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<title>Prime News Studio &#45; : विदेश</title>
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<dc:rights>Copyright 2026 Prime News Studio&#45; All Rights Reserved.</dc:rights>

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<title>Somalia के Baidoa में हिंसा: 4 नागरिकों की मौत, 98 घायल और कई हमलावर ढेर</title>
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<description><![CDATA[ सोमालिया के दक्षिण-पश्चिमी शहर बैदोआ में सैनिकों और मिलिशिया के बीच हुई झड़प में कम से कम चार नागरिकों समेत कई लड़ाके मारे गए और 98 अन्य घायल हुए। अस्पताल के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। झड़प सोमवार तड़के उस समय शुरू हुई, जब मिलिशिया समूहों ने शहर के बाहरी इलाकों में सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमला किया।सोमाली अधिकारियों के अनुसार, कम से कम 30 हमलावर मारे गए, जबकि दक्षिण-पश्चिम राज्य के अधिकारियों ने करीब 50 हमलावरों के मारे जाने का दावा किया। इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी। बे क्षेत्रीय अस्पताल के आपातकालीन विभाग के प्रमुख डॉ. अब्दिकाफी उमर महमूद ने बताया कि चार नागरिकों की मौत हुई और 28 महिलाओं तथा एक बुजुर्ग सहित 98 लोग घायल हुए।इनमें अधिकांश लोग गोलीबारी का शिकार हुए हैं। मंगलवार को शहर में स्थिति सामान्य हुई, हालांकि प्रमुख इलाकों में सुरक्षा बल तैनात रहे। अस्पताल में घायलों की बढ़ती संख्या के बीच दवाओं की किल्लत भी सामने आई। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 09:55:37 +0530</pubDate>
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<title>Palestine मुद्दे पर भारत ने दोहराया Two&#45;State Solution का समर्थन, गाजा पर जताई चिंता</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने मंगलवार को बातचीत के जरिए फलस्तीन मुद्दे के ‘द्विराष्ट्र समाधान’ के प्रति अपने लंबे समय से चले आ रहे समर्थन को दोहराया। साथ ही फलस्तीनी लोगों के प्रति भारत के निरंतन समर्थन की पुष्टि भी की। विदेश मंत्रालय में सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने यह जानकारी दी।रंगनाथन विदेश मंत्रालय में वाणिज्य दूतावास, पासपोर्ट और वीज़ा तथा प्रवासी भारतीय मामले की सचिव हैं और 16 से 21 अगस्त तक मिस्र, फलस्तीन और लेबनान की आधिकारिक यात्रा पर हैं। रंगनाथन ने मंगलवार को फलस्तीन की विदेश और प्रवासी मामलों की मंत्री वारसेन अघाबेकियन शाहीन से मुलाकात की और ‘गाजा में गंभीर मानवीय स्थिति पर भारत की चिंता व्यक्त की।’’
फलस्तीन में भारत के प्रतिनिधि कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि दोनों पक्षों ने भारत-फलस्तीन के द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की, जिसमें विकास सहयोग की उनकी व्यापक पहलें भी शामिल हैं। पोस्ट में कहा गया,‘‘भारत ने बातचीत के जरिए ‘द्विराष्ट्र समाधान’के लिए अपने लंबे समय से चले आ रहे समर्थन को दोहराया और लगातार मानवीय सहायता, बातचीत तथा कूटनीति के जरिए गाज़ा में मानवीय स्थिति से निपटने के महत्व को रेखांकित किया।’’
भारत ‘द्विराष्ट्र समाधान’ के उस नजरिए का समर्थन करता रहा है, जिसमें इजराइल और फलस्तीन अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक़ अपनी मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांति और सुरक्षा के साथ एक-दूसरे के बगल में रहें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 09:55:37 +0530</pubDate>
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<title>दुनिया के सबसे बड़े तेल मार्ग पर अमेरिकी कब्जे का दावा! Donald Trump के मैप पोस्ट से मचा महायुद्ध का हड़कंप</title>
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<description><![CDATA[ मंगलवार (18 अगस्त) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक मैप की तस्वीर पोस्ट की, जिसमें स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को &#039;अमेरिका का नया इलाका&#039; बताया गया है। यह कदम ईरान के साथ इस अहम समुद्री रास्ते को लेकर चल रहे तनाव के बीच उठाया गया है। यह पोस्ट ऐसे समय में आया है जब ईरान स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा रहा है; यह दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई के लिए एक बहुत ज़रूरी समुद्री रास्ता है।अमेरिकी राष्ट्रपति ने बिना किसी अतिरिक्त टिप्पणी के अपने &#039;ट्रुथ सोशल&#039; प्लेटफॉर्म पर यह मैप शेयर किया। पिछले हफ़्ते ट्रंप ने कहा था कि वह &#039;बहुत जल्द&#039; स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को अमेरिका का इलाका घोषित कर देंगे।होर्मुज़ बंद रहेगा: ईरानइस बीच, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेरी ग़ालिबाफ़ ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ समुद्री यातायात के लिए तब तक बंद रहेगा जब तक कि अमेरिका के साथ साइन किए गए 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) में ईरान की सभी शर्तें पूरी नहीं हो जातीं। उन्होंने इसे विदेशी प्रतिबंधों और सैन्य अभियानों को पूरी तरह हटाने से जोड़ते हुए कहा कि रास्ता तभी खुलेगा। इसे भी पढ़ें: Pilibhit में truck driver की हत्या के आरोप में पुलिस ने अमंदीप कौर को किया गिरफ्तारग़ालिबाफ़ ने कहा, &quot;जब तक समझौता ज्ञापन में अमेरिका के वादे - जिसमें नाकेबंदी हटाना, फ्रीज़ की गई संपत्ति जारी करना, तेल पर प्रतिबंध हटाना, सभी मोर्चों पर धमकियों और सैन्य अभियानों को खत्म करना और अन्य शर्तें शामिल हैं जिन पर अमेरिका ने सहमति जताई थी - लागू नहीं किए जाते, तब तक &#039;स्ट्रेट&#039; नहीं खोला जाएगा।&quot;दुश्मनों को और तनाव न बढ़ाने की चेतावनी देते हुए, स्पीकर ने ज़ोर देकर कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक &quot;दुश्मन की हरकतों और आक्रामकता के अनुपात में उसे और भी करारी हार देने के लिए तैयार है।&quot;ग़ालिबाफ़ ने कूटनीतिक प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि MoU के तहत सैन्य कार्रवाई रोकने से मिले समय ने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने का एक अहम मौका दिया।उन्होंने कहा, &quot;बेशक, यह साफ़ करना ज़रूरी है कि नाकेबंदी हटाने और युद्धविराम के संबंध में समझौते से मिले मौके ने आर्थिक मज़बूती बढ़ाने और ईरान की रक्षा क्षमता को फिर से बनाने में बहुत मदद की।&quot; इसे भी पढ़ें: Jharkhand Govt Exam Cancelled | झारखंड में भर्ती परीक्षाओं पर बड़ा फैसला, CID/SIT जांच के बीच 39 परीक्षाएं हुई रद्द और 6 स्थगितहोर्मुज़ में जहाज़ पर हमलायह घटना तब हुई जब स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से गुज़र रहे एक जहाज़ पर किसी अज्ञात चीज़ (प्रोजेक्टाइल) से हमला हुआ, जिससे उसका इंजन रूम क्षतिग्रस्त हो गया और एक क्रू मेंबर घायल हो गया। यह जानकारी UK मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) ने दी है। UKMTO ने अपनी घटना रिपोर्ट में कहा, &quot;कंपनी सिक्योरिटी ऑफिसर ने बताया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से बाहर निकलते समय जहाज से एक अज्ञात चीज़ (प्रोजेक्टाइल) टकराई।&quot;इसमें आगे कहा गया कि इस टक्कर से जहाज के इंजन रूम को नुकसान पहुंचा और चालक दल के एक सदस्य की मौत हो गई। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब बातचीत के लिए तय 60 दिन की अवधि खत्म होने वाली है, लेकिन तेहरान और वाशिंगटन के बीच मुख्य मतभेद अभी भी सुलझ नहीं पाए हैं। ईरान के लिए, होर्मुज जलडमरूमध्य से कमर्शियल ट्रैफिक का सामान्य होना इस बात पर निर्भर करता है कि नाकेबंदी हटाई जाए, सेनाएं वापस बुलाई जाएं और हर्जाने का भुगतान किया जाए। Stay updated with International
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 09:55:36 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump ने Oman पर बमबारी की धमकी दी, Iran के साथ समझौते पर जताई नाराजगी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओमान पर बमबारी की धमकी है क्योंकि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए ईरान के साथ समझौते की उसकी कोशिशों से नाराज हैं। क्षेत्र में तैनात दो अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप प्रशासन ने ओमान से कहा है कि वह उस समझौते के कुछ हिस्सों का विरोध करता है जिसकी अभी घोषणा नहीं हुई है।इस समझौते में तेल और प्राकृतिक गैस की वैश्विक आपूर्ति के लिए अहम रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य का ईरान और ओमान द्वारा संयुक्त रूप से प्रबंधन करना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के रुख और ओमान के रुख पर प्रशासन की राय के बारे में जानकारी दी गई। इस बीच, ब्रिटिश सेना की समुद्री निगरानी एजेंसी के अनुसार, जलडमरूमध्य से बाहर निकलते समय एक जहाज़ पर हमला किया गया।वहीं, ईरान के एक अधिकारी ने कहा कि जब तक अमेरिका ईरान की शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक यह जलमार्ग फिर से नहीं खुलेगा। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ईरान की ओर से उसके देश पर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका का मानना ​​है कि ओमान ने ईरान के साथ बातचीत में सख्ती नहीं बरती है।अमेरिका ओमान के उस समझौते से भी नाखुश है जिसके तहत जहाज़ों से स्वैच्छिक शुल्क लिया जाएगा, भले ही ये शुल्क सुरक्षा और समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़े हों। ट्रंप ने सोमवार को ओमान पर बम गिराने की धमकी दी, क्योंकि ओमान ईरान के साथ मिलकर उस जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) को खोलने और युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू करने का रास्ता बनाने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक मानचित्र साझा किया जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी इलाका दिखाया गया था।राष्ट्रपति ने सबसे पहले पिछले हफ़्ते एक अनौपचारिक बातचीत में इस विचार का ज़िक्र किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ओवल ऑफ़िस में ट्रंप ने संवाददाताओं को विस्तृत जानकारी दिये बिना कहा, ‘‘मुझे इसे एक अमेरिकी इलाका घोषित करने का विचार पसंद है।’’
ईरान के उप-विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया पर ट्रंप की उस पोस्ट का जवाब दिया, जिसमें जलडमरूमध्य को अमेरिकी इलाका दिखाया गया था। उन्होंने ‘एक्स’पर लिखा, ‘‘जिस तरह ट्रंप ने फारस की खाड़ी का नाम सही लिखा, उसी तरह होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में उनकी गलतफहमी भी जल्द ही या तो ठीक हो जाएगी, या फिर हम इस गलतफहमी में जी रहे व्यक्ति की गलतफहमी को दूर कर देंगे।’’
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत की कोई योजना नहीं है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक जहाज पर हमले की खबर के बावजूद यह जलमार्ग ‘‘खुला हुआ’’ है।उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में इस जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही कम हो रही है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि वहां अमेरिकी नाकेबंदी ‘‘पूरी तरह से लागू’’ है और दावा किया कि सभी समुद्री बारूदी सुरंगें हटा दी गई हैं। उनका यह पोस्ट अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के 60 दिनों का दौर इस हफ्ते खत्म होने के बाद आया है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 09:55:36 +0530</pubDate>
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<title>Kabul में स्कूल परिसर के पास विस्फोट, UN ने 42 बच्चों के घायल होने की पुष्टि की</title>
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<description><![CDATA[ अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक स्कूल परिसर के पास हुए विस्फोट में कम से कम 42 बच्चे घायल हो गए। संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक मिशन (यूएनएएमए) ने शैक्षणिक केंद्र के पास बच्चों के घायल होने की पुष्टि की है।संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक के अनुसार, घायल बच्चों की उम्र नौ से 14 वर्ष के बीच है। इससे पहले काबुल पुलिस के प्रवक्ता खालिद जादरान ने बताया था कि सोमवार को एक हथगोले से हुए विस्फोट में ‘‘कई बच्चे’’ घायल हुए हैं और मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने घटना के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी।दुजारिक ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र मिशन ने भी विस्फोट की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए जांच की मांग की है। अफगान मीडिया ने इससे पहले बताया था कि विस्फोट में करीब 50 बच्चे घायल हुए। यह विस्फोट राजधानी के अल्पसंख्यक हजारा समुदाय बहुल इलाके में हुआ।अफगानिस्तान में हजारा समुदाय की आबादी करीब नौ प्रतिशत है। यह समुदाय देश में लंबे समय से हमलों और उत्पीड़न का सामना कर रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 09:55:35 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump ने रोका Canada के सामान पर 50 प्रतिशत Tariff, अंतिम समय में बनी सहमति</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने कनाडा से आयात होने वाले 20 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के सामान पर 50 प्रतिशत शुल्क (टैरिफ) लगाने के फैसले को फिलहाल टाल दिया है। यह फैसला दोनों देशों के बीच प्रतिबंध लागू होने से कुछ घंटे पहले अंतिम क्षणों में हुए समझौते के बाद लिया गया। ट्रंप की सोशल मीडिया मंच पर की गई इस घोषणा से आगे की बातचीत के लिए समय मिल गया है।इस कदम से फिलहाल दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण रिश्तों में और कड़वाहट आने से बच गई है। ट्रंप ने शुल्क लगाने की समयसीमा से दो घंटे से भी कम समय पहले अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट किया, ‘‘मैंने कनाडा पर लगने वाले 50 प्रतिशत शुल्क को रोक दिया है। ये कल सुबह से तीन दिनों की अवधि के लिए लागू होने वाले थे।ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि कनाडा और अमेरिका के बीच एक समझौता हो गया है।’’
ट्रंप द्वारा लगाए जाने वाले ये आयात शुल्क कनाडा से हर साल अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान के करीब पांच प्रतिशत हिस्से पर लागू होते। इनमें हॉकी स्टिक से लेकर जीभ की जांच में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की छोटी छड़ियों (टंग डिप्रेसर) तक कई तरह के उत्पाद शामिल हैं। हालांकि, इसका राजनीतिक प्रभाव आर्थिक प्रभाव से कहीं अधिक होने की संभावना थी।कनाडा ने चेतावनी दी थी कि नए शुल्क लगाए जाने की स्थिति में वह भी अपने स्तर पर शुल्क लगाकर जवाब देगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक विवाद और बढ़ सकता था। पिछले साल दोनों देशों के बीच 880 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार हुआ था। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 09:55:35 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump के आदेश पर घटी US और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास की अवधि</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिण कोरिया और अमेरिका की सेनाओं ने अमेरिका के अनुरोध पर अपने संयुक्त सैन्य अभ्यास की अवधि कम करने पर सहमति जताई है। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह घटनाक्रम अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सैन्य अभ्यास में कटौती के आदेश दिए जाने के कुछ दिनों बाद हुआ है।दोनों देशों का ग्रीष्मकालीन ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ सैन्य अभ्यास सोमवार सुबह शुरू हुआ था और इसे 11 दिनों तक चलना था लेकिन ट्रंप ने अपने रक्षा मंत्री को इसे ‘‘काफी हद तक कम’’ करने का आदेश दिया। ट्रंप ने इसके लिए उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अच्छे संबंध होने और दक्षिण कोरिया द्वारा ईरान के खिलाफ अमेरिकी युद्ध में शामिल होने से इनकार करने को कारण बताया था। दक्षिण कोरियाई सेना ने एक बयान में कहा कि अमेरिका के साथ जारी यह सैन्य अभ्यास 27 अगस्त के बजाय शुक्रवार को ही समाप्त हो जाएगा।सेना ने यह भी बताया कि दोनों सहयोगी देशों ने कुछ संयुक्त मैदानी प्रशिक्षण अभ्यासों का स्तर कम करने पर भी सहमति जताई है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप का यह कदम अमेरिका और दक्षिण कोरिया की संयुक्त सैन्य तैयारियों को नुकसान पहुंचा सकता है और अंततः दोनों देशों के दशकों पुराने गठबंधन को कमजोर कर सकता है। ये अभ्यास लंबे समय से उत्तर कोरिया के साथ तनाव का भी कारण रहे हैं।उत्तर कोरिया इन अभ्यासों की निंदा करते हुए इन्हें युद्ध की तैयारी बताता रहा है और इनके जवाब में उकसावे वाले मिसाइल परीक्षण करता रहा है। उत्तर कोरिया ने ट्रंप के इस प्रस्ताव पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, बुधवार को ही उसकी सरकारी समाचार एजेंसी ‘केसीएनए’ ने अपनी एक रिपोर्ट में अमेरिका-दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यासों को ‘‘उकसावे वाला’’ और ‘‘बेहद खतरनाक’’ बताया तथा इसमें प्रतिद्वंद्वियों की शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को पूरी तरह विफल करने का संकल्प जताया गया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 09:55:34 +0530</pubDate>
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<title>क़ुसरा में फँसे परिवारों को राहत, लेकिन ग़ाज़ा में संकट गहराया</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को बताया कि उत्तरी पश्चिमी तट के क़ुसरा गाँव में कई दिनों से घिरे फ़लस्तीनी परिवारों तक मानवीय सहायता पहुँच गई है. यूएन अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की स्थिति को सामान्य नहीं बनने दिया जाना चाहिए. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:33:10 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump ने की भारतीय चुनाव प्रणाली की तारीफ़, भारत की तर्ज पर अमेरिका में भी लागू हो &amp;apos;SAVE अमेरिका एक्ट&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राज्य अमेरिका में चुनावी प्रक्रियाओं में सुधार और अनिवार्य वोटर ID (मतदाता पहचान पत्र) लागू करने के अपने अभियान को गति देने के लिए भारत की व्यापक चुनाव प्रणाली की सराहना की है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;ट्रुथ सोशल&#039; (Truth Social) पर एक पोस्ट के जरिए ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के बयानों का संदर्भ देते हुए अमेरिका में मतदान सुरक्षा को लेकर एक नया राजनीतिक विमर्श छेड़ दिया है। ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रणाली की तारीफ़ की &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में सवाल उठाया था कि अमेरिका में बिना वैध फोटो पहचान पत्र दिखाए चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं। भारत के हालिया आम चुनावों का ज़िक्र करते हुए ट्रंप ने बताया कि देश में 646 मिलियन (64.6 करोड़) मतदाता थे, जिनमें से एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने डाक से वोट डाला। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में हर मतदाता के पास वैध फोटो पहचान पत्र होना ज़रूरी था।भारत के चुनावों के बारे में ट्रंप ने क्या कहाट्रंप ने &#039;सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी&#039; (SAVE) अमेरिका एक्ट के लिए समर्थन जुटाने के मकसद से यह तुलना की। इस एक्ट में वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए नागरिकता का सबूत देने, देश भर में वोटर ID की ज़रूरत लागू करने और डाक से वोटिंग को काफ़ी हद तक सीमित करने का प्रस्ताव है। ट्रंप ने &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर एक पोस्ट में लिखा, &quot;इस महीने की शुरुआत में, भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हमारे प्रशासन से पूछा: आप वैध फोटो ID के बिना अमेरिका में चुनाव कैसे करा सकते हैं?&quot;अमेरिकी राष्ट्रपति ने बार-बार तर्क दिया है कि SAVE अमेरिका एक्ट चुनावी धोखाधड़ी को रोकने में मदद करेगा। हालाँकि, इस प्रस्ताव को लेकर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों ही गुटों में मतभेद हैं। इस महीने की शुरुआत में, अमेरिकी सीनेट ने इस कानून को पारित करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाए बिना पाँच हफ़्ते के अवकाश (recess) के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी।अमेरिकी राजदूत ने ट्रंप के विचार का समर्थन कियाअमेरिका में इसी तरह का कानून लाने के लिए भारत की चुनाव प्रणाली का ट्रंप द्वारा ज़िक्र किए जाने का समर्थन करते हुए, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा, &quot;राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप बिल्कुल सही हैं! भारत के पिछले चुनाव में 646 मिलियन मतदाता थे और हर एक के लिए ID ज़रूरी थी। कांग्रेस को SAVE अमेरिका एक्ट पारित करना चाहिए!&quot;SAVE अमेरिका एक्ट के बारे में&#039;सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी&#039; (SAVE) एक्ट अमेरिकी चुनाव प्रणाली में बड़े बदलावों का प्रस्ताव करता है। इसके तहत संघीय चुनावों में वोट देने के लिए रजिस्टर करने वाले लोगों को वैध पहचान पत्र के साथ-साथ अमेरिकी नागरिकता का सबूत भी देना होगा।प्रस्तावित कानून डाक से वोटिंग पर सख़्त सीमाएँ भी लगाएगा, लेकिन बीमार, दिव्यांग, सेना में सेवा दे रहे या यात्रा कर रहे लोगों के लिए कुछ अपवादों की अनुमति देगा। इसके अलावा, इस बिल के तहत राज्यों को वोटर लिस्ट से उन लोगों के नाम हटाने होंगे जो अमेरिकी नागरिक नहीं हैं।व्हाइट हाउस ने इस बिल का समर्थन किया है और कहा है कि फ़ेडरल चुनावों में सिर्फ़ अमेरिकी नागरिकों को ही हिस्सा लेने की इजाज़त होनी चाहिए। प्रशासन ने भारत और ब्राज़ील जैसे देशों का उदाहरण भी दिया है, जिन्होंने वोटर की पहचान के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम का इस्तेमाल किया है। उनका तर्क है कि अमेरिका में देश-स्तर पर पहचान से जुड़ी ज़रूरतें अपेक्षाकृत कम हैं। ट्रंप ने लगातार इस कानून का बचाव किया है और कहा है कि चुनावी धोखाधड़ी को रोकने के लिए यह ज़रूरी है। अधिकृत एवं निष्पक्ष जानकारी के लिए स्रोतचुनावी नियमों, मतदाता पंजीकरण और अंतरराष्ट्रीय चुनाव प्रणालियों की प्रामाणिक जानकारी के लिए आप निम्नलिखित आधिकारिक माध्यमों का संदर्भ ले सकते हैं:भारतीय चुनाव प्रणाली एवं नियम: Election Commission of Indiaअमेरिकी मतदान नियम एवं वोटर ID कानून: USA.gov Voting and Electionsवैश्विक चुनावी अध्ययन व रिपोर्ट: International IDEA  निष्कर्ष और अंतरराष्ट्रीय संदर्भव्हाइट हाउस और ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि भारत और ब्राजील जैसे विशाल लोकतंत्रों ने बायोमेट्रिक और फोटो वोटर ID प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू किया है। इस विमर्श ने अमेरिका में चुनावी पारदर्शिता बनाम मताधिकार की सुगमता को लेकर चल रही बहस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया है।  Stay updated with International
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump ने भारत के चुनावी मॉडल की तारीफ कर America में फोटो ID अनिवार्य करने की वकालत की</title>
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<description><![CDATA[ सागर कुलकर्णी
वाशिंगटन, 18 अगस्त अमेरिका में कड़े चुनावी कानूनों की पैरवी करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चुनाव प्रणाली की सराहना की और कहा कि भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी चुनावों में मतदाता की पहचान की कमी को लेकर सवाल उठाया है। ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा कि भारत में हाल में हुए आम चुनावों में 64.6 करोड़ से अधिक लोगों ने मतदान किया और एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने डाक मतपत्र के जरिए मतदान किया। ट्रंप ने कहा कि भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने इस महीने की शुरुआत में उनके प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत की थी और पूछा था कि अमेरिका में वैध फोटो पहचान पत्र के बिना चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये टिप्पणियां ‘सेव अमेरिका एक्ट’ के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से कीं। इस कानून के तहत अमेरिकियों को मतदान के लिए पंजीकरण कराते समय नागरिकता का प्रमाण देना अनिवार्य होगा, पूरे देश में मतदाता पहचान पत्र की आवश्यकता लागू की जाएगी और डाक के जरिए मतदान को काफी हद तक सीमित किया जाएगा। ट्रंप ने पोस्ट किया, ‘‘इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हमारे प्रशासन से पूछा - वैध फोटो पहचान पत्र के बिना अमेरिका में चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं?’’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘भारत के पिछले चुनाव में 64.6 करोड़ मतदाता थे।एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने डाक के जरिए मतदान किया और प्रत्येक मतदाता के पास एक वैध फोटो पहचान दस्तावेज होना जरूरी था।’’
उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘हमें अब ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पारित करने की जरूरत है।’’
ट्रंप ‘सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी’ (सेव) अमेरिका एक्ट को पारित कराने पर लगातार जोर दे रहे हैं। उनका दावा है कि यह कदम चुनावी धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में मदद करेगा। हालांकि, इस मुद्दे पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों में मतभेद हैं।अमेरिकी सीनेट ने इस महीने की शुरुआत में पांच सप्ताह के अवकाश के लिए स्थगित होने से पहले इस कानून को पारित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ की वेबसाइट पर इस एक्ट से संबंधित एक तथ्य-पत्र में यह भी कहा गया है कि भारत और ब्राजील पहले ही मतदाता पहचान पत्रों को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ चुके हैं, जबकि अमेरिका में मतदाता स्वयं द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर अपनी पात्रता की पुष्टि करते हैं। इस विधेयक में पुरुषों को महिलाओं के खेलों में प्रतिस्पर्धा करने से स्थायी रूप से प्रतिबंधित करने और बच्चों के लिए ट्रांसजेंडर म्यूटिलेशन सर्जरी (लिंग परिवर्तन संबंधी शल्य चिकित्सा) पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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<title>Hakainde Hichilema दोबारा Zambia के राष्ट्रपति बने, 61.4 प्रतिशत वोट पाकर दर्ज की जीत</title>
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<description><![CDATA[ जाम्बिया के निर्वाचन आयोग ने मंगलवार सुबह घोषणा की कि राष्ट्रपति हाकाइंडे हिचिलेमा पांच साल के दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से निर्वाचित हुए हैं। हिचिलेमा को गत बृहस्पतिवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव का स्पष्ट विजेता घोषित किया गया। इसके लिए किसी ‘रन-ऑफ’ (दोबारा मतदान) की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि मतदान के दौरान डाले गए 50 लाख वोट में से 61.4 प्रतिशत वोट हिचिलेमा के पक्ष में पड़े।इस चुनाव पर सबकी नजरें टिकी थीं। चुनाव में पिछले शुक्रवार को मतों की गिनती रोक दी गई थी और कुछ घंटों बाद कड़ी सुरक्षा के बीच इसे फिर से शुरू किया गया क्योंकि निर्वाचन आयोग ने बताया था कि कुछ मतदान केंद्र के अधिकारियों पर हमले हुए थे और मत पत्र चोरी हो गए थे। सरकार ने यह भी पुष्टि की कि चुनाव की रात विपक्ष के कई बड़े नेताओं को गिरफ्तार किया गया था; पुलिस ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने का आरोप लगाया था।निर्वाचन आयोग के अनुसार, हिचिलेमा ने 29,65,326 वोट हासिल किए और उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी विपक्षी नेता ब्रायन मुंडुबिले को 18,56,217 वोट मिले जो कुल मतों का लगभग 38 प्रतिशत था। आयोग की अध्यक्ष म्वांगला जालौमिस ने कहा, ‘‘मैं 18 अगस्त, 2026 को हिचिलेमा हाकाइंडे एस को जाम्बिया गणराज्य का नवनिर्वाचित राष्ट्रपति घोषित करती हूं।’’
हिचिलेमा ने मंगलवार को जारी एक बयान में नतीजों का स्वागत किया और दोबारा चुने जाने के लिए जाम्बिया के लोगों का धन्यवाद किया, साथ ही उन लोगों तक भी अपनी बात पहुंचाई जिन्होंने विपक्ष को वोट दिया था। उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘जिन नागरिकों ने हमारे विरोधियों के विचारों को पसंद किया, हम उनके लिए भी काम करना जारी रखेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जाम्बिया के हर नागरिक को उस विकास का लाभ मिले जो हम कर रहे हैं।’’
विपक्षी नेता मुंडुबिले की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई।मुंडुबिले ने पहले कहा था कि पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा था। इसे उन्होंने अपने ऊपर जानलेवा हमला करार दिया था। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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<title>Texas के फ्रिस्को में 80वां Independence Day मना, महावाणिज्यदूत मंजूनाथ हुए शामिल</title>
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<description><![CDATA[ सीमा हाकू काचरू
ह्यूस्टन (अमेरिका), 18 अगस्त उत्तर टेक्सास में भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, देशभक्ति से ओत-प्रोत संगीत और लेजर शो के साथ मनाया। इस अवसर पर फ्रिस्को में भारत के महावाणिज्यदूत डी. सी. मंजूनाथ भी शामिल हुए। यह कार्यक्रम शनिवार को फ्रिस्को स्थित कोमेरिका सेंटर में आयोजित 49वें वार्षिक आनंद बाजार के साथ हुआ।आनंद बाजार, इंडिया एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ टेक्सास द्वारा आयोजित एक प्रमुख सांस्कृतिक और खान-पान उत्सव है। ह्यूस्टन स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “महावाणिज्यदूत ने सभा को संबोधित किया और भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में भारतीय प्रवासी समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।”
मंजूनाथ इससे पहले ह्यूस्टन स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व कर चुके हैं।उत्तर टेक्सास में आयोजित इस समारोह में फ्रिस्को के मेयर मार्क हिल, नगर परिषद के सदस्य, स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधि, पूर्व सैनिक तथा क्षेत्र के विभिन्न भारतीय-अमेरिकी संगठनों के नेता शामिल हुए। समारोह में पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन, शास्त्रीय संगीत प्रस्तुतियां और ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। तिरंगे से की गई सजावट, पारंपरिक नृत्य, पूर्व सैनिकों के सम्मान में एक इनडोर परेड और भव्य लेजर शो ने उत्सव के माहौल को और जीवंत बना दिया।पश्चिमी तट पर सैन फ्रांसिस्को से लेकर पूर्वी तट पर न्यूयॉर्क तक, पूरे अमेरिका में भारत का स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया गया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Texas, के, फ्रिस्को, में, 80वां, Independence, Day, मना, महावाणिज्यदूत, मंजूनाथ, हुए, शामिल</media:keywords>
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<title>Philippines में छात्र ने सहपाठी की गोली मारकर हत्या की, खुद को भी गोली मारी</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिणी फिलीपीन में एक विश्वविद्यालय परिसर के अंदर बने माध्यमिक स्कूल में दो बंदूकें लेकर पहुंचे छात्र ने अपने ही एक सहपाठी की गोली मारकर हत्या कर दी और फिर खुद को भी गोली मार ली। एक अधिकारी और पुलिस ने यह जानकारी दी। जाम्बोआंगा शहर के मेयर खाइमर अदन ओलासो ने कहा कि संदिग्ध ने जाम्बोआंगा विश्वविद्यालय परिसर में स्थित माध्यमिक स्कूल में घटना की ‘लाइव स्ट्रीमिंग’ करने के लिए अपने शरीर पर बॉडी कैमरा पहना था।उन्होंने बताया कि इस घटना में दो अन्य लोग घायल हुए हैं। ओलासो ने ‘डीजेडबीबी’ रेडियो नेटवर्क को बताया कि संदिग्ध ने शुरू में एक शिक्षक पर गोली चलाई थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि शिक्षक को गोली लगी है या नहीं। इसके बाद उसने अपने ही एक सहपाठी को गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई।फिर उसने खुद को भी गोली मार ली। फिलीपीन में हुई यह गोलीबारी थाईलैंड में एक स्कूल में हुई गोलीबारी की घटना के दो सप्ताह से भी कम समय बाद हुई है। बैंकॉक के पास नोंथाबुरी प्रांत में 14 साल के लड़के द्वारा अपने दादा-दादी, स्कूल के पांच कर्मचारियों और 12 साल की लड़की की हत्या किए जाने की घटना के बाद थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देश में बंदूकों पर नियंत्रण कड़ा करने के लिए कदम उठाए हैं।एशिया में थाईलैंड में बंदूक रखने की दर पाकिस्तान के बाद दूसरे स्थान पर है और यह उसके दक्षिण-पूर्व एशियाई पड़ोसी देशों की तुलना में काफी अधिक है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
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<title>Prabhasakshi NewsRoom: दोस्त Kim Jong Un के लिए Trump ने South Korea को दे दिया झटका, आश्चर्य में पड़ी दुनिया</title>
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<description><![CDATA[ क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दक्षिण कोरिया को दरकिनार करते हुए उत्तर कोरिया के साथ रिश्ते बढ़ाने की राह पर हैं? क्या अमेरिका के पुराने सहयोगी देशों से रिश्ते बिगाड़ने या उन्हें दबाव में लाने की ट्रंप की नीति अब दक्षिण कोरिया तक पहुंच गई है? यह सवाल ट्रंप के ताजा फैसले के कारण उठ रहे हैं। हम आपको बता दें कि ट्रंप ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास उल्ची फ्रीडम शील्ड का पैमाना घटाने का आदेश दिया है। ट्रंप ने अपने इस फैसले की एक अहम वजह यह बताई है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में सहयोग करने से दक्षिण कोरिया ने इंकार कर दिया था।ट्रंप के मुताबिक उन्होंने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्यांग से ईरान के मामले में अमेरिका की मदद करने को कहा था। ली ने कथित तौर पर इससे इंकार करते हुए कहा कि सियोल ईरान संघर्ष में शामिल नहीं होना चाहता। इसके बाद ट्रंप ने सवाल उठाया कि जब अमेरिका दक्षिण कोरिया की सुरक्षा के लिए करीब 39,000 सैनिक तैनात रखता है और अरबों डॉलर खर्च करता है, तो फिर दक्षिण कोरिया अमेरिका की सैन्य कार्रवाई में मदद क्यों नहीं करता। ट्रंप ने साफ संकेत दिया कि उनकी नजर में गठबंधन केवल सुरक्षा प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि लेन-देन का रिश्ता भी है।इसे भी पढ़ें: Donald Trump ने भारत के चुनावी मॉडल की तारीफ कर America में फोटो ID अनिवार्य करने की वकालत कीयही ट्रंप की इस पूरी रणनीति की कुंजी है। उनका तर्क सरल है कि अमेरिका अपने सहयोगियों की रक्षा पर भारी रकम खर्च करता है, इसलिए सहयोगियों को भी अमेरिकी रणनीतिक अभियानों में ज्यादा योगदान देना चाहिए। ट्रंप ने इसी तर्क को NATO पर भी लागू किया है और कहा है कि अमेरिका वहां भी सैकड़ों अरब डॉलर खर्च करता है। यानी वाशिंगटन अब सिर्फ यह नहीं पूछ रहा कि सहयोगी अमेरिका से क्या हासिल कर रहे हैं, बल्कि यह भी पूछ रहा है कि वे अमेरिका के लिए क्या कर रहे हैं।लेकिन दक्षिण कोरिया के मामले में समस्या कहीं ज्यादा गंभीर है। उल्ची फ्रीडम शील्ड कोई सामान्य सैन्य अभ्यास नहीं है। यह उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल खतरे के खिलाफ अमेरिका और दक्षिण कोरिया की संयुक्त प्रतिरोधक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्षों से वाशिंगटन इसे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा की धुरी तथा दक्षिण कोरिया की रक्षा के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दिखाने का माध्यम मानता रहा है। ऐसे में अभ्यास को अचानक छोटा करना सिर्फ सैन्य कार्यक्रम में कटौती नहीं, बल्कि गठबंधन के राजनीतिक संदेश को भी कमजोर करता है।यहीं ट्रंप का उत्तर कोरिया वाला रुख सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है। ट्रंप ने कहा कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के साथ उनके “बहुत अच्छे संबंध” हैं और उन्हें ऐसे सैन्य अभ्यास पसंद नहीं हैं जिन्हें प्योंगयांग शत्रुतापूर्ण मानता है। उन्होंने अभ्यासों को महंगा बताया और कहा कि वह उत्तर कोरिया को अनुचित और शत्रुतापूर्ण संकेत देते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने किम की तस्वीर के साथ सोशल मीडिया पर ऐसा संदेश भी पोस्ट किया, जिसका अर्थ था— “हम दोनों के बीच सब ठीक है न?”इसका एक संभावित रणनीतिक कारण उत्तर कोरिया को फिर बातचीत की मेज पर लाना हो सकता है। 2019 में टूट चुकी परमाणु वार्ता को दोबारा शुरू कराने के लिए ट्रंप शायद किम को सैन्य दबाव कम होने का संकेत देना चाहते हैं। दक्षिण कोरिया ने भी उम्मीद जताई है कि ट्रंप और किम के व्यक्तिगत संबंधों के जरिए कोरियाई प्रायद्वीप पर बातचीत फिर शुरू हो सकती है। लेकिन समस्या यह है कि किम अब पहले से कहीं अधिक परमाणु हथियारों, मिसाइल परीक्षणों तथा रूस और चीन के साथ सहयोग पर निर्भर है और वह अमेरिका की परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग को स्वीकार करने के मूड में नहीं दिखता।इस फैसले का सबसे बड़ा सामरिक जोखिम यही है कि अमेरिका उत्तर कोरिया से संवाद का दरवाजा खोलने के लिए दक्षिण कोरिया की सुरक्षा-आश्वस्ति को कमजोर न कर दे। अमेरिकी विशेषज्ञों ने चेताया है कि इससे दक्षिण कोरिया में यह धारणा मजबूत हो सकती है कि अपनी सुरक्षा की गारंटी के लिए उसे खुद परमाणु हथियार विकसित करने पर विचार करना चाहिए। जापान और ताइवान जैसे अमेरिकी सहयोगियों में भी भरोसे का संकट पैदा हो सकता है, जबकि चीन और उत्तर कोरिया को रणनीतिक फायदा मिल सकता है।हालांकि इसे अभी अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन के अंत के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। अमेरिकी सैन्य अड्डे और मूल गठबंधन संरचना अभी कायम हैं। साथ ही ट्रंप का यह कदम स्थायी नीति परिवर्तन है या उनका एक और अप्रत्याशित राजनीतिक-सामरिक संदेश, यह अभी स्पष्ट नहीं है।फिर भी संदेश बेहद गंभीर है। ट्रंप चाहते हैं कि सहयोगी अपनी रक्षा पर ज्यादा खर्च करें और अमेरिका पर कम निर्भर रहें। देखा जाये तो ट्रंप की यह मांग नई नहीं है, लेकिन जब इस मांग को अपमान, धमकी और अचानक सैन्य फैसलों के साथ जोड़ा जाता है, तो गठबंधन की सबसे महत्वपूर्ण पूंजी यानि विश्वास कमजोर होने लगता है। दक्षिण कोरिया के लिए अब मुद्दा यह नहीं है कि ट्रंप ने उसे “धोखा” दिया या नहीं। बड़ा विषय यह है कि क्या सियोल अब अमेरिकी सुरक्षा छाते पर पहले जितना भरोसा कर सकता है। और अगर इस सवाल का जवाब धीरे-धीरे “नहीं” होने लगा, तो इसका असर सिर्फ कोरियाई प्रायद्वीप पर नहीं, बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत शक्ति संतुलन पर पड़ेगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:02 +0530</pubDate>
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<title>Zamboanga, Philippines में छात्र ने सहपाठी को गोली मारी, खुद की भी जान ली</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिणी फिलीपीन में एक विश्वविद्यालय परिसर के अंदर बने माध्यमिक स्कूल में दो बंदूकें लेकर पहुंचे छात्र ने अपने ही एक सहपाठी की गोली मारकर हत्या कर दी और फिर खुद को भी गोली मार ली। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि घटना के बाद स्कूल से सैकड़ों छात्रों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।जाम्बोआंगा शहर के मेयर खाइमर अदन ओलासो ने कहा कि संदिग्ध ने जाम्बोआंगा विश्वविद्यालय परिसर में स्थित माध्यमिक स्कूल में घटना की ‘लाइव स्ट्रीमिंग’ करने के लिए अपने शरीर पर बॉडी कैमरा पहन रखा था। उन्होंने बताया कि इस घटना में दो अन्य लोग घायल हुए हैं। ओलासो ने ‘डीजेडबीबी’ रेडियो नेटवर्क के अनुसार, संदिग्ध ने शुरू में एक शिक्षक पर गोली चलाई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि शिक्षक को गोली लगी या नहीं।इसके बाद उसने अपने ही एक सहपाठी को गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। फिर उसने खुद को भी गोली मार ली। गोलीबारी की आवाज सुनाई देने के बाद सैकड़ों छात्रों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।यह घटना माध्यमिक स्कूल की इमारत में हुई। संबंधित परिसर बंदरगाह शहर जाम्बोआंगा में स्थित कैथोलिक विश्वविद्यालय के उस बड़े परिसर से अलग है जहां उसके महाविद्यालय और व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। गोलीबारी के कुछ घंटों बाद पुलिस ने कहा कि हालात काबू में हैं।इसने छात्रों के माता-पिता और अभिभावकों से शांत रहने तथा बच्चों को ले जाने के लिए स्कूल की सलाह और निर्देशों का पालन करने को कहा। पुलिस प्रमुख जोस मेलेंसियो नार्टाटेज जूनियर ने कहा, ‘‘अधिकारी फिलहाल घटना के कारणों और परिस्थितियों का पता लगा रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि पुलिस जरूरत के मुताबिक सत्यापित जानकारी उपलब्ध कराएगी और लोगों से अपुष्ट खबरें, तस्वीरें या वीडियो साझा करने से बचने की अपील की जिनसे बेवजह चिंता पैदा हो सकती है।’’
नार्टाटेज ने कहा, ‘‘हम स्कूल प्रशासन, माता-पिता, अभिभावकों और समुदाय का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने अधिकारियों की जांच के दौरान धैर्य, सहयोग और समझदारी का परिचय दिया।’’
गोलीबारी की यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पुलिस ने भरोसा दिलाया था कि देश भर के स्कूलों में सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। इससे पहले जून में सेंट्रल टैकलोबन शहर में हुई गोलीबारी में माध्यमिक स्कूल के तीन छात्रों की मौत हो गई थी और कम से कम 20 लोग घायल हो गए थे।पुलिस ने उस गोलीबारी को अंजाम देने के आरोप में 14 और 15 साल के दो छात्रों को गिरफ्तार किया था। फिलीपीन में बंदूक के इस्तेमाल से जुड़े अपराध की घटनाएं आम हैं। इसकी एक वजह बिना लाइसेंस वाले हथियारों की बढ़ती संख्या है, हालांकि स्कूलों में गोलीबारी की घटनाएं अपेक्षाकृत कम होती हैं।फिलीपीन में हुई यह गोलीबारी थाईलैंड में एक स्कूल में हुई गोलीबारी की घटना के दो सप्ताह से भी कम समय बाद हुई है। बैंकॉक के पास नोंथाबुरी प्रांत में 14 साल के लड़के द्वारा अपने दादा-दादी, स्कूल के पांच कर्मचारियों और 12 साल की लड़की की हत्या किए जाने की घटना के बाद थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देश में बंदूकों पर नियंत्रण कड़ा करने के लिए कदम उठाए हैं। एशिया में थाईलैंड में बंदूक रखने की दर पाकिस्तान के बाद दूसरे स्थान पर है और यह उसके दक्षिण-पूर्व एशियाई पड़ोसी देशों की तुलना में काफी अधिक है। ]]></description>
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<title>Teesta water dispute पर Bangladesh भारत के साथ अपने संबंध खराब नहीं करना चाहता</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि उनका देश लंबे समय से अटके तीस्ता जल बंटवारा समझौते को लेकर भारत के साथ अपने मैत्रीपूर्ण संबंधों को खराब नहीं करना चाहता। साथ ही उन्होंने नयी दिल्ली से आग्रह किया कि वह अपने हितों के साथ-साथ ढाका के हितों को भी ध्यान में रखे। जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने समाचार पोर्टल ‘टीबीएसन्यूज डॉट नेट’ द्वारा यहां आयोजित एक संगोष्ठी में कहा, ‘‘पड़ोसी देश एक मित्र देश है।उन्हें यह सोचना होगा कि जिस तरह उनके अपने हित हैं, उसी तरह हमारे भी हित हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘एक मित्र को दूसरे मित्र के हितों की रक्षा करनी चाहिए। हम कभी नहीं चाहते कि उनके साथ हमारे मैत्रीपूर्ण संबंध खराब हों।’’
अनी की यह टिप्पणी रविवार को ऐसे समय आई जब बांग्लादेश ने तीस्ता नदी के मुद्दे को हल करने के लिए नए सिरे से प्रयास तेज किए हैं। इसमें चीन के सहयोग से प्रस्तावित ‘तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना’ भी शामिल है।ढाका इस परियोजना के माध्यम से देश के उत्तरी जिलों में बार-बार आने वाली बाढ़, नदी कटाव और सूखे के मौसम में पानी की कमी जैसी समस्याओं से निपटना चाहता है। उन्होंने बताया कि फरवरी में हुए चुनाव के बाद सरकार ने प्रस्तावित तीस्ता परियोजना को लेकर विशेषज्ञों की राय जानने के लिए कई संगोष्ठी आयोजित की हैं और विचार-विमर्श किए हैं। अनी ने कहा कि इन सुझावों के आधार पर तैयार विस्तृत अध्ययन से सरकार को परियोजना के संबंध में ठोस कदम उठाने में मदद मिलेगी।यह संगोष्ठी ‘तीस्ता नदी का सतत प्रबंधन’ विषय पर जल संसाधन मंत्रालय और बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गयी थी। मंत्री ने इस परियोजना को एक बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि उत्तर बांग्लादेश के पांच-छह जिलों के लोगों को इससे काफी उम्मीदें हैं। ये लोग वर्षों से नदी कटाव और अन्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं।उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम इसे लागू करने में विफल रहते हैं, तो इन क्षेत्रों के परिवारों को होने वाला नुकसान और उनकी समस्याएं लगातार बढ़ती रहेंगी। हमें किसी भी तरह इस चुनौती से पार पाना होगा।’’
तीस्ता का मुद्दा दशकों से भारत-बांग्लादेश जल सहयोग में एक प्रमुख विवाद का विषय बना हुआ है। तीस्ता नदी हिमालय से निकलती है और सिक्किम तथा पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है।वहां यह आगे चलकर जमुना नदी में मिलती है, जिसे बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र के नाम से जाना जाता है। उत्तरी बांग्लादेश में कृषि और लोगों की आजीविका के लिए यह नदी बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं, पश्चिम बंगाल में सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए भी इसका विशेष महत्व है।नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में कई जलविद्युत परियोजनाएं हैं और उत्तर बंगाल के करीब छह जिले इसके पानी पर निर्भर हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता के पानी के बंटवारे को लेकर 1980 के दशक से बातचीत होती रही है। वर्ष 1983 में हुए एक अंतरिम समझौते के तहत भारत को 39 प्रतिशत और बांग्लादेश को 36 प्रतिशत पानी देने का प्रावधान था, जबकि 25 प्रतिशत पानी को आवंटित नहीं किया गया था।इसके बाद भी बातचीत जारी रही, लेकिन कोई व्यापक दीर्घकालिक समझौता नहीं हो सका। वर्ष 2011 में एक अंतरिम समझौते का मसौदा तैयार किया गया था, जिसमें सूखे के मौसम में पानी के बंटवारे का फार्मूला प्रस्तावित था। हालांकि, पश्चिम बंगाल सरकार के विरोध के कारण इस पर हस्ताक्षर नहीं हो सके।पश्चिम बंगाल सरकार को आशंका थी कि इससे राज्य में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। अनी ने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान नियमित रूप से इस परियोजना पर चर्चा करते हैं और संबंधित विभागों तथा अंतर-मंत्रालयी बैठकों में इसकी प्रगति की समीक्षा की जाती है। उन्होंने कहा कि एक समझौते की ‘‘तत्काल आवश्यकता’’ है।उन्होंने कहा, ‘‘इसे तीस्ता संधि कहें, तीस्ता मास्टर प्लान कहें या इस परियोजना को लागू करने के लिए जो भी जरूरी हो, हम इसके कार्यान्वयन की दिशा में आगे बढ़ेंगे।’’
जून में चीन की आधिकारिक यात्रा के दौरान रहमान ने चीनी नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय बातचीत की थी। इस दौरान बीजिंग ने विवादित तीस्ता बहाली परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता का अध्ययन जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई थी। तीस्ता परियोजना में चीन को शामिल करने के बांग्लादेश के फैसले ने इस मुद्दे को रणनीतिक आयाम भी दे दिया है।भारत के लिए उत्तरी बांग्लादेश में चीन की बढ़ती मौजूदगी संवेदनशील विषय है, क्योंकि यह क्षेत्र सिलीगुड़ी गलियारे के करीब है। यह संकरा भू-भाग भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। भारत का कहना है कि तीस्ता मुद्दे का समाधान पश्चिम बंगाल समेत सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत के माध्यम से किया जाना चाहिए।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जुलाई में कहा था कि प्रस्तावित तीस्ता नदी परियोजना को लेकर भारत का पक्ष बांग्लादेश को पहले ही बता दिया गया है। उन्होंने कहा था कि भारत तीस्ता मुद्दे पर अपने ‘‘समग्र दृष्टिकोण’’ में इससे जुड़े ‘‘सभी घटनाक्रमों’’ को ध्यान में रखेगा। तीस्ता का मुद्दा गंगा जल बंटवारा संधि से अलग है।भारत और बांग्लादेश ने 1996 में गंगा जल बंटवारे को लेकर 30 वर्ष के लिए समझौता किया था, जिसकी अवधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है। भारत और बांग्लादेश की सीमाओं से होकर गुजरने वाली 54 नदिया हैं और जल संबंधी मुद्दों का समाधान दोनों देश संयुक्त नदी आयोग के माध्यम से करते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:01 +0530</pubDate>
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<title>Andy Burnham को Donald Trump की सहयोगी सूसी विल्स के नाम से मिले फर्जी संदेश</title>
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<description><![CDATA[ अदिति खन्ना
लंदन, 18 अगस्त ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम को कथित तौर पर एक ऐसे व्यक्ति से संदेशों का आदान-प्रदान करने के लिए गुमराह किया गया, जिसने खुद को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का करीबी सहयोगी बताया था। मीडिया में आई एक खबर में यह जानकारी दी गई। अमेरिकी डिजिटल समाचारपत्र ‘पॉलिटिको’ ने बताया कि बर्नहैम ने व्हाइट हाउस की ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ सूसी विल्स होने का दावा करने वाले व्यक्ति से बातचीत की, लेकिन बाद में उन्हें उस व्यक्ति की पहचान पर संदेह हुआ।ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री ने 20 जुलाई को 10 डाउनिंग स्ट्रीट का कार्यभार संभाला था और बताया जाता है कि उन्होंने अपने नए पद की जिम्मेदारी संभालने से पहले तथा उसके बाद कुछ दिन तक इन फर्जी संदेशों का जवाब दिया। डाउनिंग स्ट्रीट ने कहा, ‘‘हम राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर टिप्पणी नहीं करते।’’
हालांकि, समाचारपत्र ने मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के हवाले से सोमवार को बताया कि ‘‘कुछ संदेशों’’ का आदान-प्रदान हुआ था, लेकिन उनका ‘‘कोई महत्व नहीं’’ था। व्यक्ति ने कहा कि संदेशों के संदिग्ध होने का पता चलते ही इसकी सूचना ‘‘तुरंत’’ संबंधित अधिकारियों को दे दी गई थी।रिपोर्ट के अनुसार, बर्नहैम और विल्स होने का दावा करने वाले व्यक्ति के बीच संपर्क केवल संदेशों तक सीमित रहा और दोनों के बीच फोन पर कोई बातचीत नहीं हुई। ‘पॉलिटिको’ ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि ब्रिटिश दूतावास इस घटना को लेकर इतना चिंतित था कि उसने यह मामला व्हाइट हाउस के समक्ष उठाया। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘इस घटना का ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ के उपकरणों के हैक होने से कोई संबंध नहीं है।’’
पिछले साल व्हाइट हाउस और संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) ने उस घटना की जांच शुरू की थी, जिसमें अमेरिकी सीनेटरों, गवर्नर और कारोबारी अधिकारियों को एक ऐसे व्यक्ति की ओर से संदेश तथा फोन आया, जो ट्रंप के कार्यालय में ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ होने का दावा कर रहा था।‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने उस समय खबर दी थी कि विल्स ने अपने सहयोगियों को बताया था कि उनके मोबाइल फोन के संपर्क हैक कर लिए गए थे। उस समय ट्रंप ने कहा था, ‘‘कोई सूसी की नकल नहीं कर सकता। सूसी केवल एक है।’’
ट्रंप की करीबी सहयोगी विल्स को 2024 में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े एक साइबर जासूसी समूह ने भी निशाना बनाया था। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:01 +0530</pubDate>
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<title>Russia में सेना&#45;हथियार उतारते ही किम जोंग के आगे गिड़गिड़ाए ट्रंप,  NATO देशों के बीच खलबली मची</title>
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<description><![CDATA[ जब से उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग ने रूस यूक्रेन युद्ध में धमाकेदार एंट्री करते हुए रूस का खुलकर समर्थन किया है तब से ही दुनिया में एक नई हलचल पैदा हो गई है। क्योंकि किम जोंग की एंट्री मतलब अब यह युद्ध किस ओर जाएगा किसी को नहीं पता। जो अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन समेत कई नाटो देश यूक्रेन को लगातार भारी मात्रा में घातक हथियार भेज रहे थे। अब वो किम जोंग की ओर से रूस को मिलने वाले सपोर्ट से परेशान दिख रहे हैं। खासकर जब से किम जोंग उन ने रूस में 500 सैनिक तैनात करने के साथ ही घातक मिसाइलें देने का फैसला लिया है। उसे तो यूक्रेन ही नहीं बल्कि ट्रंप भी बुरी तरह से घबरा गए हैं। नाटो के देशों के बीच खलबली मची हुई है। क्योंकि किम जोंग से पंगा लेने का मतलब कुछ भी हो सकता है। आए दिन मिसाइलों का परीक्षण करते हुए किम जोंग किस तरह से अमेरिका को परमाणु हमले की धमकियां देते रहते हैं वह तो आपको पता ही होगा। इसीलिए अब ट्रंप भी टेंशन में है कि अब किम जोंग जंग का रूप किस ओर मोड़ेंगे किसी को नहीं पता। इसे भी पढ़ें: Donald Trump ने भारत के चुनावी मॉडल की तारीफ कर America में फोटो ID अनिवार्य करने की वकालत कीजो ट्रंप उत्तर कोरिया को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करते थे। अब उन्होंने कुछ ऐसा किया है जो यह साफ करता है कि अब उत्तर कोरिया को लेकर ट्रंप के सुर बदल गए हैं। दरअसल ट्रंप ने एक तस्वीर शेयर की है जिसमें वो उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उनके साथ नजर आ रहे हैं। अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच लंबे समय से तनाव रहा है। दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों को लेकर कई बार टकराव की स्थिति बनी है। लेकिन अब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने उत्तर कोरिया के नेता किंग जोंग के साथ अपने रिश्तों को लेकर ऐसा बयान दिया है जिसने दुनिया को चौंका दिया है। तस्वीर पर ट्रंप ने कहा कि भले ही उनकी और किंग जोंग की तस्वीर में दोनों के चेहरे सख्त नजर आ रहे हो लेकिन असल में दोनों के बीच रिश्ते अच्छे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लिखते हुए कहा कि किम जोंग उन और मैं बहुत अच्छे मिलते हैं। ट्रंप ने जिस तस्वीर को शेयर किया है, वह तब की है जब दोनों नेता 2018 में सिंगापुर में हुई अपनी पहली मुलाकात के दौरान साथ चलते नजर आए थे। इसे भी पढ़ें: Gyanesh Kumar की तारीफ कर Donald Trump ने भारत में विपक्षी दलों की &#039;बेचैनी&#039; और बढ़ा दी हैखास बात यह है कि ट्रंप ने यही तस्वीर जून 2026 में भी शेयर की थी। लेकिन उस समय उन्होंने इसके साथ कोई टिप्पणी नहीं की थी। किम जोंग के साथ मुलाकात ट्रंप के पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान तीन बार हुई थी। जून 2018 में सिंगापुर में हुई बैठक को ऐतिहासिक माना गया था क्योंकि यह पहली बार था जब किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति और उत्तर कोरिया के नेता की आमने-सामने मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात के बाद उम्मीद जगी थी कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा और उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियारों को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। हालांकि यह उम्मीद ज्यादा समय तक कायम नहीं रही। 2019 में वियतनाम में ट्रंप और किम जोंग की दूसरी बड़ी बैठक हुई। लेकिन दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम और उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंधों को लेकर सहमति नहीं बन सकी। इसके बावजूद ट्रंप ने कई बार संकेत दिया कि वह किम जोंग उनके साथ दोबारा बातचीत शुरू करने के लिए तैयार हैं। इसे भी पढ़ें: Andy Burnham को Donald Trump की सहयोगी सूसी विल्स के नाम से मिले फर्जी संदेशअक्टूबर 2025 में उन्होंने कहा था कि वह उत्तर कोरियाई नेता से फिर मिलना पसंद करेंगे। उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियारों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। कुल मिलाकर साफ है कि किम जोंग को लेकर ट्रंप के तेवर बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं। वह भी ऐसे समय में जब उत्तर कोरियाई तानाशाह हर तरह से रूस का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि किम जोंग का क्या रिएक्शन सामने आता है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:00 +0530</pubDate>
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<title>China को छोड़ पुतिन ने भारत को चुना पहला पार्टनर देश, हिला अमेरिका!</title>
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<description><![CDATA[ आज जब पूरी दुनिया एक तरफ खड़ी है और रूस दूसरी तरफ खड़ा है तब भारत ने जो किया उसने पूरी दुनिया की कूटनीति के सिद्धांतों को हिला कर रख दिया। अमेरिका ने प्रतिबंधों का जाल बिछाया। यूरोप ने आंखें दिखाई और डॉलर को हथियार बनाया गया ताकि रुपए को दुनिया के नक्शे से आर्थिक रूप से मिटाया जा सके। लेकिन मॉस्को से जो खबर आई है वह केवल एक व्यापारिक खबर नहीं होने वाली है। वह भारत की संप्रभुता का विजय घोष है। रूस ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है साल 2026 के रशियन एनर्जी वीक यानी आरईडब्ल्यू में कि भारत पहला आधिकारिक भागीदार देश बन गया है उसका। यह दर्जा आज तक किसी को नहीं मिला। चीन को भी नहीं मिला है। दरअसल मॉस्को का मोनेज सेंट्रल एग्बिशन हॉल पूरी दुनिया के लिए शक्ति का केंद्र बन चुका है। 100 देशों के 7000 डेलीगेट्स वहां मौजूद थे। लेकिन सबकी निगाहें केवल एक तिरंगे पर होगी। रूसी सरकार के बयान के अनुसार भारत इस फोरम का स्टार पार्टनर है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री यानी कि एफआईपीआई की अगुवाई में भारत की आठ सबसे बड़ी महारत्न और नवरत्न कंपनियां वहां भारत का झंडा गाड़ रही हैं। इसे भी पढ़ें: Russia ने Ukraine की Naftogaz कंपनी पर 300 बार किए हमले, ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसानयह प्रदर्शनी केवल तेल दिखाने के लिए नहीं था। यह दुनिया को यह बताने के लिए कि भारत अब रूस के ऊर्जा साम्राज्य का हिस्सेदार बन चुका है। और रूस का ऐलान भी सुनिए। उप प्रधानमंत्री एलेक्जेंडर नोवाक का यह कहना कि रूस भारत में अपना डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बनाना चाहता है। अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चेतावनी है। जुलाई 2026 के आंकड़े किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी है। भारत ने रूस से 2.8 मिलियन बैरल कच्चा तेल हर दिन खरीदा। यह भारत की कुल ऊर्जा जरूरत का 55.5% है। अब आप खुद कल्पना कीजिए यूक्रेन युद्ध से पहले यह हिस्सा 1% से भी कम था। यकीन मानिए रिपोर्ट्स देखिए। अमेरिका ने प्राइस कैप लगाया ताकि रूस को $60 से ज्यादा कीमत ना मिले। लेकिन भारत ने अपनी चतुराई दिखाई अपने दोस्त के लिए और कूटनीति से अमेरिका के उस कैप की धज्जियां उड़ा दिए।इसे भी पढ़ें: Russia में सेना-हथियार उतारते ही किम जोंग के आगे गिड़गिड़ाए ट्रंप,  NATO देशों के बीच खलबली मचीभारत ने ना केवल सस्ता तेल खरीदा बल्कि उसे रिफाइन करके यूरोप तक पहुंचा दिया। और आज हमारा दोस्त पेट्रोल जब मांगता है रूस तो भारत फटाक से दे देता है। यानी जिस रूस पर बैन लगे प्रतिबंध लगे थे उसी का तेल घूमकर यूरोप गया, रूस गया और इसमें भारत ने मिडिल मैन बनकर अरबों की कमाई भी की। यह कूटनीति का वो मास्टर स्ट्रोक था जिसे हावर्ड और ऑक्सफोर्ड में पढ़ाया जरूर जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:00 +0530</pubDate>
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<title>Zohran Mamdani ने New York में Broadway नाटकों के मुफ्त टिकट के लिए जारी किया बहुभाषी वीडियो</title>
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<description><![CDATA[ योषिता सिंह
न्यूयॉर्क, 18 अगस्त न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने ब्रॉडवे के प्रचार के लिए बांग्ला, मंदारिन और स्पेनिश में वीडियो जारी कर सोशल मीडिया पर खूब प्रशंसा बटोरी है। उन्होंने अंग्रेजी के अलावा इन तीनों भाषाओं में शहर के हाईस्कूल के विद्यार्थियों को मुफ्त थिएटर टिकट देने की पहल के बारे में जानकारी दी। ममदानी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए वीडियो में बांग्ला, मंदारिन और स्पेनिश में इस कार्यक्रम की जानकारी दी।इसके तहत शहर ने ‘टीडीएफ’ (थिएटर डेवलपमेंट फंड) के साथ साझेदारी की है, जिसके जरिए न्यूयॉर्क के हाई स्कूल के विद्यार्थियों को ब्रॉडवे के नाटकों के 2,000 से अधिक मुफ्त टिकट दिए जाएंगे। इसके लिए विद्यार्थी मुफ्त लॉटरी में हिस्सा ले सकेंगे। सोशल मीडिया पर उपयोगकर्ताओं ने ममदानी के बहुभाषी कौशल की जमकर तारीफ की और उनके उच्चारण, लहजे तथा स्पष्ट बोलने की क्षमता की सराहना की।बांग्ला में उनके वीडियो पर एक उपयोगकर्ता ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘अब वह बांग्ला भी बोल रहे हैं, यह आदमी क्या नहीं कर सकता।’’
वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, ‘‘मैं मूल रूप से बांग्ला भाषी हूं। यह व्यक्ति बांग्लादेश की मौजूदा पीढ़ी के जेन-जी युवाओं से बेहतर बांग्ला बोल रहा है।’’
अन्य उपयोगकर्ता ने लिखा कि बंगाल की कला, रंगमंच, साहित्य और संस्कृति की समृद्ध विरासत है और कोलकाता के जीवंत रंगमंच से लेकर ‘जात्रा’ तक रचनात्मकता यहां गहराई से जुड़ी है। मंदारिन में ममदानी के वीडियो पर एक उपयोगकर्ता ने टिप्पणी की, ‘‘न्यूयॉर्क के मेयर मुझसे बेहतर मंदारिन बोलते हैं, मैं चलता हूं।’’
इस संबंध में एक व्यक्ति ने लिखा कि वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार किया हुआ नहीं लगता क्योंकि उनका बोलने का अंदाज बहुत ठहरा हुआ है, जो कई गैर-मूल चीनी भाषियों में देखने को मिलता है।उपयोगकर्ता ने कहा कि वह हर चीनी अक्षर का उच्चारण सही करने की कोशिश की सराहना करता है। वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने टिप्पणी की, ‘‘भाई कितनी भाषाएं बोलता है।’’
भारतीय मूल के ममदानी, फिल्मकार मीरा नायर और कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर महमूद ममदानी के बेटे हैं। वह न्यूयॉर्क शहर के 112वें मेयर हैं और इस पद पर निर्वाचित होने वाले पहले दक्षिण एशियाई तथा मुस्लिम व्यक्ति हैं।कंपाला, युगांडा में जन्मे और पले-बढ़े ममदानी सात वर्ष की उम्र में अपने परिवार के साथ न्यूयॉर्क शहर आ गए थे। ममदानी ने सप्ताहांत में न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके में आयोजित ‘इंडिया डे परेड’ में भी हिस्सा लिया। उन्होंने कहा, ‘‘आज मैं क्वींस इंडिया डे परेड के लिए फ्लोरल पार्क में वापस आया—इस बार न्यूयॉर्क शहर के पहले भारतीय-अमेरिकी मेयर के तौर पर।यह ऐसा अनुभव है जिसे मैं कभी नहीं भूलूंगा।’’
यह संभवत: पहली बार था जब ममदानी ने सार्वजनिक रूप से खुद को ‘भारतीय-अमेरिकी’ बताया। न्यूयॉर्क के पूर्व मेयर डेविड डिंकिन्स द्वारा कभी शहर को ‘‘एक खूबसूरत मोजेक’’ बताए जाने का उल्लेख करते हुए ममदानी ने कहा कि उन्होंने इस मोजेक को भारतीय प्रवासियों में शामिल हिंदुओं, ईसाइयों, मुसलमानों, जैनों, बौद्धों और सिखों में देखा है, जिन्होंने न्यूयॉर्क को आज जैसा शहर बनाने में योगदान दिया है। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आप सभी के साथ इस काम को करना मेरे लिए सम्मान की बात है।भारतीय स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Iran पर परमाणु बम गिराएगा अमेरिका? ये महिला कौन, जिसने मचा दी सनसनी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिका की पूर्व कांग्रेस वुमेन मार्जोरी टेलर ग्रीन ने आरोप लगाया है कि वाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारी ईरान के खिलाफ संभावित परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर रणनीतिक बैठकें कर रहे हैं। ग्रीन ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्ट्स पर दावा किया कि ऐसी उच्च स्तरीय बातचीत वास्तव में हुई है। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज या अन्य ठोस सबूत पेश नहीं किया। उन्होंने कथित बैठकों में शामिल अधिकारियों के नाम भी सार्वजनिक नहीं किए हैं। ग्रीन का दावा है कि ट्रंप प्रशासन परमाणु कारवाई की सीमा को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रशासन अपने ही खुफिया आकलनों को नजरअंदाज कर रहा है। इसे भी पढ़ें: ईरान ने पलटा पूरा गेम, BRICS बैंक में एंट्री से उड़ाए अमेरिका के होश!ग्रीन के मुताबिक अमेरिकी इंटेलिजेंस आकलनों से यह संकेत मिलता है कि ईरान फिलहाल परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में नहीं है। बावजूद इसके उनके आरोप के मुताबिक वाशिंगटन ईरान को लेकर इजराइल की ओर से मिल रही चेतावनियों को ज्यादा महत्व दे रहा है। हालांकि यह दावा स्वतंत्र रूप से सच साबित नहीं हुआ है और अमेरिकी सरकार की ओर से ऐसी किसी परमाणु हमले की तैयारी की आधिकारिक पुष्टि भी नहीं की गई है। मारजोरी टेलर ग्रीन ने ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की परमाणु कारवाई को लेकर गंभीर चेतावनी दी। उनका कहना है कि ऐसा कदम अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनाव को एक बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकता है। बड़े पैमाने पर जान माल के नुकसान के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz पर Donald Trump का बड़ा दावा, बोले- जल्द ही इसे US Territory घोषित करेंगेग्रीन ने इस संदर्भ में ट्रंप के उस राजनीतिक वादे का हवाला दिया है जिसमें उन्होंने अमेरिका को विदेशी युद्धों से दूर रखने की बात कही थी। ग्रीन के इन आरोपों पर वाइट हाउस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। अमेरिकी सरकार या रक्षा अधिकारियों ने यह भी सार्वजनिक रूप से ऐसी कोई जानकारी नहीं दी है जिससे साबित हो कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी परमाणु नीति में कोई बदलाव किया है। यानी फिलहाल ईरान पर अमेरिकी परमाणु हमले की तैयारी का कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है। लेकिन यह सच है। ग्रीन का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयासों में भी लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अमेरिका की ओर से तेहरान पर दबाव बनाए रखने के साथ-साथ क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। इसे भी पढ़ें: Hormuz Strait में ADNOC Tankers पर हमला: UAE ने Iran को घेरा, कहा- यह Maritime Piracy हैखासकर होर्मुज स्टेट जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों को लेकर क्षेत्रीय तनाव लगातार चर्चा में है। मोर्चुरी टेलर ग्रीन इससे पहले भी ईरान को लेकर ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति के कुछ फैसलों का विरोध कर चुकी हैं। हालांकि वे खुद को ट्रंप का समर्थक बताती रही हैं। जून 2025 में ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद भी ग्रीन ने प्रशासन की विदेश नीति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि विदेशों में सैन्य कारवाई और शासन परिवर्तन से जुड़े अभियानों से दूरी बनाने के चुनावी वादों से प्रशासन पीछे हट रहा है। ग्रीन के ताजा आरोप एक बार फिर उन्हें ट्रंप प्रशासन की आधिकारिक विदेश नीति से अलग खड़ा करते दिखाई देते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:59 +0530</pubDate>
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<title>50 सेकंड के Video ने मचाया भारत में तहलका, पाकिस्तान के दूतावास को अपने ही नागरिकों के लिए क्यों जारी करनी पड़ी चेतावनी?</title>
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<description><![CDATA[  सऊदी अरब की सरकार ने रियाद में मौजूद पाकिस्तानी दूतावास से एक 50 सेकंड का बयान जारी करवाया है। इस बयान में पाकिस्तानी दूतावास को अपने ही देश के लोगों से यह कहना पड़ा है कि पाकिस्तान से सऊदी अरब के मक्का मदीना आने वाले लोग और काम की तलाश में सऊदी पहुंचने वाले पाकिस्तानी वर्कर्स से अपील है कि आप सऊदी अरब में आकर भीख मत मांगना। पाकिस्तानी दूतावास ने अपने लोगों से कहा है कि मक्का मदीना आकर अपनी मर्जी से व्हीलचेयर सर्विस शुरू मत कर देना। पैसा कमाने के लिए मक्का में लोगों के बाल काटना मत शुरू कर देना। लोगों की हज़ामत मत करना। पाकिस्तानी दूतावास ने कहा कि मक्का मदीना में आकर कम से कम उधार तो मत मांगना। सऊदी अरब में पाकिस्तानी दूतावास ने कहा है कि जो भी पाकिस्तानी नागरिक मक्का मदीना आ रहा है उसे हम चेतावनी देते हैं कि वह किसी भी कीमत पर भीख ना मांगे। इसे भी पढ़ें: Imran Khan की आंखों की दृष्टि लगभग सामान्य, Pakistan के उच्चतम न्यायालय में रिपोर्टपाकिस्तानी दूतावास को अपने लोगों को यह बताना पड़ गया है कि अगर आप सऊदी अरब में भीख मांगोगे तो आपको जेल में डाल दिया जाएगा। बताइए सऊदी अरब में पाकिस्तानी दूतावास को ऐसी वीडियो जारी करनी पड़ रही है। यह कितने शर्म की बात है कि किसी देश के दूतावास को अपने ही देश के नागरिकों को चेतावनी देनी पड़ रही है कि आप दूसरे देशों में जाकर भीख ना मांगे। यह वही पाकिस्तान है जो कुछ दिन पहले सऊदी अरब के साथ डिफेंस डील की अकड़ भारत को दिखा रहा था। सऊदी अरब में भीख मांगने के आरोप में 5500 से ज्यादा पाकिस्तानी नागरिक अभी जेल में है। इसके अलावा सऊदी सरकार ने भीख मांगने और अवैध गतिविधियों में शामिल होने के कारण 56,000 से ज्यादा पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार करके डिपोर्ट भी कर दिया है। यह डिपोर्टेशन पिछले कुछ सालों में हुआ है। अब रियाद में मौजूद दूतावास ने बयान में कहा है कि पाकिस्तान से आने वाले तमाम उमरा जायरीन और वर्कर्स से अहम गुजारिश। सऊदी अरब में भीख मांगना या इस तरह की किसी भी सरगर्मी में मुलव्वस होना कानूनन जुर्म है। खिलाफवर्जी की सूरत में सऊदी इदारों की जानिब से गिरफ्तारी, मुल्क बदरी और सऊदी अरब में दोबारा दाखिले पर मुस्तकिल पाबंदी समेत सख्त कानूनी कारवाई का सामना करना पड़ सकता है।इसे भी पढ़ें: Chamba, Himachal Pradesh में मिले 30 से अधिक गुब्बारे और पाकिस्तानी झंडा खासतौर पर हरमैन में अपनी जानिब से व्हीलचेयर सर्विस फराहम करना, बाल काटना या हजामत की खिदमात देना, रकम का लेनदेन और उधार करना सऊदी कवानीन के मुताबिक मुकम्मल तौर पर ममनू है। एक जिम्मेदार पाकिस्तानी शहरी के तौर पर सऊदी कवानीन की पाबंदी करें और गैर कानानूनी सरगर्मियों से मुकम्मल इ्त करें।Pakistan Embassy in Saudi Arabia telling Pakistanis/beggars not to beg???? pic.twitter.com/RJc89XcRLe— TheGlobalDecoder (@TGD_06) August 17, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:59 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan Supreme Court का बड़ा फैसला, बिगड़ती सेहत के बीच Shifa Hospital शिफ्ट होंगे पूर्व PM Imran Khan</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने आदेश दिया है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने खान को 48 घंटे के भीतर शिफा इंटरनेशनल अस्पताल जाने और 16 सितंबर तक वहीं रहने का निर्देश दिया है। 73 साल के पूर्व क्रिकेटर और अब राजनेता बन चुके इमरान खान 2023 से पाकिस्तान की अदियाला जेल में बंद हैं और उन पर कई मामले चल रहे हैं। उनकी पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने बार-बार आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने उन्हें परिवार के सदस्यों और पार्टी के साथियों से मिलने से रोका है और उनकी स्वास्थ्य समस्याओं जिसमें आंखों की एक बीमारी भी शामिल है।इसे भी पढ़ें: Shoaib Akhtar: Imran Khan की कप्तानी में 400 टेस्ट विकेट ले सकता थाखैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी, जिनके प्रांत में खान की पार्टी की सरकार है, ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री की सेहत के मामले को उतनी गंभीरता से लिया जाना चाहिए जितनी ज़रूरी है। अफरीदी ने कहा, हम न तो इमरान खान की सेहत का राजनीतिकरण करते हैं और न ही इमरान खान ने कभी किसी तरह की राहत पाने के लिए अपनी सेहत का मुद्दा उठाया है। उन्होंने मांग की कि खान का इलाज उनके निजी डॉक्टरों की देखरेख और परिवार की मौजूदगी में हो। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को इस मांग को मानने के लिए ज़रूरी नैतिक हिम्मत दिखानी चाहिए। इस्लामाबाद में सुप्रीम कोर्ट के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए अफरीदी ने चेतावनी दी कि खान की लगातार जेल में रहने से जनता में बढ़ रही निराशा उस हद तक पहुँच सकती है जहाँ शांति बहाल करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री की सुलह की अपील भी काफ़ी न हो।इसे भी पढ़ें: Imran Khan की आंखों की दृष्टि लगभग सामान्य, Pakistan के उच्चतम न्यायालय में रिपोर्टअफरीदी ने कहा मैं युवाओं की आँखों में क्रांति की चिंगारी देख सकता हूँ, और कोई भी इसे रोक नहीं पाएगा। उनकी यह बात उस धमकी के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर इमरान खान को उन PTI सहयोगियों से मिलने की इजाज़त नहीं दी गई जो इस हफ़्ते उनसे जेल में मिलने वाले थे, तो देशव्यापी विरोध प्रदर्शन होंगे। अफरीदी ने कहा था कि खान की पार्टी के सभी सांसद गुरुवार को जेल जाएँगे और चेतावनी दी थी कि अगर मुलाक़ात की इजाज़त नहीं दी गई तो &quot;पूरे पाकिस्तान&quot; में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं। उन्होंने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के बाहर धरने में भी हिस्सा लिया, जहाँ उन्होंने चेतावनी दी कि जनता का गुस्सा इतना बढ़ सकता है कि अगर इमरान खान बाद में सुलह की अपील भी करें, तो भी लोग शांति की अपील पर शायद कोई प्रतिक्रिया न दें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:58 +0530</pubDate>
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<title>ट्रंप से मुलाकात, UNGA से दूरी, 11 साल बाद जिनपिंग के लिए व्हाइट हाउस में बिछेगा रेड कार्पेट</title>
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<description><![CDATA[ चीनी नेता शी जिनपिंग अगले महीने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने के लिए अमेरिका आएंगे, लेकिन इस दौरान वे संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने के लिए न्यूयॉर्क शहर नहीं जाएंगे। चीनी नेता के यात्रा कार्यक्रम की जानकारी रखने वाले चार लोगों के अनुसार, वे 24 सितंबर को वाशिंगटन में ट्रंप से मिलेंगे, लेकिन 22 सितंबर से शुरू होने वाली संयुक्त राष्ट्र की आम बहस में शामिल होने की उनकी कोई योजना नहीं है। इस बहस में दुनिया भर के नेता एक हफ़्ते तक भाषण देने और अमेरिकी सरकारी अधिकारियों के साथ बैठकें करने के लिए इकट्ठा होते हैं। इसके बजाय, शी अमेरिका में अपनी मौजूदगी को 24 सितंबर को ट्रंप के साथ होने वाली बैठक तक ही सीमित रखेंगे। मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि शी के 23 सितंबर की देर रात पहुंचने की संभावना है। वे UNGA में शामिल नहीं होंगे और 25 तारीख को वापस चले जाएंगे। अपनी बात की कूटनीतिक संवेदनशीलता के कारण नाम न बताने की शर्त पर उन्होंने कहा कि असल में 24 तारीख को व्हाइट हाउस में उनकी सिर्फ़ एक दिन की बैठकें होंगी।इसे भी पढ़ें: सीधे रास्ते पर नहीं चला तो...सिंधु जल संधि पर शहबाज ने भारत को दी खुली धमकीस्टेट डिपार्टमेंट ने सवालों के लिए व्हाइट हाउस की ओर इशारा किया। व्हाइट हाउस ने एक बयान में पुष्टि की कि शी 24 सितंबर को व्हाइट हाउस का दौरा करेंगे, लेकिन अमेरिका में रहने के दौरान चीनी नेता के कार्यक्रम में शामिल हो सकने वाली अन्य गतिविधियों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वॉशिंगटन के कूटनीतिक हलकों में इस बात की काफी चर्चा थी कि शी इस मौके का इस्तेमाल असेंबली में शामिल होने और ईरान के खिलाफ़ अमेरिका की जारी जंग के जवाब में शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय विकास के लिए चीन की योजनाओं को पेश करने के लिए करेंगे। वॉशिंगटन के डिप्लोमैटिक समुदाय में इस बात की काफी चर्चा थी कि शी इस असेंबली में शामिल होने का मौका इस्तेमाल करेंगे ताकि ईरान के खिलाफ चल रही अमेरिकी जंग के जवाब में शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय विकास के लिए चीन की योजनाओं को पेश कर सकें।इसे भी पढ़ें: Dragon से दो-दो हाथ के बाद India-China के बीच सीमा मुद्दों पर हुआ संवाद, परिणाम में सामने आई बड़ी बातवॉशिंगटन में मौजूद EU के एक डिप्लोमैट ने कहा जब शुरू में 24 सितंबर को समिट की तारीख का ऐलान किया गया था, तो लोगों ने कहा था कि हो सकता है चीन ने यह तारीख इसलिए सुझाई हो ताकि वह UNGA के लिए न्यूयॉर्क शहर भी जा सकें। न्यूयॉर्क शहर में मौजूद डिप्लोमैट्स ने यह भी गौर किया कि बीजिंग ने शहर में कोई एडवांस टीम नहीं भेजी थी, जैसा कि शी के किसी भी दौरे से पहले उम्मीद की जाती है। चीन की एम्बेसी या न्यूयॉर्क शहर में संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन, किसी ने भी टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया। शी आखिरी बार 2015 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ के मौके पर UNGA में भाषण देने न्यूयॉर्क आए थे। 2021 में कोविड महामारी के चरम पर शी ने वीडियो लिंक के जरिए UNGA को संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने एक महीने पहले अफगानिस्तान में अमेरिका की विफलता का परोक्ष रूप से जिक्र किया था। यह विकासशील देशों के सामने चीन के आर्थिक विकास मॉडल पर आधारित, अमेरिका के दबदबे के बाद की दुनिया की व्यवस्था का प्रस्ताव रखने का हिस्सा था। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:58 +0530</pubDate>
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<title>भारत ने करोड़ों...कुछ सीखो, चुनाव को लेकर ट्रंप ने अमेरिकी प्रशासन को दिखाया आईना</title>
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<description><![CDATA[ ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के एक सवाल का हवाला देते हुए अमेरिका को सीखने को बोला है और वजह है बिना आईडी कार्ड के चुनाव। ट्रंप ने अमेरिकी प्रशासन को आईना दिखाते हुए भारत का उदाहरण दिया। ट्रंप का कहना है कि अगर भारत करोड़ों लोगों से बिना किसी धांधली के वोटिंग करवा सकता है तो अमेरिका ऐसा क्यों नहीं करवा पा रहा है? भारत के लोकतंत्र की गूंज आज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। इस बार यह तारीफ जो है वह किसी और से नहीं बल्कि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से आई है। ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रक्रिया और हमारे वोटर आईडी कार्ड सिस्टम की जमकर तारीफ की और इसकी मिसाल देते हुए अमेरिका को बड़ी नसीहत दी है। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि अमेरिका को चुनावी सूचिता के मामले में भारत से सीखना चाहिए। यानी कि दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र होने का दावा करने वाला अमेरिका अब दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र यानी कि भारत से सीखना चाहता है। इसे भी पढ़ें: Iran पर परमाणु बम गिराएगा अमेरिका? ये महिला कौन, जिसने मचा दी सनसनीयह मामला शुरू होता है ट्रंप के सोशल मीडिया ट्रू सोशल पर दिए गए बयान से। जहां पर उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि हाल ही में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से एक चुभता हुआ सवाल पूछा। उन्होंने पूछा आखिर अमेरिका में बिना किसी वैध फोटो पहचान पत्र के चुनाव कैसे हो सकते हैं? ट्रंप ने इसी सवाल को आधार बनाकर अमेरिका में सेव अमेरिका एक्ट को तुरंत पास करने की मांग की है। ट्रंप का कहना है कि अगर भारत जैसे विशाल देश में हर नागरिक फोटो आईडी कार्ड दिखाकर वोट डालता है तो अमेरिका में ऐसा क्यों नहीं होता? ट्रंप ने अपनी पोस्ट में भारत के हालिया आम चुनावों के आंकड़ों का भी जिक्र करते हुए दुनिया को चौंका दिया। ट्रंप ने लिखा कि पिछले साल चुनाव में 64 करोड़ 60 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। हर एक वोटर के पास एक वैध फोटो पहचान पत्र था। सिर्फ 1% से भी कम लोगों ने डाक के जरिए यानी कि पोस्टल बैलेट के जरिए वोट डाला। इसे भी पढ़ें: Russia में सेना-हथियार उतारते ही किम जोंग के आगे गिड़गिड़ाए ट्रंप,  NATO देशों के बीच खलबली मचीट्रंप ने तर्क दिया कि जब इतनी बड़ी आबादी वाला देश पूरी पारदर्शिता के साथ फोटो आईडी कार्ड के जरिए मतदान करवा सकता है तो अमेरिका में बिना आईडी कार्ड के वोटिंग एक चुनावी धोखाधड़ी को बढ़ावा देना है। सिर्फ ट्रंप ही नहीं इसके बाद भारत में अमेरिकी राजदूत सर्गियो गौर ने भी ट्रंप की बात का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने एक्स पर ट्रंप के पोस्ट को साझा करते हुए लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप बिल्कुल सही कह रहे हैं। भारत ने दिखा दिया कि कैसे तकनीक और पहचान पत्र के जरिए दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव सुरक्षित तरीके से करवाया जा सकता है। कानून में वोटर रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता का सबूत अनिवार्य हो जाएगा। यानी कि जो कोई भी व्यक्ति अमेरिका में वोट डालना चाहता है उसके पास सिटीजनशिप जरूरी होगी। पूरे देश में मतदान के लिए फोटो आईडी कार्ड जरूरी हो जाएगा। यानी कि अमेरिका में वोट डालने के लिए भारत की ही तरह एक फोटो आईडी कार्ड होना पड़ेगा और मेल इन बैलेट यानी कि डाक द्वारा वोटिंग पर पाबंदी लगाई जाएगी।  ]]></description>
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<title>ये है अमेरिका का नया टेर्रेटिरी, ट्रूथ सोशल पर ट्रंप की नई पोस्ट ने मचाई हलचल</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया के सबसे अहम तेल ट्रांज़िट रूट, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर अपना कंट्रोल होने का दावा करते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (वहां के समय के अनुसार) इस जलमार्ग की एक AI-जनरेटेड तस्वीर शेयर की, जिस पर नया अमेरिकी इलाका लिखा था। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर जो तस्वीर शेयर की, उसमें ईरान और अरब प्रायद्वीप के बीच के जलमार्ग का नीला नक्शा दिखाया गया है। इस नक्शे में &#039;स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़&#039; को एक फ्रेम के अंदर घेरा गया है, जिस पर मोटे अक्षरों में &quot;NEW U.S. Territory&quot; लिखा है। इस पोस्ट से ईरान के साथ जारी तनाव के बीच रणनीतिक ऊर्जा अवरोध बिंदु पर नियंत्रण के उनके प्रशासन के दावों को और बल मिलता है।इसे भी पढ़ें: ट्रंप से मुलाकात, UNGA से दूरी, 11 साल बाद जिनपिंग के लिए व्हाइट हाउस में बिछेगा रेड कार्पेटट्रम्प ने सोमवार (स्थानीय समय) को भी इसी तरह की टिप्पणी करते हुए दावा किया कि वाशिंगटन डीसी का इस क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण है। पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रम्प ने ईरान पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी की प्रभावशीलता पर जोर दिया और कहा कि तेल की कीमतें गिर रही हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है। उन्होंने आगे कहा कि ईरान बड़ी मुसीबत में है, वहाँ 300 प्रतिशत मुद्रास्फीति है, देश की हालत खराब है, और उनकी सेना पूरी तरह से पराजित है। मुझे लगता है यह एक बेहतरीन विचार है। मेरा मतलब है, हम नाकाबंदी से इसे नियंत्रित करते हैं। इसे एक क्षेत्र घोषित करने का विचार मुझे पसंद है। जलडमरूमध्य पर हमारा पूर्ण नियंत्रण है। अब, वे परेशानी खड़ी कर सकते हैं; वे पानी में बारूदी सुरंग बिछा सकते हैं, और लोग नहीं चाहते कि उनके अरबों डॉलर के जहाजों पर बारूदी सुरंगें गिरें। लेकिन नाकाबंदी बहुत प्रभावी रही है। अब, हो सकता है यह बंद हो जाए, या हो सकता है यह और भी खुल जाए, लेकिन अगर आप हमारे द्वारा किए जा रहे काम के आंकड़ों को देखें तो हम प्रति सप्ताह लाखों बैरल तेल निकाल रहे हैं।इसे भी पढ़ें: भारत ने करोड़ों...कुछ सीखो, चुनाव को लेकर ट्रंप ने अमेरिकी प्रशासन को दिखाया आईनाघालिबाफ़ ने कहा कि जब तक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (समझौता ज्ञापन) में अमेरिका के वादे - जिनमें नाकेबंदी हटाना, फ्रीज़ की गई संपत्ति जारी करना, तेल पर लगी पाबंदियां हटाना, सभी मोर्चों पर धमकियां और सैन्य कार्रवाई बंद करना और अन्य शर्तें शामिल हैं - पूरे नहीं किए जाते, तब तक &#039;स्ट्रेट&#039; (जलडमरूमध्य) नहीं खोला जाएगा। दुश्मनों को तनाव और न बढ़ाने की चेतावनी देते हुए, स्पीकर ने ज़ोर देकर कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक &quot;दुश्मन की हरकतों और आक्रामकता के हिसाब से उसे और भी करारी हार देने के लिए तैयार है। इसके अलावा, घालिबाफ़ ने कहा कि अब समय आ गया है कि ईरान की सेना और कूटनीतिक पक्ष मिलकर काम करें और अमेरिका द्वारा किए गए &quot;समझौते के उल्लंघन&quot; का जवाब दें। घालिबाफ़ ने कहा जैसा कि हमने अनुमान लगाया था, दुश्मन - जिसने मजबूरी में युद्धविराम समझौते को स्वीकार किया था । इसलिए, अब समय आ गया है कि सैन्य क्षेत्र एक बार फिर कूटनीतिक क्षेत्र के साथ खड़ा हो और दुश्मन द्वारा समझौते के उल्लंघन का व्यावहारिक जवाब दे।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:57 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन ने मचाया कोहराम, एक ही रात में रूस पर दागे 800 ड्रोन, क्या जंग ने ले लिया अब तक का सबसे भयानक रूप?</title>
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<description><![CDATA[ मॉस्को के हमले के बाद से यूक्रेन ने रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन अटैक वाला पलटवार किया है। यूक्रेन की तरफ से मॉस्को पर रात भर में लगभग 800 ड्रोन दागे गए। यह हमला ठीक दो दिन पहले हुए ऐसे ही एक हमले के बाद हुआ है। दोनों पक्ष लंबी दूरी के हमले जारी रखे हुए हैं, जबकि पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन में लगभग 1,250 किलोमीटर लंबी फ्रंट लाइन पर लड़ाई ड्रोन और ज़मीनी रोबोट तक ही सीमित है। अधिकारियों ने बताया कि इसी दौरान, यूक्रेन के उत्तर-पूर्वी खार्किव इलाके के पेचेनिही गांव में रूसी मिसाइल हमले में कम से कम 10 आम नागरिकों की मौत हो गई। राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इसे बेहद क्रूर हमला बताया, वहीं अधिकारियों ने पिछले एक दिन में यूक्रेन के सुमी इलाके में भी लोगों की मौत और घायल होने की जानकारी दी।इसे भी पढ़ें: Russia ने Ukraine की Naftogaz कंपनी पर 300 बार किए हमले, ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसानपिछले एक साल में यूक्रेन ने रूस के अंदरूनी इलाकों में हमले करने के लिए देश में ही बने लंबी दूरी के ड्रोन विकसित और तैनात किए हैं। कीव का कहना है कि ऐसे हमलों का मकसद रूसी जनता को युद्ध के नतीजों का एहसास कराना और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर शांति वार्ता के लिए दबाव डालना है, हालांकि पुतिन ने हमले को रोकने का कोई संकेत नहीं दिया है। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पुतिन यूक्रेन के व्यावहारिक युद्धविराम प्रस्तावों को स्वीकार करने और खून-खराबा खत्म करने के बजाय युद्ध को लंबा खींच रहे हैं। रूस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रात भर में कई रूसी क्षेत्रों, साथ ही क्रीमिया और काला सागर एवं आज़ोव सागरों के ऊपर 791 यूक्रेनी ड्रोन को हवाई सुरक्षा बलों ने रोका। एसोसिएटेड प्रेस की गणना के अनुसार, जनवरी 2025 के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा ड्रोन हमला था। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने बताया कि 600 से अधिक यूक्रेनी ड्रोन मॉस्को क्षेत्र की ओर बढ़े, जिनमें से 180 को मार गिराया गया। उन्होंने इसके बारे में और कोई जानकारी नहीं दी। अधिकारियों ने किसी की मौत या बड़े नुकसान की सूचना नहीं दी, हालांकि मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने कहा कि तीन लोग घायल हुए हैं। इसे भी पढ़ें: China को छोड़ पुतिन ने भारत को चुना पहला पार्टनर देश, हिला अमेरिका!रात भर हुए हमले में एक इंडस्ट्रियल ज़ोन में मौजूद वाइल्डबेरीज़ के वेयरहाउस में भी आग लग गई। यूक्रेन ने बार-बार कंपनी के डिपो को निशाना बनाया है; उसका कहना है कि इनसे रूसी सेना को सप्लाई में मदद मिलती है। वाइल्डबेरीज़ ने कहा कि इस जगह को &quot;बहुत कम नुकसान&quot; पहुँचा है। यूक्रेन में खार्किव रीजनल मिलिट्री एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख ओलेह सिनिहुबोव ने बताया कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पेचेनिही पर हुए मिसाइल हमले में 10 आम नागरिक मारे गए। बाद में उन्होंने बताया कि 17 लोग घायल हुए हैं। ज़ेलेंस्की ने कहा कि हमले में 10 घर, एक कैफ़े, एक पोस्ट ऑफ़िस, एक स्टोर और कम से कम सात गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त हुईं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा हम रूस के इस हमले का ज़रूर जवाब देंगे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:57 +0530</pubDate>
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<title>काबुल के Hazara इलाके में School के पास Grenade Attack, 50 बच्चे घायल, दहला Afghanistan</title>
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<description><![CDATA[ अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक स्कूल के पास हैंड ग्रेनेड हमले में कई बच्चे घायल हो गए। काबुल पुलिस के प्रवक्ता खालिद ज़दरान ने सोमवार देर रात कहा कि कई बच्चे घायल हुए हैं और मामले की जांच चल रही है। मंगलवार को अफ़ग़ानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपोर्टेयर रिचर्ड बेनेट ने इस हमले की निंदा की और इसे स्कूल के पास कई बच्चों को नुकसान पहुँचाने वाला घिनौना हमला बताया। अफ़ग़ानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस धमाके में लगभग 50 बच्चे घायल हुए। यह धमाका काबुल के उस इलाके में हुआ जहाँ ज़्यादातर हज़ारा अल्पसंख्यक समुदाय के लोग रहते हैं। हज़ारा लोग, जो अफ़गानिस्तान की आबादी का लगभग नौ प्रतिशत हैं, लंबे समय से देश में हमलों और उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। इनमें से ज़्यादातर शिया मुसलमान हैं और अतीत में उन्हें सुन्नी मुस्लिम चरमपंथी समूहों, जैसे कि इस्लामिक स्टेट, ने बार-बार निशाना बनाया है। सुन्नी-बहुल देश होने के कारण उन्हें भेदभाव का भी सामना करना पड़ा है।इसे भी पढ़ें: Afghanistan में Taliban पाबंदी से 22 लाख लड़कियां शिक्षा से दूर, 20,000 महिला शिक्षकों की कमी का खतरामई 2021 में जब अमेरिकी नेतृत्व वाली सेनाएँ अफ़गानिस्तान से अव्यवस्थित ढंग से हट रही थीं और उसके कुछ ही समय बाद तालिबान ने सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया, तब काबुल के एक स्कूल में हुए तीन बम धमाकों में दर्जनों लोग मारे गए थे। मारे गए सभी लोग हज़ारा समुदाय के थे और उनमें से ज़्यादातर क्लास से निकल रही युवा लड़कियाँ थीं। यह स्कूल भी काबुल के दश्त-ए-बारची इलाके में था जो अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी में हज़ारा समुदाय का मुख्य इलाका है। ठीक उसी तरह जैसे वह स्कूल जिसके पास सोमवार को धमाका हुआ था। बेनेट ने X पर एक पोस्ट में कहा कि दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए निष्पक्ष जांच ज़रूरी है। उन्होंने लिखा, &quot;एक बार फिर काबुल के इस मुख्य रूप से हज़ारा इलाके को निशाना बनाया गया है। यह बहुत दुखद है!&quot; अधिकारी उस हमले की जांच कर रहे थे जिसमें स्कूल के पास बच्चे घायल हो गए थे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:57 +0530</pubDate>
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<title>Kharkiv में Russian Attack ने मचाई भारी तबाही, 10 की मौत पर Zelenskyy बोले&#45; रूस को मिलेगा करारा जवाब</title>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि मंगलवार सुबह (स्थानीय समय के अनुसार) खार्किव इलाके के पेचेनिही में एक व्यस्त चौराहे पर रूसी सेना के हमले में 10 लोगों की मौत हो गई। एक्स पर एक पोस्ट में ज़ेलेंस्की ने कहा आज सुबह, रूसियों ने खार्किव इलाके के पेचेनिही में एक व्यस्त चौराहे पर बेरहमी से हमला किया - यह एक ऐसी जगह है जहाँ पोस्ट ऑफिस और दुकानें हैं और इसके चारों ओर सिर्फ़ रिहायशी इमारतें हैं। उन्होंने कहा अभी तक 10 लोगों की मौत की खबर है। मैं उनके परिवारों और चाहने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। उन्होंने यह भी बताया कि कई लोग घायल हुए हैं और उन्हें ज़रूरी मेडिकल मदद दी जा रही है। ज़ेलेंस्की ने कहा कि बचाव कर्मियों ने आग बुझा दी है और इमरजेंसी सर्विस की टीमें घटनास्थल पर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा इस त्रासदी से जुड़ी सभी परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है।इसे भी पढ़ें: यूक्रेन ने मचाया कोहराम, एक ही रात में रूस पर दागे 800 ड्रोन, क्या जंग ने ले लिया अब तक का सबसे भयानक रूप?ज़ेलेंस्की ने कहाहम रूस के इस हमले का निश्चित रूप से जवाब देंगे। साथ ही, उन्होंने यूक्रेन के अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से रूस पर दबाव बढ़ाने की अपील की। उन्होंने आगे कहा यह भी उतना ही ज़रूरी है कि हमारे सहयोगी रूस पर दबाव बनाने और यूक्रेन का समर्थन करने के लिए हमारे सैन्य जवाबी कदमों के साथ-साथ अपने स्तर पर भी कार्रवाई करें। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब रविवार को ही समाचार एजेंसी TASS की कई रिपोर्टों के अनुसार, रूसी एयर डिफेंस ने यूक्रेन के 822 ड्रोन को रोका और मार गिराया, जबकि यूक्रेन के ड्रोन हमलों में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई। TASS के अनुसार, रूसी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रात भर में रूसी इलाकों और काला सागर (Black Sea) व आज़ोव सागर (Azov Sea) के ऊपर यूक्रेन के 822 फिक्स्ड-विंग ड्रोन को रोका और नष्ट किया गया।इसे भी पढ़ें: China को छोड़ पुतिन ने भारत को चुना पहला पार्टनर देश, हिला अमेरिका! रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा रूसी एयर डिफेंस फोर्स ने रात 8 बजे से लेकर... बेलगोरोद, ब्रियांस्क, व्लादिमीर, वोल्गोग्राद, वोरोनिश, कलुगा, कुर्स्क, लिपेत्स्क, निज़नी नोवगोरोद, ओरियोल, रोस्तोव, रियाज़ान, ताम्बोव और तुला क्षेत्रों, मॉस्को क्षेत्र, क्रास्नोदार क्षेत्र और क्रीमिया गणराज्य के साथ-साथ आज़ोव और काला सागर के ऊपर यूक्रेन के 822 फिक्स्ड-विंग मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) को रोका और नष्ट किया।&quot; रक्षा मंत्रालय ने कहा 15 अगस्त को मॉस्को समय (शाम 5 बजे GMT) से 16 अगस्त को मॉस्को समय (सुबह 8 बजे GMT) तक... इस बीच, उसी दिन TASS की दो अलग-अलग रिपोर्टों में बताया गया कि रोस्तोव और मॉस्को में ड्रोन हमलों में कम से कम छह लोग मारे गए और चार घायल हो गए। रविवार की रिपोर्ट के अनुसार, गवर्नर यूरी स्ल्यूसर ने बताया कि दक्षिणी रूस के रोस्तोव क्षेत्र में ड्रोन हमले में तीन लोगों की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया। TASS के अनुसार, उन्होंने मैक्स चैनल पर लिखा, &quot;कल रात रोस्तोव क्षेत्र में हवाई हमले के कारण तीन लोगों की मौत हो गई और एक अन्य को चोटों के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रिपोर्ट में अधिकारी के हवाले से आगे कहा गया कि यूक्रेनी हमले में इस क्षेत्र के तीन शहरों और नौ जिलों में 150 से अधिक UAV नष्ट कर दिए गए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:56 +0530</pubDate>
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<title>PoJK में Internet Shutdown पर बरसी मानवाधिकार परिषद, कहा&#45; अभिव्यक्ति की आजादी और Digital Access का हो रहा हनन</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) की मानवाधिकार परिषद ने इलाके में इंटरनेट सेवाओं को तुरंत बहाल करने की मांग की है। परिषद का कहना है कि लंबे समय से इंटरनेट बंद रहने से लोगों के बुनियादी अधिकारों पर बुरा असर पड़ा है और छात्रों, फ्रीलांसरों, कारोबारियों और विदेशों में रहने वाले कश्मीरियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, PoJK की मानवाधिकार परिषद ने कहा कि इंटरनेट में लगातार रुकावट से अभिव्यक्ति की आज़ादी, जानकारी पाने और बातचीत करने की सुविधा पर बुरा असर पड़ा है। परिषद के अनुसार, भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने की वजह से छात्रों, फ्रीलांसरों और कारोबारियों को गंभीर मुश्किलों और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। विदेशों में रहने वाले कश्मीरियों को भी अपने परिवारों और समुदायों से संपर्क बनाए रखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।परिषद ने ज़ोर देकर कहा कि डिजिटल एक्सेस को अब सिर्फ़ एक सुविधा नहीं माना जा सकता, क्योंकि इंटरनेट कनेक्टिविटी रोज़गार, शिक्षा, बातचीत और बुनियादी मानवाधिकारों के इस्तेमाल और उनकी सुरक्षा का एक ज़रूरी ज़रिया बन गई है।इसे भी पढ़ें: ये है अमेरिका का नया टेर्रेटिरी, ट्रूथ सोशल पर ट्रंप की नई पोस्ट ने मचाई हलचलइसलिए, परिषद ने मांग की है कि PoJK में इंटरनेट सेवाओं को बिना किसी और देरी के पूरी तरह बहाल किया जाए। एक अलग पोस्ट में ह्यूमन राइट्स काउंसिल PoJK ने अगस्त 2023 में मुज़फ़्फ़राबाद के बाहरी इलाके में एक प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टिट्यूट में एक स्टूडेंट की कथित आत्महत्या के मामले को संभालने के तरीके पर भी चिंता जताई।काउंसिल के मुताबिक, उन्हें स्टूडेंट की मौत के बारे में एक शिकायत मिली थी, जिसके बाद एजुकेशन डिपार्टमेंट ने घटना से जुड़े हालात की जांच के लिए एक जांच कमिटी बनाई।हालांकि, काउंसिल का आरोप है कि एक साल से ज़्यादा समय बीतने के बाद भी कमिटी की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है और न ही ज़िम्मेदारी तय करने या एजुकेशनल इंस्टिट्यूट में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में कोई साफ़ जानकारी दी गई है। ह्यूमन राइट्स काउंसिल ने एजुकेशन डिपार्टमेंट से कहा कि वह जांच कमिटी की रिपोर्ट, मुख्य निष्कर्ष, ज़रूरी तथ्य और अब तक की गई कार्रवाई को सार्वजनिक करे, साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि मृतक स्टूडेंट और उनके परिवार की प्राइवेसी और गरिमा बनी रहे।इसे भी पढ़ें: CSAM पर सरकार सख्त: Meta को चेतावनी, नियमों के उल्लंघन पर छिनेगा Safe Harbor का दर्जाकाउंसिल ने आगे कहा कि अगर जांच अधूरी रहती है, तो एजुकेशन डिपार्टमेंट को देरी की वजह बतानी चाहिए और रिपोर्ट जारी करने के लिए एक साफ़ समय-सीमा देनी चाहिए। काउंसिल के मुताबिक, किसी स्टूडेंट की मौत को सिर्फ़ एक प्रशासनिक मामला नहीं माना जा सकता, और उसने घटना से जुड़े हालात की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की। उसने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि एजुकेशनल इंस्टिट्यूट में जवाबदेही तय करना और सुरक्षित माहौल देना राज्य की ज़िम्मेदारी है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:56 +0530</pubDate>
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<title>पुतिन&#45;नेतन्याहू का पहली बार एक साथ बड़ा ऐलान, भारत हैरान!</title>
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<description><![CDATA[ ऐसा शायद पहली बार हुआ है जब भारत के दो पक्के दोस्त एक ही समय पर भारत के तीसरे सहयोगी देश पर टूट पड़े हैं। रूस और इजराइल ने एक ही समय पर ब्रिटेन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बता दें कि ब्रिटेन ने यूक्रेन के लिए पुतिन को भड़का दिया और मुस्लिमों के लिए इजराइल से दुश्मनी कर ली। लेकिन अब रूस और इजराइल ने एक साथ ब्रिटेन पर हमला बोल दिया है। रूस ने एक तस्वीर दिखाकर ऐलान किया है कि ब्रिटेन का सर्वनाश कर दिया जाएगा। तो उसी वक्त नेतन्याहू ने ब्रिटेन को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन कह दिया है। आपको बता दें कि इस्लामिक देश और इस्लामिक रिपब्लिक देश होने में बहुत बड़ा अंतर है। दुनिया में सिर्फ तीन देश हैं जो इस्लामिक रिपब्लिक हैं। ऐसे में नेतन्याहू का ब्रिटेन को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन कहना बहुत बड़ी घटना है। दरअसल रूस ने एक तस्वीर जारी करते हुए कहा है कि यूक्रेन ने ब्रिटेन से ड्रोन लेकर हमारी जमीन पर हमला किया है। जिसकी कीमत ब्रिटेन को आने वाले समय में चुकानी पड़ेगी। यह ठीक वैसा ही है जैसे भारत पर हमला करने के लिए तुर्की ने पाकिस्तान को ड्रोन दिए थे। इस वक्त ब्रिटेन में जबरदस्त महंगाई है। अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर है। क्राइम रेट और कट्टरता बढ़ती जा रही है। इसे भी पढ़ें: यूक्रेन ने मचाया कोहराम, एक ही रात में रूस पर दागे 800 ड्रोन, क्या जंग ने ले लिया अब तक का सबसे भयानक रूप?इसके बावजूद ब्रिटेन अभी तक रूस से लड़ने के लिए यूक्रेन को 3.8 बिलियन पाउंड्स दे चुका है। मगर अब पुतिन ने कहा है कि इसकी कीमत चुकाने का वक्त आ गया है। बहरहाल आपको बता दें कि ब्रिटेन इसी तरह की दिक्कतें इजराइल के लिए भी खड़ी कर रहा है। ब्रिटेन कभी इजराइल का पक्का दोस्त हुआ करता था। लेकिन पिछले कुछ सालों में ब्रिटेन में मुस्लिम आबादी और कट्टरता इतनी बढ़ गई है कि ब्रिटेन अब इजराइल को अपने दुश्मन की तरह देखने लगा है। ब्रिटेन में मुस्लिम अब इतना बड़ा वोट बैंक बन गए हैं कि ब्रिटेन के राजनैतिक दलों को मुस्लिम तुष्टीरण के लिए इजराइल और यहूदियों को गालियां देनी पड़ रही हैं। वैसे यही काम कई बार ब्रिटेन भारतीयों और हिंदुओं के खिलाफ भी करता है। यही कारण है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नितिन याहू ने ब्रिटेन को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन बोल दिया है। यह बयान सुनते ही ब्रिटेन के लोग अपनी सरकार को गालियां दे रहे हैं। इन अंग्रेजों का कहना है कि मुसलमानों को खुश करने के लिए हमारे ही देश ने हमारे मुंह पर कालिख पोत दी है। इसे भी पढ़ें: Kharkiv में Russian Attack ने मचाई भारी तबाही, 10 की मौत पर Zelenskyy बोले- रूस को मिलेगा करारा जवाबयहां आपको एक दिलचस्प चीज बताते हैं। दुनिया में करीब 57 मुस्लिम देश हैं लेकिन उनमें से सिर्फ तीन ही इस्लामिक रिपब्लिक हैं। ये तीन देश हैं पाकिस्तान, मॉरिटानिया और ईरान। आपको बता दें कि इस्लामिक रिपब्लिक ऐसा देश होता है जहां धर्म के हिसाब से सरकार और कानून चलते हैं। जबकि इस्लामिक देश ऐसे देश होते हैं जहां ज्यादातर लोग मुस्लिम हो या देश की पहचान इस्लाम से जुड़ी हो। जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र। मगर अब तो इजराइल ने ब्रिटेन को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रिटेन बोल दिया है। यानी ब्रिटेन की तुलना पाकिस्तान से कर दी गई है। आपको बता दें कि मुस्लिम और इस्लाम ब्रिटेन पर हावी हो चुके हैं। पिछले 10 सालों में ब्रिटेन में मुस्लिम आबादी 43% से भी ज्यादा बढ़ी है। ब्रिटेन में कट्टरता इस कदर बढ़ गई है कि कुछ समय पहले संयुक्त अरब अमीरात जैसे मुस्लिम देश ने अपने छात्रों से कहा है कि ब्रिटिश यूनिवर्सिटीज में पढ़ने ना जाएं क्योंकि वहां पर कट्टरता सिखाई जाती है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:55 +0530</pubDate>
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<title>Strait of Hormuz पर Iran की US को दो टूक, Ghalibaf बोले&#45; शर्तें नहीं मानी तो बंद होगा समुद्री रास्ता</title>
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<description><![CDATA[ ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर घालीबाफ़ ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका जून में हुए 14-पॉइंट वाले समझौते (MoU) के तहत किए गए वादों को नहीं निभाता है, तो ईरान फिर से सैन्य कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि जब तक वॉशिंगटन समझौते के अनुसार प्रतिबंध और नाकेबंदी हटाने जैसी मुख्य शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद रखेगा। ईरान की 12वीं संसद के 180वें खुले सत्र को संबोधित करते हुए घालीबाफ़ ने कहा कि अब समय आ गया है कि ईरान की सेना और कूटनीतिक पक्ष मिलकर अमेरिका द्वारा किए गए समझौते के उल्लंघन का जवाब दें। घालीबाफ़ ने कहा जैसा कि हमने अनुमान लगाया था, दुश्मन - जिसने मजबूरी में युद्धविराम समझौते को स्वीकार किया था - ने अपनी भारी राजनीतिक हार की भरपाई करने के लिए जल्द ही अपने वादों से मुँह मोड़ लिया। इसलिए, अब समय आ गया है कि सैन्य क्षेत्र एक बार फिर कूटनीतिक क्षेत्र के साथ खड़ा हो और दुश्मन द्वारा समझौते के उल्लंघन का व्यावहारिक जवाब दे। इसे भी पढ़ें: Gyanesh Kumar की तारीफ कर Donald Trump ने भारत में विपक्षी दलों की &#039;बेचैनी&#039; और बढ़ा दी हैईरान की संसद के अध्यक्ष और ईरान की ओर से वार्ता दल के प्रमुख ने अपनी कड़ी चेतावनी में कहा कि जब तक अमेरिका पश्चिम एशिया में संघर्ष को समाप्त करने के लिए तकनीकी वार्ता शुरू करने हेतु हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक जलडमरूमध्य को दोबारा नहीं खोला जाएगा। उन्होंने कहा जब तक अमेरिका द्वारा समझौता ज्ञापन में की गई प्रतिबद्धताओं - जिनमें नाकाबंदी हटाना, जब्त की गई संपत्तियों को जारी करना, तेल प्रतिबंध हटाना, सभी मोर्चों पर धमकियों और सैन्य अभियानों को समाप्त करना और अमेरिका द्वारा किए गए अन्य वादे शामिल हैं - को पूरा नहीं किया जाता, तब तक &#039;जलडमरूमध्य&#039; नहीं खोला जाएगा।इसे भी पढ़ें: ये है अमेरिका का नया टेर्रेटिरी, ट्रूथ सोशल पर ट्रंप की नई पोस्ट ने मचाई हलचलइन टिप्पणियों से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का मुद्दा सीधे तौर पर प्रतिबंधों में ढील और अन्य अमेरिकी प्रतिबद्धताओं से जुड़ जाता है, जिससे संघर्ष जारी रहने के दौरान जलमार्ग के माध्यम से आवागमन तेहरान की व्यापक राजनयिक सौदेबाजी की स्थिति का हिस्सा बन जाता है।इसे भी पढ़ें: China को छोड़ पुतिन ने भारत को चुना पहला पार्टनर देश, हिला अमेरिका!ग़ालिबफ़ ने यह भी चेतावनी दी कि यदि अमेरिका अपनी कार्रवाई जारी रखता है तो ईरान और अधिक तनाव बढ़ाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा इस्लामिक गणराज्य ईरान अपने शत्रु को उसकी कार्रवाई और आक्रामकता के अनुपात में करारा जवाब देने के लिए तैयार है।&quot; उनकी ये टिप्पणियां 60 दिनों के राजनयिक ढांचे को लेकर चल रहे गंभीर तनाव के बीच आई हैं, जिसकी सोमवार को समाप्ति हो गई, और कई महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं अभी भी लागू नहीं हुई हैं। ग़ालिबफ़ के भाषण से संकेत मिलता है कि तेहरान युद्धविराम और उससे संबंधित ज्ञापन को एक अंतिम राजनीतिक समाधान नहीं मानता है और अगर वाशिंगटन अपने दायित्वों को पूरा करने में विफल रहता है तो वह सैन्य और राजनयिक दबाव दोनों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है। बाहरी टकराव के अलावा, ग़ालिबफ़ ने उस नई अमेरिकी रणनीति पर विशेष ध्यान दिया, जिसका उद्देश्य आर्थिक दबाव और सामाजिक विभाजन के माध्यम से ईरान को आंतरिक रूप से कमजोर करना था।उन्होंने कहा कि सैन्य और कूटनीतिक साधनों से अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में विफल रहने के बाद दुश्मन &quot;आर्थिक दबाव और राष्ट्रीय एकता के विनाश&quot; की तलाश कर रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Mail&#45;in Voting पर घिरे Donald Trump, विरोध के बावजूद Florida Primary में डाक से डाला वोट</title>
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<description><![CDATA[ लोकल वोटिंग रिकॉर्ड्स का हवाला देते हुए &#039;पोलिटिको&#039; ने रिपोर्ट किया है कि मेल-इन वोटिंग का बार-बार विरोध करने और इस सिस्टम में धोखाधड़ी की आशंका जताने के बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने गृह राज्य फ्लोरिडा में मेल के ज़रिए वोट डाला है। पोलिटिको के अनुसार, पाम बीच काउंटी के वोटिंग रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि ट्रंप ने जुलाई के आखिर में मेल-इन बैलेट के लिए अनुरोध किया था और 13 अगस्त को इसे वापस भेज दिया था। यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने फ्लोरिडा में मेल-इन बैलेट का इस्तेमाल किया है। उन्होंने इस साल की शुरुआत में पाम बीच काउंटी में एक विशेष चुनाव में भी मेल के ज़रिए वोट डाला था।इसे भी पढ़ें: ट्रंप से मुलाकात, UNGA से दूरी, 11 साल बाद जिनपिंग के लिए व्हाइट हाउस में बिछेगा रेड कार्पेटट्रंप का मेल-इन वोटिंग का इस्तेमाल ऐसे समय में हुआ है जब वह लगातार इस प्रक्रिया के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं और संघीय चुनावों के आयोजन पर सख्त प्रतिबंध लगाने की कोशिशों का समर्थन कर रहे हैं। फ्लोरिडा के रिपब्लिकन प्राइमरी में गवर्नर पद के लिए कड़ा मुकाबला है, जिसमें ट्रंप समर्थित अमेरिकी प्रतिनिधि बायरन डोनाल्ड्स को सबसे आगे माना जा रहा है। पोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें लेफ्टिनेंट गवर्नर जे कॉलिन्स, राज्य के पूर्व हाउस स्पीकर पॉल रेनर और निवेशक जेम्स फिशबैक से चुनौती मिल रही है। ट्रंप ने बार-बार कांग्रेस से &#039;SAVE America Act&#039; पास करने की अपील की है। इस कानून के तहत फ़ेडरल चुनावों के लिए फ़ोटो पहचान-पत्र और नागरिकता का दस्तावेज़ी सबूत देना ज़रूरी होगा।इसे भी पढ़ें: भारत ने करोड़ों...कुछ सीखो, चुनाव को लेकर ट्रंप ने अमेरिकी प्रशासन को दिखाया आईनाव्हाइट हाउस की असिस्टेंट प्रेस सेक्रेटरी ओलिविया वेल्स ने मेल-इन बैलेट के ट्रंप के इस्तेमाल का बचाव करते हुए कहा कि प्रस्तावित कानून में कुछ खास मामलों में छूट दी जाएगी। पोलिटिको के अनुसार, वेल्स ने कहा, जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है, &#039;SAVE America Act&#039; में अमेरिकियों के लिए बीमारी, विकलांगता, मिलिट्री सेवा या यात्रा के दौरान मेल-इन बैलेट के इस्तेमाल को लेकर समझदारी भरे अपवाद (छूट) रखे गए हैं - लेकिन सभी के लिए मेल-इन वोटिंग की इजाज़त नहीं होनी चाहिए क्योंकि इसमें धोखाधड़ी की बहुत ज़्यादा गुंजाइश होती है। उन्होंने आगे कहा जैसा कि सभी जानते हैं, राष्ट्रपति पाम बीच के निवासी हैं और फ़्लोरिडा के चुनावों में हिस्सा लेते हैं, लेकिन ज़ाहिर है कि वे मुख्य रूप से वॉशिंगटन, D.C. में व्हाइट हाउस में रहते हैं। यह कोई बड़ी बात या खबर नहीं है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:55 +0530</pubDate>
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<title>क्रूज मिसाइलों वाला ड्रोन, 700 KM रेंज, तुर्किए ने क्या तबाही बना ली?</title>
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<description><![CDATA[ ईरान की युद्ध नीति की दुनिया मुरीद हो चुकी है। छोटे देश हो या फिर बड़े ड्रोन युद्ध नीति ने दिशा और दशा बदल दी है। यही वजह है कि हर देश सस्ते और खतरनाक ड्रोन की दौड़ में आ चुका है। तुर्की ने अपने सबसे आधुनिक स्टील कॉम्बैट ड्रोन अंका थ्री का एक ऐसा घातक संस्करण तैयार किया जो भविष्य के हवाई युद्ध के पूरे गणित को हिला सकता है। लगभग 700 किलोमीटर तक मार करने वाली सुपर लाइटनिंग पीयूष मिसाइलों से लैस यह ड्रोन अब अकेला नहीं बल्कि इंसानी पायलटों के साथ मिलकर जंग लड़ेगा। तुर्की ने इस ड्रोन को ऐसे वक्त में दिखाया जब इसराइल से रिश्ते बेहद खतरनाक मोड़ पर हैं। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान और इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन ने नेतन्याहू के बीच जुबानी जंग भी चल रही थी। इजरायली टेक्नोलॉजी दुनिया भर में मशहूर है। तुर्की रक्षा क्षेत्र में अपनी करामात के लिए जाना जाता है। ऐसे में दुनिया इस ड्रोन को दूसरे नजरिए से भी देखने लगी। इसे भी पढ़ें: Israel के राष्ट्रपति ने X पर पोस्ट कर भारत से घनिष्ठ मित्रता और मजबूत करने की जताई उम्मीदतुर्की एरोस्पेस इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित अंका 3 एक फ्लाइंग विंग डिजाइन वाला स्टेल्थ यूसीएब भी है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका कम दृष्टता स्टेल्थ डिज़ है जिसे दुश्मन के एयर डिफेंस रडार की नजरों से बचाए रखता है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अंका 3 दो सुपर लाइटनिंग लॉन्ग रेंज क्रूज मिसाइलों के साथ जोड़ा गया। लगभग 700 किमी के स्ट्राइक रेंज के साथ यह ड्रोन दुश्मन की सीमा में घुसे बिना उसके सबसे मजबूत ठिकानों को तबाह कर सकता है। लगभग 10 घंटे तक लगातार हवा में रहने की क्षमता इसे घातक स्ट्राइक प्लेटफार्म बनाती है। अंका 3 की असली खासियत केवल उसकी मिसाइलें नहीं बल्कि उसका काम करने का तरीका है। इसे मैंड अनमैंड टीमिंग यानी मानव चालित फाइटर जेट्स और स्वयत ड्रोंस के तालमेल के लिए डिजाइन किया गया है। यह तुर्की के पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट कान के लिए एक लॉयल विंग मैन की तरह काम करेगा। इंसानी पायलट हवा में उड़ते हुए अंका3 जैसे कई स्टेल्थ ड्रोंस के बड़े बेड़े को कंट्रोल कर सकते हैं। टोही इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और बेहद खतरनाक हवाई हमलों की जिम्मेदारी यह ड्रोन खुद उठाएगा। जिसमें इंसानी पायलट की जान का जोखिम लगभग खत्म हो जाएगा। ग्लोबल डिफेंस मार्केट में तुर्की जिस तरीके से अपने ड्रोन इकोसिस्टम जैसे बायर कटार टीवी2 किजिलमा और अब अंकात्री को मजबूत कर रहा है उसने बड़ी महाशक्तियों की चिंता बढ़ा दी। भविष्य के आसमान में अब कोई फाइटर पायलट अकेले जंग में नहीं उतरेगा बल्कि उसके इर्द-गिर्द स्वायत्त स्टेल्ट ड्रोन की अदृश्य ढाल और हमलावर दस्ता मौजूद होगा। अंका 3 ने यह साबित किया है कि हवाई युद्ध का अगला दौर इंसानों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साझा तालमेल पर टिका होगा। ऐसे में अब इसराइल के साथ जिस तरीके से जुबानी जंग हाल फिलहाल में देखी गई। इसके अलावा तुर्की के मंत्री हकान फिदान ने जिस तरीके से अपनी एक फोटो के जरिए इसराइल को चेतावनी देने की कोशिश की उससे यह साफ हो रहा है कि आने वाला युद्ध कहीं ना कहीं ड्रोन वारफेयर होगा। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ईरान की ड्रोन क्रांति की दुनिया अब मुरीद हो गई और टू ही ड्रोनों की दौड़ अब खतरनाक होती जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने फैसले से पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा कर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यासों के पैमानों में भारी कटौती करने का निर्देश दिया है। इसे भी पढ़ें: Israel का Lebanon पर हवाई हमला: 11 लोगों की मौत और 19 घायल, PM सलाम ने की निंदाट्रंप ने इसके पीछे ना केवल भारी वित्तीय लागत को वजह बताया बल्कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने बेहतरीन व्यक्तिगत संबंधों का भी हवाला दिया। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप का ये दांव ऐसे समय में सामने आया जब अमेरिकी विदेश नीति इतिहास के सबसे जटिल कूटनीतिक संकट से गुजर रही है। वाशिंगटन इस समय एक तरफ उत्तर कोरिया और दूसरी तरफ ईरान के दोहरे मोर्चे पर उलझा हुआ है। दोनों ही मोर्चों पर ना तो युद्ध और ना ही शांति को लेकर कोई बातचीत फाइनल हो पा रही है और ना ही कोई ठोस समझौता धरातल पर उतरता हुआ दिखाई दे रहा है। ट्रंप के इस ताजा फैसले ने दक्षिण कोरिया की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:54 +0530</pubDate>
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<title>Russia ने जापानी राजदूत को किया तलब, Vladimir Putin की कुरील द्वीप यात्रा पर जताया कड़ा ऐतराज</title>
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<description><![CDATA[ रूस के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को जापान के राजदूत को तलब करके राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की कुरील द्वीप समूह की यात्रा की निंदा किए जाने पर विरोध जताया। कुरील प्रशांत महासागर में रूस के नियंत्रण वाला द्वीप समूह है, जबकि जापान भी इस पर दावा करता है। पिछले सप्ताह पुतिन ने इस द्वीप समूह के चार सबसे दक्षिणी द्वीपों में से एक इटुरुप का दौरा किया था।जापान इसे अपना उत्तरी क्षेत्र कहता है। द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम दिनों में सोवियत संघ ने इन द्वीपों को जापान से अपने कब्जे में ले लिया था। इस विवाद के कारण दोनों देश अब तक औपचारिक रूप से शांति संधि पर हस्ताक्षर नहीं कर पाए हैं।जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि पुतिन की यह यात्रा ‘‘उत्तरी क्षेत्रों पर जापान के रुख के अनुरूप नहीं है’’ और ‘‘पूरी तरह अस्वीकार्य’’ है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को इस यात्रा से और नुकसान पहुंचा है तथा मॉस्को को इसके परिणाम समझने चाहिए। जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा कि जापान इटुरुप की पुतिन की यात्रा का ‘‘कड़ा विरोध’’ करता है।मंगलवार को रूस के उप विदेश मंत्री मिखाइल गालुजिन ने जापानी राजदूत अकीरा मुतो को तलब करके ताकाइची तथा मोतेगी के ‘‘रूस विरोधी’’ बयानों पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, गालुजिन ने मुतो से कहा, ‘‘दक्षिणी कुरील द्वीपों पर रूस की संप्रभुता और अधिकार क्षेत्र पूरी तरह निर्विवाद है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:54 +0530</pubDate>
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<title>सीरिया का Israel पर बड़ा आरोप, Idlib Airbase पर हवाई हमलों से बढ़ा Middle East में तनाव का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ सीरिया ने मंगलवार को इदलिब में अबू अल-दुहुर मिलिट्री एयरबेस पर हुए हवाई हमलों के लिए इज़राइल को ज़िम्मेदार ठहराया। सीरिया ने आरोप लगाया कि इज़राइल ने उसकी संप्रभुता का उल्लंघन किया है और क्षेत्र में तनाव बढ़ने से रोकने की कोशिशों को कमज़ोर करने की कोशिश की है। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी सीरिया के इदलिब प्रांत के पूर्वी इलाके में अबू अल-ज़ुहुर मिलिट्री एयरपोर्ट पर चार हवाई हमले हुए। दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सरकार गिरने के बाद से इस जगह पर यह पहला हमला था। विदेश मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान में दमिश्क ने इन हमलों को सीरिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का खुला उल्लंघन और तनाव को खतरनाक स्तर तक बढ़ाने वाला कदम बताया। मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सीरियाई अधिकारियों ने संयम बरता है और देश में स्थिरता बनाए रखने के लिए काम किया है। साथ ही, चेतावनी दी कि इज़राइली सेना के लगातार सैन्य अभियानों से इन कोशिशों के कमज़ोर होने का खतरा है।इसे भी पढ़ें: Syria और Russia के बीच हुआ समझौता, हमीमीम और टार्टस बेस का नियंत्रण सीरिया लेगाविदेश मंत्रालय ने कहा, &quot;8 दिसंबर 2024 से जारी ये इज़राइली हमले ऐसे समय में हो रहे हैं जब सीरियाई सरकार ने संयम बरता है और अपनी क्षमता को मज़बूत करने और तनाव बढ़ने से रोकने के लिए काम किया है। ये हमले एक बार फिर दिखाते हैं कि इज़राइली कब्ज़ा करने वाली ताक़तें इन कोशिशों को कमज़ोर करने और इलाके को और ज़्यादा तनाव और अस्थिरता की ओर धकेलने की कोशिश कर रही हैं। तनाव बढ़ने के लिए इज़राइली सरकार को पूरी तरह ज़िम्मेदार ठहराते हुए, दमिश्क ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से दखल देने की अपील की। बयान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय से औपचारिक रूप से अपील की गई कि वे सीरिया की संप्रभुता के बार-बार उल्लंघन की तुरंत निंदा करें और इसके खिलाफ़ सख़्त रुख अपनाएं।इसे भी पढ़ें: सीरिया के तानाशाह रहे बशर अल-असद को मौत की सजा, लाखों लोगों की मौत के जिम्मेदार पाए गएअपनी बात दोहराते हुए विदेश मंत्रालय ने ज़ोर दिया कि सीरिया &quot;अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत गारंटीकृत वैध तरीकों से अपने अधिकारों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना जारी रखेगा। इसके अलावा, जॉर्डन ने सीरिया के इदलिब प्रांत में अबू अल-ज़ुहुर मिलिट्री एयरपोर्ट को निशाना बनाकर किए गए हालिया इज़राइली हवाई हमलों की कड़ी निंदा की है। जॉर्डन ने इस हमले को &quot;अनुचित आक्रामकता&quot; और अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताया है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:54 +0530</pubDate>
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<title>UK ने रूस की चेतावनी दरकिनार कर Ukraine को 100 प्रतिशत मदद का भरोसा दिया</title>
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<description><![CDATA[ (अदिति खन्ना)
लंदन, 18 अगस्त ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने रूस की चेतावनी को दरकिनार करते हुए मंगलवार को यूक्रेन का समर्थन जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। इससे पहले रूस ने यूक्रेन को ड्रोन की आपूर्ति करने के लिए ब्रिटेन को गंभीर ‘‘परिणाम’’ भुगतने की चेतावनी दी थी। लंदन स्थित रूसी दूतावास ने सोमवार को सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा था कि ब्रिटेन रूस-यूक्रेन संघर्ष में ‘‘सहयोगी और सह-अपराधी’’ के रूप में काम कर रहा है।रूस ने खुद पर हुए यूक्रेन के हमलों को आतंकवादी हमले बताया था। बर्नहम ने कहा कि ब्रिटेन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हमले का सामना करने के लिए यूक्रेन को ‘‘100 प्रतिशत’’ समर्थन देता रहेगा। रूसी दूतावास के बयान पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर बर्नहम ने कहा, ‘‘ब्रिटेन वही कर रहा है, जो वह लंबे समय से कहता रहा है।यानी व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में जारी इस अवैध युद्ध के खिलाफ यूक्रेन का 100 प्रतिशत समर्थन करना।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम यूक्रेन को उसकी रक्षा करने में सक्षम बनाने के लिए सहायता दे रहे हैं और पूरे संघर्ष के दौरान पिछले प्रधानमंत्रियों के समय भी ब्रिटेन का यही रुख रहा है। मेरे कार्यकाल में भी यह रुख जारी रहेगा। हम केवल अच्छे समय के दोस्त नहीं हैं।हम यूक्रेन की जरूरत के समय उसके साथ रहेंगे और इस रुख में कोई बदलाव नहीं होगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:53 +0530</pubDate>
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<title>General Dheeraj Seth ने Nepal PM बालेंद्र शाह से मुलाकात की, सैन्य संबंधों पर हुई चर्चा</title>
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<description><![CDATA[ (शिरिष बी प्रधान)
काठमांडू, 18 अगस्त भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार को नेपाल के प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री बालेंद्र शाह से मुलाकात की और आपसी हित के मुद्दों तथा सैन्य संबंधों को मजबूत करने के तौर- तरीकों पर चर्चा की। दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों में तनाव के बीच सिंह दरबार में प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के कार्यालय में हुई इस मुलाकात के दौरान नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी हित और द्विपक्षीय सैन्य संबंधों को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।इस महीने की शुरुआत में, प्रधानमंत्री शाह ने भारतीय राजदूत श्रीवास्तव के साथ अपनी पहली आमने-सामने की बैठक की थी और भारत के साथ देश के ‘ऐतिहासिक संबंधों’ को और मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित किया था। इहाल के सप्ताह शाह ने विदेशी राजदूतों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आमने-सामने की मुलाकात न करने के अपने ही बनाए नियम से हटकर यह मुलाकात की। जनरल सेठ अपने नेपाली समकक्ष जनरल अशोक राज सिग्देल के निमंत्रण पर 17 से 19 अगस्त तक नेपाल की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं।उन्हें सोमवार को यहां एक समारोह में राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने नेपाली सेना के ‘मानद जनरल’ का दर्जा दिया। नेपाल और भारत 1950 से एक-दूसरे के सेना प्रमुखों को ‘जनरल’ का मानद पद देने की परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। यह मानद पद देना एक अनोखी और लंबे समय से चली आ रही सैन्य परंपरा का हिस्सा है, जिसके तहत भारत और नेपाल एक-दूसरे की सेनाओं के प्रमुखों को ‘जनरल’ का मानद पद देते हैं।जनरल सेठ ने सोमवार को सेना मुख्यालय में जनरल सिग्देल के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी की और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा की। जनरल सेठ ने सोमवार को नेपाली सेना के मुख्यालय में जनरल सिग्देल के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी की और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा की। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि भारतीय सेना प्रमुख का नेपाल दौरा ‘‘भारत और नेपाल के बीच रक्षा के क्षेत्र में अद्वितीय और समय की कसौटी पर खरे उतरे रिश्तों को फिर से मज़बूत करता है।ये रिश्ते साझा मूल्यों, आपसी भरोसे और सेनाओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत संबंधों पर आधारित हैं।’’
नेपाली सेना के सूत्रों ने बताया कि जनरल सेठ ने मंगलवार को काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना भी की। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:29:53 +0530</pubDate>
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<title>डीआर काँगो: इबोला के ख़िलाफ़ जंग में उतरे पूर्व विद्रोही</title>
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<description><![CDATA[ लोकतांत्रिक गणराज्य काँगो (DRC) के पूर्वी हिस्से में निरस्त्र किए गए पूर्व विद्रोही अब इबोला से लड़ाई में मदद कर रहे हैं. वे लोगों को बीमारी से बचाव और उसके फैलाव को रोकने के तरीक़ों के बारे में जागरूक कर रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 04:30:53 +0530</pubDate>
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<title>सीरिया: मलबा हटाकर ज़िन्दगी फिर सँवारने में जुटे समुदाय</title>
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<description><![CDATA[ सीरिया के लोग एक दशक से अधिक समय के हिंसक टकराव और संकट से तबाह अपने इलाक़ों और आजीविकाओं को फिर से सँवारने में जुटे हैं. समुदाय मलबा हटा रहे हैं, मोहल्लों का पुनर्निर्माण कर रहे हैं और सामान्य जीवन की ओर लौटने की कोशिश कर रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 04:30:39 +0530</pubDate>
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<title>पश्चिमी तट में फँसे परिवार, सैकड़ों बाधाओं से मानवीय सहायता प्रभावित</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, चौकियों, अस्थिरता और आवाजाही पर पाबन्दियों जैसी बाधाओं के बावजूद, मानवीय सहायताकर्मी क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र में लोगों तक जीवनरक्षक सहायता पहुँचाना जारी रखे हुए हैं. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Aug 2026 04:30:39 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिकी दस्तावेजों ने Anthropic CEO की पत्नी Cami Clark के खोले राज़, Jeffrey Epstein से एडल्ट साईट के लिए मांगी थी फंडिंग</title>
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<description><![CDATA[ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में Anthropic के CEO डारियो अमोडेई एक जाना-पहचाना नाम हैं। लेकिन उनकी पत्नी कैमी क्लार्क की कहानी कहीं ज्यादा दिलचस्प है। कहा जाता है कि किसी समय में उन्होंने महिलाओं के लिए एक एडल्ट-कंटेंट स्टार्टअप खड़ा करने की कोशिश, फिर जेफरी एप्स्टीन से निवेश की बातचीत, उसके बाद सिलिकॉन वैली के बड़े नामों से करीबी और आज AI की दुनिया के सबसे चर्चित लोगों में से एक के साथ पर्दे के पीछे सक्रिय भूमिका, इससे साफ़ जाहिर होता है कि क्लार्क का करियर किसी सीधे रास्ते पर नहीं चला। हाल ही में जारी अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों और वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट ने उनके अतीत के उस हिस्से को फिर चर्चा में ला दिया है, जो लंबे समय से सार्वजनिक नजरों से लगभग गायब रहा था। अमेरिकी न्याय विभाग ने एप्स्टीन से जुड़े दस्तावेजों का एक बड़ा संग्रह सार्वजनिक किया है, हालांकि ऐसे दस्तावेजों में किसी व्यक्ति का नाम या संपर्क सामने आना अपने आप में किसी अपराध में शामिल होने का सबूत नहीं माना जा सकता।कहानी करीब 15 साल पीछे जाती है। साल था 2011 जब कैमी क्लार्क और उनकी बिजनेस पार्टनर मिशेल कैपोसेफालो ने महिलाओं को ध्यान में रखकर एक एडल्ट-एंटरटेनमेंट कंपनी शुरू करने की कोशिश की। कंपनी का नाम Eddice था और इसे दोनों ने महिलाओं के लिए एक अलग तरह की, ‘सेक्स-पॉजिटिव’ पोर्न कंपनी के रूप में पेश किया था। कंपनी को शुरू करने के लिए करीब 3.5 लाख डॉलर की फंडिंग चाहिए थी। इसी सिलसिले में साहित्यिक एजेंट जॉन ब्रॉकमैन ने दोनों महिलाओं की मुलाकात जेफरी एप्स्टीन से कराई। उस समय एप्स्टीन पहले ही यौन अपराध के मामले में दोषी ठहराया जा चुका था और एक रजिस्टर्ड सेक्स ऑफेंडर था।सरकारी दस्तावेजों में मौजूद बातचीत के मुताबिक, ब्रॉकमैन ने एप्स्टीन को दोनों महिलाओं से मिलने का सुझाव देते हुए उनके बिजनेस आइडिया का जिक्र किया था। कुछ समय बाद क्लार्क ने खुद एप्स्टीन को ईमेल किया और पुरानी मुलाकात याद दिलाते हुए अपने ‘लक्जरी पोर्न’ बिजनेस का जिक्र किया। एप्स्टीन ने भी उन्हें याद करते हुए जवाब दिया। क्लार्क ने Eddice में निवेश की संभावना पर एप्स्टीन से बात आगे बढ़ाई। लेकिन एप्स्टीन ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इसके बाद क्लार्क ने बातचीत का रुख तुरंत दूसरे बिजनेस आइडिया की ओर मोड़ दिया। इस बार उनका आइडिया महिलाओं के लिए एक सोशल डाइटिंग ऐप और वेबसाइट का था। इसमें फिटनेस ट्रैकर से मिलने वाला डेटा, पोषण, मासिक धर्म चक्र, मूड और लोकेशन जैसी जानकारियों को एक जगह जोड़ने का विचार था। दिलचस्प बात यह है कि एप्स्टीन के साथ संपर्क वहीं खत्म नहीं हुआ। जारी किए गए दस्तावेजों के अनुसार, दोनों के बीच करीब दो साल तक बातचीत चलती रही। क्लार्क ने उसे एक हाउसवॉर्मिंग पार्टी में भी बुलाया और बाद में दोनों LinkedIn पर भी जुड़े।इसे भी पढ़ें: Electric Vehicle स्टार्टअप Yulu ने Series C Funding में जुटाए 9.3 करोड़, अब IPO और Fleet Expansion पर बड़ा दांवकैमी क्लार्क का शुरूआती सफरक्लार्क का जन्म 1979 में नेवादा के रेनो में हुआ था। उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की और इसके बाद अलग-अलग तरह के कारोबारी प्रयोग करती रहीं। 20 साल की उम्र में उन्होंने रेनो के आर्किटेक्ट वाल्डेमार एक्लोफ III से शादी की, जो उस समय उनसे काफी बड़े थे। यह शादी करीब तीन साल चली। बाद में सैन फ्रांसिस्को में एक अपार्टमेंट से जुड़े मामले के बाद उन्होंने दिवालिया होने के लिए भी आवेदन किया। करीब 2010 में उन्होंने कैपोसेफालो के साथ Eddice की शुरुआत की। कंपनी का दावा था कि वह पारंपरिक पुरुष-केंद्रित एडल्ट इंडस्ट्री से अलग महिलाओं को केंद्र में रखकर काम करेगी। इसका स्लोगन था—‘intellectually promiscuous’। पहली चार फिल्मों के निर्माण के लिए फंड जुटाने की योजना थी, जिनमें ‘American Girl in Paris’ भी शामिल थी।फिर एंट्री हुई सिलिकॉन वैली के बड़े नामों कीक्लार्क की नेटवर्किंग धीरे-धीरे उन्हें टेक इंडस्ट्री के प्रभावशाली लोगों तक ले गई। 2011 से करीब तीन साल तक वह Google के पूर्व CEO एरिक श्मिट के साथ रिश्ते में रहीं। श्मिट ने बाद में क्लार्क के महिलाओं की सेहत से जुड़े एक बिजनेस में निवेश भी किया। इसके बाद 2014 में उनकी मुलाकात डारियो अमोडेई से हुई। उस समय अमोडेई आज के AI दिग्गज नहीं थे। वह अकेडमिक फील्ड में थे और Stanford में पोस्टडॉक्टरल रिसर्च कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने Princeton से computational neuroscience में PhD की थी और बाद में Baidu और Google जैसी कंपनियों में काम किया। और यहीं से क्लार्क की कहानी AI की दुनिया से जुड़ने लगी।इसे भी पढ़ें: FCRA Bill 2026: विदेशी फंडिंग पर रोक नहीं लगाएगा नया FCRA बिल, एम्बेसडर विनय क्वात्रा ने दी सफाईअमोडेई की प्रोफेशनल दुनिया में भी क्लार्क की भूमिकासमय के साथ अमोडेई AI इंडस्ट्री में आगे बढ़ते गए और क्लार्क भी उनके व्यापक प्रोफेशनल नेटवर्क का हिस्सा बनती गईं। रिपोर्ट के मुताबिक, क्लार्क ने अपनी करीबी दोस्त मीरा मुराती का परिचय OpenAI के को-फाउंडर ग्रेग ब्रॉकमैन से कराया। मुराती आगे चलकर OpenAI की CTO बनीं। क्लार्क ने अमोडेई और एरिक श्मिट के बीच संपर्क बनाने में भी भूमिका निभाई। 2018 में श्मिट ने सैन फ्रांसिस्को में अमोडेई और क्लार्क के घर जाकर उनसे मुलाकात की थी। बाद में उन्होंने इस मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा था कि दोनों के विचारों ने उन्हें प्रभावित किया था।OpenAI से निकलकर Anthropic तकदिसंबर 2020 में डारियो अमोडेई, उनकी बहन डेनिएला और OpenAI के पांच अन्य कर्मचारियों ने कंपनी छोड़ दी। इसके पीछे कंपनी की दिशा और नियंत्रण को लेकर मतभेद बताए गए थे। इसके बाद इन लोगों ने मिलकर Anthropic की शुरुआत की। मई 2021 में Anthropic ने 12.4 करोड़ डॉलर की Series A फंडिंग जुटाई। इस निवेश दौर में एरिक श्मिट भी शामिल थे। यहीं पर क्लार्क की भूमिका को लेकर कहानी और दिलचस्प हो जाती है। फरवरी 2021 म ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Aug 2026 00:22:41 +0530</pubDate>
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<title>भूकंप की मार झेल रहे कोलंबिया ने Donald Trump से मांगी राहत, अतिरिक्त टैरिफ टालने का किया अनुरोध</title>
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<description><![CDATA[ कोलंबिया के नए राष्ट्रपति अबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला ने शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की। उन्होंने अमेरिका से कोलंबियाई उत्पादों पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को कुछ समय के लिए स्थगित करने की अपील की है।कोलंबिया इस समय हाल ही में आए विनाशकारी भूकंप के भारी प्रभाव से गुजर रहा है। जुलाई के अंत में कोलंबियाई सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया गया था, हालांकि कॉफी और तेल जैसे मुख्य उत्पादों को इसमें छूट मिली हुई है।एक्स पर साझा की बातचीत की जानकारीराष्ट्रपति डे ला एस्प्रिएला ने एक्स पर अपनी पोस्ट में बताया कि उनकी राष्ट्रपति ट्रंप से लगभग दस मिनट तक बात हुई। उन्होंने लिखा, &quot;मैंने उनसे उन ऊंचे टैरिफ को कुछ समय के लिए रोकने पर विचार करने को कहा जो कोलंबियाई उत्पादों पर बुरा असर डाल रहे हैं। इससे हमारे उन कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी जो भूकंप के कारण बेहद मुश्किल समय का सामना कर रहे हैं।&quot; उन्होंने संकट की इस घड़ी में अमेरिका द्वारा भेजी गई आर्थिक मदद और बचाव दलों के सहयोग के लिए ट्रंप का धन्यवाद भी किया। इसे भी पढ़ें: Indiana Flood: अमेरिका में भीषण तूफान और बाढ़ से 5 लोगों की मौत, आपातकाल लागूविरासत में मिली आर्थिक चुनौतियांकोलंबियाई राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि उनके सामने देश का पुनर्निर्माण करना एक बहुत बड़ी चुनौती है, क्योंकि उन्हें पहले से ही काफी खराब और विनाशकारी आर्थिक हालात विरासत में मिले हैं। इसके ऊपर से आए भूकंप ने देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। उन्होंने कहा कि इन विषम परिस्थितियों में कोलंबिया को फिर से खड़ा करने के लिए दोनों देशों का यह गठबंधन और सहयोग पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। इसे भी पढ़ें: Iran से हारे नेतन्याहू की विदाई तय! अब तो ट्रंप ने भी खींच लिए हाथट्रंप का एकजुटता का भरोसाडे ला एस्प्रिएला ने दोनों नेताओं के बीच हुई इस वार्ता को बहुत दोस्ताना और सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भूकंप पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और प्रभावित परिवारों के साथ एकजुटता दिखाई। ट्रंप का व्यवहार काफी गर्मजोशी भरा रहा और उन्होंने कोलंबियाई लोगों के प्रति अपना स्नेह जताया। कोलंबिया के राष्ट्रपति ने अंत में देशवासियों को मजबूती से इस आपदा का मुकाबला करने का संदेश दिया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Aug 2026 00:22:41 +0530</pubDate>
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<title>Belgium Wildfire: हाई फेंस वन क्षेत्र में भीषण आग से 27 वर्ग किमी इलाका राख हुआ</title>
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<description><![CDATA[ बेल्जियम के सबसे बड़े वन क्षेत्र हाई फेंस में रविवार को लगी भीषण आग के कारण 27 वर्ग किलोमीटर से अधिक का इलाका जलकर खाक हो गया। देश के हालिया इतिहास की इस सबसे भयानक वनाग्नि के चलते आसपास के इलाकों से सैकड़ों लोगों को अपना घर छोड़कर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। जर्मनी की सीमा के करीब स्थित लीज प्रांत के वाइम्स और बूटगेनबाख नगरपालिकाओं में हवा का रुख बदलने और घना धुआं फैलने के बाद लगभग 600 निवासियों को 15 अगस्त को ही जगह खाली करने का निर्देश दिया गया था।अधिकारियों ने पर्यटकों को भी इलाका छोड़ने की सलाह दी है, जबकि विस्थापितों को ठहराने के लिए पास में एक व्यायामशाला को अस्थायी शिविर के रूप में खोला गया है।लीयैज प्रांत के गवर्नर हर्व जमार ने एक बयान में बताया कि 250 से अधिक आपातकालीन कर्मियों को तैनात किया गया है। इनमें बेल्जियम और जर्मनी के 100 से अधिक दमकल कर्मी, पुलिस, सेना के अधिकारी और नागरिक सुरक्षा बल के कर्मचारी शामिल हैं, जिन्हें अग्निशमन हेलीकॉप्टरों की मदद भी मिल रही है। यह भीषण आग हफ्तों तक पड़ी भीषण गर्मी और शुष्क मौसम के बाद लगी है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Aug 2026 00:22:40 +0530</pubDate>
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<title>Indonesia में 7.7 तीव्रता के Earthquake से 51 लोगों की मौत, 5 हजार बेघर हुए</title>
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<description><![CDATA[ पूर्वी इंडोनेशिया में एक दिन पहले आए 7.7 तीव्रता के भूकंप में मृतकों की संख्या रविवार को चार और शव बरामद होने के बाद बढ़कर 51 हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। भूकंप के कारण हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।अमेरिका भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, शक्तिशाली भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 5:58 बजे पूर्वी इंडोनेशिया के फ्लोरेस क्षेत्र में आया। भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। अमेरिका भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने बताया कि सुनामी की चेतावनी जारी होने के बाद लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए हालांकि बाद में यह चेतावनी वापस ले ली गई।इसे भी पढ़ें: भूकंप की मार झेल रहे कोलंबिया ने Donald Trump से मांगी राहत, अतिरिक्त टैरिफ टालने का किया अनुरोधइंडोनेशिया की मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, भूकंप के बाद कम से कम 235 झटके महसूस किए गए। रविवार को बचावकर्मी भूकंप के कारण हुए भूस्खलन के कारण मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटे रहे। यह अभियान फ्लोरेस के छह क्षेत्रों में चलाया गया।इसे भी पढ़ें: Indonesia में 7.7 तीव्रता के Earthquake से तबाही, 40 की मौत और 50 घायलफ्लोरेस मुख्य रूप से कैथोलिक आबादी वाला द्वीप है और मुस्लिम बहुल इंडोनेशिया का हिस्सा है। बचावकर्मियों ने उन तीन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया, जहां भूकंप के बाद अब भी पहुंचना संभव नहीं हो पाया था। इनमें सबसे अधिक प्रभावित मंगराई, पूर्वी मंगराई और नागेकेओ जिले शामिल हैं।सिक्का की राजधानी मौमेरे में खोज एवं बचाव कार्यालय के प्रमुख फतहुर रहमान ने बताया, “हमने भूस्खलनों के कारण फैले ज्यादातर मलबे को हटा दिया है और पहले से अलग-थलग पड़े गांवों के लिए सड़कें फिर से खोल दी हैं। हालांकि, संचार व्यवस्था बाधित होने और बिजली कटौती के कारण तलाश अभियान में अब भी दिक्कतें आ रही हैं।” राष्ट्रीय खोज एवं बचाव एजेंसी के अनुसार, 101 लोग घायल हुए हैं, 900 से अधिक मकान पूरी तरह नष्ट हो गए, जबकि 450 अन्य मकानों को नुकसान पहुंचा है। एजेंसी ने बताया कि भूकंप के कारण करीब 5,000 लोगों को अस्थायी आश्रय स्थलों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Aug 2026 00:22:40 +0530</pubDate>
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<title>UK PM Andy Burnham ने इंग्लैंड के किसानों के लिए 6.5 करोड़ पाउंड राहत पैकेज की घोषणा की</title>
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<description><![CDATA[ अदिति खन्ना
लंदन, 16 अगस्त ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने कहा है कि इंग्लैंड के किसानों को लंबे समय तक चलने वाली लू और सूखे मौसम के असर से निपटने में मदद के लिए 6.5 करोड़ पाउंड की अतिरिक्त निधि मिलेगी। ब्रिटिश सरकार देश के बड़े हिस्सों में लंबे समय से जारी तेज गर्मी और सूखे के हालात से निपटने के लिए संघर्ष कर रही है। इस हफ्ते की शुरुआत में, बर्नहैम ने भीषण गर्मी, जंगल की आग और सूखे के हालात पर ‘कैबिनेट ऑफिस ब्रीफिंग रूम ए (कोबरा) की एक आपातकालीन मंत्री-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।कम पैदावार और फसल बर्बाद होने से प्रभावित किसानों से मुलाकात के बाद, उन्होंने शनिवार को अतिरिक्त मदद का वादा किया। बर्नहम ने कहा, “यह पांच साल में तीसरा सूखा है। बदलते मौसम की मार सबसे ज़्यादा किसानों पर पड़ रही है और उन्हें यह जोखिम अकेले नहीं उठाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, “कम आमदनी, ज़्यादा लागत और बारिश की कोई उम्मीद नहीं।मैं इससे जुड़ी चिंता को समझता हूं। अपना अनाज उगाना राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है और मैं इसे उसी नजरिए से देखूंगा।’’
प्रधानमंत्री ने कहा, “इसलिए हम अभी कदम उठा रहे हैं: खेती में मदद के लिए ज़्यादा पैसे देना, जलाशय बनवाने में सहायता करना और पानी की कमी होने पर आसानी से पानी उपलब्ध कराना।”
इस हफ़्ते घोषित किए गए उपायों के पैकेज में ‘संपोषणीय खेती प्रोत्साहन 2026 के लिए अतिरिक्त पांच करोड़ पाउंड शामिल हैं, जिससे कुल बजट 29 करोड़ पाउंड हो गया है। किसानों को पानी जमा करने में मदद करने के लिए खेतों में बनने वाले जलाशयों के लिए 1.5 करोड़ पाउंड तक की राशि भी शामिल है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Aug 2026 00:22:39 +0530</pubDate>
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<title>Balochistan में सुरक्षा बलों ने 7 आतंकी मार गिराए, दो महिलाओं की हत्या</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में रविवार को आतंकवादी हमले में सिंध के एक परिवार की दो महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि दो अलग-अलग कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने सात आतंकवादियों को मार गिराया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के अनुसार, प्रांत के खारान जिले में एक अभियान के दौरान ये आतंकवादी मारे गए, जबकि कई अन्य आतंकवादी घायल हुए।आईएसपीआर ने बताया कि आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद शनिवार रात खारान के लाजे इलाके में अभियान चलाया गया। इस दौरान प्रतिबंधित संगठन ‘फितना अल-खवारिज’ से जुड़े सात आतंकवादी मारे गए। ‘खवारिज’ शब्द का इस्तेमाल पाकिस्तानी सरकार प्रतिबंधित संगठनों के लिए करती है।बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों का यह अभियान छह जुलाई को जियारत में मांगी बांध पंपिंग स्टेशन पर पुलिस चौकी पर हुए घातक हमले के बाद शुरू हुआ था। हथियारबंद हमलावरों ने 27 पुलिसकर्मियों का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी थी। आईएसपीआर ने 12 अगस्त को बताया था कि प्रांत में एक वाहन में लगाया गया विस्फोटक उपकरण तैयार किए जाने के दौरान समय से पहले फट गया था।इसके बाद चलाए गए सुरक्षा अभियान में 21 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 18 आतंकवादी शामिल थे। इससे पहले नौ और 10 अगस्त को दो दिनों के दौरान प्रांत में 20 आतंकवादी मारे गए थे। शनिवार को हुए एक अन्य आतंकवादी घटना में शनिवार को बलूचिस्तान के दौरे पर गया कराची का एक परिवार प्रांत के किला अब्दुल्ला जिले के आदिवासी इलाके सेगी में हमले की चपेट में आ गया।यह परिवार कारोबारी सिलसिले में बलूचिस्तान गया था। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Aug 2026 00:22:39 +0530</pubDate>
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<title>Hungary में बस दुर्घटना: 12 Polish पर्यटकों की मौत, 10 अन्य गंभीर रूप से घायल</title>
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<description><![CDATA[ हंगरी में रविवार तड़के राजमार्ग पर जा रही एक यात्री बस सड़क से फिसल कर खाई में गिर गई जिससे 12 लोगों की मौत हो गई तथा कई अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पोलैंड के पर्यटकों के एक समूह को ले जा रही बस रविवार देर रात करीब एक बजे हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट से लगभग 140 किलोमीटर पूर्व में एम3 मोटरवे पर मेजोकेरेज्त्स शहर के पास पूर्व की ओर जाने वाली सड़क पर पलट गई।पुलिस ने एक बयान में कहा कि प्रारंभिक जांच के अनुसार, हादसा संभवत: चालक को नींद आ जाने के कारण हुआ। उसने बताया कि चालक को हिरासत में ले लिया गया है। हंगरी के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन निदेशालय ने बताया कि हादसे के समय बस में 57 यात्री और दो चालक सवार थे।बस पलटने के बाद कई यात्री उसके नीचे फंस गए थे। पोलैंड के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैसिएज वेवियर ने रविवार को पोलिश समाचार एजेंसी पीएपी को बताया कि बस में सवार सभी लोग पोलैंड के नागरिक थे। हंगरी के प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने फेसबुक पर एक बयान में कहा कि हादसे में कम से कम 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घटनास्थल पर भेजे गए बचावकर्मियों का आभार जताया। पोलैंड के राष्ट्रपति कारो‍ल नावरोकी ने भी हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा मैं पीड़ितों के परिवारों और उनके चाहने वालों के साथ प्रार्थना और गहरी संवेदना में शामिल हूं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Aug 2026 00:22:39 +0530</pubDate>
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<title>Tarique Rahman के भारत दौरे पर बात जारी, लेकिन Bangladesh ने रख दी ये शर्त</title>
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<description><![CDATA[ भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक रिश्तों में एक बार फिर हलचल देखने को मिल रही है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई हफ्तों से बातचीत चल रही है। हालांकि, बांग्लादेश विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शाहिदुल करीम ने साफ किया है कि अभी तक इस प्रस्तावित दौरे की तारीखें पक्की नहीं हो पाई हैं।शेख हसीना के बयान पर बांग्लादेश को ऐतराजदोनों देशों की इस बातचीत के बीच उस समय कड़वाहट आ गई, जब बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। ढाका ने इस पर सख्त ऐतराज जताया है। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल से दोषी ठहराई गईं शेख हसीना को भारत में खुले मंच से बोलने का मौका नहीं मिलना चाहिए था। इसके साथ ही बांग्लादेश ने भारत से शेख हसीना और अन्य आरोपियों को वापस सौंपने की मांग फिर से उठाई है। इसे भी पढ़ें: भूकंप की मार झेल रहे कोलंबिया ने Donald Trump से मांगी राहत, अतिरिक्त टैरिफ टालने का किया अनुरोधभारत की सफाईबांग्लादेश के ऐतराज पर भारत ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि शेख हसीना का वह कार्यक्रम एक प्राइवेट मीडिया क्लब ने आयोजित किया था। इस इवेंट में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी और न ही सरकार वहां कही गई बातों का समर्थन करती है। इसे भी पढ़ें: अमेरिकी दस्तावेजों ने Anthropic CEO की पत्नी Cami Clark के खोले राज़, Jeffrey Epstein से एडल्ट साईट के लिए मांगी थी फंडिंगतनाव के बीच कूटनीतिक रिश्ते सुधारने की कोशिशइस बयानबाजी के बावजूद दोनों देश रिश्ते बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने पीएम तारिक रहमान से मुलाकात करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मैसेज उन तक पहुंचाया था। दोनों पक्ष आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर मिलकर आगे बढ़ने की बात कह रहे हैं। वहीं, बांग्लादेश ने फिर दोहराया है कि उसकी विदेश नीति हमेशा बांग्लादेश फर्स्ट के नियम पर ही चलेगी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Aug 2026 00:22:38 +0530</pubDate>
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<title>Australia के नेता Chris Minns 31 अगस्त से करेंगे भारत दौरा, व्यापार पर रहेगा जोर</title>
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<description><![CDATA[ ऑस्ट्रेलिया के प्रांतीय नेता क्रिस मिन्स महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय साझेदारों में एक (भारत) के साथ अपने प्रांत का आर्थिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने लिए इस माह के आखिर में एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत यात्रा करेंगे। रविवार को एक सरकारी बयान में यह जानकारी दी गयी। मिन्स के कार्यालय ने बताया कि न्यू साउथ वेल्स के शासनाध्यक्ष मिन्स 31 अगस्त से तीन सितंबर तक नयी दिल्ली और मुंबई की सरकारी यात्रा करेंगे।न्यू साउथ वेल्स (एनएसडब्ल्यू) ऑस्ट्रेलिया का सबसे ज़्यादा आबादी वाला प्रांत है और इसी प्रांत में सिडनी है, जो देश का सबसे बड़ा शहर तथा एक प्रमुख वित्तीय, व्यावसायिक और शैक्षिक केंद्र है। बयान में कहा गया है कि 2024-25 में एनएसडब्ल्यू और भारत के बीच 6.87 अरब आस्ट्रेलियाई डॉलर (4.86 अरब अमेरिकी डॉलर) का व्यापार हुआ, जिससे भारत इस प्रांत का ‘सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों’ में से एक बन गया। मिन्स ने कहा, ‘‘मुझे गर्व है कि शासनाध्यक्ष (प्रीमियर) के तौर पर मेरी पहली विदेश यात्रा भारत की होगी।यह हमारे रिश्तों की अहमियत और एनएडब्ल्यू में भारतीय समुदाय के बड़े योगदान को दर्शाता है।’’
सिडनी में भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में मिन्स ने इस यात्रा की घोषणा की। बयान के अनुसार, मिन्स की चार दिन की भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा करने के लिए सरकारी और व्यावसायिक स्तर पर बातचीत करना होगा। भारत दौरे के बाद, मिन्स नेपाल के साथ संबंध मजबूत करने के लिए चार-पांच सितंबर को काठमांडू जाएंगे। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Aug 2026 00:22:38 +0530</pubDate>
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<title>3 भारतीयों ने Libya में 13,000 फीट की ऊंचाई से Skydiving कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)में रहने वाले तीन भारतीय उन 65 ‘स्काईडाइवर्स’ में शामिल थे, जिन्होंने 13,000 फुट की ऊंचाई पर एक विमान से छलांग लगाई और अपने-अपने देश का झंडा फहराकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। स्थानीय मीडिया ने यह खबर दी है। शनिवार को ‘गल्फ न्यूज’ अखबार में शनिवार को प्रकाशित खबर के मुताबिक सात अगस्त को लीबिया में इस आयोजन में केवल तीन भारतीयों, केरल के कन्नूर से जमशीर थनालोट, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से अभिषेक रावत और बिहार के पटना से ईशा राज ने हिस्सा लिया था।खबर के मुताबिक 65 लोगों के पूरे समूह ने एक ही विमान से राष्ट्रीय झंडों के साथ एक साथ कूदने वाले सबसे ज़्यादा स्काईडाइवर्स का नया रिकॉर्ड बनाया। गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने 14 अगस्त को आधिकारिक तौर पर इस कीर्तिमान की पुष्टि की। अखबार के मुताबिक सेना के इल्यूशिन आईएल-76टीडी विमान से छलांग लगाते समय हर स्काईडाइवर ने अपने-अपने देश का झंडा साथ लिया हुआ था।खलीज टाइम्स की खबर के मुताबिक इस समूह में करीब 38 देशों के स्काईडाइवर्स शामिल थे। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Aug 2026 00:22:37 +0530</pubDate>
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<title>Bangladesh: PM Tariq Rahman के भारत दौरे के लिए &amp;apos;अनुकूल माहौल&amp;apos; बनाना जरूरी</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश ने रविवार को कहा कि वह चाहता है कि भारत प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नयी दिल्ली की प्रस्तावित यात्रा के लिए ‘‘अनुकूल माहौल’’ बनाए। स्थानीय अखबार ने अपनी खबर में यह जानकारी दी। ये टिप्पणी 12-13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए रहमान के नयी दिल्ली दौरे को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच आई है।रहमान ने पिछले सप्ताह भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से मुलाकात की थी और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को बांग्लादेश प्रत्यर्पित करने की मांग की थी। हालांकि, इस बात पर कोई स्पष्टता सामने नहीं आई कि रहमान नयी दिल्ली का दौरा करेंगे या नहीं। ‘डेली स्टार’ अखबार ने रविवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शाहिदुल करीम के हवाले से कहा, ‘‘हमने इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।हमारा मानना ​​है कि इस यात्रा के लिए उचित माहौल बनाने की जरूरत है।’’
समाचार पोर्टल ‘बीडीन्यूज24’ के अनुसार, ‘‘उचित माहौल’’ से करीम का इशारा हसीना के प्रत्यर्पण की बांग्लादेश की मांग वाले मुद्दे की ओर था। पांच अगस्त को नयी दिल्ली में हसीना के प्रेस को ऑनलाइन संबोधित करने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव आ गया था। उस संबोधन में हसीना ने कहा था कि वह दिसंबर में स्वदेश लौटने और लोकतंत्र बहाल करके देश को ‘‘सही रास्ते’’ पर लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, भले ही उन्हें जेल या मौत की सजा का सामना करना पड़े।बांग्लादेश ने हसीना की मीडिया से बातचीत पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि इस कार्यक्रम से बांग्लादेश के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और इससे भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध बेहतर करने की कोशिशों पर बुरा असर पड़ सकता है। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने सात अगस्त को कहा था कि हसीना से जुड़े उस मीडिया कार्यक्रम में नयी दिल्ली की कोई भूमिका नहीं थी और वह उस मंच पर बांग्लादेश सरकार के बारे में कही गई किसी भी बात का समर्थन नहीं करता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Aug 2026 00:22:37 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तानी राष्ट्रपति Asif Ali Zardari का दावा&#45; Pakistan में हिंदू सुरक्षित और भारत से ज्यादा यहीं रहना करते हैं पसंद</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने देश में रह रहे हिंदू समुदाय को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिस पर अब चर्चा तेज हो गई है। पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में जरदारी ने कहा कि देश में रहने वाले हिंदू “उतने ही आजाद” हैं, जितने कहीं और होते। उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान के हिंदू भारत की तुलना में अपने देश में रहना ज्यादा पसंद करेंगे। जरदारी ने ये बातें 14 अगस्त को इस्लामाबाद में आयोजित यादगार-ए-फतह विजय स्मारक समारोह के दौरान कहीं। यह कार्यक्रम पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हुआ था। पाकिस्तान ने इस स्मारक को 2025 में भारत के साथ हुए सैन्य संघर्ष में अपनी बताई गई “जीत” की याद में बनाया है, जिसे वह ‘मरका-ए-हक’ के नाम से संबोधित करता है।कार्यक्रम में पाकिस्तान और भारत की राजनीतिक-सामाजिक सोच के बीच अंतर बताते हुए जरदारी ने पाकिस्तान में हिंदू आबादी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में हिंदू आबादी करीब तीन से चार प्रतिशत है और वहां रहने वाले हिंदू उतने ही स्वतंत्र और सुरक्षित हैं, जितने किसी अन्य जगह पर होते। इसी दौरान उन्होंने पाकिस्तान की सोच को “सहनशीलता” से जोड़ते हुए कहा कि वहां ऐसे मुसलमान हैं जो दूसरे समुदायों को स्वीकार करने और उन्हें साथ लेकर चलने की मानसिकता रखते हैं। जरदारी ने आगे इससे भी बड़ा दावा कर दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू कथित तौर पर भारत जाने के बजाय पाकिस्तान में ही रहना पसंद करेंगे।इसे भी पढ़ें: Mehndi Trends 2026: जाल वर्क से लेकर फ्लोरल शेडिंग तक, Hariyali Teej के लिए बेस्ट हैं ये Pakistani Designsउनका कहना था कि भारत और पाकिस्तान की सोच अलग-अलग है। भारत के संदर्भ में उन्होंने ‘अखंड भारत’ की विचारधारा का उल्लेख किया और कहा कि भारत ने पाकिस्तान के अस्तित्व और दोनों देशों के बीच के इतिहास के “बहुत से हिस्सों” को भुला दिया है। जरदारी ने अपने भाषण में पाकिस्तान की पहचान को एक मुस्लिम देश के तौर पर रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक पहचान का अंतर है, लेकिन पाकिस्तान में मुसलमानों की सोच ऐसी है जिसमें दूसरे समुदायों के लिए जगह है। यही बात उनके भाषण का मुख्य हिस्सा रही—कि पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों को धार्मिक पहचान के बावजूद स्वतंत्रता और सम्मान मिलता है।इसे भी पढ़ें: Pakistan Hockey ने घरेलू ढांचे पर नहीं दिया ध्यान: पूर्व कप्तान सलमान अकबरहालांकि, उनके इस दावे के साथ पाकिस्तान में हिंदू आबादी को लेकर बताए गए आंकड़े सवाल खड़े करते हैं। पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने देश में हिंदुओं की आबादी तीन से चार प्रतिशत बताई। लेकिन पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स की 2023 की आधिकारिक जनगणना में हिंदुओं के लिए अलग आंकड़ा दिया गया है। जनगणना के मुताबिक पाकिस्तान में 38,67,729 हिंदू दर्ज किए गए हैं। यह देश की कुल आबादी का करीब 1.61 प्रतिशत है। इसके अलावा जनगणना में 13,49,487 लोगों को अनुसूचित जाति (Scheduled Castes) के तहत अलग से दर्ज किया गया है, जो कुल आबादी का करीब 0.56 प्रतिशत है। अगर इन दोनों श्रेणियों को जोड़कर देखा जाए तो संख्या 52,17,216 तक पहुंचती है, यानी पाकिस्तान की 2023 की करीब 24.05 करोड़ की कुल जनगणना आबादी का लगभग 2.17 प्रतिशत। इसलिए आधिकारिक जनगणना के आंकड़े हिंदू आबादी के लिए जरदारी द्वारा बताए गए तीन से चार प्रतिशत के आंकड़े की पुष्टि नहीं करते।पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की सबसे बड़ी आबादी सिंध प्रांत में रहती है। 2023 की जनगणना के अनुसार सिंध में 35,75,848 हिंदू दर्ज किए गए हैं, जो प्रांत की कुल आबादी का लगभग 6.43 प्रतिशत है। सिंध में अनुसूचित जाति के तहत दर्ज लोगों की संख्या भी काफी अधिक है। जनगणना में यहां 13,25,559 लोग इस श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। यानी पाकिस्तान के हिंदू समुदाय की आबादी पूरे देश में समान रूप से फैली हुई नहीं है। इसका बड़ा हिस्सा खास तौर पर सिंध में केंद्रित है।इसे भी पढ़ें: सहनशीलता को कमजोरी न समझें...NSA डोभाल की पाकिस्तान को सबसे बड़ी चेतावनीजरदारी का यह बयान ऐसे मौके पर आया जब पाकिस्तान अपने स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों के दौरान देश की राष्ट्रीय पहचान और भारत के साथ अपने रिश्तों को लेकर बात कर रहा था। इसलिए उनके भाषण में हिंदू अल्पसंख्यक, पाकिस्तान की मुस्लिम पहचान और ‘अखंड भारत’ जैसे मुद्दों का एक साथ आना महज सामाजिक टिप्पणी नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक संदर्भ का हिस्सा भी माना जा सकता है। एक तरफ राष्ट्रपति ने पाकिस्तान को धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए सहनशील देश के रूप में पेश किया, वहीं दूसरी तरफ उनके भाषण में भारत की विचारधारा और पाकिस्तान की अलग पहचान पर जोर रहा। अब इस बयान पर बहस सिर्फ जरदारी के “हिंदू पाकिस्तान में रहना पसंद करेंगे” वाले दावे को लेकर नहीं है। चर्चा इस बात पर भी हो रही है कि देश की आधिकारिक जनगणना के आंकड़े और राष्ट्रपति द्वारा बताए गए हिंदू आबादी के आंकड़े आपस में मेल क्यों नहीं खाते। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 11:16:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Indonesia में 7.7 तीव्रता के Earthquake से 47 लोगों की मौत, 157 मकान ढहे</title>
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<description><![CDATA[ इंडोनेशिया के तट पर शनिवार तड़के 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया जिससे कई इमारतें एवं मकान ढह गए और कम से कम 47 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप से कई लोग घायल हुए हैं और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। अधिकारियों ने सुनामी की चेतावनी जारी करके तटीय इलाकों के लोगों से ऊंचे स्थानों पर जाने को कहा था लेकिन बाद में चेतावनी को वापस ले लिया गया।इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने कहा कि समुद्र के जलस्तर की निगरानी के दौरान ऐसा कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं पाया गया जिससे तटीय इलाकों के लिए खतरा पैदा हो। अमेरिका के भूगर्भीय सर्वेक्षण ने बताया कि भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह पांच बजकर 58 मिनट पर इंडोनेशिया के फ्लोरेस क्षेत्र में 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। उसने बताया कि इसका केंद्र पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत के एंडे शहर से 68 किलोमीटर उत्तर-उत्तर पश्चिम में था।मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि भूकंप के बाद 235 झटके महसूस किये गए, जिनमें सबसे तेज झटके की तीव्रता 6.2 थी। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रमुख सुहारयांतो ने बताया कि बचावकर्मियों ने कम से कम 47 शव बरामद किए हैं, जिनमें से ज्यादातर सिका, मंगराई और पूर्वी मंगराई में मिले हैं। उन्होंने बताया कि कम से कम 50 लोगों को अस्पताल ले जाया गया है।सुहारयांतो ने बताया कि भूकंप से कम से कम 157 मकान पूरी तरह ढह गए और लगभग 200 अन्य क्षतिग्रस्त हो गए। उन्होंने बताया कि इसके कारण लगभग 2,000 ग्रामीणों को अपने घर छोड़कर अस्थायी आश्रय स्थलों पर जाना पड़ा। सिका की राजधानी मौमेरे स्थित खोज एवं बचाव कार्यालय के प्रमुख रहमान ने कहा कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि भूकंप के कारण भूस्खलन की घटनाओं के कारण फ्लोरेस द्वीप के छह जिलों के कई दूरदराज के गांवों में मलबा भर गया है और इनका संपर्क कट गया है।पूर्वी नुसा तेंगारा के पुलिस प्रमुख रूडी दारमोको ने बताया कि भूकंप से भारी नुकसान हुआ है और कई इमारतें ढह गई हैं। दारमोको ने कहा, ‘‘हम नुकसान और हताहतों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं, लेकिन संचार सेवाएं बाधित हैं।’’
उन्होंने बताया कि भूकंप के कारण एंडे रीजेंसी में हुए भूस्खलन से ‘ट्रांस-फ्लोरेस’ राजमार्ग भी अवरुद्ध हो गया है। स्थानीय टेलीविजन पर प्रसारित फुटेज में भूकंप के बाद कई अस्पतालों से मरीजों को एहतियातन बाहर निकालते देखा गया।अस्पताल कर्मचारियों ने बिस्तर, ‘ड्रिप स्टैंड’ और ऑक्सीजन सिलेंडर समेत उपकरणों को बाहर निकाला तथा आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्थायी उपचार स्थल बनाए। फ्लोरेस द्वीप के अधिकतर हिस्सों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए और शुरुआती खबरों में भारी नुकसान की बात सामने आई है। पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत की सिक्का रीजेंसी की निवासी योहाना एम्बु ने बताया कि तेज झटकों से कई इमारतों को नुकसान पहुंचा।उन्होंने कहा, ‘‘यहां कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है... मैंने देखा कि मौमेरे के बंदरगाह टर्मिनल का प्रतीक्षालय ढह गया।’’
मुख्य रूप से कैथोलिक आबादी वाले फ्लोरेस द्वीप में स्थित ‘सेंट पीटर मेजर सेमिनरी’ के प्रमुख पादरी गिडेलबर्टस टांगा ने बताया कि सुबह की प्रार्थना में शामिल छात्र उस समय घबराकर बाहर भागे, जब एक सभागार की छत ढह गई। टांगा ने कहा, ‘‘हमारे छात्र और नन छत गिरने पर घबराकर बाहर भागे। भूकंप के दौरान एक इमारत की दूसरी मंजिल से कूदने के कारण कम से कम एक पादरी का पैर टूट गया।’’
करीब 17,000 द्वीपों वाला विशाल द्वीपसमूह इंडोनेशिया प्रशांत महासागर क्षेत्र में ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित होने के कारण भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील है।‘रिंग ऑफ फायर’ प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला हुआ एक ऐसा क्षेत्र है जहां दुनिया के सबसे ज्यादा सक्रिय ज्वालामुखी और भूकंप आते हैं। दिसंबर 1992 में शक्तिशाली भूकंप के कारण आई सुनामी में फ्लोरेस द्वीप पर करीब 2,500 लोगों की मौत हो गई थी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:55:31 +0530</pubDate>
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<title>Indonesia में 7.7 तीव्रता के Earthquake से तबाही, 40 की मौत और 50 घायल</title>
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<description><![CDATA[ इंडोनेशिया के तट पर शनिवार तड़के 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया जिससे कई इमारतें एवं मकान ढह गए और कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप से कई लोग घायल हो गये। उन्होंने सुनामी की चेतावनी जारी कर तटीय इलाकों के लोगों से ऊंचे स्थानों पर जाने को कहा था लेकिन बाद में चेतावनी को वापस ले लिया गया।इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने कहा कि समुद्र के जलस्तर की निगरानी के दौरान ऐसा कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं पाया गया जिससे तटीय इलाकों के लिए खतरा पैदा हो। अमेरिका के भूगर्भीय सर्वेक्षण ने बताया कि भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह पांच बजकर 58 मिनट पर इंडोनेशिया के फ्लोरेस क्षेत्र में 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। इसका केंद्र पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत के एंडे शहर से 68 किलोमीटर उत्तर-उत्तर पश्चिम में था।शुरुआती भूकंप के बाद कई झटके महसूस किए गए। मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि शनिवार दोपहर तक भूकंप के बाद 235 झटके महसूस किये गए, जिनमें सबसे तेज झटके की तीव्रता 6.2 थी। राष्ट्रीय खोज एवं बचाव एजेंसी के प्रमुख फतुर रहमान ने बताया कि बचावकर्मियों ने कम से कम 40 शव बरामद किए हैं, जिनमें से अधिकांश सिका, मंगराई और पूर्वी मंगराई के बुरी तरह प्रभावित तीन जिलों से मिले हैं।उन्होंने बताया कि लगभग 50 लोगों को अस्पतालों में ले जाया गया है। उन्होंने बताया कि नागेकेओ रीजेंसी में करीब 2,000 ग्रामीण अपने घर छोड़कर अस्थायी आश्रय स्थलों पर चले गए हैं। रहमान ने कहा कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि भूकंप के कारण हुए भूस्खलन की घटनाओं ने फ्लोरेस द्वीप के छह जिलों के कई दूरदराज के गांवों में मलबा भरा है।पूर्वी नुसा तेंगारा के पुलिस प्रमुख रूडी दारमोको ने बताया कि भूकंप से भारी नुकसान हुआ है और कई इमारतें ढह गई हैं। दारमोको ने कहा, ‘‘हम नुकसान और हताहतों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं, लेकिन संचार सेवाएं बाधित हैं।’’ उन्होंने बताया कि भूकंप के कारण एंडे रीजेंसी में हुए भूस्खलन से ‘ट्रांस-फ्लोरेस’ राजमार्ग भी अवरुद्ध हो गया है। स्थानीय टेलीविजन पर प्रसारित फुटेज में भूकंप के बाद कई अस्पतालों से मरीजों को एहतियातन बाहर निकालते देखा गया।अस्पताल कर्मचारियों ने बिस्तर, ‘ड्रिप स्टैंड’ और ऑक्सीजन सिलेंडर समेत उपकरणों को बाहर निकाला तथा आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्थायी उपचार स्थल बनाए। फ्लोरेस द्वीप के अधिकतर हिस्सों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए और शुरुआती खबरों में भारी नुकसान की बात सामने आई है। पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत की सिक्का रीजेंसी की निवासी योहाना एम्बु ने बताया कि तेज झटकों से कई इमारतों को नुकसान पहुंचा।उन्होंने कहा, ‘‘यहां कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है... मैंने देखा कि मौमेरे के बंदरगाह टर्मिनल का प्रतीक्षालय ढह गया।’’ मुख्य रूप से कैथोलिक आबादी वाले फ्लोरेस द्वीप में स्थित ‘सेंट पीटर मेजर सेमिनरी’ के प्रमुख पादरी गिडेलबर्टस टांगा ने बताया कि सुबह की प्रार्थना में शामिल छात्र उस समय घबराकर बाहर भागे, जब एक सभागार की छत ढह गई। टांगा ने कहा, ‘‘हमारे छात्र और नन छत गिरने पर घबराकर बाहर भागे। भूकंप के दौरान एक इमारत की दूसरी मंजिल से कूदने के कारण कम से कम एक पादरी का पैर टूट गया।’’ करीब 17,000 द्वीपों वाला विशाल द्वीपसमूह इंडोनेशिया प्रशांत महासागर क्षेत्र में ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित होने के कारण भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील है।‘रिंग ऑफ फायर’ प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला हुआ एक ऐसा क्षेत्र है जहां दुनिया के सबसे ज्यादा सक्रिय ज्वालामुखी और भूकंप आते हैं। दिसंबर 1992 में सात तीव्रता के भूकंप के कारण आई सुनामी में फ्लोरेस द्वीप पर करीब 2,500 लोगों की मौत हो गई थी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:55:30 +0530</pubDate>
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<title>Taliban ने Afghanistan में सत्ता वापसी के 5 साल पूरे किए, UN ने मानवाधिकार संकट पर चेताया</title>
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<description><![CDATA[ अफगानिस्तान के तालिबान शासक और अन्य अधिकारी शनिवार को देश की पारंपरिक लोया जिरगा सभा में एकत्र हुए और सत्ता में वापसी की पांचवीं वर्षगांठ मनाई। उन्होंने देश में स्थिरता लौटने और दशकों से चले आ रहे संघर्ष के खत्म होने का दावा किया। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष अधिकारी ने अफगानिस्तान में गंभीर मानवाधिकार संकट को लेकर चेतावनी दी।उन्होंने कहा कि वहां 12 साल से अधिक उम्र की लड़कियों को स्कूल जाने की अनुमति नहीं है। तालिबान ने अमेरिका और दूसरे नाटो देशों के सैनिक के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद 15 अगस्त, 2021 को देश की सत्ता पर कब्जा कर लिया था। लोया जिरगा सभा में तालिबान सरकार के उच्च अधिकारियों के साथ कुछ विदेशी प्रतिनिधि और हजारों आम नागरिक भी शामिल हुए।तालिबान सरकार के उप प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने सभा में कहा, “हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि वह हमारी मातृभूमि को हमेशा कब्जे, आक्रमण, युद्ध और असुरक्षा से बचाए रखे और शरिया आधारित सरकार के तहत लोगों को शांति, स्थिरता और समृद्धि प्रदान करे।” प्रशासनिक मामलों के प्रभारी उप प्रधानमंत्री अब्दुल सलाम हनफी ने कहा कि तालिबान शासन ने अफगानिस्तान में “पिछले आधे दशक” से चले आ रहे बाहरी हस्तक्षेप और आंतरिक संघर्ष के दौर को खत्म करके सुरक्षा बहाल की है। हनफी ने कहा, “हर दिन कम से कम 300 अफगान युवा शहीद या मारे जाते थे। 300 बहनें विधवा हो जाती थीं, कई बच्चे अनाथ हो जाते थे और 300 माताएं शोक मनाती थीं।अल्लाह का शुक्र है कि अफगानिस्तान इस्लामी अमीरात की सरकार आने से यह त्रासदी दूर हो गई।” समारोह में कोई भी महिला मौजूद नहीं थी। इस बीच अफगानिस्तान में मानवाधिकार स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत रिचर्ड बेनेट ने एक वीडियो संदेश में कहा कि देश गंभीर मानवाधिकार संकट से गुजर रहा है। बेनेट ने कहा, “हालांकि युद्ध का दौर खत्म हो गया है, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि क्या वास्तव में शांति है।मानवाधिकार की स्थिति लगातार खराब हुई है, खासकर महिलाओं और लड़कियों के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:55:30 +0530</pubDate>
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<title>Israel का Lebanon पर हवाई हमला: 11 लोगों की मौत और 19 घायल, PM सलाम ने की निंदा</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिणी लेबनान में शनिवार को इजराइल के हवाई हमले में 11 लोगों की मौत हो गई और 19 अन्य घायल हो गए। इजराइल और हिजबुल्ला के बीच 20 जून को लागू हुए संघर्ष विराम के बाद से यह सबसे घातक हमला है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, अंसार के बाहरी इलाके में एक घर को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमले में सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें तीन बच्चे शामिल हैं।हमले में दो लोग घायल भी हुए। दूसरा हमला देर अल-जहरानी में हुआ, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 17 अन्य घायल हो गए। यह हवाई हमला 26 जून को लेबनान और इजराइल के बीच घोषित ‘‘फ्रेमवर्क समझौते’’ के बाद से सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है।इस समझौते के तहत दक्षिणी लेबनान से इजराइली सेना की वापसी के बदले ईरान समर्थित हिज्बुल्ला संगठन को निरस्त्र करने की योजना तय की गई थी। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने दक्षिणी लेबनान में इजराइली हवाई हमलों की निंदा करते हुए कहा कि ये हमले ‘‘लोगों को डराने’’ का काम करते हैं और दक्षिणी क्षेत्र में हालात को स्थिर करने के प्रयासों को कमजोर करते हैं। उन्होंने कहा कि लेबनानी लोगों की सुरक्षा और अपनी जमीन पर जीवन जीने का उनका अधिकार ‘‘किसी बातचीत या सौदेबाजी का विषय नहीं है।’’ सलाम ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘अंसार शहर में इजराइली हवाई हमले में मारे गए सात शहीद किसी सैन्य ढांचे का हिस्सा नहीं थे।’’ उन्होंने कहा कि इजराइल को भड़कावे वाला कदम रोकना चाहिए।वहीं, इजराइली सेना ने एक बयान में कहा कि उसने इलाके में इजराइली सैनिकों के खिलाफ की गई कार्रवाई के जवाब में अली ताहेर और अंसार क्षेत्रों में हिजबुल्ला के ढांचे को निशाना बनाकर हमला किया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:55:29 +0530</pubDate>
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<title>Israel PM Netanyahu और राष्ट्रपति Herzog ने भारत को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी</title>
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<description><![CDATA[ इजराइल के राष्ट्रपति आइजक हर्जोग ने शनिवार को भारत और उसके नागरिकों को 80वें स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी और दोनों देशों के बीच ‘‘घनिष्ठ मित्रता’’ को और मजबूत करने का आह्वान किया। हर्जोग ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘इजराइल की ओर से, मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत की ‘अद्भुत जनता’ को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक बधाई देता हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ईश्वर करे कि इजराइल तथा भारत के बीच यह घनिष्ठ मित्रता लगातार और मजबूत होती रहे।’’
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच नवाचार और मित्रता की ‘असीम’ है, लेकिन सबसे बेहतरीन समय अभी आना बाकी है
नेतन्याहू ने शनिवार शाम को एक्स पर एक पोस्ट में कहा, भारत और मेरे प्यारे दोस्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर बधाई।’’
इजराइली प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया, भारत और इजराइल को सिर्फ एक साल के अंतराल में आजादी मिली थी। हम दो ऐसी प्राचीन सभ्यताएं हैं जो अपने लोगों के बेहतर भविष्य और खुशहाली के लिए मिलकर आगे बढ़ रहे हैं,
उन्होंने आगे कहा, हमारा नवाचार और हमारी दोस्ती असीम है।सबसे बेहतरीन दौर तो अभी आना बाकी है! पूरे इजराइल से 400 से अधिक भारतीय स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने के लिए तेल अवीव जिले के इस उत्तरी तटीय शहर में एकत्र हुए। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:55:29 +0530</pubDate>
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<title>80वें Independence Day पर Emmanuel Macron और पुतिन समेत कई वैश्विक नेताओं ने दी बधाई</title>
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<description><![CDATA[ फ्रांस, रूस और ऑस्ट्रेलिया समेत भारत के वैश्विक साझेदारों ने शनिवार को देश को उसके 80वें स्वतंत्रता दिवस पर बधाई दी और द्विपक्षीय संबंधों तथा क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस मौके पर भारत के साथ संबंधों की सराहना करने वाले नेताओं में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू शामिल थे। मैक्रों ने ‘एक्स’ पर बधाई दी।उन्होंने कहा, “भारत के लोगों को उनके 80वें स्वतंत्रता दिवस पर बधाई!”
