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<title>Prime News Studio &#45; : फिटनेस मंत्रा</title>
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<description>Prime News Studio &#45; : फिटनेस मंत्रा</description>
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<title>PCOD में Hormonal Fat से हैं परेशान? फैंसी Diet नहीं, ये देसी चूर्ण है रामबाण इलाज</title>
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<description><![CDATA[ खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण हार्मोनल संबंधित बीमारियां परेशान करती है। PCOD लाइफस्टाइल संबंधित बीमारी है। अक्सर लड़कियां PCOD के दौरान मान लेती है, उनका वजन अधिक रहेगा या फिर PCOD में शरीर की चर्बी को कम करना पॉसिबल नहीं है, हालांकि ऐसा नहीं है। गौरतलब है कि PCOD में वजन करना काफी मुश्किल होता है, लेकिन यह मान लेना कि PCOD में वजन नहीं कर पाएंगी तो इस वजह से वजन बढ़ा ही रहता है, ये पूरी तरह से गलत है। दरअसल, PCOD में होने वाले हार्मोन्स इंबैलेंस के चलते शरीर की जिद्दी चर्बी को कम करना मुश्किल होता है। इस हेल्थ कंडीशन में कई बार हार्मोन्स ऊपर-नीचे हो रहते हैं, जिनका असर हमारी स्किन, बालों, वजन, फर्टिलिटी और मूड सहित कई चीजों पर होता है। जिस वजह से लड़कियों का वजन बढ़ने लगता है।  यदि आप PCOD में वजन कम करना चाहती है, तो एक बार घर पर इस देसी चूर्ण को जरुर बनाएं। आइए आपको बताते हैं कैसे इस देसी चूर्ण को बनाएं।PCOD में वजन कम करने के लिए देसी चूर्ण - हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया कि देसी चूर्ण हार्मोन्स को बैलेंस करता है। वहीं, यह क्रेविंग्स को भी कंट्रोल करता है, स्किन और हेयर हेल्थ को भी बेहतर करता है।  - इस चूर्ण में हेल्दी फैट्स और मिनरल्स होते हैं, जो पीसीओडी में हार्मोनल इंबैलेंस, क्रेविंग्स और मेटाबॉलिज्म के सुस्त होने की वजह से वजन बढ़ने लगता है। इसलिए रोजाना इस चूर्ण को लेने से वजन कम किया जा सकता है। - इससे डाइजेशन में सुधार होता है और ब्लोटिंग भी कम होती है। वैसे यह कोई जादुई दवा नहीं है, हां लेकिन यह वजन को मैनेज करती है।  - वैसे इसमेम फाइबर और प्रोटीन का मात्रा अधिक पाई जाती है, इसलिए यह भूख को भीं कंट्रोल करती है और बार-बार  स्नौंकिंग करने की आदत भी कम हो जाती है।  - पीसीओडी में ब्लड शुगर स्पाइक काफी आम हो जाती है। इस चूर्ण को लेने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल हो जाती है और कब्ज की समस्या भी ज्यादा परेशान नहीं करती। यह मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त करता है और कुल कैलोरी को इनटेक करता है।घर पर कैसे तैयार करें यह देसी चूर्ण - सबसे पहले आप फ्लैक्स सीड्स, कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज और तरबूज के बीज लें। - फिर इनको अलग-अलग ड्राई रोस्ट कर लें। - अब इसे ठंडा होने दें और इसके बाद इसको अच्छे पीसकर पाउडर बना लें। - इसका 1 टीस्पून एक गिलास पानी में मिलाकर पिएं। - आपको कुछ हफ्तों में फर्क काफी नजर आएगा। - वैसे यह सही डाइट और लाइफस्टाइल के लिए काफी जरुरी है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:42:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: मामूली Sunburn को न करें नजरअंदाज, बढ़ सकता है Skin Cancer का जानलेवा खतरा</title>
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<description><![CDATA[ गर्मी का मौसम आते ही लोग तेज धूप और पसीने से परेशान हो जाते हैं। गर्मियों में तेज धूप होने की वजह से जलन, रेडनेस और सनबर्न होना काफी आम समस्या है। जिसको अधिकतर लोग नजरअंदाज करने की गलती करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सनबर्न की समस्या को मामूली समझना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। क्योंकि सनबर्न की समस्या भी स्किन कैंसर का रूप ले सकती है। इसलिए इससे सावधान रहने के साथ-साथ बचाव करना भी जरूरी है।स्किन कैंसर खतरासूरज की किरणें जीवन के लिए ऊर्जा और विटामिन डी का स्त्रोत है। लेकिन कभी-कभी यह जानलेवा भी हो सकती हैं। सूर्य की पराबैंगनी किरणें स्किन की कोशिकाओं को कमजोर करके कैंसर जैसी घातक बीमारियों को जन्म दे सकती है।इसे भी पढ़ें: PCOD में Hormonal Fat से हैं परेशान? फैंसी Diet नहीं, ये देसी चूर्ण है रामबाण इलाजविश्व स्वास्थ्य संगठन की इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 में मेलेनोमा की वजह से करीब 60,000 लोगों की मौत हुई। इस बीमारी से पुरुषों के प्रभावित होने की संभावना महिलाओं की तुलना में ज्यादा पाई गई है।बचाव के उपायछाया में रहेंदिन में 12 बजे से दोपहर 3 बजे तक धूप सबसे ज्यादा तेज होती है। इसलिए इस दौरान घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए।खुद को कपड़ों से ढकेंजब भी आप धूप में निकल रहे हों, तो इस दौरान खास ध्यान रखें कि हल्के और पूरी स्किन को कवर करने वाले कपड़े पहनें। वहीं सिर को धूप से बचाने के लिए टोपी और धूप के चश्मे का इस्तेमाल करें।सनस्क्रीन लगाएंधूप में निकलने पर कम से कम एसपीएफ 30 वाला सनस्क्रीन लगाएं।सनबर्न से बचावगोरी रंग की स्किन पर सनबर्न लालिमा या गुलाबी रंग में दिखाई देता है।गहरे रंग की स्किन पर जलन और खुजली के रूप में लक्षण उभर सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:42:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Hormone Balancing Foods: PCOS और Stress से हैं परेशान? ये 5 Superfoods करेंगे Hormone Balance, जानें इनके फायदे</title>
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<description><![CDATA[ महिलाओं के शरीर में अधिकतर बदलाव हार्मोनल चेंजेस की वजह से होते हैं। फिर चाहे वह मोटापा हो, फेस पर निकलने वाले दाने हों या अचानक से वेट कम होना हो। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि ज्यादातर महिलाएं अपनी सेहत का सही से ध्यान नहीं रखती हैं। घर और जिम्मेदारियों में उलझी महिलाएं न तो पूरी तरह से पोषण वाला खाना खाती हैं और न ही पर्याप्त नींद लेती हैं। ऐसे में हम आपको कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको अपनी डाइट में शामिल करने से आपके हार्मोन बैलेंस रहेंगे। फायदेमंद है ये जड़ी बूटीशतावरी एस्ट्रोजन को बैलेंस रखता है। पीरियड्स और फर्टिलिटी के साथ-साथ PCOS को भी यह सपोर्ट करता है। इसके अलावा शतावरी के सेवन से विटेलिटी और ल्यूब्रिकेशन को इंप्रूव करने में मदद मिलती है। रोजाना रात को आधा चम्मच शतावरी को एक गिलास दूध में मिलाकर पीना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Health Tips: मामूली Sunburn को न करें नजरअंदाज, बढ़ सकता है Skin Cancer का जानलेवा खतरातिल के बीजतिल के बीज का सेवन करने से ओवेल्यूशन को इंप्रूव करने, प्रोजेस्टेरोन को सपोर्ट करने और यूट्रेस को स्ट्रेंथ देने का काम करता है। रोजाना 1 चम्मच तिल को रोस्ट करके खाएं, इससे आपको फायदा मिलेगा। रोजाना इसके सेवन से फर्टिलिटी मजबूत होती है।अश्वगंधा पाउडरतनाव कम करने के लिए जरूरी है कि आप रोजाना एक गिलास गर्म पानी में आधा चम्मच अश्वगंधा पाउडर मिलाकर पीना चाहिए। यह कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन को कम करने, थायराइड और PCOS को ठीक करने और स्लीप क्वालिटी सही करने में मदद करता है। जब आपका तनाव कम होगा तो आप मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहेंगे।खजूरअगर आपको समय पर पीरियड्स नहीं आते हैं और आपको हमेशा थकान महसूस होती रहती है। तो आपको खजूर का सेवन करना चाहिए। रोजाना 2 से 3 भीगे हुए खजूर खाती हैं, तो यह आपके मेंसुरल साइकिल को इंप्रूव करने में सहायता करता है। इससे शारीरिक कमजोरी दूर होती है और फर्टिलिटी को सपोर्ट मिलता है।मोरिंगा पाउडरसेहत के लिए मोरिंगा फायदेमंद माना जाता है। यह इंसुलिन को बैलेंस रखता है और PCOS को भी ठीक रखने में मदद करता है। साथ ही यह मेटाबॉलिज्म को इंप्रूव करता है। इसको रोजाना एक समय पर आधा चम्मच खाएं। आपके यह कुछ हेल्दी आदतें हार्मोन को हेल्दी बनाने में मदद करेंगी।इन बातों का रखें ध्यानमहिलाओं द्वारा की जाने वाली गलतियां ही हार्मोन इंबैलेंस की वजह बनती हैं।हार्मोन को हेल्दी बनाने के लिए महिलाएं आयुर्वेद का सहारा ले सकती हैं।इसके लिए आप खजूर, अश्वगंधा, मेथी के बीज और शतावरी जैसी पौष्टिक जड़ी-बूटियों का सेवन कर सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:42:05 +0530</pubDate>
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<title>WFH Side Effect: गोद में Laptop रखकर काम करना खतरनाक, Experts ने बताए गंभीर Side Effects</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में वर्क फ्रॉम होम या घंटों स्क्रीन पर काम करने के दौरान गोद में घंटों तक लैपटॉप को रखकर काम करने की आदत बन गई है। हालांकि भले ही यह तरीका आरामदायक लगता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपकी सेहत के लिए कितना नुकसानदेह होता है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक यह तरीका सीधे तौर पर आपके लिए घातक साबित हो सकता है। वहीं काम करने का यह तरीका सेहत संबंधी कई समस्याओं का बुलावा है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि गोद में लैपटॉप रखकर काम करना क्या-क्या निगेटिव असर डाल सकता है।टोस्टेड स्किन सिंड्रोमबता दें कि लैपटॉप से निकलने वाली तेज गर्मी सबसे बड़ी चिंता का विषय है। जब आप लैपटॉप को घंटों तक अपने पैरों या गोद में रखते हैं, तो यह आपकी स्किन पर बुरा असर डाल सकता है। जिसकी वजह से स्किन पर लालपन या जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं कुछ मामलों में &#039;टोस्टेड स्किन सिंड्रोम&#039; भी देखा जाता है। इसमें लगातार गर्मी की वजह से स्किन पर जालीनुमा दाग पड़ जाते हैं।इसे भी पढ़ें: PCOS Weight Loss: PCOS में Weight Loss बना चैलेंज? Diet और Lifestyle में करें ये 4 बदलाव, तुरंत दिखेगा असरमांसपेशियों में दर्द होनागोद में लैपटॉप रखकर काम करने से बैठने का तरीका बिगड़ जाता है। स्क्रीन को देखने के लिए लोगों को अपनी गर्दन अक्सर नीचे की ओर झुकानी पड़ती है। लंबे समय तक इस पोजिशन में रहने से कंधों, गर्दन और पीठ में दर्द की शिकायत बढ़ जाती है। वहीं मांसपेशियों में भी तनाव पैदा होता है और आगे चलकर रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या हो सकती है।रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर असरलैपटॉप की गर्मी की वजह से कई बार पुरुषों की रिप्रोडक्टिव हेल्थ को लेकर भी चर्चाएं सामने आई हैं। कुछ शोध इशारा करते हैं कि लंबे समय तक तेज गर्मी के संपर्क में रहने से शुक्राणुओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। हालांकि एक्सपर्ट का मानना है कि इस मामले में सावधानी बरतना ही बेहतर होता है।हाथ और कलाई में खिंचाव होनाजब आप गोद में लैपटॉप को रखकर काम करते हैं, तो हाथों और कलाई की पोजिशन असहज होती है। इस गलत एंगल में लगातार काम करने की वजह से कलाई में तेज दर्द या तनाव की समस्या हो सकती है। जानिए बचाव के आसान तरीकेएक्सपर्ट के मुताबिक अगर आपको लंबे समय तक काम करना है। तो मेज और कुर्सी का इस्तेमाल करना सबसे आरामदायक और सेफ ऑप्शन है। इसके अलावा आप इन बातों का ध्यान रख सकते हैं।सीधे लैपटॉप को अपनी गोद में रखने की बजाय डेस्क, लैपटॉप स्टैंड या कुशन ट्रे का इस्तेमाल करें। इससे आपकी शरीर तक सीधे गर्मी नहीं पहुंचेगी और आपका पोश्चर भी सही रहेगा।लगातार स्क्रीन के सामने न बैठे रहें। बल्कि हर 30-40 मिनट में एक छोटा सा ब्रेक लें।काम के दौरान बीच-बीच में अपने बैठने की पोजिशन को चेंज करते रहें। इससे शरीर और मांसपेशियों को आराम मिलेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:42:04 +0530</pubDate>
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<title>PCOS Diet Plan: PCOS को कंट्रोल करेगा ये Superfood, महिलाएं अपनी Diet में आज से ही शामिल करें ये 5 चीजें</title>
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<description><![CDATA[ पीसीओएस यानी कि पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम एक कॉमन लाइफस्टाइल कंडीशन है। जिससे लाखों महिलाएं हर रोज निपटती हैं। पीसीओएस के लक्षणों में पीरियड्स क्रैंप्स, अनियमित पीरियड्स, वेट बढ़ना, फेस पर बालों का बढ़ना और मिजाज में बदलाव आदि शामिल है। लेकिन PCOS को सही डाइट से मैनेज किया जा सकता है। इसके बढ़ते लक्षणों को रोकने के लिए अपनी डाइट में कुछ बदलाव करना जरूरी है। बता दें कि पीसीओएस सबसे आम एंडोक्रिनोपैथी है। जोकि 15% से 18% महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है। लेकिन डाइट और लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके इस बीमारी को काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे क्विक और आसान डाइट टिप्स को फॉलो करके आप पीसीओएस को कंट्रोल कर सकती हैं।इसे भी पढ़ें: Hormone Balancing Foods: PCOS और Stress से हैं परेशान? ये 5 Superfoods करेंगे Hormone Balance, जानें इनके फायदेडाइट टिप्सफल और सब्जियांवेट लॉस और PCOS को मैनेज करने के लिए फल और सब्जियों का सेवन जरूरी है। हर दिन कम से कम पांच हिस्से सब्जियां या फल खाना जरूरी है। यह आपके शरीर को जरूरी फाइबर देता है। वहीं कम से कम 35-40 ग्राम हाई फाइबर डाइट जरूर लें।प्रोटीनपीसीओएस डाइट के लिए प्रोटीन भी एक बेहतरीन ऑप्शन है। आपकी डाइट में प्रोटीन जितना ज्यादा होगा, आपकी इंसुलिन सेंसिटिविटी और तृप्ति उतनी ज्यादा बेहतर होगी।हेल्दी फैटअपनी डाइट में वसा की मात्रा को सीमित करने की कोशिश करें। हेल्दी फैट के रूप में दैनिक कैलोरी का 30% से ज्यादा नहीं खाना चाहिए। सेचुरेटेड फैट को और  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:42:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Blood Sugar रहेगा कंट्रोल! Diabetes के मरीज Diet में शामिल करें ये 5 &amp;apos;देसी Superfoods&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ डायबिटीज लाइफस्टाइल संबंधित बीमारी है। खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण डायिबटीज की बीमारी का शिकार हो जाते हैं। इसलिए प्रीडायबिटीज और डायबिटीज में खानपान का विशेष ख्याल रखा जाता है। गौरतलब है कि ब्लड शुगर लेवल बढ़ने का असर हमारे पूरे शरीर पर होता है। यदि आपको लंबे समय से शुगर बढ़ा हुआ है, तो इसकी वजह से किडनी, हार्ट और ब्रेन सहित शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में डायबिटीज रोगियों के लिए हेल्दी डाइट बहुत जरुरी है। यदि आप एक डायबिटीज पेशेंट हैं, तो डॉक्टर द्वारा बताई हुई दवाइयों को सही तरह और सही समय से लेने के साथ ही डाइट में हेल्दी चीजों को जरुर शामिल करें।वैसे डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए हमारी किचन में ऐसी कई चीजें हैं, जिनका सेवन करने से आपको काफी आराम मिलेगा। गौरतलब है कि इन देसी चीजों में मौजूद गुणों की वजह से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल होता है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं किन चीजों का सेवन करना चाहिए।मेथी दानाडायबिटीज मरीजों के लिए मेथी दाना बेहद फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें घुलनशील फाइबर होते हैं, जो कि डाइजेशन को बेहतर बनाते हैं और भोजन से शुगर का अब्जॉर्बशन कम करता है। इसके सेवन के बाद ब्लड शुगर स्पाइक नहीं होता है। वहीं, प्री-डायबिटीज वाले लोग यदि नियमित तौर पर मेथी का सेवन करें, तो इससे प्री-डायबिटीज के डायबिटीज में बदलने का खतरा कम हो जाएगा। वैसे यह इंसुलिन के काम करने की क्षमता को सुधारता है, इंसुलिन रेजिस्टेंस और कोलेस्ट्रोल को कम करता है। रोजाना आप 1 चम्मच मेथी दाना को रात भर पानी में भिगोएं और इसे खाली पेट लें। आंवलाआंवला एक ऐसा सुपरफूड है, जो शरीर के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। इससे पैनक्रियाज भी बेहतर काम करता है और इंसुलिन का सीक्रेशन बेहतर होता है।  आंवला में विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट की पर्याप्त मात्रा होती है। इसको आप रोजाना 1 आंवला खा सकती हैं।दालचीनीशुगर में दालचीनी का सेवन करना काफी फायदेमंद माना जाता है। इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी में काफी सुधार होता है, जिससे ग्लूकोज को बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। दालचीनी के सेवन से ब्लड शुगर लेवल स्पाइक नहीं होता है। यह डायबिटीज से होने वाले इंफ्लेमेशन को भी शांत करती है। इसके लिए आप एक छोटा टुकड़ा दालचीनी को गुनगुने पानी में खाने के बाद लें सकते हैं। करी पत्ता डायबिटीज में करी पत्ता का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। इसमें ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारता है। यह डाइजेशन को भी बेहतर बनाता है। करी पत्ता के सेवन से क्रेविंग्स को कम करता है और शुगर स्पाइक नहीं होता। इसको आप रोजाना खाली पेट 8-10 करी पत्ते चबा सकते हैं। जामुन की गुठली पाउडरडायबिटीज के लिए जामुन की गुठली का पाउडर रामबाण आयुर्वेदिक औषधि मानी जाती है। इसमें जंबोलिन और जंबोसिन होते हैं, जो शरीर में स्टार्च को शुगर में बदलने से रोकते हैं। इससे हमारी सेल्स ग्लूकोज का इस्तेमाल बेहतर तरीके से कर सकती हैं। आप जामुन की गुठली के आधा चम्मच पाउडर गुनगुने पानी के साथ जरुर लें।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:42:03 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: Stress और डिप्रेशन की होगी छुट्टी? Mental Health के लिए Super Supplement है Creatine, जानें पूरी सच्चाई</title>
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<description><![CDATA[ क्रिएटिन की सहायता से हमारे शरीर को फौरन एनर्जी मिलती है। इसलिए खेल या फिर ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी करने वाले लोग अलग से क्रिएटिन सप्लीमेंट का सेवन करते हैं। यह फिजिक हेल्थ के साथ-साथ मेंटल हेल्थ के लिए भी लाभकारी माना जाता है। जो भी लोग फिटनेस की फील्ड में एक्टिव हैं, वह क्रिएटिन को मसल बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। इसके सेवन से थकान कम होती है, शरीर को एनर्जी मिलती है और स्ट्रेस घटता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि मेंटल हेल्‍थ के ल‍िए क्र‍िएट‍िन के क्या फायदे होते हैं।क्या है क्रिएटिनबता दें कि क्रिएटिन एक तरह का यौगिक कंपाउंड होता है। जो शरीर में अमीनो एसिड की मदद से बनता है। यह नेचुरल रूप से किडनी, लिवर और पैंक्र‍ियाज में बनता है। कुछ खाद्य पदार्थों में भी क्रिएिन पाया जाता है। क्रिएटिन की सहायता से मसल रिकवरी होती है। इससे मसल लॉस को कम करने और स्टैमिना को बढ़ाने में मदद मिलती है।इसे भी पढ़ें: Doctor की सलाह: गर्मी में रोज पिएं छाछ, पेट की इन 5 गंभीर समस्याओं से मिलेगी राहतक्रिएटिन के मेंटल हेल्थ के लिए फायदेइससे शरीर को ऊर्जा मिलती है। इस ऊर्जा का इस्तेमाल शरीर थकान और स्ट्रेस को कम करने के लिए करता है।यह ब्रेन फंक्शन और याददाश्त को भी सपोर्ट करने में सहायता करता है।क्रिएटिन की मदद से एकाग्रता और फोकस बढ़ाने में सहायता मिलती है।यह डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने के साथ मूड को बेहतर बनाने में भी मदद करता है।क्र‍िएट‍िन की कमीमांस-मछली को क्रिएटिन का अच्छा स्त्रोत माना जाता है। इसलिए शाकाहारी लोगों में इसकी कमी हो सकती है। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि हर शाकाहारी व्यक्ति में क्रिएटिन की कमी हो। बीमार और बुजुर्ग लोगों में भी इसकी कमी हो सकती है।जानें ज्‍यादा क्र‍िएट‍िन लेने के नुकसानडिहाइड्रेशन की समस्या होनामतली या फिर पेट दर्द की समस्यापेट में गैस होनापेट फूलनावहीं अगर किसी व्यक्ति को किडनी की बीमारी है, तो आपको बिना डॉक्टर की सलाह के क्रिएटिन का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिलाओं और ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं को भी बिना डॉक्टर की सलाह या जांच के बगैर इसका सेवन नहीं करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:42:02 +0530</pubDate>
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<title>Menstrual Health Tips: पीरियड्स में भूलकर भी न खाएं ये चीजें, बढ़ सकती है Bloating की दिक्कत</title>
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<description><![CDATA[ पीरियड्स के समय महिलाओं के शरीर में तेजी से हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसका सीधा असर महिलाओं की एनर्जी, मूड और पाचन तंत्र पर प़ड़ता है। कई महिलाओं को इस दौरान ऐंठन, पेट दर्द, चिड़चिड़ापन और थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस दौरान खानपान का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। अक्सर महिलाओं को यह समझ नहीं आता है कि इन दिनों में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए। क्योंकि गलत खानपान न सिर्फ दर्द और असहजता बल्कि शरीर में सूजन और कमजोरी भी पैदा कर सकता है।एक्सपर्ट के मुताबिक इस दौरान हल्का, संतुलित और पौष्टिक आहार लेना सबसे सही होता है। वहीं पीरियड्स के दौरान कुछ खाद्य पदार्थों को सीमित या पूरी तरह से टालना सही रहता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि पीरियड्स के दौरान किन चीजों से दूरी बनाना फायदेमंद हो सकता है।इसे भी पढ़ें: Doctor की सलाह: गर्मी में रोज पिएं छाछ, पेट की इन 5 गंभीर समस्याओं से मिलेगी राहत अधिक नमक का सेवनपीरियड्स में ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करने से शरीर में पानी जमा होने लगता है।जिसकी वजह से शरीर में भारीपन, पेट फूलना या सूजन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।नमकीन, चिप्स, पैकेज्ड फूड और प्रोसेस्ड स्नैक्स में नमक की ज्यादा मात्रा पाई जाती है। इसलिए सीमित मात्रा में इनता सेवन करना चाहिए।पीरियड्स के दौरान हल्का और आरामदायक महसूस करने के लिए कम नमक वाला संतुलित खाना बेहतर ऑप्शन हो सकता है।कैफीन युक्त पेय पदार्थपीरियड्स के दौरान कॉफी, चाय, कोल्ड कॉफी और एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें कैफीन ज्यादा होता है। इसलिए यह पीरियड्स के समय असहजता बढ़ा सकता है।ज्यादा कैफीन का सेवन करने से शरीर में चिड़चिड़ापन, बेचैनी और नींद से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।वहीं कुछ महिलाओं को इस दौरान पेट की ऐंठन और सिरदर्द बढ़ सकता है।पीरियड्स में कैफीन का सेवन कम करने और इसकी जगह नारियल पानी, पानी या फिर हर्बल ड्रिंक लेना चाहिए।तला-भुना और जंक फूडफास्ट फूड, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, बर्गर और अन्य तली-भुनी चीजों में अनहेल्दी फैट ज्यादा मात्रा में होती है।यह आपके पाचन तंत्र पर ज्यादा दबाव डाल सकते हैं और इससे अपच, पेट में भारीपन और गैस आदि की समस्या हो सकती है।पीरियड्स में पहले ही शरीर कई हार्मोनल बदलावों से गुजर रहा होता है। ऐसे में जंक फूड का ज्यादा सेवन असहजता और पेट दर्द को बढ़ा सकता है।शुगर क्रेविंगपीरियड्स में मीठा खाने की इच्छा अधिक होना सामान्य बात है। लेकिन ज्यादा चीनी का सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक होता है।ज्यादा मीठा खाने से बीपी लेवल तेजी से बढ़ता और घटता है। जिस कारण थकान, मूड स्विंग्स और कमजोरी महसूस हो सकती है।ज्यादा चीनी शरीर में सूजन बढ़ा सकती है।इस दौरान अगर आपकी मीठा खाने का मन हो तो आप खजूर, फल या सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट आदि खा सकती हैं।कार्बोनेटेड ड्रिंक्ससॉफ्ट ड्रिंक्स और अन्य कार्बोनेटेड पेय पदार्थों में एक्स्ट्रा चीनी और गैस की मात्रा ज्यादा होती है।पीरियड्स के दौरान इसके सेवन से गैस बनना, पेट फूलना और असहजता बढ़ती है।कई बार यह ड्रिंक्स शरीर को पर्याप्त हाइड्रेटेड नहीं कर पाते हैं।पीरियड्स में कोल्ड ड्रिंक्स की जह नींबू पानी, सादा पानी, ताजे फलों का जूस या नारियल पानी आदि पीना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:42:02 +0530</pubDate>
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<title>खराब Lifestyle ने बिगाड़ा Digestion? ये 2 योगासन हैं रामबाण, 10 मिनट में पाएं Good Health</title>
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<description><![CDATA[ भागदौड़ भरी जिंदगी में आजकल लोगों के पास अपने हेल्थ के लिए भी समय नहीं है। अनहेल्दी लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण कई समस्याओं से जूझना पड़ता है। ऐसे पेट संबंधित कई समस्याएं देखने को मिलती है। अक्सर लोग गैस, एसिडिटी और कब्ज से परेशान रहते हैं। पेट की समस्या का असर पूरे बॉडी पर पड़ता है। इसलिए सेहतमंद रहने के लिए पेट खुलकर साफ होना भी काफी जरुरी है। कई लोगों के  हमेशा पेट में भारीपन महसूस होता है या गैस और बदहजमी बनी रहती है, उन्हें इसे नजरअंदाज नहीं करें। ऐसे में इस समस्या को दूर करने के लिए सही डाइट और योग मदद कर सकता है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं ऐसे दो योगासनों के बारे में, जो आपकी सभी परेशनियों से छुटकारा दिला सकते हैं।पवनमुक्तासन (विंड रिलीविंग पोज) - इस आसन के करने से गैस, पेट फूलने और पाचन संबंधित बाकी दिक्कतों को दूर करती है। - जब पवनमुक्तासन करते हैं,तो पेट पर दबाव पड़ता है और पेट में फंसी गैस बाहर निकल सकती है। - यह बाउल मूवमेंट को बेहतर करती हैं। - इससे ब्लोटिंग भी दूर होती है। - इसको करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं। - दोनों पैरों को सीधा रखें और हाथ बॉडी से सटाकर रखें। - इसके बाद सांस छोड़ते हुए घुटनों को मोड़े। - घुटनों को मोड़कर छाती के पास लाएं। - फिर पेट पर दबाव डालते हुए पैरों को छाती से सटाने की कोशिश करें। - सिर और गर्दन को हल्का उठाकर ठोड़ी को घुटने की तरफ ले जाएं। - इस योग को करते समय सांस रोकें नहीं और जोर लगाकर घुटनों को पेट पर न दबाएं।बद्ध कोणासन (तितली आसन)  - यह योग पोज करना बेहद आसान है और यह पाचन संबंधित कई दिक्कतों में रामबाण है।  - इसको करने के लिए सबसे पहले सुखासन में बैठ जाएं। - अब आपको पैरों को अंदर की तरफ मोड़ते हुए तलवों को एक-दूसरे से टच करवाता है। - इस बात का ध्यान रखें कि तलवे एक-दूसरे से सटे हुए रहने चाहिए। - पैरों को इसे मोड़े कि पैर आपके वजाइनल एरिया के पास रहें। - एड़ियों को बिल्कुल सीधा रखें। - इसके बाद पैरों के तलवों को एक-दूसरे से मिला लीजिए और कमर को एकदम सीधा रखें। - घुटनों को ऊपर-नीचे की तरफ रखें। - सांस छोड़ते समय घुटनों को ऊपर ले जाएं। - फिर सांस खीचते हुए घुटनों को नीचे लाएं। - इसे आप 10-15 बार रिपीट करते रहे हैं। - इस आसन के करने से सभी पेट संबंधी समस्याएं दूर हो जाएगी। - पेट में फंसी हुई गैस बाहर निकल जाएगी और कब्ज दूर हो जाएगी। - यह पेल्विक एरिया में ब्लड फ्लो को बढ़ाता है, जिससे पाचन दुरुस्त बना रहता है। - यह इनडाइजेशन और पेट की ऐंठन को कम कर सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:42:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Salad For Weight Loss: Weight Loss का अचूक फॉर्मूला, Diet में शामिल करें ये 2 Salad, तेजी से घटेगा Belly Fat</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में मोटापा एक गंभीर समस्या है। वेट कम करना कोई एक दिन का काम नहीं है। वजन कम करने के लिए कड़ी मेहनत करने की जरूरत पड़ती है, क्योंकि डाइटिंग से लेकर एक्सरसाइज तक यह इतना भी आसान नहीं होता है, जितना कि लगता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि आपको वेट कम करने के लिए खाना-पीना छोड़ने की जरूरत है।  ऐसा करने से आप कमजोरी और बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में अगर आप भी खा-पीकर वेट कम करना चाहते हैं, तो आप इन टेस्टी सलाद रेसिपी को डाइट में शामिल कर सकते हैं। ऐसे में आप वेट लॉस के लिए इन टेस्टी सलाद रेसिपी को डाइट में शामिल कर सकते हैं।इसे भी पढ़ें: खराब Lifestyle ने बिगाड़ा Digestion? ये 2 योगासन हैं रामबाण, 10 मिनट में पाएं Good Healthमोटापा कम करने के लिए सलादसफेद चने का सलाद सामग्रीपके हुए छोले कटा हुआ टमाटरकटा हुआ प्याजनींबू का रसनमक और काली मिर्चऐसे बनाएंइन सभी चीजों को एक साथ किसी बड़े बर्तन में मिला लें और फिर सर्व करें। बता दें कि चना सलाद न सिर्फ स्वाद बल्कि सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है।फायदेचने में कैल्शियम का अच्छा स्त्रोत पाया जाता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाता है और इससे पेट भी लंबे समय तक भरा रहता है। जिससे आप ओवरईटिंग करने से बच जाते हैं। यह सलाद आंतों की सेहत में सुधार करता है और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।चुकंदर का सलाद सामग्रीकद्दूकस किया हुआ चुकंदरकटा हुआ प्याज लो फैट दही नमक  स्वादानुसारकाली मिर्चऐसे बनाएंचुकंदर का सलाद बनाना काफी आसान है और इन सभी चीजों को एक बड़े बर्तन में डालकर एक साथ मिलाएं और फिर सर्व करें।फायदेलाल-लाल चुकंदर सेहत के लिए काफी अच्छा माना जाता है। चुकंदर एक कम कैलोरी वाली सब्जी है, जो बीपी को कंट्रोल रखने में मदद करती है। चुकंदर से बने सलाद का सेवन कर आप अपनी वेट लॉस जर्नी को आसान बना सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:42:00 +0530</pubDate>
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<title>Afternoon Nap के बाद होता है Headache? ये 5 गलतियां बन सकती हैं बड़ी वजह, जानें सही तरीका</title>
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<description><![CDATA[ दोपहर का भोजन करने के बाद कई लोगों को थोड़ी देर आराम या नींद लेना अच्छा लगता है। लेकिन कई बार दोपहर में सोने के बाद उठते ही सिर दर्द की समस्या होने लगती है। ऐसा क्यों होता है और दिन में कितनी देर सोना सेहत के लिए सही माना जाता है, आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।असल में लोग इस सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके पीछे कई हेल्थ संबंधी कारण हो सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट जरुरत से ज्यादा देर तक सोना, गलत समय पर झपकी लेना या शरीर के नेचुरल स्लीप साइकल में बाधा आना सिर दर्द के कारण हो सकता है। कई बार डिहाइड्रेशन, ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव और नींद की गुणवत्ता भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आइए आपको बताते हैं दोपहर में सोने का सही समय क्या है और किन बातों का ध्यान रखकर आप सिर दर्द जैसी समस्या से बचें।ज्यादा देर सोना - यदि आप 30 मिनट से ज्यादा सो जाते हैं, तो शरीर गहरी नींद में चला जाता है। - जब आप अचानक जागते हैं, तो यह स्लीप इनर्शिया की स्थिति है, जिससे सिर भारी लगना, चक्कर आना और सिर दर्द हो सकता है।डिहाइड्रेशन - जब हमारे शरीर में पानी की कमी होती है, तो नींद की झपकी बार-बार आने लगती हैं।  - असल में गर्मी और उमस वाले मौसम में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है।ब्लड शुगर में बदलाव - भोजन करने के बाद तुरंत सोने से ब्लड शुगर लेवल में काफी उतार-चढ़ाव हो सकता है। - यह स्थिति कुछ लोगों में सिर दर्द और थकान का कारण भी बन सकता है। नींद का गलत समय - अक्सर शाम को या दोपहर में सोने से शरीर की जैविक घड़ी प्रभावित हो सकती है। - कई बार इस कारण से नींद खराब हो जाती है और सिर दर्द की समस्या बढ़ सकती है।गलत सोने की पोजिशन - गर्दन या सिर को गलत स्थिति में रखने से सोने से मांसपेशियों में तनाव उत्पन्न हो जाता है। - इस कारण से जागने के बाद भी सिर दर्द का कारण बन सकता है।दोपहर में सोने का सही समय क्या है?विशेषज्ञों का कहना है कि दोपहर में 10 से 20 मिनट की छोटी झपकी लेना सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है। इससे शरीर को नई ऊर्जा मिलती है और मन व दिमाग तरोताजा महसूस करते हैं। दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच सोना सबसे उपयुक्त माना जाता है। हालांकि, 30 मिनट से अधिक देर तक सोने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे उठने के बाद सुस्ती और सिरदर्द की समस्या हो सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:42:00 +0530</pubDate>
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<title>खाने के बाद चाय पीने की गलती? जानें Health पर इसके 5 बड़े Side Effects</title>
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<description><![CDATA[ वैसे आजकल लोग सेहत पर ध्यान जरुर दे रहे हैं, लेकिन हेल्दी डाइट जरुरी नहीं बल्कि खानपान का सही तरीका और सही समय पर भोजन का सेवन करना, यह काफी जरुरी है। आयुर्वेद ने भी माना है कि अगर आप विरुद्ध आहार यानी ऐसी दो चीजों का सेवन एक साथ करते हैं, जिसकी प्रकृति काफी अलग है, तो इससे आपकी सेहत खराब भी हो सकती है। इस बात का ध्यान रखें कि किस चीज को कब खाना चाहिए और कब अवॉइड करना चाहिए, इसका भी खास ख्याल रखना जरुरी है। गौरतलब है कि हम सभी चाय को रोजाना पीते हैं। जब आप खाली पेट या रात को सोने से पहले चाय पीते हैं, तो आपकी सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।इस बात का खास ध्यान दें कि खाना खाने के तुरंत बाद चाय नहीं पीना चाहिए वरना आपकी सेहत बिगड़ सकती है, जाने इसके पीछे का मुख्य कारण।खाना खाने के तुरंत बाद क्यों नहीं पीनी चाहिए चाय?- हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, खाना खाने के बाद तुरंत चाय नहीं पीना चाहिए। क्योंकि इससे डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए खाना पचाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में गैस, एसिडिटी और अपच हो सकती है। - असल में चाय में टैनिन की मात्रा अधिक होती है, इसलिए खाने के साथ चाय या खाना खाने के बाद चाय नहीं पीना चाहिए। क्योंकि इससे शरीर में आयरन का अब्जॉर्बशन काफी धीमा हो सकता है। खासकर टैनिन, आयरन से बंधकर उसे शरीर में अब्जॉर्ब नहीं होने देता। जिससे आगे चलकर एनीमिया यानी खून की कमी हो सकती है।  - चाय का नेचर एसिडिक होता है। अगर आप खाना के बाद चाय पीते हैं, तो इससे पेट में गैस और एसिडिटी की परेशानी नहीं होती है।  - इतना ही नहीं, जब आप खाना खाने के बाद चाय पीते हैं, तो इसमें कैफीन मात्रा अधिक होती है। जिससे बीपी बढ़ जाता है और आपकी सेहत को नुकसान पहुंचाता है। - अगर आप डिनर करने के बाद चाय पीतें हैं, तो आप इसके कारण से नींद आने में मुश्किल हो जाता है। चाय पीने का सही तरीका - खाना खाने के लगभग 1 घंटे बाद चाय जरुर पीना चाहिए। - जब आप खाना खाएं, तो चाय बिल्कुल भी नबीं पिएं। - वहीं, शाम को भूलकर भी चाय न पिएं वरना आपको रात को नींद नहीं आएगी। - कभी-भी चाय को खाली पेट न पिएं। - दिनभर बार-बार चाय न पिएं।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:41:59 +0530</pubDate>
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<title>Pregnancy Health: क्यों गर्भवती महिलाओं के लिए &amp;apos;वरदान&amp;apos; है Kegel Exercise? Experts से जानें</title>
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<description><![CDATA[ मां बनने का एहसास बेहद खास होता है। हर एक महिला का सपना होता है मां बनने का और यह पल काफी खूबसूरत होते हैं। वैसे यह समय किसी भी महिला के लिए आसान नहीं होता है। गौरतलब है कि प्रेग्नेंसी के दौरान काफी बदलाव होते हैं। जब बच्चे का वजन बढ़ता है, तो हमारी बॉडी के कई पार्ट्स पर दबाव देखने को मिलता है। खासकर पेल्विक फ्लोर की मसल्स पर। इसी कारण से कई बार डॉक्टर भी प्रेग्नेंसी में भी केगल एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं। लेकिन कई लोगों को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं होती है। प्रेग्नेंसी के समय इस एक्सरसाइज करने से काफी फायदा मिलता है। जैसा कि ऊपर बताया है कि पेल्विक फ्लोर मजबूत बनाती है। आइए आपको इसके फायदे बताते हैं।क्या है केगल एक्सरसाइज?सबसे जरुरी यही है कि केगल एक्सरसाइज क्या होती है? असल में यह एक ऐसी एक्सरसाइज है, जिसमें पेल्विक फ्लोर की मसल्स को स्क्वीज करने का अभ्यास किया जाता है। ये वहीं मांसपेशियां होती हैं जो यूट्रस, Urinary Bladder और आंतों को सपोर्ट करती है। गर्भावस्था के दौरान इन सभी पर काफी दबाव देखने को मिलता है, इसलिए डॉक्टर इन्हें मजबूत बनाए रखने के लिए इस एक्सरसाइज को करने की सलाह देते हैं।क्या फायदा मिलेगा?दरअसल, प्रेग्नेंसी के समय अक्सर महिलाओं को हंसते, छींकते या खांसते समय थोड़ी-सी यूरिन निकल जाती है। इसको यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस भी कहा जाता है। गौरतलब है कि कीगल एक्सरसाइज पेल्विक फ्लोर को मजबूत बनाकर इस समस्या को कम कर देता है। अगर आप इस एक्सरसाइज को करते हैं, तो आपकी समस्या कम हो जाएगी।नॉर्मल डिलीवरी के लिए फायदेमंद हैअसल में पेल्विक मसल्स मजबूत हो जाएगी तो डिलीवरी के समय शरीर पूरा साथ देता है। इसी कारण से कई डॉक्टर प्रेग्नेंसी के दौरान एक्सरसाइज करने की सलाह भी देते हैं। लेकिन यह जरुरी नहीं है कि इससे नॉर्मल डिलीवरी की गारंटी मिल जाए।डिलीवरी के बाद रिकवरी हो सकती तेजवैसे डिलीवरी के बाद शरीर को नॉर्मल होने में काफी समय लगता है। एक्सरसाइज करने वाली महिलाओं में पेल्विक मसल्स की रिकवरी तेज हो जाती है। किन बातों का रखें ध्यानडॉक्टर भी मानते हैं कि केगल एक्सरसाइज प्रेग्रेंसी में काफी फायदेमंद होती है।  हालांकि इसको सही तरह से करना भी काफी जरुरी है। इसे हमेशा डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह के बाद ही करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:41:58 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: Thyroid के ये साइलेंट लक्षण हैं बड़े खतरे का Signal, भूलकर भी न करें Ignore</title>
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<description><![CDATA[ आजकल की बदलती लाइफस्टाइल, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के बीच थायराइड की बीमारी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। पहले इसको बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था। लेकिन अब युवा और किशोर भी इस बीमारी से प्रभावित हो रहे हैं। वहीं महिलाओं के अलावा युवा वर्ग की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। लेकिन अगर समय रहते इसकी जांच या इलाज न कराया जाए, तो यह बीमारी शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है। थायराइड गले के सामने मौजूद एक छोटी ग्रंथि होती है, जोकि शरीर में हार्मोन बनाने का काम करती है।यह हार्मोन शरीर के वजन, ऊर्जा, पाचन, हृदय गति और मानसिक स्थिति को कंट्रोल करते हैं। लेकिन जब यह ग्रंथि जरूरत से कम या ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है। तो शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती है। हार्मोन कम बनने की स्थिति को हाइपोथाइराइड और ज्यादा बनने को हाइपरथाइराइड कहा जाता है। यह दोनों की स्थितियां सेहत के लिए नुकसानदेह होती हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: खरबूजे के बीज हैं अमृत समान, महिलाओं की Health के लिए हैं ये 5 चमत्कारी फायदेथायराइड के साइलेंट लक्षणअचानक वजन बढ़ना या घटनाहाथ कांपनालगातार थकान रहनाचिड़चिड़ापननींद कम आनाबाल झड़नागले में सूजनदिल की धड़कन तेज होनाइसके अलावा महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी गड़बड़ी और गर्भधारण करने में परेशानी भी थायराइड की वजह हो सकती है। वहीं बच्चों और युवाओं में यह बीमारी, मानसिक एकाग्रता, पढ़ाई और शारीरिक विकास में बाधा डाल सकती है।लापरवाही पड़ सकती है भारीएक्सपर्ट की मानें, तो शुरूआत में कई लोग इसको सामान्य कमजोरी या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लंबे समय तक इन लक्षणों को अनदेखा करने से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मानसिक तनाव, मोटापा और कमजोरी जैसी गंभीर समस्याओं की वजह बन सकती है। वहीं नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह से इस बीमारी को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। थायराइड के मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद नहीं करना चाहिए।अपनाएं ये सावधानियांआयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करें।पौष्टिक और संतुलित डाइट लें।नियमित योग और व्यायाम करें।तनाव से दूर रहें।पर्याप्त नींद लें और अपनी दिनचर्या को नियमित करें।सेहत और वजन की समय-समय पर जांच करवाते रहें।लगातार थकान रहने या अन्य लक्षण दिखने पर फौरन डॉक्टर से संपर्क करें। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:41:58 +0530</pubDate>
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<title>Weight Loss Without Counting Calories: वेट लॉस करने के लिए कैलोरी काउंट का झंझट नहीं, आजमाएं ये तरीके</title>
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<description><![CDATA[ जब भी वजन कम करने की बात होती है तो लोग सबसे पहले कैलोरी काउंट की बात ही करते हैं, क्योंकि जब कैलोरीज कम होंगी तो वजन कम करना आसान होगा। लेकिन इस चक्कर में हर मील को गिनना या नापकर खाना काफी थका देने वाला होता है। हो सकता है कि आप भी वजन कम करना चाहते हों, लेकिन बार-बार खाना नापने की चिंता नहीं करना चाहते तो ऐसे में आपको परेशाने होने की जरूरत नहीं है।वजन कम करने के लिए हर बार कैलोरी काउंट करना जरूरी नहीं है। अगर आप सही तरीके से खाना चुनें और खाने की कुछ स्मार्ट आदतें अपनाएं, तो बिना कैलोरी गिने भी फिट रह सकते हैं। तो चलिए जानते हैं कि इसके बारे में- हर बार कैलोरी गिनना क्यों जरूरी नहीं है?अमूमन कैलोरी काउंटिंग को इसलिए अच्छा माना जाता है, क्योंकि इससे आपको यह समझने में मदद मिलती है कि आप कितना खा रहे हैं। हालांकि, इस तरीके को ताउम्र नहीं अपनाया जा सकता। यह काफी तनावभरा होता है और व्यक्ति अपनी डाइट का आनंद भी नहीं ले पाता है। इसलिए, स्मार्ट ईटिंग करने का विकल्प चुनना काफी अच्छा रहता है।   इसे भी पढ़ें: उमस वाली गर्मी में Dehydration का &#039;Silent Killer&#039; अटैक, Monsoon में इन लक्षणों को न करें Ignoreआजमाएं हाफ प्लेट रूलयह एक ऐसा तरीका है, जिसमें आप बिना मापे भी 200-400 कैलोरी कम खा सकते हैं। इसके लिए आपको इतना करना है कि बस अपनी प्लेट देखें। फिर उसमें आधी प्लेट सब्जियां या सलाद रखें। इसके बाद उसमें एक चौथाई प्रोटीन व एक चौथाई कार्बाेहाइड्रेट रखें। दरअसल, सब्जियों में पानी और फाइबर ज्यादा होता है जबकि कैलोरी कम होती है। जिसकी वजह से प्लेट और पेट दोनों भर जाते हैं, लेकिन कुल कैलोरी नहीं बढ़ती।एक ही बार में तैयार करें थालीअगर आप अपने कैलोरी काउंट में बने रहना चाहते हैं और खाना नापना नहीं चाहते तो ऐसे में एक ही बार में थाली तैयार करें। अगर आप बार-बार सर्विंग लेते हैं, तो ऐसे में आप अक्सर जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं। इसलिए, आपको जितना खाना है, प्लेट में रखें। फिर दूसरी सर्विंग लेने से पहले कुछ वक्त रूकें। आप पाएंगे कि भूख खुद ही शांत हो गई है।  प्रोटीन से करें खाना शुरूअगर आप खाने को काउंट किए बिना ही अपनी कैलोरीज में बने रहना चाहते हैं तो ऐसे में हर मील की शुरुआत प्रोटीन से करें। इसके लिए आप दाल, पनीर, दही, चना, राजमा या मूंग आदि खा सकते हैं। ऐसा इसलिए फायदेमंद है, क्योंकि प्रोटीन तृप्ति बढ़ाने वाले हार्मोन को सक्रिय करता है, जिससे आपको पेट देर तक भरा महसूस होता है। इससे आप कार्ब्स या मीठा कम खाते हैं और ऐसे में आप अपने कैलोरी काउंट में आसानी से बने रहते हैं।ना देखने वाली कैलोरी होती हैं नुकसानदायकअमूमन लोग वेट लॉस के दौरान सिर्फ अपने खाने पर ध्यान देते हैं और उसी की कैलोरीज को गिनते हैं। लेकिन फिर भी उनका वजन कम नहीं हो पाता। लेकिन कैलोरी काउंट किए बिना वजन कम करने के लिए जरूरी है कि आप ना दिखने वाली कैलोरीज को भी पहचानें। मसलन, चाय में चीनी, बिस्कुट, टेस्ट करते समय खाना या खाना बनाते समय स्नैकिंग करना आदि दिनभर में 300-500 अतिरिक्त कैलोरी जोड़ देते हैं। इन पर ध्यान देकर भी आप अपने कैलोरी काउंट में आसानी से बने रह सकते हैं।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:41:57 +0530</pubDate>
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<title>PCOS Weight Loss: PCOS में Weight Loss बना चैलेंज? Diet और Lifestyle में करें ये 4 बदलाव, तुरंत दिखेगा असर</title>
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<description><![CDATA[ पीसीओएस महिलाओं में होने वाली सबसे कॉमन समस्या है। यह एक हार्मोनल विकार है, जिसमें महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन यानी की एंड्रोजन का लेवल ज्यादा बढ़ने लगता है और प्रोजेस्ट्रॉन की कमी होने लगती है। इसके अलावा इस स्थिति में ओवरीज में सिस्ट भी बनने लगते हैं। वहीं इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ जाता है। इन बदलावों की वजह से महिलाओं को कई गंभीर समस्याओं का सामना एक साथ करना पड़ता है। जिसमें वेट बढ़ना सबसे आम है।पीसीओएस होने पर अचानक से महिलाओं का वेट बढ़ने लगता है। वहीं इस स्थिति में वजन घटाना मुश्किल लगता है। अगर आप भी इस स्थिति का सामना कर रहे हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसे टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको अपनाकर आप आराम से वेट लॉस कर सकते हैं।इसे भी पढ़ें: PCOS Diet Plan: PCOS को कंट्रोल करेगा ये Superfood, महिलाएं अपनी Diet में आज से ही शामिल करें ये 5 चीजेंडाइटवेट लॉस के लिए डाइट पर ध्यान देना सबसे जरूरी है। पीसीओएस होने पर इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ जाता है, जिस कारण बीपी कंट्रोल करना मुश्किल होता है। वहीं हाई बीपी वेट लॉस की मुख्य वजह हो सकता है। इसलिए इसको कंट्रोल करने के लिए उच्च फाइबर और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।फाइबर न सिर्फ ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है, बल्कि इसके सेवन से आपको लंबे समय तक भूख भी नहीं लगती है। जिससे आप ओवरईटिंग नहीं करते हैं। वहीं इससे आपका वेट भी संतुलित बना रहता है।वहीं फाइबर से अलग प्रोटीन से भरपूर चीजों को भी अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। प्रोटीन लेने से तृप्ति की भावना बढ़ती है और फूड क्रेविंग कम होती है। इससे भी आपका वेट नहीं बढ़ता है।एक्सरसाइजपीसीओएस से पीड़ित महिलाओं के लिए एक्सरसाइज बेहद जरूरी है। एक्सरसाइज करने से मेटाबॉलिज्म बूस्ट कर ज्यादा कैलोरी बर्न करने में सहायता करता है। इससे भी वेट लॉस में भी सहायता मिलती है। इससे खासकर कार्डियोवस्कुलर वर्कआउट हार्मोनल इंबैलेंस करने में मदद मिलती है। ऐसे में पीसीओएस वाली महिलाओं को नियमित एक्सरसाइज को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करना चाहिए।नींदवेट लॉस के लिए रोजाना कम से कम 8-9 घंटे की नींद लेना जरूरी है। जब आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं, तो भूख का संकेत देने वाला घ्रेलिन हार्मोन अपना कंट्रोल खो देता है। जब नींद पूरी नहीं होती है तो यह हार्मोन बढ़ जाता है। जिससे आपको बार-बार भूख का एहसास होने लगता है। ऐसे में आप ओवरईटिंग करते हैं और आपको वजन बढ़ने लगता है।नींद पूरी न लेने से इंसुलिन भी बाधित हो सकता है। जिससे PCOS की स्थिति गंभीर होने लगती है। इसलिए पीसीओएस में वेट कंट्रोल करने के लिए पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है।स्ट्रेसवहीं वजन कम करने के लिए तनाव पर काबू पाना भी जरूरी है। एक्सपर्ट के मुताबिक तनाव, स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल के स्त्राव को ट्रिगर करता है। वहीं बढ़े हुए कोर्टिसोल के लेवल से भूख बढ़ सकती है। वहीं आपकी मीठा खाने की लालसा भी ज्यादा हो सकती है। जिससे आप ओवरईटिंग करते हैं और आपको वेट बढ़ने लगता है। इसलिए इस स्थिति में वजन घटाने के लिए ज्यादा तनाव लेने से बचें। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:39:12 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: ग्लूटेन&#45;फ्री डाइट पर हैं तो ये आसान हैक्स आएंगे आपके बेहद काम</title>
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<description><![CDATA[ ग्लूटेन-फ्री डाइट पिछे कुछ समय से काफी पॉपुलर है। आम लोगों से लेकर सेलिब्रिटी तक, इसे फॉलो करने लगे हैं। कुछ समय पहले तक ग्लूटेन सेंसिटिविटी के लिए इस डाइट को फॉलो किया जाता था, लेकिन अब डाइजेशन और वजन कम करने के लिए भी ग्लूटेन फ्री डाइट को लोग फॉलो करते हैं। हो सकता है कि आप भी ग्लूटेन-फ्री डाइट शुरू करने की सोच रहे हैं, लेकिन इससे पहले आपको कुछ हेल्थ हैक्स के बारे में जान लेना चाहिए-ग्लूटेन-फ्री मील में प्रोटीन जरूर करें शामिल ग्लूटेन फ्री डाइट से वास्तविक फायदा तभी मिलता है, जब इसे सही तरह से फॉलो किया जाए। अक्सर लोग गेहूं हटाने के बाद सिर्फ चावल या आलू आधारित भोजन पर निर्भर हो जाते हैं। लेकिन आप हर मील में प्रोटीन शामिल करें। दाल, चना, राजमा, पनीर या दही को अपनी थाली का हिस्सा बनाएं। इससे ना केवल लंबे समय तक पेट भरा रहता है, बल्कि एनर्जी भी बनी रहती है।इसे भी पढ़ें: Salad For Weight Loss: Weight Loss का अचूक फॉर्मूला, Diet में शामिल करें ये 2 Salad, तेजी से घटेगा Belly Fatब्लोटिंग कम करने के लिए बनाएं फूड डायरी  अक्सर ग्लूटन फ्री डाइट में भी ब्लोटिंग हो सकती है, इसलिए एक डायरी बनाएं। 2-3 सप्ताह तक नोट करें कि कौन-सा भोजन खाने के बाद आपका पेट फूलता है, गैस बनती है और भारीपन महसूस होता है। इससे आपके लिए असली ट्रिगर पहचानना आसान हो जाता है।फाइबर से हो दिन की शुरुआतअक्सर डाइट से ग्लूटेन बाहर करने के बाद लोगों को कब्ज की शिकायत हो सकती है। इसलिए, अपनी डाइट में फल, चिया सीड्स, अलसी या फाइबर युक्त भोजन शामिल करें। इससे पाचन बेहतर रहता है।समझदारी से चुनें बाहर का खानाअगर आप चीट मील में रेस्टोरेंट के खाने का विकल्प चुन रहे हैं तो ऐसे में समझदारी से खाना खाएं। अक्सर रेस्टोरेंट की ग्रेवी और सॉस में अक्सर छिपा हुआ ग्लूटेन हो सकता है। ऐसे में बेहतर होगा कि जितना हो सके सादा दाल, चावल, ग्रिल्ड या तंदूरी विकल्प चुनें।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:39:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>उमस वाली गर्मी में Dehydration का &amp;apos;Silent Killer&amp;apos; अटैक, Monsoon में इन लक्षणों को न करें Ignore</title>
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<description><![CDATA[ गर्मी से राहत के लिए जुलाई का महीना खास माना जाता है। क्योंकि इस दौरान कई राज्यों में बरसात की शुरुआत हो जाती है, ऐसे में मौसम भी ठंडा हो जाता है। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि भले ही आपको गर्मी से राहत मिले जाए। हालांकि वातावरण में बढ़ी हुई नमी यानी ह्यूमिडिटी आपके कहीं ज्यादा बड़ी समस्याएं लेकर आती है। डॉक्टरों के अनुसार, तेज धूप वाली गर्मी से ज्यादा खतरा उमस भरी गर्मी में होता है। इसकी वजह यह है कि हवा में नमी अधिक होने से पसीना आसानी से सूख नहीं पाता। जबकि तेज धूप में पसीना जल्दी सूख जाता है और शरीर की गर्मी बाहर निकल जाती है। लेकिन उमस के कारण शरीर ठीक से ठंडा नहीं हो पाता। इससे शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने लगती है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं, शरीर को स्वस्थ रखने और बीमारियों से बचे रहने के लिए इस मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना काफी पसंद होता है।सिर्फ पानी नहीं, इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन भी जरूरीडिहाइड्रेशन के कारण सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी, थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, लो ब्लड प्रेशर और गंभीर मालमों में किडनी पर असर दिख लाता है।गौरतलब है कि जुलाई-अगस्त के मानसून के मौसम में वायरल संक्रमण, डायरिया और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। इन बीमारियों के दौरान भी शरीर में तेजी से पानी कमी होने लगती है, इसलिए डिहाइड्रेशन का जोखिम खतरा हो सकता है। इसलिए इन दिनों सिर्फ पानी पीना ही काफी नहीं, बल्कि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखें।मानसून के दिनों में डिहाइड्रेशन का खतरा - बरसात के दौरान हवा में नमी बढ़ने से पसीना बना रहता है, लेकिन व्यक्ति को उसका एहसास कम होता है। इसी कारण से कई लोग पानी कम पीते हैं और धीरे-धीरे शरीर में पानी की कमी होने लगती है।  - उमस, संक्रमण, डायरिया और उल्टी जैसी समस्याएं भी इस मौसम में अधिक होती हैं, जो शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी बढ़ाती हैकैसे पता करें कि कहीं आप भी तो नहीं हो गए डिहाइड्रेशन का शिकार? - यदि आपका बार-बार मुंह सूख रहा है, गहरे रंग का पेशाब हो रहा है या फिर पेशाब कम हो रहा है तो शरीर में पानी कमी का संकेत हो सकता है। - अगर आपको बार-बार सिरदर्द, थकान, चक्कर आना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होना भी इसका संकेत हो सकता है। - दरअसल, शरीर में पानी की कमी बढ़ जाए तो दिल की धड़कन तेज हो सकती है, लो ब्लड प्रेशर और बेहोशी तक स्थिति बन जाती है।कैसे दूर करें ये समस्या?शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ पानी पीना ही काफी नहीं होता। शरीर को सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और क्लोराइड जैसे जरूरी मिनरल्स (इलेक्ट्रोलाइट्स) भी चाहिए। ज्यादा पसीना आने, उल्टी या दस्त होने पर ये मिनरल्स भी शरीर से बाहर निकल जाते हैं। ऐसे में सिर्फ पानी पीने से कमी पूरी नहीं होती। इस कमी को पूरा करने के लिए नारियल पानी, ओआरएस, छाछ, नींबू पानी और ताजे फलों का सेवन करना फायदेमंद होता है। इससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और मांसपेशियां व नसें सही तरीके से काम करती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:39:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Doctor की सलाह: गर्मी में रोज पिएं छाछ, पेट की इन 5 गंभीर समस्याओं से मिलेगी राहत</title>
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<description><![CDATA[ समर सीजन में कुछ हल्का खाने का और ठंडी-ठंडी कोल्ड ड्रिंक मिल जाए, तो मजा आ जाता है। असल में छाछ सिर्फ एक ट्रेडिशनल ड्रिंक नहीं बल्कि एक सुपरड्रिंक है, जो गर्मियों के मौसम में सबसे ज्यादा सेवन की जाती है और यह शरीर को स्वस्थ रखती है। इस समय लोग छाछ को पीना पसंद करते हैं, जो गर्मियों में एक बेहतरीन नेचुरल ड्रिंक मानी जाती है। छाछ को रोजाना ड्रिंक करने से आपके पेट से लेकर लिवर तक सपोर्ट प्रदान होता है। आइए आपको छाछ पीने के फायदे के बारे में बताते हैं।छाछ के फायदेजब गर्मियों में तापमान बढ़ता है और हीटस्ट्रोक के कारण डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं काफी देखने को मिलती है। इस दौरान ब्लोटिंग, एसिडिटी, पाचन गड़बड़ होना और थकान जैसी तकलीफें लेकर भी लोग अस्पताल तक पहुंच जाते हैं। आइए आपको छाछ पीने के फायदे बताते हैं- गट हेल्थ के लिए फायदेमंदइस मौसम में गल्ट संबंधित कई परेशानियां झेलनी पड़ती है। रिसर्च के अनुसार, गर्मी के कारण आपकी आंतों में बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है और लैक्टोबैसिस जैसे अच्छे बैक्टीरिया कम हो सकते हैं। माना जाता है कि छाछ पीना आपके गट के लिए काफी बेहतर होता है और यह एक स्टेबलाइजर की तरह काम करता है। दरअसल, छाछ में मौजूद जीवित लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया भरपूर होता है। यह सक्रिय रुप से हानिकारक स्ट्रेस से लड़ते हैं और आपके पेट को अधिक प्रोटेक्टिव म्यूकस बनाने का संकेत देते हैं। इसलिए गर्मियों में अपनी गट को नेचुरल शील्ड प्रदान करने के लिए छाछ सेवन जरुर करें।एसिड रिफ्लक्स को नियंत्रित करती है छाछछाछ का सेवन केवल पाचन को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीने में जलन और एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण पेट में बनने वाले अतिरिक्त अम्ल को नियंत्रित करने में सहायता करते हैं। इसके अलावा, छाछ पाचन प्रक्रिया को सक्रिय बनाकर पेट से भोजन को समय पर आगे बढ़ाने में मदद करती है। जब भोजन लंबे समय तक पेट में नहीं ठहरता और आसानी से आंतों तक पहुंच जाता है, तो अम्ल के वापस भोजन नली की ओर आने की आशंका काफी कम हो जाती है।शरीर हाइड्रेट रहता हैसमर सीजन में हाइड्रेटेड रहना काफी जरुरी होता है। हालांकि, सिर्फ बार-बार पानी पीना शरीर को अच्छी तरह हाइड्रेट नहीं कर सकता है। ऐसे में आप छाछ पी सकते हैं, जो सादे पानी से बेहतर हाइड्रेशन देती है। क्योंकि इसमें व्हे प्रोटीन के साथ-साथ सोडियम, पोटेशियम और कैल्शियम का सही मिश्रण होता है। जो कि शरीर को कोशिकाओं तक पानी पहुंचाने में मदद करता है।लिवर के लिए फायदेमंदइतना ही नहीं, छाछ लिवर के हेल्थ को भी सपोर्ट करती है। छाछ MFGM (मिल्क फैट ग्लोब्यूल मेम्ब्रेन)नामक तत्व पाया जाता है। यह हेल्दी फैट्स का पावरहाउस होता है। एक अध्ययन में पता चला है कि विशेष फैट्स &#039;फैटी लिवर&#039; के मार्कर्स को कम करने में मदद कर सकते हैं। गर्मियों में नियमित छाछ को पीना लिवर को सुरक्षा देने वाला प्रभाव प्रदान कर सकता है। आतंरिक सूजन कम होती हैहेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, अक्सर गर्मी में आंतों की परत कमजोर हो जाती है, जिससे छोटे बैक्टीरियल टॉक्सिन्स आपके ब्लडस्ट्रीम में लीक हो सकते हैं और सीधे लिवर तक पहुंच सकते हैं, जिससे लो-ग्रेड इफ्लेमेशन की शिकायत हो सकती है। यही कारण है कि हमे अक्सर गर्मी में सुस्ती और भारीपन महसूस हो सकता है। ऐसे में छाछ पीना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। इसमें पाए जाने वाले प्रोबायोटिक्स और हेल्दी एसिड आंतों की कोशिकाओं के लिए फ्यूल का काम करते हैं और गट लाइनिंग में बने गैप्स को सील करने और शरीर में सूजन पैदा करने वाले कारकों को कम करने में मदद करते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:38:43 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: खरबूजे के बीज हैं अमृत समान, महिलाओं की Health के लिए हैं ये 5 चमत्कारी फायदे</title>
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<description><![CDATA[ गर्मियों के दिनों में हम सभी के घरों पर खरबूजा आता था। वहीं हमारी दादी इसके बीजों को फेंकने की जगह धोकर धूप में सुखाती थीं। इन बीजों के सूखने के बाद वह इन बीजों को खाने के लिए देती थीं। लेकिन आजकल अधिकतर लोग इन बीजों को बेकार समझकर फेंक देते हैं। खरबूजों के बीजों को मगज भी कहा जाता है। यह महिलाओं की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। बता दें कि इन बीजों में पोषक तत्व नेचुरली मौजूद होते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि रोजाना 1 चम्मच इनका सेवन करने से महिलाओं की सेहत पर इसका क्या असर होता है।मैग्नीशियम का स्रोतभारत में कई महिलाओं में मैग्नीशियम की कमी देखी जाती है। इस कमी से नींद में बार-बार जागना, मसल्स क्रैंप्स, चिंता और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खरबूजे के बीज में मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में होते हैं, जोकि मन और शरीर दोनों को रिलैक्स कर सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: ग्लूटेन-फ्री डाइट पर हैं तो ये आसान हैक्स आएंगे आपके बेहद कामहार्मोन बैलेंसजिंक की कमी होने से PCOS, बाल झड़ने और मुंहासे जैसी समस्याएं होने लगती हैं। मगज के बीजों में भरपूर मात्रा में जिंक पाया जाता है। जोकि स्किन रिपेयर, हार्मोन प्रोडक्शन और इम्यूनिटी के लिए जरूरी है।सूजन होती है कमइसके बीजों में कुकुर्बिटासिन पाया जाता है। जो बॉडी की सूजन को कम कर सकते हैं। यह स्किन, पेट और जोड़ों की समस्याओं में फायदेमंद माने जाते हैं।नींद और मूड होगा बेहतरखरबूजों के बीज में ट्रिप्टोफैन नामक अमीनो एसिड पाया जाता है। इसका इस्तेमाल शरीर सेरोटोनिन और मेलाटोनिन बनाने के लिए करता है। यह मूड और नींद को बेहतर बनाता है।शरीर को मिलती है ठंडकखरबूजों की बीजों की तासीर ठंडी होती है। यह शरीर की गर्मी को कम करने, पेट को ठंडक पहुंचाने और डाइजेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है।ऐसे खाएं मगजआप रोजाना एक चम्मच खरबूजे के बीज का सेवन कर सकती हैं।इनको भूनकर स्नैक्स की तरह स्मूदी, सलाद या ड्राई फ्रूट्स के साथ खा सकते हैं।मगज आपको आसानी से किराना स्टोर पर मिल जाते हैं।खरबूजे के बीजों को अच्छे से निकालकर अच्छे से धोकर और फिर सुखाकर भी खा सकती हैं।सेहत के लिए यह छोटे बीज फायदेमंद हो सकते हैं। इसलिए अगली बार इन बीजों को फेंके नहीं बल्कि इनके फायदों को जरूर याद रखें। हालांकि अगर आपको कोई सेहत संबंधी समस्या है, तो इन बीजों को खाने पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:38:37 +0530</pubDate>
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<title>International Yoga Day: 40 में चाहिए 30 वाली Fitness? एक्सपर्ट से जानें ये Anti&#45;aging secret</title>
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<description><![CDATA[ खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण बीमारियां काफी बढ़ रही है। पहले के समय में बढ़ती उम्र में अक्सर एनर्जी, ताकत और फ्लेक्सिबिलटी की कमी से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन आज कई महिलाएं 40 की उम्र में थकी हुई रहती हैं और न ही फिट नजर आती है। इस उम्र में खुद को रोकने की कोशिश नहीं करें, बल्कि शरीर और मन को बेहतर तरीके से सपोर्ट करने का है।“40 की उम्र अब नई शुरुआत का प्रतीक बनती जा रही है” यह केवल एक लोकप्रिय वाक्य नहीं, बल्कि आज की बदलती लाइफस्टाइल और सोच को दर्शाता है। आधुनिक शोध और योग विज्ञान दोनों इस बात पर जोर देते हैं कि दैनिक दिनचर्या का हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम, पर्याप्त आराम और संतुलित लाइफस्टाइल अपनाकर व्यक्ति बढ़ती उम्र के प्रभावों को बेहतर ढंग से नियंत्रित कर सकता है और लंबे समय तक स्वस्थ एवं ऊर्जावान बना रह सकता है।बढ़ती उम्र में योग क्यों है खास?आज दुनियाभर में इंटरनेशनल योगा डे मनाया जा रहा है। इसलिए योग सिर्फ एक एक्सरसाइज नहीं है, बल्कि शरीर, सांसों और मन के बीच संतुलन बनाने वाला प्रोसेस है। नियमित तौर पर योग करने से शरीर फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है मसल्‍स मजबूत होती है, पोश्चर सही होता है और ब्‍लड सर्कुलेशन को सपोर्ट मिलता है। योग एक्सपर्ट के अनुसार, योग का प्रभाव सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह तनाव कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि 40 की उम्र में 30 उम्र जैसी फिटनेस कैसे पाएं।सिद्ध वॉकखासतौर पर सिद्ध वॉक करने से फिगर-8 या इनफिनिटी शेप में धीरे-धीरे चलते हुए सांस और एकाग्रता पर ध्यान दिया जाता है। इस समय शरीर को रिलैक्स रखते हुए संतुलित गाति प्राप्त होती है। फायदे - यह शरीर को बैलेंस और कोऑर्डिनेशन बेहतर करता है। - बॉडी की गतिशीलता बनाए रखता है। - डाइजेशन और ब्लड सर्कुलेशन को सपोर्ट करता है। - मन को शांत और केंद्रित रखता है।त्रिकोणासनपैरों के बीच दूरी बनाकर खड़े होकर एक पैर को बाहर की ओर रखें और दोनों ही हाथों को फैलाएं। धीरे-धीरे शरीर को एक तरफ झुकाएं। सांस को सामान्य रखें।फायदे-पैरों को मजबूत करता है। - हिप्स और रीढ़ के फ्लेक्सिबिटी को बढ़ा सकता है। - शरीर के पोश्चर और बैलेंस को बेहतर बनाता है।भ्रामरी प्राणायामइस आसान को करने के लिए रीढ़ को सीधा करके बैठ जाएं। धीरे-धीरे सांस अंदर लें और सांस छोड़ते समय मधुमक्खी जैसी हल्की आवाज निकालें।फायदे - यह मन को शांत रखता है। - तनाव कम करता है और एकाग्रता बनाए रखता है। - मानसिक संतुलन बनाए रखता है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:59:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Summer Health Tips: Summer Superfood है सब्जा, Acidity और Body Heat का रामबाण इलाज, जानें Health Benefits</title>
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<description><![CDATA[ गर्मी के मौसम में शरीर में जलन, डिहाइड्रेशन, एसिडिटी और पेट में भारीपन जैसी समस्याएं आम होती हैं। ऐसे में अगर आप इन समस्याओं से बचने के लिए कोई नेचुरल और सस्ता उपाय ढूंढ रही हैं, तो सब्जा सीड्स आपके लिए बेस्ट ऑप्शन हो सकता है। भले ही यह बीज देखने में साधारण से लगें, लेकिन इनके फायदे काफी असरदार होते हैं। इसलिए इनको &#039;समर सुपरफूड&#039; भी कहा जाता है। क्योंकि इसके सेवन से आपके शरीर को अंदर से ठंडक मिलती है। वहीं यह आपके शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि सब्जा सीड्स शरीर की गर्मी और एसिडिटी को कैसे कम करते हैं और इनका सेवन कैसे करना चाहिए।सब्जा सीड्सअगर आपको अंदर से बहुत ज्यादा गर्मी महसूस हो रही है या फिर बार-बार एसिडिटी की समस्या हो रही है। तो सब्जा सीड्स इस समस्या को बैलेंस करने में मदद करता है। जब इन सीड्स को पानी में भिगोया जाता है, तो यह जेल जैसा रूप ले लेते हैं। जोकि शरीर में पानी को लंबे समय तक बनाए रखता है।इसे भी पढ़ें: Baby Care Tips: बच्चे की मालिश में न करें ये गलती, जानें मौसम के हिसाब से कौनसा तेल है Perfectसब्जा सीड्स के फायदेसब्जा सीड्स शरीर के तापमान को कम करने में सहायता करता है।यह जेल बनाकर पानी होल्ड करता है, जिससे हाइड्रेशन बना रहता है।इसके सेवन से एसिडिटी और ब्लोटिंग की समस्या कम होती है।यह पाचन के लिए हल्का और आसान होता है।कैसे लें सब्जा सीड्ससबसे पहले एक चम्मच सब्जा सीड्स लें।फिर एक गिलास पानी में डालकर इनको 10 मिनट के लिए भिगो दें।जब यह सीड्स फूलकर जेल जैसे हो जाएं, तो इनका सेवन करें।वहीं स्वाद के लिए आप इसमें नींबू या फिर पुदीना मिला सकती हैं।ये लोग रखें सावधानीलो ब्लड प्रेशर की समस्या से परेशान रहने वाले लोगों को सब्जा सीड्स का सेवन कम करना चाहिए।जिन लोगों को निगलने में दिक्कत होती है, उनको सब्जा सीड्स अच्छे से भिगोकर लेना चाहिए।प्रेग्नेंट महिलाएं डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन करें।वहीं छोटे बच्चों को कम मात्रा में देना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:57:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Thyroid में Sweet Cravings से हैं परेशान? यह Healthy Snack देगा तुरंत राहत</title>
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<description><![CDATA[ क्या आप भी लंबे समय से हाइपोथायरॉइडिज्‍म की समस्या परेशान हैं। अक्सर थाइरॉइड की बीमारी में दिनभर की थकान, एनर्जी की कमी या बार-बार कुछ मीठा खाने की इच्छा जरुर होती है। अधिकांश लोग मीठे की क्रेविंग को शांत करने के लिए कई हेल्दी ऑप्शन की तलाश में रहते हैं। इस लेख में हम आपको हेल्दी स्नैक बताने जा रहे है, जिसे आप शाम की भूख के दौरान जरुर खाएं। इसको आप अपनी डाइट मे भी शामिल कर सकते हैं।गौरतलब है कि केला और दालचीनी का यह कॉम्बिनेशन काफी टेस्टी होता है और इसके साथ ही यह काफी पौष्टिक स्नैक ऑप्शन है। केला नेचुरल एनर्जी देने में मदद करता है, जबकि दालचीनी इसका स्वाद बढ़ाता है। केला क्यों फायदेमंद है?केला में प्राकृतिक रुप से कार्बोहाइ़ड्रेट और पोटैशियम से भरपूर होता है, जो शरीर को तुरंत एनर्जी देता है। वैसे यह पेट के लिए काफी लाइट माना जाता है। यह आसानी से पच भी जाता है। जब आपको अचानक से भूख लगे तो कुछ मीठा खाने का मन करे, तब केला एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है।दालचीनी है फायदेमंदअसल में दालचीनी का कार्य केवल स्वाद बढ़ाने का नहीं, बल्कि इसकी हल्की गर्म तासीर इस स्नैक को और भी हेल्दी बना देती है। इसको बैलेंस डाइट का हिस्सा बनाया जाता है और यह मीठी खाने की इच्छा को भी कम कर देता है।कब खाएं इस हेल्दी स्नैक?इस स्नैक को आप दोपहर या फिर शाम की हल्की भूख के समय खा सकती हैं, खासकर जब कुछ मीठा खाने का मन हो।इस हेल्दी स्नैक को कैसे खाएं? - इसके लिए एक केला लें। - इसे छोटे टुकड़ों में काट लें। - इसके ऊपर एक चुटकी दालचीनी छिड़क दें। इस स्वादिष्ट और क्विक स्नैक को आप अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। आपको बता दें कि, यह डिश थायराइड का इलाज नहीं है, बल्कि बैलेंस डाइट का एक जरुरी हिस्सा है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:57:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Summer Body Cooling: Jeera या Saunf? जानें गर्मी को मात देने का रामबाण घरेलू नुस्खा</title>
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<description><![CDATA[ गर्मियों में लोग शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखने के लिए कई उपायों को अपनाते हैं। खासतौर पर रसोई में मौजूद जीरा और सौंफ का सेवन गर्मी में ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। सौंफ और जीरा दोनों ही आपके शरीर को अलग-अलग तरीके से लाभ पहुंचाती हैं। वहीं यह पाचन से लेकर शरीर की गर्मी तक को कम करने में मदद करती है। वहीं अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि गर्मी में जीरा और सौंफ में से क्या फायदेमंद है।बता दें कि सौंफ और जीरा दोनों की तासीर और गुण अलग-अलग होते हैं। जीरा पाचन मजबूत करता है और सौंफ शरीर को ठंडक पहुंचाने का काम करती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि गर्मियों में किसका सेवन कब और कैसे करना चाहिए। जिससे कि आपका शरीर स्वस्थ रहे और गर्मी से आपको राहत मिल सके।इसे भी पढ़ें: Summer Health Tips: Summer Superfood है सब्जा, Acidity और Body Heat का रामबाण इलाज, जानें Health Benefitsजानिए गर्मी में जीरा खाने के फायदेपाचन होगा बेहतरजीरा पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे अपच, गैस और ब्लोटिंग को कम करने में सहायता करता है। गर्मी के मौसम में पाचन हल्का बनाए रखने में जीरा फायदेमंद होता है।बॉडी डिटॉक्सजीरे का पानी पीने से शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है।वेट कंट्रोलसुबह खाली पेट जारी पानी पीना चाहिए। इसके सेवन से फैट बर्निंग प्रोसेस तेज हो सकता है। जिससे वेट कंट्रोल में रखने में मदद मिलती है।जानिए गर्मी में सौंफ खाने के फायदेशरीर को मिलती है ठंडकसौंफ की तासीर ठंडी मानी जाती है, इसलिए गर्मियों के मौसम में इसके सेवन से शरीर को ठंडा रखने में सहायता मिलती है।एसिडिटी से राहतवहीं खाना खाने के बाद अगर आप सौंफ चबाते हैं, तो इससे मुंह फ्रेश रहता है और एसिडिटी की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।शरीर रहेगा हाइड्रेटवहीं सौंफ का पानी पीने से शरीर में ठंडक बनी रहती है और इसके सेवन से डिहाइड्रेशन का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।गर्मी में क्या ज्यादा बेहतरअगर आपको पाचन से जुड़ी ज्यादा समस्याएं रहती हैं। जो आपके लिए जीरा अच्छा ऑप्शन हो सकता है। अगर शरीर में अधिक गर्मी, डिहाइड्रेशन या जलन महसूस होती है, तो सौंफ का सेवन अधिक फायदेमंद माना जाता है। वहीं कई लोग गर्मियों में सौंफ और जीरा दोनों का पानी बनाकर पीते हैं। जिससे आपके शरीर को डबल फायदा मिलता है।सेवन का तरीकासुबह के समय खाली पेट जीरा पानी पी सकते हैं।रातभर भिगोई हुई सौंफ का पानी गर्मियों में ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से बचना चाहिए। वहीं किसी बीमारी में डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन करें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:57:32 +0530</pubDate>
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<title>Baby Care Tips: बच्चे की मालिश में न करें ये गलती, जानें मौसम के हिसाब से कौनसा तेल है Perfect</title>
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<description><![CDATA[ बच्चों के शरीर की मालिश उनके सेहत के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है। आयुर्वेद में बच्चे के शरीर की मालिश से त्वचा को फायदा मिलता है। भारत में मालिश एक पुरानी परंपरा है, जोकि बच्चे के शरीर के विकास और पोषण को बेहतर बनाती है। लेकिन बच्चे की मालिश के लिए सही तेल चुनना भी उतना ही जरूरी होता है। क्योंकि यह बच्चे के विकास के साथ-साथ मांसपेशियों, हड्डियों और पूरे स्वास्थ्य विकास में सहायता करता है।आमतौर पर बच्चे के शरीर के मालिश के लिए घी या नारियल तेल का इस्तेमाल करना फायदेमंद माना जाता है। इसलिए आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि इन दोनों में से क्या ज्यादा बेहतर होता है।इसे भी पढ़ें: Ayurveda Tips: खराब Digestion से हैं परेशान, तो इन 10 गलत Food Combination से आज ही करें तौबाघी से मालिश के फायदेबता दें कि आयुर्वेद में घी का इस्तेमाल स्किन के लिए खासकर फायदेमंद माना जाता है।घी में विटामिन ए, डी, ई और के और नेचुरल फैट पाया जाता है। जोकि त्वचा को अंदर से पोषण देता है। बच्चे की ड्राई स्किन के लिए घी काफी फायदेमंद माना जाता है।सर्दियों के मौसम में बच्चे के शरीर की घी से मालिश करने से गर्माहट मिलती है।आयुर्वेद के मुताबिक बच्चे के शरीर की घी से मालिश करने से हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।बच्चों के शरीर की घी से मालिश करने से त्वचा की नेचुरली चमक बढ़ती है और स्किन की ड्राईनेस कम होती है।घी से मालिश के नुकसानघी से बच्चे के शरीर की मालिश करने के लिए घी का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है, लेकिन इसके कुछ अपने नुकसान भी हैं।गर्मियों में बच्चों के शरीर की मालिश के लिए घी का इस्तेमाल हैवी होता है।गर्मी में घी से बच्चे के शरीर की मालिश करने से त्वचा में चिपचिपाहट या दाने निकलने की समस्या भी हो सकती है।अगर घी शुद्ध नहीं होता है, तो इससे मालिश करने पर इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।नारियल तेल से मालिश के फायदेबच्चे के शरीर की मालिश के लिए नारियल का तेल फायदेमंद और सुरक्षित माना जाता है।नारियल तेल हल्का होता है और यह स्किन में आसानी से समा जाता है। इससे बच्चे को कोई असुविधा भी नहीं होती है।नारियल तेल की तासीर ठंडी होता है। जोकि गर्म मौसम में यह तेल बच्चे की स्किन के लिए ज्यादा सही माना जाता है।इस तेल में नेचुरल एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण पाए जाते हैं। जोकि त्वचा को इंफेक्शन से बचाते हैं।अगर नवजात की स्किन सेंसिटिव है या उसको एलर्जी की समस्या है, तो नारियल तेल बच्चे के लिए सेफ ऑप्शन हो सकता है।नारियल तेल से होने वाले नुकसानबच्चों की स्किन के लिए नारियल तेल फायदेमंद होने के अलावा कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं।सर्दियों के मौसम में नारियल तेल बच्चे के शरीर को सही तरीके से गर्माहट नहीं दे पाता है।अधिक ठंडक में नारियल तेल से मालिश करने से बच्चे की त्वचा को सही तरह से नमी नहीं मिल पाती है।कौन सा तेल बेहतरएक्सपर्ट के मुताबिक बच्चे के शरीर की मालिश के लिए नारियल तेल और घी दोनों की सुरक्षित और फायदेमंद माने जाते हैं। लेकिन सर्दियों में बच्चे की मालिश के लिए घी अच्छा ऑप्शन है। क्योंकि यह त्वचा को गहराई से पोषण और गर्माहट देता है। तो वहीं गर्मियों में नारियल तेल से बच्चे की मालिश करना स्किन के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि यह हल्का होने के साथ-साथ शरीर को ठंडक देने का काम करता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:29:45 +0530</pubDate>
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<title>Superfoods का मिथ! महंगे Avocado&#45;Quinoa नहीं, ये देसी चीजें हैं असली &amp;apos;Health&#45;Booster&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में हेल्दी खाने का मतलब सिर्फ महंगे सुपरफूड्स को माना जाता है। ऐसे में एवोकाडो, ब्लूबेरीज, क्विनोआ और ड्रैगन फ्रूट जैसे फूड्स देखकर लोग मानते हैं कि अच्छी सेहत के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना जरुरी है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि कई किफायती इंडियन फूड्स भी पोषण के मामले में बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है।डाइटिशियन ने बताया है कि हेल्दी डाइट का मतलब सिर्फ महंगा खाना नहीं होता, बल्कि सही जानकारी के साथ बेहतरीन ऑप्शन चयन करना है। ऐसे कई देसी फूड्स में भी फाइबर, विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे जरुरी न्यूट्रिशन देखने को मिलते हैं। आइए आपको बताते हैं महंगे सुपरफूड्स के कुछ बजट फ्रेंडली इंडियन ऑप्शन।एवोकाडो vs नारियलएवोकाडो को हेल्दी फैट्स के लिए जाना जाता है, लेकिन नारियल भी अच्छे फैट्स और कई जरुरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है। वैसे यह आसानी से मिलने वाला और किफायती ऑप्शन है।कीवी vs आंवलाकीवी- लगभग ₹60 प्रति पीसआंवला- लगभग ₹10 प्रति पीसकीवी को अक्सर विटामिन C से भरपूर फल माना जाता है, लेकिन भारतीय आंवला भी इस पोषक तत्व का बेहद समृद्ध स्रोत है। आंवला न केवल शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि यह किफायती होने के कारण बेहतर और सुलभ पोषण का विकल्प भी साबित होता है।ड्रैगन फ्रूट vs पपीताड्रैगन फ्रूट में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पपीता में फाइबर, विटामिन-सी और डाइजेशन में मदद करने वाला एंजाइम काफी पाया जाता है।ब्लूबेरीज vs जामुन ब्लूबेरीज- लगभग ₹180 प्रति 100 ग्रामजामुन- लगभग ₹40 प्रति 100 ग्रामगौरतलब है कि ब्लूबेरीज में एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाई जाती है, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। दूसरी तरफ, जामुन में एंटीऑक्सीडेंट्स और प्लांट बेस तत्वों का अच्छा स्रोत है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ इंडियन डाइट में शामिल किया जाता है और किफायती और हेल्दी ऑप्शन माना जाता है।ब्रोकली vs पत्तागोभीब्रोकली को पौष्टिक सब्जियों में गिना जाता है क्योंकि इसमें फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। हालांकि, पत्तागोभी भी पोषण के मामले में किसी से कम नहीं है। इसमें भरपूर फाइबर के साथ कई आवश्यक विटामिन और खनिज पाए जाते हैं, साथ ही यह किफायती होने के कारण रोजमर्रा के आहार में आसानी से शामिल की जा सकती है।क्विनोआ vs ज्वारक्विनोआ- लगभग ₹31.80 प्रति 100 ग्रामज्वार- लगभग ₹11 प्रति 100 ग्रामक्विनोआ को प्रोटीन से भरपूर सुपरफूड के रूप में काफी लोकप्रियता मिली है। लेकिन ज्वार भी एक बेहद पौष्टिक पारंपरिक अनाज है, जिसमें भरपूर फाइबर, आवश्यक खनिज तत्व और ऊर्जा देने वाले जटिल कार्बोहाइड्रेट मौजूद होते हैं। लंबे समय से भारतीय खानपान का हिस्सा रही ज्वार स्वास्थ्य के साथ-साथ बजट के लिए भी एक बेहतरीन विकल्प मानी जाती है।खासकर हेल्दी खाने के लिए हमेशा महंगे विदेशी सुपरफूड्स का सेवन करना जरुरी नहीं है। हमारी किचन और लोकल बाजार में मौजूद कई देसी फूड्स भी पोषण और बजट के अनुकूल भी होते हैं। जब भी आप सुपरफूड्स खरीदें, तो अपने आसपास मिलने वाले पौष्टिक ऑप्शन पर भी जरुर ध्यान दें।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:43:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Summer Health: क्या पेट की गर्मी से चेहरे पर होते हैं Pimples? जानें इस दावे का पूरा सच</title>
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<description><![CDATA[ गर्मियों के मौसम में फेस पर पिंपल्स और एक्ने की समस्या होना आम होता है। लोग इसको पेट की गर्मी से जोड़कर देखते हैं और लोगों का मानना होता है कि शरीर में बढ़ी हुई गर्मी सीधे फेस पर दाने और एक्ने की वजह बनती है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल होता है कि क्या सच में पेट की गर्मी और एक्ने का कोई कनेक्शन होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या गर्मी के मौसम में पेट की गर्मी फेस पर एक्ने का कारण बनती है।पेट की गर्मी एक्ने वजहहालांकि पेट की गर्मी कोई मेडिकल टर्म नहीं है, लेकिन शरीर में बढ़ती गर्मी, डिहाइड्रेशन, गलत खानपान की आदतें और पाचन से जुड़ी समस्याएं इस मौसम में आपकी त्वचा को प्रभावित कर सकती है। वहीं सीधे तौर पर कहा जाए, तो गर्मी और गर्मी का मौसम मिलकर एक्ने की वजह बन सकते हैं। जब आपका पाचन तंत्र खराब होता है, तो पेट में सूजन और टॉक्सिन्स बढ़ते हैं। यह आपकी बॉडी में हार्मोनल असंतुलन की वजह बन सकती है। इससे त्वचा पर सीबम ग्लैंड ज्यादा एक्टिव हो जाती है, जोकि पोर्स को बंद कर एक्ने का रूप ले लेती है।इसे भी पढ़ें: Diabetes Warning Signs: सुबह शरीर में दिखें ये लक्षण तो समझिए बज गई खतरे की घंटी, ना करें इग्नोरगर्मियों में क्यों बढ़ जाता है एक्नेएक्सपर्ट की मानें, तो गर्मी के मौसम में एक्ने बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं।ज्यादा पसीना आना और ऑयल प्रोडक्शनगर्मी के मौसम में शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए अधिक पसीना बनाता है। इस दौरान स्किन की ऑयल ग्लैंड्स भी ज्यादा एक्टिव हो जाती है। ऐसे में जब धूल, पसीना, तेल और बैक्टीरिया मिल जाते है। तो पोर्स बंद होने लगते हैं और एक्ने की वजह बनते हैं।डिहाइड्रेशन और शरीर की गर्मीगर्मियों में पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने की वजह से शरीर डिहाइड्रेट हो सकता है। जिससे त्वचा का संतुलन बिगड़ जाता है। कई बार बॉडी अधिक तेल बनाना शुरू कर देती है, जिससे पिंपल्स की समस्या बढ़ सकती है।मसालेदार और तलाभुना खानागर्मियों में बहुत ज्यादा जंक फूड, तला-भुना, मसालेदार खाना और मीठे ड्रिंक्स खाने से शरीर में सूजन की समस्या हो सकती है। वहीं इससे भी कुछ लोगों में एक्ने की समस्या अधिक होती है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:43:09 +0530</pubDate>
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<title>Ayurveda Tips: खराब Digestion से हैं परेशान, तो इन 10 गलत Food Combination से आज ही करें तौबा</title>
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<description><![CDATA[ हममें से ज्यादातर लोग हेल्दी खाने पर ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार दो अच्छी चीजों का कॉम्बिनेशन भी शरीर के लिए सही नहीं होता। इसका सबसे कॉमन उदाहरण है बनाना शेक। ज्यादातर लोग इसे हेल्दी और न्यूट्रिशियस ड्रिंक मानकर पीते हैं, लेकिन आयुर्वेद में दूध और केले को एक साथ खाने की सलाह नहीं दी जाती।आयुर्वेद मानता है कि सिर्फ यह जरूरी नहीं है कि आप क्या खा रहे हैं, बल्कि यह भी मायने रखता है कि किन चीजों को साथ खा रहे हैं। कुछ फूड कॉम्बिनेशन ऐसे होते हैं जिन्हें &#039;विरुद्ध आहार&#039; कहा जाता है। माना जाता है कि ये पाचन पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।क्या कहते हैं एक्सपर्ट?आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. दीक्षा भावसार सावलिया के मुताबिक, कुछ खाद्य पदार्थों का गलत कॉम्बिनेशन पाचन शक्ति को कमजोर कर सकता है। इससे शरीर में अधपचा भोजन जमा होने लगता है, जिसे आयुर्वेद में &#039;आम&#039; कहा जाता है।समय के साथ यह गैस, पेट फूलना, भारीपन, आलस और दूसरी डाइजेशन से जुड़ी समस्याओं की वजह बन सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ये चीजें खराब हैं। दिक्कत तब होती है जब इन्हें गलत तरीके से या गलत चीजों के साथ खाया जाता है। इसे भी पढ़ें: Summer Health: क्या पेट की गर्मी से चेहरे पर होते हैं Pimples? जानें इस दावे का पूरा सचआयुर्वेद के अनुसार इन 10 फूड कॉम्बिनेशन से बचना चाहिए1. पालक और पनीर, क्यों नहीं?पनीर में मौजूद कैल्शियम, पालक से मिलने वाले आयरन के अवशोषण को कम कर सकता है। साथ ही आयुर्वेद दो भारी चीजों को एक साथ खाने को पाचन के लिए मुश्किल मानता है।बेहतर विकल्प: पालक को दाल के साथ खाएं और पनीर को किसी दूसरे मील में शामिल करें।2. शहद और गर्म पानी, क्यों नहीं?आयुर्वेद में शहद को गर्म करने से बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि गर्म शहद शरीर में आसानी से नहीं पचता।बेहतर विकल्प: शहद को सामान्य तापमान या हल्के गुनगुने पानी में मिलाकर लें।3. रात में दही खाना, क्यों नहीं?दही को भारी माना जाता है और यह कफ बढ़ा सकता है। रात में डाइजेशन धीमा होने के कारण इससे पेट फूलना, बलगम और सुस्ती जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।बेहतर विकल्प: दही दिन में खाएं या छाछ का सेवन करें।4. दूध और नमक, क्यों नहीं?आयुर्वेद के अनुसार दूध और नमकीन चीजों के गुण एक-दूसरे से अलग होते हैं। इन्हें साथ लेने से पाचन प्रभावित हो सकता है।बेहतर विकल्प: दूध को अकेले पिएं। चाहें तो इसमें खजूर, केसर, इलायची या हल्दी मिला सकते हैं।5. खाना खाने के तुरंत बाद चाय, क्यों नहीं?चाय में मौजूद टैनिन, खाने से मिलने वाले आयरन के अवशोषण को कम कर सकता है। इससे डाइजेशन भी प्रभावित हो सकता है।बेहतर विकल्प: खाने के कम से कम 45 मिनट से 1 घंटे बाद चाय पिएं।6. खाने के साथ कोल्ड ड्रिंक्स या बहुत ठंडा पानी, क्यों नहीं?बहुत ठंडे पेय पदार्थ पाचन प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं, जिससे गैस और भारीपन महसूस हो सकता है।बेहतर विकल्प: खाने के साथ सामान्य तापमान का या हल्का गुनगुना पानी पिएं।7. बराबर मात्रा में घी और शहद, क्यों नहीं?आयुर्वेद में घी और शहद को बराबर मात्रा में मिलाकर खाना उचित नहीं माना गया है।बेहतर विकल्प: दोनों का अलग-अलग सेवन करें या बराबर मात्रा में लेने से बचें।8. अंडे और चाय, क्यों नहीं?प्रोटीन से भरपूर भोजन के तुरंत बाद चाय पीने से पोषक तत्वों के अवशोषण पर असर पड़ सकता है और पेट भारी लग सकता है।बेहतर विकल्प: अंडा खाने के 30 से 60 मिनट बाद चाय पिएं।9. दूध और केला, क्यों नहीं?आयुर्वेद में दूध और केले को विरुद्ध आहार माना गया है। दोनों ही भारी खाद्य पदार्थ हैं और इन्हें पचाने का तरीका अलग माना जाता है। साथ खाने पर डाइजेशन धीमा हो सकता है।बेहतर विकल्प: केले को स्नैक की तरह अलग खाएं। दूध पीना हो तो 1-2 घंटे का गैप रखें।10. मछली और दूध, क्यों नहीं?आयुर्वेद में मछली और दूध का मेल सबसे चर्चित विरुद्ध आहार में गिना जाता है। माना जाता है कि दोनों की तासीर अलग होती है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।बेहतर विकल्प: मछली और दूध का सेवन अलग-अलग समय पर करें और इनके बीच कम से कम 3-4 घंटे का अंतर रखें। इसे भी पढ़ें: Diabetes Warning Signs: सुबह शरीर में दिखें ये लक्षण तो समझिए बज गई खतरे की घंटी, ना करें इग्नोरआखिर में एक जरूरी बातआयुर्वेद के ये सुझाव पारंपरिक मान्यताओं और पाचन से जुड़े सिद्धांतों पर आधारित हैं। हर व्यक्ति का शरीर और डाइजेशन अलग होता है। इसलिए किसी फूड कॉम्बिनेशन से अगर आपको कोई परेशानी नहीं होती, तो जरूरी नहीं कि वही असर हर किसी पर हो।  सबसे जरूरी है कि आप अपने शरीर के संकेतों को समझें, संतुलित आहार लें और ऐसी डाइट अपनाएं जो आपके शरीर को सूट करे। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:43:08 +0530</pubDate>
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<title>Health Alert: मामूली थकान और चिड़चिड़ापन नहीं, ये Iron Deficiency के गंभीर संकेत हो सकते हैं!</title>
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<description><![CDATA[ हम सभी दिनभर की भागदौड़ में व्यस्त रहते हैं और जब शाम को थकान होती है या काम के दबाव में स्ट्रेस फील होता है, वह एक आम बात है। जब हम बिना किसी वजह के कमजोरी महसूस करते हैं या मूड खराब रहता है, तो हम अक्सर खुद ही यह मान लेते हैं कि शायद का प्रेशर ज्यादा है या फिर नींद पूरी नहीं हुई, इसलिए यह हो रहा है। अक्सर देखा गया है कि यह मामूली थकान से ज्यादा गंभीर समस्या हो सकती हैं, जिसे हम नजरअंदाज कर रहा हैं। ये लक्षण आयरन की कमी का संकेत भी हो सकते हैं। इन लक्षणों को भूलकर भी इग्नोर न करें, वरना आगे चलकर बड़ी दिक्कत हो सकती है। आइए आपको इस बारे में बताते हैं-कैसे होते हैं आयरन की कमी के संकेत?लगातार कमजोरी और सुस्तीआयरन की कमी का सबसे बड़ा संकेत है, हीमोग्लोबिन कम होने की वजह से शरीर के सभी अंगों तक सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता। हर वक्त थका हुआ और कमजोरी महसूस फील करता है।चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्सजब शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होती है, तो दिमाग को सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलता। इस कारण से कई बार काम पर फोकस करने में परेशानी, सिरदर्द या बेवजह चिड़चिड़ापन की समस्या देखने को मिलती है।सांस फूलनाअगर आप थोड़ा-सा चलने और सीढ़ियों पर चढ़ते हैं, तो सांस फूलना और घबराहट हो सकती है। यह शरीर में ऑक्सीजन की कमी पूरा करने के लिए दिल पर ज्यादा मेहनत करता है, जिस वजह से धड़कनें तेज हो जाती है, जिसे हमें कई बार एंग्जायटी समझते हैं। स्ट्रेस और आयरन की कमी में अंतरत्वचा का पीलापनयदि आपके चेहरा पीला दिखने लगा है, तो यह शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी का संकेत हो सकता है। हाथ-पैर ठंडे रहनाअगर आपके हाथ-पैर हमेशा ठंडे रहते हैं, तो यह खराब ब्लड सर्कुलेशन और आयरन की कमी का संकेत है।असामान्य चीजें खाने का मनयदि आपको आयरन की गंभीर कमी है, तो मिट्टी, चॉक या कच्चे चावल खाने की इच्छा ज्यादा होगी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:10:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: Heatwave का आंखों पर &amp;apos;साइलेंट अटैक&amp;apos;, बढ़ रहा Redness और Infection का खतरा, जानें ये Eye Care Tips</title>
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<description><![CDATA[ बढ़ती गर्मी को हम सिर्फ डिहाइड्रेशन, लू या सनबर्न से जोड़कर देखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका असर आपकी आंखों पर भी देखने को मिल सकता है। गर्मियों में ड्राई आइज, जल, एनर्जी और धुंधला दिखने की समस्या बढ़ जाती है। जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है, तो लंबे समय तक धूप में रहने से आंखों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि हीटवेव का आपकी आंखों पर क्या असर होता है और इस समस्या से बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए।हीटवेव आंखों को ऐसे पहुंचाती है नुकसानटियर फिल्म का सूख जानाबता दें कि हमारी आंखों की सतह को सेफ और नमी बनाए रखने के लिए एक बारीक टियर फिल्म होती है। जोकि प्रदूषण, धूल और इंफेक्शन से बचाव करती है। हीटवेव के दौरान चलने वाली गर्म हवाएं, तेज धूप और शरीर में पानी की कमी इस नमी को तेजी से सुखा देती है। इससे आंखों में ड्राईनेस की समस्या और कॉर्निया में जलन का खतरा बढ़ जाता है।इसे भी पढ़ें: Hormonal Imbalance है Mood Swings की वजह? Diet और Fitness से ऐसे करें कंट्रोलAC और बाहरी तापमान में बदलावअक्सर लोग तेज गर्मी से बचने के लिए एयर कंडीशनर में बैठते हैं। फिर बाहर धूप में काम के लिए जाते हैं। तापमान में अचानक बदलाव और AC की ड्राई हवा आंखों की नमी को कम कर देती है। जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है।बच्चों और युवाओं पर असरगर्मी की छुट्टियों में बच्चे और युवा लैपटॉप, मोबाइल या टैबलेट पर अधिक समय बिताते हैं। स्क्रीन देखने के दौरान हम कम पलकें झपकाते हैं। जिससे आंखों में ड्राईनेस और डिजिटल आई स्ट्रोन, खुजली, रेडनेस और जलन की समस्या बढ़ जाती है।UV रेडिएशन के नुकसानवहीं सुबह के 10 बजे से दोपहर के 3 बजे तक सूर्य की UV किरणों का स्तर सबसे ज्यादा होता है। इस दौरान अगर सीधी धूप के संपर्क में आते हैं, तो रेटिना को नुकसान, मोतियाबिंद का तेजी से बढ़ना, फोटोकेराइटाइटिस यानी आंखों का सनबर्न और टेरीजियम जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।आंखों को ऐसे रखें सुरक्षितजब भी आप धूप में घर से बाहर जाए, तो हमेशा अच्छी क्वालिटी वाले सनग्लासेज पहनने चाहिए, जो 100% UV किरणों को रोकते हों।दिन भर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, इसके अलावा आप नींबू पानी या नारियल पानी भी पी सकते हैं। इससे शरीर के साथ-साथ आंखों में भी नमी बनी रहती है।जब भी आप मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप का इस्तेमाल करें, तो हर 20 मिनट बाद, 20 फीट दूर किसी चीज को कम से कम 20 सेकेंड देखें। इससे आंखों की मांसपेशियों को भी आराम मिलता है।जब भी बाहर से वापस आएं, तो आंखों को ठंडे और साफ पानी से धोना चाहिए। इस दौरान आंखों को रगड़ने से बचें। क्योंकि ऐसा करने से इंफेक्शन फैल सकता है।आंखों में रेडनेस या जलन की समस्या होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के कोई आई ड्रॉप न डालें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:10:30 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: Prostate Cancer बन रहा &amp;apos;Silent Killer&amp;apos;, शर्म और अनदेखी बन रही जानलेवा वजह, जानें Doctor&amp;apos;s Warning</title>
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<description><![CDATA[ भारत में धीरे-धीरे प्रोस्टेट कैंसर एक &#039;साइलेंट किलर&#039; के रूप में बढ़ता जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि भारतीय पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का पता अक्सर बहुत देर से चलता है। जब तक कि यह बीमारी गंभीर रूप न ले ले, तब तक इसके बारे में पता नहीं चलता है। आखिर हमारे देश में इन गंभीर और जानलेवा बीमारी की पहचान इतनी देर में क्यों होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों और मुख्य कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं।जागरूकता न होना और लक्षणों की अनदेखी करनाप्रोस्टेट कैंसर के देरी से पकड़े जाने की सबसे बड़ी वजह जागरुकता का अभाव है। अक्सर पुरुष शुरूआती लक्षणों को सिर्फ &#039;बढ़ती उम्र का असर&#039; समझकर नजरअंदाज करने की गलती करते हैं। वहीं लोग इन शुरुआती लक्षणों को भी गंभीरता से नहीं लेते हैं।इसे भी पढ़ें: Health Alert: मामूली थकान और चिड़चिड़ापन नहीं, ये Iron Deficiency के गंभीर संकेत हो सकते हैं! लक्षणपेशाब करते समय जलन महसूस होनाबार-बार पेशाब आनारात के समय टॉयलेट के लिए बार-बार उठनापेशाब का रुक-रुक कर आनाशर्म और हिचकिचाहटआज भी हमारे समाज में पुरुष स्वास्थ्य संबंधी निजी समस्याओं पर खुलकर बात नहीं करते हैं। प्रोस्टेट जैसी बीमारी के बारे में डॉक्टर से बात करने में शर्म और संकोच महसूस करते हैं। इसी हिचकिचाहट की वजह से पुरुष अपनी तकलीफ को छिपाते रहते हैं और सही समय पर जांच नहीं हो पाती है।सुविधाओं का अभावग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बड़ी चुनौती है। कई जगहों पर कैंसर की जांच के लिए आधुनिक मशीनें और सुविधाएं नहीं हैं। वहीं आर्थिक परेशानी और बड़े अस्पतालों तक लंबी दूरी तय करने की मजबूरी की वजह से भी लोग लंबे समय तक जांच को टालते रहते हैं।रूटीन हेल्थ चेकअप न करानाभारत में अभी भी रूटीन हेल्थ चेकअप कराने का चलन काफी कम है। इसलिए डॉक्टर की सलाह है कि 50 साल से अधिक उम्र के पुरुषों को समय-समय पर प्रोस्टेट की जांच जरूर कराना चाहिए। लेकिन अधिकतर लोग डॉक्टर के पास तभी जाते हैं, जब उनकी समस्या बर्दाश्त के बाहर होती है।समय पर स्क्रीनिंगहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो कई मामलों में शुरूआती चरण में यह बीमारी बिना किसी बड़े या स्पष्ट लक्षणों के शरीर खमोशी से पनपती है। यही कारण है कि समय पर स्क्रीनिंग कराना बेहद जरूरी है। अगर बीमारी को शुरूआती चरण में पकड़ लिया जाए, तो इसके इलाज के सफल होने के चांसेज काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं।जानिए समाधानसमाज में प्रोस्टेट कैंसर को लेकर जागरुकता बढ़ाई जानी चाहिए। वहीं पुरुषों को भी यह समझना होगा कि वह बिना किसी संकोच या शर्म के डॉक्टर के सामने अपने परेशानियों को साझा कर सकते हैं। सही जानकारी, नियमित जांच और सही समय पर उठाया गया कदम इस &#039;साइलेंट किलर&#039; के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:10:29 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: आखिर रात को ही क्यों लगती है मिठाई और स्नैक्स की तलब, जानिए पूरा सच</title>
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<description><![CDATA[ क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि दिनभर आप अपनी डाइट का पूरा ख्याल रखते हैं, लेकिन रात होते-होते क्रेविंग्स बढ़ने लगती हैं। रात के समय अचानक कुछ मीठा, चॉकलेट, नमकीन या चिप्स खाने का मन करने लगता है और ऐसा लगता है कि मानो खुद पर कोई कण्ट्रोल ही ना रहा हो। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो आप अकेले नहीं हैं। यह एक ऐसी समस्या है, जिसका सामना हममें से अधिकतर लोग करते हैं। आपको शायद जानकर हैरानी हो, लेकिन रात में अनहेल्दी फूड खाने की तलब के पीछे सिर्फ भूख नहीं, बल्कि हमारे शरीर, हार्माेन और आदतों का भी बड़ा रोल होता है। तो चलिए आज इस लेख में हम इस बारे में बात करते हैं-इसे भी पढ़ें: Health Tips: Prostate Cancer बन रहा &#039;Silent Killer&#039;, शर्म और अनदेखी बन रही जानलेवा वजह, जानें Doctor&#039;s Warningदिनभर की थकान रिवार्ड ढूंढने पर मजबूर करती हैजब हम पूरा दिन काम करते हैं तो इससे हमें रात में थकान व तनाव का अहसास होता है। ऐसे में हमारा दिमाग खुद को कोई छोटा सा इनाम देना चाहता है। ऐसे में हम रात में सलाद या कोई हेल्दी फूड नहीं खाना चाहते, बल्कि आइसक्रीम, चॉकलेट, बिस्कुट या नमकीन खाकर खुद को खुशी और संतुष्टि का एहसास देना चाहते हैं।नींद की कमी से बढ़ सकती है क्रेविंगअक्सर हमें क्रेविंग्स देर रात होती है। इसका सीधा सा मतलब यही है कि नींद की कमी से भी कहीं ना कहीं क्रेविंग बढ़ती है। अगर आप देर रात तक जागते हैं तो शरीर के कुछ हार्माेन प्रभावित होते हैं। जिसकी वजह से भूख बढ़ाने वाला हार्मोन ज्यादा सक्रिय हो जाता है। ऐसे में रात में बार-बार कुछ खाने का मन करता है।  जरूरत से ज्यादा डाइटिंगअधिकतर लोग अपनी बॉडी को एक शेप में देखना चाहते हैं और इसलिए दिन में बहुत कम खाते हैं या फिर बेहद स्ट्रिक्ट डाइटिंग करते हैं। ऐसे में रात तक शरीर एनर्जी की कमी महसूस करने लगता है। जिससे अचानक तेज क्रेविंग शुरू हो जाती है और फिर हम खुद को रोक ही नहीं पाते हैं।रात की क्रेविंग कम करने के लिए क्या करें अगर आप रात की क्रेविंग को नेचुत तरीके से कण्ट्रोल करना चाहते हैं तो इसके लिए कुछ आसान तरीके आजमाएं।- दिनभर पर्याप्त प्रोटीन खाएं।- मील स्किप करने से बचें।- रात में अच्छी नींद लें।- तनाव कम करने के लिए खाने की जगह रिलैक्सेशन तकनीक अपनाएं।- टीवी देखते समय स्नैक खाने की आदत को धीरे-धीरे बदलें।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:10:28 +0530</pubDate>
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<title>Diabetes Warning Signs: सुबह शरीर में दिखें ये लक्षण तो समझिए बज गई खतरे की घंटी, ना करें इग्नोर</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण डायबिटीज बीमारी का खतरा बना रहता है। डायबिटीज की बीमारी एक साइलेंट किलर है, जो धीरे-धीरे शरीर को खराब करती है। पिछले कुछ सालों में भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। डायबिटीज की बीमारी एक तरह का मेटाबॉलिक डिसॉर्डर है जिसमें शरीर या पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है या उसे इसका ठीक से उपयोग करने में दिक्कत रहती है। इसलिए शरीर में इंसुलिन की कमी होने से शुगर का स्तर बढ़ने लगता है जो किडनी, स्किन, हृदय, आंखों और ओवरऑल पूरी हेल्थ को प्रभावित करता है।आपको बता दें कि, डायबिटीज की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन बच्चों, किशोर और युवा वयस्क टाइप 1 डायबिटीज से अधिक प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, टाइप 2 डायबिटीज 40 वर्ष की आयु के बाद के वयस्कों में अधिक घेरती है। यह बीमारी किडनी और दिल की बीमारियों का भी एक बड़ा रिस्क फैक्टर है।अक्सर डायबिटीज से पीड़ित लोगों को सुबह हाई ब्लड शुगर महससू होता है और उनमें गले और मुंह में शुष्की, रात भर बार-बार पेशाब करने के बाद भी पेशाब की थैली का भारी होना, नजर कमजोर होना और भूख जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। आइए आपको बताते हैं  डायबिटीज के ऐसे लक्षण जिन्हें कभी-भी नहीं भूलना चाहिए।सुबह दिखने वाले इन संकेतों को कभी न भूलेंहेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि सुबह नजर आने वाले ये लक्षण दिन में नहीं दिखते हैं, जैसे कि खुजली, थकान, कमजोरी, ज्यादा भूख लगना, ज्यादा प्यास लगना दिन और रात दोनों में हो सकता है। वजन कम होना, ठीक ना होने वाले घाव, प्राइवेट पार्ट में खुजली ये सभी लक्षण आपको दिन भर फील हो सकते हैं।डायबिटीज के अन्य लक्षण - अधिक भूख लगना - अचानक वजन कम होना - हाथों-पैरों में झुनझुनी होना - थकावट, कमजोरी और शुष्क त्वचा होना - घावों का धीरे-धीरे भरना - ज्यादा प्यास लगना - रात के समय अत्यधिक पेशाब आना - संक्रमण और बालों का झड़ना ये सभी लक्षण टाइप 2 डायबिटीज के आम लक्षण है। वहीं, टाइप 1 डायबिटीज में लोगों को मतली, पेट दर्द, उल्टी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:10:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>40 के बाद बढ़ रहा है Weight? Gym नहीं, ये 3 Home Workout हैं रामबाण इलाज</title>
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<description><![CDATA[ भागदौड़ भारी जिंदगी में खुद के लिए समय निकाल पाना काफी मुश्किल है। खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण तेजी से मोटापा बढ़ता है। 40 की उम्र में महिलाओं में थकान और वजन बढ़ने की समस्या आम है। वजन कम करने के लिए फिजिकल एक्टिविटी करना और डाइट पर खासा ध्यान दिया जाता है। अब आपको इस उम्र में वजन कम करने के लिए ज्यादा वर्कआउट करने की कोई जरुरत नहीं, बस आपको बेसिक एकसरसाइज करनी है।हेल्थ एक्सपर्ट क्या कहते हैं?हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि 40+ उम्र की महिलाओं को फिट रहने और शरीर सक्रिय रखने केलिए हैवी वर्कआउट करने की जरुरत नहीं है। बस उनको ऐसी एक्सरसाइज की जरुरत होती है, जो शरीर के अनुसार हो और पूरे दिन उन्हें एक्टिव रखें।फास्‍ट वॉकिंगजब आप बाहर जाए, तो गाड़ी लेने की जरुरत नहीं है। ब्रिस्क वॉकिंग करें और तेज चलें जिससे आप अपनी मंजिल तक पहुंच जाएं। हालांकि अपने ऊपर ज्यादा प्रेशर न डालें। यदि आपकी सांस फूलने लगे तो तुरंत रूक जाएं और आराम करें। वैसे यह कोई रेस नहीं बस आपको रोजाना सिर्फ 15 मिनट वॉक करना है, आपको फर्क नजर आ जाएगा।स्ट्रेंथ ट्रेनिंगमहिलाओं के लगता है कि 40 की उम्र में वजन घटाना काफी मुश्किल है, लेकिन इतना भी कठिन नहीं है। सही वेट और सही तरीके से हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर्याप्त होती है। बेसिक स्ट्रेंथ एक्सरसाइज40 की उम्र में वजन को कम करने के लिए महिलाओं को कुछ बेसिक स्ट्रेंथ एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसके लिए वह तीन एक्सरसाइज को रोजाना करें।लाइट डंबल चेस्‍ट प्रेस  - इसे करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं। - दोनों हाथों में हल्के डंबल पकड़ें। - अब डंबल्स को ऊपर करें, ध्यान रखे किं आपकी कलाई कंधों के सीध में रहे। - इसके बाद धीरे-धीरे वापस पुरानी पोजीशन में आ जाएं।बेंट ओवर रोस - इसको करने के लिए हल्के डंबल्स पकड़ें। - अब अपनी कमर से आगे की तरफ झुकें। - फिर डंबल्स को अपने हिप्स की तरफ खींचे और कंधे के ब्लेड्स को पास लाएं। - अब धीरे-धीरे वापस नीचे ले जाएं।ग्‍लूट ब्रिज- इस एक्सरसाइज को करने के लिए पीठ के बल लेटें। - घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर रखें। - अपने हिप्स को ऊपर उठाएं और ग्लूट मसल्स को टाइट करें। - इसके बाद धीरे-धीरे वापस पुरानी पोजीशन में आ जाएं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:10:27 +0530</pubDate>
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<media:keywords>के, बाद, बढ़, रहा, है, Weight, Gym, नहीं, ये, Home, Workout, हैं, रामबाण, इलाज</media:keywords>
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<title>क्या आपका Lifestyle भी बढ़ा रहा है High Blood Pressure का रिस्क? इन गलतियों से आज ही करें तौबा</title>
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<description><![CDATA[ आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग असंतुलित और अन्हेल्दी रुटीन का पालन कर रहे हैं, जिसका सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ रहा है। इसी वजह से हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। हर साल बड़ी संख्या में लोग इस समस्या की चपेट में आ रहे हैं। अधिक नमक का सेवन, फास्ट फूड की आदत, मानसिक तनाव, शारीरिक गतिविधियों की कमी, बढ़ता वजन, धूम्रपान और शराब का सेवन हाई ब्लड प्रेशर के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। चूंकि यह बीमारी अक्सर शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट संकेत नहीं देती, इसलिए इसे &#039;साइलेंट किलर&#039; भी कहा जाता है। आइए आपको बताते हैं हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां और इससे बचाव के प्रभावी उपाय।हाई ब्लड प्रेशर के कारणउच्च रक्तचाप के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है अत्यधिक नमक का सेवन करना। प्रतिदिन अधिक नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है। प्रोसेस्ड फूड चिप्स, नमकीन, अचार और बाहर का खाना अक्सर ज्यादा नमक से भरे होते हैं। इसके साथ ही लगातार काम का दबाव, पारिवारिक समस्याएं या मानसिक तनाव लंबे समय से बने रहने से बीपी बढ़ जाता है। दिनभर बैठे रहना, एक्सरसाइज न करना और मोटापा भी बढ़ने लगता है।खानपान की बातों पर ध्यान देंइस बात का ध्यान रखें कि प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन, तंबाकू और शराब से सेवन से धमनियों को नुकसान पहुंचाता है और हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही वजन बढ़ जाता है और पेट के आसपास की चर्बी, हृदय पर दबाव बन जाता है और बीपी बढ़ाती जाती है। हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के तरीकेउच्च रक्तचाप की समस्या से बचने के लिए समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर चेक कराते रहना चाहिए। इसके साथ ही पौष्टिक और कम नमक युक्त भोजन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। रोजाना लगभग 30 मिनट तक एक्सरसाइज करें- जैसे तेज चाल से चलना या व्यायाम करना। मानसिक तनाव को कम करने के लिए योग और ध्यान का अभ्यास करें। साथ ही धूम्रपान, तंबाकू और शराब के सेवन से दूरी बनाए रखें तथा स्वस्थ वजन बनाए रखना भी हाई ब्लड प्रेशर की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:10:26 +0530</pubDate>
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<title>सेहतमंद Papaya कब बन जाता है खतरनाक? Doctor से जानें किन लोगों के लिए है ये &amp;apos;Slow Poison&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ आमतौर पर पपीता का सेवन हर कोई करता है। असल में पपीता खाने की सलाह कब्ज होने पर दी जाती है। पपीता में डाइट्री फाइबर, विटामिन्स और कई सारे मिनरल्स पाए जाते हैं। हर किसी का पका पपीता काफी पसंद होता है यह मीठा और स्वादिष्ट होता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए कच्चे पपीते की सब्जी और इसका सलाद खाना पसंद होता है।वैसे कुछ लोगों के लिए पपीता का सेवन करना काफी फायदेमंद होता है। लेकिन कुछ लोगों के लिए यह नुकसानदायक होता है। आइए आपको बताते हैं कि पपीता खाने से किस तरह की हेल्थ प्रॉब्लम बढ़ जाती है। पपीते में कौन-से न्यूट्रिशन पाए जाते हैंसाइंस डायरेक्ट के अनुसार, पपीते में फाइबर, फोलेट, विटामिन-C, विटामिन-A, पोटैशियम, पपेन (Papain) एंजाइम पाए जाते हैं। यह फल हमेशा पाचन को सुधारने में मदद करता है और कब्ज की दिक्कत भी दूर करता है।ये लोग भूलकर भी न खाएं पपीतालेटेक्स एलर्जी होने पर पपीता न खाएंअगर आपको लेटेक्स एलर्जी से समस्या है, तो आप भूलकर भी पपीता सेवन न करें, क्योंकि इससे आपको एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है। पपीता में पाए जाने वाला नेचुरल लेटेक्स कुछ लोगों में क्रॉस-रिएक्शन पैदा कर सकते हैं। जनरल ऑफ एलर्जी एंड क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी में बताया है कि पपेन और पपीता लेटेक्स संवेदनशील लोगों में एलर्जी का कारण बनता है। असल में लेटेक्स एलर्जी पीड़ित व्यक्ति को खुजली, त्वचा पर रैशेज, होंठों में सूजन, सांस लेने में परेशानी और गले में जलन महसूस होना।प्रेग्नेंसी में कच्चा पपीता खाने से बचेंप्रेग्नेंसी के दौरान पपीता खाने की मनाही होती है। कच्चे पपीते में पाए जाने वाले लेटेक्स से बचना चाहिए। क्योंकि इससे प्रेग्नेंसी में तीव्र संकुचन हो सकते हैं, जिससे समय से पहले डिलीवरी की समस्या हो सकती है। वहीं, पपीते में पाए जाने वाले पैपेन को कुछ मामलों में गर्भवस्था के दौरान महिला का शरीर इसे गलती से प्रोस्टाग्लैंडिन समझ सकते हैं। प्रोस्टाग्लैंडिन का इस्तेमाल कई बार लेबर पेन शुरु करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, यह गर्भ में पल रहे बच्चों को सहारा देने वाली झिल्लियों को भी कमजोर कर देती है।सांस से जुड़ी समस्याएनआईएच की रिपोर्ट के अनुसार, पपीते में पाए जाने वाला पैपेन एंजाइम अस्थमा से पीड़ित लोगों में सांस लेने में तकलीफ पैदा हो जाती है। ऐसे में डॉक्टर्स बताते हैं कि अस्थमा से पीड़ित लोगों को पपीते का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर को जरुर दिखाएं। किडनी के मरीजअगर आपको किडनी संबंधित जुड़ी कोई समस्या है, तो उनको अधिक मात्रा में पपीते का सेवन करने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि पपीते में अधिक मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है। नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, जब शरीर में किसी फूड या अन्या सोर्स से पोटैशियमल की मात्रा अधिक हो जाती है, तो ऐसे में किडनी द्वारा अधिक पोटैशियमल को फिल्टर करके बाहर निकाला जा सकता है। जब किसी व्यक्ति पहले से किडनी की समस्या से पीड़ित है, तो उसको किडनी पर दबाव डालने वाले आहार का सेवन नहीं करना चाहिए।पपीता खाते समय किन बातों का ध्यान रखें?- ध्यान रहें कि हमेशा फ्रेश और पका हुए पपीता खाएं। - जरुरत से ज्यादा सेवन न करें। - किसी बीमारी में डॉक्टर की सलाह के बाद ही डाइट में बदलाव करें। - अगर आपको एलर्जी है, तो पपीता खाना बंद करें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:27:07 +0530</pubDate>
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<title>Internet का &amp;apos;झोलाछाप&amp;apos; Doctor बना ChatGPT, AI की आधी से ज्यादा Medical सलाह भ्रामक</title>
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<description><![CDATA[ आज के डिजिटल दौर में तकनीकी दुनिया में काफी बदलाव आया। जबसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आया है, तब से हर एक काम काफी आसान हो गया है। आजकल लोग अपनी हेल्थ संबंधित समस्याएं तुरंत ChatGPT से पूछते हैं। डॉक्टर से बीमारी परामर्श लिए बिना सभी लोग चैटजीपीटी से बीमारियों को उपचार कर रहे हैं, क्या यह एकदम सुरक्षित और सही तरीका है।  बीमारी के लक्षणों को समझने और मेडिकल कंडिशन के बारे में जानने से लेकर डाइट, फ़िटनेस और बचाव के तरीकों पर सलाह लेने तक, कई यूजर्स हेल्थ से जुड़ी तुरंत और आसानी से मिलने वाली गाइडेंस के लिए AI-पावर्ड टूल्स का सहारा ले रहे हैं। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया कि ChatGPT डॉक्टर की जगह क्यों नहीं ले सकता है। ChatGPT टूल है डॉक्टर नहीं हैआजकल लोग अपनी रिपोर्ट, प्रिस्क्रिप्शन और टेस्ट रिजल्ट ChatGPT पर अपलोड करके सलाह ले रहे हैं, जो कि सही नहीं है। अब मन में सवाल उठता है कि एआई सच में डॉक्टर की जगह ले सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि ChatGPT मेडिकल जानकारी को समझाने में मदद कर सकता है। आपकी रिपोर्ट के कठिन शब्दों को आसान भाषा में समझा सकता है। हालांकि, यह आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री, बॉडी चेकअप और वास्तिवक परिस्थितियों को नहीं बता सकता है। अगर आप AI की सलाह लेकर दवा शुरु करना, बंद करना या दवाई को बदल रहे हैं, तो यह आपके लिए जोखिम भरा हो सकता है। गौरतलब है कि एआई एक असिस्टेंट हो सकता है लेकिन डॉक्टर की जगह कभी नहीं ले सकता।  50% मेडिकल सलाह गलत होती हैन्यूज 18 के इंटरव्यू में हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया कि AI का इस्तेमाल हेल्थ के लिए इस्तेमाल करना इतना खतरनाक नहीं है। लेकिन उन्होंने खुलासा किया है कि चैटजीपीटी के द्वारा दी गई करीब 50% मेडिकल सलाह गलत होती है। इनमें से लगभग 20% जवाब अत्यधिक खतरनाक और भ्रामक होते है।आईसीयू (ICU) पहुंचने का खतराअक्सर ऐसे मामले में सामने आए है कि जहां लोगों ने एआई के जरिए अजब-गजब डाइट प्लान या नुस्खे को अपना लिए, जिसके बाद हालत इतनी बिगड़ गई कि आईसीयू में भर्ती होना पड़ा।ओपनएआई भी कर चुका है खुलासादरअसल, ओपनएआई ने अपनी पॉलिसी में स्पष्ट कहा है कि ChatGPT कोई डॉक्टर नहीं है और इसका प्रयोग मेडिकल ट्रीटमेंट या किसी भी तरह की सलाह के लिए इस्तेमाल बिल्कुल न करें।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:17:53 +0530</pubDate>
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<title>Hormonal Imbalance है Mood Swings की वजह? Diet और Fitness से ऐसे करें कंट्रोल</title>
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<description><![CDATA[ खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण कई बार शरीर में हार्मोनल बदलाव किए जाते हैं। जब हार्मोन में बदलाव होते हैं, तो व्यक्ति के मूड में बार-बार बदलाव, वजन बढ़ने और मनोदशा में काफी बदलाव देखने को मिलता है। हमारे शरीर में एंडोक्राइन सिस्टम हार्मोन को सर्कुलेट करता है, जो काफी कार्यों के लिए जरुरी होता है। शरीर हेल्दी बने रहे इसलिए बॉडी में कई हार्मोन्स सटीक मात्रा में लगातार बनते हैं।हार्मोन्स शरीर के ऐसे केमिकल मैसेंजर हैं जो मेटाबॉलिज्म, वजन, मूड, नींद, भूख प्रजनन क्षमता और एनर्जी लेवल को भी नियंत्रित करता है। अक्सर मेडिकल में देखा गया है कि अनियमित जीवनशैली के कारण  पीएमओएस, डायबिटीज, थायरॉयड आदि या खानपान की गलत आदतें   हार्मोन के संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। आइए आपको बताते हैं कैसे आप हार्मोनल असंतुलन को आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं। असंतुलित हार्मोन को ठीक करने के नेचुरल उपायअपनी डाइट में प्रोटीन रिच फूड्स को एड करेंएनसीबीआई के अनुसार, प्रोटीन शरीर के लिए बेहद जरुरी पोषक तत्व है। प्रोटीन शरीर को जरुरी अमीनो एसिड को प्रदान करता है, जिसकी मदद से कई जरुरी हार्मोन्स बनते हैं। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन युक्त आहार लेने से ग्रोथ हार्मोन्स और टेस्टोस्टोरोन में बढ़ोतरी होती है। रिसर्च में बताया गया है कि अगर आप हर मील में 25 से 30 ग्राम प्रोटीन लेते हैं, तो यह आपके लिए काफी फायदेमंद होता है। इसलिए आप डाइट में अंडे, दालें, पनीर, दूध, दही, चिकन, सोया और टोफू का सेवन कर सकते हैं।रोजाना एक्सरसाइज करेंहार्मोनल हेल्थ के लिए नियमित रुप से फिजिकल एक्टिविटी करना बेहद जरुरी है। NIH के अनुसार प्रतिदिन व्यायाम इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाने में मदद करता है और शरीर में ब्लड शुगर के लेवल को नियंत्रित करने में सहायक होता है। एनसीबीआई के अनुसार, नियमित एक्सरसाइज करने में एंडोर्फिन और ग्रोथ हार्मोन एक्टिव रहता है। जिससे मूड और एनर्जी लेवल बेहतर होते हैं। इसलिए रोजाना तेज चलना, साइकलिंग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, योग आदि एक्सरसाइज करें।वजन को नियंत्रित करता हैअगर आप बढ़ते हुए वजन से परेशान हैं, तो इसके पीछे का कारण हार्मोन असंतुलन होता है। एनसीबीआई के अनुसार, मोटापा इंसुलिन, लेप्टिन और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन्स के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। जब शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होता है, तो सूजन बढ़ने की संभावना अधिक होती है और इससे हार्मोनल समस्याएं होने का खतरा और भी बढ़ जाता है। वजन कम करने के लिए प्रोसेस्ड फूड, बाहर का अनहेल्दी खाना, व्हाइट ब्रेड और चीनी वाले अन्य ड्रिंक्स लेने से बचें। इसके साथ ही फिजिकली रूप से एक्टिव रहना बेहद जरुरी है।तनाव न लेंइंडियन जरनल ऑफ एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म के अनुसार, अत्यधिक तनाव शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकता है। तनाव की स्थिति में ग्लूकोकोर्टिकोइड्स, कैटेकोलामाइंस, ग्रोथ हार्मोन और प्रोलैक्टिन जैसे हार्मोनों के स्तर में बदलाव देखा जा सकता है। इनमें से कुछ बदलाव शरीर को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने में मदद करते हैं, लेकिन लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव ग्रेव्स रोग, प्रजनन संबंधी समस्याओं और बढ़ते वजन जैसी स्थितियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। इसलिए मानसिक तनाव को नियंत्रित रखना जरूरी है। इसके लिए नियमित योग और ध्यान का अभ्यास करें, अपने करीबी लोगों से खुलकर बातचीत करें, प्रकृति के बीच समय बिताएं और मनपसंद संगीत सुनकर खुद को रिलैक्स रखने की कोशिश करें।शुगर का सेवन कम करेंयूनिवर्सिटी ऑफ उटाह के मुताबिक, अधिक मात्रा में शुगर या चीनी से बनीं चीजें खाने से एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर पर काफी प्रभाव पड़ता है। इससे महिलाएं में ओव्यूलेशन से जुड़ी  समस्याएं हो सकती हैं। इसके साथ ही यह मेंस्ट्रुअल साइकिल को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए रोजाना अपनी डाइट में शामिल होने वाली शुगर या उससे बनी चीजों का बाहर करें। ब्रेड, कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा का सेवन न करें। इसकी जगह पर आप फल, गुड़, नारियल पानी का सेवन कर सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:17:52 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: ऑफिस में Work Stress और Anxiety से हैं परेशान? ये Lifestyle Tips देंगे तुरंत राहत</title>
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<description><![CDATA[ ऑफिस में वर्क स्ट्रेस की वजह से अक्सर लोगों को एंग्जायटी महसूस होती है। एंग्जायटी की असर उनके काम करने की क्षमता पर पड़ता है। आपके काम की क्वालिटी भी कम हो सकती है। ऑफिस में वर्कलोड को कम नहीं किया जा सकता है, लेकिन एंग्जायटी और स्ट्रेस को कम करना मुमकिन है। लेकिन आप अपनी लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके एंग्जायटी को कम कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको एंग्जायटी कम करने के उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं।शांत‍ि के साथ करें दिन की शुरूआतअगर आपको ऑफिस में स्ट्रेस या एंग्जायटी महसूस होती है। तो आपको दिन की शुरूआत में बदलाव करना चाहिए। जल्दी-जल्दी उठकर करीब भागते हुए ऑफिस जाने की जगह आपको अपने सुबह की शुरुआत अच्छे तरीके से करनी चाहिए। सुबह उठकर थोड़ी देर धूप में बैठें, एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग करें। एक स्टडी के मुताबिक सुबह सुस्ती दूर करने के लिए और प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे टास्क जैसे एक्सरसाइज करने से मदद मिलती है।इसे भी पढ़ें: Health Experts का दावा: गर्मियों में UTI से बचाएगा जौ का यह Super Drink, जानें बनाने का तरीका डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइजस्ट्रेस या एंग्जायटी दूर करने के लिए आपको डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करना चाहिए। आप इसको कहीं भी और कभी भी कर सकते हैं। डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से टेंशन दूर होती है और कुछ ही मिनट में आपका नर्वस सिस्टम शांत हो जाता है। डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने के लिए गहरी सांस लें और 4 गिनन तक सांस को होल्ड करें फिर 6 काउंट करने के साथ सांस को धीरे-धीरे छोड़ें।न करें मल्टीटास्किंगऑफिस में ज्यादा स्ट्रेस या एंग्जायटी की वजह अक्सर मल्टीटास्किंग यानी की एक साथ दो काम करने के कारण होती है। इससे प्रोडक्टिविटी घटती है और मेंटल फटीग और एंग्जायटी भी होती है। इसलिए काम को ब्रेक लेकर पूरा करें। एक साथ अधिक काम करने की कोशिश न करें। काम के बीच में छोटे-छोटे ब्रेक्स लें, इस दौरान स्ट्रेचिंग करें, पानी पिएं, आंखों को आराम दें और कुछ देर वॉक करें।लंबे समय तक एक जगह न बैठेंअगर आपको लगता है कि एक साथ लंबे समय तक बैठकर काम को जल्दी खत्म कर सकते हैं। तो आप पूरी तरह से गलत हैं। लंबे समय तक बैठे रहने से आपके मूड पर बुरा असर होता है। ज्यादा देर तक बैठे रहने से लो एनर्जी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हर 30-40 मिनट में 5 मिनट का ब्रेक लेना चाहिए और वॉक करना चाहिए। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और एंग्जायटी भी कम करने में मदद मिलती है।ऑफिस में अक्सर वर्क स्ट्रेस की वजह से लोगों को एंग्जायटी होती है। इसको दूर करने के लिए दिन की शुरूआत हड़बड़ी के साथ नहीं बल्कि शांति के साथ करनी चाहिए। वर्क स्ट्रेस कम करने के लिए डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें, एक जगह पर लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत को बदलें और मल्टीटास्किंग से बचना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:19:02 +0530</pubDate>
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<title>Health Experts का दावा: गर्मियों में UTI से बचाएगा जौ का यह Super Drink, जानें बनाने का तरीका</title>
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<description><![CDATA[ गर्मियों के दौरान महिलाओं को सबसे ज्यादा यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की समस्या देखने को मिलती है। इस दिक्कत से महिलाएं काफी परेशान रहती है। हर दूसरे दिन यूटीआई समस्या परेशान करती है, कई महिलाएं एंटीबायोटिक्स की दवाइयां लेती है फिर भी आराम नहीं मिलता है। गौरतलब है कि यूटीआई के दौरान जलन, खुजली और यूरिन पास करते समय दर्द महसूस होना। अगर आप भी इस तरह की समस्या से परेशान हैं, कई उपचार कर चुकी हैं, तो आप एक बार इस उपाय को जरुर ट्राई करें। कई बार महंगी दवाइयां भी समस्या के जड़ से खत्म नहीं कर पाती है। इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि यूटीआई में इस नुस्खे को जरुर ट्राई करें।यूटीआई में राहत दे सकता है यह अनाज - खासतौर पर जौ का पानी शरीर में जमा टॉक्सिन्स को बाहर निकालने, बर्निंग सेंसेशन को कम करने और आपको हाइड्रेट रखने में मदद करता है। - यह एक प्रकार से नेचुरल ड्यूरेटिक की तरह कार्य करता है और पेशाब में जलन को कम करता है। - बता दें कि, इसकी तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह शरीर को ठंडा रखता है। जौ का पानी पीने से शरीर का पीएच बैलेंस रहता है और यूरिन का एसिडिक लेवल कम होता है। - जौ का पानी में कई सारे विटामिन्स और मिनरल्स की मात्रा पाई जाती है। यह डाइजेशन को बेहतर करता है और वजन कम करने में मदद मिलती है।  - यह पानी एंटी-ऑक्सीडेंट्स को भरपूर होता है। इसलिए इंफेक्शन का खतरा कम हो जाता है और यह यूटीआई का खतरा भी कम करता है। इसके साथ ही यह पेट की गर्मी को शांत रखता है। - इसको पीने से शरीर इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बना रहता है और खून भी साफ होता है।  यूटीआई के लिए कैसे पिएं जौ का पानी? - इसके लिए आपको 2 चम्मच जौ लेना है और इसको 3-4 कप पानी में डालें। - इसे कम से कम 20 मिनट तक उबालें। - ये थोड़ा गाढ़ा हो जाएगा। फिर इसे छान लें और ठंडा होने दें।  - अब इसमें नींबू का रस और चुटकी भर नमक डालें लें।  - इसको आप दिन में एक या दो बार पी सकते हैं, इससे आपको काफी आराम मिलेगा।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:19:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Digestive Health Myths: दूध और मसालेदार खाने से जुड़ी इन बातों को मानते हैं सच? जानें पूरी सच्चाई</title>
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<description><![CDATA[ कई लोगों का मानना है कि दूध पीने से गैस और पेट फूलने की समस्या होती है। इसकी मुख्य वजह &#039;लैक्टोज इनटॉलेरेंस&#039; है। बता दें कि इसके पीछे का कारण शरीर में लैकेटेज एंजाइम की कमी होती है, जिसको दूध में मौजूद लैक्टोज पचा नहीं पाता है। आज के समय में गैस, पेट दर्द, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं आम हैं। लेकिन इनसे जुड़ी कई गलत धारणाएं आज भी लोगों के बीच मौजूद हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको पाचन से जुड़ी कुछ ऐसी अफवाहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी सच्चाई के बारे में आपको भी जानना जरूरी है। जिससे आप अपने न सिर्फ पेट बल्कि सेहत का भी सही तरीके से ध्यान रख सकें।हर मसालेदार खाना पेट के लिए नुकसानदेहहालांकि यह एक आम धारणा है, लेकिन इसमें पूरी सच्चाई नहीं है। असल में मसालों का सीमित इस्तेमाल पाचन प्रोसेस को बेहतर बनाता है। जीरा, धनिया, हल्दी और अदरक जैसे मसाले पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं। जिससे खाना जल्दी और बेहतर तरीके से पचता है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: ऑफिस में Work Stress और Anxiety से हैं परेशान? ये Lifestyle Tips देंगे तुरंत राहतलेकिन समस्या तब होती है, जब बहुत ज्यादा मसालेदार या तीखा भोजन लगातार खाया जाता है, तो इससे जलन, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है। इसलिए हमेशा संतुलित मात्रा में मसालों का सेवन करना चाहिए।दूध पीने से गैस बनती हैयह बात पूरी तरह से सच नहीं है, क्योंकि दूध एक पौष्टिक आहार है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन्स भरपूर मात्रा में होता है। लेकिन कुछ लोगों में लैक्टोज इनटॉलरेंस की समस्या होती है। इस दौरान शरीर दूध को ठीक से पचा नहीं पाता है। ऐसे लोगों को पेट दर्द, गैस या अपच की समस्या हो सकती है। बाकी लोगों के लिए यह एक हेल्दी ड्रिंक है, जोकि हड्डियों को मजबूत बनाता है और शरीर को एनर्जी देने का काम करता है।रोजाना मल त्याग न होनाबता दें कि हर व्यक्ति का पाचन तंत्र अलग-अलग होता है। इसलिए मल त्याग की भी आदत अलग हो सकती है। कुछ लोगों को दिन में एक बार या फिर दो बार भी सामान्य माना जाता है। लेकिन अगर लंबे समय तक पेट दर्द, कब्ज या भारीपन महसूस होता है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। इस स्थिति फाइबर युक्त भोजन और पानी की मात्रा बढ़ानी चाहिए।बार-बार एंटासिड दवाएं लेनाभले ही एंटासिड दवाएं फौरन राहत देती हैं, लेकिन इनको बार-बार और लंबे समय तक नहीं लेना चाहिए। इनका लगातार इस्तेमाल करने से शरीर में कैल्शियम और मैग्नीशियम का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे अन्य सेहत संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। अगर एसिडिटी बार-बार हो रही है, तो इसके पीछे के कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लेना चाहिए।खाना खाने के फौरन बाद पानी पीनाखाना खाने के फौरन बाद थोड़ी मात्रा में पानी पीना चाहिए। इससे कोई नुकसान नहीं होता है। लेकिन खाना खाने के बाद ज्यादा पानी पीने से पाचन रस पतला हो सकता है। इससे पाचन प्रोसेस धीमा हो सकता है। इसलिए खाना खाने के बाद संतुलित मात्रा में पानी पीना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:19:01 +0530</pubDate>
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<title>सुबह सूजे हुए चेहरे से हैं परेशान? जानें Water Retention और Face Swelling की 5 बड़ी वजहें</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर लोग वाटर रिटेंशन की समस्या से परेशान रहते हैं, जिसके कारण लोगों को अचानक से वजन बढ़ने, जोड़ों में अकड़न आने, दर्द होने और हाथों, पैरों, टखनों और चेहरे पर सूजन आने की समस्या का समाना करना पड़ता है। वैसे इस समस्या से बचने के लिए कुछ उपायों को अपनाया जा सकता है।वाटर रिटेंशन की समस्या क्यों होती है?हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, सुबह जब उठते हैं, तो चेहरे पर सूजन आना एक आम समस्या है और अक्सर यह किसी गंभीर बीमारी के कारण शरीर में कुछ समय के लिए पानी जमा होने यानी वाटर रिटेंशन की वजह से होता है। रातभर में चेहरे पर फ्लूइड जमा होने के पीछे ज्यादा नमक खाना, डिहाइड्रेशन, खराब नींद, हार्मोनल बदलाव और अल्कोहल जैसी चीजें आम समस्या हैं।वाटर रिटेंशन से चेहरे की सूजन को कम कैसे करें?हाइड्रेटेड रहेंवाटर रिटेंशन की समस्या से राहत के लिए शरीर पानी की सही मात्रा बनाए रखना बेहद जरुरी है। असल में आपको हाइड्रेटेड रहना बहुत जरुरी है और असरदार उपायों में से एक है। जब आपके शरीर में पानी की कमी होती है, तो वह जो भी पानी बचा होगा, उसे रोककर रखने की कोशिश करता है, जिससे सूजन और बढ़ जाती है।नमक युक्त खाने से बचेंअगर आप चेहरे की सूजन को कम करना चाहते हैं, तो आप नमकीन खीने की चीजों को कम करना चाहिए, क्योंकि सोडियम शरीर में फ्लूइड को रोककर रखने को बढ़ावा देता है। जिसके कारण वाटर रिटेंशन की समस्या बढ़ती है।नींद में सुधार करेंअगर आप वाटर रिटेंशन से राहत पाने के लिए नींद की क्वालिटी भी मायने रखते हैं, क्योंकि खराब नींद शरीर की फ्लूइड बैलेंस को नियंत्रित करने की क्षमता को बिगाड़ देती है। यह वजह है कि सुबह-सुबह चेहरा अक्सर सबसे ज्यादा सूजा हुआ दिखता है।चेहरे की हल्की मसाज करेंचेहरे पर हल्के हाथों से की गई मसाज या लिम्फ प्रवाह को बढ़ाने वाली तकनीकें जमा हुए अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर निकालने में सहायक हो सकती हैं, जिससे फूला हुआ चेहरा सामान्य दिखने लगता है। इसके अलावा, कुछ देर तक ठंडी पट्टी या ठंडे कपड़े से सेक करने पर त्वचा के नीचे मौजूद रक्त वाहिकाएं संकुचित हो जाती हैं, जिससे सूजन और भारीपन में अस्थायी रूप से राहत मिल सकती है।फिजिकल एक्टिविटीज करेंशरीर को एक्टिव रखना बेहद जरुरी है। शारीरिक रुप से एक्टिव रहने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहती है और फ्लूइड को एक ही जगह जमा होने से रोका जा सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:19:01 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: आपकी Diet में मौजूद ये Refined Carbs हैं &amp;apos;Slow Poison&amp;apos;, तुरंत करें बदलाव</title>
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<description><![CDATA[ कार्बोहाइड्रेट या कार्ब्स का नाम सुनते ही लोग इसको सबसे पहले अपनी डाइट से बाहर कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर कार्ब एक जैसा नहीं होता है। बता दें कि कार्ब्स को दो कैटेगिरी में बांटा गया है, रिफाइंड और कॉम्प्लैक्स। लेकिन इन दोनों के बीच के अंतर का पता होने से आपको वेट ल़ॉस, एनर्जी बढ़ाने और स्वस्थ रहने में मदद मिल सकती है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको अपनी डाइट से रिफाइंड कार्ब्स को बाहर करने के कई सिंपल तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं।ये चीजें कार्ब्स को बनाती हैं रिफाइनअधिकतर प्रोसेस्ड फूड सिंपल या रिफाइंड कार्ब्स की कैटेगिरी में आती हैं।जिन फूड्स में फाइबर न की मात्रा में होती है।यह कार्ब्स आसानी से पच जाते हैं, जिससे फौरन ही भूख लगने लगती है।प्रीजरेवेटिव युक्त पैकेटबंद फूड या एडेड शुगर भी सिंपल कार्ब्स माने जाते हैं।यह ब्लड शुगर को अचानक से बढ़ाते हैं।रिफाइंड कार्ब्स वाले फूड्सव्हाइट राइसपेस्ट्रीपास्तासोडाकैंडीऐसे कम करें रिफाइंड कार्बसुबह के नाश्ते से शुगरी सीरियल्स हटाकर घर का बना फ्रेश फूड खाना चाहिए। आप सुबह के नाश्ते में अंडे या फल को शामिल कर सकते हैं।ब्रेड या पास्ता जैसे सिंपल कार्ब लेने की बजाय किनुआ, ब्राउन राइस या रागी जैसे होल ग्रेन से बनी चीजों को खाना चाहिए। ऐसी चीजों को शामिल करें, जिनको तैयार करने में कम प्रोसेसिंग हो।रिफाइंड कार्ब्स वाली चीजों की बजाय सब्जियां और ताजे फलों को डाइट में शामिल करें। पैकेटबंद स्नैक्स की जगह रोस्टेड शकरकंद या सेब आदि का सेवन करना चाहिए।कार्ब्स के साथ हमेशा प्रोटीन लेना चाहिए। इससे खाना धीरे-धीरे पचता है और ब्लड शुगर भी कंट्रोल रहता है।ये मिलते हैं फायदेब्लड शुगर का सही लेवल बनाए रखने में मदद मिलती है।एनर्जी का लेवल स्थिर रहता है और आपको बार-बार भूख नहीं लगती है।पेट संबंधी समस्याएं कम होती हैं।हार्ट हेल्थ बेहतर होती है।वेट कंट्रोल होता है।किन लोगों को लेनी चाहिए सलाहप्रेग्नेंट महिलाओं को।डायबिटीज या किडनी से जुड़ी समस्या वाले लोगों को।कोई मेहनत का खेल खेलते हैं या एथलीट वाले लोगों को। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:45 +0530</pubDate>
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<title>Plant Based Protein का बढ़ता Trend: क्या ये Complete Protein है? जानिए इसका पूरा सच</title>
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<description><![CDATA[ आजकल प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर का चलन काफी बढ़ गया है। पिछले कुछ सालों में प्लांट बेस्ड प्रोटीन का सेवन तेजी हो रहा है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NLM) के अनुसार वेगन डाइट फॉलो करने वाले या फिर किसी अन्य कारणों से एनिमल प्रोटीन पाउडर का सेवन नहीं करने वाले लोग प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर का सेवन करते हैं। अब मन में सवाल उठता है कि क्या प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर से शरीर की आवश्यक प्रोटीन की पूर्ति हो सकती है? आज हम आपको इस लेख में प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर से शरीर की आवश्यक प्रोटीन की पूर्ति हो सकती है? आज हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे कि क्या प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर कम्प्लीट प्रोटीन पाउडर होता है।क्या है कम्प्लीट प्रोटीन?दरअसल, Harvard Health Report के अनुसार बॉडी को फिट रखने के लिए और मसल्स को रिपेयर होने में प्रोटीन की खास भूमिका होती है। प्रोटीन अमीनो एसिड से मिलकर बनता है, इसमें 9 एसेंशियल एमिनो एसिड मौजूद होते हैं। शरीर इन एमिनो एसिड को खुद से बनाने में सक्षम नहीं होते हैं। इनको डेली की डाइट से प्राप्त करना भी जरुरी होता है। जिस प्रोटीन में ये सभी एसेंशियल एमिनो एसिड पर्याप्त मात्रा में मौजूद हो, उसको कम्पलीट प्रोटीन माना जाता है।इसके अलावा, कम्प्लीट प्रोटीन के लिए प्रतिदिन अपने आहार में अंडा, मीट, मछली और चिकन को शामिल किया जाता है। वहीं प्लांट  बेस्ड प्रोटीन सोर्स में तकरीबन एक या दो एसेंशियल एमिनो एसिड मौजूद नहीं हो सकते हैं। क्या प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर को कम्प्लीट प्रोटीन कहा जा सकता है।प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर है &#039;कम्प्लीट प्रोटीन&#039;हार्वर्ड हेल्थ और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार, प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर कम्प्लीट प्रोटीन नहीं हो सकते हैं। लेकिन कुछ प्लांट सोर्स ऐसे भी होते हैं जिनमें जरुरी एसेंशियल एमिनो एसिड पाए जाते हैं। इनमें सोया प्रोटीन, क्विनोआ, चिया सीड्स के सेवन से कम्प्लीट एमिनो एसिड प्राप्त किया हो।प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर लेने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?बाजार में मिलने वाले ज्यादातर प्रोटीन पाउडर पर हाई प्रोटीन लिखा होता है। इसलिए सिर्फ हाई प्रोटीन देखकर प्रोडक्ट न खरीदें। हाई प्रोटीन पाउडर में एसेंशियल एमिनो एसिड मौजूद है या नहीं, इससे पता नहीं चलता है। इसलिए सबसे जरुरी है कि प्रोटीन पाउडर के बॉक्स पर लिखे इंग्रेडिएंट्स लेवल को ध्यान से पढ़ें। इसी तरह राइस प्रोटीन में लाइसिन की मात्रा अधिक होती है। इसलिए लोगों को कम्प्लीट प्रोटीन देने के लिए कुछ ब्रांडस मटर और ब्राउन राइस प्रोटीन को मिलाकर प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर तैयार करते हैं। हालांकि, आप इंग्रेडिएंट्स के लेवल पर जरुर ध्यान दें कि इसमें एडेड शुगर, आर्टिफिशियल फ्लेवर और प्रिजर्वेटिव का कितना इस्तेमाल किया गया है। जानें प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर के फायदे और नुकसान?प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर के फायदे - बॉडी को जरुरी प्रोटीन और अमीनो एसिड की पूर्ति हो सकती है। - प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर को आसानी से डाइजेस्ट किया जा सकता है। - प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर आसानी से डाइजेस्ट होता है। - इसमें फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा होती है। - वेगन और लैक्टोज इन्टॉलरेंस वालों के लिए सबसे अच्छा ऑप्शन है।प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर के नुकसान - प्रोटीन पाउडर में एडेड शुगर की मात्रा अधिक होती है। - IBS की समस्या से परेशान लोगों को गैस या ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है। - किसी-किसी प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर में एमिनो एसिड का लेवल कम होता है। - मार्केट में मिलने वाले सभी प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर कम्प्लीट प्रोटीन की पूर्ति नहीं करते हैं। इसलिए एक्सपर्ट की सलाह के अनुसार ही प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाउडर को खरीदें।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:55:00 +0530</pubDate>
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<title>40 के बाद Women में होते हैं Hormonal Changes, Menopause से पहले Diet में शामिल करें ये सुपरफूड्स</title>
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<description><![CDATA[ महिलाओं में उम्र के अलग-अलग पड़ाव पर कई तरह के हार्मोनल बदलाव शरीर में देखे जाते हैं। इसका असर इनकी सेहत पर भी होता है। अब बात चाहे पीरियड्स की हो, प्रेग्नेंसी की हो, पोस्टपार्टम की हो, पेरिमेनोपॉज की हो या मेनोपॉज की। महिलाओं के शरीर में उम्र के साथ कई तरह के बदलाव देखे जाते हैं। इस दौरान सेहत का ख्याल रखना भी बेहद जरुरी होता है। खासकर 40 साल की उम्र के बाद यानी ये समय जब पेरिमेनोपॉज शुरु होता है और शरीर धीरे-धीरे मेनोपॉज की तरफ जाता है, तो महिलाओं के शरीर में काफी बदलाव देखे जाते हैं। खासतौर पर पीरियड्स का अनियमित होना, हॉट फ्लैशेज, रात में पसीना आना, वजन बढ़ना, मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण नजर आते हैं। इस समय पर डाइट में कुछ खास चीजों को शामिल किया जाता है। पेरिमेनोपॉज में महिलाओं को जरूर खाने चाहिए ये फूड्स - हेल्थ एक्सपर्ट भी मानते हैं कि महिलाओं को डाइट का खास ध्यान बेहद जरुरी होता है। इस दौरान आप फल, सब्जियां, नट्स, सीड्स और ऐसे मसालों को डाइट का हिस्सा जरुर बनाएं, जिससे इंफ्लेमेशन कम हो जाएं, एस्ट्रोजन को बैलेंस कर सके, ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस कर सके और शरीर को ताकत दें। - इस समय पर स्किन, मूड और हार्ट हेल्थ को लेकर विशेष ध्यान देना और ऐसी चीजों का सेवन करें, जिससे आपकी त्वचा, मूड और हार्ट तीनों हेल्दी रहे। - पेरिमेनोपॉज में अनार, सेब,  आंवला और बेरीज खाएं। ये एंटीऑक्सीडेंट्स और न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होते हैं। इन फलों में इंफ्लेमेशन कम होता है, हार्मोन्स बैलेंस रहते हैं, स्किन और हार्ट हेल्दी रहते हैं।  - इसके अतिरिक्त सब्जियों में आप ब्रॉकली, गाजर और गोभी खाएं। इनमें फाइबर और कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। इनसे एस्ट्रोजन बैलेंस होता है, हड्डियां मजबूती होती हैं और शरीर डिटॉक्स होता है। - फ्लैक्स सीड्स, कद्दू के बीज, अखरोट और तिल के बीज खाएं। इनमें फाइटोएस्ट्रोजन, ओमेगा-3 और मिनरल्स होते हैं, जो हॉट फ्लैशेज को कम करते हैं। वहीं मूड स्विग्ंस को सुधारके हैं और हार्मोन्स भी बैलेंस रहते हैं। - आप अपनी डाइट में हल्दी, मेथी, दालचीनी और सौंफ के बीज को डाइट में शामिल कर सकते हैं। इनसे ब्लड शुगर लेवल रेगुलेट होता है, इंफ्लेमेशन कम होता है और पेरिमेनोपॉज में होने वाला हार्मोनल बदलाव आसानी से हो जाते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:54:59 +0530</pubDate>
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<title>हड्डियों और Muscles का Superfood है काला चना, रोज 1 कटोरी खाने से मिलेंगे गजब के फायदे</title>
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<description><![CDATA[ खराब जीवनशैली और गलत खान-पान के कारण कई लोगों को हेल्थ संबंधित समस्याएं परेशान करती है। घंटों तक ऑफिस में लगातार बैठे रहना और फिजिकल एक्टिविटी के कारण हिप्स और पीठ दर्द की समस्या देखने को मिलती है।  इस तकलीफ से बचने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय भी करते हैं, लेकिन कभी भी अपनी डाइट पर ध्यान नहीं देते हैं। अच्छे स्वास्थ्य के लिए अच्छी डाइट का होना बेहद जरुरी है। अगर आप अपने डाइट में काले चना को एड ऑन करेंगे, तो दर्द से बच सकते हैं। काला चना में कई जरुरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से पोषण देता है और मसल्स और हड्डियों को मजबूत बनाता है। यदि आप भी पीठ या हिप्स में दर्द और कमजोरी महसूस करते हैं, तो 1 कटोरी उबले चने को डाइट में शामिल कर सकते हैं। उबले काले चने क्यों फायदेमंद है?हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि उबले काले चने प्रोटीन, आयरन, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम जैसे न्यूट्रिशन से भरपूर होते हैं। इसके सेवन से ही शरीर को काफी फायदे होते हैं।प्रोटीन का अच्छा स्रोतकाला चना में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। इसमे पाए जाने वाले पोषक तत्व मसल्स को रिपेयर और मजबूत बनाने के लिए जरुरी माना जाता है। मजबूत मसल्स शरीर को अच्छी तरह से सपोर्ट मिलती है।आयरन की मौजूदगीगौरतलब है कि काला चना में आयरन की मात्रा काफी अच्छी होती है। आयरन शरीर में ऑक्सीजन के परिवहन में मदद करता है। इसके साथ ही आपको थकान कम महसूस होती है।मैग्नीशियम पाया जाताइसमें मैग्नीनिशय की मात्रा भी अधिक पाई जाती है, यह मसल्स और नसों का काम सही तरीके से करती है। इसके अलावा, इसकी पर्याप्त मात्रा शरीर के काम को बेहतर तरीके से करने में मदद करता है।फॉस्फोरस का स्रोतहड्डियों और दांतों के लिए फॉस्फोरस हेल्दी माना जाता है, क्योंकि यह जरुरी मिनरल है। संतुलित आहार में इसकी मात्रा हड्डियों को मजबूत बनाती है।कैसे खाएं काले चने?  - रात के समय काले चने को पानी में भिगो दें और सुबह इन्हें उबाल लें। - आप इन्हें सलाद में मिलाकर, हल्के मसालों के साथ या स्नैक के रुप में खा सकते हैं। - आप चाहें तो इसमें प्याज, टमाटर, नींबू और हरा धनिया मिलाकर स्वाद और पोषण दोनों बढ़ा सकती हैं।   ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:49 +0530</pubDate>
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<title>Pregnancy Care: प्रेग्नेंसी में Dehydration का Double Attack, मां और बच्चे दोनों की Health पर मंडराया खतरा</title>
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<description><![CDATA[ प्रेग्नेंसी में महिलाओं के शरीर में कई तरह के मानसिक और शारीरिक बदलाव होते हैं। वहीं अगर प्रेग्नेंसी के दौरान या गर्मी में महिला के शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो इससे मां और भ्रूण दोनों को कई तरह की समस्या हो सकती है। आम महिलाओं की तुलना में प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत होती है। क्योंकि मां का शरीर बच्चे के ब्लड सर्कुलेशन, विकास और एमनियोटिक फ्लूइड को बनाए रखने में मदद करता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि प्रेग्नेंसी में पानी की कमी कैसे मां और बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है।प्रेग्नेंसी में डिहाइड्रेशन से होने वाली समस्याएंएक्सपर्ट के मुताबिक गर्मियों में अधिक पसीना आना, उल्टी होना, कम पानी पीना या लंबे समय तक धूप में रहने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो इसका असर मां और गर्भ में पलने वाले बच्चे की सेहत पर भी असर हो सकता है।इसे भी पढ़ें: हड्डियों और Muscles का Superfood है काला चना, रोज 1 कटोरी खाने से मिलेंगे गजब के फायदेसमय से पहले डिलीवरी का जोखिमप्रेग्नेंसी में अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो इस पर ध्यान न दिया जाए। तो यूट्रेस सिकुड़ सकता है और इससे प्री टर्म लेबर यानी समय से पहले डिलीवरी का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए प्रेग्नेंसी में लंबे समय तक पानी की कमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एमनियोटिक फ्लूइड पर असरप्रेग्नेंसी में बच्चे की सेफ्टी और विकास के लिए मौजूद एमनियोटिक फ्लूइड जरूरी होता है। शरीर में पानी की कमी होने पर इसके लेवल पर असर हो सकता है। इससे मां और भ्रूण दोनों को नुकसान हो सकता है।ऑक्सीजन सप्लाई पर भी असरजब मां के शरीर में पर्याप्त फ्लूइड नहीं होता है, तो ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है। इससे गर्भ में पलने वाले बच्चे तक जरूरी पोषक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचने में समस्या हो सकती है।बच्चे की ग्रोथ कम होनाप्रेग्नेंसी के दौरान अगर लंबे समय तक गंभीर डिहाइड्रेशन बना रहता है, तो इसका असर बच्चे की ग्रोथ पर भी पड़ सकता है। इसलिए प्रेग्नेंट महिलाओं को हाइड्रेशन का ध्यान रखना चाहिए।कमजोरी और थकान महसूस होनाप्रेग्नेंसी में शरीर में पानी की कमी होने से ब्लड प्रेशर प्रभावित हो सकता है। इससे महिला को चक्कर, कमजोरी और अधिक थकान महसूस हो सकती है। कई बार अचानक चक्कर आने से गिरने या चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।सिरदर्द और मूड स्विंग्स होनाप्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलाव की वजह से महिलाओं को बेचैनी और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। ऐसे में अगर डिहाइड्रेशन हो जाए, तो यह स्थिति गंभीर हो सकती है। वहीं कुछ महिलाओं को फोकस करने और सिरदर्द की भी समस्या होती है। लगातार डिहाइड्रेशन रहने से प्रेग्नेंसी में मेंटल प्रॉब्लम्स मुश्किल पैदा कर सकती है।कब्ज और यूरिन इंफेक्शन का रिस्कएक्सपर्ट के मुताबिक प्रेग्नेंसी की शुरूआती महीने में कब्ज की समस्या होना काफी आम समस्या है। गर्मी में अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो कब्ज की समस्या अधिक गंभीर हो सकती है। वहीं प्रेग्नेंसी में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है। वहीं डिहाइड्रेशन में यह खतरा ज्यादा बढ़ सकता है।ऐसे रखें ध्यानप्रेग्नेंसी में डाइट के साथ हाइड्रेशन का ध्यान रखना जरूरी है। इसके लिए दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए। जिन महिलाओं को उल्टी होती है, उनको गर्मियों में खास ध्यान रखना चाहिए। आप नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और घर के बने हेल्दी ड्रिंक्स शरीर में फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट्स बनाए रखने में सहायता कर सकते हैं। वहीं आप मौसमी फल भी खा सकती हैं, इससे शरीर हाइड्रेट रहता है। वहीं अगर आप प्रेग्नेंसी में दर्द या थकान महसूस हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:48 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: खून की कमी वाली महिलाएं सावधान! चाय की ये आदत बढ़ा सकती है Health Risk</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में बहुत सी महिलाएं एनीमिया की समस्या से जूझ रही हैं। खराब खानपान, प्रेग्नेंसी, पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग और आयरन की कमी इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। एनीमिया होने पर शरीर में हीमोग्लोबिन का लेवल कम हो जाता है। जिससे चक्कर आना, कमजोरी, सांस फूलना और थकान जैसी समस्याएं होने लगती हैं। दिनभर में कई महिलाएं कई बार चाय पीती हैं, लेकिन उनको यह पता नहीं होता है कि यह आदत उन समस्या को अधिक बढ़ा सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक एनीमिया से पीड़ित महिलाओं को खाना खाने के फौरन बाद चाय पीने से बचना चाहिए। क्योंकि इससे शरीर में आयरन का अवशोषण प्रभावित होता है।क्यों कम पीनी चाहिए चायएक्सपर्ट के मुताबिक चाय में टैनिन नामक तत्व पाया जाता है। यह शरीर में आयरन को सही तरीके से अवशोषित नहीं होने देता है। वहीं जब कोई महिला आयरन का भरपूर खाना खाने के फौरन बाद चाय पीती है, तो भोजन से मिलने वाला आयरन पूरी तरह शरीर तक नहीं पहुंच पाता है। इससे धीरे-धीरे शरीर में आयरन की कमी बढ़ सकती है। खासतौर पर ब्लैक टी और ज्यादा गाढ़ी चाय का असर देखने को मिलता है। यही वजह है कि एनीमिया महिलाओं को खाने के कम से कम 1 से 2 घंटे बाद चाय पीने की सलाह दी जाती है।इसे भी पढ़ें: Pregnancy Care: प्रेग्नेंसी में Dehydration का Double Attack, मां और बच्चे दोनों की Health पर मंडराया खतराजो महिलाएं पहले से एनीमिया से पीड़ित हैं, उनको जरूरत से ज्यादा चाय पीना शरीर की कमजोरी बढ़ा सकता है।शरीर में आयरन की कमी होने से ऑक्सीजन का फ्लो सही तरीके से नहीं हो पाता है। इससे सुस्ती और थकान महसूस होती है।अगर इस स्थिति में लगातार चाय पीती हैं, तो शरीर में आयरन की कमी और गंभीर हो सकती है।कई महिलाएं सुबह खाली पेट चाय पीती हैं। जोकि एनीमिया में नुकसान पहुंचाती है। इससे एसिडिटी, गैस और पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।डाइटीशियन की सलाहएनीमिया से बचने और शरीर में आयरन का लेवल बढ़ाने के लिए आयरन से भरपूर डाइट लेनी चाहिए। डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, अनार, चुकंदर, गुड़ और ड्राई फ्रूट्स शामिल करना चाहिए। इससे शरीर में आयरन बढ़ाने में मदद करता है। वहीं इसमें विटामिन C से भरपूर चीजें जैसे आंवला, नींबू और संतरा खाने से आयरन का अवशोषण बेहतर होता है। अगर किसी महिला को बार-बार चक्कर, थकान या कमजोरी महसूस हो रही है, तो उसको फौरन ब्लड टेस्ट कराना चाहिए। वहीं डॉक्टर की सलाह पर आयरन सप्लीमेंट लेना चाहिए।क्या करेंएनीमिया से पीड़ित महिलाओं को ज्यादा या भोजन के फौरन बाद चाय पीना नुकसानदेह है। चाय में मौजूद टैनिन भोजन से मिलने वाली आयरन के अवशोषण को रोक देता है। जिससे शरीर में हीमोग्लोबिन का लेवल गिरता है। इससे थकान और कमजोरी बढ़ती है। इस समस्या से बचने के लिए खानपान में सुधार करना जरूरी है। महिलाओं को अपनी डाइट में विटामिन सी और आयरन से भरपूर चीजों को शामिल करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: Heat Sensitivity को न करें नजरअंदाज, हो सकती है ये गंभीर Medical Condition</title>
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<description><![CDATA[ गर्मी में पसीना आना और थकान महसूस होना एक आम बात होती है। लेकिन कुछ लोगों को कम गर्मी में भी बहुत ज्यादा गर्मी लगने लगती है। थोड़ी देर धूप में रहने पर कुछ लोगों को बेचैनी, चक्कर आना, सिरदर्द, ज्यादा पसीना, दिल की धड़कन तेज होना और कमजोरी महसूस होने जैसे लक्षण दिखते हैं। यह सिर्फ गर्मी के मौसम का असर नहीं बल्कि मेडिकल कंडीशन का भी संकेत हो सकता है।  हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो शरीर का तापमान कंट्रोल करने की क्षमता जब प्रभावित होने लगती है। तो व्यक्ति गर्मी के प्रति ज्यादा सेंसिटिव हो जाता है। वहीं कई बार यह समस्या थायराइड, डिहाइड्रेशन, हार्मोनल गड़बड़ी या नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियों की वजह से भी हो सकती है।इसे भी पढ़ें: Time पर नहीं आते पीरियड्स? रसोई की इन 3 चीजों से बना काढ़ा है अचूक उपाय, जानें यह Expert Tipगर्मी के प्रति सेंसिटिव बनाती हैं ये बीमारियांहाइपरथायरायडिज्महेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक हाइपरथायरायडिज्म ऐसी स्थिति है, जिसमें थायराइड ग्लैंड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है। इससे बॉडी का मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है। वहीं व्यक्ति को सामान्य तापमान भी बहुत गर्म महसूस होने लगता है। ऐसी स्थिति में लोगों को अधिक पसीना आना, तेजी से वेट घटना और दिल की धड़कन बढ़ जाना और बेचैनी महसूस होती है।मल्टीपल स्क्लेरोसिस और नर्व सिस्टम की समस्या होनाशरीर की गर्मी सहन करने की क्षमता को कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियां भी प्रभावित करती हैं। ऐसी ही एक बीमारी मल्टीपल स्क्लेरोसिस है, जिसमें नसों और मस्तिष्क के बीच संदेश पहुंचाने वाले प्रोसेस प्रभावित हो जाते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक एमएस के मरीजों को हल्की गर्मी में भी धुंधला दिखाई देना, थकान महसूस होना या कमजोरी लगने लगती है। वहीं शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ने से लक्षण गंभीर हो सकते हैं। वहीं ऑटोनोमिक नर्व डिसऑर्डर जैसी स्थितियों में भी शरीर सही तरीके से तापमान कंट्रोल नहीं कर पाता है।डायबिटीज, मोटापा और हार्ट डिजीजहार्ट डिजीज और डायबिटीज भी शरीर के तापमान कंट्रोल करने के प्रोसेस को प्रभावित करता है। डायबिटीज में नसों को नुकसान पहुंच सकता है। जिससे शरीर को ठंडा रखने की क्षमता भी कम हो जाती है। वहीं हार्ट डिजीज की समस्या होने पर ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है, जिससे शरीर सही तरीके से गर्मी बाहर नहीं निकाल पाता है।दवाओं का सेवनशरीर में पानी की कमी होना भी हीट सेंसिटिविटी की बड़ी वजह बन सकता है। जब शरीर में पर्याप्त पानी नहीं होता है, तो पसीना सही तरीके से नहीं निकल पाता है। वहीं शरीर का तेजी से तापमान बढ़ने लगता है। कुछ दवाएं भी शरीर के कूलिंग सिस्टम को प्रभावित कर सकती हैं। इसमें भी मरीज को ज्यादा गर्मी महसूस होने लगती है। अगर किसी दवा को खाने से असहनीय गर्मी लगने लगे, तो आपको फौरन डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक हीट सेंसिटिव लोगों को दिन के सबसे गर्म समय यानी की दोपहर में 12 से 4 के बीच घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। अगर बार बार उल्टी, ज्यादा चक्कर आना, कमजोरी या सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो ऐसे में भी फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। क्योंकि यह हीट स्ट्रोक या हीट एक्सॉशन का संकेत हो सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:59:08 +0530</pubDate>
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<title>लगातार थकान और भूलने की आदत सिर्फ Stress नहीं, Brain Tumor का हो सकता है Warning Sign</title>
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<description><![CDATA[ भागदौड़ भारी जिंदगी में क्या आप भी रोजाना थकान महसूस करते हैं। बातों को भूल जाना या मेंटली ड्रेन फील होना। लंबे समय तक काम करना, स्क्रीन का लगातार इस्तेमाल, नींद पूरी न होना और हर वक्त का तनाव इन सभी कारणों को हम सभी नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार लोग इन संकेतों को स्ट्रेस या बर्नआउट समझ लेते हैं, लेकिन हर बार ऐसा होना जरुरी नहीं है। इस तरह के संकेत तनाव नहीं, इसके पीछे गंभीर बीमारी भी हो सकती है। यह ब्रेन ट्यूमर के लक्षण भी हो सकते हैं। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि ब्रेन ट्यूमर होने पर सिर्फ दौरे पड़ना या दिमाग से जुड़ी कोई बहुत बड़ी और गंभीर समस्या ही सामने आती है, सच तो यह है कि इसके शुरुआती लक्षण काफी आम और सामान्य होते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। इन संकेतों को समझना जरुरी है। रोज की थकान नॉर्मल नहींवैसे रोजमर्रा की जिंदगी में थकान फील होना नॉर्मल है। हालांकि, हर समय आप थकान को महसूस करते हैं तो यह सही नहीं है। कई बार लोगों को लगता है कि ऐसा ज्यादा काम करने के कारण हो रहा है और वो थोड़ा आराम करेंगे तो ठीक हो जाएंगे, लेकिन यह जरुरी नहीं है। यदि आपकी पूरी नींद और आराम के बाद भी थकान फील होती है और इसका असर आपकी रोज की लाइफ पर हो रहा है, तो यह ठीक नहीं है।बार-बार सिरदर्द होनाआज के समय में सिरदर्द की समस्या काफी आम हो चुकी है। ऐसे कई लोग हैं, जो हर दूसरे दिन सिरदर्द से परेशान रहते है, लेकिन वे इस पर ध्यान नहीं देते हैं। जिससे कमजोरी, कभी थकान तो कभी जुकाम की वजह से होने वाला सिरदर्द को मान लेते हैं। यदि सिरदर्द के साथ उल्टी महसूस हो, जी मिचलाए या सिर के अंदर दबाव फील हो, तो यह तनाव के कारण होने वाला सिरदर्द बिल्कुल नहीं है।चक्कर आनायदि आपकी दृष्टि बार-बार धुंधली हो रही है, छोटी-छोटी बातें याद रखने में परेशानी हो रही है, किसी काम में ध्यान केंद्रित करना कठिन लग रहा है या अक्सर चक्कर आने की शिकायत रहती है, तो इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार मूड बदलना, मानसिक रूप से थकान महसूस होना या भावनात्मक अस्थिरता भी कुछ मामलों में ब्रेन ट्यूमर से जुड़े लक्षण हो सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:59:07 +0530</pubDate>
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<title>Heat Stroke Alert: बच्चों के लिए जानलेवा हो सकती है गर्मी, इन Summer Tips से करें बचाव</title>
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<description><![CDATA[ बच्चों के लिए गर्मियों का मौसम सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण माना जाता है। क्योंकि बच्चे का शरीर बड़े लोगों की तुलना में तापमान को जल्दी कंट्रोल नहीं कर पाता है। बढ़ता तापमान, तेज धूप और लू की वजह से बच्चे में हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ता है। हीट स्ट्रोक एक ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान अचानक से ज्यादा हो जाता है। वहीं अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।छोटे बच्चों में कमजोरी, डिहाइड्रेशन, तेज बुखार, चक्कर आना, बेहोशी जैसी लक्षण जल्दी दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में माता-पिता को एक्स्ट्रा सतर्क रहने की जरूरत होती है। वहीं कुछ आसान लेकिन जरूरी सावधानियां अपनाकर बच्चे को हीट स्ट्रोक और गर्मी के खतरे से सेफ रख सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: Mood Swings को कहें Bye-Bye, ये 5 योगासन देंगे Instant Stress Reliefपर्याप्त पानी देंगर्मी में बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। क्योंकि पसीने के रूप में शरीर से पानी तेजी से निकलता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।बच्चे को नारियल पानी, छाछ, ORS और घर पर बना नींबू पानी पीना चाहिए। यह शरीर में जरूरी मिनरल्स और इलेक्ट्रोलाइट्स बनाए रखता है।छोटे बच्चों को बाहर से खेलने के बाद फौरन पानी देना चाहिए।दोपहर की धूप में न निकलने देंबच्चे को दोपहर में घर से न निकले दें, क्योंकि इस दौरान तापमान ज्यादा होता है। वहीं इस दौरान लू लगने का खतरा भी बढ़ जाता है।सुबह 11 से शाम 4 बजे तक बच्चे को बाहर धूप में खेलने या घूमने न भेजें।अगर बच्चे का बाहर जाना जरूरी है, तो उसको छांव में रखें और ज्यादा देर धूप में न रहने दें।सूती और हल्के कपड़े पहनाएंबच्चे को गर्मियों में हमेशा सूती और ढीले कपड़े पहनाने चाहिए।सूती कपड़े आसानी से पसीना पोंछ लेते हैं और शरीर को ठंडा रखने में सहायता करते हैं।ज्यादा टाइट कपड़े या सिंथेटिक कपड़े पहनने से बच्चे को खुजली, घमौरियां और बेचैनी हो सकती है।तली-भुनी चीजें कम देंगर्मियों के मौसम में बच्चों का पाचन तंत्र जल्दी प्रभावित हो सकता है।ऐसे में बच्चे को ज्यादा तला भुना, जंक फूड और मसालेदार खाना देने से उसका पेट खराब हो सकता है, साथ ही शरीर में गर्मी बढ़ने की समस्या हो सकती है।बच्चे को दही, सलाद, ताजे फल, खिचड़ी और हल्का घर का बना खाना देना ज्यादा फायदेमंद रहता है।कैप और छाते का इस्तेमालजब भी बच्चे को बाहर ले जाए, तो उसको कैप या छाता जरूर दें। जिससे कि धूप सिर और चेहरे पर सीधे न पड़े।तेज धूप से बच्चे को बचाने के लिए सनग्लास का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।इन उपायों से बच्चों को गर्मी और UV किरणों के नुकसान से बचाया जा सकता है।शरीर को ठंडा रखेंगर्मियों में घर का तापमान सामान्य रखना जरूरी होता है।कमरे में एसी, कूलर या पंखे का इस्तेमाल करें। लेकिन बच्चे को बहुत ज्यादा बंद या गर्म जगह पर न रहने दें।वहीं बच्चे को समय-समय पर ठंडे पानी से हाथ-पैर और चेहरा धुलवाएं। इससे भी उसको राहत मिलेगी।हीट स्ट्रोक के लक्षणअगर बच्चे को चक्कर आना, कमजोरी, उल्टी, सिरदर्द, बेहोशी या तेज बुखार आने जैसी समस्या हो रही है। तो यह हीट स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में बच्चे को फौरन ठंडी जगह पर ले जाएं, शरीर को ठंडा करें और बिना किसी देरी के डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि सही समय पर सही इलाज मिलने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:56:14 +0530</pubDate>
