम्मेलन में आव्रजन संबंधी घोषणा से पहले बोलते हुए, उन्होंने देश की बदलती जनसांख्यिकी पर टिप्पणी की। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:32:06 +0530</pubDate>
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<title>Lahore के बाद बलूचिस्तान में Unknown गनमैन का कहर, उड़ा डाली रिफाइनरी</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में अननोन गनमैन का कहर खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है और एक बार फिर बंदूकधारियों ने पाकिस्तान को दहला दिया है और इस बार उन्होंने निशाना बनाया है पाकिस्तान के अहम ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को। दरअसल पाकिस्तान के नेशनल रिफाइनरी लिमिटेड के बलूचिस्तान में स्थित डिवारार्गनं साइट पर अज्ञात हमलावरों ने अचानक हमला बोल दिया। जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। यह हमला दक्षिण पश्चिम बलूचिस्तान में हुआ जो पहले से ही सुरक्षा के लिहाज से पाकिस्तान के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हथियार बंद हमलावरों ने रिफाइनरी साइट पर फायरिंग शुरू कर दी। जैसे ही गोलियों की आवाज गूंजी, वहां पर काम कर रहे कर्मचारियों में अफरातफरी मच गई। फिलहाल किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी तो नहीं ली है लेकिन इस घटना ने पाकिस्तान की चिंताओं को पूरा बढ़ा दिया है। इसे भी पढ़ें: Pakistan में नहीं अब भारत में होगी ईरान पीस डील? आसिम मुनीर हैरानजिस रिफाइनरी पर हमला हुआ उस कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि एतहात के तौर पर कुछ समय के लिए ऑपरेशन को रोक दिया गया था। कर्मचारियों को तुरंत सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया और इमरजेंसी प्रोटोकॉल एक्टिव कर दिया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस हमले में नुकसान को सीमित बताया जा रहा है। लेकिन पूरी जांच अभी जारी है। हमले के बाद इलाके को पूरी तरीके से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा सील कर लिया गया और अब पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां वहां पर सर्च और जांच अभियान चला रही है। साथ ही में पूरे इलाके में हाई अलर्ट भी जारी किया गया है। अन्य तेल और गैस प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को भी बढ़ा दिया गया है ताकि किसी और हमले को रोका जा सके। इस वक्त जहां अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से ऊर्जा संकट ऐसे ही गहराया हुआ है। ऐसे में और रिफाइनरी को अनन गनमैन की तरफ से निशाना बनाना पाकिस्तान के लिए नई मुसीबत खड़ा कर सकता है।इसे भी पढ़ें: भारत रिकॉर्ड तोड़ चीन-यूरोप को बनाया दीवाना, यूरोप भी बमबम, अमेरिका की निकाली काट!पाकिस्तान ने पहले ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बंद कर रखा है क्योंकि उसके देश में तेल का संकट है। ऐसे में अगर ऑयल रिफाइनरी पर हमले होते हैं तो पाकिस्तान भारी मुसीबत में आ जाएगा। यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी बलूचिस्तान के इलाके में ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं। खास करके ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है। जिसका मकसद सिर्फ एक ही होता है कि पाकिस्तान को सिर्फ नुकसान नहीं पहुंचाना बल्कि उसकी आर्थिक गतिविधि को भी प्रभावित करना है। अननोन गन मैन इसी तरीके से काम कर रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:32:04 +0530</pubDate>
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<title>भारत के लिए शेर की तरह दहाड़ा इजरायल, हिल गई दुनिया!</title>
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<description><![CDATA[ ठीक एक बरस पहले पाकिस्तान ने कश्मीर में घूमने आए 26 हिंदुओं को पहलगाम में मरवा दिया था। संयोग की बात देखिए कि इजराइल वो पहला देश बन गया है जिसने पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए 26 निर्दोष हिंदुओं को याद किया। वैसे आपको बता दें कि इजराइल ही वो देश था जिसने 1 साल पहले भी आतंकी हमला होते ही भारत को लेकर एक ऐसी बात कही थी जिसे कहने की हिम्मत उस समय किसी देश ने नहीं दिखाई थी। 1 साल पहले पहलगाम आतंकी हमले के कुछ घंटों बाद ही इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू ने अपने ट्वीट में जो लिखा उसे लिखने के लिए शेर का जिगर चाहिए। दरअसल संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन के लिए नियुक्त की गई विशेष दूत फ्रांसिस्का एल्बनीज ने नाराजगी में पूछा है कि भारत इजराइल की मदद क्यों करता है? यही सवाल भारत में बैठे वामपंथी और कट्टरपंथी भी पूछते रहते हैं। जब ईरान पर हमला हुआ तो भारत के कुछ लोग छाती पीट-पीट कर रोए। लेकिन एक साल पहले जब पहलगाम आतंकी हमले में हिंदुओं को मारा गया। तो कुछ कश्मीरियों को लगा कि उनका बिजनेस चौपट ना हो जाए तो चार कश्मीरी दिखावा करने के लिए मोमबत्ती लेकर आ गए। उनमें भी एक पीछे बैठकर हंस रहा था। इसे भी पढ़ें: ब्रिगेड मैदान की जंग में ममता बनाम अमित शाह की जंगजिस दिन पहलगाम आतंकी हमला हुआ था उसी रात इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी को फोन मिलाया था। पीएम मोदी और नितिन याहू की बातचीत के दौरान ही इजरायली विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक मीडिया चैनल से बात करते हुए कहा था कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच कोई संघर्ष होता है तो इजराइल बिना सोचे भारत का साथ देगा। क्योंकि दोस्त का यही फर्ज होता है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन ने नितिन याहू ने उसी दिन बकायदा लिखकर ऐसी बात कही जिसे कहने से दुनिया बच रही थी। नितिन याहू ने कहा कि मैं और पूरा इजराइल इस्लामिक आतंकियों के हमले में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं। हम भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर रहेंगे। नेतन्याहू ने बिना दाएं बाएं किए आतंकियों का धर्म बता दिया। जिस वक्त भारत में बैठे कई फर्जी बुद्धिजीवी आतंकियों को शूटर बोल रहे थे, मिलिटेंट बोल रहे थे, उस समय नेतन्याहू ने इन पाकिस्तानी आतंकियों को इस्लामिक आतंकी कहा था। हैरानी की बात देखिए कि पहलगाम में आतंकियों ने हिंदुओं का नाम पूछ-पूछ कर मारा। हिंदुओं की पहचान करने के लिए उनकी पेंट उतरवाई। लेकिन जब नेतन्याहू ने आतंकियों को इस्लामिक आतंकी बोला तो कई लोग नाराज हो गए। बहरहाल आप ध्यान दीजिए कि इजराइल ने यह सब कुछ पहलगाम हमले के कुछ घंटों बाद ही कह दिया था। इसे भी पढ़ें: &#039;PM Modi का विरोध कर विपक्ष बना महिला विरोधी&#039;, Women Reservation बिल पर BJP का बड़ा बयानजिस वक्त बाकी दुनिया के देश नफा नुकसान देख रहे थे। अपने बयानों को सोच समझ कर लिख रहे थे। आतंकियों को आतंकी कहें या शूटर्स कहें इस पर निर्णय ले रहे थे। उसी दौरान इजराइल ने कह दिया था कि भारत जो एक्शन लेगा हम भारत के साथ खड़े रहेंगे। इजराइल ने यह सब कुछ ऑपरेशन सिंदूर से पहले कहा था और मजे की बात देखिए कि ऑपरेशन सिंदूर में इजराइल ने भारत की खूब मदद की। संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन का एजेंडा चलाने वाली फ्रांसिस्का एल्बनीज को पता होना चाहिए कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद फिलिस्तीन की सरकार ने क्या बयान दिया था। जब कश्मीर में आतंकियों ने हिंदुओं का नाम पूछ-पूछ कर मारा।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:32:04 +0530</pubDate>
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<title>F&#45;22 से खतरनाक रूस का SU&#45;57 M1, खरीदेगा भारत?</title>
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<description><![CDATA[ भारत और रूस के बीच Sukhoi SU 57 डील की चर्चा है और खास बात इसका एडवांस वेरिएंट M1 अब रिपोर्ट क्या कहती है वो जान लीजिए। दरअसल डिफेंस पोर्टल मिलिट्री वॉच मैगज़ीन के मुताबिक भारत और रूस के बीच लाइसेंस प्रोडक्शन को लेकर बातचीत हुई है। एडवांस स्टेज पर यह बातचीत पहुंच चुकी है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत लगभग 100 से ज्यादा एसयू 57 खरीदने की योजना पर विचार कर रहा है। लेकिन अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है और भारत तक भी इसकी पुष्टि नहीं करता। मिलिट्री वॉच मैगजीन के हवाले से ये बात सामने आई है। नए फाइटर जेट्स की तुरंत ज़रूरत है। हालांकि भारत खुद का स्टील फाइटर भी बना रहा है। लेकिन इसे ऑपरेशनल होने में समय लगेगा इसलिए एक इंट्रिम सॉल्यूशन की जरूरत है। अब बात करते हैं सच की। मौजूदा एसयू 57 पूरी तरह लो ऑब्जरवेशन नहीं माना जाता है। इसके इंजन और डिज़ाइन को लेकर कई एक्सपर्ट सवाल उठाते रहे हैं। इसलिए M1 वेरिएंट की चर्चा इतनी अहम हो जाती है। इसे भी पढ़ें: Delhi में Army ब्रिगेडियर पर हमले का मामला, Police ने 4 फरार आरोपियों को दबोचारिपोर्ट के अनुसार SU 57 M1 में बड़े बदलाव हो सकते हैं। पहला नया इंजन लगेगा जिसका नाम होगा AL51F1 इंजन जो ज्यादा पावरफुल ज्यादा कॉम्पैक्ट और बेहतर स्टील सिग्नेचर के साथ लैस होगा। इसके अलावा दूसरा सबसे बड़ा पॉइंट है बदलाव का वो है एडवांस एवन। बेहतर सेंसर, बेहतर डाटा फ्यूज़ और नेटवर्क सेंट्रिक वॉारफेयर से यह लेस होगा। अब इसके अलावा रीडाज़ाइन फ्यूज़लेस बेहतर एोडायनेमिक्स और कम रडार सिग्नेचर यानी M1 वेरिएंट को ज्यादा स्टिल ऑप्टिमाइज्ड बनाया जा सकता है। अब सबसे दिलचस्प सा भारत की रणनीति। रिपोर्ट बताती है कि भारत पूरा ऑर्डर एक साथ नहीं देगा बल्कि डिफर्ड ऑर्डर देगा। मतलब पहले 30 से 40 एयरक्राफ्ट फिर अगला बैच फिर अपग्रेडेड वर्जन। इसका फायदा यह होगा कि तुरंत कमी पूरी हो जाएगी। इसे भी पढ़ें: Explained LCA Tejas Back | तेजस की वापसी: क्या 40 साल का इंतज़ार और करोड़ों का निवेश वाकई &#039;बेकार&#039; था?भविष्य में बेहतर टेक्नोलॉजी मिल जाएगी और रिस्क भारत कम उठाएगा और अगर तब तक HLM का तैयार हो जाता है तो भारत अपने घरेलू फाइटर जेट पर शिफ्ट हो जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल है क्या एसयू 57 M1 F22 रैप्टर से बेहतर होगा। सच क्या है? देखिए F22 अभी भी दुनिया के सबसे एडवांस 12 फाइटर जेट्स में से एक है। लेकिन SU 57 की खासियत है इसकी मल्टी रोल क्षमता।  स्टेल्थ सेंसर, पायलट ट्रेनिंग और मिशन प्रोफाइल पर। इसलिए अब यह कहना जल्दबाजी होगी कि Sukhoi 57, M1, F22 से बेहतर होगा। अब आते हैं राजनीति पर। अगर भारत रूस से इतनी बड़ी डील करता है तो अमेरिका की प्रतिक्रिया क्या हो सकती है? वो यह हो सकती है कि डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता रूसी हथियारों के खिलाफ सख्त रूप अपना सकते हैं। इसी वजह से ऐसी डील्स अक्सर लो प्रोफाइल रखी जाती है। संभावना यह है कि किसी बड़े इवेंट जैसे कि ब्रिक्स समिट में आधिकारिक घोषणा हो सकती है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:32:02 +0530</pubDate>
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<title>अशांत दुनिया में &amp;apos;स्थिरता&amp;apos; का संदेश! S Jaishankar बोले&#45; India&#45;Africa पार्टनरशिप देगी दुनिया को दिशा</title>
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<description><![CDATA[ विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत-अफ्रीका साझेदारी का विशेष महत्व है; यह एक अशांत दुनिया में &quot;स्थिरता&quot; और विश्वसनीयता का संदेश देती है। आगामी भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन-IV (IAFS-IV) के लोगो, थीम और वेबसाइट के अनावरण के मौके पर बोलते हुए, जयशंकर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ये दोनों क्षेत्र केवल विकास भागीदार ही नहीं हैं, बल्कि एक बेहतर दुनिया बनाने में भी भागीदार हैं। मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय कई संघर्षों से जूझ रहा है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहा संकट, जिसे 50 दिन से अधिक हो चुके हैं और जिसके वैश्विक स्तर पर दूरगामी परिणाम लगातार सामने आ रहे हैं।इस कार्यक्रम में जिसमें पूरे अफ्रीकी महाद्वीप के राजदूतों और राजनयिकों ने हिस्सा लिया, आधिकारिक लोगो का अनावरण किया गया। इसमें भारत और अफ्रीका के आपस में जुड़े हुए नक्शों के ऊपर एक शेर बना हुआ है, जो &#039;स्थायी साझेदारी, साझा दृष्टिकोण&#039; (Enduring Partnership, Shared Vision) की थीम और शिखर सम्मेलन की तारीख 28-31 जनवरी को दर्शाता है। जयशंकर ने आगामी शिखर सम्मेलन को &quot;हमारे जुड़ाव को और गहरा करने&quot; तथा एक ऐसी साझेदारी के लिए ढांचा तैयार करने का अद्वितीय अवसर बताया, जो अधिक महत्वाकांक्षी, अधिक समावेशी और अधिक भविष्य-उन्मुख हो। इस गठबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे दुनिया जटिल भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक चुनौतियों से गुज़र रही है, यह सहयोग अस्थिर दुनिया में स्थिरता का अनिश्चित दुनिया में विश्वसनीयता और कठिन समय में एकजुटता का संदेश बनकर उभरेगा।इसे भी पढ़ें:  ईरान की गद्दारी, भारत आने वाले जहाज पर मारी गोली, फिर हुए बड़ा खेल!मंत्री ने आगे बताया कि भारत की विदेश नीति में अफ्रीका का इस समय केंद्रीय स्थान है। यह जुड़ाव &quot;समानता के सिद्धांत, आपसी सम्मान और सामूहिक प्रगति पर आधारित एक दृष्टिकोण से निर्देशित है। भारत ने इस महाद्वीप पर अपनी राजनयिक उपस्थिति को काफी मज़बूत किया है; हाल के वर्षों में 17 नए मिशन खोलकर इनकी कुल संख्या 46 तक पहुँचा दी है। जयशंकर ने कहा कि यह विस्तार भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन के ढांचे द्वारा संचालित दीर्घकालिक साझेदारी का अगला अध्याय है। ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यह रिश्ता हमारी सभ्यतागत कड़ियों में निहित है&quot; और सदियों के सांस्कृतिक तथा मानवीय आदान-प्रदान से बना है। उन्होंने आगे कहा कि ये बंधन तब और भी मज़बूत हुए जब भारत ने उपनिवेशवाद के विरुद्ध अफ्रीकी राष्ट्रों के संघर्ष में उनके साथ एकजुटता दिखाई।इसे भी पढ़ें: 54 African Countries के नेता Modi के साथ मंथन करने दिल्ली आएंगे, Jaishankar बोले- हम वैश्विक शासन को दिशा देंगेदोनों क्षेत्रों के स्वतंत्रता आंदोलनों के बीच समानताएं बताते हुए, जयशंकर ने कहा कि संघर्ष, एकजुटता, जुझारूपन और आकांक्षाओं का साझा इतिहास हमारी साझेदारी को लगातार आकार दे रहा है। उन्होंने बताया कि भारत का&quot;विकसित भारत 2047 विज़न और अफ्रीका का एजेंडा 2063 पूरक रोडमैप के तौर पर काम करते हैं, जिनका मकसद सतत और समावेशी विकास के ज़रिए समृद्धि हासिल करना है। मंत्री ने अफ्रीका को वैश्विक शासन में उसका सही स्थान दिलाने के लिए भारत की लगातार वकालत को भी रेखांकित किया; उन्होंने इस दिशा में एक &quot;अहम कदम&quot; के तौर पर भारत की 2023 की अध्यक्षता के दौरान G20 में अफ्रीकी संघ को शामिल किए जाने का ज़िक्र किया। जयशंकर के अनुसार, इस कदम से यह &quot;पक्का विश्वास&quot; झलकता है कि आने वाले समय में &quot;ग्लोबल साउथ की आवाज़ों को वैश्विक शासन को आकार देना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:32:01 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump के Pentagon में बड़ी उथल&#45;पुथल, नौसेना सचिव के इस्तीफे पर Iran ने ली चुटकी</title>
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<description><![CDATA[ थाईलैंड में ईरानी दूतावास ने, यूनाइटेड स्टेट्स नेवी सेक्रेटरी जॉन सी फेलन के पद छोड़ने के बाद, डोनाल्ड ट्रंप पर एक बार फिर ज़ुबानी हमला किया है। एक्स पर एक सोशल मीडिया पोस्ट में दूतावास ने इस इस्तीफ़े का ज़िक्र करते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन का सिलसिला जारी है। यह ताज़ा तंज, दूतावास की तरफ़ से मौजूदा अमेरिकी प्रशासन पर की जा रही भड़काऊ टिप्पणियों की उसी कड़ी का हिस्सा है। हाल ही में, अमेरिकी लेबर सेक्रेटरी लोरी चावेज़-डेरेमर के अपने कैबिनेट पद से इस्तीफ़ा देने के बाद, दूतावास ने इसी प्लेटफ़ॉर्म पर एक व्यंग्यात्मक पोस्ट शेयर करते हुए व्हाइट हाउस का मज़ाक उड़ाया था। उस समय, दूतावास ने यह संकेत दिया था कि &quot;सत्ता परिवर्तन&quot; विदेश में नहीं, बल्कि खुद यूनाइटेड स्टेट्स के भीतर ही हो रहा है। तेहरान की तरफ़ से की जा रही ज़ुबानी उकसावे वाली हरकतें, अमेरिकी रक्षा विभाग के अंदर चल रही भारी उथल-पुथल के दौर से मेल खाती हैं। पेंटागन ने अमेरिकी नौसेना सचिव जॉन फ़ेलन के तुरंत इस्तीफ़े की पुष्टि कर दी है; यह डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान किसी सैन्य सेवा प्रमुख का पहला इस्तीफ़ा है।इसे भी पढ़ें: Lahore के बाद बलूचिस्तान में Unknown गनमैन का कहर, उड़ा डाली रिफाइनरीपेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने बुधवार को इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि फ़ेलन प्रशासन छोड़ रहे हैं, और यह फ़ैसला तुरंत प्रभाव से लागू होगा। एक आधिकारिक बयान में, पार्नेल ने पद छोड़ने वाले अधिकारी के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा, &quot;हम विभाग और संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना के लिए दी गई सेवाओं के लिए सचिव फ़ेलन के आभारी हैं।&quot; हालाँकि, इस अचानक इस्तीफ़े के पीछे कोई औपचारिक कारण नहीं बताया गया है।इसे भी पढ़ें: Netanyahu का Iran War प्लान: Obama, Bush और Biden तीनों ने क्यों कर दिया था रिजेक्ट? जॉन केरी का बड़ा खुलासाफ़ेलन का जाना, पेंटागन के व्यापक और ज़्यादा आक्रामक पुनर्गठन का ही एक हिस्सा लगता है। यह इस्तीफ़ा, अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ द्वारा किए गए उच्च-स्तरीय अधिकारियों को हटाने के सिलसिले के बाद आया है; हेगसेथ ने हाल ही में कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को पद से हटाने की प्रक्रिया की देखरेख की है। जिन लोगों को पहले उनके पदों से हटाया गया है, उनमें सेना के शीर्ष अधिकारी, जनरल रैंडी जॉर्ज, और उनके साथ अन्य उच्च-रैंकिंग वाले एडमिरल और जनरल शामिल हैं। ये बदलाव एडमिरल लिसा फ्रांचेटी और जनरल चार्ल्स &quot;CQ&quot; ब्राउन जूनियर के पहले हुए हाई-प्रोफाइल निष्कासनों के बाद आए हैं, जो 2025 की शुरुआत से अमेरिकी सैन्य पदानुक्रम में एक बड़े फेरबदल का संकेत देते हैं। जिन लोगों को पहले उनके पदों से हटाया गया है, उनमें सेना के शीर्ष अधिकारी, जनरल रैंडी जॉर्ज, और उनके साथ अन्य उच्च-रैंकिंग वाले एडमिरल और जनरल शामिल हैं। ये बदलाव एडमिरल लिसा फ्रांचेटी और जनरल चार्ल्स &quot;CQ&quot; ब्राउन जूनियर के पहले हुए हाई-प्रोफाइल निष्कासनों के बाद आए हैं, जो 2025 की शुरुआत से अमेरिकी सैन्य पदानुक्रम में एक बड़े फेरबदल का संकेत देते हैं। नौसेना के शीर्ष पद पर खाली जगह मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल को देखते हुए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिकी समुद्री बल ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी में भारी रूप से व्यस्त हैं। एक नाजुक संघर्ष-विराम के बावजूद, अमेरिकी बलों ने तेहरान से जुड़े जहाजों को निशाना बनाना जारी रखा है। यह परिचालन दबाव महत्वपूर्ण वैश्विक गलियारों में केंद्रित रहा है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य भी शामिल है, जहाँ नौसेना ने नाकेबंदी को लागू करने के लिए अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी है। इस क्षेत्र में तनाव अभी भी बहुत अधिक है, और वाणिज्यिक जहाजों पर हाल ही में हुए समुद्री हमलों ने मौजूदा संघर्ष-विराम की स्थिरता को और अधिक जटिल बना दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:32:01 +0530</pubDate>
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<title>Kathmandu में &amp;apos;जहरीली&amp;apos; हुई हवा, AQI 247 के साथ दुनिया का दूसरा सबसे Polluted शहर बना</title>
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<description><![CDATA[ IQAir द्वारा जारी डेटा के अनुसार, पिछले 24 घंटों में काठमांडू में हवा की गुणवत्ता में तेज़ी से गिरावट आई है, और यह शहर दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। काठमांडू में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 247 दर्ज किया गया, जो इसे पाकिस्तान के लाहौर से ठीक पीछे रखता है; लाहौर 381 के AQI के साथ वैश्विक सूची में शीर्ष पर रहा। 200 से ऊपर का AQI स्तर बहुत अस्वस्थ माना जाता है और आम जनता के लिए स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिम पैदा करता है।इसे भी पढ़ें: Nepal के Home Minister Sudan Gurung का इस्तीफा, बोले- मेरे लिए पद से बड़ी है नैतिकताPM2.5 का तात्पर्य हवा में मौजूद उन कणों (ठोस या तरल बूंदों) से है जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर से कम होता है। यह सबसे खतरनाक प्रदूषकों में से एक है जो नाक और गले से होते हुए फेफड़ों और यहाँ तक कि रक्तप्रवाह में भी प्रवेश कर सकता है। PM2.5 के कण छोटे होते हैं और हवा में लंबे समय तक निलंबित रहने की संभावना रखते हैं, जिससे लोगों द्वारा उन्हें साँस के साथ अंदर लेने की संभावना बढ़ जाती है।पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के वायु गुणवत्ता सूचकांक के अनुसार, 151-200 की वायु गुणवत्ता रीडिंग को अस्वस्थ माना जाता है, जिससे हर किसी को समस्याएँ होती हैं और संवेदनशील समूहों पर इसके अधिक गंभीर प्रभाव पड़ते हैं। जब हवा की गुणवत्ता 201-300 के स्तर पर पहुँच जाती है, तो इसे बहुत ज़्यादा अस्वस्थकर स्तर माना जाता है, और उस इलाके में रहने वाले सभी लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं। जब यह 300 के पार पहुँच जाती है, तो यह खतरनाक हो जाती है; इसका मतलब है कि हवा की गुणवत्ता बेहद खराब है और यह सभी लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिम पैदा करती है।इसे भी पढ़ें: कोल्ड ड्रिंक से केला तक No Entry, भारत से सामान लाने से अब नेपाल की बालेन शाह सरकार को क्या परेशानी?नेपाल की राजधानी काठमांडू, जिसका क्षेत्रफल 413.69 वर्ग किलोमीटर है, पिछले एक दशक में वायु प्रदूषण का एक बड़ा केंद्र बन गई है। 2022 की जनगणना के आँकड़ों के अनुसार, यहाँ की जनसंख्या 1,988,606 है और जनसंख्या घनत्व 12,440 प्रति वर्ग मील है। उद्योगों और घरों से निकलने वाला धुआँ, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन और कचरे को बेतरतीब ढंग से जलाना—ये सभी प्रदूषण के बढ़ने में योगदान दे रहे हैं। वे वाहन जो उत्सर्जन परीक्षण (emission tests) में फेल हो गए हैं, वे प्रदूषण को और भी ज़्यादा बढ़ा रहे हैं और औद्योगिक धुएँ में अपना योगदान दे रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:32:00 +0530</pubDate>
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<title>कंगाली में डूबा Pakistan Railway, Staff की कमी से पूरा Network ठप होने का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ रावलपिंडी में लगातार पाँच दिनों तक चले बड़े पैमाने पर शटडाउन ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है; अधिकारियों ने कथित तौर पर ईरान-अमेरिका वार्ता से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं को इसके औचित्य के रूप में बताया है। हालाँकि, &#039;द एक्सप्रेस ट्रिब्यून&#039; की रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रतिबंधात्मक उपायों का खामियाज़ा निवासियों और व्यवसायों, दोनों को ही भुगतना पड़ा है। &#039;द एक्सप्रेस ट्रिब्यून&#039; के अनुसार, शहर में सार्वजनिक जीवन पूरी तरह से ठप हो गया, क्योंकि परिवहन केंद्रों, थोक बाजारों, व्यावसायिक क्षेत्रों, होटलों और यहाँ तक कि शादी-विवाह स्थलों को भी बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा। नियमित गतिविधियों के इस निलंबन ने न केवल व्यापार को बाधित किया, बल्कि शिक्षा और न्यायिक कार्यवाही को भी प्रभावित किया, जिससे नागरिकों को अपनी ज़रूरी जिम्मेदारियों को निभाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।इसे भी पढ़ें: भारत के लिए शेर की तरह दहाड़ा इजरायल, हिल गई दुनिया!यात्रा एक बड़ी चिंता का विषय बनकर उभरी है। सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के बंद होने के कारण, लोगों को बढ़ी हुई कीमतों पर निजी तौर पर किराए पर लिए गए वाहनों पर निर्भर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है। जिन परिवारों को अंतिम संस्कार जैसे आपातकालीन हालातों का सामना करना पड़ रहा था, उनके पास पूरे वाहन किराए पर लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था, और अक्सर उन्हें सामान्य किराए से लगभग दोगुना किराया देना पड़ा। मांग में इस असामान्य उछाल ने, विडंबना यह है कि कार डीलरों और शोरूम संचालकों के कारोबार को बढ़ावा दिया है।शहर में जहाँ लगभग 1,470 पंजीकृत कार शोरूम हैं, कथित तौर पर सभी छोटे वाहन प्रीमियम दरों पर बुक हो गए, विशेष रूप से लाहौर, सियालकोट, फैसलाबाद और अन्य स्थानों की यात्रा के लिए। इस बीच, 34 परिवहन टर्मिनलों के बंद होने से सैकड़ों कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं, जिससे आर्थिक संकट और भी गहरा गया है। हालांकि अधिकारियों ने मंगलवार शाम को ट्रांसपोर्ट सेवाओं को फिर से शुरू करने की मौखिक अनुमति दे दी थी, लेकिन लोगों के मन में डर और यात्रियों की कम संख्या के कारण यह फिर से शुरू नहीं हो पाई। ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर बिना किसी स्पष्ट आश्वासन के काम फिर से शुरू करने में हिचकिचा रहे थे। एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, मुरी रोड और रावल रोड सहित मुख्य सड़कों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था जारी रही, और हवाई अड्डे के पास के इलाकों में भी भारी संख्या में पुलिस तैनात रही।इसे भी पढ़ें: Lahore के बाद बलूचिस्तान में Unknown गनमैन का कहर, उड़ा डाली रिफाइनरीखबरों के मुताबिक, तीन किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को कड़ी पाबंदियों का सामना करना पड़ा, जिसमें छतों पर जाने की सीमित अनुमति भी शामिल थी, जबकि आस-पास के बाज़ार बंद रहे। ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के नेता, हाजी ज़हूर अराइन ने एक ज़्यादा स्पष्ट और संतुलित नीति की मांग की है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पूरी तरह से बंद करने के बजाय नियंत्रित तरीके से ट्रांसपोर्ट चलाने का सुझाव दिया; उन्होंने सुरक्षा बनाए रखते हुए ज़रूरी आवाजाही को जारी रखने के लिए वैकल्पिक रास्तों और जगहों का प्रस्ताव रखा। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:31:59 +0530</pubDate>
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<title>Middle East में जंग से बढ़ी Ukraine की टेंशन, Zelenskyy बोले&#45; US से मदद मिलनी होगी मुश्किल</title>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने चेतावनी दी है कि ईरान में लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष, अमेरिका से ज़रूरी एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम हासिल करने की यूक्रेन की क्षमता को खतरे में डाल सकता है। सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में, ज़ेलेंस्की ने बताया कि जहाँ अमेरिका में उत्पादन में कमी के कारण कीव को ऐसे हथियारों की सीमित सप्लाई मिली है, वहीं मौजूदा सप्लाई या इंटेलिजेंस की जानकारी देने में कोई तत्काल रुकावट नहीं आई है। यूक्रेनी नेता ने बताया कि उनका देश PURL प्रोग्राम के ज़रिए अमेरिकी हार्डवेयर हासिल कर रहा है, जिसके तहत NATO सदस्य देशों को कीव के लिए हथियार खरीदने के लिए फंड देने की अनुमति मिलती है। ज़ेलेंस्की ने CNN से कहा कि इस प्रोग्राम के ज़रिए, हम पैट्रियट सिस्टम के लिए एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलें और कुछ दूसरे हथियार शामिल कर सकते हैं और खरीद सकते हैं, जो हमारे लिए बहुत ज़रूरी है। हमारे यूरोपीय पड़ोसियों के साथ हमारे पास यह सुविधा नहीं है।इसे भी पढ़ें: Ukraine War पर Putin का बड़ा ऐलान, Orthodox Easter पर 32 घंटे के सीज़फायर की घोषणाहालाँकि, उन्होंने चिंता जताई कि मध्य पूर्व में बढ़ती अस्थिरता की वजह से यूक्रेन की रक्षा ज़रूरतों से संसाधन हट सकते हैं। उन्होंने कहा, &quot;और ज़ाहिर है, (मध्य पूर्व युद्ध और ईरान की वजह से) जो बड़ी चुनौती है, उसके चलते ये सभी पैकेज खतरे में हैं। ज़ेलेंस्की ने बताया कि अमेरिका ने अब तक इन सिस्टम्स की &quot;बहुत कम संख्या&quot; ही सप्लाई की है। उन्होंने इसकी सीमित मात्रा का कारण मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बताया, और कहा, &quot;हमारे पास बहुत ज़्यादा नहीं थे। हम समझते हैं कि ऐसा क्यों है, क्योंकि अमेरिका में प्रोडक्शन बहुत ज़्यादा नहीं है।इसे भी पढ़ें: यूरोप को यूक्रेन की मदद करना पड़ा भारी, रूस ने मचा दी तबाही!राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि मध्य पूर्व में लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष या सीज़फ़ायर में देरी का यूक्रेन की सुरक्षा पर बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा, &quot;और अगर युद्ध जारी रहता है या सीज़फ़ायर में देरी होती है... (तो) यह अच्छा नहीं होगा। और शायद हमें एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों से जुड़े और भी ज़्यादा जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। इन चुनौतियों के बीच, ज़ेलेंस्की ने दोहराया कि यूक्रेन मध्य पूर्व के देशों के साथ ड्रोन युद्ध से जुड़ी अपनी रणनीतिक विशेषज्ञता साझा कर रहा है। रूसी सेना द्वारा तैनात किए गए ड्रोनों का चार साल तक मुकाबला करने के बाद—जिनमें से कई ईरानी डिज़ाइन के हैं—कीव अब अपने क्षेत्रीय साझेदारों को अपनी तकनीकी जानकारी (know-how) दे रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:31:58 +0530</pubDate>
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<title>नकाब लगाकर हमला, कैसे होर्मुज में भारतीय जहाज ईरान ने किया कब्जा, देखें Video</title>
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<description><![CDATA[ अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच ईरान ने भारत आ रहे एक कंटेनर जहाज को रोक लिया। इतना ही नहीं फायरिंग के बाद इस जहाज को अपने कब्जे में भी ईरान ने ले लिया और इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस जहाज पर भारत का एक नागरिक मौजूद है। एक नाटकीय फुटेज जारी किया है। इस फुटेज में कथित तौर पर दिखाया गया है कि कैसे नकाबपोश कमांडो ने जहाज़ों का पीछा किया, उन पर चढ़ गए और आखिरकार उन्हें ज़ब्त कर लिया। हॉलीवुड की किसी एक्शन थ्रिलर फिल्म जैसा लगने वाला यह प्रोपेगैंडा वीडियो, अमेरिकी मरीन द्वारा दो ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज़ों पर चढ़कर उन्हें ज़ब्त करने के कुछ दिनों बाद आया है। उन जहाज़ों ने होर्मुज़ में लगी नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश की थी।इसे भी पढ़ें: Middle East में जंग से बढ़ी Ukraine की टेंशन, Zelenskyy बोले- US से मदद मिलनी होगी मुश्किलबताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब 8:00 बजे जब एपा मिनी डेज़ नाम का यह कंटेनरशिप हॉर्न स्टेट को पार करने की कोशिश कर रहा था। तभी अचानक ईरान की आईआरजीसी ने इस जहाज को निशाना बनाया। पहले चेतावनी दी गई और फिर फायरिंग शुरू हो गई। समुंदर के बीच गोलियों की आवाज जहाज पर 21 लोगों के लिए वह पल किसी डरावने सपने से कम नहीं था। वॉइस कैप्टन संजय महान ने अपने वीडियो में बताया कि जैसे ही फायरिंग शुरू हुई सभी क्रू मेंबर तुरंत जहाज के अंदर चले गए और खुद को सुरक्षित करने की कोशिश की। अब आपको बताते हैं इस जहाज के बारे में। इस कंटेनरशिप का नाम है एपा मिनोडेस। यह लाइबेरिया के झंडे वाला एक कमर्शियल कारगो जहाज है। यह जहाज सऊदी अरब से भारत के गुजरात स्थित मुंद्रा पोर्ट की ओर आ रहा था।इसे भी पढ़ें: Donald Trump के Pentagon में बड़ी उथल-पुथल, नौसेना सचिव के इस्तीफे पर Iran ने ली चुटकी यानी यह एक सामान्य व्यापारिक यात्रा थी। लेकिन अचानक यह अंतरराष्ट्रीय विवाद का हिस्सा बन गई। जहाज पर कुल 21 लोग सवार हैं और इनमें वॉइस कैप्टन संजय महर भारत से हैं। बाकी क्रू मेंबर फिलीपींस, यूक्रेन और श्रीलंका के नागरिक हैं। यानी यह एक मल्टीीनेशनल क्रू है जो अब ईरान के कब्जे में है। हालांकि अभी तक किसी के घायल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन हालात तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं। ईरान के सैनिकों ने भारतीय जहाज़ पर कब्ज़ा कैसे किया?इस नाटकीय वीडियो में ईरानी सैनिक स्पीडबोट्स में सवार होकर मालवाहक जहाज़ों की ओर बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो ट्रंप के उन बार-बार किए गए दावों के बिल्कुल विपरीत है, जिनमें उन्होंने कहा था कि युद्ध के दौरान ईरानी नौसेना पूरी तरह से तबाह हो गई थी। हालाँकि, अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि इन जहाज़ों पर कब्ज़ा करने के पीछे ईरान का &quot;मच्छर बेड़ा&quot; (mosquito fleet) था यानी छोटी, तेज़ रफ़्तार वाली और जिनका पता लगाना मुश्किल होता है, ऐसी नावें जिन्हें शक्तिशाली IRGC द्वारा संचालित किया जाता है। इसके बाद वीडियो में नकाब पहने ईरानी सैनिक, जिनके पास राइफलें हैं, एक सीढ़ी के सहारे ऊपर चढ़ते और MSC Francesca पर सवार होते दिखाई देते हैं।इसे भी पढ़ें: Lahore के बाद बलूचिस्तान में Unknown गनमैन का कहर, उड़ा डाली रिफाइनरी Epaminondas पर सवार, नकाबपोश कमांडो राइफलों के साथ तलाशी लेते और इंजन रूम में दाखिल होते नज़र आते हैं। फिर विज़ुअल्स में सैनिकों को जहाज़ के ऊपरी डेक पर चढ़ते हुए दिखाया गया है। भारत की ओर जा रहे जहाज़ Epaminondas के &#039;ब्रिज&#039; (केंद्रीय कमांड सेंटर) को तब नुकसान पहुँचा, जब ईरानी सैनिकों ने अपनी स्पीडबोट से गोलीबारी की और ग्रेनेड फेंके। हालाँकि, जहाज़ के क्रू को कोई चोट नहीं आई। MSC Francesca, जो ईरान के तट से लगभग छह मील दूर था, उस पर भी ज़ोरदार गोलीबारी हुई।Scary visuals of Iranian armed forces hijacking two ships ????????Iran&#039;s Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) has seized two container ships in the Strait of Hormuz, MSC Francesca and EpaminondasThe vessels were boarded by armed Iranian forces over alleged violations pic.twitter.com/lFfJjtaXuy— Nabila Jamal (@nabilajamal_) April 23, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:31:57 +0530</pubDate>
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<title>जर्मनी ने भारत को दिया बाहुबली..मोदी&#45;राजनाथ का तगड़ा खेल, चीन&#45;अमेरिका हैरान</title>
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<description><![CDATA[ समंदर में जब भारत की नौसेना अपनी ताकत दिखाती है तो दुश्मन के पर खच्चे उड़ जाते हैं और भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी में एक ऐसी जगह अब कदम रखा है। जिसने 5310 किमी दूर पाकिस्तान की धरती को हिलाकर रख दिया है। भारत के तहलके ने शहबाज मुनीर की सांसों को इस वक्त भुला दिया है। बता दें कि आज की जंग सिर्फ जमीन या फिर आसमान में नहीं बल्कि समंदर की गहराइयों में जीती जाती है। जहां दुश्मन आपको देख नहीं सकता। लेकिन आप उसे खत्म कर सकते हैं। उसे तबाह कर सकते हैं। मिडिल ईस्ट में एक तरफ बढ़ता तनाव है और वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की जो सनक है उस पर भी कोई भरोसा नहीं है और हिंद महासागर में चाइना की बढ़ती हलचल और इसी बीच भारत ने जर्मनी में एक ऐसा दांव खेला है जिसने इस्लामाबाद से लेकर बीजिंग तक हलचल मचा दी है और इस पूरे मिशन के केंद्र में है भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनका जर्मनी दौरा। इसे भी पढ़ें: Donald Trump के Pentagon में बड़ी उथल-पुथल, नौसेना सचिव के इस्तीफे पर Iran ने ली चुटकीबता दें कि यह सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं है बल्कि यह भारत की समुद्री ताकत को नई ऊंचाई देने की रणनीति है। उन्होंने वर्लिन में भारतीय समुदाय को यहां पर संबोधित भी किया और भारत जर्मनी के 75 साल पुराने रिश्तों को और भी ज्यादा मजबूत बनाने पर जोर दिया। जर्मनी आज यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और 2000 से ज्यादा जर्मन कंपनियां भारत में इस वक्त सक्रिय भी हैं। समंदर के नीचे भारत की ताकत को कई गुना ज्यादा बढ़ाना। भारत और जर्मनी के बीच बता दें कि करीब $90 करोड़ यानी कि $ बिलियन डॉलर की पनडुपी डील पर चर्चा चल रही है। जिसे प्रोजेक्ट 75i कहा जाता है। इस डील के तहत आधुनिक पनडुपियां मिलेगी। जर्मनी से टेक्नोलॉजी इंडिया ट्रांसफर होगी और भारत में ही इनका निर्माण किया जाएगा। यानी कि स्वदेशी होंगी ये पनडुपियां। यानी भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश ही नहीं रहा बल्कि खुद ताकत बनाने वाला देश बनेगा। इस दौरे के सबसे बड़ी झलक तब सामने आई जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी की एक बेहद खतरनाक पनडुपी का निरीक्षण किया। यह पनडुपी है। इसे भी पढ़ें: नकाब लगाकर हमला, कैसे होर्मुज में भारतीय जहाज ईरान ने किया कब्जा, देखें Videoबता दें कि टाइप 212 सबमरीन यह सबमरीन कितनी खतरनाक है। सबसे पहले पानी के अंदर यह बिना आवाज के चलती है। दूसरी बात दुश्मन के सेंसर से यह बचती है। तीसरी गहराई में लंबे समय तक यह टिके रह सकती है। साइलेंट अंडर वाटर मूवमेंट का मतलब यह होता है कि यह जो पनडुपी है, यह पानी के अंदर इतनी शांति से चलती है कि दुश्मन को इसकी मौजूदगी का अंदाजा तक नहीं होता। चाहे फिर वो कुछ भी कर ले। स्टेल्थ डिजाइन का मतलब यह होता है कि इसका ढांचा और तकनीक ऐसी है कि यह रडार और सोनार से लगभग छुपी रह सकती है और उनकी पकड़ में नहीं आती। डीप सी एंडोरेंस का मतलब यह होता है कि यह लंबे समय तक गहराई में रहकर अपना मिशन पूरा कर सकती है। बिना बार-बार ऊपर आए सतह पर आए।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:31:56 +0530</pubDate>
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<title>मध्य पूर्व संकट से सीरिया में नाज़ुक प्रगति के लिए जोखिम, सुरक्षा परिषद में चर्चा</title>
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<description><![CDATA[ सीरिया के लिए यूएन के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि विशाल चुनौतियों से जूझते हुए, देश स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, मगर आर्थिक, संस्थागत व सामाजिक दबावों व असुरक्षा से राजनैतिक परिवर्तन की प्रक्रिया जटिलताओं से भरी है. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:31:11 +0530</pubDate>
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<title>Iran ने Hormuz में रोकी भारत की राह! Gujarat आ रहे पोत समेत दो Ship जब्त, तेल सप्लाई पर खतरा</title>