पुतिन ने अपनी भारतीय समकक्ष द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अभिवादन किया और भरोसा जताया कि रचनात्मक द्विपक्षीय साझेदारी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ाने में मदद करेगी। पुतिन ने कहा कि रूस-भारत संबंध “खास तौर पर विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” की भावना के साथ सफलतापूर्वक विकसित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि मास्को और नयी दिल्ली कई क्षेत्रों में “फायदेमंद सहयोग” कर रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र, शंघाई सहयोग संगठन, ब्रिक्स और अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं के दायरे में मिलकर काम कर रहे हैं।रूसी राष्ट्रपति ने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि हम अपनी संयुक्त कोशिशों से रूस और भारत की रचनात्मक साझेदारी को और मजबूत करते रहेंगे, जिससे हमारे मित्र देशों के लोगों को फायदा होगा और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।”
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री अल्बानीज ने भी इस मौके पर बधाई दी और कहा कि आजादी के बाद के आठ दशकों में भारत लगातार मजबूत होता गया है। एक बयान में उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के तौर पर भारत, “अपनी उपलब्धियों के पैमाने और अपनी अपार संभावनाओं से हमें चकित कर देता है”। अल्बानीज ने अपने “दोस्त” मोदी की हालिया ऑस्ट्रेलिया यात्रा को याद किया, जिसमें उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री से कहा था, “हमारे रिश्ते इतने अहम कभी नहीं रहे।”
उन्होंने कहा, “हम भारतीय मूल के उन अनेक ऑस्ट्रेलियाई लोगों के सहयोग से, जो हमारी बहुमूल्य मित्रता में एक जीवंत सेतु हैं, नए और उभरते क्षेत्रों में ऑस्ट्रेलिया और भारत के संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने के लिए उत्साहित हैं।”
उन्होंने कहा, “मैं भारत के इतिहास और संस्कृति, उसकी समृद्ध विविधता और असाधारण उपलब्धियों का जश्न मनाने में आपके साथ शामिल हूं - और हमारे साझा भविष्य की संभावनाओं का भी जश्न मनाता हूं।”
अपने बधाई संदेश में, मालदीव के नेता मुइज्जू ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने के लिए अपने देश की प्रतिबद्धता दोहराई।उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “आजादी के आठ दशक भारत सरकार और वहां के लोगों की आकांक्षाओं, मजबूती और अटूट जज्बे को दर्शाते हैं।”
इजराइल के राष्ट्रपति आइजक हर्जोग ने भारत और उसके नागरिकों को 80वें स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी और दोनों देशों के बीच ‘‘घनिष्ठ मित्रता’’ को और मजबूत करने का आह्वान किया। हर्जोग ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “इजराइल की ओर से, मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत की ‘अद्भुत जनता’ को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक बधाई देता हूं।” सिंगापुर के राष्ट्रपति थरमन षणमुगरत्नम ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे पत्र में उन्हें और भारत की जनता को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए कहा कि भारत और सिंगापुर दोनों की ‘‘एक शांतिपूर्ण, खुले और परस्पर जुड़े क्षेत्र में स्थायी रुचि है।’’
उन्होंने कहा कि सिंगापुर, आसियान के सबसे पुराने संवाद साझेदारों में से एक के रूप में, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और ऊर्जा परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में क्षेत्रीय एकीकरण और मजबूती के लिए भारत के साथ निकट सहयोग जारी रखेगा। भारत-सिंगापुर संबंधों को ‘‘बहुआयामी’’ बताते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी है, जो लोगों के बीच मजबूत संबंधों पर आधारित है।इस अवसर पर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने प्रधानमंत्री मोदी और भारत की ‘‘मित्रवत जनता’’ को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उनके कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया पर जारी संदेश के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘‘नेपाल और भारत के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंध, लोगों के बीच निकटता और सहयोग आने वाले वर्षों में और मजबूत होते रहें।’’
भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने भी भारत सरकार और भारत की जनता को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘मेरे बड़े भाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत की जनता को 80वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।’’
तोबगे ने कहा, ‘‘भूटान और भारत के बीच स्थायी मित्रता एवं घनिष्ठ संबंध निरंतर फलते-फूलते रहें।’’
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने भी इस अवसर पर भारत को शुभकामनाएं देते हुए 1947 के बाद भारत की यात्रा को विकासशील देशों के लिए प्रेरणादायक बताया।उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘1947 के बाद भारत की यात्रा मालदीव जैसे विकासशील देशों के लिए लोकतंत्र की हमारी अपनी यात्रा में प्रेरणा का स्रोत रही है। मालदीव और भारत के बीच सहयोग एवं मित्रता के घनिष्ठ संबंध आने वाले समय में और मजबूत हों।’’
शुभकामनाएं देने वालों में स्लोवाक गणराज्य के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी, नेपाल के पूर्व उप-प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रबी लामिछाने और भूटान के विदेश मंत्री डी.एन. ढुंगेल भी शामिल हैं। इससे पहले, शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी तथा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंधों के कारण भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हुए हैं।रूबियो ने एक बयान में कहा  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:55:28 +0530</pubDate>
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<title>Vinay Mohan Kwatra ने Washington में तिरंगा फहराया, भारतीय समुदाय की सराहना की</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने शनिवार को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना की। क्वात्रा ने इंडिया हाउस में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया। समारोह में अपने संक्षिप्त संबोधन में क्वात्रा ने कहा कि पिछले 80 वर्षों में भारत की कहानी सफलता और उपलब्धियों की रही है।उन्होंने अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय की दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका की प्रशंसा की। क्वात्रा ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्र के नाम संबोधन को भी पढ़कर सुनाया। वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने दुनिया भर में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के वैश्विक अभियान ‘सूर्यपथ तिरंगा’ में भी हिस्सा लिया।क्वात्रा ने कहा, ‘‘आज हम सूर्यपथ तिरंगा मना रहे हैं, जहां हमारा गौरव और हमारा ध्वज, जो पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता है, सूर्य के साथ आगे बढ़ रहा है। जहां भी सूरज उगता है, वहां तिरंगा भी लहराता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘तो दुनिया के हर हिस्से में किसी न किसी समय तिरंगा जरूर फहराया जाएगा। यह एक बड़ा दिन है।मैं अमेरिका में रह रहे पूरे भारतीय समुदाय, उनके परिवारों और भारत के मित्रों को स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।’’
समारोह के दौरान स्टूडियो धूम के कलाकारों ने सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियां भी दीं। क्वात्रा ने दूतावास की ओर से आयोजित ‘भारत को जानिए’ प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं में 13-16 आयु वर्ग में यादवी शर्मा, अमोघ कुलकर्णी, अरित्री मंडल, अद्विक सूद और अदिति ठाकुर शामिल रहे।वहीं 10-12 आयु वर्ग में अन्विका कज्जम, नियति रामरक्षानी, श्रेष्ठा दत्ता, रायसा वोहरा और अनघा निकेश विजेता रहे। 6-9 आयु वर्ग में यशस्वी शर्मा, सायशा वंजारी, येशा मेहता, अरन्या अनिल, मान्या मदनगोपाल, वाणी हयांकी और सायंतिका रॉय विजेता रहे। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:55:28 +0530</pubDate>
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<title>Houston में भारतीय समुदाय ने मनाया 80वां Independence Day, महावाणिज्य दूतावास में फहराया ध्वज</title>
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<description><![CDATA[ सीमा हाखू काचरू
ह्यूस्टन (अमेरिका), 16 अगस्त अमेरिका के ह्यूस्टन में भारतीय समुदाय ने पूरे उत्साह एवं देशभक्ति की भावना के साथ भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया तथा भारतीय महावाणिज्य दूतावास परिसर में आयोजित ध्वजारोहण समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर परिसर की सीढ़ियों और रेलिंग को गेंदे की मालाओं तथा ध्वज के तीन रंगों की झालरों से सजाया गया था। ह्यूस्टन में भारतीय समुदाय के लोग गर्मी के बावजूद सुबह-सुबह बड़ी संख्या में महावाणिज्य दूतावास पहुंचे।कार्यक्रम की शुरुआत वहां मौजूद लोगों के एक स्वर में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन से हुई। इसके बाद फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा के बीच ध्वजारोहण किया गया और सभी ने मिलकर राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाया। महावाणिज्य दूत डी. सी. मंजूनाथ ने ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्र के नाम दिए गए संबोधन को पढ़ा।उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का भारत के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए आभार जताया और उनसे ‘विकसित भारत’ की यात्रा में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया। इस समारोह में देशभक्ति के गीत गाए गए, ‘विकसित भारत’ विषय पर विशेष रूप से तैयार चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई और ‘भारत को जानिए’ प्रश्नोत्तरी के विजेताओं को सम्मानित किया गया। समारोह में निर्वाचित अधिकारियों और नगर निकाय संगठनों के नेताओं के एक प्रमुख प्रतिनिधिमंडल ने भी भाग लिया।इस प्रतिनिधिमंडल में ह्यूस्टन विश्वविद्यालय की कुलाधिपति रेणु खटोर, फोर्ट बेंड काउंटी के न्यायाधीश डेनियल वोंग, हैरिस काउंटी की आयुक्त लेस्ली ब्रियोनेस, फोर्ट बेंड के आयुक्त डेक्सटर मैककॉय, शुगर लैंड नगर परिषद के सदस्य संजय सिंघल, अमेरिकी सीनेटर जॉन कॉर्निन के क्षेत्रीय निदेशक जे गुएरेरो और न्यायाधीश जूली मैथ्यू एवं सुरेंद्रन पटेल शामिल थे। महावाणिज्य दूतावास में आयोजित कार्यक्रम के बाद मंजूनाथ ने ‘इंडिया हाउस ह्यूस्टन’ स्थित ओ. पी. जिंदल सेंटर में आयोजित एक समारोह में भारतीय समुदाय के नेताओं और सदस्यों के साथ भाग लिया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:55:27 +0530</pubDate>
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<title>Zimbabwe boat accident: करीबा झील से 26 और शव बरामद, मृतक संख्या 72 हुई</title>
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<description><![CDATA[ जिम्बाब्वे की करीबा झील से 26 और शव बरामद किए गए हैं, जिससे नौका हादसे में मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर 72 हो गई है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि मृतकों में 18 बच्चे शामिल हैं।उसने बताया कि तेज लहरों के कारण मंगलवार को नौका पलट गई थी तथा 26 और शव बरामद होने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 72 हो गई है। पुरानी हो चुकी यह नौका करीबा शहर से देश के उत्तर-पश्चिम में स्थित ग्रामीण इलाकों और मछुआरा समुदायों की बस्तियों की ओर जा रही थी। इन इलाकों में सड़कें क्षतिग्रस्त हैं और सार्वजनिक परिवहन के साधन बहुत कम हैं।प्राधिकारियों ने यह नहीं बताया कि नौका में कितने लोग सवार थे या कितने लोग अब भी लापता हैं। अनुमान है कि नौका में 153 यात्री सवार थे जबकि प्राधिकारियों के अनुसार इसकी क्षमता 90 यात्रियों की थी। जिम्बाब्वे की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने बताया कि 77 लोगों को बचा लिया गया है।प्राधिकारियों ने शुरुआत में कहा था कि नौका में सवार बच्चों की संख्या की सटीक जानकारी नहीं है क्योंकि टिकट के लिए निर्धारित उम्र से कम आयु के बच्चों को यात्रियों की अनुमानित संख्या में शामिल नहीं किया गया था। बाद में पुलिस की ओर से जारी सूची से जानकारी मिली कि मृत बच्चों में से 16 की उम्र 10 वर्ष या उससे कम थी और इनमें सबसे छोटा बच्चा एक वर्ष का था। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:55:27 +0530</pubDate>
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<title>Ukraine ने Russia के समारा में दागी मिसाइल, रोसकॉसमॉस से जुड़ा सेंटर हुआ क्षतिग्रस्त</title>
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<description><![CDATA[ रूस के दक्षिण-पश्चिमी समारा क्षेत्र में शनिवार को बड़े पैमाने पर यूक्रेनी हमला हुआ, जिसमें औद्योगिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। रूस के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। क्षेत्र की राजधानी समारा के प्रमुख इवान नोस्कोव ने कहा कि वायु रक्षा बलों ने “बड़े पैमाने पर” मिसाइल हमले को विफल कर दिया, हालांकि शहर के औद्योगिक प्रतिष्ठानों को “स्थानीय स्तर पर नुकसान” पहुंचा है।उन्होंने कहा कि हमले में घायल लोगों को चिकित्सा सहायता दी गई है, लेकिन इसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी। यूक्रेन ने रूसी सैन्य उद्योगों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर लंबी दूरी के हवाई हमले तेज कर दिए हैं। उसका मकसद युद्ध के लिए मॉस्को के राजस्व में कटौती करना और रूस के लोगों को हमले के परिणामों का एहसास कराना है।इसे भी पढ़ें: Russia के नोवोरोस्सियस्क नौसैनिक अड्डे पर हमले का Zelenskyy का दावा, बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्तयुद्ध अब पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। जेलेंस्की ने कहा कि रूस में शांति की जरूरत महसूस होनी चाहिए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा कि यूक्रेनी बलों ने समारा स्थित प्रोग्रेस सेंटर पर हमला किया। यह रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोसकॉसमॉस के तहत काम करता है और रॉकेट प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्माण में शामिल है।उन्होंने कहा कि इस प्रतिष्ठान को निशाना बनाने के लिए यूक्रेन में निर्मित फ्लेमिंगो मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। यह स्थान यूक्रेन की सीमा से करीब 900 किलोमीटर दूर है। जेलेंस्की ने यह भी कहा कि अग्रिम मोर्चे से करीब 700 किलोमीटर दूर स्थित रूस के सावास्लेइका हवाई अड्डे को भी निशाना बनाया गया।इसे भी पढ़ें: अब पुतिन के तारनहार बनें पूर्व CJI चंद्रचूड़, सुलझाएंगे यूक्रेन संग विवाद, रूस ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारीजेलेंस्की ने लिखा, “शांति की जरूरत है और यह रूस में साफ तौर पर दिखाई देना चाहिए—विशिष्ट प्रतिष्ठानों को ठोस नुकसान के जरिए।” यूक्रेन के अधिकांश हमलों की मारक क्षमता 200 किलोमीटर से कम है, लेकिन इस साल उसके लंबी दूरी के हमलों में काफी वृद्धि हुई है। स्वतंत्र संघर्ष निगरानी संस्था एसीएलईडी के आंकड़ों के अनुसार, यूक्रेन ने जुलाई में इस तरह के हमले जनवरी की तुलना में तीन गुना अधिक किए। रूस के भीतर दूर तक बार-बार किए जा रहे हमलों के कारण रूसी सेना को बड़े क्षेत्र में अपनी वायु रक्षा व्यवस्था तैनात करनी पड़ी है।इसे भी पढ़ें: हो गया खेल! भारत को रोककर खुद रूसी तेल खरीद रहा अमेरिका?रूस के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि उसने रूस के 19 क्षेत्रों के अलावा काला सागर, आजोव सागर और रूस द्वारा कब्जे में लिए गए यूक्रेनी क्षेत्र क्रीमिया के ऊपर यूक्रेन के 598 ड्रोन मार गिराए। स्थानीय अधिकारी आंद्रेई वोरोब्योव ने बताया कि वहीं, मॉस्को क्षेत्र के शातुरा शहर में यूक्रेनी ड्रोन हमले में एक निजी मकान को निशाना बनाए जाने से दो लोग घायल हो गए। उन्होंने बताया कि घायलों में नौ साल का एक बच्चा भी शामिल है।स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि दूसरी ओर, दक्षिण-पूर्वी यूक्रेन में शनिवार को एक अपार्टमेंट इमारत पर रूस के हमले में तीन महीने के एक बच्चे की मौत हो गई और 11 लोग घायल हो गए। द्निप्रोपेत्रोव्स्क क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख ओलेक्जांद्र गांझा ने कहा कि मारहानत्स शहर में इमारत को ड्रोन से निशाना बनाया गया। यूक्रेन की वायुसेना ने कहा कि रूस ने शनिवार को देश पर 152 ड्रोन दागे, जिनमें से 124 को नष्ट कर दिया गया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:55:26 +0530</pubDate>
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<title>Afghanistan में Taliban पाबंदी से 22 लाख लड़कियां शिक्षा से दूर, 20,000 महिला शिक्षकों की कमी का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ (गजाल हबीबयार, ओटावा विश्वविद्यालय) ओटावा, 15 अगस्त (द कन्वरसेशन) तालिबान ने अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता में वापस लौटने के कुछ ही हफ्तों के भीतर लड़कियों के कक्षा छह से आगे की पढ़ाई करने पर रोक लगा दी थी। यह प्रतिबंध अब तक नहीं हटाया गया है। अफगानिस्तान दुनिया का एकमात्र देश है, जहां लड़कियों और महिलाओं को औपचारिक रूप से माध्यमिक और उच्च शिक्षा प्राप्त करने से रोका गया है।इसके बाद के वर्षों में, अफगानिस्तान की महिलाओं को उन ज्यादातर क्षेत्रों में काम करने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया, जहां वे पहले कार्यरत थीं। लगभग 22 लाख किशोरियों को लगभग 1,800 दिनों से माध्यमिक विद्यालय जाने से रोका गया है। यूनिसेफ के 2026 के एक विश्लेषण के अनुसार, इन प्रतिबंधों के कारण 2030 तक अफगानिस्तान में 20,000 महिला शिक्षकों और 5,400 स्वास्थ्यकर्मियों की कमी हो सकती है।इन पाबंदियों की वजह से देश को पहले ही हर साल अनुमानित 8.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान हो रहा है। सितंबर, 2025 से तालिबान बलों ने संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों समेत अफगान महिलाओं को संयुक्त राष्ट्र के कार्यालयों में प्रवेश करने से भी रोक दिया है। जनवरी 2026 में महिला सरकारी कर्मचारियों को 2021 से घर पर रहने के लिए मिल रहा कम किया गया वेतन भी बंद कर दिया गया।मैंने ऐसा कुछ पहले भी एक बार होते हुए देखा था। तब मैं 1996 में छोटी लड़की थी, जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया था। इस दूसरी पाबंदी (2021 से लगाई गई) के बारे में जो बात मुझे सबसे ज्यादा परेशान करती है, वह यह नहीं है कि ऐसा दोबारा हुआ।बल्कि यह है कि इस बार दुनिया की विफलता जागरूकता की कमी के कारण नहीं है। हर कोई जानता है कि अफगान लड़कियों के साथ क्या हो रहा है। विफलता यह है कि इस सच्चाई को जानने के बावजूद तालिबान को इसकी कोई वास्तविक कीमत नहीं चुकानी पड़ी है।तालिबान के सत्ता में आने के कुछ ही दिनों के भीतर, अफगान महिलाएं काबुल की सड़कों पर “रोटी, काम, आजादी” के नारे लगाते हुए उतर आई थीं। तब से वे जोखिम उठाते हुए लगातार यही मांग करती आ रही हैं। अफगान महिलाओं के समूहों ने लगातार विरोध प्रदर्शन किए हैं और प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि इसके जवाब में उन्हें गिरफ्तारियों और यातनाओं का सामना करना पड़ा है।फरवरी 2026 में भी काबुल की लड़कियों ने सड़कों पर उतरकर शिक्षा के अधिकार की मांग की थी। लेकिन जहां विरोध प्रदर्शन करना बहुत खतरनाक हो गया है, वहां अफगान महिलाओं ने इसके बजाय एक शांत तरीका अपनाया है: उन्होंने घरों से संचालित भूमिगत स्कूलों का अनौपचारिक नेटवर्क बनाया है, जहां उन लड़कियों को पढ़ाया जाता है, जिनके पास अन्यथा कक्षा में पढ़ने का कोई अवसर नहीं होता। तालिबान के साथ अंतरराष्ट्रीय संपर्क का मुख्य माध्यम संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में चल रही दोहा प्रक्रिया है।वर्ष 2023 से तालिबान के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, जिनका उद्देश्य अंततः अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में फिर से शामिल करना है—जिसमें सामान्य राजनयिक संबंध, तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता और देश की अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं तथा व्यापार में सामान्य रूप से फिर से भागीदारी शामिल है। तालिबान के आग्रह पर महिलाओं और अफगान नागरिक समाज के समूहों को मुख्य वार्ताओं से बाहर रखा गया है। इसके बजाय, वे अलग से और मुख्य वार्ताओं से इतर मुलाकात करते हैं।वर्ष 1996 में मेरी उम्र कम थी और मेरी अंतिम परीक्षाएं होने में कुछ ही सप्ताह बाकी थे, तभी तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया। उस रात बिजली नहीं थी, इसलिए हम रेडियो के आसपास इकट्ठा हुए और सुना कि हमें अगली कक्षा में प्रोन्नत कर दिया गया है, लेकिन लड़कियों के लिए स्कूल अगली सूचना तक बंद किए जा रहे हैं। शुरुआत में, मैं समझ नहीं पाई कि इसका क्या मतलब था।एक छोटी छात्रा होने के नाते, अंतिम परीक्षाएं रद्द होने की खबर से मैं खुश थी, इसलिए मैं यह बात अपनी दादी को बताने के लिए दौड़ पड़ी। लेकिन अंधेरे गलियारे में कुछ दूर जाने के बाद मुझे असलियत समझ में आई: अगले साल स्कूल नहीं होगा। मैं वहीं बैठ गई और रोने लगी।मेरे माता-पिता मेरी बहन और मुझे पाकिस्तान ले गए ताकि हम अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। ऐसा फैसला कई अफगान परिवारों के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं था। हमारे लिए भी यह आसान नहीं था।विदेश में रहने वाले हमारे रिश्तेदारों ने हमारी पढ़ाई का खर्च उठाकर हमारा समर्थन किया। मेरी कुछ सहेलियां स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाईं और, जहां तक मुझे पता है, इसके बजाय उनकी शादी कर दी गई। आगे चलकर मैं अफगान सरकार में खान एवं पेट्रोलियम मंत्रालय की निदेशक, फिर उपमंत्री और उसके बाद कार्यवाहक मंत्री के पद पर सेवा देने वाली पहली महिला बनी।मेरी पीढ़ी के लिए वे परिस्थितियां बदल गई थीं। लेकिन इस पीढ़ी के लिए भी वे बदलेंगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है—सिर्फ जागरूकता से यह बदलाव नहीं आएगा। अफगान महिलाएं पिछले पांच साल से लगातार विरोध और संघर्ष करके यह दिखा रही हैं कि वे लड़कियों की शिक्षा पर लगे प्रतिबंध को हमेशा के लिए स्वीकार नहीं करेंगी।ऐसे में यह सवाल उठता है कि बाकी दुनिया ने तालिबान के इस प्रतिबंध के खिलाफ इतना कम प्रयास करके ही संतोष क्यों कर लिया है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:55:26 +0530</pubDate>
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<title>Guinness World Record: न्यूजर्सी में 1,300 से अधिक ध्वजों से बनी 250 की आकृति</title>
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<description><![CDATA[ योषिता सिंह
न्यूयॉर्क, 16 अगस्त अमेरिका के न्यूयॉर्क त्रि-राज्यीय क्षेत्र में भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का समापन उस समय एक विश्व रिकॉर्ड के साथ हुआ जब अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के सम्मान में 1,300 से अधिक अमेरिकी ध्वजों को ‘250’ की आकृति में सजाया गया और उनके चारों ओर भारतीय तिरंगे लगाए गए। न्यूयॉर्क त्रि-राज्यीय क्षेत्र से आशय न्यूयॉर्क शहर और उसके आसपास के उस विस्तृत महानगरीय क्षेत्र से है, जो न्यूयॉर्क, न्यूजर्सी और कनेक्टिकट प्रांतों में फैला है। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस और अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के संयुक्त समारोह के दौरान शनिवार को न्यूजर्सी के पार्सिपनी स्थित वेटरन्स मेमोरियल पार्क में ‘लारजेस्ट फ्लैगपोल नंबर’ (ध्वजदंडों से बनाई गई सबसे बड़ी संख्या) का गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाया गया।न्यूयॉर्क स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास ने प्रवासी भारतीय संगठन ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशन्स न्यूयॉर्क-न्यूजर्सी-न्यू इंग्लैंड’ (एफआईए) के साथ मिलकर इस कार्यक्रम का नेतृत्व किया। भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनी जोहो ने इसमें सहयोग दिया। आयोजकों की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, ‘‘भारत की स्वतंत्रता के 80 वर्ष और अमेरिका की स्थापना के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम भारत-अमेरिका मित्रता तथा दोनों देशों एवं उनके लोगों को करीब लाने में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के निरंतर योगदान की यादगार अभिव्यक्ति था।’’
भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर न्यूयॉर्क त्रि-राज्यीय क्षेत्र और अमेरिका के अन्य हिस्सों में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनमें यह आयोजन भी शामिल था।शनिवार के आयोजित कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों, निर्वाचित प्रतिनिधियों तथा उद्योग और सामुदायिक संगठनों के नेताओं ने भाग लिया। न्यूजर्सी के लेफ्टिनेंट गवर्नर डेल कैल्डवेल, अमेरिकी सांसद अनालिलिया मेजिया, न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत बिनय श्रीकांत प्रधान और पार्सिपनी के मेयर पुलकित देसाई ने कार्यक्रम को संबोधित किया। बयान के अनुसार वक्ताओं ने भारत और अमेरिका के बीच मजबूत संबंधों को रेखांकित किया।भारतीय महावाणिज्य दूत ने दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी तथा आर्थिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने में भारतीय समुदाय की भूमिका पर जोर दिया। बयान में कहा गया कि गिनीज विश्व रिकॉर्ड ने दोनों देशों के बीच सेतु के रूप में प्रवासी भारतीय समुदाय की भूमिका को भी रेखांकित किया। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने भी ध्वजारोहण समारोह आयोजित किए जिनमें बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीयों ने भाग लिया।‘फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशन्स’ की ओर से टाइम्स स्क्वायर पर आयोजित वार्षिक समारोह में तिरंगा फहराया गया। इस दौरान भारत की विरासत और भारत-अमेरिका की स्थायी साझेदारी को प्रदर्शित करने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। स्वतंत्रता दिवस से पहले अमेरिका के कई प्रांतों के गवर्नर ने अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में 15 अगस्त को ‘भारत दिवस’ घोषित करने संबंधी घोषणापत्र जारी किए।अमेरिकी सांसदों, गवर्नर तथा विभिन्न शहरों और कस्बों ने देश के आर्थिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक जीवन में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान की सराहना की और दोनों देशों के मजबूत संबंधों को रेखांकित किया। न्यूयॉर्क की ‘एम्पायर स्टेट बिल्डिंग’ और बोस्टन के ‘प्रूडेंशियल सेंटर’ समेत प्रमुख इमारतों को भारतीय तिरंगे के रंगों से रोशन किया गया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:55:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Indiana Flood: अमेरिका में भीषण तूफान और बाढ़ से 5 लोगों की मौत, आपातकाल लागू</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के इंडियाना प्रांत में इस सप्ताह भीषण तूफान और बाढ़ के कारण कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इंडियानापोलिस में व्हाइट नदी के किनारे स्थित इलाकों में शनिवार को जलस्तर बढ़ने के कारण बचावकर्मियों ने नौकाओं की मदद से कई लोगों को सुरक्षित निकाला।इसे भी पढ़ें: Assam Flood: असम में बाढ़ की स्थिति में सुधार, 5 जिलों में 62 हजार प्रभावितप्रांत में पिछले एक सप्ताह के दौरान हुई भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है और लोगों को ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। संघीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी ने शनिवार को बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंडियाना के लिए आपातकाल की घोषणा को मंजूरी दे दी है और प्रांत को संघीय आपदा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इंडियानापोलिस के महापोर जो हॉगसेट ने कहा कि शहर 30 से अधिक वर्षों की सबसे भीषण बाढ़ का सामना कर रहा है।इंडियानापोलिस अग्निशमन विभाग की प्रवक्ता रीटा रीथ ने बताया कि शनिवार तक 95 लोगों और 45 पालतू जानवरों को बचाया गया तथा आपात सेवा केंद्र को दिनभर में मदद के लिए सैकड़ों फोन आए। गवर्नर कार्यालय ने बताया कि डेलावेयर काउंटी में 350 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इंडियाना के अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि पिछले एक सप्ताह में खराब मौसम के कारण एक बच्चे समेत कम से कम पांच लोगों की मौत हुई है।इसे भी पढ़ें: ईरान ने पलटा पूरा गेम, BRICS बैंक में एंट्री से उड़ाए अमेरिका के होश!राष्ट्रीय मौसम सेवा ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में दो दिन के दौरान 28 सेंटीमीटर से अधिक बारिश हुई। एंडरसन और नोबल्सविले में व्हाइट नदी का जलस्तर 7.32 मीटर से अधिक पर पहुंच गया और इसने 1913 के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:55:25 +0530</pubDate>
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<title>Israel air strike: दक्षिणी लेबनान पर हवाई हमले में 7 की मौत, 3 घायल हुए</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिणी लेबनान पर शनिवार तड़के हुए इजराइल के हवाई हमले में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए। लेबनान की सरकारी नेशनल न्यूज एजेंसी (एनएनए) ने यह जानकारी दी। समाचार एजेंसी के अनुसार, बचावकर्मी और पराचिकित्सक अब भी मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Israel का Lebanon पर हवाई हमला: 11 लोगों की मौत और 19 घायल, PM सलाम ने की निंदायह हवाई हमला 26 जून को लेबनान और इजराइल के बीच घोषित ‘‘फ्रेमवर्क समझौते’’ के बाद से सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है। इस समझौते के तहत दक्षिणी लेबनान से इजराइली सेना की वापसी के बदले ईरान समर्थित हिज्बुल्ला संगठन को निरस्त्र करने की योजना तय की गई थी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:55:25 +0530</pubDate>
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<title>इंडोनेशिया में 7.7 तीव्रता का ज़बरदस्त भूकंप आया, जिसमें 2 लोगों की मौत हो गई और सुनामी की लहरें तट से टकराईं</title>
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<description><![CDATA[ इंडोनेशिया की जियोफिजिक्स एजेंसी BMKG और एक इमरजेंसी रिस्पॉन्स अधिकारी के अनुसार, शनिवार तड़के इंडोनेशिया के तट पर 7.7 तीव्रता का ज़बरदस्त भूकंप आया, जिसके बाद कई आफ्टरशॉक आए और सुनामी की चेतावनी भी जारी की गई, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। कई इलाकों में 1 मीटर (3 फ़ीट) से कम ऊँची सुनामी लहरें भी दर्ज की गईं। BMKG ने बताया कि पहला भूकंप सुबह 4:58 बजे (2158 GMT) 15 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया। मुख्य भूकंप के बाद कई आफ्टरशॉक भी महसूस किए गए। तेज़ झटकों के बाद BMKG ने देश के कुछ इलाकों के लिए सुनामी की शुरुआती चेतावनी जारी की। हालांकि, कुछ घंटों बाद यह चेतावनी वापस ले ली गई। अधिकारी हालात पर नज़र रखे हुए थे और प्रभावित इलाकों में भूकंप और उसके बाद आए झटकों के संभावित असर का आकलन कर रहे थे। राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण एजेंसी की प्रवक्ता डोडी युलेओवा ने बताया कि नागेकेओ और बीमा जैसे इलाकों में करीब एक मिनट तक ज़ोरदार झटके महसूस किए गए।इसे भी पढ़ें: Colombia Earthquake: भारत ने भेजी 20 Tons Relief की खेप, S Jaishankar बोले- संकट में First Responder है Indiaफेसबुक पर एक वीडियो सामने आया है, जिसकी पुष्टि समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने की है। यह वीडियो पूर्वी इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप पर स्थित सिक्का रीजेंसी के मुख्य शहर, मौमेरे के एक बंदरगाह का है। इसमें एक इमारत का कुछ हिस्सा धूल और मलबे के साथ गिरता हुआ दिखाई दे रहा है, जबकि लोग चीखते-चिल्लाते हुए सड़कों पर भाग रहे हैं। कोम्पास टीवी पर दिखाए गए फुटेज के अनुसार, पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत के एंडे ज़िले में एक अस्पताल से मरीज़ों को बाहर निकाला गया। इस बीच, ऑस्ट्रेलिया के सुनामी चेतावनी केंद्र ने कहा कि भूकंप से ऑस्ट्रेलिया की मुख्य भूमि, द्वीपों या क्षेत्रों के लिए &quot;सुनामी का कोई खतरा&quot; नहीं है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:59 +0530</pubDate>
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<title>Amit Shah ने Boston में स्वतंत्रता दिवस परेड के सफल आयोजन पर FIA की सराहना की</title>
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<description><![CDATA[ योषिता सिंह
न्यूयॉर्क, 14 अगस्त केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बोस्टन में भारत के स्वतंत्रता दिवस समारोह के आयोजन के लिए प्रवासी संगठन ‘फाउंडेशन ऑफ इंडियन अमेरिकन्स’ (एफआईए), न्यू इंग्लैंड की सराहना की है। मैसाचुसेट्स की गवर्नर मौरा हीली ने 15 अगस्त 2026 को राज्य में ‘इंडिया डे’ के रूप में मनाने की विशेष घोषणा जारी की। एफआईए, न्यू इंग्लैंड ने नौ अगस्त को ऐतिहासिक बोस्टन हार्बर में लगातार पांचवें वर्ष अंतरराष्ट्रीय इंडिया डे परेड और स्वतंत्रता महोत्सव का आयोजन किया।शाह ने 30 जुलाई को संगठन को भेजे गए अपने व्यक्तिगत संदेश में कहा कि एफआईए न्यू इंग्लैंड द्वारा आयोजित भारतीय स्वतंत्रता दिवस समारोह भारतीय संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों और भारत-अमेरिका की मजबूत मित्रता का उत्सव है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन दुनिया भर में बसे भारतीय समुदाय को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। शाह ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, लोकतांत्रिक परंपराएं और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का आदर्श दुनिया को एकता, शांति और सद्भाव का संदेश देता है।उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाला भारतीय समुदाय अपनी मेहनत, प्रतिभा और मूल्यों के माध्यम से न केवल भारत का गौरव बढ़ा रहा है, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक एवं सामाजिक संबंधों को भी मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल युवाओं को भारतीय विरासत, संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गृह मंत्री ने कहा कि भारत आज अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक सहभागिता के आधार पर विश्व मंच पर नयी पहचान बना रहा है।उन्होंने भारतीय प्रवासी समुदाय को भारत की सांस्कृतिक पहचान का राजदूत ही नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक प्रगति, नवाचार, निवेश और वैश्विक प्रतिष्ठा का सशक्त प्रतिनिधि भी बताया। एफआईए न्यू इंग्लैंड के अध्यक्ष अभिषेक सिंह ने शुक्रवार को कहा कि अमित शाह के विशेष संदेश से इस समारोह को महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिला। उन्होंने बताया कि भारत की स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ के समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण बोस्टन के प्रतिष्ठित ‘प्रूडेंशियल सेंटर’ को पहली बार भारतीय तिरंगे के रंगों से रोशन किया जाना होगा।नौ अगस्त को आयोजित भव्य परेड का उद्घाटन बोस्टन में भारत के महावाणिज्यदूत रघुराम शास्त्री ने किया। परेड का नेतृत्व ग्रैंड मार्शल के रूप में कर्नल इंदर प्रीत सिंह (युद्ध सेवा मेडल, सेवानिवृत्त) और अमेरिकी नौसेना की खुफिया विशेषज्ञ मैगी लेहमन ने किया, जिन्हें राष्ट्र के प्रति उनकी समर्पित सेवा के लिए सम्मानित किया गया। सिंह ने गवर्नर मौरा हीली और बोस्टन की मेयर मिशेल वू का भी आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने बोस्टन क्षेत्र में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के अनेक योगदानों को मान्यता दी और 15 अगस्त 2026 को मैसाचुसेट्स कॉमनवेल्थ में ‘इंडिया डे’ के रूप में मनाने की आधिकारिक घोषणा जारी की। नौ अगस्त की परेड में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता देखने को मिली। इसमें भारत की विरासत और भारत-अमेरिका के साझा मूल्यों को दर्शाती रंग-बिरंगी झांकियां और रथ शामिल थे।परेड में विभिन्न सामुदायिक संगठनों, पूर्व सैनिकों, आपातकालीन सेवाओं से जुड़े कर्मियों और न्यू इंग्लैंड के हजारों भारतीय-अमेरिकियों ने भाग लिया। परेड का विशेष आकर्षण अमेरिकी पूर्व सैनिकों का बैंड और मराठी ‘ढोल-ताशा’ बैंड रहा। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:58 +0530</pubDate>
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<title>Marco Rubio ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर बधाई दी, PM Modi और Trump के संबंधों को सराहा</title>
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<description><![CDATA[ सागर कुलकर्णी
वाशिंगटन, 15 अगस्त अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंधों के कारण भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हुए हैं। शुक्रवार को जारी एक बयान में रूबियो ने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच मित्रता और पारिवारिक संबंधों की गहरी जड़ें ऐसी साझेदारी की नींव हैं, जो नवोन्मेषी, लचीली और दूरदर्शी है। रूबियो ने कहा, ‘‘अमेरिका की ओर से मैं भारत के लोगों को उनके स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक बधाई देता हूं।’’
अमेरिका के विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच व्यक्तिगत संबंधों की बदौलत अमेरिका-भारत संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ हैं।’’
उन्होंने कहा कि रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा से लेकर महत्वपूर्ण खनिजों, कृत्रिम मेधा, अंतरिक्ष सहयोग और व्यापार तक, अमेरिका-भारत सहयोग दोनों देशों के साथ-साथ व्यापक हिंद महासागर क्षेत्र को अधिक सुरक्षित, मजबूत और समृद्ध बना रहा है।रूबियो ने कहा, ‘‘हमारे दोनों देशों के लोगों के बीच मित्रता और पारिवारिक संबंधों की गहरी जड़ें ऐसी साझेदारी की नींव हैं, जो नवोन्मेषी, लचीली और दूरदर्शी है।’’
अमेरिका के कई राज्यों ने अमेरिकी समाज और अर्थव्यवस्था में भारतीय प्रवासियों के बढ़ते योगदान को रेखांकित करते हुए 15 अगस्त 2026 को भारत की स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में ‘भारत दिवस’ मनाने की घोषणाएं की हैं। कई सीनेटर, संसद सदस्यों और नगर निकायो ने भी भारत के स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:58 +0530</pubDate>
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<title>Indonesia के तट पर आया 7.7 तीव्रता का भूकंप, तटीय इलाकों में Tsunami अलर्ट जारी</title>
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<description><![CDATA[ इंडोनेशिया के तट पर शनिवार सुबह 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। अमेरिका के भूगर्भीय सर्वेक्षण ने यह जानकारी दी। इस भूकंप से किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की अभी कोई खबर नहीं मिली है।भूकंप शनिवार को स्थानीय समयानुसार सुबह पांच बजकर 58 मिनट पर इंडोनेशिया के फ्लोरेस क्षेत्र में 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। इसका केंद्र पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत के एंडे शहर से 68 किलोमीटर उत्तर-उत्तर पश्चिम में था। इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने सुनामी की चेतावनी जारी की है तथा लोगों से समुद्र तटों और नदी किनारों से दूर रहने का आग्रह किया है।एजेंसी ने बताया कि समुद्र के भीतर कम गहराई पर आया यह भूकंप फ्लोरेस द्वीप के पास केंद्रित था। प्रभावित तटीय इलाकों के निवासियों को ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। करीब 17,000 द्वीपों वाला विशाल द्वीपसमूह इंडोनेशिया प्रशांत महासागर क्षेत्र में ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित होने के कारण भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>US Army ने रोकी Apache हेलिकॉप्टर की ट्रेनिंग, Texas में 2 सैनिकों की हुई थी मौत</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को अपाचे हेलीकॉप्टरों के सभी प्रशिक्षण मिशनों पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी। यह निर्णय टेक्सास में इस सप्ताह हुए एक घातक हेलीकॉप्टर हादसे के बाद लिया गया, जिसमें दो सैनिकों की मौत हो गई थी। बुधवार को हुए इस हादसे के कारणों का अभी खुलासा नहीं किया गया है, क्योंकि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है।सेना ने बताया कि अलबामा के फोर्ट रकर स्थित ‘आर्मी कॉम्बैट रेडीनेस सेंटर’ की एक सुरक्षा जांच टीम दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में जुटी है। सेना ने अपने बयान में कहा, ‘‘प्रशिक्षण पर यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक हमें इस दुर्घटना के मूल कारण का पता नहीं चल जाता।’’
अमेरिकी सेना पहले भी ऐसे हादसों के बाद इसी तरह के कदम उठा चुकी है। तीन वर्ष पहले अलास्का और केंटकी में अलग-अलग हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं में 12 सैनिकों की मौत के बाद सेना ने सभी विमानन इकाइयों की उड़ानें रोक दी थीं, ताकि अतिरिक्त सुरक्षा प्रशिक्षण पूरा किया जा सके।हालांकि, सेना ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अपाचे हेलीकॉप्टरों द्वारा संचालित लड़ाकू अभियानों को रोकने का कोई उल्लेख नहीं किया। ये हेलीकॉप्टर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री मार्गों को खुला बनाए रखने के लिए तैनात किए गए हैं। हाल ही में एक अपाचे हेलीकॉप्टर ईरानी ड्रोन से टकराने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।अमेरिका के राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (एनटीएसबी) ने पिछले वर्ष वाशिंगटन डीसी के पास ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और अमेरिकन एयरलाइंस के एक विमान की टक्कर की जांच के दौरान सेना की सुरक्षा संस्कृति की कड़ी आलोचना की थी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:57 +0530</pubDate>
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<title>White House के $400 Million Ballroom प्रोजेक्ट पर रोक के खिलाफ US Supreme Court पहुंचे Donald Trump, सुरक्षा का दिया हवाला</title>
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<description><![CDATA[ ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से व्हाइट हाउस बॉलरूम प्रोजेक्ट पर काम जारी रखने की इजाज़त मांगी, जबकि वे निर्माण कार्य रोकने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती दे रहे हैं। लगभग 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को अपील कोर्ट के एक पैनल ने रोक दिया था, जिसका कहना था कि कांग्रेस ने इसे मंज़ूरी नहीं दी थी। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने प्रोजेक्ट को चुनौती देने वाले वादियों से जवाब के लिए मंगलवार की समय-सीमा तय की। अपनी याचिका में प्रशासन ने कहा कि काम रोकने से व्हाइट हाउस में चल रहे निर्माण कार्य में बाधा आएगी और तर्क दिया कि सुरक्षा के लिए बॉलरूम की जगह ज़रूरी है। सॉलिसिटर जनरल डी. जॉन सॉयर ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि वे US कोर्ट ऑफ़ अपील्स (डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ कोलंबिया सर्किट) के तीन जजों की बेंच के पिछले हफ़्ते आए फ़ैसले पर रोक लगा दें। निचली अदालत ने प्रशासन को अपील करने का समय देने के लिए अपने फ़ैसले को दो हफ़्ते के लिए रोक दिया था, और सॉयर ने शीर्ष अदालत से कहा कि वे 21 अगस्त को फ़ैसला लागू होने से पहले इस पर कार्रवाई करें।इसे भी पढ़ें: Mallikarjun Kharge ने Independence Day पर संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का किया आह्वानअपील कोर्ट की बेंच ने बंटे हुए मतों के साथ फ़ैसला सुनाया कि ट्रंप को निर्माण कार्य रोकना होगा क्योंकि कांग्रेस ने इस प्रोजेक्ट को मंज़ूरी नहीं दी है। बहुमत की राय थी कि ट्रंप के पास उस जगह पर 90,000 स्क्वेयर फ़ीट का बॉलरूम बनाने का एकतरफ़ा अधिकार नहीं है, जहाँ पिछले साल पतझड़ में उसे गिराने का आदेश देने से पहले व्हाइट हाउस का ईस्ट विंग स्थित था। प्रशासन ने अपनी फाइलिंग में कहा इस मामले में एक असाधारण और गैर-कानूनी रोक का आदेश शामिल है, जो व्हाइट हाउस के ईस्ट विंग में बन रहे इंटीग्रेटेड मिलिट्री कॉम्प्लेक्स (जिसमें पूरी तरह सुरक्षित बॉलरूम भी शामिल है) के निर्माण कार्य को रोक देगा; यह कॉम्प्लेक्स राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत ज़रूरी है। फाइलिंग में यह भी कहा गया है कि प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति—जिसे एक खुली निर्माण-स्थल बताया गया है।इसे भी पढ़ें: Vadodara Court: पत्नी की हत्या में पूर्व Police अधिकारी को उम्रकैद, साथी को 5 साल जेलशुक्रवार को दाखिल किए गए दस्तावेज़ों में प्रशासन ने पहली बार इस बात की पुष्टि की कि &#039;एयर फ़ोर्स वन&#039; पर मिसाइल हमले की धमकी के कारण सीक्रेट सर्विस को पिछले महीने ट्रंप को एक दूसरे मिलिट्री विमान से चुपचाप तुर्की से बाहर निकालना पड़ा था। सुरक्षित बॉलरूम की ज़रूरत बताते हुए, इन दस्तावेज़ों में ट्रंप की हत्या की हालिया कोशिशों की सूची में &quot;8 जुलाई को एयर फ़ोर्स वन पर मिसाइल हमले की धमकी&quot; का ज़िक्र किया गया। प्रशासन का कहना है कि यह प्रोजेक्ट &quot;समय पर और बजट के अंदर&quot; चल रहा है और लगभग 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर के प्राइवेट डोनेशन की वजह से टैक्सपेयर्स के पैसे खर्च करने की ज़रूरत नहीं है। हालाँकि, कांग्रेस में डेमोक्रेट्स का कहना है कि ऐसा लगता है कि बॉलरूम का काम ट्रंप के &quot;बड़े, शानदार&quot; टैक्स कटौती बिल से मिले फंड से हो रहा है। प्रशासन ने कांग्रेस से अतिरिक्त फंड भी माँगा है, लेकिन सांसदों ने इसे मंज़ूरी नहीं दी है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:56 +0530</pubDate>
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<media:keywords>White, House, के, 400, Million, Ballroom, प्रोजेक्ट, पर, रोक, के, खिलाफ, Supreme, Court, पहुंचे, Donald, Trump, सुरक्षा, का, दिया, हवाला</media:keywords>
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<title>India&#45;US Relations पहले से कहीं ज्यादा मजबूत, Marco Rubio ने गिनाए Defense और AI क्षेत्र में सहयोग के बड़े फायदे</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देश के लोगों को बधाई दी और कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी संबंध पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच व्यक्तिगत संबंधों की वजह से ये रिश्ते लगातार मज़बूत हुए हैं। रुबियो ने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती और पारिवारिक संबंध एक ऐसी साझेदारी का आधार हैं जो नई सोच वाली, मज़बूत और भविष्य पर नज़र रखने वाली है। उन्होंने अहम क्षेत्रों में सहयोग का भी ज़िक्र किया, जबकि अमेरिका के कई राज्यों और अमेरिकी सांसदों ने बधाई संदेश और घोषणाओं के ज़रिए इस मौके को मनाया। एक बयान में रुबियो ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से, मैं भारत के लोगों को उनके स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक बधाई देता हूं। उन्होंने आगे कहा राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच व्यक्तिगत संबंधों की वजह से, अमेरिका-भारत संबंध लगातार बढ़ रहे हैं और पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत हुए हैं।इसे भी पढ़ें: Marco Rubio ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर बधाई दी, PM Modi और Trump के संबंधों को सराहारुबियो ने कहा कि अमेरिका-भारत सहयोग दोनों देशों और व्यापक हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित, मज़बूत और अधिक समृद्ध बना रहा है। उन्होंने रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष सहयोग और व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि हमारे दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती और परिवार के गहरे संबंध एक ऐसी साझेदारी की नींव रखते हैं जो अभिनव, मज़बूत और भविष्योन्मुखी है। संयुक्त राज्य अमेरिका उस भविष्य को लेकर उत्साहित है जिसे हमारे दोनों देश मिलकर बनाएंगे। अमेरिका के कई राज्यों ने भारत की आज़ादी के उपलक्ष्य में 15 अगस्त, 2026 को &#039;इंडिया डे&#039; के तौर पर मनाने के लिए विशेष घोषणाएं की हैं। इन घोषणाओं में अमेरिकी जीवन में भारतीय मूल के लोगों के बढ़ते योगदान को रेखांकित किया गया है। कई सीनेटरों, कांग्रेस सदस्यों, कानून निर्माताओं और नगर परिषदों ने भी भारत के स्वतंत्रता दिवस पर बधाई दी है। इन संदेशों के ज़रिए अमेरिका ने भारत के साथ मज़बूत द्विपक्षीय संबंधों और लोगों के बीच बढ़ते संपर्कों पर ज़ोर दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:56 +0530</pubDate>
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<title>Beijing में Ambassador Vikram Doraiswami ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर फहराया राष्ट्रीय ध्वज</title>
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<description><![CDATA[ के जे एम वर्मा
बीजिंग, 15 अगस्त चीन में भारत के राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। तेज बारिश के बीच बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय इस कार्यक्रम में शामिल हुए। ध्वजारोहण के बाद, उपस्थित जनसमूह दूतावास परिसर के सभागार में एकत्र हुआ, जहां दुरईस्वामी ने राष्ट्र के नाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश पढ़ा।उन्होंने स्वतंत्रता दिवस समारोह के सिलसिले में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार भी वितरित किए। इसके बाद, प्रवासी भारतीय समुदाय के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया। भारतीय मिशन की ओर से सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर की गई एक पोस्ट के अनुसार शंघाई में भारत के महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर ने एक समारोह में तिरंगा फहराया, जिसमें प्रवासी भारतीय समुदाय के 400 सदस्यों और भारत समर्थकों ने भाग लिया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:55 +0530</pubDate>
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<title>Strait of Hormuz पर Donald Trump का बड़ा दावा, बोले&#45; जल्द ही इसे US Territory घोषित करेंगे</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वे जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका का इलाका घोषित करेंगे। न्यूयॉर्क राज्य में एक राजनीतिक रैली को संबोधित करते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि अमेरिका चल रहे युद्ध में ईरान को हरा देगा। ईरान को बुरी तरह हराने के बाद और वह बहुत बुरी तरह हार रहा है। मैं जल्द ही होर्मुज़ जलडमरूमध्य को अमेरिका का इलाका घोषित कर दूँगा। होर्मुज़ जलडमरूमध्य, जिससे दुनिया का पाँचवां हिस्सा तेल और प्राकृतिक गैस गुज़रती है, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू किए जाने के बाद से ज़्यादातर बंद रहा है। ईरान के उप-विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने ट्रम्प की टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर &quot;ट्वीट&quot; या सैन्य बल के ज़रिए कब्ज़ा नहीं किया जा सकता। इसे भी पढ़ें: White House के $400 Million Ballroom प्रोजेक्ट पर रोक के खिलाफ US Supreme Court पहुंचे Donald Trump, सुरक्षा का दिया हवालाउन्होंने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर न तो ट्वीट से, न ही एयरक्राफ्ट कैरियर से, न ही कोई आदेश जारी करके और न ही चुनावी भाषण से कब्ज़ा किया जा सकता है। ईरान न तो धमकियों से डरता है और न ही ताकत के प्रदर्शन से घबराता है।ट्रंप के दावों को सख्ती से खारिज करते हुए ग़रीबाबादी ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य ईरान का रहा है, ईरान का है और ईरान का ही रहेगा।ट्रंप का होर्मुज़ पर पूरा कंट्रोल होने का दावाइससे पहले, ट्रंप ने दावा किया था कि इस जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) पर अमेरिका का &quot;पूरा कंट्रोल&quot; है और वे इसे बनाए रखेंगे, क्योंकि ईरान के साथ इस अहम जलमार्ग को फिर से खोलने को लेकर बातचीत रुकी हुई है। ट्रंप ने कहा होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अमेरिका का पूरा कंट्रोल है। मुझे लगता है कि हम इसे बनाए रखेंगे! हर कोई हमारी नौसैनिक घेराबंदी को &#039;स्टील की दीवार&#039; (Wall of Steel) कह रहा है और ईरान इसके बारे में कुछ नहीं कर सकता। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Independence Day 2026: भारत के साथ आजादी का जश्न मनाते हैं ये 5 देश, कितनों के बारे में जानते हैं आप?</title>
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<description><![CDATA[ आज पूरे भारत में 80वें स्वतंत्रता दिवस का भव्य समारोह पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी दफ्तरों और ऐतिहासिक स्थलों पर तिरंगा शान से लहरा रहा है। देश के कोने-कोने में देशभक्ति के रंग में रंगे सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 15 अगस्त की यह ऐतिहासिक तारीख सिर्फ भारत के लिए ही आज़ादी का पैगाम लेकर नहीं आई थी? दुनिया के 5 अन्य देश भी इसी दिन अपनी आज़ादी का जश्न मनाते हैं। इनमें दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, कांगो गणराज्य, लिकटेंस्टीन और बहरीन शामिल हैं।इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में नहीं पहुंचे, BJP ने साधा निशानाबहरीन और भारत का अनोखा कनेक्शनखाड़ी क्षेत्र (पश्चिमी एशिया) का द्वीपीय देश बहरीन भी 15 अगस्त को ही आज़ाद हुआ था। भारत की ही तरह बहरीन ने भी ब्रिटिश हुकूमत की गुलामी से मुक्ति पाई थी। भौगोलिक दृष्टि से 50 प्राकृतिक और 33 कृत्रिम द्वीपों से मिलकर बने इस खूबसूरत देश की कुल आबादी (2020 की जनगणना के अनुसार) करीब 15 लाख (1.5 मिलियन से अधिक) दर्ज की गई थी, जिसमें से 7,12,362 लोग बहरीन के मूल निवासी थे। दरअसल, बहरीन 15 अगस्त 1971 को ब्रिटिश शासन से मुक्त हो गया था। हालांकि, इतिहास बताता है कि बहरीन की तुर्क सरकार और अंग्रेजों के बीच एक समझौते में 1913 में देश को स्वतंत्र घोषित किया गया था। हालाँकि, इसे 1971 तक लागू नहीं किया गया था। कई लोगों के अनुसार बहरीन का स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त है। लेकिन अगले दिन को ही स्वतंत्रता दिवस के रूप में मान्यता दी जाती है।कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता प्राप्त की, जैसा कि भारत और बहरीन ने किया था। इस दिन को कांगोलेस राष्ट्रीय दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा देश है। आयतन की दृष्टि से यह विश्व में 11वें स्थान पर है। 10.8 मिलियन की आबादी वाला कांगो कभी सबसे बड़े फ्रांसीसी उपनिवेशों में से एक था। कांगो को 1960 में फ्रांसीसियों से आजाद कराया गया था। इससे पहले इस पर 80 साल तक फ्रांसीसियों का शासन था।इसे भी पढ़ें: Arvind Kejriwal ने कहा, बेहतर स्कूलों के लिए Gen-Alpha बच्चे कर रहे संघर्षलिकटेंस्टीन हमारे लिए बहुत परिचित देश नहीं है। वास्तव में, यह दुनिया के सबसे छोटे देशों की सूची में छठे स्थान पर है। 15 अगस्त, 1866 को देश जर्मन शासकों से स्वतंत्र हुआ। हालांकि लिकटेंस्टीन ने 1866 में स्वतंत्रता प्राप्त की। 15 को ही देश के तत्कालीन राजकुमार फ्रांज-जोसेफ द्वितीय का जन्मदिन था। उन्होंने 1938 से 2009 तक लिकटेंस्टीन पर शासन किया। 2019 की जनगणना के अनुसार, देश की कुल जनसंख्या 38,749 है।इसे भी पढ़ें: Congress HQ में गूंजा पूरा Vande Mataram, Mallikarjun Kharge और Rahul Gandhi की मौजूदगी में नया सियासी संदेश1940 के दशक में कोरिया एक ही दिन दो भागों में बंट गया था। उत्तर और दक्षिण कोरिया का जन्म हुआ। कोरिया 1945 से एक जापानी उपनिवेश था। उस 35 साल के शासन के अंत में इस देश को आजादी मिली। लेकिन भारत की तरह कोरियाई लोगों को भी विभाजन का दर्द सहना पड़ा। 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस को कोरिया के राष्ट्रीय मुक्ति दिवस के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान की हार हुई थी। तीन साल बाद कोरिया दो हिस्सों में बंट गया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>दबाव और चुनौतियों के बीच तालिबान के 5 साल, आज कैसे मना रहा अपना &amp;apos;आजादी दिवस&amp;apos;?</title>
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<description><![CDATA[ तालिबान सरकार शनिवार को अफगानिस्तान में अपने शासन के पाँच वर्ष पूरे होने का जश्न मना रही है। एक तरफ जहाँ प्रशासन देश की &quot;स्वतंत्रता&quot; और सुरक्षा की सराहना कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ आलोचक दैनिक जीवन के सभी क्षेत्रों में लगातार कड़े होते प्रतिबंधों की निंदा कर रहे हैं। इस सप्ताह राजधानी काबुल में &#039;इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान&#039; के चमकीले सफेद झंडे लगाए गए हैं, जहाँ दीवारों पर नए भित्तिचित्रों (म्यूरल्स) पर लिखा है: &quot;स्वतंत्रता गरिमा, गर्व और पहचान का प्रतीक है। प्रशासन एक क्रिकेट मैच और अन्य खेल आयोजनों की मेजबानी करेगा—जिनमें लड़कियों और महिलाओं के शामिल होने पर प्रतिबंध है। वहीं, तालिबान विद्रोहियों के शहर में दाखिल होने के ठीक पाँच साल पूरे होने के मौके पर उनके समर्थकों के जुटने की उम्मीद है। अमेरिकी नेतृत्व वाले सैनिकों की अव्यवस्थित वापसी के बाद पूरे अफगानिस्तान में एक तीव्र सैन्य अभियान चलाते हुए, तालिबान ने बिना किसी विरोध के सरकारी बलों को सत्ता से बेदखल कर राजधानी पर कब्जा कर लिया था। इसे भी पढ़ें: Taliban के 5 साल के राज में कितना बदला Afghanistan? बंदूकधारियों की Diplomacy देखकर दुनिया हैरानइस हफ़्ते विदेशी सेनाओं द्वारा छोड़ी गई कुछ गाड़ियाँ प्रदर्शनी के लिए रखी गईं, जिनमें धूल भरे पैरों के निशान वाली और फेयरी लाइट्स से सजी एक हमवी (Humvee) भी शामिल थी। झंडे बेचने वाले वेंडरों के अलावा, यूनिवर्सिटी के छात्र पीरूज़ मिर्ज़ाई ने कहा कि सरकार सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और &quot;बिज़नेस करने वालों के लिए बहुत सारे मौके&quot; लेकर आई है। 20 साल के छात्र ने AFP को बताया, &quot;युवाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नौकरियां ज़्यादा नहीं हैं।&quot; सरकार के मुख्य प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने इस महीने कहा कि अधिकारी &quot;अर्थव्यवस्था की नींव&quot; रख रहे हैं और इसके लिए धैर्य की ज़रूरत है। पिछले तीन सालों में पड़ोसी देशों ईरान और पाकिस्तान से 60 लाख से ज़्यादा अफ़गानों के आने की वजह से प्रति व्यक्ति GDP में गिरावट आई है, जबकि वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि वास्तविक विकास दर 4.8 प्रतिशत तक पहुँच जाएगी।इसे भी पढ़ें: Bengaluru में TTP से जुड़ा संदिग्ध असाफुल मलिक हुआ गिरफ्तार, FIR दर्जहालांकि तालिबान अधिकारियों ने यूरोप समेत कई देशों के साथ संबंध बनाए हैं, लेकिन उनकी सरकार को अभी भी सिर्फ़ रूस ने ही मान्यता दी है। पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ संबंध बहुत खराब हो गए हैं और इस साल दोनों देशों के बीच युद्ध भी हुआ। इससे अफ़ग़ानिस्तान में मानवीय संकट और गहरा गया, जबकि वहां के लोग पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मदद में कटौती की मार झेल रहे थे। कुछ देशों ने तालिबान प्रशासन के साथ अपने संबंध सीमित रखने का फ़ैसला किया है, जब तक कि अफ़ग़ानिस्तान में हालात नहीं बदलते। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, वहां के लोग &quot;बहुत गंभीर नुकसान&quot; झेल रहे हैं। अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNAMA) की मानवाधिकार निदेशक फ़ियोना फ़्रेज़र ने AFP को बताया कि लोगों को &quot;दम घोंटू पाबंदियों का सामना करना पड़ा है, जो उनके रोज़मर्रा के जीवन और मानवाधिकारों के लगभग हर पहलू में दखल देती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:54 +0530</pubDate>
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<title>100% स्वदेशी...फाइटर जेट इंजन पर लाल किले से मोदी का बड़ा ऐलान</title>
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<description><![CDATA[ 15 अगस्त की सुबह लाल किले की प्राचीन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वो गर्जना जिसने भारतीय रक्षा गलियारों में एक नई हलचल पैदा कर दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ भाषण नहीं दिया बल्कि भारत की हवाई संप्रभुता का नया घोषणापत्र जारी कर दिया। अब यह ऐलान है स्वदेशी फाइटर जेट इंजन का आज मेरा लाल किले की प्राचीन से मेरे देश के युवा वैज्ञानिकों को मेरे टैलेंटेड यूथ को मेरे इंजीनियर्स को और प्रोफेशनल्स को और सरकार के हर विभागों को भी मेरा आह्वान है क्या हमारा अपना मेड इन इंडिया फाइटर जेट्स के लिए जेट इंजीन हमारा होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 सालों के बदलाव का एक ऐसा रिपोर्ट कार्ड पेश किया जिसने आलोचकों को चुप करा दिया। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत अब सिर्फ बातें नहीं करता बल्कि जमीन पर नतीजे दिखाता है। प्यारे देशवासियों पिछले 12 वर्षों में डिफेंस प्रोडक्शन करीब चार गुना। खादी और ग्रामोद्योग का उत्पादन करीब पांच गुना हुआ। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग करीब सात गुना बढ़ा। आधुनिक रेलवे कोच का निर्माण 21 गुना बढ़ा। मोबाइल फोन उत्पादन 33 गुना बढ़ा। इतना ही नहीं आधुनिक युग को देकर के भी डिजिटल और इनोवेशन की दुनिया में भी हमने अपना परचम लहराया। इंटरनेट यूजर इंटरनेट कंज्यूमर करीब करीब चार गुना बढ़े। पेटेंट ग्रांट होने की संख्या चार गुना बढ़ी। डिजिटल ट्रांजैक्शन 100 गुना बढ़े। सामान्य मानवी की सुविधाओं की तरफ भी हमने उतना ही गंभीरता से काम किया। हर साल औसतन 15 गुना ज्यादा तेजी से हमने नल से जल कनेक्शन दिए। इसे भी पढ़ें: मोदी बोले- दिमागी नक्सलियों को पहचानें, उन्हें अलग करें: ये समाज को भटका रहेहर साल औसतन छह गुनी ज्यादा रफ्तार से लोगों को गैस कनेक्शन दिए। हर साल चार गुनी रफ्तार से गरीबों के लिए टॉयलेट बनाने का काम किया। हर साल तीन गुना ज्यादा तेजी से गरीबों को घर देने का काम किया। देश ने गवर्नेंस में भी बहुत बदलाव लाया। हजारों की संख्या में कंप्लायंसेस खत्म किए। सैकड़ों की तादाद में पुराने कानून खत्म किए। पिछली शताब्दी के कानूनों से 21वीं शताब्दी की मार्च नहीं हो सकती। हमने आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मेट्रो का विस्तार किया। हमने पब्लिक ट्रांसपोर्ट को ताकत दी। जिस स्पीड से काम जिस स्केल पर काम किया यह सब यह रफ्तार यह विस्तार ये अचीवमेंट आजादी के बाद पहली बार पिछले एक दशक में देखा है। और जब इतनी सारी सिद्धियां हमारे सामने हो, इतनी तेज गति दिखाई देती हो, देशवासियों का सामर्थ्य पल-पल प्रकट होता है। तब तो 2047 में विकसित भारत बनने का संकल्प कभी भी अधूरा नहीं रह सकता है। यह सारे आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि हम आगे बढ़ने वाले हैं। इसे भी पढ़ें: Fragile Five से दुनिया की बड़ी Economy बनने तक, PM Modi ने बताया 12 सालों में कैसे हुआ भारत का Transformअब आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में परमाणु बम बनाना आसान है। लेकिन एक फाइटर जेट का इंजन बनाना उससे कहीं ज्यादा जटिल है। आज दुनिया में सिर्फ अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन ही ऐसे देश हैं जिनके पास अपनी पूरी तरह से स्वदेशी जेट इंजन तकनीक है। चीन भी इसमें दशकों से लगा है लेकिन उसे भी अब तक पूर्ण सफलता नहीं मिली है। एक फाइटर जेट इंजन के अंदर का तापमान 1600 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है। यह इतना तापमान है कि साधारण स्टील मक्खन की तरह पिघल जाए। इसके लिए सिंगल क्रिस्टल ब्लेड और सुपर एलॉय जैसी तकनीक चाहिए होती है। और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब लाल किले से कहा कि इंजन हमारा ही होना चाहिए तो उनका इशारा किसी क्रिटिकल टेक्नोलॉजी को घर में विकसित करने की ओर था। अभी हमारे पास तेजस है लेकिन उसका दिल यानी कि इंजन अमेरिकी है। पीएम मोदी चाहते हैं कि आने वाले समय में तेजस मार्क 2 या एमका के अंदर जो भी इंजन धड़के वो मेड इन इंडिया हो। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातों में एक इमोशनल टच भी था। उन्होंने कहा कि भारत के नागरिकों के पसीने से बनी हुई वह चीजें जिसमें भारत की मिट्टी की महक हो हम उसे ही खरीदेंगे। यह एक बहुत बड़ा नीतिगत बदलाव है। यह सेनाओं और सरकारी विभागों को एक स्पष्ट आदेश है कि अब प्राथमिकता स्वदेशी ही होगी। इसे भी पढ़ें: राजस्थानी बंधेज से लेकर केसरिया पगड़ी तक, लाल किले पर हर साल कैसे बदलता रहा है PM मोदी का अंदाजअब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे एक सामूहिक संकल्प बताया। जब 140 करोड़ से ज्यादा लोग तय कर लेते हैं कि हमें स्वदेशी बनना है तो बाजार की ताकतें भी झुक जाती है। जेट इंजन के निर्माण से ना केवल हजारों हाईटेक नौकरियां पैदा होंगी बल्कि भारत की अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा भी बचेगी जो हम इंजनों के रखरखाव और खरीद में खर्च करते हैं। अब लाल किले से हुआ यह ऐलान भविष्य के भारत की नींव है। स्वदेशी इंजन का मतलब है कि युद्ध के समय हमें किसी दूसरे देश के सामने हाथ नहीं फैलाने होंगे। अगर कोई भी देश हमें पुर्जे देने से मना भी कर देता है तो भी हमारे विमान आसमान में दुश्मनों से मुकाबला करते रहेंगे। खैर स्वतंत्रता दिवस पर भारत ने अपनी गुलामी की एक और बेड़ी विदेशी तकनीक पर निर्भरता को तोड़ने का संकल्प लिया है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:53 +0530</pubDate>
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<title>ईरान ने पलटा पूरा गेम, BRICS बैंक में एंट्री से उड़ाए अमेरिका के होश!</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने अमेरिकी और पश्चिमी देशों की दादागिरी को खत्म करने के लिए ब्रिक्स यानी ब्रिक्स संगठन का इस्तेमाल करते हुए फाइनल गेम प्लान तैयार कर लिया। एक ऐसा प्लान जो ट्रंप प्रशासन के होश उड़ाने के लिए काफी है। अमेरिका और ईरान की दुश्मनी कोई नई नहीं है। लेकिन जब से डोनाल्ड ट्रंप वापस सत्ता में आए हैं, उन्हें ईरान के चारों तरफ एक सख्त आर्थिक दीवार खड़ी कर दी है। इसे ही कहते हैं आर्थिक नाकेबंदी। अमेरिका ने दुनिया भर के देशों से कह दिया है कि कोई भी ईरान से तेल नहीं खरीदेगा और अगर कोई खरीदेगा तो अमेरिका उस पर बैन लगा देगा। इतना ही नहीं ईरान को अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम जिसे Swift कहते हैं उससे बाहर निकाल दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि ईरान ना तो अपना तेल किसी को बेच पा रहा था और ना ही दुनिया से अपनी करेंसी में व्यापार कर पा रहा था। ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह संकट में थी। अमेरिका का प्लान साफ था। इसे भी पढ़ें: ऐसी जिंदगी से मौत अच्छी, ईरान के खौफ से समुंदर कूद रहे US सैनिकईरान को इतना मजबूर कर दो कि वो घुटने टेक दे। लेकिन अमेरिका यह भूल गया जब सीधी उंगली से घी नहीं निकलता तो उंगली टेढ़ी करनी पड़ती है और ईरान ने ठीक यही किया। अब आते हैं कहानी में ट्विस्ट। ईरान ने समझ लिया कि अकेले अमेरिका से लड़ना मुश्किल नहीं है। इसीलिए उसने हाथ उन देशों से जो खुद अमेरिका की नीतियों से परेशान है। ईरान जनवरी 2024 में bricks का पक्का सदस्य बन गया था। लेकिन असली मास्टर स्ट्रोक तो ईरान ने अब खेला है। ईरान ब्रिक्स के बैंक जिसे न्यू डेवलपमेंट बैंक यानी एनडीबी कहते हैं उसका हिस्सा बनने जा रहा है। अब तक ईरान डॉलर के बिना अंतरराष्ट्रीय व्यापार नहीं कर पा रहा था। लेकिन ब्रिक्स बैंक में आते ही ईरान अब रूस के साथ रूबल में, चीन के साथ युवान में और भारत के साथ रुपए में सीधा बिजनेस कर सकेगा। यानी 20 से ही अमेरिकी डॉलर का पत्ता पूरी तरह साफ। इसे भी पढ़ें: राष्ट्रपति पेजेशकियान आ रहे भारत, US सैनिकों को पीटने के बाद अब ईरान ने लिया चौंकाने वाला फैसलाअमेरिका का जो बड़ा हथियार था डॉलर ईरान ने ब्रिक्स के जरिए उसकी हवा निकाल दी। इस पूरे खेल के पीछे एक बहुत मजबूत त्रिकोणीय गठबंधन काम कर रहा है जिसे दुनिया रूस, चीन और ईरान की तड़ी कह रही है। इसमें चीन की भूमिका एक आर्थिक रीड जैसी है क्योंकि चीन लगातार ईरान से भारी मात्रा में सस्ता तेल खरीद रहा है। कच्चा तेल खरीद रहा है और बदले में ईरान को एडवांस टेक्नोलॉजी और पैसे दे रहा है। वहीं दूसरी तरफ रूस जो खुद अमेरिकी प्रतिबंधों को झेल रहा है। रूस ने ईरान से मिलकर एक नया बैंकिंग मैसेजिंग सिस्टम बना लिया है ताकि उन्हें पश्चिमी देशों के स्विफ्ट सिस्टम की जरूरत ना पड़े। ये दोनों देश मिलकर एक नया रेल कॉरिडोर भी बना रहे हैं जिससे रूस का सामान ईरान होते हुए सीधे एशिया तक पहुंच सके। अब बात करते हैं सबसे जरूरी हिस्से की। इस पूरे ड्रामे में भारत का क्या स्टैंड है? भारत के लिए बहुत स्थिति नाजुक है। एक तरफ पुराना दोस्त ईरान है। जहां भारत चाब पोर्ट बना रहा है। वहां बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद जरूरी है। क्योंकि इसके जरिए हम पाकिस्तान को छोड़े बिना सीधे अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस तक पहुंच सकते हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण चाबार पोर्ट के काम पर असर पड़ा है। भारत पर भी दबाव है कि वह ईरान से दूरी बनाए रखें। लेकिन भारत की विदेश नीति अभी बहुत स्मार्ट है। भारत ने ईरान के साथ एक अस्थाई कामकाजी रास्ता निकाला है। हमारा निवेश भी सुरक्षित रहे और अमेरिका भी ज्यादा नाराज ना हो। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:53 +0530</pubDate>
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<title>Iran से हारे नेतन्याहू की विदाई तय! अब तो ट्रंप ने भी खींच लिए हाथ</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और इजराइल के रिश्तों में प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती को लंबे समय से अहम माना जाता रहा है। लेकिन अब दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आगामी इजरायली आम चुनाव में नेतन्याहू का समर्थन करने से दूरी बना सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह इजराइल में नेतन्याहू की कमजोर होती राजनीतिक स्थिति और जनता का बदलता मूड है। इजराइल में अक्टूबर 2026 में आम चुनाव प्रस्तावित है। अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सओस की रिपोर्ट के मुताबिक जब नेतन्याहू हाल में वाशिंगटन पहुंचे थे तब ट्रंप ने उनसे बंद कमरे में चुनाव को लेकर सवाल किया था। ट्रंप ने कथित तौर पर पूछा था कि क्या वह चुनाव जीत रहे हैं? इस सवाल पर नेतन्याहू चुप रहे। इसे भी पढ़ें: White House के $400 Million Ballroom प्रोजेक्ट पर रोक के खिलाफ US Supreme Court पहुंचे Donald Trump, सुरक्षा का दिया हवालाबैठक में मौजूद दूसरे लोगों ने हालांकि कहा कि नेतन्याहू चुनाव जीत सकते हैं। लेकिन इजराइल में सामने आ रहे प्रीपोल सर्वे अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। कई सर्वों में नेतन्याहू प्रधानमंत्री पद की दौड़ में पीछे दिखाई दे रहे हैं और उनके गठबंधन  को सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का आंकड़ा हासिल करने में मुश्किल बताई जा रही है। वहीं दूसरी तरफ गादी आइजन कोर्ट यायर लैपिड और नफ्ताली बेनेट जैसे नेताओं की लोकप्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है। कई सर्वों में आइजन कोर्ट को प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे लोकप्रिय दावेदार बताया गया है। यही स्थिति ट्रंप के लिए भी मुश्किल पैदा कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक आइजन कोर्ट, लैपिट और बेनेट ने वाइट हाउस से अपील की है कि ट्रंप इजराइली चुनाव को लेकर तठस्थ रुख अपनाएं। ऐसे में ट्रंप शायद इजराइली जनता के मूड के खिलाफ जाकर नेतन्या के समर्थन में खुलकर उतरने से बचना चाहते हैं। हालांकि ट्रंप और नेतन्या के बीच व्यक्तिगत संबंधों को मजबूत माना जाता है। लेकिन नीतिगत मतभेद कई बार सामने आ चुके हैं। इसे भी पढ़ें: ईरान ने पलटा पूरा गेम, BRICS बैंक में एंट्री से उड़ाए अमेरिका के होश!ट्रंप ने अतीत में नेतन्याहू की नीतियों को लेकर नाराजगी जताई है। लेबनान को लेकर नेतन्याहू की नीति और गाजा को लेकर ट्रंप की शांति योजना दोनों नेताओं के बीच मतभेद का कारण बनी है। ट्रंप के लिए यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि दूसरे देशों के चुनावों में उतना समर्थन हमेशा कामयाब नहीं रहा। हंगरी में उन्होंने विक्टर ऑर्बन का समर्थन किया। जबकि चुनाव में ऑर्बन को हार का सामना करना पड़ा था। जर्मनी में ट्रंप ने एएफडी का समर्थन किया। लेकिन वहां भी उनकी पसंद के मुताबिक नतीजे नहीं आए। कनाडा में भी ट्रंप की राजनीतिक दखल की कोशिशों को झटका लगा। ऐसे में इजराइल में नेतन्याहू के साथ खड़ा होना ट्रंप के लिए जोखिम भरा हो सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:52 +0530</pubDate>
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<title>लाल किले से बोल रहे थे मोदी, इजरायल ने बड़ा खेल कर दिया!</title>
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<description><![CDATA[ 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम गाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13वीं बार तिरंगा फहराया। पीएम मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को अब दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना है। हमें आत्मनिर्भर बनना है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एक तरफ पीएम मोदी भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का काम कर रहे थे तो दूसरी तरफ इजराइल ने बड़ा खेल कर दिया। इजराइल ने भारत का झंडा गाड़ दिया। सबसे पहले तो भारत में इजराइली राजदूत रूएनार ने हिंदी में भारतवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी। स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। इसी बीच इजराइल के डिप्लोमेट्स भारत के एक रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए और भारतीय लोगों को झंडा बांटने लगे। इसे भी पढ़ें: Independence Day 2026: भारत के साथ आजादी का जश्न मनाते हैं ये 5 देश, कितनों के बारे में जानते हैं आप?बता दें कि दो दिन पहले भी इजराइल के डिप्लोमेट्स ने भारत में वंदे मातरम गाना शुरू कर दिया था। यह संदेश खासतौर पर भारत में रहने वाले उन लोगों के लिए था जो वंदे मातरम गाना नहीं चाहते। वंदे मातरम। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इजराइल के अखबार ने भी तहलका मचा दिया है। इजराइल का अखबार यरूशलम पोस्ट भारत की ताकत के बारे में दुनिया को बता रहा है। भारत की ग्रोथ इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में दुनिया को बता रहा है। सोचिए एक तरफ राहुल गांधी भारत की विदेश नीति का मजाक बना रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ इजराइल भारत की ताकत का गुणगान कर रहा है। हर घर तिरंगा अभियान के तहत मुंबई में इजराइल की डिप्टी काउंसिल जनरल अभिशाख हेर ने मुंबई के सीएसटी स्टेशन पर भारतीय लोगों को तिरंगा बांटना शुरू कर दिया। इजराइल की डिप्लोमेट ने खासतौर पर मुस्लिम महिलाओं को भी तिरंगा दिया और भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की बधाई भी दी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:52 +0530</pubDate>
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<title>Indonesia Earthquake: इंडोनेशिया में 7.7 तीव्रता के भूकंप से 20 की मौत</title>
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<description><![CDATA[ इंडोनेशिया के तट पर शनिवार तड़के 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया जिससे कई इमारतें एवं मकान ढह गए और कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई। प्राधिकारियों ने बताया कि छह लोग घायल हुए हैं और भूकंप के कारण हुए भूस्खलन के बाद दो अन्य लोग लापता हैं। प्राधिकारियों ने सुनामी की चेतावनी जारी कर तटीय इलाकों के लोगों से ऊंचे स्थानों पर जाने को कहा था लेकिन बाद में चेतावनी को वापस ले लिया गया।इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने कहा कि समुद्र के जलस्तर की निगरानी के दौरान ऐसा कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं पाया गया जिससे तटीय इलाकों के लिए खतरा पैदा हो। अमेरिका के भूगर्भीय सर्वेक्षण ने बताया कि भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह पांच बजकर 58 मिनट पर इंडोनेशिया के फ्लोरेस क्षेत्र में 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। इसका केंद्र पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत के एंडे शहर से 68 किलोमीटर उत्तर-उत्तर पश्चिम में था।इसे भी पढ़ें: Indonesia के तट पर आया 7.7 तीव्रता का भूकंप, तटीय इलाकों में Tsunami अलर्ट जारीशुरुआती भूकंप के बाद कई झटके महसूस किए गए। मौमेरे तलाश एवं बचाव एजेंसी के प्रमुख फतहुर रहमान ने बताया कि बचावकर्मियों ने सिक्का, पश्चिमी मंगराई और पूर्वी मंगराई के तीन प्रभावित क्षेत्रों से कम से कम 20 शव बरामद किए हैं जिनमें मंगराई के रेओक गांव में भूस्खलन के मलबे से निकाले गए आठ शव भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से घायल छह लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।रहमान ने बताया कि बचावकर्मी अब भी उन दो ग्रामीणों की तलाश कर रहे हैं, जिनके मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है। पूर्वी नुसा तेंगारा के पुलिस प्रमुख रूडी दारमोको ने बताया कि भूकंप से भारी नुकसान हुआ है और कई इमारतें ढह गई हैं। उन्होंने कहा कि शहरों और गांवों में बिजली गुल होने के कारण सूचनाएं मिलने और तलाश एवं बचाव अभियान में दिक्कत आ रही है।इसे भी पढ़ें: इंडोनेशिया में 7.7 तीव्रता का ज़बरदस्त भूकंप आया, जिसमें 2 लोगों की मौत हो गई और सुनामी की लहरें तट से टकराईंदारमोको ने कहा, ‘‘हम नुकसान और हताहतों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं, लेकिन संचार सेवाएं बाधित हैं।’’ उन्होंने बताया कि भूकंप के कारण एंडे रीजेंसी में हुए भूस्खलन से ‘ट्रांस-फ्लोरेस’ राजमार्ग भी अवरुद्ध हो गया है। स्थानीय टेलीविजन पर प्रसारित फुटेज में भूकंप के बाद कई अस्पतालों से मरीजों को एहतियातन बाहर निकालते देखा गया। अस्पताल कर्मचारियों ने बिस्तर, ‘ड्रिप स्टैंड’ और ऑक्सीजन सिलेंडर समेत उपकरणों को बाहर निकाला तथा आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्थायी उपचार स्थल बनाए।राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने एक बयान में कहा कि नागेकेओ रीजेंसी में करीब 2,000 ग्रामीण अपने घर छोड़कर अस्थायी आश्रय स्थलों पर चले गए हैं। फ्लोरेस द्वीप के अधिकतर हिस्सों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए और शुरुआती खबरों में भारी नुकसान की बात सामने आई है। पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत की सिक्का रीजेंसी की निवासी योहाना एम्बु ने बताया कि तेज झटकों से कई इमारतों को नुकसान पहुंचा।इसे भी पढ़ें: Indonesia के Bali के पास यात्री नौका में आग लगी, 106 लोगों को सुरक्षित निकालाउन्होंने कहा, ‘‘यहां कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है... मैंने देखा कि मौमेरे के बंदरगाह टर्मिनल का प्रतीक्षालय ढह गया।’’ मुख्य रूप से कैथोलिक आबादी वाले फ्लोरेस द्वीप में स्थित ‘सेंट पीटर मेजर सेमिनरी’ के प्रमुख पादरी गिडेलबर्टस टांगा ने बताया कि सुबह की प्रार्थना में शामिल छात्र उस समय घबराकर बाहर भागे, जब एक सभागार की छत ढह गई। टांगा ने कहा, ‘‘हमारे छात्र और नन छत गिरने पर घबराकर बाहर भागे। भूकंप के दौरान एक इमारत की दूसरी मंजिल से कूदने के कारण कम से कम एक पादरी का पैर टूट गया।’’ करीब 17,000 द्वीपों वाला विशाल द्वीपसमूह इंडोनेशिया प्रशांत महासागर क्षेत्र में ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित होने के कारण भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील है।‘रिंग ऑफ फायर’ प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला हुआ एक ऐसा क्षेत्र है जहां दुनिया के सबसे ज्यादा सक्रिय ज्वालामुखी और भूकंप आते हैं। दिसंबर 1992 में सात तीव्रता के भूकंप के कारण आई सुनामी में फ्लोरेस द्वीप पर करीब 2,500 लोगों की मौत हो गई थी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:51 +0530</pubDate>
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<title>जिन्हें लगता था भारत राष्ट्र के रूप में टिक नहीं पाएगा, बिखर जाएगा, सबको करारा जवाब हैं भारत के ये 80 साल!</title>
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<description><![CDATA[ 14-15 अगस्त 1947 की वह आधी रात... जब पूरी दुनिया गहरी नींद में सो रही थी, तब भारत अपनी नियति के साथ एक ऐतिहासिक साक्षात्कार कर रहा था। उस रात दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की नींव रखी गई, जिसने आगे चलकर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के ज़रिए पूरी दुनिया को चकित कर दिया। आज 15 अगस्त 2026 को भारत जब अपनी स्वतंत्रता की 79वीं वर्षगांठ मना रहा है और आज़ादी के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, तो यह जश्न सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि 1947 में भारत के वजूद पर उठाए गए हर सवाल का एक ठोस जवाब है। साम्राज्यवादी ताकतें तब तथाकथित &#039;व्हाइट मैन्स बर्डन&#039; का अहंकार पाले बैठी थीं। उनका मानना था कि अश्वेतों को सभ्य बनाने का ठेका सिर्फ गोरों के पास है। यूरोपीय बुद्धिजीवियों का दावा था कि अनगिनत भाषाओं, विविधताओं, गरीबी और अशिक्षा से जूझता यह नवजात राष्ट्र अपनी ही असमानताओं के बोझ तले कुछ ही सालों में ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा। लेकिन आज का यह भारत उन तमाम पश्चिमी भविष्यवाणियों और उपेक्षाओं के मलबे पर सीना ताने खड़ा है मजबूत, अटूट और लगातार आगे बढ़ता हुआ।इसे भी पढ़ें: PM Modi ने MSME उद्योग से 40 देशों के FTA का पूरा लाभ उठाने का आह्वान कियाभारत लूट-खसोट के दौर में वापस चला जाएगा1940 से 1945 तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे विंस्टन चर्चिल का मानना था कि अगर अंग्रेज इस उपमहाद्वीप को छोड़कर जाते हैं तो जरूरत पड़ने पर जर्मनी से श्वेत जानुसेरी सैनिकों और अधिकारियों की सेवा लेकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हिंदुओं का सशस्त्र प्रभुत्व नष्ट किया जा सके। भारत का अंग्रेजों द्वारा छोड़ दिया जाना और उसे ब्राह्मणों की सत्ता में जाने देना एक क्रूर और धूर्ततापूर्ण नजरअंदाजी होगी। अगर ब्रिटिश भारत से चले जाते हैं तो उनके द्वारा निर्मित न्यायपालिका, स्वास्थ्य सेवाएं, रेलवे और लोक निर्माण की संस्थाओं का पूरा तंत्र खत्म हो जाएगा और हिंदुस्तान बहुत तेजी से शताब्दियों पहले की बर्बरता और मध्ययुगीन लूट-खसोट के दौर में वापस चला जाएगा।अराजकता छा जाएगीब्रिटिश लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने 1891 में कहा था कि ये चार हजार साल पुराने लोग हैं। ये इतने पुराने हैं कि इस प्रणाली को सीख नहीं सकते। अगर हमने कभी भारतीयों को उनका शासन चलाने की छूट दी तो यहां अराजकता छा जाएगी या खुदा... किस तरह का भ्रम, अव्यवस्था, उलझन और बुरी स्थिति यहां छा जाएगी।भारतीय राष्ट्र नाम की कोई चीज नहींब्रिटिश भारत के गवर्नर जनरल के काउंसिल मेंबर सर जॉन स्ट्रेची ने सन 1888 में कहा था कि हिंदुस्तान के बारे में यह सबसे जरूरी सीखने लायक बात है कि एक भारतीय राष्ट्र का कभी भी अस्तित्व नहीं था, न ही यूरोपीय विचारों के मुताबिक कोई ऐसी भौतिक, राजनीतिक, सामाजिक या धार्मिक रूप से एकीकृत अवधारणा ही मौजूद थी। अतीत में भारतीय राष्ट्र नाम की कोई चीज नहीं थी, न ही भविष्य में उसके ऐसा होने की संभावना है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:51 +0530</pubDate>
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<title>Israel के राष्ट्रपति ने X पर पोस्ट कर भारत से घनिष्ठ मित्रता और मजबूत करने की जताई उम्मीद</title>
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<description><![CDATA[ इजराइल के राष्ट्रपति आइजक हर्जोग ने शनिवार को भारत और उसके नागरिकों को 80वें स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी और दोनों देशों के बीच ‘‘घनिष्ठ मित्रता’’ को और मजबूत करने का आह्वान किया। हर्जोग ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘इजराइल की ओर से, मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत की ‘अद्भुत जनता’ को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक बधाई देता हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ईश्वर करे कि इजराइल तथा भारत के बीच यह घनिष्ठ मित्रता लगातार और मजबूत होती रहे।’’ इजराइल के विदेश मंत्रालय ने भी शुभकामनाएं दीं। पूरे इजराइल से 400 से अधिक भारतीय स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने के लिए तेल अवीव जिले के इस उत्तरी तटीय शहर में एकत्र हुए।भारत के मिशन ने इजराइल में ‘सूर्यपथ तिरंगा’ के आयोजन के मद्देनजर कार्यक्रम सुबह जल्दी शुरू किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। राजदूत जे. पी. सिंह ने लोगों द्वारा लगाए जा रहे देशभक्ति के नारों के बीच तिरंगा फहराया।इसे भी पढ़ें: Vladimir Putin ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर PM Modi और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बधाई दीसमारोह की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ के गायन के साथ हुई। इस बीच, इजराइल में भारतीय समुदाय ने स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए पूरे देश में कई कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। तिरंगा फहराने के बाद भारतीय मिशन ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:50 +0530</pubDate>
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<title>Vladimir Putin ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर PM Modi और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बधाई दी</title>
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<description><![CDATA[ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शनिवार को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपनी भारतीय समकक्ष द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बधाई दी। पुतिन ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों की रचनात्मक द्विपक्षीय साझेदारी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ाने में मददगार साबित होगी। क्रेमलिन की ओर से जारी बयान के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन ने यह भी कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध ‘‘विशेष रूप से विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’’ की भावना के साथ सफलतापूर्वक मजबूत हो रहे हैं।इसे भी पढ़ें: लाल किले से PM Modi का बड़ा एलान, सुरक्षित आपूर्ति के लिए Critical Minerals मिशन पर काम कर रहा भारतउन्होंने यह भी कहा कि वह सितंबर में ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का समूह) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत की यात्रा करने वाले हैं। पुतिन ने अपने संदेश में कहा, ‘‘आपका देश आर्थिक, सामाजिक, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर उचित रूप से काफी प्रतिष्ठा रखता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘रूस-भारत संबंध विशेष रूप से विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के तहत सफलतापूर्वक विकसित हो रहे हैं।’’ रूसी राष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि मॉस्को और नयी दिल्ली विभिन्न क्षेत्रों में सार्थक सहयोग कर रहे हैं तथा संयुक्त राष्ट्र, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), ब्रिक्स और अन्य बहुपक्षीय मंचों के ढांचे के भीतर आपस में गहरा समन्वय बनाकर काम कर रहे हैं। पुतिन ने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि हमारे संयुक्त प्रयासों के माध्यम से, हम अपने मित्रवत लोगों के लाभ के लिए और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता को मजबूत करने के हित में रचनात्मक रूस-भारत साझेदारी को व्यापक रूप से मजबूत करना जारी रखेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:50 +0530</pubDate>
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<title>फिजी से सैन फ्रांसिस्को तक Har Ghar Tiranga अभियान के तहत दुनिया भर में मनाया गया Independence Day</title>
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<description><![CDATA[ देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर भारत का तिरंगा दुनिया भर में पूरब से पश्चिम की ओर एक प्रतीकात्मक यात्रा कर रहा है और फिजी से लेकर सैन फ्रांसिस्को तक दुनिया भर में मौजूद भारतीय मिशनों में इसे लगातार फहराया जा रहा है। इस पहल का नाम ‘सूर्यपथ तिरंगा’ रखा गया है। यह हर घर तिरंगा अभियान का ही एक हिस्सा है—एक ऐसा राष्ट्रीय और वैश्विक कार्यक्रम जो भारतीयों और विदेशों में रहने वाले भारतीयों को स्वतंत्रता दिवस मनाते समय राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रोत्साहित करता है।इस पहल की शुरुआत प्रशांत महासागर के छोटे से द्वीपीय देश फिजी में भारतीय समयानुसार रात 1:30 बजे (स्थानीय समय के अनुसार सुबह आठ बजे) हुई, जहां उच्चायुक्त सुनीत मेहता ने सुवा स्थित ‘इंडिया हाउस’ में तिरंगा फहराया। इसके बाद यह झंडा भारतीय मिशनों के जरिए पश्चिम की ओर बढ़ा और न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, म्यांमा, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, मालदीव, उज्बेकिस्तान, ओमान, यूएई, कतर, कुवैत और सऊदी अरब में जश्न मनाया गया। इसके बाद झंडा फहराने का यह कार्यक्रम एशिया, अफ्रीका और यूरोप में आगे बढ़ा, जिसमें इथियोपिया, रूस, केन्या, इजराइल, मिस्र, दक्षिण अफ्रीका, लातविया, जर्मनी, इटली, बेल्जियम, नीदरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन, मोरक्को और आइसलैंड में स्थित भारतीय मिशन शामिल थे।इसे भी पढ़ें: Vladimir Putin ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर PM Modi और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बधाई दीअमेरिकी महाद्वीप की बात करें तो, ब्राजील, सूरीनाम, गुयाना, अर्जेंटीना, त्रिनिदाद और टोबैगो, डोमिनिकन रिपब्लिक, कोलंबिया, कनाडा (ओटावा और टोरंटो), जमैका, अमेरिका (न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन), पेरू और मैक्सिको में भारतीय मिशनों पर भारतीय झंडा फहराया जाएगा। दिन का आखिरी झंडा सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास फहराएगा, जहां भारतीय समयानुसार रात लगभग 8:30 बजे रिले का समापन होगा। वेलिंगटन में, भारतीय समुदाय के 500 से ज्यादा लोगों और स्थानीय दोस्तों ने स्वतंत्रता दिवस के जश्न में हिस्सा लिया।इसे भी पढ़ें: Red Fort पर 80वें Independence Day पर गूंजा वंदे मातरम्, PM Modi ने 75 मिनट का भाषण दियावहां उच्चायुक्त मुआनपुई सैयावी ने तिरंगा फहराया और देश के नाम राष्ट्रपति का संदेश पढ़कर सुनाया। समुदाय के लोगों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों और ‘हर घर तिरंगा’ सेल्फ़ी अभियान में भी भाग लिया। बीजिंग में, भारतीय समुदाय के सदस्यों और “भारत के दोस्तों” की मौजूदगी में, बारिश के बावजूद राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने भारतीय दूतावास में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और राष्ट्रपति के संबोधन के कुछ अंश पढ़कर सुनाए।टोक्यो में, भारतीय राजदूत नगमा मल्लिक ने दूतावास में तिरंगा फहराया और देश के नाम राष्ट्रपति का संबोधन पढ़कर सुनाया। स्पेन में भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय तक भारतीय तिरंगा साथ रखें और भारतीयों को ‘हर घर तिरंगा’ का जोश फैलाने के लिए प्रेरित करें।” भारत के संस्कृति मंत्रालय ने पहले एक बयान में कहा था कि इस पहल का मकसद स्वतंत्रता दिवस समारोहों में भारतीय मिशनों और दुनिया भर में बसे भारतीय समुदाय की भागीदारी को उजागर करना और अलग-अलग टाइम जोन में एक साझा, लगातार चलने वाले जश्न का एहसास पैदा करना है। इस रिले के तहत शामिल प्रमुख राजनयिक केंद्रों के अलावा, विदेशों में कई अन्य दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में भी भारत का स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है।इसे भी पढ़ें: अमित शाह ने PM Modi के सप्तधारा मंत्र को आत्मनिर्भरता हासिल करने का मजबूत आधार बतायादुबई में, महावाणिज्य दूत विष्णु वर्धन रेड्डी ने भारत के महावाणिज्य दूतावास में तिरंगा फहराया और भारत-यूएई के मज़बूत रिश्तों और भारतीय समुदाय के योगदान पर ज़ोर दिया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:49 +0530</pubDate>
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<title>Delhi&#45;Dhaka तनाव के बीच Bangladesh PM Tarique Rahman का होगा पहला भारत दौरा, बड़े फैसले संभव</title>
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<description><![CDATA[ ANI ने &#039;द डेली स्टार&#039; के हवाले से बताया है कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान 20 से 25 अगस्त के बीच भारत का दौरा कर सकते हैं। यह दौरा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण और उनकी वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर ढाका और नई दिल्ली के बीच हालिया तनाव के बीच हो सकता है। बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट &#039;द डेली स्टार&#039; के अनुसार, राजनयिक सूत्रों ने बताया है कि रहमान भारत का अपना पहला आधिकारिक दौरा कर सकते हैं, और ढाका तथा नई दिल्ली दौरे की सही तारीखों पर बातचीत कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Priyank Kharge ने RSS को ललकारा: Freedom Struggle के 50 Martyrs के नाम बताओ, हम 500 की लिस्ट देंगे!यह घटनाक्रम बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी की 11 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद हुआ है। नई दिल्ली में एक वरिष्ठ राजनयिक सूत्र के हवाले से &#039;द डेली स्टार&#039; ने खबर दी है, &quot;दोनों पक्ष द्विपक्षीय यात्रा के लिए इच्छुक रहे हैं, लेकिन कार्यक्रम (शेड्यूल) को लेकर समस्या थी। विभिन्न कार्यक्रमों पर विचार करने के बाद, दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी 20 से 25 अगस्त के बीच की तारीखों पर सहमत होने के करीब पहुंच गए हैं।&quot; पद से हटाए गए प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर बांग्लादेश और भारत के बीच चल रहे राजनयिक तनाव के बीच यह प्रस्तावित दौरा काफी अहम है। हसीना ने पहले बांग्लादेश लौटने का संकल्प लिया था और कहा था कि उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है या जेल भेजा जा सकता है, लेकिन &quot;डर उनके कर्तव्य का फैसला नहीं कर सकता&quot;। बांग्लादेश लौटने पर उन्होंने कहा, &quot;मेरी वापसी सत्ता के लिए नहीं है, बल्कि बांग्लादेश को विकास और धर्मनिरपेक्षता की राह पर वापस लाने के लिए है। मुझे पता है कि वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मेरी हत्या कर सकते हैं।&quot; इसे भी पढ़ें: Mohan Bhagwat बोले: सही मार्गदर्शन मिले तो युवा देश की ताकत, वरना बन सकते हैं बोझइस बीच, ढाका ने अपनी सरकार के सत्ता से हटने की दूसरी बरसी पर हसीना की बातचीत पर कड़ी आपत्ति जताई। हालांकि, नई दिल्ली ने खुद को इस कार्यक्रम से अलग कर लिया और कहा कि इसका आयोजन एक &quot;निजी मीडिया संस्था&quot; ने किया था। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:49 +0530</pubDate>
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<title>Japan PM Sanae Takaichi विवादित यासुकुनी स्मारक नहीं गईं, चीन ने जताया कड़ा विरोध</title>
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<description><![CDATA[ जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने शनिवार को द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण की 81वीं वर्षगांठ के अवसर पर तोक्यो स्थित विवादित यासुकुनी स्मारक जाने से परहेज किया। माना जा रहा है कि उन्होंने इस कदम के जरिए चीन और दक्षिण कोरिया के साथ जापान के राजनयिक संबंधों को प्राथमिकता देने की कोशिश की। हालांकि, अपने संबोधन में उन्होंने एशिया में अपने देश के युद्धकालीन अतीत का कोई उल्लेख नहीं किया और न ही उस अतीत को लेकर किसी तरह का पश्चाताप व्यक्त किया।यासुकुनी स्मारक की स्थापना युद्धों में मारे गए 24 लाख से अधिक लोगों के सम्मान में की गई थी। यह स्मारक उस समय विवादों के केंद्र में आ गया जब वहां द्वितीय विश्व युद्ध के दोषी ठहराए गए 14 जापानी युद्ध अपराधियों को भी शामिल किया गया। चीन और दक्षिण कोरिया का कहना है कि जापानी अधिकारियों का यासुकुनी स्मारक जाना जापान द्वारा युद्धकालीन अत्याचारों पर पर्याप्त पश्चाताप न होने को दर्शाता है।ताकाइची ने हिरोशिमा, नागासाकी और ओकिनावा में हुई भारी तबाही के पीड़ितों के साथ-साथ विदेशों में युद्ध के मोर्चों पर मारे गए लोगों के प्रति शोक व्यक्त किया। उन्होंने उनके बलिदान को ‘जापान की शांति और समृद्धि की नींव’ बताया। तोक्यो के बुडोकान हॉल में अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ‘‘युद्ध की समाप्ति के बाद से जापान ने लगातार विश्व शांति और समृद्धि में योगदान दिया है।हम युद्ध की त्रासदी को दोबारा कभी नहीं होने देंगे।’’
बुडोकान हॉल यासुकुनी स्मारक से कुछ ही दूरी पर है। ताकाइची ने यह भी कहा कि जापान क्षेत्र में एक ‘विश्वसनीय राष्ट्र’ के रूप में वैश्विक चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी, तीन अन्य कैबिनेट मंत्री और ताकाइची की सत्तारूढ़ पार्टी के तीन वरिष्ठ अधिकारी शनिवार सुबह यासुकुनी स्मारक पहुंचे।इसके अलावा, विभिन्न राजनीतिक दलों के दर्जनों सांसदों के एक गैर-दलीय समूह ने भी वहां प्रार्थना की। इन यात्राओं को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय ने जापान के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया। चीन ने आरोप लगाया कि जापानी राजनेताओं का वास्तविक उद्देश्य ‘‘युद्ध अपराधियों के खिलाफ दिए गए फैसले को बदलना, जापान के युद्ध अपराधों को छिपाना, ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना और सैन्यीकरण को तेज करने का रास्ता तैयार करना’’ है।चीन ने जापान से इतिहास पर ‘गंभीर आत्ममंथन’ करने और सैन्यवाद से पूरी तरह दूरी बनाने का भी आग्रह किया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>&amp;apos;हमसे आगे निकल रहा है इबोला’: महामारी से हर 30 मिनट में एक व्यक्ति की मौत</title>
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<description><![CDATA[ काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के पूर्वी हिस्से में इबोला प्रकोप से हर 30 मिनट में एक व्यक्ति की मौत हो रही है. आशंका है कि रिकॉर्ड रफ़्तार से फैल रहा यह प्रकोप, जल्द ही अब तक का सबसे घातक प्रकोप बन सकता है. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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<title>मध्य पूर्व में मेथ तस्करी के बदलते तरीक़े &#45; UNODC की चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC) के अनुसार, ईरान ने 2026 की पहली तिमाही में योरोप और फ़ारस की खाड़ी भेजी जा रही 3,663 किलोग्राम मेथमफ़ेटामीन (Methamphetamine) ज़ब्त की. ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 04:30:00 +0530</pubDate>
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<title>झुका बांग्लादेश, पहले दिखाए तेवर, अब भारत से मांग रहा मदद!</title>
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<description><![CDATA[ भारत का पड़ोसी बांग्लादेश इस वक्त बहुत बुरे हाल में है। जहां बिजली का संकट खड़ा हो गया है और हालात इतने ज्यादा बदतर हो चुके हैं कि बांग्लादेशी सरकार ने फरमान जारी कर दिया है कि रात के 8:00 बजते ही पूरे देश के मॉल्स और बाजारों को ताला लग जाना चाहिए। वह बांग्लादेश जो भारत के साथ शेख हसीना के मामले पर अपनी तल्खी रख रहा था। अब वही भारत के सामने अपने हाथ फैलाकर मदद मांग रहा है। दरअसल बांग्लादेश इस वक्त अपने इतिहास के सबसे बुरे ऊर्जा संकट से गुजर रहा है। ढाका से लेकर खुलना तक 10-10 12-12 घंटों की बिजली कटौती हो रही है। जिसने वहां के लोगों का जीना बदहाल कर दिया। भीषण गर्मी और उमस के बीच पंखे और एसी सब कुछ बंद हो गए हैं। जनता का सब्र अब जवाब देने लगा है। कई इलाकों में पावर ग्रेड और सबस्टेशंस पर हिंसक हमले भी शुरू हो गए हैं। स्थिति को संभालने के लिए तारिक रहमान की सरकार ने इमरजेंसी कदम उठाते हुए हर रात 8:00 बजे तक दुकानों और मॉल्स को बंद कर देने का सख्त आदेश जारी कर दिया है। यानी कि रात के 8:00 बजते ही पूरा बांग्लादेश मानो कर्फ्यू के सन्नाटे में डूब जाता है। इसे भी पढ़ें: Mitchell Starc ने तोड़ा Rangana Herath का रिकॉर्ड, बने सबसे सफल बाएं हाथ के Test गेंदबाजयह सिर्फ बिजली का संकट नहीं है। यह बांग्लादेश की बर्बाद होती हुई अर्थव्यवस्था का संकेत भी है। वहां पर जो झीगा निर्यात होता है यानी कि शिमप एक्सपोर्ट जो कि दुनिया में दूसरे नंबर पर है वो अब बर्बादी के कगार पर खड़ा है क्योंकि तालाबों में ऑक्सीजन की मशीनें चलनी बंद हो गई हैं। यही हाल रहा तो जो गारमेंट इंडस्ट्री बांग्लादेश की रीड है उसमें भी भारी समस्याएं खड़ी हो जाएंगी। फैक्ट्रियों में उत्पाद आधा हो जाएगा। किसान महंगे डीजल के लिए तरस गए हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो बांग्लादेश के पास अब इस अंधेरे से निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा है। इस तबाही की जड़ में विदेशी ईंधन पर बांग्लादेश की भारी निर्भरता है। जहां पर 90% तेल और 30% गैस बांग्लादेश के बाहर से आता है। और इन सबके बीच में हाल ही में अमेरिकी कंपनी के एलएनजी टर्मिनल में लगी हुई आग ने और समंदर में खराब मौसम ने रही सही कसर भी बांग्लादेश के लिए पूरी कर दी। और अब जब बांग्लादेश में चारों ओर अंधेरा छा गया है, तो ढाका ने फिर एक बार दिल्ली को याद किया है। बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद ने भारतीय उच्चायुक्त से मुलाकात करके अतिरिक्त डीजल की गुहार भारत से लगा दी है। ताकि बांग्लादेश में बिजली उत्पादन हो सके। इसे भी पढ़ें: Tariq Rahman की India यात्रा द्विपक्षीय बातचीत की प्रगति पर निर्भर हैभारत बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन जो कि साल 2017 से दोनों देशों को जोड़ती है, अब बांग्लादेश के लिए लाइफ लाइन बन गई है। शेख हसीना के मुद्दे पर भले ही दोनों देशों के बीच में तनाव हो, लेकिन हकीकत यह है कि जबजब बांग्लादेश डूबने लगता है, तो उसे सिर्फ भारत की याद आती है और भारत ने ही उसे कई बार बचाया भी है। भारत ने हमेशा से ही अपने पड़ोसियों के लिए नेबरहुड फर्स्ट की नीति अपनाई है। संकट के समय में मदद करना भारत की संस्कृति का हिस्सा है और भारत ने हर बार अपने पड़ोसियों की मदद की है। ढाका में तारिक रहमान से मुलाकात भी की थी जिसके बाद से ही दोनों देशों के संबंध में अब वापस से अच्छे आसार दिखने लगे हैं और अब बांग्लादेश ने भारत से मदद की गुहार लगा दी है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:31:01 +0530</pubDate>
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<title>India&#45;Israel Hackathon में 1300 युवाओं ने पेश किए स्वास्थ्य सेवा के तकनीकी समाधान</title>
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<description><![CDATA[ हरिंदर मिश्रा
यरुशलम, 14 अगस्त इजराइल में ‘‘सुधारात्मक स्वास्थ्य सेवा’’ विषय पर आयोजित पहले भारत-इजराइल हैकाथॉन को युवा नवोन्मेषकों की शानदार प्रतिक्रिया मिली है। इसमें प्रतिभागी स्वास्थ्य सेवा और पुनर्वास क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए तकनीक आधारित उपाय विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इजराइल में भारत के राजदूत जेपी सिंह ने इस सप्ताह हैकाथॉन के विजेताओं को सम्मानित किया।इजराइल में विजेता घोषित किए गए समाधानों में एक ऐसा उपकरण भी शामिल है, जो व्हीलचेयर पर लगाया जा सकता है और अंगों की गतिविधि को सुगम बनाता है। यह उपकरण व्हीलचेयर के आगे वाले पहिये के स्वाभाविक घूमने की गति का इस्तेमाल करता है और बिजली के उपयोग के बिना व्हीलचेयर पर बैठे व्यक्ति के पैरों की नियंत्रित गतिविधि में मदद करता है। इस समाधान का मकसद अंगों की हरकत में मदद करने और पुनर्वास के लिए एक आसान और सुलभ तरीका उपलब्ध कराना है।भारत में चुने गए सफल समाधानों में एक ऐसा उपकरण भी शामिल है जो वास्तविक समय के वीडियो प्रसंस्करण और स्वचालित गतिविधि विश्लेषण का उपयोग कर घायल मरीजों के अंगों की गतिविधियों का आकलन करता है। भारतीय दूतावास ने बताया कि इजराइल में भारतीय यहूदी समुदाय के सदस्य ओरी कडविल ने इस हैकाथॉन की पहल की थी, जबकि समुदाय के अन्य सदस्यों ने इसके आयोजन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। दूतावास ने एक बयान में कहा, ‘‘इस पहल ने समुदाय को भारत और इजराइल के लोगों के बीच आपसी संबंध मजबूत करने का एक मंच प्रदान किया।साथ ही, इसने युवा छात्रों की रचनात्मकता और तकनीकी कौशल का इस्तेमाल करके ऐसे समाधान खोजने का मौका दिया, जिनका समाज पर व्यापक असर हो।’’
हैकाथॉन के लिए समस्याओं का चयन दोनों देशों के अस्पतालों, स्टार्ट-अप और विश्वविद्यालयों से लिया गया था। इजराइल की तरफ से चार समस्याएं चुनी गईं, जबकि भारत की तरफ से 10 समस्याओं को देखा गया। इसमें भारत में थापर यूनिवर्सिटी नोडल साझेदार थी।दूतावास के अनुसार, इस हैकाथॉन में दोनों देशों के 1300 छात्र और अन्य लोग शामिल हुए और 14 तरह की समस्याओं के समाधान के विषय पर चर्चा हुई। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:31:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>India-Israel, Hackathon, में, 1300, युवाओं, ने, पेश, किए, स्वास्थ्य, सेवा, के, तकनीकी, समाधान</media:keywords>
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<title>सीधे रास्ते पर नहीं चला तो...सिंधु जल संधि पर शहबाज ने भारत को दी खुली धमकी</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने देश के आज़ादी के जश्न के मौके पर सिंधु जल संधि को सस्पेंड करने को लेकर भारत को एक नई चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पानी की &quot;एक-एक बूंद&quot; एक &#039;रेड लाइन&#039; (अहम सीमा) है और धमकी दी कि अगर नई दिल्ली सही रास्ते पर नहीं आई तो सीधा जवाब दिया जाएगा। पाकिस्तान की आज़ादी के दिन यादगार-ए-फ़तह समारोह को संबोधित करते हुए शरीफ़ ने यह भी चेतावनी दी कि पाकिस्तान की संप्रभुता या सुरक्षा के लिए भविष्य में किसी भी चुनौती का जवाब उस जवाब से भी ज़्यादा कड़ा होगा, जो इस्लामाबाद का दावा है कि उसने 2025 के टकराव के दौरान दिया था। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि तीन दिन तक चली लड़ाई में भारत की हार के बाद उसने एकतरफा और गैर-कानूनी तरीके से सिंधु जल संधि को रद्द कर दिया। उन्होंने इस कदम को इस बात का सबूत बताया कि भारत शांति का दुश्मन है।इसे भी पढ़ें: Pakistan Political Crisis: Zardari ने 19 जजों की नियुक्ति को दी मंजूरी, खत्म हुआ सप्ताहों से जारी Deadlockअप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादियों के हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ जल-बंटवारे की संधि को रद्द कर दिया था। यह संधि रद्द करना उन कई दंडात्मक कदमों में से एक था जो नई दिल्ली ने पाकिस्तान के अंदर मौजूद आतंकी ठिकानों के खिलाफ सैन्य अभियान &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; शुरू करने से पहले उठाए थे। शरीफ़ ने कहा हमारे पानी की एक-एक बूंद एक &#039;रेड लाइन&#039; (अहम सीमा) है। अगर भारत सही रास्ते पर नहीं आया, तो उसे सीधा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में पाकिस्तान की संप्रभुता या सुरक्षा को चुनौती दी गई, तो वह और भी ज़्यादा ताकत के साथ जवाब देगा। उन्होंने कहा 2025 की लड़ाई का संदेश पूरी दुनिया तक पहुँच गया है। उन्होंने दावा किया कि इस टकराव से पाकिस्तान की प्रतिष्ठा में असाधारण वृद्धि हुई है। अगर भविष्य में कोई भी, गलती से भी, पाकिस्तान की संप्रभुता और सुरक्षा को चुनौती देता है, तो उसे 2025 की तुलना में और भी कड़ा जवाब दिया जाएगा।इसे भी पढ़ें: तीन तिगाड़ा काम...पाक-सऊदी-तुर्किये की यारी क्या भारत पर पड़ेगी भारी? &#039;सुन्नी NATO&#039; से हम कितने मजबूत, इस रिपोर्ट में जानेंपाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि उनका देश शांति, सम्मान और गरिमा चाहता है और वे पाकिस्तान को क्षेत्रीय स्थिरता लाने वाली ताकत के तौर पर दिखाना चाहते हैं। शरीफ़ ने कहा हम सम्मान और गरिमा के साथ शांति के पक्ष में हैं और इस क्षेत्र में स्थिरता की गारंटी बन गए हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पाकिस्तान चाहता है कि यह क्षेत्र और पूरी दुनिया झगड़ों से मुक्त रहे और उन्होंने न्याय तथा संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों के अनुसार विवादों को सुलझाने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि पाकिस्तान ने 2025 के संघर्ष में अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा करने की अपनी क्षमता साबित कर दी है। उन्होंने कहा कि देश का असली चरित्र और पहचान न केवल युद्ध के मैदान में उसके व्यवहार से, बल्कि शांति को बढ़ावा देने के उसके प्रयासों से भी झलकती है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:31:00 +0530</pubDate>
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<title>गाजा नहीं ये बलूचिस्तान है...बौखलाई पाकिस्तानी सेना ने F&#45;16 से गिराया बम!</title>
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<description><![CDATA[ बलूचिस्तान एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठ चुका है। चारों तरफ सिर्फ चीख पुकार, धुएं का गुबार और उठती लपटें दिखाई दे रही हैं। पाकिस्तानी सेना और बलूच अलगाव वादियों के बीच एक ऐसी खूनी जंग छिड़ चुकी है जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। एक तरफ पाकिस्तानी सेना आसमान से बम बरसा रही है। तो वहीं दूसरी तरफ बलूच विद्रोही चुन चुनकर पाकिस्तानी चौकियों को उड़ा रहे हैं। सुरा से लेकर चगाई और खुजदार तक पूरे बलचिस्तान जंग का मैदान बन चुका है। दरअसल ऐसा दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना इतनी बौखला चुकी है कि उसने बलूचिस्तान के रिहाइसी इलाकों पर F16 लड़ाकू विमानों से बमबारी कर दी है। इसे भी पढ़ें: Pakistan में सुरक्षा बलों ने 15 उग्रवादी मार गिराए, खैबर पख्तूनख्वा में हुई मुठभेड़बलूच एक्टिविस्ट मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया पर कुछ खौफनाक तस्वीरें और वीडियो शेयर किया है। दावा है कि सुराब और आसपास के इलाकों में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अंधाधुंध गोलियां और बम बरसाए हैं। घर तबाह हो चुके हैं। मासूम लोग मलवे के नीचे दबे हैं। लेकिन पाकिस्तानी हुक्मरानों के सिर पर सिर्फ खून सवार है। हालांकि इन हवाई हमलों के आंकड़ों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। लेकिन जमीनी हालत बेहद दर्दनाक है। दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उसके एक बड़े सुरक्षा अभियान में 10 बलूच विद्रोहियों को ढेर कर दिया है। सुराब जिले में एक कार बम धमाका हुआ। दावा किया जा रहा है कि यह बम समय से पहले ही फट गया जिसमें आठ संदिग्ध विद्रोही और तीन बेकसूर नागरिक मारे गए। इस झड़प में पाकिस्तानी सेना ने दो जवान भी घायल हुए।इसे भी पढ़ें: इधर डिफेंस डील, उधर इजरायल ने तुर्की-पाक को ठोका सेना इसे अपनी बड़ी कामयाबी बता रही है। लेकिन सच तो यह है कि इस खूनी खेल में सबसे ज्यादा पिस आम नागरिक रहे हैं। जो हर दिन खौफ के साए में जीने को मजबूर हो चुके हैं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। पाकिस्तानी सेना ने इन हमलों के जवाब में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने जो पलटवार किया है उसने पाकिस्तानी हुकूमत की नींद तक उड़ा दी है। बीएलए के लड़ाकों ने चगाई जिले में सीधे पुलिस स्टेशन पर हमला बोल दिया। झाव इलाके में सेना के कैंप को निशाना बनाया गया और कुछ दार में पाकिस्तानी फौज के काफिले को उड़ाने का दावा किया जा रहा है। बलोच विद्रोही अब सीधे सामने आकर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के ठिकानों पर काल बनकर टूट रहे हैं। बलूचिस्तान अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां उसे वापसी का कोई रास्ता नजर नहीं आता है। एक तरफ पाकिस्तानी सेना ताकत के दम पर इस आवाज को दबाने चाहती है तो वहीं दूसरी तरफ बलोच लड़ाके आखिरी सांस तक लड़ने की कसम खा चुके हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:31:00 +0530</pubDate>
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<title>राष्ट्रपति पेजेशकियान आ रहे भारत, US सैनिकों को पीटने के बाद अब ईरान ने लिया चौंकाने वाला फैसला</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली का दौरा करेंगे। पेज़ेश्कियान का इस शिखर सम्मेलन में शामिल होना तय है, जो सितंबर में देश की राजधानी में आयोजित होगा। यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत 2026 में अपनी अध्यक्षता में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है। यह शिखर सम्मेलन भारत की थीम &quot;मज़बूती, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के लिए निर्माण&quot; के तहत आयोजित किया जाएगा। भारत ने 2026 की शुरुआत में ब्राज़ील से ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी। ईरान ने संकेत दिया है कि वह वेस्ट एशिया में तनाव कम करने की कोशिशों में भारत को एक संभावित साझेदार के तौर पर देखता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि नई दिल्ली मौजूदा संकट को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।इसे भी पढ़ें: ऐसी जिंदगी से मौत अच्छी, ईरान के खौफ से समुंदर कूद रहे US सैनिकअराघची ने ये बातें जून में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए भारत दौरे के दौरान कहीं। नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि तेहरान इस संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं देखता और उसका मानना ​​है कि बातचीत ही आगे बढ़ने का एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है। अराघची ने कहा हम भारत की किसी भी रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेंगे।&quot; इससे पता चलता है कि ईरान कूटनीतिक कोशिशों में भारत की भूमिका के लिए तैयार है। उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब 28 फरवरी को ईरान और अमेरिका-इज़राइल की संयुक्त सेनाओं के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से वेस्ट एशिया में सुरक्षा हालात पर लड़ाई और तनाव का असर बना हुआ है। भारत और ईरान के बीच लगातार उच्च-स्तरीय बातचीत होती रही है। अक्टूबर 2024 में, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने रूस के कज़ान में ब्रिक्स समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों और क्षेत्र में हो रही घटनाओं पर चर्चा की।इसे भी पढ़ें: अब कैंची अटैक की तैयारी में हूती, सऊदी पर होगा दो तरफा हमला?ईरान 2024 में ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बना; समूह के विस्तार के तहत वह मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात के साथ इसमें शामिल हुआ। 2025 में इंडोनेशिया भी इसका पूर्ण सदस्य बन गया, जिससे सदस्यों की कुल संख्या 11 हो गई। अपनी हालिया यात्रा के दौरान, अरागची ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात की और क्षेत्रीय घटनाक्रम तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास सुरक्षा को लेकर ईरान के रुख पर चर्चा की। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:30:59 +0530</pubDate>
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<title>ऐसी जिंदगी से मौत अच्छी, ईरान के खौफ से समुंदर कूद रहे US सैनिक</title>
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<description><![CDATA[ ईरान युद्ध ने अमेरिका को बड़ा झटका दिया है। अमेरिकी नौसेना का विमान वाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन इस वक्त एक खौफनाक और भयावह दौर से गुजर रहा है। ईरानी मीडिया तस्लीम न्यूज़ एजेंसी ने दावा किया कि इस 1 लाख टन वजनी युद्धपोत पर तैनात अमेरिकी नौसैनिकों और मरीन कमांडोस के बीच आपस में ही भीषण खूनी झड़प हो गई। दावा किया जा रहा है कि इस मारपीट और चाकूबाजी में सात अमेरिकी नौसैनिकों की मौत हो गई। जबकि कई गंभीर रूप से घायल हो गए। हालांकि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय या फिर सेंट कॉम इस घटना की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रहा है। इसे भी पढ़ें: North Korea ने US-South Korea सैन्य अभ्यास को युद्ध का पूर्वाभ्यास बताकर दी चेतावनीदरअसल अमेरिका विमान वाहक पोत कई महीनों से समंदर में सिर्फ अपनी लोकेशन बदल रहा है। सैनिक लगातार मिल रही तैनाती की वजह से परेशान हो चुके हैं। ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम ने एक अज्ञात सैन्य स्रोत के हवाले से यह सनसनीखेज दावा किया। रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी एयरक्राफ्ट करियर यूएसएस अब्राहम लिंकन पर प्री मेंबर्स के बीच तनातनी इतनी बढ़ चुकी है कि यह मामला लात घूंसों, पानी की बोतलों और चाकू छुरी से हमले तक पहुंच गया है। इस हिंसक टकराव में कथित तौर पर सात अमेरिकी नौसैनिकों ने अपनी जान गवा दी और कई अन्य लहूलुहान हो गए। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि यह खूनी झड़प तब शुरू होगी जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सटक कॉम का एक वरिष्ठ सलाहकार नौसैनिकों की बढ़ती शिकायतों और मानसिक तनाव का जायजा लेने यूएसएस लिंकन पर पहुंचा था। जब अधिकारी ने सैनिकों को संबोधित करना शुरू किया तो लंबे वक्त से गुस्से में उबल रहे नौसैनिकों ने उनकी जमकर वोटिंग की और उन पर पानी की बोतलें फेंक दी। देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई और अधिकारी के सामने सैनिक आपस में भिड़ गए। गौरतलब है कि यूएसएस अब्राहम लिंकन 21 नवंबर को सैंड डिगो से रवाना हुआ था। जिसके बाद ईरान के साथ तनाव और लाल सागर में युद्ध के खतरे को देखते हुए इसे अचानक पश्चिम एशिया की ओर मोड़ दिया गया। इसे भी पढ़ें: Sensex 300 अंक टूटा, शुरुआती कारोबार में Nifty में भी गिरावट दर्जमहीनों से बिना ब्रेक के समंदर में रहते लगातार बढ़ते युद्ध के दबाव और कथित तौर पर डिप्रेशन और अपनी जान देने की कोशिशों के चलते क्रीम मेंबर्स का मानसिक संतुलन बिगड़ने की खबरें आ रही हैं। इसी मानसिक दबाव का नतीजा इस हिंसक झड़प को बताया जा रहा है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम की अमेरिकी नौसेना या सटक कॉम की ओर से कोई पुष्टि अभी तक नहीं की गई। रक्षा एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह तेहरान की ओर से चलाया जा रहा एक साइकोलॉजिकल वारफेयर या प्रोपेगेंडा हो सकता है। जिसका मकसद अमेरिकी सेना के मनोबल को तोड़ना है। लेकिन इसके बावजूद इस बात को खारिज नहीं किया जा सकता कि महीनों से जारी इस तैनाती ने अमेरिकी नौसैनिकों को भारी मानसिक तनाव में डाल दिया है। सच तो यह है कि अमेरिका अपने खिलाफ आने वाली किसी खबर का ना तो जल्दी पुष्टि करता है ना तो खंडन। क्या 1 लाख टन वजनीय अमेरिकी एयरक्राफ्ट करियर पर सच में अपनों ने ही अपनों पर चाकू चला दिए या तेहरान का यह कोई बड़ा नैरेटिव गेम है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:30:59 +0530</pubDate>
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<title>चीनी समान पर भारत से भिड़ा अमेरिका, ट्रंप के सलाहकार अब कौन सी रिपोर्ट लेकर आ गए?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने भारत को लेकर एक बड़ा आरोप लगाया है। व्हाइट हाउस की एक रिपोर्ट में भारत को शैडो ट्रांसिपमेंट नेटवर्क का हिस्सा बताया गया है। जिसके जरिए कथित तौर पर चीन के ऊंचे अमेरिकी टैरिफ वाले सामान को तीसरे देशों के रस्ते अमेरिकी बाजार तक पहुंचाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन देशों में कम टेरिफ का फायदा उठाकर चीनी सामान को इस तरह दोबारा रूट किया गया कि उसकी असली उत्पत्ति छिपी रहे और अमेरिकी शुल्क से बचाया जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो की तैयार रिपोर्ट द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम में संभावित अवैध ट्रांसशिप का अनुमान करीब 60 अरब डॉलर लगाया गया है। इस रिपोर्ट का दावा है कि इस व्यवस्था के कारण अमेरिकी सरकार को टेरिफ से मिलने वाले राजस्व में अरबों डॉलर का नुकसान हुआ और रिपोर्ट में कहा गया कि जिन देशों पर चीनी सामान की री-रूटिंग के जरिए अमेरिकी कानून से बचने में मदद करने का आरोप है उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। इनमें तत्काल माल रोकना, दंडनात्मक टेरिफ लगाना, प्रतिबंध और जरूरत पड़ने पर अमेरिकी बाजार तक पहुंच खत्म करने जैसे कदम शामिल है। इसे भी पढ़ें: सीधे रास्ते पर नहीं चला तो...सिंधु जल संधि पर शहबाज ने भारत को दी खुली धमकीव्हाइट हाउस की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 40 देश इस शैडो ट्रांसिपमेंट नेटवर्क में किसी ना किसी तरह अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इन्हें चीनी मूल के सामान को कम टैरिफ वाले रास्ते से अमेरिका पहुंचाने में उनकी भूमिका के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है। भारत को टिए वन में रखा गया है। इस श्रेणी में कनाडा, जापान, यूरोपीय संघ, इजराइल और मेक्सिको जैसे अमेरिका के कई बड़े व्यापारिक साझेदार शामिल। रिपोर्ट में अमेरिकी वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के हवाले से एक अनुमान दिया गया कि 2025 में चीन से अमेरिका जाने वाला करीब 67 अरब डॉलर का सामान मेक्सिको, भारत और वियतनाम जैसे प्रमुख हब के जरिए ट्रांसिप किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक इससे करीब 28 अरब डॉलर के टेरिफ राजस्व का नुकसान हुआ। इस रिपोर्ट के मुताबिक इस कथित नेटवर्क की शुरुआत 2018 से जोड़ी गई। इसे भी पढ़ें: Delhi Police ने Cyber Fraud गिरोह से जुड़े 4 आरोपियों को यूपी और हरियाणा से पकड़ाउस समय ट्रंप प्रशासन ने चीन के साथ बढ़ते अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करने के लिए चुनिंदा चीनी उत्पादों पर सेक्शन 301 के तहत टेरिफ लगाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद चीनी निर्यातकों ने सामान को सीधे चीन से अमेरिका भेजने के बजाय तीसरे देशों के रास्ते भेजना शुरू किया। इन जगहों पर सीमित असेंबली, फिनिशिंग, रिककैपिंग, रीलेबलिंग या दस्तावेजों में बदलाव के जरिए सामान का मूल देश अलग दिखने की स्थिति बनाई जा सकती थी। इस रिपोर्ट में भारत के पुणे, गुजरात चेन्नई कॉरिडोर का जिक्र किया गया। इसमें दावा किया गया कि इलेक्ट्रिक पंप और कंप्रेसर जैसी चीनी सामान की ट्रांसिपमेंट से इस कॉरिडोर को आर्थिक फायदा हुआ। जबकि अमेरिका के ओहायो राज्य के डेटन और कोलंबस जैसे शहर में मौजूद निर्माताओं को नुकसान हुआ। इस रिपोर्ट का सामने आना ऐसे समय में हुआ है जब भारत और अमेरिका के रिश्तों में व्यापार को लेकर तनाव बना हुआ है। इसे भी पढ़ें: Vishwakhabram: Putin के Kuril Islands पहुँचते ही भड़क उठीं Sanae Takaichi, Japan-Russia के बीच जोरदार भिड़ंत से दुनिया हैरानरिपोर्ट जारी होने से छ दिन पहले अमेरिकी सेनेट ने एक ऐसा बिल को 8611 वोटों से मंजूरी दी थी जिसमें रूस से तेल, गैस और अन्य निर्यात खरीदने वाले देशों पर 100% टेरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। इस बिल में भी चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़र-बैजान को संभावित निशाने के तौर पर शामिल किया गया। इसके प्रायोजकों ने कहा कि इसकी दर इतनी ऊंची होनी चाहिए कि चीन और भारत रूसी तेल खरीद ना पाएं। हालांकि भारत अमेरिका का तनाव और भी वजहों से बढ़ा हुआ है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:30:58 +0530</pubDate>
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<title>Berlin में 21 मंजिला इमारत में भीषण आग से 5 लोग घायल, 3 घंटे की मशक्कत के बाद पाया काबू</title>
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<description><![CDATA[ जर्मनी की राजधानी बर्लिन में 21 मंजिला एक इमारत में आग लगने से लगभग पांच लोग घायल हो गये। स्थानीय मीडिया की खबर में यह जानकारी दी गई है। जर्मन समाचार एजेंसी ‘डीपीए’ की खबर के अनुसार शुक्रवार सुबह आग पर काबू पा लिया गया।घायलों की स्थिति के बारे में तत्काल जानकारी नहीं मिल सकी। खबर के अनुसार, शुक्रवार सुबह लगभग साढ़े छह बजे ओस्टबानहोफ रेलवे स्टेशन के निकट फ्रेडरिकशाइन इलाके में आग लग गई। इमारत के सभी निवासियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।इसके अनुसार एक व्यक्ति को जान बचाने के लिए दमकल वाहन के ‘एरियल बास्केट’ में कूदना पड़ा। यह तुरंत पता नहीं चल पाया कि इस व्यक्ति ने कितनी ऊंचाई से छलांग लगाई थी। खबर के अनुसार, तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।डीपीए की खबर के अनुसार आग 11वीं मंजिल पर स्थित एक अपार्टमेंट में लगी और ऊपरी मंजिल पर स्थित अन्य अपार्टमेंट तक फैल गई। आग लगने के कारण का तत्काल पता नहीं चल सका है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:30:58 +0530</pubDate>
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<title>Afghanistan में Taliban अधिकारी की फैजाबाद में विस्फोट से मौत, बदख्शां में हमला</title>
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<description><![CDATA[ अफगानिस्तान के पूर्वोत्तर बदख्शां प्रांत के मेयर की एक विस्फोट में मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। पिछले दो सप्ताह में इस क्षेत्र में तालिबान प्रशासन के किसी उच्च पदस्थ अधिकारी पर जानलेवा हमला किये जाने की यह दूसरी घटना है।गृह मंत्रालय ने बताया कि हबीब उर रहमान मंसूर की बृहस्पतिवार देर रात प्रांतीय राजधानी फैजाबाद में उनके वाहन में हुए विस्फोट में मौत हो गई। मंत्रालय ने हमले के सिलसिले में हालांकि विस्तृत जानकारी नहीं दी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी शुक्रवार को इस घटना की पुष्टि की।यह घटना ऐसे समय हुई है जब तालिबान 15 अगस्त, 2021 को सत्ता में वापस आने के पांच साल पूरे होने का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा है। उस समय अमेरिका और अन्य नाटो देशों की सेनाएं अफगानिस्तान से वापस चली गई थीं। अधिकारियों ने बताया कि दो सप्ताह पहले दो बंदूकधारियों ने बदख्शां के सूचना एवं संस्कृति निदेशक जबीहुल्लाह अमीरी की तब गोली मारकर हत्या कर दी थी, जब वह एक स्थानीय जिले से फैजाबाद जा रहे थे।उन्होंने बताया कि उनके सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हमलावरों पर गोलीबारी की, जिसमें एक हमलावर मारा गया और दूसरे को पकड़ लिया गया। इन हमलों के कारण के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:30:58 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan Police चौकी पर बाजौर में आतंकी हमला, एक जवान की मौत और एक अन्य घायल</title>
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<description><![CDATA[ उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में शुक्रवार को अज्ञात आतंकवादियों ने एक सुरक्षा जांच चौकी पर हमला कर दिया, जिसमें एक कांस्टेबल की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, आतंकवादियों ने शुक्रवार तड़के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बाजौर जिले में बरंग थाने के अंतर्गत आने वाली कोही सार पुलिस जांच चौकी को निशाना बनाया।इस हमले की जिम्मेदारी तत्काल किसी समूह या व्यक्ति ने नहीं ली है। पुलिस ने बताया कि जांच चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच भारी गोलीबारी हुई। इस दौरान एक कांस्टेबल की मौत हो गई, जबकि एक अन्य घायल हो गया।बाजौर के जिला पुलिस अधिकारी ने मृतक पुलिसकर्मी के शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत पिछले कई वर्षों से आतंकवादी हिंसा, अफगानिस्तान से लड़ाकों की सीमा पार आवाजाही और बार-बार चलाए गए सैन्य अभियानों के कारण लगातार अशांति का सामना करता रहा है। संघीय सरकार का आरोप है कि नवंबर 2022 में संघर्षविराम समझौता खत्म होने के बाद प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) इस प्रांत में हमलों को अंजाम दे रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:30:57 +0530</pubDate>
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<title>समुद्र में चीन का बढ़ता घमंड टूटेगा, US Submarines के लिए आसान शिकार बने Flat&#45;tops</title>
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<description><![CDATA[ चीन तेज़ी से जहाज़ बना रहा है और इतनी तेज़ी से एयरक्राफ़्ट कैरियर तैयार कर रहा है कि नई दिल्ली से लेकर टोक्यो और कैनबरा तक चिंता बढ़ गई है। लेकिन एक नए आकलन के मुताबिक, इतने सारे स्टील और दिखावे के बावजूद, बीजिंग के खास एयरक्राफ़्ट कैरियर (जिन्हें &#039;फ़्लैट-टॉप&#039; भी कहा जाता है) दुश्मन की पनडुब्बी के सही जगह पर पहुँचते ही आसान शिकार बन सकते हैं। यह चेतावनी वॉशिंगटन DC स्थित थिंक टैंक सेंटर फ़ॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ (CSIS) ने दी है। इस थिंक टैंक ने बताया है कि कैसे अमेरिका और उसके सहयोगी देश, प्रशांत क्षेत्र में किसी बड़े टकराव के दौरान सैद्धांतिक रूप से चीन के कैरियर ग्रुप्स को खतरे में डाल सकते हैं। चीन ने ब्लू-वॉटर नेवी बनाने में भारी निवेश किया है; फ़ुज़ियान कैरियर का अभी समुद्री परीक्षण चल रहा है और कई और कैरियर बनाने की योजना है। इन प्लेटफ़ॉर्म्स का मकसद चीन की सीमाओं से बहुत दूर अपनी ताकत दिखाना है, जो समुद्री दबदबे के मामले में अमेरिका को टक्कर देने की बीजिंग की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। रिपोर्ट में पाँच तरह की &quot;लागत-बढ़ाने वाली&quot; (cost-imposition) रणनीति बताई गई है, जिसका निशाना चीन के एयरक्राफ़्ट कैरियर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस रणनीति के पाँच हिस्से हैं: ज़मीन से मार करने वाले मिसाइल नेटवर्क, सैटेलाइट-गाइडेड लंबी दूरी के हवाई हमले, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन के झुंड और पनडुब्बी से घात लगाकर हमला करना।इसे भी पढ़ें: चीनी समान पर भारत से भिड़ा अमेरिका, ट्रंप के सलाहकार अब कौन सी रिपोर्ट लेकर आ गए?CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के कैरियर पनडुब्बी हमलों के प्रति बहुत ज़्यादा असुरक्षित हैं। समुद्र के नीचे, चीन के विरोधी देश जैसे अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के पास एडवांस्ड पनडुब्बी बेड़े हैं, जो बिना पकड़े गए कैरियर ग्रुप्स पर हमला करने में सक्षम हैं। वे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के करीब जाकर ज़बरदस्त असर वाले टॉरपीडो या क्रूज़ मिसाइल दाग सकते हैं। ऐसा तब भी हो सकता है जब डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट और एयरक्राफ्ट जैसी कई परतों वाली सुरक्षा मौजूद हो। अमेरिकी नौसेना भी इस कमज़ोरी का सामना कर रही है, क्योंकि उसके कैरियर लंबे समय से चीन की पनडुब्बियों और मिसाइलों के मुख्य निशाने रहे हैं।इसे भी पढ़ें: सीधे रास्ते पर नहीं चला तो...सिंधु जल संधि पर शहबाज ने भारत को दी खुली धमकीपीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) कागज़ पर तो अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे निकल गई है उसके पास ज़्यादा हल (hulls), बड़े डेक और नए एयरक्राफ्ट हैं। लेकिन एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (पनडुब्बी-रोधी युद्ध) के मामले में स्थिति अलग है। रिपोर्ट में दुश्मन की पनडुब्बियों—खासकर पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में घूम रही अमेरिकी अटैक सबमरीन—का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने की चीन की क्षमता में लगातार कमियों की ओर इशारा किया गया है। पानी के नीचे की यह &#039;ब्लाइंड स्पॉट&#039; (अदृश्यता) वाली स्थिति अब पहले से कहीं ज़्यादा अहम हो गई है। CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अपनी ताकत का प्रदर्शन करना चाहता है और जैसे-जैसे उसकी क्षमता बढ़ेगी, वह अपने कैरियर को अपने तटों से दूर ले जाएगा। चीन इन जहाजों को &#039;पहली द्वीप श्रृंखला&#039; (first island chain) से आगे और &#039;दूसरी द्वीप श्रृंखला&#039; की ओर ले जा रहा है, ताकि प्रशांत महासागर के अंदरूनी हिस्सों और उससे आगे तक अपनी ताकत का प्रदर्शन कर सके। उदाहरण के लिए, जापान ने बीजिंग के बढ़ते प्रभाव को लेकर पहले ही चेतावनी दे दी है और अपनी रक्षा क्षमताओं को बेहतर बना रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:30:56 +0530</pubDate>
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<title>Colombia Earthquake: भारत ने भेजी 20 Tons Relief की खेप, S Jaishankar बोले&#45; संकट में First Responder है India</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने कोलंबिया को 20 टन राहत सामग्री की पहली खेप भेजी है। इस देश में आए भूकंप से 265 लोगों की मौत हो गई और 3,494 लोग घायल हो गए थे, जिसके बाद वहां रिकवरी और राहत का काम चल रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि मानवीय सहायता पैकेज में ज़रूरी मेडिकल उपकरण, दवाएं, अस्थायी आश्रय के लिए सामान, हाइजीन किट और अन्य ज़रूरी चीज़ें शामिल हैं, जिनकी आपदा के बाद ज़मीनी स्तर पर तुरंत ज़रूरत होती है।इसे भी पढ़ें: Pakistan का दावा, Saudi Arabia और तुर्किये से रक्षा समझौता केवल रक्षात्मक प्रकृति कामानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) के प्रति नई दिल्ली की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, जयशंकर ने इस दक्षिण अमेरिकी देश के साथ एकजुटता ज़ाहिर की, जो भीषण भूकंप के बाद के हालात से जूझ रहा है। विदेश मंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया, &quot;भूकंप के बाद रिकवरी के प्रयासों में मदद के लिए कोलंबिया को 20 मीट्रिक टन राहत सामग्री की पहली खेप भेजी गई है। इस सहायता में दवाएं और मेडिकल उपकरण, अस्थायी आश्रय और हाइजीन से जुड़ी मदद, और आपदा के बाद ज़रूरी अन्य सामान शामिल हैं। मुश्किल समय में भारत कोलंबिया के लोगों के साथ खड़ा है। तेज़ी से मदद पहुँचाना यह दिखाता है कि भारत दुनिया भर में संकट के समय सबसे पहले मदद करने वाले देश की भूमिका निभा रहा है। साथ ही, यह नई दिल्ली और बोगोटा के बीच बढ़ते कूटनीतिक और मानवीय संबंधों को भी उजागर करता है। इससे पहले, कोलंबिया के राष्ट्रपति एबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला ने बुधवार (स्थानीय समय) को भूकंप राहत और पुनर्निर्माण के लिए विशेष उपाय करने के मकसद से &quot;आर्थिक आपातकाल&quot; लागू किया।इसे भी पढ़ें: भारत को शुक्रिया बोलते ही बलूचों पर पाक ने की Fighter Jet से बमबारी, अब होगा तगड़ा पलटवार?मीडिया से बात करते हुए, डी ला एस्प्रिएला ने स्थिति को &quot;बहुत बड़े पैमाने&quot; की त्रासदी बताया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित परिवारों और व्यवसायों की मदद करने के साथ-साथ पुनर्निर्माण के काम में तेज़ी लाने के लिए उपाय कर रही है।उन्होंने कहा कि सरकार कमज़ोर परिवारों और छोटे व्यापारियों को मदद देगी, जिसमें सार्वजनिक सेवाओं के भुगतान, किराए के लिए सब्सिडी, टैक्स में छूट और आर्थिक सहायता शामिल है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:30:56 +0530</pubDate>
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<title>Balochistan के मंत्री Mir Ziaullah Langau हमले में बचे, मस्तुंग में 6 लोग घायल</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के एक मंत्री शुक्रवार को अपने काफिले पर हुए सशस्त्र हमले में बाल-बाल बच गए। इस हमले में तीन पुलिसकर्मियों समेत छह लोग घायल हो गए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद के अनुसार, प्रांतीय गृह मंत्री मीर जियाउल्लाह लांगोव के काफिले पर यह हमला मस्तुंग जिले के खड कोचा इलाके में हुआ जब वह क्वेटा से कलात जा रहे थे। रिंद ने कहा, ‘‘हमले में छह लोग घायल हुए हैं, लेकिन मंत्री सुरक्षित हैं और काफिला क्वेटा लौट आया है।’’
मस्तुंग का खड कोचा इलाका सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बन गया है। पिछले महीने से अब तक यह चौथी घटना है, जब इसी राजमार्ग पर यात्रियों को आतंकवादियों ने निशाना बनाया है।इन घटनाओं के बाद सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के खिलाफ इलाके में बड़ा अभियान चलाया था, इसके बावजूद फिर से हमला हुआ है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमले में छह लोगों को गोली लगी जिनमें तीन पुलिसकर्मी शामिल हैं। इनमें से दो की हालत गंभीर है।घायलों को क्वेटा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:30:55 +0530</pubDate>
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<title>Hormuz Strait में ADNOC Tankers पर हमला: UAE ने Iran को घेरा, कहा&#45; यह Maritime Piracy है</title>
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<description><![CDATA[ कंपनी ने बताया कि गुरुवार शाम को अबू धाबी की सरकारी तेल और गैस कंपनी ADNOC के दो टैंकरों पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रते समय हमला किया गया।कंपनी ने बताया कि गुरुवार शाम को अबू धाबी की सरकारी तेल और गैस कंपनी ADNOC के दो टैंकरों पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रते समय हमला किया गया। न्यूज़ एजेंसी AP की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने कहा कि किसी के घायल होने की खबर नहीं है और हमले के तुरंत बाद स्थिति को काबू में कर लिया गया। इस बीच, ब्रिटिश सेना के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) ने कहा कि एक अहम समुद्री रास्ते से गुज़रते समय ड्रोन हमले में दो जहाजों को मामूली नुकसान पहुँचा। हालाँकि उन्होंने जहाजों की पहचान नहीं बताई, लेकिन रिपोर्ट में इसी घटना का ज़िक्र लग रहा था।हमले के लिए UAE ने ईरान को ज़िम्मेदार ठहरायाUAE के विदेश मंत्रालय ने हमले के लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहराया और इसे समुद्र में आवाजाही की आज़ादी के संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन बताया। मंत्रालय ने शुक्रवार सुबह जारी एक बयान में कहा UAE ने उस ईरानी हमले की कड़ी निंदा की है जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़र रहे ADNOC से जुड़े दो जहाजों को निशाना बनाया गया। इसमें यह भी कहा गया कि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कहा कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना और होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल आर्थिक दबाव या ब्लैकमेल के लिए करना, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा समुद्री डकैती जैसा काम है। यह इस इलाके, वहां के लोगों और ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी के लिए सीधा खतरा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:30:55 +0530</pubDate>
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<title>भारत ने निभाई दोस्ती, दिल्ली में पहली बार धूम&#45;धाम से विक्ट्री डे मनाएगा तालिबान!</title>
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<description><![CDATA[ अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता को 5 साल पूरे हो गए हैं। लेकिन इन 5 सालों में अगर किसी रिश्ते ने सबसे ज्यादा करवट ली है तो वो है भारत और तालिबान का रिश्ता। कभी दिल्ली तालिबान से दूरी बनाकर चलती थी। अब उसी तालिबान के मंत्री लगातार भारत आ रहे हैं और सबसे बड़ी बात पहली बार दिल्ली में तालिबान अपना विक्ट्री डे रिसेप्शन आयोजित करने जा रहा है। दरअसल तालिबान के दिल्ली स्थित चार्ज डी अफेयर्स मुफ्ती नूर अहमद नूर 17 अगस्त को नई दिल्ली में एक सार्वजनिक विक्ट्री डे रिसेप्शन आयोजित करने जा रहे हैं। इस कार्यक्रम में राजनायकों, अफगान डायस्पोरा समाज के प्रमुख लोगों और मीडिया के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है और ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि भारत सरकार के अधिकारी भी इस विक्ट्री डे रिसेप्शन में शामिल हो सकते हैं। हालांकि कौन अधिकारी शामिल होगा इसकी पूरी तस्वीर अभी सामने आनी बाकी है। लेकिन इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी बात यह है कि तालिबान के 2021 में काबुल की सत्ता में लौटने के बाद भारत में यह उसका पहला सार्वजनिक विक्ट्री डे रिसेप्शन होगा जो कहीं ना कहीं यह दिखाता है कि आज भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते कैसे हैं और साथ ही साथ यह भी दिखाता है कि कैसे पिछले 5 सालों में भारत और तालिबान कितने करीब आए। इसे भी पढ़ें: Afghanistan में Taliban अधिकारी की फैजाबाद में विस्फोट से मौत, बदख्शां में हमलातालिबान हर साल 15 अगस्त को अपना विक्री डे मनाता है। 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के बीच तालिबान ने काबुल पर दोबारा नियंत्रण स्थापित किया था। तालिबान इसी सत्ता वापसी को अपनी जीत के तौर पर देखता है और इसी वर्षगाठ को विक्ट्री डे के रूप में मनाता है। हालांकि दिल्ली में इस साल इसका सार्वजनिक रिसेप्शन 17 अगस्त को आयोजित किया जा रहा है और यही तारीख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने अभी तक तालिबान शासन को औपचारिक तौर पर मान्यता नहीं दी। भारत का आधिकारिक रूप अंतरराष्ट्रीय समुदाय के व्यापक रूप के अनुरूप रहा है। लेकिन मान्यता नहीं देने का मतलब यह नहीं है कि भारत तालिबान से बात भी नहीं करेगा। मान्यता नहीं देने के अलावा भी भारत और तालिबान के रिश्ते बहुत अच्छे हैं। और यही वजह है कि इन 5 सालों में पहली बार इस तरह का कार्यक्रम तालिबान भारत में आयोजित कर रहा है। इसे भी पढ़ें: Pakistan Terror Strike: KPK में 36 घंटे चला बड़ा ऑपरेशन, 4 कमांडरों समेत 62 उग्रवादी हुए ढेरभारत ने तालिबान के साथ अपना व्यावहारिक बातचीत का रास्ता हमेशा से खुला रखा। तालिबान के आने से पहले भी और अब जब तालिबान सत्ता में है उसके बाद भी भारत ने तालिबान के सामने बार-बार यह बात कही है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए ना हो और कहीं ना कहीं तालिबान ने भी इस चीज को समझा है। इसके साथ ही भारत चाहता है कि वहां स्थिरता बनी रहे और अफगानिस्तान में भारत की आर्थिक और नैनीतिक मौजूदगी भी कायम रहे। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:30:54 +0530</pubDate>
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<title>US Special Forces एशिया में आक्रामकता रोकने Philippines संग बढ़ाएंगे सैन्याभ्यास</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी विशेष अभियान बल, एशिया में फिलीपीन और दूसरे देशों की सेना के साथ मिलकर युद्ध अभ्यास बढ़ाने के लिए तैयार हैं, ताकि सुरक्षा गठबंधन को और मजबूत किया जा सके और इस इलाके में किसी बड़े टकराव को रोकने में मदद मिल सके। अमेरिकी सेना के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अमेरिकी विशेष अभियान कमान के कमांडर एडमिरल फ्रैंक ब्रैडली, दक्षिण कोरिया की यात्रा के बाद अब फिलीपीन में हैं।इसके बाद वह सैन्य अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए जापान जाएंगे। वह एशिया में अमेरिका के अहम सहयोगी देशों का दौरा करने वाले सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से एक हैं। अमेरिका के ईरान के साथ युद्ध में व्यस्त होने के बीच वह सहयोगियों को इस क्षेत्र के प्रति अमेरिकी की प्रतिबद्धता का भरोसा दिलाना चाहते हैं।ब्रैडली की कमान के तहत करीब 80,000 कर्मी हैं और इसका मुख्यालय फ्लोरिडा के टैंपा स्थित मैकडिल वायुसेना अड्डे पर है। यह कमान अमेरिकी सेना के सबसे संवेदनशील और जोखिम भरे गुप्त अभियानों को अंजाम देती है। ब्रैडली ने कहा कि उनके अधिकतर बल दुनिया भर के 80 से अधिक देशों में तैनात हैं।उन्होंने फिलीपीन के अधिकारियों के साथ सेना के आधुनिकीकरण, अमेरिका और अन्य सहयोगी देशों के साथ युद्ध अभ्यास बढ़ाने तथा दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामक गतिविधियों को रोकने के लिए सुरक्षा साझेदारियों के दायरे को व्यापक बनाने पर चर्चा की। विवादित समुद्री क्षेत्र को लेकर चीन और उसके छोटे प्रतिद्वंद्वी दावेदार देशों- फिलीपीन, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान के बीच दशकों से तनावपूर्ण गतिरोध बना हुआ है। हालांकि, हाल के वर्षों में चीन और फिलीपीन की सेनाओं के बीच टकराव विशेष रूप से बढ़े हैं।अमेरिका ने कई बार चेतावनी दी है कि अगर फिलीपीन की सेनाओं पर सशस्त्र हमला होता है तो एशिया में उसके सबसे पुराने सहयोगी की रक्षा करना उसकी जिम्मेदारी होगी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:30:54 +0530</pubDate>
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<title>नए AI मानकों को आकार देने न्यूयॉर्क में जुटे युवा पैरोकार</title>
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<description><![CDATA[ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) हमारे सीखने के तरीक़ों से लेकर रोज़गार बाज़ार तक तेज़ी से बदलाव ला रही है. बच्चे इसे वयस्कों की तुलना में तीन गुना से भी अधिक तेज़ी से अपना रहे हैं, जिससे उनके लिए नए अवसरों के साथ-साथ नए जोखिम भी सामने आ रहे हैं. ]]></description>
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<title>यूक्रेन: जुलाई में हताहत आम नागरिकों की संख्या, मार्च 2022 के बाद सबसे अधिक</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निगरानी मिशन (HRMMU) के अनुसार, यूक्रेन में जुलाई के दौरान हताहत आम नागरिकों की संख्या मार्च 2022 के बाद सबसे अधिक रही. इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मारे गए और घायल हुए. ]]></description>
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<title>DRC: इबोला निगरानी में सुधार, मगर संक्रमण की रफ़्तार अब भी तेज़</title>
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<description><![CDATA[ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इबोला संक्रमित लोगों के सम्पर्क में आए अधिक लोगों की पहचान हो रही है. लेकिन देश के अस्थिर पूर्वी हिस्से में संक्रमण इतनी तेज़ी से फैल रहा है कि मरीज़ों का समय रहते पता लगाकर उन्हें अलग रखना मुश्किल हो रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:30:14 +0530</pubDate>
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<title>अफ़ग़ानिस्तान: मानवाधिकारों में प्रगति तक तालेबान से सम्बन्ध सामान्य करने से बचने की अपील</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अफ़ग़ानिस्तान में आम लोगों, विशेषकर महिलाओं और लड़कियों पर पाबन्दियाँ लगातार बढ़ रही हैं, जबकि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय इस बिगड़ती मानवाधिकार स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Aug 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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<title>North Korea ने US&#45;South Korea सैन्य अभ्यास को युद्ध का पूर्वाभ्यास बताकर दी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ उत्तर कोरिया ने अमेरिका एवं दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास को युद्ध का पूर्वाभ्यास बताते हुए शुक्रवार को इसकी निंदा की और आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करने की धमकी दी। अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सेनाएं सोमवार से अपना वार्षिक व्यापक सैन्य अभ्यास शुरू करेंगी। दोनों देशों ने कहा है कि इस साल अभ्यास का दायरा पिछले वर्षों के समान होगा।इसे भी पढ़ें: सऊदी-तुर्की-पाकिस्तान के Makkah Defense Pact पर बोले पूर्व राजनयिक, West Asia में अमेरिका के घटते प्रभाव का संकेतदोनों सहयोगी देशों ने कहा है कि ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ अभ्यास का उद्देश्य उत्तर कोरिया के खतरों से निपटने की उनकी तैयारियों को मजबूत करना है। उन्होंने दोहराया कि यह अभ्यास रक्षात्मक प्रकृति का है। उत्तर कोरिया की चेतावनी से संकेत मिलता है कि वह आगामी दिनों में हथियारों के और परीक्षण कर सकता है।उसके पड़ोसी देशों ने पिछले सप्ताह उत्तर कोरिया के पूर्वी तट से दो बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रक्षेपण की जानकारी दी थी। उत्तर कोरिया ने इन प्रक्षेपणों पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों का आकलन है कि इनका संभावित उद्देश्य अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास का विरोध करना या हथियार प्रणालियों को उन्नत करना था। उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को सरकारी मीडिया में जारी एक बयान में अमेरिका-दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास को ‘‘आक्रामक युद्ध का ऐसा पूर्वाभ्यास’’ बताया जिससे ‘‘क्षेत्र में अलग स्तर की अस्थिरता पैदा हो रही है।’’ बयान में कहा गया, ‘‘किसी नए स्तर के खतरे का जवाब नए स्तर की प्रतिरोधक क्षमता से देकर सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारा सतत सिद्धांत है।’’ उत्तर कोरिया ने कहा कि वह ‘‘किसी भी खतरे और चुनौती से निपटने के लिए वैध आत्मरक्षा के अधिकार का जिम्मेदारी और दृढ़ता से इस्तेमाल करके दुश्मनों के प्रति अपना रुख और स्पष्ट रूप से जाहिर करेगा।’’ उत्तर कोरिया ने यह भी कहा कि यह अभ्यास ‘‘पिछले साल की तुलना में कहीं अधिक उकसावे वाला और खतरनाक’’ होगा।इसे भी पढ़ें: Jio Credit में Bank of America करेगा $1.92 Billion का निवेश, 49.9% हिस्सेदारी के साथ मेगा Dealहालांकि, दक्षिण कोरिया एवं अमेरिका ने ऐसा कुछ नहीं कहा है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:46:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Tariq Rahman की India यात्रा द्विपक्षीय बातचीत की प्रगति पर निर्भर है</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत की प्रस्तावित यात्रा को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है और इसका समय उनके ‘‘कार्यक्रम” और द्विपक्षीय बातचीत में ‘‘प्रगति’’ पर निर्भर करेगा। एक मंत्री ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने विदेश कार्यालय में पत्रकारों से कहा, ‘‘सरकार सभी देशों की यात्राओं को लेकर सकारात्मक है।लेकिन यह प्रधानमंत्री के कार्यक्रम और दोनों देशों के बीच बातचीत कितनी आगे बढ़ती है, इस पर निर्भर करेगा।’’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रहमान को नयी दिल्ली में होने वाले आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सत्र में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। भारत 12 और 13 सितंबर को वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। भारत ने बिम्सटेक के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर रहमान को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सत्र में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है।बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल) एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें भारत, श्रीलंका, थाईलैंड, बांग्लादेश, म्यांमा, नेपाल और भूटान शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा था कि रहमान को भारत आने के लिए दो अलग-अलग निमंत्रण दिए गए हैं। इनमें एक निमंत्रण द्विपक्षीय यात्रा के लिए और दूसरा सितंबर में नयी दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संपर्क सत्र में हिस्सा लेने के लिए है।शमा ने कहा, “ब्रिक्स में अभी काफी समय है। एक महीने में बहुत कुछ हो सकता है।’’
उन्होंने आगामी घरेलू कार्यक्रमों और संवैधानिक गतिविधियों का हवाला देते हुए कहा, ‘‘सरकार व्यस्त है और प्रधानमंत्री भी व्यस्त हैं। अगर सब कुछ अनुकूल रहा, तो निश्चित रूप से भारत की यात्रा होगी, जापान की यात्रा होगी; सभी यात्राएं होंगी।’’
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के बेदखल होने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में काफी गिरावट आई थी।यह पूछे जाने पर कि क्या प्रधानमंत्री रहमान की भारत यात्रा से तनाव कम करने में मदद मिल सकती है, शमा ने कहा कि दोनों देशों की सरकारों के प्रमुखों के बीच सीधी बातचीत से लंबित मुद्दों को सुलझाने का अवसर मिल सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘जब भी दो देशों के शीर्ष नेता आपस में बातचीत करते हैं, तो कई समस्याओं के समाधान की संभावना बनती है। यह अवसर मौजूद है और बना हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:46:45 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan में सुरक्षा बलों ने 15 उग्रवादी मार गिराए, खैबर पख्तूनख्वा में हुई मुठभेड़</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में बृहस्पतिवार को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में कम से कम 15 उग्रवादी मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस और सुरक्षा बलों का एक संयुक्त काफिला दुबांडो जांच चौकी की ओर जा रहा था, तभी उग्रवादियों ने अपर दीर जिले के बरीकोट गांव के पास घात लगाकर हमला करने की कोशिश की।इसे भी पढ़ें: सऊदी-तुर्की-पाकिस्तान के Makkah Defense Pact पर बोले पूर्व राजनयिक, West Asia में अमेरिका के घटते प्रभाव का संकेतपुलिस ने बताया कि सुरक्षा बलों द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में 15 उग्रवादी मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। उसने बताया कि मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर अन्य उग्रवादियों की तलाश के लिए तलाशी अभियान शुरू किया है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:46:44 +0530</pubDate>
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<title>US Court में Abhishek Vijaykumar ने स्वीकार किया बाल शोषण सामग्री रखने का अपराध</title>
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<description><![CDATA[ सागर कुलकर्णी
वाशिंगटन, 14 अगस्त अमेरिका के न्यूजर्सी राज्य की एक संघीय अदालत में भारतीय मूल के एक व्यक्ति ने नाबालिगों से जुड़ी यौन शोषण सामग्री तक पहुंच बनाने का अपराध स्वीकार कर लिया है। न्याय विभाग ने एक बयान में यह जानकारी दी। बयान के अनुसार, न्यूजर्सी के हैसब्रुक हाइट्स निवासी अभिषेक विजयकुमार ने मार्च 2024 में इस गैरकानूनी सामग्री तक जानबूझकर पहुंच बनाई थी।जांच के दौरान विजयकुमार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पड़ताल में बाल शोषण से जुड़ी 200 से अधिक तस्वीरें बरामद की गईं। न्याय विभाग के आपराधिक प्रभाग के सहायक अटॉर्नी जनरल ए. टाइसन डुवा ने कहा कि बुधवार को विजयकुमार द्वारा अपराध स्वीकार किया जाना बाल यौन शोषण के खिलाफ जारी लड़ाई में एक और महत्वपूर्ण कदम है। संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) के नेवार्क क्षेत्रीय कार्यालय की प्रभारी विशेष एजेंट स्टेफनी रॉडी ने कहा, “एफबीआई बाल यौन शोषण और उत्पीड़न करने वालों की पहचान करने और उन्हें रोकने के अपने निरंतर प्रयास जारी रखेगा।”
विजयकुमार को छह जनवरी 2027 को सजा सुनाई जाएगी।उसे अधिकतम 20 वर्ष की कैद हो सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:46:44 +0530</pubDate>
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<title>Pew Survey Report: Pakistan को लेकर भारतीय Hindus और Muslims की सोच में दिखा बड़ा अंतर, 78% भारतीयों की नजर में Pakistan बड़ा खतरा</title>
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<description><![CDATA[ भारत और पाकिस्तान के रिश्तों की बात आते ही राजनीति, सीमा विवाद और सुरक्षा जैसे मुद्दे सामने आ जाते हैं। ऐसे माहौल में अमेरिका के प्यू रिसर्च सेंटर का ताजा सर्वे दोनों देशों के लोगों की एक-दूसरे को लेकर सोच की दिलचस्प तस्वीर पेश करता है। सर्वे के मुताबिक, भारत में करीब चार में से तीन लोग पाकिस्तान के प्रति नकारात्मक राय रखते हैं। वहीं पाकिस्तान में भारत को लेकर नकारात्मक सोच रखने वालों की संख्या इससे भी ज्यादा है। प्यू रिसर्च के मुताबिक, 78 फीसदी भारतीयों ने पाकिस्तान के बारे में नकारात्मक राय जाहिर की। इनमें 65 फीसदी लोगों की राय बेहद नकारात्मक थी। दूसरी तरफ सिर्फ 22 फीसदी भारतीयों ने पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक नजरिया जताया।पाकिस्तान में भारत को लेकर तस्वीर और ज्यादा सख्त नजर आई। वहां 93 फीसदी लोगों ने भारत के प्रति नकारात्मक राय व्यक्त की। इनमें करीब तीन-चौथाई यानी 73 फीसदी लोगों ने भारत को लेकर अपनी राय को &#039;बहुत खराब&#039; बताया।भारत में हिंदू और मुस्लिमों की राय में अंतरसर्वे का एक अहम पहलू भारत के अलग-अलग धार्मिक समूहों की राय से जुड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय मुसलमानों में पाकिस्तान को लेकर सकारात्मक सोच हिंदुओं की तुलना में ज्यादा है। करीब 21 फीसदी भारतीय मुसलमानों ने पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक राय जताई, जबकि हिंदुओं में यह आंकड़ा सिर्फ 6 फीसदी रहा। यानी दोनों समुदायों के बीच इस मुद्दे पर नजरिए में साफ अंतर दिखाई देता है। हालांकि, पाकिस्तान को भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा मानने के मामले में भी दोनों समूहों के बीच अंतर है। करीब 34 फीसदी भारतीय मुसलमान पाकिस्तान को देश के लिए सबसे बड़ा जियोपॉलिटिकल खतरा मानते हैं, जबकि हिंदुओं में यह आंकड़ा 57 फीसदी है।इसे भी पढ़ें: Pakistan में सुरक्षा बलों ने 15 उग्रवादी मार गिराए, खैबर पख्तूनख्वा में हुई मुठभेड़भारत-पाकिस्तान में एक-दूसरे को ही सबसे बड़ा खतरा मानने की प्रवृत्तिदिलचस्प बात यह है कि दोनों देशों के लोगों के बीच एक मामले में सोच काफी मिलती-जुलती नजर आती है। दोनों तरफ बड़ी संख्या में लोग पड़ोसी देश को अपने लिए सबसे बड़ा भू-राजनीतिक खतरा मानते हैं। सर्वे के मुताबिक, 54 फीसदी भारतीयों ने पाकिस्तान को अपने देश के लिए सबसे बड़ा जियोपॉलिटिकल खतरा बताया। पाकिस्तान में 43 फीसदी लोगों ने भारत को सबसे बड़ा खतरा माना। यानी सीमा के दोनों ओर सुरक्षा और राजनीतिक तनाव का असर आम लोगों की सोच पर भी साफ दिखाई देता है।पाकिस्तान में अमेरिका को लेकर सोच बदलीसर्वे में पाकिस्तान से जुड़ा एक और दिलचस्प बदलाव सामने आया है। प्यू रिसर्च के अनुसार, पाकिस्तान में अमेरिका को लेकर सकारात्मक राय में बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में इसके पीछे ट्रंप प्रशासन की नीतियों को एक संभावित कारण बताया गया है। हालांकि, सर्वे जिस समय पाकिस्तान में किया गया, उस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध चल रहा था। पाकिस्तान में यह सर्वे 8 अप्रैल से 7 मई 2026 के बीच 1,039 वयस्कों के बीच किया गया था। भारत में सर्वे इससे पहले 8 फरवरी से 27 अप्रैल 2026 के बीच किया गया, जिसमें 3,566 वयस्कों ने हिस्सा लिया।इसे भी पढ़ें: सऊदी-तुर्की-पाकिस्तान के Makkah Defense Pact पर बोले पूर्व राजनयिक, West Asia में अमेरिका के घटते प्रभाव का संकेतचीन, इजरायल और अमेरिका को लेकर भी अलग-अलग तस्वीरभारत और पाकिस्तान के लोगों के लिए दूसरे देशों से जुड़े खतरे की धारणा भी एक जैसी नहीं है। भारत में पाकिस्तान के बाद 21 फीसदी लोगों ने चीन को बड़ा खतरा माना। वहीं पाकिस्तान में 24 फीसदी लोगों ने इजरायल और इतने ही यानी 24 फीसदी लोगों ने अमेरिका को अपने देश के लिए बड़ा खतरा बताया। इससे साफ है कि दोनों देशों के लोगों की सुरक्षा संबंधी चिंताएं सिर्फ पड़ोसी देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक घटनाक्रम भी उनकी सोच को प्रभावित कर रहा है।इसे भी पढ़ें: Iran और अमेरिका हमारे दोस्त, फिर पाकिस्तान कैसे बना Mediator? Foreign Policy पर राहुल गांधी ने PM मोदी को घेरापाकिस्तान के लिए चीन सबसे बड़ा सहयोगीसर्वे में पाकिस्तान के सबसे अहम सहयोगियों को लेकर भी सवाल पूछा गया। यहां चीन काफी आगे नजर आया। करीब 75 फीसदी पाकिस्तानियों ने चीन को अपने देश का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी बताया। वहीं 12 फीसदी लोगों ने सऊदी अरब का नाम लिया। भारत में तस्वीर कुछ अलग है। यहां 36 फीसदी लोगों ने रूस को सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी बताया, जबकि 16 फीसदी ने अमेरिका को चुना। हालांकि, करीब एक-तिहाई भारतीयों ने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया।रूस और पुतिन पर भारतीयों का भरोसा कायमभारत में रूस को लेकर सकारात्मक नजरिया भी सर्वे में प्रमुखता से सामने आया। करीब 58 फीसदी भारतीयों ने रूस के प्रति सकारात्मक राय जाहिर की। वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लेकर भी भारतीयों में भरोसा अपेक्षाकृत ज्यादा दिखाई दिया। सर्वे के अनुसार, 51 फीसदी भारतीयों ने पुतिन पर भरोसा जताया। प्यू रिसर्च के मुताबिक, 37 देशों में किए गए इस सर्वे की तुलना में रूस और पुतिन को लेकर सबसे ज्यादा सकारात्मक राय भारत में देखने को मिली।प्यू रिसर्च के इन आंकड़ों से एक बात तो साफ है कि भारत और पाकिस्तान के लोगों के बीच एक-दूसरे को लेकर धारणा काफी हद तक नकारात्मक बनी हुई है। भारत में पाकिस्तान को लेकर राय में धार्मिक समूहों के बीच अंतर जरूर दिखता है, लेकिन कुल मिलाकर सकारात्मक राय रखने वालों की संख्या कम है। साथ ही, दोनों देशों के लोग अपनी-अपनी सुरक्षा के लिए पड़ोसी देश को बड़ी चुनौती मानते हैं। दूसरी ओर, सहयोगी देशों को लेकर भारत और पाकिस्तान की प्राथमिकताएं बिल्कुल अलग नजर आती हैं—पाकिस्तान में चीन का दबदबा है तो भारत में रूस को लेकर भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है। सर्वे ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। इसलिए इन आंकड़ों को सिर्फ आंकड़ों की तरह देखने के बजाय यह समझना भी अहम है कि बदलते वैश ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:46:43 +0530</pubDate>
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<title>व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt महीने के अंत में छोड़ेंगी अपना पद, बनीं रहेंगी सलाहकार</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका की राजनीति में बुधवार को एक बड़ा बदलाव सामने आया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट महीने के अंत में अपने पद से हट जाएंगी। लेविट ने यह फैसला अपने छोटे बच्चों और परिवार को ज्यादा समय देने के लिए लिया है। हालांकि, व्हाइट हाउस से उनकी विदाई पूरी तरह राजनीतिक दूरी बनाने वाली नहीं होगी। ट्रंप के मुताबिक, वह आगे भी उनकी बाहरी सलाहकार टीम का अहम हिस्सा बनी रहेंगी और रिपब्लिकन पार्टी में अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखेंगी।ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लेविट की तारीफ करते हुए उन्हें अपनी सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि लेविट के फैसले को वह पूरी तरह समझते हैं और उसका सम्मान करते हैं।राष्ट्रपति ने यह भी साफ किया कि व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद लेविट की राजनीतिक भूमिका खत्म नहीं होगी। वह उनके शीर्ष बाहरी सलाहकारों में शामिल रहेंगी और रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक प्रभावशाली आवाज के तौर पर काम करती रहेंगी। ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन आने वाले मध्यावधि चुनावों में बड़ी जीत हासिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है और इस दौरान लेविट की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।इसे भी पढ़ें: हत्या की साजिश के खतरे के बीच Donald Trump ने चुपके से बदला Air Force One विमानट्रंप ने लेविट के काम की तारीफ करते हुए उन्हें व्हाइट हाउस के इतिहास की बेहतरीन प्रेस सचिवों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि लेविट ने 2018 से ही न्याय, स्वतंत्रता और आजादी के मुद्दों पर शानदार काम किया है और 2024 के उनके ऐतिहासिक चुनाव अभियान में भी अहम योगदान दिया।इसे भी पढ़ें: ट्रंप मीडिया को $238 Million का भारी घाटा, Bitcoin और Crypto बाजार में गिरावट ने बढ़ाई Donald Trump की टेंशनकैरोलिन लेविट ने भी सोशल मीडिया पर अपने फैसले के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पिछले करीब डेढ़ साल तक व्हाइट हाउस प्रेस सचिव के रूप में काम करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है। लेविट ने राष्ट्रपति ट्रंप का आभार जताते हुए कहा कि इस जिम्मेदारी ने उन्हें ऐसे अनुभव दिए, जिन्हें वह जिंदगी भर याद रखेंगी। वेस्ट विंग में काम करने से लेकर ओवल ऑफिस में लंबे घंटे बिताने, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा करने और विदेशी नेताओं से मिलने तक, उन्होंने इस कार्यकाल को बेहद खास बताया। उनके मुताबिक, इस भूमिका का सबसे बड़ा सम्मान व्हाइट हाउस के प्रेस पोडियम से राष्ट्रपति की ओर से अमेरिकी जनता को संबोधित करना था। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रशासन की कई बड़ी उपलब्धियों के बारे में बात करने और ट्रंप की नीतियों व कामकाज को जनता के सामने रखने पर गर्व रहा। लेविट ने मीडिया को लेकर भी अपनी भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रशासन के नजरिए को सामने रखने, उदारवादी मीडिया को जवाब देने और अमेरिकी लोगों तक ट्रंप की उपलब्धियों की जानकारी पहुंचाने में कोई झिझक नहीं रही।मां की जिम्मेदारी और हाई-प्रेशर नौकरी के बीच मुश्किल फैसलालेविट के बयान का सबसे निजी हिस्सा उनके परिवार और बच्चों को लेकर था। उन्होंने माना कि मां बनने के साथ दुनिया की सबसे कठिन और व्यस्त राजनीतिक नौकरियों में से एक को संभालना आसान नहीं रहा। उन्होंने कहा कि बेटी के जन्म के बाद जब वह व्हाइट हाउस लौटीं, तभी से उनके मन में यह सवाल बना रहा कि क्या वह प्रेस सचिव की नौकरी के लिए जरूरी समय, ऊर्जा और ध्यान देने के साथ अपने दोनों छोटे बच्चों की जरूरतों के मुताबिक एक अच्छी मां बन पा रही हैं। यही सवाल आखिरकार उनके फैसले की वजह बना। लेविट ने माना कि व्हाइट हाउस छोड़ने का निर्णय उनके लिए भावुक भी था और मुश्किल भी, लेकिन अब वह अपनी जिंदगी के एक नए अध्याय की शुरुआत करना चाहती हैं।इसे भी पढ़ें: FIFA World Cup की सफलता का हवाला देकर Donald Trump ने Infantino को बताया &#039;शानदार व्यक्तित्व&#039;राजनीति से दूरी नहीं बनाएंगी लेविटहालांकि, व्हाइट हाउस से विदाई के बाद लेविट पूरी तरह राजनीतिक पर्दे के पीछे नहीं जाने वाली हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें बाहर से अपने शीर्ष सलाहकारों में से एक के तौर पर काम जारी रखने को कहा है, जिसे लेविट ने स्वीकार किया है। उन्होंने साफ किया कि वह &#039;मेक अमेरिका ग्रेट अगेन&#039; और रिपब्लिकन पार्टी के लिए अपनी आवाज उठाती रहेंगी। लेविट ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर भी तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि पार्टी लगातार ज्यादा कट्टरपंथी होती जा रही है और अमेरिका के लिए गंभीर खतरा बन रही है। लेविट ने कहा कि देश की चिंता करने वाले लोगों की जिम्मेदारी है कि वे इस चुनौती के खिलाफ अपनी भूमिका निभाएं। उनके शब्दों में, उनकी राजनीतिक लड़ाई खत्म नहीं हुई है, बल्कि अब वह एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। इस तरह लेविट का व्हाइट हाउस से जाना एक सामान्य प्रशासनिक बदलाव से कुछ ज्यादा नजर आता है। एक तरफ वह अपने परिवार और छोटे बच्चों को प्राथमिकता देने जा रही हैं, तो दूसरी तरफ ट्रंप के साथ उनकी राजनीतिक साझेदारी जारी रहेगी। यानी व्हाइट हाउस का पोडियम जरूर छूटेगा, लेकिन अमेरिकी राजनीति में कैरोलिन लेविट की आवाज फिलहाल सुनाई देती रहेगी। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:55 +0530</pubDate>
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<title>IAF का नया धमाल, 1 लाख करोड़ का टेंडर जारी, भारत खरीदेगा 60 मिलिट्री प्लेन</title>
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<description><![CDATA[ भारतीय वायुसेना ने एक बड़ा कदम उठाया है। वायुसेना अपनी पुरानी बढ़ती जा रही ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की फ्लड को बदलने की तैयारी कर रही है और इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने करीब ₹1 लाख करोड़ का बड़ा टेंडर जारी किया है। इस डील के तहत वायुसेना के लिए 60 मल्टी रोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदे जाएंगे और सबसे खास बात यह है कि इस पूरे प्रोग्राम में भारतीय कंपनियों को लीड रोल देने की तैयारी। सीधी भाषा में समझे तो वायुसेना को ऐसे विमान चाहिए जो सिर्फ सामान ढोने तक सीमित ना रहे बल्कि सैनिकों और भारी उपकरणों को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचा सकें और जरूरत पड़ने पर इन विमानों का इस्तेमाल दूसरे मिशन के लिए किया जा सकेगा और इस दौड़ में एचएल, टाटा और महिंद्रा जैसी भारतीय कंपनियां शामिल हैं। इसे भी पढ़ें: हत्या की साजिश के खतरे के बीच Donald Trump ने चुपके से बदला Air Force One विमानमहिंद्रा ने ब्राजील की एमरार के साथ हाथ मिलाया है और उसकी तरफ से C390 एयरक्राफ्ट पेश किया जा सकता है। वहीं Tata ने अमेरिकी कंपनी लॉकेट मार्टिन के साथ साझेदारी की है और C130 को मैदान में उतारने की तैयारी है। इस डील की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ विमानों की संख्या या कीमत नहीं है। असली गेम भारत में इनके निर्माण का है। योजना के मुताबिक करीब 20% विमान सीधे फ्लाई अवे कंडीशन में भारत आएंगे। बाकी विमान भारत में ही बनाए जाएंगे और इनमें 60% से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट रखने का लक्ष्य है। यानी आने वाले समय में सिर्फ विमान खरीदने के बजाय भारत में उनकी मैन्युफैक्चरिंग तकनीक और सप्लाई चेन को भी मजबूत करने पर जोर होगा। भारतीय वायुसेना के पास पहले से ही ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का एक बड़ा बेड़ा है। लेकिन कई पुराने विमान धीरे-धीरे अपनी उम्र पूरी कर रहे हैं। ऐसे में नई पीढ़ी के मल्टी रोल विमान जरूरी हो जाते हैं।इसे भी पढ़ें: IAF का मेगा टेंडर: 60 Multi-role Transport Aircraft के लिए ₹1 लाख करोड़ का प्लान, Tata और Mahindra में मुकाबलाइंडियन एयरफोर्स के पास अभी 12 सी130 जे सुपर हकुलिस है।इसके अलावा एयरबस के साथ C295 प्रोग्राम चल रहा है जिसके तहत करीब 70 विमान वायु सेना में शामिल किए जाने हैं और इनमें बड़ी संख्या में विमान भारत में बनाए जाएंगे और नई एमटीए डील इस पूरी ट्रांसपोर्ट क्षमता को और मजबूत करेगी। इन्हें मल्टी रोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट कहा जा रहा है। इनका इस्तेमाल सैनिकों, हथियारों, वाहन और दूसरे जरूरी सैन्य सामान को तेजी से पहुंचाने में हो सकता है। भविष्य में इन विमानों को एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर के तौर पर इस्तेमाल करने की संभावना भी बताई जा रही है। यानी कि एक विमान कई तरह के सैन्य काम कर सकता है।इसे भी पढ़ें: क्यों तुर्किए से खाने वाले डब्बे में छिप कर भागना पड़ा, ट्रंप ने खुद कर दिया दुनिया का सबसे विस्फोटक खुलासा इस डील को सिर्फ 60 विमान खरीदने का सौदा समझना ठीक नहीं होगा। इसके पीछे भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने की एक बड़ी रणनीति है। क्योंकि एक तरफ वायुसेना पुराने विमानों को बदल रही है। दूसरी तरफ भारत में ही नए एयरक्राफ्ट बनाने की क्षमता विकसित की जा रही है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:55 +0530</pubDate>
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<title>हत्या की साजिश के खतरे के बीच Donald Trump ने चुपके से बदला Air Force One विमान</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पिछले महीने तुर्किये से लौटते समय सुरक्षा कारणों से गुप्त रूप से विमान बदलने के दौरान विदेश मंत्री मार्को रूबियो और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट उसी ‘एअर फोर्स वन’ में रहे जिसका इस्तेमाल यह आभास देने के लिए किया गया था कि राष्ट्रपति इसी विमान में हैं। अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की बताया कि रूबियो को विमान बदले जाने और इसके पीछे के खतरे की जानकारी थी। उन्होंने लेकिन यह नहीं बताया कि इसके बावजूद रूबियो उसी विमान में क्यों रहे। इसे भी पढ़ें: ट्रंप मीडिया को $238 Million का भारी घाटा, Bitcoin और Crypto बाजार में गिरावट ने बढ़ाई Donald Trump की टेंशनअधिकारी ने कहा कि बेसेन्ट को भी संभवतः इसकी जानकारी थी लेकिन वह यह बात निश्चित रूप से नहीं कह सकते। अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए किए जाने वाले इंतजाम मंत्रिमंडल के शीर्ष सदस्यों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक होते हैं तथा खासकर ऐसे राष्ट्रपति के लिए सुरक्षा इंतजाम और कड़े होते हैं जिनकी हत्या के पूर्व में कई प्रयास हो चुके हैं। अमेरिकी संविधान के तहत राष्ट्रपति पद के उत्तराधिकार क्रम में उपराष्ट्रपति और कांग्रेस के दोनों सदनों के स्पीकर के बाद विदेश मंत्री और वित्त मंत्री आते हैं। ट्रंप तुर्किये की राजधानी अंकारा में नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) देशों के नेताओं की वार्षिक बैठक में शामिल होने के लिए उस नए विमान से गए थे जो उन्हें कतर ने उपहार में दिया था लेकिन तुर्किये से रवाना होने से पहले उन्होंने कहा था कि वह वापसी की यात्रा में कुछ दूर के लिए ‘एअर फोर्स वन’ विमान का इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसे भी पढ़ें: FIFA World Cup की सफलता का हवाला देकर Donald Trump ने Infantino को बताया &#039;शानदार व्यक्तित्व&#039;‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने इस सप्ताह खबर दी कि तुर्किये से वापसी की उड़ान में ट्रंप पुराने ‘एअर फोर्स वन’ में नहीं थे और संभवत: हत्या की ईरानी साजिश से बचने के लिए उन्हें खाद्य सामग्री ले जाने वाले एक वाहन के जरिये चुपके से दूसरे विमान तक पहुंचाया गया था। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘सीबीएस न्यूज’ ने पिछले महीने खबर दी थी कि खुफिया अधिकारियों ने राष्ट्रपति या उनके विमान पर संभावित हमले को लेकर चिंता जताई थी जिसके बाद अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए गए। ट्रंप ने विमान बदलने की बात मंगलवार देर रात स्वीकार की। राष्ट्रपति ने ‘ज्वाइंट बेस एंड्रयूज’ में संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह पूरी तरह ‘सीक्रेट सर्विस’ पर निर्भर करता है। मैं वही करता हूं जो वे चाहते हैं। मैं ‘सीक्रेट सर्विस’ और सेना की सलाह मानता हूं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:55 +0530</pubDate>
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<title>Delaware ने 15 अगस्त 2026 को घोषित किया India Day, न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी के बाद लिया फैसला</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के विभिन्न राज्य 15 अगस्त 2026 को भारत के स्वतंत्रता दिवस (भारत दिवस) के रूप में मनाने के लिए घोषणाएं कर रहे हैं जो भारत की विरासत, विविधता और अमेरिकी ताने-बाने में इसके प्रवासी समुदाय के बढ़ते योगदान प्रदर्शित करता है। न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी और मैसाचुसेट्स के बाद अब डेलावेयर राज्य ने भारत के स्वतंत्रता दिवस को मनाने की घोषणा की है। डेलावेयर ने 15 अगस्त 2026 को ‘भारत दिवस’ घोषित किया है।इसे भी पढ़ें: गाजियाबाद में 13 से 16 अगस्त तक मौसम का बिगड़ेगा मिजाज! भारी बारिश-वज्रपात का &#039;yellow alert&#039;, एडवाइजरी जारीडेलावेयर के गवर्नर मैथ्यू मेयर द्वारा हस्ताक्षरित इस घोषणा में कहा गया है कि राज्य के विभिन्न समुदायों में मौजूद अनेक संस्कृतियों और परंपराओं से डेलावेयर ‘‘मजबूत’’ हुआ है। इनमें तेजी से बढ़ता भारतीय-अमेरिकी समुदाय भी शामिल है, जिसकी मौजूदगी ने राज्य के स्वरूप को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। घोषणा में कहा गया, ‘‘भारतीय विरासत वाले डेलावेयरवासियों ने पूरे राज्य के समुदायों में अपने काम, नेतृत्व और सेवा के जरिए हमारे राज्य को समृद्ध किया है।उन्होंने हमारी साझा समृद्धि में योगदान दिया है और आने वाली पीढ़ियों के लिए अवसर पैदा किए हैं।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘भारत का इतिहास भाषाओं, परंपराओं, आस्थाओं और रीति-रिवाजों की असाधारण विविधता में निहित है। भारतीय-अमेरिकियों की पीढ़ियों ने अमेरिका में अपना जीवन और समुदाय बसाने के साथ-साथ इन परंपराओं को आगे बढ़ाया है।’’ घोषणा में कहा गया है कि ‘भारत दिवस’ भारत की स्वतंत्रता का सम्मान करने, डेलावेयर के भारतीय-अमेरिकी समुदाय की विरासत और उपलब्धियों का उत्सव मनाने तथा समुदायों और भारत के लोगों के बीच कायम मजबूत संबंधों को पहचानने का अवसर प्रदान करता है। मेयर ने इस घोषणा के जरिए सभी नागरिकों से ‘भारत दिवस’ मनाने, डेलावेयर के भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को पहचानने और ‘‘हमारे समुदायों तथा भारत के लोगों के बीच कायम मजबूत और स्थायी संबंधों का सम्मान करने’’ का आह्वान किया।इसे भी पढ़ें: UP Rojgar Mela: प्रतापगढ़ में युवाओं के लिए बड़ा अवसर, 13 अगस्त को Job Fair में ₹31000 तक मिलेगी Salaryइससे एक दिन पहले न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होकुल और न्यू जर्सी की गवर्नर मिकी शेरिल ने भी 15 अगस्त 2026 को अपने-अपने राज्यों में ‘भारत के स्वतंत्रता दिवस’ के रूप में मान्यता देने की घोषणा जारी की थी। इस महीने की शुरुआत में मैसाचुसेट्स की गवर्नर माउरा हीली ने भी 15 अगस्त को ‘भारत दिवस’ घोषित किया था और राज्य में भारतीय प्रवासी समुदाय के योगदान को मान्यता दी थी। हर साल 15 अगस्त को भारत का स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए अमेरिका के विभिन्न राज्यों और शहरों में भारतीय दूतावास, वाणिज्य दूतावासों तथा संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में ध्वजारोहण समारोह, परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशेष आयोजन किए जाते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:54 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump का दावा: नाकेबंदी से Strait of Hormuz पर अमेरिका का नियंत्रण है</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को इस बात पर जोर दिया कि नाकेबंदी से अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका के ‘‘पूर्ण नियंत्रण’’ का दावा करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘मुझे लगता है कि हम इसे बनाए रखेंगे!’’ ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट ईरान के बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी के संदर्भ में थी। युद्ध से पहले दुनिया में कारोबार किए जाने वाले तेल का पांचवां हिस्सा इस महत्वपूर्ण मार्ग से होकर गुजरता था, लेकिन ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से जलडमरूमध्य अन्य यातायात के लिए काफी हद तक बंद है।इसे भी पढ़ें: हत्या की साजिश के खतरे के बीच Donald Trump ने चुपके से बदला Air Force One विमानऐसा इसलिए क्योंकि ईरान जहाजों पर हमले करता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:54 +0530</pubDate>
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<title>BRICS पेमेंट सिस्टम पर RBI का बड़ा ऐलान, क्या है CBDC का मास्टर प्लान</title>
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<description><![CDATA[ क्या आपने सोचा है कि जब भारत रूस से तेल खरीदता है या ब्राजील चीन को सोयाबीन बेचता है तो बीच में डॉलर का क्या काम है? आखिर क्यों दुनिया के दो देश अपनी करेंसी होने के बावजूद एक तीसरी करेंसी यानी कि अमेरिकी डॉलर के मोहताज है। यह सवाल इसलिए क्योंकि दशकों से दुनिया इस डॉलर की दादागिरी को सहन कर रही है क्योंकि इसका कोई मजबूत विकल्प था ही नहीं। लेकिन अब खेल का मैदान बदलने वाला है। मुंबई के एक इवेंट में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एक ऐसा ऐलान किया जिसने वाशिंगटन से लेकर वॉल स्ट्रीट तक के कान खड़े कर दिए हैं। जहां ब्रिक्स देश अब एक ऐसे डिजिटल ब्रिज पर काम कर रहे हैं जो डॉलर और स्विफ्ट की मोनोपोली को जड़ से उखाड़ सकता है। बिना डॉलर को छुए सीधे अपनी करेंसी में व्यापार और पलक झपकते ही पेमेंट। इसे भी पढ़ें: Food Inflation ने बिगाड़ा रसोई का बजट, 4.45% हुई खुदरा महंगाई, आम आदमी की Pocket पर बढ़ा Pressureक्या यह ग्लोबल इकॉनमी में भारत का मास स्ट्रोक है? दरअसल संजय मल्होत्रा जो रिजर्व बैंक के गवर्नर हैं। उन्होंने मुंबई में साफ कर दिया कि ब्रिक्स देश अपने फास्ट पेमेंट सिस्टम और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी कि सीबीडीसी को आपस में जोड़ने के लिए गंभीर रूप से चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न तरीके और विकल्प विचाराधीन हैं, जिनमें केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्राएं और त्वरित भुगतान प्रणालियों के बीच संबंध स्थापित करना शामिल है, लेकिन यह अभी भी चर्चा के चरण में है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सीमा पार भुगतानों में, विशेष रूप से खुदरा लेनदेन के लिए, लागत कम करने और लेनदेन की गति बढ़ाने की काफी गुंजाइश है।अभी क्या सिस्टम हैअभी दुनिया का अधिकांश व्यापार Swift में होता है। यानी सोसाइटी फॉर वर्ल्ड वाइड इंटर बैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन। लेकिन यह एक मैसेजिंग सिस्टम है जो बैंकों को पैसा ट्रांसफर करने की अनुमति देता है। लेकिन अब इसमें तीन बड़ी समस्याएं हैं। एक-एक करके आप समस्याओं को समझिए। इसकी पहली बड़ी समस्या है भारी फीस। क्रॉस बॉर्डर ट्रांजैक्शन पर भारी कमीशन देना पड़ता है। दूसरा पॉइंट है वक्त की बर्बादी। पैसा पहुंचने में कई घंटे या फिर कभी-कभी दिन भी लग जाते हैं। तीसरा पॉइंट है हथियार की तरह इस्तेमाल। जी हां, अगर अमेरिका किसी देश से नाराज हो जाए जैसे कि रूस से तो उसे स्फ्ट से बाहर कर देता है। यानी आपकी इकॉनमी एक झटके में ठप। ब्रिक्स यानी ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका यह देश मिलकर दुनिया की 40% से ज्यादा आबादी और ग्लोबल जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा कंट्रोल करते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:54 +0530</pubDate>
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<title>हूती विद्रोहियों का सबसे बड़ा हमला..सऊदी के जहाज को उड़ाया!</title>
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<description><![CDATA[ मुस्लिमों के लिए सबसे अहम धार्मिक जगह मक्का के नाम पर तीन देशों ने इस्लामिक नेटो बनाया और तीन देशों का इस्लामिक नेटो तीन दिन भी चल नहीं पाया। ना पाकिस्तानी होती के हमलों का जवाब दे रहे हैं ना सऊदी उनसे लड़ पा रहा है और अब ईरान के आदेश पर यमन के होती विद्रोहियों ने बाब अल मंदब स्टेट में सऊदी से जुड़े जहाज पर मिसाइल हमला कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें चार क्रू मेंबर मारे गए और तीन पाकिस्तानी इसमें मारे गए। इसके बावजूद पाकिस्तान चुप है। रिपोर्ट के मुताबिक तंजानिया के झंडे वाले इस जहाज का नाम तियामा था और यह ओमान के सलालाहा पोर्ट से जिबूती जा रहा था। जिबूती जाने के दौरान हमला किया गया। होती विद्रोही ने 20 जुलाई को सऊदी जहाजों की नाकेबंदी शुरू की थी। इसके बाद से रडरसी में सऊदी से जुड़े आठ जहाजों पर होती हमला कर चुके हैं। इनमें एनेसलिया, लयला, गज़ल और वफा जैसे जहाज शामिल है। ये हमला ऐसे समय हुआ जब हॉर्मोस ट्रेड बंद होने से समुद्री कारोबार पहले से ही सऊदी का बहुत प्रभावित है और सऊदी के लिए हॉर्मोनस बंद होने के बाद तेल कारोबार के लिए ये आखिरी ऑप्शन की तरह रास्ता था। इसे भी पढ़ें: US Dollar के मुकाबले 3 पैसे मजबूत होकर 95.33 पर बंद हुआ रुपया, वैश्विक बाजारों से मिला सहारासऊदी ने पाकिस्तान तुर्की के साथ डिफेंस डील भी की थी कि शायद अल्लाह के नाम पर ये दोनों देश उसकी मदद कर दें। होती और ईरान से बचा लें। लेकिन हूतियों के हमले में सऊदी के जहाज पर पाकिस्तानियों के मारे जाने के बाद भी पाकिस्तान इसका जवाब नहीं दे पा रहा है। जबकि शर्त यही थी कि तीनों देशों में किसी एक देश पर भी अगर हमला हुआ तो तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और तीनों देश मिलकर जवाब देंगे। पर इसके बावजूद सिर्फ सन्नाटा है। इसके एक दिन पहले ही ईरान के इशारे पर इन्हीं होती विद्रोहियों ने सऊदी की सबसे अहम आराम को रिफाइनरी पर अटैक करके बड़े धमाके किए थे। और अब बाब अल मंडेब में भी जहाजों पर हमले बढ़ रहे हैं। इसमें शिपिंग कंपनियों की परेशानी बढ़ गई है। सऊदी की परेशानी बढ़ गई है। होती विद्रोही रेड सी से गुजरने वाले जहाजों को लगातार टारगेट कर रहे हैं। सऊदी के जहाजों को लेकर बड़ा नुकसान है। इसे भी पढ़ें: US Army का Apache helicopter Texas में हुआ दुर्घटनाग्रस्त, 2 की मौतसऊदी जहाजों पर होती के हमलों में यह पहली बार है जब किसी की मौत हुई है। हालांकि नुकसान लगातार हुआ है। होती के हमलों का असर सऊदी अरब के तेल एक्सपोर्ट पर भी पड़ा है। समुद्र में जहाजों की आवाजाही कम हो गई है। सुरक्षा के डर से कई जहाज रेड सी और स्विस कैनाल के रास्ते से बच भी रहे हैं। ईरान और सऊदी अरब यमन में युद्ध लड़ रहे हैं। दोनों देश दूसरे के खिलाफ यहां गुटों का समर्थन करते हैं। सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली सरकार का सपोर्ट करता है। जबकि ईरान होतियों के साथ है। संगठन यमन के बड़े हिस्से पर कंट्रोल रखते हैं। होतियों ने 2023 और 2024 में भी रेड सी में कई जहाजों पर हमले किए थे। इससे समुद्री यातायात पर असर पड़ा था और सऊदी को नुकसान हुआ था। इस समय हुती के हमलों का असर इसलिए ज्यादा महसूस हो रहा है क्योंकि दुनिया पहले से ही हॉर्मोस स्ट्रेट के बंद होने से जूझ रही है। जैसे ईरान हॉर्मोस में टोल वसूलना चाहता है ठीक वैसे ही यमन के होती विद्रोही रेड सी यानी कि लाल सागर के दक्षिणी हिस्से से गुजरने वाले कारोबारी जहाजों पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि इसे कब से लागू किया जाएगा इसकी कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:53 +0530</pubDate>
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<title>दिल्ली लाल किला हमले के पीछे था आतंकी संगठन AQIS, UN रिपोर्ट में हुई आधिकारिक पुष्टि</title>
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<description><![CDATA[ नयी दिल्ली में पिछले साल नवंबर में लाल किले पर हुए आतंकवादी हमले के लिए ‘अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (एक्यूआईएस) को ‘‘आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया’’ है। आतंकवाद-रोधी प्रतिबंधों की निगरानी करने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक इकाई की नयी रिपोर्ट में यह बात कही गई है। नयी दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए भीषण विस्फोट में करीब 15 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य लोग घायल हुए थे।लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास यातायात सिग्नल पर धीमी गति से चल रही एक कार में यह विस्फोट हुआ था। सोमवार को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया कि ‘‘एक्यूआईएस ने बिखरे हुए समूह से क्षेत्रीय आतंकवादी संगठन के रूप में खुद को विकसित करना जारी रखा।’’ ‘इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड द लेवांत’ (आईएसआईएल) और अल-कायदा से संबंधित सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति को सौंपी गई विश्लेषणात्मक सहायता एवं प्रतिबंध निगरानी दल की 38वीं रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘एक्यूआईएस ने साजो-सामान और वित्तीय नेटवर्क स्थापित किए तथा बड़ी इकाइयों के बजाय छोटे और अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय विकेंद्रीकृत समूहों के रूप में काम किया। नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले पर हुए हमले के लिए एक्यूआईएस को आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया।’’ रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ‘‘एक्यूआईएस द्वारा बांग्लादेश में अपने समूह स्थापित करने के लिए वहां की परिस्थितियों का फायदा उठाए जाने की कोशिश को लेकर कुछ चिंता है।’’ रिपोर्ट में कहा गया कि अल-कायदा और आईएसआईएल (दाएश) रासायनिक और जैविक हथियार विकसित करने में कई वर्षों से लगातार रुचि दिखा रहे हैं लेकिन वे इससे जुड़ी तकनीकी चुनौतियों से पार पाने में अब तक नाकाम रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Red Fort Blast Analysis: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में खुलासा, लाल किला हमले के पीछे AQIS का सीधा हाथऐसे हथियार विकसित करने के निर्देश ऑनलाइन आतंकवादी समूहों में व्यापक रूप से साझा किए गए हैं। इसमें कहा गया, ‘‘उदाहरण के लिए, फरवरी में आईएसआईएल (दाएश) की अंग्रेजी की पत्रिका ‘इनवेड’ में ‘बोटुलिनम टॉक्सिन’ और ‘सायनाइड’ विकसित करने के निर्देश शामिल थे।’’ रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड द लेवांत-खुरासान (आईएसआईएल-के) ने इसमें ‘‘विशेष रुचि’’ दिखाई है और पिछले 12 महीने में उसने ‘राइसिन’ नाम का जहरीला पदार्थ विकसित करने से संबंधित निर्देश प्रसारित किए। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘भारतीय अधिकारियों ने 2025 के अंत में एक चिकित्सक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें विदेश में सक्रिय आईएसआईएल (दाएश) के एक समूह ने राइसिन विकसित करने का काम सौंपा था।’’ रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमले जारी रहने के कारण दक्षिण एशिया में अत्यधिक क्षेत्रीय तनाव पर बना हुआ है।इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Red Fort Car Blast पर UNSC रिपोर्ट ने किया बड़ा खुलासा, धमाके के तार Al Qaeda in the Indian Subcontinent से जोड़ेतालिबान इस बात से सार्वजनिक रूप से लगातार इनकार करता रहा है कि वह किसी आतंकवादी संगठन को पनाह दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने चिंता जताई कि संघर्ष की स्थिति आतंकवादी संगठनों के लिए अवसर पैदा कर सकती है और इससे क्षेत्र के सामने सुरक्षा संबंधी अतिरिक्त चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘अफगानिस्तान से पैदा होने वाला आतंकवादी खतरा लगभग पहले जैसा ही बना हुआ है।कई आतंकवादी संगठनों का अफगानिस्तान में सक्रिय रहना पड़ोसी देशों और मध्य एशियाई क्षेत्र के लिए लगातार खतरा बना हुआ है। इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड द लेवांत-खुरासान से निपटने और अन्य आतंकवादी संगठनों पर अंकुश लगाने के अधिकारियों के प्रयासों के बावजूद वे आतंकवाद की समस्या को दबाने में नाकाम रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:53 +0530</pubDate>
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<title>मैं हाफिज सईद का गुलाम हूं... पाकिस्तान के पूर्व मंत्री ने आतंकियों की महफिल से भारत को दी धमकी</title>
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<description><![CDATA[ एक और घटना ने पाकिस्तान की असलियत सामने ला दी है और यह साबित कर दिया है कि यह देश आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है। हाल ही में एक पूर्व मंत्री को लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकवादियों के साथ मंच साझा करते और भारत को धमकी देते देखा गया, साथ ही उन्होंने आतंकी संगठन के संस्थापक हाफ़िज़ सईद की तारीफ़ भी की। सोशल मीडिया पर बिना तारीख वाला एक वीडियो तेज़ी से शेयर किया जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार में पूर्व गृह मंत्री और अवामी मुस्लिम लीग के संस्थापक शेख रशीद अहमद को लश्कर कमांडर खालिद मसूद संधू और कारी मुहम्मद याकूब शेख के साथ देखा जा सकता है। अहमद को एक सभा को संबोधित करते हुए और यह कहते हुए भी देखा जा सकता है कि वह सईद का गुलाम और अनुयायी है। उसने यह भी दावा किया कि सईद का मोबाइल नंबर उसके फोन पर मिलने के बाद उसे अमेरिका (US) से निकाल दिया गया था।इसे भी पढ़ें: &#039;आजादी&#039; का जश्न मना रहे बलूचों पर पाकिस्तान ने की Air Strike, जवाब में Baloch Liberation Army ने Pakistan Army के छक्के छुड़ाएपाकिस्तान के पूर्व मंत्री ने कहा कि मैं हाफिज सईद का गुलाम हूं। मुजाहिदीनों ने खुद को पाकिस्तान के लिए समर्पित कर दिया है। इंशाअल्लाह, हम भी हाफिज सईद के साथ हैं। हम भाइयों की तरह हैं। वायरल वीडियो में अहमद ने कहा कि जब भी पाकिस्तान पर कोई संकट आया... भारत ने कभी भी मौका नहीं छोड़ा... अगर भारत ने पाकिस्तान की तरफ आंख उठाकर भी देखा तो हम उसे बर्बाद कर देंगे। न तो भारत में पक्षी चहचहाएंगे और न ही मंदिरों में घंटियां बजेंगी। उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ कुछ भी करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। हम पाकिस्तान और हाफिज सईद के साथ हैं। यह वायरल क्लिप कोई अकेली घटना नहीं है; पाकिस्तान में अक्सर आतंकवादियों को प्रभावशाली लोगों के साथ खुलेआम मंच साझा करते देखा गया है। इससे पहले जून में, सईद के बेटे तलहा सईद को इस्लामाबाद में पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर के बड़े भाई शाहिद अख्तर के अंतिम संस्कार में शामिल होते देखा गया था। वहाँ इनाम-उर-रहमान कंबोह, अब्दुल्ला टूर, हाफिज उमर और अमजद भट्टी जैसे कई अन्य आतंकवादी भी मौजूद थे।इसे भी पढ़ें: Pakistan का दावा, Saudi Arabia और तुर्किये से रक्षा समझौता केवल रक्षात्मक प्रकृति काकई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों, जिनमें अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) की रिपोर्ट भी शामिल है, ने बार-बार चेतावनी दी है कि पाकिस्तान आतंकवादियों के लिए, खासकर भारत के खिलाफ काम करने वाले आतंकवादियों के लिए, एक सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है। नई दिल्ली ने इस बारे में बार-बार चेतावनी दी है और वैश्विक संस्थाओं से इस्लामाबाद के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पहले एक बयान में कहा था,जो देश दशकों से सीमा-पार आतंकवाद, धार्मिक कट्टरपंथ और हिंसा को बढ़ावा दे रहा है, वह किसी भी तरह की मिली-जुली सांस्कृतिक विरासत का दावा नहीं कर सकता।???? EXPOSED: “I AM A FOLLOWER OF HAFIZ SAEED SAAB”: PTI LEADER SHEIKH RASHEED’S SHOCKING ADMISSIONFormer Pakistani minister and Imran Khan ally Sheikh Rasheed openly declared himself a “follower and servant” of Hafiz Saeed.He claimed he was kicked out of the US because Hafiz… pic.twitter.com/OJEilhAPoR— OsintTV ???? (@OsintTV) August 12, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Strait of Hormuz पर US का पूर्ण कब्जा, Donald Trump बोले&#45; ईरान अब Middle East का दादा नहीं रहा</title>