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<title>Time पर नहीं आते पीरियड्स? रसोई की इन 3 चीजों से बना काढ़ा है अचूक उपाय, जानें यह Expert Tip</title>
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<description><![CDATA[ खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण भी कई समस्याएं शरीर में देखने को मिलती है। महिलाओं को हर महीने पीरियड्स आना एक नेचुरल बायोलॉजिकल प्रक्रिया है, लेकिन ये लेट हो जाए, तो बड़ी समस्या हो जाती है। क्या आप भी लेट पीरियड्स की समस्या से परेशान हैं। 2-3 दिन पीरियड्स लेट आए, तो यह नॉर्मल है। अगर 1 हफ्ते से ज्यादा लेट आते हैं, तो आगे चलकर आपको दिक्कत हो सकती है। ऐसे में आपको घबराने की जरुरत नहीं है। इस लेख में हम आपको बताएंगे ऐसा घरेलू उपचार, जिसके इस्तेमाल से ही आपके पीरियड्स जल्दी आ जाएंगे। किचन में मौजूद इन 3 चीजों से बनाएं यह स्पेशल काढ़ा। एक्सपर्ट की रायडॉक्टर भी मानते है कि कभी-कभी कुछ दिनों के लिए पीरियड्स लेट आना काफी नॉर्मल होता है। इसके पीछे तनाव, पूरी नींद न लेना, हार्मोनल में बदलाव, वजन में उतार-चढ़ाव, ज्यादा एक्सरसाइज या लाफइस्टाल से जुड़े कई कारण हो सकते हैं। ऐसे में आपको चिंता छोड़कर कुछ हेल्दी आदतें अपनाना चाहिए। आइए आपको बताते हैं काढ़ा बनाने की विधि-काढ़ा बनाने की सामग्री- मेथी के बीज - 1 चम्मच - अजवाइन - 1/2 चम्मच - पार्सले की टहनियां- 8-9 - पानी- 200 मिलीलीटरकाढ़ा कैसे बनाएं? - सबसे पहले एक पैन में पानी डालें। - अब इसमें मेथी, अजवाइन और पार्सले मिलाएं। - इसे अच्छी तरह उबालें। - जब पानी थोड़ा कम हो जाए तब गैस बंद कर दें। - इसको छानकर हल्का गर्म होने पर रात को सोने से पहले पी लें।काढ़ा कब पीना चाहिए?यदि आपके पीरियड्स रेगुलर आते हैं, तो अनुमानित पीरियड डेट से करीब 7 दिन पहले इस काढ़े को पीना शुरु कर सकते हैं।जानें काढ़े में मौजूद चीजों के फायदेपार्सलेमहिलाओं के लिए यह जड़ी-बूटी बेहद ही फायदेमंद है। इसमें पाए जाने वाले पीरियड्स फ्लो को सपोर्ट करते हैं। इसके साथ ही इसमें विटामिन A, C और K जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद हैं। मेथीमेथी के दानों को महिलाओं की सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। इनमें मौजूद फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स और अन्य पोषक तत्व शरीर के हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। नियमित रूप से उचित मात्रा में मेथी का सेवन करने से पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है, साथ ही मेटाबॉलिज्म को भी समर्थन मिलता है, जिससे पूरे हेल्थ को फायदा पहुंच सकता है।अजवाइनअजवाइन पेट से संबंधित समस्याओं गैस, अपच और पेट के भारीपन को कम करती है। इसकी गर्म तासीर के कारण पीरियड्स में होने वाली ऐंठन और पेट की असुविधा कम होती है, क्योंकि इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है। वहीं, पेट की मसल्स को आराम मिलता है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:56:13 +0530</pubDate>
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<title>Heatwave का कहर! ये 5 Superfoods घटाएंगे Body Heat, गर्मी से मिलेगा तुरंत आराम</title>
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<description><![CDATA[ गर्मियों में बढ़ता हुआ तापमान से बॉडी हीट की कई समस्याएं देखने को मिलती हैं। भीषण गर्मी में शरीर को अंदर से ठंडा रखना बेहद जरुरी है। तेज गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के दौरान शरीर में ठंडक बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में यदि आप हेल्थ एक्सपर्ट द्वारा बताए गए कुछ खास खाद्य पदार्थों को अपनी रोजाना की डाइट में शामिल करती हैं, तो शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने और गर्मी के प्रभाव से बचाने में सहायता मिल सकती है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं गर्मियों में किन फूड्स का सेवन करने से शरीर ठंडा बना रहता हैं।छाछगर्मियों में छाछ पीना हेल्दी मानी जाती है। इससे पेट भी ठंडा बना रहता है और शरीर को भी ठंडक मिलती हैं। इसके साथ ही डाइजेशन भी बेहतर रहता है, एसिडिटी कम होती है और पाचन संबंधित समस्याएं नहीं होती है।  इसको आप लंच के बाद ले सकते हैं। इसमें करी पत्ता,जीरा और पुदीना मिलाकर जरुर पिएं। गर्मियों में आप दही को भी डाइट में शामिल कर सकते हैं। यह प्रोबायोटिक्स से भरपूर होता है, जिससे गट हेल्द भी दुरुस्त रहती है।नारियल पानीगर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखना काफी जरुरी है। नारियल पानी इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होता है। नारियल पानी पीने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस रहता है। यह थकान को दूर करता है और शरीर को ताकत मिलती है। गर्मियों में डेली नारियल पानी को डाइट में जरुर शामिल करें। इससे शरीर को ठंडक मिलती है। इसमें आप बेसिल सीड्स डाल सकते हैं, इससे खून की कमी नहीं होगी।पुदीनापुदीना गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला एक बेहतरीन नेचुरल ऑप्शन माना जाता है। इसकी तासीर ठंडी होती है, जो शरीर के बढ़ते तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है। साथ ही, यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाकर पेट से जुड़ी समस्याओं से राहत दिला सकता है। गर्म मौसम में आप पुदीने को अपनी रोजमर्रा की डाइट में शामिल कर सकती हैं। इसे चटनी, सलाद या ताजगी भरे पेय के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। पुदीने का पानी या डिटॉक्स ड्रिंक भी शरीर को हाइड्रेट और तरोताजा रखने में सहायक होता है।नींबूनींबू में कई सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं, इनमें भरपूर मात्रा में विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते है। नींबू का नियमित सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी सहायक माना जाता है। गर्म मौसम में नींबू शरीर को ताजगी देने और लू के प्रभाव से बचाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, यह पाचन तंत्र को एक्टिव रखता है और वेट मैनेज में भी योगदान दे सकता है। आप इसे नींबू पानी के रूप में पी सकते हैं या सलाद और अन्य व्यंजनों में मिलाकर अपने आहार का हिस्सा बना सकते हैं।खीराखीरा में भरपूर मात्रा में पानी पाया जाता है। समर सीजन में खीरा का सेवन करना फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखता है और बॉडी की हीट को कम करता है। इससे डाइजेशन बेहतर होता है और ब्लोटिंग कम होती है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:56:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: Mood Swings को कहें Bye&#45;Bye, ये 5 योगासन देंगे Instant Stress Relief</title>
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<description><![CDATA[ आज ही लाइफस्टाइल से जुड़ी एक आम समस्या मूड स्विंग्स है, जोकि नजरअंदाज करने वाली समस्या नहीं है। उदासी, अचानक गुस्सा, बेचैनी या चिड़चिड़ापन यह सभी मानसिक असंतुलन का संकेत हो सकता है। नींद की कमी, तनाव, हार्मोनल बदलाव और अनिय़मित लाइफस्टाइल इसके प्रमुख कारण हैं। ऐसे में योग एक प्राकृतिक और प्रभावी उपाय है। जोकि शरीर और मन दोनों को संतुलित करता है। योग हमारे नर्वस सिस्टम को शांत करता है और हार्मोनल संतुलित करने में सहायता करता है और दिमाग के पॉजिटिव सोच को बढ़ावा देता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको मूड स्विंग्स को कंट्रोल करने वाले योगासन के बारे में बताने जा रहे हैं।बालासनइस आसन को करने से मानसिक थकान दूर होगा और ओवरथिंकिंग का समस्या भी कंट्रोल होती है। आप तुरंत रिलैक्सेशन के लिए यह आसन कर सकते हैं। इसके लिए घुटनों के बल बैठें और सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। फिर माथा जमीन पर लगाते हुए दोनों हाथ आगे की ओर रखें। फिर आंखें बंद कर सामान्य सांस लें।इसे भी पढ़ें: Health Tips: IVF Treatment के दौरान Stress बन सकता है विलेन, Doctor से जानें कैसे बढ़ेगा Success Rateसेतु बंधासनसेतु बंधासन का अभ्यास करने से थकान और तनाव कम होता है और हार्मोन को संतुलित करने में मदद मिलता है। इस आसन को करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं, पैरों को जमीन पर रखें और घुटनों को मोड़ें। अब हाथ को आगे की ओर रखें और सांस लेते हुए कमर को ऊपर की ओर उठाएं। ठुड्डी छाती पर रखें और कुछ सेकेंड रुकें और धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं।भुजंगासनभुजंगासन का अभ्यास करने से हार्मोन बैलेंस करने में मदद मिलती है। यह आसन डिप्रेशन और लो मूड लाभकारी होता है और यह शरीर में ऊर्जा बढ़ाने में सहायता करता है। इस आसन को करने के लिए पेट के बल जमीन पर लेट जाएं, हथेलियों को कंधों के पास रखें। सांस लेते हुए छाती को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं और नाभि को जमीन से लगाए रखें। इस पोजिशन में कुछ सेकेंड रुकने के बाद सांस छोड़ते हुए वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। इस आसन को 5 से 7 बार दोहराएं।शवासनइस आसन को करने से मानसिक तनाव कम होता है और नकारात्मक विचार कम आते हैं। वहीं दिमाग भी रिलैक्स होता है। इस आसन को करने के लिए पीठ के बल सीधे लेट जाएं, आंखें बंद करें और हाथ-पैर ढीला छोड़ दें। फिर रिलैक्स होते हुए सांस पर ध्यान फोकस करें।सुखासनइस आसन को करने से मन शांत होता है, तनाव और एंग्जायटी कम होती है। साथ ही भावनात्मक संतुलन बनाए रखें। इस आसन को करने के लिए पलथी मारकर बैठें, रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और दोनों हाथ घुटनों पर रखें। फिर आंखें बंद करते हुए गहरी सांस लें और सांस आने-जाने पर ध्यान केंद्रित करें। सुखासन को आप 5-10 मिनट तक कर सकते हैं।वज्रासनवज्रासन का अभ्यास करने से पाचन तंत्र सुधरता है और मन स्थिर होता है। इस आसन को भोजन के बाद किया जा सकता है। वज्रासन करने के लिए घुटनों के बल बैठे, पैरों को पीछे रखें और एड़ियों पर बैठ जाएं। अब रीढ़ को सीधा रखें और सामान्य सांस लें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 06 Jun 2026 11:08:36 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: IVF Treatment के दौरान Stress बन सकता है विलेन, Doctor से जानें कैसे बढ़ेगा Success Rate</title>
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<description><![CDATA[ अगर कोई कपल नेचुरल तरीके से पेरेंट नहीं बन पाता है, तो फिर कपल IVF की सहायता लेते हैं। हालांकि यह एक बेहतरीन ऑप्शन है। सामान्यत: महिलाएं IVF के जरिए गर्भवती हो जाती हैं। लेकिन यह आसान प्रोसेस नहीं है। इस प्रोसीजर के दौरान महिलाओं को कई तरह की समस्याएं, हार्मोनल बदलाव और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां तक कि कुछ महिलाओं को IVF तकनीक के दौरान ज्यादा तनाव होने लगता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि स्ट्रेस का IVF प्रोसेस पर क्या असर पड़ता है। साथ ही यह भी जानेंगे कि क्या तनाव लेने से IVF का रिजल्ट बदल सकता है।तनाव और IVF के बीच संबंधतनाव कई तरह की समस्याओं को जन्म देता है। वहीं तनाव के कारण हमारे शरीर में स्ट्रेस हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है। जो शरीर को बुरी तरह से प्रभावित करता है। साल 2024 के एक शोध पत्र के मुताबिक ज्यादा तनाव और चिंता IVF के इलाज को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। वहीं तनाव इसकी सफलता दर को कम कर सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Daily Lemon Water पीने से पहले जानें ये बातें, फायदे की जगह हो सकते हैं ये गंभीर Side Effects IVF प्रोसेस के दौरान तनाव लेने से एड्रिनिलिन और कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ता है। यह दोनों हार्मोन महिला की प्रजनन क्षमता पर सीधे-सीधे बुरा असर डालते हैं। जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के लेवल को बिगाड़ सकते हैं। ऐसे में IVF प्रोसेस का रिजल्ट प्रभावित हो सकता है।अगर आप लंबे समय तक तनाव में रहते हैं, तो शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है। IVF प्रोसेस के दौरान अगर महिलाएं तनाव में रहती हैं, तो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के कारण से महिलाओं में अंडों की गुणवत्ता और पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता प्रभावित हो सकती है। यह स्थिति भी IVF प्रोसेस की सफलता में बाधा डाल सकती है।जब तनाव बढ़ता है, तो शरीर की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती है। इस स्थिति में ब्लड फ्लो में अवरोध पैदा होता है। अगर IVF के दौरान भी तनाव लेते हैं, तो गर्भाशय की ओर से होने वाला ब्लड सर्कुलेशन कम हो सकता है। ऐसे में भ्रूण के गर्भाशय की दीवार से चिपकने की संभावना पर भी असर पड़ता है।कैसे कम करें तनावएक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए और इस दौरान विशेषज्ञ और काउंसलिंग की सलाह मददगार होती है।सेल्फकेयर पर ध्यान देना चाहिए, इससे IVF जर्नी आसान लगने लगेगी।अगर आपको कोई बात परेशान कर रही है, उसका समाधान खोजें। वहीं जरूरत पड़ने पर परिवार की मदद लें।माइंडफुल एक्टिविटी करनी चाहिए। वहीं आप डॉक्टर की सलाह पर हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करना चाहिए।IVF प्रोसेस के दौरान पार्टनर के साथ अपने इमोशनल बॉन्ड को मजबूत बनाना चाहिए। बता दें कि IVF फेल होने के लिए सिर्फ तनाव जिम्मेदार नहीं होता है, लेकिन इसकी सफलता दर में कमी जरूर आती है। इसलिए प्रयास करें कि इस प्रोसेस के दौरान तनाव न दें। वहीं IVF के दौरान योग करना, मानसिक शांति बनाए रखना और सकारात्मक रहना बेहद जरूरी होता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:04:50 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: पेट में बढ़ गया है Pitta Dosha? डाइट में शामिल करें ये 5 Superfoods, मिलेगी ठंडक</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर गर्मी के मौसम में खाना खाने के फौरन बाद पेट में जलन, एसिडिटी या भारीपन लगने लगता है। अगर आपको भी यह महसूस होता है, तो यह पेट की गर्मी के लक्षण हैं। तेज गर्मी के कारण कुछ लोगों के साथ ऐसा होता है, जोकि बाद में पेट की गंभीर समस्या के रूप में सामने आती है। बाहर के बढ़ते तापमान का असर आपके पेट पर भी होता है। गर्मी के मौसम में पाचन तंत्र में असंतुलन होने की वजह से पेट फूलन, एसिड रिफ्लक्स, ब्लोटिंग और खाना हजम न होने जैसी समस्याएं होती हैं।बता दें कि इसके पीछे सिर्फ बढ़ता तापमान नहीं बल्कि खाने-पीने में लापरवाही और डिहाइड्रेशन भी अहम कारण हैं। आयुर्वेद में इस समस्या को पित्त दोष कहा जाता है। तला-भुना, अनियमित दिनचर्या, मलालेदार खाना और पानी की कमी इस समस्या को बढ़ा देती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस मौसम में पेट को कैसे ठंडा रखें और पाचन तंत्र को मजबूत कैसे बनाएं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: शहद से लेकर गाय का दूध, 1 साल से छोटे बच्चों के लिए ये फूड्स हैं जानलेवापित्त दोष क्यों होता हैजब शरीर में पानी की कमी होती है, तो इससे पाचन क्रिया प्रभावित होती है। डिहाइ़ड्रेशऩ की वजह से शरीर का तापमान बढ़ता है और पेट से गर्मी निकलती है।जब आप ज्यादा खाना खाते हैं, तो इससे भी पाचन तंत्र पर प्रेशर पड़ता है। जिससे पेट में एक्स्ट्रा गर्मी पैदा होती है।बैक्‍टीरियल या वायरल इंफेक्‍शन की वजह से पेट की गर्मी और आंतों में सूजन आ सकती है। क्योंकि इस मौसम में बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं, वहीं बासी खाना या फिर दूषित स्ट्रीट फूड खाने से भी पेट में इंफेक्शन बढ़ता है।पेट में लंबे समय तक गर्मी रहने से आंतों में सूजन और अल्सर बनने की संभावनाएं बढ़ती हैं।जानिए कैसी हो आपकी डाइटतरल पदार्थों का सेवन करेंइस मौसम में पेट को ठंडा रखने और पाचन तंत्र को मजबूत रखने के लिए पेय पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए।कैमोमाइल चाय पाचन तंत्र को आराम देती है और एसिडिटी की समस्या को भी कम करने में सहायता करती है।आप हिबिस्कस चाय का सेवन कर सकते हैं, यह तापमान को कंट्रोल करने और शरीर को ठंडक प्रदान करती है।गर्मियों में पुदीने की चाय का सेवन कर सकते हैं। यह पेट फूलने के राहत दिलाती है और पाचन क्रिया भी बेहतर होती है।पुदीना का पानी, सौंफ और धनिया का पानी, दही, सत्तू, नारियल पानी और छाछ आदि का सेवन करना चाहिए। यह भी पेट को ठंडा रखता है। आप चाहें तो रोजाना सुबह के समय गोंद का पानी भी सकते हैं। यह पूरा दिन पेट को ठंडक देता है। वहीं इस मौसम में चिया सीड्स भी भिगोकर खाना चाहिए।हल्का भोजन लाभकारीगर्मी के दिनों में भोजन हमेशा हल्का करना चाहिए, मसलन आपको अगर तीन रोटी की भूख है, लेकिन आपने दो रोटी खाई है तो पेट हैवी नहीं होगा। इस मौसम में छिलके वाली या मूंग की धुली दाल, तूहर दाल, दलिया, खिचड़ी, रागी आदि का आहार पेट के लिए बेहतरीन विकल्प है। दरअसल, इस मौसम में जल्दी पचने वाला भोजन ही ग्रहण करना चाहिए। आप चाहें तो दही चावल, किनुआ, पोहा भी खा सकते हैं। पाचन तंत्र मजबूत करने के लिए फाइबर युक्त आहार भी जरूरी है।इन चीजों से करें परहेजमसालेदार और हैवी खाना खाने से पाचन क्रिया स्लो हो जाती है। इसलिए प्रयास करें कि गर्मियों में डिब्बा बंद चीजें, तली-भुनी चीजें और रेडी टू इट फूड्स से दूरी बनाएं। ऐसा खाना खाने से एसिडिटी बढ़ने की संभावना रहती है।हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक तेज गर्मी और शरीर में पानी की कमी का सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है। गर्मी में तापमान कंट्रोल रखने के लिए शरीर ज्यादा पानी खर्च करता है। अगर शरीर में पानी की कमी होती है, तो पाचन स्लो हो जाता है। जिसकी वजह से कब्ज, गैस और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। ऐसे मौसम में कैफीन का अधिक सेवन भी नुकसान पहुंचा सकता है।गर्मियों में लोगों को फूड इंफेक्शन और पेट खराब होने की शिकायत ज्यादा रहती है। इसलिए इस मौसम में हल्का और सुपाच्य भोजन लेना चाहिए। वहीं लंबे समय तक भूखे रहने से भी एसिडिटी की समस्या बढ़ती है। एक बार में नहीं बल्कि थोड़ी मात्रा में भोजन करना बेहतर होता है। वहीं देर रात हैवी खाना, ज्यादा मसालेदार खाना और बाहर की खुली चीजों को खाने से पेट में जलन हो सकती है। वहीं अगर बार-बार दस्त, उल्टी, पेट दर्द या ब्लोटिंग की समस्या हो रही है, तो फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:12:52 +0530</pubDate>
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<title>Daily Lemon Water पीने से पहले जानें ये बातें, फायदे की जगह हो सकते हैं ये गंभीर Side Effects</title>
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<description><![CDATA[ आजकल भीषण गर्मी के बचने के लिए ठंडा नींबू पानी मिल जाए तो मजा आ जाता है। गर्मियों में नींबू पानी ठंडक पाने के लिए अमृत से कम नहीं है। वैसे सुबह खाली पेट नींबू पानी पीना हेल्दी रुटीन बन गया है। इसे कई महिलाएं वेट लॉस, शरीर को डिटॉक्स करने और दिन की हेल्दी शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है।कुछ लोग तो इसमें शहद मिलाकर पीने से चेहरे पर बेदाग निखार आता है। इस लेख में बताएंगे कि नींबू पानी पीना सच में फायदेमंद है या इसे कितनी मात्रा में पीना सही होता है।नींबू पानी पीने के फायदेनींबू पोषक तत्वों से भरपूर होता है, इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन C और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं। नियमित रूप से संतुलित मात्रा में नींबू पानी का सेवन करने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और ताजगी बनी रहती है। पानी में नींबू मिलाने से उसका स्वाद बेहतर हो जाता है, जिससे लोग अधिक मात्रा में तरल पदार्थ पीने के लिए प्रेरित होते हैं। इसके अलावा, विटामिन C शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है और त्वचा को स्वस्थ व चमकदार बनाए रखने में भी सहायक होता है। क्या वेट लॉस में मदद करता है नींबू पानी?ऐसे में कुछ महिलाओं का मानना है कि नींबू पानी पीने से वजन तेजी से कम होता है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। नींबू अपने आप फैट नहीं जलाता है। लेकिन आप मीठे ड्रिंक्स की जगह बिना चीनी वाला नींबू पानी पीते हैं,तो यह कैलोरी कम करने में मदद करता है और वेट मैनेजमेंट का हिस्सा बन सकता है।रोज नींबू पानी पीने के साइड इफेक्‍ट्सनींबू पानी का सेवन फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग कुछ परेशानियां भी पैदा कर सकता है। जरूरत से ज्यादा या अधिक खट्टा नींबू पानी पीने पर कई महिलाओं को सीने में जलन, अपच, गैस या पेट में असहजता महसूस हो सकती है।  विशेष रूप से जिन लोगों को एसिडिटी, माइग्रेन या पाचन संबंधी समस्याएं रहती हैं, उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। साथ ही, नींबू में मौजूद अम्लीय तत्व दांतों की बाहरी परत को कमजोर कर सकते हैं। ऐसे में नींबू पानी स्ट्रॉ की मदद से पीना और इसके बाद मुंह को सादे पानी से साफ करना एक अच्छा विकल्प माना जाता है।नींबू पानी पीने के सही तरीकेनींबू पानी पीने का सही तरीका है इसे पर्याप्त पानी में मिलाकर पिया जा सकता है और इसमें ज्यादा चीनी न डालें। खाली पेट पीना सही नहीं होता है। इसे दिन में किसी भी सम अपनी सुविधा और शरीर प्रतिक्रिया के अनुसार पी सकते हैं।आखिर हम कह सकते है कि रोज नींबू पानी पीना सही हो सकता है लेकिन इसे चमत्कारी उपाय मानने के जगह संतुलित खानपान और स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा समझना ज्यादा जरुरी है। शरीर के संकेतों को समझें और कोई परेशानी फील हो सकती है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:12:51 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: शहद से लेकर गाय का दूध, 1 साल से छोटे बच्चों के लिए ये फूड्स हैं जानलेवा</title>
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<description><![CDATA[ 1 साल से कम उम्र के बच्चे का डाइजेस्टिव सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता है। इसलिए इस उम्र में दिया गया भोजन बच्चे की सेहत पर सीधा असर डालता है। गलत या भारी भोजन न सिर्फ पाचन संबंधी समस्याएं पैदा करता है, बल्कि कई गंभीर समस्याओं की वजह बन सकता है। बाल रोग एक्सपर्ट की मानें, तो 6 महीने तक के बच्चे के लिए सिर्फ मां का दूध ही सबसे ज्यादा सुरक्षित होता है। इसके बाद धीरे-धीरे बच्चे को पूरक आहार देना शुरू किया जाता है। लेकिन बच्चे को हर फूड बहुत सावधानी के साथ दिया जाना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि 1 साल से कम उम्र के बच्चे को कौन-कौन से फूड्स नहीं देना चाहिए।कौन से फूड्स नहीं देने चाहिएएक्सपर्ट के मुताबिक एक साल से छोटे बच्चे को शहद देना भी खतरनाक हो साबित हो सकता है। शहद में मौजूद बैक्टीरिया बच्चे के कमजोर डाइजेस्टिव सिस्टम में बोटुलिज्म नामक बीमारी पैदा कर सकते हैं। वहीं इस उम्र में बच्चे को चीनी, चॉकलेट और मिठाइयां आदि में नहीं देना चाहिए। यह बच्चे के दांतों और डाइजेशन दोनों के लिए नुकसानदेह है।इसे भी पढ़ें: Nutrient Deficiency: India में Vitamin B12 की कमी बनी Health Problem, Diet में शामिल करें ये 5 Superfoodsदूध और डेयरी प्रोडक्ट्स देना1 साल से पहले बच्चे को गाय का दूध देना सही नहीं माना जाता है। क्योंकि गाय के दूध में मौजूद मिनरल्स और प्रोटीन की मात्रा बच्चे की किडनी पर ज्यादा दबाव डाल सकती है। वहीं इतनी छोटी उम्र में क्रीम, पनीर और अन्य भारी डेयरी प्रोडक्ट्स भी पचाना मुश्किल होता है और यह एलर्जी का कारण भी बन सकता है।नमक और प्रोसेस्ड फूड देनाएक साल से कम उम्र वाले बच्चों के लिए नमक का सेवन सीमित या फिर बिल्कुल न के बराबर होना चाहिए। क्योंकि ज्यादा नमक बच्चे की किडनी पर असर डाल सकता है। इसके अलावा 1 साल से कम उम्र के बच्चे के लिए चिप्स, पैकेज्ड फूड, बिस्किट और प्रोसेस्ड स्नैक्स भी नुकसानदायक हो सकते हैं।ठोस फूड्सएक्सपर्ट की मानें, तो अंगूर, पॉपकॉर्न, नट्स, गाजर के बड़े टुकड़े या कोई भी सख्त भोजन देना बच्चे में दम घुटने की वजह बन सकता है। इस उम्र में हमेशा बच्चे को मैश किया हुआ खाना या फिर बहुत नरम खाना बच्चे को देना चाहिए। जिसको बच्चा आसानी से निगल ले। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 08:02:39 +0530</pubDate>
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<title>पेट के इस दर्द को न करें Ignore, हो सकता है Gall Bladder Stone, जानें इसके Symptoms</title>
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<description><![CDATA[ खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण कई सारी बीमारियां बन ही जाती हैं। आजकल आपने काफी सुना होगा कि गॉल ब्लैडर में स्टोन यानी पथरी की समस्या काफी आम हो चुकी है। जिसके गॉल ब्लैडर में स्टोन (पथरी) हो जाती है, तो फिर वे सर्जरी से इसे निकालवाते हैं। अब ये समस्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है और कई बार शुरुआत में इसके साफ लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक सर्वे के मुताबिक, भारत में लगभग 8 प्रतिशत लोग गॉल ब्लैडर से जुड़ी समस्याओं से प्रभावित हैं। हेल्थ एक्सपर्ट ने माना है कि गलत खानपान, अधिक तला-भुना खाना, मोटापा और अनियमित जीवनशैली के कारण यह बीमारी अधिक होती है। आइए आपको गॉल ब्लैडर स्टोर के बारे में विस्तार से जानकारी बताते हैं। यह समस्या कब होती है?पाचन से जुड़े जरुरी एंजाइम को सेफ रखने वाले इस महत्वपूर्ण अंग से संबंधित प्रमुख समस्या यह है कि इसमें स्टोन बनने की आशंका बहुत अधिक होती हैं, जिन्हें गॉल स्टोन कहा जाता है। खासकर, जब गॉल ब्लैडर में तरल पदार्थ की अधिक मात्रा सूखने लगती है तो इसमें मौजूद चीनी-नमक और अन्य माइक्रोन्यूट्रीएंट तत्व एक साथ जमा होकर छोटे-छोटे पत्थर टुकड़ों जैसा रूप धारण हो जाते, जिन्हें गॉलस्टोन्स भी कहा जाता है। आपको बता दें कि, यह दो प्रकार के होते हैं-कोलेस्ट्रॉल और पिगमेंट। कोलेस्ट्रॉल स्टोन पीले-हरे रंग के होते हैं। ओबेसिटी से पीड़ित लोगों और स्त्रियों में कोलेस्ट्रॉल स्टोन्स की समस्या नजर आती है। जब ब्लैडर में ब्लैक या ब्राउन कलर के स्टोन्स नजर आती हैं तो पिगमेंट स्टोन्स कहा जाता है। इस तरह की स्टोन्स शुद्ध कैल्शियम बिलिरुबिनेट से बनी होती हैं। आमतौर पर जब गॉल ब्लैडर में अनकॉन्जुगेटेड बिलिरुबिन नामक तत्व अधिक मात्रा में जमा हो जाता है तो इससे पिगमेंट स्टोन्स की समस्या होती है।प्रमुख लक्षणगॉलस्टोन की समस्या शुरुआती दौर में अक्सर बिना किसी संकेत के रहती है, इसलिए कई लोगों को इसका पता नहीं चल पाता। लेकिन जैसे-जैसे पथरी का आकार या प्रभाव बढ़ने लगता है, गॉल ब्लैडर में सूजन, संक्रमण या पित्त नलिकाओं में अवरोध पैदा हो सकता है। इस स्थिति में पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में तेज दर्द, अत्यधिक गैस बनना, पेट भरा-भरा महसूस होना, मतली या उल्टी आना तथा अधिक पसीना निकलने जैसी परेशानियां दिखाई देने लगती हैं।आखिर क्या वजह है?यदि आपकी शारीरिक एक्टिविटी और एक्सरसाइज की कमी, अधिक मात्रा में घी-तेल और मिर्च-मसाले के सेवन को इस समस्या के लिए जिम्मेदार माना जाता है। अगर आप लंबे समय से गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने या हार्मोन रिप्लेस्मेंट थेरेपी लेने वाली स्त्रियों में इस तरह की आशंका बढ़ जाती है। मोटापा घटाने वाली दवाओं की साइड इफेक्ट से भी गॉल ब्लैडर में स्टोन हो सकता है।  उपचार क्या है?यदि आपको शुरुआती चरण में इसके लक्षणों के बारे में पता चल जाए, तो इस समस्या को दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है। स्थिति ज्यादा ही गंभीर है, तो सर्जरी कराएं। आजकल लेप्रोस्कोपी द्वारा इसकी सर्जरी करके गोल ब्लैडर को ही शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है और सर्जरी के 2-3 महीने बाद मरीज ठीक हो जाता है। वहीं, सर्जरी के बाद व्यक्ति को सादा और संतुलित खानपान खाना चाहिए। इसके 15 दिनों के बाद एक्टिव जीवनशैली अपना सकते हैं।क्या जरुरी है? - इससे बचने के लिए बादाम और अखरोट का सेवन करना चाहिए। - खानपान में दलिया, मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटी, सोयाबीन, ओट्स, अंकुरित अनाज, पपीता, गाजर, सेब और अमरूद जैसी फाइबर युक्त फूड्स का सेवन करना चाहिए। - फिश और फ्लैक्स सीड में ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो इस समस्या से बचाव में मददगार होता है। - प्रतिदिन 8-10 दस ग्लास पानी पिएं और अपने खानपान में तरल पदार्थों की मात्रा अधिक करें।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 08:02:38 +0530</pubDate>
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<title>Travel के दौरान Motion Sickness से हैं परेशान? Summer Trip पर आजमाएं ये 8 रामबाण उपाय</title>
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<description><![CDATA[ इस समय बच्चों को गर्मियों की छुट्टियां शुरु हो चुकी हैं। ऐसे में माता-पिता भी कहीं घूमने के लिए जाते हैं, लेकिन कई लोगों को यात्रा के दौरान उल्टी और जी मचलने लगता है। जिस वजह लोग ट्रिप को अच्छे से एन्जॉय नहीं करपाते हैं। ऐसे कई लोग हैं, जो सफर पर जाने के लिए तैयार रहते हैं लेकिन उल्टी, चक्कर आना, जी मचलाने जैसी परेशनियों के कारण यात्रा से दूर भागते हैं। कुछ लोगों का मानना होता है कि सफर में जाने से पहले तला-भुना, तीखा और हेवी खाने के वजह से उल्टी होती है, लेकिन एक्सपर्ट की माने तो यह स्थिति शरीर के नर्वस सिस्टम में असंतुलन खोने की वजह से होती है। इस वैज्ञानिक भाषा में मोशन सिकनेस कहा जाता है। क्या है मोशन सिकनेस?सरल भाषा में समझें तो यह मोशन सिकनेस तब होती है, जब आपके मस्तिष्क को शरीर के उन हिस्सों से परस्पर विरोधी संदेश मिलते हैं, जो गति का अनुभव करते हैं, जैसे कि आंखे, कान, मांसपेशियां और जोड़। अक्सर कई बार यात्रा के समय आपका शरीर नियंत्रण खोने लगता है और उस समय दिमाग को भीतरी कान, आंख और त्वचा से अलग-अलग सिग्नल मिलने लगते हैं, जिससे नर्वस सिस्टम दुविधा में पड़ जाती है, तब इस तरह की स्थिति पैदा होती है और लोगों को उल्टी, चक्कर आने जैसी समस्याएं देखने को मिलती है।मोशन सिकनेस बचने के लिए क्या करें?अदरक का सेवन करेंयदि आपको यात्रा करते समय उल्टी या जी मचलता है, तो इस दौरान समय अदरक खाएं। अदरक गैस, जी मचलना, पेट दर्द जैसी समस्याओं को दूर करता है। आप चाहे तो सफर के दौरान अदरक की चाय पी सकते हैं। इसके अलावा, अदरक कैंडी या फिर कच्ची अदरक नमक के साथ खा सकती हैं जिससे उल्टी नहीं आएगी। जब आप यात्रा करें, तो माउथ में अदरक का टुकड़ा रख लें। आप चाहे तो पुदीना या काली मिर्च भी खा सकते हैं।केले से मिलेगा ताजगीकेले में भरपूर मात्रा में पौटेशियम पाया जाता है, इसमें इलेक्ट्रोलाइट होता है। सफर से पहले केला खाने से शरीर में शक्ति बनीं रहती है और शरीर में ताजगी बनीं रहती है।हाइड्रेटेड रहेंकुछ लोग ट्रैवलिंग के दौरान कुछ लोग पेशाब की डर के वजह से पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते हैं। सफर में कम पानी पीने से भी उल्टी होने लगती है। इन सबसे बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी-पानी जरुर पिएं। आप चाहे पानी में नींबू या ग्लूकोज डाल सकते हैं। ताजे पानी वाले फल खाएंजब आप यात्रा करें तो आप ताजे खीरा या अमरूद लेकर खा सकते हैं। अमरुद व खीरा में काला नमक डालकर खाने से आपका मन और भी अच्छा हो जाएगा। इसके सेवन से आपका पेट हल्का रहेगा और तरोताजा बन रहेगा।मीठा या शुगरअक्सर सफर में मीठी चीजें खाने से उल्टी होने लगती है या फिर जी मचलता है। इसलिए यात्रा के दौरान मीठी चीजें खाने से बचें।शराब या कैफीन से दूरी सफर पर निकलने से पहले या यात्रा के दौरान शराब और कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए। ये चीजें शरीर में पानी की कमी पैदा कर सकते हैं, जिससे चक्कर आना, बेचैनी और मतली जैसी समस्याएं अधिक बढ़ सकती हैं। यात्रा को आरामदायक बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहतर विकल्प है।तला-भुना खानायात्रा करते समय सबसे जरुरी है कि तला-भुना खाना बिल्कुल न खाएं। कई बार में सफर में पूड़ी-पराठे खाते हैं जिसके बाद उल्टी या जी मचलने लगता है। अधिक तीखी वाले खाद्य पदार्थ का भी सेवन न करें। ब्रेक लेकर ठंडी हवा लेंअगर आप यात्रा करते समय जी मचलने लगे तो गाड़ी को रोककर बाहर ठंडी हवा लें। बस में खिड़की खोलकर बाहर की हवा लें। ऐसा करने से उल्टी बंद हो जाएगी।इसके अलावा, जब आप सफर करें, तो किताब पढ़ सकते हैं या फिर मोबाइल का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा करने से उल्टी नहीं आएगी। गाड़ी में हमेशा ड्राइवर के पास ही बैठें और हमेशा सामने देखें।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 08:02:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Nutrient Deficiency: India में Vitamin B12 की कमी बनी Health Problem, Diet में शामिल करें ये 5 Superfoods</title>
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<description><![CDATA[ शरीर को सेहतमंद बनाए रखने का सबसे असरदार मंत्र पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेना है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक सभी लोगों को अपनी डाइट में ऐसी चीजों को शामिल करना चाहिए। जिससे शरीर के लिए जरूरी न्यूट्रिशन की आसानी से पूर्ति हो सके। वहीं तमाम रिपोर्ट्स इस बात को लेकर चिंता जताते रहे हैं कि अधिकतर भारतीयों को अच्छे पोषण के लिए जरूरी न्यूट्रिशन नहीं मिल पा रहे हैं। जिस कारण शरीर में आयरन, फोलेट और विटामिन बी12 जैसे जरूरी तत्वों की कमी तेजी से बढ़ रही है।प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक भारतीयों में विटामिन बी12 की कमी एक &#039;साइलेंट हेल्थ क्राइसिस&#039; है। जोकि करीब 47% से 51% आबादी को प्रभावित करती है।इस तरह अनुमान के मुताबिक करीब 37% आबादी फोलेट की कमी से प्रभावित है। शरीर पोषक तत्वों की कमी थकान, चक्कर आने, कमजोरी और हाथ-पैरों में झनझनाहट से लेकर कई गंभीर समस्याओं की वजह बन सकती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल में बताने जा रहे हैं कि शरीर में फोलेट और विटामिन बी12 की कमी होने पर पुरुषों और महिलाओं में इसका क्या असर होता है।विटामिन B12 और फोलेट की कमीहेल्दी लोगों में विटामिन बी12,फोलेट और थकान की बीच पाया गया यह संबंध अपनी तरह की पहली रिपोर्ट है।ब्लड में हीमोसिस्टीन का लेवल बढ़ने को अभी तक से डिमेंशिया, हृदय रोग और फ्रैक्चर के खतरे से जोड़कर देखा जाता रहा था।भविष्य में थकान और मोटिवेशन पर भी ध्यान देना चाहिए।अध्ययन में क्या निकलाबता दें कि 600 से अधिक हेल्दी जापानी प्रतिभागियों में फोलेट, होमोसिस्टीन और विटामिन बी12 मापी गई। जिसमें थकान और मोटिवेशन का आकलन किया गया।शुरूआती परिणामों से पता चला कि जिन लोगों के खून में हीमोसिस्टीन का लेवल ज्यादा था, उनमें फोलेट और विटामिन बी12 का लेवल कम था। फिर चाहे वह पुरुष हों या महिलाएं हों।कैसे पूरी करें इसकी कमीविटामिन बी12 की पूर्ति के लिए अपनी डाइट मुख्य अंडा, मछली, दूध, दही, चिकन और मीट खाने की सलाह दी जाती है।वहीं फोलेट की पूर्ति के लिए डाइट में ब्रोकली, चना, पालक, मेथी, राजमा, दालें, मूंगफली और खट्टे फलों का शामिल करना फायदेमंद माना जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 07:47:36 +0530</pubDate>
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<title>Mood Swings और Mental Stress का रामबाण इलाज, ये योगासन देंगे Instant Relief</title>
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<description><![CDATA[ आजकल बिजी लाइफस्टाइल के चलते लोगों में दिनों-दिन स्ट्रेस बढ़ता जा रहा है। अगर आप भी मूड स्विंग्स की समस्या से परेशान रहते हैं, तो अपने दिनचर्या में योग एक्सरसाइज करना शुरु कर सकते हैं। अचानक से गुस्सा, उदासी, चिड़चिड़ापन या बैचेनी, ये सभी मानसिक संतुलन संकेत हो सकते हैं। गौरतलब है कि तनाव, हार्मोनल बदलाव, नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या इसके प्रमुख कारण हैं। इसके लिए योग एक प्राकृतिक और प्रभावी तरीका है, जो शरीर और मन दोनों को संतुलित करता है। ये योगासन करने से नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं, हार्मोलन संतुलित करने के कार्य करता है। आइए आपको बताते हैं कौन-से योगा पोज नियमित रुप से करने चाहिए।बालासनइस योगासन के करने से मानसिक थकान दूर होती है और ओवरथिंकिंग की समस्या नियंत्रित होती है। इस योग करने से रिलैक्सेशन के लिए कर सकते हैं। इस करने के लिए आप घुटनों के बल बैठें और सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। इसके बाद अपने माथे को जमीन से लगाते हुए दोनों हाथ आगे की ओर रखें और आंखें बंद कर सामान्य सांस लें।सेतु बंधासनयह तनाव और थकान कम करता है और हार्मोन को संतुलित करने में मदद करता है। इसे करने के लिए आप योगा मेट पर पीठ के बल लेट जाएं, घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर रखें। हाथ को आगे की ओर रखें और सांस लेते हुए कमर को ऊपर उठाएं। अब ठुड्डी छाती की ओर रखें, कुछ सेकेंड रुकें और धीरे-धीरे वापस आएं।भुजंगासनभुजंगासन करने के लिए आपके हार्मोंस को बैलेंस करना बहुत जरुरी है। यह लो मू़ड और डिप्रेशन के लिए लाभकारी और यह शरीर की ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है। इसके लिए पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। अब  हथेलियों को कंधों के पास रखें। सांस लेते हुए धीरे-धीरे चेस्‍ट ऊपर उठाएं, नाभि जमीन से लगाए रखें। इस पोजिशन में कुछ सेकेंड रुकें और सांस छोड़ते हुए वापस आएं। इस योगासन को आप 5 से 7 बार दोहराएं।शवासनइस योगासन के करने से मन में आने वाले नेगेटिव विचारों और मानसिक तनाव को दूर करता है। यह दिमाग को पूरी तरह रिलैक्स करता है। इसके लिए पीठ के बल सीधे लेट जाएं, हाथ-पैर ढीले छोड़ दें, आंखें बंद करें और एकदम शांत होकर ध्यान पर फोकस करें। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 07:47:35 +0530</pubDate>
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<title>हर छोटी बात पर बढ़ जाता है तनाव? ये 7 माइंड ट्रिक्स मिनटों में देंगी सुकून</title>
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<description><![CDATA[  आजकल हर कोई स्ट्रेस की समस्या से जूझ रहा है। वर्क प्रेशर, रिलेशनशिप से जुड़ी समस्याएं और भविष्य की चिंताएं युवाओं को सबसे ज्यादा परेशान कर रखा है। हमारी खराब जीवनशैली से भी तनाव बढ़ जाता रहा है। स्ट्रेस हमारे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर काफी असर दिखाता है। इसको मैनेज करना भी बेहद जरुरी है वरना ये डिप्रेशन स्टेज पर भी पहुंच सकता है। इसलिए खुद को स्वस्थ रखने के लिए स्ट्रेस को सही तरीके से मैनेज करें। आइए आपको बताते हैं कैसे स्ट्रेस को कंट्रोल करें।स्ट्रेस मैनेज करने के लिए क्या करें?डीप ब्रीदिंग की प्रैक्टिस करेंजब तनाव बढ़े या फिर हमें बहुत तेज गुस्सा आए, तो जरा भी रिएक्शन न दें। इस दौरान आप रुकें और गहरी सांस लेना शुरु कर दें। ऐसा करने से आपका नर्वस सिस्टम शांत होता है और दिमाग साफ तरीके से सोचने के लिए मदद करता है। इसलिए रोजाना डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें। उदाहरण के तौर पर  जैसे 4 सेकंड सांस अंदर लें, 6 सेकंड होल्ड करें और 8 सेकंड तक बाहर छोड़ें। इससे आपका शरीर और मन शरीर रिलैक्स होता है।सदैव आज पर ही फोकस रखेंअक्सर व्यक्ति को स्ट्रेस बीते हुए समय की चिंता से आता है या आने वाले कल की फ्रिक से। इसलिए आज के समय में जिएं। खाने, चलने या काम करने के दौरान हर क्रिया को महसूस करें। यह तकनीक तनाव को कम करती है।दिन का प्लान बनाएंजब आपके पास कार्य का कोई शेड्यूल न हो, तो यह काम बोझ लगने लगता है। हर सुबह समय निकालकर अपनी प्रथमिकताएं तय करें। जरुरी कामों की लिस्ट बनाएं और इन्हें एक-एक करके पूरा करें।भरपूर मात्रा में पानी पिएं और हेल्दी डाइट लेंगौरतलब है कि तनाव लेने से  कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है, जो एनर्जी लेवल को कम कर देता है। ऐसे में पानी और हेल्दी फूड्स जैसे कि फल, सलाद, ओट्स, और नट्स लें। इस दौरान कैफीन और जंक फूड से दूर रहे हैं।खुद से पॉजिटिव बात करेंयह एकदम सत्य है कि नेगटिव विचार स्ट्रेस को बढ़ा देते हैं। इसलिए अपने मन को शांत रखने के लिए सेल्फ टॉक की प्रैक्टिस करें।प्रकृति के संपर्क में रहेंरोजाना कुछ समय घर से बाहर प्राकृतिक वातावरण में बिताने की आदत डालें। किसी बगीचे, हरियाली वाले क्षेत्र या खुले स्थान पर जाकर ताजी हवा और सूरज की हल्की किरणों का आनंद लें। प्रकृति के बीच बिताए गए ये छोटे-छोटे पल मन को सुकून देते हैं और तनाव को कम करने में मदद करते हैं।विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, हरियाली और खुले वातावरण के संपर्क में रहने से शरीर में डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे रसायनों का स्तर बढ़ता है, जिससे मन प्रसन्न और ऊर्जावान महसूस करता है।अच्छी नींद और आराम को प्राथमिकता देंजब आप स्ट्रेस को अधिक लेते हैं, तो सबसे जरुरी पर्याप्त नींद लेना। क्योंकि थका हुआ दिमाग तनाव और हवा देता है। सोने से पहले स्क्रीन बंद कर दें।  हल्का म्यूजिक सुनें या ध्यान करें। रोजाना 7-8 घंटे तक नींद आपको मानसिक रुप से मजबूत बनाती है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:04:31 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: Smoking का सीधा असर Heart पर! जानें कैसे बढ़ाता है Bad Cholesterol और Heart Attack का Risk</title>
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<description><![CDATA[ पूरी दुनिया में स्मोकिंग करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। WHO के मुताबिक दुनियाभर में करीब 130 करोड़ लोग तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें 80 फीसदी कम और मिडिल इनकम वाले देश शामिल हैं। सिगरेट पीना सबसे आम माना जाता है। वहीं दुनियाभर में सिगार, हीटेड टोबैको, हुक्का, खैनी, पाइप, गुटका और हाथ से बनाई जाने वाली बीड़ी या सिगरेट भी तंबाकू में शामिल हैं।आमतौर पर स्मोकिंग करना फेफड़ों से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन इसका असर कोलेस्ट्रॉल और हार्ट पर पड़ता है। सिगरेट से निकलने वाले केमिकल्स और निकोटिन शरीर की आर्टरीज को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि स्मोकिंग का कोलेस्ट्रॉल पर कितना असर पड़ता है।इसे भी पढ़ें: Summer Vacation में बच्चे बन रहे Mobile के आदी? उनकी Diet और इन Indoor Games पर दें ध्यानक्या होता है कोलेस्ट्रॉलकोलेस्ट्रॉल मोम जैसा फैटी पदार्थ है, जिसकी सही मात्रा होने से हमारा शरीर सेहतमंद रहता है। यह फैटी पदार्थ सीधे ब्लड में नहीं घुल सकता, इसलिए यह शरीर में मौजूद लिपोप्रोटीन का इस्तेमाल करता है। लिपोप्रोटीन, प्रोटीन और फैट से मिलकर बनता है। जोकि ब्लड के जरिए कोलेस्ट्रॉल को पूरे शरीर में ले जाता है, वहीं लिपोप्रोटीन दो तरह का होता है।LDLLDL लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन है। जिसको खराब कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। अगर ब्लड में इसका लेवल बढ़ जाता है, तो आर्टरीज की दीवारों पर प्लाक बनने लगता है। जिससे स्ट्रोक, हार्ट अटैक या हार्ट से जुड़ी बीमारियां होने का रिस्क बढ़ सकता है।HDLHDL एक हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन है। जिसको अच्छा कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। HDL ब्लड में मौजूद एक्स्ट्रा कोलेस्ट्रॉल और प्लाक को लेकर लिवर तक जाता है। जिसको लिवर की सहायता से शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। ब्लड में अगर HDL ज्यादा होता है, तो दिल संबंधी जोखिम को कम किया जा सकता है। कोलेस्ट्रॉल जीन्स और लाइफस्टाइल से प्रभावित होता है। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो लाइफस्टाइल में स्मोकिंग के बड़ी वजह है जिससे कोलेस्ट्रॉल पर असर पड़ता है। जो लोग स्मोकिंग ज्यादा करते हैं या फिर कई सालों से स्मोक कर रहे हैं, उनका कोलेस्ट्रॉल लेवल बिगड़ सकता है।स्मोकिंग का कोलेस्ट्रॉल पर असरएक अध्ययन में पाया गया है कि स्मोकिंग करने वालों की लिपिड प्रोफाइल स्मोकिंग न करने वालों की तुलना में काफी ज्यादा खराब थी। स्मोकिंग करने वाले पुरुषों में 9.6% और महिलाओं में 16.9% ट्राइग्लिसराइड्स अधिक पाया गया। शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स संतुलित होना जरूरी है। वहीं इन पुरुषों में 7.3% और महिलाओं में 4.3% HDL-c कम पाया गया। वहीं जो लोग स्मोकिंग छोड़ चुके हैं, उनका लिपिड लेवल स्मोकिंग न करने वाले और स्मोकिंग करने वालों के बीच में थे।जिसका मतलब हुआ कि धूम्रपान छोड़ने के बाद काफी हद तक सुधार होता है, लेकिन शरीर में धूम्रपान का असर लंबे समय तक बना रह सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक शरीर में कोलेस्ट्रॉल को बैलेंस करने के लिए स्मोकिंग छोड़ना जरूरी है। क्योंकि यह आपके लिपिड प्रोफाइल के बैलेंस को बिगाड़ता है। जिस कारण हार्ट अटैक का खतरा काफी बढ़ जाता है।स्मोकिंग से कोलेस्ट्रॉल को नुकसानस्मोकिंग से शरीर में कोलेस्ट्ऱॉल जमा होने का प्रोसेस तेज हो सकता है। वहीं स्मोकिंग से HDL लेवल कम हो सकता है। क्योंकि सिगरेट के धुएं में एक्रोलिन केमिकल पाया जाता है, जिस कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है। यह HDL के फंक्शन को खराब करता है और LDL ऑक्सीडेशन बढ़ता है। जिस वजह से कोलेस्ट्रॉल लिवर तक नहीं पहुंच पाता है और ब्लड में रह जाता है। सिगरेट के धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस होती है, जोकि ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाती है। जिससे कोलेस्ट्रॉल जमा होने का प्रोसेस तेजी से बढ़ता है। इस वजह से आर्टरी सख्त हो जाती है। लगातार स्मोकिंग करने वाले लोगों में हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा ज्यादा बढ़ सकता है।हार्ट की बीमारियांस्मोकिंग ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल को बढ़ा देता है। ब्लड को चिपचिपा बनाने की वजह से ब्लड क्लॉट की संभावना बढ़ जाती है। LDL लेवल बढ़ने और HDL लेवल कम होने से ब्लड वेसल्स में तेजी से प्लाक बनने लगते हैं। वहीं जब आप स्मोक करते हैं, तो ब्लड वेसल्स मोटी और संकरी हो जाती है। हार्ट और दिमाग तक जाने वाले ब्लड फ्लो को यह ब्लड क्लॉट रोक सकते हैं। यह सभी कारक मिलकर दिल संबंधी बीमारियों के खतरे को बढ़ा देता है।कोलेस्ट्रॉल को ऐसे रखें बैलेंसमीठे ड्रिंक्स का सेवन न करें।स्मोकिंग छोड़ देना चाहिए।लंच ब्रेक के बाद थोड़ी देर जरूर टहलें।लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करना चाहिए।सप्ताह में 150 मिनट एक्सरसाइज जरूर करना चाहिए।शराब आदि का सेवन न करें।ब्लड में कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकने के लिए राजमा, दलिया, नाशपाती और सेब आदि का सेवन करना चाहिए।ट्रांस फैट्स जैसे पैकेट बंद केक, चिप्स और कुकीज आदि चीजों को नहीं खाना चाहिए।LDL के लेवल को कम करने के लिए फुल फैट डेयरी और रेड मीट जैसे प्रोडक्ट्स कम लेने चाहिए।ओमेगा-3 फैटी एसिड वाली चीजें जैसे अखरोट, अलसी के बीज और सैल्मन मछली आदि डाइट में शामिल करना चाहिए।अगर डॉक्टर ने कोलेस्ट्रॉल की दवा लिखी है, तो डॉक्टर के कहे मुताबिक यह दवाएं लेनी चाहिए।डॉक्टर से कब मिलेंआराम करते समय या चलते समय सीने में दर्द होनाज्यादा थकान होनासांस लेने में तकलीफ होनाहाथ-पैरों में दर्द या सुन्नपनलिपिड प्रोफाइल टेस्ट में अगर LDL 100 mg/dL से ऊपर या HDL 40 mg/dL से कम आए ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 12:42:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Summer Vacation में बच्चे बन रहे Mobile के आदी? उनकी Diet और इन Indoor Games पर दें ध्यान</title>
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<description><![CDATA[ इस समय पूरे भारत में बच्चों की गर्मियों की छुट्टियां शुरु हो चुकी है। बच्चे समर वेकेशन को अच्छे से एन्जॉय कर रहे हैं, साथ ही मोबाइल भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।  तेज गर्मी और लू कारण बच्चे धूप में नहीं निकालते हैं। जिससे बच्चे दिनभर मोबाइल, टीवी और अन्य गैजेट में लगे रहते हैं, ऐसा करने से बच्चों के शारीरिक और मानसिक हेल्थ पर असर पड़ता है। इसलिए छोटी-छोटी एक्टिविटी के जरिए बच्चों को बिजी रखा जा सकता है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कैसे बच्चों को तनावमुक्त रखें।कैसी हो इनडोर एक्टिवटी?घर में रहकर बच्चों के लिए कई तरह की रचनात्मक एक्टिविटी की जा सकती है। इस आर्टिकल में हम बच्चों की शारीरिक गतिविधियों की बात कर रहे हैं, जिससे वे शारीरिक रूप से एक्टिव रहें। अगर शरीर स्वस्थ रहेगा तो उनका मन भी प्रसन्न रहेगा।इनडोर गेम्सभीषण गर्मी में बाहर जाने से अच्छा है कि आप घर में ही रस्सी कूद सकते हैं, डांस या स्ट्रेचिंग जैसी एक्टिविटी कर सकते हैं। आस-पास के पड़ोस के बच्चे हो, तो उन्हें बुलाकर घर के ही अंदर  कैरम, लूडो, चेस, सुडोकू, सांप-सीढ़ी, डांस, इनडोर बालिंग, ट्रेजर हंट, इनडोर बास्केटबाल और बैलून वालीबाल जैसे इनडोर गेम्स खेले जा सकते हैं। सुबह की सैरगौरतलब है कि दिन में धूप रहती है, इसलिए अपने बच्चों को सुबह पार्क में जरुर ले जाएं। सुबह-सुबह स्वच्छ और ताजी हवा होती है, मॉर्निंग वॉक करने से मन की सुकून और शांति प्राप्त होता है। घर के आने के बाद 15-20 मिनट योग एक्सरसाइज कर सकते हैं। ऐसा करने से बच्चों का मन पूरे दिन शांत रहेगा।साइक्लिंगजब शाम के समय धूप कम हो जाएं, तो आप बच्चों को पार्क में साइक्लिंग करवाएं या बच्चों के दोस्तों के साथ साइक्लिंग करवा सकते हैं। असल में यह एक एरोबिक व्यायाम है, जिससे रात में उन्हें अच्छी नींद आएगी। तनावमुक्त नींद आना बड़ा सुकून देता है।क्या खिलाएं-पिलाएं?- अक्सर गर्मियों में बच्चे पानी कम पीते है इसलिए उन्हें ओआरएस या नींबू मिलाकर पानी जरुर दें। - दिन में बच्चों को छाछ, आम पन्ना, सत्तू का शरबत और तरबूज का जूस दे सकते हैं। इससे वे पूरा दिन ऊर्जावान बनें रहेंगे।  - इस मौसम में बच्चों के लिए सबसे फायदेमंद है मौसमी फल जैसे कि आम, स्ट्राबेरी, खरबूजा और केला। यदि आप चाहे तो बच्चों को ओट्स में केला, दूध या दही मिलाकर खिला सकती हैं। - असल में यह जल्दी पच जाता है और पेट को ठंडा रखता है। दही में प्रोबायोटिक्स होता है, जो बच्चों के पाचन तंत्र के लिए लाभकारी हो सकता है। इन चीजों से परहेज करता हैइस बात का ध्यान रखे कि दोपहार 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक बच्चों का बाहर बिल्कुल न भेजें। बाहर का जंक फूड का सेवन न करने दें। इतना ही नहीं, चिप्स, चाकलेट, पैटिस, बर्गर, पास्ता, पिज्जा के खाने से बच्चों के पेट में जलन हो सकती है। क्योंकि ये आहार सुपाच्य नहीं होते हैं, इससे एसिडिटी की समस्या हो।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 12:42:41 +0530</pubDate>
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<title>Health Alert: शरीर पर नीले निशान सिर्फ चोट नहीं, Cyanosis जैसी गंभीर बीमारी का संकेत!</title>
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<description><![CDATA[ गर्मी के मौसम में त्वचा पर बिना किसी स्पष्ट कारण के नीले या बैंगनी रंग के निशान दिखाई देना कई लोगों को परेशान कर सकता है। अक्सर इसे सामान्य मौसमी प्रभाव मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन हर बार ऐसा होना केवल बढ़ते तापमान से जुड़ा नहीं होता। कुछ मामलों में ये निशान शरीर में पोषक तत्वों की कमी, रक्त संबंधी समस्याओं या अन्य स्वास्थ्य स्थितियों की ओर भी इशारा कर सकते हैं। इसलिए त्वचा पर अचानक उभरने वाले ऐसे बदलावों पर ध्यान देना और उनके कारण को समझना महत्वपूर्ण है।साइनोसिस क्या है ?साइनोसिस का मतलब है त्वचा का नीला पड़ जाता है। यह तब होता है जब खून में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। खासकर होंठ, उंगलियों के सिरे, नाखूनों के नीचे की त्वचा या कभी-कभी पूरा शरीर हल्का नीला दिखाई देने लगता है। वैसे यह स्थिति आमतौर पर सामान्य नहीं मानी जाती है। इसका सीधा संबंध दिल या फेफड़ों की बीमारी से हो सकता है। आपको बता दें कि, गर्मी पड़ने से सायनोसिस नहीं होता। लेकिन बहुत ज्यादा डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी होने से रक्त संचार प्रभावित हो सकता है और समस्या दिखाई देने लगती है। त्वचा पर क्यों पड़ते नीलें निशानचोट के निशान- कई बार बिना चोट याद आए भी शरीर पर नीले निशान दिखाई दे सकते हैं। चोट के निशान यानी ब्रूज होते हैं। जब त्वचा के नीचे की छोटी रक्त वाहिकाएं टूट जाती है, तब थोड़ा खून आसपास के ऊतकों में फैल जाता है और त्वचा नीली या बैंगनी दिखने लगते हैं। देखा गया है कि चोट बहुत हल्के होते हैं और व्यक्ति को याद भी नहीं रहता कि चोट कब लगी थी।दवाइयां - कई लोगों के शरीर पर बिना चोट लगे भी बार-बार नीले या बैंगनी रंग के निशान दिखाई देने लगते हैं। ऐसे निशानों के पीछे कई अलग-अलग वजहें हो सकती हैं। विशेष रूप से रक्त को पतला करने वाली कुछ दवाओं का सेवन करने से त्वचा के नीचे मौजूद छोटी रक्त वाहिकाएं आसानी से प्रभावित हो जाती हैं, जिससे मामूली दबाव या हल्के स्पर्श पर भी नील पड़ सकते हैं।विटामिन की कमी- विटामिन सी और विटामिन- K कीकमी के कारण त्वचा पर नीले निशान पड़ जाते हैं। बढ़ती उम्र में त्वचा और रक्त वाहिकाएं कमजोर हो जाती है, इसलिए बुजुर्गों में यह समस्या काफी देखी गई है। कई बार खून की कमी से यह बीमारियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं।नीले पड़ने और रक्तस्राव में क्या अंतर हैगौरतलब है कि नील पड़ने और रक्तस्राव में काफी अंतर होता है। चोट लगने पर त्वचा पर थोड़ा खून जम जाता है, जिसको नील कहते हैं। वैसे यह धीरे-धीरे खत्म होता है। हालांकि रक्तस्राव में लगातार खून बहता है। असल में यह शरीर के बाहर या अंदर कहीं भी हो सकता है और कई बार यह स्थिति बन जाता है। नीले निशान को लेकर कब चिंता करेंअगर शरीर पर बिना किसी चोट के कारण बार-बार नीले धब्बे उभरने लगें, उनका रंग गहरा होता जाए या आकार लगातार बढ़ने लगे, तो इसे सामान्य मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से जब इसके साथ मसूड़ों से रक्तस्राव, बार-बार नकसीर, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आने या लगातार थकावट जैसी समस्याएं भी दिखाई दें, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। वहीं यदि होंठों का रंग नीला पड़ने लगे या सांस लेने में कठिनाई महसूस हो, तो यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।शरीर के नीले निशान को बारे में जानेंअसल में हर नीला निशान किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता है। लेकिन शरीर के हर बदलाव को बदलते मौसम का असर मान लेना भी सही नहीं है। हमारा शरीर अक्सर बड़ी बीमारी के आने से पहले छोटे संकेत नजर आते हैं। इसलिए शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों पर ध्यान देना जरुरी है। अगर कोई लक्षण लंबे समय तक बन रहें या बार-बार नजर आ रहे हैं, तो एक बार डॉक्टर को दिखा लें।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 31 May 2026 12:42:40 +0530</pubDate>
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<title>जोड़ों में दर्द और अकड़न? आपकी Smoking Habit हो सकती है वजह, Doctors ने जारी किया Alert</title>
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<description><![CDATA[ धूम्रपान करना सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। स्मोकिंग के वजह से फेफड़ों और दिल बीमारी खतरा बढ़ जाता है। हालांकि कई लोग नहीं जानते हैं कि स्मोकिंग से हड्डियों और जोड़ों की सेहत के लिए काफी खतरनाक हो सकता है। यदि आप लगातार स्मोकिंग करते हैं, तो रूमेटाइड अर्थराइटिस का खतरा बढ़ सकता है। यह एक प्रकार से ऑटोइम्यून बीमारी है,  जो कि शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही जोड़ों पर हमला करने लगता है। इस बीमारी के कारण जोड़ों में दर्द, सूजन, अकड़न और चलने-फिरने में दिक्कत होती है। आइए आपको बताते हैं स्मोकिंग के कारण रूमेटाइड अर्थराइटिस का खतरा कैसे बढ़ता है। स्मोकिंग कैसे बढ़ाती है रूमेटाइड अर्थराइटिस का खतराजैसा कि सिगरेट के धुए में पाए जाने वाले हानिकारक केमिकल्स शरीर में सूजन बढ़ाने का कार्य करता है। कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक स्मोकिंग करता है, तो उसे इम्यून सिस्टम के सामान्य काम को प्रभावित कर सकता है। इस बीमारी के चलते शरीर में ऐसी प्रतिक्रियाएं शुरू हो जाती है, जो रूमेटाइड अर्थराइटिस को ट्रिगर कर सकती हैं। इन्हीं बदलावों के कारण इम्यून सिस्टम भ्रमित होतर शरीर के हेल्दी टिशूज पर हमला करने लगता है। यह स्थिति आगे चलकर रूमेटाइड का कारण बन सकता है। जेनेटिक कारणों से बढ़ सकता है खतरायदि किसी के परिवार में रूमेटाइड अर्थराइटिस की बीमारी की समस्या रही है, तो उस व्यक्ति के अधिक स्मोकिंग करने से यह समस्या शुरु हो जाती है। गौरतलब है कि जेनेटिक फैक्टर्स और अत्यधिक स्मोकिंग करने से इस बीमारी का खतरा अधिक हो जाता है। जानिए इसके लक्षण- जोड़ों में दर्द और सूजन होना। - सुबह के समय उठने पर शरीर में अकड़न महससू होना। - हाथ और पैरों को छोटे जोड़ों में दिक्कत रहना। - कमजोरी और थकान महसूस होना। - चलने-फिरने दिक्कत होना। - लंबे समय तक पैरों में सूजन बना रहना।बचाव के लिए क्या करें? - इस बीमारी से बचने के लिए धूम्रपान और तंबाकू के सेवन से बचें। - नियमित रुप से एक्सरसाइज करें। - पर्याप्त नींद लेना काफी जरुरी है। - जोड़ों में दर्द या सूजन है, तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 30 May 2026 08:50:10 +0530</pubDate>
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<title>Women Health: प्रेग्नेंसी में मलेरिया क्यों है खतरनाक? जानिए Premature Delivery से बचाव के उपाय</title>
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<description><![CDATA[ प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भ में एक नए जीवन को संजोना बेहद खास और संवेदनशील अनुभव होता है। इस दौरान मां अपने गर्भ में पलने वाले बच्चे को हर बाहरी खतरे से बचाने की पूरी कोशिश करती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक छोटा सा मच्छर इस सुरक्षा चक्र के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान मलेरिया को कभी एक सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान मलेरिया इतना घातक क्यों हो जाता है।घटती है शरीर की ताकतप्रेग्नेंसी के दौरान प्राकृतिक रूप से महिला के शरीर में बीमारियों से लड़ने की क्षमता थोड़ा कमजोर पड़ जाती है। यही वजह है कि आम दिनों की तुलना में प्रेग्नेंसी में मलेरिया का संक्रमण शरीर पर तेजी से हावी हो सकता है, जोकि न सिर्फ मां बल्कि बच्चे के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।इसे भी पढ़ें: जोड़ों में दर्द और अकड़न? आपकी Smoking Habit हो सकती है वजह, Doctors ने जारी किया Alertबच्चे पर असरमलेरिया सिर्फ महिला की सेहत को नहीं बल्कि इसका सीधा और बुरा असर गर्भ में पलने वाले बच्चे के विकास पर भी पड़ता है। एक्सपर्ट के मुताबिक मलेरिया की वजह से प्रेग्नेंसी में कई तरह की गंभीर परेशानियां हो सकती हैं।प्रीमैच्योर डिलीवरीबच्चे का वेट सामान्य से कम होना।गंभीर मामलों में मिसकैरेज का खतरा।इन संकेतों को पहचानेंप्रेग्नेंट महिलाओं को अपने शरीर में नजर आने वाले लक्षणों को नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए। वहीं अगर आपको नीचे बताए गए लक्षण महसूस होते हैं, तो फौरन डॉक्टर के पास जाएं।कंपकंपी या ठंड लगना।अचानक तेज बुखार होना।पूरी शरीर में दर्द रहना।करें ये उपायबता दें कि इस खतरनाक बीमारी से बचने का सबसे कारगर तरीका खुद से मच्छरों को दूर रखना है। इसके लिए आप अपनी दिनचर्या में कुछ आसान कदम शामिल कर सकते हैं।नियमित रूप से सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करना चाहिए।घर के अंदर और बाहर के हिस्सों में साफ-सफाई रखनी चाहिए।अपने घर के आसपास गमलों, गड्ढों और कूलरों में पानी न एकत्र होने दें। क्योंकि रुके हुए पानी में ही मच्छर पनपते हैं।सही समय पर इलाजहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो इस बीमारी से डरने की जगह आपको एक्स्ट्रा सतर्क रहने की जरूरत है। अगर सही समय पर इन लक्षणों की पहचान करके फौरन डॉक्टर से जांच और इलाज कराना चाहिए। ऐसे में मां और गर्भ में पलने वाले बच्चे को सुरक्षित रखा जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 30 May 2026 08:50:09 +0530</pubDate>
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<title>Vitamin D की कमी मतलब कमजोर Bones का बड़ा Risk, जानिए धूप के अलावा क्या है जरूरी</title>
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<description><![CDATA[ गर्मी हो या फिर सर्दी धूप लेना बहुत ही जरुरी माना जाता है। सुबह की धूप लेने से Vitamin D की कमी पूरी होती है। अगर शरीर विटामिन-D की कमी होगी, तो पैरों में सूजन, दर्द और हड्डियां भी कमजोर रहेगी। हेल्थ एक्सपर्ट भी मानते हैं कि सुबह की धूप जरुर लेना चाहिए। विटामिन-D से शरीर को कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में मिलता है। हमारे शरीर के कई मुख्य कार्यों के लिए विटामिन-D की जरुरत होती है। यह मांसपेशियों को बनाने और हड्डियों को मजबूत रखने में एक अहम भूमिका निभाता है। गौरतलब है कि धूप में बैठने से नुचरल रुप से विटामिन-D प्राप्त होती है। वहीं, लाइफस्टाइल में बदलाव करके और सहीं डाइट का सेवन करने से विटामिन-D की कमी दूर हो जाती है।क्या विटामिन D की पूर्ति के लिए सिर्फ सूर्य की रोशनी में बैठना काफी है?हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, सूर्य की रोशनी में विटामिन डी को प्राप्त करने का एक प्राकृतिक सोर्स है। गौरतलब, जब व्यक्ति की त्वचा अल्ट्रावॉयलेट बी किरणों के संपर्क में आती है, तो वह इस विटामिन को बनाना शुरु करती है। कई लोग धूप में बैठते हैं, लेकिन आजकल की खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण विटामिन डी की कमी देखने को मिल ही जाती है। इसलिए अपना लाइफस्टाइल सुधारन की काफी जरुरत है।विटामिन डी की कमी से कौन से रोग हो सकते हैं?खासकर विटामिन डी की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती है। वहीं, बच्चों में रिकेट्स, वयस्कों को ऑस्टियोमलेशिया और बुजुर्गों को ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या हो सकती है। इतना ही नहीं, लंबे समय विटामिन डी की कमी होने से हड्डियों का फ्रेक्चर होने का जोखिम बढ़ जाता है। विटामिन डी की कमी से इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे व्यक्ति तो बार-बार इफेंक्शन का खतरा बढ़ जाता है। विटामिन D की कमी को कैसे दूर करें?विटामिन डी की कमी को रोकने को लिए सबसे पहले अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करें। साथ ही सप्ताह में तीन से चार बार सुबह या शाम के समय सूर्य की रोशनी में करीब 15 से 30 मिनट तक जरुर लें। इस तरह से विटामिन डी का स्तर नेचुरल रुप से बढ़ता है। अक्सर विटामिन डी का खतरा प्रेग्नेंट महिलाओं, बुजुर्गों, अधिक वजन और सूर्य की रोशनी में नहीं बैठने वाले लोगों को होता है। अगर आप काफी समय से विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं, तो एक बार डॉक्टर जरुर दिखाएं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 30 May 2026 08:50:08 +0530</pubDate>
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<title>जानलेवा Heatwave का Red Alert! लू लगने से पहले पहचानें ये लक्षण, डॉक्टर ने दी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ इस समय पूरे भारत में भीषण गर्मी पड़ रही है। कुछ राज्यों में लू की चेतावनी जारी की गई है। भारत के कई राज्यों में मौसम विभाग ने रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। इस बीच, डॉक्टर ने भी लोगों को चेतावनी दे रहे हैं कि वे सिरदर्द, मतली या मांसपेशियों में ऐंठन जैसे मामूली लक्षणों को भी नज़रअंदाज़ न करें। मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि दिल्ली-एनसीआर में कुछ दिनों भीषण गर्मी पड़ने वाली है। इस दौरान डिहाइड्रेशन से बचना है, गर्मी से थकावट और लू लगने का खतरा बढ़ जाएगा। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि अधिक गर्मी शरीर पर क्या प्रभाव डालती है, कौन सबसे अधिक संवेदनशील होता है, शुरुआती लक्षण को इंग्नोर न करें। चिकित्सा इमरजेंसी की स्थिति को रोकने के लिए तत्काल क्या कदम उठाना चाहिए। शरीर के लिए लू खतरनाक क्यों हैं?यदि तापमान बढ़ रहा है और शरीर को ठंडा होने की जरुरत है। शरीर का तापमान 37 डिग्री है और बाहर का तापमान 39-40 डिग्री है, तो ऐसे में शरीर को खुद ठंडा रखना जरुरी है। गर्मी में पसीना निकालता है, तो शरीर का पानी निचोड़ लेते है। इसलिए पानी की कमी बिल्कुल न होने दे। ज्यादा-ज्यादा मात्रा में पानी पिएं। अगर आप कम पानी पीते हैं, तो आपको लगातार मतली जैसी समस्याएं हो सकती है। इसलिए उच्च तापमान का मतलब है कि आपको शरीर को ठंडा रखना है। गर्मियों के दौरान हम कौन-से लक्षण इग्नोर करते हैंगर्मियों में अधिकत्तर लोगों को सिरदर्द, मतली जैसे अस्पष्ट लक्षणों के साथ कई लोग हमारे पास आते हैं। अगर आप एथलीट है और देर रात तक दौड़ या वर्कआउट करने के बाद, मतली जैसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, वर्किंग लोगों के साथ सिरदर्द, मतली और मांसपेशियों में ऐठन होती है। इन सभी लक्षण को इग्नोर करें। हीटवेव के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान किसे होता है?लू लगने का खतरा सबसे ज्यादा बच्चों और बुजुर्गों को होता है। बुजुर्गों में इनका शरीर तापमान नियंत्रित करने वाल तंत्र यानी के थर्मोस्टेट तंत्र वयस्कों की तुलना में उतना अच्छा काम नहीं करता है और इसकी एक्टिविटी सीमित रहती हैा उदाहरण के तौर पर आप किसी वरिष्ठ नागरिक को खुले में छोड़ दिया जाए, तो उनमें खुद को बचाने की पर्याप्त शक्ति नहीं होती है। वहीं, बच्चों का शरीर भी अधिक सतही होता है, इसलिए उन्हें अधिक नुकसान होता है। लू चलने के समय लोगों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?भीषण गर्मी में पार्किंग में खड़ी गाड़ी में किसी न छोड़ें और जो गाड़ी स्टार्ट न हो उसमें भी कोई न रुके। बाहर निकालकर पेड़ के नीचे खड़े हो जाएं। गर्मी में हल्के रंग के कपड़े पहनें। छाता और पानी साथ रखें। पहले से खुद को तैयार करें, छाछ, नींबू पानी, नारियल पानी का सेवन बढ़ाएं और कॉफी, शराब, चाय या यहां तक कि ठंडे पेय पदार्थों का सेवन कम ही करें। गर्मी से होने वाली थकावट के पहले चेतावनी संकेत क्या हैं?लू लगने जाने के बाद सबसे पहला लक्षण है, जो आपको महसूस होगा वह है प्यास लगना, इसलिए अपनी प्यास बुझाएं। किसी छायादार जगह पर आएं, अपने ऊपर थोड़ा पानी छिड़कें और पानी पिएं। दूसरा लक्षण सिरदर्द या मतली है, यह ऊष्मा थकावट का संकेत है, यह सबसे पहली समस्या है जो सामने आती है। इसके बाद पिंडली की मांसपेशियों में ऐंठन शुरू हो जाती है, यह भी ऊष्मा थकावट का संकेत है और इसका मतलब है कि स्थिति गंभीर हो गई है।कब डॉक्टर को दिखाएं?लू लगने के बाद कई लोगों को चक्कर आना शुरु हो जाता है। कभी-कभी लोग गिर जाते हैं, उन्हें आराम करने दें, उनके पैर ऊपर उठाएं। यदि कोई व्यक्ति सुस्त है और प्रतिक्रिया नहीं दे रहा, तो उसके मुंह में जबरदस्ती पानी या कोई भी ठोस या तरल पदार्थ न डालें। यदि आप इस स्थिति को संभाल नहीं पा रहे हैं, तभी डॉक्टर को दिखाएं। पहला लक्षण आमतौर पर प्यास लगना होता है, लेकिन जब आप शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करते हैं, तो शरीर ऐसी स्थिति में पहुंच जाता है जहां थर्मोस्टेट तंत्र गड़बड़ा जाता है। शरीर यह नहीं समझ पाता कि तापमान अधिक है, मुझे पसीना बहाना चाहिए, जिससे बहुत तेज बुखार हो जाता है और मस्तिष्क के प्रोटीन को नुकसान पहुंचता है, कई बार दौरे पड़ते या स्ट्रोक का खतरा हो सकता है।लू लग जाने के बाद व्यक्ति को प्राथमिक उपचार के रुप में क्या देना चाहिए?यदि कोई व्यक्ति सुस्त फील कर रहा है, तो उसके कपड़े नहीं उतारें, पानी डालें और यदि वह होश में तो उसे पानी पिलाएं या अस्पताल ले जाएं। माथे पर रुमाल रखने से भी तापमान कम हो सकता है, तौलिये का खूब इस्तेमाल करें। हल्के गुनगुने पानी का प्रयोग करें और पंखा चलाएं। आप चाहे तो उस व्यक्ति को थोड़ी शॉवर के नीचे खड़ा करें या फिर शरीर पर खूब पानी डालें। यदि घर में एसी है तो उसको नीचे की तरफ हवा कर दें। इससे व्यक्ति को जल्दी से ठंडक मिलेगी।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 28 May 2026 16:09:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Women Health: Contraceptive Pills से बिगड़ सकता है Migraine, जानें क्या कहते हैं Experts और कब रहें सावधान</title>
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<description><![CDATA[ जब भी महिला की सेहत की बात हो या फिर फैमिली की बात हो, तो गर्भनिरोधक गोलियां लेने की बात सबसे ऊपर आती है। महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल असंतुलन को यह गोलियां काफी हद तक कंट्रोल करती हैं। इन गोलियों को लेने से अनवांडेट प्रेग्नेंसी को रोका जाता है। वहीं कुछ महिलाएं जब गर्भनिरोधक गोलियां लेती हैं, तो उनको तेज सिर दर्द की समस्या होती है। जोकि अक्सर माइग्रेन की वजह होती है।बता दें कि माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है। ऐसे में गर्भनिरोधक गोलियां लेने वाली महिलाओं के मन में यह सवाल आता है कि क्या इन दोनों के बीच कोई कनेक्शन है या नहीं। या फिर गर्भनिरोधक गोलियां लेने पर कब माइग्रेन की स्थिति बन जाती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि गर्भनिरोधक गोलियां और माइग्रेन में क्या संबंध है।इसे भी पढ़ें: जानलेवा Heatwave का Red Alert! लू लगने से पहले पहचानें ये लक्षण, डॉक्टर ने दी चेतावनीजानिए माइग्रेन पर गर्भनिरोधक गोलियों का क्या है असरमाइग्रेन पर गर्भनिरोधक गोलियां अलग-अलग तरह से असर डाल सकती हैं। यह गोलियां शरीर पर क्या असर करती हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि महिला का शरीर हार्मोनल बदलाव को लेकर कितना ज्यादा सेंसिटिव है। वहीं कौन सी गोली का इस्तेमाल किया जा रहा है। एस्ट्रोजन हार्मोन के लेवल में बदलाव माइग्रेन की वजह बनता है। इसलिए कई बार यह माइग्रेन की समस्या को कम कर सकती हैं और कई बार बढ़ा भी सकती हैं।वहीं जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान माइग्रेन होता है, उनके लिए यह गोलियां फायदेमंद हो सकती हैं। क्योंकि यह गोलियां बॉडी में एस्ट्रोजन के लेवल को स्थिर रखती हैं। जिससे माइग्रेन की समस्या कम हो सकती है। लेकिन कुछ महिलाओं में इन गोलियों के सेवन के बाद माइग्रेन की समस्या हो सकती है या फिर पहले से ज्यादा बढ़ सकती है। जब गोली के बीच में ब्रेक होता है, तो माइग्रेन का दर्द बढ़ सकता है।गर्भनिरोधक गोलियां लेने के दौरान ऐसे करें माइग्रेन को मैनेजकम एस्ट्रोजन वाली गोलियांबाजार में कई ऐसी लो डोज पिल्स मिलती हैं, जिनमें एस्ट्रोजन की मात्रा काफी कम होती है। हार्मोनल उतार-चढ़ाव को यह गोलियां कम करने में मदद करती हैं। जिससे माइग्रेन के ट्रिगर्स को कंट्रोल किया जा सके।लंबे समय तक या लगातार साइकल पिल्स चलनाउन महिलाओं को लगातार पैक लेना चाहिए, जिनको पीरियड्स के दौरान माइग्रेन होता है। इसमें आप बिना किसी ब्रेक के गोलियां लेती हैं, जिससे पीरियड्स कम बार होते हैं। वहीं जब आपको पीरियड्स नहीं होंगे तो एस्ट्रोजन लेवल भी नहीं गिरेगा और आपका माइग्रेन से बचाव भी होगा।गैप कम करनानॉर्मल गर्भनिरोधक पैक में प्लेसबो या खाली गोलियां 7 दिनों की होती है। ऐसे में डॉक्टर इस गैप को कम करके 2 या 3 दिन करने की सलाह दे सकते हैं। जिससे बॉडी में हार्मोन लेवल बिल्कुल न गिरे।कब बरतें सावधानीअगर गर्भनिरोधक गोलियां लेने के बाद सिर दर्द बढ़ जाता है, या पहली बार माइग्रेन का दर्द शुरू हो तो इसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह चेतावनी का संकेत हो सकता है कि आपकी बॉडी में हार्मोनल असंतुलन है। वहीं आपको नीचे बताई गई बातों का भी ध्यान रखना चाहिए।ऑरा वाले माइग्रेन में कम्बाइन्ड ओरल कंट्रासेप्टिव में एस्ट्रोजन होता है। उसको लेने से बचने की सलाह दी जाती है। क्योंकि यह माइग्रेन को बढ़ा सकता है।अगर आप पहले से दवा ले रही हैं और आपका सिर दर्द बढ़ जाता है, दर्द के साथ बोलने में मुश्किल, माइग्रेन बार-बार ट्रिगर करें या शरीर के एक हिस्से में कमजोरी महसूस हो, तो इस स्थिति में आपको फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।स्मोकिंग से दूरी बनाएं, क्योंकि यह ब्लड के थक्के और स्ट्रोक के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।इसके अलावा ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना चाहिए। क्योंकि बीपी दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।कब डॉक्टर से मिलेंगर्भनिरोधक गोलियां लेने से माइग्रेन ट्रिगर होना एक गंभीर समस्या है। लेकिन यह गोलियां लेने से पहले आपको डॉक्टर से जरूर कंसल्ट करना चाहिए। वहीं अगर गर्भनिरोधक गोलियां लेने के बाद माइग्रेन का दर्द शुरू हो जाए, तो स्थिति में भी डॉक्टर से संपर्क करें। अगर आपको पहले से माइग्रेन की समस्या है और गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से यह ट्रिगर होने लगे, माइग्रेन के साथ ऑरा जैसे धुंधलापन, आंखों के सामने चमक, सिरदर्द के साथ चक्कर आना, बोलने में समस्या या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी लगे। तो बिना किसी देरी के आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 28 May 2026 16:09:11 +0530</pubDate>
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<title>Late Periods? पपीता, अनानास और अन्य घरेलू नुस्खे भी नहीं आ रहे काम? क्या करें?</title>
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<description><![CDATA[ एक महिला होना आसान नहीं है, खासकर जब बात पीरियड्स की हो, तब चीजें और भी मुश्किल लगने लगती हैं। पीरियड्स जल्दी आ जाएं तो परेशानी, लेट हो जाएं तो टेंशन और अगर मिस हो जाएं तो मानो खतरे की घंटी बजने लगती है। आमतौर पर महिलाओं को सबसे ज्यादा चिंता तब होती है, जब पीरियड्स समय पर नहीं आते। ऐसे में कई महिलाएं घरेलू नुस्खे अपनाने लगती हैं।अगर आप सेक्सुअली एक्टिव हैं, तो पीरियड्स मिस होने का मतलब प्रेग्नेंसी भी हो सकता है। इसलिए सबसे पहले प्रेग्नेंसी टेस्ट जरूर कर लेना चाहिए। अगर टेस्ट नेगेटिव आता है और फिर भी पीरियड्स लेट हो रहे हैं, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मिताली ने कुछ आसान टिप्स साझा किए हैं, जो इस समस्या में मदद कर सकते हैं।डॉक्टर मिताली ने क्या कहा?डॉ. मिताली के मुताबिक, अगर प्रेग्नेंसी टेस्ट नेगेटिव आने के बाद भी पीरियड्स समय पर नहीं आ रहे हैं तो इसकी सबसे बड़ी वजह स्ट्रेस हो सकता है। इसके अलावा देर रात तक जागना, जंक फूड खाना, एक्सरसाइज न करना और खराब लाइफस्टाइल भी पीरियड्स के अनियमित होने की बड़ी वजह बन सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Women Health: Contraceptive Pills से बिगड़ सकता है Migraine, जानें क्या कहते हैं Experts और कब रहें सावधानपीरियड्स आने में देरी हो जाए तो क्या करें?सुबह की शुरुआत हेल्दी तरीके से करें: डॉ. मिताली ने बताया कि महिलाओं को अपने दिन की शुरुआत गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर पीने से करनी चाहिए, ये सेहत के लिए अच्छा होता है और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।खाने में फल और सब्जियां जरूर शामिल करें: डॉ. मिताली ने महिलाओं को हर मील में सही मात्रा में सब्जियां और फल शामिल करने की सलाह दी, ताकि शरीर को जरूरी पोषण मिलता रहे।जंक फूड से दूरी बनाएं: डॉ. मिताली ने महिलाओं को सलाह दी कि तली-भुनी, ज्यादा मीठी और अनहाइजीनिक जंक फूड चीजों को जितना हो सके कम कर दें।संतुलित भोजन करें: डॉ. मिताली के अनुसार, दिन में 3 बार बैलेंस डाइट लें। खाने में सब्जी, रोटी और प्रोटीन का कोई अच्छा सोर्स जरूर शामिल करें। साथ ही हर बार खाने में थोड़ा बदलाव भी रखें।शरीर को हाइड्रेट रखें: डॉ. मिताली ने बताया कि इलेक्ट्रोलाइट से भरपूर पानी पिएं। इसमें सेंधा नमक, नींबू, संतरा, खीरा और पुदीने की पत्तियां मिलाई जा सकती हैं। कोशिश करें कि दिनभर में 12-14 गिलास पानी घूंट-घूंट करके पिएं। इसे भी पढ़ें: जानलेवा Heatwave का Red Alert! लू लगने से पहले पहचानें ये लक्षण, डॉक्टर ने दी चेतावनीअगर फिर भी पीरियड्स न आएं तो क्या करें?इन बातों को 7-10 दिनों तक फॉलो करें। अगर इसके बाद भी पीरियड्स नहीं आते हैं, या पिछले कई महीनों से पीरियड्स अनियमित हैं, तो किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 28 May 2026 16:09:11 +0530</pubDate>
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<title>World Menstrual Hygiene Day 2026: पीरियड्स में सफाई की अनदेखी पड़ सकती है भारी, जानें बचाव के जरूरी टिप्स</title>
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<description><![CDATA[ पीरियड्स के दिनों में की गई एक छोटी सी लापरवाही या अनदेखी महिलाओं के लिए बड़ी बीमारी की वजह बन सकती है। डॉक्टरों का मानना है कि इन दिनों में साफ-सफाई का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है, ताकि इंफेक्शन और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सके। लेकिन आज भी जानकारी की कमी के कारण कई महिलाएं इस पर पूरा ध्यान नहीं दे पातीं।इसी सोच को बदलने और महिलाओं के साथ-साथ किशोरियों को जागरूक करने के लिए हर साल 28 मई को &#039;वर्ल्ड मेंस्ट्रुअल हाइजीन डे&#039; मनाया जाता है। आइए इस मौके पर जानते हैं कि पीरियड्स के दौरान किन जरूरी बातों का ध्यान रखकर आप खुद को पूरी तरह सुरक्षित और सेहतमंद रख सकती हैं।समय पर पैड बदलना है जरूरीपीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग चाहे कम हो या ज्यादा, हर 4 से 6 घंटे में पैड बदलना बहुत जरूरी होता है। अगर आपको हैवी फ्लो हो रहा है, तो समय से पहले ही पैड बदल लें। लंबे समय तक एक ही पैड का इस्तेमाल करने से न सिर्फ बैक्टीरिया पनपने का डर रहता है, बल्कि बदबू और रैशेज की समस्या भी हो सकती है। साफ और फ्रेश पैड का इस्तेमाल आपको दिनभर आरामदायक रखता है। इसे भी पढ़ें: Health Tips: पैरों के भयंकर दर्द-सूजन का रामबाण इलाज, ये Smart Massager देगा मिनटों में आरामप्राइवेट पार्ट की सही सफाईइन दिनों में इंटिमेट एरिया की सफाई का दोगुना ध्यान रखना चाहिए। दिन में कम से कम 2 से 3 बार गुनगुने पानी से सफाई करने से बैक्टीरिया और गंदगी जमा नहीं हो पाती। ध्यान रखें कि इस हिस्से को साफ करने के लिए तेज केमिकल वाले इंटिमेट वॉश या खुशबूदार प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बिल्कुल न करें, क्योंकि इनसे जलन और एलर्जी हो सकती है। पानी से धोने के बाद उस हिस्से को अच्छी तरह सुखाना भी जरूरी है, ताकि नमी की वजह से फंगल इंफेक्शन न हो।हाथ धोना कभी न भूलेंअक्सर महिलाएं जल्दबाजी में पैड बदलने से पहले या बाद में हाथ धोना भूल जाती हैं, जो इंफेक्शन फैलने की एक बड़ी वजह है। हमारे हाथों में मौजूद अदृश्य बैक्टीरिया आसानी से शरीर के अंदर पहुंचकर बीमार कर सकते हैं। इसलिए पैड, टैम्पोन या मेंस्ट्रुअल कप को छूने से पहले और बाद में अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह जरूर साफ करें। यह एक छोटी सी आदत आपको कई बड़ी परेशानियों से बचा सकती है।सही और आरामदायक अंडरगारमेंट्सपीरियड्स के दिनों में हमेशा सूती (कॉटन) के साफ और ढीले-ढाले अंडरगारमेंट्स ही पहनने चाहिए। कॉटन का कपड़ा हवा को आसानी से पास होने देता है, जिससे पसीना और नमी जमा नहीं हो पाती। इसके उलट, बहुत ज्यादा टाइट या सिंथेटिक कपड़े पहनने से त्वचा छिल सकती है और रैशेज या इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। अगर अंडरगारमेंट थोड़ा भी गीला या गंदा महसूस हो, तो उसे तुरंत बदल लें। इसे भी पढ़ें: Late Periods? पपीता, अनानास और अन्य घरेलू नुस्खे भी नहीं आ रहे काम? क्या करें?टैम्पोन के इस्तेमाल में सावधानीजो महिलाएं पीरियड्स में टैम्पोन का इस्तेमाल करती हैं, उन्हें इसके समय का खास ख्याल रखना चाहिए। टैम्पोन को बहुत ज्यादा देर तक अंदर छोड़ना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं, जिससे &#039;टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम&#039; जैसी गंभीर और जानलेवा समस्या का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हर कुछ घंटों में इसे बदलना न भूलें।खुद को रखें पूरी तरह हाइड्रेटइन दिनों में शरीर में पानी की कमी न होने दें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है, जिससे पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्लोटिंग, ऐंठन और थकान काफी हद तक कम हो जाती है। सादे पानी के अलावा आप अपनी डाइट में नारियल पानी, ताजे फलों का जूस और नींबू पानी जैसी हेल्दी ड्रिंक्स भी शामिल कर सकती हैं, जो आपके शरीर को ताकत और एनर्जी देंगी। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 28 May 2026 16:09:10 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: पैरों के भयंकर दर्द&#45;सूजन का रामबाण इलाज, ये Smart Massager देगा मिनटों में आराम</title>
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<description><![CDATA[ लंबे समय से क्या आप भी पैरों के दर्द और सूजन से परेशान हैं? गौरतलब है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। हालांकि पैरों की सूजन और दर्द को गलती से भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वैसे तो पैरों में सूजन आना एक समस्या है, लेकिन यह किसी बड़ी बीमारी का भी खतरा हो सकता है। अगर आप लंबे समय तक खड़े रहते हैं, खराब लाइफस्टाइल या फिर शरीर में पानी का जमा होना। इन कारणों से भी कई बार पैरों में दर्द बना रहता है या सूजन आ जाती है। सबसे जरुरी बात यही है कि इसका सही समय पर पता लग जाए और सही उपाय करने से पैरों का दर्द गायब हो जाता है।  पैरों में दर्द और सूजन के सामान्य व प्रमुख कारणलंबे समय तक बैठना या खड़े रहना: अगर आप ऑफिस, किसी जगह या यात्रा के दौरान लंबे समय तक खड़े रहते हैं, तो इससे ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है। जिस कारण से पैरों में तरल पदार्थ जमा हो जाता है।वेरीकोज वेन्स (Varicose Veins): दरअसल, पैरों की नसों में कमजोर होना या सूज जाती है, तो इससे रक्त हृदय की ओर पंप नहीं कर पाता है। इसलिए पैरों में दर्द, भरीपन या फिर सूजन आ जाती है। गठिया या जोड़ों की सूजन: अक्सर आर्थराइटिस या यूरिक एसिड के लेवल बढ़ने से जोड़ों में अकड़न, दर्द और पैरों में सूजन आ जाती है।गंभीर बीमारियां: लगातार पैरों में दर्द या सूजन बना रहे हैं, तो इसके पीछे हृदय रोग, कमजोर किडनी और लिवर की बीमारी एडिमा के लक्षण हो सकते हैं।चोट या संक्रमण: पैर में मोच, हड्डी में चोट या सेल्युलाइटिस जैसे त्वचा संक्रमण के कारण भी हो सकता है। अन्य कारण- विटामिन बी की कमी होना, प्रेग्नेंसी में होने वाले हार्मोनल बदलाव या फिर खाने में सबसे अधिक सोडियम लेने के कारण पैरों का दर्द और सूजन बना रहता है। राहत पाने के लिए कर सकते ये उपाय - पैरों को हमेशा ऊपर रखें, इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होगा। - मसाज का सहारा ले सकते हैं। यह काफी रिलैक्स प्रदान करेगा। - खाने में नमक कम करें  - ठंडे पानी से सिकाई कर सकते हैं। - आप किसी मसाजर से मसाज ले सकते हैं।  Amazon से ऑर्डर करें Foot &amp; Calf Massager - इस मसाजर का इस्तेमाल करने से पैरों और पिंडलियों की मालिश से आराम, सुकून और रक्त संचार में वृद्धि होती है। - बॉडी को आराम देने, मांसपेशियां के तनाव को कम करने और स्ट्रेस से राहत पाने के लिए आप इसकी निडिंग और रोलिंग मसाज ले सकते हैं।  - इसका हल्का गर्म ऊष्मा और वाइब्रेशन मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है, यह पैरों के जॉइंट्स में रक्त परिसचरण बढ़ाने मदद करता है।  - पैर और पिंडली की मालिश करने वाले इस फ़ंक्शन में 3 मसाज तीव्रता लेवल हैं जिन्हें अलग-अलग या एक साथ उपयोग करने के लिए मैन्युअल रूप से चुना जा सकता है। - आरामदायक बैठने की मुद्रा के लिए मसाजर को 45 डिग्री तक इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। - इसमें 15 Minutes Auto- Shut off ऑप्शन दिया गया है। इसके साथ 1 साल की वारंटी मिल रही है। अब आप भी मुश्किल से मुश्किल पैरों का दर्द और सूजन से राहत पाने के लिए इस मसाजर का इस्तेमाल कर सकते हैं। बस आपको अमेजन पर इसको ऑर्डर करना है, नीचे दी गई लिंक से आप इस प्रोडक्ट को खरीद सकते हैं।इस मसाजर को यहां से खरीदें  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 28 May 2026 16:09:10 +0530</pubDate>
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<title>Women Health: पीरियड से पहले Brown Spotting कब Normal है और कब Infection का संकेत</title>
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<description><![CDATA[ क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि पीरियड्स की डेट करीब होने के बाद आपको अचानक से स्पॉटिंग का एहसास होता है। चेक करने के पैंटी में लाल ब्लड की जगह डार्क ब्राउन या लगभग काले रंग के धब्बे नजर आते हैं। खून का ऐसा रंग देखकर अक्सर मन में तरह-तरह के ख्याल आने लगते हैं। जैसे क्या इंफेक्शन है, क्या पीरिय़ड्स नॉर्मल नहीं है या कोई गंभीर बीमारी तो नहीं हो गई है। डार्क ब्राउन धब्बे देखकर हर महिला ने कभी न कभी यह सवाल खुद से जरूर किए होंगे। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इन्हीं सवालों के जवाब देने जा रहे हैं।डार्क ब्राउन ब्लड का सचअगर आप भी उन लोगों में से एक हैं, जो डार्क ब्राउन ब्लड को टेंशन की वजह मानते हैं। तो बता दें कि पीरियड्स के पहले या आखिरी दिन भूरे रंग का डिस्चार्ज होना पूरी तरह से सेफ और नॉर्मल है, इसलिए आप रिलैक्स कीजिए।इसे भी पढ़ें: Health Tips: पैरों के भयंकर दर्द-सूजन का रामबाण इलाज, ये Smart Massager देगा मिनटों में आराममेडिकल भाषा में समझें तो यह आपका पुराना खून होता है। जब यह खून यूट्रेस से निकलकर बॉडी से बाहर आने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है, तो यह हवा या ऑक्सीजन के संपर्क में आता है और इसका रंग चेंज हो जाता है। पीरियड्स की शुरूआत और आखिर में ब्लड फ्लो धीमा होता है, जिस कारण ऐसा रंग दिखना लाजमी है।लाइफस्टाइल का असरसिर्फ खून के पुराने होने से नहीं बल्कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का भी मेंस्ट्रुअल साइकिल पर असर पड़ता है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बहुत ज्यादा तनाव, कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का इस्तेमाल, शरीर में तेजी से बदलते हार्मोन, या PCOS/PCOD जैसी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां भी पीरियड्स के रंग और फ्लो को बदल सकती है।जानें कब जाएं डॉक्टर के पासवैसे तो यह शरीर की नेचुरल सफाई का एक हिस्सा है और इससे डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन शरीर के कुछ संकेतों को नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए। अगर आपको भूरे रंग के खून के साथ नीचे बताई जाने वाली कोई समस्या हो, तो आपको बिना किसी देरी के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।अजीब बदबू आनाअगर डिस्चार्ज से अजीब सी दुर्गंध या फिर तेज बदबू आ रही है, तो य़ह वजाइनल इंफेक्शन का संकेत हो सकता है।दर्द और जलन होनाप्राइवेट पार्ट में जलन महसूस होना, तेज खुजली या पेट के निचले हिस्से में ज्यादा दर्द होना।अचानक बदलाव होनाअचानक पीरियड रूटीन में बदलाव आना, बहुत अनियमितत होना या फिर महीने के बीच में बार-बार धब्बे दिखना। ]]></description>
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<title>भयंकर गर्मी में बढ़ रहा है आपका भी गुस्सा? इन 5 Tips से रखें अपने दिमाग को एकदम Cool</title>
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<description><![CDATA[ जब भंयकर गर्मी पड़ती है तो अच्छो-अच्छों की हेकड़ी निकल जाती है। इस समय उत्तर भारत में पारा 45 डिग्री से ऊपर पहुंच चुका है। लोग भीषण गर्मी में रहना मुश्किल हो गया है। आग गोले उगलने वाली गर्मी पड़ती है, तो इंसान का गुस्सा नाक पर आ जाता है। भीषण गर्मी के कारण छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा होना शुरु हो जाते हैं। घंटो तक ट्रैफिक में खड़े रहने से गुस्सा आ जाता है, छोटी-मोटी बातों पर क्रोधित हो जाना है। यह सब सीजनल अफेक्टिव डिसआर्डर के लक्षण है। इन दिनों आपके साथ भी काफी हो रहा है। इसके पीछे मनोवैज्ञानिक कारण है और इसे कैसे कंट्रोल करें, आपको इस लेख में बताएंगे।विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, गर्मियों में अधिक तापमान बढ़ने से व्यक्ति का शरीर ही नहीं दिमाग भी गर्म हो जाता है। इस दौरान व्यक्ति अनियंत्रित गुस्सैल हो जाता है, चिड़चिड़ा नेचर हो जाता है। अब इसे कैसे कंट्रोल करें, तो आपको बताते हैं।गर्मियों में गुस्सा ज्यादा आने के कारणपानी और ऑक्सीजन की कमीभयंकर गर्मी में जब लू थपड़े मुंह पर पड़ते है, तो शरीर से पानी और ऑक्सीजन को खींच लेता है। अक्सर डिहाइड्रेशन के कारण दिमाग जल्दी गरम हो जाता है। डिहाड्रेट बॉडी के कारण व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता मर जाती है। जिससे व्यक्ति का गुस्से पारा हाई रहता है।नींद की कमीगर्मियों के समय नींद को पूरी करना काफी मुश्किल हो जाता है। आजकल लोग तो देर से सोते हैं, सारा समय सोशल मीडिया पर गुजरते हैं। रात को लेट सोते हैं और सुबह जल्दी उठ जाते है, जिससे कई लोगों की नींद पूरी नहीं होती है। जिस कारण से गर्मी में गुस्सा अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि पर्याप्त मात्रा में नींद लेना बहुत जरुरी है। जिससे व्यक्ति पूरा दिन चिड़चिड़ा रहता है।कोर्टिसल का स्तर बढ़नाकोर्सिटल एक प्रकार से तनाव हार्मोन है, जो गर्मी के समय सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। इस दौरान व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर तनाव लेता है, तो उसका कोर्सिटल हार्मोन बढ़ जाता है। इससे लोगों के अंदर गुस्सा बहुत तेजी से आ जाता है। कई बार ट्रैफिक के दौरान घंटों खड़े रहना या कही लाइन में लगे रहने से व्यक्ति का गुस्सा सातवें आसामान पर पहुंच जाता है। शारीरिक समस्याएंजरुरी नहीं है कि गर्मी में व्यक्ति के मन पर असर हो। असल में तेज सिरदर्द, दिल की धड़कन तेज होना और माइग्रेन जैसी समस्याओं से परेशान हो जाते हैं।गुस्सा को कैसे शांत रखेंविश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी बताया है कि इस मौसम में गुस्सा को कम कैसे करें। जब आपको किसी पर बहुत गुस्सा आ रहा है, तो उस जगह से हट जाएं, बाहर चलें जाएं या फिर उस इंसान दूर रहे। ऐसा करने झगड़े की गुजाइंश नहीं रहेगी। जब आपका मन शांत हो जाए, तो एक गिलास ठंडा पानी पिएं, जिससे आपके दिमाग को ऑक्सीजन मिल जाए, ऐसा करने से आपका मन शांत रहेगा। गहरी लंबी सांसों का अभ्यास करें  -जब भी आपको गुस्सा आएं, गहरी सांस अभ्यास करें। रोजाना सुबह उठकर डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज जरुर करनी चाहिए।  - अगर आप बाहर हो, मार्केट में हो, या फिर रेड लाइट सिगनल पर हो, तो गुस्सा आने पर बाक्स ब्रीदिंग कर सकते हैं। - ऐसा करने से आपके दिमांग को शांत रहने के संकेत पहुंचते हैं।  - दोपहर के समय बाहर न जाएं। - सुबह और शाम को गहरी सांस का अभ्यास करें। नियमित रुप से वॉक करें और तनाव से दूर रहे है। जब आप ट्रैफिक में फंसे हो, तो शांत म्यूजिक सुन सकते हैं। - बाहर का मसालेदार व तला-भुना खाना न खाएं। जितना संभव हो आप बाहर या खुली हवा में सुकून भरी सांस जरुर लें। ऐसा करने से आपका गुस्सा जरुर शांत होगा।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 27 May 2026 10:39:53 +0530</pubDate>
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<title>नौतपा की भीषण Heatwave में कैसे रहें Safe? जानें Doctor के ये जरूरी Health Tips</title>
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<description><![CDATA[ नौतपा की शुरुआत हो चुकी है और इन 9 दिनों तक भीषण गर्मी पड़ने वाली है। नौतपा के दौरान सूर्य की तपिश चरम पर होती है। साइंस से लेकर ज्योतिष में भी नौतपा का विशेष महत्व माना गया है। इस दौरान डॉक्टर भी सेहत पर अनदेखी करने के लिए मना करते हैं। जो रोगी पहले से बीमार चल रहे होते हैं उनको सेहत से जुड़ी समस्या और झेलने पड़ती है। ऐसे में हीट स्ट्रेस के कारण शरीर का प्राकृतिक बैलेंस सिस्टम पर असर देखने तो मिलता हैं। इस कारण से डायबिटीज, किडनी के मरीज, हार्ट के मरीज, बीपी, बुजुर्गों और प्रेग्नेंट महिलाओं की सेहत पर काफी बुरा असर पड़ सकता है। इन सभी समस्याओं से बचने के लिए डॉक्टर पहले से ही सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। नौतपा के इन 9 दिनों में सेहत का ख्याल रखना जरुरी है।नौतपा में किन मरीजों को अपनी सेहत का ध्यान रखना हैडायबिटीज आजकल डायबिटीज की समस्या हद से ज्यादा देखने को मिल रही है। गर्मियों के दौरान बढ़ता हुआ तापमान डायबिटीज के मरीजों पर असर डालता है। सीडीसी के अनुसार, पानी की कमी यानी के डिहाइड्रेशन के कारण भी डायबिटीज के मरीजों पर प्रभाव देखने को मिलता हैं। इसके अलावा इंसुलिन भी गर्मी में तेजी से बढ़ता है, जो डायबिटीज को मरीजों को प्रभावित करता है। भीषण गर्मी में डायबिटीज के मरीज अपना ध्यान जरुर रखें। नौपता में किडनी रोगNCBI के रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है और भयंकर लू चलती है, तो ऐसे में शरीर से पसीना निकालता है और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में किडनी के सामान्य कार्यों पर दवाब पड़ता है। जिन लोगों को किडनी संबंधित कोई समस्या है, तो इससे बचें।हार्ट के मरीज हो जाएं सावधानअमेरिकन हार्ट एसोसिएशन जनरल के अनुसार, भीषण गर्मी में हार्ट के मरीज अपना विशेष ख्याल रखें। जब तापमान बढ़ता है तो शरीर का थर्मोरेगुलेटरी सिस्टम गर्मी कंट्रोल करता है। अधिक गर्मी होने पर हीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉशन की संभावना बढ़ जाती है। इस तरह से थर्मल में होने वाले गड़बड़ी से हार्ट कार्य पर दवाब पड़ता है। जिससे कार्डियक स्ट्रेस होने की संभावना अधिक हो जाती है।अस्थमा के मरीज ध्यान देंएक रिपोर्ट के अनुसार, लगातार भयंकर गर्मी में रहने या फिर गर्म हवा के वातावरण में रहने से व्यक्ति फेफड़े के कार्य पर दवाब पड़ता है। इस मौसम में सबसे ज्यादा दिक्कत अस्थमा के मरीजों को होता है। ये भी पढ़ें:Nautapa Alert: 9 दिन पड़ेगी झुलसाने वाली गर्मी, जान बचाने के लिए अपनाएं ये Summer Diet नौतपा से बचने के लिए जरूरी टिप्स  - डिहाइड्रेशन की समस्या से बचें। - थोड़ा-थोड़ा समय पर पानी जरुर पिएं।  - नौतपा के दौरान इन 9 दिनों तक दोपहर में बाहर निकालने से बचें। - अगर दोपहर के समय जाना जरुरी है, तो ऐसे कपड़े पहनें जिससे पूरा शरीर ढका रहे। - कॉटन के ढीले कपड़े पहनें, जिससे पसीना जल्दी सूख जाए। - अधिक तला-भुना और मसालेदार खाना न खाएं, इनके सेवन से शरीर में गर्मी बढ़ती है। - इस दौरान हीट स्ट्रोक, चक्कर, थकान और सिरदर्द महूसस हो, कहीं छाया में आराम करने के लिए बैठ जाए।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 27 May 2026 09:41:53 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: Cardio Workout के बाद Protein को करते हैं Ignore? ये भूल आपकी Gym की मेहनत कर देगी बर्बाद</title>
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<description><![CDATA[ अधिकतर लोगों को लगता है कि प्रोटीन शेक सिर्फ मसल बिल्डिंग या वेट लिफ्टिंग के लिए जरूरी है। लेकिन कार्डियो के बाद भी प्रोटीन शेक लेना जरूरी होता है। फिर चाहे आप ताकत के लिए ट्रेनिंग कर रहे हों, फिटनेस के लेवल को बनाए रखने और फैट लॉस के लिए कर रहे हैं। तो कार्डियो के बाद प्रोटीन लेने से परफॉर्मेंस, जल्द रिकवरी और गोल तक पहुंचने के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि प्रोटीन इतना जरूरी क्यों है और इसको लेने के क्या तरीके हैं।कार्डियो के बाद प्रोटीन शेक पीने के फायदेवेट लॉस के समय प्रोटीन लीन मसल मास को बनाए रखने में सहायता करता है। जोकि धावकों और खिलाड़ियों के लिए बेहद जरूरी होता है।इसे भी पढ़ें: भयंकर गर्मी में बढ़ रहा है आपका भी गुस्सा? इन 5 Tips से रखें अपने दिमाग को एकदम Coolएक्सरसाइज के बाद रिकवरी भी बेहद जरूरी होती है। जिसमें प्रोटीन शेक अहम रोल निभाता है। इस तरह से ट्रेनिंग को बिना गैप के ज्यादा नियमित तरीके से कर पाते हैं।अगर आप फैट लॉस या वेट लॉस के लिए कार्डियो कर रहे हैं, तो वर्कआउट के बाद प्रोटीन शेक भूख को कंट्रोल करने और ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में अहम भूमिका निभाता है।जानिए कितना प्रोटीन है जरूरीवैसे तो अधिकतर लोगों को वर्कआउट के बाद 20-30 ग्राम हाई क्वालिटी प्रोटीन की जरूरत होती है। लेकिन इन बातों पर भी इसकी मात्रा निर्भर करती है।दिन भर में ली गई प्रोटीन की कुल मात्राकार्डियो का समय और तीव्रतासाथ ही ट्रेनिंग से क्या लक्ष्य पाना चाहते हैं।कैसे चुनें सही प्रोटीननो फिलर्स, लो शुगर और क्लीन इंग्रीडिएंट्स वाले प्रोटीन शेक चुनना चाहिए।व्हे और प्लांट बेस्ड प्रोटीन का ऑप्शन चुनना चाहिए। जैसे राइस या मटर जैसे सोर्स से तैयार हुआ प्रोटीन।आप प्रोटीन को फुल मील के बजाय शेक के रूप में ले सकते हैं। आप इसको जिम में भी आसानी से ले जा सकते हैं। शेक के अलावा आप ओट्स, बेक्ड चीजों और पुडिंग में भी प्रोटीन पाउडर मिला सकते हैं।न करें ये गलतियांकाफी लोग कार्डियो के बाद कार्ब और हाइड्रेशन लेना नहीं भूलते हैं, लेकिन प्रोटीन लेना भूल जाते हैं। जिस कारण उनकी रिकवरी स्लो पड़ जाती है।बता दें कि प्रोटीन शेक खाने का ऑप्शन नहीं बल्कि सप्लीमेंट है। क्योंकि भले ही कार्डियो को बाद आप प्रोटीन शेक लेते हों, लेकिन कार्डियो सेशन से कुछ घंटे पहले बैलेंस डाइट लेना न भूलें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 27 May 2026 09:41:47 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: हीटवेव अलर्ट में यह गलतियां शरीर को पहुंचा सकती हैं नुकसान, रखें ध्यान</title>
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<description><![CDATA[ देश में हीटवेव अलर्ट जारी हो चुका है। जरूरत से ज्यादा गर्मी और लू सेहत को बहुत नुकसान पहुंचा सकती हैं। हीटवेव के दौरान सिर्फ डिहाइड्रेशन या हीट स्ट्रोक की ही समस्या नहीं होती है, बल्कि यह मौसम शरीर को काफी कमजोर और बीमार भी बना सकता है।  खासतौर से, अगर इस दौरान कुछ छोटी-छोटी गलतियां की जाएं तो आपको हीटवेव का असर काफी जल्दी नजर आ सकता है। अगर आपको भी हीटवेव में बार-बार थकान, सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी या बेचैनी महसूस करते हैं, तो इसे हल्के में ना लें। इसके पीछे आपकी कुछ रोजमर्रा की आदतें जिम्मेदार हो सकती हैं-बार-बार कोल्ड ड्रिंक पीनाहीटवेव में जब बहुत ज्यादा गर्मी लगती है तो लोग कुछ ठंडा पीना चाहते हैं और इसलिए बार-बार ठंडी कोल्ड ड्रिंक का सेवन करते हैं। लेकिन यह सेहत को काफी नुकसान पहुंचा सकता है। इसमें मौजूद चीनी और कैफीन सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता। इससे आपको शरीर में पानी की कमी बढ़ना, वजन बढ़ना, अचानक एनर्जी क्रैश, पेट फूलना और एसिडिटी की शिकायत हो सकती है। बेहतर होगा कि आप घर का बना शरबत, सत्तू ड्रिंक, नारियल पानी और बेल का शरबत का सेवन करें।इसे भी पढ़ें: नौतपा की भीषण Heatwave में कैसे रहें Safe? जानें Doctor के ये जरूरी Health Tipsपसीना आने के बाद भी गीले कपड़ों में रहनागर्मी के मौसम में पसीने की वजह से कपड़े पूरे गीले हो जाते हैं, लेकि फिर भी लोग लंबे समय तक उन्हीं कपड़ों में रहते हैं। हालांकि, ऐसी गलती करने से स्किन इंफेक्शन और फंगल समस्या का खतरा बढ़ जाता है। आपको इस छोटी सी गलती से शरीर में खुजली, रैशेज, बैक्टीरियल इंफेक्शन, बदबू और स्किन इरिटेशन की शिकायत हो सकती है। बेहतर होगा कि इस मौसम में आप ढीले और सूती कपड़े पहनें। ज्यादा पसीना आने पर कपड़े जरूर बदल लें।धूप से आने के तुरंत ठंडा पानी पीनाजब लोग गर्मी से वापस आते हैं तो उसके तुरंत बाद फ्रिज से निकालकर बहुत ठंडा पानी पी लेते हैं। इससे शरीर पर अचानक तापमान का दबाव पड़ सकता है। इससे आपको गले में खराश, पेट दर्द, सिरदर्द, पाचन पर असर जैसी समस्या हो सकती है। अगर आपको घर वापस आने पर बहुत प्यास लगे तो पहले सामान्य तापमान का पानी पिएं। उसके बाद ही धीरे-धीरे ठंडा पानी लें।- मिताली जैन ]]></description>
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<title>High BP का &amp;apos;Silent Killer&amp;apos; अटैक! युवा हो रहे शिकार, Life Style में 5 बदलाव बचाएंगे जान</title>
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<description><![CDATA[ आजकल युवओं में हाई बीपी और शुगर की समस्या काफी देखने को मिल रही है। बिजी लाइफस्टाइल और गलत खान का कारण भी हो सकता है। आज के युवा तनाव में अपना सारा समय बर्बाद कर रहे है। हद से ज्यादा चिंता करना, तला-भुना खाना, मसालेदार स्ट्रीट फूड खाना, न कोई फिजकिल एक्टविटी और दिन भर पड़े रहने से हाइपरटेंशन यानी के हाई बीपी के समस्या बढ़ रही है। हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करना बेहद जरुरी है। लंबे समय बीपी का हाई और लो रहना अच्छा नहीं होता है। कई बार तो इसके शुरुआती लक्षण नहीं दिखाई देते। गौरतलब है कि हाई बीपी का प्रभाव हमारे शरीर पर काफी देखने को मिलता है। अगर आप इस समस्या से परेशान हैं, तो इस बिल्कुल भी इग्रोर न करें। इससे बचने के लिए आप अभी से अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करें। हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव - डॉक्टर बताते है कि हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए दवाई लेना काफी जरुरी होता है। लेकिन इसके साथ ही लाइफस्टाइल में बदलाव करने बेहद जरुरी है। - आपको अपने डाइट में काफी बदलाव करना जरुरी है। इसके लिए आप बैलेंस डाइट लें। कम से कम अपनी डाइट में सिर्फ 4 से 5 ग्राम नमक का सेवन ही करें। इसके साथ ही आप हरी सब्जियां, पौष्टिक से भरपूर साबुत अनाज, फल और लीन मीट्स को सेवन कर सकते हैं। लेकिन आप प्रोसेस्ड फूड और तले-भुने से दूरी बनाकर रखे।  - बीपी को कंट्रोल रखने के लिए आप नियमित तौर पर एक्सरसाइज कर सकते हैं। आप चाहे तो साइकिंग, ब्रिस्क वॉकिंग और कार्डियोवैस्कुलर एक्टिविटीज जरूर करें। हफ्ते में कम से कम 2 बार तो एक्सरसाइज जरुर करें।- अगर आप वजन से परेशान है और मोटापा कम करना चाहते हैं, तो एक्सरसाइज जरुर करें। हाई बीपी कम होने से वजन कम करने में सहायता प्राप्त होती है। - यदि आप लंबे समय शराब और तांबूक का सेवन कर रहे हैं, तो इसको जल्द ही बंद कर दें। इनके सेवन से बीपी और हार्ट हेल्थ पर असर पड़ता है। - हाई बीपी बढ़ने का मुख्य कारण तनाव होता है। बिना वजह की चिंता न करें, अगर आप अधिक तनाव लेते हैं, तो इसको दूर करने के लिए मेडिटेशन, डीप ब्रीथिंग और योग जरुर करें। पर्याप्त मात्रा में नींद लें, कम से कम 7 से 8 घंटे तक सोएं। जिन लोगों को हाई और लो बीपी की समस्या होती है वे लोग अपने बीपी का नियमित रुप सें मॉनिटरिंग करें।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 26 May 2026 11:18:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Vitamin D की खतरनाक कमी? सिर्फ धूप नहीं, ये Diet और Lifestyle Tips बनाएंगी हड्डियां Strong</title>
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<description><![CDATA[ भागदौड़ वाली जिंदगी और पूरे दिन ऑफिस में बैठे रहना या फिर घर में आराम से पड़े रहना, लेकिन धूप दूरी बनाने से विटामिन डी कमी काफी दिखी जाती है। आजकल युवा लोग धूप से लंबी दूरी बना लेते हैं, जिससे विटामिन डी कमी, इम्यूनिटी वीक हो जाना और हड्डियां कमजोर हो जाती है। विटामिन डी हड्डियों के लिए सबसे जरुरी माना जाता है। पर्याप्त विटामिन डी शरीर को न मिले, तो हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है, शरीर में थकान बना रहना, मसल्स में दर्द होना और मूड स्विंग्स होना व व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है। विटामिन डी कमी को पूरा करने के लिए लोग सप्लीमेंट का सहारा है, जो कि इतनी हेल्दी नहीं मानी जाती है। अगर आप दवाई या सप्लीमेंट को छोड़कर पर्याप्त मात्रा में धूप लेंगे और विटामिन डी रिच फूड्स का सेवन करेंगे, तो आपके शरीर में  Vitamin D बढ़ेगा और हड्डियां मजबूत रहेंगी। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि प्राकृतिक रुप से विटामिन डी कैसे लें।Vitamin D का सबसे बड़ा सोर्स धूप हैइसमें कोई दोहराएं नहीं है, विटामिन डी के लिए सबसे ब़ड़ा स्रोत धूप है। विटामिन डी प्राप्त करने का सबसे आसान तरीका है सूर्य की रोशनी है। जी हां, आप सुबह-सुबह धूप जरुर लें। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, यदि आप 4 से 5 हफ्ते सुबह की सूर्य रोशनी में बैठते हैं, तो आपको पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिलेगी। लेकिन 10 बजे के बाद धूप में न बैठें। अधिक धूप लेना भी नुकसानदायक होता है। अगर आप ज्यादा धूप लेते हैं, तो सनबर्न और स्किन पर असर पड़ेगा। इसलिए थोड़ी धूप लेना सर्वोत्तम है। इसलिए आप थोड़ी देर चेहरे, हाथों और पैरों पर थोड़ी धूप लें। एक्सरसाइज भी जरुरी हैशरीर के लिए पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी पाने के लिए एक्सरसाइज करना बेहद जरुरी है। केवल धूप ही नहीं, फिजिकल एक्टिवटी करने से विटामिन डी के बेहतर उपयोग में मदद करती है। कहा जाता है एक्सरसाइज करने से मेटाबॉलिज्म अच्छा रहता है और हड्डियां भी मजबूत बनीं रहती है। आप रोजना नीचे बताई हुई फिजिकल एक्टिविटी को जरुर करें--मॉर्निंग वॉक-योग-साइकिलिंग-जॉगिंग-आउटडोर स्पोर्ट्सडाइट का रखें खास ख्यालयह एकदम सत्य है कि विटामिन डी कमी को पूरा करने के लिए सही डाइट को अपनाना। जरुरी पोषक तत्वों के लिए सबसे जरुरी होती है डाइट। अपने आहार में इन सब चीजों को एड कर सकते हैं। जो लोग वेजिटेरियन है, उनके लिए नीचे डाइट बताई गई है।वेजिटेरियन लोगों के लिए फायदेमंद चीजें-फोर्टिफाइड मिल्‍क और डेयरी प्रोडक्ट्स-पनीर, दही और चीज-धूप में रखे गए मशरूम-फोर्टिफाइड सीरियल्स और ओट्सनॉन-वेज खाने वाले लोगों के लिए फायदेमंद चीजें-अंडे की जर्दी-फैटी फिश जैसे सैल्मन, टूना, सार्डिन और मैकरेल-लिवर और फोर्टिफाइड फिश प्रोडक्ट्सइन सभी चीजों को सही मात्रा में सेवन करने से शरीर को विटामिन डी प्राप्त होती है।लाइफस्टाइल से भी फर्क पड़तासिर्फ धूप लेना, डाइटिंग पर ध्यान और फिजिकल एक्टविटी करने से ही नहीं, बल्कि सही लाफस्टाइल होना भी जरुरी है। अगर आपकी गलत आदते हैं, तो पोषक तत्व आसानी से शरीर को नहीं मिलते है- - इसके लिए आप 7-8 घंटे तक जरुर सोएं। - तनाव बिल्कुल न लें। - शरीर को हाइड्रेटेड रखना जरुरी है। - बैलेंस डाइट का सेवन करें।कब विटामिन डी की जांच कराएं?जब आपको शरीर में बार-बार थकान महसूस हो, हड्डियां कमजोर होने लगे, इम्यूनिटी कमजोर होने लगे, मसल्स में दर्द बना रहना और हड्डियों में दर्द रहता है, तो आप विटामिन डी की जांच जरुर चेक कराएं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 26 May 2026 11:18:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: कहीं Breakfast का ब्रेड तो नहीं बन रहा Slow Poison? बढ़ा रहा Diabetes और Weight Gain का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ आजकल की बिजी लाइफस्टाइल के कारण सुबह नाश्ता बनाने का समय बहुत कम लोगों के पास होता है। ऐसे में जैम-ब्रेड, बटर-टोस्ट या सैंडविच लोगों की पहली पसंद बन जाता है। भले ही ब्रेड एक आसान और जल्दी तैयार होने वाला ऑप्शन है, वहीं इसके बड़े और बच्चे सभी चाव के साथ खाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोजाना नाश्ते में ब्रेड खाना शरीर के लिए फायदेमंद है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि रोजाना नाश्ते में ब्रेड खाने से शरीर में क्या-क्या बदलाव आते हैं।इंस्टेंट एनर्जीअधिकतर घरों में व्हाइट ब्रे़ड का इस्तेमाल किया जाता है, जोकि मैदा से बनी होती है। वहीं इसमें फाइबर कम और कार्बोहाइड्रेट काफी ज्यादा मात्रा में होता है। ऐसे में जब आप इसको खाते हैं, तो शरीर को इंस्टेंट एनर्जी तो मिलती है, लेकिन यह एनर्जी लंबे समय तक नहीं टिकती है। जिस कारण जल्दी दोबारा भूख लग जाती है। साथ ही बार-बार कुछ खाने की क्रेविंग होने लगती है।इसे भी पढ़ें: Health Alert: महिलाओं में Bloating हो सकता है Ovarian Cancer का संकेत, ये लक्षण न करें नजरअंदाजडायबिटीज का रिस्कव्हाइट ब्रेड का बड़ा नुकसान यह है कि यह जल्दी पच जाती है, जिससे ब्लड में शुगर का लेवल अचानक से बढ़ जाता है। अगर आप सुस्त लाइफस्टाइल जीते हैं और रोजाना नाश्ते में ब्रेड खाते हैं, तो समय के साथ आपको &#039;टाइप 2 डायबिटीज&#039; होने का जोखिम काफी बढ़ सकता है।पोषण की कमीब्रेड से पेट भरने का मतलब है कि आपके शरीर को जरूरी डाइट नहीं मिल रही है। ब्रेड में प्रोटीन, मिनरल्स और विटामिन की भारी कमी होती है। अगर आप रोजाना सिर्फ ब्रेड पर निर्भर रहते हैं, तो शरीर में इन जरूरी तत्वों की कमी हो जाती है, जिस कारण आपको थकान और कमजोरी हो सकती है। वहीं बीमारियों से लड़ने की ताकत कमजोर हो सकती है। वहीं पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।कई लोगों को ब्रेड खाने के बाद गैस या पेट फूलने की शिकायत होती है। जिसकी मुख्य वजह गेंहू में पाया जाने वाला &#039;ग्लूटेन&#039; नामक तत्व है। जिन लोगों का शरीर ग्लूटेन को नहीं पचा पाता है, उनके लिए रोजाना ब्रेड खाना पेट संबंधी परेशानियों को बढ़ा सकता है।वेट बढ़नाअक्सर हम ब्रेड के साथ जैम, बटर या अन्य प्रोसेस्ड स्प्रेड्स लगाकर खाते हैं। जिससे शरीर में जाने वाली कैलोरी की मात्रा काफी ज्यादा हो जाती है। इसको अगर रोजाना खाया जाए, तो धीरे-धीरे वेट बढ़ने की संभावना रहती है।पूरी तरह ब्रेड खाना छोड़नाअगर आप ब्रेड खाना चाहते हैं तो सही टाइप की ब्रेड चुनें और उसको संतुलित मात्रा में खाएं। यह एक सुविधाजन और बेहतरीन नाश्ता बन सकता है। इसके लिए आप यह आसान बदलाव कर सकते हैं।सही ब्रेडव्हाइट ब्रेड की बजाय ब्राउन ब्रेड या होल ग्रेन ब्रेड को डाइट में शामिल करना चाहिए। इसमें पोषक तत्व और फाइबर ज्यादा होते हैं। जोकि पाचन को बेहतर रखने में मदद करते हैं।अपने ब्रेड नाश्ते को हेल्दी बनाने के लिए इसमें फाइबर और प्रोटीन जरूर शामिल करें। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 26 May 2026 11:18:33 +0530</pubDate>
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<title>Health Alert: महिलाओं में Bloating हो सकता है Ovarian Cancer का संकेत, ये लक्षण न करें नजरअंदाज</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर महिलाओं में ब्लोटिंग यानी पेट फूलने की समस्या काफी देखने को मिलती है। कई बार इसे गैस, बाहर का खाना, तनाव, हार्मोनल बदलाव या पीरियड्स से जोड़कर देखा जाता है। आमतौर पर कभी-कभार पेट फूलना चिंता की बात नहीं होती, लेकिन अगर पेट लगातार फूलता रहे और लंबे समय से ठीक न हो, तो इसे गलती से भी इग्नोर न करें। यह शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।पेट फूलना क्या ओवरी कैंसर का संकेत है ?खासतौर पर महिलाओं को यह समझना जरुरी है कि पेट फूलना कई बार अंडाशय यानी ओवरी के कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है। बार-बार पेट फूलना कैंसर का संकेत नहीं हो सकता है, बल्कि यह समस्या कई दिनों या हफ्तों तक बनी रहे, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरुरी है। शुरुआती स्टेज पर कैंसर का पता लगाना काफी मुश्किल होता है, क्योंकि इसके लक्षण बेहद ही सामान्य होते हैं। ब्लोटिंग में शरीर क्या संकेत देता है-पेट या पेल्विक एरिया में दर्द-पेट भारी लगना-भूख कम लगना-थोड़ा खाने पर पेट भर जाना-बेवजह वजन बढ़ना या घटना-बार-बार पेशाब आना-कब्ज-थकानहमेशा पेट फूलना कैंसर नहीं हो सकता हैयह बिल्कुल सच है कि हर बार पेट फूलना कैंसर नहीं होता। कुछ मामलों में पेट फूलने का कारण गैस, कब्ज, तनाव, हार्मोनल बदलाव, तला-भुना मसालेदार भोजन या पीरियड्स हो सकते हैं। लेकिन समस्या तब होती है, जब महिलाएं बिना ध्यान रखें इसे सामान्य मान लेती है, लक्षण कब से महसूस हो रहे हैं, कितनी बार होते हैं, इन सब पर ध्यान देना काफी जरुरी है।किन महिलाओं को ओवरी कैंसर का खतरा ?जिन महिलाओं के परिवार में ओवरी, ब्रेस्ट या कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास रहा है, उनमें जोखिम बढ़ सकता है। इसके साथ ही बढ़ती उम्र, मोटापा, सिगरेट की लत, एंडोमेट्रियोसिस और कुछ आनुवंशिक बदलाव भी खतरा बढ़ जाता है। वहीं, जिन महिलाओं के परिवार में कैंसर का इतिहास नहीं रहा है, उन लोगों को यह बीमारी हो सकती हैं, इसलिए हमेशा जागरुक रहना जरुरी है।शरीर के बदलावों पर ध्यान देंमहिलाएं अपने शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें। अचानक से कपड़े कमर पर तंग लगने लगें, पेट लगातार फूला रहे या खानपान बदलने के बाद भी समस्या बनीं रहती है, तो महिला की जांच जरुरी है। महिला को पेल्विक टेस्ट, अल्ट्रासाउंड या कुछ ब्लड टेस्ट करने होते हैं। इनसे बीमारी का जल्दी पता लगाया जा सकता है।हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएंमहिलाओं का अपनी सेहत पर ध्यान देना जरुरी है। बैलेंस डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, पर्याप्त पानी पीना, सिगरेट से परेहज करना और वजन को कंट्रोल में रखना शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसके साथ ही रेगुलर हेल्थ चेकअप कर सकते हैं।30 साल की उम्र के बाद महिलाओं को समय-समय पर अपनी जांच, सोनोग्राफी और जरूरी टेस्ट कराने चाहिए। यदि बीमारी का पता लग जाए तो इलाज आसान हो सकता है और गंभीर उपचार की जरुरत कम पड़ सकती है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 25 May 2026 09:50:38 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: आपका Lipid Profile क्या कहता है? जानें LDL, HDL और Triglycerides का दिल से कनेक्शन</title>
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<description><![CDATA[ ट्राईग्लिसराइड्स, LDL और HDL यह तीनों ही दिल की बीमारियों से जुड़े है। आम भाषा में LDL को खराब कोलेस्ट्रॉल, HDL को अच्छा कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को नसों में जमा फैट कहा जाता है। इन तीनों के ऊपर-नीचे होने से दिल की सेहत पर असर होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इन तीनों के आपस के संबंध और दिल की बीमारी से इनके कनेक्शन के बारे में बताने जा रहे हैं।जानिए क्या है HDLHDL का मतलब है हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन और लिपोप्रोटीन लिपिड्स से है। जोकि फैट और प्रोटीन से मिलकर बना होता है। इसको अच्छा कोलेस्ट्रॉल माना जाता है। क्योंकि यह ब्लड फ्लो से कोलेस्ट्रॉल और अन्य खराब पदार्थों को एकत्र करके लिवर तक ले जाता है। फिर लिवर इस कोलेस्ट्रॉल को ब्रेक करता है और शरीर से बाहर निकालता है। कोलेस्ट्रॉल मोम जैसा पदार्थ होता है, जोकि हर टिश्यू में मौजूद होता है। शरीर के लिए सेहतमंद कोलेस्ट्रॉल बहुत फायदेमंद है। यह बॉडी के सेल्स को सही तरह से काम करने में सहायता करता है। वहीं यह विटामिन डी और हार्मोन का भी निर्माण करता है। हार्ट की बीमारियों और स्ट्रोक के खतरे को भी अच्छा कोलेस्ट्रॉल कम करता है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: सेहतमंद समझकर खाई जाने वाली ये 3 चीजें हो सकती हैं खतरनाक, जानें Ayurvedic नियमजानिए क्या है LDLLDL का मतलब है लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन होता है। जिसको आम भाषा में खराब कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। इसके कणों में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ज्यादा और प्रोटीन की मात्रा कम होती है। यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल को कोशिकाओं तक पहुंचाता है। जब शरीर में LDL की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो हाई LDL आर्टरी से चिपकने लगता है और इस फैट को प्लाक कहा जाता है। लगातार आर्टरी पर जमने की वजह से आर्टरीज सख्त और संकरी हो जाती है। जिससे ब्लड फ्लो में रुकावट आती है और दिमाग और दिल तक ऑक्सीजन युक्त ब्लड नहीं पहुंच पाता है। अगर यह प्लाक फट जाता है, तो इस कारण स्ट्रोक या हार्ट अटैक हो सकता है। हाई LDL हार्ट संबंधी बीमारियों को बढ़ा सकता है।क्या है ट्राइग्लिसराइड्सयह शरीर में पाया जाने वाला फैट होता है, जोकि अच्छी सेहत के लिए बॉडी में कुछ मात्रा में होना जरूरी होता है। ट्राइग्लिसराइड्स ब्लड में मौजूद एक तरह का लिपिड है, जोकि ब्लड सर्कुलेट करता है। जब लोग ऐसी कैलोरी लेते हैं, जिसकी शरीर को जरूरत नहीं होती है तो शरीर इसको ट्राइग्लिसराइड्स में बदल देता है। इस्तेमाल न होने वाली कैलोरी फैट सेल्स में जमा हो जाते हैं। जब शरीर में कैलोरी की जरूरत हो, तो यह ट्राइग्लिसराइड्स ब्लड में रिलीज होते हैं। शरीर में जब ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ते हैं, तो लिपिड डिसऑर्डर होता है। अगर बॉडी में HDL कम हो जाए और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ जाए, तो यह शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ट्राइग्लिसराइड्स अधिक होने पर हार्ट की बीमारियों और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है।लिपिड प्रोफाइल में LDL, HDL, Triglycerides कैसे चेक करेंहेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के जरिए शरीर में कोलेस्ट्रॉल और फैट की जांच की जा सकती है। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में टोटल कोलेस्ट्रॉल, HDL, LDL और ट्राइग्लिसराइड्स चेक किया जाता है। दिल संबंधी बीमारी या स्ट्रोक के खतरे को चेक करने के लिए इस टेस्ट को करने की सलाह दी जाती है। यह टेस्ट कराने से पहले व्यक्ति को कम से कम 9 से 12 घंटे की फास्टिंग करनी होगी। हालांकि इस दौरान पानी पिया जा सकता है। लिपिड प्रोफाइल कराने से 24 घंटे पहले शराब नहीं पीना चाहिए।डॉक्टर से कम मिलेंअगर लगातार बीपी की समस्या बनी रहे, ब्लड शुगर कंट्रोल में न रहे, ज्यादा पसीना आए, सीने में दर्द, आराम की पोजिशन में सांस फूलना और बहुत ज्यादा थकान आदि के लक्षण महसूस हों, तो फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 24 May 2026 15:11:10 +0530</pubDate>
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<title>Nautapa Alert: 9 दिन पड़ेगी झुलसाने वाली गर्मी, जान बचाने के लिए अपनाएं ये Summer Diet</title>
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<description><![CDATA[ इस साल नौतपा की शुरुआत 25 मई से शुरू होगा और 2 जून तक चलेगा। इस समय चलने वाली तेज लू और झुलसा देने वाली धूप सीधे हमारे शरीर को प्रभावित करती है। उत्तर भारत में जेठ के महीने में गर्मी प्रचंड रुप में होती है, इसी दौरान नौतपा की शुरुआत होती है। नौतपा के समय सूर्य की तपिश चरम पर होती है। इस दौरान आने वाला पसीना शरीर से पानी और जरुरी मिनरल्स को तेजी से बाहर कर देता है, जिससे डिहाइड्रेशन, कमजोरी, सिरदर्द और पेट संबंधित समस्याएं देखने को मिलती है। नौतपा के दौरान खुद को अंदर से ठंडा रखने और डाइट का सही होना काफी जरुरी है। आइए आपको बताते हैं नौतपा के दौरान किन चीजों का डाइट में शमिल करना चाहिए और किन चीजों से परेहज करना है।नौतपा के दौरान क्या खाना चाहिए?नौतपा के समय खाने का सबसे पहला नियम बना लें कि, हल्का खाना खाएं और पानी की मात्रा अधिक लें-पानी से भरपूर मौसमी फल और सब्जियांप्रकृति हर मौसम के अनुसार ऐसे फल और सब्जियां प्रदान करती है, जो शरीर को उसी मौसम में स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। गर्मियों के दौरान भोजन में तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और संतरे जैसे रसदार फलों को जरूर शामिल करना चाहिए। इनमें पानी की मात्रा भरपूर होती है, जिससे शरीर हाइड्रेट रहता है और ऊर्जा बनी रहती है। वहीं खाने में लौकी, तोरी, कद्दू और टिंडा जैसी हल्की व सुपाच्य हरी सब्जियां शामिल करें, जो पाचन को बेहतर रखने के साथ शरीर को ठंडक भी पहुंचाती हैं।देसी ड्रिंकनौतपा के समय सबसे ज्यादा घर की बनीं पारंपरिक ड्रिंक्स का सेवन करें, जैसे कि छाछ, दही। दोपहर के समय खाने में एक गिलास पुदीने और भुने जीरे वाली छाछ या एक कटोरी दही किसी अमृत से कम नहीं है। इसके अलावा, कच्चे आम का पन्ना लू से बचाने में मदद करेगा।सत्तू का शरबत का सेवन करें, यह शरीर को ठंडक पहुंचाएगा और साथ ही एनर्जी प्रदान करेगा। वहीं, नारियल का पानी और नींबू पानी का सेवन अधिक से अधिक करें। इससे इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी होगी।हल्का और आसानी से पचने वाला खानागर्मी के मौसम में दोपहर और रात के भोजन को हल्का और सुपाच्य रखना बेहतर माना जाता है। तले-भुने और ज्यादा मसालेदार भोजन से बचकर सादा खाने को प्राथमिकता दें। इस दौरान मूंग दाल की खिचड़ी, दाल-भात, दलिया या नरम रोटी के साथ हल्की हरी सब्जियां खाना शरीर के लिए फायदेमंद रहता है। ऐसा भोजन पेट पर कम भार डालता है और पाचन को भी स्वस्थ बनाए रखता है।नौतपा में किन चीजों से करें परहेज?ज्यादा मसालेदार और तला-भुना खाना- इन नौ दिनो के अंदर मिर्च-मसाले, समोसे, कचोरी और प्रोसेस्ड फूड का सेवन बिल्कुल ही न करें। ये पेट में एसिडिटी और गर्मी बढ़ाते हैं, जिससे आप दिन भर सुस्त और थका हुआ महसूस करोगे।चाय और कॉफी- चाय और कॉफी में सबसे ज्यादा कैफीन होती है, जो डाईयूरेटिक को कम करती है। जिससे बार-बार पेशाब आता है और शरीर में पानी की कमी देखने को मिलती है।मीठी चीजे और शराब - इस दौरान ज्यादा मीठा सेवन न करें और भूलकर भी शराब का सेवन न करें, इससे डिहाइड्रेशन को बढ़ावा मिलता है।बासी और खुला हुआ खाना- इस दौरान भूलकर भी बासी और बाहर का खुला हुआ खाना न खाएं, क्योंकि तेज तापमान के कारण बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं, जिससे खाना जल्दी खराब हो जाता है। इसलिए फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए हमेशा ताजा बना भोजन ही खाएं।नौतपा के लिए जरूरी टिपइन दिनों में प्यास लगने का इंतजार बिल्कुल न करें। हर आधे एक घंटे में थोड़ा-थोड़ा पानी पिएं। इन दिनों दोपहर की तेज धूप में बिना वजह घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।  यदि बहुत जरुरी काम हो, तो चेहरे को पूरा कवर करके बाहर निकलें। सही खानपान अपनाकर आप नौतपा की इस भीषण गर्मी को सेहतमंद रह सकती हैं। 

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<pubDate>Sun, 24 May 2026 15:11:09 +0530</pubDate>
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<title>Summer में चक्कर, सिरदर्द? ये हैं Heat Stroke के शुरुआती लक्षण, इन Health Tips से करें बचाव</title>
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<description><![CDATA[ गर्मियों में सेहत का ध्यान न रखा तो मुसीबत बढ़ जाती हैं। तापमान बढ़ता है हीटवेव की समस्या झेलने पड़ती है। भीषण गर्मी में शरीर का काफी नुकसान पहुंचता है। गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन हो सकता है। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के लगते हैं, लेकिन गलती से लक्षण को नजरअंदाज कर दिया तो स्थिति गंभीर हो सकती है। हीट एग्जॉस्टशन और हीटस्ट्रोक जैसी खतरनाक समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।मौसम गर्म और उमस भरा होता है, तो शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा पसीना निकालता है। पसीने के साथ ही शरीर से पानी और जरुरी मिनरल्स बाहर निकल आते हैं। यदि आप पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीतें, तो शरीर में पानी की कमी से डिहाइड्रेशन होने लगता है।डिहाइड्रेशन के लक्षणअक्सर डिहाइड्रेशन होने पर कई बार पेशाब कम आने लगती है और मांसपेशियों में ऐंठन भी हो सकती है। ये सभी संकेत बताते हैं कि शरीर को तुरंत पानी और आराम की जरुरत है। आइए आपको डिहाइड्रेशन के अन्य लक्षण के बारे बताते हैं--बहुत ज्यादा प्यास लगना-मुंह सूखना-होंठ फटना-सिरदर्द-चक्कर आना-कमजोरी-थकान-ड्राई स्किन-गहरे रंग का पेशाबडिहाइड्रेशन बढ़ने से क्या होता है?अगर आप पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पिएंगे, तो डिहाइड्रेशन गंभीर रूप ले सकता है। पानी की कमी के कारण ब्लड प्रेशर कम हो सकता है, शरीर में इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बिगड़ सकता है और इसका असर कई अंगों पर देखने को मिलता है। जिसके बाद से हीट एग्जॉस्टशन और हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।हीट एग्जॉस्टशन क्या है?हीट एग्जॉस्टशन यानी गर्मी से अत्याधिक थकावट होने से व्यक्ति को बहुत ही ज्यादा कमजोरी, चक्कर आना, पसीना, सिरदर्द और बेचैनी की समस्या देखने को मिलती है। यदि आप इस स्थिति में खुद को आराम नहीं दिया और पानी नहीं पीया, तो हीटस्ट्रोक की समस्या हो सकती है।हीटस्ट्रोक क्या है ?लू लगना गर्मी के मौसम में होने वाली सबसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। इस दौरान शरीर का तापमान अचानक अत्यधिक बढ़ जाता है और शरीर की प्राकृतिक ठंडक बनाए रखने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है। इसके प्रमुख संकेतों में तेज बुखार, धड़कन का बढ़ना, मतली या उल्टी, घबराहट, चक्कर आना, बेहोशी और सांस लेने में परेशानी शामिल हो सकते हैं। यदि स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाए तो इसका असर मस्तिष्क, हृदय और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर भी पड़ सकता है। ऐसे लक्षण नजर आते ही बिना देरी किए चिकित्सक की सलाह लेना बेहद जरूरी होता है।गर्मी का स्किन पर क्या असर देखने को मिलता है?गर्मी के कारण सिर्फ शरीर के अंदर ही नहीं, बल्कि स्किन पर भी दिखाई देता है। अधिक गर्मी के चलते और पानी की कमी के कारण त्वचा सूखी और बेजान नजर आने लगती है। सनबर्न, जलन और होंठ फटना भी आम समस्याएं हैं। अक्सर त्वचा की समस्या शरीर में पानी की कमी का संकेत होती है।गर्मी का डाइजेशन पर असरगर्मियों के दौरान पाचन संबंधी परेशानियां काफी देखने को मिलती हैं। गर्मियों के मौसम में भोजन और पानी जल्दी खराब हो जाती है, जिससे बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं। गर्मियों में ताजा और साफ भोजन खाना काफी जरुरी है। बासी खाना और बाहर का दूषित खाना खाने से बचें। वरना आप इन समस्याओं से परेशान हो सकते हैं--अपच-गैस-एसिडिटी-उल्टी-दस्त-फूड पॉइजनिंगलाइफस्टाइल के कारण बढ़ता है डिहाइड्रेशनलाइफस्टाइल के चलते भी डिहाइड्रेशन का प्रमुख लक्षण देखने को मिलता है। कई लोग लंबे समय तक घर के बाहर रहते हैं, ट्रैफिक में सफर करते हैं और वर्क में इतने व्यस्त रहते हैं कि समय पर पानी पीना भूल ही जाते हैं। कई लोग पानी की जगह ज्यादा चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक पीते हैं। इससे शरीर को सही हाइड्रेशन नहीं मिल पाता। जिस कारण से पानी की कमी बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए रेगुलर रुप से पानी जरुर पिएं।शरीर को कैस हाइड्रेट रखें?खूब पानी पिएं, पानी पीने केलिए प्यास का इंतजार न करें। गर्मियों में नियमित रुप से पानी पीना जरुरी है। सुबह से ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना शुरु कर देना चाहिए। इसके अतिरिक्त नारियल पानी, नींबू पानी और ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) भी सकते हैं, ये शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है। इतना ही नहीं, गर्मियों में पानी से भरपूर फल खाने चाहिए जैसे कि तरबूज, खीरा, खरबूजा और संतरा शरीर को ठंडक देते हैं और पानी की कमी पूरी करते हैं। हालांकि, तला-भुना मसालेदार और बाहर का खाना खाने से बचें। सिगरेट, शराब और चाय-कॉफी शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं इसलिए इनका सेवन करने से बचें।गर्मी से खुद को जरुर बचाएंगर्मी के मौसम में हमेशा हल्का, स्वच्छ और ताजा भोजन खाना बेहतर माना जाता है। शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए पूरे दिन नियमित अंतराल पर पानी और तरल पदार्थ लेते रहें। तेज धूप और लू के समय खासकर दोपहर में बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़े, तो आरामदायक सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनें, सिर को टोपी या गमछे से ढकें तथा त्वचा को धूप से बचाने के लिए सनस्क्रीन जरूर लगाएं।बच्चों और बुजुर्गों का ख्याल सबसे ज्यादा रखें क्योंकि पानी की कमी जल्दी हो सकती है। यदि किसी को लगातार चक्कर आए, बहुत कमजोरी महसूस हो, सांस लेने में परेशान हो या बेहोशी जैसा लगे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 24 May 2026 15:11:09 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: सेहतमंद समझकर खाई जाने वाली ये 3 चीजें हो सकती हैं खतरनाक, जानें Ayurvedic नियम</title>
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<description><![CDATA[ आज कम समय में लोग फिट और हेल्दी रहने के लिए रात में खूब सलाद खा रहे हैं। वहीं डाइजेशन को सुधारने के लिए दही भी खाते हैं। लेकिन इसके बाद भी ब्लोटिंग और गैस की समस्या होती है। तो बता दे कि सिर्फ हेल्दी खाना काफी नहीं होता है। क्योंकि आयुर्वेद के मुताबिक अगर आप पौष्टिक खाना गलत समय पर खाते हैं, तो यह फायदे की जगह नुकसान पहुंचाने लगता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 3 ऐसे सुपर हेल्दी फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको गलत समय पर खाने से आपकी सेहत बिगड़ सकती है।रात में दही खानाबता दें कि दही को प्रोबायोटिक्स का खजाना माना जाता है। लेकिन आयुर्वेद के मुताबिक रात में दही नहीं खाना चाहिए। क्योंकि दही की प्रकृति भारी और चिकना होता है। सूर्यास्त के बाद शरीर में प्राकृतिक रूप से कफ दोष बढ़ता है। ऐसे में रात में दही के सेवन से शरीर में टॉक्सिन और कफ की मात्रा बढ़ जाती है। जिस वजह से साइनस की समस्या, बलगम बनना, नाक बंद होना, जोड़ों में दर्द, शरीर में भारीपन और एक्ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।इसे भी पढ़ें: सुबह खाली पेट 10 Curry Leaves: जानें क्या हैं इसके चमत्कारी Health Benefits!रात में कच्चा सलाद खानावेट लॉस के लिए और फाइबर के लिए सलाद को सबसे अच्छा माना जाता है। लेकिन रात को खाने में सलाद को शामिल करने से पाचन तंत्र पर भारी असर पड़ सकता है। क्योंकि दिन से समय हमारी जठराग्नी यानी डाइजेस्टिव फायर तेज होती है। लेकिन शाम ढलते ही यह धीमी पड़ जाती है। कच्ची सब्जियां सूखी और ठंडी होती हैं। कमजोर डायजेस्टिव फायर के लिए कच्ची फाइबर वाली सब्जियों को तोड़ना मुश्किल है। इस वजह से पेट में भारीपन, गैस, ब्लोटिंग और नींद में खलल पड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।खाने के फौरन बाद फल खानाबहुत से लोग खाना खाने के बाद डेजर्ट के रूप में फल खाना पसंद करते हैं। जोकि पाचन के लिए बड़ी गलती होता है। क्योंकि फल जल्दी पच जाते हैं, लेकिन दाल रोटी या भारी खाने को पचने में 3-4 घंटे लगते हैं। क्योंकि जब आप खाना खाने के फौरन बाद फल खाते हैं, तो फल खाने के पीछे फंस जाते हैं। इससे पेट में ही फर्मेंट होने लगते हैं। जिसकी वजह से खट्टी डकारें, एसिडिटी, पाचन की धीमी गति होना और पोषक तत्वों का सही अब्जॉर्प्शन न होने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 23 May 2026 12:06:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: Work Life में दिमाग हो रहा Hang? यह Decision Fatigue है, Burnout से पहले पहचानें लक्षण</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में हम सभी अपने घर-परिवार, करियर और अन्य कारणों के बारे में काफी ज्यादा सोचने लगते हैं। सुबह उठने से लेकर रात को सोने के समय तक हमारा दिमाग शांत नहीं रह पाता है। दिन भर के कई छोटे-छोटे फैसले जैसे- कहां जाना है, कैसे जाना है, क्या पहनना है, किसके साथ मीटिंग है, खाने में क्या खाना है और किस काम को पहले करना है आदि लेने की वजह से दिमाग काफी थक जाता है।इस मानसिक थकान को मेडिकल भाषा में डिसीजन फटीग कहा जाता है। हालांकि यह कोई बड़ी मानसिक बीमारी नहीं होती है। लेकिन इस समस्या के होने पर व्यक्ति को रोजाना के नॉर्मल डिसीजन लेने भी मुश्किल हो जाते हैं। आमतौर पर यह समस्या तब होती है, जब आपका दिमाग बार-बार अपने कामों को करने के ऑप्शन के बीच में किसी एक ऑप्शन को चुनने को लेकर थक जाता है। फैसले लेने की क्षमता मानसिक ऊर्जा पर निर्भर होती है। जब मेंटल एनर्जी कम होने लगती है, तो हमारे फैसला लेने, धैर्य और सोचने-समझने की क्षमता पर इसका असर पड़ता है।इसे भी पढ़ें: Summer Health Guide: शुरू हो रहा है Nautapa, जानें 9 दिनों में हेल्दी रहने के लिए क्या खाएं और क्या नहींजानिए डिसीजन फटीग के लक्षणएक रिसर्च के मुताबिक डिसीजन फटीग हमारी मानसिक एनर्जी को कम कर देता है। जिसकी वजह से व्यक्ति की विलपॉवर और सही फैसला लेने की क्षमता कम होने लगती है। यह थकान गलत फैसले लेने के लिए मजबूर करती है। इस समस्या के होने पर शरीर में कई तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं।मानसिक थकान होनालगातार फैसले लेने के बाद दिमाग में भारीपन महसूस होने लगता है। इस स्थिति में व्यक्ति को सोचने में ज्यादा समय लगता है और साधारण काम को करने में भी मुश्किल होता है।फैसले टालनाडिसीजन फटीग की वजह से फैसला लेने की ताकत कम हो जाती है। जिस कारण व्यक्ति फैसले टालने लगता है। इस समस्या के होने पर व्यक्ति अभी मन नहीं कर रहा या हर काम को वो बाद में देखेंगे आदि तरह के बहाने बनाने लगता है।गलत फैसला लेनाकई बार दिमाग पर जोर पड़ने की वजह से हम जल्दबाजी में फैसले लेने लगते हैं। जैसे बिना सोचे समझे शॉपिंग करना, डाइट पर होने के बाद भी जंक फूड खाना या किसी काम के लिए हां या न करना।फैसले लेने से बचने की कोशिशइस समस्या की वजह से फैसला लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है। जिसकी वजह से कई लोग अक्सर निर्णय लेने से पूरी तरह से बचने लगते हैं। ऐसे में वह अपनी जिम्मेदारी को दूसरों पर डालने लगते हैं। या फिर अन्य ऑप्शन से दूरी बना लेते हैं।आत्मविश्वास न होनाडिसीजन फटीग की वजह से खुद को दोष देना, बार-बार अपने फैसलों पर शक होगा या हर फैसले के बाद यह सोचना की सही फैसला लिया या नहीं, यह भी इसका बड़ा संकेत है।शारीरिक लक्षणइस समस्या की वजह से व्यक्ति को फोकस करने में मुश्किल, सिर में दर्द, रोजमर्रा के कामों में दिक्कत और नींद में कमी होना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।डिसीजन फटीग से कैसे करें बचावकोई भी फैसला सुबह के समय लें, क्योंकि इस दौरान मानसिक एनर्जी ज्यादा होती है। इसलिए जरूरी है कि आप सुबह के समय अपने जरूरी फैसले लें।अपने किसी काम को करने के लिए ज्यादा ऑप्शन न रखें। खाना, कपड़ा या रोजमर्रा के कामों को सीमित ऑप्शन रखने चाहिए, जिससे कि ज्यादा कंफ्यूजन न हो।आपको अपने लिए एक हेल्दी रूटीन बनाना चाहिए। जिससे कि छोटे फैसले खुद लेने में आराम रहे। आप एक समय पर एक्सरसाइज करें और खुद के लिए तय किया हुआ खाना खाएं।लगातार काम करने से बचना चाहिए। क्योंकि लगातार काम करने से आप मानसिक तौर पर थक जाते हैं। इसलिए हर 60 से 90 मिनट बाद छोटा ब्रेक लें। वहीं हेल्दी डाइट और अच्छी नींद भी आपके मेंटल हेल्थ को बेहतर रखने और फैसलों को आसान बनाने में सहायता कर सकते हैं।जानिए कब है ये चिंता का कारणअगर आपको थकान, चिड़चिड़ापन और कोई भी फैसला लेने में मुश्किल होती है औऱ अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। जिसकी वजह से आपके रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। तो आपको सिर्फ डिसीजन फटीग नहीं बल्कि तनाव या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या भी हो सकती है। इस स्थिति को आपको हल्के में नहीं लेना चाहिए, बल्कि डॉक्टर या एक्सपर्ट से भी कंसल्ट करें। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 22 May 2026 11:28:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>सुबह खाली पेट 10 Curry Leaves: जानें क्या हैं इसके चमत्कारी Health Benefits!</title>
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<description><![CDATA[ पोहा, सांभर और कई अन्य साउथ इंडियन डिशेज का स्वाद बढ़ाने के लिए करी पत्ता इस्तेमाल किया जात है, ये खुशबू ही नहीं बढ़ाता बल्कि हेल्थ के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है। करी पत्ते एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो शरीर को अंदर से हेल्‍दी रखते हैं। अगर आप रोजाना खाली पेट 8-10 करी पत्ते चबाए तो शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचा सकते हैं। इसमें आयरन, केल्शियम और फाइबर जैसे जरुरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से पोषण देते हैं। आइए आपको बताते हैं खाली पेट करी पत्ता खाने के फायदे।रोज खाली पेट करी पत्ते खाने से क्‍या होता है?प्रतिदिन करी पत्ता के सेवन करने के बाद शरीर और स्किन संबंधित समस्याओं में काफी सुधार देखने को मिलता है-पाचन रहता है दुरुस्‍तकरी पत्ते में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक हो सकता है। इसका सेवन पेट की सफाई में मदद करता है और गैस, सूजन व पेट भारी लगने जैसी परेशानियों से राहत दिलाने में भी उपयोगी माना जाता है।दिन भर रहते हैं एनर्जी से भरपूरकरी पत्ते में मौजूद आवश्यक पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा देने में मददगार माने जाते हैं। इसका नियमित सेवन करने से दिनभर स्फूर्ति बनी रह सकती है और शरीर अधिक तरोताजा व हल्का महसूस कर सकता है।शरीर में जमा टॉक्सिंस को निकालता हैकरी पत्ता प्राकृतिक रुप से नेचुरली डिटॉक्स करने में काफी सहायक होता है, जिससे शरीर अधिक फ्रेश फिल करता है।हेयर फॉल होता है कमकरी पत्ता में पाए जाता है आयरन, एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्व, ये बालों की जड़ों को पोषण प्रदान करता है। इसके साथ ही बाल को हेल्दी बनाए रखता है। मुंहासे कम होते हैंआयुर्वेद में बताया है कि पाचन सही रहता है तब इसका असर स्किन पर भी नजर आता है। करी पत्ते शरीर को अंदर से साफ रखने और स्किन को हेल्दी दिखाने में सहायक माने जाते हैं।गौरतलब है कि करी पत्ता शरीर को डिटोक्स करता है,  डाइजेशन को बेहतर बनाने और ब्लड शुगर बैलेंस रखने में मदद करता है। इसमें पाए जाने वाला फाइबर पेट को साफ रखता है, जबकि एंटीऑक्सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में काफी सहायक होता है।करी पत्ते कैसे खाएं?- सुबह खाली पेट 8-10 ताजे करी पत्ते अच्छे से चबाएं। - अब एक गिलास में गुनगुना पानी पी सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 22 May 2026 11:24:18 +0530</pubDate>
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<title>Summer Health Guide: शुरू हो रहा है Nautapa, जानें 9 दिनों में हेल्दी रहने के लिए क्या खाएं और क्या नहीं</title>
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<description><![CDATA[ उत्तर भारत में 25 मई से नौतपा की शुरुआत हो रही है, जो 2 जून तक चलेगा। ये नौ दिन साल के सबसे गर्म दिन माने जाते हैं, जिसमें पूरे देश में भारी गर्मी पड़ती है। इस दौरान चलने वाली तेज लू और कड़क धूप का सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है। इसीलिए, इन नौ दिनों में अपनी सेहत का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है।तेज गर्मी में ज्यादा पसीना निकलने के कारण शरीर से पानी और जरूरी मिनरल्स कम हो जाते हैं। इससे कमजोरी, सिरदर्द, डिहाइड्रेशन और पेट की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। इस झुलसाने वाली गर्मी से बचने और शरीर को अंदर से ठंडा रखने के लिए हमारी डाइट का सही होना बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं कि नौतपा के दौरान हमें क्या खाना चाहिए और किन चीजों से दूरी बनानी चाहिए। इसे भी पढ़ें: आम Headache और Brain Cancer वाले सिरदर्द में क्या है फर्क? ये 5 Symptoms दिखें तो हो जाएं अलर्टनौतपा में क्या खाएं?इस दौरान खुद को स्वस्थ रखने का सबसे पहला नियम यह है कि ऐसा खाना खाएं जो पचने में बिल्कुल हल्का हो और जिसमें पानी की मात्रा ज्यादा हो ताकि शरीर पर ज्यादा भार न पड़े।पानी से भरपूर फल और सब्जियांइस मौसम में तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और संतरा जैसी चीजें ज्यादा से ज्यादा खाएं। इनमें 90% से ऊपर पानी होता है, जो शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता। सब्जियों में लौकी, तोरई, कद्दू और टिंडा जैसी हल्की हरी सब्जियां खाएं, जो पेट को आराम देती हैं।घर के बने देसी ड्रिंक्सबाजार की कोल्ड ड्रिंक्स या पैकेट वाले जूस की जगह घर के बने पारंपरिक ड्रिंक्स पिएं। दोपहर के खाने में पुदीने और भुने जीरे वाली छाछ या दही जरूर लें, यह पेट को ठंडा रखती है। इसके अलावा कच्चे आम का पन्ना लू से बचाता है, और सत्तू का शरबत शरीर को तुरंत ताकत और ठंडक देता है। नींबू पानी और नारियल पानी भी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करते हैं।हल्का और सादा भोजनदोपहर और रात के खाने में भारी भोजन करने से बचें। इसकी जगह मूंग की दाल की खिचड़ी, दाल-चावल, दलिया या पतली रोटी और हरी सब्जी खाएं। यह खाना आसानी से पच जाता है। इसे भी पढ़ें: Summer Heat में बढ़ जाता है कान में Infection का खतरा, Doctor से जानें बचने के सेफ उपायनौतपा में किन चीजों से परहेज करें?कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो गर्मियों में हमारे शरीर का तापमान बढ़ा देती हैं और पाचन को खराब करती हैं।ज्यादा मसालेदार और तला-भुना खानातेज मिर्च-मसाले, समोसे, कचोरी और बहार का तला हुआ खाना पचाने में भारी होता है। इससे पेट में गैस और एसिडिटी बढ़ती है, जिससे आप दिनभर सुस्त महसूस कर सकते हैं।चाय और कॉफीचाय और कॉफी में कैफीन होता है, जिससे बार-बार पेशाब आता है और शरीर में पानी की कमी हो सकती है।ज्यादा मीठी चीजें और शराबज्यादा चीनी वाली सॉफ्ट ड्रिंक्स और शराब पीने से भी शरीर का पानी तेजी से सूखता है, इसलिए इनसे दूर रहें।बासी और खुला हुआ खानागर्मियों में तेज तापमान की वजह से खाना बहुत जल्दी खराब हो जाता है। फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए हमेशा ताजा बना हुआ खाना ही खाएं।सेहत के लिए एक जरूरी सलाहनौतपा के दिनों में प्यास लगने का इंतजार न करें। हर आधे-एक घंटे में थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब धूप सबसे तेज होती है, बहुत जरूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें। सही खान-पान अपनाकर आप इस भारी गर्मी में भी पूरी तरह सेहतमंद रह सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 22 May 2026 11:24:13 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: Diabetes और High Cholesterol का &amp;apos;Reverse Connection&amp;apos; खतरनाक, बढ़ सकता है Heart Attack का Risk</title>
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<description><![CDATA[ भारत में लगातार डायबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं इसके साथ हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या भी कॉमन होती जा रही है। आज के समय में हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज दो सबसे आम लेकिन खतरनाक बीमारियां हैं। अगर एक ही व्यक्ति में एक साथ यह दोनों बीमारियां पाई जाती हैं, तो शरीर पर इसका असर कई गुना बढ़ जाता है। खासकर इस स्थिति में दिल की बीमारियों का जोखिम तेजी से बढ़ जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज का रिश्ता सीधा नहीं बल्कि दोतरफा है। जिसको रिवर्स कनेक्शन कहा जाता है। ऐसे में इन दोनों बीमारियों को अलग-अलग नहीं बल्कि एक साथ समझना और मैनेज करना जरूरी होता है।जानिए क्या है रिवर्स कनेक्शनकोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज के बीच का कनेक्शन काफी गहरा है। टाइप 2 डायबिटीज में बॉडी इंसुलिन का सही तरह से उपयोग नहीं कर पाता है। जिसको इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। इस स्थिति में बॉडी का मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है और खून में फैट का लेवल असंतुलित हो जाता है। ऐसे में इसका रिजल्ट डायबिटिक डिस्लिपिडेमिया के तौर पर सामने आता है। इसमें ट्राइग्लिसराइड्स और LDL बढ़ जाते हैं, वहीं HDL कम हो जाता है। इस स्थिति में धमनियों में फैट जमा होने का प्रोसेस तेज हो जाता है।इसे भी पढ़ें: Summer Heat में बढ़ जाता है कान में Infection का खतरा, Doctor से जानें बचने के सेफ उपायवहीं दूसरी ओर जब बॉडी में पहले से ही कोलेस्ट्रॉल का लेवल ज्यादा होता है। खासकर मोटापे के साथ तो यह इंसुलिन के काम को भी प्रभावित करता है। जिस कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और धीरे-धीरे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है। यही कारण है कि हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों में डायबिटीज का जोखिम ज्यादा होता है। इसके दो-तरफा प्रभाव को ही रिवर्स कनेक्शन कहा जाता है।हाई बीपी से बढ़ता है दिल का खतराहेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक जब ब्लड शुगर लंबे समय तक हाई रहता है, तो यह ब्लड वेसेल्स को नुकसान पहुंचाने लगता है। जिससे LDL कणों की संरचना बदल जाती है और वह छोटे और ज्यादा घने हो जाते हैं। ऐसे LDL कण धमनियों की दीवारों में आसानी से घुल जाते हैं और प्लाक बनाने लगते है। धीरे-धीरे यह प्लाक धमनियों को संकरा कर देता है, जिस कारण ब्लड फ्लो कम हो जाता है। आगे चलकर यह स्थिति स्ट्रोक और हार्ट अटैक की वजह बन सकती है।एक रिपोर्ट के मुताबिक टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का बढ़ा हुआ लेवल दिल से जुड़ी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक बढ़ा देता है। जिन लोगों में LDL कोलेस्ट्रॉल अधिक पाया जाता है। उनमें हार्ट डिजीज और मृत्यु का जोखिम ज्यादा देखा गया है। यह जोखिम ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और अन्य सामान्य कारणों से अलग भी बना रहता है। LDL कोलेस्ट्रॉल खुद में एक जोखिम कारक है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल रखना बेहद जरूरी है।कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है डायबिटीज का खतराहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो कोलेस्ट्रॉल का असर सिर्फ दिल तक ही नहीं बल्कि शरीर की मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं को भी प्रभावित करता है। जब बॉडी में खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल बढ़ जाता है, तो यह कोशिकाओं में फैट जमा करने लगता है।इससे इंसुलिन रिसेप्टर्स प्रभावित होते हैं और वह सही तरीके से काम नहीं करते हैं। जिसकी वजह से ग्लूकोज कोशिकाओं में नहीं जा पाता है और ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। वहीं यह स्थिति इंसुनिन रेजिस्टेंस को अधिक बढ़ा देती है।हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज का कॉम्बिनेशन शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। जब यह दोनों समस्याएं एक साथ होती हैं, तो अन्य कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। सबसे बड़ा दिल की बीमारियों का खतरा होता है। धमनियों में तेजी से प्लाक जमा होता है, जिससे ब्लड फ्लो बाधिक होता है। इससे स्ट्रोक या हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। वहीं किडनी की बीमारी, नसों को नुकसान और आंखों की समस्या भी हो सकती है।कैसे किया जाता है इलाजदवाइयों के साथ-साथ नियमित जांच और लाइफस्टाइल में बदलाव से डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है। आमतौर पर डॉक्टर LDL को कम करने के लिए स्टैटिन्स देते हैं, जोकि दिल के खतरे को भी कम करने में सहायता करते हैं। वहीं ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए इंसुलिन, मेटफॉर्मिन या अन्य दवाएं दी जाती हैं।ऐसे में अगर आपकी फैमिली में हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज या दिल की बीमारी का इतिहास है, तो आपको ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। वहीं 30 की उम्र के बाद हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल की जांच जरूर कराना चाहिए। वहीं जो लोग हाई कोलेस्ट्रॉल या डायबिटीज से पीड़ित हैं, उनको नियमित फॉलोअप कराना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 21 May 2026 11:40:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>आम Headache और Brain Cancer वाले सिरदर्द में क्या है फर्क? ये 5 Symptoms दिखें तो हो जाएं अलर्ट</title>
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<description><![CDATA[ भागदौड़ भारी जिदंगी और गलत लाइफस्टाइल के कारण अक्सर सिरदर्द देखने को मिलता है। तनाव, नींद की कमी, स्क्रीन के ज्यादा इस्तेमाल या काम के दबाव को जिम्मेदार माना जाता है। ये सब सिरदर्द के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। हर बार ऐसा हो, जरुरी नहीं है। एक्सपर्ट बताते हैं कि लगातार होने वाले या असामान्य सिरदर्द को हमेशा नजरअंदाज नहीं करें। कुछ मामलों में यह ब्रेन ट्यूमर का संकेत भी हो सकता है। नॉर्मल सिरदर्द और ब्रेन ट्यूमर की वजह से होने सिरदर्द में क्या अंतर होता है, इस लेख में हम आपको बताते हैं।लगातार सिरदर्द बनें रहने से ब्रेन ट्यूमर का संकेत- न्यूरोसर्जन ने बताया है कि ब्रेन ट्यूमर के कारण होने वाला सिरदर्द, नॉर्मल सिरदर्द से अलग होता है। ये धीरे-धीरे बढ़ता है और ये बहुत ज्यादा बार होता है। खासतौर पर सुबह के समय यह काफी तेज महसूस होता है। - कई लोगों को सिरदर्द के साथ उल्टी, धुंधला नजर आना, वॉक करने में इंबैलेंस होना, दौरे, हाथ-पैरों में कमजोरी या याद रखने में मुश्किल होता है। - ब्रेन ट्यूमर किसी भी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर सकता है और इसके सही इलाज के लिए इसके लक्षण जल्दी पता लग जाने चाहिए। - सबसे बड़ी मुश्किल यहीं है कि इसके संकेत शुरुआत में समझ नहीं आते हैं और अक्सर इन्हें तनाव, माइग्रेन, साइनस की समस्या या थकान समझ लेते हैं, इसको पहचानने में काफी समय लगता है। - डॉक्टर ने बताया है कि हफ्तों तक रहने वाला लगातार सिरदर्द, नींद से जगा देने वाला सिरदर्द, बार-बार उल्टी होना, कई बार दृष्टि में अचानक बदलाव देखने को मिलते हैं या नर्वस सिस्टम से संबंधित बदलावों की तुरंत जांच कराएं। एमआरआई स्कैन जैसे इमेजिंग परीक्षण शुरुआती दौर में पकड़ने में मदद करती है।- कुछ सालों से ब्रेन ट्यूमर के इलाज के कई ऑप्शन हो गए हैं। ट्यूमर के प्रकार, आकार और स्थान के आधार पर उपचार में आमतौर पर सर्जरी में शामिल है। इसके अतिरिक्त रेडियोसर्जरी (जीकेआरएस/एसआरएस), विकिरण चिकित्सा, कीमोथेरेपी, टारगेट थेरेपी या और भी कोई तकनीकी से इसका इलाज किया जा सकता है। ऐसे में इससे घबराने की जरुरत नहीं है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 21 May 2026 11:24:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Summer Heat में बढ़ जाता है कान में Infection का खतरा, Doctor से जानें बचने के सेफ उपाय</title>
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<description><![CDATA[ गर्मियों के मौसम में कान से संबंधित समस्याएं तेजी से देखने को मिलती हैं। खासकर कान में खुजली, दर्द, भारीपन, पानी भरने जैसा एहसास और इंफेक्शन संबंधित समस्याएं काफी होती है। सबसे बड़ा कारण गर्मी,नमी, ज्यादा पसीना और स्विमिंग जैसी एक्टिविटी मानी जाती है। गर्म वातावरण में बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं, जिससे कान का बाहरी हिस्सा आसानी से संक्रमित होता है। स्विमिंग से बढ़ता है कान में इंफेक्‍शन का खतरास्विमिंग के समय कान में पानी चले जाना भी इंफेक्शन का बड़ा कारण बनता है। असल में पूल का पानी पूरी तरह से साफ नहीं रहता है, इसमें मौजूद बैक्टीरिया कान के अंदर जाकर इंफेक्शन पैदा कर सकते हैं। अगर पानी लंबे समय तक कान में फंसा रहता है, तब कान के अंदर नमी बनी रहती है और इससे  &#039;स्विमर्स ईयर&#039; यानी मेडिकल भाषा में &#039;ओटाइटिस एक्सटर्ना&#039; कहा जाता है। यह एक तरह से ईयर कैनाल को प्रभावित करता है। इसमें कान में दर्द, सूजन और सुनने में परेशानी होने लगती है।पसीना भी बढ़ाता है कान में इंफेक्‍शनगर्मियों के मौसम में सबसे ज्यादा पसीना आता है, जो कि कानों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। पसीने और धूल के कारण कान के आसपास गंदगी जमा होने लगती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस को बढ़ाने का मौका मिलता है। यदि व्यक्ति को बार-बार कान खुजाता है या ईयरबड्स और हेडफोन लंबे समय तक इस्तेमाल करता है, तो इंफेक्शन का खतरा और बना रहता है। कुछ लोग कान को साफ करने के लिए ईयरबड्स या नुकीले चीजे डालकर कान को साफ करते हैं, जिससे कान में छोटे-छोटे घाव बन जाते हैं और इंफेक्शन आसानी से फैल सकता है। कान में मौजूद वैक्स प्राकृतिक सुरक्षा का काम करता है, इसलिए इसे बार-बार हटाना भी सही नहीं होता है। गर्मियों में कान कैसे सुरक्षित रखें- समर में कानों को सुरक्षित रखने के लिए स्विमिंग के बाद कानों को अच्छी तरह सुखाना जरुरी है। - गीले कानों को लंबे समय तक बिल्कुल छोड़ें और जरुरत पड़ने पर साफ तौलिए या ड्रायर की हल्की हवा का इस्तेमाल करें। - बहुत ज्यादा पसीना आने पर कान और इसके आसपास की सफाई बनाए रखें। - इसके साथ ही तेज आवाज में ईयरफोन का इस्तेमाल कम करें।- कोई भी कान में नुकीली चीज न डालें।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 20 May 2026 12:18:16 +0530</pubDate>
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<title>Basi Roti With Ghee: आपका Breakfast Habit कितना सेफ? बासी रोटी पर घी लगाकर खाने से पहले जान लें ये जरूरी Health Facts</title>
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<description><![CDATA[ सेहतमंद रहने के लिए हेल्दी नाश्ता बेहद जरूरी होता है। क्योंकि नाश्ते से न सिर्फ दिनभर के कामों के लिए हमारे शरीर को ताकत मिलती है। बल्कि हेल्दी और न्यूट्रिएंट्स से भरपूर नाश्ता स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। भारतीय घरों में नाश्ते में कई चीजें बनती हैं। जहां कई लोग नाश्ते में इडली, पोहा और पराठे जैसी चीजें खाते हैं, तो वहीं कुछ लोग सुबह के नाश्ते में चाय और बिस्किट खाते हैं। लेकिन चाय और बिस्किट सुबह के नाश्ते के लिए अच्छा ऑप्शन नहीं है।भारतीय घरों में बचे हुए खाने को अलग-अलग तरीके से डाइट में शामिल किया जाता है। कई लोग नाश्ते में बासी रोटी पर घी लगाकर खाते हैं। लेकिन क्या यह वाकई में सही है और क्या इससे सेहत को फायदा होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इसका जवाब देने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Aloe Vera जूस का रोज सेवन खतरनाक! इन लोगों के लिए बन सकता है &#039;Slow Poison&#039; बासी रोटी पर घी लगाना फायदेमंद या नुकसानदेहबता दें कि बासी रोटी पर घी लगाकर खाने से पाचन बेहतर होता है और शरीर को एनर्जी मिलती है। लेकिन बासी रोटी पर घी अधिक मात्रा में नहीं लगाना चाहिए। बासी रोटी में नेचुरल फर्मेंटेशन होता है, जिसके कारण इसमें एक ऐसा स्टार्च बनता है, जो फाइबर की तरह काम करता है और डाइजेशन व गट हेल्थ को बेहतर करता है।बासी रोटी पर घी लगाने से इसमें ब्यूटिरेट की मात्रा बढ़ जाती है। इससे गट लाइनिंग को आराम मिलता है, इंफ्लेमेशन कम होता है और गुड बैक्टीरिया बढ़ते हैं।बासी रोटी में घी लगाकर खाने से ब्लड शुगर लेवल बैलेंस रहता है। शरीर को ताकत मिलती है और ग्लाइसेमिक इंडेक्शन कम होता है। डायबिटीज पेशेंट्स के लिए यह फायदेमंद होता है। इससे वेट लॉस में भी मदद मिलती है।घी में वसा मौजूद होती है और घुलनशील विटामिन इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं। वहीं न्यूट्रिएंट्स अब्जॉर्बेशन को बढ़ाते हैं। इस कॉम्बिनेशन से आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है और आपको इसे खाने से सुस्ती भी नहीं लगती है।हालांकि इसको ज्यादा मात्रा में खाना सही नहीं होता है। क्योंकि ज्यागा घी के सेवन से कैलोरी बढ़ती है। वहीं जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल बढ़ा है, वेट बढ़ा है या जिनको हार्ट से जुड़ी समस्या है। उन लोगों को इसको खाने से बचना चाहिए।जिन लोगों का पाचन कमजोर होता है, अगर वह लोग इसका सेवन करते हैं तो उनको एसिडिटी और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है।दिन में 1 या 2 बासी रोटी से ज्यादा नहीं खाना चाहिए। वहीं इसमें 1-2 चम्मच घी लगाना चाहिए। अगर आप भी बासी रोटी पर घी लगाकर खाते हैं, तो फिर अन्य चीजों में घी का कम इस्तेमाल करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 20 May 2026 12:18:16 +0530</pubDate>
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<title>Aloe Vera जूस का रोज सेवन खतरनाक! इन लोगों के लिए बन सकता है &amp;apos;Slow Poison&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ सेहत से लेकर सौंदर्य के लिए Aloe Vera बेहद ही फायदेमंद माना जाता है। यदि आप एलोवेरा जूस पीते हैं, तो कई फायदे मिलते हैं, लेकिन यह सभी के लिए सुरक्षित नहीं होते हैं। एलोवेरा में टीऑक्सीडेंट, विटामिन, मिनरल्स और कूलिंग गुण शरीर को अंदर से हेल्दी रख सकते हैं। जिससे स्किन ग्लो होती है, डाइजेशन में सुधार आता है, शरीर को ठंडक देता और वेट लॉस जैसे फायदे के लिए एलोवेरा अच्छा माना जाता है।लेकिन हर एक हेल्दी चीज हर किसी के लिए सेहतमंद नहीं होती है। बिना किसी जानकारी के रोजाना एलोवेरा लेना शरीर को फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है। खासतौर पर कुछ  महिलाओं में यह हार्मोनल बदलाव, डाइजेशन संबंधी परेशानियां या ब्लड शुगर लेवल पर बुरा प्रभाव डालता है। अगर आप जरुरत से ज्यादा एलोवेरा का जूस पीते हैं, तो आपको पेट दर्द, स्त, कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं झेलनी पड़ सकती हैं। आइए आपको बताते हैं किन लोगों को एलोवेरा का जूस भूलकर भी नहीं पीना चाहिए।लो ब्लड शुगरएलोवेरा ब्लड शुगर लेवल को कम करता है। ऐसे में जिन महिलाओं का शुगर लेवल पहले से ही कम रहता है, उनके लिए एलोवेरा का ज्यादा सेवन नुकसानदायक हो सकता है। अगर खाली पेट एलोवेरा लेने से कमजोरी, चक्कर आना, थकान, पसीना आना या अचानक एनर्जी लो महसूस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।यदि आप डायबिटीज की दवा ले रहे हैं, तो एलोवेरा दवा के असर को और बढ़ा सकता है, जिससे ब्लड शुगर जरुरत से कम हो सकता है। लो बीपी की समस्या से परेशान महिलाओं को बिना एक्सपर्ट सलाह के एलोवेरा जूस नहीं पीना चाहिए।प्रेग्‍नेंट महिलाएंप्रेग्नेंसी  के समय एलोवेरा का सेवन करने से पहले डॉक्टर की राय लेना बेहद जरूरी माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में यह गर्भाशय की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है, जिससे प्रेग्नेंसी में जटिलताओं की आशंका बढ़ सकती है। विशेष रूप से एलोवेरा के लेटेक्स हिस्से का प्रभाव शरीर पर अधिक तीव्र माना जाता है, इसलिए इसका उपयोग सावधानी के साथ करना चाहिए।प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं का शरीर काफी संवेदनशील हो जाता है, इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए। त्वचा और स्वास्थ्य से जुड़े फायदों को ध्यान में रखते हुए कई महिलाएं एलोवेरा जूस का सेवन करने लगती हैं, लेकिन प्रेग्नेंसी के समय इसे लेने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक माना जाता है।कमजोर डाइजेशनजिन लोगों को बार-बार पेट संबंधी दिक्कतें जैसे दस्त, गैस, एसिडिटी या पाचन कमजोर रहने की परेशानी होती है, उन्हें एलोवेरा का उपयोग सावधानी से करना चाहिए। इसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व आंतों की गतिविधियों को तेज कर सकते हैं, जिसके कारण पेट में मरोड़, बार-बार शौच जाने की जरूरत या पाचन बिगड़ने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। उन लोगों के लिए जरुरत से ज्यादा एलोवेरा का जूस नहीं पीना चाहिए। खासकर खाली पेट एलोवेरा जूस पीने से कई बार पेट में जलन या ऐंठन हो सकती है।सावधानी- किसी भी घरेलू उपाय का जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें। - शरीर में कोई बीमारी या हेल्थ प्रॉब्लम हो तो पहले डॉक्टर की सलाह लें। - पहली बार सेवन करने से पहले कम मात्रा में ही पिएं। - किसी भी सोशल मीडिया ट्रेंड देखकर किसी भी चीज को रोजाना डाइट में शामिल न करें। - शुद्ध और अच्छी क्वालिटी वाला एलोवेरा का इस्तेमाल करें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 20 May 2026 12:18:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: Belly Fat से हैं परेशान? सुबह खाली पेट पिएं ये Magic Drink, हफ्तेभर में दिखेगा असर</title>