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<description><![CDATA[ खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक और बड़ी घटना सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने बुधवार को दो जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया, जिनमें से एक भारत के गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह की ओर आ रहा था।बता दें कि यह घटनाक्रम होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार बढ़ते तनाव के बीच हुआ है, जहां पहले भी एक भारत की ओर आ रहे जहाज पर गोलीबारी की खबर सामने आई थी। मौजूद जानकारी के अनुसार, उस घटना में जहाज को बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा था, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए थे।ईरान के सरकारी प्रसारण माध्यमों के मुताबिक, इन दोनों जहाजों को देश की सैन्य इकाई इस्लामिक क्रांतिकारी गार्ड कोर के नियंत्रण में लिया गया है और उन्हें ईरान की ओर ले जाया जा रहा है। गौरतलब है कि इन जहाजों की पहचान एमएससी फ्रांसेस्का और एपामिनोंडास के रूप में की गई है, हालांकि इनके मालिकों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।मौजूद जानकारी के अनुसार, एपामिनोंडास नाम का जहाज लाइबेरिया के झंडे वाला एक बड़ा मालवाहक पोत है, जो गुजरात के कच्छ जिले में स्थित मुंद्रा बंदरगाह की ओर जा रहा था। समुद्री आंकड़ों में इसकी स्थिति “रुका हुआ” बताई गई है, जिससे संकेत मिलता है कि इसे जबरन रोका गया है।गौरतलब है कि शुरुआती खबरों में इन जहाजों को एक साथ चल रहे समूह का हिस्सा बताया गया था, लेकिन बाद में विश्लेषण से यह सामने आया कि ये दोनों जहाज अलग मार्ग पर चल रहे थे और बाकी जहाज सुरक्षित तरीके से क्षेत्र से बाहर निकल गए थे। इससे यह भी साफ होता है कि इन दोनों जहाजों को अलग से निशाना बनाया गया हो सकता है।बता दें कि यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में दोनों पक्षों के बीच बातचीत के प्रयास हुए थे, लेकिन वे सफल नहीं हो सके और स्थिति टकराव की ओर बढ़ गई है।गौरतलब है कि इस बीच एक अस्थायी युद्धविराम की कोशिश भी की गई थी, जिसमें पाकिस्तान की भूमिका बताई जा रही है, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र में तनाव कम नहीं हुआ है। समुद्री मार्ग पर पाबंदियां और सैन्य गतिविधियां अब भी जारी हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।मौजूद जानकारी के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाएगी, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 08:44:39 +0530</pubDate>
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<title>सूडान युद्ध: घर लौटने वाले हताश नागरिकों के लिए, चुनौतियों का नया अम्बार</title>
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<description><![CDATA[ अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने चिन्ता जताई है कि सूडान में हिंसक टकराव की वजह से विस्थापित होने वाले लगभग 40 लाख लोगों ने अपने घरों की ओर वापसी की है, लेकिन वहाँ भी उन्हें गुज़र-बसर के लिए एक नए संघर्ष से जूझना पड़ रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 08:44:17 +0530</pubDate>
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<title>होर्मुज़ संकट: उर्वरक आपूर्ति में देरी से गहरा सकता है वैश्विक खाद्य संकट</title>
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<description><![CDATA[ फ़ारस की खाड़ी में जारी संकट के बीच, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुज़रने वाले उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित है. जिससे इन उन उर्वरकों पर निर्भर किसानों के सामने गम्भीर चुनौती खड़ी हो गई है, और दुनिया भर में करोड़ों लोगों की खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ने का ख़तरा है, विशेषकर सूडान जैसे युद्धग्रस्त देशों में. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 08:44:12 +0530</pubDate>
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<title>मध्य पूर्व: युद्धविराम की अवधि बढ़ने का स्वागत, होर्मुज़ जलक्षेत्र में तनाव बरक़रार</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व क्षेत्र में नाज़ुक परिस्थितियों के बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के साथ युद्धविराम की अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिसका यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने स्वागत किया है और कहा है कि कूटनैतिक प्रयासों के लिए अब भी खुला हुआ है. लेकिन, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अब भी असुरक्षा व्याप्त है. बुधवार को जहाज़ों पर गोलीबारी की घटनाओं से एक बार फिर सुरक्षित आवाजाही व क्षेत्रीय अस्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 08:44:12 +0530</pubDate>
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<title>ग़ाज़ा: आर्थिक बदहाली ने बढ़ाई, उच्च&#45;शिक्षा प्राप्त युवा फ़लस्तीनियों की मुश्किलें</title>
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<description><![CDATA[ ग़ाज़ा पट्टी में युनिवर्सिटी स्तर की पढ़ाई-लिखाई कर चुके युवा फ़लस्तीनी, कड़ी मेहनत से हासिल किए गए अपने सपनों के साथ समझौता करते हुए और ज्ञान व कौशल को किनारे रखकर किसी भी तरह से अपनी गुज़र-बसर करने की कोशिश कर रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:18:35 +0530</pubDate>
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<title>Tehran की सड़कों पर Iran ने कराई अपनी खतरनाक मिसाइलों की परेड, खाड़ी देश सहमे, अमेरिका को आया पसीना!</title>
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<description><![CDATA[ ईरान में सैन्य प्रदर्शन और कूटनीतिक गतिविधियां एक साथ चलती नजर आ रही हैं। एक ओर राजधानी तेहरान सहित पूरे देश में सरकार समर्थित रैलियों में शक्तिशाली हथियारों का प्रदर्शन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश भी कर रही है। हम आपको बता दें कि तेहरान की सड़कों पर आयोजित मिसाइल परेड ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। खास बात यह है कि यह परेड संघर्षविराम अवधि समाप्त होने से ठीक पहले आयोजित की गयी थी। यानि ईरान अमेरिका को साफ संदेश दे रहा था कि यदि वह दोबारा युद्ध मैदान में आया तो तेहरान पूरी ताकत के साथ सामना करने के लिए तैयार है।हम आपको बता दें कि परेड के दौरान हजारों सैनिकों के साथ अत्याधुनिक हथियारों, ड्रोन और वायु रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन किया गया। इस परेड में एस-300 मिसाइल रक्षा प्रणाली भी दिखाई गई, जिसे देश की सुरक्षा क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इस आयोजन को देखा और इसकी सराहना की। यह प्रदर्शन स्पष्ट रूप से शक्ति प्रदर्शन का संदेश देता है, जो अमेरिका के साथ ही खाड़ी देशों को यह बताने के लिए है कि ईरान की सैन्य क्षमता मजबूत और सक्रिय है। हथियारों के प्रदर्शनों के दौरान जिस तरह जनता ने सरकार और सेना की सराहना की उससे ईरानी शासन का जोश हाई नजर आ रहा है।इसे भी पढ़ें: ईरान की ताकत बरकरार, अमेरिका के घटे हथियार! क्या इसी वजह से ट्रंप ने बढ़ाया युद्धविराम?साथ ही सैन्य प्रदर्शन के दौरान इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर द्वारा मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का सार्वजनिक प्रदर्शन भी किया गया। इनमें खोर्रमशहर-4 और घदर जैसी मिसाइलें शामिल हैं, जिन्हें अत्यंत घातक माना जाता है। खोर्रमशहर-4 को एक प्रकार का प्रलयकारी हथियार कहा जाता है, जो तरल ईंधन से संचालित होता है और तेज गति से हमला करने में सक्षम है। वहीं सिज्जिल मिसाइल भी चर्चा में रही, जिसकी मारक क्षमता लगभग दो हजार से ढाई हजार किलोमीटर तक बताई जाती है। यह मिसाइल क्षेत्रीय लक्ष्यों जैसे इजराइल, सऊदी अरब और पश्चिमी देशों के ठिकानों तक पहुंच सकती है।इन सैन्य प्रदर्शनों का उद्देश्य केवल आंतरिक मनोबल बढ़ाना नहीं है, बल्कि बाहरी दुनिया को स्पष्ट संदेश देना भी है कि ईरान अपनी रक्षा क्षमता में लगातार प्रगति कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार बनाने की तकनीकी क्षमता मौजूद है, लेकिन फिलहाल उसका ध्यान पारंपरिक बैलिस्टिक शक्ति और ड्रोन तकनीक पर अधिक केंद्रित है। ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में भी ईरान ने उल्लेखनीय प्रगति की है। शाहिद जैसे आत्मघाती ड्रोन क्षेत्रीय संघर्षों में उपयोग किए गए हैं और इन्हें सटीक हमलों के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित करने की क्षमता भी ईरान की रणनीतिक ताकत का हिस्सा मानी जाती है, जो वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।हालांकि, इन सैन्य गतिविधियों के समानांतर ईरान कूटनीतिक प्रयास भी तेज कर रहा है। विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची हाल ही में मास्को पहुंचे, जहां उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि रूस ने उन्हें आवश्यक जानकारी प्रदान की है। इसके बाद उनका रोम जाने का कार्यक्रम है, जहां वह अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से बातचीत कर सकते हैं।ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी विरोधाभासी बातें सामने आ रही हैं। एक ओर अमेरिका की ओर से यूरेनियम संवर्धन को सीमित स्तर तक स्वीकार करने की बात कही जा रही है तो दूसरी ओर इसे पूरी तरह समाप्त करने की मांग भी की जा रही है। बताया जा रहा है कि यदि संवर्धन को 3.6 प्रतिशत तक सीमित किया जाता, तो यह 2015 के परमाणु समझौते के अनुरूप होता। इस समझौते के तहत ईरान को आर्थिक राहत मिली थी, बदले में उसने अपने परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण रखने का वादा किया था। लेकिन 2018 में अमेरिका के समझौते से हटने के बाद स्थिति बदल गई। ईरान ने सभी सीमाएं तोड़ दीं और अब उसके पास लगभग 60 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन करने की क्षमता होने की बात कही जाती है, जो हथियार स्तर के करीब है।इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ओर बातचीत की इच्छा जताई है, वहीं दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने भी कहा है कि बातचीत एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुकी है। वहीं ईरान के भीतर भी इस मुद्दे पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां कुछ कट्टरपंथी समूह अमेरिका के खिलाफ नारे लगा रहे हैं, वहीं धार्मिक नेताओं ने सावधानी के साथ बातचीत जारी रखने की सलाह दी है। उनका मानना है कि अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता, लेकिन बातचीत के दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए। इस प्रकार ईरान इस समय दोहरी रणनीति पर काम कर रहा है। एक ओर वह अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है, जिससे संभावित विरोधियों को चेतावनी दी जा सके, वहीं दूसरी ओर वह कूटनीतिक समाधान की दिशा में भी प्रयासरत है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह संतुलन किस दिशा में जाता है और क्या परमाणु मुद्दे पर कोई ठोस समझौता हो पाता है या नहीं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:17:20 +0530</pubDate>
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<title>भारत के लिए अपने PM पर टूट पड़ा नेपाल! बालेन शाह के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा</title>
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<description><![CDATA[ काठमांडू के मेयर से राष्ट्रीय नेता बने बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। सरकार ने दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता संभालने के एक महीने से भी कम समय में ही यह स्थिति पैदा हो गई है। विरोध प्रदर्शन सड़कों से लेकर देश के प्रशासनिक केंद्र &#039;सिंह दरबार&#039; तक फैल गए हैं; छात्र, राजनीतिक समूह और आम नागरिक सहित प्रदर्शनकारी काठमांडू और अन्य शहरों की सड़कों पर उतर आए हैं। इन विरोध प्रदर्शनों का एक मुख्य कारण सरकार का वह फैसला है, जिसके तहत भारत से लाए गए 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर अनिवार्य सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) लगा दिया गया है। सीमावर्ती इलाकों के निवासियों का कहना है कि इस कदम का उनके रोज़मर्रा के जीवन पर सीधा असर पड़ता है, क्योंकि वे ज़रूरी चीज़ों के लिए सीमा पार से की जाने वाली खरीदारी पर काफ़ी हद तक निर्भर रहते हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यह नीति आम नागरिकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालती है और इन क्षेत्रों की ज़मीनी हकीकतों को ध्यान में रखने में विफल रहती है।छात्र संघ विवाद से युवाओं में भारी रोषगुस्से का एक और बड़ा कारण सरकार का वह कथित कदम है, जिसके तहत वह राजनीतिक समूहों से जुड़े छात्र संघों को खारिज कर रही है या उन्हें दरकिनार कर रही है। छात्र नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया है कि बातचीत करने के बजाय उसने &quot;दमनकारी रवैया&quot; अपनाया है, जिससे युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है। देशभर में हज़ारों छात्र विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए हैं, जिनमें से कई प्रदर्शनों का नेतृत्व स्कूली और कॉलेज समूहों ने किया है। एक चौंकाने वाले दृश्य में, बड़ी संख्या में छात्रों को स्कूल की वर्दी में विरोध प्रदर्शन करते देखा गया; वे हाथों में तख्तियाँ लिए हुए थे और सरकार के फ़ैसलों के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे थे। यह इस बात का संकेत है कि यह आंदोलन अब केवल राजनीतिक गलियारों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका विस्तार व्यापक समाज तक हो गया है।इसे भी पढ़ें: Nepal के PM Balen Shah का बड़ा एक्शन, University Campus से Political Unions को हटाने का दिया फरमानगृह मंत्री के इस्तीफ़े की मांग तेज़विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र गृह मंत्री सुदान गुरुंग के ख़िलाफ़ लगे आरोप भी रहे हैं। उन पर आय से अधिक संपत्ति रखने और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन में शामिल होने के आरोप हैं। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी समूहों का दावा है कि गुरुंग संदिग्ध व्यावसायिक लेन-देन में शामिल थे, जिसमें वित्तीय अपराधों के आरोपियों से कथित संबंध भी शामिल हैं। नेपाल की मीडिया रिपोर्टों में ऐसे दस्तावेज़ों का हवाला दिया गया है, जिनसे पता चलता है कि उनका निवेश और शेयरहोल्डिंग कुछ विवादित संस्थाओं से जुड़ी हुई है; इससे नैतिक आधार पर उनके इस्तीफ़े की मांग और तेज़ हो गई है। राजनीतिक दल और नागरिक समाज समूह इस मुद्दे पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे यह मौजूदा अशांति का एक प्रमुख केंद्र बिंदु बन गया है।इसे भी पढ़ें: Bihar में Samrat Choudhary सरकार की पहली अग्निपरीक्षा, 24 April को NDA का बड़ा Floor Testबालेन शाह सरकार पर दबावविरोध प्रदर्शनों के बढ़ते दायरे और तीव्रता के साथ, बालेन शाह सरकार पर कई मोर्चों पर जवाब देने का दबाव बढ़ता जा रहा है: आर्थिक नीति से जुड़ी चिंताएँ, छात्रों में अशांति, और सरकार के भीतर ही अनुचित आचरण के आरोप। जो बात नीतिगत फ़ैसलों को लेकर असंतोष के रूप में शुरू हुई थी, वह अब एक व्यापक राजनीतिक चुनौती का रूप ले चुकी है; नेपाल की सड़कों पर और वहाँ के राजनीतिक परिदृश्य में, दोनों ही जगहों पर विपक्षी आवाज़ें अब और भी बुलंद होती जा रही हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:17:19 +0530</pubDate>
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<title>India International Law Violation: हथियार भेजा...UN स्पेशल दूत ने बोला&#45; भारत ने कानून तोड़ा</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में भारत पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बता दें आपको इजराइल के साथ संबंधों को लेकर भारत पर कानूनी सवाल खड़े किए गए हैं। यूएन स्पेशल दूत फ्रांसिस्का एल्विनीज़ ने भारत की भूमिका पर बड़ा बयान दिया है। रिपोर्ट में भारत पर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। इजराइल को हथियार सप्लाई को लेकर यूएन ने आपत्ति जताई है। वहीं यह रिपोर्ट यूनाइटेड नेशन ह्यूमन राइट्स काउंसिल में पेश की गई है। बता दें आपको रिपोर्ट में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के फैसलों का हवाला दिया गया है। भारत की भूमिका को लेकर अब वैश्विक स्तर पर बहस तेज हो गई है। अल्बनीज ने यूएन (UN) मानवाधिकार परिषद में अपनी &#039;टॉर्चर एंड जेनोसाइड&#039; (यातना और नरसंहार) नाम की रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में उन्होंने आरोप लगाया है कि अक्टूबर 2023 से इज़राइल लगातार एक सोची-समझी साजिश के तहत फिलिस्तीनियों को टॉर्चर कर रहा है (यातनाएं दे रहा है)।इसे भी पढ़ें: क्यों अचानक ईरान के इशारों पर नाचने लगे ट्रंप? फोन के टॉक टाइम खत्म होने से पहले रिचार्ज सरीखा सीजफायर बढ़ाने की असली वजह &#039;TACO&#039; है!रिपोर्ट में गाजा की जेलों और वहां के हालात को एक &#039;बहुत बड़े टॉर्चर कैंप&#039; जैसा बताया गया है। इसमें दर्ज आंकड़ों के मुताबिक 18,500 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 1,500 बच्चे भी शामिल हैं, और 4,000 से ज्यादा लोगों को जबरन गायब कर दिया गया है। भारत के बारे में बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि जब (इज़राइली पीएम) बेंजामिन नेतन्याहू पर युद्ध अपराध (war crimes) और इंसानियत के खिलाफ अपराध करने के आरोप लगे हैं, तो ऐसे में भारत अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत अपनी जिम्मेदारियों का उल्लंघन कर रहा है और इसके लिए उसकी भी जवाबदेही तय हो सकती है।इसे भी पढ़ें: भारत को गाली देने वाली मुस्लिम MP को संसद से ऐसे उठाकर फेंका, चौंक गए सभीअल्बानीज़ ने यह तर्क भी दिया कि इज़राइल के साथ भारत के लगातार बने राजनीतिक और रक्षा संबंध, उनकी रिपोर्ट में बताए गए हिंसा के व्यापक तंत्र को बढ़ावा देने का जोखिम पैदा करते हैं; उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के जुड़ाव उस चीज़ में योगदान देते हैं जिसे उन्होंने &#039;अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था का क्षरण&#039; बताया है। कब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी इलाकों के लिए यूएन की स्पेशल रैपोर्टियर फ़्रांसेस्का अल्बानीज़, गुरुवार, 10 जुलाई, 2025 को बोस्निया और हर्ज़ेगोविना के सारायेवो हवाई अड्डे पर एसोसिएटेड प्रेस से बात कर रही हैं। वह स्रेब्रेनिका नरसंहार की 30वीं बरसी मनाने वाले कार्यक्रमों में शामिल होने जा रही हैं। इंटरव्यू में अल्बानीज़ ने भारत और इज़राइल तथा ऐतिहासिक फ़िलिस्तीन के बीच समानताएँ बताईं; उन्होंने कहा कि इन सभी की जड़ें ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन में हैं और ये उसी विरासत से उभरे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य होने के नाते, दोनों देशों पर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के भीतर कुछ ज़िम्मेदारियाँ हैं। उन्होंने कहा, &quot;मुझे ऐसा लगता है कि मौजूदा समय में, भारत और इज़राइल उस अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमज़ोर करने में योगदान दे रहे हैं, जिसे हमारे पूर्वजों ने बड़ी मुश्किल से बनाया था। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:17:18 +0530</pubDate>
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<title>Hormuz का &amp;apos;खतरनाक Mission&amp;apos; पूरा, ईरानी फायरिंग के बावजूद 31 Crew Members संग मुंबई पहुंचा टैंकर देश गरिमा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे टकराव के बीच, भारतीय कच्चे तेल का टैंकर &quot;देश गरिमा&quot; रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण &#039;स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़&#039; से गुज़रने के बाद सुरक्षित रूप से भारतीय जलक्षेत्र में पहुँच गया है। कच्चे तेल की भारी खेप ले जा रहा यह जहाज़, फ़िलहाल मुंबई के तट से कुछ नॉटिकल मील की दूरी पर लंगर डाले खड़ा है। यह 18 अप्रैल को होर्मुज़ क्षेत्र से रवाना हुआ था और इस संकरे जलमार्ग से गुज़रते समय कथित तौर पर ईरान के &#039;इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स&#039; (IRGC) की गोलीबारी की चपेट में आने के बावजूद इसने अपनी यात्रा जारी रखी। भारतीय ध्वज फहरा रहे इस टैंकर पर 31 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार हैं। इसके सुरक्षित आगमन को एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में व्यवधान और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच।इसे भी पढ़ें: भारत के लिए अपने PM पर टूट पड़ा नेपाल! बालेन शाह के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहाहॉरमुज़ जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार करने वाला 10वां भारतीय जहाज़यह जहाज़ मार्च की शुरुआत से अब तक इस जलडमरूमध्य से गुज़रने वाला भारत के झंडे वाला 10वां जहाज़ है। यह इस बात को दिखाता है कि इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बावजूद समुद्री आवाजाही लगातार जारी है। भारत ने व्यापारिक जहाज़ों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर अपना रुख़ साफ़ तौर पर ज़ाहिर किया है, और ईरान से अपील की है कि वह हॉरमुज़ जलडमरूमध्य से भारतीय जहाज़ों के सुरक्षित गुज़रने को सुनिश्चित करे। अतीत में, ईरान ने भारत को बदलते भू-राजनीतिक हालात से निपटने और संघर्षों के बीच तेल संकट से उबरने में मदद करने के लिए सहयोग दिया है। भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक रूप से मज़बूत संबंध रहे हैं।इसे भी पढ़ें: India International Law Violation: हथियार भेजा...UN स्पेशल दूत ने बोला- भारत ने कानून तोड़ाभारत के झंडे वाले जहाज़ों पर गोलीबारीयह ध्यान रखना ज़रूरी है कि IRGC ने पहले भी भारत के दो अन्य जहाज़ों VLCC Sanmar Herald और बल्क कैरियर Jag Arnav पर गोलीबारी की थी, जब वे हॉरमुज़ जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश कर रहे थे; इस घटना के कारण दोनों जहाज़ों को वापस लौटना पड़ा था। भारत ने इस घटना को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। हालाँकि, जहाज़ों पर सवार चालक दल के किसी भी सदस्य को कोई चोट नहीं आई थी। यह पहला ऐसा मामला था जिसमें ईरानी सुरक्षा बलों ने 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद भड़के संघर्ष के बीच किसी भारतीय जहाज़ को निशाना बनाया था। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:17:17 +0530</pubDate>
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<title>Nepal के Home Minister Sudan Gurung का इस्तीफा, बोले&#45; मेरे लिए पद से बड़ी है नैतिकता</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल के गृह मंत्री, सुदान गुरुंग ने बुधवार (22 अप्रैल) को नैतिक ज़िम्मेदारी और अपनी वित्तीय संपत्तियों को लेकर उठाई गई चिंताओं की निष्पक्ष जाँच की ज़रूरत का हवाला देते हुए इस्तीफ़ा दे दिया। उन्होंने पदभार संभालने के महज़ 26 दिन बाद ही इस्तीफ़ा दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए अपने इस्तीफ़े की घोषणा की। सुदान गुरुंग ने कहा कि मेरे लिए, नैतिकता किसी भी पद से ज़्यादा अहमियत रखती है।  अपने इस्तीफ़े की घोषणा करते हुए एक फेसबुक पोस्ट में गुरुंग ने कहा कि उन्होंने जनता की आलोचना को गंभीरता से लिया है और सार्वजनिक जीवन में नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए पद छोड़ने का फ़ैसला किया है। उन्होंने कहा, मैं सुदान गुरुंग, चैत्र 13, 2082 (26 मार्च, 2026) से गृह मंत्री के तौर पर पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन कर रहा हूँ। हाल ही में, मैंने अपने शेयरों और उससे जुड़े मामलों को लेकर नागरिकों द्वारा उठाए गए सवालों, टिप्पणियों और सार्वजनिक चिंताओं को बहुत गंभीरता से लिया है।इसे भी पढ़ें: Bihar में Samrat Choudhary सरकार की पहली अग्निपरीक्षा, 24 April को NDA का बड़ा Floor Testईमानदारी के महत्व पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि पद पर बने रहने से पहले जनता का भरोसा सबसे ऊपर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरे लिए, नैतिकता किसी भी पद से ज़्यादा अहमियत रखती है, और जनता के भरोसे से बड़ी कोई ताक़त नहीं है। आज का &#039;Gen Z&#039; आंदोलन, जो सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करता है, यही संदेश देता है। सार्वजनिक जीवन साफ़-सुथरा होना चाहिए, और नेतृत्व जवाबदेह होना चाहिए। गुरुंग ने व्यापक राजनीतिक संदर्भ और देश के अतीत में दिए गए बलिदानों का भी ज़िक्र किया और कहा कि जब सवाल उठते हैं तो जवाबदेही ज़रूरी होती है। गुरुंग ने कहा, &quot;जब मेरे 46 भाइयों और बहनों के ख़ून और बलिदान पर बनी सरकार के ख़िलाफ़ सवाल उठाए जाते हैं, तो उसका एकमात्र जवाब नैतिकता ही है।इसे भी पढ़ें: भारत के लिए अपने PM पर टूट पड़ा नेपाल! बालेन शाह के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहाअपने पद से हटने के फ़ैसले का ऐलान करते हुए उन्होंने कहा कि इस कदम से पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और हितों के किसी भी टकराव से बचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इसलिए, मुझसे जुड़े मामलों की निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने और पद पर रहते हुए हितों के किसी भी टकराव को रोकने के लिए, मैंने आज से गृह मंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने नागरिकों, मीडिया और युवाओं से सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्ध होने का आग्रह किया। पूर्व नेपाली गृह मंत्री ने कहा, &quot;मैंने अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी पूरी कर दी है। अब, मैं अपने प्यारे मीडिया मित्रों, सभी नेपाली भाइयों और बहनों और युवाओं से अपील करता हूँ। अगर हम सचमुच बदलाव चाहते हैं, तो हम सभी को सत्य, ईमानदारी और आत्म-शुद्धि के मार्ग पर चलना होगा। इस बारे में जानकारी कि कुछ मीडियाकर्मियों के पास कहाँ &#039;स्वीट शेयर्स&#039; (विशेष शेयर) हैं, अंततः सामने आ ही जाएगी। जो लोग &#039;राम राज्य&#039; (आदर्श शासन) की आकांक्षा रखते हैं, उनमें त्याग करने और नैतिक बल दिखाने का साहस भी होना चाहिए।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:17:16 +0530</pubDate>
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<title>Hormuz में Iran का बड़ा एक्शन, रिवोल्यूशनरी गार्ड ने 3 जहाजों को बनाया बंधक, बढ़ा तनाव</title>
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<description><![CDATA[ डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सीज़फ़ायर की घोषणा के बीच एक अहम घटनाक्रम में, बुधवार को ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दो जहाज़ों पर हमला किया। ईरानी सरकारी टेलीविज़न की रिपोर्ट के अनुसार, ये जहाज़ अब गार्ड की हिरासत में हैं और उन्हें ईरान ले जाया जा रहा है। रिपोर्ट में इन जहाज़ों की पहचान MSC Francesca और Epaminodes के रूप में की गई है। जहाज़ों के मालिकों से इस मामले पर टिप्पणी के लिए तत्काल संपर्क नहीं हो सका। इन जहाज़ों को ज़ब्त किया जाना तनाव में एक और बढ़ोतरी का संकेत है; इससे पहले अमेरिका ने भी दो ईरानी जहाज़ों को तब ज़ब्त कर लिया था, जब इस्लामाबाद में सीज़फ़ायर वार्ता होने वाली थी।इसे भी पढ़ें: Tehran की सड़कों पर Iran ने कराई अपनी खतरनाक मिसाइलों की परेड, खाड़ी देश सहमे, अमेरिका को आया पसीना! ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तीसरे जहाज़ पर हमला कियाएपी ने ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसियों के हवाले से बताया है कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक तीसरे जहाज़ पर भी हमला किया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, ये हमले ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा किए गए थे। ये हमले तब हुए जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा देगा, जिसकी समय सीमा बुधवार को समाप्त होने वाली थी। लेकिन ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखेगा। इन हमलों ने जलडमरूमध्य में जहाज़ों की आवाजाही के लिए मौजूद खतरों को और बढ़ा दिया है, शांति काल में दुनिया का 20% तेल और प्राकृतिक गैस इसी मार्ग से होकर गुज़रता है।इसका मतलब है कि भले ही युद्धविराम काफी हद तक कायम रहे - और ईरान तथा अमेरिका एक-दूसरे पर बड़े हमले फिर से शुरू न करें - फिर भी इस युद्ध का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ता रहेगा।इस टकराव की वजह से गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं और वह भी इस इलाके से कहीं दूर तक; साथ ही खाने-पीने की चीज़ों और कई दूसरे उत्पादों की कीमतें भी बढ़ गई हैं। यह जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) जितने ज़्यादा समय तक बंद रहेगा, इसके असर उतने ही ज़्यादा गंभीर और दूरगामी होंगे और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लौटने में उतना ही ज़्यादा समय लगेगा।इसे भी पढ़ें: Hormuz का &#039;खतरनाक Mission&#039; पूरा, ईरानी फायरिंग के बावजूद 31 Crew Members संग मुंबई पहुंचा टैंकर देश गरिमाईरान ने ट्रंप के इस कदम पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन एक ईरानी राजनयिक ने कहा कि जब तक यह नाकाबंदी हट नहीं जाती, तब तक बातचीत फिर से शुरू नहीं होगी। ब्रिटिश सेना के &#039;यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर&#039; के मुताबिक, बुधवार सुबह ईरान ने इस जलडमरूमध्य में एक कंटेनर जहाज़ पर गोलीबारी की, और उसके कुछ ही समय बाद एक दूसरे जहाज़ पर भी हमला किया गया।तीनों जहाज़ &#039;रिवोल्यूशनरी गार्ड&#039; की हिरासत में हैंईरान के सरकारी टेलीविज़न ने बाद में बताया कि ये जहाज़ &#039;रिवोल्यूशनरी गार्ड&#039; की हिरासत में हैं और उन्हें ईरान ले जाया जा रहा है। उसने इन जहाज़ों की पहचान &#039;MSC Francesca&#039; और &#039;Epaminodes&#039; के तौर पर की है। जहाज़ों के मालिकों से इस मामले पर टिप्पणी के लिए तुरंत संपर्क नहीं हो पाया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:17:16 +0530</pubDate>
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<title>IDF ने Southern Lebanon में मारे 2 Hezbollah आतंकी, सीज़फ़ायर उल्लंघन का आरोप</title>
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<description><![CDATA[ इज़राइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने बुधवार को कहा कि उसके सैनिकों और वायुसेना ने दक्षिणी लेबनान में एक हमला किया। यह हमला हिज़्बुल्लाह द्वारा सीज़फ़ायर के उल्लंघन के दावे के बाद किया गया, जिसमें हिज़्बुल्लाह के दो सदस्य फॉरवर्ड डिफेंस लाइन पार करके इज़राइली सैनिकों के करीब आ गए थे। एक बयान में आईडीएफ ने कहा कि यह घटना दक्षिणी लेबनान के सलुकी इलाके में हुई, जहाँ IDF ने एक संभावित खतरे का पता लगाने का दावा किया।इसे भी पढ़ें: Lebanon में IDF सैनिक की हरकत पर भड़के PM Netanyahu, बोले- दोषी को मिलेगी सख्त सज़ाआईडीएफ ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि कल (मंगलवार को), आईडीएफ के सैनिकों ने दक्षिणी लेबनान के सलुकी इलाके में दो आतंकवादियों की पहचान की। इन आतंकवादियों ने सीज़फ़ायर समझौतों का उल्लंघन किया, फॉरवर्ड डिफेंस लाइन पार की और सैनिकों के करीब आ गए, जिससे एक तत्काल खतरा पैदा हो गया था। सेना ने कहा कि उसने स्थिति को काबू में करने के लिए हवाई हमला करके जवाब दिया। सेना ने यह भी बताया कि इस इलाके में ऑपरेशन अभी भी जारी हैं, जिसमें हिज़्बुल्लाह से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने के प्रयास भी शामिल हैं। आईडीएफ ने कहा कि पहचान होने के बाद, इज़राइली वायु सेना ने हमला किया और खतरे को खत्म करने के लिए आतंकवादियों को मार गिराया। इसके अलावा, आईडीएफ के सैनिक खतरों को दूर करने और हथियारों का पता लगाने के लिए हिज़्बुल्लाह के बुनियादी ढांचे को नष्ट करना जारी रखे हुए हैं। अपने रुख को दोहराते हुए, आईडीएफ ने कहा, इज़राइली नागरिकों और अपने सैनिकों के लिए किसी भी खतरे को दूर करने के लिए कार्रवाई जारी रखेंगे। पहचान होने के बाद, इज़राइली वायु सेना ने हमला किया और खतरे को खत्म करने के लिए आतंकवादियों को मार गिराया। इसके अलावा, आईडीएफ के सैनिक खतरों को दूर करने और हथियारों का पता लगाने के लिए हिज़्बुल्लाह के बुनियादी ढांचे को नष्ट करना जारी रखे हुए हैं। अपने रुख को दोहराते हुए, आईडीएफ ने कहा कि इज़राइली नागरिकों और अपने सैनिकों के लिए किसी भी खतरे को दूर करने के लिए कार्रवाई जारी रखेंगे।इसे भी पढ़ें: Gaza में Hamas को लगा बड़ा झटका, IDF ने कम्युनिकेशन कमांडर Ahmed Khadera को किया ढेर10-दिवसीय संघर्ष विराम लागू होने के बाद, इज़राइल रक्षा बलों (IDF) ने 19 अप्रैल को &quot;फॉरवर्ड डिफेंस लाइन&quot; (जिसे येलो लाइन भी कहा जाता है) का एक विस्तृत नक्शा जारी किया। यह घोषणा उस ऑपरेशनल ज़ोन को स्पष्ट करती है जहाँ इज़राइली सेनाएँ लेबनानी क्षेत्र के काफी अंदर तैनात रहती हैं। सेना ने पुष्टि की कि मौजूदा संघर्ष विराम के बावजूद, जो 16 अप्रैल की आधी रात से प्रभावी हुआ, पाँच डिवीजनों और इज़राइली नौसेना बलों की एक विशाल टुकड़ी इस रेखा के दक्षिण में एक साथ काम कर रही है। आईडीएफ ने कहा कि इन पाँच डिवीजनों की निरंतर उपस्थिति उत्तरी सीमा पर &quot;सुरक्षा की वास्तविकता को मौलिक रूप से बदलने&quot; के लिए आवश्यक है। एक्स पर एक पोस्ट में आईडीएफ ने कहा कि खुलासा: फॉरवर्ड डिफेंस लाइन और वह क्षेत्र जिसमें IDF के सैनिक संघर्ष विराम समझौते के बाद काम कर रहे हैं। हिज़्बुल्लाह के आतंकी बुनियादी ढांचे के स्थलों को नष्ट करने और उत्तरी इज़राइल में समुदायों के लिए सीधे खतरों को रोकने के लिए, दक्षिणी लेबनान में फॉरवर्ड डिफेंस लाइन के दक्षिण में 5 डिवीजन एक साथ काम कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:17:15 +0530</pubDate>
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<title>Hormuz Strait में फिर बढ़ा तनाव, Iran के IRGC ने इजरायली Ship समेत 2 जहाज़ों को कब्ज़े में लिया</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बुधवार को दावा किया कि उसकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो जहाजों को ज़ब्त कर लिया है। IRGC ने आरोप लगाया कि इन जहाजों ने उसके क्षेत्रीय जल का उल्लंघन किया और तेहरान से बिना अनुमति लिए इस रणनीतिक जलमार्ग से बाहर निकलने की कोशिश की। यह घटना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अस्थायी संघर्ष विराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद हुई। ईरानी सरकारी मीडिया, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, ये दोनों जहाज—जिनकी पहचान &quot;MSC-FRANCESCA&quot; और &quot;EPAMINODES&quot; के रूप में हुई है—इस रणनीतिक जलमार्ग से गुज़रते समय कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन कर रहे थे।इसे भी पढ़ें: Hormuz में Iran का बड़ा एक्शन, रिवोल्यूशनरी गार्ड ने 3 जहाजों को बनाया बंधक, बढ़ा तनावIRGC ने अपने बयान में कहा कि ये जहाज बिना अनुमति के जलडमरूमध्य से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। IRGC ने उन पर बार-बार नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, जिसमें नेविगेशनल सहायता प्रणालियों के साथ छेड़छाड़ करना और समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालना शामिल है। IRIB द्वारा जारी बयान के अनुसार, &quot;होरमुज़ जलडमरूमध्य पर &#039;इंटेलिजेंट कंट्रोल&#039; (बुद्धिमानीपूर्ण नियंत्रण) के तहत, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने आज सुबह दो उल्लंघनकारी जहाजों की पहचान की। इनमें से एक जहाज &#039;MSC-FRANCESCA&#039; ज़ायोनी शासन से संबंधित था, और दूसरा जहाज &#039;EPAMINODES&#039; था। ये जहाज बार-बार नियमों का उल्लंघन करते हुए, नेविगेशनल सहायता प्रणालियों से छेड़छाड़ करते हुए और समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालते हुए, बिना किसी अनुमति के होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुपचुप तरीके से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे।इसे भी पढ़ें: Hormuz का &#039;खतरनाक Mission&#039; पूरा, ईरानी फायरिंग के बावजूद 31 Crew Members संग मुंबई पहुंचा टैंकर देश गरिमाबयान में आगे दावा किया गया कि IRGC बलों द्वारा खुफिया निगरानी के बाद इन जहाजों को रोका गया और बाद में उन्हें ईरानी क्षेत्रीय जल में ले जाया गया। अब इन जहाजों को उनके माल और दस्तावेजों की जांच के लिए आगे भेज दिया गया है। IRGC नौसेना ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि वह इस जलडमरूमध्य पर अपना &quot;इंटेलिजेंट कंट्रोल&quot; बनाए रखती है। उसने यह भी दोहराया कि ईरान के समुद्री नियमों का उल्लंघन करने वाला या इस जलमार्ग से सुरक्षित आवागमन में बाधा डालने वाला कोई भी कार्य, उसकी कड़ी निगरानी में रहेगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:17:14 +0530</pubDate>
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<title>Pahalgam Terror Attack की बरसी पर US और EU का संदेश, आतंक के खिलाफ लड़ाई में हम India के साथ हैं</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने बुधवार को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ अपनी एकजुटता दोहराई। यह पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी के मौके पर किया गया। यह हमला पिछले साल 22 अप्रैल को हुआ था, जिसमें 26 बेकसूर लोग मारे गए थे। एक्स पर पोस्ट किए गए एक संदेश में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी और इस दुखद घटना में अपनी जान गंवाने वालों को याद किया। गोर ने अपनी पोस्ट में कहा कि पहलगाम में हुए उस भयानक हमले की पहली बरसी पर, हम बेकसूर पीड़ितों को याद करते हैं और उनके परिवारों के साथ शोक मनाते हुए उनकी याद का सम्मान करते हैं। आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में अमेरिका भारत के लोगों के साथ खड़ा है।इसे भी पढ़ें: PM Modi पर Kharge के &#039;विवादित बोल&#039; से घमासान, BJP ने Election Commission में की शिकायतजम्मू-कश्मीर के खूबसूरत शहर पहलगाम में हुए इस हमले की दुनिया भर में कड़ी निंदा हुई थी। कई देशों ने भारत के प्रति अपना समर्थन जताया था और आतंकवाद से निपटने के लिए और भी कड़े कदम उठाने की मांग की थी। इस भयानक आतंकी हमले की पहली बरसी के मौके पर, यूरोपीय संघ (EU) और उसके 27 सदस्य देशों ने भारत के प्रति अपने अटूट समर्थन को फिर से दोहराया और हमले में जान गंवाने वाले बेकसूर लोगों को श्रद्धांजलि दी।इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: IAF Sirsa Unit ने तत्काल Action नहीं लिया होता तो Pakistan की बैलिस्टिक मिसाइल Delhi में तबाही मचा सकती थीबुधवार को एक्स पर की गई एक पोस्ट में भारत में यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने &quot;एक साल पहले मारे गए बेकसूर पीड़ितों की याद में भारत के लोगों के साथ खड़े रहने&quot; की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।संगठन ने दुखी परिवारों और भारत सरकार के साथ अपनी एकजुटता पर और ज़ोर दिया। ऑफिशियल बयान में कहा गया, &quot;उनके परिवारों और भारतीय अधिकारियों के साथ, हम उनकी याद का सम्मान करते हैं। हम आतंकवाद के सभी रूपों की पूरी तरह से निंदा करते हैं, जिसे कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता। पहलगाम में हुए जानलेवा आतंकी हमले के एक साल पूरे होने पर, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी, देश ने 22 अप्रैल, 2025 के उस सदमे को याद किया, जब आतंकवादियों ने जम्मू और कश्मीर के इस खूबसूरत टूरिस्ट शहर पर हमला किया था। हमलावरों ने घुसकर 26 आम लोगों को मार डाला, जिनमें ज़्यादातर टूरिस्ट थे, जिससे यह खूबसूरत जगह खून-खराबे की जगह बन गई।इसे भी पढ़ें: &#039;जी तो रहे हैं, लेकिन जिंदगी चली गई&#039;, पहलगाम हमले के एक साल बाद शहीद लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के पिता का दर्दपहलगाम में बॉर्डर पार हुए सांप्रदायिक हमले में हमलावरों ने पीड़ितों को मारने से पहले उनसे उनके धर्म के बारे में पूछा, जिससे परिवार एक साल बाद भी नुकसान से जूझ रहे हैं। जब भारत दुख मना रहा था, तब भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के रूप में अहम कार्रवाई की। भारतीय सेना ने 7 मई, 2025 को शुरू किए गए ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (PoJK) में आतंकी ठिकानों पर हमला किया। ऑफिशियल जानकारी के मुताबिक, सेना ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े नौ बड़े आतंकी लॉन्चपैड तबाह कर दिए और 100 से ज़्यादा आतंकवादियों को मार गिराया।जवाबी हमलों के बाद पाकिस्तान ने भारत के बॉर्डर वाले शहरों पर ड्रोन हमले और गोलाबारी शुरू कर दी, जिससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच चार दिन तक लड़ाई चली।भारत ने मज़बूत डिफेंस बनाए रखा, और आगे भी हमले किए जिससे पाकिस्तान में कई ठिकानों पर मिलिट्री और कम्युनिकेशन इंस्टॉलेशन तबाह हो गए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:17:13 +0530</pubDate>