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<description><![CDATA[ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर अमेरिका का &quot;पूरा कंट्रोल&quot; है और ईरान के साथ इस अहम रास्ते को फिर से खोलने को लेकर रुकी हुई बातचीत के बीच वे इसे बनाए रखेंगे। ट्रुथ सोशल पर एक बयान में ट्रंप ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर अमेरिका का पूरा कंट्रोल है। मुझे लगता है कि हम इसे बनाए रखेंगे! हर कोई हमारी नेवल नाकेबंदी को स्टील की दीवार कह रहा है और ईरान इसके बारे में कुछ नहीं कर सकता। ट्रंप ने यह भी कहा कि तेहरान का मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर बुरी तरह कमज़ोर हो गया है और उन्होंने अपना मैसेज इस बात के साथ खत्म किया, अल्लाह की तारीफ़ हो! उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में आगे कहा, &quot;उनके पास सिर्फ़ फ़ेक न्यूज़ और 300% महंगाई है, और हालात और बिगड़ रहे हैं! ईरान सिर्फ़ बातें करता है, कोई काम नहीं करता; अब वह मिडिल ईस्ट का दादा नहीं रहा। अल्लाह की तारीफ़ हो! प्रेसिडेंट डोनाल्ड जे. ट्रंप।अमेरिकी राष्ट्रपति की ये बातें होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर लंबे समय से चल रहे टकराव के बाद आई हैं। यह समुद्री रास्ता बहुत अहम है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% पेट्रोलियम व्यापार यहीं से होता है।इसे भी पढ़ें:  हूती विद्रोहियों का सबसे बड़ा हमला..सऊदी के जहाज को उड़ाया!यह ताज़ा तनाव इस इलाके में हफ़्तों से ईरान, इज़राइल और अमेरिकी सेनाओं के बीच हुई सैन्य झड़पों के बाद बढ़ा है। इस टकराव से इलाके में बड़े पैमाने पर संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। साथ ही, तेहरान ने बार-बार चेतावनी दी है कि अगर ईरान पर बाहरी दबाव बढ़ता रहा, तो समुद्री आवाजाही पर रोक लग सकती है या उसमें रुकावट आ सकती है। इसके जवाब में, वॉशिंगटन ने खाड़ी इलाके में अपनी नौसेना की बड़ी मौजूदगी तैनात की है और फिर से कहा है कि समुद्री आवाजाही की आज़ादी सुनिश्चित करना सुरक्षा का मुख्य लक्ष्य बना हुआ है।इसे भी पढ़ें: Donald Trump का दावा: नाकेबंदी से Strait of Hormuz पर अमेरिका का नियंत्रण हैट्रंप के बयानों के साथ-साथ पर्दे के पीछे कूटनीतिक बातचीत भी चल रही थी। वॉशिंगटन और तेहरान के प्रतिनिधि होर्मुज़ संकट को कम करने और समुद्री आवाजाही को फिर से सामान्य करने की शर्तों पर अप्रत्यक्ष बातचीत में शामिल रहे हैं। खबरों के मुताबिक, तेहरान ने 28 फरवरी को ट्रंप द्वारा शुरू किए गए अमेरिकी युद्ध से हुए नुकसान और प्रतिबंधों के कारण हुए आर्थिक नुकसान के लिए मुआवज़े की मांग की है; ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इस शर्त को खारिज कर दिया है। साथ ही, ट्रंप प्रशासन ने तेहरान के खिलाफ आर्थिक कदम तेज़ कर दिए हैं, मौजूदा प्रतिबंधों को लागू किया है और चेतावनी दी है कि अगर ईरान नियमों का पालन नहीं करता है, तो और सख़्त कार्रवाई की जा सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>&amp;apos;मशीन गन&amp;apos; जैसे होंठों वाली ट्रंप की करीबी कैरोलिन लेविट छोड़ रही हैं व्हाइट हाउस, प्रेस सेक्रेटरी पद से इस्तीफे का ऐलान, बताई वजह</title>
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<description><![CDATA[ व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट अगस्त के आखिर में अपना पद छोड़ देंगी। इसके साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे भरोसेमंद और चर्चित सहयोगियों में से एक का कार्यकाल अचानक खत्म हो जाएगा। 28 साल की लेविट मई में अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने के कुछ ही हफ़्ते बाद, 16 जुलाई को व्हाइट हाउस के प्रेस ब्रीफ़िंग रूम में लौटी थीं। लीविट ने बुधवार दोपहर एक बयान में कहा कि दुनिया की सबसे मुश्किल नौकरियों में से एक में काम करते हुए माँ बनना और नए बच्चे का स्वागत करना मेरे जीवन का सबसे संतोषजनक, लेकिन साथ ही सबसे चुनौतीपूर्ण दौर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि सच तो यह है कि बेटी के जन्म के बाद व्हाइट हाउस लौटने पर मुझे दिल से यह महसूस हुआ कि व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी के तौर पर ज़रूरी लगातार समय, ऊर्जा और ध्यान देने के साथ-साथ मैं अपने दो छोटे बच्चों के लिए वैसी बेहतरीन माँ नहीं बन सकती, जिसके वे हकदार हैं। इसे भी पढ़ें: व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt महीने के अंत में छोड़ेंगी अपना पद, बनीं रहेंगी सलाहकारट्रंप बार-बार पूछते रहे कि वह कब लौटेंगीलेविट के करीबी लोगों ने बताया कि मैटरनिटी ब्रेक के दौरान नौकरी छोड़ने के फैसले को लेकर वह काफी उलझन में थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप लगातार उनके संपर्क में रहे और बार-बार पूछते रहे कि वह कब अपनी ड्यूटी पर वापस लौटेंगी। सूत्र ने डेली मेल को बताया, इसमें कोई शक नहीं कि यह उनकी ज़िंदगी के अब तक के सबसे मुश्किल फैसलों में से एक था। खबरों के मुताबिक, उनके लौटने से यह भी पता चला कि व्हाइट हाउस की ज़िम्मेदारी और दो छोटे बच्चों की देखभाल, दोनों को एक साथ संभालना कितना मुश्किल था। रिपोर्ट के अनुसार, काम पर लौटने के कुछ हफ़्तों बाद उन्हें &quot;बहुत ज़्यादा थकान और तनाव&quot; (एक्सट्रीम बर्नआउट) का सामना करना पड़ा।इसे भी पढ़ें: Donald Trump का दावा: नाकेबंदी से Strait of Hormuz पर अमेरिका का नियंत्रण हैएक और सूत्र ने बताया, बच्चों के साथ यह नौकरी करना बहुत तनावपूर्ण था। उन्हें ठीक से नींद नहीं मिल पाती थी और वह नहीं चाहती थीं कि उनके काम पर कोई असर पड़े, इसलिए उन्होंने तय किया कि जब तक हो सके, वह बनी रहेंगी और अपना काम अच्छे से करेंगी। राष्ट्रपति ने उन्हें बनाए रखने के लिए हर संभव कोशिश की। हालात की जानकारी रखने वाले एक और व्यक्ति ने प्रेस सेक्रेटरी के पद को बहुत ज़्यादा मेहनत और ज़िम्मेदारी वाला बताया। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:52 +0530</pubDate>
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<title>Energy Shortage in Bangladesh: 8 बजे बंद होंगे शॉपिंग मॉल, संकट से निपटने के लिए मांगा भारत का Diesel Support</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद के भारत से और डीज़ल सप्लाई की मांग करने के कुछ ही दिनों बाद, बांग्लादेश ने 12 अगस्त को एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें कहा गया है कि शॉपिंग मॉल, बाज़ार और दुकानें सिर्फ़ सुबह 11 बजे से रात 8 बजे के बीच ही खुल सकती हैं। यह देश में चल रहे ऊर्जा संकट को दिखाता है। मॉल और बाज़ार सरकार द्वारा तय नौ घंटे से ज़्यादा समय तक नहीं खुल सकते। इसमें यह भी कहा गया है कि सभी रोशन वाले बिलबोर्ड शाम 7 बजे तक बंद कर दिए जाने चाहिए। नोटिफिकेशन में आगे कहा गया है कि &quot;सभी तरह की सजावटी या रोशन वाली लाइटें बंद रहेंगी। इसे भी पढ़ें: RAW Chief Parag Jain के Dhaka में कदम रखते ही Pakistani ISI की बढ़ गयी बेचैनी, Bangladesh पर पैनी नजर रख रहा है Indiaमकसद आर्टिफिशियल लाइट का इस्तेमाल कम करना है, इसीलिए अब दुकानें रात 8 बजे बंद होंगी। सूरज डूबने के बाद बिलबोर्ड पर लगी लाइटें और एनर्जी संकट के समय सजावटी लाइटें ऐसी चीज़ें हैं जिनका खर्च सरकार नहीं उठा सकती। BNP प्रशासन के एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर Network18 को बताया, &quot;जब रिहायशी इलाकों में घंटों बिजली कटौती हो रही हो, तो यह एक तुरंत किया जाने वाला उपाय और सही संदेश था।&quot; उन्हें प्रशासनिक कार्रवाई का डर था। बांग्लादेश में ऊर्जा संकट इतना गंभीर है कि यह आदेश सिर्फ़ ढाका तक ही सीमित नहीं है। बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्रालय की ओर से जारी इस आदेश में देश भर में चल रहे और आने वाले मेलों, व्यापार मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर पाबंदियां लगाई गई हैं।इसे भी पढ़ें: अचानक बांग्लादेश क्यों पहुंचे भारत के 4 अफसर, खुफिया एजेंसी DGFI का क्या है खेल?सरकार ने एक विस्तृत निर्देश में कहा है कि &quot;देश भर में चल रहे या होने वाले मेलों, व्यापार मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को रात 8:00 बजे तक खत्म कर दिया जाए। इस आदेश को लागू करने के लिए इसकी प्रतियां न सिर्फ़ ढाका, बल्कि बांग्लादेश के सभी नगर निगमों के मेयर या प्रशासकों को भी भेजी गई हैं। इसे सभी डिविज़नल कमिश्नरों और डिप्टी कमिश्नरों को भी भेजा गया है, जिससे पता चलता है कि इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर प्रणय वर्मा और बांग्लादेश के बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री इकबाल हसन महमूद के बीच हुई बैठक में, मंत्री ने भारत से और डीज़ल सप्लाई करने का अनुरोध किया। यह अनुरोध देश के कुछ हिस्सों में बिजली और गैस की चल रही कमी से निपटने के लिए किया गया था, जिसके कारण बिजली उत्पादन पर असर पड़ा है और बिजली कटौती बढ़ गई है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:52 +0530</pubDate>
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<title>क्या 2028 में फिर चुनाव लड़ेंगे Donald Trump? संवैधानिक पाबंदियों पर बोले&#45; मैं तो चाहता हूं, लेकिन...</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2028 में राष्ट्रपति पद के लिए तीसरी बार चुनाव लड़ने पर लगी संवैधानिक रोक को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि हालांकि वह एक और चुनाव अभियान का स्वागत करेंगे, लेकिन कानूनी सीमाएं उन्हें ऐसा करने से रोकती हैं। मैरीलैंड में जॉइंट बेस एंड्रयूज पर मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए, ट्रंप ने अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद तीसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए संभावित उम्मीदवारी से जुड़े सीधे सवालों का जवाब दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अपने राजनीतिक समर्थकों की लगातार मांगों के बावजूद, कानून स्पष्ट रूप से किसी मुख्य कार्यकारी (राष्ट्रपति) को दो बार से अधिक पद के लिए चुने जाने से रोकता है।इसे भी पढ़ें: Fake Intelligence से बढ़कर है खतरा, Strait of Hormuz पर Donald Trump के दावे को Araghchi ने नकाराट्रंप ने कहा हर कोई मुझसे यह सवाल पूछता है, और आप जानते हैं कि इस मामले में कानून बहुत सख्त है। एक और चुनाव अभियान के प्रति अपनी इच्छा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा मैं चुनाव लड़ना चाहूंगा, लेकिन कानून बहुत सख्त है। ट्रंप ने बताया कि उनके समर्थक अक्सर उनसे दोबारा चुनाव लड़ने का आग्रह करते हैं; उन्होंने ओहियो में पहले हुए एक कार्यक्रम का भी ज़िक्र किया। उन्होंने &#039;पेट्रियट गेम्स&#039; का ज़िक्र करते हुए कहा हर कोई मुझसे पूछता है, यहां तक ​​कि आज रात भी, वे कार्यक्रम में चिल्ला रहे थे, 2028! उन्होंने आगे कहा नहीं, हर कोई चाहता है कि मैं ऐसा करूं, लेकिन कानून बहुत सख्त है।इन बयानों से पता चलता है कि ट्रंप ने तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की राह में आने वाली संवैधानिक रुकावट को साफ़ तौर पर माना है, भले ही उन्होंने अपना कार्यकाल जारी रखने में दिलचस्पी दिखाई हो। इन बयानों से यह साफ़ होता है कि उनकी टिप्पणी 2028 के चुनाव अभियान की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं है, बल्कि मौजूदा कानूनी सीमाओं को स्वीकार करना है। यह संवैधानिक रोक अमेरिकी संविधान के 22वें संशोधन से जुड़ी है, जिसमें कहा गया है कि &quot;कोई भी व्यक्ति दो बार से ज़्यादा राष्ट्रपति पद के लिए नहीं चुना जा सकता। 1947 में कांग्रेस द्वारा पारित और फरवरी 1951 में राज्यों द्वारा मंज़ूर किए गए इस संशोधन ने राष्ट्रपति के कार्यकाल पर एक पक्की सीमा तय कर दी है।इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz पर US का पूर्ण कब्जा, Donald Trump बोले- ईरान अब Middle East का दादा नहीं रहा2016 और 2024 के राष्ट्रपति चुनावों में अलग-अलग समय पर जीत हासिल करने के कारण, ट्रंप सीधे तौर पर इस नियम के दायरे में आते हैं, जिससे वे दोबारा राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाते हैं। इतिहास में अमेरिकी संविधान में कार्यकारी पद के लिए कार्यकाल की कोई सीमा तय नहीं थी। कई दशकों तक, नेताओं ने जॉर्ज वॉशिंगटन द्वारा स्थापित एक अनौपचारिक परंपरा का पालन किया, जिन्होंने दो कार्यकाल के बाद पद छोड़ दिया था। इस राजनीतिक परंपरा को फ्रैंकलिन डी. रूज़वेल्ट ने तोड़ दिया, जिन्होंने 1940 में अभूतपूर्व रूप से तीसरा कार्यकाल और 1944 में चौथा कार्यकाल हासिल किया, और अप्रैल 1945 में पद पर रहते हुए ही उनका निधन हो गया।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Fake Intelligence से बढ़कर है खतरा, Strait of Hormuz पर Donald Trump के दावे को Araghchi ने नकारा</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे का जवाब दिया जिसमें कहा गया था कि वाशिंगटन का होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर &quot;पूरा नियंत्रण&quot; है। उन्होंने अमेरिका पर बार-बार खुफिया जानकारी में चूक का आरोप लगाया और इस रणनीतिक जलमार्ग को लेकर एक बड़ी गलतफहमी या गलत फैसले के खिलाफ चेतावनी दी। एक्स पर एक पोस्ट में अरागची ने ईरान के साथ युद्ध का उदाहरण देते हुए अमेरिका पर खुफिया जानकारी में चूक के कारण बार-बार गलत फैसले लेने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर और भी बड़ी गलती कर सकता है और सावधानी बरतने का आग्रह करते हुए कहा कि &quot;नकली खुफिया जानकारी&quot; (fake intelligence), नकली खबरों (fake news) से भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है।इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz पर Donald Trump का बड़ा दावा, बोले- &#039;हमारा पूरा नियंत्रण&#039;, Iran को दी कड़ी चेतावनीपोस्ट में लिखा था, &quot;अमेरिका लंबे समय से खुफिया जानकारी में चूक के कारण गलत फैसले लेता रहा है। इसका एक उदाहरण है ईरान के साथ युद्ध। अब, होर्मुज जलडमरूमध्य पर और भी बड़ी गलती हो सकती है। नकली खबरों से भी बुरा है नकली खुफिया जानकारी। सावधान रहें। अल्लाह महान है, पृथ्वी की किसी भी शक्ति से महान। हमें अल्लाह पर भरोसा है। अरागची की यह टिप्पणी ट्रंप के उस दावे के बाद आई है जिसमें उन्होंने &#039;ट्रुथ सोशल&#039; (Truth Social) पर कहा था कि संयुक्त राज्य अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य पर &quot;पूरा नियंत्रण&quot; है और वह इसे बनाए रखेगा। ट्रंप ने इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की तैनाती को &quot;स्टील की दीवार&quot; (WALL OF STEEL) बताया और कहा कि ईरान में इसका मुकाबला करने की कोई क्षमता नहीं है।इसे भी पढ़ें: Mohsin Naqvi ने Tehran में अराघची से वार्ता की, अमेरिका-ईरान संघर्ष रोकने की कोशिशट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अमेरिका का पूरा कंट्रोल है। मुझे लगता है कि हम इसे बनाए रखेंगे! हमारी नौसेना की घेराबंदी को हर कोई &#039;स्टील की दीवार&#039; कह रहा है, और ईरान इसके बारे में कुछ नहीं कर सकता। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान का मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर बुरी तरह कमज़ोर हो गया है और उन्होंने अपने मैसेज का एक हिस्सा अल्लाह का ज़िक्र करते हुए खत्म किया। उन्होंने आगे कहा उनके पास सिर्फ़ फ़ेक न्यूज़ और 300% महंगाई है, और हालात और खराब हो रहे हैं! ईरान सिर्फ़ बातें करता है, कोई काम नहीं करता; अब वह मिडिल ईस्ट का दादा (Bully) नहीं रहा। अल्लाह की तारीफ़ हो! होर्मुज़ जलडमरूमध्य एक रणनीतिक रूप से अहम जलमार्ग है जो फ़ारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा व्यापार का रास्ता यहीं से गुज़रता है। ट्रंप की पोस्ट के कुछ घंटों बाद, ईरान ने उनके दावों को खारिज कर दिया और कहा कि रणनीतिक जलमार्ग बंद रहेगा और तेहरान की शर्तें माने जाने तक इसे दोबारा नहीं खोला जाएगा।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:51 +0530</pubDate>
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<title>Bangladesh Politics: Mirza Fakhrul Islam Alamgir बने BNP के राष्ट्रपति उम्मीदवार, Shahabuddin की लेंगे जगह</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने 20 अगस्त को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपने महासचिव मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर को उम्मीदवार घोषित किया। इससे उनके देश का अगला राष्ट्राध्यक्ष बनने का रास्ता साफ हो गया है। यह कदम पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद उठाया गया है, जिन्होंने गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए अपना कार्यकाल पूरा होने से लगभग दो साल पहले, 24 जुलाई को पद छोड़ दिया था। सीनियर जॉइंट सेक्रेटरी जनरल रूहुल कबीर रिज़वी ने बताया कि 78 साल के अनुभवी नेता को नॉमिनेट किए जाने के बाद उन्होंने BNP के सेक्रेटरी जनरल और पार्टी की सबसे बड़ी पॉलिसी बनाने वाली स्टैंडिंग कमिटी से इस्तीफ़ा दे दिया है। 12 फरवरी के चुनावों में सत्ता में लौटने के बाद संसद में BNP के पास दो-तिहाई बहुमत है, इसलिए आलमगीर इस मुकाबले में मज़बूत स्थिति में हैं।इसे भी पढ़ें: Energy Shortage in Bangladesh: 8 बजे बंद होंगे शॉपिंग मॉल, संकट से निपटने के लिए मांगा भारत का Diesel Supportरिज़वी ने कहा, मुझे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की ओर से यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि हमारे समर्पित सेक्रेटरी जनरल, मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर, BNP के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बन गए हैं। प्रधानमंत्री सचिवालय में प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान (जो पार्टी के चेयरमैन भी हैं) के साथ BNP के वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद इस नामांकन की घोषणा की गई। चुनाव आयोग के शेड्यूल के अनुसार, आलमगीर को गुरुवार शाम 4 बजे तक अपने नामांकन कागज़ात जमा करने थे। बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने भी अपने गठबंधन के नेता और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के चेयरमैन कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को मैदान में उतारा है। अहमद ने चुनाव आयोग में अपने नॉमिनेशन पेपर जमा कर दिए हैं।इसे भी पढ़ें: Mitchell Starc ने तोड़ा Rangana Herath का रिकॉर्ड, बने सबसे सफल बाएं हाथ के Test गेंदबाजबांग्लादेश के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति का चुनाव संसद करती है। पद खाली होने के कारण, संसद के स्पीकर हाफ़िज़ उद्दीन अहमद अभी कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर काम कर रहे हैं। अगर चुने जाते हैं, तो आलमगीर बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति बनेंगे। वे एक दशक से ज़्यादा समय से BNP के प्रमुख नेताओं में से एक रहे हैं; 2016 में औपचारिक रूप से पद संभालने से पहले, 2011 से वे कार्यवाहक महासचिव के तौर पर काम कर रहे थे। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:51 +0530</pubDate>
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<title>Chicago Murder Case: पत्नी के दूसरी बार छोड़ने पर बेकाबू हुआ Mehsana का युवक, चाकुओं से गोदकर की हत्या</title>
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<description><![CDATA[ गुजरात के मेहसाणा ज़िले के एक 32 साल के व्यक्ति पर शिकागो में अपनी पत्नी की चाकू मारकर हत्या करने के आरोप में &#039;फर्स्ट-डिग्री मर्डर&#039; का केस दर्ज किया गया है। पत्नी के उसे छोड़कर जाने के फ़ैसले के बाद हुई &quot;भावनात्मक परेशानी&quot; के बारे में उसने कुछ महीने पहले ही सार्वजनिक रूप से बात की थी। शिकागो पुलिस ने बताया कि 9 अगस्त को स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 1:48 बजे, अल्बानी पार्क में नॉर्थ एवर्स एवेन्यू के 4800 ब्लॉक में एक अपार्टमेंट के अंदर 32 साल की महिला बेहोश हालत में मिली। &#039;टाइम्स ऑफ़ इंडिया&#039; की रिपोर्ट के मुताबिक, उसकी गर्दन पर चाकू का ज़ख्म था और उसे घटनास्थल पर ही मृत घोषित कर दिया गया।इसे भी पढ़ें: RG Kar Case Update: साक्ष्य मिटाने के आरोप में TMC MLA Nirmal Ghosh गिरफ्तार, &#039;जल्दबाजी&#039; में Cremation पर बड़ा एक्शनमेहसाणा ज़िले के कड़ी का रहने वाला आरोपी, घटना के करीब नौ घंटे बाद शिकागो के ओ&#039;हेयर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गिरफ़्तार किया गया। पुलिस ने महिला की मौत, चाकू मारने की घटना, घटना की जगह, गिरफ़्तारी और हत्या के आरोप की पुष्टि की है, हालांकि महिला की पहचान ज़ाहिर नहीं की गई है। यह जोड़ा आठ साल पहले अमेरिका चला गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी के परिवार वालों ने बताया कि यह कपल करीब आठ साल पहले अमेरिका चला गया था। वे पहले मिशिगन में रहते थे और बाद में शिकागो चले गए। रिश्तेदारों के अनुसार, महिला ने दो बार अपने पति को छोड़कर किसी दूसरे आदमी का साथ चुना था, जो उससे लगभग 10 साल छोटा था। उन्होंने बताया कि उन दौरान कपल की पांच साल की बेटी अपने पिता के साथ ही रही थी। आरोपी के परिवार ने बताया कि उसने कथित हत्या से कुछ दिन पहले बच्ची को भारत भेज दिया था। उनका दावा है कि घटना वाले दिन उसने अपनी पत्नी को फोन किया और कहा कि वह अपनी बेटी को साथ ले जाए। रिश्तेदारों का आरोप है कि यह अनुरोध महिला को अपार्टमेंट में बुलाने का एक बहाना था, जहाँ बाद में वह गंभीर रूप से घायल हालत में मिली। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। कथित हत्या से महीनों पहले का वीडियोइस साल मई में जब पत्नी ने उसे पहली बार छोड़ा था, तो आरोपी ने अपनी परेशानी के बारे में सबके सामने बात की थी। गुजराती में पोस्ट किए गए एक वीडियो में, उसने कथित तौर पर कहा था कि वह आत्महत्या करने के बारे में सोच रहा है और उसने रिश्तेदारों से दखल देने की अपील की थी। बाद में महिला वापस आ गई, जब कथित तौर पर उस युवा व्यक्ति के साथ उसका रिश्ता खत्म हो गया या खराब हो गया। हालांकि, परिवार के करीबी लोगों के अनुसार, यह सुलह ज़्यादा समय तक नहीं चली। रिश्तेदारों ने बताया कि इसके बाद वह फिर से अपने पति को छोड़कर चली गई। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Australia Social Media Ban का असर: Meta ने हटाए 7.5 लाख से ज्यादा Minor Accounts, रेगुलेटरी दबाव बढ़ा</title>
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<description><![CDATA[ फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी मेटा ने गुरुवार को कहा कि उसने 16 साल से कम उम्र के ऑस्ट्रेलियाई लोगों के 7,50,000 से ज़्यादा अकाउंट्स को हटा दिया है। कंपनी ने यह कदम किशोरों के अकाउंट्स पर दुनिया के पहले बैन के बाद उठाया है और रेगुलेटरी दखल की संभावना को देखते हुए और कार्रवाई करने का वादा किया है। कंपनी ने बताया कि उसने दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया बैन लागू होने से ठीक पहले से लेकर जून तक 4,62,000 संदिग्ध इंस्टाग्राम अकाउंट्स और 2,94,000 संदिग्ध फेसबुक अकाउंट्स को डीएक्टिवेट किया है। जनवरी तक हटाए गए अकाउंट्स की संख्या 3,31,000 इंस्टाग्राम अकाउंट्स और 1,73,000 फेसबुक अकाउंट्स थी।इसे भी पढ़ें: क्या भारत अब वैश्विक टेक कंपनियों के लिए ‘नियम मानो या रास्ता छोड़ो’ वाला संदेश दे रहा है?कंपनी ने कहा है कि वह उस कानून का पालन करना चाहती है जिसका उसने और दूसरे प्लेटफ़ॉर्म्स ने खुलकर विरोध किया था। यह बात ऐसे समय में कही गई है जब ऑस्ट्रेलिया का इंटरनेट रेगुलेटर उन प्लेटफ़ॉर्म्स (जिनमें मेटा के मालिकाना हक वाले प्लेटफ़ॉर्म भी शामिल हैं) के खिलाफ़ कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है, जिन पर कानून का पालन करने के लिए पर्याप्त कदम न उठाने का आरोप है। किसी भी दूसरे प्लेटफ़ॉर्म ने मेटा द्वारा बताई गई समय-सीमा से मेल खाने वाला कंप्लायंस डेटा जारी नहीं किया है, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई सरकार के आंकड़ों और कई स्वतंत्र अध्ययनों से पता चला है कि बैन के शुरुआती तीन महीनों में भी 16 साल से कम उम्र के 10 में से 8 से ज़्यादा बच्चे सोशल मीडिया पर मौजूद थे।इसे भी पढ़ें: Himachal Pradesh: &#039;विधवा-अनाथ सेस&#039; से महंगा होगा Petrol-Diesel, सुक्खू सरकार के फैसले पर सवालऑस्ट्रेलियाई सरकार ने यह अहम कानून बच्चों और किशोरों कीशारीरिक और मानसिक सेहत पर सोशल मीडिया के असर को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद प्रस्तावित किया था, और यह कानून 10 दिसंबर को लागू हुआ। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:50 +0530</pubDate>
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<title>Dharamshala में Tibet Tattoo Protest: चीन के Ethnic Unity Law के खिलाफ तिब्बतियों का अनोखा और बड़ा संघर्ष</title>
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<description><![CDATA[ लोब्गा रंगज़ेन की याद में 42वें दिन, तिब्बती यूथ कांग्रेस ने धर्मशाला में &#039;तिब्बत टैटू प्रोटेस्ट&#039; नाम का एक अनोखा और सांकेतिक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। चीन के &#039;एथनिक यूनिटी लॉ&#039; (जातीय एकता कानून) के विरोध में, लोब्गा रंगज़ेन ने 2 जुलाई को आत्मदाह कर लिया था; यह घटना चीन द्वारा इस कानून को लागू करने के ठीक एक दिन बाद हुई थी। शहीद लोब्गा ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के सामने खुद को आग के हवाले कर दिया था, और तब से दुनिया भर में तिब्बती लोग विरोध प्रदर्शन और अभियान चला रहे हैं।इसे भी पढ़ें: RG Kar Case Update: साक्ष्य मिटाने के आरोप में TMC MLA Nirmal Ghosh गिरफ्तार, &#039;जल्दबाजी&#039; में Cremation पर बड़ा एक्शनतिब्बती यूथ कांग्रेस (TYC) दुनिया भर में एक &#039;चेन प्रोटेस्ट&#039; (क्रमिक विरोध प्रदर्शन) भी कर रही है और धर्मशाला में &#039;चेन हंगर स्ट्राइक&#039; (क्रमिक भूख हड़ताल) आयोजित कर रही है, जो गुरुवार को अपने 26वें दिन में है। TYC चीन के &#039;एथनिक यूनिटी लॉ&#039; की निंदा करने के लिए कई तरह के अभियान चला रही है। इसी सिलसिले में, &#039;तिब्बत टैटू प्रोटेस्ट&#039; पहल का मकसद याद को एकजुटता के एक स्थायी प्रतीक में बदलना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्वतंत्र तिब्बत के मकसद के लिए लोब्गा रंगज़ेन का संदेश जीवित रहे।तिब्बती यूथ कांग्रेस के प्रवक्ता तेनज़िन धेसल ने ANI को बताया, &quot;संयुक्त राष्ट्र के सामने लोबगा रंगज़ेन के आत्मदाह को 42 दिन हो गए हैं, और तिब्बती यूथ कांग्रेस ने दुनिया भर में कई तरह के अहिंसक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए हैं। आज, हमने धर्मशाला में मुख्य मंदिर, त्सुगलागखांग के सामने टैटू-मेकिंग विरोध प्रदर्शन आयोजित किया है, और हम यह संदेश देना चाहते हैं कि हाल ही में हुए आत्मदाह के बलिदान को दुनिया और संयुक्त राष्ट्र के इतिहास से मिटाया नहीं जा सकता; ठीक वैसे ही, जैसे हमारे शरीर से टैटू को मिटाया नहीं जा सकता। इसलिए यह लोबगा रंगज़ेन को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने तथाकथित चीनी जातीय एकता कानून के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, और हम चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र तिब्बत के मुद्दे पर अपनी आवाज़ उठाए।इसे भी पढ़ें: नेपाल के पूर्व PM देउबा, जिन्हें Gen-Z के विरोध-प्रदर्शन में मार पड़ी थी, इलाज के लिए महीनों विदेश में रहने के बाद लौटे; उनका ज़ोरदार स्वागत हुआतिब्बत और उसकी आज़ादी के लिए लोबगा रंगज़ेन के बलिदान को श्रद्धांजलि के तौर पर, हिस्सा लेने वालों ने तिब्बत से जुड़े टैटू बनवाए। इन टैटू में ऐसे संदेश और प्रतीक थे जो तिब्बती आज़ादी, राष्ट्रीय पहचान, एकता और तिब्बत में चीन के जारी दमन के खिलाफ संघर्ष को दर्शाते थे। एक तिब्बती एक्टिविस्ट, रंगज़ेन धोंडुप ने ANI को बताया, &quot;तिब्बती यूथ कांग्रेस ने यह टैटू-मेकिंग विरोध प्रदर्शन आयोजित किया है, और मैं इसके लिए यहाँ आया हूँ। मैंने अभी अपनी बांह पर &#039;रंगज़ेन&#039; का टैटू बनवाया है, जिसका मतलब है &#039;आज़ाद तिब्बत&#039;। हम तब तक अपना संघर्ष जारी रखेंगे जब तक हम चीन से अपना देश वापस नहीं पा लेते। यह टैटू मुझे हमेशा याद दिलाएगा कि हमारे जीने का एक मकसद है, और यह दूसरों को भी प्रेरित करेगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:49 +0530</pubDate>
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<title>नेपाल के पूर्व PM देउबा, जिन्हें Gen&#45;Z के विरोध&#45;प्रदर्शन में मार पड़ी थी, इलाज के लिए महीनों विदेश में रहने के बाद लौटे; उनका ज़ोरदार स्वागत हुआ</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा, जिनकी पिछले साल सितंबर में &#039;जेन-ज़ी&#039; (Gen-Z) विरोध प्रदर्शनों के दौरान पिटाई हुई थी, इलाज के लिए लगभग छह महीने विदेश में रहने के बाद गुरुवार को काठमांडू लौटे। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका ज़ोरदार स्वागत किया। 80 वर्षीय देउबा इलाज के लिए 25 फरवरी को अपनी पत्नी और पूर्व मंत्री आरज़ू राणा देउबा के साथ सिंगापुर गए थे। वे गुरुवार को अकेले नेपाल लौटे। एयरपोर्ट पर देउबा का स्वागत म्यूज़िकल बैंड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ किया गया। नेपाली कांग्रेस के &#039;नॉन-एस्टेब्लिशमेंट&#039; गुट (पार्टी के भीतर का वह गुट जो मौजूदा नेतृत्व से अलग राय रखता है) की राष्ट्रीय बैठक में शामिल होने के लिए काठमांडू आए पार्टी कार्यकर्ता भी उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट पर जमा हुए थे।त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर देउबा का इंतज़ार करते हुए नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बिमलेंद्र निधि ने ANI से कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इलाज के लिए विदेश गए थे, क्योंकि विरोध प्रदर्शनों के दौरान वे और उनकी पत्नी घायल हो गए थे।इसे भी पढ़ें: Nepal ने खो दिये Sugauli Treaty के Original Document ! अब भारत के साथ कैसे सुलझायेगा सीमा विवाद?निधि ने कहा, &quot;वे इलाज के लिए सिंगापुर गए थे। जैसा कि हम सभी जानते हैं, पिछली घटना में उन्हें बेरहमी से पीटा गया था और वे तथा उनकी पत्नी घायल हो गए थे; उनके सिर पर चोटें आई थीं। आज वे काठमांडू लौट रहे हैं। नेपाली कांग्रेस के हज़ारों साथी उनके स्वागत के लिए यहाँ मौजूद हैं; वे घर जाएँगे और कल हम नेपाली कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित कर रहे हैं, जिसमें वे मुख्य अतिथि होंगे और हमारी पार्टी को संबोधित करेंगे।&quot;पिछले साल 9 सितंबर को &#039;जेन-ज़ी&#039; (Gen-Z) विरोध प्रदर्शन के दौरान एक भीड़ ने देउबा के घर पर हमला किया था और उनकी पिटाई की थी। वे और आरज़ू राणा देउबा गंभीर रूप से घायल हो गए थे और बाद में इलाज के लिए देश छोड़कर चले गए थे।बाद में इस जोड़े को हांगकांग में देखा गया था। उन्होंने अपनी गतिविधियों या इलाज के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी नहीं दी है, बस अलग-अलग समय पर यह कहा है कि वे इलाज के लिए विदेश में थे। उन्होंने यह भी नहीं बताया है कि वे किस बीमारी का इलाज करवा रहे थे।इसे भी पढ़ें: Kathmandu Airport पर सुरक्षा घेरा तोड़ भागने की कोशिश, 18kg Thai Marijuana के साथ Punjab के दो तस्कर काबूदेउबा की वापसी नेपाली कांग्रेस के &#039;नॉन-एस्टेब्लिशमेंट&#039; गुट की राष्ट्रीय बैठक के समय हो रही है, जो 14 से 16 अगस्त तक काठमांडू में आयोजित होने वाली है। शुक्रवार को उनके इस बैठक को संबोधित करने का कार्यक्रम है। उनकी वापसी और राष्ट्रीय बैठक ऐसे समय में हो रही है जब नेपाली कांग्रेस के भीतर आंतरिक विवाद चल रहा है, खासकर पार्टी नेतृत्व और संगठनात्मक पुनर्गठन को लेकर। नेपाली कांग्रेस की केंद्रीय समिति के सूचना, संचार और प्रचार विभाग के प्रमुख मीन बहादुर विश्वकर्मा ने कहा कि देउबा का राजनीतिक अनुभव विभिन्न राजनीतिक ताकतों को एक साथ लाने में मदद कर सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:49 +0530</pubDate>
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<title>Markapuram में 330 फीट लंबे तिरंगे के साथ निकली Har Ghar Tiranga रैली, ASP Navjyoti Mishra ने युवाओं को किया प्रेरित</title>
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<description><![CDATA[ मरकापुरम शहर में &#039;हर घर तिरंगा&#039; कार्यक्रम के तहत एक भव्य तिरंगा रैली आयोजित की गई, जिसमें छात्रों और युवाओं ने स्वतंत्रता दिवस के जश्न में उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह रैली मरकापुरम जिले की ASP नवज्योति मिश्रा की अगुवाई में आयोजित की गई थी। रैली ज़िला परिषद बॉयज़ हाई स्कूल से शुरू हुई और चार माडा सड़कों से गुज़री। रैली के दौरान 330 फ़ीट लंबा विशाल तिरंगा ले जाया गया। नवज्योति मिश्रा ने रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर बोलते हुए, उन्होंने &#039;विकसित भारत&#039; बनाने के लक्ष्य के साथ देश के विकास में योगदान देने के लिए सभी से अपील की। ​​उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे भारत की आज़ादी के लिए लड़ने वाली महान हस्तियों के आदर्शों और आकांक्षाओं को आगे बढ़ाएं और देश के विकास में सक्रिय रूप से भाग लें।इसे भी पढ़ें: CM Mohan Yadav ने UCC Bill पारित होने की राज्यपाल मंगुभाई पटेल को जानकारी दीमिश्रा ने पत्रकारों को बताया, तिरंगा स्वतंत्रता दिवस समारोह के हिस्से के रूप में, एक तिरंगा रैली आयोजित की गई थी। इसमें छात्रों और युवाओं सहित कई लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसका विषय &#039;विकसित भारत के लिए युवा&#039; था। इसी आधार पर, हमने युवा पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए यह तिरंगा रैली आयोजित की क्योंकि वे इस देश का भविष्य हैं। इसलिए उन्होंने इसमें भाग लिया। साथ ही, हर दिन एक कार्यक्रम हो रहा है। कल, हम एक साइकिल रैली आयोजित करने की भी योजना बना रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Srinagar में Tiranga Yatra का LG Manoj Sinha ने किया नेतृत्व, कश्मीर में स्वतंत्रता दिवस का उत्साहमार्कापुरम रैली, स्वतंत्रता दिवस से पहले पूरे आंध्र प्रदेश में आयोजित की जा रही &#039;हर घर तिरंगा&#039; गतिविधियों की एक बड़ी श्रृंखला का हिस्सा थी। NTR जिले में, जिला प्रशासन ने भी गुरुवार को एक बड़ी &#039;हर घर तिरंगा&#039; रैली आयोजित की, जिसमें छात्रों और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। रैली जिला कलेक्टर कार्यालय से इंदिरा गांधी स्टेडियम तक निकाली गई, जिसमें प्रतिभागियों ने तिरंगा ले रखा था। NTR जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट जी. लक्षमीशा ने कहा कि इस बड़ी रैली का उद्देश्य नागरिकों को स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेने और आज़ादी के बाद से देश की यात्रा पर विचार करने के लिए प्रेरित करना था। लक्षमीशा ने कहा हम पूरे जिले में एक बड़ी रैली आयोजित कर रहे हैं। यह हर नागरिक को इस स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा बनने और उस संघर्ष का जश्न मनाने के साथ-साथ आज़ादी के 100वें वर्ष के लिए लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करेगा।इसे भी पढ़ें: UP News: हमीरपुर में जर्जर सड़क के खिलाफ &#039;Gen Alpha&#039; का हल्लाबोल, कलेक्ट्रेट पर DM Gate के बाहर डटे छात्रउन्होंने कहा कि भारत की आज़ादी के 100वें वर्ष तक के समय का उपयोग जन-जागरूकता बढ़ाने और देश के विकास की दिशा में सामूहिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए किया जाना चाहिए। कलेक्टर ने कहा कि इसका व्यापक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत के एक विकसित देश के रूप में उभरने के लिए निर्धारित लक्ष्य तब तक हासिल कर लिए जाएं जब तक देश अपनी आज़ादी की शताब्दी तक पहुंचे। हर घर तिरंगा&#039; पहल नागरिकों को अपने घरों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने और भारत की आज़ादी का जश्न मनाने वाली गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करती है, साथ ही तिरंगे के साथ एक व्यक्तिगत जुड़ाव भी पैदा करती है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:49 +0530</pubDate>
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<title>LAC पर भारत&#45;चीन सेना की झड़प? बीजिंग से क्या जवाब आया</title>
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<description><![CDATA[ भारत चीन सीमा पर एक बार फिर हलचल की खबरों के बीच चीन का एक बड़ा बयान सामने आया है। इस बयान के बाद कई सवालों के जवाब मिलने के बजाय और सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल अरुणाचल प्रदेश के पास चीनी सेना की गतिविधियां बढ़ने और हाल में भारतीय चीनी सैनिकों के आमने-सामने आने की खबरों पर जब चीन के प्रवक्ता से सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा लेकिन बस इतना कहा गया कि फिलहाल चीन भारत सीमा पर हालात आमतौर पर स्थिर हैं। यानी चीन ने ना तो किसी नई सैन्य घटना की पुष्टि की और ना ही अरुणाचल प्रदेश के पास अपनी सेना की गतिविधियां बढ़ने की खबरों को साफ तौर पर खारिज किया।इसे भी पढ़ें: क्या था माओ का 5 फिंगर प्लान, जिसे फॉलो करते हुए जिनपिंग बढ़ा सकते हैं भारत की टेंशनचीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोज याकुन से मीडिया ने सीधा सवाल किया। उनसे पूछा गया कि भारतीय सोशल मीडिया पर चीन की सीमा के पास बड़ी सैन्य गतिविधियों के वीडियो सामने आ रहे हैं। साथ ही भारत सरकार के एक प्रवक्ता ने हाल की सीमा घटना से इंकार नहीं किया है। ऐसे में क्या हाल में भारत और चीन के बीच कोई सैन्य घटना हुई है और क्या चीन ने अरुणाचल प्रदेश के पास अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं। चीनी प्रवक्ता ने कहा कि चीन भारत सीमा पर हालात फिलहाल आमतौर पर स्थिर हैं। चीन और भारत ने पिछले हफ्ते चीन भारत सीमा मामलों पर बातचीत और तालमेल के लिए बने वर्किंग मैकेनिज्म की 36वीं बैठक की। दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य चैनलों के जरिए बातचीत बनाए रखने और सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए। लेकिन यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि इतने सीधे सवाल के बावजूद चीन ने अरुणाचल प्रदेश के पास अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ने की खबरों पर कोई जवाब नहीं दिया। इसे भी पढ़ें: Arunachal Pradesh के 27 स्थानों के मानक नाम आधिकारिक Map में शामिल किए गएदरअसल पिछले कुछ वक्त में सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें फैली और कई तरह के दावे किए गए कि कुछ दिन पहले अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसेसरी जिले में तिब्बत से सटे टैक्सिंग इलाके के पास भारतीय और चीनी सेना की पेट्रोलिंग टीमें आमने-सामने आ गई थी और इसी के बाद तमाम तरह की खबरें फैलने लगी। लेकिन आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि किसी ने नहीं की और अब जब चीनी प्रवक्ता से सीधा सवाल पूछा गया तो उन्होंने भी बस इतना कह के बात पलट दी कि फिलहाल भारत चीन सीमा पर सब कुछ स्थिर है। आपको बता दें भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर पुराना विवाद है। चीन इस पूरे राज्य पर अपना गलत दावा करता है और इसे दक्षिणी तिब्बत बताता है। चीन इसे जंगना कहता है। वहीं बार-बार भारत चीन के इन दावों को पूरी तरह खारिज करता है और साफ़ कहता है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है। भारत ने हाल ही में कहा था कि चीन के साथ सीमा से जुड़े मामलों को वो बेहद गंभीरता से लेता है। नई दिल्ली ने साफ किया कि एलएसी पर शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे जरूरी है क्योंकि सीमा पर हालात दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करते हैं। आपको बता दें भारत ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं के आधिकारिक नाम तय करने को लेकर चीन की आपत्ति भी खारिज कर दी। भारत का कहना है कि नाम बदलने या किसी तरह का दावा करने से जमीन पर वास्तविकता नहीं बदल जाएगी।इसे भी पढ़ें: India-China Relation क्या वाकई सुधर रहे हैं? चीन में रह रहे भारतीयों ने चौंकाने वाला सच उजागर किया है! दरअसल यह पूरा घटनाक्रम इसलिए जरूरी है क्योंकि भारत और चीन के रिश्ते 2020 की गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद बुरी तरह प्रभावित हुए थे। इसके बाद दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने के लिए कई दौर की बातचीत की। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:48 +0530</pubDate>
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<media:keywords>LAC, पर, भारत-चीन, सेना, की, झड़प, बीजिंग, से, क्या, जवाब, आया</media:keywords>
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<title>NCB Mumbai का Interstate Drug Network पर बड़ा एक्शन, Gujarat से Mumbai तक फैला था अवैध कारोबार</title>
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<description><![CDATA[ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) मुंबई ने एक अंतर-राज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। लगातार दो ऑपरेशन्स में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया और 1.060 किलोग्राम चरस (कैनाबिस) के साथ-साथ प्रिस्क्रिप्शन ओपिओइड्स (डॉक्टर की सलाह पर मिलने वाली नशीली दवाएं) की भारी खेप ज़ब्त की गई। पहले ऑपरेशन में NCB मुंबई ने 8 अगस्त को गुजरात और मुंबई के बीच चलने वाली एक यात्री बस को रोका और मुंबई में N शेख नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया।इसे भी पढ़ें: Mumbai बम धमाका: विशेष कोर्ट ने आरोपी जैनुल शेख को जमानत दी, 15 साल से जेल में था बंदअधिकारियों ने उसके पास से कोडीन-बेस्ड कफ सिरप (CBCS) की 1,080 बोतलें ज़ब्त कीं, जिनका वज़न 108 किलोग्राम था। जांच से पता चला कि पकड़े न जाने के लिए इस प्रतिबंधित सामान को अंतर-राज्यीय यात्री बसों के ज़रिए ले जाया जा रहा था और इसे मुंबई, भिवंडी और आस-पास के इलाकों में रिटेल में बेचा जाना था। मौके पर पूछताछ के दौरान, शेख ने गुजरात के एक डिस्ट्रीब्यूटर की पहचान बताई। इसके बाद NCB की एक टीम तुरंत गुजरात गई और काफी छानबीन के बाद वडोदरा में उस डिस्ट्रीब्यूटर और उसके गोदाम का पता लगाया। आगे की तलाशी में CBCS की 13,938 बोतलें और ट्रामाडोल की 12,240 गोलियां ज़ब्त की गईं। जांचकर्ताओं ने पाया कि NRx (डॉक्टर की सलाह पर मिलने वाली नशीली दवाएं) दवाओं के डायवर्जन (गलत तरीके से सप्लाई) का पता छिपाने के लिए कई CBCS बोतलों के बैच नंबरों के साथ छेड़छाड़ की गई थी। NCB अधिकारियों ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज़ भी ज़ब्त किए, जिनमें NRx दवाओं को डायवर्ट करने के लिए इस्तेमाल किए गए नकली इनवॉइस भी शामिल थे। आगे की जांच से पता चला कि एन. शेख, जो मुख्य रूप से महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी इलाके से काम करता था, उसे पहले महाराष्ट्र पुलिस ने NDPS एक्ट के तहत एक अलग मामले में गिरफ्तार किया था। गुजरात का यह डिस्ट्रीब्यूटर पुलिस द्वारा दर्ज किए गए पुराने NDPS मामलों में भी वांछित है। 12 अगस्त को एक अलग ऑपरेशन में खास जानकारी के आधार पर, NCB मुंबई ने मुंबई के घाटकोपर में AJ शेख नाम की महिला के घर की तलाशी के दौरान 1.060 किलोग्राम चरस ज़ब्त की।इसे भी पढ़ें: Greater Noida से 2 नाइजीरियाई महिलाएं गिरफ्तार, Mumbai ATS ने जब्त किया 6 करोड़ का मादक पदार्थचरस को घर के सामान के बीच छिपाकर रखा गया था और इसे हाल ही में स्थानीय स्तर पर बेचने के लिए हासिल किया गया था। पूछताछ से पता चला कि ड्रग्स के खिलाफ सख्त रोकथाम और आने वाले त्योहारों के मौसम के कारण चरस की आवक काफी कम हो गई थी, जिससे AJ शेख और उसके साथियों ने इस मौके का फायदा उठाने और इसे ऊंचे दामों पर बेचने के लिए यह प्रतिबंधित सामान हासिल किया।इसे भी पढ़ें: Rupee शुरुआती कारोबार में 7 पैसे कमजोर होकर 95.40 प्रति US Dollar पर आ गयाइस नेटवर्क में शामिल अन्य मुख्य साथियों की पहचान कर ली गई है और उन्हें खोजने और पकड़ने की कोशिशें जारी हैं। इन पदार्थों से जुड़े खतरों के बारे में बताते हुए अधिकारियों ने कहा कि ट्रामाडोल और CBCS सख्त रूप से डॉक्टर की सलाह पर दी जाने वाली ओपिओइड दवाएं हैं जिनका वैध चिकित्सीय उपयोग होता है। ट्रामाडोल दर्द को नियंत्रित करने के लिए सेंट्रल नर्वस सिस्टम (CNS) में बदलाव करता है, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के इसे लेने से सांस लेने में दिक्कत और दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो जानलेवा साबित हो सकती हैं। CBCS, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर खांसी और सर्दी के इलाज के लिए किया जाता है, में कोडीन होता है। कोडीन एक ओपिओइड है जो CNS पर असर डालता है और इसकी अधिक मात्रा लेने से सांस लेने में गंभीर दिक्कत, लिवर और किडनी को नुकसान या मौत हो सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:48 +0530</pubDate>
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<title>सेना की वर्दी में आए पुतिन, उठाया कागज, भारत पर बड़ा खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन अचानक सेना की वर्दी में आए और यह महत्वपूर्ण कागज पढ़ने लगे। इस कागज को पढ़ने के बाद पुतिन ने ऐसा ऐलान किया जो कई देशों को परेशान कर सकता है। पुतिन ने भारत का नाम लेकर बहुत बड़ा ऐलान कर दिया है। दरअसल भारत से करीब 7000 किमी दूर एक इलाका है जहां दुनिया की महाशक्तियों के बीच एक बहुत बड़ी जंग शुरू हो चुकी है। बर्फ से ढका यह इलाका आर्कटिक है। पुतिन ने कहा है कि आर्कटिक एक नया जिओपॉलिटिकल फ्रंटियर बन रहा है और अब भारत इसका फायदा उठाने के लिए रूस के साथ आ चुका है। पुतिन ने कहा है कि भारत अब उन देशों में शामिल हो चुका है जो नॉर्दन सी रूट पर कदम रखेंगे। इसे भी पढ़ें: Russia के नोवोरोस्सियस्क नौसैनिक अड्डे पर हमले का Zelenskyy का दावा, बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्तदरअसल रूस भारत को उस आर्कटिक पर लेकर पहुंचा है जहां पर कई बार तापमान -50° तक गिर जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में ग्लोबल वार्मिंग के चलते इस इलाके का तापमान बढ़ने लगा। बर्फ पिघलने लगी और बर्फ पिघलने के बाद कई नए रास्ते खुलने शुरू हो गए। बर्फ पिघलने की वजह से आर्कटिक से आने-जाने के नए शिपिंग रूट तैयार हो रहे हैं। इन नए शिपिंग रूट्स का इस्तेमाल अब व्यापार, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए किया जाएगा। अब इन्हीं शिपिंग रूट्स पर दावा ठोकने के लिए रूस ने भारत के साथ एक बड़ा प्लान तैयार कर लिया है। आर्कटिक की बर्फ पिघलने से तीन मुख्य शिपिंग रूट्स तैयार हो रहे हैं। इनमें पहला है नॉर्थ वेस्ट पैसेज, दूसरा है ट्रांस पोलर सी रूट और तीसरा है नॉर्दन सी रूट। भारत के लिए नॉर्दन सी रूट सबसे महत्वपूर्ण है। अभी तक इस इलाके में भारत ने सिर्फ एक उंगली रखी है लेकिन अब पैर जमाने की बारी आ गई है। इसे भी पढ़ें: BRICS पेमेंट सिस्टम पर RBI का बड़ा ऐलान, क्या है CBDC का मास्टर प्लानआपको बता दें कि आर्कटिक के विशाल बर्फीले इलाकों को लेकर रूस, अमेरिका, यूरोप और चीन के बीच वर्चस्व की जंग शुरू हो चुकी है। यह इलाका भारत से दूर है, लेकिन भारत के लिए बहुत जरूरी है। इसीलिए अब रूस भारत को इस इलाके में रणनीतिक बढ़त दिलवा सकता है। आपको बता दें कि आर्कटिक किसी एक देश का नहीं है। आर्कटिक आठ तटीय देशों में बंटा हुआ है। जिनमें कनाडा, डेनमार्क, ग्रीनलैंड, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, रूस, स्वीडन और अमेरिका शामिल हैं। डॉनल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा इसीलिए करना चाहते हैं ताकि आर्किटिक में अमेरिका की पकड़ और दावेदारी मजबूत हो जाए। भारत इस इलाके में फिलहाल हिमाद्री रिसर्च स्टेशन के जरिए साइंटिफिक रिसर्च का काम कर रहा है। लेकिन भारत अब इस इलाके में अपनी मौजूदगी को बढ़ाना चाहता है। लेकिन आपके मन में सवाल होगा कि आर्कटिक के पीछे इतनी बड़ी जंग शुरू क्यों हुई है? ऐसे में आपको बता दें कि आर्किटिक की बर्फीली जमीन के नीचे रेयर अर्थ, क्रिटिकल मिनरल्स, तेल और गैस के असीम भंडार हैं। आर्कटिक की जमीन के नीचे अरबों का खजाना दबा है। ऐसे में जब इस इलाके की बर्फ पिघल रही है तो खजाना निकालना भी आसान हो गया है। बर्फ पिघल रही है तो आर्कटिक तक पहुंचना भी आसान हो रहा है। ऐसे में रूस भारत के साथ मिलकर बहुत एक्टिव हो गया है। रूस इस इलाके में बड़ा दावेदार है। लेकिन रूस के पास इतने रिसोर्सेज नहीं है कि वो अकेले ही इस इलाके पर अपना वर्चस्व बना पाए क्योंकि यहां पर रूस अमेरिका और यूरोपीय दुश्मनों से घिरा है।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:48 +0530</pubDate>
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<title>भारत को शुक्रिया बोलते ही बलूचों पर पाक ने की Fighter Jet से बमबारी, अब होगा तगड़ा पलटवार?</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अपने ही नागरिकों पर अंधाधुंध बमबारी की जिसमें 20 से ज्यादा निर्दोष लोगों की जान चली गई। लेकिन इस बार बलूचिस्तान चुप नहीं बैठा। एक तरफ बीएलए ने पाकिस्तान के खिलाफ आर-पार की जंग छेड़ दी है तो दूसरी तरफ बलूच नेताओं ने सीधे भारत से मदद की गुहार लगा दी है और भारत का शुक्रिया भी अदा किया। 11 अगस्त को बलूचिस्तान ने अपनी आजादी का जश्न मनाया लेकिन पाकिस्तान ने तोहफे में बम फोड़े वहां वो भी अपने फाइटर जेट से। दरअसल बलूच मीडिया ने वह खौफनाक तस्वीरें जारी की हैं जिन्हें देखकर आपकी रूह जरूर कांप जाएगी। द बलूचिस्तान पोस्ट के मुताबिक मंगलवार देर रात से बुधवार तड़के तक पाकिस्तान की वायु सेना के विमानों ने सुराब के गोंधन इलाके को निशाना बनाया। और स्थानीय संगठनों का कहना है कि हमला किसी सैन्य ठिकाने पर नहीं बल्कि आम गरीब बलूचों के घरों पर किया गया। अब इस अंधाधुंध बमबारी में कम से कम 20 से ज्यादा आम नागरिकों की जान चली गई और दर्जनों घायल बताए जा रहे हैं और कई घर तो मलवे के ढेर में तब्दील हो गए हैं। यह हमला तब हुआ जब पूरे प्रांत में पाक आर्मी के खिलाफ गुस्सा अपने चरम पर था। इसे भी पढ़ें: Jan Gan Man: &#039;आजादी&#039; का जश्न मनाते हुए झूम उठा पूरा Balochistan ! बीच-बीच में बाधा डाल रहा है Pakistanपाकिस्तान अक्सर इन हमलों को आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन का नाम देता है। लेकिन क्या अपने ही लोगों पर बम गिराना आतंकवाद का खात्मा है या उसे और बढ़ावा देना है यह तो तय करना है पूरी दुनिया को और यूएन जैसे संगठन को अब सवाल क्या है सेना का दावा बनाम जमीनी हकीकत क्या है वो भी चलिए हम ग्राफिक्स के जरिए जान लेते हैं। देखिए पाकिस्तानी सेना ने अभी तक सुराब के हमलों पर चुप्पी साधी है। लेकिन मंगलवार को उन्होंने एक बयान जरूर जारी किया। आईएसपीआर यानी कि पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग का दावा है कि उन्होंने पंजगुर जिले में एक इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशन चलाया है जिसमें पांच कथित आतंकवादियों को मार गिराया गया। अब सेना ने हथियार और आईडीज बरामद करने का दावा भी किया है। लेकिन बड़ा सवाल तो यह है कि अगर पंजगुर में ऑपरेशन सफल था तो सुरा में आम नागरिकों पर बमबारी क्यों हुई? अब बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सेना अपनी हार का बदला आम जनता से ले रही है ताकि डर का माहौल पैदा किया जा सके। अब इस दमन के बीच बलूच लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने पाकिस्तान को हिला कर रख दिया है। बीएलए के प्रवक्ता जियान बलूच ने हाल ही में घोषणा की कि 1 अगस्त से 8 अगस्त के बीच उन्होंने पूरे प्रांत में 38 बड़े ऑपरेशंस को अंजाम दिया। इन हमलों में 32 पाकिस्तानी सैनिकों और उनके ऑपरेटिव मारे गए। इसे भी पढ़ें: &#039;आजादी&#039; का जश्न मना रहे बलूचों पर पाकिस्तान ने की Air Strike, जवाब में Baloch Liberation Army ने Pakistan Army के छक्के छुड़ाएबीएलए ने ना केवल सेना के काफिलों और बख्तरबंद गाड़ियों को निशाना बनाया बल्कि रेलवे लाइनों, पुलिस चौकियों और कमर्शियल गाड़ियों को भी उड़ा दिया। अब जिहान बलोच का संदेश बिल्कुल साफ है कि जब तक पाकिस्तान बलूचिस्तान को आजाद नहीं मानता है ये जंग नहीं रुकेगी। अब यह लड़ाई गोरिल्ला युद्ध से कहीं आगे निकल चुकी है। दोस्तों अब इस पूरी खबर में सबसे बड़ा मोड़ है भारत का। जी हां, बहुत बड़ा जिक्र है भारत का। 11 अगस्त को जिसे बलूचिस्तान अपना असली आजादी दिवस मानता था, स्वतंत्रता दिवस मानता था, बलूच नेताओं ने स्पष्ट कर दिया था उस दिन कि वे अब पाकिस्तान के कब्जे को एक पल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। दिग्गज बलूच नेता मीरियर बलूच ने सोशल मीडिया पर भारत का आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि भारतीय मीडिया और भारत के विदेश मंत्रालय एमए ने जिस तरह बलूचिस्तान के दर्द को दुनिया के सामने रखा उसके लिए वह ऋणी हैं। उन्होंने भारत के सैद्धांतिक रुख का समर्थन किया यह पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा झटका है क्योंकि उसे डर है कि अब बलूचिस्तान का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर और भी मजबूती से उठेगा और यह सच्चाई भी है।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:47 +0530</pubDate>
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<title>अब कैंची अटैक की तैयारी में हूती, सऊदी पर होगा दो तरफा हमला?</title>
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<description><![CDATA[ ईरान हिमायती इस्लामिक रेजिस्टेंस यानी इसराइल के खिलाफ प्रतिरोध की धुरी के एक अहम ग्रुप यमन के अंसारुल्लाह को छेड़कर ऐसा लग रहा है सऊदी अरब ने मुसीबत मोल ले ली है। यमन के हूतियों ने लाल सागर सऊदी के लिए बैन कर रखा है। ना सिर्फ बैन है बल्कि हमले भी अंजाम दे रहे हैं। अब मीडिया रिपोर्ट और सऊदी अधिकारियों के हवाले से खबर है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल एक्सपोर्टर सऊदी अरब पर एक ऐसा खौफनाक खतरा मंडरा रहा है जिसने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की नींद उड़ा दी है। अब मीडिया रिपोर्ट्स और सऊदी अधिकारियों के हवाले से खबर है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल एक्सपोर्टर सऊदी अरब पर बेहद खौफनाक खतरा मंडरा रहा है। खबर है कि रेजिस्टेंस के ग्रुप सऊदी पर एक साथ दो तरफ से अटैक कर सकते हैं। सऊदी अरब के नॉर्थ बॉर्डर से हसदुशाबी, कताइयब हिजबुल्ला, अल नुजवा और कताइयब सैयद अल शोहदा जैसी तंजीमे हमला बोलेंगी और साउथ की तरफ से यमन पर कब्जा जमाए बैठे हूतियों की प्रोफेशनल आर्मी मिसाइलों, ड्रोंस और लंबी दूरी के रॉकेटों से सऊदी अरब के खिलाफ मोर्चा खोल देंगी। इसे भी पढ़ें: Fake Intelligence से बढ़कर है खतरा, Strait of Hormuz पर Donald Trump के दावे को Araghchi ने नकारावैसे भी हूतियों और सऊदी अरब की दुश्मनी 15 साल से भी ज्यादा पुरानी है। जब सऊदी पर उत्तर और दक्षिण की तरफ से एक साथ सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलों से हमले होंगे तो सऊदी अरब में लगा अमेरिकी डिफेंस का चक्रव्यूह टूट जाएगा। यह कैंची की तरह काटने वाला अटैक होगा। जैसे कैंची के दो अलग-अलग सिरे साथ जुड़ते हैं तो कोई भी चीज कट जाती है। ठीक उसी तरह सऊदी अरब को काटने की तैयारी है। हो सकता है सऊदी को पहले से इस प्लान की भनक हो तभी तो उसने पिछले दिनों अमेरिका के साथ मिलकर इराक में हजो शाबी के ठिकानों पर भीषण हमले अंजाम दिए थे। खुफिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस हमले का असली मकसद सऊदी अरब की इकोनमी की कमर तोड़ना है और उसके बुनियादी ढांचे को तबाह करना है। सऊदी अरब के एक सीनियर अफसर ने सीएनएन से बातचीत के दौरान इस बात का खुलासा किया है ऐसा मीडिया रिपोर्ट दावा करती हैं। इसे भी पढ़ें: Iran और अमेरिका हमारे दोस्त, फिर पाकिस्तान कैसे बना Mediator? Foreign Policy पर राहुल गांधी ने PM मोदी को घेरावो कहते हैं कि उन्हें खुफिया एजेंसियों से मल्टीपल कोऑर्डिनेटेड अटैक की कई रिपोर्ट्स मिली हैं। इन रिपोर्ट्स में साफ कहा गया है कि यह हमले आने वाले कुछ समय में हो सकते हैं। गौरतलब है कि हूं को ला रहे एक प्लेन पर सऊदी अरब ने उस वक्त हमला किया था जब वह ईरान से आयतुल्लाह खामने के जनाजे में शामिल होकर लौट रहे थे। वो हमला तो फेल हो गया लेकिन हूती सऊदी अरब के पीछे पड़ गए हैं और यह जंग अब बड़ी होती जा रही है। पानी में ऊपर की ओर उतर आया और समंदर से निकलकर किनारों पर बहता हुआ यह तेल देखिए। ऐसा लग रहा है जैसे समंदर से तेल की झील फूट पड़ी हो। यह ईरान का समुद्र है। ऐसा नहीं है कि ईरान का समंदर तेल छोड़ने लगा है। दरअसल, यह उन जहाजों और तेल टैंकरों से निकला ऑयल है जिन्हें ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मोस में उड़ा दिया था या डुबो दिया। यह ईरान के दुश्मनों के उन जहाजों का तेल है जिन्हें उसकी परमिशन के बिना आबनाए होमोस से गुजारा जा रहा था। ईरान समर्थित सोशल मीडिया हैंडल्स पर यह वीडियो गश्त कर रहा है। जिसमें समंदर के किनारों पर तेल ही तेल नजर आता है। ईरान में आईआरजीसी नेवी ने पहले भी वीडियो दिखाते हुए कई दावे किए हैं और कई वीडियो में दिखाया गया है कि अगर स्टेट ऑफ हुर्मस पर ईरान को इग्नोर करके कोई भी जहाज निकालने की कोशिश की गई तो अंजाम यह होगा। जो लोग अमेरिका के आर्डर को फॉलो कर रहे हैं उनका हश्र यह है।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:47 +0530</pubDate>
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<title>इधर डिफेंस डील, उधर इजरायल ने तुर्की&#45;पाक को ठोका</title>
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<description><![CDATA[ एक तरफ जहां पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की ने आपस में गठबंधन किया, डिफेंस डील किया और शेखी बघारी तो दूसरी तरफ इजराइल ने भी तुर्की और पाकिस्तान के खिलाफ ऐसा लग रहा है कि मोर्चा खोल दिया है। इजराइल के विदेश मंत्रालय ने जहां ट्वीट करके तुर्कियों पर यह आरोप लगाया है कि तुर्की लगातार आतंकी संगठन हमास को फलने फूलने की जगह दे रहा है तो दूसरी तरफ जो तुर्की का दूतावास भारत में मौजूद है। हमास का फुटप्रिंट अब पाकिस्तान में खूब बढ़ रहा है और यह चिंता का कारण है। सबसे पहले बात कर लेते हैं तुर्की पर लगे आरोप की। तो इजराइल के विदेश मंत्रालय ने एक रिपोर्ट ट्वीट करते हुए लिखा है कि तुर्की एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ खड़े होने के बजाय जिहादी हमास को पनाह दे रहा है। रिपोर्ट से पता चलता है कि फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन हमास अपनी ज्यादातर गुप्त गतिविधियां जिसमें प्लानिंग साइबर ऑपरेशन शामिल है उसको तुर्की के इलाके में ले जा रहा है। इसे भी पढ़ें: Middle East Crisis | लेबनान की संप्रभुता और Hezbollah का खात्मा, US General के साथ President Aoun की बड़ी चर्चाजो देश आतंकवादियों को प्लानिंग संगठन बनाने लोगों को भर्ती करने की जगह देता है वो आतंकवाद को बढ़ावा देता है। इस पूरे मामले पर जो कान है उसकी एक रिपोर्ट भी सामने है। उसमें कहा गया है कि हमास अपनी कुछ संगठनात्मक गतिविधियां जिसमें प्लानिंग साइबर विभाग शामिल है उसे तुर्की शिफ्ट कर रहा है। फिलिस्तीनी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि तुर्की में ट्रांसफर होने वाली गतिविधियों में हमास की ज्यादातर गुप्त गतिविधियां शामिल है। जबकि क़तर इस आतंकवादी संगठन के नेतृत्व और सार्वजनिक गतिविधियों की मेजबानी करता रहेगा। कान के मुताबिक क़तर में सुरक्षा बलों ने हमास के नेताओं की अपनी इलाके में आवाजाही पर रोक लगा दी है और उन्हें किसी भी आधिकारिक बैठक के लिए इजाजत लेने की जरूरत होती है। यह हमास के खालील अल हया को अपना नेता नियुक्त करने के फैसले का नतीजा है जिसे क़तर ने पसंद नहीं किया है। इसके बजाय क़तर ने खालिद मशाल को समर्थन किया जिसके ईरान समर्थित अल हया की तुलना में क़तर के करीबी संबंध थे।इसे भी पढ़ें: अब कैंची अटैक की तैयारी में हूती, सऊदी पर होगा दो तरफा हमला?वहीं इजराइल की तरफ से पाकिस्तान पर भी आरोप लगाया गया है। एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह कहा गया है कि 7 अक्टूबर को इजराइल पर हमास के हमले के बाद से कई सूत्रों ने दक्षिण एशिया में हमास की बढ़ती मौजूदगी की ओर इशारा किया है। हमास और पाकिस्तानी समर्थित आतंकवादी समूहों के बीच मजबूत संबंध आतंकवाद विरोधी प्रयासों के लिए गंभीर चुनौती पेश करते हैं। इजराइल ने जिस रिपोर्ट को शेयर किया है उसमें लिखा गया है कि नरसंहार के बाद लगातार हमास के प्रमुख नेता पाकिस्तान की यात्रा पर हैं। जहां उन्हें खुले तौर पर सार्वजनिक रैलियों को संबोधित करना और फिलिस्तीन के समर्थन में सम्मेलनों में भाग लिया और वहीं पर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की प्लानिंग भी हो रही है। साफ तौर पर इज़राइल के निशाने पर तुर्की और पाकिस्तान है। डिफेंस डील के बाद इज़राइल का इस तरह से खुलेआम यह लिखना, यह दावा करना बताता है कि चाहे पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी और भी कितने देश एक साथ आ जाएं। हमास के खिलाफ अपनी नीति से इजराइल पीछे हटने वाला नहीं है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>कोलम्बिया भूकम्प: राहत कार्रवाई में जुटा संयुक्त राष्ट्र</title>
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<description><![CDATA[ कोलम्बिया के पश्चिमी हिस्से में सोमवार को आए शक्तिशाली भूकम्प के बाद तलाश और बचाव अभियान जारी हैं. संयुक्त राष्ट्र भी राष्ट्रीय प्रशासन के साथ समन्वय में राहत कार्यों में जुट गया है और प्रभावित क्षेत्रों में आपात सामग्री, अतिरिक्त कर्मचारी एवं अन्य संसाधन भेजे जा रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:25 +0530</pubDate>
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<title>तालेबान शासन के पाँच साल: &amp;apos;सार्वजनिक जीवन से मिटा’ अफ़ग़ान महिलाओं का अस्तित्व</title>
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<description><![CDATA[ अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के सत्ता पर क़ब्ज़े के पाँच साल बाद भी महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों पर लगातार अंकुश लगाया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के अनुसार, सत्तारूढ़ तालेबान प्रशासन ने शिक्षा, कामकाज और आवाजाही की स्वतंत्रता पर पाबन्दियाँ लगाने वाले 100 से अधिक फ़रमान जारी किए हैं. मानवीय सहायता में भारी कटौती ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 04:30:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Pannun Case में Nikhil Gupta की सज़ा पर सस्पेंस बरकरार, US Court ने 20 नवंबर तक टाला Sentencing फैसला</title>
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<description><![CDATA[ कई अंतरराष्ट्रीय घटनाओं में भारत और आसपास का क्षेत्र शामिल रहा। इनमें एक अमेरिकी फ़ेडरल कोर्ट द्वारा गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या की साज़िश के मामले में निखिल गुप्ता की सज़ा सुनाने की तारीख़ को 20 नवंबर तक टालना और अमेरिका के दो राज्यों द्वारा 15 अगस्त को भारत स्वतंत्रता दिवस ​​घोषित करना शामिल है। पाकिस्तान ने लाल सागर में एक कमर्शियल जहाज़ पर हूथी हमले में मारे गए अपने तीन नागरिकों की मौत की निंदा की। साथ ही, पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने रुकी हुई अमेरिका-ईरान शांति बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए तेहरान में ईरान के शीर्ष नेताओं से मुलाक़ात की। इसके अलावा, न्यूयॉर्क की एक महिला ने कनाडा बॉर्डर के ज़रिए मुख्य रूप से भारत से लोगों को अमेरिका लाने की तस्करी की साज़िश में अपना अपराध स्वीकार किया, जबकि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा कि रात में किए गए एक ऑपरेशन से रूस के ब्लैक सी स्थित एक बड़े नौसैनिक अड्डे को नुकसान पहुँचा है।इसे भी पढ़ें: भुखमरी, कंगाली और दिवालीयपन के बावजूद पाकिस्तान आया नंबर-1, भारत 13वें नंबर पर, लेकिन किसमें?वॉशिंगटन में एक अमेरिकी फ़ेडरल कोर्ट ने निखिल गुप्ता की सज़ा का ऐलान टाल दिया है। निखिल गुप्ता ने सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साज़िश रचने का जुर्म कबूल कर लिया है। अब कोर्ट 20 नवंबर को सज़ा का ऐलान करेगा। अमेरिका में न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी ने 15 अगस्त को भारत स्वतंत्रता दिवस ​​घोषित किया है। इसके ज़रिए एक आज़ाद देश के तौर पर भारत के सफ़र और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को मान्यता दी गई है। पाकिस्तान ने बुधवार को इस्लामाबाद में लाल सागर में यमन के हूथी विद्रोहियों द्वारा एक कमर्शियल जहाज़ पर किए गए हमले में तीन पाकिस्तानी नागरिकों की मौत की निंदा की। पाकिस्तान ने कहा कि ऐसी घटनाएँ लाल सागर में नेविगेशन की आज़ादी, समुद्री सुरक्षा और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा के लिए &quot;गंभीर खतरा&quot; पैदा करती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने तेहरान में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अरागची के साथ बातचीत की। इस बातचीत का मकसद मध्यस्थता की कोशिशों को फिर से शुरू करना और अमेरिका-ईरान के बीच रुकी हुई शांति वार्ता को आगे बढ़ाना था।इसे भी पढ़ें: Bab al-Mandeb में Houthi Rebels का बड़ा हमला: 3 पाकिस्तानी नागरिकों की मौत, Global Shipping पर गहरा संकटएक महिला ने अंतरराष्ट्रीय तस्करी की साज़िश में अपनी भूमिका के लिए गुनाह कबूल किया। इस साज़िश के तहत लोगों को, खासकर भारत से, कनाडा के रास्ते अमेरिका की उत्तरी सीमा से गैर-कानूनी तरीके से अमेरिका लाया जाता था। कीव में ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन की एंटी-शिप मिसाइलों, जेट-पावर्ड एरियल ड्रोन और समुद्री ड्रोन ने ब्लैक सी तट पर स्थित रूस के एक बड़े नौसैनिक अड्डे पर रात में एक अनोखा हमला किया। इस हमले में रूस के ब्लैक सी नौसैनिक गढ़ को नुकसान पहुँचा। इन सभी घटनाओं को एक साथ देखें तो इनमें पन्नून मामले में अमेरिकी अदालत का फैसला, दो अमेरिकी राज्यों में भारत के स्वतंत्रता दिवस को मान्यता, पाकिस्तान से जुड़े क्षेत्रीय सुरक्षा कदम, न्यूयॉर्क में तस्करी का मामला और यूक्रेन का रूस के एक अहम नौसैनिक अड्डे को नुकसान पहुँचाने का ताजा दावा शामिल है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:42:47 +0530</pubDate>
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<title>खेल शुरु! अचानक NSA डोभाल के साथ अमेरिकी राजदूत की सीक्रेट मीटिंग</title>
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<description><![CDATA[ भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ दिनों में बैठकों का सिलसिला तेज हो गया। इसी कड़ी में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर ने 11 अगस्त को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की। वहीं इस बैठक के बाद सर्जियो गौर ने इससे सार्थक मुलाकात बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच करीबी साझेदारी वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी है। उनके मुताबिक दोनों देशों के कई लक्ष्य एक जैसे हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। लेकिन इस मुलाकात की असली अहमियत सिर्फ एक बयान में नहीं बल्कि उस समय में है जब यह बैठक हुई क्योंकि अमेरिकी राजदूत की एनएसए डोभाल के साथ बातचीत से एक दिन पहले उनकी विदेश सचिव विक्रम मिश्री से भी मुलाकात हुई थी। इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi ने PM Modi पर लगाया देश के हित बेचने का आरोप, Adani केस का दिया हवालाइसके अलावा अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बातचीत के ठीक बाद गौर की डोभाल के साथ यह बैठक हुई। यानी पिछले कुछ दिनों में भारत अमेरिका के शीर्ष स्तर पर संपर्क लगातार बना हुआ है। वहीं विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि अमेरिकी राजदूत और एनएससी डोभाल के बीच दो बैठकें हुई। हालांकि बातचीत के खास मुद्दों को सार्वजनिक नहीं किया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों बैठकों में भारत अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और दूसरे रणनीतिक क्षेत्रों में प्रगति हो रही है और दोनों पक्ष साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सर्जियो गौर की भूमिका अभी इस बैठक को खास बनाती है। वो सिर्फ भारत में अमेरिका के राजदूत नहीं बल्कि दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसका मतलब ये हुआ कि भारत के साथ-साथ कई और क्षेत्र में अमेरिकी नीति में उनकी भूमिका काफी बड़ी है। इसे भी पढ़ें: PM Modi ने युवाओं से कहा: Ram Nath Kovind की आत्मकथा पढ़ें, रील के दौर में शॉर्टकट से बचेंआपको बता दें भारत और अमेरिका के रिश्ते इस समय सिर्फ सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं है। व्यापार भी दोनों देशों के एजेंडे में एक बड़ा मुद्दा रहा है। पिछले साल अमेरिका ने भारत पर 50% का टैरिफ लगाया था। जिससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ा। बाद में बातचीत के दौरान टैरिफ को 18% तक लाने पर सहमति बनी। लेकिन व्यापार समझौते को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। भारत की कोशिश है कि अगर कोई व्यापार समझौता होता है तो उसमें टैरिफ को लेकर लंबे समय की स्पष्टता और स्थिरता हो ताकि भविष्य में किसी नए अमेरिकी फैसले से अचानक भारतीय उत्पादों पर शुल्क ना बढ़ जाए और यही वजह है कि एनएसए डोभाल और गौर की लगातार बैठकों को सिर्फ एक सामान्य कूटनीतिक मुलाकात मानना आसान नहीं होगा क्योंकि कई चीजें पिछले कुछ वक्त में देखने को मिली हैं। एक तो ट्रेड को लेकर खींचतान है। उसके अलावा रूसी तेल को लेकर रूसी तेल को लेकर अमेरिका लगातार भारत पर दबाव बना रहा है। इसे भी पढ़ें: NEET-UG विवाद के बाद बदला PM Modi का अंदाज़, Gen Z को Influencers और &#039;Shortcuts&#039; की होड़ से बचने की दी सलाहऐसे में ये बैठकें अपने आप में बहुत अहमियत रखती हैं। हालांकि भारत के साथ अमेरिका का जो तनाव है उसे अगर किनारे कर भी दिया जाए तो वैश्विक सुरक्षा का बदलता माहौल, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा की चिंता और दक्षिण एशिया में बदलते समीकरण भी अपने आप में बहुत से सवाल खड़े कर रहे हैं। ऐसे समय में भारत और अमेरिका के बीच उच्च स्तर पर लगातार बातचीत यह संकेत देती है कि दोनों देश अपने रणनीतिक हितों को लेकर संपर्क बढ़ा रहे हैं। भारत अपनी विदेश नीति में रणनीतिक स्वायता बनाए रखते हुए अमेरिका के साथ सुरक्षा तकनीक, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहा है और अमेरिका के लिए भारत सिर्फ एक बड़ा बाजार नहीं बल्कि हिंद प्रशांत और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा साझेदार बन चुका है। यानी एनएसए डोवाल और अमेरिकी राजदूत की लगातार दो दिन की मुलाकात भले ही बंद कमरे में हुई हो लेकिन संदेश काफी साफ है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:42:46 +0530</pubDate>
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<title>Red Sea Attack: पाक नाविकों की मौत के बाद Houthi Rebels पर भड़का Islamabad, सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान ने बुधवार को लाल सागर इलाके में एक कमर्शियल जहाज़ पर हुए हमले में अपने तीन नागरिकों की मौत की निंदा की। उसने कहा कि ऐसी घटनाएं नेविगेशन की आज़ादी, समुद्री सुरक्षा और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं। यह बयान तब आया जब तंजानिया के झंडे वाले जहाज़ &#039;तिहामाह&#039; को बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में निशाना बनाया गया। मंगलवार को हुए इस हमले में चार नाविक तीन पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई  मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। जहाज़ को ईरान समर्थित हूतियों ने निशाना बनाया था, जिन्होंने पिछले महीने सऊदी-लिंक्ड जहाज़ों पर समुद्री प्रतिबंध की घोषणा के बाद इस इलाके में हमले तेज़ कर दिए हैं। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि  पाकिस्तान, बिना हथियार वाले कमर्शियल जहाज़ पर हूथी हमले की कड़ी निंदा करता है। डार पाकिस्तान के विदेश मंत्री भी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हमले बेगुनाह लोगों की जान को खतरे में डालते हैं, अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हैं और रेड सी में नेविगेशन की आज़ादी, समुद्री सुरक्षा और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।इसे भी पढ़ें: Babar Azam की दमदार वापसी, ICC Test रैंकिंग के टॉप 10 में फिर शामिलडार ने कहा कि अधिकारी इस घटना की जानकारी और शवों को वापस लाने के लिए सऊदी अरब और यमन के अधिकारियों के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि मैंने रियाद में हमारे दूतावास को निर्देश दिया है कि वे संबंधित अधिकारियों के साथ तुरंत तालमेल बिठाएं और मारे गए पाकिस्तानी नागरिकों के शवों को वापस लाने और घायल पाकिस्तानी नागरिक को हर संभव मदद देने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाएं। मंत्री ने आगे कहा कि हम स्थिति पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नेविगेशन की आज़ादी और समुद्री सुरक्षा का समर्थन करता है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान, सऊदी अरब द्वारा घोषित समुद्री गठबंधन का हिस्सा है और वह ग्लोबल सप्लाई चेन और समुद्री यातायात की सुरक्षा बनाए रखने के लिए सऊदी अरब और गठबंधन के अन्य सहयोगियों की मदद करने को तैयार है।इसे भी पढ़ें: Pannun Case में Nikhil Gupta की सज़ा पर सस्पेंस बरकरार, US Court ने 20 नवंबर तक टाला Sentencing फैसलायह हमला पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच 7 अगस्त को हुए &quot;मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट&quot; (मक्का संयुक्त रक्षा समझौता) के कुछ दिनों बाद हुआ। यह समझौता पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उससे जुड़ी सुरक्षा चिंताओं के बीच किया गया था। इस तीन-पक्षीय समझौते के तहत, तीनों देशों में से किसी एक पर भी हमला होने पर उसे सभी पर हमला माना जाएगा। भारत ने मंगलवार को कहा कि वह इस समझौते का अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रहा है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान की प्रतिक्रिया अपने नागरिकों की मौत, उन्हें वापस लाने की कोशिशों और क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर अपनी व्यापक चिंताओं पर केंद्रित रही। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:42:46 +0530</pubDate>
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<title>Iran&#45;Iraq Conflict: एरबिल में कुर्द ठिकानों पर Iran का Missile Attack, अरागची का दावा&#45; अमेरिका और Israel को मिली मात</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने इराक के उत्तरी एरबिल प्रांत में ईरानी कुर्द विपक्षी समूहों के ठिकानों पर कई मिसाइलें और ड्रोन दागे। अल जज़ीरा ने &#039;रुदाव&#039; से बात करने वाले एक पेशमर्गा कमांडर के हवाले से बताया कि इन हमलों में एरबिल प्रांत की अलामा घाटी में कोमाला पार्टी और कुर्दिस्तान डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ ईरान (KDPI) के लड़ाकों को निशाना बनाया गया। इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। इसके बाद ईरान के चार ड्रोन प्रांत के कई ज़िलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गए, जिनमें सोरान, खलीफ़ान और हरीर शामिल हैं। स्थानीय मीडिया के हवाले से अल जज़ीरा ने बताया कि दो ड्रोन खलीफ़ान के एक गाँव के पास गिरे, एक सोरान में एक रिहायशी घर से टकराया और चौथा बनी हरीर पहाड़ पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे आस-पास की घास में आग लग गई।पेशमर्गा स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र की सैन्य बल के तौर पर काम करते हैं, जबकि कोमाला पार्टी और KDPI ईरानी कुर्द विपक्षी समूह हैं जिनका मुख्यालय उत्तरी इराक के सीमावर्ती इलाके में है।इसे भी पढ़ें: Pannun Case में Nikhil Gupta की सज़ा पर सस्पेंस बरकरार, US Court ने 20 नवंबर तक टाला Sentencing फैसलाइससे पहले मंगलवार को, ईरानी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा कि अमेरिका के साथ हालिया युद्ध के दौरान ईरान ने दुनिया के सामने खुद को एक &#039;मज़बूत और अजेय शक्ति&#039; के तौर पर साबित किया और आखिरकार &quot;दुश्मन को बातचीत के लिए मजबूर किया। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय में &#039;कूटनीति और स्वास्थ्य के बीच सहयोग और तालमेल&#039; पर हुई बैठक में अरागची ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल के साथ संघर्ष के दौरान ईरान की सेना ने बड़ी कुर्बानियां दी हैं।ISNA के अनुसार, अरागची ने कहा कि हमारी सेना ने अपनी जान की बाज़ी लगाई और दुनिया की सबसे बड़ी दिखने वाली सेना को हराया। यह कोई नारा नहीं है; यह एक सच्चाई है जिसे पूरी दुनिया मानती है। उन्होंने कहा कि हालिया युद्ध के दौरान पूरे देश में कुर्बानी और बहादुरी के नज़ारे देखने को मिले, जहाँ लोग संघर्ष के बावजूद अपने कर्तव्य निभाते रहे। उन्होंने कहा किसी ने नहीं सोचा था कि ईरान, अमेरिका और ज़ायोनी शासन [इज़राइल] के सहयोग—जिसमें सभी पश्चिमी देशों और कुछ अन्य देशों का समर्थन शामिल था जिन्हें हम सब जानते हैं—के ख़िलाफ़ इस तरह डटकर मुकाबला कर पाएगा और आखिरकार दुश्मन को बातचीत के लिए मजबूर कर देगा। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:42:45 +0530</pubDate>
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<title>Middle East Crisis | लेबनान की संप्रभुता और Hezbollah का खात्मा, US General के साथ President Aoun की बड़ी चर्चा</title>
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<description><![CDATA[ लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने बुधवार को बेरूत में अमेरिकी जनरल जोसेफ क्लियरफील्ड से मुलाकात की। इस दौरान 26 जून को वाशिंगटन में लेबनान, इज़राइल और अमेरिका के बीच हुए फ्रेमवर्क समझौते को लागू करने के कदमों पर चर्चा हुई।लेबनानी राष्ट्रपति कार्यालय की एक एक्स पोस्ट के अनुसार, यह बैठक जनरल क्लियरफील्ड की पिछले हफ़्ते इज़राइल में हुई बातचीत के बाद हुई है, क्योंकि अमेरिका की मदद से बना लेबनान के लिए त्रिपक्षीय मिलिट्री कोऑर्डिनेशन ग्रुप (MCG4L) इस फ्रेमवर्क समझौते को लागू करने की दिशा में काम कर रहा है। एक्स पोस्ट में लेबनानी राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया कि राष्ट्रपति आउन ने लेबनान में अमेरिकी राजदूत मिशेल इस्सा और जनरल क्लियरफील्ड के कई सहयोगियों की मौजूदगी में &#039;लेबनान के लिए मिलिट्री कोऑर्डिनेशन ग्रुप (MCG4L)&#039; के प्रमुख जनरल जोसेफ क्लियरफील्ड से मुलाकात की।इसे भी पढ़ें: इधर एक रक्षा समझौता कर उछल रहा पाकिस्तान, उधर मोदी की Defence Diplomacy ने बिछा दिया रणनीतिक सुरक्षा का जाललेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि बैठक के दौरान, उन्होंने वाशिंगटन में लेबनान-अमेरिका-इज़राइल बातचीत के बाद हुए फ्रेमवर्क समझौते को लागू करने के लिए ज़रूरी प्रक्रियाओं पर चर्चा की। यह चर्चा पिछले हफ़्ते इज़राइल में जनरल क्लूफ़ील्ड की बातचीत को ध्यान में रखकर की गई थी। अमेरिका, इज़राइल और लेबनान ने 26 जून को वाशिंगटन में त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। बयान में कहा गया कि यह समझौता लेबनान की संप्रभुता बहाल करने, हिज़्बुल्लाह को निहत्था करने और उसके आतंकवादी ढांचे को खत्म करने के लिए एक स्पष्ट और व्यवस्थित प्रक्रिया तय करता है। साथ ही, यह इज़राइल को अपने नागरिकों के लिए खतरा खत्म होने के बाद अपनी सीमाओं पर लौटने में सक्षम बनाता है।इसे भी पढ़ें: क्यों तुर्किए से खाने वाले डब्बे में छिप कर भागना पड़ा, ट्रंप ने खुद कर दिया दुनिया का सबसे विस्फोटक खुलासाइसमें यह भी कहा गया कि इस समझौते से लेबनान के लिए एक &#039;त्रिपक्षीय सैन्य समन्वय समूह&#039; (MCG4L) बनेगा, जिसे अमेरिका का सहयोग मिलेगा और इससे दोनों पक्षों को इस फ्रेमवर्क को लागू करने में मदद मिलेगी। इसमें आगे कहा गया कि हम इस फ्रेमवर्क को लागू करने और इज़राइल, लेबनान और पूरे मध्य पूर्व के लिए एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य बनाने के लिए अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं।इस बीच, लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने 31 जुलाई को दक्षिणी लेबनान में इज़राइली सेना की सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और मौजूदा युद्धविराम समझौतों का सीधा उल्लंघन तथा यूनेस्को साइटों के लिए खतरा बताया। एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री सलाम ने चेतावनी दी कि बढ़ते हमलों से दक्षिण में आम नागरिकों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो रहा है और साथ ही ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण धरोहर स्थलों को भी नुकसान पहुँच रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:42:45 +0530</pubDate>
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<title>Kathmandu Airport पर सुरक्षा घेरा तोड़ भागने की कोशिश, 18kg Thai Marijuana के साथ Punjab के दो तस्कर काबू</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल पुलिस ने बुधवार को बताया कि यहां त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दो भारतीय नागरिकों को 18 किलो थाईलैंड में बनी मारिजुआना (गांजा) के साथ गिरफ्तार किया गया। पुलिस के बयान के मुताबिक, नेपाल पुलिस के एंटी-नारकोटिक ड्रग्स ब्यूरो की एक टीम ने मंगलवार शाम एयरपोर्ट के अराइवल एरिया से पंजाब के रहने वाले 36 साल के संजीव कुमार और 26 साल के रवि कुमार को गिरफ्तार किया।इसे भी पढ़ें: Gurcharan Das को नेपाल में मिला Lifetime Libertarian अवॉर्ड, बने पहले भारतीय लेखकबताया जा रहा है कि जब पुलिस अराइवल एरिया में यात्रियों की जांच कर रही थी, तो दोनों ने भागने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें पकड़ लिया। पुलिस ने उनके पास से दो मोबाइल फोन, दो पासपोर्ट और चार बैग भी ज़ब्त किए। पुलिस ने बताया कि ये दोनों कैथे पैसिफिक की फ्लाइट से हांगकांग होते हुए थाईलैंड से काठमांडू एयरपोर्ट पहुंचे थे। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:42:44 +0530</pubDate>
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<title>Persian Gulf में बढ़ा तनाव, Strait of Hormuz को लेकर US&#45;Iran के बीच जंग, Donald Trump ने दी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) के नए प्रमुख मोहसिन रेज़ाई ने चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका &quot;सभी शर्तें&quot; पूरी नहीं करता, तब तक तेहरान रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से नहीं खोलेगा। एक्स पर पोस्ट किए गए एक संदेश में रेज़ाई ने फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में शिपिंग रूट पर ईरान का रुख स्पष्ट किया और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने के लिए ज़रूरी शर्तों के बारे में बताया। उन्होंने पोस्ट में लिखा, ईरान का संदेश साफ़ है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य तब तक नहीं खुलेगा जब तक अमेरिका युद्ध और नाकेबंदी खत्म नहीं करता, ईरान की फ्रीज़ की गई संपत्ति को जारी नहीं करता, और लेबनान व गाज़ा सहित पूरे क्षेत्र में युद्धविराम के लिए सहमत नहीं होता।इसे भी पढ़ें: US-Iran शांति वार्ता बहाल कराने तेहरान पहुंचे पाकिस्तान के मंत्री Mohsin Naqviरेज़ाई ने आगे कहा जब तक सभी शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक यह जलडमरूमध्य बंद रहेगा। प्रेस टीवी के अनुसार, रेज़ाई ने पुष्टि की कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से तभी फिर से खोला जाएगा जब वाशिंगटन तेहरान की शर्तें मान लेगा; ईरान ने अमेरिका-इज़राइल की आक्रामकता के कारण मार्च की शुरुआत से ही यहाँ आने-जाने पर पाबंदियाँ लगा रखी हैं। रेज़ाई ने तेहरान में चीनी राजदूत ज़ोंग पियू के साथ मंगलवार को हुई बैठक में ईरान का पक्ष विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के खिलाफ युद्ध खत्म करना होगा और ईरान के रोके गए फंड को जारी करना होगा। बैठक में रेज़ाई ने कहा कि जब तक अमेरिका अपना व्यवहार नहीं बदलता और ईरान की शर्तें नहीं मानता, तब तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से नहीं खोला जाएगा। इसे भी पढ़ें: Pannun Case में Nikhil Gupta की सज़ा पर सस्पेंस बरकरार, US Court ने 20 नवंबर तक टाला Sentencing फैसलाउन्होंने बताया कि हाल के हफ़्तों में परोक्ष बातचीत में शामिल मध्यस्थों के ज़रिए ईरान ने अमेरिका को कुछ और शर्तें भी बताई हैं। रेज़ाई ने फिर कहा कि अगर ईरान और ओमान (जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास का दूसरा देश है) इस जलमार्ग में आने-जाने के रास्तों पर कोई समझौता करते हैं, तो उस समझौते का ईरान के जलडमरूमध्य को बंद करने या दोबारा खोलने के फ़ैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (स्थानीय समय) को होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपना पूरा नियंत्रण होने की बात दोहराई और तेहरान को ऐसी किसी भी कार्रवाई के ख़िलाफ़ चेतावनी दी जिसका कड़ा जवाब दिया जा सकता है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए ये बातें कहीं और तेहरान पर उनसे &#039;झूठ बोलने&#039; का आरोप लगाया। ]]></description>
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<title>Russia के नोवोरोस्सियस्क नौसैनिक अड्डे पर हमले का Zelenskyy का दावा, बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त</title>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बुधवार को कहा कि एक ‘अद्वितीय’ रात्रिकालीन अभियान के दौरान यूक्रेनी जहाज-रोधी मिसाइलों और ड्रोन ने काला सागर तट पर स्थित एक प्रमुख रूसी नौसैनिक अड्डे पर ताबड़तोड़ हमला किया। मॉस्को द्वारा चार साल पहले किए गए पूर्ण आक्रमण के बाद से कीव द्वारा विकसित अत्याधुनिक ड्रोन ने काला सागर में रूसी जहाजों को बार-बार निशाना बनाया है। इनमें युद्धपोत और तेल टैंकर शामिल हैं।कीव के अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेन के हवाई और समुद्री ड्रोन ने कभी काला सागर पर दबदबा कायम करने वाली रूसी नौसेना की गतिविधियों को सीमित करने में सफलता हासिल की है, जो युद्ध में उनके देश की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। लेकिन यूक्रेनी अधिकारियों का मानना ​​है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन युद्ध को आगे बढ़ाने पर तुले हुए हैं, भले ही उनकी बड़ी सेना की युद्धक्षेत्र में प्रगति धीमी होने के साथ खर्चीली हो गई हो। अमेरिका समझौते के उपाय खोजने के लिए राजनयिक प्रयास कर रहा है।जेलेंस्की ने मंगलवार रात सोशल मीडिया पर यूक्रेनी खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि पुतिन ‘साल के अंत तक कई लाख रूसियों की अतिरिक्त खेप भेजने’ की योजना बना रहे हैं। हालांकि, न तो पुतिन और न ही अन्य वरिष्ठ रूसी अधिकारियों ने यूक्रेन में लड़ाई के लिए संभावित बड़े सैन्य अभियान का कोई संकेत दिया है। कुछ अधिकारियों ने कीव पर सैन्य जमावड़े की बात फैलाकर रूसी जनता को डराने का आरोप लगाया है।रूसी सांसद आंद्रेई गुरुलेव ने शरद ऋतु में संभावित सैन्य जमावड़े की खबरों को खारिज कर दिया। क्रेमलिन समर्थक ऑनलाइन समाचार प्रतिष्ठान ‘त्सारग्राद’ द्वारा सोमवार को प्रकाशित टिप्पणियों में उनके हवाले से कहा गया है, ‘‘दुश्मन जानबूझकर रूस के अंदर स्थिति को अस्थिर करने के लिए सैन्य जमावड़े की अफवाहें फैला रहा है।’’
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बुधवार को जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेनी सेना ने नोवोरोस्सियस्क में नौसैनिक अड्डे को निशाना बनाकर एक अनोखा अभियान चलाया, जो काला सागर में रूसी बेड़े का आखिरी बड़ा गढ़ था। उन्होंने कहा कि हमले में हवाई सुरक्षा, घाट और बंदरगाह के अन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया।युद्ध के शुरुआती दौर में क्रीमिया प्रायद्वीप पर स्थित काला सागर के मुख्य अड्डे सेवस्तोपोल पर यूक्रेनी हमलों के बाद रूस ने अपने अधिकांश नौसैनिक जहाजों को नोवोरोस्सियस्क में स्थानांतरित कर दिया था। गवर्नर वेनियामिन कोंड्राटयेव ने बताया कि रातभर में सैकड़ों यूक्रेनी ड्रोन ने नोवोरोस्सियस्क, अनापा, गेलेंड्ज़िक और क्रास्नोदार क्षेत्र के टेमरियुक जिले पर हमला किया। कोंड्राटयेव ने बताया कि इस क्षेत्र पर हुए हमले में मारे गए तीन लोगों में आठ-वर्षीय एक बच्चा भी शामिल था।उन्होंने बताया कि क्षेत्र में 24 लोग घायल हुए हैं। कोंड्राटयेव ने कहा कि दर्जनों आवासीय इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं और गिराए गए ड्रोनों का मलबा चार औद्योगिक संयंत्रों के परिसर में गिरा। रूसी व्यापार दैनिक वेदोमोस्ती के अनुसार, हमलों में नोवोरोस्सियस्क के तीन अनाज टर्मिनलों में से दो क्षतिग्रस्त हो गए, जिनमें से एक में परिचालन बंद हो गया।रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने 500 से अधिक यूक्रेनी ड्रोनों को मार गिराया। यूक्रेन की वायुसेना ने बताया कि रूस ने रात भर में 138 लंबी दूरी के ड्रोन और अज्ञात संख्या में मिसाइलें दागीं, जिससे 16 स्थानों पर नुकसान हुआ। क्षेत्रीय प्रमुख ओलेक्सांद्र प्रोकुडिन ने बताया कि दक्षिणी यूक्रेन के खेरसोन क्षेत्र में रात भर हुए एक बड़े रूसी ड्रोन हमले में दो लोग मारे गए और दो अन्य घायल हो गए।अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में दक्षिणी शहर जापोरिज्जिया में एक ‘शॉपिंग मॉल’ भी नष्ट हो गया। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:42:43 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan का दावा, Saudi Arabia और तुर्किये से रक्षा समझौता केवल रक्षात्मक प्रकृति का</title>
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<description><![CDATA[ (सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, 12 अगस्त पाकिस्तान ने बुधवार को कहा कि पिछले सप्ताह उसने सऊदी अरब और तुर्किये के साथ जिस त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, वह “पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है’’। विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने यहां संवाददाता सम्मेलन के दौरान समझौते को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में कहा, ‘‘यह समझौता पाकिस्तान की जनता की इच्छाओं के अनुरूप है।’’
उन्होंने कहा कि यह समझौता ‘‘पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है, जो सदस्य देशों के लिए खतरों और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने की अनुमति देता है।’’
अंद्राबी ने हालांकि अपनी टिप्पणी में किसी भी देश का नाम नहीं लिया। इस सप्ताह की शुरुआत में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इस्हाक डार ने भी कहा था कि यह रक्षा समझौता “किसी भी देश के खिलाफ लक्षित नहीं है’’।पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने सात अगस्त को ‘‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’’ पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच हुआ। तीनों देशों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है, ‘‘रक्षा समझौते का उद्देश्य किसी भी आक्रामक कार्रवाई के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना है।इसमें यह प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक पर किया गया कोई भी सशस्त्र हमला, तीनों देशों पर हमला माना जायेगा।’’
भारत ने मंगलवार को कहा था कि वह पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए रक्षा समझौते के देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा था, ‘‘जहां तक इस समझौते का सवाल है, हम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिहाज से इसके प्रभावों का आकलन कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा था, ‘‘भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस संबंध में सभी जरूरी कदम उठाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:42:43 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan Terror Strike: KPK में 36 घंटे चला बड़ा ऑपरेशन, 4 कमांडरों समेत 62 उग्रवादी हुए ढेर</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के दो ज़िलों में 36 घंटों तक चले खुफिया जानकारी पर आधारित कई ऑपरेशन्स में 60 से ज़्यादा चरमपंथी मारे गए। ये ऑपरेशन्स देश के उत्तर-पश्चिम में स्थित उत्तरी वज़ीरिस्तान और बन्नू ज़िलों में चलाए गए। अधिकारियों ने बताया कि उत्तरी वज़ीरिस्तान में मंगलवार सुबह से शुरू हुए ऑपरेशन्स में चार मुख्य कमांडरों समेत 52 चरमपंथी मारे गए, जबकि बुधवार को बन्नू में कई ऑपरेशन्स के दौरान 10 चरमपंथी मारे गए और 16 घायल हो गए। ये कार्रवाई उस इलाके में सुरक्षा बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा थी।इसे भी पढ़ें: Red Sea Attack: पाक नाविकों की मौत के बाद Houthi Rebels पर भड़का Islamabad, सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल उत्तरी वज़ीरिस्तान में, सुरक्षा बलों ने &#039;फ़ितना-अल-ख़वारिज&#039; (यह नाम सरकार ने प्रतिबंधित संगठन &#039;तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान&#039; के लिए इस्तेमाल किया है) के सदस्यों के ख़िलाफ़ टारगेटेड स्ट्राइक करने से पहले संदिग्ध ठिकानों पर लगातार नज़र रखी। अधिकारियों ने बताया कि पेड़ों के नीचे छिपे आतंकवादियों की पहचान करने के लिए क्वाडकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया, जिससे बल उन्हें सटीक रूप से निशाना बना सके। भागने की कोशिश कर रहे कई घायल आतंकवादियों को भी निशाना बनाया गया और मारे गए लोगों में चार मुख्य कमांडर भी शामिल थे।इसे भी पढ़ें: इधर एक रक्षा समझौता कर उछल रहा पाकिस्तान, उधर मोदी की Defence Diplomacy ने बिछा दिया रणनीतिक सुरक्षा का जालसुरक्षा बलों ने बताया कि इन ऑपरेशन्स में आतंकवादियों के कई ठिकाने नष्ट कर दिए गए और भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और अन्य सैन्य उपकरण बरामद किए गए। बन्नू में, अलग-अलग जगहों पर छिपे आतंकवादियों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। ये ऑपरेशन्स ज़िले में सुरक्षा गतिविधियां बढ़ाए जाने के बाद किए गए, जहाँ मंगलवार को जानी खेल इलाके में अदनान क्रिकेट स्टेडियम के पास एक इंटेलिजेंस-बेस्ड ऑपरेशन में दो आतंकवादी मारे गए थे। पुलिस के अनुसार, चरमपंथी कथित तौर पर एक इस्लामिक मदरसे का इस्तेमाल छिपने की जगह के तौर पर कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि चरमपंथियों की ओर से गोलीबारी होने के बाद सुरक्षा बलों ने उन्हें निशाना बनाया, लेकिन उससे पहले आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उस जगह को खाली करा लिया गया था। बन्नू में भी कई ठिकाने नष्ट किए गए, भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए और बाद में तलाशी व सफाई अभियान चलाए गए। सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि जब तक इलाके से आतंकवाद खत्म नहीं हो जाता, तब तक चरमपंथियों के खिलाफ अभियान बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:42:43 +0530</pubDate>
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<title>Taliban ने Herat से संयुक्त राष्ट्र के दो कर्मचारियों को हिरासत में लिया</title>
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<description><![CDATA[ अफगानिस्तान में तालिबान शासकों ने देश में संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक मिशन के दो अफगान कर्मचारियों को हिरासत में लिया है। संयुक्त राष्ट्र ने यह जानकारी दी। संयुक्त राष्ट्र के उप प्रवक्ता फरहान हक ने संवाददाताओं को बताया कि तालिबान के खुफिया महानिदेशालय ने रविवार को पश्चिमी शहर हेरात में दोनों कर्मचारियों को हिरासत में लिया।उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मिशन को अब तक यह नहीं बताया गया है कि दोनों व्यक्तियों पर क्या आरोप लगाए गए हैं और न ही मिशन के प्रतिनिधियों को उनसे मिलने की अनुमति दी गई है। हक ने कहा कि मिशन ने तालिबान से ‘‘संयुक्त राष्ट्र और उसके अधिकारियों को प्राप्त विशेषाधिकारों और छूट का पालन सुनिश्चित करने’’ का आह्वान किया है। अमेरिका और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की सेनाओं के दो दशक के युद्ध के बाद अफगानिस्तान से हटने के दौरान तालिबान ने 15 अगस्त 2021 को देश की सत्ता पर कब्जा कर लिया था।दोनों कर्मचारियों को ऐसे समय हिरासत में लिया गया है, जब गरीबी से जूझ रहे अफगानिस्तान में मानवीय संकट गहराता जा रहा है और तालिबान एवं पाकिस्तानी बलों के बीच सीमा पार संघर्ष की घटनाएं बढ़ गई हैं। ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ में अफगानिस्तान मामलों की शोधकर्ता फेरेश्ता अब्बासी ने कहा कि दोनों कर्मचारियों को हिरासत में लिया जाना ‘‘पूरे अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के कामकाज और जीवनरक्षक सहायता पहुंचाने की उसकी क्षमता के लिए गंभीर खतरा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘तालिबान अधिकारियों को हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल रिहा करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी सहायता एजेंसियां बिना किसी डर या हस्तक्षेप के काम कर सकें। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:42:42 +0530</pubDate>
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<title>US Army का Apache helicopter Texas में हुआ दुर्घटनाग्रस्त, 2 की मौत</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में मध्य टेक्सास के एक खुले इलाके में सेना का अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिससे उसमें सवार दोनों लोगों की मौत हो गई। शेरिफ कार्यालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। इस हादसे के बाद घटनास्थल पर भीषण आग लग गई, जिसके कारण आस-पास के कई घरों को खाली कराना पड़ा।फोर्ट हुड के अधिकारियों ने सूचना दी कि एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। बेल काउंटी शेरिफ कार्यालय के प्रवक्ता क्लिफ कोलमैन ने हेलीकॉप्टर में सवार दोनों लोगों की मौत की पुष्टि की। हादसे के कारणों का तत्काल पता नहीं चल सका है।कोलमैन ने बताया कि दुर्घटना की जांच फोर्ट हुड के आपराधिक जांच प्रभाग के नेतृत्व में की जा रही है। कार्यवाहक कमांडिंग जनरल ब्रिगेडियर जनरल एथन डिवेन ने कहा, ‘‘हमारी तत्काल प्राथमिकता घटनास्थल को सुरक्षित करना और शुरुआती राहत एवं बचाव प्रयासों में सहयोग करना है। हम चालक दल के सदस्यों और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:42:42 +0530</pubDate>
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<title>Karoline Leavitt छोड़ेंगी व्हाइट हाउस, Donald Trump की सलाहकार टीम में रहेंगी शामिल</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका की राजनीति में बुधवार को एक बड़ा बदलाव सामने आया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट महीने के अंत में अपने पद से हट जाएंगी। लेविट ने यह फैसला अपने छोटे बच्चों और परिवार को ज्यादा समय देने के लिए लिया है। हालांकि, व्हाइट हाउस से उनकी विदाई पूरी तरह राजनीतिक दूरी बनाने वाली नहीं होगी। ट्रंप के मुताबिक, वह आगे भी उनकी बाहरी सलाहकार टीम का अहम हिस्सा बनी रहेंगी और रिपब्लिकन पार्टी में अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखेंगी।ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लेविट की तारीफ करते हुए उन्हें अपनी सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि लेविट के फैसले को वह पूरी तरह समझते हैं और उसका सम्मान करते हैं। राष्ट्रपति ने यह भी साफ किया कि व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद लेविट की राजनीतिक भूमिका खत्म नहीं होगी। वह उनके शीर्ष बाहरी सलाहकारों में शामिल रहेंगी और रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक प्रभावशाली आवाज के तौर पर काम करती रहेंगी। ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन आने वाले मध्यावधि चुनावों में बड़ी जीत हासिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है और इस दौरान लेविट की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। ट्रंप ने लेविट के काम की तारीफ करते हुए उन्हें व्हाइट हाउस के इतिहास की बेहतरीन प्रेस सचिवों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि लेविट ने 2018 से ही न्याय, स्वतंत्रता और आजादी के मुद्दों पर शानदार काम किया है और 2024 के उनके ऐतिहासिक चुनाव अभियान में भी अहम योगदान दिया।इसे भी पढ़ें: ट्रंप मीडिया को $238 Million का भारी घाटा, Bitcoin और Crypto बाजार में गिरावट ने बढ़ाई Donald Trump की टेंशनलेविट बोलीं- यह मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सम्मान रहाकैरोलिन लेविट ने भी सोशल मीडिया पर अपने फैसले के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पिछले करीब डेढ़ साल तक व्हाइट हाउस प्रेस सचिव के रूप में काम करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है। लेविट ने राष्ट्रपति ट्रंप का आभार जताते हुए कहा कि इस जिम्मेदारी ने उन्हें ऐसे अनुभव दिए, जिन्हें वह जिंदगी भर याद रखेंगी। वेस्ट विंग में काम करने से लेकर ओवल ऑफिस में लंबे घंटे बिताने, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा करने और विदेशी नेताओं से मिलने तक, उन्होंने इस कार्यकाल को बेहद खास बताया। उनके मुताबिक, इस भूमिका का सबसे बड़ा सम्मान व्हाइट हाउस के प्रेस पोडियम से राष्ट्रपति की ओर से अमेरिकी जनता को संबोधित करना था। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रशासन की कई बड़ी उपलब्धियों के बारे में बात करने और ट्रंप की नीतियों व कामकाज को जनता के सामने रखने पर गर्व रहा। लेविट ने मीडिया को लेकर भी अपनी भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रशासन के नजरिए को सामने रखने, उदारवादी मीडिया को जवाब देने और अमेरिकी लोगों तक ट्रंप की उपलब्धियों की जानकारी पहुंचाने में कोई झिझक नहीं रही।इसे भी पढ़ें: FIFA World Cup की सफलता का हवाला देकर Donald Trump ने Infantino को बताया &#039;शानदार व्यक्तित्व&#039;लेविट के बयान का सबसे निजी हिस्सा उनके परिवार और बच्चों को लेकर था। उन्होंने माना कि मां बनने के साथ दुनिया की सबसे कठिन और व्यस्त राजनीतिक नौकरियों में से एक को संभालना आसान नहीं रहा। उन्होंने कहा कि बेटी के जन्म के बाद जब वह व्हाइट हाउस लौटीं, तभी से उनके मन में यह सवाल बना रहा कि क्या वह प्रेस सचिव की नौकरी के लिए जरूरी समय, ऊर्जा और ध्यान देने के साथ अपने दोनों छोटे बच्चों की जरूरतों के मुताबिक एक अच्छी मां बन पा रही हैं। यही सवाल आखिरकार उनके फैसले की वजह बना। लेविट ने माना कि व्हाइट हाउस छोड़ने का निर्णय उनके लिए भावुक भी था और मुश्किल भी, लेकिन अब वह अपनी जिंदगी के एक नए अध्याय की शुरुआत करना चाहती हैं।राजनीति से दूरी नहीं बनाएंगी लेविटहालांकि, व्हाइट हाउस से विदाई के बाद लेविट पूरी तरह राजनीतिक पर्दे के पीछे नहीं जाने वाली हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें बाहर से अपने शीर्ष सलाहकारों में से एक के तौर पर काम जारी रखने को कहा है, जिसे लेविट ने स्वीकार किया है। उन्होंने साफ किया कि वह &#039;मेक अमेरिका ग्रेट अगेन&#039; और रिपब्लिकन पार्टी के लिए अपनी आवाज उठाती रहेंगी। लेविट ने डेमोक्रेटिक पार्टी पर भी तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि पार्टी लगातार ज्यादा कट्टरपंथी होती जा रही है और अमेरिका के लिए गंभीर खतरा बन रही है।लेविट ने कहा कि देश की चिंता करने वाले लोगों की जिम्मेदारी है कि वे इस चुनौती के खिलाफ अपनी भूमिका निभाएं। उनके शब्दों में, उनकी राजनीतिक लड़ाई खत्म नहीं हुई है, बल्कि अब वह एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। इस तरह लेविट का व्हाइट हाउस से जाना एक सामान्य प्रशासनिक बदलाव से कुछ ज्यादा नजर आता है। एक तरफ वह अपने परिवार और छोटे बच्चों को प्राथमिकता देने जा रही हैं, तो दूसरी तरफ ट्रंप के साथ उनकी राजनीतिक साझेदारी जारी रहेगी। यानी व्हाइट हाउस का पोडियम जरूर छूटेगा, लेकिन अमेरिकी राजनीति में कैरोलिन लेविट की आवाज फिलहाल सुनाई देती रहेगी। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:42:41 +0530</pubDate>
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<title>Massachusetts में Arjun Arvind पर मां और भाई की हत्या का केस दर्ज किया गया</title>
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<description><![CDATA[ (योषिता सिंह)
न्यूयॉर्क, 13 अगस्त अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य में भारतीय मूल के 17 वर्षीय किशोर पर उपनगरीय इलाके में स्थित अपने घर में अपनी मां और छोटे भाई की हत्या करने का आरोप लगाया गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। ऐक्टन निवासी अर्जुन अरविंद पर अपने 14 वर्षीय भाई सिद्धार्थ अरविंद और 45 वर्षीय मां सुधा वेंकटेशन की मौत के मामले में हत्या के दो आरोप, परिवार या घर के किसी सदस्य पर हमला और मारपीट के दो आरोप, हमला और मारपीट के दो अन्य आरोप, बिना अनुमति वाहन इस्तेमाल करने तथा मोटर वाहन चोरी करने के आरोप लगाए गए हैं।आरोप है कि अर्जुन ने मंगलवार को घर में अपनी मां और भाई पर जानलेवा हमला किया और फिर फरार हो गया। सिद्धार्थ एवं सुधा ‘‘गंभीर रूप से घायल’’ अवस्था में मिले थे। अभी यह पता नहीं चल सका है कि हत्या में किस तरह के हथियार का इस्तेमाल किया गया।मिडिलसेक्स डिस्ट्रिक अटॉर्नी मैरिएन रयान और ऐक्टन पुलिस प्रमुख डगलस स्टर्निओलो ने बताया कि सिद्धार्थ एवं सुधा बोस्टन से करीब 48 किलोमीटर दूर ऐक्टन के मार्था लेन स्थित अपने घर में मंगलवार को मृत मिले। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि ऐक्टन पुलिस को 11 अगस्त को शाम छह बजकर 37 मिनट पर अर्जुन के पिता का फोन आया। उन्होंने बताया कि वह अपने परिवार के सदस्यों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।मार्था लेन स्थित मकान में पहुंचने पर पुलिस ने दोनों को अंदर मृत पाया। अधिकारियों के अनुसार, सिद्धार्थ का शव पहली मंजिल पर और सुधा का शव भूमिगत तल में मिला। पुलिस ने बताया कि अर्जुन घर पर नहीं था और अपनी मां की कार लेकर कथित तौर पर फरार हो गया था।जांचकर्ताओं ने बुधवार तड़के मैसाचुसेट्स के वेलैंड में एक पार्किंग स्थल से अर्जुन को पकड़ लिया। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:42:41 +0530</pubDate>
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<title>America के बाद Colombia का बड़ा फैसला, Golan Heights पर Israel की संप्रभुता को दी आधिकारिक मान्यता</title>
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<description><![CDATA[ कोलंबिया ने कब्जे वाले सीरियाई गोलान हाइट्स पर इज़राइल की संप्रभुता को मान्यता दे दी है। ऐसा करने वाला वह अमेरिका के बाद दूसरा देश बन गया है जिसने आधिकारिक तौर पर इस इलाके पर इज़राइल के कब्ज़े को मान्यता दी है। यह फ़ैसला दक्षिणपंथी राष्ट्रपति एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला के पद संभालने के कुछ दिनों बाद लिया गया है। एक बयान में कोलंबिया के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह फ़ैसला मध्य पूर्व में लगातार अस्थिरता और इज़राइल की सुरक्षा के लिए गोलान हाइट्स के रणनीतिक महत्व को देखते हुए लिया गया है।इसे भी पढ़ें: Colombia में 7.4 तीव्रता के भूकंप से 47 लोगों की मौत, उड़ानें निलंबितमंत्रालय ने कहा कि मध्य पूर्व में लगातार क्षेत्रीय अस्थिरता और इज़राइल की सुरक्षा के लिए गोलान हाइट्स के रणनीतिक महत्व को देखते हुए, कोलंबिया सरकार इस इलाके पर इज़राइल की संप्रभुता के साथ-साथ बाहरी खतरों से खुद की रक्षा करने के उस देश के अधिकार को भी मान्यता देती है। बोगोटा ने इज़राइल की लंबे समय से चली आ रही सुरक्षा चिंताओं का भी ज़िक्र किया और देश की सीमाओं पर &quot;लगातार और अस्तित्व के लिए खतरा पैदा करने वाली सुरक्षा चुनौतियों&quot; की ओर इशारा किया।इसे भी पढ़ें: Colombia Earthquake: विनाशकारी भूकंप से 132 की मौत, President ने देश में घोषित की National Emergencyकोलंबियाई विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, &quot;हाल के वर्षों में ये खतरे काफ़ी बढ़ गए हैं, जिसकी परिणति 7 अक्टूबर के भयानक आतंकवादी हमलों के रूप में हुई। इन हमलों ने इज़राइली लोगों के सामने मौजूद खतरों की गंभीरता और बदलते स्वरूप को उजागर किया। मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा के संदर्भ में, कोलंबिया गोलान हाइट्स पर इज़राइल के नियंत्रण और संप्रभुता को उसके राष्ट्रीय बचाव के लिए महत्वपूर्ण मानता है।उसने कहा क्षेत्रीय सुरक्षा के इस संदर्भ में, कोलंबिया मानता है कि गोलान हाइट्स पर इज़राइल का नियंत्रण और संप्रभुता बनाए रखना उसके राष्ट्रीय बचाव और अपने नागरिकों की रक्षा और सुरक्षा करने की उसकी क्षमता का एक ज़रूरी हिस्सा है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:46 +0530</pubDate>
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<title>सीरिया के तानाशाह रहे बशर अल&#45;असद को मौत की सजा, लाखों लोगों की मौत के जिम्मेदार पाए गए</title>
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<description><![CDATA[ दमिश्क की एक आपराधिक अदालत ने सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को सोच-समझकर की गई हत्या का दोषी पाए जाने पर उनकी गैर-मौजूदगी में मौत की सज़ा सुनाई। साथ ही, दक्षिणी सीरिया के डेरा प्रांत में राजनीतिक सुरक्षा के पूर्व प्रमुख आतिफ़ नजीब को भी सोच-समझकर हत्या और यातना देने का दोषी पाए जाने पर मौत की सज़ा सुनाई गई। टाइम्स ऑफ़ इज़राइल के अनुसार, दमिश्क अदालत का यह फ़ैसला सीरिया के अंतरिम अधिकारियों द्वारा असद के ख़िलाफ़ सुनाई गई मौत की पहली सज़ा है। इन अधिकारियों ने इस साल असद की पिछली सरकार से जुड़े लोगों के ख़िलाफ़ व्यक्तिगत रूप से और उनकी गैर-मौजूदगी में कानूनी कार्यवाही शुरू की थी।अदालत के फ़ैसले के मुताबिक, असद को 13 साल से चल रहे गृह युद्ध से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया गया। इस मामले को &quot;युद्ध अपराध&quot; और &quot;मानवता के ख़िलाफ़ अपराध&quot; से भी जुड़ा बताया गया है। दिसंबर 2024 में, जब हयात तहरीर अल-शाम (HTS) के नेतृत्व वाली विपक्षी सेनाएँ दमिश्क की ओर बढ़ीं, तो असद अपने परिवार के साथ सीरिया से भाग गए। इसके बाद उन्हें रूस में शरण दी गई।HTS के नेतृत्व वाली विपक्षी सेनाओं ने उत्तर-पश्चिमी प्रांत इदलिब से हमला शुरू किया और 8 दिसंबर 2024 की सुबह दमिश्क पहुँच गईं, जिससे असद परिवार के पाँच दशकों से ज़्यादा समय से चले आ रहे शासन का अंत हो गया। इसके बाद असद को सत्ता से हटा दिया गया। अहमद अल-शरा, जिनकी सेनाओं ने असद को हटाने वाले हमले का नेतृत्व किया था, बाद में सीरिया के अंतरिम प्रशासन के प्रमुख बने। उन्होंने असद के दौर में हुए खून-खराबे और अत्याचारों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने का वादा किया।इसे भी पढ़ें: Syria की राजधानी Damascus के जरामना में मिनीवैन टैक्सी में विस्फोट से 2 की मौत, 13 घायलअल-शरा लगभग 60 वर्षों में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले पहले सीरियाई नेता भी बने, जहाँ उन्होंने सीरिया पर लगे प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने की माँग की।बाद में ट्रंप प्रशासन ने हयात तहरीर अल-शाम (HTS) - जिसे अल-नुसरा फ्रंट के नाम से भी जाना जाता है - को &#039;विदेशी आतंकवादी संगठन&#039; की श्रेणी से हटा दिया। इसी संगठन ने अल-शरा के नेतृत्व में उस आंदोलन का नेतृत्व किया था जिसके कारण असद को सत्ता से हटना पड़ा। सीरिया छोड़ने के बाद, असद ने अपना पहला सार्वजनिक बयान जारी किया, जिसे सीरियाई राष्ट्रपति कार्यालय के टेलीग्राम चैनल पर प्रकाशित किया गया।असद ने इस बात से इनकार किया कि उनके जाने की योजना पहले से बनाई गई थी और उन दावों को भी खारिज कर दिया कि उन्होंने दमिश्क में लड़ाई के अंतिम चरणों के दौरान सीरिया छोड़ा था।इसे भी पढ़ें: Syria और Russia के बीच हुआ समझौता, हमीमीम और टार्टस बेस का नियंत्रण सीरिया लेगाबयान में कहा गया, सबसे पहले, सीरिया से मेरा जाना न तो पहले से तय था और न ही यह लड़ाई के आखिरी घंटों के दौरान हुआ, जैसा कि कुछ लोगों ने दावा किया है। इसमें आगे कहा गया, &quot;इसके विपरीत, मैं दमिश्क में ही रहा और रविवार, 8 दिसंबर 2024 की सुबह तक अपने कर्तव्यों का पालन करता रहा। बयान के अनुसार, विपक्षी सेनाओं के दमिश्क में घुसने के बाद असद तटीय शहर लताकिया में एक रूसी सैन्य अड्डे पर चले गए; उन्होंने कहा कि उनका इरादा सैन्य अभियानों की निगरानी करना था। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>PoJK में &amp;apos;Big Announcement&amp;apos; की तैयारी: 13 अगस्त को JKJAAC करेगा बड़ा खुलासा, Aqeel का दावा</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, अकील ने दावा किया है कि इलाके में चल रहा आंदोलन जारी रहेगा और JKJAAC के 13 अगस्त को एक &quot;बड़ी घोषणा&quot; करने की उम्मीद है। रावलकोट के टी चौक से बात करते हुए, अकील ने कहा कि एक्शन कमेटी ने एक दिन पहले एक नया &quot;अलमिया&quot; (कार्यक्रम) शुरू किया था, जिसमें कई मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने आगे कहा कि एक्शन कमेटी 13 अगस्त को अपनी अगली घोषणा करेगी, जिसे उन्होंने एक &quot;बड़ी घोषणा&quot; बताया, जिसका लोग इंतज़ार कर रहे थे। अकील ने यह भी आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों की गतिविधियां लोगों में डर पैदा करने के मकसद से की जा रही थीं। उन्होंने दावा किया कि इलाके में कभी-कभी ड्रोन देखे गए और आरोप लगाया कि रात करीब 9 बजे फायरिंग शुरू हुई जो सुबह तक चलती रही। अकील के मुताबिक, कभी-कभी मस्जिदों से भी घोषणाएं की जाती थीं जिनमें लोगों से &#039;टी चौक&#039; खाली करने को कहा जाता था। इन सबके बावजूद, उन्होंने दावा किया कि लोग डटे रहे और &#039;टी चौक&#039; पर ही बने रहे। अकील ने कहा, &quot;लोग यह जगह नहीं छोड़ेंगे,&quot; और जोड़ा कि अगर उनकी समस्याएं हल नहीं हुईं, तो वे अपना आंदोलन आगे बढ़ाएंगे।इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Pakistan में आतंकवादियों पर कहर बनकर टूट रहे हैं Unknown Gunmen, Lashkar कमांडर के बयान से हुआ &#039;खौफ&#039; का खुलासाअकील ने बाग, रावलकोट और हवेली जैसे इलाकों में चल रहे चुनाव प्रचार के बारे में भी बात की। उन्होंने दावा किया कि जनता के एक बड़े हिस्से ने चुनाव प्रचार का विरोध किया और आम लोगों ने चुनावी प्रक्रिया का बहिष्कार किया। अकील के अनुसार, कई जगहों पर वोटिंग नहीं हुई, जबकि जिन जगहों पर वोटिंग हुई, वहां उन्होंने दावा किया कि वोटिंग प्रतिशत केवल एक से दो प्रतिशत के आसपास था और आरोप लगाया कि वोटिंग दबाव में कराई गई थी।इसे भी पढ़ें: अब ब्रिटिश नेवी में घुसा चला आया चीन! ड्रोन में लगे कैमरे भेज रहे थे डेटा, मचा हड़कंपउन्होंने फिर से कहा कि चुनाव का बहिष्कार किया गया था और दावा किया कि लोगों से वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा न लेने का आग्रह किया जा रहा था। अकील ने कहा कि लोग बहिष्कार पर कायम हैं और उन्होंने दोहराया कि वोटरों से पोलिंग स्टेशन न जाने के लिए कहा जा रहा था। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:46 +0530</pubDate>
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<title>अचानक बांग्लादेश क्यों पहुंचे भारत के 4 अफसर, खुफिया एजेंसी DGFI का क्या है खेल?</title>
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<description><![CDATA[ ढाका से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी डीजीएफआई के गुप्त बुलावे पर भारत के चार शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों का खुफिया डेलीगेशन अचानक ढाका उतर चुका है। एक तरफ शेख हसीना की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बांग्लादेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। तो वहीं दूसरी तरफ  भारत के उच्चायुक्त की प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ होने वाली हाई वोल्टेज मुलाकात से पहले इस सीक्रेट विजिट ने कूटनीतिक गलियारों में इस वक्त हड़कंप मचा कर रख दिया है। रविवार की दोपहर को एयर इंडिया की फ्लाइट से भारत के चार सुरक्षा अधिकारियों का एक डेलीगेशन ढाका पर उतरता है। हैरानी की बात यह है कि इन अधिकारियों की सुरक्षा और मेहमान नवाजी का सारा इंतजाम बांग्लादेश की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसी डीजीएफआई यानी कि डायरेक्टर जनरल ऑफ फोर्स इंटेलिजेंस ने खुद किया और इन्हें सीधे होटल में ठहराया गया। इसे भी पढ़ें: India Neighborhood First policy: बांग्लादेश से लेकर नेपाल तक भारत का बड़ा गेम, पलटा पासा !यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ भारतीय उच्चायुक्त की आमने-सामने की बैठक पहले से ही तय है। हालांकि अधिकारियों के नाम और पद पूरी तरह गोपनीय रखे गए हैं। लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे बहुत बड़ा सुरक्षा समझौता या फिर बातचीत चल रही है। लेकिन इस गरमागरर्मी माहौल के पीछे की असली वजह क्या है? शेख हसीना का वो विस्फोटक बयान। बांग्लादेश छोड़ने के ठीक 2 साल बाद 5 अगस्त को नई दिल्ली से शेख हसीना ने वर्चुअल मीडिया के जरिए जो हुंकार भरी उसने ढाका की नीव हिला कर रख दी। बांग्लादेश के अंतरिम सरकार और विदेश मंत्रालय ने इस पर तीखी अपनी नाराजगी जताई। उनका यह तर्क था, कहना था कि भारत द्वारा हसीना को मंच देना बांग्लादेश की संप्रभुता और जुलाई विद्रोह के शहीदों का अपमान है। इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina के extradition की Bangladesh ने फिर मांग की, भारतीय उच्चायुक्त ने PM रहमान से की मुलाकातजवाब में भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दो टूक यह साफ कर दिया है कि यह कार्यक्रम किसी निजी मीडिया संगठन का था और भारत सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं है। भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह उन बयानों का समर्थन नहीं करता। लेकिन इस बयानबाजी के बाद जो कूटनीतिक तनाव पैदा हुआ उसकी आग को बुझाने के लिए अब सुरक्षा अधिकारियों का यह डेलीगेशन ढाका में मौजूद है? यह दावा किया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री तारिक रहमान सितंबर में होने वाली बीआईएमएस टीईईसी मीटिंग के लिए नई दिल्ली आएंगे? ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:45 +0530</pubDate>
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<title>Hebrew University की Research में बड़ा खुलासा: Israel के फूड&#45;एड सिस्टम में भारी असमानता और खामियां</title>
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<description><![CDATA[ इज़राइली रिसर्चर्स की एक नई स्टडी में इज़राइल के फ़ूड-एड (भोजन सहायता) नेटवर्क की पहली व्यापक राष्ट्रीय मैपिंग की गई है। इसके लेखकों का कहना है कि इससे उस सेक्टर की पहली विस्तृत तस्वीर सामने आई है, जिसके आकार और ढांचे को पहले कभी व्यवस्थित रूप से दर्ज नहीं किया गया था। इन नतीजों से यह सवाल उठता है कि क्या मौजूदा सिस्टम भोजन की कमी का सामना कर रहे इज़राइलियों को लगातार और समान रूप से भोजन उपलब्ध करा सकता है। रिसर्च में पाया गया कि इज़राइल का ज़्यादातर फ़ूड-एड सिस्टम गैर-लाभकारी संगठनों (nonprofit organisations) के बिखरे हुए नेटवर्क के ज़रिए चलता है। इसमें सरकारी फ़ंडिंग सीमित है और अलग-अलग इलाकों और समुदायों के बीच कवरेज में काफ़ी अंतर है।इसे भी पढ़ें: सिर के बदले सिर! कौन है जनरल रेजाई, जिसे मोजतबा ने बनाया ईरान का &#039;सिक्योरिटी बॉस&#039;7 अक्टूबर, 2023 को हमास के इज़राइल पर हमले और उसके बाद शुरू हुई जंग के 1,000 से ज़्यादा दिनों बाद भी भोजन की कमी की समस्या बड़े पैमाने पर बनी हुई है। इज़राइल के नेशनल इंश्योरेंस इंस्टीट्यूट के अनुसार, 2024 में 27.1% इज़राइली परिवारों को भोजन की कमी का सामना करना पड़ा, जिससे लगभग दस लाख परिवार और दस लाख से ज़्यादा बच्चे प्रभावित हुए। जेरूसलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी के मोरन एकोस और प्रोफ़ेसर एरन एम. ट्रोएन के साथ-साथ रामत गन के शेबा मेडिकल सेंटर की डॉ. ओर्ली तामिर की अगुवाई में रिसर्चर्स ने बड़े फ़ूड बैंकों के एडमिनिस्ट्रेटिव डेटा और रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके पूरे इज़राइल में भोजन सहायता में शामिल 2,289 सक्रिय गैर-लाभकारी संगठनों की पहचान की।इसे भी पढ़ें: हम नहीं मानेंगे...अब ट्रंप को ही आंखें दिखा रहे नेतन्याहू, प्लान कर दिया खारिज!जिन संगठनों ने वित्तीय आंकड़े बताए, उनका सालाना टर्नओवर कुल मिलाकर 6.18 बिलियन शेकेल ($1.77 बिलियन) था। इन संगठनों ने 28,000 से ज़्यादा कर्मचारियों और 170,000 वॉलंटियर्स के होने की जानकारी दी। मैपिंग से भौगोलिक और सामुदायिक स्तर पर भी काफ़ी असमानताएँ सामने आईं। हालाँकि आम आबादी की तुलना में अरब परिवारों में भोजन की कमी (फ़ूड इनसिक्योरिटी) की समस्या ज़्यादा है, फिर भी स्टडी में पहचानी गई भोजन-सहायता देने वाली ग़ैर-लाभकारी संस्थाओं में से केवल 4% ही अरब समुदायों में काम करती हैं।क्षेत्रीय असमानताएँ भी साफ़ तौर पर देखी गईं। लगभग 29% संस्थाएँ यरूशलेम ज़िले में काम करती हैं, जबकि इज़राइल के उत्तरी ज़िले में यह आँकड़ा 9% है; और यह तब है जब शोधकर्ताओं के अनुसार, दोनों ही इलाकों में भोजन की सुरक्षा को लेकर काफ़ी ज़रूरतें हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>जिसका डर था वही हुआ! किम जोंग उन ने उतारे 50000 सैनिक, खुशी से झूम उठे पुतिन</title>
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<description><![CDATA[ रूस और यूक्रेन की जंग को 4 साल से ज्यादा बीत चुका है। दुनिया को लगा था कि यह युद्ध थमेगा लेकिन यह तो और भी भयानक होता जा रहा है। तबाही का मंजर ऐसा है कि इसका असर सिर्फ कीव या फिर मॉस्को पर नहीं है बल्कि पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है। पड़ता दिखाई दे रहा है। लेकिन अब इस जंग में एक ऐसी एंट्री हुई है जिसने नाटो से लेकर अमेरिका तक की रातों की नींद उड़ा दी है। पुतिन के सबसे भरोसेमंद दोस्त किम जोंग उन ने अब सिर्फ मिसाइलों से ही नहीं बल्कि अपने 50000 खूंखार सैनिकों को युद्ध के मैदान में उतारने का बड़ा ऐलान कर दिया है। बहुत बड़ा फैसला ले ली है। इस खबर ने राष्ट्रपति जेलेंस्की को हिला कर रख दिया है। इसे भी पढ़ें: Russia हिंद महासागर तक rail network बनाने का इच्छुक: Deputy PM Marat Khusnullinपिछले कुछ सालों से रूस और यूक्रेन के बीच हमले फिर से भीषण हो गए। रूसी रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उन्होंने यूक्रेन के 150 से ज्यादा ड्रोन को मार गिराया और रूस ने यूक्रेन के खारकीव और ओसा जैसे बड़े शहरों पर बारूद की ऐसी बारिश की है कि चारों तरफ सिर्फ मलबा ही मलबा नजर आ रहा है। लेकिन यूक्रेन भी शांत नहीं बैठा है। कुछ ही घंटे पहले यूक्रेन ने सीमा के करीब 12,000 कि.मी. दूर रूस के एक महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरी सेंटर पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया है। इस हमले में 12 लोगों की जान भी गई है और 39 घायल बताए जा रहे हैं। जैसा कि रटर्स की रिपोर्ट में है। यानी जंग अब सीमा से निकल कर रूस के दिल तक पहुंच गई है।  इसे भी पढ़ें: Syria और Russia के बीच हुआ समझौता, हमीमीम और टार्टस बेस का नियंत्रण सीरिया लेगानाटो की मदद और किम जोन की एंट्री?जब अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देश यूक्रेन को घातक हथियार भेज रहे हैं तो पुतिन ने भी अपना सबसे बड़ा पत्ता खोल दिया है और रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरिया ने रूस में 300 से 500 सैनिक तैनात करने का फैसला किया है। जेलस्की अब बुरी तरह से घबराए हुए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके बताया कि कैसे उत्तर कोरियाई सैनिक अब सीधे रूस की तरफ से लड़ेंगे। जेलंस्की ने दक्षिण कोरिया से एयर डिफेंस सिस्टम लेने के लिए मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने साफ कह दिया है कि हमें ड्रोन और एयर डिफेंस के मामले में तुरंत सहयोग चाहिए क्योंकि खतरा अब दो गुना हो चुका है। अब बात सिर्फ सैनिकों तक सीमित नहीं है दोस्तों। उत्तर कोरिया ने अपनी एक घातक मिसाइल यूनिट भी रूस भेज दी है। करीब 90 जांबाज सैनिक वाली यह यूनिट रूस की 112वीं मिसाइल ब्रिगेड के साथ मिलकर काम करेगी। इतना ही नहीं रूस इस तैनाती के जरिए 120 उत्तर कोरियाई बैलेस्टिक मिसाइलें और छह भारी भरकम लांचर युद्ध में झोंकने वाला है। पहले किम जोंग सिर्फ गोला बारूद भेज रहे थे लेकिन अब पहली बार उत्तर कोरिया की पूरी मिसाइल यूनिट रूसी धरती पर तैनात है। यह रूस और उत्तर कोरिया के सैन्य संबंधों का सबसे बड़ा और खतरनाक विस्तार है।इसे भी पढ़ें: मोदी हैं कि मानते नहीं...ट्रंप 100% टैरिफ वाला बिल लाते रह गए, इधर जिगरी रूस से तेल के बाद अब क्या लाने की तैयारी में भारत?आखिर किम जोंग उन इतना रिस्क क्यों ले रहे हैं?जून 2024 में जब राष्ट्रपति पुतिन पयोंग योंग पहुंचे थे तब दोनों देश के बीच एक ऐतिहासिक रक्षा संधि हुई। इस संधि में साफ लिखा है कि अगर किसी भी देश पर बाहरी हमला होता है तो दूसरा देश तुरंत सैन्य मदद करेगा। यह ठीक वैसा ही है जैसा नाटो का आर्टिकल पांच काम करता है। साल 204 की शुरुआत में भी उत्तर कोरिया ने रूस के कुछ क्षेत्र में 14,000 सैनिक भेजे थे जिन्होंने यूक्रेनी सेना को पीछे धकेलने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:44 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan Crisis: इमरान खान को रिहा करो वरना भुगतने होंगे नतीजे, PTI की बड़ी चेतावनी, होगा देशव्यापी आंदोलन</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की लगातार जेल में रहने को लेकर लोगों का गुस्सा उस हद तक बढ़ सकता है, जहां शांति बहाल करने के लिए उनका सुलह का आह्वान भी काफी न हो। यह बात मंगलवार को उनकी पार्टी &#039;पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ&#039; के एक वरिष्ठ नेता ने कही। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी, जिनकी पार्टी वहां सत्ता में है। उन्होंने कहा कि उन्हें युवाओं में बढ़ता असंतोष दिखाई दे रहा है। उन्होंने इस्लामाबाद में सुप्रीम कोर्ट की इमारत के बाहर पत्रकारों से कहा कि मैं युवाओं की आंखों में क्रांति की चिंगारी देख सकता हूं और कोई भी इसे नियंत्रित नहीं कर पाएगा। अफ़रीदी का यह बयान तब आया है, जब उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर खान को इस हफ़्ते जेल में उनसे मिलने आने वाले पार्टी सहयोगियों से नहीं मिलने दिया गया, तो पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन होंगे। उन्होंने कहा था कि खान की पार्टी के सभी सांसद गुरुवार को जेल जाएंगे और चेतावनी दी थी कि अगर मुलाक़ात की इजाज़त नहीं दी गई, तो &quot;पूरा पाकिस्तान&quot; बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन देखेगा।इसे भी पढ़ें: Imran Khan के समर्थकों का Pakistan में प्रदर्शन, 100 से अधिक PTI कार्यकर्ता गिरफ्तार73 साल के खान 2023 से पाकिस्तान की अदियाला जेल में बंद हैं और उन पर कई मामले चल रहे हैं। उनकी पार्टी ने बार-बार आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने उन्हें परिवार के सदस्यों और पार्टी सहयोगियों से मिलने नहीं दिया है, और उनकी स्वास्थ्य समस्याओं जिसमें आँखों की एक तकलीफ़ भी शामिल है। सुप्रीम कोर्ट के बाहर धरने में शामिल होते हुए अफरीदी ने कहा कि जनता का गुस्सा इतना बढ़ सकता है कि अगर खान सुलह की अपील भी करें, तो भी लोग शांति की अपील पर शायद कोई प्रतिक्रिया न दें। उन्होंने खान की सेहत के बारे में आ रही खबरों पर भी चिंता जताई और कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री ने कभी भी मेडिकल आधार पर जेल से राहत की मांग नहीं की थी। अफ़रीदी ने कहा कि खान को झूठे मामलों में अन्यायपूर्ण तरीके से जेल में रखा गया है&quot; और चेतावनी दी कि जो लोग इस ज़्यादती के लिए ज़िम्मेदार हैं, उन्हें भी अपनी बारी आने पर इसके नतीजे भुगतने होंगे। न्यायपालिका का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर एक भी जज न्याय के लिए खड़ा होता है, तो इससे दूसरों को भी ऐसा करने का हौसला मिलेगा। इसे भी पढ़ें: Imran Khan की रिहाई पर अड़ी PTI: 27 सितंबर को Islamabad March का ऐलान, सुहैल अफरीदी की चेतावनीउन्होंने कहा अगर जज न्याय नहीं करते और अपनी उस ज़िम्मेदारी को नहीं निभाते जिसके लिए उन्हें सैलरी मिलती है, तो लोग कहाँ जाएँगे? इन बयानों से खान की लगातार जेल में रहने, उनसे मिलने-जुलने और मेडिकल सुविधा मिलने से जुड़ी दिक्कतों, और उनके मामलों को संभालने के तरीके पर पार्टी की तीखी आलोचना और विरोध की चेतावनी ज़ाहिर होती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:44 +0530</pubDate>
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<title>POJK में ब्रिटिश नागरिक की मौत, भड़का ब्रिटेन, फंसा पाकिस्तान!</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (POK) में प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने एक ब्रिटिश नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी। इस बीच, पाकिस्तान के अवैध कब्ज़े वाले इस इलाके में जारी अशांति के बीच एक और ब्रिटिश नागरिक को मीरपुर की जेल में दो महीने से ज़्यादा समय से हिरासत में रखा गया है। ये हत्याएं और गिरफ्तारियां ऐसे समय में हुई हैं जब 1948 से पाकिस्तान के अवैध कब्ज़े वाले इस भारतीय इलाके में महीनों से विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की अगुवाई प्रतिबंधित &#039;जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी&#039; (JAAC) कर रही है और प्रदर्शनकारी आर्थिक राहत और ज़्यादा राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं। लंदन के अख़बार द गार्डियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीटरबरो (लंदन से 119 किलोमीटर उत्तर में स्थित एक शहर) के रहने वाले मोहम्मद अख्तर की 9 जून को हत्या कर दी गई। वह उस समय कोटली में थे, जो उस इलाके के पास है जहां पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच बड़े पैमाने पर झड़पें हुई थीं। इसे भी पढ़ें: UN ने PoK में प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की जवाबदेही तय करने और प्रतिबंध हटाने की मांग की50 साल के अख्तर के परिवार ने अखबार को बताया कि POK में आर्थिक और चुनावी सुधारों की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों की भीड़ पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की। परिवार का आरोप है कि अख्तर की मौत सुरक्षा बलों की गोलीबारी की वजह से हुई। अख्तर के कज़िन मोहम्मद साद ने बताया कि UK का नागरिक होने के बावजूद अख्तर कोटली में था, लेकिन वह प्रदर्शनों में हिस्सा नहीं ले रहा था। उसे अपने घर के पास एक आवारा गोली लगी। साद ने द गार्डियन को बताया उस दिन सुरक्षा बलों ने फायरिंग की थी और वह [अख्तर] एक आवारा गोली का शिकार हो गया।&quot; उन्होंने आगे बताया कि उनके कज़िन अख्तर की छाती के एक तरफ गोली लगी थी। साद ने कहा कि परिवार ने ब्रिटिश अधिकारियों के सामने यह मामला नहीं उठाया, क्योंकि वे PoK में पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं करा पाए थे और उन्हें डर था कि अगर मामले पर ज़्यादा ध्यान दिया गया तो उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। इसे भी पढ़ें: UK Police से ज़मानत लेकर फरार Grooming Gang का आरोपी, Rushkar Ahmed अब PoK Assembly में बैठेगाजून से PoK में कैद ब्रिटिश नागरिक&#039;द गार्डियन&#039; की रिपोर्ट के मुताबिक, नॉटिंघम शहर के रहने वाले एक और ब्रिटिश नागरिक, वकास आरिफ को 5 जून को हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हिरासत में लिया गया था और वह दो महीने से ज़्यादा समय से मीरपुर की जेल में बंद हैं। आरिफ के परिवार ने &#039;द गार्डियन&#039; को बताया कि उन्होंने प्रदर्शनों में हिस्सा नहीं लिया था। उनकी बहन सुमेरा ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बल और रेंजर्स उनके घर में घुसे और उनके भाई को हिरासत में ले लिया। उन्होंने कहा उन पर कोई आरोप नहीं है। उन्होंने कुछ नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि विरोध प्रदर्शनों को कमज़ोर करने की कोशिश में कई और लोगों को भी जेल में डाला गया है। आरिफ की पत्नी, वारिशा कम्पुलवी ने कहा कि हिरासत में लिए जाने के बाद से ब्रिटिश अधिकारी उनसे सीधे संपर्क नहीं कर पाए हैं। 26 जून को यूके के विदेश कार्यालय से कम्पुलवी को भेजे गए एक ईमेल में कहा गया कि कांसुलर स्टाफ़ ने जेल में पाकिस्तानी अधिकारियों से संपर्क किया था और उन्हें बताया गया कि आरिफ़ की सेहत ठीक है, हालाँकि वे उनसे सीधे बात नहीं कर पाए थे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:44 +0530</pubDate>
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<title>हो गया खेल! भारत को रोककर खुद रूसी तेल खरीद रहा अमेरिका?</title>
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<description><![CDATA[ कुछ दिन पहले यूएस सेनेट में एक बिल पास हुआ। बिल था अगर कोई देश रूसी से तेल खरीदेगा तो उस पर अमेरिका 100% तक का टेरिफ लगाने का अधिकार रखेगा। भारत और चीन के लिए यह सीधा थ्रेट था क्योंकि यह दो देश रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदते हैं। लेकिन अब अगर हम कहें कि यह बिल बस मजाक है। अमेरिका और यूरोप रशियन ऑयल खरीद को लेकर दुनिया के दूसरे देशों पर टेरिफ और आर्थिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दे रहे हैं, वही देश दूसरी ओर खुद रशिया के तेल से बने रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: तातारस्तान की Oil Refinery पर भीषण ड्रोन हमला, 12 की मौत और 39 घायल हुएजुलाई के महीने में भारत ने रशिया से करीब 5.5 बिलियन यूरो यानी लगभग 55000 करोड़ का कच्चा तेल खरीदा। रशियन क्रूड की भारत को सप्लाई जुलाई में बढ़कर करीब 28 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गई। यानी इंडिया जितना कच्चा तेल दुनिया के दूसरे देशों से खरीद रहा है, उसमें अकेले रशिया की हिस्सेदारी करीब 55% की हो गई। ये आंकड़े सामने आए। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर यानी सीआरए की रिपोर्ट से। यहीं से अमेरिका और यूरोप की नीति को लेकर डबल स्टैंडर्ड की बहस भी शुरू हुई। क्योंकि सीआरए की एक रिपोर्ट ने एक बड़ा खुलासा किया। इस रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में भारत, टर्की, ब्रूनोई और जॉर्जिया की रिफाइनरीज ने जुलाई में कुल 633 मिलियन यूरो के ऑयल प्रोडक्ट्स का निर्यात किया। इनमें 214 मिलियन यूरो के उत्पाद यूरोपीय संघ उस यूरोप को गए जो रशियन ऑयल पर प्रतिबंध लगाने की लगातार धमकी देते आया है और यहां तक कि भारत के खिलाफ कई बार बयानबाजी भी की। इसके अलावा 184 मिलियन यूरो के ऑयल प्रोडक्ट ऑस्ट्रेलिया और 234 मिलियन यूरो के ऑयल प्रोडक्ट अमेरिका भेजे गए और अनुमान है कि इनमें से करीब 284 मिलियन यूरो के रिफाइंड उत्पाद रूसी कच्चे तेल से तैयार किए गए थे।   इसे भी पढ़ें: Global Oil Crisis: होर्मुज संकट से $84 के पार पहुंचा Brent Crude, ईरान-अमेरिका में बढ़ी तकरारतमाम बयानबाजी और धमकियों के बाद भी अमेरिका और यूरोप कहीं ना कहीं किसी ना किसी तरीके से रशियन ऑयल प्रोडक्ट इस्तेमाल कर रहे हैं और एक तरह से जो वो बार-बार धमकी दे रहे हैं कि जो देश रशिया से तेल खरीदेंगे उन पर वो टेरेफ लगाएंगे तो कायदे से देखा जाए तो पहले तो उन्हें इस पर रोक लगानी होगी। फिर दूसरे देशों से रशियन ऑयल को लेकर बात करनी होगी। देखिए अब बात उन कारगो की जो जुलाई में भारतीय रिफाइनरियों से निकलकर यूरोपीय संघ के बंदरगाहों तक पहुंचे। इन कारगोस में ऐसे रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद थे जिन्हें तैयार करने में रशियन कच्चे ऑयल का इस्तेमाल हुआ था। यानी आसान भाषा में समझिए कच्चा तेल रूस से आया। भारत की रिफाइनरी में उसकी प्रोसेसिंग हुई। उससे पेट्रोलियम प्रोडक्ट तैयार हुए और फिर उसका एक हिस्सा यूरोपीय बाजार तक पहुंचा। इसी तरह जामनगर रिफाइनरी से अमेरिका को भी रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की शिपमेंट भेजी गई।इसे भी पढ़ें: MEA Briefing: Balochistan Independence, Russian Oil Purchase, Doval Sergio Gor Meeting, China, Nepal, Bangladesh और Pakistan संबंधी मुद्दों पर आया India का जवाबसीआरए की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई से पहले के तीन महीनों में जामनगर रिफाइनरी के फीड स्टॉक का करीब 35% हिस्सा रूसी क्रूड था। यानी भारत सिर्फ रूसी तेल खरीद नहीं रहा बल्कि उस तेल को रिफाइंड करके तैयार पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है और यही पेट्रोलियम उत्पाद यह देश अमेरिका यूरोप के बाजार में जा रहे हैं और देखा जाए तो सीधे तौर पर नहीं लेकिन घुमा फिराकर रशिया के प्रोडक्ट अमेरिका और यूरोप के बाजार में बेचे जा रहे हैं। तो देखा जाए तो एक तरह से अमेरिका यूरोप खुद रशियन प्रोडक्ट लेने में पीछे नहीं है। मगर वो ये भी नहीं चाहते कि भारत रशिया से कोई व्यापार करे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>भुखमरी, कंगाली और दिवालीयपन के बावजूद पाकिस्तान आया नंबर&#45;1, भारत 13वें नंबर पर, लेकिन किसमें?</title>
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<description><![CDATA[ एक देश भुखमरी, कंगाली और दिवालीयपन के बावजूद दुनिया में नंबर वन कैसे आ सकता है? हम पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की बात कर रहे हैं। पाकिस्तान ने वो कर दिखाया जो कोई और देश नहीं कर पाया। लेकिन  जश्न मनाने से पहले यह जान लीजिए कि ये मेडल तरक्की का नहीं है बल्कि तबाही का है। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 की रिपोर्ट आ चुकी है और पाकिस्तान ने पूरी दुनिया को पछाड़ कर आतंक का सिरमौर होने का खिताब अपने सर पर सजा लिया है। लेकिन कहानी सिर्फ पाकिस्तान की नहीं है। इस बार भारत 13वें नंबर पर है और अमेरिका जैसी सुपर पावर 28वें स्थान पर पहुंच गई है। आखिर दुनिया के सुरक्षित देशों में यह रक्तपात क्यों बढ़ा है और भारत की नाक के नीचे चल रही इस फ्रॉड यूनिवर्सिटी का काला सच क्या है जिसने हमें टॉप 15 में खड़ा कर दिया है। दरअसल साल 2026 की जीटीआई रैंकिंग में पाकिस्तान ने 10 में से 8.5 का स्कोर हासिल किया। इसे भी पढ़ें: CAG report ने Bengaluru Metro में भूमि अधिग्रहण व वित्तीय प्रबंधन की खामियां उजागर कींयह स्कोर कितना खतरनाक है?इसका अंदाजा आप इस बात से लगाइए कि बुरकीना, फासो, सोमालिया और सीरिया जैसे देश जहां सालों से सिविल वॉर यानी कि गृह युद्ध चल रहे हैं वे भी पाकिस्तान से पीछे रह गए और पिछले साल पाकिस्तान दूसरे नंबर पर था लेकिन इस बार उसने आतंक के हर रिकॉर्ड को तोड़ दिया। रिपोर्ट साफ कहती है कि पाकिस्तान ना केवल दुनिया के लिए आतंकी पैदा कर रहा है बल्कि अब वहां होने वाले हमलों की संख्या और तीव्रता बढ़ चुकी है और ये दुनिया का सबसे असुरक्षित देश बन चुका है। अब बात अपने देश भारत की बहुत दुख के साथ यह आंकड़े साझा करने पड़ रहे हैं कि भारत 15वें स्थान से उठकर 13वें स्थान पर आ गया है। हम टॉप 10 के बेहद करीब पहुंच गए हैं और कई लोग कहेंगे कि यह पश्चिमी देशों का प्रोपोगेंडा है।इसे भी पढ़ें: ईरान के डर से अपना एयरफोर्स-1 विमान छोड़-छाड़  झट से ली सीक्रेट फ्लाइट, Turkey से गुप्त तरीके से भागे ट्रंप?आंकड़े कुछ और ही कहानी कह रहे हैं करीब 8 महीने पहले देश की राजधानी दिल्ली के दिल यानी कि लाल किले के पास एक बड़ा धमाका हुआ था। हालांकि हमारी सुरक्षा एजेंसियों ने इसे फैलने से रोक लिया। लेकिन अंतरराष्ट्रीय इंडेक्स में इसे राजधानी पर प्रहार के रूप में देखा गया। कश्मीर में भले ही हमारी सेना आतंकियों को चुन चुन कर ठोक रही है लेकिन हर मुठभेड़ और हर खतरे को टेरर एक्टिविटी के रूप में काउंटर कर रहा है। घुसपैठ की कोशिशें और छोटे हमले भी भारत के स्कोर को खराब कर रहे हैं।जीटीआई ने एक ऐसी घटना का जिक्र किया है जिसने सबको हिला कर रख दिया। दिल्ली के पास एक ऐसी यूनिवर्सिटी चल रही थी जिसे एक फ्रॉड का आदमी चला रहा था। वह व्यक्ति पहले भी जेल जा चुका है लेकिन फिर भी वो एक पूरा संस्थान चलाता है। हैरानी की बात यह है कि इस यूनिवर्सिटी का इस्तेमाल कश्मीरी युवाओं को आतंकी बनाने और उन्हें रिक्रूट करने के लिए किया जा रहा था। सालों तक यह खेल चलता रहा और हमारे एजेंसियों को भनक तक नहीं लगी। अब जब भनक लगी तो रिपोर्ट कहती है कि अगर भारत इन छोटी-छोटी स्लीपर सेल्स और संदिग्ध संस्थानों पर समय रहते कारवाई करता तो भारत आज टॉप 20 देशों की लिस्ट से बाहर होता। यह हमारे लिए एक सबक है कि दुश्मन सिर्फ सीमा पार नहीं है बल्कि शहरों के बीचों-बीच भी बैठे हो सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:43 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan Political Crisis: Zardari ने 19 जजों की नियुक्ति को दी मंजूरी, खत्म हुआ सप्ताहों से जारी Deadlock</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने मंगलवार को पांच हाई कोर्ट में 19 अतिरिक्त जजों की नियुक्ति को मंज़ूरी दी और पांच अन्य को स्थायी जज के तौर पर पक्का किया। इसके साथ ही, जजों की नियुक्ति को लेकर राष्ट्रपति कार्यालय और संघीय सरकार के बीच हफ़्तों से चल रहा गतिरोध खत्म हो गया। पाकिस्तान के ज्यूडिशियल कमीशन ने पिछले महीने उच्च न्यायपालिका में नियुक्ति के लिए 24 नामों की सिफ़ारिश की थी और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने मंज़ूरी के लिए यह प्रस्ताव ज़रदारी को भेजा था। यह मामला हफ़्तों तक लंबित रहा और पिछले हफ़्ते इस देरी को इस्लामाबाद हाई कोर्ट में चुनौती भी दी गई थी। इसे भी पढ़ें: Pakistan Crisis: इमरान खान को रिहा करो वरना भुगतने होंगे नतीजे, PTI की बड़ी चेतावनी, होगा देशव्यापी आंदोलनप्रेसीडेंसी के अनुसार, राष्ट्रपति ने लाहौर हाई कोर्ट (LHC), सिंध हाई कोर्ट (SHC), पेशावर हाई कोर्ट (PHC), इस्लामाबाद हाई कोर्ट (IHC) और बलूचिस्तान हाई कोर्ट (BHC) में अतिरिक्त जजों की नियुक्ति को मंज़ूरी दे दी है। इस मंज़ूरी में LHC के लिए 10 अतिरिक्त जज और IHC, SHC व BHC में से हर एक के लिए तीन-तीन अतिरिक्त जज शामिल हैं। PHC के चार अतिरिक्त जजों और LHC के एक अतिरिक्त जज को स्थायी जज के तौर पर पक्का किया गया। यह मंज़ूरी तब रुकी हुई थी जब ज़रदारी की कानूनी टीम ने कहा कि पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) - जिसके वे को-चेयरमैन हैं - द्वारा सुझाए गए लगभग सभी नामों को ज्यूडिशियल कमीशन ने खारिज कर दिया था। इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच अनौपचारिक बातचीत के बाद यह मंज़ूरी मिली, हालांकि यह तुरंत साफ़ नहीं हो पाया कि किस वजह से यह सफलता मिली। इससे पहले, जजों के शपथ ग्रहण समारोह की तारीख 27 जुलाई तय की गई थी, लेकिन ज़र्दारी ने न तो उस प्रस्ताव को मंज़ूरी दी और न ही उसे दोबारा विचार के लिए वापस भेजा, जिसके बाद इसे अनिश्चित काल के लिए टाल दिया गया। इस देरी की वजह से राष्ट्रपति कार्यालय और सरकार के बीच विवाद पैदा हो गया था; सरकार की कानूनी टीम का तर्क था कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत, राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री की सलाह पर काम करना होता है। यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री शरीफ़ और उनके भाई नवाज़ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) और PPP के बीच मतभेदों के बीच सामने आया है। ये दोनों पार्टियां संघीय सरकार में गठबंधन सहयोगी हैं, लेकिन पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में हाल ही में हुए चुनावों में उन्होंने एक-दूसरे के खिलाफ़ चुनाव लड़ा था, जहाँ PPP ने PML-N पर धांधली का आरोप लगाया था। इस ताज़ा कदम से न्यायिक नियुक्तियों को लेकर बना तत्काल गतिरोध खत्म हो गया है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Donald Trump और PM Modi आपस में सुलझा लेंगे रूसी तेल शुल्क विवाद, नवारो ने जताया भरोसा</title>
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<description><![CDATA[ व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ सलाहकार ने मंगलवार को कहा कि भारत द्वारा रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी शुल्क की धमकी से उत्पन्न मुद्दे को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आपस में सुलझा लेंगे। व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो की यह टिप्पणी अमेरिकी सीनेट द्वारा एक विधेयक पारित किए जाने के कुछ दिनों बाद आई है। इस विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी तेल के शीर्ष पांच खरीददारों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है।इसमें यह दलील दी गई है कि ऐसा व्यापार सीधे तौर पर यूक्रेन युद्ध को वित्तपोषित करता है। नवारो ने कहा कि 2022 में यूक्रेन युद्ध छिड़ने से पहले भारत रूस के साथ तेल व्यापार में शामिल नहीं था, लेकिन बाद में शामिल हो गया। नवारो ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप और आपके प्रधानमंत्री के बीच बहुत अच्छे कामकाजी संबंध हैं।वे इस मुद्दे का समाधान आपस में निकाल लेंगे और मेरे लिए उनके बीच आने की कोई बात नहीं है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:42 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Donald, Trump, और, Modi, आपस, में, सुलझा, लेंगे, रूसी, तेल, शुल्क, विवाद, नवारो, ने, जताया, भरोसा</media:keywords>
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<title>Congo में Ebola Outbreak का कहर बढ़ा, 2,000 से ज्यादा की मौत और 4,381 मामले दर्ज</title>
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<description><![CDATA[ कांगो में इबोला का प्रकोप तेजी से फैल रहा है और संक्रमित लोगों में से अब तक कम से कम दो हजार लोगों की मौत हो चुकी है। आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। सरकार द्वारा मंगलवार को प्रकाशित आंकड़ों से पता चलता है कि अब तक इबोला के 4,381 मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें से 2,011 लोगों की मौत हो चुकी है।मौजूदा प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई को की गई थी, लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि जीनोम अनुक्रमण से पता चला है कि यह संक्रमण कई महीने पहले, फरवरी में ही शुरू हो गया था। इटुरी में एक स्थानीय क्लीनिक में मरीजों के इलाज के प्रबंधन में मदद कर रहे डॉ. जीन-मैरी अकंदाबो ने कहा कि 2,000 मौतों का आंकड़ा ‘‘चिंताजनक’’ है और प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव प्रयासों को दोगुना करने की जरूरत है। इससे पहले 2014-2016 में पश्चिम अफ्रीका में इबोला के 28,000 से अधिक मामले सामने आए थे और 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।मौजूदा प्रकोप में मृत्यु दर 45.9 प्रतिशत है, जो 2014-2016 के पश्चिम अफ्रीका प्रकोप में दर्ज 39.6 प्रतिशत से अधिक है। पहली बार इबोला वायरस की पहचान 1976 में उस क्षेत्र में हुई थी, जो आज कांगो में आता है। यह इलाका इबोला नदी के पास स्थित है।मौजूदा प्रकोप इस मध्य अफ्रीकी देश में इबोला का 17वां और अब तक का सबसे बड़ा प्रकोप है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:42 +0530</pubDate>
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<title>Nikhil Gupta को US Court अब 20 नवंबर को सुनाएगी सजा, पीड़ित के अनुरोध पर टली सुनवाई</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका की एक संघीय अदालत सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने का आरोप स्वीकार करने वाले निखिल गुप्ता को 20 नवंबर को सजा सुनाएगी। न्यूयॉर्क के ‘सदर्न डिस्ट्रिक्ट’ की संघीय अदालत ने गुप्ता को सजा सुनाने के लिए पहले 25 सितंबर की तारीख तय की थी, लेकिन ‘‘हत्या की साजिश के कथित तौर पर निशाने पर रहे व्यक्ति’’ के अनुरोध के बाद सुनवाई टाल दी गई। अदालती दस्तावेजों में पीड़ित का नाम नहीं बताया गया है, लेकिन पन्नू के वकील ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि कथित रूप से सुपारी देकर हत्या कराने की साजिश में पन्नू ही निशाने पर थे।अमेरिका के ‘सदर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क’ की जिला अदालत में दाखिल एक पत्र में अभियोजकों ने कहा कि अज्ञात पीड़ित ‘‘सजा सुनाए जाने की कार्यवाही में शामिल होना चाहता है’’ और उसने 25 सितंबर की सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया है क्योंकि उस समय वह देश से बाहर होगा। न्यायाधीश विक्टर मारेरो ने अनुरोध स्वीकार करते हुए गुप्ता को सजा सुनाने की तारीख 20 नवंबर पूर्वाह्न 10 बजे तय की। गुप्ता ने पन्नू की हत्या की साजिश से जुड़े तीनों आरोपों-सुपारी देकर हत्या कराने, सुपारी देकर हत्या कराने की साजिश रचने और धनशोधन की साजिश रचने- के मामले में 13 फरवरी को अपना दोष स्वीकार कर लिया था।सुपारी देकर हत्या कराने के मामले में अधिकतम 10 साल की जेल, इसकी साजिश रचने के अपराध में अधिकतम 10 साल की जेल और धनशोधन की साजिश रचने के अपराध में अधिकतम 20 साल की जेल की सजा हो सकती है। गुप्ता को 30 जून 2023 को चेक गणराज्य में गिरफ्तार किया गया था और एक साल बाद उसे अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:41 +0530</pubDate>
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<title>Mohsin Naqvi ने Tehran में अराघची से वार्ता की, अमेरिका&#45;ईरान संघर्ष रोकने की कोशिश</title>
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<description><![CDATA[ ईरान-अमेरिका संघर्ष को खत्म कराने के लिए जारी मध्यस्थता प्रयासों के बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन रजा नकवी ने मंगलवार को तेहरान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से वार्ता की। ईरानी मीडिया ने यह जानकारी दी। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ ने एक राजनयिक सूत्र के हवाले से बताया था कि नकवी मंगलवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान के लिए रवाना हुए थे।बाद में ‘आईआरएनए’ ने ‘एक्स’ पर नकवी की अराघची से मुलाकात की तस्वीर पोस्ट की। पाकिस्तानी एवं ईरानी अधिकारियों ने अबतक इस बारे में कोई ब्योरा नहीं दिया है। इससे एक महीने पहले ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी पाकिस्तान के दौर पर आए थे।मोमेनी ने अपनी यात्रा के दौरान पाकिस्तानी समकक्ष के साथ बातचीत की थी। कतर जैसे खाड़ी देशों के समर्थन से पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है, लेकिन कई कारणों से संघर्ष अब भी जारी है। इस समय संघर्ष जारी रहने का मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का अवरुद्ध होना है।जून में अमेरिका और ईरान ने एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से आगे की बातचीत के लिए 60 दिनों का समय मिला था। अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद स्विट्जरलैंड में एक शिखर वार्ता भी हुई थी, लेकिन पिछले महीने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद बातचीत विफल हो गई और अमेरिका तथा ईरान दोनों ने फिर से एक-दूसरे पर सैन्य हमले शुरू कर दिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:41 +0530</pubDate>
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<title>Indonesia के Bali के पास यात्री नौका में आग लगी, 106 लोगों को सुरक्षित निकाला</title>
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<description><![CDATA[ इंडोनेशिया के पर्यटन द्वीप बाली के पास बुधवार को खराब समुद्री परिस्थितियों के बीच एक यात्री नौका में आग लग गई, जिसके बाद बचाव दल आग पर काबू पाने और नौका में सवार अन्य लोगों को बचाने में जुटा है। अधिकारियों ने बताया कि बचाव दल और आसपास से गुजर रहे जहाजों ने अब तक 106 लोगों को बचा लिया है तथा नौका से अन्य 25 लोगों को भी सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है। माताराम सर्च एंड रेस्क्यू ऑफिस के प्रमुख मोहम्मद हरियादी ने कहा, ‘‘सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।’’
उन्होंने बताया कि समुद्र में चार मीटर तक उठ रही ऊंची लहरों के कारण बचाव अभियान में दिक्कत आ रही है।कार्यालय के अनुसार, नौका ‘पुत्री यास्मीन’ बाली के पैडंग बाई बंदरगाह से पश्चिम नुसा तेंगारा प्रांत में लोम्बोक द्वीप स्थित लेम्बर बंदरगाह जा रही थी, तभी सुबह करीब चार बजकर 15 मिनट पर उसमें आग लग गई। एजेंसी को करीब आधे घंटे बाद आपात स्थिति की सूचना मिली, जिसके बाद उसने कर्मियों और बचाव नौकाओं को तुरंत मौके पर भेजा। हरियादी ने बताया कि बचाव अभियान में इंडोनेशियाई नौसेना के जहाजों, गश्ती नौकाओं, बचाव पोतों और हवाई सर्वेक्षण के लिए एक हेलीकॉप्टर की मदद ली जा रही है।उन्होंने बताया कि पैडंगबाई बंदरगाह प्राधिकरण की यात्री सूची के अनुसार, नौका में 114 यात्री और चालक दल के 17 सदस्य सवार थे। नौका पर 44 वाहन और 53 मोटरसाइकिल भी लदी थीं। इंडोनेशिया 17,000 से अधिक द्वीपों वाला देश है।यहां नौकाएं यात्रा का आम साधन हैं। देश में अक्सर समुद्री हादसे होते हैं और इसके लिए सुरक्षा नियमों को ठीक से लागू नहीं किए जाने को जिम्मेदार ठहराया जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:40 +0530</pubDate>
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<title>Stacey Taylor ने US Human Trafficking में अपराध स्वीकार किया, कम से कम 5 साल की जेल संभव</title>
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<description><![CDATA[ न्यूयॉर्क की एक महिला ने मानव तस्करी की उस अंतरराष्ट्रीय साजिश में अपनी भूमिका स्वीकार की है जिसके तहत मुख्य रूप से भारत के लोगों को उत्तरी सीमा के रास्ते अमेरिका में अवैध रूप से प्रवेश कराया जाता था। न्यूयॉर्क के प्लैट्सबर्ग की रहने वाली 43 वर्षीय स्टेसी टेलर जनवरी 2025 में मानव तस्करी के एक प्रयास में शामिल थी जो सफल नहीं हो सका। इस प्रयास के तहत भारत के लोगों को अवैध रूप से अमेरिका में लाया जा रहा था।अदालती दस्तावेजों के अनुसार, अमेरिका के सीमा गश्ती दल के अधिकारियों ने 20 जनवरी 2025 को न्यूयॉर्क के चुरुबुस्को के पास टेलर के वाहन को रोका और उसमें चार पुरुषों को पाया। अधिकारियों ने बाद में पता लगाया कि चारों पुरुष - तीन भारतीय और एक कनाडाई नागरिक - अवैध रूप से अमेरिका-कनाडा सीमा पार करके आए थे। कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने बाद में टेलर के मोबाइल फोन की जांच की तो पाया कि उसे इन लोगों की ‘लोकेशन’ साझा की गई थी और उसे उन्हें वहां से लेने के निर्देश मिले थे।अधिकारियों ने बताया कि चारों पुरुष पैदल एक जंगली इलाके से होकर अमेरिका में अवैध रूप से दाखिल हुए थे और इसके बाद वे वहां इंतजार कर रही टेलर की गाड़ी में बैठ गए। टेलर उन्हें सीमा से दूर अमेरिका के अंदरूनी हिस्से की ओर ले गई। टेलर के फोन की जांच में मिले संदेशों से संकेत मिला कि वह पहले भी मानव तस्करी की कई अन्य घटनाओं में शामिल रही है।टेलर को दिसंबर में सजा सुनाई जाएगी और उसे कम से कम पांच साल की जेल हो सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:40 +0530</pubDate>
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<title>Kariba Lake में 90 की क्षमता वाली नौका पलटी, 15 यात्रियों की मौत और 27 लापता</title>
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<description><![CDATA[ जिम्बाब्वे की करिबा झील में एक नौका के पलट जाने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और 27 अन्य लोग लापता हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने यह जानकारी दी। एजेंसी के अनुसार, 90 लोगों को ले जाने में सक्षम नौका में उसकी क्षमता से अधिक लोग सवार थे।उसने बताया कि 77 लोगों को बचाकर झील के एक छोटे द्वीप पर पहुंचा दिया गया है एवं उन्हें वापस लाने के लिए नौकाएं भेजी जा रही हैं। जिम्बाब्वे के सरकारी प्रसारक ‘जेडबीसी’ ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें तेज गति वाली कुछ नौकाएं झील में पलटी हुई नौका की ओर जाती दिखाई दे रही हैं। इस दौरान एक हेलीकॉप्टर भी घटनास्थल के ऊपर चक्कर लगाता दिख रहा है।जिम्बाब्वे की नागरिक सुरक्षा इकाई ने एक बयान में कहा कि टिकटों की बिक्री के आंकड़ों के अनुसार, नौका पर 114 वयस्क यात्री और चालक दल के पांच सदस्य सवार थे। बयान में कहा गया है कि संभव है कि नौका पर ऐसे बच्चे भी सवार हों, जिनके लिए टिकट की आवश्यकता नहीं होती। एजेंसी ने इस दुर्घटना को आधिकारिक तौर पर आपदा घोषित करने की सिफारिश की है।जिम्बाब्वे और जाम्बिया इस झील को साझा करते हैं और दोनों देशों के बीच आधिकारिक सीमा झील के बीचोंबीच से गुजरती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:40 +0530</pubDate>
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<title>US Senate में Tibet Act पेश, दलाई लामा के बाद भी समर्थन जारी रखने का प्रावधान</title>
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<description><![CDATA[ सागर कुलकर्णी
वाशिंगटन, 12 अगस्त अमेरिका की सीनेट के सदस्य के एक द्विदलीय समूह ने 14वें दलाई लामा के जीवनकाल के बाद भी तिब्बत के मुद्दे के प्रति अमेरिकी समर्थन जारी रखना सुनिश्चित करने के लिए एक विधेयक पेश किया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता एवं ओरेगन से सीनेटर जेफ मर्कले और इडाहो से सीनेटर जिम रिश (रिपब्लिकन पार्टी) ने हाल में अमेरिकी सीनेट में ‘अश्योरिंग द फ्यूचर ऑफ तिब्बत एक्ट’ (तिब्बत का भविष्य सुनिश्चित रखने संबंधी विधेयक- एएफटीए) पेश किया। विधेयक में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) को तिब्बती लोगों के वैध प्रतिनिधि और दलाई लामा द्वारा स्थापित शासन व्यवस्था की निरंतरता के रूप में मान्यता देने की बात कही गई है।इसमें अमेरिका के विदेश मंत्री को निर्वासित तिब्बती सरकार के राजनीतिक प्रमुख सिक्योंग और उसके नामित प्रतिनिधियों के साथ उच्चतम स्तर पर संपर्क बनाए रखने का निर्देश देने का भी प्रावधान है। विधेयक में संयुक्त राष्ट्र में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन को पर्यवेक्षक का दर्जा दिलाने और संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न संस्थाओं में उसकी समान पहुंच सुनिश्चित करने की पैरवी के जरिए तिब्बती लोगों के मानवाधिकारों और आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करने की भी बात कही गई है। सीनेटर टिम केन, टॉड यंग, जैकी रोजेन और रिक स्कॉट भी इस विधेयक के सह-प्रायोजक हैं।यह विधेयक प्रतिनिधि सभा में सांसद जिम मैकगवर्न और माइकल मैककॉल द्वारा 22 मई 2026 को पेश किए गए इसी तरह के विधेयक का सीनेट संस्करण है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:39 +0530</pubDate>
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<title>North Korea ने दागी Ballistic Missile, अमरीका&#45;दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास का विरोध</title>
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<description><![CDATA[ उत्तर कोरिया ने एक सप्ताह से भी कम समय में बुधवार को दूसरी बार बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। उसके पड़ोसी देशों ने यह जानकारी दी। ऐसा माना जा रहा है कि यह परीक्षण दक्षिण कोरिया और अमेरिका के प्रस्तावित संयुक्त सैन्य अभ्यास के विरोध में किया गया है जिसे उत्तर कोरिया अपने खिलाफ हमले की तैयारी के तौर पर देखता है।दक्षिण कोरिया के ‘ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ’ ने कहा कि उत्तर कोरिया के पूर्वी तटीय वोनसान क्षेत्र से सुबह करीब छह बजे दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल ने 700 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की। उसने कहा कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया की उकसावे वाली हर प्रकार की कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार हैं। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एक बयान जारी कर उत्तर कोरिया से बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रक्षेपण रोकने का आग्रह किया।परिषद ने कहा कि ‘‘उकसावे वाली ये कार्रवाइयां’’ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कई प्रस्तावों के तहत उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण पर प्रतिबंध है लेकिन उसके नेता किम जोंग उन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 2019 में उच्चस्तरीय कूटनीतिक प्रयास विफल होने के बाद उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु और मिसाइल हथियारों के भंडार को बढ़ाने के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य हथियारों के परीक्षण तेज कर दिए हैं। जापान के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि उसने भी उत्तर कोरिया की ओर से एक संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल के प्रक्षेपण का पता लगाया है।मंत्रालय ने कहा कि मिसाइल के जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र तक पहुंचने की कोई जानकारी नहीं है और माना जा रहा है कि वह जापान के तट से काफी दूर गिरी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने दो दिन पहले घोषणा की थी कि वे उत्तर कोरिया से संभावित खतरों से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने के लिए 17 अगस्त से अपना वार्षिक सैन्य अभ्यास शुरू करेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:39 +0530</pubDate>
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<title>लीबिया तक घुस गई ईरान की आग, तेल में कैसे हुए धामके पर धमाके?</title>
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<description><![CDATA[ उत्तर अफ्रीकी देश लीबिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा ठिकाने पर मंडराता सुरक्षा संकट अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सैन्य बहस का रूप ले चुका है। पश्चिमी लीबिया स्थित जाविया ऑयल रिफाइनिंग कंपनी पर दो दिनों के भीतर लगातार तीन संदिग्ध ड्रोन अटैक हुए। गैसलीन और नेफ्था टैंकों को निशाना बनाने के बाद अब ड्रोन मुख्य पाइपलाइन नेटवर्क के पास क्रैश हो गया। जिसके बाद लीबिया के नेशनल ऑयल कॉरपोरेशन को मैक्सिमम इमरजेंसी का ऐलान करना पड़ा है। इस हमले ने सबसे ज्यादा ध्यान तब खींचा जब रक्षा विशेषों और वैश्विक मीडिया ने इन हमलों के पैटर्न और इस्तेमाल हुई ड्रोन तकनीक के तार ईरान से जोड़ने शुरू कर दिए। पश्चिमी लीबिया की आर्थिक रीड मानी जाने वाली जाविया रिफाइनरी इस वक्त बारूद के ढेर पर खड़ी है। 1,20,000 बैरल क्रूड ऑयल पर डे प्रोसेस करने वाली इस रिफाइनरी के गैसोलिन और नेफ्था स्टोरेज टैंकों पर ड्रोन अटैक ने भीषण आग भड़का दी। इसे भी पढ़ें: हो गया खेल! भारत को रोककर खुद रूसी तेल खरीद रहा अमेरिका?हालांकि ताजा हमले में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन एनओसी ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो उन्हें फोर्स मेजोर लागू करके रिफाइनरी का कामकाज पूरी तरीके से ठप करना पड़ेगा। इससे पूरी लीबिया में ईंधन का भयावह संकट पैदा हो सकता है। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय रक्षा गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इन हमलों में इस्तेमाल की गई तकनीकी को लेकर होने लगी। कई एक्सपर्ट और ग्लोबल मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि रिफाइनरी पर अटैक के लिए जिन ड्रोनों का इस्तेमाल हुआ उनके डिजाइन, मारक क्षमता और रणनीति ईरान की प्रसिद्ध शाहिद ड्रोन तकनीक से मेल खाती है। मिडिल ईस्ट में सऊदी अरेको से लेकर लाल सागर में जहाजों तक तेल ठिकानों को पिन पॉइंट सटीकता से निशाना बनाने का यह वही ईरानी मॉडल है जब उत्तर अफ्रीका के संघर्ष क्षेत्रों में भी देखा जाने लगा। इसे भी पढ़ें: 12 August, 2026 Stock Market Updates: सेंसेक्स में बढ़त के बीच Godrej Consumer के शेयरों में कोहराम, CEO के इस्तीफे से 10% की भारी गिरावटसुरक्षा एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही इस हमले का सीधा आदेश तेहरान से ना आया हो लेकिन ईरान द्वारा विकसित सस्ते और घातक ड्रोन तकनीक का प्रसार अब उत्तर अफ्रीका के स्थानीय गुटों और उग्रवादी लड़ाकों तक पहुंच चुका है। लेबिया के सालों पुराने गृह युद्ध में विभिन्न गुटों के पास अब ऐसे अत्याधुनिक ड्रोन पहुंच चुके हैं जिनका इस्तेमाल वे तेल संसाधनों पर वर्चस्व जमाने या प्रतिद्वंदी सरकारों को ब्लैकमेल करने के लिए कर सकते हैं। यानी तकनीकी भले ईरानी पैटर्न की हो लेकिन निशाना लीबिया की अपनी अर्थव्यवस्था है। यदि जाविया रिफाइनरी में लंबे वक्त के लिए काम ठप होता है तो इसका असर केवल लीबिया तक सीमित नहीं रहेगा। इसे भी पढ़ें: Rupee कमजोर होकर US Dollar के खिलाफ 95.42 पर पहुंचा, कच्चे तेल में तेजी बनी वजहभूमध्य सागर से सटे इस इलाके में तेल आपूर्ति बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि पश्चिमी देश और संयुक्त राष्ट्र लीबिया के तेल बुनियादी ढांचे पर ड्रोन तकनीक के इस बढ़ते इस्तेमाल को पूरे क्षेत्र के लिए एक नया और खतरनाक मोड़ मान रहे हैं। जाविया रिफाइनरी पर हुए ड्रोन हमलों ने साफ किया है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोनों का बढ़ता इस्तेमाल अब उत्तर अफ्रीका की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है। ईरान शैली के ड्रोन तकनीक का स्थानीय गुटों के हाथों में पहुंचना एक ऐसा खतरा बन चुका है जिससे निपटने के लिए वैश्विक ताकतों को नए सुरक्षा समीकरण बनाने पड़ सकते हैं। सऊदी अरब की सबसे महत्वपूर्ण जिजान अरामको रिफाइनरी पर 5 अगस्त को हुए होती हमले को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज खुलासा हुआ है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Bab al&#45;Mandeb में Houthi Rebels का बड़ा हमला: 3 पाकिस्तानी नागरिकों की मौत, Global Shipping पर गहरा संकट</title>
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<description><![CDATA[ यमन के परिवहन मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने यमन की बाब अल-मंदेब जलसंधि में मिस्र के कार्गो जहाज &#039;तिहामाह&#039; पर हमला किया, जिसमें तीन पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक की मौत हो गई। 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से शिपिंग पर हूथी हमले में हुई मौतों का यह पहला मामला है। मंत्रालय ने कहा कि हमले की चपेट में आने के बाद चालक दल का जहाज पर से नियंत्रण खत्म हो गया। यमन कोस्ट गार्ड ने बताया कि बचाव दल के पहुंचने के बाद हूथी लड़ाकों ने कथित तौर पर दूसरा हमला किया, जिसमें यमन की हूथी-विरोधी &#039;नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज&#039; के दो बचावकर्मी भी मारे गए। इस घटना में दस लोग घायल हुए, जिनमें सात क्रू मेंबर, कोस्ट गार्ड के दो जवान और नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज का एक सदस्य शामिल है।इसे भी पढ़ें: Houthi rebels ने यमन के मोखा बंदरगाह पर किया हमला, 7 की मौत; Aramco संयंत्र में आगब्रिटिश नौसेना से जुड़ी एजेंसी &#039;यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स&#039; ने बताया कि बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में एक जहाज पर किसी अज्ञात चीज़ से हमला हुआ। मैरीटाइम सिक्योरिटी फर्म &#039;एम्ब्रे&#039; ने कहा कि यह घटना तब हुई जब जहाज पेरिम द्वीप के उत्तर-पूर्व में लंगर डाले हुए था। रॉयटर्स ने जहाज के डेक और मस्तूल की तस्वीरों की तुलना पुराने फुटेज से करके उसकी पहचान &#039;तिहामा&#039; के तौर पर की। जहाज को ट्रैक करने वाले डेटा से पता चला कि 11 अगस्त को यह जहाज यमन के मुराद के पास था। यमन के कोस्ट गार्ड और सरकारी सैन्य अधिकारियों ने पुष्टि की कि हूतियों ने एक छोटे कार्गो जहाज पर हमला किया था। बाद में हूतियों ने कहा कि उन्होंने बाब अल-मंदेब में सऊदी सैन्य उपकरण ले जा रहे एक जहाज पर हमला किया था, हालांकि उन्होंने जहाज की पहचान नहीं बताई। सऊदी अधिकारियों ने इस पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की। यह हमला तब हुआ जब हूतियों ने 20 जुलाई को लाल सागर में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया। उन्होंने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ने यमन की घेराबंदी कर रखी है। रियाद ने यमन की घेराबंदी की बात से इनकार किया है।इसे भी पढ़ें: अपनी पहली परीक्षा में ही फेल हुआ Mecca Joint Defence Agreement, हूतियों ने पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की के पैक्ट की हवा निकाल दीएम्ब्रे ने बताया कि &#039;तिहामा&#039; जहाज़ न तो सऊदी अरब की मिल्कियत में था और न ही उनके द्वारा चलाया जा रहा था; यह शनिवार को यमन सरकार के कब्ज़े वाले अल-मोखा बंदरगाह से निकला था। LSEG के डेटा के मुताबिक, इस जहाज़ के मालिक और मैनेजर मिस्र की कंपनियाँ हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब बाब अल-मंदेब और लाल सागर से होने वाली शिपिंग में भारी कमी आई है। 2023 में हूतियों द्वारा कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना शुरू करने के बाद से ट्रैफिक में 50% से ज़्यादा की गिरावट आई है। वहीं, केप्लर के डेटा से पता चलता है कि पिछले हफ़्ते इस जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) से रोज़ाना औसतन 32 जहाज़ गुज़रे, जबकि हूतियों की हालिया नाकेबंदी से पहले यह संख्या लगभग 50 थी। इसके अलावा, पनामा के झंडे वाले एक कंटेनर जहाज़ &#039;वेला नोवा&#039; पर पाकिस्तान के पास उस समय मिसाइल से हमला होने की खबर है, जब वह ओमान की खाड़ी की ओर जा रहा था। समुद्री सुरक्षा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जहाज़ पर हमला हुआ था, जबकि &#039;द वॉल स्ट्रीट जर्नल&#039; की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से जुड़ी शिपिंग पर अमेरिकी नाकेबंदी से बचने की कथित कोशिश के बाद एक अमेरिकी हेलीकॉप्टर ने उसके रडर (दिशा-नियंत्रक) पर हेलफायर मिसाइल दागी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:38 +0530</pubDate>
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<title>क्यों तुर्किए से खाने वाले डब्बे में छिप कर भागना पड़ा, ट्रंप ने खुद कर दिया दुनिया का सबसे विस्फोटक खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ 8 जुलाई 2026 जगह तुर्की का अंकारा और नजारा इस वीडियो में नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने आधिकारिक जहाज एयरफोर्स वन में चढ़ रहे हैं। अगले कुछ मिनट में जो हुआ वो अब तक यानी करीब एक महीने से टॉप सीक्रेट था।  ट्रंप जहाज के बाई तरफ के दरवाजे से अंदर दाखिल हुए। बाहर के कैमरों ने यह दर्ज किया। पत्रकारों ने भी बताया कि ट्रंप इसी विमान से पहले ब्रिटेन जाएंगे फिर वहां प्लेन बदलेंगे। एक अन्य विमान से अमेरिका जाएंगे। उसी लग्जरी प्लेन 7478 से जो क़तर ने उन्हें गिफ्ट किया। ट्रंप ने सफेद नीले प्लेन से सफर किया ही नहीं। वो विमान में आगे से चढ़े और फौरन बाद पीछे से उतर गए। सबसे छिप कर। कैटरिंग ट्रक से जहाज में खाना पहुंचाया जाता है। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस इसी कैटरिंग वैन में ट्रंप को छिपाकर दूसरे जहाज की तरफ ले गई। यह C32 ए विमान उस दिन अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेक्सेथ को ले जा रहा था और मेन एयरफोर्स वन के पास ही खड़ा था। इस जहाज से ट्रंप पहुंचे ब्रिटेन। इसे भी पढ़ें: ट्रंप मीडिया को $238 Million का भारी घाटा, Bitcoin और Crypto बाजार में गिरावट ने बढ़ाई Donald Trump की टेंशनअमेरिकी राष्ट्रपति के प्लेन में वाइट हाउस कवर कर रहे बहुत से पत्रकार भी चलते हैं। उन्हें भी सीक्रेट सर्विस ने झांसा दिया। 8 जुलाई को जब एयरफोर्स वन अंकारा से उड़ा तो उसमें सवार पत्रकार और वाइट हाउस स्टाफ को लगा कि ट्रंप भी उसी प्लेन में है क्योंकि ट्रंप को उतारते हुए उनकी आंखों में धूल झोंकी गई थी।  एयरफोर्स वन के दाहिनी साइड पत्रकारों को बिठाया जाता है। इसी तरफ से ट्रंप को ले जाया जाना था। तो पत्रकारों से कहा गया कि वह अपनी तरफ की खिड़कियां बंद कर लें। पूरे रास्ते किसी को भी नहीं बताया गया कि ट्रंप तुर्की से ब्रिटेन के सफर में उनके साथ नहीं है। मिड एयर भी यह जाहिर नहीं होने दिया गया कि ट्रंप कहां सफर कर रहे हैं। एक एयरबेस पर विमान उतरा। चुपचाप ट्रंप को उस विमान में लाया गया। फिर वो कैमरों के सामने उससे नीचे उतरे। क़तर के डोनेट किए गए प्लेन में बैठे और वाशिंगटन डीसी उड़ गए। इसे भी पढ़ें: Donald Trump और PM Modi आपस में सुलझा लेंगे रूसी तेल शुल्क विवाद, नवारो ने जताया भरोसापत्रकार जब ट्रंप से पूछते हैं क्या सुरक्षा की कोई चिंता थी? ट्रंप कहते हैं नहीं ऐसा नहीं। ऐसा क्यों होगा? पत्रकार पूछते हैं क्या आपको पता है कि हमारी खिड़कियां क्यों बंद करवाई गई? ट्रंप कहते हैं हां शायद इसलिए हुआ कि आप ऐसी फ्लाइट में हैं जिस पर जोखिम हो सकता है और इस जगह घटिया लोगों से डील करना पड़ता है। पत्रकारों का सवाल क्या आपको ईरान की ओर से एयरफोर्स वन के खिलाफ किसी विश्वसनीय खतरे की जानकारी थी? ट्रंप बोलते हैं मुझे हर समय खतरा रहता है। आपसे पहले मैं उनकी सूची में नंबर एक पर हूं। लेकिन अगर मैं गया तो आप भी गए। न्यूयॉर्क टाइम्स और सीबीएस न्यूज़ ने जुलाई में एक खबर चलाई कि अमेरिकी इंटेलिजेंस को ट्रंप के लिए डर लग रहा है। उन्हें लगता है ट्रंप या उनके विमान पर खास तरह का खतरा हो सकता है। इसके चलते ट्रंप की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी भी बरती जाने लगी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>क्यों, तुर्किए, से, खाने, वाले, डब्बे, में, छिप, कर, भागना, पड़ा, ट्रंप, ने, खुद, कर, दिया, दुनिया, का, सबसे, विस्फोटक, खुलासा</media:keywords>
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<title>US&#45;Iran शांति वार्ता बहाल कराने तेहरान पहुंचे पाकिस्तान के मंत्री Mohsin Naqvi</title>
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<description><![CDATA[ सज्जाद हुसैन
इस्लामाबाद, 12 अगस्त पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई शांति वार्ता को फिर से शुरू कराने के प्रयासों के तहत ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची से तेहरान में बातचीत की। मीडिया की खबरों में यह जानकारी दी गई है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ एक अंतरिम समझौता पिछले महीने उस समय खत्म हो गया था, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद अमेरिका और ईरान ने फिर से सैन्य हमले शुरू कर दिए थे।इस्लामाबाद संघर्ष समाप्त कराने के लिए अपनी मध्यस्थता की कोशिशों को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘इरना’ के हवाले से राजनयिक सूत्रों ने बताया कि नकवी मंगलवार तड़के तेहरान पहुंचे। यहां उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों और आपसी हित के मुद्दों पर बातचीत की।नकवी का हवाई अड्डे पर उनके ईरानी समकक्ष एस्कंदर मोमेनी ने स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने अराघची के साथ वार्ता की। ‘इरना’ ने नकवी और अराघची की मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा कीं।राजनयिक सूत्र के अनुसार, नकवी और अराघची इस यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तृत चर्चा भी करेंगे। ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन के साथ बैठक में नकवी ने दोनों देशों के संबंधों को ‘‘मजबूत, लंबे समय से चले आ रहे और अटूट’’ बताया। उन्होंने तेहरान के साथ संबंधों को व्यापक रूप से विकसित करने के लिए इस्लामाबाद की ‘‘गंभीर प्रतिबद्धता और इच्छाशक्ति’’ भी व्यक्त की।सूत्र ने बताया कि पेजेश्कियन ने भी कहा कि ईरान-पाकिस्तान संबंध दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों की पूर्ति करेंगे और क्षेत्रीय स्थिरता एवं सुरक्षा में योगदान देंगे। नकवी के पेजेश्कियन से दोबारा मुलाकात करने की भी संभावना है। राजनयिक सूत्र ने समाचार पत्र ‘डॉन’ को बताया कि नकवी की यात्रा का मुख्य उद्देश्य जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए उस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर आगे की बातचीत करना है, जिसके तहत शांति बहाली के लिए उच्च स्तरीय वार्ता के लिए 60 दिन की अवधि तय की गई थी।पाकिस्तान के वार्ता बहाल करने के प्रयासों को अब तक सफलता नहीं मिली है। इस बीच ओमान ने मध्यस्थ के रूप में प्रमुख भूमिका संभाल ली है और होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।राजनयिक सूत्र ने कहा कि ओमान और ईरान के बीच बातचीत में हुई प्रगति से इस्लामाबाद को जून समझौते से शुरू हुई व्यापक वार्ता प्रक्रिया को फिर से आगे बढ़ाने का अवसर मिला है। पाकिस्तान ने हाल में ईरानी विदेश मंत्री अराघची और ईरानी संसद के अध्यक्ष बाघेर गालिबाफ को जल्द से जल्द इस्लामाबाद आने का निमंत्रण दिया था। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि दोनों नेताओं की यात्रा ‘‘उपयुक्त समय’’ पर होगी।नकवी की यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसे पाकिस्तान की ओर से मध्यस्थता प्रक्रिया को सक्रिय बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जबकि ईरानी नेता इस्लामाबाद यात्रा को लेकर अपने स्तर पर फैसला लेने में समय ले रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:37 +0530</pubDate>
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<media:keywords>US-Iran, शांति, वार्ता, बहाल, कराने, तेहरान, पहुंचे, पाकिस्तान, के, मंत्री, Mohsin, Naqvi</media:keywords>
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<title>अब पुतिन के तारनहार बनें पूर्व CJI चंद्रचूड़, सुलझाएंगे यूक्रेन संग विवाद, रूस ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी</title>
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<description><![CDATA[ रूस ने यूक्रेन के सरकारी बैंक &#039;ओशादबैंक&#039; की ओर से इन्वेस्टमेंट ट्रीटी (निवेश संधि) विवाद में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को अपना आर्बिट्रेटर नियुक्त किया है। बार एंड बेंच के अनुसार, यह विवाद रूस की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित यूक्रेनी इलाकों में बैंक की संपत्ति और कामकाज से जुड़े दावों से संबंधित है। यह आर्बिट्रेशन यूक्रेन और रूस के बीच 1998 की द्विपक्षीय निवेश संधि के तहत किया जा रहा है। तीन सदस्यों वाले इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व ट्रेड मिनिस्टर दयाला जिमेनेज़ करेंगी, जिन्हें रूस और ओशादबैंक ने संयुक्त रूप से चुना था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के प्रोफ़ेसर स्टावरोस ब्रेकोउलाकिस को ओशादबैंक ने ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य के तौर पर नियुक्त किया है।इसे भी पढ़ें: हो गया खेल! भारत को रोककर खुद रूसी तेल खरीद रहा अमेरिका?ओशचादबैंक ने यूक्रेन में अपनी संपत्तियों के नुकसान का दावा किया है। ओशचादबैंक का यह दावा डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया में मौजूद संपत्तियों और बिज़नेस ऑपरेशन्स से जुड़ा है। यूक्रेनी बैंक का कहना है कि रूस की सैन्य कार्रवाई, और खासकर 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हुए हमले के कारण उसे ये नुकसान उठाना पड़ा। माना जा रहा है कि इस दावे की कीमत करोड़ों डॉलर है। जुलाई 2025 में ओशचादबैंक द्वारा रूस को विवाद का नोटिस भेजे जाने के बाद मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) की प्रक्रिया शुरू हुई थी। रूस द्वारा कथित तौर पर नोटिस का कोई जवाब न दिए जाने के बाद बैंक ने आगे की प्रक्रिया शुरू की। यह मामला दोनों देशों के बीच इन्वेस्टमेंट ट्रीटी (निवेश संधि) के तहत सुना जा रहा है, जो निवेशकों को निवेश से जुड़े कुछ विवादों पर आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) की मांग करने की इजाज़त देता है। चंद्रचूड़ ने पहले रूस के प्रस्तावों को ठुकरा दिया था।इसे भी पढ़ें: जिसका डर था वही हुआ! किम जोंग उन ने उतारे 50000 सैनिक, खुशी से झूम उठे पुतिनयह नियुक्ति इसलिए भी अहम है क्योंकि चंद्रचूड़ ने पहले रूस के उन प्रस्तावों को ठुकरा दिया था जिनमें उन्हें जर्मन एनर्जी कंपनी विंटरशाल डेया और यूक्रेनी एनर्जी कंपनी उक्रेनेर्गो से जुड़े अलग-अलग संधि विवादों में आर्बिट्रेटर (मध्यस्थ) के तौर पर काम करने के लिए कहा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, ये प्रस्ताव उसी दिन दिए गए थे जब परमानेंट कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन ने विंटरशाल मामले की कार्यवाही में चंद्रचूड़ को नियुक्ति करने वाला अधिकारी (अपॉइंटिंग अथॉरिटी) नामित किया था। बाद में, रूस से हुई बातचीत का खुलासा करने के बाद चंद्रचूड़ उस भूमिका से हट गए थे। मौजूदा विवाद में अब वह तीन सदस्यों वाले ट्रिब्यूनल में रूस के नॉमिनी (नामित सदस्य) के तौर पर काम करने के लिए सहमत हो गए हैं। ओशैडबैंक का प्रतिनिधित्व क्विन इमैनुएल उर्कहार्ट एंड सुलिवन के पार्टनर एपामिनोंटास ट्रियांटाफिलौ और एलेक्स गेर्बी, तथा एस्टर्स के पार्टनर ओलेक्सी डिडकोव्स्की, एंड्री पोझिदायेव और ओक्साना लेग्का कर रहे हैं। रूस का प्रतिनिधित्व पिना गोल्डबर्ग के पार्टनर एंड्रिया पिना, वकील प्रत्युष पंजवानी और सीनियर एसोसिएट दिमित्रियोस पापाजॉर्जियो कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:37 +0530</pubDate>
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<title>Carlo Lombardi ने FCRA Bill का किया समर्थन, बोले&#45; Foreign Policy का जरिया भी हो सकते हैं NGOs</title>
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<description><![CDATA[ भारत-इटली संबंधों के सीनियर एनालिस्ट और सलाहकार कार्लो लोम्बार्डी ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) अमेंडमेंट बिल में प्रस्तावित बदलावों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को मिलने वाली विदेशी फंडिंग की जांच-पड़ताल करना देश के हित में है, क्योंकि इन फंड्स का इस्तेमाल विदेश नीति के औजार के तौर पर भी किया जा सकता है। बिल के इतिहास का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह कानून सबसे पहले 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया था। लोम्बार्डी ने कहा, 2010 में मनमोहन सिंह की सरकार ने इसमें बड़े बदलाव किए थे, और असल में उस समय यह कानून और भी ज़्यादा सख्त था।इसे भी पढ़ें: FCRA Bill पर हल्ला मचा रहे विपक्षी दलों और ईसाई संगठनों को मार्को रुबियो का बयान सुनना चाहिएएएनआई के साथ बातचीत में उन्होंने NGOs की मानवीय भूमिका को माना और कहा, &quot;मेरी मुख्य बात यह है कि NGOs बहुत अच्छे होते हैं। वे मानवता के लिए बहुत अच्छा काम करते हैं, लेकिन वे विदेश नीति का एक ज़रिया भी हैं। यह कोई छिपी हुई बात नहीं है। उन्होंने 1983 में US नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी (NED) के गठन का ज़िक्र किया और इसके सह-संस्थापक एलन वेनस्टीन के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि यह संगठन दिखाता है कि कैसे गैर-सरकारी संस्थाएं विदेश नीति के बड़े लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में शामिल हो सकती हैं। लोम्बार्डी ने ANI से कहा NGO भी विदेश नीति का एक ज़रिया हैं और यह बिल्कुल सही है कि सरकार को पता हो कि कौन किसे और किस वजह से फ़ंडिंग कर रहा है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है कि विदेशी NGO से आने वाले पैसे का इस्तेमाल असल में उन्हीं मक़सदों के लिए हो जिनके बारे में बताया गया है, न कि उसका गलत इस्तेमाल हो।इसे भी पढ़ें: FCRA संशोधन बिल नियंत्रण के लिए, पारदर्शिता के लिए नहीं: Shashi Tharoor का आरोपFCRA जैसे कानून वाले दूसरे देशों के बारे में बात करते हुए लोम्बार्डी ने कहा कि पश्चिमी देशों में ऐसे कानून कई दशकों से मौजूद हैं। इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई, जिसने 1938 में &#039;फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट&#039; पास किया था। ऐसा जर्मनी के उस गुप्त प्रभाव का मुक़ाबला करने के लिए किया गया था, जिसके ज़रिए जर्मनी अमेरिका की नीति को &#039;नेशनल सोशलिस्ट जर्मनी&#039; की तरफ़ मोड़ने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और UK जैसे देश भी हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:36 +0530</pubDate>
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<title>गोलान हाइट्स पर Colombia के फैसले से भड़के Oman और Kuwait, International Law के उल्लंघन का लगाया बड़ा आरोप</title>
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<description><![CDATA[ ओमान और कुवैत ने कब्जे वाले सीरियाई गोलान हाइट्स पर इज़राइल की संप्रभुता को मान्यता देने के कोलंबियाई सरकार के फ़ैसले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह कदम सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन करता है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में, ओमान ने कब्जे वाले सीरियाई गोलान पर इज़राइल की संप्रभुता को मान्यता देने के कोलंबियाई सरकार के फ़ैसले की निंदा की। साथ ही, यह भी कहा कि यह फ़ैसला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करता है और अंतरराष्ट्रीय वैधता प्रस्तावों के ख़िलाफ़ है, जिनमें सबसे प्रमुख 1981 का सुरक्षा परिषद प्रस्ताव नंबर (497) है। सल्तनत ने अपने इस दृढ़ रुख को दोहराया कि गोलान सीरिया का अधिकृत क्षेत्र है, और सीरियाई अरब गणराज्य की अपने सभी क्षेत्रों पर संप्रभुता और उसकी एकता के प्रति अपने समर्थन की पुष्टि की। मस्कट ने आगे सभी राज्यों से संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रावधानों और संबंधित अंतरराष्ट्रीय वैधता प्रस्तावों का पालन करने का आह्वान किया। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने भी इसी प्रकार एक बयान जारी कर कोलंबिया गणराज्य की सरकार द्वारा अधिकृत सीरियाई गोलान पर इजरायली कब्जेदार अधिकारियों की संप्रभुता को मान्यता देने की कड़ी निंदा की।इसे भी पढ़ें: Syria और Russia के बीच हुआ समझौता, हमीमीम और टार्टस बेस का नियंत्रण सीरिया लेगाकुवैत ने इस कदम को खारिज करते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों का उल्लंघन है, खासकर 1981 के सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 497 का, जिसमें कब्जे वाली ताकत द्वारा कब्जे वाले सीरियाई गोलान पर अपने कानून और प्रशासन को थोपने को अमान्य और बिना किसी कानूनी असर वाला माना गया था। कुवैत ने अपनी इस पक्की राय को दोहराया कि सीरियाई गोलान, सीरिया का कब्जा किया हुआ अरब इलाका है। मंत्रालय ने कब्जे को मजबूत करने या उसे वैधता देने वाले किसी भी फैसले को खारिज कर दिया और संयुक्त राष्ट्र चार्टर व अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुसार ताकत के दम पर इलाका हथियाने को गलत ठहराया।इसे भी पढ़ें: सीरिया के तानाशाह रहे बशर अल-असद को मौत की सजा, लाखों लोगों की मौत के जिम्मेदार पाए गएकुवैत के विदेश मंत्रालय ने सीरियाई अरब गणराज्य की संप्रभुता, उसके इलाकों की एकता और अखंडता के लिए अपना समर्थन&quot; दोहराते हुए, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, खासकर सुरक्षा परिषद से अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान सुनिश्चित करने की अपनी ज़िम्मेदारियां निभाने और इज़राइली कब्ज़ा करने वाली सेनाओं को कब्ज़े वाले सभी अरब इलाकों से हटने के लिए मजबूर करने की अपील&quot; को फिर से ज़ोरदार ढंग से रखा। ये प्रतिक्रियाएं तब आईं जब कोलंबिया ने मंगलवार को कब्ज़े वाले सीरियाई गोलान हाइट्स पर इज़राइल की संप्रभुता को मान्यता दी। ऐसा करने वाला वह अमेरिका के बाद दूसरा देश बन गया है जिसने औपचारिक रूप से इस इलाके पर इज़राइल के कब्ज़े को मान्यता दी है। यह कदम दक्षिणपंथी राष्ट्रपति एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला के पद संभालने के कुछ दिनों बाद उठाया गया। कोलंबिया के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह फ़ैसला मध्य पूर्व में लगातार अस्थिरता और इज़राइल की सुरक्षा के लिए गोलान हाइट्स के रणनीतिक महत्व को देखते हुए लिया गया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:36 +0530</pubDate>
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<title>Strait of Hormuz पर Donald Trump का बड़ा दावा, बोले&#45; &amp;apos;हमारा पूरा नियंत्रण&amp;apos;, Iran को दी कड़ी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपना पूरा नियंत्रण होने का दावा दोहराया और तेहरान को ऐसी किसी भी कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी दी जिसका कड़ा जवाब दिया जा सकता है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने ये बातें कहीं और तेहरान पर उनसे &#039;झूठ बोलने&#039; का आरोप लगाया। ट्रंप ने कहा मुझे ईरान पर भरोसा नहीं है। मैं ईरान पर भरोसा करने वाला आखिरी व्यक्ति हूं। उन्होंने मुझसे लगातार झूठ बोला है। अभी होर्मुज जलडमरूमध्य पर हमारा पूरा नियंत्रण है। उनका नियंत्रण नहीं है। हमारा पूरा नियंत्रण है। यह हमारे अधिकार में है।इसे भी पढ़ें: Donald Trump और PM Modi आपस में सुलझा लेंगे रूसी तेल शुल्क विवाद, नवारो ने जताया भरोसाअमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को कोई भी कदम उठाने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि उसे कड़े जवाब का सामना करना पड़ सकता है। हो सकता है कि किसी समय वे कुछ ऐसा करें और फिर उन्हें नेस्तनाबूद कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका अच्छी स्थिति में है और कहा अभी हम बहुत अच्छी स्थिति में हैं। हमारे सामने एक ऐसा देश है जो पचास सालों से मिडिल ईस्ट में दादागिरी करता रहा है... अब वे मिडिल ईस्ट में दादागिरी नहीं कर रहे हैं। ट्रंप का यह बयान ग्लोबल एनर्जी चोकपॉइंट (ऊर्जा आपूर्ति के अहम रास्ते) को लेकर बढ़े तनाव के बीच आया है।इसे भी पढ़ें: क्यों तुर्किए से खाने वाले डब्बे में छिप कर भागना पड़ा, ट्रंप ने खुद कर दिया दुनिया का सबसे विस्फोटक खुलासाइस बीच, ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर &#039;प्रेस टीवी&#039; ने बताया कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने इस बात पर ज़ोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पैगंबर आदम की रचना के समय से लेकर 28 फरवरी, 2026 तक खुला रहा है। साथ ही, उन्होंने पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए &quot;अपमानजनक और अन्यायपूर्ण&quot; प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की। प्रेस टीवी के अनुसार, बकाई ने होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के लिए &#039;अमेरिका-इजरायल की आक्रामकता&#039; को जिम्मेदार ठहराया और कहा, &quot;हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति और वहां जो कुछ भी हुआ, वह अमेरिका और इजरायली शासन की सैन्य आक्रामकता के कारण हुआ था, जो अभी भी जारी है। जहां तक ​​ईरान द्वारा शर्तें थोपने के दावों की बात है, तो उन्हें इस मामले पर अपनी सरकार से बात करनी चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:36 +0530</pubDate>
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<title>हूतियों ने पाकिस्तान को भी नहीं छोड़ा, समुंदर में आग, बिछाई लाश!</title>
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<description><![CDATA[ लाल सागर और बाब अल मंदेब स्टेट से एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। यमन के ईरान समर्पित होती विद्रोहियों के एक ताजा हमले में एक मालवाहक पोत पर सवार तीन क्यू मेंबर्स की दर्दनाक मौत हो गई है। मारे गए लोगों में दो पाकिस्तानी नागरिक और एक इंडोनेशियाई नागरिक शामिल है। यह हमला तंजानिया के ध्वज वाले जहाज तिहामा पर तब हुआ जब वह ओमान के सलालाह से जिबूती की ओर जा रहा था। सऊदी अरब के खिलाफ लाल सागर में नौसैनिक नाकेबंदी के ऐलान के बाद यह पहला बड़ा और जानलेवा हमला है। यमन के तटीय गार्ड और सैन्य अधिकारियों के हवाले से आई खबर के मुताबिक लाल सागर को अदन की खारी से जोड़ने वाले रणनीतिक बाब अल मंदीब स्ट्रीट में हुतियों ने एक डे कॉर्गो शिप को निशाना बनाया। इस हमले में जहाज पर सवार तीन बेगुनाह क्री मेंबर्स की जान चली गई। जिनमें दो पाकिस्तानी नागरिक और एक इंडोनेशिया का नागरिक शामिल है।इसे भी पढ़ें: अपनी पहली परीक्षा में ही फेल हुआ Mecca Joint Defence Agreement, हूतियों ने पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की के पैक्ट की हवा निकाल दी हाल ही में ईरान पर हुए अमेरिकी इसराइली हमलों के बाद मध्य पूर्व में भर के नए तनाव के बीच हूतियों का यह पहला ऐसा हमला है जिसमें जान माल का इतना बड़ा नुकसान हुआ हो। दरअसल यह हमला उस घोषणा के ठीक 1 महीने के बाद हुआ है। जब अंसार उल्लाह ने सऊदी अरब पर यमन की घेराबंदी का आरोप लगाते हुए लाल सागर और बाबल मनदीप में सऊदी जहाजों के खिलाफ पूर्ण नाकेबंदी यानी नेवेल ब्लॉकेट का ऐलान किया था। हुती विद्रोही ना केवल समुद्री में व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं बल्कि उन्होंने सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरेको की रिफाइनिंग पर भी ड्रोन और मिसाइल हमले तेज किए हैं। बाब अल मंदेब जिसे आंसुओं का दरवाजा भी कहते हैं उससे दुनिया का 12% व्यापार गुजरता है। लेकिन इस नाकेबंदी के कारण जहाजों की आवाजाही लगभग आधी हो चुकी है। लेकिन इस पूरी घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस हमले में मारे जाने वाले नागरिक पाकिस्तान के थे। हाल ही में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मिलकर एक बड़े रक्षा और सुरक्षा गठबंधन का गठन किया था। इसका मकसद मुस्लिम देशों को सुरक्षा प्रदान करना और क्षेत्रीय खतरों से निपटना था।  इसे भी पढ़ें: Bab al-Mandeb में Houthi Rebels का बड़ा हमला: 3 पाकिस्तानी नागरिकों की मौत, Global Shipping पर गहरा संकटजब सऊदी अरब की रैंपको रिफाइमियों पर हमले हो रहे हैं और लाल सागर में पाकिस्तानी नागरिकों की जान जा रही है। तब ये नया त्रिस्तरीय अलायंस कहीं भी एक्टिव नजर नहीं आ रहा। ना तो तुर्की की ओर से कोई कड़ा सैन्य कदम उठाया गया और ना ही पाकिस्तान अपने नागरिकों की मौत पर हूं के खिलाफ कोई सैन्य रुख अपना पा रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि जब सऊदी, तुर्की और पाकिस्तान के इस नए गठबंधन की घोषणा की गई थी तभी यमन के अंसार उल्लाह मानेती आंदोलन के शीर्ष कमांडरों ने साफ-साफ कह दिया था कि वे दुनिया के किसी भी सैन्य गठबंधन से डरने वाले नहीं। ने यह भी साबित कर दिया कि भले ही कागजों पर कितना भी बड़ा अलायंस खड़ा कर दिया जाए लाल सागर और बाबल मंदे की सामरिक्रपिक चाबी आज ही उन्हीं के हाथों में थी और है दो पाकिस्तानी नागरिकों की मौत और बाबल मदीप में ठप होती समुद्री व्यापार ने पूरे मुस्लिम जगत और पश्चिमी देशों के बीच एक नया हड़कंप मचाया है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:35 +0530</pubDate>