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<description><![CDATA[ बैली फैट न सिर्फ खूबसूरती को खराब करती है, बल्कि कई तरह की बीमारियों भी होती हैं। ऐसे में महिलाएं बैली फैट को कम करने के लिए आसान और नेचुरल उपायों की तलाश में रहती हैं। इसको ध्यान में रखते हुए आज हम आपको एक ऐसी ड्रिंक के बारे में बताने जा रहे हैं, जोकि सब्जा सीड्स से बना है। अगर सही मात्रा और सही तरीके से इसका सेवन किया जाता है, तो वेट लॉस, डाइजेशन को सुधारने और पेट की चर्बी को कम करने में मदद करता है। जो लोग प्राकृतिक तरीकों से अच्छी सेहत पाना चाहते हैं, उनको इस ड्रिंक का सेवन करना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस ड्रिंक को बनाने, सही तरीके से सेवन करने और फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं।सामग्रीसब्‍जा सीड्स- 1 चम्‍मच (लगभग 5 ग्राम)नींबू का रस- 1 चम्मचपानी- 1 गिलास (200-250 मिली)शहद- 1/2 चम्मच (ऑप्शनल)इसे भी पढ़ें: Periods में 2 दिन से भी कम होती है Bleeding? इस Magical Tea से सुधरेगा Flowऐसे बनाएं ड्रिंकइस ड्रिंक को बनाने के लिए 1 चम्मच सब्जा सीड्स ले लें।फिर आधा कप पानी में 10-15 मिनट के लिए भिगो दें।जब यह फूलकर जेल जैसी परत बना लेंगे तो इसमें नींबू का रस, शहद और पानी मिलाएं।इसको अच्छे से मिक्स करें और फौरन पी लें।जानिए ड्रिंक पीने का सही समयअगर आप भी बैली फैट कम करना चाहती हैं, तो आपको इस ड्रिंक का सेवन सुबह खाली पेट करना चाहिए। अगर आप ओवरइटिंग को कंट्रोल करना चाहती हैं, तो इसको खाने से 30 मिनट पहले ले सकती हैं।बैली फैट कैसे कम करती है ये ड्रिंकसब्जा में हाई फाइबर भरपूर होता है, जब यह पानी सोखकर फूलता है, जिससे पेट भरा-भरा रहता है।इससे भूख जल्दी नहीं लगती है और क्रेविंग भी कम होती है।इस ड्रिंक का सेवन करने से ब्लड शुगर अचानक से नहीं बढ़ता है और साथ ही फैट स्टोर भी कम होता है।यह ड्रिंक बॉडी की सूजन और गर्मी को कम करता है।इसमें कैलोरी इनटेक कम होता है और मेटाबॉलिज्म भी बेहतर होता है।क्या हैं ड्रिंक के फायदेइस ड्रिंक के सेवन से पेट की चर्बी कम होती है।इससे पाचन बेहतर होने के साथ ब्लोटिंग कम होती है।इस ड्रिंक के सेवन से भूख और इमोशनल ईटिंग भी कंट्रोल में रहती है।बॉडी डिटॉक्स में भी सपोर्ट करता है।यह ड्रिंक शरीर को ठंडा और हाइड्रेटड रहता है।यह ड्रिंक स्किन में भी निखार लाता है।जानिए ड्रिंक गलत तरीके से लेने के नुकसानज्यादा लेने से गैस, भारीपन या दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं।सूखे बीज का सेवन करने से इसके गले में फंसने का खतरा होता है।इस ड्रिंक के ओवरयूज से पोषक तत्वों का अवशोषण धीमा हो सकता है।बरते ये सावधानीलो BP या डाइजेशन से जुड़ी गंभीर समस्या से परेशान लोगों को इस ड्रिंक को पीने से बचना चाहिए। वहीं प्रेग्नेंसी में बिना डॉक्टर की सलाह नहीं लेना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 19 May 2026 09:09:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Diabetes के मरीजों सावधान! पैर का हल्का दर्द भी हो सकता है Nerve Damage का संकेत</title>
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<description><![CDATA[ डायबिटीज के मरीज अक्सर पैरों की समस्या से परेशान रहते हैं, इसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ब्लड शुगर की समस्या होने पर मरीज के पैरों में होने वाला हल्का सा दर्द भी किसी बड़ी समस्या का संकेत माना जा सकता है। कई बार लोग डायबिटीज में होने वाले हल्के पैरों के दर्द को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन शुगर के मरीजों में यह लापरवाही एक गंभीर समस्या का कारण बन सकती है।डायबिटीज में पैरों का दर्द को इग्नोर न करेंहेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर की नसों, ब्लड वेसल्स और पैरों को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। इसी कारण डायबिटीज के मरीजो को पैरों में होने वाले हल्के दर्द को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।दर्द नसों को नुकसान पहुंचाने का संकेतलंबे समय से ब्लड शुगर की समस्या से जूझ रहे हैं, तो इसका असर आपके पैरों की नसों पर भी पड़ता है, जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी के रुप में जाना जाता है। इसके कारण पैरों में झुनझुनाहट, जलन, सुन्नपन या हल्का दर्द महसूस हो सकता है। शुरुआत में ये लक्षण नॉर्मल लग सकते हैं, हालांकि यह बाद में पैरों की सेंसिटिविटी कम हो जाती है। कई बार तो मरीज को चोट लगने पर कुछ महसूस नहीं होता है। खराब ब्लड सर्कुलेशन हो सकता है कारणडायबिटीज का असर पैरों की नसों और रक्त वाहिकाओं पर भी पड़ता है, जिससे पैरों में ब्लड सर्कुलेशन सही तरीके से नहीं हो पाता। इस समस्या को पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) कहा जाता है। इसकी वजह से व्यक्ति को चलते समय पैरों में दर्द महसूस हो सकता है, पैरों में कमजोरी और सुन्नपन आ सकता है, पैर अक्सर ठंडे रहने लगते हैं और चोट या घाव भरने में काफी समय लग सकता है। यदि इस स्थिति पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।छोटे घाव भी बन सकते हैं खतरनाकडायबिटीज के मरीजों में पैरों में मामूली कट, छाले या स्किन फटना भी गंभीर इंफेक्शन का कारण बन सकता है। खराब ब्लड सर्कुलेशन और नसों की कमजोरी के कारण घाव जल्दी से रिकवर नहीं होता है। जिससे यह समस्या अल्सर, टिश्यू डैमेज या गैंग्रीन तक पहुंच सकती है।पैरों से जुड़े किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के पैरों में दर्द, जलन, सूजन, सुन्नपन, रेडनेस या घाव दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर दिखाएं। खासकर रात के समय बढ़ने वाला दर्द नर्व डैमेज का संकेत हो सकता है।डायबिटीज में पैरों की देखभाल कैसे करेंडायबिटीज से पीड़ित मरीजों को रोज अपने पैरों की जांच करनी चाहिए। सही फुट वियर पहनना चाहिए। नंगे पैर चलने से बचना चाहिए और ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहता है। इसके साथ ही नियमित रुप से एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल भी पैरों को सुरक्षित रखने में मदद करता है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 19 May 2026 09:02:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: &amp;apos;Silent Killer&amp;apos; बन रहा High BP, जानें ये Symptoms और बचाव के उपाय</title>
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<description><![CDATA[ वैश्विक स्तर पर हाइपरटेंशन तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में हर साल लाखों लोगों में हाई बीपी की समस्या का निदान किया जाता है। वही भारत में भी एक्सपर्ट इस बढ़ते हुए खतरे को लेकर लोगों को सावधारी बरतने की सलाह देते हैं। आंकड़ों को देखे तो करीब 33% शहरी और 25% ग्रामीण आबादी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ग्रस्त हैं। वहीं गंभीर बात यह है कि 60-70 फीसदी लोगों को जब तक समस्या ज्यादा न बढ़ जाए, तब तक इसके बारे में पता नहीं चल पाता है कि वह हाइपरटेंशन के शिकार हैं।इस बीमारी के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए हर साल 17 मई को वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे मनाया जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक यह समस्या बड़ों से लेकर बूढ़ों तक किसी को भी हो सकती है। ऐसे में इसके बारे में जानना और बचाव के उपाय करना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको हाइपरटेंशन के लक्षण, कारण और बचाव के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: पेट में Gas और जलन से हैं परेशान? खाने को नहीं, अपने Sitting पोस्चर को बदलें, जानें Expert रायहाई बीपी की समस्याधमनी की दीवारों के खिलाफ अगर लंबे समय तक ब्लड के बढ़े हुए दबाव की स्थिति को हाई बीपी माना जाता है। आपका हृदय कितना ब्लड पंप करता है और धमनियों में ब्लड सर्कुलेशन के प्रतिरोध की मात्रा कितनी है। इस आधार पर ब्लड प्रेशर के स्तर का निर्धारण किया जाता है। जितनी ज्यादा धमनियों की संकीर्णता होगी, उतना ज्यादा ब्लड आपके हृदय द्वारा पंप किया जाता है, ब्लड प्रेशर उतना ही ज्यादा होता है। ब्लड प्रेशर का 120/80 मिमीएचजी स्तर को सामान्य माना जाता है।बीपी बढ़ने की वजहइस बारे में सभी लोगों का जानना जरूरी है कि आखिर ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ जाता है। फैमिली हिस्ट्री, उम्र, लाइफस्टाइल और अनहेल्दी डाइट, सोडियम का ज्यादा सेवन, शराब-धूम्रपान और मोटापा जैसी प्रमुख आदतें ब्लड प्रेशर के प्रमुख कारणों के रूप में जानी जाती हैं।वहीं कुछ लोगों में अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियों की वजह से हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है। इसमें एडर्नल ग्लैंड ट्यूमर, किडनी की बीमारियां, रक्त वाहिकाओं में दोष और कुछ दवाओं के ज्यादा सेवन जैसी समस्या को भी इसके लिए जिम्मेदार माना जाता है।ऐसे करें हाई ब्लड प्रेशर की पहचानबहुत ज्यादा पसीना आना।बेचैनी महसूस होना और चिंता या तनाव की स्थिति बने रहनानींद की समस्या होना।चिड़चिड़ापन होना या चक्कर आना। हाई बीपी का इलाजहाई ब्लड प्रेशर उम्र भर बनी रहने वाली समस्या है। इसके इलाज के रूप में बीपी को कंट्रोल करने पर ध्यान देने की जरूरत है। लाइफस्टाइल में बदलाव से हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन जिन लोगों का ब्लड प्रेशर ज्यादा बढ़ा रहता है, उनको सामान्य उपायों राहत नहीं मिल पाता है। उनको डॉक्टर्स दवाएं दे सकते हैं, जिससे हृदय रोगों के जोखिम से बचा जा सकता है।हालांकि बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से इन दवाओं को बंद नहीं करना चाहिए। इससे अचानक बीपी बढ़ने और गंभीर स्थितियों में हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है। वहीं दवाओं के साथ बीपी को कंट्रोल करने वाले उपायों पर ध्यान देना जरूरी है।बीपी कंट्रोल करने के तरीकेलाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करके ब्लड प्रेशर को कंट्रोल किया जा सकता है। जिन लोगों का बीपी अक्सर बढ़ा रहता है या फिर जिनको इसका खतरा होता है। उन लोगों को अपनी डाइट में सोडियम की मात्रा कम रखना चाहिए। सोडियम का ज्यादा सेवन करने से रक्तचाप बढ़ सकता है।इसके अलावा ज्यादा शराब और धूम्रपान करने वाले लोगों में भी इसका ज्यादा खतरा होता है। इन चीजों से दूरी बनानी चाहिए। वहीं नियमित व्यायाम की आदत से भी ब्लड प्रेशर को आसानी से कंट्रोल में किया जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 18 May 2026 09:32:31 +0530</pubDate>
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<title>पेट में Gas और जलन से हैं परेशान? खाने को नहीं, अपने Sitting पोस्चर को बदलें, जानें Expert राय</title>
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<description><![CDATA[ खराब लाइफस्टाइल और गलत खान के कारण अक्सर लोग पेट संबंधित समस्याओं से परेशान रहते हैं। एसिडिटी की समस्या लगातार परेशान करती है। एसिड रिफ्लक्स के लिए मसालेदान खाना, चाय-कॉफी या खराब खानपान को जिम्मेदार माना जाता है। हालांकि आप नहीं जानते हैं कि आपकी गलत करीके से बैठने की आदत और खराब पोश्चचर भी इसकी बड़ी वजह हो सकती है? काफी लंबे समय तक झुककर बैठना, स्क्रीन के सामने स्लाउचिंग करना और खाना खाने के तुरंत बाद लेट जाना पेट में बनने वाले एसिड को ऊपर की तरफ धकेल सकता है। ऐसे में आपके सीने में जलन, खट्टी डकारें और पेट में भारीपन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट?हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि हमारे शरीर में फूड पाइप और पेट के बीच नेचुरल बैरियर होता है, जो पेट के एसिड को ऊपर आने से रोकता है। हालांकि गलत पोश्चर पेट पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे यह सिस्टम कमजोर पड़ने लगता है और एसिड रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है।झुककर बैठना कैसे बढ़ाता है एसिडिटी?आजकल लोग घंटों तक लैपटॉप या मोबाइल के सामने बैठे रहते हैं। इस अवधि में शरीर आगे की ओर झुका रहता है और पेट की समस्या दबने लगती है। इससे पेट के अंदर दबाव बढ़ जाता है और एसिड ऊपर की ओर आने लगता है। अक्सर ज्यादा मसालेदार खाना खाए बिना भी सिर्फ गलत तरीके से बैठने के कारण एसिडिटी महसूस होने लगती है।डायफ्राम और सांस लेने का कनेक्शनडॉक्टर के मुताबिक, डायफ्राम केवल सांस लेने में मदद नहीं करता, बल्कि यह एसिड रिफ्लक्स को रोकने वाले सिस्टम का भी अहम हिस्सा है। खराब पोश्चचर डायफ्राम की मूवमेंट को सीमित कर देता है। ऐसे में बेली ब्रीदिंग या डायफ्रामेटिक ब्रीदिंग एक्सरसाइज इस मसल को मजबूत बनाकर राहत दे सकता है।खाने के तुरंत बाद लेटना क्यों है नुकसानदायक?यदि आप खाना खाने के तुरंत बाद लेट जाते हैं, तो ग्रेविटी का सपोर्ट खत्म हो जाता है। इससे पेट का एसिड आसानी से ऊपर की तरफ आने लगता है। इसी कारण से रात में एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या ज्यादा बढ़ जाती है। एक्सपर्ट भी बताते हैं खाना खाने के बाद कुछ समय तक सीधे बैठें या हल्की वॉक करें। रात को सोते समय सिर को थोड़ा ऊंचा रखकर सोना भी फायदेमंद हो सकता है।सिर्फ दवा नहीं, लाइफस्टाइल सुधारना भी जरूरीएसिडिटी सिर्फ एक केमिकल समस्या मानी जाती है, जो कि गलत है, कई मामलों में यह बॉडी मैकेनिक्स और लाइफस्टाइल से  भी जुड़ी होती है। सही तरीके से बैठना, स्क्रीन टाइम के दौरान पोश्चचर सुधारना, डीप ब्रीदिंग की आदत डालना और खाना खाने तुरंत बाद न लेटना एसिड रिफ्लक्स को कम करने में मदद करेगा।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 18 May 2026 09:32:31 +0530</pubDate>
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<title>Periods में 2 दिन से भी कम होती है Bleeding? इस Magical Tea से सुधरेगा Flow</title>
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<description><![CDATA[ महिलाओं में हर महीने में पीरियड्स का आना एक सामान्य प्रक्रिया है। पीरियड्स के दौरान फ्लो सही से फ्लो आना काफी जरुरी है। यदि आप फ्लो बहुत कम हो या बहुत ज्यादा आए, तो इसको भूलकर भी नजरअंदाज न करें। वैसे तो पीरियड्स में 3-5 दिन फ्लो आना नॉर्मल है। यदि आपको इससे ज्यादा दिनों तक ब्लीडिंग हो रही है या फ्लो बहुत कम या बहुत ज्यादा आ रहा है, तो आपको इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हार्मोनल इंबैलेंस, स्ट्रेस और भी कई सारी दिक्कतों का इशारा हो सकता है। यदि आपको इन दिनों कम फ्लो आता है, तो इस देसी चाय को डाइट में शामिल कर सकते हैं, आइए आपको बताते हैं इसे कैसे बनाएं।पीरियड फ्लो को सुधारने में मदद करेगी यह चाय - शरीर में जब एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का लेवल कम-ज्यादा होने लगे, तो उसकी वजह से पीरियड्स और रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर असर पड़ता है। - इन हार्मोन्स संतुलन बिगड़ने से पीरियड फ्लो और साइकिल पर काफी असर पड़ता है। ऐसे में कई लड़कियों को पीरियड में ब्लड बहुत ज्यादा या बहुत कम आने लगता है। - यह चाय ब्लड सर्कुलेशन को बूस्ट करती है और इससे हार्मोन्स भी मैनेज होते हैं। - जीरा डाइजेशन को सुधारता है और इससे ब्लोटिंग कम होती है। इससे साइकलि के दौरान आपको हल्का महसूस होता है और पाचन भी बेहतर होता है। यह क्रैम्प्स को कम कर सकता है। - अजवाइन शरीर को गर्म रखती है और इससे पेट की मांसपेशियों को आराम मिलता है। अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटेरी प्रॉपर्टीज होती है, जो शरीर को गर्माहट मिलती है और दर्द कम होता है। इससे सर्कुलेशन में सुधार होता है। - केसर के धागे मूड को सुधारने का काम करते हैं। इससे हार्मोन्स बैलेंस होते हैं।कैसे बनाएं यह देसी चाय - सबसे पहले एक पैन में लगभग 2 कप पानी डालें। - अब 1 टीस्पून जीरा और 1 टीस्पून अजवाइन डालें। - इसमें अदरक का एक छोटा टुकड़ा घिसकर डालें। - इसमें केसर के कुछ धागे डालें। - अब इसमें 1 टीस्पून गुड़ मिलाएं। - इसे छान लें और इसे आप दिन में 1 बार पी सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 18 May 2026 09:32:30 +0530</pubDate>
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<title>हर समय कुछ खाने का मन क्यों करता है? जानिए छिपी हुई वजह</title>
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<description><![CDATA[ दिन की शुरुआत से लेकर अंत तक, हम सभी कुछ ना कुछ खाते हैं। ब्रेकफास्ट में भरपेट खाकर ही घर से निकलते हैं। लेकिन कुछ देर बाद ही कुछ ना कुछ खाने का मन करने लगता है ना? ऐसा हम सभी के साथ कभी ना कभी हुआ ही है। ऐसा नहीं है कि हमें उस समय जोर से भूख लगी होती है, बस कुछ खाने की इच्छा होती है। ऐसे में हम कुछ भी हल्का-फुल्का व टेस्टी खाना चाहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों होता है।कई बार इसके पीछे शरीर के ऐसे छिपे कारण होते हैं जिन पर लोग ध्यान ही नहीं देते। कुछ लोग पूरा दिन खाते रहते हैं, फिर भी वह संतुष्टि का अहसास नहीं होता। अगर आपके साथ लगातार ऐसा हो रहा है, तो इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं। तो चलिए जानते हैं इस लेख में-इसे भी पढ़ें: Health Tips: &#039;Silent Killer&#039; बन रहा High BP, जानें ये Symptoms और बचाव के उपायपेट नहीं, दिमाग से भूख लगनासुनने में यह थोड़ा अजीब लगे, लेकिन हम सभी ने कभी ना कभी इसे एक्सपीरियंस किया ही है। हर बार खाने की इच्छा होने का मतलब यह नहीं होता कि शरीर को सच में भोजन चाहिए। बस कभी-कभी बहुत ज्यादा थकान, तनाव, अकेलापन, चिंता या बोरियत होने पर भी हम अच्छा महसूस करने के लिए कुछ खाना चाहते हैं। प्रोटीन की कमीअगर आपके खाने में प्रोटीन की कमी है तो ऐसे में बार-बार कुछ खाने की इच्छा होना स्वाभाविक है। दरअसल, प्रोटीन पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है। इसलिए हर किसी को अपनी डाइट में प्रोटीन रिच फूड्स जैसे अंडे, पनीर, दाल, दही, स्प्राउट्स आदि को जरूर शामिल करना चाहिए।   पोषण की कमी होनापेट भरने का मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि आप कुछ भी खा लो। अक्सर लोग ऐसी चीजें खाते हैं जो हाई कैलोरी होती हैं, लेकिन उनमें पोषण नहीं होता है। चिप्स, पैकेट स्नैक्स, बेकरी आइटम्स, इंस्टेंट नूडल्स खाने से कुछ देर के लिए पेट तो भर जाता है, लेकिन शरीर को वह पोषण नहीं मिल पाता। जिसकी वजह से कुछ देर बाद ही फिर से कुछ ना कुछ खाने की इच्छा पैदा हो जाती है।पानी की कमी को भूख समझना यह एक ऐसी गलती है, जो अक्सर लोग अनजाने में कर बैठते हैं। अक्सर जब शरीर को पानी की जरूरत होती है, तो हमें ऐसा अहसास होता है, जैसे भूख लगी हो। खासकर, गर्मियों में, व्यायाम के बाद, ज्यादा चाय या कॉफी पीने पर कुछ ना कुछ खाने का मन करने लगता है। ऐसे में अगर आपको भी अचानक भूख लगे तो पहले एक गिलास पानी पीकर कुछ मिनट इंतजार करें।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Mon, 18 May 2026 09:32:30 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: ADHD से जूझ रहा बच्चा रातभर रहता है बेचैन? समझिए Sleep और Brain का पूरा कनेक्शन</title>
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<description><![CDATA[ आमतौर पर ADHD के लक्षण बच्चों में 3 से 6 साल की उम्र के बीच सामने आने लगते हैं। इस स्थिति को कंट्रोल करने की कोशिश करना एक बड़ा काम है। ADHD बचपन के सबसे आम न्यूरोडेवलपमेंटल विकारों में से एक है। वहीं आमतौर पर इसका निदान बचपन में होता है और यह वयस्कता तक रहता है। वहीं इस स्थिति को कंट्रोल करने के लिए कई उपचार हैं। वहीं सही डाइट फॉलो करने से भी बच्चों को काफी मदद मिल सकती है। ADHA और नींद के बीच गहरा संबंध है। वहीं एडीएचडी से पीड़ित बच्चों में नींद में गड़बड़ी, सांस लेने में तकलीफ और अन्य समस्याओं से जूझते हैं।एडीएचडी के कारण नींद की समस्यादरअसल, एडीएचडी से पीड़ित लोगों में अनिद्रा और अन्य नींद संबंधी समस्याओं की संभावना ज्यादा रहती है। एक अध्ययन के मुताबिक सामान्य आबादी की तुलना में ADHA से पीड़ित लोगों में अनिद्रा का खतरा दोगुना से ज्यादा होता है।इसे भी पढ़ें: Medical Science में बड़ा बदलाव, PCOS अब हुआ PMOS! जानिए नाम बदलने की असली वजह ADHD और नींद के बीच का संबंध जटिल है। ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि इसके लक्षण आपकी नींद को प्रभावित कर सकते हैं। नींद की कमी आपके लक्षणों को प्रभावित कर सकती है। लेकिन कुछ मामले में ADHS नींद संबंधी समस्याओं की वजह बन सकता है।ADHA आपके शरीर की जैविक घड़ी या सर्कैडियन रिदम को प्रभावित कर सकता है। जोकि नींद के पैटर्न को कंट्रोल करती है। इससे आपको जरूरत के समय सोने में परेशानी हो सकती है। वहीं ADHD से पीड़ित लोगों में अवसाद या चिंता जैसे मनोदशा संबंधी विकार होने की संभावना ज्यादा होती है। वहीं मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं भी अनिद्रा की वजह बन सकती है।एडीएचडी से सबसे अधिक होने वाली नींद संबंधी समस्याएंसुबह उठने में परेशानीरात भर नींद टूटनासुबह उठने पर तरोताजा न लगनारात में सोने में 1 घंटे से ज्यादा समय लगनाप्रबंधन और सहायता के उपायसकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए थेरेपी।खेलने, पढ़ने और सोने का समय निश्चित करना चाहिए।काम को छोटे-छोटे चरणों में बांटें।स्कूल में बच्चे की एक्टिविटी पर नजर रखने के लिए टीचर्स के संपर्क में रहें।वहीं लक्षण गंभीर होने पर पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट या बाल मनोवैज्ञानिक से संपर्क करना चाहिए।ADHA और नींद का संबंधहाइपरएक्टिविटीADHD वाले बच्चों का दिमाग सोने के समय भी काफी ज्यादा सक्रिय रहता है। वहीं सोने पर दिमाग को शांति मिलती है।मेलाटोनिन की कमीअक्सर एडीएचडी वाले बच्चों में नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटोनिन का उत्पाद देर से होता है। जिस कारण उनको देर रात तक नींद नहीं आती है।दवाओं का असरADHD के लिए जो दवाएं जी जाती हैं, वह भी कभी-कभी नींद में बाधा डाल सकती हैं।यहां जानिए बेहतर नींद के उपायADHD से पीड़ित बच्चे का सोने का समय तय होना चाहिए।वहीं सोने से करीब 1 घंटा पहले टीवी, फोन या टैबलेट बंद कर देना चाहिए।कमरे का वातावरण शांत होना चाहिए और कमरे में पर्याप्त अंधेरा होना चाहिए।पढ़ने या शांत संगीत सुनने से सोने के लिए तैयार करने में सहायता मिलती है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 15 May 2026 21:44:14 +0530</pubDate>
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<title>Medical Science में बड़ा बदलाव, PCOS अब हुआ PMOS! जानिए नाम बदलने की असली वजह</title>
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<description><![CDATA[ ज्यादातर महिलाओं में हार्मोनल समस्या PCOS यानी के पॉलिसिस्टक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) का नाम बदल दिया गया है। अब इसे पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) कहा जाएगा। आपको बता दें कि, दुनियाभर के हेल्थ एक्सपर्ट्स और रिसर्चर्स की सहमति के बाद से यह बदलाव हुआ है।हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, PCOS नाम इस बीमारी की पूरी तस्वीर को सही तरीके से नहीं दिखाता था। कुछ महिलाओं में इस समस्या के बाद भी ओवरी में सिस्ट नहीं पाए जाते हैं, इसलिए पुराना काफी हद तक भ्रम पैदा करता था। इसी कारण से अब इसका नाम बदलकर PMOS रखा गया है, ताकि बीमारी की असली प्रकृति को बेहतर तरीके से समझाया जा सके।PCOS का नाम क्यों बदला गया?&#039;द लैंसेट&#039; में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में प्रजनन आयु की लगभग 17 करोड़ महिलाएं PCOS से प्रभावित हैं। काफी लंबे समय से चल रही रिसर्च और एक्सपर्ट की चर्चा के बाद यह महसूस किया गया कि &#039;PCOS&#039; नाम की यह बीमारी वास्तविक स्थिति को सही तरीके से नहीं दर्शाता है।हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि पुराने नाम की वजह के कई महिलाओं में इस समस्या की पहचान देर से हो पाती थी। इसके साथ ही इससे जुड़ी हार्मोनल, मेटाबोलिक और मेंटल हेल्थ संबंधी परेशानियों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।असल में  &#039;पॉलीसिस्टिक&#039; शब्द सबसे ज्यादा भ्रम पैदा करता था। मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस कंडीशन में ओवरी पर नॉर्मल सिस्ट नहीं बनते, बल्कि &#039;अरेस्टेड फॉलिकल्स&#039; विकसित होते हैं। यानी हार्मोनल असंतुलन के कारण एग्स पूरी तरह से मैच्योर नहीं हो पाते है और ओव्यूलेशन प्रभावित होता है।मेडिकल एक्सपर्ट मानते है कि कई महिलाएं सिर्फ इसलिए समय पर चेकअप नहीं करवाती थीं, क्योंकि उनके स्कैन में ओवरी सिस्ट नजर नहीं आते थे। वहीं, PCOS/PMOS में सिस्ट होना जरुरी नहीं है। इस वजह से पुराना नाम कई बार बीमारी की पहचान में देरी का कारण बन जाता था। नया नाम इस कंडीशन के हार्मोनल और मेटाबोलिक पहलुओं पर अधिक फोकस नहीं करते हैं।हेल्थ एक्सपर्ट ने माना है कि बीमारी का नाम उसकी पूरी जटिलता को दर्शाता है। इसके लिए सात महाद्वीपों के डॉक्टरों, रिसर्चर्स और मरीजों ने करीब 14 वर्षों तक मिलकर काम किया है। गौरतलब है कि लंबी चर्चा और इंटरनेशनल सहमति के बाद आखिरकार PCOS का नया नाम PMOS (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) रखने का फैसला किया।PMOS का नाम का मतलब क्या है?- पॉलीएंडोक्राइन - इसका अर्थ है कि यह समस्या शरीर के कई हार्मोन सिस्टम को प्रभावित करती है।- मेटाबोलिक- यह बीमारी इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ना और डायबिटीज के खतरे से जुड़ी होती है। - ओवेरियन- यह ओव्यूलेशन, पीरियड्स और फर्टिलिटी को प्रभावित करती है। - सिंड्रोम- यह कई लक्षणों और हेल्थ रिस्क का ग्रुप है।PMOS के लक्षण- पीरियड्स का न आना या फिर अनियमित पीरियड्स। - चेहरे पर अधिक बाल आना। - मुंहासे और ऑयली स्किन। - अचानक से तेजी से वजन बढ़ना। - वजन कम करने में दिक्कत होना। - इंसुलिन रेजिस्टेंस। - फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं। - मूड स्विंग और तनावएक्सपर्ट के मुताबिक, नाम बदलने से इलाज में बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा। लेकिन इससे बीमारी को समझने और सही पर पहचानने में मदद मिल सकती है।PMOS को कैसे मैनेज करें- नियमित रुप से एक्सरसाइज - हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट - वजन कंट्रोल रखना  - पर्याप्त मात्रा में नींद लें - तनाव बिल्कुल न लें - जरुरत पड़ने पर हार्मोनल थेरेपी - इंसुलिन सेंसिटिव दवाएं ]]></description>
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<pubDate>Fri, 15 May 2026 21:44:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>पेट की Acidity और Headache का रामबाण इलाज है ये Lemon Shot, आयुर्वेद का चमत्कारी नुस्खा</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर सिरदर्द की वजह केवल तनाव नहीं बल्कि डाइजेशन भी हो सकता है। गर्मी के मौसम में बार-बार डाइजेशन, गैस और ब्लोटिंग होती रहती है। असल में आयुर्वेद में पेट और ब्रेन के कनेक्शन को महत्वपूर्ण माना गया है। यह एकदम आसान Ayurvedic Lemon Shot डाइजेंशन को सपोर्ट करने और सिरदर्द को कम करने में मदद करेगा। आइए आपको बताते हैं लेमन शॉट के बारे में-लेमन शॉट रेसिपी के लिए सामग्री-नींबू का रस- आधा चम्‍मच-काला नमक- 1 चुटकी-हींग- 1 चुटकी-काली मिर्च पाउडर- 1 चुटकीइन सभी चीजों को हल्के गुनगुने पानी में मिलाकर खाने से पहले पिएं।लेमन शॉट के फायदे - डाइजेशन को इम्प्रूव करने में मदद करता है। - गैस और ब्लोटिंग कम करने में सहायक होता है। - पेट से जुड़े सिरदर्द ट्रिगर्स को शांत करता है। - शरीर को हल्का और एक्टिव फील होगा। ब्लोटिंग से होने वाले सिरदर्द में कैसे मदद करती हैं ये चीजें? गर्मियों अधिक खाने से डाइजेशन की समस्या उत्पन्न हो जाती है। गैस और ब्लोटिंग की वजह से सिर भारी रहता है और सिरदर्द महसूस हो सकता है। ऐसे में यह लेमन शॉट डाइजेशन को सपोर्ट करके राहत मिल सकती है। - नींबू का रस- नींबू पाचन एंजाइम्स को एक्टिव करता है। यह खाने को बेहतर तरीके से पचने में मदद करता है और पेट में भारीपन कम हो सकता है। - काला नमक- इसमें पाए जाने वाला मिनरल्स गैस और अपच से राहत दिलाते हैं। यह ब्लोटिंग की समस्या को कम कर सकता है। - हींग- हींग को आयुर्वेद में गैस, पेट दर्द और ब्लोटिंग कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह ब्लोटिंग की समस्या को कम करती है। - काली मिर्च पाउडर- काली मिर्च डाइजेशन को बेहतर बनाने और मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करने में सहायक है। इससे पेट हल्का महसूस होती है। इससे ब्लोटिंग और गैस कम होती है, तब इससे जुड़े सिरदर्द और भारीपन में भी राहत महसूस होगी। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 15 May 2026 21:44:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>World Hypertension Day 2026: युवाओं को क्यों घेर रहा High Blood Pressure? ये 5 Lifestyle Mistakes हैं वजह</title>
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<description><![CDATA[ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियां तो जैसे आम बात हो गई हैं। लेकिन हाई ब्लड प्रेशर भी खामोश दुश्मन की तरह बहुत तेजी से हमारे बीच अपनी जगह बना रहा है। पहले यह समस्या सिर्फ बड़े-बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन आज युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि हमारा अनहेल्दी लाइफस्टाइल और हर वक्त का स्ट्रेस इसके सबसे बड़े कारण हैं। इसी खतरे के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 17 मई को &#039;वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे&#039; मनाया जाता है।हाई ब्लड प्रेशर होने के कारण क्या?सुस्त लाइफस्टाइलआजकल हम घंटों एक जगह बैठकर काम करते हैं और देर रात तक मोबाइल में खोए रहते हैं। फिजिकल एक्टिविटी कम होने की यह आदत धीरे-धीरे हमारी ब्लड वेसेल्स और दिल पर दबाव डालने लगती है। इसके साथ ही जंक फूड, जरूरत से ज्यादा नमक, प्रोसेस्ड फूड और मीठा खाने का शौक इस समस्या को और ज्यादा गंभीर बना रहा है।लगातार बढ़ता तनावलगातार स्ट्रेस लेना और पूरी नींद न लेना भी हाई बीपी की एक बड़ी वजह है। जब हमारा शरीर हर वक्त तनाव में रहता है, तो स्ट्रेस हार्मोन्स का लेवल बढ़ जाता है, जिसका सीधा बुरा असर हमारी दिल की धड़कनों और ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। इसके अलावा स्मोकिंग, शराब और कैफीन का ज्यादा सेवन भी इस खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।बढ़ता वजनशरीर का बढ़ता वजन, खासकर पेट के आसपास जमा फैट, ब्लड प्रेशर बढ़ने का मुख्य कारण है। इसके अलावा, कम उम्र में ही डायबिटीज, थायरॉयड या हार्मोनल असंतुलन जैसी परेशानियां भी बीपी के लेवल को बिगाड़ देती हैं। इसे भी पढ़ें: पेट की Acidity और Headache का रामबाण इलाज है ये Lemon Shot, आयुर्वेद का चमत्कारी नुस्खाहाइपरटेंशन के लक्षणअक्सर सिर में भारीपन, चक्कर आना या बेवजह की थकान महसूस होना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। थोड़ा सा चलने या काम करने पर ही सांस का फूलना या सीने में हल्का दबाव महसूस होना। कभी-कभी आंखों के सामने धुंधलापन छा जाना, नाक से खून आना या दिल की धड़कन का अचानक तेज हो जाना।बिना आहट के कैसे नुकसान पहुंचा रहा हाई ब्लड प्रेशर?हाई ब्लड प्रेशर के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि कई बार इसके कोई लक्षण नजर नहीं आते, इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। हम खुद को फिट समझकर टेस्ट नहीं करवाते, जबकि यह अंदर ही अंदर शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है। हालांकि सिरदर्द, चक्कर आना, थकान या सांस फूलना जैसे संकेत कभी-कभी मिल सकते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। इसे भी पढ़ें: Medical Science में बड़ा बदलाव, PCOS अब हुआ PMOS! जानिए नाम बदलने की असली वजहकैसे रखें खुद को सुरक्षित?अपनी सेहत को वापस पटरी पर लाना उतना भी मुश्किल नहीं है। बस कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें। रोजाना कम से कम 40 मिनट की वॉक या एक्सरसाइज के लिए समय निकालें। शरीर और दिमाग को आराम देने के लिए पर्याप्त और गहरी नींद लें। अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज जैसी हेल्दी चीजों को शामिल करें। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 15 May 2026 21:44:12 +0530</pubDate>
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<title>Health Alert । इन हेल्दी बीजों से हो सकता है Kidney Failure, डॉक्टर ने जारी की पूरी Rating List</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान है। लोग हेल्दी समझकर कई चीजें खाते हैं, लेकिन वही चीजें कभी-कभी किडनी के लिए नुकसानदायक बन जाती हैं। ऐसे में सही जानकारी होना बहुत जरूरी है, ताकि आप अपनी डाइट को बेहतर तरीके से चुन सकें।डॉक्टर ने समझायायूरोलॉजिस्ट डॉ. विस्वास ने इस मुद्दे को आसान भाषा में समझाया है। उन्होंने बताया कि लोग जिन बीजों को हेल्दी समझकर रोज खाते हैं, उनमें से कुछ किडनी के लिए सही नहीं होते। इसलिए उन्होंने अलग-अलग बीजों को रेटिंग देकर बताया कि कौन सा बीज कितना सुरक्षित है।हर हेल्दी चीज किडनी के लिए अच्छी नहीं होतीअक्सर लोग मानते हैं कि बीज खाना हमेशा फायदेमंद होता है। लेकिन ऐसा हर बार सही नहीं है। कुछ बीज ऐसे होते हैं जो शरीर के लिए अच्छे हैं, लेकिन किडनी पर असर डाल सकते हैं। इसलिए यह जानना जरूरी है कि कौन से बीज कितनी मात्रा में खाने चाहिए। इसे भी पढ़ें: Pregnancy Care: Pregnancy में ये 6 Red Flags हैं खतरे की घंटी, भूलकर भी न करें नजरअंदाजये बीज किडनी के लिए फायदेमंद माने जाते हैंकद्दू के बीज किडनी के लिए काफी अच्छे माने जाते हैं। डॉ. विस्वास के अनुसार ये यूरिन में बनने वाले स्टोन के खतरे को कम करने में मदद करते हैं।अलसी के बीज भी अच्छा विकल्प हैं क्योंकि इनमें ऑक्सालेट बहुत कम होता है, जो किडनी के लिए सुरक्षित माना जाता है।तरबूज के बीज भी फायदेमंद हैं। ये शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और किडनी पर ज्यादा दबाव नहीं डालते।इन बीजों को सीमित मात्रा में ही खाएंसूरजमुखी के बीज पूरी तरह नुकसानदायक नहीं हैं, लेकिन इनमें मध्यम मात्रा में ऑक्सालेट होता है, इसलिए इन्हें कम मात्रा में ही लेना चाहिए।चिया सीड्स को लोग सुपरफूड मानते हैं, लेकिन डॉ. विस्वास बताते हैं कि ज्यादा मात्रा में लेने से किडनी पर असर पड़ सकता है।सब्जा (तुलसी) के बीज पर अभी ज्यादा रिसर्च नहीं है, इसलिए इन्हें भी सीमित मात्रा में ही खाना बेहतर है। इसे भी पढ़ें: बढ़ता पारा, पेट का बिगड़ा हाजमा! Summer में Stomach Problems से बचने के लिए अपनाएं ये उपायइन बीजों से किडनी को हो सकता है नुकसानतिल के बीज में ऑक्सालेट ज्यादा होता है, जिससे किडनी स्टोन का खतरा बढ़ सकता है।खसखस के बीज भी हाई ऑक्सालेट वाले होते हैं और अक्सर खाने में छिपे होते हैं, जिससे नुकसान बढ़ सकता है।हलीम के बीज, जिन्हें कई जगह हेल्दी माना जाता है, डॉ. विस्वास के मुताबिक किडनी के लिए सही नहीं हैं और इन्हें अवॉइड करना चाहिए।संतुलित डाइट ही है सबसे बड़ा समाधानकिडनी को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि आप किसी भी चीज को जरूरत से ज्यादा न खाएं। सही मात्रा और संतुलन बनाए रखना सबसे जरूरी है। अगर आपको पहले से किडनी की समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह लेकर ही अपनी डाइट तय करें। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 15 May 2026 09:26:15 +0530</pubDate>
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<title>Pregnancy Care: Pregnancy में ये 6 Red Flags हैं खतरे की घंटी, भूलकर भी न करें नजरअंदाज</title>
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<description><![CDATA[ प्रेग्नेंसी के समय हर महिला को अपना खास ख्याल रखने की जरूरत होती है। क्योंकि इस दौरान शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं। वहीं प्रेग्नेंसी में नजर आने वाले कुछ संकेत ऐसे होते हैं, जिन पर हर महिला को फौरन ध्यान देने की जरूरत होती है, वरना आपको समस्या हो सकती है। एक्सपर्ट की मानें, तो अगर आपको प्रेग्नेंसी के समय इनमें से कोई भी संकेत नजर आता है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि बिना देर किए डॉक्टर का रूख करना जरूरी है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इन संकेतों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।इन संकेतों को न करें नजरअंदाजवजाइनल ब्लीडिंगअगर आपको वजाइना से ब्लीडिंग हो रही है, तो इस स्थिति में भी आपको डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। प्रेग्नेंसी के शुरूआती सप्ताह में हल्की स्पॉटिंग होना नॉर्मल है, लेकिन अगर ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है, वहीं खासकर 12 सप्ताह के बाद वजाइना से ब्लीडिंग रही है तो यह एक्टोपिक प्रेग्नेंसी, मिसकैरेज या कई और दिक्कतों का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लेना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Doctor का खुलासा: PCOS और UTI का है गहरा कनेक्शन, जानें Health Risk के 5 बड़े कारणपेट में तेज दर्दप्रेग्नेंसी के समय पेट के एक साइड तेज दर्द या ऐंठन एक्टोपिक प्रेग्नेंसी, वहीं समय से पहले प्लेसेंटल एब्रप्शन या प्रसव का संकेत हो सकता है। हालांकि महिलाएं कई बार इसको गैस समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। पेट में दर्द होने पर डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए।सूजन आनावहीं प्रेग्नेंसी के समय शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन आना सही नहीं होता है। खासकर अगर आपको हाथों या चेहरे पर सूजन महसूस हो। तो इसके पीछे हाई ब्लड प्रेशर की वजह से होने वाली एक हेल्थ कंडीशन हो सकती है। इससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए ऐसा होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें।सिर में तेज दर्दअगर प्रेग्नेंसी में आपको तेज सिरदर्द महसूस हो या धुंधला दिखाई दे या फिर स्पॉट्स नजर आएं, तो डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए। इसको नॉर्मल समझने की गलती नहीं करनी चाहिए।मूवमेंट में कमी होनाअगर आपको पेट के अंदर बच्चे की मूवमेंट कम महसूस हो रही है, तो इसको नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए। खासकर 24 सप्ताह के बाद बच्चे के किक मारने में कमी महसूस हो तो इस पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। क्योंकि अगर आपका बच्चा 2 घंटे से 10 बार से भी कम हलचल कर रहा है, तो यह चिंता की बात हो सकती है। लेकिन सभी महिलाओं के लिए यह अलग-अलग एक्सपीरियंस हो सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।तेज बुखारतेज बुखार, ठंड लगना, स्मेली डिस्चार्ज होना और इंफेक्शन का संकेत हो सकता है। यह आपके और आपके होने वाले बच्चे दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए इस पर जरूर ध्यान देना चाहिए।जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्टएक्सपर्ट की मानें, तो सभी महिलाओं का शरीर प्रेग्नेंसी में अलग-अलग तरीके से रिएक्ट करता है। लेकिन फिर भी अगर आपको इनमें से कोई भी संकेत नजर आता है, तो आपको फौरन डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए। इसके लिए अगली अपॉइंटमेंट का इंतजार नहीं करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 15 May 2026 09:26:15 +0530</pubDate>
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<title>Women Health: Health के लिए Game Changer हैं ये 4 बीज, महिलाएं इन्हें अपनी Diet में जरूर करें शामिल</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप भी सेहतमंद रहना चाहती हैं तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि सेहतमंद रहना बेहद आसान है। अधिकतर बीमारियों के पीछे हमारा गलत खानपान और अनहेल्दी लाइफस्टाइल होती है। लेकिन हेल्दी डाइट इम्यूनिटी को मजबूत करके आपको बीमारियों से दूर रख सकती है। डाइजेशन में सुधार और हार्मोन्स को बैलेंस करती है। वहीं अनहेल्दी ईटिंग हमारी सेहत को बिगाड़ती है।जब भी हेल्दी डाइट की बात होती है, तो सब्जियों और फलों के साथ सीड्स और नट्स का सेवन भी जरूरी होता है। खासकर महिलाओं के शरीर में ताकत बनाए रखने और हार्मोन्स को बैलेंस करने में कई सीड्स मदद कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 4 ऐसे सीड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका सेवन महिलाओं को करना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Health Alert: क्या आपका एयर कंडीशनर आपको बीमार कर रहा है? जानिए इसके चौंकाने वाले नुकसानहेल्दी रहने के लिए रोजाना खाएं ये 4 सीड्सकद्दू के बीज, चिया सीड्स, फ्लैक्स सीड्स और तिल के बीज महिलाओं की सेहत के लिए अच्छे होते हैं। इन बीजों से शरीर को ताकत मिलती है और हार्मोन भी बैलेंसे होते हैं। इन बीजों के सेवन से गट हेल्थ अच्छी होती है।चिया सीड्स में प्रोटीन, फाइबर और ओमेगा 3 फैटी एसिड पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह हार्मोन्स को बैलेंस रखने में मदद करता है। इसके सेवन से वेट भी कम होता है और डाइजेशन में भी सुधार होता है। यह स्किन हेल्थ के लिए भी फायदेमंद होता है।कद्दू के बीज आयरन, जिंक और मैग्नीशियम से भरपूर होते हैं। यह बीज महिलाओं में खून की कमी को दूर करते हैं और इम्यूनिटी मजबूत करते है। कद्दू के बीज को डाइट में शामिल करने से पीरियड्स और पीएमएस के दिनों में होने वाली दिक्कतें भी दूर होती हैं।अलसी के बीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड और लिग्नान होता है। जिन भी महिलाओं को हार्मोनल इंबैलेंस और पीसीओएस की समस्या है, उनको इसका सेवन जरूर करना चाहिए। यह बीज दिल की सेहत के लिए भी बेहतर माने जाते हैं और कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल करते हैं।तिल के बीज में आयरन और कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इनका सेवन करने से हड्डियां मजबूत होती हैं और कैल्शियम की कमी भी दूर होती है। तिल के बीज बालों और त्वचा के लिए भी लाभकारी होते हैं।जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्टहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो इन बीजों को खाने के सही तरीके और मात्रा की जानकारी होनी जरूरी है। कुछ हेल्थ कंडीशन में इसकी ज्यादा मात्रा आपको नुकसान पहुंचा सकती है। वहीं आपके शरीर की प्रकृति और उम्र के हिसाब से भी इसकी मात्रा और खाने का तरीका तय होना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 14 May 2026 09:50:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>बढ़ता पारा, पेट का बिगड़ा हाजमा! Summer में Stomach Problems से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय</title>
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<description><![CDATA[ क्या आपके पेट में बार-बार दर्द या ऐंठन की समस्या हो रही है? तो इस भूलकर भी इग्नोर न करें। गर्मी में अधिक तापमान और शरीर में पानी की कमी से यानी के डिहाइड्रेशन के कारण पेट संबंधी समस्याएं काफी देखने को मिलती हैं। अगर आपको भी पेट की समस्या बनीं रहती हैं, तो एक बार अच्छे डॉक्टर को जरुर दिखाएं। भीषण गर्मी में शरीर से पसीने के रुप में अधिक मात्रा में पानी निकल जाता है। यदि शरीर में पानी की कमी रहती है, तो पेट के अंदर बैड बैक्टीरिया को पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिल जाता है। इस कारण से पाचन संबंधी समस्याएं अधिक हो जाती है। शरीर में पानी की कमी के कारण पेट में एसिड की अधिक मात्रा बढ़ जाती है। जिससे पेट और सीने में जलन की समस्या देखने को मिलती है। इतना ही नहीं, पानी की कमी के कारण कब्ज की दिक्कतें बढ़ जाती है। इसके साथ ही पेट फूलना और पेट में गैस बनना आम समस्या बन जाती है।खानपान में सतर्कता जरुरी हैइन दिनों आप अधिक फैट वाले भोजन से बचें। क्योंकि ज्यादा फैट वाले भोजन का सेवन करने से अपच संबंधी समस्या देखने को मिलती है। पेट में जलन की दिक्कत हो सकती है। गर्मियों में हम सभी आइसक्रीम और अन्य ठंडे पेय पदार्थों का यह सोचकर सेवन करते हैं कि ये ठंडे प्रोडक्ट है, लेकिन ठंडे तापमान और चीनी की अधिक मात्रा का संयोजन पेट संबंधी समस्याएं देखने को मिलती हैं। जिन लोगों को लैक्टोज या डेयरी उत्पादों के प्रति संवेदनशील है, ये प्रोडक्ट पेट में गैस, ऐंठन और दस्त का कारण बन सकते हैं।पेट संबंधी समस्याओं से इस तरह से करें बचाव  - यदि आपको किडनी संबंधी और पेट संबंधित कोई समस्या है, तो गर्मी के दिनों में कम से कम ढाई से तीन लीटर पानी पिएं। - इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने पर नींबू की शिकांजी, नारियल पानी या ओरआरएस का घोल लें। नारियल पानी पेट के पीएच स्तर को बैलेंस करता है। - ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्थों का भरपूर सेवन करें, आप दही, छाछ, रायता, लस्सी पी सकते हैं। यह पेट की गर्मी को शांत करता है और पाचनतंत्र भी सही रहता है। - गर्मी के दिनों में बाहर का खाना खासकर स्ट्रीट फूड खाने से बचें। - आप बाहर के खाने बजाय घर पर ही फ्रेश खाना खाएं। इस बात का ध्यान रखें कि हल्का और पचने वाला खाना का ही सेवन करें। किन चीजों से बनाएं दूरी - अधिक मात्रा में चाय और कॉफी का सेवन न करें। - तरह-तरह के कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का सेवन कम करें। - डिब्बाबंद और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें। - अत्यधिक ऑयली फूड खाने से बचें।पेट की गर्मी बढ़ने के कारण - अगर आप अधिक मसालेदार और तैलीय खाना खाते हैं, तो इससे पेट में एसिड की मात्रा अधिक हो जाती है। - खानपान में किसी भी प्रकार की अनियमितता, समय से भोजन न करना, अधिक मात्रा में खा लेना, भोजन का बिल्कुल सेवन न करना, देर रात को भोजन करना, इससे पाचनतंत्र प्रभावित रहता है। - कई बार शरीर में पानी की कमी के कारण पाचनक्रिया खराब हो जाती है और एसिडिटी की मात्रा भी काफी बढ़ जाती है। - अधिक मात्रा में कैफीन शरीर में पहुंच जाए, तो इससे पेट की अंदरुनी परत में जलन होती है। - तनाव और चिंता करने से भी शरीर में एसिड उत्पादन हो जाता है। जिससे पेट की गर्मी बढ़ जाती है। - नींद की कमी, अपर्याप्त नींद के कारण पाचनतंत्र खराब होता है, बल्कि पेट के अंदर की गर्मी को भी बढ़ा देता है।घरेलू उपाय हैं बहुत लाभकारी - रात को थोड़ी सूखी धनिया, कच्चा जीरा और सौंफ को भिगों दें। सुबह इन तीनों को पीस लें। इस मिश्रण से एक चम्मच मात्रा लेकर एक गिलास पानी में मिलाकर पिएं। इसमें आप ग्लूकोज भी मिला सकते हैं। - आप चाहे तो इस मिश्रण को फ्रिज में स्टोर करके रख लें। कच्ची या भुनी हई सौंफ में थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर खाने से भी आराम मिलता है। - इसके अलावा, छाछ के साथ सेंधा नमक, भुना पिसा जीरा मिलाकर पीने से काफी राहत मिलता है। इनसे भूख भी बढ़ जाती है। - गर्मी में आप मुरब्बा या फिर बेल का शर्बत पी सकते हैं। यह शरीर को काफी आराम देता है। बेल का पाउडर का भी सेवन कर सकते हैं। - आजवाइन, जीरा, कलौंजी और एक या दो ग्राम हींग, छोटी हर्र देसी घी में पकाकर पीस लें। इसके बाद इसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक मिला सकते हैं। खाना खाने के बाद इसे आराम से खा सकते हैं। - रात के समय मुनक्का के बीज निकालकर पानी में भिगो दें। सुबह इसके सेवन से करने से आराम मिलता है। आप चाहे तो रात को त्रिफला चूर्ण का सेवन भी कर सकते हैं। इसको आप पानी या दूध के साथ ले सकते हैं। - रात में 25 किशमिश, 2 अंजीर, 5 अखरोट के टुकड़े और 5 बादाम पानी में भिगोकर रख दें। सुबह खाली पेट इन्हें अच्छे से चबाकर खाएं और साथ में एक गिलास दूध पी लें। यह मिश्रण पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है। साथ ही बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी सहायक माना जाता है। नियमित सेवन से शरीर को भरपूर ऊर्जा और जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। इन चीजों को स्टील, कांच या चीनी मिट्टी के बर्तन में ही भिगोएं। - आप तरबूज और खरबूजा भी खा सकते हैं। लेकिन खाने के बाद तुरंत पानी न पिएं। - आम पन्ना, गन्ने का रस भी काफी लाभदायक होता है।  डॉक्टर को कब दिखाएं?  - अगर आपको घरेलू उपाय के बाद भी आराम न मिलें। फिर भी जलन हो रही है और दर्द बना हुआ है, तो एक बार डॉक्टर जरुर दिखाएं। कई बार-बार उल्टी व दस्त लग रहे हैं, तो डॉक्टर से जरुर मिलें।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 14 May 2026 09:40:08 +0530</pubDate>
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<title>Doctor का खुलासा: PCOS और UTI का है गहरा कनेक्शन, जानें Health Risk के 5 बड़े कारण</title>
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<description><![CDATA[ PCOS और UTI दोनों ही महिलाओं के हेल्थ से जुड़ी अहम समस्याएं हैं। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) ये दोनों समस्याएं एकदम अलग-अलग हैं। दरअसल, पीसीओएस हार्मोनल असंतुलन के कारण होने वाली समस्या है, जबकि UTI एक बैक्टीरियल इंफेक्शन से होने वाली दिक्कत है। लेकिन PCOS से पीड़ित महिलाएं अक्सर UTI की समस्या से परेशान रहते हैं। जिसके चक्कर में कई बार कंफ्यूज नजर आती है कि पीसीओएस और UTI में क्या कनेक्शन है? आइए आपको इसमें अंतर बताते हैं।PCOS और UTI के बीच क्या संबंध है?PCOS की समस्या में हार्मोन असंतुलित होने और ब्लड शुगर बढ़ने की वजह से शरीर में बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा अधिक हो जाता है, जिसके कारण महिलाओं को बार-बार यूरिन इंफेक्शन (UTI) की परेशानी हो सकती है। साल 2023 में Journal of the Brazilian Medical Association में प्रकाशित एक रिसार्च में PCOS और UTI के बीच मजबूत संबंध सामने आया। स्टडी में यह भी पाया गया कि PCOS, हाइपरएंड्रोजेनिज्म, मोटापा, ग्लूकोज असंतुलन और खराब लिपिड प्रोफाइल से जूझ रहे मरीजों में UTI की गंभीरता के साथ मेंटल हेल्थ संबंधी समस्याएं भी अधिक देखने को मिलीं।इंसुलिन रेजिस्टेंस और हाई ब्लड शुगरपीसीओएस से पीड़ित महिलाएं में इंसुलिन रेजिस्टेंस पाया जाता है। इसका सीधा मतलब यही है कि शरीर इंसुलिन का सही तरह से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, जिससे ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। जब यूरिन में शुगर की मात्रा बढ़ती है, तो बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं। इसी कारण से पीसीओएस वाली महिलाओं में UTI का खतरा अधिक देखने को मिलता है। हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि महिलाओं का वजन ज्यादा होता है और जिनमें असंतुलित इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है, जिनमें बार-बार यूटीआई देखने को मिलता है।हार्मोनल असंतुलन PCOS में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। जिसका असर वजाइनल फ्लोरा पर भी देखने को मिलता है। महिलाओं के शरीर में नेचुरल बैक्टीरिया बैलेंस खराब होता है तो इंफेक्शन होने की संभावना अधिक हो जाती है।वजन बढ़ना और खराब लाइफस्टाइलपीसीओएस में ज्यादातर मोटापा बढ़ने की शिकायत बेहद आम होती है। अधिक वजन और शारीरिक एक्टिविटी की कमी शरीर में इंफ्लेमेशन बढ़ा देते हैं, जिससे कमजोर होने लगती है। कमजोर इम्यून सिस्टम इंफेक्शन का खतरा अधिक रहता है, जिससे बार-बार UTI होने के चांसेस बढ़ जाते हैं। पानी कम पीनाज्यादातर महिलाएं कम पानी पीती हैं, बिजी लाइफस्टाइल के कारण कई बार पानी पीने का समय नहीं होता है। जिससे शरीर टॉक्सिंस और बैक्टीरिया को शरीर से बाहर नहीं कर पाता है। दरअसल, पीसीओएस में डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ जाए, तो यूटीआई का खतरा अधिक बढ़ जाता है।तनाव और नींद न आनाअसल में PCOS केवल हार्मोनल बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक प्रकार से मेंटल हेल्थ को भी प्रभावित करती है। ज्यादा तनाव लेने से और नींद की कमी के कारण कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाते हैं, जिससे इम्यूनिटी भी कमजोर हो जाती है। कमजोर इम्यून सिस्टम शरीर को इंफेक्शन के प्रति अधिक सेंसिटिव कर देता है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 14 May 2026 09:40:00 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Doctor, का, खुलासा:, PCOS, और, UTI, का, है, गहरा, कनेक्शन, जानें, Health, Risk, के, बड़े, कारण</media:keywords>
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<title>Health Alert: क्या आपका एयर कंडीशनर आपको बीमार कर रहा है? जानिए इसके चौंकाने वाले नुकसान</title>
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<description><![CDATA[ धीरे-धीरे तापमान बढ़ रहा है जिससे भीषण गर्मी पड़ने लगी है। चिलचिलाती धूप और बढ़ता हुआ पारा, में AC की ठंडी हवा बहुत आराम देती है। इस मौसम में बिना AC की नींद आना भी काफी मुश्किल होता है। गर्मियों के मौसम में ठंडी हवा पाने के लिए ज्यादातर लोग एसी में सोना ज्यादा आरामदायक मानते हैं। हालांकि, पूरी रात लगातार एसी चलाकर सोने से शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि रातभर एसी की ठंडी हवा लेना स्वास्थ्य के लिए कितना सुरक्षित है और इससे जुड़े फायदे-नुकसान क्या हैं, आइए एक्सपर्ट से जानते हैं।क्या AC में सोना सेहत को पहुंचा सकता है नुकसान?  - हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि, एसी में सोना सेहत के लिए अच्छा है और इसका सेहत पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। लेकिन इसका गलत तरीके से इस्तेमाल सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं। - एसी का काम होता है कि ड्राई एयर को सर्कुलेट करके कमरे को ठंडा करना और ओवरहीटिंग से बचाता है। गर्म तापमान में कई बार नींद में खलल पड़ जाता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि रातभर एसी में सोना आपको ही नुकसान पहुंचाएगा। हालांकि एसी का तापमान जरुर आपके लिए परेशानी की वजह बन सकता है। - अगर आप रात में एसी का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से बहुत कम रखती हैं, तो शरीर पर इसका असर पड़ सकता है। ज्यादा ठंडक की वजह से मांसपेशियां सख्त होने लगती हैं और जोड़ों में दर्द या जकड़न महसूस हो सकती है। जिन लोगों को गठिया या हड्डियों से जुड़ी दिक्कतें हैं, उनके लिए यह समस्या और बढ़ सकती है। खासतौर पर बुजुर्गों लोगों को तेज ठंडी हवा से अधिक असहजता और दर्द का सामना करना पड़ता है। - ड्राई एयर के कारण स्किन रुखी होने लगती है और इसी कारण से सांस संक्रमण, एलर्जी और अस्थमा की दिक्कत बढ़ जाती है।  - लंबे समय से ड्राई हवा से संपर्क में रहने से शरीर का मुख्य तापमान गिर जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है, इससे आपका रुटीन गड़बड़ा जा सकता है।  - जिन लोगों को एलर्जी और अन्य कोई समस्या है, तो तापमान को 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखें। इसके फिल्टर्स को हर हफ्ते में साफ करना चाहिए और शरीर को हवा को सीधा फ्लो दूर करें। - इसके अलावा, बच्चों और बुजु्र्गों या किसी हेल्थ कंडीशन से परेशान लोगों को पूरी रात एसी में सोने से बचना चाहिए या फिर सीमित रुप में एसी का प्रयोग करें।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:09:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Health, Alert:, क्या, आपका, एयर, कंडीशनर, आपको, बीमार, कर, रहा, है, जानिए, इसके, चौंकाने, वाले, नुकसान</media:keywords>
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<title>Knee Pain Relief: घुटनों के दर्द का रामबाण इलाज है यह तेल, 3 चीजें मिलाकर बनाएं Natural Oil</title>
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<description><![CDATA[ ज्यादातर लोग घुटनों या जोड़ों के दर्द से परेशान रहते हैं? सीढ़िया चढ़ते-उतरते समय दर्द देखने को मिलता है या सुबह उठते ही घुटनों में अकड़न महसूस होती है। इसलिए दवाइयों के साथ नेचुरल और असरदार घरेलू उपाय भी जरुर ट्राई करें। दादी-नानी के नुस्खए में से एक है यह तेल, जो कि केवल 3 चीजों से बना हुआ। इस लेख में हम आपको बताएंगे कैसे इस तेल को बनाएं और इसके फायदे। दर्द को दूर करने वाले तेल की सामग्री  - लहसुन- 4 काली - सरसों के बीज- 1 बड़ा चम्मच - अरंडी का तेल- 5 बड़े चम्मचदर्द भगाने वाला तेल कैसे बनाएं? - सबसे पहले आप अरंडी का तेल को हल्का गर्म करें। - अब इसमें लहसुन और सरसों के बीज डालकर कुछ मिनट तक पकाएं। - इसको ठंडा होने के बाद छान लें। - हल्का गुनगुना करके घुटनों या दर्द वाले हिस्से पर 5-10 मिनट तक मसाज करें।  - अच्छे रिजल्ट के लिए आप रोजाना इसे 4-5 हफ्ते इस्तेमाल करें।इस तेल इस्तेमाल कब करेंरात को सोने से पहले इस तेल का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा होता है। इससे आपकी मसल्स रिलैक्स होती हैं और सुबह दर्द कम महसूस होता है। इस में पड़ी ये 3 चीजें दर्द, सूजन और अकड़न से राहत देती हैं।लहसुन के फायदेलहसुन में प्राकृतिक रुप से सूजनरोधी तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में होने वाले दर्द और सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। इसका नियमित सेवन जोड़ों की अकड़न को धीरे-धीरे कम कर सकता है और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करता है। साथ ही, लहसुन मांसपेशियों को आराम पहुंचाकर शरीर को अधिक सहज महसूस कराने में भी उपयोगी माना जाता है।सरसों के तेल के फायदेसरसों के बीजों की तासीर गर्म होती है, जो शरीर में गर्माहट बढ़ाकर रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करती है। इसके प्रभाव से मांसपेशियों को आराम मिलता है और शरीर के दर्द में राहत महसूस हो सकती है। नियमित रूप से उपयोग करने पर सूजन और शरीर की जकड़न धीरे-धीरे कम होने लगती है।अरंडी के तेल के फायदेअरंडी का तेल त्वचा के अंदर तक जाकर सूजन को कम करता है। जोड़ों को लुब्रिकेट करता है, जिससे मूवमेंट आसान हो जाता है। अगर आप इसको नियमित तौर पर लगाते हैं, तो यह ड्राइनेस को कम करती है, दर्द में राहत पहुंचाती है और जोड़ों की फ्लेक्सिबिलिटी बेहतर होती है।घुटने के दर्द वाले तेल के फायदे  - इस तेल की मदद से घुटनों और जोड़ों के दर्द में काफी राहत मिलेगा।  - सूजन और अकड़न को कम करता है। - यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करता है। - मसल्स को रिलैक्स करता है। - दर्द को प्राकृतिक रुप से कम करता है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:09:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: Kidney Stone का 50% बढ़ जाता है Risk, पानी पीने में ये गलती पड़ सकती है भारी</title>
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<description><![CDATA[ किडनी की पथरी एक ऐसी समस्या है, जिसके होने पर व्यक्ति को बहुत ज्यादा दर्द का सामना करना पड़ता है। जब हमारे यूरिन में मौजूद नमक और मिनरल्स एक जगह जमा होकर सख्त हो जाता है, तब वह छोटे-छोटे स्टोन का रूप ले लेते हैं। जो कि किडनी स्टोन के रूप में जाना जाता है। यह न सिर्फ शरीर को दर्द पहुंचाता है, बल्कि सही इलाज न मिलने पर किडनी के काम करने की क्षमता पर भी असर पड़ता है। अक्सर ऐसा कहा जाता है कि हमारे खानपान और कम पानी पीने की वजह से किडनी स्टोन हो सकता है।ऐसे में जब भी किसी व्यक्ति को किडनी की पथरी होती है, तो सबसे पहले यह सवाल पूछा जाता है कि वह पर्याप्त मात्रा में पानी पीता है या नहीं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि कम पानी पीने से किडनी स्टोन की समस्या क्यों होती है।इसे भी पढ़ें: Hantavirus का डर: Pet Owners भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानलेवा Infection से ऐसे करें बचावकम पानी पीने से किडनी स्टोन होनाकम पानी पीना भी किडनी स्टोन होने का एक बड़ा कारण होता है। जब आप पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते हैं, तो आपका पेशाब गाढ़ा हो जाता है। जिससे ऑक्सालेट और कैल्शियम जैसे मिनरल्स क्रिस्टल बनकर पथरी का रूप लेते हैं। कम पानी पीने से किडनी स्टोन होने का खतरा 50% तक बढ़ जाता है। ऐसे में इनको शरीर से बाहर निकालने के लिए आपका हाइड्रेटेड रहना जरूरी है।पहली बार और बार-बार होने वाली किडनी की पथरी मरीजों में कम पानी पीने और कम पेशाब की मात्रा होने से होती है। पेशाब कम बनने से इसमें मौजूद गंदगी या अपशिष्ट पदार्थों का गाढ़ापन बढ़ जाता है। जिससे पेशाब में पथरी बनाने वाले तत्व अधिक जमा हो जाते हैं। इससे क्रिस्टल बनने और पथरी के बढ़ने में मदद मिलती है।जानें कम पानी पीने और किडनी स्टोन के बीच कनेक्शनशरीर में पानी की कमी से पेशाब की मात्रा कम हो जाती है। जिससे मिनरल्स की सांद्रता 20-30% तक बढ़ जाती है। पानी का सेवन बढ़ाने से किडनी स्टोन के दोबारा होने का खतरा 50% तक कम हो जाता है। अगर आप पेशाब को पतला रखते हैं, तो इसमें क्रिस्टल नहीं बन पाते हैं।किडनी की पथरी को रोकने के लिए पानी का सेवन बढ़ाना फायदेमंद है। अगर आप चाहते हैं कि आपको दोबारा किडनी की पथरी न हो तो इतना पानी पिएं कि दिनभर में कम से कमि 2 से 2.5 लीटर पेशाब आए। वहीं यह भी माना जाता है कि ज्यादा मात्रा में पानी पीने से यूरिन की मात्रा और फ्लो बढ़ता है। जोकि कैल्शियम फॉस्फेट, कैल्शियम ऑक्सालेट और यूरिक एसिड की ज्यादा सांद्रता को कम करता है।किडनी स्टोन के लक्षणपीठ या किनारे कि हिस्से और पसलियों के नीचे अचानक और तेज होने वाले दर्द की समस्या किडनी स्टोन का संकेत होता है।पेशाब का रंग लाल, गुलाबी या अन्य किसी रंग का होना।पेशाब के दौरान बहुत ज्यादा दर्द या तेज जलन होना। या फिर बार-बार पेशाब लगने जैसा महसूस होना।शरीर में तेज दर्द होने की वजह से जी मिचलाना, चक्कर आना या उल्टी जैसा महसूस होना।अगर आपको दर्द के साथ तेज फीवर और कंपकंपी जैसा महसूस हो या यह यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का संकेत हो सकता है। जोकि किडनी स्टोन की ओर इशारा करता है।कैसे चेक करें पर्याप्त पानी पी रहे या नहींशरीर में पानी की कमी नहीं होने देना आपकी सेहत को बेहतर रखता है। वहीं किडनी की पथरी जैसी बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए भी जरूरी है। इसलिए आप भी इन टिप्स की मदद से अपने शरीर में हाइड्रेशन की जांच कर सकते हैं।पेशाब का रंगअगर आप हाइड्रेटेड हैं या फिर डिहाइड्रेटेड इस बार का पता आपके पेशाब के रंग से चल सकता है। अगर आपको पेशाब हल्के पीले रंग की हो रही है, तो यह पर्याप्त मात्रा में पानी पीने का संकेत होता है। लेकिन अगर आपको गहरे पीले रंग का पेशाब हो रहा है, तो इसका मतलब है कि आपके शरीर में पानी की कमी है।डिहाइड्रेशनपानी पीने के बाद भी बार-बार प्यास लगना, सिर में दर्द होना, मुंह सूखना और थकान महसूस होना भी डिहाइड्रेशन का लक्षण होता है।ऐसे ट्रैक करें हाइड्रेशनआप एक सप्ताह तक किसी ऐप या फिर मार्किंग वाली बोतल का इस्तेमाल करके भी जान सकते हैं कि आप हाइड्रेटेड रहने के लिए सही मात्रा में पानी पी रहे हैं या फिर नहीं। दिनभर में कितना पानी पिएंएक स्टडी के मुताबिक किडनी की पथरी में व्यक्ति को पूरे दिन में 2.5 लीटर से अधिक पानी पीना चाहिए। वहीं कम से कम 2 लीटर पेशाब का आउटपुट बनाए रखना चाहिए। ऐसा करने से आप किडनी की पथरी के जोखिम को कम कर सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन भर में करीब 2.5 से 3 लीटर यानी की 10 से 12 गिलास पानी पीना चाहिए। हालांकि आप पानी पीने के प्रोसेस को अलग-अलग चरणों में भी बांट सकते हैं।सुबह उठते ही सबसे पहले 1 गिलास पानी पिएं।फिर दोपहर को खाना खाने से पहले 2 गिलास पानी पिएं।दोपहर के बीच में 2 गिलास पानी पीएं।रात में खाना खाने से पहले 2 गिलास पानी पिएं।रात को सोने से पहले 1 या 2 गिलास पानी पिएं।पानी पीने के दौरान इन बातों का जरूर रखें ध्यानअगर आप बहुत गर्मी में रहते हैं, एक्सरसाइज करते हैं या फिर आपको डायबिटीज जैसी बीमारी है, तो आप डॉक्टर की सलाह पर पानी की मात्रा बढ़ा सकते हैं।तरबूज और खीरा जैसे ताजे और पानी से भरपूर फल और सब्जियां खानी चाहिए। साथ ही सादा पानी पीने पर भी ध्यान दें।पेशाब के रंग पर ध्यान दें, जिससे कि आप हाइड्रेशन की स्थिति का आसान से पता लगा सकें।जानें कब डॉक्टर से मिलेंअगर आपको बार-बार किडनी में पथरी होती है, या परिवार में स्टोन की हिस्ट्री रही है, पेशाब करते समय दर्द या जलन महसूस होती है या फिर पेशाब में खून आता है। तो ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए।वहीं अगर आपको पेशाब करने में समस्या आती है, तेज बुखार या सूजन की समस्या है और अक्सर डिहाइड्रेटेड रहते हैं। तो आपको अपना चेकअप समय-समय पर कराते रहना चाहिए। शुरूआत में ही यूरिन टेस्ट और इमेजिंग से समस्याओं के बारे में जल्दी पता चल सकता है। जिससे आप समय पर बीमारी का इलाज करवा सकते  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 09:09:54 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: बच्चों में Low BP के इन लक्षणों को न करें इग्नोर, हो सकते हैं गंभीर परिणाम</title>
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<description><![CDATA[ लो ब्लड प्रेशर को हाइपोटेंशन भी कहा जाता है। बच्चों में यह समस्या देखने को मिलती है। हालांकि बड़ों की तुलना में बच्चों में यह समस्या कम होती है। लेकिन इसके बाद भी पेरेंट्स को बच्चों में लो बीपी की समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए। ब्लड प्रेशर, ब्लड का वह दबाव है, जिससे ब्लड धमनियों की दीवारों से टकराता है। लेकिन बच्चों में सामान्य ब्लड प्रेशर कई कारकों पर भी निर्भर करता है। जैसे उनकी लंबाई, लिंग और उम्र आदि के आधार पर। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बच्चों में लो ब्लड प्रेशर के कारण, लक्षण और जरूरी टिप्स आदि के बारे में बताने जा रहे हैं।नवजात शिशु में 60/40 mmHg1-5 साल के बच्चे में 80/50 से 95/60 mmHgकिशोरावस्था में 110/70 से 120/80 mmHgइसे भी पढ़ें: Summer Health: ठंडा या नॉर्मल पानी, क्या है सही? Doctor ने बताई Body की असल जरूरत जब बच्चे का ब्लड प्रेशर उनकी हाइट, उम्र और लिंग के मानक स्तर से नीचे चला जाता है, तो वह हाइपोटेंशन की स्थिति होती है।  छोटे बच्चों में लो बीपी की मुख्यडिहाइड्रेशनबच्चों में लो ब्लड प्रेशर का सबसे प्रमुख और सामान्य कारण डिहाइड्रेशन है। जब भी किसी बच्चे के शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो जाती है, तो इसका असर ब्लड वॉल्यूम पर भी पड़ता है। ब्लड वॉल्यूम कम होने से धमनियों की दीवारों पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाता है, जिससे बीपी लो हो जाता है। आमतौर पर बच्चों में यह स्थिति बार-बार उल्टी होना, दस्त, तेज बुखार या ज्यादा पसीना आना होता है।इलेक्ट्रोलाइट्स इंबैलेंसबच्चों के शरीर में जब भी पानी की मात्रा कम हो जाती है, तो न सिर्फ शरीर डिहाइड्रेट होता है, बल्कि इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस भी होने लगता है। ऐसेमें हृदय को अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। जिससे बीपी लो हो जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को चक्कर आ सकते हैं, वह बेहोश हो सकता है या फिर सुस्त पड़ सकता है।संक्रमणसंक्रमण बच्चों में लो बीपी की वजह बन सकता है। जिससे बच्चों में सेप्टिक शॉक जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। जब किसी संक्रमण की वजह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा सक्रिय हो जाती है। इस कारण शरीर में सूजन पैदा हो सकती है। जिससे टिश्यूज को नुकसान पहुंचता है और बीपी का स्तर खतरनाक रूप से कम हो जाता है। पोषक तत्वों की कमी होनाजब बच्चे सही डाइट नहीं फॉलो करते हैं, जिस कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। अगर बच्चे के शरीर में फोलेट और विटामिन बी12 की कमी हो जाती है, तो बॉडी में पर्याप्त मात्रा में रेड ब्लड सेल्स नहीं बन पाते हैं, जिससे बच्चे को एनीमिया हो सकता है और बीपी कम रह सकता है।हृदय संबंधी समस्याएंअगर बच्चे के जन्म से ही दिल में छेद है या हृदय की मांसपेशियां कमजोर हैं। वहीं वह शरीर के अंगों तक पर्याप्त मात्रा में ब्लड पंप नहीं कर पाता, जिससे ब्लड प्रेशर लो हो जाता है।हार्मोनल समस्याएंजब बच्चों में थायराइड एड्रिनल ग्लैंड से जुड़ी समस्या होती है, तो उनको लो बीपी की समस्या हो सकती है। अगर बच्चे का ब्ल़ड शुगर लो हो जाता है, तो इसकी वजह से ब्लड प्रेशऱ के लेवल में भी गिरावट देखने को मिल सकती है। लो ब्लड प्रेशर के लक्षणधुंधला दिखाई देनाचेहरे का रंग सफेद नजर आनाहाथ-पैर ठंडे पड़ जानाचक्कर आना या बेहोशीथकान और सुस्तीसांस लेने में तकलीफ आनाएकाग्रता में कमीबार-बार प्यास लगनाशॉकबच्चों में यह एक गंभीर स्थिति है, जिसमें बॉडी के सभी अंगों और टिश्यूज तक पर्याप्त मात्रा में ब्लड फ्लो नहीं होता है। जिस कारण ऑक्सीजन बाधित होने लगती है। शॉक के शुरूआती चरणं में बच्चे का शरीर हृदय गति बढ़ाकर बीपी को स्थिर रखने की कोशिश करता है। लेकिन जैसे-जैसे शॉक बढ़ता है और हृदय की मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती है। वहीं ब्लड फ्लो पर असर दिखने लगता है। यह एक गंभीर और जानलेवा स्थिति भी है।लगातार बेहोश होनाअगर आपका बच्चा बार-बार बेहोश हो रहा है, तो पेरेंट्स को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह सामान्य स्थिति नहीं है। जब बीपी का स्तर लो काफी कम हो जाता है, तो दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त ब्लड नहीं मिल पाता है। इस कारण बच्चे बार-बार बेहोश होने लगता है। यह स्थिति संकेत देती है कि शरीर का सर्कुलेटरी सिस्टम गंभीर दबाव में है और शरीर के अंगों को नुकसान हो सकता है।नीला पड़नाबीपी लो होने के कारण शरीर के अंगों तक सही तरह से ऑक्सीजन सप्लाई नहीं होता है। ऑक्सीजन की भारी कमी की वजह से बच्चे के नाखून, होंठ और स्किन का रंग नीला पड़ने लगता है। यह एक गंभीर संकेत होता है कि शरीर की जरूरतों को हृदय और फेफड़े पूरा नहीं कर पा रहे हैं।बच्चे में कैसे की जाती है लो ब्लड प्रेशर की जांचमेडिकल हिस्ट्रीबच्चे की मेडिकल हिस्ट्री और वह जो भी दवाएं ले रहा है, इसकी जानकारी होने के बाद ही बच्चे का बीपी का ट्रीटमेंट शुरू हो सकता है।बीपी मॉनिटरिंगबच्चे में लो बीपी के ट्रीटमेंट से पहले अलग-अलग स्थितियों जैसे लेटकर, बैठकर या खड़े होकर बीपी चेक किया जाता है।ब्लड टेस्टहालांकि कुछ मामलों में ब्लड टेस्ट करना पड़ सकता है। जिससे कि यह पता लगाया जा सके कि बच्चे का ब्लड प्रेशर क्यों लो है। इन टेस्ट के जरिए शुगर लेवल, एनीमिया और संक्रमण का पता लगाया जाता है।ईसीजी और इकोकार्डियोग्रामहृदय की धड़कन और संरचना की जांच के लिए ऐसी जांच की जाती है।जानिए पेरेंट्स क्या करेंडाइटआप डॉक्टर की सलाह पर बच्चे की डाइट में नमक की मात्रा बढ़ा सकती हैं। लो बीपी को सामान्य रखने में सोडियम मदद करता है।हाइड्रेटेड रखेंबच्चे को हाइड्रेटेड रहने की सलाह दें। इससे शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा संतुलित रहती है। आप इलेक्ट्रोलाइट को बैलेंस करने के लिए बच्चे को नारियल पानी दे सकते हैं। इससे बच्चा हेल्दी रहता है और हेल्दी बच्चों में बीपी का लेवल भी संतुलित बना रहता है।कई मील देंहैवी मील लेने के बाद ब्लड प्रेशर का लेवल गिर जाता है। इसलिए बच्चे को दिन में तीन हैवी मील देने के बजाय दिन भर में 5 से 6  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:29:19 +0530</pubDate>
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<title>World Lupus Day: क्यों महिलाओं के लिए &amp;apos;साइलेंट किलर&amp;apos; है Lupus? जानें Hormones का पूरा खेल</title>
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<description><![CDATA[ आज है  World Lupus Day मनाया जा रहा है। यह प्रकार से ऐसी ऑटोइम्यून बीमारी है, जो पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करती है। इस बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा महिलाओं को होता है। खासतौर पर इस बीमारी के बारे में लोगों को कुछ पता ही नहीं है और इसके संकेतों पर ध्यान भी नहीं जाता है। अगर समय रहते हुए इस पर ध्यान दिया जाए तो इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। सही समय पर इस बीमारी का पता लग जाए तो इस शरीर के अंगों तक पहुंचने से पहले इसे रोकने पर ध्यान दिया जाए, तो ट्रीटमेंट आसान हो जाता है। यह बीमारी महिलाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। आइए आपको बताते हैं किन लक्षणों से पर ध्यान देना जरुरी है। ल्यूपस के इन शुरुआती संकेतों पर जरूर दें ध्यान    - ल्यूपस के शुरुआती संकेतों पर ध्यान देना जरुर दें। यदि इसे समय रहते हुए ध्यान न दिया जाए, तो यह किडनी, हार्ट और बाकी अंगों को प्रभावित कर सकता है। - इसका सबसे बड़ा लक्षण जोड़ों का दर्द है। उंगलियों, कलाई और घुटनों के आसा-पास सूजन और दर्द ल्यूपस का संकेत हो सकता है। - ल्यूपस आर्थराइटिस पर जोड़ों में विकृति पैदा नहीं करती है। यह न तो रुमेटीइड है और न ही ऑस्टियोआर्थराइटिस है। - इसके अतिरिक्त चेहरे पर आने वाले लाल रैशेज भी इसका संकेत हो सकते हैं। आमतौर पर नाक और गालों पर आने वाले बटरफ्लाई रैश इसके शुरुआती लक्षण माने जाते हैं। - ये रैशेज, हाथ, पैर और शरीर के बाकी अंगों पर भी हो सकते हैं। वहीं, ये रैशेज सूरज की रोशनी में ज्यादा दिक्कत देते हैं।  - यदि आपके बाल तेजी से झड़ रहे है और स्कैल्प पर भी रैशेज नजर आते हैं, तो इसे भी नजरअंदाज न करें। इसके अतिरिक्त ओरल अल्सर, बुखार, वजन कम होना और गर्दन के पास लिम्फ नोड्स में सूजन रहना, ये इसी बीमारी के संकेत हैं। - उंगलियों और नाखूनों के आसपास की त्वचा का रंग बदलना भी सही नहीं है। हाई ब्लड प्रेशर और पफीनेस पर ध्यान देना जरुरी है।महिलाओं में क्यो ज्यादा होता है ल्यूपस का खतरा? रिसर्च के अनुसार, ल्यूपस महिलाओं को सबसे अधिक परेशान करता है। इतना ही नहीं, इसका खतरा टीनएज से लेकर 30 साल तक की महिलाओं में होता है। महिलाओं में एस्ट्रोजन का लेवल रिप्रोडक्टिव सालों में ज्यादा होता है और इसके उतार-चढ़ाव के चलते इम्यून सिस्टम प्रभावित करता है। इसके अलावा, प्रेग्नेंसी और पीरियड्स में होने वाला हार्मोनल इंबैलेंस होता है। वैसे जेनेटिक कारणों से भी हो सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:29:19 +0530</pubDate>
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<title>Hantavirus का डर: Pet Owners भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानलेवा Infection से ऐसे करें बचाव</title>
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<description><![CDATA[ दुनियाभर में एक बार फिरसे इस नए वायरस ने हड़कंप मचा दिया है। हालिए में अर्जेंटीना से अंटार्कटिका जा रहे एक क्रूज शिप पर हंतावायरस (Hantavirus) के इन्फेक्शन और मौतों की खबर ने दुनिया दहशत में डाल दिया है। असल में यह वायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है, जिस वजह से लोगों में हंतावायरस से मन में डर बैठना स्वाभाविक है।इस दौरान सबसे बड़ी चिंता उन लोगों कि जिनके घरों में पालतू जानवर हैं। ऐसे में पेट ओनर के मन में भी सवाल आता है कि क्या उनके प्यारे पेट्स भी जानलेवा वायरस को फैला सकते हैं। आइए आपको बताते हैं।सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, कुत्ते और बिल्ली इंसानों में हंतावायरस नहीं फैलाते हैं। हालांकि, कुत्ते और बिल्लियां इस वायरस से संक्रमित हो सकते हैं, यदि वे संक्रमित जंगली चूहों का शिकार करें या उनके संपर्क में आएं। लेकिन संक्रमित होने के बावजूद ये पालतू जानवर बीमार नहीं पड़ते और न ही इनमें कोई लक्षण दिखाई देते हैं। सबसे जरुरी बात यही है कि वे अपने शरीर से इस वायरस को इंसानों में ट्रांसफर नहीं कर पाएंगे।अब किन जानवरों से सावधान रहना चाहिए?पालतू जानवर खुद इस वायरस को सीधे इंसानों तक नहीं पहुंचाते, लेकिन उनके जरिए संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। यदि आपका कुत्ता या बिल्ली किसी संक्रमित चूहे को पकड़कर घर में ले आए, तो उस चूहे के पेशाब, लार या मल के संपर्क में आने से लोगों में संक्रमण फैलने की आशंका रहती है।किन जानवरों में जोखिम सबसे ज्यादा है?बहुत से लोग अपने घर में हैम्स्टर, खरगोश या पालतू चूहों को पालना पसंद करते हैं। CDC की रिपोर्ट के मुताबिक, हंतावायरस का संक्रमण ज्यादातर जंगली कृंतकों जैसे डियर माउस, व्हाइट-फुटेड माउस और कॉटन रैट के जरिए फैलता है। वहीं, पालतू जानवरों की दुकानों से खरीदे गए चूहे या छोटे पालतू जीव सामान्यतः इस वायरस से संक्रमित नहीं पाए जाते।लेकिन, इन पालतू जानवरों को ऐसी जगह रखा जाएं, जहां जंगली चूहों का आना-जाना हो, तो इन्फेक्शन का खतरा अधिक हो जाता है। इसके साथ ही घर में 5 साल से कम उम्र के बच्चे हो, प्रेग्नेंट महिलाएं या कमजोर इम्युनिटी वाले लोग हों, उन्हें घर में रोडेंट्स रखने से बचें।कैसे इंफेक्शन फैलता है?हंतावायरस फैलने का मुख्य कारण इन्फेक्टेड रोडेंट के यूरिन, मल या लार से फैलता है। किसी संक्रमित जानवर के काटने या नोचने से भी यह वायरस फैल सकता है। इसके अलावा किसी दूषित सामग्री को छूने के बाद नाक, मुंह या आंखों को छूने से भी यह फैलता है।बचाव के लिए क्या करें? - किसी भी तरह से चूहों के मूत्र, मल, लार या घोंसले के सीधे संपर्क आनें से बचना चाहिए। - घर, गैरेज या स्टोर रूम में मौजूद उन छेदों और दरारों को सील कर दें जहां से चूहे अंदर आ रहे हैं। - यदि आपको चूहे की गंदगी साफ करनी है, तो वहां झाड़ू न लगाएं। क्योंकि वायरस हवा में उड़ सकता है और नाक के द्वारा सीधे शरीर में प्रवेश कर सकता है। इसलिए उस जगह पर ब्लीच या डिसइंफेक्टेंट से गीला करें। इसके बाद सावधानी से साफ करें। - अपने पेट्स के खाने और इंसानी खाने को एयरटाइट कंटेनर में रखें जिससे जंगली चूहे आकर्षित न हो।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 12 May 2026 09:29:18 +0530</pubDate>
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<title>Summer Health: ठंडा या नॉर्मल पानी, क्या है सही? Doctor ने बताई Body की असल जरूरत</title>
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<description><![CDATA[ गर्मी के मौसम में सबसे जरुरी शरीर के तापमान को संतुलित बनाए रखने के लिए पानी पीना सबसे जरुरी काम है, जब हम पानी पीते हैं तो मन में यह सवाल आता है कि फ्रिज का बर्फ जैसा ठंडा पानी पिएं या फिर नॉर्मल पानी?  वैसे तो इसका चुनाव पूरी तरह से आपके शरीर की जरुरत और उस समय की स्थिति पर निर्भर करता है। आइए आपको बताते हैं इन दोनों ऑप्शन्स में सबसे जरुरी क्या है।ठंडा पानीअगर आप तेज धूप से लौटते हैं या मेहनत करने के बाद बहुत पसीना बहा चुके होते हैं, तो ऐसे में हम सबको ठंडा पानी पीकर गजब की शांति मिलती है।   - फायदा- ठंडा पानी शरीर के बढ़े हुए तापमान को तेजी से कम करता है और  शरीर ताजगी व ठंडक का एहसास दिलाता है। - नुकसान- साइंस के मुताबिक, बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीने से शरीर की ब्लड वेसल्स सिकुड़ सकती हैं, जिसका हल्का असर आपके पाचन पर पड़ता है। इसके साथ ही अचनाक बहुत ठंडा पानी पीने से गले में खराश, सर्दी-जुकाम, पेंट में ऐंठन और एसिडिटी जैसी पाचन से संबंधित परेशानी शुरु हो सकती हैं।नॉर्मल पानीदूसरी तरफ, नॉर्मल यानी कमरे के तापमान वाला पानी शरीर के लिए सबसे उपयुक्त और आरामदायक माना जाता है। यह शरीर में आसानी से संतुलन बनाए रखता है और पाचन प्रक्रिया पर भी सकारात्मक असर डालता है। रोजाना इस तरह का पानी पीने से शरीर को बिना किसी अतिरिक्त दबाव के सही तरीके से हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है। - आसान पाचन- नॉर्मल पानी पीने से शरीर के प्राकृतिक तापमान के काफी करीब ले आता है। इसी वजह से शरीर इसे आसानी से एब्जॉर्ब कर लेता है और यह हमारे पाचन तंत्र पर कोई फालतू दबाव नहीं पड़ता। - खाने के समय है बेस्ट- जब आप भोजन करते हैं या खाना खाने के तुरंत बाद नॉर्मल पानी पीना सबसे सही रहता है। गौरतलब है कि ठंडा पानी आपकी पाचन प्रक्रिया को धीमा कर सकता है, जबकि नॉर्मल पानी इसको संतुलित करता है।क्या है डॉक्टर की राय?हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, यह बिल्कुल साफ है कि दोनों तरह के पानी के अपने-अपने प्रभाव हैं। ठंडा पानी भले ही तुरंत ताजगी देता है, लेकिन लंबी अवधि में और पाचन को दुरुस्त रखने के लिए नॉर्मल पानी एक संतुलित और बेहतरीन विकल्प है। इसलिए जब भी आप पानी पीने के लिए गिलास उठाएं, तो अपनी स्थिति और सेहत को ध्यान में रखकर ही पानी का चयन करें।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 11 May 2026 09:31:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Daily Coffee पीना कितना सही? जानें आपकी Health के लिए अमृत है या है जहर</title>
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<description><![CDATA[ कुछ लोगों को कॉफी पीना काफी पसंद होता है। कॉफी लवर दिन में 2-3 बार कॉफी पीते हैं। ऐसे में कुछ लोग कॉफी एक बेवरेज नहीं बल्कि रुटीक का हिस्सा ही मान लेते हैं। लोग कॉफी के बिना अपना दिन अधूरा मानते हैं। कई लोग दिन की शुरुआत कॉफी से ही करते हैं और इसे एनर्जी प्रदा करने वाला और मूड बूस्ट करने वाला मानते हैं। अब सवाल उठता है कि कॉफी पीना सेहत के लिए अच्छी है या फिर नुकसानदायक। असल में कॉफी पीने की मात्रा, पीने का तरीका और कई बातों पर निर्भर करता है। इस लेख में हम आपको कॉफी के फायदे, नुकसान और इसे पीने के सही तरीके के बारे में बताएंगे।क्या कॉफी सेहत के लिए नुकसानदेह है? - कॉफी में कैफीन सबसे अधिक होता है, जो कि नर्वस सिस्टम को उत्तेजित होता है। इसे पीने से कुछ देर के लिए दिल की धड़कन और बीपी बढ़ सकता है। - ऐसा बहुत कम देर के लिए होता है और बीपी और धड़कन का लेवल बहुत ज्यादा नहीं बढ़ता है।  - हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि आमतौर पर कम मात्रा में कॉफी का सेवन करने से दिल के लिए काफी फायदेमंद होता है। लेकिन ऐसा हर किसी के साथ नहीं होता है। - कुथ लोगों को एक कप कॉफी पीने के बाद दिल की धड़कने तेज हो जाती है। कंपकंपी या बैचेनी महसूस होना जैसी समस्या हो सकती है। इन संकेतों से पता चलता है कि आपको कॉफी नहीं पीनी चाहिए।कॉफी की सही मात्रा का रखना होगा ध्यानइस बात का ध्यान रखें कि कॉफी का सीमित मात्रा में सेवन करने से कोई नुकसान नहीं होता। एक हेल्दी एडल्ट के लिए 2-3 कप कॉफी का सेवन सुरक्षित माना जाता है। इसके अधिक सेवन से नींद आने में मुश्किल, बेचैनी और घबराहट महसूस हो सकती है। इसका प्रभाव हार्ट हेल्थ पर पड़ता है। स्ट्रेस लेवल बढ़ने और नींद पूरी न होने का सीधा कनेक्शन आपकी हार्ट हेल्थ से पूरा होता है।कॉफी बनाने का सही तरीका भी है जरूरीहेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि ब्लैक कॉफी हार्ट और लिवर के लिए हेल्दी होती, लेकिन शुगर, दूध, क्रीम और फ्लेवर सिरप डालकर इसे पीना नुकसानदायक मानी जाती है, क्योंकि इसमें कैलोरी की अधिक मात्रा होती है। इससे आपका कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ जाता है, डायबिटीज हो सकती है और मोटापा भी बढ़ जाता है। फिल्टर कॉफी सबसे बेहतर विकल्प होता है, जो कॉफी को शुगर के साथ उबालकर पीते हैं, तो इससे बैड कोलेस्ट्रॉल खत्म होता है।कॉफी कैसे पिएं?हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि दिन 1-2 कप ब्लैक कॉफी पीना फायदेमंद होता है। यदि आप दूध वाली कॉफी पी रही हैं, तो एक कप से ज्यादा बिल्कुल न पिएं। गौरतलब है कि ब्लैक कॉफी हार्ट हेल्थ और लिवर के लिए फायदेमंद होती है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 10 May 2026 10:58:38 +0530</pubDate>
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<title>Heatstroke Symptoms: आग उगल रहा आसमान! लू और Dehydration से बचने के लिए फॉलो करें ये जरूरी Health Tips</title>
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<description><![CDATA[ दिल्ली-एनसीआर समेत कई जगहों पर गर्मी अपने प्रचंड रूप में आ चुकी है। भीषण गर्मी का असर सीधे तौर पर हमारी सेहत पर देखने को मिलता है। क्योंकि इस गर्मी में अगर आप अपनी सेहत का ध्यान नहीं रखते हैं, तो यह मौसम आपकी सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए इस मौसम में घर से बाहर निकलते समय विशेष सावधानी बरतनी होगी।  हीट स्ट्रोक होने पर आपको चक्कर आना, सिरदर्द, उल्टी, ज्यादा पसीना आना या स्किन का सूखा पड़ना आदि लक्षण दिखते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि हीटवेव या लू लगने का सेहत पर क्या असर होता है। वहीं बाहर निकलते समय किन चीजों को पास में रखना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Abortion के बाद दोबारा कर रहीं Pregnancy Plan? ये Medical Tips हैं बेहद जरूरी बीते कुछ समय का तापमानदिल्ली- 42.8°Cनोएडा- 41.1°Cगुरुग्राम- 41.0°Cगाजियाबाद- 40.8°Cइसी के साथ दिल्ली-एनसीआर में हीटवेव का अलर्ट जारी हो गया है। तेज गर्मी में लू से बचना सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन जाता है। आइए जानें लू लगने के लक्षण कैसे होते हैं, बचाव के लिए क्या करना चाहिए और आपकी इमरजेंसी किट में क्या-क्या होना जरूरी है।जानिए क्या है हीटवेव या लूIMD के मुताबिक किसी क्षेत्र में हीटवेव की स्थिति तब मानी जाती है, जब उस क्षेत्र का अधिकतम तापमान 40°C से ऊपर हो और सामान्य तापमान कम से कम 4.5°C ज्यादा हो। वहीं अगर किसी जगह का तापमान 45°C को पार कर जाता है, तो इसको हीटवेव घोषित किया जाता है।असर और लक्षणशरीर में पानी की कमीमांसपेशियों में ऐंठन कमजोरीचक्कर आनादौरा पड़नादिल की धड़कन तेज होनाकम यरिन आनाबीपी बढ़ना या कम होनाक्या करेंलू या हीट वेव से प्रभावित व्यक्ति को फौरन किसी ठंडे या छायादार स्थान पर लेकर जाएं।व्यक्ति को फौरन पानी या ओआरएस का घोल लें।इस दौरान कैफीन, शराब और वातित कोल्ड ड्रिंक्स आदि के सेवन न करें।फेस पर गीला कपड़ा रखें और बेहतर वेंटिलेशन के लिए कपड़ों को एकदम ढीला कर दें।बाहर निकलते समय ये चीजें जरूर रखें पासघर से बाहर निकलते समय छाता या टोपी और पानी की बोतल रखना न भूलें।इसके साथ ही छोटा तौलिया और हाथ वाला पंखा जरूर रखें।इसके अलावा ग्लूकोज, इलेक्ट्रोलाइट या ओआरएस का पैकेट साथ में रखें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 16:20:57 +0530</pubDate>
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<title>World Thalassaemia Day: इस जानलेवा Blood Disorder के Symptoms को न करें अनदेखा, जिंदगी पड़ सकती है भारी</title>
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<description><![CDATA[ कमजोरी आना, बार-बार थकान महसूस होना और शरीर में खून की कमी जैसे लक्षण आदि गंभीर ब्लड संबंधित बीमारी का संकेत हो सकता है। लेकिन इन लक्षणों को नजरअंदाज करना सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ब्लड संबंधित आनुवंशिक विकार थैलेसीमिया की समय पर पहचान और जागरुकता होना बेहद जरूरी होता है। बता दें कि 08 मई को हर साल विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है।विश्व थैलेसीमिया दिवस इस रोग के बारे में जागरुकता फैलाने, दैनिक संघर्षों को सम्मान देने और मरीजों को सहयोग देने के प्रयास के लिए किया जाता है। नेशनल हेल्थ मिशन के मुताबिक थैलेसीमिया एक आनुवांशिक रक्त विकार है, इसमें बॉडी में पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता है। जिससे व्यक्ति को लगातार खून की कमी, कमजोरी और थकान का सामना करना पड़ता है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: हल्दी दूध सुबह या शाम? Expert ने बताया कब पीने से मिलेगा दोगुना फायदाजानिए थैलेसीमिया के प्रकारबता दें कि मुख्य रूप से थैलेसीमिया दो प्रकार का होता है। जिसमें थैलेसीमिया माइनर है, जिसमें व्यक्ति रोग का वाहक होता है, लेकिन आमतौर पर व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है। थैलेसीमिया माइनर के लक्षण हल्के होते हैं या फिर दिखाई नहीं देते हैं।वहीं थैलेसीमिया मेजर एक गंभीर रूप है। थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित व्यक्ति को बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत होती है। नियमित दवाएं, मेडिकल देखभाल और विशेष उपचार के बिना जीवन मुश्किल हो जाता है।उद्देश्यविश्व थैलेसीमिया दिवस का उद्देश्य युवाओं को शादी से पहले इस जांच के लिए प्रेरित करता है। अगर दोनों ही पार्टनर थैलेसीमिया माइनर के वाहक हैं, तो उनके बच्चों में थैलेसीमिया मेजर होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं समय पर जांच से इस समस्या को रोका जा सकता है।लक्षण और बचावअगर कमजोरी, पीली स्किन, थकान, भूख न लगना या बार-बार बीमार पड़ने जैसे लक्षण दिखते हैं, तो फौरन डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। समय पर सही जानकारी और जागरुकता के जरिए थैलेसीमिया के प्रभावों और जटिलताओं को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।थैलेसीमिया मेजर के मरीजों को नियमित रूप से ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत होती है। इसलिए इन दिन का मुख्य उद्देश्य स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देना है। क्योंकि एक यूनिट रक्त कई मरीजों की जान बचा सकता है।बता दें कि थैलेसीमिया पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता है। लेकिन सही समय पहचान, नियमित इलाज और उचित देखभाल से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो परिवारों को खासकर शादी के उम्र के युवाओं को थैलेसीमिया के बारे में जानकारी होनी चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:49:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Abortion के बाद दोबारा कर रहीं Pregnancy Plan? ये Medical Tips हैं बेहद जरूरी</title>
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<description><![CDATA[ हर किसी महिला की जिंदगी में मां बनना एक खास और खूबसूरत पड़ाव होता है। शादी के बाद प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले कई कपल इन बातों का ध्यान रखते हैं। पेरेंटहुड में कदम रखना एक बड़ा फैसला है और क्योंकि करियर, पर्सनल च्वॉइस और फाइनेंशियल स्थिति सहित कई कारणों के चलते अक्सर कपल शादी के कुछ साल तक प्रेग्नेंसी प्लान नहीं करना चाहते हैं और ऐसे में इससे बचने के लिए वो कॉन्ट्रासेप्शन का इस्तेमाल करते हैं। कई बार तो अनप्लान्ड प्रेग्नेंसी के चलते अबॉर्शन की नौबत आ जाती है। गौरतलब है कि अबॉर्शन एक ऐसा अनुभव है, जो शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी महिलाओं को प्रभावित करता है। अक्सर महिलाओं के मन में यह सवाल आता है कि यदि उन्होंने अबॉर्शन करवाया, तो कहीं दोबारा से प्रेग्नेंट होने में दिक्कत तो नहीं होगी। इसका सही उत्तर डॉक्टर से जानते हैं।अबॉर्शन के बाद दोबारा कंसीव करना ज्यादा मुश्किल है? - इस बात को समझे कि यदि अबॉर्शन सुरक्षित तरीके से और सही मेडिकल गाइडेंस से कराया गया है, तो इसका असर फर्टिलिटी पर नहीं होता है। यह कहना एकदम गलत होगा कि अबॉर्शन के बाद दोबारा प्रेग्नेंट होने में काफी दिक्कत आएगी। - ध्यान रखें कि अबॉर्शन शुरुआती हफ्तों में डॉक्टर की सलाह के आधार पर ही हुआ है। यदि गलत तरीके से अबॉर्शन हुआ, तो इसका सीधा असर कंसीव करने क्षमता पर पड़ सकता है। - विशेषकर महिलाओं का इस बात पर ध्यान रखना है कि बार-बार अबॉर्शन के लिए पिल्स लेना या मेडिकल प्रोसिजर के माध्यम से इसे करवाना आपकी फर्टिलिटी और सेहत दोनों पर असर डाल सकता है। इसलिए इसे बार-बार करवाना सेफ नहीं है। - यदि अबॉर्शन सुरक्षित तरीके से हुआ हो, बार-बार अबॉर्शन कराया गया हो, तो गर्भाशय (यूट्रस) में इंफेक्शन या चोट लगने का खतरा अधिक बढ़ जाता है। जिससे फर्टिलिटी पर असर देखने को मिलता है। - अबॉर्शन कराने के बाद शरीर को आराम और रिकवर करने के लिए बॉडी को समय देना भी बेहद जरुरी है। आमतौर पर अबॉर्शन के बाद आपको सेक्शुअल रिलेशन बनाने और दोबारा प्रेग्नेंसी प्लान करने में कुछ हफ्तों का अंतर जरुर रखें। अंतर कितना होना चाहिए, इसको लेकर अपने डॉक्टर से जरुर बात करें। - कुछ हफ्तों के गैप के बाद हार्मोंन्स के बैलेंस होने और यूट्रस के सही तरह से रिकवर होने के बाद ही डॉक्टर की सलाह लेकर आगे बढ़ें। - इस दौरान महिलाएं अपनी मेंटल हेल्थ का भी ध्यान रखें। इस समय पर हेल्दी डाइट और लाइफस्टाइल बेहद ही जरुरी है। - इसलिए अपनी डाइट में आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम से रिच फूड्स को शामिल करें। इसके साथ ही पर्याप्त नींद, हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेस को मैनेज करना जरुरी है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:49:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>क्या आप भी हैं Smartphone के गुलाम? इस Digital Detox Challenge से बदलें अपनी Life</title>
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<description><![CDATA[ आजकल ज्यादातर लोग बिजी लाइफस्टाइल में दिनचर्या बीता रहे हैं। ऐसे में डिजिटल डिटॉक्स का शब्द काफी में चर्चा में है। डिजिटल डिटॉक्स का मतलब होता है कि मोबाइल, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स से दूरी बना लेना। डिजिटल दौर में लोग ज्यादातर फोन में व्यस्त रहते हैं। काम के दौरान बार-बार फोन चेक करते रहना। धीरे-धीरे यह आदत लत बन जाती है और फिर बिना वजह भी फोन देखने की इच्छा अधिक हो जाती है। फिर ऐसा समय आता है कि खुद को गैजेट्स से अलग कर पाना काफी मुश्किल होता है। इन्हीं आदतों से छुटकारा पाना डिजिटल डिटॉक्स कहा जाता है। इसका अर्थ यह नहीं कि पूरी तरह से तकनीक को छोड़ देना, बल्कि तय समय तक इससे दूर रहना। नींद न आने की समस्या हो सकती है दूरकई रिसर्च से पता चला है कि कम से कम एक घंटा डिजिटल डिटॉक्स करना फायदेमंद होता है। इससे नींद की गुणवत्ता में काफी सुधार आता है। वहीं, शरीर में ज्यादा ऊर्जावन महससू करता है और रचनात्मकता भी बढ़ती है। लेकिन फिर भी कुछ लोग यह तय नहीं कर पाते हैं कि डिटॉक्स कब और कितनी देर किया जाए। न्यूरोसाइंस के शोध बताते हैं कि मस्तिष्क को फिर से तरोताजा करने के लिए लंबे आराम की नहीं, बल्कि छोटे-छोटे ब्रेक की जरूरत होती है। जब व्यक्ति कुछ समय के लिए मोबाइल, टीवी और दूसरे डिजिटल गैजेट्स से दूरी बना लेता है, तो दिमाग को सुकून मिलता है। यह विराम केवल मानसिक थकावट को कम नहीं करता, बल्कि मस्तिष्क की नई कोशिकाओं के विकास में भी मददगार साबित होता है। इससे एकाग्रता, समझने की क्षमता और सोचने की शक्ति में सकारात्मक सुधार देखने को मिलता है।कैसे करें डिजिटल डिटॉक्स  - लंबे समय तक डिटॉक्स रहने के लिए किसी के लिए इतना आसान नहीं है, इसलिए आप छोटे-छोटे ब्रेक ले सकते हैं। हफ्ते में एक दिन या प्रतिदिन एक घंटा का डिटॉक्स कर सकते हैं।  - डिजिटल डिटॉक्स की शुरुआत करने के लिए रविवार का दिन सबसे बढ़िया है। कोशिश करें कि सुबह से रात तक फोन बंद रखें या उसे दूसरे कमरे में रखें। - फोन के ज्यादातर नोटिफिकेशन को बंद कर दें। केवल काल और जरूरी मैसेज ही चालू रखें। - फोन की स्क्रीन को ब्लैक एडं व्हाइट मोड में रखें। क्योंकि रंगीन स्क्रीन ज्यादा आकर्षित करते हैं, जबकि सादा मोड डोपामाइन के प्रभाव को कम करता है। - रील देखने के स्थान पर पेटिंग, डायरी लिखना या टहलना शुरु करें। वहीं, हेडफोन के जगह आसपास की प्राकृतिक आवाजों को सुनें। - खाना खाते समय टीवी या फोन से दूरी बनाकर रखें। खाने के स्वाद और खुशबू को महसूस करें। यह एक प्रकार से मानसिक फास्टिंग है।कौन-सी आदतें हैं? - इमेल देखने और मनोरंजन के लिए फोन पर एक समय निर्धारित करें। - लिविंग रुम, डाइनिंग टेबल और स्टडी टेबल को डिवाइस फ्री जोन रखें। - डिजिटल ब्रेक जरुर लें, 50 मिनट काम करने के बाद 10 मिनट स्ट्रेचिंग या वाकिंग करें। - मोबाइल देखने की जगह पर कोई किताब जरुर पढ़े। - रविवार को 5 घंटे चक फोन से दूरी रखें, कोई सोशल मीडिया का इस्तेमाल ना करें।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 09 May 2026 10:49:25 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: हल्दी दूध सुबह या शाम? Expert ने बताया कब पीने से मिलेगा दोगुना फायदा</title>
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<description><![CDATA[ सेहत के लिए हल्दी वाला दूध काफी फायदेमंद होता है। इसमें कर्क्युमिन होता है और यह इंफ्लेमेशन से लड़ने में सहायता करता है। यह इम्यूनिटी को मजबूत करता है और डाइजेशन को भी दुरुस्त करता है। वहीं हल्दी वाला दूध हमारे शरीर को ताकत देता है। भले ही यह गुणों की खान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हल्दी वाला दूध पीने का सही समय क्या है। किस समय इस दूध को पीने से ज्यादा फायदा मिलता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको हल्दी वाले दूध को पीने का सही समय क्या है।सुबह खाली पेट हल्दी दूध पीनासुबह के समय हल्दी वाला दूध पीने से पित्त ऊर्जा बढ़ती है। वहीं एक स्टडी के मुताबिक हल्दी में कर्क्युमिन मौजूद होता है, वहीं दूध में मौजूद फैट्स और काली मिर्च के साथ अच्छे से अब्जॉर्ब होता है। इससे लिवर डिटॉक्स होता है और ब्लड शुगर लेवल मैनेज होता है। हल्दी वाला दूध पीने से मेटाबॉलिज्म भी अच्छे से काम करता है। जिन लोगों के शरीर में वात ज्यादा होता है या जिनको आईबीएस है, उनको हल्दी वाले दूध का सेवन सुबह के समय करना चाहिए। सुबह जल्दी यह दूध पीने से गट हेल्थ दुरुस्त होती है और ब्लोटिंग कम होती है।इसे भी पढ़ें: Covid के बाद नए Virus की दस्तक? Cruise Ship पर 3 मौतें, जानें भारत के लिए क्या हैं संकेतरात को हल्दी वाला दूध पीनाकफ प्रधान लोगों को रात के समय गर्म हल्दी वाला दूध पीना फायदेमंद होता है। इसमें हल्दी में मौजूद कर्क्युमिन, दूध में मौजूद ट्रिप्टोफैन मिलकर मेलाटोनिन का प्रोडक्शन बढ़ाते हैं। इससे अच्छी नींद आती है। रात में हल्दी का दूध पीने से जोड़ों का दर्द कम होता है और बेहतर नींद आती है। रात को होने वाली सूजन को भी कम करता है। पित्त प्रकृति के लोगों या अनिद्रा और दर्द से परेशान लोगों के लिए यह एकदम सही है। यह रात भर बॉडी हीट को भी बैलेंस करता है।हल्दी वाला दूध पीने का सही समयएक्सपर्ट की मानें, तो यह आपकी पसंद पर निर्भर करता है कि आप किस समय हल्दी वाला दूध पीना चाहते हैं।अगर आप अपना वेट लॉस करने की सोच रहे हैं और शरीर को ताकत देना चाहती हैं। तो सुबह के समय हल्दी वाला दूध पीना चाहिए। वहीं अच्छी नींद या बॉडी पेन के लिए रात को हल्दी दूध पीना चाहिए।आप 1 टीस्पून ऑर्गेनिक हल्दी को फुल फैट दूध या बादाम के दूध में मिलाकर उबालना चाहिए। इससे रोजाना एक कप पिएं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 13:59:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: शरीर में ये 7 बदलाव हैं Vitamin B12 की कमी का संकेत, तुरंत हो जाएं सावधान</title>
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<description><![CDATA[ हमारा शरीर किसी भी बीमारी से पहले हमें कुछ इशारे देता है। बस इन संकेतों को समझने की जरूरत होती है। विटामिन बी12 की कमी होने पर शरीर से हमें कुछ ऐसे संकेत मिलते हैं। जिनको पहचानना जरूरी होता है। लेकिन कई बार लोग इन संकेतों को हल्के में ले लेते हैं। जोकि आगे चलकर आपकी सेहत पर भारी पड़ सकते हैं।  शरीर में विटामिन बी12 की कमी होने पर व्यक्ति को कई तरह के शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल संकेत दिखाई देते हैं। जिनको समय पर पहचानना जरूरी होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि शरीर में विटामिन बी12 की कमी होने पर क्या संकेत मिलते हैं और इसके बचाव के लिए क्या करना चाहिए।इसे भी पढ़ें: World Asthama Day: जानलेवा अस्थमा का रामबाण इलाज हैं ये 5 योगासन, Breathing Problem होगी दूरविटामिन-बी12 की कमी के लक्षणअगर आप पूरी नींद लेने के बाद भी लगातार कमजोरी और थकान महसूस करते हैं। तो यह विटामिन बी 12 की कमी का संकेत हो सकता है।अगर आपको पाचन संबंधी समस्याएं जैसे उल्टी, जी मचलाना या दस्त जैसी समस्याएं हैं। यह भी विटामिन बी 12 के कमी की वजह हो सकती है।अचानक भूख कम लगना और बिना किसी प्रयास के कारण वजन का तेजी से गिरना भी एक संकेत होता है।विटामिन बी 12 की कमी से जीभ में सूजन आ सकती है। वहीं जीभ लाल या दर्दनाक हो सकती है। मुंह में बार-बार छाले होना एक आम लक्षण है।विटामिन बी12 की कमी से पीलिया जैसा स्किन पर हल्का पीलापन नजर आ सकता है। इसकी वजह से रेड ब्लड सेल्स बनना कम हो जाता है।बिना किसी खास वजह के स्वभाव में बदलाव आना या बात-बात पर चिड़चिड़पन महसूस होना भी विटामिन बी12 की कमी का संकेत हो सकता है।व्यक्ति के सोचने के तरीके या फिर उसके सामान्य व्यवहार में अचानक बदलाव आना भी विटामिन बी12 की कमी की ओर इशारा करता है।विटामिन बी12 की कमी न्यूरोलॉजिकल लक्षणअगर आपको बार-बार हाथों या फिर पैरों में सुन्नता या फिर सुइयां चुभने जैसा एहसास होता है। तो आपको इसको हल्के में नहीं लेना चाहिए।चीजों को भूल जाना या फिर किसी काम में फोकस करने में परेशान होना भी विटामिन बी12 की कमी को दिखाता है।इस विटामिन की कमी से नर्वस सिस्टम को नुकसान होता है। जिससे व्यक्ति को चलने-फिरने या फिर सामान्य रूप से बोलने में परेशानी महसूस हो सकती है।ऐसे करें बचावहमारा शरीर खुद विटामिन बी 12 नहीं बना पाता है। इसकी कमी को आप डाइट और सप्लीमेंट्स के जरिए ही दूर कर सकते हैं। विटामिन बी 12 का मुख्य सोर्स एनिमल बेस्ड प्रोडक्ट्स जैसे - दूध, अंडा और चिकन आदि है। वहीं अगर आप वेजिटेरियन हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर विटामिन बी12 के सप्लीमेंट्स ले सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 10:50:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Covid के बाद नए Virus की दस्तक? Cruise Ship पर 3 मौतें, जानें भारत के लिए क्या हैं संकेत</title>
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<description><![CDATA[ कोविड महामारी के जख्म अभी पूरी तरह भरे भी नहीं थे कि एक और वायरस ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हंटावायरस को लेकर अलर्ट जारी किया है। यह एक दुर्लभ वायरस है जो इंसान से इंसान में भी फैल सकता है। फिलहाल, यह केप वर्डे के तट के पास खड़ा एक क्रूज जहाज पर फैला है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि जोखिम काफी कम है और स्थिति कंट्रोल में है।आखिर जहाज पर क्या हुआ?147 लोगों को ले जा रहे इस क्रूज शिप पर अब तक हंटावायरस के 7 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 3 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने सुरक्षा के लिहाज से जहाज को किनारे से दूर खड़ा कर दिया है और लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। माना जा रहा है कि संक्रमण जहाज के अंदर से नहीं, बल्कि यात्रा के दौरान दक्षिण अमेरिका में किसी जगह से शुरू हुआ था। इसे भी पढ़ें: गर्मी में Heat Stroke का रामबाण इलाज है कच्चा प्याज, ये Desi Nuskha आपको रखेगा Coolकितना खतरनाक है हंटावायरस?हंटावायरस सीधा फेफड़ों पर हमला करता है, जिससे सांस लेने में गंभीर समस्या हो सकती है। सबसे ज्यादा चिंता की बात इसका इंसान से इंसान में फैलना है, हालांकि ऐसा बहुत कम होता है। WHO के मुताबिक, यह वायरस आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति के बहुत करीब रहने वाले लोगों को ही शिकार बनाता है। जहाज जैसी बंद जगह में तो इसका खतरा रहता है, लेकिन खुले में इसके बड़े पैमाने पर फैलने की उम्मीद कम है।क्या दुनिया पर मंडरा रहा है खतरा?राहत की बात यह है कि इसके दुनिया भर में फैलने की संभावना बहुत कम है। यह कोई साधारण फ्लू नहीं है जो हवा के जरिए तेजी से फैल जाए। ज्यादातर हंटावायरस चूहों या उनके मल-मूत्र के संपर्क में आने से फैलता है। फिलहाल जो मामले सामने आए हैं, वे एक छोटे ग्रुप तक ही सीमित हैं और जहाज के बाहर इसके फैलने का कोई सबूत नहीं मिला है।WHO की चिंता की क्या है वजह?भले ही यह वायरस दुर्लभ हो, लेकिन WHO इसे गंभीरता से ले रहा है। एक्सपर्ट्स को शक है कि यह हंटावायरस का एंडीज वैरिएंट हो सकता है, जिसमें पहले भी इंसान से इंसान में संक्रमण फैलाने की क्षमता देखी गई है। क्रूज जहाज जैसी बंद जगहें ऐसे वायरस के लिए हॉटस्पॉट बन सकती हैं, इसलिए सावधानी बरती जा रही है। इसे भी पढ़ें: Health Tips: शरीर में ये 7 बदलाव हैं Vitamin B12 की कमी का संकेत, तुरंत हो जाएं सावधानक्या भारत को है कोई डर?भारत के लिए फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है। हमारे यहाँ इस वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है और इसके इंटरनेशनल लेवल पर फैलने के चांस भी न के बराबर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि हमें बस जागरूक रहने की जरूरत है, पैनिक करने की बिल्कुल नहीं।इन लक्षणों को न करें इग्नोरहंटावायरस के शुरुआती लक्षण बिल्कुल फ्लू जैसे होते हैं, जैसे तेज बुखार, थकान, सिरदर्द और पेट में दर्द। अगर स्थिति बिगड़ती है, तो सांस लेने में बहुत दिक्कत होने लगती है। अगर कोई संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया है, तो इन लक्षणों के दिखते ही तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 10:50:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>सावधान! आपकी ये गलतियां अचानक बढ़ा सकती हैं Migraine का दर्द, Expert ने बताए Triggers</title>
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<description><![CDATA[ आजकल माइग्रेन का दर्द तेजी से बढ़ रह है और कुछ लोगों में इसके पीछे की वजहों को नहीं समझ आया। माइग्रेन एक ऐसा न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जो अचानक से तेज सिरदर्द के साथ हमारे पूरी रुटीन पर प्रभाव डालता है। असल में यह अचानक से ट्रिगर करता है। हार्मोनल बदलाव, स्ट्रेस, लाइफस्टाइल और पर्यावरण जैसे कई फैक्टर्स मिलकर इसे ट्रिगर कर सकते हैं। इसे समझना बेहद जरुरी है।क्यों अचानक ट्रिगर करता है माइग्रेन?  - माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। इसमें सिर के एक तरफ तेज दर्द होता है, जो कई घंटों तक रह सकता है। कई लोगों को इसके साथ उल्टी भी होने लगती है। इसे मैनेज करने के लिए डॉक्टर की सलाह से दवाइयां जरुर  लेनी चाहिए और जीवनशैली में बदलाव करना जरुरी है।  - अक्सर होता है कि माइग्रेन अचानक से ट्रिगर करता है और लोग समझ नहीं पाते कि इसके पीछे का कारण क्या है। असल में यह कई कारणों से हो सकता है। - महिलाओं में होने वाले हार्मोनल बदलाव, जिनमें एस्ट्रोजन का लेवल कम हो जाता है, उनकी वजह से भी ब्रेन सेंसिटिव हो जाता है और माइग्रेन ट्रिगर हो जाता है। कई बार पीरियड्स या मेनोपॉज के दौरान माइग्रेन हो सकता है।  - अचानक से माइग्रेन होने का कारण इसके पीछे स्ट्रेस एक मुख्य कारण है। जब शरीर में स्ट्रेस या एंग्जायटी अधिक होती है और इसकी वजह से कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर अधिक बढ़ जाता है।  - कुछ लोगों की नर्व्स अधिक सेंसिटिव होती हैं। ऐसे में तेज रोशनी, शोर, तीव्र गंध या मौसम में बदलाव (बैरोमेट्रिक दबाव में परिवर्तन) जैसे कारकों से अधिक प्रभावित होती हैं और माइग्रेन टिगर होने लगता है।  - कैफीन, एल्कोहल या खान न खाने के कारण से भी सेरोटोनिन इंबैलैंस हो जाता है और ब्लड वेसल्स फैलने लगती है। ये भी दर्द का कारण बन सकता है। - कई बार डिहाइड्रेशन भी माइग्रेन के ट्रिगर होने का एक कारण हो सकता है। डिहाइड्रेशन से ब्लड गाढ़ा हो जाता है और ऑक्सीजन का फ्लो कम होने लगता है। इसके साथ ही नींद की कमी या अनियमित स्लीप पैटर्न भी इसका कारण हो सकता है।  - यदि आपके परिवार में किसी को माइग्रेन हैं, तो भी आपको माइग्रेन होने के काफी चांस बढ़ जाते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:14:52 +0530</pubDate>
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<title>गर्मी में Heat Stroke का रामबाण इलाज है कच्चा प्याज, ये Desi Nuskha आपको रखेगा Cool</title>
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<description><![CDATA[ गर्मियों में सबसे बड़ी समस्या लू की होती है। भीषण गर्मी में लू बचना और हेल्दी रहना किसी चमत्कार से कम नहीं है। इस दौरान घर से निकालते ही धूप से बचाव करना बेहद जरुरी होता है। समर सीजन में डाइट का ध्यान रखना चाहिए। आयुर्वेद ने माना है कि मौसम और शरीर की प्रकृति के हिसाब से डाइट में बदलाव करना सबसे महत्वपूर्ण है। इस दौरान हमे ऐसे फूड्स को डाइट में शामिल करना चाहिए, जो शरीर को अंदर से ठंडक दे। गर्मियों में कच्चा प्याज का सेवन करना अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह लू से बचाने का एकदम बेहतरीन उपाय है। गर्मी में कच्चा प्याज खाने से सेहत को क्या फायदे मिलते हैं, आइए आपको इस लेख में बताते हैं।गर्मियों में कच्चा प्याज खाने के फायदे और सही तरीका  - गर्मियों में तेज धूप और लू बचने के लिए कच्चा प्याज का सेवन करना एकदम प्राकृतिक एसी जैसा होता है। यह शररी को अंदर से ठंडा रखता है और इससे हीट स्ट्रोक का खतरा कम होता है। - कच्चे प्याज में पाए जाने वाला सल्फर यौगिक और एंटीऑक्सीडेंट शरीर के तापमान को संतुलित रखता है और पसीने के जरिए गर्मी को बाहर निकालने में मददगार साबित होगा।  - प्याज को सही तरीके से खाने से सलाद के रुप में अपने भोजन में शामिल करना सबसे अच्छा होता है। आप चाहे तो इसमें नींबू और थोड़े से नमक के साथ खा सकते हैं, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाएगा।  - इसके सेवन मात्र से ही लू और गर्मी के कारण होने वाली समस्याएं जैसी डिहाइड्रेशन और चक्कर आना भी कम होता है। - कच्चे प्याज को नींबू के साथ खाने से कई फायदे मिलते हैं। यह शरीर को अतिरिक्त इलेक्ट्रोलाइट्स भी मिलते हैं। इसके अलावा, दही या छाछ के साथ प्याज का सेवन करने से ठंडक अधिक बढ़ जाती है। - यदि आप कच्चे प्याज को डाइट में शामिल करते हैं, तो याद रखें कि प्याज को ज्यादा देर तक बिल्कुल भी काटकर न रखें, क्योंकि इससे इसके पोषक तत्व कम हो सकते हैं।  - सही मात्रा में कच्चा प्याज का सेवन करने से लू बचाव होता है, बल्कि पाचन भी बेहतर होता है। यह एकदम सस्ता, आसान और असरदार उपाय है जो गर्मियों में शरीर को हेल्दी और ठंडा बनाए रखने में मदद करता है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 07 May 2026 09:14:50 +0530</pubDate>
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<title>World Asthama Day: जानलेवा अस्थमा का रामबाण इलाज हैं ये 5 योगासन, Breathing Problem होगी दूर</title>
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<description><![CDATA[ वर्तमान समय में दुनियाभर में करीब 24 करोड़ लोग अस्थमा से परेशान हैं। वहीं अगर भारत की बात की जाए, तो करीब 2 करोड़ लोग इस बीमारी का शिकार हैं। बता दें कि जब व्यक्ति की सांस की नली में सूजन आ जाती है। तो रिस्पेटरी ट्रैक के चारों तरफ की मसल्स कसने लगती है। जिस कारण लोगों को खांसी और घबराहट जैसी समस्या होती है। वहीं कई लोगों में यह बीमारी जेनेटिक तो कई लोग एलर्जी के कारण अस्थमा का शिकार हो जाते हैं।वहीं कई बार प्रदूषण और अधिक टेंशन लेने की वजह से भी लोगों को अस्थमा बीमारी हो जाती है। लेकिन अगर सही समय पर इसका इलाज नहीं किया जाता है, तो यह अटैक का रूप ले लेता है। वहीं यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। लेकिन योग और प्रणायाम के द्वारा अस्थमा को कंट्रोल और क्योर किया जा सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसे आसन और प्राणायाम के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको करके अस्थमा के मरीज खुद को हमेशा फिट रख सकते हैं।अस्थमा के लक्षणठंडा पानी पीने से गले में खराश होना खांसी की समस्या से परेशानबार-बार सर्दी-जुकाम होनाफेफड़ों में दर्द होनादौड़ने में सांस का फूलनाअस्थमा के मरीज करें ये योगाआसनगौमुखासनगौमुखासन को करने से अस्थमा के मरीजों को आराम मिलता है। इस आसन को करने से आपकी मांसपेशियों में खिंचाव आता है। जिससे आपके फेफड़े हेल्दी रहते हैं।भस्त्रिकाइस प्राणायाम का अभ्यास करने से शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह ठीक ढंग से होता है। इससे न सिर्फ अस्थमा बल्कि डायबिटीज के साथ-साथ अन्य कई बीमारियों से भी आपको निजात मिल सकता है।मकरासनमकरासन का अभ्यास करने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है। साथ ही इसके अभ्यास से कमर और घुटनों के दर्द से आराम मिलता है। वहीं ब्लड प्रेशर और वेट लॉस कम करने में भी कारगर माना जाता है।भुजंगासनयह योगासन अस्थमा के मरीजों के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। इस आसन का अभ्यास करने से फेफड़ों में खिंचाव आता है और फेफड़ों में ऑक्सीजन पहुंचती है।सूर्य नमस्कारसूर्य नमस्कार का अभ्यास करने से सिर्फ अस्थमा ही कंट्रोल नहीं होता है, बल्कि आपका पूरा शरीर फिट रहता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 06 May 2026 09:58:57 +0530</pubDate>
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<title>Diabetes: बच्चों में बढ़ रहा Diabetes का खतरा, ये 5 Lifestyle Changes हैं जेनेटिक रिस्क का असली तोड़</title>
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<description><![CDATA[ डायबिटीज एक वैश्विक समस्या के रूप में उभर रहा है। लगभर हर दूसरे घर में डायबिटीज का कोई न कोई मरीज नजर आता है। यही वजह है कि हाल के सालों में डायबिटीज के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ी है। खासकर जब किसी फैमिली में पेरेंट्स में किसी एक को डायबिटीज है, तो बच्चों में भी इसका खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में हर माता-पिता के मन में यह सवाल उठता है कि बच्चे को डायबिटीज होने से कैसे बचाया जा सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि बच्चे को डायबिटीज कैसे होता है और इसको कैसे रोका जा सकता है।जब पेरेंट्स को डायबिटीज हो, बच्चों को भी यह समस्या होने का खतरा बना रहता है। इसको हम जेनेटिक डायबिटीज कहते हैं। आमतौर पर पेरेंट्स से यह जीन बच्चों में ट्रांसफर होता है। अगर पेरेंट्स के डीएनए में कुछ ऐसे &#039;ससेप्टिबिलिटी जीन्स&#039; है, जोकि इंसुलिन के प्रति बॉडी की प्रतिक्रिया को प्रभावित करते हैं। तो यह बच्चों को विरासत में मिल सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Heat Wave Alert: गर्मी में क्यों घटता-बढ़ता है Blood Pressure, Sugar Level? जानें Health Tipsटाइप 1 डायबिटीजटाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून कंडीशन है। अगर पुरुष को टाइप 1 डायबिटीज है, तो बच्चे को डायबिटीज होने की संभावना 17 में से 1 होती है। वहीं अगर मां को टाइप 1 डायबिटीज है और बच्चे का जन्म 25 साल से पहले हुआ है, तो उन बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज का खतरा 25 में से 1 है। वहीं अगर बच्चे का जन्म 25 साल की उम्र के बाद हुआ, तो उनके बच्चों में इस डायबिटीज का खतरा 100 में से 1 है।टाइप 2 डायबिटीजयह जीन और लाइफस्टाइल के मिश्रण से होने वाली समस्या है। अगर फैमिली में पहले से किसी को टाइप 2 डायबिटीज है, तो यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि आपकी डायबिटीज लाइफस्टाइल की वजह से है या फिर जेनेटिक्स की वजह से है।जेनेटिक डायबिटीज की वजहइंसुलिन रेजिस्टेंसजब पेरेंट्स से ऐसे जीन मिलते हैं, जोकि बॉडी को इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं करने देते हैं। तो टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। जब हमारे सेल्स इंसुलिन की बात मानना बंद कर देते हैं, जिसको हम इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं। इससे हमारे ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ने लगता है। बीटा सेल डिस्फंक्शनबता दें कि पैनक्रियाज वह अंग है, जिसमें बीटा सेल्स होती हैं। इसका काम इंसुलिन हार्मोन प्रोड्यूस करना होता है। इंसुलिन का काम ब्लड से शुगर यानी ग्लूकोज को निकालकर बॉडी की सेल्स तक पहुंचाना है। जिससे हमको एनर्जी मिल सके। इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण पैनक्रियाज बीटा सेल्स नहीं बना पाती है। ऐसे में भी डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।अन्य कारकअगर फैमिली में किसी को पहले डायबिटीज है, साथ ही उनकी लाइफस्टाइल भी खराब है, तो डायबिटीज का रिस्क ज्यादा बढ़ जाता है। जो बचपन में ज्यादा कैलोरी वाला खाना खाते हैं, उनका वेट ज्यादा है और अक्सर तनाव में रहते हैं, तो डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।लक्षणआंखों की रोशनी में अचानक बदलाव होना।घाव भरने में अधिक समय लगना।बहुत ज्यादा प्यास लगना।बिना कारण वजन घटनाबार-बार पेशाब आना।त्वचा का काला पड़ना।थकान और कमजोरी।टाइप 2 और प्री-डायबिटीज के लिए टेस्टएचबीए1सी टेस्टएचबीए1सी टेस्ट के जरिए पिछले 2 से 3 महीनों का औसत शुगर लेवल का पता लगाया जा सकता है। बच्चों में डायबिटीज का पता लगाने के लिए यह सबसे आसान टेस्ट है। क्योंकि इस टेस्ट के लिए बच्चे को भूखे रहने की भी जरूरत नहीं है।फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोजसुबह खाली पेट यह टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट से पहले आमतौर पर बच्चे को कम से कम 8 से 10 घंटे तक भूखे रहना होता है। इस दौरान बच्चा सिर्फ पानी पी सकता है। यह प्री-डायबिटीज और डायबिटीज का पता लगाने का आसान तरीका है।ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्टइसमें ग्लूकोज वाला पानी पिलाया जाता है। फिर उसको 2 घंटे बाद शुगर लेवल चेक किया जाता है। ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट से पता चलता है कि बॉडी किस तरह से शुगर को हैंडल कर रहा है।पेरेंट्स बच्चे को ऐसे डायबिटीज से बचाएंहेल्दी डाइटअगर माता-पिता को डायबिटीज है, तो उनको अपने बच्चे की डाइट का खास ख्याल रखना चाहिए। बच्चे को प्रोसेस्ड फूड और चीनी जैसे- पैकेट बंद जूस, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक्स और चॉकलेट्स बहुत कम मात्रा में दें।बच्चों में डाइट मुख्य रूप से जेनेटिक डायबिटीज को ट्रिगर करती है। जोकि आनुवांशिक रूप से संवेदनशील बच्चों में ऑटोइम्यूनिटी के लिए एक एंवायरमेंट फैक्टर्स के रूप में काम करती हैं। या फिर इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देती है। पेरेंट्स को बच्चों की डाइट में फाइबर की मात्रा को बढ़ाना चाहिए। वहीं उनकी डाइट में सलाद और हरी पत्तेदार सब्जियों को जरूर शामिल करें।कम करें स्क्रीन टाइमआज के समय में बच्चों का स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है। कई बच्चे घंटों तक मोबाइल पर समय बिताते हैं। जितना ज्यादा स्क्रीन टाइम होता है, टाइप 2 डायबिटीज का खतरा उतना बढ़ जाता है। क्योंकि स्क्रीन टाइम के समय बच्चे निष्क्रिय बैठते हैं, जिससे मांसपेशियां ग्लूकोज का इस्तेमाल कम करती हैं। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने लगता है। अक्सर स्क्रीन देखते हुए बच्चे अनहेल्दी स्नैक्स का भी सेवन कर बैठते हैं। जिससे मोटापे का खतरा बढ़ता है। इसलिए पेरेंट्स को चाहिए कि बच्चे का स्क्रीन टाइम कम करें।फिजिकल एक्टिविटीकम से कम 60 मिनट तक बच्चे को पसीने वाली फिजिकल एक्टिविटी जैसे बैडमिंटन, फुटबॉल, रनिंग या स्विमिंग करने के लिए मोटिवेट करना चाहिए। इससे बच्चा शारीरिक रूप से सक्रिय होता है और मोटापा नहीं बढ़ता है। वहीं मेटाबॉलिज्म भी ठीक तरह से काम करता है। इससे डायबिटीज के खतरे को भी कम किया जा सकता है।वजन कंट्रोलमाता-पिता के लिए जरूरी है कि वह अपने बच्चे का वेट कंट्रोल में रखने की कोशिश करें। एक रिपोर्ट के मुताबिक मोटापा बच्चों में इंसुलिन रिजेस्टेंस पैदा करके टाइप 2 डायबिटीज की वजह बनता है। ऐसे में बॉडी सेल्स इंसुलिन के प्रति किसी भी तरह की प्रतिक्रिया नहीं कर पाती है ]]></description>
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<pubDate>Mon, 04 May 2026 19:52:34 +0530</pubDate>
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<title>Heat Wave Alert: गर्मी में क्यों घटता&#45;बढ़ता है Blood Pressure, Sugar Level? जानें Health Tips</title>
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<description><![CDATA[ र्मी में बढ़ता हुआ पारा हमारे शरीर पर असर करता है। जब तापमान अधिक होता है, तो इसकी वजह से हमारे कई बॉडी फंक्शंस पर प्रभाव पड़ता है। भीषण गर्मी के कारण सिरदर्द, चक्कर आना और उल्टी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं, यह बातें तो हम सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते है तेज गर्मी का असर बीपी और शुगर पर भी होता है और इसी कारण ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल बढ़ने-घटने लगते हैं। आइए आपको बताते हैं हेल्थ एक्सपर्ट से जानते हैं।तेज गर्मी में क्यों बढ़ता-घटता है बीपी और शुगर लेवल?  - गर्मियों में डिहाइड्रेशन और शरीर के स्ट्रेस रिस्पॉन्स के कारण बीपी और शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। तेज गर्मी से पसीना ज्यादा आता है और इसकी वजह से ब्लड गाढ़ा होने लगता है। ब्लड में ग्लूकोज कंसंट्रेट होने लगता है और इसकी वजह से शुगर लेवल अधिक बढ़ने लगता है। क्योंकि ये कोर्टिसोल और वैसोप्रेसिन हार्मोन बढ़ने के कारण होता है।  - इसके अतिरिक्त डिहाइड्रेशन के कारण से ब्लड वॉल्यूम कम होने लगता है और बीपी लो हो सकता है। हालांकि, शरीर को ठंडा करने के लिए कई बार धमनियां चौड़ी हो जाती हैं, जिस कारण से ब्लड प्रेशर में कमी या अधिकता देखने को मिलती है। - ब्लड शुगर की बात करें, तो गर्मी में रक्त वाहिकाओं में इंसुलिन का अब्जॉर्बशन अधिक हो जाता है। अगर जो लोग पहले से डायबिटीज की दवाई ले रहे हैं, उन्हें हाइपोग्लाइसीमिया यानी शुगर लो होने का खतरा रहता है।  कुछ लोगों में इंसुलिन के इस्तेमाल में मुश्किल आ सकती है। - डायबिटीज पेशेंट्स पर इसका ज्यादा असर देखने को मिलता है, क्योंकि नर्वस सिस्टम पसीना आना शुरु हो जाता है और शरीर को ठंडा करने में मुश्किल पैदा हो सकती है। - तेज गर्मी के कारण शरीर का ज्यादा गर्म हो जाना है, डिहाइड्रेशन के कारण बीपी लो हो सकता है और चक्कर आना शुरु हो जाते हैं। - गर्मियों में पसीने के वजह से बॉडी डिहाइड्रेट रहता है और इसका सीधा असर ब्लड शुगर लेवल पर रहता है। - इसलिए दिन 3-4 बार बीपी चेक करें। बाहर धूप में कम निकलें और हमेशा हाइड्रेट रहें।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 03 May 2026 18:28:54 +0530</pubDate>
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<title>Pregnancy में UTI के ये लक्षण हैं खतरे की घंटी, Doctor से जानें इसका Safe Treatment</title>
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<description><![CDATA[ प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में काफी बदलाव देखने को मिलते हैं। गर्भवती महिलाओं में हार्मोनल बदलावों और पेशाब का फ्लो धीमा होने के कारण पेशाब नली में कई बार बैक्टीरिया पनपने लगे, जिस वजह से यूटीआई (UTI) हो सकता है। यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) पेशाब की नली में होने वाला इंफ्केशन है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं प्रेग्नेंसी में UTI होने के कारण, लक्षण, बच्चे के लिए खतरे और इलाज के बारे में बताते हैं।प्रेग्नेंसी में UTI कितनी तरह का होता है?हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, प्रेग्नेंसी में UTI चार तरह की होती है, जिनकी पहचान करनी बहुत जरुरी है।असिम्प्टोमैटिक बैक्टीरियुरियाबता दें कि, इस कंडीशन में महिला को यूटीआई के लक्षण महसूस नहीं होते हैं, हालांकि यूरिन कल्चर में बैक्टीरिया मिलते हैं। इस कंडीशन में करीब 2 से 10 प्रतिशत प्रेग्नेंट महिला देखने को मिलती है। सही समय पर इलाज हो जाए, तो किडनी इंफेक्शन का खतरा लगभग 20 से 35% तक कम हो जाता है। डॉक्टर बताती है कि, महिला जब प्रेग्नेंट हो, तो यूरिन कल्चर टेस्ट जरुर कराएं, जिससे बिना लक्षण के भी यूटीआई की पहचान हो सके।एक्यूट सिस्टाइटिसAmerican College of Obstetricians and Gynecologists के अनुसार, इस स्थिति में गर्भवती महिलाओं को पेशाब करते समय जलन महसूस हो सकती है और बार-बार मूत्र त्याग की समस्या भी हो सकती है। ऐसे संकेत मिलने पर डॉक्टर आमतौर पर यूरिन कल्चर जांच कराने की सलाह देते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही दवाइयों का चयन करना चाहिए, क्योंकि बिना जांच के एमोक्सिसिलिन या एम्पिसिलिन जैसी दवाएं देने से Escherichia coli में दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है। इस संक्रमण का उपचार सामान्य तौर पर 5 से 7 दिनों तक एंटीबायोटिक कोर्स से किया जाता है।पायलोनेफ्राइटिसप्रेग्नेंसी के दौरान यूटीआई कंडीशन काफी गंभीर होती है। ऐसे में महिला को अस्पताल भर्ती भी कराना पड़ सकता है। ACOG की रिपोर्ट में कहा गया है कि, यदि महिला को  100.4°F  या इससे अधिक बुखार हो, पीठे नीचे के हिस्से में दर्द होना, मतली और उल्टी हो, तो डॉक्टर के पास जरुर जाना चाहिए। डॉक्टर ने कहा है कि, इस स्थिति में इंफेक्शन का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है, फिजिकल चेकअप और यूरिन कल्चर टेस्ट किया जाता है। शुरु में महिला के नसों के माध्यम से (IV) एंटीबायोटिक दवा दी जाती है, जो कि ओरल दवाओं पर स्विच किया जा सकता है। इस स्थिति में महिला को 14 दिन तक एंटीबायोटिक कोर्स पूरा करना बेहद जरुरी है।बार-बार होने वाला इंफेक्शनजिन महिलाओं के प्रेग्नेंसी में दो या उससे ज्यादा बार UTI हुआ है, उनको बार-बार होने वाला इंफेक्शन माना जाता है। ACOG की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कंडीशन में महिला को पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान रात में एक बार कम खुराक वाली एंटीबायोटिक लेने की सलाह दी जाती है। प्रेग्नेंसी में UTI होने के कारण- प्रोजेस्टेरोन हार्मोन पेशाब की नलियों को ढीला करने देता है, जिससे यूटीआई का खतरा बढ़ता है।  - इस दौरान यूटरेस बढ़ता है जिससे प्रेशर यूरिन ब्लैडर पर पड़ता है। जिस वजह से प्रेग्नेंसी में महिलाओं का ब्लैडर पूरी तरह से खाली नहीं हो पाता है। जिससे यूटीआई खतरा बढ़ जाता है।  - प्रेग्नेंट महिलाएं कई बार पेशाब को रोकती हैं, तो यह समस्या काफी बढ़ जाती है, जिससे ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हो पाता है और यूटीआई के कारण बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। इसका सही समय पर इलाज न हो, तो कई बार बैक्टीरिया ऊपर किडनी तक पहुंच जाती है। प्रेग्नेंसी में UTI के लक्षण  - पेशाब करते समय जलन महसूस होना। - थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार पेशाब जाना। - यूरिन का रंग हल्का लाल, गहरा गुलाबी या भूरा दिख रहा है, तो पेशाब में ब्लड होने का लक्षण है। - बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होना, जो जल्दी खत्म न हो। - पेल्विक एरिया में दर्द महसूस होना या भारीपन लगना, तो यह यूटीआई हो सकता है।प्रेग्नेंसी में UTI से बचाव के तरीके  - प्रेग्नेंट महिलाओं को बार-बार हाथ धोना और प्राइवेट पार्ट के आसपास साफ-सफाई रखना बहुत जरुरी है। - प्रेग्नेंट महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। - रेगुलर रुप से पेशाब करने से पेशाब के जमा होने या रुकने की समस्या से बचा जा सकता है। - डिलीवरी से पहले बिना लक्षणों वाले इंफेक्शन की स्क्रीनिंग करना बेहद जरुरी है। यदि रिजल्ट पॉजिटिव आए, तो इसका तुरंत इलाज किया जाना जरुरी है, वरना यह लक्षण गंभीर इन्फेक्शन में न बदल जाएं।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 03 May 2026 18:28:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: बच्चों को चाय&#45;बिस्कुट देना खतरनाक, Anemia समेत 5 बीमारियों का बढ़ता है खतरा</title>
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<description><![CDATA[ कई घरों में सुबह की शुरुआत आमतौर पर चाय और बिस्कुट या हल्के स्नैक्स से होती है। जब घर के बड़े ऐसा करते हैं, तो बच्चे भी यही आदत अपना लेते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक यह आदत बच्चों के लिए बिल्कुल अच्छी नहीं होती है। चाय और बिस्कुट से शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता है। वहीं लंबे समय तक ऐसा नाश्ता करने से बच्चे के फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर भी बुरा असर पड़ सकता है।  वहीं बच्चे की इम्युनिटी भी कमजोर हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि बच्चे को हेल्दी नाश्ते का ऑप्शन दिया जाए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि चाय और बिस्कुट बच्चे के लिए अनहेल्दी क्यों है। साथ ही यह बच्चे की फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर कैसे बुरा असर डाल सकता है।चाय-ब‍िस्‍क‍िट क्यों है अनहेल्‍दीसुबह का नाश्ता बच्चे के पूरे दिन की एनर्जी, ओवरऑल हेल्थ और दिमाग के काम के लिए बहुत जरूरी है। चाय-बिस्कुट में न के बराबर पोषण होता है। बिस्कुट ज्यादातर चीनी, मैदा और अनहेल्दी फैट से बना होता है। इनमें फाइबर, प्रोटीन, मिनरल्स और विटामिन जैसे पोषक तत्व न के बराबर पाए जाते हैं।वहीं चाय में भी कोई खास पोषण नहीं होता है। चाय और बिस्कुट मिलकर &#039;खाली कैलोरी&#039; देते हैं। जोकि पेट तो भरते हैं, लेकिन शरीर को जरूरी पोषण और ताकत नहीं देते हैं। इसी वजह से यह कॉम्बिनेशन बच्चों के लिए पूरी तरह से अनहेल्दी है।एनीम‍िया का खतराचाय में टैनिन नामक तत्व पाया जाता है। जोकि शरीर में आयरन को सही तरीके से अवशोषित होने से रोकता है। अगर रोज सुबह बच्चा चाय पीता है, तो उनके शरीर में आयरन की कमी हो सकती है। जोकि आगे चलकर एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है। इससे बच्चे की इम्युनिटी और ग्रोथ दोनों पर निगेटिव असर पड़ सकता है।बढ़ सकता है चिड़चिड़ापनबिस्कुट में चीनी अधिक होती है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है और फिर अचानक से गिर जाता है। इस उतार-चढ़ाव के कारण बच्चे चिड़चिड़े हो सकते हैं। बच्चे का ध्यान कम लगने की शिकायत भी हो सकती है। वहीं बच्चे का बार-बार कुछ अनहेल्दी खाने की इच्छा हो सकती है।नींद पर असरबच्चों के लिए कैफीन वाली चाय सही नहीं होती है। यह उनकी नींद को खराब कर सकती है और बेचैनी को बढ़ा सकती है। इससे बच्चे की ध्यान लगाने की क्षमता और व्यवहार भी प्रभावित हो सकता है।अनहेल्‍दी खाने की इच्‍छा चाय-बिस्कुट का कॉम्बिनेशन शरीर को ज्यादा देर तक एनर्जी नहीं देता है। थोड़ी देर में बच्चा फिर भूख महसूस करने लगता है। जिससे वह ज्यादा खाना खा सकते हैं। या फिर बार-बार अनहेल्दी स्नैक्स मांग सकते हैं।कमजोर इम्युनिटीहर रोज चाय-बिस्कुट खाने से बच्चे के शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है। जिससे बच्चे के विकास पर असर पड़ता है। ऐसी आदत की वजह से बच्चे जल्दी थक जाते हैं और उनकी इम्युनिटी कमजोर हो सकती है। शरीर में पोषक तत्वों खासकर कैल्शियम और आयरन की कमी हो सकती है।मोटापे की समस्याज्यादा चीनी या तला भुना नाश्ता देने से बच्चे का मोटापा बढ़ सकता है। वहीं बच्चे को दांत से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।कमजोर हो सकती है याददाश्तपोषण की कमी वाला नाश्ता बच्चे के दिमाग पर बुरा असर डाल सकता है। बच्चे को कॉन्स्ट्रेशन में समस्या होती है। याददाश्त कमजोर हो सकती है और शिक्षा के प्रदर्शन में भी गिरावट देखने को मिल सकती है।हेल्दी नाश्ते के ऑप्शनसांभर और नारियल की चटनी के साथ इडलीदही के साथ होल व्हीट वेजिटेबल पराठादूध के साथ पीनट बटर या पनीर सैंडविचहोल ग्रेन टोस्ट के साथ उबले अंडेदूध और फलों के साथ ओट्स दलियामेवे और बीजों के साथ फ्रूट स्मूदीपनीर स्टफिंग वाला बेसन चिल्लामूंगफली के साथ वेजिटेबल पोहासब्जियों के साथ उपमासादा या मीठा दलियाजानिए कैसे छुड़ाएं यह आदतमाता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि आदत एकदम से नहीं छूटती है। इसलिए धीरे-धीरे चाय-बिस्कुट की जगह फल, दूध या हेल्दी नाश्ता देना शुरू करें।बच्चे वही सीखते हैं, जो अपने पेरेंट्स को करते हुए देखते हैं। जब आप हेल्दी नाश्ता करेंगे, तो उसी आदत को बच्चा भी अपनाएगा।अलग-अलग शेप और अच्छे तरीके से रंग-बिरंगे फलों को सजाकर खाना दें। जो बच्चे को पसंद आए।रोजाना एक ही समय पर नाश्ता करने की आदत डालें। इससे बच्चे की आदत पड़ जाएगी।बच्चों को आसान भाषा में यह बताएं कि अच्छा खाना उनके शरीर को ताकत देता है और सीखने व खेलने में मदद करता है।पेरेंट्स को समझना जरूरीबता दें कि पेरेंट्स को यह समझना जरूरी हो जाता है कि चाय-बिस्कुट बच्चे को पोषण पूरा नहीं देते हैं। इससे बच्चे के दिमाग और शरीर पर निगेटिव असर पड़ सकता है। इसलिए बच्चे को हमेशा ऐसा नाश्ता देना चाहिए, जो पोषक तत्वों से भरपूर और संतुलित हो। क्योंकि पोषण से भरपूर नाश्ता बच्चों को पूरा दिन के लिए एनर्जी देता है और पढ़ाई में ध्यान लगाने में भी मदद करता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:34:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>AC से धूप में जाने की गलती? Doctor ने बताया क्यों लगता है Heart और Brain को &amp;apos;थर्मल शॉक&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ गर्मी से राहत पाने के लिए हम सभी एयर कंडीशनर में जरुर बैठते हैं। अब सभी के घरों में एसी का इस्तेमाल शुरु हो चुका है। गौरतलब है कि एसी वाले कमरे से बाहर निकलने में हर किसी को आफत आती है और ऐसे में आप सीधा बाहर धूप में किसी काम से बाहर जाते हैं, तो क्या आपको इसका नुकसान होगा। अगर आप ठंडी हवा के बाद सीधा धूप पर जाते हैं, तो क्या होगा। आइए आपको इस लेख में बताते हैं।शरीर का इंटरनल थर्मोस्टेट सिस्टमहमारे बॉडी का तापमान 36.5 से लेकर 37.5°C के बीच बना रहता है। यह कंट्रोल सिस्टम दिमाग के छोटे से, मगर बहुत ताकतवर हिस्से द्वारा मैनेज किया जाता है, जिसको हाइपोथैलेमस कहा जाता है। जब आप एसी  के ठंडे वातावरण से गर्मी में बाहर कदम रखते हैं, तो शरीर एकदम से बाहरी तापमान को भांप लेता है। जिसके बाद हाइपोथैलेमस शरीर का ठंडा करने की प्रक्रिया शुरु करता है। जिसमें- - स्किन में मौजूद ब्लड वेसल्स चौड़ी होने लगती है, जिसे वैसोडिलेशन कहा जाता है।  - गर्मी बाहर निकालने के लिए स्वेट ग्लैंड्स काम करने लगती हैं।  - दिल की धड़कन धीरे से बढ़ने लगती है।शरीर को क्यों होता है &#039;शॉक&#039; जैसा एहसासडॉक्टर ने बताया है कि शरीर को जो असहजता होती है, वो हीट शॉक जैसा एहसास दिलाता है, जो कि तापमान बदलने पर नर्वस सिस्टम की प्रतिक्रिया से होता है। आपकी स्किन के पास खास टेंप्रेचर सेंसर होते हैं, जो दिमाग को सिग्नल भेजते हैं। ठंड से गर्म माहौल में अचानक बदलाने आने से ये सेंसर ओवरस्टिम्युलेट हो जाते हैं। जिसके बाद दिमाग को तेजी से एडजस्ट करना पड़ता है, जिसकी वजह से कुछ पल के लिए भारीपन या भ्रम जैसी स्थिति हो सकती है। बार-बार आपको चक्कर आ सकते हैं और सिर भी घूमने की समस्या हो सकती है। हाइड्रेशन कम होने पर बॉडी में ड्राईनेस बढ़ जाती है। ऐसे माहौल में पसीना निकाले बिना भी बॉडी फ्लूइड खोते रहते हैं। जब आप गर्मी में जाते हैं तो तेजी से पसीना आने लगता है। डिहाइड्रेटेड होने से  सिरदर्द, थकान और फोकस में कमी झेलनी पड़ सकती है।इन टिप्स को फॉलों करें - जब भी आप एसी से धूप में जाएं, तो कुछ देर पहले छाया में ही रहे हैं। - एसी में रहने पर भी पर्याप्त पानी पिएं। - एसी का टेंप्रेचर बहुत कम रखें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 02 May 2026 15:34:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Alert: गर्मी में सिर्फ सादा पानी पीना क्यों है खतरनाक? जानें कैसे Delhi का युवक पहुंचा ICU</title>
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<description><![CDATA[ उत्तर भारत में सूरज का सितम जारी है और लोग गर्मी से बचने के लिए खूब पानी पी रहे हैं। लेकिन दिल्ली से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सबको हैरान कर दिया है। एक 25 वर्षीय युवक दिन भर में 5 लीटर पानी पीने के बावजूद गंभीर हालत में अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हो गया। डॉक्टरों ने बताया कि यह स्थिति जरूरत से ज्यादा सादा पानी पीने की वजह से पैदा हुई है।केवल सादा पानी पीना क्यों है खतरनाक?अक्सर हम सोचते हैं कि गर्मी में जितना ज्यादा पानी पिएंगे, उतने सुरक्षित रहेंगे। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि जब हमें बहुत पसीना आता है, तो शरीर से केवल पानी ही नहीं, बल्कि सोडियम और पोटेशियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी बाहर निकल जाते हैं। ऐसी स्थिति में अगर सिर्फ सादा पानी पिया जाए, तो खून में सोडियम की मात्रा बहुत कम हो जाती है। मेडिकल भाषा में इसे &#039;हाइपोनेट्रेमिया&#039; कहते हैं। इसकी वजह से दिमाग में सूजन आ सकती है, जो जानलेवा भी हो सकती है। इसे भी पढ़ें: Health Tips: माइंडलेस स्नैकिंग करने की है आदत, तो आजमाएं ये आसान ट्रिकशरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन क्यों है जरूरी?गर्मी से बचने के लिए सिर्फ पानी पर निर्भर न रहें। पानी के साथ शरीर को इलेक्ट्रोलाइट्स देना भी जरूरी है। बचाव के लिए सादे पानी के बजाय ओआरएस, नमक-चीनी का घोल, नींबू पानी, नारियल पानी या छाछ का सेवन करें। ये चीजें शरीर में नमक और पानी का सही संतुलन बनाए रखती हैं। इसे भी पढ़ें: Vitamin D की कमी कर सकती है आपकी Gut Health बर्बाद, पेट की सूजन और दर्द को न करें Ignoreइन जरूरी बातों का रखें खास ख्यालखाली पेट न रहें: तेज धूप में निकलने से पहले कुछ जरूर खाएं। फल और पौष्टिक भोजन लेते रहने से शरीर में जरूरी लवणों की कमी नहीं होती।लक्षणों को पहचानें: अगर आपको अचानक सिरदर्द, चक्कर आना, जी मिचलाना, बहुत ज्यादा सुस्ती या बोलने में परेशानी महसूस हो, तो इसे हल्के में न लें। यह गंभीर इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के संकेत हो सकते हैं।धूप से बचाव: कोशिश करें कि दोपहर की तेज धूप में बाहर न निकलें। यदि बाहर हैं, तो हर आधे घंटे में कुछ न कुछ तरल पदार्थ जरूर लेते रहें। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:25:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>SAD Disorder: लोगों से मिलने में कांपते हैं हाथ&#45;पैर? कहीं आप इस Mental Health Disorder के शिकार तो नहीं</title>
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<description><![CDATA[ शरीर को सेहतमंद बनाए रखने के लिए फिजिकल और मेंटल दोनों तरह की सेहत पर ध्यान देना जरूरी होता है। हम सभी अक्सर फिजिकल सेहत पर ध्यान देते हैं। लेकिन मेंटल हेल्थ को अनदेखा कर देते हैं। मेडिकल रिपोर्ट्स की मानें, तो सोशल मीडिया पर लोगों से अपनी तुलना, काम के बढ़ते दबाव, असुरक्षा की भावना और अकेलेपन के कारण स्ट्रेस और एंग्जाइटी की समस्या सभी उम्र के लोगों में बढ़ती हुई देखी जा रही है।अकेलापन गंभीर बीमारियों को बढ़ाने वाला हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनियाभर में करोड़ों लोग एंग्जाइटी डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं। वहीं कई मामलों में चिंता और डर इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि रोजमर्रा की जिंदगी जैसे पढ़ाई, रिश्तों और नौकरी आदि पर इसका असर होने लगता है। ऐसी ही एक समस्या सैड यानी सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर है, जिसका खतरा युवाओं में तेजी से देखने को मिल रहा है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: माइंडलेस स्नैकिंग करने की है आदत, तो आजमाएं ये आसान ट्रिकसोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर के बारे में जानिएयह एक ऐसी समस्या है, जिसकी अक्सर लोगों में पहचान नहीं हो पाती है। इस समस्या से पीड़ित लोगों को नई जगह जाने, लोगों से मिलने में डर लगना या फिर अंजाने लोगों से बात करने में डर लगता है। हालांकि इसको लोग अक्सर शर्मिलापन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कुछ लोगों में यह समस्या इतनी बढ़ जाती है कि इसका असर दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगता है।विशेषज्ञ सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर को मानसिक स्वास्थ्य स्थिति मानते हैं, जिसकी पहचान और इलाज करना जरूरी है।इस डिसऑर्डर की वजह रोगी को लगने लगता है कि लोग उनको जज करेंगे या फिर उनका मजाक उड़ाएंगे।अगर 6 महीने तक यह डर बना रहे और दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगे, तो इसको डिसऑर्डर माना जाता है। डिसऑर्डर की पहचानआपको ऐसी स्थितियों से डर लगना, जहां आपका निगेटिव रूप से मूल्यांकन हो सकता है।अजनबियों से बात करने में डर महसूस होना।शर्मिंदा या अपमानित महसूस करने की चिंता होना।यह डर महसूस होना कि दूसरे लोग यह महसूस कर लेंगे कि आप घबराए हुए दिख रहे हैं।दूसरों से बातचीत करने में पसीना आना, चेहरा लाल होना, कांपना या फिर आवाज का लड़खड़ाना।उन स्थितियों से बचना, जहां आप पर सबकी नजरें हो सकती हैं।क्यों होती है ये दिक्कतअगर आपके घर में माता-पिता या भाई-बहन को यह समस्या है। तो आपको भी सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर होने का रिस्क बढ़ जाता है।जिन बच्चों को तंग किया जाता है, चिढ़ाया जाता है और सामाजिक रूप से नकारा जाता है, उनमें भी इसका रिस्क ज्यादा होता है।ये डिसऑर्डर होने पर क्या करेंबता दें कि सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर किसी को भी हो सकता है। डॉक्टर जिन लोगों में इस समस्या की पहचान करते हैं, उनको मनोवैज्ञानिक परामर्श या फिर टॉक थेरेपी की सलाह दी जाती है। वहीं कुछ दवाओं के इस्तेमाल से दिमाग के कैमिकल इंबैलेंस और लक्षणों को ठीक करने में भी सहायता मिल सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:22:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Normal Vs Cesarean Delivery: Normal Delivery में कम Risk, तो C&#45;Section में ज्यादा आराम? समझिए फायदे&#45;नुकसान का पूरा Health&#45;Calculus</title>
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<description><![CDATA[ प्रसव के लिए दो तरह की डिलीवरी सबसे ज्यादा प्रचलित है। जिनमें से एक सिजेरियन डिलीवरी है और दूसरी वैजाइनल डिलीवरी है। आमतौर पर महिलाएं और डॉक्टर भी नॉर्मल यानी की वैजाइनल डिलीवरी को ज्यादा बेहतर मानते हैं। क्योंकि इसके बाद जल्दी रिकवरी हो जाती है। वहीं सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं को पूरी तरह से ठीक होने में महीने लग जाते हैं। तो वहीं कुछ महिलाएं सिजेरियन डिलीवरी कराती हैं, क्योंकि उनको नॉर्मल डिलीवरी का दर्द नहीं सहना होता है।ऐसे में इस बीच हमेशा इस बात को लेकर बहस छिड़ी रहती है कि नॉर्मल और सिजेरियन डिलीवरी दोनों में क्या ज्यादा बेहतर है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको दोनों के फायदे और नुकसान के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Health Alert: गर्मी में सिर्फ सादा पानी पीना क्यों है खतरनाक? जानें कैसे Delhi का युवक पहुंचा ICUसिजेरियन डिलीवरीसिजेरियन डिलीवरी में पेट को काटकर हल्के हाथों से बच्चे को बाहर निकाला जाता है। जिससे बच्चे पर कोई प्रेशर या दबाव नहीं पड़ता है। बच्चा बड़े आराम से बाहर आ जाता है।नॉर्मल डिलीवरीनॉर्मल डिलीवरी में बच्चा काफी देर तक प्रसव के रास्ते में रहता है। जिस कारण बच्चे को कम ऑक्सीजन मिलने का खतरा रहता है।फायदे और नुकसानसिजेरियन डिलीवरी में बच्चे पर किसी तरह के उपकरण का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। जिससे बच्चे पर किसी तरह का जोखिम कम हो जाता है।वहीं कई बार नॉर्मल डिलीवरी में बच्चे को खींचने के लिए कुछ उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे - वैक्यूम या फोरसेप्स आदि। इससे बच्चे को ट्रामा होने का खतरा रहता है।नॉर्मल डिलीवरी के दौरान कई बार बच्‍चे को बाहर निकालने के दौरान मूत्र मार्ग या मलाशय को चोट आती है। जिससे डिलीवरी के बाद महिलाओं को पेशाब रोकने में दिक्कत होती है। नॉर्मल डिलीवरी में योनी की मांसपेशियां फट या ढीली हो जाती हैं। जो आगे चलकर सेक्स में प्रॉब्लम और पेशाब न रोक पाने की समस्या होती है। लेकिन यह सभी समस्याएं सिजेरियन डिलीवरी में नहीं होती है।सिजेरियन डिलीवरी के दौरान दर्द कम होता है। वहीं नॉर्मल डिलीवरी में कई घंटों तक दर्द सहना होता है। लेबर पेन के डर से कई महिलाएं सिजेरियन डिलीवरी को चुनती हैं।सिजेरियन डिलीवरी कराने से मूत्राशय और योनि को चोट लगने का रिस्क कम हो जाता है। वहीं योनि, गर्भाशय, मूत्राशय या मलाशय के बाहर आने का खतरा भी घट जाता है। इसको पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स कहते हैं। लेकिन सिजेरियन डिलीवरी के बाद रिकवरी करने में काफी समय लगता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:22:56 +0530</pubDate>
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<title>जानलेवा Heatwave का Red Alert! 45 डिग्री पारे में लू से बचें, फॉलो करें ये Health Tips</title>
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<description><![CDATA[ इस समय गर्मी बढ़ती है जा रही है। तापमान का पारा हाई होता जा रहा है। कई जगहों पर इस समय 45 डिग्री तक तापमान पहुंच गया है। असल में भारत मौसम विभाग ने भी चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों में तापमान और अधिक बढ़ जाएगा। इस दौरान अपनी सेहत का ख्याल रखना भी जरुरी है। भीषण गर्मी में खुद को सुरक्षित रखने के लिए किसी चैलेंज से कम नहीं है। वैसे मानव शरीर का औसत तापमान 36.9 डिग्री माना जाता है, लेकिन जब आसपास तापमान बढ़ने लगा है, तो हमारा शरीर हीट अब्जॉर्ब करना शुरु कर देता है और जिस वजह से सेहत बिगड़ने लगती है। इसे बैलेंस करने के लिए शरीर भी कुछ प्रतिक्रिया देता है और पसीना ज्यादा आता है। आइए आपको बताते हैं कैसे गर्मी में खुद का बचाव करें।बढ़ते तापमान के बीच खुद को सुरक्षित कैसे रखें?- प्रतिदिन 3-4 लीटर पानी जरुर पिएं, जिससे शरीर हाइड्रेट रहें। इस मौसम में एल्कोहल का सेवन करने से बिल्कुल बचें और कैफीन जैसै कि चाय-कॉफी भी कम से कम लें।- बाहर निकलते वक्त टोपी और सनग्लासेस जरुर पहनें और कॉटन के ढीले कपड़े पहनें। दोपहर 11 से 4 के बीच बाहर कम ही निकलें। सुबह या शाम को ही बाहर जाएं।- यदि आपको उल्टी आना, चक्कर आना, हार्टबीट बढ़ना, सोचने-समझने में मुश्किल होना या सिर में तेज दर्द जैसे संकेत नजर आएं, तो तुरंत धूप से किसी ठंडी जगह पर जाएं। इसके बाद कपड़े हल्का गीला कर लें और इलेक्ट्रोलाइट को पानी में मिला लो और फिर इसको पी ले।- गर्मियों में लू से बच्चों और बुजुर्गों को बचना जरुरी है।  भीषण गर्मी में इनका ख्याल रखना बेहद जरुरी है। वहीं, जिन लोगों को दिल की बीमारी या  डायबिटीज है, उन्हें भी इस वक्त पर अपना खास ख्याल रखना चाहिए।- अपनी डाइट में खीरा तरबूज और संतरे को जरुर शामिल करें। इनमें अधिक मात्रा में पानी पाया जाता है। घर को हमेशा एसी या पंखा से ठंडा रखें। इस समय पर किसी को भी पार्क की हुई गाड़ी में बिल्कुल न छोड़ें।- अगर आपको लू लगने के जरा से भी संकेत दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। - इस दौरान ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं, जिससे आपकी सेहत अच्छी रहेगी। ऐसे में खुद को डिहाइड्रेट न रखेंष- यदि आपका मुंह अधिक सूख रहा है, गहरे पीले रंग का यूरिन आ रहा है, मांसपेशियों में दर्द रहता है या कमजोरी महसूस होती है, तो इन चीजों पर ध्यान जरुर दें।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:54:43 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: माइंडलेस स्नैकिंग करने की है आदत, तो आजमाएं ये आसान ट्रिक</title>
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<description><![CDATA[ हम सभी की वेट लॉस जर्नी में सबसे बड़ा विलेन होता है माइंडलेस स्नैकिंग। कभी-कभी ऐसा होता है कि हमारा कुछ ना कुछ खाने का मन करता है, भले ही हमें भूख ना लगी हो। ऐसे में हम कभी बिस्किट तो कभी चॉकलेट या चिप्स खा लेते हैं और हमें पता ही नहीं चलता कि हम कितनी कैलोरी इनटेक करते हैं। इसकी वजह ना केवल क्रेविंग बढ़ने लगती है, बल्कि एनर्जी भी कम महसूस होती है।  आज के समय में जब लोगों का लाइफस्टाइल काफी बिजी हो गया है और तनाव व स्क्रीन टाइम भी बढ़ने लगता है तो इस तरह की अनहेल्दी मंचिंग और माइंडलेस स्नैकिंग की आदत भी बढ़ने लगी है। हालांकि, अगर आप एक हेल्दी वजन के साथ अच्छा लाइफस्टाइल जीना चाहते हैं तो आपको सख्त डाइटिंग करने या फिर खुद को भूखा रखने की जरूरत नहीं है। सिर्फ एक आसान ट्रिक को आजमाकर आप अपनी इस आदत को आसानी से कंट्रोल कर सकती हैं। तो चलिए आज इस आसान ट्रिक के बारे में-इसे भी पढ़ें: Vitamin D की कमी कर सकती है आपकी Gut Health बर्बाद, पेट की सूजन और दर्द को न करें Ignoreरुकें और पीएं पानी माइंडलेस स्नैकिंग को रोकने की ट्रिक बेहद ही आसान है। इसके लिए आप पहले रुकें और पानी पीएं। मसलन, जब भी अचानक आपको स्नैकिंग का मन हो तो ऐसे में आप इंस्टेंट पैकेट खोलने की जगह 5 मिनट रुकें और फिर एक गिलास पानी पीएं। यह एक बेहद ही सिंपल सी आदत है, लेकिन काफी पावरफुल है।इस ट्रिक से कैसे मिलता है फायदाअगर आप इस ट्रिक को आजमाते हैं तो इससे आपको कई अलग-अलग तरीकों से फायदा मिलता है -सबसे पहले तो आपको असली भूख व नकली भूख के बीच अंतर करने में मदद मिलती है। दरसअल, कई बार बॉडी को खाना नहीं, हाइड्रेशन चाहिए होती है। हम प्यास को भूख समझते हैं। जब आप पानी पीते हो और 5 मिनट रुकते हो, तब समझ आता है कि सच में भूख थी या सिर्फ प्यास। इस ट्रिक से इंस्टेंट क्रेविंग को ब्रेक करना आसान होता है। दरअसल, माइंडलेस ईटिंग इम्पल्सिव होती है। दिमाग बोलता है कि अभी चिप्स खा लो। अगर आप तुरंत चिप्स खा लेंगे तो यह आदत जारी रहेगी। लेकिन जब आप 5 मिनट रुके हो तो दिमाग का ऑटोमैटिक मोड ब्रेक हो जाता है। जिससे खुद पर कंट्रोल बेहतर होता है। बहुत से लोग स्ट्रेस, टेंशन, बोरियत या मूड के कारण से स्नैक करते हैं। ऐसे में जब आप रुकते हैं तो इससे आपको खुद से पूछने का मौका मिलता है कि क्या मुझे भूख है या मैं बोर या तनावग्रस्त हूं? जिससे इमोशनल ईटिंग कम होती है।यह ट्रिक पोर्शन कंट्रोल करने में भी मददगार है। अगर 5 मिनट रुकने के बाद भी भूख लगेगी तो यकीनन आप स्मार्ट चॉइस जैसे फल, दही, भुना चना या मखाने आदि लोगे।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:54:42 +0530</pubDate>
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<title>Toilet Hygiene: Toilet Hygiene को न करें Ignore, आपकी एक गलती दे सकती है गंभीर UTI और Infection</title>
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<description><![CDATA[ रोजमर्रा की भागदौड़ और जिम्मेदारियों के कारण कई बार महिलाएं अपनी सेहत का ध्यान नहीं रख पाती हैं। जिसका सीधा असर उनकी सेहत पर देखने को मिलता है। महिलाओं की सेहत से जुड़ा एक बेहद अहम लेकिन अक्सर नजरअंदाज करने वाला विषय टॉयलेट हाइजीन है। टॉयलेट में गंदगी रखने या फिर लापरवाही बरतने से कई तरह के संक्रमणों को पैदा कर सकता है।  ऐसे में आपको यह समझने की जरूरत है कि किस तरह से आपकी छोटी सी लापरवाही Urinary Tract Infection और स्किन से जड़ी समस्याओं को पैदा कर सकती है। खासकर पीरियड्स के दौरान पब्लिक टॉयलेट के इस्तेमाल में हाइजीन का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है।इसे भी पढ़ें: Women Health: Hot Flashes से लेकर Mood Swings तक, मेनोपॉज कैसे बदलता है आपका शरीर और मनसही टॉयलेट हाइजीन न सिर्फ संक्रमण से बचाती है, बल्कि महिलाओं को लंबे समय तक सुरक्षित और स्वस्थ भी रखती है। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि टॉयलेट हाइजीन क्या है और इसको कैसे बनाएं रखें और किन गलतियों को करने से बचना चाहिए।क्यों जरूरी है टॉयलेट हाइजीनटॉयलेट हाइजीन सिर्फ साफ-सफाई की आदत नहीं बल्कि महिलाओं की सेहत से जुड़ा हिस्सा है। क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही गंभीर संक्रमण और लंबे समय की सेहत संबंधी समस्याओं की वजह बन सकती है। ऐसे में अगर आप रोजाना हाइजीन अपनाती हैं, तो न सिर्फ बीमारियों से बच सकते हैं, बल्कि शरीर भी आरामदायक और स्वस्थ महसूस करता है। इसलिए टॉयलेट हाइजीन को अपने डेली लाइफ का हिस्सा बनाएं।साफ-सफाई रखने का सही तरीकाटॉयलेट के बाद प्राइवेट पार्ट की सफाई का तरीका ज्यादा मायने रखता है।इसलिए बाथरूम का इस्तेमाल करने के बाद सही से प्राइवेट पार्ट को साफ करें।इसके लिए हमेशा माइल्ड वाइप्स या साफ पानी का इस्तेमाल करना ज्यादा सही है।कैसे इस्तेमाल करें पब्लिक टॉयलेटपब्लिक टॉयलेट में संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा होता है। क्योंकि एक ही जगह का कई लोग इस्तेमाल करते हैं। वहीं ऐसे में सीट पर बैठने से पहले उसको साफ करना, टिश्यू या सीट कवर का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं हाथों को साबुन से धोना जरूरी है। हैंड सैनिटाइजर भी साथ रखना अच्छी आदत है।पीरियड्स में ऐसे मेंटेन करें हाइजीनपीरियड्स के समय साफ-सफाई का ध्यान ज्यादा जरूरी हो जाता है।हर 4-6 घंटे में टैम्पोन या सेनेटरी पैड को चेंज करना चाहिए।अधिक समय तक एक पैड इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया, बदबू और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।इस दौरान सूखे और साफ कपड़े पहनना चाहिए।सही प्रोडक्ट का इस्तेमालज्यादा खुशबू वाले या फिर केमिकल युक्त इंटिमेट प्रोडक्ट्स स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं।इससे ड्रायनेस, जलन या एलर्जी हो सकती है।हमेशा हल्के pH-बैलेंस्ड और डॉक्टर द्वारा सुझाए प्रोडक्ट का ही इस्तेमाल करना चाहिए।सिर्फ साफ पानी से भी कई बार सफाई पर्याप्त होती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:16:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Vitamin D की कमी कर सकती है आपकी Gut Health बर्बाद, पेट की सूजन और दर्द को न करें Ignore</title>
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<description><![CDATA[ आंतों से संबंधित समस्याएं आजकल काफी बढ़ रही है। खासकर के सूजन, पेट दर्द, बार-बार दस्त, ऐंठन और कमजोरी जैसी परेशनियां शामिल है। इस तरह की दिक्कत लोगों में लंबी बनीं रहती है, यह हमारे इम्यूनिटी और एनर्जी लेवल को भी कमजोर करता है। ऐसे में शरीर को सही न्यूट्रिशन मिलना काफी जरुरी होता है, खासतौर पर Vitamin D, जो आंतों की सेहत को बनाए रखने में मदद करता है। आइए आपको बताते हैं Vitamin D आंतों के लिए क्यों जरुरी है और यह किस तरह से आपकी गट हेल्थ को बेहतर बनाता है। Vitamin D इम्‍यून सिस्‍टम को बनाता है मजबूतीलोग मानते हैं कि विटामिन-D सिर्फ हड्डियों के लिए जरुरी होता है, जबकि आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए बेहद जरुरी पोषक तत्व है। आंतों में रोग होने से शरीर का इम्यून सिस्टम आंतों की परत पर गलत तरीके से हमला करने लगता है, जिससे सूजन और डैमेज बढ़ता है। Vitamin D इस इम्यून रिस्पॉन्स को बैलेंस करता है और सूजन को भी कम करता है।गट हेल्थ के लिए Vitamin D फायदेमंदविटामिन-D आंतों की अंदरूनी दीवार (गट लाइनिंग) को मजबूत बनाता है, जिसके पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है। इसी से शरीर को जरुरी विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं, जो रिकवरी और एनर्जी के लिए जरुरी होते हैं। कई रिसर्च में यह भी पाया गया है कि जिन लोगों में Vitamin D की कमी पाई जाती है, उन लोगों को आंतों के रोगों के लक्षण देखने को मिलते हैं और रिकवरी में भी टाइम लगता है।Vitamin D के स्रोतविटामिन-D का सबसे अच्छा स्रोत धूप मानी जाती है। 15-20 मिनट हल्की धूप में बैठना शरीर के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है। इसके अलावा, दूध, अंडे, मशरूम और मछली जैसे फूड्स में भी विटामिन-D पाई जाती है। अगर आपके शरीर में विटामिन-D की कमी हुई तो आपको इसके लिए सप्लीमेंट लेना पड़ सकता है।   ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 09:16:01 +0530</pubDate>
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<title>Women Health: Hot Flashes से लेकर Mood Swings तक, मेनोपॉज कैसे बदलता है आपका शरीर और मन</title>
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<description><![CDATA[ मेनोपॉज हर महिला के जीवन का एक स्वाभाविक चरण होता है। जिसमें मासिक धर्म यानी पीरियड्स हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं। आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज होता है। लेकिन हर महिला के लिए यह अनुभव अलग हो सकता है। इस दौरान शरीर में हार्मोन का लेवल धीरे-धीरे कम होने लगता है। जिसका असर सिर्फ पीरियड्स पर ही नहीं बल्कि पूरे शरीर और मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है। वहीं कई बार इन बदलावों को महिलाएं समझ नहीं पाती हैं और असहज महसूस करती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरी में क्या-क्या बदलाव होते हैं।जानिए क्या है मेनोपॉजजब किसी महिला को लगातार 12 महीनों तक पीरियड्स नहीं आते, तो उस अवस्था को मेनोपॉज़ कहा जाता है। यह प्रजनन क्षमता के समाप्त होने का संकेत होता है।इसे भी पढ़ें: Summer में दही खाते वक्त न करें ये Common Mistake, सेहत को होगा भारी नुकसानइस समय शरीर में दो मुख्य हार्मोन, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन, का स्तर कम हो जाता है। यही हार्मोन महिलाओं के शरीर के कई जरूरी कार्यों को नियंत्रित करते हैं, इसलिए इनके कम होने से कई तरह के बदलाव दिखाई देते हैं।शरीर में होने वाले प्रमुख बदलावमेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव सिर्फ एक या दो लक्षणों तक सीमित नहीं होता है। बल्कि यह महिलाओं के पूरे शरीर को प्रभावित करते हैं। हालांकि यह बदलाव धीरे-धीरे सामने आते हैं और हर महिला में इनकी तीव्रता अलग-अलग हो सकती है।मेंस्ट्रुएशन में बदलावमेनोपॉज का सबसे पहला और स्पष्ट बदलाव पीरियड्स से जुड़ा होता है। शुरूआत में यह अनियमित हो जाते हैं और फिर समय के साथ पूरी तरह से बंद हो जाते हैं। शरीर के अंदर हो रहे यह बदलाव हार्मोनल परिवर्तन का संकेत होता है।ब्लीडिंग का कम या ज्यादा होनापीरियड्स का अंतराल बदलनाअचानक से पीरियड्स बंद होनाहॉट फ्लैश और पसीना आनामेनोपॉज़ का सबसे आम और पहचानने योग्य लक्षण हॉट फ्लैश और पसीना आना है। आपको शरीर में अचानक से गर्मी महसूस हो सकती है। वहीं कई महिलाओं के लिए पसीना आना असहज अनुभव हो सकता है। यह समस्या कुछ मिनटों तक रहती है, लेकिन बार-बार यह समस्या होने से आपकी दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।अचानक से गर्मी का एहसासफेस और गर्दन पर लालिमारात में ज्यादा पसीना आनानींद और थकान होनामेनोपॉज के दौरान नींद की समस्या काफी आम हो जाती है। हार्मोन में बदलाव होने और हॉट फ्लैश की वजह से रात में नींद टूट सकती है। वहीं नींद न पूरी होने पर दिन भर एनर्जी काफी कम रहती है और इससे चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।बार-बार जागनासोने में देर लगनासुबह थकान महसूस होनामानसिक और भावनात्मक बदलाव होनाहार्मोन का असर सिर्फ आपके शरीर पर ही नहीं बल्कि मन और फीलिंग्स पर भी पड़ता है। इस दौरान महिलाओं को अपनी भावनाओं और व्यवहार में बदलाव महसूस हो सकता है। इसलिए इन बदलावों को समझना और स्वीकार करना जरूरी होता है। जिससे कि मेंटल हेल्थ को बेहतर रखा जा सके।उदासी या मन न लगनामूड स्विंगचिंता और घबराहटध्यान और याददाश्त में कमीवेट और शरीर में बदलाववहीं मेनोपॉज के दौरान शरीर का मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है। जिससे वेट बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। इस दौरान खासकर पेट के आसपास चर्बी जमा होने लगती है। लेकिन अगर आप इस पर ध्यान नहीं देते हैं, तो मोटापे के साथ-साथ अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।वेट  तेजी से बढ़नाशरीर का आकार बदलनाऊर्जा स्तर में कमीहड्डियां कमजोर होनाबता दें कि एस्ट्रोजन की कमी का सीधा असर हड्डियों पर पड़ता है। वहीं समय के साथ हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इस उम्र में हड्डियों की देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है।चोट लगने पर जल्दी फ्रैक्चरहड्डियों में दर्दकमजोरी ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:48:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>No Exercise, फिर भी मिलेगी Flat Tummy! सुबह की बस एक कप चाय घटाएगी Belly Fat</title>