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<title>भारत&#45;चीन रिश्तों में नई उड़ान? Air China ने शुरू की Beijing&#45;Delhi डायरेक्ट फ्लाइट्स</title>
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<description><![CDATA[ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए एक अहम कदम उठाते हुए, एयर चाइना ने 21 अप्रैल से बीजिंग और दिल्ली के बीच अपनी सीधी उड़ान सेवाएँ आधिकारिक तौर पर फिर से शुरू कर दी हैं। इस अहम हवाई संपर्क की बहाली, यात्रा को आसान बनाने और दोनों पड़ोसी देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। इस घोषणा की जानकारी भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने दी, जिन्होंने इस सेवा की बहाली को इस रूट के लिए एक मज़बूत और आत्मविश्वास से भरी शुरुआत बताया। फिर से शुरू की गई इस सेवा की शुरुआती उड़ानों ने बेहतरीन ऑपरेशनल क्षमता का प्रदर्शन किया, जिससे आगे के शेड्यूल के लिए एक सकारात्मक माहौल बना।इसे भी पढ़ें: ईरान की ताकत बरकरार, अमेरिका के घटे हथियार! क्या इसी वजह से ट्रंप ने बढ़ाया युद्धविराम?यात्रा के दोनों चरणों के लिए एयरबस A332 (A330-200) विमान का इस्तेमाल किया गया। यह एक वाइड-बॉडी विमान है जो अंतरराष्ट्रीय रूटों पर अपनी विश्वसनीयता के लिए जाना जाता है। इस सेवा की शुरुआत की तकनीकी सफलता का प्रमाण यह था कि आने और जाने वाली, दोनों ही उड़ानें तय समय से पहले ही अपने गंतव्य पर पहुँच गईं।इस सेवा को फिर से शुरू करने का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक यात्रियों, पर्यटकों और छात्रों के लिए यात्रा को और अधिक आसान बनाना है, ताकि दोनों देशों की राजधानियों के बीच की दूरी को कम किया जा सके। एक्स पर पोस्ट में पर एक पोस्ट में, यू ने कहा, &quot;21 अप्रैल को, एयर चाइना ने आधिकारिक तौर पर बीजिंग और दिल्ली के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू कर दीं। दोनों उड़ानें Airbus A332 पर संचालित हुईं, और दोनों ही निर्धारित समय से पहले पहुँच गईं -- यह फिर से शुरू हुए इस रूट के लिए एक मज़बूत और आत्मविश्वास से भरी शुरुआत है।इसे भी पढ़ें: भारत के लिए अपने PM पर टूट पड़ा नेपाल! बालेन शाह के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहासीधी उड़ानों की फिर से शुरुआत को लॉजिस्टिक्स और संचार को स्थिर करने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। हालाँकि यह कदम व्यावसायिक प्रकृति का है, लेकिन कूटनीतिक परिदृश्य में इसका एक प्रतीकात्मक महत्व भी है। आसमान एक बार फिर जुड़ गए हैं -- हमारी दोनों जनता के बीच आसान यात्राओं और गहरे संबंधों की कामना! ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:17:12 +0530</pubDate>
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<title>Trump का बड़ा ऐलान, Iran संग Peace Talks पर बोले&#45; Friday तक मिलेगी Good News</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के साथ सीज़फ़ायर (युद्धविराम) बढ़ाने के कुछ घंटों बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि बातचीत के दूसरे दौर को लेकर एक अच्छी खबर है, जो शायद शुक्रवार तक आ सकती है। उन्होंने कहा कि अगले 36 से 72 घंटों के भीतर शांति वार्ता की नई संभावनाएँ बन रही हैं और NY पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा होना संभव है।इसे भी पढ़ें: भारत के लिए अपने PM पर टूट पड़ा नेपाल! बालेन शाह के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहाट्रंप ने ईरान के साथ सीज़फ़ायर अनिश्चित काल के लिए बढ़ायाइससे पहले दिन में ट्रंप ने मध्यस्थ पाकिस्तान के अनुरोध पर ईरान के साथ सीज़फ़ायर को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद तेहरान के बिखरे हुए नेतृत्व को सात हफ़्ते से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए एक साझा प्रस्ताव तैयार करने का समय देना है। इस नाटकीय घोषणा का पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने स्वागत किया। यह घोषणा 8 अप्रैल को घोषित दो हफ़्ते के सीज़फ़ायर की समय सीमा खत्म होने से ठीक कुछ घंटे पहले की गई थी। इस विस्तार के कारण, उपराष्ट्रपति JD वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का इस्लामाबाद का प्रस्तावित दौरा, जो ईरानी वार्ताकारों के साथ शांति वार्ता के लिए होना था, प्रभावी रूप से टल गया।इसे भी पढ़ें: Tehran की सड़कों पर Iran ने कराई अपनी खतरनाक मिसाइलों की परेड, खाड़ी देश सहमे, अमेरिका को आया पसीना!JD Vance को शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद जाना था।Vance और US के विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner को मंगलवार को इस्लामाबाद जाना था, लेकिन White House ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की &quot;पाकिस्तान यात्रा आज (मंगलवार को) नहीं होगी। ट्रंप ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि इस बात को ध्यान में रखते हुए कि ईरान की सरकार में गंभीर फूट पड़ी हुई है जो कि कोई हैरानी की बात नहीं है और पाकिस्तान के Field Marshal Asim Munir और प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif के अनुरोध पर, हमसे कहा गया है कि हम ईरान पर अपना हमला तब तक रोककर रखें, जब तक कि उनके नेता और प्रतिनिधि कोई एकमत प्रस्ताव लेकर नहीं आ जाते। हालाँकि, Trump ने यह साफ़ कर दिया कि US ईरान पर हमला करने से तभी तक परहेज़ करेगा, जब तक कि उसका नेतृत्व बातचीत के लिए कोई एकमत प्रस्ताव पेश नहीं कर देता। उन्होंने कहा कि ईरान के बंदरगाहों की आर्थिक नाकेबंदी जारी रहेगी। US राष्ट्रपति ने कहा कि इसलिए उन्होंने &quot;सेना को नाकेबंदी जारी रखने का निर्देश दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:17:11 +0530</pubDate>
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<title>West Asia में तनाव होगा कम? US&#45;Iran Ceasefire Extension का भारत ने किया खुलकर स्वागत</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने बुधवार को पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष-विराम (सीज़फ़ायर) की अवधि बढ़ाए जाने का स्वागत किया। इसका मकसद दोनों पक्षों के बीच बातचीत के लिए जगह बनाना है, ताकि इस दुश्मनी का कोई पक्का हल निकाला जा सके। इसके साथ ही, भारत ने एक बार फिर इस क्षेत्र में शांति, बातचीत और तनाव कम करने की अपनी पुरानी मांग दोहराई।इसे भी पढ़ें: Pahalgam Terror Attack की बरसी पर US और EU का संदेश, आतंक के खिलाफ लड़ाई में हम India के साथ हैंपश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रमों पर हुई एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए, विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने हमेशा उन पहलों का समर्थन किया है, जिनका मकसद शांति और स्थिरता बहाल करना है।जायसवाल ने कहा कि भारत हमेशा से शांति के पक्ष में रहा है। हम उन सभी पहलों और कदमों का स्वागत करते हैं, जिनसे शांति और स्थिरता आती है। जैसा कि आप जानते हैं, हमने पहले ही उस संघर्ष-विराम का स्वागत किया है, जिस पर सहमति बनी है, और हमें उम्मीद है कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति आएगी। उन्होंने आगे इस बात पर ज़ोर दिया कि चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए तनाव कम करना, बातचीत और कूटनीति बेहद ज़रूरी हैं। इस संघर्ष के कारण पहले ही बड़े पैमाने पर लोगों को तकलीफ़ें उठानी पड़ी हैं, और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार नेटवर्क में भी रुकावटें आई हैं। एमईए के प्रवक्ता ने कहा कि जैसा कि हम लगातार कहते आ रहे हैं, इस चल रहे संघर्ष को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए तनाव कम करना, बातचीत और कूटनीति बहुत ज़रूरी हैं।इसे भी पढ़ें: Hormuz में Iran का बड़ा एक्शन, रिवोल्यूशनरी गार्ड ने 3 जहाजों को बनाया बंधक, बढ़ा तनावइस संघर्ष की वजह से लोगों को पहले ही बहुत ज़्यादा तकलीफ़ उठानी पड़ी है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क में भी रुकावट आई है। उन्होंने आगे कहा कि हमें उम्मीद है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से बिना किसी रुकावट के जहाज़ों की आवाजाही और वैश्विक व्यापार का प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा। यह बयान तब आया जब मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने की घोषणा की। उन्होंने इसके पीछे यह वजह बताई कि तेहरान के नेतृत्व को बातचीत के लिए एक साझा प्रस्ताव तैयार करने के लिए और समय मिलना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:17:11 +0530</pubDate>
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<title>सीजफायर खत्म, अब युद्ध की बारी? Donald Trump की Iran को दो टूक चेतावनी&#45; समझौता करो या सैन्य टकराव के लिए तैयार रहो</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। बुधवार को 14 दिनों का सीजफायर (युद्धविराम) समाप्त होने वाला है, लेकिन शांति वार्ता के दूसरे दौर पर अनिश्चितता के काले बादल मंडरा रहे हैं। इस्लामाबाद में प्रस्तावित इस बातचीत से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त तेवरों और ईरान के अड़ियल रुख ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है।  डोनाल्ड ट्रंप के विरोधाभासी बयानों ने अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है, उन्होंने एक तरफ संकेत दिया कि संघर्ष को खत्म करने की कोई जल्दबाजी नहीं है, तो वहीं दूसरी तरफ यह भी इशारा किया कि नई बातचीत जल्द ही शुरू हो सकती है। ट्रंप ने कहा कि उनकी योजना अभी भी JD Vance के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल को आगे की चर्चा के लिए पाकिस्तान भेजने की है। हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपना रुख नरम नहीं करता, वह बातचीत में हिस्सा नहीं लेगा। इसे भी पढ़ें: Pahalgam Terror Attack | &#039;इंसाफ मिल गया, भारत भूलता नहीं&#039;, पहलगाम हमले की पहली बरसी पर सेना की हुंकार, कश्मीर में सुरक्षा के कड़े पहरेट्रंप की कड़ी चेतावनीट्रंप ने एक कड़ी चेतावनी भी जारी की, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर कोई समझौता नहीं हो पाता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिसमें संभावित सैन्य टकराव भी शामिल है। साथ ही, उन्होंने ब्लूमबर्ग को बताया कि सीज़फ़ायर को आगे बढ़ाना &quot;बहुत ही मुश्किल&quot; है।दबाव में कोई समझौता नहीं, ईरान का कहना हैईरानी अधिकारियों ने दबाव में बातचीत करने के प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़ ने वाशिंगटन के रवैये की आलोचना करते हुए उस पर ईरान को झुकाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ईरान ऐसी बातचीत को स्वीकार नहीं करेगा जिस पर धमकियों का साया हो, और दावा किया कि ज़रूरत पड़ने पर देश नई रणनीतियों के साथ जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने X पर पोस्ट किया, &quot;हम धमकियों के साये में बातचीत स्वीकार नहीं करते।&quot; इसे भी पढ़ें:  शादी समारोह में जहरीला खाना! 400 से ज्यादा मेहमान बीमार, गुजरात सरकार ने दिए जांच के आदेश इससे पहले न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए बयानों में, ट्रंप ने कहा था कि प्रस्तावित बातचीत का लक्ष्य सिर्फ़ एक अस्थायी युद्धविराम से कहीं आगे का है; इसका असली मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से खत्म करना है। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि जब तक कोई समझौता नहीं हो जाता, तब तक ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंध जारी रहेंगे।इस बीच, क्षेत्र में कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने सोमवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से फ़ोन पर बात की और मौजूदा हालात पर चर्चा की।इससे पहले, 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत के कई दौर हुए थे, लेकिन वे बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गए, जिससे बातचीत का भविष्य अनिश्चित हो गया है।ترامپ با اعمال محاصره و نقض آتش‌بس می‌خواهد تا به خیال خود این میز مذاکره را به میز تسلیم تبدیل کند یا جنگ‌افروزی مجدد را موجّه سازد. مذاکره زیر سایهٔ تهدید را نمی‌پذیریم و در دو هفتهٔ اخیر برای رو کردن کارت‌های جدید در میدان نبرد آماده شده‌ایم.— محمدباقر قالیباف | MB Ghalibaf (@mb_ghalibaf) April 20, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:35 +0530</pubDate>
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<title>दिखाया युद्ध का खौफनाक ट्रेलर!  ईरान का &amp;apos;मछली बम&amp;apos; तबाही मचाएगी?</title>
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<description><![CDATA[ युद्ध के राउंड टू के लिए ईरान की तैयारियों का ट्रेलर रिलीज हो चुका है। इस बार भी ईरान की मिसाइलों का जखीरा दुश्मन के होश फास्ता कर देगा। लेकिन युद्ध में पहली बार ईरान का मछली बम समंदर में तबाह हिलाएगा। मछली जैसा दिखाई देने वाला यह बारूदी बम है जो पानी के अंदर बड़े से बड़े शिप को तबाह करने का मादा रखता है। पानी के भीतर कैसे यह बम अटैक करता है, उसका ट्रेलर ईरान ने अमेरिका को दिखा दिया है। छोटे-छोटे बम पानी में कुछ इस तरह तैरते हैं और फिर टारगेट को पानी में ही उड़ा देते हैं। ईरान का एआई वीडियो का ट्रेलर धमाकेदार है। यह ईरान की अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी है। जहां एक से एक मिसाइल और ड्रोन भरे पड़े हैं। खुद आईआरजीसी एयररोस्पेस कमांडर जनरल मौसवी ने वीडियो रिलीज़ किया है। अमेरिका इजराइल को धमकी देते हुए दो टूक कहा कि सीज फायर के दौरान ईरान ने अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमता पहले से भी तेजी से बढ़ाई है। दुश्मन अपने हथियार भंडार दोबारा नहीं बना पाया और विदेशों से हथियार मंगाने को मजबूर है। ईरान की यह तैयारी इसलिए भी है क्योंकि जंग के दूसरे राउंड के संकेत मिलने लगे हैं। इसे भी पढ़ें: ईरानी जहाज में तबाही का सामान! China-Iran के &#039;खतरनाक गठबंधन&#039; ने उड़ाई दुनिया की नींद, अब क्या करेंगे ट्रंप?अमेरिका जो चाहता है ईरान वो कतई मानने को तैयार नहीं है इसलिए अपनी तैयारी पुख्ता कर रहा है। मिडिल ईस्ट में फिर बारूद बरस सकता है। फिर से धमाकों की गूंज सुनाई दे सकती है। फिर मिसाइलों से हमलों की शुरुआत हो सकती है। क्योंकि ट्रंप शांति वार्ता के लिए ईरान पर दबाव बना रहे हैं। धमकी दे रहे हैं कि डील करो नहीं तो पावर प्लांट और पुल पर हमले होंगे। औरस में ईरानी शिप पर अमेरिकी नेवी ने फायरिंग की है तो उधर ईरान शांति वार्ता के लिए अपना डेलीगेशन पाकिस्तान नहीं भेजेगा। ईरान ने कहा अमेरिका की अत्यधिक मांगे बार-बार रुख बदलना और ट्रंप के विरोधाभासी बयान मिडिल ईस्ट में शांति नहीं ला सकते। यानी ईरान अमेरिका की शर्तें नहीं मानेगा। नतीजा युद्ध से निकलना है। यह अब तय हो चुका है। ईरान इसके लिए पूरी तरह से कमर कर चुका है। पहले राउंड में ईरान ने अपनी मिसाइलों से अमेरिकी रेस, गाड़ी के देश और इजराइली शहरों में तबाही की लकीर खींची थी।इसे भी पढ़ें: Iran का America को दोटूक जवाब, कहा- बार-बार बदलती शर्तों पर नहीं होगी Peace Talks इस बार भी ईरान की मिसाइलें उसका सबसे बड़ा हथियार साबित होंगी। ईरान को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। पता चला है कि अमेरिका की तरफ से ईरान को नुकसान तो खूब हुआ लेकिन ईरान के सैन्य क्षमता अभी भी बरकरार है। रिपोर्ट बताती है कि ईरान ने अपनी अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी से हथियारों को निकालना शुरू कर दिया है। कई हफ्तों की जंग के बावजूद ईरान की सैन्य ताकत का बड़ा हिस्सा भी बचा हुआ है। ईरान के पास अभी भी अपने ड्रोन जखीरे का करीब 40% हिस्सा मौजूद है। इतना ही नहीं ईरान के 60% से ज्यादा मिसाइल लांचर भी सक्रिय हैं। अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के पास करीब 70% बैलस्टिक मिसाइलें बची हैं। यानी साफ है कि ईरान के पास अभी भी हजारों मध्यम और कम दूरी की मिसाइलें हमले के लिए तैयार हैं। और अगर फिर से युद्ध भड़का तो इनका इस्तेमाल वो दुश्मन के खिलाफ करेगा। अपनी इन्हीं मिसाइलों के दम पर ईरान ट्रंप की शर्तों को मानने से इंकार कर रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:34 +0530</pubDate>
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<title>ईरानी जहाज में तबाही का सामान! China&#45;Iran के &amp;apos;खतरनाक गठबंधन&amp;apos; ने उड़ाई दुनिया की नींद, अब क्या करेंगे ट्रंप?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच रिपब्लिकन नेता निक्की हेली ने एक बड़ा दावा कर हड़कंप मचा दिया है। हेली के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी नौसेना द्वारा जब्त किया गया पहला ईरानी जहाज MV Touska, चीन से मिसाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों (Chemicals) की खेप लेकर ईरान जा रहा था। X पर हेली ने ट्वीट किया, “इस हफ़्ते के आखिर में होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिका ने जिस जहाज़ को ज़ब्त किया, वह चीन से ईरान की ओर जा रहा था और उसका संबंध मिसाइलों के केमिकल की खेप से है। उसने रुकने के बार-बार दिए गए आदेशों को मानने से इनकार कर दिया।” इसे भी पढ़ें: Health Alert! व्हाइट डिस्चार्ज में भूलकर भी न खाएं ये 5 चीजें, बढ़ सकता है Infection का खतराउन्होंने यह भी दावा किया कि चीन द्वारा ईरान को सैन्य मदद देने की संभावना एक “ऐसी हकीकत है जिसे अब नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।” उन्होंने आगे कहा, “यह एक और याद दिलाता है कि चीन ईरान की सरकार को मज़बूत करने में मदद कर रहा है—एक ऐसी हकीकत जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।”इस बीच, ईरान ने इस ज़ब्ती को “हथियारों के बल पर की गई लूट” करार दिया और जवाबी कार्रवाई की कसम खाई। इस्लामाबाद वार्ता से पहले, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी और ईरानी झंडे वाले जहाज़, MV Touska की ज़ब्ती, बातचीत में बड़ी अड़चनें बनकर उभरी हैं। इसे भी पढ़ें: Lenskart Bindi-Hijab Row | लेंसकार्ट स्टोर में हाई-वोल्टेज ड्रामा! बिंदी-हिजाब विवाद के बीच मुस्लिम BJP नेता ने कर्मचारियों को लगाया तिलकईरानी पक्ष ने कहा है कि जब तक नाकेबंदी हटाई नहीं जाती, तब तक वह इस्लामाबाद में बातचीत के दूसरे दौर के लिए अमेरिका के साथ शामिल नहीं होगा। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी बात पर अड़े हुए हैं, उनका कहना है कि नाकेबंदी तभी हटाई जाएगी जब कोई समझौता हो जाएगा। इस बीच, अमेरिका-ईरान संघर्षविराम गुरुवार सुबह (भारतीय समय के अनुसार) खत्म होने वाला है, और अभी तक किसी समझौते के आसार नज़र नहीं आ रहे हैं।विश्लेषक और अमेरिकी नौसेना के पूर्व कैप्टन कार्ल शूस्टर ने CNN को बताया कि ज़ब्त किए गए सामान को “युद्ध की लूट” माना जा सकता है, और साथ ही कहा कि ईरानी चालक दल के सदस्यों को हिरासत में लिया जा सकता है और जहाज़ पर मौजूद किसी भी IRGC कमांडो को युद्धबंदी के तौर पर रखा जा सकता है।वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट दी कि MV Touska, जिसे इस हफ़्ते के आखिर में ओमान की खाड़ी में ज़ब्त किया गया था, जहाज़ों के ऐसे बेड़े का हिस्सा था जो अक्सर चीन आता-जाता रहता था और जिस पर ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए केमिकल ढोने का आरोप है। समुद्री विश्लेषकों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में आगे कहा गया कि इस जहाज़ ने पिछले छह हफ़्तों में दो बार चीन का दौरा किया था।दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Truth Social पर एक पोस्ट में दावा किया कि चीन ने ईरान को हथियार न भेजने पर सहमति जताई है, जबकि खाड़ी संघर्ष के दौरान वाशिंगटन लगातार चीन पर तेहरान को सैन्य मदद देने के आरोप लगाता रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:34 +0530</pubDate>
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<title>Saudi ने ऐसा डांटा, डील छोड़कर भागा पाकिस्तान, 1.5 बिलियन डॉलर का झटका</title>
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<description><![CDATA[ कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगीगी झेलनी पड़ी। जिस सऊदी अरब को पाकिस्तान अपना सबसे बड़ा हमदर्द समझता है। उसी सऊदी ने उसे तगड़ा झटका दिया। दरअसल पाकिस्तान सूडान के साथ 1.5 बिलियन करीब 125 अरब का एक बड़ा रक्षा सौदा करने वाला था। इस डील के तहत पाकिस्तान सूडान को अपने फाइटर जेट्स और हथियार बेचने वाला था। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि इस डील से उसकी डूबती हुई अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा और दुनिया में उसके हथियारों का डंका बजेगा। लेकिन पेज ये था कि इस पूरी खरीददारी के लिए पैसा सऊदी अरब देने वाला था। सूत्रों के मुताबिक सऊदी अरब ने अब इस डील के लिए फंडिंग देने से साफ मना कर दिया और सिर्फ पैसा ही नहीं रोका बल्कि सऊदी ने पाकिस्तान को सीधे शब्दों में कहा कि इस समझौते को तुरंत खत्म कर दिया जाए। सऊदी के इस कदम के बाद पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगा है। हालांकि सऊदी के इस यूटर्न के पीछे दो बड़े कारण माने जा रहे हैं। पहला पश्चिमी देशों का दबाव। इसे भी पढ़ें: 3500 KM से खरगोश नाम का आतंकी दबोचा लाया भारत, हिली दुनिया!अमेरिका और कई यूरोपीय देशों ने रियाद को सलाह दी है कि वह अफ्रीका के प्रॉक्सिमिटी वॉर से दूर रहे। और दूसरा रणनीति में बदलाव। सूडान में सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच भीषण गृह युद्ध चल रहा है। सऊदी अरब अपनी रणनीति बदल रहा है और वह इस खूनी जंग में हथियारों की सप्लाई का जरिया नहीं बनना चाहता। रही बात पाकिस्तान की तो पाकिस्तान के लिए यह झटका इसलिए बड़ा है क्योंकि पिछले साल भारत के साथ हुई झड़प के बाद पाकिस्तान अपने हथियारों का जमकर प्रचार कर रहा था। उसे लगा था कि सूडान उसके इस झांसे में आ जाएगा और सूडान की डील उसके लिए गेम चेंजर होगी। लेकिन जैसे ही उसके मालिक यानी कि सऊदी अरब ने आंखें दिखाई पाकिस्तान को बिना कुछ कहे डील से पीछे हटना पड़ा। और तो और खबर है कि लीबिया के साथ होने वाले पाकिस्तान की $4 बिलियन की एक और डील अब खतरे में है। वहां भी सऊदी अरब अपनी रणनीति पर दोबारा विचार कर रहा है। कुल मिलाकर पाकिस्तान की हालत फिलहाल ऐसी है कि बिना सऊदी अरब के कर्ज और मदद के उसका गुजारा नामुमकिन है। पिछले साल ही दोनों देशों ने एक डिफेंस पैक साइन किया था। जबजब सऊदी ने पैसे देने से मना कर दिया और डील तोड़ने का हुक्म दिया तो पाकिस्तान के पास जी हुजूर कहने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने मोदी से मांगी ये 3 मदद, चिढ़े किम जोंग, दिया ये ऑर्डर</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे मंग भारत आए और जैसे ही दिल्ली में उन्हें राजशाही अंदाज में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया उसी पर दिल्ली से करीब 4700 किमी दूर पोंगयांग में हलचल तेज हो गई। जहां किम जोंग उन पूरे इवेंट को टुकुर टुकुर टीवी पर देख रहा था। नजरें जमाए बैठा था। दिल्ली सिर्फ एक कूटनीतिक मुलाकात का गवाह नहीं बनी है। बल्कि एशिया की ताकत के बदलते समीकरणों की एक बड़ी कहानी भी दिल्ली में लिखी जा रही है। बता दें कि यहां पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जय म्यूंग की मुलाकात हुई है। इन्होंने हैदराबाद हाउस में एक बैठक की और यह हाई लेवल बैठक थी। बता दें कि राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में उनका भव्य स्वागत किया। लेकिन यहां पर सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि यह मुलाकात क्यों हुई? कैसे हुई? सवाल यह है कि इस मुलाकात को सबसे ज्यादा ध्यान से कौन देख रहा है? जवाब है उत्तर कोरिया। किम जोंग। दक्षिण कोरिया और नॉर्थ कोरिया के रिश्ते। बता दें कि किसी से भी छिपे नहीं है। दोनों के बीच दशकों से तनाव और परमाणु प्रतिस्पर्धा चलती आ रही है। यानी कि कंपटीशन चल रहा है। ऐसे में जब दक्षिण कोरिया का राष्ट्रपति भारत जैसे बड़े लोकतंत्र और उभरती शक्ति के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करने आता है तो किम जोंग उन के लिए यह सिर्फ एक विजिट या एक दौरा नहीं बल्कि एक संभावित रणनीतिक खतरे का एक साफ-साफ संकेत है। और यह एक इशारा है यह अलर्ट है।इसे भी पढ़ें: India-South Korea का बड़ा ऐलान, 2030 तक व्यापार दोगुना कर $50 Billion पहुंचाने का लक्ष्ययही वजह है कि इस वक्त किम जोंग उन कुछ ज्यादा ही एक्टिव नजर आ रहे हैं। हर मूवमेंट पर वो नजर रख रहे हैं। पिछले एक महीने में ही उत्तर कोरिया ने बता दें कि लगातार चार बैलस्टिक मिसाइलें टेस्ट की हैं। जो यह साफ दिखाता है कि प्यायोंगयांग अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर रहा है और किसी भी संभावित खतरे के लिए खुद को तैयार रख रहा है या कहे कि एक नया फ्रंट खोलने की कोशिश कर रहा है। इस बीच दक्षिण कोरिया का भारत दौरा किम के लिए एक नया समीकरण खड़ा करता है। उन्हें किम जोंगून को ये डर है कि कहीं भारत और दक्षिण कोरिया के बीच कोई नई हथियार डील ना हो जाए। कोई डिफेंस स्ट्रेटजी ना तैयार की जाए जो उसके खिलाफ हो जाए या फिर इंडोपेसिफिक में ऐसा कोई प्लान ना बन जाए जो भविष्य में उत्तर कोरिया पर ही बैकफायर कर जाए। और यही वजह है यही कारण है कि पियोंगयांग में बैठा किम जोंग उन दिल्ली में हो रही हर मीटिंग हर बयान और हर समझौते पर बारीकी से नजर रख रहा है क्योंकि इस बार मामला सिर्फ बता दें कि एक विजिट एक दौरे का नहीं है बल्कि एशिया में बदलते शक्ति संतुलन का भी है और यह बिल्कुल साफ है। इसे भी पढ़ें: 3500 KM से खरगोश नाम का आतंकी दबोचा लाया भारत, हिली दुनिया!दरअसल बता दें कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की शुरुआत साल 2010 में हुई थी और आज यानी कि मौजूदा समय में यह साझेदारी कई अहम क्षेत्रों में फैल चुकी है। रक्षा सहयोग हो या फिर सेमीकंडक्टर हो या फिर टेक्नोलॉजी हो या फिर बैटरी हो या फिर इलेक्ट्रिक व्हीकल की बात करें। सप्लाई चेन, साइबर सिक्योरिटी, इंडोपेसिफिक सुरक्षा दोनों देशों के बीच व्यापार हो। यह कई अहम मुद्दे हैं। 30 मिलियन डॉलर से ज्यादा का व्यापार दोनों देशों के बीच हो चुका है और आने वाले समय में इसे और भी ज्यादा बढ़ाने की तैयारी भी है। और इस बार की यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि 8 साल बाद किसी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति का यह भारत दौरा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:32 +0530</pubDate>
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<title>ट्रंप टैरिफ पर बड़ा अपडेट, भारत को क्या फायदा?</title>
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<description><![CDATA[ ट्रंप प्रशासन ने सोमवार से अरबों डॉलर का टेरिफ लौटाना शुरू कर दिया है। नीतिगत मामलों पर यह ट्रंप की बड़ी हार है। टेरिफ लौटाने की दिशा में यह पहला व्यावहारिक कदम भी है। अमेरिकी आयातकों से जो टेरिफ ट्रंप प्रशासन ने वसूले थे, उन्हें पाने के लिए अमेरिकी आयातक और ब्रोकर ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं। ध्यान रहे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आते ही अमेरिका फर्स्ट की नीति लागू की थी और अपनी ताकत का बेजा इस्तेमाल करते हुए दुनिया के देशों पर मनमाने ढंग से टेरिफ लगाना शुरू कर दिया था। भारत भी ट्रंप की इस सनक का शिकार हुआ था। भारत पर ट्रंप ने कुल 50% टेरिफ लगाए थे। इस मामले को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को 63 के बहुमत से अपना फैसला दिया था। फैसले में साफ कहा गया था कि जिस आईईपीए यानी इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट 1997 के तहत मिले अधिकार का हवाला देकर ट्रंप अपने लगाए टेरिफ को जस्टिफाई कर रहे हैं। वह राष्ट्रपति को शांति काल में टेरिफ लगाने की ताकत देता ही नहीं। इसे भी पढ़ें: भारत को पृथ्वी की सबसे जादुई जगह ले गया रूस, दुनिया में हड़कंपकोर्ट ने कहा कि अमेरिकी संविधान के आर्टिकल एक के सेक्शन आठ के तहत टेरिफ लगाने का अधिकार सिर्फ कांग्रेस को है। अमेरिका के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कहा था कि ट्रंप ने अपने अधिकारों की सारी सीमाएं लांग दी हैं। इसलिए इस टेरिफ को खत्म किया जा रहा है। बता दें कि जिन कंपनियों आयातकों को ट्रंप सरकार से टेरिफ रिफंड चाहिए उन्हें उन सामानों की पहचान करते हुए घोषणाएं दाखिल करनी होगी जिन पर उन्होंने टेरिफ चुकाए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दावों का रिफंड 60 से 90 दिनों के भीतर मिलने की उम्मीद है। हालांकि तकनीकी और प्रक्रियागत दिक्कतों के कारण ज्यादा समय भी लग सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार योजना बना रही है कि अलग-अलग चरणों में रिफंड जारी किया जाए। हाल ही में चुकाए गए टेरिफ भुगतानों को पहले प्राथमिकता दिए जाने की बात है। अमेरिकी वेबसाइट एक्सओस के मुताबिक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते की दिशा में रिफंड पोर्टलों की शुरुआत ट्रंप प्रशासन का पहला चरण है। अदालती फाइलिंग से पता चलता है कि 3300 से ज्यादा आयातकों ने 53 मिलियन से अधिक शिपमेंट पर अनुमानित 166 बिलियन डॉलर का टेरिफ चुकाया था। इसे भी पढ़ें: दिखाया युद्ध का खौफनाक ट्रेलर!  ईरान का &#039;मछली बम&#039; तबाही मचाएगी?भारतीय मुद्रा में 166 बिलियन डॉलर का मतलब तकरीबन 1545794 करोड़। हालांकि इस रिफंड के लिए अमेरिकी सरकार बारीकी से सभी दावों की जांच कर रही है। लेकिन असल सवाल है कि क्या भारत के व्यापारी इस वापसी के हकदार हैं? मीडिया रिपोर्ट्स बताती है कि भारत के एक्सपोर्टर्स इस टेरिफ रिफंड के सीधे हकदार नहीं है। यह रिफंड केवल उन अमेरिकी कंपनियों या यूनिट्स को दिया जाएगा जो सीबीपी यानी यूएस कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के पास एंट्री फाइल करते थे और टेरिफ का सीधा पेमेंट भी करते थे। भारत से सामान निर्यात करने वाले ज्यादातर भारतीय व्यापारी एफओबी यानी फ्री ऑफ बोर्ड या सीआईएफ यानी लागत, बीमा और बाल ढुलाई टर्म पर शिपमेंट करते हैं। जिसमें अमेरिकी खरीदार ही आयातक रिकॉर्ड पर होता है। नतीजतन टेरिफ का बोझ अमेरिकी इंपोर्टर पर पड़ता था। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:31 +0530</pubDate>
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<title>भारत को पृथ्वी की सबसे जादुई जगह ले गया रूस, दुनिया में हड़कंप</title>
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<description><![CDATA[ भारत से करीब 7000 किमी दूर एक ऐसा इलाका है जहां दुनिया की महाशक्तियों के बीच एक होश उड़ा देने वाली जंग शुरू हो चुकी है। यह वो इलाका है जहां कई बार तापमान -50° तक गिर जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में ग्लोबल वार्मिंग के चलते इस इलाके का तापमान बढ़ने लगा है। यहां की बर्फ पिघलने लगी है और इसी की वजह से नए-नए रास्ते और शिपिंग रूट्स दुनिया के सामने आने लगे हैं। इन्हीं पर दावा ठोकने के लिए रूस ने भारत के साथ मिलकर एक ऐसा प्लान बनाया है जिसने इस इलाके का कूटनीतिक तापमान भी बढ़ा दिया है। यह इलाका है आर्कटिक। बर्फ पिघलने की वजह से इस इलाके में नए-नए शिपिंग रूट्स बनने शुरू हो गए हैं। इनमें से एक है नॉर्थ वेस्ट पैसेज वे। दूसरा है ट्रांस पोलर सी रूट और तीसरा है नॉर्थ सी रूट। आज से 20-25 साल बाद यह जगह भारत और दुनिया के लिए सबसे बड़ा खजाना बनने वाली है।इसे भी पढ़ें: 3000 सैनिक,5 युद्धपोत,10 विमान...भारत-रूस की मिलिट्री डील के बाद यूक्रेन का बड़ा ऐलानमौजूदा समय में भारत ने इस इलाके में अभी तक सिर्फ एक उंगली रखी है। लेकिन अब यहां पर पैर जमाने की बारी आ गई है। भारत यह काम रूस के साथ शुरू भी कर चुका है। इसका ऐलान खुद रूस ने कर दिया है। यह होश उड़ा देने वाली कहानी क्या है? वो आपको आसान भाषा में समझाते हैं। दरअसल आपने खबर पढ़ी होगी कि भारत और रूस के बीच रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स सपोर्ट नाम का एक मिलिट्री एग्रीमेंट हुआ है। इस एग्रीमेंट के तहत भारत और रूस एक दूसरे के देश में एक ही समय पर 3000 तक सैनिक, 10 मिलिट्री एयरक्राफ्ट और पांच युद्धपोतों की तैनाती कर सकते हैं। कई लोगों ने इस खबर को ऐसे पेश किया मानो भारत रूस का साथ देने के लिए यूक्रेन के खिलाफ अपनी सेना उतार देगा। तो वहीं रूस भी भारत के लिए पाकिस्तान पर हमला करने के लिए अपने सैनिक और हथियार भेज देगा।इसे भी पढ़ें: Russia ने भारत में उतारे सैनिक और वॉरशिप! बड़ी तैयारी से चौंका US, दुश्मनों में खलबली लेकिन ऐसा कुछ नहीं होने वाला। सबसे पहले तो यह एग्रीमेंट मुख्य रूप से जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज, ट्रेनिंग, ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस और डिजास्टर रिलीफ ऑपरेशन के लिए किया गया है। लेकिन इस एग्रीमेंट की सबसे खास बात यह है कि अगर रूस और भारत किसी महत्वपूर्ण चीज को लेकर एक मत हैं तो दोनों एक दूसरे के देश में अपने मिलिट्री एसेट्स की तैनाती कर सकते हैं। आपको बता दें कि इस एग्रीमेंट के तहत भारत और रूस को वो महत्वपूर्ण काम मिल गया है जिसके लिए भारत के सैनिक एयरक्राफ्ट और जंगी जहाज रूस जा सकते हैं। रूस भारतीय सेना को अपने देश में एक ऐसी रणनीतिक जगह पर तैनात करना चाहता है जहां भारत भी घुसने की तैयारी कर रहा है। वैसे तो इस एग्रीमेंट के तहत भारत रूस के 40 से ज्यादा बेसिस का इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन आने वाले समय में रूस भारतीय सैनिकों को अपने मरमंस्क इलाके में लाकर बैठा सकता है। रूस इसी इलाके से आर्कटिक में अपनी सबसे बड़ी दावेदारी पेश करता है। इस वक्त आर्कटिक की मोटी बर्फ की तह के नीचे अरबों का खजाना छिपा है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:31 +0530</pubDate>
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<title>धमकियों के बीच बातचीत नहीं होगी, अड़ा ईरान, 24 घंटे बाद क्या होगा?</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में वार्ता से पहले ही ईरान और अमेरिका में तनाव बढ़ गया है। अब ईरान ने साफ कर दिया है कि धमकियों के बीच कोई बातचीत नहीं होगी। साथ ही अमेरिका पर सीज फायर के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही वार्ता को लेकर अब अनिश्चितताएं बढ़ गई हैं। ईरान की तरफ से यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद आई जिसमें उन्होंने डील नहीं होने पर बम गिराने की बात कही थी। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गलीबा ने लिखा कि ट्रंप घेराबंदी करके और युद्ध विराम का उल्लंघन करके अपनी कल्पना में इस बात की मेज को आत्मसमर्पण की मेज में बदलना चाहते हैं या फिर से युद्ध भड़काने को सही ठहराना चाहते हैं। हम धमकियों के साए में बातचीत स्वीकार नहीं करते। पिछले दो हफ्तों में हमने युद्ध के मैदान में अपने नए पत्ते खोलने की पूरी तैयारी कर ली है। इसे भी पढ़ें: दोस्त Trump ने कतर दिये Netanyahu के पर, Lebanon पर बमबारी नहीं कर पाएँगे इजराइली विमान, दुनिया हैरानईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत की ईरान की कोई योजना नहीं है। उन्होंने अमेरिका पर सीज फायर का उल्लंघन कर कूटनीति को कमजोर करने के आरोप लगाए थे। हालांकि खबरें यह भी आई कि ईरान दूसरे दौर की बातचीत के लिए इच्छुक है। बहरहाल अब तक आधिकारिक तौर पर वार्ता में शामिल होने को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वाकई ने समुद्री प्रतिबंधों सहित अमेरिकी दबाव की आलोचना की और कहा कि बिना किसी स्पष्ट ढांचे के ईरान नई वार्ता में भाग नहीं लेगा। उन्होंने दोहराया कि यूरेनियम संवर्धन और रक्षा से संबंधित मुद्दे ऐसे हैं जिन पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस्माइल बाकी ने ओमान सागर में एक ईरानी व्यापारिक जहाज पर अमेरिकी हमलों का जिक्र भी किया और इसे समुद्री समझौतों का उल्लंघन और आक्रामकता करार दिया। इसे भी पढ़ें: Lebanon में IDF सैनिक की हरकत पर भड़के PM Netanyahu, बोले- दोषी को मिलेगी सख्त सज़ाउन्होंने कहा कि ईरानी जवाबी कार्रवाही के बाद अमेरिकी सैनिकों को पीछे हटना पड़ा। इसके साथ ही उन्होंने लेबनान के खिलाफ इजराइली उल्लंघन और आत्मरक्षा के दावों की भी आलोचना की। हाल ही में मीडिया से बात करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान को पाकिस्तान वार्ता में होना चाहिए। उन्होंने कहा हम वहां जाने के लिए सहमत हुए हैं। साथ ही चेतावनी भी दे दी कि अगर सीज फायर खत्म हो गया तो बमबारी भी कर दी जाएगी। वहीं ब्लूमबर्ग से बातचीत में उन्होंने कहा था कि इस बात की संभावनाएं कम ही है कि दो हफ्ते के सीज फायर को आगे बढ़ाया जाएगा। इसे भी पढ़ें: दिखाया युद्ध का खौफनाक ट्रेलर!  ईरान का &#039;मछली बम&#039; तबाही मचाएगी?यानी कि ट्रंप की बातों में साफ तौर पर नजर आ रहा है कि युद्ध आगे तेज हो सकता है। हाल फिलहाल में होर्मुज जडोमरू मध्य में जो भी गतिविधियां हुई है जैसे कि ईरानी शिप को अमेरिका द्वारा कब्जा किया जाना और इसके अलावा समुंदर में जो नाकेबंदी है वो तेज होना साथ ही साथ ईरान का किसी भी व्यापारिक जहाज को ना गुजरने देना ये तमाम घटनाएं दर्शाती हैं कि आने वाले समय में युद्ध और ज्यादा भड़क सकता है और यह जो 14 दिन का सीज फायर था वो सिर्फ एक सेफ विंडो के लिए था| देखना यह होगा कि युद्ध आगे किस ओर रुख करता है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और साथ ही साथ ईरान क्या रुख अपनाता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध से हटकर बातचीत के जरिए संघर्ष सुलझाने के संकेत दिए हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:30 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran की Peace Talks पर बड़ा सस्पेंस, क्या Pakistan में होगी बातचीत? तेहरान ने साधी चुप्पी</title>