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<title>क्या सच में इमरान खान की मौत हो गई? PTI बोली&#45; 20 लाख लोग तैयार रहे</title>
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<description><![CDATA[ पिछले कई महीनों से पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही रहा है कि क्या वह जल्द ही जेल से बाहर आ सकते हैं। कुछ महीने पहले रावलपिंडी की अदियाला जेल में उनकी मौत की अफवाहें उड़ी थीं और अब एक बार फिर इमरान खान की सलामती को लेकर सवाल उठने लगे हैं। क्या क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान अभी ज़िंदा भी हैं? पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान के एक सनसनीखेज लेकिन बिना पुष्टि वाले दावे ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री की सलामती को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। एमी अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट हो चुके और अब अमेरिका में रहने वाले इस पत्रकार ने दावा किया है कि सेना के तीन सीनियर सूत्रों ने उन्हें बताया कि उन्हें लगता है कि इमरान की जेल में मौत हो गई होगी। वजाहत का यह दावा ऐसे समय में आया है जब हालात बहुत तनावपूर्ण हैं। मंगलवार को इमरान खान की सेहत को लेकर चिंता के बीच, उनके परिवार और उनकी पार्टी &#039;पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ&#039; (PTI) के साथियों ने शिकायत की कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री से मिलने नहीं दिया जा रहा है।इसे भी पढ़ें: Pakistan Crisis: इमरान खान को रिहा करो वरना भुगतने होंगे नतीजे, PTI की बड़ी चेतावनी, होगा देशव्यापी आंदोलनखान की सेहत को लेकर बढ़ती चिंता अब एक बड़े टकराव की वजह बन रही है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री और PTI नेता सोहेल अफरीदी ने दावा किया है कि &quot;20 लाख से ज़्यादा लोग सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं&quot; और चेतावनी दी है कि पाकिस्तान के युवाओं का गुस्सा इतना बढ़ सकता है कि उसे संभालना मुश्किल हो जाए—खासकर पाकिस्तान के उस &#039;हाइब्रिड शासन&#039; के लिए जिसके मुखिया फील्ड मार्शल आसिम मुनीर हैं। PTI ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद तक एक &#039;लॉन्ग मार्च&#039; निकालने का ऐलान किया है, साथ ही धमकी दी है कि अगर इमरान के परिवार और डॉक्टरों को उनसे मिलने नहीं दिया गया, तो वे उससे पहले भी विरोध-प्रदर्शन कर सकते हैं। पाकिस्तानी सरकार पर देश के बाहर से भी दबाव बन रहा है। अमेरिकी सांसदों के एक द्विदलीय समूह (जिसमें दोनों पार्टियों के सदस्य शामिल हैं) ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की हिरासत की स्थितियों का मुद्दा सीधे इस्लामाबाद के सामने उठाने को कहा है। उनके पत्र में इमरान को लंबे समय तक अकेले कैद (solitary confinement) में रखने और उनकी सेहत से जुड़े आरोपों पर UN के स्पेशल रैपोर्टियर की चिंताओं का ज़िक्र किया गया है। इन सभी घटनाओं ने मिलकर एक विस्फोटक स्थिति पैदा कर दी है। मौत का एक ऐसा दावा सामने आया है जिसकी पुष्टि नहीं हुई है। एक परिवार उनसे मिलने की मांग कर रहा है। खान को जिस तरह से हिरासत में रखा गया है, उसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है और PTI नेतृत्व ने इस्लामाबाद की सड़कों पर 20 लाख लोगों को उतारने की धमकी दी है।इमरान खान जेल में क्यों हैं?पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान 5 अगस्त, 2023 से जेल में हैं और अभी 190 मिलियन पाउंड के अल-कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में 14 साल की सज़ा काट रहे हैं। इसी मामले में जनवरी 2025 में उनकी पत्नी बुशरा बीबी को सात साल की सज़ा सुनाई गई थी। दोनों ने अपनी सज़ा को चुनौती दी है। इमरान पर 9 मई, 2023 के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामले भी चल रहे हैं, जिनमें PTI समर्थकों ने पूरे पाकिस्तान में सेना के ठिकानों (गैरीसन, चौकियां) पर हमले किए थे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:50:34 +0530</pubDate>
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<title>कोलम्बिया: 7.4 तीव्रता के भूकम्प में भारी जनहानि, मदद के लिए मुस्तैद यूएन</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र ने कोलम्बिया में आए शक्तिशाली भूकम्प के बाद सहायता की पेशकश की है. देश के पश्चिमी हिस्से में रिक्टर पैमाने पर 7.4 तीव्रता के भूकम्प से कम से कम 111 लोगों की मौत हो गई है और कई बच्चों समेत 87 लोग घायल हुए हैं. कई लोग अब भी मलबे में फँसे हैं, जबकि भूस्खलनों से घरों और बुनियादी ढाँचे को भारी नुक़सान पहुँचा है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:07:49 +0530</pubDate>
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<title>अफ़ग़ानिस्तान: सुरक्षा बलों की जवाबदेही बढ़ाने की अपील</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि तालेबान शासन के पाँच साल बाद भी अफ़ग़ान लोगों को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने वाले सैनिकों, पुलिसकर्मियों और नैतिकता अधिकारियों के ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई की जाती है. पारदर्शिता की यह कमी शासन व्यवस्था में लोगों का भरोसा कमज़ोर कर रही है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:07:39 +0530</pubDate>
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<title>म्याँमार: नागरिकों पर सुनियोजित सैन्य हमलों के प्रमाण</title>
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<description><![CDATA[ मानवाधिकार परिषद द्वारा नियुक्त स्वतंत्र जाँचकर्ताओं के अनुसार, म्याँमार की सेना लगातार नागरिकों को निशाना बना रही है. घरों, स्कूलों और विस्थापित लोगों के शिविरों पर हवाई हमलों के अलावा, मनमाने तरीक़े से लोगों को हिरासत में लिए जाने, यातनाएँ देने और यौन हिंसा के मामले भी सामने आए हैं. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:07:39 +0530</pubDate>
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<title>भारत: सपनों से अवसरों तक का सफ़र</title>
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<description><![CDATA[ भारत के महाराष्ट्र राज्य में शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ी साझेदारियाँ, आदिवासी युवजन के लिए आगे बढ़ने और नए अवसर हासिल करने के रास्ते खोल रही हैं. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:07:39 +0530</pubDate>
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<title>Russia&#45;Ukraine War: तातारस्तान की Oil Refinery पर भीषण ड्रोन हमला, 12 की मौत और 39 घायल हुए</title>
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<description><![CDATA[ रूस के तातारस्तान इलाके के निज़नेकामस्क शहर में औद्योगिक और आम लोगों से जुड़ी जगहों पर यूक्रेनी ड्रोन हमले में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और 39 लोग घायल हो गए। शहर के मेयर रादमीर बेल्यायेव ने सोमवार को यह जानकारी दी। निज़नेकामस्क में एक बड़ी तेल रिफाइनरी भी है। अलग-अलग रूसी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले में इलाके की तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया, जो रूस की सबसे आधुनिक तेल रिफाइनरियों में से एक है। सोशल मीडिया पर मौजूद कुछ वीडियो में, जो तेल रिफाइनरी जैसे दिख रहे हैं, वहां से धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा है। रॉयटर्स स्वतंत्र रूप से इन फुटेज की पुष्टि नहीं कर सका। जून की शुरुआत में यूक्रेन के हमले का शिकार हुई टैटनेफ्ट की टैनेको रिफाइनरी ने 2024 में 1.7 करोड़ टन कच्चे तेल की प्रोसेसिंग की, जिससे 27 लाख टन गैसोलीन और 85 लाख टन डीज़ल ईंधन का उत्पादन हुआ।इसे भी पढ़ें: Kyiv क्षेत्र में Russia के हमले से चार लोगों की मौत, बेलग्रेड पहुंचे जेलेंस्कीमेयर बेल्यायेव ने बताया कि यूक्रेनी हमले के बाद तातारस्तान के प्रमुख रुस्तम मिन्निखानोव ने शोक की अवधि घोषित की है। हाल के महीनों में यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले तेज़ कर दिए हैं। इस अभियान की वजह से रूस के कई हिस्सों में ईंधन की कमी हो गई है, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती ज़्यादातर समस्याओं को अब सुलझा लिया गया है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:58:40 +0530</pubDate>
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<title>Diplomatic Tension के बीच ढाका में सक्रिय भारत, Dinesh Trivedi ने PM Tarique Rahman से की अहम मुलाकात</title>
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<description><![CDATA[ 5 अगस्त को नई दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के वर्चुअल संबोधन के बाद दोनों पड़ोसी देशों के बीच राजनयिक तनाव के माहौल में, बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने सोमवार को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। यह एक महत्वपूर्ण राजनयिक बैठक थी। यह बैठक रविवार को त्रिवेदी और बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुुर रहमान के बीच हुई आमने-सामने की बातचीत के एक दिन बाद हो रही है; रहमान आज की बैठक में भी मौजूद थे। हाई कमिश्नर और विदेश मंत्री के बीच यह बैठक इसलिए अहम है क्योंकि हाल ही में भारत से बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सार्वजनिक बयानों को लेकर ढाका और नई दिल्ली के बीच राजनयिक तनाव देखा गया है।यह राजनयिक बातचीत 5 अगस्त को नई दिल्ली में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के वर्चुअल प्रेस इंटरेक्शन के बाद हो रही है। यह तारीख 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद उनके सत्ता से हटने की दूसरी बरसी थी, जिस पर ढाका ने भी कड़ी आपत्ति जताई थी।इसे भी पढ़ें: ढाका की राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों की नई परीक्षाबांग्लादेश में हसीना की वापसी की निंदाअपने संबोधन में हसीना ने कहा कि लोकतंत्र को बहाल करके देश को &quot;सही राह&quot; पर लाने के लिए वह दिसंबर में अपने देश लौटने के अपने संकल्प पर अडिग हैं, हालांकि उन्होंने वापसी पर कारावास या मृत्युदंड के खतरे को भी स्वीकार किया। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इन बयानों का कड़ा विरोध दर्ज कराया और इनकी निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि इस घटना से जनभावना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है और द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के प्रयासों में बाधा उत्पन्न हुई है। इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina Press Conference | शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत की कोई भूमिका नहीं, FCRA कानून पर अमेरिका को MEA का दोटूक जवाबरहमान से मुलाक़ात से पहले त्रिवेदी ने उम्मीद जताईरविवार को ढाका में इंडियन वीज़ा एप्लीकेशन सेंटर में बच्चों के लिए एक कोने का उद्घाटन करने के बाद  पत्रकारों से बात करते हुए, त्रिवेदी ने तारिक रहमान के साथ अपनी मुलाक़ात को लेकर उम्मीद जताई और दोनों देशों के नेताओं के बीच सीधी बातचीत के महत्व पर ज़ोर दिया। भारतीय राजदूत ने कहा कि मुझे लगता है कि जब दो नेता मिलते हैं, तो कई समस्याएं हल हो जाती हैं। जब हम एक-दूसरे से बात करते हैं, तो समस्याएं सुलझ जाती हैं। और मुझे पूरा भरोसा है कि लोग साथ हैं और समाधान ज़रूर निकलेगा... यह ज़रूर होगा। मुझे पूरा यकीन है। यहां कुछ भी नकारात्मक नहीं है; सब कुछ सकारात्मक है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:58:38 +0530</pubDate>
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<title>US Visa Rules: H&#45;1B और L&#45;1 वीजा एक्सटेंशन पर अब देना होगा भारी शुल्क, Indian IT कंपनियों की बढ़ी टेंशन</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने H-1B याचिकाओं पर 4,000 USD और L-1 याचिकाओं पर 4,500 USD की फीस को उन खास एम्प्लॉयर्स द्वारा जमा किए गए वीज़ा एक्सटेंशन तक बढ़ा दिया है, जिनके कर्मचारी उसी कंपनी में बने रहते हैं। 9 सितंबर से लागू होने वाले इस अंतिम नियम से उन व्यवसायों के लिए बार-बार होने वाले इमिग्रेशन खर्च में काफी बढ़ोतरी होगी जो विदेशी टैलेंट पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं। यह नियम खास तौर पर उन कंपनियों पर लागू होता है जो अमेरिका में कम से कम 50 कर्मचारियों को रोजगार देती हैं, और जहां 50 प्रतिशत से ज़्यादा घरेलू वर्कफोर्स के पास सामूहिक रूप से H-1B, L-1A या L-1B स्टेटस है।इसे भी पढ़ें: Canada Deportation Record: सिर्फ 6 महीने में कनाडा से 3 हजार से ज्यादा भारतीय डिपोर्ट, क्या है वजह?अपडेट किए गए नियम के तहत, ऐसी कंपनियों को हर बार किसी कवर किए गए कर्मचारी के रहने की अवधि बढ़ाने (एक्सटेंशन) के लिए 9/11 रिस्पॉन्स और बायोमेट्रिक एंट्री-एग्जिट फीस जमा करनी होगी। पहले, यह फीस आम तौर पर शुरुआती रोजगार या एम्प्लॉयर बदलने से जुड़े आवेदनों तक ही सीमित थी। मौजूदा एम्प्लॉयर द्वारा उसी स्टाफ मेंबर के लिए प्रोसेस किए गए एक्सटेंशन को छूट मिली हुई थी, बशर्ते कि अलग से धोखाधड़ी-रोकथाम फीस लागू न हो।इसे भी पढ़ें: H1B Visa ग्रेस अवधि खत्म करने का US प्रस्ताव, विशेषज्ञों ने दी बड़े विस्थापन की चेतावनीइस बदलाव के पीछे की वजह बताते हुए DHS ने कहा, &quot;रेगुलेटरी बदलाव DHS की कानूनी भाषा की व्याख्या को सही करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कवर किए गए एम्प्लॉयर्स स्टेटस एक्सटेंशन की सभी याचिकाओं के लिए &#039;9-11 बायोमेट्रिक फीस&#039; जमा करें, चाहे संबंधित धोखाधड़ी रोकथाम और पहचान फीस लागू हो या न हो।हालांकि फीस की असल दरें वही हैं, लेकिन इस बदलाव से उन आवेदनों की संख्या काफी बढ़ गई है जिन पर ये मौजूदा शुल्क लागू होंगे। प्रभावित एम्प्लॉयर्स को हर योग्य H-1B आवेदन के लिए 4,000 USD और हर L-1 फाइलिंग के लिए 4,500 USD का खर्च उठाना होगा। जिन संशोधित याचिकाओं में कर्मचारी के अधिकृत स्टेटस की अवधि बढ़ाने का अनुरोध नहीं किया गया है, उन्हें छूट मिलती रहेगी। वित्तीय जिम्मेदारी पूरी तरह से एम्प्लॉयर पर होगी; DHS ने उन प्रस्तावों को खारिज कर दिया है जिनके तहत विदेशी प्रोफेशनल्स खुद यह शुल्क दे सकते थे, अगर उनकी कंपनियां भुगतान करने को तैयार न हों। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:58:35 +0530</pubDate>
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<title>ताइवान में Chinese Intelligence का बड़ा खुलासा, लाखों नागरिकों का Personal Data लीक कर रही थी बीजिंग की जासूसी एजेंसी</title>
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<description><![CDATA[ ताइपे के अभियोजकों ने हुआंग पो-वेई और वांग ता-वेई की कथित चीनी जासूसी गतिविधियों की जांच के दौरान एक चीनी खुफिया नेटवर्क से संबंध उजागर किए हैं। इन गतिविधियों में एक सेवानिवृत्त नौसेना सार्जेंट की निजी जानकारी का खुलासा भी शामिल है, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ आवाज उठाई है। ताइपे टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, हुआंग और वांग पर ताइवान के व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन करने का आरोप है। उन पर लाखों ताइवानी नागरिकों के निजी रिकॉर्ड प्राप्त करने, व्यक्तियों की निजी जानकारी ऑनलाइन प्रकाशित करने और ऐसी जानकारी चीनी खुफिया एजेंसियों को देने का आरोप है।इसे भी पढ़ें: China को अचानक जयशंकर ने ऐसा क्या कहा? दुनिया में मची हलचलसेवानिवृत्त नौसेना सार्जेंट, जिनकी पहचान त्साई उपनाम से हुई है, वर्षों से साम्यवाद के मुखर विरोधी रहे हैं और सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी राष्ट्रीय रक्षा और ताइवान जलडमरूमध्य के घटनाक्रमों पर नजर रखते रहे हैं। त्साई ने एक चीनी जीवनसाथी के पुत्र होने के नाते ताइवान को लक्षित चीनी घुसपैठ और &quot;संयुक्त मोर्चा&quot; गतिविधियों से उत्पन्न खतरे को उजागर करने के लिए अपनी पृष्ठभूमि का उपयोग किया है। उन्होंने चीन के श्वेत पत्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान अधिक स्वतंत्रता की मांग करने वाले चीनी नागरिकों के प्रति भी समर्थन व्यक्त किया। त्साई ने चीन की सूचना सेंसरशिप और संज्ञानात्मक युद्ध की आलोचना करते हुए तर्क दिया है कि सिना वीबो, डौयिन और शियाओहोंग्शु सहित प्लेटफॉर्म आधिकारिक चीनी कथन को चुनौती देने वाली सामग्री को दबाते हैं, जिससे शांति और स्थिरता का भ्रामक प्रभाव पैदा होता है, जैसा कि ताइपे टाइम्स ने उद्धृत किया है।इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War में China की &#039;चुपचाप&#039; मदद, US Weapon Stock खत्म होने से बढ़ी Xi Jinping की ताकतपिछले साल, वांग का त्साई के साथ ऑनलाइन झगड़ा हुआ था और उन्होंने त्साई की माँ का नाम सार्वजनिक कर दिया था। त्साई ने कहा कि हालाँकि उनकी माँ मूल रूप से चीन की रहने वाली थीं, फिर भी उन्होंने कई सालों तक कम्युनिज़्म का विरोध किया था। त्साई ने कहा कि अगर वांग को उनकी माँ का नाम मिल गया था, तो हो सकता है कि उन्हें उनके रजिस्टर्ड पते समेत और भी निजी जानकारियाँ मिल गई हों। उन्होंने कहा कि इससे यह चिंता पैदा हुई कि ताइवान के नागरिकों की निजी जानकारी हासिल करके उसे लीक किया जा सकता था। उस समय, त्साई ने चेतावनी दी थी कि अगर दुश्मन ताकतों को सेना के जवानों और उनके परिवार के सदस्यों की निजी जानकारी मिल जाती है, तो युद्ध की स्थिति में उन्हें डराने-धमकाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। ताइपे टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जाँचकर्ताओं ने अब यह पता लगाया है कि निजी जानकारी का लीक होना चीन के एक इंटेलिजेंस नेटवर्क से जुड़ा है, जिससे पता चलता है कि त्साई की पहले की चिंताएँ शायद सही थीं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:58:35 +0530</pubDate>
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<title>Yemen War Alert: UN Envoy Hans Grundberg ने दी चेतावनी, Houthi हमलों से बढ़ सकता है भीषण संघर्ष</title>
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<description><![CDATA[ यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना ने कहा कि मोखा पर हुए हमले में सात लोग मारे गए, जिनमें चार सैनिक और तीन आम नागरिक शामिल थे, और कम से कम 30 अन्य घायल हो गए। अल जज़ीरा के अनुसार, रविवार को मोखा पर हुए हमलों के एक पिछले दौर में कम से कम 11 लोग मारे गए थे। ग्रंडबर्ग ने कहा कि ये ताज़ा हमले 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद से सैन्य गतिविधियों में सबसे बड़ी तेज़ी के बीच हुए हैं, जिससे यमन में पूर्ण पैमाने पर संघर्ष के फिर से शुरू होने का ख़तरा काफ़ी बढ़ गया है।इसे भी पढ़ें: Yemen Conflict Alert: हूती ठिकानों पर सेना के भीषण प्रहार, UN ने दी बड़े युद्ध की चेतावनीउन्होंने कहा कि अंसार अल्लाह के हालिया हमलों ने मोखा, मारिब और उसके बाहर भी आम नागरिकों को गंभीर ख़तरे में डाल दिया है। इस तनाव को रोकना होगा, और आम नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करनी होगी। उन्होंने सभी पक्षों से &quot;अधिकतम संयम बरतने&quot; और तनाव कम करने तथा युद्धविराम के तहत हासिल की गई उपलब्धियों को और कम होने से रोकने के लिए ठोस उपायों पर उनके कार्यालय के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया। ग्रंडबर्ग ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि संघर्ष को केवल एक समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से ही स्थायी रूप से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल एक समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से ही स्थायी रूप से समाप्त हो सकता है, और तनाव का बढ़ना यमन को विपरीत दिशा में ले जा रहा है।इसे भी पढ़ें: Houthi rebels ने यमन के मोखा बंदरगाह पर किया हमला, 7 की मौत; Aramco संयंत्र में आगसोमवार को जारी एक बयान में, यमनी सरकार की सेना के आधिकारिक प्रवक्ता कर्नल माजिद अब्दुल्ला अल-नुज़ैली ने कहा कि हमले में अल-मोखा और उसके आसपास कई जगहों को निशाना बनाया गया, जिनमें नागरिक बुनियादी ढांचा, कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाएं, कार्यालय, बिजली उत्पादन केंद्र और सैन्य ठिकाने शामिल थे। उन्होंने बताया कि हमले में सशस्त्र बलों के चार सदस्य और तीन आम नागरिक मारे गए, जबकि 30 लोग घायल हुए, जिनमें से ज़्यादातर आम नागरिक थे। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:58:34 +0530</pubDate>
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<title>हम नहीं मानेंगे...अब ट्रंप को ही आंखें दिखा रहे नेतन्याहू, प्लान कर दिया खारिज!</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिमी एशिया में तनाव लगातार गहराता जा रहा है। एक ओर इजराइल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की ओर से पेश किए गए गाजा समझौते के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है तो दूसरी ओर होर्मुज स्टेट को लेकर ईरान और ओमान के बीच संभावित प्रबंधन व्यवस्था की खबरों ने नई रणनीतिक बहस छेड़ दी है। इसी बीच यमन में ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों ने लाल सागर तट पर सरकार के नियंत्रण वाले एक बंदरगाह और सऊदी अरब की एक तेल सुविधा को निशाना बनाने का दावा किया है। इन घटनाओं ने पूरे मिडिल ईस्ट में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने गाजा में युद्ध समाप्त करने, बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करने और मानवीय सहायता को सुचारू रूप से पहुंचाने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव रखा था। इस योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से युद्ध विराम लागू करने और आगे स्थाई समाधान की दिशा में बातचीत करने का रास्ता खोलने की बात कही गई थी। इसे भी पढ़ें: Iran ने US के सामने रखीं सख्त शर्तें, बर्ताव बदलने तक बंद रहेगा Hormuz Straitहालांकि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। उनका कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह से हथियार नहीं डाल देता और उसकी सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती तब तक इजराइल गाजा से अपनी सेनाएं नहीं हटाएगा। नेतन्याहू ने दोहराया कि इजराइल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा और किसी बाहरी दबाव में फैसला नहीं लेगा। गाजा में गहरा था मानवीय संकट। गाजा में मानवीय हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। महीनों से जारी संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए हैं और लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। अस्पतालों में भारी दबाव है जबकि दवाइयां, भोजन, स्वच्छ पानी और ईंधन की भारी कमी बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि गजा के कई इलाकों में मानवीय संकट बेहद गंभीर स्तर तक पहुंच चुका है। राहत सामग्री सीमित मात्रा में पहुंच रही है। लेकिन जरूरत के मुकाबले यह काफी कम है। लगातार जारी सैन्य कारवाही के कारण कई क्षेत्रों तक सहायता पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है।इसे भी पढ़ें: Iran के साथ युद्ध के बीच America का बड़ा कदम, डिफेंस कंपनियों को हथियारों का प्रोडक्शन बढ़ाने के निर्देशइसी बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होमोस स्ट्रेट को लेकर भी तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान और ओमान इस जलमार्ग के प्रबंधन को लेकर संभावित व्यवस्था पर विचार कर रहे हैं। तेहरान ने संकेत दिया है कि जिन जहाजों के संबंध उनके दुश्मन देशों से होंगे उन्हें हुरमज स्टेट से गुजरने की अनुमति नहीं दी जा सकती। होर्मुज से दुनिया की कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में अगर इस मार्ग पर किसी भी तरह की रोक या फिर तनाव बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। एक और हॉर्मोस को लेकर मध्य पूर्व में तनाव गहराता जा रहा है। तो वहीं दूसरी ओर इजराइल ने भी स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हमास पूरी तरह से हथियार नहीं डाल देता, जब तक हमास निशस्त्र नहीं हो जाता तब तक इजराइल अपनी सैनिक कारवाई गजा पर जारी रखेगा।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:58:34 +0530</pubDate>
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<title>India Neighborhood First policy: बांग्लादेश से लेकर नेपाल तक भारत का बड़ा गेम, पलटा पासा !</title>
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<description><![CDATA[ भारत की ओर से एक साथ दो मोर्चों पर खेले गए बड़े कूटनीतिक दाव का फल अब भारत को देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ बांग्लादेश में प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ भारतीय हाई कमिश्नर की मुलाकात हुई है। तो वहीं दूसरी ओर नेपाल में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद बालन शाह ने सबसे पहले जिस विदेशी दूत के साथ आमने-सामने की मुलाकात की वो भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव हैं। यह दोनों मुलाकातें ऐसे समय में हुई है जब भारत के दोनों पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को लेकर बीते कुछ समय से लगातार तनाव भी देखने को मिला है। यह दोनों मुलाकातें बेहद अहम मानी जा रही हैं। भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में शेख हसीना को लेकर तनाव अभी देखने को मिल रहा है। इन सबके बीच ढाका से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जो काफी कुछ बयां करती है। भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ मुलाकात की। इस मुलाकात का वीडियो भी सामने आया है जिसमें दोनों नेता मुस्कुराते हुए एक दूसरे से मिलते हुए दिखाई दे रहे हैं। माहौल काफी गर्मजशी भरा है। इसे भी पढ़ें: घुसपैठिए मुस्लिमों को खदेड़ते ही नेपाल में हिंदू राष्ट्र पर बड़ा ऐलान, शुरू हुआ इलाज!दिनेश त्रिवेदी ने तारिक रहमान को एक भेंट भी दिया और इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बैठक हुई। खास बात यह है कि ये मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब शेख हसीना को लेकर भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तल्खी देखने को मिल रही है। इससे ठीक 1 दिन पहले भारतीय हाई कमिश्नर ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलील उर रहमान से भी वन टू वन की मुलाकात की थी। वहीं प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ हुई इस बैठक में बांग्लादेश के विदेश मंत्री भी मौजूद थे। यानी लगातार दो दिनों तक भारत और बांग्लादेश के बीच में उच्च स्तरीय बातचीत देखने को मिली। भारत और बांग्लादेश के बीच हालिया विवाद का मुख्य केंद्र पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना है। 5 अगस्त को नई दिल्ली में शेख हसीना ने एक वर्चुअल संबोधन दिया था। जिसके बाद बांग्लादेश की सरकार ने उस पर आपत्ति जताई थी। शेख हसीना ने अपने इस संबोधन में दिसंबर में बांग्लादेश लौटने के ऐलान को दोहराया था और कहा था कि वह वापस से बांग्लादेश के अंदर लोकतंत्र बहाल करने के लिए वापस जा रही हैं। हालांकि उनके इस बयान के बाद बांग्लादेश ने भारत के सामने कड़ी आपत्ति जताई और अपना विरोध दर्ज कराया था। इसे भी पढ़ें: भारत के पड़ोस में हो गया बड़ा खेल! नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए सरकार लेगी बड़ा फैसला?बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने कहा था कि ऐसे बयानों से जनता की भावनाएं प्रभावित होती हैं और भारत बांग्लादेश के सहयोग को आगे बढ़ाने में मुश्किल आ सकती है। लेकिन इसी तनाव के बीच भारतीय हाई कमिश्नर ने बातचीत को लेकर बेहद सकारात्मक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता एक दूसरे से बात करेंगे तो बहुत सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा और इन सबके बीच उन्होंने खुद बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ मुलाकात की है। अब हम बात करते हैं दूसरी बड़ी खबर की जो कि नेपाल से सामने आई है। जी हां, नेपाल के प्रधानमंत्री बालन शाह ने जो अपनी पहली विदेशी दूत के साथ मुलाकात को अंजाम दिया, तो भारतीय राजदूत के साथी है। आपको बता दें कि नेपाली प्रधानमंत्री बालन शाह और भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव के बीच यह एक लंबी बातचीत थी। लगभग 1 घंटे तक दोनों के बीच बातचीत हुई और इस दौरान भारत नेपाल संबंध आपसी हित विकास साझेदारी और दोनों देशों के बीच चल रहे सहयोग को लेकर काफी सारी चर्चाएं हुई। इसे भी पढ़ें: Gurcharan Das को नेपाल में मिला Lifetime Libertarian अवॉर्ड, बने पहले भारतीय लेखकभारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री बालन शाह को शुभकामनाएं भी दी और भारत की ओर से दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दोहराया है। व नेपाल के प्रधानमंत्री बालन शाह की ओर से भारत और नेपाल के ऐतिहासिक संबंधों को और गहरा करने की जरूरत पर जोर दिया गया। यह मुलाकात इसलिए भी अहम हो जाती है क्योंकि प्रधानमंत्री बनने के बाद बालन शाह ने अपनी विदेश नीति को थोड़ा अलग रखा था और कहा था कि वह किसी राजदूत के साथ आमने-सामने की बातचीत नहीं अपनाएंगे। लेकिन अब उन्होंने अपनी इस नीति में बदलाव करते हुए सीधे भारतीय राजदूत के साथ अपनी पहली मुलाकात को अंजाम दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:58:33 +0530</pubDate>
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<title>USCIS ने US में Green Card और नागरिकता के लिए ऑनलाइन आवेदन किया अनिवार्य</title>
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<description><![CDATA[ सागर कुलकर्णी
वाशिंगटन, 11 अगस्त अमेरिका जल्द ‘ग्रीन कार्ड’, नागरिकता और शरण समेत विभिन्न आव्रजन लाभों के लिए ऑनलाइन आवेदन को अनिवार्य करने जा रहा है जिसका मकसद कामकाज को अधिक कुशल बनाना और संचालन लागत को कम करना है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने सोमवार को ‘फेडरल रजिस्टर’ में प्रकाशित एक नए नियम में कहा कि अब ऐसे किसी भी प्रपत्र को ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य होगा, जो कम से कम 180 दिनों से इलेक्ट्रॉनिक रूप से दाखिल करने के लिए उपलब्ध है। इसके तहत ऐसी प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी, जिसके माध्यम से एजेंसी कम से कम 60 दिन का नोटिस देने के बाद किसी भी प्रपत्र को केवल ऑनलाइन माध्यम से जमा करना अनिवार्य कर सकेगी।यह नियम आव्रजन से जुड़े कई तरह के लाभों को प्रभावित कर सकता है। इनमें ‘ग्रीन कार्ड’ के लिए आवेदन और उसका नवीनीकरण, परिवार-आधारित याचिकाएं, नागरिकता के अनुरोध, शरण के दावे, रोजगार के लिए आवेदन और अस्थायी संरक्षित स्थिति (टीपीएस) से जुड़े आवेदन शामिल हैं। आवेदक आमतौर पर यूएससीआईएस के ऑनलाइन खाते के माध्यम से आवेदन जमा कर सकेंगे।इसके लिए वे या तो प्रपत्र ऑनलाइन भरेंगे या भरे हुए प्रपत्र और संबंधित दस्तावेजों की पीडीएफ प्रति अपलोड करेंगे। यूएससीआईएस ने कहा कि इस नियम का उद्देश्य कामकाज को कागज रहित बनाना है और वित्त मंत्रालय की ‘लॉकबॉक्स’ सेवा पर निर्भरता कम करना है। लॉकबॉक्स सेवा डाक के माध्यम से भेजे गए आवेदनों को प्राप्त करने और उनकी प्रारंभिक प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल की जाती है।एजेंसी के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक तरीके से आवेदन दाखिल करने से कार्यकुशलता बढ़ेगी और गलतियां कम होंगी। साथ ही, आव्रजन संबंधी आंकड़ों तक पहुंच और उनके विश्लेषण में आसानी होने से धोखाधड़ी का पता लगाने तथा सुरक्षा जांच को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी। जो लोग ऑनलाइन आवेदन जमा करने में असमर्थ होंगे, वे एक नए प्रपत्र के माध्यम से इससे छूट का अनुरोध कर सकेंगे।यूएससीआईएस ऐसे अनुरोधों की व्यक्तिगत मामलों के आधार पर समीक्षा करेगा और उचित पाए जाने पर छूट प्रदान करेगा। ऐसे मामलों में आवेदकों को आवेदन शुल्क के अतिरिक्त 25 अमेरिकी डॉलर का शुल्क देना होगा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:58:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>US Court ने SpineFrontier के CFO Aditya Humad को रिश्वत केस में 4 महीने जेल की सजा सुनाई</title>
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<description><![CDATA[ सागर कुलकर्णी
वाशिंगटन, 11 अगस्त अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ‘स्पाइनल इम्प्लांट’ नामक कंपनी के भारतीय मूल के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) को फर्जी परामर्श शुल्क के नाम पर सर्जन को रिश्वत देने और बदले में कंपनी के उत्पादों का इस्तेमाल कराने के मामले में चार महीने कारावास की सजा सुनाई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। कैम्ब्रिज निवासी आदित्य हुमाद (41) को जेल की सजा पूरी करने के बाद एक साल तक निगरानी में रहना होगा।हुमाद को 9,500 अमेरिकी डॉलर का जुर्माना भी भरना होगा। हुमाद ने स्वास्थ्य सेवाओं में रिश्वतखोरी पर रोक संबंधी कानून के उल्लंघन की साजिश रचने के एक मामले में पहले ही अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। सितंबर 2021 में हुमाद को ‘स्पाइनफ्रंटियर’ के संस्थापक, अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) किंग्सले आर. चिन के साथ इस मामले में आरोपी बनाया गया था।मैसाचुसेट्स डिस्ट्रिक के अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने सोमवार को एक बयान में कहा कि हुमाद ने सर्जन को फर्जी परामर्श शुल्क के नाम पर 5.4 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की रिश्वत देने और उसका भुगतान कराने की साजिश रची। अटॉर्नी कार्यालय के मुताबिक हुमाद ने बदले में सर्जन को सर्जरी के दौरान ‘स्पाइनफ्रंटियर’ के उत्पादों का इस्तेमाल करने के लिए मनाया जिससे कंपनी लाखों डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:58:29 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Court, ने, SpineFrontier, के, CFO, Aditya, Humad, को, रिश्वत, केस, में, महीने, जेल, की, सजा, सुनाई</media:keywords>
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<title>घुसपैठिए मुस्लिम खदेड़े, अब नेपाल से क्यों भगाए जा रहे चीनी लोग!</title>
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<description><![CDATA[ जिस वक्त नेपाल में फिर से देश को हिंदू राष्ट्र घोषित कराने के लिए भारी संख्या में सड़कों पर हिंदू उतरे हुए हैं और इसके लिए सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं। ठीक इसी दौरान नेपाल से ऐसी खबर आई है जिसने चीन और अमेरिका में बहुत बड़ी खलबली मचा दी है। जब भी नेपाल में राजनीतिक हलचलें होती हैं तो उसका आरोप कहीं ना कहीं चीन और अमेरिका पर लगता है। हाल ही में जब नेपाल में तख्तापलट हुआ तो इसका भी आरोप चीन और अमेरिका पर ही लगा। लेकिन अब नेपाल ने ही चीन और अमेरिका को बहुत बड़ा झटका दिया है। दरअसल एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2021 से 2025 के बीच नेपाल से सबसे ज्यादा चीनी नागरिकों को निकाला गया है। इसे भी पढ़ें: जय हिंद...अमेरिका में बड़ी कानूनी राहत मिलने के बाद कुछ इस अंदाज में गौतम अंडानी का आया पहला रिएक्शन, कोर्ट ने आपराधिक केस किया खारिजनेपाल की सालाना रिपोर्ट में विभाग ने बताया कि नेपाल ने 695 चीनी नागरिकों को निकाला है जो देश से डिपोर्ट किए गए विदेशी नागरिकों का सबसे बड़ा हिस्सा है। नेपाल ने 5 साल में कुल 2267 विदेशी नागरिकों को देश से डिपोर्ट किया है। जिनमें चीनी नागरिकों की हिस्सेदारी 30.65% रही है। नेपाल की इस लिस्ट में दूसरे पायदान पर अमेरिका के नागरिक रहे हैं। अमेरिका के 191 नागरिकों को डिपोर्ट किया गया है। और तीसरे नंबर पर बांग्लादेश रहा जिसके 145 नागरिकों को डिपोर्ट किया गया। चौथे पर यूके और पांचवें पर पाकिस्तान के नागरिक रहे जिन्हें रिपोर्ट किया गया। नेपाल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आंकड़े बताते हैं कि कुछ देशों के नागरिक किस कदर इमीग्रेशन कानून का उल्लंघन करते हैं। इसे भी पढ़ें: USCIS ने US में Green Card और नागरिकता के लिए ऑनलाइन आवेदन किया अनिवार्यदरअसल 2025 में निकाले गए अपने नागरिकों की संख्या के मामले में भी चीन इस लिस्ट में सबसे ऊपर था। नेपाल ने उस साल कुल 523 विदेशी नागरिकों को देश से निकाला था। जिनमें से 120 चीनी नागरिक थे। 2023 में भी चीनी नागरिकों का डिपोर्टेशन भी बहुत ज्यादा हुआ। इस दौरान 209 चीनी नागरिकों को डिपोर्ट किया गया जो 2023 में नेपाल से डिपोर्ट किए गए सभी विदेशी नागरिकों का 46% था। तो इस तरह से चीनी नागरिकों को लेकर नेपाल में शिकंजा कसता जा रहा है। यह सब तब हो रहा है जब बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों को नेपाल से खदेड़ने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं।इसे भी पढ़ें: US Visa Rules: H-1B और L-1 वीजा एक्सटेंशन पर अब देना होगा भारी शुल्क, Indian IT कंपनियों की बढ़ी टेंशन दरअसल नेपाल में चीन की बढ़ती सक्रियता और निवेश भारत के लिए कई मोर्चों पर गहरी चिंता का विषय बनता जा रहा था। लेकिन जिस तरह से नेपाल चीनी नागरिकों पर एक्शन ले रहा है उससे उतना तो साफ है कि कहीं ना कहीं चीन और नेपाल के रिश्तों में खटास दिखाई दे रही है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में नेपाल और क्या कुछ एक्शन लेता है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:58:28 +0530</pubDate>
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<title>ईरान के डर से अपना एयरफोर्स&#45;1 विमान छोड़&#45;छाड़  झट से ली सीक्रेट फ्लाइट, Turkey से गुप्त तरीके से भागे ट्रंप?</title>
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<description><![CDATA[ खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर देश बताने वाला अमेरिका और वहां के राष्ट्रपति जो खुद को सबसे ताकतवर लीडर बताते हैं। डोनाल्ड ट्रंप, वह ईरान के डर से चोरी-छुपे चुपचाप अपना प्लेन बदलकर तुर्की से वापस अमेरिका लौटते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के डर से अपने सबसे ताकतवर विमान एयरफोर्स वन की जगह एक छोटे से सैन्य विमान में चुपचाप बिना किसी को कानों कान खबर लगे तुर्की से वापस ब्रिटेन लौटे थे। दरअसल ट्रंप को लेकर एक ऐसा बड़ा खुलासा सामने आया है जिसने उनके तुर्की दौरे को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि जुलाई में जो नाटो समेत तुर्की में आयोजित की गई थी ट्रंप जब वहां से ब्रिटेन के लिए रवाना हुए थे तो उनका पूरा ट्रैवल प्लान अचानक से बदल दिया गया था और यह सब कुछ ईरान के डर से था। इसे भी पढ़ें: Iran ने US के सामने रखीं सख्त शर्तें, बर्ताव बदलने तक बंद रहेगा Hormuz Straitरिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप को एयरपोर्ट पर एक कैटरिंग ट्रक की आड़ में एक छोटे से सन विमान तक पहुंचाया गया। इसके बाद उन्हें अमेरिकी एयरफोर्स के C32A से तुर्की से बाहर निकाला गया। यानी कि कैमरों को दिखाई देने के लिए वो विमान एयरफोर्स वन में चढ़ते हैं और इसके बाद छुप-छुपाकर एक छोटे से सैन्य विमान में बैठकर तुर्की से बाहर निकलते हैं। पुराने एयरफोर्स वन विमान को भी उनके साथ ब्रिटेन भेजा गया ताकि बाहर से देखने वाले लोगों को यही लगे कि अमेरिकी राष्ट्रपति एयरफोर्स वन में सवार होकर ब्रिटेन पहुंचा है। दोनों विमान कुछ मिनटों के अंतर पर ब्रिटेन पहुंचे। और अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर अमेरिका जो खुद को इतना शक्तिशाली बताता है वो ईरान के डर से अपने सबसे भरोसेमंद विमान को क्यों छोड़ देगा?इसके पीछे कई सारी वजह बताई गई है। जिसमें से एक बड़ी वजह यह है कि ट्रंप जब नाटो समिति के लिए तुर्की गए थे तो तुर्की की सीमा ईरान से लगती है। ऐसे में अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने ट्रंप की यात्रा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने का फैसला किया और उन्हें चुपचाप निकालने के लिए यह कारवाई की। इसे भी पढ़ें: Donald Trump प्रशासन में अमेरिका ने 1.75 लाख से अधिक US Visa रद्द किएआपको बता दें कि ट्रंप अपने नए बोइंग 7478 विमान में पहुंचे थे। यही विमान है जो क़तर की तरफ से अमेरिका को दान दिया गया है। जिसे अब ट्रंप एयरफोर्स वन की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इस नए विमान की यह पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा थी। लेकिन वापसी के वक्त अचानक इससे वापसी नहीं की गई। उस समय ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा था कि वह पुराने समय की याद दिलाने के लिए पुराने एयरफोर्स वन से उड़ान भरेंगे। लेकिन रिपोर्ट्स का दावा है कि असल में राष्ट्रपति को कुछ देर बाद ऐसे ही गुपचुप तरीके से C32 ए विमान तक पहुंचाया गया और वहां से वह रवाना हो गए। ट्रंप के यूं प्लेन बदलने की जानकारी किसी को नहीं थी। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:58:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Colombia Earthquake: विनाशकारी भूकंप से 132 की मौत, President ने देश में घोषित की National Emergency</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिमी कोलंबिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसमें कम से कम 132 लोगों की मौत हो गई, सैकड़ों लोग घायल हो गए और कई शहरों में दर्जनों इमारतें ढह गईं। US जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) और कोलंबिया की संबंधित एजेंसी के अनुसार, भूकंप ज़मीन से लगभग 66 मील (107 किलोमीटर) की गहराई पर आया। इस ज़बरदस्त झटके को पड़ोसी देश इक्वाडोर में भी महसूस किया गया। कोलंबिया के राष्ट्रपति एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करते हुए कहा, &quot;यह सरकार पीड़ितों की पूरी देखभाल और इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित इलाकों के पुनर्निर्माण की ज़िम्मेदारी पूरे संकल्प, पूरी तैयारी और पूरी प्रतिबद्धता के साथ उठाती है। राष्ट्रपति ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि आइए हम उन पीड़ितों और परिवारों का साथ दें जो आज इस मुसीबत का सामना कर रहे हैं; हम उन्हें उस महानता और एकजुटता का सहारा दें जो हमारे देशभक्तिपूर्ण चरित्र की पहचान है। इसे भी पढ़ें: अमेरिका के कोलंबिया में जबरदस्त भूकंप, रिक्टर स्केल पर 6.8 तीव्रता रिकॉर्डसबसे ज़्यादा प्रभावित इलाकों में से एक, चोको के लोगों के लिए सरकार ने 1,400 से ज़्यादा प्रभावित परिवारों और लोगों की मदद के लिए आर्थिक संसाधन और मानवीय सहायता का इंतज़ाम किया है। राष्ट्रपति ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि घायलों और जिन्हें तुरंत मेडिकल मदद की ज़रूरत है, उन्हें उपलब्ध सभी हॉस्पिटल सुविधाओं के साथ मेडेलिन भेजा जा रहा है। इसके अलावा, जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें किराए के लिए अस्थायी सब्सिडी दी जाएगी। कई रिपोर्टों के मुताबिक, भूकंप में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई है और क्विबडो तथा आस-पास के इलाकों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। इसे भी पढ़ें: Colombia में नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण के अगले दिन Car Bomb विस्फोटभूकंप का केंद्रभूकंप का केंद्र चोको इलाके के सैन होज़े डेल पाल्मार में था। इस इलाके की आबादी लगभग 4,800 है और यह बोगोटा से करीब 400 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। USGS ने बताया कि भूकंप ज़मीन से 107 किलोमीटर की गहराई पर आया था। काफी गहराई पर होने के बावजूद, भूकंप इतना ज़बरदस्त था कि इससे काफ़ी नुकसान हुआ और इसे एक बड़े इलाके में महसूस किया गया। पड़ोसी देश में भी महसूस किए गए भूकंप के झटकेभूकंप का असर सिर्फ़ कोलंबिया तक ही सीमित नहीं रहा। पड़ोसी देश इक्वाडोर में भी झटके महसूस किए गए, जिससे इस ज़बरदस्त भूकंपीय घटना के बड़े दायरे का पता चलता है। प्रभावित इलाकों में लोगों को तुरंत प्रतिक्रिया देनी पड़ी क्योंकि इमारतें हिलने लगीं और लोग अपनी सुरक्षा के लिए घरों से बाहर भागने लगे। पिछले साल जून में, वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो ज़बरदस्त भूकंप आए थे। उन भूकंपों से भारी तबाही हुई थी; सैकड़ों इमारतें क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गईं और 5,000 से ज़्यादा लोगों की मौत की खबर थी। कोलंबिया में आए ताज़ा भूकंप ने एक बार फिर इस इलाके की भूकंपीय गतिविधियों की ओर ध्यान खींचा है, हालाँकि उपलब्ध जानकारी कोलंबिया और वेनेजुएला के भूकंपों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं दिखाती है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:58:27 +0530</pubDate>
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<title>दक्षिण सूडान: भारतीय शान्तिरक्षक बने पशुपालकों का सहारा</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिण सूडान में तैनात संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNMISS) के भारतीय शान्तिरक्षक जोंगलेई प्रान्त के दूरदराज़ समुदायों तक पशुचिकित्सा सेवाएँ पहुँचा रहे हैं. पिछले एक वर्ष में उन्होंने 41 हज़ार 500 से अधिक गम्भीर रूप से बीमार मवेशियों और बकरियों का उपचार किया है. इससे पशुपालक परिवारों को अपनी आजीविकाएँ सुरक्षित रखने और स्थानीय पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत बनाने में मदद मिली है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:57:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>दक्षिण, सूडान:, भारतीय, शान्तिरक्षक, बने, पशुपालकों, का, सहारा</media:keywords>
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<title>DRC: बच्चों पर इबोला का बढ़ता कहर, नए टीके से उम्मीद</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पूर्वी काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इबोला के प्रकोप से 300 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इबोला की दुर्लभ बुंडिबुग्यो प्रकार का फैलाव रोकने के लिए उपलब्ध टीके के परीक्षण की सिफ़ारिश की है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:57:18 +0530</pubDate>
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<title>ईरान से चौंकाने वाली रिपोर्ट: अंधेरे में कार की पिछली सीट पर Mojtaba Khamenei से मिले राष्ट्रपति, पहचान पर बना सस्पेंस</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के ठिकाने और उनकी स्थिति को लेकर अनिश्चितता के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने तेहरान में एक अत्यंत गुप्त स्थान पर सुप्रीम लीडर से कुछ ही मिनटों की मुलाकात की। यह मुलाकात पूरी तरह अंधेरे में एक कार के भीतर हुई, जिससे मोजतबा खामेनेई की मौजूदगी और उनकी वास्तविक सेहत को लेकर फिर से अटकलें तेज हो गई हैं। क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले दावा किया था कि अमेरिकी हमलों में सुप्रीम लीडर गंभीर रूप से घायल हो गए थे।&#039;ईरान इंटरनेशनल&#039; की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेज़ेशकियन ने खामेनेई से एक &quot;अंधेरी, टिंटेड-विंडो वाली कार&quot; में मुलाकात की, जहाँ एक व्यक्ति ने उन्हें सुप्रीम लीडर के तौर पर पेश किया। हालाँकि, ऐसा लगता है कि पेज़ेशकियन को इस पर पूरा यकीन नहीं था और उन्होंने उस व्यक्ति से पूछा कि क्या वे सच में खामेनेई ही हैं।यह रिपोर्ट पेज़ेशकियन के पहले के दावों से बिल्कुल अलग है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मई में उन्होंने खामेनेई से ढाई घंटे तक मुलाकात की थी और बातचीत &quot;सौहार्दपूर्ण माहौल&quot; में हुई थी।&#039;ईरान इंटरनेशनल&#039; ने सूत्रों के हवाले से कहा कि पेज़ेशकियन और खामेनेई के बीच यह मुलाकात तब तय हुई जब पेज़ेशकियन ने इस्तीफे की धमकी दी। हालाँकि, पेज़ेशकियन को बताया गया कि वे खामेनेई से उनके सामान्य आवास पर नहीं, बल्कि राजधानी तेहरान में एक गुप्त जगह पर मिलेंगे।अंधेरी, टिंटेड खिड़कियाँ, पिछली सीटजब पेज़ेशकियन उस जगह पहुँचे, तो उन्हें एक कमर्शियल कार की पिछली सीट पर बिठाया गया, जिसकी खिड़कियाँ अंधेरी और टिंटेड थीं। खामेनेई पहले से ही उस कार में इंतजार कर रहे थे, लेकिन पेज़ेशकियन उन्हें देख नहीं पाए। इसके अलावा, हाथ मिलाने की भी इजाजत नहीं थी और बाद में पेज़ेशकियन ने पूछा कि क्या वह व्यक्ति सच में सुप्रीम लीडर ही था। इसे भी पढ़ें: National Handloom Day 2026: आत्मनिर्भर भारत और Women Empowerment की दिशा में हथकरघा उद्योग का बढ़ता कद&#039;ईरान इंटरनेशनल&#039; ने राष्ट्रपति कार्यालय के लोगों के हवाले से कहा कि इस बर्ताव से पेज़ेशकियन को &quot;अपमानित&quot; महसूस हुआ। बाद में उन्होंने पूछा कि क्या दूसरी मुलाकात हो सकती है, लेकिन अब तक इस अनुरोध को ठुकरा दिया गया है।यह रिपोर्ट पेज़ेशकियन की हालिया टिप्पणियों से मेल खाती है, जिसमें उन्होंने कहा था कि खामेनेई से बातचीत करना बहुत मुश्किल हो गया है। उन्होंने इस हफ़्ते की शुरुआत में कहा, &quot;इस समय उनसे बातचीत करना बहुत मुश्किल है, लेकिन किसी भी हाल में, उनकी मौजूदगी हमारे लिए बहुत बड़ी ताकत है ताकि हम आगे बढ़ सकें।&quot; इसे भी पढ़ें: Assam Floods | असम में बाढ़ की स्थिति विकराल! मौतों का आंकड़ा 97 पहुंचा, 15 जिलों के 1.68 लाख लोग प्रभावितखामेनेई की सेहत को लेकर कोई साफ़ जानकारी नहींजब से यह टकराव शुरू हुआ है, खामेनेई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। यहाँ तक कि उन्होंने अपने पूर्ववर्ती और पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भी हिस्सा नहीं लिया, जबकि उनके तीनों भाई वहाँ मौजूद थे। इसी बीच, ट्रंप ने पहले दावा किया था कि खामेनेई गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और वे &quot;90 प्रतिशत खत्म हो चुके हैं&quot;।ट्रंप ने जुलाई में फॉक्स न्यूज़ से कहा था, &quot;उनके पास कोई नौसेना नहीं है, कोई वायु सेना नहीं है, सब कुछ खत्म हो चुका है। उनका एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम खत्म हो गया है, उनके सभी नेता मारे जा चुके हैं, उनके सबसे अच्छे नेता मारे जा चुके हैं।&quot; अब, ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट ने खामेनेई की सेहत और उनके ठिकाने को लेकर अटकलों को और हवा दे दी है, और लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सुप्रीम लीडर असल में देश के फ़ैसले ले रहे हैं या नहीं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Trump ने US में हथियारों की कमी की खबर को बताया Fake News, दी जेल की चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि वॉशिंगटन में हथियारों और गोला-बारूद की कमी हो रही है। उन्होंने इस दावे का भी खंडन किया कि उन्होंने इस कमी को लेकर अपने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से कोई तीखी बहस की थी। उन्होंने इन खबरों को फर्जी खबर करार दिया और पेंटागन के हथियारों के भंडार से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद मामले की नई जांच के आदेश दिए हैं। इसे भी पढ़ें: National Flag का अपमान बर्दाश्त नहीं करती BJP, तिरंगे को उल्टा पकड़ने वाली Mehbooba Mufti की तस्वीर ही उल्टी कर दीयह बात तब सामने आई जब &#039;द वॉशिंगटन पोस्ट&#039; की एक रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रंप ने पिछले हफ़्ते हेगसेथ से पूछताछ की थी। उन्हें पता चला था कि हेगसेथ को गोला-बारूद की भारी कमी के बारे में गलत जानकारी दी गई थी, जिससे ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी सेना के विकल्प सीमित हो सकते थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका के पास हथियारों का भारी भंडार है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जो लोग कमी के बारे में अफवाहें फैला रहे हैं, उन्हें जेल हो सकती है।उन्होंने गुरुवार को &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर लिखा कि पीट हेगसेथ जो काम कर रहे हैं, उससे मैं बहुत खुश हूँ। सब कुछ असाधारण रहा है, जिसमें वेनेजुएला पर हमारा हमला भी शामिल है, और इसी तरह ईरान में भी, &quot;जहाँ देश को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका के पास भारी मात्रा में &#039;गोला-बारूद है, खासकर कुछ खास तरह का, लेकिन उन्होंने इसके बारे में और कोई जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, ज़रूरत के हिसाब से बड़ी मात्रा में गोला-बारूद बनाया जा रहा है और अमेरिका भेजा जा रहा है। डिफेंस कंपनियाँ हमारे देश के इतिहास में सबसे ज़्यादा प्लांट और फ़ैक्ट्रियाँ बना रही हैं। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: SC ST Reservation पर कोई आंच नहीं आने देगी Modi Government, Creamy Layer पर Supreme Court में कह दी बड़ी बातट्रंप ने इन रिपोर्टों की आलोचना करते हुए कहा कि देशद्रोह वाली बातें लीक करने वालों को ढूंढा जा रहा है और उनके लिए लंबी जेल की सज़ा की मांग की जाएगी! व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने भी इन दावों को खारिज कर दिया और हेगसेथ के साथ हुई कथित बातचीत को &quot;फ़ेक न्यूज़&quot; बताया! उन्होंने X पर लिखा कि मैं राष्ट्रपति ट्रंप और सेक्रेटरी हेगसेथ के साथ कैंप डेविड में थी। ऐसा असल में कभी हुआ ही नहीं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>15 आकर्षक झांकियों के साथ Boston में मनेगा Independence Day, दिखेगी भारत&#45;अमेरिका की मजबूत साझेदारी</title>
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<description><![CDATA[ बोस्टन में भारतीय-अमेरिकी समुदाय भारत के स्वतंत्रता दिवस को पूरे उत्साह के साथ मनाने की तैयारियों में जुटा हुआ है। इस अवसर पर भव्य परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जो भारत और अमेरिका के बीच मजबूत साझेदारी को भी प्रदर्शित करेंगे। ‘फाउंडेशन ऑफ इंडियन-अमेरिकन्स’ (एफआईए)- न्यू इंग्लैंड द्वारा नौ अगस्त को बोस्टन में 5वीं ‘इंटरनेशनल इंडिया डे परेड’ आयोजित की जाएगी।इसे भी पढ़ें: Boston में 9 अगस्त को होगी International India Day Parade, जुटेंगे हजारों लोगइसे न्यू इंग्लैंड क्षेत्र में भारत के स्वतंत्रता दिवस, उसकी सांस्कृतिक विरासत और भारत-अमेरिका की स्थायी मित्रता के सबसे बड़े आयोजनों में से एक माना जाता है। एफआईए-न्यू इंग्लैंड ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा कि भारत की स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित इस वर्ष की परेड का विषय ‘स्वतंत्रता का उत्सव एवं अमेरिका-भारत मित्रता’ रखा गया है। परेड में 15 आकर्षक झांकियां शामिल होंगी।इसके साथ ही एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न सामुदायिक संगठनों, पूर्व सैनिकों, आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों और न्यू इंग्लैंड के भारतीय-अमेरिकी समुदाय की विविधता का प्रतिनिधित्व करने वाले हजारों लोगों की भागीदारी होगी। इस समारोह के ग्रैंड मार्शल कर्नल इंदर प्रीत सिंह (युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित पूर्व सैनिक) और अमेरिकी नौसेना की खुफिया विशेषज्ञ मैगी लेहमन होंगे। उन्हें देश की सेवा और राष्ट्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए सम्मानित किया जाएगा।इसे भी पढ़ें: Massachusetts ने 15 अगस्त को किया India Day घोषित, गवर्नर मॉरा हेली ने दिया आदेशइस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बोस्टन में भारत के पहले महावाणिज्यदूत रघुराम शास्त्री होंगे। उनकी उपस्थिति भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और न्यू इंग्लैंड में तेजी से बढ़ते भारतीय-अमेरिकी समुदाय के समर्थन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतीक है। एफआईए-न्यू इंग्लैंड के कार्यकारी निदेशक दीपक राठौर ने कहा कि इस वर्ष की परेड अब तक का सबसे बड़ा और सबसे रंगारंग आयोजन होगा, जिसमें स्वतंत्रता, लोकतंत्र, सांस्कृतिक विविधता और भारत-अमेरिका की मजबूत साझेदारी के मूल्यों का उत्सव मनाया जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Syria की राजधानी Damascus के जरामना में मिनीवैन टैक्सी में विस्फोट से 2 की मौत, 13 घायल</title>
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<description><![CDATA[ सीरिया की राजधानी दमिश्क के एक उपनगर में बृहस्पतिवार को हुए विस्फोट में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। सीरिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी। सीरिया के सरकारी टेलीविजन ने एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि जरामना में यह विस्फोट एक मिनीवैन टैक्सी में लगाए गए विस्फोटक उपकरण के कारण हुआ।स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि विस्फोट में दो लोगों की मौत हो गई और कम से कम 13 अन्य घायल हुए हैं। घटनास्थल पर मौजूद ‘एसोसिएटेड प्रेस’ के एक पत्रकार ने मलबे से एक शव निकाले जाते देखा। इस हमले की फिलहाल किसी समूह ने जिम्मेदारी नहीं ली है।जरामना में ड्रूज धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय की बड़ी आबादी रहती है। यहां ड्रूज समुदाय के कुछ सदस्यों और देश की इस्लामवादी नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार का समर्थन करने वाले सुन्नी मुसलमानों के बीच तनाव रहा है। ड्रूज बंदूकधारियों और सरकार समर्थक लड़ाकों के बीच अप्रैल 2025 में सांप्रदायिक झड़पों में कम से कम 10 लोग मारे गए थे। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:31 +0530</pubDate>
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<title>Thailand के देबसिरिन नोंथाबुरी स्कूल में गोलीबारी के बाद प्रधानमंत्री Anutin Charnvirakul ने दिए उचित देखभाल के निर्देश</title>
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<description><![CDATA[ थाईलैंड में बैंकॉक के बाहरी इलाके में स्थित एक हाई स्कूल में शुक्रवार को एक छात्र द्वारा की गई गोलीबारी में तीन शिक्षकों और तीन विद्यार्थियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। ‘रॉयल थाई पुलिस’ के प्रवक्ता त्रैरोंग पिवपन ने बताया कि गोलीबारी की यह घटना देश की राजधानी के उत्तर-पश्चिम में स्थित नोंथाबुरी प्रांत के ‘देबसिरिन नोंथाबुरी स्कूल’ में हुई।बाद में उन्होंने समाचार प्रसारक ‘चैनल 3’ को बताया कि हमलावर छात्र की हालत गंभीर है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि घटना में 15 अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है। उन्होंने बताया कि गोलीबारी के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।इसे भी पढ़ें: Thailand School Shooting | थाईलैंड के स्कूल में अंधाधुंध गोलीबारी! 15 से ज्यादा छात्र घायल, कई मौतों की आशंका, पुलिस ने शुरू किया सर्च ऑपरेशनऐसा माना जा रहा है कि बंदूक छात्र के परिवार के ही किसी सदस्य की थी। प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने इस घटना पर संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पीड़ितों कीउचित देखभाल करने का निर्देश दिया है। घटना के लगभग एक घंटे बाद सामने आई तस्वीरों में लोग स्कूल के बाहर एक-दूसरे को सांत्वना देते दिखे, जबकि पुलिस और बचाव दल स्कूल के अंदर स्थिति का जायजा ले रहे थे।इसे भी पढ़ें: Greater Noida में ITBP जवान ने गुटखा विवाद के बाद दुकानदार को मारी गोली, गिरफ्तारएक प्रत्यक्षदर्शी ने संवाददाताओं को बताया कि जब अन्य भवन से गोलियां चलने की आवाजें आईं तो छात्र एक कक्षा के अंदर छिप गए। बाद में पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर उन्हें बाहर निकाला। इसी साल फरवरी में दक्षिणी थाईलैंड के एक सरकारी हाई स्कूल में 17 वर्षीय एक लड़के ने पुलिस की बंदूक चुराकर अंधाधुंध गोलीबारी की थी और लोगों को बंधक बना लिया था।इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और दो अन्य घायल हुए थे। इससे पहले 2023 में बैंकॉक के एक शॉपिंग मॉल में 14 वर्षीय लड़के द्वारा गोलीबारी किए जाने का मामला सामने आया था। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:30 +0530</pubDate>
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<title>3 मुस्लिम राष्ट्रों ने चला बड़ा दाँव, Turkey, Saudi Arabia और Pakistan के बीच Defence Pact से दुनिया हैरान</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच आज मुस्लिम दुनिया के तीन महत्वपूर्ण देश तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान एक ऐतिहासिक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। यह समझौता ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी देशों को भी निशाने पर लिया है और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।इस समझौते पर जेद्दा में तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की मौजूदगी में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ हस्ताक्षर किए जाएंगे। तुर्किये के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस रक्षा समझौते की पुष्टि भी की है।इसे भी पढ़ें: Article 370 पर बदजुबानी कर रहे थे जरदारी और शहबाज शरीफ, मोदी ने खुद आगे आकर दिया करारा जवाबकरीब एक वर्ष तक चली बातचीत के बाद यह समझौता अंतिम रूप तक पहुंचा है। इसकी अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि ईरान के साथ जारी संघर्ष ने खाड़ी देशों की सुरक्षा कमजोरियों को उजागर कर दिया है। साथ ही, दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।हालांकि समझौते के सभी प्रावधान अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि इससे सुन्नी मुस्लिम देशों के बीच सामरिक और सैन्य सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। यह गठजोड़ क्षेत्र में उभरते नए शक्ति संतुलन का संकेत माना जा रहा है।तीनों देशों की सामरिक क्षमता इस समझौते को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। तुर्किये नाटो का सदस्य है और उसकी सैन्य क्षमता पश्चिम एशिया में सबसे मजबूत मानी जाती है। वहीं सऊदी अरब अमेरिका का प्रमुख सहयोगी होने के साथ दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में शामिल है और खाड़ी क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली शक्ति है। वहीं पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न मुस्लिम देश है।रिपोर्टों के मुताबिक, तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अंकारा क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा मंच के पक्ष में है। ऐसे में यह नया रक्षा समझौता उसी रणनीतिक सोच का विस्तार माना जा रहा है।गौरतलब है कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पहले से ही एक रक्षा समझौता मौजूद है, जिसके तहत किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाता है और आवश्यकता पड़ने पर &quot;सभी सैन्य साधनों&quot; के उपयोग का प्रावधान है। अब तुर्किये के इस ढांचे से जुड़ने के बाद पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया की सुरक्षा राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने की संभावना है।विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-इज़राइल-अमेरिका संघर्ष के बीच यह रक्षा गठबंधन केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की रक्षा और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को भी नई दिशा दे सकता है। देखा जाये तो ऐसे समय में जब हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य और पूरे खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता वैश्विक चिंता का विषय बनी हुई है, यह समझौता आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की रणनीतिक राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:29 +0530</pubDate>
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<title>Russia की युद्ध अर्थव्यवस्था को झटका देने के लिए UK ने 6 बैंकों और जहाजों पर लगाया प्रतिबंध</title>
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<description><![CDATA[ ब्रिटेन ने यूक्रेन के समर्थन में बृहस्पतिवार को रूस पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की, जिनमें बैंक और ‘छद्म बेड़े’ के जहाजों को निशाना बनाया गया है। यह प्रतिबंध पैकेज एड मिलिबैंड के ब्रिटेन का विदेश मंत्री का पद संभालने के बाद पहला है। उन्होंने पिछले महीने यह जिम्मेदारी संभाली थी।इसे भी पढ़ें: Russia में Drone फैक्टरी के प्रमुख Vladimir Tkachuk कार धमाके में घायल, चालक की मौतब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (एफसीडीओ) ने बताया कि प्रतिबंधों के दायरे में 19 लक्ष्य शामिल हैं। इनमें छह रूसी बैंक हैं, जिन पर रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को समर्थन देने का आरोप है। इसके अलावा छह नए अधिग्रहीत ‘छद्म बेड़े’ (शैडो फ्लीट) टैंकर को भी प्रतिबंधित किया गया है, जिन पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से बचने में मदद करने का आरोप है।साथ ही प्रतिबंधों में चार रूसी कंपनियां भी शामिल हैं, जो टैंटलम और नियोबियम जैसी दुर्लभ धातुओं का आयात करती हैं। इन धातुओं का इस्तेमाल यूक्रेन के युद्ध में इस्तेमाल होने वाले सैन्य उपकरणों के निर्माण में किया जाता है। मिलिबैंड ने कहा, ‘‘आज के नए प्रतिबंध यूक्रेन के समर्थन और क्रेमलिन की आक्रामकता को बढ़ावा देने वालों पर दबाव बनाने की ब्रिटेन की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यूक्रेन की लड़ाई हमारी लड़ाई है।इसे भी पढ़ें: Lion Brewery बीयर: ब्रिटेन की लॉयन ब्रूअरी ने 60 साल बाद भारतीय बाजार में की वापसीजो लोग यूक्रेन की स्वतंत्रता और लोकतंत्र को खतरा पहुंचाते हैं, वे ब्रिटेन की घरेलू सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं। इसलिए हम रूस पर तब तक दबाव बढ़ाते रहेंगे, जब तक न्यायपूर्ण और स्थायी शांति स्थापित नहीं हो जाती। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:29 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Russia, की, युद्ध, अर्थव्यवस्था, को, झटका, देने, के, लिए, ने, बैंकों, और, जहाजों, पर, लगाया, प्रतिबंध</media:keywords>
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<title>Nonthaburi School Attack: थाईलैंड में गोलीबारी के बाद पुलिस जांच जारी, 6 की मौत</title>
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<description><![CDATA[ पुलिस ने बताया कि शुक्रवार को थाईलैंड के नोंथाबुरी प्रांत के एक हाई स्कूल में एक छात्र ने गोलीबारी की, जिसमें तीन टीचर और तीन छात्रों की मौत हो गई और 15 अन्य घायल हो गए। रॉयल थाई पुलिस के प्रवक्ता ट्राइरोंग पिवपान ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि गोलीबारी बैंकॉक के उत्तर-पश्चिम में स्थित डेबसिरिन नोंथाबुरी स्कूल में हुई। पिवपान ने बाद में चैनल 3 को बताया कि संदिग्ध शूटर की हालत गंभीर है और उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि घायल हुए 15 लोगों में से दो की हालत गंभीर थी। इसे भी पढ़ें: 3 मुस्लिम राष्ट्रों ने चला बड़ा दाँव, Turkey, Saudi Arabia और Pakistan के बीच Defence Pact से दुनिया हैरानपुलिस ने कहा कि गोलीबारी के पीछे की वजह की अभी जांच चल रही है। माना जा रहा है कि हमले में इस्तेमाल किया गया हथियार छात्र के परिवार के किसी सदस्य से लिया गया था। प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना जताई और कहा कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्रभावित लोगों की मदद और देखभाल करने का निर्देश दिया है। गोलीबारी के लगभग एक घंटे बाद घटनास्थल की तस्वीरों में लोगों को स्कूल के बाहर इकट्ठा होकर एक-दूसरे को दिलासा देते हुए देखा गया, जबकि पुलिस अधिकारी और इमरजेंसी रिस्पॉन्डर परिसर में मौजूद थे।पुलिस ने कहा कि छात्र पर स्कूल में गोलीबारी करने का शक है। गोलीबारी की खबर मिलने के बाद प्लाई बैंग पुलिस स्टेशन के अधिकारियों को कैंपस भेजा गया और उन्होंने इलाके को सुरक्षित किया। अधिकारियों ने कहा कि हताहतों की संख्या अभी शुरुआती है क्योंकि बचाव अभियान चल रहा था। पुलिस ने लोगों से यह भी अपील की कि जब अधिकारी स्थिति को संभाल रहे हों, तो वे इस घटना की लाइव-स्ट्रीमिंग न करें। इसे भी पढ़ें: Trump ने US में हथियारों की कमी की खबर को बताया Fake News, दी जेल की चेतावनीशुक्रवार को हुई गोलीबारी, इस साल थाईलैंड में स्कूल में गोलीबारी की दूसरी घटना थी। फरवरी में, 17 साल के एक लड़के ने कथित तौर पर एक पुलिस अधिकारी से बंदूक चुराई और दक्षिणी थाईलैंड के एक पब्लिक हाई स्कूल में गोलीबारी की, जिसमें एक टीचर की मौत हो गई, एक छात्र घायल हो गया और कुछ समय के लिए लोगों को बंधक बना लिया गया।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:28 +0530</pubDate>
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<title>Strait of Hormuz Conflict | समझौते के बेहद करीब ईरान, अमेरिका और ओमान! जानिए क्या है 5&#45;7% टोल टैक्स का विवाद?</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में पिछले पांच महीनों से जारी भारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। ईरान ने दावा किया है कि वह ओमान के मध्यस्थता वाले &#039;होर्मुज़ समझौते&#039; (Hormuz Deal) के बेहद करीब पहुंच गया है। इस समझौते का मकसद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और एलएनजी (LNG) आपूर्ति मार्ग—&#039;होर्मुज़ जलडमरूमध्य&#039; (Strait of Hormuz)—को जहाजों के आवागमन के लिए फिर से खोलना है। हालांकि, तेहरान को अभी भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वाशिंगटन की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। इसी बीच, ईरान की संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेरी घालीबाफ़ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर &quot;थिएटर डिप्लोमेसी&quot; (दिखावे की कूटनीति) करने का आरोप लगाया है।होर्मुज़ जलडमरूमध्य, जो खाड़ी (Gulf) को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और जिसके एक तरफ ओमान और संयुक्त अरब अमीरात तथा दूसरी तरफ ईरान है, मध्य पूर्व में तनाव का एक बड़ा केंद्र बन गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सामान्य समय में दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति इसी रास्ते से की जाती है।इसे भी पढ़ें: Instagram Username से पति का सरनेम हटाना चाहती हैं Akanksha Chamola, नियमों के कारण फंसा पेंच घालीबाफ़ ने क्या कहाअपने X अकाउंट पर, घालीबाफ़ ने तनाव बढ़ाने की ट्रंप की बार-बार दी जा रही धमकियों पर निशाना साधा और कहा, &quot;बड़ा हमला होने वाला है... यह बात बार-बार दोहराई जा रही है।&quot;धौंस जमाना, वादे तोड़ना और फ़र्ज़ी ख़बरों का इस्तेमाल करना एक नाकाम रणनीति है। तथ्यों को स्वीकार करें और अपने वादे पूरे करें। उन्होंने कहा, &quot;हमें और ज़्यादा दिखावे की ज़रूरत नहीं है।&quot;होरमुज़ डील की मौजूदा स्थितिईरान ने कहा है कि ओमान के साथ होरमुज़ जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़) को फिर से खोलने का समझौता &quot;लगभग तय हो चुका है&quot;। दोनों देशों ने इस अहम जलमार्ग से गुज़रने वाले जहाज़ों के रास्तों के लिए कोऑर्डिनेट्स (निर्देशांक) पर सहमति की पुष्टि की है। इस प्रस्ताव पर अमेरिका की ओर से अभी कोई टिप्पणी नहीं आई है।हालांकि ट्रंप ने कहा है कि जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का समझौता जल्द ही हो जाएगा, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने बार-बार ज़ोर देकर कहा है कि वे कभी भी इस बात के लिए सहमत नहीं होंगे कि ऊर्जा आपूर्ति के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग तक पहुँच का नियंत्रण ईरान के पास हो।ईरान के एक सांसद ने फार्स न्यूज़ एजेंसी को बताया कि एक संसदीय समिति एक शुरुआती बिल की समीक्षा कर रही है। इस बिल में होरमुज़ जलडमरूमध्य से अमेरिका, इज़राइल और अन्य दुश्मन माने जाने वाले देशों के जहाज़ों के गुज़रने पर रोक लगाने और प्रस्तावित प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वालों पर कार्गो (सामान) की कीमत का 20 प्रतिशत तक जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है।इसे भी पढ़ें: Independence Day पर Lal Qila से गूँजेगा Vande Mataram, राष्ट्रगीत को मिला ऐतिहासिक संवैधानिक सम्मान होरमुज़ डील से हर पक्ष क्या चाहता हैरॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान इस जलडमरूमध्य का इस्तेमाल करने वाले जहाज़ों के कार्गो की कीमत का 5 से 7 प्रतिशत शुल्क लेना चाहता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ओमान लगभग 3 प्रतिशत शुल्क पर बातचीत कर रहा है, जबकि वाशिंगटन कोई शुल्क नहीं चाहता है।इस समझौते से ईरान को जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले ट्रैफ़िक पर अधिकार मिल जाएगा। इसका मतलब यह होगा कि फरवरी में अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू किए गए युद्ध के परिणामस्वरूप क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में तेहरान के पक्ष में बड़ा बदलाव आया है। युद्ध से पहले, यह जलडमरूमध्य सभी जहाज़ों के लिए बिना किसी शुल्क के खुला रहता था।खाड़ी देशों को ईरान की चेतावनीइस बीच, पाँच सूत्रों के अनुसार, ईरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि अगर उसके क्षेत्र पर अमेरिका का कोई नया हमला होता है, तो वह पूरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढाँचे के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई करेगा। तेहरान वाशिंगटन के करीबी क्षेत्रीय सहयोगियों को धमकाकर सैन्य कार्रवाई की कीमत बढ़ाना चाहता है।खाड़ी क्षेत्र के एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया, &quot;ईरान की चेतावनी स्पष्ट थी: अगर अमेरिका ने ईरान के बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया, तो वे खाड़ी के ऊर्जा केंद्रों और अन्य क्षेत्रीय ठिकानों पर हमला करके जवाबी कार्रवाई करेंगे।&quot;ईरान इस क्षेत्र में वाशिंगटन के सहयोगियों के ख़िलाफ़ मिसाइलों और ड्रोनों से जवाबी हमले कर रहा है और साथ ही अपनी अनुमति के बिना जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले व्यावसायिक जहाज़ों को भी निशाना बना रहा है।ट्रंप की धमकीलास वेगास में एक रैली में समर्थकों को संबोधित करते हुए, ट्रंप ने कूटनीति को प्राथमिकता दी। ट्रंप ने कहा &quot;मैं समझौता करना पसंद करूँगा क्योंकि मैं लोगों की जान नहीं लेना चाहता।&quot; ट्रंप ने कहा, &quot;मैं लोगों को मारना नहीं चाहता, लेकिन किसी न किसी मोड़ पर हमें ऐसा करना ही पड़ेगा।&quot;28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के युद्ध शुरू करने के बाद से ईरान में 3,400 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि अमेरिका के 18 सैन्य कर्मियों की मौत की खबर है। Stay updated with International
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:27 +0530</pubDate>
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<title>Vishwakhabram: दुनिया के सबसे &amp;apos;मजबूत&amp;apos; से सबसे &amp;apos;मजबूर&amp;apos; नेता बने US President, Iran War ने Trump को ऐसे जाल में फंसाया जहां से हर रास्ता हार की ओर जाता है</title>
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<description><![CDATA[ वैसे तो अमेरिकी राष्ट्रपति पद पर बैठने वाले व्यक्ति को दुनिया का सबसे शक्तिशाली नेता माना जाता है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आक्रामक नीतियों और जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से खुद ही ऐसी परिस्थितियां पैदा कर दी हैं कि आज व्हाइट हाउस में बैठे होने के बावजूद वह दुनिया के सबसे मजबूर नेताओं में से एक नजर आ रहे हैं। छह महीने से जारी ईरान युद्ध ने ट्रंप को ऐसे रणनीतिक चौराहे पर ला खड़ा किया है, जहां हर रास्ता उनकी राजनीतिक और कूटनीतिक विफलता की कहानी लिखता दिखाई देता है। यदि वह ओमान की मध्यस्थता में तैयार हो रहे अंतरिम समझौते को स्वीकार करते हैं तो हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान को वह प्रभाव मिल सकता है, जिसे रोकना ही अमेरिकी सैन्य अभियान का सबसे बड़ा उद्देश्य बताया गया था। लेकिन यदि ट्रंप सैन्य कार्रवाई को और तेज करते हैं तो उन्हें एक लंबे, महंगे और राजनीतिक रूप से विनाशकारी युद्ध में फंसने का खतरा है, जिसका खामियाजा आगामी मध्यावधि चुनावों में भी भुगतना पड़ सकता है। यानी ट्रंप के सामने ऐसा कोई विकल्प नहीं बचा है जो उन्हें सम्मानजनक तरीके से इस संकट से बाहर निकाल सके; हर फैसला इतिहास में उनकी किसी न किसी नाकामी को और अधिक उजागर करने वाला साबित हो सकता है।देखा जाये तो दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल और एलएनजी व्यापार का मार्ग हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यदि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है तो ईरान को इस समुद्री मार्ग पर निगरानी और प्रभाव का ऐसा अधिकार मिल सकता है, जिसे रोकना ही अमेरिका और उसके सहयोगियों के सैन्य अभियान का प्रमुख उद्देश्य बताया गया था। यही कारण है कि ट्रंप प्रशासन के भीतर भी मतभेद उभरते दिखाई दे रहे हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस जलमार्ग को पूरी तरह मुक्त अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग बनाए रखने की बात कर रहे हैं, जबकि विश्लेषकों का मानना है कि परिस्थितियां ट्रंप को अंततः समझौते की ओर धकेल सकती हैं।इसे भी पढ़ें: Trump ने US में हथियारों की कमी की खबर को बताया Fake News, दी जेल की चेतावनीस्थिति इसलिए भी जटिल है क्योंकि लगातार सैन्य दबाव के बावजूद अमेरिका अपने घोषित उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल नहीं कर सका है। ट्रंप ने कई बार ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने और उसके नेतृत्व को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया, लेकिन विश्लेषकों का आकलन है कि ईरान अब भी निर्णायक रूप से झुका नहीं है। उल्टा, अमेरिकी राष्ट्रपति अब घरेलू राजनीतिक दबाव, बढ़ती ईंधन कीमतों, घटती लोकप्रियता और आगामी मध्यावधि चुनावों की चुनौती से घिर गए हैं। ऐसे में लंबा युद्ध उनके लिए राजनीतिक बोझ बनता जा रहा है। साथ ही अमेरिका से इस तरह की भी खबरें आ रही हैं कि उसका गोला बारूद, मिसाइलों और हथियारों का जखीरा खत्म होता जा रहा है तथा अमेरिका को दूसरे देशों में मौजूद अपने सैन्य अड्डों पर मौजूद मिसाइलों को वापस मंगवाना पड़ा है।इसी बीच, ईरान ने सैन्य मोर्चे के समानांतर अत्यंत आक्रामक कूटनीतिक अभियान भी शुरू कर दिया है। तेहरान ने सऊदी अरब, कतर, ओमान, तुर्किये और अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ उच्चस्तरीय संपर्क स्थापित कर स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि अमेरिका ने ईरानी ऊर्जा अवसंरचना पर नए हमले किए तो जवाब केवल अमेरिकी ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि खाड़ी देशों के तेल क्षेत्र, रिफाइनरियां, बिजली ग्रिड, जल संयंत्र, परिवहन नेटवर्क और अन्य रणनीतिक प्रतिष्ठान भी जवाबी कार्रवाई का लक्ष्य बन सकते हैं।इस चेतावनी का असर भी दिखाई दिया। रिपोर्टों के अनुसार सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से बातचीत कर सैन्य कार्रवाई टालने, युद्धविराम और वार्ता को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। हालांकि रियाद ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि उसके क्षेत्र पर हमला हुआ तो वह सैन्य जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा। यह घटनाक्रम बताता है कि पूरा खाड़ी क्षेत्र किसी व्यापक युद्ध की आशंका से चिंतित है और ऊर्जा सुरक्षा अब केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामरिक अस्तित्व का प्रश्न बन चुकी है।देखा जाये तो हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर प्रभाव स्थापित करना ईरान के लिए केवल समुद्री नियंत्रण का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बनाने का सबसे प्रभावी साधन है। यदि तेहरान इस मार्ग पर अपनी भूमिका संस्थागत रूप से स्थापित कर लेता है तो भविष्य में वह पश्चिमी देशों के विरुद्ध आर्थिक और भू-राजनीतिक दबाव का अधिक प्रभावी उपकरण हासिल कर सकता है। दूसरी ओर अमेरिका के लिए यह उसकी समुद्री प्रभुत्व रणनीति और पश्चिम एशिया में विश्वसनीयता की बड़ी परीक्षा होगी।दूसरी ओर, इस संघर्ष को चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देश भी बेहद करीब से देख रहे हैं। अमेरिकी सीमाओं, उसकी सैन्य क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का आकलन भविष्य के वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। यदि अमेरिका निर्णायक परिणाम हासिल किए बिना समझौते के लिए मजबूर होता है तो यह उसके प्रतिद्वंद्वियों के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक संदेश माना जाएगा।उधर, ईरान के भीतर भी सत्ता संरचना को लेकर सवाल गहराते जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई से मुलाकात अत्यंत गोपनीय और असामान्य परिस्थितियों में हुई। दावा है कि मुलाकात कुछ मिनटों तक सीमित रही, दोनों एक-दूसरे को देख भी नहीं सके और बातचीत केवल आवाज के माध्यम से हुई। यहां तक कि राष्ट्रपति ने बाद में यह संदेह भी व्यक्त किया कि जिनसे उनकी बातचीत हुई, वे वास्तव में सर्वोच्च नेता थे या नहीं। दरअसल, मोजतबा खामेनेई के सार्वजनिक रूप से लगातार अनुपस्थित रहने और उनके संबंध में विरोधाभासी दावों ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व को लेकर रहस्य और गहरा कर दिया है।बहरहाल, कुल मिलाकर पश्चिम एशिया इस समय ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ा है जहां एक गलत सैन्य निर्णय पूरे खाड़ी क्षेत्र को व्यापक युद्ध में धकेल सकता है। दूसरी ओर यदि समझौता होता है औ ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:27 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Vishwakhabram:, दुनिया, के, सबसे, मजबूत, से, सबसे, मजबूर, नेता, बने, President, Iran, War, ने, Trump, को, ऐसे, जाल, में, फंसाया, जहां, से, हर, रास्ता, हार, की, ओर, जाता, है</media:keywords>
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<title>Pakistan सेना ने Khyber Pakhtunkhwa में 10 TTP आतंकवादियों को ढेर किया</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सुरक्षा बलों ने दो अलग-अलग अभियानों में 10 आतंकवादियों को मार गिराया। सेना की मीडिया इकाई ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। ये दोनों घटनाएं बृहस्पतिवार को दक्षिण वजीरिस्तान और अपर दीर जिलों में प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान हुईं।सरकार टीटीपी आतंकवादियों के लिए ‘फितना अल खवारिज’ शब्द का इस्तेमाल करती है। पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग (आईएसपीआर) के अनुसार, दक्षिण वजीरिस्तान के आजम वारसक इलाके में आतंकवादियों के एक समूह ने सुरक्षा बलों की चौकियों पर हमला करने का प्रयास किया। आईएसपीआर ने बताया कि सैनिकों ने हमले का प्रभावी ढंग से जवाब दिया और आठ आतंकवादियों को मार गिराया।इसे भी पढ़ें: WTC Points Table: West Indies को हराकर Pakistan ने लगाई लंबी छलांग, टॉप 8 में की धमाकेदार वापसीदूसरी घटना दीर जिले में हुई, जहां सुरक्षा बलों ने दो और आतंकवादियों को ढेर कर दिया। अभियान के दौरान हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए। आईएसपीआर ने कहा कि मारे गए आतंकवादी इलाके में कई आतंकी गतिविधियों में शामिल थे।इसे भी पढ़ें: Shehbaz Sharif तीन दिवसीय यात्रा पर Saudi Arabia जाएंगे, रक्षा संबंधों पर होगी वार्ताइस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 10 आतंकवादियों को मार गिराने के लिए सुरक्षा बलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के पूरी तरह खात्मे तक इसके खिलाफ अभियान पूरी दृढ़ता के साथ जारी रहेगा। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत पिछले कई वर्षों से उग्रवादी हिंसा, अफगानिस्तान से लड़ाकों की सीमा पार आवाजाही और लगातार सैन्य अभियानों के कारण अशांति का सामना करता रहा है।पाकिस्तान की संघीय सरकार का आरोप है कि नवंबर 2022 में संघर्षविराम समझौता समाप्त होने के बाद प्रतिबंधित टीटीपी ने प्रांत में कई हमले किए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:26 +0530</pubDate>
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<title>Iran ने Saudi Arabia, पाकिस्तान और Turkey के रक्षा समझौते को बताया बेअसर</title>
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<description><![CDATA[ दुबई, सात अगस्त (एपी) ईरान के एक प्रमुख सांसद ने शुक्रवार को सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हुए संयुक्त रक्षा समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि यह रियाद को सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाएगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत इनमें से किसी एक भी देश पर किए गए हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के सदस्य इब्राहिम रेजाई ने ‘एक्स’ पर इस समझौते की आलोचना की।उन्होंने पोस्ट में कहा, ‘‘सऊदी अरब को यह समझना चाहिए कि तुर्किये और पाकिस्तान के साथ कागजी समझौता उसे सुरक्षा नहीं दिला सकता, ठीक उसी तरह जैसे अमेरिका द्वारा वर्षों तक किए गए एकतरफा दोहन से भी उसे सुरक्षा नहीं मिली। अपनी नीतियों में बदलाव करें, ताकि आपको दूसरों से सुरक्षा की गुहार न लगानी पड़े।’’
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी युवराज (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई एक बैठक के दौरान संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। तुर्किये सरकार के एक अधिकारी ने इस समझौते को ‘‘पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति’’ का बताया।उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने केवल रक्षा के क्षेत्र में एक-दूसरे को समर्थन देने का वादा किया है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:25 +0530</pubDate>
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<title>Israel ने China के चेंगदू में बंद किया अपना Consulate, रिश्तों में बढ़ा तनाव</title>
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<description><![CDATA[ बीजिंग, सात अगस्त इजराइल ने चीन में अपना एक वाणिज्य दूतावास बंद कर दिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच संबंधों में बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया है। तनाव की वजह चीन का ईरान और अरब देशों के करीब आना तथा पश्चिम एशिया की अपनी व्यापक नीति में बदलाव करना बताया जा रहा है।हांगकांग स्थित ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की एक खबर में कहा गया है कि इजराइल ने चेंगदू स्थित अपना वाणिज्य दूतावास बंद कर दिया है। इस दूतावास ने पिछले महीने अपना कामकाज रोक दिया था। बुधवार को प्रकाशित एक पत्र में निवर्तमान इजराइली महावाणिज्यदूत गादी हरपाज ने चीन के दक्षिण-पश्चिमी शहर चेंगदू में बिताए अपने पांच वर्षों को ‘‘अपने राजनयिक करियर का सबसे यादगार समय’’ बताया।उन्होंने कहा कि वह ‘‘गहरे दुख और पुरानी यादों के एहसास’’ के साथ यहां से विदा ले रहे हैं। हरपाज ने कहा, ‘‘वाणिज्य दूतावास बंद हो रहा है, लेकिन पिछले पांच वर्षों में हमने दोस्ती, आपसी सम्मान और साझा यादों के जो पुल बनाए हैं, वे हमेशा कायम रहेंगे।’’
इजराइल वर्तमान में चीन में शंघाई, ग्वांगझू और हांगकांग में वाणिज्य दूतावासों के अलावा बीजिंग में अपना दूतावास संचालित करता है। पिछले साल के अंत में इजराइल ने चीन में अपने एक राजनयिक मिशन को बंद करने की घोषणा की थी।हालांकि उसने इसके पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की थी। दोनों देशों के संबंधों में तनाव के संकेत तब दिखे जब चीन ने अक्टूबर 2023 में हमास आतंकवादियों द्वारा इजराइल पर किए गए हमले की तत्काल निंदा नहीं की और गाजा संघर्ष में फलस्तीन के समर्थन में अपना रुख रखा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:25 +0530</pubDate>
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<title>US Senate ने 100% Tariff प्रावधान वाला रूस प्रतिबंध विधेयक पारित किया, भारत पर होगा असर</title>
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<description><![CDATA[ सागर कुलकर्णी
वाशिंगटन, आठ अगस्त अमेरिकी सीनेट ने रूस तथा उसके पेट्रोलियम उत्पादों के चीन एवं भारत जैसे प्रमुख खरीदार देशों को दंडित करने के उद्देश्य से लाए गए एक विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। विधेयक में दावा किया गया है कि रूस के साथ इस प्रकार का व्यापार यूक्रेन युद्ध को जारी रखने में मदद कर रहा है। सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम के इस विधेयक को 11 के मुकाबले 86 मतों से मंजूरी दी।यह विधेयक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करने वाले पांच देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने का अधिकार देता है। चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस से तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करने वाले पांच देश हैं। रूस पर प्रतिबंधों के अलावा विधेयक में 1996 के ‘ईरान प्रतिबंध अधिनियम’ की अवधि 2031 तक बढ़ाने का भी प्रावधान है।इस कानून के तहत ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाती है। इस द्विदलीय विधेयक को रिपब्लिकन पार्टी के नेता एवं सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट पार्टी के नेता एवं सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने प्रस्तावित किया था। ग्राहम का 11 जुलाई को निधन हो गया था।कीव की यात्रा के बाद ग्राहम के अचानक निधन के पश्चात दोनों दलों के नेताओं ने विधेयक को पारित कराने और यूक्रेन के समर्थक के रूप में दिवंगत सांसद की विरासत का सम्मान करने के लिए नए सिरे से प्रयास तेज किए। ग्राहम के निधन के बाद उनकी सीट से सीनेटर चुनी गईं उनकी बहन डारलाइन ग्राहम ने कहा, ‘‘यह विधेयक रूस की अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले प्रमुख देशों को एक सरल लेकिन बेहद महत्वपूर्ण विकल्प चुनने के लिए मजबूर करता है-अमेरिका के साथ कारोबार करना या सस्ती रूसी ऊर्जा खरीदना।’’
विधेयक में रूस के नेताओं और अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है। इसके तहत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, रूस के धनाढ्य कारोबारियों और वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाया गया है।मतदान के बाद सीनेटर ब्लूमेंथल ने पत्रकारों से कहा, ‘‘हमने जो किया है, ग्राहम को उस पर गर्व होता।’’
ब्लूमेंथल ने कहा, ‘‘ये बेहद कड़े प्रतिबंध और शुल्क उन सभी को रोकेंगे जो बहादुर और स्वतंत्र लोगों के खिलाफ इस जानलेवा और आपराधिक आक्रामक युद्ध में सहभागी हैं।’’
ग्रेगरी मीक्स और डॉन बेयर समेत कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने हालांकि आगाह किया है कि यह विधेयक ऐसे समय में ट्रंप को शुल्क लगाने की नयी शक्तियां देगा, जब उन्होंने शुल्क को अपनी व्यापार नीति का प्रमुख आधार बनाया हुआ है। यह विधेयक मंजूरी के लिए अब प्रतिनिधि सभा में भेजा जाएगा, जिसका सत्र 31 अगस्त को फिर शुरू होगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:24 +0530</pubDate>
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<title>US Wildfire: उताह में सिकोरस्की हेलीकॉप्टर क्रैश, ओरेगन में चालक की जान गई</title>
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<description><![CDATA[ रिचफील्ड (अमेरिका), आठ अगस्त (एपी) अमेरिका के उताह राज्य में जंगल की भीषण आग पर काबू पाने के अभियान में जुटा हेलीकॉप्टर शुक्रवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हेलीकॉप्टर में दो लोग सवार थे। वहीं, ओरेगन में जंगल की बेकाबू आग से निपटने के दौरान एक बुलडोजर ऑपरेटर की मौत हो गई।अधिकारियों ने बताया कि उताह में दुर्घटनाग्रस्त हुए हेलीकॉप्टर में सवार दो लोगों की स्थिति के बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं मिल सकी है, क्योंकि अधिकारी अभी तक दुर्घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाए हैं। उन्होंने बताया कि ओरेगन में आग बुझाने के अभियान के दौरान बुलडोजर चला रहे 47 वर्षीय जेसन एनसाइन की बृहस्पतिवार को मौत हो गई। स्थानीय शेरिफ विभाग ने बताया कि राइट्स स्प्रिंग क्षेत्र में लगी आग ने अचानक और तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे एनसाइन के बच निकलने का रास्ता बंद हो गया।यह आग बुधवार को दक्षिण-मध्य ओरेगन में चिलोक्विन शहर के पूर्व में लगी थी। अमेरिकी वन सेवा के अनुसार, शुक्रवार तक यह आग करीब 14 वर्ग मील (36 वर्ग किलोमीटर) क्षेत्र में फैल चुकी थी और इस पर अभी तक पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका था। अधिकारियों ने बताया कि अत्यधिक गर्म और शुष्क मौसम के कारण आग लगने की घटना हुई।उताह के मध्य क्षेत्र में लगी आग पर काबू पाने के अभियान में सात हेलीकॉप्टर की मदद ली जा रही थी, जिनमें से एक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह आग 27 जुलाई को बिजली गिरने के कारण लगी थी। संघीय विमानन प्रशासन (एफएए) ने बताया कि हेलीकॉप्टर साल्ट लेक सिटी से करीब 258 किलोमीटर दक्षिण में स्थित रिचफील्ड के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ।यह ‘सिकोरस्की एस-64’ हेलीकॉप्टर था और यह पहाड़ी एवं दुर्गम इलाके में आग बुझाने के काम में लगा था। दुर्घटना के बाद वहां एक और आग भड़क गई। अधिकारियों ने बताया कि आग की लपटों के कारण बचाव दल शुक्रवार शाम तक दुर्घटनास्थल तक नहीं पहुंच सके।हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि अगले 24 घंटे में वहां पहुंचा जा सकेगा। सेवियर काउंटी के शेरिफ नाथन कर्टिस ने कहा, ‘‘हम उन्हें और बड़े खतरे में नहीं डालना चाहते थे। जैसे ही संभव होगा, हम वहां पहुंचेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:24 +0530</pubDate>
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<title>US Senate Russia Sanctions Bil | अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल किया पास: जानें भारत और चीन के लिए क्यों बढ़ी चिंता?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों (तेल और प्राकृतिक गैस) को खरीदने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाने से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विधेयक (Bill) पास कर दिया है। 86-11 के भारी बहुमत से पारित इस बिल के दायरे में भारत और चीन जैसे बड़े देश भी सीधे तौर पर आ सकते हैं। बिल के समर्थकों का तर्क है कि रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देश अप्रत्यक्ष रूप से मॉस्को को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए फंड दे रहे हैं। इस बिल का नाम बदलकर &#039;लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026&#039; कर दिया गया है और अब इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (अमेरिकी संसद का निचला सदन) में भेजा जाएगा। ग्राहम एक रिपब्लिकन सीनेटर थे जिनका 11 जुलाई को निधन हो गया था; उन्होंने यूक्रेन युद्ध के कारण रूस पर प्रतिबंध लगाने की पुरजोर वकालत की थी।हालांकि, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इस पर वोटिंग सितंबर में ही होगी क्योंकि कांग्रेस (अमेरिकी संसद) में गर्मियों की छुट्टियां चल रही हैं।AFP के अनुसार, सीनेट की विदेश संबंध समिति के चेयरमैन रिपब्लिकन जिम रिस्क ने कहा, &quot;इससे रूस बातचीत की मेज पर आ सकता है और यह संघर्ष खत्म हो सकता है। इसका ऐसा निर्णायक असर होगा जो युद्ध के मैदान में हासिल होने वाले नतीजों से कहीं ज़्यादा होगा। इससे पुतिन की युद्ध मशीन को चलाने वाले कैश का फ्लो रुक जाएगा।&quot;क्या बिल का निशाना भारत और चीन हैं?इस बिल का निशाना रूस का एनर्जी सेक्टर है और यह ट्रंप प्रशासन को रूस से होने वाले आयात (जिसमें गैस और तेल शामिल हैं) पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की इजाज़त देगा। यह US को रूसी कच्चे तेल के पांच बड़े आयातकों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की भी इजाज़त देता है। फिलहाल, रूसी तेल और गैस के पांच मुख्य आयातक चीन, भारत, अज़रबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया हैं। इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina Press Conference | शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत की कोई भूमिका नहीं, FCRA कानून पर अमेरिका को MEA का दोटूक जवाबएनर्जी सेक्टर के अलावा, यह बिल रूसी नेताओं और अधिकारियों (जिनमें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल हैं), साथ ही रईस कारोबारियों (ओलिगार्क्स) और वित्तीय संस्थानों को भी निशाना बनाएगा। यह &#039;ईरान सैंक्शन एक्ट ऑफ 1996&#039; की समय-सीमा को भी 2031 तक बढ़ा देगा; यह कानून उन कंपनियों को दंडित करता है जो ईरान के एनर्जी सेक्टर में निवेश करती हैं। इसे भी पढ़ें: Gajendra Singh Shekhawat बोले: BRICS देश केवल आर्थिक नहीं, साझा संस्कृति से जुड़े हैंहालांकि, डेमोक्रेट्स ने इस बिल की आलोचना की है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर टैरिफ का इस्तेमाल एक हथियार के तौर पर करने का आरोप लगाया है। न्यूज़ एजेंसी PTI के अनुसार, डेमोक्रेट कांग्रेस सदस्य ग्रेगरी मीक्स और डॉन बेयर ने कहा, &quot;हम यूक्रेन का समर्थन करने और रूस के लगातार गैर-कानूनी युद्ध के लिए उसे सज़ा देने की दिशा में सीनेट में अपने सहयोगियों की तत्काल कोशिशों का स्वागत करते हैं, लेकिन यह बिल उन लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाएगा। इसके बजाय, यह राष्ट्रपति ट्रंप को रूस को जवाबदेह ठहराने से बचने और अपने विनाशकारी व्यापार युद्धों में और अधिक टैरिफ लगाने की छूट देगा, जिसका खामियाजा अमेरिकियों को भुगतना पड़ेगा।&quot; Stay updated with International
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:23 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Senate, Russia, Sanctions, Bil, अमेरिकी, सीनेट, ने, रूस, पर, प्रतिबंध, लगाने, वाला, बिल, किया, पास:, जानें, भारत, और, चीन, के, लिए, क्यों, बढ़ी, चिंता</media:keywords>
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<title>UN ने PoK में प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की जवाबदेही तय करने और प्रतिबंध हटाने की मांग की</title>
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<description><![CDATA[ (योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, आठ अगस्त संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के एक प्रवक्ता ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सुरक्षा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। महासचिव के उप प्रवक्ता फरहान हक ने शुक्रवार को यहां कहा, ‘‘महासचिव अपने उच्चायुक्त के काम का समर्थन करते हैं और हमें वास्तव में उम्मीद है कि तुर्क (संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क) की अपीलों पर ध्यान दिया जाएगा।’’
उन्होंने पीओके की स्थिति और वहां हाल के घटनाक्रम को लेकर महासचिव के रुख के बारे में ‘पीटीआई’ के एक सवाल का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने पिछले महीने पीओके के हालिया घटनाक्रम पर चिंता जताई थी।उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मौत मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराए जाने तथा पाकिस्तान द्वारा ‘संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति’ पर प्रतिबंध लगाने एवं उसके नेताओं को गिरफ्तार किए जाने का मुद्दा उठाया था। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण रूप से एकत्र होने के अधिकार का उल्लंघन करते हुए इंटरनेट के इस्तेमाल और सार्वजनिक सभाओं पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर भी चिंता जताई गई थी। हक ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग से जुड़े सवाल पर कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण है कि हर जगह सभी प्राधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दें और निश्चित रूप से यहां भी ऐसा ही होना चाहिए।अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के कारण लोगों को नुकसान पहुंचा है तो इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।’’
पिछले महीने जिनेवा में जारी एक बयान में कहा गया था कि तुर्क ने क्षेत्रीय चुनावों से पहले पीओके में पैदा हुई अशांति के मद्देनजर शांति बनाए रखने की अपील की। बयान में विशेष रूप से कहा गया था कि 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव से पहले जून से अब तक कई लोगों के मारे जाने की खबर है। मानवाधिकार उच्चायुक्त ने अशांति के कारण प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के सदस्यों की हुई सभी मौतों की गहन और निष्पक्ष जांच तत्काल कराए जाने का आह्वान किया था।संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति (जेएएसी) ने इन प्रदर्शनों की अगुवाई की। इनमें ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील, कार्यकर्ता एव अन्य लोग शामिल हैं। सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने के आरोप में समिति पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया गया है।बयान में कहा गया था, ‘‘हम अधिकारियों से पूरे क्षेत्र में इंटरनेट की सुविधा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं।’’
इसमें कहा गया था कि मानवाधिकार उच्चायुक्त ने स्थानीय लोगों की मूल समस्याओं और शिकायतों के समाधान के लिए सार्थक और समावेशी राजनीतिक संवाद का भी आह्वान किया है। ]]></description>
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<title>सालों बाद भारत ने निकाला बाहुबली, पाकिस्तान में मची खलबली</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने मैदान में उतार दिया है अपना नया और अचूक ब्रह्मास्त्रस शत्रुंज। अब आसमान से आए हर हमले का पूरा-पूरा हिसाब होगा। पाकिस्तान, चीन और उनकी हर नापाक ड्रोन साजिश को अब हवा में ही नस्तनाबूत कर दिया जाएगा बल्कि दुश्मन के मंसूबे वहीं के वहीं राख कर दिए जाएंगे। हर उड़ते हुए खतरे का पीछा करेगा शत्रुंजय क्योंकि इसके प्रहार से अब बचना मुश्किल ही नहीं बल्कि पूरी तरह नामुमकिन है। पिछले कुछ सालों में सरहद पर मंडराते ड्रोन आतंकवाद और जासूसी का सबसे बड़ा यह जरिया बन चुके हैं। चाहे हथियारों की तस्करी हो, नशे की खेप पहुंचाने की साजिश हो। दुश्मन ने कई बार भारत को अस्थिर करने की कोशिश की है। लेकिन अब पूरी तरह से खेल जो है बदल चुका है, पलट चुका है। मैदान में वो उतर चुका है जो दुश्मनों के लिए अकेला ही काफी है। जिसका नाम है शत्रुंजय। शत्रु यानी दुश्मन और जय यानी विजय। जिसके नाम में ही विजय का हुंकार हो वो दुश्मनों से कैसे डर सकता है? यह स्वदेशी एंट्री ड्रोन सिस्टम ना सिर्फ पाकिस्तान और चीन बल्कि भारत की तरफ बुरी नजर उठाने वाले हर शत्रु की नींद उड़ाने के लिए काफी है। सूत्रों के अनुसार दिल्ली स्थित रक्षा कंपनी भूमि एंड द्वारा विकसित यह काउंटर अनमेड एरियल सिस्टम यानी कि सीयूएएस सीधे तौर पर भारतीय सेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य हमारे सीमावर्ती इलाकों, संवेदनशील सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रतिष्ठानों को दुश्मन के ड्रोन हमलों से पूरी तरह सुरक्षित करना है। शत्रुंजय रेडियो फ्रीक्वेंसी यानी कि आरएफ डिटेक्शन तकनीक का इस्तेमाल करता है। यह लगभग 4 कि.मी. की दूरी तक दुश्मन के ड्रोन की मौजूदगी का सटीक पता लगा सकता है। सिस्टम की एंटीना आधारित सिग्नेचर डिटेक्शन और डायरेक्शन फाइंडिंग तकनीक पलक झपकते ही यह पहचान लेती है कि ड्रोन किस दिशा से संचालित किया जा रहा है। सबसे बड़ी और घातक बात यह है कि यह बिना एक भी गोली चलाए दुश्मन के ड्रोन को नेस्तनाबूत कर सकता है। यह सॉफ्ट किल तकनीक पर आधारित है। यानी ड्रोन को हवा में नष्ट करने के बजाय यह उसके कंट्रोल सिग्नल को पूरी तरह से जाम कर देता है। इसके अलावा जीपीएस, स्पूफिंग और जीएसएस डिरप्शन तकनीक की मदद से यह दुश्मन के नेविगेशन सिस्टम को भटका भी देता है। जिससे ड्रोन अपने तय लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही हवा में लाचार होकर बेकार हो जाता है। इसे भी पढ़ें: MEA Press Briefing : FCRA पर अमेरिकी टिप्पणी को भारत ने किया खारिज, विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया, &#039;हमारी संसद ही लेगी फैसला&#039;शत्रुंजय की अजय क्षमता क्या है? डिटेक्शन रेंज 4 कि.मी. की है। आरएफ सिग्नेचर आधारित है। बता दें कि इसमें ओमनी डायरेक्शनल जैमिंग भी है। दूसरी खासियत यह 5 कि.मी. या 4 कि.मी. तक की मुख्य तकनीक पर काम करता है। दुश्मन चाहे तुर्की के ड्रोन ले आए या फिर चीन के शत्रुंजय के चक्रव्यूह से बच पाना अब असंभव है। इसमें दो तरह की अचूक जैमिंग क्षमताएं दी गई हैं। ओमनी डायरेक्शनल जैमि लगभग 2 कि.मी. तक यह प्रभावी है और दूसरा डायरेक्शनल जैमि सीधे 5 कि.मी. तक दुश्मन के तंत्र को तहस-नहस करने में यह सक्षम है। यह सिस्टम सिर्फ ताकतवर नहीं बल्कि बेहद लचीला भी है। इसे भारीभरकम सैन्य वाहनों पर आसानी से माउंट किया जा सकता है। या फिर जरूरत पड़ने पर सैनिक खुद इसे उठाकर सीधे मोर्चे पर पैदल ही दुश्मन के मुहाने तक पहुंचा सकते हैं। यह स्टैंड अलोन और मोबाइल दोनों तरह की रणनीतिक तैनाती के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है। मौसम चाहे कितना भी चरम पर क्यों ना हो शत्रुंजय कभी नहीं थकता। यह लगभग 3000 मीटर की ऊंचाई तक पूरी ताकत से काम कर सकता है। इसे भी पढ़ें: NIA ने 2 आरोपियों पर दाखिल की Charge Sheet, यात्री ट्रेन पर आईईडी हमले की रची थी साजिशसियाचीन जैसी -20° सेल्सियस की भयंकर ठंड हो या फिर रेगिस्तान का 55 डिग्री सेल्सियस झुलसा देने वाला तापमान इसकी कार्य क्षमता पर कभी आंच नहीं आने देता। इतना ही नहीं इसमें एआई आधारित इलेक्ट्रो आर्टिफिशियल ट्रैकिंग सब सिक्स जीएच जेड आरएफ स्पेक्ट्रम सर्िलंस और एईएस 256 इंक्रिप्शन पर आधारित सुरक्षित संचार जैसी अत्याधुनिक तकनीकें भी इसमें जोड़ी गई हैं जो निगरानी को अचूक बनाती है। दुश्मन के लिए कैसे शत्रुंजय काल है उसे समझिए। पाकिस्तान और चीन की तरफ से आते ड्रोन शत्रुंजय के बीम से हवा में ही ढेर हो जाते हैं। मुख्य इसकी टैगलाइन जो है हवा में ही भस्म होना है। नो एंट्री और एआई बेस्ड ट्रैकिंग। सेना ने भले ही आधिकारिक तौर पर इसकी तादाद का खुलासा ना किया हो। लेकिन शत्रुंजय का भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि अब भारत हमला होने का इंतजार नहीं करता बल्कि खतरे को हवा में ही भस्म कर देता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:22 +0530</pubDate>
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<title>भारत के पड़ोस में हो गया बड़ा खेल! नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए सरकार लेगी बड़ा फैसला?</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल के अंदर इस वक्त जो भी हो रहा है उसने सबको चौंका दिया है क्योंकि इस बार नेपाल के अंदर आंदोलन देश को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए हो रहा है। नेपाल 240 साल तक हिंदू राष्ट्र रहा है। 2008 में राजतंत्र के अंत के साथ इसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना दिया गया था। अब फिर से इस विरासत को वापस बहाल करने के लिए नेपाल में नया आंदोलन खड़ा हो गया है। नेपाल में इसके लिए दम भर रहे प्रदर्शनकारी हिंसक होते जा रहे हैं और यह सब शुरू हुआ है हाल ही में कावड़ यात्रा के दौरान हुई पत्थरबाजी के बाद। 26 जुलाई को हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद नेपाल के हिंदू संगठन सड़कों पर आ चुके हैं और हिंसक विरोध प्रदर्शन के साथ सरकार पर हिंदू राष्ट्र बनाने का दबाव बना रहे हैं। नेपाल में इस वक्त हर शख्स की एक ही आवाज है कि नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करो। हिंदू संगठनों का विरोध प्रदर्शन पिछले दो दिनों में ज्यादा हिंसक हो चला है। सरकारी दफ्तरों में आग और वाहनों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं आम हो चुकी है।इसे भी पढ़ें: Balen Shah को भारत ने दिया 440 वोल्ट का झटका,  रोका चीनी का एक्सपोर्ट का माल, नेपाल में मचा बवालमस्जिदों पर हमले किए जा रहे हैं। मुसलमानों की टोपियां जलाई जा रही हैं। जिसके चलते कई नेपाल में मौजूद मुस्लिम घुसपैठिए देश छोड़कर भाग रहे हैं। देवानगंज में हुई हिंसा के बाद नेपाल के संयुक्त हिंदू मोर्चे और दूसरे संगठनों ने नेपाल से घुसपैठियों को बाहर करने और संसद में हिंदू राष्ट्र बनाने का प्रस्ताव लाने की मांग कर रहे हैं। नेपाल के अलग-अलग इलाकों में विरोध प्रदर्शन इतना हिंसक है कि लोग प्रदर्शनकारियों की आहट सुनते ही दुकानें बंद कर रहे हैं। सड़कों पर पुलिस की तैनाती जरूर है लेकिन इन्हें अभी शांति बरतने के निर्देश हैं। नेपाल सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने और सीमाओं पर सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री बालिन शाह ने साफ किया है कि हिंदू राष्ट्र के प्रस्ताव के नेपाल का वर्तमान संघीय व्यवस्था प्रभावित हो सकता है। हालांकि हालात खराब होता देखकर अब सरकार भी इस मुद्दे पर विचार कर रही है। चलिए आपको बताता हूं कि नेपाल कब से कब तक हिंदू राष्ट्र रहा है। इसे भी पढ़ें: घुसपैठिए मुस्लिमों को खदेड़ते ही नेपाल में हिंदू राष्ट्र पर बड़ा ऐलान, शुरू हुआ इलाज!दरअसल आधिकारिक रूप से नेपाल सन 1768 से 2008 तक 240 साल हिंदू राष्ट्र था। 1768 में पृथ्वी नारायण शाह ने गोरखा साम्राज्य का विस्तार कर इसे हिंदू राष्ट्र घोषित किया। 1975 में राजा वीरेंद्र नेपाल को आधिकारिक रूप से हिंदू आधिराज्य दर्जा दिया। 2006 से 2008 तक जन आंदोलन और राजशाही के पतन के बाद अंतरिम संविधान पर बहस चली। मई 2008 में देश से राजतंत्र खत कर इसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना दिया गया। लेकिन अब 18 साल बाद नेपाल में वही बहस फिर से छिड़ गई है। क्या नेपाल को हिंदू राष्ट्र फिर से घोषित किया जाना चाहिए? प्रदर्शनकारियों का दावा है कि जेंजी आंदोलन के साथ उन्होंने नेपाल की पुरानी सरकार का विरोध इसी भरोसे के साथ किया था कि नई सरकार हिंदू राष्ट्र का अपना वादा पूरा करेगी। लेकिन प्रधानमंत्री और पूरी कैबिनेट को डर है कि हिंदू राष्ट्र की मांग माने जाने के बाद संवैधानिक जटिलताएं और बढ़ जाएंगी।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:21 +0530</pubDate>
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<title>भारत बनेगा अगला सऊदी? 150 कुओं की खुदाई चालू कर रचने वाला है इतिहास</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट जल रहा है। रूस यूक्रेन युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है और इन सबके बीच भारत की धड़कनें तेज हैं। क्योंकि हम अपनी जरूरत का 89% तेल विदेशों से मंगाते हैं। अगर कल सप्लाई रुक गई तो भारत थम जाएगा। लेकिन दिल्ली के गलियारों में एक ऐसी योजना को हरी झंडी दे दी गई है जो दुनिया के तेल बाजारों में हलचल पैदा कर सकती है। नाम है समुद्र मंथन। बजट है 8484 करोड़ और लक्ष्य है भारत के गहरे समुद्र से तेल के भंडार को निचोड़ लेना। यह मेगा रिपोर्ट  केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के उस आधिकारिक ऐलान पर आधारित है जिसमें 8484 करोड़ की नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम को मंजूरी दे दी गई है। तेल की खोज कोई नल लगाना नहीं है। यह एक वैज्ञानिक तपस्या होती है। यही वो कुएं हैं जो आने वाले समय में आपकी गाड़ी के पेट्रोल की कीमत तय करेंगे। भारत सरकार ने 8484 करोड़ को दो बड़े हिस्सों में बांट दिया है। पहला हिस्सा है 28000 करोड़ का। यह समुद्र के सीने का डिजिटल एक्सरे है और इसे कहते हैं सिस्मिक डाटा। इनमें अत्याधुनिक जहाज समुद्र की गहराई में तरंगे भेजते हैं ताकि पता चल सके कि चट्टानों के नीचे तेल है या सिर्फ पानी। इसे भी पढ़ें: दोस्त रूस ने तो भारत की लॉटरी लगा दी! क्या है दुनिया का पहला परमाणु आइसब्रेकर?दूसरा हिस्सा 43,200 करोड़ का है। यह वो पैसा है जो ड्रिलिंग मशीनों और उत्पादन के लिए इस्तेमाल होगा। भारत सरकार का लक्ष्य है कि साल 2030-31 तक हम अपने समुद्रों का पूरा नक्शा तैयार कर लें। अब समुद्र मंथन की सबसे बड़ी खबर यह है कि ओएनजीसी ने आने वाले समय में 150 गहरे पानी के कुएं यानी डी वाटर वेल्स खोदने की योजना बनाई है। एक गहरा कुआं खोदने का खर्च 500 करोड़ से 1000 करोड़ तक हो सकता है। 150 कुओं का मतलब है कि हज़ारों करोड़ का दाव और भारत सरकार को उम्मीद है कि इन कुओं से 600 मिलियन मीट्रिक टन तेल के बराबर संसाधन मिल सकते हैं। गहराई में ड्रिलिंग शुरू करना कोई आसान खेल नहीं है। हाल ही में ओएनजीसी की टीम ने प्लैटिनम एक्सप्लोरर पर एमए डीडब्ल्यू जैसे व्हेल के लिए 84 इंच बिट प्रोटोजन की जांच की है। समुद्र की लहरों के बीच हज़ारों फीट नीचे एक ड्रिल बीट को सटीक तरीके से पहुंचाना जहां दबाव इतना ज़्यादा होगा कि लोहा भी चिपका दे। ये इस भारत के इंजीनियरिंग की वो चुप्पी है जो आने वाले समय में धमाका करने वाली है और यहां सुरक्षा और सटीकता ही सबसे बड़ा हथियार है। भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है। हमारा 88 से 89% तेल बाहर से आता है। जब हम आयात करते हैं तो हम सिर्फ तेल नहीं खरीदते हैं। हम अपनी मेहनत की कमाई यानी कि विदेशी मुद्रा जिसे हम फॉरेक्स कहते हैं वो बाहर भेजते हैं। इसे भी पढ़ें: Hormuz पर धरी रह गई अमेरिका की हसरतें, ईरान-ओमान में डील डन!समुद्र मंथन के जरिए अगर हम 150 कुओं से तेल निकालने में सफल रहे तो भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा। रुपया मजबूत होगा और हम खाड़ी देशों की दादागिरी से मुक्त हो पाएंगे। यह मिशन सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि सामरिक भी है। लेकिन सवाल उठता है सवाल यह है कि आखिर भारत को इस मिशन की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?  भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है। रूस की बात करें तो रूस वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्ति यानी सप्लायर बन गया है। जिसकी हिस्सेदारी बढ़कर 35 से 40% से भी अधिक हालिया आंकड़ों में 50% से अधिक है। हालिया कुल द्विपक्षीय व्यापार के मामले में अमेरिका और चीन के बाद रूस शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में शामिल है और भारत के कुल आयात का सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में रूस से ही आ रहा है। इसे भी पढ़ें: Deep Strike: Russia के अंदर 1300km दूर Ukraine का बड़ा हमला, Zelenskyy ने मांगी और Patriot Missilesजुलाई 2026 में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़कर 27.8 लाख बैरल प्रतिदिन के ऑल टाइम रिकॉर्ड पर पहुंच गया। जो कुल आयात का 55% से अधिक है। बात करें इराक और सऊदी अरब की तो यह भारत के पारंपरिक और भरोसेमंद साथी हैं जो दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं। अमेरिका और यूएई की बात करें तो तो इन देशों से भी हम अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। संकट यह है कि हम हर साल करीब 150 बिलियन विदेशी तेल पर खर्च कर देते हैं। यह पैसा भारत के टैक्स पेयर्स का है जो विदेशों में जा रहा है। अगर हम इसमें से थोड़ा हिस्सा भी बचा लें तो भारत की अर्थव्यवस्था रॉकेट की रफ्तार से दौड़ेंगी। समुद्र मंथन भारत की ऊर्जा सुरक्षा की वो महागाथा है जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी। ₹84,000 करोड़ का यह निवेश जोखिम भरा हो सकता है लेकिन बिना जोखिम के कोई भी राष्ट्र महाशक्ति नहीं बन सकता है। समुद्र की गहराइयों में होने वाली यह खोजे भारत की कल की बुनियाद है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:20 +0530</pubDate>
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<title>Bangladesh ने मारा यू&#45;टर्न, भारत से मांग ली बड़ी मदद</title>
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<description><![CDATA[ एक तरफ बांग्लादेश भारत की खिलाफत कर रहा है। भारत के खिलाफ बयानबाजी कर रहा है। लेकिन सब कुछ करने के बाद भी बांग्लादेश भारत की मदद चाहता है। अभी कुछ दिन पहले बांग्लादेश की सरकार भारत पर नाराजगी जता रही थी। वजह बनी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की नई दिल्ली से हुई लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस। बांग्लादेश ने तब कहा था कि भारत ने हसीना को मंच देकर दोनों देशों के रिश्ते सुधारने की कोशिशों को नुकसान पहुंचाया। यहां तक कि बांग्लादेश ने इसे अपनी संप्रभुता का अपमान बताया और भारत से शेख हसीना को प्रत्यार्पित करने की मांग दोहराई। यह सब कुछ बांग्लादेश ने तीन दिन पहले किया और अब खबर है कि बांग्लादेश भारत से मदद चाहता है। मतलब जिस भारत पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसी भारत के दरवाजे पर बांग्लादेश मदद मांगने पहुंच गया। वजह बनी ऊर्जा संकट। बांग्लादेश में डीजल, गैस और बिजली की भारी कमी हो गई है। कई इलाकों में लोड शेडिंग हो रही है। बिजली उत्पादन प्रभावित है और ऐसे में बांग्लादेश ने भारत से कहा है कि उसे पहले से ज्यादा डीजल सप्लाई करें। यानी कि एक तरफ भारत की खिलाफत करो। भारत के खिलाफ बयानबाजी करो और दूसरी तरफ जब संकट पड़े तो भारत से मदद मांग लो। दरअसल भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री इकबाल हसन महमूद से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच बिजली और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा हुई। बैठक के बाद खुद बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री ने माना कि गैस और डीजल की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है और इसलिए भारत से अतिरिक्त डीजल की मांग की गई। भारत पहले से ही बांग्लादेश की ऊर्जा सुरक्षा का एक बड़ा सहारा बना हुआ है और दोनों देशों के बीच इंडिया बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन बनाई गई जो भारत के असम स्थित नुमालीगढ़ रिफाइनरी से निकलकर पश्चिम बंगाल के रास्ते पर्वतीपुर डिपो तक जाती है करीब 131 किमी लंबी ये पाइप लाइन 2023 में शुरू हुई थी ताकि डीजल तेजी से और कम लागत में बांग्लादेश पहुंच सके। इसी पाइपलाइन के जरिए भारत हर साल करीब 1880 मीट्रिक टन डीजल बांग्लादेश को सप्लाई करता है और हाल ही में लगभग 5000 मीट्रिक टन डीजल की नई खेप भेजी गई। इसे भी पढ़ें: MEA Press Briefing : FCRA पर अमेरिकी टिप्पणी को भारत ने किया खारिज, विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया, &#039;हमारी संसद ही लेगी फैसला&#039;हर घंटे करीब 113 मेट्रिक टन डीजल पंप किया जा रहा है ताकि बांग्लादेश में बिजली उत्पादन परिवहन और खेती के लिए ईंधन की कमी ना हो और यह सब कुछ करने के बाद क्या हो रहा है शेख हसीना की सरकार गिरी मोहम्मद यूनुस आए उन्होंने भरभर के भारत की खिलाफत की तारिक रहमान आए और उसके बाद भी भारत बांग्लादेश के जो द्विपक्षीय रिश्ते हैं उनमें थोड़ी खटास देखी गई और हाल ही में जो प्रेस कॉन्फ्रेंस शेख हसीना ने दिल्ली से बैठकर की थी उसके बाद बांग्लादेश मीडिया में और बांग्लादेश की तरफ से भारत के खिलाफ बयानबाजी की गई और सोचिए इन सबके बावजूद बांग्लादेश ने अब अगले 4 महीनों में इसी पाइपलाइन के जरिए अतिरिक्त 500 मीट्रिक टन डीजल देने का अनुरोध भी किया है। इसके अलावा बांग्लादेश ने ऊर्जा क्षेत्र में करीब 25 अलग-अलग क्षेत्रों में भारत से सहयोग मांगा है। इसमें पावर ग्रिड टेक्नोलॉजी, स्मार्ट ग्रिड सिस्टम, बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों की ट्रेनिंग और तकनीकी सहायता जैसी मांग शामिल है। यानी साफ है। मुश्किल की घड़ी में बांग्लादेश की सबसे बड़ी उम्मीद भारत है। लेकिन दूसरी तरफ राजनीतिक रिश्तों में तनाव भी लगातार बढ़ रहा है। ये सब कुछ बांग्लादेश की सरकार की तरफ से जब हो रहा था यानी कि एक तरफ बयानबाजी हो रही थी, एक तरफ मदद मांगी जा रही थी। इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina के दिल्ली बयान से भारत ने बनाई दूरी, MEA बोले- सरकार की भूमिका नहींउस बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस और उनके बेटे का एक बड़ा बयान भी बहुत चर्चा में था। सबसे पहले शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस की बात करते हैं। नई दिल्ली से हुई उनकी वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बांग्लादेश सरकार भड़क गई थी। ढाका ने आरोप लगाया था कि भारत ने हसीना को मंच देकर द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचाया। उसने यह भी कहा कि जुलाई 204 के आंदोलन में मारे गए लोगों का यह अपमान है। हालांकि भारत पहले साफ कर चुका है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन एक निजी मीडिया संस्था ने किया था और सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं था। उधर प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेख हसीना ने भी बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि वह इस साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी। चाहे उन्हें जेल भेज दिया जाए या उनकी हत्या कर दी जाए। लेकिन वह वापस अपने देश जरूर जाएंगी।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:20 +0530</pubDate>
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<title>शहबाज&#45;मुनीर के सऊदी पहुंचते ही टूट पड़ा ईरान, बिछा दी लाशें</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में चारों तरफ विद्रोह भड़का हुआ है। लगातार मार-काट की तस्वीरें सामने आ रही है। लेकिन मुनीर और शहबाज इन सबको नजरअंदाज करके अलग ही खेल में लगे हुए हैं। कभी मुनीर शहबाज ईरान की तरफ से बैटिंग करते हैं तो कभी अमेरिका की तरफ से। लेकिन इस बार इनकी गर्दन ऐसी फंसी है कि सारी हेकरी निकल गई और बुरी तरह से फड़फड़ा रहे हैं। दरअसल ईरान की ओर से लगातार उन मुस्लिम देशों में हमले किए जा रहे हैं जहां अमेरिका की सेना या सैन्य अड्डे हैं। उन्हीं में से एक सऊदी अरब भी है जो इन दिनों हमलों की सबसे ज्यादा मार झेल रहा है। वही सऊदी जिसने कुछ समय पहले पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया था कि अगर दोनों देशों में से किसी एक पर हमला होता है तो वो दोनों देशों पर ही हमला माना जाएगा। ये एक डिफेंस डील की गई और इस डील के तहत एक दूसरे की मदद भी की जाएगी।  इसे भी पढ़ें: बलूचिस्तान का 70% क्षेत्र गंवाया, खैबर को तालिबान ने कब्जाया, PoK में गोलियों से आवाज को दबाया, किस पाकिस्तान पर हुकूमत कर रहे मुनीर-शहबाज?जैसे ही ईरान की ओर से हमले शुरू हुए तो पाकिस्तान बिल में जा चुका और उसने किसी भी तरह की सऊदी की मदद नहीं की। लगातार हो रहे हमलों के बीच अचानक पाकिस्तान के पीएम शहबाज और सेना प्रमुख मुनीर सऊदी पहुंचे तो ईरान और ईरान समर्थित हूती ने ऐसे भीषण हमले किए कि पाकिस्तान के डिफेंस बिल की सारी हवा निकल। हूती विद्रोहियों ने यमन सीमा से लगे सऊदी इलाके में हमला जोरदार किया है। सैन्य ठिकानों को बैलेस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया। हमला इतना भीषण था कि कई किलोमीटर तक तबाही का धुआं साफ-साफ दिखाई दे रहा था। इन हमलों में कम से कम 30 सैनिकों की मौत और 50 से ज्यादा घायल होने की खबर सामने आई। इसे भी पढ़ें: मुनीर-नकवी ने मिलकर कर दिया खेल, पाकिस्तान में तख्तापलट होने वाला है?हूती ने दावा किया है कि सऊदी समर्थित बलों को निशाना बनाया गया और बड़ी संख्या में हताहत हुए। यह हमला तब हुआ जब पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर सऊदी में ही मौजूद थे। सीधे तौर पर इस्लामाबाद के लिए भूति विद्रोहियों ने एक कड़ा संदेश भी दिया है कि पाकिस्तान की सैनिक गारंटी के बावजूद पूछे हटने वाले नहीं। 2022 के युद्ध विराम के बाद यह पहला मौका है जब सऊदी अरब की सीमा पर तनाव इस कदर चरम पर पहुंच गया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हुई है कि रियाद में जुटने जा रहे सऊदी अरब तुर्की और पाकिस्तान के शीर्ष नेता हूती विद्रियों और ईरान समर्थित मिलीशिया के इस सीधे चैलेंज का क्या जवाब देते हैं?  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:19 +0530</pubDate>
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<title>किसी भी पल हो सकती है मौत...मोजतबा खामनेई को लेकर इजरायल ने कर दिया सबसे बड़ा खुलासा, ईरान के जवाब ने दुनिया को चौंकाया</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की सेहत एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि इज़राइली मीडिया का दावा है कि उनकी हालत गंभीर है और दुनिया जल्द ही उनके निधन की खबर सुन सकती है। फरवरी के आखिर में अमेरिकी-इज़राइली हमलों में अपने पिता की मौत के बाद पद संभालने के बाद से ही मोजतबा सार्वजनिक रूप से नज़र नहीं आए हैं। काफ़ी समय से ईरान उसकी सेहत पर उठने वाले सवालों को नकारता रहा है, लेकिन इज़राइल के नए दावों से पता चलता है कि वह अभी गंभीर हालत में है और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इज़राइली चैनल चैनल 14 के मुताबिक, खामेनेई की हालत बेहद गंभीर थी। न्यूज़ चैनल ने ईरान के अंदर के सूत्रों का हवाला दिया।इसे भी पढ़ें: बहुत मुश्किल...Mojtaba Khamenei को लेकर ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने क्या बड़ा खुलासा किया?रिपोर्ट में ईरानवायर के दावों का भी ज़िक्र किया गया, जिसने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के प्रशासन के करीबी सूत्रों का हवाला दिया; इन सूत्रों ने भी लगभग वैसी ही बातें कहीं। इस आउटलेट ने दो सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि 28 फरवरी को सुप्रीम लीडर के परिसर पर हुए अमेरिकी हमले में अपने पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के मारे जाने के बाद से मोजतबा खामेनेई किसी भी कैबिनेट सदस्य से नहीं मिले हैं। सूत्र ने कहा कि उनकी किसी भी पल मौत हो सकती है और उनकी हालत की खबर अभी ईरान के नेतृत्व के वरिष्ठ स्तरों पर फैलाई जा रही है। पेज़ेशकियन की कैबिनेट के करीबी एक सूत्र के हवाले से कहा गया कि उनकी शारीरिक हालत खराब थी। सूत्र ने कहा अगर हमें जल्द ही उनके शहीद होने की खबर सुनने को मिले, तो हमें हैरानी नहीं होगी।इसे भी पढ़ें: होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद के बीच Iran क्या बना पाएगा परमाणु हथियारईरान ने खबरों को नकाराईरान के अधिकारियों ने पहले उन सभी खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि खामेनेई काम करने की हालत में नहीं हैं। उनका कहना है कि फरवरी में हुए हमले में उन्हें जो चोटें आई थीं, वे गंभीर नहीं थीं। हालांकि, ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने हाल ही में माना कि इस समय सुप्रीम लीडर से बातचीत करना बहुत मुश्किल है। फिर भी, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि खामेनेई सरकार के लिए ताकत का स्रोत बने हुए हैं। ईरानी सरकारी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में पेज़ेशकियन ने कहा, इस समय उनसे बातचीत करना बहुत मुश्किल है, लेकिन किसी भी हाल में, उनकी मौजूदगी हमारे लिए ताकत का बहुत बड़ा स्रोत है ताकि हम अपना काम जारी रख सकें। उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने उनके साथ काम की बातें करने वाली बैठकें की हैं और बताया कि उनकी सोच-समझ बहुत अच्छी है। हालांकि, खामेनेई का लंबे समय से लोगों के सामने न आना क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय जानकारों के बीच अटकलों का कारण बना हुआ है। पहले की रिपोर्टों में दावा किया गया था कि हमलों के दौरान उन्हें गंभीर चोटें आई थीं, जबकि ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वे अब भी देश के कामकाज की देखरेख कर रहे हैं। वहीं, पश्चिमी और विपक्षी खुफिया सूत्रों ने भी अक्सर यह संकेत दिया है कि हमलों के दौरान उन्हें गंभीर या ऐसी चोटें आईं जिनसे उनका चेहरा या शरीर बुरी तरह प्रभावित हुआ। उनके सार्वजनिक रूप से सामने न आने से इन अटकलों को और बल मिल रहा है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:18 +0530</pubDate>
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<title>मुस्लिमों से हार चुके ब्रिटेन का भारत पर होश उड़ाने वाला ऐलान! खुलासे से चौंकी दुनिया</title>
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<description><![CDATA[ मुस्लिम तुष्टीरण की वजह से तेजी से बर्बाद हो रहे ब्रिटेन ने भारत पर एक ऐसा ऐलान किया है जिस पर यकीन करना मुश्किल है। ब्रिटेन का यह दावा अगर सही है तो भारत ने सही मायने में तहलका मचा दिया है। दरअसल यूके की पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल ने एक पॉडकास्ट में दावा किया है कि भारत सरकार ने यूके में रहने वाले अवैध भारतीय प्रवासियों को वापस लेने से मना कर दिया है क्योंकि ब्रिटेन ने अभी तक भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत के हवाले नहीं किया है। यानी भारत को नीरव मोदी का प्रत्यार्पण नहीं किया है। आपको बता दें कि नीरव मोदी लंदन की एक जेल में बंद है। प्रीति पटेल के दावे के मुताबिक लंदन द्वारा नीरव मोदी को अभी तक डिपोर्ट ना किए जाने को लेकर भारत बहुत नाराज है। इसीलिए भारत सरकार ने यूके में गैरकानूनी तरीके से रहने वाले भारतीय प्रवासियों को वापस लेने से मना कर दिया। यानी दावे के मुताबिक भारत ने कहा है कि भगोड़े नीरव मोदी का प्रत्यार्पण करो। तभी हम उन भारतीयों को वापस लेंगे जो अवैध रूप से आपके देश में रह रहे हैं। इसे भी पढ़ें: आंखें बंद कर क्यों बैठे ट्रंप? भारत के खिलाफ अमेरिका में चल रही क्या प्लानिंगआपको बता दें कि ज्यादातर भारतीय भगोड़े अक्सर यूके ही भागते हैं क्योंकि वहां की अदालतें प्रत्यार्पण की मांग को आसानी से नहीं मांगती। इसके अलावा यूके भगोड़ों को पनाह देने की कीमत भी जरूर वसूलता होगा। हैरानी की बात देखिए कि यूके भारत से आए अवैध प्रवासियों को तो भारत वापस भेजना चाहता है। लेकिन पाकिस्तान से आए प्रवासियों के लिए उत्तर पश्चिमी लंदन के क्वींस पार्क में एक पुराने पब की जगह तीन मंजिला मेगा मस्जिद बनाने की तैयारी कर रहा है। यूके सरकार के इस फैसले ने वहां रहने वाले निवासियों को नाराज कर दिया है। यही वजह है कि यूके आज बर्बाद हो रहा है। इसीलिए शायद सिंगापुर के पूर्व राजदूत महबूबानी कहते हैं कि 100 साल पहले भले ही अंग्रेजों ने भारत पर शासन किया था लेकिन 2050 तक भारत की अर्थव्यवस्था ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था से चार गुना ज्यादा बड़ी हो जाएगी। इसे भी पढ़ें: UK Police से ज़मानत लेकर फरार Grooming Gang का आरोपी, Rushkar Ahmed अब PoK Assembly में बैठेगासिंगापुर के पूर्व राजदूत का बने कहा है कि 100 साल पहले भारत पर अंग्रेजों का शासन था। साल 2000 में ब्रिटिश अर्थव्यवस्था भारतीय अर्थव्यवस्था से 3.5 गुना बड़ी थी। लेकिन आज भारत की अर्थव्यवस्था यूके से बड़ी है। 2050 तक भारत की अर्थव्यवस्था ब्रिटिश अर्थव्यवस्था से चार गुना बड़ी हो जाएगी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:18 +0530</pubDate>
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<title>Strait of Hormuz को लेकर Iran&#45;Oman बातचीत में प्रगति, US को कमर्शियल तेल शिपमेंट बहाल होने की उम्मीद</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के एक अधिकारी ने बताया कि ईरान और ओमान के बीच बातचीत में प्रगति हुई है। इससे रणनीतिक रूप से अहम &#039;स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़&#039; (Hormuz जलडमरूमध्य) को फिर से खोलने और पांच महीने से चल रहे टकराव के कारण रुके हुए तेल निर्यात को बहाल करने में मदद मिल सकती है। रॉयटर्स ने नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि वॉशिंगटन को उम्मीद है कि ईरान और ओमान जो इस जलमार्ग से सटे दो देश हैं के बीच जल्द ही कोई समझौता होगा, जिससे सामान्य कमर्शियल तेल शिपमेंट फिर से शुरू हो सकेंगे। इस रणनीतिक रास्ते पर नियंत्रण को लेकर समझौता होना, शांति के लिए एक बड़े समझौते की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।इसे भी पढ़ें: किसी भी पल हो सकती है मौत...मोजतबा खामनेई को लेकर इजरायल ने कर दिया सबसे बड़ा खुलासा, ईरान के जवाब ने दुनिया को चौंकायारॉयटर्स ने अधिकारी के हवाले से कहा कि इस जलडमरूमध्य को लेकर ओमान और ईरान के बीच प्रगति हुई है और हमें जल्द ही समझौते की उम्मीद है। एक बार जब बिना किसी रुकावट के कमर्शियल शिपिंग बहाल करने के समझौते की घोषणा हो जाएगी, तो अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटा लेगा।अधिकारी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भविष्य के कदम ईरान द्वारा अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करने पर निर्भर करेंगे। उन्होंने कहा हमेशा की तरह, अमेरिका के कदम ईरान के काम और उसके वादों को पूरा करने पर आधारित होंगे। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किसी समझौते के करीब पहुँचने के साथ ही ईंधन की कीमतें कम हो सकती हैं। फॉक्स न्यूज़ के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि बातचीत में प्रगति से तेल की ढुलाई के लिए दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक को स्थिर करने में मदद मिल सकती है। अगर बातचीत सफल रही, तो इससे पेट्रोल की कीमतें कम होने की उम्मीद है। राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार (स्थानीय समय) को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने भरोसा जताया कि ईरान के साथ चल रहा टकराव &quot;बहुत जल्द&quot; खत्म हो जाएगा और कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इस्लामिक रिपब्लिक ज़्यादा समय तक यह टकराव जारी रख पाएगा। उन्होंने फिर दोहराया कि अमेरिका यह पक्का करने के लिए प्रतिबद्ध है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर पाए।इसे भी पढ़ें: अगर भारत-पाक युद्ध हुआ तो क्या India के खिलाफ अपनी सेना उतारेंगे Turkey और Saudi Arabia?ट्रंप ने चल रही कूटनीतिक कोशिशों पर उम्मीद जताते हुए कहा, मुझे लगता है कि हम बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। मैं बातचीत में शामिल हूँ। मुझे लगता है कि सब ठीक चल रहा है... यह जल्द ही हो सकता है। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को लेकर बातचीत पर ट्रंप ने कहा कि सुरक्षा संबंधी चिंताएँ तो हैं, लेकिन बातचीत आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा मैं यह नहीं कहना चाहता कि यह हो चुका है... अभी स्थिति कुछ खुली हुई है। हमारे पास अमेरिकी नौसेना के नेतृत्व में नाकेबंदी (ब्लॉकेड) की व्यवस्था है और हम इसे नियंत्रित करते हैं। लेकिन वे कभी भी कुछ शूट कर सकते हैं या कोई माइन (समुद्री सुरंग) गिरा सकते हैं... अगर वहाँ एक भी माइन पड़ी हो, तो चीजें बिगड़ सकती हैं क्योंकि लोग अपनी अरबों डॉलर की नावों को जोखिम में नहीं डालना चाहते और गलती से किसी माइन की चपेट में नहीं आना चाहते। दूसरी ओर, ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल माजिद एब्न-ए-रेज़ा ने गुरुवार को कहा कि देश की सेना किसी भी बाहरी खतरे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईरान की सैन्य ताकत उसके अपने रक्षा उद्योग पर आधारित है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:17 +0530</pubDate>
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<title>Yemen Army का बड़ा Military Action, Houthi ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमला, क्या Middle East में बढ़ेगा महायुद्ध का खतरा?</title>
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<description><![CDATA[ यमन की सेना ने शनिवार को घोषणा की कि उन्होंने कई मोर्चों पर हूथी ठिकानों को निशाना बनाते हुए एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई मारिब और हद्रामौत प्रांतों में मिलिशिया द्वारा हाल ही में किए गए हमलों का सीधा जवाब है। सरकारी ब्रॉडकास्टर यमन टीवी पर दिए गए एक बयान में सेना के प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नुज़ैली ने कहा कि यह अभियान &quot;यमन की सेना के उस वैध अधिकार के तहत शुरू किया गया था, जिसके तहत वे अपनी और अपने बहादुर जवानों की सुरक्षा कर सकते हैं, और आतंकवादी हूथी मिलिशिया द्वारा किए जाने वाले धोखेपूर्ण और बार-बार के आतंकवादी हमलों से निहत्थे नागरिकों की रक्षा कर सकते हैं।इसे भी पढ़ें: बर्दाश्त नहीं...लाल सागर में डूबा भारतीय झंडे वाला जहाज, भयंकर भड़का भारत, अब होगा एक्शन!अल-नुज़ैली ने बताया कि हाल ही में हूथी हमलों में सैनिकों और आम नागरिकों की जान गई है, जिसके जवाब में कई मोर्चों पर एक साथ जवाबी कार्रवाई शुरू की गई है। अल-नुज़ैली ने कहा हमारी सेना ने हूथी मिलिशिया और उनके आतंकवादी गुटों की ताकतों और क्षमताओं के खिलाफ कई मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई की है, जहाँ हमारी सेना का उनसे आमना-सामना होता है।&quot; उन्होंने आगे कहा कि इस कार्रवाई से हमारी सेना की कमांड और कंट्रोल की एकता का पता चलता है। सैन्य तनाव और बढ़ाने के खिलाफ़ कड़ी चेतावनी देते हुए, प्रवक्ता ने ज़ोर देकर कहा कि किसी एक सेक्टर पर हमले को देश भर में सरकार के साथ जुड़ी सभी यूनिट्स पर हमला माना जाएगा।इसे भी पढ़ें: शहबाज-मुनीर के सऊदी पहुंचते ही टूट पड़ा ईरान, बिछा दी लाशेंउन्होंने कहा हम इस बात पर ज़ोर देते हैं कि किसी भी मोर्चे या एक्सिस (axis) के ख़िलाफ़ आक्रामकता को हमारी सशस्त्र सेनाओं के सभी मोर्चों और एक्सिस के ख़िलाफ़ आक्रामकता माना जाएगा, जिसमें उनके सभी फ़ॉर्मेशन और बहादुर जवान शामिल हैं। जनता को संबोधित करते हुए, अल-नुज़ैली ने यमनी कबीलों और नागरिकों से अपील की कि वे सरकारी संस्थानों को बहाल करने के लिए सरकारी बलों का समर्थन करें। उन्होंने हूथी मिलिशिया पर आरोप लगाया कि वे &quot;देश के संसाधनों और संपत्ति को लूट रहे हैं, अवैध टैक्स लगा रहे हैं, अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर रहे हैं और बाहरी एजेंडे के लिए देश को क्षेत्रीय संघर्षों में धकेल रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:17 +0530</pubDate>
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<title>US Senate में Todd Blanche की अग्निपरीक्षा, महज एक वोट से मिली Attorney General पद की मंजूरी</title>
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<description><![CDATA[ US सीनेट ने 50-49 के करीबी अंतर से टॉड ब्लैंच को अटॉर्नी जनरल के तौर पर मंज़ूरी दे दी। इसके साथ ही, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व पर्सनल डिफेंस लॉयर को डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस की औपचारिक कमान मिल गई। ट्रंप द्वारा अप्रैल में पैम बॉन्डी को शीर्ष पद से हटाने के बाद से ही ब्लैंच कार्यवाहक भूमिका में विभाग का कामकाज संभाल रहे थे। इस मंज़ूरी के साथ ही एक तीखे विधायी टकराव का समापन हुआ। इस टकराव ने डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन के बीच गहरी चिंताएँ उजागर कीं; उन्हें चिंता थी कि राष्ट्रपति के एक खास वफ़ादार को ऐसे विभाग का प्रमुख बनाया जा रहा है, जो ऐतिहासिक रूप से व्हाइट हाउस से अपनी स्वतंत्रता को महत्व देता रहा है।इसे भी पढ़ें: देश को America के हाथों गिरवी रख रहे PM Modi, Trump की गुलामी क्यों: Kejriwal का बड़ा हमलाCNN के अनुसार, ब्लैंच को बहुत कम अंतर से मंज़ूरी मिली; मेन की रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स और अलास्का की लिसा मुर्कोव्स्की ने अपनी पार्टी से अलग हटकर उनके ख़िलाफ़ वोट किया। जब से ट्रम्प व्हाइट हाउस लौटे हैं, ब्लैंच ने राष्ट्रपति की प्राथमिकताओं के हिसाब से विभाग को फिर से व्यवस्थित करने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने ट्रम्प की कानूनी बचाव टीम का नेतृत्व करने से लेकर बड़े प्रशासनिक एजेंडे को आगे बढ़ाने तक का काम किया है। एजेंसी में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कार्यकारी अधिकार और राष्ट्रपति को मिलने वाली सुरक्षा को बढ़ाने वाले कानूनी तर्क पेश किए; अनुभवी अभियोजकों और वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े बड़े पैमाने पर कर्मचारियों में बदलाव किए; और एक ऐसी कानूनी रणनीति का नेतृत्व किया जिस पर देश भर के जजों ने कड़े सवाल उठाए हैं।इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz को लेकर Iran-Oman बातचीत में प्रगति, US को कमर्शियल तेल शिपमेंट बहाल होने की उम्मीदकार्यवाहक अटॉर्नी जनरल के तौर पर अपने छोटे से कार्यकाल में, न्याय विभाग ने पूर्व FBI डायरेक्टर जेम्स कोमी समेत कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के ख़िलाफ़ आरोप तय करने की कार्रवाई की और पत्रकारों के सूत्रों से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए समन जारी किए। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, विभाग ने हथियारों के प्रसार को रोकने वाले विवादित फंड को बनाया और बाद में उसे खत्म भी कर दिया, साथ ही राष्ट्रपति और इंटरनल रेवेन्यू सर्विस के बीच टैक्स से छूट की व्यवस्था को मंज़ूरी दी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:16 +0530</pubDate>
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<title>कागज के टुकड़े जान नहीं बचाते...पाकिस्तान&#45;तुर्की डील के बाद सऊदी पर दमकर दहाड़ा भारत का दोस्त</title>
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<description><![CDATA[ 7 अगस्त की रात को दुनिया के नक्शे पर एक ऐसी लकीर खींची गई है जिसने ना सिर्फ मिडिल ईस्ट बल्कि भारत के रणनीतिकारों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। मक्का में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मिलकर मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट साइन किया। इसे दुनिया के कई देश इस्लामिक नेटो की शुरुआत कह रहे हैं। लेकिन जैसे ही पाकिस्तान की न्यूक्लियर पावर और तुर्की की ड्रोन टेक्नोलॉजी के एक साथ आने की खबर आई, ईरान ने ऐसी दहाड़ लगाई कि पूरी दुनिया सहम गई। ईरान ने दो टूक शब्दों में कहा कि सऊदी अरब सावधान रहे क्योंकि कागज के टुकड़े कभी भी जान नहीं बचाते। इस एग्रीमेंट की सबसे चौंकाने वाली बात इसकी कलेक्टिव डिफेंस क्लॉज़ है। ठीक वैसे ही जैसे नाटो का आर्टिकल पांच कहता है कि अगर किसी एक सदस्य देश पर हमला हुआ तो बाकी सब मिलकर युद्ध लड़ेंगे। अब यही नियम पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की पर लागू होगा। अब आप सोचिए अगर कल को यमन की हूं विद्रोही या ईरान की सेना सऊदी अरब पर हमला करती है तो पाकिस्तान की फौज और तुर्की की वायु सेना को सऊदी के बचाव में सीधे युद्ध के मैदान में उतरना पड़ेगा। यह वेस्ट एशिया के इतिहास में पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा जियोपॉलिटिकल शिफ्ट है।इसे भी पढ़ें: शहबाज-मुनीर के सऊदी पहुंचते ही टूट पड़ा ईरान, बिछा दी लाशेंसऊदी अरब ने आखिर तुर्की को क्यों चुना? इसका जवाब है तुर्की के घातक बैरख्तर ड्रोंस। आज की तारीख में तुर्की दुनिया का सबसे तेजी से उभरता हुआ डिफेंस हब है। तुर्की के पास नेटो की ट्रेनिंग है और सीरिया लीबिया जैसे देशों में लड़ने का कड़वा अनुभव है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान है। पाकिस्तान की माली हालत चाहे जो भी हो लेकिन उसके पास एक विशाल सेना और परमाणु हथियार है। सऊदी अरब को हमेशा से डर रहा है कि ईरान एक परमाणु शक्ति ना बन जाए। ऐसे में पाकिस्तान का परमाणु छाता सऊदी अरब को एक मानसिक सुरक्षा देता है। सऊदी अरब अपना पैसा लगाएगा। तुर्की अपनी टेक्नोलॉजी देगा और पाकिस्तान अपना सैन, मैन पावर और परमाणु ताकत। लेकिन इस पूरी कहानी में विलेन की एंट्री होती है ईरान के रूप में। ईरान के सांसद इब्राहिम रजई ने मक्का पैक को पेपर एग्रीमेंट कहकर इसकी धज्जियां उड़ा दी और खुद इस बात की पुष्टि की अपने एक्स अकाउंट पर की। ईरान का कहना है कि सऊदी अरब पहले अमेरिका के संरक्षण में था तब भी ईरान ने उसे नुकसान पहुंचाया।   इसे भी पढ़ें: Iran ने Saudi Arabia, पाकिस्तान और Turkey के रक्षा समझौते को बताया बेअसरतुर्की और पाकिस्तान उसका क्या भला करेंगे? ईरान का तर्क बड़ा सीधा है। क्या पाकिस्तान वाकई ईरान के खिलाफ परमाणु बम इस्तेमाल करने की हिम्मत करेगा? क्या तुर्की अपने आर्थिक हितों को दांव पर लगाकर ईरान से सीधी दुश्मनी लेगा?  ईरान इसे सिर्फ एक दिखावा बता रहा है ताकि सऊदी अरब अपनी जनता को दिखा सके कि वो सुरक्षित है। भारत का इन सब से क्या लेना देना? भारत के लिए स्थिति थोड़ी जटिल है। सऊदी अरब के साथ भारत के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से सबसे अच्छे दौर में है। लेकिन पाकिस्तान और तुर्की का गठजोड़ हमेशा भारत के खिलाफ जहर उगलता रहा है। चाहे कश्मीर का मुद्दा हो या इंटरनेशनल फोरम। तुर्की ने हमेशा पाकिस्तान का साथ दिया है। अगर पाकिस्तान इस डिफेंस पैक के बहाने तुर्की के एडवांस टेक्नोलॉजी हासिल करता है और सऊदी के फंड से अपनी सैन्य मशीनरी को आधुनिक बनाता है तो ये भारत की सुरक्षा के लिए एक चुनौती बन सकता है।  हालांकि भारत को भरोसा है कि सऊदी अरब कभी भी भारत के हितों के खिलाफ इस पैक का इस्तेमाल नहीं होने देगा क्योंकि भारत सऊदी के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक बाजार है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:15 +0530</pubDate>
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<title>Yemen Conflict Alert: हूती ठिकानों पर सेना के भीषण प्रहार, UN ने दी बड़े युद्ध की चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ यमन की सेना ने हूती विद्रोहियों पर हमले तेज़ कर दिए हैं, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि देश में बड़े पैमाने पर संघर्ष फिर से शुरू होने का खतरा बढ़ रहा है। तुर्की में कुर्द शांति प्रयासों से जुड़ा एक विधेयक संसद में अपने पहले चरण से मंज़ूर हो गया है। इस विधेयक में कुर्द उग्रवादियों के हथियार छोड़ने और कुछ पूर्व लड़ाकों के पुनर्वास की शर्तें तय की गई हैं। यमन में सेना ने कहा कि उसके हमले, देश के मध्य और पूर्वी हिस्सों में हाल ही में हुए हूती हमलों के जवाब में थे। यमन की सेना के प्रवक्ता कर्नल माजेद अल-नाज़िली ने कहा कि इन हमलों में कई मोर्चों पर विद्रोहियों के ठिकानों और क्षमताओं को निशाना बनाया गया, हालांकि उन्होंने और कोई जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि इन हमलों का मकसद सेना की सुरक्षा करना था।इसे भी पढ़ें: Indian Cargo Ship Attack | Red Sea में भारतीय कार्गो जहाज़ पर हमला, डूबने के बाद 13 भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया, विदेश मंत्रालय ने जताई सख्त आपत्तियह लड़ाई 2022 में हुए उस समझौते के बाद तनाव में बड़ी बढ़ोतरी है, जिसने काफी हद तक लड़ाई को रोक दिया था। यमन के गृह युद्ध में एक तरफ ईरान समर्थित हूथी हैं और दूसरी तरफ सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन है, जो देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का सहयोगी है। शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र के दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि अप्रैल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता वाले समझौते के बाद से अब यमन में बड़े पैमाने पर फिर से संघर्ष शुरू होने का खतरा सबसे ज़्यादा है। तुर्की में शनिवार को एक संसदीय समिति ने कानून के मसौदे को मंज़ूरी दे दी। इस बिल में हज़ारों पूर्व लड़ाकों के लिए सशर्त माफ़ी जैसा एक तरीका शामिल है और उम्मीद है कि अगले हफ़्ते की शुरुआत में आम सभा में इस पर बहस होगी और इसे मंज़ूरी मिल जाएगी। पिछले साल, कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) ने कहा था कि वह तुर्की सरकार के साथ दशकों से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के मकसद से शुरू की गई शांति पहल के तहत हथियार छोड़ देगी और अपना संगठन भंग कर देगी।इसे भी पढ़ें: बर्दाश्त नहीं...लाल सागर में डूबा भारतीय झंडे वाला जहाज, भयंकर भड़का भारत, अब होगा एक्शन!यह कानून ग्रुप के हथियार छोड़ने और कुछ PKK सदस्यों के पुनर्वास की प्रक्रिया तय करता है। इसके तहत, ग्रुप का सदस्य होने के दोषी लोगों की कुछ जेल की सज़ाएं रोक दी जाएंगी और दूसरों पर मुकदमा चलाने में देरी की जाएगी। ये उपाय तब लागू होंगे जब तुर्की की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद यह पुष्टि कर देगी कि ग्रुप ने खुद को खत्म कर लिया है और सारे हथियार सौंप दिए हैं। 1980 के दशक में शुरू हुए इस संघर्ष में हज़ारों लोग मारे गए हैं और यह पड़ोसी देशों इराक और सीरिया तक फैल गया है। तुर्की और उसके पश्चिमी सहयोगी PKK को आतंकवादी संगठन मानते हैं। कुल मिलाकर, ये घटनाक्रम बताते हैं कि संयुक्त राष्ट्र की संयम बरतने की अपील के बावजूद यमन में तनाव बढ़ रहा है, जबकि तुर्की में संसद में एक ड्राफ्ट कानून को मंज़ूरी मिलने के साथ ही कुर्द शांति प्रक्रिया आगे बढ़ी है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:14 +0530</pubDate>
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<title>यूएन जिनीवा में मोरों की नई टोली, ऐतिहासिक परम्परा में लौटे रंग</title>
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<description><![CDATA[ जिनीवा स्थित संयुक्त राष्ट्र ने शुक्रवार को पैलेस ऑफ़ नेशन्स में भारत से आए पाँच युवा मोरों का स्वागत किया. अपने चटख रंगों एवं शाही अन्दाज़ के लिए पहचाने जाने वाले ये मोर, भारत की ओर से उपहार हैं और संयुक्त राष्ट्र परिसर में दशकों से चली आ रही एक अनोखी परम्परा की नई कड़ी हैं. मोरों की मौजूदगी का यह इतिहास इतना पुराना है कि इसकी जड़ें संयुक्त राष्ट्र ही नहीं, बल्कि उसके पूर्ववर्ती संगठन लीग ऑफ़ नेशन्स की स्थापना से भी पहले तक जाती हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:48:40 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन: कीव पर घातक हमलों की निन्दा, महासचिव ने कहा ‘स्पष्ट उल्लंघन’</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बुधवार को कीव पर इस वर्ष हुए सबसे घातक रूसी हमलों की निन्दा की. रातभर हुए इन हमलों में 17 लोगों की मौत हो गई और नागरिक बुनियादी ढाँचे को भारी नुक़सान पहुँचा. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:48:40 +0530</pubDate>
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<title>डीआर काँगो: विस्थापन शिविरों तक पहुँचा इबोला वायरस</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने बताया है कि काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इबोला बुंडिबुग्यो वायरस का संक्रमण विस्थापित समुदायों तक पहुँच गया है. अब तक आन्तरिक रूप से विस्थापित 19 लोग इसकी चपेट में आए हैं और पाँच की मौत हुई है. इन ख़बरों के बाद राहत एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:48:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>ग़ाज़ा: ‘युद्धविराम’ के बावजूद 300 दिनों में 300 बच्चों की मौत</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने कहा है कि ग़ाज़ा में युद्धविराम लागू होने के बावजूद बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है. पिछले अक्टूबर में युद्धविराम लागू होने के बाद से 300 दिनों के दौरान कम से कम 300 बच्चे मारे गए हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:48:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Imran Khan के समर्थकों का Pakistan में प्रदर्शन, 100 से अधिक PTI कार्यकर्ता गिरफ्तार</title>
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<description><![CDATA[ लाहौर, पांच अगस्त पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की कैद के तीन साल पूरे होने पर उनके समर्थकों ने बुधवार को पुलिस की कार्रवाई के बावजूद देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन किया। इस दौरान 100 से अधिक समर्थकों को गिरफ्तार किया गया। पंजाब और सिंध प्रांतों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की।खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर में एक रैली आयोजित की गई, जहां खान की पार्टी ‘पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ’ (पीटीआई) सत्ता में है। पंजाब में पुलिस ने लाहौर, मियांवाली और रावलपिंडी में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और पीटीआई के कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। लाहौर के मॉल रोड पर पुलिस ने खान की रिहाई की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो फुटेज में दंगा नियंत्रण पुलिस को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग करते हुए दिखाया गया है। कुछ पत्रकारों के साथ भी पुलिस ने कथित तौर पर मारपीट की, जिसके बाद मीडिया संगठनों ने विरोध जताया। पीटीआई की पंजाब इकाई के महासचिव चौधरी बिलाल एजाज ने कहा कि लाहौर में गिरफ्तार किए गए 25 अन्य लोगों में पार्टी के पांच विधायक भी शामिल हैं।उन्होंने कहा, दमन, उत्पीड़न और फासीवाद के इस दौर के बावजूद पंजाब में बड़ी संख्या में पीटीआई कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने विरोध रैलियां निकालीं और इमरान खान के साथ खड़े रहने का संकल्प लिया। पीटीआई के अनुसार, मियांवाली, रावलपिंडी और पंजाब के अन्य हिस्सों में उसके कम से कम 50 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Vikram Misri ने Sri Lanka नेतृत्व से की मुलाकात, 35 करोड़ डॉलर के ऋण समझौते का हुआ आदान&#45;प्रदान</title>
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<description><![CDATA[ कोलंबो, पांच अगस्त विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बुधवार को श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने श्रीलंका में भारत के सहयोग से जारी विकास परियोजनाओं समेत प्रमुख द्विपक्षीय परियोजनाओं की समीक्षा भी की। मिसरी एक दिवसीय दौरे पर कोलंबो पहुंचे हैं।उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुर कुमार दिसानायके, प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या और विदेश मंत्री विजिता हेराथ से भी अलग-अलग मुलाकात की। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय मुद्दों और परियोजनाओं पर जारी सहयोग की व्यापक समीक्षा की।’’
कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि दोनों पक्षों के बीच वार्ता आपसी हितों से जुड़े मुद्दों और श्रीलंका में भारत के सहयोग से चल रही विकास परियोजनाओं समेत प्रमुख द्विपक्षीय परियोजनाओं की समीक्षा पर केंद्रित रही। इसमें कहा गया, ‘‘बैठक के बाद, दोनों पक्षों ने भारतीय मूल्य में 35 करोड़ अमेरिकी डॉलर की ऋण सुविधा को लेकर समझौतों का आदान-प्रदान किया, जो चक्रवात दित्वाह के मद्देनजर भारत द्वारा दिए गए 45 करोड़ अमेरिकी डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज का हिस्सा है।यह ऋण सुविधा चक्रवात के बाद पुनर्निर्माण, बुनियादी ढांचा विकास और खरीद आवश्यकताओं की पूर्ति में मदद करेगी।’’
विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने विभिन्न परियोजनाओं के कार्यान्वयन में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। मिसरी ने विदेश मंत्री विजिता हेराथ से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों ने प्राथमिकता वाले प्रमुख क्षेत्रों में जारी सहयोग की समीक्षा की।विदेश सचिव मिसरी ने अपने श्रीलंकाई समकक्ष अरुनी रानाराजा से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों अधिकारियों ने आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की तथा द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>वॉशिंगटन के आसमान में Donald Trump पर मंडराया मौत का साया? राष्ट्रपति के हेलिकॉप्टर के सामने अचानक आ गया पैसेंजर प्लेन!</title>
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<description><![CDATA[  वॉशिंगटन के आसमान में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ले जा रहा हेलिकॉप्टर &#039;मरीन वन&#039; एक पैसेंजर प्लेन के खतरनाक रूप से बेहद करीब आ गया। दोनों उड़ानों के बीच की दूरी महज एक मील से भी कम रह गई थी, जिससे एक पल के लिए बड़ा हादसा होने का डर पैदा हो गया। हालांकि, पायलटों की सूझबूझ से सीधी टक्कर टल गई और एक बड़ा हादसा होने से बच गया। वाशिंगटन के एयर स्पेस में हुई इस गंभीर सुरक्षा चूक के बाद फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है, जबकि व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि राष्ट्रपति पूरी तरह सुरक्षित थे। इस चूक में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ले जा रहा हेलिकॉप्टर इस हफ्ते की शुरुआत में वाशिंगटन के ऊपर एक पैसेंजर प्लेन के &#039;बहुत करीब&#039; आ गया था। इसे भी पढ़ें: Meta ने PM Modi का वीडियो हटाने पर मांगी माफी, ग्लोबल अफेयर्स चीफ Joel Kaplan ने स्वीकारी गलतीयह घटना संभवतः मंगलवार दोपहर को हुई, जब ट्रंप को ले जा रहा हेलिकॉप्टर &#039;मरीन वन&#039; एक पैसेंजर प्लेन के एक मील से भी कम दूरी पर आ गया। पैसेंजर प्लेन देरी के कारण उसी समय हवा में था। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि सीधी टक्कर का कोई तत्काल खतरा नहीं था।व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा है कि ट्रंप की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हुआ। उन्होंने AFP को बताया, &quot;मरीन वन की उड़ानें दुनिया के कुछ बेहतरीन पायलट उड़ाते हैं, और राष्ट्रपति को किसी भी समय कोई खतरा नहीं था।&quot;जांच शुरूअमेरिकी अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है, लेकिन &#039;द वॉल स्ट्रीट जर्नल&#039; (WSJ) के अनुसार, रीगन वाशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। FAA ने एक बयान में कहा कि &quot;दूरी कम होने&quot; (loss of separation) के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोलर कमर्शियल विमान और मरीन वन हेलिकॉप्टर के पायलटों के सीधे संपर्क में था।बयान में कहा गया, &quot;राष्ट्रपति कभी खतरे में नहीं थे। हम घटना की समीक्षा जारी रखे हुए हैं और अपनी जांच के आधार पर कोई भी उचित सुधारात्मक कदम उठाएंगे।&quot; इसे भी पढ़ें: Delhi के LNJP Hospital समेत 3 अस्पतालों की संशोधित लागत मंजूर, जांच के आदेशनियम क्या कहता है?&#039;द वॉल स्ट्रीट जर्नल&#039; के अनुसार, ऐसी स्थिति में सुरक्षा उपायों के तहत क्षैतिज रूप से (horizontally) कम से कम 1.5 मील और लंबवत रूप से (vertically) 500 फीट की दूरी बनाए रखना जरूरी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मंगलवार की घटना, जो दोपहर करीब 2:30 बजे (1830 GMT) हुई, उसमें अमेरिकन एयरलाइंस का एम्ब्रेयर E-170 विमान शामिल था, जिसे उसकी सहायक कंपनी एनवॉय एयर (Envoy Air) ऑपरेट करती है।इसमें यह भी बताया गया कि मरीन वन एंड्रयूज एयर फोर्स बेस जा रहा था, जहां 80 वर्षीय ट्रंप कैलिफोर्निया जाने के लिए एयर फोर्स वन में सवार हुए। फिलहाल, न तो अमेरिकी मरीन कॉर्प्स और न ही अमेरिकन एयरलाइंस ने इस घटना के बारे में कोई बयान जारी किया है। इस बीच, जनवरी 2025 में वाशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट के पास एक एयरलाइनर और आर्मी के ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर की घातक टक्कर में 67 लोगों की मौत के बाद से FAA ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Iran&#45;Oman Shipping Agreement | होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान और ओमान में बड़ी डील! क्या अमेरिका के साथ खत्म होगा दशकों पुराना तनाव?</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान और ओमान &#039;होर्मुज़ जलडमरूमध्य&#039; (Strait of Hormuz) से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते के करीब पहुंच गए हैं। हालांकि, तेहरान ने स्पष्ट किया है कि इस मार्ग को पूरी तरह खोलने का अंतिम निर्णय &quot;तीसरे पक्षों&quot;—विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका—के रुख पर निर्भर करेगा। जाहिर है, उनका इशारा अमेरिका (US) की तरफ है, जो मानता है कि यह रणनीतिक जलमार्ग सभी व्यापारिक जहाजों के लिए खुला रहना चाहिए।28 फरवरी को मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद से होर्मुज़ पर ईरान का असल नियंत्रण है, लेकिन उसके विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ओमान के साथ डील का ड्राफ्ट साइन होने के लिए तैयार है, जबकि अमेरिका का कहना है कि स्ट्रेट को फिर से खोलने का समझौता &#039;जल्द ही&#039; होने वाला है।इसे भी पढ़ें: Meta ने PM Modi का वीडियो हटाने पर मांगी माफी, ग्लोबल अफेयर्स चीफ Joel Kaplan ने स्वीकारी गलती AFP ने बघाई के हवाले से कहा, &quot;दोनों पक्षों ने रूट के भौगोलिक को-ऑर्डिनेट (स्थान की जानकारी) पर सहमति बना ली है और अगर कुछ तीसरे पक्ष इस प्रक्रिया में बाधा नहीं डालते हैं, तो दोनों देशों का संयुक्त बयान - जिसमें मुख्य बातें और सहमति के बिंदु शामिल हैं - भी अंतिम समीक्षा और ड्राफ्टिंग के चरण में है।&quot;उन्होंने आगे कहा, &quot;होर्मुज़ स्ट्रेट को असुरक्षित बनाने वाले कारक अभी भी अमेरिका की तरफ से मौजूद हैं, खासकर नौसैनिक नाकेबंदी और ईरान व उसके हितों के खिलाफ अन्य आक्रामक और धमकी भरे कदम।&quot;होर्मुज़ का महत्वदुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल होर्मुज़ से होकर गुजरता है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन का संतुलन बनाए रखने के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन लगभग पांच महीने पहले संघर्ष शुरू होने के बाद से, दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ी हैं, जिससे अमेरिका पर अपने सैन्य अभियानों को खत्म करने का दबाव बढ़ रहा है।इसे भी पढ़ें: अमेरिका का बड़ा झटका! भारतीय छात्रों के छात्र वीजा में 62% की भारी गिरावट, पढ़ाई और नौकरी के सपनों पर फिरा पानी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड बुधवार को 80 डॉलर प्रति बैरल पर रहा, जो संघर्ष शुरू होने के बाद बढ़ी कीमतों के स्तर से कम था।क्या होर्मुज़ डील संघर्ष को खत्म कर सकती है?AP द्वारा बताए गए क्षेत्रीय अधिकारियों का कहना है कि ओमान के साथ डील के ड्राफ्ट के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई की मंजूरी की जरूरत होगी, जिन्हें इस साल की शुरुआत में उनके पिता और पूर्ववर्ती अयातुल्ला अली खमेनेई की मौत के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। हालांकि, उन्होंने इस डील को होर्मुज़ को लेकर विवाद का एक अस्थायी समाधान बताया। उन्होंने यह भी कहा कि यह डील उस समझौते से जुड़ी है जिस पर अमेरिका और ईरान ने जून में साइन किए थे, लेकिन बाद में दोनों देशों के बीच एक-दूसरे पर हमले फिर से शुरू होने के कारण वह समझौता टूट गया था। हालांकि, उनका कहना था कि इस संभावित डील से अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत फिर से शुरू करने का रास्ता भी साफ होगा।इससे पहले, उन्होंने कहा था कि संभावित समझौते के तहत जहाज ईरान के कंट्रोल वाले रास्ते से फारस की खाड़ी में आएंगे और ओमान के कंट्रोल वाले रास्ते से बाहर निकलेंगे। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा देने और समुद्री पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए सर्विस फीस ली जाएगी। हालांकि, अमेरिका का कहना है कि ईरान का फीस लेना समझौते के खिलाफ है और होर्मुज सभी जहाजों के लिए खुला रहना चाहिए। Stay updated with International
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>अमेरिका का बड़ा झटका! भारतीय छात्रों के छात्र वीजा में 62% की भारी गिरावट, पढ़ाई और नौकरी के सपनों पर फिरा पानी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में पढ़ाई और उसके बाद नौकरी का सपना देखने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों—विशेषकर भारतीयों—के लिए आंकड़े चिंताजनक संकेत दे रहे हैं। सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज (CIS) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में भारतीय छात्रों को जारी किए जाने वाले अमेरिकी छात्र वीजा (F-1 Visa) में 62 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही, पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में अस्थायी रोजगार देने वाले &#039;ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग&#039; (OPT) कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने की सिफारिश की गई है।छात्र वीजा के आंकड़ों में बड़ा अंतरसीआईएस (CIS) के वरिष्ठ कानूनी फेलो जॉर्ज फिशमैन द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में मई से अगस्त की मुख्य अवधि को आधार बनाया गया है, क्योंकि नए शैक्षणिक सत्र के लिए अधिकांश F-1 वीजा इसी दौरान जारी किए जाते हैं।भारतीय छात्र: अमेरिका ने 2024 में भारतीयों को 58,694 छात्र वीजा जारी किए थे, जो 2025 में 62% घटकर महज 22,149 रह गए।चीनी छात्र: चीन के छात्रों को जारी किए गए वीजा में भी 34% की कमी आई है। 2024 में चीनी छात्रों को 61,075 वीजा मिले थे, जो 2025 में घटकर 40,034 हो गए।रिपोर्ट के अनुसार, चीनी छात्रों को जारी किए गए वीजा में भी 34 प्रतिशत की कमी आई। वर्ष 2025 में चीन के छात्रों को 40,034 वीजा जारी किए गए, जबकि 2024 में यह संख्या 61,075 थी।
 इसी तरह, अमेरिका ने 2025 में भारतीय नागरिकों को 22,149 छात्र वीजा जारी किए, जबकि 2024 में यह संख्या 58,694 थी।
अंतरराष्ट्रीय शिक्षा संस्थान (आईआईई) की वार्षिक जनगणना के अनुसार, 2024-25 शैक्षणिक सत्र में अमेरिका के उच्च शिक्षा संस्थानों में 11,77,766 विदेशी छात्र अध्ययनरत थे। इसे भी पढ़ें: Meta ने PM Modi का वीडियो हटाने पर मांगी माफी, ग्लोबल अफेयर्स चीफ Joel Kaplan ने स्वीकारी गलती  इनमें 3,63,019 छात्र भारत और 2,65,919 छात्र चीन से थे। दोनों देशों के छात्र मिलाकर कुल विदेशी छात्रों का 53 प्रतिशत थे।
 रिपोर्ट में आईआईई के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि 2024-25 शैक्षणिक वर्ष में अमेरिका में पढ़ रहे 10 लाख से अधिक विदेशी छात्रों में से 2,94,253 छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद ओपीटी कार्यक्रम के तहत अमेरिका में काम कर रहे थे।
 रिपोर्ट के अनुसार, ओपीटी कार्यक्रम के तहत काम कर रहे छात्रों में 49 प्रतिशत (1,43,740) भारतीय थे, जबकि 21 प्रतिशत (61,981) छात्र चीन से थे।
 फिशमैन ने कहा, ‘‘मैं ओपीटी कार्यक्रम को समाप्त करने की वकालत करता रहा हूं ताकि अमेरिकी छात्रों और कर्मचारियों के वेतन तथा रोजगार के अवसरों की रक्षा की जा सके।’’
 उन्होंने कहा, ‘‘यदि ऐसा नहीं भी होता है, तो भी भारत और चीन से आने वाले ओपीटी कार्यक्रम के छात्रों की संख्या कम करने से अमेरिकी छात्रों और कर्मचारियों पर इसके प्रतिकूल प्रभाव कम होंगे क्योंकि ओपीटी प्रतिभागियों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी इन्हीं दोनों देशों के छात्रों की है।’’
सीआईएस की रिपोर्ट में तुलना के लिए मई से अगस्त की अवधि को आधार बनाया गया है, क्योंकि आगामी शैक्षणिक सत्र को ध्यान में रखते हुए एफ-1 छात्र वीजा का अधिकांश हिस्सा इसी अवधि में जारी किया जाता है।
 रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारतीय नागरिकों को जारी किए गए 77 प्रतिशत एफ-1 वीजा और चीनी नागरिकों को जारी किए गए 76 प्रतिशत एफ-1 वीजा मई से अगस्त के बीच ही जारी किए गए थे।OPT कार्यक्रम खत्म करने की वकालत क्यों?रिपोर्ट के लेखक जॉर्ज फिशमैन का मानना है कि OPT कार्यक्रम को बंद करने या इसमें कटौती करने से स्थानीय अमेरिकी नागरिकों को फायदा होगा। जॉर्ज फिशमैन ने कहा, &quot;मैं ओपीटी (OPT) कार्यक्रम को समाप्त करने की वकालत करता रहा हूं ताकि अमेरिकी छात्रों और कर्मचारियों के वेतन तथा रोजगार के अवसरों की रक्षा की जा सके।&quot;इसे भी पढ़ें: Biocon का शुद्ध लाभ पहली तिमाही में 53.36% बढ़कर 136.8 करोड़ रुपये पहुंचा उन्होंने आगे कहा कि यदि इस योजना को पूरी तरह बंद नहीं भी किया जाता है, तब भी भारत और चीन से आने वाले OPT प्रतिभागियों की संख्या सीमित करने से अमेरिकी कार्यबल पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव कम होंगे, क्योंकि इस योजना में सबसे बड़ा हिस्सा इन्हीं दो देशों के स्नातकों का है।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:55 +0530</pubDate>
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<title>USCIS ने अधूरे आव्रजन आवेदन खारिज करने का अधिकार बहाल किया, नए नियम लागू हुए</title>
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<description><![CDATA[ सागर कुलकर्णी
वाशिंगटन, छह अगस्त अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने आव्रजन अधिकारियों का विवेकानुसार यह निर्णय लेने का अधिकार फिर से बहाल कर दिया है कि यदि कोई आवेदक अधूरा आवेदन जमा करता है या पात्रता साबित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराता, तो उसकी आव्रजन लाभ संबंधी याचिका सीधे खारिज की जा सकती है। पहले की नीति के तहत, यदि किसी आव्रजन अधिकारी ने आवेदन पर अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज मांगे थे, तो आवेदक को 12 सप्ताह का समय दिया जाता था। यह व्यवस्था वीजा, ग्रीन कार्ड, नागरिकता, आव्रजन स्थिति में बदलाव या उसके विस्तार से जुड़े आवेदनों पर लागू थी।इसके अलावा, यदि साक्ष्य के लिए अनुरोध (आरएफई) या आवेदन खारिज करने के आशय का नोटिस (एनओआईडी) अमेरिका के बाहर डाक से भेजा जाता था, तो जवाब देने की समय-सीमा में 14 दिन और जोड़ दिए जाते थे। यूएससीआईएस ने बुधवार को जारी बयान में कहा, ‘‘आवेदक की जिम्मेदारी है कि वह आवेदन दाखिल करते समय यह साबित करे कि वह मांगे गए आव्रजन लाभ के लिए पात्र है और निर्णय होने तक उसकी पात्रता बनी हुई है।’’
एजेंसी ने कहा कि यदि कोई आवेदक अपनी पात्रता साबित करने में विफल रहता है या आवेदन के पास आवश्यक प्रारंभिक दस्तावेज जमा नहीं करता है, तो यूएससीआईएस बिना आरएफई या एनओआईडी जारी किए भी आवेदन खारिज कर सकता है। नयी नीति तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है और यह लंबित आवेदनों के साथ-साथ नए आवेदनों पर भी लागू होगी।नयी व्यवस्था के तहत आव्रजन अधिकारी आवश्यक प्रारंभिक दस्तावेजों के अभाव में आवेदन खारिज कर सकते हैं, आवेदन दाखिल करते समय पात्रता स्थापित न होने पर उसे अस्वीकार कर सकते हैं या यदि उन्हें उचित लगे तो अतिरिक्त साक्ष्य मांगने के लिए आरएफई जारी कर सकते हैं। यूएससीआईएस ने विशेष रूप से यह चिंता जताई कि कुछ आवेदक जानबूझकर अधूरे आवेदन दाखिल कर रहे थे ताकि मूल आवेदन पर अंतिम फैसला आने तक वे रोजगार परमिट जैसे अन्य आव्रजन लाभ हासिल कर सकें। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:54 +0530</pubDate>
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<title>PoK Election: शुरुआती दो चरणों की 34 में से 24 सीटें जीतकर PML&#45;N की वापसी तय</title>
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<description><![CDATA[ इस्लामाबाद, छह अगस्त (एपी) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में विधानसभा चुनाव के पहले दो चरणों के नतीजों में बुधवार को सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने स्पष्ट बढ़त बना ली। यह बढ़त ऐसे समय मिली है, जब पिछले कई सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी हैं और एक प्रतिबंधित संगठन ने चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया हैं। क्षेत्रीय चुनाव आयोग के प्रवक्ता राजा शकील ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली पीएमएल-एन समर्थित उम्मीदवारों ने पहले दो चरणों में 34 में से 24 सीट पर जीत हासिल की है।उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय राजधानी मुजफ्फराबाद में मतदान 56 प्रतिशत से अधिक रहा। शकील ने कहा कि शेष 11 सीट के लिए मतदान 10 अगस्त को होगा, लेकिन पार्टी अगली क्षेत्रीय सरकार बनाने की स्थिति में पहले ही पहुंच चुकी है। इसके साथ ही एक दशक बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सत्ता में वापसी तय मानी जा रही है।शकील ने बताया कि सुरक्षा चिंताओं और भारी मानसूनी बारिश के कारण चुनाव तीन चरण में कराए जा रहे हैं। बारिश के कारण चुनाव प्रचार प्रभावित हुआ और खुले मैदान में बड़ी जनसभाओं का आयोजन मुश्किल हो गया। क्षेत्रीय सरकार और चुनाव अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा चिंताओं तथा प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) द्वारा चुनाव बहिष्कार की अपील के बावजूद मुजफ्फराबाद सहित कई क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ।जेएएसी हिंसक प्रदर्शनों के लिए कुख्यात रहा है। नवाज शरीफ ने एक बयान जारी कर विजयी उम्मीदवारों को बधाई दी। भारत और पाकिस्तान, दोनों कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों का प्रशासन चलाते हैं, लेकिन दोनों ही पूरे कश्मीर पर अपना दावा करते हैं।रविवार को मतदान से पहले जेएएसी समर्थकों और पुलिस के बीच कई बार झड़पें हुईं। हालांकि स्थानीय लोगों ने बताया कि हिंसा की आशंका के बावजूद उन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को मजबूत किया है, क्योंकि लोगों ने कई सप्ताह तक चले विरोध प्रदर्शनों, हिंसा और बहिष्कार अभियान के बावजूद मतदान किया।विवाद का मुख्य कारण 12 आरक्षित सीट हैं, जो ब्रिटिश शासन समाप्त होने के बाद भारत के हिस्से वाले कश्मीर से विस्थापित लोगों के लिए निर्धारित की गई हैं। जेएएसी का तर्क है कि इन सीटों के कारण पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से बाहर रहने वाले लोगों को असंगत राजनीतिक प्रभाव मिलता है। संगठन इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है।विवाद उस समय और बढ़ गया, जब जून में क्षेत्र के उच्चतम न्यायालय ने फैसला दिया कि ये सीटें संविधान द्वारा संरक्षित हैं और संवैधानिक संशोधन के बिना इन्हें समाप्त नहीं किया जा सकता। अधिकारी अक्सर जेएएसी समर्थकों पर चुनाव बाधित करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हैं। उनका यह भी आरोप है कि पाकिस्तानी तालिबान के सदस्य इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल हो गए थे।हालांकि जेएएसी ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वर्ष 2023 में गठित जेएएसी कश्मीर के लोगों के लिए अधिक राजनीतिक अधिकारों की मांग कर रहा है। सरकार का कहना है कि उसने संगठन की 38 में से 36 मांग स्वीकार कर ली हैं, जबकि आरक्षित सीटों का मुद्दा केवल विधानसभा के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:53 +0530</pubDate>
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<title>Prabhasakshi NewsRoom: Sheikh Hasina के भाषण के बाद बड़ा बवाल, Shakib Al Hasan के घर पर हमला, Sajeeb Wazed Joy बोले&#45; Bangladesh बन रहा दूसरा Pakistan</title>
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<description><![CDATA[ क्या बांग्लादेश में लोकतांत्रिक असहमति के लिए जगह बची है? यह सवाल तब फिर चर्चा में आ गया, जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के वर्चुअल कार्यक्रम में शामिल होने वाले पूर्व क्रिकेटर और अवामी लीग के नेता शाकिब अल हसन के घर पर हमला किया गया। क्या बांग्लादेश में मीडिया स्वतंत्र है? यह सवाल तब फिर चर्चा में आ गया जब बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार के फतवे का पालन करते हुए हर मीडिया संस्थान ने शेख हसीना के भाषण को अपने प्रकाशन या प्रसारण में कोई जगह नहीं दी।देखा जाये तो बांग्लादेश में साफ नजर आ रहा है कि शेख हसीना भले वापस लौटने की बात कह कर अपने समर्थकों में उत्साह भरने का प्रयास कर रही हों लेकिन तारिक रहमान सरकार हसीना की पार्टी को अलग थलग करने और उनके समर्थकों का उत्साह ठंडा करने तथा उनको कहीं से भी समर्थन नहीं मिलने देने की नीति पर अडिग है। दिल्ली में हुए कार्यक्रम के दौरान भले शेख हसीना की पार्टी के नेताओं ने बड़ी बड़ी हुंकारें भरी हों लेकिन उनको रोकने के लिए बांग्लादेश सरकार भी तूफानी गति से रणनीति बनाने में जुटी हुई है। 2024 की &#039;अगस्त क्रांति&#039; के चलते बांग्लादेश से भागने पर मजबूर हुईं शेख हसीना &#039;दिसंबर क्रांति&#039; की सफलता की कल्पना कर रही हैं मगर उसको विफल करने के लिए ढाका हर तरह से तैयारी कर रहा है।इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina दिसंबर में Bangladesh लौटेंगी, कहा- गिरफ्तारी या मौत का डर नहींजहां तक नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब में वर्चुअल माध्यम से शेख हसीना के संबोधन की बात है तो आपको बता दें कि उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी और गिरफ्तारी की आशंका से भयभीत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनकी वापसी सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश को &quot;सही रास्ते&quot; पर लाने के लिए होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें जेल भी जाना पड़े तो भी वह अपने देश लौटेंगी। अपने संबोधन में हसीना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की बहाली का समर्थन करने की अपील की और अवामी लीग पर लगा प्रतिबंध हटाने, राजनीतिक बंदियों की रिहाई, अभिव्यक्ति और मीडिया की स्वतंत्रता बहाल करने तथा न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने जैसी मांगें रखीं।हसीना ने 2024 के &quot;जुलाई विद्रोह&quot; को स्वतःस्फूर्त छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सत्ता परिवर्तन अभियान बताया। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन अंतरिम प्रशासन के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के पुराने बयानों से भी इस दिशा में संकेत मिलते हैं।इसी कार्यक्रम में हसीना के पुत्र और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता सजीब वाजेद जॉय ने भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश एक &quot;विफल राष्ट्र&quot; बनने की ओर बढ़ रहा है और यदि मौजूदा हालात जारी रहे तो भविष्य में यह क्षेत्रीय और वैश्विक आतंकवाद का बड़ा केंद्र बन सकता है। जॉय ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की आईएसआई को बांग्लादेश में खुली छूट मिल गई है, अवामी लीग सरकार के दौरान गिरफ्तार किए गए सैकड़ों दोषी आतंकियों को रिहा कर दिया गया है, प्रतिबंधित संगठन खुलेआम मार्च कर रहे हैं और अल-कायदा से जुड़े लोगों को सार्वजनिक मंच मिल रहे हैं। उन्होंने भारत के लिए भी इसे सुरक्षा चुनौती बताया और भारतीय मीडिया से इस विषय को लगातार उठाने की अपील की।जॉय ने यह भी आरोप लगाया कि अवामी लीग को राजनीतिक प्रक्रिया से बाहर रखा गया है, हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों को लंबे समय से बिना मुकदमे या जमानत के हिरासत में रखा गया है, जबकि पार्टी से सहानुभूति रखने वाले पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर भी कार्रवाई हुई है। उन्होंने यह दावा भी किया कि उनके कार्यक्रम से पहले भारतीय मीडिया संस्थानों तक दबाव बनाने की कोशिश की गई।उधर, शेख हसीना के संबोधन के कुछ ही घंटों बाद पूर्व बांग्लादेश क्रिकेट कप्तान और अवामी लीग के पूर्व सांसद शाकिब अल हसन के मगुरा स्थित घर पर हमला हुआ। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मोटरसाइकिलों पर पहुंचे कुछ लोगों ने घर के मुख्य गेट पर पेट्रोल बम जैसी वस्तु फेंकी, जिससे आग लगी, लेकिन पड़ोसियों ने समय रहते आग बुझा दी। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस्तेमाल की गई वस्तु वास्तव में पेट्रोल बम थी या कुछ और। घटना के समय घर में कोई मौजूद नहीं था।यह हमला ऐसे समय हुआ जब शाकिब अल हसन शेख हसीना के वर्चुअल कार्यक्रम में दिखाई दिए थे। इसी कारण अवामी लीग समर्थक इस घटना को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़ रहे हैं। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक हमले के पीछे किसी राजनीतिक उद्देश्य की पुष्टि नहीं की है।दूसरी ओर, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने शेख हसीना को &quot;फरार दोषी&quot; बताते हुए उनके कार्यक्रम पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि भारत में इस कार्यक्रम के आयोजन से दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ सकता है। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि नई दिल्ली में आयोजित यह कार्यक्रम पूरी तरह निजी था और भारत सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी ढाका ने इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए नुकसानदायक बताया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारत को पहले ही इस कार्यक्रम के संभावित कूटनीतिक प्रभावों से अवगत करा दिया गया था, इसके बावजूद शेख हसीना को भारतीय धरती से मीडिया को संबोधित करने की अनुमति देना बांग्लादेश की जनता की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है। मंत्रालय ने शेख हसीना के बयानों को जुलाई-अगस्त 2024 की घटनाओं पर संयुक्त राष्ट्र के निष्कर्षों को नकारने का प्रयास बताते हुए इसे बांग्लादेश की संप्रभुता और &#039;जुलाई क्रांति&#039; के शहीदों का अपमान करार दिया। साथ ही ढाका ने एक बार फिर 2013 की भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि के तहत शेख हसीना के प्रत्यर्पण की अपनी मांग दोहराई, जबकि भारत ने दोहराया कि यह कार्यक्रम फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया द्वारा आयोजित निजी आयोजन था और सरकार ने  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:52 +0530</pubDate>
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<title>बहुत मुश्किल...Mojtaba Khamenei को लेकर ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने क्या बड़ा खुलासा किया?</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के नेतृत्व में तनाव की खबरों के बीच, राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा है कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई से बातचीत करना &quot;इस समय बहुत मुश्किल&quot; हो गया है। 56 साल के खामेनेई अपने पिता, पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की जगह लेने के बाद से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उनके पिता की मौत अमेरिका-इजरायल के हमले में हुई थी, जिसमें खबरों के मुताबिक मोजतबा खामेनेई भी घायल हो गए थे। सार्वजनिक रूप से दिखाई न देने के बावजूद, पेज़ेशकियन ने ज़ोर देकर कहा कि खामेनेई इस टकराव पर ईरान की प्रतिक्रिया तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद के बीच Iran क्या बना पाएगा परमाणु हथियारखामेनेई पर पेज़ेशकियनAFP के अनुसार, पेज़ेशकियन ने कहा कि इस समय उनसे बातचीत करना बहुत मुश्किल है, लेकिन किसी भी स्थिति में, उनकी मौजूदगी हमारे लिए ताकत का बहुत बड़ा स्रोत है ताकि हम आगे बढ़ सकें। हालांकि खामेनेई ने पद संभालने के बाद से लिखित बयान जारी किए हैं, लेकिन अमेरिका के साथ चल रहे टकराव के दौरान सार्वजनिक रूप से उनके कम दिखने की वजह से वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य नेताओं के साथ उनके रिश्तों को लेकर अटकलें तेज़ हो गई हैं। वे पिछले महीने अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुए थे। आपसी मतभेद की बातों को खारिज करते हुए, पेज़ेशकियन ने कहा कि उन्होंने सुप्रीम लीडर के साथ सार्थक बैठकें की हैं और बताया कि उन्होंने उनके साथ दयालुता और बहुत ठोस तर्क के साथ व्यवहार किया। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा दुर्भाग्य से, मौजूदा हालात कुछ बुरे इरादे वाले लोगों को उनके बारे में अलग तरह से बात करने और उनकी एक अलग छवि पेश करने का मौका देते हैं।इसे भी पढ़ें: Iran Political Crisis: खामेनेई का Pezeshkian को आखिरी अल्टीमेटम, IRGC कमांडर के हाथ में कमानलीडरशिप में मतभेदों की खबरेंपेज़ेशकियान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मीडिया में ईरान की लीडरशिप के बीच बढ़ते मतभेदों की खबरें आ रही हैं। इज़राइली ब्रॉडकास्टर &#039;चैनल 14&#039; ने तेहरान के घटनाक्रम से वाकिफ़ सूत्रों का हवाला देते हुए दावा किया कि खामेनेई ने राष्ट्रपति को &quot;आखिरी अल्टीमेटम&quot; दिया था और संघर्ष व बातचीत से जुड़े अहम फैसलों पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर अहमद वाहिदी का समर्थन किया था। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि खामेनेई ने पेज़ेशकियान को इस्तीफ़ा देने से रोकने की कोशिश नहीं की, जिससे राष्ट्रपति का राजनीतिक प्रभाव कमज़ोर हो गया। चैनल 14 के मुताबिक, पेज़ेशकियान ने नीतिगत मतभेदों के दौरान कई बार इस्तीफ़ा देने की धमकी दी थी और मई में औपचारिक रूप से अपना इस्तीफ़ा भी पेश किया था। उनका तर्क था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े फैसलों में उनके प्रशासन को काफी हद तक दरकिनार कर दिया गया था। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>US Court में भारतीय मकान मालिक Venkatachalam Mani पर यौन उत्पीड़न का केस दर्ज</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन, छह अगस्त अमेरिका की संघीय सरकार ने पेनसिल्वेनिया में एक महिला किरायेदार के यौन उत्पीड़न के आरोप में एक भारतीय मकान मालिक के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। पेनसिल्वेनिया के ‘मिडल डिस्ट्रिक्ट’ की ‘यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट’ में बुधवार को दायर मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि स्टेट कॉलेज नगर क्षेत्र में मकान मालिक वेंकटचलम मणि ने महिला किरायेदार का यौन उत्पीड़न किया और जब महिला ने उसका विरोध किया तो मणि ने मकान की मरम्मत के लिए बार-बार उसके अनुरोधों को नजरअंदाज किया। अमेरिकी न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रभाग की सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों ने कहा, ‘‘ऐसा आचरण गैरकानूनी है।न्याय विभाग महिला किरायेदारों के उस अधिकार की रक्षा करेगा, जिसके तहत वे मकान मालिक द्वारा यौन उत्पीड़न के खतरे के बिना आवास में रह सकें।’’
मुकदमे में महिला किरायेदार और उसके बच्चों के लिए आर्थिक मुआवजे तथा भविष्य में भेदभाव रोकने के लिए अदालत से आदेश जारी करने की मांग की गई है। पेनसिल्वेनिया के ‘मिडल डिस्ट्रिक्ट’ के अमेरिकी अटॉर्नी ब्रायन डी. मिलर ने कहा, ‘‘यौन संबंध का दबाव बनाने के लिए मकान मालिकों द्वारा किरायेदारों का शोषण करने, उनका यौन उत्पीड़न करने और उनके खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई करने के प्रयासों को पेनसिल्वेनिया के ‘मिडल डिस्ट्रिक्ट’ में कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’’
जांच के बाद विभाग ने पाया कि मणि ने निष्पक्ष आवास अधिनियम का उल्लंघन करते हुए आवेदक के साथ भेदभाव किया। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:52 +0530</pubDate>
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<title>Hormuz पर धरी रह गई अमेरिका की हसरतें, ईरान&#45;ओमान में डील डन!</title>
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<description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच हुए सैन्य टकराव ने कुछ हफ्तों पहले पूरी दुनिया की सांसे रोक दी थी। ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले जवाब में ईरान की मिसाइल कारवाई और फिर दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते स्टेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से ग्लोबल तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई थी। लाखों बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हुई। कई कमर्शियल जहाजों ने अपना रोड बदल लिया और दुनिया भर में आशंका जताई जाने लगी थी कि अगर यह संकट लंबा चला तो उर्जा बाजार पर गंभीर असर पड़ेगा। लेकिन अब इसी हुरमूस को लेकर एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने अमेरिका और पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ा दी है। ईरान और ओमान ने स्टेट ऑफ हुरमूस के लिए एक नए शिपिंग मॉडल पर एक सहमति बना ली है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच नए समुद्री कॉरिडोर के भौगोलिक कोऑर्डिनेट्स पर सहमति बन चुकी है और अब संयुक्त बयान को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसे भी पढ़ें: Hormuz Strait जल्द खुलने के आसार, Donald Trump बोले- Iran से समझौता नहीं हुआ तो होगा &#039;बड़ा प्रहार&#039;ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता स्माइल बगई ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। जबकि ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबादी ने कहा कि वार्ता बुनियादी समझौतेों तक पहुंच चुकी है और प्रक्रिया लगभग पूरी होने वाली है। प्रस्तावित व्यवस्था के मुताबिक फारस की खाली में प्रवेश करने वाले कमर्शियल जहाजों का मुख्य मार्ग ईरान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरेगा। इससे तेरान को खाली में आने वाले जहाजों की निगरानी करने का अधिकार मिलेगा। वर्तमान व्यवस्था में जहाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शिपिंग लेन का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें ना तो ईरान और ना ही ओमान से अलग से अनुमति लेने की जरूरत होती है। नए मॉडल के तहत मौजूदा अस्थाई शिपिंग लेनों को धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा। इनमें ईरान के लहराक द्वीप के पास का उत्तरी मार्ग और ओमान के समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाला दक्षिणी मार्ग शामिल है। इनकी जगह एक नया कॉरिडोर बनाया जाएगा जिसका अधिकांश हिस्सा ईरानी समुद्री सीमा में और शेष हिस्सा ओमान के समुद्री क्षेत्र में होगा। इसे भी पढ़ें: बहुत मुश्किल...Mojtaba Khamenei को लेकर ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने क्या बड़ा खुलासा किया?फाइनल ड्रॉफ्ट तैयारदो क्षेत्रीय अधिकारियों ने द एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि ईरान और ओमान के बातचीत करने वालों ने जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) को फिर से खोलने के लिए समझौते का ड्राफ़्ट तैयार कर लिया है और वे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की अंतिम मंज़ूरी का इंतज़ार कर रहे हैं। माना जाता है कि युद्ध की शुरुआती कार्रवाई में खामेनेई घायल हो गए थे और तब से उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। बातचीत की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने इस संभावित समझौते को जलडमरूमध्य को लेकर चल रहे विवाद का एक अस्थायी समाधान बताया। उन्होंने कहा कि यह जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए उस समझौते से जुड़ा है, जिसका मकसद लड़ाई खत्म करना और जलमार्ग को फिर से खोलना था, लेकिन वह समझौता अंततः विफल हो गया था। निजी बातचीत के बारे में बताने के लिए नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले अधिकारियों ने कहा कि यह संभावित समझौता अमेरिका और ईरान के लिए तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर से शुरू करने का रास्ता साफ़ करेगा। इससे पहले, उन्होंने कहा था कि संभावित समझौते के तहत जहाज़ ईरान के कंट्रोल वाले रास्ते से फ़ारस की खाड़ी में प्रवेश करेंगे और ओमान के कंट्रोल वाले रास्ते से बाहर निकलेंगे। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा देने और समुद्री पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए सर्विस फ़ीस ली जाएगी। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:51 +0530</pubDate>
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<title>वो हमें चुन चुन कर मार रहे हैं...पहली बार हनुमान का नाम लेकर आतंकी ने खोला भारत का राज!</title>