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<description><![CDATA[ खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण मोटापा बढ़ता है। मोटापे के बढ़ने से कई बीमारियां बढ़ जाती है। पेट की चर्बी से हर कोई परेशान रहता है। कई बार यह जिद्दी चर्बी खानपान के कारण नहीं, बल्कि हार्मोनल इबैलेंस के कारण होता है, जिस वजह से पेट और कमर के आसपास फैट जमने लगता है। जब शरीर में कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है तो इससे बेली फैट बढ़ने लगता है। लटकती तोंद से कई महिलाएं परेशान रहती है और इसे कम करने के लिए कारगर तरीके ढूंढने लगती हैं। कितना भी डाइट कर लों लेकिन फिर भी बेली फैट पीछा नहीं छोड़ता। अब आपका बेली फैट मक्खन की तरह पिघल जाएगा, बस आपको रोजाना इस चाय को अपनी डाइट में शामिल करना है। यह आपकी तोंद को कम कर सकता है। आइए आपको इस बारे में बताते हैं।स्ट्रेस बेली को कम कर सकती है यह चाय- इस चाय के सेवन से स्ट्रेस के कारण बढ़ने वाला बेली फैट कम हो जाएगा। दरअसल, जब शरीर में कोर्टिसोल लेवल बढ़ता है, तो इसकी वजह से हमारे शरीर में फैट जमने लगता है।- बेली फैट को कम करने के लिए कोर्टिसोल हार्मोन को कम करना बेहद जरुरी है। इस चाय को बनाने के लिए लेमन बाम, हल्दी और तुलसी का इस्तेमाल होता है।- लेमन बाम में कई सारे औषधीय गुण पाए जाते हैं। इससे नर्वस सिस्टम शांत रहता है और स्ट्रेस की वजह से शरीर जो प्रतिक्रिया देता है, वो भी कम हो जाती है।- यह हमारी स्किन को सॉफ्ट करती है और पेट के आसपास जमा हुआ फैट को कम करती है। तुलसी फिजिकल और इमोशनल तनाव को कम करती है और इससे दिमाग शांत होता है। इससे आपकी मसल्स कूल रहने वाली है।- हल्दी में एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाएं जाते हैं, जो कि शरीर को तनाव से बचाती है। ये एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है और यह शरीर के इंफ्लेमेसन को कम करता है।- यह नर्वस सिस्टम को शांत करता है और फैट कम होता है। इससे मेटाबॉलिज्म को भी मजबूत बनाता है।इस तरह से बनाएं चाय- सबसे पहले आप 1 पैन में 2 कप पानी डालें।- अब इसमें 1 टीस्पून लेमन बाम डालें।- इसमें 4-5 पत्तियां तुलसी डालें।- फिर इसमें 1 चुटकी हल्दी मिलाएं।- इसे अच्छे से उबालें।- इसे छान लें और दिन में एक बार जरुर पिएं।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:45:19 +0530</pubDate>
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<title>Summer में दही खाते वक्त न करें ये Common Mistake, सेहत को होगा भारी नुकसान</title>
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<description><![CDATA[ गर्मियों के मौसम में दही का सेवन करना पाचन, हाइड्रेशन और गट हेल्थ के लिए काफी हेल्दी माना जाता है। क्योंकि दही में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम, प्रोटीन और गुड बैक्टीरिया (प्रोबायोटिक्स) पाए जाते हैं, जो डाइजेस्टिव सिस्टम को मजबूत करते हैं और शरीर को भी ठंडक पहुंचाता है। भीषण गर्मी में दही का सेवन करने से बॉडी का तापमान संतुलित रहता है और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है। समर सीजन में दही खाना आमतौर पर काफी फायदेमंद माना जाता है, हालांकि यह जब भी अच्छा माना जाता है जब आप इसे सही तरीके और समय पर खाना पसंद करें। गर्मियों में दही खाया तो सेहत अच्छी बनेंगी या बिगड़ेगी, यह आपको बताते हैं।गर्मियों में दही खाने के फायदेदही खाने से पेट हल्का और सुपाच्य होता है, इसलिए यह एसिडिटी, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में राहत देता है। जब आप लस्सी, छाछ या रायता के रुप में दही का सेवन करते हैं, तो ज्यादा फायदे मिलते हैं, क्योंकि ये शरीर को हाइड्रेट करता है और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाता है। गौरतलब है कि प्रोबायोटिक्स आंतों के गुड बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम भी मजबूत रहता है। गट हेल्थ के लिए दही का सेवन करना अच्छा माना जाता है। क्योंकि इसमें प्रोबायोटिक्स आंतों के माइक्रोबायोम को संतुलित रखते हैं, जिससे पाचन प्रक्रिया बेहतर होती है और शरीर पोषक तत्वों को प्रभावी तरीके से अवशोषित करता है। प्रतिदिन दही का सेवन करने से गैस, ब्लोटिंग और इर्रिटेबल बॉवेल जैसी समस्याओं में राहत दिलाता है। इसके साथ ही हेल्थ पाचन तंत्र मानसिक स्वास्थ्य को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है, जो कि ऊर्जा और मूड बेहतर रहता है।गर्मियों में दही खाने का सही तरीका- रात के समय दही खाने से आप बीमार हो सकते हैं या फिर सर्दी-खांसी, गले में खराश, और कफ की समस्या हो सकती है। सबसे बेहतर है कि आप दिन में दही का सेवन करें।- इस बात का ध्यान रखें कि बहुत ही ज्यादा खट्टा या बासी दही खाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह पेट में गैस, जलन या इंफेक्शन का कारण बन सकता है।- जिन लोगों के लैक्टोज इंटॉलरेंस, एलर्जी या बार-बार सर्दी-जुकाम की समस्या होती है, उन्हें दही को सीमित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए।- हमेशा दही को ताजा ही खाएं और लंबे समय से बाहर रखा हुआ दही का सेवन बिल्कुल भी न करें, क्योंकि गर्मी में यह जल्दी खराब होता है। गौरतलब है कि गर्मी में दही खाना काफी सुरक्षित है लेकिन इसको हमेशा सही मात्रा में ही सेवन करें, तो यह शरीर के लिए काफी फायदेमंद मानी जाएगी और आपको गर्मी से राहत मिलेगी। इसके साथ ही आपका गट हेल्थ भी स्ट्रांग बना रहेगा।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 09:40:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: जानलेवा मलेरिया का बढ़ा खतरा, इन 5 Tips से करें अपना और परिवार का बचाव</title>
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<description><![CDATA[ गर्मी और बारिश के मौसम में मलेरिया का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। मलेरिया जैसी बीमारी मादा Anopheles मच्छर के काटने से फैलती है। वहीं अगर समय रहते इस बीमारी पर ध्यान न दिया जाए, तो यह गंभीर रूप ले सकती हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक भारत में 2022 में 1.8 लाख लोग मलेरिया का शिकार हुए थे। वहीं साल 2020 में यह आंकड़ा 32 लाख तक था। ऐसे में भारत और अन्य देशों में मलेरिया के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए हर साल 25 अप्रैल को वर्ल्ड मलेरिया दिवस मनाया जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे आप कुछ आसान आदतों को अपनाकर आसानी से मलेरिया को मात दे सकते हैं।मलेरिया से बचाव के उपायसाफ-सफाई का ध्यान रखेंबता दें कि मलेरिया का मच्छर सिर्फ गंदे पानी से नहीं बल्कि साफ पानी में भी पनपता है। इसलिए घर और आसपास के क्षेत्र का पूरी तरह से ध्यान रखना चाहिए। घर या आसपास किसी तरह का पानी न जमा होने दें। वहीं गमले, कूलर और टायर और बाल्टी आदि में पानी न जमा रहने दें। गर्मियों में अगर आप जानवरों या पक्षियों के लिए पानी रखते हैं। तो हर 2 से 3 मिनट पर जरूर बदलें। नालियों और छत की रेगुलर बेसिस पर सफाई करनी चाहिए।इसे भी पढ़ें: Health Tips: तेल बदल-बदलकर इस्तेमाल करने से सेहत पर क्या असर होता है, आइए जानें मच्छरदानी का इस्तेमालमार्केट में कई इलेक्ट्रिक रिपेलेंट या फिर क्रीम लाते हैं, जोकि मच्छर भगाने का दावा करते हैं। लेकिन इनमें केमिकल्स भी होता है, जोकि स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए रात को सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। इससे मच्छर आपको नहीं काटते हैं।घर को बनाएं मच्छर-प्रूफमच्छर घर के अंदर प्रवेश न कर पाए, इसके लिए अपने घर को मच्छर प्रूफ बनाएं। दरवाजों औऱ खिड़कियों पर जाली लगाएं। वहीं शाम के समय घर में मच्छर ज्यादा आते हैं। इसलिए समय से घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद कर दें।पूरी बाजू के कपड़ेमलेरिया वाले मच्छर से खुद का बचाव करने के लिए हमेशा फुल स्लीव के कपड़े पहनें। शाम को घर से बाहर निकलते समय शरीर को पूरी तरह से ढककर रखें। इस तरह से मच्छरों के काटने का खतरा कम होता है।अपनाएं घरेलू उपायअगर आपके घर में भी मच्छर घुस गए हैं, तो कपूर रखकर या फिर नीम के पत्तों का धुआं करके इनको भगाएं। मच्छरों को घर से भगाने के लिए आप कमरे के अंदर तुलसी का पौधा भी रख सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:17:30 +0530</pubDate>
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<title>मक्खन की तरह पिघलेगी जिद्दी Belly Fat, बस सुबह खाली पेट पी लें ये Magical Drink</title>
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<description><![CDATA[ खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण शरीर में मोटापा बढ़ने लगता है। पेट की चर्बी न केवल खूबसूरती खराब करती है और बल्कि कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए पेट की चर्बी कम करना चाहिए। महिलाओं वजन को कम करने के लिए आसान और नेचुरल उपायों की तलाश में रहती हैं। इस लेख में हम आपको ऐसी ड्रिंक के बारे में बताने जा रहे हैं, जो सब्जा सीड्स से बना है। यदि इसको सही मात्रा और सही तरीके से लिया जाए तो यह वजन घटाने में मदद करती है। पेट की चर्बी को कम करने और डाइजेशन को सुधारने में सहायक रहती है। आपको रोजान इस ड्रिंक का सेवन करना चाहिए। इसे बनाने के लिए सही तरीके और फायदों के बारे में आपको बताते हैं।बेली फैट कम करने वाले ड्रिंक की सामग्रीसब्‍जा सीड्स- 1 चम्‍मच (लगभग 5 ग्राम)पानी- 1 गिलास (200-250 मिली)नींबू का रस- 1 चम्मचशहद- 1/2 चम्मच (ऑप्शनल)बेली फैट कम करने वाले ड्रिंक की विधि- इसे बनाने के लिए 1 चम्मच सब्जा सीड्स लें।- फिर आधा कप पानी में 10-15 मिनट तक भिगोएं।- ये फूलकर जेल जैसी परत बना लेंगे।- अब इसमें बाकी पानी, नींबू का रस और शहद मिलाएं।- फिर इसको अच्छे से मिक्स कर लें और तुरंत ही पिएं।- इस बात का ध्यान रखें कि इसको ज्यादा स्टोर न करें और दिनभर में 1-2 चम्मच से ज्यादा सब्जा सीड्स न लें। इसके साथ ही सब्जा सीड्स को भिगोकर ही लें।ड्रिंक पीने का सही समयइस ड्रिंक को आप सुबह खाली पेट लें। ओवरईटिंग कंट्रोल करने के लिए खाने में 30 मिनट पहले इसको ले सकते हैं। ड्रिंक पेट की चर्बी कैसे कम करती है?- इस ड्रिंक में हाई फाइबर है, वहीं सब्जा पानी सोखकर फूलता है, जिससे पेट भी पूरे दिन भरा रहता है।- अगर आपको जल्दी भूख लगती है, तो यह आपके डाइजेशन को धीमा करेगी और क्रेविंग कम होती है।- यह ड्रिंक शुगर को कंट्रोल करता है। ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता है और फैट को भी स्टोर कम करता है।- इसमें कूलिंग इफेक्ट पाए जाते हैं, जो शरीर की गर्मी और सूजन को कम करता है।- यह बेहतर मेटाबॉलिज्म करता है, कैलोरी इनटेक कम होती है।ड्रिंक के फायदे- इस ड्रिंक के सेवन से पेट की चर्बी कम करता है।- भूख और इमोशनल ईटिंग कंट्रोल होती है।- पाचन बेहतर और ब्लोटिंग कम होती है।- शरीर हाइड्रेटेड और ठंडा रहता है।- यह बॉडी को डिटॉक्स करता है।- त्वचा में गजब का ग्लो आता है। ड्रिंक गलत तरीके से लेने के नुकसान- अगर आप सूखे बीज खाती हैं तो गले में फंसने के खतरा रहता है।- ज्यादा लेने से गैस, अपच या दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं।- ओवरयूज से पोषक तत्वों का अवशोषण धीमा हो जाता है।किन लोगों को नहीं पीनी चाहिए ये ड्रिंकइस ड्रिंक को लो  BP या डाइजेशन से संबंधित समस्या से परेशान लोग पीने से बचते हैं। इसके अलावा, इसे प्रेग्नेंसी में डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं पीना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:06:57 +0530</pubDate>
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<title>Newborn Care Tips: गर्मी में शिशु की देखभाल में न करें ये गलतियां, Health को हो सकता है नुकसान</title>
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<description><![CDATA[ गर्मियों के मौसम में हर किसी की हालत खराब हो जाती है। बड़े लोग तो अपनी परेशानी कहकर बता देते हैं, लेकिन दिक्कत छोटे बच्चों के सामने आती है। खासकर तौर पर छोटे बच्चों के साथ। क्योंकि वह तो अपनी दिक्कत किसी को बता भी नहीं सकते हैं। ऐसे में घरवालों को छोटे बच्चों का ध्यान रखना पड़ता है। ऐसे में अगर आपके घर में भी गर्मी में नन्हा मेहमान आया है, तो आपको उसकी देखभाल सही तरीके से करनी चाहिए।ऐसा इसलिए क्योंकि गर्मी के मौसम में बच्चे को पसीना, गर्मी, डिहाइड्रेशन और रैशेज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसे टिप्स देने जा रहे हैं, जिनको फॉलो करके आपके बच्चे की किसी भी तरह की परेशानी कम होगी।इसे भी पढ़ें: Iron Deficiency: शरीर में घट रहा है Iron? अपनी Diet में शामिल करें ये 5 Super Foods, लौट आएगी Energyसही कपड़ों का चयनगर्मी के मौसम में बच्चे के लिए सही कपड़े चुनने चाहिए। इस मौसम में स्किन इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बच्चे को हल्के फैब्रिक वाले कपड़े पहनाएं। क्योंकि हल्का सा भी मोटा फैब्रिक वाला कपड़ा उनको परेशान कर सकता है। इसलिए बच्चे को गर्मियों में सूती या लिनेन फैब्रिक के कपड़े पहनाने चाहिए। तापमान रखें सामान्यभले ही आपको कितनी ही तेज गर्मी लग रही हो, लेकिन बच्चे के हिसाब से कमरे का तापमान रखना चाहिए। क्योंकि ज्यादा ठंड में बच्चे को परेशानी हो सकती है। वहीं कमरे में तेज एसी या कूलर चलाने से बचना चाहिए। क्योंकि इससे बच्चे के साथ-साथ मां को भी परेशानी होगी।घमौरियों से बचावनन्हे बच्चे को घमौरियों से बचाने के लिए उनको रोजाना सादे पानी से नहलाएं। फिर उनके शरीर को अच्छे से सुखाएं। क्योंकि नमी की घमौरियों का कारण होती हैं। बच्चे के शरीर को सुखाने के बाद डॉक्टर द्वारा बताया गया पाउडर लगाएं। जिससे कि बच्चे को रैशेज न हों।रोज बदलें बेडशीटआमतौर पर घरों में रोजाना चादर नहीं चेंज की जाती हैं। लेकिन बच्चे की चादर को रोजाना बदलना चाहिए। चादर में लगी हल्की सी भी गंदगी बच्चे के शरीर में इंफेक्शन पैदा कर सकती है। कई बार लोगों को इंफेक्शन का कारण भी नहीं समझ आता है।दिन में न ले जाएं बाहरदिन के समय तेज गर्मी होती है, ऐसे में इस दौरान बच्चे को बाहर ले जाने से बचना चाहिए। खासतौर पर गर्मियों में 11 से 4 बजे के बीच बच्चे को बाहर न ले जाएं। वहीं अगर बाहर जाना बहुत जरूरी है, तो सिर को हल्के कपड़े से ढककर रखें, जिससे बच्चे को धूप और लू न लगे। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:58:30 +0530</pubDate>
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<title>Pregnancy Planning: यह 1 &amp;apos;Yoga Pose&amp;apos; कंसीव करने में करेगा मदद, Boost होगी Fertility</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप कंसवी की तैयारी कर रही हैं, तो सबसे पहले अपने खान-पान और दिनचर्या को संतुलित बनाना जरूरी है। स्वस्थ डाइट के साथ-साथ नियमित रूप से मेडिटेशन और योग करना भी बेहद फायदेमंद होता है। यदि खानपान सही नहीं होगा तो जीवनशैली अनियमित हो, शरीर में जरुरी न्यूट्रिएंट्स की कमी हो या हार्मोनल इंबैलेंस हो, तो इसका सीधा असर आपकी फर्टिलिटी पर होता है और कंसीव करने में दिक्कत आती है। कंसीव करने के लिए जितना जरुरी फर्टाइल विंडो में इंटिमेट होना, उतनी ही जरुरी बैलेंस और हेल्दी लाफस्टाइल को फॉलो करना। इस लेख में हम आपको एक ऐसे योगासन के बारे में बता रहे हैं, जो आपकी प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है और गर्भधारण की प्रक्रिया को आसान बना सकता है।कैमल पोज को करने का सही तरीका- सबसे पहले आप योगा मैट पर घुटनों के बल बैठ जाएं।- अब अपने तलवों को फैलाना है और हाथों को एड़ियों पर रखें।- रीढ़ की हड्डी को पीछे की ओर झुकाएं।- गर्दन पर दबाव डाले बिना ऊपर की ओर देखें।- कमर से घुटनों तक के हिस्से को आपको सीधा रखना है।- सिर को ढीला छोड़ दें और छाती को ऊपर की तरफ उठाएं।- इसको आपको कम से कम 10 सेकेंड इस पोजिशन को होल्ड करने की कोशिश करना।- शुरुआत में आपको 10 सेकेंड के लिए ऐसा करें और फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।- कुछ समय इस पोजिशन को होल्ड करें और फिर वापिस नॉर्मल पोजिशन में आ जाएं।कंसीव करने में कैसे मदद करता है कैमल पोज?रिप्रोडक्टिव एरिया में बढ़ता है ब्लड सर्कुलेशनइस योगासन करने से पेल्विक एरिया में ब्लड फ्लो बेहतर होता है। इससे ओवरी और यूट्रस बेहतर तरीके से काम करता है।हार्मोन्स को करता है बैलेंस- इस आसन के करने से एंडोक्राइन सिस्टम को हेल्दी बनाता है और हार्मोन्स बैलेंस करने में मदद करता है।- यह कंसीव करने के लिए बेहद जरुरी है। इसे करने से फर्टिलिटी भी बूस्ट होती है।तनाव और एंग्जायटी कम होती है कंसीव करने के लिए शरीर का स्ट्रेस फ्री होना जरुरी है। ऐसे में ये आसन तनाव को दूर करने में मदद करता है और मन को शांत करता है। पेल्विक एरिया में लचीलापन आता है। इस आसन को प्रतिदिन करने पेल्विक एरिया में लचीलापन आता है और कंसीव करने में आसानी होती है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:58:29 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: तेल बदल&#45;बदलकर इस्तेमाल करने से सेहत पर क्या असर होता है, आइए जानें</title>
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<description><![CDATA[ भारतीय किचन में कुकिंग ऑयल का इस्तेमाल ही ना हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। अक्सर हम अपनी किचन में कुकिंग ऑयल को कई अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल करते हैं। लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब एक ही कुकिंग ऑयल को लंबे समय तक किचन का हिस्सा बना दिया जाता है। अगर समय-समय पर तेल बदलकर इस्तेमाल ना किया जाए तो इससे सेहत को कई तरह के नुकसान भी उठाने पड़ सकते हैं।हालांकि, इसका मतलब हर दिन तेल बदलना नहीं है, बल्कि समय-समय पर जरूरत और खाना बनाने के तरीके के हिसाब से अलग तेल चुनना है। तो चलिए जानते हैं कि तेल बदल-बदलकर इस्तेमाल करने से सेहत पर किस तरह प्रभाव पड़ता है-इसे भी पढ़ें: महिलाओं में White Discharge और थकान का रामबाण इलाज, अपनाएं ये 2 Ayurvedic Home Remedyफैटी एसिड बैलेंस होता है बेहतर  अमूमन लोग अपनी किचन में ऐसे तेलों का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं, जिनमें ओमेगा-6 काफी ज्यादा होता है। सूरजमुखी, सोयाबीन, कॉर्न, रिफाइंड तेल, सभी में ओमेगा-6 काफी मात्रा में पाया जाता है। वहीं अलसी, अखरोट, सरसों या कैनोला का तेल जैसे ओमेगा 3 रिच तेल कम ही भारतीय किचन में देखने को मिलते हैं। लेकिन जब आप तेल बदल-बदलकर इस्तेमाल करते हैं तो इससे फैटी एसिड बैलेंस करने में मदद मिलती है। याद रखें कि आपके शरीर को ओमेगा-6 और ओमेगा-3 दोनों की जरूरत होती है।   शरीर को मिलता है पर्याप्त न्यूट्रिशनजब कुकिंग में तेल को बदल-बदलकर इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे शरीर को पर्याप्त न्यूट्रिशन मिलता है। दरअसल, ऐसा कोई तेल नहीं है, जिसमें सभी तरह के न्यूट्रिएंट्स या फैटी एसिड सही मात्रा में हों। जहां कुछ तेलों में मोनोअनसैचुरेटेड फैट ज्यादा होते हैं, कुछ में पॉलीअनसैचुरेटेड फैट और कुछ में ओमेगा-3 या ओमेगा-6 बेहतर मात्रा में मिलते हैं। साथ ही, तेल में अपने एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन भी मौजूद होते हैं। मसलन, कच्चे जैतून का तेल में ओलियोकैंथल नेचुरल पेनकिलर की तरह काम करता है। इसी तरह, राइस ब्रान ऑयल में पाया जाने वाला गामा-ओरिजैनॉल कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है। एवोकाडो तेल आंखों और स्किन के लिए अच्छा माना जाता है।सेल्स की दीवारों पर पड़ता है अच्छा असरयह तो हम सभी जानते हैं कि शरीर की हर कोशिका यानी सेल की दीवार चर्बी से बनी होती है। इसलिए, आप जैसा तेल खाएंगे, वैसी ही चर्बी सेल की दीवारों में लग जाएगी। ऐसे में अगर आप सिर्फ एक ही तरह का तेल खाएंगे तो इससे आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। मसलन, अगर आप सिर्फ नारियल तेल खाएंगे तो तुम्हारी सेल की दीवारें सख्त हो जाएंगी। जिसकी वजह से हार्मोन सिग्नलिंग, इम्यून सिस्टम, सब धीमा हो जाता है। इसी तरह, अगर सिर्फ ओमेगा-6 रिच तेल खाते हैं तो इससे दीवारें सूजन वाली हो जाएंगी। तेल के रोटेशन से हर कोशिका की दीवार बैलेंस्ड बनती है।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:58:28 +0530</pubDate>
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<title>महिलाओं में White Discharge और थकान का रामबाण इलाज, अपनाएं ये 2 Ayurvedic Home Remedy</title>
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<description><![CDATA[ क्या आपको भी पूरे दिन वजाइना में गीलापन महसूस होता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। वजाइनल डिस्चार्ज एक नहीं, कई तरह का होता है। वैसे यह कब नॉर्मल होता है और कब आपको इस पर ध्यान देने की जरुरत है, तो यह हर महिला को पता होना चाहिए। अक्सर वजाइनल डिस्चार्ज के साथ स्मैल आना, गाढ़ा डिस्चार्ज होना या डिस्चार्ज का रंग एकदम से बदल जाना सही नहीं है। दिनभर गीलापन महसूस करना और डिस्चार्ज के साथ कमजोरी भी महूसस होती है। दरअसल, ये शरीर में मौजूद कफ और कमजोर पाचन से जुड़ा है। यदि आपके साथ रोजाना यही हो रहा है, तो आपको ये उपाय जरुर करना चाहिए। जीरा, धनिया और सौंफ का पानी पिएं- आपको बता दें कि, योनि में दिनभर में गीलापपन महसूस होने की दिक्कत कफ या पित्त के बढ़े हुए होने के कारण होता है। वैसे यह हार्मोनल असंतुलन की वजह भी हो सकता है।- ऐसे में डाइजेशन और दोषों को बैलेंस करने में ये पानी मदद करता है।- हार्मोन्स बैलेंस करने में भी यह काफी मदद करता है। ये पानी एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों से भरपूर होता है। इससे वजाइना का पीएच लेवल बैलेंस होता है और खुजली, डिस्चार्ज व दुर्गंध कम होती है।- इस पानी से वजाइनल डिस्चार्ज के साथ कमर दर्द और थकान भी दूर होती है और मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है। - इसके लिए आपको आधा चम्मच जीरा, आधा चम्मच धनिया के बीज और आधा चम्मच सौंफ के बीज ले सकते हैं। - इसके बाद रातभर एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें और सुबह करीब आधा रह जाने तक उबालें और दिन में एक बार जरुर पिएं।चावल का पानी पिएं- हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, चावल का पानी को आयुर्वेद में काफी फायदेमंद माना जाता है। यह व्हाइट डिस्चार्ज में आराम दिलाता है, बल्कि यूटीआई की दिक्कत भी दूर होती है।- वैसे ये पचाने में भी हल्का होता है। इससे हैवी पीरियड्स और ब्लीडिंग डिसऑर्डर को भी दूर करता है।- हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि इसकी तासीर ठंडी होती है। यह शरीर की गर्मी को दूर करता है।- इसके लिए आपको 1 कटोरी चावल को एक बार धोना है।- फिर इसको किसी मिट्टी के बर्तन या फिर स्टेनलेस स्टील के बर्तन में डालें।- इसमें पानी भरकर कुछ घंटों के लिए छोड़ दें।- चावल को पानी में ही थोड़ा मैश करें।- इसको आप छानकर एक गिलास में भर लें और पूरे दिन में इसे कभी भी पी सकते हैं।- इस बात का ध्यान रखना कि इसको स्टोर नहीं करना है, बल्कि रोज नया-ताजा बनाएं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 09:58:28 +0530</pubDate>
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<title>Iron Deficiency: शरीर में घट रहा है Iron? अपनी Diet में शामिल करें ये 5 Super Foods, लौट आएगी Energy</title>
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<description><![CDATA[ आयरन हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी खनिज है। आयरन खून में हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है, जोकि ऑक्सीजन को पूरी बॉडी में पहुंचाता है। लेकिन शरीर में अगर आयरन की कमी हो जाती है, तो कई सेहत संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन आयरन की शुरूआती लक्षणों को लोग अनदेखा करते हैं। जिससे समस्या गंभीर हो सकती है। वहीं समय रहते आयरन की कमी को पहचानकर अपनी डाइट में सुधार करना जरूरी होता है।आयरन युक्त भोजन और सही डाइट लेने से शरीर की एनर्जी बढ़ती है। कमजोरी दूर होती है और इम्यूनिटी भी मजबूत होती है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में आयरन की कमी ज्यादा देखी जाती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि आयरन की कमी से होने वाले लक्षणों कैसे दूर करें और इसकी कमी को कैसे दूर करें।इसे भी पढ़ें: Yoga For Joint Pain: क्या Knee Pain ने जीना कर दिया है मुहाल? ये 3 Powerful Yoga Asanas देंगे तुरंत आरामआयरन की कमी के लक्षणशरीर में आयरन की कमी होने पर खून में हीमोग्लोबिन कम होने लगता है। साथ ही शरीर की एनर्जी घटने लगती है। आयरन की कमी होने पर लगातार कमजोरी, थकान और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है। होंठ और स्किन पीले पड़ सकते हैं और बाल व नाखून कमजोर हो सकते हैं। आयरन की कमी से सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सांस लेने में परेशानी हो सकती हैं। वहीं आयरन की कमी से काफी ज्यादा सर्दी भी लगती है।ऐसे दूर करें आयरन की कमीआयरन की कमी को दूर करने से आपको अपनी डाइट में बदलाव करना चाहिए। आपको अपनी डाइट में मेथी, पालक और हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करना चाहिए। इसके अलावा मूंगफली, चना, गुड़ और बीन्स जैसी चीजें भी आयरन का अच्छा स्त्रोत होती हैं। फल में आप सेब, चुकंदर और अनार आदि का सेवन कर सकती हैं।डॉक्टर से लें सलाहबता दें कि डॉक्टर की सलाह पर आयरन सप्लीमेंट लेना फायदेमंद हो सकता है। आयरन की सही मात्रा को अवशोषित करने के लिए आपको संतरा, नींबू आदि का सेवन करना चाहिए। इनमें विटामिन C की अच्छी मात्रा पाई जाती है। वहीं इन उपायों को नियमित रूप से अपनाकर शरीर में आयरन की कमी को दूर किया जा सकता है। साथ ही आप कमजोरी और थकान जैसी समस्याओं से भी बच सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:11:57 +0530</pubDate>
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<title>आपकी Low Sodium Diet पहुंचा सकती है Brain को नुकसान! चक्कर और सिरदर्द हैं Warning Sign.</title>
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<description><![CDATA[ खाने में नमक यानी सोडियम की मात्रा कम रखना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है,लेकिन इसे जरूरत से ज्यादा घटा देना भी सही नहीं है। लंबे समय तक बहुत कम सोडियम लेने से शरीर में कमजोरी, चक्कर आना और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए संतुलित मात्रा में सोडियम का सेवन करना ही बेहतर रहता है।सोडियम शरीर के लिए जरूरी तत्व है, जो मांसपेशियों के सही कामकाज, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने और शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। आमतौर पर लोग ज्यादा नमक के नुकसान के बारे में जानते हैं, लेकिन यह कम ही लोग समझते हैं कि लंबे समय तक बहुत कम सोडियम लेना भी नुकसानदेह हो सकता है। खासतौर पर बुजुर्गों में लो-सोडियम डाइट अपनाने से कमजोरी, चक्कर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।अक्सर इस समस्या को हाइपोनेट्रिया कहलाती है। आइए आपको बताते हैं सोडियम का कम होना कैसे शरीर को नुकसान पहुंचाता है, इसके क्या लक्षण हैं और इसे कैसे बैलेंस करें।क्या समस्याएं होती है?- मितली- सिरदर्द- मांसपेशियों में ऐंठन- भ्रमहाइपोनेट्रेमिया के ये होते हैं कारणहाइपोनेट्रेमिया होने का सबसे बड़ा कारण होता है थोड़े ही अंतराल में ज्यादा मात्रा में पानी पी लेना, जिसकी वजह से खून में सोडियम का लेवल कम हो जाता है। ज्यादा मेहनत करने वाले खेल खेलने वाले खिलाड़ियों में भी पसीने के जरिए सोडियम का लॉस होता है। इन कारणों से भी सोडियम की मात्रा लाइट होती है-- कुछ खास दवाएं- हार्ट फेल्यिर, किडनी या लिवर की बीमारी और डायबिटीज- लगातार डायरिया या उल्टी की समस्या बने रहना- हॉर्मोन का असंतुलन- अधिक मात्रा में शराब पीनाब्रेन पर पड़ता है असरयदि हाइपोनेट्रमिया की स्थिति में जल्द मेडिकल सहायता ना दी जाए तो ब्रेन को स्थायी रुप से नुकसान हो सकता है। इससे मुख्य रुप से ब्रेन के नर्व सेल्स डिहाइड्रेट और डैमेज होते हैं। सोडियम करता है ये कामबॉडी अच्छे से काम करें, तो इसके लिए सोडियम का रोल मुख्य होता है-- शरीर में फ्लूइड की मात्रा बैलेंस करना।- नर्व्स और मसल्स के फंक्शन में मदद करना।ऐसे मेंटेन करें सोडियम का लेवल- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। एक बार में ज्यादा पानी पीने से बचें।- इसके साथ ही हेल्दी, बैलेंस डाइट लें। फ्रोजन प्रोडक्ट या प्रोसेस फूड के लेवल को जरुर पढ़ें।- खाने में ऊपर से नमक बिल्कुल न डालें और हाई सोडियम स्नैक्स लेने से बचें।- शराब का सेवन ना करें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:17:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Yoga For Joint Pain: क्या Knee Pain ने जीना कर दिया है मुहाल? ये 3 Powerful Yoga Asanas देंगे तुरंत आराम</title>
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<description><![CDATA[ सिर्फ उम्रदराज लोगों में ही नहीं बल्कि कम उम्र के लोगों में भी जोड़ों के दर्द की समस्या देखने को मिलती है। वहीं बदलती लाइफस्टाइल और अनहेल्दी डाइट के कारण लोगों को कई तरह की सेहत संबंधी समस्याएं होती हैं। जिनमें घुटनों और कमर का दर्द आम समस्या है। अक्सर हर उम्र के लोगों को घुटनों में दर्द का अनुभव होता है। वहीं इस दर्द को कम करने के लिए आप अपनी डेली रूटीन में योग को शामिल कर सकते हैं। लेकिन गंभीर मामलों में डॉक्टर की सलाह जरूरी लेना चाहिए। लेकिन आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसे योगासन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका अभ्यास करने से आप घुटनों के दर्द और अकड़न से राहत पा सकते हैं।इन योगासनों से पाएं घुटनों के दर्द से राहतत्रिकोणासनइस आसन का अभ्यास करने से घुटने के जोड़ के आसपास की मसल्स को टारगेट करता है। इस आसन को करने से क्वाड्रिसेप्स को मजबूत करने, लचीलेपन में सुधार और घुटनों की स्थिरता को बढ़ाने में मदद करता है।इसे भी पढ़ें: आपकी Low Sodium Diet पहुंचा सकती है Brain को नुकसान! चक्कर और सिरदर्द हैं Warning Sign.ऐसे करें त्रिकोणासनइस आसन को करने के लिए सबसे पहले पैरों को करीब 3-4 फीट की दूरी पर रखकर खड़े हों।फिर दाहिने पैर को 90 डिग्री के कोण पर बाहर की तरफ मोड़ें। वहीं बाएं पैर को थोड़ा अंदर की तरफ मोड़ें।अपनी आर्म्स को जमीन के पैरेलल फैलाएं।इसके बाद दाहिने पैर पर झुकें और अपर बॉडी को दाहिने पैर की तरफ नीचे रखें।दाहिने हाथ को टखने, काफ या फर्श पर रखें, वहीं बाएं हाथ को छत की ओर बढ़ाएं।अब दोनों पैरों को सीधा रखें और अपनी जांघ की मांसपेशियों को शामिल करें।30 सेकेंड से लेकर 1 मिनट तक इस मुद्रा में रहें और फिर यह दूसरी ओर से दोहराएं। ऐसे करें वीरभद्रासन IIखड़े होकर इस आसन की शुरूआत करें और फिर बायां पैर पीछे ले जाएं। अब दायां पैर आगे की तरफ रखें।अपने दाहिने घुटने को 90 डिग्री के कोण पर मोड़ें। यह टखने के साथ अलाइन हों।अपनी आर्म्स को जमीन के समानांतर फैलाएं और हथेलियों को नीचे की ओर रखें।अपने कंधों को ढीला रखें और फिर दाहिनी उंगलियों पर अपनी नजर रखें।अब 30 सेकेंड से लेकर 1 मिनट तक इस पोज में रहें और फिर दूसरी तरफ जाएं।ऐसे करें वृक्षासनवृक्षासन का अभ्यास करने से पहले खड़े हो जाएं और अपना वेट अपने दाहिने पैर पर डालें।अब बाएं पैर को उठाएं और घुटने के जोड़ से बचते हुए दाहिने पैर की भीतरी जांघ पर रखें।अपनी हथेलियों को अपनी छाती के सामने एक साथ लाएं। या अपनी बाहों को ऊपर की तरफ फैलाएं।अब संतुलन के लिए अपनी आंखों को एक निश्चित बिंदु पर केंद्रित करें।फिर 30 सेकेंड से एक मिनट तक इसी मुद्रा में रहें और फिर दूसरे पैर पर आ जाएं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 20:17:49 +0530</pubDate>
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<title>Health Alert! व्हाइट डिस्चार्ज में भूलकर भी न खाएं ये 5 चीजें, बढ़ सकता है Infection का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ ज्यादातर महिलाओं को व्हाइट डिस्चार्ज या सफेद पानी की समस्या रहती है। अक्सर महिलाएं समझ नहीं पाती कि इसे कैसे कंट्रोल करें। असल में कई लोग दवाइयों के साथ-साथ डाइट पर ध्यान नहीं देते हैं, जबकि खान-पान का सीधा असर इस समस्या पर पड़ता है। ऐसी कई चीजों हैं जिनके खाने से समस्या और भी बढ़ सकती है। यदि आप बार-बार होने वाले डिस्चार्ज की समस्या से परेशान हैं, तो जरूरी है कि अपनी डाइट में थोड़े बदलाव करें। इस लेख हम आपको बताएंगे कि किन चीजों को अपनी डाइट में शामिल नहीं करना चाहिए। आइए आपको बताते हैं कौन-सी 5 चीजें, जिनको भूलकर भी सेवन नहीं करना चाहिए।डाइट कंट्रोल क्यों जरूरी है?व्हाइट डिस्चार्ज केवल एक साधारण समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर में हो रहे किसी आंतरिक असंतुलन का संकेत भी हो सकता है। गलत खान-पान की आदतें इस समस्या को और बढ़ा सकती हैं, इसलिए संतुलित और सही आहार लेना बहुत जरूरी है।अनानासअनानास की तासीर काफी एसिडिक होती है, जो शरीर में गर्मी बढ़ा सकती है। इसके अधिक सेवन से वजाइनल डिस्चार्ज ज्यादा हो सकता है और जलन या इरिटेशन भी महसूस हो सकती है।मशरूमअसल में मशरूम एक प्रकार का फंगस है, जो कुछ मामलों में यीस्ट  (कैंडिडा) की ग्रोथ को बढ़ाता है और नम व ठंडी तासीर के कारण डिस्चार्ज बढ़ सकता है। यदि पहले से यीस्ट इंफेक्शन है, तो इसका सेवन भूलकर भी न करें।पत्तागोभी और फूलगोभीइन दोनों सब्जियों की तासीर ठंडी और नमी बढ़ाने वाली होती है, जिससे शरीर में सूजन बढ़ सकती है, वजाइनल डिस्चार्ज ज्यादा हो सकता है और गैस व ब्लोटिंग की समस्या भी हो सकती है।कद्दूकद्दू की सब्जी ज्यादातर लोग कम खाना पसंद करते हैं, लेकिन आपको यह सब्जी अधिक पसंद है। आप कद्दू की सब्जी खाते हैं, तो सफेद पानी समस्या ज्यादा बढ़ सकती है।लौंगवैसे लौंग का प्रयोग सबसे ज्यादा मसाला में किया जाता है। अगर आप लौंग का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं, तो यह वजाइनल पीएच बैलेंस को बिगाड़ सकता है। इससे इंफेक्शन बढ़ने का खतरा रहता है, जलन और असहजता हो सकती है।व्हाइट डिस्‍चार्ज को कंट्रोल करने के टिप्‍स- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।- डाइट प्रोबायोटिक फूड्स शामिल करें।- अधिक मीठा और जंक फूड खाने से बचें।- साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:47:04 +0530</pubDate>
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<title>Intermittent Fasting: वजन घटाने का यह Popular Trend सेहत पर पड़ सकता है भारी, जानें Side Effects</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में &#039;इंटरमिटेंट फास्टिंग&#039; वजन घटाने और फिटनेस के लिए सबसे लोकप्रिय डाइट ट्रेंड बना हुआ है। इसमें एक व्यक्ति एक निश्चित समय के लिए उपवास करता है और बाकी समय भोजन करता है। वहीं कुछ शोध में यह सामने आया है कि बिना एक्सपर्ट की सलाह के और अधूरी जानकारी के &#039;इंटरमिटेंट फास्टिंग&#039; अपनाना शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। वहीं यह फास्टिंग सिर्फ कैलोरी को कम करने का तरीका नहीं, बल्कि यह शरीर के हार्मोनल असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को पूरी तरह से बदल देता है।हालांकि &#039;इंटरमिटेंट फास्टिंग&#039; के कई लाभ भी होते हैं। तो वहीं इसके साइड इफेक्ट्स जैसे ज्यादा कमजोरी, हार्मोनल असंतुलन, चिड़चिड़ापन और पाचन संबंधी समस्याएं देखने को मिलती हैं। विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और डायबिटीज के मरीजों के लिए यह इंटरमिटेंट फास्टिंग एक बड़ी मुसीबत बन सकता है। इसलिए किसी भी बदलाव से पहले इसके नकारात्मक पहलुओं को समझना जरूरी है।इसे भी पढ़ें: Health Alert! व्हाइट डिस्चार्ज में भूलकर भी न खाएं ये 5 चीजें, बढ़ सकता है Infection का खतरामेंटल हेल्थ पर असरइंटरमिटेंट फास्टिंग का सबसे गहरा और पहला असर हमारे हार्मोन्स और दिमाग पर होता है। लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर में &#039;कोर्टिसोल&#039; का लेवल बढ़ सकता है। जिस कारण नींद न आने और तनाव की समस्या होती है।महिलाओं पर असरइंटरमिटेंट फास्टिंग विशेष रूप से महिलाओं के लिए खतरनाक है। क्योंकि य़ह फास्टिंग महिलाओं के मासिक चक्र को बाधित कर सकता है। वहीं शुगर लेवल में बार-बार होने वाले उतार-चढ़ाव होने से व्यक्ति को दिनभर धुंधलापन, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी महसूस हो सकती है।पोषक तत्वों की कमीइस फास्टिंग के दौरान लोग सिर्फ फैट नहीं बल्कि मांसपेशियों को धीरे-धीरे खोने लगते हैं। जब आपके शरीर को पर्याप्त समय तक पोषण नहीं मिलता है। तो शरीर ऊर्जा के लिए मांसपेशियों को तोड़ना शुरूकर देता है। अगर आपके आहार में प्रोटीन की सही मात्रा नहीं है, तो वेट तो कम होगा। लेकिन शरीर में ढीलापन और कमजोरी आ जाएगी। भोजन की सीमित अवधि की वजह से शरीर को मिनरल्स और विटामिन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते हैं।एक्सपर्ट की सलाह लेंहर किसी के शरीर के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग उपयुक्त नहीं है। लो ब्लड प्रेशर, टाइप-1 डायबिटीज और ईटिंग डिसऑर्डर के शिकार लोगों को इस फास्टिंग से बचना चाहिए। अगर आप इसको शुरू करना चाहते हैं, तो अपने शरीर को अचानक से झटका देने की जगह धीरे-धीरे बदलाव करें। साथ ही पर्याप्त पानी का सेवन करें।वहीं किसी डायटीशियन या डॉक्टर से परामर्श लेकर अपना डाइट चार्ट तैयार कर लें। फिटनेस का मतलब सिर्फ पतला होना नहीं बल्कि शरीर का अंदरूनी रूप से संतुलित और मजबूत होना है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:47:03 +0530</pubDate>
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<title>Women Health: फॉल्स लेबर पेन असली डिलीवरी दर्द नहीं, जानें दोनों के बीच का बड़ा अंतर</title>
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<description><![CDATA[ प्रेग्नेंसी के तीसरे ट्राइमेस्टर में होने वाला पेन हमेशा डिलीवरी का संकेत नहीं देता है। बता दें प्रेग्नेंसी के तीसरे ट्राइमेस्टर में होने वाला पेन कई बार प्रोड्रोमल यानी की फॉल्स लेबर पेन भी हो सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रोड्रोमल महिला के शरीर को असली लेबर पेन के लिए तैयार करता है। लेकिन इसको डिलीवरी की शुरूआत नहीं माना जा सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको प्रेग्नेंसी के तीसरे ट्राइमेस्टर में होने वाला पेन प्रोड्रोमल यानी की फॉल्स लेबर पेन के बारे में बताने जा रहे हैं। साथ ही यह भी जानेंगे कि इससे कैसे निपटा जा सकता है।जानिए क्‍या है प्रोड्रोमल लेबरप्रोड्रोमल लेबर प्रसव प्रोसेस का एक सामान्य हिस्सा है। इस दौरान महिला के पेट में आने वाले कॉन्ट्रैक्शन और कभी-कभी एक्टिव लेबर के कॉन्ट्रैक्शन जितना दर्दनाक लग सकता है। यह समय-समय पर आते हैं और कुछ मिनटों तक ही रहते हैं।इसे भी पढ़ें: World Liver Day: भारत में क्यों बढ़ रहा Liver Damage का खतरा? इन 7 संकेतों को न करें Ignoreमाना जाता है कि यह कॉन्‍ट्रैक्‍शन गर्भ में पल रहे बच्चे को जन्म के लिए सही स्थिति में लाने में मदद करते हैं। वहीं यह महिला के गर्भाशय और पेल्विस की मांसपेशियों को सक्रिय लेबर के लिए भी तैयार करते हैं।समझा जाता है असली लेबर पेनप्रेग्नेंसी की आखिरी तिमाही में प्रोड्रोमल लेबर महसूस होता है। इस कारण कई महिलाएं इसको असली लेबर पेन की शुरूआत समझ लेती हैं। लेकिन इसमें घबराने की कोई जरूरत नहीं है।कब होता है ये दर्दज्यादातर महिलाओं में प्रेग्नेंसी के करीब 37वें सप्ताह के आसपास प्रोड्रोमल लेबर शुरू हो सकता है। लेकिन इसकी अवधि निश्चित नहीं होती है और हर गर्भावस्था और हर महिला में यह अलग-अलग हो सकती है। कभी-कभी फॉल्स लेबर की कॉन्ट्रैक्शन कई दिनों तक भी चल सकती है।दर्द कितनी देर रहता हैबता दें कि आमतौर पर फॉल्स लेबर कॉन्ट्रैक्शन हल्के दर्द वाले होते हैं, जोकि हर 5 मिनट में आ सकते हैं। करीब 60 सेकेंड तक रह सकते हैं। लेकिन समय का साथ इनमें बढ़ोतरी नहीं होती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि महिला की सर्विक्स फैल रही है या फिर वह सही में लेबर पेन में जा रही हैप्रोड्रोमल लेबर के लक्षणसमय के साथ ऐंठन या दर्द नहीं बढ़ना।1 मिनट तक हर कॉन्‍ट्रेक्शन चलता है।पेट के सामने वाले हिस्सा में कड़ापन या कसाव होना।कॉन्‍ट्रेक्‍शन जो पांच मिनट के अंतराल पर होते हैं। फॉल्‍स लेबर पेन से ऐसे निपटेंअगर रात में फॉल्स लेबर पेन शुरू हो तो थोड़ी देर सोने की कोशिश करें।कुछ स्नैक्स खा लें।गुनगुने पानी से नहाएं।पानी या फिर स्पोर्ट्स ड्रिंक पिएं।एक झपकी लें।कोई हल्का-फुल्का काम करें।थोड़ा समय के लिए आराम से टहलें।इस दौरान ऐसा काम करें, जिससे आप रिलैक्स हों, जैसे- संगीत सुनना, किताबें पढ़ना, सुरक्षित हर्बल चाय पीना और ध्यान आदि करना।इन लक्षणों से समझें मह‍िला एक्‍ट‍िव लेबर पेन में हैएक लेख में बताया गया है कि पेल्विक जांच के बिना यह बता पाना संभव नहीं होता है कि फॉल्स लेबर एक्टिव लेबर कॉन्ट्रैक्शन में बदल गए हैं या फिर नहीं।लेकिन कुछ लक्षणों के द्वारा आप इसको समझ सकते हैं। जैसे- अगर कॉन्ट्रैक्शन नियमित अंतराल पर 5 मिनट से कम गैप में होने लगें, या फिर 1 मिनट से ज्यादा समय तक हर कॉन्ट्रैक्शन चले और यह स्थिति लगातार 1 घंटे से ज्यादा बनी रहे। इस स्थिति में आपको गायनोकोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।डॉक्टर से कब संपर्क करेंप्राप्त जानकारी के मुताबिक अगर कॉन्ट्रैक्शन के दौरान प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग हो रही है। या फिर आपको ऐसा लग रहा है कि बच्‍चे की मूवमेंट सामान्‍य से कम हो रही है। तो इस स्थिति में आपको फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:24:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>गर्भवती महिलाओं के लिए राहत! Pregnancy में Paracetamol Use पर बड़ा खुलासा, जानें नई Health Report</title>
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<description><![CDATA[ प्रेग्नेंसी के दौरान हर चीज का ध्यान रखना बेहद जरुरी होता है। डॉक्टर भी कहते हैं कि प्रेग्नेंट महिला को कभी भी किसी भी तरह की दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। प्रेग्नेंसी के समय महिलाओं को चिंता रहती है, तो उन्हें भूलकर भी कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए। हल्का सा सिरदर्द, बुखार होने पर किसी भी तरह की दवा लेना चाहिए। अब मन में सवाल आता है कि महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान पेरासिटामोल सेवन करना चाहिए या नहीं।क्या कहती है रिसर्च? द लैंसेट ऑब्स्टेट्रिक्स गायनेकोलॉजी एंड विमेंथ हेल्थ जर्नल में पब्लिश एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रेग्नेंसी के समय पेरासिटामोल लेने से बच्चों में किसी भी मानसिक विकास ऑटिज्म का खतरा नहीं है। प्रेग्नेंसी के दौरान तेज बुखार आना डॉक्टर की सलाह से पेरासिटामोल ले सकते हैं।क्या है स्टडी में खास एक हालिया शोध में कई अध्ययनों का गहराई से विश्लेषण किया गया, जिसमें यह सामने आया कि इस दवा के उपयोग से बच्चों के विकास पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। कुछ वर्ष पहले आई कुछ रिपोर्ट्स में यह आशंका जताई गई थी कि गर्भावस्था के दौरान पेरासिटामोल लेने से बच्चों में ऑटिज्म और ADHD का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, नए अध्ययन के निष्कर्ष इस धारणा का समर्थन नहीं करते। इसमें स्पष्ट किया गया है कि पेरासिटामोल के सेवन और बच्चों में ऑटिज्म या ADHD के जोखिम के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया।पेरासिटामोल को खाना गलत है?नई स्टडी से पता चला है कि पेरासिटामोल का सीधा संबंध बच्चों की सेहत से नहीं है। जैसे प्रेग्नंसी के समय बार-बार बुखार या दर्द रहना, किसी भी तरह का संक्रमण, ज्यादा तनाव और बेचैनी, जेनेटिक कारण की वजह से बच्चों के न्यूरोडेवलपमेंट पर असर पड़ सकता है। इसलिए पेरासिटामोल को गलत मान लिया गया था।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 20:24:06 +0530</pubDate>
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<title>World Liver Day 2026: बिना लक्षण खराब हो रहा है लिवर, Expert से जानें इसे Healthy रखने के अचूक उपाय</title>
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<description><![CDATA[ भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब जीवनशैली के कारण हम सभी अपनी सेहत का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखते हैं। ऐसे में कई तरह की बीमारियां लोगों को घेर रही है। लिवर से संबंधित बीमारियां आजकल आम होती जा रही हैं। यह हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, लेकिन अक्सर लोग इसकी सेहत पर ध्यान नहीं देते। लिवर शरीर में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालने, भोजन के पाचन में सहायता करने और आवश्यक प्रोटीन के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है।जब आप गलत खानपान को अपनाती है तो लिवर पर असर पड़ता है। शुरुआत में लिवर की बीमारी के लक्षण साफ नहीं दिखते है। बाद में धीरे-धीरे बीमारी बढ़ती है। हर साल 19 अप्रैल को वर्ल्ड लिवर डे (World Liver Day 2026) मनाया जाता है। आइए आपको बताते हैं लिवर खराब के संबंधित लक्षण।खराब जीवनशैली के कारण लिवर में दिक्कत आती हैंलिवर की सेहत बिगड़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण हमारी दिनचर्या और गलत खानपान की आदतें होती हैं। जब हम नियमित रूप से ज्यादा तेल-मसालेदार भोजन, फास्ट फूड और शराब का सेवन करते हैं, तो इसका सीधा असर लिवर पर पड़ता है। इसके अलावा बढ़ता वजन और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी लिवर संबंधी समस्याओं को बढ़ावा देती है। आजकल फैटी लिवर जैसी बीमारी तेजी से फैल रही है, जो शुरुआत में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के पनपती है। यानी आपको शुरुआत में कुछ महसूस नहीं होता, लेकिन अंदर ही अंदर लिवर धीरे-धीरे प्रभावित होता रहता है।इन संकेतों पर ध्यान देना जरुरी है- अगर आपको बार-बार थकान महसूस होना।- अचानक वजन बढ़ना या कम होना।- पेट के ऊपरी हिस्से में हल्का दर्द होना।- आंखों या त्वचा का पीला पड़नालिवर को हेल्दी रखने के ये हैं आसान तरीके- रोजाना खाने में हरी सब्जियां, फल और फाइबर जरुर खाएं।- तला-भुना और जंक फूड से दूर रहे।- शराब और स्मोक से दूरी बनाएं- रोजाना एक्सरसाइज जरूर करें- समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना बहुत जरुरी है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 10:08:46 +0530</pubDate>
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<title>World Liver Day: भारत में क्यों बढ़ रहा Liver Damage का खतरा? इन 7 संकेतों को न करें Ignore</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी 19 अप्रैल को वर्ल्ड लिवर डे मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उदेश्य है लिवर से जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरुकता फैलाना, शुरुआती पहचान को बढ़ावा देना और लिवर के हेल्थ के लिए प्रति लोगों को सचेत करना है। इस साल की थीम है &quot;सॉलिड हैबिट्स, स्ट्रांग लिवर&quot; जिसका मतलब है कि मजबूत आदतें, स्वस्थ लिवर है। भारत में लिवर की बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं। सबसे डराने वाली बात तो यह है कि लिवर की बीमारी के लक्षण तब तक सामने नहीं आते, जब तक कि स्थिति बहुत गंभीर न हो जाए। इसी वजह से लिवर की बीमारियां जल्दी पता नहीं चलती है। हालांकि, कुछ संकतों पर ध्यान देने से बीमारी का पता चल जाता है। आइए आपको इन संकेतों के बारे में बताते हैं।लगातार थकान और कमजोरी महसूस होनाअगर आपको सबसे ज्यादा थकान महसूस होती है तो इसका पहला संकेत यही होता है। जब लिवर ठीक से कम नहीं करता है, तो ब्लड में टॉक्सिंस जमा होने लगते हैं। इससे दिमाग की काम करने की क्षमता और शरीर की एनर्जी प्राभिवत होती है।त्वचा और आंखों का पीला पड़ना जब लिवर बिलीरुबिन को ठीक तरह से संभाल नहीं पाता, तो यह शरीर में इकट्ठा होने लगता है। इसके कारण त्वचा और आंखों में पीला रंग दिखाई देने लगता है, जिसे पीलिया का संकेत माना जाता है। आमतौर पर लोग इसी बदलाव को देखकर डॉक्टर से सलाह लेते हैं, लेकिन कई बार तब तक समस्या काफी गंभीर रूप ले चुकी होती है।भूख में कमी और वजन का अचानक गिरनाअक्सर पाया जाता है कि लिवर खराब होने पर पाचन तंत्र पर सीधा असर दिखने लगता है। भारत की 9% से 32% आबादी फैटी लिवर से परेशान है। आज की जनरेशन में भी भूख लगने जैसे लक्षण आम होते जा रहे हैं, जो लिवर का समस्या का बड़ा संकेत है।पेट में दर्द या सूजनपेट में तरल पदार्थ का जमा होना इस बात का संकेत होता है कि लिवर बुरी तरह प्रभावित हो चुका है। भारत में सिरोसिस के मामलों का एक बड़ा कारण अत्यधिक शराब का सेवन माना जाता है, जिसके चलते पेट फूलने और सूजन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।गहरे रंग का पेशाब और हल्का मलयदि आपके पेशाब का रंग गहरा है और मल का रंग असामान्य रुप से हल्का है, तो यह बाइल के फ्लो में समस्या का संकेत हो सकता है। कई लोग इसे सिर्फ  डिहाइड्रेशन समझकर इंग्नोर कर दते हैं, जो बाद में दिक्कत दे सकता है।आसानी से चोट लगना या ब्लीडिंग होनालिवर शरीर में खून को जमाने वाले जरूरी तत्व तैयार करता है। जब यह अंग कमजोर पड़ जाता है, तो छोटी-सी चोट लगने पर भी अधिक रक्तस्राव होने लगता है या शरीर पर आसानी से नीले निशान उभर आते हैं। कई शोधों के अनुसार, भारत में अनेक लोगों को सिरोसिस की जानकारी तब मिलती है, जब उन्हें खून बहने जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।त्वचा पर खुजली होनाअगर बिना किसी रैशेज या दाने के शरीर पर खुजली होना लिवर की बीमारी का एक छिपा हुआ लक्षण हो सकता है। यह त्वचा के नीचे बाइल सॉल्ट्स जमा होने के कारण होता है, जिसे लोग अक्सर सामान्य त्वचा समझते हैं।समय पर पहचान है जरूरीआपको बता दें कि, लिवर अचानक से फेल नहीं होता बल्कि यह धीरे-धीरे खराब होता है और अक्सर इसमें दर्द भी नहीं होता है। इसलिए समय रहते हुए लिवर की बीमारियों के लक्षणों की पहचान करना बेहद जरुरी है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 10:08:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>दिनभर का Stress और थकान मिटाएगा यह Foot Detox, जानें बॉडी को Relax करने का सीक्रेट</title>
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<description><![CDATA[ दिनभर की थकान, स्ट्रेस और शरीर में भारीपन से परेशान रहते हैं, तो यह लेख सिर्फ आपके लिए है। दरअसल, लंबे समय तक खड़े रहना, भागदौड़ भरी जीवनशैली और मेंटल प्रेशर के कारण आपका शरीर जरुर थका हुआ महसूस करता है। ऐसे में आप इस सिंपल सा Foot Soak किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह केवल पैरों की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण बॉडी रिलैक्सेशन और प्राकृतिक डिटॉक्स प्रक्रिया है, जो शरीर और मन दोनों को आराम पहुंचाती है। गुनगुने पानी में कुछ देर तक पैरों को डुबोकर रखने से थकान कम होती है और रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे पूरे शरीर में ताजगी और हल्कापन महसूस होता है।अगर आप खुद को एनर्जेटिक, फ्रेश और रिलैक्स महसूस करेंगी। रात को सोने से पहले इसे जरुर करें, ऐसा करने से आपको गहरी नींद और अगले दिन आप ज्यादा एक्टिव नजर आएंगे। आइए आपको बताते घर पर आप कैसे पैरों को डिटॉक्स कर सकते हैं।Detox Foot Soak की सामग्री-गुनगुना पानी- 1 बाल्टी-एप्सम सॉल्ट- 1 बड़ा चम्‍मच-एप्‍पल साइडर विनेगर- 1 बड़ा चम्‍मच-रोजमेरी की पत्तियां- 10-अदरक (कद्दूकस या स्लाइस)- 1 छोटा चम्मचDetox Foot Soak की विधि- इन सभी चीजों को अच्छे से मिलाएं।- पैरों को 15-20 मिनट तक इसमें डुबोकर रखना है।- इसके बाद पैरों को हल्के हाथ से नीचे से ऊपर की दिशा में ब्रश करें।- इसे रात को सोने से पहले करें।- इससे आपको गहरी और सुकूम भरी नींद मिलेगी और सुबह आप फ्रेश महसूस करेंगे।- इसकी मदद से आपका ब्लड सर्कुलेशन और लिम्फेटिक फ्लो अच्छा रहता है।Detox Foot Soak क्‍यों हैं फायदेमंद?- इस डिटॉक्स Foot Soak से नर्वस सिस्टम शांत रहता और मानसिक तनाव को कम करता है, जिससे आपको अंदर से सुकून मिलता है।- ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाना है, जिससे शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सजीन और पोषक तत्व सही तरीके से पहुंचते हैं।- पैरों और पूरे शरीर की थकान को कम करके आपको हल्का और रिलैक्स फील कराता है।- शरीर के नेचुरल डिटॉक्स प्रोसेस को सपोर्ट करता है, जिससे टॉक्सिंस बाहर निकलते हैं।- सूजन और भारीपन कम होना, जब आप लंबे समय तक खड़ी रहती है या चलती हैं।- डिटॉक्स फुट सोक मसल्स को रिलैक्स करके दर्द और अकड़न को कम करती है।- इससे शरीर रिचार्ज होता है पूरे दिन की थकान दूर हो जाती है।- इसके साथ ही नींद की क्वालिटी बेहतरीन बन जाती है, जिससे आप सुबह कुछ ज्यादा ही फ्रेश और एनर्जिटिक महसूस बनाते हैं।- यह डिटॉक्स सोक पैरों की स्किन को सॉफ्ट और हेल्दी करता है, इससे ड्राईनेस और रफनेस कम होती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 06:21:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>GIST Cancer: पेट दर्द, थकान को न समझें मामूली, Experts ने GIST Cancer को बताया &amp;apos;Silent Killer&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ दुनियाभर में तेजी से कैंसर की बीमारी बढ़ रही है। जिसका खतरा सभी उम्र के लोगों में बढ़ रहा है। वहीं कुछ दशकों पहले कैंसर को उम्र बढ़ने के साथ या बुजुर्गों को होने वाली बीमारी के रूप में जाना जाता है। लेकिन अब बच्चे भी तेजी से इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल अकेले भारत में 50 हजार बच्चे कैंसर का शिकार हो रहे हैं। वहीं कुछ खास तरह के कैंसर के मामले बच्चों में ज्यादा रिपोर्ट किए जा रहे हैं।वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों की रिपोर्ट्स के हिसाब से हर साल कैंसर के नए मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। पर्यावरणीय प्रदूषण, खराब लाइफस्टाइल, खानपान में गड़बड़ी और समय पर रोग का पता न चलना कैंसर के खतरे को बढ़ाता जा रहा है। वहीं भारत जैसे विकासशील देशों में स्थिति अधिक गंभीर और चिंताजनक है। क्योंकि यहां बड़ी आबादी समय पर स्क्रीनिंग और इलाज के लिए नहीं पहुंच पाती है।इसे भी पढ़ें: Haemophilia Disease: मामूली चोट भी हो सकती है जानलेवा, जानें इस Bleeding Disorder के लक्षणहम सभी अक्सर लंग्स-ब्रेस्ट, सर्वाइकल और ओवेरियन जैसे कैंसर के बारे में सुनते और पढ़ते रहते हैं। एक्सपर्ट की मानें, तो कुछ तरह के कैंसर काफी दुर्लभ होते हैं, जिनकी चर्चा कम होती है। ऐसा ही एक कैंसर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर है, जिसके जोखिमों के बारे में हम सभी लोगों को अलर्ट होना चाहिए।गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर के मामलेयह एक दुर्लभ लेकिन गंभीर तरह का कैंसर है। जोकि पाचन तंत्र में विकसित होता है। आमतौर पर यह कैंसर पेट और छोटी आंत में होता है। वहीं कुछ मामलों में यह बड़ी आंत, भोजन नली और मलाशय में भी हो सकता है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर के मामले बहुत कम होते हैं, लेकिन यह अक्सर धीरे-धीरे बढ़ने वाला कैंसर है। जेनेटिक म्यूटेशन को इस कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है।GIST कैंसर वाले ट्यूमर होते हैं। यह एक तरह से सॉफ्ट टिशू सारकोमा होता है।आमतौर पर ट्यूमर आपके पेट या छोटी आंत में आपके गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में बनते हैं।कुछ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर एक इंच से छोटे हो सकते हैं। आमतौर पर इस तरह के ट्यूमर के कोई लक्षण नहीं होते हैं।गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर की पहचानगैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर और इसके हर बार लक्षण हों यह जरूर नहीं है। कई बार लोगों को इसका तब पता चलता है, जब वह किसी और वजह से सर्जरी या टेस्ट करवाते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो सभी लोगों को पेट से संबंधित कुछ लक्षणों को लेकर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए, जिससे कम समय रहते इसकी पहचान हो सके।अक्सर कब्ज और थकान की दिक्कत होना।अक्सर पेट में दर्द रहना या शौच के साथ खून आना।बिना किसी प्रयास के वेट लॉस होना।भूख न लगना या फिर खाने की इच्छा न होना।वहीं उल्टी के साथ खून आना।कैंसर की वजहइस कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम जेनेटिक म्यूटेशन माना जाता है। अधिकतर मामलों में KIT या PDGFRA जीन में बदलाव की वजह से कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती है और ट्यूमर का रूप ले लेती है। आमतौर पर यह म्यूटेशन पर जन्म के समय नहीं होता है। बाद में यह विकसित हो सकता है। इसलिए ज्यादातर मामलों में इसको वंशानुगत कैंसर नहीं माना जाता है। आमतौर पर इस कैंसर का खतरा 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में देखा जाता है।कुछ दुर्लभ जेनेटिक सिंड्रोम जैसे न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप-1 से पीड़ित लोगों में कैंसर और ट्यूमर होने की आशंका बढ़ जाती है।वहीं जिन लोगों में पहले किसी तरह का ट्यूमर रहा हो, या जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो। उनमें भी यह जोखिम ज्यादा हो सकता है।बचावहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो आमतौर पर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर को रोका नहीं जा सकता है। क्योंकि यह पर्यावरणीय या लाइफस्टाइल फैक्टर्स के बजाय जेनेटिक म्यूटेशन के कारण से होते हैं।अब तक इसके बचाव का कोई पुख्ता तरीका नहीं खोजा गया है। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो हेल्दी लाइफस्टाइल जैसे- व्यायाम करें और पौष्टिक आहार लें, वहीं स्मोकिंग से दूरी बनाकर रखें। यह कैंसर के जोखिमों को कम करने के साथ इम्युनिटी को बढ़ाने में मददगार हो सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 06:21:55 +0530</pubDate>
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<title>Morning Drink: पेट की चर्बी मक्खन की तरह पिघलेगी, Gym जाए बिना होगा तेजी से Weight Loss</title>
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<description><![CDATA[ भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब लाइफस्टाइल के चलते वजन का बढ़ना आम हो गया है, लेकिन इसको कम करना काफी मुश्किल होता है। इसके लिए महिलाएं जिम, डाइटिंग और कठिन रुटीन को फॉलो करती हैं, फिर भी वजन कम नहीं कर पाती है। आज हम आपको इस लेख में ऐसा तरीका बताने जा रहे हैं, जो नेचुरल भी है, असरदार भी और इसे फॉलो करना भी बेहद आसान है।वजन कम करने के लिए आप रोजाना मॉर्निंग में एलोवेरा, आंवला और अंबा हल्दी का बना हुआ जूस जरुर पिए। यह न केवल वेट लॉस बल्कि शरीर को अंदर से जूस करके आपको हल्का, एनर्जेटिक और ग्लोइंग भी बनाता है। आइए आपको इस जूस को बनाने के फायदे बताते हैं।स्पेशल वेट लॉस जूस की सामग्री-एलोवेरा जेल- 2 चम्‍मच-आंवला- 1 छोटा (या 1 चम्मच आंवला जूस)-अंबा हल्दी- 1/4 चम्‍मच (पाउडर या कच्ची)-पुदीने की पत्तियां- 4-5-पानी- 1 गिलासस्पेशल वेट लॉस जूस कैसे लें?- ऊपर बताई हुई सभी सामग्री को एक साथ ब्लेंड करें और फ्रेश जूस को तैयार करें।- अब इसमें पुदीने की पत्तियां भी मिलाएं।- रोजाना सुबह खाली पेट पिएं।- जब आप इस जूस पी लें, कम से कम 20-30 मिनट तक कुछ भी न पिएं।- इसको लगातर आप 2-3 हफ्तों तक सेवन करें।इस मॉर्निंग जूस के अनगिनत फायदे- यह शरीर को डिटॉक्स करता है, जिससे शरीर में हल्कापन फील होता है।- पेट की चर्बी धीरे-धीरे मक्खन की तरह पिघलने लगती है।- लिवर साफ और मजबूत बना रहता है।- डाइजेशन बेहतर होता है।- इस जूस के सेवन से हार्मोनल बैलेंस बेहतर होता है।- स्किन और बाल हेल्दी बनते हैं।- एनर्जी लेवल भी बढ़ेगा।आंवला के फायदे- आयरन लेवल को सही करता है।- इम्यूनिटी को बूस्ट करता है।- मोटापा कम करता है।- त्रिदोष को बैलेंस करता है।- चेहरे पर ग्लो आता है और हेयर फॉल कम होता है।एलोवेरा के फायदे- एलोवेरा पित्त दोष को बैलेंस करता है।- वजन को कंट्रोल में रखता है।- लिवर के लिए काफी फायदेमंद होता है।- हार्मोनल बैलेंस को बेहतर करता है।अंबा हल्‍दी- डाइजेशन के लिए यह काफी अच्छी होती है।- लिवर के लिए सबसे बेहतरीन है।- यह एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है।-इसमें एंटी-फंगस होती है।- बालों और त्वचा के लिए किसी अमृत से कम नहीं है।- वजन को कम करता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 06:21:54 +0530</pubDate>
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<title>Haemophilia Disease: मामूली चोट भी हो सकती है जानलेवा, जानें इस Bleeding Disorder के लक्षण</title>
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<description><![CDATA[ हीमोफीलिया एक आनुवांशिक ब्लीडिंग डिसऑर्डर होता है। इस बीमारी में ठीक तरह से ब्लड का क्लॉट नहीं बन पाता है। जिससे ब्लड लंबे समय तक पीड़ित व्यक्ति से बहता रहता है। चोट या दुर्घटना में यह जानलेवा भी साबित होता है, क्योंकि ब्लड का बहना जल्दी बंद नहीं होता है। ऐसा इसलिए होता है कि ब्‍लीडिंग को रोकने के लिए जरूरी क्लॉटिंग फैक्टर्स नाम के प्रोटीन की अनुपस्थिति होती है। आमतौर पर यह बीमारी पुरुषों को होती है, लेकिन बता दें कि यह बीमारी महिलाओं द्वारा फैलती है।यह डिसऑर्डर कितना गंभीर है, यह ब्लड में मौजूद क्लॉटिंग फैक्टर्स की मात्रा पर निर्भर करता है। इसलिए इस बीमारी के बारे में जानना बेहद जरूरी है। जिससे कि इसके बचाव के तरीकों को अपनाया जा सके। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस बीमारी, इसके लक्षण और रोकथाम के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: नीम जूस के गंभीर Side Effects: फायदे की जगह Body को हो सकता है बड़ा नुकसान, हो जाएं अलर्ट!हीमोफीलिया की वाहकएक्सपर्ट की मानें, तो महिलाएं हीमोफीलिया की वाहक होती हैं। हालांकि यह तब तक जिंदगी को खतरे में डालने वाला डिसऑर्डर नहीं माना जाता है, जब तक कि किसी जरूरी अंग से ब्लीडिंग न होने लगे। यह एक गंभीर रूप से कमजोर करने वाला डिसऑर्डर हो सकता है, जिसका कोई इलाज नहीं है।मां या बच्चे के जीन के एक नए उत्परिवर्तन की वजह से करीब एक तिहाई मामले सामने आते हैं। ऐसे मामलों में जब मां वाहक होती है और पिता में यह विकार नहीं होता है। तो लड़कों में हीमोफीलिया होने का 50% अंदेशा होता है। वहीं लड़कियों के वाहक होने का 50% जोखिम रहता है। इस स्थिति में डॉक्टर को दिखाना चाहिए। जब गर्दन में दर्द, धुंधली निगाह, ज्यादा नींद, बार-बार उल्टी और एक चोट से लगातार ब्‍लड बहने जैसे लक्षण दिखाई दें।हीमोफीलिया के प्रकारहीमोफीलिया एहीमोफीलिया बीहीमोफीलिया सीलक्षणजोड़ों में सूजन और दर्दहोनाशरीर पर नीले-नीले निशान बननाचोट लगने पर लंबे समय तक खून बहनाबिना वजह नाक से खून आनाछोटे घाव का भी देर से ठीक होनाहीमोफीलिया के लिए टिप्‍स एक्सपर्ट के मुताबिक पर्याप्त फिजिकल एक्टिविटी बॉडी के वेट को बनाए रखने, मसल्स और हड्डियों की शक्ति में सुधार करने में सहायता कर सकती है। लेकिन आपको किसी भी ऐसी फिजिकल एक्टिविटी से बचना चाहिए, जोकि चोट या फिर ब्लीडिंग की वजह बन सकती है।अपने दांतों और मसूड़ों की अच्छे से साफ-सफाई करें। वहीं डेंटिस्ट से सलाह ले सकते हैं कि मसूड़ों से ब्लड को बहने से कैसे रोका जाए।ब्लड थिनिंग दवा जैसे कि हेपरिन और वार्फरिन से बचना चाहिए। इबुप्रोफेन और एस्पिरिन जैसी ओवर-द-काउंटर दवाओं से बचना चाहिए।वहीं ब्लड इंफेक्शन को रोकने के लिए रेगुलर टेस्ट करें और हेपेटाइटिस ए और बी इंजेक्शन से बारे में अपने डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:31:07 +0530</pubDate>
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<title>नीम जूस के गंभीर Side Effects: फायदे की जगह Body को हो सकता है बड़ा नुकसान, हो जाएं अलर्ट!</title>
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<description><![CDATA[ खराब  लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण लोग अपनी सेहत का ध्यान बिल्कुल भी नहीं रखते हैं। सेहतमंद रहने के लिए लोग ज्यादातर महंगी डाइटिंग और फैंसी चीजों की तरफ जाते हैं। लेकिन हमारे आसपास मौजूद पेड़-पौधों, पत्तों और फूलों के औषधीय गुणों के बारे में जान लें और इन्हें डाइट में शामिल करें,तो आधी से ज्यादा बीमारियां से बचा जा सकता है। आयुर्वेद में नीम के पत्तों को किसी खजाना माना गया है। खून को साफ करने के लिए नीम के पत्ता सबसे अच्छा माना जाता है, वजन कम करने और शरीर को डिटॉक्स करने में नीम बेहद ही फायदेमंद होता है। कुछ लोग रोजाना नीम के पत्तों का जूस पीते हैं, लेकिन वे यह नहीं जानते हैं किन लोगों के लिए यह जूस फायदेमंद नहीं होता है। और अगर आप रोजाना इसके जूस पीने को अपनी सबसे हेल्दी आदत मान रही हैं, तो आप गलत है। नीम के पत्तों के जूस पीने के सही तरीके और मात्रा में पीना चाहिए। आइए आपको इस बारे में बताते हैं।नीम के पत्तों का जूस पीने से पहले जान लें ये जरूरी बातेंहेल्थ के एक्सपर्ट बताते हैं कि नीम के पत्तों का कड़वा स्वाद हमारे शरीर में रूखापन लेकर आता है। यदि आप इसे बिना बैलेंस के रोजाना डाइट में शमिल करते हैं, तो ये शरीर के हर सेल में मौजूद नमी को बाहर खींच लेता है।- नीम की तासीर की प्रकृति ठंडी और शुष्क होती है और ऐसे में इसे लंबे समय तक लेने से बॉडी में ड्राईनेस पैदा हो सकती है।- अगर आप अत्यधिक कड़वी चीजों का सेवन करते हैं, तो ब्लड, मसल्स और फैट समेत शरीर के सात मुख्य टिश्यूज कमजोर होने लगते है। जिससे हेल्दी डाइट लेने के बाद भी आपको कमजोरी और थकान हो सकती है।- लोग सोचते हैं कि नीम का जूस पीकर हमारी बॉडी डिटॉक्स होगी, लेकिन असल में हमारे टिश्यू मास कम होने लगता है।- कड़वा रस अधिक शरीर में पहुंचता है, तो इसका असर वात रस पर पड़ता है, जिससे ऑयल कम होने लगता है और जोड़ों में अकड़न और दर्द हो सकती है। - नीम का जूस पीने से स्किन अधिक ड्राई हो जाते हैं और समय से पहले एजिंग के साइन्स नजर आ सकते हैं।नीम का जूस पीने का सही तरीका- जब आप नीम का जूस पिएं तो साथ में घी जरुर लें। ऐसा करने से आपकी सभी रुखे हर्ब्स के साथ करना चाहिए ताकि शरीर में ड्राईनेस ने आए।- रोजाना नीम का जूस 15-30 मिली से ज्यादा न लें।- एक्सपर्ट के सलाह लेकर ही नीम का जूस पिएं।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:31:07 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: Toilet में Mobile ले जाने की है आदत? आप एक खतरनाक बीमारी को दे रहे हैं न्योता, नई Research में बड़ा दावा</title>
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<description><![CDATA[ स्मार्टफोन हमारी दिनचर्या का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। लोग खाते-पीते, उठते-बैठते और यहां तक कि टॉयलेट में भी फोन का इस्तेमाल करने लगे हैं। टॉयलेट पर बैठकर सोशल मीडिया स्क्रॉल करना और खबरें पढ़ना भले ही एक आम आदत हो, लेकिन यह आदत सेहत के लिए ठीक नहीं है। शोधकर्ताओं के नए अध्ययन में सामने आया है कि टॉयलेट सीट पर बैठकर स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वाले लोगों में बवासीर होने का खतरा फोन न इस्तेमाल करने वालों की तुलना में 46% ज्यादा है।हाल ही में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है। बवासीर को मेडिकल भाषा में हेमोरॉयड्स कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गुदा और मलाशय की नसें सूज जाती हैं। जिससे जलन, दर्द और कई मामलों में रक्तस्त्राव भी हो सकता है। लंबे समय तक टॉयलेट पर बैठे रहना बवासीर के जोखिम कारकों में से एक है। क्योंकि इससे गुदा क्षेत्र की नसों पर लगातार दबाव पड़ता है। इस शोध में 125 वयस्कों को शामिल किया गया है। जोकि नियमित जांच के लिए कोलोनोस्कोपी करवाने आए थे।इसे भी पढ़ें: Double Vision: क्या है &#039;Diplopia&#039; बीमारी, जिसमें एक की दो तस्वीरें दिखती हैं? ये Life Style है बड़ी वजहअनजाने में बिताते हैं ज्यादा समयशोधकर्ताओं के मुताबिक जब लोग टॉयलेट सीट पर बैठकर समाचार, सोशल मीडिया या वीडियो देखने लगते हैं। तो उनको समय का एहसास नहीं होता है। इस वजह से वह अंजाने में लंबे समय तक बैठे रहते हैं। ज्यादा देर तक बैठने से मलाशय और गुदा की नसों पर दबाव बढ़ता है। जिससे सूजन की आशंका बढ़ जाती है। हालांकि इस अध्ययन में जोर लगाने और बवासीर के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है। जिससे यह संकेत मिलता है कि सिर्फ दबाव डालना ही नहीं बल्कि लंबे समय तक बैठे रहना भी बवासीर के खतरे को बढ़ाने का अहम कारण हो सकता है।ऐसे बरतें सावधानीविशेषज्ञों की मानें, तो टॉयलेट पर सिर्फ इतना ही समय बिताना चाहिए। जितना वास्तव में जरूरी हो। अगर मल त्याग में सामान्य से ज्यादा समय लग रहा है, तो यह समझना बेहद जरूरी है कि वजह शारीरिक या फिर आप फोन में व्यस्त हैं। हेल्थ एक्सपर्ट फाइबर युक्त डाइट लेने, नियमित व्यायाम करने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह देते हैं। वहीं बाथरूम में स्मार्टफोन ले जाने की आदत को छोड़ना छोटा लेकिन प्रभावी कदम हो सकता है।भले ही स्मार्टफोन ने हमारी जिंदगी आसान बना दी है, लेकिन हर समय और हर जगह स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। टॉयलेट पर बैठकर फोन चलाने की आदत भले ही आपको मामूली लगती हो, लेकिन यह भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्या की वजह बन सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 20:52:44 +0530</pubDate>
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<title>Double Vision: क्या है &amp;apos;Diplopia&amp;apos; बीमारी, जिसमें एक की दो तस्वीरें दिखती हैं? ये Life Style है बड़ी वजह</title>
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<description><![CDATA[ दुनियाभर में आंखों से संबंधित समस्याओं के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में इसका जोखिम देखा जा रहा है। स्वास्थ्य एक्सपर्ट के मुताबिक आंखें हमारे शरीर का सबसे अहम अंग हैं। यह काफी संवेदनशील भी होती हैं। इसलिए आंखों को स्वस्थ रखने के लिए हमें एक्स्ट्रा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। लेकिन जिस तरह से हमारी डाइट और लाइफस्टाइल में गड़बड़ी बढ़ती जा रही है, आंखों से संबंधित समस्याओं के मामले में काफी बढ़ गए हैं।मोतियाबिंद-ग्लूकोमा आदि समस्या के बारे में अक्सर बात की जाती है। लेकिन क्या आप डबल विजन के बारे में जानते हैं। मेडिकल की भाषा में डबल विजन को डिप्लोपिया कहा जाता है। अगर आपको कोई एक चीज दो-दो दिखती हैं, तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। क्योंकि यह डबल विजन की समस्या हो सकती है।इसे भी पढ़ें: Summer Health: गोंद कतीरा बन सकता है &#039;जहर&#039;, इन 3 लोगों के लिए हैं गंभीर Side Effects डबल विजन के बारे में जानेंइसका मतलब चीजों का दो-दो दिखना है। डबल विजन की समस्या होने पर एक चीज की दो तस्वीरें दिखती हैं।हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो आमतौर पर दोहरी दृष्टि एक अस्थायी समस्या होती है। लेकिन यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। इस समस्या की वजह से ड्राइव करने या फिर चलने-फिरने में दिक्कत होती है।डॉक्टर की मानें, तो आंखों की मांसपेशियों की कमजोरी, स्ट्रोक, नसों में समस्या, थायरॉइड और ब्रेन ट्यूमर के कारण डबल विजन की समस्या हो सकती है। इसके कारणों को समझना और इलाज कराना जरूरी हो जाता है।डबल विजन की दिक्कतेंडबल विजन का मतलब किसी वस्तु का दो दिखना होता है। वहीं डबल विजन के कारण आंखों में दर्द, सिरदर्द, शरीर का संतुलन बिगड़ने में परेशानी, चक्कर आ सकता है। डबल विजन वालों के लिए गाड़ी चलाने या पढ़ने आदि में परेशानी होती है।मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक 60 साल के बाद लोगों में डबल विजन होने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के शिकार लोगों में भी इसका खतरा बढ़ जाता है।डबल विजन की क्यों होती है समस्याकई समस्याओं की वजह से आपको डिप्लोपिया या फिर दोहरी दृष्टि की समस्या हो सकती है। कोई भी ऐसी चीज जो आपके दिमाग, आपकी आंखों या फिर उनको कंट्रोल करने वाली नसों और मांसपेशियों पर असर डालती हैं। इससे डिप्लोपिया की समस्या बढ़ जाती है।निकट-दृष्टि दोष और दूर-दृष्टि दोष के शिकार लोगों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।ड्राई आई सिंड्रोम और मोतियाबिंद वालों में भी इसका खतरा रहता है।जिन लोगों के सिर में चोट लगी है, उनमें भी डबल विजन की समस्या हो सकती है।वहीं कुछ खास न्यूरोलॉजिटक या अन्य सेहत संबंधी समस्याओं जैसे स्ट्रोक, विटामिन बी1 की कमी, डायबिटीज, ब्रेन एन्यूरिज्म और थायरॉइड के मरीजों में खतरा अधिक होता है।क्या करें और कैसे बचेंएक्सपर्ट के मुताबिक अगर आपको डबल विजन है, तो इसका इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि आपको यह समस्या किस कारण से है। कुछ लोगों को सिर्फ चश्मे या फिर कॉन्टैक्ट लेंस से लाभ मिल जाता है। लेकिन अगर आंखों की मांसपेशियां कमजरो होने के कारण ऐसा हो रहा है, जो फिर सर्जरी की जरूरत हो सकती है।इस समस्या से बचने का कोई तरीका नहीं है। लेकिन कुछ सावधानियों के साथ आप इन जोखिमों को कम कर सकती हैं। धूम्रपान न करें, इससे आंखों को ज्यादा नुकसान होता है। स्क्रीन टाइम कम करें और आंखों को चोट से बचाएं। साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर कराएं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 09:34:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Best Flour: Diabetes और Fatty Liver का रामबाण! Diet में शामिल करें कटहल&#45;क्विनोआ के ये 2 Superfood आटे</title>
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<description><![CDATA[ अच्छी सेहत के लिए लाइफस्टाइल में और खानपान में सुधार की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। हम जो भी खाते हैं या हमारी जैसी लाइफस्टाइल है, उसका सेहत पर सीधा असर होता है। यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट भी लोगों को अपनी दिनचर्या सही रखने की सलाह देते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक रिफाइंड आटा यानी मैदा, प्रोसेस्ड फूड, नमक और चीनी वाली चीजों का अधिक सेवन किया जाता है, जिससे डायबिटीज, मोटापा, हाई बीपी और हृदय रोगों का खतरा भी तेजी से बढ़ता है।क्योंकि शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित आहार दुनियाभर में होने वाली क्रॉनिक बीमारियों के प्रमुख कारण है। अगर हम अपनी डाइट में पौष्टिक और फाइबर वाली चीजों की मात्रा को बढ़ाते हैं, तो इससे न सिर्फ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, बल्कि कई बीमारियों का भी खतरा कम हो सकता है। जब खानपान में सुधार की बात होती है, तो लोगों के मन में एक सवाल यह भी होता है कि सेहत के लिए कौन सा आटा अच्छा है।इसे भी पढ़ें: Kids Heart Attack: बदलता Lifestyle बना खतरा, बच्चों में बढ़ रहा High BP और Heart Attack का Risk, एक्सपर्ट्स ने चेतायासेहत के लिए कौन सा आटा अच्छाभारत में गेहूं का आटा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसमें फाइबर, कार्बोहाइड्रेट्स, आयरन और विटामिन बी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। साबुत गेहूं का आटा पाचन को बेहतर करने और ऊर्जा देने में मदद करता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में अन्य तरह के आटे की मांग भी तेजी से बढ़ गई है।पारंपरिक गेहूं के आटे के अलावा आजकल हरे कटहल का आटा और क्विनोआ का आटा भी लोग इस्तेमाल में ला रहे हैं।यह दोनों ऑप्शन पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। यह उन लोगों के लिए खासतौर पर फायदेमंद हैं, जो ब्लड शुगर, पाचन या वजन से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं।क्विनोआ का आटायह एक स्वास्थ्यवर्धन बीज है, यह कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसलिए इसको सुपरफूड माना जाता है। क्विनोआ में फाइबर, मैग्नीशियम, आयरन, पोटैशियम, अमीनो एसिड, मैंगनीज, फॉस्फोरस, विटाबिन बी और फोलेट पाया जाता है। इसमें मौजूद अमीनो एसिड मांसपेशियों की मरम्मत करने और इसके विकास में अहम भूमिका निभाता है। क्विनोआ में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पेट को लंबे समय तक भरा महसूस कराता है। जिससे आप बार-बार खाने से बच जाते हैं।जानिए ये फायदेक्विनोआ के आटे में पोटेशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है, जो बीपी को कंट्रोल करने के साथ बैड कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है।क्विनोआ में मौजूद मैग्नीशियम, विटामिन बी, आयरन और फॉस्फोरस एनीमिया को रोकने में मदद करते हैं।हरे कटहल का आटामधुमेह रोगियों में प्लाज्मा शर्करा के लेवल को कम करने और ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन को कंट्रोल करने में कटहल का आटा काफी कारगर माना गया था। ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन का बढ़ना डायबिटीज का संकेत माना जाता है।टाइप-2 डायबिटीज को कंट्रोल करने वाले पेटेंटेड हरे कटहल के आटे पर नैदानिक परीक्षण में इसको मोटापे और फैटी लिवर को रोकने में कारगर बताया गया था।लिवर और शुगर के लिए फायदेमंदबता दें कि चूहों पर किए गए शोध में पता चलता है कि हरे कटहल के आटे का सिर्फ 3 महीने सेवन करने से वजन वृद्धि को काफी हद तक रोका जा सकता है। वहीं यह लिवर में फैट जमने की समस्या को कम करने में प्रभावी है।शोधकर्ताओं में से एक और हरे कटहल का आटा बनाने वाली कंपनी के मुताबिक गेहूं के आटे के साथ प्लेसबो समूह की तुलना में इससे इंसुलिन संवेदनशीलता में भी सुधार पाया गया है। इससे लिपोजेनेसिस मार्करों और इंफ्लामेशन में भी काफी कमी आ सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 16:52:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>पेट में गैस का &amp;apos;गुब्बारा&amp;apos;? यह Magic Drink सिर्फ 2 मिनट में देगा Instant Relief</title>
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<description><![CDATA[ बिजी लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण कई बार हम सभी पेट संबंधित परेशनियों से गुजरना पड़ता है। एसिडिटी, ब्लोटिंग, गैस इन सभी समस्याओं से हम सभी कभी न कभी जरुरत महसूस करते हैं। खाना खाने के बाद अचानक से पेट टाइट हो जाना, डकार न आना या असहज महसूस होना ये सभी डाइजेशन की गड़बड़ी का संकेत होता है। इन परेशनियों के चक्कर में कई लोग तो दवाओं का सेवन करने लग जाते हैं, हर बार दवा लेना भी ठीक नहीं होता है। अब आपकी किचन में ही इसका असान और असरदार इलाज छिपा हुआ है। इस लेख में हम आपको ऐसी देसी ड्रिंक के बारे में बताने जा रहे है, जो गैस से तुरंत आराम देती है। गैस दूर करने वाले ड्रिंक की सामग्री- नींबू का रस- 1/2- हींग- 1 चुटकी- काली मिर्च- 1 चुटकी- गुनगुना पानी- 1/2 कपगैस के लिए मैजिक ड्रिंक कैसे बनाएं और पिएं?- इसे बनाने के लिए सभी चीजों को अच्छी तरह से मिलाएं।- धीरे-धीरे छोटे घूंट में पिएं।- इसे खाने के बाद या जब भी गैस महसूस हो, तब इसका सेवन कर सकते हैं।ये ड्रिंक कैसे काम करती है?- यह ड्रिंक फंसी हुई गैस को बाहर निकालती है।- पेट की सूजन और भारीपन कम करती है।- डाइजेशन को तुरंत एक्टिव करती है।ड्रिंक में मौजूद चीजों के फायदे- गुनगुने पानी के साथ नींबू का रस लेने से ब्लोटिंग की समस्या कम होती है। यह डाइजेस्टिव जूस को बढ़ाता, इसके साथ ही फैट के डाइजेशन को आसान बनाता है और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है।- गर्म पानी पीन से ब्लोटिंग के लिए आसान और नेचुरल उपाय है। यह डाइजेशन को बेहतर करता है। यह आंतों की मसल्स को रिलैक्स करता है और गुब्बारे की तरह फूली गैस को बाहर निकालता है।- आयुर्वेद में हींग को गैस, अपच और ब्लोटिंग के लिए पारंपरिक उपाय है क्योंकि यह पेट में अग्नि को बढ़ाती है। यह एकदम कर्मिनेटिव की तरह काम करता है, डाइजेशन एंजाइम्स को एक्टिव करता है और पेट में फंसी गैस से राहत दिलाता है।- काली मिर्च डाइजेशन को बेहतर बनाती है और ब्लोटिंग को कम करती है। इसमें मौजूद पिपेरिन डाइजेशन एंजाइम्स को बढ़ाता है, प्रोटीन को तोड़ता है और गैस कम करता है। - इसके साथ ही यह हल्के मूत्रवर्धक की तरह काम करके शरीर में पानी की अतिरिक्त मात्रा को भी कम करता है। इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से आपको पेट में जलन हो सकती है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 16:52:25 +0530</pubDate>
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<title>Summer Health: गोंद कतीरा बन सकता है &amp;apos;जहर&amp;apos;, इन 3 लोगों के लिए हैं गंभीर Side Effects</title>
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<description><![CDATA[ धीरे-धीरे तापमान बढ़ रहा है। भीषण गर्मी और लू से बचने को लिए लोग आयुर्वेद या फिर दादी-नानी के नुस्खों को जरुर अपनाते हैं। इन्हीं में से एक है गोंद कतीरा, जो अपनी कूलिंग प्रॉपर्टीज के लिए जाना जाता है। कई लोग गर्मियों में गोंद कातीरा का सेवन करते हैं लेकिन यह सबके लिए फायदेमंद नहीं है। आइए आपको बताते हैं गोंद कतीरा किन लोगों के लिए नुकसानदायक होता है। आइए आपको गोंद कतीरा खाना सेहत पर भारी पड़ सकता है।किन लोगों के लिए गोंद कतीरा नुकसानदायक हैपीरियड्स के दौरान पीरियड्स के समय महिलाओं को गोंद कतीरा का सेवन करने से परहेज करना चाहिए, खासकर अगर उन्हें पहले से ही ज्यादा दर्द या ऐंठन की समस्या रहती हो। इसकी प्रकृति अत्यधिक ठंडी मानी जाती है, जो शरीर का तापमान जरूरत से ज्यादा कम कर सकती है। ऐसे में पेट दर्द, क्रैम्प्स या ब्लीडिंग से जुड़ी परेशानियां और बढ़ सकती हैं।लो ब्लड प्रेशर की समस्याजिन लोगों का ब्लड प्रेशर अक्सर कम रहता है, उन्हें गोंद कतीरा का सेवन सोच-समझकर करना चाहिए। इसकी ठंडी तासीर के कारण लो बीपी वालों को आलस, चक्कर या अधिक कमजोरी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।आईबीएस (IBS) और ब्लोटिंग भले ही यह कब्ज से राहत देने में मदद करता है, लेकिन अगर आपको अक्सर पेट फूलने या इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की समस्या रहती है, तो इसका सेवन आपके लिए दिक्कत बढ़ा सकता है। कुछ स्थितियों में यह पाचन बेहतर करने की बजाय पेट में गैस, भारीपन या असहजता पैदा कर सकता है।क्या है गोंद कतीरा खाने का सही तरीका?- गोंद कतीरा को कभी भी सूखा नहीं खाना चाहिए। इसे रात भर या कम से कम 7-8 घंटे पानी में भिगोकर रखें जब तक कि यह फूलकर क्रिस्टल जेली जैसा न हो जाए।- जब आप इसका सेवन करें तो दिनभर खूब पानी पिए, क्योंकि यह फाइबर सोखता है। पानी कम पीने पर यह आंतों में फंसकर कब्ज पैदा कर सकता है।- दिन में एक बार 1 से 2 चम्मच भीगा हुआ गोंद कतीरा काफी है।   ]]></description>
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<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 16:52:24 +0530</pubDate>
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<title>Women&amp;apos;s Health Alert: पीरियड का दर्द 1 नहीं 9 तरह का होता है, जानें आपका कौनसा है?</title>
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<description><![CDATA[ महिलाओं को हर महीना पीरियड्स आना एक बायोलॉजिकल प्रक्रिया है। इस दौरान हर महिला पीरियड के दर्द से गुजरती है। कुछ महिलाओं को इन दिनों काफी असहनीय दर्द होता है। वहीं, कुछ महिलाओं को हल्का दर्द महसूस होता है। अक्सर दर्द के कारण महिलाएं अपना रोजमर्रा काम करने में भी दिक्कत आती है। आमतौर पर पीरियड्स का दर्द कम करने के लिए कुछ महिलाएं पैन किलर दवाई लेती हैं, तो कुछ घरेलू नुस्खे या फिर हॉट पैचेज का सहारा लेती हैं। गौरतलब है कि कई महिलाएं नहीं जानती है कि पीरियड पेन एक नहीं बल्कि कई तरह का होता है। ज्यादातर लड़कियां नहीं जानती है कि पीरियड पेन के भी प्रकार होते है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि पीरियड्स में किस टाइप का दर्द होता है और इन 9 प्रकार के पीरियड पेन को आप कैसे पहचान सकती हैं।1 नहीं 9 तरह का होता है पीरियड पेन- हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि कई महिलाओं को हर महीने इन्हीं 9 प्रकार के पीरियड्स का पेन महसूस होते हैं। सबसे पहले पेन का प्रकार है पीरियड क्रैम्प्स यानी एकदम से तेज उठने और धीमा हो जाने वाला दर्द, ये लगभग हर महिला को होता है।- इस दौरान कई महिलाओं को डाइजेशन से जुड़ी दिक्कतें होती हैं और इस वजह से ब्लोटिंग और डाइजेस्टिव पेन होता है। ये दर्द कई महिलाओं को पूरे दिन बना रहता है। - जिन महिलाओं को पीएमएस या पीरियड्स में ब्रेस्ट में भी दर्द होता है। इस समय पर होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण, ब्रेस्ट के टिश्यूज सेंसिटिव हो जाते हैं और ब्रेस्ट में दर्द महसूस होने लगता है।- पीरियड्स के समय कई महिलाओं को सिर में तेज दर्द उठता है। ये दर्द कई बार माइग्रेन के दर्द से भी अधिक तेज होता है। - इस दौरान कई महिलाएं पैरों के दर्द से भी परेशान रहती है। अक्सर पीरियड की शुरुआत होने से पहले पैरों में तेज दर्द महसूस होने लगता है।- इस दौरान कई बार ऐसा भी लगता है कि जैसे आपको पॉटी आएगी और इस वजह से पेट में मरोड़ महसूस हो सकती है।- कुछ महिलाओं को ओव्युलेशन के समय भी हल्का दर्द महसूस होता है। ऐसे में यह जरुरी नहीं है कि हर लड़की को ये सभी प्रकार के दर्द महसूस हो। यह आपके शरीर की प्रकृति, लाफस्टाइल, हार्मोनल बैलेंस और खान-पान समेत कई चीजों से निर्भर करता है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 09:36:03 +0530</pubDate>
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<title>Kids Heart Attack: बदलता Lifestyle बना खतरा, बच्चों में बढ़ रहा High BP और Heart Attack का Risk, एक्सपर्ट्स ने चेताया</title>
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<description><![CDATA[ दुनियाभर में दिल की बीमारियां स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम बनी हुई है। बीते एक दशक का आंकड़ा उठाकर देखा जाए, तो न सिर्फ इन बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा है, बल्कि कम उम्र वाले लोग भी तेजी से इसका शिकार होते जा रहे हैं। किशोरों और युवाओं में भी हार्ट अटैक और इससे होने वाली मौतों की खबरें लगातार सुनने को मिलती हैं। ऐसे में लोगों के मन में एक सवाल यह भी रहता है कि क्या बच्चे भी इसका शिकार हो सकते हैं। क्या 10 साल से कम उम्र के बच्चों को भी हार्ट अटैक का जोखिम हो सकता है।कुछ समय पहले तक हाई कोलेस्ट्रॉल, बढ़ती उम्र या लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों को हार्ट अटैक का प्रमुख कारण माना जाता है। लेकिन अध्ययनों से यह पता चलता है कि खानपान, बदलती लाइफस्टाइल और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कम उम्र में दिल को कमजोर बना रही हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या मासूम बच्चे इन बीमारियों से सुरक्षित हैं या फिर उनमें भी हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है।इसे भी पढ़ें: Women&#039;s Health Alert: पीरियड का दर्द 1 नहीं 9 तरह का होता है, जानें आपका कौनसा है?कम उम्र वालों में हार्ट अटैकहृदय रोग एक्सपर्ट की मानें, तो 20 साल से कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। इसके लिए असंतुलित खानपान और गड़बड़ लाइफस्टाइल एक बड़ा कारण है।ज्यादा नमक, प्रोसेस्ड फूड, ट्रांस फैट और चीनी से भरपूर डाइट धमनियों में फैट जमा करता है। जिस कारण ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है और हार्ट अटैक हो सकता है।वहीं व्यायाम न करना, ऑफिस में लंबे समय तक बैठे रहना, हाई बीपी, बढ़ता मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी स्थितियों ने हार्ट अटैक के जोखिम को कई गुना तक बढ़ा देता है। लंबे समय तक स्ट्रेस की वजह से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है, जिससे हाई बीपी और हार्ट अटैक हो सकता है।10 साल से कम उम्र के बच्चों में हार्ट अटैक का जोखिमआमतौर पर 1 से 3 साल तक के बच्चों में हार्ट अटैक का खतरा कम होता है। इस तरह के मामले काफी ज्यादा दुर्लभ माने जाते हैं। यह उम्र चलने-फिरने और दौड़ने वाला होता है। लाइफस्टाइल में गड़बड़ी की वजह से टॉडलर या प्री-स्कूलर बच्चों में हार्ट अटैक होना दुर्लभ है।हालांकि कुछ बच्चों में हार्ट की खराबी, आनुवांशिक हार्ट और जन्मजात हृदय रोग से संबंधित समस्याओं या कावासाकी बीमारी जैसी दुर्लभ बीमारियों की वजह से दिल संबंधित रोगों और जटिलताओं का खतरा हो सकता है। ऐसे बच्चों में बहुत ज्यादा थकान, तेजी से सांस लेने, चिड़चिड़ापन और दिल की धड़कनों के अनियमित रहने का जोखिम हो सकता है। वहीं कुछ स्थितियों में गंभीर रूप लेने वाली हो सकती है।बच्चों में इस खतरे को ऐसे पहचानेंएक्सपर्ट के मुताबिक वयस्कों में हार्ट अटैक से उलट बच्चों को लाइफस्टाइल के कारण से हार्ट अटैक का जोखिम बहुत कम या न के बराबर होता है। जन्मजात दिल की बीमारी या फिर कावासाकी जैसे रोग ब्लड वेसल पर असर डाल सकती है। जिसकी वजह से दिल तक ब्लड सर्कुलेशन बाधित हो जाता है। ऐसे में अगर आपके बच्चे में जन्मजात दिल की बीमारी है, तो कुछ लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।बच्चों के चलने-दौड़ने, सीने में दर्द या मेहनत के दौरान दर्द होना चेतावनी हो सकता है।बिना किसी वजह के बेहोशी और अचानक गिर जाना भी दिल की बीमारियों का संकेत है।सांस लेने में तकलीफ होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।दिल की धड़कन अनियमित या तेज रहना हार्ट की समस्या हो सकती है।स्किन का रंग पीला या फिर नीला पड़ना भी दिल की सेहत के लिए ठीक नहीं होती है।बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर का खतराबच्चों में बढ़ती दिल की बीमारियों के लिए हाई बीपी को एक बड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है। एक वैश्विक विश्लेषण के मुताबिक पिछले दो दशकों में किशोरों और बच्चों में उच्च रक्तचार के मामले करीब दोगुने हो गए हैं।साल 2000 में यह 3.2% से बढ़कर साल 2020 में 6% से ज्यादा हो गया है।अगर समय रहते इस गंभीर समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो हाई बीपी की वजह से हृदय रोगों और हार्ट अटैक के साथ किडनी संबंधित बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़़ सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 09:36:02 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: मेनोपॉज में क्या खाएं? आसान डाइट टिप्स जो बदल दें आपकी हेल्थ</title>
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<description><![CDATA[ मेनोपॉज ऐसा समय होता है, जब महिला को कई तरह की समसयाओं का सामना करना पड़ता है। अचानक से वजन बढ़ना, पेट पर फैट जमा होना, बार-बार गर्मी लगना, मूड स्विंग्स और थकान का अहसास यह सब बेहद ही सामान्य है। अमूमन इस दौरान समझ में नहीं आता कि खुद को किस तरह फिट रखें। इसका सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपनी डाइट व लाइफस्टाइल का ख्याल रखें।चूंकि, इस फेज में शरीर की जरूरतें बदल जाती हैं, इसलिए स्मार्ट ईटिंग करना बेहद जरूरी होता है। अपनी डाइट में कुछ छोटे-छोटे बदलाव जैसे प्रोटीन इनटेक बढ़ाना, कैल्शियम का ध्यान रखना और प्रोसस्ड फूड को कम करने आप एक हेल्दी लाइफस्टाइल जी सकती हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही डाइट टिप्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें मेनोपॉज के दौरान फॉलो करने से आपको फायदा मिल सकता है-इसे भी पढ़ें: Kids Heart Attack: बदलता Lifestyle बना खतरा, बच्चों में बढ़ रहा High BP और Heart Attack का Risk, एक्सपर्ट्स ने चेतायाप्रोटीन इनटेक पर दें ध्यान  उम्र के इस पड़ाव पर मसल्स जल्दी कम होने लगता है, इसलिए शरीर में ढीलापन बढ़ने लगता है। साथ ही, शरीर का वजन भी बढ़ने लगता है। ऐसे में मसल मास को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी होता है कि आप अपने प्रोटीन इनटेक का खास ख्याल रखें। इसके लिए आप अपनी हर डाइट में दाल, चना, राजमा, पनीर, दही, स्प्राउट्स व एग व्हाइट आदि को जरूर शामिल रखें।कैल्शियम का रखें ख्यालमेनोपॉज के दौरान हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इसलिए, कैल्शियम रिच फूड्स को डाइट में शामिल करना बेहद जरूरी होता है। कोशिश करे कि आप अपनी डाइट में दही, पनीर, तिल, हरी सब्जियां (पालक, मेथी) व रागी आदि को जरूर शामिल करें। इसके अलावा, अपनी हड्डियों की सेहत बनाए रखने के लिए हर दिन 15-20 मिनट धूप भी जरूरी है।जरूर खाएं हेल्दी फैट्सअक्सर महिलाएं फैट का नाम सुनकर दूर भागती हैं। उन्हें लगता है कि फैट का मतलब है वजन बढ़ना, जबकि यह पूरी तरह से सच नहीं है। अगर हेल्दी फैट्स को डाइट में शामिल किया जाए तो इससे हार्मोन बैलेंस रहते हैं। इसलिए, अपनी डाइट में बादाम, अखरोट, अली के बीज व देसी घी आदि को जरूर शामिल करें।  - मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 09:36:01 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: सेंधा नमक का बढ़ता Trend बना थायराइड का कारण, जानें Doctors की क्या है राय</title>
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<description><![CDATA[ नमक हम सभी के जीवन का अभिन्न हिस्सा है। भारतीय रसोई में नमक के बिना खाने की कल्पना करना बहुत मुश्किल है। पिछले कुछ सालों में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। लोग सेंधा नमक को ज्यादा नेचुरल और मिनरल्स से भरपूर मानकर अपने डाइट में शामिल कर रहे हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक सेंधा नमक और आयोडाइज्ड नमक के बीच सबसे बड़ा अंतर &#039;आयोडीन&#039; का है।आयोडाइज्ड नमक हमारी बॉडी में थायराइड ग्लैंड को सही तरीके से काम करने में सहायता करता है। बॉडी में आयोडीन की कमी होने पर थायराइड हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है। जिस कारण मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। जिस कारण वजन बढ़ना, कब्ज, बालों का झड़ना और ज्यादा ठंड लगने जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। सेंधा नमक के बढ़ते क्रेज की वजह से हाल ही के दिनों में &#039;हाइपोथायरायडिज्म&#039; के मामलों में तेजी देखी गई है।इसे भी पढ़ें: Homeopathic Vs Allopathic: Homeopathy vs Allopathy की बहस में बड़ा दावा, बच्चों के लिए कौन सी Medical पद्धति बेस्ट? पढ़ें रिपोर्टआयोडीन की भूमिकाहमारे शरीर की कोशिकाओं के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करने के लिए आयोडीन बहुत जरूर है। एक्सपर्ट के मुताबिक अगर डाइट में आयोडीन युक्त नमक की कमी होती है, तो थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाएगी। जिस कारण शरीर के सभी सेल्स का फंक्शन धीमा पड़ जाता है। इस वजह से लोग सुस्ती और थकान महसूस करने लगते हैं।मिनरल्स की वास्तविकतालोगों को लगता है कि सेंधा नमक मिनरल्स का खजाना होता है। लेकिन जितना मिनरल्स आपको सेंधा नमक से मिलता है, उतना आप आसानी से सामान्य बैलेंड डाइट, सीड्स और नट्स से आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही सेंधा नमक से मिनरल्स पाने के चक्कर में आप इसका ज्यादा सेवन करते हैं, तो हाई बीपी का जोखिम बढ़ सकता है। बढ़ते जोखिमजैसे-जैसे रिफाइंड नमक छोड़सकर लोग पूरी तरह से सेंधा नमक पर निर्भर हो रहे हैं। वैसे-वैसे हाइपोथायरायडिज्म के मामलों में बढ़त देखी जा रही है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के आयोडीन को अपनी डाइट में पूरी तरह बाहर नहीं करना चाहिए।क्या करना चाहिएबता दें कि दोनों नमकों के अपने फायदे हैं। लेकिन संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एक्सपर्ट के मुताबिक सेंधा नमक का सेवन कभी-कभी और सीमित मात्रा में करना चाहिए। लेकिन रोजाना के लिए आयोडीन युक्त नमक को प्राथमिकता दें। अगर आपको भी थायराइड की समस्या है, तो नमक के खुराक में बदलाव करने से एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 12 Apr 2026 23:18:43 +0530</pubDate>
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<title>Homeopathic Vs Allopathic: Homeopathy vs Allopathy की बहस में बड़ा दावा, बच्चों के लिए कौन सी Medical पद्धति बेस्ट? पढ़ें रिपोर्ट</title>
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<description><![CDATA[ होम्योपैथी और एलोपैथी दोनों ही बीमारियों को ठीक करने की मेडिकल पद्धति है। लेकिन दोनों के इलाज करने के तरीके में काफी ज्यादा अंतर है। एलोपैथी की दवाइयों में कंपाउंड को द्रव्य, ठोस और गैस तीनों अवस्थाओं में इस्तेमाल किया जाता है। वहीं आमतौर पर होम्योपैथिक दवाओं को पतला बनाया जाता है। जिससे इसका साइड इफेक्ट्स न के बराबर हो। ऐसे में अक्सर इस बात को लेकर कंफ्यूजन रहती है कि होम्योपैथी और एलोपैथी में कौन सी मेडिकल पद्धति बेहतर है।जो लोग होम्योपैथ से इलाज कराते हैं, उनको होम्योपैथ अच्छा लगता है। लेकिन अधिकतर लोग होम्योपैथ से इलाज नहीं कराते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सामान्य बीमारियों में 2 साल से कम उम्र के बच्चों को होम्योपैथिक का असर एलोपैथ से कहीं ज्यादा होता है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: रात में भूलकर भी ना खाएं ये फूड्स, वरना पड़ेगा पछतानाइन बीमारियों में 100% कारगरएक रिपोर्ट के मुताबिक 2 साल से कम उम्र के बच्चों में सामान्य बीमारियों में होम्योपैथिक दवाएं एलोपैथ की तुलना में सुपीरियर हैं। एक अध्ययन में 24 महीनों से कम उम्र के 108 बच्चों को शामिल किया गया था। इन बच्चों का नियमित रूप से सामान्य परेशानियों जैसे डायरिया, बुखार और सांसों से संबंधित दिक्कत आदि के लिए या तो होम्योपैथी के जरिए इलाज कराया जाता था, या फिर एलोपैथी के जरिए से।इस अध्ययन में पाया गया है कि जिन बच्चों का इलाज होम्योपैथिक के जरिए कराया गया, वह एलोपैथ के जरिए से इलाज कराने वालों की तुलना में कम बीमार पड़े। स्टडी में बताया गया है कि होम्योपैथ से इलाज कराने वाले 24 महीने से कम उम्र के बच्चे औसतन 5 दिन बीमार पड़े। वहीं पारंपरिक रूप से इलाज कराने वाले समूह के बच्चो औसतन 21 दिन बीमार रहे।इस अध्ययन में बताया गया है कि जिन बच्चों का इलाज में होम्योपैथिक चिकित्सा को पहली प्राथमिकता दी गई। उनको सांस संबंधी समस्याएं कम हुईं। वहीं इलाज के बाद उनको कम आना पड़ा। लेकिन दस्त जैसी बीमारियों में दोनों माध्यम से इलाज कराने वाले बच्चों में कोई खास अंतर नहीं पाया गया। वहीं इस अध्ययन में दवाओं के साइड इफेक्ट्स और बीमारियों की वजह से होने वाली मौतों को शामिल नहीं किया गया।इस अध्ययन में सिर्फ यह देखा गया था कि जो भी बच्चे होम्योपैथ से इलाज कर रहे हैं और अन्य माध्यमों से इलाज कर रहे हैं। उनमें सही होने की संभावना कितनी बेहतर है। साथ ही होम्योपैथिक विधि से इलाज कराने वाले बच्चों में एंटीबायोटिक की जरूरत सिर्फ 14 बार पड़ी। लेकिन अन्य जरिए से इलाज करा रहे बच्चों में इसकी जरूरत 141 बार पड़ी। जिसका मतलब यह हुआ कि जिन बच्चों का इलाज होम्योपैथिक के जरिए हुआ, उनमें ज्यादा इम्यूनिटी बूस्ट हुई। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 11:38:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Still Alive में Samay Raina ने बयां किया Psychosis का दर्दनाक अनुभव, जानें इसके बारे में</title>
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<description><![CDATA[ समय रैना ने अपने नए वीडियो Still Alive के साथ एक बार फिर जोरदार वापसी की है। ये वापसी ऐसे समय में आई है जब India&#039;s Got Latent विवाद को एक साल से ज्यादा हो चुका है। वीडियो में समय ने साफ तौर पर उन लोगों पर तंज कसा, जिनमें रणवीर अल्लाहबादिया भी शामिल हैं, जो उस समय लाइमलाइट लेने की कोशिश कर रहे थे। साथ ही, उन्होंने अपने पिता का भी जिक्र किया और बताया कि उनके सबसे मुश्किल समय में वही उनके साथ चट्टान की तरह खड़े रहे।मेंटल हेल्थ पर क्या बोले समय रैना?समय ने बताया कि जब ये विवाद शुरू हुआ, तब वो यूएस टूर पर थे। अपने दूसरे शो के दौरान उन्हें अचानक ऐसी हालत का सामना करना पड़ा जिसे उन्होंने साइकोसिस जैसा बताया।उन्होंने कहा कि उन्हें पहले भी एंग्जायटी अटैक होते रहे हैं, लेकिन इस बार हालत ज्यादा खराब हो गई। शो से पहले उन्हें कंपकंपी, तेज धड़कन, ज्यादा पसीना और सांस लेने में दिक्कत जैसी परेशानी होने लगी। ये सब कुछ चक्कर आने जैसा महसूस हो रहा था। थेरेपिस्ट ने उन्हें परफॉर्म न करने की सलाह दी थी, लेकिन फिर भी समय स्टेज पर गए और शो किया। इसे भी पढ़ें: भीषण गर्मी में Dehydration के ये Symptoms जानलेवा हैं, भूलकर भी न करें नजरअंदाज साइकोसिस क्या होता है?सीधी भाषा में समझें तो साइकोसिस एक ऐसी स्थिति होती है, जब इंसान कुछ समय के लिए असलियत और अपने दिमाग में चल रही बातों के बीच फर्क करना भूल जाता है। हालांकि, आम बातचीत में लोग इस शब्द का इस्तेमाल तब भी करते हैं जब मानसिक दबाव इतना ज्यादा हो जाए कि सोच को संभालना मुश्किल लगने लगे। इसे भी पढ़ें: Summer में चाय-कॉफी पीने की लत हो सकती है जानलेवा, ये बदलाव बचा सकते हैं आपकी जानह्यूमर कैसे एक ढाल बन जाता है?ऐसी मुश्किल हालत में, जैसा समय रैना ने झेला, ह्यूमर कई बार एक ढाल की तरह काम करता है। जब इंसान अंदर से बहुत दबाव में होता है, तो वो मजाक और कॉमेडी के जरिए उस दर्द को थोड़ा हल्का करने की कोशिश करता है। सामने से देखने पर लगता है कि वो बस मजाक कर रहा है, लेकिन असल में वो उसी के जरिए खुद को संभाल रहा होता है। समय ने भी अपने वीडियो में तंज और ह्यूमर का इस्तेमाल करके ना सिर्फ लोगों को जवाब दिया, बल्कि अपने उस मुश्किल दौर को भी थोड़ा आसान बनाने की कोशिश की। यही वजह है कि कई बार कॉमेडी सिर्फ हंसाने के लिए नहीं, बल्कि खुद को टूटने से बचाने का तरीका भी बन जाती है।साइकोसिस होने पर खुद को कैसे संभालें?अगर किसी को साइकोसिस जैसी स्थिति महसूस हो रही है, तो सबसे पहले खुद को सुरक्षित और शांत रखने की कोशिश करें। ऐसे समय में अकेले रहने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति परिवार या दोस्त के साथ रहना ज्यादा मददगार होता है। गहरी सांस लेना, आसपास की चीजों पर ध्यान देना (जैसे क्या दिख रहा है, क्या सुनाई दे रहा है) दिमाग को थोड़ा स्थिर करने में मदद करता है। सबसे जरूरी बात, इसे नजरअंदाज न करें और जितनी जल्दी हो सके किसी डॉक्टर या थेरेपिस्ट से बात करें, क्योंकि सही मदद और इलाज से इस स्थिति को संभाला जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 09:41:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Women Health: ये 5 Super Drinks रखेंगी मां और बच्चे को Healthy, दिनभर रहेगी भरपूर Energy</title>
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<description><![CDATA[ प्रेग्नेंसी के दौरान सही खानपान के अलावा हाइड्रेशन का ध्यान देना बेहद जरूरी होता है। शरीर में पानी की कमी से चक्कर, थकान, यूरिन इंफेक्शन और कब्ज के अलावा बच्चे की ग्रोथ पर भी बुरा असर पड़ सकता है। लेकिन अगर आप सुबह से शाम तक सही समय पर हेल्दी ड्रिंक्स का सेवन करती हैं, तो इससे न सिर्फ मां बल्कि गर्भ में पलने वाले बच्चे को भी अच्छी सेहत मिलती है। साथ ही शरीर दिनभर एनर्जेटिक बना रहता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 5 ऐसी ड्रिंक्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसको रोजाना अपनी डाइट में शामिल करने से मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहेंगे। साथ ही यह भी जानेंगे कि इनको कब पीना ज्यादा फायदेमंद रहेगा।नारियल पानीनारियल पानी एक नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक है, जोकि शरीर को हाइड्रेट रखता है। नारियल पानी को सुबह खाली पेट या नाश्ते के बाद पीने से डिहाइड्रेशन दूर होता है। उल्टी-मिचली और सूजन में भी राहत मिलती है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: Perfume से Cancer का Risk? गले पर स्प्रे करने से पहले जानें Health Experts की ये बड़ी चेतावनीफुल फैट दूधदूध प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन D का अच्छा स्त्रोत है। जोकि बच्चे के दांतों, हड्डियों और मसल्स की ग्रोथ के लिए जरूरी होता है। यह मां की कमजोरी को भी दूर करता है और दिनभर के लिए ताकत देता है।छाछवहीं लंच के बाद छाछ पीना सबसे ज्यादा लाभकारी साबित होता है। यह डाइजेशन को बेहतर बनाती है, गैस और एसिडिटी से राहत देती है और शरीर को भी ठंडक पहुंचाती है। छाछ में मौजूद प्रोबायोटिक्स पेट को हेल्दी रखते हैं।संतरे का ताजा जूससंतरे का जूस विटामिन सी से भरपूर होता है। जोकि इम्यूनिटी को मजबूत करता है और शरीर में आयरन के अवशोषण को बढ़ाता है। दोपहर के समय संतरे का जूस पीने से थकान कम होती है और फौरन एनर्जी मिलती है।अनार का जूसअनार में एंटीऑक्सीडेंट्स और आयरन पाया जाता है। जोकि हीमोग्लोबिन को बढ़ाने, कमजोरी दूर करने और बच्चे तक ऑक्सीजन सप्लाई बेहतर करने में मदद करता है। शाम के समय अनार के जूस का सेवन करने से दिनभर की थकान कम होती है।जरूरी टिप्सदिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए।हमेशा फ्रेश और बिना ज्यादा चीनी का जूस पीना चाहिए।ज्यादा चाय, कॉफी और पैकेज्ड ड्रिंक्स नहीं पीना चाहिए।ज्यादा ठंडा या बर्फ वाले ड्रिंक्स नहीं लेना चाहिए।किसी नए ड्रिंक को डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।अगर आप भी अपने डेली रूटीन में इन हेल्दी ड्रिंक्स को शामिल करती हैं, तो इससे प्रेग्नेंसी ज्यादा सुरक्षित, आरामदायक और हेल्दी बन सकती हैं। इससे मां का शरीर मजबूत रहेगा, बच्चे की ग्रोथ सही होगी और इम्यूनिटी भी बेहतर रहेगी। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 09:41:31 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: रात में भूलकर भी ना खाएं ये फूड्स, वरना पड़ेगा पछताना</title>
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<description><![CDATA[ खाना शरीर का ईंधन है और इसलिए स्वस्थ रहने के लिए सही भोजन करना बेहद जरूरी है। अक्सर लोग अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए घर का खाना ही पसंद करते हैं। लेकिन आप किस समय क्या खा रहे हैं, यह बहुत अधिक मायने रखना है। खासतौर से, रात का खाना आपकी नींद, वजन और पाचन पर सीधा असर डालता है। इसलिए, रात का खाना बेहद सोच-समझकर चुनना चाहिए।हालांकि, अक्सर यह देखने में आता है कि लोग दिन का बचा हुआ खाना ही रात में खा लेते हैं। इससे भले ही उनका पेट भर जाए, लेकिन कहीं ना कहीं सेहत को काफी नुकसान होता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ इंडियन फूड्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें आपको रात में खाने से बचना चाहिए-चावल (White Rice)अधिकतर घरों में अगर दिन में चावल बने हैं और वह बच गए हैं तो लोग रात में भी उसे खा लेते हैं। लेकिन रात में व्हाइट राइस खाना अच्छा नहीं माना जाता है। दरअसल, इसमें कार्ब्स ज्यादा होते हैं, जो फैट में जल्दी बदलते हैं। साथ ही साथ, इससे ब्लड शुगर भी स्पाइक हो सकता है। चावल खाने के कुछ देर बाद ही आपको फिर से भूख लग सकती है। इसलिए, अगर आपको चावल खाना ही है तो ब्राउन राइस खाएं या फिर चावलों को कम मात्रा में लें।इसे भी पढ़ें: Still Alive में Samay Raina ने बयां किया Psychosis का दर्दनाक अनुभव, जानें इसके बारे मेंदही (Curd)रात के समय दही खाने से भी बचना चाहिए। बहुत से लोगों को रात में दही खाने या फिर फ्रिज की रखी हुई दही खाने से बलगम या सर्दी-खांसी की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, कभी-कभी इससे डाइजेशन की समस्या भी हो सकती है।फ्राइड फूड (Fried Food)भले ही आपको फ्राइड फूड खाना कितना भी पसंद हो, लेकिन रात में फ्राइड फूड खाने से बचना चाहिए। रात के समय अगर आप समोसा या पकौड़ा खाएंगे तो इससे आपकी नींद खराब होगी। यह बहुत ही हैवी और ऑयली होते हैं, जिससे डाइजेशन की समस्या हो सकती है। साथ ही, इससे आपका वजन भी बढ़ सकता है।मीठा (Sweet Items)अगर आपको डिनर के बाद मीठा खाने की आदत है तो इसे आज ही बदल दीजिए। मीठा खाने से एकदम से शुगर स्पाइक होता है, जिससे फैट स्टोरेज बढ़ता है। साथ ही, इससे आपकी क्रेविंग्स भी बढ़ सकती है। खासतौर से, अगर आपको हार्मोनल असंतुलन की समस्या है तो यह आपके लिए और भी ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 09:41:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Summer में चाय&#45;कॉफी पीने की लत हो सकती है जानलेवा, ये बदलाव बचा सकते हैं आपकी जान</title>
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<description><![CDATA[ गर्मियों में डिहाइड्रेशन की समस्या आम है, लेकिन इसे हल्के में लेना जानलेवा साबित हो सकता है। अगर समय रहते इसपर ध्यान न दिया जाए, तो शरीर के अंग काम करना बंद कर सकते हैं और आपकी मौत हो सकती है। हालांकि, इससे बचना बहुत मुश्किल नहीं है, बस आपको अपनी रोजमर्रा की आदतों में थोड़े से बदलाव करने होंगे। डिहाइड्रेशन से बचने और शरीर में पानी का लेवल सही रखने के लिए आप ये आसान तरीके अपना सकते हैं।पानी पीने का पक्का नियम बनाएंसबसे जरूरी बात यह है कि प्यास लगने का इंतजार न करें। जब हमें प्यास लगती है, तो इसका मतलब है कि शरीर पहले ही पानी की कमी महसूस कर रहा है। अपने पास हमेशा पानी की बोतल रखें और हर आधे या एक घंटे में कुछ घूंट पानी पीते रहें। अगर आप सादा पानी पीकर बोर हो जाते हैं, तो उसमें नींबू या पुदीना डालकर उसे रिफ्रेशिंग बना सकते हैं। इसे भी पढ़ें: भीषण गर्मी में Dehydration के ये Symptoms जानलेवा हैं, भूलकर भी न करें नजरअंदाजपानी से भरपूर फल और सब्जियां खाएंसिर्फ पीने के पानी से ही नहीं, बल्कि खाने-पीने की दूसरी चीजों से भी आप हाइड्रेटेड रह सकते हैं। गर्मियों में ऐसे फल खाएं जिनमें पानी की मात्रा ज्यादा हो, जैसे तरबूज, खरबूजा, खीरा और संतरा। ये न सिर्फ शरीर को ठंडा रखते हैं, बल्कि जरूरी विटामिन्स भी देते हैं। साथ ही, खाने में दही या छाछ को जरूर शामिल करें, क्योंकि ये पेट के लिए भी बहुत अच्छे होते हैं। इसे भी पढ़ें: शादी से पहले Weight Loss का शॉर्टकट पड़ सकता है भारी, डॉक्टर्स ने बताई Ozempic इंजेक्शन की चौंकाने वाली सच्चाईचाय, कॉफी और धूप से दूरी बनाकर रखेंकोशिश करें कि दोपहर की तेज धूप में बाहर न निकलें। अगर निकलना जरूरी हो, तो सिर को ढक कर रखें और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें। एक और जरूरी बात यह है कि गर्मी में चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन कम से कम करें, क्योंकि ये शरीर से पानी को जल्दी बाहर निकालते हैं। इसकी जगह नारियल पानी या ओआरएस का घोल लेना कहीं ज्यादा फायदेमंद है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 09:57:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: Perfume से Cancer का Risk? गले पर स्प्रे करने से पहले जानें Health Experts की ये बड़ी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ शरीर को तरोताजा बनाए रखने और पसीने की बदबू को कम करने के लिए ज्यादातर लोग डियोड्रेंट्स-परफ्यूम का इस्तेमाल करते हैं। परफ्यूम आपको न सिर्फ अच्छी खुशबू देता है, बल्कि पर्सनालिटी को भी निखारता है। साथ ही इससे आत्मविश्वास भी बढ़ता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सेहत के लिए ठीक नहीं है। कई अध्ययन इस बात को लेकर अलर्ट करते हैं कि डियोड्रेंट्स-परफ्यूम में कुछ हानिकारक रसायन हो सकते हैं। जिससे आपकी सेहत को गंभीर खतरा होता है।बताया जाता है कि डियोड्रेंट्स की खुशबू को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए इसमें कुछ ऐसे रसायन मिलाए जाते हैं। जिससे स्किन संबंधी समस्याओं का खतरा होता है। वहीं इससे कैंसर के खतरे को लेकर भी सावधान किया गया है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक विशेष रूप से गले पर डियोड्रेंट्स या परफ्यूम्स को स्प्रे करना आपकी सेहत के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकता है।इसे भी पढ़ें: Summer में चाय-कॉफी पीने की लत हो सकती है जानलेवा, ये बदलाव बचा सकते हैं आपकी जानपरफ्यूम में हानिकारक तत्वइस तरह के उत्पादों में कम से कम 4000 तरह के रसायनों का उपयोग किया जाता है। लेकिन आप इसको परफ्यूम बॉटल पर अंकित नहीं पाएंगे। क्योंकि कंपनियां लोगों से इन्हें छिपाकर रखती हैं।परफ्यूम में मस्क कीटोन, फ्थेलेट्स और फॉर्मलडिहाइड जैसे रसायनों को उपयोग में लाया जाता है। कई देशों ने फ्थेलेट्स के उपयोग को बैन कर रखा है।इससे मस्तिष्क के विकास संबंधी दिक्कतों के साथ तंत्रिका तंत्र से संबंधित बीमारियां और एकाग्रता में परेशानी हो सकती है।गले पर परफ्यूम लगाना नुकसानदायकगले की त्वचा पतली और अधिक सोखने वाली होती है। इससे थैलेट्स जैसे रसायन आसानी से ब्लड के संपर्क में आ सकते हैं।बार-बार इस्तेमाल से सूखापन, स्किन में जलन, पिग्मेंटेशन या एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है।परफ्यूम और डियोड्रेंट में मौजूद कई रसायनों को एंडोक्राइन डिसरप्टर्स भी माना जाता है। यह हार्मोन सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।थायरॉइड की समस्यागर्दन की त्वचा पतली और ज्यादा वैस्कुलराइज्ड होती है। इससे परफ्यूम के रसायन ब्लड में तेजी से जा सकते हैं।लंबे समय तक इन रसायनों के संपर्क में रहने से आपकी थायरॉइड ग्रंथि का कार्य प्रभावित हो सकता है।शरीर में थायरॉइड हार्मोन मेटाबॉलिज्म से लेकर कई अहम कार्यों में मदद करते हैं। यही वजह है कि इससे सेहत को नुकसान हो सकता है।कैंसर का जोखिमकुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि कुछ डियोड्रेंट्स में एल्यूमीनियम और पैराबिन्स जैसे यौगिक पाए गए हैं। ये यौगिक अवशोषित होकर त्वचा में गंभीर खतरे का कारण बन सकते हैं। वहीं इससे हार्मोनल असंतुलन का भी खतरा हो सकता है।शोधकर्ताओं की मानें, तो डियोड्रेंट में प्रयोग में लाए जाने वाले पैराबीन्स या एल्यूमीनियम यौगिकों कैंसर को कारक नहीं पाया गया है। लेकिन संवेदनशील स्किन और जोखिम कारक वाले लोगों में इनका लंबे समय तक इस्तेमाल गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। इससे कैंसर को खतरे को लेकर भी लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 09:43:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Pica Eating Disorder Causes: चॉक&#45;मिट्टी खाने की आदत है Iron Deficiency का संकेत, एक्सपर्ट ने बताई वजह</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर यह देखने को मिलता है कि छोटे बच्चे दीवार की पपड़ी या मिट्टी या चॉक खाते है। बहुत से लोग इस आदत को सामान्य समझते हैं और बच्चे को डांटते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी होने का यह संकेत होता है। कई बार वयस्कों और खासकर महिलाओं में यह समस्या देखने को मिलती है। मिट्टी, कच्चा कोयला, चॉक या कागज जैसी अजीबो-गरीब चीजें खाने की बहुत इच्छा होती है।इस स्थिति को मेडिकल भाषा में &#039;पाइका&#039; कहते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक जब किसी व्यक्ति का इन चीजों को खाने का मन करे, जिसमें कोई पोषण नहीं होता है। तो इसको हल्के में नहीं लेना चाहिए। पाइका होने का सबसे बड़ा और आम कारण शरीर में आयरन की कमी होना है। जब बॉडी में हीमोग्लोबिन का लेवल गिरता है, तो मस्तिष्क इस तरह की असामान्य चीजों को तरफ आकर्षित होता है। लेकिन ऐसी इच्छा होने पर आपको सतर्क हो जाना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Common Cause Of Weight Loss: आपका भी घट रहा है Weight, इन 5 Serious Symptoms को बिल्कुल नजरअंदाज न करेंक्या सिर्फ बच्चों को होती है मिट्टी या चॉक खाने की इच्छाएक्सपर्ट के मुताबिक यह मिथ है कि सिर्फ बच्चों को मिट्टी या चॉक खाने की आदत होती है।यह समस्या किसी भी उम्र के साथ हो सकती है, फिर चाहे वह बच्चे हो, जवान हो या बुजुर्ग हो।लेकिन बड़े लोग अक्सर शर्म की वजह से इस बात को छिपाते हैं। लेकिन यह एक शारीरिक समस्या है, जिसको पोषण से सही किया जा सकता है।क्यों होती है चॉक या मिट्टी खाने की इच्छाचॉक या मिट्टी खाने का मन करने का मूल कारण शरीर में आयरन और कभी-कभी जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की भारी कमी होना है। जब खून में आयरन का लेवल कम होता है। जो व्यक्ति की पलेट यानी की स्वाद ग्रंथियां बदलने लगती है। ऐसे में चॉक का टेक्सचर और मिट्टी की खुशबू पसंद आने लगता है। यह मस्तिष्क की एक प्रतिक्रिया है, जो शरीर में चल रही अंदरूनी कमी को दिखाता है।महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है ये समस्यामहिलाओं में गर्भावस्था, मासिक धर्म और स्तनपान के दौरान शरीर में आयरन की कमी हो जाती है। भारत में महिलाओं के सबसे ज्यादा एनीमिया की समस्या पाई जाती है। जिस वजह से महिलाओं में &#039;पाइका&#039; के लक्षण ज्यादा नजर आते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलाव और पोषक तत्वों की बढ़ती जरूरत भी चॉक या मिट्टी खाने की क्रेविंग को तेज कर देती है। ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करें।आयरन के लिए किन चीजों का करें सेवनएक्सपर्ट के अनुसार, सबसे पहले अपना आयरन लेवल चेक कराएं और जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट्स लें। वहीं इस कमी को नेचुरल रूप से पूरी करने के लिए अपनी डाइट में गुड़, अनार, किशमिश और खजूर जैसे फलों को शामिल करें। वहीं हरी पत्तेदार सब्जियां और पालक आयरन के बेहतरीन स्त्रोत है। जोकि इस समस्या को जड़ से खत्म करने में सहायता करते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 10:15:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Pica, Eating, Disorder, Causes:, चॉक-मिट्टी, खाने, की, आदत, है, Iron, Deficiency, का, संकेत, एक्सपर्ट, ने, बताई, वजह</media:keywords>
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<title>शादी से पहले Weight Loss का शॉर्टकट पड़ सकता है भारी, डॉक्टर्स ने बताई Ozempic इंजेक्शन की चौंकाने वाली सच्चाई</title>
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<description><![CDATA[ आजकल शादियों का सीजन आते ही दूल्हा-दुल्हन के बीच फिट दिखने की एक अलग ही होड़ मच जाती है। खुद को स्लिम दिखाने के चक्कर में कई लोग अब डाइट और एक्सरसाइज के बजाय शॉर्टकट रास्ता चुन रहे हैं। वे वजन घटाने वाले इंजेक्शन, जैसे सेमाग्लूटाइड और टिर्जेपेटाइड का सहारा ले रहे हैं। असल में ये दवाएं टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे जैसी गंभीर बीमारियों के लिए बनाई गई हैं, लेकिन लोग इसे कॉस्मेटिक फायदे के लिए इस्तेमाल करने लगे हैं।इंजेक्शन से वजन घटाने का नया ट्रेंडडॉक्टरों का कहना है कि उनके पास आने वाले हर 5 में से 1 मरीज ऐसी होने वाली दुल्हनें हैं, जो जल्द से जल्द वजन कम करना चाहती हैं। भारत में वजन घटाने वाली ये दवाएं ओजेम्पिक (Ozempic) और वेगॉवी (Wegovy) जैसे नामों से मिलती हैं। ये शरीर के नेचुरल हार्मोन की नकल करती हैं, जिससे भूख कम लगती है और पेट भरा-भरा महसूस होता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि ये दवाएं सिर्फ मेडिकल जरूरत के लिए हैं, न कि शादी में सुंदर दिखने के लिए। इसे भी पढ़ें: Pica Eating Disorder Causes: चॉक-मिट्टी खाने की आदत है Iron Deficiency का संकेत, एक्सपर्ट ने बताई वजहसेहत के लिए बढ़ सकता है खतराअगर आप बिना किसी बड़ी बीमारी के सिर्फ पतला होने के लिए ये इंजेक्शन लेते हैं, तो इसके फायदे से ज्यादा नुकसान हो सकते हैं। इसे लेने से जी मिचलाना, उल्टी, दस्त और बहुत ज्यादा थकान जैसी समस्याएं आम हैं। इतना ही नहीं, अगर सही पोषण न मिले तो शरीर में पानी की कमी और मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। कुछ गंभीर मामलों में तो ये किडनी और पाचन तंत्र पर भी बुरा असर डाल सकती हैं।चेहरे पर पड़ सकता है बुरा असरतेजी से वजन घटाने का असर आपकी खूबसूरती पर उल्टा भी पड़ सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक, अचानक वजन कम होने से चेहरे की त्वचा लटक सकती है, जिसे &#039;ओजेम्पिक फेस&#039; कहा जाता है। साथ ही, आपके बाल भी तेजी से झड़ सकते हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि दवा छोड़ते ही वजन दोबारा बढ़ जाता है, इसलिए शादी के लिए यह कोई पक्का समाधान नहीं है। इसे भी पढ़ें: Common Cause Of Weight Loss: आपका भी घट रहा है Weight, इन 5 Serious Symptoms को बिल्कुल नजरअंदाज न करेंसही और सुरक्षित तरीका क्या है?डॉक्टरों की सलाह यही है कि खूबसूरती के लिए शॉर्टकट न अपनाएं। अगर आप वाकई फिट दिखना चाहते हैं, तो एक अच्छा डाइट प्लान, रोजाना एक्सरसाइज और भरपूर नींद ही सबसे बेहतर विकल्प है। इससे आपकी स्किन भी ग्लो करेगी और शरीर में कमजोरी भी नहीं आएगी। याद रखिए, ये इंजेक्शन तभी सही हैं जब कोई डॉक्टर आपकी सेहत को देखकर इन्हें जरूरी समझे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 10:15:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>शादी, से, पहले, Weight, Loss, का, शॉर्टकट, पड़, सकता, है, भारी, डॉक्टर्स, ने, बताई, Ozempic, इंजेक्शन, की, चौंकाने, वाली, सच्चाई</media:keywords>
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<title>भीषण गर्मी में Dehydration के ये Symptoms जानलेवा हैं, भूलकर भी न करें नजरअंदाज</title>
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<description><![CDATA[ जैसे-जैसे गर्मी का पारा चढ़ने लगता है, हम अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। गर्मी के मौसम में सबसे जरूरी है अपने शरीर में पानी की कमी न होने देना। अगर हम पर्याप्त पानी नहीं पीते, तो डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। यह सिर्फ मामूली प्यास नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जो मेडिकल इमरजेंसी बन सकती है। आसान शब्दों में कहें तो जब हमारे शरीर से पसीने के जरिए पानी ज्यादा निकलता है और हम उतना पानी पी नहीं पाते, तब डिहाइड्रेशन होता है।शरीर देने लगता है खतरे के संकेतहमारा शरीर बहुत समझदार है और पानी की कमी होने पर हमें चेतावनी देना शुरू कर देता है। सबसे पहला संकेत है बार-बार मुंह सूखना। इसके अलावा, अगर आपको महसूस हो कि पेशाब कम आ रहा है या उसका रंग गहरा पीला हो गया है, तो समझ जाइए कि शरीर को तुरंत पानी की जरूरत है। इन संकेतों को अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। इसे भी पढ़ें: शादी से पहले Weight Loss का शॉर्टकट पड़ सकता है भारी, डॉक्टर्स ने बताई Ozempic इंजेक्शन की चौंकाने वाली सच्चाईलापरवाही पड़ सकती है जान पर भारीडिहाइड्रेशन को हल्के में लेना जानलेवा भी हो सकता है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो शरीर के अंग काम करना बंद कर सकते हैं। ज्यादा थकान महसूस होना, चक्कर आना या कमजोरी लगना इसके गंभीर लक्षण हैं। गर्मी के इन दिनों में खुद को सुरक्षित रखने का सबसे आसान तरीका यही है कि आप प्यास लगने का इंतजार न करें और पूरे दिन थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। इसे भी पढ़ें: Pica Eating Disorder Causes: चॉक-मिट्टी खाने की आदत है Iron Deficiency का संकेत, एक्सपर्ट ने बताई वजहडिहाइड्रेशन को मात देने के अचूक उपायगर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप प्यास लगने का इंतजार न करें। पूरे दिन थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें और अपनी डाइट में तरबूज, खीरा और छाछ जैसी चीजें शामिल करें जो शरीर में पानी की कमी को पूरा करती हैं।सादे पानी के अलावा नारियल पानी या नींबू पानी लेना बहुत फायदेमंद रहता है। साथ ही तेज धूप में बाहर निकलने से बचें और चाय-कॉफी का सेवन कम करें, क्योंकि ये शरीर को जल्दी सुखा देते हैं। बस इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप भीषण गर्मी में भी खुद को फिट और हाइड्रेटेड रख सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 10:15:21 +0530</pubDate>
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<title>Women Health: Periods से पहले Breast Pain सामान्य है या Breast Cancer, जानें Doctors के बताए Red Flags</title>
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<description><![CDATA[ आमतौर पर पीरियड्स से पहले स्तनों में दर्द और भारीपन होना हार्मोनल बदलावों से संबंधित होता है। यह प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम में आम है। यह ब्रेस्ट कैंसर का संकेत नहीं होता है। खासतौर पर अगर दर्द मासिक चक्र के साथ होता है और पीरियड्स के बाद ठीक हो जाता है। पीरियड्स के दौरान पीठ दर्द होना आम है और मांसपेशियों में ऐंठन या गर्भाशय के संकुचन की वजह होता है।  आपको जिन असामान्य बदलावों पर ध्यान देना चाहिए, जैसे - निपल्स से स्त्राव, गांठ, स्किन में बदलाव या सूजन और मासिक चक्र से संबंधित न होने वाला लगातार दर्द आदि है। अगर आपको इनमें से कोई लक्षण देखते हैं या फिर गंभीर दर्द है, तो आप डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं।इसे भी पढ़ें: G6PD Deficiency: पुरुषों के लिए &#039;साइलेंट&#039; खतरा, Red Blood Cells को खत्म कर रही ये जेनेटिक बीमारीमासिक धर्म के दौरान पीठ दर्दअगर आपको एलर्जी नहीं है, तो आइबुप्रोफेन या नेप्रोक्सन जैसी बिना प्रिस्क्रिप्शन वाली दर्द निवारक दवाओं का सेवन कर सकते हैं।कमर के निचले हिस्से में हीटिंग पैड से सफाई कर सकती हैं।दर्द से राहत पाने के लिए आप हल्का व्यायाम भी कर सकती हैं।पीरियड से पहले स्तन में दर्द और भारीपनबता दें कि आमतौर पर ऐसा हार्मोनल परिवर्तनों की वजह से होता है। इसलिए किसी भी असामान्य परिवर्तन पर नजर जरूर रखें।नियमित रूप से खुद के स्तन की जांच करें और आपको गांठ या लगातार दर्द महसूस हो तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।कब लें डॉक्टर की सलाहअगर आपको अधिक दर्द महसूस हो, रोजाना के कार्यों में बाधा पैदा हो या फिर स्तनों में कोई असामान्य परिवर्तन दिखाई दे, तो आपको फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।आगे की जांच के लिए आप किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ या स्तन रोग विशेषज्ञ से परामर्श ले सकती हैं।बचावबचाव के लिए जरूरी है कि लक्षणों पर नजर रखें और नियमित रूप से हेल्थ चेकअप कराती रहें।अगर किसी लक्षणों में बदलाव हो या फिर वह बिगड़ जाए, तो डॉक्टर की सलाह लें। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 07 Apr 2026 09:22:25 +0530</pubDate>
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<title>Common Cause Of Weight Loss: आपका भी घट रहा है Weight, इन 5 Serious Symptoms को बिल्कुल नजरअंदाज न करें</title>
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<description><![CDATA[ आजकल बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल का सीधा असर लोगों के शरीर पर पड़ रहा है। आज के समय में तेजी से वेट लॉस की समस्या बेहद आम होती जा रही है। ऐसे में आपको यह समझने की जरूरत है कि अचानक से वेट लॉस का कारण सिर्फ लाइफस्टाइल या डाइट नहीं हो सकता है। बल्कि यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का भी संकेत हो सकता है। शरीर का तेजी से वेट कम होना, कमजोरी, थकान और इम्यूनिटी में कमी जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।ऐसे में अगर आपको भी लगता है कि आपका वेट लगातार कम हो रहा है और नींद, भूख या ऊर्जा में बदलाव दिख रहा है। तो इसको नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए। इसलिए सही समय पर जांच और इलाज आपको गंभीर सेहत संबंधी जोखिम से बचा सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 5 ऐसी दिक्कतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी वजह से आपका वेट तेजी से घट सकता है।इसे भी पढ़ें: Women Health: Periods से पहले Breast Pain सामान्य है या Breast Cancer, जानें Doctors के बताए Red Flagsथायरॉयड की समस्या होनाबता दें कि थायरॉइड ग्रंथि बॉडी के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करती है।अगर थायरॉयड ग्रंथि ज्यादा सक्रिय हो, तो शरीर की कैलोरी बर्निंग दर तेजी से बढ़ने लगता है।जिसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति का बिना एक्सरसाइज और डाइट के भी तेजी से वेट लॉस होने लगता है।इस दौरान हाथ-पांव कांपना, दिल की धड़कन तेज होना, नींद न आना और थकान आदि जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।डायबिटीज की समस्याअनियंत्रित डायबिटीज में बॉडी ग्लूकोज को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता है।शरीर एनर्जी के लिए मांसपेशियों और फैट का इस्तेमाल करने लगता है, जिससे वेट कम होने लगता है।इसके लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, भूख में बदलाव, थकान और लगातार प्यास लगना आदि बदलाव शामिल हैं।अगर सही समय पर इलाज न हो तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।पाचन संबंधी दिक्कतपाचन तंत्र संबंधी समस्या जैसे अल्सरस,  क्रॉनिक डाइजेशन डिसऑर्डर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन या इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम पोषण अवशोषण को प्रभावित करते हैं।इसका सीधा असर ऐसे होता है कि शरीर जितना खाता है, उतनी ही कैलोरी और न्यूट्रिएंट्स अवशोषित नहीं होते हैं।जिसके परिणामस्वरूप पेट दर्द, वेट कम होना, दस्त या गैस जैसी समस्या हो सकती है।मानसिक तनाव होनालगातार मानसिक तनाव रहने से शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है।तनाव के कारण हार्मोन कोर्टिसोल भूख को कम करता है और मेटाबॉलिज्म को बढ़ा देता है।लंबे समय तक तनाव रहने से व्यक्ति का वेट तेजी से कम हो सकता है।वहीं तनाव होने पर चिड़चिड़ापन, नींद न आना और ऊर्जा की कमी जैसी समस्याएं होती हैं।संक्रामक रोगकुछ संक्रमण जैसे इंफ्लुएंजा, टीबी, वायरल फीवर या अन्य गंभीर संक्रमण शरीर की एनर्जी खपत बढ़ा देते हैं।यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और वेट लॉस में भी योगदान देता है।इसके अलावा कमजोरी, बुखार, पसीना और भूख कम होना जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 07 Apr 2026 09:22:24 +0530</pubDate>
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<title>G6PD Deficiency: पुरुषों के लिए &amp;apos;साइलेंट&amp;apos; खतरा, Red Blood Cells को खत्म कर रही ये जेनेटिक बीमारी</title>
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<description><![CDATA[ हमारा शरीर स्वस्थ रहे और सभी अंग सही तरीके से काम करते रहें, इसके लिए ब्लड सर्कुलेशन ठीक तरीके से होते रहना जरूरी होता है। ब्लड के जरिए सभी अंगों तक पोषक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचता है। लेकिन कुछ स्थितियों में खून की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है। जी6पीडी डिफिशिएंसी एक ऐसी स्थिति है, जिसको लेकर सभी लोगों को जागरुक होने की जरूरत है। जी6पीडी एक तरह का एंजाइम है, जो रेड ब्लड सेल्स को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है। शरीर में इसकी कमी होने पर लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से डैमेड होने लगती हैं।यह रक्त कोशिकाएं ही फेफड़ों से पूरे शरीर में ऑक्सीजन ले जाने का काम करती है। शरीर में इसकी कमी होने पर खून की कमी या एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है। बता दें कि जी6पीडी की कमी एक जेनेटिक बीमारी है, जो माता-पिता से विरासत में मिलती है। इस कारण से आपका जी6पीडी लेवल कम हो जाता है। इसका खतरा महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक होता है।इसे भी पढ़ें: Cold Water Side Effects: गर्मी में Cold Water पीना बढ़ा सकता है जान का Risk, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनीजी6पीडी की कमी होने पर खतरामेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जी6पीडी की कमी होना काफी आम होता है। दुनियाभर में करीब 40 से 50 करोड़ लोग इस समस्या से प्रभावित हैं।अधिकतर लोगों में इसके लक्षण नहीं दिखते हैं। इसलिए समय रहते पहचान नहीं हो पाती है।कुछ दवाओं जैसे ट्रिगर की वजह से हीमोलिटिक एनीमिया जैसी गंभीर समस्या हो सकती है।इसमें कई सारे रेड ब्लड सेल्स क्षतिग्रस्त होकर डेड होने लगते हैं।जी6पीडी की कमी होने पर नए जन्मे बच्चों में गंभीर पीलिया हो सकती है।हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो जी6पीडी की कमी होने पर आमतौर पर कोई लक्षण नहीं नजर आते हैं। जब तक कि कोई ट्रिगर आपके रेड ब्लड सेल्स पर दबाव न डाले और उनके टूटने की वजह न बने।जी6पीडी की कमी की पहचानदिल की धड़कन का तेज होनासांस लेने में समस्यापेशाब का रंग गहरा पीला या फिर नारंगी होनाअक्सर थकान और कमजोरी महसूस होनाजब ऊपर बताए गए लक्षण तेज और गंभीर होते हैं, तो इसको हीमोलिटिक क्राइसिस कहा जाता है।क्यों होती है जी6पीडी की कमीहेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक फवा बीन्स खाना सबसे आम ट्रिगर हो सकता है। अगर जी6पीडी की कमी वाला व्यक्ति फवा बीन्स का सेवन करता है, तो उसको हीमोलिटिक एनीमिया हो सकता है।टाइफाइड बुखार, हेपेटाइटिस-ए, हेपेटाइटिस-बी और निमोनिया की वजह से भी यह ट्रिगर होता है।शराब और स्मोकिंग भी आपके लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।ऐसे ठीक करें ये समस्याबता दें कि जिन मरीजों को सीबीसी टेस्ट बार-बार लो रहता है। तो उनमें जी6पीडी की कमी को चेक करने के लिए डॉक्टर टेस्ट कर सकते हैं।वैसे तो इसकी कमी का कोई इलाज नहीं हैं, लेकिन इसको ट्रिगर करने वाली चीजों से बचाव करके आप इसके जोखिम को कम कर सकते हैं। वहीं जिन लोगों को पीलिया की समस्या होती है, उनको डॉक्टर दवा और अन्य उपचार दे सकते हैं।जी6पीडी की कमी वाले लोगों को कभी पता नहीं चलता क्योंकि उनमें लक्षण नहीं होते हैं। लेकिन जिनका ब्लड काउंड हमेशा कम रहता है, उनको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 09:24:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips:  Air Pollution का Brain पर सीधा अटैक, US Research में Alzheimer&amp;apos;s को लेकर बड़ा खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ बुढ़ापे में याददाश्त कमजोर होना एक आम समस्या मानी जाती है। अब तक वैज्ञानिक भी इसके पीछे के ठोस कारणों का पता नहीं लगा सके हैं। लेकिन हाल ही में हुए अध्ययन ने एक बड़े खतरे की तरफ इशारा किया है। यह खतरा और कुछ नहीं बल्कि हमारे आसपास मौजूद प्रदूषत हवा है। नई रिसर्च के अनुसार, खराब हवा में सांस लेने से इस गंभीर बीमारी का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस रिसर्च और इससे बचाव के तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं।अमेरिका में हुई रिसर्चअमेरिका के शोधकर्ताओं ने इस विषय पर एक बड़ा अध्ययन किया है। यह रिसर्च अमेरिका के करीब पौने तीन करोड़ लोगों के डेटा पर हुई। इसके चौंकाने वाले रिजल्ट &#039;पीएलओएस मेडिसिन&#039; नामक फेमस मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुए। इस अध्ययन के लिए साल 2000 से लेकर 2018 के बीच के उन लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिनकी उम्र 65 साल या फिर इससे अधिक थी।इसे भी पढ़ें: Child Health: ये 6 देसी Superfoods हैं कमाल, महीने भर में बढ़ेगा बच्चे का Weight Gainदिमाग पर असर करता है &#039;PM 2.5&#039;अध्ययन में यह साफ तौर पर सामने आया है कि हवा में मौजूद खतरनाक प्रदूषण कण, जिनको &#039;PM 2.5&#039; कहा जाता है। इससे अल्जाइमर का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने का सबसे अधिक और सीधा असर हमारे दिमाग की सेहत पर पड़ता है। यह प्रदूषण स्ट्रोक, हाई बीपी और डिप्रेशर का खतरा बढ़ता है। जोकि अल्जाइमर से जुड़ी बीमारियां हैं। लेकिन शोधकर्ताओं ने यह स्पष्ट किया है कि प्रदूषण इन बीमारियों के माध्यम से नहीं बल्कि सीधे तौर पर दिमाग पर असर करके अल्जाइमर का खतरा ज्यादा बढ़ाता है।किसको ज्यादा खतरावैसे तो हर किसी के लिए हवा का जहर नुकसानदेह है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है।स्ट्रोक के मरीजजिन लोगों को पहले कभी भी स्ट्रोक आ चुका है, उन लोगों पर वायु प्रदूषण का सबसे अधिक असर होता है।हाई बीपीजिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर जैसी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोग भी हवा प्रदूषण के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं।बचाव का तरीकारिसर्च टीम का मानना है कि &#039;डिमेंशिया&#039; जैसी गंभीर बीमारियों से बचने के लिए हवा की गुणवत्ता में सुधार करना बेहद जरूरी होता है। क्योंकि साफ हवा ही हमारे दिमाग को भविष्य के खतरों से सुरक्षित रखने की एक अहम चाबी हो सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:23:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Mental Health Tips: Social Media की Negativity है धीमा ज़हर, आपकी Mental Health पर ऐसे हो रहा हमला</title>
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<description><![CDATA[ आजकल हम सुबह उठते ही सबसे पहले अपना फोन चेक करते हैं। फोन स्क्रॉल करते हुए हमारी नजर कभी किसी राजनीतिक विवाद पर पड़ती है, तो कभी नफरत कमेंट्स या कभी किसी हादसे की खबर पर। हम जाने-अंजाने में पूरा दिन इस निगेटिविटी से घिरे रहते हैं। हालांकि आपको लगे कि यह सिर्फ एक पोस्ट है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपका दिमाग इसको एक खतरे की तरह देखता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि सोशल मीडिया की निगेटिविटी कैसे हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।स्ट्रेस हार्मोनजब आप लगातार दुख भरी खबरें, हिंसा और गुस्से वाली खबरें देखते हैं। तो हमारा दिमाग कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज करने लगता है। सोशल मीडिया पर दिखने वाली निगेटिविटी दिमाग को संकेत देती है कि हम किसी खतरे में है, जिस कारण हम हर समय घबराहट या तनाव महसूस करते हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: एंग्जाइटी को कहना है अलविदा, तो डाइट में शामिल करें ये फूड्स डूमस्क्रॉलिंग की आदतअगर आप बुरी खबरें देख रहे हैं और चाहकर भी नहीं रुक पा रहे हैं, तो इसको डूमस्क्रॉलिंग कहा जाता है। बुरी खबरों को हमारा दिमाग ज्यादा अहमियत देता है। जिससे कि हम सतर्क रह सकें। लेकिन सोशल मीडिया पर यह एंडलेस साइकिल बन जाता है, जिससे सिरदर्द, नींद की कमी और मानसिक थकान होने लगती है।कंपेरिजन और हीन भावनाबता दें कि नकारात्मकता सिर्फ खबरों तक की सीमित नहीं होती है। दूसरों की परफेक्ट लाइफ देखकर खुद को उनसे कम आंकना भी निगेटिव अनुभव है। जब आप अपनी की तुलना दूसरों के फिल्टर वाली जिंदगी से करते हैं। तो हमारे अंदर जलन और लो सेल्फ एस्टीम पैदा होती है। धीरे-धीरे यह डिप्रेशन का भी रूप ले सकती है।रेज बेटिंग का ट्रेंडसोशल मीडिया पर आजकल रेज बेटिंग का ट्रेंड काफी चल रहा है। इसमें ऐसा कंटेंट जानबूझकर बनाया जाता है, जिससे आपको गुस्सा आए और आप इस तरह के पोस्ट पर कमेंट करें। एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए लोग ऐसा कंटेंट बनाते हैं। जिस कारण आपको गुस्सा आता है, स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होता है और बीपी बढ़ता है।अन्य गंभीर असरलगातार बदलती और निगेटिव जानकारी हमारे अटेंशन को कम कर देती हैं। जिस कारण हम किसी एक काम पर पूरी तरह से फोकस नहीं कर पाते हैं।जब हम सोशल मीडिया पर रोजाना बहुत सारी हिंसा या फिर दुखद कंटेंट देखते हैं। तो हमारा दिमाग उनकी तरफ सुन्न हो जाता है। वहीं हम दूसरों के दुख के लिए संवेदनहीन होने लगते हैं।सोशल मीडिया पर नफरत भरे शब्द और बहस आदि हमारे व्यवहार में दिखने लगते हैं। जिस कारण हम छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:23:46 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: एंग्जाइटी को कहना है अलविदा, तो डाइट में शामिल करें ये फूड्स</title>
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<description><![CDATA[ स्ट्रेस और एंग्जाइटी एक ऐसी समस्या है, जिसका सामना आज के समय में अधिकतर लोग कर रहे हैं। पढ़ाई से लेकर काम या फिर निजी जीवन को लेकर अक्सर लोगों को एंग्जाइटी होती है। ऐसे में अधिकतर लोग दवाइयों का सहारा लेते हैं, लेकिन अगर आप अपने खान-पान पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देते हैं तो ऐसे में नेचुरल तरीके से ही एंग्जाइटी को मैनेज कर सकते हैं। जी हां, ऐसे कई फूड्स होते हैं, जो आपको मेंटली रिलैक्स करने में काफी मददगार साबित हो सकते हैं। जिसकी वजह से हर दिन इनका सेवन करना आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ फूड्स के बारे में बता रहे हैं, जो आपको मेंटली रिलैक्स करने और एंग्जाइटी को कम करने में सहायक साबित हो सकते हैं-इसे भी पढ़ें: Health Tips:  Air Pollution का Brain पर सीधा अटैक, US Research में Alzheimer&#039;s को लेकर बड़ा खुलासाडार्क चॉकलेटअगर आप नेचुरल व हेल्दी तरीके से एंग्जाइटी से निपटना चाहते हैं तो ऐसे में डार्क चॉकलेट खाना अच्छा ऑप्शन हो सकता है। यह शरीर में तनाव हार्मोन अर्थात् कोर्टिसोल को कम करता है, जिससे ब्रेन में “फील-गुड केमिकल्स”जैसे सेरोटोनिन रिलीज़ होता है। डार्क चॉकलेट चुनते समय आप 70 प्रतिशत से ज्यादा कोको वाली चॉकलेट ही चुनें।मैग्नीशियम रिच फूड्सएंग्जाइटी को कम करने के लिए मैग्नीशियम रिच फूड्स को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। कोशिश करें कि आप केला, पालक, कद्दू के बीज, बादाम आदि को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। खासतौर से, अगर एंग्जाइटी में आपकी बॉडी टाइट फील होती है तो ऐसे में मैग्नीशियम रिच फूड्स जरूर खाने चाहिए। इससे मसल रिलैक्सेशन के साथ-साथ अच्छी नींद भी आती है।प्रोबायोटिक फूड्सप्रोबायोटिक्स फूड्स जैसे दही, योगर्ट, फरमेंट फूड्स भी मूड को बूस्ट करने में मदद कर सकते हैं। दरअसल, ये फूड्स गट हेल्थ को बेहतर बनाते हैं, जिससे मूड अच्छा होता है। आपको शायद पता ना हो, लेकिन 90 प्रतिशत सेरोटोनिन गट में बनता है। इसलिए, प्रोबायोटिक फूड्स खाकर भी आप एंग्जाइटी को नेचुरल तरीके से कम कर सकते हैं।विटामिन सी रिच फलविटामिन सी रिच फल खाने से ना केवल आपकी स्किन दमकती है, बल्कि यह एंग्जाइटी को कम करने में भी मददगार है। दरअसल, विटामिन सी के सेवन से स्ट्रेस हार्मोन कम होते हैं और ऐसे में आपको काफी रिलैक्स फील होता है। इसलिए, हर दिन बेरीज, संतरा या आंवला जैसे फलों को जरूर खाएं।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:23:46 +0530</pubDate>
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<title>TV की लत बना रही है Depression का शिकार? New Research में हुआ चौंकाने वाला खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ हाल ही में यूरोपियन साइकिएट्री जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, टीवी देखने के समय में कटौती करने से डिप्रेशन का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन के शोधकर्ताओं ने 65 हजार से ज्यादा लोगों पर 4 साल तक अध्ययन किया। इस रिसर्च में पाया गया कि रोजाना केवल 1 घंटा टीवी कम देखने से डिप्रेशन का जोखिम 11% तक घट सकता है। यदि इसे 2 घंटे कम कर दिया जाए, तो यह जोखिम 40% तक कम हो सकता है। इसका सबसे अधिक सकारात्मक प्रभाव 40 से 65 साल की उम्र के लोगों में देखा गया है।ज्यादा टीवी देखने से डिप्रेशन का खतरा क्यों?एक्सपर्ट के अनुसार, टीवी सीधे तौर पर डिप्रेशन पैदा नहीं करता, लेकिन यह उन स्थितियों को जन्म देता है जो डिप्रेशन का कारण बनती हैं। लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है और सामाजिक मेलजोल घट जाता है। इसके अलावा, हिंसक या हाई-ड्रामा कंटेंट देखने से दिमाग हमेशा अलर्ट मोड पर रहता है, जिससे तनाव पैदा करने वाले हॉर्मोन रिलीज होते हैं और मानसिक थकान बढ़ने लगती है। इसे भी पढ़ें: Mental Health Tips: Social Media की Negativity है धीमा ज़हर, आपकी Mental Health पर ऐसे हो रहा हमलानींद पर बुरा प्रभावटीवी और मोबाइल की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी हमारे दिमाग को दिन होने का भ्रम देती है। इससे शरीर में मेलाटोनिन नामक स्लीप हॉर्मोन कम बनता है, जिससे नींद आने में समस्या होती है और बॉडी क्लॉक बिगड़ जाती है। शारीरिक रूप से, टीवी के सामने घंटों बैठे रहने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और वजन बढ़ने लगता है, जो भविष्य में कई गंभीर बीमारियों को न्योता देता है।बिंज-वॉचिंग के नुकसानज्यादा टीवी देखने से व्यक्ति अकेलापन महसूस करने लगता है। बिंज-वॉचिंग की लत दिमाग को बार-बार नए कंटेंट की मांग करने पर मजबूर करती है। अक्सर स्क्रीन पर दूसरों की परफेक्ट लाइफ या डरावना कंटेंट देखने से इंसान में असुरक्षा की भावना और आत्मविश्वास की कमी आ सकती है। इसके अलावा, टीवी देखते समय मंचिंग यानी जंक फूड खाते रहने से शरीर का शुगर लेवल बिगड़ता है, जिससे चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स बढ़ते हैं। इसे भी पढ़ें: Health Tips: एंग्जाइटी को कहना है अलविदा, तो डाइट में शामिल करें ये फूड्सफिजिकल एक्टिविटी का महत्वएक्सपर्ट्स का मानना है कि वयस्कों के लिए रोजाना 1 से 2 घंटे का स्क्रीन टाइम सुरक्षित है। एक्सरसाइज, वॉक या योग करने से शरीर में फील-गुड केमिकल्स जैसे सेरोटोनिन और डोपामिन बढ़ते हैं, जो मूड सुधारते हैं। टीवी के दुष्प्रभावों से बचने के लिए इसे बेडरूम से बाहर रखें, अंधेरे कमरे में टीवी न देखें और सोने से कम से कम 2 घंटे पहले स्क्रीन बंद कर दें। टीवी देखते समय बीच-बीच में ब्रेक लेना और 10 फीट की दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।टीवी की लत को कैसे कम करें?अगर टीवी देखने की आदत कंट्रोल से बाहर हो रही है, तो इसे धीरे-धीरे कम करें। आप 30 दिन का नो टीवी चैलेंज ले सकते हैं या टीवी देखने के समय को किसी नई हॉबी (जैसे बुक रीडिंग) में बदल सकते हैं। घर में नो-स्क्रीन नियम लागू करें और टीवी के ऊपर अपने लक्ष्यों का पोस्टर चिपका दें, ताकि जब भी आप टीवी चलाएं, आपको अपने जरूरी कामों की याद आ जाए। टीवी का समय कम करने से न केवल नींद बेहतर होगी, बल्कि आपका फोकस और मानसिक ऊर्जा भी बढ़ेगी। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:23:45 +0530</pubDate>
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<title>Autism Awareness Month: क्या है ऑटिज्म? इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, जानें Experts की राय</title>
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<description><![CDATA[ हर साल 02 अप्रैल को वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे मनाया जाता है। यह बच्चों के मस्तिष्क के विकास से संबंधित एक गंभीर समस्या है। जिसका असर जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। लेकिन समय रहते बच्चों में इसके लक्षणों की पहचान और इलाज किया जाए, तो उनमें काफी हद तक सुधार आने की संभावना हो सकती है। एक अनुमान के मुताबिक हर 100 में से एक बच्चा ऑटिज्म का शिकार होता है, जिसके लिए दैनिक जीवन के काम करना और नाम सुनते ही जवाब देने में विफलता या लोगों से अलग-थलग रहने की समस्या हो सकती है।दुनियाभर में बढ़ती इस तरह की समस्या के खतरों को कम करने के लिए हर साल 02 अप्रैल को वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस मनाया जाता है। इसमें ऑटिस्टिक विकारों के शिकार व्यक्तियों के बारे में जागरुकता बढ़ाने के उपाय करने और बच्चों में इसके खतरे को कम करने के बारे में लोगों को जागरुक करना है।जानिए क्या है ऑटिज्मबता दें कि ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर मस्तिष्क के विकास से संबंधित समस्या है। जो इस बात को प्रभावित करती है कि एक व्यक्ति का दूसरों के साथ व्यवहार कैसा है। इस बीमारी के शिकार लोगों में बातचीत के कौशल और सामाजिक संपर्क में समस्याएं होने लगती हैं। इस विकार की वजह से दैनिक जीवन के सामान्य कार्यों और व्यवहार को करने तक में परेशानी हो सकती है।वहीं एएसजी के लक्षण बचपन में दिखने लगते हैं। अक्सर बच्चों में जन्म के पहले साल में ही ऑटिज्म के लक्षणों की पहचान की जा सकती है। 18 से 24 महीने की उम्र में यह विकार बढ़ी हुई समस्याओं के रूप में नजर आने लगती है।बच्चों में होने वाली दिक्कतेंकुछ बच्चों में जन्म के पहले साल में इसके लक्षण साफ तौर पर नजर आने लगते हैं। जैसे बच्चे का आई कॉन्टैक्ट कम होना, बार-बार किसी बात को रटते रहना, नाम सुनने की प्रतिक्रिया में कमी और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी महसूस होना आदि।ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार वाले कुछ बच्चों को सीखने आदि में परेशानी होती है। वहीं कुछ बच्चों में सामान्य से कम बुद्धि के लक्षण होते हैं। इस विकार वाले अन्य बच्चों में सामान्य से उच्च बुद्धि हो सकती है। वह जल्दी सीखते हैं औऱ रोजमर्रा की जिंदगी में जो भी जानते हैं, उसको संप्रेषित करने और प्रयोग करने में परेशानी हो सकती है।समस्याएंऐसे काम करना जो खुद को नुकसान पहुंचा सकती है, जैसे सिर पीटना या काटना।दिनचर्या के एक खास रूटीन में रमा होना और थोड़े सा बदलाव होने पर परेशान हो जाना।समन्वय के साथ समस्याएं होना, जैसे पैर की उंगलियों पर चलना या फिर शरीर का बैलेंस बनाने में समस्या होना।ध्वनि, प्रकाश या स्पर्श के प्रति असामान्य रूप से संवेदनशील होना।सामाजिक या भाषा कौशल में कठिनाई होना।डॉक्टरों की लें मददजन्म के पहले-दूसरे साल में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार के लक्षण दिखने लग जाते हैं। अगर आप अपने बच्चे के विकास के बारे में चिंतित हैं, या फिर आपको संदेह है कि आपके बच्चे को ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर हो सकता है। इसलिए डॉक्टर से चर्चा करें। वैसे तो ऑटिज्म के लिए कोई खास इलाज नहीं है पर थेरेपी और अन्य उपायों के जरिए इन लक्षणों में सुधार करके जीवन की गुणवत्ता को सुधारा जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:23:45 +0530</pubDate>
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<title>Cold Water Side Effects: गर्मी में Cold Water पीना बढ़ा सकता है जान का Risk, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ मार्च-अप्रैल के महीने में मौसम अक्सर अनिश्चित रहता है। कभी तेज धूप और कभी अचानक बारिश होती है। लेकिन एक छोटी सी लापरवाही आपके सेहत को बिगाड़ सकती है। इस मौसम में ठंडा पानी पीना भी सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। होली के बाद हल्की गर्मी होने लगती है। जिस कारण लोग ठंडा पानी पीना शुरूकर देते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो बदलते मौसम में गर्म और ठंडे पानी का संतुलित सेवन करना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि मौसम बदलने पर ठंडा पानी पीने से शरीर को कौन-कौन से नुकसान हो सकते हैं।पाचन संबंधी समस्या होनाठंडा पानी पीने से पाचन तंत्र प्रभावित होता है।खाना खाने के फौरन बाद ठंडा पानी पीने से गैस, पेट में ऐंठन और डकार जैसी समस्या हो सकती है।ठंडा पानी पाचन एंजाइम्स जैसी गतिविधि को धीमा कर देता है।ठंडे पानी के कारण खाना सही से पच नहीं पाता है।इसे भी पढ़ें: TV की लत बना रही है Depression का शिकार? New Research में हुआ चौंकाने वाला खुलासासर्दी-जुकाम और खराशठंडा पानी पीने से गले में खराश और नाक बहने जैसी समस्या हो सकती हैं।बदलते मौसम में ठंडा पानी पीना खतरनाक हो सकता है। यह प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट करता है, जिससे वायरल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।कमजोर इम्यूनिटीअगर आप लगातार ठंडा पानी पीते हैं, तो शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है।इम्यूनिटी कमजोर होने पर आपको सर्दी-जुकाम, बुखार और अन्य संक्रमण जल्दी पकड़ सकते हैं।एक्सपर्ट के मुताबिक बदलते मौसम में गुनगुना या फिर तापमान के मुताबिक पानी पीना चाहिए।माइग्रेन और सिरदर्दकुछ लोगों को ठंडा पानी पीने से सिर दर्द या फिर माइग्रेन की शिकायत हो सकती है।यह ब्रेन फ्रीज या फिर सिर में रक्त वाहिकाओं के संकुचन की वजह से होता है।अगर आपको माइग्रेन की समस्या है, तो आपको ठंडा पानी पीने से बचना चाहिए। हृदय पर असर होनाअचानक से ठंडा पानी पीने पर ब्लड प्रेशर या रक्तस्त्राव में अस्थायी बदलाव आ सकता है।खासकर यह उन लोगों के लिए नुकसानदेह है, जिनको हृदय संबंधी समस्याएं हैं। उनको ठंडे पानी का सेवन करने से बचना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:23:44 +0530</pubDate>
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<title>Child Health: ये 6 देसी Superfoods हैं कमाल, महीने भर में बढ़ेगा बच्चे का Weight Gain</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर माता-पिता इस बात से परेशान रहते हैं कि उनका बच्चा खाना तो भरपेट खाता है, लेकिन इसके बाद भी वह दुबला-पतला है और उसका वेट भी नहीं बढ़ रहा है। अगर आप भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक आप बच्चे की डाइट में कुछ खास फूड्स को शामिल करके इस समस्या को दूर कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको उन बेहतरीन सुपरफूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जोकि बच्चे का वेट बढ़ाने में मदद करती है। दाल और घीकिसी भी दाल को पहले अच्छे से उबाल लें। फिर इसको मैश करके इसमें घी मिलाएं और बच्चे को खाने के लिए दें। यह वजन बढ़ाने का एक अच्छा तरीका है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: रोज करें एक्सरसाइज, Body के साथ Brain भी रहेगा फिट, Alzheimer&#039;s का खतरा होगा कमटोफू, पनीर या अंडाबच्चे के सभी विकास के लिए जरूरी होता है कि उनके शरीर को सभी पोषक तत्व मिलें। टोफू, अंडे या पनीर में प्रोटीन पाया जाता है, जोकि बच्चे का वेट बढ़ने में मदद मिलती है।शकरकंद या आलूआलू या शकरकंद को अच्छे से उबालकर और मैश करके बच्चे को खाने को दें। इसमें कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और फाइबर होते हैं, जोकि शरीर को एनर्जी देने का काम करता है और तेजी से वेट बढ़ाता है।सूखे मेवेसूखे मेवों को बीरीक पीस लें और इसके पाउडर को दही, दूध या दाल में मिलाकर बच्चे को दे सकते हैं। क्योंकि ड्राई फ्रूट्स बच्चे का वेट बढ़ाने में असरदार होते हैं।ओट्स की दलिया और आटे का हलवाआप हल्की चीनी डालकर बच्चे को आटे का हलवा भी बनाकर खिलाना चाहिए। इससे भी वजन बढ़ता है। आप बच्चे को ओट्स की दलिया बनाकर दे सकते हैं। यह भी वेट गेन में मदद करता है।फुल फैट दही और फलफुल फैट दही में चीकू, केला या आम मिलाकर टेस्टी फ्रूट योगर्ट तैयार करें और बच्चे को खाने को दें। इससे बच्चे का वेट तेजी से बढ़ता है।अगर आपका बच्चा अंडरवेट है और उसका भी वेट नहीं बढ़ रहा है। तो आप उसको पौष्टिक चीजें दे सकते हैं। डॉक्टर का मानना है कि इससे भी बच्चे का वेट बढ़ेगा और उसके शरीर में किसी भी तरह के पोषण की कमी नहीं रहेगी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 30 Mar 2026 12:54:18 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: रोज करें एक्सरसाइज, Body के साथ Brain भी रहेगा फिट, Alzheimer&amp;apos;s का खतरा होगा कम</title>
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<description><![CDATA[ जैसा कि हम सभी जानते हैं कि व्यायाम करना हमारे शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह हमारे दिमाग को अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियों से बचा सकता है। बता दें कि शोधकर्ताओं ने एक नई जैविक प्रक्रिया की पहचान की है, जिसमें यह पूरी तरह से साफ कर दिया गया है कि शारीरिक एक्टिविटी से हमारे सोचने और याद रखने की क्षमता में सुधार क्यों होता है। यह शोध बताता है कि व्यायाम सिर्फ बॉडी ही नहीं बल्कि दिमाग को जवां बनाए रखता है।उम्र के साथ कमजोर होता है दिमागहमारे मस्तिष्क की सुरक्षा के लिए एक खास परत होती है, जिसको ब्लड ब्रेन बैरियर कहा जाता है। यह ब्लड वाहिकाओं का एक जटिल जाल है, जो सामान्य तौर पर खून में मौजूद हानिकारक पदार्थों को दिमाग में जाने से रोकता है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: दोपहर की नींद बन सकती है &#039;Silent Killer&#039;, बढ़ाती है Heart Attack और Diabetes का खतरालेकिन जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, यह सुरक्षा कवच कमजोर पड़ने लगता है और इसमें रिसाव होने लगता है। इस रिसाव की वजह से खून से हानिकारक प्रोटीन मस्तिष्क के ऊतकों में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। यह हानिकारक प्रोटीन दिमाग में सूजन पैदा करते हैं। जोकि सीधे रूप में बौद्धिक क्षमता में गिरावट और अल्जाइमर जैसी बीमारियों से जुड़ा होता है।मस्तिष्क की मरम्मत करता है व्यायामव्यायाम एक जादू की तरह काम करता है। शोध के मुताबिक फिजिकल एक्टिविटी मस्तिष्क के इस अंतर्निहित रक्षा तंत्र को मजबूत करती है। जब आप व्यायाम करते हैं, तो हमारा शरीर लिवर को एक खास एंजाइम छोड़ने के लिए प्रेरित करता है। यह एंजाइम उन हानिकारक प्रोटीनों को नष्ट कर देता है, जो दिमाग को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं व्यायाम मस्तिष्क की इस सुरक्षात्मक परत की मरम्मत करके दिमाग को तेज करता है। इससे बढ़ती उम्र के साथ दिमाग के कमजोर होने का प्रोसेस भी धीमा हो जाता है।भविष्य के लिए उम्मीदइस प्रोसेस को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने चूहों पर अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि जब शरीर में हानिकारक प्रोटीन की मात्रा को कम किया गया, तो चूहों के दिमाग की सूजन कम हो गई। उनकी याददाश्त में भी काफी सुधार हुआ। यह महत्वपूर्ण खोज है, क्योंकि इसके माध्यम से अल्जाइमर और उम्र के साथ होने वाली दिमागी समस्याओं के लिए नए और बेहतर उपचार ढूंढने में मदद मिल सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 29 Mar 2026 12:03:16 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: दोपहर की नींद बन सकती है &amp;apos;Silent Killer&amp;apos;, बढ़ाती है Heart Attack और Diabetes का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ दोपहर के समय में एक छोटी सी झपकी लेना हम सभी को पसंद होता है। दिनभर की थकान के बीच यह कुछ पल का सुकून जरूर देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि डॉक्टर के मुताबिक दोपहर की नींद आपके लिए यह जानलेवा भी साबित हो सकती है। हार्वर्ड की एक स्टडी ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया है कि दोपहर में सोने की आदत दिल की बीमारियों, डायबिटीज और यहां तक कि समय से पहले मौत के खतरे को बढ़ा सकती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इसके बारे में बताने जा रहे हैं।सोने से पहले जान लें ये नियमदरअसल, दोपहर की नींद बुरी नहीं होती है। लेकिन खतरा तब पैदा होता है, जब आप &#039;गलत समय&#039; या &#039;गलत अवधि&#039; के लिए सोते हैं।  शरीर के लिए गलत तरीके और गलत समय से ली गई झपकी किसी जहर की तरह काम करती है, वहीं आपकी सेहत को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाती है।इसे भी पढ़ें: Women Health: क्या प्रेग्नेंसी वाला Sugar, Delivery के बाद भी बना रहता है? जानें पूरा सचहेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक एक स्टडी में बताया गया है कि आप खुद को इस खतरे से कैसे बचा जा सकता है। अगर आप दोपहर में सोना ही चाहते हैं और बीमारियों से भी बचना चाहते हैं। तो आपको इन दो आसान नियमों का पालन करना चाहिए।सही अवधिदोपहर की झपकी सिर्फ 10 से 30 मिनट के बीच होना चाहिए। इससे ज्यादा लंबी नींद आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है।सही समयदोपहर की छोटी सी झपकी लेने का सबसे सुरक्षित समय सुबह 11:00 बजे दोपहर 02:00 बजे के बीच का है। दोपहर 2 बजे के बाद भूलकर भी नहीं सोना चाहिए।वहीं सबसे जरूरी बात यह है कि आपको अपनी नींद का मुख्य हिस्सा रात में ही पूरा करना चाहिए। अगर आप रात में बिना किसी परेशानी के सुकून भरी नींद लेना चाहते हैं, तो दोपहर में ज्यादा देर नहीं सोना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 28 Mar 2026 12:30:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Women Health: क्या प्रेग्नेंसी वाला Sugar, Delivery के बाद भी बना रहता है? जानें पूरा सच</title>