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<description><![CDATA[ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने  ईरान के खिलाफ अमेरिका के युद्ध की आगे की राह के बारे में मिले-जुले संकेत दिए। उन्होंने एक तरफ यह घोषणा की कि उन्हें इस संघर्ष को खत्म करने की कोई जल्दी नहीं है, वहीं दूसरी तरफ यह भी भरोसा जताया कि तेहरान के साथ आगे की बातचीत जल्द ही पाकिस्तान में होगी। 14 दिन का सीज़फ़ायर 22 अप्रैल, 2026 को खत्म होने वाला है। ऐसे में, फ़ोन इंटरव्यू और सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए ट्रंप ने कभी संयमित आशावाद दिखाया कि जल्द ही कोई समझौता हो सकता है, तो कभी यह चेतावनी दी कि अगर सीज़फ़ायर की समय सीमा से पहले कोई समझौता नहीं हुआ, तो बहुत सारे बम फटने लगेंगे। तेहरान ने कहा कि उसने पाकिस्तान में अमेरिका के साथ शांति वार्ता के एक नए दौर में शामिल होने पर अभी तक कोई फ़ैसला नहीं किया है; उसने इसके लिए बदनीयती और ऐतिहासिक अविश्वास का हवाला दिया।इसे भी पढ़ें: सीजफायर खत्म, अब युद्ध की बारी? Donald Trump की Iran को दो टूक चेतावनी- समझौता करो या सैन्य टकराव के लिए तैयार रहोमिस्टर ट्रंप ने संकेत दिया कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि वे अपनी वार्ता टीम को जिसका नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वैंस करेंगे। वार्ता के दूसरे दौर के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद भेजेंगे; हालाँकि, ईरान ने ज़ोर देकर कहा कि जब तक मिस्टर ट्रंप अपनी माँगें कम नहीं कर लेते, तब तक वह इसमें हिस्सा नहीं लेगा। ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद के स्पीकर, मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़ ने अमेरिका पर यह आरोप लगाया कि वह चाहता है कि ईरान आत्मसमर्पण कर दे; उन्होंने आगे कहा कि इसके विपरीत, ईरान &quot;युद्ध के मैदान में नए पत्ते खोलने&quot; की तैयारी कर रहा है। ग़ालिबफ़ ने मंगलवार तड़के एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, हम धमकियों के साए में बातचीत स्वीकार नहीं करते।इसे भी पढ़ें: दिखाया युद्ध का खौफनाक ट्रेलर!  ईरान का &#039;मछली बम&#039; तबाही मचाएगी?ईरान संकट से फ्रांस को 6 अरब यूरो तक का नुकसान: मंत्रीवित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने आज कहा कि ईरान में संकट के आर्थिक नतीजों के कारण फ्रांस को 4 अरब यूरो ($4.70 अरब) से लेकर 6 अरब यूरो तक का नुकसान हुआ है। सरकार कुछ खर्चों पर रोक लगाने के साथ-साथ नए सहायता उपायों की तैयारी कर रही है। लेस्क्योर ने RTL रेडियो को बताया कि मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद से बॉन्ड यील्ड में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है, और इसके परिणामस्वरूप सरकारी उधार लेने की लागत में हुई वृद्धि से ही बजट पर 3.6 अरब यूरो का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू की सरकार ने वादा किया है कि वह उन उपायों के बजटीय प्रभाव की पूरी तरह से भरपाई करेगी, जिनका उद्देश्य परिवारों को संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतों में हुई अचानक वृद्धि से निपटने में मदद करना है। लेस्क्योर ने कहा कि वह आज सांसदों के साथ होने वाली एक बैठक में कुछ खर्चों पर रोक लगाने की योजनाओं की रूपरेखा पेश करेंगे। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकार सीधे तौर पर बजट में कटौती नहीं करेगी।इसे भी पढ़ें: धमकियों के बीच बातचीत नहीं होगी, अड़ा ईरान, 24 घंटे बाद क्या होगा?इजरायली रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने आज कहा कि लेबनान में उनके देश का अभियान ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करने के लिए सैन्य और राजनयिक दोनों तरह के दबाव पर आधारित है। काट्ज़ ने आतंकवादी हमलों में शहीद हुए सैनिकों और पीड़ितों के लिए इजराइल के राष्ट्रीय स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह में कहा लेबनान में अभियान का मुख्य लक्ष्य सैन्य और राजनयिक उपायों के संयोजन के माध्यम से हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करना और उत्तरी समुदायों (इजराइल के) के लिए खतरे को समाप्त करना है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:29 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan की मेहनत पर फिरा पानी, Trump के एक Tweet ने US&#45;Iran समझौते पर लगाया ब्रेक!</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष-विराम की बातचीत नाकाम रहने के बाद, सप्ताहांत में दोनों देश दो महीने से चले आ रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए एक समझौते के करीब पहुँच गए थे; लेकिन फिर वही हुआ जिसका अंदेशा था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया और प्रेस के सामने समझौते की शर्तों को समय से पहले ही सार्वजनिक कर दिया। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, इस अचानक आए गुस्से ने पहले से ही नाज़ुक हालात को और उलझा दिया, जिससे ईरान पीछे हट गया और पूरी प्रक्रिया पटरी से उतर गई।इसे भी पढ़ें: ईरानी जहाज में तबाही का सामान! China-Iran के &#039;खतरनाक गठबंधन&#039; ने उड़ाई दुनिया की नींद, अब क्या करेंगे ट्रंप?ट्रंप की सोशल मीडिया पर की गई शेखीबाज़ी कैसे महंगी पड़ीअमेरिका और ईरान के अधिकारी, पाकिस्तान के मध्यस्थों की मदद से चल रही गुप्त बातचीत के ज़रिए एक फ्रेमवर्क समझौते के करीब पहुँच रहे थे। हालाँकि, रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की उन कथित रियायतों के बारे में की गई सार्वजनिक टिप्पणियों ने, जो अभी तक तय नहीं हुई थीं, उस सावधानी भरी गति को बाधित कर दिया जो धीरे-धीरे बन रही थी। शुक्रवार सुबह ट्रंप ने फ़ोन पर पत्रकारों से बात की और साथ ही चल रही चर्चाओं के बारे में सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया; यह सब तब हो रहा था जब पाकिस्तानी मध्यस्थ उन्हें तेहरान में ईरानी अधिकारियों के साथ हो रही बातचीत के बारे में जानकारी दे रहे थे।इसे भी पढ़ें: ट्रंप टैरिफ पर बड़ा अपडेट, भारत को क्या फायदा?सीज़फ़ायर डील की जानकारी बहुत जल्दी ज़ाहिर करनाउन मुलाक़ातों के दौरान, ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने कई ऐसी शर्तें मान ली हैं, जिनके बारे में बातचीत से जुड़े सूत्रों का कहना था कि उन पर अभी तक सहमति नहीं बनी थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि तेहरान ने वॉशिंगटन की कुछ सबसे मुश्किल माँगें मान ली हैं, जिनमें अपने एनरिच्ड यूरेनियम का ज़ख़ीरा सौंपना भी शामिल है; साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संघर्ष का अंत नज़दीक है। ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक तौर पर इन दावों का खंडन किया और इस बात से इनकार किया कि बातचीत के एक और दौर की तैयारियाँ चल रही हैं, जिससे जल्द ही कोई बड़ी सफलता मिलने की उम्मीदें कम हो गईं। इन घटनाक्रमों ने इस बात पर फिर से अनिश्चितता पैदा कर दी है कि क्या आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रगति जारी रह पाएगी। निजी तौर पर, ट्रंप प्रशासन के कई अधिकारियों ने CNN से माना कि राष्ट्रपति की सार्वजनिक टिप्पणियों से बातचीत को नुकसान पहुँचने का ख़तरा है, क्योंकि ये चर्चाएँ बेहद संवेदनशील हैं और ईरान का अमेरिका पर लंबे समय से अविश्वास रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:29 +0530</pubDate>
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<title>इस्लामाबाद वार्ता 2.0: जंग रोकने की बड़ी कूटनीतिक कोशिश, Pakistan की मध्यस्थता में मिलेंगे America&#45;Iran के टॉप लीडर्स</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के पाकिस्तान में संघर्ष-विराम वार्ता के एक और दौर के लिए लौटने की उम्मीद है। अधिकारियों ने मंगलवार को एपी को बताया कि पाकिस्तान की अगुवाई वाले मध्यस्थों को इस बात की पुष्टि मिली है कि शीर्ष वार्ताकार अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़—बुधवार की सुबह इस्लामाबाद पहुँचेंगे। अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बात की, क्योंकि उन्हें मीडिया को जानकारी देने का अधिकार नहीं था। दोनों पक्षों के बीच 14 दिन का संघर्ष-विराम बुधवार (22 अप्रैल) को समाप्त होने वाला है, जिससे प्रस्तावित वार्ता की urgency और बढ़ गई है।इसे भी पढ़ें: Pakistan की मेहनत पर फिरा पानी, Trump के एक Tweet ने US-Iran समझौते पर लगाया ब्रेक!पाकिस्तान में कोई ईरानी प्रतिनिधिमंडल नहींहालाँकि, न तो वॉशिंगटन और न ही तेहरान ने सार्वजनिक रूप से इस कार्यक्रम की पुष्टि की है। ईरानी सरकारी टेलीविज़न ने भी इस बात से इनकार किया है कि कोई भी अधिकारी पहले ही पाकिस्तान की राजधानी पहुँच चुका है। ईरान के सरकारी प्रसारक, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) ने कहा है कि कोई भी ईरानी राजनयिक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी, इस्लामाबाद नहीं गया है, और ऐसी किसी भी आवाजाही की खबरों को खारिज कर दिया है। बयान में कहा गया है, कोई भी ईरानी राजनयिक प्रतिनिधिमंडल—चाहे वह प्राथमिक या द्वितीयक टीम हो, या प्रारंभिक या अनुवर्ती मिशन हो, अब तक इस्लामाबाद, पाकिस्तान नहीं गया है।इसे भी पढ़ें: धमकियों के बीच बातचीत नहीं होगी, अड़ा ईरान, 24 घंटे बाद क्या होगा?&#039;ईरान ने कई बार सीज़फ़ायर का उल्लंघन किया है&#039;: ट्रंपइस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान पर मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के दौरान अमेरिका के साथ सीज़फ़ायर का बार-बार उल्लंघन करने का आरोप लगाया। यह आरोप ऐसे समय में लगाया गया है जब दोनों देश शांति वार्ता के एक संभावित नए दौर पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। ट्रंप ने अपने &#039;ट्रुथ सोशल&#039; प्लेटफ़ॉर्म पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान ने कई बार सीज़फ़ायर का उल्लंघन किया है!&quot; उन्होंने दो हफ़्ते के उस संघर्ष-विराम का ज़िक्र किया जो बुधवार को समाप्त होने वाला है; इसके बाद मध्य-पूर्व एक बार फिर से खुले संघर्ष की चपेट में आ सकता है। युद्ध शुरू होने के बाद से, लड़ाई में ईरान में कम से कम 3,375 लोग और लेबनान में 2,290 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं। इसके अलावा, इज़रायल में 23 लोग और खाड़ी के अरब देशों में एक दर्जन से ज़्यादा लोग मारे गए हैं। लेबनान में 15 इज़रायली सैनिक और पूरे क्षेत्र में 13 अमेरिकी सैनिक भी इस लड़ाई में मारे गए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:28 +0530</pubDate>
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<title>इधर ट्रंप अड़े उधर ईरान, फिर होगा घमासान! Trump की धमकी के जवाब में Iran की घु़ड़की, फिर मँडराया युद्ध का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच टकराव, इजराइल की सैन्य गतिविधियां और होरमुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर बढ़ती खींचतान ने हालात को और जटिल बना दिया है। ताजा घटनाक्रम संकेत देता है कि कूटनीतिक प्रयास फिलहाल ठहराव की स्थिति में हैं और संघर्ष का खतरा लगातार बढ़ रहा है। हम आपको बता दें कि ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच हुआ संघर्षविराम खत्म होने को है और शांति वार्ता को लेकर संशय के बादल छंट नहीं रहे हैं।ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान परिस्थितियों में अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता संभव नहीं है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य मोहम्मद रजा मोहसेनी सानी ने कहा कि अमेरिका की अत्यधिक मांगें और उसके आंतरिक राजनीतिक उद्देश्यों के कारण बातचीत का कोई आधार नहीं बचा है। उन्होंने यह भी कहा कि हालिया घटनाओं और पिछले अनुभवों को देखते हुए निकट भविष्य में वार्ता का कोई दौर नहीं होगा। हालांकि कुछ रिपोर्टों में यह भी संकेत मिला है कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में संभावित युद्धविराम वार्ता हो सकती है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार अभी तक कोई प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद के लिए रवाना नहीं हुआ है, जिससे स्पष्ट होता है कि अंदरूनी स्तर पर भी सहमति नहीं बन पाई है। वहीं अमेरिका से इस प्रकार की भी खबरें थीं कि अगर शांति वार्ता आगे बढ़ती है और समझौते की स्थिति बनती है तो खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उस पर अंतिम मुहर लगाने के लिए इस्लामाबाद जा सकते हैं या शांति वार्ता में ऑनलाइन जुड़ सकते हैं। लेकिन ट्रंप जिस तरह कभी ईरान पर बम बरसाने और कभी शांति वार्ता की बात कर रहे हैं उससे पूरी स्थिति को लेकर संशय बना हुआ है।इसे भी पढ़ें: Pakistan की मेहनत पर फिरा पानी, Trump के एक Tweet ने US-Iran समझौते पर लगाया ब्रेक!इसी बीच, ईरान की सैन्य चेतावनी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। खतम अल अंबिया मुख्यालय के कमांडर अली अब्दुल्लाही ने कहा है कि यदि किसी भी प्रकार की शत्रुतापूर्ण कार्रवाई दोबारा होती है तो ईरान तुरंत और निर्णायक जवाब देगा। उन्होंने दावा किया कि सैन्य दृष्टि से ईरान की स्थिति मजबूत है और होरमुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण उसे रणनीतिक बढ़त देता है। देखा जाये तो होरमुज जलडमरूमध्य इस पूरे संकट का केंद्र बन गया है। ईरान ने इसे एक रणनीतिक हथियार के रूप में देखना शुरू कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। हाल के दिनों में ईरान ने इसे कुछ समय के लिए खोला, लेकिन फिर शत्रुतापूर्ण देशों के लिए बंद कर दिया। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है और कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।उधर, संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है और सभी पक्षों से समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि जलडमरूमध्य में प्रतिबंधों और सैन्य गतिविधियों से न केवल व्यापार प्रभावित हो रहा है बल्कि खाद और ऊर्जा जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी बाधित हो रही है।दूसरी ओर, इस संकट का मानवीय पहलू भी बेहद चिंताजनक है। अब तक ईरान, लेबनान, इजराइल और खाड़ी देशों में हजारों लोगों की जान जा चुकी है। गाजा और दक्षिणी लेबनान में लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई से आम नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। लेबनान की रिपोर्टों के अनुसार इजराइली सेना ने कई गांवों में तोपखाना चलाया और घरों को ध्वस्त किया, जिससे व्यापक तबाही हुई है। इसके साथ ही इजराइल ने अपने सैन्य अभियान को जारी रखने का संकेत दिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि युद्ध अभी समाप्त नहीं हुआ है और देश अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर कदम उठाएगा। इसके साथ ही इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में एक नई अग्रिम रक्षा रेखा स्थापित की है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।उधर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस संकट के प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। यूरोप में ईंधन संकट की आशंका जताई जा रही है और वहां के परिवहन मंत्री इस मुद्दे पर आपात बैठक कर रहे हैं। खाद की आपूर्ति बाधित होने से कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है। वहीं चीन ने इस स्थिति को संक्रमण के महत्वपूर्ण चरण के रूप में बताया है और मध्यस्थता की कोशिशें तेज कर दी हैं। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों को निकालने की योजना बना रहा है, लेकिन इसके लिए तनाव कम होना जरूरी है।हम आपको यह भी बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध में एक और नया मोड़ तब आया जब एक ईरानी तेल टैंकर ने कथित अमेरिकी धमकियों के बावजूद अपने क्षेत्रीय जल में प्रवेश किया। ईरान ने इसे अपनी नौसेना की सफलता बताया है, जबकि अमेरिका की ओर से इस पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक संकट का रूप ले चुका है। ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार, और कूटनीतिक संतुलन सभी इस तनाव से प्रभावित हो रहे हैं।विश्लेषकों का मानना है कि भले ही सीमित स्तर पर युद्धविराम हो जाए, लेकिन मूल समस्याओं का समाधान अभी दूर है। यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहते हैं, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:27 +0530</pubDate>
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<media:keywords>इधर, ट्रंप, अड़े, उधर, ईरान, फिर, होगा, घमासान, Trump, की, धमकी, के, जवाब, में, Iran, की, घु़ड़की, फिर, मँडराया, युद्ध, का, खतरा</media:keywords>
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<title>Saudi Arabia ने Hajj और Umrah के लिए बदले Visa नियम, अब सिर्फ 30 दिन की मिलेगी Entry वैधता</title>
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<description><![CDATA[ हज 2026 मई के आखिर में (लगभग 26–31 मई के बीच) होगा। सऊदी अरब ने इस तीर्थयात्रा को व्यवस्थित रखने के लिए कुछ सख्त नए नियम लागू किए हैं। यह जानना बहुत ज़रूरी है कि हज वीज़ा और उमराह वीज़ा एक जैसे नहीं होते। आप उमराह या टूरिस्ट वीज़ा पर हज नहीं कर सकते। अगर आप ऐसा करने की कोशिश करते हैं, तो आप पर जुर्माना लगाया जा सकता है, आपको देश से निकाला जा सकता है, या यहाँ तक कि 10 साल के लिए देश में आने पर रोक भी लगाई जा सकती है।इसे भी पढ़ें: भारत को पृथ्वी की सबसे जादुई जगह ले गया रूस, दुनिया में हड़कंपउमराह वीज़ा 2026: वैधता के नए नियमआपके उमराह वीज़ा की इस्तेमाल से पहले की वैधता अवधि में एक बड़ा बदलाव आया है। प्रवेश के लिए नई समय-सीमा: वीज़ा जारी होने के बाद, आपको सऊदी अरब में प्रवेश करने के लिए केवल 30 दिन (एक महीना) का समय मिलेगा। पहले यह समय-सीमा तीन महीने की थी। ठहरने की अवधि: देश में पहुँचने के बाद भी, आप अपनी आध्यात्मिक यात्रा पूरी करने के लिए 90 दिनों तक वहाँ ठहर सकते हैं।उमराह करने वालों के लिए सख्त समय-सीमाएँहज यात्रियों के लिए जगह बनाने के उद्देश्य से, सऊदी अरब ने उमराह के लिए एक &quot;सख्त कट-ऑफ&quot; (अंतिम सीमा) निर्धारित की है:वीज़ा पर रोक: उमराह वीज़ा जारी करना लगभग 20 मार्च, 2026 से बंद कर दिया गया।अंतिम प्रवेश: उमराह के लिए प्रवेश करने का अंतिम दिन 3 अप्रैल, 2026 था।अनिवार्य प्रस्थान: सभी उमराह यात्रियों को 18 अप्रैल, 2026 तक मक्का छोड़ देना अनिवार्य है।अप्रैल के मध्य के बाद, मक्का एक &quot;केवल-हज क्षेत्र&quot; (Hajj-only zone) बन जाता है। इस दौरान उमराह के लिए कोई अनुमति जारी नहीं की जाती है, और केवल वे लोग ही पवित्र स्थलों में प्रवेश कर सकते हैं जिनके पास आधिकारिक हज वीज़ा हो। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>गजब! शहबाज&#45;मुनीर के लिए नोबेल पुरस्कार मांगने लगे पाकिस्तानी, प्रस्ताव किया गया पेश</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में हलचल मची हुई है। अमेरिका और ईरान ने संकेत दिया है कि वे इस्लामाबाद में नए दौर की युद्धविराम वार्ता में शामिल होंगे।  अधिकारियों की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब न तो अमेरिका और न ही ईरान ने सार्वजनिक रूप से वार्ता के समय की पुष्टि की है। वहीं, ईरानी सरकारी टेलीविजन ने इस बात से इनकार किया है कि उनके देश का कोई अधिकारी पहले से ही पाकिस्तान की राजधानी में मौजूद है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की तारीफें हो रही हैं। पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया पर इन दोनों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग जोर पकड़ रही है। पाकिस्तान ने इसे अपनी मध्यस्था का परिणाम बताया और पाकिस्तान में खबर आते ही मीडिया और सोशल मीडिया में खुशी का माहौल बन गया। मीडिया में खुशी का माहौल बन गया। टीवी डिबेट्स में इसे पाकिस्तान की बड़ी कूटनीतिक जीत बताया गया। सभी पैनलिस्ट ने कहा कि शहबाज शरीफ और आसिम मुनी नोबेल शांति पुरस्कार के सबसे ज्यादा उम्मीदवार हैं। कई लोगों ने दुनिया के नेताओं से अपील की कि वे इन्हें नॉमिनेट करें। इसे भी पढ़ें: Pakistan की मेहनत पर फिरा पानी, Trump के एक Tweet ने US-Iran समझौते पर लगाया ब्रेक!अब तो खैबर पख्तूनख्वा विधानसभा में मंगलवार को एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को कूटनीति के माध्यम से क्षेत्रीय तनाव कम करने में उनकी भूमिका के मद्देनजर नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अनुशंसित किया गया। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की विधायक फराह खान ने यह प्रस्ताव विधानसभा सचिवालय को दिया। इसमें वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के समय पाकिस्तान की ‘‘जिम्मेदार, विवेकपूर्ण और सक्रिय कूटनीतिक भागीदारी’’ की सराहना की गई है। प्रस्ताव की विषयवस्तु के अनुसार, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तर पर शांति को बढ़ावा देने और उसे बनाए रखने में पाकिस्तान के योगदान को स्वीकार किया गया है। इसमें शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के नेतृत्व की सराहना की गई है, जिसमें उनके दूरदर्शी नेतृत्व, रणनीतिक दूरदर्शिता और अथक कूटनीतिक प्रयासों को रेखांकित किया गया है। प्रस्ताव में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने अपनी वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है और एक जिम्मेदार, शांतिप्रिय और सुलह को बढ़ावा देने वाले राष्ट्र के रूप में उभरा है, साथ ही अपनी कूटनीतिक भूमिका के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। इसमें कहा गया है कि देश के प्रयासों ने संभावित वैश्विक संकट को टालने और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव को कम करने में योगदान दिया। इसे भी पढ़ें: इस्लामाबाद वार्ता 2.0: जंग रोकने की बड़ी कूटनीतिक कोशिश, Pakistan की मध्यस्थता में मिलेंगे America-Iran के टॉप लीडर्सप्रस्ताव का समापन यह कहते हुए किया गया है कि शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के योगदान को स्वीकार करते हुए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया जाए। इस बीच, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सदन में इस प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना कम है, क्योंकि बहुमत पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के पास है और वह इसका विरोध कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रस्ताव पेश भी किया जाता है, तो उसके पारित होने की संभावना न के बराबर है। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ प्रमुख इमरान खान ने 2022 में मुनीर की सेना प्रमुख के रूप में नियुक्ति का विरोध किया था। शहबाज और मुनीर के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग संबंधी इसी तरह का एक प्रस्ताव पंजाब विधानसभा ने 16 अप्रैल को सर्वसम्मति से पारित किया था। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:25 +0530</pubDate>
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<title>West Asia संकट के बीच MEA का बड़ा ऑपरेशन, 11.6 लाख से ज्यादा भारतीयों की हुई घर वापसी</title>
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<description><![CDATA[ विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार को हाल के समय में सबसे बड़े स्वैच्छिक वापसी और यात्रा प्रबंधन अभियानों में से एक पर प्रकाश डाला, क्योंकि भारत खाड़ी देशों में रहने वाले अपने 1 करोड़ से ज़्यादा लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।पश्चिम एशिया में बदलती सुरक्षा स्थिति पर एक महत्वपूर्ण ब्रीफिंग में MEA ने घोषणा की कि 28 फरवरी, 2026 से अब तक इस क्षेत्र से 11,61,000 से ज़्यादा यात्री भारत आ चुके हैं। विभिन्न मंत्रालयों के बीच हुई एक ब्रीफिंग के दौरान, अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर. महाजन द्वारा दी गई इस जानकारी में, इराक में फंसे 12 भारतीय नाविकों की सफल वापसी पर भी प्रकाश डाला गया। इराक के हवाई क्षेत्र के रणनीतिक रूप से फिर से खुलने के बाद, यह समूह कल मुंबई पहुँचा। बगदाद में भारतीय दूतावास ने उनके दस्तावेज़ीकरण और आवागमन में मदद की, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि वे संघर्ष-ग्रस्त क्षेत्र से सुरक्षित रूप से बाहर निकल सकें।इसे भी पढ़ें: इधर ट्रंप अड़े उधर ईरान, फिर होगा घमासान! Trump की धमकी के जवाब में Iran की घु़ड़की, फिर मँडराया युद्ध का खतरामहाजन ने बताया, इराक में फँसे 12 भारतीय नाविक कल इराक का हवाई क्षेत्र खुलने के बाद मुंबई पहुँचे। बगदाद में हमारे मिशन ने उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की और भारत लौटने में उनकी मदद की। महाजन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि नाविकों का कल्याण &quot;उच्च प्राथमिकता&quot; बना हुआ है, और भारतीय मिशन स्थानीय बंदरगाह अधिकारियों तथा समुद्री एजेंसियों के साथ चौबीसों घंटे समन्वय कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम इस क्षेत्र में भारतीय नाविकों के कल्याण को उच्च प्राथमिकता देते हैं। हमारे मिशन उन्हें हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं, जिसमें स्थानीय अधिकारियों और एजेंसियों के साथ समन्वय, कांसुलर सहायता प्रदान करना और भारत लौटने के अनुरोधों में मदद करना शामिल है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:24 +0530</pubDate>
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<title>ट्रंप का ईरान पर गंभीर आरोप, सीजफायर तोड़ने से बढ़ा तनाव, क्या फिर छिड़ेगी जंग?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान पर आरोप लगाया कि उसने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहे दो हफ़्ते के सीज़फ़ायर समझौते का &quot;कई बार&quot; उल्लंघन किया है। यह समझौता पश्चिम एशिया में एक महीने से ज़्यादा समय से चल रही दुश्मनी को रोकने के लिए लागू किया गया था। इस बीच, एक मुकम्मल हल निकालने के लिए चल रही बातचीत अधर में लटकी हुई है, क्योंकि इस नाज़ुक सीज़फ़ायर की समय सीमा नज़दीक आ रही है। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान ने सीज़फ़ायर का कई बार उल्लंघन किया है!ये टिप्पणियाँ वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आई हैं।इसे भी पढ़ें: इधर ट्रंप अड़े उधर ईरान, फिर होगा घमासान! Trump की धमकी के जवाब में Iran की घु़ड़की, फिर मँडराया युद्ध का खतरा दो हफ़्ते का सीज़फ़ायर समझौता 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है, जिससे इस क्षेत्र में संघर्ष के और बढ़ने की आशंकाएँ बढ़ गई हैं। इस महीने की शुरुआत में, कूटनीतिक बातचीत के लिए माहौल बनाने के मकसद से जो सीज़फ़ायर करवाया गया था, वह अब भी नाज़ुक बना हुआ है; दोनों ही पक्ष इसके लागू होने को लेकर अपनी-अपनी आशंकाएँ ज़ाहिर कर रहे हैं। बातचीत का एक और दौर आयोजित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने की उम्मीद है। ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर, &#039;इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ब्रॉडकास्टिंग&#039; (IRIB) के अनुसार, अब तक ईरान का कोई भी कूटनीतिक प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद नहीं गया है।इसे भी पढ़ें: इधर ट्रंप अड़े उधर ईरान, फिर होगा घमासान! Trump की धमकी के जवाब में Iran की घु़ड़की, फिर मँडराया युद्ध का खतराएक बयान जारी करते हुए, ब्रॉडकास्टर ने पाकिस्तान में किसी भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी की बात को साफ़ तौर पर नकार दिया। बयान में कहा गया, ईरान का कोई भी कूटनीतिक प्रतिनिधिमंडल चाहे वह मुख्य टीम हो या सहायक टीम, या फिर शुरुआती मिशन हो या फ़ॉलो-अप मिशन अब तक पाकिस्तान के इस्लामाबाद नहीं गया है। हालाँकि, अल अरबिया की रिपोर्टों में, एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सूत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को एक ही समय पर पाकिस्तानी राजधानी में पहुँचने वाले हैं, जो क्षेत्रीय कूटनीति में एक संभावित सफलता का संकेत है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्ष लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने के उद्देश्य से होने वाली महत्वपूर्ण वार्ताओं में भाग लेने के लिए इस्लामाबाद में जुट रहे हैं। यह एक साथ आगमन कूटनीतिक रूपरेखा में तीव्र अंतरराष्ट्रीय रुचि के बीच हो रहा है, हालाँकि तेहरान की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल, ईरान ने इस विशिष्ट घटनाक्रम की पुष्टि नहीं की है, बावजूद इसके कि ऐसी रिपोर्टें बढ़ रही हैं कि दोनों विरोधी पक्षों के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत के लिए स्थल तैयार कर लिया गया है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:24 +0530</pubDate>
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<title>Hormuz Strait में US की कार्रवाई से गरमाई सियासत, World Energy सप्लाई पर बढ़ा संकट का खतरा।</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक नया विवाद सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को और गरमा दिया है। अमेरिका द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में एक जहाज को जब्त किए जाने के बाद अब चीन और ईरान भी इस मामले में खुलकर आमने-सामने आ गए हैं।बता दें कि अमेरिका की एक प्रमुख नेता निक्की हेली ने दावा किया है कि यह जहाज चीन से ईरान जा रहा था और इसमें मिसाइलों से जुड़े रासायनिक सामान ले जाए जा रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि जहाज को कई बार रोकने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उसने उनका पालन नहीं किया, जिसके बाद कार्रवाई करनी पड़ी। गौरतलब है कि उन्होंने चीन पर ईरान की सरकार को सहयोग देने का आरोप भी लगाया है।हालांकि, चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, चीन का कहना है कि यह एक सामान्य विदेशी मालवाहक जहाज था और उसका इस तरह के किसी सैन्य या संवेदनशील सामान से कोई संबंध नहीं है। चीन ने इन दावों को बेबुनियाद बताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत ठप पड़ी हुई है और समुद्री क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना ने इस ईरानी झंडे वाले जहाज को रोका था, जिसे इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स से जुड़ा बताया जा रहा है।मौजूद जानकारी के अनुसार, शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि जहाज में ऐसे सामान हो सकते हैं जो आम उपयोग के साथ-साथ सैन्य काम में भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसमें धातु, पाइप और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे सामान शामिल बताए जा रहे हैं।बता दें कि यह जहाज ईरान के चाबहार बंदरगाह के पास रोका गया था और कई घंटों तक चेतावनी देने के बावजूद नहीं रुकने पर अमेरिकी बलों ने इसमें सवार होकर कार्रवाई की। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह जहाज उनके द्वारा लागू समुद्री नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था।वहीं, ईरान ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे सशस्त्र लूट करार दिया है। गौरतलब है कि ईरान ने चेतावनी दी है कि वह इसका जवाब दे सकता है, हालांकि जहाज में मौजूद आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है।मौजूद जानकारी के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव से जुड़ा हुआ है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी असर डाल सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:23 +0530</pubDate>
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<title>BrahMos in focus: फिलीपींस ने निकाली ब्रह्मोस, छटपटा उठा चीन</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिण चीन सागर में चाइना की दादागिरी को करारा जवाब मिलने वाला क्योंकि भारत से ब्रह्मोस मिसाइल मिलने के बाद अब फिलीपींस अपनी ताकत का प्रदर्शन करने जा रहा है। दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस अब फिलीपींस और अमेरिका के बीच होने वाले सबसे बड़े सैन्य अभ्यास बालीट्टन में अपना दम दिखाएगी। दरअसल फिलीपींस पहली बार इस मिसाइल का सिमुलेशन फायरिंग करने जा रहा है। जो कि बड़े सैन्य अभ्यास बालिका के दौरान होगा। यह असली फायरिंग नहीं होगी लेकिन पूरी तैयारी वैसी ही रहेगी। रडार ऑन, टारगेट लॉक, लॉन्च सिस्टम एक्टिव सब कुछ असली युद्ध जैसे माहौल में। दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच लंबे समय से टकराव की स्थिति है। द्वीपों और समुद्री इलाकों को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा है और चीन की आक्रामक रणनीति को फिलीपींस अपने लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है। यही वजह है कि फिलीपींस ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदी ताकि चीन को साफ संदेश दिया जा सके कि अब जवाब देने की ताकत उसके पास भी है। इसे भी पढ़ें: Pakistan दागने जा रहा मिसाइल, भारत ने उतारा खूंखार INS ध्रुव, घेरा इलाकाअप्रैल 2024 में इसकी पहली बैटरी डिलीवर की गई जिसमें कई लांचर, ट्रैकिंग सिस्टम और सपोर्ट व्हीकल शामिल होते हैं। और आपको बता दें ब्रह्मोस की ताकत ही इसे खास बनाती। करीब 2.8 मैक की रफ्तार यानी लगभग 3400 कि.मी. प्रति घंटा इतनी तेज की दुश्मन को संभलने का मौका तक नहीं मिलता। जमीन, समुद्र, हवा कहीं से भी लॉन्च होने की क्षमता ब्रह्मोस को और घातक बनाती है। 200 से 300 किलो तक का बोरहेड ले जाने वाली ये मिसाइल सीधे दुश्मन के ठिकानों को निशाना बना सकती है। फिलीपींस के लिए यह सिर्फ एक हथियार नहीं बल्कि एक डिटरेंसी यानी दुश्मन को पहले ही रोकने की ताकत। खासतौर पर समुद्री सुरक्षा, तटीय रक्षा और एंटी एक्सेस ऑपरेशन में यह गेम चेंजर मानी जा रही है। और फिलीपींस के पास जब से ब्रह्मोस आई थी। चीन की बौखलाहट भी देखने को मिली। 2024 में जब भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस दी थी, उस वक्त भी चीन काफी बौखलाया था। और अब बेलीटन अभ्यास में पहली बार ब्रह्मोस का सिमुलेशन फायरिंग फिलीपींस करने जा रहा है। इसलिए चीन और बौखलाएगा। इसे भी पढ़ें: उधर बुरा भिड़े अमेरिका-ईरान, इधर मलक्का में खेल गया भारत!बड़ी बात यह है कि इसमें अमेरिका भी शामिल रहे और इस दौरान कई एडवांस सिस्टम भी शामिल किए जा रहे हैं। मकसद साफ है सभी सिस्टम को एक साथ जोड़कर ज्यादा ताकतवर सैन्य क्षमता तैयार करना। हालांकि आधिकारिक तौर पर कहा जा रहा है कि यह अभ्यास किसी एक देश के खिलाफ नहीं है। लेकिन जमीन की सच्चाई यही है कि पूरा फोकस इंडोपेसिफिक में बढ़ते तनाव पर है। जहां चीन की मौजूदगी लगातार चुनौती बन रही है। कुल मिलाकर ब्रह्मोस की एंट्री ने पूरे इलाके का रणनीतिक समीकरण बदल दिया है। भारत की यह मिसाइल अब सिर्फ देश की ताकत नहीं रही बल्कि चीन के खिलाफ खड़े देशों के लिए एक मजबूत ढाल बनती जा रही है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:23 +0530</pubDate>
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<title>खोल दो नहीं तो...हॉर्मुज में चीन की एंट्री, ईरान को दिया सख्त आदेश!</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिमी एशिया का तनाव अभी निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। हालात इतने संवेदनशील हो चुके हैं कि पूरी दुनिया की निगाहें इस क्षेत्र पर टिकी हैं। एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान में दूसरे दौर की वार्ता की तैयारी चल रही है। दूसरी ओर ईरान हॉर्मुज में अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए है। इसी बीच इस पूरे घटनाक्रम में एक नई एंट्री चीन की हुई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ फोन पर बातचीत की है। इस चर्चा के दौरान ईरान और होर्मुज स्टेट की स्थिति पर विस्तार से बात हुई है। दरअसल, होर्मुद के बंद रहने से वैश्विक स्तर पर खासकर एशिया में ऊर्जा संकट गहरा गया है। चीन ईरानी तेल का प्रमुख आयातक है। अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के लंबे समय तक चलने से चिंतित है। इसे भी पढ़ें: ट्रंप टैरिफ पर बड़ा अपडेट, भारत को क्या फायदा?शी जिनपिंग ने कहा है कि चीन क्षेत्रिय देशों को सदभावना, विकास और सहयोग के आधार पर एक साझा भविष्य बनाने के लिए समर्थन देता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य आवागमन जारी रहना चाहिए, क्योंकि यह क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों की पूर्ति करता है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने और उसके बाद मौजूदा संघर्ष में अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी पर चीनी नेता का यह पहला बयान है। जलडमरूमध्य के बंद होने से दुनिया भर में, विशेष रूप से एशिया में, ऊर्जा की भारी कमी हो गई है, और चीन, जो ईरानी तेल का एक प्रमुख आयातक है, अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध के लंबे समय तक चलने को लेकर तेजी से चिंतित है। इसे भी पढ़ें: ईरानी जहाज में तबाही का सामान! China-Iran के &#039;खतरनाक गठबंधन&#039; ने उड़ाई दुनिया की नींद, अब क्या करेंगे ट्रंप?शी ने कहा कि चीन क्षेत्रीय देशों का समर्थन करता है कि वे परस्पर अच्छे पड़ोसी होने, विकास, सुरक्षा और सहयोग के आधार पर अपना भविष्य स्वयं अपने हाथ में रखें, तथा क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा को बढ़ावा दें। उनकी यह टिप्पणी महत्वपूर्ण थी क्योंकि चीन ने पश्चिम एशिया में एक प्रमुख राजनयिक सफलता” हासिल की, जिसके तहत मार्च 2023 में कट्टर प्रतिद्वंद्वी ईरान और सऊदी अरब को एक साथ लाया गया। परिणामस्वरूप, दोनों देशों ने राजनयिक संबंध बहाल कर लिए। अमेरिका-ईरान संघर्ष ने लेकिन सब कुछ बदल दिया है, ईरान ने सऊदी अरब और अन्य क्षेत्रीय देशों पर हमला करने के अलावा, उसके खिलाफ अमेरिकी युद्ध का मुकाबला करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। इसके अलावा, चीनी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी नौसेना द्वारा चीन से ईरान के बंदरगाह की ओर जा रहे उस मालवाहक जहाज पर गोलीबारी करने पर चिंता व्यक्त की है, जिसने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी का उल्लंघन किया था।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:22 +0530</pubDate>