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<description><![CDATA[ खतरनाक आतंकी ने अपने साथियों को सामने बैठाकर पहली बार वो जानकारी दी है जिसने बवाल मचा दिया है। इसने बताया है कि भारत बदला लेता है तो कैसे लेता है। भारत छोड़ता नहीं है। पाकिस्तान के इस आतंकी ने अचानक भगवान राम, हनुमान और घनश्याम का नाम ले लिया। दरअसल इस्लामाबाद में लश्कर तैयबा से जुड़े आतंकी रिज़वान हनीफ ने दावा किया है कि पिछले 3-4 सालों में उसके संगठन के 30 से भी ज्यादा लोग मारे गए हैं। इस आतंकी ने बताया है कि उसके साथी पेशावर, कराची, रावलपिंडी, रावलकोट और मुजफराबाद में मारे गए हैं। उसने कहा कि मेरे इन 30 से ज्यादा साथियों को मारने वाले अज्ञात हमलावर थे। वह सभी के सभी भारत के एजेंट्स थे। यानी इस आतंकी ने इस्लामाबाद में खड़े होकर बताया है कि भारत ने 30 से ज्यादा आतंकी उड़ा दिए हैं। वैसे आपको बता दें कि भारत का इससे कुछ लेना देना नहीं है। भारत तो पहले ही मना कर चुका है कि हम अज्ञात हमलावर नहीं हैं। लेकिन फिर भी यह आतंकी पता नहीं क्यों बोल रहा है कि भारत की खुफिया एजेंसी हमारे लोगों को मार रही है। हमारे लोगों को पीओके में चैन से जीने नहीं दे रही। भारत के एजेंट्स हमें चुन चुन कर मार रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Imran Khan की रिहाई पर अड़ी PTI: 27 सितंबर को Islamabad March का ऐलान, सुहैल अफरीदी की चेतावनीआतंकी रिज़वान हनीफ ने धार्मिक कार्ड खेलते हुए अपने साथियों को यहां तक कह दिया कि हमें इसलिए मारा जा रहा है क्योंकि हम इस्लाम को मानते हैं। हम राम, हनुमान, घनश्याम और गाय की पूजा नहीं करते। चलिए इस आतंकी ने राम, हनुमान और घनश्याम का नाम ले तो लिया है। इसकी सारी पीड़ाएं जल्द ही खत्म होने वाली हैं। तीन चार सालों के अंदर 30 से ज्यादा वाक्यात हो चुके हैं कि हमारे भाइयों को शहीद किया गया। किसी को पेशावर में, किसी को कराची में, किसी को पिंडी में, किसी को रावकोट में, किसी को मुजफराबाद में। जुर्म क्या है? जुर्म सिर्फ ये है कि हम ला इलाहा इल्लल्लाह के मानने वाले हैं। हम हनुमान घनश्याम हरि राम हम गाय की बछों की पूजा करने वाले नहीं है।इसे भी पढ़ें: Pakistan में कुछ बड़ा होने वाला है? विदेशी मीडिया पर बैन, बाहर जाने के लिए पत्रकारों को लेना होगा NOC राम हनुमान का नाम लेने वाले इस आतंकी को क्या डर सता रहा है। दरअसल कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के एक आतंकी ने कश्मीर में दो हिंदुओं का धर्म पूछकर उन्हें गोली मार दी। ऐसी घटना के बाद भारतीय सेना चुप नहीं बैठती। भारतीय सेना कुछ ना कुछ बड़ा खेल करने वाली है। सर्च ऑपरेशन में भारतीय सेना ने दो ओवर ग्राउंड वर्कर्स यानी पाकिस्तान की मदद करने वाले दो गद्दारों को दबोच लिया है। इनमें पहला है एजाज अहमद गने जिसे बारामुल्ला से पकड़ा गया है और दूसरा है तौसीफ अहमद डार जिसे पुलवामा से दबोचा गया है। इन दोनों के पास हथियार गोला बारूद सब मिले हैं। अब इन गद्दारों से जानकारियां जुटाई जा रही हैं। इसी कड़ी में पाकिस्तान के आतंकियों को डर है कि भारत बहुत बड़ा एक्शन लेने जा रहा है।Senior LeT commander Rizwan Hanif is absolutely terrified of the unknown gunmen model. 30 terrorists hoorified in last 3 years. Ye Dar achha hai. pic.twitter.com/eIs91bfxJO— Shining Star (@ShineHamesha) August 4, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>वो, हमें, चुन, चुन, कर, मार, रहे, हैं...पहली, बार, हनुमान, का, नाम, लेकर, आतंकी, ने, खोला, भारत, का, राज</media:keywords>
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<title>Red Sea Crisis | सऊदी टैंकर Daisy पर हूतियों का Missile Attack, अदन की खाड़ी में बढ़ा भारी तनाव</title>
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<description><![CDATA[ यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने अदन की खाड़ी में सऊदी अरब के एक तेल टैंकर पर बैलिस्टिक मिसाइल से &quot;सफलतापूर्वक&quot; हमला किया है। ईरान का समर्थन करने वाला यह समूह इस इलाके में सऊदी अरब से जुड़े जहाजों के खिलाफ अपना अभियान जारी रखे हुए है। टेलीग्राम पर जारी एक बयान में हूतियों ने दावा किया कि सऊदी तेल टैंकर &#039;डेज़ी&#039; को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया गया और कहा कि जहाज पर हमला हुआ और उसे अपना रास्ता बदलने पर मजबूर होना पड़ा। बयान में कहा गया अदन की खाड़ी में सऊदी तेल टैंकर डेज़ी को बैलिस्टिक मिसाइल से सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। ईश्वर की कृपा से इस ऑपरेशन का मकसद पूरा हुआ। जहाज पर हमला हुआ और उसे वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा।इसे भी पढ़ें: Indian Cargo Ship Attack | Red Sea में भारतीय कार्गो जहाज़ पर हमला, डूबने के बाद 13 भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया, विदेश मंत्रालय ने जताई सख्त आपत्तिहूतियों ने कहा कि यह हमला लाल सागर में खासकर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के रास्ते सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी के तहत किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे सऊदी तेल जहाजों को निशाना बनाना जारी रखेंगे। बयान में आगे कहा गया यह हमला सऊदी दुश्मन के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू करने के तहत किया गया है, जो &#039;नाकेबंदी के बदले नाकेबंदी&#039; के सिद्धांत पर आधारित है।इसमें आगे कहा गया कि हम सऊदी तेल टैंकरों की हर गतिविधि पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। जब तक हमारे लोगों की जायज़ मांगें पूरी नहीं हो जातीं और नाकेबंदी खत्म नहीं हो जाती, तब तक हम किसी भी जहाज को - चाहे वह दक्षिणी लाल सागर से आ रहा हो या उत्तरी लाल सागर से गुजरने नहीं देंगे। यह दावा हुतियों द्वारा उत्तरी लाल सागर में सऊदी तेल टैंकर पर एक और हमले की घोषणा के एक दिन बाद किया गया है।इसे भी पढ़ें: बर्दाश्त नहीं...लाल सागर में डूबा भारतीय झंडे वाला जहाज, भयंकर भड़का भारत, अब होगा एक्शन!हुती प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि सऊदी बंदरगाह शहर यानबू के तट के पास बैलिस्टिक मिसाइलों से वफ़ा टैंकर को निशाना बनाया गया।सरी ने X पर शेयर किए गए एक बयान में कहा अल्लाह की कृपा से हमला सटीक रहा। हूती प्रवक्ता ने दावा किया कि &#039;वफ़ा&#039; पर हमले के साथ ही, 22 जुलाई को अपना समुद्री अभियान शुरू होने के बाद से इस समूह द्वारा निशाना बनाए गए सऊदी तेल जहाजों की संख्या आठ हो गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि लाल सागर और अरब सागर में 29 सऊदी तेल जहाजों को उनके रास्ते पर आगे बढ़ने से रोका गया या उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर किया गया।इस बीच, यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) ने 5 अगस्त को इस क्षेत्र में समुद्र से जुड़ी दो अलग-अलग घटनाओं की जानकारी दी। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>15 अगस्त को भारत ऐसा क्या करने वाला है? पता चलने पर चीन&#45;पाक घबराया,  CCS की मेज पर रखी कौन सी गुप्त फाइल पर मुहर लगने वाली है!</title>
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<description><![CDATA[ युद्ध में दुश्मन की सबसे बड़ी ताकत मिसाइलें, रडार नहीं उसका इंजन और साथ ही साथ कड़वा सच तो यह भी है कि भारत ने परमाणु बम बनाए तो जरूर। चांद पर तिरंगा भी लहराया। लेकिन जब बात फाइटर जेट इंजन की आई तो हम दशकों तक दुनिया के सामने हाथ फैलाए खड़े थे। लेकिन रूस ने आंखें दिखाई। अमेरिका ने पाबंदियां लगाई और फ्रांस ने भी जेब खाली कर दी थी। लेकिन कैलेंडर पर 15 अगस्त 2026 की तारीख मार्क कर लीजिए क्योंकि इसी दिन भारत अपनी वायु सेना की आजादी का नया घोषणा पत्र लिखने जा रहा है। आपको बता दें कि कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी यानी कि सीसीएस की मेज़ पर आज वह गुप्त फाइल है जो भारत को दुनिया के उन चुनिंदा चार मुल्कों की लिस्ट में शामिल कर देगी जो अपना इंजन खुद बनाते हैं। सैफरन और साथ ही साथ जीटीआरई का 120 किल न्यूटन का यह महा इंजन जो है वो सिर्फ और सिर्फ एक मशीन नहीं बल्कि यह भारत की संप्रभुता की नई क्रांति है। आलोचकों ने यह कहा था कि इंजन बनाना रॉकेट साइंस से भी मुश्किल है। लेकिन पिछले एक साल में बता दें कि भारत ने पूरा गेम यहां पर पलट कर रख दिया है। अब हम सिर्फ सरकारी फाइल्स और HL के ऊपर भरोसा और निर्भर नहीं है। साथ ही साथ आपको बता दें कि Tata, LNT और BS जैसी जो प्राइवेट कंपनियां हैं अब इस रेस में वो भी कूद चुकी हैं। और ध्यान देने वाली बात यहां पर यह है कि इस डील का सबसे शॉकिंग सच क्या है? आज तक हमने जो भी विदेशी इंजन लिए उनकी चाबी कभी हमारे पास नहीं थी। इसे भी पढ़ें: Dubai के Jebel Ali Industrial Zone में 7 भीषण धमाके, धुएं के गुबार से सहमा UAE का ट्रेड हबआज सफरान डील में भारत 100% इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी यानी कि आईपी का मालिक होगा। यानी कि इंजन का ब्लूप्रिंट, सोर्स कोड सब कुछ भारत का भारत के हाथों में होने वाला है और साथ ही साथ इसमें कोई भी बदलाव करना हो या फिर किसी भी और देश का यहां पर इसको बेचना हो तो हमें फ्रांस से भी एनओसी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उसे मांगनी नहीं पड़ेगी। और सबसे खौफनाक टेक्नोलॉजी उसके बारे में बात कर लेते हैं। हॉट सेक्शन टेक्नोलॉजी फाइटर जेट इंजन के अंदर का तापमान 2100 केल्विन तक पहुंच जाता है। जहां पर लोहे का पानी बन जाता है। और आपको बता दें कि भारत अब वो सिंगल क्रिस्टल टरबाइन ब्लेड्स में बनाने जा रहा है जो इस भयंकर आग में भी चट्टान की तरह खड़े रहेंगे। यह वही आपको बता दें कि टेक है जिसे अमेरिका ने अपनी सबसे करीबी दोस्तों को देने से भी साफ-साफ मना कर दिया था। तो अब सवाल यह है कि यह राक्षसी ताकत जाएगी कहां? तो बता दें कि यह जो ताकत है वो जाएगी हमारे सपनों के विमान एमका में यानी कि एएमसीए में और भारत का पहला फिफ्थ जनरेशन स्टिल्थ फाइटर जेट। एक ऐसा विमान जो दुश्मन के रडार पर एक मच्छर से ज्यादा कुछ नहीं दिखेगा। इसे भी पढ़ें: Hormuz पर धरी रह गई अमेरिका की हसरतें, ईरान-ओमान में डील डन!आपको बता दें कि सैफरान का यह 120 किलो न्यूटन इंजन ना सिर्फ बेमिसाल ताकत रखता है बल्कि साथ ही साथ इसके लो इंफ्रारेड सिग्नेचर्स दुश्मन की गर्मी खोजने वाली मिसाइलों को भी अंधा बना देगा। योजना यहां पर बिल्कुल साफ है। मतलब प्लान बिल्कुल साफ है। पहले नौ प्रोडक्ट टाइप बनाए जाएंगे और उसके बाद फिर से अपग्रेड कर कर 140 किटन तक इसे लिया जाएगा जो आगे चलकर हमारे सिक्स्थ जनरेशन विमानों की रीड बनेगा। अब आप यहां पर कहेंगे कि हमें इतनी ज्यादा जल्दी क्यों हो रही है? तो जवाब है क्योंकि सीमा पार चीन बैठा है और चीन के पास जे 20 स्टील फाइटर हैं जिसमें से उसका जो 180 किलो वाला न्यूटन वाला WS15 इंजन लगा है। चीन ने रूस से टेक्नोलॉजी चुरा ली है। रिवर्स इंजीनियरिंग की है और साथ ही साथ आज लद्दाख बॉर्डर पर तैनात भी हैं। ईरान इजराइल युद्ध ने भी पूरी दुनिया को यहां पर साबित कर दिया है कि जंग में वही हथियार काम आते हैं जिनका सीधा-सीधा रिमोट कंट्रोल आपके खुद के हाथों में होता है। कावेरी प्रोजेक्ट की पुरानी नाकामियों से सीखकर अब भारत ने भी रिएक्टिव नहीं बल्कि साथ ही साथ प्रोएक्टिव तरीके से काम करना शुरू कर दिया है। 15 अगस्त 2026 की वो सुबह जब सीसीएस इस फाइल पर दस्तखत करेगी तो फिर वो सिर्फ और सिर्फ एक इंजन को मंजूरी नहीं दे रही होगी।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>अगस्त, को, भारत, ऐसा, क्या, करने, वाला, है, पता, चलने, पर, चीन-पाक, घबराया, CCS, की, मेज, पर, रखी, कौन, सी, गुप्त, फाइल, पर, मुहर, लगने, वाली, है</media:keywords>
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<title>US Ammo Shortage की खबरों पर भड़के Donald Trump, बोले&#45; जानकारी Leak करने वालों को होगी लंबी जेल</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि ईरान के साथ टकराव के दौरान अमेरिकी सेना का गोला-बारूद का भंडार काफी कम हो गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास गोला-बारूद का &quot;बहुत बड़ा भंडार&quot; है और चेतावनी दी कि जो लोग सेना के भंडार के बारे में जानकारी लीक करेंगे, उन पर मुकदमा चलाया जाएगा और उन्हें लंबी जेल की सजा हो सकती है। ट्रंप की यह टिप्पणी CNN की एक रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें कई सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि ईरान के साथ टकराव के बाद अमेरिकी सैन्य कमांडरों ने कुछ खास तरह के गोला-बारूद, खासकर एयर डिफेंस इंटरसेप्टर के भंडार में भारी कमी को लेकर चिंता जताई थी।इसे भी पढ़ें: वॉशिंगटन के आसमान में Donald Trump पर मंडराया मौत का साया? राष्ट्रपति के हेलिकॉप्टर के सामने अचानक आ गया पैसेंजर प्लेन!ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा अमेरिका के पास गोला-बारूद का बहुत बड़ा भंडार है, खासकर कुछ खास तरह के गोला-बारूद का। इसके अलावा, ज़रूरत के हिसाब से बड़ी मात्रा में इनका उत्पादन किया जा रहा है और अमेरिका भेजा जा रहा है। रक्षा कंपनियां हमारे देश के इतिहास में सबसे ज़्यादा प्लांट और फैक्ट्रियां बना रही हैं। देशद्रोह जैसी बातें लीक करने वालों का पता लगाया जा रहा है। उन्हें लंबी जेल की सजा दिलाने की कोशिश की जाएगी!CNN ने मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी सेना ने अहम मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए अपने इंटरसेप्टर का एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है। साथ ही, सीनियर कमांडरों ने चेतावनी दी है कि पेंटागन के कुछ स्टॉक चिंताजनक स्तर तक कम हो गए हैं।इसे भी पढ़ें: Hormuz पर धरी रह गई अमेरिका की हसरतें, ईरान-ओमान में डील डन!रिपोर्ट के अनुसार, इन्वेंट्री के हालिया आकलन की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने बताया कि युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में अमेरिकी सेना ने अपने &#039;टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस&#039; (THAAD) मिसाइल स्टॉक का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है और संघर्ष के दौरान अपने &#039;पैट्रियट&#039; इंटरसेप्टर का लगभग आधा हिस्सा इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि THAAD स्टॉक में आई इस कमी के पैमाने का खुलासा पहले सार्वजनिक रूप से नहीं किया गया था। &#039;सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़&#039; (CSIS) का अनुमान है कि ईरान के साथ युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के पास लगभग 452 THAAD मिसाइलें और दो सबसे आधुनिक वेरिएंट वाले लगभग 2,200 पैट्रियट इंटरसेप्टर मौजूद थे। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:49 +0530</pubDate>
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<title>Iran के पास कभी नहीं होंगे Nuclear Weapons, बातचीत से गिरेंगे Oil Prices, जेडी वेंस का दावा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुधवार (स्थानीय समय) को ईरान के नेतृत्व को बिखरा हुआ और समझने में मुश्किल बताया। उन्होंने कहा कि तेहरान के साथ बातचीत एक जटिल प्रक्रिया होगी जो &quot;उलझी हुई&quot; हो सकती है और किसी नतीजे तक पहुँचने में कुछ समय लगेगा। साथ ही, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वॉशिंगटन अपने पक्ष में नतीजा पाने के लिए सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक तरीकों का इस्तेमाल करेगा।फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि ईरान के नेतृत्व में आपसी मतभेदों ने समाधान की कोशिशों को मुश्किल बना दिया है। 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के विफल होने के बाद तनाव में कुछ समय की कमी आई थी, जिसके बाद ईरान के साथ फिर से कूटनीतिक बातचीत शुरू हुई है। वेंस ने बताया कि ईरान में कुछ गुट संघर्ष खत्म करना चाहते हैं, जबकि दूसरे गुट दुश्मनी जारी रखने पर अड़े हुए हैं।इसे भी पढ़ें: US Ammo Shortage की खबरों पर भड़के Donald Trump, बोले- जानकारी Leak करने वालों को होगी लंबी जेलवेंस ने फॉक्स न्यूज़ से कहा ईरानी लोग बहुत मुश्किल स्वभाव के होते हैं। दूसरी बात, उनका सिस्टम बंटा हुआ है। उनके सिस्टम में कुछ लोग ऐसे हैं जो चाहते हैं कि युद्ध खत्म हो जाए; वहीं कुछ ऐसे कट्टरपंथी भी हैं जो चाहते हैं कि युद्ध जारी रहे। उन्होंने आगे कहा हमारा काम इन हालात को संभालना और अमेरिकी लोगों के साथ-साथ अमेरिका के राष्ट्रपति के लिए भी सबसे अच्छा नतीजा हासिल करना है।इसे भी पढ़ें: Michigan Senate Primary: प्रोग्रेसिव नेता Abdul El-Sayed की जीत पर Donald Trump का बड़ा बयान, बताया GOP के लिए शुभ संकेतवेंस ने कहा कि ईरान के साथ कोई भी समझौता जल्दी नहीं होगा, लेकिन उन्हें भरोसा है कि अमेरिका अपने मकसद पूरे कर लेगा। उन्होंने कहा और मुझे लगता है कि आखिर में हम जिस स्थिति में पहुंचेंगे—हालांकि वहां तक ​​पहुंचने का रास्ता उलझा हुआ होगा और इसमें कुछ समय भी लगेगा—वहां तेल की कीमतें कम हो जाएंगी और कम ही रहेंगी। ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा, और अमेरिका ज़्यादा मज़बूत स्थिति में होगा। उप-राष्ट्रपति ने बातचीत जारी रहने के दौरान ही उसके नतीजों के बारे में कोई राय बनाने से बचने की सलाह दी। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:48 +0530</pubDate>
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<title>Michigan Senate Primary: प्रोग्रेसिव नेता Abdul El&#45;Sayed की जीत पर Donald Trump का बड़ा बयान, बताया GOP के लिए शुभ संकेत</title>
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<description><![CDATA[ प्रोग्रेसिव उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद ने मिशिगन में US सीनेट के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी का नॉमिनेशन हासिल कर लिया है। उन्होंने पार्टी के स्थापित धड़े (एस्टेब्लिशमेंट) के समर्थन वाली प्रतिनिधि हेली स्टीवंस को एक कड़े मुकाबले वाले प्राइमरी चुनाव में हराया। यह जीत पार्टी के प्रोग्रेसिव धड़े के लिए एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। अल-सईद की जीत को डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर प्रोग्रेसिव नेताओं के लिए एक बड़ा बढ़ावा माना जा रहा है, क्योंकि पब्लिक हेल्थ के पूर्व अधिकारी रहे अल-सईद एक ऐसे कड़े मुकाबले से जीतकर आए हैं, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा और जिसमें बाहरी समूहों ने भारी खर्च किया। इस नतीजे पर प्रतिक्रिया देते हुए US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका स्वागत किया और इसे रिपब्लिकन के लिए बहुत अच्छी खबर बताया।ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में अल-सयद की जीत को रिपब्लिकन के लिए फ़ायदेमंद बताया। उन्होंने डेमोक्रेटिक प्राइमरी को कम्युनिस्ट लूज़र कहा और कहा कि उनकी जीत से डेमोक्रेट्स की &quot;पागलपन भरी नीतियां&quot; और खराब हो जाएंगी।इसे भी पढ़ें: Hormuz पर धरी रह गई अमेरिका की हसरतें, ईरान-ओमान में डील डन!ट्रंप ने कहा रिपब्लिकन पार्टी के लिए बहुत अच्छी खबर है। अल-सयद, एक कम्युनिस्ट लूज़र जो यहूदियों और इज़राइल से नफ़रत करता है, सोशलिस्ट के साथ अपनी दौड़ में संभावित विजेता है। हमेशा की तरह, इस मामले में भी पोल (सर्वे) काफ़ी गलत साबित हुए। उससे इतने अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद नहीं थी, जितना उसने किया। अब, डेमोक्रेट्स की पागलपन भरी नीतियां और भी खराब हो जाएंगी!इसे भी पढ़ें: US Ammo Shortage की खबरों पर भड़के Donald Trump, बोले- जानकारी Leak करने वालों को होगी लंबी जेलपोलिटिको के अनुसार, अल-सयद ने स्टीवंस को बहुत कम अंतर से हराया। स्टीवंस को डेमोक्रेटिक पार्टी के बड़े नेताओं का समर्थन हासिल था और उन्हें &#039;अमेरिकन इज़राइल पब्लिक अफ़ेयर्स कमेटी&#039; (AIPAC) द्वारा रिकॉर्ड 32 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च किए जाने का फ़ायदा भी मिला था। नतीजा कुछ प्रगतिशील समूहों की उम्मीद से ज़्यादा करीबी था, क्योंकि पहले के पोल में अल-सयद को काफ़ी बढ़त बनाए हुए दिखाया गया था। हालाँकि, उनकी जीत मौजूदा चुनावी दौर में प्रगतिशील आंदोलन के लिए सबसे बड़ी जीतों में से एक है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:48 +0530</pubDate>
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<title>Sri Lanka के Delft Island के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ Indian Trawler, 11 मछुआरों को बचाने के लिए Rescue Operation जारी</title>
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<description><![CDATA[ श्रीलंका के समुद्री इलाके में 11 क्रू मेंबर वाली एक भारतीय मछली पकड़ने वाली नाव दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसके बाद श्रीलंकाई नौसेना ने बचाव अभियान चलाया। नौसेना ने बताया कि ट्रॉलर कथित तौर पर इंटरनेशनल मैरीटाइम बाउंड्री लाइन पार करके श्रीलंका के समुद्री इलाके में आ गई थी और दुर्घटना से पहले कथित तौर पर &#039;बॉटम ट्रॉलिंग&#039; कर रही थी। यह नाव श्रीलंका के मुख्य भू-भाग के उत्तरी तट के पास पाक जलडमरूमध्य में डेल्फ़्ट द्वीप (जिसे नेदुनथीवु भी कहा जाता है) के पास एक तटीय चट्टान पर फंस गई। श्रीलंकाई नौसेना ने बताया कि यह घटना बुधवार को हुई और मछुआरों को कोई तत्काल खतरा नहीं था। श्रीलंकाई नौसेना के प्रवक्ता कमांडर चमिंडा वालाकुलुगे ने कहा कि भारतीय जहाज श्रीलंकाई समुद्री सीमा में गैर-कानूनी मछली पकड़ने की गतिविधियों में शामिल था, तभी यह हादसा हुआ। श्रीलंकाई नौसेना ने एक बयान में कहा, &quot;रीफ (चट्टान) से टकराने के कारण ट्रॉलर के ढांचे को कुछ नुकसान पहुंचा है।इसे भी पढ़ें: ट्रंप की कसम, ईरान को मिटा देंगे, अब अमेरिका करेगा भयंकर बमबारीहालांकि, नौसेना ने यह भी कहा कि स्थिति गंभीर नहीं है और मछुआरों को कोई तत्काल खतरा नहीं है। उन्होंने बताया कि भारतीय मछुआरों की मदद के लिए बचाव दल भेजे गए हैं। बयान में आगे कहा गया इस घटना के संबंध में आगे की कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार की जा रही है। भारत और श्रीलंका के बीच मछुआरों का मुद्दा हमेशा से विवाद का विषय रहा है। श्रीलंकाई नौसेना पर पाक जलडमरूमध्य (Palk Strait) में भारतीय मछुआरों पर गोलीबारी करने और श्रीलंकाई समुद्री सीमा में कथित तौर पर घुसने के आरोप में उनकी नावें ज़ब्त करने के कई मामले सामने आए हैं। पाक जलडमरूमध्य, जो तमिलनाडु को श्रीलंका से अलग करता है, दोनों देशों के मछुआरों के लिए मछली पकड़ने का एक समृद्ध क्षेत्र है। अक्सर दोनों तरफ के मछुआरे अनजाने में एक-दूसरे की समुद्री सीमा में चले जाते हैं और गिरफ्तार कर लिए जाते हैं। इसे भी पढ़ें: Hezbollah के ठिकानों पर IDF का बड़ा प्रहार, Southern Lebanon में तबाह किया ईरान समर्थित Tunnel Networkकुल मिलाकर, इस घटना में 11 क्रू मेंबर वाला एक भारतीय ट्रॉलर शामिल था जो श्रीलंका के समुद्री इलाके में फंसकर ज़मीन से टकरा गया और उसे कुछ नुकसान पहुंचा, जिसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया; साथ ही, इस मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाएं भी चल रही हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:47 +0530</pubDate>
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<title>UK Police से ज़मानत लेकर फरार Grooming Gang का आरोपी, Rushkar Ahmed अब PoK Assembly में बैठेगा</title>
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<description><![CDATA[ लंदन के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों &#039;द गार्डियन&#039; और &#039;द टाइम्स&#039; की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हुए विधानसभा चुनावों में एक बेहद विवादित चेहरे की जीत दर्ज की गई है। 1990 के दशक में ब्रिटेन के मैनचेस्टर में सक्रिय रहे एक चर्चित &#039;ग्रूमिंग गैंग&#039; के आरोपी और पूर्व मंत्री रुश्कर अहमद को पीओके असेंबली के लिए चुन लिया गया है। 62 वर्षीय रुश्कर अहमद पर यूके में बच्चों के यौन शोषण, बलात्कार और मानव तस्करी से जुड़े गंभीर आरोप हैं, और वह वर्तमान में इस मामले में यूके पुलिस की जमानत पर बाहर है।इसे भी पढ़ें: वो हमें चुन चुन कर मार रहे हैं...पहली बार हनुमान का नाम लेकर आतंकी ने खोला भारत का राज!54% मतों के साथ हासिल की जीत27 जुलाई को हुए पीओके चुनावों के पहले चरण में अहमद ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) के टिकट पर मीरपुर-IV (LA-4) निर्वाचन क्षेत्र से किस्मत आजमाई थी। &#039;द गार्डियन&#039; की रिपोर्ट के मुताबिक, अहमद ने इस सीट पर कुल पड़े वोटों का 54% हिस्सा हासिल कर शानदार जीत दर्ज की। वर्ष 2021 के चुनावों में इसी सीट पर मिली शिकस्त के बाद, यह पिछले पांच वर्षों में पहला मौका है जब वह किसी निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। एक गंभीर आपराधिक मामले में घिरे व्यक्ति का जन-प्रतिनिधि के रूप में चुना जाना अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद का विषय बन गया है।इसे भी पढ़ें: Imran Khan की रिहाई पर अड़ी PTI: 27 सितंबर को Islamabad March का ऐलान, सुहैल अफरीदी की चेतावनीअहमद इससे पहले 2006 और 2021 के बीच POK की कई सरकारों में मंत्री रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने राजस्व, व्यापार, उद्योग, पशुपालन और बिजली विकास संगठन जैसे कई विभागों की जिम्मेदारी संभाली। पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (POK) में तथाकथित विधानसभा के चुनाव 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच तीन चरणों में हो रहे हैं। PML-N अभी आगे चल रही है और उसने 53 सदस्यों वाली विधानसभा में 24 सीटें हासिल की हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने तथाकथित स्थानीय चुनावों को पूरी तरह से दिखावा बताया है। मंत्रालय ने PoK में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ़ इस्लामाबाद की कार्रवाई का हवाला दिया है, जिसमें खबरों के मुताबिक कम से कम 90 लोगों की जान गई है।इसे भी पढ़ें: Pakistan में कुछ बड़ा होने वाला है? विदेशी मीडिया पर बैन, बाहर जाने के लिए पत्रकारों को लेना होगा NOCरुश्कर अहमद को 2024 में UK में गिरफ़्तार किया गया, बाद में ज़मानत पर रिहा कर दिया गयाद गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस (GMP) ने 18 जुलाई, 2024 को मैनचेस्टर एयरपोर्ट पर अहमद को रेप और बच्चों की तस्करी के शक में गिरफ़्तार किया। ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस (GMP) के डिटेक्टिव्स ने अहमद से कम से कम दो महिलाओं के आरोपों के बारे में पूछताछ की। इन महिलाओं का दावा है कि 1990 के दशक में जब वे मैनचेस्टर के रुशोलम इलाके में केयर होम्स में रह रही थीं और कमज़ोर स्थिति में थीं, तब अहमद ने उनका रेप किया और उनकी तस्करी की। अहमद की गिरफ़्तारी और पूछताछ, बच्चों के साथ पुराने समय में हुए यौन शोषण के कई आरोपों की GMP की बड़ी जांच का हिस्सा थी। इन आरोपों का संबंध कथित &#039;ग्रूमिंग गैंग&#039; से है, जिससे अहमद भी जुड़ा हुआ है। हालांकि, GMP पुलिस अहमद पर आरोप तय नहीं कर पाई और उसके ख़िलाफ़ आरोपों की जांच अभी भी चल रही है। पूछताछ के बाद उसे ज़मानत पर रिहा कर दिया गया। &#039;द टाइम्स&#039; की रिपोर्ट के अनुसार, GMP की इस बड़ी जांच में अब तक 22 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है।अहमद ज़मानत की शर्तों के तहत पेश नहीं हुआ, PoK में प्रचार करते देखा गयारुश्कर अहमद को पिछले महीने जुलाई में मैनचेस्टर के एक पुलिस स्टेशन में ज़मानत के सिलसिले में पेश होना था, लेकिन वह नहीं पहुँचा। उसने अधिकारियों को बताया कि वह &quot;इतना बीमार था कि UK के लिए उड़ान नहीं भर सकता था। इसी दौरान, सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आए जिनमें अहमद को PoK के मीरपुर में तथाकथित चुनावों से पहले चुनावी रैलियों में सक्रिय रूप से प्रचार करते हुए देखा गया। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:46 +0530</pubDate>
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<title>Deep Strike: Russia के अंदर 1300km दूर Ukraine का बड़ा हमला, Zelenskyy ने मांगी और Patriot Missiles</title>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन ने कहा कि उसने रात भर चले हमलों में रूस के अंदर मौजूद तेल ठिकानों पर हमला किया। कीव मॉस्को की युद्ध-कालीन अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाने और क्रेमलिन पर दबाव बनाने की कोशिशें जारी रखे हुए है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेनी सेना ने काला सागर में रूसी मिलिट्री पेट्रोल बोट्स और मॉस्को के तथाकथित &#039;शैडो फ्लीट&#039; (गुप्त बेड़े) के जहाजों पर भी हमला किया; इन जहाजों का इस्तेमाल तेल निर्यात पर पश्चिमी देशों की पाबंदियों से बचने के लिए किया जाता था। अधिकारियों ने बताया कि इसी दौरान, रात भर यूक्रेन पर हुए रूसी हमलों में कम से कम तीन आम नागरिकों की मौत हो गई और 22 अन्य घायल हो गए। जैसे-जैसे मॉस्को ने ड्रोन, मिसाइल और ग्लाइड बम से हमले तेज़ किए, यूक्रेन ने अपनी एयर डिफेंस (हवाई सुरक्षा) को मज़बूत करने के लिए और ज़्यादा इंटरसेप्टर मिसाइलों की मांग फिर से तेज़ कर दी है; अधिकारियों का कहना है कि एयर डिफेंस सिस्टम पर बहुत ज़्यादा दबाव है।इसे भी पढ़ें: रूस के खिलाफ Zelenskyy का बड़ा दांव, यूरोप की सुरक्षा के लिए FREYJA Anti-Ballistic Shield का किया ऐलानज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर बताया कि यूक्रेनी सेना ने बशकोर्तोस्तान में एक रिफाइनरी पर हमला किया, जो पूर्वी यूक्रेन में फ्रंट लाइन से 1,300 किलोमीटर से ज़्यादा दूर है, और यारोस्लाव क्षेत्र में एक और रिफाइनरी पर हमला किया, जो यूक्रेनी सीमा से लगभग 700 किलोमीटर दूर है। उन्होंने ब्लैक सी में निशाना बने जहाजों या हुए नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। बार-बार हो रहे इन हमलों से रूस में ईंधन की कमी हो गई है और वहां के लोग परेशान हैं, जबकि यूक्रेन का हौसला बढ़ा है क्योंकि वह लगातार रूसी हमलों का सामना कर रहा है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी एयर डिफेंस ने रात भर में कई रूसी इलाकों के साथ-साथ गैर-कानूनी रूप से कब्ज़े में लिए गए क्रीमिया और काला सागर व आज़ोव सागर के ऊपर 605 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए।इसे भी पढ़ें: Kyiv पर Russia missile attack में 17 लोगों की मौत, Zelenskyy ने मांगी और एयर डिफेंस सिस्टमइस बीच, मॉस्को की सेनाओं ने पूरे यूक्रेन में नए हमले किए। यूक्रेन की वायु सेना ने बताया कि रूस ने बुधवार से गुरुवार के बीच चार मिसाइलें और 101 लंबी दूरी तक मार करने वाले ड्रोन दागे, और एयर डिफेंस सिस्टम ने 66 ड्रोन को मार गिराया या जाम कर दिया। शहर के मिलिट्री एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख विटाली काराबानोव के अनुसार, उत्तर-पूर्वी खार्किव इलाके के बालाक्लिया में तीन लोगों की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि पहला हमला एक घर पर हुआ, जिसमें एक महिला की मौत हो गई और आग लग गई, जबकि दूसरे हमले में एक अन्य घर के पास एक पुरुष और एक महिला की मौत हो गई। नेशनल पुलिस ने बताया कि पड़ोसी सुमी इलाके में रूसी ग्लाइड बमों से 12 लोग घायल हो गए। रीजनल मिलिट्री एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख ओलेह ग्रिगोरोव ने कहा कि हमले वाली जगहों के पास अपार्टमेंट बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा और सैकड़ों खिड़कियां टूट गईं। दक्षिणी खेरसॉन इलाके में, स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि खेत में काम करने वाले मजदूरों को ले जा रही एक बस पर रूसी ड्रोन से हमला हुआ, जिसमें छह लोग घायल हो गए। दक्षिण-पूर्वी शहर ज़ापोरिज्जिया में, रीजनल एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख इवान फेडोरोव ने बताया कि रूसी ड्रोन ने एक रिहायशी इलाके में हमला किया, जिससे चार लोग घायल हो गए। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:46 +0530</pubDate>
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<title>Strait of Hormuz पर Iran&#45;Oman के बीच ऐतिहासिक समझौता, US Sanctions के बीच क्या बदलेगी दुनिया की सूरत?</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने कहा है कि वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर ओमान के साथ एक समझौते का मसौदा तैयार करने के अंतिम चरण में है। वहीं, गुरुवार को ईरान युद्ध और व्यापक मध्य पूर्व से जुड़ी हालिया घटनाओं के तहत लेबनान में दो इज़राइली सैनिक मारे गए। सूडान में चल रहे युद्ध से यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल, प्राचीन मेरो पिरामिड (Meroe pyramids) को खतरा पैदा हो गया है, क्योंकि वहां संरक्षण का काम पूरी तरह से रुक गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बुधवार को कहा कि ओमान के साथ &#039;स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़&#039; (होर्मुज़ जलडमरूमध्य) को लेकर एक समझौता तैयार करने का काम &quot;आखिरी चरण&quot; में है। उन्होंने कहा कि अगर &quot;कुछ पक्ष इस प्रक्रिया में रुकावट नहीं डालते हैं&quot; तो एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा; उनका इशारा साफ़ तौर पर अमेरिका की ओर था। यह समझौता इस बात पर निर्भर कर सकता है कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाता है या नहीं। यह जलडमरूमध्य दुनिया भर में शिपिंग और ऊर्जा की सप्लाई के लिए बहुत अहम है। फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों से शुरू हुई जंग से पहले, दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और प्राकृतिक गैस फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित इसी जलमार्ग से होकर गुज़रता था। गुरुवार को आगे क्या होता है, इस पर सबकी नज़रें अमेरिका पर टिकी थीं।इसे भी पढ़ें: Iran के पास कभी नहीं होंगे Nuclear Weapons, बातचीत से गिरेंगे Oil Prices, जेडी वेंस का दावासूडान में अप्रैल 2023 में शुरू हुआ संघर्ष खार्तूम से लगभग 200 किलोमीटर उत्तर में स्थित मेरोए पिरामिडों के लिए खतरा बन गया है। इस जगह पर 200 से ज़्यादा पिरामिड हैं, जिन्हें 800 ईसा पूर्व और 350 ईस्वी के बीच कुश साम्राज्य के शाही मकबरों के तौर पर बनाया गया था; यह जगह अपनी खास कोणीय बनावट (आर्किटेक्चर) के लिए जानी जाती है। युद्ध ने सूडान की कई ऐतिहासिक जगहों और संग्रहालयों को नुकसान पहुँचाया है, और यूनेस्को ने अप्रैल में चेतावनी दी थी कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों पर खतरा बढ़ रहा है। पुरातत्वविद् महमूद सुलेमान ने कहा कि मेरोए में पिरामिडों के ढहने की आशंका है।इसे भी पढ़ें: US Ammo Shortage की खबरों पर भड़के Donald Trump, बोले- जानकारी Leak करने वालों को होगी लंबी जेलगुरुवार को हुई ताज़ा घटनाओं में मुख्य रूप से ओमान के साथ ईरान के प्रस्तावित &#039;स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़&#039; समझौते, लेबनान में दो इज़राइली सैनिकों की मौत और सूडान के मेरो पिरामिडों पर बढ़ते ख़तरे को लेकर नई चिंता शामिल रही, क्योंकि युद्ध के कारण वहाँ की धरोहर वाली जगहों को ख़तरा बना हुआ है।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:45 +0530</pubDate>
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<title>North Korea का शक्ति प्रदर्शन: Kim Jong Un ने दागी Ballistic Missile, US और Japan के साथ दक्षिण कोरिया अलर्ट पर</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार, उत्तर कोरिया ने गुरुवार को अपने पूर्वी तट के पास समुद्र की ओर एक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागी। यह इस साल प्योंगयांग द्वारा किए गए हथियारों के परीक्षणों की श्रृंखला में नवीनतम है। दक्षिण कोरिया ने बताया कि उसने शाम करीब 5 बजे पूर्वी तटीय शहर वॉनसन से मिसाइल लॉन्च का पता लगाया। जापान के रक्षा मंत्रालय ने भी कहा कि उत्तर कोरिया ने संभवतः एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी है, और साथ ही यह भी कहा कि जापान या उसके आसपास इसका कोई असर नहीं हुआ। एक बयान में, दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ़ स्टाफ़ ने कहा कि मिसाइल लॉन्च के बाद सेना ने अपनी निगरानी बढ़ा दी है और वह अमेरिका और जापान के साथ मिलकर काम कर रही है।इसे भी पढ़ें: India Bhutan China Tri-Junction पर भारत की नई रणनीति ने किया हैरान, Doklam तक पहुँचेगी रेल, चीन के छूटे पसीने2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ नेता किम जोंग उन की अहम बातचीत नाकाम होने के बाद से ही उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल हथियारों के भंडार को बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। जानकारों का कहना है कि किम उत्तर कोरिया को परमाणु शक्ति संपन्न देश के तौर पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाना चाहते हैं, ताकि वे देश पर लगे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों को हटवा सकें। पिछले महीने, किम ने 5,000 टन वज़न वाले एक नए डिस्ट्रॉयर पर परमाणु क्षमता वाली क्रूज़ मिसाइल और दूसरे हथियारों के परीक्षण की देखरेख की। कई सालों तक बैलिस्टिक मिसाइल बनाने को प्राथमिकता देने के बाद, अब उन्होंने अपना ध्यान नौसेना की क्षमताओं को बढ़ाने पर केंद्रित किया है, जिसमें परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी बनाना भी शामिल है।इसे भी पढ़ें: Assam में बाढ़ राहत कार्य के बाद अपने हेल्पर के गांव पहुंचे Randeep Hooda, नगालैंड बॉर्डर को देखकर बोले- &#039;यह तो धरती पर स्वर्ग है&#039;फरवरी में वर्कर्स पार्टी की कांग्रेस में किम ने पानी के नीचे से लॉन्च होने में सक्षम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों की भी मांग की। हाल के वर्षों में, उन्होंने रूस के साथ उत्तर कोरिया के संबंधों को भी मज़बूत किया है; उत्तर कोरिया ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस की लड़ाई में मदद के लिए पारंपरिक हथियार और सैनिक भी उपलब्ध कराए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:45 +0530</pubDate>
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<title>Hiroshima परमाणु हमले की 81वीं बरसी पर मेयर Kazumi Matsui ने परमाणु हथियारों की होड़ की निंदा की</title>
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<description><![CDATA[ जापान के हिरोशिमा शहर में अमेरिका द्वारा किए गए परमाणु बम हमले की बृहस्पतिवार को 81वीं बरसी मनाई गई। इस अवसर पर शहर के महापौर काजुमी मात्सुई ने प्रमुख शक्तियों द्वारा युद्ध का सहारा लेने की आलोचना की और परमाणु हथियारों को प्रतिरोधक क्षमता के साधन के रूप में उचित ठहराने की प्रवृत्ति समाप्त करने का आह्वान किया। हिरोशिमा शांति स्मारक पार्क में आयोजित समारोह में अपने शांति संदेश में मात्सुई ने कहा कि परमाणु हथियारों की अमानवीयता को कम करके आंकना और अपनी समृद्धि के लिए बल प्रयोग को स्वीकार करना हिंसक प्रतिशोध के ऐसे चक्र को जन्म दे सकता है, जिसका अंत एक और हिरोशिमा या नागासाकी जैसी त्रासदी में हो सकता है।इसे भी पढ़ें: परमाणु हथियारों के प्रतिबंध की वकालत करती है हिरोशिमा त्रासदीउन्होंने कहा कि आज भी अनेक राजनीतिक नेता परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को व्यावहारिक नीति मानते हैं और हिंसा को वैध ठहराते हैं। उनके अनुसार, इससे परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व का लक्ष्य और दूर होता जा रहा है। उन्होंने लोगों से अतीत से सीख लेकर शांति के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की अपील भी की।समारोह में अमेरिका और ईरान सहित लगभग 120 देशों और क्षेत्रों के प्रतिनिधियों समेत करीब 50,000 लोगों ने भाग लिया। सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर, जब वर्ष 1945 में अमेरिकी बी-29 बमवर्षक विमान ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था, उसी समय घंटी बजाई गई और दो मिनट का मौन रखा गया। प्रधानमंत्री बनने के बाद सानाए ताकाइची ने पहली बार इस स्मृति समारोह में भाग लिया।इसे भी पढ़ें: BJD ने Odisha में Nuclear Power Plant प्रस्ताव का विरोध किया, सुरक्षा पर उठाए सवालउन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने संबंधी संयुक्त राष्ट्र की संधि के ढांचे के भीतर वह ऐसे विश्व के निर्माण के लिए ‘‘व्यावहारिक दृष्टिकोण’’ अपनाएंगी, जहां परमाणु हथियारों का कभी इस्तेमाल न हो। यह समारोह ऐसे समय आयोजित हुआ है, जब यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का समर्थन करने वाली ताकाइची सरकार इस वर्ष के अंत में नई सुरक्षा एवं रक्षा नीति तैयार करते समय जापान के युद्धोत्तर तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों में ढील दे सकती है। परमाणु बम हमले के जीवित बचे लोगों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, जिसमें जापान भी शामिल है, के बीच प्रतिरोधक क्षमता के नाम पर परमाणु हथियार रखने के बढ़ते समर्थन पर चिंता और निराशा व्यक्त की है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:44 +0530</pubDate>
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<title>Shehbaz Sharif तीन दिवसीय यात्रा पर Saudi Arabia जाएंगे, रक्षा संबंधों पर होगी वार्ता</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से बृहस्पतिवार से तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सऊदी अरब जाएंगे। पाकिस्तान ने पिछले सप्ताह कहा था कि वह 18 जून को हस्ताक्षरित ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ के तहत अमेरिका और ईरान को फिर से वार्ता की मेज पर लाने के लिए ‘‘हरसंभव प्रयास’’ कर रहा है। शरीफ छह से आठ अगस्त तक होने वाली इस यात्रा के लिए एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।विदेश कार्यालय (एफओ) ने ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि प्रतिनिधिमंडल में फील्ड मार्शल मुनीर के अलावा उप प्रधानमंत्री इशाक डार और अन्य केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। डार उप प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ विदेश मंत्री भी हैं। वह यरुशलम पर आयोजित एक मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेने के बाद जॉर्डन की यात्रा पूरी करके पहले ही सऊदी अरब पहुंच चुके हैं।विदेश कार्यालय ने कहा कि वह वहीं प्रधानमंत्री के प्रतिनिधिमंडल में शामिल होंगे। बयान में कहा गया, ‘‘यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री शरीफ सऊदी अरब के युवराज और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात करेंगे। वार्ता में पाकिस्तान-सऊदी अरब द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने तथा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से जुड़े साझा हितों के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा।’’ पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने कहा कि यह यात्रा पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच दशकों पुराने आपसी विश्वास, सहयोग और भाईचारे पर आधारित दीर्घकालिक साझेदारी को दर्शाती है।उसने कहा, ‘‘हालांकि यह यात्रा खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव के बीच हो रही है, लेकिन इसका महत्व मौजूदा संकट और अल्पकालिक परिस्थितियों से कहीं अधिक है। इससे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे, रणनीतिक सहयोग गहरा होगा, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर समन्वय बढ़ेगा तथा बहुपक्षीय सहयोग को भी मजबूती मिलेगी।’’ यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया का संघर्ष कई मोर्चों तक फैल गया है, जिसके चलते खाड़ी देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा समन्वय बढ़ाने की दिशा में कदम तेज किए हैं। इससे पहले 30 जुलाई को सऊदी अरब ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले वाणिज्यिक समुद्री मार्गों और महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा के लिए बहुराष्ट्रीय समुद्री रक्षा गठबंधन (एमएमडीसी) का प्रस्ताव रखा था।खबरों के अनुसार, पाकिस्तान सहित 14 देशों ने इस पहल का समर्थन किया, जिससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री गलियारों में से एक की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं का संकेत मिला। इस्लामाबाद ने साथ ही सऊदी अरब की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और लाल सागर तथा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से वैध समुद्री व्यापार के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया। पाकिस्तान और सऊदी अरब ने पिछले वर्ष रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करके अपने रक्षा संबंधों को और मजबूत किया था।यह समझौता इस वर्ष की शुरुआत में प्रभावी हुआ। इस समझौते का क्रियान्वयन ऐसे समय शुरू हुआ, जब पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच संवाद को बढ़ावा देने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा था। इसे इस्लामाबाद की सऊदी अरब के साथ अपनी करीबी रणनीतिक साझेदारी बनाए रखने और साथ ही तेहरान के साथ संवाद के रास्ते खुले रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।रक्षा ढांचे के तहत पाकिस्तान ने संयुक्त प्रशिक्षण, रक्षा सहयोग और सऊदी अरब की सुरक्षा आवश्यकताओं के समर्थन के लिए सैन्य कर्मियों और विमान भी वहां तैनात किए हैं। पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए वित्तीय सहायता के मामले में भी सऊदी अरब पर निर्भर है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:43 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिका की अदालत का बड़ा फैसला: युवाओं को नुकसान पहुंचाने के मामले में Meta पर $56.7 करोड़ का जुर्माना</title>
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<description><![CDATA[ इंस्टाग्राम और फेसबुक की मूल कंपनी मेटा (Meta) को युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के मामले में एक बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के न्यू मेक्सिको की एक अदालत ने मेटा को अपने सोशल मीडिया मंचों के दुष्परिणामों से निपटने के लिए 56.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹4,700 करोड़ से अधिक) का भुगतान करने का आदेश दिया है। न्यायाधीश ब्रायन बीडशाइड ने बृहस्पतिवार देर रात यह फैसला सुनाया। फैसले के अनुसार, इस भारी राशि का सबसे बड़ा हिस्सा यानी 42 करोड़ डॉलर युवाओं के मानसिक उपचार से जुड़ी सेवाओं पर खर्च किया जाएगा। वहीं, शेष राशि अगले पांच वर्षों में बाल सुरक्षा, जागरूकता, रोकथाम और जांच सेवाओं पर लगाई जाएगी।इसे भी पढ़ें: FCRA Amendment Bill 2026 | द्रमुक सांसद पी. विल्सन और ईसाई नेताओं ने गृह मंत्री अमित शाह से की मुलाकात, कानून वापस लेने की मांगमुकदमे के पहले चरण में अदालत ने मेटा पर 37.5 करोड़ डॉलर का दीवानी जुर्माना लगाया था। अदालत ने माना था कि कंपनी ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया और अपने मंचों पर बच्चों के यौन शोषण के बारे में उपलब्ध जानकारी छिपाई।
अभियोजकों ने मुकदमे के दूसरे चरण में न्यायाधीश से मेटा के कामकाज में बुनियादी बदलाव करने का आदेश दिए जाने का अनुरोध किया था। इन बदलावों का उद्देश्य लोगों को लत लगाने वाले ‘फीचर’ पर अंकुश लगाना, उम्र के सत्यापन की व्यवस्था में सुधार करना और स्वतः लागू होने वाली निजता संबंधी व्यवस्थाओं तथा कड़ी निगरानी के जरिये बच्चों के यौन शोषण को रोकना था।इसे भी पढ़ें: पिता की कब्र के पास दफनाया जाएगा अतीक अहमद का लाडला, सड़क हादसे में हुई दर्दनाक मौत
अदालत ने कहा कि बच्चों की निजता से संबंधित संघीय कानून मेटा को 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए आयु सत्यापन उपकरण लागू करने से रोकते हैं।
अदालत ने कहा कि बाल ऑनलाइन निजता संरक्षण अधिनियम यानी ‘सीओपीपीए’ के कारण वह मेटा को बच्चों से निजी जानकारी देने या आयु सत्यापन के उद्देश्य से इंटरनेट पर उनकी गतिविधियों पर स्वतः नजर रखने के लिए कहने का आदेश नहीं दे सकती।
अदालत ने यह भी कहा कि बच्चों की उम्र सत्यापित करने का आदेश केवल मेटा को देना और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों को इससे बाहर रखना कंपनी के लिए ‘‘अनुचित और अत्यधिक नुकसानदेह’’ होगा।Stay updated with International
News in Hindi on Prabhasakshi  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:43 +0530</pubDate>
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<title>Boston में 9 अगस्त को होगी International India Day Parade, जुटेंगे हजारों लोग</title>
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<description><![CDATA[ योषिता सिंह
न्यूयॉर्क, सात अगस्त बोस्टन में भारतीय-अमेरिकी समुदाय भारत के स्वतंत्रता दिवस को पूरे उत्साह के साथ मनाने की तैयारियों में जुटा हुआ है। इस अवसर पर भव्य परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जो भारत और अमेरिका के बीच मजबूत साझेदारी को भी प्रदर्शित करेंगे। ‘फाउंडेशन ऑफ इंडियन-अमेरिकन्स’ (एफआईए)- न्यू इंग्लैंड द्वारा नौ अगस्त को बोस्टन में 5वीं ‘इंटरनेशनल इंडिया डे परेड’ आयोजित की जाएगी।इसे न्यू इंग्लैंड क्षेत्र में भारत के स्वतंत्रता दिवस, उसकी सांस्कृतिक विरासत और भारत-अमेरिका की स्थायी मित्रता के सबसे बड़े आयोजनों में से एक माना जाता है। एफआईए-न्यू इंग्लैंड ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा कि भारत की स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित इस वर्ष की परेड का विषय ‘स्वतंत्रता का उत्सव एवं अमेरिका-भारत मित्रता’ रखा गया है। परेड में 15 आकर्षक झांकियां शामिल होंगी।इसके साथ ही एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न सामुदायिक संगठनों, पूर्व सैनिकों, आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों और न्यू इंग्लैंड के भारतीय-अमेरिकी समुदाय की विविधता का प्रतिनिधित्व करने वाले हजारों लोगों की भागीदारी होगी। इस समारोह के ग्रैंड मार्शल कर्नल इंदर प्रीत सिंह (युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित पूर्व सैनिक) और अमेरिकी नौसेना की खुफिया विशेषज्ञ मैगी लेहमन होंगे। उन्हें देश की सेवा और राष्ट्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए सम्मानित किया जाएगा।इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बोस्टन में भारत के पहले महावाणिज्यदूत रघुराम शास्त्री होंगे। उनकी उपस्थिति भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और न्यू इंग्लैंड में तेजी से बढ़ते भारतीय-अमेरिकी समुदाय के समर्थन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतीक है। एफआईए-न्यू इंग्लैंड के कार्यकारी निदेशक दीपक राठौर ने कहा कि इस वर्ष की परेड अब तक का सबसे बड़ा और सबसे रंगारंग आयोजन होगा, जिसमें स्वतंत्रता, लोकतंत्र, सांस्कृतिक विविधता और भारत-अमेरिका की मजबूत साझेदारी के मूल्यों का उत्सव मनाया जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:42 +0530</pubDate>
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<title>NASA यात्रियों Anil Menon और Jessica Meir ने ISS में spacewalk पूरी कर पावर किट लगाई</title>
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<description><![CDATA[ सागर कुलकर्णी वाशिंगटन, सात अगस्त अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अंतरिक्ष यात्रियों अनिल मेनन और जेसिका मेयर ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर अपनी चहलकदमी सफलतापूर्वक पूरी कर ली। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन के पावर चैनल में तकनीकी उन्नयन किट स्थापित करने का काम किया, जिससे भविष्य में अतिरिक्त सौर पैनल लगाए जा सकेंगे। अंतरिक्ष स्टेशन के उन्नयन की कड़ी में यह 281वीं चहलकदमी थी।यह अंतरिक्ष में जेसिका मेयर की छठी और अनिल मेनन की पहली चहलकदमी थी। चहलकदमी बृहस्पतिवार को भारतीय समयानुसार शाम छह बजकर तीन मिनट पर शुरू हुई और बृहस्पतिवार रात साढ़े 12 बजे समाप्त हुई। मेनन और मेयर ‘क्वेस्ट एयरलॉक’ से बाहर निकले और उन्होंने लगभग छह घंटे 27 मिनट तक अंतरिक्ष स्टेशन की बाहरी संरचना में तकनीकी उन्नयन का कार्य किया।‘क्वेस्ट एयरलॉक’ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) का एक विशेष वायुरुद्ध प्रवेश-निकास कक्ष (एयरलॉक मॉड्यूल) है, जिसके माध्यम से अंतरिक्ष यात्री चहलकदमी के लिए स्टेशन से बाहर निकलते हैं और वापस अंदर आते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य स्टेशन के 3बी पावर चैनल पर ‘माउंटिंग हार्डवेयर’ स्थापित करना था। नासा ने एक बयान में कहा, ‘‘यह कार्य भविष्य में आईआरओएसए (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन रोल-आउट सोलर एरे) नामक नए ‘रोल-आउट’ सौर पैनलों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेगा।इससे अंतरिक्ष स्टेशन को अतिरिक्त बिजली मिलेगी, जो उसकी महत्वपूर्ण प्रणालियों के संचालन और स्टेशन को भविष्य में सुरक्षित एवं नियंत्रित तरीके से कक्षा से बाहर करने में सहायक होगी।’’ वर्ष 2021 से अब तक अंतरिक्ष यात्री छह आईआरओएसए सौर पैनल इकाइयां स्थापित कर चुके हैं। अब केवल दो इकाइयां और लगाई जानी बाकी हैं, जिन्हें इस वर्ष के अंत तक अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचाया जाएगा। चहलकदमी के दौरान कुछ देर के विश्राम में जेसिका मेयर ने कहा, ‘‘अनिल, तुम चंद्रमा को देख सकते हो…, हालांकि मुझे नहीं पता कि तुम किस दिशा में हो।’’ इस पर मेनन ने जवाब दिया, ‘‘मेरी दाहिनी ओर है।हां, मैं उसे देख सकता हूं। जानकारी देने के लिए धन्यवाद। वहां मुझे भविष्य में चंद्रमा का एक आधार (मून बेस) दिखाई दे रहा है।’’ यह इस महीने अंतरिक्ष स्टेशन के ‘एक्सपीडिशन-75’ दल के लिए निर्धारित तीन चहलकदमी में पहली चहलकदमी थी।इसके बाद 13 अगस्त को होने वाली दूसरी चहलकदमी के दौरान दो अंतरिक्ष यात्री स्टेशन के ‘स्पेस-टू-ग्राउंड’ एंटीना को बदलेंगे। यह एंटीना नासा की एक अत्यंत महत्वपूर्ण संचार प्रणाली है, जिसके माध्यम से ह्यूस्टन स्थित मिशन नियंत्रण केंद्र और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बीच डेटा और हाई-स्पीड संचार किया जाता है। फिर 25 अगस्त को होने वाली तीसरी चहलकदमी में दल के सदस्य पावर चैनल की केबलों और डेटा रिले प्रणालियों को जोड़ेंगे।यह कार्य नियमित रखरखाव का हिस्सा है और अंतरिक्ष स्टेशन को भविष्य में कक्षा से सुरक्षित रूप से बाहर लाने की तैयारियों से भी जुड़ा है। नासा के अनुसार, इस अंतरिक्ष चहलकदमी के दौरान अंतरिक्ष यात्री ‘हार्मनी मॉड्यूल’ के अग्र पोर्ट पर स्थित अंतरिक्ष यानों की ‘डॉकिंग’ में उपयोग होने वाले एक ‘नेविगेशन’ सहायक उपकरण को भी बदलेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:42 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump ने US में Birth Tourism रोकने के लिए दो नए आदेशों पर हस्ताक्षर किए</title>
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<description><![CDATA[ सागर कुलकर्णी
वाशिंगटन, सात अगस्त अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में बच्चे को जन्म देकर उसे यहां की नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से विदेशियों के ‘बर्थ टूरिज्म’ (जन्म पर्यटन) के मामलों पर सख्ती करने और जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता पाने के पात्र लोगों की संख्या सीमित करने के लिए दो कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब कुछ सप्ताह पहले उच्चतम न्यायालय ने इस संबंध में ट्रंप के पहले जारी आदेश को खारिज कर दिया था। बृहस्पतिवार को हस्ताक्षरित आदेशों में से एक उन लोगों को निशाना बनाता है जो व्यावसायिक रूप से ‘बर्थ टूरिज्म’ को चुनते हैं और बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका आते हैं।इस आदेश का उद्देश्य ऐसे लोगों की अमेरिका में प्रवेश की सुविधा सीमित करना है। दूसरा आदेश उन लोगों की परिका विस्तार करता है जिन्हें जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता के लिए अयोग्य माना जाएगा। इसमें विदेशी सरकारों की ओर से ‘लॉबिंग’ (पैरवी) करने वाले विदेशी नागरिकों के बच्चों को भी शामिल किया गया है।अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने 30 जून को ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया था जिसमें जन्म के आधार पर नागरिकता समाप्त करने की कोशिश की गई थी। अदालत ने 100 वर्ष से अधिक समय से चली आ रही संवैधानिक व्यवस्था को बरकरार रखते हुए कहा था कि अमेरिका में जन्म लेने वाले लगभग सभी लोग अमेरिकी नागरिक होते हैं। ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ के ‘ओवल ऑफिस’ में इन आदेशों पर हस्ताक्षर करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उच्चतम न्यायालय के 30 जून के फैसले की आलोचना की और कहा कि नया कदम ‘‘कुछ आवश्यक बदलाव करने’’ के लिए उठाया गया है।उन्होंने कहा, ‘‘जन्म के आधार पर नागरिकता के मामले में उच्चतम न्यायालय का फैसला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था इसलिए हम इसमें बदलाव कर रहे हैं।’’
इस दौरान ट्रंप के साथ ‘व्हाइट हाउस’ के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ अधिकारी स्टीफन मिलर, वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर और व्हाइट हाउस स्टाफ सचिव विल शार्फ मौजूद थे। नौ जुलाई 1868 को अनुमोदित अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन ने अमेरिका में जन्मे या कानूनी रूप से नागरिकता प्राप्त करने वाले सभी व्यक्तियों को अमेरिकी नागरिकता प्रदान की थी जिनमें पहले दास रह चुके लोग भी शामिल थे। ट्रंप ने कहा, ‘‘यह प्रावधान गृहयुद्ध के तुरंत बाद बनाया गया था।इसका उद्देश्य दासों के बच्चों को नागरिकता देना था लेकिन अब क्या हो रहा है? लोग इसके आधार पर पूरा कारोबार खड़ा कर रहे हैं।’’
ट्रंप की आप्रवासन विरोधी नीतियों के प्रमुख रणनीतिकार माने जाने वाले स्टीफन मिलर ने कहा कि लोग पर्यटक बनकर अमेरिका आते हैं लेकिन उनका वास्तविक उद्देश्य यहां बच्चा पैदा करना होता है ताकि वह बच्चा स्वतः अमेरिकी नागरिक बन जाए। मिलर ने कहा, ‘‘इस त्रुटिपूर्ण व्यवस्था के कारण ऐसे लोगों को सरकारी कल्याण योजनाओं, भविष्य में मतदान के अधिकार और वे सभी अधिकार एवं विशेषाधिकार मिल जाते हैं जो केवल अमेरिकी नागरिकों के लिए होने चाहिए।’’
इन आदेशों में कई ऐसी श्रेणियां सूचीबद्ध की गई हैं जिनके बच्चों को अमेरिकी नागरिकता से संबंधित दस्तावेज जारी नहीं किए जाने चाहिए।इनमें वे बच्चे शामिल हैं जिनके माता-पिता ने ऐसा व्यावसायिक लेन-देन किया हो, जिसका उद्देश्य गर्भवती महिला को अमेरिका या उसके किसी क्षेत्र में प्रसव कराने के लिए लाना हो। इसके अलावा, आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों के बच्चे, विदेशी सरकारों के कर्मचारियों के बच्चे और अमेरिकी क्षेत्रों में जन्मे ऐसे बच्चे जिन्हें संघीय कानून के तहत नागरिकता नहीं मिलती, उन्हें भी इस सूची में शामिल किया गया है। आप्रवासन विशेषज्ञों ने ट्रंप के इन नए कार्यकारी आदेशों की तीखी आलोचना करते हुए उन्हें असंवैधानिक बताया है।न्यूयॉर्क स्थित आव्रजन मामलों के वकील साइरस मेहता ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया, ‘‘ट्रंप का जन्म के आधार पर नागरिकता से संबंधित नया कार्यकारी आदेश स्पष्ट रूप से असंवैधानिक है। यदि किसी व्यक्ति के माता-पिता ने अमेरिका में बच्चे के जन्म को सुनिश्चित करने के लिए व्यावसायिक लेन-देन किया है, तो उसके आधार पर नागरिकता से इनकार करना 14वें संशोधन का उल्लंघन है।’’
‘माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट’ के अनुसार, सबसे व्यापक जनगणना आधारित अनुमान के मुताबिक हर वर्ष अमेरिका में 22,000 से 26,000 बच्चों का जन्म ‘बर्थ टूरिज्म’ के कारण होता है। हालांकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024 में विदेशी पते वाली माताओं से केवल 9,600 बच्चों का जन्म अमेरिका में हुआ।‘अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन’ ने एक बयान में कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय इस मुद्दे पर पहले ही फैसला दे चुका है कि जन्म के आधार पर नागरिकता अमेरिकी संविधान द्वारा सुनिश्चित की गई है। ऐसा कोई भी कार्यकारी आदेश, जो इस अधिकार पर हमला करने की कोशिश करेगा, उसका भी वही हश्र होगा जो राष्ट्रपति ट्रंप के पिछले आदेश का हुआ था। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:41 +0530</pubDate>
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<title>Houthi Attack Saudi Arabia | सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों का सिलसिलेवार हमला! 4 साल के बच्चे समेत 11 नागरिक घायल</title>
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<description><![CDATA[ यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए सिलसिलेवार हमलों से खाड़ी क्षेत्र में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। सऊदी अरब की सेना के अनुसार, यमन सीमा के पास सऊदी अरब के दक्षिणी नजरान क्षेत्र में हुए हूती हमलों में एक चार वर्षीय बच्चे सहित कम से कम 11 आम नागरिक घायल हो गए हैं। इससे कुछ घंटे पहले ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने मध्य और पूर्वी यमन में उन सिलसिलेवार हमलों की जिम्मेदारी ली थी, जिनमें कम से कम 30 सैनिक मारे गए थे और कम से कम 50 अन्य घायल हुए थे।इसे भी पढ़ें: Delhi में बारिश के दौरान नाले में गिरा व्यक्ति, NDRF का सर्च ऑपरेशन जारी  हूती के एक नेता ने कहा कि इन हमलों में सऊदी अरब समर्थित सैनिकों को निशाना बनाया गया और ‘‘सैकड़ों’’ लोग मारे गए या घायल हुए।
 यमन के अधिकारियों ने बताया कि ये हमले मारिब और हद्रामौत प्रांतों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के सुरक्षा बलों के शिविरों पर किए गए।इसे भी पढ़ें: CGPSC scam: पूर्व IAS जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका खारिज, High Court का सख्त रुख 
 सऊदी अरब की सेना के प्रवक्ता तुर्की अल-मल्की ने कहा कि नजरान में हुए हमले में सऊदी अरब के सात नागरिक, यमन का एक नागरिक तथा मिस्र के दो और पाकिस्तान का एक प्रवासी घायल हुआ। इन घायलों में एक बच्चा भी शामिल है।
 हूती विद्रोहियों ने इस हमले के संबंध में कोई बयान जारी नहीं किया है।सऊदी के नजरान में आम नागरिकों को बनाया निशानासऊदी अरब की सेना के प्रवक्ता तुर्की अल-मल्की ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि नजरान क्षेत्र में हुए इस हमले में घायलों में विभिन्न देशों के नागरिक शामिल हैं:सऊदी नागरिक: 7 लोग (जिनमें एक 4 साल का बच्चा भी शामिल है)मिस्र के प्रवासी: 2 लोगयमन का नागरिक: 1 व्यक्तिपाकिस्तान का प्रवासी: 1 व्यक्तिफिलहाल हूती विद्रोहियों की ओर से नजरान में हुए इस हमले को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। Stay updated with International
News in Hindi on Prabhasakshi ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:41 +0530</pubDate>
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<title>Thailand School Shooting | थाईलैंड के स्कूल में अंधाधुंध गोलीबारी! 15 से ज्यादा छात्र घायल, कई मौतों की आशंका, पुलिस ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन</title>
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<description><![CDATA[ थाईलैंड में शुक्रवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहाँ बैंकॉक के उत्तरी हिस्से में स्थित नोंथाबुरी प्रांत के एक प्रतिष्ठित स्कूल में अचानक गोलीबारी शुरू हो गई। स्थानीय मीडिया और प्रांतीय अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 15 छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जबकि कई अन्य लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। शुरुआती रिपोर्टों से यह भी संकेत मिला कि कई लोगों की मौत हो सकती है, हालांकि हताहतों की सही संख्या की पुष्टि नहीं हुई थी। इसे भी पढ़ें: Jammu and Kashmir | रामबन में सुरक्षा बैरिकेड तोड़कर भागी संदिग्ध स्कॉर्पियो: चेतावनियों और फायरिंग के बावजूद फरार, अमरनाथ यात्रा मार्ग पर हाई अलर्टयह घटना शुक्रवार सुबह बांग क्रुआई जिले के डेबसिरिन नोंथाबुरी स्कूल में हुई। थाई प्रसारक &#039;थाई पीबीएस&#039; ने शुरू में बताया कि गोलीबारी में 10 से 15 लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने कहा कि स्कूल में गोलीबारी करने का संदेह एक छात्र पर है। गोलीबारी की सूचना मिलने के बाद प्लाई बांग पुलिस स्टेशन के अधिकारियों को कैंपस भेजा गया और उन्होंने इलाके को सुरक्षित करने का काम शुरू किया।अधिकारियों ने कहा कि हताहतों की संख्या अभी शुरुआती है क्योंकि बचाव और कार्रवाई का काम चल रहा था। पुलिस ने लोगों से यह भी आग्रह किया कि जब अधिकारी स्थिति को संभाल रहे हों, तो वे घटना की लाइव-स्ट्रीमिंग न करें। इसे भी पढ़ें: PM Modi ने Handloom Day पर हथकरघा उत्पाद खरीदने की अपील की, बुनकरों की मदद का दिया संदेशघायलों की हालत, क्या किसी की मौत की पुष्टि हुई है और गोलीबारी के पीछे का मकसद क्या था, इस बारे में और जानकारी तुरंत उपलब्ध नहीं थी।अधिकारी स्कूल को सुरक्षित करने और घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जांच करने का काम जारी रखे हुए थे।और जानकारी का इंतज़ार है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:46:40 +0530</pubDate>
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<title>‘खेल का मैदान हो, समुद्र तट या घर’: रूस&#45;यूक्रेन युद्ध में बच्चों की मौतें रोकने की पुकार</title>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन पर रूस का आक्रमण जारी है और हाल के सप्ताहों में दोनों देशों ने हवाई व ड्रोन हमले तेज़ किए हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने इन हमलों में बच्चों के मारे जाने और घायल होने पर चिन्ता जताते हुए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:45:57 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन: रूसी हमलों में तेज़ी, जुलाई नागरिकों के लिए सबसे घातक महीना</title>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार, रूसी सेनाओं ने मंगलवार रात कीव और उसके आसपास के इलाक़ों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और लम्बी दूरी के ड्रोन से हमले किए. इनमें कम से कम 17 नागरिक मारे गए, जबकि 44 अन्य घायल हुए. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:45:56 +0530</pubDate>
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<title>DRC: बढ़ते इबोला प्रकोप के बीच नए टीके का परीक्षण शुरू</title>
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<description><![CDATA[ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि इबोला के बुंडिबुग्यो प्रकार के बेहतर उपचार और दुनिया के पहले टीके की दिशा में परीक्षण आगे बढ़ रहे हैं, हालाँकि इनके नतीजे आने में कई महीने लग सकते हैं. इस बीच, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इबोला के अब तक के सबसे बड़े प्रकोप में संक्रमण और मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:45:52 +0530</pubDate>
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<title>ग़ाज़ा: घरों और कक्षाओं पर इसराइली हमलों के बीच आमजन ‘असुरक्षित’</title>
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<description><![CDATA[ मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (OCHA) ने मंगलवार को कहा कि अक्टूबर में इसराइल और हमास के बीच युद्धविराम के बावजूद ग़ाज़ा में आमजन अब भी सुरक्षित नहीं हैं. इसराइली हमलों में घरों, स्कूलों और तिरपाल से बनी अस्थाई कक्षाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:02:00 +0530</pubDate>
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<title>China ने विकसित की टनल बोरिंग मशीन, पहाड़ी इलाकों के लिए है दुनिया की पहली तकनीक</title>
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<description><![CDATA[ (केजेएम वर्मा)
बीजिंग, चार अगस्त चीन ने दुनिया की पहली ‘टनल बोरिंग-एंड-ब्लास्टिंग’ मशीन बनाई है। यह एक नए तरह का उपकरण है, जिसे दुर्गम भू-वैज्ञानिक स्थितियों में सुरंग बनाने की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। सरकार द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, 4.5 मीटर व्यास वाली इस मशीन का नाम ‘शियांगलोंग’ है।इसे सिंघुआ विश्वविद्यालय और सरकारी कंपनी ‘चाइना रेलवे ग्रुप’ की एक इकाई ने मिलकर बनाया है। हुबेई प्रांत की सरकार के बयान के अनुसार, यह मशीन मध्य हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान में बनकर तैयार हुई। हांगकांग के अखबार ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ ने मंगलवार को इस बयान का हवाला देते हुए बताया कि आम टनल बोरिंग मशीन की तुलना में छोटी यह हाइब्रिड मशीन खुदाई के साथ-साथ ‘ड्रिलिंग एंड ब्लास्टिंग’ का काम भी एक साथ करती है।उन्होंने बताया कि इससे कठोर चट्टानों की खुदाई की क्षमता 30 प्रतिशत बढ़ जाती है। अभी, मुश्किल भू-वैज्ञानिक स्थितियों का सामना करते समय इंजीनियर दो अलग-अलग प्रणाली का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें पारंपरिक टनल बोरिंग मशीन और ‘ड्रिल-एंड-ब्लास्ट’ तरीका शामिल है। बयान के अनुसार, परंपरागत टनल बोरिंग मशीन बहुत ज्यादा कठोर या टूटी-फूटी पहाड़ी चट्टानों को काटते समय धीमी हो जाती हैं, जिससे अक्सर बड़ी परियोजनाओं में देरी होती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:45 +0530</pubDate>
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<title>Gaza में 2023 के Israel हमले के मलबे से मिले 112 शवों का अंतिम संस्कार</title>
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<description><![CDATA[ दीर अल-बलाह (गाजा शहर), चार अगस्त (एपी) गाजा में 2023 में इजराइली हवाई हमले में मारे गए 100 से अधिक लोगों के अवशेष हाल में मलबे से निकाले जाने के बाद मंगलवार को फलस्तीनियों ने उनका सामूहिक अंतिम संस्कार किया। हमास के साथ युद्ध शुरू होने के कुछ सप्ताह बाद 22 नवंबर, 2023 को इजराइली लड़ाकू विमानों ने गाजा शहर के सबरा इलाके में एक रिहायशी परिसर को ध्वस्त कर दिया था। इस हमले में 300 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।हमले के तुरंत बाद राहतकर्मियों और स्थानीय लोगों ने साधारण औजारों तथा हाथों से मलबा हटाकर करीब 40 शव निकाले थे, लेकिन अधिकांश लोग मलबे के नीचे दबे रह गए थे। युद्ध के शुरुआती संघर्षविराम से ठीक पहले फैली अव्यवस्था के कारण इस भीषण हमले में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की जानकारी सार्वजनिक होने में कई दिन लग गए थे। सप्ताहांत में राहत एवं बचावकर्मियों ने ध्वस्त इमारतों के मलबे में खोज अभियान चलाकर 40 बच्चों सहित 112 लोगों के अवशेष बरामद किए।हमास के नियंत्रण वाले गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने यह जानकारी दी। एजेंसी के अनुसार, अभी भी 157 लोगों के शवों का पता नहीं चल सका है। अक्टूबर में लागू हुए मौजूदा संघर्षविराम के बाद गाजा के कुछ तबाह इलाकों में मलबे के नीचे दबे लोगों के शवों की तलाश का काम फिर से शुरू हो सका है।इसके चलते युद्ध के शुरुआती महीनों में मारे गए लोगों के अवशेष अब धीरे-धीरे बरामद किए जा रहे हैं। इन बरामदगियों के कारण युद्ध में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सात अक्टूबर, 2023 को हमास के नेतृत्व वाले उग्रवादियों ने दक्षिणी इजराइल पर हमला किया था, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था।इसके जवाब में इजराइल द्वारा शुरू किए गए सैन्य अभियान में अब तक 73,377 से अधिक फलस्तीनी नागरिक मारे जा चुके हैं। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस संख्या में संघर्षविराम लागू होने के बाद मारे गए लोग भी शामिल हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:45 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump प्रशासन ने US में Brazil की राजदूत मारिया लुइजा का वीजा रद्द किया</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन, पांच अगस्त (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राजील द्वारा पिछले महीने दो अमेरिकी राजनयिकों को वीजा देने से इनकार किए जाने और ब्रासीलिया में अमेरिकी राजदूत पद के लिए ट्रंप के नामित उम्मीदवार को मंजूरी देने में देरी के जवाब में, अमेरिका में ब्राजील की राजदूत मारिया लुइजा रिबेरो वियोटी का वीजा रद्द कर दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इसे पारस्परिक कार्रवाई बताया। अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला कई बार टाला गया ताकि ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को अपना रुख बदलने का अवसर मिल सके, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।हालांकि, अमेरिका ने संकेत दिया कि यदि ब्राजील ट्रंप द्वारा राजदूत पद के लिए नामित डैनी पेरेज को मंजूरी दे देता है तो यह फैसला वापस लिया जा सकता है। ब्राजील सरकार ने अमेरिकी कदम को राजनीति से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य अक्टूबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करना है। उसने यह भी कहा कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय संधि के प्रावधानों का पालन किए बिना राजदूत की नियुक्ति की घोषणा की।पिछले महीने ब्राजील ने दो अमेरिकी राजनयिकों को वीजा देने से इनकार कर दिया था। ब्राजील का आरोप था कि वे देश की चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाने और चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के इरादे से आ रहे थे। पिछले सप्ताह ब्राजील के एक वरिष्ठ राजनयिक ने नाम न उजागर करने की शर्त पर पत्रकारों से कहा था कि उनकी सरकार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की ओर से जवाब का इंतजार है।इसी राजनयिक ने मंगलवार को बताया कि राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की सरकार यह समझने की कोशिश कर रही है कि अमेरिकी सरकार अक्टूबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से कुछ ही महीने पहले ब्रासीलिया में राजदूत की नियुक्ति को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखा रही है। ब्राजील की राजधानी में अमेरिकी राजदूत का पद जनवरी 2025 में ट्रंप के दोबारा व्हाइट हाउस लौटने के बाद से खाली है। ब्राजील के राष्ट्रपति के रूप में चौथा कार्यकाल हासिल करने की कोशिश कर रहे 80 वर्षीय लूला का मुकाबला सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो से होगा।फ्लावियो के पिता जायर बोल्सोनारो ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति रह चुके हैं और उनके परिवार के ट्रंप प्रशासन से करीबी संबंध माने जाते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:44 +0530</pubDate>
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<title>Massachusetts ने 15 अगस्त को किया India Day घोषित, गवर्नर मॉरा हेली ने दिया आदेश</title>
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<description><![CDATA[ (सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, पांच अगस्त मैसाचुसेट्स की गवर्नर मॉरा हेली ने राज्य के विकास में भारतीय समुदाय के योगदान को मान्यता देते हुए 15 अगस्त को ‘इंडिया डे’ घोषित किया है और राज्य के निवासियों से इस अवसर के आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लेने का आह्वान किया। एक अगस्त को जारी सरकारी आदेश में गवर्नर ने यह भी कहा कि सामुदायिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने वार्षिक स्वतंत्रता दिवस समारोहों तथा सामुदायिक सेवा गतिविधियों के माध्यम से नागरिक भागीदारी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी समझ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी तरह की घोषणा बोस्टन की मेयर मिशेल वू ने भी की है।उन्होंने भी 15 अगस्त को ‘इंडिया डे’ घोषित किया है। उन्होंने बोस्टन में भारतीय वाणिज्य दूतावास के नए कार्यालय के उद्घाटन का स्वागत किया और ‘सेलबोस्टन-250’ कार्यक्रम में भारतीय नौसैनिक पोत आईएनएस सुदर्शिनी के आगमन पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। मैसाचुसेट्स की गवर्नर द्वारा जारी सरकारी आदेश में कहा गया है कि 15 अगस्त 2026 को भारत की ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से 1947 में मिली आजादी की 79वीं वर्षगांठ होगी।इस आजादी ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की नींव रखी। इसमें कहा गया है कि भारतीय मूल के 3.6 करोड़ से अधिक लोग विभिन्न देशों में रहते हैं। अमेरिका में भारतीय मूल के 50 लाख से अधिक लोग निवास करते हैं, जो देश और समाज के सामाजिक, आर्थिक तथा नागरिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।सरकारी आदेश में कहा गया है कि भारत एक प्राचीन और बहुआयामी सभ्यता वाला देश है, जो विभिन्न जातीय समूहों, धर्मों, भाषाओं, रीति-रिवाजों, परंपराओं, वेशभूषा, खान-पान, जलवायु और प्राकृतिक संसाधनों की अद्भुत विविधता के बावजूद अपनी मूलभूत एकता को बनाए रखे हुए है। इसमें कहा गया है कि मैसाचुसेट्स में भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने चिकित्सा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कारोबार और लोकसेवा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है, जिससे राज्य की सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि बढ़ी है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:43 +0530</pubDate>
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<title>Indian Cargo Ship Attack | Red Sea में भारतीय कार्गो जहाज़ पर हमला, डूबने के बाद 13 भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया, विदेश मंत्रालय ने जताई सख्त आपत्ति</title>
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<description><![CDATA[ लाल सागर (Red Sea) में यमन तट के पास भारतीय ध्वज वाले एक व्यावसायिक कार्गो जहाज़ पर हुए हमले के बाद वह समुद्र में पलटकर डूब गया। इस जहाज़ पर सवार 13 भारतीय नागरिकों समेत सभी 14 क्रू सदस्यों को यमनी कोस्ट गार्ड ने सुरक्षित बचा लिया है और उन्हें मोखा बंदरगाह पहुँचाया गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने व्यावसायिक जहाजों पर हो रहे इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। इसे भी पढ़ें: Tamil Nadu Assembly में TVK सरकार का पहला Budget पेश करेंगी वित्त मंत्री Mary Wilsonविदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा कीव्यावसायिक जहाज़ &#039;MSV फ़ैज़ नूर ओलिय&#039; पर हुए हमले की निंदा करते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि रियाद में भारतीय दूतावास स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और क्रू की सुरक्षा के लिए यमनी अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से तालमेल बिठा रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा, &quot;हम भारत के झंडे वाले व्यावसायिक जहाज़ &#039;MSV फ़ैज़ नूर ओलिय&#039; पर हुए हमले की निंदा करते हैं, जो 4 अगस्त, 2026 को यमन के तट के पास रेड सी में डूब गया था। सभी 13 भारतीय नागरिकों को बचा लिया गया है। रियाद में हमारा दूतावास स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और क्रू की सुरक्षा के लिए यमनी अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से तालमेल बिठा रहा है। हम सहयोग के लिए यमनी अधिकारियों का धन्यवाद करते हैं।&quot; इसे भी पढ़ें: Trisha Krishnan Controversy | &#039;मेरे साथ आतंकवादी जैसा बर्ताव किया गया&#039;, जेल से रिहाई के बाद Udhayanidhi Stalin ने TVK सरकार पर साधा निशानाविदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि इस क्षेत्र में व्यावसायिक जहाज़ों पर लगातार हो रहे हमले बहुत चिंताजनक हैं। मंत्रालय ने कहा, &quot;इस क्षेत्र में व्यावसायिक जहाज़ों को निशाना बनाना बंद होना चाहिए, और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार, इस क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से जहाज़ों की आवाजाही और व्यापार बिना किसी रुकावट के जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए।&quot;इस बीच, केंद्रीय बंदरगाह, जहाज़रानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि उन्होंने मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन के महानिदेशक (DGMA) को निर्देश दिया है कि वे सभी संबंधित एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाकर इस क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बचाए गए क्रू को हर ज़रूरी मदद देने के लिए तुरंत कदम उठाएँ।ब्लैक सी में व्यावसायिक जहाज़ पर हमलाइससे पहले जुलाई में, ब्लैक सी में एक व्यावसायिक जहाज़ पर हमले के बाद एक भारतीय नाविक की मौत हो गई थी, क्योंकि रूस और यूक्रेन के बीच चार साल से ज़्यादा समय से चल रहा संघर्ष जारी है। रूस के समुद्री इलाके में मौजूद इस जहाज़ की पहचान मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले &#039;MV OMORFI&#039; के तौर पर की गई थी। यह जहाज़, जो पिछली बार रूस के सेंट पीटर्सबर्ग बंदरगाह पर रुका था, घटना के समय दस क्रू सदस्यों को ले जा रहा था, जिनमें तीन भारतीय नागरिक भी शामिल थे। इसमें यह भी कहा गया कि जहाज़ पर मौजूद अन्य दो भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने यह भी कहा कि रूस में भारतीय मिशन ने संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया है और मृतक के परिवार की मदद के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।विदेश मंत्रालय ने इस हमले की निंदा की है और सभी पक्षों से &quot;समुद्री नेविगेशन की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करने&quot; का आह्वान किया है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बयान में कहा, &quot;भारत ऐसे हमलों की स्पष्ट रूप से निंदा करता है जो वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाते हैं और निर्दोष नागरिक क्रू सदस्यों की जान को खतरे में डालते हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है कि नेविगेशन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्वतंत्रता को बढ़ते खतरों का सामना करना पड़ रहा है।&quot; Stay updated with International
News in Hindi on Prabhasakshi Indian MSV Faize Noore Oliya has been hit by a projectile near Yemeni waters, causing the vessel to capsize and sink.India strongly condemns this unprovoked attack on the defenseless mechanised sailing vessel. The safety of our people is our supreme priority &amp; I am relieved to…— Sarbananda Sonowal (@sarbanandsonwal) August 4, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:42 +0530</pubDate>
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<title>Sri Lanka Rains: श्रीलंका में बारिश और भूस्खलन से 7 मौतें, 3,500 लोग विस्थापित</title>
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<description><![CDATA[ कोलंबो, पांच अगस्त (एपी) श्रीलंका के चाय उत्पादक पर्वतीय इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई है। हालात को देखते हुए स्कूल बंद कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।पिछले दो दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के कारण देश के कई हिस्सों में घर, खेत और सड़कें जलमग्न हो गई हैं। सरकारी आपदा प्रबंधन केंद्र के अनुसार मध्य श्रीलंका के पर्वतीय क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। आपदा प्रबंधन केंद्र के प्रवक्ता प्रदीप कोडिप्पिली ने बताया कि मध्य क्षेत्र में भूस्खलन में दो मकान दब गए, जिससे कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई।इसके अलावा बाढ़ से दो अन्य लोगों की जान चली गई। इस आपदा में तीन लोग घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि 291 मकानों को नुकसान पहुंचा है और लगभग 3,500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए नौसेना और सेना के जवान राहत एवं बचाव कार्य में मदद कर रहे हैं। स्थानीय टेलीविजन चैनल ‘हिरु टीवी’ ने ऐसे दृश्य दिखाए, जिनमें सैनिक और स्थानीय लोग बाढ़ में फंसे लोगों को उनके घरों से सुरक्षित निकालते नजर आए। कुछ इलाकों में भूस्खलन का भी खतरा बना हुआ है।स्थानीय समाचार चैनलों ने मध्य क्षेत्र की कई सड़कों पर विशाल चट्टानों, मलबे और गिरे हुए बिजली के खंभों के कारण यातायात बाधित होने के दृश्य भी प्रसारित किए। यह आपदा ऐसे समय आई है जब श्रीलंका पिछले वर्ष नवंबर में आए चक्रवात ‘दित्वा’ से हुए भारी नुकसान से अब भी उबरने की कोशिश कर रहा है। इस चक्रवात में लगभग 640 लोगों की मौत हुई थी, 20 लाख लोग प्रभावित हुए थे और करीब 4.1 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ था। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:42 +0530</pubDate>
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<title>Iran से संघर्ष के चलते अमेरिका की अत्याधुनिक Missiles लगभग खत्म, खाली मिसाइल भंडार देखकर Trump परेशान</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य अभियान ने दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति की उस कमजोरी को उजागर कर दिया है, जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक मुश्किल मानी जाती थी। अमेरिकी सेना के लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाले अत्याधुनिक मिसाइल भंडार तेजी से खाली हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, पेंटागन के कई वरिष्ठ अधिकारियों और सैन्य सूत्रों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के पास मौजूद कई अहम मिसाइल प्रणालियों का स्टॉक खतरनाक स्तर तक घट चुका है। यह स्थिति केवल ईरान युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि इंडो-पैसिफिक में चीन जैसे महाशक्ति प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ अमेरिका की भविष्य की सैन्य तैयारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सेना ने अपने आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (ATACMS) और नई पीढ़ी की प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल (PrSM) का लगभग पूरा परिचालन भंडार इस्तेमाल कर लिया है। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि इन लंबी दूरी की सटीक मारक मिसाइलों का &quot;वर्चुअली ऑल&quot; यानी लगभग पूरा स्टॉक खर्च हो चुका है। हालांकि पेंटागन ने शेष संख्या सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन यह स्वीकार किया गया है कि सेंट्रल कमांड को अपने अभियान जारी रखने के लिए दुनिया के अन्य अमेरिकी सैन्य भंडारों से मिसाइलें मंगानी पड़ीं।इसे भी पढ़ें: Donald Trump प्रशासन ने US में Brazil की राजदूत मारिया लुइजा का वीजा रद्द कियायुद्ध के दौरान केवल आक्रामक हथियार ही नहीं, बल्कि रक्षात्मक मिसाइलों का भंडार भी तेजी से घटा है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका अपने THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) इंटरसेप्टरों का लगभग 80 प्रतिशत और पैट्रियट इंटरसेप्टरों का लगभग आधा इस्तेमाल कर चुका है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ (CSIS) के अनुमान के अनुसार युद्ध से पहले अमेरिका के पास लगभग 452 THAAD और 2,200 Patriot इंटरसेप्टर थे। इसी अवधि में अमेरिकी नौसेना और अन्य बलों ने अपने वैश्विक टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल भंडार का भी लगभग आधा हिस्सा खर्च कर दिया है।सबसे बड़ी चिंता यह है कि ये वही हथियार हैं जिन पर अमेरिका चीन जैसे तकनीकी रूप से सक्षम प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ युद्ध की स्थिति में सबसे अधिक निर्भर करता है। चीन की बहुस्तरीय और अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली के कारण पारंपरिक लड़ाकू विमानों के जरिए गहरे हमले करना बेहद जोखिम भरा माना जाता है। ऐसे में ATACMS और PrSM जैसी लंबी दूरी की सटीक मिसाइलें अमेरिकी युद्धनीति की रीढ़ हैं। यदि इनका भंडार सीमित हो जाता है, तो इंडो-पैसिफिक में अमेरिका की प्रतिरोधक क्षमता और त्वरित जवाबी कार्रवाई की शक्ति दोनों कमजोर पड़ सकती हैं।यही वजह है कि पेंटागन के भीतर इस बात पर गंभीर बहस छिड़ी हुई है कि ईरान के खिलाफ अभियान को कितने समय तक जारी रखा जाए। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आगाह किया है कि यदि मौजूदा गति से मिसाइलों का इस्तेमाल जारी रहा, तो अमेरिका किसी दूसरे बड़े सैन्य संकट के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं रहेगा। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरानी ठिकानों पर मानव चालित लड़ाकू विमानों को भेजने की बजाय लंबी दूरी की मिसाइलों से हमले को प्राथमिकता दी, ताकि पायलटों को जोखिम से बचाया जा सके। लेकिन इसी रणनीति ने अत्याधुनिक मिसाइल भंडार पर भारी दबाव डाल दिया।इस बीच, अमेरिका का रक्षा उद्योग उत्पादन बढ़ाने की कोशिश में जुटा है। लॉकहीड मार्टिन ATACMS के स्थान पर नई PrSM मिसाइलों का उत्पादन बढ़ा रही है। हालांकि PrSM अपेक्षाकृत नई प्रणाली है, इसलिए उसका उत्पादन अभी सीमित है। अमेरिकी सेना ने भविष्य के लिए बड़े ऑर्डर जरूर दिए हैं, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि रिकॉर्ड उत्पादन भी लंबे और उच्च तीव्रता वाले युद्ध में खर्च हुए हथियारों की भरपाई इतनी तेजी से नहीं कर सकता।राष्ट्रपति ट्रंप और व्हाइट हाउस लगातार इन चिंताओं को खारिज कर रहे हैं। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका के पास दुनिया के किसी भी देश से कहीं अधिक हथियार हैं और जरूरत से ज्यादा गोला बारूद मौजूद है। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता सीन पार्नेल और व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने भी कहा है कि अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति के सभी रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त सैन्य क्षमता और गहरा हथियार भंडार मौजूद है।इसके बावजूद घटनाक्रम अलग तस्वीर पेश करता है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले सप्ताह ट्रंप ने ईरान पर बड़े पैमाने पर प्रस्तावित हमले को अंतिम क्षणों में रोक दिया। आधिकारिक तौर पर इसका कारण खाड़ी देशों की चिंता और ऊर्जा ढांचे पर संभावित ईरानी जवाबी हमला बताया गया, लेकिन अमेरिकी मीडिया के अनुसार हथियारों के घटते भंडार और लंबा युद्ध झेलने की क्षमता भी इस फैसले के पीछे एक अहम कारक थी।इसी बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी हलचल तेज हो गई है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच &quot;बेहद अच्छी बातचीत&quot; चल रही है, जबकि ईरान सार्वजनिक रूप से इससे इंकार करता रहा है। दूसरी ओर, एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने के लिए अंतरिम समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है।देखा जाये तो ईरान युद्ध ने एक बड़ा सबक दिया है कि आधुनिक युद्ध केवल तकनीक या सैन्य शक्ति का नहीं, बल्कि सतत हथियार उत्पादन, आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक क्षमता का भी संघर्ष है। यदि दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति को एक क्षेत्रीय युद्ध के दौरान अपने वैश्विक मिसाइल भंडार से हथियार खींचने पड़ रहे हैं, तो यह भविष्य के बहु-मोर्चीय संघर्षों के लिए गंभीर चेतावनी है।बहरहाल, ऐसा लग रहा है कि चीन, रूस, उत्तर कोरिया और ईरान जैसे देशों के साथ संभावित समानांतर संकट की स्थिति में अमेरिका को अपने संसाधनों का विभाजन करना पड़ सकता है। इससे उसकी वैश्विक सैन्य विश्वसनीयता, सहयोगी देशों का भरोसा और प्रतिरोधक  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:41 +0530</pubDate>
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<title>घुसपैठिए मुस्लिमों को खदेड़ते ही नेपाल में हिंदू राष्ट्र पर बड़ा ऐलान, शुरू हुआ इलाज!</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल में मुस्लिमों की ओर से कावन यात्रा पर की गई पत्थरबाजी और गोलीबारी में हुई हिंदू युवक की मौत के बाद से ही नेपाल के हिंदू संगठन गुस्से में दिखाई दे रहे हैं। नेपाल से लगातार वो वीडियो सामने आ रहे हैं जिसमें हिंदू संगठन सड़कों पर उतर कर कई सालों से अवैध रूप से रह रहे मुस्लिम घुसपैठियों को बाहर निकालने की मांग कर रहे हैं। जिस वक्त हिंदू राष्ट्र की मांग तेज हो रही है, ठीक उसी वक्त सोशल मीडिया पर कई ऐसी तस्वीरें वायरल हो रही हैं जिसमें भारी संख्या में मुस्लिम भीड़ बोरिया बिस्तर बांधकर जाती हुई दिखाई दे रही है। वैसे तो हिंदू संगठनों ने सरकार के आगे कई मांगे रखी हैं। लेकिन सबसे बड़ी जो मांग उन्होंने रखी है वो पाकिस्तानी बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर खदेड़कर नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने की है। उनकी इस मांग पर सरकार ने पहला ऐसा काम किया है कि जिसके बाद लग रहा है कि नेपाल में आने वाले दिनों में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसे भी पढ़ें: Nepal Violence : सड़कों पर उतरे हिंदू, नेपाल छोड़कर भागने लगे मुसलमान!दरअसल नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग इतनी तेज हो गई है कि यह मुद्दा केवल हिंदू संगठनों और प्रदर्शनों तक ही सीमित नहीं रह गया बल्कि आम लोग अपने जनप्रतिनिधियों से भी सीधे जवाब मांग रहे हैं। सांसदों का घेराव कर उनसे हिंदू समुदाय की सुरक्षा और अधिकारों के पक्ष में खुलकर बोलने की मांग की जा रही है। हिंदूवादी संगठनों ने सरकार को 13 से 19 सूत्रीय मांगों वाला लेटर सौंपते हुए नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने समेत कई बड़े फैसले लेने की मांग की है। मांग पत्र में सुनसरी जिले के कप्तानगंज में हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच। घटना के दोषियों और साजिशकर्ताओं की तुरंत गिरफ्तारी और जांच समिति की रिपोर्ट साधनी करने की मांग की गई है। अब खबर है कि गृह मंत्री सुदन गुरंग को हिंदू संगठनों ने जिस 13 से 19 सूत्रीय मांगों वाले ज्ञापन को सौंपा है जिसमें 3 महीने के भीतर सर्वदलीय बैठक के माध्यम से हिंदू राष्ट्र की मांग पर विचार विमर्श करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई है। इसे भी पढ़ें: Balen Shah को भारत ने दिया 440 वोल्ट का झटका,  रोका चीनी का एक्सपोर्ट का माल, नेपाल में मचा बवालअब कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नेपाल सरकार ने हिंदू संगठनों की मांगों वाले पत्र पर सकारात्मक सहमति जता दी है। जिसके बाद नेपाल के हिंदू खुश दिखाई दे रहे हैं और वह इसे अपनी पहली बड़ी जीत बता रहे हैं। हालांकि कुछ घंटे पहले ही नेपाल के पीएम बालन शाह ने कहा था कि हिंदू राष्ट्र की बहाली के साथ राजशाही का मुद्दा भी जुड़ जाता है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में यह उचित नहीं होगा। लेकिन अब हिंदुओं की बढ़ती जा रही मांग और गुस्से को देखते हुए सरकार कहीं ना कहीं इस मुद्दे पर यू टर्न मारती हुई दिखाई दे रही है। खैर अब देखना यह होगा कि क्या घुसपैठियों के खिलाफ कोई बड़ा एक्शन होता है या नहीं और सरकार नेपाल को कब तक हिंदू राष्ट्र घोषित करती है क्योंकि जिस तरह से नेपाल की लगातार डेमोग्राफी जो है चेंज हो रही है। लगातार वहां बदलाव हो रहे हैं। मुस्लिमों की कई इलाकों में संख्या बढ़ती जा रही है और इसीलिए हिंदू आक्रोश में दिख रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:40 +0530</pubDate>
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<title>FCRA Bill पर US MP Riley Moore ने जताई चिंता, द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ने की कही बात</title>
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<description><![CDATA[ सागर कुलकर्णी
वाशिंगटन, पांच अगस्त अमेरिकी सांसद रिले मूर ने भारत में गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), न्यासों, शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक संगठनों को मिलने वाले विदेशी चंदे से संबंधित कानून में प्रस्तावित संशोधनों पर चिंता जताई और कहा कि इनका असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है। वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद मूर ने मंगलवार को कहा कि विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधन भारतीय सरकार को गिरजाघरों और धार्मिक परोपकारी संस्थाओं का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की अनुमति देंगे तथा यह ‘‘ईसाइयों पर स्पष्ट हमला’’ होगा। मूर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘प्रभु यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने के कुछ ही दशक बाद सेंट थॉमस भारत के मालाबार तट पर पहुंचे थे और तभी से भारत में ईसाइयों की उपस्थिति है लेकिन इतने लंबे इतिहास के बावजूद भारत की संसद विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन (एफसीआरए) नियमों में ऐसे बदलाव पर विचार कर रही है, जिससे सरकार गिरजाघरों और धार्मिक परोपकारी संस्थाओं का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकेगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह ईसाइयों पर स्पष्ट हमला है।यदि यह विधेयक इसी स्वरूप में आगे बढ़ता है तो भारत के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों में यह गंभीर चिंता का विषय होगा।’’
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 में सरकार को एक ‘नामित प्राधिकरण’ गठित करने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। यह प्राधिकरण उन मामलों में विदेशी अंशदान और उससे निर्मित परिसंपत्तियों का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकेगा, जब किसी संगठन का एफसीआरए पंजीकरण रद्द हो जाए, वह स्वेच्छा से पंजीकरण छोड़ दे या नवीनीकरण नहीं होने के कारण समाप्त हो जाए। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि यदि संबंधित परिसंपत्ति कोई पूजा स्थल है, तो नामित प्राधिकरण उसके धार्मिक स्वरूप को बनाए रखना सुनिश्चित करेगा।इसमें नियमों के उल्लंघन पर अधिकतम सजा भी पांच वर्ष के कारावास से घटाकर एक वर्ष करने का प्रस्ताव किया गया है। गृह मंत्रालय के अनुसार 2019 से 2022 के बीच 13,520 संगठनों को विदेशी अंशदान के रूप में 55,741 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। एफसीआरए पोर्टल के अनुसार, 15 जुलाई 2026 तक 14,449 संगठनों के एफसीआरए प्रमाणपत्र सक्रिय थे, जबकि 22,498 प्रमाणपत्र रद्द किए जा चुके थे और 15,212 प्रमाणपत्रों की अवधि समाप्त मानी गई थी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:40 +0530</pubDate>
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<title>BRICS Pay: 90 बिलियन का झटका, अमेरिका से भयंकर भिड़ गया चीन</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन के गलियारों में इस समय जो सन्नाटा है, वह किसी बड़े तूफान के आने की आहट है। कल तक जो अमेरिका दुनिया को टैरिफ की धमकियां देता था, आज वह खुद अपने ही बुने हुए जाल में फंस गया है। चीन ने 90 अरब डॉलर का ऐसा आर्थिक बम फोड़ा है कि अमेरिका की कृषि से लेकर एनर्जी सेक्टर तक की नीव हिल गई है। लेकिन यह तो सिर्फ झांकी है। असली खबर उस 23 जुलाई 2026 के फैसले में छिपी है जिसने रातों-रात बीजिंग और वाशिंगटन के रिश्तों को उस नए मोड़ पर खड़ा कर दिया जहां से वापसी नामुमकिन है। दरअसल पीटरसन इंस्टट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकॉनमी की रिपोर्ट कोई सामान्य चेतावनी नहीं है। यह अमेरिका के लिए एक डेथ वारंट की तरह है।  अगर 2017 में ट्रंप ने वो ट्रेड वॉर शुरू ना किया होता तो आज अमेरिकी कंपनियां हर साल $90 अरब डॉलर का एक्स्ट्रा प्रॉफिट कमा रही होती। यह पैसा कहां से आता? यह पैसा आता अमेरिका के सोयाबीन किसानों की जेब से, टेक्सास के तेल कुओं से और मिड वेस्ट की फैक्ट्रियों से। लेकिन आज हालत क्या है? इसे भी पढ़ें: BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए बांग्लादेश को निमंत्रणचीन जो दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आयात करने वाली अर्थव्यवस्था है उसने अमेरिका की तरफ पीट कर लिया है। निर्यात 2008 की वैश्विक मंदी के स्तर पर गिर चुका है। इसका सीधा मतलब है कि अमेरिका की ग्रोथ अब रिवर्स गियर में है। दोस्तों, अब बात करते हैं उस सेक्टर की जिसने अमेरिका की कमर तोड़ दी है और उस सेक्टर का नाम है ऊर्जा यानी कि एनर्जी। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी एक्सपोर्टर बनने का सपना देखता रहता था। लेकिन चीन ने एक ही झटके में सपने को चगनाचूर कर दिया। 2026 की शुरुआत में चीन ने अमेरिकी गैस खरीदना लगभग शून्य कर दिया। क्यों? क्योंकि टेरिफ की वजह से अमेरिकी गैस इतनी महंगी हो गई कि चीन को क़तर और रूस से गैस मंगाना सस्ता पड़ने लगा। हैरानी की बात यह है कि चीन की चालाकी यहां खत्म नहीं हुई। चीन की कंपनियों ने अमेरिका से जो गैस पहले से बुक कर रखी थी, उसे अपने देश लाने के बजाय रास्ते में ही यूरोप को महंगे दाम पर बेच दिया। यानी अमेरिका की गैस, चीन का मुनाफा और अमेरिका का बाजार खत्म। इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina के प्रस्तावित संबोधन पर MEA का बड़ा बयान, भारत सरकार की इसमें कोई भूमिका नहींएक्सपर्टों का मानना है कि अब चीन कभी भी अमेरिका के साथ नए लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट नहीं करेगा। आखिर 23 जुलाई 2026 को ऐसा क्या हुआ? दरअसल अमेरिका का पुराना टेरिफ सिस्टम कानूनी लड़ाई में हार गया था। अपनी ईगो बचाने के लिए अमेरिकी प्रशासन ने सेक्शन 301 [संगीत] का इस्तेमाल किया और चीनी सामानों पर 12.5% का नया टैक्स थोप दिया। बहाना बनाया गया कि जबरन शंका। लेकिन इसके पीछे की कड़वी सच्चाई कुछ और ही थी। अमेरिका को पता था कि अगर उसने यह टेरिफ नहीं लगाया तो चीन का सस्ता सामान अमेरिकी मार्केट को पूरी तरह निकल जाएगा। लेकिन चीन ने इसका ऐसा जवाब दिया जिसकी उम्मीद पेंटागन को भी नहीं थी। 27 जुलाई 2026 को ब्लूमबर्ग ने एक ऐसी रिपोर्ट छापी जिसने वाशिंगटन की साख को मिट्टी मिला दिया।इसे भी पढ़ें: सेंट्रल एशिया के खजाने तक पहुंचा भारत, Rare Earth Minerals पर मोदी के जय ने क्या बड़ा गेम कर दिया? चीन ने दावा किया कि अमेरिका ने बंद कमरों में उनसे भीख मांगी थी कि हम टेरिफ तो लगा रहे हैं लेकिन वादा करते हैं यह 20% से ऊपर नहीं जाएगा। चीन ने इस प्राइवेट बातचीत को पब्लिक कर दिया। यह अमेरिका के लिए सबसे बड़ी शर्मिंदगी थी। इससे दुनिया को क्या मैसेज गया? यह गया कि महाशक्ति कहलाने वाला अमेरिका अब चीन के साथ डील करने के लिए मजबूर है। साल 2022 में जब रूस के डॉलर फ्रीज किए गए तब हमने कहा था कि अमेरिका अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारी है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:39 +0530</pubDate>
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<title>दोस्त रूस ने तो भारत की लॉटरी लगा दी! क्या है दुनिया का पहला परमाणु आइसब्रेकर?</title>
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<description><![CDATA[ आज से करीब 65 साल पहले रूस ने सफेद मौत के साम्राज्य को चुनौती दी थी। एक ऐसी चुनौती जिसने दुनिया का भूगोल और इतिहास बदल दिया था। दुनिया के पहले परमाणु ऊर्जा से चलने वाले सिविलियन जहाज लेनिन सिर्फ एक आइस ब्रेकर नहीं था। यह सोवियत संघ का यानी इस समय के रूस और उस समय के सोवियत संघ का वो न्यूक्लियर जिद था जिसने बर्फ की दीवार को हमेशा हमेशा के लिए तोड़ दिया। आज 2026 में इस पुराने जहाज की बात इसलिए हो रही है क्योंकि  लेनिन ने जो रास्ता बनाया था आज उसी रास्ते पर भारत और रूस की दोस्ती की सबसे बड़ी इबारत लिखी जा रही है। 1950 के दशक की शीत युद्ध चरम पर था। परमाणु ऊर्जा का मतलब केवल एटम बम समझा जाता था। लेकिन 17 जुलाई 1956 को सेंट पीटर्सबर्ग यानी तब का लेनिन ग्रा एडमिलिट्री शिपयार्ड में कुछ ऐसा हुआ जिसने विज्ञान की दिशा बदल दी। वहां लेनिन की नींव रखी गई। रूस चाहता था कि एक ऐसा जहाज बने जो बिना रुके, बिना ईंधन खत्म हुए महीनों तक आर्कटिक की 2 से 3 मीटर मोटी बर्फ को कागज की तरह फाड़ सके और 3 सितंबर 1959 को यह चमत्कार हकीकत बन गया। जब लेनिन समुद्र में उतरा तो अमेरिका समेत पूरी दुनिया दंग रह गई। अब परमाणु ऊर्जा से चलने वाला दुनिया का यह पहला सतह का जहाज है। इसकी ताकत का अंदाजा आप इस बात से लगाइए कि इसे बार-बार बंदरगाह पर तेल भरने के लिए नहीं रुकना पड़ता है। इतना ही नहीं यह रूस की उस आर्कटिक महत्वाकांक्षा की पहली बड़ी जीत थी जिसने उसे इस क्षेत्र का अघोषित राजा बना दिया। इतना ही नहीं एफएसयूई के विशेषज्ञ व्लादमीर के आंकड़े किसी के भी होश उड़ा सकते हैं। लेनिन ने 30 साल तक लगातार सेवा की।  इसे भी पढ़ें: BRICS Pay: 90 बिलियन का झटका, अमेरिका से भयंकर भिड़ गया चीन30 साल का महापराक्रम सबसे पहला पॉइंट है 26 आर्किटिक नेविगेशन। इसने नॉर्दन सी रूट को एक व्यापारिक मार्ग में बदल दिया। दूसरा है 3741 जहाज। लेनिन ने अकेले करीब 3/4000 जहाजों को बर्फ के बीच से सुरक्षित रास्ता भी दिया है। 6,54,000 समुद्री मील यह दूरी पृथ्वी के 30 चक्कर लगाने के बराबर है। अब आप खुद सोचिए दोस्तों कि अगर लेनिन ना होता तो आज रूस का वो उत्तरी तट व्यापार के लिए कभी खुल ही ना पाता। लेनिन ने यह साबित कर दिखाया कि परमाणु आइस ब्रेकर ही भविष्य है और आज रूस के पास 40 से ज्यादा आइस ब्रेकर है जिनमें आठ परमाणु शक्ति से भी लैस हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा बेड़ा है और इसकी नींव इसी लेनिन ने रखी थी।  भारत और रूस इस बर्फीले रास्ते पर एक साथ क्यों आ रहे हैं?  अक्टूबर 2024 में नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक बैठक होती है। भारत के जहाज रानी मंत्रालय और रूस की परमाणु दिग्गज रूसाटम के बीच एक वर्किंग ग्रुप बनता है। इसका मकसद है नॉर्दर्न सी रूट यानी एनएसआर को भारत के लिए मेन स्ट्रीम बनाना। भारत के लिए यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसके तीन बड़े कारण हैं। पहला है समय की बचत। स्वेज नहर के मुकाबले यह रास्ता यूरोप तक पहुंचने में 40% कम लेता है। दूसरा है सुरक्षा। लाल सागर यानी रेड सी में जहाजों पर हमले हो रहे हैं। लेकिन आर्कटिक का रास्ता पूरी तरह सुरक्षित और रूस के नियंत्रण में है। तीसरा मुख्य पॉइंट है ऊर्जा सुरक्षा। भारत रूस से कच्चा तेल और कोयला मंगाता है और यह रास्ता इस सप्लाई को तेज और सस्ता बना देता है। आज भारत न सिर्फ इस रास्ते का इस्तेमाल कर रहा है बल्कि रूस के साथ मिलकर विशाल बुनियादी ढांचे का निर्माण भी कर रहा है और यह दोस्ती का वो स्तर है वो प्रमाण है जहां रूस अपनी सबसे एडवांस तकनीक भारत के साथ साझा कर रहा है और इस वक्त कर रहा है। आज लेनिन रिटायर हो चुका है और मूरमास बंदरगाह पर एक भव्य संग्रहालय के रूप में खड़ा है। यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र तो है ही, लेकिन यह रूस की उस तकनीक की विरासत का जीता जागता सबूत भी है। इसे भी पढ़ें: सर्जियो गोर काट रहे थे बांग्लादेश के चक्कर, तभी रूस ने ली धमाकेदार एंट्री,  भारत का नाम लेकर किया सबसे बड़ा ऐलानआर्कटिक में रूस का साझेदार बना भारतलेनिन से शुरू हुआ यह सफर आज आर्कटिका और साइबेरिया जैसे नए महाशक्तिशाली जहाजों पर पहुंच चुका है। इतना ही नहीं रूस आज आर्कटिक में जो भी कर रहा है भारत उसमें इसका सबसे बड़ा साझेदार बनकर उभर चुका है। यह साझेदारी आने वाली सदी की ग्लोबल सप्लाई चेन को बदल कर रख देगी और इतिहास भी बदल दी जाएगी। लेकिन दोस्तों वो कहा जाता है ना कि संकट का साथी ही असली मित्र होता है और वैश्विक राजनीति के मंच पर अगर किसी दो देशों की दोस्ती इस मुहावरे पर सटीक बैठती है, फिट बैठती है तो वो है भारत और रूस की पक्की दोस्ती। पिछले सात दशकों में दुनिया का भूगोल बदल गया। महाशक्तियां बदल गई और युद्धों के कारण समीकरण बदल गए। लेकिन नई दिल्ली और मॉस्को के बीच का भरोसा कभी खत्म नहीं हुआ। भारत रूस यानी तब का सोवियत संघ की दोस्ती की शुरुआत भारत की आजादी के तुरंत बाद हो गई थी।  नॉर्दर्न सीट यानी एनएसआर के जरिए भारत और रूस एक ऐसा समुद्री रास्ता तैयार कर रहे हैं जो स्वेज नहर के मुकाबले 40% छोटा और सस्ता है।  भारत और रूस की यारी दोस्ती कोई मजबूरी नहीं है बल्कि एक ऐतिहासिक जरूरत भी है। रूस को अपनी अर्थव्यवस्था के लिए भारत जैसे विशाल बाजार और भरोसेमंद दोस्त की जरूरत है। तो दूसरी तरफ भारत को अपनी रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक संतुलन के लिए रूस के साथ की बहुत ज्यादा आवश्यकता है। अब लेनिन आइस ब्रेकर की तरह ही यह दोस्ती भी वक्त की जमी हुई बर्फ को काटकर भविष्य का रास्ता बनाने का दम रखती है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:38 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump Assassination Plot: ट्रंप को मारने की साजिश, गोल्फ कोर्स के पास हुई बड़ी गिरफ्तारी</title>
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<description><![CDATA[ कैलिफ़ोर्निया में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गोल्फ़ कोर्स के पास एक 38 साल के आदमी को गिरफ़्तार किया गया। उसके पास भरी हुई पिस्तौल और गोलियां थीं। आरोप है कि उसने उस जगह पर रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के फ़ंडरेज़र प्रोग्राम से कुछ दिन पहले सुरक्षा इंतज़ामों की तस्वीरें ली थीं। अधिकारियों ने बताया कि उसके घर की तलाशी के दौरान उन्हें हथियार, बॉडी आर्मर और ऐसी नोटबुक मिलीं जिनमें &quot;चिंताजनक बातें&quot; लिखी हुई थीं।इसे भी पढ़ें: BRICS Pay: 90 बिलियन का झटका, अमेरिका से भयंकर भिड़ गया चीनअब तक घटित घटनाक्रम पर एक नजर1. ट्रंप के दौरे से कुछ दिन पहले गिरफ़्तारी38 साल के जीनिन जॉन टेले को रैंचो पालोस वर्डेस के ट्रंप नेशनल गोल्फ़ कोर्स में गिरफ़्तार किया गया। यह गिरफ़्तारी डोनाल्ड ट्रंप के वहां रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के फ़ंडरेज़िंग डिनर में शामिल होने से ठीक दो दिन पहले हुई।2. संदिग्ध पर सुरक्षा व्यवस्था पर नज़र रखने का आरोपलॉस एंजिल्स काउंटी शेरिफ़ डिपार्टमेंट के मुताबिक, जीनिन जॉन टेले को डेप्युटीज़ द्वारा रोके जाने से पहले गोल्फ़ कोर्स के आस-पास सुरक्षा इंतज़ामों की तस्वीरें लेते और वीडियो बनाते हुए देखा गया था।3. बंदूक और गोला-बारूद बरामदगिरफ़्तारी के दौरान, डेप्युटीज़ ने जीनिन जॉन टेले की गाड़ी से एक लोडेड पिस्तौल बरामद की और उसकी जेब से गोला-बारूद से भरी 16-राउंड वाली मैगज़ीन भी मिली।4. घर की तलाशी में और हथियार मिलेअगले दिन डाउनी में जीनिन जॉन टेले के घर की तलाशी के दौरान जांचकर्ताओं को कई हथियार, मैगज़ीन, गोला-बारूद, बॉडी आर्मर और ऐसी नोटबुक मिलीं जिनमें अधिकारियों के अनुसार &quot;चिंताजनक बातें&quot; लिखी थीं।5. कई आपराधिक आरोपों का सामनाजीनिन जॉन टेले पर कई गंभीर अपराधों के आरोप लगाए गए हैं, जिनमें सेकंड-डिग्री रॉबरी (लूटपाट), बड़ी क्षमता वाली मैगज़ीन रखना और छोटी बैरल वाली राइफल या शॉटगन रखना शामिल है। उन पर गाड़ी के अंदर छिपाकर हथियार रखने का भी आरोप है। उन्होंने सभी आरोपों में खुद को बेगुनाह बताया है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:38 +0530</pubDate>
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<title>2 साल बाद आज क्या कहेंगी शेख हसीना, भारत से क्यों उलझा बांग्लादेश?</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश इन दिनों घबराया हुआ है। इसकी बजाय देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर हुई नई घोषणा। आज बांग्लादेश में हुए तख्तापलट को दो साल हो गए हैं। इस तख्तापलट के बाद आज पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना सबके सामने आने वाली हैं। शेख हसीना शाम 6 बजे आज मीडिया को संबोधित करने वाली हैं। 5 अगस्त 2024 को हुए इस तख्तापलट का मुख्य कारण बना था छात्रों का आंदोलन। छात्रों का आंदोलन इतना हिंसक हो गया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपना ही देश छोड़ना पड़ गया था। 2 साल से शेख हसीना भारत में निर्वासन कर रही थी। लेकिन आज वे मीडिया के सामने आने वाली हैं।इसे भी पढ़ें: विदेश मंत्रालय का Pakistan पर तीखा प्रहार, PoK Elections को बताया ढकोसला, Sheikh Hasina और China से संबंधों को लेकर भी कह दी बड़ी बातदरअसल बांग्लादेश छोड़कर भारत में शरण लेने वाली शेख हसीना दो सालों में पहली बार मीडिया से लाइव जुड़ेंगी। वह मीडिया से सीधा मुखातिब होंगी और उनके सवालों के जवाब भी देंगी। इस कार्यक्रम के ऐलान के बाद से बांग्लादेश बेचैन हो गया है। ढाका ने भारत से इस कार्यक्रम को रोकने की गुहार लगाई है। हालांकि भारत ने बांग्लादेश को टका सा जवाब दे दिया। बता दें आपको बांग्लादेश में अगस्त 2024 में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना देश छोड़कर भारत आ गई थी और तब से यहां किसी गुप्त स्थान पर रह रही हैं। बुधवार को वे वर्चुअल तरीके से विदेशी पत्रकार क्लब में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करेंगी। इससे पहले उन्होंने सिर्फ लिखित बयान ही जारी किए थे। अब भारत पहुंचने के बाद वह पहली बार वर्चुअल तरीके से ही सही पहली बार लोगों से रूबरू होंगी। बांग्लादेश सरकार ने इस आयोजन पर सवाल उठाए। बांग्लादेश के विदेशी राज्य मंत्री शमा ओबेद इस्लाम ने बयान दिया है कि एक भगोड़े नेता को भारत किस आधार पर ऐसी राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति दे रहा है। उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ भविष्य की सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हम नहीं चाहते कि इस प्रक्रिया पर कोई असर पड़े इसलिए भारत को अपना रुख साफ करना चाहिए। व शेख हसीना के इस कदम को लेकर जानकारों का कहना है कि अपना पक्ष रखने से हसीना बांग्लादेश के लोगों की सहानुभूति बटोर सकती हैं। ढाका इस बात को लेकर ही चिंतित है। गौरतलब है कि इससे पहले बांग्लादेश की एक ट्रिब्यूनल ने मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी मानते हुए हसीना को मौत की सजा सुनाई थी। उन पर जुलाई अगस्त 2024 में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर हिंसक कारवाई के आरोप लगे हैं। इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina Virtual Address: यह भारत का Official Event नहीं, पूर्व राजनयिक ने बताया FCC का कार्यक्रमहालांकि हसीना ने इन आरोपों से पूरी तरह इंकार किया है। ऐसे में तारिक रहमान सरकार को डर है कि शेख हसीना अपना पक्ष मजबूत करने के लिए यह तरीका अपना रही है। इस बीच भारत ने बांग्लादेश को सदा हुआ जवाब दे दिया है। बांग्लादेश की चिंताओं पर सवाल पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह एक निजी कार्यक्रम है। इससे सरकार का कोई लेना देना नहीं है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक साक्षात्कार की प्रक्रिया में सरकार की भूमिका नहीं है। मीडिया ईमेल के जरिए सीधे उनसे संपर्क कर रहा है। और साक्षात्कार देना या ना देना उनका फैसला है। सुद्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई और साक्षात्कार देकर शेख हसीना बांग्लादेश की जनता समेत दुनिया के समक्ष अपना पक्ष रखेंगी। यह बात बांग्लादेश सरकार को नागवार गुजर रही है। बांग्लादेश की सरकार ने कई बार शेख हसीना को ढाका भेजने की मांग दोहराई। बांग्लादेश ने उनके प्रतारण के लिए औपचारिक अनुरोध भी किया। हालांकि भारत में भी अभी कोई कानूनी प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। जानकारों की मानें तो भारत का मानना है कि अगर हसीना खुद वापस जाने का फैसला करती हैं तो फिर इसकी जरूरत ही नहीं रहेगी। इससे पहले हसीना ने पिछले महीने एक इंटरव्यू में संकेत दिए थे कि वह दिसंबर में वतन वापसी कर सकती हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:37 +0530</pubDate>
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<title>बर्दाश्त नहीं...लाल सागर में डूबा भारतीय झंडे वाला जहाज, भयंकर भड़का भारत, अब होगा एक्शन!</title>
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<description><![CDATA[ लाल सागर में हर गुजरते दिन के साथ खतरा और बढ़ता जा रहा है। कभी मिसाइलें, कभी ड्रोन और कभी कारोबारी जहाजों पर हमले। दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में शामिल ये इलाका अब जंग के साए में जी रहा है और अब इस आग की चपेट में भारत के झंडे वाला एक जहाज भी आ गया है। लेकिन राहत की बात सिर्फ इतनी है कि सभी भारतीय नाविकों की जान बच गई। लेकिन इस हमले ने एक बार फिर दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दरअसल लाल सागर में यमन के तट के पास भारत के झंडे वाले कारोबारी जहाज एमएसवी फैज नूर ओलिया प्रोजेक्टाइल हमले का शिकार हो गया। हमला इतना तेज था कि जहाज पलट गया और देखते ही देखते समुद्र में समा गया। उस वक्त जहाज पर 14 लोग सवार थे। जिनमें 13 भारतीय नाविक और एक यमन का नागरिक शामिल था। हादसे के तुरंत बाद यमन की कोस्ट गार्ड और नौसेना ने संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। वहीं हमले की खबर मिलते ही भारत सरकार हरकत में आ गई। विदेश मंत्रालय ने इस पूरे हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि भारतीय झंडा लगे कारोबारी जहाज को निशाना बनाया जाना बेहद गंभीर मामला है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि राहत की बात यह है कि जहाज पर सवार सभी 13 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया। इसे भी पढ़ें: ISI की Jantar Mantar पर हमले की बड़ी साजिश नाकाम, Amritsar से 9 आतंकी गिरफ्तारविदेश मंत्रालय ने बताया कि सऊदी अरब की राजधानी रियाद में मौजूद भारतीय दूतावास पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यमन के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। भारत ने इस मुश्किल वक्त में मदद के लिए यमन की सरकार और वहां के अधिकारियों का भी धन्यवाद दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि लाल सागर और आसपास के इलाकों में जिस तरह से लगातार व्यापारिक जहाजों पर हमले हो रहे हैं, वह बेहद चिंताजनक हैं। भारत का साफ कहना है कि व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए। साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक इस क्षेत्र के समुद्री रास्तों पर बिना किसी रुकावट के जहाजों की आवाजाही और व्यापार जल्द से जल्द बहाल होना चाहिए ताकि दुनिया भर का समुद्री कारोबार सुरक्षित और सामान्य तरीके से चलता रहे। वहीं केंद्रीय पोत जहाज रानी और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनवाल ने इस हमले को बिना किसी उकसावे के किया गया हमला बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी वजह से समुद्री प्रशासन को सभी एजेंसियों के साथ मिलकर तुरंत जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।इसे भी पढ़ें: Red Sea में MSV Faiz Noor Oliya जहाज पर हमला, सभी 13 भारतीय सुरक्षितभारत ने साफ कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर कारोबारी जहाजों को निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए और समुद्री व्यापार में किसी तरह की रुकावट स्वीकार नहीं की जा सकती। लेकिन यह मामला सिर्फ एक भारतीय जहाज पर हुए हमले का नहीं असली चिंता उस समुद्री गलियारे को लेकर है जहां पिछले कई दिनों से लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। लाल सागर, बाबल मंडेप और होरमोज अब दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में बदल चुके हुती विद्रोहियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने इस पूरे क्षेत्र को असुरक्षित बना दिया है। हाल ही में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी के ऐलान के बाद हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए। आपको बता दें इस पूरे रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल, गैस, कंटेनर, कारगो और रोजमर्रा का सामान गुजरता है। वहीं होमोस को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है। ऐसे में इस इलाके में होने वाला हर हमला सिर्फ एक जहाज या एक देश की समस्या नहीं रहता। बल्कि उसका असर पूरी दुनिया के व्यापार, तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:37 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan में कुछ बड़ा होने वाला है? विदेशी मीडिया पर बैन, बाहर जाने के लिए पत्रकारों को लेना होगा NOC</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान ने विदेशी पत्रकारों पर नई पाबंदियां लगाई हैं। अब उन्हें कुछ चुनिंदा बड़े शहरों से बाहर जाने के लिए खास मंज़ूरी लेनी होगी। &#039;द डॉन&#039; की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में घोषित &#039;विदेशी मीडिया सुविधा गाइडलाइंस, 2026&#039; के तहत पाकिस्तान सरकार ने सभी विदेशी मीडिया कर्मियों के लिए इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर किसी भी जगह से रिपोर्टिंग करने से पहले सूचना और प्रसारण मंत्रालय से &#039;नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट&#039; (NOC) लेना ज़रूरी कर दिया है। इस फ़ैसले को देश में चल रही राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल के बीच निगरानी और सख़्ती बढ़ाने की एक बड़ी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। नए नियमों के तहत पत्रकारों की आवाजाही पर सरकार का नियंत्रण काफी बढ़ गया है। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े विदेशी पत्रकारों को अब तीन तय शहरों के बाहर सामान्य समाचार रिपोर्ट, डॉक्यूमेंट्री या सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के लिए भी पहले से मंज़ूरी लेनी होगी।इसे भी पढ़ें: ISI की Jantar Mantar पर हमले की बड़ी साजिश नाकाम, Amritsar से 9 आतंकी गिरफ्तारयहाँ तक कि घूमने-फिरने के लिए की जाने वाली यात्राओं पर भी कोई छूट नहीं है। एबटाबाद या मरी जैसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों पर जाने की योजना बना रहे पत्रकारों को मंज़ूरी के लिए आवेदन करना होगा, और मंज़ूरी मिलने में तीन कामकाजी दिनों तक का समय लग सकता है। यात्रा पर लगी पाबंदियों के अलावा, पाकिस्तान ने रजिस्ट्रेशन की एक व्यापक व्यवस्था भी लागू की है। सभी विदेशी मीडिया संगठनों, फ्रीलांसरों, फिक्सरों और यहां तक ​​कि अंतरराष्ट्रीय आउटलेट्स के साथ काम करने वाले स्थानीय योगदानकर्ताओं को मंत्रालय के &#039;एक्सटर्नल पब्लिसिटी विंग&#039; द्वारा संचालित एक सेंट्रलाइज्ड ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। विदेशों में रहने वाले और विदेशी प्रकाशनों में योगदान देने वाले पाकिस्तानी पत्रकारों को भी इस दायरे में लाया गया है, जिसके लिए राजनयिक मिशनों के माध्यम से अतिरिक्त वेरिफिकेशन की आवश्यकता होगी।इसे भी पढ़ें: मुनीर-नकवी ने मिलकर कर दिया खेल, पाकिस्तान में तख्तापलट होने वाला है?गाइडलाइंस में यह भी अनिवार्य किया गया है कि विदेशी मीडिया की सहायता करने वाले सभी सहयोगियों - जिनमें प्रोडक्शन हाउस और गैर-पत्रकार भी शामिल हैं। अधिकारियों के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा। हालांकि सरकार ने कहा है कि रजिस्ट्रेशन से कोई आधिकारिक दर्जा नहीं मिलता है, लेकिन असल में इससे विदेशी रिपोर्टिंग से जुड़े लोगों का एक व्यापक डेटाबेस तैयार हो जाता है। मान्यता (एक्रेडिटेशन) की प्रक्रिया को भी सख्त कर दिया गया है। अब पत्रकारों को सालाना या कम समय के लिए प्रेस कार्ड के लिए आवेदन करना होगा। ये कार्ड मांगे जाने पर दिखाने होंगे और कार्यकाल खत्म होने या संबद्धता (एफिलिएशन) बदलने पर इन्हें वापस करना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद भी मान्यता को मंज़ूरी मिलने में कई हफ़्ते लग सकते हैं, जिससे रिपोर्टिंग के काम में देरी हो सकती है। जानकारों का कहना है कि ये कदम पाकिस्तान के सिस्टम में बढ़ती बेचैनी को दिखाते हैं, क्योंकि वह कई संकटों से जूझ रहा है - जैसे राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कड़ी नज़र। ज़मीनी स्तर पर पहुँच को सीमित करने और अफ़सरशाही की रुकावटें बढ़ाने वाले इस नए नियम-कानून से स्वतंत्र रिपोर्टिंग मुश्किल हो सकती है और संवेदनशील इलाकों से कवरेज सीमित हो सकता है। इस कदम की आलोचना ग्लोबल मीडिया संस्थाओं और प्रेस की आज़ादी की वकालत करने वालों द्वारा किए जाने की संभावना है, जिन्होंने पाकिस्तान में स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए कम होती जगह पर बार-बार चिंता जताई है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:36 +0530</pubDate>
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<title>हम भारत संग अपने रिश्ते नहीं बिगाड़ना चाहते हैं...शेख हसीना के कार्यक्रम से नई दिल्ली ने बनाई दूरी, बांग्लादेश ने भी बदले अपने सुर</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शामा ओबेद ने मंगलवार को कहा कि ढाका पड़ोसी देश भारत के साथ अपने रिश्ते खराब नहीं करना चाहता और दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध हैं। यह बयान नई दिल्ली में 5 अगस्त को होने वाले एक प्रस्तावित मीडिया इवेंट के संदर्भ में आया है, जो बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश से हटने की बरसी पर आयोजित किया जा रहा है। हसीना, जो 2024 से भारत की राजधानी में रह रही हैं, फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल होंगी। अगस्त 2024 में छात्रों के बड़े पैमाने पर हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद बांग्लादेश अवामी लीग (BAL) की सरकार गिरने के बाद यह उनकी पहली सार्वजनिक उपस्थिति होगी। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शमा ओबेद ने कहा कि हम भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। हम नहीं चाहते कि भारत के साथ हमारे संबंध खराब हों या उन पर कोई असर पड़े। उम्मीद है कि भारत इस बात को समझेगा। इस बात को दोहराते हुए कि केंद्र सरकार का इस प्रस्तावित कार्यक्रम से कोई लेना-देना नहीं है, उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका इससे कोई संबंध नहीं है।इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina के प्रस्तावित संबोधन पर MEA का बड़ा बयान, भारत सरकार की इसमें कोई भूमिका नहींभारत ने शेख हसीना की प्रेसवार्ता की योजना से खुद को अलग कियाभारत ने कहा कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस सप्ताह नयी दिल्ली में ऑनलाइन प्रेसवार्ता करने की योजना से उसका कोई लेना-देना नहीं है। हसीना भारत आने के बाद बुधवार शाम को पहली बार मीडिया से बातचीत करने वाली हैं। यह प्रेसवार्ता बांग्लादेश में सरकार विरोधी व्यापक प्रदर्शनों के बाद ढाका से हसीना के भारत आने के दो साल बाद हो रही है। ढाका ने सोमवार को इस मामले पर भारत से स्पष्टीकरण मांगा। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा कि भारत में होने वाली यह प्रस्तावित सार्वजनिक बातचीत हाल के महीनों में दोनों पक्षों के रिश्तों में आए सकारात्मक माहौल को नुकसान पहुंचा सकती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि आप जिसकी (प्रेसवार्ता की) बात कर रहे हैं, उसे एक निजी मीडिया संस्था आयोजित कर रहा है। सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है और न ही वह इस मंच पर व्यक्त किए जाने वाले किसी भी विचार का समर्थन करती है। जायसवाल अपनी प्रेसवार्ता के दौरान हसीना से जुड़े एक सवाल का जवाब दे रहे थे। हसीना की फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब में ऑनलाइन माध्यम से प्रेसवार्ता को संबोधित करने की योजना है। पूर्व प्रधानमंत्री हसीना के बेटे साजीब वाजेद जॉय और अवामी लीग के कई अन्य नेता, जिनमें मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल और शाकिब अल हसन शामिल हैं, इस प्रेसवार्ता में अपनी बात रख सकते हैं। हसीना अगस्त 2024 में सरकार विरोधी व्यापक आंदोलन के कारण अपनी सरकार गिरने के बाद ढाका से भारत आ गई थीं।इसे भी पढ़ें: BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए बांग्लादेश को निमंत्रणतसलीमा नसरीन ने की मांग- लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने की अनुमति दी जानी चाहिएबांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन ने कहा कि अपदस्थ बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना को स्वदेश लौटने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने की अनुमति दी जानी चाहिए। हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद पांच अगस्त 2024 को हसीना की सरकार गिर गई थी, जिसके बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ा था। इस घटनाक्रम की दूसरी बरसी से एक दिन पहले तसलीमा ने यह बात कही है। उन्होंने कहा कि हसीना की पार्टी अवामी लीग पर से प्रतिबंध भी हटना चाहिए ताकि वह लोकतांत्रिक क्रियाकलापों में भाग ले सके। जबरन कोलकाता छोड़ने के 19 साल बाद नसरीन शहर के दौरे पर हैं। वह पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के पानिहाटी में समाज सुधारक बेगम रुकय्या की कब्र पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद सभा को संबोधित कर रही थीं। नसरीन ने कहा, “किसी भी राजनीतिक दल पर प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए। शेख हसीना को जिस तरह देश छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, उस पर सवाल उठते हैं। अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाना सही नहीं था। यह लोकतंत्र के खिलाफ कदम था। मैं चाहती हूं कि यह प्रतिबंध जल्द से जल्द हटा लिया जाए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>हम, भारत, संग, अपने, रिश्ते, नहीं, बिगाड़ना, चाहते, हैं...शेख, हसीना, के, कार्यक्रम, से, नई, दिल्ली, ने, बनाई, दूरी, बांग्लादेश, ने, भी, बदले, अपने, सुर</media:keywords>
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<title>India&#45;Myanmar Border Dispute पर बोले MEA प्रवक्ता, मणिपुर सीमा पर ज़मीन की अदला&#45;बदली पर चर्चा जारी</title>
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<description><![CDATA[ भारत और म्यांमार मणिपुर से लगी अपनी साझा सीमा के उस हिस्से को लेकर ज़मीन की अदला-बदली पर विचार कर रहे हैं, जिसकी सीमा रेखा दशकों से तय नहीं हो पाई है। मंगलवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सीमा पर कुछ ऐसे इलाके हैं जिन्हें अभी सुलझाया जाना बाकी है। उन हिस्सों पर बातचीत चल रही है। जायसवाल उस सवाल का जवाब दे रहे थे जिसमें कहा गया था कि भारत मणिपुर सीमा पर म्यांमार के साथ ज़मीन की अदला-बदली पर विचार कर रहा है। उन्होंने इन खबरों की पुष्टि तो नहीं की, लेकिन यह ज़रूर माना कि सीमा के अनसुलझे हिस्सों को ठीक करने के लिए बातचीत चल रही है। इसे भी पढ़ें: म्यांमा में आंग सान सू ची से ICRC के प्रतिनिधि ने की मुलाकातउनके ये बयान, अमेरिका की मैगज़ीन &#039;द डिप्लोमैट&#039; की उस रिपोर्ट के कुछ हफ़्ते बाद आए हैं जिसमें कहा गया था कि नई दिल्ली ऐसे किसी प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। 17 जुलाई की एक रिपोर्ट में, जिसमें एक &quot;आधिकारिक दस्तावेज़&quot; का ज़िक्र था, मैगज़ीन ने कहा कि भारत सरकार म्यांमार के साथ मणिपुर की सीमा पर बॉर्डर पिलर 65 और 68 के बीच सीमांकन पूरा करने के लिए लगभग 1.4 वर्ग मील ज़मीन की अदला-बदली करने के &quot;प्रस्ताव&quot; पर विचार कर रही है। पिलर 65 और 68 के बीच की दूरी लगभग 2.8 किलोमीटर है।इसे भी पढ़ें: विदेश मंत्रालय का Pakistan पर तीखा प्रहार, PoK Elections को बताया ढकोसला, Sheikh Hasina और China से संबंधों को लेकर भी कह दी बड़ी बातअदला-बदली के लिए प्रस्तावित इलाका मणिपुर के चंदेल ज़िले में है, जो म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र की कबाव घाटी से सटा हुआ है। 26 मई, 2026 की तारीख वाले &quot;आधिकारिक दस्तावेज़&quot; के अनुसार, सीमांकन का काम तीन महीने के भीतर, यानी अगस्त के आसपास पूरा होने की उम्मीद थी। भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। यह सीमा अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरती है और फिर म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र और चिन राज्य में प्रवेश करती है। इस सीमा का ज़्यादातर हिस्सा पहाड़ी, जंगलों से घिरा और खुला (पोरस) है, जो उन जातीय समुदायों के इलाकों से होकर गुजरता है जो ऐतिहासिक रूप से सीमा के दोनों ओर रहते आए हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, सीमा के लगभग 1,472 किलोमीटर हिस्से को सीमा-स्तंभों (बाउंड्री पिलर्स) के ज़रिए चिह्नित किया गया है, जबकि लगभग 171 किलोमीटर का हिस्सा अभी भी अनसुलझा है; यह मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश के लोहित सेक्टर और मणिपुर की कबाव घाटी में है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:45:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>सोमालिया: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से भूखे परिवारों को खाद्य सहायता</title>
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<description><![CDATA[ सोमालिया में भूख का संकट गहराता जा रहा है और लाखों लोगों को भोजन की तत्काल आवश्यकता है. ऐसे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से संकटग्रस्त इलाक़ों की पहचान कर, ज़रूरतमन्द परिवारों तक समय पर खाद्य सहायता पहुँचाई जा रही है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:44:44 +0530</pubDate>
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<title>अफ़ग़ानिस्तान में भूख संकट गहराया, लाखों लोग खाद्य सहायता से वंचित</title>
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<description><![CDATA[ अफ़ग़ानिस्तान में 1.4 करोड़ लोग गम्भीर भूख की स्थिति का सामना कर रहे हैं. हालात इतने ख़राब हैं कि कई ग़रीब परिवार अपने शिशुओं को दूध के बजाय पतली चाय और रोटी देने को मजबूर हैं. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:44:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>भारत: आन्ध्र प्रदेश में मैन्ग्रोव बने तटीय सुरक्षा कवच</title>
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<description><![CDATA[ भारत के आन्ध्र प्रदेश राज्य के संगमेश्वरम गाँव में मैन्ग्रोव वनों की बहाली से घरों और आजीविकाओं के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच तैयार किया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र समर्थित इस प्रयास के तहत कृष्णा वन्यजीव अभयारण्य में 694 हैक्टेयर क्षतिग्रस्त भूमि को बहाल किया गया है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:44:40 +0530</pubDate>
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<title>ग़ाज़ा में जानलेवा इसराइली हमले, लेबनानी हवाई क्षेत्र का उल्लंघन</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और शान्तिरक्षकों के अनुसार, युद्धविराम के बावजूद सप्ताहान्त में ग़ाज़ा पर इसराइली हमलों में दो दर्जन से अधिक फ़लस्तीनी मारे गए. इस दौरान लेबनान के हवाई क्षेत्र का 100 से अधिक बार उल्लंघन किया गया. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:44:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Sheikh Hasina Virtual Address: यह भारत का Official Event नहीं, पूर्व राजनयिक ने बताया FCC का कार्यक्रम</title>
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<description><![CDATA[ पूर्व सीनियर डिप्लोमैट सुरेंद्र कुमार ने मंगलवार को कहा कि बांग्लादेश को सत्ता से हटाई गईं प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रस्तावित वर्चुअल संबोधन का इंतज़ार करने के बाद ही कोई प्रतिक्रिया देनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत को बांग्लादेश में किसी भी राजनीतिक गतिविधि या उकसावे में शामिल नहीं माना जाना चाहिए। ANI से बात करते हुए कुमार ने कहा कि बांग्लादेश की चिंता का कारण यह है कि हसीना सत्ता से हटाई गई नेता हैं, जिन पर गंभीर कानूनी आरोप हैं और ढाका ने भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश का मुख्य तर्क यह है कि वह एक भगोड़ी और आरोपी हैं, जिन्हें सज़ा (मेरे ख्याल से मौत की सज़ा) सुनाई गई है, और वह यहाँ हैं। उन्होंने प्रत्यर्पण का अनुरोध भी किया है। इसलिए उन्हें कोई भी राजनीतिक काम करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina के प्रस्तावित संबोधन पर MEA का बड़ा बयान, भारत सरकार की इसमें कोई भूमिका नहींहालांकि, कुमार ने कहा कि भारत ने बांग्लादेश के प्रत्यर्पण (extradition) के अनुरोध को खारिज नहीं किया है और इस मामले को कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए देखा जा रहा है। उन्होंने कहा हमारा कहना है कि आपके प्रत्यर्पण के अनुरोध को खारिज नहीं किया गया है; उस पर विचार किया जा रहा है; यह एक कानूनी प्रक्रिया है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि प्रस्तावित संबोधन कोई आधिकारिक भारतीय कार्यक्रम नहीं है। उन्होंने कहा, &quot;और यह कोई आधिकारिक भारतीय कार्यक्रम नहीं है। यह फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब (FCC) है। यह यहाँ कई सालों से काम कर रहा है। उन्होंने किसी को बोलने के लिए आमंत्रित किया है।इसे भी पढ़ें: विदेश मंत्रालय का Pakistan पर तीखा प्रहार, PoK Elections को बताया ढकोसला, Sheikh Hasina और China से संबंधों को लेकर भी कह दी बड़ी बातकुमार ने इस बारे में अटकलें लगाने से बचने को कहा कि हसीना अपने संबोधन में क्या कह सकती हैं या क्या इससे बांग्लादेश में अशांति फैल सकती है। उन्होंने कहा हमें पहले से कोई राय नहीं बनानी चाहिए; उन्होंने अभी कुछ नहीं कहा है, हमें नहीं पता कि वह क्या कहने वाली हैं, इसलिए यह मान लेना कि वह बांग्लादेश में अपने पार्टी समर्थकों को भड़का सकती हैं और सरकार के खिलाफ कोई प्रतिक्रिया हो सकती है, सही नहीं है। उन्होंने आगे कहा ये सब काल्पनिक अटकलें हैं। हमें बस इंतज़ार करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 20:40:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Heat Pack रसायन विज्ञान के किस सिद्धांत पर काम करते हैं?</title>
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<description><![CDATA[ (एलन ब्लैकमैन, ऑकलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी)
ऑकलैंड, चार अगस्त (द कन्वरसेशन) सर्दियों के दिनों में कुछ लोग बर्फीले पहाड़ों पर स्कीइंग का आनंद ले रहे होते हैं, तो कुछ को मजबूरी में खुले आसमान के नीचे काम करना पड़ता है। दोनों ही स्थितियों में शरीर को गर्म रखना जरूरी होता है। लेकिन कई बार केवल गर्म कपड़े पहनना पर्याप्त नहीं होता।
ऐसे में तुरंत गर्माहट देने वाले ‘हीट पैक’ बेहद काम आते हैं। प्लास्टिक के पैकेट से ‘हैंड वॉर्मर’ निकालकर जेब में रखते ही वह धीरे-धीरे गर्म महसूस होने लगता है और कई घंटों तक हल्की, आरामदायक गर्माहट देता रहता है। यह किसी जादू से कम नहीं लगता।
लेकिन ये ‘हीट पैक’ आखिर काम कैसे करते हैं? ये इतनी देर तक गर्म कैसे रहते हैं? और कुछ ‘हीट पैक’ दोबारा इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जबकि कुछ केवल एक बार ही क्यों काम आते हैं? इसका जवाब रसायन विज्ञान के कुछ बुनियादी सिद्धांतों में छिपा है।उष्माक्षेपी अभिक्रिया क्या है?
रासायनिक अभिक्रियाओं और भौतिक प्रक्रियाओं को इस आधार पर भी समझा जाता है कि वे ऊष्मा का क्या करती हैं—क्या वे ऊष्मा को अवशोषित करती हैं या उत्सर्जित करती हैं।
जो प्रक्रिया अपने आसपास के वातावरण से ऊष्मा ग्रहण करती है, उसे उष्माशोषी (एंडोथर्मिक) प्रक्रिया कहा जाता है। सामान्य तापमान पर बर्फ का पिघलना इसका आम उदाहरण है। बर्फ वातावरण से ऊष्मा लेकर पानी में बदल जाती है।
इसके विपरीत, जो प्रक्रिया अपने आसपास ऊष्मा छोड़ती है, उसे उष्माक्षेपी (एक्सोथर्मिक) प्रक्रिया कहते हैं। पेट्रोल का जलना इसका परिचित उदाहरण है, जिसमें बड़ी मात्रा में ऊष्मा निकलती है।
‘हीट पैक’ भी इसी प्रकार की उष्माक्षेपी प्रक्रियाओं पर आधारित होते हैं। हालांकि, पेट्रोल के दहन की तरह इनमें प्रतिक्रिया बहुत तेज नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे होती है, इसलिए गर्माहट लंबे समय तक बनी रहती है।
‘हीट पैक’ में इस प्रक्रिया को शुरू करने के दो प्रमुख तरीके हैं—हवा के संपर्क से सक्रिय होना और यांत्रिक रूप से सक्रिय होना। यही तय करता है कि कोई ‘हीट पैक’ एक बार इस्तेमाल होगा या उसे दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।हवा के संपर्क से सक्रिय होने वाले हीट पैक कैसे काम करते हैं?
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, ऐसे हीट पैक हवा के संपर्क में आते ही सक्रिय हो जाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनमें वास्तव में लोहे की ऑक्सीजन के साथ होने वाली प्रतिक्रिया यानी जंग लगने की प्रक्रिया होती है।
जब कोई शुद्ध धातु हवा के संपर्क में आती है, तो वह ऑक्सीजन से प्रतिक्रिया करती है और इस दौरान ऊष्मा निकलती है। कई बार यह प्रक्रिया बहुत तेज भी हो सकती है। उदाहरण के लिए, जब एंगल ग्राइंडर स्टील टुकड़े से टकराता है तो चिंगारियां निकलती हैं और वे लोहे और ऑक्सीजन के बीच अत्यंत तीव्र उष्माक्षेपी प्रतिक्रिया का परिणाम होती हैं।
इसी तरह, 2016 में कैलिफोर्निया में लगी एक भीषण दावानल (जंगल में आग) की शुरुआत तब हुई थी, जब एक गोल्फ खिलाड़ी ने धातु के क्लब से एक पत्थर पर वार किया था।
यदि ऐसा है, तो फिर धातु की वस्तुएं हर समय चिंगारियां क्यों नहीं छोड़तीं?
दरअसल, लगभग सभी धातुओं की सतह पर ऑक्साइड की एक बेहद पतली परत बन जाती है, जो ऑक्सीजन के साथ उनकी प्रतिक्रिया की गति को काफी धीमा कर देती है। यही कारण है कि लोहे के ठोस टुकड़े पर जंग बहुत धीरे-धीरे लगती है।
लेकिन हीट पैक के लिए यह गति पर्याप्त नहीं होती।
इसीलिए इनमें लोहे के ठोस टुकड़े की जगह लोहे का बारीक पाउडर भरा जाता है। इससे लोहे का सतही क्षेत्रफल बहुत बढ़ जाता है और ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करने के लिए अधिक सतह उपलब्ध हो जाती है।
लोहे के पाउडर के साथ पैक में नमक और पानी भी होता है, जो इस रासायनिक प्रक्रिया को आसान बनाते हैं। पैक के भीतर सामग्री बंद रहती है, लेकिन उसकी परत इतनी सूक्ष्म होती है कि हवा अंदर पहुंच सकती है। जैसे ही पैक हवा के संपर्क में आता है, प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है।
यह प्रतिक्रिया इतनी नियंत्रित गति से होती है कि कई घंटों तक लगातार हल्की गर्माहट मिलती रहती है।
प्रतिक्रिया पूरी होने पर सारा लोहा स्थायी रूप से जंग में बदल जाता है। यही वजह है कि हवा से सक्रिय होने वाले ‘हीट पैक’ केवल एक बार इस्तेमाल किए जा सकते हैं।पुन: इस्तेमाल होने वाले ‘हीट पैक’ कैसे काम करते हैं?
पुन: उपयोग किए जा सकने वाले ‘हीट पैक’ भी उष्माक्षेपी प्रक्रिया पर आधारित होते हैं, लेकिन इनमें प्रतिक्रिया यांत्रिक तरीके से शुरू होती है।
आपने बर्फ जमते समय यह प्रक्रिया देखी होगी। पानी जमकर बर्फ बनते समय अपने आसपास ऊष्मा छोड़ता है। यानी पानी का जमना भी एक उष्माक्षेपी प्रक्रिया है।
ऐसे ‘हीट पैक’ में सोडियम एसीटेट नामक रंगहीन ठोस पदार्थ होता है, जो पानी में बहुत आसानी से घुल जाता है।
यदि गर्म पानी में इसकी अधिकतम मात्रा घोलकर उसे बहुत सावधानी से ठंडा किया जाए, तो अतिसंतृप्त विलयन तैयार हो जाता है। इसमें सामान्य स्थिति से अधिक मात्रा में ‘सोडियम एसीटेट’ घुला रहता है।
यह विलयन तब तक स्थिर रह सकता है, जब तक उसे कोई हल्का यांत्रिक झटका न मिले।
‘हीट पैक’ के भीतर लगी छोटी धातु की पट्टी को मोड़ने या दबाने पर इतना झटका मिल जाता है कि सोडियम एसीटेट का क्रिस्टलीकरण शुरू हो जाता है। यह एक उष्माक्षेपी प्रक्रिया है, जिससे ऊष्मा निकलती है और पैक के भीतर मौजूद पानी गर्म हो जाता है।
पानी अपेक्षाकृत धीरे-धीरे गर्म होता है और उतनी ही धीमी गति से ठंडा भी होता है। इसलिए सोडियम एसीटेट के क्रिस्टलीकरण से उत्पन्न ऊष्मा लंबे समय तक पैक में बनी रहती है।
इन ‘हीट पैक’ को फिर से इस्तेमाल करने के लिए केवल इतना करना होता है कि उन्हें गर्म पानी में रखकर गर्म किया जाए। इससे सारा सोडियम एसीटेट दोबारा घुल जाता है और पैक अगली बार उपयोग के लिए तैयार हो जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 20:40:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Iran Political Crisis: खामेनेई का Pezeshkian को आखिरी अल्टीमेटम, IRGC कमांडर के हाथ में कमान</title>
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<description><![CDATA[ क्षेत्रीय संघर्ष और पश्चिम एशिया को लेकर अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के बीच, ईरान में नई राजनीतिक मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। इज़राइली मीडिया की खबरों के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने कथित तौर पर राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन को &quot;आखिरी अल्टीमेटम&quot; दिया है और बातचीत व संघर्ष से जुड़े अहम फैसलों पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर अहमद वाहिदी का समर्थन किया है। इज़राइली ब्रॉडकास्टर चैनल 14 ने तेहरान के घटनाक्रम से वाकिफ सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि खामेनेई ने राष्ट्रपति पेज़ेशकियन को एक और इस्तीफे की कोशिश से न रोककर, असल में उनसे उनकी मुख्य राजनीतिक ताकत छीन ली है। रिपोर्ट के मुताबिक, पेज़ेशकियन ने ईरान के नेतृत्व के साथ नीतिगत मतभेदों के दौरान बार-बार इस्तीफे की धमकी दी थी और मई में औपचारिक रूप से इस्तीफा देने की कोशिश भी की थी। उनका कहना था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े फैसलों में उनके प्रशासन को &quot;पूरी तरह से दरकिनार&quot; कर दिया गया था। इसे भी पढ़ें: Pakistan-Iran Diplomacy: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच Islamabad बना मध्यस्थ, Ishaq Dar ने अरागची को भेजा न्योताचैनल 14 ने दावा किया कि खामेनेई का नया रुख ईरान के मिलिट्री एस्टेब्लिशमेंट के साथ पूरी तरह तालमेल का संकेत देता है, जिससे राष्ट्रपति के पास रणनीतिक पॉलिसी बनाने में असर डालने की गुंजाइश कम हो गई है। चैनल 14 ने बिना नाम बताए सूत्रों के हवाले से यह भी बताया कि तेहरान ने अमेरिका के प्रति सख्त रुख अपनाया है, और IRGC कमांडर अहमद वाहिदी का तरीका अब असल में सरकार की आधिकारिक पॉलिसी बन गया है।रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की राजनीतिक लीडरशिप और IRGC के बीच मतभेद काफी कम हो गए हैं, और सुप्रीम लीडर ने कथित तौर पर अमेरिका से जुड़े बड़े फैसलों पर वाहिदी को आखिरी फैसला लेने का अधिकार दे दिया है।इसे भी पढ़ें: होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद के बीच Iran क्या बना पाएगा परमाणु हथियाररिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरानी नेताओं का मानना ​​है कि नवंबर में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के किसी बड़े पॉलिसी बदलाव की संभावना कम है, इसलिए तेहरान ज़्यादा से ज़्यादा दबाव बनाए रखने के साथ-साथ अपनी रणनीतिक और आर्थिक ताकत को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। उन्हीं सूत्रों का हवाला देते हुए, चैनल 14 ने बताया कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची और अमेरिकी विशेष दूतों - खासकर स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत और कतर व पाकिस्तान की मध्यस्थता तक ही सीमित है।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अभी कोई औपचारिक बातचीत नहीं हो रही है।इसे भी पढ़ें: UKMTO ने ओमान तट पर मालवाहक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल हमले की शुरू की जांचयह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब ट्रंप ने ईरान को समझौते तक पहुँचने का &quot;आखिरी मौका&quot; दिया है। वाशिंगटन ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के अनुरोध पर इस्लामिक रिपब्लिक पर नियोजित सैन्य हमले को रोक दिया था, ताकि कूटनीति का रास्ता अपनाया जा सके। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि कूटनीतिक कोशिशों की वजह से हमले को रोकने से पहले अमेरिका ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू करने के लिए तैयार था। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 20:40:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>रूस के खिलाफ Zelenskyy का बड़ा दांव, यूरोप की सुरक्षा के लिए FREYJA Anti&#45;Ballistic Shield का किया ऐलान</title>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने सोमवार को यूक्रेन के राजदूतों को दिए एक अहम भाषण में विदेश नीति और रक्षा से जुड़ी बड़ी पहलों के बारे में बताया। उन्होंने कीव की क्षेत्रीय सुरक्षा योजना के केंद्र में &#039;FREYJA&#039; (फ्रेया) के विकास को रखा, जो यूरोप का एक संयुक्त एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। एक्स पर यूक्रेनी राजदूतों के साथ हुई बातचीत में अपनी कही बातों का ज़िक्र करते हुए, ज़ेलेंस्की ने &#039;एंटी-बैलिस्टिक गठबंधन&#039; के विस्तार पर ज़ोर दिया ताकि &#039;FREYJA&#039; को पूरा किया जा सके। यह यूक्रेन के नेतृत्व वाला एक प्रोजेक्ट है जिसका मकसद यूरोप के लिए एक संयुक्त मिसाइल डिफेंस शील्ड बनाना है। एयर डिफेंस को यूक्रेन की अहम ऑपरेशनल प्राथमिकता बताते हुए, ज़ेलेंस्की ने बताया कि यूक्रेन के पास &#039;FREYJA&#039; फ्रेमवर्क के लिए मिसाइलें और मोबाइल लॉन्चर तो हैं, लेकिन इस शील्ड को चालू करने के लिए कुछ खास यूरोपीय पुर्ज़ों और संयुक्त फंडिंग की ज़रूरत है।इसे भी पढ़ें: सर्जियो गोर काट रहे थे बांग्लादेश के चक्कर, तभी रूस ने ली धमाकेदार एंट्री,  भारत का नाम लेकर किया सबसे बड़ा ऐलानयूरोप के अरबों डॉलर के मिलिट्री टेक्नोलॉजी मार्केट की रणनीतिक स्थिति पर बात करते हुए, ज़ेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोगियों से मुकाबला करने के बजाय मिलकर काम करने की अपील की। ​​उन्होंने चेतावनी दी कि मॉस्को महाद्वीप की रक्षा एकजुटता को तोड़ने की कोशिश करेगा। उन्होंने लिखा एंटी-बैलिस्टिक गठबंधन के तहत पहला कदम &#039;FREYJA&#039; है। यह हमारा एंटी-बैलिस्टिक सिस्टम होना चाहिए, जो उन यूरोपीय सहयोगियों के लिए खुला हो जिन्होंने इस युद्ध और हमारे सामने आई सभी चुनौतियों के दौरान हमारी मदद की है। हमारे पास मिसाइलें और लॉन्चर हैं, लेकिन कुछ पुर्ज़ों की कमी है। हमने उन सहयोगी देशों को एक साथ किया है जिनके पास वे खास चीज़ें हैं जिनकी हमें ज़रूरत है। हम सहयोगियों का स्वागत करते हैं। हमें इस सिस्टम के लिए ज़रूरी पुर्ज़ों और फंडिंग, दोनों की ज़रूरत होगी। जिन देशों के पास संबंधित प्रोडक्शन क्षमता नहीं है, लेकिन जिनके पास अभी पैट्रियट मिसाइलें हैं - और जो उन्हें देते हैं, यानी हमारे आसमान की सुरक्षा की हमारी क्षमता में उन मिसाइलों का योगदान करते हैं - उनका इस एंटी-बैलिस्टिक गठबंधन में शामिल होने के लिए बहुत स्वागत है।इसे भी पढ़ें: Moscow drone attack में पांच की मौत, रूस और यूक्रेन में तेज हमलेउन्होंने आगे कहा हम समझते हैं कि हम न केवल यूरोप के लिए सुरक्षा बना रहे हैं, बल्कि एक प्रतिस्पर्धा भी पैदा कर रहे हैं। स्वीडन में साब (Saab), जर्मन कंपनियाँ, अमेरिका में लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन, और इटली की बहुत मज़बूत कंपनी लियोनार्डो मौजूद हैं। हमें प्रतिस्पर्धियों की ज़रूरत नहीं है; हमें ऐसे लोगों की ज़रूरत है जो हमें मज़बूत बनाएँ और हमें एक-दूसरे के करीब लाएँ। जब हम &#039;सिस्टमैटिक कदमों&#039; की बात करते हैं, तो यहाँ राजनीति बहुत अहम हो जाती है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 20:40:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>11 अगस्त को बलूचिस्तान की आजादी का ऐलान! भारत भी हैरान</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिण एशिया की भू राजनीति में एक ऐसा भूचाल आया है जिसने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक नींद उड़ा दी है पूरी दुनिया की। रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने एक ऐतिहासिक घोषणा की है कि 11 अगस्त को बलूचिस्तान का स्वतंत्रता दिवस घोषित कर दिया गया है। यह सिर्फ एक तारीख नहीं है बल्कि पाकिस्तान के अस्तित्व को दी गई सबसे बड़ी चुनौती है। पाकिस्तान के कब्जे से अपनी आजादी का दावा करने के कुछ ही हफ्तों बाद अब बलूच नेतृत्व ने पूरी दुनिया के देशों से अपील की है कि वे बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता दे दे। आखिर 11 अगस्त का राज क्या है? दरअसल बलूचिस्तान का दावा है कि वे कभी भी ब्रिटिश भारत का हिस्सा नहीं थे बल्कि वे एक अलग रियासत थे। 11 अगस्त 1947 को यानी पाकिस्तान बनने से 3 दिन पहले बलूचिस्तान ने अपनी आजादी का ऐलान किया। हैरानी की बात यह है कि उस समय द न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी इस खबर को छापा था और ऑल इंडिया रेडियो ने दुनिया को बताया था कि बलूचिस्तान आजाद हो चुका है। लेकिन फिर क्या हुआ? इसे भी पढ़ें: Balochistan में Pakistani Army पर भीषण हमला, UBA और BRG के धमाकों में 8 जवानों की मौतमार्च 1948 में पाकिस्तान की सेना ने जबरन बलूचिस्तान में घुसकर उस पर कब्जा कर लिया। आज के बलूच नेता मीरियार बलूच ये कहते हैं कि पाकिस्तान के साथ उनका रिश्ता सिर्फ और सिर्फ अवैध कब्जे का है। इसलिए 11 अगस्त को फिर से मनाना उस खोई हुई आजादी को वापस पाने की एक सबसे बड़ी मुहिम है। दरअसल रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान के ताजा बयान में पाकिस्तान पर जो आरोप लगाए गए हैं, वह रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान का जन्म ही इस पूरे क्षेत्र में अशांति और आतंकवाद का कारण बना है। इसमें साफ तौर पर जिक्र किया गया है कि कैसे पाकिस्तान की नीतियों ने कश्मीर में घुसपैठ की। कैसे 1971 में पूर्वी पाकिस्तान जो अब बांग्लादेश है वहां नरसंहार किया गया पाकिस्तानी सैनिकों के द्वारा और कैसे जॉर्डन में फिलिस्तीनियों के खिलाफ सैन्य अभियान चलाए गए। इतना ही नहीं, बलूच नेतृत्व ने 1998 के चगाई परमाणु परीक्षणों को भी याद दिलाया जो बलूचिस्तान की जमीन पर किए गए थे, और जिससे वहां की पर्यावरण और जनता को भारी नुकसान पहुंचा था। उनका तर्क सीधा है कि जब तक पाकिस्तान अपने मौजूदा नक्शे में रहेगा तब तक ना तो भारत सुरक्षित है और ना ही अफगानिस्तान और ना ही पूरी दुनिया। इसे भी पढ़ें: Pakistan में इस साल 3,000 से अधिक आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गईं: सेनाअब बलूचिस्तान की यह लड़ाई सिर्फ जंगलों और पहाड़ों तक सीमित नहीं रह गई है। अब यह डिप्लोमेसी की मेज पर पहुंच चुकी है और बलूच नेतृत्व ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय विशेषकर भारत, अमेरिका और यूरोपीय देशों से अपील कर दी है और उनका कहना है कि 60 मिलियन बलूच जनता अपनी संप्रभुता के लिए तैयार खड़े हैं। बलूच दुनिया से पूछ रहे हैं कि अगर सूडान अलग हो सकता है अगर तिमोर लेसे को पहचान मिल सकती है तो बलूचिस्तान को क्यों नहीं? वे चाहते हैं कि दुनिया पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को पीछे छोड़कर बलूचिस्तान की जमीनी हकीकत देखे जहां हर दिन युवा लापता हो रहे हैं और संसाधनों की लूट मची हुई है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 20:40:22 +0530</pubDate>
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<title>ईरान का बड़ा बयान, Pezeshkian बोले &amp;apos;हम युद्ध नहीं चाहते&amp;apos; पर Trump ने दी Last Chance की चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने सोमवार को कहा कि तेहरान इलाके में कोई झगड़ा या तनाव नहीं बढ़ाना चाहता, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया कि देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए कोई समझौता नहीं करेगा। प्रेस टीवी के मुताबिक, पेज़ेश्कियान ने कहा इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान इलाके में तनाव या अस्थिरता नहीं बढ़ाना चाहता।हालांकि, देश की सुरक्षा, राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए वह अपनी पूरी ताकत से काम करेगा। उनके ये बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आए हैं जिसमें उन्होंने सोमवार (स्थानीय समय) को कहा था कि ईरान को समझौता करने का &quot;आखिरी मौका&quot; दिया गया है। ट्रंप ने दावा किया कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और ईरान के अनुरोध पर कूटनीति का रास्ता अपनाने के लिए वॉशिंगटन ने एक तय सैन्य हमले को रोक दिया था।इसे भी पढ़ें: Delhi Gold Price: दिल्ली में सोना ₹1,47,500 के पार, US-Iran Tension के बीच बाजार में बेचैनीओवल ऑफिस में &#039;प्रेसिडेंशियल मिलिट्री स्पाउस कमीशन&#039; बनाने वाले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि कूटनीतिक कोशिशों की वजह से हमले को रोकने से पहले अमेरिका ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू करने के लिए तैयार था। तेहरान के साथ चल रही बातचीत पर चर्चा करते हुए ट्रंप ने कहा यह आखिरी मौका है। अगर ऐसा नहीं होता है, तो यह उनके लिए एक अच्छा समझौता करने का आखिरी मौका है। ईरान के अनुरोध पर बातचीत होने का दावा करते हुए ट्रंप ने कहा हम अभी बातचीत कर रहे हैं, हम बातचीत कर रहे हैं और यह बातचीत ईरान के अनुरोध पर हो रही है, जिसे सऊदी अरब, UAE और खासकर कतर का समर्थन हासिल है, और दूसरे देशों का भी। कई देशों ने फोन किया... वे सभी इसे एक आखिरी मौका देना चाहते थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि अमेरिकी अधिकारियों के साथ कई बैठकें करने के बावजूद ईरान ने पहले बातचीत करने से इनकार कर दिया था।ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के साथ बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से फिर से खोलने पर चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि बातचीत के नए दौर का पहला चरण इस अहम शिपिंग रूट को खोलने पर केंद्रित होगा।इसे भी पढ़ें: Iran Political Crisis: खामेनेई का Pezeshkian को आखिरी अल्टीमेटम, IRGC कमांडर के हाथ में कमानहालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी या अप्रत्यक्ष बातचीत में शामिल नहीं है। उन्होंने तेहरान और वाशिंगटन के बीच सक्रिय द्विपक्षीय बातचीत के दावों को सख्ती से खारिज कर दिया। फार्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, बघाई ने जोर देकर कहा कि ईरान का मौजूदा राजनयिक जुड़ाव केवल पड़ोसी देश ओमान के साथ द्विपक्षीय है, जो रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर एक अस्थायी सुरक्षित रास्ता बनाने पर केंद्रित है। बघाई ने स्पष्ट किया कि ओमान में चल रही बातचीत पूरी तरह से समुद्री यातायात प्रबंधन तक ही सीमित है। हालांकि मस्कट के साथ एक नए अस्थायी शिपिंग लेन को लेकर बनी सहमति सुरक्षित नेविगेशन के लिए एक तकनीकी पूर्व-शर्त है, लेकिन उन्होंने जोर दिया कि ऐसा समझौता एक जरूरी शर्त तो है, लेकिन इस अहम &#039;चोकपॉइंट&#039; (संकरे समुद्री रास्ते) को पूरी तरह से फिर से खोलने के लिए अकेले यह काफी नहीं है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 20:40:22 +0530</pubDate>
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<title>Pak सेना की सीक्रेट Info भारत की खुफिया एजेंसी को मिली, चीन के साथ बड़े खेल का खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान की सेना में बड़े बदलाव हो रहे हैं। भारत की खुफिया एजेंसियों को कई अहम जानकारी इससे जुड़ी हुई हासिल हुई है। भारत की सुरक्षा एजेंसी को मिली खुफिया जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने अपने अधिकारियों, सैन्य कर्मियों को मेटा के स्वामित्व वाले मैसेजिंग प्लेटफार्म WhatsApp का इस्तेमाल बंद करके चीन के वीचैट प्लेटफार्म पर ट्रांसफर होने के निर्देश दिए हैं। ये कदम बीजिंग और इस्लामाबाद के बीच लगातार गहराते रणनीतिक, सैन्य और तकनीकी सहयोग का एक बेहद महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के शीर्ष सैन्य नेतृत्व की ओर से जारी एक आंतरिक निर्देश में सभी अधिकारियों, जवानों और प्रशासनिक अधिकारियों को आधिकारिक और ऑपरेशनल संचार के लिए धीरे-धीरे WhatsApp का इस्तेमाल बंद कर वीट अपनाने को कह दिया गया है। सूत्र कहते हैं कि इस फैसले के पीछे पश्चिमी मैसेजिंग प्लेटफार्म पर निगरानी, डाटा लीक और इंटरसेप्शन की आशंकाएं बहुत अहम वजह बताई जा रही हैं। इसे भी पढ़ें: 11 अगस्त को बलूचिस्तान की आजादी का ऐलान! भारत भी हैरानपाकिस्तानी सेना का मानना है कि संवेदनशील सैन्य संचार के लिए चीन के डिजिटल इको सिस्टम का इस्तेमाल अधिक सुरक्षित और रणनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि इस पूरे मामले पर जो विशेषज्ञ हैं वह कहते हैं कि वीchaat को अपनाने से पाकिस्तान और चीन के सैन्य संचार तंत्र में अधिक तालमेल स्थापित हो सकता है। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभियानों खुफ़िया जानकारी के आदान-प्रदान और साइबर समन्वय को और अधिक मजबूत करने में मदद हासिल हो सकता है। यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा सहयोग लगातार नए आयाम हासिल कर रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Pakistan-Iran Diplomacy: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच Islamabad बना मध्यस्थ, Ishaq Dar ने अरागची को भेजा न्योताबीते कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंध केवल लड़ाकू विमान, नौसैनिक युद्धपोत, एयर डिफेंस सिस्टम और दूसरे उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं रहे हैं। बल्कि साइबर क्षमताओं, सुरक्षित संचार नेटवर्क, साझा कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल और खुफिया सहयोग तक भी विस्तार हो चुका है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तानी सेना के यह कदम केवल एक मैसेजिंग ऐप बदलने का फैसला नहीं बल्कि यह चीन के साथ उसके बढ़ते डिजिटल और डिजिटल और मिलिट्री इंटीग्रेशन का स्पष्ट संकेत है। इससे भविष्य में दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य योजना, साइबर सुरक्षा, संवेदनशील सैन्य संचार में अधिक समन्वय देखने को मिल सकता है। और सबसे बड़ी बात ये कि जिस तरह से पाकिस्तान और चीन की हाल के दिनों में जुगलबंदी बनी है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब पाकिस्तान और चीन की मिसाइलें बुरी तरह से भारत के आगे पिट गई, तो उसके बाद दोनों ही देश मिलकर अब नए तौर तरीके अपनाने पर लगे हैं। इसी कड़ी में माना जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना चीन के साथ मिलकर अब इस नए तरह के कम्युनिकेशन गेम में आना चाहती है जिसके जरिए वो अपनी सेनाओं की जानकारी को बचा सके और हैकिंग प्रूफ बना सके।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 20:40:21 +0530</pubDate>
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<title>ट्रंप की कसम, ईरान को मिटा देंगे, अब अमेरिका करेगा भयंकर बमबारी</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने वो कर दिया जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी आईआरजीसी के आत्मघाती ड्रोंस ने कुवैत में बने अमेरिकी मिलिट्री बेस पर सीधा हमला बोल दिया है। यही नहीं ओमान के समंदर में एक और मालवाहक जहाज को मिसाइल से उड़ाने की कोशिश हुई है। इस घटना के बाद वाइट हाउस से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वो बयान आया है जिसने ईरान के माथे पर पसीना ला दिया। ट्रंप ने दो टूक कह दिया है ईरान के पास समझौते का यह आखिरी मौका है। वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे। ट्रंप ने साफ कर दिया कि अगर ईरान नहीं सुधरा तो अमेरिका टोटल मिलिट्री डिस्ट्रक्शन यानी ईरान का नामोनिशान मिटाने वाली कारवाई करेगा। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है एक तरफ ट्रंप कह रहे हैं कि डील की बातचीत चल रही है। वहीं दूसरी तरफ ईरान ने सीना तान कर कह दिया हम अमेरिका से कोई बात नहीं कर रहे। इसे भी पढ़ें: मध्यस्थ ही संदिग्ध...अमेरिका-ईरान डील में पाकिस्तान OUT, ट्रंप को सऊदी पर भरोसायह बातचीत फेल हो गई तो क्या अमेरिका ईरान पर बम बरसाएगा और इस लड़ाई से आपकी और हमारी जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा? ईरान के खतरनाक शाहिद 136 सुसाइड ड्रोंस ने कुवैत में अमेरिकी बेस को निशाना बनाकर उड़ान बढ़ी। गनीमत यह रही कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते इन ड्रोंस को हवा में ही मार गिराया। लेकिन इसका मलबा जब नीचे गिरा तो अमेरिकी कैंपों में हड़कंप मच गया। अभी दुनिया इस हमले की कड़ियां जोड़ ही रही थी कि ओमान के तट से 20 समुद्री मील दूर होमज स्टेट में एक मालवाहक जहाज पर अज्ञात मिसाइल से हमला हो गया। शक की सुई सीधे ईरान पर है क्योंकि यह पूरा इलाका ईरान के दबदबे वाला है। इस हमले के बाद डोनाल्ड ट्रंप गुस्से से लाल है। ट्रंप ने दावा किया कि वह शुक्रवार को ही ईरान पर एक बड़ा हमला करने वाले थे। लेकिन ईरान की तरफ से आए शांति के संकेतों के बाद उन्होंने प्लान टाल दिया था। ट्रंप चाहते हैं कि ईरान तुरंत न्यूक्लियर डील पर साइन करे और समंदर का रास्ता जहाजों के लिए हमेशा खुला रखे। इसे भी पढ़ें: US-Iran युद्ध के बीच भारत का बड़ा एक्शन, अचानक तेहरान में नियुक्त किया अपना नया राजदूतलेकिन ईरान झुकने को तैयार नहीं है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कह दिया है हम अमेरिका से कोई डायरेक्ट बात नहीं कर रहे। जो भी बात हो रही है वो ओमान के जरिए सिर्फ समंदर के रास्ते को मैनेज करने के लिए हो रही। इतना ही नहीं ईरान के सांसदों ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने उनके देश पर एक भी बम गिराया तो पूरे मिडिल ईस्ट में फैले अमेरिकी ठिकानों को श्मशान बना देंगे और सऊदी अरब व यूएई के तेल कुओं को आग लगा देंगे।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 20:40:21 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran युद्ध के बीच भारत का बड़ा एक्शन, अचानक तेहरान में नियुक्त किया अपना नया राजदूत</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच लगातार जारी तनाव को देखते हुए भारत सरकार अब एक्शन मोड में नजर आ रही है। जहां भारत ने एक बड़ा कूटनीतिक फैसला लेते हुए ईरान में अचानक नए राजदूत की नियुक्ति कर दी है। दरअसल भारत सरकार ने ईरान में अपने राजदूत को बदलते हुए भारतीय विदेश सेवा यानी कि आईएफएस के साल 2002 बैच के वरिष्ठ अधिकारी विश्वेश नेगी को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया है। विदेश मंत्रालय ने 3 अगस्त को जारी अपने आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि की। फिलहाल विश्वेश नेगी जो हैं वह नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं और जल्द ही तेहरान में अपनी नई जिम्मेदारी को संभालेंगे। नए राजदूत की यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पूरा पश्चिम एशिया तनाव के दौर से गुजर रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच लगातार तनाव बना हुआ है। इसे भी पढ़ें: ईरान का बड़ा बयान, Pezeshkian बोले &#039;हम युद्ध नहीं चाहते&#039; पर Trump ने दी Last Chance की चेतावनीपूरे इलाके में सैन्य गतिविधियां भी देखने को मिल रही है और कूटनीतिक प्रयास भी लगातार समानांतर तौर पर जारी है। ऐसे माहौल में भारत का ईरान में नए राजदूत को भेजना केवल एक नियमित प्रशासनिक फैसला नहीं है बल्कि यह एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना जा रहा है। भारत के लिए ईरान सिर्फ एक पड़ोसी देश नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा समुद्री व्यापार क्षेत्रीय संपर्क का एक अहम साझेदार है। भारत के तेल आयात, व्यापारिक जहाजों की आवाजाही और पश्चिम एशिया में उसके आर्थिक हित काफी हद तक स्ट्रेट ऑफ हार्मोस की सुरक्षा पर निर्भर करते हैं। यही कारण है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर भी बनाए हुए हैं और साथ-साथ में एक्शंस भी ले रहा है। इन सबके बीच भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास सराची से भी फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत में भारत ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर अपनी गहरी चिंता जताई है।इसे भी पढ़ें: Iran Political Crisis: खामेनेई का Pezeshkian को आखिरी अल्टीमेटम, IRGC कमांडर के हाथ में कमान जयशंकर ने साफ कहा है कि किसी भी परिस्थिति में व्यवसायिक जहाजों और नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत ने यह भी दोहराया कि किसी भी पक्ष द्वारा व्यापारिक जहाजों पर किए गए हमलों की वह कड़ी निंदा करते हैं। जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से ही संवाद और कूटनीति के जरिए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थक रहा है। वहीं ईरान की ओर से भी मौजूदा हालात और चल रही कूटनीतिक कोशिशों की जानकारी भारत के साथ साझा की गई। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच बिचौलियों के माध्यम से नई बातचीत शुरू होने की संभावना है। दूसरी ओर ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार ईरान और ओमान के बीच समुद्रिक गलियारे के संचालन को लेकर साझा व्यवस्था बनाने पर भी बातचीत जारी है जो कि जल्द ही अंतिम चरण में पहुंच सकती है। ऐसे संवेदनशील माहौल में विश्वेश नेगी की नियुक्ति भारत की उस रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है। जिसके तहत भारत सरकार एक तरफ़ अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों की रक्षा करना चाहती है। तो वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को भी मजबूत बनाए रखना चाहती है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 20:40:21 +0530</pubDate>
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<title>Vinay Mohan Kwatra ने Georgia के गवर्नर Brian Kemp से की मुलाकात</title>
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<description><![CDATA[ (सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, चार अगस्त अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने जॉर्जिया के गवर्नर ब्रायन केम्प से मुलाकात की और दक्षिण-पूर्वी राज्य के साथ व्यापार और निवेश साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा की। क्वात्रा ने सोमवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “हमने भारत-जॉर्जिया व्यापार और निवेश साझेदारी बढ़ाने, बेहतर कनेक्टिविटी और व्यापार, नवाचार एवं शिक्षा में सहयोग को गहरा करने के मौकों पर चर्चा की। भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में जॉर्जिया के लगातार योगदान के प्रति हम आशान्वित हैं।’’
उन्होंने गवर्नर केम्प को उनके सफल कार्यकाल के लिए बधाई दी।अटलांटा की अपनी यात्रा के दौरान, क्वात्रा ने लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट कंपनी यूनाइटेड पार्सल सर्विस (यूपीएस) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैरल टोम से भी मुलाकात की और भारत में निवेश के अवसरों पर चर्चा की। भारतीय राजदूत ने कहा कि टोम के साथ चर्चा भारत-अमेरिका की बढ़ती आर्थिक साझेदारी, मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं, लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी और भारत में यूपीएस के बढ़ते निवेश, जुड़ाव तथा मौजूदगी पर केंद्रित थी। अटलांटा में भारत के महावाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित भारत-अमेरिका शिक्षा गोलमेज वार्ता में, क्वात्रा ने अनुसंधान साझेदारियों, अकादमिक आदान-प्रदान, नवाचार, प्रौद्योगिकी सहयोग तथा भारत में सैटेलाइट परिसर खोलने पर लाभकारी चर्चा की।उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे भारत और अमेरिका भविष्य में निवेश कर रहे हैं, शिक्षा हमारी रणनीतिक साझेदारी के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक बनी हुई है।”
भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ अपनी बैठक में क्वात्रा ने कहा कि उनकी उपलब्धियां बढ़ती भारत-अमेरिका साझेदारी का मजबूत स्तंभ हैं। भारतीय राजदूत ने कहा, “अटलांटा में भारतवंशी समुदाय के सदस्यों से मिलकर बहुत अच्छा लगा। पूरे दक्षिण पूर्व में, हमारा समुदाय हर क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रहा है और भारत तथा अमेरिका के बीच रिश्तों को गहरा कर रहा है।उनकी उपलब्धियां गौरवान्वित करती हैं और हमारी बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का मजबूत स्तंभ हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 20:40:20 +0530</pubDate>
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<title>मुनीर&#45;नकवी ने मिलकर कर दिया खेल, पाकिस्तान में तख्तापलट होने वाला है?</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने पिछले 21 सालों के सबसे बड़े घोटाले का खुलासा करते हुए कहा है कि देश का प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह से विफल हो गया है। इससे पाकिस्तान को दुनिया भर में शर्मिंदगी उठानी पड़ी है। नकवी ने जजों, राजनीतिक नेताओं और अधिकारियों पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। नतीजतन, पाकिस्तान में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम और सत्ता परिवर्तन की संभावना को लेकर फिर से अटकलें लगाई जा रही हैं। इंटरनेशनल एनालिस्ट्स के अनुसार, मोहसिन नकवी तेज़ी से एक मीडिया प्रमुख से एक ताकतवर राजनीतिक नेता बन गए हैं। लंबे समय से उनकी प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रही है। माना जाता है कि सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इस भूमिका में नकवी का सीधे तौर पर समर्थन करते हैं, क्योंकि नकवी को जनरल का बेहद करीबी माना जाता है। इसे भी पढ़ें: 11 अगस्त को बलूचिस्तान की आजादी का ऐलान! भारत भी हैरानबलूचिस्तान और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में बढ़ते जन-आक्रोश और नागरिक अशांति के बीच, जनरल आसिम मुनीर अपनी पकड़ मज़बूत करने की कोशिश कर रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, मुनीर देश में नए प्रांत या प्रशासनिक इकाइयाँ बनाने का रास्ता साफ़ करने के लिए मोहसिन नक़वी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका असल मकसद मुनीर के लिए पूरी सत्ता हासिल करने का रास्ता बनाना है—जिसमें वे राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों के प्रमुख, दोनों की भूमिका निभाएँगे—ठीक वैसे ही जैसे परवेज़ मुशर्रफ़ ने किया था। नकवी ने देश में जवाबदेही और न्यायिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नए प्रशासनिक प्रांत बनाने की मांग की है। पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता ने भी सुरक्षा और सुशासन के नज़रिए से इस प्रशासनिक पुनर्गठन का समर्थन किया है। हालाँकि, दोनों सत्ताधारी पार्टियों ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी है, क्योंकि उनकी राजनीतिक ताकत पंजाब और सिंध प्रांतों से आती है; प्रांतों की सीमाओं में किसी भी बदलाव से उनका राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ़ ने मोहसिन नकवी के लगातार बयानों से नाराज़ होकर उन पर तीखा हमला किया है। आसिफ़ ने कहा कि नकवी पिछले तीन सालों से बहुत ताकतवर पद पर हैं और प्रधानमंत्री के प्रति भी जवाबदेह नहीं हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर इतनी ज़्यादा ताकत वाला व्यक्ति शिकायत कर रहा है, तो बाकी मंत्रियों को घर चले जाना चाहिए। आसिफ़ ने कैबिनेट की बैठकों और संसदीय सत्रों में नकवी की कम भागीदारी की भी आलोचना की। आसिफ़ ने नक़वी को यह सलाह भी दी कि वे अपने मंत्रालय और PCB से ही सिस्टम में बदलाव करना शुरू करें।इसे भी पढ़ें: विदेश मंत्रालय ने Pakistan में पीओके चुनाव को बताया दिखावापाकिस्तान की राजनीति पर करीब से नजर रखने वाले बताते हैं कि मोहसिन नकवी लंबे वक्त से प्रधानमंत्री बनने की महत्वकांक्षा रखते हैं। मोहसिन नकवी के इन बयानों के पीछे सीधे सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का हाथ है। नकवी को जनरल मुनीर का बेहद करीबी और रिश्तेदार माना जाता है। मुनीर ने संघर्ष के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के लिए भी मुनीर ने शहबाज सरकार को दरकिनार कर नकवी को ही अपना विशेष प्रतिनिधि बनाया था। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 20:40:20 +0530</pubDate>
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<title>Russia&#45;Ukraine War: यूक्रेन के भीषण Drone Attack से दहला रूस, 8 लोगों की मौत और जवाबी Air Strikes तेज</title>
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<description><![CDATA[ रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेज हो गया है। बीती रात यूक्रेन की ओर से रूस के कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए गए, जिनमें कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई। इन हमलों में नागरिक इलाकों के साथ-साथ व्यावसायिक ढांचे को भी निशाना बनाया गया। दूसरी ओर रूस ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रातभर में सैकड़ों यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया।मौजूद जानकारी के अनुसार, रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रातभर में कुल 635 यूक्रेनी ड्रोन को नष्ट कर दिया। इसके बावजूद कुछ ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे, जिससे कई क्षेत्रों में जान-माल का नुकसान हुआ।बता दें कि रूस के सीमावर्ती बेलगोरोद क्षेत्र में एक ड्रोन हमला बच्चों के खेल मैदान के पास हुआ। कार्यवाहक गवर्नर अलेक्जेंडर शुवायेव के अनुसार, इस हमले में एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग घायल हुए। बाद में बेलगोरोद के अन्य हिस्सों में हुए अलग-अलग हमलों में तीन और लोगों की मौत तथा पांच लोगों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।वहीं पड़ोसी सारातोव क्षेत्र के एंगेल्स शहर में एक रिहायशी इमारत पर ड्रोन गिरने से दो लोगों की जान चली गई। क्षेत्र के गवर्नर रोमन बुसारगिन ने बताया कि एंगेल्स और क्षेत्रीय राजधानी सारातोव दोनों जगह नागरिक ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। गौरतलब है कि एंगेल्स में रूस का एक महत्वपूर्ण सैन्य हवाई अड्डा मौजूद है, जबकि सारातोव अपने बड़े तेल शोधन संयंत्र के लिए जाना जाता है। इसी वजह से ये दोनों शहर पहले भी कई बार यूक्रेनी हमलों का निशाना बन चुके हैं।उदमुर्तिया क्षेत्र में भी ड्रोन हमले से तीन लोगों की मौत और दो अन्य के घायल होने की पुष्टि कार्यवाहक गवर्नर ओल्गा अब्रामोवा ने की है। वहीं बश्कोर्तोस्तान क्षेत्र के गवर्नर रादिय खाबीरोव ने बताया कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर किए गए बड़े ड्रोन हमले को वायु रक्षा प्रणाली ने विफल कर दिया। हालांकि क्षेत्रीय राजधानी उफा के औद्योगिक इलाके में एक ड्रोन गिरने के बाद आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए राहत दलों को तैनात किया गया।दूसरी ओर रूस ने भी यूक्रेन पर जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। रूस के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उसकी सेना ने यूक्रेन के मिकोलाइव बंदरगाह पर सैन्य सामान ले जा रहे दो जहाजों और वहां मौजूद बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। इसके अलावा काला सागर में सैन्य सामग्री ले जा रहे एक अन्य जहाज पर भी हमला किया गया।उधर यूक्रेन के दक्षिण-पूर्वी शहर जापोरिज्जिया में रूसी निर्देशित बम हमलों में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 21 अन्य लोग घायल हुए। क्षेत्रीय गवर्नर इवान फेदोरोव ने इसकी पुष्टि की है।गौरतलब है कि हाल के दिनों में यूक्रेन ने रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने की रणनीति के तहत कई व्यावसायिक ठिकानों को भी निशाना बनाया है। इसी अभियान के तहत रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन खुदरा कंपनी वाइल्डबेरीज़ के एक गोदाम पर भी हमला किया गया। बताया जा रहा है कि पिछले दो सप्ताह से भी कम समय में इस कंपनी के एक दर्जन से अधिक गोदाम ड्रोन हमलों का शिकार बन चुके हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते ड्रोन और मिसाइल हमलों से युद्ध का दायरा और व्यापक होता जा रहा है। इसका असर अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आम नागरिकों, व्यापारिक गतिविधियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:41 +0530</pubDate>
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<title>Sheikh Hasina के प्रस्तावित कार्यक्रम पर Bangladesh ने India से मांगा रुख स्पष्ट करने को</title>
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<description><![CDATA[ ढाका, तीन अगस्त बांग्लादेश ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के बुधवार को नयी दिल्ली में प्रस्तावित संवाददाता सम्मेलन को लेकर भारत से उसका रुख स्पष्ट करने को कहा है। यह संवाददाता सम्मेलन पांच अगस्त को हसीना सरकार के पतन के दो साल पूरे होने के मौके पर होना है। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबेद इस्लाम ने सोमवार को ढाका में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि भारतीय क्षेत्र से हसीना की सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों का दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि हसीना (78) के पांच अगस्त को नयी दिल्ली में ‘फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया’ की ओर से आयोजित एक निजी कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शामिल होने की उम्मीद है। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वालों में हसीना के अमेरिका में रहने वाले बेटे साजीब वाजेद जॉय, पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल और बांग्लादेश ह्यूमन राइट्स वॉच के महासचिव मोहम्मद अली सिद्दीकी शामिल हैं। शमा ने कहा, “बांग्लादेश चाहता है कि भारत इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करे।” उन्होंने कहा कि ढाका नहीं चाहता कि इस मुद्दे से दोनों देशों के आपसी संबंधों पर बुरा असर पड़े।शमा ने कहा कि “भारत में रह रहे भगोड़े, जो बांग्लादेश में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं”, उनकी राजनीतिक गतिविधियों से दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ढाका ने लगातार दोहराया है कि “भगोड़ों या दोषी ठहराए गए लोगों” को बांग्लादेश में अस्थिरता फैलाने के मकसद से राजनीतिक गतिविधियां संचालित करने के लिए भारतीय जमीन के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। शमा ने कहा, “हम चाहते हैं कि भारत के साथ हमारे संबंध बेहतर हों।मेरा मानना ​​है कि भारत भी यही चाहता है।”
उधर, सरकारी समाचार एजेंसी ‘बीएसएस’ की खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा कि भारत की जमीन से हसीना का प्रस्तावित सार्वजनिक संबोधन “द्विपक्षीय संबंधों में आई सकारात्मक गति” को कमजोर कर सकता है। खबर में कहा गया है कि कबीर ने यह बात तब कही, जब बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने सोमवार को उनसे शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों अधिकारियों ने बांग्लादेश-भारत संबंधों के विभिन्न पहलुओं का जायजा लिया और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा की।ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “बातचीत आपसी हित और आपसी फायदे के आधार पर दोनों पड़ोसी देशों के बीच लोगों पर केंद्रित सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित थी।”
गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने सोमवार को कहा कि सरकार ने देशभर में लोगों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पांच अगस्त से पहले कानून लागू करने वाली और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:41 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump का दावा, ईरान के पास समझौता करने और अमेरिकी हमलों से बचने का आखिरी मौका</title>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन, तीन अगस्त (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ प्रस्तावित नयी वार्ता तेहरान के लिए समझौता करने और अमेरिका के हमलों से बचने का आखिरी मौका है। ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले एक-दो दिन में बातचीत शुरू होगी, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खोला जाएगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की चिंताओं का समाधान निकालने का रास्ता तैयार होगा। राष्ट्रपति ने कहा, “पहला चरण जलडमरूमध्य को खोलने का है।दूसरा चरण परमाणु निरस्त्रीकरण का है।”
ट्रंप ने कहा कि “इसमें थोड़ा समय लगेगा।”
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे सहयोगी खाड़ी देशों के आग्रह पर ईरान पर नए और बड़े हमले का आदेश देने का फैसला फिलहाल टाल दिया। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:40 +0530</pubDate>
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<title>Satyanjal Pandey इस्लामाबाद में बने भारत के नए प्रभारी राजदूत</title>
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<description><![CDATA[ इस्लामाबाद, तीन अगस्त भारतीय राजनयिक सत्यांजल पांडे ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में भारत के प्रभारी राजदूत के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। भारतीय मिशन ने सोमवार को यह जानकारी दी। वर्ष 2008 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी पांडे ने गीतिका श्रीवास्तव का स्थान लिया है, जिन्हें अगस्त 2023 में इस पद पर नियुक्त किया गया था।भारतीय मिशन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, डॉ. सत्यांजल पांडे ने एक अगस्त 2026 को इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में प्रभारी राजदूत के तौर पर कार्यभार संभाला। उच्चायोग की पोस्ट को दोबारा साझा करते हुए पांडे ने लिखा, एक शानदार टीम का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं।’’
इससे पहले वह श्रीलंका में भारत के उप उच्चायुक्त थे। अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने के भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान द्वारा राजनयिक संबंधों का स्तर कम किए जाने के बाद इस्लामाबाद और दिल्ली स्थित भारतीय और पाकिस्तानी उच्चायोगों का नेतृत्व प्रभारी राजदूत कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:40 +0530</pubDate>
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<title>Iran US Conflict | अमेरिकी सेना को ईरान पर &amp;apos;नए और अनोखे&amp;apos; तरीकों से हमले की सलाह, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले जारी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव और संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के पास किसी समझौते पर पहुँचने का यह &quot;आखिरी मौका&quot; है। ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है, हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी दावों को खारिज किया है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने ईरान को सबक सिखाने और उस पर दबाव बनाने के लिए गैर-पारंपरिक और अपरंपरागत रणनीतियों पर विचार करना शुरू कर दिया है।  इसे भी पढ़ें: भारत में कई WhatsApp Accounts अचानक हुए 24 घंटे के लिए ब्लॉक, रिव्यू में जाने से यूजर्स परेशान, कंपनी ने दी सफाई व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और अन्य क्षेत्रीय सहयोगियों के अनुरोध पर बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने वाशिंगटन के साथ बातचीत के दावों को खारिज कर दिया, लेकिन ट्रंप ने जोर देकर कहा कि चर्चा चल रही है। ट्रंप ने कहा, &quot;हम अभी बात कर रहे हैं।&quot; उन्होंने आगे कहा, &quot;यह उनके लिए एक अच्छे समझौते पर हस्ताक्षर करने का आखिरी मौका है। मैं उन्हें कड़ी कार्रवाई से पहले हर संभव आखिरी मौका देना चाहता हूँ।&quot;CENTCOM ने ईरान पर कार्रवाई के लिए &#039;नए और अनोखे&#039; विचारों की मांग कीइस बीच, खबर है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर दबाव बनाने के नए तरीकों के लिए सैन्य विश्लेषकों से नए विचारों की मांग की है। इसे भी पढ़ें: FSSAI का Dabur India पर बड़ा एक्शन! &#039;100% शुद्ध&#039; और &#039;ऑर्गेनिक&#039; के गुमराह करने वाले दावों पर लगी रोक, 15 दिनों में मांगी रिपोर्टCNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, CENTCOM की खुफिया शाखा के एक अधिकारी ने पिछले हफ्ते एक ईमेल भेजा था जिसमें कर्मचारियों से &quot;ईरान पर दबाव बनाने और उसे दंडित करने के नए, अनोखे और अपरंपरागत तरीकों&quot; का प्रस्ताव देने को कहा गया था।क्राउडसोर्सिंग-शैली के इस अनुरोध को अमेरिकी सेना के लिए एक असामान्य कदम माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन अपने विकल्पों पर फिर से विचार कर रहा है क्योंकि वह ईरान को वाशिंगटन की शर्तों पर समझौते के लिए मजबूर करना चाहता है।मामले से परिचित एक दूसरे सूत्र ने CNN को बताया कि CENTCOM सभी उपलब्ध विकल्पों की समीक्षा कर रहा है और उसने अपनी मौजूदा रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता को स्वीकार किया है।CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिमोथी हॉकिन्स ने CNN को दिए एक बयान में कहा, &quot;अमेरिकी सेंट्रल कमांड का नए और अनोखे तरीकों से सोचने और काम करने का लंबा इतिहास रहा है।&quot;उन्होंने आगे कहा, &quot;खासकर एडमिरल कूपर, ऑपरेशनल परफॉर्मेंस के उच्चतम स्तर को हासिल करने के लिए रैंक की परवाह किए बिना हमारी बेहतरीन टीम के सदस्यों से संपर्क करते हैं।&quot;होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु कार्यक्रम पर फोकसट्रंप के अनुसार, चर्चा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से निपटने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक जलमार्ग &quot;सचमुच कल तक&quot; फिर से खुल सकता है, जबकि ईरान के परमाणु-मुक्त होने की प्रक्रिया में &quot;थोड़ा समय&quot; लग सकता है।अमेरिका और ईरान 28 फरवरी से ही संघर्ष में उलझे हुए हैं, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ अचानक हमले किए थे। हालांकि बीच-बीच में हुई कूटनीतिक कोशिशों से कुछ समय के लिए शांति रही है, लेकिन टकराव जारी है। ईरान के पास अब भी एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार है और वह इस इलाके में अमेरिका और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने की क्षमता रखता है।होर्मुज में कार्गो जहाज पर हमलाएक नई घटना में, ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी, UK मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) ने मंगलवार सुबह बताया कि ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरते समय एक अज्ञात कार्गो जहाज पर &quot;अज्ञात प्रोजेक्टाइल&quot; (किसी अज्ञात चीज़) से हमला हुआ।एजेंसी ने कहा कि अधिकारी घटना की जांच कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने जहाज की पहचान या संभावित नुकसान या हताहतों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। Stay updated with International
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:39 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump के नए आयात शुल्क के खिलाफ 25 अमेरिकी राज्यों ने खटखटाई अदालत</title>
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<description><![CDATA[ सागर कुलकर्णी
वाशिंगटन, चार अगस्त डेमोक्रेटिक पार्टी शासित 25 अमेरिकी राज्यों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत अमेरिका के कुल आयात में 99.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए आयात शुल्क लगाए गए हैं। अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी पर पर्याप्त कार्रवाई न होने का हवाला देते हुए पिछले महीने इन 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक के नए आयात शुल्क लगाए थे। ये शुल्क 24 जुलाई को समाप्त हो चुके 10 प्रतिशत के वैश्विक आयात शुल्क के स्थान पर लागू किए गए हैं।इन 25 राज्यों ने कई देशों पर फिर से शुल्क लागू करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ सोमवार को अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय का रुख किया। राज्यों का तर्क है कि इस कदम से पूरे देश में उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटीटिया जेम्स, गर्वनर कैथी होचुल और डेमोक्रेटिक राज्यों के इस समूह ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय से इन शुल्कों को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया है।जेम्स ने एक बयान में कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय में हार के बाद भी प्रशासन (ट्रंप) एक बार फिर नए शुल्कों के जरिए परिवारों और कारोबारों पर अवैध रूप से अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है।’’
भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका ने 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इससे पहले भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव था। भारत को यह राहत 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद मिली।बयान में कहा गया कि प्रशासन दावा कर रहा है कि वह वैश्विक व्यापार में बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत कार्रवाई कर रहा है। याचिका में दलील दी गई कि यह वास्तव में उन व्यापक आयात शुल्कों को दोबारा लागू करने का एक बहाना भर है, जिन्हें लागू करने के प्रशासन के पूर्व प्रयास विफल हो चुके हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने धारा 301 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया।न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने कहा, ‘‘प्रशासन इसे किसी भी तरह उचित ठहराने की कोशिश करे, लेकिन कानून और हमारा संविधान स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देश पर व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:39 +0530</pubDate>
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<title>UGC की मंजूरी से भारत में खुलेंगे 15 विदेशी विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा का होगा विस्तार</title>
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<description><![CDATA[ भारत में उच्च शिक्षा के विस्तार को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 15 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इन संस्थानों में ऑस्ट्रेलिया, इटली, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम के विश्वविद्यालय शामिल हैं।
कहां खुलेंगे नए कैंपस?
ये विदेशी विश्वविद्यालय भारत के प्रमुख शहरों में अपने परिसर स्थापित करेंगे। स्वीकृत शहरों में बेंगलुरु, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मुंबई और चेन्नई जैसे महत्वपूर्ण शैक्षिक और व्यावसायिक केंद्र शामिल हैं। यह कदम भारत को एक वैश्विक शैक्षिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
UGC की मंजूरी और प्रक्रिया
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने इन विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपनी शाखाएं खोलने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए थे। इन दिशानिर्देशों का पालन करने वाले विश्वविद्यालयों को ही मंजूरी दी गई है। यह सुनिश्चित करेगा कि भारत में खुलने वाले विदेशी कैंपस उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करें और स्थानीय नियामक निकायों के मानकों का पालन करें।
शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर
इन विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस खुलने से भारतीय छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिलेंगे। इससे न केवल विदेशी शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या कम होगी, बल्कि यह भारत में शिक्षा की गुणवत्ता को भी बढ़ाएगा। साथ ही, यह विभिन्न देशों के साथ शैक्षिक सहयोग को भी बढ़ावा देगा।
क्या होंगे फायदे?