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<description><![CDATA[ प्रेग्नेंसी के समय कई महिलाओं को डायबिटीज की समस्या हो जाती है। जिसको जेस्टेशनल डायबिटीज कहा जाता है। इस स्थिति में महिलाओं को ब्लड शुगर की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन ऐसे में मन में यह सवाल आता है कि क्या यह स्थिति डिलीवरी के बाद भी रह सकती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली डायबिटीज क्या डिलीवरी के बाद भी रह सकती है।डायबिटीज का खतराहेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक आमतौर पर डिलीवरी के बाद जेस्टेशनल डायबिटीज ठीक हो जाता है। अधिकतर मामलों में डिलीवरी के बाद प्लेंसेंटा निकालने के बाद ब्लड शुगर का लेवल सामान्य हो जाता है। लेकिन ध्यान रखें कि बच्चे के जन्म के करीब 6 से 12 सप्ताह बाद तक ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट कराना चाहिए। लेकिन अगर किसी महिला को पहले से डायबिटीज की समस्या है, तो उनको अपनी सेहत का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चे के ग्रोथ को बढ़ाने के लिए महिलाओं के शरीर में हार्मोन्स प्रभावित होते हैं। जिसकी वजह से इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या बढ़ती है।इसे भी पढ़ें: Uric Acid और Joint Pain से हैं परेशान? ये चमत्कारी Detox Drink देगा फौरन राहतजेस्टेशनल डायबिटीज का खतराअगर प्रेग्नेंसी से पहले मोटापे की स्थिति में है।डिलीवरी के बाद अधिक वेट बढ़ने पर।जेनेटिक प्रेडिस्पोजिशन की स्थिति में।फिजिकल एक्टिविटी न करने की वजह से।प्रेग्नेंसी के समय इंसुलिन ट्रीटमेंट लेने की स्थिति में।ज्यादा मीठा खाने की वजह से हाई शुगर की समस्या होने पर। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 27 Mar 2026 10:01:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>World TB Day: भारत में क्यों हैं दुनिया के सबसे ज्यादा TB Cases? ये लक्षण दिखें तो रहें अलर्ट</title>
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<description><![CDATA[ हर साल 24 मार्च को &#039;वर्ल्ड ट्यूबरक्लोसिस डे&#039; मनाया जाता है। वर्ल्ड टीबी डे को इसलिए भी मनाया जाता है कि ताकि लोग इस संक्रामक रोग के प्रति जागरुक रहे। भारत में टीबी एक गंभीर हेल्थ समस्या बनीं हुई है। दुनियाभर में सबसे अधिक टीबी के मामले भारत में ही दर्ज किए जाते हैं। इस साल 2026 में ट्यूबरक्लोसिस डे की थीम है &#039;हां, हम टीबी खत्म कर सकते हैं&#039;, जिसका उद्देश्य 2030 तक टीबी को खत्म करने की दिशा में प्रयासों को तेज करना है। फिलहाल भारत में टीबी अभी भी एक बड़ी हेल्थ समस्या बनीं हुई है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और जागरुकता के बावजूद अभी भी भारी संख्या में टीबी के मरीज के इस बीमारी से जूझ रहे हैं। आपको बता दें कि, यह बीमारी भीड़भाड़ वाली जगहों पर यह रोग तेजी से फैलता है। इस लेख हम आपको टीबी के कारण, लक्षण और बचाव बताएंगे।क्या है ट्यूबरक्लोसिस क्या है?ट्यूबरक्लोसिस यानी टीबी एक संक्रामक रोग है। आमतौर पर ये मुख्य रुप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन ये शरीर के अन्य पार्ट्स में फैल सकता है। बता दें कि, यह बीमारी माइकोबैक्टीरियल ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया से फैलती है। टीबी का सही समय पर उचित इलाज न हो तो ये जानलेवा भी हो सकती है।टीबी की बीमारी कैसे फैलती हैटीबी एक संक्रमित बीमारी है जो व्यक्ति के खांसने और छींकने से भी यह रोग अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है। जिन लोगों को एक्टिब टीबी है, उन्हीं के कारण से यह रोग दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। खराब वेंटिलेशन और भीड़भाड़ वाले स्थानों में टीबी फैलने का खतरा अधिक होता है। वहीं, भारत में यह बीमारी कुपोषण, कमजोर इम्यून और खराब लाइफस्टाइल के चलते फैलती है। जब प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और टीबी होने का जोखिम बढ़ जाता है।इसके अलावा, डायबिटीज और एचआईवी के इन्फेक्शन से पीड़ित रोगियों, सिगरेट और शराब का सेवन तथा वायु प्रदूषण से भी टीबी की बीमारी हो सकती है।टीबी के लक्षण-2 हफ्ते से ज्यादा समय तक खांसी-खांसी के साठ बलगम या खून आना-बेवजह थकान और कमजोरी-भूख कम हो जाना-लगातार वजन घटना-बुखार ठीक न होना-सीने में दर्द रहना टीबी के कितने प्रकार हैटीबी दो प्रकार है: - पल्मोनरी टीबी- सबसे आम प्रकार पल्मोनरी टीबी है, जो फेफड़ों को प्रभावित करती है। इसके लक्षण दो हफ्तों से अधिक रहते हैं, जैसे कि खांसी, सीने में दर्द, खांसी के साथ खून या बलगम आना, बुखार, रात में पसीना आना, थकान और वजन कम होना शामिल हैं। कई लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं या इसे सामान्य सर्दी समझ लेते हैं, जिससे इलाज में देरी होगी।- एक्सट्रापल्मोनरी टीबी- टीबी शरीर के अन्य हिस्सों को प्रभावित करती है। इसे एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी कहा जाता है। यह हड्डियों, जोड़ों, मस्तिष्क या पेट को प्रभावित कर सकती हैं। इसके लक्षण प्रभावित जगह पर निर्भर करते हैं, जैसे कि गर्दन में सूजन, जोड़ों में दर्द या गंभीर सिरदर्द। टीबी को फैलने से कैसे रोकें?- हमेशा खांसते या छींकते समय मुंह को ढक लें।- लोगों के बहुत करीब न आएं।- ऑफिस या स्कूल न जाएं।- मास्क पहनकर घर से निकलें।- घर का वेंटिलेशन अच्छा रखें। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 26 Mar 2026 10:12:47 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: सिर्फ मास्क नहीं, ये Natural Boosters बनाएंगे आपकी Immunity को फौलादी</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में तेजी से बढ़ता एयर पॉल्यूशन हमारी इम्यूनिटी के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। गाड़ियों के धुएं, लंबे समय तक धूल और इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन के संपर्क में रहने के लिए सिर्फ फेफड़ों में जलन होती है बल्कि शरीर का नेचुरल इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो जाता है। इससे बार-बार एलर्जी, इंफेक्शन, लगातार थकान और शरीर में सूजन की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए आज के समय में इम्यूनिटी मजबूत करना सिर्फ ऑप्शन नहीं बल्कि एक जरूरत बन चुका है।विश्व स्वास्थ्य संगठन की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की लगभग पूरी आबादी ऐसे इलाकों में रहती है, जहां पर एयर क्वालिटी तय मानकों से नीचे है। यह बताता है कि पॉल्यूशन ग्लोबल समस्या बन चुकी है। भारत में कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि मौसम और पॉल्यूशन में बदलाव की वजह से सांस से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।इसे भी पढ़ें: Health Experts का Alert! चक्कर आने को न समझें मामूली, इन 3 खतरनाक लक्षणों पर रखें नजरबता दें कि साल 2024 के एक शहरी अध्ययन के मुताबिक करीब 18.3% वयस्क हर साल सांस संबंधी बीमारियों से प्रभावित होते हैं। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर माना जाता है कि करीब हर 6 में से 1 व्यक्ति एलर्जिक राइनाटिस से जूझता है। यह आंकड़े बताते हैं कि अब हमें अंदर से मजबूत और लंबे समय तक असर करने वाले उपायों की जरूरत पड़ेगी। इसलिए आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इम्यूनिटी को मजबूत बनाने वाले उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं।इम्यूनिटी के लिए मौसमी आहारपॉल्यूशन से होने वाले नुकसान से लड़ने में सही डाइट अहम भूमिका निभाता है। अधिक पॉल्यूशन वाले महीनों में ऐसे फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए। जो एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर हों। जैसे पालक, आंवला, चुकंदर और संतरा आदि का सेवन करना चाहिए। मौसमी चीजें शरीर को नेचुरल तरीके से डिटॉक्स करती हैं।काढ़ा, सूप, हल्दी वाला भोजन, लहसुन, अदरक और जीरा जैसी चीजें डाइजेशन को सुधारती हैं और इम्यूनिटी को मजबूत करती है। वहीं पर्याप्त पानी पीना जरूरी है, इससे पॉल्यूशन से शरीर में जमा टॉक्सिन्स बाहर निकलता है।इम्यूनिटी बढ़ाने वाला लाइफस्टाइललाइफस्टाइल में छोटे-छोटे लेकिन नियमित बदलाव बड़ा फर्क ला सकते हैं। ब्रीदिंग एक्सरसाइज, प्रणायाम और रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है। शरीर में ऑक्सीजन का सही इस्तेमाल होता है।कम स्क्रीन टाइम, अच्छी नींद और तनाव को कंट्रोल करना जरूरी है। क्योंकि लगातार तनाव इम्यूनिटी को कमजोर करता है। घर के अंदर हवा को साफ रखने के उपाय और नमक वाले पानी से नाक की सफाई करने से सांस की नलियों पर पॉल्यूशन का असर कम होता है।इम्यूनिटी में होम्योपैथी की भूमिकाहोम्योपैथी सिर्फ लक्षणों को दबाने पर नहीं बल्कि शरीर की अंदरूनी इम्यूनिटी को मजबूत करने पर काम करती है। इसमें व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक बनावट, लाइफस्टाइल और मानसिक स्थिति को समझकर इलाज किया जाता है।होम्योपैथिक दवाएं शरीर की इंफेक्शन से लड़ने की क्षमता, सांस से जुड़ी समस्याओं और एलर्जी की बार-बार होने वाली समस्या को कम करने में सही करती है। यह तरीका समय के साथ शरीर को पॉल्यूशन जैसे पर्यावरणीय तनावों के साथ बेहतर तरीके से ढलने में मददगार होता है। क्योंकि होम्योपैथिक इलाज व्यक्ति विशेष पर आधारित होता है, इसलिए किसी अच्छे होम्योपैथिक डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा शुरू करनी चाहिए।वर्तमान समय में पॉल्यूशन से पूरी तरह से बच पाना मुश्किल है। लेकिन सही डाइट और बैलेंस लाइफस्टाइल अपनाकर इसके असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इम्यूनिटी मजबूत करना भविष्य की ऊर्जा, अच्छी सेहत और बेहतर जीवन के लिए अहम निवेश हो सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 26 Mar 2026 10:12:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Dental Care: क्या Baking Soda से दांत साफ करना है सही, एक्सपर्ट्स ने बताया पूरा सच</title>
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<description><![CDATA[ नियमित रूप से दांतों की सफाई के लिए दो बार ब्रश करना चाहिए। यह आपकी ओरल हेल्थ के लिए भी सही है। इससे दांतों में कैविटी नहीं लगती है और न ही मसूड़ों से संबंधित समस्या होती है। कुछ लोग दांतों की क्लीनिंग के लिए सिर्फ बाजार में मिलने वाले पेस्ट का उपयोग नहीं करते हैं। इसके अलावा दांतों पर बेकिंग सोडा भी लगाते हैं। ऐसे में यह सवाल जरूर मन में उठता है कि दांतों पर बेकिंग सोडा लगाना कितना सही है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या बेकिंग सोडा का रोजाना कर सकते हैं।बेकिंग सोडा जिसको सोडियम बाइकार्बोनेट के नाम से जानते हैं। इसमें अल्कलाइन प्रॉपर्टी पाई जाती है। जोकि दांतों की हेल्थ के लिए सही है। इसका इस्तेमाल करने से दांतों की ऊपरी परत के दाग-धब्बे दूर होते हैं। प्लाक कम करते हैं और मुंह का एसिड भी बेअसर हो जाता है। देखा जाए, तो दांतों पर बेकिंग सोडा लगाना पूरी तरह सुरक्षित है। हेल्थ एक्सपर्ट इसको ओरल क्लींजर भी कहते हैं। इससे दांतों का पीलापन दूर हो जाता है और दाग-धब्बे भी निकलते हैं।इसे भी पढ़ें: Healthy समझकर गन्ने का रस पी रहे हैं? इन 5 Health Problems में यह बन सकता है &#039;जहर&#039; कितनी बार यूज करेंहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो सप्ताह में सिर्फ दो बार बेकिंग का इस्तेमाल करना काफी होता है। इससे ज्यादा बेकिंग सोडा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इससे दांतों को फायदा होने की जगह नुकसान हो सकता है। ओरल हाइजीन के लिए आप रोजाना दो बार ब्रश करें और समय-समय पर फ्लॉसिंग भी करनी चाहिए।बेकिंग सोडा यूज करने के नुकसानअगर आप रोजाना बेकिंग सोडा का दांतों पर इस्तेमाल करते हैं, तो यह सही नहीं है। इससे दांतों का इनेमल कमजोर हो सकता है, जिससे दांतों की सेंसिटिविटी बढ़ सकती है। यह मसूड़ों को भी प्रभावित करता है। हेल्थ एक्सपर्ट भी बताते हैं कि अगर किसी ने अपने दांतों पर क्राउन, ब्रेसेस या कैप लगा रखी है, तो उन लोगों को भी बेकिंग सोडा का इस्तेमाल कम करना चाहिए। ज्यादा इस्तेमाल करने से दांतों पर उपयोग हुए प्रोडक्ट कमजोर होकर निकल सकते हैं।फायदेबेकिंग सोडा के इस्तेमाल से दांतों की चमक बढ़ती है औऱ दाग-धब्बे दूर होते हैं।बेकिंग सोडा की सहायता से प्लाक दूर होता है।मुंह से मौजूद एसिड भी बेकिंग सोडा से माइल्ड हो जाता है।बेकिंग सोडा में अल्कलाइन पाया जाता है, जोकि मुंह की बदबू दूर करता है।बेकिंग सोडा के इस्तेमाल से मुंह की बदबू से छुटकारा मिलता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 26 Mar 2026 10:12:45 +0530</pubDate>
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<title>Healthy समझकर गन्ने का रस पी रहे हैं? इन 5 Health Problems में यह बन सकता है &amp;apos;जहर&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ समर सीजन में सबसे ज्यादा गन्ने का रस पिया जाता है। यह एक प्रकार ठंडा और रिफ्रेशिंग ड्रिंक है। गन्ने का जूस पीने से शरीर को तुरंत ठंडक मिलती है और भरपूर एनर्जी मिलती है। हालांकि इसका जूस हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता है। आमतौर पर कई महिलाएं इसको नेचुरल और हेल्दी जानकर बिना-समझे इसको पी लेते हैं। लेकिन उनको इसके नुकसान नहीं पता। अगर आप गन्ने के रस को अधिक मात्रा में पीते हैं, तो इससे आपके शरीर को काफी नुकसान हो सकता है। जिन लोगों को कुछ हेल्थ कंडीशन्स हैं, तो आप गन्ने का रस आपके लिए परेशानी बन जाएगा। आइए आपको बताते हैं इसके नुकसान।डायबिटीजयदि आप डायबिटीज के मरीज है, तो आप गन्ने का रस अधिक न पिएं। वहीं, डॉक्टर की बिना सलाह के गन्ने का रस न पिएं। क्योंकि गन्ने के रस में लगभग 40-50 ग्राम शुगर होती है। इसका ग्लाइसेमिक लोड हाई(20-25) होता है। इसके सेवन से तेजी से आपका ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाएगा।वेट लॉसअगर आप बढ़ते हुए वजन से परेशान है और मोटापा कम करने की कोशिश में लगे हुए है, तो आपको गन्ने का रस पीने से बचना चाहिए। इसमें 150-180 कैलोरी होती है। असल में गन्ने के जूस में लिक्विड शुगर होने के कारण पेट भरा हुआ महसूस नहीं होता है। इसके सेवन से आपको बार-बार भूख लगती है और वजन बढ़ सकता है। फैटी लिवरगन्ने के रस में सुक्रोज मौजूद होता है, जो शरीर में जाकर ग्लूकोज और फ्रक्टोज में टूटता है। ज्यादा फ्रक्टोज लिवर में फैट के रुप में जमा हो जाता है। अधिक गन्ने के जूस के सेवन से फैटी लिवर की समस्या बढ सकती है। इसलिए फैटी लिवर से परेशान महिलाओं को गन्ने का रस रेगुलर पीने से बचना जरुरी है।किडनी से जुड़ी समस्याजिन लोगों को किड़नी से जुड़ी समस्याएं हैं, वो लोग डॉक्टर से पूछे बिना गन्ने का रस नहीं पीना चाहिए। एक गिलास में लगभग 250-300 mg पोटैशियम होता है। किडनी की समस्या होने पर यह शरीर में जमा हो जाता है। यह हार्ट और मसल्स पर असर डालता है। इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम (IBS)आमतौर पर यह एक क्रोनिक डिजीज है जो गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट को प्रभावित करता है। जब आप गन्ने का रस पीते हैं, तो आपका पेट दर्द, ऐंठन, सूजन, गैस और दस्त या कब्ज जैसे लक्षण शामिल हैं। ज्यादा शुगर आंतों में osmotic effect उत्पन्न करते हैं। जिससे ब्लोटिंग, गैस या लूज मोशन जैसी समस्याएं हो सकती है। जिन लोगों का पेट संवेदनशील है उनको यह ट्रिगर कर सकता है। अगर आपका पेट जल्दी खराब होता है तो इसे पीने से बचना चाहिए। सावधानी- गन्ने का रस नेचुरल होने का यह मतलब नहीं है कि हर किसी के लिए सुरक्षित है।- इसके साथ ही मात्रा और आपकी हेल्थ कंडीशन दोनों बहुत मायने रखते हैं।- कभी-कभार और सीमित मात्रा में पिएं।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 26 Mar 2026 10:12:45 +0530</pubDate>
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<title>क्या होगा अगर आप रोज खाएं अंडा? Expert ने बताए दिमाग से लेकर आंखों तक के लिए इसके Health Benefits</title>
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<description><![CDATA[ अंडा आपके लिए सबसे बेहतरीन नाश्ता साबित हो सकता है क्योंकि यह प्रोटीन और कई जरूरी पोषक तत्वों का खजाना है। अक्सर लोग यह सोचते हैं कि अंडा सिर्फ उन्हीं के लिए है जो जिम जाते हैं या भारी कसरत करते हैं। लेकिन सच तो यह है कि चाहे आप वर्कआउट करें या न करें, आपके शरीर को प्रोटीन की जरूरत हमेशा होती है। अच्छी बात यह है कि आप इसे अपनी डेली डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। कैलिफोर्निया के मशहूर गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी (एम्स, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से प्रशिक्षित) ने बताया है कि लगातार 14 दिनों तक अंडा खाने से शरीर पर क्या असर पड़ता है।दिमागी ताकत और एकाग्रता में बढ़ोतरीडॉ. सेठी के अनुसार, अंडे में &#039;कोलीन&#039; नाम का एक खास पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह शरीर में &#039;एसिटाइलकोलीन&#039; बनाने में मदद करता है, जो एक महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर है। यह तत्व हमारी याददाश्त को तेज करने और किसी भी काम में फोकस यानी एकाग्रता बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है। इसे भी पढ़ें: Dental Care: क्या Baking Soda से दांत साफ करना है सही, एक्सपर्ट्स ने बताया पूरा सचकोलेस्ट्रॉल लेवल में सुधारज्यादातर लोग अंडे की जर्दी में मौजूद कोलेस्ट्रॉल को लेकर डरे रहते हैं और इसी वजह से इसे रोज नहीं खाते। हालांकि, डॉ. सेठी का कहना है कि नियमित रूप से अंडे खाने से असल में कोलेस्ट्रॉल की प्रोफाइल बेहतर हो सकती है। कई लोगों में अंडा खाने से &#039;एचडीएल&#039; यानी शरीर के लिए फायदेमंद &#039;अच्छे कोलेस्ट्रॉल&#039; की मात्रा बढ़ जाती है।आंखों की रोशनी और सुरक्षा के लिए फायदेमंदरोजाना अंडा खाने से हमारी आंखों को खास सुरक्षा मिलती है। डॉ. सेठी ने समझाया कि अंडे की जर्दी में &#039;ल्यूटिन&#039; और &#039;जेक्सैंथिन&#039; जैसे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। ये तत्व मोबाइल और कंप्यूटर से निकलने वाली हानिकारक नीली रोशनी (ब्लू लाइट) को फिल्टर करते हैं और बढ़ती उम्र में भी आंखों को स्वस्थ बनाए रखते हैं। इसे भी पढ़ें: Healthy समझकर गन्ने का रस पी रहे हैं? इन 5 Health Problems में यह बन सकता है &#039;जहर&#039;त्वचा और बाल के लिए जरूरीअंडे में सल्फर वाले अमीनो एसिड होते हैं, जो शरीर में &#039;केराटिन&#039; बनाने में मदद करते हैं। केराटिन एक ऐसा प्रोटीन है जो हमारे बालों, नाखूनों और त्वचा की बनावट के लिए सबसे अहम है। इसे खाने से आपकी स्किन हेल्दी रहती है और बालों की मजबूती बढ़ती है।शाकाहारी लोगों के लिए विकल्पजो लोग अंडा नहीं खाते, उनके लिए डॉ. सेठी ने बेहतरीन प्लांट-बेस्ड विकल्प भी सुझाए हैं। सोया से बनी चीजें जैसे टोफू, टेम्पेह और एडामे प्रोटीन के मामले में अंडे के सबसे करीबी और बढ़िया शाकाहारी विकल्प माने जाते हैं।



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<pubDate>Thu, 26 Mar 2026 10:12:44 +0530</pubDate>
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<title>नई Research में खुलासा, सुबह की कसरत से टल जाएगा इन गंभीर बीमारियों का खतरा</title>
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<description><![CDATA[ एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि जो लोग सुबह के समय कसरत करते हैं, उनमें हाई ब्लड प्रेशर, टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा उन लोगों की तुलना में काफी कम होता है, जो दिन के दूसरे समय एक्सरसाइज करते हैं। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और बेथ इजरायल डिकनेस मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने करीब 15,000 लोगों के दिल की धड़कन  के डेटा का एक साल तक बारीकी से विश्लेषण करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है।कैसे की गई यह रिसर्च?वैज्ञानिकों ने उन समयों को &#039;एक्सरसाइज&#039; माना जब लोगों के दिल की धड़कन लगातार कम से कम 15 मिनट तक बढ़ी रही। इसके लिए वियरेबल डिवाइसेस (जैसे स्मार्टवॉच) से डेटा इकट्ठा किया गया। रिसर्च के दौरान उम्र, जेंडर, कमाई, नींद की क्वालिटी, शराब और स्मोकिंग जैसी आदतों को भी ध्यान में रखा गया ताकि नतीजे सटीक मिल सकें। इसे भी पढ़ें: क्या होगा अगर आप रोज खाएं अंडा? Expert ने बताए दिमाग से लेकर आंखों तक के लिए इसके Health Benefitsमुख्य नतीजा: सुबह 7-8 बजे का समय सबसे बेस्टस्टडी के अनुसार, दिन में देर से कसरत करने वालों के मुकाबले सुबह एक्सरसाइज करने वालों में ये फायदे देखे गए। इसमें मोटापे का खतरा 35% कम, दिल की बीमारियों (कोरोनरी आर्टरी डिजीज) का खतरा 31% कम, टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 30% कम, हाई कोलेस्ट्रॉल की संभावना 21% कम और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा 18% कम देखा गया। विशेषज्ञों ने पाया कि जो लोग सुबह 7 से 8 बजे के बीच वर्कआउट करते हैं, उनमें दिल की बीमारियों का जोखिम सबसे कम रहता है।सुबह कसरत करने के पीछे का विज्ञानजानकारों का मानना है कि इसके पीछे शरीर की &#039;जैविक घड़ी&#039; (सर्केडियन रिदम) का हाथ हो सकता है। सुबह के समय शरीर में &#039;कोर्टिसोल&#039; जैसे स्ट्रेस हार्मोन का लेवल प्राकृतिक रूप से बढ़ा होता है, जो शरीर को एक्टिव होने में मदद करता है। सुबह की एक्सरसाइज एक सिग्नल की तरह काम करती है, जो शरीर को पूरी तरह जगा देती है और दिनभर एनर्जी लेवल बनाए रखती है। साथ ही, सुबह वर्कआउट करने वाले लोग अक्सर ज्यादा अनुशासित जीवन जीते हैं और देर रात अनहेल्दी स्नैक्स खाने से बचते हैं। इसे भी पढ़ें: Dental Care: क्या Baking Soda से दांत साफ करना है सही, एक्सपर्ट्स ने बताया पूरा सचनियमितता सबसे ज्यादा जरूरीहालांकि यह स्टडी सुबह के समय को बेहतर बताती है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि सबसे जरूरी चीज &#039;नियमितता&#039; है। अगर आपके लिए सुबह समय निकालना मुश्किल है, तो दोपहर या शाम को एक्सरसाइज करना भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। सुबह का फायदा यह है कि इस वक्त काम का दबाव कम होता है और वर्कआउट मिस होने की संभावना कम रहती है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 26 Mar 2026 10:12:43 +0530</pubDate>
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<title>Uric Acid और Joint Pain से हैं परेशान? ये चमत्कारी Detox Drink देगा फौरन राहत</title>
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<description><![CDATA[ जब यूरिक एसिड का लेवल बढ़ता है, तो इससे जोड़ों में दर्द होने लगता है। अक्सर बदलते मौसम में दर्द और अकड़न बहुत ही ज्यादा परेशान रहते हैं। कई बार तो दर्द इतना भंयकर होता है कि रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी महसूस होती है। अब आपको बिल्कुल भी परेशान होने की जरुरत नहीं है। इस आर्टिकल में हम आपको एक ऐसी देसी डिटॉक्स के बारे में बता रहे हैं, जो आपकी मदद कर सकता है।हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि यह डिटॉक्स जूस शरीर में बढ़े हुए यूरिक एसिड को कंट्रोल कर सकता है और इसके साथ ही बॉडी को यह अंदर साफ करता है। आइए आपको बताते हैं कैसे इस जूस को बनाएं।सामग्री-खीरा- 1-चुकंदर- 1-अदरक- 1 इंच-नींबू का रस- 1 बड़ा चम्‍मच-हरा धनिया- थोड़ा सा-नारियल पानी- आधा गिलासजानें इसे बनाने का तरीका- सबसे पहले इन सभी चीजों को अच्छे से धो लें।- फिर इन्हें मिक्सर में अच्छे से ब्लेंड कर लें बिल्कुल स्मूद पीस लें।- अगर जरुरत है तो आपको इसको छान लें।- इसे सुबह खाली पेट या लंच से पहले ताजा-ताजा पिएं।डिटॉक्स जूस पीने के फायदेयूरिक एसिड कंट्रोल होता हैशरीर को हाइड्रेट खीरा और नारियल रखता है, यह यूरिक एसिड पेशाब के माध्यम से बाहर निकलने में मदद करता है। जोड़ों के दर्द में राहत मिलताइस जूस में अदरक और नींबू पड़ा है, इनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। सूजन, अकड़न और दर्द को कम करता है।शरीर डिटॉक्स करता हैचुकंदर और हरा धनिया शरीर से टॉक्सिंस बाहर निकालता है और लिवर को साफ रखता है। इसके सेवन से हल्का और एनर्जेटिक महसूस किया है।डाइजेशन होता बेहतरइस जूस के सेवन से डाइजेशन को सुधारता है और पेट को हल्का रखता है। इससे गैस और अपच की प्रॉब्लम को दूर करता है। इम्यूनिटी को बढ़ाता हैइसमें मौजूद विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की इम्यूनिटी को स्ट्रांग रखता है। स्किन को ग्लोइंग बनाता हैशरीर के अंदर से साफ होने त्वचा पर निखार आता है और पिपंल्स की प्रॉब्लम को दूर करता है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 26 Mar 2026 10:12:42 +0530</pubDate>
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<title>Women Health: पीरियड साइकिल का बिगड़ा Balance, यह Herbal Tea करेगी हॉर्मोन्स को ठीक</title>
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<description><![CDATA[ कई लड़कियों का सवाल होता है कि हर दूसरे महीने उनकी पीरियड्स डिले हो जाते हैं। कभी कभी 3-4 दिन तो कभी-कभी एक सप्ताह तक पीरियड्स लेट हो जाते हैं। वहीं किसी-किसी महीने से पीरियड्स स्किप हो जाते हैं। तो क्या यह सब नॉर्मल है। तो जवाब है कि आपको यह समझने की जरूरत है कि यह बिल्कुल भी नॉर्मल नहीं है। क्योंकि पीरियड्स आपके हार्मोन्स का रिपोर्ड कार्ड होते हैं। ऐसे में पीरियड्स में किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी सीधे इस ओर इशारा करती है कि आपके बॉडी में हार्मोनल इंबैलेंस है। इसलिए इसको मैनेज करने के लिए लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करना बेहद जरूरी है। वहीं कुछ देसी नुस्खे भी इस समस्या के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। अगर आपके पीरियड्स भी अनियमित हो गए हैं या फिर फ्लो कम आने लगा है। तो आप देसी चाय को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: Morning Fatigue से हैं परेशान? Deep Sleep के लिए अपनाएं ये दमदार Bedtime Health Tipsये चाय रेगुलर कर सकती है पीरियड्सबता दें कि अजवाइन पीरियड्स को रेगुलेट करने, हार्मोनल इंबैलेंस के कारण होने वाली ब्लोटिंग को कम करने और डाइजेशन को सुधारने में मदद करती है।दालचीनी हार्मोन्स को बैलेंस करती है और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में सहायता करती है।चेस्टबेरी के बीच प्रोजेस्टेरोन के लेवल को बैलेंस करती है और पीरियड्स साइकिल को रेगुलर बनाने में मदद करता है।यूट्राइन हेल्थ को बेहतर बनाने में केसर मदद करता है और इसके सेवन से मेंस्ट्रुअल साइकिल नियमित होती है।इसमें आयरन का अच्छा स्त्रोत होता है और शरीर को ताकत मिलती है।हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो यह चाय एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन को बैलेंस करती हैं औऱ डाइजेशन में सुधार करती है।वहीं जिन महिलाओं को पीरियड्स के दिनों में ब्लोटिंग, गैस और कब्ज की समस्या रहती है, उनके लिए यह चाय काफी फायदेमंद हो सकती है।इस चाय के सेवन से पीरियड फ्लो खुलकर आता है। अगर आपको पीरियड्स में 1-2 दिन ब्लीडिंग होती है, तो इस चाय का सेवन जरूर करना चाहिए।ऐसे बनाएं ये चायसबसे पहले एक पैन में पानी डालें।फिर इसमें 1 चम्मच अजवाइन डालें।अब दालचीनी का 1 चुटकी पाउडर डालें।इसमें 1 चम्मच चेस्टबेरी के बीज डालें।केसर के 1-2 धागे डालें।इसमें 1 चम्मच गुड़ का पाउडर डालें।अब इसको अच्छे से उबलने दें और फिर छानकर गुनगुना पिएं।इस चाय को अपनी साइकिल के 10वें दिन से पीना स्टार्ट कर दें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 21:38:43 +0530</pubDate>
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<title>World Down Syndrome Day: डाउन सिंड्रोम कोई अभिशाप नहीं, एक Genetic Condition है, जानें इसके Symptoms और इलाज</title>
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<description><![CDATA[ विश्वभर में हर साल 21 मार्च को &#039;वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे&#039;मनाया जाता है। लाखों लोगों और उनके परिवारों को इसके बारे में जागरुक किया जा सके। अब मन में सवाल आता है कि इसके लिए 21 तारीख ही क्यों चुनी गई है? दरअसल, 21 तारीख इसलिए क्योंकि मां के गर्भ में रहने के दौरान 21 वें क्रोमोसोम की एक्ट्रास कॉपी के कारण बच्चों को ये बीमारी हो जाती है। बता दें कि, डाउन सिंड्रोम एक आनुवंशिक विकार है।आपको याद होगा कि आमिर खान ने अपनी फिल्म &#039;सितारे जमीन पर&#039; में डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों की समस्या को दर्शको के बीच प्रस्तुत किया है, जिसकी वजह से इस बीमारी के लेकर जागरुकता बढ़ी है। &#039;डाउन सिंड्रोम&#039; बच्चे के शारीरिक विकास और सीखने की क्षमताओं को प्रभावित करता है। जागरुकता और सतर्कता से डाउन सिंड्रोम से काफी हद तक बचा जा सकता है।डाउन सिंड्रोम क्या है?डाउन सिंड्रोम एक आनुवंशिक विकार है। जो प्रेग्नेंसी के दौरान जेनेटिव बदलाव के कारण बच्चा डाउन सिंड्रोम की चपेट में आ जाता है। यह विकार तब होता है जब किसी व्यक्ति के शरीर में 21वें क्रोमोसोम की एक्सट्रा कॉपी हो जाती है। डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों का शारीरिक और मानसिक आम बच्चों बच्चों की तरह सही तरीके से नहीं होता।डाउन सिंड्रोम के 3 प्रकारइस बीमारी के तीन प्रकार है। जो शरीर की कोशिकाओं में क्रोमोसोम 21 की एक्स्ट्रा कॉपी के जुड़ने के तरीके पर निर्धारित है। ये 3 टाइप इस प्रकार से है-- ट्राइसॉमी 21- आपको बता दें कि, ये सबसे सामान्य प्रकार है, जिसमें शरीर की सभी कोशिकाओं में 21वें क्रोमोसोम की 3 कॉपी होती हैं।- ट्रांसलोकेशन- ये एक दुर्लभ प्रकार है, जिसमें 21 वें क्रोमोसोम का पूरा या आंशिक हिस्सा किसी अन्य क्रोमोसोम से जुड़ा होता है। - मोजेक- ये डाउन सिंड्रोम का सबसे दुर्लभ प्रकार है, जिसमें कुछ कोशिकाओं में ही एक्स्ट्रा क्रोमोसोम होता है।डाउन सिंड्रोम के शारीरिक लक्षण-  इस बीमारी से पीड़ित बच्चों का चेहरा और नाक चपटी, कान छोटे और जीभ बाहर निकली हुई हो सकती है। आंखों का कोना ऊपर की ओर झुका हो सकता है और आंखों पर सफेद धब्बे दिखाई सकते हैं।- डाउन सिंड्रोम बीमारी में बच्चों की गर्दन के पीछे एक्स्ट्रा स्किन, जोड़ों में अधिक लचीलापन और मांसपेशियां कमजोर नजर आ सकती हैं। इनके अक्सर हाथ छोटे और चौड़े तथा उंगलियां छोटी पाई जाती हैं। इन्हें बोलने में दिक्कत होती है और इनका कद भी सामान्य रुप से छोटा हो सकता है। - डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों का शारीरिक विकास और सीखने की क्षमता धीमी हो सकती है। आम बच्चों की तुलना में इन्हें बैठने या चलना सीखने में अधिक समय लगता है। स्पीच और फिजियों थेरेपी में ऐसे बच्चों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलती है।डाउन सिंड्रोम से होने वाली हेल्थ समस्याएंडाउन सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों को कई प्रकार की हेल्थ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन सही देखभाल, नियमित जांच और उचित उपचार के जरिए इन समस्याओं को काफी हद तक संभाला जा सकता है।-दिल के रोग-कमजोर नजर-सुनने में दिक्कत-थायरॉयड-सांस से जुड़ी तकलीफ-कान में संक्रमण-नींद की समस्याएं-उम्र से पहले अल्जाइमरडाउन सिंड्रोम से कैसे बचें?- जन्म से पहले क्या करें- प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउड द्वारा डाउन सिंड्रोम का पता लगाया जा सकता है। - जन्म के बाद क्या करें- जिन बच्चों के शारीरिक लक्षणों के आधार पर और कैरियोटाइप नामक लैब टेस्ट से डाउन सिंड्रोम की पुष्टि की जा सकती है। जागरुकता है जरुरी&#039;वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे&#039; के मौके पर डाउन सिंड्रोम के प्रति जागरुकता बढ़ाना जरुरी है। इससे रोग को जल्दी पहचानने में मदद मिलती है। डाउन सिंड्रोम से पीड़ित लोग खुशहाल जीवन जी पाएं। इन लोगों का सम्मान करना और इन्हें सहयोग देना हम सबका नैतिक कर्तव्य है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 21:38:42 +0530</pubDate>
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<title>पीरियड्स में होता है तेज दर्द और Mood Swings? इन 7 गलतियों से आज ही करें तौबा</title>
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<description><![CDATA[ पीरियड्स हर महीने में लड़की के शरीर में होने वाला एक नॉर्मल बायोलॉजिकल प्रोसेस है। हालांकि, इस दौरान या इससे पहले हर एक महिला के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव देखने को मिलते हैं। जिससे मूड, वजन, खान-पान की आदतों, डाइजेशन और नींद के पैटर्न सहित कई आदतों में बदलाव नजर आ सकते हैं। इस समस्या पर आपके हार्मोंन्स सेंसिटिव और इंफ्लेमेशन बढ़ा हुआ हो सकता है। अगर आप पीरियड्स आने से पहले अधिक कैफीन, ज्यादा शुगर, नमक, एल्कोहल, जंक फूड या मील्स न लेना कोर्टिसोल लेवल को बढ़ा सकता है और इसकी वजह से क्रैम्प्स, ब्लोटिंग, मूड स्विंग्स और ब्लड शुगर क्रैशेज बढ़ सकते हैं। जिन लड़कियों को पीसीओडी की समस्या होती उनके लिए यह और भी ज्यादा मुश्किल है। अगर आप पीरियड्स आने से पहले आपको अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करेंगे, तो पीरियड्स आने से पहले पूरी तरह इन चीजों को अवॉइड करें। पीरियड्स की डेट नजदीक है, तो छोड़े दें ये 7 काम - एक्सपर्ट ने बताया है कि अगर आपकी पीरियड्स की डेट नजदीक है, तो आपको कैफीन, जंक, एल्कोहल और ज्यादा  शुगर को अवॉइड करना चाहिए। इस समय पर मील्स स्किप करने के बजाय आप बैलेंस मील लें। इससे ब्लड शुगर बैलेंस होता है और एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन बैलेंस रहते हैं। - इस दौरान महिलाओं को अक्सर चॉकलेट खाने की तीव्र इच्छा होती है, लेकिन पीरियड्स शुरू होने से पहले इसका अधिक सेवन करना ठीक नहीं माना जाता। चॉकलेट में मौजूद शुगर और कैफीन मूड स्विंग्स को और बढ़ा सकते हैं। बेहतर होगा कि आप इसकी जगह खजूर या अंजीर जैसे हेल्दी विकल्प चुनें।- दर्द कम करने के लिए बहुत ज्यादा कॉफी या चाय न पिएं। कैफीन से कोर्टिसोल बढ़ता है, जिससे क्रैम्प्स और बढ़ सकते हैं। इसके जगह आप पीरियड्स क्रैम्प्स कम करने के लिए अदरक की चाय या कैमोमाइल टी पिएं।- इस दौरान होने वाली क्रेविंग्स पर ध्यान दें और कई बार महिलाएं बहुत अधिक फ्राइड या जंक फूड्स खा लेती हैं, लेकिन इसमें अनहेल्दी फैट्स होते हैं, जो हार्मोन्स को इंबैलेंस कर देते हैं। इसकी जगह आप घर का ही खाना खाएं।- पीएमएस के दौरान अक्सर लड़कियों को नमकीन चीजें खाने का मन करता है, लेकिन ज्यादा चिप्स या नमकीन का सेवन करने से पेट फूलना और शरीर में पानी रुकने की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में बेहतर है कि आप भुने हुए मखाने या चने जैसे हेल्दी विकल्प अपनाएं।- इस अवधि के दौरान एल्कोहल का सेवन न करें। ऐसा करने से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टोरोन हार्मोन इंबैलेंस होते हैं और पीरियड फ्लो और साइकिल पर असर हो सकता है। अगर आपकी पीरियड्स बेहद ही नजदीक है, तो आप नींबू पानी पीना शुरु कर सकते हैं। इससे आपको काफी फायदा होगा।- पीरियड्स शुरुआत से पहले मील्स बिल्कुल भी स्किप न करें। ऐसा करने से ब्लड शुगर लेवल पर असर पड़ता है और शरीर को कमजोरी महसूस हो सकती है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 21:38:41 +0530</pubDate>
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<title>2 महीने से रुके हैं Periods? ये 5 जादुई Kitchen Hacks पटरी पर लाएंगे Menstrual Cycle</title>
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<description><![CDATA[ हर महीने महिलाओं का पीरियड्स आना एक बायोलिजिकल प्रक्रिया है। वैसे महिला की सेहत काफी हद तक मेंस्ट्रुअल साइकिल पर निर्भर करती है। गौरतलब है कि भागदौड़ भरी जिंदगी और तनाव के कारण अक्सर पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। खराब खान-पान और बढ़ता हुआ तनाव अक्सर हार्मोंस के बैलेंस को बिगाड़ देते हैं। इसका सीधा असर पीरियड्स पर पड़ता है। जब आपके पीरियड्स एक या दो महीने तक नहीं आते हैं, तब मन में घबराहट और चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है। अगर आपके दो महीने तर पीरियड्स नहीं आए, तो यह आर्टिकल सिर्फ आपके लिए है।हल्दी वाला गुनगुना दूध- खासतौर पर हल्दी को मसाला माना जाता है लेकिन यह औषधि से कम नहीं है। यह एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है और हार्मोंस को रेगुलेट करते हैं। - रोज रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में चुटकी भर हल्दी मिलाकर पिएं। - यह शरीर में गर्मी पैदा करता है और साइकिल को सुचारु करता है। कच्चा पपीता - रुके हुए पीरियड्स को वापस लाने के लिए कच्चा पपीता सेवन करना सबसे जरुरी है और असरदार माना जाता है। - पपीता में पेपेन नामक तत्व होता है जो यूट्रस की मसल्स में संकुचन उत्पन्न करता है, जिससे पीरियड्स शुरु होने में मदद मिलती है। तिल और गुड़- तिल की तासीर गर्म होती है और गुड़ शरीर में आयरन की कमी को पूरा करता है। - एक चम्मच भुने हुए तिल को थोड़े से गुड़ के साथ मिलाएं। - यह आपके शरीर के तापमान को संतुलित करता है और रुके हुए फ्लो को फिर से एक्टिव करता है।अजवाइन और गुड़ का पानी  - अजवाइन केवल पेट की गैस को दूर करने में ही सहायक नहीं होती, बल्कि यह गर्भाशय (यूट्रस) को साफ रखने में भी लाभकारी मानी जाती है।- एक गिलास पानी लें और उसमें आधा चम्मच अजवाइन के साथ थोड़ा सा गुड़ मिलाकर अच्छे से उबाल लें।- इस काढ़े को आप सुबह खाली पेट पी सकते हैं, जो काफी फायदेमंद होगा।दालचीनी की चाय- दालचीनी शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करती है, जो कि PCOD या PCOS का मुख्य कारण होता है। - यह मेंस्ट्रुअल साइकिल को रेगुलेट करने में मदद करता है। - आप इस पाउडर के रुप में चाय में उबालकर ले सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 21:38:40 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: रोज की थाली को बनाएं लो&#45;कैलोरी, कुछ ही दिनों में दिखेंगे फिट</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में अधिकतर लोग अपने बढ़ते वजन से परेशान हैं और उसे कम करने के लिए तरह-तरह के उपाय अपनाते हैं। लेकिन सबसे जरूरी होता है कि आप अपने खाने पर ध्यान दें। जब आप अपनी मेंटेनेंस कैलोरी से कम इनटेक करते हैं तो इससे शरीर पहले से स्टोर फैट को बतौर एनर्जी इस्तेमाल करता है और फिर आपका फैट बर्न होता है। हालांकि, कैलोरी कम करने का मतलब क्रैश डाइट करना नहीं होता, बल्कि आपको पोर्शन का ध्यान रखना होता है और स्मार्ट स्वैप करने की जरूरत होती है। कुछ लोगों को यह समझ नहीं आता कि वह अपनी ही रोज की थाली को स्मार्टली कैसे तैयार करें, जिससे वे कम कैलोरी में भी अपने रोज के खाने को आसानी से एन्जॉय कर पाएं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि आप अपनी रोज की थाली को लो कैलोरी किस तरह बना सकते हैं-इसे भी पढ़ें: पीरियड्स में होता है तेज दर्द और Mood Swings? इन 7 गलतियों से आज ही करें तौबातेल पर करें कंट्रोल आप जिस तेल में खाना बना रहे हैं, उस पर कंट्रोल करके काफी हद तक अपनी कैलोरी इनटेक को कम कर सकते हैं। अक्सर हमें अंदाजा नहीं होता है, लेकिन खाने को टेस्टी बनाने के लिए हम सभी बहुत सारे तेल का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि एक बड़ा चम्मच तेल में लगभग 120 कैलोरी होती है। इसलिए, खाना बनाते समय सीधा तेल डालने की जगह उसे ब्रश से इस्तेमाल करें या फिर स्प्रे बोतल का इस्तेमाल करें। इसी तरह, नॉन-स्टिक पैन का इस्तेमाल करके भी कैलोरी इनटेेक को काफी हद तक कम किया जा सकता है।    स्मार्टली खाएं रोटी और चावल  रोटी और चावल हर भारतीय थाली का हिस्सा है। अक्सर वजन कम करने के लिए हम इसे अपनी डाइट से बाहर कर देते हैं। लेकिन इसे लंबे समय तक फॉलो नहीं किया जा सकता। इसलिए, कार्ब्स को पूरी तरह से न हटाएं, बस उन पर कंट्रोल करें। कोशिश करें कि आप 2-3 रोटी की जगह 1-2 रोटी $ सलाद लें या फिर सफेद चावल की क्वांटिटी आधी करें और आधी सब्ज़ियां प्लेट में शामिल करें। जब प्लेट में 50 प्रतिशत सब्ज़ी, 25 प्रतिशत प्रोटीन और 25 प्रतिश कार्ब्स होंगे तो ऐसे में वही खाना कम कैलोरी वाला बन जाएगा और फिर आपका फैट बर्न भी सस्टेनेबल होगा।कुकिंग करने का तरीका बदलेंअगर आप अपने कुकिंग करने के तरीके को थोड़ा बदलते हैं तो इससे आपको टेस्ट तो वही मिलता है, लेकिन इससे कैलोरी इनटेक काफी कम हो जाता है। मसलन, आप किसी फूड को फ्राई करने की जगह एयर फ्रायर का इस्तेमाल करें। इसी तरह, डीप फ्राई करने की जगह शैलो फ्राई करना अच्छा रहता है। आपका स्मार्ट कुकिंग स्टाइल काफी हद तक कैलोरी बचाता है।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 21:38:40 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: Boiled Egg या Omelette? Weight Loss पर स्टडी के नतीजों ने सबको चौंकाया</title>
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<description><![CDATA[ आजकल के समय में अधिकतर लोग वेट बढ़ने की समस्या से परेशान हैं। जितनी तेजी से वेट बढ़ जाता है, उसको कम करना उतना ही मुश्किल होता है। वेट लॉस के लिए लोग जिम करते हैं और स्ट्रिक्ट डाइट रूटीन फॉलो करते हैं। वहीं डाइट में प्रोटीन से भरपूर चीजों को शामिल करते हैं। लेकिन जब प्रोटीन की बात आती है, तो लोग अंडे को प्राथमिकता देते हैं। आमतौर पर लोग बॉयल्ड एग खाना पसंद करते हैं।क्योंकि अंडे को हमेशा पौष्टिक और हेल्दी खाना मानते हैं। इसमें अच्छा फैट, प्रोटीन और कई जरूरी विटामिन होते हैं। लेकिन अक्सर लोग कंफ्यूज रहते हैं कि अंडे को कैसे खाया जाए। अंडे को बॉयल्ड, पोच्ड या ऑमलेट के रूप में सेवन करना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि बॉयल्ड, पोच्ड और ऑमलेट जैसे अलग-अलग तरीकों में पकाए गए अंडों की डाइजेशन क्षमता और पोषक तत्वों की मौजूदगी कैसे बदल जाती है।इसे भी पढ़ें: 2 महीने से रुके हैं Periods? ये 5 जादुई Kitchen Hacks पटरी पर लाएंगे Menstrual Cycleबॉयल्ड एग, पोच्ड या ऑमलेटजब हम अंडे को पोच करते हैं, उबालते हैं या फिर ऑमलेट बनाते हैं। तो न सिर्फ इसका स्वाद बदलता है। बल्कि अंदर से इसकी बनावट भी बदल जाती है। उबला अंडा अधिक सख्त और घनी बनावट वाला होता है। पोच्ड एग नरम और हल्का जेली जैसा होता है। ऑमलेट में पीला पार्ट यानी जर्दी और सफेद भाग अच्छे से मिल जाता है, वहीं तेल या मक्खन की वजह से यह फूला हुआ बन जाता है।अंडे का पाचन पर ऐसे पड़ता है असरअंडे की ये अलग-अलग बनावट हमारे डाइजेशन पर असर डालती है। हर तरह के अंडे की बनावट अलग है, इसलिए हमारे शरीर के डाइजेशन एंजाइम उन पर अलग-अलग तरह से काम करते हैं। इसी वजह से ये फर्क पड़ता है कि अंडे में मौजूद कितना प्रोटीन, फैट और विटामिन हमारे शरीर को पूरी तरह से मिल पाता है।ऐसे डाइजेस्‍ट होता है अंडाशरीर में अंडा कैसे डाइजेस्ट होता है, इसके लिए लैब में एक नकली पाचन प्रणाली तैयार की थी। यह सिस्टम बुजुर्गों के पेट जैसी थी। क्योंकि उनकी पाचन शक्ति कम होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि अलग-अलग तरह से पकाए गए अंडे कितनी आसानी से टूटते हैं और शरीर को कितनी आसानी से उनके पोषक तत्व मिल पाते हैं। पोच्ड अंडा इसमें सबसे बेहतर पाया गया। इसका प्रोटीन और फैट सबसे अच्छे से टूटा। यानी की शरीर के लिए पोच्ड अंडे के पोषक तत्वों को पाना सबसे आसान थावहीं बॉयल्ड एग भी अच्छे से डाइजेस्ट हुआ। लेकिन यह पोच्ड एग जितना आसान नहीं था। क्योंकि इसको पचाने में थोड़ा ज्यादा समय लगा। ऑमलेट डाइजेस्ट होने में सबसे ज्यादा समय लगा। कमजोर डाइजेशन वाले पेट में इसका प्रोटीन 37% तक कम टूटा। जिसका मतलब यह हुआ कि शरीर के लिए ऑमलेट से पोषक तत्वों को निकालना सबसे कठिन होता है।अंडे का विटामिन्स पर असरबता दें कि विटामिन ए तीनों तरह के अंडे में पाया जाता है। लेकिन विटामिन डी3 की मौजूदगी कमजोर डाइजेशन की कंडीशन में थोड़ी कमी रह गई।वेट लॉस में असरदारएक स्टडी में पाया गया है कि इसके नतीजे वेट कंट्रोल के लिए जरूरी हैं। वेट कम करने के लिए दो चीजें सबसे ज्यादा खास होती हैं। जिनमें से पहला प्रोटीन का सही इस्तेमाल और दूसरा कम कैलोरी खाना।डाइजेशन और भूख पर असरपोच्ड और उबला हुआ अंडा आसानी से पच जाता है। साथ ही प्रोटीन भी अच्छे से टूटता है। जितना अच्छे से प्रोटीन टूटता है, उतनी देर तक हमारा पेट भरा रहता है। जिस कारण हमें जल्दी भूख नहीं लगती है। यह वेट कंट्रोल करने में सहायता करता है और ऑमलेट को पचाना थोड़ा मुश्किल होता है।कैलोरी की मात्रापोच्ड और उबले हुए अंडे बनाने के दौरान मक्खन या तेल का इस्तेमाल नहीं होता है। इसलिए इनमें कैलोरी कम मात्रा में होती है। लेकिन ऑमलेट में मक्खन, तेल या चीज डाला जाता है, जिससे इसकी कैलोरी बढ़ जाती है।मेटाबॉलिज्म बूस्‍टअंडे से विटामिन ए और डी जैसे जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म और एनर्जी के सही इस्तेमाल में मदद करते हैं।ऐसे खाएं एगअगर आप अपना वेट कंट्रोल में रखना चाहते हैं, तो कम तेल में अंडा बनाएं। इससे डाइजेशन भी अच्छा रहेगा।ये भी जानेंबता दें कि बॉयल्ड अंडा कम कैलोरी वाला होता है।पोच्ड एग बिना तेल के पौष्टिकता को बनाए रखने का काम करता है।ऑमलेट भी अच्छा ऑप्शन है, बस तेल कम रखें और सब्जियां ज्यादा डालें और चीज, प्रोसेस्ड मीट से बचना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 21:38:39 +0530</pubDate>
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<title>डार्क सर्कल्स से हैं परेशान? Diet में शामिल करें ये &amp;apos;Iron Rich&amp;apos; सलाद, दिखेगा कमाल का असर</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर आंखों के नीचे काले घेरे, आंखों के नीचे सूजन और आंखों का पीला होना, ये सभी चीजें हमारी सेहत से जुड़े होते हैं। हमारी आंखें शरीर से जुड़ी कई जरुरी बातों की जानकारी देते हैं। आंखों के नीचे सूजन आने का कारण शरीर में सोडियम की अधिकता हो सकती है या पेरिमेनोपॉज में होने वाले फ्ल्यूड रिटेंशन की वजह से भी हो सकता है। अगर आंखों में पीलापन बना रहता है तो इसके पीछे फैटी लिवर या पित्त से जुड़ी दिक्कतें हो सकती है। आंखों के नीचे होने वाले काले घेरे के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि आयरन की कमी और हैवी पीरियड्स शामिल हैं। ऐसे में एक्सपर्ट बताते हैं कि डाइट में इस सलाद के एड ऑन करने से काफी फायदा मिलता है। डार्क सर्कल्स कम करने के लिए डाइट में शामिल करें ये सलाद - एक्सपर्ट के मुताबिक, यदि आपकी आंखों के नीचे काले घेरे रहे हैं, तो आपके शरीर में आयरन की कमी हो सकती है। इसलिए अपनी डाइट में आयरन रिच फूड को शामिल करें।  - चुकंदर खाने से शरीर में आयरन लेवल बढ़ता है और इसका सलाद आप मील्स के साथ ले सकते हैं। - चुकंदर में नेचुरली रुप से काफी आयरन पाया जाता है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है। यदि शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है। अगर आप रोजाना चुकंदर सलाद में खाएंगे, तो इससे खून की कमी एनिमिया को दूर करने में मदद मिलेगी। - चुकंदर में मौजूद फोलेट और आयरन मिलकर नई रेड ब्लड सेल्स बनाने में मदद करता है, जिससे हीमोग्लोबिन लेवल तेजी से बढ़ सकता है। - इसको और खास बनाने के लिए आप इसमें नींबू का रस, सेंधा नमक, काली मिर्च या आंवला मिला सकती है। नींबू और आंवला में मौजूद विटामिन-सी शरीर में आयरन के अब्जॉर्बशन को बढ़ाता है। - महिलाओं को पीरियड्स में होने वाली हैवी ब्लीडिंग की वजह से शरीर में खून की कमी हो जाती है, जो चुकंदर खून की कमी को दूर कर सकता है। - इसके साथ ही चुकंदर शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करता है और खून को साफ करता है। इससे शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई बेहतर होती है और थकान कम होती है। - चुकंदर में फाइबर होता है, जो पाचन को सुधारता है। ऐसे में चुकंदर का सेवन में डाइजेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है। जब पाचन अच्छा होता है, तो शरीर पोषक तत्वों का अब्जॉर्बशन अच्छे से कर पाता है। अगर आप चाहे तो इसमें गाजर मिला सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 21:38:39 +0530</pubDate>
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<title>Working Women का Navratri Vrat Survival Guide, फॉलो करें ये Diet, कभी नहीं होंगी Low on Energy</title>
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<description><![CDATA[ नवरात्रि का व्रत अनुशासन का प्रतीक है, लेकिन जब ऑफिस की डेडलाइन और मीटिंग्स बीच में आती हैं, तो कामकाजी महिलाओं के लिए यह काफी चैलेंजिंग हो जाता है। काम के प्रेशर में अक्सर थकान और लो एनर्जी महसूस होने लगती है। ऐसे में पुरानी परंपराओं पर अड़े रहने के बजाय अपनी डाइट और रूटीन में बदलाव करना जरूरी है, ताकि सेहत भी बनी रहे और काम पर भी असर न पड़े।सवाल: वर्किंग लोगों के लिए 9 दिन का व्रत रखना मुश्किल क्यों हो जाता है?जवाब: ऑफिस के काम के साथ व्रत रखने से शरीर और दिमाग दोनों पर असर पड़ता है। घर और जॉब की डबल जिम्मेदारी स्ट्रेस बढ़ा देती है। फील्ड वर्क करने वालों को खाली पेट रहने से जल्दी थकान होती है, वहीं डेस्क जॉब वालों को लंबी मीटिंग्स की वजह से मेंटल स्ट्रेस हो सकता है। इसके अलावा, व्रत में ज्यादा तला-भुना खाना सुस्ती लाता है और ज्यादा चाय-कॉफी पीने से डिहाइड्रेशन हो जाता है, जिससे काम में मन नहीं लगता। इसे भी पढ़ें: Navratri Vrat Shopping: ऑनलाइन छोड़िए, Delhi-NCR की इन 3 मार्केट से खरीदें Best Quality वाले ड्राई फ्रूट्ससवाल: नौकरीपेशा लोगों को व्रत के तरीके में क्या बदलाव करने चाहिए?जवाब: डाइट एक्सपर्ट्स का मानना है कि वर्किंग लोगों को बैलेंस डाइट लेनी चाहिए। लंबे समय तक भूखे रहने के बजाय &#039;स्मॉल मील्स&#039; लें, यानी थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ हेल्दी खाते रहें। अपनी डाइट में प्रोटीन और फाइबर वाली चीजें शामिल करें। बहुत ज्यादा हैवी या ऑयली खाने से बचें और खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए पानी, छाछ या नारियल पानी पीते रहें।सवाल: वर्किंग लोगों के लिए सुबह से रात तक का सही डाइट प्लान क्या हो?जवाब: दिन की शुरुआत भीगे हुए बादाम, नट्स या किसी ताजे फल से करें। ब्रेकफास्ट में कुट्टू का चीला, साबूदाना खिचड़ी या फ्रूट योगर्ट ले सकते हैं, जो आपको दोपहर तक एनर्जी देगा। लंच में राजगिरा की रोटी और लौकी की सब्जी या सामक के चावल का पुलाव बेस्ट है। शाम को मखाना, शकरकंद चाट या खजूर लें। डिनर हल्का रखें, जैसे लौकी का सूप या कद्दू की सब्जी के साथ कुट्टू की रोटी। मीठे के लिए चीनी की जगह खजूर या गुड़ का इस्तेमाल करें। इसे भी पढ़ें: Navratri Special: व्रत में भी खाएं टेस्टी और हेल्दी, बनाएं समा चावल का उपमा, जानें Quick Recipeसवाल: इंस्टेंट एनर्जी के लिए कौन से फल और ड्रिंक्स सबसे अच्छे हैं?जवाब: तुरंत एनर्जी के लिए केला सबसे अच्छा है क्योंकि इसमें पोटेशियम ज्यादा होता है। इसके अलावा सेब, पपीता और अनार भी धीरे-धीरे एनर्जी देते हैं और पचने में आसान होते हैं। ड्रिंक्स में नारियल पानी बॉडी में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करता है। नींबू पानी थकान दूर करता है और छाछ पेट को ठंडा रखकर डाइजेशन सुधारती है।सवाल: अगर ऑफिस में कमजोरी या चक्कर आए तो क्या करें?जवाब: ऐसी स्थिति में तुरंत छोटा ब्रेक लेकर आराम करें। पानी या नारियल पानी पिएं और इंस्टेंट एनर्जी के लिए केला या खजूर खाएं। अगर बार-बार कमजोरी महसूस हो, तो सेहत को अहमियत दें। जबरदस्ती व्रत खींचने के बजाय हल्का खाना खा लें और डॉक्टर की सलाह लें। खासकर डायबिटीज के मरीजों को व्रत शुरू करने से पहले डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 21:38:38 +0530</pubDate>
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<title>Health Experts का Alert! चक्कर आने को न समझें मामूली, इन 3 खतरनाक लक्षणों पर रखें नजर</title>
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<description><![CDATA[ क्या आपको भी बार-बार चक्कर आते है और यह लंबे समय से स्थिति बनीं हुई है, तो यह एकदम सही नहीं है। कई बार चक्कर आने की स्थिति हम गंभीरता से नहीं लेते हैं, क्योंकि यह समस्या कुछ देर में ठीक हो जाती है। बार-बार चक्कर आना या सिर घूमने के पीछे कुछ मेडिकल कंडीशंस जिम्मेदार मानी जाती है। अगर आपके साथ भी यही होता है, तो इसको हल्के में मत लें।चक्कर आने को गंभीरता से कब लें?हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि सिर घूमना अपने आप में कोई बीमारी नहीं है बल्कि यह कई गंभीर बीमारी या समस्या का कारण हो सकता है। यदि आपका अचानक से संतुलन बिगड़ने लगता है, अचानक से खड़े होने पर बीपी कम होने और सिर हिलाने या करवट बदलने पर अचानक चक्कर आते हैं, तो इसे गंभीरता से लिया जाना बेहद जरुरी है।जानें इसके अन्य लक्षणहाथ-पैर सुन्न होनायदि सिर घूमने या चक्कर आने के साथ-साथ आपके हाथ-पांव सुन्न पड़ रहे हैं, तो इसको हल्के में न लें। यह एक प्रकार न्यूरोलॉजिकल समस्या का लक्षण हो सकता है। हालांकि, आपको अपने शरीर में नजर आ रहे अन्य लक्षणों पर भी ध्यान देना जरुरी है। अगर अचानक से कमजोरी महसूस करना, चलने या खड़े होने में दिक्कत होना। बोलने में परेशानीयदि चक्कर आने के साथ आपको बोलने में भी कठिनाई महसूस होने लगे, तो इसे हल्के में न लें, क्योंकि यह किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। स्थिति तब और ज्यादा चिंताजनक हो जाती है, जब इसके साथ नजर धुंधली होने लगे और दिमाग में उलझन या भ्रम जैसी स्थिति पैदा हो। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत सतर्क हो जाएं और बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है।सीने में दर्दचक्कर आने के साथ ही सीने में दर्द, अकड़न, हार्ट रेट का बढ़ना और सांस लेने में तकलीफ हो, तो यह भी सही संकेत नहीं है। इन सभी लक्षणों से पता चलता है कि आप किसी गंभीर समस्या की चपेट में लिप्त है। इस स्थिति में प्रोफेशनल की मदद से लेने में देरी न करें। हां, अगर साथ में कोई है, तो उन्हें लेकर अस्तपताल पहुंच जाएं, यह काफी फायदेमंद रहेगा। डॉक्टर को कब दिखाएं?- बार-बार चक्कर आ रहे हैं या फिर लंबे समय तक सिर घूम रहा है।- चक्कर आने की वजह से आपके रोजमर्रा के काम बाधित हो रहे हैं।- चक्कर आने के साथ ही बुखार आना, सुनने की क्षमता का प्रभावित होना और कानों में घंटी की आवाज सुनाई देना।चक्कर आने पर तुरंत क्या करें?- चक्कर आने पर तुरंत अपना प्राथमिक उपचार करवाएं।- जब चक्कर आए तो तुरंत कहीं बैठ जाएं या लेट जाएं।- चक्कर आने पर ड्राइव न करें।- चक्कर आने पर जितना ज्यादा हो सके, पानी जरुर पिएं।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 21:38:37 +0530</pubDate>
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<title>Summer Heat में Dehydration बन सकता है जानलेवा, High Blood Pressure के मरीज रहें अलर्ट</title>
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<description><![CDATA[ जब गर्मियों के मौसम में तापमान बढ़ता है, तो शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का रिस्क बढ़ जाता है। अगर शरीर को सही मात्रा में पानी न मिले, तो पानी ब्लड सर्कुलेशन और दिल की धड़कनों को भी कंट्रोल कर देता है। जब शरीर में फ्लू्इड कम होता है तो खून भी गाढ़ा होने लगता है। इसके साथ ही हॉर्मोनल सिस्टम में गड़बड़ी देखने को मिलती है। वहीं, ब्लड प्रेशर (BP) अचानक खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है। अगर आप भी हाई बीपी या दिल की बीमारी से जूझ रहे हैं, तो आपको डिहाइड्रेशन एक साइलेंट थ्रेट हो सकता है।डिहाइड्रेशन क्या होता है और यह कब होता है?डिहाइड्रेशन एक ऐसी कंडीशन है कि जब शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे कि सोडियम पोटेशियम की कमी हो जाती है। इस दौरान व्यक्ति को ज्यादा पसीना आता, उल्टी-दस्त होने, बुखार या पर्याप्त पानी न पीने से होता है। गर्म मौसम, हैवी फिजिकल एक्टिविटी और लंबे समय तक धूप में बनें रहने से इसका जोखिम काफी बढ़ जाता है। डिहाइड्रेशन का ब्लड प्रेशर पर क्या असर पड़ता है?- डिहाइड्रेशन होने से शरीर में ब्लड का  वॉल्यूम घट जाता है, जिससे कुछ मामलों में ब्लड प्रेशर कम हो जाता है।- शरीर इसकी भरपाई के लिए एक हार्मोनल सिस्टम एक्टिव करता है।- डिहाइड्रेशन के कारण ब्लड वेसल्स सिकुड़ने लगती हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। डिहाइड्रेशन रिस्क इन लोगों को ज्यादा होता है- हाई बीपी पेशेंट्स - हार्ट पेशेंट्स- डायबिटिक लोग- बुजुर्ग- छोटे बच्चे- एथलीट्स- आउटडोर काम करने वालेहाई बीपी या हार्ट से जुड़ी समस्या वाले गर्मी के मौसम में क्या सावधानियां बर्तें- सबसे जरुरी है कि नियमित रुप से ब्लड प्रेशर मॉनिटर करते रहें।- पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और फ्लूइड लेते रहे हैं।- तेज धूप और गर्मी में लंबे समय तक न रहें।- डॉक्टर की सलाह के अनुसार बीपी और हार्ट की दवाएं नियमित रुप से लें।- नमक और कैफीन का सेवन सीमित करें।- इसके साथ ही हल्का और संतुलित ही भोजन का सेवन करें, जिससे शरीर पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।- चक्कर, कमजोरी या हार्ट बीट तेज होने पर आराम करें।- जरुरत पड़ने पर डॉक्टर को जरुर दिखाएं। डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखें तो तुरंत क्या करना चाहिए?- लू या अत्यधिक गर्मी लगने पर सबसे पहले व्यक्ति को तुरंत किसी ठंडी या छायादार स्थान पर ले जाकर आराम से लिटा दें। उसके पैरों को थोड़ा ऊंचा रखें, ताकि दिमाग तक रक्त संचार सही तरीके से हो सके। - पानी एकदम से ज्यादा मात्रा में न पिलाएं, बल्कि ओआरएस या नमक-चीनी का घोल धीरे-धीरे छोटे-छोटे घूंट में दें। शरीर का तापमान ज्यादा लगने पर सिर और गर्दन पर ठंडी, गीली पट्टियां रखकर उसे कम करने की कोशिश करें। - यदि व्यक्ति बेहोश हो जाए या कुछ भी पीने की स्थिति में न हो, तो बिना देर किए उसे अस्पताल पहुंचाएं, क्योंकि ऐसे में उसे आईवी फ्लूइड (ड्रिप) की आवश्यकता पड़ सकती है। इन सभी बातों का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 21:38:37 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: Morning Fatigue से हैं परेशान? Deep Sleep के लिए अपनाएं ये दमदार Bedtime Health Tips</title>
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<description><![CDATA[ क्या आप भी दिनभर की भागदौड़, स्क्रीन के सामने घंटों बिताने और काम के तनाव के बाद सुबह उठते ही भारीपन और थकान महसूस करती हैं। अक्सर लोग अपनी सुबह को बेहतर बनाने का प्रयास करते हैं। लेकिन यह भूल जाते हैं कि शानदार सुबह की शुरूआत पिछली रात से हो जाती है। अगर रात में सुकून भरी नींद नहीं आती है, तो आपकी सुबह कभी एनर्जी से भरपूर नहीं हो सकती है। इसलिए रात को सोने से पहले खुद के लिए कुछ समय निकालना जरूरी है।हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो रात को बिस्तर पर जाने से पहले हम जो भी काम करते हैं, उसका सीधा हमारी नींद की क्वालिटी और अगली सुबह की एनर्जी पर पड़ता है। रात को सोने से पहले कुछ असरदार उपायों को अपनाकर आप रात को अच्छी नींद ले पाएंगी और अपने शरीर को भी अंदर से हील कर सकती हैं।इसे भी पढ़ें: Yogasana: Yoga का पावरहाउस है &#039;विपरीत करणी&#039; आसन, Stress और Aging की होगी छुट्टीकैमोमाइल टी का सेवनअच्छी नींद के लिए कैमोमाइल टी किसी वरदान से कम नहीं है। इसमें एपिनिन नामक एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। जोकि ब्रेन को नींद लाने वाले रिसेप्टर्स से जोड़ता है और चिंता को करता है। इसलिए सोने से करीब 30 मिनट पहले एक कप गर्म कैमोमाइल टी का सेवन करना चाहिए।क्राउन चक्र टैपिंग करेंअपने सिर के ऊपरी हिस्से पर अपनी उंगलियों से हल्की टैपिंग करनी चाहिए। ऐसा रोजाना 5 मिनट तक करने से दिन भर का मानसिक तनाव कम होता है और आपका मन भी शांत होता है। यह मेडिटेशन का असरदार और आसान तरीका है।कान की मालिश करेंकानों में कई नसों का केंद्र होता है। इसको धीरे से नीचे की तरफ खींचे और मालिश करें। ऐसा सिर्फ 1 मिनट करने से नर्वस सिस्टम को फौरन आराम मिलता है। वहीं शरीर को रेस्ट मोड में डाल देता है।पैरों की मालिश करेंबता दें कि पैरों के तलवों में शरीर के कई जरूरी प्रेशऱ पॉइंट्स होते हैं। कांसा वैंड से 5 मिनट तक पैरों की मालिश करने से थकान मिटती है और यह शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में सहायता करता है।नट्स और सीड्स लेनारात से ही अगले दिन की तैयारी शुरू कर दें। मुट्ठी भर बादाम, कद्दू के बीज और अखरोट को पानी में भिगो दें। अगली सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से शरीर को भरपूर पोषण और एनर्जी मिलती है।हेड ड्रॉप एक्सरसाइज करेंपीठ और गर्दन का दर्द दूर करने के लिए हेड ड्रॉप सबसे अच्छा ऑप्शन है। बिस्तर के किनारे लेटकर सिर को हल्का सा नीचे 1-5 मिनट के लिए लटकाएं। यह रीढ़ की हड्डी को आराम देने के साथ दिनभर की अकड़न को भी खत्म करता है।नाभि में लगाएं अरंडी का तेलबता दें कि नाभि हमारे शरीर का सेंटर पॉइंट होता है। इसलिए रात को सोने से पहले 2 बूंद अरंडी का तेल नाभि में लगाएं। यह हार्मोनल संतुलन को बनाए रखता है और स्किन व पाचन के लिए भी फायदेमंद होता है।सुप्त वीरासन बिस्तर पर जाने से पहले 1 से 5 मिनट तक सुप्त वीरासन की मुद्रा में रहें। यह आसन गहरी नींद लाने में मदद करता है और पैरों की थकान के साथ डाइजेशन संबंधी समस्या भी दूर होती है।बरतें ये सावधानीअगर आपको स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या, चोट या फिर आप प्रेग्नेंट हैं, तो आप इन उपायों को करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 14:47:52 +0530</pubDate>
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<title>Face Fat: Face Fat और Double Chin होंगे गायब, परफेक्ट Jawline के लिए फॉलो करें ये आसान Diet Tips</title>
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<description><![CDATA[ फेस की लटकती चर्बी न सिर्फ हमारे लुक्स को खराब करती है, बल्कि इसके कारण उम्र भी ज्यादा नजर आती है। फेस फैट को कम करना इतना मुश्किल नहीं है। लेकिन फेस फैट को कम करने के लिए इसका सही तरीका पता होना जरूरी है। हेल्दी लाइफस्टाइल, सही डाइट और फेशियल एक्सरसाइज की सहायता से इसको कम किया जा सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि फेस की चर्बी को कम करने के लिए डाइट में क्या बदलाव करने चाहिए।डाइट में करें ये बदलावहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो जॉलाइन को कम करने और फेस फैट को कम करने के लिए अपनी डाइट में बदलाव करें। हार्मोनल इंबैलेंस, एजिंग और अनियमित लाइफस्टाइल का असर फेस फैट पर होता है। इसके कारण जॉलाइन के आसपास चर्बी जमने लगती है। लेकिन डाइट में कुछ खास बदलावों की जरिए इसको कम किया जा सकता है।इसे भी पढ़ें: Pregnancy के Third Trimester में Iron क्यों है सबसे जरूरी? Expert से जानें इसके फायदेन्यूट्रिएंट्स से भरपूर एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट लेनी चाहिए। कैलोरीज को कम करें, लेकिन डाइट में पोषक तत्वों की कमी न होने दें। प्रोसेस्ड कार्ब्स जैसे सोडा, व्हाइट ब्रेड, रिफाइंड शुगर और पेस्ट्रीज को अवॉइड करना चाहिए। क्योंकि इनके कारण इंसुलिन स्पाइक होता है और चेहरे का फैट बढ़ने लगता है।ब्लड शुगर को रेगुलेट करने और ब्लोटिंग की समस्या को कम करने के लिए डाइट में ओट्स, क्विनोआ और शकरकंद जैसे कॉम्पलेक्स कॉर्ब्स को शामिल करना चाहिए। इनका सेवन करने से आपको 100-150 ग्राम से अधिक नहीं करना चाहिए।प्रोटीन से भरपूर चीजों को अपनी डाइट हिस्सा बनाना चाहिए। प्रोटीन रिच फूड शरीर में वॉटर रिटेंशन को कम करता है और फेस के पफीनेस को कम करता है। इससे मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है और वेट लॉस के समय भी मसल्स को नुकसान नहीं होता है।सप्ताह में कम से कम दो बार फ्लैक्स सीड्स और ओमेगा- 3 से भरपूर चीजों को डाइट का हिस्सा बनाएं। इससे इंफ्लेमेशन कम होता है और चेहरे के फैट को भी कम करने में मदद मिलती है।रोजाना 3-4 लीटर पानी पीना चाहिए। आप नींबू या खीरा से इंफ्यूज्ड वॉटर पी सकती हैं। इससे जॉ एरिया के आसपास जमा हुआ फैट कम होता है और बॉडी डिटॉक्स होती है।डाइट में पोटैशियम से भरपूर चीजें जैसे पालक, केले और एवाकाडो को शामिल करना चाहिए। इनका सेवन करने से सोडियम लेवल रेगुलेट होता है और फेस की चर्बी कम होती है।बाहर का खाना औऱ पैकेज्ड स्नैक्स का सेवन नहीं करना चाहिए। जिससे शरीर में सोडियम कम हो सके।मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने के लिए हल्दी, अदरक और ग्रीन टी को डाइट में शामिल करें। इससे फेस फैट के साथ-साथ बेली फैट भी कम होगा। आप चाहें तो 16:8 घंटे की फास्टिंग विंडो को फॉलो कर सकते हैं, इससे फैट कम होता है।इसके अलावा रोजाना कुछ फेशियल एक्सरसाइज भी करना चाहिए। इन बदलावों को फॉलो करने से आपको 4 से 8 सप्ताह में असर दिखेगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 09:52:25 +0530</pubDate>
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<title>स्वाद ही नहीं, Health का भी खजाना है हरी मिर्च, Nutritionist ने बताए ये 5 Amazing Benefits</title>
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<description><![CDATA[ खाने के स्वाद को और बेहतर करने के लिए ज्यादातर लोग हरी मिर्च खाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाना के साथ हरी मिर्च खाने से सेहत को काफी फायदा मिलता है। वजन घटाने से लेकर मेटाबॉलिज्म और पाचन को सुधारता है। एक्सपर्ट ने बताया है कि हरी मिर्च सिर्फ स्वाद तो बढ़ाता ही है इसके साथ ही शरीर के कई फंक्शन्स को सपोर्ट करता है। इसमें पाए जाने वाला कैप्साइसिन एक एक्टिव कंपाउंड है, जो शरीर थर्मोजेनेसिस बढ़ाकर मेटाबॉलिज्म को एक्टिव करता है। इन्हीं कारण से कई लोग इसे अपनी डाइट में जरुर शामिल करते हैं। आइए आपको बताते हैं रोज 1-2 मिर्च खाने से क्या फायदा होता है।मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करता हैयदि आप वजन कम करना चाहते हैं, तो मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करना बेहद जरुरी है। ऐसे में हरी मिर्च आपकी मदद कर सकती है। इसमें मौजूद कैप्साइसिन शरीर में थर्मोजेनेसिस बढ़ा सकता है, जिससे शरीर थोड़ी ज्यादा कैलोरी बर्न करता है।विटामिन C से भरपूरहरी मिर्च में विटामिन-C की मात्रा भरपूर होती है, जो इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करती है। यदि आप रोजाना खाने के साथ 2 हरी मिर्च खाते हैं तो सर्दी-जुकाम जैसी छोटी बीमारियों से बच सकते हैं। इसके साथ ही इसे खाने से आपके चेहरे पर ग्लो भी आता है। ब्लड शुगर कंट्रोल में मददएक रिसर्च के अनुसार, हरी मिर्च में पाए जाने वाला कैप्साइसिन शरीर में ब्लड शुगर को बैलेंस रखने और इंसुलिन को बेहतर तरीके से काम करने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही कुछ रिसर्च में पता चला है कि कैप्साइसिन रिस्पॉन्स को बेहतर कर सकता है और खाने के बाद शुगर स्पाइक्स कम कर सकता है। डाइजेशन में मददगारमिर्च खाने से डाइजेस्टिव एंजाइम्स और गैस्ट्रिक जूस बढ़ता है, जिससे खाना पचाने में मदद मिलती है। किन महिलाओं के मिर्च नहीं खानी चाहिए?  - एसिडिटी या GERD  - गैस्ट्राइटिस या पेट के अल्सर  - IBS  - पाइल्सहरी मिर्च कितनी खानी चाहिए?रोजाना महिलाओं को 1-2 छोटी हरी मिर्च का सेवन करना चाहिए। इससे ज्यादा मिर्च न खाएं। बस किसी तरह की जलन महसूस न हो।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 09:52:24 +0530</pubDate>
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<title>Health Alert: पीरियड दर्द और थकान को न करें Ignore, ये 5 Rare बीमारियां हो सकती हैं जानलेवा</title>
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<description><![CDATA[ आमतौर पर महिलाओं को पीसीओएस, फाइब्रॉइड या ब्रेस्ट कैंसर जैसी समस्याओं के बारे में जानकारी जरुर होती है। हालांकि, कुछ ऐसी भी बीमारियां हैं जिनके लक्षण सामान्य होते हैं और उनके अनदेखा कर दिए जाते हैं। इन बीमारियों का सही समय पर पहचान नहीं हुई, तो ये खतरनाक रुप ले सकती है। डॉक्टर भी कहते है कि शरीर में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को समझना और डॉक्टर से सलाह लेना जरुरी है। इस लेख में हम आपको बताएंगे 5 ऐसी दुर्लभ बीमारियों के बारे में बता रहे हैं, जिसके बार में आपको पता होना चाहिए।एंडोमेट्रियोसिस ज्यादातर महिलाओं में होने वाली पहली दुर्लभ बीमारी एंडोमेट्रियोसिस है। इस बीमारी में यूट्रस के अंदर की परता जैसी सेल्स यूट्रस के बाहर बढ़ने लगते हैं। इस बीमारी में पेट में तेज दर्द, बहुत ज्यादा पीरियड्स और गर्भधारण में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अक्सर महिलाएं इसे सामान्य पीरियड दर्द समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, बल्कि समय पर इलाज जरुरी होता है। एडेनोमायोसिसदूसरी दुर्लभ बीमारी है एडेनोमायोसिस है। इस स्थिति में गर्भाशय की अंदरूनी परत (एंडोमेट्रियम) उसकी मांसपेशियों में फैलने लगती है। इसके कारण पीरियड्स के दौरान तेज दर्द, अधिक रक्तस्राव, पेट में भारीपन या सूजन और खून की कमी (एनीमिया) जैसी परेशानियां हो सकती हैं। यह दिक्कत आमतौर पर 35 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है, लेकिन उचित जांच के बिना इसका पता लगाना आसान नहीं होता।प्रीमैच्योर ओवेरियन इनसफिशिएंसीइस लिस्ट में तीसरी दुर्लभ बीमारी प्रीमैच्योर ओवेरियन इनसफिशिएंसी (POI) है। इसमें 40 वर्ष की आयु से पहले ही अंडाशय की कार्य क्षमता कम हो जाती है। जिसके चलते पीरियड्स अनियमित हो जाते है या फिर बंद भी हो सकते हैं। इस हार्मोनल असुंतलन को एक बार समझ लिया, तो यह भविष्य में प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है।लिचेन स्क्लेरोससचौथी दुर्लभ बीमारी है लिचेन स्क्लेरोसस है, जो प्राइवेट पार्ट्स की त्वचा को प्रभावित करने वाली दुर्लभ सूजन संबंधी बीमारी है। इस स्थिति में खुजली, जलन और उसकी परत का पतला होना जैसे लक्षण नजर आते हैं। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह आगे चलकर अधिक परेशानी पैदा कर सकती है और संक्रमण का खतरा भी बढ़ा देती है। जेस्टेशनल ट्रोफोब्लास्टिक डिजीजपांचवी दुर्लभ बीमारी है जेस्टेशनल ट्रोफोब्लास्टिक डिजीज, जो प्रेग्नेंसी से जुड़ी असामान्य कोशिका वृद्धि के कारण होती है। इसमें असामान्य ब्लीडिंग, बहुत ज्यादा उल्टी और यूट्रस का ज्यादा बड़ा होना जैसे लक्षण हो सकते हैं। वैसे यह स्थिति दुर्लभ है, लेकिन समय पर इसकी पहचान और इलाज से पूरी तरह ठीक की जा सकती है।क्या करें?जब भी महिलाओं को किसी भी  असामान्य दर्द, अनियमित ब्लीडिंग, ज्यादा थकान या प्राइवेट पार्ट्स में बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। रेगुलर स्त्री रोग चेकअप, पैप स्मीयर और अल्ट्रासाउंड से कई बीमारियों की शुरुआती पहचान हो सकती है।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 09:52:24 +0530</pubDate>
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<title>Yogasana: Yoga का पावरहाउस है &amp;apos;विपरीत करणी&amp;apos; आसन, Stress और Aging की होगी छुट्टी</title>
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<description><![CDATA[ बॉलीवुड की फेमस अभिनेत्री करीना कपूर अपनी टोंड बॉडी और जवां निखार के लिए जानी जाती हैं। एक्ट्रेस खुद को फिट रखने के लिए रोजाना योगासन करती हैं। वहीं हर लड़की या महिला फिट और टोंड बॉडी पाना चाहती हैं। ऐसे में आप भी फिट बॉडी और जवां लुक के लिए अपनी डेली रूटीन में योगासन को शामिल कर सकती हैं। आप 10 मिनट तक सिर्फ एक योगासन करने खुद को फिट और यंग रख सकती हैं।यह योगासन जितना दिखने में आसान लगता है, इसका शरीर और दिमाग पर भी उतना कमाल का फायदा दिखता है। ऐसे में हर महिला को अपनी डेली रूटीन में यह योगासन शामिल करना चाहिए। इस आसन को करने से आप अंदर से हेल्दी और रिफ्रेश महसूस करती हैं। साथ ही इस आसन के कई अद्भुत फायदे मिलते हैं। यह आसन विपरीत करणी आसन है। इस आसन को करने से कुछ ही दिनों में आपको फर्क महसूस होगा। तनाव कम होगा, चेहरे की चमक बढ़ेगी और शरीर हल्का लगेगा।इसे भी पढ़ें: Health Alert: पीरियड दर्द और थकान को न करें Ignore, ये 5 Rare बीमारियां हो सकती हैं जानलेवाऐसे करें विपरीतकरणी आसनइस आसन को करने के लिए दीवार के पास किसी शांत जगह को चुनें।फिर योगा मैट बिछाएं और आप चाहें तो इस आसन को बिस्तर पर भी कर सकती हैं।शरीर की पोजिशन को सेट करें और घुटने मोड़कर दीवार के एकदम पास बैठें।अब धीरे-धीरे करवट लेकर लेटें और पैरों को दीवार के ऊपर की तरफ सीधा रखें।दीवार से आपकी कमर करीब 2-3 इंच दूर होना चाहिए।पैरों को बिलकुल सीधा रखें औऱ पंजे को ढीला छोड़ दें।हाथों को शरीर के बगल में ढीला छोड़ दें और हथेलियां ऊपर की तरफ रखें।आंखें बंद करें और नाक से गहरी सांस लें और फिर धीरे-धीरे छोड़ें।इस दौरान पेट को रिलैक्स रखें और शुरूआत में 1-3 मिनट तक इस पोजिशन में रहें।जब आदत को जाए, तो इसको 10 मिनट तक करें।विपरीतकरणी आसन के फायदे इस आसन को करने से पेट की सूजन और ब्लोटिंग की समस्या कम होती है।यह आसन लसीका तंत्र को तेज करने के साथ शरीर में मौजूद टॉक्सिंस बाहर निकलते हैं।तनाव, चिंता और ओवरथिंकिंक की समस्या कम होती है और मन शांत होने लगता है।यह मसल्स का तनाव दूर करता है और शरीर रिलैक्स होता है।इस आसन को करने से रात को गहरी और शांत नींद आती है।इस आसन को करने से ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है और दिल की सेहत भी अच्छी बनी रहती है।इससे इम्यून सिस्टम बूस्ट होता है और बीमारियां कम होती हैं।इस आसन का अभ्यास करने से दिमाग शांत होता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 09:52:17 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: पीरियड क्रैम्प्स से परेशान? ये फूड्स दर्द को कर देंगे कम</title>
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<description><![CDATA[ हर महीने आने वाले पीरियड्स अमूमन लड़कियों के लिए काफी परेशान कर देने वाले होते हैं। इस दौरान ना केवल ब्लड फ्लो कम या ज्यादा होता रहता है, बल्कि थकान और मूड स्विंग्स जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। यह एक ऐसा समय होता है, जब एक महिला शारीरिक व मानसिक रूप से काफी थकान व दर्द का अहसास करती है। इस दौरान कमर दर्द, पेट में मरोड़, भारीपन और कमजोरी की समस्या बेहद आम है। ऐसे में हम सभी सिर्फ और सिर्फ पेनकिलर पर ही भरोसा करती हैं, जबकि आपका खानपान बहुत अधिक मायने रखता है।  आपको शायद ना पता हो, लेकिन कुछ फूड्स शरीर में सूजन कम करते हैं, मांसपेशियों को रिलैक्स करते हैं और हार्मोन को बैलेंस करने में मदद करते हैं। इसलिए, अगर आप पीरियड्स के दौरान समझदारी से खाती हैं, तो ऐसे में क्रैम्प्स, ब्लोटिंग और थकान काफी हद तक कम किया जा सकता है। तो चलिए जानते हैं ऐसे ही कुछ फूड्स के बारे में–इसे भी पढ़ें: Health Experts का अलर्ट: ज्यादा Screen Time बना Spine का दुश्मन, हो सकती हैं ये 5 गंभीर बीमारियांकेलापीरियड्स के दौरान केला खाना काफी अच्छा माना जाता है। दरअसल, इसमें भरपूर मात्रा में पोटैशियम और विटामिन बी6 होता है जो मांसपेशियों को रिलैक्स करता है और साथ ही साथ, यह ब्लोटिंग व पेट के दर्द को कम करने में मदद करता है। केला मूड स्विंग्स को भी कम करता है।  अदरक अगर आपको पीरियड्स के दौरान क्रैम्प्स हो रहे हैं तो ऐसे में अदरक का सेवन करना काफी अच्छा माना जाता है। यह एक नेचुरल पेनकिलर की तरह काम करता है, जिससे दर्द व सूजन को कम करने में मदद मिलती है। इससे पेट दर्द, उल्टी व जी मचलाना जैसी समस्याएं भी दूर होती हैं। आप पीरियड्स के दौरान अदरक की चाय पी सकते हैं। इसके अलावा, गर्म पानी में अदरक उबालें या फिर इसे सब्जियों में डाला जा सकता है।  हरी पत्तेदार सब्जियां हरी पत्तेदार सब्जियां सेहत के लिए काफी अच्छी मानी जाती हैं। लेकिन पीरियड्स के दौरान इन्हें खाने से काफी फायदा होता है। दरअसल, इस दौरान शरीर में आयरन की कमी हो सकती है और इससे कमजोरी और चक्कर महसूस हो सकते हैं। आप पीरियड्स में पालक, मेथी, सरसों व चौलाई आदि खाएं। इनमें मौजूद आयरन, मैग्नीशियम और कैल्शियम शरीर को काफी फायदा पहुंचाती हैं।    ओमेगा-3 वाले फूड्सकई रिसर्च में यह पाया गया है कि ओमेगा-3 लेने से पीरियड क्रैम्प्स कम हो सकते हैं। इसलिए, पीरियड्स के दौरान आपको ओमेगा-3 वाले फूड्स जैसे चिया सीड्स, अलसी के बीज, अखरोट आदि का सेवन करना चाहिए। अगर आप नॉन-वेजिटेरियन हैं तो ऐसे में आप मछली का सेवन भी कर सकते हैं।    - मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Wed, 18 Mar 2026 10:16:19 +0530</pubDate>
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<title>Pregnancy के Third Trimester में Iron क्यों है सबसे जरूरी? Expert से जानें इसके फायदे</title>
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<description><![CDATA[ प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को अपनी हेल्थ पर ध्यान काफी जरुरी माना जाता है। गौरतलब है कि गर्भावस्था की हर तिमाही में आयरन की जरूरत होती है। आयरन एक बहुत ही जरुरी पोषक तत्व माना जाता है। क्योंकि प्रेग्नेंसी के समय प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की मात्रा 50 फीसदी की वृद्धि को पूरा करने, भ्रूण और प्लेसेंटा को ऑक्सीजन सप्लाई करने और एनीमिया यानी खून की कमी को रोकने के लिए आयरन बहुत जरूरी तत्व है। इतना ही नहीं, गर्भ में पल रहे शिशु को पर्याप्त मात्रा में आयरन की जरुरत होती है और क्योंकि इससे शिशु के मस्तिष्क का विकास होता है। अगर किसी गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी हो जाती है, तो प्री-टर्म बर्थ, जन्म के समय शिशु का वजन कम होने और प्रसवोत्तर थकान खतरा बढ़ जाता है। अब ज्यादातर लोगों के मन में सवाल आता है कि प्रेग्नेंसी के किस चरण में महिलाओं को सबसे ज्यादा आयरन की जरुरत होती है। किस तिमाही में महिलाओं को सबसे ज्यादा आयरन लेना चाहिए?गर्भावस्था के दौरान हर चरण में आयरन जरूरी होता है, लेकिन तीसरी तिमाही में इसकी आवश्यकता सबसे अधिक बढ़ जाती है। एक्सपर्ट के अनुसार, इस समय महिलाओं को सामान्य से करीब 50% ज्यादा (लगभग 27 mg प्रतिदिन) आयरन की जरूरत होती है, ताकि शिशु का विकास सही ढंग से हो और शरीर में बढ़ते रक्त की पूर्ति हो सके। खासकर अंतिम हफ्तों में अतिरिक्त आयरन लेना अधिक फायदेमंद माना जाता है।आखिरी तिमाही में आयरन लेने के फायदे- एनीमिया के जोखिम में कमी- प्रेग्नेंसी की आखिरी तिमाही में मतलब है कि डिलीवरी कभी हो सकती है। यदि डिलीवरी के दौरान महिला को बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो जाती है या गर्भवस्था के दौरान महिला के शरीर में आयरन की कमी होती है, जिससे महिलाओं को एनीमिया हो सकता है।   - डिलीवरी की तैयारी- आखिरी तिमाही में भरपूर मात्रा में आयरन लेने से शरीर डिलीवरी के लिए तैयार रहता है। वैसे भी नॉर्मल डिलीवरी हो या सिजोरियन डिलीवरी। दोनों ही स्थिति में महिला के शरीर से ब्लड बहता है। इसलिए आयरन लेने से शरीर में ब्लड वॉल्यूम बढ़ता है, जो बाद में रिकवरी में मदद करता है। -शिशु के वजन पर असर- प्रेग्नेंसी के आखिरी तिमाही में पर्याप्त मात्रा में आयरन लेने से शिशु का मानसिक विकास बेहतर रहता है। इसके साथ ही जन्म के समय शिशु का वजन भी सही रहता है। यहां तक कि प्री-टर्म डिलीवरी का जोखिम भी कम रहता है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 18 Mar 2026 10:16:18 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: ये है &amp;apos;जादुई&amp;apos; गंधराज नींबू, Body Detox कर चेहरे पर लाएगा Natural Glow</title>
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<description><![CDATA[ सेहत के लिए नींबू का सेवन काफी फायदेमंद माना जाता है। वहीं मार्केट में नींबू की कई तरह की वैरायटी मिलती है। जिनको देखकर लोगों के मन में उत्सुकता बढ़ने के साथ इसको खाने के क्या फायदे हैं या इनका कैसे सेवन करना चाहिए। इस तरह के सवाल भी मन में आते हैं। मार्केट में गंधराज नींबू भी देखने को मिलता है। यह एक खास किस्म का नींबू होता है। जोकि भारत के पूर्वी हिस्से में पाया जाता है। इसका साइज नॉर्मल नींबू से बड़ा होता है और खुशबू भी काफी तेज होती है। वहीं गंधराज नींबू नॉर्मल नींबू से ज्यादा खट्टा और फ्रेश होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको गंधराज नींबू के फायदे और इसके सेवन करने से तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं।जानिए गंधराज नींबू के फायदेगंधराज नींबू में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जोकि सेहत के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं। गंधराज नींबू का सेवन करने से आपको कई तरह के फायदे मिल सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: पीरियड क्रैम्प्स से परेशान? ये फूड्स दर्द को कर देंगे कमबेहतर होगा पाचनगंधराज नींबू में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जोकि पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। गंधराज नींबू का रस अपच, गैस और कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद करता है। खाने के साथ या खाना खाने के बाद इसके सेवन से खाना जल्दी पच जाता है।इम्यूनिटी बूस्टयह नींबू विटामिन सी से भरपूर होता है। जो आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। गंधराज नींबू के सेवन से वायरल इंफेक्शन, मौसमी बुखार और सर्दी-खांसी जैसी बीमारियों से भी बचाव किया जा सकता है। वेट लॉस में करने में मददगारवेट लॉस की चाह रखने वाले लोगों के लिए भी गंधराज नींबू फायदेमंद होता है। रोजाना सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में इसका रस मिलाकर पीने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और शरीर की अधिक चर्बी कम होती है।दिल की सेहत के लिए लाभकारीइस नींबू में एंटीऑक्सीडेंट और पोटैशियम पाया जाता है। जोकि बीपी को कंट्रोल करने में मदद करता है। गंधराज नींबू के नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल का लेवल संतुलित होता है, जिससे दिल की सेहत बेहतर होती है।बॉडी डिटॉक्स में मददइसका सेवन करने से शरीर में मौजूद टॉक्सिक पदार्थ बाहर निकलते हैं। यह लिवर की क्षमता को भी बेहतर बनाता है और खून को भी साफ करने में मदद करता है।त्वचा के लिए लाभकारीबता दें कि गंधराज नींबू में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। यह त्वचा को चमकदार और साफ बनाने में मदद कर सकता है। गंधराज नींबू शरीर से टॉक्सिक पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। जिससे आपकी त्वचा हेल्दी रहती है। आप सुबह के समय खाली पेट इसको नींबू पानी के रूप में पी सकते हैं। इससे यह स्किन में निखार लाने का काम करता है।गंधराज नींबू खाने का तरीकानींबू पानीआप इसका सेवन नींबू पानी के रूप में भी कर सकते हैं। इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में आधा गंधराज नींबू निचोड़कर पी सकते हैं। आप चाहें तो इसमें थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं। सलाद के साथ खाएंआप इस नींबू का सेवन अंकुरित अनाज, सलाद, दाल या सब्जी आदि में निचोड़कर खा सकते हैं। इसको खाने में मिलाने से खाने का स्वाद बढ़ जाता है और शरीर को पोषण भी मिलता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 18 Mar 2026 10:16:18 +0530</pubDate>
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<title>Sujok Ring Benefits: 10 रुपए की यह &amp;apos;Magic Ring&amp;apos; कैसे है Health का रिमोट कंट्रोल? जानें इसके फायदे</title>
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<description><![CDATA[ क्या आप जानती हैं कि पर्स या पॉकेट में रखी छोटी सी अंगूठी शरीर के कई अंगों को हेल्दी और दर्द को कम करने में सहायक हो सकती है। यह सुनने में किसी चमत्कार से कम नहीं लगता है। लेकिन इसको एक्यूप्रेशर में मैजिक रिंग के नाम से जानते हैं। यह छोटी सी रिंग असल में सेहत का जादुई रिमोट है। यह रिंग 10 रुपए में आसानी से मिल जाएगी। लेकिन इसके फायदे हजारों रुपए की दवा और थेरेपी पर भी भारी पड़ सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सुजोक रिंग इस्तेमाल करने के 10 जबरदस्त फायदे के बारे में बताने जा रहे हैं।एक्‍सपर्ट की रायहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो भले ही यह देखने में नॉर्मल स्प्रिंग जैसी लगे, लेकिन यह सुजोक थेरेपी के सिद्धांतों पर काम करती हैं। &#039;सु&#039; का अर्थ हाथ और &#039;जोक&#039; का अर्थ पैर होता है। वहीं शरीर हाथों और पैरों में समाया हुआ है।इसे भी पढ़ें: Health Alert: टॉयलेट हाइजीन में लापरवाही दे सकती है गंभीर Skin Infection, एक्सपर्ट्स से जानें बचावउंगलियों में ऐसे छोटे-छोटे प्रेशर पॉइंट्स होते हैं, जो सीधे दिल, लिवर, फेफड़े और नर्वस सिस्टम से जुड़े होते हैं। जब इस रिंग को उंगलियों में ऊपर-नीचे घुमाया जाता है, तो इन पॉइंट्स पर एक साथ काम करती है। इस रिंग से शरीर का नेचुरल हीलिंग प्रोसेस तुरंत एक्टिव होता है और यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है। यह नसों को एक्टिव करती है और शरीर में रुकी हुई प्राण ऊर्जा को मुक्त करती है। अच्छी तरह होते हैं अंगों के कार्ययह रिंग एक्यूप्रेशर पॉइंट्स को एक्टिव करती हैं। जिससे लिवर, किडनी और पेट जैसे अंगों की कार्यक्षमता में सुधार होता है।ब्‍लड सर्कुलेशनइस रिंग को पहनने से उंगलियों से लेकर पूरे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। इससे चेहरे पर भी निखार आता है।दूर होगा तनावइस रिंग को घुमाने से दिमाग में एंडोर्फिन नामक हैप्पी हार्मोंस रिलीज होते हैं। इससे आपको सुकून और मानसिक शांति मिलती है।दर्द और अकड़न से राहतअगर आप दिनभर लिखने या फिर टाइपिंग का काम करती हैं, तो यह हाथों और उंगलियों के दर्द को भी मिनटों में कम कर सकती है।हीलिंग गुणबता दें कि इसमें नेचुरल हीलिंग गुण पाया जाता है। यह शरीर के डिफेंस मैकेनिज्म को इतना मजबूत करती है कि शरीर खुद को ठीक करने लगता है।सुस्ती और थकान दूर होगीअक्सर दोपहर के समय सुस्ती आती है। इस दौरान 2 मिनट इस रिंग का इस्तेमाल करना चाहिए। यह शरीर में फौरन एनर्जी का फ्लो बढ़ा देती है।झुनझुनी और सुन्नपन में आरामयह रिंग उंगलियों की झुनझुनी और अकड़न दूर करने के लिए सबसे अच्छा घरेलू उपाय है।फोकस बढ़ता हैयह रिंग दिमाग को शांत करके फोकस बढ़ाती है। छात्रों और ऑफिस जाने वाले लोगों के लिए यह एक बेहतरीन स्ट्रेस बस्टर है।नर्वस सिस्टम के लिए अच्छायह नसों के नेटवर्क को सही करने के साथ पैरालिसिस जैसी कंडीशन में भी मददगार हो सकती है।सुरक्षायह पूरी तरह से आसान और नेचुरल तरीका है। इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है और हर उम्र का व्यक्ति इस्तेमाल कर सकता है। लेकिन फिर भी इसके इस्तेमाल से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।रिंग इस्तेमाल करने का तरीकाइसको हर उंगली में एक-एक करके डालें और ऊपर से नीचे तक 2-3 मिनट तक रोल करें।जब उंगली हल्की गर्म और लाल महसूस होने लगे, तो समझ लेना कि ब्लड सर्कुलेशन शुरू हो गया है।इसका सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि आप इसको घर पर, सफर के दौरान, ऑफिस में काम करते हुए या टीवी देखते हुए कहीं भी इस्तेमाल कर सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 17 Mar 2026 10:42:22 +0530</pubDate>
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<title>Health Experts का अलर्ट: ज्यादा Screen Time बना Spine का दुश्मन, हो सकती हैं ये 5 गंभीर बीमारियां</title>
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<description><![CDATA[ आज का दौर पूरी तरह से डिजिटल हो गया है। हमारे रोजमर्रा की लाइफ में मोबाइल और लैपटॉप जरुरी हिस्सा बन गए हैं। वर्क, पढ़ाई और सोशल मीडिया हर काम स्क्रीन के सामने बैठकर ही होता है, लेकिन लगातार कई घंटों तक स्क्रीन देखने की आदत हमारी स्पाइन या रीढ़ की हड्डी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अगर हम लगातार गलत पॉश्चर में बैठे रहेंगे, गर्दन को आगे झुकाकर मोबाइल देखना, लैपटॉप पर झुककर काम करना और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से स्पाइन पर अधिक दबाव पड़ता है। इसको मेडिकल भाषा में टेक्स्ट नेक भी कहा जाता है। आइए आपको बताते हैं अधिक स्क्रीन टाइम स्पाइन को किस तरह से प्रभावित कर रही है और इसके नुकसान। पॉश्चर खराब हो सकता हैहेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि जब हम मोबाइल या लैपटॉप देखते समय गर्दन को आगे झुका लेते हैं, तो ऐसा करने से स्पाइन पर दबाव बढ़ जाता है। सिर को 40-60 डिग्री तक झुकाने से गर्दन और ऊपरी पीठ की मांसपेशियों पर अतिरिक्त तनाव पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा करने से गर्दन में जकड़न, कंधों में दर्द और पीठ खिंचाव महसूस होने लगता है।मांसपेशियों का असंतुलनलंबे समय तक लगातार बैठकर काम करने से शरीर की कई मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं, जबकि कुछ मांसपेशियों पर जरूरत से ज्यादा दबाव आने लगता है। इस तरह का असंतुलन शरीर के प्राकृतिक ढांचे को प्रभावित करता है। परिणामस्वरूप पीठ में दर्द, कंधों का आगे की ओर झुकना और गलत पॉश्चर जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।डिजनरेटिव बदलावस्पाइन में मौजूद डिस्क कुशन की तरह काम करती हैं, जो हड्डियों के बीच झटकों को सोखती हैं। गौरतलब है कि गलत पोजीशन और लगातार दबाव के कारण इन डिस्क में समय से पहले घिसाव (डिजनरेशन) शुरु हो सकता है। इससे स्लिप डिस्क या कमर दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। नसों पर दबावजब रीढ़ की हड्डी की बनावट प्रभावित होने लगती है, तो इसका असर नसों पर भी पड़ सकता है और उन पर दबाव बढ़ने लगता है। ऐसी स्थिति में हाथों में झनझनाहट, सुन्नता या कमजोरी महसूस हो सकती है। कई बार यह दर्द गर्दन से शुरू होकर हाथों तक या कमर से पैरों तक फैलने लगता है, जिसे अक्सर साइटिका जैसी समस्याओं से जोड़ा जाता है। बच्चों और युवाओं पर प्रभावआजकल ऑनलाइन क्लास और गेमिंग के कारण बच्चों में भी स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ा है। कम उम्र में ही यदि वे गलत पोजीशन में बैठते हैं, तो भविष्य में स्पाइन से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। बढ़ती उम्र में हड्डियों का विकास प्रभावित हो सकता है। जानें बचाव के उपाय - स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखें, ताकि गर्दन ज्यादा न झुके। - ऑफिस या वर्क के दौरान हर 30-40 मिनट में ब्रेक लें और स्ट्रेचिंग करें। - बैठते समय पीठ सीधी रखें और कुर्सी का सपोर्ट लें। - रोजाना योग और बैक स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज करें। - जब आप मोबाइल का यूज करें तो आंखों की ऊंचाई तक उठाएं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 17 Mar 2026 10:38:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>शरीर बन जाएगा &amp;apos;खून की Factory&amp;apos;, दूर होगी Iron Deficiency, Diet में शामिल करें ये 4 चीजें</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर शरीर में खून की कमी के कारण थकान और कमजोरी महसूस होती है। क्या आपके शरीर में खून की कमी है? खून की कमी के कारण व्यक्ति को बार-बार चिड़चिड़ापन और कमजोरी महसूस होती होती है। इस दौरान बालों को झड़ना और चेहरे पीला दिखने लगा है, तो आपको जल्द से ही अपने डाइट में इन फूड्स को एड ऑन कर लें। यह फूड्स शरीर में हीमोग्लोबिन को बढ़ाने में मदद करते हैं। आइए आपको बताते हैं अपने आहार में कौन-सी चीजें हासिल करें।  सहजन की पत्तियांसहजन को मोरिंगा के नाम से भी जाना जाता है। इसकी पत्तियों को सुपरफूड कहा जाता है। इसमें संतरे से ज्यादा विटामिन सी और दूध से अधिक कैल्शियम पाया जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है। मोरिंगा की पत्तियों का साग, परांठा या सूप बनाकर पिएं। यह हीमोग्लोबिन बढ़ाने की सबसे तेज तरीका है। चुकंदर लाल रंग का यह सब्जी खून की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें आयरन, फोलिक एसिड और पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। रोजाना एक गिलास चुकंदर का जूस पीने या इसे सलाद में शामिल करने से शरीर में नए रेड ब्लड सेल्स (RBC) बनने की प्रक्रिया तेज होती है और खून की कमी दूर करने में मदद मिलती है। सफेद तिलसफेद तिल के बीजों में भरपूर आयरन पाया जाता है। एक चम्मच सफेद तिल खाने से शरीर को आयरन और जिंक प्राप्त होता है। इसको आप सलाद पर छिड़ककर, लड्डू बनाकर या चाटनी के तौर पर खा सकते हैं। अनार अनार पोषक तत्वों से भरपूर फल है, इसमें आयरन के साथ-साथ विटामिन C भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। एक्सपर्ट के अनुसार शरीर आयरन को सही तरीके से अवशोषित तभी कर पाता है जब उसे विटामिन C भी मिले। अनार में ये दोनों पोषक तत्व एक साथ मौजूद होते हैं, इसलिए इसे खून बढ़ाने के लिए बेहद लाभकारी फल माना जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 09:18:48 +0530</pubDate>
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<title>Health Alert: टॉयलेट हाइजीन में लापरवाही दे सकती है गंभीर Skin Infection, एक्सपर्ट्स से जानें बचाव</title>
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<description><![CDATA[ यदि आप टॉयलेट की साफ-सफाई और हाइजीन का ठीक से ध्यान नहीं रखती हैं, तो इसका असर सीधे आपकी सेहत पर पड़ सकता है। इसके अलावा, लापरवाही के कारण त्वचा से जुड़ी कई तरह की समस्याएं भी होने की संभावना बढ़ जाती है। गंदे वॉशरूम का इस्तेमाल या टॉयलेट जाने के बाद हाथ न धोना सहित कई चीजें खराब टॉयलेट हाइजीन में आती है। टॉयलेट हाइजीन का मतलब क्या होता है, खराब टॉयलेट साफ-सफाई की वजह से त्वचा से जुड़ी समस्याएं कैसे हो सकती हैं और इन परेशानियों से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इन सभी बातों के बारे में आपको इस लेख में बताएंगे।टॉयलेट हाइजीन क्या होती है?हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक खराब टॉयलेट हाइजीन सिर्फ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल हेल्थ खराब करती है, इसके साथ ही कई तरह के स्किन इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। स्किन हमारे शरीर को बाहरी गंदगी से बचाने में एक रक्षा कवच के तौर पर काम करती है। जब हाइजीन सही नहीं होता है, तो कई तरह के बैक्टीरियल और फंगल इंफेक्शन हमारी स्किन को घेर लेते हैं। खराब टॉयलेट हाइजीन का सीधा मतलब है कि आप वॉशरूम जाने के बाद अपने हाथ सही से नहीं धो रही हैं या गंदी टॉयलेट सीट का इस्तेमाल कर रही हैं। इसके साथ ही अपना टॉवेल खराब कर सकती हैं। खराब टॉयलेट हाइजीन के कारण हो सकती हैं स्किन से जुड़ी ये 5 दिक्कतें- टॉयलेट का वातावरण अक्सर गर्म और नमी से भरा होता है, जो फंगस के बढ़ने के लिए अनुकूल माना जाता है। यदि ऐसे में साफ-सफाई का सही ध्यान न रखा जाए, तो टीनिया क्रूरिस (जांघों में होने वाली खुजली) या दाद जैसे फंगल संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर कमर और जांघों के अंदरूनी हिस्सों में इस तरह की समस्या ज्यादा देखने को मिल सकती है। - यदि आप खराब क्लीनिंग एजेंट का इस्तेमाल करती हैं, टॉयलेट पेपर की क्वालिटी खराब है या आप बार-बार कीटाणुनाशकों के संपर्क में आते हैं, तो स्किन में एलर्जी या जलन हो सकती है। इससे प्राइवेट एरिया के आसपास लालिमा, खुजली और जलन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।- ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी), जो मस्से होने का कारण बनता है, गंदे टॉयलेट या गंदे पर्सनल आइटम्स के संपर्क में आने से फैल सकता है। हालांकि, यदि सही तरीके से साफ-सफाई और हाइजीन का पालन किया जाए, तो इस संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।- गंदे टॉयलेट का इस्तेमाल करने या हाथ न धोने के कारण स्किन इरिटेशन और खुजली हो सकती है। स्किन इंफेक्शन आसानी से परिवार के एक सदस्य से दूसरे सदस्य में फैल सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 10:13:37 +0530</pubDate>
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<title>High Cholesterol Home Remedy: High Cholesterol का अचूक देसी इलाज, Kashmiri लहसुन से मिलेगी Heart Health की गारंटी</title>
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<description><![CDATA[ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ते तनाव और खानपान में गड़बड़ी की वजह हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या आम होती जा रही है। नसों में जमा खराब कोलेस्ट्रॉल, हाई बीपी, हार्ट ब्लॉकेज और दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में लोग अक्सर दवाओं पर निर्भर रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद में इसका असरदार और नेचुरल समाधान मौजूद हैं। हम यहां पर कश्मीरी लहसुन के बारे में बताने जा रहे हैं।कश्मीरी लहसुन को कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने का शक्तिशाली देसी उपाय माना जाता है। यह लहसुन बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने और हार्ट हेल्थ को सुधारने में मदद कर सकता है। ऐसे में आप भी कश्मीरी लहसुन का सेवन करके अपने दिल की सेहत को हेल्दी रख सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: Medical Report का बड़ा अलर्ट, Blood Sugar जांचने वाला HbA1c टेस्ट भरोसेमंद नहींकश्मीरी लहसुनआप कुछ समय के लिए सिर्फ दवाओं पर निर्भर रहने से पहले डॉक्टर की सलाह पर आयुर्वेदिक उपाय कर सकती हैं। कश्मीरी लहसुन को &#039;एक कली लहसुन&#039; भी कहा जाता है। कश्मीरी लहसुन अपने औषधीय गुणों की वजह दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद हैं। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और सल्फर शरीर में जमा बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने और गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में सहायता करता है।ऐसे खाएं कश्मीरी लहसुनकश्मीरी लहसुन की 4-5 छोटी कलियां लें।इनको छीलकर हल्का सा कूट लें।इसको खाली पेट अच्छे से चबाकर खाएं या इनको पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं और फिर धीरे-धीरे पिएं।इसके सेवन के कम से कम 1 घंटे तक कुछ न खाएं-पिएं।जानिए कश्मीरी लहसुन के फायदेकश्मीरी लहसुन गुड कोलेस्ट्रॉल को नेचुरली बढ़ा सकता है। जिससे दिल की सुरक्षा मजबूत होती है और धमनियों में भी लचीलापन आता है।यह बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक माना जाता है। इसके सेवन से नसों में जमी चर्बी धीरे-धीरे कम होती है और ब्लॉकेज का भी खतरा काफी कम होता है।कश्मीरी लहसुन हृदय की धमनियों को मजबूत करके हार्ट हेल्थ को बेहतर करता है। इससे हार्ट अटैक जैसे जोखिम भी कम होते हैं।यह शरीर में सूजन को कम करने के साथ ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करता है। इससे पूरे शरीर को पर्याप्त पोषण और ऑक्सीजन मिलता है।कश्मीरी लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाया जाता है, जोकि फ्री रेडिकल्स से लड़ने में सहायता करता है। इसके सेवन से सेल डैमेज कम होता है और एजिंग प्रोसेस धीमा पड़ सकता है।कश्मीरी लहसुन के सेवन से बीपी बैलेंस होता है। वहीं हाई बीपी से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी कम होता है।आयु्र्वेद में लहसुन को दिल की सेहत के लिए अमृत के समान माना जाता है। अगर आप इसको सही तरीके से रेगुलर खाते हैं, तो यह नसों की सफाई और दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है।सावधानीहालांकि अगर आप पहले से हार्ट की दवा ले रहे हैं, ब्लड थिनर पर है या फिर किसी गंभीर बीमारी से परेशान हैं। तो इस उपाय को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 14 Mar 2026 14:28:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Weight Loss Tips: Weight Loss का यह &amp;apos;Secret Formula&amp;apos; देगा कमाल के Results, 21 दिन में घटेगा 5 किलो वजन</title>
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<description><![CDATA[ क्या आप भी अपना वजन घटाने की कोशिश कर रही हैं। या फिर शाम को 7 बजे के बाद खाना छोड़कर खुद को तकलीफ दे रही हैं। अगर आपका जवाब हां है तो यह आदतें फौरन छोड़ दें। क्योंकि वजन घटाना भूखे रहने या किसी ट्रेंडिंग डाइट को फॉलो करने से नहीं होता है। बल्कि यह शरीर को अंदर से मजबूत और बैलेंस करने से शुरू होता है। बता दें हेल्दी और परमानेंट फैट लॉस सिर्फ कैलोरी गिनने या खाने में कटौती करने से नहीं मिलता है। वजन घटाने की नींव होती है, तो आपका हार्मोनल बैलेंस, मेटाबॉलिज्म, पेट की सफाई, शरीर में पानी का सही बैलेंस और इंसुलिन का उतार-चढ़ाव। जब यह 5 चीजें ठीक हो जाती हैं, तो शरीर खुद ब खुद फैट को जलाना शुरूकर देता है। यही वजह है कि हम आपको यहां 5 साइंस बेस्ड और बेहद आसान नुस्खे लेकर आए हैं। यह आपके शरीर की अंदरूनी प्रणाली को रीसेट करते हुए सिर्फ 21 दिनों में करीब 5 किलो तक वेट कम करते हैं। यह टिप्स घर पर आसानी से अपनाए जा सकते हैं। हम आपको इन कारगर नुस्खों के बारे में डाइटिशियन और हेल्दी लाइफस्टाइल के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे कि आप बिना भूखे रहे। बिना पेनिक किए और बिना किसी महंगी डाइट के भी अपने वजन घटाने की शुरूआत कर सकें।इसे भी पढ़ें: भीषण गर्मी में सिर्फ पानी से नहीं चलेगा काम, Diet में शामिल करें ये 5 Superfoodsआंतों की सेहतकब्ज के कारण और आंतों में गड़बड़ी की वजह बाहर निकलने वाले टॉक्सिंस को शरीर दोबारा सोख लेता है। पेट में चिपका हुआ मल भी बढ़े हुए पेट के जिम्मेदार होता है। इसलिए डाइट में फाइबर से भरपूर फूड्स और प्रोबायोटिक्स को शामिल करना चाहिए। जिससे पेट की सफाई ठीक से हो सके।शरीर में रुका हुआ पानीअधिकतर महिलाएं 2 से 4 किलो वजन सिर्फ ब्लोटिंग का उठाती हैं। जोकि ज्यादा नमक खाने, हार्मोनल सूजन और खराब डाइजेशन की वजह से जमा होता है। अपनी डाइट में पोटैशियम और लो सोडियम से भरपूर फूड्स शामिल करें। वहीं पर्याप्त पानी पीकर शरीर से एक्स्ट्रा पानी बाहर निकालें।गट को नुकसान पहुंचाने वाले फूड्सअक्सर हम जिन चीजों को हेल्दी समझ कर खाते हैं, वह असल में हमारी आंतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स अदरक, हल्दी, ताजे फल और सब्जियों को डाइट में शामिल करना चाहिए।खाने के बाद करें वॉकवेट लॉस करने के लिए कार्डियो की जरूरत नहीं है। बल्कि खाना खाने के फौरन बाद 10 मिनट वॉक करें। यह शरीर की भोजन के बाद वाली नेचुरल फैट बर्निंग विंडो को एक्टिव करता है। जिससे ग्लूकोज का लेवल तेजी से कम होने के साथ चर्बी जलती है।मेटाबॉलिक कटऑफ सेटशाम के बाद मेटाबॉलिक कटऑफ करें। इसके बाद कुछ न खाएं। ऐसा करने से शरीर को रात भर पचे खाने को संभालने की जगह फैट बर्न करेगा। देर रात खाने से शरीर रात भर खाने के पचाने में लगा रहता है और यह फैट जमा करता है।वेट कम करने के लिए सिर्फ कम खाना और एक्सरसाइज काफी नहीं होता है। सही यह समय पर सही भोजन करना जरूरी है। इससे आप 21 दिनों में 5 किलो तक वजन कम कर सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 22:46:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Painkiller का Overdose आपकी Kidney को कर रहा है डैमेज, एक्सपर्ट्स से जानें खतरे के Signal</title>
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<description><![CDATA[ सिरदर्द हो, पेट दर्द या फिर शरीर में कोई भी समस्या होती है, तो हम सभी तुरंत दर्द निवारक गोलियां खाने लग जाते हैं। बिना डॉक्टर के सलाह से पेन किलर लेना काफी आम हो चुका है। जो लोग वर्किंग हैं, वे लोग दर्द के दौरान बहुत जल्द दर्द निवारक गोलियां खाते हैं। बार-बार पेन किलर खाने से किडनी पर असर पड़ता है। आइए आपको बताते हैं कि दर्द निवारक गोलियां खाने से क्या होता है? पेन किलर किडनी को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं?हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि ज्यादातर दर्द निवारक दवाएं एनएसएआईडी( NSAIDs) नाम की दवाओं की कैटेगरी में आती हैं। यदि इनको अधिक मात्रा में खाया जाए या फिर गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो ये किड़नी के फंक्शन को खराब कर देती है।कम हो जाता है ब्लड सर्कुलेशनअगर आप पेन किलर का अधिक सेवन करती हैं, तो यह खून की मात्रा को कम कर देता है। जब किडनी तक ब्लड सर्कुलेशन सही से नहीं हो पाता है तो किडनी को सही तरीके से काम करने में परेशानी होती है।किडनी के फिल्टर को पहुंचता है नुकसानअधिक पेन किलर खाने से किडनी के अंदर बहुत छोटे-छोटे फिल्टर होते हैं, जिन्हें नेफ्रॉन कहा जाता है। ऐसे में अगर आप लंबे समय से पेन किलर ले रही हैं, तो इससे फिल्टर को नुकसान पहुंच सकता है। यह धीरे-धीरे किडनी की क्षमता को कम करता है।किडनी फेल होने का बढ़ जाता है खतराअगर आप हर एक दर्द में पेन किलर लेते हैं, तो आपको इससे किडनी फैल होने का खतरा बढ़ सकता है। इसको एक्यूट किडनी इंजरी कहा जाता है।किन लोगों के लिए खतरनाक है पेन किलरहेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, पेन किलर का असर काफी खतरनाक हो सकता है। जैसे कि बुजुर्गों में, डायबिटीज के मरीज, हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग या जो पहले से किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं, इन लोगों को पेन किलर नहीं लेना चाहिए। यह इनके लिए काफी खतरनाक है।दर्द हो तब क्या करें?अक्सर लोग हल्के सिरदर्द, पीरियड्स के दर्द या मांसपेशियों में होने वाले दर्द में तुरंत पेन किलर खा लेते हैं। हालांकि हर बार दवा लेने के बजाय यह समझना ज्यादा जरूरी है कि दर्द किस वजह से हो रहा है। यदि दर्द बार-बार हो रहा है या ज्यादा बढ़ जाए, तो खुद दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।किडनी को हेल्दी रखने के लिए क्या करें?- ध्यान रखें कि बिना डॉक्टर के सलाह के बार-बार पेन किलर न लें।- अगर दवा लेनी पड़े, तो कभी कभार ही लें।- दिनभर चार से पांच लीटर पानी जरुर पिएं।- हेल्दी डाइट लें।- समय-समय पर टेस्ट करवाएं।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 22:46:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: Medical Report का बड़ा अलर्ट, Blood Sugar जांचने वाला HbA1c टेस्ट भरोसेमंद नहीं</title>
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<description><![CDATA[ वैश्विक स्तर पर डायबिटीज तेजी से बढ़ती हुई क्रॉनिक बीमारी है। बच्चे और बुजुर्ग सभी इसका शिकार हो रहे हैं। अक्सर ब्लड शुगर का सामान्य से ज्यादा बने रहना शरीर को अंदर से खोखला करता है। यही वजह है कि शुगर के मरीजों को नसों, आंखों-किडनी और दिल से संबंधित बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। आंकड़ों के हिसाब से भारत में 101 मिलियन से ज्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। वहीं 13 करोड़ से अधिक लोग प्री-डायबिटीज का शिकार हैं। इसमें भविष्य में इस बीमारी का खतरा हो सकता है। इस बढ़ते हुए खतरे को भांपते हुए भारत को &#039;दुनिया का डायबिटीज कैपिटल&#039; कहा जाने लगा है।बता दें कि इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई बार इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं। लंबे समय तक व्यक्ति बिना जानकारी के इस बीमारी के साथ जीता रहता है। इसलिए नियमित रूप से शुगर की जांच कराना जरूरी हो जाता है। हालांकि शुगर की जांच के लिए HbA1c को सबसे अच्छा टेस्ट माना जाता है। लेकिन क्या वाकई इस टेस्ट पर भरोसा किया जा सकता है।इसे भी पढ़ें: Weight Loss Tips: Weight Loss का यह &#039;Secret Formula&#039; देगा कमाल के Results, 21 दिन में घटेगा 5 किलो वजनHbA1c टेस्ट भरोसेमंद होता है या नहींइस टेस्ट को लेकर ऐसे सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं, क्योंकि हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में अलर्ट किया गया है कि इस पर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता है। आमतौर पर एनीमिया, क्रोनिक किडनी रोग और पोषण की कमी वाले लोगों में HbA1c टेस्ट के परिणाम विश्वसनीय नहीं माने जा सकते हैं। तो आइए जानते हैं कि इस रिपोर्ट में ऐसा क्यों कहा गया और HbA1c टेस्ट क्या है।HbA1c यानी ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट एक तरह के खून की जांच है। यह खून में पिछले 2 से 3 महीनों के दौरान शुगर का लेवल कितना रहा है और इसका औसत बताता है।जब हमारे ब्लड में शुगर अधिक समय तक बनी रहती है, तो यह धीरे-धीरे हीमोग्लोबिन से चिपक जाती है।ब्लड में जितनी ज्यादा शुगर चिपकेगी, उतना ही HbA1c टेस्ट की रीडिंग अधिक होगी।डॉक्टर इस टेस्ट को डायबिटीज की सही पहचान और इस बीमारी की गंभीरता को समझने के लिए भरोसेमंद मानते हैं।आमतौर पर HbA1c का नॉर्मल लेवल 5.7% से कम होना चाहिए। अगर यह 5.7% से 6.4% के बीच है, तो इसको प्री-डायबिटीज कहा जाता है। वहीं 6.5% या इससे ज्यादा आने पर डायबिटीज माना जाता है।क्या कहती है रिपोर्टHbA1c टेस्ट को लेकर एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय क्लिनिकल प्रैक्टिस में HbA1c टेस्ट को टाइप-2 डायबिटीज का पता लगाने और मॉनिटरिंग के लिए उपयोगी माना जाता है।लेकिन आयरन की कमी, एनीमिया, हीमोग्लोबिनोपैथी, क्रोनिक किडनी रोग और पोषण की कमी वाले लोगों में इस टेस्ट के परिणाम को भरोसेमंद नहीं माना जाता है।वहीं टाइप-2 डायबिटीज के लिए HbA1c टेस्ट पर लोगों के निर्भर होने पर भी सवाल उठाए हैं।एक्सपर्ट्स ने कहा है कि हीमोग्लोबिनोपैथी और एनीमिया जैसी कोई भी ऐसी स्थिति जो हीमोग्लोबिन की मात्रा, हीमोग्लोबिन के लाइफस्पैन या इसकी बनावट को प्रभावित करती है। यह HbA1c टेस्ट की रीडिंग पर भी असर डाल सकती है।एनीमिया पीड़ित लोगों में गलत आ सकती है टेस्ट की रीडिंगएक रिपोर्ट में कहा गया है कि डायबिटीज के लिए सिर्फ HbA1c टेस्ट पर अकेले निर्भर रहना मिसलीडिंग हो सकता है।HbA1c उन लोगों में ब्लड ग्लूकोज के लेवल को कम या ज्यादा बता सकता है। जिनमें एनीमिया और आनुवांशिक ब्लड डिसऑर्डर जैसी समस्याएं रही हैं।भारत की 57% से अधिक महिलाएं आयरन की कमी से एनीमिया से जूझ रही हैं। ऐसे लोगों में HbA1c टेस्ट से डायबिटीज के डायग्नोसिस और मॉनिटरिंग दोनों पर असर पड़ सकता है। साथ ही उनका इलाज भी प्रभावित हो सकता है।वहीं जिन पुरुषों में G6PD की कमी का पता नहीं चला है, उनमें सिर्फ HbA1c टेस्ट पर निर्भर रहने से डायबिटीज के डायग्नोसिस में 4 साल तक की देरी हो सकती है।बता दें कि G6PD की कमी एक आनुवंशिक स्थिति होती है। इस स्थिति में बॉडी में &#039;ग्लूकोज-6-फॉस्फेट डीहाइड्रोजनेज&#039; एंजाइम की कमी होती है। एंजाइम लाल रक्त कोशिकाओं की रक्षा करता है। इस कमी की वजह से RBCs तेजी से टूटने लगता है और शरीर में ब्लड की कमी हो सकती है।क्या कहते हैं एक्सपर्टहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो डायबिटीज के सही निदान के लिए HbA1c टेस्ट के साथ फ्रुक्टोसामाइन और ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट भी किए जाने चाहिए।जिन लोगों को आनुवांशिक रूप से डायबिटीज की बीमारी का खतरा रहा हो। साथ ही उनको एनीमिया जैसी समस्या भी हैं, उनको शुगर की अन्य जांचें भी कराते रहना चाहिए। जिससे कि ब्लड ग्लूकोज लेवल का सही अंदाजा भी लगाया जा सके। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 22:43:35 +0530</pubDate>
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<title>Irregular Periods का रामबाण इलाज, Lifestyle में करें ये 5 बदलाव, Hormone रहेंगे Fit</title>
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<description><![CDATA[ हर महीने महिलाओं को पीरियड्स आना एक सामान्य प्रक्रिया है। ज्यादातर लड़कियों की परेशानी है अनियमित पीरियड्स। अक्सर होता है कि पीरियड्स एक हफ्ते तो कभी-कभी  दस दिन डिले हो जाते हैं। पीरियड्स का कभी-कभार डिले होना बेशक नॉर्मल है, लेकिन अगर आपके पीरियड्स लगभग हर महीने डिले हो जाते हैं या आपकी साइकिल अनियमित ही है, तो इसको भूलकर भी इग्नोर न करें। यह आमतौर पर इस बात का इशारा करता है कि आपकी डाइट, लाइफस्टाइल और हार्मोन्स में कुछ गड़बड़ी है। असल में पीरियड्स आपकी हार्मोनल हेल्थ रिपोर्ट कार्ड होते हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं पीरियड्स के नियमित करने के टिप्स।सूर्य नमस्कारअपनी सुबह की शुरुआत सूर्य नमस्कार के साथ जरुर करें। इसकी शुरुआत में 3-4 राउंड करें और फिर धीरे-धीरे 12 राउंड तक करें। इससे पेल्विक ऑर्गन्स में सर्कुलेशन बढ़ता है और मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है। इसके अलावा, हार्मोनल रिदम को बैलेंस करने में भी सूर्य नमस्कार फायदेमंद माना जाता है।12 घंटे की फास्टिंग करेंरात के खाने और सुबह के नाश्ते के बीच कम से कम 12 घंटे का अंतर रखना फायदेमंद माना जाता है। जैसे अगर आपने रात का खाना 8 बजे खाया है, तो अगला नाश्ता सुबह करीब 8 बजे करें। ऐसा करने से शरीर में इंसुलिन का स्तर संतुलित रहता है और शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक यानी सर्कैडियन रिदम भी सही ढंग से काम करती है। ये दोनों ही कारक पीरियड साइकिल को नियमित बनाए रखने में मददगार होते हैं।रात को 11 बजे से पहले सो जाएंहार्मोनल रिपेयर और डिटॉक्सिफिकेशन के लिए गहरी नींद बहुत जरुरी है। देर रात तक जागने से पीरियड साइकिल इंबैलेंस होती है। इसलिए रात 10-11 बजे के बीच सोने की कोशिश करें।न्यूट्रिशन से भरपूर खाना खाएंआयुर्वेद में बताया गया है कि डाइजेशन का मजबूत होना हार्मोंस को बैलेंस करता है, इसलिए घर का बना ताजा खाएं और प्रोसेस्ड फूड्स को अवॉइड करें। इसके अलावा, ठंडे और पैकेज्ड फूड को भी बिल्कुल न खाएं। क्योंकि इनसे पाचन खराब होता है।सीड साइकिलिंगमेंस्ट्रु्ल साइकिल चक्र के विभिन्न चरणों के अनुसार सीड साइकिलिंग करना काफी लाभकारी माना जाता है। यह प्रक्रिया शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे जरूरी हार्मोन को संतुलित रखने में मदद करती है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 10:05:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Pregnancy Tips: Pregnancy में Normal Delivery होगी या C&#45;Section इन बातों पर न करें यकीन, Expert ने बताया सच</title>
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<description><![CDATA[ किसी भी महिला के जीवन में प्रेग्नेंसी का समय सबसे खास समय होता है। जैसे-जैसे डिलीवरी की डेट पास आती है, वैसे-वैसे मन में कई सवाल उठने लगते हैं। जैसे कितना दर्द होगा, कितना समय लगेगा और डिलीवरी नॉर्मल होगी या सिजेरियन। सोशल मीडिया के एक्सपीरियंस, परिवार की सलाह और गूगल सर्च अक्सर इन सवालों की ओर जिज्ञासा को बढ़ा देते हैं। वहीं कई बार प्रेग्नेंट महिला के चलने के तरीके, पेट के आकार और चेहरे की चमक देखकर लोग अनुमान लगाते हैं कि डिलीवरी कैसे होगी।वहीं हमारे समाज में नॉर्मल डिलीवरी को लेकर एक अलग ही धारणा बनी है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या ये खुद से जाना जा सकता है कि डिलीवरी नॉर्मल होगी या फिर सिजेरियन।इसे भी पढ़ें: Irregular Periods का रामबाण इलाज, Lifestyle में करें ये 5 बदलाव, Hormone रहेंगे Fitकैसे जानेंहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो डिलीवरी का तरीका कई मेडिकल फैक्टर्स पर निर्भर करता है। लेकिन डिलीवरी का अंतिम फैसला प्रसव के समय परिस्थितियों के आधार पर लिया जाता है। अक्सर कहा जाता है कि अगर महिला की हाइट कम है या पेल्विस छोटा है तो सिजेरियन होगा। लेकिन ऐसा मानना पूरी तरह से सही नहीं है। हालांकि शरीर की बनावट एक फैक्टर हो सकती है, लेकिन यह अकेली वजह नहीं है।क्योंकि कम हाइट वाली महिलाएं भी सफलतापूर्वक नॉर्मल डिलीवरी करती हैं। लेकिन असली भूमिका पेल्विस के अंदरूनी माप और बच्चे के आकार के तालमेल की होती है। जोकि सिर्फ क्लिनिकल जांच से समझा जा सकता है।कई बार कम हाइट वाली महिलाएं भी सफलतापूर्वक नॉर्मल डिलीवरी करती हैं। असली भूमिका पेल्विस के अंदरूनी माप और बच्चे के आकार के तालमेल की होती है, जो केवल क्लिनिकल जांच से समझा जा सकता है।अक्सर डिलीवरी का लास्ट तरीका लेबर रूम में तय होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान जोखिम का आकलन किया जा सकता है। लेकिन प्रसव के समय मां और बच्चे की स्थिति का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। क्योंकि डॉक्टर का काम हमेशा सेफ डिलीवरी कराना होता है, फिर चाहे वह नॉर्मल डिलीवरी हो या सिजेरियन।पहली सिजेरियन तो अगली भी सिजेरियनअगर आपकी पहली डिलीवरी सिजेरियन से हुई है, तो यह जरूरी नहीं होता है कि अगली भी सिजेरियन से हो। लेकिन इसका फैसला डॉक्टर की देखरेख में लिया जाता है। हेल्दी लाइफस्टाइल होने पर नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है। नियमित हल्की एक्सरसाइज, बैलेंस डाइट, वॉकिंग और प्रेग्नेंसी योग से शरीर मजबूत होने के साथ लेबर के लिए भी तैयार होता है। शुगर, अधिक वेट बढ़ना, बीपी कम या ज्यादा होना सिजेरियन के खतरे को बढ़ा सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित चेकअप और डॉक्टर की सलाह को मानना जरूरी होता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 10:05:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>भीषण गर्मी में सिर्फ पानी से नहीं चलेगा काम, Diet में शामिल करें ये 5 Superfoods</title>
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<description><![CDATA[ गर्मियों के मौसम में शरीर को हेल्दी खाने के साथ हाइड्रेट रखना जरुरी है। मार्च के महीने में ही भीषण गर्मी देखने को मिल रही है। तापमान 35 से 36 डिग्री तक पार कर चुका है। ऐसे में हमें अपनी सेहत का ध्यान रखना बेहद जरुरी है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि गर्मी से बचने के लिए पानी पीना ही काफी है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। आपको अपनी डाइट पर भी ध्यान देने की काफी जरुरत है। गर्मियों के दौरान अपनी डाइट में कौन-से सुपरफूड शामिल कर सकती हैं, आइए आपको इस लेख में बताते हैं।हर्बल काढ़े से करें सुबह की शुरुआतसमर सीजन में आप चाय पीने बजाय हर्बल काढ़ा पी सकती हैं। ये सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसको बनाना भी बेहद आसान है। बस आपको पानी में सौंफ, धनिया के बीज और पुदीना डालकर कम से कम पांच मिनट के लिए उबाल लें। इसको गुनगुने होने पर छानकर पी लें। ये शरीर को ठंडक पहुंचाता है। इससे डाइजेशन भी सही रहता है।खसखस वाला पानीगर्मियों के मौसम में खसखस का पानी पीना शरीर के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। इसे तैयार करने के लिए लगभग एक लीटर पानी में खसखस की जड़ों को डालकर कुछ समय तक भिगोकर रखें। जब पानी अच्छी तरह उसमें घुल जाए, तब इसे दिनभर थोड़ा-थोड़ा करके पी सकते हैं। इससे शरीर को ठंडक मिलती है और ताजगी बनी रहती है।जूसी फ्रूट्स को बनाएं डाइट का हिस्सागर्मियों में बाजारों में आपको कई तरह के फ्रूट्स देखने को मिल जाएंगे। रसीले फल खाने से आपके शरीर में पानी की कमी नहीं हो पाएगी। इसलिए आप तरबूज, खरबूज, संतरा और खीरा जैसे फलों का सेवन कर सकते हैं।ये तरीका भी आएगा कामजिन लोगों को गर्मियों में पेट में जलन की समस्या झेलने पड़ती है, वे लोग इसके लिए चंदन पाउडर, एलोवेरा जेल, गुलाब का पाउडर और थोड़ा-सा घी मिलाकर पेस्ट बना सकते हैं। इस पेस्ट को आप नाभि के आसपास 15 से 20 मिनट के लिए लगाएं और फिर हल्के हाथों से मसाज करें। यह जलन को कम करती है और शरीर को ठंडक मिलती है।इन बातों का रखें ध्यान- ऑयली खाना खाने से बचें।- हल्का खाना ही खाएं।- कम से कम 4 से 5 लीटर पानी पिएं।- धूप में निकलते ही समय पर सिर को ढक लें।- अधिकत्तर लिक्विड डाइट ही लें।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 10:05:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: गुस्सा है &amp;apos;Silent Killer&amp;apos;, High BP से लेकर Heart Attack तक, जानें कितना बड़ा है Risk</title>
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<description><![CDATA[ शरीर को हेल्दी और फिट रखने के लिए हम सभी अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में कई तरह के सुधार करते हैं। लेकिन क्या यह काफी होता है। जिसका जवाब है नहीं। क्योंकि हम जिस तरह की लाइफस्टाइल फॉलो करते हैं, जो कुछ खाते-पीते हैं, इन सबका हमारी सेहत पर असर होता है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग खाना, नींद और मानसिक शांति को नजरअंदाज कर देते हैं। जिसका असर धीरे-धीरे शरीर और दिमाग पर भी पड़ता है। वहीं हमारा लोगों के प्रति कैसा व्यवहार है, यह भी सेहत को प्रभावित करने वाली स्थिति हो सकती है।हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक अगर आपको गुस्सा अधिक आता है, बार-बार चिड़चिड़ापन महसूस होता है, तो यह स्थितियां शरीर में कई तरह के निगेटिव असर डाल सकती हैं। वहीं अगर आपका व्यवहार प्रिय है और आप हंसते-मुस्कुराते रहते हैं, तो यह सेहत में बेहतर सुधार लाने में मददगार हो सकता है। लेकिन अगर आपको ज्यादा गुस्सा आता है, आपको सावधान होने की जरूरत है। क्योंकि यह आपको बीमार करने वाली समस्या हो सकती है।इसे भी पढ़ें: Women&#039;s Health: सिर्फ खूबसूरती नहीं, श्रृंगार में छिपा है Hormonal Balance का आयुर्वेदिक राजज्यादा गुस्सा क्यों आता हैहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो ज्यादा गुस्सा आना सिर्फ स्वभाव की बात नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई मानसिक, जैविक और सामाजिक वजह हो सकती है। जब व्यक्ति चिंता, तनाव, नींद की कमी या हार्मोनल असंतुलन से गुजरता है, तो मस्तिष्क का भावनाओं को कंट्रोल करने वाला हिस्सा अमिगडाला अधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे जल्दी गुस्सा आता है।लंबे समय तक तनाव में रहना भी गुस्से की समस्या को बढ़ाने वाला हो सकता है।वहीं बचपन के पारिवारिक विवाद, ट्रॉमा, काम का तनाव और आर्थिक दबाव भी अधिक गुस्सा आने की वजह हो सकता है।इसके अलावा नींद की कमी से कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं। जिससे शरीर फाइट मोड में रहता है। इस कारण भी आपको गुस्सा आ सकता है।ज्यादा गुस्सा से होने वाली दिक्कतेंअधिक गुस्सा आने पर हमारे शरीर में कई जैविक बदलाव होते हैं। ऐसे में आपके दिल की धड़कन भी तेज होने लगती है, बीपी बढ़ने लगता है और मांसपेशियों में भी तनाव आ सकता है।वहीं जो लोग अक्सर गुस्से में रहते हैं, उनके शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ा रह सकता है। जिससे क्रॉनिक बीमारियों, दिल की सेहत और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। गुस्सा मानसिक सेहत पर निगेटिव असर डालता है।बार-बार गुस्सा करने से मस्तिष्क में निगेटिव सोच का पैटर्न विकसित होता है। जिससे जातक असंतुष्ट, चिड़चिड़ा और मानसिक रूप से अस्थिर हो सकता है।गुस्से की वजह से हाई बीपीजब हम ज्यादा गुस्से में होते हैं, तो शरीर में एड्रेनालिन हार्मोन तेजी से बढ़ता है। जिस कारण दिल तेजी से पंप करता है और रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे बीपी अचानक बढ़ जाता है। वहीं लगातार यह स्थिति बनी रहने पर आप हाई बीपी का शिकार हो सकते हैं। हाई ब्लड प्रेशर की वजह से किडनी, मस्तिष्क और दिल पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिमगुस्से के दौरान दिल की धड़कन बढ़ जाती है और रक्त वाहिकाओं पर भी दबाव पड़ता है। इससे हृदय को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और इससे समय के साथ हृदय कमजोर हो सकता है। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि बार-बार गुस्सा करने वाले लोगों में हार्ट अटैक का जोखिम 2 से 3 गुना तक बढ़ सकता है। कई बार गुस्से की स्थिति शरीर में सूजन को बढ़ाने वाली हो सकती है। जिससे धमनियों में प्लाक जमा होने और ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 11 Mar 2026 10:20:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>40 के बाद Women में Hormonal Changes से बढ़ा UTI? ये मैजिकल चाय Urine Leakage से देगी राहत</title>
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<description><![CDATA[ 40 की उम्र के बाद कई महिलाओं को यूटीआई की समस्या बार-बार होने लगती है। इसके साथ ही कुछ महिलाओं को पेशाब के रिसाव यानी यूरिन लीकेज की परेशानी भी महसूस होती है। दरअसल, इस उम्र में शरीर में हार्मोनल बदलाव तेजी से होते हैं, जो इन दिक्कतों की वजह बन सकते हैं। ऐसे में डाइटिशियन द्वारा बताई गई यह देसी हर्बल चाय इन समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार साबित हो सकती है। गौरतलब है कि पेरिमेनोपॉज में महिलाओं के शरीर में कई हार्मोंस ऊपर-नीचे हो जाते हैं। इस कारण से मूड स्विंग्स और कमजोरी सहित कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस दौरान कई  महिलाओं को यूटीआई बार-बार हो जाता है, अक्सर यूरिन पर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है और यूरिन लीकेज की दिक्कत हो जाती है। 40 की उम्र के बाद यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) को बढ़ना और यूरिन लीकेज जैसी परेशनियां एस्ट्रोजन के लेवल में कमी के कारण हो सकती हैं।40 की उम्र में अक्सर यूटीआई और यूरिन लीकेज को कम कर सकती है ये देसी चाय- हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि 40 की उम्र के बाद यूरिन लीकेज और यूटीआई को कम करने में कीगल एक्सरसाइज के साथ ये हर्बल टी मदद कर सकती हैं। धनिए, सौंफ शतावरी और कैमोमाइल से बनने वाली ये हर्बल चाय आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकती है।- धनिए के बीज नेचुरल ड्यूरेकिट की तरह काम करती है और पेशाब में जलन और यूटीआई को कम कर सकती है। इससे यूरिनरी इंफेक्शन कम होता है। दरअसल, शतावरी एस्ट्रोजन को बैलेंस करती है और पेल्विक मसल्स को मजबूत करती है। शतावरी, यूरिनरी हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है।- कैमोमाइल चाय ब्लैडर से जुड़ी परेशानियों को कम करने में सहायक मानी जाती है। वहीं सौंफ के बीज यूरिनरी ट्रैक्ट की मांसपेशियों को रिलैक्स करने में मदद करते हैं। सौंफ हार्मोनल संतुलन बनाए रखने के साथ सूजन को भी घटाने में फायदेमंद होती है। इसके अलावा कैमोमाइल चाय नर्वस सिस्टम को शांत करके शरीर को आराम देने में भी मदद करती है।कैसे बनाएं यह चाय?- सबसे पहले बड़े गिलास पानी को पैन में डालें।- इसके बाद इसमें 1 टीस्पून धनिए के बीज डालें।- फिर इसमें 1 चम्मच सौंफ के बीज मिलाएं।- अब इसमें 1 टुकड़ा शतावरी डालें। - इसके बाद 1 चम्मच कैमोमाइल टी मिलाएं।- इसे आधा रह जाने तक उबालें।- इसे छान लें और 8-12 हफ्तों तक दिन में एक बार जरुर पिएं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 11 Mar 2026 10:20:35 +0530</pubDate>
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<title>Health Alert: आपकी Skin दे रही है Thyroid&#45;Cholesterol का Warning? इन संकेतों को पहचानें</title>
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<description><![CDATA[ हमारे शरीर में किसी भी तरह की गड़बड़ की शुरुआत होती है, तो उसके लक्षण धीरे-धीरे नजर आने लगते हैं। जब हम इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, तो शरीर में पनप रही ये गड़बड़ धीरे-धीरे गंभीर बीमारी में बदलने लगती है। इसलिए अपने शरीर का खास ख्याल रखना काफी जरुरी है। यदि आपका पाचन खराब रहता है, भूख कम लगती हैं, अचानक से वजन कम होने लगे या फिर बहुत अधिक कमजोरी महसूस होती है, इस बात का संकेत है कि शरीर में किसी न किसी गड़बड़ की शुरुआत हो चुकी है। कई बार शरीर में होने वाली बीमारियों के संकेत हमारी त्वचा और आंखों पर भी दिखाई देने लगते हैं। त्वचा के बदलाव यह इशारा कर सकते हैं कि शरीर के अंदर कोई गंभीर समस्या विकसित हो रही है। आइए जानते है एक्सपर्ट से कि स्किन किस तरह इन बीमारियों के बारे में संकेत देती है।स्किन से जुड़े ये इशारे समझना सभी के लिए है जरूरी- यदि आपके बालों के बीच की रेखा पतली होती जा रही है, तो बाल लगाताक झड़ रहे हैं, तो ये हार्मोनल इंबैलेंस का एक संकेत हो सकता है। ऐसा डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन (DHT) के बढ़ने के कारण हो सकता है।- आंखों के नीचे काले घेरे हो रहे हैं और ये बढ़ते ही जा रहे हैं, तो आपको इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।  कई बार नींद पूरी न होने के कारण होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह आयरन की कमी का कारण हो सकता है।- अचानक से आपके आईब्रो के बाल पतले होते जा रहे हैं, तो इस पर ध्यान देना काफी जरुरी है। यह थायराइड हार्मोन के इंबैलेंस के कारण हो सकता है।- अगर आपके आंखों के आस-पास पीले पैच पड़ रहे हैं, तो आपको अपने कोलेस्ट्रोल लेवल पर ध्यान देने की जरुरत है क्योंकि ऐसा शरीर में कोलेस्ट्रॉल स्तर बढ़ने के कारण होता है। इसलिए आपको एक बार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरुर करवाना चाहिए।- इसके अलावा, गालों पर पिग्नेंटेशन या झाइयां शरीर में एस्ट्रोजन लेवल के बढ़ने के कारण हो सकती है। महिलाओं के चेहरे पर अनचाहे बाल भी शरीर में हार्मोनल इंबैलेंस की तरफ इशारा करती है। इसका सीधा अर्थ है कि आपके शरीर में टेस्टेस्टेरोन की मात्रा अधिक है। स्किन में क्रैक या हल्की दरारे नजर आना इस बात का इशारा है कि आपके शरीर में विटामिन-बी12 लेवल बहुत कम है। इसके अलावा, रुखापना, ओमेगा-3 की कमी का संकेत है। - यदि आपके चेहरे पर एक्ने हैं, तो जिंक की कभी का संकेत हो सकता है। आपको जिंक से भरपूर चीजों को डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 11 Mar 2026 10:20:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Ayurvedic Vaginal Wash: अब खुजली&#45;बदबू की &amp;apos;No Tension&amp;apos;, घर पर बनाएं ये असरदार Ayurvedic Wash</title>
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<description><![CDATA[ आजकल की बिजी लाइफस्टाइल में लोग अपनी सेहत का ख्याल नहीं रख पा रहे हैं। जिस कारण उनको कई तरह की समस्याएं हो रही हैं। अगर महिलाओं की बात की जाए, तो उनको इंटिमेट एरिया से जुड़ी कई समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। ऐसा होने पर वह हॉस्पिटल के चक्कर लगाती हैं और महंगी दवाओं के खर्च उठाती हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं कि आयुर्वेद में कई ऐसे नुस्खों के बारे में बताया गया है, जिनको अपनाकर महिलाएं अपनी इंटिमेट हेल्थ को सुधार सकती हैं।ऐसे में अगर आप भी यूरिन इंफेक्शन या बदबू से परेशान हैं, तो आज हम आपको एक आयुर्वेदिक नुस्खे के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। क्योंकि आयुर्वेद में योनि धावन को इंटिमेट केयर का एक आसान और सेफ तरीका माना गया है। आप इसको घर पर आसानी से तैयार कर सकती हैं।इसे भी पढ़ें: Hidden Symptoms Of Acidity: Acidity को ना लें हल्के में! ये 5 Silent Symptoms हैं खतरे की घंटी, ना करें ये Health Mistake आयुर्वेदिक Vaginal Washयह एक केमिकल फ्री तरीका है, जिससे इंटिमेट एरिया को बाहर से साफ किया जा सकता है। इसमें हल्की, जीरा और नीम की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। इन चीजों में नेचुरल तत्व पाए जाते हैं। वहीं आप रोजाना की सफाई के लिए इसका इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे आपकी इंटिमेट हेल्थ बेहतर होगी।सामग्रीकुछ नीम की पत्तियांएक चुटकी हल्दीआधा चम्मच जीरादो कप पानीऐसे बनाएंसबसे पहले पानी को उबलने के लिए रख दें। जब पानी उबलने लगे तो इसमें नीम की पत्तियां, हल्दी और जीरा डाल दें। अब गैस की फ्लेम को धीमा कर दें और कम से कम 5 मिनट के लिए इसको उबलने के लिए छोड़ दें। अब गैस को बंद कर दें और पानी को ठंडा या फिर गुनगुना होने दें। इस आसान तरीके से आपका आयुर्वेदिक Vaginal Wash तैयार है।ऐसे करें इस्तेमालबता दें कि इस पानी का इस्तेमाल सिर्फ बाहर ही करना चाहिए।वहीं दिन में सिर्फ एक बार ही इसका इस्तेमाल करें।ध्यान रखें कि जोर से रगड़ने से बचना चाहिए। फायदेयह इंटिमेट एरिया की बदबू और खुजली को कम करने में सहायता करता है।इसके इस्तेमाल से यूरिन इन्फेक्शन से भी बचाव होता है।यह इंटिमेट एरिया का नेचुरल pH बैलेंस बनाए रखने में मदद करता है।इसके इस्तेमाल से जलन और इरिटेशन से छुटकारा मिलता है।इन बातों का रखें ध्यानइस पानी का इंटरनल इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।प्रेग्नेंट महिलाओं को इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए।वहीं पीरियड्स के दौरान भी इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 08 Mar 2026 20:10:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>स्लिम फिगर पाने के लिए डाइट की जरूरत नहीं, अपनी रोज की थाली को ही कुछ इस तरह बनाएं वेट लॉस थाली</title>
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<description><![CDATA[ मोटापा एक ऐसी समस्या है, जिससे ज्यादातर लोग जूझ रहे हैं। अधिक वजन कई तरह की समस्याओं व बीमारियों की जड़ है और इसलिए लोग तरह-तरह की डाइट करके वजन कम करना चाहते हैं। हालांकि, यह तरीका लंबे समय में काम नहीं करता, क्योंकि हम सभी की ईटिंग हैबिट्स अलग होती हैं और ऐसे में बोरिंग खाना खाना, रोटी छोड़ना और सलाद पर गुज़ारा करना हमेशा के लिए संभव नहीं है। साथ ही, आपको फैंसी डाइट, बाहर से मंगाए गए सामान या महंगे मील प्लान की जरूरत नहीं है।अगर आप वजन कम करने के साथ-साथ उसे हमेशा बनाए रखना चाहते हैं तो इसका सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपनी रेगुलर थाली को ही वेट लॉस थाली में बदल दें। मतलब, आसान ट्रिक बस यही है कि आपको खाना बदलना नहीं है, बल्कि उसे स्मार्टली खाना है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ आसान ट्रिक्स के बारे में बता रहे हैं, जो आपकी रेगुलर थाली को वेट लॉस थाली में बदल देंगे-इसे भी पढ़ें: Ayurvedic Vaginal Wash: अब खुजली-बदबू की &#039;No Tension&#039;, घर पर बनाएं ये असरदार Ayurvedic Washआधी प्लेट में हों सब्जियांअपनी थाली को वेट लॉस थाली बनाने के लिए आप उसमें सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं। कोशिश करें कि आपकी थाली में मौसमी सब्जियां, सलाद जैसे खीरा, गाजर, टमाटर, सॉटे की हुई सब्ज़ियां व पत्तेदार सब्ज़ियां मौजूद हों। दरअसल, सब्ज़ियों में फ़ाइबर ज्यादा और कैलोरी कम होती है। जिसकी वजह से आपका पेट काफी हद तक भर जाता है और आप नेचुरली रोटी और चावल कम खाते हैं।प्रोटीन सोर्स जरूर हो शामिलआप अपनी थाली में दाल, राजमा, छोले, पनीर, दही व स्प्राउट्स आदि को जरूर रखें। यह ना केवल भूख कंट्रोल करने और पेट को ज्यादा देर तक भरा रखने में मदद करता है। बल्कि इससे आपकी स्नैक्स की क्रेविंग्स भी कम होती है।कार्ब्स रखें कम अक्सर लोग कार्ब्स को अपना दुश्मन मानते हैं और वजन कम करने के लिए इसे डाइट से बाहर रखने की कोशिश करें। आपको कार्ब्स पूरी तरह से अवॉयड नहीं करना चाहिए, बल्कि पोर्शन कंट्रोल करें। मसलन, आपकी प्लेट में 1 रोटी या आधा कप चावल काफी हैं। यह बिना ज्यादा कैलोरी के बैलेंस एनर्जी देते हैं।अपना खाना सलाद से शुरू करेंआप खाना किस तरह खाते हैं, इससे भी काफी फर्क पड़ता है। जब भी आप अपना मील लें तो सबसे पहले सलाद खाएं। इसमें फाइबर होता है, जो खाने की स्पीड को स्लो करता है और कुल कैलोरी इनटेक को कम करता है। इससे आपको पता भी नहीं चलता और आप खुद ब खुद ओवरईटिंग से बच जाते हैं।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Sun, 08 Mar 2026 20:10:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Alert: रात में Dry Throat से टूटती है नींद? एक्सपर्ट से जानें 5 कारण और अचूक उपाय</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर रात में गले में होने वाली खराश या सूखापन आपकी नींद में खलल डाल सकता है। यह समस्या कभी सर्दियों के मौसम में तो कभी मौसम के अचानक बदलने पर महसूस होती है। इसके पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। वैसे तो गला खराब होने पर दिन में भी परेशानी होती है, लेकिन रात के समय यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है और सोने में दिक्कत पैदा करती है। कई लोग इसे केवल सर्दी-जुकाम का लक्षण मान लेते हैं, जबकि ऐसा हमेशा नहीं होता। गले की इस परेशानी के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए इसके कारणों को समझना और सही उपाय अपनाना जरूरी है।सोते वक्त क्यों सूख जाता है गला?- हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि सोते समय सूखा और खराश भरा गला आपकी नींद में कई बार खलल डाल सकता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। क्या पता नींद के दौरान लार का कम बनना रात में गले के सूखेपन का कारण है, जिसे जेरोस्टोमिया (रात में मुंह सूखना) भी कहा जाता है। मुंह से सांस लेना, डिहाइड्रेशन, दवाओं या खराब वातावरण के कारण ऐसा हो सकता है।- एलर्जी के कारण  ऐसा हो सकता है, साइनस में भी लोगों की ये परेशानी हो सकती है। जिन लोगों को एसिड रिफ्लक्स, जिसमें पेट का एसिड गले तक पहुंचकर जलन पैदा करता है। इसकी वजह से जो लोग कम पानी पीते हैं या तला-भुना अधिक खाते हैं, उनके साथ भी ये समस्या हो सकती है।- लंबे समय से आपको परेशानी है, तो इसकी वजह से दांत से जुड़ी दिक्कतों का खतरा बढ़ सकता है, गले में इंफेक्शन हो सकता और नींद आने में मुश्किल हो जाती है, इसे नजरअंदाज करना मुश्किल होता है। सोते वक्त गला सूख जाए तो क्या करें?आप कुछ सरल उपाय अपनाकर इस समस्या से आराम पा सकती हैं। सबसे पहले दिनभर में लगभग 3 से 4 लीटर पानी पीने की आदत डालें। कोशिश करें कि ज्यादा मात्रा में पानी शाम 7 बजे से पहले ही पी लें, ताकि रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना न पड़े। एसिड रिफ्लक्स कम करने और सांस लेने में आसानी के लिए सोते समय सिर के नीचे एक अतिरिक्त तकिया लगा सकती हैं। इसके अलावा गुनगुने पानी में शहद और नींबू मिलाकर पीना भी लाभकारी माना जाता है, क्योंकि शहद में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। वहीं रात के खाने के बाद शराब, कैफीन और बहुत ज्यादा मसालेदार भोजन से दूरी बनाए रखें, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 08 Mar 2026 20:10:27 +0530</pubDate>
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<title>Women&amp;apos;s Health: सिर्फ खूबसूरती नहीं, श्रृंगार में छिपा है Hormonal Balance का आयुर्वेदिक राज</title>
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<description><![CDATA[ सजना-संवरना हर एक महिला को खूब पसंद है। चाहे त्योहार हो या कोई खास मौका महिलाएं बनने-संवरने का कोई कसर नहीं छोड़ती हैं। लड़कियों को मेकअप करने का भी काफी शौक होता है। बिंदी हो या फिर काजल व चूड़ियां आपकी खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सजने-सांवरने आपकी से सेहत का राज छिपा हुआ है। आपको यकीन नहीं हो रहा होगा, तो चलिए आपको बताते है कि, आयुर्वेदिक डॉक्टर के मुताबिक आपके श्रृंगार में सचमुच में हार्मोनल बैलेंस राज छिपा हुआ। आइए आपको बताते हैं श्रृंगार कैसे हार्मोन्स बैलेंस करता है। महिलाओं के श्रृंगार में छिपा है हार्मोनल बैलेंस का राज- आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के मुताबिक महिलाओं की हार्मोनल हेल्थ का सीधा संबंध इनके नर्वस सिस्टम, बॉडी हीट और अपन वायु यानी उस एनर्जी के बैलेंस से होता है, तो पीरियड्स और रिप्रोडक्टिव बैलेंस के लिए जरूरी है।- अगर आप श्रृंगार करती हैं तो आपको इन चीजों को बैलेंस करके हार्मोन्स हेल्थ को सुधार करता है। कुमकुम बिंदी माथे के अजन हिस्से में लगाई जाती है और इसकी वजह स्ट्रेस कम होता है और इमोशंस में उतार-चढ़ाव नहीं होता है। वहीं, यह तनाव को कम करके मेंस्ट्रुअल हेल्थ को सुधारने में मदद करता है।- अगर आप पारंपरिक तरीके से तैयार किए गए काजल की तासीर ठंडी होती है। हमारी आंखे पित्त दोष से जुड़ी होती हैं। ऐसे में काजल लगाने से सिरदर्द और चिड़चिड़ापन कम हो जाता है। यह पीरियड्स से पहले शरीर में बढ़ रही हीट को कम करने में मदद करता है।- मोती से बनी ज्वैलरी को ठंडक देने वाली और मानसिक शांति बढ़ाने वाली माना जाता है। जिन महिलाओं को अक्सर चिड़चिड़ापन, मूड में उतार-चढ़ाव या शरीर में ज्यादा गर्मी महसूस होती है, उनके लिए इसे पहनना फायदेमंद माना जाता है। माना जाता है कि यह पीएमएस से जुड़े लक्षणों को संतुलित करने में भी मदद कर सकती है।- चूड़ियों से कलाई पर हल्का प्रेशर पड़ता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है।- नाभि के नीचे चांदी के गहने पहनती है, तो इससे हैवी ब्लीडिंग कम होती है। इसके साथ ही, शरीर की अतिरिक्त हीट भी दूर होती है और पीएमएस के लक्षण कम होते हैं।- अगर नाभि से ऊपर सोने के गहने पहनें तो काफी फायदेमंद होता है। इससे शरीर को ताकत और पोषण मिलता है। - वहीं, नथ पहनने से रिप्रोडक्टिव हेल्थ बैलेंस करती है। - सिंदूर और मांग टीका भी हार्मोनल और इमोशनल बैलेंस में मदद करता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 08 Mar 2026 20:10:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Leucorrhoea Remedies: White Discharge की Problem होगी जड़ से खत्म, एक्सपर्ट ने बताए ये 2 अचूक उपाय</title>
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<description><![CDATA[ महिलाओं के लिए वजाइनल हेल्थ का ध्यान रखना जरूरी होता है। यह एक सेल्फ क्लीनिंग ऑर्गन है और यह खुद को साफ करता है। बता दें कि वजाइना से होने वाले नेचुरल डिस्चार्ज की सहायता से यह अंदर से खुद को साफ कर सकती हैं। लेकिन इसके बाहरी हिस्से वल्वा को साफ करना भी जरूरी होता है। वजाइना से हल्का-फुल्का डिस्चार्ज होना नॉर्मल माना जाता है। लेकिन अगर वजाइना से चिपचिपा, गाढ़ा और बदबूदार डिस्चार्ज आता है, तो यह सही नहीं होता है।अक्सर महिलाओं को वजाइनल डिस्चार्ज, सफेद पानी या ल्यूकोरिया की समस्या परेशान करती हैं। वहीं इसके कारण कई बार तेज कमर दर्द भी महसूस हो सकता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए आप देसी नुस्खों की मदद ले सकती हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: Car Driving से आपकी Spine हो रही है खराब, स्पाइन सर्जन ने बताए ये Golden Rules आंवला खाएंबता दें कि वजाइनल हेल्थ के लिए आंवला काफी फायदेमंद होता है। आप चाहें तो इसको ताजा खा सकती हैं, या इसका जूस या चूरन ले सकती हैं। आंवला रिप्रोडक्टिव टिश्यूज को मजबूती देने के साथ इम्यूनिटी को भी बढ़ाता है।आंवला में विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके सेवन से शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद मिलती है।आप चाहें तो आंवला के चूर्ण को शहद या गुड़ के साथ खा सकती हैं। वहीं स्किन और हेल्थ के लिए भी आंवला फायदेमंद होता है और यह महिलाओं की इंटिमेट हेल्थ के लिए भी लाभकारी है।हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो अगर आपको डिस्जार्ज के साथ दर्द और तेज जलन महसूस होती है। तो यह वजाइनल इंफेक्शन का भी संकेत हो सकता है।त्रिफला का पानीहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो त्रिफला के पानी से वजाइनल एरिया वॉश करने से भी आपको इंफेक्शन और वजाइनल इचिंग से राहत मिल सकती है। त्रिफला चूर्ण को पानी में उबाल लें और हल्के गुनगुने पानी से वजाइनल एरिया को वॉश करना चाहिए।यह जड़ी-बूटियों का मिश्रण होता है, इसकी मदद से इंटिमेट एरिया के इंफेक्शन दूर होता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाया जाता है। इसस सहायता से वजाइना की सूजन दूर होती है।अगर आप दिन में 1 से 2 बार वजाइनल एरिया को अच्छे से वॉश करती हैं, तो आपको कुछ सप्ताह में ही अंतर महसूस हो सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 11:35:44 +0530</pubDate>
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<title>Ayurveda का खजाना जावित्री, Women&amp;apos;s Health के लिए है चमत्कारी, जानें इसके फायदे</title>
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<description><![CDATA[ बिजी लाइफस्टाइल के चलते महिलाएं अपनी सेहत का ध्यान बिल्कुल भी नहीं रखती हैं। आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ा-बूटियां बताई गई हैं, जो छोटी-छोटी हेल्थ प्रॉब्लम को नेचुरली ठीक करने में मदद करती है। इन्हीं में से एक है जावित्री, यह एक आयुर्वेदिक औषधि है, जो डाइजेशन सुधारने से लेकर तनाव को कम करता है और महिलाओं के हार्मोनल हेल्थ को बैलेंस रखने तक कई फायदे देती है। असल में जावित्री जायफल का बाहरी रेड-ऑरेंज कवर होता है, जिसमें कई पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट और एसेंशियल ऑयल पाए जाते हैं। सही मात्रा में इनका सेवन किया जाए, तो यह शरीर को अंदर से मजबूत बना देता है। इस लेख में हम आपको जावित्री से बनने वाली एक आसान और असरदार ड्रिंक और इसके हेल्‍थ बेनिफिट्स के बारे में बताएंगे।जावित्री की ड्रिंक-जरूरी सामग्री (1 कप के लिए)-जावित्री- 1 छोटा टुकड़ापानी- 1 कप गुनगुनाशहद- 1/2 चम्मच (पानी हल्का ठंडा होने पर मिलाएं)इलायची पाउडर- एक चुटकी (वैकल्पिक)बनाने का तरीका- सबसे पहले आप पानी को हल्का गर्म करें, लेकिन इसे उबालें नहीं।- फिर इसमें जावित्री का छोटा टुकड़ा डालकर 5-7 मिनट के लिए ढक दें, जिससे अर्क पानी में अच्छे से घुल जाए।- इसके बाद पानी को छान लें और जब यह गुनगुना रह जाए, तब इसमें शहद मिलाएं।- इसको आप सुबह खाली पेट या रात के खाने में करीब 1 घंटे बाद पी सकती हैं।- यह तरीका जावित्री के वोलेटाइल ऑयल्स को सुरक्षित रखता है, जिससे इसका औषधीय असर ज्यादा मिलता है।जावित्री का सेवन करने मिलते हैं ये फायदेपाचन को दुरुस्त करता हैजावित्री में मिरिस्टिसन और यूजेनॉल जैसे तत्व पाए जाते हैं, यह पाचन एंजाइम को एक्टिव करते हैं। इससे गैस और ब्लोटिंग कम होती होती है, खाना जल्दी पचता है और आंतों की मूवमेंट बेहतर होती है। तनाव और मानसिक थकान को दूर करता हैजावित्री के एसेंशियल ऑयल गाबा रिसेप्टर्स पर प्रभाव डालते हैं। यह दिमाग को शांत रखते हैं। इससे चिंता और चिड़चिड़ापन कम हो जाता है और मानसिक थकान कम करता है।यूट्रस हेल्थ के लिए फायदेमंद हैंजावित्री में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पेल्विक एरिया में ब्लड फ्लो बेहतर करता है। पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को कम करता है, पेल्विक सूजन कम करता है और हार्मोनल संतुलन बनाए रखता है। एंटी माइक्रोबियल गुणजावित्री में प्राकृतिक रूप से एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं। ये गुण शरीर को हानिकारक बैक्टीरिया और फंगस से सुरक्षित रखने में सहायक होते हैं। इसके साथ ही, यह कुछ प्रकार के श्वसन तंत्र से जुड़े संक्रमणों से बचाव करने में भी मदद कर सकती है। सावधानियां बरतें- इसका अधिक सेवन न करें सिर्फ सीमित मात्रा में लें। इसको आप दिन में केवल एक छोटा टुकड़ा करीब 300-400 mg ही लें। अधिक मात्रा में सेवन करने से दिल की धड़कन तेज हो सकती है।- प्रेग्नेंसी के दौरान जावित्री का सेवन करने से बचें।- जिन लोगों का शरीर ज्यादा गर्म रहता है या हाई BP है, उन लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।- शहद को ज्यादा गर्म पानी में न मिलाएं, यह एंजाइम को नष्ट कर देता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 11:35:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Hidden Symptoms Of Acidity: Acidity को ना लें हल्के में! ये 5 Silent Symptoms हैं खतरे की घंटी, ना करें ये Health Mistake</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में एसिडिटी या पेट में जलन होना एक आम समस्या बन चुकी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके लक्षण सिर्फ पेट तक ही सीमित नहीं रहते हैं। अक्सर खट्टी डकारों औऱ सीने में जलन को एसिडिटी का संकेत मानते हैं। जबकि यह शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकती है। बता दें कि एसिडिटी के कुछ ऐसे &#039;छिपे हुए लक्षण&#039; भी होते हैं, जिनको अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं। या फिर गलत बीमारी समझकर गलत इलाज करवाते हैं। एसिड रिफ्लेक्स कभी-कभी कंधों में दर्द, सिरदर्द या गले की समस्या के रूप में सामने आता है। जिसको पहचानना जरूरी होता है।ऐसे में अगर आप भी बार-बार गले को साफ करते हैं या बिना किसी वजह के कंधों में भारीपन महसूस करते हैं। तो यह पाचन तंत्र की गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। इसलिए इन लक्षणों को समझकर इसका इलाज करना जरूरी है।इसे भी पढ़ें: Ayurveda का खजाना जावित्री, Women&#039;s Health के लिए है चमत्कारी, जानें इसके फायदेसिरदर्द और कंधों में चुभनअगर आपको सुबह उठने के फौरन बाद या खाना खाने के कुछ देर बाद तेज सिरदर्द महसूस होता है। तो यह एसिडिटी का असामान्य लक्षण हो सकता है। वहीं लोग कंधों के दर्द को लोग मस्कुलर पेन या थकान समझ लेते हैं। लेकिन एसिडिटी के कारण से पैदा होने वाली गैस नसों पर दबाव डाल सकती है। जिससे ऊपरी पीठ और कंधों में चुभन महसूस होती है। गले में अटकाव क्या आपको भी ऐसा लगता है कि बार-बार गले में कुछ अटका है। तो मेडिकल की भाषा में इसको &#039;ग्लोबल संसेशन&#039; कहते हैं। एसिडिटी की वजह से जब पेट का एसिड गले की नलिका तक पहुंचता है, तो गले में सूजन और जलन महसूस होती है। इस कारण व्यक्ति को बार-बार अपना गला साफ करने की जरूरत महसूस होती है। वहीं आवाज में भारीपन आ सकता है। जिसको लोग सामान्य सर्दी-जुकाम समझ लेते हैं।सीने में जकड़न होना और धड़कन का बढ़नाबता दें कि एसिडिटी का एक डरावना लक्षण सीने में जकड़न महसूस होना और दिल की धड़कन का तेज होना है। कई बार गैस हृदय के पास की नसों को उत्तेजित कर देती है। जिस कारण व्यक्ति को घबराहट महसूस होने लगती है। अगर खाना खाने के बाद भी ऐसी समस्या हो रही है, तो यह एसिडिटी का संकेत होता है।भूख न लगना और उल्टी का एहसासएसिडिटी का मुख्य लक्षण में भूख न लगना और लगातार जी मिचलाना भी शामिल है। जब पेट में एसिड लेवल असंतुलित हो जाता है, तो पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है। जिससे खाना देखकर ही उल्टी महसूस होती है। इन लक्षणों को नजरअंदाज करने की बजाय एक्सपर्ट से सलाह लें और अपनी लाइफस्टाइल में सुधार करें। सही समय पर इसकी पहचान ही इस समस्या का स्थायी समाधान दे सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 11:35:43 +0530</pubDate>
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<title>Digital Fatigue से Mind हो रहा है Overload? Luke Coutinho के ये 60&#45;Second Rituals देंगे आराम</title>
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<description><![CDATA[ आजकल स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया है। हम अक्सर खाली समय मिलते ही फोन पर स्क्रॉलिंग शुरू कर देते हैं। लाइफस्टाइल एक्सपर्ट ल्यूक कॉउटिन्हो का कहना है कि स्क्रॉल करना अपने आप में कोई बुराई नहीं है, लेकिन जब हम बोरियत या खुशी में भी बिना सोचे-समझे इसे लगातार करते रहते हैं, तो यह हमारे दिमाग के लिए नुकसानदेह हो जाता है।दिमाग की थकान का असली कारण क्या?ल्यूक कॉउटिन्हो के अनुसार, असली समस्या &#039;ओवरस्टिमुलेशन&#039; है। जब हमारा नर्वस सिस्टम बहुत ज्यादा शोर और सूचनाओं से भर जाता है, तो हमारा दिमाग थक जाता है। इसी थकान को दूर करने के लिए हम अक्सर एक और वीडियो देखने लगते हैं, जिससे घंटों का समय बर्बाद हो जाता है। इससे निपटने के लिए उन्होंने 60 सेकंड के कुछ आसान &#039;माइक्रो-रिचुअल्स&#039; बताए हैं, जो आपके दिमाग को तुरंत शांति दे सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Hidden Symptoms Of Acidity: Acidity को ना लें हल्के में! ये 5 Silent Symptoms हैं खतरे की घंटी, ना करें ये Health Mistake5-5-5 रीसेटदिमाग को शांत करने का एक तरीका &#039;5-5-5 रीसेट&#039; है। इसमें आपको नाक से 5 बार धीरे-धीरे सांस लेनी है, 5 सेकंड तक सांस अंदर खींचें और 5 सेकंड तक बाहर छोड़ें।सन चेकएक और प्रभावी तरीका &#039;सन चेक&#039; है। बस 60 सेकंड के लिए फोन छोड़कर खिड़की के पास जाएं और आसमान को देखें। सुबह की धूप लेना इसमें सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।ग्रैटिट्यूड वॉकआप &#039;ग्रैटिट्यूड वॉक&#039; भी कर सकते हैं, जिसमें अपने घर के एक कोने से दूसरे कोने तक 2 मिनट टहलें और किसी ऐसे व्यक्ति को याद करें जिसके लिए आप आभारी हैं।म्यूजिकग्रैटिट्यूड वॉक के अलावा, अपना पसंदीदा गाना सुनना भी एक &#039;मेडिसिन&#039; की तरह काम करता है। ल्यूक कहते हैं कि बिना कोई दूसरा काम किए सिर्फ संगीत को सुनना नर्वस सिस्टम को शांत करने का सबसे तेज तरीका है।सुरक्षा का अहसासखुद को सुरक्षित महसूस कराना भी सेहत के लिए जरूरी है। इसके लिए एक हाथ छाती और दूसरा पेट पर रखकर 30 सेकंड तक कहें, &#039;मैं अभी सुरक्षित हूं।&#039;  इसे भी पढ़ें: Ayurveda का खजाना जावित्री, Women&#039;s Health के लिए है चमत्कारी, जानें इसके फायदेपानी पीने का सही तरीकापानी को दवा की तरह धीरे-धीरे घूंट लेकर पीना चाहिए। इससे मन की घबराहट कम होती है। आप किसी अपने को एक छोटा सा मैसेज (बिना इमोजी वाला) भी भेज सकते हैं, जिससे शरीर को सुकून मिलता है।10 चीजों का डीक्लटर रूलल्यूक &#039;डीक्लटर रिचुअल&#039; की सलाह देते हैं। अपने आस-पास बिखरी हुई 10 चीजों को उठाएं और उन्हें उनकी सही जगह पर धीरे-धीरे रखें। चीजों को व्यवस्थित करने से दिमाग को सुकून मिलता है। ल्यूक का कहना है कि स्क्रॉलिंग छोड़ने के लिए खुद से लड़ें नहीं, बल्कि अपने थके हुए दिमाग को मनोरंजन के बजाय आराम का विकल्प दें।



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<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 11:35:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: Car Driving से आपकी Spine हो रही है खराब, स्पाइन सर्जन ने बताए ये Golden Rules</title>
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<description><![CDATA[ सफर को आसान बनाने के लिए कई लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट की जगह अपनी कार से ट्रैवल करना पसंद करते हैं। ऐसे में कई बार लंबी ड्राइविंग के बाद पीठ और टेल बोन में दर्द या गर्दन में अकड़न की समस्या महसूस होती है। ड्राइव करते समय एक ही पोजिशन में लंबे समय तक बैठे रहने या झटके लगने की वजह से यह समस्या हो सकती है। ऐसे में अगर आपको भी यह समस्या होती है, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि आप इस समस्या से कैसे बच सकते हैं।ड्राइविंग पीठ को क्यों पहुंचाती है नुकसानलगातार बैठे रहनाघंटों तक एक ही जगह पर बैठने से रीढ़ की डिस्क पर दबाव पड़ता है।इसे भी पढ़ें: Holi पर Acidity और Bloating से हैं परेशान? Gut Health के लिए तुरंत अपनाएं ये 5 जादुई Drinksगलत पोस्चरझुककर बैठने से गर्दन और कमर की मांसपेशियों में खिंचाव आता है।झटके लगनाऊबड़-खाबड़ सड़कें औऱ गाड़ी की कंपन से रीढ़ की स्पाइन में चोट आ सकती है।गतिहीनता होनाजब लंबे समय तक मूवमेंट नहीं होता है, तो ब्लड सर्कुलेशन रुकता है और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।बरतें ये सावधानियांसही पोस्चर है जरूरीबैठने से पहले पीछे की जेब से फोन या वॉलेट जैसी चीजों को निकाल दें। स्टेयरिंग व्हील से सही दूरी पर बैठें और सीट को थोड़ा सा पीछे झुकाकर रखें। वहीं जरूरत पड़े तो लम्बर सपोर्ट पिलो का इस्तेमाल करें।ब्रेक लेंलगातार गाड़ी न चलाएं। हर 1.5 से 2 घंटे में 5-10 मिनट का ब्रेक जरूर लें। गाड़ी से बाहर निकलें, स्ट्रेचिंग करें औऱ थोड़ा सा टहलें। ऐसा करने से मांसपेशियों का तनाव कम होता है और साथ ही ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है।रखरखाव और आरामआपको ऐसी कार चुननी चाहिए, जिसकी सीटें कंफर्टेबल हों। गाड़ी के शॉक एब्जॉर्बर और टायरों को दुरुस्त रखें। जिससे झटके कम लगें। वहीं गाड़ी चलाते समय अचानक ब्रेक लगाने से बचना चाहिए और पैरों को पैडल पर कंफर्टेबल रखें।ऐसे करें ड्राइविंगड्राइविंग के दौरान पूरी तरह से जकड़ कर न बैठें। हर 15-20 मिनट में बैठने की स्थिति को थोड़ा सा बदलें। वहीं अगर हो सके तो लंबी ड्राइविंग की जिम्मेदारी को आपस में बांट लें।पहले से दर्द है तो क्या करेंअगर आप पहले से साइटिका या स्लिप डिस्क जैसी समस्या से परेशान हैं, तो तो आपको ये टिप्स अपनाने चाहिए।हीट और कोल्ड थेरेपीब्रेक के दौरान ठंडी या गर्म सिकाई करें। सर्दियों में हीटेड सीट के इस्तेमाल से आपको राहत मिल सकती है।सपोर्टिक एक्सेसरीजटेल बोन के दर्द से राहत पाने के लिए आप कॉक्सिक्स कुशन या कमर के लिए सपोर्ट बेल्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं।दवाआप डॉक्टर की सलाह पर पेन रिलीफ दवा ले सकते हैं।कब लें डॉक्टर से सलाहबता दें कि दर्द को नजरअंदाज करने की गलती करने से स्थिति गंभीर बन सकती है। अगर आपको ड्राइविंग के बाद कुछ लक्षण दिखते हैं, तो आपको फौरन स्पाइन एक्सपर्ट से संपर्क करना चाहिए।हाथ-पैरों में सुन्नपन, झुनझुनी या कमजोरी महसूस होना।दर्द कुछ दिनों से ज्यादा समय तक बना रहे।सीधे खड़े होने या चलने में परेशानी होना। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 05 Mar 2026 09:09:40 +0530</pubDate>
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<title>Holi पर Acidity और Bloating से हैं परेशान? Gut Health के लिए तुरंत अपनाएं ये 5 जादुई Drinks</title>
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<description><![CDATA[ आज पूरे देशभर में होली का पर्व मनाया जा रहा है। हर जगह रंगों की बौछार और खुशियों के साथ जश्न मनाया जा रहा है। त्योहार के दिन हवा में रंगों के साथ मुंह में मीठे और तीखे पकवानों की मिठास भी घुलने लगती है। होली के मौके पर करीब सभी घरों में गुजिया मठरी, दही-भल्ले और भी कई पकवान खाए जाते हैं। इस दौरान लोगों का हाजमा जरुर बिगड़ जाता है। कई लोगों को ज्यादा या मसालेदार खाना खाने के बाद गैस, अपच या पेट में सूजन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में स्वादिष्ट लेकिन भारी भोजन के साथ कुछ पौष्टिक पेय पदार्थों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद रहता है। आगे हम आपको ऐसी ही कुछ हेल्दी ड्रिंक्स के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जो पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।छाछहेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, होली की मिठाई, तले-भुने खाने और ठंडाई के बीच ब्लोटिंग, एसिडिटी और अपच को दूर करने के लिए गट हेल्थ को बेहतर रखने वाले ड्रिंक्स को डाइट में शामिल करें। छाछ एक हल्का और फायदेमंद पेय विकल्प है, जिसे भोजन के साथ लिया जा सकता है। इसमें पुदीना, काला नमक और भुना हुआ जीरा मिलाकर इसका स्वाद और गुण दोनों बढ़ाए जा सकते हैं। चाहें तो इसमें थोड़ी सी अदरक या कुछ करी पत्ते भी डाल सकती हैं। यह मिश्रण पाचन प्रक्रिया को सुधारने में मदद करता है और शरीर द्वारा पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाता है।जीरे का पानीएक गिलास पानी में एक टीस्पून जीरा डालकर उबालें। इसमें एक चुटकी सेंधा नमक मिलाएं और इसे गुनगुना ही पिएं। यह डाइजेशन को बेहतरीन बनाता है और गैस को दूर करता है और पेट का एसिड बैलेंस होता है।आंवला जूसआंवले का जूस सेहत के लिए तो अच्छा होता ही है। आप आंवले के जूस को शहद और नींबू के साथ लेने से भी पाचन बेहतर करता है। ये विटामिन-सी और फाइबर से भरपूर होता है। यह शरीर को डिटॉक्स करता है और मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त करता है और कब्ज की समस्या को दूर करता है।नारियल पानीनारियल पानी प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसका सेवन शरीर को तुरंत तरावट और पर्याप्त हाइड्रेशन देता है, जिससे मल त्याग की प्रक्रिया भी सहज हो सकती है। यह पाचन तंत्र को संतुलित रखने में सहायक है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में भी मदद करता है।सौंफ का पानीएसिडिटी की समस्या के लिए सबसे फायदेमंद हैं सौंफ का पानी। यह ब्लोटिंग और सांसों की दुर्गंध दूर करता है। गुनगुने पानी में 1 टीस्पून सौंफ के बीज उबालकर पिएं। इससे आपको आराम मिलेगा और गैस भी नहीं बनेगी। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 05 Mar 2026 09:09:40 +0530</pubDate>