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<title>Border पर भारत ने किया खतरनाक &amp;apos;शेषनाग&amp;apos; से धमाका, दहल उठे मुनीर&#45;शहबाज</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान की नैया डूबाने के लिए भारत ने निकाल लिया है शेषनाग और पाकिस्तान बॉर्डर के ठीक पास जब यह शेषनाग मंडराता दिखा तो इस्लामाबाद और कराची की धरती हिलने लगी। बेचैनी बढ़ गई। कहावत है कि जब नाग फन फैलाता है तो सामने वाले के होश उड़ जाते हैं। वो बिल्कुल बौखला जाता है और इस बार भारत का यह शेषनाग कोई कहानी नहीं बल्कि एक ऐसा आधुनिक हथियार है जो दुश्मन के इलाके में घुसकर घंटों मंडराएगा और फिर सटीक वार करके खुद को ही खत्म कर देगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इसकी रेंज में पूरा पाकिस्तान आता है। बता दें कि राजस्थान के पोखरण की रेत में सफल परीक्षण भी हो चुका है और अब सवाल यही है कि क्या शेषनाग 150 वाकई इतना खतरनाक है? क्या यह भारत के लिए गेम चेंजर साबित होगा?इसे भी पढ़ें: इस्लामाबाद वार्ता 2.0: जंग रोकने की बड़ी कूटनीतिक कोशिश, Pakistan की मध्यस्थता में मिलेंगे America-Iran के टॉप लीडर्सबता दें कि यह कोई साधारण ड्रोन नहीं है। यह एक लोटरिंग म्यूशन है। यानी देखो, इंतजार करो और सही समय पर खत्म कर दो। इसे तैयार किया है बेंगलुरु के स्टार्टअप न्यू स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी ने और इसका मकसद आपको बता दें कि इसका मकसद एकदम साफ है कि दुश्मन के इलाके में गहराई तक घुसना है और लंबे समय तक हवा में रहना है और फिर सही मौके पर सटीक हमला कर देना है। राजस्थान के पोखरण टेस्ट रेंज में इसके टेस्ट के दौरान बता दें कि ड्रोन ने तय रूट्स फॉलो किए। करीब 720 कि.मी. की दूरी तय भी की और लगभग बता दें कि 5 घंटे तक यह हवा में भी रहा और अंत में अपने लक्ष्य पर सटीक हमला भी इसने किया। इसकी अधिकतम रेंज बता दें कि 1000 कि.मी. तक बताई जा रही है। और सबसे बड़ा सवाल। क्या सच में इसके रेंज में पूरा पाकिस्तान है? सीधा जवाब है काफी हद तक। हां, इसकी रेंज का मतलब यह है कि सीमा से उड़ान भरकर यह ड्रोन पाकिस्तान के बड़े शहरों तक पहुंच सकता है। लेकिन यहां पर असली बात यह है कि यह हमला नहीं डिट्रेस है। यानी कि दुश्मन को पता है कि आपके पास ऐसी ताकत है जो कहीं भी पहुंच सकती है। इसे भी पढ़ें: गजब! शहबाज-मुनीर के लिए नोबेल पुरस्कार मांगने लगे पाकिस्तानी, प्रस्ताव किया गया पेशईरान के चर्चित ड्रोन शहीद 136 से इसकी तुलना भी इस वक्त बता दें कि जमकर की जा रही है सोशल मीडिया पर। जिसने हाल के संघर्षों में दिखाया कि सस्ते ड्रोन भी युद्ध का रुख एकदम बदल सकते हैं। लेकिन भारत का जो शेषनाग 150 है यह भारतीय जरूरतों के हिसाब से एकदम तैयार किया गया है। इसकी ताकत एक नए तौर पर उभरी है। रेंज इसकी 1000 कि.मी. तक है। एंडोरेंस 5 घंटे वॉर हेड 25 किलो सटीकता 10 मीटर से कम। यानी यह सिर्फ डराने के लिए नहीं सीधा टारगेट खत्म करने के लिए बनाया गया है। यह किन टारगेट्स पर हमला कर सकता है आप उसे भी जान लीजिए। रडार सिस्टम, हथियार डिपो, कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम और अगर दुश्मन जीपीएस जाम कर दे तब भी यह ड्रोन अपने ऑनबोर्ड सेंसर से मिशन पूरा कर सकता है। और इसे देखते हुए एक कहावत याद आती है कि जिसके पास तकनीक की ताकत हो उसके सामने दुश्मन की हर चाल कमजोर पड़ जाती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:21 +0530</pubDate>
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<title>Indian Ocean में US Navy का बड़ा एक्शन, संदिग्ध Iranian Oil Tanker को रोका, बढ़ा टकराव का खतरा।</title>
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<description><![CDATA[ मध्य और पूर्वी समुद्री क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक और अहम घटनाक्रम सामने आया है, जहां अमेरिका ने एक संदिग्ध तेल टैंकर पर कार्रवाई करने का दावा किया है। इस घटना ने पहले से ही संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय माहौल को और गंभीर बना दिया है।बता दें कि अमेरिकी रक्षा विभाग ने जानकारी दी है कि उसके बलों ने एक “बिना पहचान वाले” और प्रतिबंधित तेल टैंकर पर समुद्री रोकथाम अभियान चलाया। मौजूद जानकारी के अनुसार, इस टैंकर का नाम एम टी टिफानी बताया जा रहा है, जिस पर बिना किसी टकराव के सवार होकर जांच की गई है।गौरतलब है कि यह कार्रवाई हिंद-प्रशांत क्षेत्र में की गई है, जहां अमेरिका ने वैश्विक समुद्री प्रतिबंधों को लागू करने के तहत यह कदम उठाया है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य अवैध नेटवर्क को तोड़ना और उन जहाजों को रोकना है, जो ईरान को सामग्री सहयोग पहुंचा रहे हैं।मौजूद जानकारी के अनुसार, यह जहाज हिंद महासागर में श्रीलंका और इंडोनेशिया के बीच तेल लेकर जा रहा था। हालांकि, इसके माल, चालक दल या मूल स्थान के बारे में अभी तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।बता दें कि अमेरिका ने साफ कहा है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र किसी भी प्रतिबंधित जहाज के लिए सुरक्षित स्थान नहीं है और वह ऐसे जहाजों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। गौरतलब है कि हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।इसी बीच एक दिन पहले ईरान का एक अन्य तेल टैंकर सफलतापूर्वक अपने देश के जलक्षेत्र में पहुंच गया, जिसे लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। ईरान का दावा है कि उसका जहाज अमेरिकी नौसैनिक दबाव के बावजूद सुरक्षित तरीके से अपने बंदरगाह तक पहुंचा है।मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने कहा है कि उनका देश धमकी के साये में किसी भी तरह की बातचीत स्वीकार नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर नए कदम उठाने के लिए तैयार है।वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ लागू समुद्री नाकेबंदी फिलहाल जारी रहेगी और युद्धविराम की अवधि भी आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। गौरतलब है कि इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री मार्गों पर बढ़ती यह सख्ती वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाल सकती है। खास तौर पर हिंद महासागर और आसपास के क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियां आने वाले समय में बड़े टकराव का कारण बन सकती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय हालात और जटिल हो सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:20 +0530</pubDate>
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<title>Iran के पास चंद घंटों का समय, Donald Trump की चेतावनी&#45; &amp;apos;समझौता करें या बमबारी के लिए तैयार रहें&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि बुधवार सुबह तक ईरान किसी ठोस समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य हमले शुरू कर देगा। ट्रंप का यह बयान दो सप्ताह के युद्धविराम की समाप्ति से ठीक पहले आया है। सीएनबीसी के ‘‘स्क्वॉक बॉक्स’’ कार्यक्रम में यह पूछे जाने पर कि क्या वह ईरान के साथ युद्धविराम की अवधि बढ़ाएंगे ताकि शांति वार्ता के माध्यम से युद्ध समाप्त करने के लिए कोई समझौता हो सके, ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं ऐसा नहीं करना चाहता।’’इसे भी पढ़ें: Laureus Awards: Madrid में Carlos Alcaraz का बड़ा सम्मान, बने Sportsman of the Year
उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें बातचीत करनी है। और, आप जानते हैं कि एक चीज कहना चाहूंगा...ईरान अपनी स्थिति को काफी मजबूत कर सकता है। अगर वे समझौता कर लेते हैं, तो वे फिर से एक मजबूत राष्ट्र, एक शानदार राष्ट्र बन सकते हैं।’’
ट्रंप ने कहा कि अगर बुधवार को बिना किसी समझौते के युद्धविराम समाप्त हो जाता है, तो वह ईरान पर फिर से हमला शुरू करने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं बमबारी करने की उम्मीद कर रहा हूं क्योंकि मुझे लगता है कि यही बेहतर रुख है।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें लगता है कि अमेरिका हफ्तों से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए ईरान के साथ एक शानदार समझौता करेगा।
ईरान के साथ शांति वार्ता के दूसरे दौर से अपनी अपेक्षाओं के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि उनके पास कोई विकल्प नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने उनकी नौसेना को नष्ट कर दिया है, हमने उनकी वायु सेना को नष्ट कर दिया है, हमने उनके नेताओं को हटा दिया है।’’
ट्रंप ने कहा, ‘‘हमने उनके नेताओं को हटा दिया है, जिससे एक तरह से मामला थोड़ा जटिल हो जाता है, लेकिन ये नेता कहीं अधिक तर्कवादी हैं।’’इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz में व्यवधान कोई दूर की घटना नहीं, इसका भारत पर सीधा प्रभाव, राजनाथ सिंह के बताई &#039;कड़वी सच्चाई&#039;
उन्होंने कहा, ‘‘यह सत्ता परिवर्तन है, चाहे आप इसे कुछ भी कहें, जो मैंने करने का वादा नहीं किया था, लेकिन मैंने इसे अप्रत्यक्ष रूप से कर दिया है।’’
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्ला तरार ने मंगलवार शाम कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ वार्ता के दूसरे दौर में ईरान की भागीदारी के संबंध में अब भी औपचारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युद्धविराम बुधवार तड़के चार बजकर 50 मिनट पर समाप्त हो रहा है।
तरार ने कहा, “दो सप्ताह के युद्धविराम की समाप्ति से पहले वार्ता में भाग लेने का ईरान का निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है।”
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि शांति वार्ता में भागीदारी के संबंध में अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
अमेरिका और ईरान के बीच 11 और 12 अप्रैल को हुई पहले की दौर की वार्ता बेनतीजा समाप्त हो गई, वहीं दूसरे दौर को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:19 +0530</pubDate>
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<title>Asim Munir और Donald Trump के बीच कुछ बड़ा पक रहा है? अमेरिका ने मानी पाकिस्तान की बात, ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि वह ईरान पर होने वाले सैन्य हमलों को तब तक के लिए टाल रहे हैं, जब तक कि तेहरान की ओर से कोई &#039;संयुक्त शांति प्रस्ताव&#039; पेश नहीं किया जाता। इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत का श्रेय ट्रंप ने पाकिस्तान के सैन्य और नागरिक नेतृत्व को दिया है। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से आगे की सैन्य कार्रवाई में देरी करने और कूटनीति के लिए समय देने के अनुरोध के बाद यह निर्णय लिया गया। इसे भी पढ़ें: Stock Market Opening | Sensex-Nifty में गिरावट की घंटी, HCLTech 7% टूटा, भू-राजनीतिक तनाव का बाजार पर सायाएक आधिकारिक बयान में विस्तार से बताते हुए, ट्रम्प ने कहा कि यह निर्णय असीम मुनीर और प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ सहित पाकिस्तान के नेतृत्व की सीधी अपील के बाद किया गया था। ट्रंप ने कहा, &quot;इस तथ्य के आधार पर कि ईरान सरकार गंभीर रूप से खंडित है, अप्रत्याशित रूप से नहीं और, फील्ड मार्शल असीम मुनीर और पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहबाज़ शरीफ के अनुरोध पर, हमें ईरान देश पर अपना हमला तब तक रोकने के लिए कहा गया है जब तक कि उनके नेता और प्रतिनिधि एक एकीकृत प्रस्ताव के साथ नहीं आ जाते।&quot; उन्होंने कहा, &quot;इसलिए मैंने अपनी सेना को नाकाबंदी जारी रखने और अन्य सभी मामलों में तैयार और सक्षम रहने का निर्देश दिया है, और इसलिए जब तक उनका प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया जाता है, और चर्चा किसी न किसी तरह से समाप्त नहीं हो जाती है, तब तक मैं युद्धविराम का विस्तार करूंगा।&quot;यह कदम मौजूदा नाकाबंदी और सैन्य तत्परता के माध्यम से ईरान पर दबाव बनाए रखते हुए तनाव में अस्थायी कमी का संकेत देता है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मंगलवार को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इस्लामाबाद के लिए रवाना नहीं हुए और वाशिंगटन में ही रहे, व्हाइट हाउस ने बाद में संवाददाताओं से पुष्टि की कि वह अब यात्रा नहीं करेंगे।युद्ध की किसी गतिविधि पर नाकेबंदी करेंट्रम्प की घोषणा से कुछ ही घंटे पहले, अब्बास अराघची ने एक्स पर पोस्ट किया, जिसमें ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी को &quot;युद्ध का कार्य&quot; और युद्धविराम का उल्लंघन बताया गया। उन्होंने आगे चेतावनी दी कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने और चालक दल को हिरासत में लेने से तनाव बढ़ेगा, उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अपने हितों की रक्षा करना और दबाव का विरोध करना जानता है।इस बीच, अर्ध-आधिकारिक तस्नीम समाचार एजेंसी की रिपोर्ट है कि ईरान ने पाकिस्तान में होने वाली आगामी वार्ता में शामिल नहीं होने का फैसला किया है।अपने एक संवाददाता का हवाला देते हुए, एजेंसी ने कहा कि यह निर्णय अमेरिका द्वारा हाल के दिनों में &quot;अत्यधिक मांगों&quot; से पीछे हटने से इनकार करने के बाद लिया गया है। तस्नीम ने अनुवादित टिप्पणी में कहा, &quot;इस कारण से, ईरान ने अंततः आज घोषणा की कि, इस स्थिति को देखते हुए, वह वार्ता में भाग लेने को समय की बर्बादी मानता है, क्योंकि अमेरिका किसी भी उपयुक्त समझौते में बाधा डाल रहा है। इसलिए, ईरान अमेरिकियों के साथ बातचीत नहीं करेगा।&quot; इसे भी पढ़ें: Uttarakhand Chardham Yatra 2026 | केदारनाथ के कपाट खुले, मार्गों, पंजीकरण, हेलीकाप्टर बुकिंग और नए नियमों के बारे में सब कुछरिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने औपचारिक रूप से पाकिस्तान को अपनी स्थिति बता दी है और मध्यस्थों को सूचित किया है कि वह निर्धारित वार्ता के लिए उपस्थित नहीं होगा।ईरान को साजिश की आशंकाईरान के मुख्य वार्ताकार और संसदीय अध्यक्ष के सलाहकार मोहम्मद बाक़र ग़ालिबफ़ ने मंगलवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का युद्धविराम बढ़ाने का निर्णय संभावित आश्चर्यजनक हमले के लिए &quot;समय खरीदने की एक चाल&quot; है। एक बयान में, सलाहकार ने चेतावनी दी कि ईरानी बंदरगाहों पर जारी अमेरिकी नाकाबंदी &quot;बमबारी से अलग नहीं है&quot; और इसका सैन्य जवाब दिया जाना चाहिए।सलाहकार ने कहा, &quot;ट्रंप का युद्धविराम विस्तार निश्चित रूप से एक आश्चर्यजनक हमले के लिए समय निकालने की एक चाल है। ईरान को पहल करनी चाहिए।&quot;पाकिस्तान के पीएम ने ट्रंप को धन्यवाद दियापाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स पर एक पोस्ट में युद्धविराम की अवधि बढ़ाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस फैसले से चल रहे राजनयिक प्रयासों को जारी रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, &quot;अपनी व्यक्तिगत ओर से और फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर की ओर से, मैं ईमानदारी से राष्ट्रपति ट्रम्प को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने युद्धविराम को बढ़ाने के हमारे अनुरोध को स्वीकार कर लिया ताकि चल रहे राजनयिक प्रयासों को अपना रास्ता मिल सके।&quot;शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान बातचीत के जरिए समाधान के लिए दबाव डालना जारी रखेगा और उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष संघर्ष विराम को बरकरार रखेंगे और इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता के अगले दौर में एक व्यापक &quot;शांति समझौते&quot; की दिशा में काम करेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:18 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;US Ceasefire | राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के अनुरोध पर युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाया</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के विशेष अनुरोध पर ईरान के साथ जारी युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है। यह फैसला उस समय लिया गया जब पहले से घोषित दो सप्ताह का युद्धविराम समाप्त होने में कुछ ही घंटे शेष थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले के पीछे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के व्यक्तिगत अनुरोध को मुख्य कारण बताया।
 यह घोषणा तब की गई है, जब आठ अप्रैल को घोषित दो सप्ताह का युद्धविराम कुछ ही घंटों में समाप्त होने वाला था। इसके साथ ही उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की इस्लामाबाद यात्रा भी प्रभावी रूप से टल गई, जहां ईरानी प्रतिनिधियों के साथ शांति वार्ता प्रस्तावित थी।
 हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका ईरान पर हमला करने से केवल तभी तक परहेज करेगा, जब तक उसका नेतृत्व बातचीत के लिए एक समेकित प्रस्ताव पेश नहीं करता। उन्होंने कहा कि ईरान के बंदरगाहों पर आर्थिक नाकेबंदी जारी रहेगी।
 वेंस और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ तथा जेरेड कुशनर को मंगलवार को इस्लामाबाद रवाना होना था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल की ‘‘पाकिस्तान यात्रा मंगलवार को नहीं होगी।’’
 ट्रंप ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ‘‘इस तथ्य के आधार पर कि ईरान की सरकार गंभीर रूप से आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तथा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुरोध पर हमसे कहा गया है कि हम ईरान पर अपने हमले को तब तक रोकें, जब तक उसके नेता और प्रतिनिधि समेकित प्रस्ताव तैयार नहीं कर लेते।’’
 अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने ‘‘इसलिए अपनी सेना को नाकेबंदी जारी रखने तथा अन्य सभी मामलों में पूरी तरह तैयार और सक्षम रहने का निर्देश दिया है और युद्धविराम को तब तक बढ़ाया जाएगा, जब तक उनका प्रस्ताव पेश नहीं हो जाता और बातचीत किसी न किसी नतीजे पर नहीं पहुंच जाती।’’
 यह घोषणा वॉशिंगटन, इस्लामाबाद और तेहरान के अधिकारियों के बीच कई दिनों से चल रही गहन कूटनीतिक गतिविधियों के बाद हुई, जिसका उद्देश्य सभी पक्षों को स्वीकार्य मसौदा प्रस्ताव तैयार करना था।
 विटकॉफ और कुशनर मंगलवार सुबह मियामी से इस्लामाबाद रवाना होने वाले थे, लेकिन उन्हें व्हाइट हाउस में ‘‘अतिरिक्त बैठकों’’ में शामिल होने को कहा गया। वेंस भी वाशिंगटन में बैठक में शामिल हुए। उनका भी पाकिस्तान जाने का कार्यक्रम था।
 युद्धविराम बढ़ाने का फैसला ट्रंप के रुख में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। मंगलवार सुबह उन्होंने कहा था कि यदि बुधवार तक समझौता नहीं हुआ तो ‘‘बमबारी होगी।’’ उन्होंने यह भी कहा था कि सेना ‘‘पूरी तरह तैयार’’ है।
 ट्रंप ने मंगलवार दोपहर व्हाइट हाउस में एनसीएए कॉलेज चैंपियंस को संबोधित करते समय ईरान संघर्ष या वार्ता का कोई जिक्र नहीं किया।इसे भी पढ़ें: सनराइजर्स हैदराबाद ने दिल्ली कैपिटल्स को रौंदा, अभिषेक शर्मा और ईशान मलिंगा का चला जादू
 पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने पर ट्रंप का आभार जताया और उम्मीद जतायी कि दोनों पक्ष “व्यापक शांति समझौते” तक पहुंचेंगे।
 ट्रंप की घोषणा के बाद शरीफ ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘मैं व्यक्तिगत रूप से और फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप का तहे दिल से धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ने देने के लिए युद्धविराम बढ़ाने के हमारे अनुरोध को स्वीकार किया।’’
 उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पर जताए गए ‘‘विश्वास और भरोसे के साथ वह संघर्ष के बातचीत से समाधान के लिए गंभीर प्रयास जारी रखेगा।’’
 शरीफ ने कहा, ‘‘मुझे पूरी उम्मीद है कि दोनों पक्ष युद्धविराम का पालन करना जारी रखेंगे और इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता के दूसरे दौर के दौरान संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए एक व्यापक ‘शांति समझौते’ पर पहुंचने में सक्षम होंगे।’’
 इस बीच, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान, तुर्किये और संयुक्त अरब अमीरात स्थित 14 व्यक्तियों, संस्थाओं और विमानों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। उन पर ईरानी शासन की ओर से हथियार या हथियारों के पुर्जों की खरीद-फरोख्त और उनके परिवहन में शामिल होने का आरोप है।
 बेसेंट ने कहा, ‘‘ईरानी शासन को वैश्विक ऊर्जा बाजारों से जबरन लाभ उठाने और मिसाइलों व ड्रोन से नागरिकों को निशाना बनाने के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।’’इसे भी पढ़ें: Apple में Tim Cook युग का अंत, जानिए कौन हैं नए CEO John Ternus जो संभालेंगे कमान।
 उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के खार्ग द्वीप स्थित तेल भंडारण केंद्र कुछ ही दिनों में भर सकते हैं, जिससे तेल कुओं को बंद करना पड़ सकता है।
 उन्होंने कहा, ‘‘ईरान के समुद्री व्यापार पर रोक सीधे उसके राजस्व के मुख्य स्रोतों पर चोट है।’’
 वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘अमेरिकी वित्त मंत्रालय ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ (आर्थिक प्रहार) के जरिए अधिकतम दबाव बनाए रखेगा, ताकि तेहरान की धन जुटाने, भेजने और वापस लाने की क्षमता को कमजोर किया जा सके। कोई भी व्यक्ति या जहाज जो गुप्त व्यापार या वित्त के जरिए इसमें मदद करेगा, वह अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आएगा।’’
 अमेरिका ने तेहरान पर दबाव बनाने के लिए नाकेबंदी का सहारा लिया है, ताकि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ खत्म करे। यह अहम समुद्री मार्ग है, जिससे शांति काल में दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और कच्चा तेल गुजरता था।
 इस जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ के कारण तेल कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। ]]></description>
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<title>Crisis in Nepal Politics | सत्ता संभालने के एक महीने के भीतर बालेन शाह सरकार के खिलाफ जनआक्रोश, सड़कों पर उतरे छात्र</title>
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<description><![CDATA[ काठमांडू के मेयर से देश के प्रधानमंत्री पद तक का सफर तय करने वाले बालेन शाह के लिए सत्ता की राह कांटों भरी साबित हो रही है। दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाने के एक महीने के भीतर ही उन्हें चौतरफा विरोध का सामना करना पड़ रहा है। नेपाल की सड़कों से लेकर प्रशासनिक केंद्र &#039;सिंघा दरबार&#039; तक जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। बालेन सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों का एक बड़ा कारण भारत से आने वाले सामान पर लगाया गया नया अनिवार्य सीमा शुल्क है। विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख कारणों में से एक भारत से लाए गए 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर अनिवार्य सीमा शुल्क लगाने का सरकार का निर्णय है।सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों का कहना है कि यह कदम सीधे तौर पर उनके दैनिक जीवन को प्रभावित करता है, क्योंकि वे आवश्यक वस्तुओं के लिए सीमा पार खरीद पर बहुत अधिक निर्भर हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि नीति आम नागरिकों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ डालती है और इन क्षेत्रों में जमीनी हकीकत को ध्यान में रखने में विफल रहती है।इसे भी पढ़ें: Stock Market Opening | Sensex-Nifty में गिरावट की घंटी, HCLTech 7% टूटा, भू-राजनीतिक तनाव का बाजार पर साया छात्र संघ विवाद से युवाओं में आक्रोशगुस्से का एक अन्य प्रमुख स्रोत राजनीतिक समूहों से संबद्ध छात्र संघों को अस्वीकार करने या किनारे करने का सरकार का कथित कदम है। छात्र नेताओं ने सरकार पर बातचीत में शामिल होने के बजाय &quot;दमनकारी दृष्टिकोण&quot; अपनाने का आरोप लगाया है, जिससे युवाओं में नाराजगी बढ़ रही है। स्कूल और कॉलेज समूहों के नेतृत्व में कई प्रदर्शनों के साथ, हजारों छात्र देश भर में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हैं।एक आकर्षक दृश्य में, बड़ी संख्या में छात्रों को स्कूल की वर्दी में विरोध प्रदर्शन करते हुए, तख्तियां लिए हुए और सरकार के फैसलों के खिलाफ नारे लगाते हुए देखा गया है - यह दर्शाता है कि आंदोलन राजनीतिक दायरे से परे व्यापक समाज में फैल गया है। इसे भी पढ़ें: Uttarakhand Chardham Yatra 2026 | केदारनाथ के कपाट खुले, मार्गों, पंजीकरण, हेलीकाप्टर बुकिंग और नए नियमों के बारे में सब कुछगृह मंत्री के इस्तीफे की मांग बढ़ रही हैविरोध प्रदर्शन गृह मंत्री सूडान गुरुंग के खिलाफ आरोपों पर भी केंद्रित है, जो आय से अधिक संपत्ति रखने और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में शामिल होने के आरोपों का सामना कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी समूहों का दावा है कि गुरुंग संदिग्ध व्यापारिक लेनदेन में शामिल थे, जिसमें वित्तीय अपराधों में आरोपी व्यक्तियों के साथ कथित संबंध भी शामिल थे। नेपाल में मीडिया रिपोर्टों में विवादास्पद संस्थाओं से जुड़े निवेश और शेयरधारिता का सुझाव देने वाले दस्तावेजों का हवाला दिया गया है, जिससे नैतिक आधार पर उनके इस्तीफे की मांग और तेज हो गई है। राजनीतिक दलों और नागरिक समाज समूहों ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन जारी रखा है, जिससे यह चल रही अशांति का एक प्रमुख केंद्र बिंदु बन गया है।बालेन शाह सरकार दबाव मेंविरोध प्रदर्शन के पैमाने और तीव्रता में वृद्धि के साथ, बालेन शाह सरकार को कई मोर्चों पर प्रतिक्रिया देने के लिए बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है: आर्थिक नीति संबंधी चिंताएँ, छात्र अशांति, और इसके रैंकों के भीतर अनुचितता के आरोप।नीतिगत निर्णयों पर असंतोष के रूप में जो शुरू हुआ वह अब एक व्यापक राजनीतिक चुनौती में बदल गया है, सड़कों पर और नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में विरोध की आवाज़ें तेज़ हो रही हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:17 +0530</pubDate>
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<title>China से जा रहे ईरानी जहाज पर टूट पड़ा अमेरिका, अंदर जो मिला...उड़े ट्रंप के होश!</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने ईरान का जहाज पकड़ा। लेकिन उसमें क्या मिला? बता दें कि इस वक्त वाशिंगटन से लेकर बीजिंग तक काफी हलचल मचा दी है। ओमान की खाड़ी में पकड़े गए इस जहाज ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या समुद्र के रास्ते चुपचाप एक बड़ा खेल खेला जा रहा था?  यह खेल ईरान और चीन मिलकर खेल रहे थे। दरअसल 19 अप्रैल ओमान की खाड़ी ईरानी झंडे वाला कंटेनर जहाज जिसका नाम टोस्का बताया जा रहा है यह अपने रास्ते पर था और जैसे ही यह जहाज चबाहार पोर्ट के पास पहुंचता है अमेरिकी सेना पूरी तरह से एक्टिव हो जाती है। यूएस सेंट्रल कमांड का यह दावा है कि लगातार 6 घंटे तक इस जहाज को चेतावनी दी गई। लेकिन जहाज ने ना कोई जवाब दिया ना ही कोई रिएक्शन। फिर उसके बाद अमेरिकी कमांडोज़ ने जहाज को अपने कब्जे में पूरी तरीके से ले लिया। इसे भी पढ़ें: Asim Munir और Donald Trump के बीच कुछ बड़ा पक रहा है? अमेरिका ने मानी पाकिस्तान की बात, ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ालेकिन असली कहानी तब शुरू हुई जब शुरुआती जांच में जहाज के अंदर से सामान का खुलासा हुआ। इस जहाज में बता दें कि ड्यूल यूज़ समान हो सकता है। ड्यूल यूज़ यानी कि ऐसी चीजें जो आम जिंदगी में भी काम आए और युद्ध में भी इस्तेमाल हो। जैसे कि बता दें कि मेटल बाइक, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, माइक्रो चिप्स जो बता दें कि मोबाइल में भी लगती है और मोबाइल इससे ही बनता है और मिसाइल भी। अब यहां से कहानी और भी ज्यादा दिलचस्प हो जाती है। डाटा के मुताबिक यह जहाज चीन के ताई चांग और पोर्ट से चला और फिर उसके बाद मलेशिया के पोर्ट क्लांग पर यह रुका और फिर उसके बाद ओमान की खाड़ी तक इस तरीके से यह पहुंचता है। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि इस जहाज में ऐसे कंपोनेंट्स हो सकते हैं जो ईरान के मिसाइल प्रोग्राम से जुड़े हो। लेकिन यहां पर एक चीज को ध्यान रखें कि इसकी अभी तक कोई भी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। यह सभी अभी कयास है, दावे हैं। इसे भी पढ़ें: Iran के पास चंद घंटों का समय, Donald Trump की चेतावनी- &#039;समझौता करें या बमबारी के लिए तैयार रहें&#039;अमेरिका का यह कहना है कि यह जहाज पहले से ही प्रतिबंधित था और आईआरआईएसएल से जुड़ा हुआ है। वहीं ईरान का यह आरोप है कि यह सीधी समुद्री डकैती है और अंतरराष्ट्रीय कानून का यह उल्लंघन भी है। अब इस मामले में बता दें कि चीन ने भी चिंता जताई है। यानी अब ये सिर्फ अमेरिका बनाम ईरान की लड़ाई नहीं बल्कि एक बड़ा जिओपॉलिटिकल गेम बनता हुआ नजर आ रहा है। एक जहाज जिसमें ड्यूल यूज़ समान है और तीन बड़े देश जो हैं वो आमने-सामने टकरा रहे हैं। क्या यह सिर्फ एक सुरक्षा कारवाई थी या फिर एक बड़े नेटवर्क की झलक सामान को लेकर सामने आई। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:16 +0530</pubDate>
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<title>भारत&#45;रूस ने तोड़ डाले दोस्ती के सारे रिकॉर्ड, मॉस्को ने डबल की तेल की सप्लाई</title>
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<description><![CDATA[ भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर इस वक्त एक बड़ी कहानी सामने आ रही है और इस कहानी के केंद्र में है भारत और रूस की मजबूत होती हुई दोस्ती और साझेदारी। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ हार्मोंस के लगभग ठप हो जाने से वैश्विक तेल सप्लाई बुरी तरीके से प्रभावित हुई है और इसका सीधा असर भारत पर भी देखने को मिला है। जहां मार्च महीने में कच्चे तेल का आयात करीब 13% तक गिर गया है। यह गिरावट मुख्य तौर पर ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई रुकने की वजह से आई है। लेकिन इस संकट की स्थिति में भी भारत और रूस ने एक बार फिर से दिखा दिया कि इन दोनों देशों की दोस्ती इतनी गहरी क्यों है और एक बार फिर देखने को मिला जहां भारत ने रूस से भारी मात्रा में तेल को आयात किया है।इसे भी पढ़ें: भारत को पृथ्वी की सबसे जादुई जगह ले गया रूस, दुनिया में हड़कंप दरअसल हॉर्मोज स्ट्रेट से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है। लेकिन युद्ध जैसे हालात के चलते यह रास्ता लगभग बंद हो गया है। कई टैंकर रास्ते में ही फंस गए हैं और कुछ पर हमलों की खबरें भी सामने आ रही हैं। जिससे भारत जैसे बड़े आयातक देश पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे संकट के समय में भारत की मदद के लिए रशिया सामने आया है और एक बड़ा सहारा बनकर तेल सप्लाई जारी की है। मार्च के महीने में रूस से भारत का तेल आयात लगभग दोगुना होकर 22.5 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया है। जो कि भारत के कुल आयात का लगभग आधा हिस्सा है। यानी कि भारत ने मार्च में जो भी तेल आयात किया है उसका आधा हिस्सा सिर्फ रूस से लिया है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। उसके लिए यह बढ़ती सप्लाई बेहद अहम है। मार्च महीने में कुल आयात करीब 45 लाख बैरल प्रतिदिन का रहा और इसमें रूस की साझेदारी सबसे ज्यादा थी। इन सबके बीच भारत की मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई में भारी गिरावट देखने को मिली है। यूनाइटेड अरब एमिरेट्स यानी यूएई और इराक जैसे देशों से भारत के तेल आयात कई सालों के निचले स्तर पर पहुंच गया है और कुल आयात में मिडिल ईस्ट की हिस्सेदारी भी घटकर सिर्फ 26.3% रह गई है। इसे भी पढ़ें: दो भाई, दोनों तबाही...क्या है भारत-रूस का RELOS समझौता? चीन-पाक और US की हेकड़ी निकलीआपको बता दें कि एक दिलचस्प बात यह भी है कि अमेरिका ने भी इस स्थिति में एक अहम भूमिका निभाई है। जहां अमेरिका ने वैश्विक तेल कीमतों को काबू में रखने के लिए रूसी तेल पर लगाए गए प्रतिबंध को हटा दिया था और रूस से तेल खरीदने पर छूट दी थी। तो भारत ने भी इस छूट का पूरा फायदा उठाते हुए रूस से दबाकर तेल खरीदा है और भारत ने समुद्र में उपलब्ध रूसी तेल को बढ़ाकर खरीदा जिसकी वजह से भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में आसानी हुई। मिडिल ईस्ट से सप्लाई कम होने के कारण भारत ने कुछ अफ्रीकी देश जैसे कि अंगोला से भी तेल आयात को बढ़ाया है। लेकिन इसके बावजूद रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बनकर सामने आया है। कुल मिलाकर यह स्थिति एक साफ संकेत देती है कि वैश्विक संकट के समय भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग और भी ज्यादा मजबूत हो गया है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:15 +0530</pubDate>
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<title>China ने ईरान को भेजा था गिफ्ट, ट्रंप बोले&#45; हमने पकड़ लिया, ड्रैगन ने किया इनकार</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने  चीन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चीन, ईरान को हथियार या अन्य घातक सैन्य सामग्री उपलब्ध करा सकता है। ट्रंप के अनुसार, यदि ऐसा होता है तो यह अमेरिका की उस चेतावनी को चुनौती होगी, जिसमें युद्ध के दौरान तेहरान की मदद को “रेड लाइन” बताया गया है। सीएनबीसी को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने एक नाव पकड़ी है, जिसमें चीन की ओर से भेजा गया एक “गिफ्ट” मिला। उन्होंने संकेत दिया कि यह कथित तौर पर ईरान के लिए किसी प्रकार की घातक सैन्य सहायता हो सकती है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट रूप से इसकी पुष्टि नहीं की। हालांकि, ट्रंप ने इस रहस्यमयी “गिफ्ट” की प्रकृति को लेकर कोई ठोस जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कथित तौर पर भेजी गई सामग्री वास्तव में क्या थी, लेकिन उनके बयान ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।इसे भी पढ़ें: Iran-US Ceasefire | राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के अनुरोध पर युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ायामाना जा रहा है कि यह घटनाक्रम हाल ही में उस समय सामने आया, जब अमेरिका द्वारा लगाए गए समुद्री प्रतिबंध (ब्लॉकेड) के तहत जहाजों की कड़ी निगरानी की जा रही है। इस पहल की शुरुआत ट्रंप प्रशासन ने की थी, जिसका उद्देश्य अहम जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की जांच कर यह सुनिश्चित करना है कि वे ईरान के लिए या वहां से किसी प्रकार का सामान न ले जा रहे हों। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी कमांडो ने इस क्षेत्र में कई प्रतिबंधित जहाजों पर चढ़कर तलाशी अभियान चलाया है। इनमें एक कार्रवाई रात के दौरान भी की गई, जहां संदिग्ध गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए जहाज की गहन जांच की गई। यह आरोप ट्रंप की उस पिछली चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर चीन ने पिछले हफ़्ते हुए संघर्ष के दौरान ईरान को हवाई रक्षा प्रणालियाँ मुहैया कराईं, तो उसे काफ़ी परेशानी उठानी पड़ सकती है। इसे भी पढ़ें: China से जा रहे ईरानी जहाज पर टूट पड़ा अमेरिका, अंदर जो मिला...उड़े ट्रंप के होश!शी और ट्रंप मई में मिलेंगेशी और ट्रंप की मई के मध्य में बीजिंग में मुलाक़ात तय है। इस दौरे की योजना पहले अप्रैल की शुरुआत के लिए बनाई गई थी, लेकिन ईरान संघर्ष के दौरान ट्रंप के अमेरिका में ही रहने की इच्छा के कारण इसे टाल दिया गया। जैसे-जैसे यह संघर्ष अपने दूसरे महीने में पहुँच रहा है, यह अभी भी अनिश्चित है कि 14-15 मई को बीजिंग में ट्रंप के दौरे से पहले कोई समाधान निकल पाएगा या नहीं। शुरुआत में, ट्रंप ने अनुमान लगाया था कि यह युद्ध छह हफ़्तों के भीतर समाप्त हो जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:14 +0530</pubDate>
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<title>भारत को गाली देने वाली मुस्लिम MP को संसद से ऐसे उठाकर फेंका, चौंक गए सभी</title>
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<description><![CDATA[ भारत को गाली देकर हंसने वाली पाकिस्तानी मूल की ब्रिटिश सांसद को धक्के मारकर पार्लियामेंट से भगा दिया गया। पाकिस्तानी मूल की यह महिला सांसद ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को ही क्लीन चिट दे चुकी है। यह अपनी दुकान चलाने के लिए एजेंडा चलाती है कि कश्मीर में मुस्लिमों पर अत्याचार हो रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि कश्मीर से असल में भगाया तो हिंदुओं को गया था। आज भी सेना की सुरक्षा में ही हिंदुओं को अमरनाथ यात्रा पर जाना पड़ता है और इस महिला जैसे सांसद दुनिया में एजेंडा चलाते हैं कि कश्मीर में मुस्लिम दुखी हैं। भारत में जब किसान आंदोलन करवाया गया था तब इसी ब्रिटिश सांसद ने जमकर ज़हर फैलाया था। लेकिन कर्मों का फल इसी जन्म में मिलता है। इसे भी सरेआम डांट खानी पड़ी। इसे धक्के मारकर पार्लियामेंट से निकाल दिया गया। पाकिस्तानी मूल की इस ब्रिटिश सांसद का नाम जराह सुल्ताना है। इसने ब्रिटेन की संसद में खड़े होकर प्रधानमंत्री कीर स्टारमर को झूठा व्यक्ति बोल दिया जिसके बाद संसद के स्पीकर को इतना गुस्सा आ गया कि उन्होंने ज़राह सुल्ताना को डांटते हुए संसद से भगा दिया और उसके बाद सस्पेंड भी कर दिया। इसे भी पढ़ें: China से जा रहे ईरानी जहाज पर टूट पड़ा अमेरिका, अंदर जो मिला...उड़े ट्रंप के होश!कीर स्टारमर ने संसद में कुछ वादा किया था लेकिन उसे पूरा नहीं किया। इसी वजह से जोश में आते हुए इसने कीर स्टारमर को झूठा कह दिया। वैसे तो आजकल ब्रिटेन में मुस्लिमों को पुचकार कर रखा जाता है क्योंकि मुस्लिम अब ब्रिटेन में एक बड़ा वोट बैंक बन चुके हैं। लेकिन जब बात प्रधानमंत्री पद का अपमान करने की आई तो ब्रिटेन की संसद इसे झेल नहीं पाई। वरना आप ही सोचिए कि ब्रिटेन तो वो देश है जहां मुस्लिम वोटर्स नाराज ना हो जाए। उसका ध्यान रखने के लिए हजारों ब्रिटिश बच्चियों से यौन शोषण करने वाले पाकिस्तानियों को आज तक सजा नहीं दी गई है। इसे भी पढ़ें: China ने ईरान को भेजा था गिफ्ट, ट्रंप बोले- हमने पकड़ लिया, ड्रैगन ने किया इनकारलेकिन जब बात प्रधानमंत्री पर आई तो मुस्लिम सांसद को उसकी हैसियत दिखा दी गई। अब आप इसे भारत के संदर्भ में देखिए। भारत में भी मुस्लिमों को एक वोट बैंक समझा जाता है। लेकिन इससे भी हैरान करने वाली बात यह है कि भारत में नेता हो, कट्टरपंथी हो या कोई वामपंथी।  यह रोजाना पीएम मोदी को कोसते हैं। पीएम मोदी को गालियां देते हैं। धमकी देते हैं कि एक बार मोदी को जाने दो उसके बाद तुम्हें बताएंगे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:46:13 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन: तनाव व टकराव में चिन्ताजनक तेज़ी, &amp;apos;कूटनैतिक मोर्चे पर प्रगति नहीं&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ राजनैतिक एवं शान्तिनिर्माण मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आगाह किया है कि यूक्रेन में रूसी सैन्य बलों के हमले तेज़ होते जा रहे हैं, हताहत होने वाले आम नागरिकों की संख्या बढ़ रही है और देश भर में तबाही हो रही है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:45:35 +0530</pubDate>
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<title>एशिया&#45;प्रशान्त: मध्य पूर्व टकराव और बढ़ती क़ीमतों से अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध, एशिया-प्रशान्त की अर्थव्यवस्था पर नया दबाव बढ़ा रहा है. इस संकट से ऐसे समय में ऊर्जा एवं वस्तु बाज़ार, व्यापार मार्ग और क्षेत्रीय सम्पर्क प्रभावित हो रहे हैं, जब दुनिया पहले से ही भारी अनिश्चितता के दौर से गुज़र रही है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:45:30 +0530</pubDate>