यह पहल भारत को उच्च शिक्षा के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाने में मदद करेगी। छात्रों को विभिन्न देशों के शैक्षणिक पाठ्यक्रमों और शोध के अवसरों तक पहुंच मिलेगी। इसके अतिरिक्त, यह स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा और भारत में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करेगा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:38 +0530</pubDate>
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<title>US Tariff Lawsuit | भारत समेत 60 देशों पर ट्रंप के नए टैरिफ का मामला फिर पहुंचा कोर्ट, अमेरिका के 25 राज्यों ने दायर किया मुकदमा</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों को लेकर अमेरिका के भीतर ही बड़ा कानूनी और राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले अमेरिका के 25 राज्यों के एक समूह ने सोमवार को अदालत का रुख किया है। इन राज्यों ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) समेत 60 व्यापारिक साझेदार देशों (Trading Partner Countries) से होने वाले आयात पर लगाए गए नए टैरिफ को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर किया है। राज्यों का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन इसी तरह के कदमों पर कोर्ट के कई फैसलों के बावजूद एक बार फिर अपनी कानूनी सीमा से बाहर जाकर काम कर रहा है। न्यूयॉर्क में US कोर्ट ऑफ़ इंटरनेशनल ट्रेड में दायर इस मुकदमे में 10% से 12.5% ​​तक के उन टैरिफ को निशाना बनाया गया है, जो पिछले महीने ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 301 के तहत लागू हुए थे। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये ड्यूटी उन देशों के खिलाफ हैं जो जबरन मजदूरी से बने सामान के एक्सपोर्ट को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में नाकाम रहे हैं।यह मामला ट्रंप की टैरिफ स्ट्रैटेजी की नई परीक्षा है, जो US कोर्ट में बार-बार झटके लगने के बावजूद कायम रही है।US राज्यों का कहना है कि ट्रंप कोर्ट के फैसलों को नहीं मान रहे हैंयह मुकदमा ओरेगन और न्यूयॉर्क समेत 25 राज्यों ने दायर किया है, जिनके गवर्नर या अटॉर्नी जनरल डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं। राज्यों का तर्क है कि ट्रंप एक अलग कानूनी आधार का इस्तेमाल करके उन बड़े इम्पोर्ट टैक्स को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं जिन्हें कोर्ट पहले ही गैर-कानूनी करार दे चुका है। शिकायत के अनुसार, धारा 301 का इस्तेमाल ऐतिहासिक रूप से अनुचित व्यापार प्रथाओं के आरोपी खास देशों या उद्योगों को निशाना बनाने के लिए किया गया है - न कि लगभग सभी US इम्पोर्ट पर व्यापक टैरिफ लगाने के लिए। शिकायत में यह भी तर्क दिया गया है कि प्रशासन जबरन मजदूरी का बहाना बनाकर उन टैरिफ को फिर से लागू कर रहा है जिन्हें कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है।रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ओरेगन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने एक बयान में कहा, &quot;हर कदम पर हारने के बावजूद, ट्रंप एक बार फिर कामकाजी परिवारों और ओरेगन के स्थानीय व्यवसायों के लिए और अधिक मुश्किलें पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।&quot;नए टैरिफ 60 ट्रेडिंग पार्टनर देशों पर लागूविवादित टैरिफ की घोषणा 24 जुलाई को की गई थी और ये यूरोपीय संघ और भारत समेत 60 ट्रेडिंग पार्टनर देशों से होने वाले इम्पोर्ट पर लागू होते हैं। कुछ देशों को कड़े नियम लागू करने के बाद कम टैरिफ दरें मिलीं। उदाहरण के लिए, प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, भारत के लिए टैरिफ दर 12.5% ​​से घटाकर 10% कर दी गई। कुछ खास प्रोडक्ट्स, जैसे तेल, नैचुरल गैस, फर्टिलाइज़र और US-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट के तहत ड्यूटी-फ्री सुविधा पाने वाले सामानों को नए टैरिफ से छूट दी गई। इसे भी पढ़ें: भारत में कई WhatsApp Accounts अचानक हुए 24 घंटे के लिए ब्लॉक, रिव्यू में जाने से यूजर्स परेशान, कंपनी ने दी सफाईनए टैरिफ का ऐलान करते हुए US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने इस कदम का बचाव किया। अमेरिका में लगभग एक सदी से ज़बरदस्ती मज़दूरी से बने सामान के इंपोर्ट पर रोक है और इसे सख्ती से लागू किया जाता है; अब हमारे ट्रेडिंग पार्टनर्स के लिए भी ऐसा ही करने का समय आ गया है।ट्रंप ने एक नई कानूनी रणनीति अपनाईये टैरिफ ट्रंप के आर्थिक एजेंडा के मुख्य स्तंभों में से एक को बचाने की उनकी नई कोशिश है, क्योंकि इससे पहले के उपायों को कानूनी तौर पर काफी झटके लगे थे। इस साल की शुरुआत में, US सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को बड़े पैमाने पर ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है, जिससे ट्रंप की एक अहम ट्रेड पहल रद्द हो गई।इसके जवाब में, ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत दुनिया भर में अस्थायी टैरिफ लगाए। बाद में US कोर्ट ऑफ़ इंटरनेशनल ट्रेड ने उन लेवी को भी गैर-कानूनी करार दिया, हालांकि प्रशासन की अपील के दौरान वे लागू रहे। इसे भी पढ़ें: Ramayana की रिलीज से पहले स्पेशल स्क्रीन की मांग, श्री रामलीला महासंघ ने निर्माताओं को लिखा पत्र, विरोध प्रदर्शन की दी चेतावनीकानूनी चुनौतियों के कारण उन विकल्पों के बाद, प्रशासन ने अब ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 का रुख किया है, एक ऐसा कानून जिसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से विदेशी सरकारों की अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यापार प्रथाओं का जवाब देने के लिए किया जाता है।ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान चीन पर टैरिफ लगाने के लिए इसी प्रावधान का इस्तेमाल किया था, और वे उपाय कानूनी चुनौतियों में टिके रहे क्योंकि वे किसी खास देश को टारगेट करके लगाए गए थे।कोर्ट से बार-बार झटके मिलने के बावजूद ट्रंप US मैन्युफैक्चरिंग को फिर से शुरू करने और ग्लोबल ट्रेड को नया रूप देने के लिए टैरिफ को एक बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं। पिछले साल, उन्होंने तर्क दिया था कि अमेरिका का लंबे समय से चला आ रहा ट्रेड डेफिसिट एक राष्ट्रीय आपातकाल है, और आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए लगभग हर देश से होने वाले इंपोर्ट पर टैरिफ लगाए, हालांकि बाद में कोर्ट ने उन उपायों पर रोक लगा दी। Stay updated with International
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:38 +0530</pubDate>
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<title>Sheikh Hasina के वर्चुअल संबोधन को लेकर Bangladesh ने मांगी Bharat से सफाई</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश भारत से यह स्पष्टीकरण मांग रहा है कि क्या वह प्रधानमंत्री शेख हसीना के 5 अगस्त को होने वाले वर्चुअल संबोधन का समर्थन करेगा। ढाका चाहता है कि भारत इस बात का आश्वासन दे कि उसकी धरती का उपयोग राजनीतिक बयानबाजी के लिए नहीं किया जाएगा।बांग्लादेश की चिंताएंबांग्लादेश सरकार को इस बात की चिंता है कि ऐसे राजनीतिक बयान देश की स्थिरता को खतरे में डाल सकते हैं और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे पहले, भारत ने संकेत दिया था कि वह भगोड़ों से राजनीतिक बयानबाजी की उम्मीद नहीं करता है।तारीक रहमान और ब्रिक्स शिखर सम्मेलनइस बीच, प्रधानमंत्री तारीक रहमान के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यह मामला बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति और भारत के साथ उसके संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:37 +0530</pubDate>
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<title>UKMTO ने ओमान तट पर मालवाहक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल हमले की शुरू की जांच</title>
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<description><![CDATA[ अल-खसाब [ओमान], 4 अगस्त (एएनआई): यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने मंगलवार को कहा कि ओमान के अल-खसाब से लगभग 20 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में एक मालवाहक जहाज अज्ञातProjectile से टकरा गया।यूकेएमटीओ ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उसे मालवाहक जहाज द्वारा वीएचएफ चैनल 16 पर संदेश प्रसारित करने के बाद घटना के संबंध में एक संकट कॉल प्राप्त हुई।“यूकेएमटीओ को ओमान के अल-खसाब से 20 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में एक घटना की रिपोर्ट मिली है। एक मालवाहक जहाज ने वीएचएफ 16 पर प्रसारित किया है कि वे एक अज्ञातProjectile से टकरा गए हैं। अधिकारी जांच कर रहे हैं,” यूकेएमटीओ ने कहा।यह घटना ईरान के साथ चल रही बातचीत के संबंध में सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टिप्पणियों के बाद क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आई है।राष्ट्रपति ट्रम्प ने ओवल ऑफिस में संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर और ईरान के राजनयिक हस्तक्षेप के बाद ईरान के खिलाफ नियोजित सैन्य हमले को टाल दिया था।“यह आखिरी मौका है। यह कुछ ऐसा नहीं है जिसे यदि यह नहीं होता है, तो यह उनके लिए एक अच्छा दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने का आखिरी मौका है,” ट्रम्प ने वार्ताओं का जिक्र करते हुए कहा।उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के अनुरोध पर बातचीत हो रही थी और दोहराया कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना वाशिंगटन का प्राथमिक उद्देश्य बना हुआ है।सोमवार को पहले, ट्रम्प ने यह भी कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के संबंध में चर्चा चल रही है और जोर देकर कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।उनकी टिप्पणियों के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वार्ताओं की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और कहा था कि तेहरान वाशिंगटन के साथ द्विपक्षीय वार्ता में शामिल नहीं है। बघेई ने यह भी कहा था कि ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से एक नए समुद्री यातायात मार्ग पर समझ केवल सुरक्षित जहाज आवाजाही के लिए एक तकनीकी व्यवस्था थी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोलने का संकेत नहीं देती थी।मालवाहक जहाज पर कथित हमला ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से क्षेत्रीय सुरक्षा और नौपरिवहन पर राजनयिक प्रयास जारी हैं। (एएनआई) ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:37 +0530</pubDate>
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<title>Narinder Singh समेत 25 लोगों की अमेरिकी नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई</title>
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<description><![CDATA[ सागर कुलकर्णी
वाशिंगटन, चार अगस्त अमेरिका में पहचान संबंधी जानकारी में कथित फर्जीवाड़े से लेकर हत्या के प्रयास और बाल यौन शोषण जैसे आरोपों वाले मामलों में भारतीय मूल के एक व्यक्ति सहित 25 लोगों की नागरिकता रद्द की जा रही है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने 65 वर्षीय नरिंदर सिंह के खिलाफ डेलावेयर जिला न्यायालय में मुकदमा दायर किया है।उन पर अमेरिका में प्रवेश पाने के लिए फर्जी पहचान का सहारा लेने का आरोप है। न्याय मंत्रालय के मुताबिक सिंह ने 1996 में अमेरिका में प्रवेश के लिए गलत पहचान का इस्तेमाल किया और एक मई, 2008 को अमेरिका के नागरिक बन गए। शिकायत में उनके कई गलत बयानों और गैर-कानूनी कामों का जिक्र करते हुए सात आरोप लगाए गए हैं।जिन 25 लोगों के खिलाफ नागरिकता रद्द करने की कार्यवाही शुरू की गई है उनमें पाकिस्तानी मूल के दो लोग – जिया मुराद भट्टी और मोहम्मद वासिफ भी शामिल हैं। उन पर पहचान से जुड़ी गलत जानकारी देने के आरोप हैं। कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने सोमवार को एक बयान में कहा, ‘‘अमेरिका की नागरिकता हमारे देश के सर्वोच्च विशेषाधिकारों में से एक है और इसे वैध तरीके एवं ईमानदारी से ही हासिल किया जाना चाहिए।’’
ब्लांश ने कहा, ‘‘आज दर्ज की गई शिकायतों में आरोप है कि इन लोगों ने धोखाधड़ी से, तथ्यों को छिपाकर या गैर-कानूनी तरीके से नागरिकता हासिल की।​​इसमें हिंसक अपराध, बच्चों के खिलाफ यौन अपराध, फर्जी पहचान और नागरिकता के लिए अयोग्य ठहराने वाली अन्य बातें छिपाना शामिल है।’’
ये शिकायतें 20 जुलाई से तीन अगस्त के बीच दर्ज की गई हैं। नागरिकता पाने वाले इन लोगों में 17 देशों जैसे कि पाकिस्तान, मोल्दोवा, भारत, मेक्सिको, कोलंबिया, नाइजीरिया, लाइबेरिया, घाना, जमैका, ताइवान, होंडुरास, कैमरून, जॉर्डन, क्यूबा, ​​अल साल्वाडोर, हैती और स्वीडन के लोग शामिल हैं। ब्लांश ने कहा, ‘‘आज की ये कार्रवाई मंत्रालय के इतिहास में नागरिकता रद्द करने की सबसे बड़ी समन्वित कोशिश है, लेकिन यह तो बस शुरुआत है।न्याय मंत्रालय नागरिकता प्रक्रिया की शुचिता और अमेरिकी लोगों की रक्षा के लिए हर उपलब्ध तरीके का इस्तेमाल करना जारी रखेगा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:36 +0530</pubDate>
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<title>Ethiopia Landslide में 14 की मौत, अम्हारा क्षेत्र की घटना</title>
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<description><![CDATA[ अदीस अबाबा, चार अगस्त (एपी) इथियोपिया के अम्हारा क्षेत्र में सोमवार को मूसलाधार बारिश के बीच हुए भूस्खलन में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए साथ ही कई लोग लापता हैं। यह हादसा त्सादकाने देब्रे मितमाक सेंट मैरी मठ में हुआ जहां पुरानी बीमारियों के आध्यात्मिक तरीके से उपचार के लिए लोकप्रिय, पवित्र जल से शुद्धिकरण अनुष्ठान में शामिल होने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु एकत्र हुए थे। मठ के महाप्रबंधक मेगाबे हादिस नेका तिबेब अबाबू ने कहा, ‘‘यह दुर्घटना सुबह लगभग सात बजे हुई।मृतकों में अधिकतर वे श्रद्धालु शामिल हैं, जो पवित्र जल से शुद्धिकरण के धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने के लिए पहुंचे थे।’’
उन्होंने कहा कि मलबे के नीचे अब भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है, हालांकि उनकी संख्या का अभी पता नहीं चल सका है। अबाबू के अनुसार, मृतकों में से 11 का अंतिम संस्कार मठ परिसर में ही कर दिया गया, जबकि अन्य के शव उनके पैतृक स्थानों पर पहुंचाए गए हैं, कुछ मृतकों की पहचान अब भी नहीं हो सकी है। गंभीर रूप से घायल लोगों को मठ से लगभग 70 किलोमीटर दूर उत्तर शेवा प्रशासनिक क्षेत्र की राजधानी देबरे बिरहान के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:36 +0530</pubDate>
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<title>Prabhasakshi NewsRoom: Pakistan में आतंकवादियों पर कहर बनकर टूट रहे हैं Unknown Gunmen, Lashkar कमांडर के बयान से हुआ &amp;apos;खौफ&amp;apos; का खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में Unknown men अथवा Unknown gunmen आतंकवादियों पर कहर बन कर टूट रहे हैं। अक्सर खबर आती है कि बड़े बड़े आतंकी संगठनों के खूंखार आतंकी को अचानक से अज्ञात व्यक्ति या अज्ञात बंदूकधारी ठोक कर चला गया। इसी बीच, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कमांडर रिजवान हनीफ ने ऐसा बयान दिया है, जो पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के भीतर का खौफ दर्शा रहा है। हम आपको बता दें कि रिजवान हनीफ ने स्वीकार किया कि वर्ष 2020 से अब तक लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 30 से अधिक आतंकवादी पाकिस्तान के विभिन्न शहरों और क्षेत्रों में लक्षित हमलों में मारे जा चुके हैं।सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए हनीफ ने दावा किया कि पिछले चार वर्षों के दौरान संगठन के कई सक्रिय सदस्य पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में निशाना बनाए गए। उसने कहा कि इन आतंकियों की मौत पेशावर, कराची, रावलपिंडी, मुजफ्फराबाद और रावलाकोट जैसे शहरों में हुई। उसने कहा कि इन घटनाओं के पीछे भारतीय खुफिया एजेंसियों का हाथ था। हालांकि, उसने अपने दावों के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।इसे भी पढ़ें: China के J-20 Stealth Fighter Jets और Pakistan की SH-15 Howitzer Guns भारत की ओर तैनात, अब क्या करेंगे PM Modi?अपने संबोधन में हनीफ ने कहा, “पिछले चार वर्षों में हमारे 30 लोग भारतीय खुफिया एजेंटों द्वारा मार दिए गए। कोई पेशावर में मारा गया, कोई कराची में, कोई रावलपिंडी में, कोई मुजफ्फराबाद में और कोई रावलाकोट में।”देखा जाये तो रिजवान हनीफ का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आतंकी संगठन आमतौर पर अपने नेटवर्क को हुए नुकसान या अपने सदस्यों की मौत को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से बचते हैं। ऐसे में संगठन के एक वरिष्ठ सदस्य द्वारा खुले मंच से इतनी बड़ी संख्या में आतंकियों के मारे जाने की बात स्वीकार करना लश्कर-ए-तैयबा के भीतर हुए नुकसान की ओर संकेत माना जा रहा है।हालांकि, इस दौरान हनीफ का पूरा भाषण कट्टरपंथी और भड़काऊ टिप्पणियों से भी भरा रहा। उसने विभिन्न धर्मों के प्रति आपत्तिजनक और घृणा फैलाने वाली टिप्पणियां कीं तथा धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया। अपने भाषण में उसने अन्य आस्थाओं और उनके अनुयायियों के खिलाफ अपमानजनक बयान दिए और संगठन के समर्थकों को धार्मिक आधार पर उकसाने की कोशिश भी की।उधर, हनीफ के भाषण पर कई विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के संबोधन यह दर्शाते हैं कि आतंकवादी संगठन किस प्रकार धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग कर कट्टरता, वैमनस्य और हिंसा को बढ़ावा देने का प्रयास करते हैं। ऐसे संगठन अक्सर समाज में विभाजन पैदा करने और युवाओं के कट्टरपंथीकरण के लिए धर्म आधारित प्रचार का सहारा लेते हैं।बहरहाल, लश्कर को हुए नुकसान की बात तो उसके कमांडर ने कबूल कर ली लेकिन पाकिस्तान में कई और आतंकी संगठन भी हैं जिन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। हम आपको बता दें कि हालिया वर्षों में पाकिस्तान में &quot;अज्ञात हमलावर&quot; या &quot;अज्ञात बंदूकधारी&quot; शब्द का इस्तेमाल उन रहस्यमय लक्षित हत्याओं के लिए व्यापक रूप से किया जाता रहा है, जिनमें भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों से जुड़े कई वांछित और हाई-प्रोफाइल आतंकवादी मारे गए हैं। कराची, लाहौर, सियालकोट और रावलाकोट सहित कई शहरों में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और अल-बद्र जैसे प्रतिबंधित संगठनों के कई वरिष्ठ कमांडरों की गोली मारकर हत्या की जा चुकी है। इनमें वर्ष 2016 के पठानकोट आतंकी हमले के साजिशकर्ता शाहिद लतीफ, मसूद अजहर के भाई मोहम्मद ताहिर अनवर और वर्ष 2019 के पुलवामा हमले से जुड़े हमजा बुरहान जैसे नाम भी शामिल हैं। इन घटनाओं को लेकर पाकिस्तान समय-समय पर विदेशी खुफिया एजेंसियों, विशेषकर भारत की खुफिया एजेंसी रॉ पर आरोप लगाता रहा है। हालांकि, भारत सरकार ने ऐसे सभी आरोपों को लगातार खारिज किया है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:36 +0530</pubDate>
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<title>टूटे सारे रिकॉर्ड, रूस से रोजाना 28 लाख बैरल कच्चा तेल खरीद रहा भारत!</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया भर में इस वक्त तनाव चरम पर है। कहीं युद्ध का खतरा है तो कहीं ऊर्जा संकट की चिंता बनी हुई है और ऐसे ही माहौल में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद को और बढ़ा दिया है। जुलाई महीने में भारत ने रूस से रिकॉर्ड मात्रा में तेल खरीदा जो देश के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से भी ज्यादा हिस्सा रहा। जुलाई महीने में भारत ने रूस से अब तक का सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदा। आंकड़ों के मुताबिक रूस से भारत को करीब 28 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल मिला। यानी भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी पहली बार 55% से ज्यादा हुई। सीधे शब्दों में कहें तो जुलाई में भारत ने जितना भी कच्चा तेल विदेशों से खरीदा उसमें से आधे से ज्यादा हिस्सा रूस का था। इसे भी पढ़ें: Middle East में टला बड़ा युद्ध: क्षेत्रीय सहयोगियों की अपील पर Trump ने Iran से बातचीत को दी मंजूरीदरअसल साल 2022 में जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ था तब अमेरिका और यूरोप समेत कई पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद रूस ने अपना तेल कम कीमत पर बेचना शुरू किया और भारत ने भी अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस से तेल खरीद बढ़ा दी। अब हालात यह हैं कि रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन चुका है। हालांकि ऐसा नहीं है कि भारत सिर्फ रूस पर निर्भर है। जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने पश्चिम एशिया के देशों से भी तेल खरीद बढ़ाई। सऊदी अरब से भारत का तेल आयात बढ़कर करीब 4.2 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। वहीं इराक से भी तेल खरीद में तेजी आई और जुलाई में यह करीब 1.3 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। कुवैत ने भी दोबारा भारत को तेल सप्लाई शुरू की। वहीं संयुक्त अरब अमीरात से आयात थोड़ा कम हुआ लेकिन वह अभी भी भारत के बड़े तेल सप्लायर देशों में शामिल हैं। इसके पीछे वजह यह है कि कुछ समय पहले पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी। लेकिन अब हालात सामान्य होने के बाद भारत ने वहां से भी खरीद बढ़ानी शुरू कर दी है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump का दावा, ईरान के पास समझौता करने और अमेरिकी हमलों से बचने का आखिरी मौकाआपको बता दें भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयात करने वाला देश है। देश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और आम लोगों की जरूरतों के लिए लगातार ऊर्जा की जरूरत होती है। ऐसे में भारत की नीति साफ है कि जहां से बेहतर कीमत और भरोसेमंद सप्लाई मिले वहां से तेल खरीदा जाए। भारत, रूस के अलावा अमेरिका, खाड़ी देशों और दूसरे देशों से भी तेल आयात करता है। हालांकि अब एक नई चुनौती सामने जरूर आ रही है। अमेरिकी सीनेट ने हाल ही में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले एक बिल को मंजूरी दी। इस बिल में उन देशों पर 100% तक अतिरिक्त टेरिफ लगाने का प्रावधान है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल या गैस खरीदते हैं। इस बिल के निशाने पर सीधे तौर पर रूस के बड़े तेल खरीददार देशों में भारत और चीन भी आ सकते हैं। हालांकि अभी तक यह बिल कानून नहीं बना। इसे आगे अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में मंजूरी मिलनी बाकी है। इसे भी पढ़ें: Iraq और तुर्किये ने पाइपलाइन के जरिए तेल निर्यात बढ़ाने के समझौते पर किए हस्ताक्षरभारत ने इस पूरे मामले पर कहा है कि वह घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने भी साफ किया कि भारत की ऊर्जा नीति किसी दबाव में नहीं बल्कि देश के हित और 140 करोड़ लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। यानी एक तरफ भारत रूस से सस्ता और भरोसेमंद तेल लेकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका जैसे देशों के साथ अपने रिश्तों का संतुलन भी बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल दुनिया की नजर भारत की इस रणनीति पर है क्योंकि तेल सिर्फ व्यापार का मुद्दा नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति का बड़ा हथियार बन चुका है। लेकिन जिस तरह से पिछले महीने भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदा यह जरूर दिखाता है कि भारत किसी भी दबाव में नहीं आने वाला है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:35 +0530</pubDate>
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<title>गाजा में निरस्त्रीकरण के समझौते पर शांति बोर्ड के दूत ने नेतन्याहू से मुलाकात की, हमले रोकने की अपील</title>
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<description><![CDATA[ यरुशलम, चार अगस्त (एपी) गाजा में युद्ध के बाद के बदलावों की निगरानी कर रहे शांति बोर्ड के एक अधिकारी ने सोमवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। एक बयान के अनुसार, इस बैठक में अन्य मुद्दों के अलावा उस नए निरस्त्रीकरण समझौते पर भी चर्चा हुई जिस पर शांति बोर्ड की हमास के साथ चर्चा के दौरान सहमति बनी है। शांति बोर्ड ने एक बयान में कहा कि गाजा के लिए उच्च प्रतिनिधि निकोले म्लादेनोव ने प्रधानमंत्री और उनकी टीम के साथ ‘‘रचनात्मक और विस्तृत’’ बातचीत की।बयान में कहा गया, ‘‘मकसद साफ है और इस पर कोई सवाल नहीं है। गाजा पट्टी में पूर्ण निरस्त्रीकरण और बंदूक के बल पर शासन की जगह नागरिक प्रशासन स्थापित करना हमारा उद्देश्य है।’’
बैठक की जानकारी रखने वाले दो लोगों के अनुसार, म्लादेनोव ने नेतन्याहू से गाजा पट्टी में इजराइल के हमलों को रोकने के लिए भी कहा। म्लादेनोव और उनकी टीम इजराइल पर गाजा में हमले रोकने का दबाव बना रही है ताकि हमास के पास मौजूद हथियारों को निष्क्रिय कराने संबंधी समझौते को आगे बढ़ाया जा सके।म्लादेनोव की टीम में वरिष्ठ सलाहकार आर्ये लाइटस्टोन भी शामिल हैं। हमास ने सोमवार को एक बयान में कहा कि वह और फलस्तीन के अलग-अलग गुट ‘‘युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण को लागू करने के बारे में हुई सहमति पर कायम हैं जिसमें सभी पक्षों की जिम्मेदारियां भी शामिल हैं।’’
बयान में यह भी कहा गया है कि समूह युद्धविराम को लेकर बनी सहमति पर म्लादेनोव और मध्यस्थों से ‘‘स्पष्ट और आधिकारिक जवाब’’ का इंतजार कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले वर्ष हुए व्यापक युद्धविराम समझौते के तहत इस नए समझौते की घोषणा पिछले बृहस्पतिवार को की थी।समझौते में इजराइल से अपने सैन्य अभियान रोकने और गाजा में हमास व उसके सहयोगियों से सभी उग्रवादी गतिविधियां बंद करने की बात कही गई है। समझौते में मोटे तौर पर यह भी बताया गया था कि हथियार हटाने की प्रक्रिया कैसे लागू की जाएगी। समझौते का मसौदा सार्वजनिक किए जाने के बाद इजराइल ने कहा कि उसे सुरक्षा को लेकर ‘‘गंभीर चिंताएं’’ हैं और उसने इन्हें अमेरिका के साथ साझा किया है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:35 +0530</pubDate>
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<title>Nepal Violence : सड़कों पर उतरे हिंदू, नेपाल छोड़कर भागने लगे मुसलमान!</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल में कावड़ यात्रा के दौरान हुए बवाल के बाद किस तरह से कई इलाकों में हिंसा भड़की की तस्वीरें  आपने देखी होंगी। इस हिंसा की शुरुआत तब हुई जब कावड़ियों पर पत्थरबाजी हुई। 24 साल के एक हिंदू युवक की गोली लगने से मौत हो गई। जिसके बाद हिंदू संगठन सड़कों पर उतर गए और फिर जो हुआ वो सब ने देखा। हालात इतने बिगड़ गए कि कई हिस्सों में कर्फ्यू लगाना पड़ा। भले ही अब यहां हिंसा की आग शांत होती हुई दिखाई दे रही हो लेकिन हिंदू संगठन अब भी भड़के हुए हैं। इसके पीछे की वजह वो रोहिंग्या बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठिए हैं जो यहां आकर माहौल खराब कर रहे हैं और नेपाल की डेमोग्राफी के लिए बहुत बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। क्योंकि जिस सुनसुरी जिले के कप्तानगंज इलाके में हिंसा भड़की वहां मुस्लिम आबादी लगभग 13% है। सोचिए पूरे नेपाल की कुल मुस्लिम आबादी लगभग 5% है। लेकिन अकेले सुनसरी इलाके में 13% मुस्लिम रहते हैं।इसे भी पढ़ें: नेपाल curfew में ढील: मधेश और कोशी प्रांत में सांप्रदायिक हिंसा के बाद हालात सुधरेबताया जा रहा है कि इनमें सबसे बड़ी संख्या घुसपैठियों की है। इसलिए अब इन्हें खदेड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। दरअसल अब हिंदूवादी संगठनों नेपाल सरकार को 15 सूत्री मांग पत्र सौंपा है। जिसमें सबसे बड़ी मांग रोहिंग्या बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से खदेड़ने की की गई है। साथ ही सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने के साथ ही साल 1990 के बाद जारी नेपाली नागरिकताओं की जांच कराने की मांग भी उठाई गई है और इस मांग के बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने घुसपैठियों के बीच भगदड़ मचा दी है। तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि भारी संख्या में मुस्लिम भीड़ अपने कंधों पर बैग टांग कर हाथों में सामान लेकर निकलते हुए दिखाई दे रही है। इस तस्वीर को लेकर दावा किया जा रहा है कि ये बांग्लादेश और पाकिस्तानी घुसपैठियां हैं जो अब एक्शन के डर से नेपाल छोड़कर भाग रहे हैं। ठीक वैसे ही जैसे हाल ही में बंगाल से भागते हुए दिखाई दिए। दरअसल नेपाल के आईजी ने हाल ही में आरोप लगाया था कि भारत से भगाए गए बांग्लादेशी और रोहिंग्या अब नेपाल में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा सिलीगुड़ी रूट से भी बांग्लादेश से रोहिंग्या नेपाल में आ रहे हैं। आईजी ने बताया था कि रोहिंग्या नेपाल के अलग-अलग इलाकों में बसने की कोशिश कर रहे हैं।इसे भी पढ़ें: घरों से इस्लामिक झंडे खींच रहा नेपाल, क्या बोले मुसलमान? जिससे डेमोग्राफी चेंज हो रही है। जहां पर मुसलमानों की संख्या ज्यादा हो रही है, वहां पर हिंदुओं के साथ उनका टकराव हो रहा है। दरअसल नेपाल में अब तक मुसलमानों की आबादी सिर्फ तराई इलाकों में बढ़ रही थी। लेकिन अब पहाड़ों में भी मुसलमानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। नेपाल में राजा के शासन के दौरान पहाड़ों पर मुसलमान ना के बराबर थे। लेकिन अब पहाड़ों पर मुसलमानों की तादाद इतनी बढ़ गई है कि वहां इस्तमा का आयोजन किया जा रहा है। इस्तमा मुख्य रूप से तबबलीगी जमात की ओर से किए जाने वाले बड़े धार्मिक सम्मेलन को कहा जाता है। इसी के बहाने बांग्लादेश, पाकिस्तान और सोमालिया से भी मुसलमान नेपाल पहुंचते हैं और एक बार मुसलमान नेपाल में घुस जाते हैं तो वापस नहीं लौटते। यही वजह है कि नेपाल में इस्तिमा बंद करवाने की भी मांग उठ रही है। क्योंकि नेपाल में इसका आयोजन सिर्फ घुसपैठ के लिए होता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नेपाल में बसने के बाद यह मुसलमान लव जिहाद को बढ़ावा दे रहे हैं।इसे भी पढ़ें: घरों से इस्लामिक झंडे खींच रहा नेपाल, क्या बोले मुसलमान? मस्जिद और मदरसों ऐसी गतिविधियों के केंद्र बन गए हैं जिससे नेपाल के लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। मुसलमानों की तादाद बढ़ने के साथ-साथ नेपाल में मदरसों और मस्जिदों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। 2020 में नेपाल के अंदर 911 रजिस्टर्ड मदरसे थे। 2025 तक उनकी संख्या बढ़कर 1200 से ज्यादा हो गई। जबकि इस दौरान अनरजिस्टर्ड मदरसों की संख्या बढ़कर 2400 तक पहुंच गई।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:34 +0530</pubDate>
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<title>आखिर चाहता क्या है पाकिस्तान? बॉर्डर के पास 250 तोपें लेकर उतरी मुनीर की सेना</title>
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<description><![CDATA[ ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि पाकिस्तान लगातार अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में जुटा है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक उसने चीन से मिले 250 अत्याधुनिक एसएच 15 सेल्फ प्रोपेल होवेसर भारत से लगी पूरी पश्चिमी सीमा पर तैनात करने शुरू कर दिए हैं। यानी जम्मू कश्मीर से लेकर पंजाब, राजस्थान और गुजरात सेक्टर तक पाकिस्तान अपनी लंबी दूरी की आर्टिलरी को नए सिरे से व्यवस्थित कर रहा है। यह हाल के सालों में उसकी सबसे बड़ी आर्टिलरी तैनाती मानी जा रही है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने हाल ही में चीन से 250 एसएच 15 ट्रक माउंटेड सेल्फ प्रोपेल होत्सर हासिल किए। अब इन्हें चरणबंद तरीके से भारत से लगी पश्चिमी सीमा पर तैनात किया जा रहा है। यह तैनाती किसी एक जगह नहीं हो रही बल्कि पूरी सीमा पर अलग-अलग रणनीतिक इलाकों में की जा रही है। इसका सीधा मतलब है कि पाकिस्तान अपनी आर्टिलरी फायर पावर को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाने की कोशिश में है। इसे भी पढ़ें: Pakistan में M2 Motorway के पास बस दुर्घटना, 13 लोग घायल और बुनियादी ढांचे पर सवालअचानक पाकिस्तान यह तैनाती क्यों कर रहा है? इसका बहुत साफ और सीधा जवाब है ऑपरेशन सिंदूर। मई 2025 में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी ढांचों पर सटीक हमले किए। उस अभियान ने पाकिस्तान को साफ संदेश दिया कि भारत जरूरत पड़ने पर सीमा पार भी कार्रवाई करने की क्षमता रखता है और अब माना जा रहा है कि उसी के बाद पाकिस्तान अपनी सैन्य तैयारियों में तेजी लाने में जुटा है और यही वजह है कि चीन से इतने बड़े स्तर पर उसने ये तोपें हासिल की और अब इनकी तैनाती शुरू की जा रही है। इसे भी पढ़ें: जानिए, भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हो रहे सरकारी दमन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप और जवाबदेही तय करने का आह्वान क्यों किया?अब अगर बात चीन के इस हथियार के बारे में करें यानी कि एसएच होवसर तोपो की तो आपको बता दें एसए 15 चीन की सरकारी रक्षा कंपनी नोरिंको ने बनाया है। यह चीन की सेना के पीसीएल 1881 का एक्सपोर्ट वर्जन है। यह कोई साधारण तोप नहीं इसे 6 * 6 यानी ट्रक पर लगाया गया है। यानी इसे किसी ट्रेलर से खींचने की जरूरत नहीं पड़ती। जहां जरूरत पड़ी वहां पहुंची। कुछ ही मिनटों में फायरिंग की और फिर तुरंत दूसरी जगह निकल गई। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। आधुनिक युद्ध में इसे शूटन स्कूट क्षमता कहा जाता है। यानी गोली चलाओ और जवाबी हमला आने से पहले अपनी जगह बदल दो। यही वजह है कि ऐसी तोपों को नष्ट करना पारंपरिक आर्टिलरी की तुलना में कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाता है। और अगर इसकी मारक क्षमता की अगर हम बात करें तो यह 155 एमएम और 52 कैलिबर की होवेस्टर है। सामान्य गोले से करीब 30 से 40 कि.मी. तक हमला कर सकती है। लेकिन अगर रॉकेट असिस्टेड बी लैप गोले इस्तेमाल किए गए तो इसकी रेंज 53 से 72 किमी तक बताई जाती है। इसमें ऑटोमेटेड फायर कंट्रोल सिस्टम है और यह 1 मिनट में छह राउंड तक फायर कर सकती है। यानी कम समय में भारी गोलाबारी और फिर तुरंत दूसरी जगह। इसे भी पढ़ें: Satyanjal Pandey इस्लामाबाद में बने भारत के नए प्रभारी राजदूतयहां पर खबर ये नहीं है कि पाकिस्तान ने चीन से तोपे ली क्योंकि पाकिस्तान ने 250 की संख्या में ये तोपे ली हैं तो इसी वजह से ये अपने आप में एक बड़ी खबर बन जाती है क्योंकि 250 अमित सर किसी एक ब्रिगेड के लिए नहीं होते। इतनी संख्या कई आर्टिलरी रेजीमेंट को पूरी तरह लेस कर सकती है। यानी पाकिस्तान सिर्फ नई तोपे नहीं खरीद रहा बल्कि अपनी पूरी लंबी दूरी की गोलाबारी क्षमता को अपग्रेड कर रहा है। लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा किरदार चीन। पाकिस्तान भले ही यह हथियार सीमा पर तैनाती कर रहा हो लेकिन अगर बड़ी तस्वीर देखा जाए तो चीन की भूमिका यहां पर ज्यादा बड़ी है। आज पाकिस्तान की सेना का आधुनिकीकरण तेजी से चीन के भरोसे पर हो रहा है। लड़ाकू विमान चाहिए। चीन दे रहा है। ड्रोन चाहिए उसके लिए चीन है। यहां तक कि एयर डिफेंस चाहिए वो भी पाकिस्तान चीन से ले रहा है। अब आधुनिक सेल्फ प्रोपेल्ड ऑफिसर भी चीन ने दे दिए। यानी पाकिस्तान की सैन्य ताकत में जो भी नया जोड़ रहा है उसमें चीन की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:34 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump  के हाथ से निकल गई ये जंग? ईरान ने फिर ठोका अमेरिका का MQ&#45;9</title>
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<description><![CDATA[ ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर से चरम पर है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने दावा किया है कि उसने हॉर्मोज जलडमरूमध्य के ऊपर ओढ़ रहे एक अमेरिकी एमकेाइन रिपड ड्रोन को मार गिराया है। इसके साथ ही ईरान ने यह भी संकेत दिए हैं कि होमोस जलडम मध्य को लेकर उसकी रणनीति में बदलाव हो सकता है। लेकिन फिलहाल वह इस अहम समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलने के पक्ष में नहीं है। इन घटनाओं ने पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव को और ज्यादा बढ़ा दिया है। इसे भी पढ़ें: Donald Trump का दावा, ईरान के पास समझौता करने और अमेरिकी हमलों से बचने का आखिरी मौकाआईआरजीसी के आधिकारिक मीडिया प्लेटफार्म सिपाह न्यूज़ के अनुसार अमेरिकी एम99 रिपेर ड्रोन को हॉर्मोज जलडमरूमध्य के ऊपर तैनात ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया। रिपोर्ट में कहा गया है कि ड्रोन को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ड्रोन ने किस स्थान से उड़ान भरी थी। एम9 रिपर ड्रोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से अमेरिकी वायुसेना निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमलों के लिए करती है। 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष के बाद से तेहरान लगातार अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को चुनौती देता रहा है। ईरानी मीडिया का दावा है कि अब तक 30 से ज्यादा एम क्यूाइन रिपोन गिराए गए हैं। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आरागची ने होमस जलडमरू मध्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ओमान के साथ जलडम मध्य के प्रबंधन को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उनके मुताबिक दोनों देशों के बीच नए शिपिंग रूट को लेकर सहमति बनने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।इसे भी पढ़ें: UKMTO ने ओमान तट पर मालवाहक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल हमले की शुरू की जांचईरानी विदेश मंत्रालय ने भी संकेत दिए हैं कि संबंध में जल्द ही कोई औपचारिक समझौता हो सकता है। हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि किसी नए समुद्री मार्ग पर सहमति बनने का अर्थ यह नहीं होगा कि हुरम जलडम्र मध्य को पूरी तरह खोल दिया जाए। तेहरान का कहना है कि क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और मौजूदा हालात को देखते हुए जलडू मंदिर में जहाजों की आवाजाही पर नियंत्रण बनाए रखा जाएगा। यानी नए शिपिंग रूट की व्यवस्था के बावजूद ईरान अपने रणनीतिक विकल्प अपने हाथ में रखना चाहता है। फिलहाल ईरान ने एक और एम9 रिपब ड्रोन को मार गिराया है। अब देखना यह होगा कि अमेरिका इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है। यमन के ईरान हिमायती अंसारुल्लाह या हूती ने जिस तरह सऊदी के सेंशंस के खिलाफ सख्त एक्शन लेते हुए लाल सागर पर सऊदी के लिए कंप्लीट ब्लॉकेट लगा दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:34 +0530</pubDate>
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<title>सर्जियो गोर काट रहे थे बांग्लादेश के चक्कर, तभी रूस ने ली धमाकेदार एंट्री,  भारत का नाम लेकर किया सबसे बड़ा ऐलान</title>
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<description><![CDATA[ भारत के पड़ोस में एक ऐसी घटना हुई है जिसके बारे में जितनी चर्चा होनी चाहिए थी उतनी नहीं हुई। यह खबर इतनी बड़ी है कि भारत की किस्मत बदल सकती है। रूस ने पहली बार भारत के पड़ोस में ऐसा दांव खेला है जिसके बारे में जानकर सभी चौंक जाएंगे। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भारत पर दबाव डालने के लिए आजकल बांग्लादेश के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन इसी बीच रूस ने धमाकेदार एंट्री ली है। रूस ने अमेरिका और बांग्लादेश दोनों को एक साथ लपेट दिया है। दरअसल रूस ने बांग्लादेश से कहा है कि हमने तुम्हें जो लोन दिया था उसका भुगतान अब भारत की करेंसी यानी रुपए में करो। रुपए में पेमेंट लेने के लिए रूस ने बांग्लादेश को यहां तक कह दिया है कि वह ढाका में अपने बैंक की ब्रांच तक खोलने के लिए तैयार है। आपको बता दें कि रूस ने बांग्लादेश के रूपपुर में बिजली उत्पादन के लिए बांग्लादेश का पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाया था। इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए रूस ने बांग्लादेश को $1.38 अरब डॉलर का लोन दिया था।इसे भी पढ़ें: आखिर चाहता क्या है पाकिस्तान? बॉर्डर के पास 250 तोपें लेकर उतरी मुनीर की सेनाबांग्लादेश को 20 सालों के अंदर यह सारा पैसा रूस की कंपनी को लौटाना है। अब इसी पैसे को लेकर रूस ने बहुत बड़ा खेल कर दिया है। रूस ने बांग्लादेश से कहा है कि आप पेमेंट के लिए रुपए का इस्तेमाल कर सकते हैं। बांग्लादेश ने सोचा नहीं था कि रूस रुपए में पेमेंट मांगेगा। हालांकि रूस ने भारत से इस बारे में बात जरूर की होगी। आपको याद होगा कि जब रूस पर अमेरिकी सेंशंस चरम पर थे तब भारत ने रूस से जमकर तेल खरीदा था। उसी तेल की पेमेंट भारत ने रुपए में की थी। यानी भारत ने रूस को पेमेंट के लिए रुपए का एक नेटवर्क तैयार कर लिया था। अब रूस चाहता है कि बांग्लादेश भी इसी नेटवर्क का इस्तेमाल करें और पेमेंट रुपए में करें। आप जानते ही हैं कि कोई भी देश रूस को डॉलर में पेमेंट नहीं कर सकता क्योंकि अमेरिका ने रूस के लिए इंटरनेशनल पेमेंट गेटवे बंद कर रखा है। बांग्लादेश चाहकर भी रूस को डॉलर में पेमेंट नहीं कर सकता। आपके मन में सवाल होगा कि रूस चीनी करेंसी युवान में भी तो बांग्लादेश से पेमेंट मांग सकता था।इसे भी पढ़ें: 12-13 सितंबर को दिल्ली में ऐसा दिखेगा नजारा, व्हाइट हाउस से लेकर NATO मुख्यालय तक मच जाएगी खलबली! लेकिन यहां पर एक बहुत बड़ा खेल है। बांग्लादेश और चीन के बीच ज्यादातर बटरल व्यापार डॉलर में होता है। उसके बाद लोकल करेंसी आती है। लेकिन बांग्लादेश और भारत के बीच जो बटरल व्यापार होता है वो पहले लोकल करेंसी में होता है। उसके बाद डॉलर आता है। यानी बांग्लादेश और भारत के बीच रुपए वाला सिस्टम पहले से ही चल रहा था और अब रूस और भारत के बीच रुपए वाला सिस्टम शुरू हो गया है। यानी बांग्लादेश आराम से रुपए के जरिए रूस का लोन चुका सकता है। आप समझ रहे हैं कि यह कितनी बड़ी खबर है। यह सीधे-सीधे डॉलर को झटका है। अमेरिका में बवाल है कि रूस अभी तक भारत के साथ बटरल व्यापार में ही रुपए का इस्तेमाल कर रहा था। लेकिन अब रूस दूसरे देशों पर भी रुपए को इस्तेमाल करने का दबाव डाल रहा है। अमेरिका को डर है कि अगर ब्रिक्स देशों ने अपना व्यापार लोकल करेंसी में शुरू कर दिया तो यह डॉलर को सबसे बड़ी चोट होगी। दुनिया की 42% जीडीपी ब्रिक्स देश ही बनाते हैं। बहरहाल आप सोचिए कि बांग्लादेश अगर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए मिला 11.38 अरब डॉलर का लोन अगर रुपए में चुकाता है तो यह कितनी बड़ी घटना होगी। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:33 +0530</pubDate>
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<title>5 अगस्त को दिल्ली से क्या बड़ा ऐलान करेंगी शेख हसीना? भड़क गए तारिक रहमान</title>
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<description><![CDATA[ वो शेख हसीना जो कभी बांग्लादेश की सबसे ताकतवर नेता थी। करीब 15 साल तक देश की सत्ता पर उनका दबदबा रहा। लेकिन फिर 5 अगस्त 2024 आया और कुछ ही घंटों में पूरा राजनीतिक समीकरण बदल गया। सत्ता गई, देश छूटा और शेख हसीना भारत आ गई। तब से वह भारत में हैं और बांग्लादेश की राजनीति से लगभग पूरी तरीके से दूरी बनाए हुए हैं। लेकिन अब करीब 2 साल बाद शेख हसीना एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर अपनी आवाज बुलंद करने जा रही हैं और वो तारीख है 5 अगस्त 2026। दिलचस्प बात यह है कि जिस तारीख ने शेख हसीना की सत्ता का अंत किया था उसी तारीख को अब उनकी राजनीतिक वापसी का संकेत दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक शेख हसीना 5 अगस्त को नई दिल्ली से एक वर्चुअल कार्यक्रम में शामिल होंगी। यह कार्यक्रम फॉरेन कॉरेस्पोंडेंस क्लब ऑफ साउथ एशिया से जुड़ा बताया जा रहा है। कार्यक्रम में बांग्लादेश की राजनीति और शेख हसीना के भविष्य को लेकर चर्चा होने की उम्मीद है और इस कार्यक्रम की टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण है। इसे भी पढ़ें: Taslima Nasreen ने Bangladesh में अवामी लीग पर प्रतिबंध को बताया लोकतंत्र के खिलाफ5 अगस्त 2024 को छात्र आंदोलन ने ऐसा रूप ले लिया था कि शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़कर बांग्लादेश से भागना पड़ा था, निकलना पड़ा था। इसके बाद उनकी सरकार गिर गई और देश की राजनीति पूरी तरह बदल गई। लेकिन अब सवाल यह है कि 2 साल बाद शेख हसीना अचानक सामने क्यों आ रहे हैं? क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक या फिर सार्वजनिक संबोधन है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति है? शेख हसीना के लिए यह जो मामला है सिर्फ राजनीति का नहीं है। बांग्लादेश में उनके खिलाफ गंभीर कानूनी कारवाई हो चुकी है और नवंबर 2025 में एक ट्रिब्यूनल ने उन्हें मौत की सजा सुना दी। बांग्लादेश लगातार भारत से उनके प्रत्यार्पण की मांग भी कर रहा है। यानी अगर शेख हसीना वापस बांग्लादेश जाती हैं तो मामला बेहद गंभीर हो सकता है। और खुद शेख हसीना ने हाल ही में कहा है कि वह इस साल के अंत तक बांग्लादेश लौटने और अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने की योजना रखती हैं। हालांकि उनकी वापसी की कोई निश्चित तारीख अभी सामने नहीं आई है। इसे भी पढ़ें: Sheikh Hasina के प्रस्तावित कार्यक्रम पर Bangladesh ने India से मांगा रुख स्पष्ट करने कोशेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद देश में अंतरिम व्यवस्था आई। बाद में राजनीतिक परिस्थितियां बदली और अब बांग्लादेश की सत्ता में नई राजनीतिक ताकतें हैं। वहीं शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग पर भी बड़ा राजनीतिक दबाव है। ऐसे में 5 अगस्त का उनका संबोधन सिर्फ एक भाषण नहीं माना जा रहा। क्योंकि अगर शेख हसीना अपनी पार्टी के भविष्य बांग्लादेश लौटने की योजना या फिर वहां के राजनीतिक हालात पर खुलकर बोलती हैं तो इसका असर ढाका से लेकर नई दिल्ली तक दिखाई दे सकता है और भारत के लिए यह मामला आसान नहीं है। बांग्लादेश पहले ही भारत से शेख हसीना के प्रत्यार्पण की मांग कर चुका है। भारत कह रहा है कि प्रत्यार्पण से जुड़ा मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत देखा जाएगा। अब बांग्लादेश ने शेख हसीना के 5 अगस्त के कार्यक्रम को लेकर भारत से अपनी स्थिति स्पष्ट करने को भी कह दिया है। इसे भी पढ़ें: सर्जियो गोर काट रहे थे बांग्लादेश के चक्कर, तभी रूस ने ली धमाकेदार एंट्री,  भारत का नाम लेकर किया सबसे बड़ा ऐलानढाका का कहना है कि भारत की जमीन से उनकी राजनीतिक गतिविधियां दोनों देशों के रिश्तों पर असर डाल सकती है। यानी कि साफ-साफ धमकी कह सकते हैं। एक तरफ शेख हसीना है जो करीब 2 साल से भारत में है। दूसरी तरफ बांग्लादेश की नई राजनीतिक व्यवस्था है जो उन्हें वापस लाना चाहती है।  तीसरी तरफ भारत है जिसके सामने कानून, कूटनीति और पड़ोसी देश के साथ रिश्तों तीनों को संतुलित करने की चुनौती है। तो 5 अगस्त का दिन सिर्फ शेख हसीना के लिए नहीं बल्कि भारत बांग्लादेश संबंधों के लिए भी बेहद अहम होने वाला है। क्या शेख हसीना इस मंच से अपनी राजनीतिक वापसी का रोड मैप देंगी? क्या वह बांग्लादेश लौटने की तारीख का संकेत देंगी? क्या आवामी लीग को फिर से खड़ा करने की रणनीति सामने आएगी? या फिर यह सिर्फ अपनी बात दुनिया तक पहुंचाने की एक कोशिश होगी। इन सवालों के जवाब 5 अगस्त को मिलने के लिए। एक बात जरूर साफ है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:32 +0530</pubDate>
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<title>Balen Shah को भारत ने दिया 440 वोल्ट का झटका,  रोका चीनी का एक्सपोर्ट का माल, नेपाल में मचा बवाल</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल में इस वक्त चीनी चीनी नहीं बल्कि सोना बन चुकी है। जिस चीनी से चाय और मिठाइयां होती है मीठी उसकी कड़वाहट ने पूरे नेपाल में हड़कंप मचा दिया। आलम यह है कि दुकानों से चीनी गायब हो रही है और जो मिल रही हैं उसके दाम आसमान छू रहे हैं। दरअसल कहानी शुरू होती है भारत के एक बड़े फैसले से। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश यानी हमारे भारत ने घरेलू कीमतों को काबू में रखने के लिए चीनी के निर्यात यानी एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया। यह बैन मई के महीने में लगाया गया था। जो फिलहाल सितंबर 2026 तक या फिर अगले आदेश तक जारी रहेगा। भारत ने यह फैसला क्यों लिया यह जान लीजिए। दरअसल अलनीनो के चलते सूखे की आशंका और गन्ने की कम पैदावार को देखते हुए मोदी सरकार अपनी जनता के लिए स्टॉक सुरक्षित रखना चाहती थी। लेकिन भारत का यह सुरक्षा कवच नेपाल के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया। इसे भी पढ़ें: Nepal Violence : सड़कों पर उतरे हिंदू, नेपाल छोड़कर भागने लगे मुसलमान!नेपाल में चीनी की कीमतों का बड़ा धमाकादरअसल जैसे ही भारत से सप्लाई रुकी नेपाल के बाजारों में चीनी की कीमतें रॉकेट की तरह ऊपर चली गई। जो चीनी कुछ समय पहले तक ₹95 प्रति किलो मिल रही थी उसकी कीमत अब ₹110 के पार जा चुकी है और यह सब बस शुरुआत है। नेशनल कंज्यूमर फोरम के अध्यक्ष प्रेमलाल कहते हैं कि सरकार इस पूरे संकट पर ऐसे खामोश है जैसे कुछ हुआ ही नहीं। अब जब सितंबर-अक्टूबर के बड़े त्यौहार, दशहरा, त्यौहार और छठ करीब आ रहे हैं तो सप्लाई मैनेजमेंट ना होने से कालाबाजारी और कीमतें और बढ़ने का डर सता रहा है। लेकिन दोस्तों, जहां कमी होती है, वहीं गैरकानूनी रास्ते भी खुल जाते हैं। नेपाल की दक्षिणी सीमा पर अब चीनी की तस्करी जोरों शोरों पर है। नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल यानी एपीएफ के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। मध्य जून से मध्य जुलाई के बीच चीनी की जप्त्ती दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ गई है। पुलिस ने महज एक महीने में सीमा से करीब 10 टन तस्करी की चीनी जप्त की है। जिसकी कीमत लाखों में है। छापा जैसे जिलों में तो हर दिन छापेमारी हो रही है। तस्कर चोरी छिपे भारतीय चीनी को नेपाल पहुंचा रहे हैं क्योंकि वहां इसकी भारी डिमांड है। लेकिन यह तस्करी सिर्फ राजस्व का नुकसान नहीं कर रही है। बल्कि बिना किसी जांच के आ रही यह चीनी स्वास्थ्य के लिए कितनी सुरक्षित है इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।इसे भी पढ़ें: नेपाल curfew में ढील: मधेश और कोशी प्रांत में सांप्रदायिक हिंसा के बाद हालात सुधरेक्या कहता है आंकड़ों का गणितनेपाल की डिमांड और सप्लाई की गणित। दरअसल दोस्तों नेपाल में हर महीने 20,000 से 25,000 टन चीनी की जरूरत होती है। त्योहारों के दौरान यह बढ़कर 3000 टन तक पहुंच जाती है। सालाना मांग 3 लाख टन है। जबकि नेपाल का अपना उत्पादन केवल 1.8 लाख से 2.15 लाख टन के बीच रहता है। यानी करीब 1 लाख टन चीनी के लिए नेपाल पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। साल्ट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के पास फिलहाल स्टॉक बहुत कम है। सरकार भारत से जी टू जी यानी सरकार से सरकार समझौते के तहत चीनी मांगने की कोशिश कर रही है। लेकिन पिछला अनुभव अच्छा नहीं रहा। पिछले साल नेपाल ने 60 टन चीनी मांगी थी। लेकिन भारत ने केवल 25,000 टन की अनुमति दी थी। ऊपर से हाई कस्टम ड्यूटी के कारण आयातित चीनी बाजार भाव से भी महंगी हो जाती है। खैर कुल मिलाकर यह पहली बार नहीं है। सितंबर 2023 में भी जब भारत ने बैन बढ़ाया था, प्रतिबंध बढ़ाया था तब नेपाल में चीनी की कीमतें ₹88 से सीधे ₹160 प्रति किलो तक पहुंच गई थी।   ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:32 +0530</pubDate>
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<title>सेंट्रल एशिया के खजाने तक पहुंचा भारत, Rare Earth Minerals पर मोदी के जय ने क्या बड़ा गेम कर दिया?</title>
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<description><![CDATA[ भारत मध्य एशिया के भू-राजनीतिक में अब बड़ा कदम उठा रहा है और आने वाले वक्त में यह पूरी दुनिया की तकनीक और ऊर्जा की तस्वीर बदल देगी। उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव भारत विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मुलाकात करते नजर आए। इस मुलाकात ने एक नई रणनीतिक साझेदारी की नींव रख दी है। चाहे वो डिफेंस हो, ट्रेड हो या फिर भविष्य की तकनीक के लिए जरूरी दुर्लभ खनिज भारत और उज़्बेकिस्तान अब एक नई ऊंचाई पर पहुंचने के लिए साथ में तैयार हैं। दरअसल उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव भारत के दौरे पर हैं। जहां पर उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ अहम बैठक को अंजाम दिया है।  इस मुलाकात की सबसे बड़ी और खास बात जो रही है वो है माइनिंग यानी कि खनन क्षेत्र में दोनों देशों का बढ़ता हुआ सहयोग। बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने साफ कह दिया कि अब वक्त आ गया है कि हमारे रिश्तों को कंस्ट्रक्शन, हेल्थ और डिजिटल सेक्टर से आगे बढ़ाकर जमीन के अंदर छिपे हुए खजाने तक ले जाया जाए। इसे भी पढ़ें: 5 अगस्त को दिल्ली से क्या बड़ा ऐलान करेंगी शेख हसीना? भड़क गए तारिक रहमानउज्बेकिस्तान दुर्लभ खनिजों के मामले में बहुत समृद्ध देश है जो स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियों और डिफेंस इक्विपमेंट बनाने में काम आता है। भारत अब उज़्बेकिस्तान के साथ मिलकर खनिजों के खनन पर फोकस कर रहा है। इतना ही नहीं उज़्बेकी विदेश मंत्री ने भारतीय राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के साथ भी मुलाकात की है। और उस मुलाकात के दौरान भी इस बात पर जोर दिया गया कि एग्रीकल्चर और फार्मा के साथ-साथ आईटी और माइनिंग में भी असीम संभावनाएं हैं जिसे दोनों देश एक साथ मिलकर आगे बढ़ाएं। इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्या कुछ कहा है पहले आप वो देखिए। फिलहाल भारत और उज्बेकिस्तान के बीच करीब $1 अरब डॉलर के आसपास का व्यापार होता है। लेकिन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट कर दिया है कि यह नंबर काफी नहीं है और इसे कई गुना तक बढ़ाया जा सकता है। इसे भी पढ़ें: Balen Shah को भारत ने दिया 440 वोल्ट का झटका,  रोका चीनी का एक्सपोर्ट का माल, नेपाल में मचा बवालकनेक्टिविटी को सुधारने के लिए ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स पर भी गैन चर्चा हुई। इसके अलावा भारत ने अफगानिस्तान की 2027 से 29 की नॉन अलाइनमेंट मूवमेंट की अध्यक्षता का भी समर्थन किया है। वहीं ताशकंद से ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत का साथ देने की बात को भी उन्होंने दोहराया है। सबसे अहम बात रही दोनों देशों ने एक साथ मिलकर एक आवाज में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को फिर से पुख्ता किया और पूरी दुनिया को संदेश दिया कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस होना चाहिए। यानी कि रेयर अर्थ से लेकर आतंकवाद तक भारत और उज़्बेकिस्तान अब अपनी साझेदारी को बढ़ाने के लिए तैयार है। उज़्बेकिस्तान के साथ भरोसेमंद दोस्ती को आगे बढ़ाना भारत के लिए बड़ी बात है। मई में भारत और उज्‍बेकिस्तान के बीच नई दिल्ली में विदेश कार्यालय परामर्श का 17वां दौर आयोजित किया गया था। इसमें व्यापार और निवेश, पर्यटन, प्रौद्योगिकी, नवाचार, ऊर्जा, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को लेकर चर्चा हुई थी। दोनों देशों के अधिकारियों ने आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया था। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद के बीच Iran क्या बना पाएगा परमाणु हथियार</title>
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<description><![CDATA[ (एंड्र्यू थॉमस, दाइकिन विश्वविद्यालय)
सिडनी, चार अगस्त (द कन्वरसेशन) अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध लंबा खिंचने के साथ एक अहम सवाल पीछे छूटता नजर आ रहा है—क्या ईरान परमाणु हथियार बनाना चाहता है और यदि हां, तो क्या वह अब भी ऐसा करने में सक्षम है?
दोनों देशों के बीच अब होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे बड़ा विवाद का विषय बन गया है। ऐसे में यह हैरानी की बात है कि परमाणु कार्यक्रम पर पहले जैसी चर्चा नहीं हो रही। वर्ष 2025 और 2026 में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के प्रमुख कारणों में से एक यह आशंका भी थी कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर सकता है।
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। इससे युद्ध समाप्त होने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बनाने का उसे एक नया साधन मिल गया है। हालांकि, परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर उसकी वास्तविक मंशा पहले की तुलना में और अधिक अस्पष्ट हो गई है।----- क्या ईरान अब भी परमाणु हथियार बना सकता है?-----
माना जाता है कि ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है, जो सैद्धांतिक रूप से लगभग 10 परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त हो सकता है।
सामान्य परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए केवल तीन से पांच प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम की आवश्यकता होती है, जबकि अनुसंधान कार्यों में अधिकतम 20 प्रतिशत तक संवर्धन पर्याप्त माना जाता है।
ऐसे में 60 प्रतिशत तक संवर्धन चिंता का विषय माना जाता है क्योंकि विशेषज्ञों के अनुसार, परमाणु हथियार विकसित करने की संभावना के अलावा इसका कोई और व्यावहारिक उद्देश्य नहीं दिखता। इससे संकेत मिलता है कि ईरान भविष्य के लिए अपने विकल्प खुले रखना चाहता है।
हालांकि, परमाणु हथियार बनाने के लिए केवल संवर्धित यूरेनियम ही पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए विशेष उपकरण, सामग्री और तकनीकी ढांचे की भी आवश्यकता होती है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों से उसकी तकनीकी क्षमता को कुछ नुकसान पहुंचा हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक ज्ञान और विशेषज्ञता को बमबारी से समाप्त नहीं किया जा सकता।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई अपने पिता की तुलना में परमाणु हथियार हासिल करने के प्रति अधिक इच्छुक हैं।
इस कारण, जब तक अमेरिका और इज़राइल जमीनी सैन्य कार्रवाई, सत्ता परिवर्तन या लंबे समय तक कब्जे जैसी कार्रवाई नहीं करते, तब तक ईरान के पास भविष्य में परमाणु हथियार विकसित करने का विकल्प बना रहेगा।----- क्या ईरान वास्तव में ऐसा करना चाहेगा? -----
परमाणु प्रतिरोध सिद्धांत के अनुसार देश मुख्य रूप से अपने विरोधियों को सैन्य या परमाणु हमले से रोकने के लिए परमाणु हथियार विकसित करते हैं। इन हथियारों का उद्देश्य उनका उपयोग करना नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व भर से संभावित हमलावर को हमले से रोकना होता है।
उदाहरण के तौर पर, उत्तर कोरिया के पास परमाणु क्षमता होने के कारण अमेरिका उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने से बचता है, क्योंकि उत्तर कोरिया जापान, दक्षिण कोरिया या अमेरिका के गुआम क्षेत्र पर हमला करने की क्षमता रखता है।
इसी प्रकार यदि ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता है, तो क्षेत्रीय देशों के लिए उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई करना कहीं अधिक कठिन हो जाएगा। साथ ही, उसे इज़राइल के संभावित परमाणु हमले का जवाब देने की क्षमता भी मिल सकती है।
हालांकि विशेषज्ञ इस बात पर एकमत नहीं हैं कि हालिया युद्ध ने ईरान के लिए परमाणु हथियारों को अनिवार्य बना दिया है या नहीं।
एक पक्ष का तर्क है कि यदि ईरान के पास पहले से परमाणु हथियार होते तो अमेरिका और इज़राइल शायद उस पर हमला नहीं करते। वहीं दूसरा पक्ष मानता है कि बिना परमाणु हथियारों के भी ईरान कई महीनों तक हमलों का सामना करने में सफल रहा है और उसने अपेक्षाकृत अधिक शक्तिशाली देशों पर रणनीतिक बढ़त हासिल की है।
ईरान ने यह भी प्रदर्शित किया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित कर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकता है। इसलिए संभव है कि भविष्य में यही उसकी सबसे प्रभावी प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे और उसे सक्रिय परमाणु हथियार कार्यक्रम की आवश्यकता न पड़े।
यह भी संभव है कि ईरान ने संवर्धित यूरेनियम का भंडार केवल कूटनीतिक दबाव बनाने और सुरक्षा गारंटी तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में पुनः शामिल होने के उद्देश्य से सुरक्षित रखा हो।
युद्ध शुरू होने से पहले ईरान संकेत दे चुका था कि यदि अमेरिका प्रतिबंध हटाने पर सहमत हो तो वह अपने संवर्धित यूरेनियम का स्तर कम करने को तैयार है। जून में युद्ध समाप्त करने के लिए हुए समझौता ज्ञापन के तहत भी उसने संवर्धित यूरेनियम को कम स्तर पर लाने पर सहमति जताई थी।
इन परिस्थितियों में भविष्य में ईरान के परमाणु हथियार संपन्न बनने की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन की खुफिया एजेंसियों ने भी पिछले वर्ष सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि ईरान कई दशकों से सक्रिय रूप से परमाणु हथियार विकसित करने के कार्यक्रम पर काम नहीं कर रहा है।----- क्या कूटनीति समाधान बन सकती है? -----
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2015 में हुआ संयुक्त व्यापक कार्ययोजना (जेसीपीओए) समझौता इस समस्या का व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत कर चुका था।
इस समझौते पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों—अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन—के साथ जर्मनी तथा ईरान के बीच कई वर्षों की बातचीत के बाद सहमति बनी थी। वर्ष 2018 में ट्रंप प्रशासन द्वारा समझौते से अलग होने से पहले अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने पुष्टि की थी कि ईरान अपनी सभी प्रतिबद्धताओं का पालन कर रहा था।
अमेरिका के समझौते से बाहर निकलने और प्रतिबंध दोबारा लागू करने के बाद ही ईर ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:30 +0530</pubDate>
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<title>OpenAI और Anthropic के AI मॉडल परीक्षण के दौरान वास्तविक प्रणालियों में घुसे</title>
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<description><![CDATA[ (फ्रांसिस्को बेइलो, यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी)
सिडनी, चार अगस्त (द कन्वरसेशन) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में अग्रणी दो कंपनियों ने पिछले 10 दिनों के भीतर खुलासा किया है कि परीक्षण के दौरान उनके कुछ शक्तिशाली और अर्ध-स्वायत्त एआई मॉडल चार अलग-अलग घटनाओं में वास्तविक कंप्यूटर प्रणालियों में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने में सफल रहे।
ये घटनाएं केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं थीं। कई मामलों में एआई मॉडल यह पहचानने में भी सफल रहे कि वे वास्तविक प्रणालियों तक पहुंच चुके हैं, लेकिन केवल एक मॉडल ने यह समझने के बाद अपनी गतिविधि रोक दी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि अत्याधुनिक एआई मॉडलों का परीक्षण अब पूरी तरह नियंत्रित प्रक्रिया नहीं रह गया है और इन्हें विकसित करने वाली कंपनियों को इनकी संभावित खतरनाक क्षमताओं को सुरक्षित रखने के लिए अधिक सख्त उपाय करने होंगे।----- जब परीक्षण वास्तविक दुनिया तक पहुंच गया -----
पहला मामला चैटजीपीटी विकसित करने वाली कंपनी ओपनएआई से सामने आया। कंपनी ने बताया कि अधिकतम साइबर क्षमताओं के परीक्षण के दौरान उसके कुछ नए एआई मॉडलों ने एक अज्ञात सुरक्षा खामी का पता लगाकर उस पृथक परीक्षण वातावरण से बाहर इंटरनेट तक पहुंच बना ली, जहां उन्हें सीमित रखा गया था।
इसके बाद इन मॉडलों ने चोरी किए गए लॉग-इन विवरण और अन्य तकनीकी कमजोरियों का उपयोग कर मुक्त स्रोत एआई मंच ‘हगिंग फेस’ के सर्वरों तक पहुंच बनाई, ताकि उन्हें दिए गए परीक्षण कार्यों के समाधान खोजे जा सकें। ओपनएआई को इस सेंधमारी की जानकारी तब मिली, जब हगिंग फेस ने कई दिन पहले ही इसका पता लगाकर इसे रोक दिया था।
कुछ ही दिनों बाद दूसरी प्रमुख एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने भी अपने साइबर सुरक्षा परीक्षणों की समीक्षा की। कंपनी ने पाया कि उसके तीन अलग-अलग ‘क्लॉड’ मॉडल, जिन्हें पूरी तरह पृथक वातावरण में रखा जाना था, गलती से इंटरनेट से जुड़ गए थे।
इन मॉडलों को यह बताया गया था कि उनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है और वे केवल एक काल्पनिक परीक्षण में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद एक मॉडल ने एक वास्तविक कंपनी के डेटाबेस से लॉग-इन जानकारी और अन्य आंकड़े प्राप्त कर लिए। दूसरे मॉडल ने एक हानिकारक सॉफ्टवेयर तैयार कर उसे सार्वजनिक कर दिया, जिसे एक वास्तविक साइबर सुरक्षा कंपनी ने डाउनलोड कर चलाया।
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि एआई मॉडलों की आंतरिक तर्क प्रक्रिया से पता चला कि एक मॉडल ने सही ढंग से पहचान लिया था कि वह वास्तविक प्रणाली तक पहुंच चुका है, लेकिन बाद में उसने स्वयं को यह विश्वास दिलाया कि वह अब भी एक काल्पनिक परीक्षण का हिस्सा है।
एक अन्य मॉडल ने भी यह समझा कि लक्ष्य वास्तविक है, लेकिन उसने अपनी गतिविधि जारी रखी। कुछ परीक्षणों में उसने यह मान लिया कि संबंधित कंपनी भी परीक्षण प्रक्रिया का ही हिस्सा होगी। केवल तीसरे और सबसे उन्नत मॉडल ने वास्तविक प्रणाली तक पहुंचने का निष्कर्ष निकलने के बाद अपनी कार्रवाई रोक दी।
एंथ्रोपिक के अनुसार, एआई मॉडलों के लिए यह समझना आवश्यक है कि वे किस परिस्थिति में काम कर रहे हैं, ताकि वे यह तय कर सकें कि कौन-से कदम उठाना उचित है। इन घटनाओं में उनकी परिस्थिति की समझ ही गलत साबित हुई।----- सुरक्षा परीक्षण भी जोखिमपूर्ण -----
दोनों कंपनियों की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि एआई मॉडलों की सुरक्षा जांच के लिए किए जा रहे परीक्षण भी अब पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रित नहीं रह गए हैं। ये स्वयं ऐसे जोखिमपूर्ण अभियान बन चुके हैं, जिनसे वास्तविक दुनिया में नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन मॉडलों की क्षमताएं अत्यंत तेज गति से बढ़ रही हैं। ऐसे में यह कहना कठिन है कि वे संभावित रूप से खतरनाक नहीं हैं, खासकर तब जब कंपनियों, सरकारों और अन्य संस्थानों के संवेदनशील आंकड़ों पर साइबर हमले पहले से ही गंभीर चुनौती बने हुए हैं।
वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी आईबीएम के हालिया अनुमान के अनुसार, इस वर्ष एआई की मदद से किए जाने वाले साइबर हमलों में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है, जबकि एक औसत डेटा सेंधमारी की लागत लगभग 50 लाख अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है।
एआई कंपनियों का मानना है कि उनकी तकनीक को सुरक्षित तरीके से विकसित और इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए दो प्रमुख शर्तें आवश्यक हैं। पहली, एआई की वास्तविक नुकसान को पहचानने और समय रहते रुकने की क्षमता उतनी ही तेजी से विकसित हो, जितनी तेजी से उसकी नुकसान पहुंचाने की क्षमता बढ़ रही है। दूसरी, मॉडलों में लगाए गए सुरक्षा निर्देशों की वे हर स्थिति में सही और एक समान तरीके से व्याख्या करें, ताकि उन्हें ऐसे उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल न किया जा सके जिनकी उनके निर्माताओं ने कल्पना भी न की हो।
हालांकि हालिया घटनाओं ने इन दोनों धारणाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपनियों के अपने परीक्षणों में यह सामने आया कि कुछ मॉडल स्पष्ट संकेत मिलने के बावजूद यह मानने को तैयार नहीं थे कि उनका लक्ष्य वास्तविक है। इसके अलावा मुक्त स्रोत एआई मॉडलों से सुरक्षा प्रतिबंध हटाने के लिए तकनीकी उपायों पर काम करने वाला एक सक्रिय समुदाय भी मौजूद है।----- भविष्य की नई चुनौतियां -----
विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में बहु-एजेंट एआई प्रणालियां और बड़ी चुनौती बन सकती हैं। इनमें कई एआई मॉडल आपस में मिलकर काम करते हैं और उनके बीच होने वाली पारस्परिक गतिविधियों को नियंत्रित करना कहीं अधिक कठिन होता है।
ऐसी प्रणालियों पर हुए शोध बताते हैं कि इनमें मॉडलों के बीच समन्वय की कमी, आपसी मिलीभगत और एक गलती के दूसरे मॉडल तक फैलने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इन जोखिमों का अनुमान केवल प्रत्येक मॉडल का अलग-अलग परीक्षण करके नहीं लगाया जा सकता।
लेख में विज्ञान कथा लेखक आइजैक एसीमोव के वर्ष 1957 के उपन्यास ‘द नेकेड सन’ का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें रोबोटों को मनुष्यों को नुकसान न पहुंचाने के लिए प्रो ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:30 +0530</pubDate>
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<title>मध्यस्थ ही संदिग्ध...अमेरिका&#45;ईरान डील में पाकिस्तान OUT, ट्रंप को सऊदी पर भरोसा</title>
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<description><![CDATA[ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करने वाले अमेरिका के एक रिटायर्ड जनरल और डिफेंस एनालिस्ट ने पाकिस्तान और कतर पर आरोप लगाया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ के तौर पर उनकी भूमिका &quot;प्रभावित&quot; रही है। उनका आरोप है कि दोनों देश अमेरिका के बजाय ईरान का पक्ष लेते हैं। रिटायर्ड जनरल जैक कीन ने फॉक्स न्यूज़ को बताया कि मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान और कतर को चुनने से ईरान के साथ अमेरिका की कूटनीति पर असर पड़ा है और इससे तेहरान के इरादों को समझने में गलतफहमी पैदा हुई है। कीन की ये टिप्पणियां तब आई हैं जब ट्रंप ने तेहरान के साथ कूटनीतिक कोशिशों को फिर से शुरू करने के लिए ईरान पर बड़े सैन्य हमले की योजना को रोकने का फैसला किया है।इसे भी पढ़ें: सर्जियो गोर काट रहे थे बांग्लादेश के चक्कर, तभी रूस ने ली धमाकेदार एंट्री,  भारत का नाम लेकर किया सबसे बड़ा ऐलानकीन &#039;इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ़ वॉर&#039; के चेयरमैन हैं, &#039;सेक्रेटरी ऑफ़ डिफेंस पॉलिसी बोर्ड&#039; के सदस्य हैं, चार अमेरिकी रक्षा मंत्रियों को सलाह दे चुके हैं और &#039;नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी&#039; पर 2018 और 2022 के कांग्रेसनल कमीशन में भी काम कर चुके हैं। कीन ने कहा मिडिल ईस्ट में हमारी इंटेलिजेंस एजेंसियों और सभी संबंधित पक्षों को यह अच्छी तरह पता है कि पाकिस्तान और कतर की स्थिति संदिग्ध है, क्योंकि वे अमेरिका के बजाय ईरान का पक्ष लेते हैं। यह बात पुरानी है, कोई नई नहीं। फिर भी, वे ही मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए, मुझे लगता है कि ईरान के असली इरादों के बारे में अमेरिका को गुमराह करने में उनके प्रभाव की भी भूमिका रही है। रिटायर्ड जनरल ने सऊदी अरब के रवैये की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि रियाद ने बार-बार वॉशिंगटन को ईरान के खिलाफ़ सैन्य कार्रवाई न करने की सलाह दी थी। कीन के मुताबिक, सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने एयरबेस और एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की इजाज़त देने से इनकार कर दिया और तर्क दिया कि ऐसा ऑपरेशन सफल नहीं होगा।इसे भी पढ़ें: Donald Trump  के हाथ से निकल गई ये जंग? ईरान ने फिर ठोका अमेरिका का MQ-9उन्होंने आगे दावा किया कि सऊदी अरब ने लगातार अमेरिका को ईरान के खिलाफ़ सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित किया। कीन ने कहा सऊदी अरब मध्य पूर्व क्षेत्र को ईरान की आक्रामकता से मुक्त कराने के लिए कोई कुर्बानी देने को तैयार नहीं है। यही वह सच्चाई है जो हम यहां होते हुए देख रहे हैं। कीन ने यह भी आरोप लगाया कि सऊदी अरब ईरान का सामना करने का बोझ अमेरिका और इज़राइल पर डालना चाहता था, जबकि वह खुद अपने तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान या जान-माल के नुकसान का जोखिम नहीं उठाना चाहता था। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:29 +0530</pubDate>
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<title>OpenAI और Anthropic के AI मॉडल ने परीक्षण के दौरान कंप्यूटर प्रणालियों में लगाई सेंध</title>
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<description><![CDATA[ ( वि5 आवश्यक सुधार के साथ रिपीट)
(फ्रांसिस्को बेइलो, यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी)
सिडनी, चार अगस्त (द कन्वरसेशन) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में अग्रणी दो कंपनियों ने पिछले 10 दिनों के भीतर खुलासा किया है कि परीक्षण के दौरान उनके कुछ शक्तिशाली और अर्ध-स्वायत्त एआई मॉडल चार अलग-अलग घटनाओं में वास्तविक कंप्यूटर प्रणालियों में अनधिकृत रूप से प्रवेश कर गए।
ये घटनाएं केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं थीं। कई मामलों में एआई मॉडलों ने यह भी पहचान लिया कि वे वास्तविक प्रणालियों तक पहुंच चुके हैं, लेकिन केवल एक मॉडल ने यह समझने के बाद अपनी गतिविधि रोक दी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि अत्याधुनिक एआई मॉडलों का परीक्षण अब पूरी तरह नियंत्रित प्रक्रिया नहीं रह गया है और इन्हें विकसित करने वाली कंपनियों को इनकी संभावित खतरनाक क्षमताओं को सुरक्षित रखने के लिए अधिक सख्त उपाय करने होंगे।----- जब परीक्षण वास्तविक दुनिया तक पहुंच गया -----
पहला मामला चैटजीपीटी विकसित करने वाली कंपनी ओपनएआई से सामने आया। कंपनी ने बताया कि अधिकतम साइबर क्षमताओं के परीक्षण के दौरान उसके कुछ नए एआई मॉडलों ने एक अज्ञात सुरक्षा खामी का पता लगाकर उस पृथक परीक्षण वातावरण से बाहर इंटरनेट तक पहुंच बना ली, जहां उन्हें सीमित रखा गया था।
इसके बाद इन मॉडलों ने चोरी किए गए लॉग-इन विवरण और अन्य तकनीकी कमजोरियों का उपयोग कर मुक्त स्रोत एआई मंच ‘हगिंग फेस’ के सर्वरों तक पहुंच बनाई, ताकि उन्हें दिए गए परीक्षण कार्यों के समाधान खोजे जा सकें। ओपनएआई को इस सेंधमारी की जानकारी तब मिली, जब हगिंग फेस ने कई दिन पहले ही इसका पता लगाकर इसे रोक दिया था।
कुछ ही दिनों बाद दूसरी प्रमुख एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने भी अपने साइबर सुरक्षा परीक्षणों की समीक्षा की। कंपनी ने पाया कि उसके तीन अलग-अलग ‘क्लॉड’ मॉडल, जिन्हें पूरी तरह पृथक वातावरण में रखा जाना था, गलती से इंटरनेट से जुड़ गए थे।
इन मॉडलों को यह बताया गया था कि उनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है और वे केवल एक काल्पनिक परीक्षण में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद एक मॉडल ने एक वास्तविक कंपनी के डेटाबेस से लॉग-इन जानकारी और अन्य आंकड़े प्राप्त कर लिए। दूसरे मॉडल ने एक हानिकारक सॉफ्टवेयर तैयार कर उसे सार्वजनिक कर दिया, जिसे एक वास्तविक साइबर सुरक्षा कंपनी ने डाउनलोड कर चलाया।
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि एआई मॉडलों की आंतरिक तर्क प्रक्रिया से पता चला कि एक मॉडल यह जान चुका था कि वह वास्तविक प्रणाली तक पहुंच गया है, लेकिन बाद में उसने स्वयं को यह विश्वास दिलाया कि वह अब भी एक काल्पनिक परीक्षण का हिस्सा है।
एक अन्य मॉडल ने भी यह समझा कि लक्ष्य वास्तविक है, लेकिन उसने अपनी गतिविधि जारी रखी। कुछ परीक्षणों में उसने यह मान लिया कि संबंधित कंपनी भी परीक्षण प्रक्रिया का ही हिस्सा होगी। केवल तीसरे और सबसे उन्नत मॉडल ने वास्तविक प्रणाली तक पहुंचने का निष्कर्ष निकलने के बाद अपनी कार्रवाई रोक दी।
एंथ्रोपिक के अनुसार, एआई मॉडलों के लिए यह समझना आवश्यक है कि वे किस परिस्थिति में काम कर रहे हैं, ताकि वे यह तय कर सकें कि कौन-से कदम उठाना उचित है। इन घटनाओं में उनकी परिस्थिति की समझ ही गलत साबित हुई।----- सुरक्षा परीक्षण भी जोखिमपूर्ण -----
दोनों कंपनियों की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि एआई मॉडलों की सुरक्षा जांच के लिए किए जा रहे परीक्षण भी अब पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रित नहीं रह गए हैं। ये स्वयं ऐसे जोखिमपूर्ण अभियान बन चुके हैं, जिनसे वास्तविक दुनिया में नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन मॉडलों की क्षमताएं अत्यंत तेज गति से बढ़ रही हैं। ऐसे में यह कहना कठिन है कि वे संभावित रूप से खतरनाक नहीं हैं, खासकर तब जब कंपनियों, सरकारों और अन्य संस्थानों के संवेदनशील आंकड़ों पर साइबर हमले पहले से ही गंभीर चुनौती बने हुए हैं।
वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी आईबीएम के हालिया अनुमान के अनुसार, इस वर्ष एआई की मदद से किए जाने वाले साइबर हमलों में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है, जबकि एक औसत डेटा सेंधमारी की लागत लगभग 50 लाख अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है।
एआई कंपनियों का मानना है कि उनकी तकनीक को सुरक्षित तरीके से विकसित और इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए दो प्रमुख शर्तें आवश्यक हैं। पहली, एआई की वास्तविक नुकसान को पहचानने और समय रहते रुकने की क्षमता उतनी ही तेजी से विकसित हो, जितनी तेजी से उसकी नुकसान पहुंचाने की क्षमता बढ़ रही है। दूसरी, मॉडलों में लगाए गए सुरक्षा निर्देशों की वे हर स्थिति में सही और एक समान तरीके से व्याख्या करें, ताकि उन्हें ऐसे उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल न किया जा सके जिनकी उनके निर्माताओं ने कल्पना भी न की हो।
हालांकि हालिया घटनाओं ने इन दोनों धारणाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपनियों के अपने परीक्षणों में यह सामने आया कि कुछ मॉडल स्पष्ट संकेत मिलने के बावजूद यह मानने को तैयार नहीं थे कि उनका लक्ष्य वास्तविक है। इसके अलावा मुक्त स्रोत एआई मॉडलों से सुरक्षा प्रतिबंध हटाने के लिए तकनीकी उपायों पर काम करने वाला एक सक्रिय समुदाय भी मौजूद है।----- भविष्य की नई चुनौतियां -----
विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में बहु-एजेंट एआई प्रणालियां और बड़ी चुनौती बन सकती हैं। इनमें कई एआई मॉडल आपस में मिलकर काम करते हैं और उनके बीच होने वाली पारस्परिक गतिविधियों को नियंत्रित करना कहीं अधिक कठिन होता है।
ऐसी प्रणालियों पर हुए शोध बताते हैं कि इनमें मॉडलों के बीच समन्वय की कमी, आपसी मिलीभगत और एक गलती के दूसरे मॉडल तक फैलने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इन जोखिमों का अनुमान केवल प्रत्येक मॉडल का अलग-अलग परीक्षण करके नहीं लगाया जा सकता।
लेख में विज्ञान कथा लेखक आइजैक एसीमोव के वर्ष 1957 के उपन्यास ‘द नेकेड सन’ का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें रोबोटों को मनुष्यों को नुकसान न पहुंचाने के लिए ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:28 +0530</pubDate>
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<title>Moscow drone attack में पांच की मौत, रूस और यूक्रेन में तेज हमले</title>
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<description><![CDATA[ मॉस्को, चार अगस्त (एपी) मॉस्को के आसपास के इलाके में यूक्रेनी ड्रोन हमलों में पांच लोगों की मौत हो गई। स्थानीय अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। जबकि यूक्रेन के अधिकारियों का कहना है कि वहां रूसी हवाई हमलों में भी कम से कम पांच नागरिकों की जान चली गई है।दोनों ही देश पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन में लगभग 1,250 किलोमीटर (800 मील) में फैले संघर्ष क्षेत्र में मारे गए या घायल हुए सैनिकों की संख्या उजागर नहीं करते हैं। क्षेत्रीय अधिकारियों ने बताया कि रूस के काला सागर तट पर स्थित रिसॉर्ट शहर अरखिपो-ओसिपोवका में सोमवार को हुए एक ड्रोन हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर सात हो गई है, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं। मंगलवार सुबह, क्रास्नोडार क्षेत्रीय अधिकारियों ने घायलों की संख्या अद्यतन करते हुए 58 बताई, जिनमें से 21 लोग अस्पताल में भर्ती हैं।इंटरनेट पर सामने आए वीडियो में एक ड्रोन को भीड़भाड़ वाले समुद्र तट से टकराते देखा गया, वीडियो में तेज गोलीबारी जैसी आवाजें भी सुनाई दे रही थीं। यूक्रेन ने इस हमले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। मॉस्को क्षेत्र (जो रूसी राजधानी को घेरता है लेकिन खुद राजधानी का हिस्सा नहीं है) के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव ने बताया कि मंगलवार सुबह एक यूक्रेनी ड्रोन हमले में पांच लोगों की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए।वोरोब्योव ने कहा कि इस हमले से सबसे ज्यादा नुकसान चेखव नगर पालिका क्षेत्र में हुआ, जहां नोवोसेल्की औद्योगिक क्षेत्र में कई जगह आग लग गई। रूस के सबसे बड़े ऑनलाइन विक्रेता वाइल्डबेरीज पर लगातार हो रहे हमलों की कड़ी में, कंपनी ने मंगलवार को बताया कि सेंट पीटर्सबर्ग से सटे लेनिनग्राद क्षेत्र में स्थित उसके गोदाम में आग लग गई है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार सुबह रिपोर्ट दी कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रात भर में 320 यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:28 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan&#45;Iran Diplomacy: अमेरिका&#45;ईरान तनाव के बीच Islamabad बना मध्यस्थ, Ishaq Dar ने अरागची को भेजा न्योता</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान ने ईरान के साथ अपने राजनयिक संपर्क बढ़ा दिए हैं। विदेश मंत्री इशाक डार ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची को बातचीत के लिए &quot;जल्द से जल्द&quot; इस्लामाबाद आने का न्योता दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब तेहरान और वॉशिंगटन के बीच संपर्क को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि क्षेत्रीय सहयोगियों की अपील के बाद उन्होंने ईरान के खिलाफ तय सैन्य हमले रद्द कर दिए थे। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से ईरान और अमेरिका के बीच एक अहम राजनयिक कड़ी बने रहने की इस्लामाबाद की कोशिश झलकती है, भले ही पाकिस्तान ने – जैसा कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया – काफी हद तक कम प्रोफ़ाइल बनाए रखी है। इस न्योते पर ईरान की प्रतिक्रिया के बारे में तुरंत कोई जानकारी नहीं मिल पाई।इसे भी पढ़ें: Pakistan की स्थिति West Indies के खिलाफ टेस्ट में मजबूतसोमवार को एक्स पर एक पोस्ट में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा उप प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री सीनेटर मोहम्मद इशाक डार (@MIshaqDar50) ने आज ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची से बात की। उन्होंने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें कब्जे वाले पूर्वी यरुशलम में बिगड़ते हालात भी शामिल हैं। इसमें आगे कहा गया उप प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री (डार) ने विदेश मंत्री अरागची को अपनी सुविधानुसार जल्द से जल्द पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया। इसके अलावा, खबर है कि नेशनल असsembly के स्पीकर अयाज सादिक ने अपने ईरानी समकक्ष मोहम्मद बागेर घालीबाफ को इस्लामाबाद आने का निमंत्रण दिया है। अरागची और घालीबाफ, दोनों ने हाल ही में हुई अमेरिका-ईरान बातचीत में अहम भूमिका निभाई थी।इसे भी पढ़ें: आखिर चाहता क्या है पाकिस्तान? बॉर्डर के पास 250 तोपें लेकर उतरी मुनीर की सेनापाकिस्तान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया हालिया कोशिशों के ज़रिए पाकिस्तान एक भरोसेमंद मध्यस्थ के तौर पर अपनी स्थिति मज़बूत करना चाहता है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब कूटनीतिक कोशिशें कमज़ोर हैं और खाड़ी क्षेत्र में एक और सैन्य टकराव का खतरा बना हुआ है।&quot; अधिकारी ने कहा कि तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान अभी &quot;काफी हद तक खामोश&quot; है। उन्होंने आगे कहा मैं आपको बता दूं... पर्दे के पीछे कूटनीतिक बातचीत जारी है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:28 +0530</pubDate>
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<title>Sheikh Hasina के प्रस्तावित संबोधन पर MEA का बड़ा बयान, भारत सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं</title>
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<description><![CDATA[ सरकार ने आज कहा कि बुधवार को राजधानी में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से जुड़े प्रस्तावित मीडिया इवेंट में उसकी कोई भूमिका नहीं है। सरकार ने ज़ोर देकर कहा कि इसे एक &quot;प्राइवेट मीडिया संस्था&quot; आयोजित कर रही है और नई दिल्ली वहां व्यक्त किए जाने वाले किसी भी विचार का समर्थन नहीं करती है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हर दो हफ़्ते में होने वाली मीडिया ब्रीफ़िंग में कहा कि सरकार की इस इवेंट में कोई भूमिका नहीं है। यह बयान बांग्लादेश की उन चिंताओं के बीच आया है जिनमें उसने नई दिल्ली में &#039;फ़ॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब [FCC] ऑफ़ साउथ एशिया&#039; द्वारा आयोजित इवेंट में 5 अगस्त को शेख हसीना के प्रस्तावित संबोधन पर चिंता जताई थी।इसे भी पढ़ें: MEA का बयान: दोहरे इस्तेमाल वाली चीजों का भारत का निर्यात अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूपजायसवाल ने कहा कि आप जिस बातचीत का ज़िक्र कर रहे हैं, उसे एक प्राइवेट मीडिया संस्था आयोजित कर रही है। इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है। साथ ही, सरकार उस फ़ोरम पर व्यक्त किए जाने वाले किसी भी विचार का समर्थन भी नहीं करती है। बांग्लादेश ने भारत के सामने अपनी चिंता ज़ाहिर की है कि शेख हसीना - जो पिछले साल ढाका छोड़ने के बाद से भारत में हैं एक वर्चुअल भाषण देने वाली हैं। बांग्लादेश का कहना है कि इस कार्यक्रम से दोनों देशों के रिश्तों में हाल ही में आए सुधार पर बुरा असर पड़ सकता है। यह मुद्दा सोमवार को बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर और ढाका में भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी के बीच हुई बैठक में उठा। एक और सवाल का जवाब देते हुए जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को फरवरी 2026 में पद संभालने पर भारत की द्विपक्षीय यात्रा के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था। उन्होंने कहा कि जहां तक ​​ब्रिक्स समिट की बात है, भारत ने BIMSTEC के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने के लिए अलग से निमंत्रण भेजा है।इसे भी पढ़ें: विदेश मंत्रालय का Pakistan पर तीखा प्रहार, PoK Elections को बताया ढकोसला, Sheikh Hasina और China से संबंधों को लेकर भी कह दी बड़ी बातउन्होंने कहा कि BRICS में आउटरीच सेशन के लिए अपनाई जाने वाली आम प्रक्रिया के तहत यह निमंत्रण भेजा गया है। इसी तरह क्षेत्रीय समूहों के अन्य प्रमुखों को भी आमंत्रित किया गया है। इससे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की थी कि रहमान को BRICS समिट में शामिल होने का निमंत्रण मिला है और इस मामले को विचार के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा गया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने ANI को बताया हमें निमंत्रण मिला है और हमने इसे विचार के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय भेज दिया है; इस पर अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री ही लेंगे। अधिकारी ने आगे कहा BIMSTEC के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर, बांग्लादेश को प्रधानमंत्री तारिक रहमान के लिए BRICS समिट के आउटरीच सेशन में भाग लेने का निमंत्रण मिला है। यह निमंत्रण 2027 से पहले आया है, जब BIMSTEC अपनी 30वीं वर्षगांठ मनाएगा और बांग्लादेश ढाका में BIMSTEC समिट की मेजबानी करेगा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Pakistan Atrocities in PoJK: 90 नागरिकों की मौत, MEA बोला&#45; खोखली चुनावी प्रक्रिया से नहीं छिपेगा सच</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुए तथाकथित चुनावों को लेकर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की और दुनिया भर से अपील की कि वे आम नागरिकों पर पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा किए जा रहे अत्याचारों पर ध्यान दें। राष्ट्रीय राजधानी में हर दो हफ़्ते में होने वाली प्रेस ब्रीफ़िंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि PoK में यह तथाकथित स्थानीय चुनाव पूरी तरह से दिखावा है। असल में वहां जनता विरोध-प्रदर्शन कर रही है और पाकिस्तानी सेना आम लोगों की बेरहमी से हत्या कर रही है। ऐसी खोखली कवायदें सच्चाई को छिपा नहीं सकतीं।इसे भी पढ़ें: मध्यस्थ ही संदिग्ध...अमेरिका-ईरान डील में पाकिस्तान OUT, ट्रंप को सऊदी पर भरोसाउन्होंने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि जून के बाद से पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा आम नागरिकों को बिजली कटौती, डराने-धमकाने और दमन का शिकार बनाने के कारण कम से कम 90 नागरिकों की जान जा चुकी है; यह सब एक खोखली चुनावी प्रक्रिया को वैधता दिलाने की कोशिश में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस साल जून से, लगातार हो रही कार्रवाई में कम से कम 90 आम नागरिकों की जान गई है। पाकिस्तानी प्रशासन ने जनता की नाराज़गी का जवाब गोलियों, ब्लैकआउट, डराने-धमकाने और दमन से दिया है, और अब एक खोखली चुनावी प्रक्रिया के ज़रिए अपनी वैधता साबित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस्लामाबाद को जवाबदेह ठहराने की अपील की।उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए, और दुनिया को मानवाधिकारों पर पाकिस्तान के पाखंडपूर्ण उपदेशों के खोखलेपन को समझना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Pakistan-Iran Diplomacy: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच Islamabad बना मध्यस्थ, Ishaq Dar ने अरागची को भेजा न्योताउनकी यह टिप्पणी PoJK में स्थानीय चुनाव के दौरान आम नागरिकों पर हुई बेरहम कार्रवाई के बीच आई है। रविवार को हुए चुनाव में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी, लॉजिस्टिक्स की विफलता और लगातार विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लग गया और इसकी विश्वसनीयता पर नए सिरे से सवाल उठने लगे। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:46:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Pakistan, Atrocities, PoJK:, नागरिकों, की, मौत, MEA, बोला-, खोखली, चुनावी, प्रक्रिया, से, नहीं, छिपेगा, सच</media:keywords>
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<title>रोज़गार के झाँसे से मानव तस्करी तक, साहस से मिली आज़ादी</title>
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<description><![CDATA[ सोफ़िया* 27 वर्ष की थीं और वेनेज़ुएला में अपने सात वर्षीय बेटे की अकेले परवरिश कर रही थीं. वह वर्षों से घर-घर जाकर निजी स्वच्छता उत्पाद बेचती थीं, लेकिन ग्राहकों की आर्थिक स्थिति बिगड़ने के साथ उनकी आमदनी भी कम होती गई. जल्द ही उनके लिए गुज़ारा करना मुश्किल हो गया. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:45:41 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन: युद्ध के बीच जीवन की नई शुरुआत</title>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच, लोग स्कूलों, अस्पतालों, प्रसूति वार्डों और अपने समुदायों में जीवन को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:45:37 +0530</pubDate>
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<title>डीआर काँगो: बढ़ते इबोला मामलों के बीच नए उपचार केन्द्र</title>
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<description><![CDATA[ पूर्वी डीआर काँगो में संयुक्त राष्ट्र समर्थित नए उपचार केन्द्र खोले गए हैं, जो इबोला के बढ़ते मामलों से निपटने में मदद करेंगे. देश में अब तक के सबसे बड़े इबोला प्रकोप के बीच सप्ताहान्त में भी संक्रमण के मामलों में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:45:34 +0530</pubDate>
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<title>भारत: सौर सिंचाई से सँवरा ओडिशा की महिला किसानों का भविष्य</title>
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<description><![CDATA[ भारत में ओडिशा के नबरंगपुर ज़िले में सौर सिंचाई पम्प से महिला किसानों की खेती और आमदनी बढ़ने के साथ-साथ परिवार व समुदाय में उनकी भूमिका भी मज़बूत हुई है. UNDP की पहल के तहत मिले इस पम्प की बदौलत अब वे वर्षा व महँगे डीज़ल पर निर्भर हुए बिना विभिन्न फ़सलें उगा रही हैं और अहम निर्णयों में हिस्सा ले रही हैं. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 03 Aug 2026 11:05:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Russia&#45;Ukraine War में China की &amp;apos;चुपचाप&amp;apos; मदद, US Weapon Stock खत्म होने से बढ़ी Xi Jinping की ताकत</title>
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<description><![CDATA[ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक ऐसी लड़ाई में अमेरिका को उलझा दिया है जिसे शायद जीता नहीं जा सकता, और इससे चीन की स्थिति मज़बूत हुई है। इसके अलावा, बीजिंग दुनिया भर में अपना असर बढ़ा रहा है और यूक्रेन और पश्चिमी देशों के साथ रूस की लड़ाई में चुपचाप उसका साथ भी दे रहा है। अमेरिका के मिसाइल और हथियारों का स्टॉक कम होने की बात लंबे समय से पता है - और ईरान युद्ध ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है - जिसका सीधा फ़ायदा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को मिल रहा है। बहुत मुमकिन है कि चीन और रूस अपनी अगली चालों (क्रमशः ताइवान और यूक्रेन के ख़िलाफ़) की योजना बनाते समय इस बात को ध्यान में रख रहे हों।इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War में फंसे भारतीयों पर Supreme Court सख्त, MEA को नोडल अफसर नियुक्त करने का आदेशजैसा कि ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट के सीनियर एनालिस्ट डॉ. मैल्कम डेविस ने कहा यह बात उतनी ही पक्की है जितनी कि दिन के बाद रात का आना यह स्थिति अब अमेरिकी सैन्य क्षमता के लिए एक बहुत ही खतरनाक संकट पैदा कर रही है और यह संकट एक दशक या एक-दो साल बाद नहीं, बल्कि अभी आ रहा है। बेशक, रूस को समर्थन देने के मामले में चीन का रवैया उत्तर कोरिया जितना खुला नहीं रहा है। बीजिंग ने न तो तोप का चारा बनने वाले सैनिक भेजे हैं और न ही मिसाइलें बेची हैं, लेकिन फिर भी वह यूक्रेन में व्लादिमीर पुतिन की लंबी खिंचती लड़ाई का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहा है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने चीन को रूस की लड़ाई को निर्णायक रूप से आगे बढ़ाने वाला बताया है। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बीजिंग की तथाकथित तटस्थता असल में वैसी नहीं है। यह शुरू से ही एक दिखावा रहा है; चीन ने तुरंत मॉस्को की बातों को दोहराया और यहाँ तक कि अनिवार्य कोर्स भी चलाए, जिनमें शिक्षकों और लेक्चररों को यह बताया गया कि पुतिन की लड़ाई के बारे में आधिकारिक नैरेटिव को कैसे पेश किया जाए। तब से चीन अपनी इस बात पर अडिग रहा है।इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: Trump की शांति पहल के बीच Kyiv पर मिसाइल वर्षा, क्या पुतिन अब और बढ़ाएंगे युद्ध?चीन अपनी आलोचना को लेकर बहुत सोच-समझकर कदम उठाता है। जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने तुरंत कहा, &quot;चाहे कोई भी वजह हो, बिना सोचे-समझे ताकत का इस्तेमाल मंज़ूर नहीं है, और बेगुनाह नागरिकों और गैर-सैन्य ठिकानों पर किसी भी हमले की निंदा की जानी चाहिए। फिर भी, यूक्रेन के खिलाफ पुतिन की चार साल से ज़्यादा चली लड़ाई में, चीन ने मॉस्को को सिर्फ़ एक ही चेतावनी दी है कि वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल न करे। यह बात ही चीन के दोहरे रवैये को दिखाती है।इसके बावजूद, रूस में जन्मे पूर्व शतरंज ग्रैंडमास्टर गैरी कास्पारोव ने कहा, &quot;चीन बिना किसी बुरे नतीजे के रूस की सीधे और परोक्ष रूप से मदद करता है।&quot; रूस की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने के बावजूद, उसे कोई खास सज़ा नहीं मिली है। हाँ, कुछ चीनी कंपनियों पर अमेरिका, ब्रिटेन या यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन उन्हें कोई खास राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना पड़ा है। तो फिर, रूस के लिए चीन का समर्थन किस तरह का है? काम के बँटवारे के तहत, मॉस्को &#039;पीपल्स लिबरेशन आर्मी&#039; (PLA) को लड़ाई के गुर सिखाता है, जबकि बदले में चीन रूस को इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और मशीनरी भेजता है ताकि उसके सैन्य-औद्योगिक ढांचे को मदद मिल सके। चीन रूस से लड़ाई के सबक सीखने के लिए उत्सुक है, क्योंकि ये सीधे तौर पर ताइवान को लेकर उसकी सैन्य योजनाओं से जुड़े हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Balochistan में Pakistani Army पर भीषण हमला, UBA और BRG के धमाकों में 8 जवानों की मौत</title>
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<description><![CDATA[ बलूचिस्तान के कच्छी ज़िले में हुए अलग-अलग हमलों की ज़िम्मेदारी दो बलूच हथियारबंद गुटों - यूनाइटेड बलूच आर्मी (UBA) और बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) - ने ली है। इस दौरान इलाके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और हथियारबंद लड़ाकों के बीच रुक-रुक कर झड़पें भी होती रहीं। रिपोर्ट के अनुसार, कच्छी के सन्नी इलाके में एक धमाके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की एक गाड़ी को निशाना बनाया गया, जबकि आस-पास के इलाकों से भी गोलीबारी की खबरें मिलीं। UBA के प्रवक्ता मज़ार बलूच ने एक बयान में कहा कि उनके गुट ने धादर और सन्नी के बीच चिघार्डी इलाके में पाकिस्तानी बलों के सात गाड़ियों वाले काफिले में शामिल एक गाड़ी पर रिमोट-कंट्रोल विस्फोटक डिवाइस से हमला किया। प्रवक्ता ने बताया कि हमला तब हुआ जब काफिला एक मिलिट्री चेकपॉइंट की ओर जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि इस हमले में आठ जवान मौके पर ही मारे गए और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।इसे भी पढ़ें: Pakistan के Balochistan में कोयला खदान विस्फोट, 34 खनिकों की मौत और बचाव अभियान जारीउन्होंने आगे आरोप लगाया कि UBA के लड़ाकों ने इलाके से पीछे हटने से पहले काफिले की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों के साथ थोड़ी देर गोलीबारी की। TBP की रिपोर्ट के अनुसार, मज़ार बलूच ने कहा हमारा संगठन, UBA, इस हमले की ज़िम्मेदारी लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज़ाद बलूचिस्तान बनने तक ऐसे ऑपरेशन जारी रहेंगे। इस बीच, बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) ने बताया कि उसके लड़ाके बुधवार सुबह 7:00 बजे से पाकिस्तानी सेना के दो अलग-अलग काफिलों पर हमले कर रहे थे। संगठन ने दावा किया कि बयान जारी होने के समय भी झड़पें जारी थीं।इसे भी पढ़ें: Balochistan Civil War Like Situation: बलूचिस्तान में बेकाबू हुए हालात, Army और Rebels के बीच खूनी संघर्ष तेज़समूह ने कहा कि वह बाद में इन झड़पों के बारे में विस्तार से बयान जारी करेगा। एक अलग बयान में, BRG के प्रवक्ता दोस्तैन बलूच ने कहा कि समूह ने कच्छी के धादर इलाके में सरकारी सिंचाई विभाग के दफ़्तर को निशाना बनाया और वहां विस्फोटक उपकरण लगाए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Russian Army में फंसे 139 भारतीयों की घर वापसी, MEA ने Job Fraud को लेकर नागरिकों को किया सावधान</title>
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<description><![CDATA[ विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को भारतीय नागरिकों को विदेशों में नौकरी दिलाने वाली धोखाधड़ी करने वाली एजेंसियों के बारे में कड़ी चेतावनी जारी की। मंत्रालय ने बताया कि राजनयिक कोशिशों से रूसी सेना में शामिल 139 भारतीयों को छुड़ा लिया गया है और लगभग दो दर्जन अन्य लोगों को भी छुड़ाने की कोशिशें जारी हैं। राष्ट्रीय राजधानी में हर दो हफ़्ते में होने वाली मीडिया ब्रीफिंग में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नौकरी चाहने वालों से कहा कि वे विदेश में नौकरी के ऑफ़र पर विचार करते समय बहुत सावधानी बरतें। जायसवाल ने कहा हम रूसी सेना में बचे हुए भारतीय नागरिकों को छुड़ाने के लिए रूसी पक्ष के साथ लगातार संपर्क में हैं। अब तक हमारी कोशिशों से 139 भारतीय नागरिकों को छुड़ाया जा चुका है। हम बाकी बचे लगभग दो दर्जन भारतीय नागरिकों को भी छुड़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जिनके बारे में खबर है कि वे रूसी सेना में हैं।खतरनाक मानव तस्करों से जुड़े खतरों का ज़िक्र करते हुए जायसवाल ने कहा हम एक बार फिर अपने लोगों को उन नौकरी के ऑफ़र के बारे में सावधान करना चाहते हैं जिनमें जोखिम हो और जो बेईमान लोगों या एजेंसियों की तरफ़ से दिए गए हों। MEA का यह अपडेट उसी दिन आया जब भारत के सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावित परिवारों को राहत पहुँचाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए कई ज़रूरी निर्देश जारी किए। रूस-यूक्रेन संघर्ष में फँसाए गए भारतीय नागरिकों के रिश्तेदारों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने MEA को एक खास नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया, जिसकी संपर्क जानकारी सीधे पीड़ित परिवारों के साथ साझा की जाएगी।इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: 280 अटैक ड्रोन और मिसाइल बारिश से दहला यूक्रेन, Zelensky ने बताया &#039;रूसी आतंक&#039; का खौफनाक मंजरकोर्ट ने केंद्र को यह भी निर्देश दिया कि वह शवों की पहचान के लिए DNA जाँच की सुविधा दे, मुफ़्त कानूनी मदद मुहैया कराए और मुआवज़े के दावों व स्वदेश वापसी से जुड़े दस्तावेज़ों का अनुवाद करवाए। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) को यह भी निर्देश दिया कि वह प्रभावित परिवारों के लिए एक कंबाइंड डॉकेट (जानकारी का सेट) तैयार करे। इसे स्थानीय भाषाओं में अनुवादित किया जाना चाहिए और इसमें रूसी अधिकारियों के सामने मुआवज़े का दावा करने की प्रक्रिया समझाई जानी चाहिए। कोर्ट ने साफ़ किया कि मुआवज़े के दावे विदेश मंत्रालय के ज़रिए भेजे जाएंगे, लेकिन इनके पेंडिंग रहने की वजह से शवों की वापसी या अंतिम संस्कार में देरी नहीं होनी चाहिए।इसे भी पढ़ें: MEA Press Conference : Pakistan पर India का अब तक का सबसे बड़ा हमला, विदेश मंत्रालय ने दुनिया के सामने खोली आतंकिस्तान की पूरी पोलकोर्ट ने राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों के सदस्य सचिवों को यह भी निर्देश दिया कि वे प्रभावित परिवारों को मुआवज़े का दावा करने और DNA टेस्टिंग में मदद के लिए मुफ़्त कानूनी सहायता दें। विदेश मंत्रालय से यह भी कहा गया कि वह रूसी अधिकारियों से मिले उन दस्तावेज़ों का अनुवादित वर्शन उपलब्ध कराए जो शवों की वापसी और मुआवज़े के दावों से संबंधित हैं। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि 2024 और 2025 में, कई भारतीय युवा अलग-अलग वीज़ा पर रूस गए थे, क्योंकि उन्हें कंस्ट्रक्शन, हॉस्पिटैलिटी और सर्विस सेक्टर में नौकरी का वादा किया गया था। हालाँकि, वहाँ पहुँचने पर उनके पासपोर्ट और पहचान के दस्तावेज़ ज़ब्त कर लिए गए और उन्हें रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया, जिसके बाद उन्हें लड़ाई के मोर्चे पर भेज दिया गया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:17 +0530</pubDate>
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<title>IDF का बड़ा स्ट्राइक: Beaufort Ridge के नीचे Hezbollah का मुख्य Underground Network तबाह, ईरान की बड़ी साजिश नाकाम</title>
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<description><![CDATA[ इज़राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने शुक्रवार को कहा कि उसने दक्षिणी लेबनान में ब्यूफोर्ट रिज के नीचे कई अहम अंडरग्राउंड सुरंगों को नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई सुरक्षा क्षेत्र में एक &quot;सीमित गतिविधि&quot; के दौरान की गई, जबकि अगस्त में रोम में अमेरिका की मध्यस्थता में इज़राइल-लेबनान बातचीत फिर से शुरू होने वाली है। आईडीएफ ने कहा कि सुरंग नेटवर्क हिज़्बुल्लाह के लिए एक मुख्य कमांड सेंटर का काम करता था, जहाँ से उसके कमांडर लड़ाई की गतिविधियों को संभालते थे और इज़राइली सैनिकों और नागरिकों पर हमले का निर्देश देते थे।इसे भी पढ़ें: US के साथ समझौते से Iran का साफ इनकार, Strait of Hormuz को बताया अपनी ताकत का &#039;विराट शिखर&#039;आईडीएफ के अनुसार, इस अंडरग्राउंड नेटवर्क में कई स्तर थे और इसे दो दशकों में बनाया गया था। IDF ने यह भी कहा कि यह दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह की &#039;बदर यूनिट&#039; के लिए एक मुख्य कमांड सेंटर के तौर पर काम करता था और इसे &quot;ईरान के आतंकवादी शासन ने प्लान और फंड किया था। आईडीएफ ने कहा कि यह नेटवर्क उत्तरी इज़राइल के लिए खतरा था क्योंकि यह मेटुला और गैलिली पैनहैंडल से लगभग छह किलोमीटर दूर स्थित था। आईडीएफ ने कहा, &quot;युद्ध के दौरान, इस इंफ्रास्ट्रक्चर से इज़राइली नागरिकों और IDF सैनिकों पर दर्जनों UAV, विस्फोटक उपकरण और एंटी-टैंक मिसाइलें दागी गईं।आईडीएफ ने कहा, &quot;आज रात, IDF ने ज़मीन के नीचे बने सुरंगों के नेटवर्क के एक बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया।इसे भी पढ़ें: सलमान रुश्दी पर हमला करने वाले अमेरिकी नागरिक हादी मतर को आतंकवाद संबंधी आरोपों में दोषी ठहराया गयाइज़राइली सेना ने बताया कि उसकी टुकड़ियों ने पिछले कुछ हफ़्तों में ब्यूफोर्ट रिज इलाके में अपनी तैनाती पूरी कर ली है। साथ ही, उन्होंने ज़मीन के नीचे बने सुरंगों के नेटवर्क पर अपना ऑपरेशनल कंट्रोल बनाए रखा और उन्हें नष्ट करने की तैयारी भी की। आईडीएफ ने कहा, &quot;IDF के सैनिक अली ताहिर रिज इलाके में ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं, वे पूरी तरह सतर्क हैं और बचाव व हमले, दोनों तरह की स्थितियों के लिए तैयार हैं। आईडीएफ सैनिकों पर होने वाले हमलों का उचित जवाब दिया जाएगा।&quot;सेना ने यह भी कहा कि वह लेबनान के साथ हुए सीज़फ़ायर समझौते का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही अपनी सेना के लिए खतरों को खत्म करने के लिए ऑपरेशन भी जारी रखे हुए है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:16 +0530</pubDate>
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<title>Iran vs US: कुवैत में अमेरिकी Airbase पर बड़ा Drone Attack, ईरान ने लिया Qeshm Island का बदला</title>
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<description><![CDATA[ ईरानी सेना ने कहा है कि उसने &#039;ऑपरेशन लाइटनिंग&#039; के 27वें चरण के दौरान कुवैत में अहमद अल-जाबेर एयर बेस पर मौजूद अमेरिका के अहम ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB ने सेना के जनसंपर्क विभाग के बयान का हवाला देते हुए बताया कि यह ऑपरेशन अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में किया गया था; इसमें खास तौर पर केशम द्वीप पर एक रिहायशी घर पर हुए हमले का ज़िक्र किया गया। सरकारी ब्रॉडकास्टर ने बताया कि इन हमलों में कुवैती बेस पर मौजूद फाइटर जेट के ठिकानों, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम&quot; और &quot;उपकरणों के गोदामों&quot; को निशाना बनाया गया। इस बेस को अमेरिकी एयर सपोर्ट, निगरानी और ऑपरेशन्स के लिए एक अहम केंद्र माना जाता है।इसे भी पढ़ें: Pakistan ने ट्रंप से कर दी गद्दारी, ईरान कैसे पहुंचा हथियारों का जखीरा?IRIB ने आगे बताया कि ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लगातार बड़े हमलों की वजह से दुश्मन के डिफेंस सिस्टम के लिए ड्रोन और मिसाइलों को रोकना मुश्किल और महंगा हो गया है। साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया है कि हताहतों और हुए नुकसान की खबरों को दबाने के लिए कड़ी सेंसरशिप लागू की जा रही है। इससे पहले, ईरान के सरकारी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत में अमेरिका द्वारा संचालित अली अल सलेम एयरबेस पर दो ड्रोन हैंगर और मिलिट्री एयरक्राफ्ट व हेलीकॉप्टर के लिए बनाए गए फ्यूल स्टोरेज सेंटर को नष्ट कर दिया है।इसे भी पढ़ें: Mahan Air की एजेंट भारत की Skies Travels समेत कई कंपनियों पर US Sanctionsशुक्रवार को कुवैत के नागरिकों को संबोधित करते हुए, IRGC के बयान में कहा गया कि तेहरान की सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक कि इस इलाके से अमेरिका की &quot;कब्जा करने वाली और लूटने वाली सेनाओं&quot; को पूरी तरह से हटा नहीं दिया जाता। कुवैत में तनाव बढ़ने की यह घटना तेहरान द्वारा गुरुवार को जॉर्डन के अल-अज़राक एयरबेस पर एक अलग जवाबी मिसाइल हमले के दावों के बाद हुई है। हालांकि, अमेरिकी सेना ने ईरान के इन दावों को खारिज कर दिया है कि हमले में अमेरिकी F-35 फाइटर जेट नष्ट हो गए थे। सेना का कहना है कि किसी भी अमेरिकी विमान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और उसकी सेनाएं पूरे इलाके में ऑपरेशन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के दावे का जवाब देते हुए, US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने X पर पोस्ट किया, &quot;ईरान के हालिया हमलों की कोशिशों में कोई भी अमेरिकी विमान नष्ट या क्षतिग्रस्त नहीं हुआ। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:16 +0530</pubDate>
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<title>Russia&#45;India Oil Deal: भारत&#45;रूस की यारी के सामने अमेरिकी बैन फेल! 3 मिलियन बैरल का नया रिकॉर्ड</title>
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<description><![CDATA[ जब दुनिया में संकट गहराया, तब एक पुरानी दोस्ती भारत की सबसे बड़ी ताकत बन कर उभरी। पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के बीच कयास लगाए जा रहे थे कि भारत का एनर्जी सेक्टर संकट में आ जाएगा। लेकिन आज जो खबर वाशिंगटन से लेकर यूरोप तक हलचल मचा रही है, उसने सारे समीकरण बदल दिए हैं। भारत और रूस मिलकर तेल आयात का एक ऐसा नया रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। आख़िर क्या है वो रिपोर्ट जिसने ग्लोबल ऑयल मार्केट में खलबली मचा दी है? ग्लोबल कमोडिटी इंटेलिजेंस फर्म केप्लर का कहना है कि भारत का रूस से कच्चे तेल यानी कि क्रूड ऑयल का आयात लगभग 30 लाख बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर को छू सकता है। लेकिन ये खबर सिर्फ तेल की नहीं है। यह खबर तब आ रही है जब अमेरिका में नए टेरिफ बिल को लेकर चर्चाएं तेज है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत अमेरिका के संभावित दबाव के आगे झुकेगा? या फिर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बरकरार रखते हुए रूस के साथ इस रिकॉर्ड तेल आयात को अंजाम देगा।इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War में फंसे भारतीयों पर Supreme Court सख्त, MEA को नोडल अफसर नियुक्त करने का आदेदरअसल इस पूरी खबर के पीछे एक बड़ा कारण है लाल सागर यानी रेड सी और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस में बढ़ता हुआ तनाव। कैप्टनर की रिपोर्ट बताती है कि अगर रेड सी में सप्लाई बाधित होती है तो भारतीय रिफाइनरियों के पास रूस ही सबसे भरोसेमंद विकल्प बचेगा। भारत ने पिछले कुछ सालों में अपनी तेल खरीद को काफी ज्यादा डायवर्सिफाई कर लिया है। चाहे वो वेनेजुएला हो, अफ्रीका हो या अटलांटिक बेसिन। लेकिन जब बात बफर की आती है तो रूस का कोई भी मुकाबला नहीं है। सऊदी अरब का ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन भारत को कुछ राहत तो देता है लेकिन वो रूस की विशाल सप्लाई की बराबरी नहीं कर सकता। रूस भारत के लिए एक हैच की तरह काम करता है। यानी दुनिया में कहीं भी सप्लाई रुके। रूस भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए खड़ा है। केप्लर की लीड एनालिस्ट सुमित रितोलिया का मानना है कि अनुकूल परिस्थितियों में रूस से शिपमेंट 30 लाख बैरल प्रतिदिन से भी ऊपर जा सकता है। हालांकि इसमें कुछ चुनौतियां भी हैं। रूस के ऊर्जा ढांचे पर यूक्रेन के साथ चल रहे संघर्ष के कारण हमले हो रहे हैं। जुलाई में रूस का निर्यात पहले की तुलना में कम भी हुआ है। इसके बावजूद भारत की रिफाइनरियों ने अपनी रणनीति को इतना लचीला बनाया है कि वह रूस से अधिक तेल खरीद कर भी शॉर्ट टर्म गैप को भर सकती हैं। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War: Trump की शांति पहल के बीच Kyiv पर मिसाइल वर्षा, क्या पुतिन अब और बढ़ाएंगे युद्ध?वैसे यहां एक टेक्निकल बात समझना बेहद जरूरी हो जाता है। रूस के इन ओरस्कियस एक्सपोर्ट टर्मिनल की भी भूमिका बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ रूस का ओरसल तेल ही नहीं बल्कि कजाकिस्तान का तेल भी दुनिया तक पहुंचाता है। अगर ब्लैक सी में कोई बड़ी बाधा उत्पन्न होती है तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत इसी रिस्क को मैनेज करने के लिए रूस के साथ अपने संबंधों को और मजबूत कर रहा है। तो क्या भारत अमेरिका के टेरिफ बिल से पहले यह बड़ा कदम उठाएगा? जानकारों का मानना है कि भारत ने हमेशा ही इंडिया फर्स्ट की नीति अपनाई है। रूस से सस्ता तेल ना केवल हमारी अर्थव्यवस्था को महंगाई से बचाता है बल्कि हमारी रिफाइनरी को भी दुनिया के कंपटीशन में बनाए रखता है। खैर 30 लाख बैरल ऑयल प्रतिदिन का यह आंकड़ा सिर्फ एक नंबर नहीं है बल्कि यह भारत की बढ़ती हुई आर्थिक ताकत और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति का प्रमाण है। रूस के साथ यह दोस्ती भविष्य में भारत को एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:15 +0530</pubDate>
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<title>पाकिस्तान जाएंगे पीएम मोदी? इस्लामाबाद से क्या बड़ा ऐलान होने वाला है!</title>
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<description><![CDATA[  क्या पाकिस्तान जाएंगे पीएम मोदी पाकिस्तान में ऐसा क्या हो रहा है कि जिसमें पीएम मोदी को बुलाने की तैयारी शुरू हो गई है क्या पाकिस्तान अपने कुकर्मों की पीएम मोदी से मांगेगा माफ। पाकिस्तान ने ऐसा क्या ऐलान किया है जिसने भारत को भी चौंका दिया है। इआप चौंक रहे होंगे कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है कि पीएम मोदी मोदी पाकिस्तान जाएं। वो भी तब जब लगातार पाकिस्तान बॉर्डर पर तनाव बढ़ाने वाली हरकतें कर रहा है। अपने पालतू आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने के लिए आए दिन बॉर्डर पर गोलीबारी करता रहता है। पहलगाम हमले के बाद से ही पाकिस्तान और भारत के बीच किस तरह से तनाव की स्थिति बनी हुई है। क्या ऐसे हालातों के बीच पीएम मोदी पाकिस्तान जा सकते हैं?  इसे भी पढ़ें: Jammu के खौर सेक्टर में सेना की बड़ी कार्रवाई, Pakistan का Chinese Drone मार गिरायादरअसल कुछ ही महीने बाद पाकिस्तान में एसइओ समिट होने वाला है क्योंकि इस बार एसइओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी पाकिस्तान ही कर रहा है। लेकिन पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से यह संकेत दे दिए हैं कि वो इस्लामाबाद में होने वाले एसइओ शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करेगा। दरअसल पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया ब्रीफिंग में भारत और एसइओ समिट को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं। लेकिन जब उनसे पत्रकारों ने पूछा कि क्या अगले साल इस्लामाबाद में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया जाएगा। तो इस पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्रावी ने कहा कि एससीओ के सभी मेंबर देशों को सम्मेलन में आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें सभी सदस्य देशों के राष्ट्र अध्यक्ष और शासन अध्यक्ष भी शामिल हैं।इसे भी पढ़ें: POJK में प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता की जांच के लिए India ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की मतलब साफ है कि भारत भी आमंत्रित देशों में शामिल है। पाकिस्तानी प्रवक्ता ने कहा कि एससीओ की प्रक्रिया और प्रोटोकॉल के तहत मेजबान देश के लिए सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करना उनकी दायित्व है। हालांकि एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी शिरकत करेंगे या नहीं? इसको लेकर सस्पेंस है। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या पाकिस्तान यह हिम्मत जुटा पाएगा कि वह पीएम मोदी को एसइओ समिट में आने का न्योता दे सके। क्योंकि भारत के खिलाफ वो जिस तरह की कायराना हरकतों को अंजाम देता रहता है उससे तो नहीं लगता कि वो न्योता भेजने लायक बचा हो। पाकिस्तान वो आतंकी मुल्क है जो किसी भी तरह से भारत के आगे मुंह दिखाने लायक नहीं है। उसके चेहरे पर ना जाने कितने बेगुनाहों के खून बहाने के दाग हैं जिससे भारत कभी भी माफ नहीं कर सकता। दरअसल एसइओ बहुपक्षीय बैठकों के तहत सदस्य देशों के बीच निमंत्रण भेजे जाते हैं। एसओ शिखर सम्मेलन एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय मंच है। इसमें 10 सदस्य देश हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:15 +0530</pubDate>
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<title>Algeria में भीषण Bus Accident: गहरी खाई में बस गिरने से 25 की मौत, 44 घायल</title>
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<description><![CDATA[ अल्जीरिया में शुक्रवार को एक बस दुर्घटना में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई, जबकि 44 घायल हो गए। अल्जीरिया के नागरिक सुरक्षा विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट से यह जानकारी मिली। बस यात्रियों को सेतीफ से अल्जीरिया की राजधानी अल्जीयर्स ले जा रही थी।बस अल्जीयर्स से लगभग 50 किलोमीटर दूर एल कर्मा क्षेत्र में सड़क से फिसलकर एक गहरी खाई में जा गिरी। इस घटना में 25 लोगों की मौत हो गई और 44 घायल हो गए। घटनास्थल पर बचाव दल मौजूद थे और एंबुलेंस के माध्यम से लगातार घायलों को नजदीकी अस्पतालों तक पहुंचाया जा रहा था।सरकारी टेलीविजन के अनुसार, अल्जीरिया के राष्ट्रपति अब्देलमजीद तेब्बौने ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। पंद्रह अगस्त 2025 को अल्जीयर्स में एक सार्वजनिक परिवहन बस पुल के सुरक्षा अवरोधक को तोड़ते हुए नीचे नदी में जा गिरी थी। इस नदी में शहर का सीवेज (मलजल) प्रवाहित होता है।उस दुर्घटना में 18 लोगों की मौत हुई थी और 21 लोग घायल हुए थे। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:14 +0530</pubDate>
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<title>EU ने AI कंपनियों पर निगरानी के लिए बनाई नई टीम, ब्रसेल्स में कार्यालय का विस्तार</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया भर की एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) कंपनियों पर लगाम लगाने के लिए यूरोपीय संघ (ईयू) ने शुक्रवार को एक नयी टीम का गठन किया। दुनिया भर में तेजी से बढ़ती एआई तकनीक से लोगों, राजनीति और अर्थव्यवस्था पर मंडराते खतरों को लेकर चिंताएं बढ़ गयी हैं। ईयू का यह दल नए नियमों के उल्लंघन के मामलों पर नजर रखेगा।इसमें यौन सामग्री का प्रकाशन, फर्जी फोटो-वीडियो और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर साइबर खतरे शामिल हैं। जैसे ही इस संगठन का एआई कानून लागू होगा, एआई कंपनियों के लिए यह अनिवार्य हो जाएगा कि वे उपभोक्ताओं को लेबल या डिजिटल वाटरमार्क के जरिए स्पष्ट रूप से बताएं कि तस्वीर या सामग्री एआई द्वारा बनाई गई है। ईयू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘जैसे-जैसे नियम लागू हो रहे हैं, हम एक ऐसे एआई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं जिसे लोग समझ सकें, जिस पर भरोसा कर सके और जिसके लाभ पूरे समाज में साझा हों।’’
ईयू अतिरिक्त 38 कर्मियों के साथ ब्रसेल्स में अपने एआई कार्यालय का विस्तार कर रहा है, जो नयी कंपनियों से लेकर ओपेनएआई और डीपसीक जैसी अमेरिकी और चीनी तकनीकी दिग्गजों तक की निगरानी करेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:13 +0530</pubDate>
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<title>Nepal के Saptari में सांप्रदायिक हिंसा के बाद प्रशासन ने लगाया अनिश्चितकालीन Curfew</title>
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<description><![CDATA[ (शिरिष बी प्रधान)
काठमांडू, 31 जुलाई नेपाल के अधिकारियों ने सुनसरी जिले में हाल में हुई सांप्रदायिक हिंसा के विरोध में प्रदर्शन शुरू होने के बाद शुक्रवार को भारत की सीमा से लगे सप्तरी जिले के कुछ हिस्सों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने तनावपूर्ण स्थिति पर गहरी चिंता जताई तथा लोगों से शांति, एकता एवं संयम बनाए रखने की अपील की। नेपाल पुलिस ने एक बयान में बताया कि मधेश प्रांत में सांप्रदायिक हिंसा फैलाने में कथित रूप से शामिल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया।पुलिस के मुताबिक, इन आठ लोगों में से पांच को सिरहा और तीन को धनुषा से गिरफ्तार किया गया। सप्ताहांत में कोशी प्रांत के सुनसरी में सांप्रदायिक झड़पें शुरू होने के बाद से नेपाल के कई जिलों में तनाव बना हुआ है। तनाव के कारण अधिकारियों ने कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लागू की है तथा सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।प्रधानमंत्री शाह ने मधेश प्रांत का प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं के साथ शुक्रवार को बैठक की। बैठक में महंत ठाकुर, राजेंद्र महतो, सीके राउत, प्रभु शाह और समीम अंसारी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शाह ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी से जुड़े मधेश क्षेत्र के सांसदों से भी मुलाकात की।बैठक में मधेशी लोगों की आजीविका और वहां जारी विकास एवं निर्माण कार्यों पर चर्चा की गई। सप्तरी जिला प्रशासन कार्यालय ने एहतियाती कदम के तौर पर राजबिराज नगरपालिका के कुछ हिस्सों में सुबह आठ बजे से कर्फ्यू लागू कर दिया। यह फैसला सांप्रदायिक झड़पों के विरोध में कुछ समूहों द्वारा प्रदर्शन किए जाने के बाद लिया गया।इस नये आदेश के बाद अब चार जिलों में कर्फ्यू लागू हो गया है। नेपाल के दक्षिणी तराई क्षेत्र में भारत की सीमा से लगे सुनसरी, धनुषा और सिरहा जिलों के कुछ हिस्सों में पहले से ही कर्फ्यू लागू है। अधिकारियों को तनाव को नियंत्रित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है।बीते रविवार को दो धार्मिक समुदायों के कार्यक्रमों के दौरान हुए विवाद के बाद आपस में भिड़े समूहों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और सुरक्षा कर्मियों समेत एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। हिंसा उस समय शुरू हुई, जब अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर रहे दोनों समुदायों के लोगों के बीच लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और धार्मिक झंडे लगाने को लेकर विवाद हो गया। बातचीत के दौरान हुई बहस ने हिंसक रूप ले लिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा।बृहस्पतिवार को हिंसा मधेश प्रांत तक फैल गई, जहां सिरहा जिले में हुई झड़पों में एक नाबालिग की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि सुनसरी में हुई हिंसा में घायल एक व्यक्ति की कोशी प्रांत में मौत हो गई। सहायक मुख्य जिला अधिकारी होम प्रसाद घिमिरे ने बताया कि इस बीच, सीमा से लगे सरलाही जिले की जिला सुरक्षा समिति ने फैसला लिया कि सीमा पार से नेपाल में प्रवेश करने वाले लोगों के लिए वैध पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य होगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:13 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan में इस साल 3,000 से अधिक आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गईं: सेना</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान में इस साल आतंकवाद से जुड़ी 3,000 से अधिक घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें सुरक्षा बलों सहित 800 लोगों की मौत हो गई। सेना के एक शीर्ष अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। ‘इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस’ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने बताया कि पाकिस्तान में इस साल विभिन्न अभियानों के दौरान कुल 2,084 आतंकवादी मारे गए।इस्लामाबाद में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में चौधरी ने कहा, “साल 2026 में पाकिस्तान में 3,145 आतंकवादी घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 1,971 घटनाएं खैबर पख्तूनख्वा, 1,148 बलूचिस्तान और 26 देश के अन्य हिस्सों घटीं।”
उन्होंने कहा कि उक्त अवधि में रोजाना औसतन 10 आतंकवादी मारे गए, जो अब तक का सर्वाधिक औसत है। चौधरी के मुताबिक, पाकिस्तान में 2026 में हुए आतंकवादी हमलों में 819 लोग मारे गए, जिनमें सेना के 303 जवान और पुलिस तथा नागरिक सशस्त्र बल के 194 कर्मी भी शामिल हैं।उन्होंने बताया कि देश में इस साल खुफिया जानकारी पर आधारित कुल 40,348 अभियान चलाए गए, जिनमें से 31,000 बलूचिस्तान में संचालित हुए। चौधरी के अनुसार, पाकिस्तान में इस साल आत्मघाती हमले की 28 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से अधिकतर में अफगान नागरिक और उनके सुरक्षा बलों से जुड़े लोग शामिल थे। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:12 +0530</pubDate>
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<title>Sri Lanka 2019 ईस्टर संडे हमले में पूर्व पुलिस प्रमुख और नौकरशाह को मौत की सजा</title>
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<description><![CDATA[ श्रीलंका पुलिस के पूर्व प्रमुख पुजित जयसुंदरा और रक्षा मंत्रालय के तत्कालीन शीर्ष नौकरशाह हेमासिरी फर्नांडो को 2019 के ईस्टर संडे आतंकी हमले के मामले में शुक्रवार को मौत की सजा सुनाई गई। इस हमले में 270 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। उच्च न्यायालय ने दोनों पूर्व अधिकारियों को पहले से मिली खुफिया चेतावनियों पर कार्रवाई नहीं करने का दोषी माना।अदालत ने कहा कि अगर समय पर कार्रवाई की जाती, तो इन हमलों को रोका जा सकता था। पुलिस के मुताबिक, 21 अप्रैल 2019 को गिरजाघरों और महंगे होटलों पर हुए सिलसिलेवार आत्मघाती बम धमाकों में 279 लोगों की मौत हुई थी तथा मरने वालों में 45 विदेशी नागरिक भी शामिल थे। जयसुंदरा और फर्नांडो को 2019 में गिरफ्तार किया गया था।चार महीने तक हिरासत में रहने के बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था। नवंबर 2021 में दोनों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे और उन पर स्थानीय जिहादी हमले की साजिश रचने की भारतीय एजेंसियों से मिली खुफिया जानकारी की अनदेखी करने का आरोप था। उच्च न्यायालय ने फरवरी 2022 में दोनों को बरी कर दिया था और उनके खिलाफ लगाए गए सभी 855 आरोप खारिज कर दिए थे।नवंबर 2024 में अटॉर्नी जनरल द्वारा उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद इस मामले की फिर से सुनवाई शुरू हुई। अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि पिछली सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से कोई गवाह पेश नहीं किया गया था। न्यायमूर्ति प्रियंथा लियानागे और न्यायमूर्ति तिलकरत्ने बंडारा ने बहुमत का फैसला सुनाते हुए कहा कि खुफिया जानकारी की अनदेखी के कारण 268 लोगों की मौत हुई और 586 लोग घायल हुए।पीठ ने कहा कि जयसुंदरा नागरिकों की जान की रक्षा करने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे। तीन सदस्यीय पीठ के न्यायमूर्ति विराज वीरसूरिया ने इससे अलग फैसला दिया और दोनों को बरी कर दिया था। जयसुंदरा 150 से अधिक वर्षों के इतिहास में श्रीलंका पुलिस के सबसे वरिष्ठ अधिकारी बन गए, जिन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ा और दोषी ठहराए जाने के बाद सजा सुनाई गई। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:12 +0530</pubDate>
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<title>London में चीन के विवादित Super Embassy निर्माण को मिली अदालत से मंजूरी</title>
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<description><![CDATA[ (अदिति खन्ना)
लंदन, 31 जुलाई ब्रिटेन के ‘टावर ऑफ लंदन’ के पास चीन के विवादित नये ‘सुपर दूतावास’ के निर्माण का रास्ता शुक्रवार को इंग्लैंड उच्च न्यायालय में कानूनी बाधा दूर होने के बाद साफ हो गया। ब्रिटेन की राजधानी में चीन के स्वामित्व वाली रॉयल मिंट कोर्ट साइट पर रहने वाले लोगों के एक संगठन ने इस विवादित परियोजना के लिए ब्रिटेन सरकार द्वारा दी गई निर्माण अनुमति को कानूनी चुनौती देने के लिए हजारों पौंड की राशि जुटाई थी। रॉयल मिंट कोर्ट रेजिडेंट्स एसोसिएशन (आरएमसीआरए) ने इस साल की शुरुआत में आवास, समुदाय और स्थानीय सरकार मंत्रालय तथा ‘लंदन बरो ऑफ टावर हैमलेट्स’ द्वारा लिये गए फैसले की न्यायिक समीक्षा का अनुरोध किया था।रॉयल मिंट कोर्ट रेजिडेंट्स एसोसिएशन इस क्षेत्र में रहने वाले परिवारों और व्यवसायों का प्रतिनिधित्व करता है। अदालत की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस नथाली लीवेन और लॉर्ड जस्टिस जेम्स डिंगेमन्स ने कहा कि इसमें ‘कोई संदेह नहीं’ है कि सरकार ने इस बात को ध्यान में रखा था कि निर्माण अनुमति चीन सरकार द्वारा मांगी गई थी। उन्होंने फैसला दिया कि इस प्रक्रिया के दौरान निवासियों के संगठन के साथ ‘कोई अन्याय नहीं’ हुआ।एसोसिएशन ने कहा कि वह अपनी लड़ाई जारी रखेगा और इस सप्ताह उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए जुटाए गए 2,20,000 पौंड से अधिक की राशि में और बढ़ोतरी के लिए लोगों से समर्थन मांगना जारी रखेगा। एक प्रवक्ता ने कहा, “एसोसिएशन हमेशा से इस मामले को उच्चतम न्यायालय तक ले जाने के लिए तैयार रहा है।”
उन्होंने कहा, “मकसद अब भी वही है। हम इस विशाल दूतावास से हमारे निवासियों के सामने उत्पन्न होने वाले गंभीर और अनसुलझे सुरक्षा जोखिमों को स्वीकार नहीं कर सकते।साथ ही, हम अपने ऐतिहासिक इलाके को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के यूरोपीय शक्ति केंद्र में बदलने की अनुमति नहीं देंगे।’’
प्रवक्ता ने कहा, “हमने साबित कर दिया है कि जब हम एकजुट होकर खड़े होते हैं, तो हम दुनिया की सबसे बड़ी शक्तियों को भी चुनौती दे सकते हैं। अब हमें इस लड़ाई के अगले चरण में ले जाने की जरूरत है।”
चीन ने 2018 में इस ऐतिहासिक स्थल को 22.5 करोड़ पौंड में खरीदा था और इसके बाद स्थानीय ‘टावर हैमलेट्स काउंसिल’ के पास इस जगह को लंदन में अपने मौजूदा दूतावास से कहीं बड़ा दूतावास बनाने की योजना पेश की थी। वर्तमान दूतावास बेकर स्ट्रीट के पास पोर्टलैंड प्लेस में है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:11 +0530</pubDate>
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<title>US Immigration Fraud: भारतीय वकील Suraj Raj Singh पर 4 करोड़ का जुर्माना, फर्जी Asylum आवेदन का आरोप</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका में इमिग्रेसन मामलों से जुड़े एक भारतीय मूल के वकील पर गंभीर आरोप लगने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि उन्होंने अपने कई मुवक्किलों की ओर से कथित रूप से गलत और भ्रामक शरण आवेदन दाखिल किए। इस मामले में अब उनके खिलाफ करोड़ों रुपये के बराबर का नागरिक जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि मामले की कानूनी सुनवाई अभी जारी है और अंतिम फैसला संबंधित प्राधिकरणों द्वारा लिया जाना बाकी है।मौजूद जानकारी के अनुसार, भारतीय मूल के आव्रजन वकील सूरज राज सिंह अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में इमिग्रेसन से जुड़े मामलों की पैरवी करते हैं। बताया गया है कि उन्होंने मुख्य रूप से भारतीय मूल के लोगों के लिए शरण से संबंधित आवेदन तैयार किए और उन्हें अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया। अब अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग और आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी ने उनके खिलाफ नागरिक दंड की कार्रवाई शुरू की है।अधिकारियों का आरोप है कि सूरज राज सिंह ने 54 अलग-अलग इमिग्रेसन मामलों में कुल 118 कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर दाखिल किए। जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि कई आवेदनों में इस्तेमाल की गई भाषा, घटनाओं का विवरण और तथ्यों का उल्लेख लगभग एक जैसा था। यहां तक कि अलग-अलग आवेदकों द्वारा कथित उत्पीड़न की कहानी भी काफी हद तक समान पाई गई, जिससे अधिकारियों को दस्तावेजों की सत्यता पर संदेह हुआ है।बता दें कि इन्हीं आरोपों के आधार पर इमिग्रेसन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी ने सूरज राज सिंह पर अधिकतम 4 लाख 70 हजार 584 अमेरिकी डॉलर का नागरिक जुर्माना लगाने की मांग की है। भारतीय मुद्रा में इसकी अनुमानित राशि लगभग 4 करोड़ रुपये के बराबर बैठती है। हालांकि यह प्रस्तावित दंड है और अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।गृह सुरक्षा विभाग के महाधिवक्ता जेम्स पर्सिवल ने कहा कि कथित रूप से फर्जी शरण आवेदन केवल आव्रजन व्यवस्था को कमजोर नहीं करते, बल्कि इससे वास्तविक जरूरतमंद लोगों के मामलों में भी देरी होती है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों के कारण गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान आव्रजन नियमों के दुरुपयोग को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है और इस तरह के मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।गौरतलब है कि गृह सुरक्षा विभाग ने बताया है कि यह कार्रवाई मई 2026 में जारी उस निर्देश के तहत की जा रही है, जिसमें कथित फर्जी शरण दावों पर सख्ती बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। विभाग का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य आव्रजन प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना और नियमों के दुरुपयोग को रोकना है।यह भी उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में यह दूसरा बड़ा मामला है, जिसमें किसी आव्रजन वकील के खिलाफ दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी को लेकर नागरिक दंड की कार्रवाई की गई है। इससे पहले जून 2026 में भारतीय मूल के एक अन्य आव्रजन वकील विनोद दोड्डमणि को भी कथित रूप से फर्जी शरण आवेदन दाखिल करने के आरोप में 2 लाख 55 हजार अमेरिकी डॉलर से अधिक के प्रस्तावित जुर्माने का नोटिस जारी किया गया था।मौजूद जानकारी के अनुसार, सूरज राज सिंह के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है। फिलहाल संबंधित एजेंसियां मामले की जांच और सुनवाई कर रही है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:10 +0530</pubDate>
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<title>Nirmal Purja समेत छह पर्वतारोही पाकिस्तान में Broad Peak पर हिमस्खलन के बाद लापता</title>
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<description><![CDATA[ (शिरीष बी प्रधान)
इस्लामाबाद/काठमांडू, 31 जुलाई नेपाल के अनुभवी पर्वतारोही निर्मल पुर्जा दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों में से एक पाकिस्तान की ‘ब्रॉड पीक’ पर हिमस्खलन की चपेट में आने के बाद अब भी लापता बताए जा रहे छह पर्वतारोहियों में शामिल हैं। हालांकि, बचाव कर्मियों ने शुक्रवार को खराब मौसम के बावजूद चार शव बरामद किए और तलाशी अभियान जारी है। पाकिस्तान की काराकोरम पर्वत शृंखला में के2 के निकट स्थित 8,047 मीटर ऊंची ‘ब्रॉड पीक’ दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी है।इसे पर्वतारोहण की सबसे चुनौतीपूर्ण चोटियों में से एक माना जाता है। अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान (एसीपी) के अनुसार, बृहस्पतिवार को लगभग 7,000 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ पर बर्फीला तूफान आया जिससे 10 सदस्यों वाली पर्वतारोहियों की टीम लापता हो गई। तूफान आने के वक्त यह टीम चोटी पर चढ़ने की कोशिश शुरू कर चुकी थी।एसीपी अध्यक्ष मेजर जनरल इरफान अरशद ने बताया कि शुक्रवार को बचाव अभियान के दौरान चार शव बरामद किए गए। उन्होंने मृतकों में से दो की पहचान ओमान की नाधिरा अहमद अब्दुल्ला अल हारथी और नेपाल के पुर बहादुर गुरुंग के तौर पर की। बाकी दो शवों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।बर्फीले तूफान के बाद बृहस्पतिवार सुबह करीब नौ बजे ये पर्वतारोही (जिनमें नेपाल के छह, और पाकिस्तान, ओमान, अमेरिका व चीन के एक-एक सदस्य शामिल हैं) लापता हो गए। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि लापता पर्वतारोहण दल की तलाश के लिए चलाए गए बचाव अभियान में खराब मौसम के कारण गंभीर बाधाएं आ रही हैं। ‘द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है।पुर्जा और गुरुंग के अलावा अन्य नेपाली पर्वतारोहियों में किली पेम्बा शेरपा, निमा शेरपा, नवांग थिंडू शेरपा और ग्यालु शेरपा हैं। लापता अन्य पर्वतारोहियों में पाकिस्तान के सोहेल सखी, चीन के वांग झोंग और अमेरिका की मैलोरी गीस शामिल हैं। नेपाल पर्वतारोहण संघ के महासचिव राज बहादुर लामा ने बताया कि निर्मल पुर्जा सहित नेपाल के पांच पर्वतारोहियों और पांच विदेशी पर्वतारोहियों का दल बृहस्पतिवार सुबह स्थानीय समयानुसार करीब नौ बजे से लापता है।यह दल लगभग 7,000 मीटर की ऊंचाई पर ब्रॉड पीक पर हुए हिमस्खलन की चपेट में आ गया था। बचाव और तलाश अभियान जारी है, लेकिन खराब मौसम के कारण राहत कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नेपाल पर्वतारोहण संघ के पूर्व अध्यक्ष आंग छेरिंग शेरपा के अनुसार, पर्वतीय क्षेत्र में मौसम अत्यंत खराब होने के कारण हेलीकॉप्टर उतर नहीं पा रहे हैं।पूर्व गोरखा सैनिक और ब्रिटेन की स्पेशल फोर्सेज में रह चुके निर्मल पुर्जा हिमालय की ऊंची चोटियों को फतह करने वाले दुनिया के अग्रणी पर्वतारोहियों में गिने जाते हैं। 2019 में उन्होंने ‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ अभियान के तहत छह महीने से कुछ अधिक समय में 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों पर चढ़कर इतिहास रच दिया था। पुर्जा का जन्म 25 जुलाई 1983 को गंडकी प्रांत के म्यागदी जिले में हुआ था, पर वे चितवन में पले-बढ़े।पुर्जा ने वर्ष 2003 से 16 साल तक सेना में रहे जिसमें से उन्होंने छह साल गोरखा के तौर पर और 10 साल ब्रिटिश स्पेशल फोर्सेज (एसबीएस) के सदस्य के रूप में बिताए। नेपाल के पर्यटन, संस्कृति और नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क प्रसाद पौडेल ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि नेपाल सरकार पाकिस्तान के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा , ‘‘पाकिस्तान में हिमस्खलन और निर्मल पुर्जा निम्स दाई तथा अन्य नेपाली पर्वतारोहियों से संपर्क टूटने की खबरों से मैं बेहद चिंतित हूं।’’
पौडेल ने कहा, ‘‘हम पाकिस्तान के अधिकारियों के साथ नियमित संपर्क में हैं और स्थिति की लगातार जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।हमारी संवेदनाएं पर्वतारोहियों और उनके परिवारों के साथ हैं। हम सभी की सुरक्षित वापसी की उम्मीद करते हैं।’’
पाकिस्तान का ग्रीष्मकालीन पर्वतारोहण सत्र जून से अगस्त तक चलता है। इस दौरान अक्सर हिमस्खलन और मौसम में अचानक बदलाव जैसी घटनाएं होती रहती हैं, जिससे पर्वतारोहियों के सामने गंभीर जोखिम उत्पन्न हो जाता है।‘अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान’ ने एक बयान में कहा कि वह तत्काल खोज एवं बचाव अभियान शुरू कराने के लिए सरकारी अधिकारियों के संपर्क में हैं। इसमें कहा गया है कि हेलिकॉप्टर की मदद हासिल करने और उपलब्ध सभी संसाधनों को जल्द से जल्द जुटाने की हर संभव कोशिश की जा रही है। बयान में कहा गया है, ‘‘क्लब सभी पर्वतारोहियों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित बचाए जाने की प्रार्थना करता है और इस मुश्किल समय में उनके परिवारों तथा अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण समुदाय के साथ एकजुटता से खड़ा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:09 +0530</pubDate>
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<title>Manipur के Churachandpur में भारी बारिश से अचानक आई बाढ़, एक व्यक्ति लापता</title>
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<description><![CDATA[ मणिपुर के चूड़ाचांदपुर जिले के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ आने से एक व्यक्ति लापता हो गया। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘न्यू लामका वेंगनुआम साउथ’ का रहने वाला थांगजॉनसन नाम का एक व्यक्ति बृहस्पतिवार शाम लानवा नदी के पानी में बह गया।उन्होंने बताया कि नदी के किनारे तटबंध बनाने का काम जारी था तभी तेज बहाव में बह गई निर्माण सामग्री को वापस पाने की कोशिश करते समय वह भी बह गए। लापता व्यक्ति का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, जबकि स्थानीय लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो में उन्हें बाढ़ के पानी में बहते हुए देखा जा सकता है। उपायुक्त कृष्णा कुमार ने अचानक आई बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए सबसे अधिक प्रभावित इलाकों जैसे सिएलमैट, लोअर चैपल लेन, हियांगटाम लामका, चिएंगकोनपांग और बेउलालेन का दौरा किया।उपायुक्त ने प्रभावित परिवारों से बातचीत की, राहत सामग्री का वितरण किया और उन्हें जिला प्रशासन की ओर से हर संभव मदद प्रदान करने का भरोसा दिलाया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:09 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump ईरान पर नए सैन्य हमलों पर कर रहे विचार, White House ने दिए संकेत</title>
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<description><![CDATA[ काहिरा, एक अगस्त (एपी) अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय एवं आधिकारिक आवास व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर नए सैन्य हमले करने पर विचार कर रहे हैं। अमेरिका, ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और पिछले महीने दोनों देशों के बीच हुए युद्धविराम समझौते की शर्तों का पालन करने का दबाव बना रहा है। रातभर अमेरिका की ओर से ईरान पर कोई हमला नहीं किया गया।वहीं, ईरान के अर्धसैनिक बल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (रिवोल्यूशनरी गार्ड) ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो और तेल टैंकरों को निशाना बनाया है। दूसरी ओर, कुवैत ने कहा कि उसने अपने क्षेत्र में आए ड्रोन को मार गिराया। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने ईरान पर अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।उन्होंने कहा कि तेहरान ने पिछले महीने अमेरिका के साथ युद्धविराम संबंधी एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन इसके तुरंत बाद उसने उसे तोड़ दिया, वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया और अमेरिकी सैनिकों की हत्या की। लेविट ने शुक्रवार शाम एक बयान में कहा, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप इस तरह की आतंकवादी हरकत बर्दाश्त नहीं करेंगे। जब तक ईरान राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार सार्थक तरीके से बातचीत की मेज पर नहीं आता, तब तक उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।’’
इससे पहले शुक्रवार को ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा था कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान में ‘जीत हासिल करना’ है और उन्होंने संकेत दिया था कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई कुछ समय तक जारी रह सकती है।मैरीलैंड स्थित कैम्प डेविड में ट्रंप ने कहा, ‘‘हम उन पर बहुत कड़ा प्रहार करेंगे। एक समय ऐसा आएगा जब वे कहेंगे कि अब हम और नहीं झेल सकते।’’
उधर, हमास ने शुक्रवार को पुष्टि की कि वह हथियार छोड़ने के लिए तैयार है। इसे गाजा युद्ध समाप्त करने की दिशा में एक संभावित बड़ी प्रगति माना जा रहा है, हालांकि युद्ध खत्म होने की राह में अब भी कई बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:08 +0530</pubDate>
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<title>Russia के मिसाइल और Drone attack से यूक्रेन की राजधानी Kyiv दहली, 3 की मौत</title>
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<description><![CDATA[ कीव, एक अगस्त (एपी) रूस ने शुक्रवार देर रात से शनिवार तड़के तक यूक्रेन की राजधानी कीव पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से भीषण हमला किया जिसमें कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और 12 से अधिक लोग घायल हो गए। स्थानीय अधिकारियों ने यह जानकारी दी। कीव के महापौर विट्टाली क्लिचको ने सोशल मीडिया मंच ‘टेलीग्राम’ पर बताया कि सोलोमियांस्की जिले में मलबा गिरने से पांच मंजिला रिहायशी इमारत क्षतिग्रस्त हो गई।आशंका है कि अब भी कई लोग इमारत के अंदर फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया कि शेवचेंकिव्स्की जिले की एक अन्य रिहायशी इमारत की पहली और दूसरी मंजिल का हिस्सा ढह जाने से वहां भी कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका है। क्लिचको के अनुसार, दारनित्स्की जिले में स्थित गोदामों में भी इस हमले के कारण आग लग गई।यह हमला ऐसे समय हुआ है जब महज दो दिन पहले रूस ने पूरे यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया था। उस हमले में 10 नागरिकों की मौत हो गई थी और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। साथ ही, एक रूसी मिसाइल पोलैंड के हवाई क्षेत्र में भी प्रवेश कर गई थी।यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर जेलेंस्की लगातार अमेरिका और अन्य पश्चिमी सहयोगी देशों से रूस के मिसाइल हमलों का मुकाबला करने के लिए पैट्रियट हवाई रक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं। जेलेंस्की ने शुक्रवार देर रात बताया कि उनकी अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से बातचीत हुई। इस दौरान उन्होंने इस सप्ताह वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बैठक पर भी चर्चा की, जिसे उन्होंने ‘सकारात्मक और सार्थक’ बताया।जेलेंस्की ने ‘टेलीग्राम’ पर अपने पोस्ट में कहा, ‘‘रूस की ओर से हमारे देश पर हवाई हमले लगातार जारी हैं। बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए पैट्रियट प्रणाली के इंटरसेप्टर और हवाई रक्षा क्षमता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बने हुए हैं।’’
जुलाई में अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका यूक्रेन को पैट्रियट प्रणाली के निर्माण का लाइसेंस देगा। हालांकि, शुक्रवार को मैरीलैंड स्थित कैम्प डेविड में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:08 +0530</pubDate>
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<title>Dhurandhar Style में Lyari की सड़कों पर बहा खून, Gangster Uzair Baloch के भाई Zubair को गोलियों से भून डाला</title>
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<description><![CDATA[ फिल्म &#039;धुरंधर&#039; का पर्दा उठता है। कैमरा कराची के कुख्यात लियारी की तंग गलियों में दौड़ता है। सड़क किनारे बैठा एक शख्स, चारों तरफ सन्नाटा, तभी अचानक मोटरसाइकिल पर सवार दो नकाबपोश आते हैं। गोलियों की तड़तड़ाहट से खामोशी चकनाचूर हो जाती है। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते हैं, हमलावर हवा में धुआं छोड़ते हुए फरार हो जाते हैं और सड़क पर खून से लथपथ पड़ा शख्स अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहा होता है। फर्क सिर्फ इतना है कि यह किसी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि पाकिस्तान के सबसे बदनाम गैंगस्टर परिवारों में से एक की असल कहानी है, जिसने एक बार फिर लियारी की खूनी विरासत को सुर्खियों में ला दिया है।हम आपको बता दें कि कराची के लियारी इलाके में गैंगस्टर उजैर बलोच के भाई जुबैर बलोच पर हुए जानलेवा हमले ने पाकिस्तान की कानून-व्यवस्था और अंडरवर्ल्ड की हलचल को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। गुरुवार शाम करीब 40 वर्षीय जुबैर अपने घर सिंगू लेन के बाहर बैठा था, तभी मोटरसाइकिल पर आए दो नकाबपोश हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। सीने और पेट में कई गोलियां लगने से जुबैर गंभीर रूप से घायल हो गया। गोलीबारी की चपेट में आए दो राहगीर भी घायल हुए, जिनमें से एक की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है।इसे भी पढ़ें: Nirmal Purja समेत छह पर्वतारोही पाकिस्तान में Broad Peak पर हिमस्खलन के बाद लापताघटना के तुरंत बाद जुबैर और दोनों घायलों को सिविल हॉस्पिटल कराची ले जाया गया, जहां जुबैर की आपातकालीन सर्जरी की गई। पुलिस के मुताबिक हमलावर उस समय भाग निकले, जब पास के एक दुकानदार ने जवाबी फायरिंग कर दी। घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज में सड़क पर अफरा-तफरी और हमलावरों के फरार होने का दृश्य साफ दिखाई देता है।चाकीवाड़ा पुलिस और दक्षिण कराची के डीआईजी सैयद असद रजा के अनुसार मामले की कई कोणों से जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में व्यक्तिगत दुश्मनी, पुरानी गैंगवार और आपराधिक रंजिश जैसे पहलुओं को खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह हमला जुबैर के पुराने आपराधिक इतिहास से जुड़ा है या किसी नए विवाद का नतीजा।हम आपको बता दें कि जुबैर बलोच का आपराधिक रिकॉर्ड भी कम चर्चित नहीं रहा है। वर्ष 2012 में उसे सात आपराधिक मामलों में गिरफ्तार किया गया था। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद जनवरी 2025 में उसकी रिहाई हुई थी। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि जेल से बाहर आने के बाद उसकी गतिविधियां किन लोगों के निशाने पर आ गई थीं।दूसरी ओर, इस हमले ने एक बार फिर पाकिस्तान के कुख्यात गैंगस्टर उजैर बलोच की यादें ताजा कर दी हैं। उजैर वही शख्स है जिसने अपने चचेरे भाई और लियारी के खूंखार डॉन रहमान डकैत की 2009 में पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद पूरे गैंग की कमान संभाल ली थी। उसके नेतृत्व में लियारी लंबे समय तक खून-खराबे, रंगदारी, ड्रग तस्करी और राजनीतिक संरक्षण के दम पर चलने वाले संगठित अपराध का सबसे बड़ा अड्डा बना रहा।उजैर बलोच पर हत्या, पुलिस पर हमले, विस्फोटक रखने और संगठित अपराध सहित कई गंभीर मामले दर्ज हैं। मार्च 2026 में आतंकवाद निरोधी अदालत ने 2012 में कानून-व्यवस्था बलों पर हथियारों और विस्फोटकों से किए गए हमले से जुड़े सात मामलों में उसकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इससे पहले अप्रैल 2020 में एक सैन्य अदालत ने उसे जासूसी के आरोप में दोषी ठहराते हुए 12 साल की सजा सुनाई थी। वह फिलहाल जेल में बंद है।दरअसल, लियारी की कहानी केवल अपराध की नहीं, बल्कि सत्ता, राजनीति और गैंगस्टरों के गठजोड़ की भी रही है। दशकों तक यह इलाका ड्रग तस्करी के रास्तों और रंगदारी के धंधे को लेकर खूनी गैंगवार का केंद्र बना रहा। रहमान डकैत और उसके कट्टर प्रतिद्वंद्वी अरशद पप्पू के बीच चली हिंसक लड़ाइयों ने लियारी की गलियों को युद्धक्षेत्र में बदल दिया था। बाद में विभिन्न राजनीतिक समूहों के संरक्षण ने इन गैंगों को और ताकत दी, जिससे पुलिस के लिए कार्रवाई करना बेहद मुश्किल हो गया।स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि जुबैर बलोच पिछले कुछ महीनों से एक राजनीतिक दल से जुड़ा था और इलाके में उस पार्टी के झंडे भी लगाए गए थे। वहीं, लियारी में यह चर्चा भी तेज है कि कराची ऑपरेशन के दौरान दुबई और ईरान भागे कई पुराने गैंगस्टर अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद फिर लौट आए हैं। इन खबरों ने स्थानीय लोगों के बीच डर पैदा कर दिया है कि कहीं लियारी एक बार फिर पुराने खूनी दौर में न लौट जाए।फिलहाल पुलिस हमलावरों की तलाश में छापेमारी कर रही है, लेकिन जुबैर बलोच पर हुआ यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं माना जा रहा। यह उस लियारी की दहशतभरी यादों को फिर जिंदा कर रहा है, जिसने कभी पाकिस्तान के सबसे खूनी गैंगवार का चेहरा देखा था। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत दुश्मनी का मामला है या फिर लियारी में अंडरवर्ल्ड का वह खौफनाक अध्याय दोबारा खुलने वाला है, जिसकी गूंज आज भी कराची की तंग गलियों में सुनाई देती है? ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:07 +0530</pubDate>
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<title>Hamas की मदद के आरोप में ब्रिटेन में तुर्किये का नागरिक गिरफ्तार</title>
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<description><![CDATA[ न्यूयॉर्क, एक अगस्त (एपी) ब्रिटेन में तुर्किये के एक नागरिक को एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता संगठन के माध्यम से हमास को धन एवं अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने की कथित साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस्तांबुल निवासी मोहम्मद यूसुफ हसन (45) को शुक्रवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उसे न्यूयॉर्क लाए जाने से पहले प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।मैनहट्टन में अमेरिकी अटॉर्नी जेमी मैकडोनाल्ड ने कहा कि हसन ने मानवीय सहायता की आड़ में हमास को खाद्य सामग्री, अन्य आवश्यक वस्तुएं और धन उपलब्ध कराने के लिए संगठन के शीर्ष नेतृत्व के साथ मिलकर काम किया। अमेरिका ने हमास को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि अमेरिका में हसन की ओर से किस अधिवक्ता द्वारा पैरवी की जाएगी।हसन के खिलाफ लगाए गए आरोपों में हमास को सामग्री सहायता उपलब्ध कराने की साजिश रचना, आतंकवाद के वित्तपोषण की साजिश रचना तथा आतंकवाद के वित्तपोषण में संलिप्त होना शामिल है। इनमें से प्रत्येक आरोप में अधिकतम 20 वर्ष के कारावास का प्रावधान है। अमेरिका की सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया है कि हसन 2023 से हमास के शासी निकाय के सदस्य और वरिष्ठ नेता गाजी हमद के साथ मिलकर काम कर रहा था। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:07 +0530</pubDate>
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<title>California में F&#45;35B लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त, पायलट सुरक्षित बाहर निकला</title>
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<description><![CDATA[ सैन डिएगो (अमेरिका), एक अगस्त (एपी) अमेरिकी मरीन कोर ने कहा कि कैलिफोर्निया में एफ-35बी स्टील्थ लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसके पायलट ने समय रहते विमान से आपात स्थिति में बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली। मरीन कोर के अनुसार, यह विमान शुक्रवार को सैन डिएगो स्थित मिरामार एयर बेस के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पायलट को सुरक्षित बाहर निकालकर स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई गई है।उसे मामूली चोटें आई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान रनवे की ओर उतर रहा था, तभी वह अचानक धीमा पड़ गया। जमीन से करीब 30 मीटर की ऊंचाई पर पायलट आपात स्थिति में विमान से बाहर निकला और पैराशूट खुलने के कुछ ही क्षण बाद विमान जमीन से टकराकर विस्फोट के साथ आग की लपटों में घिर गया।हादसे के बाद घटनास्थल पर दमकल और सैन्य बचाव दल पहुंच गया तथा आग पर काबू पाया गया। एफ-35बी, एफ-35 लड़ाकू विमान का ऐसा संस्करण है जिसे कम दूरी से उड़ान भरने और लगभग सीधी लैंडिंग करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी कीमत लगभग 10.9 करोड़ अमेरिकी डॉलर है।मरीन कोर ने एक बयान में शुक्रवार की इस दुर्घटना को ‘क्लास-ए मिसहैप’ यानी सबसे गंभीर श्रेणी की सैन्य विमान दुर्घटना बताया है। इस श्रेणी में वे हादसे शामिल होते हैं जिनमें विमान पूरी तरह नष्ट हो जाए, 20 लाख डॉलर से अधिक का नुकसान हो या किसी सैन्यकर्मी की मौत हो। अमेरिकी सेना के बेड़े में एफ-35 को सबसे सुरक्षित और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:07 +0530</pubDate>
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<title>12&#45;13 सितंबर को दिल्ली में ऐसा दिखेगा नजारा, व्हाइट हाउस से लेकर NATO मुख्यालय तक मच जाएगी खलबली!</title>
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<description><![CDATA[ इतिहास गवाह है कि जब-जब दुनिया किसी बड़े संकट की ओर बढ़ती है तब-तब समाधान की तलाश में दुनिया की नजरें भारत की तरफ मुड़ती है। लेकिन 12-13 सितंबर 2026 को दिल्ली की धरती पर जो होने जा रहा है वैसा नजारा दुनिया ने दशकों से नहीं देखा होगा। यह सिर्फ प्रधानमंत्री और राष्ट्रपतियों की एक और रूटीन मुलाकात नहीं है। यह ग्लोबल पॉलिटिक्स का वह कुरुक्षेत्र है जहां दुनिया का नया भूगोल और नया इतिहास लिखा जाने वाला है। दिल्ली में सजने वाला है आरआईसी यानी रूस, भारत, चीन का वो महामंच जिसके नाम मात्र से ही वाइट हाउस से लेकर नाटो के मुख्यालयों तक खलबली मच जाती है। दरअसल कूटनीति में एक शब्द बहुत मशहूर है। आरआईसी यानी रशिया, इंडिया, चाइना। सालों तक यह सिर्फ कागजों पर रहा, लेकिन साल 2026 की दिल्ली समिट इसे हकीकत के धरातल पर उतार रही है। सोचिए जब दुनिया की तीन सबसे बड़ी सेनाएं, तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और तीन परमाणु शक्तियां एक ही मेज पर बैठकर चाय की चुस्कियों के साथ भविष्य का एजेंडा तय करेंगी, तो क्या होगा? पश्चिम को डर इस बात का नहीं है कि यह साथ मिल रहे हैं। डर इस बात का है कि इनके पास डीडोलाइजेशन का हथियार है। इसे भी पढ़ें: Xi Jinping की India यात्रा: ग़लवान झड़प के बाद पहली बार दिल्ली आ सकते हैं चीनी राष्ट्रपतिअगर दिल्ली में इन तीनों ने डॉलर के विकल्प के तौर पर अपनी मुद्राओं में व्यापार को अंतिम मुहर लगा दी तो अमेरिकी डॉलर का साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ढह सकता है और यह पावरफुल तगड़ी संदेश दे रही है कि अब दुनिया का रिमोट कंट्रोल वाशिंगटन में नहीं बल्कि नई दिल्ली के इस हॉल में होगा। वैसे इस समिट की सबसे बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ है चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत आना। अक्टूबर 2019 में जब वे आए थे भारत तब माहौल कुछ और था। लेकिन साल 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में चोक हुआ। उसने रिश्तों में दशकों पुरानी कड़वाहट भर दी। अब 5 साल बाद जिनपिंग का दिल्ली आना कोई साधारण घटना नहीं है। अक्टूबर 204 के कजान समझौते के बाद से कूटनीतिक गलियारों में जो वार्म अप चल रहा था, उसका फाइनल मैच अब दिल्ली में होगा। क्या पीएम मोदी और शिजनपिंग के बीच होने वाली द्विपक्षी बातचीत एलएसी पर हमेशा के लिए शांति का रास्ता तय कर देंगी? अगर भारत और चीन के बीच आर्थिक संबंधों की नई शुरुआत होती है तो यह एशिया के लिए स्वर्ण युग की शुरुआत हो सकती है जो पश्चिम देशों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं होगा। इसे भी पढ़ें: अमेरिकी संसद में रूस के दोस्तों पर 100% टैरिफ वाला बिल आया, जिनपिंग ने अपना प्लेन अचानक दिल्ली की ओर घुमाया!हालांकि इस बार ब्रिक्स की मेज पर वो मुद्दे नहीं होंगे जो सालों से चल रहे थे। इस बार तीन बिल्कुल नए और संवेदनशील मुद्दों पर मंथन होगा। मुद्दा नंबर एक है ईरान की शक्ति प्रदर्शन और चाबहार का रास्ता। देखिए ईरान के राष्ट्रपति का दिल्ली आना एक मास्टर स्ट्रोक है। एक तरफ इजराइल और अमेरिका के साथ ईरान की जंग जैसी स्थिति है। हर दिन क्या हो रहा है हम आपको बता रहे हैं। और दूसरी तरफ भारत के साथ उनका पुराना सांस्कृतिक और रणनीतिक रिश्ता। दिल्ली में पिजिशियान सिर्फ अपनी बात नहीं रखेंगे बल्कि चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट को फिर से जीवित करेंगे जो भारत को मध्य एशिया और रूस तक सीधा रास्ता देता है। यह कॉरिडोर स्वेज नहर का सबसे बड़ा विकल्प बनकर उभरेगा। मुद्दा नंबर दो बांग्लादेश और भारत की बड़े भाई वाली भूमिका। भारत ने बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान को बुलाकर यह साफ कर दिया है कि BRI सिर्फ बड़े देशों का क्लब नहीं है। Bimstek के अध्यक्ष के नाते उनकी मौजूदगी दक्षिण एशिया में भारत के पड़ोसी प्रथम नीति का सबसे बड़ा सबूत है। भारत यहां एक सेतु की भूमिका में है जो छोटे देशों को वैश्विक मंच पर आवाज दे रहा है। मुद्दा नंबर तीन फिलिस्तीन और मिडिल ईस्ट का पेचीदा पेंच ब्रिक्स के अंदर एक नई दरार दिख रही है। ईरान और यूएई आमने-सामने है। यूएई फिलिस्तीन मुद्दे पर थोड़ी नरम भाषा चाहता है। जबकि रूस, चीन और ईरान एक सख्त स्टैंड की मांग कर रहे हैं। यहां भारत की भूमिका एक ग्लोबल मिडिएटर की तौर पर होगी। इसे भी पढ़ें: पहली बार सामने आया चीन की खुफिया एजेंसी का नाम, पूरा भारत हैरान !पीएम मोदी को दोनों धड़ों के बीच सहमति बनानी होगी ताकि एक साझा घोषणापत्र जारी हो सके। जनवरी 2024 में जब ब्रिक्स का विस्तार हुआ तो दुनिया ने तालियां बजाई। लेकिन अब वही विस्तार भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन गया है। ईरान और यूएई के बीच का तनाव ब्रिक्स के कामकाज को ठप कर सकता है। मई की विदेश मंत्रियों की बैठक का बिना किसी साझा बयान के खत्म होना एक चेतावनी थी। दुनिया देख रही है कि क्या भारत अपनी मेजबानी में इन दोनों इस्लामिक देशों को एक मेज पर ला पाएगा। तो पीएम मोदी के निजी रिश्ते किंग सलमान यानी सऊदी और जायद और यूएई के साथ भी बेहतरीन है और ईरान के नेतृत्व के साथ भी है। अगर दिल्ली समिट में टू स्टेट सॉल्यूशन पर कोई ऐतिहासिक समझौता होता है तो भारत की कूटनीति का लोहा पूरी दुनिया मानेगी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ब्रिक्स साझा मुद्रा लाएगा? देखिए आर्थिक विशेषज्ञ का कहना है कि यह कठिन है क्योंकि भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाएं अलग-अलग तरह से काम करती हैं। लेकिन समाधान एक करेंसी नहीं बल्कि एक यूनिट ऑफ अकाउंट हो सकता है। एक ऐसा सिस्टम जहां हम आपस में व्यापार स्वर्ण यानी गोल्ड या फिर अपनी मुद्राओं के एक बास्केट के आधार पर करें। अगर ऐसा हुआ तो ब्रिटेन वुड्स टू का ताश का महल ढह जाएगा। अमेरिका अब दुनिया को डरा नहीं पाएगा क्योंकि व्यापार के विकल्प मौजूद हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:06 +0530</pubDate>
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<title>रहमान डकैत के भाई को किसने गोली मारी? &amp;apos;धुरंधर&amp;apos; का खेल है जारी, फिर क्या गैंगवार से दहलने वाला है ल्यारी</title>
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<description><![CDATA[ 30 जुलाई की शाम पाकिस्तान के ल्यारी का सिंघु लेन इलाका 40 साल का एक आदमी अपने घर के बाहर बैठा था। तभी दो मोटरसाइकिल सवार वहां से गुजरे और गुजरते हुए उस 40 साल के आदमी पर गोलियों की बरसात कर दी और मौके से फरार हो गए। उसके पेट में और सीने में कई गोलियां लगी। अब वह अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। ल्यारी का नाम सुनते ही आपने आईडिया लगा लिया होगा कि यह स्टोरी किसके बारे में है। जिस आदमी को गोलियां मारी गई हैं, उसका नाम है जुबैर बलोच। ल्यारी के कुख्यात गैंगस्टर उजैर बलोच का भाई जो फिलहाल पाकिस्तान की जेल में बंद है। रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर की कहानी इसी उजैर बलोच के इर्द-गिर्द घूमती है। पाकिस्तानी न्यूज़ वेबसाइट डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक जब जुबैर बलोच को गोली मारी गई तब वहां से गुजर रहे दो राहगीरों को भी गोली लगी जिनमें से एक की हालत गंभीर है। हमलावरों ने अपने चेहरे ढक रखे थे जिसके कारण उनका चेहरा पहचान नहीं पाया गया। हमले के बाद पास के एक दुकानदार ने भी अपनी बंदूक निकाली और उन पर फायरिंग कर दी। जिसके बाद वह वहां से भागते बने। इसे भी पढ़ें: Lyari में Gangster Uzair Baloch के भाई को मारी गोली, क्या फिर शुरू होगा खूनी Gang War?डॉन ने कराची साउथ जोन के डीआईजी सैयद असद रजा के हवाले से लिखा है कि अपने भाई उजैर की ही तरह जुबैर भी कई मामले में आरोपी है। उसका भी आपराधिक इतिहास है। 2012 में उसको सात अपराधिक मामलों में गिरफ्तार किया गया था। 13 साल जेल में रहने के बाद 2025 में उसको रिहा कर दिया गया। डीआईजी का कहना है कि इस केस में कई एंगल्स हैं। लेकिन सबसे अहम है गिरोहों की आपसी दुश्मनी। इसके अलावा व्यक्तिगत तौर पर भी जुबैर और उजैर के कई दुश्मन हैं। इसी इलाके के एक सोशल वर्कर ने नाम ना बताने की शर्त पर डॉन को एक अलग एंगल बताया है जो पॉलिटिकल है। कुछ महीने पहले जुबैर एक राजनीतिक दल में शामिल हुआ था। पार्टी का नाम सामने नहीं आया है। लेकिन जुबैर ने अपने इलाके में इस पार्टी के झंडे फहराए थे। इस सोशल वर्कर ने यह भी बताया कि ल्यारी में कुछ अफवाहें फैली हुई हैं। यह अफवाह कराची ऑपरेशन को लेकर है। यह ऑपरेशन 2010 से लेकर 2020 तक चला। इसमें आतंकवादियों के साथ-साथ ल्यारी के गैंगस्टर्स को भी निशाना बनाया गया।इसे भी पढ़ें: Balochistan में छात्रों के गायब होने की घटनाएं तेज, Sami Baloch ने Pakistan सरकार को घेराइलाके के एक सोशल एक्टिविस्ट ने नाम न बताने की शर्त पर &#039;डॉन&#039; को बताया कि ज़ुबैर कुछ महीने पहले एक &quot;राजनीतिक पार्टी&quot; में शामिल हुआ था और उसने अपने इलाके में उस पार्टी के झंडे भी लगाए थे। एक्टिविस्ट ने लियारी में फैली उन अफ़वाहों का भी ज़िक्र किया कि कराची ऑपरेशन के बाद दुबई और ईरान भाग गए कुछ गैंगस्टर, अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद वापस आ गए हैं, और इलाके के लोग पुरानी गैंग-वॉर के फिर से शुरू होने के डर में जी रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि हमलावरों ने अपने चेहरे ढके हुए थे और जब पास के एक दुकानदार ने जवाबी फायरिंग की, तो वे भाग गए। इससे पहले मार्च में, एक एंटी-टेररिज्म कोर्ट (ATC) ने हत्या, पुलिस एनकाउंटर और विस्फोटक रखने से जुड़े सात मामलों में उज़ैर बलोच की ज़मानत अर्ज़ियां खारिज कर दी थीं। उज़ैर और अन्य लोगों पर 2012 में कालाकोट पुलिस स्टेशन के इलाके में हथियारों और विस्फोटकों से कानून लागू करने वाले अधिकारियों पर हमला करने का आरोप था। अप्रैल 2020 में एक मिलिट्री कोर्ट ने उज़ैर बलोच को जासूसी का दोषी ठहराया था और उसे 12 साल की जेल की सज़ा सुनाई थी।इसे भी पढ़ें: परमाणु संपन्न पाकिस्तान में छिड़ेगा गृहयुद्ध? ग्वादर मिलिट्री कैंप तबाह... मारे गये 30 से ज़्यादा सैनिक, बलूच विद्रोहियों की खुली चेतावनी!साल 2020 में जब उजैर बलोच को सजा सुनाई गई तब भी पाकिस्तान ने इस मामले में भारत को घसीटा। बलोच को लेकर कहा गया कि वह ईरान के साथ-साथ रॉ के लिए भी जासूसी कर रहा था। इस मामले में सीटीडी ने तीन और गैंगस्टर्स को भारत से जुड़ा हुआ बताया। ये तीन गैंगस्टर्स थे। मुदसिर जावेद, हारिस उर्फ़, लंगड़ा और अबू सुफियान। इनको 2020 में गिरफ्तार किया गया। सीटीडी के अनुसार यह सब लेरी के ही एक गैंगस्टर जाहिद उर्फ़ शटर के गिरोह में थे। सीटीडी का आरोप है कि जाहिद संयुक्त अरब अमीरात में रहता है और भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के लिए जासूसी करता है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि उजैर बलोच के बाद लेहारी में जो कुछ गैंगस्टर बचे हैं रॉ उनका इस्तेमाल टारगेट किलिंग्स के लिए करता है। अप्रैल 2020 में पाकिस्तान की एक मिलिट्री कोर्ट ने उजैर बलोच को जासूसी करने के लिए दोषी ठहराया और 12 साल की जेल की सजा सुनाई। लेकिन यह इकलौता मामला नहीं है जिसमें वो जेल काट रहा है। अवैध हथियार रखने, विस्फोट करने, अरसद पप्पू की हत्या के साथ-साथ दर्जनों मामले उसके खिलाफ चल रहे हैं।   ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:05 +0530</pubDate>
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<title>Kyiv पर Russian Missile Attack से भारी तबाही, 9 की मौत के बाद Zelenskyy ने मांगी Air Defense मदद</title>
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<description><![CDATA[ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने शनिवार को कहा कि रूसी सेना ने रात भर में कीव के सात ज़िलों में आम रिहायशी इलाकों पर ज़बरदस्त हवाई हमला किया, जिसमें कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। एक्स पर एक पोस्ट में ज़ेलेंस्की ने बताया कि इस बड़े हमले में 35 मिसाइलें (जिनमें 27 बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल थीं) और अलग-अलग तरह के 185 अटैक ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। हालांकि मुख्य निशाना कीव था, लेकिन हमलों का असर निप्रो, सुमी, खार्किव और पोल्टावा इलाकों पर भी पड़ा। राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने राजधानी में भारी नुकसान की जानकारी दी और बताया कि हमलों के दौरान 18 रिहायशी इमारतों, एक स्कूल, बुनियादी ढाँचे की सुविधाओं और लिथुआनियाई दूतावास को निशाना बनाया गया।इसे भी पढ़ें: 12-13 सितंबर को दिल्ली में ऐसा दिखेगा नजारा, व्हाइट हाउस से लेकर NATO मुख्यालय तक मच जाएगी खलबली!जेलेंस्की ने लिखा कि कल रात रूस के हमले के बाद से कीव और उसके आस-पास के इलाकों में बचाव और राहत का काम चल रहा है। शहर में कई जगहों पर आग लग गई थी। सात ज़िले प्रभावित हुए और हमेशा की तरह, रूस ने आम रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया। अठारह रिहायशी इमारतों, एक स्कूल, लिथुआनियाई दूतावास और बुनियादी ढाँचे की सुविधाओं को नुकसान पहुँचा है। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, इस हमले में नौ लोगों की मौत हुई है। मैं उनके परिवारों और चाहने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूँ। दर्जनों लोग घायल हुए हैं। मेडिकल टीमें ज़रूरतमंद लोगों की मदद कर रही हैं। हमले की गंभीरता को उजागर करते हुए, ज़ेलेंस्की ने बताया कि &quot;सिर्फ़ एक बैलिस्टिक मिसाइल को रोका जा सका, क्योंकि पैट्रियट सिस्टम के लिए इंटरसेप्टर मौजूद नहीं हैं। और बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर की यही कमी रूस को ऐसे हमले करने के लिए बढ़ावा देती है जिनमें लोगों की जान जाती है।इसे भी पढ़ें: Russia के मिसाइल और Drone attack से यूक्रेन की राजधानी Kyiv दहली, 3 की मौतइससे पहले, ज़ेलेंस्की ने बताया कि उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से फ़ोन पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि इस बातचीत में व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई हालिया मुलाक़ात, बेहतर एयर डिफेंस सिस्टम की ज़रूरत और रूस के साथ चल रहे संघर्ष के ग्लोबल मार्केट पर असर जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने एक्स पर लिखा कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से अच्छी फ़ोन पर बातचीत हुई। हमने वॉशिंगटन में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हुई अपनी हालिया मुलाक़ात के बाद की स्थिति पर चर्चा की, जो सकारात्मक और फ़ायदेमंद रही। चूंकि रूस हमारे देश पर लगातार हवाई हमले कर रहा है, इसलिए एयर डिफेंस खासकर बैलिस्टिक मिसाइलों के ख़िलाफ़ पैट्रियट इंटरसेप्टर - हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उपराष्ट्रपति और मैंने रूस के युद्ध के ग्लोबल मार्केट पर पड़ने वाले असर के बारे में भी बात की। हम इस बात पर सहमत हुए कि हमारी टीमें संपर्क में रहेंगी और आज हुई चर्चा के आधार पर आगे काम करेंगी। मैं यूक्रेन और हमारे लोगों का समर्थन करने के लिए अमेरिका का शुक्रिया अदा करता हूँ। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:04 +0530</pubDate>
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<title>डूबते पाकिस्तान को सऊदी ने दिया वफादारी का ईनाम,  5 अरब डॉलर का सहारा</title>
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<description><![CDATA[ क्या पाकिस्तान एक बार फिर डिफॉल्ट होने की कगार पर बाल-बाल बचा है या फिर सऊदी अरब ने पाकिस्तान की गर्दन पर लटकी कर्ज की तलवार को 3 साल के लिए और ढीला कर दिया है। जिस देश के पास अपने कंगाली के ढोल पीटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा उस पाकिस्तान को एक बार फिर सऊदी अरब ने संजीवनी बूटी दे दी है। पूरे $5 अरब डॉलर। $5 अरब डॉलर का कर्ज रोलओवर हो चुका है। यानी अगले 3 साल तक पाकिस्तान को यह पैसा सऊदी को वापस नहीं लौटाना पड़ेगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये पाकिस्तान के लिए राहत की बात है या ये इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि पाकिस्तान बिना विदेशी बैसाखियों के अब दो दिन भी नहीं चल सकता। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब और स्टेट बैंक के गवर्नर जमील अहमद आज छाती ठोक कर कह रहे हैं कि सऊदी ने हमारी मदद कर दी है। रोलओवर का मतलब तरक्की नहीं होता है। रोलओवर का सीधा सा मतलब है कि आपकी जेब में पैसा लौटाने की औकात नहीं। इसीलिए आपने हाथ जोड़कर मालिक से कहा हुजूर थोड़ा टाइम और दे दो। अभी हम लुटे पीटे हैं और सुनिए ये पहली या दूसरी बार नहीं है। इसे भी पढ़ें: Kartarpur Sahib गलियारा सुरक्षा कारणों से बंद, Lok Sabha में बोली सरकारसऊदी अरब ने लगातार तीसरी बार पाकिस्तान को यह मोहलत दी है। अगर सऊदी अपना पैसा आज वापस मांग ले तो अगले 24 घंटे के अंदर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह जाएगी। अब जो आंकड़े मैं आपको बताने जा रही हूं उन्हें सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पास विदेशी जमा के नाम पर कुल $1 अरब डॉलर पड़े हैं। और आपको जानकर हैरानी होगी कि इस 12 में से $8 अरब डॉलर अकेले सऊदी अरब का है। यानी पाकिस्तान का अपना फॉरेक्स रिजर्व्स सिर्फ नाम का है। असली मालिक तो रियाद में बैठा है। इस चालू वित्त वर्षा में पाकिस्तान को 21.5 अरब डॉलर का विदेशी कर चुकाना पड़ा है। अकेले जुलाई 2026 में ही यह $.2 अरब डॉलर बहा चुका है। 3 जुलाई को इनका विदेशी मुद्रा भंडार $8.4 अरब डॉलर का था जो कर्ज की किस्तें चुकाते-चुकाते 17 जुलाई तक घटकर 17.2 अरब डॉलर पार कर चुका है। सोचिए अगर सऊदी के यह $5 अरब डॉलर रोल ओवर ना होते तो पाकिस्तान अपने कर्ज की किस्ते चुकाना तो दूर अपने देश के लिए तेल और आटा भी नहीं खरीद पाता। सवाल यह है कि क्या सऊदी अरब यह सब मुफ्त में कर रहा है?इसे भी पढ़ें: रहमान डकैत के भाई को किसने गोली मारी? &#039;धुरंधर&#039; का खेल है जारी, फिर क्या गैंगवार से दहलने वाला है ल्यारीबिल्कुल नहीं। दुनिया में कोई किसी को मुफ्त में $5 अरब डॉलर नहीं देता। सऊदी अरब जानता है कि पाकिस्तान इस वक्त उनके इशारों पर नाचने को मजबूर है। चाहे वो मध्यपूर्व यानी मिडिल ईस्ट की राजनीति हो या रणनीति फायदे। सऊदी जब चाहे पाकिस्तान का गला दबा सकता है। पाकिस्तान आज एक ऐसा मुल्क बन चुका है जो सिर्फ कर्ज लेकर पुराना कर्ज चुका रहा है। इसे अर्थशास्त्र की भाषा में डेफ ट्रैप यानी कर्ज का चक्रव्यूह कहते हैं। स्टेट बैंक के गवर्नर भले ही कहें कि तनाव कम हो गया है लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि यह राहत सिर्फ और सिर्फ वेंटिलेटर पर पड़े मरीज को कुछ दिन और जिंदा रखने जैसी है। जब तक पाकिस्तान अपनी बर्बादी की नीतियां नहीं बदलेगा 3 साल क्या? 30 साल बाद भी यह देश कटोरे लेकर ही खड़ा मिलेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:04 +0530</pubDate>
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<title>ईरान की खुली धमकी: US और Israel के Energy Assets को बनाएंगे निशाना, Trump की कार्रवाई का देंगे करारा जवाब</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमला होता है, तो वह पूरे इलाके में इज़राइल के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर और अमेरिका के एनर्जी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह चेतावनी उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि वॉशिंगटन और तेल अवीव मिलकर ईरान के खिलाफ नए मिलिट्री ऑपरेशन की योजना बना रहे हैं। ईरान के एक सीनियर सिक्योरिटी अधिकारी ने शुक्रवार को तस्नीम न्यूज़ एजेंसी को बताया कि ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर पर संभावित हमलों के बारे में पश्चिमी मीडिया की खबरें &quot;एक तरह का पागलपन&quot; हैं। तस्नीम के मुताबिक, अधिकारी ने कहा कि तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की व्यापक योजनाएं तैयार की हैं, जिनमें इज़राइल के अहम ठिकानों और पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिका के एनर्जी एसेट्स पर हमले शामिल हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उकसावे की स्थिति में ईरान इन कदमों को उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है।इसे भी पढ़ें: 12-13 सितंबर को दिल्ली में ऐसा दिखेगा नजारा, व्हाइट हाउस से लेकर NATO मुख्यालय तक मच जाएगी खलबली!ईरान के अधिकारी ने कहा कि देश की सेना ने 40 दिन की लड़ाई और उसके बाद हुई झड़पों के दौरान ऐसे ऑपरेशन करने की अपनी क्षमता और पक्के इरादे को साबित किया है। यह चेतावनी तब आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी ठिकानों पर फिर से हमले की तैयारी के आदेश देने की खबरों के बाद सैन्य तनाव बढ़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने शुक्रवार को अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से खबर दी कि राष्ट्रपति ट्रंप ने नए हमलों का निर्देश दिया है जो इसी सप्ताहांत शुरू हो सकते हैं। साथ ही, उन्होंने तेहरान को चेतावनी दी कि अगर वह बातचीत की मेज पर वापस नहीं आता है, तो उसे कड़े सैन्य कदमों का सामना करना पड़ेगा। शुक्रवार को कैंप डेविड में कैबिनेट की बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने जल्द होने वाले ऑपरेशन का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका उन पर बहुत जोरदार हमला करेगा और भरोसा जताया कि ईरान आखिरकार उस स्थिति में पहुंच जाएगा जहां वह इसे और बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। बढ़ती बयानबाजी वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव को दिखाती है। इससे यह चिंता पैदा हो रही है कि आगे कोई सैन्य कार्रवाई पूरे इलाके में बड़े संघर्ष को जन्म दे सकती है, जिससे क्षेत्र के अहम ऊर्जा संसाधनों और रणनीतिक बुनियादी ढांचे पर असर पड़ सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:03 +0530</pubDate>
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<title>घरों से इस्लामिक झंडे खींच रहा नेपाल, क्या बोले मुसलमान?</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल सब दिन से सद्भाव वाला देश रहा है। नेपाल का तो नुकसान होगा ही होगा। पड़ोसी देशों को भी नुकसान इसका असर पड़ेगा। नेपाल के हिंदू अचानक मुस्लिम मोहल्लों में पहुंच गए और एक बहुत अजीब घटना हो गई। इस घटना के बाद पहली बार नेपाल में रहने वाले मुस्लिमों का भी बयान आया है।अभी तक अकड़ दिखा रहे नेपाल के मुस्लिमों की अचानक भाषा बदल गई है। नेपाल के मुस्लिम अचानक प्यार मोहब्बत की बातें करने लगे हैं। दरअसल आपने यह खबरें तो पढ़ी होगी कि नेपाल में मुस्लिमों ने एक कावड़ यात्रा पर हमला कर दिया था। जिसके बाद तनाव बढ़ गया। नेपाल जैसे हिंदू बहुल देश में भी अब सांप्रदायिक झगड़े शुरू हो गए हैं। लेकिन इसी तनाव के बीच नेपाल के हिंदू मुस्लिम मोहल्लों में पहुंच गए और उसके बाद जो हुआ वो होश उड़ा देने वाला था। इसे भी पढ़ें: Nepal में भड़की साम्प्रदायिक हिंसा की चिंगारी क्या समूचे हिंदू समाज के लिए खतरे की घंटी है?नेपाल के हिंदुओं ने मुस्लिम मोहल्लों के घरों से हरे झंडे उतारने शुरू कर दिए। हिंदुओं ने कहा कि नेपाल में रहना है तो नेपाल की इज्जत करनी होगी। नेपाल के लोग अब मुस्लिम कट्टरता के खिलाफ खड़े हो गए हैं। नेपाली हिंदुओं ने मुस्लिमों के घर पर लगे इस्लामिक झंडों को हटा दिया और उसकी जगह नेपाल का झंडा लगाने की बात कही। वायरल वीडियो में  नेपाल के लोग मुस्लिम मोहल्लों में जाकर बोल रहे हैं कि नेपाली झंडा लगाओ। नेपाल का झंडा लगाओ। नेपाल का झंडा इन लोगों का कहना है कि हम नेपाल का इस्लामीकरण नहीं होने देंगे। आपको बता दें कि यह वीडियो वायरल हैं। इसकी पुष्टि हम नहीं करते लेकिन अब नेपाल से ऐसी सैकड़ों वीडियो आ रही हैं जिसमें नेपाल के लोग अपनी हिंदू पहचान को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। इसी बीच भारत का नाम लेकर नेपाल के एक सीनियर जर्नलिस्ट अनिल गिरी ने लिखा है कि नेपाल के तरई इलाकों में हो रहे डेमोग्राफिक बदलावों और धर्म के नाम पर जमीन पर बढ़ती अस्थिरता को देखते हुए भारतीय पक्ष की चेतावनी मुझे याद आ गई।इसे भी पढ़ें: MEA Press Conference : Pakistan पर India का अब तक का सबसे बड़ा हमला, विदेश मंत्रालय ने दुनिया के सामने खोली आतंकिस्तान की पूरी पोल भारतीय पक्ष ने चेतावनी दी थी कि तरई में जो हो रहा है वह सिर्फ एक ट्रेलर है। कुछ भारतीय अधिकारी अक्सर यह चेतावनी देते आए हैं कि एक दिन आपको पूरी पिक्चर देखने को मिलेगी। क्या अब यह सच हो रहा है? क्या नेपाल की डेमोग्राफी बदल रही है? आपको बता दें कि नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स यानी एपीएफ ने करीब 3 साल पहले नेपाल की सरकार को एक गोपनीय रिपोर्ट सौंपी थी। उस वक्त नेपाल में चीन के प्यादे केपी शर्मा ओली की सरकार थी। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि नेपाल के तराई मधेश इलाकों में ऐसे तत्व सक्रिय हो गए हैं जो सांप्रदायिक और जातीय झगड़ों को भड़काकर समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन नेपाल की सरकार ने उस वक्त कोई एक्शन नहीं लिया। Nepal mein hindu jaag raha hai ???????????? pic.twitter.com/8pTaOKBP2i— indian (@priyaaarora12) August 1, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:02 +0530</pubDate>
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<title>Bangladesh में US की बढ़ती रुचि: PM Tarique Rahman और Sergio Gor की बैठक से Strategic Ties को मिलेगी नई दिशा</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए अमेरिका के विशेष दूत सर्जियो गोर ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से शिष्टाचार भेंट की। यह बैठक आज सुबह, शनिवार को ढाका के तेजगांव स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा, बैठक के दौरान आपसी हित के विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया, जिनमें बांग्लादेश और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंध, व्यापार और निवेश का विस्तार तथा क्षेत्रीय सहयोग शामिल हैं। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका के स्पेशल एनवॉय सर्जियो गोर से मुलाकात की और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा की।इसे भी पढ़ें: ईरान की खुली धमकी: US और Israel के Energy Assets को बनाएंगे निशाना, Trump की कार्रवाई का देंगे करारा जवाबअमेरिकी पक्ष के एक राजनयिक सूत्र ने UNB को बताया यह बैठक सुबह शहर के एक होटल में हुई। मैं बस इतना कह सकता हूं कि यह एक अच्छी बैठक थी। यह पता नहीं चल सका कि बैठक के दौरान उन्होंने असल में किन मुद्दों पर चर्चा की। 25 जून को, गोर ने हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत के नए हाई कमिश्नर के तौर पर अपनी &quot;महत्वपूर्ण भूमिका&quot; संभालने के लिए शुभकामनाएं दीं।इसे भी पढ़ें: 12-13 सितंबर को दिल्ली में ऐसा दिखेगा नजारा, व्हाइट हाउस से लेकर NATO मुख्यालय तक मच जाएगी खलबली! गोर ने 25 जून को कहा कि दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका के स्पेशल एनवॉय के तौर पर, मैं उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं। बैठक के बारे में बताते हुए गोर ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि आज मैंने माननीय प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की और अमेरिका और बांग्लादेश के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और हमारी साझेदारी को बढ़ाने के शानदार मौकों पर चर्चा की। यह अमेरिका के लिए प्राथमिकता है, और साथ मिलकर काम करके हम असल नतीजे हासिल कर सकते हैं ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:02 +0530</pubDate>
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<title>Scarborough Shoal विवाद पर दक्षिण चीन सागर में चीन का सैन्य अभ्यास</title>
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<description><![CDATA[ चीन की सेना ने विवादित दक्षिण चीन सागर में स्कारबोरो शोल के पास संयुक्त हवाई और नौसैनिक अभ्यास आयोजित किए हैं। इन अभ्यासों का मुख्य उद्देश्य चीन की युद्धक तत्परता का परीक्षण करना और देश की क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा करना था।
हुअंगयान द्वीप पर नए नियम
इसी बीच, चीन ने हुअंगयान द्वीप राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व के लिए नए नियमों की घोषणा की है। इसके साथ ही, चीन के तटरक्षक बल ने इस क्षेत्र में गश्त और कानून प्रवर्तन गतिविधियों को बढ़ाने की भी घोषणा की है।
दक्षिण चीन सागर में तनाव
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय तनाव पहले से ही बना हुआ है। स्कारबोरो शोल (जिसे फिलीपींस में पां.ग.सी.एन.श.य.ओ. ग.स. ग.न. और चीन में हुअंगयान द्वीप के नाम से जाना जाता है) पर चीन, फिलीपींस और वियतनाम जैसे देशों के बीच संप्रभुता को लेकर विवाद है।
चीन इन अभ्यासों और नियमों के माध्यम से अपनी क्षेत्रीय दावों को मजबूत करने और किसी भी संभावित चुनौती का सामना करने की अपनी क्षमता को प्रदर्शित कर रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:01 +0530</pubDate>
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<title>WSJ की सनसनीखेज रिपोर्ट, President Donald Trump ने Iran पर सैन्य हमले का दिया आदेश</title>
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<description><![CDATA[ &#039;वॉल स्ट्रीट जर्नल&#039; में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना को इसी वीकेंड ईरान पर नया हमला करने का निर्देश दिया है। अखबार ने नाम न बताने की शर्त पर अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा कि इस प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई का मकसद तेहरान को घुटने टेकने पर मजबूर करना है। यह घटनाक्रम राष्ट्रपति ट्रंप के उन बयानों के बाद सामने आया है जिनमें उन्होंने तेहरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत को लेकर अनिश्चितता जताई थी। साथ ही, उन्होंने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए हमले के बाद कड़ी सैन्य जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दोहराई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को मैरीलैंड में कैंप डेविड प्रेसिडेंशियल रिट्रीट में कैबिनेट की बैठक के दौरान कहा, &quot;हम उन पर बहुत ज़ोरदार हमला करेंगे और आगे कहा और किसी न किसी मोड़ पर वे कहेंगे कि अब वे इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते।इसे भी पढ़ें: Donald Trump ईरान पर नए सैन्य हमलों पर कर रहे विचार, White House ने दिए संकेतइसके अलावा, CBS ने रिपोर्ट दी कि वॉशिंगटन ईरान की एनर्जी सुविधाओं, जैसे कि बिजली घरों और पेट्रोलियम रिफाइनरियों पर संभावित हमलों पर विचार कर रहा है। मानवाधिकार और वकालत करने वाले संगठनों ने कहा है कि आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए गए जानबूझकर हमले युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं। CBS की रिपोर्ट के बाद, शुक्रवार दोपहर पोस्ट-सेटलमेंट ट्रेडिंग के दौरान वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमतें 86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं। इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा ईरान को तब तक कीमत चुकानी होगी जब तक वे उस तरीके से बातचीत की मेज पर नहीं आते जिसे राष्ट्रपति ट्रंप सार्थक मानते हैं।इसे भी पढ़ें: ईरान की खुली धमकी: US और Israel के Energy Assets को बनाएंगे निशाना, Trump की कार्रवाई का देंगे करारा जवाबराष्ट्रपति ट्रंप ने अपना रुख बदलने से पहले कई बार बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है, लेकिन जारी संघर्षों ने अमेरिकी सैन्य भंडार को काफी कम कर दिया है, खासकर उन अहम एयर डिफेंस इंटरसेप्टर्स को जिनका इस्तेमाल सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए किया जाता है। यह संघर्ष, जो 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त सैन्य हमलों के बाद शुरू हुआ था, पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अस्थिरता का कारण बना है।इसके बाद तेहरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया, जिससे कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक की महत्वपूर्ण समुद्री आपूर्ति रुक ​​गई। फारस की खाड़ी के देशों पर ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण कामकाज और अर्थव्यवस्था में भारी व्यवधान पैदा हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:01 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन: घातक रूसी हमलों से शहरों में भारी नुक़सान</title>
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<description><![CDATA[ गुरूवार को यूक्रेन के कई शहरों पर रात भर रूसी मिसाइल और ड्रोन हमले हुए. इस बीच, परमाणु बिजली संयंत्रों के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर भी चिन्ता बढ़ी है. हमलों के बाद सहायता कर्मी और आपात सेवा दल प्रभावित लोगों की मदद में जुट गए. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:31:48 +0530</pubDate>
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<title>जंगल की आग: रोकथाम ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय</title>
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<description><![CDATA[ योरोप और उत्तरी अमेरिका में भड़क रही जंगल की आग ने तत्काल कार्रवाई की ज़रूरत बढ़ा दी है. जलवायु परिवर्तन, भूमि पर बढ़ता दबाव और मानवीय गतिविधियाँ भविष्य में ऐसी भीषण घटनाओं का ख़तरा और बढ़ा रही हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:31:48 +0530</pubDate>
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<title>DRC: इबोला के मामलों की संख्या 3,200 के पार, भूख से राहत अभियान बाधित</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र की खाद्य सहायता एजेंसी ने चेतावनी दी है कि बढ़ती भूख, काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में इबोला प्रकोप पर क़ाबू पाने के प्रयासों में बाधा बन रही है. एजेंसी ने तत्काल वित्तीय सहायता की अपील की है. देश में अब तक 3,200 से अधिक लोग इबोला से संक्रमित हो चुके हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:31:45 +0530</pubDate>
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<media:keywords>DRC:, इबोला, के, मामलों, की, संख्या, 3, 200, के, पार, भूख, से, राहत, अभियान, बाधित</media:keywords>
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<title>भारत: टिकाऊ खेती से बदली किसान परिवार की ज़िन्दगी</title>
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<description><![CDATA[ अनियमित बारिश, मिट्टी की घटती उर्वरता और महंगे उर्वरकों के कारण मध्य प्रदेश के ग्रामीण परिवारों के लिए खेती लगातार कठिन होती जा रही है. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम - UNDP की एक समुदाय-आधारित परियोजना, लघु अनुदान कार्यक्रम के समर्थन से, किसानों को जैविक खेती अपनाने, जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और टिकाऊ आजीविका बनाने में मदद कर रही है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:31:43 +0530</pubDate>
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<title>भारत: अल&#45;नीनो के ख़तरे के बीच सामुदायिक प्रयासों से जल सुरक्षा मज़बूत</title>
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<description><![CDATA[ भारत में महाराष्ट्र राज्य की 364 ग्राम पंचायतों के समुदायों ने कमज़ोर मानसून व बढ़ते सूखे के ख़तरे से निपटने के लिए जल संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के प्रयास तेज़ किए हैं. यूनीसेफ़ समर्थित इस पहल का उद्देश्य, बच्चों और किसान परिवारों को बढ़ते जलवायु जोखिमों से बचाना है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:31:42 +0530</pubDate>
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<title>बांग्लादेश: अंडमान सागर में रोहिंग्याओं की तस्करी और मौतें रोकने की अपील</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने बांग्लादेश में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों की तत्काल सहायता की अपील की है. यह अपील उन ख़बरों के बाद की गई है, जिनमें आशंका जताई गई है कि जुलाई के मध्य में 500 से अधिक लोगों को ले जा रही दो नौकाएँ म्याँमार के तट के पास डूब गईं. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:31:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>भारत: नागालैंड में शिक्षा सुधारों से खुली बेहतर रोज़गार की राह</title>
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<description><![CDATA[ भारत के पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड में शिक्षा सुधारों से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं में सुधार हुआ है. विश्व बैंक समर्थित परियोजना के तहत, तीन वर्षों में कक्षा 10 पूरी करने वाले विद्यार्थियों की दर 34 प्रतिशत से बढ़कर 47 प्रतिशत हुई है, जिससे युवजन में उच्च शिक्षा और बेहतर रोज़गार की आकांक्षाएँ बढ़ी हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:31:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>भारत:, नागालैंड, में, शिक्षा, सुधारों, से, खुली, बेहतर, रोज़गार, की, राह</media:keywords>
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<title>पाबन्दियाँ, मनमानी और भय: तालेबान शासन में सिमटती आज़ादी</title>
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<description><![CDATA[ अकेले किराने का सामान ख़रीदने गई एक महिला को रोक लिया जाता है. उसे सामान बेचने वाले दुकानदार को थप्पड़ मारकर पूछताछ के लिए ले जाया जाता है. वहीं, एक शिक्षिका को ‘ग़लत’ चोगा पहनने के कारण अपनी ही कक्षा में प्रवेश नहीं करने दिया जाता. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:31:41 +0530</pubDate>
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<title>अफ़ग़ानिस्तान: स्वदेश लौट रहे अफ़ग़ानों पर मानव तस्करी का बढ़ता ख़तरा</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र ने गुरूवार को चेतावनी दी कि पड़ोसी देशों से अफ़ग़ानिस्तान वापिस लौट रहे लोगों पर मानव तस्करी और शोषण का ख़तरा बढ़ रहा है. गहराते मानवीय और आर्थिक संकटों के कारण उनके लिए अपनी बुनियादी ज़रूरतें पूरी करना भी मुश्किल होता जा रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:31:40 +0530</pubDate>
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<title>Prabhasakshi NewsRoom: दो&#45;चार दिन की शांति के बाद फिर भड़की युद्ध की आग, US Saudi Arabia Strikes के जवाब में Iran का मिसाइल पलटवार</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में दो-चार दिन तक छाई नाजुक शांति आखिरकार टूट गई है। अमेरिका और ईरान एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं, जिससे पूरी दुनिया की चिंता बढ़ गई है। एक ओर अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों पर संयुक्त हवाई हमले किए हैं, तो दूसरी ओर ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने और रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों को रोकने का दावा किया है। लगातार हो रहे इन जवाबी हमलों ने आशंका पैदा कर दी है कि मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान ने मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी बलों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलों से अचानक हमला करने की कोशिश की। हालांकि अमेरिकी सेना ने दावा किया कि दागी गई सभी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मिसाइलें जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर दागी गई थीं। वहीं ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि उसने जॉर्डन में अमेरिकी एयरबेस और सेंट्रल कमांड सेंटर पर मिसाइल हमला किया है। ईरान ने इसे अमेरिकी कार्रवाइयों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई बताते हुए चेतावनी दी कि उसके जवाबी हमले आगे भी जारी रहेंगे।इसे भी पढ़ें: नेतन्याहू के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन...इजराइल के विपक्षी नेता का बयान भारत की राजनीति हिला देगाउधर, ईरानी मिसाइल हमलों के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक के पूर्वी हिस्से में ईरान समर्थित मिलिशिया ठिकानों पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की। वॉशिंगटन के अनुसार, इन ठिकानों का इस्तेमाल हथियारों के भंडारण, लॉजिस्टिक्स और ड्रोन हमलों के संचालन के लिए किया जा रहा था। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि पिछले 72 घंटों में सऊदी अरब की तेल सुविधाओं पर हुए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के पीछे यही ईरान समर्थित गुट थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड और उसके सहयोगी गुट यदि हमले बंद नहीं करते हैं तो अमेरिका आगे भी सैन्य कार्रवाई करेगा।सऊदी अरब ने भी संयुक्त हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि उसका उद्देश्य तनाव बढ़ाना नहीं है, लेकिन यदि उसके ऊर्जा ढांचे या राष्ट्रीय सुरक्षा पर हमला किया गया तो वह हर आक्रामक कार्रवाई का जवाब देगा। रियाद ने इन हवाई हमलों को अपनी तेल सुविधाओं पर हुए ड्रोन हमलों की प्रतिक्रिया बताया।हालांकि ईरान ने सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमलों में किसी भी तरह की भूमिका से इंकार किया है। ईरानी रक्षा अधिकारियों ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के आरोपों को &quot;गंभीर गलत आकलन&quot; बताया। वहीं इराक के ईरान समर्थित मिलिशिया संगठनों ने भी इन हमलों की जिम्मेदारी लेने से इंकार किया। &#039;इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक&#039; ने दावा किया कि सऊदी ठिकानों पर हमलों के पीछे यमन के हूती विद्रोही हो सकते हैं।रिपोर्टों के मुताबिक संयुक्त अमेरिकी-सऊदी हमलों का सबसे बड़ा नुकसान इराक की पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF) को हुआ। पीएमएफ ने बताया कि उसके कई मुख्यालय निशाना बने हैं। संगठन की नीनवे कमांड के अनुसार, हमलों में उसके आठ लड़ाकों की मौत हो गई जबकि चार अन्य घायल हुए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में नीनवे और बसरा प्रांतों में कई ठिकानों से आग की ऊंची लपटें और धुएं के विशाल गुबार उठते दिखाई दिए। दमकलकर्मी भी प्रभावित इलाकों में आग बुझाने के लिए पहुंचते नजर आए।इस बीच, ईरान ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि उसकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों को रोक दिया है। IRGC के मुताबिक, इन जहाजों ने सुरक्षा चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए &quot;अवैध और असुरक्षित मार्ग&quot; अपनाया था। ईरान ने चेतावनी दी कि यदि कोई भी जहाज अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप या निर्देशों का पालन करता है तो उसे भी इसी तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।देखा जाये तो होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक लाइनों में से एक है, जहां से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। ताजा संघर्ष के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तीन डॉलर प्रति बैरल से अधिक की तेजी दर्ज की गई। निवेशकों को डर है कि यदि होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित हुई तो वैश्विक तेल आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।दूसरी ओर, तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन के संयुक्त प्रबंधन का खाड़ी देशों के समर्थन वाला प्रस्ताव रखा है, जबकि अमेरिका ने दोहराया है कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग किसी भी देश, विशेषकर ईरान, के नियंत्रण या प्रतिबंध से मुक्त रहना चाहिए।देखा जाये तो यह ताजा टकराव ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के खिलाफ प्रस्तावित दो सप्ताह के बमबारी अभियान को अचानक रोक दिया था। ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान के साथ &quot;सकारात्मक बातचीत&quot; चल रही है, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका &quot;काम पूरा कर देगा&quot; और सैन्य कार्रवाई फिर शुरू होगी। दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने की किसी भी संभावना से इंकार किया है। इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की, जहां दोनों नेताओं ने वार्ता को &quot;सार्थक और सकारात्मक&quot; बताया।हम आपको याद दिला दें कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए थे। इसके जवाब में तेहरान ने इजरायल और उन खाड़ी देशों को निशाना बनाया जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:27:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>चीन के छिंगहाई प्रांत में 18 मिनट के भीतर आए दो भूकंप, जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं</title>
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<description><![CDATA[ बीजिंग, 28 जुलाई (एपी) चीन के दूरस्थ प्रांत के छिंगहाई में मंगलवार सुबह करीब 18 मिनट के अंतराल में दो भूकंप आए, लेकिन इससे जानमाल के नुकसान की कोई खबर फिलहाल नहीं है। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, दोनों भूकंपों की तीव्रता 5.7 और 5.8 मापी गई। यूएसजीएस ने बताया कि पहला भूकंप पूर्वाह्न 11 बजकर 16 मिनट पर आया, जबकि दूसरा भूकंप 11 बजकर 34 मिनट पर दर्ज किया गया।दोनों भूकंपों का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर (करीब छह मील) की गहराई में था। अभी तक भूकंप के कारण किसी के हताहत होने की तत्काल कोई सूचना नहीं मिली है। चीन के उत्तर-पश्चिम में स्थित छिंगहाई प्रांत कम आबादी वाला क्षेत्र है और यहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं।सरकारी प्रसारक सीसीटीवी द्वारा जारी एक वीडियो में भूकंप के दौरान चट्टानों से धूल के गुबार उठते दिखाई दिए। भूकंप का असर पड़ोसी गंसू प्रांत के लानझोउ शहर में भी महसूस किया गया, जो इस क्षेत्र के बड़े शहरों में शामिल है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में शहर के घरों के अंदर लगे लैंप हिलते हुए दिखाई दिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:00 +0530</pubDate>
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<title>श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर आयातित वाहनों के जमावड़े के बीच ऑपरेटर ने निकासी तेज करने पर दिया जोर</title>
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<description><![CDATA[ कोलंबो, 28 जुलाई चीन को पट्टे पर दिए गए श्रीलंका के हंबनटोटा अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह ने आयातित वाहनों के लंबे समय से वहीं खड़े रहने की खबरों के बीच स्पष्ट किया है कि उसकी प्राथमिकता माल की शीघ्र निकासी सुनिश्चित करना और भंडारण अवधि को कम रखना है, ताकि बंदरगाह माल को उतारने और फिर चढ़ाने के(रो-रो) के क्षेत्रीय पारगमन केंद्र के रूप में अपनी स्थिति बरकरार रख सके। इस प्रमुख पारगमन केंद्र का संचालन करने वाले हंबनटोटा इंटरनेशनल पोर्ट ग्रुप (एचआईपीजी) ने सोमवार को यह स्पष्टीकरण उन खबरों के बाद जारी किया, जिनमें दावा किया गया था कि आयातकों द्वारा आवश्यक दस्तावेज औपचारिकताएं पूरी नहीं किए जाने और बंदरगाह शुल्क का भुगतान नहीं करने के कारण 1,000 से अधिक आयातित वाहन बंदरगाह पर ही खड़े हैं। एचआईपीजी ने एक विज्ञप्ति में कहा, “बंदरगाह वहां पहुंचने वाले माल को तेजी से निकालने और उन्हें आगे भेजने का काम करते हैं न कि वाहनों को लंबे समय तक खड़ा रखने के लिए।कोई भी वाहन यदि महीनों या वर्षों तक बंदरगाह पर खड़ा रहता है, तो वह नए माल की निकासी और उसके प्रबंधन के लिए आवश्यक बहुमूल्य परिचालन स्थान घेर लेता है। इससे श्रीलंका के तेजी से बढ़ते वाहन आयात और उन्हें आगे भेजने की व्यवस्था भी प्रभावित होती है।”
कंपनी ने कहा कि वह माल की त्वरित निकासी सुनिश्चित करने और भंडारण अवधि कम करने पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि यह सुविधा क्षेत्रीय रो-रो पारगमन केंद्र के रूप में प्रभावी ढंग से कार्य करती रहे। रो-रो पारगमन केंद्र वह विशेष बंदरगाह सुविधा होती है, जहां वाहन और पहियों वाले अन्य माल को क्रेन के बजाय सीधे चलाकर जहाज से उतारा जाता है, अस्थायी रूप से रखा या छांटा जाता है और फिर दूसरे जहाज अथवा परिवहन के अन्य साधन पर चढ़ा दिया जाता है।एचआईपीजी ने बताया कि वर्तमान में बंदरगाह पर पारगमन माल और घरेलू बाजार के लिए आयातित वाहनों सहित 50,000 से अधिक वाहनों का प्रबंधन किया जा रहा है। हालांकि, मीडिया खबरों में दावा किया गया था कि पारगमन के लिए निर्धारित 40,000 वाहनों के अतिरिक्त 1,000 से अधिक आयातित वाहन ऐसे ही बंदरगाह पर खड़े हैं। इस पर कंपनी ने कहा कि केवल 1,278 वाहन ऐसे हैं, जो तीन महीने से अधिक समय से बंदरगाह पर हैं, जबकि 581 वाहन एक वर्ष से अधिक समय से वहां खड़े हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:00 +0530</pubDate>
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<title>आंदोलन संस्थापक के छोटे भाई को पाकिस्तानी सेना ने मारी गोली, हालात बेकाबू? शहबाज के हाथ से निकल रहा PoJK</title>
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<description><![CDATA[ अवामी हुकूक लॉन्ग मार्च से जुड़े चश्मदीदों का दावा है कि सोमवार शाम रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई और लगभग दो दर्जन अन्य घायल हो गए। जारी किए गए एक वीडियो में, जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) के मुख्य सदस्य इम्तियाज़ असलम ने बताया कि विरोध प्रदर्शन का काफिला चिनार चौक पहुँच गया था और रावलकोट में मकबूल भट्ट शहीद चौक पर रात भर रुकने से पहले D-चौक की ओर बढ़ रहा था। असलम ने कहा आज पाकिस्तान की सेना ने हमारे बेगुनाह युवाओं पर गोलीबारी की। इसके नतीजतन, हमारे 14 युवा शहीद हो गए हैं। इनमें आंदोलन के संस्थापक उमर नज़ीर कश्मीरी के छोटे भाई उस्मान नज़ीर भी शामिल हैं। अन्य  मृतकों में खैगाला, कोटली शहर, टट्टापानी, बंजा-बासपुर, छोटा गाला और हवेली का एक-एक साथी शामिल है।इसे भी पढ़ें: PoK में मुनीर की सेना का आतंक, कई लोगों पर चलाई दिन-दहाड़े गोलियां!कुल मिलाकर 14 लोग मारे गए हैं, जिनमें हमारे दो बलूच साथी भी शामिल हैं। लगभग दो दर्जन अन्य लोग घायल हैं। उन्होंने विदेशों में रहने वाले कश्मीरियों से इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की अपील की और आरोप लगाया कि अधिकारी प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार कर रहे हैं। हम आगे बढ़ रहे हैं। मैं विदेशों में रहने वाले कश्मीरियों से अपील करता हूं कि वे इन अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाएं। राज्य घबराहट की स्थिति में है और नरसंहार पर उतर आया है। उन्होंने कहा कि कृपया पाकिस्तानी दूतावासों और संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के सामने विरोध प्रदर्शन करें। &#039;लॉन्ग मार्च&#039; में शामिल लोगों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए रैलियां आयोजित करें। असलम ने मीरपुर और मुजफ्फराबाद डिवीजनों के लोगों से भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में प्रदर्शन करने का आग्रह किया। उन्होंने दावा किया कि इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गई हैं, जिससे बातचीत करना मुश्किल हो गया है। इसे भी पढ़ें: दोस्त हो तो इजरायल जैसा, कभी नहीं छोड़ा साथ, झूम उठा भारत!ट्रांसपोर्ट की दिक्कतों की वजह से, हम अगले कुछ दिनों तक पैदल मार्च करेंगे। खुदा ने चाहा तो तीन-चार दिनों में हम शहीदों और ताकत के शहर, मुज़फ़्फ़राबाद पहुँच जाएँगे। उन्होंने आगे कहा कि आज रात &#039;अवामी हुकूक लॉन्ग मार्च&#039; अपना पहला पड़ाव मकबूल भट्ट शहीद चौक पर करेगा। एक और चश्मदीद ने बताया कि प्रदर्शनकारी सफ़ेद झंडे लेकर रावलकोट के चांदनी चौक पहुँचे और ज़ोर देकर कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण रहा। हमारे युवा अल्लाहु अकबर के नारे लगाते हुए रावलकोट के चांदनी चौक पहुँच गए हैं। अल्हम्दुलिल्लाह! अल्लाह की मेहरबानी और रहमत से हम यहाँ पहुँच गए हैं। कई लोग शहीद हो चुके हैं, और इन निर्दयी लोगों ने हमारा बहुत खून बहाया है। फिर भी, मैं मंच से की जा रही उन घोषणाओं को सलाम करता हूँ जिनमें सेना से पीछे हटने का अनुरोध किया जा रहा है। हम शांतिप्रिय लोग हैं, सफेद झंडे लिए हुए हैं। कृपया पीछे हटें; हमारा आपसे कोई झगड़ा नहीं है।No folks…..This ain’t IOK ..This is POK!! pic.twitter.com/979RD4axcs— The Accountant (@Theaccoutant1) July 27, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:59 +0530</pubDate>
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<title>Japan Earthquake Alert: 7.1 तीव्रता के भूकंप से दहला दक्षिणी जापान, JMA ने जारी की Tsunami Warning</title>
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<description><![CDATA[ जापान के दक्षिणी हिस्से में 7.1 तीव्रता का भूकंप आने के बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता जापान के &#039;शिंडो&#039; स्केल (झटकों को मापने का पैमाना) पर अधिकतम सात के स्तर पर मापी गई। जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे नुकसान की स्थिति का जल्द से जल्द आकलन करें। सरकार ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि वे इंसानी जान को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दें और आपातकालीन आपदा राहत कार्यों में कोई कसर न छोड़ें। जापान सरकार ने कुमामोटो, नागासाकी, कागोशिमा, फुकुओका, सागा, ओइता और मियाज़ाकी प्रांतों के लिए भूकंप की इमरजेंसी चेतावनी जारी की; ये सभी जापान के दक्षिणी क्यूशू द्वीप पर स्थित हैं।एक हफ़्ते में दूसरा भूकंप25 जून को उत्तरी जापान में 7.2 तीव्रता का भूकंप आया था, लेकिन इससे किसी की मौत नहीं हुई और न ही कोई बड़ा नुकसान हुआ। जापान दुनिया के सबसे ज़्यादा भूकंप-संभावित देशों में से एक है, क्योंकि यह प्रशांत महासागर के &quot;रिंग ऑफ़ फ़ायर&quot; के पश्चिमी किनारे पर चार बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों के ऊपर स्थित है। लगभग 12.5 करोड़ लोगों की आबादी वाले इस द्वीप समूह में हर साल सैकड़ों झटके महसूस किए जाते हैं और दुनिया के कुल भूकंपों में से लगभग 18 प्रतिशत यहीं आते हैं। इनमें से ज़्यादातर भूकंप हल्के होते हैं, हालाँकि इनसे होने वाला नुकसान उनकी जगह और ज़मीन की सतह के नीचे उनकी गहराई पर निर्भर करता है। यहाँ के लोगों के मन में 2011 में आए समुद्र के नीचे 9.0 तीव्रता वाले ज़बरदस्त भूकंप की यादें आज भी ताज़ा हैं; उस भूकंप के कारण आई सुनामी में लगभग 18,500 लोग मारे गए या लापता हो गए और फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट तबाह हो गया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:59 +0530</pubDate>
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<title>क्या आधुनिक तकनीक सुलझा पाएगी दुनिया की सबसे रहस्यमय प्राचीन भाषाओं की गुत्थी</title>
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<description><![CDATA[ (जेन एडकिन्स, डबलिन सिटी यूनिवर्सिटी)
डबलिन (आयरलैंड), 28 जुलाई (द कन्वरसेशन) आज तक जिन भी प्राचीन भाषाओं को पढ़ा और समझा जा सका है, उनके रहस्य सुलझाने के लिए शोधकर्ताओं को किसी न किसी आधार का सहारा मिला है। आमतौर पर यह आधार कोई द्विभाषी अभिलेख होता है, जैसे रोसेटा स्टोन, या फिर उससे मिलती-जुलती कोई ज्ञात भाषा, जिससे तुलना की जा सके, लेकिन कांस्य युग में यूनान के क्रीट द्वीप पर विकसित मिनोअन सभ्यता की लिपि ‘लीनियर ए’ के साथ ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।
‘लीनियर ए’ को भाषाविज्ञान में ‘असंबद्ध भाषा’ माना जाता है, क्योंकि इसका किसी ज्ञात जीवित या विलुप्त से अबतक कोई प्रमाणित संबंध स्थापित नहीं हो सका है। यही कारण है कि पिछले एक शताब्दी से यह भाषाविदों के लिए सबसे कठिन पहेलियों में से एक बनी हुई है।
इसी तरह रोमन साम्राज्य के उदय से पहले प्रचलित रही इटली की ‘एट्रस्कन’ को समझने में भी केवल सीमित सफलता मिली है। कब्रों पर मिले छोटे-छोटे अभिलेखों के आधार पर इसका कुछ शब्दकोश तैयार किया जा सका है, लेकिन इसकी व्याकरण और गहरे अर्थ अब भी भाषाविदों की पकड़ से बाहर हैं।
यही वे भाषाएं हैं, जिनकी पहेली सुलझाने में अब कृत्रिम मेधा (एआई) को भी शामिल किया जा रहा है। हालांकि एआई भाषाविदों की जगह नहीं ले रहा, बल्कि उनके अनुमानों की जांच को कहीं अधिक तेज और व्यापक बना रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एआई वह कर पाएगा, जो एक सदी के मानवीय प्रयासों के बावजूद अबतक संभव नहीं हो सका?