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<title>Health Experts ने बताया Weight Loss का सीक्रेट, आटे में ये चीजें मिलाकर बनें Fat to Fit</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर जब वजन कम करने की बात होती है, तो लोग सबसे पहले सख्त डाइटिंग शुरू कर देते हैं। कई लोग डाइटिंग का अर्थ पूरी तरह भोजन छोड़ देना या लंबे समय तक भूखे रहना समझ लेते हैं, जबकि ऐसा करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इससे कमजोरी और पोषण की कमी हो सकती है, जबकि वजन पर खास असर नहीं पड़ता। इसलिए जरूरी है कि आप समझदारी से संतुलित आहार अपनाएं और अपने रोजमर्रा के भोजन में छोटे लेकिन असरदार बदलाव करें। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि आप अपने आटे में कुछ खास पौष्टिक तत्व शामिल करें, तो वजन नियंत्रित रखने के साथ शरीर को भरपूर न्यूट्रिशन भी मिल सकता है।आटे में बेसन मिलाएंबेसन पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जिसमें प्रोटीन, फाइबर और जरूरी मिनरल्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। जब आप गेहूं के आटे की रोटी बनाएं, तो उसमें कुछ हिस्सा बेसन का भी मिला सकती हैं। बेसन में कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी अपेक्षाकृत कम होती है। साथ ही इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है और यह प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-फ्री होता है। इस वजह से यह वजन नियंत्रित रखने में सहायक माना जाता है।अलसी के बीज का पाउडरवजन घटाने की प्रक्रिया को सपोर्ट करने के लिए गेहूं के आटे में अलसी के बीजों का पाउडर मिलाया जा सकता है। अलसी ओमेगा-3 फैटी एसिड और फाइबर का अच्छा स्रोत है, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। यह पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। साथ ही, अलसी त्वचा और बालों के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है।आटे में तिल शामिल करेंसफेद तिल को हल्का भूनकर पीस लें और फिर इसे आटे में मिलाएं। तिल में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो पाचन को बेहतर बनाता है और पेट को देर तक संतुष्ट रखता है। इसके अलावा, तिल कैल्शियम से भरपूर होता है, जो हड्डियों, बालों और त्वचा के लिए लाभकारी है।अजवाइन का प्रयोग करेंअजवाइन में सूजन कम करने वाले और पाचन सुधारने वाले गुण पाए जाते हैं। यह मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में भी सहायक हो सकती है। अजवाइन को हल्का भूनकर या कूटकर आटे में मिलाया जा सकता है। इससे स्वाद के साथ-साथ सेहत को भी फायदा मिलता है।मोरिंगा मिलाएंमोरिंगा को पोषण का खजाना माना जाता है। इसमें विटामिन ए, बी और सी के साथ आयरन और कैल्शियम भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह त्वचा संबंधी समस्याओं में मददगार हो सकता है और कम कैलोरी वाला होने के कारण स्वस्थ तरीके से फैट लॉस में सहायक विकल्प बन सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 05 Mar 2026 09:09:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Holi Health Alert: रंग और पानी बन सकते हैं मुसीबत, एक्सपर्ट्स ने बताए बचाव के Golden Tips</title>
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<description><![CDATA[ होली का पर्व रंगों की बौछार, पसंदीदा पकवान और मस्ती अपार होती है, लेकिन इस दौरान हम सभी अपनी सेहत के बारे में तो भूल ही जाते हैं। संक्रमित पानी और असुरक्षित रंगों के साथ-साथ खानपान में लापरवाही से होली का रंग न हो जाए बदरंग। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि होली के दिन किन बातों का रखें ध्यान, किन चीजों से सावधानी बरतें।स्वाद नहीं देखें रंग भीहोली पर्व पर बिस्किट, कुकीज, कोल्ड ड्रिंक्सबच्चों की गोलियां, चाकलेट जैसे तमाम खाने-पीने की चीजों में कृत्रिम रंगों का खूब प्रयोग होता है। जिसको सिंथेटिक फूड डाइ भी कहा जाता है। इनके प्रयोग से बचना जरुरी है। वरना पाचन या एलर्जी की समस्या हो सकती है। अत्यधिक चटर-पटर खाने से कब्ज, गैस या पेट दर्द भी हो सकता है।पानी न बने मुसीबतहोली पर पानी से जरुर होली खेली जाती है। अगर आप होली वाले दिन संक्रमित या अस्वच्छ पानी से होली खेलेंगे, तो नुकसान हो सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट की माने तो अस्वच्छ या संक्रमित पानी कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है। विशेषकर डायरिया, त्वचा संक्रमण और आंखों में जलन जैसी दिक्कतें सामने आ सकती हैं। होली के समय टंकियों, पाइपलाइन या खुले स्रोतों का पानी कई बार शुद्ध नहीं होता। यदि ऐसा पानी गलती से मुंह में चला जाए, तो उसमें मौजूद कीटाणु और विषाणु शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। स्किन एलर्जी का खतराअगर आप लंबे समय तक गीले कपड़ों में न रहें। गंदे पानी के संपर्क में आने से त्वचा को नुकसान हो सकता है। फंगल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। इससे आपको खुजली, लाल चकत्ते या रैशेज हो सकते हैं। कृत्रिम रंगों के प्रयोग से पूर्व- यदि किसी कारणवश कृत्रिम रंगों का उपयोग करना अनिवार्य हो, तो केवल एफएसएसएआई से प्रमाणित रंगों का ही चयन करें। इससे सुरक्षा और गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित रहती हैं।- बाजार में मिलने वाले रंगों के पैकेट के ऊपर लेबल देखकर ही खरीदारी करें।होली खेलने से पहले क्या करें- सबसे पहले स्किन पर अच्छी मात्रा में नारियल तेल, बादाम तेल या एलोवेरा जेल लगाएं। इससे त्वचा पर एक नेचुरल लेयर बन जाएगी।- इसके बाद चेहरे पर सनस्क्रीन लगाएं क्योंकि धूप व रंग मिलकर त्वचा का अधिक नुकसान नहीं होगा।- होली खेलने के दौरान बार-बार चेहरा पानी से धोना या रगड़ना सही नहीं। ऐसा करने से रंग गहराई से भीतर चला जाता है।ये सावधानियां बरतें- रंग हटाने के लिए त्वचा को जोर-जोर से रगड़ना सही नहीं है। ऐसा करने से जलन और रैशेज की समस्या हो सकती है, साथ ही त्वचा में सूखापन भी बढ़ जाता है। बेहतर है कि रंग को धीरे-धीरे और सौम्य तरीके से साफ किया जाए।- बालों पर रंगों के साइड-इफेक्ट न हो इसलिए तेल जरुर लगाएं और इन्हें ढंक लें।- बालों का रंग निकालने के लिए हल्के शैंपू से हेयर्स धोएं। अधिक शैंपू के प्रयोग करने से बाल रुखे हो सकते हैं। - गलती से आंखों में रंग चला गया है, तो मसलें नहीं। उसे ठंडे पानी से धोएं। अधिक जलन हो तो गुलाब जल की कुछ बूंदें डालें या चिकित्सक से सलाह लें। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 22:54:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: Quinoa और कटहल का आटा है &amp;apos;Health&amp;apos; का खजाना, Diabetes&#45;Liver की बीमारियों में रामबाण</title>
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<description><![CDATA[ अच्छी सेहत के लिए सही खानपान और लाइफस्टाइल में सुधार सबसे जरूरी माना जाता है। क्योंकि जैसी लाइफस्टाइल है और जो भी हम खाते हैं, उसका हमारी सेहत पर सीधा असर होता है। यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट सभी लोगों को अपनी लाइफस्टाइल ठीक रखने की सलाह देते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक आजकल लोग मैदा, प्रोसेस्ड फूड, नमक और चीनी वाली चीजों का अधिक सेवन करते हैं। जिस कारण डायबिटीज, हाई बीपी, मोटापा और हृदय रोगों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।असंतुलित डाइट और फिजिकल एक्टिविटी की कमी दुनियाभर में होने वाली क्रॉनिक बीमारियों की वजह है। ऐसे में अगर हम अपने डाइट में पौष्टिक और फाइबर वाली चीजों की मात्रा को बढ़ाते हैं। तो इससे न सिर्फ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। साथ ही कई बीमारियों का खतरा भी कम हो सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि सेहत के लिए कौन सा आटा सबसे अच्छा माना जाता है।सेहत के लिए कौन सा आटा अच्छाभारत में गेहूं और इसका आटा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला अनाज है। इसमें फाइबर, आयरन, कार्बोहाइड्रेट और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। साबुत गेंहूं का आटा पाचन को बेहतर बनाता है और ऊर्जा देने में मदद करता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में अन्य तरह के आटे की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। जिसको अध्ययनों में कई प्रकार से लाभकारी पाया गया है।आजकल पारंपरिक गेहूं के आटे के साथ हरे कटहल के आटे और क्विनोआ के आटे का भी लोग काफी इस्तेमाल कर रहे हैं।यह दोनों ऑप्शन पोषक तत्वों से भरपूर हैं। यह खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो ब्लड शुगर, पाचन या वजन से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं।सेहत के लिए लाभकारी क्विनोआ का आटाक्विनोआ एक स्वास्थ्यवर्धन बीज है, जोकि कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इस कारण इसको सुपरफूड माना जाता है।क्विनोआ में फाइबर, आयरन, अमीनो एसिड, मैग्नीशियम, मैंगनीज, प्रोटीन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, फोलेट और विटामिन-बी होता है।क्विनोआ में मौजूद अमीनो एसिड मांसपेशियों की मरम्मत करता है और इसके विकास में अहम भूमिका निभाता है।क्विनोआ में फाइबर अधिक मात्रा में पाया जाता है, जोकि पेट को लंबे समय तक भरा महसूस कराता है। जिससे आप ओवरईटिंग से बच जाते हैं।जानिए ये फायदेइसमें पोटैशियम और ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है। जोकि बीपी को कंट्रोल करने के साथ बैड कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकता है।क्विनोआ में मौजूद मैग्नीशियम, विटामिन बी, आयरन और फॉस्फोरस एनीमिया को रोकने में मदद करते हैं।हालांकि क्विनोआ के अधिक सेवन से गैस, पेट दर्द, ब्लोटिंग या डायरिया हो सकती है। वहीं जिनको हाई बीपी, किडनी स्टोन या एलर्जी की समस्या है, उनको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।हरे कटहल का आटामधुमेह रोगियों में प्लाज्मा शर्करा के लेवल को कम करने और ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन को कंट्रोल करने में कटहल का आटा काफी कारगर माना गया है। बता दें कि ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन बढ़ना डायबिटीज का संकेत माना जाता है। साथ ही इसको फैटी लीवर और मोटापे को रोकने में भी कारगर बताया गया था।लिवर और शुगर दोनों के लिए फायदेमंदचूहों पर किए गए शोध में पता चलता है कि सिर्फ तीन महीने हरे कटहल के आटे के सेवन से न सिर्फ शरीर के वजन में वृद्धि को काफी हद तक रोका जा सकता है। बल्कि यह लिवर में फैट जमने समस्या को भी कम करने में कारगर है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 13:02:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Eye Drops पर Health Alert! बिना Doctor की सलाह के इस्तेमाल पड़ सकता है भारी, जानें Side Effects</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर होता है कि कोई भी समस्या शरीर में आती हैं, तो हम सभी डॉक्टर को दिखाने से पहले मेडिकल स्टोर पर दवाई खरीद लेते हैं। जब भी आंखों में कोई तकलीफ होती है या फिर खुजली व जलन होती है, तो सीधे मेडिकल स्टोर पर जाकर आई ड्रॉप्स खरीद कर आंखों में डाल देते हैं, लेकिन क्या जानते हैं कि आई स्पेशलिस्ट एक्सपर्ट ने बताया है कि यह छोटी-सी आदत आपकी आंखों के लिए खतरनाक हो सकती है। कोई भी लक्षण मामूली नहीं हैआंखों में होने वाली कोई भी समस्या एक जैसी नहीं होती है। खासतौर पर सामान्य एलर्जी, बैक्टीरियल या वायरल इन्फेक्शन हो सकता है या फिर ड्राई आई सिंड्रोम, कॉर्निया में चोट और &#039;ग्लूकोमा&#039; जैसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। सिर्फ ऊपर से लक्षण देखकर अपनी मर्जी से दवा लेने से असली बीमारी छिप सकती है और स्थिति आगे चलकर और भी ज्यादा जटिल हो सकती है।स्टेरॉयड वाले आई ड्रॉप्स से बड़ा नुकसान- तुरंत राहत, पर छिपा हुआ खतरा: ये दवाइया आंखों की लाली और सूजन को जल्दी कम कर देती हैं, जिससे रोगी को ऐसा महसूस होता है कि समस्या पूरी तरह ठीक हो गई है, जबकि अंदरूनी परेशानी अभी भी बनी रह सकती है।- गंभीर बीमारियों का खतरा: बिना डॉक्टर की निगरानी के इन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल करने से आंखों का दबाव बढ़ सकता है। यह &#039;ग्लूकोमा&#039; और &#039;मोतियाबिंद&#039; जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा उत्पन्न करती है।- इन्फेक्शन का बिगड़ना: यदि आपको आंख पहले से कोई इन्फेक्शन है और उस पर स्टेरॉयड डाल दिया जाए, तो वह इन्फेक्शन और भी भयंकर रुप ले लेगी। एंटीबायोटिक और &#039;रेडनेस रिलीफ&#039; ड्रॉप्स का सच- एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल: हर बार आंख लाल होने या चिपचिपी होने का मतलब बैक्टीरियल इन्फेक्शन नहीं होता है। उदाहरण के तौर पर वायरल कंजंक्टिवाइटिस में एंटीबायोटिक बिल्कुल बेअसर होते हैं। इसका उपयोग न करें।- रेडनेस रिलीफ ड्रॉप्स: इस तरह की ड्रॉप्स आंखों की वाहिकाओं को सिकोड़ कर कुछ समय के लिए आराम देता है। इनका बार-बार इस्तेमाल करने से आंखों में और रिबाउंड रेडनेस और ड्राईनेस आ सकती है। क्या लुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स एकदम सेफ हैं?कई लोग “आर्टिफिशियल टीयर्स” या लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स को बिल्कुल सेफ समझते हैं। लेकिन यदि आपको इनका उपयोग बार-बार करना पड़ रहा है तो नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। लगातार आंखों में सूखापन किसी छिपी हुई समस्या या बीमारी का संकेत भी हो सकता है। साथ ही, कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को विशेष सतर्कता रखनी चाहिए, क्योंकि गलत प्रकार की ड्रॉप्स का इस्तेमाल कॉर्निया को गंभीर क्षति पहुंचा सकता है।डॉक्टर कब दिखाएं?- आंखों में बहुत तेज दर्द होना।- अधिक रोशनी आंखों में चुभना या धुंधला दिखाई देना।- आंख में चोट लगना या पस आना।- कोई भी ऐसे लक्षण जो 2 से 3 दिनों में ठीन न हो रहा हो।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 13:02:17 +0530</pubDate>
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<title>Heart Attack: Heart Attack का &amp;apos;Golden Hour&amp;apos; है सबसे अहम, Experts की ये 3 Life Saving Tips बचा सकती हैं जान</title>
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<description><![CDATA[ आजकल दुनियाभर में दिल की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक-कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ रहा है। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं पर एक्स्ट्रा दबाव को बढ़ाती जा रही है। दिल की बीमारियां भारत सहित दुनियाभर में मौत का सबसे बड़ा कारण बन चुकी हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हर साल करीब 1.79 करोड़ लोगों की मौत हृदय संबंधी रोगों के कारण होती है, जिसमें हार्ट अटैक प्रमुख है।खराब लाइफस्टाइल, धूम्रपान-शराब पीने की आदत, खान-पान से संबंधित गड़बड़ी और फिजिकल एक्टिविटी कम होने से दिल की सेहत को नुकसान पहुंचता है। इसकी वजह से डायबिटीज, मोटापा और हाई बीपी के मामले बढ़ गए हैं, जो सीधे तौर पर हार्ट अटैक के जोखिमों को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि अगर आप घर पर अकेले हैं और हार्ट अटैक आ जाए, तो कैसे रोगी की जान बचाई जा सकती है।इसे भी पढ़ें: Eye Drops पर Health Alert! बिना Doctor की सलाह के इस्तेमाल पड़ सकता है भारी, जानें Side Effectsसीपीआर देने से बच सकती है जानहेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक हार्ट अटैक तब होता है, जब दिल की मांसपेशियों तक खून पहुंचाने वाली कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉक हो जाता है। इससे दिल को सही तरीके से ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है। इस स्थिति में सही समय पर सही कदम उठाने से जीवन को बचाया जा सकता है।एक्सपर्ट के मुताबिक हार्ट अटैक के बाद पहले के 60 मिनट को &#039;गोल्डन आवर&#039; कहा जाता है। सही इलाज मिलने पर मृत्यु का खतरा कम किया जा सकता है। इन लक्षणों की पहचान करके सही इलाज देना जरूरी है।अगर किसी को हार्ट अटैक आ जाए और मरीज बेहोश हो जाता है या सांस या नाड़ी न मिले। तो फौरन कार्डियो-पल्मोनरी रिससिटेशन शुरूकर देना चाहिए।छाती के बीच प्रति मिनट 100-120 बार दबाव देने से दिन और दिमाग तक ब्लड सर्कुलेशन बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे जीवन बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।हार्ट अटैक आने पर क्या करेंहार्ट अटैक अपने आप में डरावना होता है, वहीं यह डर तब ज्यादा बढ़ सकता है, जब आप घर में अकेले हों और हार्ट अटैक आ जाए, लेकिन कोई मदद करने वाला कोई न हो। इस स्थिति में धैर्य और थोड़ी सी जागरुकता से आपकी जान बच सकती है।अगर सीने में जकड़न या दबाव महसूस हो रहा है औऱ यह दर्द आमतौर पर चुभन की तरह नहीं होता है। बल्कि भारीपन महसूस होता है, जैसे कोई सीने को निचोड़ रहा है।यह दर्द बाएं हाथ, पीठ के ऊपरी हिस्से, गर्दन और जबड़े तक फैल सकता है।आपको बिना वजह ज्यादा थकान महसूस हो रहा है। आपको ऐसा महसूस होगा कि शरीर का पूरा सिस्टम बंद हो गया और कोई भी काम करने की हिम्मत नहीं है।ठंडा पसीना और सांस फूलना भी हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है।उल्टी या चक्कर आना जैसा महसूस होना भी अलार्मिंग का संकेत माना जाता है।फौरन करें ये उपायफौरन बैठ जाएं और अगर कोई काम कर रहे हैं, तो वह फौरन बंद कर दें। किसी कुर्सी या सोफा पर पीठ को सहारा देकर बैठ जाएं। इसके बाद 75 से 100 मिलीग्राम एस्पिरिन की टैबलेट को चबाकर पानी से निगलें। इससे यह जल्दी असर करेगा। एस्पिरिन नसों को खोलने में सहायता करता है। ऐसी स्थिति में इमरजेंसी सर्विस या एंबुलेंस को कॉल करें। अपना एड्रेस साफ-साफ बताएं। वहीं घर पर भी किसी सदस्य या दोस्त को सूचना दें। घर का दरवाजा खुला छोड़ दें। इससे मदद करने वाला जल्द से जल्द आप तक पहुंच जाएगा। वहीं सही पोस्चर में बैठें और 45 डिग्री के एंगल पर बैठें और अपने पैरों को थोड़ा ऊपर उठाकर रखें। इस दौरान गहरी और लंबी सांस लें। नाक से 4 सेकेंड तक अंदर की ओर सांस लें और मुंह से 6 सेकेंड तक धीरे-धीरे सांस बाहर की ओर छोड़ें।घर पर रखें राम-किटहेल्क एक्सपर्ट के मुताबिक हार्ट अटैक के समय राम किट &#039;संजीवनी&#039; साबित हो सकती है।हार्ट अटैक के लक्षण दिखने पर आपको फौरन दो इकोस्प्रिन और एक रोसुवास्टेटिन खानी चाहिए। इसके बाद सोबिट्रेट की टेबलेट को जीभ पर रखकर इसको चूसना चाहिए। इससे मरीज की जान बचाई जा सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 13:02:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Heart Attack का खतरा होगा खत्म, बस 2 महीने पिएं यह Ayurvedic Drink, Cholesterol होगा कंट्रोल।</title>
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<description><![CDATA[ बदलते मौसम में अर्जुन की छाल किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है। इस मौसम में नसें सिकुड़ती जरुर है और यह ब्लॉकेज को खतरा बढ़ा सकती है। ऐसे में आयुर्वेद में यह औषधि अर्जुन की छाल एक प्रकार से सुरक्षा कवच का काम करेगी। अर्जुन की छाल दिल की सेहत के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि अर्जुन की छाल कैसे फायदेमंद हो सकती है और इसे कैसे लेना चाहिए? अक्सर गलत खानपान और खराब लाइफस्टाइल के कारण हमारी नसों में कोलेस्ट्रॉल (LDL) जमा होने लगता है, जिसे नसों की ब्लॉकेज कहते हैं। यह आगे चलकर हार्ट अटैक और डायबिटीज का कारण बनती है। हालांकि आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है, इसके सेवन से ही आपका हार्ट हेल्दी रहेगा।अर्जुन की छाल का पानी कैसे तैयार करें?- रात के समय एक गिलास गुनगुन पानी में अर्जुन की छाल का एक छोटा टुकड़ा (या आधा चम्मच पाउडर) डालकर ढककर रख दें।- फिर सुबह इस पानी को धीमी आंच पर उबालें, जब तक उबालें यह थोड़ा कम न हो जाए।- अब इसे छान लें और हल्का गुनगुना होने पर घूंट-घूंट करके खाली पेट पिएं। अर्जुन की छाल का पानी सिर्फ 2 महीने पीने के 8 जबरदस्त फायदे- इसका सेवन करने से नसों में जमा जिद्दी कोलेस्ट्रोल और गंदगी को धीरे-धीरे काटकर बाहर निकाल देता है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन सही हो जाता है।- यह दिल की मसल्स को मजबूती देता है और हार्ट फेलियर या स्ट्रोक के खतरे को कम करता है।- इसके साथ ही यह हाई बीपी को नेचुरली कम करता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाकर ब्लड शुगर को बैंलेस रखता है।- इसके सेवन से महिलाओं में बंद फेलोपियन ट्यूब्स को खोलने में मददगार माना जाता है और हार्मोनल असंतुलन को ठीक करता है।- अगर आपको कब्ज या गैस की समस्या है, तो यह ड्रिंक आपके मेटाबॉलिज्म को बूस्ट कर पाचन तंत्र को दुरुस्त करती है।- शरीर के अंदरुनी अंगों की सूजन को कम करके यह पुराने दर्द और गंभीर बीमारियों को भी दूर करता है।- आपको बता दे कि, अर्जुन छाल की तासीर मन को शांत करती है, जिससे मानसिक तनाव और चिंता कम होती है और नींद अच्छी आती है।- यह शरीर के मुख्य अंगों से टॉक्सिंस को बाहर निकालता है और पूरी बॉडी को अंदर से साफ करता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 01 Mar 2026 21:18:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Experts का दावा, Diarrhea&#45;Constipation से मिलेगा छुटकारा, Diet में शामिल करें ये 5 फूड्स</title>
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<description><![CDATA[ खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण हमारे शरीर पर असर जरुर पड़ता है। गौरतलब है कि हम सभी हेल्दी रहना चाहते हैं,लेकिन क्या आप जानते है कि इसके लिए सही खान-पान और पाचन का दुरुस्त होना जरुरी है। अगर आप समय रहते छोटे-छोटे लक्षण पहचान लेंगी, तो कोई बड़ी बीमारी शरीर को नहीं घेर पाएगी। हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि किचन पाचन से जुड़ी दिक्कतों में इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) सबसे आम है। इसी के कारण आंते ठीक से काम नहीं कर पाती हैं। जिस वजह से पेट में ऐंठन, दर्द, दस्त या कब्ज हो सकती है, हालांकि इसे आयुर्वेदिक डाइट, हर्ब्स और लाइफस्टाइल में बदलावों के जरिए ठीक भी किया जा सकता है। आइए आपको बताते हैं कुछ ऐसे फूड्स के बारे में जो इरिटेबल बॉवेव सिंड्रोम को कम करने में कारगर है। पुराने चावलहेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि पुराने चावल को पचाना बहुत ही आसान होता है। इससे वात और पित्त शांत होते हैं और ब्लोटिंग और दस्त भी कम होता है। इसलिए आप चावल को अच्छे से पकाकर खाएं। मूंग दाल के साथ ही इसकी खिचड़ी बनाकर खाना और भी फायदेमंद रहेगा। इसमें घी जरुर मिलाएं और नए चावल को अवॉइड करें।बेलबेल ऐसा फल है जो दस्त की समस्या को दूर करता है। बेल भी आईबीएस में होने वाले दस्क की दिक्कत को रोकता है। यह आंतों की सूजन को दूर करता है और डाइजेशन में सुधार लेकर आता है। ये आंतों की मसल्स को मजबूती देता है और स्टूल में म्यूकस को कम करता है। आप बिना चीनी के बेल का शर्बत पी सकती हैं या बेल के पाउडर को गुनगुने पानी के साथ ले सकती है।छाछछाछ हमारे पेट के लिए काफी फायदेमंद है। ये पाचन को सुधारता है और गट बैक्टीरिया को बैलेंस करता है। यह गैस और पेट फूलने जैसी दिक्कतें कम होती हैं। इसलिए खाने के बाद जीरा और काला नमक डालकर छाछ पिएं। आपको काफी फायदा मिलेगा।मूंग दालमूंग दाल को पचाना काफी आसान होता है। इससे शरीर में जमा टॉक्सिंस कम होते हैं और ब्लोटिंग कम होती है। आप दाल को पतला बनाएं या दाल का सूप बनाएं। इसे हींग और जीरे के तड़के के साथ खाएं।अनारअनार आंतों को मजबूत बनाने में सहायक होता है। यह दस्त की समस्या को नियंत्रित करने में मदद करता है और भूख बढ़ाने में भी लाभकारी है। इसे सुबह के समय सेवन करना अधिक फायदेमंद माना जाता है। अनार पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और शरीर की कमजोरी दूर करने में भी सहायक होता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 01 Mar 2026 21:18:25 +0530</pubDate>
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<title>Winter Superfood: महिलाओं के लिए काले या सफेद तिल, जानें Health के लिए क्या है बेहतर</title>
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<description><![CDATA[ सर्दियों के मौसम में महिलाओं के शरीर को पोषण, ज्यादा गर्माहट और खास देखभाल की जरूरत होती है। आयरन कैल्शियम की कमी, हार्मोनल बदलाव, जोड़ों की समस्या और थकान इस मौसम में महिलाओं को अधिक प्रभावित करती है। ऐसे में तिल जैसे छोटे-से दिखने वाले बीज सर्दियों में महिलाओं के लिए किसी सुपरफूड से कम नहीं होते हैं। लेकिन अक्सर महिलाओं के मन में यह सवाल रहता है कि काले तिल और सफेद दोनों तिलों में से ज्यादा फायदेमंद कौन है।बता दें कि दोनों ही तिल महिलाओं की सेहत, सुंदरता और ऊर्जा के लिए फायदेमंद है। बस इन दोनों तिलों के फायदे अलग-अलग हैं। यह सही चुनाव, लाइफस्टाइल, शरीर की जरूरतों और उम्र पर निर्भर करता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सफेद और काले दोनों तिलों के फायदे के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Heart Attack का खतरा होगा खत्म, बस 2 महीने पिएं यह Ayurvedic Drink, Cholesterol होगा कंट्रोलकाले तिल के फायदेकाले तिल में मैग्नीशियम, आयरन, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके सेवन से महिलाओं को कई तरह के फायदे हो सकते हैं।काले तिल हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मददगार होते हैं।यह बालों की ग्रोथ को सपोर्ट करने के साथ हेयर फॉल को कम करते हैं।काले तिल के सेवन से शरीर में एनर्जी और गर्माहट को बढ़ाते हैं।थकान, आयरन की कमी या PCOS से जुड़ी समस्याएं में काले तिल खास लाभकारी होते हैं।काले तिल बिना छिले होते हैं, इसलिए इनमें मिनरल्स की मात्रा थोड़ी ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं।सफेद तिल के फायदेबता दें कि सफेद तिल में हेल्दी फैट्स, कैल्शियम और हड्डियों को मजबूत करने वाले मिनरल्स का का अच्छा स्त्रोत पाया जाता है। सफेद तिल को खाने से शरीर को इसके कई फायदे मिलते हैं।सफेद तिल हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और बोन डेंसिटी को बढ़ाते हैं।महिलाओं की ओवलऑल हेल्थ के लिए सफेद तिल फायदेमंद होते हैं। यह स्किन की नमी और जोड़ों की सेहत में भी सुधार करते हैं।बच्चों, बुजुर्गों और कैल्शियम की कमी वाले लोगों को अपनी डाइट में सफेद तिल शामिल करना चाहिए।आप सफेद तिल को लड्डू, चटनी और सलाद के रूप में आसानी से डाइट में शामिल कर सकते हैं।कौन से तिल चुनें काले या सफेदकाले और सफेद दोनों ही तिल सेहत के लिए फायदेमंद हैं, तो डाइट में किसे शामिल करना चाहिए। ऐसे में आपके शरीर की जरूरतों और सेहत से जुड़ी समस्याओं पर यह निर्भर करता है कि आपको कौन से तिल अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। क्योंकि हर तिल का अपना अलग पोषण और फायदा होता है। इसलिए सही चुनाव करना जरूरी है।शरीर में आयरन की कमी, लगातार थकान महसूस होना और बालों का झड़ना आदि की समस्या होने पर आपको अपनी डाइट में काले तिल शामिल करना चाहिए। काले तिल आयरन, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंस से भरपूर होते हैं। ऐसे में इनका सेवन करने से खून की कमी दूर होती है और एनर्जी बढ़ती है।वहीं हड्डियों की कमजोरी, कैल्शियम की कमी और महिलाओं की सेहत के लिए सफेद तिल फायदेमंद होती है। इनमें कैल्शियम और हेल्दी फैट्स का अच्छा स्त्रोत पाया जाता है, जोकि हड्डियों को मजबूत बनाने और जोड़ों की सेहत को सुधारने में मदद करता है।इसके अलावा संतुलित पोषण, स्वास्थ्य और सर्दियों में गर्माहट के लिए आपको अपनी डाइट में सफेद और काले दोनों तिल शामिल करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 01 Mar 2026 21:18:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Iftar के बाद होती है एसिडिटी&#45;सिरदर्द? Doctor की इन Health Tips से पूरे Ramadan 2026 रहें फिट</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर रमजान के दौरान लोग दिन भर भूखा रहने के बाद इफ्तार में भारी, तला-भुना और बहुत ज्यादा मीठा खाना खा लेते हैं। यह आदत सेहत को नुकसान पहुंचाती है। मशहूर डॉक्टर मल्हार गणला ने सोशल मीडिया पर बताया है कि इफ्तार का असली मकसद सिर्फ पेट भरना नहीं, बल्कि शरीर में पानी, नमक और प्रोटीन की कमी को पूरा करना होना चाहिए। गलत खान-पान से न केवल एसिडिटी और सिरदर्द होता है, बल्कि अगले दिन सुस्ती और बेचैनी भी बनी रहती है। डॉक्टर ने इफ्तार के लिए एक सही वैज्ञानिक क्रम बताया है जिसे अपनाकर आप पूरे महीने फिट रह सकते हैं।गुनगुने पानी और नमक से शुरुआत करेंरोजा खोलते समय शरीर को सबसे पहले पानी और नमक की जरूरत होती है। डॉक्टर गणला के अनुसार, आप नींबू पानी या सूप ले सकते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि पानी हल्का गुनगुना हो। बहुत ठंडा पानी पीने से अचानक एसिडिटी हो सकती है, जिससे सिरदर्द शुरू हो जाता है। उपवास के दौरान हमारा मुख्य लक्ष्य शरीर में एसिडिटी को बढ़ने से रोकना होना चाहिए। इसे भी पढ़ें: Ramadan 2026: आ रही है &#039;लैलत अल-कद्र&#039;, पढ़ें ये Special Dua, अल्लाह कबूल करेगा हर मुराद10 मिनट का ब्रेक लेना बहुत जरूरी हैपानी और नमक लेने के तुरंत बाद भारी खाना न खाएं। मुख्य भोजन से पहले 10-15 मिनट का गैप जरूर दें। अगर आप सीधे तला-भुना या नॉनवेज खाने लगेंगे, तो आप जरूरत से ज्यादा कैलोरी ले लेंगे। यह छोटा सा ब्रेक शरीर को शांत करता है और आपको ओवरईटिंग यानी जरूरत से ज्यादा खाने से बचाता है।कैसा हो आपका सही आहार?ब्रेक के बाद अपने खाने में, क्लीन प्रोटीन जैसे 120-150 ग्राम ग्रिल्ड चिकन या अंडे शामिल करें। साथ ही चावल या रोटी जैसे अच्छे कार्बोहाइड्रेट लें। डॉक्टर गणला सलाह देते हैं कि समोसे और पकौड़ों जैसे ज्यादा तेल वाले खाने से बचें। इसकी जगह पकी हुई सब्जियां और सलाद खाएं। जो लोग इफ्तार के बाद वर्कआउट करते हैं, वे प्रोटीन शेक या ओट्स भी ले सकते हैं।मीठे का सेवन सिर्फ स्वाद के लिए, भूख के लिए नहींज्यादातर लोग इफ्तार में पेट भरने के लिए बहुत ज्यादा मीठा खा लेते हैं। डॉक्टर के अनुसार, मीठा सिर्फ स्वाद के लिए थोड़ा सा खाना चाहिए, भूख मिटाने के लिए नहीं। मीठे को हमेशा खाने के अंत में रखें। तले हुए स्नैक्स और फ्रूट जूस से बचें क्योंकि ये शरीर में शुगर लेवल को एकदम से बढ़ा देते हैं। इसे भी पढ़ें: Ramadan 2026: रमजान में सिर्फ परंपरा नहीं, Health का खजाना है खजूर, जानें इसके 5 Amazing Benefitsपानी की कमी को ऐसे करें पूरासेहतमंद रहने के लिए इफ्तार से सहरी के बीच करीब 2.5 से 3.5 लीटर पानी या तरल पदार्थ पिएं। एक साथ बहुत सारा पानी पीने के बजाय धीरे-धीरे पिएं। अगर ज्यादा पसीना आता है, तो इलेक्ट्रोलाइट का इस्तेमाल करें। याद रखें, सही तरीका यही है: पहले खजूर और पानी, फिर थोड़ा ब्रेक, उसके बाद प्रोटीन और कार्ब्स वाला खाना और आखिर में जरा सा मीठा खाएं।



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<pubDate>Sun, 01 Mar 2026 21:18:24 +0530</pubDate>
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<title>Ramadan 2026 । पीरियड्स में रोजा रखने पर क्या कहते हैं Islam के Rules?</title>
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<description><![CDATA[ रमजान के दौरान इबादत का सफर जितना पुरुषों के लिए है, उतना ही महिलाओं के लिए भी है। लेकिन महिलाओं को हर महीने पीरियड्स जैसी प्राकृतिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या इन दिनों में रोजा रखना चाहिए? इस्लाम ने महिलाओं की सेहत और सुविधा का खास ख्याल रखते हुए पीरियड्स के दौरान रोजा और नमाज से छूट दी है। यह कोई सजा नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ से दी गई एक राहत है ताकि शरीर पर ज्यादा बोझ न पड़े।नियम क्या कहता है?इस्लामी शरीअत के मुताबिक, पीरियड्स के दिनों में महिलाओं के लिए रोजा रखना जरूरी नहीं है। इन दिनों में जो रोजे छूट जाते हैं, उन्हें रमजान खत्म होने के बाद किसी भी समय पूरा (कजा) किया जा सकता है। जैसे ही पीरियड्स खत्म हों, महिला को पाक होने के लिए गुस्ल (पवित्र स्नान) करना चाहिए और फिर से अपनी इबादत और रोजे शुरू कर देने चाहिए। अगर रोजे के दौरान ही पीरियड्स शुरू हो जाएं, तो रोजा उसी वक्त छोड़ देना चाहिए और बाद में उसकी भरपाई करनी चाहिए। इसे भी पढ़ें: Iftar के बाद होती है एसिडिटी-सिरदर्द? Doctor की इन Health Tips से पूरे Ramadan 2026 रहें फिटसेहत का ख्याल सबसे पहलेमेडिकल नजरिए से देखें तो पीरियड्स के दौरान शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे महिलाओं को दर्द, थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। ऐसे में पूरे दिन भूखा-प्यासा रहना सेहत को बिगाड़ सकता है। इस्लाम में इंसान की भलाई और स्वास्थ्य को हमेशा ऊपर रखा गया है, इसीलिए दुनिया का कोई भी कोना हो, मुस्लिम महिलाएं इस प्राकृतिक नियम का पालन सहजता से करती हैं। इसे भी पढ़ें: Ramadan Diet: ईद तक दिखना है फिट? Health Expert का ये सीक्रेट प्लान घटाएगा 5 किलो वजनबिना रोजा रखे भी मिल सकता है सवाबभले ही पीरियड्स के दिनों में नमाज और रोजा मना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि महिलाएं इबादत नहीं कर सकतीं। वे अल्लाह का जिक्र कर सकती हैं, दुआएं मांग सकती हैं, धार्मिक किताबें पढ़ सकती हैं और गरीबों की मदद या दान-पुण्य (सदका) कर सकती हैं। इन नेक कामों के जरिए वे पीरियड्स के दौरान भी रमजान की बरकतों और सवाब का हिस्सा बनी रह सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 01 Mar 2026 21:18:23 +0530</pubDate>
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<title>Ramadan 2026: रमजान में सिर्फ परंपरा नहीं, Health का खजाना है खजूर, जानें इसके 5 Amazing Benefits</title>
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<description><![CDATA[ इस्लाम में रमजान को पाक महीना माना जाता है। रमजान के दौरान अल्लाह की इबादत, संयम और सेहत के लिए खास संगम है। इस दौरान लोग दिनभर रोजा रखते हैं जब इफ्तार का समय आता है, तो सबसे पहले खजूर ही खाया जाता है। इसको परंपरा नहीं बल्कि हेल्दी आदत भी मानी जाती है। खासतौर पर खजूर शरीर को तुरंत एनर्जी प्रदान करता है और लंबे समय तक भूखे रहने के बाद होने वाली कमजोरी को भी दूर करता है। हेल्थ एक्सपर्ट भी बताते हैं कि, यदि आप पूरे रमजान में रोजाना खजूर खाते हैं, तो इसका असर आपकी एनर्जी, डाइजेशन, हार्ट हेल्थ और ओवरऑल वेलनेस पर साफ दिखाई देता है। इसमें मौजूद नेचुरल शुगर, फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स शरीर को पोषण देता है। रोजे के दौरान होने वाली कई आम परेशानियों को कम करता है। इसके अलावा, खजूर खाने के इफ्तार की शुरुआत हल्की और पौष्टिक रहती है, जिससे आप ओवरईटिंग से भी बचते हैं। आइए आपको बताते हैं 1 महीने तक खजूर खाने से शरीर क्या फायदे मिलते हैं।शरीर को एनर्जी मिलती हैजब आप रोजा खोलते है तो खजूर का सेवन जरुर करते हैं, यह थकान को तुरंत कम करती है। क्योंकि खजूर में सबसे ज्यादा विटामिन्स का स्रोत पाया जाता है। इसमें विटामिन A और C के साथ बी1, बी2, बी3, बी5 भी पाए जाते हैं। खजूर में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले शुगर जैसे कोज, फ्रक्टोज और सुक्रोज तुरंत एनर्जी देते हैं। रमजान के दौरान खजूर खाने से शरीर को जरुरी पोषक तत्व मिलते हैं और अलग से सप्लीमेंट्स की जरुरत कम हो सकती है।रोजा रखने से कब्ज नहीं होगीअक्सर लंबे समय से खाली पेट रहने के कारण रमजान में कब्ज की समस्या होने लगती है। खजूर में पाए जाने वाले फाइबर डाइजेशन को बेहतर बनाता है और आंतों की सफाई में मदद करता है। इफ्तार में खजूर खाने से डाइजेशन सही रहता है और कब्ज से राहत प्राप्त होती है।दिल का रखता है ख्यालखजूर में पर्याप्त मात्रा में फाइबर और पोटैशियम पाया जाता है, जो दिल को हेल्दी रखता है। पोटैशियम ब्लड प्रेशर को संतुलित रखता है और हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करता है। रोजाना खजूर खाने से दिल संबंधित समस्याओं का खतरा कम होता है।मूड भी अच्छा रहता हैखजूर में विटामिन B कॉम्प्लेक्स होता है, जो ब्रेन को एक्टिव रखता है और रोजे के दौरान चिड़चिड़ापन कम करता है।ओवरईटिंग से बचाता हैअगर आप इफ्तार से पहले खजूर खाते हैं तो भूख कंट्रोल रहती है, जिससे ज्यादा खाने से होने वाली गैस, एसिडिटी और अपच की समस्याओं से बचा जाता है।रमजान में खजूर का खाना क्यों खास है?खजूर एक तरह से नेचुरल सुपरफूड माना जाता है, जो शरीर को एनर्जी, फाइबर और जरुरी मिनरल्स देता है। यदि आप पूरे रमजान में प्रतिदिन 2-3 खजूर खाती हैं, तो आपको एनर्जी मिलेगी और डाइजेशन भी बेहतरीन रहता है व सेहत भी बढ़िया रहता है। गौरतलब है कि खजूर फायदेमंद हैं लेकिन इसको सीमित मात्रा में खाएं।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 22:04:07 +0530</pubDate>
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<title>Fatty Liver: Fatty Liver बना &amp;apos;Silent Killer&amp;apos;, आपकी ये 4 आदतें बन सकती हैं Liver Failure का कारण</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में फैटी लिवर एक बड़ी बीमारी बन चुकी है। जो गलत लाइफस्टाइल और खानपान के कारण तेजी से पैर पसार रहा है। अक्सर लोग लिवर में सूजन या हल्की चर्बी को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यह लापरवाही आगे चलकर लिवर सिरोसिस या लिवर फेलियर जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा कर सकती है। जब लिवर अपनी क्षमता से ज्यादा फैट जमा करने लगता है, तो लिवर की कार्यक्षमता घटने लगती है। साथ ही शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलने बंद हो जाते हैं।बता दें कि यह स्थिति सिर्फ शराब पीने वालों तक सीमित नहीं है। बल्कि अब बच्चों और युवाओं में भी &#039;नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर&#039; आम हो गया है। ऐसे में अगर कोई इस परेशानी से जूझ रहा है, तो कुछ सामान्य लगने वाली गलतियां आपके लिवर को हमेशा के लिए बर्बाद कर सकती हैं। इन गलत आदतों को समय रहने पहचानना और सुधारना आपकी सेहत को ठीक कर सकता है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: कब्ज से हैं परेशान, रात में भिगो दें ये 2 Superfoods, सुबह मिलेगा Instant Reliefफैटी मरीजों की ये आदतें हैं खतरनाकपैकेज्ड जूस और कोल्ड ड्रिंक्स में मौजूद चीनी लिवर में सीधे फैट के रूप में जमा होती है।बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर्स या सप्लीमेंट्स लेने से लिवर पर दबाव बढ़ता है।देर रात को भोजन करना रात के समय मेटाबॉलिज्म को स्लो कर देता है। जिससे खाया हुआ फैट सीधे लिवर में स्टोर होता है।फिजिकल एक्टिविटी की कमी से लिवर के चारों ओर चर्बी जमा होने लगती है।इलाज न होने पर जा सकती है जानफैटी लिवर एक खतरनाक बीमारी है। अगर शुरूआती &#039;स्टेज 1&#039; पर ध्यान न दिया जाए, तो यह &#039;स्टीटोहेपेटाइटिस&#039; में बदल जाता है। जहां पर लिवर की कोशिकाएं मरने लगती हैं और घाव होने लगते हैं। अंतिम चरण में यह &#039;सिरोसिस&#039; का रूप से ले लेता है। जिसका एक मात्र समाधान लिवर ट्रांसप्लांट होता है। यह स्थिति शरीर के अन्य अंगों जैसे किडनी और हृदय को प्रभावित कर सकती है। यह जान जाने के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।करें ये बदलावआप रिफाइंड कार्ब्स की जगह साबुत अनाज और हरी पत्तेदार सब्जियों को डाइट में शामिल करना चाहिए।दिन में कम से कम 30 मिनट टहलें या कार्डियो एक्सरसाइज करनी चाहिए। यह लिवर फैट को कम करता है।बॉडी के कुल वजन का सिर्फ 5-7% कम करने से भी लिवर की सूजन कम हो सकती है।शराब लिवर कोशिकाओं के लिए जहर की तरह काम करती है। इसलिए शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।जानिए क्या करेंबता दें कि फैटी लिवर ऐसी बीमारी नहीं है, जिसको ठीक न किया जा सके। लेकिन इस समस्या से निजात पाने के लिए पुरानी आदतों का त्यार करना होगा। अक्सर हम पेट के बाहरी घेरे की चिंता करते हैं, लेकिन शरीर के भीतर सबसे महत्वपूर्ण &#039;फिल्टर&#039; यानी लिवर को भूल जाते हैं। इसलिए अपनी लाइफस्टाइल में सुधार करें। आपके द्वारा बरती गई छोटी सी सावधानी आपके हॉस्पिटल के चक्करों से बचा सकती है।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 22:04:06 +0530</pubDate>
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<title>Blood Purifier: Healthy Life के लिए क्यों जरूरी है Blood Purification, एक्सपर्ट्स से जानें ये सबसे असरदार Natural उपाय</title>
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<description><![CDATA[ शरीर को हेल्दी रखने के लिए सभी अंगों का ठीक तरह से काम करते रहना जरूरी है। इसके लिए जरूरी है कि शरीर का हर अंग को पर्याप्त मात्रा में शुद्ध रक्त मिलता रहे। रक्त की शुद्धता का मतलब यह विषाक्तता से मुक्त रहे। डाइट में गड़बड़ी की वजह से समय के साथ ब्लड में कई विषाक्त पदार्थ मिल जाते हैं, जिससे शरीर के कई अंगों में विषाक्तता होने का खतरा हो सकता है। आमतौर पर लिवर और किडनी जैसे पाचन तंत्र के अंग स्वाभाविक रूप से ब्लड को निरंतर फिल्टर करते रहते हैं।लेकिन ज्यादा विषाक्तता की वजह यह प्रोसेस बाधित हो जाती है। इसके लिए जरूरी है कि हम अपना डाइट ठीक रखें और कुछ ऐसी चीजों का सेवन करें, जो रक्त से विषाक्तता को कम करने में सहायता करती हों। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि रक्त की अशुद्धि से किस तरह की समस्याओं का खतरा होता है और इसको कैसे दूर किया जा सकता है।इसे भी पढ़ें: Fatty Liver: Fatty Liver बना &#039;Silent Killer&#039;, आपकी ये 4 आदतें बन सकती हैं Liver Failure का कारणखून साफ न होने के कारण होती हैं ये दिक्कतेंडाइट में गड़बड़ी की वजह से ब्लड की अशुद्धि बढ़ जाती है। जिसका हमारी स्किन से लेकर शरीर के कई अंगों पर असर हो सकता है।खून साफ न होने की वजह से लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता है। इसकी वजह से पाचन की समस्या बढ़ जाती है। इसके साथ ही मुंहासे-दाने और जलन बने रहना, स्किन में संक्रमण होना, चेहरे की चमक कम होना और थकान महसूस होना इस बात का संकेत हो सकता है कि आपका खून साफ नहीं है।अपनाएं ये उपायखूब पानी पिएंलिवर और किडनी के कार्यों को ठीक रखने के लिए अधिक पानी पीना चाहिए। पर्याप्त पानी पीने से ब्लड शुद्ध होता है और इसमें मौजूद अशुद्धि को बाहर करता है। इसलिए आपको रोजाना इतना पानी पीना चाहिए, जिससे करीब 6 कप मूत्र का उत्पादन हो सके।फायदेमंद है नींबू का रसब्लड और पाचन तंत्र दोनों को साफ करने में नींबू का रस मदद कर सकता है। यह नेचुरल रूप से अम्लीय होता है, जो पीएच लेवल को कम करने और ब्लड से विषाक्त पदार्थों को निकालने में उपयोगी होता है।शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर करने के लिए रोजाना गुनगुने पानी में ताजा नींबू का रस मिलाकर सुबह खाली पेट पीना चाहिए। यह ब्लड को साफ करने में लाभकारी होता है।हल्दी से मिलेगा लाभहल्दी में करक्यूमिन नामक यौगिक पाया जाता है, जो सूजन और संक्रमण के जोखिमों से बचाने में लाभकारी है। आयुर्वेद के मुताबिक एक कप गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पीना चाहिए।यह लिवर के कार्यों को बेहतर बनाता है और शरीर से विषाक्तता को कम करने में भी मदद करता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 22:04:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: अब Iron Pills की नहीं जरूरत, ये 3 चीजें बनाएंगी Body को फौलादी, आजमाएं ये घरेलू नुस्खे</title>
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<description><![CDATA[ शरीर में विटामिन, मिनरल और हार्मोन या अन्य चीज की कमी होने पर इसका सीधा असर बॉडी फंक्शन पर देखने को मिलता है। वहीं इसके लक्षण भी साफ नजर आते हैं। शरीर में खून की कमी होने पर महिलाओं को कमजोरी और थकान महसूस होती है। आयरन एक जरूरी मिनरल है, जो हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है। लेकिन जब शरीर में आयरन की कमी होती है, तो शरीर के अंगों तक सही से ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है।वहीं जब शरीर में हीमोग्लोबिन सही लेवल पर नहीं होता है, तो खून की कमी होती है। एनीमिया के लक्षणों को अक्सर महिलाओं द्वारा नजरअंदाज किया जाता है। लेकिन लंबे समय तक शरीर में खून की कमी बनी रहती है, तो यह सही नहीं माना जाता है। खून की कमी को दूर करने के लिए आपको अपनी डाइट में आयरन रिच फूड्स शामिल करना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Blood Purifier: Healthy Life के लिए क्यों जरूरी है Blood Purification, एक्सपर्ट्स से जानें ये सबसे असरदार Natural उपायडाइट में शामिल करें आयरन रिच फूड्सहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो शरीर में खून की कमी को दूर करने के लिए डाइट में आयरन से भरपूर चीजों को शामिल करना चाहिए। कद्दू के बीज, चुकंदर, मेथी दाने और दालों में भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है।चुंकदर में विटामिन सी और आयरन भरपूर पाया जाता है। यह हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ाने में मदद करती है और इसमें मौजूद विटामिन सी की वजह से आयरन शरीर के बेहतर तरीके से अब्जॉर्ब भी होता है।वहीं कद्दू के बीजों में फोलेट होता है, जोकि रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन में मदद करते हैं।शरीर में आयरन के अब्जॉर्बशन के लिए आपको डाइट में विटामिन सी रिच फूड्स शामिल करना चाहिए। आपको डाइट में ब्रॉकली, पपीता और अनार को शामिल करना चाहिए। अनार में आयरन के साथ विटामिन सी काफी मात्रा में पाया जाता है।वहीं ओमेगा- 3 रिच फूड्स जैसे फ्लैक्स सीड्स, अखरोट और चिया सीड्स शरीर में ताकत बनाए रखने का काम करते हैं।इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए आपको जिंक से भरपूर चीजों को सेवन करना चाहिए। इसमें नट्स, टोफू, कद्दू के बीज और ओट्स आदि शामिल हैं।बेरीज, दालचीनी, कच्ची हल्दी और हरी पत्तेदार सब्जियों को डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए। यह सभी चीजें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है और गट हेल्थ में सुधार होता है और शरीर में खून की कमी दूर होती है।हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि अगर महिलाएं इन चीजों को अपनी डाइट में शामिल करती हैं। तो शरीर में ताकत बनी रहेगी, खून की कमी दूर होगी, इम्यूनिटी मजबूत होगी और गट हेल्थ बेहतर होगी। साथ ही बीमारियों से भी बचाव होगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 22:04:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Alert: ऑफिस का AC बन सकता है आंखों का दुश्मन, Dry Eye Syndrome का खतरा!</title>
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<description><![CDATA[ धीरे-धीरे मौसम बदल रहा है और गर्मी का एहसास भी होने लगा है। ऑफिस में भी एयर कंडीशनर (AC) चलने लगी है। ज्यादातर लोग ऑफिस में लंबे समय तक AC में बैठने लगे हैं, तो इससे कई लोगों को आंखों में जलन, चुभन और सूखापन महसूस होने लगता है। वैसे यह समस्या काफी आम है, हालाकिं इसे अक्सप नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। वरना आगे चलकर ड्राई आई सिंड्रोम की परेशानी होने लगती है। इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण भी हो सकते हैं, जिनको समझना काफी जरुरी है। आइए आपको बताते हैं एसी में घंटों बैठने से क्या होता है।AC कमरे की नमी कम कर देता है कमएसी चलने का सबसे अधिक असर कमरे की नमी पर दिखाई देता है। एयर कंडीशनर वातावरण की अतिरिक्त नमी को सोख लेता है, जिससे हवा शुष्क हो जाती है। जब हवा में नमी कम हो जाती है, तो आंखों की सतह पर मौजूद आंसुओं की परत जल्दी सूखने लगती है। यही आंसू आंखों को नमी प्रदान करते हैं और उन्हें सुरक्षित रखते हैं। इनके तेजी से सूख जाने पर आंखों में रूखापन, जलन और असहजता महसूस होने लगती है।एसी वाले वातावरण में लगातार बैठने पर ठंडी और ड्राई हवा आंखों पर सीधे असर डालती है। खासकर अगर आप सीधे एसी के नीचे या वेंट के सामने बैठी हैं, तो हवा का प्रवाह आंखों की नमी को और भी तेजी से कम करता है। जिससे आपकी आंखों में जलन, रेडनेस और कभी-कभी धुंधला दिखना भी शुरु हो सकता है। ज्यादा स्क्रीन टाइम करता है कंडीशन को खराबयह समस्या ऑफिस में कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल स्क्रीन का लगातार इस्तेमाल से बढ़ सकता है। स्क्रीन देखते समय हमारी पलकें सामान्य से कम झपकती हैं, जिससे आंखों में आंसू बनने और फैलने की प्रक्रिया बाधित होती है। वहीं, एसी की सूखी हवा और कम ब्लिंक करना मिलकर आंखों को और भी ज्यादा ड्राई बना देता है, जिसके कारण से जलन और भारीपन महसूस हो सकता है।बंद कमरों में एलर्जन का असरआमतौर पर एसी वाले ऑफिस में हवा का नेचुरल सर्कुलेशन कम होता है। जिससे धूल, एलर्जन और छोटे कण हवा में घूमते रहते हैं, जो आंखों में जाकर जलन और खुजली उत्पन्न कर देते हैं। जिन लोगों को पहले से एलर्जी या ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या होती है, उनके लिए यह स्थिति और ज्यादा परेशानी का कारण बन सकती है।किन लोगों को खतरा रहता है- लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने पर- कॉन्टैक्ट लेंस यूजर्स- एलर्जी व साइनस वाले लोग- पहले से ड्राई आई सिंड्रोम से परेशान लोग- 30+ उम्र के बाद महिलाएं (हार्मोनल कारणों से)नजरअंदाज करने पर क्या हो सकता है?यदि समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या आगे चलकर क्रॉनिक ड्राई आई सिंड्रोम का रूप ले सकती है। इसके कारण नजर धुंधली होने लगती है, आंखों में लगातार दर्द बना रह सकता है और तेज रोशनी से परेशानी बढ़ सकती है। साथ ही, आंखों में बार-बार संक्रमण होने की संभावना भी काफी बढ़ जाती है।किस तरह से पहचाने कि एसी आंखों को नुकसान पहुंचा रही है?- ऑफिस में ज्यादा जलन, घर में कम- आंखों में रेत जैसा एहसास- स्क्रीन देखते समय भारीपन- बार-बार आंखें मलने का मन करना ]]></description>
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<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 22:04:00 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: Female Fertility के लिए &amp;apos;चमत्कार&amp;apos; हैं ये 3 चीजें, Ghee के साथ ऐसे खाएं, जल्द मिलेगी Good News</title>
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<description><![CDATA[ जब कोई कपल पेरेंट्स बनने की प्लानिंग करता है। तो हर किसी के लिए यह अनुभव अलग हो सकता है। कई महिलाओं के लिए कंसीव करना मुश्किल होता है, तो कुछ महिलाओं के लिए आसान होता है। ऐसा कई कारणों से हो सकता है। कई महिलाओं को अपने ओव्युलेशन डेज के बारे में नहीं पता होता है। वह नहीं जानती हैं कि किन दिनों इंटिमेट होने से प्रेग्नेंसी के चांसेज बढ़ते हैं। तो वहीं कुछ मामलों में हेल्थ कंडीशन भी कंसीव करने की राह में अड़चन पैदा करता है।सही खानपान या लाइफस्टाइल अनियमित न होने से महिला और पुरुषों की फर्टिलिटी पर असर पड़ता है। वहीं महिलाओं के खानपान का सीधा असर उनके हार्मोन्स और शरीर में जरूरी न्यूट्रिशन के लेवल पर होता है। जिस कारण फर्टिलिटी भी प्रभावित होती है। महिलाओं की हेल्थ के लिए घी, खजूर और अंजीर तीनों चीजें फायदेमंद होते हैं। इससे फर्टिलिटी में सुधार हो सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इसके फायदे के बारे में बताने जा रहे हैं और साथ ही यह भी जानेंगे कि इसको डाइट में कैसे शामिल करना है।इसे भी पढ़ें: Yoga For Fatty Liver: Fatty Liver की समस्या का रामबाण इलाज, ये 5 Yoga आसन देंगे Liver को नई जिंदगीफर्टिलिटी सुधारने में मदद कर सकता है ये देसी नुस्खाहेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक यह देसी नुस्खा फर्टिलिटी के लिए एक टॉनिक की तरह काम करता है। इसके लिए आपको 1 चम्मच घी, 1 भीगा हुआ अंजीर और खजूर सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ लें।बता दें कि खजूर में विटामिन बी6, फाइटोएस्ट्रोजन, आयरन और मैग्नीशियम पाया जाता है। यह ओव्युलेशन को सुधारने, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने और हार्मोनल बैलेंस को बनाए रखने में मदद करता है।वहीं खजूर रिप्रोडक्टिव हेल्थ को मजबूत बनाता है। यह पीरियड्स से जुड़ी दिक्कतों को दूर करता है और फर्टिलिटी को सुधारने में सहायता करता है। यह शरीर को कंसीव करने के लिए तैयार करता है।अंजीर महिलाओं की फर्टिलिटी को सुधारने में सहायता करता है। इसमें आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। यह हार्मोन्स को बैलेंस करने में सहायता करता है। इसके सेवन से गर्भाशय की हेल्थ बेहतर होती है और रिप्रोडक्टिव सेल्स को नुकसान पहुंचाने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से लड़ने में शरीर को ताकत मिलती है।इसके साथ ही घी हेल्दी फैट्स से भरपूर होता है। यह पीरियड्स को नियमित करने के साथ रिप्रोडक्टिव टिश्यूज को पोषण देने का काम करता है। इसके सेवन से कंसीव करने की क्षमता बढ़ती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 22:54:11 +0530</pubDate>
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<title>खराब Vaginal pH Level दे सकता है गंभीर Infection को दावत, इन 5 गलतियों से आज ही बचें</title>
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<description><![CDATA[ बिजी लाइफस्टाइल के चलते महिलाएं अपनी खुद की केयर करना भूल ही जाती हैं। स्किन केयर पर तो ध्यान देती हैं लेकिन वजाइना की साफ-सफाई में कई बार लापरवाही कर देती हैं। योनि का pH संतुलन ठीक रहना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह उसकी सेहत से जुड़ा होता है। कई बार गलत जीवनशैली, अस्वस्थ आदतें या साफ-सफाई में लापरवाही के कारण योनि का pH स्तर असंतुलित हो सकता है, जिससे समस्याएं पैदा हो सकती हैं। बता दें कि, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ की मानें, तो हेल्दी योनि का पीएच लेवल, आमतौर पर एसडिक (3.8 से 4.5) होता है, जो काफी जरुरी है। NCBI वेबसाइट में प्रकाशित एक लेख में बताया है कि  योनि का पीएच लेवल प्रोटेक्टिव, एसिडिक माहौल बनाता है, जो योनि में नुकसानदायक बैक्टीरिया और यीस्ट को बढ़ने से रोकता है।गौरतलब है कि इससे कई तरह के संक्रमण, बैक्टीरियल वेजिनोसिस और थ्रश जैसी समस्याओं के रिस्क कम हो जाते हैं। यदि आप इन गलतियों के बारे में नहीं जानते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है।गलतियां जो योनि का पीएच लेवल बढ़ा सकती हैं- जब आप अपनी योनि की सफाई नहीं करते हैं, तो आपको काफी दिक्कत हो सकती है। यह एकदम सत्य है कि वजाइना सेल्फ क्लीनिंग ऑर्गन है। ध्यान रहे है कि योनि की सफाई के लिए तरह-तरह के प्रोडक्ट यूज नहीं करने चाहिए, लेकिन योनि की क्लीनिंग को पूरी तरह इग्नोर किया जाए, यह सही नहीं है। रोजाना सादे पानी से योनि की सफाई करना चाहिए।- कुछ महिलाएं तो ऐसी हैं कि जो अपने प्राइवेट पार्ट को ओवर वॉश करती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट ने माना है कि अधिक वजाइना की सफाई करना ठीक नहीं है। इससे पीएचल लेवल बिगड़ सकता है। इसके अलावा, स्प्रे या सेंटेड पैड्स का यूज नहीं करना चाहिए। ऐसा करने पर संक्रमण बन जाएगा और पीएच लेवल बिगड़ जाएगा।- टाइट फिटिंग स्कीनी जींस या सिंथेटिक कपड़े पहनना त्वचा के लिए अच्छा नहीं माना जाता। खासकर योनि क्षेत्र में ऐसे कपड़े पहनने से पसीना बाहर नहीं निकल पाता और त्वचा पर ही जमा रह जाता है। इससे नमी बढ़ती है,जो असहजता और संक्रमण का कारण बन सकती है।- पीरियड्स के दौरान महिलाओं को योनि की स्वच्छता पर खास ध्यान देना चाहिए। कुछ महिलाएं लंबे समय तक एक ही पैड का उपयोग करती रहती हैं, जो बिल्कुल सही नहीं है। ऐसा करने से बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके कारण योनि का pH संतुलन भी प्रभावित हो सकता है।स्मोकिंग करने से भी रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है। यहां तक कि योनि का पीएच लेवल भी प्रभावित होती है। योनि का पीएच लेवल कैसे मैनेज करें?- वजाइना की सफाई के लिए सादे पानी का यूज करें।- हमेशा कॉटन के अंडरवियर पहनें।- योनि के बैक्टीरिया मैनेज करने के लिए प्रोबायोटिक फूड लें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 22:54:10 +0530</pubDate>
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<title>नारियल के छिलके फेंकने की गलती न करें, जानें इसके हैरान करने वाले Amazing Health Benefits</title>
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<description><![CDATA[ नारियल का सेवन हम सभी करते हैं और इसको अलग-अलग तरीके से सेवन करते हैं। कई बार हम नारियल पानी पीते हैं, तो कभी कच्चा नारियल खाते हैं। यह हेल्थ के लिए अच्छा माना जाता है। लेकिन, क्या आप ने कभी नारियल के छिलकों का कभी इस्तेमाल किया है। नारियल के छिलको को बेकार समझकर फेंक देती हैं। दरअसल, नारियल के छिलके न्यूट्रिशन्स का पावर हाउस होते हैं। अगर आप इन्हें सही तरह से डाइट में शामिल करेंगी, तो इससे सेहत को कई फायदे मिल सकते हैं। आइए आपको बताते नारियल के छिलके कैसे फायदेमंद है।नारियल के छिलकों के सेहत के लिए फायदे- नारियल के छिलकों में एंटीऑक्सीडेंट्स, फाइबर और कई लाभदायक बायोएक्टिव कंपाउंड्स होते हैं। फेरुलिक और क्लोरोजेनिक एसिड जैसे पॉलीफेनॉल से भरपूर नारियल के छिलके ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से लड़ने में मदद करते हैं, जिससे डायबिटीज और हार्ट डिजीज जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है। - हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि इनमें एंटीमाइक्रोबेयिल गुण होते हैं, जिसकी वजह से ये गट हेल्थ के लिए सेफ होता है। - नारियल के छिलकों में डाइटरी फाइबर पाए जाते है। यह बाउल मूवमेंट में सुधार करते हैं और कब्ज को दूर करते हैं। इनमें एंटी-ऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो कि कई फलों से अधिक है। - ये फ्री रेडिकल्स को बेअसर करके स्किन को हेल्दी बनाते हैं और एजिंग के साइन्स को कम करता है।- यह मेटाबॉलिज्म के लिए भी फायदेमंद होते हैं। इनमें ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को रेगुलेट करने वाले गुण पाए जाते हैं। ये लिपिड प्रोफाइल को मैनेज करने में मदद कर सकते हैं। सूखे नारियल के छिलकों को डाइट में कैसे इस्तेमाल करें?- सूखे नारियल को डाइट में हिस्सा बनाने के लिए आप छिलकों को ग्रांइड करके इनका पाउडर बनाएं। इस पाउडर को आप स्मूदीज या सब्जियों में डाल सकती हैं। इनकी चाय भी काफी फायदेमंद है। - आप चाहे तो इन छिलकों को अदरक के साथ उबालकर इसकी चाय बनाएं। इससे आपका शरीर डिटॉक्स होगा और वजन भी कम होगा।- इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों के कारण इन्हें स्किन पर स्क्रब की तरह भी इस्तेमाल कर सकते हैं।- नारियल के छिलके इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं और लिवर हेल्थ के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन इनका ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। प्रेग्नेंसी में इनका इस्तेमाल बिना डॉक्टर की सलाह के इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 22:54:10 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: कब्ज से हैं परेशान, रात में भिगो दें ये 2 Superfoods, सुबह मिलेगा Instant Relief</title>
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<description><![CDATA[ स्वस्थ रहने के लिए रोजाना पेट का खुलकर साफ होना जरूरी होता है। हम में से बहुत सारे लोग इस बात को नहीं जानते हैं कि अधिकतर बीमारियों की जड़ पेट साफ न होना होती है। जब हमारी पेट सही से साफ नहीं होता है, तो शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। इससे शरीर में कई तरह की बीमारियां पनपने लगती हैं। पेट में भारीपन, कब्ज होने पर भूख न लगना, गैस, चिड़चिड़ापन और एसिडिटी बनी रहती है। डाइट में पानी और फाइबर की कमी, नींद न पूरी होना, फिजिकल एक्टिविटी कम होना, हार्मोनल बदलाव और तनाव की वजह से पेट सही से साफ नहीं होता है।कब्ज के कारण त्वचा से जुड़ी दिक्कतें भी होने लगती है। वहीं कई बार दिन भर थकान बनी रहती है। कब्ज दूर करने में डाइट का अहम रोल है। फाइबर से भरपूर चीजें खाने से पेट साफ होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 2 ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको पानी में भिगोकर खाली पेट खाने से सुबह आपका पेट झट से साफ हो जाएगा।इसे भी पढ़ें: Depression Symptoms: Depression के ये Warning Signs ना करें इग्नोर, आपकी Mental Health के लिए हो सकते हैं खतरनाकखाएं भीगे हुए मुनक्के और अंजीरहेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक कब्ज दूर करना का एक रामबाण नुस्खा है। रातभर 4 मुनक्के और 1 अंजीर को रात भर के लिए पानी में भिगो दें। फिर इसको खाली पेट खाएं और पानी को पी लें। इसका सेवन करने से पेट आसानी से साफ हो जाएगा।भीगे हुए मुनक्के और अंजीर का सेवन करने से न सिर्फ पेट साफ होता है। बल्कि डाइजेशन से जुड़ी दिक्कतें भी दूर होती है। इसका सेवन करने से आपके शरीर में ताकत भी बनी रहती है।यह बाउल मूवमेंट को बेहतर बनाने का काम करता है। अगर आप खाली पेट इन दोनों चीजों का सेवन करते हैं, तो इससे मल मुलायम होता है और आसानी से बाहर निकल जाता है। यह आंतों की सफाई करता है। एक्सपर्ट की मानें, तो मुनक्का और अंजीर खाने से न सिर्फ डाइजेशन बेहतर होता है, बल्कि इससे खून की कमी भी दूर होती है और कमजोरी नहीं महसूस होती है।अंजीर और मुनक्का खाने से हड्डियां मजबूत होती है। यह दोनों चीजें महिलाओं की पीरियड्स से जुड़ी दिक्कते दूर करती हैं। इसमें विटामिन्स, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें अगर आप सौंठ पाउडर और खजूर भी डालेंगी, तो शरीर में ताकत बनी रहेगी। वहीं इससे सर्दियों में कई बीमारियों से बचाव होगा। रात को पानी में भीगे हुए अंजीर और मुनक्के खाने से सुबह खुलकर पेट साफ हो जाएगा। जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्या परेशान करती है और कब्ज बनी रहती है। तो उनको इस समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 22:54:09 +0530</pubDate>
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<title>Depression Symptoms: Depression के ये Warning Signs ना करें इग्नोर, आपकी Mental Health के लिए हो सकते हैं खतरनाक</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में मानसिक सेहत पर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो हाल के वर्षों में मेंटल हेल्थ से संबंधित कई तरह की दिक्कतें तेजी से बढ़ती हुई देखी गई हैं। बड़ी संख्या में युवा इसका शिकार हो रहे हैं। यह एक गंभीर विषय है। हालांकि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लक्षणों के बारे में जानकारी होना जरूरी है। वहीं हर बार लो फील करना डिप्रेशन नहीं होता है।अवसाद या डिप्रेशन मेंटल हेल्थ की गंभीर समस्या है। ऐसा होने पर लगातार उदासी, सुस्ती लगने, काम में मन न लगने और निगेटिव विचारों के आते रहने की समस्या हो सकती है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है, जिसका समय पर इलाज होना जरूरी होता है। मानसिक सेहत के इस विकार का असर फिजिकल हेल्थ को भी प्रभावित कर सकती है। डिप्रेशन के लक्षण, चिंता-तनाव जैसी समस्याओं से मिलते-जुलते हैं। ऐसे में इसका अंतर करना जरूरी होता है।इसे भी पढ़ें: खराब Vaginal pH Level दे सकता है गंभीर Infection को दावत, इन 5 गलतियों से आज ही बचेंउदासी का मतलब डिप्रेशन नहींनौकरी छूट जाने, किसी प्रियजन की मृत्यु या किसी रिश्ते के टूटने पर निगेटिविटी और जीवन से संबंधित कई तरह की समस्याओं का अनुभव हो सकता है। लेकिन उदास होना डिप्रेशन होने जैसा नहीं है।वहीं चिंता-तनाव की स्थिति अगर लंबे समय तक बनी रहती है, तो मस्तिष्क में रासायनिक बदलाव और कुछ अन्य परिस्थितियां डिप्रेशन के खतरे को बढ़ाने वाली होती है।डिप्रेशन की पहचानभूख न लगना और वजन कम होना।पहले जिन एक्टिविटी में रुचि थी, उनमें अब रुचि न होना।अधिक नींद आना या फिर सोने में परेशानी होना।अक्सर उदास महसूस करना और समय के साथ इसके लक्षणों का बिगड़ने जाना।एनर्जी की कमी या अधिक थकान महसूस करना।खुद को बेकार या दोषी समझना।मृत्यु या आत्महत्या का मन में विचार आना।सोचने, निर्णय लेने या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होना।इलाज है जरूरीअगर आपको लंबे समय तक इस तरह की समस्या महसूस हो रही है, तो आपको मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। आप अपने किसी प्रियजन या मित्र से अपनी समस्याओं के बारे में बताएं। जिससे समय रहते स्थिति का अंदाजा लगाया जा सके।बता दें कि अवसाद एक गंभीर विकार है, तो आपके परिवार पर गंभीर निगेटिव असर डाल सकता है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो डिप्रेशन बदतर हो सकता है। जिसके परिणामस्वरूप व्यवहारिक, भावनात्मक और शारीरिक सेहत संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 22:54:09 +0530</pubDate>
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<title>Body Fat घटाने का Secret: नींद में भी बर्न होगी कैलोरी, बस ये Sleep Hacks अपनाएं</title>
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<description><![CDATA[ क्या आप ने सुना है कि जब शरीर नींद की अवस्था में होता है तो कैलोरी स्टोर करता है, बर्न नहीं करता। वैसे यह एक आम धारणा है, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। सोते समय कैलोरी बर्न करने की मात्रा अलग-अलग फैक्टर्स पर निर्भर करती है जैसे वजन, मेटाबॉलिज्म और हर रात की अच्छी नींद। आखिर हम सोते समय कितनी कैलोरी बर्न करते हैं और कैसे बेहतर रिजल्ट पा सकते हैं। तो आइए आपको बताते हैं-कितनी कैलोरी करते हैं खर्चअधिकांश लोग आठ घंटे की नींद के दौरान लगभग 400 कैलोरी खर्च कर लेते हैं, जबकि जिन व्यक्तियों की मांसपेशियां अधिक होती हैं या जिनका मेटाबॉलिज्म तेज होता है, वे करीब 500 कैलोरी तक जला सकते हैं। इससे यह समझा जा सकता है कि शरीर आराम करते समय भी ऊर्जा का निरंतर उपयोग करता रहता है।इन तरीकों से ज्यादा कैलोरी कर सकते हैं बर्न- रात 8 बजे के बाद खाना आपके मेटाबॉलिज्म को उतना स्लो नहीं करता है, जितना गलत खानपान। रात के समय या शाम के स्नैक्स में क्या ले रहे हैं उस पर जरुर ध्यान दें।- प्रतिदिन एक्सरसाइज करने और खासकर मसल्स को मजबूत बनाने वाले वर्कआउट करने से ज्यादा मात्रा कैलोरी बर्न करने में सहायक होती है। अगर आप सोने से पहले एक्सरसाइज करते हैं तो यह फायदा पहुंचा सकता है।- वजन कम करने से मेटाबॉलिज्म की रफ्तार बढ़ती है। अगर आप सोने से पहले कैफीन युक्त ड्रिंक लेने से नींद आने में दिक्कत हो सकती है। - प्रतिदिन सोने-जागने का नियमित रुल बनाएं। आप चाहे तो सोने से पहले कुछ एक्टिविटी कर सकते हैं। जिससे आप आसानी सो सकते हैं। - सोने से पहले भूलकर भी फोन, कंप्यूटर या टीवी को बंद कर सकते हैं। इन डिवाइसेस से निकलने वाली रोशनी आपकी नींद की रिदम को खराब कर सकती हैं। क्या सोते समय फैट भी होता है बर्नजब हम सोते हैं, तब भी शरीर कैलोरी बर्न करते हैं। यह ऊर्जा कभी शरीर में जमा वसा (फैट) से आती है तो कभी कार्बोहाइड्रेट से, जो ऊर्जा का प्रमुख स्रोत होते हैं। हालांकि, असल मायने इस बात के हैं कि आपकी कुल ऊर्जा जरूरत कितनी है, शरीर में मांसपेशियों की मात्रा कितनी है, आपकी नींद कितनी अच्छी है और आप दिनभर कितने सक्रिय रहते हैं। यही सभी कारक मिलकर तय करते हैं कि शरीर ऊर्जा का उपयोग किस तरह करेगा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 10:28:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Yoga For Fatty Liver: Fatty Liver की समस्या का रामबाण इलाज, ये 5 Yoga आसन देंगे Liver को नई जिंदगी</title>
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<description><![CDATA[ इन दिनों फैटी लिवर एक आम समस्या है, जो इन दिनों तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रही है। इस कारण जातक को अक्सर कई तरह की सेहत संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह एक गंभीर समस्या है, जिसको नजरअंदाज करने की गलती आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है। वहीं लंबे समय तक फैटी लिवर का इलाज न कराने से यह लिवर फेलियर की वजह बन जाता है।बता दें कि लिवर हमारे शरीर के अहम अंगों में से एक है। जोकि शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। इसके अलावा यह शरीर में और भी कई जरूरी काम करता है। इसलिए जरूरी है कि अपने लिवर का खास ख्याल रखा जाए, जिससे किसी गंभीर परिणामों बचा जा सके। फैटी लिवर से बचाव के लिए जरूरी है कि डाइट के साथ एक्सरसाइज और योग भी जरूरी है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसे आसनों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो फैटी लिवर से बचाव में मददगार हो सकते हैं।इसे भी पढ़ें: महिलाओं की Ovarian Health के लिए रामबाण हैं ये 3 Superfoods, 40 में भी बनी रहेगी Fertilityत्रिकोणासनयह एक ऐसा ट्राएंगल पोज है, जिसको फायदेमंद आसन माना जाता है। यह आसन बाहों, कोर और पैरों को मजबूत करने के अलावा कमर, कूल्हों और हैमस्ट्रिंग की स्ट्रेचिंग जैसे शारीरिक फायदे भी देता है। इस आसन को करने से पाचन बेहतर होता है।ऐसे करें ये आसनइस आसन को करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और फिर अपने पैरों को फैलाएं।अब दाहिने हाथ को नीचे पैर की ओर झुकाएं और बाएं हाथ को ऊपर की तरफ उठाएं।फिर 30 सेकेंड तक इस पोजिशन में बने रहें और फिर दूसरे हाथ से भी इस पोजिशन को ट्राई करें।स्फिंक्स आसनइस आसन को रीढ़ की हड्डी के लिए फायदेमंद माना जाता है। स्फिंक्स आसन को करने से स्पाइनल कार्ड मजबूत होती है। इस आसन का अभ्यास करने से कंधे, छाती और पेट स्ट्रेच होते हैं और पेट के अंगों की फंक्शनिंग बेहतर होती है। यह आसन थकान और तनाव दूर करने में भी मददगार है।ऐसे करें ये आसनइस आसन को करने के लिए पेट के बल लेट जाएं।अब कोहनियों को अपने कंधों के नीचे रखें और छाती को ऊपर की ओर उठाएं।इस दौरान आपको सीधा देखना है।इस पोजिशन में करीब 1 मिनट तक रहें और फिर पहले जैसी स्थिति में आ जाएं।भुजंगासनभुजंगासन को कोबरा पोज भी कहा जाता है। यह कई सारे फायदे पहुंचाता है। इसे करने से रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है, पोश्चर में सुधार होता है और पीठ में लचीलापन बढ़ता है।ऐसे करें ये आसनइस आसन को करने से पेट के बल लेट जाएं और दोनों हथेलियों को कंधों के नीचे रखें।फिर सांस लेते हुए छाती और सिर एक साथ ऊपर उठाएं।अब 30 सेकेंड तक इसी पोजिशन में रहें और इस प्रोसेस को 1 से 3 बार रिपीट करें।धनुरासनबता दें कि धनुरासन को बो पोज भी कहा जाता है। इस आसन को करने से पीठ और पेट की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। नियमित रूप के इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन में सुधार आता है। यह छाती और कंधों को खोलता है। पोश्चर में सुधार करता है, थकान, पाचन और तनाव कम करने में मदद करता है।ऐसे करें ये आसनइस आसन को करने के लिए पेट के बल लेट जाएं।फिर पैरों को मोड़कर टखनों को पकड़ें।इसके बाद अपनी छाती और पैरों को ऊपर की ओर उठाएं।अब 30 सेकेंड तक इस पोजिशन में रहें और फिर इसको 1-2 बार दोहराएं।अर्ध मत्स्येन्द्रासनयह आसन पाचन और रीढ़ की हड्डी के लिए फायदेमंद होता है। यह आसम तनाव से भी राहत दिलाने में मदद करता है। इसको करने से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ता है और पीठ दर्द से राहत मिलेती है। इस आसन के अभ्या से पेट के अंगों की फंक्शनिंग भी बेहतर होती है, जिससे पाचन में सुधार होता है और कब्ज की समस्या भी दूर होती है।ऐसे करें ये आसनइस आसन को करना बेहद आसान है। इस आसन को करने के लिए एक पैर को मोड़ें और दूसरे पैर को बाहर रखें।फिर शरीर को घुमाएं और पीछे की तरफ देखें।1 मिनट तक इसी तरह रुकें और फिर दूसरी तरफ भी ऐसा ही करें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 12:14:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>महिलाओं की Ovarian Health के लिए रामबाण हैं ये 3 Superfoods, 40 में भी बनी रहेगी Fertility</title>
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<description><![CDATA[ बिजी लाइफस्टाइल के चलते हम सभी खुद का ख्याल रखना ही भूल गए हैं। हमेशा कोई-कोई टेशन में लगे रहते हैं। कभी-कभी तो काम के चक्कर में खाना भी छोड़ देते है, लेकिन हेल्थ के बारे में बिल्कुल नहीं सोचते हैं। अगर आप खुद से प्यार करते हैं, तो हेल्थ को लेकर ध्यान देना भी काफी जरुरी है। असल में सेल्फ-लव का मतलब केवल मोमबत्तियां जलाना या चॉकलेट खाना नहीं है। असली सेल्फ लव का मतलब कुछ ऐसे फूड्स का चयन करना , जो आपकी ओवरीज (अंडाशय) को पोषण दें। इसका मतलब है हार्मोन्स का ख्याल रखना, अपने पीरियड्स साइकिल को समझना और अपने शरीर की जरुरतों को सुनना। महिलाओं के लिए ओवरीज की सेहत पूरे स्वास्थ्य का आईना है, चाहे वह फर्टिलिटी हो, अनियमित पीरियड्स, PCOS, एंडोमोट्रियोसिस, मूड ,स्विंग्स या हार्मोनल असंतुलन। इसलिए आज ही आप अपने डाइट में , ये 3 सुपरफूड्स को एड ऑन कर लें।अनार आप रोजाना अनार का सेवन कर सकते हैं। आयुर्वेद में अनार प्रजनन अंगों के लिए वरदान माना जाता है। यह प्रजनन अंगों में बढ़े हुए पित्त को संतुलित करता है और एंडोमेट्रियम (गर्भाश्य की परत) को हेल्दी रखने में मदद करता है। इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स एग्स की क्वालिटी को बेहतर बनाता है। इन समस्याओं में है सबसे बेहतर- पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग- खून की कमी (एनीमिया)- हार्मोनल असंतुलन के कारण होने वाले मुहांसे- फर्टिलिटी बढ़ाने में मददगारकैसे अनार का सेवन करें- रोजाना एक ताजा अनार खाएं- इसे सुबह के नाश्ते के साथ या दोपहर के खाने से पहले लेना सबसे अच्छा होता है।- बाजार में मिलने वाले डिब्बाबंद जूस से बचें, क्योंकि इनमें प्रिजर्वेटिव्स और चीनी होती है। मूंग दालछिलके वाली मूंग दाल ओवरीज के लिए सबसे फायदेमंद होती है। इस दाल को आयुर्वेद में सुपाच्य और हार्मोन फ्रेंडली प्रोटीन माना जाता है। यह इंसुलिन संवदेनशीलता को बढ़ाती है और पाचन तंत्र पर दबाव डाले बिना शरीर से आम को कम करने मदद करती है।इन समस्याओं में है सबसे बेहतर- PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम)- इंसुलिन रेजिस्टेंस (इंसुलिन प्रतिरोध)- पेट फूलने की समस्या हो या फिर ब्लोटिंग- हार्मोनल गड़बड़ी के कारण बढ़ने वाला वजनकैसे सेवन करें?- इसे मूंग दाल के चिल्ले या खिचड़ी के रुप में खाएं।- इस दाल को दोपहर के भोजन या डिनर के लिए सबसे अच्छा है।- इस दाल को जब भी बनाएं तीखा या बहुत अधिक मसालों वाला बनाने से बचें।  काले तिलकाले तिल के सेवन से प्रजनन क्षमता और पीरियड्स में पोषण प्रदान करता है। यह ओवेरियन टिश्यू और एग्स की क्वालिटी को सुधारने के लिए जाने जाते हैं। यह पीरियड के फ्लो को नियमित करने में बेहद असरदार हैं।इन समस्याओं में है सबसे बेहतर- अनियमित पीरियड्स- एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी- शरीर में कमजोरी और थकान महसूस होना- त्वचा का रूखापन- कंसीव करने में आ रही दिक्कतेंकैसे सेवन करें?- प्रतिदिन 1 छोटा चम्मच काले तिल लें।- इन्हें रातभर पानी में भिगो दें और सुबह अच्छी तरह चबाकर खाएं।- आप इन्हें चटनी या बिना चीनी वाले लड्डू में मिलाकर भी ले सकती हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 12:14:13 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: Aluminium Foil में पैक खाना है Slow Poison, Alzheimer के Risk से बचाएगा यह देसी तरीका</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में लगभग हर घर में एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल किया जाता है। चाहे रोटियां लपेटनी हों या फिर बच्चों का टिफिन पैक करना हो। इस तरह के हर काम के लिए एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें खाना लंबे समय तक गर्म रहता है। अगर आप कहीं बाहर जा रही हैं, तो फिर घर में खाने को लंबे समय तक रखना है, तो यह फॉयल सबसे आसान ऑप्शन होता है।लेकिन क्या आप जानती हैं कि जो चीज हमको सबसे ज्यादा आसान लगती है, तो वह पर्यावरण के साथ हमारे स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा रही होती है। वहीं कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जब मसालेदार, खट्टा या गरम खाना एल्युमिनियम फॉयल पैक किया जाता है, तो थोड़ी मात्रा में एल्युमिनियम खाने में मिल सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको देसी ऑप्शन बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Aluminium Foil से Cancer का खतरा? वायरल दावों का Health Expert ने किया पर्दाफाश इन बीमार‍ियों का बढ़ता है खतराअगर आप कभी-कभी एल्युमिनियम फॉयल में खाना रखती हैं, तो कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन रोजाना ऐसा करना आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा रहा होता है। अधिक एल्युमिनियम शरीर में जाने से नर्वस सिस्टम, दिमाग और हड्डियों से जुड़ी दिक्कतों का खतरा बढ़ सकता है। इसको अल्जाइमर जैसी समस्या से भी जोड़कर देखा जाता है। एल्युमिनियम फॉयल जल्‍दी गलता नहीं है और यह पर्यावरण के लिए भी सही नहीं माना जाता है।क्‍या है दूसरा ऑप्शनअगर आप यह सोच रही हैं कि अगर एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल न करें, तो फिर खाना किसमें पैक करें। ऐसे में आप एल्युमिनियम फॉयल की जगह केले के पत्ते का इस्तेमाल कर सकती हैं। पहले के समय में खाना सर्व करना हो या बाहर ले जाना हो, तो पुराने समय में केले के पत्ते का इस्तेमाल करती थीं। क्योंकि यह सबसे सेफ तरीका है।केले का पत्ता है सेफकेले के पत्ते में खाना रखना स्वास्थ्य को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है। साथ ही इससे खाने का स्वाद भी दोगुना हो जाता है। यह पूरी तरह से नेचुरल है और केले के पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। जोकि खाने को खराब होने से बचाता है।सेहत के लिए फायदेमंदकेले के पत्तों में कुछ नेचुरल कंपाउंड जैसे पॉलीफेनोल्स और विटामिन A और C आदि पाए जाते हैं। ऐसे में जब आप इसमें गरम खाना रखते हैं, तो यह गुण खाने में भी पहुंच जाते हैं। यह गुण डाइजेशन को भी बेहतर बनाता है।ऐसे में अगर आप भी Aluminium Foil में खाना रखती हैं, तो इससे बेहतर है कि आप केले के पत्ते का इस्तेमाल कर सकती हैं। यह तरीका न सिर्फ सेहत के लिए बेहतर है बल्कि पर्यावरण के लिए भी अच्छा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Feb 2026 18:02:00 +0530</pubDate>
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<title>क्या आपका 10 साल का बच्चा बिस्तर गीला करता है? अब परेशान न हो, ये असरदार Home Remedy दिखाएगी कमाल</title>
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<description><![CDATA[ ऐसे कई पेरेंट्स हैं जिनके बच्चे बिस्तर पर पेशाब कर देते हैं। इस समस्या से कई लोग जूझ रहे होंगे। बच्चों को बिस्तर पर पेशाब करने की समस्या बहुत बड़ी चिंता और शर्मिंदगी का कारण बन जाती है। अक्सर होता है कि दवाइयां भी काम नहीं करती हैं, लेकिन आपकी इस समस्या का हल आपकी रसोई में ही मौजूद है। बता दें कि, हल्दी वाला दूध किसी वरदान से कम नहीं है। यह पुराना नुस्खा न केवल इम्यूनिटी बढ़ाता है, बल्कि बच्चों में यूरिन कंट्रोल को बेहतर बनाने में भी चमत्कारी असर दिखाता है। यदि आपका बच्चा सोते समय बिस्तर में पेशाब करता है, तो यह नुस्खा एक बार जरुर ट्राई करें। यह नुस्खा पूरी तरह से नेचुरल है और इसके कोई साइड इफेक्ट्स नहीं है। आइए आपको इसे बनाने के तरीके और फायदे बताते हैं।बिस्‍तर में पेशाब की समस्‍या के लिए हल्दी वाला दूधआपको बस उबलते हुए दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर देने से शरीर में बदलान आने हैं, जो बच्चों में रात को सोते समय पेशाब निकलने की समस्या को रोक सकते हैं। आइए आपको बताते हैं यह कैसे काम करता है।ब्लैडर की मसल्‍स में मजबूतीखासतौर पर हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुण होते हैं, जो ब्लैडर (मूत्राशय) की मसल्स को अंदरूनी मजबूतू देते हैं, जिससे बच्चा पेशाब को ज्यादा देर तक रोक पाता है। शरीर में गर्माहटआयुर्वेद के अनुसार जब शरीर में अत्यधिक ठंडक बढ़ जाती है, तो पेशाब बार-बार आने की समस्या हो सकती है। हल्दी की तासीर गर्म मानी जाती है, जो शरीर को अंदर से गर्माहट प्रदान करती है। इससे शरीर का संतुलन बना रहता है और बार-बार मूत्र त्याग की परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है।नर्वस सिस्टम को सुकूनएक्सपर्ट के मुताबिक, हल्दी ब्रेन और नर्व को शांत करती है। जब बच्चा गहरी और तनावमुक्त नींद सोता है, जिससे उसका दिमाग भी शरीर के संकेतों को अच्छी तरह से समझ पाता है।पाचन होता है बेहतरखराब पाचन से भी कई बार रात को परेशानी होती है। हल्दी पेट को साफ रखने में मदद करती है। इससे शरीर भी रात को रिलैक्स रहता है।हल्‍दी वाले दूध की सामग्री- 1 कप गुनगुना दूध- 1/4 चम्मच शुद्ध हल्दीहल्‍दी वाला दूध बनाने का तरीका- एक पैन में दूध डालकर उबालें।- अब खौलते हुए दूध में थोड़ी-सी हल्दी मिलाएं। हल्‍दी वाला दूध पीने का सही समयरात को सोने से ठीक पहले बच्चों को यह बिल्कुल न दें। हल्दी वाला दूध बच्चे को सोने से कम से कम 3 घंटे पहले दें। क्योंकि सोने से ठीक पहले लिक्विड देने से ब्लैडर भर सकता है, इसलिए 3 घंटे का गैप देना जरुरी है। इन बातों का रखें ध्यान- रात को सोने से पहले बच्चे को टॉयलेट जाने की आदत डालें।- शाम के बाद बच्चे को कैफीन या बहुत ज्यादा मीठी चीजें न दें।- इस समस्या को दूर करने के लिए हल्की एक्सरसाइज और योग करना भी काफी जरुरी है। सावधानीआमतौर पर यह एक घरेलू उपाय है, इसलिए इसके परिणाम हर बच्चे में अलग-अलग हो सकते हैं। यदि समस्या लंबे समय से बनी हुई है या बच्चे को किसी प्रकार का संक्रमण महसूस हो रहा है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह अवश्य लें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Feb 2026 18:01:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Ramadan Diet: ईद तक दिखना है फिट? Health Expert का ये सीक्रेट प्लान घटाएगा 5 किलो वजन</title>
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<description><![CDATA[ इस्लाम में रमजान का महीना बेहद ही पवित्र माना जाता है। यह समय अल्लाह की इबादत और आत्मचिंतन का माना जाता है, हालांकि यह अवधि हेल्थ के नजरिए से शरीर को डिटॉक्स करने और जिद्दी चर्बी से छुटकारा पाने का भी सबसे अच्छा मौका है। कई बार होता है कि लोग शिकायत करते हैं कि रोजे रखने के बाद भी वजन बढ़ जाता है, जिसका कारण इफ्तार में होने वाली ओवरईटिंग है, हालांकि इस बार बिल्कुल ऐसा नहीं होगा। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है सबसे बेहतरीन प्लान बता रही हैं, जो आपको घर बैठे बिना जिम जाए फिट बनाने में मदद करेगा। आइए आपको बताते हैं यह सीक्रेट बताते हैं जिससे आप ईद तक खुद को एक नए अवतार देख पाएंगे। अगर आप 1 महीने में 5 किलों को वजन कम करना चाहती हैं, तो इस डाइट प्लान को जरुर फॉलो करें।सहरी एनर्जी का पावर हाउसआप सेहरी में ऐसी चीजें लें, जो आपको दिनभर प्यास न लगने दें और पेट भरा हुआ महसूस कराएं।-सहरी में आप प्रोटीन रिच ऑमलेट बना सकते हैं, 2 अंडों में ढेर सारी सब्जियां डालकर कम तेल में पकाएं।- मीडियम पराठा- इसको आप देसी घी या बहुत कम तेल में बनाएं, जिससे एनर्जी बनी रहे।- लो-फैट दही- आप एक कटोरी दही जरुर लें, दही में प्रोबायोटिक्स भरपूर मात्रा में पाई जाती है और यह पाचन को दुरुस्त रखता है।  सावधानी से शुरुआत करें इफ्तारगौरतलब है कि इफ्तार में अचानक हैवी खाने से शरीर को नुकसान हो सकता है। - शुगर-फ्री चाट- ताजे फलों का सेवन जरुर करें, लेकिन इस पर चीनी का इस्तेमाल न करें।- एयर-फ्राइड समोसा- यदि आपका चिकन खाने का मन है, तो आप 2-3 चिकन समोसे खा सकते हैं। लेकिन इन समोसे को डीप-फ्राई न होने दें। एयर-फ्रायर या कम तेल का इस्तेमाल करें।- डिटॉक्स वॉटर- शरबत की जगह नींबू, पुदीना और खीरे वाला डिटॉक्स वॉटर पिएं। यह फैट बर्न करने में मदद करता है। - रोजाना 1 खजूर से रोजा खोलें, यह आपको इंस्टेंट एनर्जी देता है।डिनर- हल्का और स्वादिष्टइफ्तार के कुछ घंटों बाद आप संतुलित आहार ले सकते हैं।- ग्रिल्ड चिकन- सबसे बेहतर है कि आप ग्रिल्ड चिकन का सेवन करें, यह एक अच्छा विकल्प है।- वेजी फ्राइड राइस- फ्राइड राइस में आप सब्जियों की मात्रा अधिक और चावल कम रखें। इसे बनाने में तेल का इस्तेमाल कम करें।- चाय के शौकीन- यदि आप चाय के बिना नहीं रह सकते हैं, तो डिनर के बाद कम चीनी वाली एक छोटी प्याली चाय ले सकते हैं। वेट लॉस के 5 गोल्‍डन रूल्‍स- इस बात का ध्यान रखे कि, इफ्तार से सेहरी के बीच पर्याप्‍त पानी पिएं, ताकि बॉडी हाइड्रेटेड रहे।- रमजान के दौरान नो प्रोसेस्ड फूड जैसे कि पैकेट बंद चिप्स, बिस्कुट या बाहर के खाने से परहेज करें।- पानी पीने का सही तरीका अपनाएं, इफ्तार के वक्त एकदम से बहुत सारा पानी न पिएं, बल्कि घूंट-घूंट कर पिएं।- कम मीठा खाएं, इस दौरान मिठाई और तली-भुनी चीजों से परहेज करके ही आप वजन घटा सकती हैं।- हल्की एक्टिविटी तरावीह की नमाज खुद में अच्‍छी एक्सरसाइज है। इसके अलावा 15 मिनट की सैर जरूर करें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Feb 2026 18:01:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Iron Deficiency: हर दूसरी भारतीय महिला को Anemia, ये 4 Lifestyle गलतियां बन रही हैं बड़ी वजह</title>
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<description><![CDATA[ अच्छी सेहत के लिए पौष्टिक आहार लेना सबसे जरूरी माना जाता है। लेकिन जब बात महिलाओं की सेहत की हो, तो इस पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। महिलाओं में आयरन की कमी से एनीमिया की समस्या हो जाती है। वहीं भारतीय महिलाओं में इसका खतरा और भी ज्यादा होता है। आंकड़ों की मानें, तो देश में 57% से ज्यादा महिलाओं को एनीमिया की समस्या है। शरीर में आयरन की कमी को एनीमिया कहा जाता है।बता दें कि शरीर में आयरन की मुख्य भूमिका हीमोग्लोबिन को बनाने में होती है। जो ब्लड के जरिए पूरे शरीर तक ऑक्सीजन पहुंचाता है। लेकिन जब शरीर में आयरन की कमी हो जाती है, तो हीमोग्लोबिन घटने लगता है। यह स्थिति एनीमिया का रूप ले लेती है। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो अक्सर कई महिलाएं इसके शुरूआती लक्षणों को कमजोरी या सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन धीरे-धीरे यह समस्या गंभीर रूप ले लेती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको एनीमिया के लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: आपकी Skin दे रही है 5 गंभीर बीमारियों का Warning, इन लक्षणों को भूलकर भी न करें Ignoreआयरन की कमी के कारणखानपान में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है।दाल, हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, गुड़ और आयरन युक्त खाद्य पदार्थ पर्याप्त मात्रा में नहीं लेने से शरीर को जरूरी आयरन नहीं मिल पाता है।वहीं लंबे समय तक आयरन की कमी रहने पर चक्कर आना, बाल झड़ना, ज्यादा थकान, सांस फूलना और स्किन का पीला पड़ना आदि लक्षण दिखने लगते हैं।गलत खानपानडाइट में दालों, हरी पत्तेदार सब्जियों, साबुत अनाज, फलों और सूखे मेवे शामिल करना चाहिए। इससे आपका आयरन मिलता है।अगर लंबे समय तक लो कैलोरी और कम डाइट लेती हैं, तो महिलाओं में हीमोग्लोबिन का लेवल तेजी से गिरता है।खानपान गड़बड़ होने की वजह से एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है।ज्यादा चाय या कॉफी पीनाचाय और कॉफी में टैनिन और कैफीन मौजूद होता है, ऐसे में इसका अधिक सेवन आयरन के अवशोषण को कम कर देता है।खाना खाने के फौरन बाद चाय या कॉफी पीने से शरीर में आयरन का अवशोषण 40-60% तक घट सकता है।जो महिलाएं पहले से आयरन की कमी से जूझ रही हैं, उनके लिए यह आदत विशेषरूप से नुकसानदायक साबित हो सकती है।अनियमित पीरियड्स की अनदेखीबता दें कि हर महीने जरूरत से ज्यादा खून निकलने पर बॉडी में आयरन की मात्रा कम होने लगती है।अगर समय-समय पर हीमोग्लोबिन की जांच करानी चाहिए, वरना एनीमिया गंभीर रूप ले सकता है।हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक जिन महिलाओं को लंबे समय तक अनियमित या हैवी पीरियड्स रहते हैं। उन महिलाओं में एनीमिया का जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 14:48:57 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: आपकी Skin दे रही है 5 गंभीर बीमारियों का Warning, इन लक्षणों को भूलकर भी न करें Ignore</title>
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<description><![CDATA[ जब भी हमारे में शरीर में किसी गड़बड़ी की शुरूआत होती है, तो इसके लक्षण धीरे-धीरे नजर आते हैं। लेकिन जब हम इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, तो शरीर में पनप रही यह गड़बड़ी धीरे-धीरे गंभीर बीमारी में बदल जाती हैं। इसलिए अपने शरीर का ख्याल रखना जरूरी हो जाता है। अगर पाचन खराब रहने लगे, वजन कम होने लगे, भूक कम लगे या अचानक से अधिक कमजोरी महसूस होने लगे, तो यह इस बात का संकेत होता है कि शरीर में किसी न किसी गड़बड़ी की शुरूआत हो चुकी है।हमारी आंखों और स्किन पर भी बीमारी के संकेत नजर आता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि स्किन किस तरह बताती है कि हमारे शरीर में कोई बड़ी बीमारी पनप रही है।इसे भी पढ़ें: Constipation Causes at Night: खराब Digestion से हैं परेशान, Dinner के बाद ये गलतियां बनती हैं कब्ज की जड़, बदलें अपना LifeStyleस्किन के इशारे समझेंअगर आपके बालों के बीच की रेखा भी पतली हो रही है और बाल लगातार झड़ रहे हैं। तो यह हार्मोनल इंबैलेंस का एक संकेत हो सकता है। ऐसा डायहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन के बढ़ने की वजह से हो सकता है।अगर आंखों के नीचे काले घेरे हो रहे हैं और यह बढ़ते जा रहे हैं। तो आपको इस संकेत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अक्सर लोगों को लगता है कि आंखों के नीचे काले घेरे सिर्फ नींद न पूरी होने की वजह से होता है। लेकिन ऐसा नहीं है। जबकि ऐसा शरीर में आयरन की कमी से हो सकता है।अगर आपकी आईब्रो के बाल पतले होते जा रहे हैं, तो इस पर भी आपको ध्यान देने की जरूरत है। थायराइड हार्मोन के इंबैलेंस की वजह से ऐसा हो सकता है।अगर आपकी आंखों के आसपास पीले पैच हो रहे हैं। तो आपको अपने कोलेस्ट्रॉल लेवल पर ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ने की वजह से होता है। ऐसे में आपको एक बार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।शरीर में एस्ट्रोजन लेवल के बढ़ने की वजह से गालों पर पिग्मेंटेशन या झाइयां हो सकती हैं। महिलाओं के चेहरे पर अनचाहे बाल भी बॉडी में हार्मोनल इंबैलेंस की ओर इशारा करते हैं। इसका मतलब है कि आपके शरीर में टेस्टेस्टेरोन की मात्रा ज्यादा है।त्वचा में क्रैक या हल्की दरारें नदजर आना इस ओर इशारा करता है कि आपके शरीर में विटामिन बी12 का लेवल काफी कम है। वहीं त्वचा में रूखापन ओमेगा 3 की कमी का संकेत है। फेस पर एक्ने होना जिंक की कमी का संकेत होता है। इसलिए आपको अपनी डाइट में जिंक से भरपूर चीजों को शामिल करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 14:48:57 +0530</pubDate>
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<title>हर महीने Time पर आएंगे Periods, बस पीना शुरू कर दें यह असरदार Herbal Tea</title>
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<description><![CDATA[ हर महीने महिलाओं में पीरियड्स आना एक सामान्य प्रक्रिया है। ऐसे में हर एक लड़की का सवाल होता है कि उनके पीरियड्स हर दूसरे महीने डिले हो जाते हैं, कभी 3-4 दिन तो कभी 1 हफ्ते तक भी पीरियड्स लेट हो जाते हैं और किसी-किसी महीने तो स्किप ही जाते हैं। अब मन में सवाल आता है कि क्या वाकई ये नॉर्मल है? इस बात को आप जरुर समझें कि यह नॉर्मल तो बिल्कुल भी नहीं है। पीरियड्स आपके हार्मोन्स का रिपोर्ट कार्ड होते हैं।  ऐसे में पीरियड्स में किसी भी तरह की गड़बड़ी सीधा इस तरफ इशारा करती है कि आपके शरीर में हार्मोनल इंबैलेंस है। अगर आप इसको मैनेज करना चाहते हैं, तो डाइट और लाइफस्टाल को बदलना बेहद जरुरी है। इसके साथ ही कुछ देसी नुस्खे भी आपके लिए फायदेमंद माना जाता है। यदि आपके पीरियड्स अनियमित हो गए हैं या फ्लो कम आने लगा है, तो इस देसी चाय को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं अपनी डाइट में बदलाव करके कैसे पीरियड्स को नॉर्मल किया जा सकता है। पीरियड्स को रेगुलर कर सकती है ये चाय- अजवाइन पीरियड्स को रेगुलेट करने, डाइजेशन को सुधारने और हार्मोनल इंबैलेंस की वजह से होने वाली ब्लोटिंग को कम करता है।- दालचीनी हार्मोन्स को बैलेंस करती है और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में सहायक होता है। - चेस्टबेरी के बीज प्रोजेस्टोरोन के लेवल को बैलेंस करते हैं और साइकिल को रेगुलर बनाने का काम करते हैं। - केसर को पारंपरिक रूप से महिलाओं के सेहत के लिए लाभकारी माना जाता है। यह गर्भाशय (यूट्राइन) की कार्यक्षमता को संतुलित रखने में सहायक हो सकता है और मेंस्ट्रुअल साइकिल को नियमित बनाने में मदद करता है। नियमित और संतुलित सेवन से हार्मोनल संतुलन बेहतर हो सकता है, जिससे पीरियड्स से जुड़ी अनियमितताओं में राहत मिलती है।- इससे आयरन का लेवल बेहतरीन होता है और शरीर को ताकत मिलती है।- हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि ये चाय एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन को बैलेंस करती है और डाइजेशन को भी सुधारती है।- जिन महिलाओं को पीरियड्स के दिनों में गैस, ब्लोटिंग और कब्ज रहती है, उनके लिए भी ये चाय काफी फायदेमंद मानी जाती है।- इस चाय के सेवन से पीरियड फ्लो भी खुलकर आता है। यदि आपको पीरियड्स में 1-2 दिन ब्लीडिंग आती है, तो इस चाय को जरुर पिएं। कैसे बनाएं ये देसी चाय?- सबसे पहले आप एक पैन में पानी डालें।- अब 1 चम्मच अजवाइन इसमें डालें।- दालचीनी का 1 चुटकी पाउडर डालें।- इसमें अब 1 चम्मच चेस्टबेरी के बीज डालें।- इसमें केसर के 1-2 धागे डालें।- अब इसमें गुड़ का 1 टीस्पून पाउडर डालें।- इसे अच्छे से उबलने दें और फिर छानकर गुनगुना ही पिएं।- बता दें कि, इसको आप साइकिल के 10वें दिन से पीना शुरु करना चाहिए।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 14:48:56 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: Winter में Gym जाने का झंझट खत्म, बस 3 मिनट की यह Magic Exercise बनाएगी Super Fit</title>
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<description><![CDATA[ सर्दियों के मौसम में सुबह रजाई से बाहर निकलना सबसे मुश्किल काम लगता है। ऐसे में जिम जाना या फिर लंबी एक्सरसाइज करना कई महिलाओं के लिए नामुमकिन हो जाता है। अगर आप भी फिट और हेल्दी रहना चाहती हैं, लेकिन ठंड के कारण एक्सरसाइज टाल देती हैं। तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको आसान लेकिन बेहद असरदार एक्सरसाइज के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसको आप घर पर रोजाना 3 मिनट करके खुद को फिट और एक्टिव रख सकती हैं।यह एक्सरसाइज मालासन वॉक है। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, यह एक्सरसाइज महिलाओं के लिए खासतौर पर फायदेमंद होती है। यह एक्सरसाइज फिटनेस बढ़ाती है और हार्मोनल बैलेंस और रिप्रोडक्टिव हेल्थ में भी मदद करती है।इसे भी पढ़ें: Iron Deficiency: हर दूसरी भारतीय महिला को Anemia, ये 4 Lifestyle गलतियां बन रही हैं बड़ी वजहजानिए क्या है मालासन एक्सरसाइजमालासन एक स्क्वाट पोज है, इसमें पैरों को थोड़ा फैलाकर बैठा जाता है। जब इस पोज में धीरे-धीरे आगे बढ़ा जाता है, तो इसको मालासन वॉक कहते हैं। आप इस एक्सरसाइज को घर के अंदर या फिर खुले स्थान पर कहीं भी आसानी से कर सकती हैं।ऐसे करें मालासन वॉकइस एक्सरसाइज को करने से पैरों को थोड़ा चौड़ा करके स्क्वाट पोज में बैठ जाएं।पीठ को सीधी रखें और दोनों हाथ सामने या फिर नमस्कार की मुद्रा में रखें।इस पोजिशन में छोटे-छोटे कदमों से आगे बढ़ें।शुरूआत में 30 सेकेंड से शुरू करें और फिर धीरे-धीरे 3 मिनट तक करें।इसके फायदेमालासन वॉक एक्सरसाइज महिलाओं की फर्टिलिटी बढ़ाने में सहायक होती है।यह एक्सरसाइज पीरियड्स को रेगुलेट करती है और क्रैम्प्स कम करती है।इस एक्सरसाइज को करने से कब्ज से राहत मिली है और डाइजेशन में भी सुधार होता है।इस एक्सरसाइज को करने से लोअर बैक और हिप्स में भी मजबूती आती है।मालासन वॉक एक्सरसाइज लोअर बॉडी को टोन करती है।अगर आप तेजी से कैलोरी बर्न करना चाहती हैं, तो इस एक्सरसाइज को रोजाना करना चाहिए।सेक्सुअल एनर्जी को यह एक्सरसाइज बैलेंस करती है और यह इमोशनल ब्लॉकेज को रिलीज करता है।महिलाओं के लिए खास है ये एक्सरसाइजमहिलाओं के लिए यह वॉक एक बेहतरीन एक्सरसाइज है। जो महिलाएं ज्यादा समय नहीं निकाल पाती हैं, या जिनके लिए हैवी वर्कआउट करना मुश्किल होता है। यह एक्सरसाइज हर उम्र की महिलाओं के लिए सुरक्षित मानी जाती है। सर्दियों के मौसम में यह एक्सरसाइज शरीर को अंदर से गर्म रखती है।अगर आप चाहती हैं कि सर्दियों में आपका शरीर फिट, एक्टिव और एनर्जेटिक बना रहे, तो आपको फिटनेस रूटीन में 3 मिनट का मालासन वॉक जरूर शामिल करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 14:48:53 +0530</pubDate>
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<title>Ramadan 2026 Fasting Tips: रोजे में दिनभर High Energy के लिए अपनाएं ये Diet Plan, सिरदर्द&#45;थकान रहेंगे दूर</title>
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<description><![CDATA[ रमजान के दौरान रोजा रखना शरीर और मन दोनों के लिए एक खास सफर है। साल 2026 में जब दिन लंबे होने लगे हैं, तब सहरी का महत्व और भी बढ़ जाता है। सुबह सूरज निकलने से पहले आप जो कुछ भी खाते हैं, वही तय करता है कि पूरे दिन आप कैसा महसूस करेंगे। एक सही और संतुलित सहरी आपको थकान और सिरदर्द से बचाती है, जबकि गलत खान-पान से आपको जल्दी प्यास या कमजोरी महसूस हो सकती है।दिन भर एनर्जेटिक कैसे रहें?खुद को एनर्जेटिक रखने के लिए आपकी सहरी में प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट का सही मिक्सचर होना चाहिए। ओट्स, दलिया या ब्राउन ब्रेड जैसे अनाज धीरे-धीरे पचते हैं और लंबे समय तक ताकत देते हैं। साथ ही अंडे, दही, दूध या दालों से मिलने वाला प्रोटीन भूख को कंट्रोल में रखता है। बादाम और अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स भी पाचन को धीमा कर एनर्जी के स्तर को बनाए रखते हैं। याद रखें, सहरी छोड़ना या सिर्फ मीठी चीजें खाना आपको दिन के बीच में ही थका सकता है। इसे भी पढ़ें: Ramadan Iftar Party में चाहिए सबसे अलग लुक? ये Fashion-Makeup Tips आएंगे आपके बेहद कामथकान से बचने के लिए क्या खाएं?एक अच्छी सहरी का मतलब बहुत ज्यादा खाना नहीं, बल्कि सही खाना है। आप दूध और फलों के साथ ओट्स ले सकते हैं, या फिर अंडे के साथ पूरी शक्ति वाली रोटी खा सकते हैं। दही और खजूर का मेल भी पेट के लिए बहुत अच्छा होता है। केला, सेब और मुट्ठी भर ड्राई फ्रूट्स ऐसे विकल्प हैं जो प्राकृतिक मिठास और फाइबर प्रदान करते हैं, जिससे रोजे के दौरान शरीर में कमजोरी महसूस नहीं होती। इसे भी पढ़ें: Sehri Special: सिर्फ 10 मिनट में बनाएं ये टेस्टी-हेल्दी डिश, Ramadan में नहीं होगी कमजोरीपानी पीने का सही तरीका क्या है?सहरी में पानी पीना बेहद जरूरी है, लेकिन इसे एक बार में पीने के बजाय घूंट-घूंट करके धीरे-धीरे पिएं। इससे आपका शरीर पानी को बेहतर तरीके से सोख पाता है। ज्यादा चीनी वाले जूस, चाय या कॉफी पीने से बचें क्योंकि इनसे शरीर में डिहाइड्रेशन हो सकती है। पानी की कमी को पूरा करने के लिए तरबूज जैसे रसीले फल और दही को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 14:48:53 +0530</pubDate>
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<title>Aluminium Foil से Cancer का खतरा? वायरल दावों का Health Expert ने किया पर्दाफाश</title>
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<description><![CDATA[ खाने को गर्म रखने के लिए हमारी मम्मी स्कूल और ऑफिस के लिए लंच पैक करती है, तो एल्युमिनियम फॉइल को रोटी पर जरुर लपेट के रख देती है। काफी समय से सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कहा जा रहा है कि एल्युमिनियम फॉइल का इस्तेमाल आपकी सेहत के लिए काफी खतरनाक है। अब कहा जा रहा है कि एल्युमिनियम फॉइल में लंच पैक करने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। अब सबके मन में यही सवाल आता है कि एल्युमिनियम फॉइल के इस्तेमाल से सच में कैंसर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। आइए आपको बताते हैं वाकई  एल्युमिनियम फॉइल  से कैंसर होता है।एल्युमिनियम हैवी मेटल नहीं है आमतौर पर एल्युमिनियम सबसे कॉमन मेटल में से एक है। यह हैवी मेटल नहीं है, बहुत लाइट वेट होता है। वैसे यह ज्यादा चीजों से रिएक्ट नहीं करता है। इसलिए यह खाने में शामिल नहीं होता है और जितनी मात्रा में आती है उसका बहुत छोटा प्रतिशत बॉडी में अब्जॉर्ब होता है। शरीर में पहुंचने वाला एल्युमिनियम का जो हिस्सा अवशोषित होता है, उसे आमतौर पर किडनियां मूत्र के जरिए बाहर निकाल देती हैं। इसी कारण यह शरीर में लंबे समय तक जमा नहीं रहता, क्योंकि इसे भारी धातुओं की श्रेणी में नहीं माना जाता। हालांकि कुछ लोगों को एल्युमिनियम से एलर्जी या हल्की टॉक्सिसिटी की समस्या हो सकती है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में इससे कैंसर होने का खतरा नहीं माना जाता।एल्युमिनियम से एलर्जी हो सकती हैयूके हेल्थ के अनुसार, एल्युमिनियम फॉइल से कैंसर का जोखिम नहीं देखा गया। लेकिन इसके संपर्क में आने से एलर्जी हो सकती है। यदि आप ज्यादा मात्रा में एल्युमिनियम पेट में जाएगा, तो मतली, दस्‍त या उल्‍टी हो सकती है। इसके साथ ही एल्युमिनियम वाली धूल के संपर्क में आने से सांस लेने पर गले और नाक में आपको जलन महसूस होने लगती है। एल्युमिनियम का संबंध अल्जाइमर रोग से हो सकता हैहेल्थ एक्सपर्ट ने बताया कि एल्युमिनियम फॉइल दरअसल एल्युमिनियम की एक पतली परत होती है, जिसका उपयोग आमतौर पर भोजन को ढकने या गर्म रखने के लिए किया जाता है। कुछ लोगों का मानना है कि इसमें गर्म खाना रखने से कैंसर या किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन इस तरह की धारणा का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इस समय पर्याप्त स्टडीज मौजूद नहीं हैं, जो यह बता है कि एल्युमिनियम फॉइल का संबंध अल्जाइमर रोग के साथ देखा जाता है, लेकिन इसके इस्तेमाल का सावधानी से करना चाहिए।एल्युमिनियम फॉइल के इस्‍तेमाल में ये सावधान‍ियां बरतें- बहुत हाई हीट पर एल्युमिनियम के बर्तन में खाना न पकाएं।- ज्यादा खट्टा यानी एसिडिक खाना एल्युमिनियम के बर्तन में न पकाएं। - लंबे समय तक खट्टी चीजों को स्टोर करने के लिए एल्युमिनियम के बर्तन का यूज न करें।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 14:48:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Constipation Causes at Night: खराब Digestion से हैं परेशान, Dinner के बाद ये गलतियां बनती हैं कब्ज की जड़, बदलें अपना LifeStyle</title>
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<description><![CDATA[ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कब्ज यानी की कॉन्स्टिपेशन एक ऐसी साइलेंट समस्या है। जो हमारे पूरे दिन की कार्यक्षमता और मानसिक शांति को प्रभावित करता है। हम दिन भर तो अपनी सेहत का ख्याल रखते हैं, लेकिन रात के समय की गई कुछ छोटी लेकिन गंभीर गलतियां करते हैं, जो हमारे पाचन तंत्र को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर देती हैं। रात को सोने से पहले अपनी आदतों की लापरवाही बरतते हैं। तो शरीर की नेचुरल सफाई प्रोसेस यानी &#039;पेरिस्टालसिस&#039; धीमी पड़ जाती है।इसके परिणामस्वरूप सुबह के समय आपका पेट साफ नहीं होता है। जो आगे जाकर गैस, बवासीर और गंभीर एसिडिटी का कारण बन सकती है। आयुर्वेद और मेडिकल विज्ञान का मानना है कि रात का समय शरीर के डिटॉक्सिफिकेशन के लिए होता है। अगर इस दौरान पाचन तंत्रों पर एक्स्ट्रा दबाव डाला जाए, तो आंतों की नमी सूखने लगती है और मल सख्त हो जाता है। इसलिए अपनी रात की दिनचर्या में सुधार करने से आप न सिर्फ पेट की समस्या बल्कि पूरे शरीर को दीर्घकालिक बीमारियों से बचाने के लिए जरूरी है।इसे भी पढ़ें: Periods Delay को न करें Ignore, हो सकते हैं PCOS-Thyroid के लक्षण, जानें डॉक्टर की रायजानिए क्या हैं वो गलतियांरात में हैवी खानारात में सोने से पहले भारी या तला-भुना खाना आपके पाचन तंत्र को थका देता है।पानी की कमी होनारात को पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने से आंतों में सूखापन बढ़ता है।फौरन सो जानाअगर खाने और सोने के बीच अंतर न होने पर भोजन के सड़ने की वजह बनता है।कैफीन का सेवनरात में चाय या कॉफी पीना आंतों की सक्रियता को बाधित करता है।आंतों पर गंभीर प्रभावजब रात की गलतियां रोजाना की आदतें बन जाती हैं, तो आंतों की दीवारें अपने लचीलेपन को खोने लगती हैं। इससे &#039;क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन&#039; की स्थिति पैदा होती है। जहां शरीर से अपशिष्ट पदार्थ नहीं निकल पाते हैं। यह रुके हुए टॉक्सिन्स ब्लड में मिलकर स्किन की समस्याओं, सिरदर्द और थकान को जन्म देते हैं। लंबे समय तक कब्ज रहने की वजह से आंतों में सूजन और संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।कब्ज से बचने के लिए बरतें ये सावधानियांकब्ज से बचने के लिए रात के खाने में दलिया या सलाद जैसी फाइबर वाली चीजों को शामिल करना चाहिए।भोजन के बाद कम से कम 100 कदम चलना पाचन अग्नि को सक्रिय रखता है।सोने से पहले रोजाना एक गिलास पानी पीना चाहिए, इससे आंतें हाइड्रेटेड रखता है।सोने में कम से कम 2 से 3 घंटे पहले अपना भोजन कर लेना चाहिए। बेहतर होगी सुबहबता दें कि कब्ज कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। बल्कि यह हमारी गलत लाइफस्टाइल का एक संकेत है। अक्सर हम दवाओं के जरिए कब्ज का समाधान ढूंढते हैं, जबकि असली समाधान हमारी आदतों में छिपा है। रात के समय अपने पाचन तंत्र को आराम देकर उसको सही पोषण प्रदान करके आप कब्ज से छुटकारा पा सकते हैं। साथ ही अपनी एनर्जी लेवल भी बढ़ा सकते हैं। स्वस्थ पेट ही हेल्दी मस्तिष्क और खुशहाल जीवन का आधार है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 10:59:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Bra During Pregnancy: Pregnancy में Bra पहनना कितना जरूरी? जानें इस फैसले से जुड़े Facts और Myths</title>
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<description><![CDATA[ प्रेग्नेंसी किसी भी महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत दौर होता है। महिलाओं के लिए यह समय काफी संवेदनशील होता है। इस दौरान शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। जिसका सीधा असर महिलाओं के ब्रेस्ट पर भी पड़ता है। प्रेग्नेंसी में महिला का ब्रेस्ट साइज बढ़ने लगता है और इसमें भारीपन महसूस होता है। ऐसे में कभी-कभी ब्रेस्ट में दर्द भी होता है और महिलाओं के जहन में यह सवाल उठता है कि क्या प्रेग्नेंसी के समय ब्रा नहीं पहनना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या प्रेग्नेंसी में ब्रा नहीं पहनने से कोई नुकसान हो सकता है।प्रेग्‍नेंसी में बिना ब्रा के रहना सुरक्षित है या नहींप्रेग्नेंसी में ब्रा पहनना चाहिए या नहीं यह पूरी तरह से किसी भी महिला की व्यक्तिगत सुविधा पर निर्भर करता है। ऐसा कोई नियम नहीं है कि आपको ब्रा पहननी ही चाहिए। अगर आप ब्रा पहनकर रहने से कंफर्टेबल महसूस करती हैं, तो इसको पहन सकती हैं। वरना आपको बिना ब्रा पहने भी आराम से प्रेग्नेंसी के दौरान रह सकती हैं।इसे भी पढ़ें: Eye Makeup Side Effects: रोज आईलाइनर-मस्कारा लगाना पड़ सकता है भारी, जानें ये 3 बड़े Riskप्रेग्‍नेंसी में ब्रा न पहनने से क्या होगाप्रेग्नेंसी के 9 महीने में धीरे-धीरे महिला की बॉडी में कई तरह के बदलाव आते हैं। इनमें से एक बदलाव ब्रेस्ट साइज का बढ़ना है। आप में से कुछ महिलाओं को भारीपन की वजह से पीठ और गर्दन में दर्द हो सकता है। लेकिन अगर आप कंफर्टेबल हैं, तो बिना ब्रा पहने भी रह सकती हैं। इसको नहीं पहनने से लिगामेंट्स में खिंचाव बढ़ सकता है। जिससे ब्रेस्ट में ढीलापन हो सकता है। लेकिन इसमें परेशानी वाली कोई बात नहीं है। क्योंकि यह बीमारी नहीं बल्कि एक ऐसी शारीरिक स्थिति है, जिसको लेकर महिलाएं असहज महसूस करती हैं।गलत साइज की ब्रा पहनने के खतरेअगर आप प्रेग्नेंसी में बहुत टाइट या गलत साइज की ब्रा पहनती हैं, तो इससे नुकसान हो सकता है। आपकी स्किन में संवेदनशीलता बढ़ सकती है। खुजली, जलन या ब्लड सर्कुलेशन में परेशानी हो सकती है। इसलिए ब्रा पहनने से पहले ब्रेस्ट साइज की अच्छी तरह जांच कर लें। प्रेग्नेंसी के दौरान प्रयास करें कि आप जो ब्रा पहनें उसका फैब्रिक सॉफ्ट हो और इसमें कोई वायर न हो।रात को सोते समय क्या करेंकई महिलाओं के मन में यह भी सवाल होता है कि रात में सोने के दौरान क्या ब्रा उतार सकते हैं। तो बता दें कि यह आपके कंफर्ट पर निर्भर करता है। अगर आप बिना ब्रा के सोने में सहज हैं, तो आप इसको उतार सकती हैं। इससे किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन जिन महिलाओं के ब्रेस्ट हैवी हैं और वह रात में ब्रा न पहनने पर असहज महसूस करती हैं और बार-बार आपकी नींद खुलती है, तो आप ब्रा पहनकर सो सकती हैं।प्रेग्नेंसी का समय किसी भी महिला के लिए ज्यादा संवेदनशील होता है। इसलिए इस समय आपके शरीर में होने वाले हर बदलाव को समझना जरूरी होता है। अगर आपको ब्रा पहनने से खुजली, पसीना या फिर बेचैनी होती है, तो आप बिना ब्रा पहने भी रह सकती हैं। लेकिन अगर ब्रा पहनने में कंफर्टेबल फील करती हैं, तो इसको पहनकर रह सकती हैं। ब्रा आपके ब्रेस्ट को सपोर्ट करता है। लेकिन इसको पहनना या न पहनना पूरी तरह से आप पर निर्भर करता है। इसलिए अपनी सेहत और सुख के हिसाब से आप प्रेग्नेंसी के दौरान ब्रा नहीं पहनने का चयन कर सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 12:02:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Periods Delay को न करें Ignore, हो सकते हैं PCOS&#45;Thyroid के लक्षण, जानें डॉक्टर की राय</title>
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<description><![CDATA[ हर महीने महिलाओं में पीरियड्स आना एक सामान्य प्रक्रिया है। वैसे ये महिलाओं की फर्टिलिटी और ओवरहेल्थ के लिए काफी जरुरी है। खासतौर पर मेंस्ट्रुअल साइकिल 21 से 35 दिनों के बीच की होती है और ज्यादातर महिलाओं में 28 दिन की साइकिल हेल्दी मानी जाती है। यह कि हर महिला का शरीर अलग होता है और इसलिए भी जरुरी नहीं है कि सभी की पीरियडस साइकिल 28 दिनों की हो। कई बार पीरियड्स का कुछ दिन आगे-पीछे होना बिल्कुल सामान्य माना जाता है। जब पीरियड्स डिले हो जाते हैं, तो ऐसे में हर किसी महिला के मन में ये सवाल जरुर आता है कि पीरियड्स का कितने दिन डिले होना नॉर्मल है और कब उन्हें डॉक्टर से मिलना चाहिए और कब पीरियड्स का डिले होने से शरीर में किसी गड़बड़ की तरफ इशारा करता है। आइए आपको बताते हैं क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट।पीरियड्स का कितने दिन लेट आना नॉर्मल है?- डॉक्टर ने बताया है कि, यदि पीरियड्स 2 से 5 दिन तक लेट हो जाए तो यह नॉर्मल हो सकता है। इसके लिए आपको परेशान होने की कोई जरुरत नहीं है।- अक्सर हार्मोनल बदलाव, स्ट्रेस, ट्रैवल, खान-पान में बदलाव या नींद की कमी के कारण साइकिल थोड़ी गड़बड़ हो जाती है। - हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर आप पीरियड्स 7 दिन तक लेट हैं, तब भी घबराने की जरुरत नहीं है, हालांकि हर महीने में ऐसा हो रहा है या 10 दिन से ज्यादा की देर हो रही है तो डॉक्टर से सलाब जरुर लें।- पीरियड्स डिले होने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें तनाव का ज्यादा होना। जब हम अधिक तनाव में होते हैं, तो स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल बढ़ने लगता है और उसका असर ओव्यूलेशन पर होता है। इसके अतिरिक्त, थायरॉइड या PCOS जैसी दिक्कतें भी साइकिल को अनियमित कर सकती हैं।- किसी भी तरह का पिल्स का सेवन या डाइट में बदलाव भी पीरियड्स को डिले कर देते हैं।- यदि आपके पीरियड्स 10-15 दिन से ज्यादा लेट हों, लगातार 2-3 महीने तक पीरियड्स मिस हों या इन दिनों में तेज दर्द या असामान्य ब्लीडिंग हो रही है, तो डॉक्टर जरुर मिलें।- इसके अलावा, यदि आपकी साइकिल अचानक से पूरी बदल जाए, तो भी डॉक्टर से बात जरुर करें। डॉक्टर जरुरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड या हार्मोनल टेस्ट जरुर कराएं।- पीरियड्स साइकिल को नियमित रखने के लिए, रोजाना 7-8 घंटे की नींद जरुर लें। हेल्दी डाइट लें और तनाव से दूर रहे हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 12:02:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Fatty Liver को न करें नजरअंदाज! जानें कैसे करें Reverse, ये 5 चीजें हैं रामबाण इलाज</title>
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<description><![CDATA[ क्या आपने कभी सोचा है कि लिबर पर चर्बी जमती है। अक्सर लोग फैटी लिवर को ये समझकर नजरअंदाज कर देते हैं कि इसमें केवल लिवर पर चर्बी जमती है और इसका शरीर पर कुछ खास असर नहीं होता है, लेकिन ये पूरी तरह गलत है। आमतौर पर फैटी लिवर का असर आपके मेटाबॉलिज्म, डाइजेशन, एनर्जी लेवल और वजन सहित कई चीजों पर होता है। ऐसे में इसकी शुरुआती स्टेज में ही इसे रिवर्स करने की कोशिश करना जरुरी है। आयुर्वेद में फैटी लिवर को यकृत योग कहा जाता है, यह शरीर में कफ और पित्त इंबैलेंस करता है, अग्नि धीमी हो जाती है और पाचन कमजोर होने लगता है। इससे लिवर चैनल्स ब्लॉक हो जाता है और फैट जमा होने लगता है, तो शरीर में ट्राईग्लिसाइड्स और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने लगते हैं। आइए आपको बताते हैं फैटी लिवर को रिवर्स करने के लिए डाइट और लाइफस्टाइल बदलने से क्या फायदा होगा।  फैटी लिवर को रिवर्स करने के लिए करें ये 5 काम- अपने डाइजेस्टिव अग्नि को तीव्र करने की कोशिश करें। इसके लिए आप डाइट में बदलाव करें। दिन की शुरुआत हल्दी और अदरक वाली चाय से करें। इसके सेवन से फैट मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है।- हल्दी और अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। ये लिवर पर जमी चर्बी को कम करते हैं। यह बाइल जूस का प्रोडक्शन को बढ़ाते हैं। ये लिवर में फैट भी जमा नहीं होने देते हैं। - डाइट में कड़वी सब्जियों को शामिल करें । करेला, मेथी के पत्ते और पालक को डाइट का हिस्सा बनाएं। इसके सेवन से इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार होता है और लिवर डिटॉक्स होता है।- पका हुआ गर्म खाना खाएं। इसमें अग्नि बेहतर होती है और शरीर में टॉक्सिन्स जमा नहीं होते हैं। आप ठंडा खाने की जगह दाल, सूप और पकी हुई सब्जियों को डाइट का हिस्सा बनाएं।- इसके अलावा, योग और मेडिटेशन को रुटीन का हिस्सा बनाएं। इससे आपकी सेहत और भी बेहतर होती है। शरीर में जमा टॉक्सिंस भी बाहर निकलते हैं। सही समय पर सोएं, जिससे आपका शरीर नेचुरल रिदम को फॉलो कर सके। - वहीं, अदरक और डैंडेलियन जैसे हर्ब्स को डाइट में शामिल करें। ये इंफ्लेमेशन को कम करते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 12:02:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>सिक्के जैसे गोल पैच में झड़ रहे हैं बाल? Experts से जानें Alopecia के Symptoms और Treatment</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर आपने ऐसे व्यक्ति को जरुर देखा होगा कि जिसके सिर या दाढ़ी में गोल पैच हों? एक ही जगह से अचानक से सारे बाल झड़ गए हों। दरअसल, यह एलोपेशिया एरियाटा’ हो सकता है। यह एक प्रकार से ऑटोइम्यून हेयर लॉस कंडीशन है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से हेयर फॉलिकल्स को दुश्मन मानकर उसे नुकासान पहुंचाने लगता है। इस कंडीषसन के कारण सिर से गोल-गोल पैचेज में बाल झड़ने लगते हैं। यह आइब्रो, दाढ़ी और शरीर के सभी अंगों के बालों को भी प्रभावित करते हैं।नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के रिचर्स के मुताबिक, पूरी दुनिया में करीब 2% लोग जीवन में कभी न कभी एलोपेशिया से प्रभावित होते हैं। अमेरिका में ही करीब 68 लाख लोग इस कंडीशन का सामना कर रहे हैं। आइए आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं।क्या है एलोपेशिया?असल में एलोपेशिया एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही हेयर फॉलिकल्स (बालों की जड़) पर हमला करने लगता है। इसी वजह से अचानक से बाल झड़ने लगते हैं और गोल या पैची गंजापन दिखने लगते हैं। बता दें कि, यह समस्या कॉस्मेटिक समस्या नहीं, बल्कि एक ऑटोइम्यून कंडीशन है। इतना ही नहीं, इस कंडीशन में बालों की जड़ स्थायी रूप से नष्ट नहीं होती, बल्कि अस्थायी रूप से निष्क्रिय हो जाती है।एलोपेशिया के शुरुआती लक्षण क्या हैं?- एलोपिशिया में अचानक से बाल झड़ने लगते हैं, खासकर के सिक्के के आकार में पैच में। कंघी करते या नहाते समय बाल गुच्छों में झड़ते हैं।- स्कैल्प में खुजली होना, हल्की जलन या झुनझुनी महसूस होना। - नाखूनों पर गड्ढे, खुरदरापान या सफेद धब्बे भी दिख सकते हैं। शुरुआत में दर्द नहीं होता है। इसलिए लोग इसे सामान्य हेयर फॉल को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। हालांकि समय पर बीमारी की शिनाख्त इलाज को ज्यादा कारगर बना सकती है। - नहाते समय बाल झड़ना, भौंह,पलक, दाढ़ी के बाल झड़ना और स्कैल्प में पैचेज बनना एलोपेशिया होने के संभावित करण- वैसे तो एलोपेशिया का मुख्य कारण इम्यून सिस्टम का असंतुलन है। इसके पीछे जेनेटिक कारण, तनाव, वायरल इंफेक्शन, हॉर्मोनल बदलाव और अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों जिम्मेदार हो सकती हैं।- न्यूट्रिशन की कमी के कारण एलोपेशिया हो सकता है।- इसके अलावा, क्रॉनिक स्ट्रेस व क्रॉनिक इन्फेक्शन, या फिर कोई फ्रॉनिक बीमारी और दवाओं के साइड इफेक्ट भी हो सकता है।एलोपेशिया का इलाज क्या है?एलोपेशिया का इलाज उसकी स्थिति और गंभीरता के अनुसार तय किया जाता है। आमतौर पर डॉक्टर ऐसी दवाएं देते हैं जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करें, जैसे स्टेरॉइड युक्त क्रीम, इंजेक्शन या अन्य औषधियां, जिससे बालों की दोबारा वृद्धि में सहायता मिल सके। कुछ गंभीर मामलों में इम्यूनोथेरेपी या ओरल दवाओं का भी सहारा लिया जाता है। इसके अलावा संतुलित आहार, तनाव कम करना और पर्याप्त नींद लेना भी उपचार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि ये सभी कारक बालों के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। क्या घरेलू या नेचुरल उपाय एलोपेशिया के इलाज में मदद करते हैं?वैसे तो घरेलू या नेचुरल उपाय एलोपेशिया का इलाज नहीं, हालांकि सहायक भूमिका निभा सकता है-- आप संतुलित आहार, प्रोटीन, आयरन, जिंक और विटामिन-डी की पर्याप्त मात्रा जरुरी है।- इसके अलावा, आप रोजाना योग, ध्यान और स्ट्रेस मैनेजमेंट इम्यून बैलेंस में मदद कर सकते हैं।- प्याज का रस, एलोवेरा या नारियल तेल स्कैल्प की हेल्थ सुधार सकते हैं, लेकिन ये इम्यून अटैक को नहीं रोकते हैं।- इन्हें मेडिकल ट्रीटमेंट के विकल्प की बजाय सपोर्ट के रुप में ही अपनाना चाहिए।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 12:02:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>सीढ़ियों पर फूलती है सांस? ये Lungs की कमजोरी का Sign, Health Experts से जानें समाधान</title>
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<description><![CDATA[ आजकल भागदौड़ भारी जिंदगी के कारण लोगों के पास खुद की सेहत के लिए भी समय नहीं है। ऊपर से खराब जीवनशैली और गलत खान-पान के कारण बीमारियों का बुलावा दे रहे हैं। अगर आप रोजाना एक्सरसाइज नहीं करते हैं, तो आप सीढ़िया चढ़ सकते हैं। सीढ़ियां चढ़ना न सिर्फ एक अच्‍छी एक्‍सरसाइज है, बल्कि यह हमारे दिल और फेफड़ों के स्वास्थ्य का आईना है। कई बार होता है कि लोग सीढ़ियां चढ़ते ही बेहाल हो जाते हैं। यदि आप इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो घबराएं नहीं। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि आपकी फिटनेस और स्टैमिना को सही ट्रेनिंग और आदतों से बदला जा सकता है। आइए आपको बताते हैं सीढ़िया चढ़ते समय सांस फूलने के कारण और उपायों के बारे में जानते हैं।सीढ़ियां चढ़ते समय सांस क्यों फूलती है?- सीढ़ियां चढ़ने में बैठने की तुलना में 9 गुना ज्यादा ऊर्जा खर्च होती है। क्योंकि इस दौरान आपके दिल और फेफड़ों को शरीर के वजन को गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध ऊपर ले जाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।- जब आप सीढ़ियां चढ़ते हैं तो आपके पैर की मसल्स का एक्टिव रूप से इस्तेमाल होता है, जिसके लिए ऑक्सीजन की मांग बढ़ जाती है। - यदि आप रेगुलर एक्सरसाइज नहीं करते हैं, तो स्टैमिना की कमी के कारण मामूली फिजिकल एक्टिविटी करने से भी सांस फूलने लगती हैं।- ह्रदय रोग, फेफड़ों की समस्या, हाई ब्लड प्रेशर या वातावरण में मौजूद धूल-मिट्टी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।- नाक या मुंह में किसी प्रकार की रुकावट या बहुत सारी सीढ़ियां चढ़ने का तनाव भी सांस फूलने की प्रोसेस को तेज कर देता है।- अक्सर बहुत सारी सीढ़ियां चढ़ने का तनाव या चिंता भी सांस फूलने का कारण बन जाती है।स्टैमिना और मजबूती बढ़ाने के उपायसीढ़ियां चढ़ना आसान बनाने के लिए फिटनेस विशेषज्ञ सलाह देती हैं कि शरीर के निचले हिस्से, जैसे पैरों और कूल्हों की मांसपेशियों को मजबूत किया जाए। इसके साथ-साथ फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि सांस फूलने की समस्या कम हो और शरीर अधिक ऊर्जा के साथ काम कर सके। नियमित व्यायाम से सहनशक्ति और संतुलन दोनों में सुधार होता है, जिससे सीढ़ियां चढ़ना सहज बन जाता है।निचले शरीर की मजबूती- वॉकिंग से शुरुआत: पहले दो हफ्तों तक नॉर्मल वॉक से शरीर को तैयार करें।- इंटरवल से ट्रेनिंग: तीसरे हफ्ते से 1 मिनट चलें और इसके बाद 10 सेकंड जॉगिंग करें। इसे अगले दो हफ्तों तक दोहराएं। धीरे-धीरे जॉगिंग का समय बढ़ाकर 20 सेकंड तक ले जाएं।- स्क्वाट्स- रोजाना 20 स्क्वाट्स से शुरुआत करें और इसे धीरे-धीरे दो महीनों में 20-20 के तीन सेट तक ले जाएं।- सूमो स्क्वाट्स- पैर की मसल्स को मजबूती देने के लिए इन्हें भी अपने वर्कआउट में शामिल करें।कार्डियो और एरोबिक क्षमता- फेकड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए एरोबिक एक्सरसाइज काफी असरदार होती है।- ब्रिस्क वॉकिंग और साइकिल चलाना।- स्विमिंग या हाइकिंग जैसे कार्डियो एक्सरसाइज।- जुंबा या एरोबिक्स क्लासेस।- जिम में ट्रेडमिल या क्रॉस ट्रेनर का इस्तेमाल।जब आपके पैर की मसल्स जितनी मजबूत होंगी, आपका कार्डियोवैस्कुलर स्टैमिना उतना ही बेहतर होगा और सीढ़ियां चढ़ना उतना ही आसान हो जाएगा।डॉक्टर से सलाह कब लें?- अगर आप पूरी तरह से हांफने लगते हैं और सांस नॉर्मल होने में बहुत समय लगता है, तो इसे नजरअंदाज न करें।- अगर आपकी भी यही कंडीशन में किसी कार्डियोलॉजिस्ट से मिलना जरुरी है। - डॉक्टर आपके कुछ जरुरी टेस्ट के जरिए यह चेकअप करेंगे कि क्या आपको किसी विशेष दवा या ट्रीटमेंट की जरुरत है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 19:34:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>महिलाएं ध्यान दें! टाइट Bra पहनने की गलती खराब कर रही है Digestion, जानें Health Experts की राय</title>
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<description><![CDATA[ ज्यादातर महिलाएं कंफर्टेबल ब्रा का पहनती है और इससे उनका शरीर भी स्वस्थ रहता है। लेकिन गलती से आप ने गलत साइज की ब्रा खरीद ली और उसको पहनती है, तो वह आपके लिए सिरदर्द बन जाएगा। टाइट ब्रा पहनने से हमारे शरीर पर काफी असर देखने को मिलता है। अक्सर होता है कि अपच, गैस या ब्लोटिंग जैसी समस्या अचानक से परेशान कर देती हैं। जिसके बाद लगता है कि हमारा खानपान बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। लेकिन कभी आपने सोचा है कि आपके पाचन का सीधा संबंध आपकी ब्रा भी हो सकता है। यह बात को आपको बेहद ही अजीब लग रही है, क्योंकि ब्रा और डाइजेशन से बीच भी कोई रिश्ता हो सकता है, ये बात कुछ महिलाएं नहीं जानती हैं, लेकिन असल में ये बात एकदम सत्य है। गौरतलब है कि ब्रा की फिटिंग का सीधा असर आपके पाचन पर होता है और किस तरह ब्रा की वजह से आपको पाचन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं डॉक्टर क्या कहते हैं।ब्रा की वजह से हो सकती हैं डाइजेशन से जुड़ी दिक्कतें- हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि यदि आपकी ब्रा का साइज सही नहीं है या फिर आप गलत फिटिंग की ब्रा पहन रही हैं, तो इसका न केवल आपके ब्रेस्ट की शेप, कंफर्ट और पॉश्चर पर हो सकता है। इस कारण से आपके पाचन पर बुरा असर पड़ता है।- यदि आपको डाइजेशन से जुड़ी दिक्कतें परेशान करती हैं, अपच, गैस और एसिडिटी की समस्या बनीं रहती हैं, तो इसके पीछे की वजह ब्रा भी हो सकती हैं। यदि आप गलत साइज या फिटिंग की ब्रा पहनने से कंधे, सीने और पेट के ऊपरी हिस्से पर दबाव पड़ता है और इसके चलते खाना पचाने में मुश्किल आ सकती है।- आपको बता दें कि, ब्रा का बैंड (Band), पट और डूओडेनम से होकर गुजरता है। लेकिन हम जो भी खाते हैं, वो डूओडेनम तोड़ने का काम करता है। इसलिए बैंड की वजह से इस जगह पर प्रेशर पड़ता है, तो उससे डाइजेशन से संबंधित दिक्कतें बढ़ सकती हैं। - अब यह भी नहीं कि आप एकदम ढीली ब्रा पहनने लगें। क्योंकि ऐसा करने ब्रेस्ट को सही सपोर्ट नहीं मिलेगा। इसलिए आप अपने ब्रेस्ट और कप साइज के मुताबिक सही ब्रा का चयन करें।- अगर आप अधिक टाइट ब्रा पहनेंगे तो ब्रेस्ट टिश्यूज को नुकसान पहुंचेगा। सीने में दर्द और जलन भी हो सकती है। अगर आपको ब्रेस्ट पर ज्यादा दबाव पड़ेगा, तो उसकी वजह से हमारी भोजन नलिका पर भी प्रेशर पड़ता है और पाचन खराब रहने लगता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 19:34:20 +0530</pubDate>
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<title>Eye Makeup Side Effects: रोज आईलाइनर&#45;मस्कारा लगाना पड़ सकता है भारी, जानें ये 3 बड़े Risk</title>
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<description><![CDATA[ ऑफिस से लेकर बाहर जाने के लिए हम सभी आईलाइनर-मस्करा जरुर लगा सकते हैं। हम सभी महिलाएं आईलाइनर और मस्कारा जैसे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। अब मन में सवाल आता है कि क्या आंखों पर आईलाइनर और मस्कारा का रोज इस्तेमाल करना सही? क्या रोजाना आईलाइनर और मस्कारा लगाने से आंखों की हेल्थ पर असर पड़ता है। आइए आपको बताते हैं रोजाना आईलाइनर-मस्करा लगाने  से क्या होता है।आईलाइनर-मस्करा लगाने से क्या नुकसान होते हैं?आईलाइनर और मस्कारा जैसे कैमिकल युक्त वाले उत्पादों का लंबे समय तक और बार-बार उपयोग आंखों के लिए हानिकारक हो सकता है। इनका लगातार इस्तेमाल आंखों की नाजुक त्वचा और सतह को प्रभावित कर सकता है, जिससे जलन, लालिमा और आंखों से पानी आने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।एलर्जी हो सकती हैअगर आप काफी लंबे समय से रोजाना कैमिकल युक्त आईलाइनर और मस्कारा का इस्तेमाल करने से आंखों में एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस की समस्या हो सकती हैं। इस परिस्थिति में आंखों की सफेद झिल्ली में सूजन आने लगती हैं, जिसके कारण आंखों में जलन होने, खुजली होने और लाल होने की समस्या हो सकती है।आंखों से पानी आने की समस्या हो सकती हैयदि आप आंखों में काफी लंबे समय से आईलाइनर-मस्करा लगाने से आंखों पानी आने की समस्या होने लगती है। आंखों में अधिक ड्राइनेस हो सकती है। इसके कारण आंखों की बीमारी के खतरे बढ़ते हैं, जिससे आंखों की रोशनी के कमजोर होने की समस्या भी हो सकती है। ग्लैंड होने की समस्याबार-बार आईलाइनर और मस्कारा लगाने से आंखों की पलकों के पास मौजूद तेल ग्रंथियां (ऑयल ग्लैंड) बंद हो सकती हैं। जब ये ग्रंथियां ठीक से काम नहीं करतीं, तो आंखों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाती, जिससे ड्राइनेस की समस्या हो सकती है। इसके कारण आंखों में जलन, चुभन और कभी-कभी धुंधला दिखाई देने जैसी परेशानियां भी महसूस हो सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 19:34:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Early Pregnancy Signs: क्या पेट छूकर Pregnancy कन्फर्म होती है, जानें इस वायरल दावे पर Medical Experts की राय</title>
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<description><![CDATA[ आज भी महिलाओं के मन में प्रेग्नेंसी और डिलीवरी से जुड़ी काफी बातों को लेकर मन में कंफ्यूजन है। पीरियड मिस होने के कितने दिन बात प्रेग्नेंसी टेस्ट करना चाहिए और डिलीवरी के बाद पहला पीरियड कब आता है या फिर क्या प्रेग्नेंसी के दौरान सेक्शुअल रिलेशन सही है। महिलाओं के मन में ऐसे कई सवाल होते हैं, जिनको लेकर महिलाएं कंफ्यूज रहती हैं।  ऐसा ही एक सवाल यह भी है कि क्या पेट छूकर भी प्रेग्नेंसी का अनुमान लगाया जा सकता है कि आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं। गांवों या फिर पारंपरिक सोच रखने वाले परिवारों में इसको लेकर कई मिथ हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या पेट छूकर प्रेग्नेंसी के बारे में पता लगाया जा सकता है।इसे भी पढ़ें: पानी पीते ही Toilet जाने की Problem? Normal है या कोई गंभीर Health Warningजानिए क्या कहते हैं एक्सपर्टएक्सपर्ट की मानें, को पेट को छूकर प्रेग्नेंसी का पता नहीं लगाया जा सकता है। शुरूआती महीनों में पेट छूकर प्रेग्नेंसी का अंदाजा लगाना काफी मुश्किल है। ऐसे में प्रेग्नेंसी है या नहीं इसको बाहर से महसूस कर पाना संभव नहीं है।बता दें कि पहले के 2-3 महीने में यूट्रस, पेल्विक एरिया के अंदर रहता है। वहीं बाहर से पेट भी बढ़ा हुआ नहीं नजर आता है। अगर किसी महिला का पेट बढ़ा हुआ है, तो इसके पीछे वजन बढ़ना, गैस, ब्लोटिंग, हार्मोनल बदलाव और पीरियड से पहले सूजन जैसे कई कारण हो सकते हैं।वहीं अगर आप प्रेग्नेंसी के लिए ट्राई कर रही हैं और आपके पीरियड्स मिस हो गए हैं। तो ऐसे में सीधे इसको प्रेग्नेंसी का संकेत मानना गलत है।पीरियड्स मिस होने के करीब 2 सप्ताह बाद आप होम किट से प्रेग्नेंसी की जांच कर सकती हैं। इसके बाद अल्ट्रासाउंज और ब्लड टेस्ट से आगे की पूरी जानकारी मिलती है।अगर टेस्ट पॉजिटिव आए और पेट में दर्द, चक्कर, ब्लीडिंग या कमजोरी महसूस हो रही है, तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।शुरूआती लक्षणपीरियड्स मिस होनाज्यादा थकान लगनाबार-बार पेशाब जानास्तनों में दर्द या भारीपनखाने-पीने में बदलाव ]]></description>
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<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 19:31:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: इन लोगों को भूल से भी नहीं करना चाहिए काली मिर्च का सेवन, सेहत को होगा बड़ा नुकसान</title>
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<description><![CDATA[ काली मिर्च खाने के स्वाद को पूरी तरह बदल सकती है, फिर चाहे सूप हो, सब्जी हो, या काढ़ा, इससे आपको एक अलग ही तरह का टेस्ट मिलता है। यूं तो काली मिर्च को सेहत के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है। यह ना केवल डाइजेशन बेहतर बनाता है, बल्कि मेटाबॉलिज्म को थोड़ा बूस्ट मिलता है, और इम्यूनिटी के लिए भी अच्छा माना जाता है। लेकिन हर किसी के लिए काली मिर्च फायदेमंद नहीं होती है। कुछ लोगों को इसके सेवन से नुकसान भी उठाना पड़ सकता है, खासकर जब इसे ज्यादा मात्रा में या हर दिन लिया जाए। अगर आपको एसिडिटी, बवासीर, गले में जलन जैसी समस्याएं रहती हैं, तो काली मिर्च आपके शरीर पर उल्टा रिएक्ट कर सकती है। अक्सर हम इसे नजरअंदाज कर देते हैं और फिर परेशानी काफी ज्यादा बढ़ जाती है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि किन लोगों को काली मिर्च का सेवन करने से बचना चाहिए-इसे भी पढ़ें: सीढ़ियों पर फूलती है सांस? ये Lungs की कमजोरी का Sign, Health Experts से जानें समाधानएसिडिटी या अल्सर की समस्याअगर आपको एसिडिटी या अल्सर की शिकायत रहती है तो ऐसे में आपको काली मिर्च का सेवन करने से बचना चाहिए। काली मिर्च की तासीर गर्म होती है और यह पेट में एसिड बढ़ाती है। साथ ही, पेट की अंदरूनी परत में जलन पैदा कर सकती है, जिसकी वजह से आपको सीने में जलन या दर्द महसूस हो सकता है।बवासीर की समस्याअगर आपको बवासीर की शिकायत है तो ऐसे में काली मिर्च के सेवन से आपके डाइजेस्टिव ट्रैक्ट में जलन पैदा हो सकती है। ऐसे में आपको मल त्याग करते समय दर्द या जलन का अहसास हो सकता है। साथ ही, यह दर्द और सूजन दोनों को बढ़ा सकता है। इसलिए, बवासीर होने पर मसालेदार खाने से परहेज करना चाहिए।प्रेग्नेंसी में बचेंअगर आप प्रेग्नेंट हैं तो ऐसे में आप काली मिर्च का सेवन सीमित मात्रा में कर सकते हैं, लेकिन इसे बहुत अधिक लेने से बचना चाहिए। वरना आपको एसिडिटी, जलन, गैस व पाचन में दिक्कत हो सकती है। दरअसल, प्रेग्नेंसी में पेट पहले से ही सेंसिटिव होता है और ऐसे में काली मिर्च का ज्यादा सेवन इसे और भी परेशान कर सकता है।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 19:31:02 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: पीरियड्स में दर्द और क्रैम्प्स से नहीं होगी परेशानी, बस इन फलों का करें सेवन</title>
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<description><![CDATA[ पीरियड्स का दौर किसी भी महिला के लिए काफी परेशानीभरा होता है। इस दौरान सिर्फ ब्लीडिंग ही नहीं होती, बल्कि क्रैम्प्स, ब्लोटिंग, थकान, मूड स्विंग्स, क्रेविंग और लो एनर्जी जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। अमूमन महिलाओं के पास इन्हें बरदाशत करने के अलावा दूसरा ऑप्शन नहीं होता। लेकिन अगर आप थोड़ी स्मार्टनेस दिखाएं और सही फूड को खाएं तो इससे आप काफी हद तक अपने दर्द से राहत पा सकती हैं।  पीरियड्स के दौरान बॉडी में कई बार इन्फ्लेमेशन बढ़ सकती है और आयरन लॉस की वजह से कमजोरी भी महसूस हो सकती है। ऐसे में फलों का सेवन करना काफी अच्छा माना जाता है, क्योंकि ये नेचुरल हीलर की तरह काम करते हैं। जहां पोटैशियम रिच केला ऐंठन को आराम देता है, वहीं संतरा थकान और आयरन एब्जॉर्प्शन में मदद करते हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ फलों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें पीरियड्स में खाने से काफी फायदा मिल सकता है-इसे भी पढ़ें: Health Tips: इन लोगों को भूल से भी नहीं करना चाहिए काली मिर्च का सेवन, सेहत को होगा बड़ा नुकसानकेलापीरियड्स क्रैम्प्स से राहत पाने में केला काफी मददगार है। इसमें मौजूद पोटैशियम क्रैम्प को कम करता है, वहीं विटामिन बी6 मूड स्विंग्स को मैनेज करते हैं। आप केले को ऐसे ही खा सकती हैं या फिर इसे स्मूदी की तरह भी लिया जा सकता है। इसके अलावा, अगर आप चाहें तो केले को पीनट बटर के साथ भी खा सकती हैं।संतरासंतरा विटामिन सी रिच होता है और इससे आयरन का अब्जॉर्बशन बेहतर तरीके से होता है। अगर आपको पीरियड्स में थकान और कमजोरी महसूस कर रही हैं तो ऐसे में आप संतरे का सेवन करें। साथ ही, यह इम्यूनिटी सपोर्ट भी करता है।अनानासअनानास में ब्रोमेलेन एंजाइम पाया जाता है जो सूजन और ऐंठन को कम करने में मदद करता है। साथ ही, यह पाचन बेहतर करता है और मीठे की क्रेविंग शांत करता है। हालांकि ध्यान रखें कि आप इसे ज्यादा ना खाएं।सेबसेब का सेवन सेहत के लिए काफी अच्छा माना जाता है। यह फाइबर रिच होता है जो कब्ज और पेट फूलने जैसी समस्याओं से आराम मिलता है। साथ ही, इससे मिलने वाली नेचुरल शुगर आपको लगातार एनर्जी देती है। आप सेब को नट्स के साथ खा सकती है। इससे आपको क्रैम्प्स से भी राहत मिलती है।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 19:31:01 +0530</pubDate>
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<title>Miscarriage के बाद कब शुरू करें Sexual Life? जानें फिजिकल और मेंटल Recovery का सही समय</title>
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<description><![CDATA[ ज्यादातर लोगों का यहीं सवाल होता है कि मिसकैरेज के बाद कितने दिनों तक सेक्शुअल रिलेशन से बचना जरुरी चाहिए। मिसकैरेज यानी गर्भपात किसी भी महिला के लिए फिजिकल और मेंटल लेवल पर बहुत सेंसिटिव होता है। इससे जल्दी रिकवर होने में काफी समय लग जाता है। यह समय हर किसी महिला के लिए अलग-अलग हो सकता है। मिसकैरेज के बाद महिलाओं के शरीर, हार्मोंस और इमोशंस सभी को पहले जैसा होने के लिए कुछ समय जरुर लेता है। इस मुश्किल समय में पार्टनर की समझ और सहारा काफी मायने रखता है। ज्यादातर कपल्स के मन में ये सवाल आता है कि मिसकैरेज के बाद दोबार से वे अपनी सेक्शुअल लाइफ कब शुरु कर सकते हैं या फिर कब इंटिमेट होना सही होता है। आइए आपको बताते हैं हेल्थ एक्सपर्ट की राय क्या है।मिसकैरेज के बाद दोबारा सेक्शुअल रिलेशन कब बनाने चाहिए?- डॉक्टर के मुताबिक, मिसकैरेज के बाद लगभग 2-3 हफ्तों तक सेक्शुअल रिलेशन को पूरी तरह अवॉइड करना जरुरी है।- क्योंकि इस दौरान गर्भाशय और सर्विक्स का मुंह पूरी तरह से बंद होता है और वजाइना भी सेंसिटिव हो जाती है, ऐसे में इंफेक्शन का खतरा रहता है और दर्द भी अधिक होता है।- इस दौरान महिलाओं की ब्लीडिंग पूरी तरह से बंद न हुई हो, तो सेक्शुअल रिलेशन बिल्कुल नहीं होना चाहिए। ऐसे में कुछ डॉक्टर 3-4 हफ्ते रुकने की सलाह भी दे सकते हैं। इसलिए अपने डॉक्टर से एक बार सलाह ले कि, मिसकैरेज के बाद दोबारा इंटिमेट होने से पहले डॉक्टर की सलाह जरुर लें।- यदि आपका मिसकैरेज किसी मेडिकल प्रोसिजर से हुआ है, ज्यादा ब्लीडिंग या इंफेक्शन रहा हो या शरीर बहुत कमजोर महसूस कर रहा है, तो शरीर को समय देने की काफी जरुरत होती है। जल्दबाजी बिल्कुल न करें।- मिसकैरेज के बाद महिलाओं के शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है। साथ ही गर्भाशय की अंदरूनी परत को पूरी तरह से ठीक होकर सामान्य अवस्था में आने में कुछ समय लगता है। इसलिए शारीरिक संबंध दोबारा शुरू करने से पहले शरीर को पर्याप्त आराम देना और उचित समय तक प्रतीक्षा करना बेहद आवश्यक होता है, ताकि स्वास्थ्य पूरी तरह से सुरक्षित रह सके।- यदि आप जल्दबाजी करेंगे तो दोबारा से ब्लीडिंग समस्या शुरु हो सकती है और इंफेक्शन का खतरा भी रहता है।- इस बात को समझना जरुरी है कि मिसकैरेज के बाद किसी भी महिला को फिजिकल ही नहीं, बल्कि मेंटल तौर पर भी प्रभावित करता है, इसलिए अगर वो फिजिकली फिट भी हैं, लेकिन मेंटली ठीक महसूस नहीं कर रही हैं, तो उन्हें समय दें।- यदि फिर से कंसीव करना चाहते हैं तो डॉक्टर की सलाह लें कि अगली प्रेग्नेंसी की कोशिश से पहले कम से कम नॉर्मल पीरियड साइकिल आने दें। क्योंकि इससे शरीर पूरी तरह से तैयार हो जाता है और गर्भ ठहरने की संभावना बेहतर रहती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 19:31:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Heart Attack का खतरा होगा कम, नसों में जमा Bad Cholesterol साफ करेगा यह खास लहसुन</title>
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<description><![CDATA[ भागदौड़ भारी जिंदगी, गलत खान-पान और तनाव के कारण हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या बढ़ने लगी है। यह समस्या बेहद आम हो गई है और यह काफी तेजी बढ़ता जा रहा है। नसों में जमा हुआ खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) हार्ट ब्लॉकेज, हाई बीपी और दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियां का खतरा बढ़ा सकता है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए लोग अक्सर दवाओं पर निर्भर रहने लगते हैं, लेकिन क्या आप जानती हैं कि आयुर्वेद में इसका नेचुरल और असरदार समाधान है। अब आप कश्मीरी लहसुन की मदद से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल कर सकते हैं। यह उपाय बेहद ही शक्तिशाली देसी उपाय है। यह न सिर्फ बैड कोलेस्ट्रॉल कम करता है, बल्कि गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) बढ़ाने और हार्ट हेल्थ को बेहतर रखने के लिए सबसे बढ़िया है। कोलेस्ट्रॉल का देसी रामबाण उपाय- कश्मीरी लहसुन कश्मीरी लहसुन जिसे ‘एक कली लहसुन’ के नाम से भी जाना जाता है, अपने विशेष औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। यह हृदय स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इसमें पाए जाने वाले प्रबल एंटीऑक्सीडेंट और सल्फर तत्व शरीर में जमा हानिकारक कोलेस्ट्रॉल (LDL) को घटाने तथा लाभकारी कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं, जिससे दिल को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। इसलिए आप दवाओं की जगह एक बार डॉक्टर से सलाह लेकर आयुर्वेदिक उपाय जरुर करें। कश्मीरी लहसुन को कैसे खाएं?- सबसे पहले आप कश्मीरी लहसुन की 4-5 छोटी कलियां जरुर लें।- इन्हें आप छीलकर हल्का से कूट लें। - सुबह खाली पेट अच्छी तरह चबाकर खाएं और इन्हें पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं और धीरे-धीरे पिएं।- इसके सेवन के बाद कम से कम 1 घंटे तक कुछ भी न खाएं-पिएं।कश्मीरी लहसुन के फायदे- कश्मीरी लहसुन खाने से गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL)को नेचुरली बढ़ा सकता है, जिससे आपका दिल स्वस्थ रहेगा और धमनियों में लचीलापन बना रहेगा।- खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को घटाने में यह सहायक माना जाता है। इससे धमनियों में जमा वसा धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे रक्त प्रवाह बेहतर होता है और नसों में रुकावट या ब्लॉकेज होने की संभावना घट सकती है।- हार्ट की धमनियों को मजबूत बनाकर हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करता है और हार्ट अटैक जैसी समस्याओं के खतरे को कम करता है।- यह शरीर में सूजन कम करता है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है। जिससे पूरे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण प्रदान करता है।- इसमें पाई जाने वाली एंटीऑक्सीडेंट गुण फ्री-रेडिकल्स से लड़ने में मदद करता है, जिससे सेल डैमेज कम होता है और एजिंग प्रोसेस धीमी पड़ जाती है। - ब्लड प्रेशर को बैलेंस रखता है, जिससे हाई बीपी से जुड़ी बीमारियों का खतरा न हो। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 23:04:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Vitamin&#45;E Deficiency: Muscle Pain से लेकर Nervous System तक, Vitamin E की कमी दे रही है ये गंभीर संकेत</title>
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<description><![CDATA[ स्वस्थ रहने के लिए शरीर तक सभी पोषक तत्वों का सही मात्रा में पहुंचना जरूरी है। लेकिन हम कुछ ही विटामिन और मिनरल्स पर ध्यान देते हैं और कुछ को अनदेखा कर देते हैं। इनमें से एक विटामिन ई भी है। यह एक जरूरी पोषक तत्व है, जो शरीर को हेल्दी रखने में अहम भूमिका निभाता है। विटामिन ई एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो सेल्स को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से बचाने का काम करता है।बता दें कि विटामिन ई स्किन, आंखों, बालों और इम्यून सिस्टम के लिए भी बेहद जरूरी होता है। इस विटामिन की कमी होने पर शरीर में कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको विटामिन ई की कमी के लक्षण और इस कमी को दूर करने के तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Heart Attack का खतरा होगा कम, नसों में जमा Bad Cholesterol साफ करेगा यह खास लहसुनविटामिन ई की कमी के लक्षणमांसपेशियों में दर्दविटामिन ई की कमी से मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी की समस्या हो सकती हैं। विटामिन ई नर्वस सिस्टम को सही तरीके से काम करने में मदद करता है। इसलिए इस विटामिन की कमी से मसल कॉर्डिनेशन भी प्रभावित होता है।स्किन संबंधी समस्याएंविटामिन ई स्किन को हेल्दी रखने में मदद करता है। विटामिन ई की कमी से स्किन बेजान, रुखी और खुजली वाली हो सकती है। वहीं कुछ मामलों में स्किन पर झुर्कियां या धब्बे दिखाई दे सकते हैं।कमजोर इम्यूनिटीयह विटामिन शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है। विटामिन ई की कमी से बीमारियों और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ सकता है और उसको ठीक होने से अधिक समय लग सकता है।आंखों की समस्याआंखों के लिए भी विटामिन ई जरूरी होता है। शरीर में विटामिन ई की कमी से आंखों में थकान, धुंधला दिखाई देना और रेटिना से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। अगर आप लंबे समय तक विटामिन ई की कमी को इग्नोर करते हैं, तो आंखें कमजोर हो सकती हैं।थकान और कमजोरी होनाशरीर में विटामिन ई की कमी से शरीर में एनर्जी लेवल कम हो जाता है। जिस कारण व्यक्ति लगातार कमजोरी और थकाम महसूस करता है। यह लक्षण अक्सर अन्य पोषक तत्वों की कमी के साथ जुड़ा होता है।बालों का रूखापन और झड़नाविटामिन ई बालों के विकास और हेल्थ के लिए जरूरी होता है। जब शरीर में इस विटामिन की कमी होती है, तो बाल बेजान, रूखे और कमजोर नजर आते हैं। जिस कारण बाल ज्यादा झड़ने लगते हैं।नर्वस सिस्टम से जुड़ी दिक्कतेंबता दें कि विटामिन ई की कमी होने पर नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है। जिसकी वजह से हाथ-पैरों में सुन्नता और झनझनाहट जैसे समस्याएं हो सकती हैं।इन फूड्स से पूरी करें विटामिन ई की कमीसूरजमुखी के बीज और तिलएवोकाडो और कीवीबादाम, मूंगफली और अखरोटपालक, ब्रोकली और हरी पत्तेदार सब्जियांसोयाबीन तेल और जैतून का तेल ]]></description>
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<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 23:04:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>पानी पीते ही Toilet जाने की Problem? Normal है या कोई गंभीर Health Warning</title>
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<description><![CDATA[ स्वस्थ रहने के लिए डॉक्टर भी कहते हैं अत्यधिक पानी पीना अच्छा होता है। शरीर के लिए भी पर्याप्त पानी पीना बेहद जरुरी होता है। आमतौर पर पानी पीने के बाद यूरिन आना भी नेचुरल प्रोसेस है। हम सभी जानते हैं कि दिनभर में हमें कम से कम 2-3 लीटर पानी पीना चाहिए। हालांकि, दिनभर में कितनी बार पेशाब आना नॉर्मल माना जाता है, कुछ लोग तो इसे नॉटिस ही नहीं करते है। हालांकि कुछ नोटिस करते हैं कि कई बार पानी पीने के बाद हर 10-15 मिनट बाद पेशाब जरुर जाते हैं। ऐसे में लोग इस समस्या बचने के लिए पानी पीना कम तो नहीं कर देते हैं, अब मन में सवाल उठता है कि यह सब नॉर्मल है या कोई बीमारी का संकेत है। आइए आपको बताते हैं विस्तार से-क्या पानी पीने के हर 10-15 मिनट बाद पेशाब आना नॉर्मल है?- अगर आप पानी पीने के बाद हर 10-15 मिनट में पेशाब जाते हैं, तो कई लोगों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। वैसे यह किसी गंभीर समस्या का संकेत नहीं है, लेकिन इसके पीछे कुछ कारण हो सकते हैं, जिन पर जरुर ध्यान दें।- जब कोई व्यक्ति कम समय में बहुत ज्यादा पानी पी लेता है, तो शरीर संतुलन बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने की प्रक्रिया तेज कर देता है। इस कारण किडनी अधिक मात्रा में बार-बार मूत्र बनाता है, जिससे मूत्राशय जल्दी-जल्दी भरने लगता है। परिणामस्वरूप व्यक्ति को बार-बार पेशाब जाने की आवश्यकता महसूस होती है।- अक्सर कुछ लोगों का ब्लैडर काफी सेंसिटिव होता है, जिससे थोड़ी मात्रा में पेशाब बनने पर भी पेशाब लगने लगती है। इसके अलावा चाय, कॉफी, कैफीन, शरब, मसालेदार भोजन और आर्टिफिशियल मिठास, मूत्राशय को उत्तेजित कर सकते हैं।- स्ट्रेस और चिंता के कारण भी समस्या अधिक बढ़ जाती है। यह मानसिक दबाव का सीधा असर, हमारे बॉडी फंक्शंस पर होता है।- यदि बार-बार पेशाब आने के साथ जलन,दर्द,दुर्गंध,अत्यधिक थकान या बहुत ज्यादा प्यास लगने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। यह स्थिति यूरिन इंफेक्शन,डायबिटीज, अधिक सक्रिय मूत्राशय या हार्मोन असंतुलन से जुड़ी हो सकती है। इसके अलावा, कुछ दवाएं खासकर वे जो शरीर से पानी निकालने का काम करती हैं वे भी बार-बार पेशाब आने का कारण बन सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 23:04:17 +0530</pubDate>
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<title>Miscarriage के बाद Periods में देरी? जानें कब Normal होता है आपका Menstrual Cycle</title>
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<description><![CDATA[ प्रेग्नेंसी के दौरान मिसकैरेज होने से इसका असर महिलाओं के पूरे शरीर पर पड़ता है। अक्सर इन बदलावों का सिलसिला कुछ महीनों तक चलता है। इसकी वजह से शारीरिक ही नहीं, बल्कि मेंटल और इमोशनल लेवल पर भी महिलाओं की बॉडी में कई बदलाव आते हैं। मिसकैरेज के बाद हार्मोनल बदलावों का प्रभाव महिलाओं के पीरियड्स पर जरुर पड़ते हैं। इस दौरान महिलाओं के मन भी कई सवाल आते है, जैसे कि दोबारा पीरियड्स कब से आएंगे, क्या फिर से कंसीव करने में कोई दिक्कत तो नहीं होगी या कहीं फिर से ऐसा तो नहीं होगा। इस समय में महिलाओं को अपनी सेहत का खासा ध्यान रखना होता है। मिसकैरेज के बाद दोबारा पीरियड्स कब आते हैं, आइए जानते हैं डॉक्टर क्या कहते हैं।मिसकैरेज के बाद पहला पीरियड कब आता है?- मिसकैरेज होने के बाद किसी भी महिला के शरीर को दोबारा से ठीक होने में थोड़ा समय तो लगता है। प्रेग्नेंसी के वक्त बढ़े हुए हार्मोन्स जैसे HCG, प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन, मिसकैरेज के बाद धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं। - डॉक्टर के मुताबिक, जब ये हार्मोन नॉर्मल लेवल पर आते हैं, तो ओव्यूलेशन दोबारा शुरु हो जाता है और उसके बाद पहला पीरियड आता है।- दरअसल, मिसकैरेज के 4 से 6 हफ्तों के अंदर पहला पीरियड आ जाता है। क्योंकि हर महिला में यह अलग-अलग हो सकता है। कुछ महिलाओं को 3 हफ्ते में भी पीरियड आ जाते हैं, तो कुछ को 8 हफ्ते तक इंतजार करना पड़ता है।- वैसे यह इस बात पर निर्भर करता है कि गर्भ कितने हफ्तों का था और मिसकैरेज नैचुरल था या मेडिकल प्रोसीजर से हुआ था।- यदि मिसकैरेज से पहले आपका पीरियड साइकिल रेगुलर था, तो ये जल्दी ही नॉर्मल हो जाएगा।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 12:44:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Jawline Acne से हैं परेशान? यह खास Detox ड्रिंक 7 दिन में देगा बिल्कुल Clear Skin</title>
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<description><![CDATA[ आजकल खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण स्किन संबंधित समस्याएं बढ़ती ही जा रही है। जॉलाइन पर छोटे-छोटे दाने नजर आने से आपके चेहरे की खूबसूरती भी कहीं न कहीं खो जाती है। इसके लिए आप चेहरे पर महंगी क्रीम और सीरम लगाती होती हैं। हालांकि, कोई खास असर नहीं हो रहा है। इसके लिए शरीर की अंदरूनी सेहत पर भी निर्भर करती है। शरीर में जमे टॉक्सिंस और डाइजेशन से संबंधित गड़बड़ी का संकेत होते हैं। यदि आप भी महंगी दवाओं और केमिकल-भरपूर क्रीम्स की जगह नेचुरल तरीके अपनाएंगे तो इन दानों को कम किया जा सकता है। आइए आपको बताते हैं कैसे इन दानों से छुटकारा पाएं। सुबह का रूटीनसुबह खाली पेट एक गिलास पानी में नीम की पत्तियां, तुलसी और थोड़ी सी काली मिर्च उबालकर पीना फायदेमंद माना जाता है। नीम में प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और एंटीपैरासिटिक गुण होते हैं, जो पेट में मौजूद हानिकारक कीटाणुओं और कीड़ों को कम करने में मदद करते हैं। तुलसी पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है, जबकि काली मिर्च शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होती है। नियमित सेवन से आंतों की सेहत सुधरती है और त्वचा पर होने वाले छोटे-छोटे दानों में भी धीरे-धीरे सुधार दिखाई दे सकता है।सामग्री- 1 गिलास पानी- 1/4 चम्मच नीम पाउडर- तुलसी के पत्ते- 4-5 - 1 चुटकी काली मिर्चविधि- इन सभी चीजों को पानी में मिलाकर उबाल लें।- छानकर सुबह के बाद या मिड-मॉर्निंग में धीरे-धीरे पिएं।शाम का रूटीनशाम के वक्त आपको बस 1 गिलास पानी में अजवाइन और सौंफ उबालकर लेना है। ऐसा इसलिए क्योंकि सौंफ में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण पाचन को दुरुस्त रखते हैं, गैस और सूजन को कम करते हैं, वहीं अजवाइन पेट में जमा कीड़ों और खराब बैक्टीरिया को खत्म करता है। यह ड्रिंक आंतों को साफ रखता है, मेटाबॉलिज्म सुधारता है और अंदरुनी गंदगी को बाहर निकालकर स्किन संबंधित समस्याओं को कम करता है।सामग्री- 1 गिलास पानी- 1/4 चम्मच अजवाइन - 1/4 सौंफविधि- इन सभी चीजों को एक साथ पानी में मिलाकर 5 मिनट तक उबालें।- इसे छानकर शाम को आराम से घूंट-घूंट कर पिएं।रात का रुटीनरात के समय सोने से पहले अरंडी तेल लेने से पेट के कीड़े बाहर निकलते हैं। यह आंतों की सफाई करता है और मैजिक क्लींजर की तरह काम करता है, जिससे पाचन तंत्र हल्का रहता है और शरीर अंदर से डिटोक्स करता है। सामग्री- अरंडी का तेल- 1 चम्‍मचविधि- 1 चम्मच अरंडी का तेल लें।हफ्ते में एक बार का रूटीनपपीते के बीजों को शहद के साथ सेवन करने से पेट की अंदरूनी सफाई में मदद मिलती है। यह मिश्रण पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है और पेट में जमा टॉक्सिक तत्वों तथा कीड़ों को बाहर निकालने में सहायक माना जाता है। साथ ही, यह आंतों को स्वस्थ रखने और उनकी कार्यक्षमता सुधारने में भी लाभदायक होता है।सामग्री- 1 चम्मच पपीते के बीज का पाउडर - 1/2 चम्मच शहदविधि- इसके लिए पपीते के बीज का पाउडर और शहद को मिलाएं। - अब गुनगुना पानी के साथ इसका सेवन करे।यह आयुर्वेदिक रूटीन आपके पेट और त्वचा को साफ करती हैं और पाचन को भी सही रखता है। यदि आप प्रेग्नेंट हैं या किसी गंभीर बीमारी का दवा ले रहे, तो यह रुटीन फॉलो करन से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह जरुर ले।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 12:44:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>How To Reduce Stress: Mental Health पर पड़ रहा है बुरा असर, Depression के इन लक्षणों को पहचानकर ऐसे करें बचाव</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बुजुर्गों तक हर उम्र के लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। आसपास फैली निगेटिविटी की वजह से लोगों को तनाव हो रहा है। आधुनिकता के इस दौर में लोगों का लाइफस्टाइल बिगड़ चुका है। विश्व भर में करीब 300 मिलियन लोग डिप्रेशन की समस्या से गस्त हैं। इसलिए हर व्यक्ति को न सिर्फ फिजिकली बल्कि मेंटली भी फिट होना जरूरी है। हर व्यक्ति के जीवन में विपरीत परिस्थितियां जरूर आती हैं। जब आप उन परिस्थितियों के हिसाब से नहीं ढल पाते हैं, तो व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो जाता है।इन दिनों बढ़ता वर्क प्रेशर और भावनाओं पर कंट्रोल की कमी के कारण तनाव बढ़ रहा है। ऐसे में हर समय सोचना, नींद न आना, भूख का अचानक से बढ़ जाना या घर जाना इसके संकेत होते हैं। यह डिप्रेशन के शुरूआती लक्षण होते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको डिप्रेश के संकते और इससे बचने के उपाय के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Miscarriage के बाद Periods में देरी? जानें कब Normal होता है आपका Menstrual Cycleडिप्रेशन के लक्षणहर समय एकांत की तलाश में रहनालोगों से कम बातचीत करनाकिसी भी काम पर फोकस नहीं कर पानापूरी नींद न लेनाभूख बढ़ना या फिर कम हो जानाहर समय उदास रहनाआत्म नियंत्रण की कमी होनाऐसे कम करें तनावमजबूत रिलेशनशिप बनाएंअकेलापन तनाव का कारण बनने लगता है। अकेलापन व्यक्ति को अंदर ही अंदर मानसिक रूप से खोखला बना देता है। ऐसे लोगों को हर व्यक्ति में सिर्फ कमियां नजर आती हैं। जोकि उनके झुंझलाहट की वजह होती है। खुद को डिप्रेशन से बाहर निकालने के लिए लोगों में मजबूत बॉन्डिंग बनाने की कोशिश करें। दूसरों पर विश्वास करना सीखें। इससे आपके पर्सनल रिश्ते में भी मजबूती आएगी।इंटरैक्टिव बनना सीखेंअपने विचारों को लिखने के साथ-साथ उनको एक्सप्रेस भी करें। जो भी आप महसूस करते हैं, उसको जाहिर होने दें। दिन भर में कुछ समय दोस्तों से बातचीत करें। अपने परिवार के साथ समय बिताएं, बच्चों के साथ खेलें और उनके विचारों को जानें। इन चीजों से आपका तनाव खुद ब खुद दूर होने लगेगा। साथ ही अभिव्यक्ति आपके अंदर के डर को खत्म करने सुकून पहुंचाएगी। इससे आपकी मेंटल हेल्थ भी सही रहेगी।फिजिकली एक्टिवसिडेंटरी लाइफस्टाइल को छोड़कर कुछ समय एक्सरसाइज के लिए भी निकालना चाहिए। इससे न सिर्फ आप चिंतामुक्त हो पाते हैं, बल्कि आप फिजिकली भी फिट रहते हैं। दिनभर में वॉक के साथ ही योगासन और हाई इंटसिटी एक्सपरसाइज को भी शामिल करें। अपनी पसंदीदा एक्टिविटी आपको तनाव जैसी समस्या से बाहर निकालने में मदद करेगा। इसके साथ ही आप डांसिंग और एरोबिक्स कर सकते हैं, यह भी मेंटल हेल्थ के लिए लाभकारी है।पूरी नींद लेना है जरूरीनींद न आना खराब लाइफस्टाइल का संकेत है। अगर आपको मेडिकल रीजन या कैफीन इनटेक की वजह से नींद नहीं आती है, तो आपको अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव लाना चाहिए। करीब 6 से 8 घंटे की नींद लेना जरुरी है। इससे तनाव खुद ब खुद दूर होने लगता है। इससे आलस और बार-बार झपकी आने की समस्या भी कम हो सकती है। रात को खाना खाने के बाद वॉक करना जरूरी है। इससे न सिर्फ कैलोरीज बर्न होती हैं, बल्कि थकान से भी नींद आने लगती है। ज्यादातर वह लोग जो दिनभर कोई काम न करते हुए समय बिताते हैं, उन लोगों को नींद न आने की दिक्कत से दो चार होना पड़ता है।हेल्दी डाइटस्लिम होने के लिए अगर आप मील को स्किप करते हैं, तो यह डिप्रेशन की वजह साबित होता है। ऐसे में सभी पोषक तत्वों को लेना जरूरी होता है। पौष्टिक तत्वों की कमी शरीर में थकान, कमजोरी और अनिद्रा की वजह बनती है। इससे चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है, जोकि डिप्रेशन की समस्या को बढ़ा देता है। मेंटली रूप से स्वस्थ रहने के लिए मौसमी फलों और सब्जियों का सेवन करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 12:44:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>How to Control Weight: बिना Gym जाए और सख्त Diet के घटेगा वजन, बस इन 5 आदतों को बनाएं Lifestyle का हिस्सा</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में वजन कम करना एक मुश्किल काम है। अधिकतर लोग बढ़ते वजन के कारण परेशान रहते हैं। वहीं वजन कम करने के लिए तरह-तरह की डाइट और वर्कआउट फॉलो करते हैं। लेकिन इसके बाद भी वजन कम नहीं होता है, खासकर पेट की चर्बी। वेट लॉस के लिए शारीरिक मेहनत, समर्पण और मानसिक दृढ़ता की जरूरत होती है। ऐसे में अगर आप भी हेल्दी तरीके से वेट कम करना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ महत्वपूर्ण टिप्स और आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको फॉलो करने से आप आसानी से वजन कम कर सकते हैं।घर का बना खानास्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि आप घर का खाना खाएं। क्योंकि जब आप घर का बना खाना खाते हैं, तो इसमें पोर्शन साइज, कैलोरी कंट्रोल और सामग्री की पूरी स्वतंत्रता मिलती है। रेस्तरां और पैकेज्ड फूड्स में कैलोरीज हाई होती है, जो वेट बढ़ने की वजह बन सकती है। इसलिए घर का पोषक तत्वों से भरपूर खाना खाएं।इसे भी पढ़ें: Joint Pain: घुटनों के दर्द को न करें नजरअंदाज, बढ़ सकता है Surgery का खतरा, पढ़ें ये Health Alertहेल्दी डाइट है जरूरीहेल्दी और फिट रहने के लिए प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स और वसा से भरपूर डाइट लें। प्रोटीन मांसपेशियों की मरम्मत करता है, वसा हार्मोनल असंतुलन के लिए जरूरी होता है और कार्बोहाइड्रेट्स ऊर्जा प्रदान करता है। ऐसे में डाइट में इन तीनों का संतुलन होना चाहिए। जिससे कि शरीर की सभी जरूरतें पूरी हो सकें। ज्यादा सख्त डाइट की बजाय हेल्दी और पौष्टिक खाना खाएं।वर्कआउट है जरूरीवर्कआउट के लिए आपको घंटों जिम में बिताने की जरूरत नहीं है। आप सप्ताह में 4-5 वर्कआउट सत्रों के साथ अपना वेट लॉस कर सकते हैं। लेकिन इन सत्रों में खुद को कड़ी मेहनत करने के लिए चुनौती दें। आप इस दौरान स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, लेग रेज और क्रंच जैसी एक्सरसाइज कर सकते हैं। इससे आप अपने शरीर को टोन कर सकते हैं।आराम है जरूरीबता दें कि आराम करना भी उतना ही जरूरी होता है, जितना कि वर्कआउट करना। इससे मांसपेशियों की ठीक तरह से रिकवरी होती है। आराम का मतलब आलसी होने से नहीं है। आप इस दौरान बाहरी एक्टिविटी का आंनद उठा सकते हैं, नींद पूरी कर सकते हैं। इससे आपको अगले वर्कआउट के लिए ताजगी और ऊर्जा मिलेगी।7-8 घंटे की नींदस्वस्थ रहने के लिए 7-8 घंटे की नींद जरूरी है। अगर आप 7-8 घंटे की नींद लेते हैं, तो मांसपेशियों की रिकवरी होती है और मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है। इससे फैट लॉस में भी मदद मिलती है। इसलिए नियमित रूप से ऊर्जावान और सक्रिय बने रहने के लिए पर्याप्त और अच्छी नींद जरूर लेना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 15:08:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Food Poisoning: Kitchen की ये 5 गलतियां बन सकती हैं Food Poisoning का कारण, Health Risk से ऐसे बचें</title>