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<title>मध्य पूर्व संकट: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में उथलपुथल, होर्मुज़ जलमार्ग पर असुरक्षा</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने आगाह किया है कि मध्य पूर्व में हिंसक टकराव की वजह से वर्तमान पीढ़ी के लिए अब तक का सबसे गम्भीर ऊर्जा संकट उपजा है और विश्व भर में ईंधन की आपूर्ति में उथलपुथल मची हुई है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:45:27 +0530</pubDate>
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<title>मध्य पूर्व संकट: खाद्य क़ीमतों में वृद्धि से बढ़ता दबाव, तेल आपूर्ति पर भीषण असर</title>
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<description><![CDATA[ विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में व्याप्त संकट का दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा की स्थिति पर गहरा असर हो रहा है, कृषि उत्पादन, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला में चुनौतियाँ उपजी हैं और आयात पर निर्भर देश इससे सर्वाधिक प्रभावित हो रहे हैं.  ]]></description>
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<title>3000 सैनिक,5 युद्धपोत,10 विमान...भारत&#45;रूस की मिलिट्री डील के बाद यूक्रेन का बड़ा ऐलान</title>
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<description><![CDATA[ जैसे यूक्रेन ने देखा कि रूस और भारत के बीच रीलॉस समझौता हो गया, वैसे ही यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलस्की ने खुद एक्स पर पोस्ट लिखा और ऐलान कर दिया कि हम भारत के साथ सुरक्षा सहयोग का समझौता अंतिम रूप दे रहे हैं। बहुत बड़ा स्टेटमेंट है और उन्होंने कहा कि दस्तावेज तैयार हो रहे हैं और यह ऐलान ठीक उसी दिन हुआ जब 18 अप्रैल को रूस ने भारत के साथ रीलॉस समझौते के पूरे दस्तावेज अपने ऑफिशियल पोर्टल पर जारी कर दिए। यानी रीलॉस लागू होते ही 3000 सैनिक, पांच युद्धपोत और 10 लड़ाकू विमान तैनात करने की अनुमति मिलते ही यूक्रेन घबरा गया और भारत को रिझाने की कोशिश में लग गया। रूस से जारी जंग में फंसे हुए यूक्रेन को अचानक समझ में आ गया है कि अगर रूस की मार से उन्हें कोई बचा सकता है तो वो है भारत और इसीलिए जेलस्की साहब भारत को रिझाने में लग चुके हैं। तो आज भारत तक के खास शो मित्र देश में हम बात करेंगे चर्चा करेंगे कि भारत की ताकत की जिसे देखकर यूक्रेन खुद डील करने का ऐलान कर चुका है और यह सब रूस भी देखकर हैरान होगा कि भारत ने आखिरकार एक तीर से दो निशाने कैसे मारे। तो चलिए हम विस्तार से समझते हैं कि रिलॉस समझौते के दस्तावेज जारी होते ही जेलस्की ने भारत के साथ सुरक्षा समझौते का ऐलान क्यों कर दिया।इसे भी पढ़ें: यूरोप को यूक्रेन की मदद करना पड़ा भारी, रूस ने मचा दी तबाही!यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलस्की ने कहा कि हम अगले सप्ताह अपने साझेदारों के साथ सुरक्षा सहयोग के बारे में बड़ा ऐलान बड़ी घोषणाएं करने वाले हैं। हवाई सुरक्षा और सेना को सपोर्ट हमारी टॉप प्रायोरिटी है और हां भारत के साथ हमारा सुरक्षा सहयोग का समझौता पहले से ही है। हम उसे फाइनल करने जा रहे हैं ताकि दस्तावेज तैयार हो जाए। बता दें कि रूस ने 18 तारीख को रिलॉस के कागजात पब्लिक कर दिए।  19 तारीख को जलस्की ने भारत का नाम ले लिया और यह संयोग नहीं है दोस्तों यह घबराहट है यूक्रेन की। यूक्रेन को लग रहा है कि भारत अब रूस के साथ इतना गहरा हो चुका है कि शायद भारत कुछ बोल दे या मध्यस्था कर दे तो रूस रुक जाए। अब रुस्तम उमेरो जो यूक्रेन के नेशनल सिक्योरिटी के सेक्रेटरी हैं। 17 अप्रैल को दिल्ली आते हैं। अजीत डोबाल और एस जयशंकर से मुलाकात करते हैं। मुलाकात में डोबाल साहब ने साफ कह दिया कि भारत शांति चाहता है।इसे भी पढ़ें: 6 यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी, जेलस्की के बेहद करीबी अचानक NSA डोभाल से मिलने पहुंचेबातचीत से समाधान चाहता है। वहीं उमेरोव ने भी कहा कि स्थाई शांति के लिए समाधान ढूंढने पर उनकी सहमति है। लेकिन जेलस्की ने ऐलान कर दिया इसी बीच कि समझौता फाइनल हो रहा है भारत के साथ। दोस्तों, यह दिखाता है, बताता है कि यूक्रेन रूस की मार खा कर थक चुका है। जंग चौथे साल में पहुंच गई है। पश्चिमी मदद रुक चुकी है। हथियार कम पड़ रहे हैं। ऐसे में भारत को रिझाना पड़ा है अब यूक्रेन को। रूस यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद इनमें नई गतिशीलता देखने को मिली। अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूक्रेनी यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच एक संयुक्त बयान जारी हुआ था। हमने भारत पर आपको दिखाया भी था। जिसमें द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया था और अब जेलस्की की घोषणा उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 09:37:41 +0530</pubDate>
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<title>उधर बुरा भिड़े अमेरिका&#45;ईरान, इधर मलक्का में खेल गया भारत!</title>
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<description><![CDATA[ एक तरफ ईरान और अमेरिका के युद्धपोत आमने-सामने है तो दूसरी तरफ पूरी दुनिया की नजर उस पतली सी समुद्री गली पर टिकी है जिसे स्टेट ऑफ हॉर्मोज कहा जाता है। यही वो जगह है जहां से दुनिया का करीब 20 से 30% तेल गुजरता है। अगर यहां एक चिंगारी भी भड़की तो असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी ग्लोबल इकॉनमी हिल जाएगी। लेकिन इस पूरे संकट के बीच एक और देश है जिसकी ताकत चुपचाप दुनिया को चौंका रही है और वो देश है भारत। जी हां, बहुत से लोग सोच रहे हैं कि जंग जमीन पर लड़ी जाती है। लेकिन सच्चाई यह है कि आज की जंग चोक पॉइंट्स पर लड़ी जाती है। स्टेट ऑफ फॉर्म सिर्फ 33 किमी चौड़ा है। लेकिन इसकी अहमियत इतनी बड़ी है कि यहां खड़ा छोटा सा देश भी सुपर पावर को रोक सकता है। ईरान ने यही किया। छोटी स्पीड बोट्स, एंटीशिप मिसाइल और माइंस का ऐसा जाल बिछाया कि दुनिया की सबसे ताकतवर नेवी भी सोचने पर मजबूर हो गई। इसे भी पढ़ें: America में H-1B वीज़ा का बड़ा &#039;Ghost Jobs&#039; स्कैम, तेलुगू जोड़ी को होगी 5 साल की जेलयहीं से दुनिया को एक बड़ा सबक मिला कि समंदर में ताकत जहाजों की संख्या से नहीं लोकेशन और रणनीति से तय होती है। अब इस पूरे सीन को हिंद महासागर के मैप पर रखकर देखिए। भारत के पास एक ऐसा ट्रंप कार्ड है जो शायद किसी देश के पास नहीं है और उस ट्रंप कार्ड का नाम है अंडमान और निकोबार द्वीप समूह। यह द्वीप सीधे दुनिया के सबसे अहम चौक पॉइंट्स में से एक है। मलक्का जलडमरू मध्य के पास स्थित है। यही वो रास्ता है जहां से चीन का ज्यादातर तेल और व्यापार गुजरता है। अगर भारत यहां अपनी पकड़ मजबूत कर ले तो चीन की सप्लाई लाइन पर सीधा असर पड़ सकता है। इसे ही रणनीतिक भाषा में कहा जाता है मलक्क का डायलेमा। पहले भारत की रणनीति सिर्फ अपनी सीमाओं की रक्षा तक सीमित थी। लेकिन अब गेम बदल चुका है। आज भारतीय नौसेना के पास आईएएस विक्रांत आईएस विक्रमादित्य हैं। ये सिर्फ जहाज नहीं चलते फिरते एयरबेस हैं। इन पर तैनात लड़ाकू विमान और मिसाइल सिस्टम समंदर के बीच से ही दुश्मन पर हमला कर सकते हैं। अगर भारतीय ताकत की बात हो और ब्रह्मोस मिसाइल का जिक्र ना किया जाए ऐसा हो ही नहीं सकता है। इसे भी पढ़ें: America-Iran Talks से Pakistan को नई पहचान, कांग्रेस बोली- PM Modi की कूटनीति पूरी तरह फेलयह दुनिया की सबसे तेज एंटीशिप क्रूज मिसाइलों में से एक है। इसकी स्पीड और सटीकता दुश्मन को संभलने का मौका नहीं देती है। अब इसका एयर लॉन्च और हाइपरसोनिक वर्जन आने से भारत की ताकत और बढ़ गई है। मतलब साफ है दुश्मन का जहाज 500 किमी दूर भी सुरक्षित नहीं रहेगा। समंदर की असली जंग सतह पर नहीं गहराई में होती है। भारत की सबसे बड़ी ताकत है अरिहंत क्लास सबमरीन। महीनों तक पानी के नीचे रह सकती है। दुश्मन के लिए लगभग अदृश्य है।न्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम है। यह भारत को देती है सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी। यानी अगर कोई हमला करे तो जवाब और भी खतरनाक होगा। अगर पाकिस्तान की बात की जाए तो उसका पूरा व्यापार दो पोर्ट्स पर टिका है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 09:37:39 +0530</pubDate>
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<title>3500 KM से खरगोश नाम का आतंकी दबोचा लाया भारत, हिली दुनिया!</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में अज्ञात हमलावर ने हाल ही में अमीर हमजा नाम के एक आतंकी को गोलियों से भून दिया था। इसी बीच भारत 3500 किमी दूर छिप कर बैठे एक पाकिस्तानी आतंकी को दबोच लाया है। इस आतंकी का कोड नेम खरगोश है क्योंकि यह आतंकी कश्मीर में अपने मददगारों की वजह से घनी आबादी में भी छुपकर आराम से रह रहा था। जिस तरह से खरगोश अपने बिल में रहते हैं। यह आतंकी बहुत तेजी से जगह बदलकर सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से भी बच निकलता था इसीलिए इसे खरगोश कोड नेम दिया गया था। लेकिन आखिरकार भारत ने इस खतरनाक आतंकी को एक मुस्लिम देश में जाकर दबोच लिया है। इसे भी पढ़ें: उधर बुरा भिड़े अमेरिका-ईरान, इधर मलक्का में खेल गया भारत!आपको बता दें कि इस आतंकी को सऊदी अरब में पकड़ा गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस आतंकी की गिरफ्तारी की खबर ऐसे समय पर सार्वजनिक की गई है जिस वक्त भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोवाल खुद सऊदी अरब में थे। खरगोश कोड नेम वाले इस पाकिस्तानी आतंकी का नाम उमेर हारिस है। यह पीओके के खैबर पख्तूनख्वा का रहने वाला है और लश्कर तैबा का आतंकी है। सालों पहले यह बॉर्डर पार करके कश्मीर में दाखिल हुआ था। उसके बाद यह कश्मीर के बांदीपुरा और श्रीनगर जैसे इलाकों में रहा। इसने कश्मीर के एक ओवर ग्राउंड वर्कर की बेटी से शादी की। यह शादी जयपुर में की गई थी। आपको बता दें कि ओवर ग्राउंड वर्कर का मतलब वो गद्दार है जो समाज में एक आम नागरिक की तरह रहता है लेकिन रात के अंधेरे में पाकिस्तान के लिए काम करता है। पाकिस्तानी आतंकियों को खानापानी हथियार और इंफॉर्मेशन पहुंचाता है। बहरहाल उमेर हारिस पर जब कश्मीर में शिकंजा कसना शुरू हुआ तो यह किसी तरह इंडोनेशिया भागने में सफल रहा। इसने इंडोनेशिया जाने के बाद भारत का एक जाली पासपोर्ट बनवाया। खुद को राजस्थान का नागरिक बताकर सऊदी अरब में फेक भारतीय पहचान से रहने लगा।इसे भी पढ़ें: America-Iran Talks से Pakistan को नई पहचान, कांग्रेस बोली- PM Modi की कूटनीति पूरी तरह फेल लेकिन हाल ही में सुरक्षा बलों ने कश्मीर में एक एलईटी के नेटवर्क का भांडा फोड़ किया। इस ऑपरेशन में दो पाकिस्तानी आतंकियों समेत तीन कश्मीरी भी पकड़े गए थे। यह कश्मीरी आतंकवादियों को मदद पहुंचाते थे। जिन दो पाकिस्तानी आतंकियों को पकड़ा गया था, उनमें से एक तो 16 साल से फरार चल रहा था। बहरहाल इसी ऑपरेशन के दौरान भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को खरगोश उर्फ़ उमेर हारिस की लोकेशन का पता चल गया। इसके बाद सऊदी अरब से संपर्क किया गया।सऊदी अरब ने भी तुरंत भारत के इनपुट्स पर काम करते हुए उमेर हारिस को पकड़ लिया। इस खबर की जानकारी तब सार्वजनिक की गई जब एनएसए अजीत डोबाल खुद सऊदी अरब पहुंचे। यहां दिलचस्प बात यह है कि सऊदी अरब ने यह जानते हुए कि उमेर हारिस एक पाकिस्तानी है। इसके बावजूद इसको पकड़ लिया।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 09:37:38 +0530</pubDate>
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<title>Iran का America को दोटूक जवाब, कहा&#45; बार&#45;बार बदलती शर्तों पर नहीं होगी Peace Talks</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व से एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां ईरान ने अमेरिका के साथ होने वाली शांति वार्ता के अगले दौर में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता नजर आ रहा है।बता दें कि ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने कहा है कि फिलहाल किसी भी नई वार्ता की कोई योजना नहीं है। मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान ने इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया है कि वह लगातार अपनी शर्तें बदल रहा है और बातचीत के दौरान विरोधाभासी रुख अपना रहा है। साथ ही, ईरान ने समुद्री नाकेबंदी और हाल के समुद्री घटनाक्रमों को भी बातचीत में बाधा बताया है।गौरतलब है कि ईरान का कहना है कि मौजूदा हालात में बातचीत का माहौल सकारात्मक नहीं कहा जा सकता और फिलहाल किसी ठोस नतीजे की उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है। वहीं, इस्लामाबाद में संभावित वार्ता को लेकर सामने आई खबरों को भी ईरान ने खारिज करते हुए इसे एक तरह का दबाव बनाने की कोशिश बताया है।मौजूद जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेजा अमीरी मोघदम ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ अमेरिका नाकेबंदी जारी रखता है और दूसरी तरफ बातचीत की बात करता है, जो सही नहीं है। उनका कहना है कि जब तक समुद्री नाकेबंदी खत्म नहीं होती, तब तक मतभेद बने रहेंगे।बता दें कि यह पूरा विवाद होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। ईरान का आरोप है कि उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी सामूहिक सजा के समान है।गौरतलब है कि हाल ही में एक और घटना ने तनाव को और बढ़ा दिया, जब खबर आई कि एक अमेरिकी युद्धपोत ने ईरानी झंडे वाले एक मालवाहक जहाज को रोककर नुकसान पहुंचाया। अमेरिका का दावा है कि यह जहाज पहले से प्रतिबंधों के दायरे में था, जबकि ईरान ने इस कार्रवाई को सशस्त्र लूट बताते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने भी साफ कर दिया है कि फिलहाल आगे की किसी वार्ता में शामिल होने की योजना नहीं है। वहीं अन्य मीडिया रिपोर्टों में भी कहा गया है कि जब तक ईरान पर लगे प्रतिबंध नहीं हटाए जाते, तब तक बातचीत का माहौल तैयार नहीं हो पाएगा।इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है, ऐसे में यहां तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों में तेजी आ गई है।ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका असर न सिर्फ क्षेत्रीय शांति पर पड़ेगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और संवेदनशील हो सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 09:37:37 +0530</pubDate>
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<title>Germany Gurdwara Clash | गुरुद्वारे के भीतर खूनी संघर्ष! कृपाण, बंदूक और पेपर स्प्रे से हमला, 11 लोग हुए लहूलुहान | VIDEO</title>
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<description><![CDATA[ जर्मनी के डुइसबर्ग (Duisburg) शहर से एक विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक गुरुद्वारे के भीतर सिख श्रद्धालुओं के दो गुट आपस में भिड़ गए। यह हिंसक झड़प इतनी भीषण थी कि इसमें पारंपरिक कृपाणों और चाकुओं के साथ-साथ बंदूक और पेपर स्प्रे का भी इस्तेमाल किया गया। इस खूनी संघर्ष में कम से कम 11 लोग घायल हुए हैं। इस घटना के वीडियो क्लिप ऑनलाइन सामने आए हैं, जिनमें दो समूहों के सदस्य एक-दूसरे पर हमला करते हुए दिखाई दे रहे हैं; बताया जा रहा है कि यह सब पूजा स्थल के अंदर हुआ। फुटेज में परेशान करने वाले दृश्य हैं, जिनमें लोग झड़प के दौरान चाकू और कृपाण जैसे धारदार हथियारों का इस्तेमाल करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसे भी पढ़ें:  शादी समारोह में जहरीला खाना! 400 से ज्यादा मेहमान बीमार, गुजरात सरकार ने दिए जांच के आदेशअसल में क्या हुआ?&#039;बिल्ड&#039; (Bild) अखबार के अनुसार, इस कहासुनी में लगभग 40 लोग शामिल थे, जिसके बाद पुलिस ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की और विशेष सामरिक इकाइयों (special tactical units) को भी तैनात किया।प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धारदार हथियारों के अलावा, धार्मिक परिसर के अंदर पेपर स्प्रे और यहाँ तक कि एक बंदूक का भी इस्तेमाल किया गया।पुलिस की जाँच में झड़प का संबंध चुनावों की आपसी रंजिश से जुड़ाहिंसा का असली कारण अभी भी जाँच के दायरे में है। हालाँकि, पुलिस की शुरुआती जाँच से पता चलता है कि यह विवाद नए बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स के चुनाव से जुड़ा हो सकता है। यह भी माना जा रहा है कि इस विवाद में गुरुद्वारे के फंड को लेकर भी असहमति शामिल है, जिस पर कई समूह अपना-अपना कब्ज़ा जमाना चाहते हैं। इसे भी पढ़ें: स्पेशल फोर्सेज के प्रशिक्षण के दौरान शहीद हुए फरीदाबाद के लाल मोहित कुमार, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कारसोमवार को इस घटना को अपनी आँखों से देखने वाले श्रद्धालुओं में से एक 56 वर्षीय व्यक्ति ने &#039;बिल्ड&#039; को बताया, &quot;यह ज़रूर पहले से सोचा-समझा (planned) हमला रहा होगा। सेवा शुरू होने से कुछ ही देर पहले, हमलावरों ने अचानक अपने विरोधियों पर पेपर स्प्रे का इस्तेमाल कर दिया। फिर उनमें से एक ने पिस्तौल से गोली चला दी। मैंने चाकू भी देखे।&quot;प्रत्यक्षदर्शी ने आगे बताया कि बोर्ड के पूर्व और मौजूदा सदस्यों के बीच तनाव काफी समय से बढ़ रहा था, जिसका मुख्य कारण मंदिर के भीतर फंड और अधिकार पर कब्ज़े की होड़ थी। &quot;जब हमला शुरू हुआ, तो कई लोग घबराकर इधर-उधर भागने लगे; हालात इससे भी कहीं ज़्यादा बुरे हो सकते थे। शुक्र है कि किसी की जान को कोई खतरा नहीं है।&quot;रिपोर्ट के अनुसार, इस झड़प में 11 लोग घायल हुए, जिनका मौके पर ही पैरामेडिक्स और एक आपातकालीन चिकित्सक द्वारा इलाज किया गया। पुलिस ने कम से कम एक संदिग्ध को हिरासत में ले लिया है और उसे गश्ती गाड़ी (patrol car) में बिठाया है; वहीं, जाँचकर्ता अब घटनाक्रम को समझने और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों की पहचान करने में जुटे हुए हैं। इस घटना में इस्तेमाल की गई बंदूक अभी तक बरामद नहीं हुई है, लेकिन मौके पर मिले कारतूस के खोखों (shell casings) से यह संकेत मिलता है कि शायद यह एक &#039;ब्लैंक फायरिंग पिस्तौल&#039; (बिना गोली वाली पिस्तौल) रही होगी।Scenes from Gurdwara in Duisburg, Germany: Sikhs fighting inside, turbans in the air, kirpans turned on each other. it started over Golak and The previous management, who lost the election, came forcefully for takeover the administration. pic.twitter.com/k6tz2rI4Aj— Harpreet Official (@harpeetsubh) April 20, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 09:37:36 +0530</pubDate>
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<title>&amp;apos;ईरान युद्ध में निर्णायक जीत&amp;apos;, Donald Trump का दावा&#45; सीजफायर की डेडलाइन से पहले अमेरिका को मिली बड़ी बढ़त</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच सोमवार को एक बड़ा बयान देकर वैश्विक हलचल तेज कर दी है। ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध अब अपने निर्णायक मोड़ पर है और अमेरिका इसमें &quot;बहुत आगे&quot; निकल चुका है। उन्होंने सैन्य अभियानों की सफलता को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि परिणाम पूरी तरह से वॉशिंगटन के पक्ष में झुक चुके हैं। कई पोस्ट की एक सीरीज़ में, ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने &quot;ज़बरदस्त&quot; प्रदर्शन किया है और संकेत दिया कि संघर्ष का नतीजा पहले से ही निर्णायक रूप से अमेरिका के पक्ष में झुक रहा है। इसे भी पढ़ें: Iran का America को दोटूक जवाब, कहा- बार-बार बदलती शर्तों पर नहीं होगी Peace Talksअपनी जीत के दावों के साथ-साथ, ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स जैसे कि द न्यूयॉर्क टाइम्स, द वॉल स्ट्रीट जर्नल और द वॉशिंगटन पोस्ट पर भी निशाना साधा। उन्होंने उन पर युद्ध की एक गुमराह करने वाली तस्वीर पेश करने का आरोप लगाया। ट्रंप के अनुसार, उनकी रिपोर्टों से ऐसा लगता है जैसे अमेरिका संघर्ष कर रहा है, जो उनके अनुसार सच्चाई से कोसों दूर है। उन्होंने कहा &quot;अगर आप खबरें पढ़ेंगे, तो आपको लगेगा कि हम हार रहे हैं, और यह भी जोड़ा कि इस तरह की कवरेज से केवल भ्रम ही पैदा होता है।उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना &quot;पूरी तरह से खत्म&quot; हो चुकी है और उसकी हवाई क्षमताएं बुरी तरह से कमज़ोर हो गई हैं। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका द्वारा लगाई गई मौजूदा नाकेबंदी ईरान पर गंभीर आर्थिक दबाव डाल रही है, और आरोप लगाया कि इससे उसे प्रतिदिन लगभग $500 मिलियन का नुकसान हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Jaypee Associates Case में नया मोड़, Vedanta पर Bid की जानकारी लीक करने का संगीन आरोपसमझौते की कोई जल्दी नहींलगातार तनाव और सीज़फ़ायर की डेडलाइन करीब आने के बावजूद, ट्रंप ने कहा कि तेहरान के साथ किसी समझौते पर पहुंचने का उन पर कोई दबाव नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी समझौता &quot;काफी जल्दी&quot; हो जाएगा, लेकिन केवल उन्हीं शर्तों पर जो अमेरिका के लिए फायदेमंद हों।उन्होंने यह भी कहा कि जिस नए समझौते पर चर्चा हो रही है, वह 2015 में हस्ताक्षरित &#039;ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ़ एक्शन&#039; से बेहतर होगा। ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं पर संघर्ष के दौरान अमेरिका की स्थिति को कमज़ोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, राजनीतिक विरोधी अपने निजी स्वार्थों के लिए सैन्य सफलता को कम करके आंक रहे हैं।सीज़फ़ायर की डेडलाइन करीब, बातचीत अनिश्चितहालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं, क्योंकि दो हफ़्ते का सीज़फ़ायर जल्द ही खत्म होने वाला है। ट्रंप ने संकेत दिया कि इस बात की &quot;बहुत कम संभावना है&quot; कि इस सीज़फ़ायर को आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही, उम्मीद है कि अमेरिका इस्लामाबाद में होने वाली आगामी चर्चाओं में हिस्सा लेगा, हालांकि यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि ईरान इसमें शामिल होगा या नहीं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 09:37:36 +0530</pubDate>
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<title>सूडान: युद्ध के जारी विनाश में, तीन&#45;चौथाई महिलाएँ असुरक्षित</title>
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<description><![CDATA[ सूडान में तीन वर्ष से जारी भीषण युद्ध के दौरान महिलाएँ और लड़कियाँ लगातार ख़तरे और लैंगिक हिंसा के जोखिमों का सामना कर रही हैं. उनके लिए सभी स्थान एक जैसे हैं, चाहे वे हिंसा व अस्थिरता से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रही हों या विस्थापन शिविरों में पहुँच रही हों, सबको जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 09:37:17 +0530</pubDate>
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<title>UNESCAP: सभी आयु वर्गों के लिए समावेशी समाजों पर मन्थन</title>
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<description><![CDATA[ एशिया और प्रशान्त के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (UNESCAP) का 82वाँ सत्र सोमवार को बैंकॉक में आरम्भ हुआ है. इसमें शिरकत करने के लिए पहुँचे वैश्विक और क्षेत्रीय नेताओं ने ऐसे समावेशी समाजों के विस्तार पर ज़ोर दिया है जिनमें कोई भी व्यक्ति पीछे नहीं रह जाए. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 09:37:14 +0530</pubDate>
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<title>ग़ाज़ा: युद्ध ने मानव विकास को धकेला 77 वर्ष पीछे, उबरने के लिए 71 अरब डॉलर की ज़रूरत</title>
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<description><![CDATA[ ग़ाज़ा में इसराइली सैन्य बलों और हमास के बीच हिंसक टकराव से बड़े पैमाने पर तबाही हुई और एक विकराल मानवीय संकट उपजा. संयुक्त राष्ट्र, योरोपीय संघ और विश्व बैंक ने अपने एक नए आकलन में आगाह किया है कि युद्ध ने ग़ाज़ा में मानव विकास को 77 वर्ष पीछे धकेल दिया है और यहाँ अगले एक दशक के दौरान पुनर्बहाली और पुनर्निर्माण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लगभग 71 अरब डॉलर की आवश्यकता होगी. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 09:37:11 +0530</pubDate>
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<title>मध्य पूर्व संकट: खाद्य क़ीमतों में वृद्धि से बढ़ता दबाव, तेल आपूर्ति में उथलपुथल</title>
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<description><![CDATA[ विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में व्याप्त संकट का दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा की स्थिति पर गहरा असर हो रहा है, कृषि उत्पादन, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला में चुनौतियाँ उपजी हैं और आयात पर निर्भर देश इससे सर्वाधिक प्रभावित हो रहे हैं.  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 09:37:10 +0530</pubDate>
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<media:keywords>मध्य, पूर्व, संकट:, खाद्य, क़ीमतों, में, वृद्धि, से, बढ़ता, दबाव, तेल, आपूर्ति, में, उथलपुथल</media:keywords>
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<title>Lebanon में IDF सैनिक की हरकत पर भड़के PM Netanyahu, बोले&#45; दोषी को मिलेगी सख्त सज़ा</title>
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<description><![CDATA[ इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को उस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की, जिसमें दक्षिणी लेबनान में आईडीएफ के एक सैनिक पर कथित तौर पर एक कैथोलिक प्रतिमा को &quot;नुकसान पहुंचाने&quot; का आरोप लगा था। एक्स पर एक पोस्ट में नेतन्याहू ने कहा कि एक यहूदी राष्ट्र के तौर पर, इजरायल यहूदियों और सभी धर्मों के अनुयायियों के बीच सहिष्णुता और आपसी सम्मान के यहूदी मूल्यों को संजोता है और उनका पालन करता है। हमारी धरती पर सभी धर्म फलते-फूलते हैं और हम अपने समाज और क्षेत्र के निर्माण में सभी धर्मों के लोगों को समान मानते हैं। उन्होंने आगे भरोसा दिलाया कि सैन्य अधिकारी दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Hamas को ट्रेनिंग दे रहा पाकिस्तान? अब इजरायल करेगा तगड़ा इलाजकल, ज़्यादातर इज़रायलियों की तरह, मैं भी यह जानकर हैरान और दुखी था कि IDF के एक सैनिक ने दक्षिणी लेबनान में एक कैथोलिक धार्मिक मूर्ति को नुकसान पहुँचाया। मैं इस हरकत की कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ। सैन्य अधिकारी इस मामले की आपराधिक जाँच कर रहे हैं और दोषी के खिलाफ उचित रूप से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे। नेतन्याहू ने आगे दावा किया कि, मध्य पूर्व के अन्य देशों के विपरीत, इज़रायल ही एकमात्र ऐसी जगह है जो सभी के लिए पूजा की आज़ादी&quot; का पालन करता है।इसे भी पढ़ें: दोस्त Trump ने कतर दिये Netanyahu के पर, Lebanon पर बमबारी नहीं कर पाएँगे इजराइली विमान, दुनिया हैरानसीरिया और लेबनान में मुसलमानों द्वारा ईसाइयों का नरसंहार किया जा रहा है, वहीं मध्य पूर्व के अन्य हिस्सों के विपरीत, इज़राइल में ईसाई आबादी फल-फूल रही है। इज़राइल इस क्षेत्र का एकमात्र देश है जहाँ ईसाई आबादी और जीवन स्तर में वृद्धि हो रही है। इज़राइल मध्य पूर्व का एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ सभी को पूजा की स्वतंत्रता प्राप्त है। हम इस घटना और लेबनान तथा दुनिया भर के विश्वासियों को हुई किसी भी प्रकार की पीड़ा के लिए खेद व्यक्त करते हैं। इज़राइली विदेश मामलों के मंत्री गिदोन सार ने सोमवार को दक्षिणी लेबनान में एक घटना की कड़ी निंदा की, जिसमें कथित तौर पर आईडीएफ सैनिक द्वारा एक &quot;ईसाई धार्मिक प्रतीक&quot; को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था, और इस कृत्य को &quot;गंभीर और शर्मनाक&quot; बताया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:32:04 +0530</pubDate>
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<title>Nepal के PM Balen Shah का बड़ा एक्शन, University Campus से Political Unions को हटाने का दिया फरमान</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के कुलपतियों को निर्देश दिया है कि वे पार्टी से जुड़े संघों को तुरंत हटा दें। प्रधानमंत्री ने सोमवार को अपने कार्यालय में कुलपतियों के साथ हुई एक बैठक के दौरान यह निर्देश दिया, और उन्हें आदेश दिया कि वे परिसरों से पार्टी से जुड़े छात्र और कर्मचारी संघों को हटाने के फैसले को तुरंत लागू करें। तीन घंटे तक चली इस लंबी बैठक में, प्रधानमंत्री ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी परिस्थिति में राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनके कार्यालय के अनुसार, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से पार्टी से जुड़ी संरचनाओं को हटाने में कोई भी कानून बाधा नहीं बनेगा।इसे भी पढ़ें: नेपाली पीएम का नया खेल, भारत से 100 रुपए से ज्यादा खर्च तो देना होगा टैक्सइस बात पर ज़ोर देते हुए कि अस्पताल, परिसर और स्कूल &quot;पवित्र स्थान&quot; हैं, शाह ने कहा कि ऐसी जगहों पर किसी भी राजनीतिक दल के झंडे, प्रभाव या संगठनात्मक ढांचे की अनुमति नहीं होगी। शाह ने यह भी सुझाव दिया कि जो लोग राजनीति में रुचि रखते हैं, उन्हें अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों से हट जाना चाहिए और पूरी तरह से राजनीति में शामिल होना चाहिए। चर्चा के दौरान, नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. धनेश्वर नेपाल ने कहा कि छात्र संगठनों को खत्म करने के प्रयासों के कारण धमकियाँ और हमले हुए हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। प्रधानमंत्री शाह ने कुलपतियों को निर्देश दिया कि यदि राजनीतिक ढांचों को हटाने के दौरान कोई सुरक्षा संबंधी समस्या आती है, तो वे तुरंत संबंधित मंत्रालय या प्रधानमंत्री सचिवालय को सूचित करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार सुरक्षा समन्वय सहित सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, और कहा कि पुलिस प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करेगा। शाह ने कुलपतियों से यह भी आग्रह किया कि वे पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करें।इसे भी पढ़ें: भारत और नेपाल ने की द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा, बालेन शाह के पदभार संभालने के बाद पहली मुलाकातप्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालयों को आगे निर्देश दिया कि वे शैक्षणिक कैलेंडर का सख्ती से पालन करें और परीक्षा परिणाम एक महीने के भीतर प्रकाशित करें।इसी तरह, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री सस्मित पोखरेल ने कहा कि मंत्रालय ने राजनीतिक दलों से जुड़े ढांचों को समाप्त करने के निर्देश पहले ही जारी कर दिए हैं, और मौजूदा कानून इनके कार्यान्वयन में कोई बाधा नहीं डालते हैं।बैठक के दौरान, त्रिभुवन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. दीपक आर्यल ने कहा कि &quot;Gen-Z&quot; आंदोलन और हालिया चुनावों के बाद छात्र और कर्मचारी संगठन धीरे-धीरे निष्क्रिय हो गए हैं। मिड-वेस्ट यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. डॉ. ध्रुव कुमार गौतम, पूर्वांचल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. डॉ. बीजू कुमार थापलिया और सुदूरपश्चिम यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. डॉ. हेमराज पंत ने कहा कि कुछ घटक परिसरों में राजनीतिक तनाव अभी भी बना हुआ है। हालांकि, अन्य विश्वविद्यालयों और अकादमियों के कुलपतियों ने कहा कि उनके संस्थानों में राजनीतिक गतिविधियां बहुत कम हैं, और उन्होंने विश्वास जताया कि अधिक सख्त प्रशासन शैक्षणिक क्षेत्र में राजनीतिक प्रभाव को खत्म करने में मदद कर सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:32:00 +0530</pubDate>
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<title>Strategic Mission: NSA Ajit Doval की सऊदी अरब यात्रा, पश्चिम एशिया के तनाव के बीच अहम मुलाकात</title>
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<description><![CDATA[ : भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल एक महत्वपूर्ण रणनीतिक दौरे पर रविवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद पहुंचे। डोभाल की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। सऊदी अरब में भारत के राजदूत सुहेल खान और सऊदी अरब के राजनीतिक मामलों के उप मंत्री सऊद अल-सती ने उनका स्वागत किया।
 डोभाल ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान, ऊर्जा मंत्री अब्दुलअजीज बिन सलमान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुसैद अल-ऐबान से मुलाकात की।इसे भी पढ़ें: North Korea Cluster Bomb Test | किम जोंग उन ने दागीं ऐसी मिसाइलें जो आसमान से बरसाएंगी तबाही! थर्राए अमेरिका और जापान!  भव्य स्वागत और उच्च स्तरीय वार्तारियाद पहुंचने पर सऊदी अरब में भारत के राजदूत सुहेल खान और सऊदी अरब के राजनीतिक मामलों के उप मंत्री सऊद अल-सती ने डोभाल का गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके तुरंत बाद, डोभाल ने सऊदी अरब के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठकों का सिलसिला शुरू किया।इसे भी पढ़ें: Middle East Tension | ओमान की खाड़ी में भारी तनाव: ईरानी जहाज पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद IRGC का ड्रोन हमला इन प्रमुख नेताओं से हुई मुलाकात:फैसल बिन फरहान: सऊदी अरब के विदेश मंत्री।अब्दुलअजीज बिन सलमान: ऊर्जा मंत्री (वैश्विक तेल आपूर्ति पर चर्चा हेतु महत्वपूर्ण)।मुसैद अल-ऐबान: सऊदी अरब के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार।चर्चा के मुख्य केंद्र बिंदुसऊदी अरब में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;X&#039; पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है।द्विपक्षीय संबंध: व्यापार, सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना।क्षेत्रीय स्थिति: ओमान की खाड़ी में जारी सैन्य हलचल और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर मंथन।ऊर्जा सुरक्षा: भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करना।
 सऊदी अरब में भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि इन बैठकों के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय स्थिति और परस्पर हित के अन्य मुद्दों पर चर्चा की।
 डोभाल की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में संभवत: दूसरे दौर की चर्चा होगी।
 पाकिस्तान में 11 और 12 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच हुई पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:23:19 +0530</pubDate>
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<title>Iran में &amp;apos;साइलेंट तख्तापलट&amp;apos;? कूटनीति पर IRGC का कब्जा, मोजतबा खामेनेई और अहमद वाहिदी बने नए पावर सेंटर</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के भीतर से आ रही खबरें दुनिया भर के रणनीतिकारों को चौंका रही हैं। &#039;द न्यूयॉर्क पोस्ट&#039; और &#039;इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर&#039; (ISW) की हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के कट्टरपंथी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने देश के सैन्य और कूटनीतिक तंत्र पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है। विश्लेषकों का मानना है कि सप्ताहांत में हुए इस बड़े बदलाव ने ईरान के नागरिक नेतृत्व और मध्यमपंथी हस्तियों को हाशिए पर धकेल दिया है। कहा जा रहा है कि यह बदलाव सप्ताहांत में हुआ, जिसमें IRGC कमांडर अहमद वाहिदी और उनके करीबी सहयोगियों ने इस्लामिक गणराज्य के भीतर एक प्रमुख नेतृत्व की भूमिका संभाल ली है। यह घटनाक्रम होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और अमेरिका के साथ नियोजित संघर्ष-विराम वार्ता को दरकिनार करने के तेहरान के कदम के बीच सामने आया है। इसे भी पढ़ें: बिहार में नई राजनीतिक पारी: नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद आज JDU विधायक दल की बैठक, नए नेता पर होगा फैसला मध्यमपंथी नेताओं को दरकिनार किया गयावाशिंगटन स्थित &#039;इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर&#039; ने बताया कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित अधिक मध्यमपंथी हस्तियों को दरकिनार कर दिया गया है। हालांकि अराघची ने ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत के बाद इस रणनीतिक जलमार्ग को फिर से खोलने की इच्छा जताई थी, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार IRGC ने उनके फ़ैसले को पलट दिया और ज़ोर देकर कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी दबाव के जवाब में इस जलडमरूमध्य को बंद ही रखा जाए।इसे भी पढ़ें: Basava Jayanti 2026 | प्रधानमंत्री मोदी ने जगद्गुरु बसवेश्वर को श्रद्धांजलि दी, जातिवाद के खिलाफ शंखनाद करने वाले महापुरुष की गौरव गाथा रिपोर्ट के अनुसार, वाहिदी को ईरान की &#039;सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल&#039; के सचिव मोहम्मद बाक़िर ज़ोलघाद्र का समर्थन मिल गया है, जिससे सैन्य और रणनीतिक अभियानों पर उनकी पकड़ और मज़बूत हो गई है। IRGC ने इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है, और हाल के संघर्षों में अपनी पारंपरिक नौसेना को हुए नुकसान के बाद अब वह तेज़ी से हमला करने वाले जहाज़ों (fast attack vessels) पर ज़्यादा निर्भर है।तनाव तब और बढ़ गया जब रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने जलडमरूमध्य से गुज़रने की कोशिश कर रहे कम से कम तीन जहाज़ों को निशाना बनाया, जिससे फ़ारसी खाड़ी में सैकड़ों जहाज़ फँस गए और नाकेबंदी और मज़बूत हो गई।ईरानी नेतृत्व में मतभेदज़ोलघाद्र का प्रभाव कूटनीतिक प्रयासों तक भी फैल गया है। उन्हें इस महीने की शुरुआत में ईरान की वार्ता टीम में शामिल किया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि टीम IRGC के निर्देशों और सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के अधिकार के अनुरूप काम करे।&#039;इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर&#039; ने प्रतिनिधिमंडल के भीतर आंतरिक मतभेदों का ज़िक्र करते हुए बताया कि ज़ोलघाद्र ने IRGC नेतृत्व से शिकायत की थी कि अराघची ने तथाकथित &#039;प्रतिरोध की धुरी&#039; (Axis of Resistance) के प्रति ईरान के समर्थन के मामले में लचीलापन दिखाकर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इसके परिणामस्वरूप वार्ता टीम को तेहरान वापस बुला लिया गया; इस कदम को हुसैन ताइब सहित कई हस्तियों का समर्थन प्राप्त था।रिपोर्ट से पता चलता है कि वाहिदी, मोजतबा खामेनेई के साथ मिलकर, अब ईरान में फ़ैसले लेने वाले प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे हैं, जिससे IRGC प्रभावी रूप से संसदीय नेता मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ जैसे नागरिक नेतृत्व वाली हस्तियों से ऊपर हो गया है। जानकारों का कहना है कि सत्ता में आया यह बदलाव पश्चिम के साथ बातचीत की संभावनाओं को काफी हद तक सीमित कर देता है, क्योंकि अराघची और ग़ालिबफ़ जैसे लोगों के पास नीति को प्रभावित करने का अधिकार नहीं है।ये घटनाक्रम वॉशिंगटन के उन दावों को भी चुनौती देते हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों के हालिया नुकसान के बाद ईरान के नेतृत्व का रवैया नरम पड़ गया है। नई बातचीत के लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा न होने के कारण, इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या यह नाज़ुक संघर्ष-विराम मौजूदा समय-सीमा के बाद भी कायम रह पाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:23:18 +0530</pubDate>