हाल का एक उदाहरण इस संभावना और उसकी सीमाओं, दोनों को सामने लाता है। जून 2026 में कृत्रिम मेधा के जानकार और शौकिया भाषाविद ने दावा किया कि उसने ‘लीनियर ए’ को समझने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। इसकी शुरुआत उसने एक अनुमान से की कि एक प्रार्थना संबंधी अभिलेख में प्रयुक्त एक अज्ञात शब्द किसी सामी की उस मूल धातु से निकला हो सकता है, जिसका अर्थ ‘‘बसना’’ या ‘‘निवास करना’’ होता है।
इसके बाद उसने कृत्रिम मेधा से तैयार प्रोग्रामिंग स्क्रिप्ट की मदद से इस ध्वनि-पैटर्न की तुलना ‘लीनियर ए’ के उपलब्ध समूचे अभिलेख-संग्रह से की। उसके अनुसार, वह 40 संकेतों का ध्वनि-रूप निर्धारित करने और 408 शब्दों का एक कोश तैयार करने में सफल रहा। उसके दावे के मुताबिक, ‘लीनियर ए’ वास्तव में सामी परिवार की एक विलुप्त है, जिसमें हिब्रू और अरामाइक जैसी भाषाएं शामिल हैं।रचनात्मक सोच की जरूरत
यह समझना जरूरी है कि इस मामले में कृत्रिम मेधा ने क्या किया और क्या नहीं किया। मूल विचार एआई का नहीं, बल्कि उस तकनीकी जानकार का था।
एआई ने केवल एक शोध सहायक की भूमिका निभाई। उसने मानवीय अनुमान के हजारों संकेतों के साथ बहुत तेजी से तुलना कर उसकी जांच की। यही काम यदि कोई व्यक्ति हाथ से करता, तो उसे महीनों लग सकते थे। फिलहाल कृत्रिम मेधा और मनुष्य के बीच यही कार्य-विभाजन सबसे महत्वपूर्ण है, न कि कोई ऐसा दावा जिसकी अब भी विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जा रही है।
तो आखिर एआई कहां सबसे अधिक उपयोगी साबित होता है और कहां उसकी सीमाएं सामने आ जाती हैं? बड़े पैमाने पर पैटर्न की जांच करने में उसकी क्षमता असाधारण है। किसी संकेत या शब्द के बारे में लगाए गए अनुमान की वह पूरे अभिलेख-संग्रह में कुछ ही मिनटों में जांच कर सकता है, जिसमें मनुष्य को वर्षों लग सकते हैं। वह ऐसे दोहराए जाने वाले क्रम भी पहचान सकता है, जो सामान्यतः मानवीय नजर से छूट जाते हैं। इतना ही नहीं, वह क्षतिग्रस्त या अधूरे अभिलेखों में संभावित लुप्त संकेतों का अनुमान लगाकर उन्हें पुनर्निर्मित करने में भी मदद कर सकता है।
कृत्रिम मेधा की एक और विशेष क्षमता ‘अंतर-भाषीय अंतरण’ है। इसमें किसी ज्ञात पर प्रशिक्षित मॉडल कभी-कभी उससे निकट संबंध रखने वाली किसी अज्ञात के पैटर्न का भी अनुमान लगा सकता है। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि यदि आपको स्पेनिश आती है, तो पुर्तगाली के कुछ शब्द और संरचनाएं सहज ही समझ में आने लगती हैं।
शोधकर्ता इस पद्धति का सफल उपयोग उगारिटिक जैसी लिपियों पर कर चुके हैं, जहां भाषा-परिवार पहले से ज्ञात है। उगारिटिक एक विलुप्त सामी थी, जो कांस्य युग के अंत (लगभग 1300-1190 ईसा पूर्व) में प्राचीन तटीय नगर उगारिट (वर्तमान सीरिया) में बोली जाती थी।
लेकिन यहां एक बड़ी रुकावट भी है। केवल सांख्यिकीय पैटर्न की पहचान के आधार पर किसी का अर्थ नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए किसी ज्ञात या द्विभाषी अभिलेख जैसे ठोस आधार की आवश्यकता होती है, जिससे यह तय किया जा सके कि कौन-सा पैटर्न वास्तव में अर्थपूर्ण है और कौन-सा केवल संयोग।
‘लीनियर ए’ और ‘एट्रस्कन’ को समझना इसलिए इतना कठिन है, क्योंकि ऐसा आधार या तो उपलब्ध नहीं है या अधूरा है। केवल अधिक कंप्यूटिंग क्षमता इस कमी को पूरा नहीं कर सकती।सीमित साक्ष्य सबसे बड़ी चुनौती
यदि किसी का पर्याप्त बड़ा अभिलेख-संग्रह उपलब्ध हो, तो सैद्धांतिक रूप से कोई एआई मॉडल इतना दक्ष हो सकता है कि वह किसी मिनोअन या एट्रस्कन वक्ता से अपनी सांख्यिकीय समझ के आधार पर बातचीत जैसा व्यवहार कर सके। यानी वह शब्दों और की संरचनाओं में दोहराए जाने वाले क्रमों को पहचानकर उन्हें दूसरे संदर्भ में इस्तेमाल कर सकता है, जिससे सतही स्तर पर सीमित संवाद संभव प्रतीत हो सकता है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वह मनुष्यों को उस का सही अनुवाद दे सकेगा। यहां में दक्षता और अर्थ की समझ, दो अलग-अलग बातें हैं। मॉडल यह तो सीख सकता है कि कौन-सा संकेत किसके बाद आता है और कौन-से शब्द अक्सर साथ दिखाई देते हैं, लेकिन वह यह नहीं जान सकता कि वे वास्तव में किस वस्तु, व्यक्ति या विचार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इसी कारण इन भाषाओं से जुड़े कृत्रिम मेधा आधारित किसी भी दावे की पुष्टि करना अत्यंत कठिन है। सामान्यतः किसी प्रस्तावित अनुवाद या व्याख्या की जांच उस के वक्ताओं, अन्य उपलब्ध ग्रंथों या दशकों से विकसित विशेषज्ञों की सहमति के आधार पर की जाती है। लेकिन जिन भाषाओं  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:58 +0530</pubDate>
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<title>विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सेंट्रल पार्टी स्कूल के उपाध्यक्ष से की मुलाकात</title>
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<description><![CDATA[ (केजेएम वर्मा)
बीजिंग, 28 जुलाई विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने चीन में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के ‘सेंट्रल पार्टी स्कूल’ के उपाध्यक्ष ली वेंतांग से मुलाकात की और भविष्य में सहयोग के विषय पर चर्चा की। मिसरी बीजिंग की आधिकारिक यात्रा पर हैं। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के एक सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, ली के साथ अपनी बैठक के दौरान मिसरी को स्कूल के ऐतिहासिक महत्व, बौद्धिक योगदान और शैक्षणिक कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी गई।पोस्ट के अनुसार, दोनों पक्षों ने भविष्य में सहयोग और आदान-प्रदान के अवसरों पर भी चर्चा की। सोमवार को, मिसरी ने उप विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग सहित अन्य चीनी नेताओं से मुलाकात की थी, जिनके साथ उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा की। विदेश सचिव ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमेटी के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप-मंत्री सुन हैयान और ‘चाइनीज पीपल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस’ की 14वीं राष्ट्रीय समिति की उप-महासचिव होंग लियांग से भी मुलाकात की।होंग पूर्व में चीनी विदेश मंत्रालय के सीमा विभाग की महानिदेशक थीं। चीन में भारत के राजदूत रह चुके मिसरी की यह यात्रा, 21 जुलाई को मनीला में दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संगठन (आसियान) से जुड़ी बैठकों के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई मुलाकात के बाद हो रही है। मौजूदा यात्रा के दौरान, मिसरी चीनी अधिकारियों के साथ कई बैठकें कर रहे हैं, क्योंकि दोनों देशों ने द्विपक्षीय बातचीत बढ़ा दी है।गलवान घाटी में, 2020 में हुई झड़पों और उसके बाद चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध के कारण भारत और चीन के संबंधों में भारी गिरावट आई थी। इसके बाद, संबंधों को बेहतर बनाने के लिए पिछले एक साल में दोनों देशों ने कई कदम उठाए हैं। पिछले कुछ महीनों में, भारत और चीन ने अपने संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के लिए कई कदम उठाए हैं।इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करना, वीजा जारी करना और दोनों देशों के बीच उड़ान सेवाओं को बहाल करना शामिल है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:58 +0530</pubDate>
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<title>पुतिन से सीधे बात करेंगे... रूस की मदद पर बोले ट्रंप, Zelenskyy की चेतावनी को किया खारिज</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (स्थानीय समय) को कहा कि वॉशिंगटन के खिलाफ चल रही लड़ाई में ईरान को रूस से अगर कोई मदद मिली भी है, तो उसका कोई खास असर नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि वह यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के हालिया आरोपों के बारे में अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे। ज़ेलेंस्की ने शनिवार को मॉस्को पर आरोप लगाया कि वह ईरान को सैटेलाइट से जुड़ी खुफिया जानकारी दे रहा है ताकि अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी देशों में मौजूद सुविधाओं पर हमले किए जा सकें। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि मॉस्को अपनी सेना को मजबूत करने के लिए उत्तर कोरिया के 30,000 सैनिकों को बुलाने की तैयारी कर रहा है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने दोहराया कि इस संघर्ष में वॉशिंगटन का दबदबा कायम करने के लिए अमेरिका ने ईरान की बुरी तरह खबर ली है। उन्होंने दावा किया कि रूस की मदद के बावजूद (अगर कोई मदद मिली भी है तो) इस्लामिक रिपब्लिक हार रहा है।इसे भी पढ़ें: Donald Trump ने AI Images के जरिए दिखाया Iran पर हमला, &#039;दुनिया के रक्षक&#039; अवतार में आए नजरट्रंप ने कहा कि हम पता लगाएंगे कि यह सच है या नहीं। मैं पुतिन से इस बारे में पूछूंगा। हम सच्चाई जान लेंगे। उन्होंने कहा कि इसका कोई खास असर नहीं हुआ है क्योंकि हमने उन्हें (ईरान को) बुरी तरह से हराया है... हो सकता है कि वे मदद कर रहे हों, लेकिन अगर ऐसा है भी, तो इसका कोई नतीजा नहीं निकला है क्योंकि उनके (ईरान के) पास कोई सेना, एयर फ़ोर्स या नेवी नहीं है; उनके पास कुछ भी नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने वेनेज़ुएला के खिलाफ़ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का ज़िक्र करते हुए रूस की मदद को बेअसर बताया; उन्होंने कहा कि वेनेज़ुएला के पास सारा रूसी साज़ो-सामान था। ट्रंप ने आगे कहा, उन्होंने (रूस ने) वेनेज़ुएला को बहुत सारा साज़ो-सामान दिया था। वेनेज़ुएला के पास सारा रूसी साज़ो-सामान था। उसका क्या नतीजा निकला? कुछ खास नहीं।इसे भी पढ़ें: अमेरिका और ईरान के बीच हमले रुकने के बाद मध्यस्थों ने बातचीत बहाल कराने के प्रयास तेज किएमॉस्को के खिलाफ़ ज़ेलेंस्की के दावे से असहमति जताते हुए, ट्रंप ने मज़ाक भरे अंदाज़ में कहा कि अगर रूस ने कोई मदद की भी है, तो वह बेअसर रही है। उन्होंने कहा मुझे नहीं लगता कि वे ऐसा कर रहे हैं, कम से कम बड़े स्तर पर तो बिल्कुल नहीं। और अगर उन्होंने ऐसा किया भी है, तो उसका कोई खास असर नहीं हुआ है। उनकी यह टिप्पणी ज़ेलेंस्की की उस विस्तृत चेतावनी के बाद आई है जो उन्होंने X पर शेयर की थी। इसमें ज़ेलेंस्की ने बताया था कि यूक्रेनी इंटेलिजेंस ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी देशों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर रूस की सक्रिय सैटेलाइट निगरानी का पता लगाया है, और यह जानकारी बाद में ईरान को दी जाती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:57 +0530</pubDate>
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<title>दक्षिणी जापान के क्यूशू क्षेत्र में 7.1 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारी</title>
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<description><![CDATA[ तोक्यो, 28 जुलाई (एपी) जापान के दक्षिणी मुख्य द्वीप क्यूशू के कुमामोतो क्षेत्र में मंगलवार को 7.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (जेएमए) ने यह जानकारी दी। एजेंसी ने बताया कि सुनामी की चेतावनी कुमामोतो के पश्चिमी तट पर स्थित निकटवर्ती अरियाके खाड़ी के लिए जारी की गई है।यह क्षेत्र टोक्यो से लगभग 900 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने एक्स पर जारी एक संदेश में उन क्षेत्रों के लोगों से समुद्र तटों से दूर रहने की अपील की, जहां एक मीटर तक ऊंची सुनामी आने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने स्थिति की जानकारी जुटाने, संभावित नुकसान का आकलन करने और आवश्यकता पड़ने पर बचाव अभियान की तैयारी के लिए एक विशेष कार्यबल का गठन किया है।उन्होंने कहा, लोगों की जान बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ताकाइची ने तेज झटके महसूस करने वाले इलाकों के लोगों से संभावित शक्तिशाली आफ्टरशॉक (भूकंप के बाद आने वाले झटकों) को देखते हुए अत्यधिक सतर्क रहने की अपील की। जापान की अग्निशमन एवं आपदा प्रबंधन एजेंसी ने बताया कि क्षेत्र के प्रमुख सार्वजनिक प्रतिष्ठानों और बुनियादी ढांचे को किसी नुकसान की तत्काल कोई सूचना नहीं मिली है।हालांकि, अधिकारी भूकंप से हुए नुकसान के वास्तविक दायरे का आकलन करने में जुटे हैं। जापान के परमाणु विनियमन प्राधिकरण ने बताया कि भूकंप के बाद आसपास स्थित तीन परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में कोई असामान्यता नहीं पाई गई। सुरक्षा जांच के मद्देनजर क्यूशू क्षेत्र में शिंकानसेन बुलेट ट्रेनों और स्थानीय रेल सेवाओं का संचालन अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है।जापान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि स्थिति का आकलन करने के लिए प्रभावित क्षेत्र में विमान भेजे गए हैं। वर्ष 2016 में कुमामोतो में आए भीषण भूकंप में 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, लगभग 1,800 लोग घायल हुए थे और हजारों घर क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो गए थे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:57 +0530</pubDate>
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<title>US के साथ समझौते से Iran का साफ इनकार, Strait of Hormuz को बताया अपनी ताकत का &amp;apos;विराट शिखर&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के संसद उप-अध्यक्ष हामिदरेज़ा हाजी बाबाई ने कहा कि ईरान अमेरिका के साथ कभी कोई समझौता नहीं करेगा और इस बात पर ज़ोर दिया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य हमारी शक्ति का शिखर है। उन्होंने प्रतिरोध के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए यूक्रेन को कैस्पियन सागर में किसी भी प्रकार की अशांति फैलाने के खिलाफ चेतावनी दी। आईएसएनए के अनुसार, सोमवार को संसद के सार्वजनिक और बंद सत्र के दौरान बोलते हुए, हाजी बाबाई ने हिज़्बुल्लाह द्वारा हाल ही में ईरान के नेतृत्व के प्रति निष्ठा की शपथ का उल्लेख करते हुए अपने भाषण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि यह &quot;राष्ट्र का उच्च शिखर और प्रतिरोध का विजयी चेहरा है, जिसका अंतर्राष्ट्रीय मंच पर और विशेष रूप से इस क्षेत्र में व्यापक प्रभाव पड़ा है&quot; और इसने &quot;इस्लामी राष्ट्र और प्रतिरोध&quot; की शक्ति का प्रदर्शन किया है, जिसके विरुद्ध &quot;अमेरिका और ज़ायोनी शासन इज़राइल को पीछे हटना पड़ा।इसे भी पढ़ें: अमेरिका और ईरान के बीच हमले रुकने के बाद मध्यस्थों ने बातचीत बहाल कराने के प्रयास तेज किएउन्होंने ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली हुसैनी खामेनेई की टिप्पणियों का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान ने लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना और ज़ायोनी शासन की आक्रामकता का पूर्ण और बिना शर्त उन्मूलन को आक्रामक अमेरिका के साथ थोपे गए युद्ध&quot; को समाप्त करने के लिए किसी भी समझौता ज्ञापन की पहली शर्त बनाया था। मौजूदा सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद मुजतबा हुसैनी खामेनेई का हवाला देते हुए हाजी बाबाएई ने कहा, &quot;जिहाद और प्रतिरोध के अलावा आगे बढ़ने का कोई और रास्ता नहीं है, और इस रास्ते पर डटे रहने से ही सच्चे रास्ते पर चलने वाले मुजाहिदीनों को वह ईश्वरीय जीत मिलेगी जिसका वादा किया गया है।अमेरिका का ज़िक्र करते हुए हाजी बाबाएई ने कहा, &quot;अमेरिका को अपनी मर्ज़ी से कभी भी लड़ने और कभी भी युद्धविराम की घोषणा करने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए। ईरान के इस्लामिक गणराज्य को अमेरिका की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ मज़बूती से खड़ा होना चाहिए और अमेरिका को इस क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने की इजाज़त नहीं देनी चाहिए।इसे भी पढ़ें: पुतिन से सीधे बात करेंगे... रूस की मदद पर बोले ट्रंप, Zelenskyy की चेतावनी को किया खारिजउन्होंने तर्क दिया कि &quot;महान ईरानी राष्ट्र की इच्छाशक्ति ने दिखाया है कि अमेरिका निष्क्रिय है, और हमारी राजनीति में भी अमेरिका को निष्क्रिय ही रहना चाहिए और आगे कहा अमेरिका का युद्ध भी युद्ध है, उसकी शांति भी युद्ध है, और उसकी बातचीत भी युद्ध है; इसलिए हमें सावधान रहना होगा, क्योंकि हम अमेरिका के साथ कभी भी किसी समझौते पर नहीं पहुँच पाएँगे, और राष्ट्र की इच्छाशक्ति ही हमेशा निर्णायक होती है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़) के बारे में, जहाँ से दुनिया भर में तेल की एक बड़ी खेप गुज़रती है, हाजी बाबाएई ने कहा होर्मुज़ जलडमरूमध्य ने ईरानी राष्ट्र के लिए बड़ी ताकत पैदा की है, और आज यह हमारी ताकत का शिखर है। महान ईरानी राष्ट्र की ताकत और सम्मान के इस शिखर का निश्चित रूप से समर्थन और संरक्षण किया जाना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:56 +0530</pubDate>
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<title>PoJK Rawalakot Violence: JAAC ने मीडिया के दावों को नकारा, कहा Pakistani Army ने की निहत्थे नागरिकों पर फायरिंग</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुई हिंसा के बाद रावलकोट में हुई जानलेवा घटनाओं को मीडिया के कुछ हिस्सों ने गलत तरीके से पेश किया है, ऐसा जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का आरोप है। एक्स पर कई पोस्ट में कमेटी ने उन खबरों को गलत बताया जिनमें कहा गया था कि प्रदर्शनकारियों ने जबरन शहर में घुसने की कोशिश की थी। ग्रुप ने लिखा, बेशर्म मीडिया कह रहा है कि जॉइंट एक्शन कमेटी ने रावलकोट में जबरन घुसने की कोशिश की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि रावलकोट वहां के लोगों का है और आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कार्रवाई के दौरान गोलाबारी और फायरिंग करके शांतिपूर्ण, निहत्थे नागरिकों की जान ले ली।इसे भी पढ़ें: आंदोलन संस्थापक के छोटे भाई को पाकिस्तानी सेना ने मारी गोली, हालात बेकाबू? शहबाज के हाथ से निकल रहा PoJKएक और पोस्ट में JAAC ने दावा किया कि 5 जून से 28 जुलाई के बीच मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर 67 हो गई है। मारे गए लोगों को &quot;शहीद&quot; बताते हुए कमेटी ने अपनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प लेते हुए एक कविता शेयर की। उन्होंने कहा कि खून-खराबे के बावजूद उन्होंने अपनी मातृभूमि की &quot;रक्षा करने की कसम&quot; खाई है। बताई गई मौतों की संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। कमेटी ने हिंसा के असर पर भावुक विचार भी पोस्ट किए। उन्होंने कहा कि ऐसे नुकसान को खुद झेलने के बाद ही लोग उन परिवारों का दर्द समझ पाए हैं जिन्होंने अतीत में ऐसी ही त्रासदियां झेली थीं। पोस्ट में बचे हुए लोगों पर पड़ने वाले भावनात्मक और मानसिक असर का ज़िक्र किया गया। इसमें कहा गया कि भले ही वे शारीरिक रूप से जीवित हैं, लेकिन वे हुए नुकसान के बड़े पैमाने को समझने और उससे उबरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने अधिकारियों पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को दबाने और कथित चुनावी गड़बड़ियों के ज़रिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमज़ोर करने का आरोप लगाया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने कमेटी के सोशल मीडिया पर लगाए गए हालिया आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस आंदोलन ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली, राजनीतिक दखलअंदाज़ी और लोकतांत्रिक अधिकारों को व्यवस्थित रूप से दबाने का आरोप लगाया है। विरोध प्रदर्शन के नेताओं का दावा है कि चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर की गई है, जिससे लोगों की इच्छा का अनादर हुआ है और लोकतांत्रिक संस्थाएं कमज़ोर हुई हैं। उन्होंने अधिकारियों पर गिरफ़्तारियों, डराने-धमकाने और भारी सुरक्षा बल तैनात करके राजनीतिक असहमति को दबाने का भी आरोप लगाया है। हालिया प्रदर्शनों, खासकर रावलकोट में स्थिति तब और गंभीर हो गई जब &#039;अवामी हुकूक लॉन्ग मार्च&#039; में शामिल हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने मुज़फ़्फ़राबाद की ओर अपना मार्च जारी रखने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अंधाधुंध गोलीबारी की और अत्यधिक बल का प्रयोग किया, जिसके परिणामस्वरूप कई लोग हताहत और घायल हुए। इस हिंसा ने PoJK में असहमति से निपटने के इस्लामाबाद के तरीके की आलोचना को और बढ़ा दिया है; कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अधिकारी राजनीतिक मांगों का जवाब बातचीत के बजाय बल प्रयोग से दे रहे हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:55 +0530</pubDate>
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<title>अमेरिका के दो सांसदों ने पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई चर्चा</title>
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<description><![CDATA[ (एम जुल्करनैन)
इस्लामाबाद, 28 जुलाई अमेरिका के दो सांसदों ने रावलपिंडी में पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर से मुलाकात की है। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने की कोशिश कर रहे हैं। सेना की मीडिया इकाई ‘इंटर-सर्विस पब्लिक रिलेशंस’ (आईएसपीआर) ने एक बयान में कहा कि यह मुलाकात सोमवार को रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय में हुई।बयान के मुताबिक, अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के निचले सदन ‘हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव’ में मोंटाना से सदस्य रयान जिंके और वॉशिंगटन से सदस्य माइकल बॉमगार्टनर ने फील्ड मार्शल मुनीर के साथ अपनी बैठक के दौरान पारस्परिक हित के मुद्दों, क्षेत्रीय सुरक्षा, द्विपक्षीय रक्षा सहयोग और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। अमेरिका की सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी के दोनों सांसदों की पाकिस्तान यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच संबंधों में नयी गर्माहट आई है। पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा पद संभालने के बाद से दोनों पक्षों ने उच्चस्तरीय राजनीतिक, रक्षा और आर्थिक संपर्क बढ़ाया है।दोनों अमेरिकी सांसद पिछले हफ्ते पाकिस्तान पहुंचे। उन्होंने लाहौर यात्रा के दौरान पंजाब के गवर्नर सरदार सलीम हैदर खान से भी मुलाकात की। पाकिस्तान के सरकारी टेलीविजन चैनल से बातचीत में बॉमगार्टनर ने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध ‘‘और मजबूत होने वाले हैं।’’
जिंके ने कहा, ‘‘संबंध पहले कभी इतने अच्छे नहीं रहे’’। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:55 +0530</pubDate>
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<media:keywords>अमेरिका, के, दो, सांसदों, ने, पाकिस्तान, के, सेनाध्यक्ष, आसिम, मुनीर, से, की, मुलाकात, द्विपक्षीय, संबंधों, पर, हुई, चर्चा</media:keywords>
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<title>हूती नहीं कोई और...सऊदी की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी किसने फूंक दी?</title>
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<description><![CDATA[ सऊदी अरब में स्थित सरकारी तेल कंपनी अरामको के अबक ऑयल प्रोसेसिंग प्लांट और पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशन पर ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई है। सेटेलाइट आधारित सर्विलांस सिस्टम नासा फर्म्स की सेटेलाइट तस्वीरों में संयंत्र के आसपास बड़े पैमाने पर आग लगी दिखी जिससे ऑयल सेंटर को नुकसान पहुंचने की बड़ी आशंका जताई जा रही है। हालांकि सऊदी अधिकारियों ने नुकसान का आकलन अभी सार्वजनिक नहीं किया है। लेकिन घटना ने दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा केंद्रों में से एक की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल स्टेबलाइजेशन प्लांट माना जाता है। यहां सऊदी अरब के बड़े हिस्से का कच्चा तेल निर्यात से पहले प्रोसेस्ड किया जाता है। अनुमान है कि यह संयंत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लगभग 5 से 7% हिस्से की प्रोसेसिंग से जुड़ा है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है। इसे भी पढ़ें: Iran-US के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिश कर रहा Pakistan बुरा फँसा, Asim Munir की Secret Deal के खुलासे से चारों ओर हड़कंपजानकार मानते हैं कि अगर संयंत्र की उत्पादन क्षमता लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से और वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बन सकता है। सऊदी अरब ने इस हमले के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार ड्रोन इराकी क्षेत्र से छोड़े गए थे और उनका मकसद तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना था। विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि देश अपनी सुरक्षा और अहम बुनियादी ढांचे की रक्षा के लिए उचित जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है। साथ ही इराक से अपने क्षेत्र का उपयोग ऐसे हमलों के लिए ना होने देने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की गई है। आपको बता दें कि इसी बीच सऊदी अरब और हूं विद्रोहियों के बीच तनाव बना हुआ है। इसे भी पढ़ें: अमेरिका और ईरान के बीच हमले रुकने के बाद मध्यस्थों ने बातचीत बहाल कराने के प्रयास तेज किएहूती विद्रोहियों ने इससे पहले अरामको के अन्य फैसिलिटीज पर भी हमला किया था जिससे अरामको की फैसिलिटीज में आग लग गई थी। सऊदी की तेल रिफाइनरिया, होती विद्रोहियों या फिर ईरान समर्थित अन्य मलेशिया समूहों के निशाने पर बहुत आसानी से आ जाते हैं। सऊदी के एयर डिफेंस सिस्टम कई बार इन्हें रोक लेते हैं। लेकिन जब नहीं रोक पाते तो यह भीषण तबाही मचाते हैं। एक हमला सऊदी की तेल रिफाइनरी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि हमला ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है और क्षेत्र की ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। अब एक संयंत्र पर अतीत पर हुए हमलों का भी वैश्विक तेल कीमतों पर असर पड़ा था। इसलिए यह घटना अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा क्षेत्र की नजर में आ गई है। फिलहाल सऊदी अधिकारी स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए और नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं। जबकि निवेशक संभावित आपूर्ति रुकावट और तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर सतर्क हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:54 +0530</pubDate>
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<title>PoK चुनाव: पहले चरण में शहबाज की पार्टी ने जीती 9 सीटें, PPP बोली&#45; धांधली हुई</title>
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<description><![CDATA[ चुनाव आयोग ने मंगलवार (28 जुलाई, 2026) को बताया कि पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में हुए चुनावों के पहले चरण में सेना समर्थित पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) ने 13 में से नौ सीटें जीतीं। सोमवार (27 जुलाई, 2026) को हुए चुनावों के पहले चरण में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे, जिसमें पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) ने बाकी सीटें जीतीं। दोनों पार्टियां केंद्र स्तर पर गठबंधन की सहयोगी हैं। पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में तथाकथित विधानसभा की 45 सीटों के लिए चुनाव 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच तीन चरणों में हो रहे हैं। भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश उसके अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। नई दिल्ली का यह भी कहना है कि पाकिस्तान ने इन केंद्र शासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों पर &quot;गैर-कानूनी और ज़बरदस्ती कब्ज़ा&quot; कर रखा है। मंगलवार को चुनाव आयोग द्वारा जारी शुरुआती नतीजों के मुताबिक, शरीफ़ बंधुओं—नवाज़ और शहबाज़—की अगुवाई वाली PML-N नौ सीटों पर जीती, जबकि भुट्टो परिवार की अगुवाई वाली PPP ने चार सीटें हासिल कीं।इसे भी पढ़ें: PoK में मुनीर की सेना का आतंक, कई लोगों पर चलाई दिन-दहाड़े गोलियां!दोनों पार्टियां संघीय स्तर पर गठबंधन की साझेदार हैं। पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में तथाकथित विधानसभा की 45 सीटों के लिए चुनाव 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच तीन चरणों में हो रहे हैं। भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश उसके अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। नई दिल्ली का यह भी कहना है कि पाकिस्तान ने इन केंद्र शासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों पर गैर-कानूनी और ज़बरदस्ती कब्ज़ा कर रखा है। मंगलवार को चुनाव आयोग द्वारा जारी शुरुआती नतीजों के अनुसार, शरीफ़ भाइयों—नवाज़ और शहबाज़—की अगुवाई वाली PML-N नौ सीटों पर जीती, जबकि भुट्टो परिवार की अगुवाई वाली PPP ने चार सीटें हासिल कीं। सात सीटों पर धांधली का आरोप लगाते हुए PPP के वरिष्ठ नेता नय्यर बुखारी ने कहा: &quot;हमारी जीती हुई सीटें PML-N को तोहफ़े में दे दी गई हैं।&quot; PPP के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग से मांग की है कि जब तक कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में धांधली की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक नतीजे घोषित न किए जाएं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>अल्लाह का आदेश और...पेरिस में ताबड़तोड़ हमले का Video रोंगटे खड़े कर देगा</title>
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<description><![CDATA[ फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक ऐसी घटना घटित हुई है जिसकी तस्वीरें दिल दहला देने वाली है। तस्वीरों में हमलावर चीखता नजर आ रहा है, चिल्ला रहा है और वह कह रहा है कि उसने ऐसा किसके हुक्म पर किया है। हैरान कर देने वाली यह तस्वीरें पेरिस में सोमवार को पोर्ट डीलीची के पास दिखाई दी। जहां एक सिरफिरे शख्स ने तीन महिलाओं पर हमला किया। वहां मौजूद आम नागरिकों और छुट्टी पर चल रहे पुलिस अधिकारी की बहादुरी से आरोपी को मौके पर ही दबोच लिया गया। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंज ननेज ने कहा कि इस हमले में 19, 24 और 36 साल की तीन महिलाएं घायल हुई हैं। इनमें से दो महिलाओं की हालत नाजुक है। इसे भी पढ़ें: महान फुटबॉलर जिनेदीन जिदान बने फ्रांस के नए कोच, दिदियेर देसचैम्प्स की जगह संभालेंगे टीम की कमानदबोचे जाने के बाद हमलावर फ्रेंच भाषा में कहता हुआ सुनाई दिया कि यह उसने अल्लाह के हुक्म पर किया है जिसने उसे ऐसा करने को कहा। इस पूरी घटना का वीडियो भी रिकॉर्ड हुआ है। इस पूरे वाक्य का वीडियो बनाने वाले मोहम्मद अली बोहाजर ने कहा कि जब मैंने उसे एक महिला के पीठ में हमला करते देखा तो मैं चिल्लाने लगा और कहा कि आओ इसे रोकते हैं। कई लोग मदद के लिए आगे आए। एक शख्स ने उस पर सूटकेस फेंक कर मारा और उसके बाद उसके हाथ से हथियार गिर गया। फिर उसी पल में उसे पकड़ लिया गया। पैर मारकर उसका बैलेंस बिगाड़ा गया। उसे जमीन पर पटक कर दबोचा गया। इस वायरल वीडियो में  ट्रैक सूट पहने ने हमलावर को स्थानीय लोगों ने पूरी तरह से जमीन पर दबोचा। पास ही पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग के पास हथियार पड़े हुए थे। गृह मंत्री ने बताया है कि घटना के वक्त वहां से गुजर रहे एक ऑफ ड्यूटी पुलिस अधिकारी ने तुरंत आरोपी को पुलिस हिरासत में ले लिया। पेरिस पुलिस फिलहाल आरोपी से पूछताछ कर रही है और हमले की वजह जानने की कोशिश कर रही है। ‼️???????? ???????????????????????? ???????????????? — « C’est Allah qui me l’a ordonné » : Une ATTAQUE AU COUTEAU vient d’avoir lieu à Paris, aux alentours de la place de Clichy.Un individu a poignardé 3 femmes, dont l’une serait enceinte. L’une des victimes est en URGENCE ABSOLUE.Les victimes ont… pic.twitter.com/kjbPpBDOlT— Bastion (@BastionMediaFR) July 27, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>पीओके चुनाव के पहले चरण में पीएमएल&#45;एन ने जीतीं नौ सीटें, पीपीपी ने लगाया धांधली का आरोप</title>
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<description><![CDATA[ (एम. जुल्करनैन)
इस्लामाबाद, 28 जुलाई पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हुए पहले चरण के चुनाव में सेना समर्थित पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने 13 में से 9 सीटों पर जीत हासिल की है। निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सोमवार को हुए पहले चरण के मतदान में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगे।बाकी बची चार सीट पर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने जीत दर्ज की। दोनों पार्टियां केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी दल हैं। पीओके की तथाकथित विधानसभा की 45 सीटों के लिए चुनाव 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच तीन चरणों में हो रहे हैं।भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख उसके अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। नयी दिल्ली का कहना है कि इन केंद्र शासित प्रदेशों के कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान का अवैध व जबरन कब्जा है। निर्वाचन आयोग द्वारा मंगलवार को जारी शुरुआती नतीजों के अनुसार, नवाज शरीफ और शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पीएमएल-एन ने नौ निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की, जबकि भुट्टो परिवार के नेतृत्व वाली पीपीपी ने चार सीट जीतीं।पीपीपी के वरिष्ठ नेता नैयर बुखारी ने सात सीट पर धांधली का आरोप लगाते हुए कहा, हमारी जीती हुई सीट पीएमएल-एन को दे दी गई हैं। पीपीपी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने मांग की कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में धांधली के आरोप लगे हैं, वहां जांच पूरी होने तक निर्वाचन आयोग नतीजे घोषित न करे। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने धांधली के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव शांतिपूर्ण व निष्पक्ष तरीके से हुए।उन्होंने कहा कि केवल एक निर्वाचन क्षेत्र में हिंसा की घटना हुई। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:52 +0530</pubDate>
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<title>आतंकवाद और Indus Valley Civilization साथ नहीं चलते, MEA ने Pakistan के दावे को किया सिरे से खारिज</title>
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<description><![CDATA[ विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार को पाकिस्तान की उस कोशिश को सख्ती से खारिज कर दिया जिसमें उसने सिंधु घाटी सभ्यता (IVC) की साझा विरासत का हवाला दिया था। मंत्रालय ने कहा कि जो देश दशकों से सीमा पार आतंकवाद, धार्मिक कट्टरपंथ और हिंसा को बढ़ावा देता रहा है - खासकर अल्पसंख्यकों के खिलाफ - वह विविध सांस्कृतिक विरासत पर अपना दावा नहीं कर सकता। मीडिया ब्रीफिंग के दौरान, सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में पाकिस्तान के हालिया बयानों पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए, MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि आतंकवाद और अल्पसंख्यक अधिकारों के मामले में इस्लामाबाद का रिकॉर्ड ऐसे दावों को कमजोर करता है।इसे भी पढ़ें: पीओके चुनाव के पहले चरण में पीएमएल-एन ने जीतीं नौ सीटें, पीपीपी ने लगाया धांधली का आरोपजायसवाल ने कहा मैं साफ-साफ कहना चाहता हूं - जो देश सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है, जो दशकों से धार्मिक कट्टरपंथ और हिंसा को बढ़ावा देता रहा है, वह किसी भी विविध सांस्कृतिक विरासत पर दावा नहीं कर सकता। अल्पसंख्यकों और उनके सांस्कृतिक अधिकारों की सुरक्षा के मामले में उनका बेहद खराब रिकॉर्ड ऐसी हताशा भरी कोशिशों को और भी झूठा साबित करता है। जयसवाल पाकिस्तान द्वारा हाल ही में &quot;सिंधु घाटी सभ्यता की साझा विरासत&quot; के संदर्भ में दिए गए एक प्रश्न के जवाब में यह बात कह रहे थे। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने हाल ही में सिंधु घाटी सभ्यता को पाकिस्तान की राष्ट्रीय पहचान का केंद्र बताया था।एक कार्यक्रम के दौरान तरार ने कहा, &quot;जब हम खुद को पाकिस्तानी कहते हैं, तो हम खुद से पूछते हैं कि हम कौन हैं। और अगर आप इतिहास में झांकें, तो सिंधु जल सभ्यता ही हमें एक राष्ट्र के रूप में परिभाषित करती है। जब भी मैं विदेश जाता हूं, तो अक्सर अपने समकक्षों से कहता हूं कि हम सिंधु घाटी सभ्यता के लोग हैं। हमारी पहचान यह है कि हम विशाल सिंधु नदी के तट और सहायक नदियों पर बसे लोग हैं।इसे भी पढ़ें: नेतन्याहू के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन...इजराइल के विपक्षी नेता का बयान भारत की राजनीति हिला देगायह पाकिस्तानी मंत्री द्वारा 1960 में हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि (IWT) के तहत सिंधु नदी प्रणाली के जल पर इस्लामाबाद के दावे को मजबूत करने का प्रयास था, जिसके तहत भारत और पाकिस्तान नदी प्रणाली के जल को साझा करते हैं। जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद, भारत ने 23 अप्रैल, 2025 को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया। भारत ने कहा कि संधि पर बातचीत के दौरान जो शर्तें रखी गई थीं, उनमें मौलिक परिवर्तन आ चुके हैं। भारत ने बार-बार कहा है कि पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद ने सिंधु जल संधि के तहत द्विपक्षीय सहयोग के आधार को कमजोर कर दिया है, और दोहराया है कि इस संधि को इस्लामाबाद द्वारा आतंकवाद को दिए जा रहे निरंतर समर्थन से अलग करके नहीं देखा जा सकता। ब्रीफिंग के दौरान, जायसवाल से सोशल मीडिया पर चल रहे उन वीडियो के बारे में भी पूछा गया जिनमें पाकिस्तानी पीढ़ी के युवा नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान अपने भारतीय समकक्षों की प्रशंसा करते नजर आ रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सीमा पार आतंकवाद पर भारत के रुख को दोहराया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:51 +0530</pubDate>
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<title>नेतन्याहू के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन...इजराइल के विपक्षी नेता का बयान भारत की राजनीति हिला देगा</title>
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<description><![CDATA[ इजराइल के विपक्षी नेता येर लैपिड ने एक ऐसा बयान दिया है जो भारत की राजनीति को हिला कर रख देगा| इजराइल के विपक्षी नेता का बयान देखने के बाद आपको पता चल जाएगा कि इजराइल हारता क्यों नहीं है। जिस तरह से आजकल भारत में पीएम मोदी के खिलाफ विपक्षी नेता संसद में हंगामा कर रहे हैं। ठीक उसी तरह से इजराइल की संसद में नेतन्याहू के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन चल रहा है। लेकिन इन दोनों ही विरोध प्रदर्शनों का अंतर आपके होश उड़ा देगा। दोनों देशों के विपक्षी नेताओं का विरोध और विरोध करने की मंशा भी आपको हिला देगी। सत्ता में तो भारत और इजराइल दोनों का ही विपक्ष आना चाहता है। दरअसल इजराइल के विपक्षी नेता के एक बयान ने भारत के राजनैतिक सिस्टम की पोल खोल दी है। इजराइल के लीडर ऑफ अपोजिशन येर लेपिड ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू का विरोध किया है। येर लेपिड ने कहा है कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एक टीवी को इंटरव्यू दिया। लेकिन इस इंटरव्यू में नेतन्याहू ने वह नहीं कहा जो कहना चाहिए था। इसे भी पढ़ें: दोस्त हो तो इजरायल जैसा, कभी नहीं छोड़ा साथ, झूम उठा भारत!येर लैपिड का कहना है कि अमेरिका की देखरेख में सऊदी अरब और इजराइल के बीच शांति स्थापित करने की एक डील हो रही है। यह अच्छी बात है। लेकिन इस डील में इजराइल को झुकना नहीं चाहिए। येर लैपिड ने कहा कि डील के तहत सऊदी अरब औपचारिक रूप से इजराइल को मान्यता देगा। इसके बदले में अमेरिका सऊदी अरब को सुरक्षा गारंटी देगा। सऊदी अरब के नागरिक परमाणु कार्यक्रम में मदद करेगा। यहां तक तो हम भी इस बात से सहमत हैं। लेकिन नेतन्याहू  को यह साफ-साफ बोल देना चाहिए कि सऊदी अरब को न्यूक्लियर पावर प्लांट से बिजली बनाने के लिए खुद यूरेनियम एनरच करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। येर लैपिड ने कहा कि सऊदी अरब बार-बार अमेरिका से रिक्वेस्ट कर रहा है कि वह यूरेनियम खुद ही एनरिच करेगा। लेकिन इजराइल के प्रधानमंत्री के तौर पर नेतन्याहू को अड़ जाना चाहिए। किसे पता कि कल सऊदी अरब भी यूरेनियम का गलत इस्तेमाल कर ले। उस यूरेनियम से हथियार बनाकर इजराइल के खिलाफ ही और बड़ा खतरा बन जाए। इजराइल का विपक्ष नहीं चाहता कि नेतन्याहू से कोई गलती हो और उसका फायदा सऊदी अरब को मिले। यह है इजराइल का विपक्ष। इसे भी पढ़ें: हूती नहीं कोई और...सऊदी की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी किसने फूंक दी?इसी विपक्षी नेता ने ईरान जंग के दौरान कहा था कि हम सरकार के साथ खड़े हैं। कुछ समय के लिए इजराइल में अब कोई विपक्ष नहीं है। सब देश हित में एक साथ काम करेंगे। अब आप इसकी तुलना भारत से कीजिए। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत का विपक्ष पीएम मोदी से सवाल कर रहा था कि हमें सबूत चाहिए। सबूत दीजिए कि हम जीते हैं। सबूत दीजिए कि हमारे विमान नहीं गिरे। सेना तत्व पर सवाल खड़े कर दिए गए। बीजेपी की मानें तो हमारे लीडर ऑफ अपोजिशन विदेशों में जाकर भारत के खिलाफ ही बयानबाजी करते हैं। सीक्रेट विदेश यात्राएं करते हैं। आप सोचिए कि नीट पेपर लीक के खिलाफ विपक्षी दलों ने पीएम मोदी के घर के बाहर धरना तक देना शुरू कर दिया। लेकिन जब सरकार पेपर लीक को रोकने के लिए संसद में एक बिल लाई तो भारत के ही विपक्षी दल उस बिल को पास नहीं होने दे रहे।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:51 +0530</pubDate>
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<title>US के नए Tariffs के खतरे के बीच China का बड़ा पलटवार, Excess Capacity के आरोपों को बताया पूरी तरह बेबुनियाद</title>
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<description><![CDATA[ चीन ने उन दावों को खारिज कर दिया कि उसके पास ज़रूरत से ज़्यादा इंडस्ट्रियल कैपेसिटी है। यह बात अमेरिका की एक जांच के नतीजे आने से ठीक पहले कही गई है, जिसके कारण नए टैरिफ लग सकते हैं। यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि चीन का एक्सपोर्ट तेज़ी से बढ़ा है और ट्रेडिंग पार्टनर्स ने ऑटोमोबाइल और सोलर पैनल से लेकर सीमेंट और स्टील जैसे सेक्टर को लेकर चिंता जताई है। बीजिंग ने कहा कि उसने कभी भी बड़े ट्रेड सरप्लस की कोशिश नहीं की और &quot;चीन शॉक 2.0&quot; की हालिया चर्चा को खारिज कर दिया। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब अमेरिका जल्द ही चीन समेत 16 अर्थव्यवस्थाओं में ज़रूरत से ज़्यादा कैपेसिटी और मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट की जांच के नतीजे घोषित करने वाला है, और माना जा रहा है कि कुछ देशों पर ज़्यादा टैरिफ लगाए जा सकते हैं।इसे भी पढ़ें: MEA Briefing: Vikram Misri China Visit, POJK Elections, West Asia, Nepal संबंधी मुद्दों पर India ने दिया जवाबचीन का तथाकथित अतिरिक्त क्षमता के मुद्दे पर रुख&quot; नाम की एक रिपोर्ट में चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि देश के नेताओं ने अर्थव्यवस्था में संतुलन बनाने को प्राथमिकता दी है, लेकिन घरेलू मांग में कमी के कारण कंपनियों को विदेशों में विस्तार करना पड़ा है। निर्यात में भारी बढ़ोतरी से पिछले साल चीन का व्यापार अधिशेष रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचकर लगभग 1.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने कभी भी बड़े व्यापार अधिशेष की चाहत नहीं रखी और उन दावों की आलोचना की जिनमें कहा जाता है कि उसके औद्योगिक विकास से पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं को खतरा है। रिपोर्ट में कहा गया, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने &#039;तथाकथित चीन शॉक 2.0&#039; का मुद्दा उठाया है और गलत तरीके से आरोप लगाया है कि चीन का औद्योगिक विकास पश्चिमी देशों के एकाधिकार के लिए खतरा पैदा कर रहा है। रिपोर्ट में आगे कहा गया, इस बात का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और यह दावा पूरी तरह से बेबुनियाद है।इसे भी पढ़ें: भारत के ऐलान से UN में भूचाल, 190 देशों में सन्नाटामंत्रालय के दस्तावेज़ में प्रीमियर ली कियांग की उन बातों को दोहराया गया जो उन्होंने डालियान में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की समर दावोस बैठक में कही थीं। उन्होंने कहा था कि हाल के रुझानों को चाइना शॉक 2.0 के तौर पर नहीं, बल्कि चाइना अपॉर्चुनिटी 2.0 के तौर पर देखा जाना चाहिए। बीजिंग में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, कॉमर्स मिनिस्ट्री के पॉलिसी रिसर्च ऑफिस के डायरेक्टर लिन वेलोंग ने कहा कि अमेरिका के पास यह तय करने का कोई अधिकार नहीं है कि उसके ट्रेडिंग पार्टनर्स के पास ज़रूरत से ज़्यादा कैपेसिटी है या नहीं, और फिर उन पर पाबंदियां लगाई जाएं। लिन ने कहा अमेरिका घरेलू मांग से ज़्यादा प्रोडक्शन कैपेसिटी को सिर्फ़ एक्सेस कैपेसिटी (ज़रूरत से ज़्यादा क्षमता) नहीं कह सकता और न ही उस पर &#039;सरप्लस&#039; (अतिरिक्त) का लेबल लगा सकता है। अमेरिका की ये संभावित फाइंडिंग्स तब सामने आ रही हैं जब वाशिंगटन ने चीन समेत 60 देशों पर 10% से 12.5% ​​तक ज़्यादा टैरिफ लगाए हैं। अमेरिका का कहना है कि ये देश ज़बरदस्ती मज़दूरी से बने सामान पर लगी रोक को ठीक से लागू करने में नाकाम रहे हैं। चीन उन देशों में शामिल था जिन्होंने इस कदम का विरोध किया था। इस महीने की शुरुआत में, यूरोपियन यूनियन ने भी चीन के साथ व्यापार को संतुलित करने के लिए व्यापार से जुड़े उपाय किए हैं, जिनमें अपने स्टील उद्योग के लिए सुरक्षा और ई-कॉमर्स के ज़रिए आने वाले छोटे पार्सल के आयात पर पाबंदियां शामिल हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:50 +0530</pubDate>
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<title>भारत के ऐलान से UN में भूचाल, 190 देशों में सन्नाटा</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने संयुक्त राष्ट्र में शब्दों से ऐसी आग लगाई है जिसमें कई देशों का खतरनाक धार्मिक एजेंडा जलकर राख हो गया। जो बात संयुक्त राष्ट्र में आज तक कोई देश नहीं बोल पाया, वह भारत ने कह दी है। भारत ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र में इस तरह से धर्मांतरण का मुद्दा उठा दिया है। ग्लोबल जिहादी और ईसाई मिशनरी भारत का यह बयान सुनकर बौखला जाएंगे। यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट कमीशन में बीजेपी तमिलनाडु के स्टेट प्रेसिडेंट अश्वत्थमन अली मुथू ने अचानक धर्म परिवर्तन को पर्यावरण के लिए खतरा बता दिया है। आपको लग रहा होगा कि धर्म परिवर्तन पर्यावरण के लिए कैसे खतरा हो सकता है। यही बात सुनकर वहां मौजूद कई देश भी हैरान थे। लेकिन अश्वत्थमन ने इसके पीछे जो तर्क दिया वो हैरान करने वाला था। इसे भी पढ़ें: मैं न्यूयॉर्क आ रहा...ममदानी के गिरफ्तारी वाले बयान पर बोले नेतन्याहूअश्वत्थ अमन ने बताया कि आज तक हम ग्लोबल वार्मिंग को सिर्फ टेक्निकल और इंडस्ट्रियल नजरिए से देखते आए हैं। लेकिन अक्सर हम ग्लोबल वार्मिंग के सांस्कृतिक पहलू को नजरअंदाज कर देते हैं। अश्वत्थमन ने कहा कि अगर किसी देश में कई संस्कृतियां होंगी। कई तरह की जीवन शैलियां होंगी और जीवन जीने के अलग-अलग तरीके होंगे तो पर्यावरण पर कम दबाव पड़ेगा। जैसे हम कई देवी देवताओं को मानते हैं। आप इसे कई तरह की जीवन शैलियों के तौर पर समझ सकते हैं। अश्वतमन का मतलब है कि हम प्रकृति की हर चीज में देवता को देखते हैं। भगवान के रूप में प्रकृति को पूजते भी हैं और बचाते भी हैं। पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, पर्वत, वृक्ष, नदियां हम सबको पूजते हैं। यही हमारी विविध जीवन शैली का एक तरीका है। जबकि ज्यादातर धर्म एक ईश्वर की विचारधारा पर आधारित हैं, जो सिर्फ एक ही तरह की जीवनशैली को बढ़ावा देते हैं। इसी की वजह से पर्यावरण पर दबाव बढ़ता जाता है। इसे भी पढ़ें: &#039;जिहाद और प्रतिरोध के अलावा कोई रास्ता नहीं&#039;, Mojtaba Khamenei ने Israel के खिलाफ Hezbollah के रुख की तारीफ़ कीअश्वत्थ ने कहा कि हम पहले ही मिस्र और रोम जैसी प्राचीन सभ्यताओं को खो चुके हैं। ऐसा धार्मिक धर्मांतरण के कारण हुआ है। दुनिया के लिए मौजूदा सभ्यताओं की रक्षा करना बहुत जरूरी है। भारत सबसे पुरानी जीवित सभ्यताओं में से एक है। ऐसे में अगर कोई भारत में धार्मिक धर्मांतरण का खेल खेलता है तो इससे भारतीय सभ्यता को भी नुकसान पहुंचता है। अश्वत्थमन ने कहा कि मेरा प्रस्ताव है कि तेजी से हो रहे धार्मिक धर्मांतरण को रोकने के लिए हमें जल्द से जल्द बड़े कदम उठाने होंगे। यहां पर उनका सीधा सा मतलब यह है कि भारत में धार्मिक धर्मांतरण रोके जाने चाहिए। भारत की सभ्यता को बचाया जाना चाहिए क्योंकि भारत की धार्मिक विविधता ही पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा वरदान है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:50 +0530</pubDate>
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<title>जापान में भूकंप की दर्दनाक तस्वीरें, खिलौने की तरह पलट गई ट्रेन</title>
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<description><![CDATA[ जापान के क्यूसू द्वीप पर 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया तो तस्वीरें कुछ ऐसे सामने आई जहां आपको ट्रेन उल्टी हुई दिखाई दे रही है। तो दूसरी तरफ आपको कई बिल्डिंग ज़मीदोज़ हुई दिखाई दे रही होगी। यह भूकंप कूबा मेतो क्षेत्र में आया और इसके बाद सुनामी की चेतावनी भी जारी कर दी गई। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के मुताबिक भूकंप के बाद 1 मीटर तक ऊंची लहरें उठने की आशंका जताई गई है। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है। इस बीच चीन की भी धरती हिली है। चीन के किंगाई में 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। जापान सरकार ने कुमा मोतो के अलावा नागासाकी, कागोशिमा, फुकू, ओका, शागा, ओइता और मियाजाकी प्रांतों में भी आपातकालीन भूकंप की चेतावनी जारी की है।इसे भी पढ़ें: रात 12:01 बजे से लागू होगा वो &#039;गुप्त नियम&#039;... Donald Trump के एक सीक्रेट फैसले से हिली दुनिया, भारत अब बड़े संकट में फंसने वाला है? यह सभी इलाके क्यूशु द्वीप पर स्थित हैं। यह जानकारी न्यूज़ एजेंसी रइर्स के हवाले से दी गई है। तस्वीरों में भी आप देख सकते हैं कि जब भूकंप आया तो उसकी तबाही और उसकी तीव्रता कैसी थी कि सब कुछ इधर-उधर होकर रह गया। स्टेशन पर कांपते हुए ट्रेन भी आप साफ तौर पर देख सकते हैं और कैसे खिलौने की तरह ट्रेन की बोगियां पलटी हुई हैं। यह सब कुछ जापान में आए 7.0 की तीव्रता वाले भूकंप की देन से है। जापान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां भूकंप सबसे ज्यादा आता है। इसे भी पढ़ें: दक्षिणी जापान के क्यूशू क्षेत्र में 7.1 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारीइस वजह से यहां भूकंप और सुनामी की चेतावनी देने वाला सिस्टम दुनिया के सबसे बेहतर सिस्टमों में गिना जाता है। यह सिस्टम कुछ ही सेकंड में लोगों को अलर्ट भेज देता है। जिससे जान माल का नुकसान कम करने में मदद मिलता है। क्यूसू द्वीप पर रहने वाले लोगों को फिलहाल सतर्क रहने और अधिकारियों को निर्देश का पालन करने की सलाह दी गई है। आने वाले कुछ घंटों में और स्थिति साफ होने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं जापान के पीएम कार्यालय ने कूबामेटो प्रांत में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद सभी संबंधित एजेंसियों को तत्काल कारवाई के निर्देश दिए हैं। पीएम की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि सबसे पहले भूकंप से हुए नुकसान का जल्द से जल्द आकलन किया जाए। इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत और बचाव अभियान तेज करने को कहा गया है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:49 +0530</pubDate>
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<title>भारतीय नाविकों वाले जहाज पर हमला होते ही यूक्रेन पर टूट पड़ा भारत! सब अलर्ट</title>
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<description><![CDATA[  महज 10 दिनों के भीतर तीन भयानक हमले और पांच भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत। सहनशीलता की हर सीमा पार हो चुकी है। भारत ने यूक्रेन के राजदूत को तलब कर यह साफ कर दिया है कि निर्दोष नाविकों की जान से खेलना अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दरअसल बता दें कि 18 जुलाई को जब मार्शल आइलैंड के झंडे वाले मालवाहक जहाज एमवी ओमोफ्री पर ब्लैक सी में अचानक हमला बोल दिया गया तो भारतीय नाविकों की यूनियनों ने सीधे तौर पर इस खूनी हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया। इस हमले में भारत के होनहार चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की जान चली गई। भारत ने बिना एक पल गवाए यूक्रेन के राजदूत को साउथ ब्लॉक तलब किया। भारत ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी। व्यापारिक जहाजों और बेकसूर क्रू मेंबर की जान को खतरे में डालना पूरी तरह अस्वीकार्य है।इसे भी पढ़ें: पुतिन से सीधे बात करेंगे... रूस की मदद पर बोले ट्रंप, Zelenskyy की चेतावनी को किया खारिजसमुद्री यातायात की आजादी और वैश्विक व्यापार पर हमला किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जाएगा। रूस यूक्रेन युद्ध की आग अब सीधे तौर पर भारतीयों को लील रही है। इन 10 दिनों का खौफनाक सच चीख-चीख कर यह बयां कर रहा है कि ब्लैक सी अब नाविकों के लिए एक खुला श्मशान बन चुका है। पहला हादसा होता है 18 जुलाई को। जहाज एमवी ओमोफ्री पर ब्लैक सी में हमला होता है। यूक्रेनी ड्रोन और इस वार में भारत के होनहार नाविक सागर गुप्ता शहीद हो गए। दूसरा हादसा 19 जुलाई को ओसा पोर्ट के पास गोल्डन लियो जहाज पर होता है यह हमला जिसमें चार भारतीय नाविकों की मौत हो जाती है। इसे भी पढ़ें: MEA Briefing: Vikram Misri China Visit, POJK Elections, West Asia, Nepal संबंधी मुद्दों पर India ने दिया जवाबतीसरा हादसा 25 जुलाई को एक बार फिर गोल्डन लियो को निशाना बनाया गया जिसमें दो और भारतीय नाविक अपनी जान गवा बैठे। लगातार हो रहे इन हमलों ने पूरी दुनिया के शिपिंग उद्योग को हिलाकर रख दिया है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा नाविक सप्लायर देश है। लेकिन यूक्रेन और रूस की इस जंग में हमारे नागरिकों को मोहरा बनाया जा रहा है। भारत सरकार ने अब देश के सभी नाविकों और शिपिंग कंपनियों के लिए हाई अलर्ट एडवाइज़री जारी कर दी है। ब्लैक सी के इन खूनी इलाकों में कदम रखने से पहले अपनी सुरक्षा पुख्ता करें। भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता अपने नागरिकों की रक्षा करना है। नई दिल्ली ने यह साफ कर दिया है कि खून की एक-एक बूंद का हिसाब लिया जाएगा और इस अंधी हिंसा को अब हर हाल में रोकना ही होगा।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:49 +0530</pubDate>
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<title>ऑनलाइन ठगी केंद्रों पर काम कराने के लिए लोगों की तस्करी कर रहे आपराधिक नेटवर्क: संयुक्त राष्ट्र एजेंसी</title>
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<description><![CDATA[ जिनेवा, 28 जुलाई (एपी) संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी ने चेतावनी दी है कि आपराधिक नेटवर्क ऑनलाइन ठगी केंद्रों पर काम कराने के लिए पढ़े-लिखे अंग्रेजी बोलने वालों समेत हजारों लोगों की तस्करी कर रहे हैं तथा ऐसे मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) का कहना है कि ज्यादातर सोशल मीडिया के जरिये ऐसे लोगों को अक्सर विदेश में नौकरी का झांसा देकर फंसाया जाता है, उसके बाद उन्हें कैद कर लिया जाता है, उनके पहचान पत्र जब्त कर लिये जाते हैं तथा हिंसा, धमकियों और ‘कर्ज़ के बोझ’ के जरिये उन्हें ऑनलाइन ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता है। आईओएम महानिदेशक एमी पोप ने मंगलवार को यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘हमारे सामने ऐसे बहुत सारे मामले आ रहे हैं।हम देख रहे हैं कि 80 से ज़्यादा अलग-अलग देशों के लोगों की तस्करी करके ठगी के इस धंधे में फंसाया जा रहा है।’’
पोप ने कहा, ‘‘वे ऐसे लोगों को भर्ती कर रहे हैं जो अक्सर बहुत अच्छी अंग्रेज़ी बोलते हैं, जिनके पास स्नातक की डिग्री होती है या वे कुछ हद तक पढ़े-लिखे होते हैं।’’
उन्होंने कहा कि ये मामले ‘‘खासकर पूरे एशिया में सामने आ रहे हैं।’’
प्रवासन एजेंसी ने संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय के अनुमानों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले साल पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में नुकसान 114 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया और इस क्षेत्र में मौजूद ‘ठगी के इन परिसरों’ में तस्करी करके लाए गए लाखों मज़दूर हो सकते हैं। आईआएम ने बताया कि उसने 2022 एवं 2025 के बीच जबरदस्ती अपराध में धकेल दिये गये ऐसे 3,500 से ज़्यादा पीड़ितों की मदद की है, जो लगभग 40 देशों से संबद्ध थे। उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में इंडोनेशिया, भारत, श्रीलंका, इथियोपिया, केन्या और बांग्लादेश के लोग सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:48 +0530</pubDate>
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<title>विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बीजिंग में चीनी अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर की व्यापक चर्चा</title>
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<description><![CDATA[ (केजेएम वर्मा)
बीजिंग, 28 जुलाई विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने मंगलवार को बीजिंग की अपनी दो दिवसीय यात्रा पूरी की और इस दौरान उन्होंने भारत-चीन संबंधों पर कई चीनी अधिकारियों के साथ व्यापक चर्चा की। मिसरी ने चीन में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के ‘सेंट्रल पार्टी स्कूल’ के उपाध्यक्ष ली वेंतांग से मुलाकात की और भविष्य में सहयोग के विषय पर चर्चा की। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के एक सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, ली के साथ अपनी बैठक के दौरान मिसरी को स्कूल के ऐतिहासिक महत्व, बौद्धिक योगदान और शैक्षणिक कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी गई।पोस्ट के अनुसार, दोनों पक्षों ने भविष्य में सहयोग और आदान-प्रदान के अवसरों पर भी चर्चा की। सोमवार को, मिसरी ने उप विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग सहित अन्य चीनी नेताओं से मुलाकात की थी, जिनके साथ उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा की थी। विदेश सचिव ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमेटी के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप-मंत्री सुन हैयान और ‘चाइनीज पीपल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस’ की 14वीं राष्ट्रीय समिति की उप-महासचिव होंग लियांग से भी मुलाकात की।होंग पूर्व में चीनी विदेश मंत्रालय के सीमा विभाग की महानिदेशक थीं। चीन में भारत के राजदूत रह चुके मिसरी की यह यात्रा, 21 जुलाई को मनीला में दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संगठन (आसियान) से जुड़ी बैठकों के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई मुलाकात के बाद हो रही है। मौजूदा यात्रा के दौरान, मिसरी चीनी अधिकारियों के साथ कई बैठकें कर रहे हैं, क्योंकि दोनों देशों ने द्विपक्षीय बातचीत बढ़ा दी है।गलवान घाटी में, 2020 में हुई झड़पों और उसके बाद चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध के कारण भारत और चीन के संबंधों में भारी गिरावट आई थी। इसके बाद, संबंधों को बेहतर बनाने के लिए पिछले एक साल में दोनों देशों ने कई कदम उठाए हैं। पिछले कुछ महीनों में, भारत और चीन ने अपने संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के लिए कई कदम उठाए हैं।इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करना, वीजा जारी करना और दोनों देशों के बीच उड़ान सेवाओं को बहाल करना शामिल है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:48 +0530</pubDate>
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<title>इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से की मुलाकात</title>
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<description><![CDATA[ यरूशलम, 28 जुलाई (एपी) इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस (अमेरिकी राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में मुलाकात की। फरवरी में ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किए जाने के बाद यह दोनों नेताओं के बीच पहली बैठक है। इसे नेतन्याहू के लिए दोनों नेताओं के संबंधों में आई खटास को दूर करने के एक मौके के तौर पर देखा जा रहा है।यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब दोनों नेताओं को अपने-अपने देशों में बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है। नेतन्याहू फिर से चुनाव लड़ने वाले हैं और वह ट्रंप के साथ बिगड़ते संबंधों के कारण मुश्किलों से घिरे हुए हैं। ट्रंप पर नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले एक ऐसे युद्ध को समाप्त करने का दबाव है, जिसने आर्थिक उथल-पुथल मचा दी है और महंगाई को बढ़ा दिया है।ट्रंप ने मंगलवार को उन खबरों को लेकर नाराजगी जताई, जिनमें कहा गया था कि इजराइली नेता पिकऐक्स माउंटेन पर ईरानी गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी पर चर्चा करने की योजना बना रहे हैं। पिकऐक्स माउंटेन एक संभावित परमाणु स्थल है, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति बार-बार बमबारी करने की धमकी दे चुके हैं। ट्रंप ने ‘फॉक्स एंड फ्रेंड्स’ से कहा, ‘‘मुझे बिल्कुल पता है कि पिकऐक्स में क्या हो रहा है।’’
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, दोनों नेता इजराइल-हिज्बुल्लाह युद्ध को लेकर अमेरिका और इजराइल द्वारा लेबनान के साथ किए गए रूपरेखा समझौते तथा अब्राहम समझौते के विस्तार पर भी चर्चा करने की योजना बना रहे हैं।ट्रंप ने सोमवार को संवाददाताओं की ओर से यह पूछे जाने पर कि क्या वह और इजराइल के प्रधानमंत्री ईरान के मुद्दे पर एक ही राय रखते हैं, कहा था, ‘‘हमारे विचारों में थोड़ा-सा अंतर है।’’
नेतन्याहू ने कहा कि वह ट्रंप से मुलाकात में यह जानना चाहते हैं कि ईरान के मुद्दे पर वह क्या सोच रहे हैं और उनकी आगे क्या योजना है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:47 +0530</pubDate>
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<title>Japan के Kyushu में 7.1 तीव्रता के भीषण भूकंप से 13 लोगों की मौत, बचाव अभियान जारी</title>
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<description><![CDATA[ जापान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में आए 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद 13 लोगों के शव मिले हैं और लापता लोगों की तलाश के लिए बुधवार सुबह भी बचाव अभियान जारी रहा। देश की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने यह जानकारी दी। दक्षिणी मुख्य द्वीप क्यूशू के कुमामोतो क्षेत्र में मंगलवार को 7.1 तीव्रता का भूकंप आया।ताकाइची ने कहा, ‘‘कुछ लोग उन्हें बचाए जाने का इंतजार अब भी कर रहे हैं और समय तेजी से निकल रहा है। हम अधिक से अधिक लोगों का पता लगाने और उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।’’ ताकाइची ने मृतकों के परिजन के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने भूकंप से प्रभावित लोगों से गर्म मौसम में अपना ध्यान रखने का आग्रह किया।इसे भी पढ़ें: जापान में भूकंप की दर्दनाक तस्वीरें, खिलौने की तरह पलट गई ट्रेनउन्होंने कहा कि जापान का ‘सेल्ड डिफेंस फोर्स’ भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त एक शॉपिंग मॉल में तलाश एवं बचाव अभियान में बचावकर्मियों के साथ जुटा है तथा सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में पानी, भोजन और अन्य जरूरी वस्तुएं पहुंचाई जा रही हैं। कुमामोतो में अग्निशमन विभाग ने बताया कि काशिमा कस्बे में ‘एयॉन मॉल’ की दूसरी मंजिल ढह गई जिससे कई लोग फंस गए। कुमामोतो के आपातकालीन दल ने बताया कि ‘निप्पॉन पेपर इंडस्ट्रीज कंपनी’ के यत्सुशिरो कारखाने की एक चिमनी ढह गई और लोग मलबे के नीचे दब गए।प्रभावित क्षेत्र तोक्यो से लगभग 900 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है। अग्निशमन एवं आपदा प्रबंधन एजेंसी ने बताया कि प्रमुख सार्वजनिक सुविधाओं या बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। परमाणु विनियमन प्राधिकरण ने कहा कि आसपास के तीन परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में किसी प्रकार की गड़बड़ी का पता नहीं चला है।इसे भी पढ़ें: दक्षिणी जापान के क्यूशू क्षेत्र में 7.1 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारी‘क्योदो न्यूज’ ने बताया कि यत्सुशिरो शहर के एक अस्पताल में लगभग 40 घायलों को भर्ती कराया गया जबकि करीब 50 अन्य लोगों को कुमामोतो शहर के एक अस्पताल ले जाया गया। क्यूशू में कई प्रमुख विनिर्माण कंपनियों ने मंगलवार को अपना कामकाज रोक दिया था लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं होने पर उन्होंने बुधवार को परिचालन फिर शुरू करने की योजना बनाई। आसो कुमामोतो हवाई अड्डे का रनवे बंद कर दिया गया है और इस बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं दी गई कि इसे दोबारा कब खोला जाएगा।इसे भी पढ़ें: Japan Earthquake Alert: 7.1 तीव्रता के भूकंप से दहला दक्षिणी जापान, JMA ने जारी की Tsunami Warningक्योदो ने बताया कि यत्सुशिरो स्टेशन पर एक ट्रेन पटरी से उतरकर एक ओर पलट गई। प्रमुख पर्यटन स्थल कुमामोतो किले की पत्थर की दीवारों को भी नुकसान पहुंचा है। यह किला 2016 के भूकंप में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और इसकी मरम्मत अब भी जारी है।मिफुने नगर कार्यालय के अधिकारी हिरोकी शिमोदा ने कहा, ‘‘भूकंप के झटकों ने मुझे कुमामोतो में (10 साल पहले) आए भूकंप की याद दिला दी और मैं डर गया।’’ उन्होंने आसपास के मकानों की छतों से खपरैल गिरते हुए देखीं। कुमामोतो में 2016 में आए विनाशकारी भूकंप में कम से कम 50 लोगों की मौत हुई थी। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने भूकंप बाद के संभावित झटकों के मद्देनजर निवासियों से अगले दो से तीन दिनों तक सतर्क रहने का आग्रह किया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:46 +0530</pubDate>
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<title>भारत सीमा से लगे नेपाल के सुनसरी जिले में सांप्रदायिक तनाव के बाद अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू</title>
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<description><![CDATA[ (शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, 28 जुलाई भारत से लगे नेपाल के पूर्वी सुनसरी जिले के कुछ हिस्सों में मंगलवार को कर्फ्यू को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया। जिले में रविवार को हुई सांप्रदायिक हिंसा में एक व्यक्ति की मौत के बाद तनाव बना हुआ है। सुनसरी जिला प्रशासन कार्यालय (डीएओ) ने बताया कि कोशी प्रांत के सुनसरी जिले के कई इलाकों में मंगलवार को सुबह 7:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लागू रही।मुख्य जिला अधिकारी ईश्वर प्रसाद आर्याल ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और स्थानीय हितधारकों के साथ बैठक कर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की और तनाव कम करने के उपायों पर चर्चा की। बैठक के बाद सहायक मुख्य जिला अधिकारी पोशन लामिछाने ने कहा, कर्फ्यू अनिश्चितकाल तक या अगले आदेश तक जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए सुनसरी जिले से गुजरने वाले पूर्व-पश्चिम राजमार्ग पर सुबह सात बजे से दोपहर तीन बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई थी।इसके बाद दोपहर तीन बजे से वहां फिर से कर्फ्यू लागू कर दिया गया, जो अगले आदेश तक जारी रहेगा। सुनसरी जिले के हरिनगरा बाजार, भुटाहा बाजार, कप्तानगंज बाजार, घुस्की बाजार और देवानगंज बाजार में सोमवार सुबह से ही कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लागू है। जिले में प्रतिबंध सोमवार को पहली बार लगाए गए थे, जब रविवार को कप्तानगंज क्षेत्र में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी।पुलिस के मुताबिक, दो धार्मिक समुदायों के जश्न के दौरान हुए विवाद के बाद आपस में भिड़े समूहों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस की गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई और सुरक्षाकर्मियों समेत 12 से अधिक लोग घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि घायलों में से दो की हालत गंभीर बनी हुई है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने एक बयान जारी कर सभी संबंधित पक्षों से शांति, सामाजिक सद्भाव और सहिष्णुता बनाए रखने की अपील की। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:46 +0530</pubDate>
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<title>US बलों पर Iran का मिसाइल हमला नाकाम, बीच में ही नष्ट की गईं सभी मिसाइलें</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी सेना ने कहा कि ईरान ने मंगलवार को पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी बलों पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं जिन्हें उनके लक्ष्य पर पहुंचने से पहले की रोक दिया गया। इन हमलों से युद्ध में आया कुछ समय का विराम खत्म हो गया। ये हमला ऐसे समय में हुए हैं जब मध्यस्थ, दोनों पक्षों को फिर से बातचीत की मेज पर लाने और युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे थे।‘यूएस सेंट्रल कमांड’ ने एक बयान में कहा कि ईरान की सभी मिसाइलों को उनके लक्ष्य पर पहुंचने से पहले ही बीच में ही सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया गया। उसने कहा कि अमेरिकी बल ‘‘सतर्क हैं और पूरी तरह तैयार हैं।’’ अमेरिका और ईरान के बीच कुछ समय से शांति थी तथा दोनों देशों ने कुछ दिनों से किसी हमले की घोषणा नहीं की थी जबकि इससे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कई सप्ताह तक तनाव लगातार बढ़ता रहा था। फारस की खाड़ी के इस संकरे समुद्री मार्ग से सामान्य तौर पर दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति होती है।इसे भी पढ़ें: अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित लड़ाकों के ठिकानों पर किया संयुक्त हवाई हमलाइस बीच, अमेरिकी सेना ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका और सऊदी अरब की सेनाओं ने इराक में उन ठिकानों पर संयुक्त रूप से हवाई हमले किए जिनका इस्तेमाल ईरान समर्थित सशस्त्र समूह हाल के दिनों में हमलों को अंजाम देने के लिए कर रहे थे। ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ (सेंटकॉम) ने एक बयान में कहा, ‘‘पिछले 72 घंटों में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के निर्देश पर किए गए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में अमेरिकी और सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने पूर्वी इराक में आतंकवादी संगठनों के कई साजो सामान और हथियार भंडारण स्थलों को निशाना बनाया।’’ इससे पहले सऊदी अरब ने मंगलवार को कहा कि उसने लगातार दूसरे दिन इराक में ईरान समर्थित लड़ाकों द्वारा दागे गए ड्रोन मार गिराए। वहीं, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने नाकेबंदी कर सऊदी अरब के एक तेल टैंकर को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:45 +0530</pubDate>
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<title>UNSC सुधारों में देरी पर UN में भड़का भारत, कहा कुछ देशों के हितों के लिए नहीं रुकेगी प्रक्रिया</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत ने कहा है कि सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर अब तक 17 दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन कोई ठोस परिणाम नजर नहीं आया है। राजदूत ने कहा कि इस प्रक्रिया को कुछ देशों के ‘‘विभाजनकारी हितों’’ के कारण बाधित नहीं होने दिया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सुरक्षा परिषद में सुधार से संबंधित अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) को अपने अगले सत्र तक जारी रखने का मंगलवार को फैसला किया।यह 193 सदस्यीय महासभा की वार्षिक प्रक्रिया है जो बिना किसी ठोस परिणाम या अंतिम समयसीमा के अब 18वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। शक्तिशाली 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए वार्ता अब संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में होगी। यह सत्र सितंबर में शुरू होगा।इसे भी पढ़ें: ऑनलाइन ठगी केंद्रों पर काम कराने के लिए लोगों की तस्करी कर रहे आपराधिक नेटवर्क: संयुक्त राष्ट्र एजेंसीभारत ने ‘सुरक्षा परिषद में समान प्रतिनिधित्व और इसकी सदस्य संख्या में वृद्धि के प्रश्न’ पर अंतर-सरकारी वार्ता को 81वें सत्र तक जारी रखने संबंधी मौखिक मसौदा निर्णय को अपनाने का समर्थन किया लेकिन उसने ठोस परिणाम हासिल करने की दिशा में प्रगति नहीं होने और कुछ सदस्य देशों द्वारा प्रक्रिया को बाधित करने के प्रयासों की कड़ी आलोचना की। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने मंगलवार को कहा, ‘‘पिछले सत्रों की तरह अंतर-सरकारी वार्ता का 80वां सत्र भी ऐसे किसी परिणाम या पहल पर सहमति बनाने में सफल नहीं रहा जिससे वास्तविक सुधारों को लागू करने का मार्ग प्रशस्त हो सके। विभिन्न विषयों पर हुई चर्चाओं में सदस्य देशों और समूहों ने मोटे तौर पर अपने पहले से ज्ञात रुख को ही दोहराया।’’ अंतर-सरकारी वार्ता को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र तक जारी रखने संबंधी मौखिक निर्णय को अपनाए जाने के अवसर पर हरीश ने भारतीय दर्शन का उल्लेख किया, जिसके अनुसार आत्मा मोक्ष प्राप्त करने से पहले जन्म और मृत्यु के चक्रों से गुजरती है तथा हर बार कुछ प्रगति करती है।इसे भी पढ़ें: भारत के ऐलान से UN में भूचाल, 190 देशों में सन्नाटाउन्होंने कहा, ‘‘अंतर-सरकारी वार्ता अब तक 17 चक्रों से गुजर चुकी है लेकिन दुख की बात है कि अभी तक मुक्ति नजर नहीं आ रही। दुनिया को और कितने समय तक इंतजार करना होगा?’’ भारत ने सुधार प्रक्रिया की धीमी गति की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश न्यूयॉर्क में बैठकर हर सत्र में अपने पुराने रुख को दोहराते रहते हैं और इस बीच असल दुनिया में संयुक्त राष्ट्र को उद्देश्य के अनुरूप बनाने की उम्मीद कमजोर होती जाती है। हरीश ने कहा, ‘‘दुनियाभर में संघर्षों में सार्थक हस्तक्षेप करने में सुरक्षा परिषद की अक्षमता को लेकर सदस्य देशों और वैश्विक नागरिकों में साफ तौर पर निराशा है।संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक स्पष्ट और अत्यावश्यक है। इसे कुछ चुनिंदा सदस्य देशों के संकीर्ण और विभाजनकारी हितों के कारण बाधित नहीं होने दिया जा सकता।’’ उन्होंने कहा कि ऐसे सुधार हासिल करने का रास्ता स्पष्ट है- निर्धारित समयसीमा एवं लक्ष्यों के साथ लिखित मसौदे पर आधारित वार्ता। भारत ने कहा कि इस तरह के गंभीर प्रयास का परिणाम सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों में विस्तार के रूप में सामने आना चाहिए तथा इसमें ‘ग्लोबल साउथ’ को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।इसे भी पढ़ें: जलवायु परिवर्तन: अमीर देशों में बढ़ेगा एसी का इस्तेमाल, गरीब देशों में बढ़ेंगी मौतें, रिपोर्ट में दावा‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं। हरीश ने कहा, ‘‘भारत इस प्रयास में योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है। हमें पूरी उम्मीद है कि अंतर-सरकारी वार्ता का 81वां सत्र इस दिशा में एक नयी शुरुआत करेगा।’’ विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस महीने की शुरुआत में 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट पर भारत की उम्मीदवारी का आधिकारिक प्रचार अभियान शुरू किया था। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:44 +0530</pubDate>
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<title>Strait of Hormuz में समुद्री जहाजों पर हमले और भारतीय नाविक की मौत पर भारत ने UNSC में जताई चिंता</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा और तनाव को ‘‘गंभीर रूप से चिंताजनक’’ करार दिया तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में कई समुद्री जहाजों पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा करते हुए क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में निर्बाध नौवहन और व्यापार जल्द बहाल करने की मांग की। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने पश्चिम एशिया को भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया और कहा कि, ‘‘क्षेत्र में थोड़े समय हमले रुकने के बाद फिर हमले शुरू हो गए हैं जो चिंताजनक है। यह बेहद गंभीर स्थिति है और भारत तत्काल तनाव कम करने का आग्रह करता है।’’ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मंगलवार को पश्चिम एशिया की स्थिति पर आयोजित एक चर्चा में हरीश ने इस महीने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे जीएफएस गैलेक्सी, एमटी अल बहियाह और एमटी मोम्बासा सहित कई जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की।उन्होंने कहा, ‘‘इन हमलों में कई भारतीय नागरिक घायल हुए, जिनमें कुछ गंभीर रूप से घायल हैं। एक भारतीय नागरिक को अपनी जान गंवानी पड़ी जबकि एक अन्य अब भी लापता है। भारत, नाविकों को निशाना बनाने और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित एवं स्वतंत्र नौवहन बाधित करने वाली सभी हिंसक घटनाओं की लगातार निंदा करता रहा है।’’ भारत ने क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के हित में संवाद और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की पुरजोर वकालत की।इसे भी पढ़ें: राष्ट्रमंडल खेल: हरजिंदर कौर ने भारोत्तोलन में जीता रजत पदक, भारत को दिलाया सातवां पदकहरीश ने कहा, ‘‘क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और असैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप क्षेत्र के समुद्री मार्गों पर निर्बाध नौवहन और व्यापार को जल्द से जल्द बहाल किया जाना चाहिए।’’ अमेरिका और इजराइल के ईरान के खिलाफ जारी युद्ध के बीच छह जुलाई से वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के बाद ईरान ने 11 जुलाई को एक बार फिर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद घोषित कर दिया। संयुक्त राष्ट्र के एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए आर्थिक एवं सामाजिक आयोग के अनुसार, संघर्ष से पहले प्रतिदिन 100 से अधिक जहाज इस मार्ग से गुजरते थे।इसे भी पढ़ें: US-Iran War | मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर! होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर पर हमला, अमेरिका की ओर से लगातार 10वें दिन बमबारीसात जुलाई तक यह संख्या 49 तक पहुंच गई थी, लेकिन जुलाई के मध्य तक घटकर केवल आठ से 15 जहाज प्रतिदिन रह गई। हरीश ने कहा कि इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता से भारत के महत्वपूर्ण हित जुड़े हैं क्योंकि भारत का व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति तंत्र पश्चिम एशिया से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत और पश्चिम एशिया के बीच लगभग 180 अरब डॉलर का वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार, 31 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश तथा केवल खाड़ी सहयोग परिषद के देशों से 52 अरब डॉलर से अधिक का वार्षिक प्रेषण (रेमिटेंस) होता है।इनका भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रभाव है। उन्होंने कहा कि लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी क्षेत्र में रहकर काम करते हैं और उनकी सुरक्षा एवं कल्याण भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत ने सुरक्षा परिषद में यह भी कहा कि दुनिया का ध्यान केवल होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर केंद्रित है और ऐसे में गाजा पट्टी में जारी गंभीर मानवीय संकट की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।इसे भी पढ़ें: होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और जहाज पर हुआ हमला, ब्रिटिश सेना ने जारी किया अलर्टहरीश ने कहा कि नागरिकों की मौत और असैन्य बुनियादी ढांचे का विनाश चिंता का बेहद गंभीर विषय है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:44 +0530</pubDate>
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<title>US और Saudi Arabia ने इराक में ईरान समर्थित लड़ाकों के ठिकानों पर किया संयुक्त हवाई हमला</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी सेना ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका और सऊदी अरब की सेनाओं ने इराक में उन ठिकानों पर संयुक्त रूप से हवाई हमले किए जिनका इस्तेमाल ईरान समर्थित सशस्त्र समूह हाल के दिनों में हमलों को अंजाम देने के लिए कर रहे थे। ‘यूएस सेंट्रल कमांड’ (सेंटकॉम) ने एक बयान में कहा, ‘‘पिछले 72 घंटों में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के निर्देश पर किए गए 30 से अधिक ड्रोन हमलों के जवाब में अमेरिकी और सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने पूर्वी इराक में आतंकवादी संगठनों के कई साजो सामान और हथियार भंडारण स्थलों को निशाना बनाया।’’ सेंटकॉम ने कहा कि ‘‘रिवोल्यूशनरी गार्ड और उससे जुड़े आतंकवादी समूहों को ये हमले तुरंत बंद करने चाहिए, अन्यथा अमेरिका की ओर से आगे भी सैन्य कार्रवाई की जाएगी।’’ इससे पहले मंगलवार को सऊदी अरब ने बताया था कि उसने लगातार दूसरे दिन इराक में सक्रिय ईरान समर्थित सशस्त्र समूह द्वारा दागे गए ड्रोन मार गिराए। इन ड्रोन का लक्ष्य देश के पूर्वी क्षेत्र में स्थित पेट्रोलियम प्रतिष्ठान थे।इसे भी पढ़ें: Johnson &amp; Johnson का बड़ा फैसला: Cancer के हजारों केस खत्म करने के लिए देगी $5.5 Billion Settlementवहीं, सऊदी अरब द्वारा सोमवार को भी इसी तरह के ड्रोन हमले का आरोप लगाए जाने के बाद इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने सुरक्षा एजेंसियों को पूरे मामले की जांच के आदेश दिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:01:44 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन: युद्ध में पैर खोने के बाद भी नहीं रुकी हौसले की उड़ान</title>
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<description><![CDATA[ पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में 10 वर्षीय यूक्रेनी जिम्नास्ट साशा पास्कल ने अपने प्रदर्शन के ज़रिए दुनिया को एक बड़ा सन्देश दिया. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:00:49 +0530</pubDate>
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<title>‘UNFPA का चैटबॉट’: युवजन के सवालों के विश्वसनीय जवाब</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) का AI-सक्षम चैटबॉट ‘JustAsk!’ भारत में युवजन को यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण से जुड़ी गोपनीय और भरोसेमन्द जानकारी दे रहा है. संयुक्त राष्ट्र के ऑनलाइन स्वयंसेवकों ने इस सेवा के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसे युवाओं व समुदायों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:00:43 +0530</pubDate>
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<title>सीरिया: नई शुरुआत के लिए भरोसे और आजीविकाओं की बहाली ज़रूरी</title>
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<description><![CDATA[ लम्बे समय से सभ्यताओं के संगम के रूप में पहचाना जाने वाला सीरिया आज अपने इतिहास के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:00:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Analysis Pakistan Nuclear History: पाकिस्तान के परमाणु इतिहास का US&#45;सऊदी अरब न्यूक्लियर डील पर क्या पड़ेगा असर?</title>
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<description><![CDATA[ करीब दो दशक पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने इस्लामाबाद के &#039;ऐवान-ए-सदर&#039; (राष्ट्रपति भवन) में परवेज़ मुशर्रफ के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान को भारत जैसी &#039;सिविल न्यूक्लियर डील&#039; देने से साफ़ इनकार कर दिया था। बुश का स्पष्ट संदेश था—&quot;दोनों देशों का इतिहास अलग है।&quot; इस इनकार के पीछे की सबसे बड़ी वजह थी पाकिस्तान का काला परमाणु इतिहास और डॉ. ए.क्यू. खान (AQ Khan) का वैश्विक परमाणु तस्करी नेटवर्क। आज जब अमेरिका और सऊदी अरब के बीच ऐतिहासिक सिविल न्यूक्लियर डील (22 जुलाई 2026) पर मुहर लगी है, तब एक बार फिर पाकिस्तान के इस काले इतिहास और उसके सऊदी अरब के साथ संबंधों की छाया इस वैश्विक कूटनीति पर मंडरा रही है। उन्होंने कहा, &quot;दोनों देशों का इतिहास अलग-अलग है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, हमारी रणनीति में उन जाने-पहचाने अंतरों को ध्यान में रखा जाएगा।&quot; बुश ने अपने बगल में खड़े मुशर्रफ के लिए दरवाज़ा पूरी तरह बंद कर दिया, और इसके पीछे एक वजह थी। इसे भी पढ़ें: Raj Thackeray का NEET विवाद पर बड़ा ऐलान, 26 जुलाई को Mumbai में गैर-राजनीतिक Tiranga MarchAQ खान का गुप्त न्यूक्लियर प्रसारदो साल पहले, बुश प्रशासन ने मुशर्रफ को एक पाकिस्तानी न्यूक्लियर साइंटिस्ट के बारे में पक्के सबूत सौंपे थे, जो इतिहास का सबसे बड़ा न्यूक्लियर प्रसार नेटवर्क चला रहा था। डॉ. AQ खान ने लीबिया, उत्तर कोरिया और ईरान को न्यूक्लियर मटीरियल, बम के डिज़ाइन और सेंट्रीफ्यूज बेचे थे। खान आधुनिक ज़माने के जॉनी एप्पलसीड जैसे थे - जो 19वीं सदी में अमेरिका के नए इलाकों में सेब के बागान लगाने वाले मशहूर अमेरिकी मिशनरी नर्सरीमैन थे। खान ने 1980 के दशक में ईरान को यूरेनियम एनरिचमेंट सेंट्रीफ्यूज बेचे थे, जिन्हें ईरान ने रिवर्स-इंजीनियरिंग से बनाया (जिन्हें अमेरिका अब हवाई हमलों से नष्ट करने की कोशिश कर रहा है)।बुश-मुशर्रफ प्रेस कॉन्फ्रेंस के ठीक सात महीने बाद उत्तर कोरिया ने अपना पहला न्यूक्लियर बम टेस्ट किया। सिर्फ लीबिया ने 2003 में स्वेच्छा से अपना न्यूक्लियर हथियार प्रोग्राम छोड़ दिया था - और तभी IAEA जांचकर्ताओं ने खान नेटवर्क का पता लगाया। मुअम्मर गद्दाफी ने जो न्यूक्लियर ब्लूप्रिंट सौंपे थे, वे एक चीनी न्यूक्लियर बम, CHIC-4 के थे। ये ड्रॉइंग इस्लामाबाद के &#039;गुड लुक्स टेलर्स&#039; के शॉपिंग बैग में लिपटी हुई थीं, जहाँ अच्छे कपड़े पहनने वाले खान अपने सूट सिलवाते थे। इसे भी पढ़ें: छात्रों को गुमराह करने की साजिश, PIB ने PM Modi और पीयूष गोयल के AI Deepfake वीडियो को बताया फेकपाकिस्तानी प्रशासन आज भी यही कहता है कि खान, जिनकी 2021 में नज़रबंदी के दौरान मौत हो गई थी, एक मनमौजी व्यक्ति थे जो अपनी मर्ज़ी से काम कर रहे थे। दिलचस्प बात यह है कि इस्लामाबाद सालों से अपनी ज़मीन पर काम करने वाले आतंकवादियों को सही ठहराने के लिए इसी तरह की दोहरी बातें कहता रहा है। इन बातों पर यकीन करना मुश्किल है। खान ने कड़ी निगरानी वाले मिलिट्री-संचालित न्यूक्लियर प्रोग्राम से सेंट्रीफ्यूज और न्यूक्लियर मटीरियल लिया। उन्होंने हज़ारों मील दूर स्थित तीन देशों तक न्यूक्लियर मटीरियल पहुँचाने के लिए पाकिस्तानी वायु सेना के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट समेत देश के संसाधनों का इस्तेमाल किया।सऊदी अरब ने अमेरिका के साथ न्यूक्लियर डील कीपाकिस्तान के विरोध के बावजूद, AQ खान की धोखेबाज़ी की छाया उसकी सभी न्यूक्लियर गतिविधियों पर मंडरा रही है। फिलहाल, उसे सऊदी अरब जैसी शांतिपूर्ण न्यूक्लियर सहयोग डील मिलने की संभावना कम है, जैसी सऊदी अरब ने 22 जुलाई को अमेरिका के साथ की थी। यह डील सऊदी अरब को बिना किसी अंतरराष्ट्रीय निगरानी के अपना न्यूक्लियर फ्यूल एनरिच करने की इजाज़त देती है, जो उसे इस जानकारी का इस्तेमाल करके हथियार बनाने लायक यूरेनियम बनाने से रोकती। सऊदी अरब ने सार्वजनिक रूप से न्यूक्लियर हथियार हासिल करने की अपनी मंशा ज़ाहिर की है।क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 2018 में अल जज़ीरा से कहा था, &quot;सऊदी अरब कोई न्यूक्लियर बम हासिल नहीं करना चाहता, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि अगर ईरान न्यूक्लियर बम बनाता है, तो हम भी जल्द से जल्द वैसा ही करेंगे।&quot;सऊदी अरब सिर्फ़ पाकिस्तान की मदद से ही न्यूक्लियर हथियार वाला देश बन सकता है। सितंबर 2025 में, जब पश्चिम एशिया पर युद्ध के बादल मंडरा रहे थे, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने आपसी रक्षा समझौता किया।इस समझौते के बाद, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि ज़रूरत पड़ने पर पाकिस्तान का न्यूक्लियर प्रोग्राम &quot;सऊदी अरब के लिए उपलब्ध कराया जाएगा&quot;। आसिफ ने 24 घंटे के भीतर अपना बयान वापस ले लिया, ज़ाहिर तौर पर अंतरराष्ट्रीय दबाव में, लेकिन उनका बयान इज़राइल के लिए था।पाकिस्तान फिलहाल एकमात्र ऐसा इस्लामिक देश है जिसके पास न्यूक्लियर हथियार और ऐसी मिसाइलें हैं जो सीधे तेल अवीव को निशाना बना सकती हैं, हालाँकि ऐसा करने पर इज़राइल की तरफ़ से भयानक न्यूक्लियर जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। आपसी रक्षा समझौता पाकिस्तान को सबसे महत्वपूर्ण अरब देश में रणनीतिक गहराई देता है, जिससे वह भारत की सैन्य जवाबी कार्रवाई से सुरक्षित रहता है।सऊदी अरब को चीन के प्रभाव से दूर करनासऊदी अरब भी ट्रंप प्रशासन के फोकस में है। भारत के लिए बुश की 2008 की न्यूक्लियर डील का मकसद उभरते चीन के खिलाफ़ एक रणनीतिक साझेदार बनाना था। ट्रंप की 2026 की न्यूक्लियर डील सऊदी अरब को बीजिंग के प्रभाव से दूर करती है। इसके बदले में सऊदी अरब अब्राहम समझौते के तहत इज़राइल को मान्यता भी दे सकता है। इस समझौते का दूसरा पहलू यह है कि ट्रंप ने एक ऐसे देश को न्यूक्लियर डील दी है जो लंबे समय से कहता आ रहा है कि उसे बम चाहिए, और जिसकी रणनीतिक साझेदारी एक ऐसे इस्लामिक देश के साथ है जो परमाणु हथियार रखने के बावजूद लगभग दिवालिया हो चुका है और जिसका परमाणु सामग्री की तस्करी का पुराना इतिहास रहा है।सऊदी परमाणु  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:10:49 +0530</pubDate>
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<title>Trump का दावा: Iran की Military खत्म, अब Deal चाहते हैं लेकिन Nuclear सपना भूल जाएं!</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान पश्चिम एशिया में फिर से शुरू हुए टकराव को खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ समझौता करना चाहेगा, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि तेहरान अभी इसके लिए तैयार नहीं है। उन्होंने फिर से कहा कि उनका प्रशासन इस्लामिक रिपब्लिक को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन (WHCA) के दोबारा तय किए गए डिनर में बोलते हुए, ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन ईरान के मुद्दे को &quot;बहुत अच्छे&quot; तरीके से संभाल रहा है और उन्होंने इस टकराव की स्थिति पर मीडिया की आलोचनात्मक कवरेज को खारिज कर दिया। इसे भी पढ़ें: Analysis Pakistan Nuclear History: पाकिस्तान के परमाणु इतिहास का US-सऊदी अरब न्यूक्लियर डील पर क्या पड़ेगा असर?ट्रंप ने अपनी बात रखते हुए कहा कि सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा है। फ़ेक न्यूज़ पर भरोसा न करें। ईरान के ख़िलाफ़ जारी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का ज़िक्र करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान की सैन्य क्षमताएँ बुरी तरह कमज़ोर हो गई हैं। ट्रंप ने कहा कि हमने ईरान पर बहुत ज़ोरदार हमला किया है। उनकी नेवी खत्म हो गई है; उनकी एयर फ़ोर्स भी खत्म हो गई है। अब उनके पास 250 जेट और 159 अच्छी नावें नहीं बची हैं।उन्होंने आगे कहा कि जो जहाज़ तबाह हुए, वे सब समुद्र की तलहटी में चले गए हैं। उनके पास कोई रडार नहीं है। जो कुछ भी आपको दिखता है, उसके बावजूद उनके पास बहुत कम ड्रोन बचे हैं। और कभी-कभी वे कोई न कोई हरकत करते रहते हैं। अपनी बात जारी रखते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान को भारी नुकसान हुआ है और संकेत दिया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि उनके पास अब ज़्यादा कुछ नहीं बचा है। वे अभी हमसे बात कर रहे हैं। वे डील करना चाहेंगे। मुझे नहीं लगता कि वे इसके लिए तैयार हैं। मुझे नहीं लगता कि अभी सही समय है, लेकिन मैं बात सुनने को तैयार हूँ। लेकिन उनके पास न्यूक्लियर हथियार नहीं हो सकते। इसे भी पढ़ें: Middle East संकट का असर: Crude Oil में उबाल से Stock Market धराशायी, Sensex और Nifty के प्रमुख सेक्टर्स में भारी गिरावटईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अपने प्रशासन के पुराने रुख को दोहराते हुए ट्रंप ने कहा कि हम उन्हें परमाणु हथियार नहीं हासिल करने देंगे। एक बड़े प्रेस इवेंट में भाषण देने से पहले, ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन अभी तेहरान के साथ बातचीत कर रहा है और साथ ही इस टकराव से बाहर निकलने के दो तरीकों पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन अभी इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या सैन्य हमलों को बढ़ाया जाए, क्षमताओं को तेज़ी से खत्म किया जाए या बातचीत के ज़रिए कोई कूटनीतिक समाधान निकाला जाए।  ]]></description>
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<title>Iran&#45;US के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिश कर रहा Pakistan बुरा फँसा, Asim Munir की Secret Deal के खुलासे से चारों ओर हड़कंप</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में लगभग पाँच महीने से भड़की ईरान-अमेरिका जंग अब वैश्विक ऊर्जा, समुद्री व्यापार और महाशक्तियों की प्रतिष्ठा की निर्णायक लड़ाई बन चुकी है। इसी बीच पाकिस्तान एक बार फिर स्वयं को मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसका यह नया दांव शुरू से ही कमजोर दिखाई देता है। पहले भी अनेक कूटनीतिक मोर्चों पर संतुलन साधने में विफल रहा इस्लामाबाद अब चीन के इशारे पर ईरान और अमेरिका के बीच रुकी हुई वार्ता को पुनर्जीवित करने की कवायद कर रहा है। ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी की हालिया पाकिस्तान यात्राएं और शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बैठकों ने इस प्रयास को गति तो दी है, लेकिन ज़मीनी हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं। एक ओर ईरान समर्थित हूती संगठन सऊदी अरब के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है, दूसरी ओर अमेरिका लगातार सैन्य दबाव बढ़ा रहा है। ऐसे में सऊदी अरब, चीन, ईरान और अमेरिका, चारों के परस्पर विरोधी हितों के बीच फंसा पाकिस्तान किसी भी पक्ष का भरोसा पूरी तरह नहीं जीत पा रहा। पाकिस्तान भले मध्यस्थता का प्रयास कर रहा है, लेकिन संघर्ष की लगातार बढ़ती तीव्रता, समुद्री नाकाबंदी और क्षेत्रीय ध्रुवीकरण को देखते हुए यह पहल सफल होने की संभावना बेहद क्षीण दिखाई देती है।दिलचस्प बात यह भी है कि पाकिस्तान की यह नई कूटनीतिक सक्रियता ऐसे समय सामने आई है, जब उसके सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को लेकर एक और बड़ा दावा चर्चा में बना हुआ है। हम आपको बता दें कि एक अंतरराष्ट्रीय समाचार रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर ने इसी वर्ष मार्च में सऊदी अरब और ईरान के बीच एक कथित गुप्त युद्धविराम समझौता कराने में भूमिका निभाई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह समझौता ईरानी तेल के अनौपचारिक निर्यात को सुगम बनाए रखने के बदले कराया गया, जिसमें ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े शीर्ष अधिकारियों और पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़े लोगों के आर्थिक हित भी जुड़े बताए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कथित समझौते के बाद कई महीनों तक सऊदी अरब पर ईरानी हमले लगभग थम गए थे, लेकिन हाल में फिर मिसाइल हमला होने के बाद मुनीर ने कथित तौर पर तेहरान को अपने साझा तेल कारोबार पर असर पड़ने की चेतावनी दी, जिसके बाद हमले रुक गए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों ने सार्वजनिक रूप से इन्हें स्वीकार भी नहीं किया है, लेकिन यदि इन रिपोर्टों में दम है तो यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता केवल शांति स्थापना तक सीमित नहीं, बल्कि उसके पीछे सामरिक, आर्थिक और ऊर्जा हितों का जटिल ताना-बाना भी मौजूद है। यही कारण है कि इस्लामाबाद की मौजूदा कूटनीतिक पहल को कई विश्लेषक निष्पक्ष शांति प्रयास की बजाय क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और अपने रणनीतिक हितों को साधने की कोशिश के रूप में भी देख रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Analysis Pakistan Nuclear History: पाकिस्तान के परमाणु इतिहास का US-सऊदी अरब न्यूक्लियर डील पर क्या पड़ेगा असर?वैसे हम आपको बता दें कि पाकिस्तान की कूटनीतिक कवायद बेहद कठिन संतुलन की मांग करती है। एक ओर वह सऊदी अरब की आर्थिक सहायता पर निर्भर है, वहीं दूसरी ओर चीन उसका सबसे बड़ा रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। उधर, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के विरुद्ध नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा कर दी है और तेल टैंकरों को निशाना बनाकर पूरे क्षेत्र में तनाव कई गुना बढ़ा दिया है। ऐसे में पाकिस्तान यदि ईरान के अधिक निकट दिखाई देता है तो सऊदी अरब नाराज हो सकता है, जबकि चीन चाहता है कि किसी भी कीमत पर क्षेत्र में शांति स्थापित हो ताकि उसके व्यापारिक और ऊर्जा हित सुरक्षित रह सकें।हम आपको बता दें कि चीन की सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते संकट और लाल सागर में अस्थिरता ने वैश्विक तेल आपूर्ति को गंभीर खतरे में डाल दिया है। चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और उसके कच्चे तेल का प्रमुख खरीदार है। यदि होर्मुज और लाल सागर दोनों मार्ग बाधित होते हैं तो चीन की अर्थव्यवस्था और उसकी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा असर पड़ सकता है। यही कारण है कि बीजिंग पाकिस्तान की मध्यस्थता का खुलकर समर्थन कर रहा है और क्षेत्र में तनाव कम कराने के लिए सक्रिय कूटनीतिक प्रयासों में जुटा हुआ है।दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में ईरान ने क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और हूती विद्रोहियों को कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देते हुए ऊर्जा प्रतिष्ठानों, रणनीतिक ठिकानों और अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर हमले की संभावना भी जताई है। इसके बावजूद उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि यदि गंभीर वार्ता की संभावना बनती है तो समझौते का रास्ता अब भी खुला है। यही विरोधाभास इस पूरे संकट को और अधिक जटिल बना रहा है।सऊदी अरब पर बढ़ते हमलों ने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया है। यमन से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को वायु रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया, जबकि हूती विद्रोहियों ने तेल टैंकरों और सामरिक ढांचे को निशाना बनाकर स्पष्ट संदेश दिया है कि वे लाल सागर में भी दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। यदि लाल सागर और होर्मुज दोनों समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित रहते हैं तो वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मचना तय है। पहले ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया जा चुका है, जिसका असर विश्व अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है।उधर, यमन भी एक बार फिर व्यापक युद्ध की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। वर्षों से ठहरे संघर्ष में अब नई सैन्य तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हूती लड़ाके और सरकारी बल आमने-सामने तैनात हैं। संयुक्त राष्ट्र, ओमान और पाकिस्तान की मध्यस्थता के बावजूद समझौते की उम्मीद कमजोर पड़ती जा रही है। विश्लेषकों का मानन ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:10:48 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Iran-US, के, बीच, मध्यस्थता, कराने, की, कोशिश, कर, रहा, Pakistan, बुरा, फँसा, Asim, Munir, की, Secret, Deal, के, खुलासे, से, चारों, ओर, हड़कंप</media:keywords>
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<title>SCO में Iran के FM Araghchi का Washington को दो टूक: US दादागिरी नहीं सहेंगे</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने फिर से कहा कि तेहरान अमेरिकी दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकेगा और देश किसी भी तरह के ज़बरदस्ती या बल-प्रयोग को स्वीकार नहीं करेगा। &#039;प्रेस टीवी&#039; की एक रिपोर्ट के अनुसार, किर्गिस्तान के चोलपोन-अता में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अरागची ने राजनयिक माध्यमों से जुड़ी चर्चाओं पर बात की। इसे भी पढ़ें: Iran-US के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिश कर रहा Pakistan बुरा फँसा, Asim Munir की Secret Deal के खुलासे से चारों ओर हड़कंपबैठक के दौरान हुई द्विपक्षीय बातचीत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच मुख्य बाधा बातचीत के रास्तों की कमी नहीं है, बल्कि अमेरिका का धौंस जमाने और ज़बरदस्ती करने पर लगातार निर्भर रहना है। अरागची ने ज़ोर देकर कहा कि ईरान ने दिखा दिया है कि वह अमेरिका की धौंस के आगे नहीं झुकेगा और किसी भी हाल में बल, दबाव और धमकियों की भाषा का जवाब नहीं देगा।उन्होंने कहा कि अलग-अलग प्रस्तावों पर पाकिस्तान के साथ बातचीत करना एक स्वाभाविक कदम है, क्योंकि पाकिस्तान इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभाता है। तेहरान का मुख्य रुख बताते हुए अरागची ने कहा कि ईरानी लोगों की सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के हितों की रक्षा करना हमारे सिद्धांतों में शामिल है। उन्होंने कहा कि जब तक ईरानी लोगों के जायज़ मकसद और मांगें पूरी नहीं हो जातीं, हम स्वाभाविक रूप से अपने रास्ते पर आगे बढ़ते रहेंगे।&quot; उन्होंने आगे कहा, &quot;हम धमकियों से डरते नहीं हैं, न ही दबाव में झुकेंगे, और हम धमकी भरी भाषा बर्दाश्त नहीं करते। इसे भी पढ़ें: Analysis Pakistan Nuclear History: पाकिस्तान के परमाणु इतिहास का US-सऊदी अरब न्यूक्लियर डील पर क्या पड़ेगा असर?अरागची ने कहा कि ईरान की सेनाएं मोर्चे पर और उसके राजनयिक अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की सेवा में एक-दूसरे के पूरक की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने SCO (जिसे उन्होंने एक प्रगतिशील संगठन बताया) के सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे वाशिंगटन और उन पश्चिमी संस्थाओं के एकतरफा एजेंडे का मुकाबला करें जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर हावी होना चाहती हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:10:48 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan Army पर अंधा भरोसा न करे America, विशेषज्ञ ने &amp;apos;Hybrid System&amp;apos; पर दी बड़ी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ एक नई रिपोर्ट में, पाकिस्तान में कमजोर होते लोकतंत्र और सेना के बढ़ते असर को लेकर अमेरिका से बड़ा कदम उठाने की अपील की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को मिल रहे समर्थन पर फिर से विचार करना चाहिए। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान की असल ताकत चुनी हुई सरकार के बजाय सेना के प्रभाव वाली &#039;हाइब्रिड राजनीतिक व्यवस्था&#039; के हाथ में है, जिससे लोकतांत्रिक सिस्टम पूरी तरह कमजोर पड़ रहा है।2024 के चुनावों के बाद गहराया संवैधानिक संकट&#039;टाइम्स ऑफ इजरायल&#039; में राजनीतिक शोधकर्ता वास शेनाय के छपे एक लेख के अनुसार, 2024 के आम चुनावों के बाद से पाकिस्तान भारी कानूनी और राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद मीडिया पर पाबंदियां बढ़ा दी गईं, अदालतों की आजादी पर असर पड़ा और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के मामले भी बढ़े हैं। इस वजह से आम लोगों का लोकतंत्र और चुनावों से भरोसा उठता जा रहा है। इसे भी पढ़ें: Spain Fire Crisis: 70 हजार लोगों ने छोड़ा घर, Madrid में धुएं का गुबार, प्रशासन ने जारी किया Emergency Alertचरमपंथ, आतंकवाद और सुरक्षा की गंभीर चुनौतियांलेख में पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गहरी चिंता जताई गई है। खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान की गतिविधियां तेज हुई हैं, वहीं बलूच अलगाववादी और इस्लामिक स्टेट-खोरासान जैसे आतंकी गुट भी लगातार सक्रिय हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि आतंकवादी संगठनों को लेकर पाकिस्तान की दोहरी नीति ने उसकी सुरक्षा चुनौतियों को और भी ज्यादा खतरनाक बना दिया है।आर्थिक तंगी, कर्ज और बढ़ती गरीबी का बोझआर्थिक मोर्चे पर रिपोर्ट कहती है कि अंतरराष्ट्रीय मदद से पाकिस्तान का तुरंत डूबने का खतरा भले ही टल गया हो, लेकिन वह अब भी भारी कर्ज, ऊर्जा संकट और विदेशी फंड्स पर निर्भर है। तेजी से बढ़ती आबादी, गरीबी और जलवायु परिवर्तन जैसी परेशानियां देश की अर्थव्यवस्था को और ज्यादा कमजोर बना रही हैं।अमेरिका को सुझावविशेषज्ञ ने सलाह दी है कि अमेरिका को पाकिस्तान को आर्थिक और क्लाइमेट चेंज से जुड़ी मदद देनी चाहिए, लेकिन इसके साथ ही कुछ सख्त शर्तें भी लगानी चाहिए। जैसे, देश में निष्पक्ष और आजाद चुनाव कराए जाएं। नागरिक सरकार को मजबूत किया जाए। सभी आतंकी संगठनों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कड़ी कार्रवाई हो। लेख में साफ कहा गया है कि वॉशिंगटन को पहले की तरह पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व को आंख मूंदकर समर्थन देने से बचना चाहिए। इसे भी पढ़ें: SCO में Iran के FM Araghchi का Washington को दो टूक: US दादागिरी नहीं सहेंगेपरमाणु हथियारों की सुरक्षारिपोर्ट में पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का भी जिक्र किया गया है। फिलहाल उसके न्यूक्लियर हथियार एक सुरक्षित &#039;कमांड एंड कंट्रोल&#039; सिस्टम के तहत हैं और किसी आतंकी गुट के हाथ लगने की गुंजाइश कम है। हालांकि, अंदरूनी मिलीभगत, परमाणु सामग्री की चोरी, रास्ते में हमला या सेना के अंदर किसी संभावित टूट जैसे बड़े खतरों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:10:47 +0530</pubDate>
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<title>Spain Fire Crisis: 70 हजार लोगों ने छोड़ा घर, Madrid में धुएं का गुबार, प्रशासन ने जारी किया Emergency Alert</title>
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<description><![CDATA[ स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने शनिवार को बताया कि मैड्रिड के पश्चिमी इलाके में लगी भीषण आग पर काबू पाने और लोगों की जान बचाने के लिए दमकलकर्मी लगातार कोशिश कर रहे हैं। तेज हवाएं चलने की आशंका ने इस राहत और बचाव काम को और भी ज्यादा कठिन बना दिया है।70 हजार लोगों को छोड़ना पड़ा अपना घरसरकारी जानकारी के मुताबिक, सूखे इलाकों में फैली इस आग की वजह से करीब 70,000 लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा है। स्थानीय अधिकारियों ने इसे इस पूरे इलाके के इतिहास की अब तक की सबसे भयानक और विनाशकारी आग करार दिया है। इसे भी पढ़ें: Iran-US के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिश कर रहा Pakistan बुरा फँसा, Asim Munir की Secret Deal के खुलासे से चारों ओर हड़कंपआने वाले कुछ घंटे हो सकते हैं बेहद मुश्किलप्रभावित इलाके सेनिसीएंटोस गांव पहुंचे पीएम सांचेज ने कहा, &quot;हमारी सबसे पहली प्राथमिकता और मकसद लोगों की जान बचाना और रिहाइशी इलाकों की सुरक्षा करना है।&quot; उन्होंने आगे सावधान करते हुए कहा, &quot;आने वाले कुछ घंटे काफी मुश्किल भरे हो सकते हैं। भले ही तापमान थोड़ा कम हुआ है, लेकिन हवा की रफ्तार और उसकी दिशा को लेकर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।&quot;हर तरफ तबाही का मंजरब्रुनेट शहर की मेयर मार निकोलस ने हालात पर चिंता जताते हुए कहा, &quot;इस इलाके में हर साल आग की घटनाएं होती हैं, लेकिन इस बार का रूप बेहद खौफनाक है। यह एक बहुत बड़ी तबाही है।&quot; इसे भी पढ़ें: Trump का दावा: Iran की Military खत्म, अब Deal चाहते हैं लेकिन Nuclear सपना भूल जाएं!मैड्रिड की सड़कों तक फैला धुआंआग का धुआं इतना भयानक है कि पूरी राजधानी के पश्चिमी हिस्से का आसमान धुएं से भर गया। सुबह-सुबह सेंट्रल मैड्रिड की सड़कों तक जलने की बदबू पहुंचने लगी, जिससे लोगों को गले में खराश की परेशानी होने लगी और उन्हें खिड़कियां बंद करनी पड़ीं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अलर्ट जारी कर लोगों को बाहर न निकलने की सलाह दी है।शेल्टर होम में कटे दिन, लोगों में दहशत का माहौलआसपास के गांवों से निकाले गए हजारों लोगों को स्पोर्ट्स हॉल में बनाए गए अस्थाई शेल्टर होम में ठहराया गया है। पेरू की रहने वाली 38 साल की जैकलीन विलाफ्रांका ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि जब फोन पर आग का इमरजेंसी अलर्ट बजा, तो उन्हें लगा कि उनका घर और सब कुछ जलकर राख हो जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:10:47 +0530</pubDate>
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<title>Nepal जाने वाले भारतीयों के लिए गुड न्यूज! अब ₹200 और ₹500 के नोट ले जा सकेंगे साथ</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल ने इंडियन करेंसी को लेकर लगे अपने पुराने बैन में ढील दे दी है। अब अगर आप नेपाल जा रहे हैं, तो अपने साथ 200 और 500 के भारतीय नोटों को आराम से ले जा सकते हैं। बस आपको यह ध्यान रखना है कि ये नोट 9 नवंबर 2016 वाले होने चाहिए।25,000 रुपए तक की है लिमिटनेपाल के सेंट्रल बैंक के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति 25,000 रुपए तक की लिमिट में 200 और 500 के नोट नेपाल ले जा सकता है या वहां से वापस ला सकता है। यह नया रूल इंडिया और नेपाल, दोनों देशों के लोगों पर लागू होगा। इसे भी पढ़ें: Israel High Alert पर, लेकिन Trump ने Iran हमलों को अचानक क्यों रोका? जानिए US Army की वो चेतावनीपुराने नोटों पर बैन रहेगा जारीबैंक ने अपने नए नोटिस में एकदम क्लियर कर दिया है कि 2016 की नोटबंदी से पहले वाले पुराने भारतीय नोट नेपाल में अभी भी पूरी तरह से बैन रहेंगे। नई गाइडलाइंस के हिसाब से सिर्फ नए डिजाइन वाले 200 और 500 के नोट ही एक्सेप्ट किए जाएंगे। इसे भी पढ़ें: Pakistan Army पर अंधा भरोसा न करे America, विशेषज्ञ ने &#039;Hybrid System&#039; पर दी बड़ी चेतावनीबॉर्डर पर अब नहीं होगी कन्फ्यूजनदरअसल, नेपाल के सेंट्रल बैंक ने इस साल 11 फरवरी को ही इस नए रूल को पास कर दिया था। लेकिन अब गुरुवार को एक और नोटिस निकालकर पूरी प्रोसेस क्लीयर कर दी गई है, ताकि बॉर्डर क्रॉस करते समय करेंसी के लेन-देन से जुड़ी कोई भी कन्फ्यूजन या टेंशन न रहे। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:10:46 +0530</pubDate>
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<title>Israel High Alert पर, लेकिन Trump ने Iran हमलों को अचानक क्यों रोका? जानिए US Army की वो चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सेना को निर्देश दिया है कि वह फिलहाल ईरान पर कोई नया हमला न करे। द न्यूयॉर्क टाइम्स और एक्सियोस की रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को अपने टॉप एडवाइजर्स और कैबिनेट मंत्रियों के साथ हुई मीटिंग के बाद ट्रंप ने यह अहम फैसला लिया। लगातार 13 दिनों तक ईरान पर सैन्य कार्रवाई कराने के बाद ट्रंप ने अब इस पर ब्रेक लगा दिया है। उन्होंने साफ किया है कि वे किसी बड़े युद्ध के बजाय ईरान के साथ बातचीत करके एक समझदारी भरा समझौता करना चाहते हैं।सैन्य अधिकारियों की चेतावनीरिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप को चेतावनी दी थी कि अगर यह सैन्य अभियान ऐसे ही जारी रहा, तो मिडिल-ईस्ट में तैनात अमेरिकी सेना के पास पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों और एयर डिफेंस हथियारों की भारी कमी हो सकती है। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने सलाह दी कि बड़े पैमाने पर युद्ध जारी रखने से रक्षा हथियारों का स्टॉक खत्म हो सकता है, जिससे वहां मौजूद अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसे भी पढ़ें: Pakistan Army पर अंधा भरोसा न करे America, विशेषज्ञ ने &#039;Hybrid System&#039; पर दी बड़ी चेतावनीक्या यह फैसला हमेशा के लिए है?एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी यह पूरी तरह साफ नहीं है कि हमलों पर रोक का यह फैसला हमेशा के लिए है या कुछ समय के लिए। हालांकि, अगर राष्ट्रपति ट्रंप दोबारा आदेश देते हैं, तो अमेरिकी सेना बहुत ही कम समय में हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। सूत्रों का कहना है कि सेना ने आगे के ऑपरेशन्स की योजनाएं बनाकर रखी हैं, लेकिन फिलहाल ट्रंप ने उन्हें आगे बढ़ने की हरी झंडी नहीं दी है। इस पूरे मुद्दे पर व्हाइट हाउस ने कोई आधिकारिक बयान देने से मना कर दिया है।ईरान के साथ बातचीत से समझौता करना ही समझदारीशुक्रवार को रोजाना की तरह सेना ने राष्ट्रपति के सामने हमले का प्लान पेश किया था, लेकिन ट्रंप ने उसे मंजूरी नहीं दी। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके पास हमले तेज करने या ईरान की पूरी ताकत को तबाह करने का विकल्प मौजूद है, लेकिन बातचीत ही सबसे सही रास्ता है।ट्रंप ने कहा, &quot;हम इस समय ईरान के प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहे हैं। मुझे लगता है कि वक्त बीतने के साथ वे भी बातचीत को लेकर सीरियस हो रहे हैं। हमारी सेना किसी भी एक्शन के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन फिलहाल हम बातचीत को मौका दे रहे हैं।&quot; इसे भी पढ़ें: Spain Fire Crisis: 70 हजार लोगों ने छोड़ा घर, Madrid में धुएं का गुबार, प्रशासन ने जारी किया Emergency Alertइजरायल था हाई अलर्ट परइस पूरे घटनाक्रम के दौरान इजरायल पूरी तरह अलर्ट मोड पर था। इजरायली अधिकारियों को लग रहा था कि अमेरिका शुक्रवार को फिर बड़ा हमला कर सकता है। इजरायल को यह डर था कि अमेरिका के हमले के जवाब में ईरान उन पर पलटवार कर सकता है, इसलिए उन्होंने अपनी सुरक्षा तैयारियां पूरी कर ली थीं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:10:46 +0530</pubDate>
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<title>&amp;apos;जिहाद और प्रतिरोध के अलावा कोई रास्ता नहीं&amp;apos;, Mojtaba Khamenei ने Israel के खिलाफ Hezbollah के रुख की तारीफ़ की</title>
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<description><![CDATA[ क्षेत्र में जारी भारी तनाव और संघर्ष के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने इज़राइल के खिलाफ लेबनान के हथियारबंद गुट हिज़्बुल्लाह के मजबूत प्रतिरोध और संघर्ष की जमकर तारीफ की है। खामेनेई ने हिज़्बुल्लाह के हौसले को दुनिया भर के दबे-कुचले लोगों के लिए उम्मीद और आज़ादी का प्रतीक करार दिया। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म &#039;X&#039; पर की गई एक पोस्ट में, खामेनेई ने हिज़्बुल्लाह के महासचिव शेख़ नईम कासिम और गुट के लड़ाकों द्वारा भेजी गई वफ़ादारी की चिट्ठी का जवाब दिया। उन्होंने इज़राइल और उसके सहयोगियों की सैन्य आक्रामकता के सामने &quot;अडिग चट्टान&quot; की तरह डटे रहने के लिए हिज़्बुल्लाह की सराहना की।जिहाद और प्रतिरोध के अलावा आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं: खामेनेईखामेनेई ने कहा, &quot;आज, जब दुनिया के देश अमेरिकी सरकार और अपराधी ज़ायोनियों (जो जिंदगियों और पीढ़ियों को बर्बाद करने वाले हैं) के ज़ुल्म और अत्याचार से तंग आ चुके हैं, तो जिहाद और प्रतिरोध के अलावा आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं बचा है।&quot;नेता ने कहा कि हिज़्बुल्लाह का लगातार चल रहा अभियान &quot;दुनिया के आज़ाद देशों के लिए &#039;ग्लोबल एरोगेंस&#039; (वैश्विक अहंकार) और उसके प्यादों के ज़ुल्म और अत्याचार से आज़ादी की उनकी कोशिश में एक प्रेरणादायक संदेश&quot; है।खामेनेई ने हिज़्बुल्लाह के कमांडरों और लड़ाकों के हौसले की भी तारीफ़ की। उन्होंने कहा कि उनकी प्रतिबद्धता इस्लामी सिद्धांतों, धार्मिक वादों और दिवंगत पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के साथ-साथ इमाम खुमैनी की विरासत पर आधारित है। उन्होंने कहा, &quot;इस्लामी क्रांति के महान शहीद नेता इमाम सैयद अली खामेनेई द्वारा तय की गई नीति के अनुसार, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान इन दबे-कुचले लेकिन ताकतवर लड़ाकों की रक्षा को अपनी रणनीतिक ज़िम्मेदारी मानता है।&quot; इसे भी पढ़ें: पेपर लीक पर सरकार का बड़ा प्रहार! लोकसभा में पेश होगा नया सख्त विधेयक, 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ का जुर्मानाUS-ईरान समझौते में लेबनान पर इज़राइली हमलों को खत्म करना शामिल होना चाहिएखामेनेई ने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान हिज़्बुल्लाह और लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा को एक रणनीतिक ज़िम्मेदारी मानता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका से जुड़े उस &quot;थोपे गए युद्ध&quot; (जैसा कि उन्होंने इसे बताया) को खत्म करने के लिए किसी भी समझौते में लेबनान के खिलाफ इज़राइली सैन्य कार्रवाई को खत्म करना भी शामिल होना चाहिए। ईरानी नेता ने दक्षिणी लेबनान के लोगों के हौसले और समर्थन की भी तारीफ़ की, साथ ही मारे गए हिज़्बुल्लाह नेता सैयद हसन नसरल्लाह और गुट के अन्य कमांडरों को श्रद्धांजलि दी। खामेनेई ने कहा कि लड़ाकों ने हिज़्बुल्लाह को एक &quot;छोटे पौधे&quot; से बदलकर एक &quot;विशाल पेड़&quot; बना दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिशों से इस्लामी दुनिया में लेबनान का मान-सम्मान बढ़ा है।पूर्व महासचिव सैयद हसन नसरल्लाह समेत शहीद हुए लड़ाकों को श्रद्धांजलि देते हुए, सर्वोच्च नेता ने कहा कि उनके बलिदानों ने हिज़्बुल्लाह को &quot;एक छोटे पौधे से एक विशाल पेड़&quot; में बदल दिया है, जिससे इस्लामी दुनिया में लेबनान का सम्मान बढ़ा है। इसे भी पढ़ें: France India Defence Deal | फ्रांस अगस्त के मध्य तक भारत के 114 राफेल जेट के &#039;लेटर ऑफ़ रिक्वेस्ट&#039; का दे सकता है जवाबखामेनेई की ये बातें क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आई हैं और हिज़्बुल्लाह के लिए तेहरान के लगातार राजनीतिक और वैचारिक समर्थन को फिर से पुष्ट करती हैं। Stay updated with International
News in Hindi on Prabhasakshi Today, as the nations of the world have grown weary of the tyranny and oppression of the US government and the criminal Zionists, who are the destroyers of lives and generations, there remains no path forward except jihad and resistance.— Ayatollah Mojtaba Khamenei (@MKhamenei_ir) July 26, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:10:45 +0530</pubDate>
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<title>Typhoon Noul का तांडव! चीन के Guangdong में सर्वोच्च चेतावनी, 400 से ज्यादा Flights रद्द</title>
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<description><![CDATA[ चीन के दक्षिणी हिस्से में नौल नामक शक्तिशाली तूफान को लेकर खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। तूफान के गुआंगडोंग प्रांत के तटीय इलाके से टकराने की आशंका को देखते हुए चीन के राष्ट्रीय मौसम केंद्र ने अपनी चार स्तरीय चेतावनी व्यवस्था के तहत सबसे उच्च स्तर की लाल चेतावनी जारी कर दी है। प्रशासन ने लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।मौजूद जानकारी के अनुसार शनिवार देर रात नौल तूफान गुआंगडोंग प्रांत के हुइझोउ शहर के हुइदोंग काउंटी से लगभग 100 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित था। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक तूफान के केंद्र के आसपास हवाओं की रफ्तार बेहद तेज है और इसकी शक्ति लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि यह तूफान उत्तर-पश्चिम दिशा में लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है और गुआंगडोंग के तट से टकराने से पहले और अधिक ताकतवर हो सकता है।बता दें कि चीन का राष्ट्रीय मौसम केंद्र देश में आने वाले बड़े तूफानों के दौरान चार स्तर की चेतावनी जारी करता है। इनमें लाल चेतावनी सबसे गंभीर मानी जाती है। ऐसी स्थिति में स्थानीय प्रशासन को तुरंत राहत और बचाव की तैयारियां तेज करने तथा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए जाते हैं।तूफान के खतरे को देखते हुए शनिवार को 410 से अधिक हवाई उड़ानें रद्द कर दी गईं। इसके अलावा लगभग 150 तेज रफ्तार रेल सेवाओं का संचालन भी रोक दिया गया, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। परिवहन सेवाओं पर इसका व्यापक असर पड़ा है और हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुई हैं।गौरतलब है कि तूफान के तट से टकराने के बाद इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ने और धीरे-धीरे कमजोर पड़ने की संभावना जताई गई है। हालांकि इससे पहले भारी वर्षा, तेज हवाओं और समुद्री लहरों के ऊंचा उठने का खतरा बना हुआ है, जिसके कारण तटीय इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।उधर चीन के राष्ट्रीय बाढ़ नियंत्रण और सूखा राहत मुख्यालय ने गुआंगडोंग प्रांत में बाढ़ और तूफान से निपटने के लिए आपात प्रतिक्रिया स्तर को बढ़ाकर तीसरे स्तर पर कर दिया है। वहीं जियांगशी और हुनान प्रांतों में चौथे स्तर की बाढ़ आपात प्रतिक्रिया लागू की गई है। इसके अलावा फुजियान, जियांगशी, हेनान, हुबेई, हुनान, गुआंगडोंग और गुआंगशी सहित कई प्रांतों में भी चेतावनी जारी की गई है।लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय गृह विभाग ने 28 अस्थायी आश्रय स्थल भी तैयार किए हैं, जहां जरूरत पड़ने पर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित ठहराया जाएगा। प्रशासन लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने तथा सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि राहत और बचाव दल पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:10:45 +0530</pubDate>
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<title>योरोप में जंगल की आग का क़हर, स्पेन और फ़्रांस में भीषण स्थिति</title>
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<description><![CDATA[ योरोप में जंगल की आग का दायरा तेज़ी से बढ़ रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के योरोप कार्यालय के नए आँकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में पूरे योरोप में जंगल की आग से जली भूमि का क्षेत्रफल 57 प्रतिशत बढ़ा है. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:10:07 +0530</pubDate>
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<title>भारत: प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ, यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल</title>
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<description><![CDATA[ भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है. इसके साथ ही भारत में विश्व धरोहर स्थलों की संख्या बढ़कर 45 हो गई है. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:10:00 +0530</pubDate>
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<title>मध्य पूर्व: लाल सागर में हूती हमलों से व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का ख़तरा</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि अमेरिका-ईरान युद्ध के और फैलने का ख़तरा बढ़ रहा है. मध्य पूर्व में तेज़ होती लड़ाई और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियन्त्रण को लेकर जारी टकराव से दुनिया भर में जहाज़ों की आवाजाही भी ख़तरे में है. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:09:57 +0530</pubDate>
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<title>Middle East Conflict | अमेरिका ने ईरान पर लगातार 12वीं रात किए हमले, तेहरान ने दी &amp;apos;जैसे को तैसा&amp;apos; जवाब देने की चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष अब और अधिक भयावह रूप लेता जा रहा है। गुरुवार तड़के अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ लगातार 12वीं रात भारी गोलाबारी और हवाई हमले किए। दोनों देशों के बीच तनाव उस समय चरम पर पहुँच गया जब सैन्य ठिकानों के साथ-साथ नागरिक और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की धमकियाँ दी जाने लगीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस सैन्य क्षमता को पूरी तरह से नष्ट करना है, जिससे वह होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री मार्गों से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों तथा नाविकों के लिए खतरा पैदा कर रहा है।ये ताजा हमले ऐसे समय में हुए हैं जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को चेतावनी दी थी कि अगर ईरान जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) में किसी जहाज पर गोलीबारी करता है, तो अमेरिका हर बार एक पुल या पावर प्लांट को नष्ट कर देगा।ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, &quot;अब से, जब भी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर गोलीबारी करेगा - चाहे वह मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य उपकरण या हथियार से हो - तो अमेरिका एक पुल या पावर प्लांट पर बम गिराकर उसे नष्ट कर देगा।&quot;&#039;जैसे को तैसा&#039;: ईरान ने निर्णायक जवाब देने की कसम खाईईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने चेतावनी दी कि ईरान के खिलाफ किसी भी हमले - जिसमें देश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला भी शामिल है - का &quot;निर्णायक जवाब&quot; दिया जाएगा और इसमें शामिल लोगों को भी &quot;वैध लक्ष्य&quot; माना जाएगा।X पर एक पोस्ट में अरागची ने कहा, &quot;हमारी रक्षा नीति स्पष्ट है: जैसे को तैसा। ईरान के खिलाफ किसी भी हमले - जिसमें हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला भी शामिल है - का जोरदार और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। जो लोग ऐसे हमले में मदद करेंगे, चाहे वह किसी भी तरह की मदद हो, उन्हें भी वैध लक्ष्य माना जाएगा।&quot;ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने कहा कि अगर ईरान की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित नहीं रहेगा। उन्होंने दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति युद्ध से पहले जैसी नहीं रहेगी। &quot;इस युद्ध का समीकरण साफ़ है: या तो सब या कोई नहीं! जिस इलाके में हम तेल नहीं बेचते, वहां कोई और भी तेल नहीं बेचेगा। अगर हमारी सुरक्षा पक्की नहीं हुई, तो कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित नहीं रहेगा, और जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) की सुरक्षा अमेरिकी सेनाओं की गैर-मौजूदगी में ही है। हमने बार-बार कहा है कि जलडमरूमध्य के हालात युद्ध से पहले जैसी स्थिति में वापस नहीं आएंगे,&quot; उन्होंने कहा।होर्मुज में तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटकाइस जलडमरूमध्य के बंद होने से - जिससे शांति के समय दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल और गैस का व्यापार होता था - वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका लगा है और इसका असर मध्य पूर्व से कहीं आगे तक फैला है। यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में सऊदी जहाजों को निशाना बनाने की नई धमकी ने व्यापार के एक और अहम रास्ते (चोकपॉइंट) को खतरे में डाल दिया है।ट्रेडिंग में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 93 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई। यह इस महीने की शुरुआत में 72 डॉलर प्रति बैरल से कम थी, जो लगभग युद्ध से पहले की कीमत थी। गैसोलीन की कीमतें भी बढ़ रही हैं।ईरान का कहना है कि उसे जलडमरूमध्य में ट्रैफिक को मैनेज करने और संभवतः फीस वसूलने का अधिकार है, जो युद्ध से पहले सभी के लिए खुला और टोल-फ्री था। उसने उन जहाजों पर हमला किया है जो जलडमरूमध्य के उस रास्ते का इस्तेमाल कर रहे थे जिसकी निगरानी अमेरिकी सेना करती है और जिसे तेहरान के नियंत्रण से बाहर रखा गया था। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:15 +0530</pubDate>
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<title>China को अचानक जयशंकर ने ऐसा क्या कहा? दुनिया में मची हलचल</title>
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<description><![CDATA[ ड्रैगन के सबसे बड़े दुश्मन देश की धरती पर खड़े होकर भारत ने आज एक ऐसा ऐलान कर दिया है जिसे सुनकर बल्जिंग के हुक्मरानों की नींद तक उड़ गई है। उनके पूरे रक्षा और कूटनीतिक तंत्र में खलबली मच गई है। फिलीपींस की राजधानी मनीला में जहां चीन की दादागिरी के खिलाफ रोज विरोध के सुर उठते हैं। उसी मंच से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन के तथाकथित चाणक्य वोंगी को आंखें दिखाकर वह कह डाला जो पिछले कई दशकों में कोई नहीं कह पाया। मैसेज बिल्कुल क्लियर है। या तो एलएसी पर शांति मानो वरना भारत के सब्र का इम्तिहान मत लो और यह 112 अरब डॉलर का पहाड़ जैसा व्यापार घाटा। अब ड्रैगन की यह खुली लूट किसी कीमत पर नहीं चलेगी। जरा स्थिति की गंभीरता को समझिए। इसे भी पढ़ें: चीन ने क्यों कहा भारत का एहसान कभी नहीं भूलेंगे.. दुनिया हैरान!मनीला जो दक्षिण चीन सागर में चीन की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ एक प्रमुख मोर्चा है। वहां भारत ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर ड्रैगन को एक बहुत बड़ा रणनीतिक संदेश दिया है। जब भारत और चीन के विदेश मंत्री आमने-सामने बैठे तो चीन के चाणक्य वांगी को लगा होगा कि वह हमेशा की तरह कूटनीतिक बातों से गुमराह कर देंगे। लेकिन एच शंकर ने आते ही कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने वांगी को दो टूक चेतावनी दी कि रिश्ते तब तक सामान्य नहीं हो सकते जब तक वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर शांति और स्थिरता नहीं लौटती। अक्टूबर 2024 में जो समझौते हुए थे उनका सम्मान करो वरना परिणाम भुगतने को तैयार रहो। भारत अब दबाव की राजनीति के आगे रत्ती भर भी झुकने वाला नहीं है। लेकिन असली वार तो इकोनॉमी के मोर्चे पर हुआ जिसने चीन की कमर ही तोड़ दी। इसे भी पढ़ें: भयंकर मारपीट के बाद फिर से चीन-फिलीपींस ने मचाया बवाल, राजदूतों को किया तलब!भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर के खौफनाक स्तर को छू चुका है। चीन अपनी दगाबाजी दिखाते हुए अक्सर भारत को क्रिटिकल टेक्नोलॉजी, मशीनरी और रेयर अर्थ एलिमेंट का निर्यात रोक देता है। यानी व्यापार के मैदान में पूरी बेशर्मी से एकाधिकार जमाने की कोशिश करता है। लेकिन इस बार ड्रैगन की दाल नहीं गली। एस जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री के सामने चीनी बाजार में भारतीय उत्पादों को निष्पक्ष फेयर एंट्री देने की कसमसाती मांग रख दी। उन्होंने साफ कह दिया है कि ग्लोबल उथल-पुथल के इस दौर में सप्लाई चैन में हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मैरिटाइम ट्रेड और इंटरनेशनल लॉस का उल्लंघन अब नहीं चलेगा। मनीला के इस मंच से भारत ने दुनिया को बता दिया है कि नया भारत अपनी शर्तों पर बात करता है। चाणक्य बनने का ढोंग करने वाले वोंगी को जयशंकर ने साफ बता दिया है कि कूटनीति के रण में भारत हर मोर्चे पर भारी पड़ना जानता है। लद्दाख की सरहद से लेकर व्यापार की महाजंग तक भारत का रुख बिल्कुल चट्टान की तरह अडिंग है। बीजिंग अलर्ट हो चुका है और अब उसे यह बात माननी ही पड़ेगी।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:14 +0530</pubDate>
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<title>Indus Waters Treaty पर India का दोटूक जवाब, Cross&#45;Border Terrorism के रहते Pakistan से कोई सहयोग नहीं</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए इस्लामाबाद पर सीमा पार आतंकवाद को राज्य नीति के एक उपकरण के रूप में बार-बार इस्तेमाल करने और जम्मू-कश्मीर पर &quot;झूठा नैरेटिव&quot; फैलाने का आरोप लगाया। नई दिल्ली ने यह भी दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग &quot;हमेशा से रहा है, है और रहेगा। ये टिप्पणियां संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत परवथानेनी हरीश ने बुधवार (अमेरिकी स्थानीय समय) को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्राकृतिक संसाधन शासन: शांति, सुरक्षा और समृद्धि की नींव&quot; विषय पर उच्च स्तरीय खुली बहस के दौरान कीं।भारत ने पाकिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मंच का दुरुपयोग करने का आरोप लगायाबहस के दौरान पाकिस्तान के हस्तक्षेप पर प्रतिक्रिया देते हुए, राजदूत हरीश ने कहा कि भारत का इरादा द्विपक्षीय मुद्दों को उठाने का नहीं था, लेकिन इस्लामाबाद द्वारा कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय मंच का दुरुपयोग करके एक भ्रामक कहानी गढ़ने के बाद भारत को जवाब देने के लिए विवश होना पड़ा।भारतीय राजदूत ने कहा मंच पर अन्य मुद्दों को उठाने का हमारा कोई इरादा नहीं था, लेकिन मेरे प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तान को जवाब देने के लिए विवश होना पड़ा, क्योंकि उसने आज की चर्चा का दुरुपयोग करके अपनी झूठी कहानी को आगे बढ़ाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जम्मू और कश्मीर की स्थिति संवैधानिक और कानूनी रूप से स्थापित है, और इस क्षेत्र पर पाकिस्तान के बार-बार किए जाने वाले दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहा है, है और रहेगा। यह संवैधानिक और कानूनी वास्तविकता है जिसे पाकिस्तान जानबूझकर नजरअंदाज करना चुनता है।भारत ने जम्मू और कश्मीर पर अपना रुख दोहरायाभारतीय राजदूत ने यह भी कहा कि जम्मू और कश्मीर से संबंधित एकमात्र अनसुलझा मुद्दा उन क्षेत्रों से जुड़ा है जिन पर भारत का कहना है कि पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। जम्मू और कश्मीर के संबंध में एकमात्र लंबित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारत की संप्रभु भूमि पर खुला आक्रमण और अवैध कब्जा है।सिंधु जल संधि पर तीखा संदेशराजदूत हरीश ने सिंधु जल संधि पर भी बात की और सार्थक सहयोग को आतंकवाद मुक्त वातावरण से जोड़ा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीमा पार आतंकी गतिविधियों के साथ विश्वास और सद्भावना नहीं रह सकती। “सिंधु जल संधि पर हमारा रुख स्पष्ट और स्थिर है। आपसी विश्वास और सद्भावना के आधार पर सहयोग की उम्मीद तब तक नहीं की जा सकती जब तक सीमा पार आतंकवाद को राज्य नीति के एक उपकरण के रूप में नियमित रूप से इस्तेमाल किया जाता है।” यह बयान आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर दोनों पड़ोसी देशों के बीच जारी तनाव के बीच आया है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:14 +0530</pubDate>
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<title>Ayodhya Ram Mandir Donation Theft: भक्तों का विश्वास बहाल करने के लिए VHP&#45;RSS और संतों का मास्टर Action Plan</title>
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<description><![CDATA[ अयोध्या राम मंदिर में दान की रकम चोरी होने की कथित घटना के सामने आने के बाद पहली बार, वरिष्ठ संत और विश्व हिंदू परिषद (VHP) व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रतिनिधि गुरुवार को इस घटना के असर और आगे की कार्रवाई पर चर्चा करने के लिए बैठक करेंगे। यह बैठक अयोध्या में मणि राम दास छावनी में दोपहर 3 बजे होगी। उम्मीद है कि इसमें श्रद्धालुओं का भरोसा फिर से कायम करने, दान चोरी के मामले में जवाबदेही तय करने और मंदिर के धार्मिक कामकाज के प्रबंधन पर चर्चा की जाएगी।बड़े संत हाई-लेवल मीटिंग में शामिल होंगेराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की दोबारा बनी धार्मिक समिति के कई सदस्यों के इस मीटिंग में शामिल होने की उम्मीद है। इनमें निर्मोही अखाड़े के संत दिनेन्द्र दास, मणि राम छावनी के स्वामी कमलनयन दास, रामवल्लभ कुंज के महंत राजकुमार दास, राम कथा कुंज के स्वामी रामानन्द दास और स्वामी मिथिलेशानन्दिनी शरण शामिल हैं। अयोध्या भर के मंदिरों और मठों के संतों को भी निमंत्रण भेजे गए हैं। इस सभा में 150 से ज़्यादा संतों के शामिल होने की उम्मीद है। मंदिर की पूजा-पद्धति और दान की चोरी का मामला चर्चा का मुख्य विषय रहेगास्थानीय संतों के अनुसार, चर्चा के मुख्य मुद्दों में से एक यह हो सकता है कि राम मंदिर में पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों का जिम्मा सिर्फ़ रामानंदी संप्रदाय के सदस्यों के पास ही हो। बैठक के मुख्य एजेंडे में दान की चोरी के मामले के बाद भक्तों का भरोसा फिर से जीतना और मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के लिए कड़ी सज़ा की मांग करना भी शामिल होगा। सूत्रों से पता चला है कि बैठक में शामिल लोग इस विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और भक्तों पर इसके असर पर भी चर्चा कर सकते हैं।इसे भी पढ़ें: कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च से सुलगते सवाल और राजनीतिक निहितार्थचंपत राय की भूमिका पर भी चर्चा हो सकती हैहालांकि चंपत राय ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफ़ा दे दिया है, लेकिन अयोध्या के कई संत अभी भी उनका समर्थन कर रहे हैं। बैठक के दौरान दान की चोरी के कथित मामले में उनकी भूमिका पर भी चर्चा हो सकती है, खासकर ट्रस्ट के भीतर हाल की घटनाओं को देखते हुए। ट्रस्ट की धार्मिक समिति का हाल ही में पुनर्गठन किया गया है और गोविंद देव गिरी को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सात सदस्यीय पैनल में से पांच सदस्य अयोध्या के संत हैं। दान की चोरी के मामले में अब तक आठ लोग गिरफ़्तारदान की चोरी के मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया है। गिरफ़्तार किए गए लोगों में मंदिर के कैशियर से लेकर दूसरे कर्मचारी तक शामिल हैं। वे सभी अभी न्यायिक हिरासत में हैं। आरोपियों की पहचान राम शंकर यादव उर्फ़ टिन्नू यादव, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला और करुणेश पांडे के तौर पर हुई है।इसे भी पढ़ें: ज़रूरत पड़ी तो मैं दिल्ली जाऊँगी... CJP के विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने का ममता ने दिया संकेतआज की बैठक क्यों अहम हैयह बैठक ऐसे अहम समय पर हो रही है जब मंदिर के दान की कथित चोरी ने भक्तों के मन में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और लोगों का ध्यान इस ओर खींचा है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में अयोध्या के धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रिया तय होने और विवाद के बाद मंदिर के मैनेजमेंट में भरोसा मज़बूत होने की उम्मीद है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:13 +0530</pubDate>
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<title>Red Sea Crisis: Saudi Tankers पर हमले से Global Trade पर खतरा, US&#45;Iran के बीच आर&#45;पार की जंग तेज</title>
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<description><![CDATA[ यमन के ईरान-समर्थित हूथी विद्रोहियों ने गुरुवार तड़के कहा कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया है। वहीं, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान के खिलाफ लगातार 12वीं रात हमले किए, क्योंकि दोनों पक्ष अहम शिपिंग रास्तों पर नियंत्रण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हूथी हमले से संघर्ष के और फैलने का खतरा बढ़ गया है, जिसका असर ग्लोबल ट्रेड, ईंधन की कीमतों और व्यापक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। साथ ही, युद्ध खत्म करने की कोशिशों में प्रगति के कोई संकेत नहीं दिखे, जबकि क्षेत्रीय देश तनाव कम करने के लिए लगातार जोर दे रहे हैं। हूतियों ने कहा कि उन्होंने लाल सागर में दो टैंकरों, एन्सेलिया और लैला, पर हमला किया, जिससे दोनों जहाजों में आग लग गई। अगर इसकी पुष्टि हो जाती है, तो यह इस हफ्ते की शुरुआत में बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य से सऊदी-लिंक्ड जहाजों की आवाजाही रोकने की घोषणा के बाद किसी जहाज पर उनका पहला हमला होगा। उन्होंने कहा कि यह कदम यमन पर सऊदी अरब की नाकेबंदी और विद्रोहियों के कब्जे वाली राजधानी सना के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हाल ही में हुए हमले के जवाब में उठाया गया था।इसे भी पढ़ें: West Asia Crisis: Jordan ने Aqaba में मार गिराईं Iranian Missiles, US Strikes के बाद क्षेत्र में भारी तनावअरब प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे पर स्थित बाब अल-मंडेब, लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला एक अहम शिपिंग मार्ग है। मिस्र की स्वेज नहर के रास्ते यूरोप और एशिया के बीच होने वाले वैश्विक व्यापार का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा (जिसमें दुनिया का एक-चौथाई कंटेनर ट्रैफिक भी शामिल है) यहीं से गुजरता है। सऊदी सरकारी मीडिया ने &#039;जनरल अथॉरिटी ऑफ़ ट्रांसपोर्ट&#039; के एक अज्ञात सूत्र के हवाले से बताया कि रेड सी में रात भर हुए हमले के बाद &#039;एन्सेलिया&#039; (Encelia) में आग लग गई। सऊदी प्रेस एजेंसी ने कहा कि हमले से जहाज़ के अगले हिस्से में आग लग गई, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। इसमें &#039;लैला&#039; (Layla) का ज़िक्र नहीं था। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स सेंटर ने कहा कि उसे सऊदी अरब में अल-शुकाइक़ (Al Shuqaiq) से दक्षिण-पश्चिम में 70 नॉटिकल मील (यानी 130 किलोमीटर) दूर एक टैंकर के &quot;अज्ञात प्रोजेक्टाइल&quot; (मिसाइल या रॉकेट जैसी चीज़) की चपेट में आने की रिपोर्ट मिली है, और बताया कि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। यह नई लड़ाई तब हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर विवाद चल रहा था। यह दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई के लिए एक अहम रास्ता है, जो ज़्यादातर बंद ही रहता है। शांति के समय, दुनिया के व्यापार का पांचवां हिस्सा तेल और गैस इसी रास्ते से गुज़रता था, और इसके बंद होने से मध्य पूर्व के अलावा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। ईरान का कहना है कि उसे वहां ट्रैफिक को मैनेज करने का अधिकार है और वह फीस भी ले सकता है। उसने उन जहाजों पर हमला किया है जो उस रास्ते का इस्तेमाल कर रहे थे जिसकी निगरानी अमेरिकी सेना करती है और जिसे तेहरान के कंट्रोल से बाहर रखा जाना था।इसे भी पढ़ें: Iran के सपोर्ट में उतरे ऐसे खतरनाक लड़ाके, Bab-Al-Mandeb बंद,  MBS को अमेरिका बचा पाएगा?अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसके हमलों का मकसद &quot;ईरान की उस क्षमता को और कम करना था जिससे वह इलाके के पानी से गुज़रने वाले आम नाविकों और कमर्शियल जहाजों को खतरा पहुंचा सकता है।&quot; अमेरिका होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर फिर से कंट्रोल हासिल करना चाहता है और इंटरनेशनल शिपिंग को बहाल करना चाहता है। ईरान के हमलों के जवाब में, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर फिर से नाकेबंदी लागू कर दी और पूरे देश में अपने हमले का दायरा बढ़ा दिया। मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया कि अमेरिकी सेना जल्द ही पहाड़ के नीचे गहराई में बन रही ईरान की एक न्यूक्लियर साइट को निशाना बना सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:12 +0530</pubDate>
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<title>Bangladesh News: शेख हसीना से संपर्क की खबरों ने बढ़ाई बेचैनी, मुश्किल में President Mohammed Shahabuddin की कुर्सी</title>
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<description><![CDATA[ राजनीतिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के जल्द ही इस्तीफ़ा देने की संभावना है, जबकि उनका कार्यकाल खत्म होने में अभी लगभग दो साल बाकी हैं। शहाबुद्दीन को पिछली संसद ने चुना था और जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद, जिसमें शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार गिर गई थी, वे अपने संवैधानिक पद पर बने रहने वाले एकमात्र व्यक्ति हैं। पिछले दो दिनों में ये खबरें तेज़ी से फैलीं कि बांग्लादेश के मुख्यधारा के कई मीडिया संस्थानों का मानना ​​है कि प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान की सरकार अब शहाबुद्दीन से सहज नहीं है। हसीना 5 अगस्त, 2024 को भारत भाग गई थीं और तब से वहीं रह रही हैं। सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के एक वरिष्ठ नेता ने बिना ज़्यादा जानकारी दिए बताया, संभावना है कि वह (शहाबुद्दीन) जल्द ही इस्तीफ़ा दे देंगे। अख़बार प्रोथोम आलो ने सरकार के एक उच्च-स्तरीय सूत्र के हवाले से कहा कि सरकार उन खबरों से नाराज़ थी जिनमें कहा गया था कि शहाबुद्दीन ने हाल ही में हसीना से फिर से संपर्क करने की कोशिश की थी।इसे भी पढ़ें: Tiger Lightning: बांग्लादेश में US Army और सशस्त्र बलों का सैन्य अभ्यास शुरू, आतंकवाद पर होगा प्रहारबीएनपी के एक वरिष्ठ नेता ने &#039;द डेली स्टार&#039; को यह भी बताया कि बांग्लादेश के राष्ट्रपति और हसीना के बीच हाल ही में हुई टेलीफ़ोन पर बातचीत उनके संभावित इस्तीफ़े का एकमात्र कारण नहीं थी। उन्होंने कहा कि मामला &quot;ज़्यादा जटिल&quot; है क्योंकि देश की राजनीतिक स्थिति तब और संवेदनशील हो गई थी जब अपदस्थ प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि वह इस साल दिसंबर में घर लौटेंगी। बांग्लादेश ने उनके घर लौटने के प्लान का &quot;स्वागत&quot; किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें कानून का सामना करना होगा। 17 नवंबर, 2025 को बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को मौत की सज़ा सुनाई। उन्हें विरोध-प्रदर्शन को दबाने में मुख्य भूमिका निभाने के लिए उनकी गैर-मौजूदगी में दोषी ठहराया गया था; इस विरोध-प्रदर्शन को अब &#039;जुलाई विद्रोह&#039; कहा जा रहा है।इसे भी पढ़ें: बांग्लादेश में पहली बार घुसे इजरायली एजेंट्स, भारत भी हैरान!1971 के मुक्ति संग्राम के अनुभवी और निचली अदालत के पूर्व जज शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए शपथ ली थी। बांग्लादेश के संविधान के अनुसार, अगर राष्ट्रपति इस्तीफा देते हैं, तो नए राष्ट्राध्यक्ष के चुने जाने तक संसदीय स्पीकर अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर काम करेंगे। यह ट्रिब्यूनल मूल रूप से 2010 में हसीना की सरकार ने 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना का साथ देने वालों पर मुकदमा चलाने के लिए बनाया था। हसीना के भारत भागने के बाद, मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने - जिसने तीन दिन बाद सत्ता संभाली थी - ट्रिब्यूनल के कानून में संशोधन किया। इस संशोधन से अवामी लीग सरकार के नेताओं और अधिकारियों पर मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप में मुकदमा चलाने की इजाज़त मिल गई। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:12 +0530</pubDate>
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<title>कंगाली और Forex Crisis से जूझता Pakistan, US से 10 Billion Dollar के Economic Package की बड़ी गुहार</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश होगा जिसने पिछले कुछ सालों में कर्ज मांगने के इतने दरवाजे खटखटाए हो जितने पाकिस्तान ने खटखटाए हैं। कभी आईएमएफ से बेल आउट, कभी चीन से अरबों डॉलर की मदद, कभी सऊदी अरब की जमा राशि के भरोसे, विदेशी मुद्रा भंडार बचाने की कोशिश तो कभी यूएई से राहत क्यों मिली? अब खबर है कि पाकिस्तान ने एक बार फिर अमेरिका से भी $10 अरब डॉलर की आर्थिक मांग जैसी एक बड़ी वित्तीय सुविधा की मांग कर दी है। लेकिन सवाल यही है कि आखिर कब तक आतंकियों को पालने वाले पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बार-बार उसी मोड़ पर क्यों पहुंच जाती है जहां उसे अपने दम पर नहीं बल्कि दूसरे देशों के सहारे खड़ा होना पड़ता है। दरअसल अमेरिका से सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने इस बार अमेरिका से $10 अरब डॉलर की एक्सचेंज स्टेबलाइजेशन सपोर्ट फैसिलिटी की मांग की और अगर यह सुविधा मिलती है तो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी। इसे भी पढ़ें: West Asia Crisis: Jordan ने Aqaba में मार गिराईं Iranian Missiles, US Strikes के बाद क्षेत्र में भारी तनावपाकिस्तानी रुपए पर दबाव भी कम होगा और उसे कुछ समय के लिए आर्थिक राहत मिल सकती है। यह मांग ऐसे समय में आई जब पाकिस्तान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ के  के कार्यक्रम के तहत आर्थिक सुधार लागू करने का दावा कर रहा है। इसके बावजूद इस्लामाबाद को अब एक और बड़े वित्तीय सहारे की जरूरत महसूस हो रही है। दरअसल पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या सिर्फ कर्ज नहीं बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था का बार-बार बाहरी मदद पर निर्भर हो जाना है। पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान ने रिकॉर्ड, महंगाई, विदेशी मुद्रा की भारी कमी, आयात संकट और आर्थिक अस्थिरता का सामना किया। साल 2023 में तो हालात ऐसे बन गए थे कि देश डिफॉल्ट के बेहद करीब पहुंच गया था। उस समय आईएमएफ के आपातकालीन पैकेज ने उसे तत्काल राहत दी थी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। आज भी पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा मित्र देशों की मदद, कर्ज के रोलओवर, और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मिलने वाली किस्तों पर निर्भर माना जाता है। इसे भी पढ़ें: China को अचानक जयशंकर ने ऐसा क्या कहा? दुनिया में मची हलचलरिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल में पाकिस्तान ने संयुक्त अरब अमीरात को लगभग $3.5 अरब डॉलर लौटाए थे। जिसके बाद सऊदी अरब ने नई वित्तीय सहायता देकर उसकी स्थिति संभालने की मदद की थी। देखा भी जाए तो पाकिस्तान की आर्थिक हालत किसी से नहीं छिपी। पिछले कुछ सालों में देश ने रिकॉर्ड महंगाई, विदेशी मुद्रा संकट, बेरोजगारी और जरूरी सामान की कमी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना किया है। कई मौकों पर आटे और सब्जियों की कमी के दौरान लंबी कतारें और आपस में लड़ाई झगड़े की तस्वीरें भी सामने आई। आज भी बड़ी आबादी, बढ़ती महंगाई और कमजोर अर्थव्यवस्था का बोझ उठा रही है। लेकिन फिर भी पाकिस्तान आतंकियों को पालनेपसने, उन्हें ट्रेनिंग देने और उन्हें हथियार देने से पीछे नहीं हट रहा। और इसी बीच एक बार फिर पाकिस्तान ने अमेरिका से मदद मांगी। अब अगर मान लीजिए अमेरिका ने इस $ अरब डॉलर की सुविधा को मंजूरी दे भी दी तो पाकिस्तान को जरूर कुछ समय के लिए राहत मिल जाएगी।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:11 +0530</pubDate>
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<title>ट्रंप की Saudi Arabia को दो&#45;टूक: Abraham Accords में शामिल होने पर ही मिलेगी Nuclear Deal को मंजूरी</title>
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<description><![CDATA[ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच सिविल न्यूक्लियर डील इस बात पर निर्भर करती है कि सऊदी अरब &#039;अब्राहम समझौते&#039; में शामिल होता है या नहीं। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि डील के तहत किसी भी तरह की &quot;सामग्री का संवर्धन&quot; (enrichment of material) नहीं होगा और इसमें सिर्फ़ सिविल न्यूक्लियर गतिविधियां ही शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका के ऊर्जा विभाग और सऊदी अरब के बीच जो सिविल न्यूक्लियर डील (इसमें मटीरियल का एनरिचमेंट नहीं होगा!) हो रही है - जो सिर्फ़ गैर-सैन्य इस्तेमाल के लिए है, जैसा कि ईरान और UAE (और दूसरे देशों) के पास पहले से है। उसे मंज़ूरी तो मिल जाएगी, लेकिन यह पूरी तरह से सऊदी अरब के बहुत सम्मानित और सफल &#039;अब्राहम समझौते&#039; में शामिल होने पर निर्भर करेगा। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अपनी पोस्ट में कहा कि अमेरिका सिविल (बिना एनरिचमेंट वाली) न्यूक्लियर सुविधाओं के ख़िलाफ़ नहीं है।इसे भी पढ़ें: Share Market में कोहराम और Crude Oil के बढ़ते दाम, Dollar के मुकाबले 96.59 के रिकॉर्ड स्तर पर लुढ़का रुपयाट्रंप का यह बयान वॉशिंगटन द्वारा रियाद के साथ एक ऐतिहासिक समझौते की घोषणा के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसके तहत सऊदी अरब में एक सिविलियन न्यूक्लियर प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। इस समझौते को सऊदी अरब के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है, जो इस क्षेत्र में ईरान का लंबे समय से प्रतिद्वंद्वी रहा है। हालांकि, AFP की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समझौते में जोखिम भी हैं और इससे मध्य पूर्व में न्यूक्लियर हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है, जो पहले से ही बरसों से चले आ रहे संघर्षों से जूझ रहा है। इसे भी पढ़ें: Red Sea Crisis: Saudi Tankers पर हमले से Global Trade पर खतरा, US-Iran के बीच आर-पार की जंग तेजअब्राहम समझौते पर सऊदी अरब का रुखअब्राहम समझौते की बात करें तो यह समझौतों का एक समूह है जिसका प्रस्ताव 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान रखा गया था। इनका मकसद अरब देशों और इज़राइल के बीच संबंधों को सामान्य बनाना और उनके बीच द्विपक्षीय संबंध स्थापित करना था। अब तक, केवल चार देशों ने अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं: संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, मोरक्को और सूडान। सऊदी अरब अब्राहम समझौते से दूर रहा है और उसका कहना है कि समझौते में शामिल होने के लिए इज़राइल और फ़िलिस्तीन के बीच शांति का रास्ता बनाना ज़रूरी है। उसका प्रस्ताव है कि अब्राहम समझौते में शामिल होने का फ़ैसला करने से पहले एक स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना होनी चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:11 +0530</pubDate>
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<title>Iran पर कहर बनकर टूटेगा America? फिर से निकाल दिया अपना ब्रह्मास्त्र</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका ने पहली बार अपने उस ब्रह्मास्त को जंग के मैदान में उतार दिया जिसके नाम मात्र से दुश्मन की सेना थर-थर कांपती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं बी वन लैंसर लॉन्ग रेंज बॉम्बर की। मंगलवार को जब दुनिया सो रही थी तब इन आसमानी शिकारियों ने ईरान के ठिकाने पर वो भी हमला किया जिसने तेहरान से लेकर मॉस्को तक हड़कंप मचा दिया।  मिलिट्री एक्सपर्ट्स इसे द बोन कहते हैं। यह अमेरिकी वायुसेना का वो बम वर्ष है जो सबसे भारी बम ले जाने में सक्षम है। अब B1 लेंसर बमबर अमेरिका का सबसे घातक संदेश है ईरान के लिए। इसकी खासियतों की बात करें तो सबसे पहले नंबर पर आता है रफ्तार। यह आवाज की गति यानी सुपरसोनिक स्पीड से भी तेज उड़ान भर सकता है। दूसरी खासियत है मारक क्षमता। यह दो दर्जन 2000 पाउंड से भारी भरकम बम या दर्जन क्रूज मिसाइलें एक साथ दाग सकता है। तीसरी खासियत है यह बहुत कम ऊंचाई पर उड़कर रडार को चकमा देने में माहिर है। और यह सबसे बड़ी खासियत है इसकी। इसे भी पढ़ें: आखिर कैसे थमेगा अमेरिका-ईरान युद्ध? कबतक राहत पाएगी दुनिया? समझिएअमेरिका ने इसे यूके के एयरबेस से उड़ाया है और सीधे ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉप्स यानी आईआरजीसी के ठिकाने को उड़ाने का आदेश दे दिया है। यह हमला सिर्फ सैन्य हमला नहीं है बल्कि ईरान को एक सीधा अल्टीमेटम था कि अब अमेरिका रुकने वाला नहीं है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस मिशन की गंभीरता को समझते हुए बहुत नपे तुले शब्दों में जानकारी साझा की है पूरी दुनिया के सामने। हालांकि उन्होंने सीधे B1 का नाम तो नहीं लिया लेकिन जो तबाही हुई वो गवाही दे रही है कि यह हमला यह हमला B1 का है। अब चलिए जानते हैं कहां-कहां हुई तबाही। क्या-क्या अमेरिका ने बयान दिया है। तो अमेरिका के निशाने पर थे पहला है ईरान के मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर। दूसरा है समंदर में हमला करने वाली बोट्स और नेवल कैपेबिलिटीज और तीसरा है ड्रोन स्टोरेज साइट्स। जहां से हुती और अन्य गुटों को ड्रोन की सप्लाई होती है। चौथा है लॉजिस्टिक हब और एयरक्राफ्ट हैंगर्स। मकसद साफ है हॉररमज स्टेट यानी स्टेट ऑफ हॉरमज में ईरान की दादागिरी को पूरी तरह खत्म करना। अमेरिका चाहता है कि ईरान जहाजों को निशाना बनाना बंद करे वरना उसका पूरा मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर खंडर बना दिया जाएगा। तो वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख इस बार पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक है। इसे भी पढ़ें: Red Sea Crisis: Saudi Tankers पर हमले से Global Trade पर खतरा, US-Iran के बीच आर-पार की जंग तेजडोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है। साफ कर दिया है कि अगर अगर ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो अमेरिका केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रंप ने साफ चेतावनी दे दी है कल की अगर फोरमज स्टेट में जहाजों पर हमले जारी रहेंगे तो अमेरिका तेहरान के पुलों, बिजली घरों और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा। यानी कुल मिलाकर इसका मतलब समझिए अमेरिका अब टोटल वॉर की तरफ आगे निकल चुका है। अगर ईरान की बिजली काट दी गई और उसके पुल उड़ा दिए गए तो पूरे देश में सिविल वॉर जैसी स्थिति सिचुएशन पैदा हो जाएगी। ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। उसने पलटवार करते हुए धमकी दी है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह खाड़ी देशों यानी गल्फ कंट्रीज के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएंगे अपनी मिसाइलों से। यानी यह जंग अब केवल दो देशों की नहीं बल्कि पूरी खाड़ी देशों मिडिल ईस्ट को तबाह करने वाली आग बन सकती है। यही नहीं ईरान के इशारे पर यमन के हूं विद्रोहियों ने रेड सी में एक नया मोर्चा खोल दिया है। कल भारत तक पर हमने आपको खबर भी दिखाई थी कि उन्होंने सऊदी अरब के जहाजों पर हमला कर दिया है और बाप अलमदेव में नाकाबंदी का ऐलान कर दिया है। इसके डर से दुनिया भर के कमर्शियल जहाजों ने अपने रास्ते बदल लिए हैं। जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महंगाई का एक नया खतरा मंडराने लगा है। एक तरफ बम बरस रहे हैं तो दूसरी तरफ क़तर और ओमान जैसे देश सुलह की कोशिशों में जुटे हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:10 +0530</pubDate>
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<title>आंखें नोंच लेंगे, ईरान ने दिया ऐसा जवाब, धमकी देना भूल जाएंगे ट्रंप</title>
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<description><![CDATA[ खाड़ी की जंग अब किसी भी पल एक विनाशकारी और विकराल रूप अख्तियार कर सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बारूदी जंग अब सीधे दोनों देशों के बुनियादी ढांचों को तबाह करने की धमकी तक पहुंच गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बेहद सख्त और खुली चेतावनी जारी की। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर लिखा अब से जब भी ईरान होर्मुज जल डमरू मध्य में किसी भी जहाज पर मिसाइल रॉकेट या ड्रोन से हमला करेगा तो अमेरिकी सेना उसके बदले में ईरान के अंदर स्थित एक पुल या बिजली घर यानी पावर प्लांट पर बम गिराकर उसे पूरी तरीके से नष्ट कर देगी। ट्रंप की ओर से आम लोगों के इस्तेमाल वाले बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की यह ताजा धमकी ऐसे वक्त में आई जब उनके द्वारा शुरू किया गया यह युद्ध बिना किसी अंत के लगातार बढ़ता जा रहा। डोनाल्ड ट्रंप के इस बारूदी धमकी के कुछ ही घंटों बाद ईरान की तरफ से बहुत बड़ा पलटवार और आक्रामक तीखा जवाब आया। इसे भी पढ़ें:  Iran पर कहर बनकर टूटेगा America? फिर से निकाल दिया अपना ब्रह्मास्त्रईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागुची ने श्रम को दो टुक जवाब देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान की रक्षा नीति बिल्कुल साफ है। हम हर आंख के बदले एक आंख लेंगे। ईरानी विदेश मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामकता जिसमें उनके बुनियादी ढांचे पर हमला भी शामिल है। उसका बेहद जबरदस्त और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। सिर्फ यही नहीं ईरान ने उन तमाम देशों को भी लपेटे में ले लिया जो अमेरिका की मदद कर रहे हैं। अराकची ने साफ कर दिया कि जो लोग भी अमेरिका की इस आक्रामकता में किसी भी तरह से मदद करेंगे उन्हें भी ईरान का दुश्मन और वैध निशाना माना जाएगा। असल में दोनों पक्षों के बीच चल रही यह भयंकर लड़ाई होरमूद जलमार्ग पर नियंत्रण को लेकर है। यह वो इलाका है जो पूरी दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई के लिए सबसे अहम लाइफ लाइन माना जाता है। लेकिन जंग की शुरुआत के बाद से ही यह रास्ता पूरी तरीके से ठप पड़ चुका है। इस नाकेबंदी के कारण दुनिया भर में आर्थिक उथल-पुथल का खतरा बढ़ गया। इसे भी पढ़ें: जहां घुसे वहीं दफ्न, US के ग्राउंड ऑपरेशन से पहले किया साफ, भयंकर तैयारी में लगा ईरानअमेरिका में होने वाली मध्यावधि चुनाव के ठीक पहले तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इस तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने लगातार 12वीं रात भी ईरान के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ अटैक किए। दूसरी तरफ लाल सागर में ईरान के सहयोगी यमन के हूं विद्रोहियों ने भी अपनी नाकेबंदी को और सख्त कर दिया। खबर है कि हूतियों ने सऊदी अरब के तट के पास दो बड़े तेल टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करके खाड़ी के इस वैकल्पिक रास्ते को दहला दिया। अमेरिका और ईरान के बीच की यह जुबानी और बारूदी जंग अब उस मुहाने पर आकर खड़ी हुई है जहां से पीछे हटना दोनों में से किसी एक के लिए भी मुमकिन नहीं है। अगर ट्रंप की धमकी के बाद अमेरिका ने ईरान के किसी पावर प्लांट को छुआ तो ईरान का आंख के बदले वाला आंख संकल्प पूरे खाड़ी क्षेत्र को राख के ढेर में तब्दील कर सकता है। जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पे पड़ सकता है। फिलहाल यह लड़ाई रुकने का नाम तो नहीं ले रही और ना ही ऐसा लग रहा है कि भविष्य में कोई समाधान निकल सकता है। क्योंकि यह लड़ाई अब बाबल मंदेव यानी हूतियों के इलाकों तक पहुंच चुकी है। हूतियों ने साफ तौर पर हर एक देशों को चेतावनी दी है कि अगर वह किसी भी तरीके से उनके नाकेबंदी का उल्लंघन सऊदी के लिए करते हैं तो फिर उन पर अटैक हो सकता है। खासतौर पर सऊदी से जाने वाला कोई जहाज  खाड़ी में चल रहा महायुद्ध पूरी तरीके से बेकाबू हो चुका है।  ]]></description>
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<title>अमेरिका यूक्रेन में निरर्थक जंग समाप्त करने में मदद के लिए तैयार, लेकिन समझौता आसान नहीं: मार्को रूबियो</title>
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<description><![CDATA[ मनीला, 23 जुलाई (एपी) अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बृहस्पतिवार को कहा कि ट्रंप प्रशासन यूक्रेन में “निरर्थक जंग” खत्म करने में मदद करने के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने माना कि किसी समझौते तक पहुंचने का कोई आसान या छोटा रास्ता नहीं है, इसके लिए लगातार कोशिशों और नए विचारों की जरूरत होगी। यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के प्रयासों को फिर से आगे बढ़ाने की संभावना तलाशने के उद्देश्य से अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने फिलीपीन की राजधानी मनीला में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि अमेरिका की मध्यस्थता वाली बातचीत कैसे रुकी हुई है।उन्होंने पहले भी इन्हें “असफल या कम से कम बेनतीजा” बताया था, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस काम के लिए प्रतिबद्ध हैं, “अगर हालात और कारक ऐसे बदल जाएं जिनसे यह मुमकिन हो सके”। रूबियो ने पत्रकारों से कहा, “चुनौती यही रही है - एक ऐसा समाधान जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें। हमने कोशिश की है और आगे भी कोशिश करते रहेंगे कि कोई बीच का रास्ता निकल सके।और अगर मौका मिला, तो हम वह भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।”
उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) के विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठक के इतर लावरोव और चीन के विदेश मंत्री समेत कई नेताओं के साथ मुलाकात की। अमेरिका के शीर्ष राजनयिक ने कहा कि ईरान के साथ लड़ाई तेज करने, यूक्रेन में रूस के युद्ध को खत्म करने का रास्ता खोजने और क्यूबा सरकार पर बदलाव के लिए दबाव डालने के बावजूद अमेरिका का ध्यान एशिया पर केंद्रित है। मंगलवार से बंद कमरे में जारी तीन दिवसीय वार्ता में पश्चिम एशिया में फिर तेज हुए संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध और दक्षिण चीन सागर की स्थिति प्रमुख मुद्दे रहे।दक्षिण चीन सागर में बृहस्पतिवार को एक नया टकराव भी सामने आया। रूबियो ने कहा, “हमेशा यह चिंता बनी रहेगी कि अमेरिका एक जगह पर इतना ज़्यादा ध्यान दे रहा है कि वह दूसरी जगह पर ध्यान नहीं दे पा रहा है।”
उन्होंने हालांकि कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र में मजबूत साझेदारी और आर्थिक संबंधों के कारण “हर दिन एशिया में सक्रिय” रहता है। रूबियो से मुलाक़ात के बाद, लावरोव ने पत्रकारों के सवालों को ज़्यादातर नज़रअंदाज़ कर दिया।मॉस्को में रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उन्होंने रूबियो से साफ कहा कि यूक्रेन को और हथियार देना “मंज़ूर नहीं है”। रूसी मंत्रालय ने कहा कि लावरोव ने “टकराव के राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान” के लिए रूस की तैयारी और पिछले साल अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तथा ट्रंप के बीच हुई शिखर बैठक में हुए समझौतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। रूबियो ने हालांकि कहा, “हमें नए सुझाव और नए विचार खोजने होंगे” जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हों।उन्होंने कहा कि यूक्रेन के लिए वॉशिंगटन की सैन्य मदद में कोई बदलाव नहीं हुआ है, और नाटो सहयोगी देश हथियार खरीदकर युद्ध से तबाह हुए इस देश को भेज रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:08 +0530</pubDate>
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<title>अपनी पर आ गए यमन के हूती, बीच समुंदर तेल टैंकर को फूंक डाला, तड़प उठा सऊदी</title>
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<description><![CDATA[ सऊदी ने ईरान हिमायती यमन के अंसारुल्लाह से दुश्मनी मोल तो ले ली है मगर अब खेला शुरू हो गया है। यमन के हूती अपनी पर आ जाए तो फिर रुकते नहीं है। अमेरिका हो या इसराइल सभी उनसे तौबा कर चुके हैं। ऐसे में ईरान अमेरिका जंग के बीच सऊदी ने हूतियों को ला रहे ईरान की महान एयरलाइंस के प्लेन पर जब से हमला किया है तब से हूतियों ने अपने दुश्मन सऊदी के खिलाफ ऐलान जंग कर रखा है। अब खबर है कि हूतियों ने अपने कंट्रोल वाले लाल सागर से ब्लॉकेट तोड़कर गुजरने की कोशिश कर रहे सऊदी के दो ऑयल टैंकरों को उड़ा दिया है। हूती का आरोप है कि दोनों जहाजों ने उनके घोषित नेवल ब्लॉकेट का उल्लंघन किया था। इसलिए उन्हें बैलेस्टिक और क्रूज मिसाइलों से निशाना बनाया गया है। अंसारुल्लाह ने जिन दो टैंकरों पर हमले का दावा किया है उनके नाम एनसेलिया और लैला बताए जा रहे हैं। इनमें से एनसेलिया पर हमले की पुष्टि समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने भी कर दी है। इसे भी पढ़ें: Red Sea Crisis: Saudi Tankers पर हमले से Global Trade पर खतरा, US-Iran के बीच आर-पार की जंग तेजयमन में अंसारुल्ला आर्म फोर्सेस के प्रवक्ता याहिया सारी ने खुद मीडिया में इस बात की जिम्मेदारी ली है। उनका कहना है कि 12 साल से लगे सऊदी के हर सेंशंस का अब तगड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने साफ कह दिया कि हमारे दुश्मन सऊदी के टैंकर समुद्री ब्लॉकेट का उल्लंघन कर रहे थे। इसीलिए यह कारवाई की गई है। मीडिया रिपोर्ट बता रही है कि सऊदी झंडे वाले टैंकर एनसेलिया ने वीएचएफ के जरिए संकट संदेश भेजकर बताया कि लाल सागर में सऊदी अरब के जीजान बंदरगाह के बाहरी इलाके में उसे एक मिसाइल ने निशाना बनाया है जिससे जहाज में आग लग गई। ब्रिटेन की समुद्री जोखिम प्रबंधन कंपनी वैनगार्ड ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है कि एनसेलिया पर सऊदी अरब के अलशक से करीब 70 नॉटिकल मील दक्षिण पश्चिम में एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ है। वहीं यूनाइटेड किंगडम मेरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने भी उसी इलाके में एक टैंकर पर हमले की पुष्टि की है। टैंकर पर हमले के वीडियो ईरान की प्रेस टीवी से लेकर ईरान समर्थित तमाम हैंडल्स शेयर कर रहे हैं। जिसमें देखा जा सकता है कि एक टैंकर पर भयानक आग लगी हुई है। इसे भी पढ़ें:  Iran पर कहर बनकर टूटेगा America? फिर से निकाल दिया अपना ब्रह्मास्त्रहूती ने तो यह भी दावा किया है कि जब से उन्होंने नेवल ब्लॉकेट लगाया है तब से करीब 10 जहाजों को अपना रास्ता बदलकर लौटना पड़ा है। दरअसल 20 जुलाई को ईरान हिमायती यमन के अंसारुल्लाह और उनकी फौज ने सऊदी अरब के खिलाफ पूरी तरह समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है। यमन में होती आर्म्ड फोर्सेस के तर्जुमान ब्रिगेडियर जनरल यहयास सारी ने उस वक्त भी साफ कह दिया था कि नाकेबंदी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और इसे आंख के बदले आंख की नीति के तहत उठाया गया कदम बताया गया है। मतलब सऊदी जैसा करेगा उसी तरह से भरेगा। कोई रियायत नहीं, कोई लिहाज नहीं, कोई दया नहीं। हूथियों ने साफ कह दिया है कि सऊदी अरब की किसी भी बेवकूफी भरी हरकत का जवाब पूरी और निर्णायक कारवाई से दिया जाएगा और दो जहाजों पर हमला करके अंसारुल्लाह ने वो कारवाई आखिर कर ही दी। यमन के अंसारुल्ला इल्जाम लगाते रहे हैं कि सऊदी की हुकूमत जालिम है। उसने साल 2015 के बाद से यमन पर सेंशंस लगाकर लाखों लोग मार दिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:08 +0530</pubDate>
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<title>ट्रंप के नए शुल्क लागू होने पर जवाब देने के लिए तैयार है कनाडा: प्रधानमंत्री मार्क कार्नी</title>
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<description><![CDATA[ वैंकूवर, 24 जुलाई (एपी) कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनका देश व्यापक व्यापार समझौते के लिए अमेरिका के साथ बातचीत तेज कर रहा है लेकिन यदि कनाडाई वस्तुओं पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने की अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी को लागू किया जाता है तो वह जवाब देने के लिए तैयार है। ट्रंप ने सोमवार को इन नए शुल्कों की घोषणा की थी और ये 19 अगस्त से लागू होंगे। कार्नी ने प्रिंस एडवर्ड आइलैंड के शार्लेटाउन में कनाडा के प्रांतों और क्षेत्रों के प्रमुखों के साथ बैठक के बाद कहा, ‘‘यदि ये शुल्क या अन्य उपाय लागू होते हैं तो हमारे पास जवाब देने के लिए कई विकल्प हैं।’’
कार्नी ने कहा कि शुल्क लागू होने से पहले समझौता नहीं हो पाने की स्थिति में ‘‘सभी विकल्प खुले हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें पहले से जवाब देने की आवश्यकता नहीं है।वास्तव में मेरा मानना है कि इस स्तर पर पहले से जवाब देना नुकसानदेह होगा।’’
नए शुल्क शहद, शराब, सीमेंट, दुग्ध उत्पादों, लकड़ी से बने कुछ उत्पादों और हॉकी स्टिक समेत कई वस्तुओं पर लागू होंगे। ऊर्जा उत्पादों, पोटाश, मछली और महत्वपूर्ण खनिजों को इससे बाहर रखा गया है। हालांकि, अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते (यूएसएमसीए) के तहत आयात शुल्क से अब तक सुरक्षित वस्तुएं भी शुल्क के दायरे में आएंगी।वर्ष 2020 के इस व्यापार समझौते का अमेरिका ने नवीनीकरण नहीं किया, जिसके कारण नए सिरे से बातचीत शुरू हुई है और यह प्रक्रिया 2036 तक चल सकती है। कार्नी ने कहा कि अमेरिका की शुल्क लगाने की धमकी बातचीत की रणनीति भी हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने अमेरिका को कई व्यापार वार्ताएं करते देखा है और आमतौर पर उनके लिए एक समयसीमा तय होती है।सामान्यतः उस समयसीमा के साथ बहुत अधिक शुल्क लगाने की धमकी भी जुड़ी होती है।’’
कार्नी ने विश्वास जताया कि अमेरिकी अधिकारी व्यापार समझौते पर पहुंचने के इच्छुक हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:07 +0530</pubDate>
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<title>बता रहा रूस, तोड़&#45;फोड़ मचा रहा ईरान, पुतिन ने ट्रंप से लिया ये कैसा इंतकाम?</title>
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<description><![CDATA[ पहाड़ी के मैदान में चल रहा महायुद्ध अब पूरी तरीके से बेकाबू हो चुका है और इस मुश्किल वक्त में रूस ने आकर पूरा खेल मानो पलट दिया। असल में अमेरिकी सेना का ध्यान और उसकी हवाई सुरक्षा प्रणाली कहीं दूसरी जगह तैनात थी। लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के सबसे सुरक्षित ठिकानों पर सटीक हमले हो गए। वाशिंगटन में मची खलबली के बीच अब रक्षा विशेषज्ञ यानी एक्सपर्ट साफ कह रहे हैं कि रूस की गुप्त मदद के बिना ईरान के लिए इन अति संवेदनशील अमेरिकी ठिकानों को ढूंढना और उन्हें तबाह करना किसी भी कीमत पर संभव नहीं था। वाशिंगटन इस बात की गहन जांच करने लगा कि क्या पुतिन ने पर्दे के पीछे से चुपचाप मोजतबा की कोई मदद की जिससे सीआईए के इन गुप्त ठिकानों का सटीक डाटा ईरान को मिल पाया। डोनाल्ड ट्रंप की सेना भले ही ईरान पर लगातार हवाई हमले कर रही हो लेकिन मोजतबा खामनेई की सेना ने जवाबी कार्यवाही करते हुए जॉर्डन में अमेरिकी हितों के खिलाफ एक बहुत बड़े सैन्य अभियान का ऐलान कर दिया जिसे नाम दिया गया है ऑपरेशन अलबर्ग जॉर्डन के अल फैसल और प्रिंस हसन सैन्य ठिकानों को घेर कर निशाना बनाया गया। इसे भी पढ़ें: अमेरिका यूक्रेन में निरर्थक जंग समाप्त करने में मदद के लिए तैयार, लेकिन समझौता आसान नहीं: मार्को रूबियोइस बारूदी प्रहार ने अमेरिकी सेना के सबसे कमजोर नस को सरेआम एक तरीके से बेनकाब करके रख दिया। ईरान का दावा है कि उसके इस हमले में अमेरिका के आठ सबसे खतरनाक और नए MQ9 जासूसी ड्रस जलकर खाख हो गए। जबकि दो अन्य ड्रोंस और भारीभरकम हेलीकॉप्टरों को बहुत गंभीर नुकसान पहुंचा है। राइटर्स की रिपोर्ट्स बताती हैं अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस बात का पता लगा रही है क्या रूस ने ईरान को कोई वाकई गुप्त सेटेलाइट डाटा ट्रांसफर किया था? हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में ईरान के ड्रोंस ने जिस सटीकता से सीआईए के ठिकानों को तबाह किया उसने अमेरिका को पूरी तरीके से हिला कर रख दिया। ईरान के ड्रोंस ने सऊदी अरब के रियाद में मौजूद अमेरिकी दूतावास परिसर के भीतर बने गुप्त सीआईए स्टेशन को भी निशाना बना दिया। इसके अलावा पूर्वी इराक में सक्रिय सीआईए के एक और खुफिया केंद्र को ईरानी ड्रोंस ने मलवे की ढेर में तब्दील कर दिया। सूत्र बताते हैं कि सीआईए के एक दर्जन से कम लेकिन एक से अधिक ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। जिनकी सटीक संख्या को अमेरिका ने अब तक छुपा कर रखा है। इस पूरे हमले में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि ईरान ने रूस द्वारा उन्नत किए गए शाहिद ड्रोन्स का इस्तेमाल किया। इसे भी पढ़ें: भारतीय क्रू जहाज पर अचानक रूस ने क्यों बोल दिया हमला? 4 की गई जान, भड़का भारत!जांचकर्ताओं का ध्यान अब रूस के कोमेटा एन सेटेलाइट गाइडेंस सिस्टम पर टिका है। जिसने अमेरिकी हवाई सुरक्षा को पंगू बना दिया। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुली चेतावनी दी है कि जब भी ईरान होमो जलडमरू मध्य में किसी भी जहाज पर अटैक करता है तो अमेरिकी सेना ईरान के अंदर स्थित किसी बिजली घर या फिर पुल को निशाना बनाएगी। जिसका जवाब देते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास सराची ने कहा है कि हमारी रक्षा नीति स्पष्ट है। हम हर आंख के बदले एक आंख लेंगे। रूस और ईरान की बढ़ती जुगलबंदी के बीच अब अमेरिका के लिए सबसे बड़ा संकट खड़ा हो चुका है। ईरान अब मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर भरपूर मिसाइल मार रहा है। ऐसी कि अमेरिका को ख्ते में बेदम किया जा सके। एक ऐसी रणनीति है जिसकी कल्पना भी उसके दुश्मनों ने नहीं की थी। एक्सपर्ट कहते हैं कि अमेरिका तो इसराइल के इस झांसे में लड़ने चला गया कि ईरान की मिसाइलें लगती कहां है। वो तो इंटरसेप्ट कर ली जाती हैं। तीन-चार दिन में वहां तख्तापलट हो जाएगा। लेकिन अब हालत यह है कि 5 माह से अमेरिका फंसा हुआ है मिडिल ईस्ट में और ईरान हर दिन अरब देशों में मौजूद उसके ठिकानों पर मार रहा है। थका डाल रहा है। उस पर से ईरान का दोस्त चीन, कुवैत, जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों की सेटेलाइट इमेज डाल दे रहा है। जिसमें नुकसान साफ दिख रहा है। इतना ही नहीं ईरान से आ रही कुछ मीडिया रिपोर्ट तो दावा कर रही हैं कि ईरान का मिसाइल प्रोडक्शन जबरदस्त तरीके से जारी है। हालात जंग में भी मिसाइल प्रोडक्शन रुका नहीं है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:06 +0530</pubDate>
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<title>रात 12:01 बजे से लागू होगा वो &amp;apos;गुप्त नियम&amp;apos;... Donald Trump के एक सीक्रेट फैसले से हिली दुनिया, भारत अब बड़े संकट में फंसने वाला है?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक अचानक लिए गए फैसले ने वैश्विक व्यापार जगत में हड़कंप मचा दिया है। शुक्रवार रात 12:01 बजे से एक ऐसा नियम लागू होने जा रहा है, जिसे लेकर कयासों और आशंकाओं का बाजार गर्म हो चुका है। पर्दे के पीछे से जारी इस आदेश के बाद पूरी दुनिया की नजरें अब वाशिंगटन पर टिकी हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या अमेरिकी प्रशासन के इस एक बड़े दांव से भारत की अर्थव्यवस्था और निर्यात क्षेत्र पर कोई गहरा संकट मंडराने वाला है? आखिर क्या है इस &#039;गुप्त नियम&#039; का पूरा सच, और इससे वैश्विक बाजार में क्या उथल-पुथल मचने वाली है—पढ़िए हमारी यह विशेष रिपोर्ट। एक बड़ी घटनाक्रम में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और 16 अन्य देशों से आयातित सामान पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। यह कदम ऐसे सामान के उत्पादन में ज़बरदस्ती मज़दूरी के इस्तेमाल को रोकने की कोशिशों के तहत उठाया गया है। पिछले महीने, जब अमेरिका ने ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत टैरिफ का प्रस्ताव रखा था, तो भारत को उन देशों की श्रेणी में रखा गया था जिन पर 12.5 प्रतिशत लेवी (शुल्क) लगनी थी। लेकिन वाशिंगटन ने नई दिल्ली द्वारा अपनी विदेश व्यापार नीति में किए गए उस संशोधन पर ध्यान दिया, जिसमें ज़बरदस्ती मज़दूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाई गई है। इसे भी पढ़ें: Narendra Modi Instagram Video | &#039;संसद में आएगा कड़ा &#039;एंटी-पेपर लीक बिल&#039;: PM मोदी का बड़ा ऐलान, बोले- दोषियों को जेल भेजा, त्वरित अदालतें भी गठितअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को इस मुद्दे पर जारी एक मेमोरेंडम में कहा, &quot;इन कदमों के परिणामस्वरूप, ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ने मुझे सलाह दी है कि इन अर्थव्यवस्थाओं के सामान पर 10 प्रतिशत की दर से टैरिफ लगाया जाना चाहिए, ताकि उन्हें ऐसी रोक को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए और प्रोत्साहित किया जा सके।&quot;जेमिसन ग्रीर ने 60 देशों पर नए टैरिफ की घोषणा कीअमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने गुरुवार को ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत 60 देशों पर नए टैरिफ की घोषणा की। यह घोषणा सभी देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त लेवी की समय-सीमा खत्म होने से एक दिन पहले की गई। इसे भी पढ़ें: सोनिया गांधी का आरोप, मोदी सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ देश के शत्रुओं जैसा व्यवहार कर रही हैजिन देशों में ज़बरदस्ती मज़दूरी से बने सामान पर रोक लगाने वाले कानून नहीं हैं - जैसे चीन, यूनाइटेड किंगडम और जापान - उन्हें 12.5 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। ज़बरदस्ती मज़दूरी से जुड़े टैरिफ उन कच्चे माल पर लागू नहीं होंगे जिनकी घरेलू आपूर्ति की कमी हो सकती है; उन उत्पादों पर नहीं जिनसे पूरी अर्थव्यवस्था में व्यवधान पैदा हो सकता है; और उन उत्पादों पर भी नहीं जिनका उत्पादन या खेती अमेरिका में पर्याप्त मात्रा में नहीं की जा सकती।टैरिफ का सामना कर रहे 60 देशों में से 17 देशों पर 10 प्रतिशत की दर लागू होगी, जिनमें भारत, कनाडा, यूके, बांग्लादेश और पाकिस्तान शामिल हैं। बाकी 43 देशों को 12.5 प्रतिशत टैरिफ देना होगा।USTR के बयान में कहा गया है कि ग्रीर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर, 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत 60 अर्थव्यवस्थाओं पर टैरिफ लगाने का अंतिम कदम उठाया है। यह कार्रवाई ज़बरदस्ती मज़दूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में उनकी विफलता के कारण की गई है।  शुक्रवार रात 12:01 बजे से नई टैरिफ लागू होंगीनई टैरिफ शुक्रवार रात 12:01 बजे से लागू होंगी, ठीक उसी समय जब 10 प्रतिशत का अस्थायी इंपोर्ट टैक्स खत्म हो रहा है। यह कदम फरवरी में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद उठाया गया था जिसमें अप्रैल 2025 में राष्ट्रपति द्वारा लागू की गई &quot;लिबरेशन डे&quot; टैरिफ को रद्द कर दिया गया था।ग्रीर ने यहां एक बयान में कहा कि यह कदम मानवाधिकारों के उल्लंघन और व्यापार के गलत तरीकों, दोनों को ठीक करने की दिशा में काम करेगा, ताकि हर जगह कामगारों का भला हो सके। इस संबंध में एक फेडरल नोट में इस बात का ज़िक्र किया गया कि जून में प्रस्तावित टैरिफ की घोषणा के बाद भारत ने जबरन मज़दूरी से जुड़े सामान के इंपोर्ट पर रोक लगाने का फैसला किया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:06 +0530</pubDate>
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<title>दुबई, कतर, बांग्लादेश...कॉकरोचों पर दुनिया हुई मेहरबान! डिलीवरी ब्यॉज कहां&#45;कहां के ऑर्डर लेकर आ रहे?</title>
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<description><![CDATA[ जंतर-मंतर पर एक महीने से ज्यादा से चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के लिए लोगों का सपोर्ट उनका प्यार लगातार बढ़ता जा रहा है। जहां एक और विपक्षी दलों के नेताओं ने बॉलीवुड सेलिब्रिटीज ने मंच पर आकर अपना समर्थन जाहिर किया। वहीं दूसरी ओर देश ही नहीं विदेश से भी लोग इस आंदोलन में हिस्सेदारी लेने के लिए पहुंच रहे हैं। जंतर-मंतर पर हजारों की संख्या में लोग पहुंचे हैं। हालांकि ऐसे भी बहुत लोग हैं जो दिल्ली किसी कारण से नहीं पहुंच पाए। लेकिन बावजूद इसके उन्होंने इस बात को पुख्ता किया कि वह किसी ना किसी रूप में इन प्रदर्शनकारियों के लिए मदद जरूर भेजें। अपना समर्थन जाहिर करें। पहले प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों से संपर्क किए गए। कांटेक्ट नंबर्स के माध्यम से, सोशल मीडिया के माध्यम से जिसकी जितनी हैसियत थी मदद पहुंचाई गई। इसके बाद डिलीवरी एप्स का सहारा लिया गया। इसे भी पढ़ें: Jantar Mantar Protest Updates: NEET Paper Leak पर CJP का कड़ा रुख, Abhijeet Dipke बोले - Dharmendra Pradhan के इस्तीफे से कम कुछ मंजूर नहींदेश भर के लोगों ने खाना, पीना, ब्रश, सेनेरी पैड, मच्छरदानी, पंखा, दवाइयां और जरूरत का तमाम सामान भेजना शुरू किया।  अब तो जानकारी मिल रही है कि केवल देश के लोग ही नहीं विदेश में बैठे लोग भी कॉकरोचेस को सपोर्ट कर रहे हैं। वे कॉकरोचेस के लिए खानापीना और जरूरत का सामान भेज रहे हैं। कुछ ही दिनों पहले जंतरमंतर पर एक नया ट्रेंड देखने को मिला। फूड डिलीवरी एप्स जैसे कि स्विगी, जोमैटो, ब्लिकिट, जेप्टो और तमाम ऐसी एप्स के माध्यम से प्रदर्शनकारियों के लिए सुबह के नाश्ते से लेकर रात के डिनर और उनकी जरूरत के सामान उनके पास लगातार भेज रहे हैं। कोई मुंबई से खाना बुक कर रहा है, कोई सूरत से, कोई चेन्नई से तो कोई कोच्ची से। पटना, जयपुर, हैदराबाद, नागपुर, बेंगलुरु और ऐसे कितने ही शहर हैं जहां से अलग-अलग लोग कॉकरोचेस के लिए मदद भेज रहे हैं। कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। जिनमें अलग-अलग डिलीवरी पार्टनर से पूछा गया कि यह खाना कहां से आया है।इसे भी पढ़ें: दंगा करने वालों का पासपोर्ट होगा रद्द! CJP प्रोटेस्ट के बीच दिल्ली पुलिस सख्तकिसी ने कहा कि यह खाना बांग्लादेश से आया है। किसी ने कहा दुबई से तो किसी ने कतर का नाम लिया। इस बारे में एक प्रदर्शनकारी ने एक यूट्यूबव चैनल से बातचीत में बताया कि विदेशों से भी खूब खाना भेजा जा रहा है। दुबई से किसी ने 2000 लोगों के लिए खाना भेजा। आपको बता दें इस प्रोटेस्ट को लेकर लगातार एक सवाल जो उठाया जा रहा है वो ये कि फंडिंग कहां से आ रही है? इसी बात का जवाब देते हुए प्रोटेस्टर ने कहा, यह आर्डर से खाना आ रहा है। ऑर्डर वाला देता है और चला जाता है। विदेशों से भी खाना आ रहा है। कल दुबई से किसी ने आठ बार में कुल 2000 पार्सल भेजे थे। इसी तरह एक और वीडियो है जो सोशल मीडिया पर वायरल है जिसमें डिलीवरी बॉय भीड़ दिखाते हुए कहते हैं कि रात के 11:00 बजे का समय है। स्विगी, जोमैटो से खाना आ रहा है। एक खाने का पॉकेट पकड़ कर जब डिलीवरी बॉय से पूछा जाता है कि यह किसने भेजा? तो जवाब देते हैं कि यह बांग्लादेश से भेजा गया है। हालांकि आपको यह बता दें कि यह साफ नहीं है कि विदेशों से जो खाना आ रहा है उसे वहां रहने वाले भारतीय भेज रहे हैं या फिर वहां के नागरिक।फ़ूड डिलीवरी करने वालों का कहना है कि जंतर-मंतर पर डिलीवरी के लिए कतर और बांग्लादेश से खाना ऑर्डर किया गया था।बांग्लादेश या कतर के लोग भारत में अचानक खाना कैसे ऑर्डर कर सकते हैं? कोई जंतर-मंतर के लिए विदेशों से ऑनलाइन ऑर्डर क्यों स्वीकार करेगा? क्या इसमें कोई विदेशी हाथ है? pic.twitter.com/Ql6fGbhPYZ— SONELAL RAWAT (@SONELALRAWAT87) July 23, 2026 ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:05 +0530</pubDate>
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<title>DRDO का बड़ा धमाका, देश का पहला Expendable Turbo जेट इंजन तैयार</title>