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<description><![CDATA[ फूड पॉइजनिंग एक ऐसी स्थिति है, जो बासी, बैक्टीरिया युक्त या दूषित खाना खाने से होती है। लेकिन अक्सर फूड पॉइजनिंग को हम सामान्य पेट की खराबी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन आपकी यह लापरवाही शरीर में डिहाइड्रेशन और अंगों की विफलता की वजह बन सकती है। बता दें कि जब ई-कोलाई, साल्मोनेला या लिस्टेरिया जैसे सूक्ष्मजीव खाने के जरिए हमारे पाचन तंत्र में प्रवेश करते हैं, तो वह जहरीले तत्व छोड़ते हैं। जिससे दस्त, तेज बुखार और उल्टी जैसे लक्षण उभरते हैं।हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, फूड पॉइजनिंग की मुख्य वजह, भोजन पकाने, परोसने और स्टोर करने दौरान की जाने वाली लापरवाहियां और से होती हैं। विशेष रूप से नमी वाले मौसम और गर्मी के मौसम में फूड पॉइजनिंग की समस्या महामारी की तरह फैलसी है। खाने की स्वच्छता सिर्फ बाहरी सफाई तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह इस पर भी निर्भर करती है कि भोजन को सही तापमान में पकाया गया है या नमीं। ऐसे में आप इन जोखिमों को समझने के साथ अपने किचन की आदतों में सुधार करके ही इस समस्या से बच सकते हैं।भोजन पकाने और स्टोर करने में होने वाली गलतियांफूड पॉइजनिंग की सबसे बड़ी वजह &#039;क्रॉस-कंटैमिनेशन&#039; है। अक्सर लोग उसी चॉपिंग बोर्ड या चाकू का इस्तेमाल पकी हुई चीजों के लिए करते हैं, जिसका इस्तेमाल सब्जियों या कच्चे मांस के लिए किया था। वहीं खाने के कमरे के तापमान पर लंबे समय तक खुला छोड़ाना भी बैक्टीरिया को पनपने का मौका देता है। वहीं फ्रीजर में रखे खाने को बार-बार गर्म करने और फिर ठंडा करना भी टॉक्सिन्स पैदा करता है।पर्सनल हाइजीन की कमीहाथों की सफाई में कोताही बरतना भी फूड पॉइजनिंग एक बड़ी वजह हो सकती है। खाना बनाने से पहले या खाना खाने से पहले हाथों को साबुन से जरूर धोना चाहिए। वरना कीटाणु सीधा आपके पेट तक पहुंच जाएंगे। वहीं रसोई के कपड़ों और स्पंज की नियमित सफाई करनी चाहिए। क्योंकि इनमें भी लाखों बैक्टीरिया छिपे होते हैं, जोकि बर्तन के जरिए खाने को दूषित कर देते हैं।बाहर का खाना और अधपका खानाबाहर का खाना या स्ट्रीट फूड खाने के दौरान स्वच्छता के मानकों का ध्यान न रखना सेहत पर भारी पड़ता है। कच्चे अंडे, अधपका मांस या बिना धुली सब्जियां &#039;पैरासाइट्स&#039; का घर होती हैं। अधपके खाने में बैक्टीरिया जीवित रह जाते हैं और शरीर के अंदर पहुंचकर तेजी से प्रजनन करते हैं। विशेष रूप से सी फूड और डेयरी उत्पादों के मामले में बासी भोजन भी जानलेवा साबित हो सकती है।सतर्कता है जरूरीफूड पॉइजनिंग से बचाव पूरी तरह से आपके हाथों में होता है। अक्सर स्वाद के चक्कर में हम सेहत को भूल जाते हैं। इसलिए ताजा भोजन खाएं, कच्चे और पके भोजन को अलग-अलग स्टोर करें और रसोई के औजारों को साफ-सुथरा रखें। अगर संक्रमण के बाद लगातार तेज बुखार और उल्टी आ रही हैं, तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आपके द्वारा बरती गई छोटी सी सावधानी आपको हॉस्पिटल के खर्चे और शारीरिक कष्ट से बचा सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 15:08:50 +0530</pubDate>
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<title>बदलते मौसम में Bone Density हो रही है कम? महिलाएं इन 4 तरीकों से हड्डियों को बनाएं मजबूत</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर बदलते मौसम में ठंडी और तेज हवाएं शुरु हो जाती हैं। फरवरी के महीने में चलने वाली हवाओं से शरीर में जकड़न, जलन और दर्द को बढ़ा देती हैं। असल में बदलता मौसम हड्डियों और जोड़ों पर असर डालता है, लेकिन यह समय मिड लाइफ यानी 40 से 65 साल की महिलाओं के लिए हड्डियों की सेहत के लिहाज से खराब होता है। आमतौर पर इस उम्र में हार्मोनल बदलाव के कारण मेनोपॉज के आसपास, बोन डेंसिटी को तेजी से प्रभावित करते हैं, जिससे अकड़न, जलन, कमजोरी और चलने-फिरने में काफी दिक्कत होती है। ऐसे में इन लक्षणों को महिलाएं बढ़ती उम्र का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देती है। यही समय है कि जब थोड़ी-सी जागरुकता और सही देखभाल की जरुरत होती है जिससे हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत बनाया जा सके। क्या आपको सुबह उठते ही शरीर में अकड़न, पैरों या कमर में जलन, घुटनों में दर्द या थकान महसूस हो सकती है, यह संकेत आपकी हड्डियों को भी एक्स्ट्रा केयर करने का है। आइए आपको बताते हैं ये 4 आसान तरीके, जिससे आप अपनी हड्डियों को मजबूत कर सकती हैं।हड्डियां कमजोर होने का मुख्य कारणहार्मोनल बदलाव के कारण हड्डियों में असर पड़ता है। मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन तेजी से कम होता है, जो हड्डियों में कैल्शियम बनाए रखने के लिए जरुरी है। इसके घटने से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।विटामिन डी की कमी सर्दियों के दौरान धूप कम होती है, जिससे शरीर कैल्शियम को सही ढंग से अवशोषित नहीं कर पाता है।फिजिकल एक्टिविटी की कमठंड के मौसम में फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है। सर्दियों में कम चलने-फिरने से हड्डियों पर जरुरी प्रेशर नहीं पड़ता है, जिससे बोन लॉस प्रोसेस तेज हो जाता है।साइलेंट डिजीजऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण अक्सर तब तक सामने नहीं आते जब तक कि कोई फ्रैक्चर न हो जाए।हड्डियों को मजबूत करने के उपाययदि आप चाहती हैं कि आपकी हड्डियां बढ़ती उम्र के साथ मजबूत बनीं रहे, तो आज से ही कुछ जरुरी आदतों को अपनाएं। अगर आप अपनी लाइफस्टाइल को जरा-सा भी बदलेंगी तो आपकी हड्डियों की सेहत मजबूत बनीं रहेगी।धूप में बैठेंसुबह के समय रोजाना कम से कम 15-20 मिनट तक धूप जरुर लें। धूप से मिलने वाली विटामिन डी शरीर में कैल्शियम को सही तरीके से अवशोषित करता है, जिससे हड्डियां अंदर से मजबूत बनती हैं।एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएंअगर आप लंबे समय से एक ही जगह पर बैठे रहते हैं, तो यह आपकी हड्डियों को कमजोर कर देता है। हफ्ते में कम से कम 2-3 दिन वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज, जैसे वॉकिंग, स्क्वाट्स, सीढ़ियां चढ़ना या योगासन जरुर करें। ये एक्सरसाइज हड्डियों पर हल्का प्रेशर जरुर डालती हैं, जिससे बोन डेंसिटी बेहतरीन होती है। कैल्शियम से भरपूर डाइटहड्डियों के लिए सबसे जरुरी है कैल्शियम। अपनी डाइट में तिल, दूध, दही,हरी पत्तेदार सब्जियां,पनीर, गुड़ और बादाम को जरुर खाएं। इसके अतिरिक्त मैग्नीशियम और प्रोटीन भी हड्डियों की मजबूती के लिए सबसे जरुरी मानी जाती है और रोजाना संतुलित आहार का सेवन करें। रेगुलर चेकअप कराएं45 वर्ष की उम्र के बाद बोन डेंसिटी टेस्ट कराना एक समझदारी भरा कदम माना जाता है। यह जांच हड्डियों की मजबूती का आकलन करने में मदद करती है और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं को शुरुआती चरण में पहचान लेती है। समय पर सही इलाज और सावधानियां अपनाकर हड्डियों को कमजोर होने से बचाया जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 15:08:50 +0530</pubDate>
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<title>पेट की जिद्दी चर्बी के असली विलेन हैं ये Hormones, जानें इन्हें Control करने के Health Tips</title>
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<description><![CDATA[ खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण हमारे शरीर पर असर ज्यादा देखने को मिलता है। आज के समय में बेली फैट किसी को पसंद नहीं है। क्योंकि ये हमारे लुक्स को खराब करता है, बल्कि हमारा कॉन्फिडेंस को भी कम करता है। क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर में मौजूद कई हार्मोंस का लेवल जब ऊपर-नीचे होता है, तो इससे बेली फैट बढ़ने लगता है और लटकती हुई तोंद को कम करने में मुश्किल आती है। अक्सर एस्ट्रोजन, कोर्टिसोल, इंसुलिन और थायराइड जैसे हार्मोंस बेली फैट के बढ़ने का कारण बन जाते हैं। ऐसे में लटकती हुई तोंद किसी को पंसद नहीं होची है। आइए आपको बताते हैं हार्मोन्स को बैलेंस कैसे करें।बेली फैट के लिए जिम्मेदार हार्मोन्स को बैलेंस कर सकते हैं ये फू्ड्स- इंसुलिन हार्मोन को मैनेज करने के लिए बेली फैट कम किया जा सकता है। इसके लिए आप मेथी दाना, दालचीनी, करेला और मूंग दाल इंसुलिन लेवल को मैनेज करने में मदद करते हैं। जब इंसुलिन लेवल बढ़ा हुआ होता है, तो अंगों के आस-पास विसरल फैट बढ़ने लगता है। इन सबके सेवन से इंसुलिन लेवल मैनेज होने लगता है।- बेली फैट को कम करने के लिए स्ट्रेस हार्मोन यानी कोर्टिसोल का कम होना भी जरुरी है। जब शरीर में कोर्टिसोल बढ़ा हुआ होता है, तो शरीर फैट जमा करने लगता है और ऐसे में चर्बी को कम करना बहुत मुश्किल हो जाता है।- इसके अलावा, अश्वगंधा, तुलसी, बादाम और मुलेठी स्ट्रेस हार्मोन को कंट्रोल करने पेट की चर्बी कम करने में मदद करते हैं। यह दिमाग को शांत रखता है और धीरे-धीरे कोर्टिसोल स्तर को कम करता है। - अगर आपके शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल बढ़ा हुआ है, तो इस कारण से बेली फैट की समस्या उत्पन्न होने लगती हैं। अगर आप इसको कम करना चाहते हैं तो ब्रोकली, पत्तागोभी, नींबू और फ्लैक्स सीड्स को डाइट में शामिल करें। ये फूड्स अतिरिक्त एस्ट्रोजन को बाहर निकालने और लिवर को डिटॉक्स करने का काम करता है। - जब शरीर में थायराइड हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, तो इसका सीधा असर मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है, जिससे वजन बढ़ने और खासकर पेट की चर्बी बढ़ने की समस्या होने लगती है। ऐसे में बेली फैट कम करने के लिए थायराइड हार्मोन का संतुलित रहना बहुत जरूरी है। इसके लिए अपनी डाइट में दही, कद्दू के बीज, काबुली चना और धनिये के बीजों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 15:08:42 +0530</pubDate>
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<title>Intimate Hygiene Tips: प्यूबिक हेयर हटाने के बाद नहीं होंगे दाने, जानें Doctor की ये सलाह</title>
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<description><![CDATA[ प्यूबिक एरिया से बाल रिमूव करना हर महिला की अपनी पर्सनल च्वॉइस है। कुछ लोग हाईजीन को मेंटेन और कंफर्ट के कारण अपने प्यूबिक एरिया के बालों को हटा देती है। ज्यादातर लोगों को प्यूबिक हेयर्स हटाती तो हैं, लेकिन उन्हें इसका सही तरीका पता नहीं होता है। अक्सर होता है कि प्यूबिक हेयर रिमूव करने के बाद महिलाओं को दाने और खुजली हो जाती है। दरअसल, वैक्सिंग, शेविंग या हेयर रिमूवल क्रीम इस्तेमाल करने के बाद, इंटिमेट एरिया में जलन, लालिमा या खुजली जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। इस तरह की दिक्कते महिलाएं आमतौर पर नजरअंदाज ही कर देती है। आइए आपको बताते हैं इस समस्या बचने के लिए क्या करना सही होता है?आखिर प्यूबिक एरिया में दाने और खुजली क्यों होती है?हम सभी यह जानते हैं कि प्यूबिक एरिया की स्किन बहुत ही सेंसिटिव होती है। अक्सर होता है कि गलत तरीके से हेयर रिमूव करने के बाद गंदे रेज, हार्श केमिकल क्रीम के इस्तेमाल या पसीने के कारण भी इंफेक्शन और खुजली हो सकती है। रेजर की मदद से हेयर रिमूव करने से कई बार ऊपरी त्वचा पर माइक्रो कट्स भी आ जाते हैं। जिससे बैक्टीरिया को अंदर जाने का रास्ता आसानी से मिल जाता है और दाने, बालों की जड़ों में इंफेक्शन और खुजली की समस्या बढ़ जाती है।Pubic Hair हटाने के बाद दाने और खुजली से बचने के लिए क्या करें?- जब आप शेविंग या ट्रिमिंग करें तो सबसे पहले प्यूबिक एरिया को गुनगुने पानी से साफ कर लें, जिससे स्किन थोड़ी सॉफ्ट हो जाए।- ट्रिमिंग करने के लिए हमेशा नए रेजर का यूज करें। कभी भी ड्राई स्किन पर शेव न करें। - इस बात का ध्यान रखें कि बालों की ग्रोथ की दिशा में रेजर को चलाएं। यदि आप हेयर रिमूवल क्रीम का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इसके इंग्रीडिएंट्स को जरुर चेक करें। - प्यूबिक हेयर हटाने के बाद इंटिमेट एरिया को अच्छे से वॉश कर लें और सुखा लें। इसके बाद ऐलोवेरा जेल या कोई नेचुरल मॉइश्चराइजिंग क्रीम लगाएं, जो इंटिमेट एरिया की सेंसिटिव स्कीन को नकुसान न पहुंचाए।- ध्यान रहे हैं कि बहुत ही टाइट अंडरवियर न पहनें, कॉटन फैब्रिक का ही चूज करें। - हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, प्यूबिक हेयर को पूरी तरह हटाने के बजाय इन्हें ट्रिम करना बेहतर साबित होगा।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 08:42:20 +0530</pubDate>
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<title>Rabies Prevention Tips: Dog Bite के बाद पहले 15 मिनट हैं बेहद अहम, यह First Aid बचा सकता है आपकी जान</title>
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<description><![CDATA[ कुत्ते का काटना एक ऐसी स्थिति होती है, जिसको लापरवाही में लेना जानलेवा बन सकता है। भारत में रेबीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है और चौंकाने वाली बात यह है कि रेबीज वायरस होने के बाद इसका कोई सटीक इलाज नहीं है। बचाव ही इस घातक बीमारी का एकमात्र रास्ता है। जब कुत्ता काटता है, तो उसकी लार में मौजूद खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया घाव के माध्यम से हमारे रक्तप्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं।ऐसी घटना होने पर अक्सर लोग घबराहट में घाव पर पट्टी बांध देते हैं। या फिर घाव पर तेल, हल्दी या फिर मिर्च आदि लगाने लगते हैं। जोकि संक्रमण को शरीर के अंदर और गहराई तक धकेलता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि कुत्ते के काटने पर क्या करना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Fasting Diet: Mahashivratri Vrat में कमजोरी होगी दूर, अपनी Diet में शामिल करें ये 5 Superfoodsप्राथमिक उपचारकुत्ते के काटने के फौरन बाद सबसे जरूरी है कि घाव को बहते हुए पानी और साबुन से करीब कम से कम 10 से 15 मिनट तक धुलें। साबुन में मौजूद तत्व वायरस की बाहरी परत को नष्ट करने में सहायता करते हैं। घाव को रगड़ने की गलती न करें और न ही उस पर पट्टी बांधे। क्योंकि घाव का खुला रखना और ऑक्सीजन के संपर्क में रहना वायरस को धीमा कर देता है। वहीं सफाई के बाद किसी एंटीसेप्टिक लोशन का इस्तेमाल करें और फौरन डॉक्टर के पास जाएं।न करें ये गलतियांघाव पर चूना, लाल मिर्च, तेल, मिट्टी या फिर हल्दी लगाने जैसा देसी इलाज करना सबसे बड़ी गलती है। यह चीजें वायरस को खत्म करने की बजाय घाव में गंभीर संक्रमण पैदा कर सकती हैं।अक्सर लोग सोचते हैं कि पालतू कुत्ते ने काटा है, तो वैक्सीन की जरूरत नहीं है। लेकिन ऐसा करना जानलेवा भूल है। कुत्ता पालतू हो या आवारा, डॉक्टर की सलाह और वैक्सीन जरूरी है।कुत्ते के काटने के फौरन बाद टीका न लगवाने से वायरस पूरे शरीर में फैलने और तंत्रिका तंत्र तक पहुंचने का मौका देता है। एक्सपर्ट की मानें, तो कुत्ते के काटने के 24 घंटे के अंदर वैक्सीन लगवाना चाहिए।कुछ लोग एक-दो वैक्सीन लगवाकर कोर्स को छोड़ देते हैं। इस कोर्स को पूरा न करने से शरीर में वायरस के खिलाफ पूरी प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हो पाती है।घाव पर फौरन पट्टी बांधने या फिर टांके लगवाने से वायरस अंदर ही दब जाता है। रेबीज का घाव खुला रखना और ऑक्सीजन के संपर्क में रहना जरूरी है।अगर आपको रेबीज के लक्षण दिखने शुरू हो जाएं, तो फिर मृत्यु की संभावना करीब 100% हो जाती है, क्योंकि रेबीज का कोई इलाज नहीं है, इसका सिर्फ बचाव है।टीके और इंजेक्शन है जरूरीबता दें कि हॉस्पिटल पहुंचते ही डॉक्टर घाव की गंभीरता के आधार पर फौरन &#039;एंटी-रेबीज वैक्सीन&#039; शुरू करते हैं। अगर घाव गहरा होता है, तो &#039;रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन&#039; का इंजेक्शन घाव के आसपास दिया जाता है। जिससे कि वायरस को जल्दी बेअसर किया जा सके। वहीं साथ ही टिटनेस का भी इंजेक्शन भी लगाया जाता है। लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना वैक्सीन की कोई भी डोज छोड़ने की गलती नहीं करनी चाहिए।जागरुकता है जरूरीकुत्ते के काटने की घटना को कभी भी हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए। सही समय पर की गई सफाई और टीकाकरण रेबीज को 100% रोक सकते हैं। इसलिए अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए प्राथमिक चिकित्सा के इन नियमों को याद रखें। आवारा कुत्तों से दूरी बनाएं और नियमित रूप से पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण कराना चाहिए। क्योंकि आपकी सतर्कता ही आपको और समाज को इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रख सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:40:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Mahashivratri Fasting Diet: Mahashivratri Vrat में कमजोरी होगी दूर, अपनी Diet में शामिल करें ये 5 Superfoods</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि व्रत बेहद अहम व्रत माना जाता है। महाशिवरात्रि पर्व को बड़ी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है। इस खास पर्व पर लोग व्रत करते हैं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। हालांकि व्रत में भोजन की कमी और उपवास की वजह से हमारे शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। ऐसे में अगर व्रत के दौरान सही डाइट ली जाए, तो आप पूरी तरह से ऊर्जावान महसूस कर सकते हैं और साथ ही सही ढंग से व्रत का पालन भी कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 5 तरह के ऐसे फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको खाकर आप थकान और कमजोरी से बच सकते हैं।ताजे फलव्रत के दौरान आप ताजे फलों का भी सेवन कर सकते हैं। यह आपके शरीर को फौरन ऊर्जा प्रदान करता है। आप केला, संतरा, सेब, अंगूर और पपीता आदि खा सकते हैं। यह न सिर्फ आपको ऊर्जा देते हैं, बल्कि इन फलों में विटामिन्स और मिनरल्स की भी भरपूर मात्रा पाई जाती है। जो ताजगी बनाए रखने में मदद करती है।इसे भी पढ़ें: Diabetes Control पर डॉक्टर का बड़ा खुलासा, क्या धूप से घटता है Blood Sugar Level?नट्स और बीजआप व्रत में ताजे फलों के अलावा बीज और नट्स जैसे अखरोट, काजू, बादाम, मूंगफली और चिया सीड्स खा सकते हैं। इससे आपके शरीर को एनर्जी मिलती है। यह प्रोटीन और हेल्दी फैट्स से भरपूर होते हैं, जो आपके शरीर को पूरा दिन सक्रिय रखते हैं। वहीं नट्स और बीज का सेवन करने से मस्तिष्क की कार्यक्षमता भी बेहतर होती है।आलूव्रत के दौरान आलू का सेवन करना एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। यह कार्बोहाइड्रेट्स का एक अच्छा स्त्रोत है। जोकि शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। आप व्रत में आलू को उबालकर या फिर हल्का सा सेंककर खा सकते हैं। आलू में फाइबर और पोटैशियम भी पाया जाता है, जो शरीर की थकान को दूर करने में सहायता करता है।दहीदही कैल्शियम और प्रोटीन का एक बेहतरीन स्त्रोत है। यह आपके पाचन तंत्र को बेहतर रखने के साथ ही शरीर को भी ठंडक प्रदान करता है। व्रत में दही का सेवन करने से शरीर को ताजगी और ऊर्जा मिलती है। आप दही को शहद, सूखे मेवे या फिर फल के साथ मिलाकर खा सकते हैं।साबूदानाबता दें कि महाशिवरात्रि के व्रत में साबूदाना भी एक लोकप्रिय खाद्य ऑप्शन हो सकता है। साबूदाना हल्का होता है और इसमें कार्बोहाइड्रेट्स की अच्छी खासी मात्रा पाई जाती है। जो आपके शरीर को ऊर्जा और ताजगी देता है। आप साबूदाना की टिक्की, खीर या फिर हलवा बनाकर खा सकते हैं। जिससे आपको न सिर्फ ऊर्जा मिलेगी, बल्कि व्रत के दौरान भूख से आपके पेट को भी संतुष्टि मिलेगी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:40:30 +0530</pubDate>
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<title>What Not To Eat In Pregnancy: गर्भवती महिलाएं भूलकर भी न खाएं ये फूड्स, एक्सपर्ट ने बताई चौंकाने वाली वजह</title>
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<description><![CDATA[ प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को काफी सोच-समझकर डाइट प्लान दिया जाता है और कुछ चीजों को खाने की मनाही होती है। क्योंकि इसका सेहत पर काफी बुरा असर पड़ता है। इन चीजों के सेवन से गर्भपात की स्थिति बन सकती है। तो वहीं कुछ बार प्रेग्नेंट महिलाएं कुछ चीजें खा लेती हैं, जिसका बाद में उनको भारी नुकसान झेलना पड़ता है। बता दें कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को भूलकर भी कुछ फूड्स का सेवन नहीं करना चाहिए। इन चीजों का सेवन करने से लेने के देने पड़ सकते हैं।खासतौर पर प्रेग्नेंट महिलाओं को कटहल और पपीता जैसी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को किन चीजों का भूलकर भी सेवन नहीं करना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Rabies Prevention Tips: Dog Bite के बाद पहले 15 मिनट हैं बेहद अहम, यह First Aid बचा सकता है आपकी जानऐसे में झारखंड की राजधानी रांची के डाइटिशियन डॉक्टर प्रभास ने बताया, गर्भवती महिलाओं को भूलकर भी पांच चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए, अन्यथा लेने के देने पड़ जाएंगे. खासतौर पर पपीता व कटहल जैसी चीज का सेवन भूल कर भी नहीं करना चाहिए. अगर हम कटहल कहते हैं, तो कटहल का मतलब यह नहीं कि आप सिर्फ कटहल की सब्जी में ना खाए बल्कि, वह सब्जी के ग्रेवी में भी कटहल के कुछ पार्टिकल्स होते हैं, ऐसे में उसे भी ना खाए।इन चीजों को न करें सेवनहेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, कटहल और पपीता दोनों ही चीजों में लैक्टिक नामक एसिड पाया जाता है। इनमें पेपिन और लेटेक्स नाम के एंजाइम पाया जाता है, जोकि गर्भाशय के संकुचन को बढ़ावा देता है। जिस कारण गर्भपात जैसी स्थिति देखने को मिल सकती है। कटहल खाने से एसिडिटी या फिर मल त्यागने में समस्या हो सकती है। क्योंकि कटहल में फाइबर की उच्च मात्रा पाई जाती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी होता है, जोकि प्रेग्नेंसी के दौरान गैस की समस्या बन सकती है।इसके अलावा प्रेग्नेंसी में भूलकर भी बाहर के पैकेट फूड या फिर कैंट फूड नहीं खाना चाहिए। क्योंकि इनमें सोडियम और पाम तेल की मात्रा अधिक होती है। जोकि हाई ब्लड प्रेशऱ का कारण बन सकती है और बेचैनी हो सकती है। इन चीजों के सेवन से ब्लड पतला हो सकता है और डिलीवरी के समय कुछ परेशानी देखी जा सकती है।इसके साथ ही जंक फूड और खासतौर पर कोल्ड ड्रिंक का सेवन नहीं करना चाहिए। कोल्ड ड्रिंक में सोडा और पीएच लेवल काफी हाई होता है। जो बच्चे की स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है। इसमें मौजूद हाई लेवल सोडा और पीएच वैल्यू गर्भपात की वजह बन सकता है।इसलिए इन चीजों से प्रेग्नेंसी के दौरान दूर ही रहना चाहिए। खासतौर पर जो हाई फाइबर वाले फूड होते हैं, उनसे प्रेग्नेंसी के दौरान दूरी बनाकर रखना चाहिए। प्रयास करें कि ऐसी डाइट लें, जिसमें 90% पानी हो और पचाने में भी आसान हो। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:40:29 +0530</pubDate>
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<title>Health Expert ने बताया Belly Fat घटाने का अचूक उपाय, Diet में शामिल करें ये चमत्कारी अनाज</title>
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<description><![CDATA[ आजकल ज्यादतर लोग मोटापे की वजह से परेशान है रहते हैं। खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण भी मोटापा बढ़ ही जाता है। अगर आपका वजन लगातार बढ़ रहा है, मोटापा कम होने का नाम नहीं ले रहा और पेट के आसपास जमी चर्बी परेशानी बढ़ा रही है, तो अपनी डाइट में एक खास आयुर्वेदिक अनाज को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। यह अनाज न सिर्फ वजन नियंत्रित करने में मदद करता है, बल्कि पाचन को बेहतर बनाकर शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी को घटाने में भी सहायक होता है। इसके लिए आप अपनी डाइट में कुछ खास बदलाव करने चाहिए। आइए आपको बताते हैं अपनी डाइट में क्या बदलाव करना चाहिए।मोटापा कम करने के लिए डाइट में शामिल करें जौ- हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, वजन कम करने के लिए आपको जौ को डाइट में एड ऑन करना है। - जौ एक आयुर्वेदिक अनाज है, जो फैट लॉस में मदद कर सकता है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और कफ इंबैलेंस कम होता है। - जौ में फाइबर की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है। इससे डाइजेशन बेहतर होता है और भूख भी कम लगती है। इसके सेवन से पेट लंबे समय तक भरा रहेगा और अनहेल्दी क्रेविंग्स नहीं होती है। इसके सेवन से ही आपका मेटाबॉल्जिम मजबूत होता है और कैलोरी इनटेक कम होता है। - यह कोलेस्ट्रॉल कम होता है और ब्लड शुगर भी बैलेंस रहता है। शरीर में हार्मोनल बैलेंस बनाए रखने में मदद करता है।- पीसीओएस के कारण बढ़ता हुआ वजन और बेली फैट बढ़ रहा है, तो भी ये अनाज फायदेमंद रहेंगे।अपनी डाइट में जौ को कैसे करें शामिल? - जौ का पानी,दलिया, चीला, रोटी या खिचड़ी को डाइट में शामिल कर सकती हैं। - इसको आप ब्रेकफास्ट या लंच में खाएं। - इसको जीरा, अजवाइन या अदरक के साथ लेना ज्यादा अच्छा रहेगा। - रात के समय इसे अवॉइड करें। - वजन कम है या आपको अक्सर कमजोरी महसूस होती है, तो इसको बिल्कुल भी न लें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:40:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: मोटापा सिर्फ दिल का नहीं, Brain का भी दुश्मन, Dementia का बढ़ रहा है खतरा</title>
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<description><![CDATA[ दुनियाभर में तेजी से बढ़ती क्रॉनिक बीमारियों जैसे डायबिटीज, हृदय रोग और मेटाबॉलिज्म की समस्या के लिए खानपान और लाइफस्टाइल में गड़बड़ी को प्रमुख कारण माना जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि सभी लोगों को अपने वेट को कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है। बढ़ते वेट या हाई बॉडी मास इंडेक्स की स्थिति कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों का प्रमुख कारण पाया गया है। अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों का वेट अधिक होता है, उनमें हृदय से संबंधित बीमारियां, टाइप-2 डायबिटीज और आर्थराइटिस का खतरा तो रहता ही है। साथ ही मोटापे को दिमागी सेहत के लिए भी खतरनाक पाया गया है।हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक आज के समय में मोटापा एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। पहले इसको सिर्फ वयस्कों की समस्या माना जाता था, तो वहीं अब किशोर और बच्चे भी तेजी से मोटापे का शिकार होते जा रहे हैं। ज्यादा बढ़े वजन की स्थिति शरीर के कई अंगों और प्रणालियों को प्रभावित करता है। अगर समय रहते वेट को कंट्रोल नहीं किया जाए, तो इससे आपके सोचने-समझने, याददाश्त और निर्णय लेने संबंधित दिक्कतें भी बढ़ सकती हैं। एक अध्ययन में पाया गया है कि जिन लोगों का वेट अधिक होता है, उनमें भविष्य में अल्जाइर रोग-डिमेंशिया का खतरा भी अधिक देखा गया है।इसे भी पढ़ें: What Not To Eat In Pregnancy: गर्भवती महिलाएं भूलकर भी न खाएं ये फूड्स, एक्सपर्ट ने बताई चौंकाने वाली वजहडिमेंशिया का खतराएक अध्ययन के आधार पर दुनिया के जाने-माने हेल्थ एक्सपर्ट ने अलर्ट किया है कि वेट ज्यादा होने या मोटापे की वजह से व्यक्ति में डिमेंशिया का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में अगर समय रहते वेट लॉस कर दिया जाए और बीपी को कंट्रोल कर लिया जाए, तो डिमेंशिया के लाखों मामलों को रोका जा सकता है।एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बीएमआई और वैस्कुलर डिमेंशिया के बीच सीधा संबंध पाया है।दिमाग में खून के प्रवाह में कमी की वजह से वैस्कुलर डिमेंशिया होता है। यह दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और कोशिकाएं डेड होने लग जाती हैं।यह दिमाग में छोटी खून की नसों के ब्लॉक होने या सिकुड़ने की वजह से होता है। जिसको अक्सर लाइफस्टाइल कारकों या स्ट्रोक से जोड़कर देखा जाता है।मोटापे के शिकार लोगों में स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ भी सभी लोगों को कम उम्र से अपने वेट को कंट्रोल रखने पर ध्यान देने की सलाह देते हैं।हाई बीएमआई और डिमेंशिया का लिंकएक अध्ययन में पाया गया है कि हाई बीएमआई और हाई बीपी डिमेंशिया के सीधे कारण हैं। बढ़े हुए वेट और ब्लड प्रेशर का इलाज और रोकथाम डिमेंशिया के रोकथाम में काफी मददगार हो सकता है।इस अध्ययन के लिए 5 लाख से ज्यादा प्रतिभागियों को शामिल किया गया। इसमें उनके वजन और कारणों की जांच की गई।जिन लोगों का बीएमआई जेनेटिकली अधिक था, उनमें वैस्कुलर डिमेंशिया होने का खतरा अधिक पाया गया।डिमेंशिया के बढ़े हुए खतरे को करीब एक चौथाई हिस्सा हाई बीपी की वजह से था।एक्सपर्ट की मानें, यह अध्ययन दिखाता है कि वेट और ब्लड प्रेशर की रोकथाम के लिए किए गए उपाय दिमाग की इस खतरनाक बीमारी के खतरे को कम करने वाले साबित हो सकते हैं।क्या कहते हैं एक्सपर्टएक्सपर्ट के अनुसार, डिमेंशिया एक खतरनाक बीमारी है, जिससे अभी भी दुनियाभर में 50 मिलियन से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। लेकिन दुर्भाग्य है कि इसके इलाज और बचाव के तरीके कम हैं। यह अध्ययन आपको डिमेंशिया से बचाव के लिए एक कारगर उपाय दे रहा है।जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को यह बीमारी या फिर अधिक वजन की समस्या रही है। उनको इन बीमारी को लेकर अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए। कम उम्र से ही अगर आप वेट कंट्रोल करने वाले उपाय अपनाते हैं, तो इससे न सिर्फ आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है, साथ ही डायबिटीज, हृदय रोग और डिमेंशिया से भी काफी हद तक खुद को सुरक्षित कर सकते हैं।मोटापे का शिकारएक्सपर्ट की मानें, तो जिन लोगों का वेट सामान्य से अधिक है, उनमें दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और जोड़ों की समस्याओं जैसे अर्थराइटिस का खतरा अधिक हो सकता है। वेट चेक करने के लिए बॉडी मास इंडेक्स की जांच को कारगर तरीका माना जाता है। हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया कि मोटापे के खतरे का पता लगाने में वेस्ट-टू-हाट रेशियो बीएमआई की तुलना में अधिक बेहतर हो सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:40:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Morning Bloating और Water Retention से हैं परेशान? ये देसी Detox Drink देगी तुरंत आराम</title>
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<description><![CDATA[ क्या आप भी वॉटर रिटेंशन से परेशान हैं, सुबह उठते ही अगर पेट, चेहरे या पूरे शरीर में सूजन-सी महसूस होती है और दिनभर गैस-ब्लोटिंग आपकी परेशानी की वजह बनती है, तो काफी हद तक ये इसे बात का संकेत है कि आपका डाइजेशन सही नहीं है और आपके शरीर में टॉक्सिन्स जमा रहता है। गलत लाइफस्टाइल और खान-पान की आदतें जैसे देर रात भोजन करना, पर्याप्त पानी न पीना, नींद पूरी न होना और लगातार तनाव लेना शरीर के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। इन कारणों से कई तरह की शारीरिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं लेकिन कुछ आसान और प्रभावी देसी उपाय अपनाकर इनसे राहत पाई जा सकती है। ब्लोटिंग दूर करने में ये देसी ड्रिंक करेगी मदद- अदरक और हल्दी में सूजन को कम करने के गुण पाए जाते हैं। सौंफ नेचुरल ड्यूरेटिक की तरह काम करती है और शरीर से अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में मदद करता है। - दालचीनी में ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस करती हैं। हल्दी में कर्क्युमिन नामक एंटी-ऑक्सीडेंट होता है और काली मिर्च में मौजूद पिपेरिन की मदद से शरीर इसे अच्छे से अब्जॉर्ब कर पाता है। - यह ड्रिंक शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है और जमा वॉटर रिटेंशन की समस्या को कम करता है। सौंफ का सेवन शरीर को भीतर से ठंडक पहुंचाता है और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में सहायक होता है।- दालचीनी शरीर में हार्मोनल बैलेंस को बनाए रखती है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस भी कम होता है। हल्दी अपने एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण जानी जाती है। अदरक भी पाचन को सुधारने, गैस और एसिडिटी को दूर करने में मदद करती है।घर पर कैसे बनाएं ये देसी ड्रिंक?सामग्री- 1 इंच अदरक का टुकड़ा- 1 टीस्पून सौंफ के बीज (कूटकर)- 1 छोटा टुकड़ा दालचीनी- चौथाई टीस्पून हल्दी पाउडर या 1 इंच कच्ची हल्दी का टुकड़ा- 1 चुटकी काली मिर्च- 2 कप पानीविधि - एक पैन में पानी डालें और इसे धीमी आंच पर उबलने दें। - इसके बाद अदरक, सौंफ और दालचीनी डालें। इसे कम से कम 6-7 मिनट उबालें। - इसमें अब हल्दी और काली मिर्च मिलाएं और 1-2 मिनट उबालें। - जब यह आधा रह जाए, तो इसे छानकर पिएं। - कुछ हफ्तों में अंदर दिख सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:40:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Mouthwash का रोज इस्तेमाल, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये बड़ी गलती? जानें Side Effects</title>
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<description><![CDATA[ रोजाना हम सभी सुबह उठते ही ब्रश करते हैं। यह आदत हम सभी ने बचपन से सीखी है। आजकल केवल ब्रश और टूथपेस्ट से लोग संतुष्ट नहीं हैं। क्योंकि लोग दांतों की पूरी तरह से सफाई करने के लिए महकती सांस के लिए माउथवॉश इस्तेमाल करते है। अक्सर टीवी में आने वाले विज्ञापनों में दावा किया जाता है कि माउथवॉश इस्तेमाल करने से 99% जर्म्स खत्म हो जाते हैं और मुंह घंटों तक फ्रेश रहता है। ऐसे में कई लोग बिना-सोचे समझे इसे रोजाना कभी-कभी तो दिन में दो बार तक इस्तेमाल करने लगते हैं लेकिन क्या यह आदत वाकई दांतों और मसूड़ों के लिए फायदेमंद है?क्या रोज माउथवॉश इस्तेमाल करना सुरक्षित है?रोजाना माउथवॉश करने से आमतौर पर सेफ होता है, हालांकि, इसकी सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती हैं कि आप किस प्रकार का माउथवॉश इस्तेमाल कर रहे हैं। बाजार में मिलने वाले सभी माउथवॉश एक जैसे नहीं होते हैं। कुछ माउथवॉश केवल मुंह की ताजगी बनाए रखने और दुर्गंध कम करने के लिए बनाए जाते हैं, जबकि कुछ में औषधीय तत्व या शक्तिशाली एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो गहराई से असर करते हैं। ऐसे माउथवॉश का रोजाना बिना सही जानकारी या जरूरत के उपयोग करना हमेशा फायदेमंद नहीं माना जाता। - स्ट्रॉन्ग एंटीबैकटीरियल माउथवॉश का रोजाना इस्तेमाल मुंह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को कम करता है, लेकिन इसके साथ ही कुछ अच्छे बैक्टीरिया भी खत्म हो सकते हैं। - आपको बता दें कि, ये अच्छे बैक्टीरिया शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड के प्रोडक्शन में मुख्य भूमिका निभाते हैं।- नाइट्रिक ऑक्साइड रक्तचाप को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है। जब इसके स्तर में गड़बड़ी होती है, तो इसका प्रभाव सिर्फ मुंह तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर की समग्र सेहत पर भी असर डाल सकता है।सही माउथवॉश कैसे चुनें?यदि आप रोजाना माउथवॉश यूज करते हैं, तो फ्लोराइड बेस्ड और अल्कोहल फ्री माउथवॉश सबसे सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं। ये दांतों पर जमी प्लाक को कंट्रोल करने में मदद करते हैं, दांतों के इनेमल को मजबूत बनाते हैं और कैविटी से बचाव में असरदार होते हैं। इसी कारण से डेंटिस्ट माउथवॉश को ब्रश और फ्लॉस के साथ इसका उपयोग बताते हैं, न कि उनके विकल्प के तौर पर है।अल्कोहल बेस्ड माउथवॉश से दूरीअल्कोहल बेस्ड माउथवॉश तुरंत ताजगी का देता है। हालांकि, लंबे समय तक रोज इस्तेमाल करने पर ये मुंह में सूखापन, जलन और सेंसिटिविटी बढ़ा सकते हैं। इससे मुंह का नेचुरल बैलेंस बिगड़ सकता है और लार का प्रोडक्शन भी प्रभावित कर सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:40:25 +0530</pubDate>
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<title>Fatty Liver को जड़ से मिटाएगा ये Super Drink, किचन की 3 चीजों से करें Liver Detox</title>
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<description><![CDATA[ खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण बीमारियां काफी बढ़ती जा रही है। आज के समय में फैटी लिवर की समस्या आम बन गई है। अगर आपके शरीर में इंफ्लेमेशन लंबे समय तक बढ़ा हुआ रहता है, तो इस कारण से इंसुलिन सेंसिटिविटी, मेटाबॉलिज्म और लिवर हेल्थ पर भरोसा होता है। इसके कारण व्यक्ति को कमजोरी, फैटी लिवर, मोटापा और हार्मोनल इंबैलेंस जैसी दिक्कतें होती हैं। इसलिए अपने लिवर हेल्थ का ध्यान देना काफी जरुरी है। अगर आप सही खानपान पर ध्यान देते हैं, ऐसा करने से लिवर हेल्थ में सुधार आता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस कम होता है, इंफ्लेमेशन कम होता है और मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है। कई आयुर्वेदिक हर्ब्स लिवर फंक्शन और इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारने में काफी मदद करते हैं। हल्दी, काली मिर्च और नींबू इन्हीं में से एक हैं। इसको अपनी डाइट में कैसे शामिल करें, आइए आपको बताते हैं।  फैटी लिवर को कम करने के लिए करें हल्दी, काली मिर्च और नींबू का इस्तेमाल - हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि, हल्दी लिवर को डिटॉक्स करती हैं, इंफ्लेमेशन और लिवर में जमे हुए फैट को कम करती है। - यह ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को भी सुधारती है और फैटी लिवर में बेहद फायदेमंद होती है। - हल्दी, फैटी लिवर, पीसीओएस, मेटाबॉलिक इंबैलेंस और इंफ्लेमेशन को कम करने में मदद करता है। - वैसे तो हल्की का इस्तेमाल खाना बनाने में किया जाता है, लेकिन आप हल्दी को थोड़े से घी में मिलाकर खाना फायदेमंद रहने वाला है।- नींबू, लिवर एंजाइम्स के सीक्रेशन को बढ़ाता है, फैट डाइजेशन और इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारता है। - ये फैटी लिवर, अपच और मील्स के बाद होने वाले भारीपन को कम करने में मदद करता है। - गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीना अच्छा रहेगा। इसके अतिरिक्त, सूप, सलाद और दालों में नींबू निचोड़कर खाना फायदेमंद रहने वाला है।- काली मिर्च पाचन को बेहतर बनाने का कम करती है। इससे शरीर में जमा टॉक्सिंस बाहर निकलते हैं और इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार होता है। - इस उपाय से फैटी लिवर और इंसुलिन रेजिस्टेंस में बेहतर तरीके से काम करता है। इसके अलावा, आप काली मिर्च को कूटकर खाने में डालें। जिन लोगों को एसिडिटी है, उन्हें इसके अधिक इस्तेमाल से बचना जरुरी है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:40:24 +0530</pubDate>
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<title>Joint Pain: घुटनों के दर्द को न करें नजरअंदाज, बढ़ सकता है Surgery का खतरा, पढ़ें ये Health Alert</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में घुटनों और जोड़ों के दर्द की समस्या आम होती जा रही है। पहले यह समस्या बुजुर्गों में देखी जाती थी। लेकिन आजकल जिस तरह की लोगों की लाइफस्टाइल हो गई है। युवाओं में भी जोड़ों की समस्याएं काफी बढ़ गई हैं। अधिक वेट, ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करना, फिजिकल एक्टिविटी में कमी की कारण बड़ी संख्या में लोग दर्द से परेशान हैं। घुटना हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण जोड़ होता है। जोकि उठने-बैठने, चलने, रोजमर्रा के कामों और सीढ़ियां चढ़ने जैसे कामों में मदद करता है।यही वजह है कि घुटनों में होने वाली किसी भी समस्या का असर आपके पूरे शरीर पर पड़ सकता है। समय रहते इसके कारणों को समझना और सही इलाज बेहद जरूरी होता है। यदि इसको नजरअंदाज किया जाता है, तो सर्जरी तक की नौबत आ सकती है। जोड़ों और घुटनों के दर्द की सबसे बड़ी वजह ऑस्टियोआर्थराइटिस है। इसमें समय के साथ जोड़ों की कार्टिलेज घिसने लगती है। इसलिए इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए कम उम्र से ही सतर्क हो जाना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Fatty Liver को जड़ से मिटाएगा ये Super Drink, किचन की 3 चीजों से करें Liver Detoxपूरे शरीर पर होता है असरघुटनों का दर्द आपके पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है। दर्द की वजह से चलना-फिरना कम हो जाता है, जिस कारण मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। फिजिकल एक्टिविटी कम होने से वेट बढ़ता है और शुगर, हृदय और ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वहीं घुटनों में होने वाला दर्द गंभीर नहीं होता, लेकिन ऑस्टियो आर्थराइटिस, चोट और जोड़ों में तनाव आदि का यदि समय रहते इलाज नहीं किया जाता है, तो यह गंभीर रूप ले सकता है।व्यायाम है जरूरीनियमित रूप से व्यायाम की आदत घुटनों की समस्या को कम करने में कारगर साबित हो सकती है। क्वाड्रिसेप्स, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग व्यायाम और हैमस्ट्रिंग की मांसपेशियों को केंद्रित करती है। जिससे दर्द को कम करने में मदद मिलती है। बॉडी के सक्रिय रहने से वेट को कंट्रोल करने और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में सहायता मिलती है। इससे आप अपने घुटनों को स्वस्थ रख सकते हैं। गठिया जैसी दिक्कतों से बचने के लिए व्यायाम की भूमिका अहम है।ऐसी डाइट लेंआपको ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर डाइट जैसे अलसी, अखरोट और मछली सूजन को कम करने में सहायता करते हैं। वहीं विटामिन डी और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। इससे भरपूर चीजों को नियमित रूप से अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। यह पोषक तत्व शरीर को हेल्दी रखने के साथ घुटनों की समस्या को भी कम करते हैं। वहीं प्रोसेस्ड फूड और अधिक नमक-शुगर सूजन को बढ़ा सकते हैं। इसलिए इनके सेवन से बचना चाहिए।कंट्रोल में रखें वजनशरीर का अधिक वजन घुटने के दर्द को बढ़ाने वाला हो सकता है। यह गठिया के एक कारणों में से एक है। वेट ज्यादा होने से जोड़ों पर दबाव बढ़ता है और वहां की मांसपेशियां प्रभावित हो सकती हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक अगर नियमित रूप से व्यायाम किया जाए, तो वेट कंट्रोल में रखने और आर्थराइटिस के खतरो को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।सही जूतों का चयनआमतौर पर हम सभी ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन खराब क्वालिटी वाले जूते, ऊंची एड़ियों वाली सैंडिल भी घुटनों और जोड़ों की समस्याओं की वजह बन सकती है। इसलिए आरामदायक और अच्छे जूते पहनें। जिन लोगों को गठिया की समस्या है, उनको इस पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है। सही जूते एड़ी और घुटनों की कई समस्याओं से बचाने में आपके लिए मददगार हो सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:40:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Blood Pressure: High BP का नया टारगेट बच्चे और युवा, Heart Attack से बचना है तो जानें उम्र के हिसाब से सही रीडिंग</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप भी शरीर को सेहतमंद बनाए रखना चाहते हैं, तो इसके लिए जरूरी है कि आप ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर दोनों को कंट्रोल में रखें। क्योंकि ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर बढ़ने से कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। जिन लोगों का अक्सर बीपी हाई रहता है, उनको तंत्रिकाओं, आंखों और किडनी से संबंधित दिक्कतें होने का खतरा रहता है। वहीं यह हार्ट अटैक और हार्ट स्ट्रोक जैसी समस्याओं की वजह बन सकती है।हाई बीपी को हेल्थ एक्सपर्ट &#039;साइलेंट किलर&#039; भी कहते हैं। क्योंकि इसके लक्षण लंबे समय तक सामने नहीं आते हैं। यह अंदर ही अंदर शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाता है। गलत खानपान, लाइफस्टाइल में गड़बड़ी, फिजिकल एक्टिविटी में कमी, तनाव और नींद की अनियमितता की वजह से हाई बीपी की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि बीपी का नॉर्मल रेंज कितनी होनी चाहिए और कब आपको सावधान होने की जरूरत होती है।इसे भी पढ़ें: महिलाओं की Health का Superfood है सेब का हलवा, फायदे जानकर आप भी हो जाएंगे हैरानहाई बीपी की समस्याहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो बीपी वह दबाव है, जो ब्लड सर्कुलेशन के दौरान हमारी रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर पड़ता है। समस्या यह है कि अधिकतर मामलों में व्यक्ति को इस समस्या का तब तक पता नहीं चलता है, जब तक कोई गंभीर समस्या सामने न आ जाए।वहीं समय रहते इनके लक्षणों को पहचान करना और साथ ही इसको कंट्रोल करने के उपाय करना चाहिए। जिससे कि दिल, दिमाग, आंखों और किडनी को होने वाले स्थायी नुकसान से बचा जा सके।इसके नियमित अंतराल पर अपने बीपी को चेक करते रहें। ऐसे में आइए जानते हैं इसकी रीडिंग कितनी होनी चाहिए।कितनी होनी चाहिए बीपी रीडिंगबता दें कि 18 साल से अधिक के लोगों के लिए सामान्य बीपी 120/80 mmHg माना जाता है।छोटे बच्चे, जिनकी उम्र 5 से 12 साल के बीच है, उनका बीपी करीब 90/60 से 110/70 mmHg के बीच होना चाहिए।बच्चों में बीपी लंबाई, उम्र और वजन पर निर्भर करता है।इसी तरह से वयस्कों की शारीरिक स्थिति और वेट के हिसाब से ब्लड प्रेशर की रीडिंग अलग हो सकती है।अगर इससे ज्यादा की रीडिंग लंबे समय तक बनी रहती है, तो आपको डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।बच्चों के क्यों जरूरी बीपी की जांचहेल्थ एक्सपर्ट ने एक अध्ययन में पाया कि उम्र बढ़ने के साथ हृदय रोगों की समस्या से बचे रहने के लिए जरूरी है कि आप नियमित रूप से बच्चों के बीपी की जांच की जाती रहे।वहीं नए अध्ययन में पाया गया है कि 10 साल के कम उम्र के बच्चों में भी हाइपरटेंशन के मामले बढ़ते जा रहे हैं। वहीं 7 साल के बच्चों में उच्च रक्तचाप की समस्या थी। इनमें 50 साल की उम्र तक हृदय रोगों से मृत्यु का खतरा 50% तक ज्यादा था। यानी की अगर कम उम्र से ही ब्लड प्रेशऱ पर ध्यान दिया जाए, तो यह भविष्य में हृदय संबंधित खतरों को कम करने में सहायक हो सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 04 Feb 2026 18:21:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Diabetes Control पर डॉक्टर का बड़ा खुलासा, क्या धूप से घटता है Blood Sugar Level?</title>
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<description><![CDATA[ डायबिटीज को लेकर लोगों के मन में यह जिज्ञासा अक्सर रहती है कि क्या दवाओं और खान-पान के परहेज के अलावा कोई प्राकृतिक उपाय भी है, जो ब्लड शुगर को संतुलित रखने में सहायक हो सके। कुछ लोगों का मानना है कि रोजाना थोड़ी देर धूप में बैठने से शुगर लेवल पर सकारात्मक असर पड़ता है, जबकि कुछ इसे केवल एक भ्रम समझते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इसकी सच्चाई क्या है। दरअसल, डायबिटीज केवल बढ़े हुए ब्लड शुगर तक सीमित बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर के मेटाबॉलिज्म, हार्मोन संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य से भी गहराई से जुड़ी होती है। खराब नीदं, तनाव और एक्सरसाइज न करने पर शुगर लेवल बिगाड़ सकता है। आइए जानते है कि धूप लेने से डायबिटीज कंट्रोल कैसे होता है। क्या धूप लेने से डायबिटीज कंट्रोल हो सकती है?धूप को डायबिटीज का सीधा इलाज नहीं माना जा सकता, लेकिन अगर इसे सही समय और उचित मात्रा में लिया जाए, तो यह शरीर में ऐसे सकारात्मक बदलाव ला सकती है जो डायबिटीज को नियंत्रित करने में मददगार हो सकते हैं। डॉक्टर जी. कृष्ण मोहन रेड्डी के अनुसार, सूर्य की रोशनी विटामिन D प्राप्त करने का सबसे प्राकृतिक माध्यम है। जब शरीर को भरपूर धूप मिलती है, तो त्वचा के माध्यम से विटामिन D का निर्माण होता है, जो शरीर के कई जरूरी कार्यों में अहम भूमिका निभाता है। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि केवल धूप में बैठने से डायबिटीज कंट्रोल नहीं होती है। न तो यह दवा का विकल्प है और न ही डाइट या एक्सरसाइज का। वहीं, जो लोग रोज धूर लेते हैं उनका मेटाबॉलिज्म बेहतर रहता है और शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार देखा जा सकता है। इसका सीधा अर्थ है कि धूप सपोर्टिव रोल निभा सकती हैं, लेकिन इलाज का मुख्य आधार नहीं बन सकती। - रिसर्च में भी यही पाया गया है कि जिन लोगों में विटामिन-D की कमी होती है, उनमें इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा अधिक रहता है।  - विटामिन डी शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है। -  डायबिटीज के मरीजों के लिए रोजाना 15 से 25 मिनट की धूप पर्याप्त मानी जाती है। सुबह की हल्की धूप लेना सेहत के लिए भी अच्छा होता है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 04 Feb 2026 18:21:30 +0530</pubDate>
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<title>Fasting Diet: Mahashivratri Vrat में कमजोरी होगी दूर, अपनी Diet में शामिल करें ये 5 Superfoods</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि व्रत बेहद अहम व्रत माना जाता है। महाशिवरात्रि पर्व को बड़ी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है। इस खास पर्व पर लोग व्रत करते हैं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। हालांकि व्रत में भोजन की कमी और उपवास की वजह से हमारे शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। ऐसे में अगर व्रत के दौरान सही डाइट ली जाए, तो आप पूरी तरह से ऊर्जावान महसूस कर सकते हैं और साथ ही सही ढंग से व्रत का पालन भी कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 5 तरह के ऐसे फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको खाकर आप थकान और कमजोरी से बच सकते हैं।ताजे फलव्रत के दौरान आप ताजे फलों का भी सेवन कर सकते हैं। यह आपके शरीर को फौरन ऊर्जा प्रदान करता है। आप केला, संतरा, सेब, अंगूर और पपीता आदि खा सकते हैं। यह न सिर्फ आपको ऊर्जा देते हैं, बल्कि इन फलों में विटामिन्स और मिनरल्स की भी भरपूर मात्रा पाई जाती है। जो ताजगी बनाए रखने में मदद करती है।इसे भी पढ़ें: Diabetes Control पर डॉक्टर का बड़ा खुलासा, क्या धूप से घटता है Blood Sugar Level?नट्स और बीजआप व्रत में ताजे फलों के अलावा बीज और नट्स जैसे अखरोट, काजू, बादाम, मूंगफली और चिया सीड्स खा सकते हैं। इससे आपके शरीर को एनर्जी मिलती है। यह प्रोटीन और हेल्दी फैट्स से भरपूर होते हैं, जो आपके शरीर को पूरा दिन सक्रिय रखते हैं। वहीं नट्स और बीज का सेवन करने से मस्तिष्क की कार्यक्षमता भी बेहतर होती है।आलूव्रत के दौरान आलू का सेवन करना एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है। यह कार्बोहाइड्रेट्स का एक अच्छा स्त्रोत है। जोकि शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। आप व्रत में आलू को उबालकर या फिर हल्का सा सेंककर खा सकते हैं। आलू में फाइबर और पोटैशियम भी पाया जाता है, जो शरीर की थकान को दूर करने में सहायता करता है।दहीदही कैल्शियम और प्रोटीन का एक बेहतरीन स्त्रोत है। यह आपके पाचन तंत्र को बेहतर रखने के साथ ही शरीर को भी ठंडक प्रदान करता है। व्रत में दही का सेवन करने से शरीर को ताजगी और ऊर्जा मिलती है। आप दही को शहद, सूखे मेवे या फिर फल के साथ मिलाकर खा सकते हैं।साबूदानाबता दें कि महाशिवरात्रि के व्रत में साबूदाना भी एक लोकप्रिय खाद्य ऑप्शन हो सकता है। साबूदाना हल्का होता है और इसमें कार्बोहाइड्रेट्स की अच्छी खासी मात्रा पाई जाती है। जो आपके शरीर को ऊर्जा और ताजगी देता है। आप साबूदाना की टिक्की, खीर या फिर हलवा बनाकर खा सकते हैं। जिससे आपको न सिर्फ ऊर्जा मिलेगी, बल्कि व्रत के दौरान भूख से आपके पेट को भी संतुष्टि मिलेगी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 04 Feb 2026 18:21:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>World Cancer Day 2026: कैंसर के खिलाफ जंग में Awareness है सबसे बड़ा हथियार, जानिए इसका इतिहास, महत्व और थीम</title>
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<description><![CDATA[ कैंसर एक घातक और जानलेवा बीमारी है। कैंसर का नाम सुनते ही हर एक व्यक्ति डरने लगता हैं। अगर सही समय पर कैंसर का पता चल जाए, तो इसका इलाज संभव वरना इसे बचना नामुमकिन। आमतौर पर इसका इलाज भी काफी महंगा है, कई बार होता है कि पैसे के अभाव के कारण मरीज का सही से इलाज नहीं हो पाता है। एनसीबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें कैंसर सेल्स तेजी से शरीर के अन्य हिस्सों तक फैलने लगते हैं। ये सेल्स शरीर में गांठ बना सकती और आसपास के हेल्दी टिश्यूज को काफी नुकसान पहुंचाती हैं। हालांकि, ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) जैसे कुछ कैंसरों में गांठ नहीं बनती। दरअसल, हर साल लाखों की संख्या में लोग कैंसर की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं। इसी कारण से कैंसर के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए हर साल विश्वभर में कैंसर दिवस मनाया जाता है। हर साल 4 फरवरी को कैंसर दिवस मनाया जाता है। जानें इसका इतिहास, थीम और महत्व। क्यों मनाया जाता है विश्व कैंसर दिवस?गौरतलब है कि कैंसर का लाइलाज नहीं है, अगर समय पर पहचान और सही इलाज हो। इसके साथ ही यह मरीजों को मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक समर्थन देने का संदेश भी देता है। हर साल 4 फरवरी को कैंसर के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए World Cancer Day मनाया जाता है।वर्ल्ड कैंसर डे की थीमआपको बता दें कि, हर साल अंतर्राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ द्वारा कैंसर दिवस को मनाए जाने के लिए एक विशेष थीम नियुक्त की जाती है। इस साल की थीम है  &#039;United by Unique&#039;।  इस थीम का उद्देश्य कैंसर से पीड़ित हर व्यक्ति के निजी यात्रा, जरुरतें और अनुभवों को जोड़ना है। इसे सरल शब्दों में समझें कि यूनाइटेड बाय यूनिक का अर्थ है कि कैंसर से पीड़ित हर मरीज की अपनी कहानी होती है, हालांकि इसके लिए हमें बीमारी पर नहीं, बल्कि व्यक्ति के अनुभवों और जरुरतों पर ध्यान देना जरुरी है। वर्ल्ड कैंसर डे का इतिहासविश्व कैंसर दिवस की शुरुआत वर्ष 2000 में पेरिस से हुई थी। 4 फरवरी 2000 को पेरिस में “वर्ल्ड समिट अगेंस्ट कैंसर” का आयोजन किया गया, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ (UICC) ने यह विचार रखा कि साल में एक दिन ऐसा निर्धारित होना चाहिए, जब पूरी दुनिया में कैंसर की रोकथाम, उसके लक्षणों और उपचार के बारे में लोगों को जागरूक किया जाए। इसी सोच से विश्व कैंसर दिवस की नींव पड़ी। आज भी कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों, अस्पतालों और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों द्वारा लगातार अभियान चलाए जाते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 04 Feb 2026 18:21:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Drink To Lower Bad Cholesterol: High Cholesterol की छुट्टी करेगा यह देसी ड्रिंक, नसों में जमा LDL Fat होगा बाहर</title>
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<description><![CDATA[ आजकल के समय में खराब खानपान और अनहेल्दी लाइफस्टाइल की वजह से लोगों में कई तरह की बीमारियों का खतरा बना रहता है। मोटापे से लेकर डायबिटीज और हार्ट डिजीज के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं आज के समय में हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या भी आम हो गई है। इस बीमारी के पीछे कम फिजिकल एक्टिविटी, गलत खानपान और अधिक स्ट्रेस लेने से शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है।जिसका सीधा असर ब्लड सर्कुलेशन, दिल और लिवर पर पड़ता है। अगर आप समय रहते इस पर ध्यान नहीं देते हैं, तो आपके लिए बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। वहीं आप इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए एक देसी ड्रिंक का सेवन कर सकते हैं, जो LDL की छुट्टी कर सकता है।इसे भी पढ़ें: क्या Pregnancy के Last Month में Driving करना Safe है? एक्सपर्ट Doctor से जानें पूरा सच ऐसे बनाएं ये ड्रिंकगुनगुना पानी- एक लीटरदालचीनी का टुकड़ा- एक इंच नींबू- आधा कटा हुआ अदरक- दो स्लाइसइन सभी चीजों को मिक्स करके रोजाना सुबह खाली पेट पिएं।दालचीनी का कामबैड कॉलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए दालचीनी काफी सहायक होती है। यह बॉडी में फैट मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाती है और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने का काम करती है। रोजाना इसका सेवन करने से आपका दिल हेल्दी रहता है।नींबू का कामलिवर हेल्थ के लिए नींबू अच्छा होता है। लिवर ही बॉडी में कोलेस्ट्रॉल को प्रोसेस करता है। ऐसे में अगर आप नींबू पानी का सेवन करती हैं, तो लिवर एक्टिव रहता है। इसके सेवन से शरीर में जमा एक्स्ट्रा फैट और बैड कोलेस्ट्रॉल आसानी से बाहर निकल जाते हैं।अदरक का रोलअदरक ब्लड सर्कुलेशन को सुधारने में मदद करता है। अगर ब्लड फ्लो सही रहता है, तो कोलेस्ट्रॉल के जमने की संभावना काफी कम हो जाती है। वहीं अदरक आपके डाइजेशन को भी बेहतर बनाता है।गुनगुने पानी के फायदेअगर आप रोज गुनगुना पानी पीती हैं, तो यह डाइजेस्टिव सिस्टम को एक्टिव रखता है। रोजाना सुबह गुनगुना पानी पीने से डाइजेशन बेहतर होता है और फैट नहीं जमा हो पाता है। ऐसे में जब आपका डाइजेशन बेहतर होगा, तो कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल में रखने में आसानी होगी।पीने का सही तरीकाबता दें कि इस ड्रिंक को आप एक बार में भी पी सकते हैं। या फिर चाहें, तो दिनभर में थोड़ा-थोड़ा सिप लें। इसको लगातार एक से डेढ़ महीने तक के लिए पिया जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 03 Feb 2026 10:49:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>महिलाओं की Health का Superfood है सेब का हलवा, फायदे जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान</title>
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<description><![CDATA[ बिजी लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण महिलाएं अपनी सेहत का ध्यान रखना भूल ही गईं है। वैसे कहा जाता है कि फलों का सेवन करने से सेहत बढ़िया रहती है। एक कहावत भी है कि&#039;रोज एक सेब खाओ, डॉक्टर से दूर रहो&#039;। सेब का सेवन करना सबसे हेल्दी होता है, क्योंकि यह मल्टी विटामिन और फाइबर से भरपूर होता है। आजकल लोगों को सेब खाना बिल्कुल भी पसंद नहीं आता है। कुछ लोग तो फायदे जानते हुए भी इसे नहीं खाते हैं। इसकी जगह आप  सेब का हलवा बनाकर खा सकते हैं जो काफी टेस्टी होने के साथ हेल्दी भी होता है। खासतौर पर महिलाओं के लिए सेब का हलवा शरीर को एनर्जी देने के साथ कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करता है जिससे महिलाओं की सेहत बेहतर होती है। आइए आपको बताते हैं सेब का हलवा खाने के फायदे।महिलाओं को क्यों खाना चाहिए सेब का हलवासेब का हलवा एक पौष्टिक और स्वाद से भरपूर मिठाई माना जाता है। अगर इसे संतुलित मात्रा में और बिना अतिरिक्त चीनी के बनाया जाए, तो यह महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से लाभकारी हो सकता है। इतना ही नहीं, सेब का हलवा हर उम्र और हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा और मजबूती प्रदान करते हैं।प्रीबायोटिक है सेब का हलवासेब सबसे ज्यादा प्रीबायोटिक्स का अच्छा स्त्रोत माना जाता हैं। यह आंतों में मौजूद स्वस्थ बैक्टीरिया के लिए पोषण का काम करता है। यह बिगड़े हुए गट हेल्थ को भी सुधार करता है। पेट की सेहत बेहतर बनीं रहती है। इसके सेवन से मेटाबॉलिज्म सही होता है और महिलाओं को क्रेविंग कंट्रोल करके वेट लॉस करने में मदद कर सकता है।फाइबर से भरपूरसेब के हलवे में भरपूर मात्रा में फाइबर भी होता है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है। पेट फूलने की समस्या को कम करने में मदद करता है। सेब का हलवा नियमित तौर पर खाने से  ब्लोटिंग की समस्या में कमी आ सकती हैं और बार-बार खाना खाने के बाद होने वाली गैस और भारीपन जैसे लक्षणों में कमी आ सकती है।एंजिंग कम करने वालासेब में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है तो त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है और बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करते हैं। सेब का हलवे खाने से चेहरे पर चमक आती है, यदि आप इसे नियमित तौर पर खाते हैं। थकान नहीं होती है सेब में आयरन के साथ-साथ विटामिन सी भी पाया जाता है, जो शरीर में आयरन के सही अवशोषण में मदद करता है और कमजोरी व थकान को कम करता है। जब सेब का हलवा दूध या सूखे मेवों के साथ तैयार किया जाता है, तो यह हड्डियों को मजबूत बनाने और हार्मोन संतुलन को बनाए रखने में सहायक होता है। सीमित मात्रा में इसका सेवन करने से शरीर का समग्र स्वास्थ्य बेहतर रहता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 03 Feb 2026 10:49:16 +0530</pubDate>
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<title>बेअसर हो रही हैं Antibiotics? Immunity बढ़ाने के लिए Diet में शामिल करें ये 5 Superfoods</title>
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<description><![CDATA[ क्या आप एंटीबायोटिक्स का सेवन करते हैं? क्या आपके शरीर पर एंटीबायोटिक्स काम नहीं कर रही हैं? शरीर में बार-बार इंफेक्शन होने लगता है और ठीक भी नहीं हो रहे हैं। यह एंटीबायोट‍िक्‍स रेज‍िस्‍टेंस की समस्या हो सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि यह आजकल एक वैश्विक समस्या बनती जा रही है। इसलिए ध्यान रहे कि बिना डॉक्टर की सलाह के या बिना जरुरत के एंटीबायोटिक्स लेने से दवा बैक्टीरिया पर काम नहीं करती है। दिनों-दिन यह समस्या भारत में बढ़ती जा रही है। खासतौर पर सेल्फ मेडिकेशन से बचना चाहिए और डॉक्टर से संपर्क करना सबसे बेहतर होता है। ऐसे में आप कुछ फूड्स को डाइट में शामिल करने से इम्यूनिटी मजबूत कर सकते हैं और एंटीबायोटिक्स की जरुरत को घटा सकते हैं। आइए आपको ऐसे सुपरफूड्स बताने जा रहे हैं, जिन्हें आप जरुर सेवन करें।प्रोबायोटिक्स को डाइट में शामिल करेंअपनी डाइट में दही, छाछ, कांजी, अचार जैसे प्रोबायोटिक्स को जरुर शामिल करें। प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। इनके नियमित सेवन से आंतों में लाभकारी बैक्टीरिया की संख्या बढ़ती है, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।प्रीबायोट‍िक्‍स का सेवन करेंइसके अलावा, आप अपनी डाइट में केला, सेब, प्याज, लहसुन, ओट्स जैसे प्रीबायोटिक्स को डाइट का हिस्सा बनाएं। इनके सेवन से इम्यूनिटी मजबूत होती है, क्योंकि प्रीबायोटिक्स शरीर में गुड बैक्टीरिया को बढ़ाने का काम करते हैं जिससे बीमारियों से बचाव होता है।  व‍िटाम‍िन सी र‍िच फूड्स खाएंअपनी डाइट में आंवला,अमरूद और नींबू जैसे विटामिन C से भरपूर सुपर फूड को शामिल करें। विटामिन C युक्त चीजों का नियमित सेवन करने से सर्दी-जुकाम और अन्य संक्रमणों से बचाव में मदद मिलती है।हल्‍दी और काली म‍िर्च का सेवन करेंइम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए सबसे पहले हल्दी और काली मिर्च को डाइट का हिस्सा बनाएं। इसके लिए आप हल्दी और काली मिर्च को दूध या पानी के साथ ले सकते हैं। इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते पाएं जाते हैं। इसके सेवन से ही इम्यूनिटी मजबूत हो जाती है।मौसमी फल और सब्‍ज‍ियां खाएंइम्यूनिटी को बूस्ट करने केलिए मौसमी फल और सब्जियों को डाइट में शामिल करें। इनमें मौजूद पोषक तत्व इम्यूनिटी को संतुलित रखने में मदद करते हैं। इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें, जो शरीर के टॉक्सिंस बाहर निकाल दें। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 03 Feb 2026 10:49:16 +0530</pubDate>
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<title>Winter Weight Gain से हैं परेशान? आपकी ये 5 Lifestyle Mistakes हो सकती हैं असली वजह.</title>
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<description><![CDATA[ आजकल सबसे बड़ी समस्या लोगों में वजन बढ़ने की है। यह समस्या सर्दियों में सबसे ज्यादा बढ़ जाती है। आमतौर पर अनहेल्दी लाइफस्टाइल और इससे जुड़ी कुछ आदतों के कारण वजन बढ़ जाता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका वजन आपका न बढ़े तो इन आदतों से जरुर बचें। आइए आपको बताते हैं किन गलतियों के कारण लोगों को वजन बढ़ने की समस्या होती है। सर्दियों की गलतियां जो बढ़ाती हैं वजन रात को ज्यादा खाना खानेअक्सर लोग रात में स्वाद के चक्कर में जरूरत से ज्यादा भोजन कर लेते हैं, जिससे वजन बढ़ने की समस्या पैदा हो सकती है। दरअसल, रात के समय शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे पाचन प्रक्रिया भी सुस्त पड़ जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि खाना सही से पच नहीं पाता और शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होने लगता है। इसी वजह से धीरे-धीरे वजन बढ़ने लगता है।पानी कम पीनासर्दियों के दौरान लोग सबसे कम पानी पीते हैं। प्यास न लगने के कारण लोगों के शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन की समस्या होती है। शरीर में पानी की कमी होने के कारण लोगों की क्रेविंग्स बढ़ती है, जिसके कारण लोग जरुरत से ज्यादा कार्ब्स का सेवन करते हैं, जो कि वजन बढ़ने का कारण बनता है। फिजिकल एक्टिविटीज न करनेअक्सर सर्दियों में लोग बाहर जाने से काफी बचते हैं और घर के अंदर कंबल में बैठे रहते हैं। इस स्थिति में फिजिकल एक्टिविटीज न करने से लोगों का वजन बढ़ने की समस्या उत्पन्न हो जाती है। ज्यादा खाना खानेइस मौसम में लोग सबसे ज्यादा चाय, पकौड़े, गाजर का हलवा और घी के लड्डू जैसे फूड्स को स्वाद में ज्यादा खाते हैं। जिससे ज्यादा कार्ब्स और कैलोरीज से युक्त फूड्स को खाने और एक्सरसाइज न करने के कारण लोगों को वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है। विटामिन-डी की कमीसर्दियों में धूप में बैठना अच्छा माना जाता है। हालांकि, वर्किंग लोगों को धूप में बैठने का टाइम नहीं मिलता है। जिस कारण से लोगों को शरीर में विटामिन-डी जैसे जरुरी पोषक तत्व की कमी होने लगती है। शरीर में विटामिन-डी की कमी होने पर व्यक्ति को बार-बार थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। साथ ही, इस कमी के कारण मूड में बदलाव और अनावश्यक खाने की इच्छा बढ़ जाती है। ऐसे में लोग अक्सर जंक या अनहेल्दी फूड की ओर आकर्षित हो जाते हैं, जिससे वजन बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 01 Feb 2026 21:57:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: कॉफी नहीं, ये है थायरॉइड में सही प्री&#45;वर्कआउट आइडियाज</title>
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<description><![CDATA[ फिट रहने के लिए हर किसी को वर्कआउट करने की सलाह दी जाती है, लेकिन अगर आपको थायरॉइड हो तो ऐसे में वर्कआउट करना काफी चैलेंजिंग हो जाता है, क्योंकि एक्सरसाइज करने का मन तो करता है, लेकिन शरीर साथ नहीं देता। वर्कआउट करते हुए जल्दी थकान महसूस होती है या फिर कभी चक्कर-सा महसूस होता है, जिसकी वजह से सही तरह से एक्सरसाइज करना संभव ही नहीं हो पाता है। अमूमन लोग एनर्जी के लिए वर्कआउट से पहले कॉफी या रेडीमेड प्री-वर्कआउट ड्रिंक का सेवन करते हैं। लेकिन अगर आपको थायरॉइड है तो ऐसे में इससे शरीर पर उल्टा असर पड़ सकता है। थायरॉइड में जरा-सी लापरवाही थकान, सूजन और वजन बढ़ने की वजह बन सकती है। इसलिए, आपको सही प्री-वर्कआउट चुनने की जरूरत होती है। तो चलिए आज इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे-इसे भी पढ़ें: Kamjor Dil Ke Lakshan: कहीं आपका Heart भी तो नहीं हो रहा कमजोर, इन 5 लक्षणों को भूलकर भी न करें Ignoreभीगा हुआ बादाम और किशमिशवर्कआउट से करीबन आधे घंटे पहले आप 4-5 भीगे बादाम और 4-5 किशमिश ले सकती हैं। बादाम से हेल्दी फैट और हल्का प्रोटीन मिलता है, जबकि किशमिश से नेचुरल एनर्जी देती है। जिससे आपको थकान कम होती है। थायरॉइड में इसे एक अच्छा प्री-वर्कआउट माना जाता है, क्योंकि इसमें कोई स्टिमुलेंट नहीं होता है और ब्लड शुगर धीरे-धीरे बढ़ती है।केला और दालचीनी केले को एक बेहतरीन प्री-वर्कआउट के रूप में देखा जाता है। आप आधा केला या फिर एक छोटा केला लें और ऊपर से एक चुटकी दालचीनी डालकर खा लें। इससे आपको तुरंत एनर्जी मिलेगी और मसल्स में क्रैम्प कम होंगे। साथ ही, वर्कआउट में ताकत बनी रहती है। भुना चना और थोड़ा गुड़वर्कआउट से पहले आप एक मुट्ठी भुना चने के साथ छोटा सा गुड़ का टुकड़ा भी ले सकती हैं। इससे आपको अच्छी एनर्जी और प्रोटीन मिलता है। साथ ही, वर्कआउट के दौरान स्टैमिना बना रहता है और भूख कंट्रोल होती है। थायरॉइड में इसे सेफ माना जाता है, क्योंकि इसमें प्रोसेस्ड शुगर नहीं होती है और लंबे समय तक एनर्जी बनी रहती है। यह आपके मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट भी करता है।  नारियल पानी अगर आप चाहें तो वर्कआउट से करीबन 20 मिनट पहले एक गिलास सादा नारियल पानी भी ले सकते हैं। इससे शरीर हाइड्रेट रहता है और कमजोरी और चक्कर की शिकायत नहीं होती है। नारियल पानी इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस रखने में मदद करता है।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Sun, 01 Feb 2026 21:57:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>क्या Pregnancy के Last Month में Driving करना Safe है? एक्सपर्ट Doctor से जानें पूरा सच</title>
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<description><![CDATA[ हर एक महिला की जीवन का सबसे अच्छा पल प्रेग्नेंसी के दौरान होता है। प्रत्येक महिला का मां बनने का सपना जरुर देखती है। लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को कई तरह की परेशनियों से भी गुजरना पड़ता है। प्रेग्नेंसी के दौरान मूड स्विंग्स से लेकर वजन बढ़ने और बॉडी पेन तक, कई सारी परेशानियां सामने आती हैं। इन सभी तकलीफों के बाद वे रोजाना अपना काम जरुर करती हैं। आजकल ज्यादातर महिलाएं वर्किंग हैं,तो ऐसे में उन्हें ऑफिस तो जाना ही पड़ता है। कुछ महिलाएं ऐसी है जो ऑफिस और घर के काम के लिए कहीं जाने पर ड्राइविंग करती हैं। हालांकि, जैसे-जैसे प्रेग्नेंसी आखिरी महीने में पहुंची है, तो लोगों के मन में डर बना रहता है कि प्रेग्रेंसी के लास्ट मंथ में कार चलाना सेफ है या नहीं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि प्रेग्नेंसी के आखिरी महीने में ड्राइविंग करना सेफ है या नहीं। क्या प्रेग्नेंसी के आखिरी महीने में ड्राइव करना सेफ है?गायनेकोलॉजिस्ट बताते हैं कि प्रेग्नेसी के लास्ट मंथ में कार ड्राइव करना सेफ नहीं माना जाता है। क्योंकि इस समय शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इस दौरान पेट काफी हैवी हो जाता है, चलने-फिरने और उठने-बैठने में परेशानी बढ़ जाती है।इन चीजों का बढ़ सकता है खतरा अगर आप ड्राइविंग करेंगी तो जल्दी थकान आना, पेट में खिंचाव, अचानक दर्द या कभी भी लेबर पेन शुरु होने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में ड्राइव करना रिस्क भरा हो सकता है। डॉक्टर ने बताया है कि यदि आप किसी वजह से ड्राइव करना बहुत जरुरी होता है, तो आपको कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।- छोटी दूरी पर ही ड्राइव करें। -सीट को थोड़ा पीछे रखें ताकि पेट पर दबाव न पड़े। - ध्यान रखें कि सीट बेल्ट को सही तरीके से लगाएं।- अकेले ड्राइव करने से बचें।- किसी भी तरह की परेशानी आए तो तुरंत डॉक्टर के पास जरुर जाएं। क्योंकि एक छोटी-सी लापरवाही बड़ी परेशानी बन सकती हैं।क्‍या प्रेग्‍नेंसी के शुरुआती महीनों में ड्राइव कर सकते हैं?डॉक्टर ने बताया है कि प्रेग्नेंसी की शुरुआत के महीनों में ड्राइव करना सेफ माना जाता है। हालांकि तब भी सावधानी जरुरी है।ड्राइव करते समय इन बातों का ध्यान रखें - जब आप ड्राइव करें तो सीट बेल्ट हमेशा लगाएं। - लैप बेल्ट पेट के नीचे रहे। - शोल्डर बेल्ट कंधे के ऊपर से जाए। - सीट और पेट के बीच थोड़ा गैप रखें। - लंबी ड्राइव करने से बचें। - यदि आप थकान, चक्कर या कमजोरी लगे ड्राइव बिल्कुल भी न करें।हाई-रिस्क प्रेग्रेंसी में क्या करें यदि आपकी प्रेग्नेंसी हाई-रिस्क है, जैसे -  ब्लड प्रेशर की समस्या - डायबिटीज - पहले से कोई कॉम्पिकेशनइन सभी कंडीशनों के बाद डॉक्टर करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरुरी है। दरअसल, हर महिला की कंडीशन अलग होती है इसलिए किसी के कहने पर ड्राइव बिल्कुल न करें। तो आप प्रेग्नेंसी के आखिरी महीने में ड्राइव करती हैं तो यह जोखिम हो सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 01 Feb 2026 21:57:20 +0530</pubDate>
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<title>अपने Baby की Diet में क्यों शामिल करें अंकुरित रागी? जानें इसके हैरान करने वाले फायदे</title>
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<description><![CDATA[ जब शिशु 6 महीने का हो जाता है, तो माता-पिता अपने बच्चे की डाइट में हेल्दी और पौष्टिक चीजों को शामिल कर सकते हैं। यह डाइट शिशुओं के मानसिक और शारीरिक विकास में काफी मददगार साबित होते हैं। अक्सर पेरेंट्स भी अपने छोटे बच्चों को क्या खिलाएं, इन बातों को लेकर सदैव कंफ्यूज रहते हैं। ऐसे में रागी का सेवन बच्चों की सेहत के लिए काफी फायदेमंद हैं। जब आप रागी को अंकुरित करते हैं तो इसके पोषक तत्व और भी ज्यादा प्रभावी हो जाते हैं। शिशुओं की डाइट में अंकुरित रागी का सही तरीके से इस्तेमाल उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। आइए जानते हैं शिशुओं को अंकुरित रागी खिलाने के क्या फायदे हैं।शिशुओं के लिए अंकुरित रागी के फायदे पाचन में आसान अंकुरित रागी शिशुओं को नाजुक पाचन तंत्र के लिए हल्का और आसानी से पचने वाला होता है। नॉर्मल रागी की तुलना में अंकुरित रागी पेट में गैस, अपच या कब्ज की समस्या को कम पैदा करती हैं। ऐसे में जिन बच्चों को नया फूड पचाने में दिक्कत होती है तो उनके लिए अंकुरित रागी बेहद ही फायदेमंद है।हड्डियां मजबूत बनाएंरागी में कैल्शियम की मात्रा सबसे अधिक पाई जाती है, जो शिशुओं की हड्डियों और दांतों के विकास के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है। बढ़ती हुई उम्र में मजबूत हड्डियां आगे चलकर बच्चों के शारीरिक विकास में मदद करता है। एनीमिया से बचावअंकुरित रागी आयरन से भरपूर होती है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है। शिशुओं में आयरन की कमी होने पर एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में अंकुरित रागी का नियमित सेवन आयरन की पूर्ति करने में सहायक होता है। यह न केवल एनीमिया से बचाव में मदद करता है, बल्कि बच्चे को स्वस्थ,सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखने में भी उपयोगी है। इम्यूनिटी बढ़ाता हैरागी को अंकुरित करने से उसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स और आवश्यक खनिज अधिक प्रभावी हो जाते हैं। ये पोषक तत्व शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं। मजबूत इम्यूनिटी बच्चों को बार-बार होने वाले संक्रमण, सर्दी-जुकाम और अन्य सामान्य बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करती है।वजन बढ़ाने में फायदेमंद जिन बच्चों का वजन कम होता है या जिनका शारीरिक विकास धीमा हो जाता है, उनके लिए अंकुरित रागी बेहद ही फायदेमंद मानी जाती है। इसमें पाए जाने वाला प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और जरुरी फैट्स बच्चे को पर्याप्त एनर्जी देता है और स्वस्थ वजन बढ़ाने में मदद करते हैं। मस्तिष्क विकास के लिए उपयोगीअंकुरित रागी में अमीनो एसिड्स और जरुरी पोषक तत्व होते हैं, जो शिशु के दिमाग के विकास में फायदेमंद होते हैं। यह बच्चे की याददाश्त, एकाग्रता और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं। अंकुरित रागी शिशुओं को कैसें खिलाएं?शिशुओं को अंकुरित रागी खिलाने के लिए सबसे पहले रागी को अच्छी तरह से सुखाकर, भूनकर और इसे पीसकर महीन आटा बना लें। अब इसके आटे को पानी या मां के दूध के साथ पतली खीर या दलिया के रुप में तैयार कर सकते हैं। शुरुआत में एक या दो चम्मच से शुरु करें और फिर धीरे-धीरे इसकी मात्रा को बढ़ाएं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 11:45:46 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: शरीर का &amp;apos;Center Point&amp;apos; है नाभि, तेल लगाने का ये Ancient Secret देगा गजब के Health फायदे</title>
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<description><![CDATA[ नाभि हमारे शरीर का सेंटर पॉइंट होता है। यह शरीर के बहुत जरूरी और सेंसिटिव हिस्सों में से एक होती है। क्योंकि नाभि में आकर शरीर की कई नसें मिलती हैं। यही कारण है कि आयुर्वेद में नाभि को साफ रखने से लेकर इसकी केयर करने तक के बारे में हर चीज विस्तार से बताई गई है। क्या आप जानते हैं कि नाभि में अलग-अलग तरह के तेल लगाने से आपकी कौन-कौन सी समस्याएं हल हो सकती हैं।बता दें कि नाभि में तेल लगाने के बाद छोड़ना नहीं होता है। बल्कि हल्के हाथों से मसाज भी करना होता है। इससे आपको फायदा मिलता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि नाभि में कौन-कौन से तेल लगाने से किन-किस समस्याओं से निजात मिलती है।इसे भी पढ़ें: Intimate Hygiene Tips: घर पर बनाएं Chemical free Vaginal Wash, इंफेक्शन और खुजली होगी दूरनीम का तेलआयुर्वेद में कई सारी बीमारियों को दूर करने में नीम का महत्वपूर्ण स्थान है। नाभि में नीम का तेल लगा सकते हैं। नीम के तेल में विटामिन ई, फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट्स पाया जाता है। साथ ही नीम के तेल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं। इसको नाभि में लगाने से स्किन संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।बादाम का तेलआपने भी बादाम तेल के काफी फायदे सुने होंगे। खासतौर पर बादाम का तेल बालों और स्किन के लिए फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन ई के अलावा विटामिन ए, प्रोटीन, विटामिन, फैटी एसिड और जिंक भी पाया जाता है। ऐसे में आप बादाम तेल को अपनी नाभि पर लगाएं। इससे स्किन और बालों से जुड़ी समस्याएं काफी हद तक कम हो सकती हैं।नारियल का तेलकई मायनों में नारियल तेल फायदेमंद माना जाता है। इसको बालों और स्किन पर भी लगाया जाता है। नारियल तेल में विटामिन ई, विटामिन ए और कई तरह के मिनरल्स पाए जाते हैं। ऐसे में नाभि पर नारियल तेल लगाने से आपकी स्किन में निखार आता है और स्किन खूबसूरत बनती है।तिल का तेलतिल के तेल की तासीर गर्म होती है। ऐसे में आप सर्दियों में अपनी नाभि में तिल का तेल भी लगा सकते हैं। नाभि में तिल का तेल लगाने से शरीर को गर्माहट मिलती है और इससे आपके बालों को भी मजबूती मिलती है।सरसों का तेलआप सभी ने सरसों के तेल के खूब फायदे सुने होंगे। इसको खाने में खूब इस्तेमाल किया जाता है। जब आप नाभि पर सरसों का तेल लगाते हैं, तो यह आपकी स्किन और बालों को हेल्दी बनाता है। सरसों के तेल की तासीर गर्म होती है, ऐसे में इसको लगाने से आपके शरीर में गर्माहट बनी रहती है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 11:45:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Muscle Cramps का रामबाण इलाज है Pickle Juice? जानें इस Viral Trend का पूरा सच</title>
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<description><![CDATA[ क्या आप ने कभी अचार का पानी यानी पिकल जूस पिया है? फिटनेस लवर्स के बीच यह काफी ट्रेंडी बना हुआ है। गौरतलब है कि पिकल जूस को हमारी दादी-नानी पेट की गड़बड़ी, कमजोरी या गर्मी से राहत के लिए घरेलू नुस्खे की तरह इस्तेमाल करती थीं। अब मॉर्डन हेल्थ ट्रेंड के रुप में यह वापस आ रहा है। आपको बता दें कि, पिकल जूस में नमक, मसाले और फर्मेंटेशन से बने प्रोबायोटिक गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। इस दौरान सोशल मीडिया पर भी पिकल जूस पीने के फायदे को लेकर कोई दावे किए जा रहे हैं, कोई इसे मसल क्रैम्प्स का इलाज बता रहा है, तो कोई डाइजेशन सुधारने का आसान तरीका। आइए आपको इसके फायदे बताते हैं। Pickle Juice पीने के फायदे क्या हैं? - पिकल जूस को पर्याप्त मात्रा में पीने से कई फायदे मिलते हैं। इसमें मौजूद सोडियम और पोटैशियम शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित रखते हैं, जिससे कमजोरी और चक्कर आने की समस्या कम हो जाती है।- इतना ही नहीं, यह डाइजेशन को बेहतर बनाता है और आंतों के गुड बैक्टीरिया को सपोर्ट करता है। - एक्सरसाइज के बाद मसल क्रैम्प्स में भी पिकल जूस मददगार माना जाता है।  - हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, गर्मी या डायरिया के बाद शरीर में नमक की कमी को पूरा करने में पिकल जूस उपयोगी हो सकता है।कैसे बनाएं पिकल जूसघर पर पिकल जूस तैयार करना बहुत सरल है और इसके लिए किसी जटिल विधि की जरूरत नहीं होती। इसके लिए खीरा, गाजर, नींबू या कच्चा आम लें। इन सभी को अच्छी तरह साफ करके टुकड़ों में काट लें। फिर सब्जियों को कांच के जार में डालकर ऊपर से उबला हुआ और ठंडा पानी डालें। इसमें स्वाद के अनुसार सेंधा नमक, थोड़ी हल्दी, सरसों के दाने और सिरका या नींबू का रस मिलाएं। जार को ढककर 4–5 दिनों तक धूप में रखें। जब सब्जियां अच्छे से फर्मेंट हो जाएं, तो वही पानी नेचुरल पिकल जूस बन जाता है। घर पर बना पिकल जूस बाजार में मिलने वाले जूस की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और सेहतमंद होता है।इस बात का ध्यान रखें कि व्यक्ति को दिन में अधिकतम 30-50 मिलीलीटर से ज्यादा पिकल जूस नहीं लेना चाहिए। अधिक सेवन करने से हाई ब्लड प्रेशर, एसिडिटी और किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, क्योंकि इसमें सोडियम की मात्रा अधिक होती है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 11:45:44 +0530</pubDate>
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<title>Kamjor Dil Ke Lakshan: कहीं आपका Heart भी तो नहीं हो रहा कमजोर, इन 5 लक्षणों को भूलकर भी न करें Ignore</title>
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<description><![CDATA[ हमारा शरीर सेहतमंद रहे, इसके लिए जरूरी है कि दिल की सेहत अच्छी रहे। क्योंकि अगर आपका दिल दुरुस्त नहीं होगा, तो शरीर ठीक से काम करना बंद कर देगा। दिल खराब होने या कमजोर होने का मतलब होता है कि दिल सही तरीके से हार्ट पंप नहीं कर पा रहा है। या फिर शरीर का बोझ नहीं झेल पा रहा है।  बता दें कि दिल एक दिन में या फिर अचानक से खराब नहीं होता है, बल्कि यह धीरे-धीरे आपको संकेत देता है। ऐसे में इन संकेतों को नजरअंदाज करने की भूल नहीं करनी चाहिए। यह संकेत हार्ट अटैक या फिर स्ट्रोक की चेतावनी भी दे सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि दिल कमजोर होने से पहले आपको कौन से संकेत देता है।इसे भी पढ़ें: Muscle Cramps का रामबाण इलाज है Pickle Juice? जानें इस Viral Trend का पूरा सचदिल कमजोर होने के लक्षणबेंडोपनियाअगर सामने झुकते ही 10-15 सेकेंड में आपका दम भरने लगता है और सांस फूलने लग जाती है। लेकिन जैसे ही आप सीधे खड़े होते हैं, वैसे ही सब ठीक हो जाता है।खाने के बाद सुस्ती आनाखाना खाने के बाद आमतौर पर थोड़ा-बहुत आलस तो हर किसी को आता है। लेकिन अगर खाना खाने के बाद बहुत ज्यादा सुस्ती आती है और छाती में दबाव महसूस होता है और कभी-कभी चक्कर आता है। तो यह दिल कमजोर होने का लक्षण हो सकता है।पेट फूलनाअगर आप थोड़ा सा भी खाना खाते हैं और महसूस होता है कि आपका पेट फूल रहा है। यह अक्सर होता है कि तो यह भी दिल कमजोर होने का संकेत है।पैरों में सूजनअगर शाम होते ही आपके पैरों में सूजन आ जाती है और आप जो भी जुराब पहनते हैं, उसको निशान आपके पैरों पर नजर आते हैं, तो यह भी दिल के कमजोर होने के लक्षण हो सकते हैं।ओर्थोपेनअजब आप बिस्तर पर सीधे लेटते हैं और आपको घुटन या घबराहट का एहसास होता है, तो यह भी दिल कमजोर होने का संकेत है। वहीं बिना सर्दी-खांसी के अचानक से आपको अधिक खांसी आने लगती है, तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए।दिल कमजोर होने के कारणमधुमेह की बीमारी होने पर दिल कमजोर होने लगता है। हाई बीपी हार्ट फेलियर का कारण बनता है। अगर आप जरूरत से ज्यादा शराब का सेवन करते हैं, तो आपकी इस आदत के कारण भी आपका दिल कमजोर हो सकता है। अगर आपके फैमिली में किसी को हार्ट प्रॉब्लम रही है, तो इस वजह से भी दिल कमजोर होने लगता है। तनाव के कारण भी दिल कमजोर होता है।कमजोर दिल का इलाजअगर आपका दिल कमजोर होने लगा है और इसके लक्षण दिखने शुरू हो गए हैं। तो आपको बिना देर किए हार्ट स्पेशलिस्ट से संपर्क करना चाहिए। वहीं आप हेल्दी डाइट, नियमित व्यायाम, कम नमक वाला भोजन करें। इसके साथ ही धूम्रपान और शराब आदि छोड़ना आपके दिल की सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 11:45:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Nipah Virus Alert: West Bengal में 5 पॉजिटिव केस, चमगादड़ से फैल रही बीमारी के Symptoms ऐसे पहचानें</title>
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<description><![CDATA[ र्तमान में पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के मामले सामने आ रहे हैं, जिस वजह से लोगों की चिंता बढ़ गई है। अभी तक बंगाल में इसके 5 मामले सामने आ चुके हैं। जिसके बाद से एशिया के कई एयरपोर्ट्स पर भी सुरक्षा जांच बढ़ा दी गई है। आपको बता दें कि, निपाह जानवरों से फैलने वाली एक बीमारी है, दो संक्रमित चमगादड़ या शुअर से इंसानों में फैल जाती है। हालांकि यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भी संक्रमित कर सकता है। निपाह को सबसे संक्रामक बीमारियों में गिना जाता है। इससे बचाव का सबसे  बड़ा हथियार इसके बारे में सही जानकारी होना। आइए आपको इस लेख में निपाह वायरस के लक्षण और बचने के लिए क्या करें और क्या नहीं।निपाह वायरस के लक्षणइस वायरस के संक्रमण का दायरा बहुत ही बड़ा है। इसके लक्षण एक सामान्य सर्दी-जुकाम से लेकर जानलेवा स्थिति तक जा सकते हैं।  - शुरुआती लक्षण- इंफेक्शन की शुरुआत में व्यक्ति को तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और गले में खराश जैसी शिकायतें होती हैं। - सांस संबंधी समस्याएं- कुछ मरीजों में यह वायरस एटिपिकल निमोनिया का कारण बन जाता है, इससे सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती हैं। - दिमाग पर असर- जब इंफेक्शन बढ़ता है, मरीज को चक्कर आना, सुस्ती और मानसिक भ्रम महसूस होने लगता है। गंभीर मामलों में यह &#039;एक्यूट एन्सेफलाइटिस&#039; यानी दिमाग में सूजन का रुप ले लेता है। - अंतिम अवस्था- गंभीर स्थिति में मरीज को दौरे पड़ने लगते हैं और वह 24 से 48 घंटों के भीतर कोमा में जा सकता है। - याद रखें- निपाह वायरस का &#039;इनक्यूबेशन पीरियड&#039; यानी के इंफेक्शन से लक्षण दिखने तक का समय आमतौर पर 4 से 14 दिन का होता है, लेकिन कुछ मामलों में यह 45 दिनों का देखा गया है। बचाव के लिए क्या करें?   - नियमित तौर पर हाथों की सफाई बेहद जरुरी है। इसलिए साबुन और पानी से हाथ जरुर धोएं। - जब भी आप फलों का सेवन करें तो अच्छे सो धोएं और छिला हो, तभी सेवन करें। जमीन पर गिरे हुए या पक्षियों द्वारा कुतरे गए फलों को भूलकर भी न खाएं। - यदि आपके एरिया में इन्फेक्शन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, तो संक्रमित व्यक्तियों से दूरी बनाए रखें। - भीड़भाड़ वाले इलाकों या अस्पताल जाते समय मास्क और दस्तानों का इस्तेमाल करें।क्या न करें?   - ताड़ का कच्चा रस न पिएं क्योंकि इसमें अक्सर चमगादड़ अपनी लार छोड़ देते हैं।  - बीमारी के लक्षण दिखने पर खुद डॉक्टर न बनें, तुरंत नजदीकी अस्पताल में अपना इलाज कराएं। - जो लोग निपाह वायरस से संक्रमित है उनके पास जाने से बचें। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 10:15:02 +0530</pubDate>
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<title>महिलाओं का &amp;apos;साइलेंट किलर&amp;apos; हैं Cervical Cancer, इन लक्षणों को भूलकर भी न करें Ignore</title>
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<description><![CDATA[ महिलाओं में पाए जाने वाले आम कैंसरों में से एक है सर्वाइकल कैंसर। सर्वाइकल कैंसर यानी गर्भाशय के मुंह (सर्विक्स) में होने वाला कैंसर। इस कैंसर की वजह से हर साल कई महिलाएं अपनी जान गंवाती हैं और इसकी बड़ी वजह सही समय पर लक्षणों की पहचान न होना और जागरुकता में कमी है। सर्वाइकल कैंसर के बचाव के लिए वैक्सीन भी उपलब्ध है, लेकिन कई महिलाओं को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं होती है। कई बार तो इसके लक्षणों की पहचान न समझ आने के कारण काफी समय लग जाता है, जिससे लोग अपनी जान तक गवा देते हैं। आइए आपको सर्वाइकल कैंसर के बारे में ये 10 बातें हर महिला को पता होनी चाहिए।सर्वाइकल कैंसर के बारे में ये बातें हर महिला को होनी चाहिए पता - सर्वाइकल कैंसर धीरे-धीरे बढ़ता है और इसके लक्षण साइलेंट होते हैं, जो शुरुआत में किसी को नजर नहीं आते हैं। बीमारी बढ़ने के साथ बदबूदार या असमान्य वजाइनल डिस्चार्ज, इंटरकोर्स में बहुत अधिक दर्द, थकान, कमजोरी, पीरियड्स में हैवी ब्लीडिंग होना और बार-बार पेशाब आना जैसे लक्षण नजर आते हैं। - आमतौर पर सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के कारण होता है। यह एक सामान्य वायरस है, जो यौन संपर्क से फैलता है। इससे बचाव के लिए HPV वैक्सीन लगवाना जरुरी है।  - पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग, सेक्शुअल रिलेशन के बाद खून आना या मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग जैसे वॉर्निंग साइनस को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। - इसके अलावा, 25 साल की उम्र के बाद हर महिला को नियमित रुप से Pap smear टेस्ट जरुर करवाएं। इससे कैंसर होने से पहले ही बदलाव पकड़ में आ जाते हैं। - HPV वैक्सीन लड़कियों और महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा प्रदान करने में सहायक होती है। यह टीका आमतौर पर 9 वर्ष से लेकर 45 वर्ष की आयु तक लगाया जा सकता है। वैक्सीन की सही डोज,समय और अन्य जरूरी जानकारी के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद आवश्यक है।- सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए, इंटरकोर्स के दौरान सेफ्टी का ध्यान जरुर रखें। कंडोम का इस्तेमाल करना सही रहेगा। - यदि आप सर्वाइकल कैंसर को शुरुआती स्टेज में पकड़ लें, तो इलाज से पूरी तरह ठीक होना संभव है। इसलिए शुरुआती लक्षणों पर ध्यान दें।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 10:11:56 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: Health Experts का दावा, डायबिटीज मरीजों के लिए &amp;apos;वरदान&amp;apos; है दालचीनी, ऐसे करें इस्तेमाल</title>
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<description><![CDATA[ सेहतमंद रहना कितना जरूरी होता है, यह बात हमें तब समझ आती है, जब हमारा स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है। कई बार हम हेल्दी खानपान और लाइफस्टाइल दोनों को नजरअंदाज कर देते हैं। वहीं अपनी सेहत पर भी ध्यान नहीं देते हैं, जितना कि हमें देना चाहिए। लेकिन जब हम किसी बीमारी के शिकार हो जाते हैं, तब हमें समझ आता है कि अच्छी सेहत किसी वरदान से कम नहीं है। आज कम समय में करीब-करीब हर दूसरा व्यक्ति शुगर, हाई बीपी, जोड़ों में दर्द, खून की कमी और नींद न आना जैसी समस्याओं से परेशान है।अधिकतर लोग इस बात को नहीं जानते हैं कि इनमें से करीब-करीब सभी कंडीशन्स में सही खानपान होना बेहद जरूरी होता है। अगर बात डायबिटीज की हो, तो इसको मैनेज करने के लिए दवाओं के अलावा हेल्दी डाइट का भी अहम रोल होता है। बता दें कि हमारी रसोई में कई ऐसे मसाले होते हैं, जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में सहायता करता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको एक ऐसे मसाले के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके इस्तेमाल से आप ब्लड शुगर को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Nipah Virus Alert: West Bengal में 5 पॉजिटिव केस, चमगादड़ से फैल रही बीमारी के Symptoms ऐसे पहचानेंब्लड शुगर कंट्रोल करेगा ये एक ब्लड शुगरहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो दालचीनी डायबिटीज को मैनेज करने में मदद कर सकती हैं। यह खाने में स्वाद बढ़ाने वाला एक मसाला नहीं बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर है। दालचीनी के इस्तेमाल से शरीर को इंसुलिन का बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने में सहायता मिलती है।आयुर्वेद के मुताबिक दालचीनी ब्लड शुगर को कम कर सकती है और कफ बैलेंस करने के साथ डाइजेशन को सुधारती है।अगर आप रोजाना एक छोटा टुकड़ा दालचीनी को अपनी डाइट में शामिल करें। इससे आपका ब्लड शुगर लेवल बैलेंस करने में सहायता मिलेगी।दालचीनी इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारती है, इससे सेल्स ग्लूकोज का सही तरह से इस्तेमाल कर पाती है। इसके सेवन से फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल कम होता है और खाना खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल स्पाइक भी नहीं होता है।दालचीनी एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है और इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करती है। यह सिर्फ ब्लड शुगर को कंट्रोल नहीं करती है, बल्कि पूरे मेटाबॉलिक सिस्टम को मजबूत करती है।डाइट में ऐसे शामिल करें दालचीनीदिनभर में आधा चम्मच दालचीनी पाउडर का इस्तेमाल काफी रहेगा। आप चाहें तो खाली पेट दालचीनी की चाय पी सकती हैं। खाने के बाद दालचीनी के एक छोटे से टुकड़े को चबाएं। इससे डाइजेशन बेहतर होगा और शुगर भी कंट्रोल में रहेगी। आप सलाद और फलों के ऊपर दालचीनी पाउडर को छिड़ककर खाएं। दालचीनी की काढ़ा पीना भी फायदेमंद होगा। आप दालचीनी का सेवन किसी भी समय कर सकती हैं, लेकिन सुबह के समय इसको लेना ज्यादा लाभकारी रहेगा। ध्यान रहे कि आपको दालचीनी सीमित मात्रा में लेनी है। क्योंकि इसका अधिक सेवन आपको नुकसान दे सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 10:11:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Intimate Hygiene Tips: घर पर बनाएं Chemical free Vaginal Wash, इंफेक्शन और खुजली होगी दूर</title>
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<description><![CDATA[ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत का सही तरीके से ध्यान नहीं रख पा रहे हैं। जिस कारण उनको कई तरह की समस्याएं हो रही हैं। महिलाओं की बात की जाए, तो उनको इंटिमेट एरिया से जुड़ी कई समस्याएं झेलनी पड़ सकती हैं। जिस कारण उनको हॉस्पिटल के चक्कर लगाने पड़ते हैं, महंगी दवाएं लेनी पड़ती है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि आयुर्वेद में कई ऐसे नुस्खों के बारे में बताया गया है, जिनको अपनाकर आप अपनी इंटिमेट हेल्थ को सुधार सकती हैं।ऐसे में अगर आप भी यूरिन इंफेक्शन या फिर बदबू से परेशान रहती हैं, तो आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको एक ऐसे आयुर्वेदिक नुस्खे के बारे में बताने जा रहे हैं। आयुर्वेद में योनि धावन को इंटिमेट केयर का एक आसान तरीका बताया गया है। आप इसको घर पर ही सिर्फ 5 मिनट में तैयार कर सकती हैं।यह भी पढे़ं: रिश्तों की Low Battery को Intimacy से करें Rechargeआयुर्वेदिक Vaginal Washबता दें कि आयुर्वेदिक Vaginal Wash एक केमिकल-फ्री तरीका है। इसमें इंटिमेट एरिया को बाहर से साफ किया जाता है। इसमें हल्दी, नीम और जीरा जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें सभी नेचुरल तत्व पाए जाते हैं। इसका इस्तेमाल आप रोजाना की सफाई के लिए कर सकती हैं। इससे आपकी इंटिमेट हेल्थ बेहतर होगी।आयुर्वेदिक Vaginal Wash सामग्रीकुछ नीम की पत्तियांआधा चम्मच जीराएक चुटकी हल्दीदो कप पानीबनाने का तरीकासबसे पहले पानी को उबाल लें।अब इस पानी में हल्दी, जीरा और नीम डालें।इसको लो फ्लेम पर कम से कम 5 मिनट के लिए उबलने दें।गैस बंद करने के बाद इसको हल्का गुनगुना या ठंडा होने दें।इस आसान तरीके से आयुर्वेदिक Vaginal Wash तैयार है।ऐसे करें इस्तेमालइस पानी का इस्तेमाल सिर्फ बाहर से करना चाहिए।वहीं दिन में सिर्फ एक बार इस्तेमाल करना चाहिए।आप साफ मग या हाथों की मदद से हल्के-हल्के साफ करना चाहिए।वहीं जोर से रगड़ने से बचना चाहिए।इन बातों का रखें ध्यानइंटरनल इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए।पीरियड्स में भी इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।अगर आप भी आसान और केमिकल फ्री तरीका अपनाना चाहती हैं, तो यह आयुर्वेदिक Vaginal Wash को अपनी डेली इंटिमेट केयर रूटीन का हिस्सा बना सकती हैं। लेकिन अगर इसके इस्तेमाल से आपको कोई दिक्कत जैसे खुजली या जलन होती है, तो आपको इससे दूरी बना लेनी चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 10:11:56 +0530</pubDate>
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<title>Women Health: सिर्फ पीरियड बंद होना नहीं, Womens Health से जुड़े ये हैं मेनोपॉज के असली Symptoms</title>
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<description><![CDATA[ किसी भी महिला की जिंदगी में मेनोपॉज एक ऐसा पड़ाव होता है, जब शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इस दौरान ओवरीज धीरे-धीरे एग रिलीज करना बंद कर देती है। वहीं पीरियड्स आना भी बंद हो जाता है। मेनोपॉज में महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का लेवल कम होने लगता है। जिसका असर महिलाओं के पूरे शरीर पर होता है। हालांकि कई महिलाओं को लगता है कि मेनोपॉज का संबंध सिर्फ फर्टिलिटी और पीरियड्स से है, लेकिन ऐसा नहीं है। मेनोपॉज के कारण से शरीर के कई फंक्शन्स प्रभावित होते हैं। यहां तक कि इसका असर महिलाओं को बोन हेल्थ औक हार्ट पर भी होता है।मेनोपॉज के दौरान नींद न आना, रात में पसीना आना, वजाइनल ड्राईनेस और मूड स्विंग्स जैसे कई लक्षण नजर आते हैं। यह मेनोपॉज के आम लक्षण होते हैं, जिनके बारे में अधिकतर महिलाएं जानती हैं। मेनोपॉज से पहले पेरिमेनोपॉज का फेज आता है। जब एस्ट्रोजन का लेवल धीरे-धीरे कम होने लगता है। पेरिमेनोपॉज के भी कई ऐसे लक्षण होते हैं। जिनसे अधिकतर महिलाएं अनजान होती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको पेरिमेनोपॉज के लक्षणों के बारे में जानते हैं।इसे भी पढ़ें: Women&#039;s Wellness Secret: 30 के बाद शरीर के इन 2 अंगों पर करें Tapping, Health पर होगा Magicपेरिमेनोपॉज के लक्षणकई महिलाओं को पेरिमेनोपॉज के दौरान कानों में खुजली होती है। दरअसल, हार्मोन्स के उतार-चढ़ाव का असर आपकी त्वचा पर होता है। एस्ट्रोजन के लेवल में होने वाले ड्रॉप की वजह से कानों में खुजली हो सकती है।एस्ट्रोजन के लेवल में होने वाली कमी का असर सर्कुलेशन और नर्व्स पर भी होता है। इसके कारण से आपको कानों में घंटी बजने या फिर किसी और तरह की तेज आवाज सुनाई दे सकती है।हार्मोनल इंबैलेंस की वजह से पैनिक अटैक और एंग्जायटी आ सकते हैं। अगर आपको पहले भी पैनिक अटैक या एंग्जायटी जैसी समस्याएं नहीं हुई हैं, तो इस दौरान आपके साथ ऐसा हो सकता है।एस्ट्रोजन में कमी की वजह से कान के अंदर के फंक्शन पर भी इसका असर होता है। जिस कारण से कुछ महिलाओं को चक्कर आने लगते हैं।कई महिलाओं को पेरिमेनोपॉज में ऐसा फील होता है कि उनका दिल काफी तेजी से धड़क रहा है। एस्ट्रोजन में उतार-चढ़ाव का हमारी हार्ट रिदम पर होता है।इस समय पर हार्मोनल इंबैलेंस के कारण से मूड स्विंग्स होने लगते हैं। कई बार छोटी सी बात पर बहुत गुस्सा और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है।एस्ट्रोजन की कमी की वजह से इंफ्लेमेशन, अकड़न और जोड़ों में दर्द हो सकती है।एक्सपर्ट की मानें, तो पेरिमेनोपॉज में महिलाओं को अपना खास ख्याल रखना चाहिए। इस दौरान डाइट और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 10:31:55 +0530</pubDate>
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<title>रोटी&#45;चावल छोड़ने पर भी क्यों बढ़ रहा है पेट? Fitness Expert ने बताई Belly Fat की असली वजह</title>
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<description><![CDATA[ क्या आपने कभी सुना है कि जो लोग कम खाते हैं, उनका पेट ही सबसे ज्यादा निकलता है। हमारे आसापास रहने वाले लोगों में देख सकते हैं जो खाना तो काफी कम खाते हैं लेकिन उनका वजन काफी बढ़ा हुआ होता है। वहीं, कुछ लोगों का केवल पेट ही बाहर आया हुआ होता है बाकी हाथ, पैर और फेस पतले ही रहते हैं। अब सवाल है कि क्या सच में ऐसा है कि कम खाने वालों का पेट ज्यादा बाहर निकलता है या ये महज अफवाह? आइए आपको बताते हैं फिटनेस एक्सपर्ट क्या कहते हैं।कम खाना और पेट निकलने का कनेक्शनफिटनेस कोच ने बताया है कि ये बात एकदम सत्य है कि जो लोग बहुत कम खाना खाते हैं, उनका पेट निकल जाता है। दरअसल, लोगों को ये गलतफहमी है कि बहुत काम खाने से उनकी बॉडी फैट बर्न करेगी जबकि असल में बॉडी सर्वाइकल मोड में चली जाती है। ऐसे में शरीर को लगता है कि फूड कम है और शायद कोई डेंजर सिचुएशन है, इसलिए बॉडी ज्यादा फैट स्टोर करना शुरु कर देती है। स्लों हो जाता है मेटाबॉलिज्मअगर आप बहुत कम खाना खाते हैं, तो बॉडी सर्वाइवल मोड में आ जाती है, तो मेटाबॉलिज्म भी स्लो होने लगता है। इस समय स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल भी बढ़ा हुआ रहता है, जिस कारण से लोअर बैली फैट काफी बढ़ जाता है। इसी वजह से आप नोटिस करेंगे कि आपके हाथ, पैर और फेस तो पतले ही रहते हैं लेकिन बैली फैट काफी ज्यादा हो जाता है।मसल लॉस भी होता हैअक्सर लोग डाइटिंग के नाम पर खाना छोड़ देते हैं या बहुत ही कम खाना शुरु कर देते हैं। इससे फैट कम नहीं होता बल्कि मसल लॉस हो जाती है, जिससे बॉडी की शेप बिगड़ने लगती है। पेट और भी ज्यादा दिखने लगता है, इसलिए लोग पतले होने के बावजूद भी बैली फैट से स्ट्रगल कर रहे होते हैं। मसल लॉस होने के कारण से कैलोरी बर्न होना भी कम हो जाता है, जिससे फैट लॉस और स्लो हो जाता है। भूखे रहना सॉल्यूशन नहीं हैएक्सपर्ट ने बताया है कि वेट लॉस करने के लिए कम खाना सॉल्यूशन नहीं है, ना ही रोटी-चावल छोड़ने या भूखे रहने से बात बनेगी। वेट लॉस एक लंबी जर्नी है, जिसके लिए आपको संतुलित डाइट लेना काफी जरुरी है। अपनी डाइट में ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन और फाइबर रिच फूड्स का सेवन करें। नियमित रुप से एक्सरसाइज करना अपने रूटीन का हिस्सा जरुर बनाएं और जितना एक्टिव रहेंगे उतना ही बढ़िया रहेगा। 

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<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 10:31:54 +0530</pubDate>
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<title>Pregnancy में Bra पहनना कितना Safe? जानें फायदे और नुकसान, दूर करें हर Confusion.</title>
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<description><![CDATA[ हर महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत दौर प्रेग्नेंसी माना जाता है। इस दौरान महिलाएं बेहद ही संवेदनशील होती है और उनके शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। महिलाओं के ब्रेस्ट पर इसका सीधा असर देखने को मिलता है। उनके ब्रेस्ट का साइज अचानक से बढ़ने लगता है और इसमें भारीपन महसूस होने लगता है। ऐसी स्थिति में कई बार ब्रेस्ट में दर्द या भारीपन महसूस होता है, जिससे महिलाओं के मन में यह सवाल आने लगता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान ब्रा पहनना जरूरी है या नहीं। कुछ महिलाएं सोचती हैं कि बिना ब्रा के रहना ज्यादा आरामदायक होगा लेकिन यह समझना भी जरूरी है कि ब्रा न पहनने से ब्रेस्ट को सही सहारा नहीं मिल पाता। इससे दर्द बढ़ सकता है, त्वचा में खिंचाव आ सकता है और असहजता महसूस हो सकती है। इसलिए गर्भावस्था के समय सही साइज की आरामदायक ब्रा पहनना फायदेमंद माना जाता है।क्या प्रेग्नेंसी में बिना ब्रा के रहना सुरक्षित है?हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि इस सवाल का जवाब यही हैं कि पहले आपको समझना होगा कि ब्रा पहनना या ब्रा नहीं पहनना किसी भी महिला की व्यक्तिगत सुविधा पर निर्भर करता है। ऐसा कोई नियम नहीं है कि ब्रा पहननी ही जरुरी है। यदि आप ब्रा पहनकर रहने में आरामदायक महसूस करती हैं, तो इसे पहन सकती हैं अन्यथा आप ब्रा पहने बिना भी प्रेग्नेंसी में आराम से रह सकती हैं।प्रेग्‍नेंसी में ब्रा न पहनने से क्या हो सकता है?प्रेग्नेंसी के 9 महीने के दौरान धीरे-धीरे महिला के शरीर में काफी बदलाव देखने को मिलते हैं, जिसमें से एक ब्रेस्ट साइज को बढ़ते रहना है। कुछ महिलाओं को इस भारीपन के कारण पीठ और गर्दन में दर्द होता है, हालांकि आप कम्फर्टेबल हैं, तो बिना ब्रा के रह सकती हैं। ब्रा नहीं पहनने से लिगामेंट्स का खिंचाव बढ़ सकता है, जिससे ब्रेस्ट में ढीलापन हो सकता है। ऐसे में आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है, क्योंकि यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि एक शारीरिक स्थिति है जिसे लेकर महिलाएं अनकम्फर्टेबल महसूस करती हैं।प्रेग्‍नेंसी में गलत साइज की ब्रा पहनने के खतरे  प्रेग्नेंसी में यदि गलती से आप बहुत टाइट या गलत साइज की ब्रा पहनती हैं, तो इससे भी नुकसान हो सकता है। यह आपकी त्वचा में संवेदनशीलता बढ़ सकती है, जलन, खुजली या ब्‍लड सर्कुलेशन में परेशानी हो सकती है। इसी कारण जब भी ब्रा पहने तो पहले अपने ब्रेस्ट साइज की अच्छी तरीके से जांच कर लें। प्रेग्नेंसी के दौरान कोशिश यही करें कि आपकी ब्रा का फैब्रिक सॉफ्ट हो और इसमें कोई वायर न हो।प्रेग्‍नेंसी में रात को सोते समय क्या करें?अक्सर महिलाओं के मन में यह भी सवाल रहता है कि क्या रात में सोते समय ब्रा उतार सकते हैं, ऐसा करने से कोई नुकसान तो नहीं होगा? यह बिल्कुल आपके कम्फर्ट पर निर्भर करता है। यदि आप बिना ब्रा के आरामदायक महसूस करती हैं, तो ब्रा खोलकर ही सो सकती हैं। यह आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा। वहीं, जिन महिलाओं के ब्रेस्ट हैवी हैं और रात में ब्रा न पहनने पर अनकम्फर्टेबल महसूस होता है, बार-बार नींद खुल जाती है, तो आप ब्रा पहनकर सो सकती हैं। यदि आपको ब्रा पहनने से पसीना, खुजली या बेचैनी होती है, तो आप बिना ब्रा के रह सकती हैं। हालांकि, आप ब्रा पहनने से  कम्‍फर्टेबल महसूस करती हैं, तो इसे पहनकर रह सकती हैं। क्योंकि यह आपके ब्रेस्ट को सपोर्ट करता है, लेकिन इसे पहनना या न पहनना पूरी तरह से आपकी इच्छा पर निर्भर करता है। इसलिए आप अपने हेल्थ और सुख के अनुसार आप प्रेग्नेंसी में ब्रा नहीं पहनने का चयन कर सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 10:31:53 +0530</pubDate>
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<title>Detox Drink: Diet&#45;Workout से नहीं घट रहा वजन, 3 हफ्ते पिएं ये Green Juice, 5 किलो Fat हो जाएगा गायब</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप भी बढ़ते हुए वजन से परेशान हैं और आपने वजन कम करने के लिए अभी तक वर्कआउट, डाइटिंग और कई तरह के महंगे उपाय करके देख लिया है। लेकिन इसके बाद भी आपको मनचाहा रिजल्ट नहीं मिल रहा है, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि आप वजन कम करने के लिए प्रकृति की शक्ति पर भी भरोसा कर सकते हैं। इसलिए आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 4 चमत्कारी हरे पत्तों से बने खास डिटॉक्स जूस के बारे में बताने जा रहे हैं, जोकि वजन कम करने का प्राकृतिक समाधान साबित हो सकता है। बता दें कि यह जादुई ड्रिंक जिद्दी फैट को कम करता है और लिवर को डिटॉक्स करके पूरे शरीर को हेल्दी बनाता है।बेस्‍ट डिटॉक्स ड्रिंकबता दें कि दिन की शुरूआत इस जूस से करें। यह सबसे अच्छा प्राकृतिक तरीका है और यह मेटाबॉलिज्म को भी बूस्ट करता है। इस जूस का सेवन करने से शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं।इसे भी पढ़ें: रोज 15 मिनट Surya Namaskar और प्राणायाम, बढ़ेगी Immunity, दूर होगी Vitamin D की कमीड्रिंक बनाने के लिए सामग्रीपालक के पत्तेनीम के पत्तेधनिया के पत्तेपुदीना के पत्तेड्रिंक बनाने का तरीकाइन सभी पत्तों को थोड़ी मात्रा में लेकर अच्छे से धोएं।फिर थोड़ा सा पानी मिलाकर ब्लेंडर या मिक्सी में पीस लें, जिससे कि स्मूथ पेस्ट तैयार हो जाए।आप इसको सीधे पी सकती हैं या फिर चाहें तो छानकर भी जूस निकाल सकती हैं।इसको छानने के बाद गूदे को फेंके नहीं, इसको आप किसी अन्य व्यंजन में इस्तेमाल कर सकती हैं।लगातार 21 दिनों तक खाली पेट यह जूस पिएं।क्यों खास है डिटॉक्स ड्रिंकडिटॉक्स ड्रिंक मेटाबॉलिज्म को बढ़ाती है।यह शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है।यह आंतों को साफ करती है।भूख और क्रेविंग्स को भी कंट्रोल करती है।वहीं आपको 21 दिन में 5 किलो वेट कम करने में मदद मिलती है। पत्ते वेट लॉस में कैसे करते हैं मददनीम के पत्तेनीम के पत्ते ब्लड को शुद्ध करने के साथ एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए भी जाने जाते हैं। यह आंतरिक सूजन को कम करते हैं, जोकि वेट बढ़ाने का अहम कारण होता है।पालक के पत्तेपालक के पत्ते पोषक तत्वों और पालक से भरपूर होते हैं। पालक से आपको लंबे समय तक भूख नहीं लगती है, जिससे क्रेविंग काफी कम होती है।धनिया के पत्तेधनिया के पत्ते पाचन में सुधार करते हैं और शरीर में वॉटर रिटेंशन की समस्या को कम करते हैं।पुदीना के पत्तेपुदीना का जूस ताजगी देने का काम करता है और डाइजेस्टिव सिस्टम को भी शांत करता है। इससे ब्लोटिंग की समस्या दूर होती है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 22:14:44 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: छाती में जमे बलगम से हैं परेशान, ये Home Remedy देगा 2 दिन में Instant Relief</title>
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<description><![CDATA[ आजकल आपको हर दूसरा व्यक्ति खांसी और जुकाम से परेशान दिख जाएगा। सर्द मौसम और प्रदूषण के कारण गले की खराश और इंफेक्शन जैसी समस्या लोगों को परेशान कर रही हैं। सर्दी-खांसी के लिए बार-बार दवा देना भी सही नहीं है। लेकिन कई बार जिद्दी कफ बिना दवा के टस से मस नहीं होता है। सीने में जमे बलगम की वजह से कई बार सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। आमतौर पर रात में कफ ज्यादा परेशान करता है और खांसी के कारण नींद भी नहीं आती है।बलगम और खांसी की समस्या दूर करने में कई देसी नुस्खे सहायता कर सकते हैं। बशर्ते आपको इन नुस्खों का सही तरीके से इस्तेमाल करना आता हो। सर्दी-जुकाम में दादी-नानी घरों में कई ऐसे नुस्खे आजमाती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको एक ऐसे देसी नुस्खे के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: Constipation का रामबाण इलाज हैं ये 2 चीजें, इस Morning Routine से पेट रहेगा हमेशा साफआजमाएं ये देसी नुस्खाहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो अगर आपका कफ काफी समय से परेशान कर रहा है, तो इस नुस्खे से आपको सिर्फ 2 दिन में राहत मिल सकती है। इसमें अदरक, शहद, दालचीनी, कालीमिर्च और हल्दी का इस्तेमाल किया जाता है।इससे इंफ्लेमेशन कम होता है और गले की खराश भी दूर होती है। सीने में जमा बलगम बाहर निकलता है और खांसी की समस्या दूर होती है।आपको 1 चम्मच शहद लेना है और उसमें 1 चम्मच सौंठ, चौथाई चम्मच हल्दी, चुटकी भर काली मिर्च और आधा चम्मच दालचीनी पाउडर ले लें। इन सब चीजों में हल्का गुनगुना पानी डालना है। ध्यान रखें कि पानी गर्म नहीं होना चाहिए, वरना यह शहद के साथ मिलकर आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। आप इसको दिन में 1-2 बार ले सकती हैं।शहद में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। यह गले को आराम देता है और सीने में जमा बलगम को बाहर निकालने सहायता करता है। इस नुस्खे से खांसी दबती है।सौंठ में एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। इससे शरीर को अंदर से गर्माहट मिलती है। यह बलगम को ढीला होकर आसानी से बाहर निकालने में मदद करता है। यह फेफड़ों को भी साथ करने में मदद करती है।दालचीनी गले की खराश को खत्म करता है और इससे बलगम आसानी से साफ होता है। यह इम्यूनिटी को मजबूत करके इंफ्केशन से लड़ने की ताकत भी देती है।हल्दी और काली मिर्च भी खांसी और बलगम में रामबाण की तरह काम करता है। यह दोनों चीजें जिद्दी कफ को दूर करती है और हल्दी से इम्यूनिटी भी मजबूत होती है।काली मिर्च में पिपेरिन मौजूद होता है और हल्दी में कर्क्यूमिन के अब्जॉर्बशन को बढ़ाता है।हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो इस देसी नुस्खे को आजमाने के अलावा आपको खाने में ठंडी चीजों को नहीं शामिल करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 22:14:43 +0530</pubDate>
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<title>Periods में क्यों बढ़ जाते हैं Acne? जानें Hormonal Changes और Skin Problem का पूरा कनेक्शन।</title>
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<description><![CDATA[ महिलाओं को हर महीने काफी तकलीफ से गुजरना पड़ता है। महिलाओं को हर महीने पीरियड्स के दौरान तेज दर्द और असहजता का सामना करना पड़ता है। इस समय शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं,जिनका असर मूड से लेकर शारीरिक सेहत तक दिखाई देता है। पेट और कमर दर्द के साथ-साथ मानसिक उतार-चढ़ाव भी आम है। इन बदलावों का प्रभाव त्वचा पर भी पड़ता है। कई लोगों को इस दौरान पिंपल्स की समस्या होने लगती है,जबकि कुछ की त्वचा ज्यादा तैलीय और चिपचिपी नजर आने लगती है। एक्सपर्ट ने बताया है कि पीरियड्स के दौरान स्किन में काफी बदलाव देखने को मिलते हैं और इन दोनों के बीच क्या कनेक्शन है, आइए आपको बताते हैं।पीरियड्स में स्किन पर क्या प्रभाव पड़ता है? आमतौर पर पीरियड्स से पहले और उस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। इसके साथ ही प्रोजेस्टेरोन को लेवल बढ़ने लगता है। इसी कारण से हमारी स्किन में ऑयल ज्यादा बनने लगता है। इससे पोर्स बंद हो सकते हैं और पिंपल्स या एक्ने की समस्या बढ़ जाती है। इस दौरान कुछ महिलाओं की स्किन बहुत सेंसिटिव हो जाती है। ऐसे में रेडनेस, खुजली या ड्राइनेस की समस्या  बढ़ जाती है।पीरियड्स के दौरान स्किन पर होने वाली आम समस्याएं  - चेहरे पर पिंपल्स या छोटे-छोटे दाने निकल आना।  - स्किन को ज्यादा ऑयली चिपचिपा हो जाना।  - ड्राइनेस या खिंचाव महसूस होना।  - रेडनेस या खुजली की समस्या होना।  - स्किन पहले से ज्यादा सेंसिटिव लगना।स्किन का कैसे ख्याल रखें?   - दिन में दो बार हल्के फेसवॉश का इस्तेमाल करके चेहरा को साफ करें।  - ऑयली क्रीम लगाने से बचना चाहिए।  - इस समय जितना पानी पिएंगे उतना ही स्किन अंदर से हाइड्रेच रहेगी। - पिंपल्स को बार-बार छुए नहीं। - अत्यधिक मेकअप करने से बचें।डॉक्टर को कब दिखाएं?यदि आप हर महीने पीरियड्स के समय बहुत ज्यादा एक्ने हो रहे हैं और पिंपल्स बहुत ही ज्यादा दर्द दे रहे हों या स्किन में ज्यादा जलन हो रही हो तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरुरी है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 22:14:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Alert: Normal BP पर भी तेज है Heartbeat? हो सकता है गंभीर बीमारी का संकेत</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर होता है कि बीपी सामान्य होता है लेकिन दिल की धड़कन यानी पल्स रेट तेज होती है। सामान्य वस्यको में पल्स रेट 60 से 100 बीट्स प्रति मिनट होती है, अगर पल्स रेट 100 से ऊपर चला जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। भारी कसरत करने या तेज गति से चलने के बाद दिल की धड़कन बढ़ना सामान्य है, लेकिन इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं। थायराइड हार्मोन का स्तर बढ़ने पर हार्टबीट तेज हो सकती है। वहीं शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने से ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होती है, जिससे पल्स रेट बढ़ जाता है। इसके अलावा अस्थमा इनहेलर, डीकंजेस्टेंट जैसी कुछ दवाएं भी दिल की धड़कन को तेज कर सकती हैं। इस लेख में हम हार्टबीट बढ़ने के ऐसे ही अन्य कारणों के बारे में विस्तार से जानेंगे।तनाव और च‍िंता बन सकती है कारणजो लोग काम का अत्यधिक दबाव या किसी अन्य वजह से लंबे समय तक तनाव और चिंता में रहते हैं,उनके शरीर में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इसका सीधा असर दिल पर पड़ता है और धड़कन तेज होने लगती है। कई बार ब्लड प्रेशर सामान्य रहने के बावजूद भी ज्यादा तनाव की स्थिति में हार्टबीट बढ़ सकती है।ड‍िहाइड्रेशन भी हो सकता है कारणशरीर में पानी की कमी से भी पल्स रेट बढ़ सकता है। क्योंकि शरीर में पानी की कमी से खून का वॉल्यूम कम हो जाता है और इसकी भरपाई के लिए दिल को तेजी से पंप करना पड़ता है जिससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है। इसके अलावा जो लोग कैफीन का सेवन करते हैं या धूम्रपान करते हैं उनमें भी हाई पल्स रेट की समस्या हो सकती है।बीपी नार्मल और द‍िल की तेज धड़कन है बीमारी का संकेतनेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के एक अध्ययन के मुताबिक, जिनकी पल्स रेट ज्यादा होती है, उनमें हार्ट की बीमारियों का खतरा ज्यादा पाया गया जबकि उनका बीपी नॉर्मल रेंज में था। अध्ययन में यह भी पता चला है कि दिल की तेज धड़कन के कारण बाद में हाई बीपी या अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। यदि आपका बीपी सामान्य है, लेकिन पल्स रेट तेज है, तो भी स्वास्थ्य जोखिमों का खतरा और खासकर दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।द‍िल की धड़कन तेज होने पर क्‍या करें? - दिल की धड़कन तेज होने पर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। - सिगरेट और फैफीन का सेवन न करें। - एक्सरसाइज, योग, प्राणायाम और मेडिटेशन करें। - संतुलित डाइट जरुर लें। अपने आहार में आयरन और पोषक तत्वों को शामिल करें। - यदि तेज धड़कन, सीने में दर्द, सांस फूलने जैसे लक्षण नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 22:14:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: Constipation का रामबाण इलाज हैं ये 2 चीजें, इस Morning Routine से पेट रहेगा हमेशा साफ</title>
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<description><![CDATA[ सेहतमंद बने रहने के लिए रोजाना पेट का खुलकर साफ होना बेहद जरूरी होता है। हालांकि हम में से बहुत सारे लोग इस बात को नहीं जानते होंगे कि अधिकतर बीमारियों की जड़ पेट साफ न होना होता है। लेकिन जब हमारा पेट ठीक से साफ नहीं होता है, तो शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। वहीं शरीर में कई तरह की बीमारियां पनपने लगती हैं। पेट में भारीपन, कब्ज होने पर भूख न लगना, गैस-एसिडिटी और चिड़चिड़ापन बनी रहती है। डाइट में पानी की कमी, फाइबर की कमी, तनाव, हार्मोनल बदलाव, नींद न पूरी होना और फिजिकल एक्टिविटी कम होने के कारण पेट ठीक से साफ नहीं होता है।कब्ज के कारण त्वचा की जुड़ी दिक्कतें भी होने लगती हैं। कई बार दिनभर थकान बनी रहती है। कब्ज दूर करने में डाइट का महत्वपूर्ण रोल होता है। फाइबर से भरपूर चीजों को डाइट में शामिल करने से पेट साफ करने में मदद मिलती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 2 चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको पानी में भिगोकर रात में रोजाना खाने से सुबह आपको पेट झट से साफ हो जाएगा।इसे भी पढ़ें: Women&#039;s Wellness Secret: 30 के बाद शरीर के इन 2 अंगों पर करें Tapping, Health पर होगा Magicखाएं भीगे हुए मुनक्के और अंजीरएक्सपर्ट के हिसाब से यह कब्ज को दूर करने का रामबाण तरीका है। रात को 4 मुनक्के और 1 अंजीर को पानी में भिगो दें। फिर सुबह इसका खाली पेट सेवन करें और पानी भी पी लें। इससे आपका पेट आसानी से साफ हो जाएगा।अंजीर और मुनक्के को भिगोकर खाने से न सिर्फ आपका पेट साफ होता है। बल्कि इससे डाइजेशन से जुड़ी समस्या दूर होती है। इसका सेवन करने से शरीर में ताकत भी बनी रहती है।यह बाउल मूवमेंट को बेहतर बनाता है। अगर आप खाली पेट इन दोनों चीजों का सेवन करती हैं, तो इससे मल मुलायम होता है और यह आसानी से बाहर निकल जाता है। यह आंतों को साफ करता है। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, मुनक्का और अंजीर न सिर्फ डाइजेशन बेहतर बनाता है। बल्कि खून की कमी को दूर करता है और कमजोरी महसूस नहीं होती है।इससे आपकी हड्डियां मजबूत होती है और इन दोनों चीजों का सेवन करने से महिलाओं को पीरियड्स से जुड़ी समस्या दूर होती है। इनमें विटामिन्स, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स भरपूर माना में होते हैं। वहीं अगर आप इसमें सोंठ पाउडर और खजूर डालेंगी, तो शरीर में ताकत बनी रहेगी और सर्दियों में भी कई बीमारियों से बचाव होगा।रात को पानी में भीगे हुए मुनक्के और अंजीर खाने से रोजाना सुबह पेट खुलकर साफ होगा। जिन लोगों को अक्सर पाचन संबंधी समस्याएं परेशान करती हैं और कब्ज बनी रहती है, उनको इसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 11:38:33 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: Diabetes को लेकर इन 3 Myths पर करते हैं यकीन, आज ही जानें Blood Sugar का कड़वा सच</title>
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<description><![CDATA[ आजकल काफी लोगों में डायबिटीज की समस्या देखने को मिल रही है। जब हमारा शरीर ठीक तरह से इंसुलिन का इस्तेमाल नहीं कर पाता है या फिर शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बन पाता है। तो डायबिटीज हो जाती है। हालांकि इस बीमारी के होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इसमें हार्मोनल बैलेंस, फैमिली हिस्ट्री, मोटापा, गलत खानपान और स्ट्रेस आदि शामिल है। कई लोगों को लगता है कि अगर वह मीठा नहीं खाते हैं, तो उनको शुगर नहीं होगा।अगर आप भी ऐसा सोचते हैं कि सिर्फ मीठा खाने से डायबिटीज होती है और आप भी कम मीठा खाते हैं, तो आपको यह बीमारी नहीं होगी, तो आप बिल्कुल गलत हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको डायबिटीज से जुड़े कुछ ऐसे मिथ्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको अधिकतर लोग सच मानते हैं। जबकि इस बारे में ज्यादातर लोगों को सही जानकारी नहीं है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: Constipation का रामबाण इलाज हैं ये 2 चीजें, इस Morning Routine से पेट रहेगा हमेशा साफइन मिथ्स पर न करें यकीनअगर आप ऐसा सोचते हैं कि आपके परिवार में किसी को भी डायबिटीज नहीं है, इसलिए आपको भी यह बीमारी नहीं हो सकती है, तो आप गलत हैं।बता दें कि डायबिटीज पर जेनेटिक कारणों का असर होता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि परिवार में किसी को डायबिटीज नहीं है, तो यह आपको भी नहीं होगा।कई लोगों का मानना है कि सिर्फ मीठा खाने के कारण डायबिटीज होती है। अगर आप मीठा नहीं खाते हैं या फिर कम मीठा खाते हैं, तो आपको डायबिटीज नहीं होगी। तो यह भी एक मिथ है। क्योंकि यह बीमारी सिर्फ मीठा खाने पर निर्भर नहीं होती है।कई बार डायबिटीज के शुरूआती लक्षण नहीं नजर आते हैं। ऐसे में अगर आपको भी इस बीमारी के कोई लक्षण नहीं नजर आ रहे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपका ब्लड शुगर लेवल बढ़ा हुआ नहीं हो सकता है।हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो यह एक लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है। ऐसे में अगर आप हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो नहीं करती हैं, तो आप किसी भी उम्र में डायबिटीज का शिकार हो सकती हैं।डायबिटीज बीमारी होने पर आपको हेल्दी डाइट लेना चाहिए। ऐसी डाइट जिसमें फैट, नमक और मीठा कम हो। सही लाइफस्टाइल, हेल्दी डाइट और डॉक्टर की सलाह के साथ आप इस बीमारी को काफी हद तक मैनेज कर सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 11:38:32 +0530</pubDate>
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<title>रोज 15 मिनट Surya Namaskar और प्राणायाम, बढ़ेगी Immunity, दूर होगी Vitamin D की कमी</title>
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<description><![CDATA[ आधुनिक जीवनशैली के चक्कर में लोग अपनी सेहत पर ध्यान देना भूल ही गए हैं। ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट ने माना है कि विटामिन डी केवल एक पोषक तत्व ही नहीं, बल्कि ऊर्जा है। जब इसकी कमी होती है, तब हड्डियां, दिल, ब्रेन और कोशिकाएं कमजोर पड़ने लगती हैं। क्या आप जानते हैं कि विटामिन डी बढ़ाने के लिए हर बार दवाइयों या सप्लीमेंट्स की जरुरत नहीं होती। योग, सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और सुबह की धूप, इन सभी तरीकों से शरीर को प्राकृतिक रुप से हेल्दी बनाने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।शहरी भारत में विटामिन D की कमी क्यों बड़ी समस्या बन गईआज  Urban सिटी में  Vitamin D Deficiency गंभीर हेल्थ समस्या बन गया है। ऑफिस कल्चर, इंडोर लाइफस्टाइल, प्रदूषण और खुले स्थानों की कमी के कारण शरीर सूर्य-ऊर्जा को ठीक से ग्रहण नहीं कर पा रहा है। यौगिक विज्ञान में सूर्य को ऊर्जा, इम्यूनिटी और जीवन शक्ति का स्रोत माना गया है, हालांकि विटामिन डी कमी से शरीर अंदर से कमजोर हो जाता है।जब धूप भरपूर है तो विटामिन D कम क्यों? - लोग ज्यादा समय तक घर के अंदर रहते हैं  - ढकी हुई गाड़ियों में सफर  - जरुरत से ज्यादा सनस्क्रीन   - शरीर को ढकने वाले कपड़े  - वायु प्रदूषण सूर्य नमस्कार से कैसे बढ़ता है विटामिन डीसुबह सूर्य उगते ही सूर्य नमस्कार करना चाहिए। क्योंकि सूर्य की किरणें सॉफ्ट और फायदेमंद होती हैं। इस समय शरीर सुरक्षित रुप से UV-B किरणें ग्रहण कर सकता है। अब सवाल उठता है कि सूर्य नमस्कार करने से क्या होता है।  - ब्लड सर्कुलेश बढ़ाता है।  - मणिपूर चक्र को एक्टिव करता है।  - शरीर को सूर्य-ऊर्जा ग्रहण करने के लिए तैयार करता है।प्राणायाम कैसे बढ़ाता है इम्यूनिटी और ऊर्जा?- कपालभाति सौर ऊर्जा को एक्टिव करता है।  - अनुलोम-विलोम इड़ा-पिंगला नाड़ियों को संतुलित करता है।  - ऑक्सीजन और प्राण प्रवाह बढ़ाता है। - इससे शरीर विटामिन-डी को बेहतर तरीके से उपयोग करने लगता है।सूर्य नमस्कार कब और कितनी देर करें? सूर्य नमस्कार करने के लिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है, विशेषकर सुबह 6 से 8 बजे के बीच। इस समय सूर्य की किरणें कोमल होती हैं और शरीर को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं। आमतौर पर सूर्य नमस्कार के 12 से 24 चक्र किए जा सकते हैं। जो लोग शुरुआत कर रहे हैं, वे पहले 4 से 6 चक्रों से आरंभ करें और अभ्यास बढ़ने के साथ धीरे-धीरे संख्या में वृद्धि करें।क्या सूर्य नमस्कार विटामिन डी सप्लीमेंट का विकल्प है?नियमित रुप से सूर्य नमस्कार करने और धूप शरीर की प्राकृतिक क्षमता को बढ़ाते हैं। लंबे समय में यह विटामिन डी के स्तर को संतुलित रखती है। क्योंकि विटामिन-D की कमी की स्थिति में सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरुरी है।क्या रेगुलर योग और धूप विटामिन D बढ़ाते हैं?यह बिल्कुल सच है कि आप नियमित रुप से योग करना और सुबह की धूप शरीर की मेटाबॉलिक अग्नि को जाग्रत करती है। इससे शरीर सूर्य-ऊर्जा को बेहतर तरीके से ग्रहण करने लगता है और समय के साथ विटामिन-D का लेवल सही होने लगता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 11:38:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>रोज, मिनट, Surya, Namaskar, और, प्राणायाम, बढ़ेगी, Immunity, दूर, होगी, Vitamin, की, कमी</media:keywords>
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<title>Women Health: 50 Plus Women ध्यान दें, जोड़ों के दर्द और कमजोरी को दूर भगाएंगे ये 4 Superfoods, Diet में करें शामिल</title>
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<description><![CDATA[ महिलाओं को 50 साल के उम्र के बाद मेनोपॉज की वजह से महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव तेजी से होते हैं। इस दौरान शरीर की रिकवरी भी धीमी पड़ जाती है। इससे एनर्जी कम होने लगती है, जोड़ों में दर्द होता है और शरीर में जकड़न महसूस होती है। साथ ही चिड़चिड़पने या मूड स्विंग्स भी होते हैं। ऐसे में आपको घबराना नहीं चाहिए, बल्कि आप अपनी मां को हेल्दी डाइट देकर इन समस्याओं से लड़ने की ताकत दे सकती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको आसान 4 सुपरफूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे आपकी मां की सेहत किसी वरदान से कम नहीं है।50 के बाद खास है ये डाइटमेनोपॉज के बाद शरीर को अलग-अलग तरह के पोषण की जरूरत होती है। सही खाना शरीर की सूजन को कम करता है और मानसिक स्वास्थ्य को भी अच्छा बनाता है।यह भी पढ़ें: महिलाओं के लिए Health Resolutions 2026; जरुर लें ये 5 संकल्प, दिखेंगी हेल्दी-फिटअखरोटअखरोट को ब्रेन का साथी माना जाता है। क्योंकि यह हेल्दी फैट्स ओमेगा 3 का खजाना होता है। यह बॉडी की अंदरूनी सूजन को कम करने में जादुई तरीके से काम करता है। इसके सेवन से याददाश्त बढ़ती है और मानसिक स्पष्टता लाता है।अगर आपकी मां अक्सर उदास या फिर परेशान रहती हैं, तो आप रेगुलर अखरोट खाने से मूड स्विंग्स कम होने लगेंगी।ग्रीक योगर्ट50 साल की उम्र के बाद मांसपेशियों और हड्डियों कमजोर होने लगती हैं। सादे दही की तुलना में ग्रीक योगर्ट में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है।इसमें मांसपेशियों की ताकत बनाए रखता है।इसमें मौजूद गुड बैक्टीरिया पाचन को सुधारते हैं। इसके सेवन से पेट हेल्दी रहेगा, शरीर की सूजन कम होगी और आपकी मां खुद को हल्का महसूस करेंगी।अनार के दानेअनार एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। यह कोशिकाओं को उम्र के साथ होने वाले नुकसान से बचाता है।यह जोड़ों की दर्द और जकड़न को कम करने में काफी असरदार होता है।मेनोपॉज के दौरान और इसके बाद यह शरीर के प्राकृतिक हार्मोनल बैलेंस को बनाए रखता है।शकरकंदअक्सर लोग शकरकंद को नजरअंदाज करते हैं, लेकिन यह कार्बोहाइड्रेट का सबसे अच्छा स्त्रोत है, जिससे दिनभर एनर्जी से भरपूर खाता है।यह अचानक से शुगर बढ़ाने की जगह धीरे-धीरे और लगातार एनर्जी देता है। जिससे आपको थकान नहीं महसूस होती है।इसको खाने से शाम के समय होने वाली फालतू की क्रेविंग कम होती है। यह पाचन और पेट के लिए भी अच्छा होता है। स्पेशल &#039;हेल्थ बाउल&#039;सबसे पहले एक कटोरी में ग्रीक योगर्ट लें।अब इसमें उबले हुए शकरकंद के छोटे-छोटे टुकड़े लें।इसमें ऊपर से क्रिस्पी अखरोट और ताजे अनार के दाने डालें।स्वाद बढ़ाने के लिए एक चुटकी काला नमक या चाट मसाला डालें।क्यों खास है ये बाउलइसको पचाना आसान है, पेट भरता है और स्वाद में भी यह लाजवाब होता है।इसको खाने से आपकी मां पूरा दिन ऊर्जावान महसूस करेंगी।इसके सेवन से जोड़ों का दर्द कम होगा।50 साल की उम्र के बाद महिलाएं अपने बदलते शरीर के साथ अच्छी तरह से तालमेल बिठा पाएंगी। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 11:06:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>UTI Surge in Winter: सर्दियों में महिलाओं को क्यों घेरता है UTI, जानें बचाव के ये 5 जरूरी Tips</title>
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<description><![CDATA[ यूटीआई महिलाओं में होने वाली आम समस्याओं में से है। लगभग हर महिला को कभी न कभी UTI यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन ने जरूर परेशान किया होगा। हालांकि इसके पीछे कई वजह हो सकती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मौसम में बदलाव होने की वजह से भी यूटीआई का खतरा हो सकता है। सर्दियों में महिलाओं में यूटीआई का खतरा बढ़ जाता है। सर्दियों की शुरूआत से ही हमारे शरीर में कई तरह के बदलाव नजर आने लगते हैं। इससे स्किन रूखी हो जाती है, एड़ियां फटने लगती हैं, होंठ फटने लगते हैं, प्यास कम लगती है और सर्दी-जुकाम भी परेशान करने लगता है।सर्दियों के मौसम में यूटीआई के मामले ज्यादा देखने को मिलता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम इस मौसम में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन क्यों बढ़ जाता है और किन टिप्स से इस समस्या से बचा सकता है।इसे भी पढ़ें: Health Experts का अलर्ट: आपकी Morning Coffee बन सकती है &#039;जहर&#039;, अगर कर रहे हैं ये गलतीसर्दियों में यूटीआई का खतराआपने महसूस किया होगा कि जब टेंपरेचर गिरने लगता है, तो ठंड अधिक बढ़ जाती है। जिस कारण बार-बार यूरिन आता है। हालांकि यह कोई इत्तेफाक नहीं है। सर्दियों में हमें पसीना भी कम आता है, यानी की त्वचा से फ्ल्यूड कम बाहर निकलता है। इसकी भरपाई के लिए फ्ल्यूड यूरिन के माध्यम से बाहर निकलने लगता है। इस दौरान यूटीआई का खतरा अधिक बढ़ जाता है। क्योंकि सर्दियों के मौसम में हम पानी कम पीते हैं, जिस कारण यूरिन गाढ़ा होने लगता है और बैक्टीरिया बढ़ने लगता है। वहीं सर्दियों में इम्यूनिटी कम हो जाती है, जिसकी वजह से इंफेक्शन से लड़ने की शरीर की क्षमता कम होने लगती है।सर्दियों में हर समय गर्म और टाइट कपड़े पहनने की वजह से यूरिन इंफेक्शन ज्यादा होता है। सर्दी में ब्लड वेसेल्स सिकुड़ने लगती हैं, जिससे कि शरीर की गर्मी बाहर न निकले। इस कारण यूरिनरी ट्रैक्ट के आसपास का एरिया संकुचिन होने लगता है। इससे बैक्टीरिया ज्यादा पनपने लगते हैं। इस मौसम में स्किन ड्राई हो जाती है और यह भी यूटीआई के खतरे को बढ़ा सकता है। इस सभी कारणों से सर्दियों में यूरिन इंफेक्शन ज्यादा परेशान करता है।ऐसे करें बचावयूरिन को होल्ड करने से बचना चाहिए।वहीं पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, जिससे कि बैक्टीरिया को पनपने का मौका नहीं मिलेगा।यूरिन पास करने के बाद इंटिमेट एरिया को अच्छे से वॉश करना चाहिए।ज्यादा अधिक टाइट कपड़े नहीं पहने चाहिए।हल्की और हेल्दी डाइट लेना चाहिए। डाइट में इम्यूनिटी मजबूत करने वाली चीजों को शामिल करना चाहिए।जानिए क्या है एक्सपर्ट की रायसर्दियों में यूटीआई का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। क्योंकि इस मौसम में प्यास कम लगती है और इस कारण हम पानी कम पीते हैं। इसके कारण भी यूरिन इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। यूरिन रोकने की वजह से भी ऐसा हो सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 11:06:05 +0530</pubDate>
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<title>Health Experts का अलर्ट: आपकी Morning Coffee बन सकती है &amp;apos;जहर&amp;apos;, अगर कर रहे हैं ये गलती</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में हर किसी को कॉफी पीना बेहद पसंद है। सुबह कॉफी के बिना नहीं होती है लेकिन आप जिस तरह से कॉफी पी रहे हैं, क्या वो सही तरीका है। एक हालिए स्टडी में पता चला है कि ज्यादातर लोग कॉफी पीने के सही तरीके को नहीं जानते हैं और इसे गलत तरीक से पीते हैं, तभी उनकी सेहत पर नुकसान पड़ता है। आइए जानते हेल्थ एक्सपर्ट से किस तरह से कॉफी पीना सही होता है?कॉफी पीना का सही तरीकादरअसल, Nutrition, Metabolism &amp; Cardiovascular Diseases में प्रकाशित इस स्टडी के मुताबिक सबसे बड़ा स्वास्थ्य कारक कॉफी नहीं, बल्कि उसमें मिलाई जाने वाली चीजें हैं, जो कि शरीर पर होने वाले इसके असर को प्रभावित कर सकती है। शोधकर्ताओं का यह कहना है कि  कॉफी में ऐसे यौगिक होते हैं जो एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुणों सहित कई संभावित लाभों से जुड़े हैं। हालांकि, समस्या तब उत्पन्न होती है जब कॉफी को डिजर्ट यानी मिठाई में बदल दिया जाता है जैसे कि-  - चीनी वाली कॉफी  - फ्लेवर्ड सिरप वाली कॉफी  - व्हीप्ड क्रीम वाली कॉफी  - हैवी क्रीम वाली कॉफी इस तरह की सभी कॉफी में कैलोरी अधिक हो जाता है और ये हाई शुगर वाले ड्रिंक में बदल जाते हैं,  जिससे इसके अधिकांश लाभ खत्म हो जाते हैं।सही समय पर पिएं कॉफीइस शोध में बताया गया है कि कॉफी पीने का सही समय सेहत के लिए बेहद अहम होता है। बहुत सुबह या दिन के आखिरी हिस्से में कॉफी पीने से शरीर के प्राकृतिक हार्मोन चक्र और नींद की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसका परिणाम खराब नींद, मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी और शरीर में सूजन के रूप में सामने आ सकता है। शोध के अनुसार, ब्लैक कॉफी हल्की या दूध वाली कॉफी की तुलना में अधिक लाभकारी होती है। साथ ही, कॉफी का तापमान और उसे बनाने की विधि भी इसके स्वास्थ्य लाभों को प्रभावित करती है। क्या है डॉक्टर की राय? वैज्ञानिक रिसर्च से पता चला है कि कॉफी कितनी पी जा रही है, इसके साथ-साथ यह भी उतना ही जरुरी है कि उसे किस तरह और किस समय पिया जा रहा है। खासतौर पर कॉफी में एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। लेकिन फायदे तब तक ही सीमित रहते हैं, जब तक कॉफी को उसके सिंपल फॉर्म में लिया जाए। जब आप ज्यादा चीनी, फ्लवर्ड सिरप, व्हीप्ड क्रीम या हैवी क्रीम मिलाई जाती है, यह एक साधारण कप कॉफी कब हाई-कौलोरी और हाई-शुगर ड्रिंक बन जाती है, फिर कॉफी पीने के सारे फायदे खत्म हो जाते हैं। कम मात्रा में कॉफी पीना सहीरोजाना सिर्फ 2 से 3 कप ब्लैक या हल्की दूध वाली कॉफी पीना सेफ नहीं है। अक्सर होता है कि ज्यादा कॉफी पीने से बेचैनी, एसिडिटी, नींद की कमी और हार्ट से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। वैसे कॉफी पीने का समय भी बेहद अहम है। चाहे कॉफी खुद कितनी ही हेल्दी क्यों न मानी जाए। इसलिए नियमित रुप से सिंपल और संतुलित कॉफी पीना और कभी-कभार फ्लेवर वाली कॉफी का आनंद लेना। तभी सेहत और स्वाद के बीच सबसे अच्छा संतुलन है। अगर आप कॉफी को सीमित मात्रा में पीते तो यह हेल्दी बन जाती है। कम मिलावट के साथ ही इसे समय पर पिया जाए।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 11:06:05 +0530</pubDate>
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<title>Women&amp;apos;s Wellness Secret: 30 के बाद शरीर के इन 2 अंगों पर करें Tapping, Health पर होगा Magic</title>
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<description><![CDATA[ हेल्दी रहने के लिए हम सभी क्या-क्या नहीं करते हैं। स्वस्थ रहने के लिए कई तरीके अपनाते हैं। जब महिलाओं की हेल्थ की बात आती है, तो सबसे बड़ी दिक्कत ये होती है कि ज्यादातर महिलाएं खुद नहीं जानती हैं कि उन्हें किस तरह से अपने हेल्थ का ध्यान रखना है। शरीर के किस अंग की किस तरह देखभाल करनी है और कौन-सी वो छोटी बातें हैं, जो उनकी सेहत बिगाड़ सकती हैं। उम्र बढ़ने के साथ सेहत का ख्याल रखना जरुरी हो जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि महिलाओं को 30 उम्र के बाद शरीर के दो खास हिस्सों पर टैपिंग करने से सेहत को कई फायदे मिल सकते हैं। आइए आपको इन फायदों के बारे में बताते हैं।30 की उम्र के बाद ब्रेस्ट और पेल्विक एरिया पर टैपिंग करने के फायदे  - हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि 30 की उम्र के बाद यदि आप हल्के हाथों से रोजाना चेस्ट पर टैपिंग करती हैं, तो इससे आपको कई फायदे मिल सकते हैं। इससे ऑक्सीजन फ्लो में सुधार होता है और ब्रीदिंग क्वालिटी भी बेहतर होती है। - ऐसा करने से नर्वस सिस्टम शांत होता है और तनाव भी दूर होता है। छाती पर हल्के हाथों से टैपिंग करने से स्ट्रेस और एंग्जायटी कम होती है। - 30 की उम्र के बाद इस तरह टैपिंग करने से शरीर रिलैक्स होता है और हार्मोनल बैलेंस बना रहता है। - सोने पहले अगर आप यह करते हैं, तो नींद में भी सुधार आता है। इससे सीन की जकड़न भी दूर होती है। - एक्सपर्ट का कहना है कि 30 की उम्र के बाद पेल्विक एरिया में टैपिंग करना भी जरुरी है। इससे रिप्रोडक्टिव हेल्थ में भी सुधार होता है। पेल्विक एरिया में टैपिंग करने से रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स में ब्लड फ्लो में सुधार होता है और फर्टाइल हेल्थ को भी बेहतर करता है।- इससे कमर के निचले हिस्से में होने वाले दर्द को कम करने में सहायक होता है और हिप्स के भारीपन की समस्या से भी राहत दिलाता है।- इसके साथ ही यह पीरियड्स के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करता है और शरीर के हार्मोन को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है। - टैपिंग करने के लिए आराम से बैठ जाएं या खड़ी हो जाएं। 2-3 उंगलियों से पेल्विक एरिया के आस-पास टैपिंग करें और गहरी सांस लें और छोड़ें। रोजाना 2 मिनट ऐसा करना है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 11:06:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Cramping Post Abortion: Abortion Pill के बाद क्यों होता है असहनीय दर्द, जानिए इसके पीछे की Medical Science</title>
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<description><![CDATA[ कई बार महिलाओं को अनचाही प्रेग्नेंसी हो जाती है। जिसके बाद वह अबॉर्शन कराने के बारे में सोचती हैं। लेकिन अबॉर्शन को लेकर महिलाओं के मन में यह डर भी रहता है कि इसमें ज्यादा दर्द होता है। अबॉर्शन के दौरान कोई दर्द नहीं होता है। बता दें कि अबॉर्शन दो तरीकों से किया जाता है, जिनमें एक अबॉर्शन पिल और दूसरा ऑप्शन सर्जरी का होता है। वहीं जब दवाओं के इस्तेमाल से प्रेग्नेंसी की शुरूआत में गर्भावस्था को खत्म किया जाता है, तो इसको मेडिकल अबॉर्शन कहा जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि अबॉर्शन पिल लेने के बाद दर्द क्यों होता है।अबॉर्शन पिल लेने पर क्यों होता है दर्दबता दें कि अबॉर्शन पिल लेने के बाद दर्द इसलिए होता है, क्योंकि दवा यूट्रेस को सिकोड़ती है। जिससे वह गर्भावस्था के टिशू को बाहर निकाल सके। यह दर्द और ऐंठन मासिक धर्म के दर्द जैसा या फिर इससे कहीं ज्यादा हो सकता है। लेकिन यह शरीर की इस प्रक्रिया से गुजरने का एक सामान्य हिस्सा होता है। इससे शरीर खुद को साफ करता है और हार्मोनल बदलाव की वजह से भी ऐसा होता है।इसे भी पढ़ें: Women Health Care: अबॉर्शन के बाद इन चीज़ों से करें परहेज़, रिकवरी को मिलेगी गति, शरीर रहेगा स्वस्थदर्द की मुख्य वजहगर्भाशय का सिकुड़नामिसोप्रोस्टोल नामक दवा लेने से यह गर्भाशय को तेज संकुचन करती है। जिससे कि गर्भावस्था के ऊतक बाहर निकल सकें। जब गर्भाशय में संकुचन होता है, तो यह दर्द और ऐंठन पैदा करते हैं। इस दौरान ठीक वैसे ही दर्द होता है, जैसे पीरियड्स के दौरान होता है। लेकिन कई बार यह दर्द काफी तेज हो सकता है।हार्मोनल बदलाव होनागर्भपात के बाद बॉडी में प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का लेवल तेजी से गिरता है। इन हार्मोनल उतार-चढ़ाव की वजह से भी गर्भाशय में दर्द और ऐंठन हो सकता है। क्योंकि बॉडी गर्भावस्था के बाद अपनी सामान्य स्थिति में वापस लौटता है।ऊतकों का बाहर निकलनाजब गर्भ के ऊतक और रक्त के थक्के को गर्भाशय से बाहर निकलते हैं, तो इस वजह से भी भारी ब्लीडिंग और तेज दर्द हो सकता है।राहत के उपायदर्द की तीव्रताअबॉर्शन पिल लेने से होने वाला दर्द हर महिला में अलग-अलग होता है। लेकिन आमतौर पर यह दर्द पीरियड्स के जैसा होता है। वहीं दूसरी पिल लेने के कुछ घंटों बाद सबसे ज्यादा होता है। जोकि कुछ घंटों या फिर एक दिन में ठीक हो जाता है।राहत के तरीकेअगर आपको ज्यादा दर्द हो रहा है, तो आप डॉक्टर की सलाह पर आइबुप्रोफेन जैसी दर्द निवारक दवा ले सकती हैं। वहीं आपको पेट पर हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल रखने से भी राहत मिल सकती है।डॉक्टर से मिलेंअगर अबॉर्शन पिल लेने से आपको अधिक ज्यादा ब्लीडिंग हो, दर्द अधिक हो, चक्कर आएं, तो ऐसी स्थिति में आपको फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 19 Jan 2026 22:22:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Disha Patani जैसा Slim Figure चाहिए? रोज सुबह पिएं हल्दी&#45;अदरक वाले ये 3 जादुई ड्रिंक्स</title>
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<description><![CDATA[ आजकल लोग अपनी सेहत पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते हैं, ऐसे में आपको अपनी फिटनेस पर काफी ध्यान देना जरुरी होता है। इसके लिए लोग कुछ भी नहीं करते हैं, बस घटों जिम में जाकर पसीना बहा रहे हैं और कई तरह की स्ट्रिक्ट डाइट रुटीन फॉलो करें। जब बॉलीवुड की सबसे फिट सेलिब्रिटी की चर्चा होती है, तो अक्सर मलाइका अरोड़ा और शिल्पा शेट्टी का नाम सबसे पहले सामने आता है। हालांकि, दिशा पाटनी भी अपनी शानदार फिटनेस, टोन्ड बॉडी और ग्लैमरस अंदाज के चलते लगातार सुर्खियों में बनी रहती हैं।दिशा की तस्वीरें और वीडियो देखकर अक्सर लोगों के मन में यही सवाल आता है कि वह इतनी स्लिम और फिट कैसे रहती हैं। हाल ही में अभिनेत्री दिशा पाटनी ने एक पॉडकास्ट के दौरान अपनी फिटनेस से जुड़े कुछ खास राज साझा किए हैं, जिसकी वीडियो यूट्यूब पर उपलब्ध है। अगर आप भी उनकी तरह टोन्ड और फिट फिगर पाना चाहती हैं, तो उनके बताए गए इस रूटीन को अपनाया जा सकता है।सुबह की आदतों पर द‍िया ध्‍यानकिसी पॉडकास्ट म दिशा पाटनी ने बताया था कि जब उन्होंने अपनी फिटनेस जर्नी शुरु की थी तो सबसे पहले उन्होंने अपनी सुबहकी आदतों पर खास ध्यान दिया था। दिन की शुरुआत कुछ खास ड्रिंक्स से करना उनके लिए बहुत ही फायदेमंद रहा है। बता दें कि, एक्ट्रेस ने तीन ड्रिंक्स की जानकारी दी है।हल्दी वाला पानीदिशा पाटनी अपने दिन की शुरुआत सबसे पहले हल्दी मिले गुनगुने पानी से करती हैं। हल्दी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है, क्योंकि यह मेटाबॉलिज्म को सक्रिय करने में मदद करती है। रोजाना हल्दी वाला पानी पीने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और दिनभर फ्रेश महसूस होता है।खास चाय पीती हैंहल्दी वाला पानी पीने के बाद दिशा एक खास चाय का सेवन करती हैं, जिसमें अदरक और दालचीनी मिलाई जाती है। यह चाय खास तौर पर गले की देखभाल के लिए होती है। इससे गले को राहत मिलती है और साथ ही शरीर को भी आराम और सुकून महसूस होता है।दो से तीन गिलास गुनगुना पानीइन दोनों आदतों को अपनाने के बाद दिशा 2 से 3 गिलास गुनगुना पानी भी पीती हैं। इससे शरीर में डिहाइड्रेशन नहीं होता। सही तरह से हाइड्रेटेड रहने पर शरीर बेहतर तरीके से काम करता है और वजन को संतुलित रखने में भी सहायता मिलती है।घर का सादा खाना भी है बड़ी वजहड्रिंक्स के साथ ही दिशा अपने खानपान को भी बेहद सरल रखती हैं। वह अधिकतर घर का बना संतुलित भोजन लेना पसंद करती हैं, जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और सब्जियों का सही मेल होता है। नाश्ते में दिशा अंडों के साथ ब्रेड खाती हैं, जबकि लंच और डिनर में भी प्रोटीन और कार्ब्स को जरूर शामिल करती हैं। इसके अलावा, एक्ट्रेस बार-बार कुछ खाने की आदत से दूर रहती हैं।इसलिए आपको भी स्लिम और फिट दिखना है, तो यह तरीका को अपना सकते हैं। ऐसा करने से आपका वजन भी कंट्रोल में होगा। दिनभर आप ऊर्जावन बनें रहेंगे ।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 19 Jan 2026 22:22:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Women Health: इंटिमेसी के बाद ये गलती बढ़ा सकती है UTI का खतरा, महिलाएं न करें नजरअंदाज</title>
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<description><![CDATA[ किसी भी कपल के रिश्ते को इंटिमेसी मजबूत करता है। फिजिकल इंटिमेसी के पल किसी भी कपल के लिए बेहद खास होते हैं। इंटिमेसी से कपल फिजिकली, इमोशनली और मेंटली दोनों करीब आते हैं। हालांकि महिला और पुरुषों दोनों के लिए इंटिमेसी को समझने का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है। लेकिन यह दोनों के लिए जरूरी है। लंबे समय तक फिजिकल रिलेशन न बनाने की वजह से महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं। इससे फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर भी बुरा असर हो सकता है।वहीं इंटिमेसी के बाद महिला के शरीर में कई पॉजिटिव बदलाव आते है। यह एक फिजिकल एक्टिविटी नहीं बल्कि उससे ज्यादा है, इससे कपल के बीच में जुड़ाव बढ़ता है। लेकिन सेक्शुअल रिलेशन के दौरान कुछ छोटी-छोटी बातें आपके अनुभव को अच्छा बना सकती हैं, लेकिन कुछ गलतियां इसको आपके लिए मुश्किल बनाती हैं। जिसका असर आपकी सेहत और सेक्शुअल हेल्थ पर भी होता है। सेक्शुअल रिलेशन के दौरान इंफेक्शन या किसी अन्य मुश्किल से बचने के लिए आपको कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि इंटिमेसी के 10 मिनट के अंदर आपको क्या करना चाहिए।यह भी पढ़ें: अपने पार्टनर के साथ पहली बार करने वाले हैं सेक्स तो जरूर ट्राई करें ये 5 आसान पोजीशनइंटिमेसी के बाद 10 मिनट के अंदर क्या करेंसेक्शुअल रिलेशन के बाद यूरिन जरूर पास करना चाहिए। इसका प्रेग्नेंसी के चांसेज का कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन अगर कोई बैक्टीरिया इंटिमेसी के दौरान यूरिन ट्रैक तक पहुंच गया है, तो यूरिन पास करने से वह बाहर निकल जाता है। इंटिमेसी के बाद 10 मिनट के अंदर अगर आप ऐसा करती हैं, तो इससे संक्रमण का खतरा काफी कम होता है।इंटिमेसी के 10 मिनट के अंदर वजाइना की अच्छे से सफाई करना चाहिए। आपको हल्के गुनगुने पानी से बाहरी लेयर को साफ करना है। इस दौरान किसी केमिकल वाले वॉश या साबुन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से वजाइना का पीएच बैलेंस बिगड़ सकता है।फिर बाद में साफ और मुलायम टॉवल से प्राइवेट एरिया को पोंछ लें।इसके साथ ही सेक्शुअल रिलेशन के बाद पैंटी जरूर चेंज करें। इंटिमेसी के बाद साफ और कॉटन वाली पैंटी पहनना चाहिए। जिससे कि स्किन सांस ले पाए और बैक्टीरियल ग्रोथ न हो।वहीं सेक्शुअल इंटिमेसी के बाद 10 मिनट के अंदर महिलाओं को पानी जरूर पीना चाहिए। इससे आपके शरीर को हाइड्रेशन मिलता है। साथ ही यूरिन के जरिए बैक्टीरिया बाहर निकल जाता है। इससे यूटीआई का खतरा भी कम होता है।इंटिमेसी के बाद कुछ समय आराम करना जरूरी है। अपने शरीर को रिलैक्स होने का समय दें और यह आपकी फिजिकल और मेंटल दोनों तरह से सही है।इंटिमेसी के बाद अगर आपको खुजली, जलन, अजीब डिस्चार्ज या फिर यूरिन पास करने में दर्द महसूस हो रहा है, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है। इन पर जरूर ध्यान दें। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 18 Jan 2026 17:09:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Women, Health:, इंटिमेसी, के, बाद, ये, गलती, बढ़ा, सकती, है, UTI, का, खतरा, महिलाएं, न, करें, नजरअंदाज</media:keywords>
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<title>Cervical Cancer को जड़ से मिटा सकता है HPV Vaccine, जानें कब और क्यों लगवाना है जरूरी?</title>
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<description><![CDATA[ हर साल सर्वाइकल कैंसर से न जाने कितनी महिलाओं को अपनी चपेट में ले ले जाता है। इसके बचाव के लिए वैक्सीन भी मौजूद है। सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के मुंह (सर्विक्स) में होने वाला खतरनाक कैंसर है, हालांकि इसे पूरी तरह से रोका भी जाता है। अगर सही समय पर इस कैंसर का पता लग जाए तो इसका इलाज संभव है। सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) है। इससे बचाव के लिए समय पर जांच और HPV वैक्सीन लगवाना जरूरी है। लेकिन इस वैक्सीन को लेकर भी जागरुकता की कमी है। इसे लगवाने की सही उम्र क्या है, इसे लगाना क्यों जरुरी है और यह क्या सेक्शुअली एक्टिव होने के बाद भी लगवाया जा सकता है। आइए आपको बताते हैं इस बारे में-HPV वैक्सीन से जुड़ी ये बातें हर लड़की को होनी चाहिए पता - हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, HPV वैक्सीन, सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसको लगवाना काफी जरुरी है। - HPV वैक्सीन शरीर को इन खतरनाक वायरल टाइप से लड़ने की क्षमता देती है। यह वैक्सीन कैंसर बनने से पहले ही वायरल को रोक देती है।   - हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, इसको लगवाने की सही उम्र 9 से 14 साल मानी जाती है, हालांकि इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि आप 14 साल के बाद इसे नहीं लगवा सकती हैं। डॉक्टर इसे लगवाने के लिए 45 साल तक की उम्र तक लगवाने की सलाह दी जाती है। -अगर आप पहले से सेक्शुअली एक्टिव हैं और सोचती हैं कि अब इस वैक्सीन का कोई लाभ नहीं है, तो यह धारणा सही नहीं है। सेक्शुअल लाइफ शुरू हो जाने के बाद भी यह वैक्सीन फायदेमंद होती है और स्वास्थ्य सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है। हालांकि, बेहतर प्रभाव के लिए इसे आमतौर पर सेक्शुअल लाइफ शुरू होने से पहले लगवाने की सलाह दी जाती है, लेकिन बाद में भी इसे नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए। - इस वैक्सीन की 2-3 डोज दी जाती है। वैक्सीन लगवाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। वैक्सीन के साथ ही नियमित जांच भी जरुरी है। हर 1-2 साल में  Pap Smear टेस्ट जरुर कराएं। - इसके अतिरिक्त आप सेफ सेक्शुअल रिलेशन बनाएं। अनप्रोटेक्डे सेक्शुअल रिलेशन भी कई तरह की सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज का कारण बन सकते हैं। - आपको बता दें कि, इस वैक्सीन को लगवाने के बाद कोई साइड-इफेक्ट नहीं होते हैं। कुछ महिलाओं को हल्का बुखार और हाथ में दर्द हो सकता है, हालांकि ये अपने आप ही ठीक हो जाता है। यदि आपको वैक्सीन लगवाने के बाद कोई तकलीफ महसूस होती है, तो डॉक्टर की सलाह जरुर लें।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 18 Jan 2026 17:09:42 +0530</pubDate>
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<title>Vitamin U का यह Health Secret जानते हैं आप? Healthy Gut के लिए है रामबाण</title>
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<description><![CDATA[ आजकल हेल्दी लाइफ जीना काफी मुश्किल हो चुका है। खाने-पीने से लेकर वातावरण तक कुछ भी शुद्ध नहीं है। इसी वजह से लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होने लगती है और कम उम्र में ही बीमारियों लोगों को घेरने लगी हैं। इसलिए खुद को हेल्दी रखने के लिए विटामिन्स, मिनरल्स और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेना काफी जरुरी है। इस लेख में हम आपको विटामिन-यू के बारे में बताएंगे। आमतौर में लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं, ये कोई पिल या ट्रेंड नहीं, बल्कि एक ऐसा विटामिन है जो गट को हेल्दी रखने में मदद करता है। आखिर है यह विटामिन-यू क्या है, ये किन चीजों में पाया जाता है और किस तरह ये गट को हेल्दी रखने में मदद करता है, आइए आपको इस बारे में बताते हैं।विटामिन-यू क्या है और ये किस तरह सेहत के लिए जरूरी है?  - विटामिन-यू पेट और आंतों की सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। यह एक प्राकृतिक तत्व है जो पत्तागोभी, ब्रोकली और अन्य क्रूसिफेरस सब्जियों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह पेट में बनने वाले अतिरिक्त एसिड को संतुलित करने में मदद करता है, जिससे जलन और एसिडिटी की समस्या कम होती है। साथ ही, यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाकर गट हेल्थ को मजबूत करता है। - गट को हेल्दी रखने के लिए हमे किसी तरह की सप्लीमेंट की जरुरत नहीं है। ब्लोटिंग कम करने के लेकर, एसिड रिफ्लक्स को दूर करने तक और एनर्जी को बूस्ट करने में विटामिन-यू फायदेमंद होती है।  - इसके लिए आप डाइट में कच्ची पत्तागोभी और ब्रॉकली को शमिल करें। ऐसा करने से आपको गट हेल्थ में अंतर महसूस होगा। - विटामिन-यू पेट में होने वाली जलन और एसिडिटी से राहत दिलाने में सहायक होता है। यह तनाव और जंक फूड के कारण गट में बनने वाले सूक्ष्म घावों को कम करने में मदद करता है। साथ ही, यह आंतों की अंदरूनी परत को मजबूत और ठीक करने का काम करता है, जिससे पाचन तंत्र स्वस्थ बना रहता है। - इससे इंफ्लेमेशन कम होता है और इम्यूनिटी भी मजबूत होती है। इसलिए अपनी डाइट में विटामिन-यू को शामिल करें। - ये शरीर में न्यूट्रिएंट्स के अब्जॉर्बशन को भी बढ़ाता है। यह स्किन हेल्थ और मूड बेहतर होता है और शरीर को ताकत भी मिलती है। - आप चाहे तो लंच में ब्रॉकली या पत्तागोभी को स्टीम करके भी खा सकती हैं। इसके अतिरिक्त पत्तागोभी को नींबू का रस डालकर खाना भी फायदेमंद रहेगा। - पकाने की प्रक्रिया के दौरान भोजन में मौजूद विटामिन-यू की मात्रा कम हो जाती है, जबकि कच्ची या हल्की स्टीम की गई चीज़ों में यह अधिक सुरक्षित रहता है। इसलिए सलाद या हल्की स्टीम की गई सब्ज़ियों से विटामिन-यू बेहतर मात्रा में प्राप्त किया जा सकता है। - जब भोजन को अधिक पकाया जाता है तो उसमें मौजूद विटामिन-यू घटने लगता है, लेकिन कच्ची या कम समय तक भाप में पकाई गई चीजों में यह तत्व अच्छी मात्रा में बना रहता है। इसी वजह से सलाद या हल्की स्टीम सब्ज़ियों का सेवन करने से विटामिन-यू अधिक प्रभावी रूप से मिल सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 18 Jan 2026 17:07:32 +0530</pubDate>
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<title>Winter में Gas&#45;Acidity का रामबाण इलाज हैं ये 6 Superfoods, पेट को मिलेगा फौरन आराम</title>
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<description><![CDATA[ सर्दियों के मौसम में पाचन को धीमा कर देता है। इस दौरान लार का उत्पादन कम होता है। सर्दियों में लोगों को भारी और मसालेदार खाने की इच्छा होती है, जो एसिड रिफ्लक्स की समस्या का कारण बनती हैं। हेल्दी डाइट अपनाने से पेट को आराम मिलता है और एसिडिटी की समस्या से बचाव किया जा सकता है। पाचन से जुड़ी परेशानियों को कम करने के लिए ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जो हल्के हों और आसानी से पच जाएं। इस लेख में हम उन छह खास चीजों के बारे में बता रहे हैं, जिनका सेवन करने से सर्दियों के मौसम में एसिडिटी की समस्या से राहत मिल सकती है। हर्बल चाय का सेवन करेंठंड के दौरान एसिडिटी से बचने के लिए हाइड्रेशन जरुरी है। सौंफ, अदरक या कैमोमाइल टी पिएं। ये एसिड के स्राव को रोकते हैं। सर्दियों में ज्यादा कैफीन, चॉकलेट या तले हुए खाने से बचना चाहिए। कम खाना खाएं और उसे सीधे बैठकर खाएं। रात में बेड का सिरहाना 6 से 8 इंच ऊपर रखकर सोएं।ओट्स और साबुत अनाज खाएंहेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि एसिडिटी से बचने के लिए एक बाउल केले या सेब के साथ ओटमील खाएं। इससे शरीर को घुलनशील फाइबर मिलता है जो पेट के अतिरिक्त एसिड को सोख लेता है और पाचन को दुरुस्त करता है। ओट्स का बीटा-ग्लूकन भोजन नली में एक सुरक्षा परत बनाता है जो सर्दियों में पेट की समस्याओं से निजात दिलाता है।खट्टे फल न खाएंठंड के मौसम में खरबूजा, पपीता, नाशपाती जैसे खट्टे फलों का सेवन न करें। ये कम एसिड वाले फल होते हैं इनमें एंजाइम भरपूर मात्रा में होता है। पपीते में मौजूद पपैन प्रोटीन को ब्रेक करने में मदद करता है जिससे एसिड जमा नहीं होता है। संतरे या अनानास का सेवन नहीं करना चाहिए। सर्दि‍यों में सब्‍ज‍ियों को प्राथम‍िकता देंहेल्थ एक्सपर्ट में बताया है कि सर्दियों में सब्जियों का सेवन करें जैसे कि- गाजर, पालक और स्टीम्ड ब्रोकली का सेवन करें, इनमें मैग्नीशियम और पोटैशियम मौजूद होता है जिससे एसिड रिफ्लक्स की समस्या दूर होती है। शकरकंद को भूनकर या मैशकर खाएं। ये पीएच लेवल को स्थिर रखता है। डेयरी प्रोडक्‍ट्स का सेवन करेंएसिडिटी से बचाव के लिए डेयरी के हल्के और सेहतमंद विकल्पों को अपनी डाइट में शामिल करना फायदेमंद होता है। बादाम का दूध और कम वसा वाला दही इसके अच्छे विकल्प हैं। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पेट की अंदरूनी परत को शांत रखने में मदद करते हैं और पाचन को बेहतर बनाते हैं। अगर दही को अदरक के साथ लिया जाए, खासकर ग्रीक दही, तो यह पेट की सूजन को कम करने में सहायक होता है। वहीं अदरक एसिड रिफ्लक्स की समस्या को भी नियंत्रित करने में मदद करता है।लीन प्रोटीन को चयन करेंएसिडिटी से बचने के लिए लीन प्रोटीन का सेवन करें। इसलिए आप ग्रिल्ड चिकन, मछली या टोफू को डाइट का हिस्सा बनाएं। लीन प्रोटीन क सेवन करने से पेट भारीपन फील नहीं करता। इसके साथ ही खाने के बाद सौंफ चबाएं, इसमें मौजूद एनेथॉल कंपाउंड जीआई मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 18 Jan 2026 17:07:31 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: Fatty Liver का Silent Attack, Grade 1 को &amp;apos;Normal&amp;apos; समझने की भूल पड़ सकती है बहुत भारी</title>