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<title>ईरान&#45;अमेरिका के बीच टूटा सीजफायर, होर्मुज को लेकर कुछ बड़ा हो सकता है?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ईरान के बीच दूसरी शांति वार्ता होने से पहले ही होर्मुज में बारूद बरसने लगा है। यूएस नेवी ने ईरानी कार्गो शिप को कब्जे में ले लिया जिसका ईरान ने भी विध्वंसक पलटवार किया है।  इसके बाद से होर्मुज पर टेंशन एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गई है। पाकिस्तान में होने वाली वार्ता में शामिल होने से ईरान ने साफ इंकार कर दिया है। उधर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि टॉस्का नामक जहाज हॉर्मोज स्टेट को पार करने की कोशिश कर रहा था। इसे अमेरिकी डिस्ट्रयर यूएसएस क्रोंस ने रोक दिया है और जहाज ने चेतावनी को नजरअंदाज किया था। इसके बाद अमेरिकी मरीन ने उसे रोका और इसके बाद मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से जंग के विध्वंसक होने के आसार हैं और सबसे बड़ा सवाल क्या सीजफायर की मियाद खत्म होने से पहले ही एक बार फिर से जंग भड़क चुकी है। बारूद बरस रहा है। इसी पर खास मेहमानों के साथ करेंगे चर्चा। इसे भी पढ़ें: US-Iran वार्ता से पहले Islamabad बना छावनी, Trump के दौरे की अटकलों पर 10,000 जवान तैनातफिलहाल बातचीत से समाधान के कोई आसार नहीं दिखाई दे रहे। अमेरिका का डेलीगेशन इस्लामाबाद के लिए उड़ान भरने वाला है। ट्रंप ईरान को धमका रहे हैं तो उधर ईरान झुकने को कतई तैयार नहीं है। ऐसे में बारूदी हमले का राउंड टू कभी भी शुरू हो सकता है। डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा डील करो नहीं तो फिर हमले होंगे। ईरान ने कहा शर्तें नहीं मानेंगे और ना ही इस्लामाबाद डेलीगेशन भेजेंगे। अमेरिका का रवैया ठीक नहीं। यानी साफ है की बात बनती नहीं दिखाई दे रही है। दूसरे दौर की शांति वार्ता खतरे में पड़ गई है और इसके लिए ईरान ने अमेरिका को ही जिम्मेदार ठहराया है। ईरान ने कहा अमेरिका की अत्याधिक मांगे बार-बार रुख बदलना और ट्रंप के विरोधाभासी बयान। इसे भी पढ़ें: अमेरिका के लिए जासूसी कर रहे हैं मुनीर? ईरान में एंट्री से मचा बड़ा बवालमिडिल ईस्ट में शांति नहीं ला सकते। इस बीच होर्मुज की इन तस्वीरों ने तनाव और बढ़ा दिया है। दूसरे राउंड की बातचीत से पहले अमेरिका ने ईरान के कारगोशिप पर फायरिंग की है। ट्रंप का दावा है कि ईरानी जहाज ने होर्मुज में अमेरिकी नेवी की वार्निंग को नजरअंदाज किया। नाकेबंदी को पार करने की कोशिश की। इसके बाद उसे बलपूक रोका गया और फिर उसे कब्जे में ले लिया गया और अब ईरानी जहाज अमेरिका के कब्जे में है। दोनों देशों के बीच तनाव को लेकर सिर्फ होर्मुज ही नहीं बल्कि कई अहम मुद्दे हैं जिन पर अभी तक बात नहीं बन पाई है। ट्रंप चाहते हैं कि ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को सौंप दे। लेकिन ईरान ऐसा करने को बिल्कुल तैयार नहीं है। यह ईरान के लिए पवित्र मिट्टी की तरह है। ट्रंप ने कहा ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम अनिश्चित काल के लिए रोकेगा। ईरान ने कहा हमारा परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए है और जारी रहेगा। ट्रंप ने कहा होर्मुज की नाकेबंदी जारी रहेगी तो ईरान ने कहा नाकेबंदी जारी रही तो दूसरे रास्ते बंद करेंगे। ईरान के परमाणु कार्यक्रम होम पर कंट्रोल और लेबनान में सीज फायर जैसे मुद्दों को लेकर पिछली शांति वार्ता विफल हो गई थी। अमेरिका फिर से इन्हीं मुद्दों पर दबाव बनाएगा। यह ईरान जानता है और इसीलिए ईरान ने इस बार इस्लामाबाद में अपना डेलीगेशन भेजने से इंकार कर दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:23:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>ईरान-अमेरिका, के, बीच, टूटा, सीजफायर, होर्मुज, को, लेकर, कुछ, बड़ा, हो, सकता, है</media:keywords>
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<title>भारत के जहाज पर फायरिंग के बाद ईरान ने चीन के जहाजों को रोका, बड़ा ऐलान!</title>
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<description><![CDATA[ क्या ईरान ने चीन को भी रोक दिया? एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने इंटरनेशनल शिपिंग और जियोपॉलिटिक्स में हलचल मचा दी है। चीनी नागरिकों के स्वामित्व और क्रू वाला जहाज लेकिन फिर भी होर्मुज स्टेट से गुजरने की इजाजत नहीं मिली। कैरियर सन प्रॉफिट जो पूरी तरह से चीनी स्वामित्व वाला था और जिसका क्रू भी चीनी नागरिकों से बना था उसे हॉर्मज स्टेट से गुजरने की इजाजत नहीं मिली। नतीजा इस जहाज को अचानक अपना रास्ता बदलना पड़ा और वापस लौटना पड़ा। ऐसे में सवाल उठता है कि इसमें इतना बड़ा क्या है? आम धारणा यह रही कि ईरान और चीन के बीच मजबूत रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते हैं और माना जाता था कि ईरान चीन के जहाजों को प्राथमिकता देता है लेकिन इस घटना ने उस धारणा को भी पूरी तरह से तोड़ दिया। ईरान का यह कदम बताता है कि होर्मुज स्टेट में फैसले पूरी तरह रणनीतिक और परिस्थितियों पर आधारित है। इसे भी पढ़ें: Iran में &#039;साइलेंट तख्तापलट&#039;? कूटनीति पर IRGC का कब्जा, मोजतबा खामेनेई और अहमद वाहिदी बने नए पावर सेंटरकिसी भी देश को ऑटोमेटिक छूट नहीं मिलती है और सुरक्षा हालात के हिसाब से ही जहाजों को अनुमति दी जाती है। अब सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह बयान भारत में स्थित ईरानी काउंसलेट से आया। यानी यह संदेश सीधे भारत और दुनिया को दिया गया कि ईरान किसी के साथ पक्षपात नहीं करता। ना भारत के साथ, ना चीन के साथ, ना किसी और के साथ। हाल के घटनाक्रम पर नजर डालें तो भारतीय जहाजों पर फायरिंग की खबरें आई। कुछ जहाजों को वापस लौटना पड़ा लेकिन कुछ भारतीय जहाजों ने सफलतापूर्वक रास्ता पार कर लिया। ऐसे में यह बयान एक तरह से डिप्लोमेटिक बैलेंस बनाने की कोशिश की जा रही है। अब बात करते हैं उस जहाज की यानी कि सन प्रॉफिट की। यह एक बल्क कैरियर है। यानी भारी मात्रा में सामान ले जाने वाला जहाज। इसके मालिक भी चीनी नागरिक थे और क्रू मेंबर भी। जब यह जहाज हॉर्म स्टेट के पास पहुंचा तो अचानक इसे आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। इसे भी पढ़ें: Middle East Tension | ओमान की खाड़ी में भारी तनाव: ईरानी जहाज पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद IRGC का ड्रोन हमलारिपोर्ट्स के मुताबिक स्थिति को देखते हुए जहाज को तुरंत रूट बदलना पड़ा और पीछे लौटना पड़ा। यह फैसला दिखाता है कि ईरान हर जहाज को अलग-अलग आधार पर आंक रहा है और सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं कर रहा है। इस पूरी घटना को समझने के लिए थोड़ा बड़ा परिपेक्ष देखना जरूरी है। हाल ही में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले हुए। इसके बाद ईरान ने होर्मुज स्टेट में कंट्रोल बढ़ा दिया। कई जगहों पर जहाजों को रोका गया था या फिर फायरिंग की गई जिसकी खबरें हमने आपको दिखाई भारत तक पर। ऐसे में ईरान अब महत्वपूर्ण जलमार्ग पर कड़ी निगरानी और चयनात्मक अनुमति की नीति अपना रहा है। यानी कि सेलेक्टिव एक्सेस और यही वजह है कि चाहे जहाज भारत का हो या चीन का हो हर किसी को समान रूप से जांचा जा रहा है। अब अगर हम भारत और चीन के जहाजों की स्थिति की तुलना करें तो एक दिलचस्प तस्वीर सामने आती है। कुछ भारतीय जहाजों ने जोखिम के बावजूद रास्ता पार किया जबकि एक चीनी जहाज को लौटना पड़ा। इससे साफ होता है। दिखता है कि ईरान का फैसला सिर्फ देश के आधार पर नहीं बल्कि तत्काल सुरक्षा स्थिति और ऑपरेशनल फैक्टर्स पर निर्भर करता है। कुल मिलाकर सन प्रॉफिट का वापस लौटना सिर्फ एक शिपिंग घटना नहीं यह एक बड़ा जिओपॉलिटिकल संकेत है। ईरान ने साफ कर दिया कि कोई भी देश विशेष नहीं है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:23:16 +0530</pubDate>
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<title>ईरान की गद्दारी, भारत आने वाले जहाज पर मारी गोली, फिर हुए बड़ा खेल!</title>
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<description><![CDATA[ एक तरफ ईरान ने पाकिस्तान के बंकर इन चीफ असीम मुनीर को गले लगाया तो दूसरी तरफ स्टेट ऑफ हॉर्मोस में दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग कर दी। इस घटना के बाद ईरान अब बयानबाजी कर रहा है कि यह सब कुछ कंफ्यूजन में हो गया।  बता दें कि जिस वक्त ईरान ने भारत आने वाले जहाज पर फायरिंग की, तो उस जहाज के कैप्टन ने ईरान को एक ऑडियो मैसेज भेजा। दरअसल, यह फायरिंग तब हुई जब ईरान ने अमेरिकी नाकाबंदी के जवाब में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा बंद करने का ऐलान कर दिया। जिस वक्त ईरान ने यह ऐलान किया, उस वक्त दो जहाज भारत की तरफ आ रहे थे। इन दोनों जहाजों को भारत आने की इजाजत भी थी, लेकिन इसके बावजूद ईरान के सैनिकों ने इन जहाजों पर गोली चला दी। इसे भी पढ़ें: भारत के जहाज पर फायरिंग के बाद ईरान ने चीन के जहाजों को रोका, बड़ा ऐलान!इन दोनों जहाजों को अपना रास्ता बदलने और पश्चिम की ओर वापस जाने के लिए मजबूर होना पड़ गया। आपको बता दें कि इन जहाजों में 20 लाख बैरल इराकी तेल लदा था। हैरानी की बात देखिए कि भारत सरकार दो बार ईरान के लोगों को भारी मात्रा में राहत सामग्री भेज चुकी है। लेकिन इसके बावजूद ईरान ने भारत की तरफ आने वाले जहाज पर गोली चलाई। ईरान की इस घटना के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने रात में ही ईरान के राजदूत को तलब कर लिया। उनसे पूछा गया कि ऐसी घटना क्यों की गई है? इसे भी पढ़ें: ईरान-अमेरिका के बीच टूटा सीजफायर, होर्मुज को लेकर कुछ बड़ा हो सकता है?बहरहाल, जहाज के कैप्टन ने ईरान के सैनिकों से कहा कि आपने मुझे जाने की मंजूरी दी थी।  लेकिन आप फिर भी मेरे जहाज पर गोलियां चला रहे हैं। ऐसा मत कीजिए। मुझे वापस जाने दीजिए। अब आप ही बताइए कि क्या ईरान ने भारत से गद्दारी नहीं की है? यह बात सही है कि ईरान और भारत के बीच सदियों पुराना रिश्ता रहा है। भारत और ईरान की सभ्यताओं के बीच भी रिश्ता जरूर रहा होगा। लेकिन जब से ईरान पर इस्लाम हावी हुआ उसके बाद से भारत और ईरान के बीच रिश्ते सिर्फ व्यापारिक ही रहे हैं। ऐसे में जब भी कोई लिबरल और वामपंथी ईरान की गलतियों पर पर्दा डालते हुए आपसे यह कहे कि हमारे ईरान से रिश्ते काफी पुराने हैं तो इमोशनल होने की बजाय आप उन वामपंथियों को यह बता दीजिएगा कि ईरान से रिश्ते जरूर रहे होंगे, लेकिन ईरान की गद्दारी हम नहीं झेलेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:23:15 +0530</pubDate>
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<title>Russia ने भारत में उतारे सैनिक और वॉरशिप! बड़ी तैयारी से चौंका US, दुश्मनों में खलबली</title>
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<description><![CDATA[ कहते हैं ताकतवर वही है जिससे दुश्मन दूर से ही सावधान रहे और आज भारत ने ऐसा ही एक कदम उठाया है जिसने दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है। भारत और रूस एक दूसरे की जमीन पर अपने हजारों सैनिक फाइटर जेट और वॉरशिप तैनात करने की तैयारी शुरू कर रहे हैं। क्या यह किसी बड़े युद्ध की तैयारी है या फिर एक ऐसा कदम जिसने दुनिया के कई देशों की नींद उड़ा दी है। दरअसल बता दें कि भारत और रूस के बीच रीलॉस यानी कि रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौता पूरी तरह से लागू हो चुका है। इसके तहत दोनों देश एक दूसरे के एयरबेस, नेवल बेस और सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल कर सकते हैं और वह भी पूरी ऑपरेशनल क्लेरिटी के साथ। इस डील की सबसे बड़ी ताकत इसकी क्षमता है। अब दोनों देश एक साथ 3000 सैनिक, 10 मिलिट्री एयरक्राफ्ट और पांच वॉरशिप्स एक दूसरे के क्षेत्र में तैनात कर सकते हैं। लेकिन असली खेल सिर्फ तैनाती नहीं है बल्कि उस तैनाती को मिलने वाला पूरा सपोर्ट है। यानी कि रिफ्यूलिंग, रिपेयर, मेंटेनेंस, मेडिकल और ट्रांसपोर्ट यानी पूरी युद्ध मशीन को कहीं भी चलाने की ताकत। इसे भी पढ़ें: Putin से पहले भारत आ सकते हैं Ukraine के राष्ट्रपति, Zelensky के करीबी ने दिल्ली में Jaishankar और Doval से की मुलाकातअब भारत की सेना सिर्फ अपने क्षेत्र तक सीमित नहीं बल्कि जरूरत पड़ने पर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तेजी से ऑपरेट कर सकती है। अब अब आप यह समझिए कि यह डील इतनी जरूरी क्यों थी? पहली वजह बदलती दुनिया। आज दुनिया एक नए पावर गेम में है। जहां हर देश अपने सप्लाई रूट्स और मिलिट्री रीच को सुरक्षित कर रहा है। दूसरी वजह चीन का बढ़ता असर। चीन लगातार एशिया और इंडोपेसिफिक में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। ऐसे में भारत के लिए अपनी मौजूदगी बढ़ाना जरूरी था। तीसरी वजह रूस की रणनीति। पश्चिमी दबाव के बीच रूस को ऐसे पार्टनर की जरूरत थी जिस पर भरोसा किया जा सके और भारत इस समीकरण में सबसे मजबूत विकल्प बनकर सामने आया। और इन सबके बीच भारत ने जो रास्ता चुना है वह सबसे अलग है ना पूरी तरह किसी एक के साथ और ना किसी के खिलाफ बल्कि अपने हितों के हिसाब से हर बड़े देश के साथ संतुलन बनाकर चलना और इसे ही कहते हैं स्ट्रेटेजिक ऑटोनोमी और यही इस समझौते का सबसे बड़ा मैसेज भी है। अब आप यह समझिए कि इस डील से भारत को क्या-क्या मिला। पहला ग्लोबल रीच। इसे भी पढ़ें: 6 यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी, जेलस्की के बेहद करीबी अचानक NSA डोभाल से मिलने पहुंचेरूस के पास आर्कटिक से लेकर यूरोप तक फैले सैन्य बेस है और इस डील के बाद भारत को इन इलाकों में एक्सेस मिल सकता है। खासकर आर्कटिक जहां भविष्य के नए समुद्री रास्ते बन रहे हैं। यानी आने वाले समय में व्यापार और संसाधनों पर सीधा असर होगा। दूसरा लॉजिस्टिक मतलब रियल पावर। युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं बल्कि सप्लाई से भी जीता जाता है। अब भारत और रूस एक दूसरे को फ्यूल, रिपेयर बेस सपोर्ट दे सकेंगे। मतलब जहां जरूरत वहां ऑपरेशन आसान। तीसरा स्ट्रेटेजिक ऑटोनोमी जिसका पहले हमने जिक्र किया। यानी कि भारत ने अमेरिका के साथ एलई एमओए किया और अब रूस के साथ रिलोस। मतलब साफ है भारत किसी एक गुट में नहीं बल्कि हर बड़ी ताकत के साथ संतुलन बनाकर चल रहा है। अब आप यह समझिए कि दुश्मन देश इससे क्यों चिंतित है। सबसे बड़ा कारण भारत की बढ़ती पहुंच। भारत अब सिर्फ अपने इलाकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि यूरोप, आर्कटिक और एशिया में भी एक्टिव हो सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:23:14 +0530</pubDate>
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<title>हट जाओ वरना उड़ा देंगे... भारत के बाद अब चीनी जहाज को भी खदेड़ा</title>
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<description><![CDATA[ होर्मुज में भूचाल आ चुका है। जंग फिर से कभी भी छिड़ सकती है और अब खबर है कि आईआरजीसी इस वक्त फिर से बेकाबू होती जा रही है जो सिर्फ इमाम मुस्तबा खामिनेई के इशारे पर काम कर रही है। दरअसल भारतीय जहाज पर हमले के बाद अब एक और बड़ी खबर सामने आई है और वह यह है कि चीन के जहाज को भी आईआरजीसी ने होर्मुज पार करने से रोक दिया है। उसे साफ शब्दों में चेतावनी दी गई कि अगर तुरंत वो पीछे नहीं हटा तो निशाना बनाया जा सकता है। यानी अब हालत यह हो गई है कि जिस चीन को अब तक ईरान का सबसे बड़ा साझेदार माना जा रहा था उसके जहाज को भी बिना इजाजत हो होर्मुज गुजरने नहीं दिया गया। मुंबई स्थित ईरान के महावाणिज्य दूतावास की तरफ से खुद इस बात की पुष्टि की गई है कि सन प्रॉफिट नाम के चीनी जहाज को स्टेट ऑफ फोरमोस से वापस लौटना पड़ा। वजह साफ है। इसे भी पढ़ें: भारत के जहाज पर फायरिंग के बाद ईरान ने चीन के जहाजों को रोका, बड़ा ऐलान!आईआरजीसी ने क्लियर कर दिया है कि अब कोई भी जहाज बिना अलग-अलग मंजूरी के इस रास्ते से गुजर नहीं सकता। यानी ब्लैंकेट अप्रूवल जैसा कोई सिस्टम नहीं है। हर जहाज को अलग से क्लीयरेंस लेना होगा। इसका मतलब समझिए होर्मू अब जब पूरी तरह ईरान के कंट्रोल में है और वहां से गुजरना अब किसी भी देश के लिए आसान नहीं रह गया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हो पाती। इससे पहले भारत के दो जहाजों पर फायरिंग की खबर आई थी। जिसके बाद भारत सरकार हरकत में आ गई। दिल्ली में ईरान के राजदूत को तलब किया गया। विदेश सचिव ने सीधे तौर पर अपनी नाराजगी जताई और साफ कहा कि हुरमुस से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। भारत ने यह भी कहा कि व्यापारिक जहाजों पर हमला बेहद गंभीर मामला है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। हालांकि ईरान की तरफ से सिर्फ इतना कहा गया कि वो भारत की चिंता अपने अधिकारियों तक पहुंचाएगा। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर ईरान ऐसा कर क्यों रहा है? इसे भी पढ़ें:  ईरान की गद्दारी, भारत आने वाले जहाज पर मारी गोली, फिर हुए बड़ा खेल!दरअसल फरवरी के आखिर से ही ईरान ने होर्मुज पर सख्त नियंत्रण लागू कर रखा है। पहले कहा गया था कि चीन भारत पाकिस्तान समेत कुछ देशों को छूट दी जाएगी। लेकिन अब जो हालात बन रहे हैं उससे साफ है कि ईरान अपने ही नियम बदल रहा है और हर जहाज को केस बाय केस आधार पर देख रहा है। यानी आज दोस्त कल रूप ऐसी स्थिति बन चुकी है। ईरान का मानना है कि हर जहाज को अलग से क्लीयरेंस लेनी होगी क्योंकि ऐसे वक्त में दुश्मन बहुत ज्यादा चौकन्ना है और वो किसी तरीके की हरकत कर सकता है। शायद इसी वजह से वो हर जहाज को रोक रहे हैं और फिर अपने नियम के मुताबिक उन्हें जाने की एक-एक करके क्लीयरेंस दे रहे हैं। सबसे अहम बात यह है इजराइल लेबनान सीज फायर के बाद ईरान ने होरबूज खोलने का ऐलान किया था। लेकिन कुछ ही वक्त बाद उसने यू टर्न लेते हुए इसे फिर से उसी पुराने कंट्रोल मोड में ला दिया। इसके पीछे की वजह बताई गई डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगातार दी जा रही धमकियां। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:23:14 +0530</pubDate>
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<title>क्या Donald Trump को धोखा देंगे Asim Munir? PAK आर्मी चीफ के Iran&#45;IRGC लिंक ने बढ़ाई US की टेंशन</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, पहले ऐसे विदेशी नेता थे जिन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद ईरान का दौरा किया। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल संग अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजदीकियां तो किसी से छुपी नहीं है वहीं ईरान के सैन्य नेतृत्व के साथ भी उनके बेहद करीबी रिश्ते हैं। फॉक्स न्यूज़ डिजिटल के अनुसार, इसकी वजह यह है कि जब मुनीर 2016 और 2017 में पाकिस्तान के मिलिट्री इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जनरल के तौर पर काम कर रहे थे, तभी उन्होंने ईरान के साथ संबंध बनाने शुरू कर दिए थे। वह नेतृत्व के साथ बातचीत कर रहे हैं। रिटायर्ड पाकिस्तानी जनरल अहमद सईद ने चैनल को बताया वह खुफिया समुदाय के साथ बातचीत कर रहे हैं। वह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ बातचीत कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें:  ईरान की गद्दारी, भारत आने वाले जहाज पर मारी गोली, फिर हुए बड़ा खेल!सईद ने कहा कि आईआरजीसी के अलावा, मुनीर के ईरान की नियमित सेना और उनकी खुफिया एजेंसी के साथ भी संबंध हैं। उनके अनुसार, मुनीर की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कुद्स फोर्स के पूर्व कमांडर कासिम सुलेमानी—जो 2020 में एक अमेरिकी हमले में मारे गए थे—और कमांडर हुसैन सलामी जो 2025 में एक इजरायली हमले में मारे गए थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह आज भी एक ऐसी हस्ती बने हुए हैं, जिनके ईरान के खुफिया समुदाय, वहां की सैन्य व्यवस्था, राजनयिक समुदाय और साथ ही राजनीतिक नेतृत्व के साथ भी व्यक्तिगत संपर्क और निजी समीकरण मौजूद हैं। फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज़ के सीनियर फेलो बिल रोगियो ने चैनल को बताया कि ट्रंप को पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं करना चाहिए और मुनीर के IRGC से संबंध अमेरिका के लिए एक रेड फ्लैग हैं।इसे भी पढ़ें: ईरान-अमेरिका के बीच टूटा सीजफायर, होर्मुज को लेकर कुछ बड़ा हो सकता है?रोगियो ने दावा किया कि ट्रंप को पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। अफ़गानिस्तान में पाकिस्तान एक धोखेबाज़ &#039;सहयोगी&#039; था; वह हमारे दोस्त होने का दिखावा करते हुए तालिबान का साथ दे रहा था। मुनीर के IRGC से संबंधों को ट्रंप प्रशासन के लिए एक बहुत बड़ा &#039;रेड फ़्लैग&#039; (खतरे का संकेत) माना जाना चाहिए। पाकिस्तानी विश्लेषक रज़ा रूमी ने कहा कि मुनीर जैसे लोगों का उभार यह दिखाता है कि पाकिस्तान में सेना किस तरह नागरिक नेतृत्व पर &quot;लगातार हावी&quot; होती जा रही है। मुनीर ने शनिवार को ईरान का अपना तीन-दिवसीय दौरा पूरा किया, जिसका मकसद शांति समझौते को पक्का करना था। पाकिस्तानी सेना के एक बयान के अनुसार, तेहरान के अपने तीन-दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने ईरान के शीर्ष नेतृत्व और शांति वार्ताकारों से मुलाकात की। उन्होंने देश के राष्ट्रपति, विदेश मंत्री, संसद के स्पीकर और ईरान के सैन्य केंद्रीय कमान केंद्र के प्रमुख के साथ बातचीत की। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:23:13 +0530</pubDate>
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<title>Japan Earthquake: 7.5 तीव्रता के भूकंप से कांपी धरती, Tsunami Alert के बीच रोकी गईं Bullet Trains</title>
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<description><![CDATA[ सोमवार को जापान के उत्तर-पूर्वी तट पर 7.5 तीव्रता का एक ज़ोरदार भूकंप आया, जिसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई और यातायात सेवाएँ बाधित हो गईं; अधिकारियों ने निवासियों से तटीय इलाकों से दूर हटने की अपील की है।इसे भी पढ़ें: North Korea Cluster Bomb Test | किम जोंग उन ने दागीं ऐसी मिसाइलें जो आसमान से बरसाएंगी तबाही! थर्राए अमेरिका और जापान!जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, यह भूकंप प्रशांत महासागर में 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। एजेंसी ने यह भी बताया कि इवाते प्रांत के कुजी बंदरगाह पर लगभग 80 सेंटीमीटर (2.6 फीट) ऊँची सुनामी देखी गई, जबकि इसी प्रांत के एक अन्य बंदरगाह पर 40 सेंटीमीटर (1.3 फीट) ऊँची एक छोटी सुनामी दर्ज की गई। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने एक आपातकालीन कार्यबल के गठन की घोषणा की और प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों को वहां से हटने के आदेश जारी किए। ताकाइची ने टोक्यो स्थित अपने कार्यालय में पत्रकारों से कहा, संभावित नुकसान और हताहतों के बारे में अब जानकारी जुटाई जा रही है।इसे भी पढ़ें: North Korea Cluster Bomb Test | किम जोंग उन ने दागीं ऐसी मिसाइलें जो आसमान से बरसाएंगी तबाही! थर्राए अमेरिका और जापान!सुनामी अलर्ट, लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने का काम जारीसरकारी ब्रॉडकास्टर NHK के अनुसार, ओत्सुची और कामाईशी समेत कई बंदरगाह वाले शहरों ने हज़ारों निवासियों के लिए सुरक्षित जगहों पर जाने के आदेश जारी किए हैं। भूकंप की तीव्रता जापान के भूकंपीय तीव्रता पैमाने पर &#039;ऊपरी 5&#039; मापी गई – यह इतनी तेज़ थी कि लोगों का चलना-फिरना मुश्किल हो गया और बिना मज़बूती वाले कंक्रीट-ब्लॉक की दीवारें ढह गईं। NHK पर दिखाए गए फुटेज में होक्काइडो के हाचिनोहे बंदरगाह से जहाज़ों को लहरों के आने की आशंका में बाहर निकलते हुए दिखाया गया, जबकि स्क्रीन पर &#039;सुनामी! सुरक्षित जगह पर जाएं!&#039; का अलर्ट चमक रहा था। JMA के अनुसार, 3 मीटर ऊंची सुनामी निचले इलाकों को नुकसान पहुंचा सकती है, इमारतों में पानी भर सकती है, और जो कोई भी इसके संपर्क में आएगा, वह इसकी तेज़ धाराओं में फंस जाएगा। अधिकारियों ने निवासियों को तटीय इलाकों से दूर रहने की चेतावनी दी, क्योंकि लहरों के किनारे तक पहुंचने की उम्मीद थी।इसे भी पढ़ें: South Korea के राष्ट्रपति Lee का भारत दौरा, PM Modi संग AI-Semiconductor पर होगी मेगा डील!बुलेट ट्रेन सेवाएँ निलंबितक्योडो समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप के झटकों के बाद टोक्यो और आओमोरी के बीच बुलेट ट्रेन का संचालन रोक दिया गया। जापान के भूकंपीय तीव्रता पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता &quot;ऊपरी 5&quot; दर्ज की गई -- जो इतनी तेज़ थी कि इससे चलना-फिरना मुश्किल हो जाए और इमारतों को ढांचागत नुकसान पहुँच सकता है, जिसमें कमज़ोर कंक्रीट की दीवारों का ढहना भी शामिल है।बिजली कंपनियाँ अपनी सुविधाओं की जाँच कर रही हैंबिजली कंपनियों ने बताया कि वे भूकंप के प्रभाव का आकलन कर रही हैं। टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी और तोहोकू इलेक्ट्रिक पावर ने कहा कि उनकी विभिन्न सुविधाओं पर जाँच-पड़ताल चल रही है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:23:12 +0530</pubDate>
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<title>Hormuz में बढ़ा तनाव, Iran की IRGC की फायरिंग के बाद भारतीय जहाजों को सख्त हिदायत</title>
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<description><![CDATA[ 18 अप्रैल को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा दो भारतीय जहाजों पर की गई गोलीबारी की घटना के बाद, भारतीय नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास सुरक्षा घेरा और भी कड़ा कर दिया है। भारत ने फारस की खाड़ी में भारतीय ध्वज वाले जहाजों के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उनसे लारक द्वीप से दूर रहने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल तभी आगे बढ़ने को कहा गया है, जब उन्हें ऐसा करने का निर्देश दिया जाए। भारतीय नौसेना उन सभी भारतीय जहाज़ों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार करने का इंतज़ार कर रहे हैं। रॉयटर्स का हवाला देते हुए, भारत सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि 10 भारतीय जहाज़ों ने सुरक्षित रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार कर लिया है। आखिरी टैंकर, &#039;देश गरिमा&#039;, 18 अप्रैल को जलडमरूमध्य से गुज़रा ठीक उसी दिन, जब दो भारतीय जहाज़ों, &#039;जग अर्णव&#039; और &#039;सनमार हेराल्ड&#039; को, वहाँ से गुज़रने की कोशिश के दौरान IRGC द्वारा गोलीबारी किए जाने के बाद वापस लौटना पड़ा था।इसे भी पढ़ें: Germany दौरे पर जाएंगे Rajnath Singh, चीन की बढ़ेगी टेंशन! 99,000 करोड़ की Submarine Deal पर लगेगी मुहर?जलडमरूमध्य पार करने के बाद, देश गरिमा को अब अरब सागर में भारतीय नौसेना द्वारा सुरक्षा दी जा रही है और इसके 22 अप्रैल को मुंबई पहुँचने की उम्मीद है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने बताया कि भारतीय जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही के लिए सरकार ईरान और अन्य देशों के संपर्क में है। लारक द्वीप, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के सबसे संकरे बिंदु पर स्थित है और यहाँ ईरान के तेल से जुड़े बुनियादी ढाँचे का एक बड़ा हिस्सा मौजूद है। चूँकि यह ईरान के ऊर्जा क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसके आस-पास के जलक्षेत्र की कड़ी सुरक्षा की जाती है; साथ ही, होर्मुज़ से होने वाली आवाजाही पर बंकरों और रडार प्रणालियों के एक नेटवर्क के ज़रिए बारीकी से नज़र रखी जाती है। लारक द्वीप, होर्मुज़ द्वीप के दक्षिण में, लगभग 33 किलोमीटर चौड़ी होर्मुज़ जलसंधि में स्थित है। यह एक अहम &#039;चोकपॉइंट&#039; (तंग रास्ता) है, जिससे ईरान-अमेरिका संघर्ष से पहले दुनिया का लगभग 20% तेल गुज़रता था।इसे भी पढ़ें: Germany दौरे पर जाएंगे Rajnath Singh, चीन की बढ़ेगी टेंशन! 99,000 करोड़ की Submarine Deal पर लगेगी मुहर?रिपोर्टों के अनुसार, वहाँ ईरान के कई सैन्य अड्डे भी सक्रिय हैं, जो जहाज़ों को निशाना बनाने के लिए छोटी और तेज़ गति वाली नावें तैनात करने में सक्षम हैं। लारक द्वीप, होर्मुज़ द्वीप के दक्षिण में, लगभग 33 किलोमीटर चौड़ी होर्मुज़ जलसंधि में स्थित है। यह एक अहम &#039;चोकपॉइंट&#039; है, जिससे ईरान-अमेरिका संघर्ष से पहले दुनिया का लगभग 20% तेल गुज़रता था। फिलहाल, होर्मुज़ और लारक द्वीपों के बीच से गुज़रने वाले इस रास्ते को जहाज़ों की आवाजाही के लिए ज़्यादा सुरक्षित माना जा रहा है। युद्ध से पहले इस्तेमाल होने वाले, ओमान के तट के पास दक्षिण में स्थित रास्ते से फिलहाल बचा जा रहा है; रिपोर्टों के अनुसार, उस इलाके में बारूदी सुरंगों (माइन्स) से जुड़ा खतरा हो सकता है। अब जबकि भारतीय जहाज़ों को लारक द्वीप के करीब से न गुज़रने की सलाह दी गई है, ऐसे में होर्मुज़ जलसंधि से किसी भी भारतीय जहाज़ का गुज़रना तब तक अनिश्चित बना रहेगा, जब तक उसे भारतीय नौसेना से मंज़ूरी (क्लियरेंस) नहीं मिल जाती। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:23:11 +0530</pubDate>
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<title>India&#45;South Korea का बड़ा ऐलान, 2030 तक व्यापार दोगुना कर $50 Billion पहुंचाने का लक्ष्य</title>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के साथ एक संयुक्त प्रेस बयान में कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया संघर्षों और देशों के बीच बढ़ते तनाव से जूझ रही है, भारत और दक्षिण कोरिया शांति और स्थिरता का संदेश दे रहे हैं। यह बयान तब आया जब पीएम मोदी और राष्ट्रपति म्युंग ने नई दिल्ली में राष्ट्रपति के भारत दौरे के दौरान एक द्विपक्षीय बैठक की। पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक तनाव के इस दौर में, भारत और कोरिया मिलकर शांति और स्थिरता का संदेश देते हैं। हमें बहुत खुशी है कि आज, कोरिया &#039;अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन&#039; और &#039;हिंद-प्रशांत महासागर पहल&#039; में शामिल हो रहा है। अपने साझा प्रयासों के माध्यम से हम एक शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र की दिशा में योगदान देना जारी रखेंगे। उन्होंने आगे कहा कि नई दिल्ली और सियोल इस बात पर सहमत हुए हैं कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार आवश्यक हैं।इसे भी पढ़ें: होर्मुज की उथल-पुथल के बीच अचानक मोदी से मिले कोरियाई राष्ट्रपति, चीन की उल्टी गिनती शुरू?भारत-कोरिया डिजिटल ब्रिज की शुरुआतपीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच एक दशक तक चलने वाली परियोजना &quot;भारत-कोरिया डिजिटल ब्रिज&quot; की शुरुआत की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करना है। पीएम मोदी ने घोषणा की हम जहाज़ निर्माण, सस्टेनेबिलिटी, स्टील और बंदरगाहों जैसे क्षेत्रों में MoU पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों में सहयोग के माध्यम से, हम फ़िल्म, एनिमेशन और गेमिंग के क्षेत्र में भी नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे। आज का बिज़नेस फ़ोरम इन अवसरों को ठोस परिणामों में बदलने के लिए एक मंच के रूप में काम करेगा।इसे भी पढ़ें: South Korea के राष्ट्रपति Lee का भारत दौरा, PM Modi संग AI-Semiconductor पर होगी मेगा डील!व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक किया जाएगाप्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, राष्ट्रपति ली ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया इस बात पर सहमत हुए हैं कि वे 2030 तक अपने मौजूदा 25 अरब डॉलर के सालाना व्यापार को बढ़ाकर लगभग 50 अरब डॉलर तक ले जाएंगे। विकसित भारत के लक्ष्य के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने आपसी संबंधों को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा की और वैश्विक तथा क्षेत्रीय मामलों पर अपने विचार साझा किए। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने कहा कि भारत &#039;ग्लोबल साउथ&#039; में एक अग्रणी देश के रूप में उभरा है। आपके &#039;विकसित भारत 2047&#039; के विज़न के तहत, भारत उल्लेखनीय विकास कर रहा है। वहीं, रिपब्लिक ऑफ कोरिया भी चिप-निर्माण, सेमीकंडक्टर और सांस्कृतिक उद्योगों के क्षेत्र में एक अग्रणी देश के रूप में विकसित हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:23:10 +0530</pubDate>
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<media:keywords>India-South, Korea, का, बड़ा, ऐलान, 2030, तक, व्यापार, दोगुना, कर, 50, Billion, पहुंचाने, का, लक्ष्य</media:keywords>
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<title>America में H&#45;1B वीज़ा का बड़ा &amp;apos;Ghost Jobs&amp;apos; स्कैम, तेलुगू जोड़ी को होगी 5 साल की जेल</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी न्याय विभाग ने बताया कि अमेरिका में भारतीय मूल के दो तेलुगू पुरुषों ने H-1B वीज़ा धोखाधड़ी की साज़िश रचने का अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। कैलिफ़ोर्निया के डबलिन में रहने वाले संपत राजिडी और श्रीधर माडा (दोनों 51 वर्ष के) ने विदेशी नागरिकों को नौकरी पर रखा और उन्हें कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय में नौकरी दिलाने का वादा किया, लेकिन असल में विश्वविद्यालय को ऐसे किसी भी कर्मचारी की ज़रूरत नहीं थी। राजिडी और माडा, दोनों को पाँच साल की जेल और $250,000 का जुर्माना हो सकता है। अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेज़ों के अनुसार, संपत राजिडी दो वीज़ा-प्रोसेसिंग कंपनियाँ चलाते थे: S-Team Software Inc. और Uptrend Technologies LLC. S-Team और Uptrend के बिज़नेस मॉडल के तहत, राजिडी ने अलग-अलग कंपनियों में अस्थायी तौर पर काम करने के लिए विदेशी कर्मचारियों को लाने हेतु H-1B स्पेशलिटी ऑक्यूपेशन वर्कर वीज़ा के लिए आवेदन किया। श्रीधर माडा, कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के कृषि और प्राकृतिक संसाधन विभाग में मुख्य सूचना अधिकारी के तौर पर काम करते थे। माडा के पास केवल सुपरवाइज़री अधिकार थे, और उन्हें अपने विभाग के लिए H-1B कर्मचारियों को नियुक्त करने का कोई अधिकार नहीं था, जब तक कि वे वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों से सलाह न ले लें।इसे भी पढ़ें: US Vice-President JD Vance ने Pakistan से लौटने के बाद अपने ससुराल India के बारे में क्या बड़ी बात कह दीजून 2020 से जनवरी 2023 तक, इस जोड़ी ने कई लाभार्थियों के लिए धोखाधड़ी वाले H-1B वीज़ा आवेदन जमा करने की साज़िश रची। जमा किए गए आवेदनों में, राजिडी ने झूठा दावा किया कि लाभार्थियों को कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय में पदों पर नियुक्त किया जाएगा। माडा ने मुख्य सूचना अधिकारी के तौर पर अपने पद का इस्तेमाल किया और इस झूठे दावे को और मज़बूत किया कि लाभार्थियों को विश्वविद्यालय की परियोजनाओं पर काम पर लगाया जाएगा। तेलुगू जोड़ी ने H-1B नियमों का पालन करने वाली कंपनियों के मौकों को नुकसान पहुँचाया H-1B वीज़ा का आवंटन एक लॉटरी सिस्टम के ज़रिए होता है। राजिडी और माडा के झूठे संस्थागत दावों की वजह से उन्हें ऐसे अप्रूवल मिल गए, जो उनके उम्मीदवारों को अन्यथा कभी नहीं मिलते। इस कदम ने असल में उन प्रतिस्पर्धी कंपनियों के आवेदकों से जगह छीन ली, जो नियमों का पालन कर रहे थे। अदालत के दस्तावेज़ों के मुताबिक, इस जोड़ी को पता था कि याचिकाओं में जिन पदों का ज़िक्र किया गया था, वे असल में मौजूद ही नहीं थे।इसे भी पढ़ें: Russia ने भारत में उतारे सैनिक और वॉरशिप! बड़ी तैयारी से चौंका US, दुश्मनों में खलबलीअदालत के दस्तावेज में ये बात कही गई लाभार्थियों ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया में किसी प्रोजेक्ट पर काम नहीं किया, और इसके बजाय, प्रतिवादियों ने झूठे दावों के आधार पर H1-B वीज़ा हासिल करने के बाद, इन लाभार्थियों को दूसरे क्लाइंट्स को बेचने का काम शुरू कर दिया। उन्होंने जान-बूझकर झूठी जानकारी दी, क्योंकि उन्हें पता था कि वीज़ा देने के मामले में US Citizenship and Immigration Services (USCIS) के फ़ैसलों के लिए ऐसी जानकारी बहुत अहम होती है। उनकी साज़िश के नतीजे के तौर पर, राजिडी और माडा को दूसरी कंपनियों के मुकाबले गलत फ़ायदा मिला और उन्होंने प्रतिस्पर्धी कंपनियों के लिए उपलब्ध H-1B वीज़ा के कोटे को कम कर दिया।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:23:10 +0530</pubDate>
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<title>Fahmida Laghari की मौत पर Karachi में बवाल, &amp;apos;न्याय दो&amp;apos; की गूंज, Harassment का गंभीर आरोप</title>
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<description><![CDATA[ नागरिक समाज के समूह, छात्र, राजनीतिक कार्यकर्ता और फहमीदा लघारी के रिश्तेदार कराची प्रेस क्लब के बाहर जमा हुए। उन्होंने कराची के मीरपुरखास इलाके में एक युवा मेडिकल छात्रा की कथित आत्महत्या की जांच के तरीके पर गहरी चिंता जताई। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे एक पारदर्शी, निष्पक्ष और पूरी जांच करने में नाकाम रहे हैं, और साथ ही पीड़ित के परिवार द्वारा नामजद किए गए लोगों को गिरफ्तार करने में भी लापरवाही बरती है। डॉन के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने तत्काल कार्रवाई की मांग की। इसमें कथित दोषियों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई, तथा सभी शिक्षण संस्थानों में उत्पीड़न-रोधी (एंटी-हैरेसमेंट) समितियों की स्थापना शामिल थी। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) के उपाध्यक्ष काज़ी खिज़र ने पुष्टि की कि HRCP, औरत फाउंडेशन और छात्र समूहों के सदस्य लघारी के परिवार के अनुरोध पर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इस बीच, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के कार्यकर्ताओं ने भी, जिनमें कई महिलाएं शामिल थीं, उसी जगह पर एक अलग प्रदर्शन किया।इसे भी पढ़ें: Balochistan और Karachi में Pakistan Army का एक्शन, छात्रों समेत दर्जनों लोग जबरन &#039;गायब&#039;पीटीआई सिंध के अध्यक्ष हलीम आदिल शेख ने आरोप लगाया कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने प्रदर्शन के दौरान पार्टी की दो महिला कार्यकर्ताओं, हुस्ना बट और हुमा को हिरासत में ले लिया। उन्होंने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार के &quot;तानाशाही रवैये&quot; का संकेत बताया। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने इन आरोपों के संबंध में पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। खबरों के अनुसार, मेडिकल की तीसरे वर्ष की छात्रा फहमीदा लघारी ने अपने घर पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली; आरोप है कि कॉलेज में लंबे समय से हो रहे उत्पीड़न के कारण उसने यह कदम उठाया।इसे भी पढ़ें: Pakistan में Petrol Price Hike से हाहाकार, कफन ओढ़कर सड़कों पर लोग, बोले- जीना हुआ मुश्किलजैसा कि &#039;डॉन&#039; अखबार ने बताया है, उसके परिवार ने दावा किया है कि इस घटना के लिए संस्थान के प्रिंसिपल और कई छात्र जिम्मेदार हैं। सैटेलाइट टाउन के निवासियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी पास के एक टोल प्लाजा पर प्रदर्शन किया, और न्याय तथा जवाबदेही की अपनी मांगों को दोहराया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:23:09 +0530</pubDate>