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<description><![CDATA[ एक तरफ डीआरडीओ ने स्वदेशी कुशा मिसाइल का सफल परीक्षण किया तो इसके साथ ही एक और बड़ा धमाका था जो डीआरडीओ ने किया और वो था स्वदेशी जेट इंजन तकनीक को तैयार करना। इसके बाद भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो चुका है जिनके पास खुद जेट इंजन की तकनीक मौजूद है।  डीआरडीओ ने देश के पहले 350 किग्र थ्रस्ट क्लास का स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बो जेट इंजन तैयार कर लिया है। यह सिर्फ एक इंजन नहीं है बल्कि भारत की तकनीकी ताकत, आत्मनिर्भरता भविष्य की सैन्य शक्ति का नया प्रतीक है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल किया है डीआरडीओ की गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट यानी कि जीटीआरई ने। इस इंजन का निर्माण और असेंबली हैदराबाद की आजाद इंजीनियरिंग के सहयोग से किया गया है। इसे भी पढ़ें: UAV, AKASH TARANG, MPATGM, MRSAM, V-SHORADS के जरिये Air Defence System को और मजबूत करेगा India, रक्षा मंत्री ने नई खरीद को दी मंजूरीसालों की रिसर्च, हाई प्रसीजन इंजीनियरिंग और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग के बाद 22 जुलाई 2026 को यह इंजन सफलतापूर्वक तैयार होकर जीटीआरई को सौंप दिया गया। यह उपलब्धि बताती है कि भारत अब केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं रह गया है बल्कि अत्याधुनिक रक्षा तकनीक विकसित करने वाले देशों की कतार में मजबूती से खड़ा है। यह आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान की बड़ी सफलता है। दरअसल जेट इंजन टेक्नोलॉजी को दुनिया की सबसे कठिन इंजीनियरिंग उपलब्धियों में गिना जाता है। इसे विकसित करने के लिए बेहद उन्नान धातु अत्यधिक तापमान सहने वाली सामग्री, माइक्रोन स्तर की सटीक मैन्युफैक्चरिंग और सालों के वैज्ञानिक अनुभव की जरूरत होती है। यही वजह है कि आज तक दुनिया केवल कुछ ही ऐसे देश हैं जिनके पास इस तकनीक में महारत हासिल है। आसान शब्दों में कहा जाए तो जेट इंजन बनाना एिएशन की दुनिया का माउंट एवरेस्ट है और इसे फतह भारत ने अब कर लिया है। यह 350 किग्र थ्रस्ट क्लास का स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बो जेट इंजन भविष्य में भारत की क्रूज मिसाइल, लॉटरिंग म्यनिशन, मानव रहित लड़ाकू विमान यानी कि यूएवीस और अत्याधुनिक ड्रोन को शक्ति देने का काम करेगी। यानी कि अब भारत धीरे-धीरे महत्वपूर्ण इंजनों के लिए विदेशी देशों से अपनी निर्भरता को कम कर रहा है। इसे भी पढ़ें: 120 इस्तीफे...एक्शन में आई सरकार, ISRO में भगदड़ क्यों मची है? भारत की &#039;स्पेस मिस्ट्री&#039; का MRI स्कैनइससे देश की रणनीतिक क्षमता को मजबूती मिलेगी। साथ ही में भविष्य में जो स्वदेशी मिसाइल्स और ड्रोन कार्यक्रम आएंगे उनको नई ताकत मिलेगी। इस इंजन को आजाद इंजीनियरिंग के सीईओ राकेश चौपदार ने डीआरडीओ की डिस्टिंग्विश साइंटिस्ट एवं डायरेक्टर जनरल एरोनॉटिकल सिस्टम डॉ के राजक्ष्मी मेनन को और जीटीआरए के डायरेक्टर डॉ एस वी रामना मूर्ति को औपचारिक रूप से सौंपा है। इस मौके पर रक्षा सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने जीटीआर और भारतीय उद्योग की साझेदारी की जमकर सराहना की है और इसे भारत की रक्षा इतिहास का ऐतिहासिक मेल का पत्थर बताया है। यह उपलब्धि केवल एक इंजन बनाने की सफलता नहीं है बल्कि ये दुनिया को एक संदेश है कि भारत अब रक्षा तकनीक के सबसे कठिन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ चुका है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:04 +0530</pubDate>
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<title>CJP Protest ने पाकिस्तान को भी बदल कर रख दिया? पहले रिएक्शन में ये क्या कह दिया</title>
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<description><![CDATA[ भारत में चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी यानी कि सीजेपी के विरोध प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर कई सारी चर्चाएं हैं। लेकिन इस पर अब हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान का पहला आधिकारिक बयान सामने आ गया है। जहां पर बीते कुछ दिनों से लगातार दिल्ली के जंतरमंतर पर यह विरोध प्रदर्शन चल रहा है और इसको लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही थी। लेकिन ऐसे में जब पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से इस प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछा गया तो इस्लामाबाद ने जो जवाब दिया है उसने सबको चौंका दिया है। दरअसल पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के जो प्रवक्ता हैं ताहिर अंध्रावी उनसे उनकी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पूछा गया कि क्या भारत सरकार जिस तरीके से प्रदर्शनकारियों से निपट रही है? क्या उसे मानव अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है?इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर फिर मंडराया संकट: वित्त वर्ष 2025-26 में चालू खाता सरप्लस से घाटे में बदला, व्यापार घाटा $35.5 अरब के पार इस सवाल के जवाब में पाकिस्तान ने साफ तौर पर कहा, दिस इज एन इंटरनल मैटर ऑफ इंडिया। वी डू नॉट ऑफर कमेंट्स ऑन सच मैटर्स। यानी हिंदी में इसका मतलब यह होगा कि यह भारत का आंतरिक मामला है। हम ऐसे मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं करते हैं। यानी कि पाकिस्तान की ओर से इस पूरे मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया गया है और इसे पूरी तरीके से भारत का आंतरिक विषय बताया है। यह जवाब अपने आप में थोड़ा चौंकाने वाला भी है क्योंकि वो पाकिस्तान जो भारत के हर अंदरूनी मुद्दे पर अपनी नाक घुसाए रखता है। वह इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा और इसे भारत का आंतरिक मामला बता रहा है। अगर आप पाकिस्तान के इस बयान को देखकर गलतफहमी में आ गए कि पाकिस्तान सुधर गया है तो यह गलत होगा क्योंकि इस बयान के इधर पाकिस्तान की एक और सच्चाई भी है। पाकिस्तान से जुड़े हुए कई सारे सोशल मीडिया अकाउंट्स हैं जो इस प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार गलत जानकारी फैला रहे हैं। दिल्ली पुलिस का दावा है कि 480 से ज्यादा पाकिस्तान आधारित सोशल मीडिया हैंडल्स हैं जो कि सीजेपी प्रदर्शन के दौरान अफवाहें फैला रहे थे। फर्जी पोस्ट और एडिट किए गए वीडियोस को फैलाने में लगे हुए थे। दिल्ली पुलिस के मुताबिक यह वही सारे कई हैंडल्स हैं जो पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी सक्रिय थे और भारत के खिलाफ भ्रामक जानकारी फैला रहे थे। इसे भी पढ़ें: China को अचानक जयशंकर ने ऐसा क्या कहा? दुनिया में मची हलचलपुलिस का कहना है कि इन अकाउंट्स का मकसद खासतौर पर छात्रों को भड़काना है, भ्रम फैलाना है और सोशल मीडिया के जरिए माहौल को खराब करना है। पुलिस ने कहा कि ऐसे सभी संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान उनके द्वारा कर ली गई है और उन्हें ब्लॉक कराने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है। साथ ही में लोगों और खास करके प्रदर्शन कर रहे छात्रों से अपील की गई है कि वह किसी भी वायरल पोस्ट, एडिटेड वीडियो या अनजान सोशल मीडिया हैंडल की जानकारी पर बिना पुष्टि के भरोसा ना करें और उसे आगे शेयर ना करें। हमने नोटिस किया है कि सोशल मीडिया में कुछ मिसइफ फैलाने की कोशिश की जा रही है। अभी तक 400 से ज्यादा पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स आइडेंटिफाई किए जा चुके हैं जो इस सिचुएशन का फायदा उठाते हुए फेक कंटेंट और रमर स्प्रेड कर रहे हैं। उनको ब्लॉक कराया जा रहा है। यह वही सोशल मीडिया हैंडल्स हैं जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी एक्टिव थे। उनका सिर्फ एक ही मकसद है लोगों को भड़काना और स्पेशली स्टूडेंट्स का ध्यान भटकाना। मेरी आपसे अपील है कि बच्चों की सेफ्टी के लिए किसी भी फेक पोस्ट, एडिटेड वीडियोस या एनोनिमस हैंडल से किया हुआ कोई भी पोस्ट के भड़कावे में ना आए।इसे भी पढ़ें: कंगाली और Forex Crisis से जूझता Pakistan, US से 10 Billion Dollar के Economic Package की बड़ी गुहारकिसी भी पोस्ट को शेयर करने से पहले फैक्ट चेक करो। रमर्स को स्प्रेड मत करो और किसी भी एंटीसोशल एलिमेंट्स को अपने इमोशंस का कंट्रोल मत लेने दो। याद रखो कि पीसफुल प्रोटेस्ट करना आपका अधिकार है और दिल्ली पुलिस इस अधिकार का रिस्पेक्ट करती है। जंतरमंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी वहां पर नीट यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर और शिक्षा व्यवस्था में सुधार और दोषियों के खिलाफ सख्त कारवाई की मांग कर रहे हैं। 20 जुलाई को हुए संसद चलो मार्च के दौरान वहां पर प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच में झड़प हुई। जिसके बाद से यह आंदोलन और भी ज्यादा तेज हो गया है। इस बीच प्रधानमंत्री मोदी ने कल रात एक वीडियो साझा करते हुए संदेश दिया है कि सरकार पेपर लीक को लेकर एक्शन में है और गुनहगारों को फास्ट ट्रैक कारही के जरिए सजा दे रही है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:03 +0530</pubDate>
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<title>सबसे बड़ा खिलाड़ी तो अपना भारत निकला, ट्रंप के टैरिफ की पलट दी पूरी बाजी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर एक बार टैरिफ का बम फोड़ दिया है। और इस बार इसकी चपेट में भारत भी आता हुआ नजर आ रहा है। जहां अमेरिका ने भारत से आने वाले कुछ उत्पादों पर 10% का अतिरिक्त टेरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। यानी कि अब उन सामानों पर जिन पर पहले से कुछ टैरिफ लग रहा था उनके ऊपर एक्स्ट्रा 10% का टेरिफ लगेगा। दरअसल अमेरिका का कहना है कि दुनिया के कई सारे ऐसे देश हैं जो कि कुछ उत्पादों को फोर्स लेबर यानी कि जबरन मजदूरी करके मजबूर श्रमिकों से बनवाते हैं और अमेरिका चाहता है कि उनके यहां ऐसे उत्पाद बिल्कुल भी ना आए। इसी वजह से अमेरिका व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय यानी कि यूएसटीआर ने जांच की है और पाया है कि कई देशों ने जबरन मजदूरी से बने सामान को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं और इसी आधार पर अमेरिका ने सेक्शन 301 के तहत कारवाई करते हुए भारत समेत 17 देशों पर अतिरिक्त टेरिफ लगाने का फैसला लिया है। इसे भी पढ़ें: ट्रंप के नए शुल्क लागू होने पर जवाब देने के लिए तैयार है कनाडा: प्रधानमंत्री मार्क कार्नीइसका मतलब क्या है? मान लीजिए अगर भारत है तो भारत से कोई सामान अमेरिका जाता है और उस पर पहले से 15% का आयात शुल्क लगता है यानी कि टेररिफ लगता है। लेकिन अब उसी सामान पर 10% अतिरिक्त टेररिफ जुड़ जाएगा। यानी कि अमेरिकी बाजार में वो सामान पहले से और भी ज्यादा महंगा हो जाएगा और जब कीमत बढ़ेगी तो उसकी मांग पर असर पड़ सकता है और भारतीय निर्यातकों को उसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि राहत की बात यह है कि शुरुआत में चर्चा थी कि भारत के ऊपर 12.5% का अतिरिक्त टिफ लगाया जा सकता है। लेकिन भारत और अमेरिका के बीच श्रम मानकों को लेकर जो बातचीत हुई उसके बाद भारत के ऊपर 10% का ही स्लैब अमेरिका की ओर से रखा गया है। आपको बता दें कि अमेरिका ने सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि इसके साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया, इंडोनेशिया, कनाडा, मेक्सिको, श्रीलंका, ब्रिटेन समेत कुल 17 देशों पर इसी 10% अतिरिक्त टेरिफ को रखा है। वहीं कुछ ऐसे भी देश हैं जिस पर 12.5% का टेरिफ लगाया गया है अमेरिका की ओर से। इसे भी पढ़ें:  Iran पर कहर बनकर टूटेगा America? फिर से निकाल दिया अपना ब्रह्मास्त्र क्या भारत के सभी उत्पादों पर इसका असर होगा? आपको बता दें कि इसका जवाब है नहीं। सभी उत्पादों पर इसका असर नहीं होगा। अमेरिका ने साफ कहा है कि स्टील, एलुमिनियम जैसे उत्पाद जिन पर पहले से अलग सेलेक्टोरल टेरिफ लागू है। इस फैसले से वह बिल्कुल प्रभावित नहीं होंगे। इसके अलावा कुछ ऊर्जा और उत्पाद उर्वरक और यूएस एमसीए समझौते के तहत होने वाले व्यापार भी इस अतिरिक्त टेरिफ शुल्क के बाहर रहेंगे। यानी कि कुछ अलग सेक्शन है जो बाहर रहेंगे। जानकारी के मुताबिक भारत को पहले से ही इस फैसले की आशंका थी। इसलिए सरकार ने फोर्स लेबर से जुड़े उत्पादों की पहचान की और उनकी निगरानी के लिए नए दिशा निर्देश तैयार करने की शुरू किए थे ताकि अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का बेहतर तरीके से पालन किया जा सके और भविष्य में ऐसे कदमों से बचा जा सके। यानी कि सरकार अपनी ओर से तैयारी कर रही थी ताकि यह तहरीफ ना आए। कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो यह फैसला सीधे तौर पर भारत के खिलाफ नहीं लिया गया है। अमेरिका चाहता है कि वह इस नीति का पालन करें। जहां वैश्विक सप्लाई चेन में जेबरन मजदूरी से बने हुए उत्पाद ना पहुंचे। हो सकता है यह अमेरिका का सिर्फ एक बहाना हो। लेकिन यह भी एक सच्चाई है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:02 +0530</pubDate>
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<title>दारू, ड्रग्स और दवाई... लंदन के एक लग्ज़री होटल में सऊदी प्रिंस की मौत, ब्रिटिश कोर्ट ने क्या खुलासा कर दिया</title>
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<description><![CDATA[ के एक कोरोनर की जांच में पता चला है कि लंदन के एक लग्ज़री होटल में शराब, पार्टी ड्रग्स और डॉक्टर की सलाह पर दी जाने वाली दवाओं का जानलेवा कॉम्बिनेशन लेने के बाद सऊदी अरब के एक 29 साल के राजकुमार की मौत हो गई। &#039;द सन&#039; और &#039;डेली मिरर&#039; जैसे कई मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राजकुमार अब्दुल्ला बिन फहद बिन अब्दुल्ला बिन अब्दुलअज़ीज़ बिन जलावी अल सऊद 25 नवंबर को केंसिंग्टन के मैरियट होटल में अपने कमरे में मृत पाए गए थे। कई तरह की दवाएं लेने की वजह से उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ था। इनर वेस्ट लंदन कोरोनर कोर्ट में पेश किए गए सबूतों के मुताबिक, प्रिंस अब्दुल्ला 19 नवंबर को 600 यूरो प्रति रात वाले होटल में एक हफ़्ते के लिए रुके थे। मौत से एक शाम पहले उन्हें आखिरी बार CCTV में सिगरेट पीने के लिए बाहर निकलते हुए देखा गया था। अगले दिन, होटल का एक सफ़ाई कर्मचारी उनके पांचवीं मंज़िल वाले कमरे में गया और उन्हें बाथरूम के फ़र्श पर पूरे कपड़ों में पड़ा पाया। होटल के स्टाफ़ ने इमरजेंसी सर्विस को सूचना दी, लेकिन पैरामेडिक्स उन्हें बचा नहीं पाए और उन्हें वहीं मृत घोषित कर दिया गया।इसे भी पढ़ें: बता रहा रूस, तोड़-फोड़ मचा रहा ईरान, पुतिन ने ट्रंप से लिया ये कैसा इंतकाम?टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट से पता चला कि ड्रग्स और शराब के खतरनाक मिश्रण से मौत हुई। जांच में पता चला कि प्रिंस अब्दुल्ला के खून में अल्कोहल की मात्रा 222mg प्रति 100ml थी—जो इंग्लैंड में शराब पीकर गाड़ी चलाने की कानूनी सीमा से लगभग तीन गुना ज़्यादा है। विशेषज्ञों ने कोर्ट को बताया कि अकेले अल्कोहल के इस स्तर से ही कोमा हो सकता था। जांच करने वालों को &#039;गामा-हाइड्रॉक्सीब्यूटायरेट&#039; (GHB) की जानलेवा मात्रा मिली, जिसे आमतौर पर पार्टी ड्रग के तौर पर जाना जाता है। इसके साथ ही, उन्हें कैनबिस, ज़ैनैक्स और चिंता कम करने वाली दूसरी दवाएं (एंटी-एंग्जायटी दवाएं) भी सही मात्रा में मिलीं। मेडिकल एक्सपर्ट्स ने नतीजा निकाला कि इन चीज़ों के मेल से कार्डियक अरेस्ट हुआ और आखिरकार उनकी मौत हो गई।प्रिंस ने लत से छुटकारा पाने के लिए इलाज कराया थाकोर्ट को बताया गया कि मौत से पहले प्रिंस अब्दुल्ला शराब के गलत इस्तेमाल और डॉक्टर की सलाह पर ली जाने वाली दवाओं की लत से जूझ रहे थे। उन्हें अगस्त 2025 में रोहैम्पटन के प्रायरी क्लिनिक में भर्ती कराया गया था, जहां शराब, बेंजोडायजेपाइन और प्रीगाबालिन की लत छुड़ाने के लिए उनका डिटॉक्सिफिकेशन किया गया। कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट डॉ. विक्टोरिया चमोरो ने बताया कि प्रिंस ने इलाज में अच्छा सहयोग दिया। भर्ती होने के समय उनमें चिंता और उदासी के लक्षण दिखे थे, लेकिन उन्होंने बिना किसी शारीरिक परेशानी के डिटॉक्स प्रोग्राम पूरा किया। हालांकि, बाद में वे तय फॉलो-अप अपॉइंटमेंट में शामिल नहीं हुए, लेकिन डिस्चार्ज होने के समय डॉक्टरों को उनमें खुद को नुकसान पहुंचाने का कोई खतरा नहीं दिखा। जांच के दौरान पेश किए गए सबूतों के मुताबिक, प्रायरी में रहने के बाद प्रिंस अब्दुल्ला ने मर्सीसाइड के रेनफोर्ड हॉल क्लिनिक में और इलाज कराया। ऊपरी श्वसन तंत्र के संक्रमण (अपर रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन) से ठीक होने के बाद अक्टूबर में वे वहां से चले गए।कोरोनर ने मौत को एक दुर्घटना मानाअसिस्टेंट कोरोनर जीन हार्किन ने निष्कर्ष निकाला कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि प्रिंस ने अपनी जान देने की कोशिश की थी। कोर्ट को बताया गया कि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, न ही इस बात का कोई संकेत था कि उन्होंने कभी आत्महत्या के विचार ज़ाहिर किए हों, और न ही किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका का कोई सबूत मिला। सीसीटीवी फुटेज में भी उन्हें मौत से पहले के आखिरी घंटों में अकेले देखा गया। हादसे से हुई मौत का फ़ैसला सुनाते हुए, हार्किन ने कहा कि मौत की मेडिकल वजह कई तरह की दवाइयाँ लेना थी। उन्होंने प्रिंस के परिवार के प्रति संवेदना भी ज़ाहिर की। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:02 +0530</pubDate>
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<title>शेख हसीना के लौटने से पहले ही बांग्लादेश में भयंकर बवाल हो गया, राष्ट्रपति की जाएगी कुर्सी?</title>
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<description><![CDATA[ ढाका के गलियारों में चर्चा तेज है कि एक फोन कॉल ने तख्तापलट के बाद बनी नई व्यवस्था की नींव हिला दी है। राष्ट्रपति शहाबुद्दीन पर इस्तीफे का दबाव बन रहा है और खबर आ रही है कि वह अब कभी भी कुर्सी छोड़ सकते हैं। यह पूरा मामला शुरू होता है बांग्लादेशी राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन की लंदन यात्रा से। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने लंदन दौरे के दौरान शेख हसीना से संपर्क करने की कोशिश की। बल्कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दोनों के बीच फोन पर बातचीत होने का भी दावा किया गया है। हालांकि इन दावों की अब तक आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दरअसल बांग्लादेश के अखबार प्रथम आलोक की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति मोहम्मद शबुद्दीन ने अपने लंदन दौरे के दौरान भारत में रह रही शेख हसीना से कथित तौर पर फोन पर बातचीत की थी। इसे भी पढ़ें: सबसे बड़ा खिलाड़ी तो अपना भारत निकला, ट्रंप के टैरिफ की पलट दी पूरी बाजीजैसे ही यह खबर सामने आई बांग्लादेश की राजनीति में सवाल उठने लगे कि क्या राष्ट्रपति अपने संवैधानिक निष्पक्षता बनाए हुए हैं या नहीं? सबसे कड़ी प्रतिक्रिया बांग्लादेशी नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी की ओर से आई। पार्टी के नेताओं ने राष्ट्रपति शहबुद्दीन के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बीएपी का मानना है कि अगर राष्ट्रपति ने वास्तव में निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री से संपर्क किया है तो यह राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मामला है। यही नहीं कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन अपना कार्यकाल पूरा होने से करीब 2 साल पहले ही स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि राष्ट्रपति भवन की ओर से ना तो इन खबरों की पुष्टि की गई है और ना ही इनका खंडन किया गया है। जब बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाउद्दीन अहमद से इसकथित फोन कॉल के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने भी साफ जवाब देने से बचा और कहा कि इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने इतना जरूर कहा कि अगर राष्ट्रपति स्वास्थ्य या किसी अन्य कारण से इस्तीफा देना चाहते हैं तो संविधान उन्हें उसकी इजाजत देता है।इसे भी पढ़ें: महिला प्रदर्शनकारी से बदसलूकी का दावा? Mumbai Police बोलीं- Viral Video की गलत व्याख्या न करेंराष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को अप्रैल 2023 में 5 सालों के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था और उनकी नियुक्ति उस समय हुई थी जब शेख हसीना प्रधानमंत्री थे। अगस्त 2024 में छात्रा आंदोलन के बाद तख्तापलट हुआ और शेख हसीना को देश छोड़कर भारत आना पड़ा। तब से वह भारत में ही रह रही हैं। अब उन्होंने दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटने की घोषणा की है। जिससे देश की राजनीति फिर एक बार गर्म हो चुकी है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि अगर राष्ट्रपति शबुद्दीन इस्तीफा देते हैं तो बांग्लादेश के संविधान के अनुसार संसद के स्पीकर अंतरिम राष्ट्रपति का कार्यभार संभालेंगे। जब तक कि नए राष्ट्रपति का चुनाव नहीं हो जाता है। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि शेख हसीना और राष्ट्रपति मोहम्मद शाहबुद्दीन के बीच कथित फोन कॉल की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस खबर को अभी दावे और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर ही देखा जा रहा है। लेकिन इतना जरूर तय है कि शेख हसीना की संभावित वापसी से पहले बांग्लादेश की राजनीति में उठा यह नया हलचल आने वाले दिनों में कोई बड़ा घटनाक्रम बन सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:01 +0530</pubDate>
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<title>1100 दिनों से जेल में कैद, आंखों की रौशनी जा रही है...इमरान खान के बेटे ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लगाई गुहार</title>
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<description><![CDATA[ पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटे ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दखल देने की अपील की है। उनका कहना है कि उनके पिता, जो 1,100 दिनों से जेल में हैं, उन्हें तुरंत मेडिकल मदद की ज़रूरत है। 73 साल के पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और राजनेता इमरान खान अभी रावलपिंडी की अदियाला जेल में अकेले बंद हैं। उन्हें 5 अगस्त 2023 को गिरफ़्तार किया गया था, जब इस्लामाबाद की एक ट्रायल कोर्ट ने उन्हें तोशाखाना (राष्ट्रीय खज़ाना) मामले में भ्रष्टाचार का दोषी पाया था। इसके बाद इमरान खान को कई और मामलों में भी गिरफ़्तार किया गया और दोषी ठहराया गया, जिसकी वजह से वे लगातार जेल में हैं।इसे भी पढ़ें: Congress के Imran Masood ने Sonam Wangchuk को बताया &#039;दूसरा Anna&#039;, BJP ने किया पलटवारइमरान खान की सेहत और उनसे मिलने-जुलने को लेकर चिंताकासिम खान ने शुक्रवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि मेरे पिता इमरान खान को जेल में बंद हुए अब लगभग 1,100 दिन हो चुके हैं और मैंने और मेरे भाई ने मार्च के बाद से उनकी आवाज़ नहीं सुनी है। महीनों से हमें उनसे संपर्क करने की इजाज़त नहीं दी गई है। 26 वर्षीय कासिम खान अपने 29 वर्षीय भाई सुलेमान खान के साथ UK में रहते हैं। उन्होंने कहा कि हमें उनकी सेहत और इलाज की सुविधाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं है, जबकि उनकी नज़र लगातार कमज़ोर होती जा रही है। उन्हें तुरंत मेडिकल मदद की ज़रूरत है, और परिवार या कानूनी तौर पर उनसे मिलने की इजाज़त न होने के कारण, हमें उनके बारे में कोई भी जानकारी या भरोसा नहीं मिल पाता है। पाकिस्तान सरकार ने दिसंबर 2025 में इमरान खान की सभी तरह की मुलाकातों पर रोक लगा दी थी। यह रोक तब लगाई गई थी जब उन्होंने अपनी एक बहन के साथ मुलाकात के दौरान फील्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर को मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति कहा था। कासिम खान ने कहा कि हाल ही में मुझे उनकी बहुत याद आ रही है। मैं उनसे आम चीज़ों के बारे में बात करना चाहता हूँ, जैसे कि मेरा क्रिकेट, मैं कौन सी किताबें पढ़ रहा हूँ और कौन सी नई फ़िल्में अच्छी हैं, वगैरह। मैं समझता हूँ कि पाकिस्तान के लोग अपने चुने हुए नेता को आज़ाद देखना चाहते हैं, लेकिन मुझे अपने पिता की पहले से कहीं ज़्यादा याद आ रही है।इसे भी पढ़ें: इमरान खान की बहन का दावा: पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री मोदी की मिलीभगत से हुआ 2025 का सैन्य टकरावपाकिस्तान की सरकार पर आरोपपाकिस्तान में सेना समर्थित व्यवस्था की कड़ी आलोचना करते हुए खान के बेटे ने कहा: &quot;लेकिन यह सिर्फ़ एक पिता की बात नहीं है। यह पाकिस्तान और उसके भविष्य की बात है। उन्होंने कहा कि एक धांधली वाली, तानाशाही सरकार राजनीतिक विरोध को कुचल रही है, लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर कर रही है और लाखों पाकिस्तानियों को अपने नेता चुनने के अधिकार से वंचित कर रही है, साथ ही जो लोग अपनी बात रखते हैं, उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है। मैं एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करता हूँ कि वे आँखें न फेरें। अन्याय के सामने चुप्पी उसे और बढ़ावा देती है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:01 +0530</pubDate>
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<title>Bangladesh Political Crisis: राष्ट्रपति शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद अब क्या? Speaker संभालेंगे कार्यवाहक कमान</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शुक्रवार को इस्तीफ़ा दे दिया। सूत्र ने आगे बताया कि राष्ट्रपति के इस्तीफ़े की आधिकारिक घोषणा बांग्लादेश के समय के अनुसार शाम 5:00 बजे की जाएगी। बांग्लादेश के संविधान के अनुसार, अगर राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन इस्तीफ़ा देते हैं, तो नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक संसद के स्पीकर कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर काम करेंगे। इसके बाद संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए जातीय संसद के सदस्य नए राष्ट्रपति को चुनेंगे।इसे भी पढ़ें: शेख हसीना के लौटने से पहले ही बांग्लादेश में भयंकर बवाल हो गया, राष्ट्रपति की जाएगी कुर्सी?चूंकि नए राष्ट्रपति का कार्यकाल मौजूदा संसद से जुड़ा होगा, इसलिए अगला राष्ट्राध्यक्ष कौन बनेगा, यह सवाल काफ़ी राजनीतिक महत्व रखता है। मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 अप्रैल, 2023 को बांग्लादेश के राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी। उन्हें सत्ताधारी अवामी लीग के उम्मीदवार के तौर पर निर्विरोध चुना गया था।उनका पाँच साल का कार्यकाल अप्रैल 2028 में खत्म होने वाला था। यह आधिकारिक घोषणा बांग्लादेशी मीडिया में चल रही ज़बरदस्त अटकलों और ऐसी स्वतंत्र जानकारियों के बाद आई है जिनसे पता चलता है कि बंगभवन में जल्द ही सत्ता का बदलाव होने वाला है। स्थानीय समाचार माध्यमों की रिपोर्टों - जिनमें जमुना टीवी की ताज़ा खबरें और दैनिक समाचार पत्र &#039;प्रोथोम आलो&#039; की कवरेज शामिल है - से पहले ही संकेत मिल चुके थे कि राष्ट्रपति शहाबुद्दीन स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ सकते हैं।इसे भी पढ़ें: महिला प्रदर्शनकारी से बदसलूकी का दावा? Mumbai Police बोलीं- Viral Video की गलत व्याख्या न करेंसोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर यूके-स्थित बांग्लादेशी पत्रकार ज़ुलकर्णैन साएर के खुलासों के बाद इन राजनीतिक घटनाक्रमों ने और ज़ोर पकड़ा। साएर ने बताया कि राष्ट्रपति शहाबुद्दीन का पद छोड़ना तय है और इस बात पर ज़ोर दिया कि कैबिनेट सचिव नसीमुल गनी राष्ट्रपति पद के संभावित उत्तराधिकारियों की शॉर्टलिस्ट में शामिल हो गए हैं; यह एक अहम पद है जिसके लिए कथित तौर पर किसी वरिष्ठ BNP नेता पर विचार नहीं किया जा रहा था।इसके बाद बांग्लादेश के मुख्यधारा के प्रकाशनों ने इन रिपोर्टों को प्रमुखता से उठाया और बड़े पैमाने पर प्रसारित किया। बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 50 और 54 के तहत, जब राष्ट्रपति शहाबुद्दीन औपचारिक रूप से संसद के स्पीकर को अपना इस्तीफ़ा सौंप देंगे, तो स्पीकर को तुरंत कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालना होगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:00 +0530</pubDate>
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<title>भारत और Israel के बीच FTA पर बड़ी प्रगति, New Delhi में संपन्न हुई दूसरे दौर की महत्वपूर्ण बातचीत</title>
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<description><![CDATA[ भारत और इज़राइल ने प्रस्तावित फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लिए बातचीत का दूसरा दौर पूरा कर लिया है। दोनों पक्षों ने आपसी व्यापार, निवेश और आर्थिक संबंधों को मज़बूत करने के लिए एक संतुलित, व्यापक और दोनों के लिए फ़ायदेमंद समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, चार दिनों तक चली यह बातचीत 20 से 23 जुलाई के बीच नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में हुई। बातचीत के दौरान, दोनों पक्षों ने प्रस्तावित समझौते के सभी पहलुओं की समीक्षा की और प्रस्तावित FTA की दिशा में और प्रगति की।इसे भी पढ़ें:  Iran पर कहर बनकर टूटेगा America? फिर से निकाल दिया अपना ब्रह्मास्त्रमंत्रालय ने बताया कि दोनों देशों के तकनीकी विशेषज्ञों ने कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इन विषयों में वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, &#039;रूल्स ऑफ़ ओरिजिन&#039; (उत्पत्ति के नियम), सैनिटरी और फ़ाइटो-सैनिटरी उपाय, व्यापार में तकनीकी बाधाएं, बौद्धिक संपदा अधिकार, कस्टम प्रक्रियाएं और व्यापार को आसान बनाना, आर्थिक सहयोग और प्रस्तावित समझौते के तहत अन्य विषय शामिल थे। इसमें कहा गया कि बातचीत &quot;रचनात्मक और भविष्य की ओर देखने वाली&quot; थी, जिसमें दोनों पक्षों ने मतभेदों को कम करने और सहमति वाले क्षेत्रों की पहचान करने के मकसद से विस्तृत तकनीकी चर्चा की।शुरुआती सत्र के दौरान, भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव, अजय भादू ने एक संतुलित, व्यापक और दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद समझौते पर बातचीत करने के भारत के संकल्प को दोहराया, जिससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे। इज़राइल की मुख्य वार्ताकार, यिफात एलोन पेरेल (जो अर्थव्यवस्था और उद्योग मंत्रालय के विदेशी व्यापार प्रशासन में व्यापार नीति और समझौतों की वरिष्ठ निदेशक और उप व्यापार आयुक्त हैं) ने बातचीत के पहले दौर के बाद हुई प्रगति का स्वागत किया और एक महत्वाकांक्षी और दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद नतीजे तक पहुँचने की दिशा में गति बनाए रखने के महत्व पर ज़ोर दिया।इसे भी पढ़ें: आंखें नोंच लेंगे, ईरान ने दिया ऐसा जवाब, धमकी देना भूल जाएंगे ट्रंपमंत्रालय ने कहा कि बातचीत नवंबर 2025 में दोनों देशों द्वारा हस्ताक्षरित &#039;टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस&#039; (कामकाज के नियम) के आधार पर जारी है। ये नियम द्विपक्षीय व्यापार, आर्थिक सहयोग और समग्र आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए पहचाने गए क्षेत्रों में चर्चा का ढांचा प्रदान करते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:06:59 +0530</pubDate>
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<title>Nepal Judiciary Crisis: नेपाल की न्यायपालिका में राजनीतिक दखल पर भड़के International Rights Groups, दी गंभीर चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने नेपाल सरकार को चेतावनी दी है कि वह सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियों और उसके गठन में दखल न दे; उन्होंने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है। शुक्रवार को जारी एक संयुक्त बयान में, एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और इंटरनेशनल कमीशन ऑफ़ जूरिस्ट्स (ICJ) ने कहा कि नेपाल सरकार के हालिया &quot;कदम देश की न्यायपालिका की आज़ादी के लिए खतरा हैं और गंभीर चिंता का विषय हैं। बयान में कहा गया है, खासकर, मौजूदा जजों से ज़बरदस्ती इस्तीफ़ा दिलवाकर या उन पर महाभियोग चलाकर सुप्रीम कोर्ट के गठन को बदलने के लिए राजनीतिक दबाव डाला गया है। मई 2026 में, सरकार ने नेपाल के संविधान और कानून के शासन के सिद्धांतों के तहत ज़रूरी संसदीय कानून के बजाय, एक कार्यकारी अध्यादेश के ज़रिए &#039;कॉन्स्टिट्यूशनल काउंसिल एक्ट&#039; में गलत तरीके से संशोधन किया।इसे भी पढ़ें: Balen Shah का बड़ा U-Turn: नेपाल के PM अब भारत और China के दूतों से करेंगे अलग-अलग मुलाकातअंतर्राष्ट्रीय अधिकार समूहों को &#039;कॉन्स्टिट्यूशनल काउंसिल एक्ट&#039; (संवैधानिक परिषद अधिनियम) में किए गए बदलावों के नतीजों की चिंता है। इन बदलावों ने संवैधानिक परिषद के कोरम और वोटिंग के नियमों को बदल दिया है। यह परिषद मुख्य न्यायाधीश समेत अहम संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों की सिफारिश करने के लिए जिम्मेदार संस्था है। ICJ के सीनियर लीगल और पॉलिसी डायरेक्टर इयान सीडरमैन ने कहा, &quot;न्यायपालिका की आज़ादी कानून के शासन की नींव है और मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए एक ज़रूरी सुरक्षा कवच है। नेपाल की न्याय प्रणाली में कोई भी सुधार अदालतों की आज़ादी, निष्पक्षता और ईमानदारी को मज़बूत करने वाला होना चाहिए, न कि उन्हें कमज़ोर करने वाला।इसे भी पढ़ें: नेपाल के पोखरा में चोरी और लूटपाट के आरोप में दो भारतीयों समेत नौ गिरफ्तारहाल ही में मनोज कुमार शर्मा की मुख्य न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति ने इन चिंताओं को और बढ़ा दिया है। उनकी नियुक्ति नेपाल की उस पुरानी परंपरा से अलग थी जिसके तहत सबसे सीनियर जज को नियुक्त किया जाता है, जबकि अभी भी तीन और सीनियर जज पद पर हैं। इसके बावजूद, संसदीय सुनवाई समिति ने उनकी नियुक्ति को मंज़ूरी दे दी, जबकि उनके नामांकन को लेकर शिकायतें की गई थीं और उन शिकायतों की कोई सार्थक सार्वजनिक जांच भी नहीं हुई थी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:06:59 +0530</pubDate>
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<title>US Blockade तोड़ने की कोशिश कर रहे Cargo Ship पर अमेरिकी सेना की गोलीबारी, Gulf region में भारी तनाव</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को कहा कि उसने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे एक और मालवाहक पोत पर गोलीबारी की। वहीं, ईरान ने फारस की खाड़ी के आसपास स्थित अमेरिकी सैन्य स्थलों को निशाना बनाया। लगातार 13वीं रात हमले होने के बाद भी अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष थमने के कोई संकेत नहीं मिले।लड़ाई फिर तेज होने और कूटनीतिक प्रयासों को लेकर अनिश्चितता के बीच दोनों पक्षों ने ऐसे कदम उठाए, जिनसे संघर्ष के और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी दूतावासों ने क्षेत्र में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को आगाह करना शुरू कर दिया कि वहां से निकलने के विकल्प सीमित हो सकते हैं। वहीं, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने पड़ोसी देशों के निवासियों को उन सैन्य अड्डों से दूर रहने की सलाह दी जहां अमेरिकी सेना की मौजूदगी है।इसे भी पढ़ें: Middle East संकट का असर: Crude Oil में उबाल से Stock Market धराशायी, Sensex और Nifty के प्रमुख सेक्टर्स में भारी गिरावटइस बीच, यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने शनिवार तड़के बताया कि सऊदी अरब ने लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों के जवाब में यमन के बंदरगाह शहर हुदैदा पर हमला किया। हूती विद्रोहियों ने कहा कि वे अपने हमलों और तेज करेंगे। इन हमलों से कई वर्षों से कायम शांति भंग हो गई है और पिछले कई सप्ताह से तनाव बढ़ रहा था।अमेरिकी केंद्रीय कमान के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि ‘एम/टी लवीन’ नामक पोत ने कम से कम चार बार नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश की जिसके बाद अमेरिकी बलों ने ओमान की खाड़ी में उसे निष्क्रिय कर दिया। हॉकिन्स ने कहा कि पोत के चालक दल को चेतावनी दी गई थी लेकिन उसने निर्देशों का पालन नहीं किया जिसके बाद सेना ने पोत के इंजन कक्ष पर गोलीबारी की। नाकाबंदी फिर लागू किए जाने के बाद से निष्क्रिय किया गया यह दूसरा वाणिज्यिक पोत है।‘यूएस सेंट्रल कमांड’ ने बताया कि उसने 12 अन्य पोतों का मार्ग भी बदल दिया है। जिस दिन नौसैनिक नाकाबंदी फिर लागू की गई, अमेरिकी सेना ने उसी दिन कहा था कि उसने फारस की खाड़ी में ईरान के मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल खार्ग द्वीप की ओर जा रहे कुराकाओ के ध्वज वाले तेल टैंकर ‘बेल्मा’ पर गोलीबारी की। अमेरिका ने कहा कि पोत ने ‘‘कई चेतावनियों की अनदेखी’’ की, जिसके बाद 15 जुलाई को एक अमेरिकी विमान ने उसकी चिमनी पर मिसाइल दागकर उसे निष्क्रिय कर दिया।इसे भी पढ़ें: बता रहा रूस, तोड़-फोड़ मचा रहा ईरान, पुतिन ने ट्रंप से लिया ये कैसा इंतकाम?इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान के साथ वार्ता को ‘‘अब तक की सबसे गंभीर वार्ता’’ बताया। हालांकि अमेरिका ईरान पर रोजाना हमले कर रहा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें युद्ध समाप्त करने की ‘‘कोई जल्दी नहीं’’ है।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश अमेरिकी ‘‘धौंस’’ के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने चीन और रूस के साथ जारी बातचीत का भी उल्लेख किया। अराघची ने अर्ध-सरकारी समाचार संस्थान ‘तस्नीम’ को दिए साक्षात्कार में चेतावनी दी कि इस्लामी गणराज्य ‘‘न तो धमकियों से डरता है और न ही वह दबाव के आगे झुकेगा।’’ इस संघर्ष के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य है, जो विश्व की ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है।इसे भी पढ़ें: Red Sea में Tension के बीच Crude Oil $100 के पार, Global Market में बढ़ी महंगाई की चिंताईरानी हमलों के कारण यह मार्ग प्रभावी रूप से बंद हो गया है जिससे ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है और व्यापक आर्थिक उथल-पुथल पैदा हुई है। अमेरिकी सैन्य सलाहकारों की एक टुकड़ी की मौजूदगी वाले उत्तरी इराक के शहर इरबिल में सुरक्षा अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिका के नेतृत्व वाले बलों ने विस्फोटकों से लदे पांच ड्रोन मार गिराए। इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्द क्षेत्र की राजधानी इरबिल में लगातार कई विस्फोटों की आवाज सुनाई दी।शहर के हवाई अड्डे के पास वहां काले धुएं के गुबार भी दिखाई दिए, जहां अमेरिकी बल तैनात हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:06:58 +0530</pubDate>
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<title>Pakistan के Khyber Pakhtunkhwa में सुरक्षा चौकी पर भीषण आतंकी हमला, 12 सैनिकों समेत 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक संयुक्त पुलिस जांच चौकी पर हुए भीषण आतंकी हमले में 12 सैनिकों समेत कम से कम 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई। सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। आईएसपीआर के अनुसार टांक जिले में तड़के यह हमला प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े आतंकवादियों द्वारा किया गया।मृतकों में दो पुलिसकर्मी और वन विभाग का एक कर्मचारी भी शामिल है। आईएसपीआर ने एक बयान में कहा कि आतंकियों ने सुरक्षा घेरा तोड़कर चौकी में घुसने की कोशिश की, जिसका सुरक्षाबलों ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। इसमें बताया गया कि भागते समय आतंकवादियों ने बारूद से भरी एक गाड़ी चौकी की बाहरी दीवार से टकरा दी।इसे भी पढ़ें: वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ ने पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट सीरीज खेलने से इनकार किया: डैरेन सैमीइस जोरदार विस्फोट से 15 कर्मियों की मौत हो गई और इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। कार्रवाई के दौरान सुरक्षाबलों ने भाग रहे आतंकवादियों का पीछा किया और 12 को मार गिराया। आईएसपीआर ने बताया कि इलाके में बचे हुए आतंकियों का सफाया करने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:06:58 +0530</pubDate>
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<title>IRGC का Ali Al Salem Air Base पर विध्वंसक हमला, US Army की मौत पर Pentagon के आंकड़ों पर उठे सवाल</title>
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<description><![CDATA[ ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में नए सिरे से हमले किए, जिनमें अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले अली अल सलेम एयर बेस को भी निशाना बनाया गया। इसके बाद कुवैत की सेना ने कहा कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को रोक दिया। रिपोर्ट के अनुसार, तनाव बढ़ने के इस दौर में ईरान ने जॉर्डन, बहरीन और एरबिल की ओर भी हमले किए। इस बीच, ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB पर जारी एक बयान में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने &quot;ऑपरेशन नस्र 2 के 27वें चरण&quot; के तहत इन हमलों की ज़िम्मेदारी ली।इसे भी पढ़ें: अब यूरोप में सीधे घुस जाएंगी ईरानी मिसाइलें? IRGC ने दी ऐसी धमकी, कांपे अमेरिका के दोस्तIRGC ने कहा कि उसने कुवैत में अली अल सलेम एयर बेस पर बहुत भारी और एडवांस्ड विनाशकारी ड्रोन से हमला किया। उसने दावा किया कि उसने गोला-बारूद के एक बहुत बड़े भंडार को निशाना बनाया और लगातार हुए धमाकों से वह पूरी तरह नष्ट हो गया। बयान में यह भी दावा किया गया कि बेस पर मौजूद कर्मियों के लिए बने छह बड़े शेल्टर पूरी तरह नष्ट हो गए, जबकि &quot;तीन अन्य शेल्टर&quot; &quot;बुरी तरह क्षतिग्रस्त&quot; हुए। साथ ही, यह आरोप लगाया गया कि &quot;बड़ी संख्या में दुश्मन के लोग&quot; मारे गए और घायल हुए। IRGC ने अमेरिका पर युद्ध के मैदान में हुए नुकसान को छिपाने का आरोप भी लगाया। उसने दावा किया कि वाशिंगटन हताहतों की संख्या के बारे में &quot;अपने ही लोगों से झूठ बोल रहा है&quot; और &quot;अमेरिकी मीडिया से इस युद्ध की सच्चाई की जांच करने&quot; तथा &quot;असली आंकड़ों और सेंसरशिप के तरीकों को उजागर करने&quot; की मांग की।इसे भी पढ़ें: आखिर कैसे थमेगा अमेरिका-ईरान युद्ध? कबतक राहत पाएगी दुनिया? समझिएइसमें आगे कहा गया है कि आक्रमणकारियों के खिलाफ दंडात्मक अभियान जारी हैं। इस बीच, न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, बुधवार को पेंटागन ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ईरान युद्ध के दौरान 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत की सूचना दी।लेकिन गुरुवार तक, पता चला कि युद्ध विभाग ने हताहतों की आधिकारिक संख्या कम कर दी थी और बताया कि युद्ध में 14 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। आंकड़ों में इस बदलाव के जवाब में, तीन सैन्य अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि इस बदलाव का एक कारण यह था कि ट्रंप प्रशासन ने पिछले सप्ताहांत मारे गए चार सैनिकों (तीन जॉर्डन में और एक उत्तरी ईरान में) को सूची से हटाने का फैसला किया था। इसका कारण यह बताया गया कि राष्ट्रपति द्वारा अप्रैल में युद्धविराम की घोषणा के बाद इन सैनिकों की मौत हुई थी। पेंटागन के कार्यवाहक प्रेस सचिव, जोएल वाल्डेज़ ने इस बदलाव का कारण वेबसाइट पर &quot;अस्थायी डेटा व्यवधान&quot; बताया, जिसे उन्होंने जल्द ही ठीक कर दिया जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:06:58 +0530</pubDate>
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<title>&amp;apos;अब्राहम समझौते&amp;apos; में शामिल हो Saudi Arabia, तभी मिलेगी न्यूक्लियर डील: Donald Trump की Riyadh के सामने शर्त</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और सऊदी अरब के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय सिविल न्यूक्लियर समझौते (Civil Nuclear Deal) को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और सख्त रुख अपनाया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ परमाणु ऊर्जा साझेदारी को अंतिम रूप देने के लिए सऊदी अरब को &#039;अब्राहम समझौते&#039; (Abraham Accords) में शामिल होना ही होगा। उन्होंने कहा कि रियाद के लिए अब ईरान जैसी क्षेत्रीय ताकत का खतरा नहीं है, जिसके कारण वे पीछे हट रहे थे। अमेरिकी न्यूक्लियर इनोवेशन पर दिए गए अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि इजरायल के साथ क्षेत्रीय सामान्यीकरण समझौते में शामिल होना मध्य पूर्व के शांतिपूर्ण भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अब्राहम समझौते के बारे में सब कुछ जानें&quot;अब्राहम समझौते&quot; 2020 में शुरू किए गए अमेरिका की मध्यस्थता वाले राजनयिक समझौतों की एक श्रृंखला हैं, जिन्होंने इज़राइल और कई अरब देशों - जिनमें संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को और सूडान शामिल हैं - के बीच औपचारिक राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध स्थापित किए।अमेरिकी न्यूक्लियर इनोवेशन पर एक भाषण के दौरान, ट्रंप ने प्रस्तावित ऊर्जा साझेदारी के केंद्र में अपनी ये नई बातें रखीं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इज़राइल के साथ क्षेत्रीय सामान्यीकरण समझौते में शामिल होना &quot;मध्य पूर्व के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण&quot; है। ट्रंप ने कहा, &quot;ऐसा करने के लिए, उन्हें अब्राहम समझौते का सदस्य बनना होगा... अब समय आ गया है कि वे ऐसा करें।&quot;&quot;वे और अन्य देश ऐसा नहीं करना चाहते थे क्योंकि उन्हें ईरान से समस्या थी। अब आपको वह समस्या नहीं है। अब आपको वह समस्या नहीं है, अब वहां कोई बड़ी ताकत नहीं है। वे मध्य पूर्व में दादागिरी करते थे। अब वे वास्तव में उतनी दादागिरी नहीं कर पाएंगे।&quot; राष्ट्रपति ने आगे कहा, &quot;किसी न किसी समय, वे इसमें शामिल हो जाएंगे।&quot;ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा ढांचा केवल गैर-सैन्य न्यूक्लियर कार्यों तक ही सीमित रहेगाये टिप्पणियां ट्रंप द्वारा एक दिन पहले &#039;ट्रुथ सोशल&#039; पर पोस्ट किए गए उस बयान पर आधारित हैं, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि ऊर्जा ढांचा सख्ती से गैर-सैन्य न्यूक्लियर कार्यों तक सीमित रहेगा और घरेलू यूरेनियम संवर्धन (enrichment) को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने गुरुवार को लिखा, &quot;सिविल न्यूक्लियर डील... को मंज़ूरी दी जाएगी, लेकिन यह पूरी तरह से सऊदी अरब के बहुत सम्मानित और सफल अब्राहम समझौते में शामिल होने पर निर्भर है।&quot;&quot;अमेरिका सिविल (गैर-संवर्धित) न्यूक्लियर सुविधाओं का विरोधी नहीं है&quot; ट्रंप की यह स्पष्ट शर्त अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट और सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान द्वारा एक महत्वपूर्ण सिविल न्यूक्लियर ऊर्जा समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद आई है, जिसे अमेरिकी कांग्रेस में विधायी समीक्षा के लिए भेजा गया है। इन दोनों मुद्दों को जोड़कर, ट्रंप ने सिविल एनर्जी पार्टनरशिप को मध्य-पूर्व की कूटनीति में लंबे समय से चले आ रहे विवाद के एक मुद्दे से जोड़ दिया है।इजरायल को कूटनीतिक मान्यता देने पर सऊदी ने यह कहादूसरी ओर, रियाद ने बार-बार यह दोहराया है कि इजरायल को औपचारिक कूटनीतिक मान्यता देना, एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की दिशा में स्पष्ट और विश्वसनीय रोडमैप पर निर्भर करता है।वाशिंगटन और रियाद के बीच द्विपक्षीय सिविल न्यूक्लियर फ्रेमवर्क को लेकर बातचीत कई अमेरिकी प्रशासनों के दौरान चलती रही है, हालांकि परमाणु प्रसार रोकने की शर्तों को लेकर पिछली कोशिशें अटक गई थीं।पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के समय परखे गए पिछले ड्राफ्ट के उलट, मौजूदा ड्राफ्ट सऊदी अरब को इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के &#039;एडिशनल प्रोटोकॉल&#039; पर हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य नहीं करता है। इस प्रोटोकॉल के तहत इंस्पेक्टरों को बिना घोषित साइटों तक कम समय की सूचना पर जाने की अनुमति मिलती है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:06:57 +0530</pubDate>
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<title>महाराष्ट्र: अल&#45;नीनो के ख़तरे के बीच सामुदायिक प्रयासों से जल सुरक्षा मज़बूत</title>
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<description><![CDATA[ भारत में महाराष्ट्र राज्य की 364 ग्राम पंचायतों के समुदायों ने कमज़ोर मानसून व बढ़ते सूखे के ख़तरे से निपटने के लिए जल संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के प्रयास तेज़ किए हैं. यूनीसेफ़ समर्थित इस पहल का उद्देश्य, बच्चों और किसान परिवारों को बढ़ते जलवायु जोखिमों से बचाना है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 08:42:33 +0530</pubDate>
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<title>दक्षिण&#45;पूर्व एशिया में संगठित अपराध का बढ़ता ख़तरा: यूएन रिपोर्ट</title>
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<description><![CDATA[ नई प्रौद्योगिकियों और साझा वित्तीय नैटवर्कों ने दक्षिण-पूर्व एशिया में संगठित अपराध को पहले से कहीं अधिक व्यापक और जटिल बना दिया है. संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यह बदलता आपराधिक ढाँचा अब क्षेत्र की सीमाओं से आगे फैलकर शासन, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए गम्भीर चुनौती बन रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 08:42:33 +0530</pubDate>
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<title>अगली औद्योगिक क्रान्ति की धुरी है ‘स्वच्छ ऊर्जा’: यूएन जलवायु प्रमुख</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने स्वच्छ ऊर्जा को अगली औद्योगिक क्रान्ति का आधार बताते हुए कहा है कि नवीकरणीय ऊर्जा का तेज़ विस्तार भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और लोगों के जीवन स्तर को मज़बूत कर सकता है. लेकिन इसके लिए बिजली ग्रिड, बैटरी भंडारण और विद्युतीकरण में अधिक निवेश की आवश्यकता होगी. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 08:42:33 +0530</pubDate>
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<title>होर्मुज़ में अनिश्चितता बरक़रार, फँसे नाविकों की सुरक्षा पर चिन्ता</title>
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<description><![CDATA[ ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही का भविष्य अब भी अनिश्चित है. संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षित मार्ग देने के बदले जहाज़ों से शुल्क वसूलना अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के विरुद्ध है. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 08:42:30 +0530</pubDate>
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<title>ग़ाज़ा में खाद्य सुरक्षा में सुधार, लेकिन हालात अब भी नाज़ुक: यूएन</title>
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<description><![CDATA[ ग़ाज़ा पट्टी में मानवीय सहायता और वाणिज्यिक आपूर्ति बढ़ने से खाद्य सुरक्षा एवं बच्चों के पोषण में सुधार हुआ है. मगर यह प्रगति अभी नाज़ुक है और मानवीय पहुँच, वित्तीय सहायता व पुनर्बहाली के लिए निरन्तर समर्थन न मिलने पर हालात फिर तेज़ी से बिगड़ सकते हैं. ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 08:42:30 +0530</pubDate>
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<title>भारतीय क्रू जहाज पर अचानक रूस ने क्यों बोल दिया हमला? 4 की गई जान, भड़का भारत!</title>
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<description><![CDATA[ समुंदर के बीच से फिर एक बार भारत के लिए बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। जहां भारतीय नाविकों वाले जहाज को फिर एक बार निशाना बनाया गया है। लेकिन इस बार यह हमला अमेरिका और इरान के बीच स्ट्रेट ऑफ फॉरमोस में नहीं बल्कि ब्लैक सी में हुआ है। जहां यूक्रेन और रशिया का युद्ध चल रहा है। यूक्रेन के ओडसा बंदरगाह से रवाना हुए मालवाहक जहाज पर मिसाइलों से हमला हुआ और इस हमले में चार भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई। जबकि एक भारतीय नाविक गंभीर रूप से घायल है। जिसके बाद भारत सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और कहा है कि कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना पूरी तरीके से अस्वीकार्य है। दरअसल यूक्रेन के ओसा बंदरगाह से 19 जुलाई की शाम रवाना हो रहे एमबी गोल्डन लियो पर मिसाइल से हमला हुआ। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर्स सवार थे। जिनमें से पांच भारतीय नागरिक शामिल है और इस हमले में चार भारतीयों की मौत हो गई है। जबकि एक भारतीय गंभीर रूप से घायल है जिन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। इसे भी पढ़ें: Russia-Ukraine War में अब तक का सबसे बड़ा एक्शन, मॉस्को पर 400 ड्रोन से भीषण हमलाविदेश मंत्रालय ने बताया कि यूक्रेन में स्थित भारतीय दूतावास लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित भारतीयों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने में जुटा हुआ है। साथ ही में सरकार ने मृतकों के परिवारों के साथ गहरी संवेदनाएं व्यक्त की है और घायल भारतीयों के जल स्वस्थ होने की कामना की है। वहीं इस हमले को लेकर यूक्रेनी अधिकारियों का बड़ा दावा सामने आया है। जहां उन्होंने कहा है कि इस जहाज पर रूस की ओर से तीन क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया और यह जहाज ओडसा बंदरगाह से मक्का यानी कि कौन लेकर रवाना हुआ था। हमला होते ही जहाज में भीषण आग लग गई और यूक्रेन की नौसेना के अनुसार पूरी रात चले सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन में कई लोगों को सुरक्षित निकाला गया। लेकिन कई लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। जिसमें चार भारतीय नाविक भी शामिल थे। इस हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा भारत इस प्रकार के हमलों की कड़ी निंदा करता है और दोहराता है कि कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना निर्दोष नागरिक चालक दल के सदस्यों की जान को खतरे में डालना तथा समुद्री नौवाहन और व्यापार की स्वतंत्रता में बाधा उत्पन्न करना अत्यंत निंदनीय है और इससे हर हाल में बचा जाना चाहिए। इसे भी पढ़ें: यूक्रेन में जहाज पर हमले में चार भारतीयों की मौत, भारत ने घटना की कड़ी निंदा कीमृत भारतीयों में केरल के कासरगोड़ जिले के रहने वाले 26 वर्षीय अखिल जोयान भी शामिल थे। परिवार को शिपिंग कंपनी की ओर से ईमेल के जरिए उनके निधन की सूचना दी गई है। इसके बाद केरल सरकार ने भी मामले की गंभीरता को लिया और प्रवासी मामलों की एजेंसी नोरका को विदेश मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए। बताया जा रहा है कि यह जहाज गिनी बिसाऊ के झंडे के तहत संचालित हो रहा था। शिपिंग डाटा के मुताबिक इसका स्वामित्व मुंबई की ओशन ग्रे शिपिंग लिमिटेड के पास है। जबकि इसका संचालन फ्रेंड्स शिपिंग कंपनी ऐसे कर रही थी। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूस और यूक्रेन के बीच ब्लैक सी में संघर्ष लगातार तेज हो रहा है। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों ने एक दूसरे के बंदरगाहों, तेल टैंकरों और और समुद्री ढांचे पर लगातार हमले बढ़ा दिए हैं। यही वजह है कि दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल ब्लैक सी शिपिंग रूट पर खतरा बढ़ता जा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:51 +0530</pubDate>
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<title>ट्रंप के कई ड्रोन, लड़ाकू विमान तबाह, ईरान में भारत का बड़ा एक्शन</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच फिर से छिड़ी जंग इतनी भीषण हो गई है कि हालात एकदम आर-पार जैसे दिखाई दे रहे हैं। जहां अमेरिका ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए ड्रोन लड़ाकू विमानों से हमला कर रहा है। जिसमें अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है। तो वहीं ईरान भी पीछे नहीं है। ईरान भी उन मुस्लिम देशों में ताबड़तोड़ मिसाइलें दाग रहा है। जहां अमेरिका के एयरबेस हैं। कुछ घंटे पहले ही ईरान ने अमेरिका के कई लड़ाकू विमानों को तबाह कर दिया था। यह वो फाइटर जेट्स थे जिन पर ट्रंप सबसे ज्यादा गुरूर करते आए हैं। जॉर्डन में खड़े कई अमेरिकी सैन्य फाइटर जेट्स को बैलस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया था। अब खबर है कि ईरान ने जॉर्डन, कुवैत, ओमान में अमेरिकी ठिकानों पर सबसे भीषण हमले किए हैं। जिसमें अमेरिका के एमQ9 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया गया है। इसे भी पढ़ें: होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और जहाज पर हुआ हमला, ब्रिटिश सेना ने जारी किया अलर्टMQ9 ड्रोन दुनिया के सबसे ताकतवर ड्रोंस में से एक है जिसे हंटर किर भी कहा जाता है। ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग जैसे-जैसे खतरनाक रूप लेती जा रही है, वैसे ही भारत भी एक्शन में है और लगातार सतर्कता बरत रहा है। बिगड़ते हालातों के बीच भारत ने बहुत बड़ा फैसला लिया है। दरअसल अमेरिकी सेना ने एक बार फिर ईरान के अलग-अलग शहरों पर स्ट्राइक की तो भारत ने ईरान यात्रा की प्लानिंग करने वाले भारतीय नागरिकों को यात्रा टालने की सलाह दी है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने अपनी ट्रैवल एडवाइज़री जारी की है। एडवाइज़री में तेहरान में मौजूद भारतीयों से कमर्शियल उड़ानों का इस्तेमाल करके देश छोड़ने को कहा गया है। दूतवास ने कहा है कि हाल ही के दिनों में ईरान में अस्थिरता और संघर्ष का स्तर बड़ा है। जो भारतीय नागरिक की सीमी मकसद से ईरान जाने की योजना बना रहे हैं। उन्हें सुरक्षा हालात बेहतर होने तक अपनी यात्रा टाल देनी चाहिए। इतना ही नहीं दूतावास ने कहा है कि जो भारतीय नागरिक पहले से ही ईरान में हैं उन्हें उपलब्ध फ्लाइट विकल्पों का इस्तेमाल करके कुछ समय के लिए ईरान से बाहर निकलने पर विचार करना चाहिए। इसे भी पढ़ें: दिल्ली में किसान महापंचायत से पहले शंभू बॉर्डर सील, हरियाणा पुलिस ने सीमेंट के ब्लॉक लगाकर रोके रास्तेभारतीय दूतावास ने ईरान में रहने वाले अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वह बहुत ज्यादा सावधानी बरतें। भारतीय दूतावास की इस एडवाइज़री से साफ है कि आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा बिगड़ने वाले हैं। इसलिए भारत अपने नागरिकों को लेकर पहले से ही सतर्क हो गया है। उधर हॉर्मोज क्रॉस कर रहे दो जहाजों में ब्लास्ट की खबर सामने आई है। ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका इस इलाके में सैन्य अभियान चलाता रहेगा तब तक हॉर्मोज किसी भी जहाज के लिए सुरक्षित नहीं रहेगा। दरअसल ईरान अमेरिका जंग की शुरुआत के बाद से ही हॉररमुज इस समय दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में गिना जा रहा है। खाड़ी से निकलने वाले बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस के टैंकर इसी रास्ते से गुजरते हैं। लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच यहां से गुजरने वाले जहाजों के सामने हर पल मिसाइल ड्रोन या समुद्री माइन का खतरा बना हुआ है। हाल ही में कई भारतीय नाविक वाले जहाजों पर हमले हुए हैं। जिसके बाद भारत, ईरान और अमेरिका को चेता चुका है कि भारतीयों पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:50 +0530</pubDate>
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<title>ईरान का बड़ा पलटवार: Jordan में F&#45;15 और Bahrain में Amazon Data Center तबाह, US Bases पर भीषण हमला</title>
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<description><![CDATA[ ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उसकी सेना ने कहा है कि उन्होंने खाड़ी इलाके में अमेरिका से जुड़ी कई जगहों को निशाना बनाया है। इनमें जॉर्डन में एक शेल्टर के अंदर अमेरिकी मिसाइल डिफेंस रडार सिस्टम और F-15 एयरक्राफ्ट को नष्ट करना, और बहरीन में अमेज़न के सेंट्रल डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करना शामिल है। ये दावे IRGC और ईरानी सेना की ओर से जारी कई घोषणाओं में किए गए और ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर &#039;इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ब्रॉडकास्टिंग&#039; (IRIB) ने इन्हें प्रसारित किया। ईरान के ये हमले अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ हमलों का एक और दौर शुरू करने के बाद जवाबी कार्रवाई के तौर पर किए गए। इससे पहले, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों पर नए हमले किए।इसे भी पढ़ें: होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और जहाज पर हुआ हमला, ब्रिटिश सेना ने जारी किया अलर्टईरान की जवाबी कार्रवाई से पहले, CENTCOM ने X पर एक पोस्ट में कहा, आज शाम 4 बजे ET पर, कमांडर-इन-चीफ के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ हमलों का एक नया दौर शुरू किया। इन हमलों का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों पर हमले के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करना है। अपनी घोषणा में IRGC ने कहा कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने &quot;ऑपरेशन नस्र 2&quot; (Operation Nasr 2) के 24वें चरण के दौरान इलाके में अमेरिकी रडार और एयर डिफेंस क्षमताओं को निशाना बनाया। IRIB के अनुसार, IRGC ने कहा, &quot;IRGC एयरोस्पेस फोर्स के जोशीले लड़ाकों ने &#039;ऑपरेशन नस्र 2&#039; के 24वें चरण को जारी रखते हुए, एक मिसाइल डिफेंस रडार सिस्टम को नष्ट कर दिया और संबंधित शेल्टर के अंदर एक F-15 एयरक्राफ्ट को भी नष्ट कर दिया। IRGC ने आगे दावा किया कि इस ऑपरेशन का मकसद इलाके से रडार और डिफेंस सिस्टम को हटाना था, ताकि आगे मिसाइल और ड्रोन ऑपरेशन किए जा सकें।इसे भी पढ़ें: ट्रंप के कई ड्रोन, लड़ाकू विमान तबाह, ईरान में भारत का बड़ा एक्शनबयान में कहा गया यह इलाका अमेरिकी हमलावरों के लिए नहीं है। बच्चों की हत्या करने वाली अमेरिकी सेना को हमारे इलाके से चले जाना चाहिए ताकि और नुकसान न हो। एक और घोषणा में IRGC ने दावा किया कि उसने कई क्रूज़ मिसाइलों से &quot;बहरीन में अमेरिकी कंपनी अमेज़न के सेंट्रल डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर&quot; को निशाना बनाया। बयान में कहा गया कल अमेरिकी सेना ने दार खुयिन में बन रही आम नागरिकों की सुविधा वाली जगह पर हमला किया था। इसके जवाब में IRGC के एयरोस्पेस योद्धाओं ने कई क्रूज़ मिसाइलों से बहरीन में अमेरिकी कंपनी अमेज़न के सेंट्रल डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया और उसे नष्ट कर दिया। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:49 +0530</pubDate>
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<title>Ukraine तट पर Russian Missile Attack में 4 भारतीयों की मौत, India ने रूसी राजदूत को किया Summon</title>
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<description><![CDATA[ भारत ने रूस के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराया। भारत ने नई दिल्ली में रूसी &#039;चार्ज डी अफेयर्स&#039; (राजनयिक प्रतिनिधि) को बुलाकर गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले एक मर्चेंट जहाज़ पर हुए हमले में चार भारतीय नाविकों की मौत पर आपत्ति जताई। यह जहाज़ यूक्रेन के तट के पास हमले का शिकार हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने रूसी राजनयिक से कहा कि उनके हमले में हुई मौतें स्वीकार्य नहीं हैं। &#039;एमवी गोल्डन लियो&#039; नाम के इस जहाज़ पर 19 जुलाई की शाम को हमला हुआ था, जब वह ओडेसा बंदरगाह से निकल रहा था। जहाज़ पर 17 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें पांच भारतीय नागरिक शामिल थे। हमले में चार भारतीयों की मौत हो गई, जबकि पांचवां व्यक्ति गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस जहाज़ पर ज़्यादातर भारतीय और सीरियाई क्रू मेंबर थे। इस पर तीन क्रूज़ मिसाइलें दागी गईं, जिससे जहाज़ में ज़बरदस्त आग लग गई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में हमले के बाद जहाज़ से धुआं उठता दिख रहा है, हालांकि इन क्लिप्स की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।इसे भी पढ़ें: यूक्रेन में जहाज पर हमले में चार भारतीयों की मौत, भारत ने घटना की कड़ी निंदा कीयूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने कहा कि रूस ने उस नागरिक जहाज़ पर हमला किया जो यूक्रेन के तय समुद्री रास्ते से गुज़र रहा था। यूक्रेन की वायु सेना ने बताया कि जहाज़ पर रूसी क्रूज़ मिसाइलों से हमला हुआ। रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से यह पहली घटना है जिसमें भारतीय नाविकों की मौत हुई है।भारत की प्रतिक्रियाविदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि यूक्रेन में भारतीय मिशन स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और प्रभावित लोगों की मदद के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा हम मारे गए भारतीय नागरिकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायल भारतीय नागरिक के जल्द और पूरी तरह से ठीक होने की कामना करते हैं।&quot; रूस का सीधे तौर पर नाम लिए बिना, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है और दोहराता है कि कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना और निर्दोष नागरिक क्रू सदस्यों की जान जोखिम में डालना, या नेविगेशन और व्यापार की आज़ादी में बाधा डालना निंदनीय है और इससे बचना चाहिए।इसे भी पढ़ें: भारतीय क्रू जहाज पर अचानक रूस ने क्यों बोल दिया हमला? 4 की गई जान, भड़का भारत!ओडेसा पर बार-बार हमले क्यों हो रहे हैं?यह हमला ओडेसा के पास हुआ। यह शहर यूक्रेन के लिए रणनीतिक रूप से बहुत अहम है क्योंकि यह उसका मुख्य बंदरगाह है और ब्लैक सी (काला सागर) पर मौजूद सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक है। यहाँ से अनाज, धातु, केमिकल और दूसरे सामान का निर्यात होता है। इस बंदरगाह पर रूस कई बार हमले कर चुका है; पिछले हफ़्ते ही हुए एक हमले में दो लोगों की मौत हो गई थी। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने उस हमले की निंदा की थी। उन्होंने एक्स पर कहा यह ज़रूरी है कि हर सरकारी संस्था और यूक्रेन की सुरक्षा और मज़बूती के लिए सहयोगियों के साथ बातचीत में शामिल सभी लोग तेज़ी और असरदार ढंग से काम करें। नेताओं के स्तर पर जिन चीज़ों पर सहमति बनी है, उन्हें लागू करने की रफ़्तार बढ़ाई जानी चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:49 +0530</pubDate>
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<title>Balochistan Missing Persons: 6300 दिनों से जारी Protest के बीच गायब हुए दो और युवा, Pakistan सरकार पर बढ़ा भारी दबाव</title>
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<description><![CDATA[ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से ज़बरदस्ती गायब किए जाने के दो नए मामले सामने आए हैं। इनमें अवारान का एक किशोर छात्र और एक युवा दुकानदार शामिल हैं, जो हुब में अलग-अलग घटनाओं में हिरासत में लिए जाने के बाद से लापता बताए जा रहे हैं। &#039;द बलूचिस्तान पोस्ट&#039; के अनुसार, अवारान के रहने वाले और सब्ज़ल के बेटे, 15 साल के मुइज़ जान को कथित तौर पर 14 जुलाई की रात हुब के ज़हरी गोठ डारो होटल इलाके से हिरासत में लिया गया था। उसके परिवार का दावा है कि उसे हिरासत में लेने में पाकिस्तान की मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) के माने जाने वाले लोग शामिल थे। तब से उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।इसे भी पढ़ें: Balochistan में छात्रों के गायब होने की घटनाएं तेज, Sami Baloch ने Pakistan सरकार को घेराएक और मामले में &#039;द बलूचिस्तान पोस्ट&#039; ने बताया कि नबी बख्श के 21 साल के बेटे सद्दाम हुसैन को कथित तौर पर 17 जुलाई की सुबह हब के मीराबाद इलाके से हिरासत में लिया गया था। अवारान का रहने वाला हुसैन एक दुकानदार था। खबरों के मुताबिक, उसे एक ऑपरेशन के दौरान ले जाया गया था, जिसमें उसके परिवार का आरोप है कि फ्रंटियर कॉर्प्स (FC), काउंटर-टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) और मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) के जवान शामिल थे। उसके परिवार का कहना है कि तब से उसे नहीं देखा गया है। इसके अलावा, &#039;द बलूचिस्तान पोस्ट&#039; ने खबर दी कि क्वेटा प्रेस क्लब के बाहर &#039;वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स&#039; (VBMP) की ओर से आयोजित विरोध प्रदर्शन कैंप ने सोमवार को 6,300 दिन पूरे कर लिए। यह कथित तौर पर जबरन गायब किए गए लोगों की वापसी और उनके परिवारों के लिए न्याय की मांग को लेकर लगातार हो रहे प्रदर्शनों के 17 साल से ज़्यादा का समय है।इसे भी पढ़ें: सात समंदर पार सोनम वांगचुक के अनशन की गूंज, इस देश में सड़कों पर उतरे लोग&#039;द बलूचिस्तान पोस्ट&#039; की रिपोर्ट के मुताबिक, सभा को संबोधित करते हुए VBMP के चेयरमैन नसरुल्ला बलोच ने जबरन गायब किए जाने की घटनाओं को पाकिस्तान के संविधान, राष्ट्रीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का गंभीर उल्लंघन बताया। उन्होंने पाकिस्तानी सरकार, न्यायपालिका, संसद और अन्य संबंधित संस्थाओं से अपील की कि वे सभी लापता लोगों का पता लगाने और उनके परिवारों की चिंताओं को दूर करने के लिए तुरंत कदम उठाएं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:48 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran Conflict: 10वीं रात भी अमेरिकी बमबारी जारी, Iran का जॉर्डन में US Bases और F&#45;15 पर भीषण पलटवार</title>
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<description><![CDATA[ यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ़ हमले का एक और नया दौर पूरा कर लिया है। यह लगातार 10वीं रात थी जब सैन्य कार्रवाई की गई। इन कार्रवाइयों का मकसद तेहरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमज़ोर करना था, जिनका इस्तेमाल होर्मुज़ जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों पर हमले के लिए किया जाता रहा है। सोमवार को जारी एक बयान में CENTCOM ने बताया कि ये ताज़ा हमले 20 जुलाई को रात 9 बजे (ET) खत्म हुए। इन हमलों में ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, समुद्री क्षमताएं, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया। बयान में कहा गया है अमेरिका सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 20 जुलाई को रात 9 बजे (ET) ईरान के खिलाफ हमलों का एक और दौर पूरा किया।इसे भी पढ़ें: ईरान का बड़ा पलटवार: Jordan में F-15 और Bahrain में Amazon Data Center तबाह, US Bases पर भीषण हमलाCENTCOM के अनुसार, इस ऑपरेशन का मकसद ईरान की उस क्षमता को कम करना था, जिससे वह रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर हमले जारी रखता है। बयान में आगे कहा गया अमेरिकी सेना ने ईरान के मिलिट्री कमांड सेंटर्स, समुद्री क्षमताओं, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स और एयर डिफेंस सिस्टम्स पर हमले किए, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर हमले जारी रखने की ईरान की क्षमता को कमजोर किया जा सके। CENTCOM ने कहा कि जारी तनाव के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही जारी है। ज़रूरी इंटरनेशनल समुद्री रास्ते से कमर्शियल जहाज़ों का आना-जाना जारी है। इसमें कहा गया है कि मई की शुरुआत से, CENTCOM की फ़ोर्स ने लगभग 900 कमर्शियल जहाज़ों और 450 मिलियन बैरल कच्चे तेल के गुज़रने में मदद की है। इस इलाके में अमेरिकी सेना की स्थिति को दोहराते हुए, CENTCOM ने कहा कि अमेरिकी फ़ोर्स आम नागरिकों के समुद्री ट्रैफ़िक के ख़िलाफ़ खतरों का जवाब देने के लिए तैयार हैं।इसे भी पढ़ें: होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और जहाज पर हुआ हमला, ब्रिटिश सेना ने जारी किया अलर्टबयान में कहा गया अमेरिकी सेनाएं उस जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) से आज़ादी और खुले तौर पर गुज़रने वाले आम नागरिकों और नाविकों के ख़िलाफ़ ईरान की बिना वजह की आक्रामकता के लिए उसे ज़िम्मेदार ठहराने के लिए तैयार हैं। इन हमलों के बाद, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उसकी सेना ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़ी कई जगहों और संपत्तियों को निशाना बनाया। इनमें जॉर्डन में एक अमेरिकी मिसाइल डिफेंस रडार सिस्टम और शेल्टर के अंदर मौजूद F-15 विमान को नष्ट करने का दावा, और बहरीन में अमेज़न के सेंट्रल डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला शामिल है। IRGC और ईरानी सेना की ओर से जारी और ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर &#039;इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ब्रॉडकास्टिंग&#039; (IRIB) द्वारा प्रसारित कई घोषणाओं में, IRGC ने कहा कि उसके हमले &quot;ऑपरेशन नसर 2&quot; का हिस्सा थे, जबकि ईरानी सेना ने &quot;ऑपरेशन लाइटनिंग&quot; के तहत इन संपत्तियों को निशाना बनाया। IRGC ने दावा किया कि उसकी सेना ने जॉर्डन के रुकबान इलाके में अमेरिकी सैनिकों के ठिकाने पर हमला किया और आरोप लगाया कि इसमें कई सैनिक मारे गए। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:47 +0530</pubDate>
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<title>अब यूरोप में सीधे घुस जाएंगी ईरानी मिसाइलें? IRGC ने दी ऐसी धमकी, कांपे अमेरिका के दोस्त</title>
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<description><![CDATA[ बस दो से तीन दिन और और अमेरिका को उसकी जुर्रतों का मजा चखाया जाएगा। यह इशारे मोहसन रजाई के हैं। मोहसिन रजाई आईआरजीसी यानी पाजदराने इस्लाम के पूर्व कमांडर रहे हैं और इस वक्त वो ईरान में सुप्रीम लीडर के सलाहकार और वहां की सुप्रीम सिक्योरिटी काउंसिल के मेंबर हैं। उनकी बात को इसलिए भी गंभीरता से लिया जा सकता है कि उन्होंने ईरान इराक जंग के दौरान आईआरजीसी को लीड किया था। दरअसल ईरान में एक नेशनल न्यूज़ चैनल को दिए गए इंटरव्यू में मोहसिन रिजाई ने साफ इशारे दिए हैं कि अब ईरान ज्यादा बर्दाश्त नहीं करेगा। बस दो से तीन दिन और देखेगा और अगर अमेरिकी हिमाकत जारी रही तो ईरान अपने जंग लड़ने के अंदाज को एकदम से बदल देगा और जंग यूरोप तक जाएगी। हालांकि जंग लड़ने का नया अंदाज क्या होगा इसका खुलासा ईरान के पूर्व आईआरजीसी अधिकारी ने नहीं किया लेकिन उनके जंग को यूरोप तक ले जाने वाले इशारों से कयासों का दौर भी शुरू हो गया है। इसे भी पढ़ें: ट्रंप के कई ड्रोन, लड़ाकू विमान तबाह, ईरान में भारत का बड़ा एक्शनमोहसिन रजाई के ये इशारे इसलिए भी अहम है क्योंकि ईरान में सरकार या आईआरजीसी सीधे तौर पर जंग की रणनीति पर कोई चर्चा नहीं करती लेकिन अपने सीनियर अफसरों या पूर्व अधिकारियों के जरिए अपनी मंशा का इज़हार भी कर देती है। इंटरव्यू में मोहसिन रिजाई ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि बस दो से तीन दिन बाद अमेरिका पछताएगा। अब उनकी इस धमकी पर कई तरह की थ्योरी सोशल मीडिया पर चल रही हैं। साथ ही ईरान में इस पर चर्चा हो रही है। कयास यह लग रहे हैं कि मुमकिन है कि ईरान के पास अमेरिका के यूरोप में मौजूद एसेट पर हमला करने की क्षमता आ गई हो। चर्चा तो यह भी है कि पर्शियन गल्फ में अमेरिका के जो इंटरेस्ट है उन्हें ईरान तबाह कर सकता है। अमेजन कंपनी के दफ्तर मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी तेल गैस इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल इसमें हो सकते हैं। ईरान का मीडिया तो यह भी आकलन कर रहा है कि अगर अमेरिका नहीं मानता है तो ईरान की मिसाइलें सऊदी अरब में मदीना के पास यंबू तेल पाइपलाइन को ध्वस्त कर सकती हैं। यह पाइपलाइन सऊदी ने सीधे अमेरिका की तरफ जहाजों से तेल भेजने के लिए तैयार कर रखी है। कयास है कि ईरान इसे टारगेट कर सकता है। मतलब जहां-जहां अमेरिका का इंटरेस्ट है उसे तबाह कर देगा ईरान। चाहे वो यूरोप हो या फिर पर्शियन गल्फ में। और तो और लोग सोशल मीडिया पर यह आकलन भी कर रहे हैं कि जंग के नए अंदाज में ईरान फारस के समंदर से गुजरने वाले ऑप्टिकल फाइबर केबल को भी काट सकता है। यह दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी मुसीबत होगी। इंटरनेट थप हो जाएगा।  इसे भी पढ़ें: ईरान का बड़ा पलटवार: Jordan में F-15 और Bahrain में Amazon Data Center तबाह, US Bases पर भीषण हमलाईरान ने अमेरिका को थमने के लिए सिर्फ दो दिन की मोहलत दी है। उसके बाद यूरोप तक हमले की बात बड़े खतरे के संकेत हैं। कुवैत में ईरान ने भीषण तबाही मचा दी है। क्या पावर प्लांट? क्या वाटर डिसलिनेशन प्लांट और क्या अमेरिकी सेना के बेस हथियार और गोला बारूद के वेयर हाउस कुवैत में इस वक्त हर ओर सिर्फ आग ही आग नजर आ रही है। मिसाइल गिर रहे हैं।  ड्रोन हमले हो रहे हैं। दरअसल ईरान ने कुवैत के अलसुबिया पावर जनरेशन एंड वाटर डिसलिनेशन प्लांट पर ऐसा भीषण मिसाइल अटैक किया कि महज एक सेकंड के अंदर पूरे इलाके की बिजली व्यवस्था ठप हो गई। आननफानन में कुवैती प्रशासन को दूसरे इलाकों की बिजली आपूर्ति काटकर इस प्रभावित क्षेत्र में सप्लाई पहुंचाने की व्यवस्था करनी पड़ी।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:45 +0530</pubDate>
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<title>Houthi Rebels का Eye for an Eye एक्शन, Bab al&#45;Mandeb Strait में Saudi Arabia की समुद्री नाकेबंदी का किया ऐलान</title>
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<description><![CDATA[ यमन के हूती विद्रोहियों ने घोषणा की कि वे सोमवार को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू करेंगे। यह कदम सऊदी अरब द्वारा सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर की गई नाकेबंदी और हवाई हमलों के जवाब में उठाया गया है। इस नाकेबंदी से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) को खतरा है, जो लाल सागर का प्रवेश द्वार है और जहाँ से दुनिया का लगभग 12% व्यापार होता है। हूथी सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने एक वीडियो बयान में कहा कि सऊदी अरब पर समुद्री प्रतिबंध तुरंत लागू होगा और इसे &quot;आँख के बदले आँख&quot; वाली कार्रवाई बताया। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि इस बारे में कोई और जानकारी नहीं दी गई कि यह रोक कैसे काम करेगी, लेकिन हूती मीडिया ऑफिस के डिप्टी हेड, नसरुद्दीन आमेर ने एक्स पर कहा कि सऊदी अरब के लिए बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य (strait) को बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने ऐसा सऊदी अरब द्वारा यमन के लोगों पर 10 साल से ज़्यादा समय से लगाई गई अनुचित नाकेबंदी के जवाब में कहा।इसे भी पढ़ें: Houthi Rebels की Saudi Arabia के जहाजों पर नाकेबंदी, Global Oil Supply पर मंडराया गहरा संकटक्या सऊदी अरब ने यमन पर हमला किया?सऊदी अरब (KSA) ने 2015 में हूतियों के खिलाफ़ एक गठबंधन का नेतृत्व किया और साथ ही युद्ध से जूझ रहे इस देश पर हवाई और समुद्री नाकेबंदी भी लगा दी। हूतियों ने 2014 में शुरू हुए गृह युद्ध के दौरान यमन की राजधानी पर कब्ज़ा कर लिया था। हालाँकि, 2022 में KSA और हूतियों के बीच युद्धविराम हुआ था। अब उस युद्धविराम पर खतरा मंडरा रहा है। हूतियों ने KSA पर आरोप लगाया है कि उसने ईरान से लौट रहे हूती नेताओं को ले जा रही एक उड़ान को रोकने की कोशिश में सना हवाई अड्डे पर हमला किया। इसके बाद, मिलिटेंट समूह ने 13 जुलाई, 2026 को KSA के आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मिसाइलें और ड्रोन दागे। ईरान के साथ तनाव से शिपिंग रूट पर असरईरान के कब्ज़े के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के ज़्यादातर बंद हो जाने के कारण, सऊदी अरब अपने कच्चे तेल को ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के ज़रिए रेड सी (Red Sea) तक भेज रहा है। रिस्टैड एनर्जी (Rystad Energy) के अनुसार, अब रोज़ाना लगभग 25 लाख बैरल तेल का ट्रांसपोर्ट खतरे में है, क्योंकि बाब अल-मंदेब (Bab al-Mandeb) पर हूतियों की नई नाकेबंदी से सऊदी अरब के तेल निर्यात का यह आखिरी रास्ता भी बंद होने का खतरा पैदा हो गया है। इससे सऊदी अरब पर अपने दोनों मुख्य शिपिंग रूट को लेकर एक साथ दबाव बढ़ गया है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:44 +0530</pubDate>
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<title>Iran से बवाल के बीच बड़ी बैठक, सऊदी के साथ डोभाल ने की सीक्रेट मीटिंग</title>
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<description><![CDATA[ ईरान और अमेरिका में बढ़ते तनाव के बीच भारत भी लगातार मध्यपूर्व के हालात पर नजर बनाए हुए हैं। इसी बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सऊदी अरब पहुंचे हैं। जहां उन्होंने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैजल बिन फरहान के साथ लंबी बातचीत की। इस मुलाकात को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि तनाव के वक्त में भारत अपने सबसे भरोसेमंद साझेदारों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। रियाद में हुई इस बैठक में भारत और सऊदी अरब के रिश्तों को और मजबूत करने पर बात हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर चर्चा की कि बदलते हालात में दोनों देश किस तरह एक दूसरे के साथ मिलकर काम कर सकते हैं। बातचीत सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रही बल्कि पूरे अरब क्षेत्र की मौजूदा स्थिति ऊर्जा की सप्लाई और समुद्री रास्तों की सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। बड़ी बात यह रही कि 3 महीने के अंदर यह अजित डोभाल का दूसरा सऊदी दौरा है। इससे पहले अप्रैल में भी वह रियाद गए थे। इसे भी पढ़ें: Houthi Rebels का Eye for an Eye एक्शन, Bab al-Mandeb Strait में Saudi Arabia की समुद्री नाकेबंदी का किया ऐलानउस समय भी उन्होंने सऊदी के बड़े नेताओं के साथ बैठक कर दोनों देशों के रिश्तों, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्र के हालात पर बातचीत की थी। इतने कम समय में दोबाल का सऊदी जाना साफ बताता है कि भारत इस रिश्ते को कितना महत्व दे रहा है। बता दें पिछले कुछ सालों में भारत और सऊदी अरब के रिश्ते तेजी से मजबूत हुए हैं। पहले जहां दोनों देशों के बीच बात सिर्फ तेल खरीदने बेचने तक होती थी। वहीं अब सुरक्षा, निवेश, व्यापार और कई दूसरे क्षेत्रों में भी साथ मिलकर काम किया जा रहा है। पिछले साल दोनों देशों के बीच वीजा छूट का एक बड़ा समझौता हुआ था। इस समझौते का मकसद दोनों देशों के अधिकारियों और प्रतिनिधियों की आवाजाही आसान बनाना था ताकि मिलकर काम करने में किसी तरह की दिक्कत ना आए। आपको बता दें भारत के लिए सऊदी अरब की अहमियत सिर्फ इसलिए नहीं है क्योंकि वहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आता है बल्कि इस वजह से भी है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में शांति बनी रहना भारत के लिए बेहद जरूरी है। अगर इस इलाके में तनाव बढ़ता है तो उसका असर तेल की कीमतों, व्यापार और समुद्री रास्तों पर पड़ सकता है और यही वजह है कि भारत लगातार इस क्षेत्र के देशों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं।इसे भी पढ़ें: Houthi Rebels की Saudi Arabia के जहाजों पर नाकेबंदी, Global Oil Supply पर मंडराया गहरा संकटहालांकि सऊदी अरब में भारतीयों की बड़ी आबादी भी दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बनाती है। करीब 27 लाख भारतीय वहां रहते हैं और काम करते हैं। सऊदी सरकार भी कई बार यह कह चुकी है कि भारतीय समुदाय ने उसके विकास में बड़ा योगदान दिया है और यही वजह है कि दोनों देशों के बीच भरोसा लगातार बढ़ता जा रहा है। हालांकि यहां पर आपको एक और बात बता दें। पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी के बीच एक डिफेंस फैक्ट हुआ था। जिसके बाद ऐसा लगा था कि सऊदी और भारत के रिश्तों में थोड़ी दूरी आएगी, लेकिन इसके बावजूद भारत ने सऊदी अरब के साथ अपने रणनीतिक संपर्कों की रफ्तार कम नहीं होने दी। पिछले कुछ महीनों में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की लगातार दूसरी रियाद यात्रा इस बात का संकेत है कि भारत खाड़ी क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली देश के साथ सुरक्षा ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर लगातार करीबी तालमेल बनाए हुए हैं। ऐसे में मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत और सऊदी अरब के बीच बढ़ता संवाद दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की अहमियत को और मजबूत करता है। कुल मिलाकर अजीत डोबाल का यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं रही।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:43 +0530</pubDate>
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<title>इधर South China Sea में चीन का हमला, उधर ब्रह्मोस पर फिलीपींस का बड़ा ऐलान</title>
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<description><![CDATA[ इतिहास गवाह है कि जब-जब कोई शक्ति अपनी सीमाओं को भूलकर दूसरों के आंगन में लहू बहाती है तो उसका अंत भी करीब होता है। दक्षिण चीन सागर यानी साउथ चाइना सी की लहरें आज फिर से चीख रही है। एक तरफ दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंभू रखवाला यानी कि चीन जिसने कोस्ट गार्ड की वर्दी में अपने समुद्री डकैतों को खूनी खेल खेलने के लिए उतार दिया और दूसरी तरफ है फिलीपींस। एक छोटा सा देश जो अब झुकने को तैयार नहीं है। लेकिन इस पूरी जंग में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट क्या है? और वो टर्निंग पॉइंट है भारत। आज मनीला के गलियारों में भारत के नाम की गूंज है। फिलीपींस के राजदूत जोसे फ्रांसिस्को इग्नासियो ने दिल्ली से जो संदेश भेजा है उसने चीन के सैन्य मुख्यालयों में हलचल मचा दी है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में दो निहत्त रबर बोट्स अपने साथियों के लिए खाना और दवाइयां लेकर जा रही थी। तभी चीन की आठ हाई स्पीड नावें उन्हें घेर लेती है। चीनी जवान आधुनिक बंदूकों की बजाय लकड़ी के लट्ठों, डंडों और नुकीले हथियारों जैसे कि कुल्हाड़ी से हमला करते हैं। यह हमला मारने के लिए नहीं बल्कि फिलीपींस के नेवी को मानसिक रूप से तोड़ने और अपमानित करने के लिए था। इसे भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश की विशाल युवा आबादी राज्य की सबसे बड़ी ताकत है, कोई चुनौती नहीं: योगी आदित्यनाथफिलीपींस के एक जवान सैनिक का अंगूठा तक कट गया। कई के सिर फट गए और चीनी सैनिकों ने उनके संचार, उपकरण जैसे कि रेडियो और फोन छीन लिए ताकि वे दुनिया को मदद के लिए ना भुला सके। उन्होंने फिलीपींस की नाव को जानबूझकर पंचर भी कर दिया। यह एक पेशेवर कोस्ट गार्ड का काम नहीं है बल्कि मध्य युगीन लुटेरों जैसा व्यवहार है। चीन यह दिखाना चाहता है कि इस समुद्र में कोई कानून नहीं है। सिर्फ उसकी लाठी ही कानून है। जब दुनिया ने चीन पर थू-थू की तो ग्लोबल टाइम्स ने एक रिपोर्ट जारी की कि फिलीपींस ने पहले हम पर हमला किया। चीन पर हमला किया। जिस इलाके में यह हुआ वो फिलीपींस के मुख्य तट से सिर्फ 200 नॉटिकल मील दूर है। यह फिलीपींस का एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन है। वहीं चीन की मुख्य भूमि से इसकी दूरी की बात करें तो करीब ये 1300 किमी से भी ज्यादा है। अगर आपका पड़ोसी आपके घर के बरामदे में आकर आपको डंडे से पीठे और कहे कि वह आत्मरक्षा कर रहा है तो क्या कोई यकीन करेगा? बिल्कुल नहीं करेगा। चीन की नाइन डैश लाइन एक काल्पनिक रेखा है जिसे साल 2016 में अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने खारिज कर दिया था। लेकिन चीन अपनी विस्तारवादी भूख के कारण इसे मानने के लिए तैयार नहीं है।  इसे भी पढ़ें: Operation Sindoor से दुनिया ने देखा भारत का दम, Rajnath Singh बोले- अब Defense Production में रचेंगे नया इतिहासउधर हमला होता है। इधर ब्रह्मोस पर फिलीपींस ने बड़ा ऐलान कर दिया भारत से। यह कोई संयोग नहीं है। दरअसल भारत में फिलीपींस के राजदूत इग्नासियो का बयान कि ब्रह्मोस एक बहुत अच्छी शुरुआत है। यह चीन के लिए एक कड़ी चेतावनी है। फिलीपींस ने दुनिया को बता दिया कि वो अब सॉफ्ट टारगेट नहीं है। उसके पास दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस है।  बता दें भारत का रक्षा उद्योग अब आत्मनिर्भर से वैश्विक शक्ति की ओर बढ़ रहा है। फिलीपींस ने भारत को सबसे प्रमुख विकल्प चुना है क्योंकि भारत की मिसाइलें चीन की मिसाइल रक्षा प्रणाली जैसे कि S300 को चकमा देने में माहिर है। फिलीपींस अपनी तटीय सीमाओं पर ब्रह्मोस तैनात कर रहा है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:42 +0530</pubDate>
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<title>Saudi Arabia Nuclear Deal | क्या सऊदी अरब अब बनाएगा परमाणु बम? ट्रंप की सिविल न्यूक्लियर डील के पीछे के मायने, शर्तें और चुनौतियाँ | Explained</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ एक ऐतिहासिक और दूरगामी असर वाले परमाणु समझौते को अपनी मंज़ूरी दे दी है। इस समझौते से जुड़े दो वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इससे सऊदी अरब को अपने असैन्य (Civilian) परमाणु कार्यक्रम के लिए यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) की क्षमता हासिल करने का रास्ता साफ हो सकता है। &#039;द वॉल स्ट्रीट जर्नल&#039; में सबसे पहले सामने आई इस खबर के बाद वैश्विक राजनीति में यह बहस छिड़ गई है कि क्या रियाद अब परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है?परमाणु डील के 30 साल तक चलने की उम्मीद हैजिन लोगों को इस फ़ैसले के बारे में सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने की इजाज़त नहीं थी (जिसकी अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है), उन्होंने AP को बताया कि इस समझौते की सार्वजनिक घोषणा बुधवार तक हो सकती है। उम्मीद है कि यह डील 30 साल तक चलेगी और इसमें कार्यक्रम को विकसित करने में अमेरिकी कंपनियाँ भी शामिल होंगी। अमेरिका-सऊदी की संयुक्त स्टडी के बाद, इस डील के तहत सऊदी अरब में यूरेनियम संवर्धन सुविधा बनाने की इजाज़त मिल सकती है।लेकिन इस डील को समीक्षा के लिए कांग्रेस के सामने पेश किया जाएगा, और इसे सांसदों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें डर है कि सऊदी अरब को अपना यूरेनियम संवर्धित करने की उनकी पुरानी इच्छा पूरी करने में मदद करने से परमाणु प्रसार और प्रतिस्पर्धा का एक नया दौर शुरू हो सकता है।क्या सऊदी अरब अब परमाणु बम बनाएगा?क्या अमेरिकी परमाणु डील का मतलब यह है कि सऊदी अरब अब परमाणु बम बना सकता है? इसका जवाब है - नहीं। लेकिन यह समझौता दुनिया के सबसे अस्थिर क्षेत्रों में से एक में परमाणु सहयोग के प्रति अमेरिकी नीति में एक बड़ा बदलाव है।सऊदी अरब &#039;इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी&#039; (IAEA) का सदस्य देश है। वियना स्थित यह एजेंसी शांतिपूर्ण परमाणु कार्यों को बढ़ावा देती है, लेकिन साथ ही देशों की जाँच-पड़ताल भी करती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके पास गुप्त परमाणु हथियार कार्यक्रम नहीं हैं।लेकिन एक व्यक्ति के अनुसार, इस समझौते में IAEA के &#039;अतिरिक्त प्रोटोकॉल&#039; (Additional Protocol) के शामिल होने की उम्मीद नहीं है, जो ज़्यादा निगरानी, ​​निरीक्षण और सत्यापन की अनुमति देता है। यह संभावित घोषणा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और इज़राइल ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध लड़ रहे हैं, जिसका एक मकसद तेहरान की परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता को खत्म करना है। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु संवर्धन कार्यक्रम शांतिपूर्ण है।सिविल परमाणु डील के बारे में सब कुछ जानें?नागरिक परमाणु समझौता सरकारों के बीच एक ऐसा ढाँचा है जो देशों को शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा पर सहयोग करने की अनुमति देता है। ऐसे समझौतों में आम तौर पर ये बातें शामिल होती हैं:न्यूक्लियर पावर प्लांट बनानान्यूक्लियर फ्यूल की सप्लाईरिएक्टर टेक्नोलॉजी का ट्रांसफरन्यूक्लियर सुरक्षा और बचाव के स्टैंडर्डसाइंटिस्ट और इंजीनियरों की ट्रेनिंगरेडियोएक्टिव कचरे का मैनेजमेंट इंटरनेशनल जांच और सुरक्षा उपायइस फ़ैसले पर टिप्पणी के अनुरोधों का व्हाइट हाउस और रियाद में मौजूद सऊदी अधिकारियों ने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया; इस फ़ैसले की सबसे पहले रिपोर्ट &#039;द वॉल स्ट्रीट जर्नल&#039; ने दी थी। ट्रंप और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन, दोनों ने ही अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयर करने के लिए सऊदी अरब के साथ न्यूक्लियर डील करने की कोशिश की थी।लेकिन परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के मामलों के एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि सऊदी अरब में सेंट्रीफ्यूज घूमने से देश के लिए संभावित हथियार प्रोग्राम का रास्ता खुल सकता है। सऊदी अरब के असरदार और असल नेता, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने संकेत दिया है कि अगर तेहरान परमाणु बम हासिल कर लेता है, तो वे भी ऐसा प्रोग्राम शुरू कर सकते हैं।एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने पिछले साल ट्रंप के सऊदी अरब दौरे से कुछ समय पहले वहां का दौरा किया था और अपने सऊदी समकक्ष के साथ देश के कमर्शियल न्यूक्लियर पावर इंडस्ट्री को विकसित करने पर चर्चा की थी।इससे पहले, इज़राइल द्वारा कतर में हमास के अधिकारियों को निशाना बनाकर हमला करने के बाद सऊदी अरब और परमाणु हथियार संपन्न पाकिस्तान ने आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। तब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा था कि ज़रूरत पड़ने पर उनके देश का परमाणु प्रोग्राम सऊदी अरब के लिए &quot;उपलब्ध कराया जाएगा&quot;। इसे इज़राइल के लिए एक चेतावनी के तौर पर देखा गया, जिसे लंबे समय से मध्य पूर्व का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न देश माना जाता रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:41 +0530</pubDate>
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<title>Afghanistan Flash Floods: नूरिस्तान में कुदरत का कहर, भारी तबाही में 20 की मौत और 100 से ज्यादा Missing</title>
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<description><![CDATA[ अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। देश के नूरिस्तान प्रांत में मूसलाधार बारिश के बाद आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं करीब 80 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जबकि 100 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहे हैं।बता दें कि अफगानिस्तान के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रवक्ता यूसुफ हम्माद ने सामाजिक माध्यम पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि अचानक आई बाढ़ के कारण नूरिस्तान प्रांत में बड़े पैमाने पर जनहानि हुई है। कई गांवों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है, जिससे राहत कार्यों में शुरुआती कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।मौजूद जानकारी के अनुसार भारी बारिश के बाद पहाड़ी इलाकों से तेज बहाव के साथ पानी नीचे की बस्तियों में पहुंच गया। इससे कई घर, सड़कें और स्थानीय ढांचे प्रभावित हुए। बाढ़ इतनी तेजी से आई कि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का पर्याप्त समय भी नहीं मिल सका। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं।गौरतलब है कि घटना की सूचना मिलते ही प्रांतीय आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच गए। बचाव दलों ने घायलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, लापता लोगों की तलाश करने और मृतकों के शवों को निकालने का अभियान शुरू कर दिया है। कई स्थानों पर स्थानीय लोग भी राहत और बचाव कार्य में प्रशासन की मदद कर रहे हैं।यूसुफ हम्माद ने बताया कि फिलहाल राहत अभियान प्राथमिकता के आधार पर चलाया जा रहा है। इसके साथ ही नुकसान का विस्तृत आकलन भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मृतकों, घायलों और संपत्ति के नुकसान से जुड़े अंतिम आंकड़े जांच और सर्वेक्षण पूरा होने के बाद ही जारी किए जाएंगे।बता दें कि अफगानिस्तान में हर वर्ष बारिश के मौसम के दौरान अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएं सामने आती रहती हैं। देश के कई पहाड़ी क्षेत्रों में जल निकासी की सीमित व्यवस्था और कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण ऐसे हादसों में जान-माल का नुकसान अधिक होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज बारिश के दौरान संवेदनशील इलाकों में समय रहते चेतावनी और बेहतर राहत व्यवस्था से ऐसे हादसों का असर कम किया जा सकता है।फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान लापता लोगों की तलाश, घायलों के उपचार और प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने पर है। बचाव अभियान लगातार जारी है और आशंका जताई जा रही है कि जैसे-जैसे खोज अभियान आगे बढ़ेगा, मृतकों और प्रभावित लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:41 +0530</pubDate>
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<title>Netanyahu की गिरफ्तारी पर Mayor Mamdani के सुर बदले, बोले&#45; ICC Warrant लागू करना Federal Government का काम</title>
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<description><![CDATA[ न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान मम्दानी ने मंगलवार को कहा कि शहर के पास इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ख़िलाफ़ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) द्वारा जारी गिरफ़्तारी वारंट को लागू करने का कानूनी अधिकार नहीं है। हालाँकि, उन्होंने फ़ेडरल सरकार से कार्रवाई करने की अपील की और कहा कि नेतन्याहू एक &quot;युद्ध अपराधी&quot; हैं और न्यूयॉर्क शहर में उनका स्वागत नहीं है। एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में मम्दानी ने कहा कि उनके प्रशासन ने फ़ैसला लेने से पहले सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार किया था। उन्होंने कहा कि यह साफ़ है कि हमारे पास इस वारंट को लागू करने का स्वतंत्र कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने आगे कहा हालाँकि, फ़ेडरल सरकार के पास यह अधिकार है और मैं उनसे ICC में शामिल होने और इस वारंट को लागू करने की अपील करता हूँ।इसे भी पढ़ें: फुटबॉल का विवाद सियासत में पहुंचा, New York Mayor बोले- रेफरी के गलत फैसले से हारा Egyptइस महीने की शुरुआत में, ममदानी ने &#039;द न्यूयॉर्क टाइम्स&#039; को बताया था कि वह और शहर का कानूनी विभाग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि अगर नेतन्याहू सितंबर में UN जनरल असेंबली के लिए न्यूयॉर्क आते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या नहीं। पिछले साल मेयर पद के चुनाव प्रचार के दौरान, उन्होंने यह भी कहा था कि वह शहर की पुलिस को निर्देश देंगे कि वे गाजा युद्ध से जुड़े ICC वारंट के तहत नेतन्याहू को गिरफ्तार करें। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि नेतन्याहू को &quot;अमेरिका में रहने के दौरान किसी भी तरह से गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। पोस्ट में ममदानी का सीधे तौर पर ज़िक्र नहीं था। मंगलवार के वीडियो संदेश में मेयर ने कहा मैं बिल्कुल साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि न्यूयॉर्क शहर में बेंजामिन नेतन्याहू का स्वागत नहीं है, और न ही किसी दूसरे युद्ध अपराधी का। यूएन में इज़राइल के राजदूत डैनी डैनन ने मेयर को जवाब देते हुए कहा बस बहुत हुआ। डैनन ने सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा आपको न्यूयॉर्क के लोगों की सेवा करने के लिए चुना गया था, न कि हमास के प्रोपेगैंडा को बढ़ावा देने के लिए।इसे भी पढ़ें: ट्रंप मौन, ममदानी ने नेतन्याहू को दे दी खुली चुनौती, UN की बैठक से गिरफ्तार करवाएंगे मेयर ममदानी?ICC ने 2024 में नेतन्याहू और अन्य लोगों के खिलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी किए। उन पर गाज़ा युद्ध के दौरान मानवता के ख़िलाफ़ अपराध करने का आरोप लगाया गया। कोर्ट का कहना था कि इस बात के सबूत हैं कि नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योव गैलेंट ने मानवीय सहायता रोककर भूख को युद्ध के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया और गाज़ा में हमास के ख़िलाफ़ इज़राइल के अभियान के दौरान जान-बूझकर आम नागरिकों को निशाना बनाया। इज़राइली अधिकारी इन आरोपों से इनकार करते हैं। मम्दानी की हालिया टिप्पणियों से यह साफ़ होता है कि हालाँकि वह वारंट पर कार्रवाई चाहते हैं, लेकिन उनका कहना है कि न्यूयॉर्क शहर ख़ुद इसे लागू नहीं कर सकता। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:40 +0530</pubDate>
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<title>Caracas Raid पर छिड़ा कानूनी घमासान: US Court में पेश होंगे Nicolas Maduro, कहा&#45; मैं शरीफ आदमी और देश का संवैधानिक President हूं</title>
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<description><![CDATA[ वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो बुधवार को अपने वकीलों के साथ अदालत में पेश होंगे। उम्मीद है कि उनके वकील उस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को चुनौती देना जारी रखेंगे, जिसके तहत उन्हें सत्ता से हटाया गया और ड्रग तस्करी के आरोपों का सामना करने के लिए न्यूयॉर्क लाया गया। 63 साल के मादुरो और उनकी 69 साल की पत्नी सिलिया फ्लोरेस को जनवरी की शुरुआत में कराकस स्थित उनके घर पर अमेरिकी सेना की देर रात की छापेमारी के बाद से ब्रुकलिन की जेल में रखा गया है। दोनों ने खुद को बेगुनाह बताया है। अगर जूरी यह पाती है कि वे अमेरिका में कोकीन भेजने की साजिश का हिस्सा थे, तो उन्हें उम्रकैद की सजा हो सकती है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने इस रेड का बचाव करते हुए इसे छह साल पहले दर्ज हुए एक आपराधिक मामले में कानून लागू करने वाला सर्जिकल ऑपरेशन बताया है। हालांकि, मादुरो ने खुद को युद्धबंदी बताया है और कहा है कि उन्हें अगवा किया गया था।इसे भी पढ़ें:  इधर South China Sea में चीन का हमला, उधर ब्रह्मोस पर फिलीपींस का बड़ा ऐलानअमेरिकी अभियोजकों का आरोप है कि मादुरो उस साजिश का हिस्सा थे जिसके तहत ड्रग माफियाओं की मदद के लिए वेनेजुएला की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर हजारों टन कोकीन अमेरिका भेजी गई। जनवरी में जब उन्हें अदालत में पेश किया गया, तो मादुरो ने स्पेनिश भाषा में कहा मैं दोषी नहीं हूं। मैं एक शरीफ आदमी और अपने देश का संवैधानिक राष्ट्रपति हूं। मादुरो के वकील बैरी पोलैक ने कहा है कि वे मादुरो के &quot;सैन्य अपहरण&quot; की वैधता को चुनौती देने की योजना बना रहे हैं।इसे भी पढ़ें: अब यूरोप में सीधे घुस जाएंगी ईरानी मिसाइलें? IRGC ने दी ऐसी धमकी, कांपे अमेरिका के दोस्त  बचाव पक्ष का यह भी कहना है कि कई जटिल कानूनी मुद्दे हैं जिन पर कोई भी ट्रायल शुरू होने से पहले विचार किया जाना ज़रूरी है। न तो मादुरो और न ही फ्लोरेस ने ज़मानत की मांग की है, और जज एल्विन के. हेलरस्टीन ने अभी तक ट्रायल की तारीख तय नहीं की है। यह मामला बुधवार को फिर से कोर्ट में आएगा, और उम्मीद है कि बचाव पक्ष उस ऑपरेशन पर अपनी आपत्तियां उठाएगा जिसके तहत इस जोड़े को न्यूयॉर्क लाया गया था। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:39 +0530</pubDate>
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<title>Manila में S Jaishankar और Marco Rubio की बड़ी बैठक: Trade, Tariffs और AI पर बनी नई रणनीति</title>
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<description><![CDATA[ विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को मनीला में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के अहम मुद्दों पर चर्चा की। यह मुलाकात आसियान से जुड़ी बैठकों के दौरान क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक (FMM) के फिर से शुरू होने के मौके पर हुई। बैठक के बारे में जानकारी देते हुए जयशंकर ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि मनीला में अमेरिका के विदेश मंत्री रुबियो से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत उन क्षेत्रों पर केंद्रित रही जो भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के लिए प्राथमिकता वाले हैं, जिनमें व्यापार और टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल हैं। इसे भी पढ़ें: Donald Trump का बड़ा ऐलान: Imported Generic medicines पर लागू होगी चरणबद्ध टैरिफ पॉलिसी, 2028 से लगेगा 100% और फिर 200% टैक्सदो नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान कियाजयशंकर ने बताया कि दोनों नेताओं ने आपसी हित के क्षेत्रीय, वैश्विक और बहुपक्षीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। विदेश मंत्री ने कहा कि आपसी हित के क्षेत्रीय, वैश्विक और बहुपक्षीय मुद्दों पर भी संक्षिप्त चर्चा हुई। अपनी बातचीत में जयशंकर और रुबियो ने व्यापार, टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और AI से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के &#039;क्वाड&#039; समूह ने मनीला में आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान चर्चा की। इसे भी पढ़ें: Donald Trump ने सऊदी अरब के साथ परमाणु समझौते को मंजूरी दी, यूरेनियम संवर्धन की अनुमति संभव: सूत्रमार्को रुबियो का कहना है कि क्वाड, ASEAN की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करने के अपने वादे को फिर से दोहराता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि क्वाड की बैठक में समूह ने ASEAN की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करने और एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक को बढ़ावा देने के अपने वादे को फिर से दोहराया। रुबियो ने एक्स पर पोस्ट किया कि AN विदेश मंत्रियों की बैठक में क्वाड की बैठक फिर से बुलाकर खुशी हुई ताकि हम अपना संदेश दे सकें: इस क्षेत्र में ASEAN की अपनी प्राथमिकता और केंद्रीय भूमिका का समर्थन करने के लिए मज़बूत सहयोग बहुत ज़रूरी है। उन्होंने आगे कहा अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक का विज़न साझा करते हैं जो कानून के शासन, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर आधारित है। क्वाड एक प्राथमिकता बना हुआ है, और हम इस साल के आखिर में फिर से मिलेंगे। यशंकर मनीला में दो दिन की यात्रा पर हैं। वे ASEAN फ्रेमवर्क के तहत विदेश मंत्री स्तर की कई बैठकों में हिस्सा लेंगे, जिनमें ASEAN-भारत विदेश मंत्रियों की बैठक, ईस्ट एशिया समिट (EAS) विदेश मंत्रियों की बैठक और ASEAN रीजनल फोरम (ARF) की बैठकें शामिल हैं। देश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि यह यात्रा &#039;एक्ट ईस्ट पॉलिसी&#039; के तहत ASEAN के साथ भारत के लगातार जुड़ाव और ASEAN-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दिखाती है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:38 +0530</pubDate>
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<title>Donald Trump का बड़ा ऐलान, Imported Generic Drugs पर लगेगा 200% Tariff, US में बढ़ेगा मैन्युफैक्चरिंग</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंपोर्ट की जाने वाली जेनेरिक दवाओं के लिए एक नई टैरिफ पॉलिसी लागू की है। इस पॉलिसी में ड्यूटी (टैक्स) को धीरे-धीरे बढ़ाने की योजना है, ताकि दवा बनाने का काम वापस अमेरिका में शुरू हो सके। इस योजना के तहत, इंपोर्ट की जाने वाली जेनेरिक दवाओं पर अगले दो साल तक कोई टैरिफ नहीं लगेगा, लेकिन 2028 से इन पर भारी ड्यूटी लगाई जाएगी। अपने &#039;ट्रुथ सोशल&#039; प्लेटफॉर्म पर इस फैसले की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा कि इस पॉलिसी का मकसद दवा कंपनियों को विदेश में प्रोडक्शन पर निर्भर रहने के बजाय अमेरिका में ही मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह प्रस्ताव घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने और इंपोर्ट की जाने वाली दवाओं पर निर्भरता कम करने की उनकी बड़ी रणनीति का एक नया कदम है। इसे भी पढ़ें: Caracas Raid पर छिड़ा कानूनी घमासान: US Court में पेश होंगे Nicolas Maduro, कहा- मैं शरीफ आदमी और देश का संवैधानिक President हूंटैरिफ योजना कैसे काम करेगीट्रम्प की घोषणा के अनुसार, आयातित जेनेरिक दवाओं पर 1 अगस्त, 2026 से दो साल की अवधि के लिए शून्य प्रतिशत टैरिफ लागू रहेगा। इस संक्रमणकालीन अवधि के समाप्त होने के बाद, टैरिफ एक वर्ष के लिए 100 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा और उसके बाद 200 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। ट्रंप ने लिखा  अगस्त, 2026 से, संयुक्त राज्य अमेरिका में लाई जाने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर दो साल की अवधि के लिए शून्य प्रतिशत टैरिफ लागू रहेगा, जिसके बाद टैरिफ एक वर्ष की अवधि के लिए 100% तक बढ़ जाएगा और उसके बाद 200% तक बढ़ जाएगा।इसे भी पढ़ें: Netanyahu की गिरफ्तारी पर Mayor Mamdani के सुर बदले, बोले- ICC Warrant लागू करना Federal Government का कामट्रंप का कहना है कि इस कदम का मकसद दवा बनाने का काम वापस अमेरिका लाना है।इस पॉलिसी के पीछे की वजह बताते हुए ट्रंप ने कहा कि टैरिफ स्ट्रक्चर इस तरह बनाया गया है कि कंपनियां अमेरिका के अंदर दवा बनाने वाले प्लांट में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित हों। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां बदलाव के समय में अपना प्रोडक्शन कहीं और शिफ्ट नहीं करेंगी, उन्हें बाद में इंपोर्ट पर काफी ज़्यादा खर्च करना पड़ सकता है। ट्रंप ने लिखा यह कदम जेनेरिक दवा बनाने का काम अमेरिका में वापस लाने के लिए उठाया गया है। जो कंपनियां तय समय में प्लांट और इक्विपमेंट नहीं लगाएंगी, उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। इस पॉलिसी का मकसद अमेरिका के लोगों की सुरक्षा करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए उनके प्रशासन की कोशिशों के तहत पूरे देश में दवा बनाने की सुविधाएं तेज़ी से स्थापित की जा रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि पेटेंट वाली, ब्रांडेड या नई दवाओं पर बनी पॉलिसी, जो बहुत सफल रही है, वैसी ही बनी रहेगी। पूरे अमेरिका में दवा बनाने की सुविधाएं ऐसी तेज़ी से बनाई जा रही हैं, जैसी पहले कभी नहीं देखी गईं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Balen Shah का बड़ा U&#45;Turn: नेपाल के PM अब भारत और China के दूतों से करेंगे अलग&#45;अलग मुलाकात</title>
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<description><![CDATA[ विदेशी दूतों के साथ आमने-सामने की बैठक न करने के नियम का पालन अब तक करने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह इस हफ़्ते अपना यह नियम तोड़कर भारत और चीन के दूतों से मुलाक़ात करने वाले हैं। शाह यह भी दिखाने की कोशिश करेंगे कि दोनों देश उनके लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। शाह, ने PM के तौर पर अपने 100 दिनों के कार्यकाल में कम से कम दो बड़े विरोध-प्रदर्शन देखे हैं। एक मामला भारत-नेपाल सीमा पर कस्टम ड्यूटी लागू करने से जुड़ा था, जबकि दूसरा मामला तब भड़का जब पुलिस की कार्रवाई से परेशान होकर एक राइड-शेयर ड्राइवर ने खुद को आग लगा ली। द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, बालेन शाह इस हफ़्ते भारत और चीन के राजदूतों के साथ अलग-अलग बैठकें करने वाले हैं। हालांकि अभी तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन नेपाल के विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित की जा रही इन बैठकों के, शाह के प्रशासन के 100 दिन पूरे होने के कुछ ही समय बाद होने की उम्मीद है।इसे भी पढ़ें: सामने बैठे थे 6 देशों के NSA, Ajit Doval ने इस दौरान ऐसा क्या कह दिया जिससे पूरी दुनिया में हलचल मच गईनेपाली अख़बार की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह दिखाने के लिए कि काठमांडू के लिए नई दिल्ली और बीजिंग दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, शाह एक ही दिन भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीनी राजदूत झांग माओमिंग से मुलाक़ात करेंगे। हाल के समय में, नेपाल के प्रधानमंत्रियों को या तो बीजिंग-समर्थक या दिल्ली-समर्थक माना जाता रहा है। शाह इस साल मार्च में प्रधानमंत्री बने। वे &#039;जेन-ज़ी&#039; (Gen-Z) समर्थित उस आंदोलन के दम पर सत्ता में आए, जिसने केपी ओली के नेतृत्व वाली पिछली सरकार को हटा दिया था। हालांकि, तब से शाह ने विदेशी राजनयिकों से अलग-अलग मिलने से इनकार करके स्थापित राजनयिक परंपराओं से हटकर काम किया है। इस रुख के कारण प्रधानमंत्री ने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री, चीन के वाणिज्य उप-मंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी के नेता यान डोंग, और अमेरिका के असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट समीर पॉल कपूर और अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर के साथ बैठक करने के अनुरोधों को ठुकरा दिया है। द काठमांडू पोस्ट के अनुसार, शाह ने इसके बजाय इस साल अप्रैल और मई में काठमांडू स्थित राजदूतों के साथ संयुक्त बैठकें कीं। इस नियम का एकमात्र अपवाद एशियाई विकास बैंक के अध्यक्ष मासातो कांडा के साथ उनकी बैठक थी, जो जुलाई की शुरुआत में नेपाल की तीन दिवसीय यात्रा पर आए थे।इसे भी पढ़ें: नेपाल के पोखरा में चोरी और लूटपाट के आरोप में दो भारतीयों समेत नौ गिरफ्तारबालेन शाह ने विदेशी दूतों के साथ आमने-सामने की बैठकें न करने का जो नियम खुद बनाया है, उसकी नेपाल में राजनयिकों, पूर्व अधिकारियों और टिप्पणीकारों ने लगातार आलोचना की है। जून की शुरुआत में वरिष्ठ पत्रकार केशव प्रधान ने &#039;इंडिया टुडे डिजिटल&#039; को बताया था, &quot;जब भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी मई में काठमांडू का दौरा करना चाहते थे, तो खबर है कि बालन शाह उनसे मिलना नहीं चाहते थे। उनका रुख यह था कि वह विदेश मंत्री के पद से नीचे के किसी भी व्यक्ति से नहीं मिलेंगे। इससे पहले, उन्होंने नेपाल में भारत के राजदूत से भी अलग से मुलाकात नहीं की थी, बल्कि केवल दूतों के एक समूह के हिस्से के तौर पर उनसे मिले थे। यह अभूतपूर्व है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>भयंकर मारपीट के बाद फिर से चीन&#45;फिलीपींस ने मचाया बवाल, राजदूतों को किया तलब!</title>
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<description><![CDATA[ दक्षिण चीन सागर में एक बार फिर चीन और फिलीपींस आमने-सामने हैं। लेकिन इस बार मामला सिर्फ समुद्र में जहाजों की भिड़ंत तक सीमित नहीं रहा। दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़प अब कूटनीतिक टकराव में बदल चुकी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि चीन और फिलीपींस ने एक दूसरे के राजदूतों को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। फिलीपींस का आरोप है कि चीन के तटरक्षक बल ने उसके नौसैनिक पर हमला किया। जबकि चीन कह रहा है कि पूरी घटना की शुरुआत फिलीपींस ने की। वहीं इस पूरे बवाल के बाद अमेरिका भी खुलकर फिलीपींस के समर्थन में उतर आया है। ऐसे में सवाल है कि आखिर दक्षिण चीन सागर में हुआ क्या? क्यों बार-बार यही इलाका चीन और फिलीपींस के बीच टकराव की वजह बन रहा है? क्या यह विवाद अब और भी खतरनाक मोड़ की ओर बढ़ रहा है?  इसे भी पढ़ें:  इधर South China Sea में चीन का हमला, उधर ब्रह्मोस पर फिलीपींस का बड़ा ऐलानदरअसल दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। सेकंड थॉमस शॉल के पास दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़प के बाद बीजिंग और मनीला ने एक दूसरे के राजदूतों को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि समुद्र में शुरू हुआ विवाद अब सीधे कूटनीतिक टकराव में बदल चुका है। फिलीपींस के अनुसार घटना 20 जुलाई को उस समय हुई जब उसके सैनिक सेकंड थॉमस शॉल के पास मौजूद थे। मनीला का कहना है कि चीन के तटरक्षक बल के जवानों ने उसके एक नौसैनिक के सिर पर लकड़ी के डंडे से हमला किया जिससे वह घायल हो गया। साथ ही फिलीपींस की रबर नौका को भी नुकसान पहुंचाया गया। दूसरी ओर चीन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उसके जवानों ने केवल कानून के मुताबिक कार्रवाई की और असली उकसावा फिलीपींस की ओर से हुआ। चीन तटरक्षक बल का दावा है कि फिलीपींस के जहाज LT-57 से निकली दो रबर नौकाएं तेज रफ्तार से उसकी गश्ती नौका के करीब पहुंची और खतरनाक तरीके से टकरा गई। चीन का कहना है कि फिलीपींस के जवानों ने चप्पुओं और झंडों से हमला करने की कोशिश की। जिसके बाद उसके कर्मियों ने जवाबी कारवाई की। बीजिंग ने फिलीपींस पर तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की छवि खराब करने का आरोप लगाया। वहीं फिलीपींस के सशस्त्र बल यानी एएफपी ने चीन के इन दावों को झूठा और भ्रामक बताया। इसे भी पढ़ें: Balen Shah का बड़ा U-Turn: नेपाल के PM अब भारत और China के दूतों से करेंगे अलग-अलग मुलाकातफिलीपींस ने सवाल उठाया कि चीन तटरक्षक बल की रबर नौका बीआरपी सिरा माद्रे के इतने करीब आखिर पहुंची ही क्यों? फिलीपींस का कहना है कि यह इलाका उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र का हिस्सा है और चीन की मौजूदगी अवैध थी। फिलीपींस के मुताबिक उसकी नौकाओं को केवल चीनी जहाज को क्षेत्र छोड़ने की चेतावनी देने के लिए भेजा गया था ना कि टकराव शुरू करने के लिए। फिलीपींस का आरोप है कि चीन ने बार-बार क्षेत्र छोड़ने की चेतावनी को नजरअंदाज किया और फिर उसके सैनिक पर हमला किया। फिलीपींस के मुताबिक फिलीपीनी सैनिकों ने पूरे घटनाक्रम के दौरान संयम बर्ता और केवल आत्मरक्षा में जवाब दिया। फिलीपींस ने चीन को साफ तौर पर कहा कि पेशेवर रवय को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। फिलीपींस ने चीन पर दुष्प्रचार फैलाने का भी आरोप लगाया।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:35 +0530</pubDate>
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<title>छिपाता हुआ US, बेनकाब हुआ झूठ! ईरानी हमले में कितने सैनिक मरे?</title>
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<description><![CDATA[ ईरानी हमलों के बाद अमेरिकी सैनिकों की मौत से अमेरिका में बवाल मच चुका है। हाल ही में जॉर्डन के मुआफिक साल्ट एयरबेस पर ईरान ने एक विनाशकारी मिसाइल हमला किया था। इस हमले में अमेरिका की महज 19 साल के युवा प्राइवेट सैनिक ईसा बेला गोंजा लीस की दर्दनाक मौत हो गई। इसके साथ एक दूसरे सैनिक की भी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद जहां एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच खाड़ी में युद्ध अलग ही लेवल पर पहुंच गया, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी जनता के भीतर अपनी ही सरकार के खिलाफ भारी गुस्सा भड़क गया। लोग सोशल मीडिया पर तीखे सवाल पूछ रहे हैं कि इतनी भयानक और विनाशकारी युद्ध के मैदान में 19 साल के एक सैनिक को भेजना क्या अमेरिकी जनरलों की भारी मूर्खता नहीं थी? इस एक मौत ने वाशिंगटन की युद्ध नीति की धज्जियां उड़ा कर रख दी और इसी लाचारी को छुपाने के लिए अमेरिका भी एक नया खेल खेलने लगा। इसे भी पढ़ें: Manila में S Jaishankar और Marco Rubio की बड़ी बैठक: Trade, Tariffs और AI पर बनी नई रणनीतिन्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अब जॉर्डन में ईरान के इन शुरुआती तीन हमलों ने अमेरिकी सेना को भारी नुकसान पहुंचाया तब वाशिंगटन ने चुप्पी साध ली। आखिरकार सुपर पावर ने अपने सैनिकों पर हुए हमलों को दुनिया के सामने क्यों नहीं रखा? अमेरिकी अधिकारियों की दलील है कि हताहतों और नुकसान की जानकारी सार्वजनिक करने से ऑपरेशनल सिक्योरिटी पर बुरा असर पड़ सकता था। लेकिन रक्षा विशेषज्ञ ने इसे अमेरिकी कमजोरी और घबराहट करार दिया। दरअसल अमेरिका को डर था कि अगर उसने इन हमलों को स्वीकार किया तो उस पर जवाबी कार्रवाई करने का भारी दबाव बनेगा जो सीधे तौर पर ईरान के साथ एक बड़े और विनाशकारी युद्ध की शुरुआत कर सकता था। वाशिंगटन अपनी नाकामी छिपाने के लिए कूटनीति का सहारा ले रहा था। यह छिपा हुआ सच अब पूरी तरीके से आखिरकार बेनकाब हुआ। इसे भी पढ़ें: भयंकर मारपीट के बाद फिर से चीन-फिलीपींस ने मचाया बवाल, राजदूतों को किया तलब!रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े अमेरिकी सेंट्रल कमांड के हवाले से बताए गए हैं जो वाशिंगटन के दावों की धज्जियां उड़ा देते हैं। आंकड़ों के मुताबिक जब से अमेरिका और इसराइल ने फरवरी मिनान पर हमले शुरू किए तब से अब तक खाड़ी क्षेत्र में कम से कम 17 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई। यही नहीं इस भीषण संघर्ष में 400 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। ये आंकड़े साफ गवाही दे रहे हैं कि ईरान ने खाड़ी में अमेरिका के अभिद्ध किले को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया। सुपर पावर अमेरिका अब अपने ही सहयोगियों के घर में लाचार और बेबस नजर आ रहा है। जहां उसके सैनिक ईरान के मिसाइल रडार पर खड़े हैं। पेंटगन ने शुक्रवार को जिस घातक हमले को स्वीकार किया वह महज एक ट्रेलर था। असली तबाही तो अमेरिका पहले ही झेल चुका था। मिडिल ईस्ट में अब एक ऐसे ही महायुद्ध की सुगबुगाहट नजर आ रही है। खाड़ी क्षेत्र में छिड़ा ईरान युद्ध पूरी तरीके से बेकाबू हो चुका है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा। दोनों ओर से हो रहे ताबड़तोड़ जवाईबी हमलों ने पूरी खाड़ी में बारूदी तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। एक तरफ ईरान की सेना और उसके विशेष सुरक्षा बल ने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से भीषण हमले करने का दावा किया तो दूसरी तरफ अमेरिकी सेना के केंद्रीय कमान ने कल 20 जुलाई की रात को ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर अब तक की सबसे बड़ी स्ट्राइक की।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:34 +0530</pubDate>
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<title>West Asia Crisis: Jordan ने Aqaba में मार गिराईं Iranian Missiles, US Strikes के बाद क्षेत्र में भारी तनाव</title>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया। पूरे इलाके में कई मिसाइल हमलों और सैन्य कार्रवाई की वजह से पाकिस्तान में हो रही उन बातचीत पर संकट के बादल छा गए, जिनका मकसद एक नाकाम हो चुके अंतरिम युद्धविराम को फिर से बहाल करना था।जॉर्डन के बंदरगाह शहर अकाबा में एयर डिफेंस सायरन बजने लगे, जबकि वाशिंगटन और तेहरान के बीच हवाई हमले जारी रहे। जॉर्डन की सेना के मुताबिक, ईरान के हमले में दागी गई चार मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया गया, जबकि दो अन्य मिसाइलें बिना आबादी वाले इलाकों में गिरीं।इसी दौरान, अमेरिका ने कहा कि उसने ईरानी ठिकानों को निशाना बनाते हुए लगातार 11वीं रात सैन्य हमले किए, जबकि तेहरान के अधिकारी पाकिस्तान में हो रही बैठकों के ज़रिए बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहे थे। पास के इज़राइली शहर इलात से चश्मदीदों द्वारा शूट किए गए वीडियो में अकाबा के ऊपर धुएं के घने गुबार उठते हुए दिखाई दिए। पूरे ईरान में, राजधानी तेहरान के आसपास एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम तैनात किए गए थे। ईरान के सरकारी मीडिया आउटलेट IRNA ने बुशहर, पूर्वी अज़रबैजान, हमदान, होर्मोज़गन, खुज़ेस्तान और सिस्तान-बलूचिस्तान सहित कई इलाकों में धमाकों की आवाज़ें सुनाई देने की खबर दी। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने पुष्टि की कि उनके हमले खास ठिकानों पर केंद्रित थे, जिनमें एयरक्राफ्ट हैंगर और ड्रोन स्टोरेज साइटें शामिल थीं। सैन्य कार्रवाई का यह नया दौर मंगलवार को ईरानी सेना द्वारा एक रणनीतिक जलमार्ग में एक कमर्शियल जहाज़ को निशाना बनाने के ठीक बाद शुरू हुआ, जिसके कारण जहाज़ पर मौजूद क्रू को उसे खाली करने के लिए मजबूर होना पड़ा।इसे भी पढ़ें: ज़रूरत पड़ी तो मैं दिल्ली जाऊँगी... CJP के विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने का ममता ने दिया संकेतइसके अलावा, तेहरान ने क्षेत्रीय अमेरिकी सहयोगियों के खिलाफ अपना आक्रमण जारी रखा और बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में लक्ष्यों को निशाना बनाया। हालिया बमबारी से पहले, ईरानी गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी ने कूटनीतिक प्रयास के तहत पाकिस्तान में बातचीत की। हालांकि, इस बात को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है कि किन शर्तों पर मौजूदा शत्रुता को सफलतापूर्वक रोका जा सकेगा, जो तेजी से होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण पर केंद्रित हो गई है, जो वैश्विक ऊर्जा शिपमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री गलियारा है। मंगलवार को ओवल ऑफिस से बोलते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संभावित वार्ता के बारे में कड़ा आकलन पेश करते हुए कहा कि वाशिंगटन को &quot;बैठक में कोई दिलचस्पी नहीं है।इसे भी पढ़ें: भयंकर मारपीट के बाद फिर से चीन-फिलीपींस ने मचाया बवाल, राजदूतों को किया तलब!उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी सेना जल्द ही तेहरान की प्रमुख यूरेनियम संवर्धन सुविधाओं में से एक के पास स्थित ईरानी क्षेत्र पर हमले कर सकती है। एक दिन पहले, यमन के ईरान समर्थित हाउथी लड़ाकों ने सऊदी अरब के खिलाफ एक और तनाव का बिंदु खोल दिया, देश के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की घोषणा की और अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक पेट्रोलियम वितरण के लिए एक सीधी चुनौती पेश की। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:33 +0530</pubDate>
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<title>WSJ Report: US&#45;Israel के घातक हमलों के बाद भी Iran की Missile Power बरकरार, मिडिल ईस्ट में बढ़ा बड़ा खतरा</title>
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<description><![CDATA[ &#039;द वॉल स्ट्रीट जर्नल&#039; (WSJ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर पर हफ़्तों तक हमले किए जाने के बावजूद, ईरान के पास अभी भी बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन मौजूद हैं। हाल के हमलों से पता चलता है कि तेहरान ने अपने हथियार प्रोग्राम के कुछ हिस्सों को फिर से तैयार कर लिया है और वह अमेरिकी सेना और क्षेत्रीय सहयोगियों के लिए खतरा पैदा करने में सक्षम है।मिलिट्री एनालिस्ट्स का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि जॉर्डन में मुवाफ़्फ़क साल्टी एयर बेस पर ईरान के हालिया हमले में तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। माना जा रहा है कि यह हमला तेहरान के सबसे एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम में से एक, &#039;खेबर शेकन&#039; मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल करके किया गया था।इसे भी पढ़ें: Iran के सपोर्ट में उतरे ऐसे खतरनाक लड़ाके, Bab-Al-Mandeb बंद,  MBS को अमेरिका बचा पाएगा?यह मिसाइल सिस्टम उन ज़मीन के नीचे बने ठिकानों में रखा गया था, जिन्हें इस साल की शुरुआत में अमेरिका और इज़राइल के हवाई हमलों में निशाना बनाया गया था।रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च और अप्रैल में ज़मीन के नीचे बने इन मिसाइल ठिकानों पर लगातार बमबारी के बावजूद, ईरान ने कुछ सुरंगों के रास्ते फिर से खोल दिए हैं, वहाँ तक जाने वाली सड़कें ठीक कर ली हैं और कुछ जगहों से मिसाइल ऑपरेशन फिर से शुरू कर दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये घटनाक्रम अमेरिका के सामने बनी चुनौती को दिखाते हैं; अमेरिका ईरान के खिलाफ़ सैन्य कार्रवाई कर रहा है, जबकि तेहरान जवाबी हमले करता रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मंगलवार को पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने लगातार 11वीं रात ईरान में सैन्य ठिकानों पर हमले किए। WSJ की रिपोर्ट में बताया गया है कि जॉर्डन में हुआ हमला पांच दिनों के अंदर अमेरिकी सेना पर चौथा हमला था। इससे पता चलता है कि ईरान का मिसाइल भंडार खत्म नहीं हुआ है और हो सकता है कि उसने अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने की अपनी क्षमता में सुधार किया हो। &#039;फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज़&#039; में ईरान प्रोग्राम के सीनियर डायरेक्टर बेहनम बेन तालेब्लू ने WSJ को बताया, &quot;अरब दुनिया के खिलाफ ईरान की धीरे-धीरे अपनाई जा रही &#039;स्कॉर्च्ड-अर्थ&#039; (सब कुछ तबाह करने वाली) नीति का मकसद अमेरिका को इस इलाके से पीछे हटने पर मजबूर करना है, न कि उसे और मजबूती से डटे रहने के लिए उकसाना।&quot;रिपोर्ट में अमेरिका के पहले के अनुमानों और युद्ध के मैदान की मौजूदा स्थिति के बीच अंतर को भी उजागर किया गया।इसे भी पढ़ें: West Asia Crisis: Jordan ने Aqaba में मार गिराईं Iranian Missiles, US Strikes के बाद क्षेत्र में भारी तनावअप्रैल में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा था कि ईरान का मिसाइल प्रोग्राम पूरी तरह से बेकार हो चुका है और उसके लॉन्चर व मिसाइलें खत्म और बर्बाद हो चुकी हैं तथा लगभग पूरी तरह से बेअसर हैं। हालांकि, आज सीनेट एप्रोप्रिएशन्स कमेटी की सुनवाई के दौरान हेगसेथ ने माना कि अमेरिका को कभी यह उम्मीद नहीं थी कि ईरान अपनी सारी हमला करने की क्षमता खो देगा। हेगसेथ ने कहा हमें कभी उम्मीद नहीं थी कि वे हमला करने की क्षमता पूरी तरह खो देंगे। सवाल यह है कि अमेरिका जैसे दुश्मन के खिलाफ वे किस स्तर पर हमला कर सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:32 +0530</pubDate>
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<title>Jaishankar&#45;Wang Yi Meeting: सीमा पर शांति के बिना सामान्य नहीं होंगे रिश्ते, जिनपिंग के मंत्री को सामने बिठा जयशंकर ने दिया साफ संदेश</title>
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<description><![CDATA[ विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से कहा कि सामान्य राजनयिक बातचीत बहाल करने के लिए सीमावर्ती इलाकों में स्थिरता बनाए रखना एक &quot;ज़रूरी शर्त&quot; है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों देशों के संबंध आपसी सम्मान, हितों और संवेदनशीलता पर आधारित होने चाहिए। बातचीत के दौरान, जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष के सामने अहम आर्थिक चिंताएं रखीं। उन्होंने बाज़ार में प्रवेश की बाधाओं, बढ़ते व्यापार घाटे और अनिश्चित ग्लोबल सप्लाई नेटवर्क की ओर ध्यान दिलाया। दोनों राजनयिक प्रतिनिधि फिलीपींस की राजधानी में &#039;एसोसिएशन ऑफ़ साउथईस्ट एशियन नेशंस&#039; (ASEAN) के तहत आयोजित अहम मंत्री-स्तरीय चर्चाओं में हिस्सा लेने के लिए इकट्ठा हुए थे। पूर्वी लद्दाख में चार साल पहले शुरू हुए लंबे सैन्य गतिरोध के कारण दोनों एशियाई देशों के बीच काफी तनाव रहा था, लेकिन हाल के समय में उनके संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।इसे भी पढ़ें: Balen Shah का बड़ा U-Turn: नेपाल के PM अब भारत और China के दूतों से करेंगे अलग-अलग मुलाकातप्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए जयशंकर ने ज़ोर दिया कि एक स्थिर और सहयोगी साझेदारी के लिए साझा सिद्धांतों पर आधारित एक बुनियादी ढांचा ज़रूरी है। अपनी शुरुआती बात में उन्होंने कहा हमारा मानना ​​है कि आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर ही एक स्थिर और सहयोगी संबंध को सबसे बेहतर ढंग से विकसित किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा इस तरह का संबंध बहु-ध्रुवीय एशिया और बहु-ध्रुवीय दुनिया में अहम योगदान दे सकता है। लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर शांति बनाए रखने की बेहद ज़रूरत को दोहराते हुए, मंत्री ने कहा कि सीमा पर स्थिरता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।इसे भी पढ़ें: भयंकर मारपीट के बाद फिर से चीन-फिलीपींस ने मचाया बवाल, राजदूतों को किया तलब!जयशंकर ने कहा कि सामान्य संबंधों के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता का होना ज़रूरी है। अक्टूबर 2024 से दोनों पक्ष इस अहम मकसद को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं। इसके लिए हमें लगातार ध्यान देने की ज़रूरत होगी। इस क्षेत्र में संबंधित तंत्रों को पूरा समर्थन और मज़बूत प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। समझदारी भरी कूटनीतिक सूझबूझ की ज़रूरत बताते हुए, जयशंकर ने चेतावनी दी कि अलग-अलग विचारों को सक्रिय टकराव में बदलने से रोका जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि यह स्वाभाविक है कि दो बड़े और अहम देशों के तौर पर, और वो भी पड़ोसी होने के नाते, भारत और चीन के अपने-अपने खास हित होंगे। इसीलिए हमारे नेताओं ने सहमति जताई थी कि मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए। उन्हें सही ढंग से संभालना कूटनीति की ज़िम्मेदारी है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:31 +0530</pubDate>
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<title>Lalit Modi के भारत लौटने का रास्ता साफ, Tribunal ने 2009 IPL मामले में ED की भारी पेनल्टी को किया रद्द</title>
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<description><![CDATA[ इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने बुधवार को कहा कि वह भारत लौटने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। यह बात उन्होंने तब कही जब एक अपीलेट ट्रिब्यूनल ने दक्षिण अफ्रीका में 2009 के IPL से जुड़े फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) मामले में एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) की ओर से उन पर लगाए गए जुर्माने और मुख्य निष्कर्षों को रद्द कर दिया। ललित मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया कि मैं बहुत लंबे समय बाद भारत लौटने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हूँ। अपना ध्यान रखें और सुरक्षित रहें। नई दिल्ली में एक अपीलीय ट्रिब्यूनल ने दक्षिण अफ्रीका में 2009 के T20 क्रिकेट टूर्नामेंट के आयोजन से जुड़े FEMA (फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट) मामले में, पूर्व IPL चेयरमैन ललित मोदी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ़ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी जुर्माने के आदेश को रद्द कर दिया है।इसे भी पढ़ें: चोटिल चेहरा, फटे कपड़े: एक तस्वीर ने कैसे कांग्रेस को दी वो छवि, जिसकी उसे तलाश थी!नई दिल्ली में स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स फॉरफीचर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट (SAFEMA) के तहत अपीलीय ट्रिब्यूनल ने ED के स्पेशल डायरेक्टर के 31 मई, 2018 के उस आदेश के खिलाफ अपील करने वालों की अपील को आंशिक रूप से मंज़ूर कर लिया, जिसमें उन पर FEMA के अलग-अलग नियमों के उल्लंघन के लिए जुर्माना लगाया गया था। साथ ही, ट्रिब्यूनल ने ED के निष्कर्षों और जुर्माने को रद्द कर दिया। FEMA के कथित उल्लंघन से जुड़े लेन-देन की प्रकृति के बारे में ED की जांच के मुख्य आधार को खारिज करते हुए ट्रिब्यूनल ने कहा: &quot;हमने दलीलों पर विचार किया है और पाया है कि अगर किसी मामले में सर्विस के लिए पेमेंट समय-समय पर और बिना किसी बजटिंग के किया गया था, तो प्रतिवादी (ED) के अनुसार, यह &#039;कैपिटल अकाउंट ट्रांज़ैक्शन&#039; की परिभाषा में आएगा। हम प्रतिवादी (ED) की इस दलील को स्वीकार करने में असमर्थ हैं।इसे भी पढ़ें: Chandrababu Naidu की PM Modi से मुलाक़ात, Bhogapuram Airport बनेगा उत्तरी Andhra का आर्थिक गेमचेंजरभारत में आम चुनावों के कारण IPL का 2009 वाला सीज़न दक्षिण अफ्रीका में आयोजित किया गया था। मंगलवार को आए इस आदेश का स्वागत करते हुए ललित मोदी ने कहा ट्रिब्यूनल ने उस मुख्य आधार को खारिज कर दिया है जिस पर ED ने मेरे खिलाफ़ मामला बनाया था... यह 2009 के दक्षिण अफ्रीका IPL से जुड़े सबसे अहम कानूनी मामले का अंत है। मोदी एक दशक से ज़्यादा समय से भारत से बाहर रह रहे हैं और IPL चेयरमैन के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कई जांचों का सामना कर चुके हैं। ट्रिब्यूनल के आदेश के एक दिन बाद उनका यह नया पोस्ट संकेत देता है कि वे अब सालों तक विदेश में रहने के बाद भारत लौटने की तैयारी कर रहे हो सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:31 +0530</pubDate>
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<title>US FDA के Nicotine Products पर बड़े फैसले के बाद उठी मांग, क्या ICMR अब करेगा स्वतंत्र Scientific Review?</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने हाल ही में कुछ ऐसे निकोटीन प्रोडक्ट्स के लिए &#039;कम जोखिम वाले दावों&#039; (modified-risk claims) को मंज़ूरी दी है जिन्हें जलाया नहीं जाता (non-combustible)। यह कदम तंबाकू और निकोटीन के इस्तेमाल से जुड़ी रणनीतियों पर हो रही व्यापक अंतरराष्ट्रीय बातचीत का हिस्सा है। भारत के लिए अहम सवाल यह है कि क्या देश के रिसर्च संस्थान इस नए डेटा का स्वतंत्र विश्लेषण करने के लिए तैयार हैं, और क्या वे इसे अपनी परिस्थितियों के हिसाब से ढाल सकते हैं। अलग-अलग निगरानी मॉडल अपनाने वाले देशों से नतीजे सामने आ रहे हैं। स्वीडन, यूनाइटेड किंगडम, जापान और नॉर्वे में सिगरेट पीने वालों की संख्या में कमी देखी गई है, साथ ही वहाँ बिना जलाए इस्तेमाल होने वाले विकल्पों को भी अपनाया गया है।इसे भी पढ़ें: Ladakh जैसा अहसास और Shimla जैसी वादियां, Mainpat बना पर्यटकों के लिए नया Travel Destinationअमेरिका में FDA के मूल्यांकन के बाद ही &#039;कम जोखिम वाले दावों&#039; की इजाज़त दी जाती है। इनमें से किसी भी तरीके या ढांचे को पूरी तरह से वैसा का वैसा नहीं अपनाया जाना चाहिए। हालाँकि, कुल मिलाकर ये रिसर्च का एक ऐसा आधार बनाते हैं जिस पर देश के वैज्ञानिकों को निष्पक्ष रूप से विचार करना चाहिए—न तो इसे विचारधारा के आधार पर खारिज किया जाना चाहिए और न ही बिना सोचे-समझे अपना लिया जाना चाहिए। इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (ICMR) देश की सबसे बड़ी बायोमेडिकल रिसर्च संस्था है और स्वास्थ्य के मामलों में सरकार की मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार है। एक सदी से भी ज़्यादा समय से, इसके आकलन ने संक्रामक बीमारियों की रोकथाम से लेकर क्लिनिकल रिसर्च के मानकों तक, हर चीज़ पर राष्ट्रीय नीति को दिशा दी है। अपनी संस्थागत विश्वसनीयता के कारण, ICMR तंबाकू और निकोटीन से जुड़े नए डेटा का निष्पक्ष मूल्यांकन करने के लिए सबसे उपयुक्त संस्था है।इसे भी पढ़ें: Jaishankar-Wang Yi Meeting: सीमा पर शांति के बिना सामान्य नहीं होंगे रिश्ते, जिनपिंग के मंत्री को सामने बिठा जयशंकर ने दिया साफ संदेशनई दिल्ली के सर गंगा राम हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट और पद्म श्री से सम्मानित डॉ. मोहसिन वली कहते हैं, भारत का ग्लोबल सबूतों की बारीकी से जांच करने और उन्हें देश की ज़रूरतों के हिसाब से ढालने का अच्छा रिकॉर्ड रहा है। ICMR इस व्यावहारिक नज़रिए का एक बेहतरीन उदाहरण है: COVID-19 डायग्नोस्टिक वैलिडेशन, जीन थेरेपी डेवलपमेंट, क्लिनिकल ट्रायल और &#039;गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस&#039; के मामलों में, इसने अपने सिस्टम को U.S. FDA और ICH जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माने जाने वाले मानकों के अनुरूप बनाया है। इस तरीके से भारत को साबित हो चुके तकनीकी तरीकों को अपनाने और साथ ही उन्हें राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार ढालने में मदद मिली। अब तंबाकू नियंत्रण के मामले में अमेरिका के तौर-तरीकों का भी इसी तरह से आकलन करना फायदेमंद हो सकता है। कई दशकों में अमेरिका में सिगरेट पीने और कुल मिलाकर तंबाकू के सेवन में काफी कमी आई है, जबकि भारत के सामने अभी भी एक बड़ी और कुछ वर्गों में बढ़ती हुई चुनौती है। उस अंतर का अध्ययन करने से भारत की खास परिस्थितियों के अनुकूल रणनीतियां बनाने में मदद मिल सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:30 +0530</pubDate>
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<title>भारतीयों की जान जाने के बाद फुल एक्शन में दिखे जयशंकर, रूस के मंत्री लावरोव को दिखाया आईना</title>
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<description><![CDATA[ जब चार भारतीयों की जान चली गई तो भारत की खामोशी भी गरजने लगी। यूक्रेन की जंग में जब मिसाइल हमले में निर्दोष भारतीय नाविकों की जान गई तो दिल्ली से लेकर मनीला तक हड़कंप मच गया। पूरी दुनिया देख रही थी कि क्या जयशंकर हमेशा की तरह रूस के साथ सिर्फ व्यापार की बात करेंगे। लेकिन जयशंकर कहां छोड़ने वाले थे। उन्होंने लावरोव से हाथ जरूर मिलाया लेकिन उसी हाथ से रूस को भारत की लाल लेखा भी दिखा दी।  19 जुलाई की शाम यूक्रेन का ओडसा पोर्ट मालवाहक जहाज अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ रहा था। अचानक एक मिसाइल ने उसे निशाना बनाया। जहाज पर 17 चालक दल सदस्य थे। जिनमें से पांच भारतीय थे और इस हमले में चार भारतीयों की जान तुरंत चली गई। अब जरा कल्पना कीजिए उन परिवारों की जिनके बेटे विदेशी धरती पर सिर्फ रोजीरोटी के लिए गए थे और जंग का शिकार हो गए। भारत ने इसे सिर्फ एक हादसा नहीं माना। यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन था और भारत ने इसे बहुत ही गंभीरता से लिया। हमले के तुरंत बाद दिल्ली में हलचल शुरू हुई। इसे भी पढ़ें: Jaishankar-Wang Yi Meeting: सीमा पर शांति के बिना सामान्य नहीं होंगे रिश्ते, जिनपिंग के मंत्री को सामने बिठा जयशंकर ने दिया साफ संदेशविदेश मंत्रालय ने सबसे पहले दिल्ली में रूसी राजनयिक को तलब किया और एक कड़ा मैसेज दिया था। लेकिन असली रणभूमि बनी फिलीपींस की राजधानी मनीला। यहां मौके पर क्वाड यानी कि भारत, अमेरिका, जापान और और आसियान देशों की बैठक का एक तरफ चीन की विस्तारवादी नीतियों पर चर्चा हो रही थी। दूसरी तरफ रूस भी यह डायलॉग पार्टनर के तौर पर वहां मौजूद था। इसी माहौल के बीच जयशंकर साहब ने अपना दांव चला।इसे भी पढ़ें: Manila में S Jaishankar और Marco Rubio की बड़ी बैठक: Trade, Tariffs और AI पर बनी नई रणनीति उन्होंने क्वाड की व्यवस्था के बीच लावारू के साथ द्विपक्षी बैठक कर ली। अब जयशंकर साहब की कूटनीति की सबसे बड़ी खूबी है सही समय पर सही बात कहना। उन्होंने लावरूफ के साथ बैठक की तस्वीरों तो साझा की लेकिन उनके शब्दों में छिपा संदेश बेहद तीखा था। जयशंकर साहब ने साफ कहा कि द्विपक्षी संबंधों की समीक्षा तो जरूरी है लेकिन भारतीय नागरिकों की सुरक्षा हमारी सबसे पहले प्राथमिकता है। उन्होंने यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र के हालातों पर रूस को आईना दिखाया। जयशंकर साहब ने यह मुद्दा उस मंच पर उठाया जहां अमेरिका, जापान जैसे देश भी मौजूद थे और यह रूस को बताने का तरीका था कि भारत की दोस्ती को कमजोरी ना समझा जाए। व्यापार और निवेश की चर्चा तो हुई लेकिन भारत के नाविकों की मौत का साया पूरी बातचीत पर हावी रहा। मनीला में जो कुछ हुआ वह सिर्फ एक मुलाकात नहीं है। यह इंडोपेसिफिक में बदलते गेम पावर का सबूत है। चीन की नाक के नीचे भारत, अमेरिका और रूस का एक साथ होना यह बताता है कि भारत अब किसी एक के पाले में खड़े होने वाला देश नहीं है। यूक्रेन ने इस हमले के लिए सीधे रूस को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि भारत ने सीधे किसी का नाम नहीं लिया लेकिन जयशंकर साहब का लावर को तेवर दिखाना यह साफ करता है कि भारत को पता है कि गोली कहां से चली है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने जिस सख्त लहजे से इसकी निंदा की वो भारत की न्यू फॉरेन पॉलिसी का हिस्सा है। खैर साफ है कि भारत अब वो देश नहीं है जो अपने नागरिकों की मौत पर सिर्फ शोक संवेदनाएं जता कर बैठ जाए। जयशंकर साहब ने मनीला में जो किया वो भारत की बढ़ती ताकत का एहसास है। उन्होंने रूस को बता दिया कि हमारे संबंधों की गहराई तभी बनी रहेगी जब हमारे लोगों की जान सुरक्षित रहेगी। मौके पर चौका मारना इसी को कहते हैं मुलाकात भी हुई, हाथ भी मिलाया और देश का पक्ष भी पूरी मजबूती से रख दिया। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:29 +0530</pubDate>
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<title>जहां घुसे वहीं दफ्न, US के ग्राउंड ऑपरेशन से पहले किया साफ, भयंकर तैयारी में लगा ईरान</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो ट्रूक चेतावनी देते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हर हमले के जवाब में अमेरिका, ईरान के एक पुल या पावर प्लांट को बम से उड़ा देगा। वहीं दूसरी तरफ, तेहरान ने वाशिंगटन पर हमलावर रुख अपनाते हुए आरोप लगाया है कि अमेरिका &#039;पिकैक्स माउंटेन&#039; को ढाल बनाकर उस पर नए हमलों की ज़मीन तैयार कर रहा है—खासकर तब, जब ट्रंप पहले ही ईरान के इस संदिग्ध अंडरग्राउंड न्यूक्लियर साइट को निशाना बनाने की खुली धमकी दे चुके हैं। जॉर्डन की सेना का कहना है कि उन्होंने आज ईरान के कई हमलों को रोका और उन्हें नाकाम कर दिया। इससे पहले मंगलवार देर रात अमेरिकी सेना ने ईरान के पश्चिमी और दक्षिणी शहरों पर हमले किए थे। जैसा कि ईरानी अधिकारियों ने बताया।इसे भी पढ़ें: छिपाता हुआ US, बेनकाब हुआ झूठ! ईरानी हमले में कितने सैनिक मरे? पेंटागन के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक 37.5 अरब डॉलर का खर्च आया है। इस बीच, एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ एक परमाणु समझौते को मंज़ूरी दी है, जिससे सऊदी अरब नागरिक रिएक्टरों के लिए अपना ईंधन खुद तैयार कर सकता है। इज़राइल के विपक्षी नेताओं ने इस समझौते की आलोचना की है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि हर बार जब ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले किसी जहाज को निशाना बनाएगा, तो अमेरिका एक पुल या बिजली संयंत्र को बम से उड़ाकर तबाह कर देगा।इसे भी पढ़ें: WSJ Report: US-Israel के घातक हमलों के बाद भी Iran की Missile Power बरकरार, मिडिल ईस्ट में बढ़ा बड़ा खतराट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, इस पल के बाद से, जब भी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी भी अन्य हथियार से हमला करेगा, संयुक्त राज्य अमेरिका एक पुल या पावर प्लांट पर बमबारी कर उसे पूरी तरह नष्ट कर देगा, जिसमें राजधानी तेहरान के अंदर या उसके पास मौजूद ठिकाने भी शामिल हैं। ट्रंप इससे पहले भी ईरानी नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की धमकी दे चुके हैं—जिसे युद्ध अपराध माना जा सकता है। पिछले हफ्ते फॉक्स न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में भी उन्होंने कहा था कि अगर ईरान टेबल पर आकर बातचीत नहीं करता है, तो अमेरिका &quot;ईरान के सभी पुलों को नष्ट कर देगा। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:28 +0530</pubDate>
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<title>चीन ने क्यों कहा भारत का एहसान कभी नहीं भूलेंगे.. दुनिया हैरान!</title>
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<description><![CDATA[ मजबूरियां बड़े-बड़े देशों से क्या-क्या करवा सकती हैं, उसका अंदाजा आपको लग जाएगा। अगर बात चीन की हो तो कहानी और भी ज्यादा दिलचस्प हो जाती है। कूटनीति में कई बार ऐसी चीज बोलनी पड़ती है जिन्हें सुनकर यकीन नहीं होता। भारत को समय-समय पर उकसाने वाला चीन अचानक भारत की ही तारीफ में हद से आगे निकल चुका है। दरअसल आपको बता दें कि नई दिल्ली में चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी यानी कि पीएलए की 99 वर्षगांठ पर आयोजित समारोह में चीन के नए डिफेंस अटैची रियर एडमिरल यू जियान ने जो बोला जो बयान दिया उसने बीजिंग के हेकड़ी के परखच्चे समय उड़ा दिए। रेड आर्मी के इस बड़े अधिकारी ने खुले मंच से भारतीय सेना का आभार जताया और कहा है कि चीन भारत के इस एहसान को कभी नहीं भूलेगा। जरा याद कीजिए पिछले साल जून का वो महीना जब केरल तट के पास एक मालवाहक कारगो जहाज में भयंकर आग लग गई थी। उसमें बड़ा विस्फोट हुआ था। उस जहाज पर फंसे 12 चीनी चालक दल के सदस्यों को मौत के मुंह से बाहर निकालने वाला कोई और नहीं बल्कि भारतीय सेना और भारतीय नौसेना थी। इसे भी पढ़ें: Jaishankar-Wang Yi Meeting: सीमा पर शांति के बिना सामान्य नहीं होंगे रिश्ते, जिनपिंग के मंत्री को सामने बिठा जयशंकर ने दिया साफ संदेशचीन जो समंदर में अपनी दादागिरी दिखाता है। आज उसी भारत के सामने मजबूर है क्योंकि चीनी चालक दल के सदस्यों की जान भारतीय सेना ने बचाई थी। रियर एडमिरल यूजियान को मंच पर यह कबूल करना पड़ा कि भारत और चीन के साझा हित उनके आपसी मतभेदों से कहीं ज्यादा बड़े हैं। सिर्फ इतना ही नहीं ड्रैगन के इस अधिकारी ने यह भी कहा कि वह भारत के साथ राजनीतिक और सैन्य स्तर पर लगातार संवाद बनाए रखना चाहते हैं। आपसी विश्वास बढ़ाना चाहते हैं। जरा सोचिए जो चीन कल तक भारत को हर मोर्चे पर घेरने की साजिश रचता था। आज वहीं चीन कह रहा है कि भारत चीन ऐसे पड़ोसी देश हैं जिन्हें अलग नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति जिंगपिंग की मुलाकातों के बाद से ड्रैगन के तेवर अचानक पूरी तरह से बदल चुके हैं और इसे ही कहते हैं वक्त का पहिया। सरहद पर आंख दिखाने वाला चीन आज भारत की इंसानियत और ताकत के आगे झुकने पर मजबूर हो गया है। इसे भी पढ़ें: भारत में बना ऐसा चुंबक चीन भी हैरान, ऐसा क्या करेगा कि देश के लिए पैसा खींचकर लाएगा?विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से कहा कि सामान्य राजनयिक बातचीत बहाल करने के लिए सीमावर्ती इलाकों में स्थिरता बनाए रखना एक &quot;ज़रूरी शर्त&quot; है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों देशों के संबंध आपसी सम्मान, हितों और संवेदनशीलता पर आधारित होने चाहिए। बातचीत के दौरान, जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष के सामने अहम आर्थिक चिंताएं रखीं। उन्होंने बाज़ार में प्रवेश की बाधाओं, बढ़ते व्यापार घाटे और अनिश्चित ग्लोबल सप्लाई नेटवर्क की ओर ध्यान दिलाया। दोनों राजनयिक प्रतिनिधि फिलीपींस की राजधानी में &#039;एसोसिएशन ऑफ़ साउथईस्ट एशियन नेशंस&#039; (ASEAN) के तहत आयोजित अहम मंत्री-स्तरीय चर्चाओं में हिस्सा लेने के लिए इकट्ठा हुए थे। पूर्वी लद्दाख में चार साल पहले शुरू हुए लंबे सैन्य गतिरोध के कारण दोनों एशियाई देशों के बीच काफी तनाव रहा था, लेकिन हाल के समय में उनके संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इसे भी पढ़ें: भारत में बना ऐसा चुंबक चीन भी हैरान, ऐसा क्या करेगा कि देश के लिए पैसा खींचकर लाएगा?प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए जयशंकर ने ज़ोर दिया कि एक स्थिर और सहयोगी साझेदारी के लिए साझा सिद्धांतों पर आधारित एक बुनियादी ढांचा ज़रूरी है। अपनी शुरुआती बात में उन्होंने कहा हमारा मानना ​​है कि आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर ही एक स्थिर और सहयोगी संबंध को सबसे बेहतर ढंग से विकसित किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा इस तरह का संबंध बहु-ध्रुवीय एशिया और बहु-ध्रुवीय दुनिया में अहम योगदान दे सकता है। लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर शांति बनाए रखने की बेहद ज़रूरत को दोहराते हुए, मंत्री ने कहा कि सीमा पर स्थिरता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:27 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;China Relations में सुधार की उम्मीद: Marco Rubio बोले&#45; Xi Jinping की यात्रा से सुलझेंगे आपसी मतभेद</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं, लेकिन दोनों देश संवाद के जरिए रिश्तों को स्थिर बनाए रखने की कोशिश भी कर रहे हैं। इसी कड़ी में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि सितंबर में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित अमेरिका यात्रा काफी सकारात्मक रहेगी। हालांकि इस यात्रा की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।बता दें कि मार्को रुबियो ने यह बयान मनीला में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के बाद दिया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच विस्तृत बातचीत हुई है, जिससे आगामी उच्चस्तरीय यात्रा के लिए बेहतर माहौल तैयार हुआ है।मौजूद जानकारी के अनुसार रुबियो ने स्वीकार किया कि अमेरिका और चीन के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद हैं। उन्होंने कहा कि ये मतभेद निकट भविष्य में पूरी तरह समाप्त होने की संभावना नहीं है, लेकिन दोनों देशों की जिम्मेदारी है कि इन विवादों को इस तरह संभाला जाए कि स्थिति कभी नियंत्रण से बाहर न जाए।गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय हुई है जब हाल ही में अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों की आलोचना की थी। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल के दिनों में चीन पर अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप करने और वर्ष 2020 के चुनाव से जुड़े आंकड़ों में सेंध लगाने के आरोप लगाए थे। हालांकि चीन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि उनकी और वांग यी की मुलाकात के दौरान इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई।मौजूद जानकारी के अनुसार यदि शी जिनपिंग की यह यात्रा तय होती है तो इससे पहले मई में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की यात्रा कर चुके होंगे। ट्रंप कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद उनके और शी जिनपिंग के बीच व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं।दक्षिण चीन सागर का मुद्दा भी दोनों देशों के संबंधों में प्रमुख विवाद का विषय बना हुआ है। हाल ही में चीन और फिलीपींस के जहाजों के बीच टकराव के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने चीन के व्यवहार पर चिंता जताई थी। यह समुद्री क्षेत्र वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।बता दें कि मार्को रुबियो ने मनीला में भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों के साथ भी अलग बैठक की। इस दौरान उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशिया में समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता दोहराई। वहीं गुरुवार को उनकी रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भी मुलाकात होने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका, चीन और अन्य प्रमुख देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>India&#45;China Relations | &amp;apos;भारत के साथ संवेदनशील मुद्दों का हल और सहयोग बढ़ाने को तैयार&amp;apos;, चीनी विदेशमंत्री वांग यी का बयान</title>
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<description><![CDATA[ चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को सकारात्मक दिशा देने और संवेदनशील मुद्दों का उचित हल निकालने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है। फिलीपीन की राजधानी मनीला में आसियान (ASEAN) से जुड़ी बैठकों के इतर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई उच्चस्तरीय मुलाकात के दौरान वांग यी ने यह बात कही।फिलीपीन की राजधानी मनीला में आसियान से जुड़ी बैठकों के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई मुलाकात में वांग ने कहा कि चीन, दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी अहम आम सहमति को लागू करने, उच्च-स्तरीय संपर्क बनाए रखने और अर्थव्यवस्था, व्यापार, मीडिया तथा लोगों के बीच और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।उन्होंने कहा कि चीन दोनों देशों के बीच संवेदनशील मुद्दों का उचित समाधान तलाशने के लिए मिलकर काम करने को तैयार है।
 दोनों देशों से मानवता की भलाई का ध्यान रखने का आग्रह करते हुए वांग ने कहा कि चीन और भारत को बड़े देशों से अपेक्षित ज़िम्मेदारी दिखानी चाहिए, द्विपक्षीय संबंधों में बनी सकारात्मक गति को मज़बूत करना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय मामलों में आपसी तालमेल और सहयोग को बढ़ाना चाहिए।मुख्य बिंदु: द्विपक्षीय सहयोग और संवाद पर जोरविदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ वार्ता के दौरान चीनी विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए निम्नलिखित अहम पहलुओं को रेखांकित किया:शीर्ष नेताओं की सहमति पर अमल: वांग यी ने कहा कि चीन दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण आम सहमति को पूरी तरह लागू करने और उच्च-स्तरीय संपर्कों को निरंतर बनाए रखने के लिए तैयार है।संवेदनशील मुद्दों का समाधान: दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संवेदनशील मुद्दों का निष्पक्ष और उचित समाधान निकालने के लिए चीन ने मिलकर प्रयास करने की इच्छा जताई।व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान: चीन ने अर्थव्यवस्था, द्विपक्षीय व्यापार, मीडिया और दोनों देशों की जनता के बीच आपसी व सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करने पर बल दिया।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>France Social Media Ban: 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर पाबंदी, President Macron का ऐतिहासिक फैसला</title>
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<description><![CDATA[ फ्रांस ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। देश की संसद ने 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सामाजिक माध्यमों के उपयोग पर देशभर में प्रतिबंध लगाने वाले कानून को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही उच्च माध्यमिक विद्यालयों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भी रोक लगाने का प्रावधान किया गया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, यह कानून राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के दूसरे कार्यकाल की प्रमुख योजनाओं में शामिल था।बता दें कि इस कानून को संसद के दोनों सदनों का समर्थन मिला है। हालांकि इसे लागू करने से पहले संवैधानिक समीक्षा की प्रक्रिया पूरी होगी। सरकार चाहती है कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के साथ ही सितंबर से यह व्यवस्था लागू कर दी जाए। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कानून पारित होने के बाद कहा कि फ्रांस बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के मामले में पूरे यूरोप का नेतृत्व कर रहा है और सरकार इस दिशा में आगे भी लगातार काम करती रहेगी।गौरतलब है कि नए कानून के तहत शैक्षणिक और वैज्ञानिक जानकारी देने वाले कुछ डिजिटल मंचों तथा ऑनलाइन ज्ञानकोशों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है। सरकार का मानना है कि शिक्षा से जुड़े संसाधनों तक बच्चों की पहुंच प्रभावित नहीं होनी चाहिए।मौजूद जानकारी के अनुसार, हाल के वर्षों में फ्रांस में सामाजिक माध्यमों के बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता लगातार बढ़ी है। कई परिवारों ने कुछ बड़े डिजिटल मंचों के खिलाफ अदालत का दरवाजा भी खटखटाया है। उनका आरोप है कि हानिकारक सामग्री देखने के कारण कई किशोर अवसाद, आत्महत्या जैसे विचार, आत्मक्षति और खानपान से जुड़ी गंभीर मानसिक समस्याओं का शिकार हुए हैं।हालांकि इस कानून का कुछ राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों ने विरोध भी किया है। उनका कहना है कि इस प्रतिबंध को व्यवहार में लागू करना आसान नहीं होगा। साथ ही कुछ लोगों ने इसकी संवैधानिक वैधता और इंटरनेट पर गोपनीयता से जुड़े अधिकारों पर भी सवाल उठाए हैं।बता दें कि फ्रांस की स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार 12 से 17 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 90 प्रतिशत बच्चे प्रतिदिन स्मार्टफोन के जरिए इंटरनेट का उपयोग करते हैं, जबकि 58 प्रतिशत बच्चे सामाजिक माध्यमों का नियमित इस्तेमाल करते हैं। एजेंसी का मानना है कि अत्यधिक उपयोग से आत्मविश्वास में कमी और हानिकारक सामग्री तक पहुंच का खतरा बढ़ जाता है।गौरतलब है कि फ्रांस इस तरह का कानून लागू करने वाला यूरोपीय संघ का पहला देश बन गया है। वहीं ऑस्ट्रेलिया पहले ही कम उम्र के बच्चों के लिए ऐसे प्रतिबंध को मंजूरी दे चुका है, जबकि स्पेन, डेनमार्क, ग्रीस, ब्रिटेन और यूरोपीय आयोग भी बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर इसी तरह के कदमों पर विचार कर रहे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:57:25 +0530</pubDate>
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<title>वेनेज़ुएला भूकम्प: मौत के मलबे से निकली नई ज़िन्दगी की उम्मीद</title>
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<description><![CDATA[ वेनेज़ुएला के ला गुएरा में पिछले महीने के अन्त में आए दो शक्तिशाली भूकम्पों के बाद एक 12 मंज़िला आवासीय इमारत भरभराकर ढह गई. इसके बाद घायलों और मलबे में फँसे लोगों को बचाने के लिए अफ़रातफ़री मच गई. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:56:36 +0530</pubDate>
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<title>यूक्रेन: रूसी हमलों से मानवीय सहायता गोदामों को भारी नुक़सान</title>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने सोमवार को बताया कि हाल के दिनों में यूक्रेन के कई हिस्सों में हुए रूसी हमलों में कम से कम दो बच्चों की मौत हुई और दर्जनों लोग घायल हुए. इन हमलों में राहत सामग्री रखने वाले तीन प्रमुख गोदामों को भी भारी नुक़सान पहुँचा. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:56:33 +0530</pubDate>
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<title>भारत: सरल नवाचार, सुरक्षित पानी का भरोसा</title>
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<description><![CDATA[ भारत के बाढ़-प्रभावित इलाक़ों में एक प्रकृति-प्रेरित तकनीक, साधारण हैंडपम्पों को सुरक्षित पेयजल के स्रोत में बदल रही है. यह उपकरण बिना बिजली, रसायन, फ़िल्टर या झिल्ली के पानी को शुद्ध करता है और वंचित समुदायों को जलजनित बीमारियों से बचाने में मदद कर रहा है. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:56:26 +0530</pubDate>
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<title>यमन: दुर्गम इलाक़ों में हज़ारों लोगों तक पहुँची जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवा</title>
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<description><![CDATA[ यमन में हिसक टकराव से सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों के हज़ारों लोगों तक अब उनके घरों के पास जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँच रही हैं. यह सहायता संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता समन्वय कार्यालय (OCHA) ने यमन मानवीय कोष के ज़रिए उपलब्ध कराई है. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:56:26 +0530</pubDate>
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<title>मध्य पूर्व: अमेरिका&#45;ईरान हमले जारी, नागरिक फिर निशाने पर</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे सप्ताह भी घातक हमले जारी हैं. संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल तनाव कम करने की अपील करते हुए मध्य पूर्व में नागरिकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को हो रहे भारी नुक़सान पर चिन्ता जताई है. ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:56:23 +0530</pubDate>
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<title>US&#45;Iran War | शहीदों का बदला, ईरान में तबाही! आग की लपटों में घिरा होर्मुज... Donald Trump बोले&#45; &amp;apos;हमारी सेना का प्रतिशोध है!&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोमवार तड़के ईरान के ठिकानों पर हवाई हमलों के एक और विनाशकारी दौर की पुष्टि की। अमेरिकी सैन्य अभियानों की यह लगातार नौवीं रात है, जिसके बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है।ट्रंप का कड़ा संदेश: शहीद सैनिकों के सम्मान में &#039;बहुत ज़ोरदार&#039; हमलावर्ल्ड कप फाइनल देखने के बाद वाशिंगटन लौटते समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई पर बड़ा बयान दिया। पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, &quot;हमने आज रात फिर उन पर बहुत ज़ोरदार हमला किया है। यह कार्रवाई हाल के दिनों में मारे गए हमारे तीन महान देशभक्तों (अमेरिकी सैनिकों) के सम्मान में की जा रही है।&quot; सैन्य कर्मियों की मौत पर दुख जताते हुए ट्रंप ने साफ किया कि ये जांबाज इसलिए लड़ रहे थे ताकि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। इसे भी पढ़ें: Accenture Salary Hike में बड़ा बदलाव, अब 50% Base Salary और 50% Lump Sum Payment के रूप में मिलेगा लाभड्रोन विस्फोट में एक और अमेरिकी सैनिक की मौतयह नया हमला उत्तरी इराक में हुई एक दुखद घटना के बाद शुरू हुआ। वहां मार गिराए गए एक ईरानी ड्रोन के मलबे और बिना फटे विस्फोटक को &#039;नियंत्रित तरीके से नष्ट&#039; (Controlled Detonation) करने के दौरान एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया। CENTCOM के मुताबिक यह घटना 18 जुलाई को हुई। इस नई मौत के बाद, 28 फरवरी से ईरान के खिलाफ शुरू हुए इस युद्ध में अब तक जान गंवाने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। इसे भी पढ़ें: Rohit Sharma की फॉर्म पर Morne Morkel का बड़ा बयान, लॉर्ड्स में निर्णायक मुकाबले के लिए बताया जीत का प्लानहोर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज में लगी आगअमेरिकी हमलों के शुरू होते ही ओमान के तट के पास रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक कमर्शियल जहाज में भीषण आग लग गई। हालांकि, आग लगने की सटीक वजह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह वही समुद्री रास्ता है जहां अमेरिकी सेना जहाजों को ईरानी नियंत्रण से बचने के लिए जाने की सलाह देती रही है। CENTCOM ने कहा कि उनके हमलों का मकसद अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में नागरिक जहाजों पर हमला करने की ईरानी सैन्य क्षमता को पूरी तरह से नेस्तनाबूत करना है।ईरान का जवाबी पलटवार: बहरीन, जॉर्डन और कुवैत निशाने परअमेरिकी कार्रवाई से बौखलाए ईरान ने भी मध्य पूर्व में अमेरिका के सहयोगी देशों पर मिसाइलों और ड्रोनों की बरसात कर दी है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, तेहरान ने अपने लोरेस्तान प्रांत से दुश्मन के ठिकानों की ओर मिसाइलों का एक नया जत्था दागा है। इस हमले के बाद बहरीन, जॉर्डन और कुवैत को हाई अलर्ट पर रखकर अपने एयर डिफेंस सिस्टम को दोबारा एक्टिवेट करना पड़ा है।दूतावासों की चेतावनी और इज़राइल में अलर्टबहरीन में अमेरिकी दूतावास ने एक गंभीर सुरक्षा चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि ईरान राजधानी मनामा के मध्य इलाकों को निशाना बना सकता है। वहीं, इज़राइल ने भी चेतावनी दी है कि जॉर्डन की ओर दागी गई ईरानी मिसाइलों के कारण हफ़्तों में पहली बार आग की लपटें इज़राइली सीमा तक फैल सकती हैं। दोनों देशों के बीच शुरू हुआ यह टकराव अब एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता जा रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:12:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Middle East Crisis | रणनीतिक जलमार्ग में हाहाकार! होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़ फूँका, ईरान के परमाणु प्लांट पर अमेरिकी मिसाइल स्ट्राइक</title>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध अब दुनिया की लाइफलाइन कहे जाने वाले समुद्री रास्तों और संवेदनशील परमाणु प्रतिष्ठानों तक फैल गया है। सोमवार तड़के दुनिया के सबसे अहम चोकपॉइंट ‘होर्मुज़ जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में ओमान के तट के पास एक कमर्शियल जहाज़ में भीषण आग लग गई। इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र में पहले से ही चरम पर चल रहे सैन्य तनाव को बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँचा दिया है। ब्रिटिश सेना की विंग &#039;यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स&#039; (UKMTO) ने इस आग की पुष्टि करते हुए हाई अलर्ट जारी किया है।यह घटना ओमान के तट के पास हुई; ब्रिटिश समुद्री अधिकारियों ने आग लगने की पुष्टि की है, लेकिन कहा है कि आग लगने का कारण अभी पता नहीं चला है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच टकराव और खतरनाक दौर में पहुँच गया है। दोनों पक्ष सैन्य गतिविधियाँ तेज़ कर रहे हैं, जिनका असर अब मध्य पूर्व में क्षेत्रीय शिपिंग, ऊर्जा सुरक्षा और आम लोगों के बुनियादी ढाँचे पर पड़ रहा है। इसे भी पढ़ें: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट में SIT ने सौंपी सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट, आज होगी बेहद अहम सुनवाईब्रिटिश सेना द्वारा संचालित &#039;यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स&#039; (UKMTO) ने ओमान के पास पानी में जहाज़ में आग लगने के बाद अलर्ट जारी किया। अधिकारियों ने अभी तक यह पता नहीं लगाया है कि आग किस वजह से लगी या क्या यह घटना चल रहे टकराव से जुड़ी है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री &#039;चोकपॉइंट&#039; (संकरे समुद्री रास्ते) में से एक है।  हाल के हफ़्तों में, अमेरिकी सेना ने कमर्शियल जहाज़ों को सलाह दी है कि वे इस जलडमरूमध्य से गुज़रते समय ओमान के तट के करीब के रास्तों का इस्तेमाल करें। हालाँकि, ईरान उन रास्तों का इस्तेमाल करने वाले जहाज़ों को निशाना बनाता रहा है। उसका कहना है कि इस जलमार्ग से होने वाले आवागमन पर उसका नियंत्रण होना चाहिए; शांति के समय में दुनिया के कुल व्यापारिक तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग पाँचवाँ हिस्सा इसी रास्ते से गुज़रता है।इसे भी पढ़ें: International Chess Day 2026: भारत का &#039;चतुरंग&#039; कैसे बना आधुनिक Chess? जानिए इस खेल का दिलचस्प History और महत्व टकराव के एक और खतरनाक दौर में पहुँचने पर अमेरिका ने नए हमले किएअमेरिका ने सोमवार तड़के ईरान पर एक और दौर के हवाई हमले किए। यह लगातार नौवीं रात है जब सैन्य अभियान जारी है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इन ताज़ा हमलों का मकसद ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमज़ोर करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज़ जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाज़ों और आम नाविकों को धमकाने के लिए किया जा रहा है।सेंट्रल कमांड ने एक बयान में कहा, &quot;इन हमलों से ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमज़ोर करना जारी रहेगा जिनका इस्तेमाल होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले कमर्शियल जहाज़ों और आम नाविकों पर हमले के लिए किया जाता है।&quot;यह ताज़ा तनाव तब बढ़ा है जब वाशिंगटन ने एक और अमेरिकी सैनिक की मौत की घोषणा की और साथ ही ईरान ने जॉर्डन की ओर नए मिसाइल हमले किए। इससे यह डर पैदा हो गया है कि यह टकराव पूरे क्षेत्र में और फैल सकता है।अमेरिकी सैनिक की मौतअमेरिकी सेना ने बताया कि शनिवार को इराक में एक ईरानी ड्रोन को गिराने के बाद उसे &quot;नियंत्रित तरीके से नष्ट&quot; (controlled detonation) करने के दौरान एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई। इससे पहले, वाशिंगटन ने जॉर्डन में हुए हमले के लिए ईरान समर्थित ताकतों को ज़िम्मेदार ठहराया था, जिसमें अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। उस हमले के बाद सेना का एक जवान लापता हो गया था। रविवार को सेना ने बताया कि &quot;पहचान न हो पाने वाले अवशेष&quot; मिले हैं और उनकी जांच की जा रही है। इस नई मौत के साथ, संघर्ष शुरू होने के बाद से मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या 17 हो गई है। इसे भी पढ़ें: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट में SIT ने सौंपी सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट, आज होगी बेहद अहम सुनवाईअमेरिका ने सैन्य ठिकानों के अलावा भी अपने हमले का दायरा बढ़ायाहमलों का यह नया दौर दूसरे हफ़्ते में प्रवेश कर चुका है, जिसमें अमेरिका ईरान के अंदर बुनियादी ढांचों पर भी हमले कर रहा है। हाल के ऑपरेशनों में सैन्य ठिकानों के अलावा पुलों और बिजली सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया है। रविवार को अमेरिकी सेना द्वारा जारी फुटेज में लड़ाकू विमानों को हमले करते हुए और नौसैनिक प्लेटफॉर्म से छोड़ी गई टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलों को इस्तेमाल करते हुए दिखाया गया। कुछ लक्ष्य पहाड़ी इलाकों में स्थित लग रहे थे, जहाँ ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के मिसाइल बेस और अन्य रणनीतिक सैन्य बुनियादी ढांचे होने की जानकारी है।बन रहे परमाणु संयंत्र को निशाना बनाया गयासरकारी टेलीविज़न के अनुसार, ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने कहा कि अमेरिकी हमलों में से एक हमला देश के दक्षिण-पश्चिम में डारखोविन में बन रहे परमाणु ऊर्जा संयंत्र की निर्माण साइट पर हुआ। साइट की हालिया सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला कि ज़मीन साफ़ करने का काम तो हुआ था, लेकिन 9 जुलाई तक मुख्य निर्माण कार्य सीमित ही था। ईरान ने पहले यह जानकारी नहीं दी थी कि उस जगह पर हमला हुआ है।बाद में इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने साफ़ किया कि वह संयंत्र अभी निर्माण के शुरुआती चरण में था और हालिया निरीक्षण के दौरान वहाँ कोई परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी।  इसे भी पढ़ें: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट में SIT ने सौंपी सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट, आज होगी बेहद अहम सुनवाईईरान के मिसाइल हमलों से पूरे मिडिल ईस्ट में अलर्ट जारीजैसे ही अमेरिका ने अपना हवाई अभियान तेज़ किया, ईरान ने मिडिल ईस्ट में कई अमेरिकी सहयोगियों को निशाना बनाते हुए मिसाइलों और ड्रोनों की एक और खेप दागी। बहरीन, जॉर्डन और कुवैत ने आने वाले खतरों को रोकने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिवेट किए, जबकि इज़राइल ने चेत ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:12:51 +0530</pubDate>
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<title>Putin ने जेट इंजन पर भारत को दिया ऐसा ऑफर, हिला अमेरिका!</title>
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<description><![CDATA[ रूस ने अपना सबसे खतरनाक AL51 F1 इंजन विकसित कर लिया है और इससे पहले कि इसकी टेस्टिंग की धूल ठंडी होती रूस ने भारत के दरवाजे पर एक ऐसा ऑफर रख दिया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। यह सिर्फ एक सौदा नहीं है। यह भारत के लिए स्टेल्थ पावर बनने का सुनहरा टिकट है। AL51 को दुनिया मास्टर पीस कह रही है। दशकों से स्टेल फाइटर इंजन के मामले में अमेरिका का कोई मुकाबला नहीं था। लेकिन रूस के AL51 F1 ने उस वर्चस्व को हिला कर रख दिया। यह इंजन ना केवल फाइटर जेट को सुपर क्रूज यानी बिना आफ्टर बर्नर के सुपरसोनिक रफ्तार की ताकत देता है बल्कि इसका थ्रस्ट वेक्टरिंग और इसका कम हीट सिग्नेचर इसे रडार की नजरों से ओझल रखने में मदद करता है। रूस की टेस्टिंग अब अंतिम चरण में है और रिपोर्ट कहती है कि यह इंजन अमेरिका के सबसे एडवांस इंजनों को पानी पिलाने की ताकत रखता है। इसे भी पढ़ें: परमाणु हमला...NATO देश का मोदी पर होश उड़ाने वाला खुलासा, हिली दुनिया!रूस ने भारत को केवल यह इंजन बेचने की बात नहीं की है। रूस ने जो ऑफर दिया है उसे सुनिए। तकनीक का साझा यानी टेक शेयरिंग। रूस इस इंजन के डिजाइन समाधान और विकास के दौरान मिले अपने बरसों के अनुभव को भारत के साथ साझा करने को तैयार है। दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट है स्वदेशी इंजन में मदद। अगर भारत भविष्य में अपना खुद का स्टील इंजन विकसित करता है तो रूस उसमें तकनीकी सहयोग देने का वादा कर रहा है। तीसरा है ब्रिज सप्लाई। जब तक भारत का अपना इंजन तैयार नहीं हो जाता, रूस AL51 F1 की निर्वात आपूर्ति करेगा ताकि हमारे फाइटर जेट्स को उड़ान भरने के लिए किसी का इंतजार ना करना पड़े। यह किसी भी देश द्वारा दी जाने वाली सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की पेशकश मानी जा रही है। इस ऑफर की टाइमिंग बहुत महत्वपूर्ण है। इसे भी पढ़ें: मोदी की सुनते हैं पुतिन! पोलैंड का बड़ा खुलासाभारत काफी समय से अमेरिकी F414 इंजन का इंतजार करता रहता है। लेकिन हाल ही में खबरें आई कि उन इंजनों की सप्लाई को लेकर अनिश्चितताएं बनी हुई है। कुछ रिपोर्ट तो यहां तक दावा कर रही हैं कि जो इंजन भारत को मिलने थे उन्हें किसी और ग्राहक को दिया जा सकता है। ऐसे में भारत के पास अपने एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एमका के लिए एक बहुत बड़ा शून्य पैदा हो गया था। पुतिन ने इसी मौके को भांप लिया। रूस जानता है कि इंजन ही वो कड़ी है जहां भारत को सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है और इसी दुबती रख पर मरहम लगाकर रूस ने भारत को अपना सबसे बड़ा रक्षा साझदार बनाए रखने का दांव खेल दिया है। लेकिन गौर करने वाली बात है कि इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में कुछ भी मुफ्त में नहीं मिलता। एक्सपर्टों का मानना है कि रूस के इस ऑफर के पीछे एक बड़ा मकसद है। रूस चाहता है कि भारत उसके सबसे आदमी स्टील फाइटर जेट एसयू 57 की खरीद पर फिर से विचार करें।इसे भी पढ़ें: दुनिया के आगे एक नया खतरा, भयंकर जंग शुरू होते ही रूस ने ईरान में उतारा खतरनाक विमान! एसयू 57 को अब तक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर नहीं मिले हैं। अगर भारत जैसा बड़ा खरीदार इसमें दिलचस्पी दिखाता है तो रूस के रक्षा उद्योग को वो ऑक्सीजन मिलेगी जिसकी उसे पश्चिमी पाबंदियों के बीच सख्त जरूरत है। इसके अलावा AL51 के विकास पर रूस ने अरबों डॉलर खर्च किए हैं और भारत को इंजन बेचकर वह उस निवेश की भरपाई करना चाहता है। एक तरफ अमेरिका की आधुनिक लेकिन अनिश्चित तकनीक है और दूसरी तरफ रूस का वह भरोसा और तकनीक है जो भारत को आत्मनिर्भर बना सकती है। अगर यह समझौता भारत रूस के बीच हो जाता है तो भारत ना केवल उन्नत इंजन तकनीक तक पहुंचेगा बल्कि भविष्य के स्वदेशी स्टील फाइटर के निर्माण में दशकों की दूरी को कुछ ही सालों में तय कर लेगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:12:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Iran ने ढूंढ़ ली खाड़ी देशों की कमजोर नस, ऐसा वार, घुटनों पर आएंगे अरब देश!</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अब तक सैन्य ठिकानों, मिसाइल अड्डों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आ रही थी। लेकिन अब इस संघर्ष की आंच समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने वाले डिसलिनेशन प्लांट्स तक पहुंच गई है। यह वही प्लांट हैं जिन पर खाड़ी क्षेत्र के कई देशों की पीने के पानी की आपूर्ति पूरी तरह से निर्भर करती है। ऐसे में इन संयंत्रों पर हमले केवल युद्ध का हिस्सा नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की बुनियादी जरूरतों पर सीधा खतरा माने जा रहे हैं। ईरान ने दावा किया है कि अमेरिकी हवाई हमले में हुरमुजगान प्रांत के बोंजी इलाके में स्थित एक डिसलिनेशन प्लांट पूरी तरह से तबाह हो गया है। इसे भी पढ़ें: तुरंत ईरान छोड़ो...  US की बमबारी के बीच एक्शन में भारत, कर दिया बड़ा ऐलानईरानी अधिकारियों के अनुसार इस हमले के बाद करीब 10,000 लोगों की पानी की आपूर्ति ठप हो गई है। जिससे इलाके में पीने के पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। ईरान का कहना है कि नागरिकों के लिए जरूरी जल आपूर्ति व्यवस्था को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों की भावना के खिलाफ है। वहीं दूसरी ओर कुवैत ने आरोप लगाया है कि ईरान ने लगातार दूसरे दिन उसके एक पावर प्लांट और वाटर डिसलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया जिससे प्लांट में आग लग गई। कुवैती अधिकारियों के मुताबिक आग पर समय रहते काबू पा लिया गया। लेकिन इस तरह के हमले देश की सुरक्षा के लिए बेहद गंभीर खतरा हैं। इसे भी पढ़ें: ईरान के सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei देश में नहीं! सऊदी मीडिया का बड़ा दावाकुवैत सरकार ने कहा कि अगर ऐसे हमले जारी रहे तो देश की आवश्यक सेवाएं और आम लोगों की पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। दरअसल खाड़ी क्षेत्र के अधिकांश देशों के लिए डिसलिनेशन प्लांट जीवन रेखा है। यह संयंत्र समुद्र के खारे पानी से नमक और अन्य अशुद्धियां निकालकर उसे पीने योग्य बनाते हैं। रेगिस्तानी इलाकों में जहां प्राकृतिक मीठे पानी के स्रोत बेहद सीमित है, वहां यही तकनीक करोड़ों लोगों की प्यास बुझाती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो कुवैत और ओमान करीब अपनी 90% पानी की जरूरत डिसलिनेशन प्लांट से पूरी करते हैं। बहरीन में यह आंकड़ा 85% है। जबकि सऊदी अरब अपने करीब 70% पानी की जरूरत इस प्रक्रिया के जरिए पूरा करता है। अबू धाबी, दुबई, दोहा, कुवैत सिटी और जिद्दा जैसे बड़े शहर लगभग पूरी तरह इन्हीं संयंत्रों पर निर्भर है। ऐसे में अगर ये प्लांट बड़े पैमाने पर निशाना बनते हैं तो लाखों नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो सकता है। ईरान की स्थिति इससे कुछ अलग है। देश पूरी तरह डिसलिनेशन पर निर्भर नहीं है। लेकिन उसके सूखा प्रभावित तटीय इलाकों में समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्र पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इसलिए ईरान में भी ऐसे प्लांट पर हमला स्थानीय आबादी के लिए गंभीर मानवीय संकट पैदा कर सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:12:48 +0530</pubDate>
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<title>तुरंत ईरान छोड़ो...  US की बमबारी के बीच एक्शन में भारत, कर दिया बड़ा ऐलान</title>
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<description><![CDATA[ भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए बहुत गंभीर एडवाइज़री जारी कर दी है। दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष लगातार खतरनाक होता जा रहा है। दोनों ही देशों के बीच सैन्य कारवाही अब केवल सीमित जवाबी हमलों तक नहीं रह गई है बल्कि कई सारे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है दोनों की ओर से और ऐसी ही तेजी से बिगड़ते हुई सुरक्षा स्थिति को देखते हुए तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए संशोधित ट्रेवल एडवाइज़री जारी की है। इस एडवाइज़री में भारत सरकार की ओर से चार पॉइंटर्स का सुझाव दिया गया है। भारतीय दूतावास की तरफ से जारी की गई एडवाइज़री में चार सलाह है। पहला सुझाव जो है वह यह कि जो भी भारतीय नागरिक किसी भी उद्देश्य से ईरान जाने की योजना बना रहे हैं, वह फिलहाल अपनी यात्रा को स्थगित कर दें। जब तक वहां की सुरक्षा स्थिति में सुधार नहीं हो जाता, तब तक वहां ना जाए। इसे भी पढ़ें: सुबह कैमरा, रात में बंदूक... इजरायल ने UN में बवाल मचा दिया, ये देख भारत भी हैरान!दूसरी सलाह यह है कि ईरान में रह रहे भारतीय नागरिक उपलब्ध कमर्शियल फ्लाइट्स का उपयोग करते हुए अस्थाई रूप से देश छोड़ने पर विचार करें और तीसरे बिंदु पर एंबेसी ने कहा है जो भी भारतीय ईरान में रहने का फैसला कर रहे हैं, वह अत्याधिक सावधानी बरतें। समाचारों पर लगातार नजर बनाए रखें। विशेष रूप से दक्षिणी तटीय इलाकों सहित उन इलाकों से दूर रहें जहां पर सैनिक गतिविधियां अधिक हो रही हैं। इसके साथ ही चौथे बिंदु पर भारतीय दूतावास ने कहा है कि जिन भी भारतीय नागरिकों ने अब तक दूतावास में अपना पंजीकरण नहीं कराया है वह तुरंत अपना रजिस्ट्रेशन करवाएं और दूतावास की वेबसाइट एवं सोशल मीडिया हैंडल पर जारी अपडेट्स को लगातार देखते रहें। यानी कि सरकार की ओर से ईरान में मौजूद भारतीयों को आगाह कर दिया गया है कि वहां की स्थिति कभी भी बेहद चिंताजनक हो सकती है। तो सचेत रहना जरूरी है। इसे भी पढ़ें: चाबहार का इतना भयंकर बदला, ईरान ने 15 मिनट में 60 फाइटर जेट उड़ाए? हिल गए ट्रंपदरअसल हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। अमेरिकी सेना लगातार नौवीं रात ईरान के ऊपर कई राजनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड यानी कि सेंट कॉम के अनुसार इन हमलों में स्ट्रीट ऑफ होमोस के पास मौजूद ईरान के टट्टी निगरानी प्रणाली एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया है। इसके साथ ही इन हमलों का वीडियो फुटेज भी सेंट कॉम की ओर से जारी किया गया है। तो वहीं दूसरी तरफ ईरान है जो कि जवाबी कारवाइयों को तेज कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया है। इसके अलावा जॉर्डन और बहरीन के आसपास भी मिसाइल गतिविधियों को देखा गया है। यानी कि संघर्ष अब केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। बल्कि यह फिर एक बार पूरे के पूरे मिडिल ईस्ट में दिख रहा है। और ऐसे माहौल में किसी भी विदेशी नागरिक के लिए वहां पर रहना खतरनाक हो सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:12:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>भारत में बना ऐसा चुंबक चीन भी हैरान, ऐसा क्या करेगा कि देश के लिए पैसा खींचकर लाएगा?</title>
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<description><![CDATA[ भारत के पोटेंशल को पूरी तरह से इस्तमाल करने के लिए। अब नरेंद्र मोदी ऐसा मेगा प्लान भी बना रहे हैं जिससे भारत के लाखों-करोड़ रुपए बच सकते हैं। भारत ने पिछले वित्तीय वर्ष में करीब सत्तर लाख करोड़ रुपए का सामान इंपोर्ट किया है। इंटर्नल एसेस्मेंट से पता चला कि इसमें से करीब 35 लाख करोड़ का सामान भारत में बनाया जा सकता था। जैसे पिछले साल भारत ने 4600 करोड रुपए के जूते के सोल का मोल्ड इंपोर्ट किया। इस तरह की चीज़ें आसानी से भारत में ही 14 दिन में बनाई जा सकती है। इसके बाद सरकार ने करीब 4 ,90 ,000 करोड़ रुपए के 100 प्रोजेक्ट उनको चिन्हित किया। जो हम अपने यहां बना सकते हैं। ये प्रोड़क्स, फूटवेर, टेक्स्टाइल, ईवी और सोलर पैनल जैसे सेक्टर्स में से खोजे गए। अब इन सारे प्रोड़क्स को बाहर से मंगाने की बजाए, भारत में बनाने पर जोड़ दिया जाएगा। इससे दूसरे देशों पर निर्भरता कम होगी और ग्लोबल क्राइसिस से दिक्कत भी नहीं आएगा। इससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी बचा रहेगा, रूपया मजबूत होगा, देश में रोजगार के नए मौके बनेंगे और महंगाई पर भी कंट्रोल रहेगा। इसे भी पढ़ें: भारत-रूस की दोस्ती तोड़ने के लिए अमेरिका ला रहा कौन सा बिल? सीनेटर्स का भी मिल गया सपोर्टएक तरफ यह सब चल रहा है, रेलवे की तस्वीर बदल रहे है, प्रधानमंत्री मोदी फ्यूचर रेडी भारत की तस्वीर खीच रहे हैं और इधर भारत में फ्यूचर के लिए ऐसी तकनीक भी बन रही है कि दुनिया हैरान है। भारत में ऐसा चुम्बक बना है, जिससे चीन सबसे ज़्यादा हैरान परिशान है। यह चुम्बक देश के लिए पैसा खींच कर लाने वाला चुम्बक है। पैसा मतलब नोत नहीं। दरअसल बैंगलुरू की एक डीप टेक स्टार्टप है, इसने इलेक्टरिक व्हीकल्स के लिए खास तकनीक विकसित करने का दावा किया है, जिससे न सिर्फ भारत के लिए, बल्कि दुनिया भर के ईवी मार्केट के लिए, इसे गेम चेंजर माना जा रहा है। ईवी मोटर के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इस तकनीक को वर्चुअल मैग्नेट मोटर कहा जा रहा है, ये तकनीक इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्यूंकि ईवी मोटर बनाने के लिए, ये चीन से आने वाले रेयर अर्थ मिनिरल्स पर निर्भरता को कम कर सकती है। ई-वी की लागत को स्थिर रख सकती है, ईवी की लागत को स्थिर रख सकती है। आम तौर पर  ईवी में परमानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर होता है। इसका इस्तमाल किया जाता है, जिससे गाड़ी चलती है, पीएमएस मोटर में नियोडिमियम, लोहा और बोरान के रेयर अर्थ मैग्नेट लगे होते है, इन रेयर अर्थ मैग्नेट की मदद से ही यह मोटर चलती है, जिससे गाड़ी चल पाती है, एक इलेक्ट्रिक व्हीकल में 1-3 किलो का रेयर रेयर अर्थ मैंगनेट लगता है।इसे भी पढ़ें: सुबह कैमरा, रात में बंदूक... इजरायल ने UN में बवाल मचा दिया, ये देख भारत भी हैरान!हालिया दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी दुनिया में  कहां कहां से रेयर अर्थ मिनिरल्स मिल सकता है उसके लिए दौरा कर रहे हैं, जिससे चीन पर निर्भरता कम हो। अब बैंगलोर की  कम्पनी वाइमाग इसके मुताबिक उनकी नई तकनीक बिना किसी रेयर अर्थ मैंगनेट के इस्तेमाल को किये मोटर चलाने की क्षमता रखती बल्कि इस कम्पनी ने वर्चुअल मैंग्नेट से चलने वाली मोटर बना दी है इस नई मोटर में कम्पनी ने फिजिकल मैंग्नेट की बजाए इलेक्ट्रॉनिकली जनरेटेड मैंग्नेट का इस्तेमाल किया है जिसकी वजह से इसे वर्चुअल मैंग्नेट कहा जा रहा है यानि इस मोटर में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल होगा जो मैंग्नेट के बगैर मैंग्नेट वाला काम कर रही है। कम्पनी के इंजिनियर्स ने इसे सॉफ्टवेयर कंट्रोल भी बना दिया यानि अपनी सुविधा के अनुसार इसके मैंग्नेटिक फिल्ड को कम और ज्यादा कर सकेंगे वो भी सिर्फ सॉफ्टवेयर से कंट्रोल होना बड़ी बात इसलिए है क्योंकि मोटर चलाना एक बात है लेकिन उसे कंट्रोल्ड तरीके से चलाना अलग बात है तो यानि यहां रेयर अर्थ पर  निर्भरता भी कम होगी, सस्ते में काम होगा, बेहतर काम होगा, पैसा बचेगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:12:47 +0530</pubDate>
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