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<title>West Asia संकट: MEA का बड़ा ऑपरेशन, 11 लाख से ज़्यादा भारतीयों की हुई सुरक्षित घर वापसी</title>
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<description><![CDATA[ जैसे-जैसे पश्चिम एशिया में दो हफ़्ते की सीज़फ़ायर की समय-सीमा 22 अप्रैल को खत्म होने के करीब पहुँच रही है, भारत ने इस क्षेत्र के अलग-अलग देशों से लगातार फ़्लाइट ऑपरेशन चलाकर 11 लाख से ज़्यादा यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला है और उन्हें दूसरे रास्तों से भेजा है। ये जानकारी विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (खाड़ी) असीम महाजन ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में हुई एक अंतर-मंत्रालयी प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान दी। महाजन ने बताया कि इस क्षेत्र के जिन देशों का हवाई क्षेत्र खुला है, वहाँ से भारत के लिए फ़्लाइट्स लगातार चल रही हैं। 28 फ़रवरी से अब तक, इस क्षेत्र से लगभग 11,30,000 यात्रियों ने भारत की यात्रा की है। एयरलाइंस, ऑपरेशनल और सुरक्षा से जुड़ी बातों को ध्यान में रखते हुए, UAE और भारत के बीच सीमित कमर्शियल फ़्लाइट्स चलाना जारी रखे हुए हैं। आज यूएई से भारत के लिए लगभग 110 फ़्लाइट्स के चलने की उम्मीद है।इसे भी पढ़ें: Pakistan पर एक साथ टूट पड़े 4 देशों के लाखों लोग, भारत पर हुआ ऐलान!उन्होंने आगे कहा कि सऊदी अरब और ओमान के अलग-अलग हवाई अड्डों से भारत के अलग-अलग शहरों के लिए उड़ानें चल रही हैं। कतर का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुला होने के कारण, आज कतर एयरवेज़ से भारत के अलग-अलग शहरों के लिए लगभग 10 से 11 उड़ानें संचालित होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि बहरीन का हवाई क्षेत्र खुला होने के बावजूद, बहरीन की गल्फ़ एयर ने घोषणा की है कि वे बहरीन से भारत के लिए सीमित उड़ानें शुरू करने की योजना बना रहे हैं। गल्फ़ एयर सऊदी अरब के दम्माम हवाई अड्डे से भारत के अलग-अलग शहरों के लिए गैर-निर्धारित कमर्शियल उड़ानें संचालित कर रही है। महाजन ने यह भी बताया कि इराकी हवाई क्षेत्र खुला है और इस क्षेत्र के गंतव्यों के लिए सीमित उड़ानें चल रही हैं, जिनका उपयोग भारत की आगे की यात्रा के लिए किया जा सकता है।इसे भी पढ़ें: Hormuz में टकराए भारत-पाकिस्तान नेवी के युद्धपोत? फिर जो हुआ...कुवैत का हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण, उन्होंने कहा कि जज़ीरा एयरवेज़ और कुवैत एयरवेज़ सऊदी अरब के दम्मम हवाई अड्डे से भारत के विभिन्न गंतव्यों के लिए गैर-निर्धारित वाणिज्यिक उड़ानें चलाना जारी रखे हुए हैं।संयुक्त सचिव ने कहा कि इज़राइली हवाई क्षेत्र खुला है और इस क्षेत्र के गंतव्यों के लिए सीमित उड़ानें फिर से शुरू हो गई हैं, जिनका उपयोग भारत की आगे की यात्रा के लिए किया जा सकता है। उन्होंने ब्रीफिंग के दौरान बताया कि भारत, इज़राइल से जॉर्डन और मिस्र के रास्ते भारतीय नागरिकों की भारत वापसी की यात्रा को सुगम बनाना जारी रखे हुए है।इस बात पर ज़ोर देते हुए कि भारत खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर लगातार नज़र रखे हुए है, उन्होंने कहा कि हमारे प्रयास इस क्षेत्र में रहने वाले बड़े भारतीय समुदाय की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं। महाजन ने मीडिया को बताया कि मंत्रालय में एक विशेष कंट्रोल रूम पूरी तरह से काम कर रहा है और हमारे उन दूतावासों और चौकियों के साथ मिलकर काम कर रहा है, जो समय पर सहायता प्रदान करने और लोगों के सवालों के जवाब देने के लिए चौबीसों घंटे हेल्पलाइन चला रहे हैं। महाजन ने आश्वासन दिया कि इस क्षेत्र में भारतीय नाविकों के कल्याण को उच्च प्राथमिकता दी जा रही है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:23:09 +0530</pubDate>
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<title>China का Tibet पर बढ़ा शिकंजा, &amp;apos;संवेदनशील&amp;apos; Photos के चलते दो बौद्ध भिक्षु एक साल से क़ैद</title>
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<description><![CDATA[ माचू काउंटी के चू खामा मठ के दो तिब्बती भिक्षुओं, समतेन ग्यात्सो और जामयांग समतेन को एक साल से भी पहले चीनी अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया था। वे अभी भी हिरासत में हैं, और उनकी हालत या कानूनी स्थिति के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। तिब्बत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी हिरासत को लेकर लंबे समय से बनी चुप्पी ने उनके मठ, परिवारों और सहयोगियों को गहरी चिंता में डाल दिया है। तिब्बत टाइम्स के अनुसार, दोनों भिक्षुओं में से एक को सीधे मठ परिसर से ही हिरासत में ले लिया गया था, जबकि दूसरे को पुलिस ने एक मोबाइल फ़ोन लेने के लिए बुलाया था, जिसे पहले ज़ब्त कर लिया गया था; वहीं बुलाए जाने पर उसे गिरफ़्तार कर लिया गया। एक साल से भी ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी, उनकी गिरफ़्तारी की सही तारीखें स्पष्ट नहीं हैं, जिससे स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि करना और ज़्यादा जानकारी हासिल करना मुश्किल हो गया है।इसे भी पढ़ें: होर्मुज की उथल-पुथल के बीच अचानक मोदी से मिले कोरियाई राष्ट्रपति, चीन की उल्टी गिनती शुरू?इस मामले में पारदर्शिता की कमी ने स्थानीय सूत्रों के बीच चिंताओं को और बढ़ा दिया है। हालाँकि चीनी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से आरोपों के बारे में स्पष्टीकरण नहीं दिया है, लेकिन यह गिरफ़्तारियाँ उनके फ़ोन में मिली संवेदनशील सामग्री से जुड़ी हो सकती हैं, जिसमें तिब्बती राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीरें भी शामिल हैं। रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि हिरासत में लिए जाने से पहले दोनों भिक्षुओं से बार-बार पूछताछ की गई थी, जो अक्सर उन आरोपों पर आधारित थी जिन्हें सूत्र &#039;बेबुनियाद&#039; बताते हैं।इसे भी पढ़ें: सीजफायर खत्म होते ही कुछ बड़ा होगा, 4 चीनी विमान ईरान में लैंड, बड़ा खुलासा!बताया जाता है कि समतेन ग्यात्सो पर विशेष रूप से इसलिए कड़ी नज़र रखी गई थी क्योंकि उन्होंने अपने WeChat डिस्प्ले इमेज के तौर पर परम पावन दलाई लामा की एक तस्वीर लगाई हुई थी। कथित तौर पर इसी वजह से चीनी अधिकारियों ने उनके रहने की जगह पर कई बार तलाशी ली, जिसके दौरान कई किताबें ज़ब्त की गईं; इनमें &#039;द बुद्धा हैज़ कम टू द स्नो लैंड&#039; (The Buddha Has Come to the Snow Land) नामक एक किताब भी शामिल थी। इससे पहले उनसे दलाई लामा को मिले नोबेल शांति पुरस्कार के सम्मान में एक निबंध लिखने के लिए भी पूछताछ की गई थी, हालाँकि उस समय पूछताछ के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था, जैसा कि &#039;तिब्बत टाइम्स&#039; ने बताया है।इसे भी पढ़ें: ड्रैगन का Nepal पर बढ़ा दबाव, Tibet और Taiwan Policy पर दी कड़ी चेतावनीदूसरी ओर, जामयांग समतेन पर आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक जानकारी साझा करने के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म बनाया था, और उन्हें पहले भी बिना सरकारी मंज़ूरी या आधिकारिक ISBN नंबर के कोई प्रकाशन वितरित करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। हालाँकि उन्हें भी शुरू में रिहा कर दिया गया था, लेकिन बाद में उन्हें अस्पष्ट परिस्थितियों में दोबारा गिरफ़्तार कर लिया गया, जैसा कि &#039;तिब्बत टाइम्स&#039; ने रिपोर्ट किया है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:23:07 +0530</pubDate>
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<title>China की Economy पर &amp;apos;बुढ़ापे&amp;apos; का बोझ, घटती आबादी बनी सबसे बड़ी चुनौती?</title>
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<description><![CDATA[ ताइपे टाइम्स की एक रिपोर्ट में एक ताइवानी शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि चीन में तेज़ी से जनसांख्यिकीय बदलाव आ रहा है, जिसकी पहचान बढ़ती उम्र वाली आबादी और घटती प्रजनन दर है। दशकों तक आर्थिक विस्तार में मददगार रहा जनसांख्यिकीय लाभ अब तेज़ी से एक बोझ बनता जा रहा है। मेनलाइन अफेयर्स काउंसिल की &#039;मेनलाइन चीन और क्रॉस-स्ट्रेट स्थिति&#039; पर नवीनतम ब्रीफिंग में प्रकाशित चीन की जनसंख्या संरचना के मुद्दों पर अवलोकन नामक एक लेख में, इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल डिफेंस एंड सिक्योरिटी रिसर्च के एसोसिएट शोधकर्ता वांग चान-हसी ने बताया कि 2016 के बाद से चीन की जन्म दर में काफ़ी गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि पिछले साल नवजात शिशुओं की संख्या घटकर 7.92 मिलियन रह गई, जो 2016 के आँकड़े का सिर्फ़ 44 प्रतिशत है।इसे भी पढ़ें: China का Tibet पर बढ़ा शिकंजा, &#039;संवेदनशील&#039; Photos के चलते दो बौद्ध भिक्षु एक साल से क़ैदयह गिरावट न केवल 9 मिलियन और 8 मिलियन जन्मों के पिछले अनुमानों से नीचे रही, बल्कि 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना की स्थापना के बाद से यह सबसे निचला स्तर भी था। उन्होंने आगे कहा कि चीन की कुल आबादी घटकर 1.40489 बिलियन रह गई है, जो लगातार चार वर्षों की नकारात्मक वृद्धि को दर्शाता है। वांग ने चेतावनी दी कि चीन की जन्म दर तेज़ी से गिर रही है और अगले तीन से पाँच वर्षों के भीतर यह ताइवान, जापान और दक्षिण कोरिया में देखे गए स्तरों तक पहुँच सकती है। जैसे-जैसे जन्मों में कमी आ रही है, शिक्षा क्षेत्र पर इसका असर पहले ही दिखना शुरू हो गया है।इसे भी पढ़ें: होर्मुज की उथल-पुथल के बीच अचानक मोदी से मिले कोरियाई राष्ट्रपति, चीन की उल्टी गिनती शुरू?रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में लगभग 20,000 किंडरगार्टन बंद कर दिए गए, जिससे 240,000 से ज़्यादा प्रीस्कूल टीचिंग की नौकरियाँ चली गईं। प्राइमरी स्कूलों में भी 2023 से हर साल 20 लाख से ज़्यादा छात्रों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है, और कई इलाकों में टीचिंग पदों में भारी कमी आई है। शिक्षकों पर अपनी भूमिकाएँ बदलने का दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे जन्म दर में गिरावट के कारण होने वाली बेरोज़गारी और बढ़ रही है।इसे भी पढ़ें: भारत के जहाज पर फायरिंग के बाद ईरान ने चीन के जहाजों को रोका, बड़ा ऐलान!जनसंख्या की लिंग संरचना में भी असंतुलन दिख रहा है; ग्रामीण इलाकों में पुरुषों की संख्या ज़्यादा है, जबकि शहरी केंद्रों में महिलाओं की संख्या ज़्यादा है। चीन की 2021 की सातवीं राष्ट्रीय जनगणना के आँकड़ों से पता चलता है कि शहरों में लिंग अनुपात 100 महिलाओं पर 106 पुरुषों का है, जो ग्रामीण इलाकों में बढ़कर 100 महिलाओं पर 120 पुरुषों का हो जाता है। वांग ने बताया कि ग्रामीण चीन में लगभग 3 करोड़ अविवाहित युवा पुरुष रहते हैं, जबकि 2 करोड़ से ज़्यादा अविवाहित महिलाएँ पहली और दूसरी श्रेणी के शहरों में रहती हैं; यह असमानता शादी और जन्म दर को लगातार कम कर रही है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:23:06 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;US Peace Talks पर सस्पेंस, तेहरान बोला&#45; फाइनल समझौते में अभी लगेगा काफी वक्त</title>
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<description><![CDATA[ ईरान और अमेरिका के बीच जल्द ही दूसरे दौर की शांति वार्ता होने की उम्मीद है। ईरान का कहना है कि अमेरिका के साथ बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन अंतिम समझौता होने में अभी काफी समय लगेगा। चूंकि बुधवार को दो हफ्ते का युद्धविराम खत्म हो रहा है, इसलिए दोनों पक्षों पर समझौते का दबाव है।ईरान का दावा, अमेरिका ने हमारी मांगें मानींईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने स्पष्ट किया कि अभी कई बुनियादी मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। उन्होंने दावा किया कि हालिया युद्ध के दौरान ईरान का पलड़ा भारी रहा है। गालिबफ के अनुसार, अमेरिका ने युद्धविराम केवल इसलिए स्वीकार किया क्योंकि उन्होंने ईरान की शर्तें मान ली थीं। इसे भी पढ़ें: Strait Of Hormuz में गोलियों की गूंज! जहाजों पर फायरिंग, भारतीय सुपरटैंकर भी शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रणगालिबफ ने जोर देकर कहा कि अमेरिका अपने लक्ष्य पूरे करने में नाकाम रहा है। उन्होंने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का पूरा नियंत्रण है। उनके मुताबिक, बातचीत करना संघर्ष का ही एक तरीका है ताकि ईरान अपने अधिकारों को मजबूती से रख सके। इसे भी पढ़ें: सीजफायर खत्म होते ही कुछ बड़ा होगा, 4 चीनी विमान ईरान में लैंड, बड़ा खुलासा!वार्ता की अभी कोई तारीख तय नहींपिछले दिनों इस्लामाबाद में गालिबफ और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की मुलाकात हुई थी, जो 1979 के बाद से दोनों देशों के बीच अब तक का सबसे उच्च-स्तरीय संपर्क था। हालांकि, इस महत्वपूर्ण बैठक के बावजूद अभी तक बातचीत के अगले दौर के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 10:08:17 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran वार्ता से पहले Islamabad बना छावनी, Trump के दौरे की अटकलों पर 10,000 जवान तैनात</title>
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<description><![CDATA[ ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता को लेकर पाकिस्तान की मध्यस्थता काफी महत्वपूर्ण मोड़ पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस विषय पर एक बयान दिया है, जिससे अटकलें तेज हो गई हैं। ट्रंप ने कहा, &#039;अगर समझौता इस्लामाबाद में साइन होता है, तो मैं वहां जा सकता हूं।&#039; हालांकि, अभी तक अमेरिकी राष्ट्रपति के पाकिस्तान दौरे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह केवल एक संभावना है जो समझौते के अंतिम रूप लेने पर निर्भर करती है।इस्लामाबाद-रावलपिंडी में सुरक्षा का घेराट्रंप के संभावित दौरे और हाई-प्रोफाइल वार्ता को देखते हुए पाकिस्तान प्रशासन ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस्लामाबाद और रावलपिंडी में सुरक्षा का स्तर बेहद सख्त कर दिया गया है। फिलहाल 10,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है और शहर भर में 600 से ज्यादा सुरक्षा चौकियां बनाई गई हैं।नूर खान एयरबेस और इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास के इलाकों को रविवार आधी रात से सील करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही, इन संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन उड़ाने, कबूतरबाजी और हवाई फायरिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump का बड़ा कबूलनामा, Oval Office में बर्गर डिलीवरी था Political Stunt, बोले- ये जरूरी हैजनजीवन पर सख्त पाबंदियांसुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आम जनता के लिए कई कड़े नियम लागू किए गए हैं। रावलपिंडी में रेस्टोरेंट, जिम, ब्यूटी पार्लर, बैंक और बेकरियां अगली सूचना तक बंद कर दी गई हैं। प्रशासन ने सभी लड़कों और लड़कियों के हॉस्टल को भी बंद करने के निर्देश दिए हैं।संवेदनशील रूटों पर रहने वाले लोगों को चेतावनी दी गई है कि वे बालकनी या खिड़कियों पर न आएं, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सभी गेस्ट हाउसों को भी निर्देश दिया गया है कि वे हर दिन अपने मेहमानों का डेटा स्थानीय पुलिस थाने में जमा करें। इसे भी पढ़ें: Iran-US Peace Talks पर सस्पेंस, तेहरान बोला- फाइनल समझौते में अभी लगेगा काफी वक्तशांति समझौते की वार्ता बेनतीजामौजूदा समय में दुनिया की नजरें पाकिस्तान की इस कूटनीतिक कोशिश पर टिकी हैं। 11 और 12 अप्रैल को हुई पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी, लेकिन अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के प्रयासों से दूसरे दौर की उम्मीदें बंधी हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जारी सीजफायर 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है, जिससे पहले एक ठोस समझौते पर पहुंचना वैश्विक शांति के लिए अत्यंत आवश्यक है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 10:08:15 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump का बड़ा कबूलनामा, Oval Office में बर्गर डिलीवरी था Political Stunt, बोले&#45; ये जरूरी है</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में &#039;टिप पर कोई कर नहीं&#039; नीति के प्रचार के लिए किए गए अपने एक कार्यक्रम पर खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि राजनीति में अपनी नीतियों का संदेश जनता तक पहुंचाने के लिए कभी-कभी दिखावे वाले कदम उठाने पड़ते हैं। ट्रंप ने कहा कि ओवल ऑफिस में बर्गर और फ्राइज मंगवाना थोड़ा अजीब जरूर लग सकता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य इस नीति से आम लोगों को होने वाले लाभ को समझाना था।&#039;डोरडैश&#039; डिलीवरी स्टंट पर विवादयह मामला तब सुर्खियों में आया जब एक &#039;डोरडैश&#039; डिलीवरी ड्राइवर, शैरोन सिमंस ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति के लिए बर्गर और फ्राइज के दो बैग पहुंचाए। इस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें 100 डॉलर की टिप भी दी।व्हाइट हाउस और कंपनी ने इस घटना का इस्तेमाल यह बताने के लिए किया कि कैसे &#039;टिप पर कोई कर नहीं&#039; नीति ने शैरोन को 11,000 अमेरिकी डॉलर की बचत करने में मदद की। इसे नीति की सफलता के तौर पर पेश किया गया। इसे भी पढ़ें: Iran-US Peace Talks पर सस्पेंस, तेहरान बोला- फाइनल समझौते में अभी लगेगा काफी वक्तविश्वसनीयता पर उठे सवालइस घटना के बाद सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर काफी आलोचनाएं हुईं। लोगों ने इस स्टंट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। जांच में पता चला कि शैरोन सिमंस पहले भी अमेरिकी कांग्रेस के सामने इसी नीति के समर्थन में गवाही दे चुकी थीं और वह इस नीति की पक्षधर रही हैं।आलोचकों का कहना है कि यह पूरी घटना एक पूर्व-नियोजित स्टंट थी, जिसे महज प्रचार के लिए तैयार किया गया था। कंपनी और व्हाइट हाउस ने हालांकि इस बात को नकारा नहीं कि यह आयोजन नीति के प्रचार का हिस्सा था। इसे भी पढ़ें: Strait Of Hormuz में गोलियों की गूंज! जहाजों पर फायरिंग, भारतीय सुपरटैंकर भी शामिल प्रचार की नई रणनीतिट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अपनी नीतियों के प्रचार के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते रहते हैं। उन्होंने पिछले दिनों फास्ट-फूड आउटलेट में खुद काम करने और कचरा ट्रक पर चढ़कर प्रचार करने जैसी घटनाओं का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, ये तरीके लोगों का ध्यान आकर्षित करने और अपनी बात को सरल भाषा में उन तक पहुंचाने के लिए अपनाए जाते हैं। यह घटना अब इस बात पर एक नई बहस छेड़ गई है कि क्या राजनीतिक संदेश देने के लिए इस तरह के स्टंट उचित हैं या ये वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 10:08:15 +0530</pubDate>
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<title>हमारी DEAL मानो, नहीं तो.... Islamabad में Peace Talks से पहले Donald Trump का Iran को अल्टीमेटम</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर एक कड़ा बयान जारी करते हुए ईरान को चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फ्रांसीसी और यूनाइटेड किंगडम के जहाजों पर गोलियां चलाकर सीजफायर समझौते का पूरी तरह उल्लंघन किया है। उन्होंने इसे एक बहुत ही गलत कदम बताया है।अब मिस्टर नाइस गाय बनने का समय खत्मट्रंप ने ईरान के सामने एक स्पष्ट शर्त रखी है। उनका कहना है कि वे ईरान को एक निष्पक्ष और उचित समझौता पेश कर रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में धमकी दी है कि यदि ईरान इस समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो अमेरिका ईरान के हर पावर प्लांट और हर एक पुल को तबाह कर देगा। ट्रंप ने कहा कि अब &#039;मिस्टर नाइस गाय&#039; बनकर रहने का समय खत्म हो गया है। इसे भी पढ़ें: US-Iran वार्ता से पहले Islamabad बना छावनी, Trump के दौरे की अटकलों पर 10,000 जवान तैनातट्रंप ने बताई अमेरिका की स्थितिट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से अमेरिका का कोई नुकसान नहीं हो रहा है, बल्कि इससे ईरान को हर दिन 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी जहाज अब टेक्सास, लुइसियाना और अलास्का की ओर जा रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब ईरान की &#039;किलिंग मशीन&#039; को खत्म करने का समय आ गया है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump का बड़ा कबूलनामा, Oval Office में बर्गर डिलीवरी था Political Stunt, बोले- ये जरूरी हैइस्लामाबाद में होगी बातचीतट्रंप ने जानकारी दी कि उनके प्रतिनिधि शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद जा रहे हैं, जो कल शाम वहां पहुंचेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई है कि ईरान इस समझौते को स्वीकार कर लेगा, अन्यथा अमेरिका कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 10:08:14 +0530</pubDate>
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<title>Hormuz Strait में ईरान की नौसेना ने रोके भारत के 2 तेल टैंकर, गोलीबारी के बीच लौटाया, New Delhi ने जताई चिंता।</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच समुद्री रास्तों पर भी हालात गंभीर होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में भारत से जुड़े दो तेल टैंकरों को होरमुज स्ट्रेट से वापस लौटना पड़ा, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।मौजूद जानकारी के अनुसार, भारतीय झंडे वाला टैंकर ‘भाग्य लक्ष्मी’ जब होरमुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहा था, तब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना ने उसे आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। जहाज के चालक दल ने रेडियो के जरिए अनुमति मांगी, लेकिन उन्हें तुरंत वापस लौटने का निर्देश दिया गया, जिसके बाद जहाज ने रास्ता बदल लिया।बता दें कि इसी दौरान एक अन्य टैंकर ‘सन्मार हेराल्ड’ ने भी संकट संदेश भेजा। चालक दल के एक सदस्य ने बताया कि उन्हें पहले आगे बढ़ने की अनुमति दी गई थी, लेकिन अचानक गोलीबारी शुरू होने के बाद उन्हें लौटने के लिए कहा गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने या जहाज को नुकसान की खबर नहीं है।गौरतलब है कि यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच तनाव चरम पर है। होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है।मौजूद जानकारी के अनुसार, कुछ जहाजों को पहले इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी गई थी, लेकिन बाद में ईरान की ओर से संदेश जारी कर कहा गया कि केवल उन्हीं मार्गों से आवागमन होगा जिन्हें सुरक्षित माना गया है। इस दौरान कुछ जहाजों ने गोलीबारी की भी सूचना दी, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।इस घटना के बाद भारत ने भी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश सचिव ने ईरानी राजदूत से बातचीत कर इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया और जल्द से जल्द सुरक्षित आवागमन बहाल करने की मांग की है।ईरान की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आई है। भारत में ईरान के प्रतिनिधि ने कहा कि दोनों देशों के संबंध मजबूत हैं और इस तरह की घटनाओं को सुलझाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, ईरान की सैन्य कमान ने संकेत दिया है कि जलडमरूमध्य पर अब कड़ा नियंत्रण रखा जा रहा है और संदिग्ध गतिविधियों वाले जहाजों पर कार्रवाई की जा सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर असर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 10:08:13 +0530</pubDate>
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<title>Strait of Hormuz पर बढ़ा तनाव, Donald Trump की धमकी से दुनिया में Oil Crisis का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता दिख रहा है और हालात एक बार फिर टकराव की ओर जाते नजर आ रहे हैं। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा बयान दिया है, जिससे वैश्विक चिंता और गहरी हो गई है।मौजूद जानकारी के अनुसार, ट्रंप ने साफ चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया तो अमेरिका सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने अपने बयान में कहा कि अब “नरम रवैया” खत्म हो चुका है और अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है।बता दें कि यह बयान ऐसे समय आया है जब होरमुज स्ट्रेट को लेकर तनाव चरम पर है। ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। गौरतलब है कि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है।अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस विवाद में दोनों पक्षों की ओर से सख्त रुख अपनाया गया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक कार्रवाई जारी रखी हुई है, जबकि ईरान ने साफ कहा है कि जब तक यह कार्रवाई खत्म नहीं होती, तब तक वह समुद्री मार्ग को पूरी तरह सामान्य नहीं होने देगा।इस बीच बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। जानकारी के मुताबिक दोनों देशों के प्रतिनिधि पाकिस्तान में मुलाकात करने वाले हैं, जहां समझौते की संभावनाओं पर चर्चा होगी। हालांकि, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने संकेत दिया है कि अभी अंतिम समझौता काफी दूर है और कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।गौरतलब है कि हाल ही में एक अस्थायी युद्धविराम लागू किया गया था, जिससे कुछ समय के लिए हालात सामान्य होने की उम्मीद जगी थी। लेकिन ट्रंप के सख्त रुख और ईरान की प्रतिक्रिया के बाद स्थिति फिर से तनावपूर्ण हो गई है।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गतिरोध लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों और व्यापार पर साफ दिख सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत इस पूरे संकट को सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 10:08:13 +0530</pubDate>
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<title>Middle East Tension | ओमान की खाड़ी में भारी तनाव: ईरानी जहाज पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद IRGC का ड्रोन हमला</title>
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<description><![CDATA[ ओमान की खाड़ी में युद्ध के बादल गहरा गए हैं। सोमवार को आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी व्यापारिक जहाज पर अमेरिकी सेना की कार्रवाई के जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने क्षेत्र में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों पर आत्मघाती ड्रोन से हमला किया है। यह सैन्य टकराव उस समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं। स्थानीय मीडिया ने बताया कि ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना ने एक ईरानी जहाज़ को निशाना बनाया था। हालाँकि, IRGC की नौसेना इकाइयों की &quot;सही समय पर मौजूदगी और त्वरित कार्रवाई&quot; के कारण अमेरिकी सेना को पीछे हटना पड़ा। इसे भी पढ़ें: West Asia तनाव का असर: घरों में LPG सिलेंडर की बिक्री घटी, Commercial Supply पर लगी रोकयह घटना पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बातचीत विफल होने के बाद अमेरिका द्वारा ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी लगाए जाने के बीच हुई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अनुसार, जहाज़ की पहचान &#039;TOUSKA&#039; के रूप में हुई थी और उसे &quot;अवैध गतिविधियों के पिछले इतिहास&quot; के कारण अमेरिकी हिरासत में ले लिया गया था।उन्होंने अपने &#039;ट्रुथ सोशल&#039; (Truth Social) अकाउंट पर पोस्ट किया, &quot;जहाज़ अब पूरी तरह हमारी हिरासत में है, और हम देख रहे हैं कि जहाज़ पर क्या-क्या मौजूद है!&quot;ईरान ने हमलों की पुष्टि की, त्वरित जवाब देने का संकल्प लियाईरानी जहाज़ पर हमले की पुष्टि करते हुए, तेहरान ने अमेरिकी सेना की &quot;सशस्त्र समुद्री डकैती&quot; के खिलाफ त्वरित जवाब देने का संकल्प लिया है। यह ध्यान देने योग्य है कि ट्रम्प की नाकेबंदी के बाद ईरान ने पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है, जिससे दुनिया का लगभग पाँचवाँ हिस्सा तेल और तरल प्राकृतिक गैस (LNG) का परिवहन होता है। ईरान ने कहा है कि यदि अमेरिका नाकेबंदी नहीं हटाता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य बंद ही रहेगा। इसे भी पढ़ें: Hormuz Strait में ईरान की नौसेना ने रोके भारत के 2 तेल टैंकर, गोलीबारी के बीच लौटाया, New Delhi ने जताई चिंता।ईरानी सेना ने एक बयान में कहा, &quot;आक्रामक अमेरिका ने संघर्ष-विराम का उल्लंघन करते हुए और समुद्री डकैती को अंजाम देते हुए, ओमान सागर के जलक्षेत्र में ईरान के एक व्यापारिक जहाज़ पर हमला किया। उन्होंने जहाज़ पर गोलीबारी की और अपने कई &#039;आतंकवादी मरीन&#039; सैनिकों को जहाज़ के डेक पर उतारकर उसके नेविगेशन सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया।&quot;क्या बातचीत का दूसरा दौर रद्द हो गया है?ईरान ने बातचीत के दूसरे दौर में भी शामिल होने से इनकार कर दिया है, जिसका आयोजन संभवतः पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाला था। इस्लामिक गणराज्य ने बातचीत में शामिल न होने का कारण अमेरिका की &quot;अत्यधिक माँगें, अवास्तविक अपेक्षाएँ, लगातार बदलते रुख और बार-बार के विरोधाभास&quot; बताए हैं।विशेष रूप से, यह इनकार तब सामने आया जब ट्रम्प ने कहा था कि बातचीत के लिए एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान जा रहा है। हालांकि, इस बात को लेकर कुछ भ्रम था कि प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कौन कर रहा है—क्योंकि पहले ट्रंप ने कहा था कि जेडी वेंस इसका हिस्सा नहीं हैं, जबकि बाद में व्हाइट हाउस ने पुष्टि की कि बातचीत के दूसरे दौर के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति ही टीम का नेतृत्व करेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 10:08:12 +0530</pubDate>
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<title>Iran Rejects Ceasefire | ईरान ने ठुकराई &amp;apos;सीज़फ़ायर 2.0&amp;apos; वार्ता, अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों को एक बड़ा झटका लगा है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ होने वाले &#039;सीज़फ़ायर 2.0&#039; (युद्धविराम) के दूसरे दौर की बातचीत में शामिल नहीं होगा। मौजूदा युद्धविराम की समय सीमा समाप्त होने से ठीक पहले आए इस फैसले ने क्षेत्र में सैन्य संघर्ष की आशंकाओं को फिर से जीवित कर दिया है।वार्ता विफल होने के मुख्य कारण: ईरान का पक्षईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने इस कूटनीतिक विफलता के लिए पूरी तरह से वाशिंगटन को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान ने वार्ता से पीछे हटने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित किया है:अवास्तविक मांगें: ईरान का आरोप है कि अमेरिका ऐसी शर्तें रख रहा है जिन्हें पूरा करना नामुमकिन है।नौसैनिक नाकेबंदी: तेहरान के अनुसार, ईरानी बंदरगाहों के आसपास अमेरिकी नौसेना की निरंतर मौजूदगी सीज़फ़ायर समझौते का सीधा उल्लंघन है।असंगत रुख: ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा आरिफ़ ने अमेरिकी रवैये को &#039;भ्रमित&#039; करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि एक तरफ अमेरिका शांति की बात करता है और दूसरी तरफ आर्थिक और सैन्य दबाव बढ़ा रहा है। इसे भी पढ़ें: Srinagar Airport पर Satellite Phone संग अमेरिकी नागरिक गिरफ्तार, खुफिया एजेंसियां High Alert परईरान ने बातचीत टूटने के लिए वॉशिंगटन को ज़िम्मेदार ठहराया है, और उस पर &quot;अवास्तविक मांगें&quot; करने और बार-बार अपना रुख़ बदलने का आरोप लगाया है। तेहरान के अधिकारियों ने अपने बंदरगाहों के आसपास अमेरिका की लगातार नौसैनिक नाकेबंदी की ओर भी इशारा किया, और इसे सीज़फ़ायर समझौते का उल्लंघन तथा बातचीत से पीछे हटने का एक मुख्य कारण बताया।अमेरिका के रवैये पर ईरान का तीखा हमलाएक उच्च-स्तरीय बैठक में, ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा आरिफ़ ने अमेरिका के रवैये की कड़ी आलोचना की, और इसे असंगत तथा भ्रमित करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका मिले-जुले संकेत दे रहा है—एक तरफ़ शांति की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ़ दबाव बढ़ा रहा है, जिससे सार्थक बातचीत मुश्किल हो गई है।ईरान की घोषणा से कुछ ही घंटे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिकी अधिकारी बातचीत के लिए इस्लामाबाद जाएँगे, जिससे किसी संभावित सफलता की उम्मीद जगी थी। बैठक की उम्मीद में पाकिस्तान की राजधानी में सुरक्षा पहले ही कड़ी कर दी गई थी। हालाँकि, ईरान के अचानक पीछे हटने से अब पूरी प्रक्रिया पर गंभीर संदेह पैदा हो गया है। इसे भी पढ़ें: हमारी DEAL मानो, नहीं तो.... Islamabad में Peace Talks से पहले Donald Trump का Iran को अल्टीमेटमट्रम्प की बढ़ती धमकियाँट्रम्प द्वारा एक कड़ी चेतावनी जारी करने के बाद स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि कोई समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका ईरान के प्रमुख बुनियादी ढाँचे को निशाना बना सकता है। उन्होंने कहा कि यदि तेहरान उस चीज़ को अस्वीकार करता है जिसे उन्होंने &quot;निष्पक्ष समझौता&quot; कहा है, तो बिजली संयंत्रों और पुलों को नष्ट किया जा सकता है; इससे पहले से ही नाज़ुक संबंधों पर और अधिक दबाव बढ़ गया है।पहले के बैक-चैनल प्रयासों के बावजूद, दोनों पक्ष प्रमुख मुद्दों पर अभी भी एक-दूसरे से काफ़ी दूर हैं। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, उसका क्षेत्रीय प्रभाव, और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण शामिल है।इस बीच, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव बना हुआ है, और इस महत्वपूर्ण तेल मार्ग के दोनों सिरों पर जहाज़ों के फँसे होने की ख़बरें आ रही हैं। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, और इसमें किसी भी तरह की रुकावट के दूरगामी आर्थिक प्रभाव हो सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 10:08:11 +0530</pubDate>
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<title>North Korea Cluster Bomb Test | किम जोंग उन ने दागीं ऐसी मिसाइलें जो आसमान से बरसाएंगी तबाही! थर्राए अमेरिका और जापान!</title>
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<description><![CDATA[ उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए सोमवार को &#039;क्लस्टर&#039; (Cluster) बमों से लैस बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया। यह इस महीने में दूसरी बार है जब उत्तर कोरिया ने इस प्रकार की घातक तकनीक का उपयोग किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई रक्षा प्रणालियों को भेदने की उत्तर कोरिया की रणनीति का हिस्सा है।इसे भी पढ़ें: Middle East Tension | ओमान की खाड़ी में भारी तनाव: ईरानी जहाज पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद IRGC का ड्रोन हमला  उत्तर कोरिया की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी’ (केसीएनए) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका ने उत्तर कोरिया के पूर्वी तट से दूर कई बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण का पता लगाया है।
 केसीएनए की ओर से जारी तस्वीरों में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और उनकी बेटी एक तटीय निगरानी क्षेत्र से पानी के ऊपर से गुजरते हुए एक प्रक्षेपास्त्र को देखते नजर आ रहे हैं। इस दौरान दोनों ने काले रंग की चमड़े की जैकेट पहनी हुई है।इसे भी पढ़ें: Iran Rejects Ceasefire | ईरान ने ठुकराई &#039;सीज़फ़ायर 2.0&#039; वार्ता, अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
 दक्षिण कोरिया की खुफिया सेवा ने हाल में कहा था कि किम की बेटी का नाम कथित तौर पर किम जू ऐ है और वह किम की उत्तराधिकारी बन सकती हैं।
 केसीएनए ने अपनी खबर में कहा कि किम ने ‘क्लस्टर’ बम से लैस सतह से सतह पर मार करने वाली पांच उन्नत ‘ह्वासोंग-11 का’ बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रक्षेपण का निरीक्षण किया।
 केसीएनए के अनुसार, मिसाइलों ने एक द्वीप को निशाना बनाया और किम ने प्रक्षेपणों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘ मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है..। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 10:08:11 +0530</pubDate>
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<title>बहुपक्षवाद और यूएन चार्टर के मूल्यों के लिए अम्बेडकर के विचारों की प्रासंगिकता</title>
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<description><![CDATA[ प्रसिद्ध विधि विद्वान और भारत के संविधान का प्रारूप तैयार करने वाले डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर ने जिस संवैधानिक नैतिकता को प्रोत्साहन दिए जाने की हिमायत की थी, उससे बहुपक्षवाद और यूएन चार्टर में समाहित वैश्विक मूल्यों की प्रासंगिकता की पुष्टि होती है. इसी तरह के कुछ विचार, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन द्वारा 14 अप्रैल को, डॉक्टर  की 135वीं जयन्ती के अवसर पर, यूएन मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में व्यक्त किए गए. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 10:07:32 +0530</pubDate>
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