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<description><![CDATA[ आजकल फैटी लिवर की समस्या होना आम हो गया है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आप इस पर ध्यान न दें या फिर इसको नजरअंदाज कर दें। अक्सर जब रिपोर्ट में फैटी लिवर आता है, तो लोग कहते नजर आते हैं कि यह नॉर्मल है और आजकल सभी को होता है। ऐसा सुनकर कई बार हम फैटी लिवर ग्रेड 1 पर ध्यान नहीं देते हैं। अगर आप भी ऐसी गलती कर रहे हैं, तो आपको समझना चाहिए कि अगर ग्रेड 1 फैटी लिवर पर ध्यान न दिया जाए, तो यह कब ग्रेड 2 या फिर उससे भी सीरियस कंडीशन में बदल जाए, आपको पता भी नहीं चलेगा।लिवर डैमेज की शुरूआत होने पर आपको डॉक्टरों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। ग्रेड 1 फैटी लिवर को मैनेज करने के लिए आपको अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करना चाहिए। साथ ही कुछ खास बातों पर ध्यान देना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Health Tips: महंगे Probiotics भूल जाएं, बस 10 रुपए में सुधारें अपना Gut Health, अपनाएं ये 3 आसान घरेलू नुस्खेइन तीन बातों पर दें ध्यानशरीर में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स जैसे विटामिन-ई, कोलीन और विटामिन-बी कॉम्पलेक्स, हमारे लिवर के सही तरीके से फंक्शन के लिए काफी जरूरी है। अधिकतर लोग इस बात को नहीं जानते हैं कि अगर में इन चीजों की कमी हो जाती है, तो इसका सीधा असर हमारे लिवर हेल्थ पर पड़ता है। इनकी कमी होने पर लिवर सही तरीके से अपना काम नहीं कर पाता है।अगर आपको ग्रेड 1 फैटी लिवर है, तो आपको अपनी डाइट में इन न्यूट्रिएंट्स से भरपूर चीजों को शामिल करना चाहिए। जिससे कि लिवर फंक्शन में सुधार हो सके। जब लिवर सही तरीके से काम नहीं करता है, तो शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। ऐसे में लिवर का सही तरीके से फंक्शन करना बहुत जरूरी होता है।आपकी लिवर हेल्थ पर इंसुलिन रेजिस्टेंस पर असर डालता है। इसकी वजह से भी फैटी लिवर के लक्षण बढ़ सकते हैं। आमतौर पर इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से ही फैटी लिवर होता है। क्योंकि ब्लड शुगर लेवल बढ़ा हुआ रहता है, इसके कारण लिवर में फैट जमा होने लगता है। फैटी लिवर के लक्षणों को कम करने के लिए इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करना जरूरी होता है। आपकी मेथी दाना और दालचीनी समेत कई चीजें मदद कर सकती हैं।इंसुलिन रेजिस्टेंस भी आपकी लिवर हेल्थ पर असर डालता है और इसके कारण भी फैटी लिवर के लक्षण बढ़ सकते हैं। आमतौर पर फैटी लिवर, इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से ही होता है, क्योंकि हमारा ब्लड शुगर लेवल बढ़ा हुआ रहता है और इसकी वजह से लिवर में फैट जमा होने लगता है। फैटी लिवर के लक्षणों को कम करने के लिए, इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करना जरूरी है। दालचीनी और मेथी दाना समेत कई चीजें आपकी मदद कर सकती हैं।जैसे-जैसे इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार होगा, फैटी लिवर के लक्षण भी कम हो सकते हैं।इंफ्लेमेशन का लिवर हेल्थ पर सबसे बुरा असर होता है। अगर बॉडी में इंफ्लेमेशन ज्यादा है, तो न सिर्फ लिवर खराब हो सकता है। बल्कि कई और बॉडी फंक्शन्स पर भी इसका असर होता है। ईएसआर और एचएस-सीआरपी टेस्ट की सहायता से बॉडी में इंफ्लेमेशन का पता चलता है। इसलिए डाइट में एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स को शामिल करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 17 Jan 2026 07:52:46 +0530</pubDate>
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<title>Cervical Cancer Awareness Month 2026: क्या आप भी इन साइलेंट लक्षण को कर रहीं इग्नोर? हो सकता है सर्वाइकल कैंसर</title>
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<description><![CDATA[ आमतौर पर महिलाओं में होने वाला सर्वाइकल कैंसर एक मुख्य कैंसर है। इसके बाद महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर अधिक देखने को मिलता है। इसके बचाव के लिए वैक्सीन भी मौजूद है, लेकिन सही जानकारी न होने के कारण हर साल कई महिलाएं इसकी वजह से अपनी जान गंवा देती हैं। सर्वाइकल कैंसर की सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआती दौर में बिना शोर किए, चुपचाप शरीर में पनपता है। इस कैंसर इलाज संभव है क्योंकि इसकी वैक्सीन मौजूद है। टीकाकारण, समय पर स्क्रीनिंग और  शुरूआती लक्षणों की पहचान से इसे आसानी से रोका और ठीक किया जा सकता है। एक्सपर्ट का कहना है कि अगर सर्वाइकल कैंसर की पहचान शुरुआती अवस्था में हो जाए, तो इसका पूरी तरह इलाज संभव है। लेकिन दिक्कत यह है कि शुरुआती लक्षण अक्सर इतने सामान्य होते हैं कि महिलाएं उन्हें पहचान नहीं पातीं या अनदेखा कर देती हैं। खासतौर पर 30 से 35 वर्ष की उम्र की महिलाओं में इसका जोखिम अधिक देखा जाता है। इसलिए जरूरी है कि इसके छिपे हुए संकेतों को समय रहते समझा जाए। आइए जानें सर्वाइकल कैंसर के ऐसे साइलेंट संकेतों के बारे में, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।30 की उम्र में सर्वाइकल कैंसर के साइलेंट लक्षण  - पीरियड्स के बीच या सेक्शुअल रिलेशन के बाद ब्लीडिंग  - बदबूदार या असमान्य वजाइनल डिस्चार्ज  - पेल्विक या लोअर बैक में लगातार दर्द  - इंटरकोर्स में बहुत अधिक दर्द  - बार-बार थकान और कमजोरी महसूस होना है - वजन घटना - पीरियड्स में हैवी ब्लीडिंग होना - बार-बार यूरिन आना - अचानक से भूख न लगनासर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए इन बातों पर दें ध्यानहेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, यदि इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से बात जरुर करें। सर्वाइकल कैंसर कई प्रकार के एचपीवी वायरस से कारण होता है। ऐसे में इससे बचने के लिए वैक्सीन लगवाना जरूरी है। ये लक्षण सर्वाइकल कैंसर के ही हों, ऐसा जरुरी नहीं है, हालांकि आप डॉक्टर की राय जरुर लें। इसके अलावा, पैप स्मीयर (Pap Smear) या HPV टेस्ट के बारे में भी डॉक्टर से सलाह लें। इस बात का ध्यान रखें कि समय पर जांच और सही इलाज से इस कैंसर को ठीक किया जा सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 17 Jan 2026 07:52:45 +0530</pubDate>
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<title>Headache Analysis: माथे, कनपटी या पिछला हिस्सा, जानें सिर का कौन सा दर्द है सबसे Dangerous</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर कई लोग सिरदर्द की समस्या से परेशान रहते हैं। यह एक ऐसी समस्या है जिसे लोग थकान और नींद की कमी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई लोग तो तेज सिरदर्द के दौरान पेन किलर खाना शुरु कर देते हैं। कभी आपने ध्यान दिया है कि सिर के किस हिस्से में दर्द हो रहा है। गौरतलब है कि सिर में अलग-अलग हिस्से में दर्द होने के अलग मायने होते हैं। कुछ मामलों में यह आपके शरीर के भीतर की किसी बड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट मानते हैं कि सिरदर्द के अलग-अलग प्रकार और उनकी जगह के पीछे अलग-अलग कारण छिपे होते हैं।कई बार माथे में दर्द अक्सर तनाव या साइनस से संबंधित होता है, जबकि सिर के पिछले हिस्से का दर्द हाई ब्लड प्रेशर या गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव का इशारा करता है। कई बार माइग्रेन जैसे दर्द में सिर का सिर्फ एक हिस्सा को ही प्रभावित करते हैं। इन संकेतों को समझना इसलिए जरुरी है क्योंकि एक साधारण दिखने वाला सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर, स्ट्रोक या गंभीर संक्रमण का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है। दर्द की जगह और उसकी तीव्रता को पहचान कर सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना ही भविष्य की गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से बचने का एकमात्र सॉल्यूशन है।माथे के चारों ओर का दर्द का मतलबतनाव सिरदर्द सबसे आम प्रकार है, जिसमें ऐसा फील होता है जैसे माथे के चारों ओर एक टाइट बैंड बांध दिया गया हो। इस तरह का दर्द आमतौर पर माथे और कनपटियों में शुरु होता है। इसके पीछे के मुख्य कारण मानसिक तनाव, नींद की कमी, आंखों पर जोर या गर्दन की मांसपेशियों में जकड़न होती है। इसका दर्द धीमा लेकिन स्थिर होता है और आमतौर पर आराम या रिलैक्सेशन तकनीकों से ठीक हो जाता है। गालों और एक हिस्से का दर्दआमतौर पर आपके माथे और आंखों के बीच या गालों की हड्डियों में भारीपन और दर्द महसूस होता है, तो यह साइनस सिरदर्द हो सकता है, जो अक्सर संक्रमण या एलर्जी के कारण होता है। वहीं, माइग्रेन में सिर के किसी एक हिस्से में तेज धड़कन जैसा दर्द होता है, जिसके साथ ही जी मिचलाना और रोशनी से परेशानी हो सकती है। यह दर्द कई घंटों या दिनों तक बना रह सकता है।सिर के पिछले हिस्सा में दर्दअगर आपके सिर के पिछले हिस्से में दर्द होता है तो यह अक्सर सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस या हाई ब्लड प्रेशर का संकेत होता है। इसको नजरअंदाज न करें। दरअसल, क्लस्टर सिरदर्द में दर्द एक आंख के पीछे या उसके आसपास केंद्रित होता है, जो अचानक और बेहद तीव्र हो जाता है। इसके अलावा आंख लाल होना या नाक बहने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो नंसों के असंतुलन का परिणाम हैं।कब लें न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह?ऐसे में सिरदर्द को सिर्फ थकान समझना या कई मामलों में भारी पड़ सकता है। यदि दर्द के साथ धुंधला दिखना, बोलने में लड़खड़ाहट, गर्दन में अकड़न या बेहोशी महसूस हो, तो यह इमरजेंसी की स्थिति हो सकती है। लाइफस्टाइल में सुधार, पर्याप्त पानी और समय पर नींद से अधिकांश सिरदर्द ठीक हो जाते हैं, हालांकि बार-बार होने वाले दर्द के लिए एक्सपर्ट की सलाह जरुर लें और जांच जरुर कराएं। अपनी सेहत का भी ध्यान रखें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 17 Jan 2026 07:52:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: आयुर्वेद की इन 5 आदतों से बढ़ाएं Immunity, सर्दी&#45;जुकाम और बीमारियां रहेंगी दूर</title>
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<description><![CDATA[ पहले के समय में लोग कम बीमार पड़ते थे और शरीर में ताकत होती थी। उन लोगों की इम्यूनिटी मजबूत रहती थी और मानसिक रूप से भी लोग अधिक हेल्दी नजर आते थे। लेकिन आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्थिति बिल्कुल उलट हो गई है। कम उम्र से ही लोगों को बीपी, पेट की बीमारी, डायबिटीज, तनाव और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं से घिरे रहते हैं। खासकर सर्दियों के मौसम में सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और स्किन संबंधी परेशानियां तेजी से बढ़ जाती हैं।हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो इन बीमारियों के होनी की सबसे बड़ी वजह हमारी बिगड़ती लाइफस्टाइल है। लेकिन आयुर्वेद में स्वस्थ जीवन के लिए सही लाइफस्टाइल फॉलो करना बेहद जरूरी है। सुबह जागने से लेकर रात में सोने तक का ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए आपको उन आयुर्वेदिक आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका सर्दियों में पालन करने से आप बड़ी से बड़ी बीमारियों से बच सकते हैं।यह भी पढ़ें - अपनाएं आयुर्वेद के यह नियम और परहेज, बीमारियां आपको छू भी नहीं सकतीकितने बजे उठेंआयुर्वेद में सुबह जागने का सबसे अच्छा समय ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह 04 से 04:30 बजे माना गया है। लेकिन सूर्योदय से पहले किसी भी हाल में बिस्तर छोड़ दें। नैतिक क्रियाएं करने के बाद धूप निकलने पर योग, हल्का व्यायाम और प्राणायाम आदि करना सर्दियों में बेहद फायदेमंद होता है। ऐसा करने से शरीर में गर्माहट बनी रहती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।कैसी होनी चाहिए दिनचर्यासर्दियों के मौसम में गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। आयुर्वेद में नहाने से पहले तिल या फिर सरसों के तेल से मालिश करना लाभकारी माना जाता है। इससे स्किन का रूखापन, जोड़ों के दर्द और थकान से राहत मिलती है। मालिश करने के बाद गुनगुने पानी से नहाने से शरीर तरोताजा महसूस करता है।वहीं सुबह का नाश्ता 08 से 09 बजे के बीच करना चाहिए। सर्दियों में दूध, दलिया, घी लगी रोटी, पोहा, मूंग दाल का चीला और उपमा जैसी गर्म और पौष्टिक चीजों का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही अखरोट, बादाम और किशमिश जैसे सूखे मेवे डाइट में शामिल करना चाहिए, इससे आपके शरीर को भरपूर ऊर्जा मिलती है।लंच और डिनरआपको दोपहर का खाना 12 से 1 बजे के बीच करना चाहिए। आयुर्वेद के मुताबिक इस समय पाचन अग्नि समय सबसे मजबूत होती है। दोपहर में घर का बना खाना खाएं। दोपहर के खाने में दाल, मौसमी सब्जियां, रोटी, चावल, घी और छाछ को शामिल करना चाहिए। सर्दियों में ज्वार, बाजरा और मक्के की रोटियां खाने से शरीर अंदर से मजबूत बनता है। वहीं शाम को 4 से 5 बजे के बीच हल्का नाश्ता कर सकते हैं। रात को हमेशा हल्का और समय पर 6 से 7 बजे तक भोजन कर लेना चाहिए।रात में सोने का समयहेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, एक सामान्य व्यक्ति के लिए 7-8 घंटे की नींद जरूरी होती है। इसलिए रात को 10 बजे से पहले सो जाना चाहिए। क्योंकि सर्दियों में देर रात तक टीवी या मोबाइल देखने से शरीर कमजोर होता है। वहीं आयुर्वेदिक दिनचर्या को नियमित रूप से अपनाने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही पेट से जुड़ी बीमारियां धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं। मानसिक तनाव, सुस्ती, थकान और चिड़चिड़ापन आदि से भी राहत मिलती है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 14:06:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल वालों को भी Winter में Heart Attack का खतरा, ये 4 गलतियां पड़ सकती हैं भारी</title>
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<description><![CDATA[ सर्दियों के मौसम में हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा ही बढ़ जाता है। हार्ट अटैक एक ऐसी कंडीशन है, जो दुनियाभर में कई लोगों की मौत का कारण बनती है। खासकर भारत में तेजी से हार्ट अटैक में मामले बढ़ रहे हैं। पहले तो इसका शिकार बुजुर्ग हो रहे थे, लेकिन अब युवाओं में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ गया है। दरअसल, शरीर में बढ़ती कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को हार्ट अटैक का कारण माना जाता है, हालांकि क्या आप जानते हैं कि शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल सही होने पर भी हार्ट अटैक का शिकार हो सकते हैं। इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होने पर भी हार्ट अटैक का खतरा कैसे बढ़ जाता है और इससे कैसे बचाव करें।इन कारण से होता है हार्ट अटैकआमतौर पर देखने को मिलता है कि कम एलडीएल लेवल यानी लो कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों में हार्ट अटैक का खतरा कम देखने को मिलता है, हालांकि, करीब आधे दिल के दौरे उन लोगों में होते हैं, जिनका कोलेस्ट्रॉल स्तर &#039;सामान्य&#039; होता है। ऐसा इसलिए किसी व्यक्ति में कई अन्य स्थितियां भी हो सकती हैं, जो जोखिम को बढ़ा सकती हैं।वहीं, स्मोकिंग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और फिजिकल एक्टिविटी की कमी हैं। इसके अलावा अन्य संभावित कारणों में स्मोकिंग इफेक्ट और वायु प्रदूषण भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, ऐसे जेनेटिक और लाइफस्टाइल से जुड़े फैक्टर भी इसमें शामिल हो सकते हैं, जिन्हें हम पूरी तरह से नहीं समझते हैं।सर्दियां भी हैं जिम्मेदारठंड के मौसम में हार्ट अटैक के मामलों में बढ़ोतरी अक्सर देखी जाती है। कई वैज्ञानिक अध्ययनों, रिसर्च और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ठंडी हवाएं और कम होता तापमान दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा देता है। साल 2024 में अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की प्रमुख जर्नल JACC में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया कि ठंड के संपर्क में आने के तुरंत बाद नहीं, बल्कि 2 से 6 दिनों के भीतर हार्ट अटैक का जोखिम सबसे अधिक होता है।सर्दियों में क्यों बढ़ता हार्ट अटैक का खतरा?  - सर्दियों में हमारा शरीर खुद को गर्म रखने की कोशिश करता है। इस प्रोसेस में शरीर में मौजूद ब्लड वेसल्स और नसें सिकुड़ने लगती हैं। इससे दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा जोर लगाना पड़ता है, इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो सकती है।   - अक्सर होता है कि सर्दियों में आलस और सुस्ती के कारण लोग फिजिकल एक्टिविटी कम कर देते हैं। ऊपर से इस मौसम में लोग गाजर का हलवा, पराठे और पकौडे जैसे फूड्स का सेवन करते हैं और एक्सरसाइज नहीं करते हैं, इस वजह से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, वजन बढ़ता है और नसों में बैड कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है। - सर्दियों के मौसम में खून के थक्के बनने का खतरा आमतौर पर बढ़ जाता है। ठंड के कारण शरीर में कुछ हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं, जिनसे रक्त गाढ़ा होने लगता है और थक्का बनने की संभावना बढ़ती है। यदि ऐसा थक्का हृदय की किसी रक्त नली में अटक जाए, तो नस में रुकावट पैदा हो सकती है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है।   - सर्दी के दिनों में अक्सर पसीना भी कम आता है और हम पानी भी कम मात्रा पीने लगते हैं। जिससे शरीर में फ्लूइड या प्लाज्मा की मात्रा बढ़ जाती है, जो ब्लड प्रेशर बढ़ाकर दिल पर एक्स्ट्रा बोझ डालती है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 14:06:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Winter Special: अब Hot Chocolate नहीं करेगा बीमार, बस फॉलो करें ये Ayurvedic Health Tips</title>
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<description><![CDATA[ सर्दियों के दौरान जब ठंड ज्यादा लगती हैं, तो ऐसे में लोग हॉट चॉकलेट ड्रिंक का सेवन जरुर करते हैं। विंटर में गर्म दूध, हॉट चॉकलेट और कॉफी सहित कई हॉट ड्रिंक्स को लोग अपनी डाइट में जरुर शामिल करते हैं। इससे न केवल शरीर को अंदर से गर्माहट मिलती है, बल्कि ठंडे मौसम में इनका स्वाद भी खूब पसंद आता है। सबसे ज्यादा लोग सर्दियों में हॉट चॉकलेट का सेवन करते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि हॉट चॉकलेट को बनाते समय अगर आप कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरुरी है, ये आपकी सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। यदि आप इसे गलत तरीके से बनाएंगी, तो इससे अपच, थकान और डायबिटीज का बढ़ना जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। आइए आपको बताते हैं हॉट चॉकलेट बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। आयुर्वेद से जानें हॉट चॉकलेट को बनाने का सही तरीका   - एक्सपर्ट ने बताया है कि यदि आप सर्दियों में हॉट चॉकलेट पीना चाहते हैं, तो ये इस मौसम के लिए सबसे बेस्ट है। इसको आप अपनी डाइट का हिस्सा बना सकती हैं, लेकिन आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि ये आपकी सेहत को नुकसान न पहुंचाए। - इस बात को जान लीजिए कि हॉट चॉकलेट एक मिल्क बेस्ड ड्रिंक है और इसे पचाना काफी मुश्किल होता है। इसलिए इसे मील्स के साथ या भारी खाने के तुरंत बाद न लें। - अक्सर इसे पीने के बाद पेट भारी रहता है या बहुत फूला हुआ लगता है। इसे कम करने के लिए आप हॉट चॉकलेट बनाते समय इसमें अदरक और दालचीनी (Cinnamon) मिलाएं। - अदरक और दालचीनी का तासीर गर्म होती है और यह सर्दियों के मौसम में काफी फायदेमंद है। इसके सेवन से शरीर को गर्माहट मिलेगी, सर्दी-खांसी नहीं होती है और इंफेक्शन से बचाव होता है। - हॉट चॉकलेट के लिए आप हल्का दूध चुनें। फुल क्रीम मिल्क इसके लिए ठीक नहीं है। आप A2 मिल्क या ओट मिल्क का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके ऊपर किसी भी तरह की हैवी क्रीम न डालें। - अगर आप हैवी मिल्क के साथ इसे बनाकर पीने से गैस, अपच और बदहजमी हो सकती है। इसमें शक्कर भी न डालें वरना डायबिटीज का खतरा हो सकता है।   ]]></description>
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<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 14:06:19 +0530</pubDate>
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<title>Women Health: अनचाही Pregnancy से बचना है, Period Cycle ट्रैक करने का यह है सही तरीका</title>
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<description><![CDATA[ हर महीने होने वाली पीरियड साइकिल के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। पीरियड क्रैंप्स के अलावा वॉमिटिंग, ब्लोटिंग और थकान शरीर को कई तरह से प्रभावित करती है। ऐसे में अगर आप अपनी पीरियड साइकिल को ट्रैक करती हैं, तो इस तरह की अनियमितताओं से बची रह सकती हैं। वहीं इस दौरान शरीर को हेल्दी और एक्टिव रखने के लिए लोग कई तरह के पीरियड ट्रैक का भी प्रयोग करते हैं, जिससे कि वह इन खास दिनों में अपनी उचित देखभाल कर पाएं। पीरियड साइकिल ट्रैक करने से आप अनचाही प्रेग्नेंसी से भी बच सकती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि आप किस तरह से अपनी मंथली साइकिल ट्रैक कर सकती हैं। पीरियड साइकिलपीरियड की लेंथ आपकी प्रेग्नेंसी को कई तरह से प्रभावित कर सकता है। सामान्य रूप से पीरियड साइकिल की लेंथ 21 से 35 दिनों के अंदर मानी जाती है। इसमें महिलाओं को 3 से 7 दिनों तक ब्लीडिंग से गुजरना पड़ता है। अगर आप अपनी पीरियड साइकिल को ट्रैक करते हैं, तो आपको ओव्यूलेशन साइकिल की जानकारी मिल जाती है। ओव्यूलेशन साइकिल उस प्रोसेस को कहते हैं, जब एग्स फर्टाइल होकर ओवरी में रिलीज होते हैं। इसके बाद अंडे फैलोपियन ट्यूब में जाते हैं।यह भी पढ़ें: गर्भपात गोली लेने के बाद हो रहा है पेट में दर्द, हो जाएं सतर्कपीरियड साइकिल में इन चीजों को ट्रैक करेंब्लड फ्लोपीरियड साइकिल के दौरान होने वाले ब्लड फ्लो का ख्याल रखना जरूरी है। इससे आप स्टेन्स की समस्या से बची रह सकती हैं। वहीं इस बात को भी ट्रैक करें कि आपको पीरियड के दौरान किन दिनों में ज्यादा ब्लीडिंग होती है। वह कौन से दिन होते हैं, जब आप क्लॉटिंग से होकर गुजरते हैं।पीरियड क्रैंप्सपीरियड के दौरान अगर आपको भी दर्द और ऐंठन महसूस होती है, तो इस बात का ख्याल रखें कि आपको कितना ऐंठन और दर्द होता है। अधिकतर महिलाओं को पहले और दूसरे दिन ज्यादा और फिर बाद में हल्के क्रैंप्स का अनुभव होता है। लेकिन अगर आपको पीरियड के दौरान क्रैंप्स ज्यादा होते हैं, जिस वजह से आपकी डेली रूटीन डिस्टर्ब होती है, तो आपको डॉक्टर से बात करनी चाहिए। यह असामान्य दर्द PCOD जैसी समस्याओं का संकेत हो सकता है। कई बार आपका खानपान और लाइफस्टाइल भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है।इतने दिनों का रखें रिकॉर्डबता दें कि सामान्य पीरियड साइकिल की लेंथ 28 दिन की मानी जाती है। यह आमतौप पर 21 दिन से लेकर 35 दिनों के भीतर रहती है। पीरियड कम से कम 21 दिन और ज्यादा से ज्यादा 40 दिनों तक आ सकता है। लेकिन अगर आपकी पीरियड साइकिल बार-बार डिस्टर्ब हो रही है, या फिर 2 सप्ताह से ज्यादा डिले हो रहा है। तो आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए।साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि आपकी पीरियड साइकिल कितने दिनों तक चलती है। इसकी जानकारी रखने से आप अपने ओव्यूलेशन साइकिल को आसानी से ट्रैक कर सकते हैं। ऐसे में आपको प्रेग्नेंसी प्लान करने में आसानी होगी।इमोशनल हेल्थ न करें इग्नोरप्री. मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम में महिलाओं को मूड स्विंग्स झेलने पड़ते हैं। उदास हो जाना, बात-बात पर रोना और एकांत में रहना इसके प्राथमिक लक्षण हैं। इसके साथ ही महिलाओं की एपिटाइट और स्लीप साइकिल भी प्रभावित होने लगता है।पीरियड्स के दौरान महिलाओं को मूड स्विंग्स होते हैं। जिस कारण महिलाओं में थकान, चिड़चिड़ापन और तनाव की समस्या बढ़ने लगती है। इसलिए अपने इमोशनल हेल्थ को मजबूत बनाए रखने के लिए शरीर को एक्टिव रखें। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 14:06:17 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: महंगे Probiotics भूल जाएं, बस 10 रुपए में सुधारें अपना Gut Health, अपनाएं ये 3 आसान घरेलू नुस्खे</title>
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<description><![CDATA[ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने स्वास्थ्य का सही तरीके से ध्यान नहीं रख पा रहे हैं। जिस कारण लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खराब खानपान की वजह से पेट को ज्यादा नुकसान हो रहा है। ऐसे में अधिकतर लोग गैस, पेट की तकलीफ या कब्ज जैसी दिक्कतों से परेशान रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारा पेट यानी की गट ही हमारी पूरी सेहत की जड़ है।अगर आपका पेट ठीक है, तो इम्यूनिटी, दिमाग और मूड सब सही रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पेट को हेल्दी रखने के लिए आपको किसी महंगे प्रोबायोटिक की जरूरत नहीं है, बस आपको कुछ सादे और सस्ते फर्मेंटेड फूड्स ही काफी हैं। जो 10 रुपए से कम में आपका पेट फिट रख सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको तीन आसान फर्मेंटेड फूड के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Women Health: अनचाही Pregnancy से बचना है, Period Cycle ट्रैक करने का यह है सही तरीकाफर्मेंटेड राइस कांजीयह एक सस्ती, देसी और असरदार रेसिपी है। जोकि पेट की सफाई तो करती है, साथ ही यह डाइजेशन को भी बेहतर बनाता है। फर्मेंटेड राइस कांजी बनाने के लिए दो चम्मच पके हुए चावल और दो चम्मच दही को एक गिलास पानी में मिलाना होगा। इसको रातभर ढककर रख दें, जिससे कि यह फर्मेंट हो जाए। अब सुबह इसको अच्छे से मसलें या फिर ब्लेंड कर लें। इसके बाद इसमें नमक डालें और चाहें तो बारीक कटी हरी मिर्च और प्याज डाल सकती हैं। अब इसको डाइट में शामिल करें, इसमें मौजूद नेचुरल बैक्टीरिया आंतों की लाइनिंग को हील करते हैं और डाइजेशन को बेहतर बनाते हैं।फर्मेंटेड रागी कांजीवहीं रागी अपने आप में एक सुपरफूड है। जब इसको फर्मेंट किया जाता है, तो इसका फायदा दोगुना हो जाता है। रागी कांजी बनाने के लिए आपको 4 चम्मच रागी आटे में आधा कप पानी मिलाकर पतला सा घोल तैयार कर लें। फिर एक पैन में दो कप पानी उबालें और धीरे-धीरे रागी घोल डालते हुए चलाते रहें। अब करीब 5 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं। जब यह ठंडा हो जाए, तो इसको कांच या मिट्टी के बर्तन में डालें। इसको रात भर ढककर रखें। सुबह इसमें थोड़ा सा नमक, मट्ठा, हरी मिर्च और प्याज डालकर पिएं। इसमें मौजूद आयरन, कैल्शियम और प्रोबायोटिक्स हड्डियों और पेट दोनों के लिए फायदेमंद है।दही या ग्रीक योगर्टबता दें कि अगर आप जल्दी में हैं, तो यह सबसे आसान तरीका है। लंच के बाद एक कटोरी दही खाएं। अगर आ ग्रीक योगर्ट लेते हैं, तो इसमें 12 ग्राम तक प्रोटीन भी मिलता है, यह शरीर को एनर्जी देता है और पाचन को आसान बनाता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 14:06:16 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: बंद नाक से हैं परेशान, 10 रुपये का यह Home Remedy देगा Instant Relief, जानें सही तरीका</title>
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<description><![CDATA[ सर्दियों के मौसम में ठंडी हवाओं को बढ़ते प्रदूषण की वजह से नाक बंद होना और साइनस की समस्या होना आम परेशानी है। बता दें कि जब नाक के मार्ग में झिल्ली में सूजन आ जाती है और गाढ़ा म्यूकस जमा हो जाता है। इस कारण सांस लेने में बहुत समस्या होती है और सिर भारी रहने लगता है। ऐसी दिक्कत होने पर &#039;भाप लेना&#039; सबसे प्रभावी और सुरक्षित घरेलू उपाय माना जाता है। भाप लेने से श्वसन मार्ग को फौरन नमी देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ 10 रुपए में मिलने वाली अजवाइन इस प्रोसेस के लाभ को दोगुना कर सकती है।अजवाइन में &#039;थायमोल&#039; नाम का एक शक्तिशाली तेल होता है। इसमें डिंकजेस्टेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। जब आप अजवाइन के पानी की भाप लेते हैं, तो यह गर्म वाष्प नसों और फेफड़ों तक पहुंचकर कफ को पिघला देती है। यह प्रोसेस न सिर्फ बंद नाक को खोलती है, बल्कि गले में खराश और संक्रमण फैलाने वाले कीटाणुओं को नष्ट करने में भी सहायता करता है।इसे भी पढ़ें: सुबह की ये 5 जादुई ड्रिंक्स बढ़ाएंगी आपका Metabolism, दिनभर रहेंगे Full of Energy भाप लेने का सही तरीकाअजवाइन की भाप लेने के लिए आप गहरे बर्तन में 2-3 गिलास पानी उबाल लें। अब इसके एक चम्मच अजवाइन को थोड़ा सा मसलकर डाल दें। गैस बंद करके एक बड़े तौलिए की मदद से इसको ढकें। अब करीब 5-10 मिनट तक नाक और मुंह से गहरी और लंबी सांस लें। वहीं यह भी देखें कि भाप बाहर तो नहीं निकल रही।बरतें ये सावधानियांहालांकि भाप लेना फायदेमंद है, लेकिन लापरवाही होने से आपका चेहरा भी जल सकता है। इसलिए बर्तन से हमेशा थोड़ी दूरी बनाए रखें, जिससे गर्म पानी की छींटे आपके चेहरे पर न पड़ें। वहीं भाप लेने के दौरान अपनी आंखों को बंद रखें, क्योंकि वाष्प आंखों में जलन पैदा कर सकती हैं। वहीं छोटे बच्चों को भाप दिलाने के दौरान खास सावधानी बरतें और बिना एक्सपर्ट की सलाह के अस्थमा के मरीजों को बहुत तेज भाप नहीं लेना चाहिए।कैसे करता है कामजब आप भाप लेते हैं, तो गर्म और नम हवा सीधे नासिका मार्ग में जाती है। यह गर्मी रक्त वाहिकाओं को फैलाने के साथ सूजन को कम करती है। इससे बलगम ढीला होता है और आसानी से बाहर निकल जाता है। वहीं अजवाइन में औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो म्यूकस को साफ करने के प्रोसेस को तेज कर देते हैं। जिससे साइनस के दबाव और इससे होने वाले सिरदर्द से फौरन राहत मिलती है और सांस लेना भी आसान हो जाता है।ये भी जरूरीअजवाइन की भाप लेने के अलावा आप रात को सोने के दौरान सिर को थोड़ा ऊंचा रखने के लिए एक्स्ट्रा तकिए का इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं दिन में गुनगुना पानी पिएं और नेजल स्प्रे का इस्तेमाल करें। यह तरीका भी बंद नाक खोलने में मददगार है। यह 10 रुपए का नुस्खा न सिर्फ सस्ता है, बल्कि आपको दवाओं से भी बचाता है। अगर रोजाना 2-3 बार भाप लेने के बाद भी समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करें। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 13 Jan 2026 10:31:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>महिलाओं के लिए रामबाण है यह Detox Drink, पेरिमेनोपॉज में Hormones रहेंगे कंट्रोल में</title>
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<description><![CDATA[ महिलाओं के जीवन में एक ऐसा भी समय आता है, जब शरीर धीरे-धीरे मेनोपॉज की तरफ बढ़ने लगता है। इस बदलाव के इस समय को पेरिमेनोपॉज कहा जाता है। इस दौरान महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं और इसका असर न केवल पीरियड्स, बल्कि शारीरिक और मानसिक सेहत पर भी पड़ता है। खासतौर पर महिलाओं में 40 की उम्र के आस-पास शुरु हो सकता है। इस दौरान शरीर में एट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोनल इंबैलेंस हो जाते हैं और पीरियड्स धीरे-धीरे अनियमित होने लगता है। पेरिमेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव दिखाई देने लगते हैं। इस समय हॉट फ्लैशेज, रात को अधिक पसीना आना, मूड में उतार-चढ़ाव, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, वजन बढ़ना, लगातार थकान महसूस होना और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में महिलाओं के लिए यह बहुत जरूरी हो जाता है कि वे अपनी सेहत और खासकर खानपान पर विशेष ध्यान दें। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि पेरिमेनोपॉज में पीना चाहिए जिससे हार्मोन्स बैलेंस हो और शरीर डिटॉक्स करता है। पेरिमेनोपॉज में हार्मोन्स को मैनेज कर सकती हैं ये देसी ड्रिंक  - लेमन बाम नर्वस सिस्टम को आराम देता है। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। इसकी मदद से अनिद्रा और बेचैनी को कम करके अच्छी नींद आती है। - ये पीरियड के दर्द में भी आराम देता है और डाइजेशन से जुड़ी दिक्कतों जैसे गैस, कब्ज और अपच में आराम पहुंचाता है।  - पुदीने की पत्तियां हॉट फ्लैशेज की समस्या को कम करने में मददगार होती हैं और पाचन तंत्र को मजबूत बनाती हैं। पुदीने में पाया जाने वाला यूजेनॉल तत्व पाचन एंजाइम्स के स्राव को बढ़ाने में सहायक होता है, जिससे खाना आसानी से पचता है और पेट से जुड़ी परेशानियां कम होती हैं। - सौंफ में फाइटोएस्ट्रोजन होते हैं और ये हार्मोन्स को संतुलित रखने में मदद करता है। पेरिमेनोपॉज में अपच, गैस, कब्ज और पाचन से जुड़ी अन्य दिक्कतें काफी आम हैं। सौंफ इन दिक्कतों में आराम पहुंचाती है और यह शरीर को अंदर से ठंडक भी देती है।  - सूखी अदरक का पाउडर पीरियड्स से जुड़ी दिक्कतों में रामबाण की तरफ काम करता है। ऐसा करने से जोड़ों की अकड़न भी दूर होती और मेटाबॉलिज्म में भी सुधार होता है। - माका रूट का पाउडर शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर को संतुलित करने में सहायक माना जाता है। इसके नियमित उपयोग से हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है। कैसे तैयार करें हार्मोनल बैलेंसिंग ड्रिंक?  - सबसे पहले आप 1 टीस्पून सौंफ के बीज लेने हैं। - 1 चुटकी सौंठ पाउडर लेना है। - पुदीने की 2-3 पत्तियां लेनी है। लेमन बाम की 1 टीस्पून सूखी हुई पत्तियां लें। - माका रूट का 1 टीस्पून पाउडर लें। - इसे आपको पानी में उबालना है। - इसे छानकर सुबह के समय पिएं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 13 Jan 2026 10:31:52 +0530</pubDate>
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<title>Body Detox से लेकर Glowing Skin तक, कमाल का है हल्दी&#45;मोरिंगा का ये Ayurvedic काढ़ा</title>
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<description><![CDATA[ जब इंफेक्शन हो जाएं या फिर बार-बार बीमार पड़ने लगते हैं, तो ऐसे में लोग काढ़ा पीते हैं, जिससे शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने, शरीर को गर्म रखने और इंफेक्शन से बचाव भी करता है। डिटॉक्स जैसे कई स्वास्थ्य लाभ पाने के लिए अलग-अलग प्रकार के काढ़ों का सेवन किया जाता है। हेल्दी रहने के लिए आयुर्वेद में काढ़ों को विशेष महत्व दिया गया है। हल्दी और मोरिंगा से बना काढ़ा भी सेहत के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। हल्दी और मोरिंगा दोनों ही आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ हैं, जिनमें भरपूर औषधीय गुण पाए जाते हैं। इनसे तैयार काढ़े का नियमित सेवन शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है और ओवरऑल हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। आइए जानते हल्दी और मोरिंगा का काढ़ा पीने के फायदे।हल्दी और मोरिंगा का काढ़ा पीने के फायदेइम्यूनिटी बूस्ट करें मोरिंगा और हल्दी के काढ़ा में अच्छी मात्रा में विटामिन-ए और सी जैसे पोषक तत्व और एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-माइक्रोबियल के गुण होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने, इंफेक्शन से बचाव करने और बीमारियों से बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है।पाचन के लिए फायदेमंदहल्दी और मोरिंगा से तैयार काढ़ा में फाइबर सहित कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं और इसमें सूजन कम करने वाले गुण भी होते हैं। इसका नियमित सेवन पाचन तंत्र को दुरुस्त करने में सहायक होता है। इसके साथ ही यह कब्ज, पेट फूलना और गैस जैसी आम पाचन समस्याओं से राहत दिलाने में मदद कर सकता है।हार्ट के लिए फायदेमंदहल्दी और मोरिंगा में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी के गुण पाए जाते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से हार्ट के कार्यों को बेहतर करने और हार्ट हेल्थ में सुधार करने में मदद मिलती है। शरीर को डिटॉक्स करे हल्दी और मोरिंगा से बने काढ़ा में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। इसका सेवन शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने में मदद करता है और रक्त की शुद्धता बनाए रखने में सहायक होता है। साथ ही यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है, त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है और संपूर्ण स्वास्थ्य को सुधारने में योगदान देता है।स्किन और बालों के लिए फायदेमंद हैइस काढ़ा में विटामिन-ए, सी और ई जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं और साथ ही इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। इसलिए यह स्किन और बालों के लिए हेल्दी है, यह झुर्रियों और फाइन लाइन्स को कम करने, इंफेक्शन से बचाता है और स्किन ग्लोइंग करता है। सूजन को कम करता हैमोरिंगा और हल्दी वाला काढ़ा पीने से शरीर की सूजन कम होती है, मांसपेशियों को रिलैक्स करता है, दर्द और ऐंठन को कम करने में मदद करता है।कैसे बनाएं हल्दी-मोरिंगा का सूप  - सबसे पहले 1 पैन में घी या ऑलिव ऑयल को डालकर प्याज, लहसुन और गाजर को अच्छे से भून लें और इसमें हल्दी और काली मिर्च का पाउडर डाल दें। - अब इसमें  मोरिंगा के पत्ते और वेजिटेबल स्टॉक को डालें। अब इसको 10-12 मिनट के लिए धीमी आंच पर पकाएं।  - फिर इसको हल्का ब्लैंड करें। अब इसमें धनिया के पत्तों को डालकर इसका सेवन करें।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 13 Jan 2026 10:31:51 +0530</pubDate>
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<title>Giloy Benefits: Giloy के चमत्कारी Health Benefits, Immunity बढ़ाने से लेकर Diabetes तक में रामबाण औषधि</title>
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<description><![CDATA[ गिलोय एक ऐसी औषधि है, जिसको हेल्थ एक्सपर्ट काफी लाभकारी मानते हैं। कोरोना काल के दौरान इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए लोगों ने गिलोय का इस्तेमाल किया। वहीं आयुर्वेद में भी गिलोय के पौधे के सभी भागों का उपयोग किया जाता है। लेकिन इसके तने को सबसे ज्यादा लाभकारी माना जाता है। गिलोय के बने काढ़े के सेवन से शरीर की इम्यूनिटी मजबूत करने के साथ कई तरह की बीमारियों से भी बचाव होता है।गिलोय में मौजूद यौगिक कई तरह की बीमारियों जैसे- मूत्र संबंधी समस्याएं, बुखार, पेचिश, दमा, दस्त और स्किन के संक्रमण को ठीक करने में काफी फायदेमंद हो सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको गिलोय के सेवन से होने वाले फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Fast Food बना रहा शरीर को खोखला, Health Experts ने दी चेतावनी, हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियांएंटीऑक्सीडेंट क्षमतागिलोय में एंटीऑक्सीडेंट्स की अच्छी-खासी मात्रा होती है। ऐसे में इसका सेवन करने से यह कोशिकाओं के ऑक्सीडेटिव डैमेज को बचाने में सहायता कर सकता है। लैब में स्तन, ओबरियन और प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं पर किए गए परीक्षण में यह पाया गया है कि गिलोय का सेवन करने से कैंसर का जोखिम कम हो सकता है।प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावावहीं गिलोय का सेवन करने से एलर्जी के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में सहायता करता है। एक अध्ययन के मुताबिक गिलोय एलर्जी वाले लक्षणों को कम करने में मददगार होता है। वहीं इम्यूनिटी मजबूत होने के साथ यह अन्य कई तरह की बीमारियों और संक्रमण का खतरा भी काफी हद तक कम करता है।शुगर मरीजों के लिए फायदेमंदबता दें कि आयुर्वेद में गिलोय को &#039;मधुनाशिनी&#039; के रूप में जाना जाता है। यह ब्लड शुगर के लेवल को कम करने में सहायक हो सकती है। इंसुलिन के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करने के साथ यह ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करने में भी फायदेमंद मानी जाती है। गिलोय का सेवन किडनी, अल्सर और आंखों की समस्याओं में भी उपयोगी है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 11 Jan 2026 20:33:20 +0530</pubDate>
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<title>New Moms की उदासी को न करें Ignore, ये हो सकते हैं Postpartum Blues के Signs, जानें उपाय</title>
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<description><![CDATA[ र्टम ब्लूज एक ऐसी स्थिति है जिसमें नई मां को अचानक उदासी, भावनात्मक उतार-चढ़ाव या बेचैनी महसूस होती है, जबकि इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं होता। यह समस्या डिलीवरी के बाद लगभग 70 से 80 प्रतिशत महिलाओं में देखी जाती है। आमतौर पर यह स्थिति कुछ समय में अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन इस दौरान मां को परिवार की समझ, भावनात्मक सहारा और सहयोग मिलना बेहद जरूरी होता है।पोस्टपार्टम ब्लूज के लक्षण   - महिला कभी बहुत खुश महसूस करती है और अगले ही पल अचानक उदास हो जाती है या रोने लगती हैं। छोटी-छोटी बातों पर उनके इमोशन्स उन पर हावी हो जाती है। - बिना किसी कारण रोने का मन करना पोस्टपार्टम ब्लूज का सबसे आम लक्षण होता है, जिससे महिला को खुद भी समझ नहीं पाती हैं कि वह क्यों रो रही है।  - नई मां को जल्दी गुस्सा आना, बेचैन रहना या छोटी-छोटी बातों पर झुंझलाहट महसूस होने लगती है। - डिलीवरी के बाद शरीर कमजोर महसूस करता है, इसके साथ ही नींद की कमी भी रहती है, जिसके कारण मानसिक और शारीरिक थकान बढ़ जाती है। - अक्सर पोस्टपार्टम ब्लूज में देखने को मिलता है कि बच्चे के सो जाने के बाद भी मां को नींद नहीं आती है या बच्चे की सही देखभाल करने में उन्हें समस्या होती है।  - बच्चे की हेल्थ, भविष्य या अपनी जिम्मेदारियों को लेकर अक्सर वह जरुरत से ज्यादा चिंता होना भी इसका एक आम लक्षण है।पोस्टपार्टम ब्लूज से निपटने के उपाय  - सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि पोस्टपार्टम ब्लूज होना बिल्कुल सामान्य है। इस वजह से खुद को कमजोर समझना या किसी तरह का अपराधबोध महसूस करना सही नहीं है। अपनी भावनाओं को छिपाने या दबाने के बजाय उन्हें समझें और स्वीकार करें, क्योंकि यही ठीक होने की पहली और सबसे अहम प्रक्रिया होती है। - अपने पति, माता-पिता या किसी भरोसेमंद मित्र से दिल की बात खुलकर साझा करें। जब आप अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करती हैं, तो मन का बोझ हल्का होता है और मानसिक तनाव भी काफी हद तक कम हो जाता है। - जब भी आपका बच्चा सो रहा हो, उस समय आप भी थोड़ा आराम करने का प्रयास करें। पूरी नींद न मिलना आपके मन और भावनाओं पर नकारात्मक असर डाल सकता है और स्थिति को और कठिन बना सकता है। - दिनभर की जिम्मेदारियों के बीच थोड़ा समय केवल अपने लिए जरूर निकालें। इस दौरान हल्का म्यूजिक सुनना, गहरी सांसों का अभ्यास करना या कुछ देर टहलना भी मन को शांत करने और अच्छा महसूस कराने में मदद कर सकता है। - इसके अलावा, पोषक तत्वों से भरपूर भोजन आपके शरीर और मन दोनों से मजबूत बनाने में मदद करता है। अपनी डाइट में आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर फूड्स का सेवन करें। - बता दें कि, नई मां के लिए हर चीज तुरंत परफेक्ट होना जरुरी नहीं है। आपसे गलतियां होना आम बात है इसलिए धीरे-धीरे सीखना ही आपके लिए सही तरीका है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 11 Jan 2026 20:33:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>सुबह की ये 5 जादुई ड्रिंक्स बढ़ाएंगी आपका Metabolism, दिनभर रहेंगे Full of Energy</title>
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<description><![CDATA[ आजकल लोग हेल्दी डाइट पर ज्यादा ध्यान देते हैं। हर कोई हेल्दी रहना प्रायोरिटी में शामिल कर रहे हैं। लोग अपनी डाइट से लेकर लाइफस्टाइल तक कई छोटे-बड़े बदलाव करते हैं। इसलिए सुबह की शुरुआत में पहला गिलास काफी हद तक यह तय करता है कि आपका दिन कैसा गुजरेगा। अधिकतर लोग सुबह साधारण पानी पीते हैं, लेकिन अगर इसकी जगह कुछ खास हेल्दी ड्रिंक्स को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जाए, तो ये सेहत पर कई गुना बेहतर असर डाल सकती हैं। ऐसी मॉर्निंग ड्रिंक्स न सिर्फ मेटाबॉलिज्म को तेज करती हैं, बल्कि शरीर को जरूरी पोषण देकर एनर्जी लेवल भी बढ़ाती हैं। आइए जानते हैं 5 ऐसी खास सुबह की ड्रिंक्स के बारे में, जो आपको पूरे दिन तरोताजा और ऊर्जावान बनाए रख सकती हैं।नारियल पानीसुबह की शुरुआत नारियल पानी पीने से दिन अच्छा जाता है। यह कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटेशियम का अच्छा स्रोत है। सुबह-सुबह नारियल पानी पीने से शरीर हाइड्रेटेड रहता है और दिन भर फ्रेशनेस बनी रहती है। ग्रीन टीग्रीन टी में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को सक्रिय करने में सहायक होते हैं। यह वजन को संतुलित रखने के लिए एक अच्छा ऑप्शन माना जाता है। रोज सुबह एक कप ग्रीन टी पीने से शरीर में गर्माहट बनी रहती है और साथ ही एनर्जी व एकाग्रता में भी सुधार होता है।वेजिटेबल जूसयदि आप सुबह की शुरुआत एक कप कॉफी पीते करते हैं, लेकिन थकान दूर नहीं हुई, तो पालक, केल जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों का जूस पिएं। क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में आयरन होता है, जो शरीर को एनर्जी देता है और थकान कम करता है। एलोवेरा जूस एलोवेरा जूस केवल स्किन के लिए नहीं, बल्कि पेट के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। इसमें सूजन कम करने वाले गुण होते हैं, जो ibs जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं और गैस-अपच जैसी परेशनियों को भी दूर रखते हैं।अदरक वाली चायअक्सर लोग सुबह की शुरुआत एक कप अदरक की चाय से भी करते हैं, जो सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है। इसे पीने से मतली और उल्टी जैसी समस्या कम होती है। इसमें उबले पानी में कद्दूकस किया अदरक डालकर पांच मिनट तक छोड़ दें। यह पेट को हल्का और एनर्जी को बढ़ाता है। टमाटर का जूसअगर शरीर में डिहाइड्रेशन हो या हैंगओवर की परेशानी महसूस हो रही हो, तो टमाटर का जूस एक बेहतरीन विकल्प साबित होता है। इसमें करीब 95 प्रतिशत पानी मौजूद होता है, जो शरीर को तेजी से हाइड्रेट करता है। इसके अलावा, यह हैंगओवर से जुड़ी थकान और अन्य लक्षणों को कम करने में भी मददगार होता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 11 Jan 2026 20:33:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Fast Food बना रहा शरीर को खोखला, Health Experts ने दी चेतावनी, हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियां</title>
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<description><![CDATA[ भागदौड़ भारी जिंदगी में हम सभी अपनी सेहत का ख्याल बिल्कुल भी नहीं रखते हैं। बिजी लाइफस्टाइल के कारण लोग अपने खानपान पर इतना ध्यान नहीं देते हैं। इन सब के कारण कहीं न कहीं हेल्दी खान-पान तो छूटता ही जा रहा है। धीरे-धीरे लोग हेल्दी डाइट पर जोर दे रहे हैं। वैसे सोशल मीडिया पर आपको हेल्दी डाइंटिंग की कई रील्स देखने को मिल जाएगी। हालांकि, कुछ लोग जिनका जिनका गुजारा फास्ट फूड के बिना नहीं होता। लोग न्यूट्रिशन से भरपूर डाइट को इग्नोर करके स्वादिष्ट फास्ट फूड का सेवन करना चाहते हैं, हालांकि क्या आप जानते हैं कि इसका सेहत पर क्या असर पड़ता है। चलिए आपको बताते हैं फास्ट फूड का सेवन करने से सेहत पर क्या असर पड़ता है।फास्ट फूड खाने से शरीर को क्या नुकसान होते हैं? - वैसे तो फास्ट फूड का सेवन करना हम सभी को काफी अच्छा लगता है, लेकिन यह हमारी सेहत के लिए ठीक नहीं होता है। इसमें काफी मात्रा में तेल, नमक, चीनी और मसाले होते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचता है। - हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर आप रोजाना फास्ट फूड का सेवन करते हैं, तो आपका वजन तेजी से बढ़ने लगता है। मोटापा बढ़ने से थकान, सांस लेने में दिक्कत और शरीर में आलस जैसी समस्या होने लगती है। - फास्ट फूड का नियमित और अधिक सेवन पाचन तंत्र पर नकारात्मक असर पड़ता है। इससे पेट सही तरह से काम नहीं कर पाता और गैस, एसिडिटी, पेट दर्द व कब्ज जैसी परेशानियां बार-बार होने लगती हैं। ज्यादा फास्ट फूड खाने से आंतों की कार्यक्षमता घट सकती है और धीरे-धीरे लिवर में चर्बी जमा होने का खतरा भी बढ़ जाता है। - यदि आप अधिक फास्ट फूड खाती हैं तो इसकी वजह से हार्ट हेल्थ पर असर पड़ता है। ज्यादा तला-भुना और नमक वाला खाना खाने से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है। - फास्ट फूड में आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा बेहद कम होती है, जैसे विटामिन, खनिज और फाइबर। इस वजह से इसका सेवन करने पर शरीर को पूरा और संतुलित पोषण नहीं मिल पाता। यदि लंबे समय तक ऐसा भोजन किया जाए तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है, जिससे व्यक्ति जल्दी-जल्दी बीमार होने लगता है। - अत्यधिक फास्ट फूड का सेवन करने से कम उम्र में शुगर और बीपी जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। इसकी वजह से शरीर सुस्त रहता है और काम करने का मन नहीं करता है। - कई बार तो न्यूट्रिशन की कमी होने के कारण आपका शरीर अंदर से खोखला होने लगता है, जिससे कई बीमारियां अंदर पनप रही होती हैं। जो भी घर पर ही ताजा खाना खाएं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 09 Jan 2026 20:06:42 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: आयुर्वेद के ये Golden Rules बदल देंगे आपका Daily Routine, Stress रहेगा कोसों दूर</title>
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<description><![CDATA[ खुद को हेल्दी रखने के लिए हम कई चीजों को फॉलो करते हैं। लेकिन खराब आदतों को छोड़ना इतना भी आसान नहीं है। हेल्दी रहने के लिए क्या करना चाहिए, जो उचित हो, यही जानलेना पर्याप्त है। आयुर्वेद एक ऐसा विज्ञान है, जो हमें सिखाता है कि आप सेहतमंद कैसे रह सकते हैं। आप अपनी लाइफस्टाइल और आयुर्वेद के बीच संतुलन बनाकर अपनी दिन को बेहतर बना सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको आयुर्वेद के उन नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको फॉलो करने से आप खुद भी तंदुरुस्त रहेंगे और बीमारियां भी कोसों दूर रहेंगी।आयुर्वेदिक नियमदिनभर तनाव मुक्त रहने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने दिन की शुरूआत जल्दी करें। इसलिए सूर्योदय से पहले बिस्तर छोड़ दें और फिर कुछ देर घर में ही वॉक करें। इससे आपकी सुस्ती दूर होगी।इसे भी पढ़ें: Health Tips: चिया सीड्स के इन फायदों को न करें Ignore, Weight Loss के अलावा पाएं Glowing Skin और दमदार एनर्जीवहीं आप सुबह ही अपनी टेबल बना लें कि आज के दिन आपको कौन-कौन से जरूरी काम करने हैं। जिससे कि तनाव आप पर हावी न हो सके। वहीं खुद की प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए काम करते चले जाएं। इससे शाम के समय आप खुद में बहुत अच्छा अनुभव करेंगे।बता दें कि सुबह के समय पेट साफ होने से सेहत संबंधी कई लाभ मिलते हैं। आपको हल्कापन और स्फूर्ति महसूस होती है और मन प्रसन्न होता है। वहीं दिनभर खुद को ऊर्जावान अनुभव करते हैं। इस तरह से आप अपने पूरे दिन के कामों को अच्छे से कर पाते हैं।योगासन और व्यायामआपको दिन में कुछ समय योगासन के लिए भी निकालना चाहिए। अगर संभव हो तो कम से कम रोजाना 30 मिनट योगाभ्यास करें और फिर 30 मिनट के अंतराल के बाद स्नान करना चाहिए।प्रोडक्टिविटी जरूरीअगर आप अपने काम का अच्छा रिजल्ट चाहते हैं या फिर अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाना चाहते हैं, तो जरूरी है कि आप अपने मन को केंद्रित रखना चाहिए। आपको अनावश्यक विचारों से बचना चाहिए। काम करने के दौरान मोबाइल आपका ध्यान भटकाने का काम करता है, इसलिए संभव हो तो मोबाइल को साइलेंट मोड पर रखें।पौष्टिक डाइटआपको अपनी डाइट पौष्टिक और पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करना चाहिए। आपकी डाइट ऐसी होनी चाहिए, जो आपको ऊर्जा देने वाला है। वहीं इतना अधिक नहीं खाना चाहिए कि आपको पूरा दिन सुस्ति आती रहे।शरीर के साथ मन को भी रखें शांतसोने जाने के दौरान अधिकतर लोगों का ध्यान सिर्फ शारीरिक विश्राम पर होता है। जबकि हमें अपने शरीर के अलावा मन के आराम पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए। इसलिए बिस्तर पर लेटने के बाद सबसे पहले अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें।जब आप अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करेंगे, तो इस दौरान सांसों को लंबा और गहरा रखने की कोशिश करें। इस प्रोसेस को करके देखिए आपको कुछ ही मिनट्स में नींद आ जाएगी और अगली सुबह जब उठेंगे, तो आप खुद को ऊर्जावान और प्रसन्न महसूस करेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 09 Jan 2026 20:06:39 +0530</pubDate>
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<title>How To Balance Overeating: पार्टी में कर लिया है ओवरईट तो करें ये उपाय</title>
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<description><![CDATA[ नया साल आ चुका है और हम सभी ने नए साल का जश्न धूमधाम से मनाया। इस सेलिब्रेशन में यमी खाने से लेकर मिठाइयों और पार्टियों का खूब लुत्फ उठाया। लेकिन जमकर पार्टी करने के बाद हम एक गिल्ट में चले जाते हैं। जब स्केल पर बढ़ा हुआ वजन नजर आता है तो सारी खुशियां कहीं ना कहीं गिल्ट में बदल जाती हैं। हमें लगता है कि इतना सारा खाने के बाद वजन बहुज ज्यादा बढ़ जाएगा।कई बार तो लोग गिल्ट में आकर क्रैश डाइटिंग, ओवर-एक्सरसाइजिंग या खुद को पनिश करना शुरू कर देते हैं। जबकि आपको ऐसा करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। आज इस लेख में हम बात कर रहे हैं कि ओवरईटिंग के बाद क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, क्योंकि हेल्थ का मतलब पनिशमेंट नहीं, बैलेंस है-इसे भी पढ़ें: Daily Walking Steps: Daily Walking का कमाल, रोज 10 हजार कदम से Heart Attack और Belly Fat को कहें &#039;Bye&#039;पैनिक ना होंपार्टी में हम सभी ज्यादा खा लेते हैं, लेकिन बाद में पैनिक करना शुरू कर देते हैं और गिल्ट में आकर खुद को ही ब्लेम करना शुरू कर देते हैं। लेकिन ऐसा करने से आपका स्ट्रेस बढ़ता है और क्रेविंग और भी ज्यादा होती है। इसलिए, मान लीजिए कि आपने ज्यादा खा लिया है और अब आप इसे आराम से बैलेंस कर लेंगे।पीएं गुनगुना पानीअगर आपने ज्यादा खा लिया है तो यह बेहद जरूरी है कि आप शरीर के हाइड्रेशन का खास ख्याल रखें। आप खाली पेट 1-2 गिलास गुनगुना पानी जरूर पीएं। अगर आप चाहें तो इसमें नींबू डाल सकते हैं या फिर जीरा या अजवाइन का पानी पीना भी अच्छा विचार है। याद रखें कि आपको किसी फैट बर्नर ड्रिंक की जरूरत नहीं है।खाएं लाइट और बैलेंस्ड मीलबहुत सारे लोग अगर पार्टी में ज्यादा खा लेते हैं तो अगले दिन भूखा रहने लग जाते हैं। लेकिन आपको ऐसा करने की जगह लाइट और बैलेंस्ड मील खाना चाहिए। आप अगले दिन ऑयली या पार्टी का बचा हुआ खाना ना खाएं। इसकी जगह दाल, सब्जी, दही, फल, सलाद या खिचड़ी आदि लें।  नमक और चीनी लें थोड़ा कमकोशिश करें कि आप नमक और चीनी कम मात्रा में लें। दरअसल, ये पानी रोकते हैं, जिससे आपको ब्लोटिंग हो सकती है। इसलिए, पैकेज्ड फूड, चिप्स, नमकीन या मिठाइयों का सेवन कम करने की कोशिश करें।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 15:40:03 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: Plastic Bottles बनी Slow Poison, खून में घुसकर DNA और Immunity को कर रहा तबाह</title>
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<description><![CDATA[ लाइफस्टाइल और खानपान में होने वाली गड़बड़ी ने हमारे स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। वहीं पर्यावरणीय स्थितियों ने दोहरी मार दी है। भारत में वायु प्रदूषण एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। वहीं कोरोना के बाद तेजी से बढ़ने वाले प्रदूषण की स्थिति को वैज्ञानिकों ने गंभीर स्वास्थ्य संकट बताया था। वायु प्रदूषण के अलावा वातावरण में बढ़ते माइक्रो और नैनोप्लास्टिक के लेवल ने भी चिंता को बढ़ाया है।कई अध्ययनों से यह पता चलता है कि प्लास्टिक के छोटे कण हमारी शरीर में जमा होकर गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकते हैं। वहीं रोजाना इस्तेमाल में आने वाली सिंगल यूज प्लास्टिक की चीजों ने इस खतरे को दोगुना कर दिया है। ऐसे में अगर समय रहते इसको कंट्रोल नहीं किया गया, तो भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकते हैं।इसे भी पढ़ें: How To Balance Overeating: पार्टी में कर लिया है ओवरईट तो करें ये उपायसिंगल यूज प्लास्टिक के नुकसानवहीं रोजाना इस्तेमाल में आने वाली सिंगल यूज पीईटी बोतलों से नैनोप्लास्टिक पैदा होती है। जोकि सीधे खून, आंतों और कोशिकाओं के बायोलॉजिकल सिस्टम को नुकसान पहुंचाती है। यह अदृश्य कण लंबी अवधि में शरीर में सूजन, डीएनए क्षति, मेटाबॉलिज्म की गड़बड़ी और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए खतरा बन सकते हैं।क्या कहते हैं एक्सपर्टवैज्ञानिकों की मानें, तो सिंगल-यूज पीईटी बोतलों से निकलने वाले नैनोप्लास्टिक काफी खतरनाक होता है। यह शरीर के अहम जैविक तंत्रों को बाधित कर सकते हैं। यह कण आंतों में मौजूद गुड जीवाणुओं, एपिथेलियल सेल्स और रक्त कोशिकाओं के सामान्य कामकाज को कमजोर करते हैं। जिसका इंसानी स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।प्लास्टिक के महीन कण दुनिया के करीब हर पर्यावरणीय माध्यम जैसे पानी, मिट्टी, नदियों, समुद्र, बादलों और इंसानी ब्लड और ऊतकों तक पहुंच चुके हैं।गट माइक्रोब्स और इम्युनिटी को खतरानैनोप्लास्टिक की मौजूदगी माइक्रोब्स यानी आंतों के लाभकारी जीवाणुओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। क्योंकि गट माइक्रोब्स पाचन, मेटाबॉलिज्म, प्रतिरक्षा प्रणाली और मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती है। इसलिए इसका नुकसान सीधे तौर पर शरीर को प्रभावित करने का काम करता है।बता दें कि डीएनए क्षति और मेटाबॉलिज्म गड़बड़ी कई गंभीर बीमारियों का कारण हो सकती है। इन अदृश्य कणों का जोखिम अब सिर्फ पर्यावरण तक नहीं बल्कि पोषण, कृषि और व्यापक परिस्थितिक तंत्र पर भी असर डाल सकता है।सेहत पर असरहालिया अध्ययनों के मुताबिक नैनोप्लास्टिक के ये कण सिर्फ आपके पाचन तंत्र नहीं बल्कि हार्मोनल बैलेंस, कार्डियोवेस्कुलर सिस्टम और न्यूरोलॉजिकल प्रक्रियाओं तक के लिए समस्याएं बढ़ा रही हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह कण कोशिकाओं की मेम्ब्रेन को पार करके सीधे नाभिक तक जाते हैं। जिससे डीएनए क्षति और दीर्घकालिक सूजन का खतरा बढ़ जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 15:40:02 +0530</pubDate>
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<title>Air Fryer का बढ़ा क्रेज: क्या इसमें बनी सब्जियां सच में हैं Healthy? जानें एक्सपर्ट की राय</title>
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<description><![CDATA[ आजकल की बिजी लाइफस्टाइल में भी लोग स्वाद के साथ ही सेहत का भी खास ध्यान रखते हैं। इसी वजह से लोग एयर फ्रायर का इस्तेमाल करते हैं। एयर फ्राइड सब्जियां न केवल स्वादिष्ट होती हैं, बल्कि तली हुई सब्जियों या फूड की तुलना में ज्यादा हेल्दी माने जाते हैं। कुछ लोग तो वेट लॉस करने के लिए अपनी डाइट में सब्जियां जरुर शामिल करते हैं। ऐसे में एयर फ्राइड सब्जियां बहुत कम तेल में तैयार हो होती रहती हैं। आजकल लोग एयर फ्राइड सब्जियों का सेवन ज्यादा मात्रा में करने लगते हैं। क्या आप ने कभी सोचा है कि यह हेल्दी हैं या नहीं। आइए आपको बताते हैं एयर फ्राइड सब्जी होती है।क्या एयर फ्रायर में सब्जियां बनाना अच्छा है? नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी से पता चला है कि सब्जियों को एयर फ्रायर में पकाना  सेहत के लिए अच्छा होता है। यह तरीका सब्जियों को उबालने या तेल में तलने से कहीं ज्यादा बेहतर माना गया है क्योंकि ब्रोकली और गोभी जैसी सब्जियों को खाने से बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ जाती है और शरीर को ज्यादा पोषक तत्व मिलता है। एयर फ्रायर सब्जियों को खाने के फायदे तेल का कम इस्तेमालएयर फ्रायर में सब्जियां बनाने के लिए कम मात्रा में तेल यूज किया जाता है। कम तेल खाने से मोटापा, कोलेस्ट्रॉल और दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम कम होता है, जो कि हमारे दिल के लिए फायदेमंद माना जाता है। वजन कम करने में फायदेमंदएयर फ्रायर में बनीं हुई सब्जियां कम कैलोरी वाली होती हैं। इनमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखती हैं, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या दूर होती है और वजन कंट्रोल में रहता है।पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं  हरी सब्जियों में पाए जाने वाले विटामिन और मिनरल्स एयर फ्रायर में पकाने से ज्यादा खत्म नहीं होते हैं, बल्कि ज्यादा तेल में तलने की तुलना में यह तरीका पोषण को बेहतर तरीके से सुरक्षित रखता है। आपके शरीर को ज्यादा पोषक तत्व मिलते हैं। पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद एयर फ्रायर में पकाई गई सब्जियां स्वाद में हल्की होती हैं और पेट के लिए भी आसानी से पचने योग्य होती हैं। इनमें मौजूद प्राकृतिक फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाए रखने में सहायक होता है, जिससे कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिलती है और पेट स्वस्थ रहता है। दिल की सेहत के लिए लाभकारी कम फैट और कम कैलोरी होने के कारण एयर फ्रायर में तैयार सब्जियों को सेवन दिल की सेहत को बेहतर रखने में काफी फायदेमंद माना जाता है। यह ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल रखता है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 15:40:02 +0530</pubDate>
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<title>Liver Damage का सबसे बड़ा Warning, ये 8 आदतें चुपके से कर रहीं हैं लिवर फेल, बदलें अपना Lifestyle</title>
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<description><![CDATA[ बिजी लाइफस्टाइल और खराब खानपान के कारण लोगों को अक्सर कई बीमारियां घेर ही लेती है। अगर सेहतमंद रहना चाहते हैं, तो इसके लिए यह जरुरी है कि हमारे शरीर के सभी अंग ठीक से फंक्शन करें। यदि बॉडी में विटामिन्स और मिनरल्स का लेवल सही हो और सभी हार्मोन्स बैलेंस हों। इसके लिए एक हेल्दी जीवनशैली को फॉलो करना भी जरुरी है। लिवर हमारे शरीर का एक जरूरी अंग है। इसका सही ढंग से काम करना हमारी सेहत के लिए बहुत जरूरी है। जब लिवर ढंग से काम नहीं करता, तो शरीर में टॉक्सिंस जमा होने लगते हैं। कई बार जाने-अनजाने में हम रोजमर्रा में कई ऐसी चीजें करते हैं, जो चुपचाप हमारे लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं, लेकिन इस तरफ हमारा ध्यान नहीं जाता है, तब तक लिवर डैमेज शुरु होने लगता है। आइए आपको बताते हैं किन वजहों से लिवर डैमेज होता है।किन वजहों से लिवर खराब होता?  - लिवर डैमेज होने का सबसे बड़ा कारण अत्यधिक एल्कोहल का सेवन करना है। एल्कोहल के कारण लिवर में फैट जमा होने लगता है और लिवर सेल्स में इंफ्लेमेशन हो जाता है।  - हम डाइट में सबसे ज्यादा चीनी लेने लगते हैं, तो इसकी वजह से भी लिवर डैमेज होने लगता है। अधिक शुगर के सेवन से ट्राईग्लिसाइड्स बढ़ने लगते हैं और फैटी लिवर की दिकक्त हो जाती है। - यदि आप डॉक्टर की सलाह के बिना बहुत अधिक दवाईयों या सप्लीमेंट्स का सेवन करते हैं, तो इसका सीधा असर आपके लिवर हेल्थ पर पड़ता है और इसके चलते शरीर को डिटोक्स होने में दिक्कत भी आती है। - नींद कम लेना या फिर नींद की कमी लिवर की कार्यक्षमता पर असर डालती है और जिसके कारण से लिवर खराब होने लगता है। - मोटापे की वजह से नॉन-एल्कोहॉलिक लिवर डिजीज हो सकती हैं। इसके अलावा जो लोग स्मोकिंग करते हैं, उनका लिवर भी जल्दी डैमेज हो सकता है क्योंकि स्मोकिंग का असर लिवर सेल्स पर होता है।  - यदि आप एक ही जगह बैठी रहती हैं, फिजिकल एक्टिविटी न के बराबर हैं, तो भी इसकी वजह से लिवर खराब हो सकता है। क्योंकि इसकी वजह से मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है और लिवर से फैट बाहर नहीं निकल पाता है।  - तनाव बढ़ने पर शरीर में कोर्टिसोल लेवल बढ़ने लगता है और इसकी वजह से लिवर में फैट जमा होने लगता है। - इसके अलावा प्रोसेस्ड और रिफाइंड फूड्स जैसे मैदा, सॉफ्ट ड्रिंक्स और मिठाईयों का अधिक सेवन भी लिवर को खराब कर सकता है। जिस वजह से ट्राईग्लिसाइड्स और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने लगता है और लिवर में इंफ्लेमेशन हो जाता है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 15:40:01 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: चिया सीड्स के इन फायदों को न करें Ignore, Weight Loss के अलावा पाएं Glowing Skin और दमदार एनर्जी</title>
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<description><![CDATA[ चिया सीड्स के बीच अपने अंदर कई पोषक तत्वों को समेटे होते हैं। हालांकि यह पिछले कई सालों से ह्यूमन डाइट का हिस्सा रहे हैं। लेकिन आज के समय में इन बीच के फायदों को लेकर काफी ज्यादा जागरुकता बढ़ी है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, तो चिया सीड्स के फायदों से अंजान हैं। चिया सीड्स में प्रोटीन, फाइबर, ओमेगा 3 फैटी एसिड्स और एंटी ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो इसको पावरफुल बनाने का काम करते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको चिया सीड्स के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं।हार्ट डिजीज और हार्ट अटैक का जोखिम कमचिया सीड्स में फाइबर पाया जाता है। इसलिए यह बीच कई तरह की बीमारियों के जोखिम को कम कर सकते हैं। इन बीमारियों में कुछ तरह के कैंसर, हार्ट संबंधी बीमारियां और डायबिटीज आदि शामिल है। इसके साथ ही यह डाइजेस्टिव डिसऑर्डर के खतरे को भी कम कर सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Liver Damage का सबसे बड़ा Warning, ये 8 आदतें चुपके से कर रहीं हैं लिवर फेल, बदलें अपना Lifestyleअल्जाइमर का रिस्क कमअल्जाइमर रोग एक मस्तिष्क विकार है। यह बीमारी सोचने की क्षमता और याददाश्त को धीरे-धीरे खत्म कर देता है। यह बीमारी बुजुर्गों में आम है। लेकिन अगर आप चिया सीड्स खाते हैं, तो इस विकार का जोखिम कम हो सकता है। चिया बीज में एंटीऑक्सीडेंट्स पाया जाता है। एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में अहम भूमिका निभाता है।भरपूर एनर्जीबता दें कि चिया सीड्स में प्रोटीन पाया जाता है और इसमें सभी 9 जरूरी अमीनो एसिड होते हैं। चिया सीड्स में मौजूद प्रोटीन ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करने और एनर्जी का एक स्थिर स्त्रोत देने में मदद करता है।वेट लॉसअगर आप भी वेट लॉस की कोशिश कर रहे हैं, तो इसको अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। चिया सीड्स फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होते हैं, जिस कारण आपका पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है। अगर आप अधिक खाने से बचना चाहते हैं, तो इसको डाइट में शामिल करना चाहिए, इससे आपका वेट मेंटेन रहता है।स्किन बेनिफिट्सइसके साथ ही ओमेगा 3 फैटी एसिड और एंटी ऑक्सीडेंट्स जैसे पोषक तत्वों से भरपूर चिया सीड्स आपकी त्वचा के लिए भी फायदेमंद है। यह हाइड्रोजन में सुधार करने, सूजन को कम करने और पर्यावरणीय क्षति से बचाने में सहायता करता है। यह बालों को भी उचित पोषण देता है, जिससे बाद सुंदर और घने बनते हैं।डाइट में करें शामिलचिया सीड्स का हमेशा पानी में भिगोने का बाद ही सेवन करना चाहिए। अगर आप चिया सीड्स को ओवरनाइट पानी में नहीं रखते हैं, तो कम से कम 30 मिनट पहले इसको भिगो दें। आप इसको दही, सीरियल्स, स्मूदी, फ्रूट सलाद और पुडिंग बनाकर डाइट में शामिल कर सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 15:40:00 +0530</pubDate>
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<title>Health Experts की बड़ी चेतावनी, इन 5 कारणों से बेटियों 7&#45;8 साल में हो रहे Early Periods, रहें सावधान!</title>
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<description><![CDATA[ हर लड़की के लिए पीरियड्स की शुरुआत ऐसे समय में होती है, जब उसके शरीर में कई बदलाव आने लगें। पीरियड्स का आना किसी भी लड़की में होने वाली सामान्य प्रक्रिया है। पीरियड्स का सही उम्र में शुरु होना, हर महीने समय पर आना और फिर सही उम्र में पीरियड्स आना बंद हो जाना ये एक ऐसा साइकिल है, जो सभी महिलाओं की जिंदगी में फॉलो जरुर होता है। वैसे तो पीरियड्स शुरु होने की उम्र 12-15 साल मानी जाती थी, हालांकि आजकल तो 10 साल से कम उम्र की लड़कियों में भी पीरियड्स की शुरुआत होने लगी है। इतना ही नहीं 7-8 साल की उम्र में भी कई लड़कियों को पीरियड्स आने शुरु हो चुके हैं। इसके पीछे के क्या कारण है, आइए आपको हेल्थ एक्सपर्ट की बात बताते हैं। क्यों लड़कियों में पीरियड्स जल्दी आने लगे हैं? - यदि आपकी बेटी को पहली बार पीरिड्स 7-8 साल की उम्र में आ गए हैं, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। बेटी को प्यूबर्टी जल्दी आने पर कई बार मां के मन में ये सवाल उठता है कि इसके पीछे क्या कारण हो सकता है और यह क्या नॉर्मल है या नहीं। - एक्सपर्ट का कहना है कि काफी समय से लड़कियों में कम उम्र में ही पीरियड्स आने की शुरुआत  होने लगी है। इसके पीछे नींद की कमी, जंक फूड खाना और अत्यधिक स्क्रीन टाइम अधिक होना जैसे कई कारण शामिल है। - अधिक स्क्रीन टाइम होने से मेलाटनिन हार्मोन और स्लीप साइकिल पर असर होता है। इसकी वजह से हार्मोन्स प्रभावित होते हैं।  - यदि आपकी बेटी की फिजिकल एक्टिविटी कम है, तो भी ऐसा हो सकता है। अक्सर फिजिकल एक्टिविटी कम होने पर शरीर में फैट जमा होने लगता है और इसके कारण से एस्ट्रोजन प्रोडक्शन बढ़ जाता है। - स्ट्रेस में रहने के कारण भी पीरियड्स सही उम्र से पहले आ जाते हैं। वहीं, शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाता है, तो हार्मोन्स जल्दी मैच्योर होने लगते हैं। - नींद की कमी के कारण भी रिप्रोडक्टिव हार्मोन्स समय से पहले रिलीज हो सकते हैं और इसकी वजह से भी प्यूबर्टी जल्दी आ जाती है।  - हार्मोनल क्रीम का यूज और अधिक जंक फूड का सेवन करने की वजह से भी ऐसा होता है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 15:40:00 +0530</pubDate>
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<title>Vitamin D Superfoods: Sunshine Vitamin की कमी से न हों परेशान, Winter Diet में ये 4 चीजें हैं &amp;apos;पावरहाउस&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ सर्दियों के मौसम में ठंड और कोहरे की वजह से सूरज की रोशनी नसीब नहीं होती है। जिस कारण हमारे शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है। विटामिन डी को &#039;सनशाइन विटामिन&#039; भी कहा जाता है। यह विटामिन न सिर्फ हड्डियों की मजबूती बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता और मेंटल हेल्थ के लिए भी जरूरी होता है। लेकिन जब शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती है, तो जोड़ों में दर्द, थकान, मांसपेशियों में कमजोरी और बार-बार बीमार पड़ने जैसी समस्याएं होने लगती हैं।क्योंकि सर्दियों में धूप काफी कम होती है और घंटों तक धूप में बैठना हर किसी के लिए संभव नहीं होता है। ऐसे में आप अपनी डाइट के जरिए विटामिन डी की कमी को पूरा कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसे सुपरफूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको रोजाना अपनी डाइट में शामिल करके आप बिना सप्लीमेंट्स के बॉडी में विटामिन डी के लेवल को सामान्य बनाए रख सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: High Cholesterol बना &#039;साइलेंट किलर&#039;, इन Tips से महीने भर में घटाएं Heart Attack का रिस्कअंडे का पीला भाग और फैटी फिशनॉनवेज खाने वालों के लिए फैटी फिश विटामिन डी सबसे बेहतरीन ऑप्शन है। फैटी फिश में ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है, जोकि हृदय हेल्थ के लिए गुणकारी है। वहीं जो लोग मछली का सेवन नहीं करते हैं, वह अंडे का पीला भाग खा सकते हैं। अंडे के सफेद हिस्से में प्रोटीन होता है। लेकिन विटामिन डी और हेल्दी फैट अंडे के पीले हिस्से में होता है।मशरूमवेजिटेरियन लोगों के लिए मशरूम किसी वरदान से कम नहीं है। खासकर वह मशरूम जो सूर्य की रोशनी में उगाए जाते हैं। बता दें कि मशरूम धूप के संपर्क में आने पर प्राकृतिक रूप से विटामिन डी उत्पन्न करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में मशरूम को डाइट में शामिल करने से सर्दियों में विटामिन डी के लेवल को प्राकृतिक रूप से बढ़ाने का एक प्रभावी तरीका है।पनीरपनीर को भी कैल्शियम और विटामिन डी का एक बेहतर ऑप्शन माना जाता है। पनीर न सिर्फ आपके शरीर को प्रोटीन देता है, बल्कि इसमें मौजूद विटामिन डी हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने और हड्डियों को अंदर से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती है। अगर आप नियमित रूप से पनीर का सेवन करते हैं, तो इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं और जोड़ों के स्वास्थ्य में सुधार होता है।फोर्टिफाइड फूड्सआजकल मार्केट में फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों का प्रचलन बहुत बढ़ा है। फोर्टिफाइड दूध और दही में विटामिन डी से अलग मिलाया जाता है। जिससे कि शाकाहारी आबादी में इसकी कमी को दूर किया जा सके। रोजाना एक गिलास फोर्टिफाइड दूध का सेवन करने से शरीर की जरूरत का काफी हिस्सा पूरा हो जाता है। यह पाचन तंत्र को हेल्दी रखने के साथ हड्डियों को भी पोषण देने का सरल और प्रभावी तरीका है।डाइट और धूपबता दें कि विटामिन डी की कमी को दूर करने के लिए सिर्फ डाइट ही नहीं बल्कि धूप भी बहुत जरूरी है। इसलिए रोजाना 15-20 मिनट की ताजी धूप जरूर लेना चाहिए। सर्दियों के मौसम में इन चार सुपरफूड्स को अपनी डाइट में शामिल करें। वहीं विटामिन डी वसा में घुलनशील होता है। इसलिए हेल्दी फैट के साथ इसको लेना ज्यादा प्रभावी होता है। ऐसे में अगर आपको ज्यादा थकान महसूस होती है, तो एक बार ब्लड टेस्ट जरूर कराएं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 Jan 2026 14:58:12 +0530</pubDate>
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<title>Office Job में घंटों बैठना पड़ रहा भारी? Expert से जानें क्यों दब रही है पैर की नस</title>
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<description><![CDATA[ भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत का ध्यान रखना तो भूल ही गए। ऊपर से लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करना, मोबाइल या लैपटॉप पर झुककर रहना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी आम हो गई है। जिसका सीधा असर हमारी रीढ़ और नसों पर जरुर पड़ता है। जब कमर या पैर की नसों पर लगातार दबाव बना रहता है, तो दिमाग और मांसपेशियों के बीच सिग्नल सही तरीके से नहीं पहुंच पाते।  इस समस्या का परिणाम दर्द, सुन्नता और कमजोरी के रूप में सामने आता है। कई मामलों में दर्द कमर से शुरू होकर धीरे-धीरे पैर तक फैल जाता है। हैरानी की बात यह है कि पैर की नस दबने की दिक्कत अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही। आज के समय में युवा, ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोग और यहां तक कि खिलाड़ी भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। अक्सर इसके लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं, जिस वजह से लोग समय रहते डॉक्टर से सलाह नहीं ले पाते। इस लेख में हम आपको पैर की नस दबने के क्या कारण होते हैं बताते हैं-पैर की नस दबने के क्या कारण होते हैं?स्लिप डिस्क या हर्नियेटेड डिस्कआमतौर पर पैर में नर्व दबने की सबसे बड़ी वजह स्लिप डिस्क होती है। जब कमर की रीढ़ की हड्डी के बीच मौजूद डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है, तो वह आसपास की नसों को दबाने लगती है। इससे दर्द कमर से शुरु होकर पैर तक फैल सकता है, जिसको साइटिका कहा जाता है।स्पाइनल स्टेनोसिस और बोन स्पर की भूमिकाजब उम्र बढ़ने लगती हैं तो कई लोगों में रीढ़ की नलिका सिकुड़ने लगती हैं, जिसे स्पाइनल स्टेनोसिस कहा जाता है। इसके अलावा हड्डियो पर अतिरिक्त बढ़ोतरी यानी बोन स्पर भी बन सकते हैं। इन दोनों स्थितियों में नसों के लिए जगह कम कर देती हैं, जिससे पैर की नसों पर दबाव पड़ता है और चलने में दर्द या सुन्नपन महसूस होने लगता है।  चोट या एक्सीडेंट के बाद बढ़ सकता है खतरागिरने, सड़क हादसे या खेल गतिविधियों के दौरान लगी चोट के कारण शरीर में सूजन या आंतरिक क्षति हो सकती है। यह सूजन आसपास की नसों पर दबाव डालती है। कई मामलों में, बाहरी चोट ठीक हो जाने के बाद भी नसों पर पड़ा दबाव बना रहता है, जिससे पैरों में लंबे समय तक दर्द, झनझनाहट या कमजोरी महसूस हो सकती है।टाइट मसल्सकेवल हड्डियां ही नहीं, बल्कि टाइट मसल्स भी नसों को दबा सकती हैं। आमतौर पर हिप और जांग की मांसपेशियां यदि सख्त हो जाए, तो वे नसों को फंसा लेती है। इसे पिरिफॉर्मिस सिंड्रोम जैसी स्थितियों में देखा जाता है, जहां दर्द पैर तक फैलता है।  गलत पोश्चर और लंबे समय तक बैठनाऑफिस में लगातार गलत ढंग से बैठकर काम करना, आगे झुककर बैठना या लंबे समय तक बिना आराम किए बैठे रहना पैरों की नसों पर बुरा असर डाल सकता है। खराब बैठने की पोश्चर से रीढ़ की हड्डी पर अधिक दबाव पड़ता है, जिससे समय के साथ नसें दबने लगती हैं और दर्द या कमजोरी की समस्या पैदा हो सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 Jan 2026 14:58:11 +0530</pubDate>
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<title>Daily Walking Steps: Daily Walking का कमाल, रोज 10 हजार कदम से Heart Attack और Belly Fat को कहें &amp;apos;Bye&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ हम नए साल 2026 में प्रवेश कर चुके हैं। ऐसे में हमारा सबसे पहला &#039;न्यू ईयर रेजोल्यूशन&#039; अपनी सेहत के लिए होना चाहिए। ऐसे में खुद को हेल्दी रखने के लिए आपको रोजाना कुछ कदम जरूर चलना चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक रोजाना सिर्फ 10,000 कदम पैदल चलना आपकी हेल्थ के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। जब आप पैदल चलते हैं, तो आपका हार्ट बेहतर तरीके से ब्लड को पंप करता है, इससे धमनियों में लचीलापन बना रहता है और ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है।रोजाना पैदल चलने से हमारे गट हेल्थ यानी की पेट के माइक्रोबायोम पर पॉजिटिव प्रभाव पड़ता है। फिजिकल एक्टिविटी पेट में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है, यह न सिर्फ पाचन में सुधार करता है, बल्कि मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करते हैं। ऐसे में आप नए साल के मौके पर अपनी फिटनेस जर्नी को सिर्फ एक आरामदायक जूते और सुबह की ताजी हवा के साथ शुरू करने का संकल्प लें।इसे भी पढ़ें: Vitamin D Superfoods: Sunshine Vitamin की कमी से न हों परेशान, Winter Diet में ये 4 चीजें हैं &#039;पावरहाउस&#039;स्वस्थ होगा हार्ट हेल्थपैदल चलना दिल के लिए सबसे प्रभावी &#039;एरोबिक एक्सरसाइज&#039; है। जब आप रोजाना नियमित रूप से चलते हैं, तो बॉडी में खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल गिरता है। साथ ही अच्छे कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि होती है।जब आप पैदल चलते हैं, तो धमनियों में प्लाक जमने का प्रोसेस धीमा हो जाता है। इससे स्ट्रोक और हार्ट अटैक का जोखिम 30-40% तक कम हो सकता है। आने वाले नए साल में खुद को फिट रखने के लिए &#039;ब्रिस्क वॉकिंग&#039; को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाएं।गट हेल्थ और इम्यून सिस्टम होगा मजबूतजब आप पैदल चलते हैं, तो पेट के बैक्टीरिया खुश होते हैं। पैदल चलने से आंतों की गतिशीलता बढ़ती है और कब्ज जैसी समस्याएं दूर होती हैं।हेल्दी गट का मतलब एक मजबूत इम्यून सिस्टम है। हमारे शरीर की 70% इम्यूनिटी सिस्टम आंतों में होती है। बेहतर गट हेल्थ आपकी मानसिक शांति और मूड को भी खुशनुमा बनाए रखने में सहायता करती है।मेटाबॉलिज्म और वेट कंट्रोलजब आप 10,000 कदम चलते हैं, तो शरीर की कैलोरी बर्निंग प्रोसेस तेज हो जाती है। यह कदम वेट लॉस करने में भी मील का पत्थर साबित होगी। रोजाना चलने से इंसुलिन संवेदनशीलता को सुधारने के साथ शरीर शुगर को ऊर्जा के रूप में बेहतर इस्तेमाल कर पाता है। वहीं इससे टाइप- डायबिटीज का खतरा टल जाता है।साल 2026 में अगर आप रोजाना सिर्फ पैदल चलने का नियम बना लेते हैं, तो आपके बढ़े हुए वेट और &#039;बैली फैट&#039; को कम करने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका है।ऐसे पूरे करें 10 हजार कदमअगर आपको भी एक साथ 10,000 कदम चलना मुश्किल लग रहा है, तो आप इसको टुकड़ों में बांट सकते हैं। आप सुबह 3,000, दोपहर में खाना खाने के बाद 2,000 और शाम को 5,000 कदम चलने का लक्ष्य रखें। आप लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें और फोन पर बात करने के दौरान टहलने की आदत डालें। साल 2026 में आपकी यह छोटी सी शुरूआत आपको बढ़ती उम्र यानी की बुढ़ापे में भी बीमारियों से मुक्त रखेंगी। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 Jan 2026 14:58:10 +0530</pubDate>
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<title>Health Alert: महिलाएं सेहत से जुड़ी ये 5 गलतियां ना करें, Gynecologist ने दी कैंसर टेस्ट की सलाह</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर होता है कि महिलाएं अपनी हेल्थ लेकर हमेशा लापरवाही करती हैं। नए साल की शुरुआत के साथ ही उन्हें अपनी सेहत पर ध्यान देना काफी जरुरी है।  गायनेकोलॉजिस्ट ने बताया है कि, महिलाएं इस साल इन 5 कामों को जरुर करना चाहिए। इन कामों से फिट रखने , खुश रखने औक लाइफ में आगे बढ़ने में सहायता प्राप्त होगी।हेल्दी रहने के लिए इन 5 चीजों के समझौता ना करेंस्ट्रेंथ ट्रेनिंगडॉक्टर ने बताया है कि आप किसी भी एज ग्रुप की हो, फर्टिलिटी का टाइम है या फिर प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं। हर महिला को स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जरुर करनी चाहिए। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग महिलाओं की हड्डी, मसल्स और हार्मोंस को  स्ट्रांग बनाने में मदद करती है। याद रखें कि हर महिलाएं धीरे-धीरे मेनोपॉज की तरफ बढ़ती है जो इरवर्सिबल होता है। इसलिए हेल्थ का ध्यान रखना जरुरी है।प्रोटीन का सेवन अधिक करेंयदि आपको शरीर में एनर्जी और स्ट्रेंथ चाहिए तो प्रोटीन की मात्रा को रुटीन में बढ़ाएं। आमतौर पर महिलाओं को लगता है कि रोजाना एक कटोरी दाल से प्रोटीन की पूर्ति होती है। लेकिन ये पूरी तरह मिथ है। ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर तीनों में प्रोटीन का इनटेक बॉडी को हेल्दी रखने में मदद करता है। 6-8 घंटे की नींद जरुर लेंआमतौर पर महिलाएं दिन-भर काम करती हैं और रात को भी काम करती हैं, लेकिन आराम से दूर भागती हैं, तो समझें नींद हेल्द के लिए बेहद जरुरी है। हेल्दी रहने के लिए रोजाना कम से कम 6-8 घंटे की नींद लेना जरुरी है। अच्छी नींद से फिजिकल और मेंटल हेल्द दोनों बेहतर रहेगी। कैंसर टेस्ट जरूर करवाएंमहिलाएं अपने पीरियड्स और इससे जुड़ी समस्याओं पर नजर रखें। पैप स्मियर नाम का टेस्ट कराएं। ये टेस्ट बच्चेदानी में होने वाले कैंसर के शुरुआती स्टेज को पता करने के लिए करवाया जाता है। आपको बता दें कि, इस टेस्ट कराने से कोई दर्द नहीं होता है। हालांकि, यह टेस्ट कराने से बड़ी बीमारी से बचाने में मदद करेगा। साल में एक बार में पैप स्मियर टेस्ट जरुर कराएं। खुद का ध्यान रखेंपांचवां सबसे जरुरी बात यह है कि खुद के लिए समय जरुर निकालें। महिलाएं अधिकतर घर, फैमिली, करियर में बिजी रहती है। खुद को नेगलेक्ट करने की जल्दी ही फिजकली और मेंटली बीमार होने लगती हैं। इसलिए जरुरी कामों में खुद के लिए समय निकालना भी शुरु करें।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 17:17:36 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: High Cholesterol बना &amp;apos;साइलेंट किलर&amp;apos;, इन Tips से महीने भर में घटाएं Heart Attack का रिस्क</title>
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<description><![CDATA[ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनहेल्दी डाइट की वजह से हाई-कोलेस्ट्रॉल एक साइलेंट किलर बन चुका है। खासतौर पर LDL शरीर के लिए तब अधिक खतरनाक हो जाता है, जब यह बल्ड वेसेल्स यानी की नसों के अंदर जमने लगता है। इससे नसों में रुकावट पैदा होती है और हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। लेकिन राहत की बात यह है कि इसको बिना दवाओं के भी कंट्रोल किया जा सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे है कि किस तरह से आप अपनी लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करके एक महीने के अंदर बैड कोलेस्ट्रॉल को 30% से 50% तक कम कर सकते हैं। बता दें कि कोलेस्ट्ऱॉल का सीधा संबंध हमारी शारीरिक सक्रियता और भोजन से है, जिसको सही दिशा देकर आप हृदय रोगों से सुरक्षित रह सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Health Alert: महिलाएं सेहत से जुड़ी ये 5 गलतियां ना करें, Gynecologist ने दी कैंसर टेस्ट की सलाह हेल्दी फैट्स अपनाएंआपको अपना डाइट से रिफाइंड ऑयल को हटा देना चाहिए। क्योंकि रिफाइंड तेल निर्माण प्रक्रिया के दौरान उच्च तापमान पर संसाधित होता है। यह नसों में सूजन और कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। इसकी जगह आप कोल्ड प्रेस्ड मूंगफली का तेल या फिर ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करें। यह &#039;कोल्ड प्रेस्ड&#039; तेल प्राकृतिक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और आपके शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में सहायता करता है।मेवों और फाइबर का सेवनकोलेस्ट्रॉल घटाने के लिए रोजाना 2 चम्मच घुलनशील फाइबर जैसे- इसबगोल की भूसी, ओट्स, फ्लैक्स सीड्स या चिया सीड्स का सेवन करना चाहिए। यह फाइबर शरीर में &#039;स्पंज&#039; की तरह काम करता है और बैड कोलेस्ट्रॉल को सोखकर बाहर निकाल देते हैं। वहीं रोजाना 20-30 ग्राम बादाम और अखरोट खाना चाहिए। यह मेवे न सिर्फ कोलेस्ट्रॉल कम करते हैं, बल्कि शरीर की आंतरिक सूजन को घटाते हैं।रोजाना करें वॉकसिर्फ डाइट ही नहीं बल्कि फिजिकल एक्टिविटी भी कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए जरूरी है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक रोजाना 7,000 से 10,000 कदम पैदल चलें। रोजाना वॉक करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है और जमा हुआ फैट ऊर्जा के रूप में जलने लगता है। रोजाना वॉक करने से नसों में ब्लड सर्कुलेशन को सुचारू बनाता है। इससे हृदय की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है।संतुलित डाइटआपको अपनी डाइट में सब्जियों की मात्रा बढ़ानी चाहिए, यह कोलेस्ट्रॉल को सुधारने का सबसे आसान तरीका है। इसलिए लंच और डिनर में उबली या कम तेल में पकी सब्जियों को जरूर शामिल करें। सब्जियों में एंटीऑक्सीडेंट और फाइटोस्टेरॉल की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जोकि कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकती है। एक्सपर्ट की मानें, तो अगर आप इन टिप्स को एक महीने तक पूरी ईमानदारी के साथ अपनाती हैं, तो आपको कोलेस्ट्ऱ़ॉल रिपोर्ट में सुधार देखने को मिलेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 17:17:35 +0530</pubDate>
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<title>Pregnancy का Third Trimester: Mood Swings और नींद की समस्या में रामबाण है केसर</title>
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<description><![CDATA[ कहा जाता है कि प्रेग्नेंसी में गोरा-चिट्टा बच्चा पाने के लिए केसर का सेवन करना अच्छा होता है। ऐसे में कई लोग केसर का सेवन जरुर करते हैं। कहते हैं केसर के सेवन से बच्चा खूबसूरत होता है और उसके गाल भी लाल होते हैं। लेकिन क्या कभी सोचा है कि केसर खाने से गोरा बच्चा होता है या नहीं, क्या है इसके पीछे की सच्चाई। वैसे तो केसर में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं। अक्सर प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में इसे अपनी बैलेंस्ड डाइट का हिस्सा बनाने से कई तरह के फायदे मिलते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में केसर का सेवन करने से क्या फायदे मिलते हैं।प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में केसर का सेवन कैसे करें? - सबसे पहले आप 2-3 धागों को एक गिलास दूध में अच्छी तरह से उबाल लें।  - सोने से पहले इस दूध का सेवन करें।  - या फिर आप चाहें, तो केसर के धागे को गुनगुने पानी में मिक्स करके भी पी सकती हैं। - अगर आप रोजाना केसर का सेवन करना चाहते हैं, तो सिर्फ 2-3 केसर के धागे सबसे बेस्ट है।प्रेग्नेंसी में केसर का सेवन करने के फायदेपाचन क्षमता में सुधारप्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में केसर का सेवन पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है। इस समय तक गर्भ में शिशु का वजन काफी बढ़ जाता है, जिससे पेट और आसपास के अंगों पर दबाव पड़ता है। इसका असर पाचन प्रणाली पर भी पड़ता है और कब्ज, गैस या अपच जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में नियमित रूप से केसर लेने से पेट की सूजन, एसिडिटी और सीने में जलन जैसी दिक्कतें कम हो सकती हैं, जिससे पाचन शक्ति में सुधार होता है।मूड अच्छा होता हैअक्सर होता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के मूड में बार-बार बदलाव होने लगते हैं। कभी उन्हें अपनी प्रेग्नेंस में एंग्जाइटी महसूस होती है, तो कभी उन्हें डिप्रेशन जैसा फील होता है। कई बार तो बहुत ही ज्यादा चिड़चिड़ी हो जाती हैं। इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए जरुरी है कि आप नियमित रूप से दूध में डालकर केसर का सेवन करें। क्योंकि यह सेरोटोनिन हार्मोन का फ्लो बेहतर करता है और मूड एन्हैंस भी करता है।मॉर्निंग सिकनेस में कमीआमतौर पर प्रेग्नेसी की शुरुआत में ही महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस का सामना करना पड़ता है, लेकिन कई महिलाओं में यह समस्या तीनों तिमाहियों तक बनी रह सकती है। इस दौरान मतली और उल्टी की शिकायत रोजमर्रा की जिंदगी को काफी प्रभावित करती है। अगर आप केसर को संतुलित आहार में शामिल करती हैं, तो इससे मतली की तीव्रता कम हो सकती है और मॉर्निंग सिकनेस से कुछ हद तक राहत मिलती है।नींद भी बेहतर होती हैअक्सर होता है कि  प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में महिलाओं के लिए अच्छी और गहरी नींद लेना काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में महिलाएं सही तरह से पीठ के बल नहीं लेट पाती हैं, क्योंकि पेट में खिंचाव होने लगता है। ऐसे में नींद भी बाधित होती है। एक्सपर्टी की माने तो प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में केसर का सेवन करने से नींद अच्छी आती है और यह गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए बेहतरीन है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 17:17:34 +0530</pubDate>
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<title>किचन में रखी यह एक चीज High BP और Cholesterol को करेगी कंट्रोल, जानें इस्तेमाल का सही तरीका।</title>
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<description><![CDATA[ वैसे तो जीरा का पानी पीना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। यह पाचन क्षमता में सुधार करता है, ब्लोटिंग में कमी करता है और मेटाबॉलिज्म को भी बूस्ट करता है। इसी कारण से ज्यादातर लोग इसको अपनी डाइट का हिस्सा बना लेते हैं। जीरा पानी पीने से बॉडी को डिटॉक्स करता है। यह शरीर के सभी टॉक्सिंस बाहर चले जाते हैं, जो आपको बीमार करने का जोखिम बढ़ा सकते हैं। यह माना जाता है कि जीरे का पानी पीने से हेल्थ अच्छी होती है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि जीरे का पानी पीने से ब्लड प्रेशर का स्तर कम होता है? इसलिए जीरा पानी को डाइट का हिस्सा बनाने से पहले यह जानकारी पता होनी चाहिए। क्या जीरे का पानी पीने से ब्लड प्रेशर कम होता है?जीरा का पानी एक प्रकार से डिटॉक्स वॉटर है, जो ओवर ऑल हेल्थ को लाभ पहुंचाता है। अगर आप रोजाना जीरे का पानी पीते हैं, तो यह आपके ब्लड प्रेशर पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। जीरे के पानी में पोटैशियम सहित कई उपयोगी तत्व होते हैं, जो दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाने में सहायक होता है और खून के थक्के बनने के खतरे को कम करता है। नियमित सेवन से हाई बीपी को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।जीरा पानी किस तरह ब्लड प्रेशर को रेगुलेट करता हैपोटैशियम कंटेंटेजीरे में सबसे अधिक पोटैशियम की मात्रा पाई जाती है। यह ब्लड प्रेशर के स्तर को कम करने और हार्ट रेट को रेगुलेट करने में मदद करता है।  अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में प्रकाशित हुई एक लेख में साफ लिखा है कि पोटैशियम की मदद से सोडियम के इफेक्ट को कम किया जा सकता है। एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता हैजीरे में कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं, जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद करते हैं, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर रहता है। इसके असर से रक्त वाहिकाएं सही तरीके से काम करती हैं और रक्त संचार भी सुधरता है। इसी कारण जीरा ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में सहायक भूमिका निभा सकता है।कोलेस्ट्रॉल के स्तर की कमीकोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने से हाई ब्लड प्रेशर की दिक्कत हो जाती है। ये दोनों ही आपसे में जुड़े हुए होते है। जब हाई कोलेस्ट्रॉल होता है, तो ब्लड वेसल्स में प्लाक जम जाता है, जिस कारण से ब्लड फ्लो बाधित होता है और यह अवस्था को ब्लड प्रेशर को भी प्रभावित करती है। यदि आप जीरा पानी पीते हैं, तो इसकी वजह से कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित किया जा सकता है, जो कि ब्लड प्रेशर को सही तरह से रेगुलेट करता है, हार्ट डिजीज का रिस्क कम करता है और ब्लड क्लॉटिंग से भी बचाव करता है। कैसे पिएं जीरा का पानी?  - एक गिलास पानी लें और उसमें एक चम्मच जीरा डालकर भिगो दें। इसे लगभग 8 घंटे या पूरी रात ऐसे ही रहने दें। सुबह उठकर जीरे को छान लें और बचे हुए पानी को खाली पेट पीएं। नियमित रूप से ऐसा करने से बेहतर लाभ मिल सकता है। - एक चम्मच जीरा लें और उसे एक से दो कप पानी में डालकर अच्छे से उबालें। लगभग 5–10 मिनट तक उबालने के बाद आंच बंद कर दें। अब पानी को छान लें और इस जीरे के पानी को चाय की तरह आराम से पिएं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 17:17:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: फेफड़ों को जहरीली हवा से कैसे बचाएं, 60 सेकेंड का ये &amp;apos;Power Breath&amp;apos; Routine देगा Immunity Boost</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप भी रोजाना जहरीली हवा में सांस लेने के लिए मजबूर हैं। बाहर निकलते ही धूल, धुएं और जहरीले कणों से बच पाना मुश्किल है। ऐसे में फेफड़ों पर इसका सीधा असर पड़ता है। जिससे सांस लेने में दिक्कत, एलर्जी, थकान और कमजोर इम्यूनिटी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में आपको घबराने की जरूरत नहीं है। भले ही हवा को पूरी तरह से आप साफ न कर सकें, लेकिन अपने शरीर को अंदर से मजबूत बना सकते हैं।रोजाना 60 सेकेंड का आसान और असरदार ब्रीदवर्क रूटीन फॉलो करके फेफड़ों को की क्षमता को बढ़ा सकती हैं। साथ ही पॉल्यूशन से होने वाले नुकसान से भी बचा सकती हैं। यह रूटीन न तो अधिक समय लेता है और न ही इसको करने के लिए किसी खास उपकरण की आवश्यकता होती है। ऐसे में आप ब्रीद वर्क रूटीन से अपने फेफड़ों को मजबूत बना सकते हैं। इस एक्सरसाइज को करने से फेफड़े मजबूत होते हैं और शरीर का इम्यून सिस्टम सही रहता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि ब्रीद वर्क रूटीन कैसे करें और इसके क्या फायदे होते हैं।इसे भी पढ़ें: Cold Early Symptoms: सर्दी-जुकाम का Early Warning, इन लक्षणों को पहचानें और घर बैठे ऐसे पाएं राहतएयर पॉल्यूशन में फेफड़ों को ऐसे बनाएं मजबूतआप बाहरी माहौल को नहीं बदल सकते हैं, लेकिन शरीर को अंदरूनी मजबूत बनाना बेहद जरूरी है। जब हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, तो बाहरी परेशानियों जैसे पॉल्यूशन का असर खुद ब खुद कम होने लगता है।योग विज्ञान में सांस को सिर्फ हवा नहीं बल्कि जीवित ऊर्जा माना गया है।वहीं प्रणायाम सांस को कंट्रोल करने की पुरानी तकनीक है। इससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और सांस लेने की ताकत भी मजबूत होती है।आज के समय में अधिकतर लोग सांस लेते हैं, जिस कारण फेफड़ों का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता है। वहीं बढ़ते पॉल्यूशन में यह आदत ज्यादा नुकसानदायक होती है।नाड़ी शोधन और कपालभाति जैसे रेगुलर ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से ऑक्सीजन के आदान-प्रदान को अच्‍छा बनाने, फेफड़ों को फैलाने और श्वसन तंत्र में जमी गंदगी को साफ करने में मदद मिलती है।जानिए क्या है 60 सेकेंड का ब्रीद वर्क रूटीनहमारे शरीर और मन के बीच सांस सबसे मजबूत कड़ी है। सुबह के समय 60 सेकेंड का अभ्यास करना सबसे अच्छा होता है। इसमें भस्त्रिका प्राणायाम किया जाता है। इस दौरान गहरी सांस ेना, थोड़ी देर सांस रोकना और फिर आराम से सांस छोड़ना शामिल है।ऐसे करें 60 सेकेंड का ब्रीद वर्कइस एक्सरसाइज को करने के लिए रीढ़ को सीधा करके बैठ जाएं।फिर अपना पूरा ध्यान सांसों पर लगाएं और जितना हो सके, गहरी सांस लें।अब कुछ सेकेंड के लिए सांस रोकें।फिर ध्यान के साथ सांस छोड़ें।जोर लगाकर नहीं बल्कि अनुशासन के साथ करें।आप चाहें तो इसको 2-3 बार दोहरा सकते हैं।फेफड़ों को रखता है हेल्दीजब आप गहरी सांस लेते हैं, तो फेफड़ों के ऐसे हिस्से भी सक्रिय होते हैं, जो निष्क्रय रहते हैं।सांस रोकने से बॉडी में ऑक्सीजन को अच्छे से सोखने की क्षमता बढ़ती है।सांस छोड़ने से फेफड़ों में जो कचरा जमा होता है, वह बाहर निकलता है।धीरे-धीरे फेफड़े अधिक मजबूत और पॉल्यूशन के प्रति सहनशील बनते हैं।60 सेकेंड ब्रीद वर्क के फायदेइसको करने से तनाव कम होता है और दिमाग को तेज करता है।यह इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करता है और आपको अंदरूनी मजबूती देता है।यह नर्वस सिस्टम को भी संतुलित करता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 02 Jan 2026 11:36:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Cold Early Symptoms: सर्दी&#45;जुकाम का Early Warning, इन लक्षणों को पहचानें और घर बैठे ऐसे पाएं राहत</title>
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<description><![CDATA[ हम सभी सर्दी-जुकाम को तब तक सीरियस नहीं लेते हैं, जब तक यह भयंकर रूप नहीं ले लेता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वायरस के हमले के 24 से 48 घंटे पहले ही शरीर संकेत देने लगता है। जुकाम की शुरूआत में गले में हल्की खराश, निगलने में असुविधा आदि होने लगती है। वहीं ज्यादा थकान, शरीर में हल्का दर्द और बार-बार छींक आना शामिल है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें, यह &#039;प्रोड्रोमल चरण&#039; होता है। ऐसे में आपका इम्यून सिस्टम वायरस से लड़ना शुरूकर देता है।ऐसे में अगर आप शुरूआत में ही कुछ सही कदम उठा लेते हैं, तो बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है। इसके अलावा नाक के अंदरूनी हिस्से में खुजली या स्वाद या गंध कम होगा और आंखों में हल्की जलन भी इस ओर संकेत करता है कि आपका शरीर संक्रमण की चपेट में आ रहा है। ऐसे में आप इन संकेतों को पहचानकर पहले ही सर्दी-जुकाम से बचने के लिए कुछ प्रभावी तरीके अपना सकते हैं।तुलसी और अदरक की चायअगर आपको गले में खराश महसूस होती है, तो आपको तुलसी और अदरक का काढ़ा या चाय का सेवन करना चाहिए। अदरक में जिंजरोल होता है, जोकि सूजन को कम करता है। वहीं तुलसी की पत्तियों में एंटी वायरल और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। पानी में अदरक और 5-7 तुलसी की पत्ती और काली मिर्च उबालकर इसका सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सक्रिय हो जाती है। वहीं इसका सेवन करने से वायरस का असर कम होने लगता है।भाप और नमक के पानी के गरारेनाक और गले के संक्रमण को रोकने के लिए आप नमक के गुनगुने पानी से गरारे कर सकते हैं। नमक का पानी गले के ऊतकों से वायरस और अतिरिक्त तरल को खींचकर बाहर निकलता है। वहीं रात को सोने से पहले सादे पानी की भाप लें। इससे श्वसन मार्ग नम रहता है और शुरूआती कफ नहीं जमता है। ऐसे में आपको सिरदर्द और साइनस की समस्या नहीं बढ़ती है।शहद और दालचीनी है लाभकारीआयुर्वेद में सर्दी-जुकाम के लिए दालचीनी और शहद को रामबाण बताया गया है। एक चम्मच शहद में आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिक्स करके इसका दिन में दो बार सेवन करें। शहद गले की झिल्ली को शांत करके खांसी को दबाता है और दालचीनी शरीर के अंदरूनी तापमान को बढ़ाती है और वायरस को पनपने से रोकती है। यह मिश्रण उन लोगों के लिए खासरूप से फायदेमंद है, जिनको जल्दी ठंड लगती है।हाइड्रेशन और आराम है जरूरीबता दें कि जब शरीर संक्रमण का संकेत देता है, तो शरीर को लड़ने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। ऐसे में 7-8 घंटे अच्छी और गहरी नींद लें और खुद को हाइड्रेटेड रखें। सूप, नारियल पानी और गुनगुने पानी का सेवन करें, जिससे शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल सकें। अगर आप शुरूआत के 24 घंटों में यह सावधानियां बरतते हैं, तो आप कमजोरी और दवाओं के खर्चों से बच सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 01 Jan 2026 18:47:56 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: फिट होने पर भी हो सकता है फैटी लिवर, डॉक्टर ने बताई असली वजह और बचाव के खास उपाय</title>
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<description><![CDATA[ ज्यादातर लोग मानते हैं कि फैटी लिवर सिर्फ मोटापे या खराब लाइफस्टाइल वाले लोगों को होता है। लेकिन सच्चाई यह है कि कई बार बिल्कुल फिट दिखने वाले लोग भी फैटी लिवर का शिकार बन जाते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो पतले या सामान्य वजन वाले लोगों में भी नॉन-ओबेस फैटी लिवर काफी तेजी से बढ़ रहा है। यह इसलिए भी खतरनाक है, क्योंकि ऐसे लोग इस समस्या को पहचान नहीं पाते हैं। जिस कारण यह बीमारी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है।फिट दिखना अंदरूनी सेहत का संकेत नहींसबसे बड़ी वजह यह है कि फिट दिखना हमेशा अंदरूनी सेहत का संकेत नहीं होता है। कुछ लोग बाहर से दुबले-पतले दिखाई देते हैं, लेकिन उनके शरीर में विजरल फैट का मात्रा ज्यादा होती है। यह छिपा हुआ फैट लिवर में जाकर ट्राइग्लिसराइड्स जमा करता है। फिर धीरे-धीरे यह फैटी लिवर का रूप ले लेता है। इसके अलावा असंतुलित खानपान, नींद की कमी, जेनेटिक फैक्टर, कम प्रोटीन और उच्च कार्ब डाइट, हल्की-फुल्की शारीरिक एक्टिविटी और बार-बार बाहर के खाने की भी प्रमुख भूमिका होचती है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: &#039;साइलेंट किलर&#039; PCOS, फैटी लिवर और डायबिटीज का मेल, महिलाओं की सेहत के लिए बड़ा खतरा  में फ्राइड फूड, शुगर और प्रोसेस्ड आइटम्स शामिल होता है। जोकि लिवर पर सीधा असर डालती है। वहीं पतले लोगों में एल्कोहल सेवन भी फैटी लिवर का आम कारण है। भले ही शरीर फिट दिखे, लेकिन नियमित शराब का सेवन लिवर में फैट जमा करती है और सूजन बढ़ाकर फाइब्रोसिस का खतरा बढ़ाती है। इस तरह से इंसुलिन रेसिस्टेंस, थायरॉयड असंतुलन और पीसीओएस जैसी स्थिति दुबले-पतले लोगों में फैटी लिवर की वजह बन सकती है।बचावसबसे पहले हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार लिवर फंक्शन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड करवाना चाहिए। फिर चाहे वह कितना भी हेल्दी और फिट क्यों न दिखता हो। साथ ही डाइट में शुगर युक्त पेय, रिफाइंड कार्ब्स, जंक फूड और डीप फ्राइड स्नैक्स का कम रखें। फल, प्रोटीन, हरी सब्जियां, ओमेगा 3 और फाइबर युक्त भोजन लें। रोजाना कम से कम 30-40 मिनट स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, ब्रिस्क वॉक जरूर करना चाहिए। क्योंकि यह एक्सरसाइज लिवर में जमे फैट को घटाता है। इसके अलावा तनाव कम करें, शराब का सेवन न्यूनतम रखें और नींद पूरी लें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 31 Dec 2025 13:43:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Health, Tips:, फिट, होने, पर, भी, हो, सकता, है, फैटी, लिवर, डॉक्टर, ने, बताई, असली, वजह, और, बचाव, के, खास, उपाय</media:keywords>
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<title>Health Tips: &amp;apos;साइलेंट किलर&amp;apos; PCOS, फैटी लिवर और डायबिटीज का मेल, महिलाओं की सेहत के लिए बड़ा खतरा</title>
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<description><![CDATA[ आजकल युवा महिलाओं में भी डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इसके पीछे गलत खानपान और खराब लाइफस्टाइल समेत कई कारण जिम्मेदार होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फैटी लिवर और पीसीओएस भी डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकती है। इन दोनों ही कंडीशन में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है। जिसकी वजह से टाइप- डायबिटीज हो सकती है। यह दोनों हेल्थ कंडीशन्स जैसे डायबिटीज के खतरे को बढ़ाती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि इससे बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए।पीसीओएस और फैटी लिवर बढ़ा सकता है डायबिटीज का खतराएक्सपर्ट की मानें, तो अगर आपको पीसीओएस या फैटी लिवर है, तो इसका कारण टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। ऐसा इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से होता है। इंसुलिन हार्मोन, जोकि ब्लड से ग्लूकोज को सेल्स में पहुंचाने में सहायता करता है और बॉडी में एनर्जी बनाए रखने के लिए जरूरी होता है।इसे भी पढ़ें: Benefits of Yoga: बिस्तर पर करें ये 2 योगासन, 7 दिन में पिघलेगी पेट की चर्बी, महिलाओं के लिए खासवहीं जब सेल्स इंसुलिन के लिए सही रिस्पॉन्स नहीं देती है, तो हमारा शरीर ब्लड शुगर के लेवल को बनाए रखने के लिए इंसुलिन का अधिक सीक्रेशन रहता है। वहीं जब लंबे समय तक ऐसा होता है, तो इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह बनता है। इस प्रोसेस में होने वाले इंबैलेंस के कारण पीसीओएस और फैटी लिवर हो सकता है।बता दें कि जब सेल्स इंसुलिन के लिए सही रिस्पॉन्स नहीं देती है, तो हमारा शरीर ब्लड शुगर के लेवल को बनाए रखने के लिए इंसुलिन का अधिक सीक्रेशन रहता है। जब लंबे समय तक ऐसा होता रहता है, तो यह इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह बनती है। इस प्रोसेस में होने वाले इंबैलेंस के कारण पीसीओएस और फैटी लिवर हो सकता है।फैटी लिवर में अधिक मीठा खाने, गलत खानपान और एक्सरसाइज की कमी की वजह से लिवर सेल्स में चर्बी जमने लगती है।इंसुलिन, अधिक वसा और ब्लड शुगर रेगुलेशन के मामले में लिवर के काम में बाधा डालती है। इस तरह से PCOS में इंसुलिन का हाई लेवल, ओवरीज में ज्यादा मेल हार्मोन बनाने के लिए प्रेरित करता है। इंसुलिन प्रतिरोध के साथ होने वाला हार्मोनल इंबैलेंस डायबिटीज के खतरे को बढ़ा देती है।वहीं फैटी लिवर बॉडी में प्रो-इंफ्लेमेटरी केमिकल पैदा करता है। जो शरीर को इंसुलिन रेजिस्टेंस बना देता है। जब फास्टिंग ब्लड शुगर बढ़ना शुरू हो जाती है, तब प्री-डायबिटीज या टाइप 2 के लिए ब्लड शुगर को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। वहीं फैटी लिवर के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरूआत में इसके कोई लक्षण नहीं नजर आते हैं।बता दें कि PCOS एक मेटाबॉलिज्म डिजीज है। यह रिप्रोडक्टिव सिस्टम से जुड़ी होती है। आमतौर पर PCOS महिलाओं में मेटाबॉलिज्म इंबैलेंस की ओर इशारा करती है। इस कारण शरीर के लिए ब्लड शुगर को कंट्रोल करना मुश्किल होता है। वहीं उच्च कोलेस्ट्रॉल और मोटापे का खतरा बढ़ जाता है। PCOS से पीड़ित महिलाओं में टाइप 2 मधुमेह होने की संभावना अन्य महिलाओं की तुलना में कई गुना अधिक हो सकती है।फैटी लिवर और पीसीओएस को ऐसे करें मैनेजरोजाना कम से कम 30-45 मिनट एक्सरसाइज करना चाहिए, जिससे कि इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार हो सके। वहीं आपको बैलेंस मील लेना चाहिए। वहीं डाइट में प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स शामिल करें।रिफाइंड शुगर कम से कम खाना चाहिए। लिवर फंक्शन, ब्लड शुगर और हार्मोनल इंबैलेंस की जांच करवानी चाहिए। वहीं अगर अचानक से आपका वेट बढ़ने लगे या फिर थकान महसूस होने लगे, तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। डायबिटीज, फैटी लिवर और पीसीओएस तीनों को मैनेज करने के लिए सही लाइफस्टाइल और सही डाइट का होना बेहद जरूरी है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 30 Dec 2025 16:46:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में सफर? डॉक्टर की सलाह, ये सावधानियां हैं जरूरी</title>
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<description><![CDATA[ एक महिला के लिए सबसे खास समय का प्रेग्नेंसी होता है। इस दौरान महिलाएं अपनी केयर काफी करती हैं। डॉक्टर भी बताते हैं कि प्रेग्नेंसी में ध्यान रखना काफी जरुरी होता है। आजकल महिलाएं काम के चलते ट्रैवल करती हैं, तो हाइ रिस्क प्रेग्नेंसी में ट्रैवल करना कितना सेफ है और इस दौरान कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में ध्यान कैसे रखें और किन महिलाओं को हाई प्रेग्नेंसी कैटेगरी में रखा जाता है।क्या है हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी?डॉक्टर बताते हैं कि हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वह स्थिति होती है, जब गर्भावस्था के दौरान मां या गर्भ में विकसित हो रहे शिशु के स्वास्थ्य पर सामान्य से अधिक खतरा रहता है। इसके पीछे कई तरह के कारण हो सकते हैं, इसलिए गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी है कि वे इन जोखिमों को समझें और विशेष सावधानी बरतें।  - हाई ब्लड प्रेशर या प्री-एक्लेम्पसिया  - डायबिटीज - प्रेग्नेंसी से पहले या प्रेग्नेंसी के दौरान  - एनीमिया  - थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं  - पहले मिसकैरेज या प्री-टर्म डिलीवरी की हिस्ट्री  - जुड़वां या ट्रिपलेट्स होना  - प्लेसेंटा प्रीविया या प्लेसेंटा से जुड़ी अन्य समस्याएं  - समय से पहले डिलीवरी का रिस्कहाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में क्या ट्रेवल किया जा सकता है?डॉक्टर बताते हैं कि इसका हां या नहीं में जवाब देना काफी मुश्किल होता है। दरअसल, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में सफर करना पूरी तरह मना नहीं किया जाता, हालांकि यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती हैं कि प्रेग्नेंट महिला का मेडिकल कंडीशन कैसी है, प्रेग्नेंसी का कौन-सा ट्राइमेस्टर चल रहा है और डॉक्टर ने महिला की स्थिति को देखते हुए क्या निर्देश दिए हैं। यदि गर्भावस्था सामान्य और नियंत्रण में है तथा कोई खास जोखिम नहीं है, तो जरूरी और कम दूरी की यात्रा की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि, बिना कारण लंबी, अधिक थकान देने वाली या जोखिम भरी यात्राओं से आमतौर पर दूर रहने की सलाह दी जाती है। हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में सफर करते समय सावधानियां बरतें - सफर करते समय एक बार अपने गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह जरूर लें और इस बात का ध्यान रखें कि डॉक्टर की लिखित अनुमति जरुर हो। - अगर यात्रा ज्यादा लंबी है, खराब सड़कें और ज्यादा झटके वाले सफर से बचना जरुरी है। दूरस्थ स्थान पर जाने के लिए ब्रेक जरुर लें। - यात्रा के दौरान पर्याप्त पानी पीते रहना काफी जरुरी है। क्योंकि डिहाइड्रेशन से प्री-टर्म लेबर का रिस्क बढ़ता है। - सफर में ढीले, कॉटन कपड़े और सपोर्टिव फुटवियर पहनें ताकि सूजन न हो। - हर एक से दो घंटे में वॉक करें या पैरों को जरुर हिलाएं ताकि ब्लड क्लॉट बनने का रिस्क कम हो। - इसके साथ ही समय पर अपनी दवाइयां लें। प्रिस्क्रिप्शन, अल्ट्रासाउंड और रिपोर्ट्स हमेशा अपने  साथ रखें।  - इस बात का ध्यान रखें कि जहां जा रहे हैं, वहां के नजदीकी अच्छे अस्पताल और इमरजेंसी नंबर पहले से नोट कर लें। - अपने साथ कोई भी भारी बैग या वजन उठाने से बचना जरुरी है और चाहे वह छोटा ही क्यों न लगे। फ्लाइट में सफर करते समय बरतें ये सावधानी  हर एयरलाइन में प्रेग्नेंसी से संबंधित अपनी अलग नियम और शर्तें तय करती है, इसलिए यात्रा से पहले यह जानना जरूरी है कि किस जेस्टेशनल उम्र तक उड़ान की अनुमति है। अधिकतर स्थितियों में डॉक्टर द्वारा जारी किया गया फिट-टू-फ्लाई प्रमाण पत्र आवश्यक होता है, जो आमतौर पर उड़ान से तीन दिन के भीतर बना होना चाहिए। एयर ट्रैवल की योजना बनाने से पहले एयरलाइन और अपने डॉक्टर दोनों से पुष्टि करना बेहद जरूरी माना जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 29 Dec 2025 22:33:44 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: खाने की आदत बदलें, वरना पछताएंगे, जंक फूड की लत दे रही मोटापे और हार्मोनल असंतुलन को दावत</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में हमारी दिनचर्या में सुविधाजनक और स्वादिष्ट दिखने वाला जंक फूड तेजी से जगह बना चुका है। खासकर दिल्ली जैसे बड़े शहरों में जंक फूड की खपत काफी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में अब यह एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुकी है। नमकीन, नूडल्स, चिप्स, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक और ब्रेकफास्ट सीरियल जैसी पैकेट बंद चीजें न सिर्फ बच्चों बल्कि युवाओं की पहली पसंद बन गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनके पीछे छिपे खतरे बेहद गहरे होते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको जंक फूड के सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में बताने जा रहे हैं।कई गुना बढ़ी बिक्रीकरीब पिछले 15 सालों में भारत में पैक्ड और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स की बिक्री काफी ज्यादा बढ़ गई है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक इस साल इन उत्पादों का मार्केट 50 बिलियन डॉलर के करीब पहुंच सकता है। यह तेज बढ़ोतरी एक्सपर्ट्स के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। क्योंकि इसका सीधा संबंध बढ़ते मोटापे और उससे जुड़ी बीमारियों से है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: पीसीओडी में करना है वेट लॉस, तो डाइट में शामिल करें ये इवनिंग स्नैक्समोटापा और हार्मोनल असंतुलनवहीं जंक फूड में पोषण का संतुलन गायब होता है। जंक फूड में फाइबर, विटामिन या प्राकृतिक तत्वों की जगह नमक, चीनी, तेल और आर्टिफिशियल रंग होते हैं। यही कारण है कि इनको खाने के बाद पेट भर जाता है, लेकिन हमारे शरीर को जरूरी ऊर्जा नहीं मिल पाती है। वहीं हमें ऐसी चीजें बार-बार खाने की आदत डाल देती हैं। यह आदत धीरे-धीरे हार्मोनल असंतुलन, मोटापा और सेहत से जुड़ी अन्य समस्याओं को जन्म देती है।दोगुना बढ़ा मोटापाबता दें कि देश में मोटापे की स्थिति चिंताजनक है। आंकड़ों के मुताबिक पुरुषों में मोटापे 12% से बढ़कर 23% तक पहुंच गया है। वहीं महिलाओं में यह 15% से बढ़कर 24% पहुंच चुका है। यानी की कुछ ही सालों में दोनों ही श्रेणियों में मोटापा करीब दोगुना बढ़ा है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह बढ़ोत्तरी उतनी ही खतरनाक है, जितना कि प्रदूषण से फेफड़ों पर पड़ने वाली मार खतरनाक है।अब नहीं संभले तो कब संभलेइन सभी बातों से साफ है कि जंक फूड का बढ़ता मार्केट सिर्फ स्वाद का मामला नहीं बल्कि एक व्यापक स्वास्थ्य चुनौती बन गया है। जरूर है कि लोग जागरुक हों, घर में स्वास्थ्यवर्धक ऑप्शन को प्राथमिकता दें और बच्चों में सही खानपान की आदतों को विकसित करना चाहिए। अगर अभी यह कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले सालों में मोटापा और इससे जुड़ी बीमारियां ज्यादा तेजी से बढ़ सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 29 Dec 2025 22:33:44 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: वेट लॉस के लिए नींबू पानी या सिरका, किसका करें सेवन</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में हर दूसरा व्यक्ति अपने बढ़े हुए वजन से परेशान है और इसे कम करने के लिए तरह-तरह की डिटॉक्स ड्रिंक पीना पसंद करते हैं। जब वेट लॉस की बात होती है तो इसमें विनेगर और नींबू पानी को बहुत अधिक फायदेमंद माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि ये दोनों ड्रिंक्स फैट बर्निंग में मदद करते हैं और मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करते हैं। जिसकी वजह से आपको फ्लैट टमी मिलता है। लेकिन अक्सर लोग इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि इन दोनों में से किसका सेवन किया जाए। तो आज इस लेख में आसान शब्दों में समझेंगे कि विनेगर और नींबू पानी में क्या अंतर है, वजन घटाने के लिए कौन सी ड्रिंक बेहतर है, इसे कैसे और कब पीना चाहिए-इसे भी पढ़ें: Health Tips: खाने की आदत बदलें, वरना पछताएंगे, जंक फूड की लत दे रही मोटापे और हार्मोनल असंतुलन को दावतविनेगर वेट लॉस में किस तरह मदद करता है विनेगर आपकी भूख थोड़ी कम कर सकता है, जिससे आपको ज्यादा देर तक पेट भरा हुआ महसूस होगा। साथ ही, यह ब्लड शुगर को भी कंट्रोल करने में मदद कर सकता है, जिससे आपको कम क्रेविंग होती है। यह डाइजेशन को भी बेहतर कर सकता है। विनेगर में एसिटिक एसिड होता है, जो फैट मेटाबॉलिज्म को भी हल्का सपोर्ट करता है। विनेगर का सेवन किस तरह करेंएक चम्मच विनेगर को एक गिलास पानी में मिलाकर लिया जा सकता है। इसे खाने से पहले लेना सबसे अच्छा है। इसे कभी भी डायलूट किए बिना ना लें, क्योंकि यह एसिडिक होता है।विनेगर से क्या नुकसान हो सकते हैंविनेगर आपके दांतों के इनेमल को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा, इससे एसिड रिफ्लक्स, ब्लोटिंग, जलन हो सकती है। बीपी या शुगर की दवाओं के साथ यह दिक्कत कर सकता है। इसलिए अगर आपको गैस्ट्राइटिस, एसिडिटी, अल्सर है या आप बीपी या डायबिटीज की दवाएं ले रहे हैं, तो पहले डॉक्टर से पूछें।नींबू पानी वेट लॉस में किस तरह मदद करता है नींबू पानी आपको हाइड्रेटेड रखता है, जिससे आप बेवजह की स्नैकिंग कम होती है। यह डाइजेशन में मदद करता है। यह आपको फ्रेश और हल्का महसूस कराता है। हाइड्रेशन से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है, वॉटर रिटेंशन कम होता है और आप पतले लगते हैं। नींबू पानी का सेवन किस तरह करें गर्म पानी में आधा नींबू निचोड़कर लें। आप इसे सुबह या कभी भी ले सकते हैं। अगर आप चाहें तो इसमें थोड़ा शहद भी डाल सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से ऑप्शनल है।नींबू पानी से क्या नुकसान हो सकते हैं नींबू पानी से साइड इफेक्ट होने की संभावना काफी कम होती है। लेकिन सेंसिटिव लोगों में इससे एसिडिटी हो सकती है। इसका बहुत ज्यादा सेवन करने से दांतों का इनेमल खराब हो सकता है।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Mon, 29 Dec 2025 22:33:43 +0530</pubDate>
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<title>ऑफिस में बैठे&#45;बैठे बढ़ रहा है पेट? ऐसे करें कंट्रोल, जानें एक्सपर्ट की सलाह</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप ऑफिस या फील्ड में लंबे समय तक काम करने वाले वर्कर्स हैं, ऐसे में आप वजन को कम करना चाहते हैं, तो अब आप आसानी से वजन को कम कर सकते हैं। लगातार बैठे रहना, अनियमित भोजन और जंक फूड की आदतें वजन बढ़ाने के मुख्य कारण हैं। बायोमेड सेंट्रल (BMC) के एक अध्ययन बताता है कि लोग सेडेंटरी काम करते हैं यानी ऑफिस में बैठकर काम करते हैं उनमें पेट की चर्बी होने की संभावना अधिक हो जाती है। अगर आप नियमित रुप से हेल्दी आदतें को अपनाएंगे तो वजन को कम करने बेहद आसान हो जाएगा। आइए आपको बताते हैं कैसे करें वजन को कम।हेल्दी स्नैक्स को चूज करेंअगर लंबी ड्यूटी करते समय आपको भूख लगे तो आप भी जंक फूड का सेवन करते हैं, तो नट्स, फल, दही या ओट्स जैसे हेल्दी स्नैक्स लें। फिटनेस कोच ने बताया कि हेल्दी स्नैक्स लंबे समय तक पेट का भरा रखते हैं और शुगर क्रेविंग को कम करेंगे और कंट्रोल करेंगे। हेल्दी स्नैक्स का सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में भी मदद मिलती हैं।छोटे वर्कआउट्स करेंलॉन्ग टाइम वर्क के दौरान आप कम से कम 10-15 मिनट के छोटे वर्कआउट्स कर सकते हैं। यह स्ट्रेचिंग, स्कवैट्स, वॉक या हल्की कार्डियो एक्सरसाइज मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करती है और कैलोरी बर्निंग प्रक्रिया को बढ़ाते हैं। इसलिए छोटे ब्रेक आपके लिए शरीर और दिमाग दोनों को रिफ्रेश करते हैं और लंबी जॉब के दौरान बैठकार काम करने से नुकसान को कम करते हैं।पर्याप्त पानी पिएंलंबी ड्यूटी के समय अक्सर लोग पानी पीना नज़रअंदाज कर देते हैं। जबकि पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से भूख पर नियंत्रण रहता है, मेटाबॉलिज़्म बेहतर होता है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। फिटनेस कोच के अनुसार, पानी और हर्बल टी जैसे हेल्दी पेय दिनभर शरीर में ऊर्जा बनाए रखते हैं और बार-बार स्नैक्स खाने की इच्छा को कम करने में मदद करते हैं।माइंडफुल ईटिंगलंबी शिफ्ट वाली नौकरी के दौरान अक्सर हम जल्दी में या कंप्यूटर और फोन के सामने खाते हैं। इस दौरान शरीर को यह कभी भी संकेत नहीं मिल पाता कि पेट भरा है। हर बाइट पर ध्यान देना जरुरी है, इसलिए धीरे-धीरे खाएं और भूख लगने पर ही स्नैक्स लें। इससे ओवरईटिंग कम होती है और कैलोरी कंट्रोल करने में मदद मिलती हैं। नियमित ब्रेक लेंपूरे दिन बैठे रहने वाली नौकरी करने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। प्रत्येक 1-2 घंटे में 5 मिनट का छोटा ब्रेक जरुर लें। इसके अलावा, आप खड़े होकर हल्की स्ट्रेचिंग या थोड़ी वॉक जरुर करें। ऐसा करने से कैलोरी बर्निंग प्रक्रिया बढ़ती है, साथ ही ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है और लंबे समय एनर्जी भी बनीं रहती है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 29 Dec 2025 22:33:42 +0530</pubDate>
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<title>Benefits of Yoga: बिस्तर पर करें ये 2 योगासन, 7 दिन में पिघलेगी पेट की चर्बी, महिलाओं के लिए खास</title>
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<description><![CDATA[ महिलाएं अक्सर कामकाज, घर-परिवार और अनगिनत जिम्मेदारियों में इतना ज्यादा खो जाती हैं कि वह अपने मन और शरीर की जरूरतों को अनदेखा कर देती हैं। बढ़ती उम्र, भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल और हार्मोनल इंबैलेंस के बीच पेट के आसपास जिद्दी चर्बी जम जाती है। ऐसे में लंबा वर्कआउट या जिम जाने का समय निकाल पाना काफी मुश्किल होता है। वहीं सर्दियों में यह बड़ी चुनौती बन जाता है। क्योंकि सर्दियों में सुबह बिस्तर से निकलने का मन नहीं करता है।ऐसे में आप योग के जरिए अपनी फिटनेस को बरकरार रख सकती हैं। क्योंकि योग न सिर्फ शारीरिक रूप से बल्कि आपको मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। योग से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन और मन में स्थिरता भी बढ़ती है। वहीं सही आसन और रोजाना अभ्यास करने से किसी भी परेशानी को आप मात दे सकती हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: खाने की आदत बदलें, वरना पछताएंगे, जंक फूड की लत दे रही मोटापे और हार्मोनल असंतुलन को दावतऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको दो खास योगासन के बारे में बताने जा रहे हैं। इन योगासन को आप सुबह बिस्टर पर पेट के बल लेटकर भी कर सकती हैं। इन आसन को करने में सिर्फ 10 मिनट का समय लगता है। लेकिन इसके नियमित अभ्यास से आपको सिर्फ 1 सप्ताह में पेट की चर्बी में हल्का सा बदलाव महसूस होने लगेगा।धनुरासनधनुरासन का अभ्यास करने से पेट की चर्बी पर सबसे ज्यादा प्रेशर डालता है और यह पाचन क्रिया को तेज करता है। इस आसन का अभ्यास करने से वेट लॉस में मदद मिलती है।ऐसे करें ये आसनइस आसन को करने के लिए पेट के बल लेट जाएं।फिर पैरों को घुटनों से मोड़ें और टखनों को पकड़ने के लिए हाथों को पीछे की तरफ ले जाएं।अब सांस लेते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से और शरीर के निचले हिस्से को फर्श से ऊपर उठाएं। इससे आपका शरीर धनुष का आकार ले ले।इसके बाद चिन को धीरे से ऊपर की तरफ मोड़ें और इसको बहुत धीरे-धीरे करें।इस मुद्रा में 15-20 सेकेंड तक रहें। फिर सांस छोड़ते हुए आसन से बाहर आ जाएं और आराम करें।भुजंगासनइस आसन को करने से आपकी पीठ लचीली बनती है और पेट की चर्बी पर सीधा प्रेशर डालकर कम करने में सहायता मिलती है।ऐसे करें ये आसनइस आसन को करने के लिए पेट के बल लेट जाएं।फिर हथेलियों को कंधों के ठीक नीचे जमीन पर रखें और पैरों को एक साथ रखें।अब सांस पूरी तरह से अंदर लें और कुछ देर सांस रोकें।इसके बाद धीरे-धीरे सिर, कंधे और धड़ को 3- डिग्री कोण पर ऊपर की ओर उठाएं।इस दौरान आपकी नाभि जमीन पर टिकी रहे। कंधे चौड़े हों और सिर थोड़ा सा ऊपर की ओर उठा होना चाहिए।करीब 10 सेकेंड तक इस आसन में रहें।अब धड़ को धीरे-धीरे नीचे लाएं और फिर बाहर की ओर सांस छोड़ें।बता दें कि इन रोजाना सिर्फ 10 मिनट इन योगासनों को करने से आपकी कोर स्ट्रेंथ बढ़ती है। पीठ दर्द कम होता है और पेट की चर्बी भी तेजी से कम हो सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 29 Dec 2025 22:33:42 +0530</pubDate>
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<title>Women Health Care: अबॉर्शन के बाद इन चीज़ों से करें परहेज़, रिकवरी को मिलेगी गति, शरीर रहेगा स्वस्थ</title>
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<description><![CDATA[ अबॉर्शन के बाद एक महिला को कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याओं से गुजरना पड़ता है। अबॉर्शन के बाद महिला को काफी लंबे समय तक कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस दौरान महिला के शरीर में करीब 2 सप्ताह पेट में ऐंठन, दर्द, शरीर में कमजोरी और अधिक ब्लीडिंग जैसी कई समस्याओं का अनुभव हो सकता है। शारीरिक तौर पर महिला को इस परेशानी से निपटने में थोड़ा सा समय लग सकता है।अबॉर्शन के बाद लक्षणों को मैनेज करने के लिए हेल्दी डाइट लेना चाहिए। ऐसे में जरूरी है कि महिला सभी पोषक तत्वों का सेवन करें और डाइट से जुड़ी कुछ खास बातों का ध्यान रखें। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि अबॉर्शन के बाद महिला को क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए।इसे भी पढ़ें: दादी-नानी के अजमाएं नुस्खें से शिशु पड़ सकता है बीमार, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट करें इन चीजों का सेवनप्रोटीन युक्त डाइटअबॉर्शन के बाद पर्याप्त प्रोटीन वाली डाइट लेने से आपकी मांसपेशियों के निर्माण में सहायता मिलती है। यह गर्भपात के बाद शरीर को तेजी से ठीक होने में सहायता करता है।लिक्विड डाइटअबॉर्शन के बाद खूब सारे तरह पदार्थों का सेवन करने से बॉडी में खून की कमी नहीं होती है। इसलिए अपनी सेहत को बेहतर बनाने के लिए नारियल पानी, डिटॉक्स ड्रिंक्स और अनार के जूस का सेवन करना चाहिए।कैल्शियम वाले आहारप्रेग्नेंट महिला के शरीर में कैल्शियम की कमी होने की संभावना होती है। इसलिए अबॉर्शन के बाद कैल्शियम से भरपूर फूड्स को डाइट को शामिल करना चाहिए।इन चीजों का न करें सेवनअबॉर्शन के बाद शुगर वाले प्रोडक्ट्स और जंक फूड्स का सेवन करने से बचना चाहिए। अबॉर्शन के बाद अगर आप बहुत ज्यादा मीठे का सेवन करती हैं, तो आपके ब्लड शुगर का लेवल बढ़ सकता है।अबॉर्शन के बाद शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे आपके स्वास्थ्य पर गलत प्रभाव पड़ता है।अबॉर्शन के बाद जंक फूड का सेवन सही नहीं है। इसलिए आपको बर्गर, पिज्जा और फ्रेंच फ्राइज जैसे फूड आइटम्स को खाने से बचना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 27 Dec 2025 10:26:13 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: &amp;apos;नो शुगर&amp;apos; चैलेंज, 30 दिन में पाएं ग्लोइंग स्किन और दुरुस्त सेहत, देखें चौंकाने वाले फायदे</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में रिफाइंड शुगर यानी की सफेद चीनी हमारी डेली लाइफ में शामिल हो चुकी है। सुबह की चाय से लेकर बिस्किट, मिठाइयों, ब्रेड, सॉस, मिठाइयों और यहां तक कि हेल्दी लगने वाले स्नैक्स तक में चीनी मौजूद होती है। अधिक शुगर का सेवन करने से न सिर्फ वेट बढ़ता है, बल्कि यह दिमाग, स्किन, नींद और पूरी सेहत पर भी बुरा असर डालता है। लेकिन अगर आप 30 दिनों तक सिर्फ रिफाइंड शुगर छोड़ देते हैं, तो आपके शरीर में हैरान कर देने वाले बदलाव आएंगे। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 30 दिन रिफाइंड शुगर छोड़ने के फायदे के बारे में बताने जा रहे हैं।वेट लॉस और कमर की चर्बी में कमीशुगर कैलोरी से भरपूर होती है, लेकिन इसमें पोषण शून्य होता है। इसको छोड़ने से शरीर जमा फैट को जलाना शुरू करता है। इससे वेट तेजी से घटता है, खासतौर पर पेट और कमर की चर्बी में फर्क दिखने लगता है।इसे भी पढ़ें: Women Health Care: अबॉर्शन के बाद इन चीज़ों से करें परहेज़, रिकवरी को मिलेगी गति, शरीर रहेगा स्वस्थएनर्जी लेवल में सुधारशुगर से मिलने वाली एनर्जी थोड़ी देर के लिए होती है और फिर थकान महसूस होती है। शुगर छोड़ने पर शरीर स्थायी एनर्जी पैदा करता है, जिससे आप दिनभर एक्टिव और फ्रेश फील करते हैं।स्किन में आएगा निखाररिफाइंड शुगर त्वचा में कोलेजन को नुकसान पहुंचाता है। जिससे डलनेस, झुर्रियां और पिंपल्स बढ़ते हैं। शुगर से दूरी बनाने के बाद स्किन में फर्मनेस, ग्लो और क्लियरनेस आने लगती है।बढ़ेगा दिमागी स्पष्टता और फोकसशुगर का ज्यादा सेवन मानसिक फॉग और फोकस की कमी पैदा करता है। 30 दिनों तक शुगर न लेने से दिमाग अधिक तेज, केंद्रित और शांत महसूस करता है।बेहतर होगी नींद की क्वालिटीशुगर का सेवन हमारे शरीर के हार्मोन बैलेंस को बिगाड़ती है। जिस वजह से नींद में खलल पड़ता है। शुगर न लेने से नींद सुकूनभरी और गहरी हो जाती है।मूड में स्थिरता और स्ट्रेस में कमीबता दें कि शुगर का सेवन करने से डोपामिन में असंतुलन आता है। जिस कारण मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन होता है। लेकिन शुगर न लेने पर मूड शांत और पॉजिटिव रहता है।डायबिटीज और हार्ट डिजीज का कम खतरारिफाइंड शुगर का सेवन न करने से इंसुलिन और ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। जिससे टाइप 2 डायबिटीज और हार्ट डिजीज का खतरा कम होता है।आप सिर्फ 30 दिन चीनी छोड़कर देखिए, इससे आपका मनोस्थिति, सेहत और रूप में ऐसा बदलाव आएगा कि आप खुद को पहले से ज्यादा खुश, हेल्दी और एनर्जेटिक महसूस कर पाएंगे। यह एक ऐसा चैलेंज है, जो आपकी जिंदगी को बदल सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 27 Dec 2025 10:26:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Health, Tips:, नो, शुगर, चैलेंज, दिन, में, पाएं, ग्लोइंग, स्किन, और, दुरुस्त, सेहत, देखें, चौंकाने, वाले, फायदे</media:keywords>
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<title>स्ट्रेस का सीधा असर गट और हार्मोन पर! अनियमित पीरियड्स से परेशान हैं तो जानें एक्सपर्ट की सलाह</title>
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<description><![CDATA[ भागदौड़ भारी जिंदगी में आमतौर पर लोग तनाव को मानसिक परेशानी मान लेते हैं। हालांकि, यह सच नहीं है कि स्ट्रेस केवल दिमाग तक सीमित नहीं रहता, वह शरीर में बस जाता है। न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह के अनुसार, जब कोई महिला लंबे समय तक तनाव में रहती है, तो उसका पहला असर पाचन तंत्र पर और हार्मोनल सिस्टम पर दिखाई देता है। इसकी वजह से ब्लोटिंग, एसिडिटी, गैस, अनियमित पीरियड्स, देर से साइकल आना या ज्यादा दर्द जैसे लक्षण आम हो जाते हैं। तनाव का प्रभाव केवल मानसिक नहीं होता, बल्कि इसका पहला असर पेट पर और उसके बाद मासिक चक्र पर दिखाई देता है। जब शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, तो वह पाचन तंत्र के साथ-साथ हार्मोन संतुलन को भी प्रभावित कर देता है।आयुर्वेद में इसे वात दोष के बढ़ने से भी जोड़ता है जो भागदौड़, ओवरथिंकिंग और अनियमित दिनचर्या से पैदा होता है। यदि तनाव को मैनेज नहीं किया जाता, तब तक गट और पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं बार-बार लौटती रहती हैं।स्ट्रेस कैसे गट और पीरियड्स को बिगाड़ता है?पाचन पर असरतनाव बढ़ने से पेट की आग कमजोर हो जाती है जिससे गैस, ब्लोटिंग और एसिडिटी होती है।हार्मोनल असंतुलनहाई कॉर्टिसोल के कारण एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन संतुलन खो देते हैं जिससे पीरियड्स लेट इर्रेगुलर हो सकते हैं। पीरियड क्रैम्प्स और दर्दतनाव मांसपेशियों को सख्त करता हैं, जिससे पीरियड्स के दौरान दर्द और ऐंठन बढ़ जाती है।आयुर्वेदिक नजरियाआयुर्वेद के अनुसार, ज्यादा भाग-दौड़, ओवरथिंकिंग और अनियमित दिनचर्या के कारण वात दोष बढ़ता है, इसका सीधा असर गट और मासिक धर्म पर पड़ता है।हीलिंग की शुरुआत कैसे हुई  - दिन की शुरुआत थोड़ी धीमी करें।  - गरम, हल्का और ताजा खाना खाएं। - बहुत ठंडा, प्रोसेस्ड और जंक फूड कम करें। - रात को पर्याप्त और गहरी नींद जरुर लें। - खाने से पहले 5-10 मिनट शांत बैठें या गहरी सांस लें।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 27 Dec 2025 10:26:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: कम चीनी बच्चों को देती है स्वस्थ भविष्य, दिल की बीमारियों से मिलेगी मुक्ति</title>
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<description><![CDATA[ कुछ दशकों पहले तक जो बीमारियां उम्र बढ़ने के साथ हुआ करती थीं। वह बीमारियां अब कम उम्र के लोगों और बच्चों को भी अपना शिकार बना रही हैं। यह वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट कम उम्र से ही स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। बता दें कि बच्चों का खानपान, खासकर अधिक शुगर और नमक का सेवन कई गंभीर बीमारियों का कारण बनता जा रहा है। शोध बताते हैं कि बच्चों के खाने में शुगर की अधिकता जैसे चॉकलेट, बिस्किट और जूस आदि उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है।अगर समय रहते इसको कंट्रोल न किया जाए, तो इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा हो सकता है। ऐसे में अगर आपका लाडला बच्चा भी अगर चीनी वाली चीजों का अधिक सेवन कर रहा है, तो आपको सावधान हो जाना चाहिए, क्योंकि यह गंभीर बीमारियों को न्योता देने जैसा है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: &#039;नो शुगर&#039; चैलेंज, 30 दिन में पाएं ग्लोइंग स्किन और दुरुस्त सेहत, देखें चौंकाने वाले फायदेज्यादा चीनी बच्चों की सेहत के लिए हानिकारकअध्ययनों से यह पता चलता है कि अधिक चीनी का सेवन करने से बच्चों में बार-बार बीमार पड़ने, एकाग्रता की कमी, मोटापा, हाइपरएक्टिविटी, प्रतिरोधक क्षमता की कमजोरी, दांतों की सड़न और डायबिटीज जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। वहीं पैक्ड फूड्स में भी हाई कैलोरी और हाई शुगर होती है, जिसको बच्चे काफी ज्यादा पसंद करते हैं। लेकिन लंबे समय तक इन चीजों का सेवन करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।एक अध्ययन में विशेषज्ञों ने बताया कि ज्यादा चीनी का सेवन करने से वेट बढ़ने और मोटापे से लेकर दिल की बीमारियों और डायबिटीज तक बच्चों की सेहत को कई नुकसान हो सकते हैं।3 साल तक के बच्चों को नहीं देनी चाहिए चीनीक्या जीवन के शुरूआती दौर में शुगर की मात्रा का सेवन कम करने से बड़े होने पर दिल की बीमारियों का जोखिम कम किया जा सकता है। हालांकि इसको समझने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने अध्ययन किया।इस अध्ययन में पाया गया कि जीवन के पहले 1,000 दिनों तक यानी की करीब 3 साल तक अगर बच्चों को चीनी वाली चीजें कम दी जाएं, तो इससे बड़े होने पर कार्डियोवैस्कुलर यानी की दिल और धमनियों से संबंधित बीमारियों का जोखिम कम हो जाता है।ज्यादा चीनी से होने वाली समस्याएंयूके बायोबैंक में 63,433 बच्चों के डेटा अध्ययन के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की गई। इन बच्चों में कोई आम कार्डियोवैस्कुलर बीमारी नहीं थी। इस अध्ययन में पाया गया कि जिन बच्चों को जन्म के दो साल तक चीनी वाली चीजें कम दी गई हैं, उनमें कार्डियोवैस्कुलर बीमारी का खतरा उन बच्चों की तुलना में 20 प्रतिशत कम था, जिन बच्चों ने चीनी से भरपूर चीजों का सेवन किया था।जो बच्चे कम चीनी का सेवन करते हैं, उनमें हार्ट फेलियर 26%, मायोकार्डियल इन्फार्क्शन 25%, एट्रियल फिब्रिलेशन 24%, स्ट्रोक 31% और कार्डियोवैस्कुलर बीमारी से होने वाली मौत का 27% का जोखिम कम था।हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, अक्सर बच्चे दिनभर में जितना चीनी का सेवन करते हैं, उनका उनको पता नहीं चलता। WHO की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिनभर बच्चों को 25 ग्राम से अधिक चीनी नहीं लेनी चाहिए। लेकिन भारत में अधिकतर बच्चे कहीं अधिक चीनी रोजाना ले रहे हैं। इसका सीधा असर बच्चों के दांतों, वजन, ऊर्जा लेवल और यहां तक कि फ्यूचर में होने वाली बीमारियों पर भी पड़ता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 27 Dec 2025 10:26:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: पीसीओडी में करना है वेट लॉस, तो डाइट में शामिल करें ये इवनिंग स्नैक्स</title>
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<description><![CDATA[ पीसीओडी में वेट लॉस करना काफी मुश्किल होता है और इसमें सबसे बड़ी बाधा होती है इवनिंग स्नैक्स। शाम के समय हमेशा कुछ उल्टा-सीधा खाने का मन करता है और ऐसे में पूरी डाइट खराब हो जाती है। कभी हम चाय के साथ बिस्किट खा लेते हैं तो कभी नमकीन और फिर हमें बाद में गिल्ट होता है।हो सकता है कि आप भी इसी चक्र में फंसी हुई हो, लेकिन आपको वास्तव में परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगर आप अपने इवनिंग स्नैक्स को थोड़ा स्मार्टली चुनें तो ऐसे में आपको अपने टेस्ट के साथ भी कोई समझौता नहीं करना पड़ेगा और आप अपनी हेल्थ का ख्याल भी रख पाएंगे। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही इवनिंग स्नैक्स के बारे में बता रहे हैं, जो पीसीओडी में अच्छा ऑप्शन साबित हो सकते हैं-इसे भी पढ़ें: Health Tips: कम चीनी बच्चों को देती है स्वस्थ भविष्य, दिल की बीमारियों से मिलेगी मुक्तिभुना हुआ चना  शाम के समय अगर आपको हल्की भूख लग रही है तो ऐसे में मुट्ठीभर भुना हुआ चना खा सकती हैं। इसमें मौजूद प्रोटीन ना केवल क्रेविंग को कम करता है, बल्कि इससे ब्लड शुगर भी स्टेबल रहता है और ऐसे में फैट स्टोरेज कम होता है। साथ ही साथ, इससे आपको बहुत ज्यादा भूख भी नहीं लगती है।  पनीर वेज बाउलपनीर को हार्मोन बैलेंस के लिए कए अच्छा प्रोटीन माना जाता है। आप लगभग 50-70 ग्राम पनीर और खीरा व टमाटर से एक अच्छा बाउल तैयार करें। इससे पेट देर तक भरा रहता है। अगर आप इन दिनों वेट लॉस पर हैं तो ऐसे में आप लो फैट पनीर का इस्तेमाल करें। स्प्राउट्स चाट  शाम के समय स्प्राउट्स की चाट खाना भी अच्छा विचार माना जाता है। इसके लिए आप स्प्राउट्स मूंग में नमक व नींबू डालकर मिक्स करें। इसमें मौजूद फाइबर डाइजेशन को बेहतर बनाता है। साथ ही साथ, अगर आपको पीसीओडी में कब्ज की शिकायत रहती है तो इसमें भी आपको फायदा मिलता है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि आप इसे शाम में ही खाएं, रात में नहीं।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Sat, 27 Dec 2025 10:26:09 +0530</pubDate>
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<title>ओवरथिंकिंग से पेट खराब! दिमाग&#45;आंत कनेक्शन समझे, जाने क्या कहते हैं एक्सपर्ट?</title>
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<description><![CDATA[ आजकल की भागदौड़ भारी जिंदगी में लोग ओवरथिंकिंग में ज्यादा समय बिता रहे हैं। हर बार जरुरत ज्यादा सोचना हर व्यक्ति जीवन का एक हिस्सा बन चुका है। छोटी-सी बात हो या बड़ा फैसला, दिमाग बार-बार उसी पर अटक जाता है। दिलचस्प बात तो यह है कि जब आपका दिमाग लगातार चलता रहता है , तो सबसे पहले असर हमारे पेट पर नजर आता है। कभी अचानक से पेट दर्द शुरु होने लगता है, तो कभी गैस, एसिडिटी, पेट खराब या मतली महसूस होने लगती है। ऐसे में कुछ लोगों को लगता हैं कि मैंने कुछ गलत खा लिया है, जबकि असल वजह खाना नहीं, बल्कि मन में चल रहा तनाव होता है। कई बार आपने देखा होगा कि परीक्षा, इंटरव्यू, ऑफिस प्रेजेंटेशन या किसी इमोशनल टेंशन के दौरान पेट में गड़बड़ी होने लगती हैं। कई लोग तो बार-बार टॉयलेट जाना पड़ता है, तो कुछ का पेट जकड़ जाता है। आइए आपको बताते हैं क्यों ज्यादा सोचने से पेट खराब हो जाता है?ज्यादा सोचने से पेट खराब क्यों हो जाता है? हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, दिमाग और पेच के बीच एक मजबूत रिश्ता होता है, जिसे गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है। इसका मतलब है कि हमारा दिमाग और पाचन तंत्र लगातार एक-दूसरे से संवाद करते रहते हैं। गौरतलब है कि हम शांत रहते हैं, तो पाचन प्रक्रिया सामान्य रहती है, लेकिन जैसे ही हम जरुरत से ज्यादा सोचने लगते हैं, जिसके बाद से संतुलन बिगड़ने लगता है। कहते हैं ओवरथिंकिंग के दौरान दिमाग लगातार तनाव की स्थिति में रहता है, जिसका सीधा असर पेट की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। इसी दौरान शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होते हैं। ये हार्मोन शरीर को खतरे से निपटने के लिए तैयार करते हैं, हालांकि पाचन को प्राथमिकता नहीं देते हैं।डॉक्टर के मुताबिक, तनाव और बार-बार ओवरथिंकिंग के कारण शरीर खून की सप्लाई को पेट और आंतों से हटाकर मांसपेशियों की तरफ भेजता है। जिससे पेट और आंतों का काम प्रभावित होता है। ये होते हैं कारण  - पेट दर्द और ऐंठन  - गैस और पेट फूलना    - मतली और उल्टी जैसा महसूस होना  - एसिडिटी और सीने में जलनपाचन पर ओवरथिंकिंग का असरओवरथिंकिंग और मानसिक तनाव का असर के कारण केवल पेट के मूवमेंट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह गट बैक्टीरिया को भी प्रभावित करता है। आंतों में स्थित अच्छे बैक्टीरिया पाचन और इम्यूनिटी के लिए बेहद जरुरी होते हैं। वहीं, लंबे समय तक स्ट्रेस लेने से तनाव रहने से इन बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे पाचन कमजोर हो जाता है, इम्यूनिटी भी कमजोर हो जाती है। इसके साथ ही पेट से संबंधित समस्याएं बार-बार होने लगती हैं। कब डॉक्टर को दिखाएं?यदि ओवरथिंकिंग के साथ पेट की समस्या लंबे समय तक चल रही है, वजन तेजी से घट रहा है, चो लगातार उल्टी, खून आना या तेज दर्द हो, तुरंत ही डॉक्टर को जरुर दिखाएं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 27 Dec 2025 10:26:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>ओवरथिंकिंग, से, पेट, खराब, दिमाग-आंत, कनेक्शन, समझे, जाने, क्या, कहते, हैं, एक्सपर्ट</media:keywords>
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<title>Health Tips: मेनोपॉज सिर्फ हार्मोनल नहीं, दिमाग और न्यूरोलॉजी पर डालता है गहरा असर</title>
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<description><![CDATA[ अब तक दुनियाभर में मेनोपॉज को सिर्फ प्रजनन क्षमता से जुड़े स्वाभाविक जैविक चरण के रूप में देखा जाता है। लेकिन हाल ही में हुए वैज्ञानिक शोध इस ओर संकेत देता है कि यह बदलाव सिर्फ हार्मोनल इतार-चढ़ाव तक ही सीमित नहीं है। बल्कि यह बदलाव न्यूरोलॉजी, दिमाग की संरचना और संज्ञानात्मक क्षमता पर भी गहरा असर डालता है। बता दें कि मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के दिमाग में होने वाले बदलाव निर्णय क्षमता, स्मरणशक्ति, भावनात्मक संतुलन और मानसिक स्पष्टता को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।हालांकि दुनियाभर की करोड़ों महिलाएं इस समस्या का सामना कर रही हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक हेल्थ और तंत्रिका विज्ञान के एक्सपर्ट के बीच इस विषय पर बढ़ते इंट्रेस्ट को देखते हुए मेनोपॉज के दौरान दिमाग की कार्यप्रणाली और ढांचे में आने वाले बदलावों का गहन अध्ययन किया गया है।इसे भी पढ़ें: Lemon Water For Fat Loss: सही तरह से पीएंगे नींबू पानी तो देखते ही देखते पिघल जाएगी पेट की चर्बीकई निष्कर्षों से यह पता चलता है कि पीरियड्स खत्म होने के बाद दिमाग के कई हिस्सों में ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है। साथ ही ब्रेन वॉल्यूम में संकुचन देखा गया है। यही वजह है कि मेनोपॉज में प्रवेश करने वाली कई महिलाएं ब्रेन फॉग, एकाग्रता में कमी और भूलने की आदत जैसे लक्षणों को महसूस करती हैं। यहां तक कि महिलाओं का सेल्फ कॉन्फिडेंस भी पूरी तरह से डोल जाता है और वह खुद को कमजोर समझने लगती हैं।जागरूक महिलाएं कर लेती हैं परिवर्तनयह शोध इस ओर भी संकेत देता है कि दिमाग धीरे-धीरे इस बदलाव को अपनाने की क्षमता को विकसित कर लेता है। वहीं जागरुक महिलाएं कुछ सालों में संज्ञानात्मक स्थिरता फिर से पा लेती है। 54 फीसदी महिलाओं में यह पाया गया है कि मेनोपॉज की शुरूआत के साथ ही दिमाग पर कई अहम प्रभाव सामने आए हैं। जैसे- स्मृति और तर्क क्षमता संभालने वाले हिस्सों में 1-2% संकुचन, मस्तिष्क में ऊर्जा उत्पादन 10-15% तक कम होना, दिमाग में ब्लड प्रवाह 12-14% तक घटा, 54% महिलाओं में मूड स्विंग और भावनात्मक अस्थिरता और 62% महिलाओं ने ब्रेन फाग और भूलने की समस्या की शिकायत की।दिमागी सेहत के लिए अहम मोड़एक रिपोर्ट के मुताबिक मेनोपॉज सिर्फ महिला जीवन के लिए एक जैविक अध्याय नहीं बल्कि मेंटल हेल्थ के लिए भी निर्णायक मोड़ है। आने वाले सालों में यह शोध न सिर्फ ट्रीटमेंट सिस्टम और मेंटल हेल्थ पॉलिसी को दिशा देगा। बल्कि समाज में महिलाओं की हेल्थ को लेकर दृष्टिकोण बदलने में भी मददगार होगा। वैज्ञानिक समझ, जागरुकता और समय पर मेडिकल देखभाल के साथ मेनोपॉज जीवन की एक स्थिर और स्वस्थ अवस्था की ओर मार्ग प्रशस्त कर सकता है। इस दौरान महिलाओं को मानसिक रूप से होने वाली बहुत सारी समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 23 Dec 2025 17:20:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Health, Tips:, मेनोपॉज, सिर्फ, हार्मोनल, नहीं, दिमाग, और, न्यूरोलॉजी, पर, डालता, है, गहरा, असर</media:keywords>
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<title>Health Tips: किडनी स्टोन के मरीज तले&#45;भुने खाने से रहें कोसों दूर, इन चीज़ों को आज ही डाइट से करें बाहर</title>
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<description><![CDATA[ गुर्दे की पथरी या किडनी स्टोन एक ऐसी दर्दनाक स्थिति है, जिसमें डाइट और लाइफस्टाइल पर कंट्रोल रखना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या किडनी स्टोन के मरीज तला-भुना खा सकते हैं। बता दें कि तले-भुने खाने में फैट और सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है। ज्यादा फैट का सेवन करने से शरीर पाचन तंत्र को बाधित करता है और पथरी की समस्या को बढ़ा सकता है।ज्यादा सोडियम का सेवन किडनी पर ज्यादा दबाव डालता है। इससे मूत्र में कैल्शियम का उत्सर्जन बढ़ जाता है। यह पथरी बनने की प्रक्रिया को तेज कर देता है। इसलिए पकौड़े, समोसे, पूड़ियां और चिप्स जैसे तले-भुने खाद्य पदार्थों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। इसकी जगह पर उबले या भुने हुए भोजन को प्राथमिकता पर रखना चाहिए। डाइट में किया गया बदलाव न सिर्फ पथरी को दोबारा बनने से रोकेगा, बल्कि पथरी की वजह से किडनी पर पड़ने वाला दबाव भी कम करेगा।इसे भी पढ़ें: Health Tips: मेनोपॉज सिर्फ हार्मोनल नहीं, दिमाग और न्यूरोलॉजी पर डालता है गहरा असरनमक और प्रोसेस्ड फूड्स से करें परहेजकिडनी स्टोन के मरीजों को नमक का कम से कम सेवन करना चाहिए। ज्यादा सोडियन वाला खाना मूत्र में कैल्शियम की मात्रा को बढ़ा देते हैं। जिससे कैल्शियम ऑक्सालेट पथरी बनने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। इसलिए डिब्बाबंद सूप, पैकेज्ड फूड्स, सॉस और अचार को खाने से पूरी तरह से परहेज करना चाहिए। क्योंकि इन सभी चीजों को सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है।ऑक्सालेट युक्त खाद्य पदार्थपथरी कई तरह की होती है, जिनमें से एक पथरी का प्रकार कैल्शियम ऑक्सालेट भी है। यह पथरी का सबसे आम प्रकार माना जाता है। अगर यह पथरी हो जाए, तो व्यक्ति को ऑक्सालेट से भरपूर खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए। इनमें मुख्य रूप से चुकंदर, चॉकलेट, पालक और चाय का ज्यादा सेवन शामिल है। इसलिए इन चीजों का सेवन नहीं करें या फिर सीमित मात्रा में करें।रेड मीट और प्रोटीन का ज्यादा सेवनसमुद्री खाना, रेड मीट और मुर्गे में प्यूरीन की मात्रा ज्यादा होती है। शरीर में प्यूरीन के टूटने से यूरिक एसिड बनता है। ज्यादा नॉनवेज खाने से यूरिक एसिड पथरी का खतना अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में प्रोटीन का सेवन संतुलित रखना चाहिए। क्योंकि अधिक प्रोटीन लेने से किडनी पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।सॉफ्ट ड्रिंक और आर्टिफिशियल शुगरबता दें कि कोल्ड ड्रिंक और सॉफ्ट ड्रिंक में चीनी और फॉस्फोरिक एसिड की मात्रा ज्यादा होती है। वहीं यह दोनों ही तत्व मूत्र में पथरी बनाने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं। आर्टिफिशियल शुगर और फ्लेवर्ड जूस भी किडनी के लिए अच्छे नहीं होते हैं। इसकी जगह पर आप नींबू पानी या फिर सादा पानी पीना ज्यादा फायदेमंद होता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 23 Dec 2025 17:20:38 +0530</pubDate>
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<title>महिलाओं के लिए Health Resolutions 2026; जरुर लें ये 5 संकल्प, दिखेंगी हेल्दी&#45;फिट</title>
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<description><![CDATA[ 2025 का आखिरी महीना दिसंबर खत्म होने में कुछ ही दिन रह गए। ऐसे में साल 2026 कुछ ही दिनों में दस्तक देने वाला है। प्रत्येक व्यक्ति नव वर्ष का उत्साह के साथ इंतजार कर रहा है। हर कोई नए साल, नई ऊर्जा व नई शुरुआत के साथ करना चाहते हैं। ऐसे में आप ने बीते साल जो भी गलतियां की है, उन्हें आने वाले साल में न दोहराएं। आने वाले नए साल में महिलाओं को अपने हेल्थ का विशेष ध्यान रखना है। हर महिला को अपने लिए समय निकालकर अपनी हेल्थ पर फोकस करना है। साल 2026 में आप कुछ ऐसे संकल्प लें, जिन्हें आप पूरा साल फॉलो कर सकें। पहला संकल्प- पूरे साल बैलेंस्ड डाइटमहिलाएं चाहे नौकरीपेशा हों या गृहिणी, अक्सर परिवार के हर सदस्य के खाने-पीने का पूरा ध्यान रखती हैं, लेकिन अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। अब 2026 के लिए यह संकल्प लें कि आप यह गलती नहीं दोहराएंगी। आने वाले साल में अपनी डाइट को संतुलित रखेंगी और खुद को प्राथमिकता देंगी। अपने भोजन में हरी सब्जियां, ताजे फल और साबुत अनाज को शामिल करेंगी। साथ ही लीन प्रोटीन और फाइबर से भरपूर आहार को भी अपनी दिनचर्या का अहम हिस्सा बनाएंगी।संकल्प 2 - एक्सरसाइज जरुर करेंमहिलाएं अपने कामकाज में इतनी व्यस्त रहती है वे अपने अच्छी सेहत के लिए फिजिकली एक्टिविटी करने का समय न के बराबर होता है। आने वाले साल में यह संकल्प  जरुर लें कि आप अपने लिए केवल आधा घंटा जरुर निकालेंगी। इस दौरान आप वर्कआउट कर सकते हैं। चाहे आप वॉक भी कर सकते हैं। ऐसा करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होगा और बीमारियों को जोखिम भी कम करेगा। संकल्प 3 - इमोशनल हेल्थ फिट रखेंआजकल महिलाएं तनाव ज्यादा लेती है, ऐसे में आने वाले साल में महिलाएं संकल्प जरुर लें कि इमोशनल हेल्थ का ध्यान रखना है, इसको कभी भी अनदेखा न करें। पूरा साल महिलाएं अपना परिवार, बच्चों को इतना महत्व देती हैं कि खुद को इमोशनली फिट रखने के बारे में सोचती हैं। इसलिए नए साल में खुद को इमोशनली फिट रखेंगे। इसलिए स्ट्रेस से दूर रहें, तनाव को मैनेज करेंगी, रोजाना डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करेंगी।संकल्प 4- अच्छी आदतें अपनाएंगीअक्सर देखा जाता है कि महिलाएं अपनी दिनचर्या और आदतों को लेकर सजग रहती हैं, लेकिन स्वास्थ्य से जुड़ी बातों में लापरवाही कर जाती हैं। आने वाले साल में जरूरी है कि वे अच्छी हेल्थ हैबिट्स अपनाने का संकल्प लें। रोज पर्याप्त पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेटेड रखें। समय-समय पर पूरे शरीर की जांच करवाएं और खुद के लिए सेल्फ केयर का समय निकालें। साथ ही धूम्रपान या शराब जैसी नुकसानदायक आदतों से दूरी बनाने की भी कोशिश करें, ताकि सेहतमंद जीवन जी सकें। संकल्प 5- हेल्थ प्रोग्रेस को मॉनिटर करें अक्सर होता है कि महिलाओं का स्वास्थ्य खराब न हो जाए, तब तक शायद ही कोई महिला अपने हेल्थ के प्रति जागरुक होती है। इस साल भी आप यह गलती को दोहराने से बचें। अब आप संकल्प ले कि आने वाले साल में आप अपनी हेल्थ प्रोग्रेस को मॉनिट करेंगी। इसका मतलब है कि जब एनर्जी का स्तर कम महसूस हो, अक्सर थकान लगे, रात को नींद अच्छी न हो, तो इन चीजों को इग्नोर ना करें। इसके अलावा, अपने बढ़ते वजन को लाइफस्टाइल की गलती सोचकर नजरअंदाज नहीं करेंगी।   इसके बजाय इनमें सुधार करने की जरुर है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 23 Dec 2025 17:20:38 +0530</pubDate>
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<title>भुने चने छिलके सहित खाना फायदेमंद या नुकसानदायक? जानिए विशेषज्ञ की राय</title>
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<description><![CDATA[ भुना चना एक ऐसा स्नैक है जिसे लोग सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखते हैं। अक्सर स्वाद के कारण हम इसे ज्यादा मात्रा में खा लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भुने चने को उसके छिलके के साथ खाना सही है या नहीं? आइए जानते हैं कि छिलके सहित भुने चने खाने से सेहत पर क्या प्रभाव पड़ता है।भुने चने छिलके सहित क्यों खाने चाहिएस्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भुने चनों का सेवन हमेशा उनके छिलके के साथ करना ज्यादा फायदेमंद होता है। छिलके में मौजूद पोषक तत्व शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं। आइए जानते हैं इसके मुख्य फायदे।पाचन तंत्र को मिलती है मजबूतीअगर आपको पाचन से जुड़ी दिक्कतें रहती हैं, तो छिलके समेत भुने चने खाना फायदेमंद हो सकता है। इसमें भरपूर फाइबर होता है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है।नर्वस सिस्टम रहता है संतुलितछिलके सहित भुने चने खाने से नर्वस सिस्टम को भी लाभ मिलता है। इसमें राइबोफ्लेविन, नियासिन, थायमिन, फोलेट और विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो नर्वस सिस्टम को संतुलित रखने में सहायक होते हैं।एनर्जी बढ़ाने में सहायकअगर आपको अक्सर थकान या कमजोरी महसूस होती है, तो छिलके सहित भुने चने का सेवन लाभकारी हो सकता है। यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है और दिनभर एक्टिव बने रहने में मदद करता है।हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मददगारभुने चनों में प्रोटीन के साथ-साथ आयरन और अन्य जरूरी पोषक तत्व भरपूर होते हैं। इनके नियमित सेवन से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ सकता है, जिससे खून की कमी दूर करने में सहायता मिलती है।दिल की सेहत के लिए फायदेमंदछिलके सहित भुने चने खाने से दिल को भी लाभ होता है। यह हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है और दिल से जुड़ी कई समस्याओं के जोखिम को कम कर सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 23 Dec 2025 17:20:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>दादी&#45;नानी के अजमाएं नुस्खें से शिशु पड़ सकता है बीमार, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट</title>
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<description><![CDATA[ एक समय था जब भारत में शिशु मृत्य दर काफी गिर गया था। उस समय आधुनिक तकनीकी साधन का काफी अभाव था। डॉक्टरों की कमी भी थी। लेकिन आज के समय में भारत में काफी बदल गया है। शिशु मृत्यु दर पहले से काफी सुधार हुआ है। पहले शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 पर 100 घटकर अब 25 हो गया, इसमें काफी सुधार हुआ है। फेमस डॉक्टर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो शेयर की, जिसमें उन्होंने बताया कि 2 महीने के बच्चे को शहद चटाया था जिससे वह बच्चा बीमार हो गया और ICU में भर्ती हो गया था। आइए जानते हैं 1 साल से छोटे बच्चे की केयर कैसे करें।दादी-नानी के बताए नुस्खें को न अजमाएंआज के समय में विज्ञान ने काफी तरक्की की है और नई-नई तकनीकी सुविधा आ गई है। जिससे बच्चों के विकास में काफी बदलाव आया है। भारत में एक समय पर शिशु मृत्यु दर 1000 पर 100 थी, लेकिन आज के समय में 25 है। बेहतर सुविधाएं और इलाज से बच्चों की केयर हो रही है। डॉ पवन ने अपने वीडियो में बताया कि उनके पास 2 महीने का बच्चा आया जो ICU में भर्ती है क्योंकि उसकी दादी ने शहद चटाया था। पहले के समय में दादी-नानी के बताए नुस्खे से बच्चों का उपचार किया जाता था लेकिन आज के समय यह सही नहीं है। बच्चों को बिना डॉक्टर के सलाह कुछ भी घर पर इलाज नहीं किया जाना चाहिए। जरुरी नहीं घरेलू नुस्खे से ही शिशु मृत्य दर पहले बढ़ी थी, डॉक्टर पवन ने आगे बताया है कि जरुरी नहीं है कि दादी-नानी के अजमाएं उपाय से ही शिशु मृत्यु दर बढ़ी है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। इसके पीछे और कुछ कारण भी हो सकता है।1 साल से कम बच्चों का ने दें ये चीजेंएक्सपर्ट ने बताया  कि 1 साल से छोटे बच्चों को न शहद चटाएं और गाय का दूध भूलकर भी न दें। गाय का दूध बच्चे पचा नहीं सकते इसलिए न दे। इसके अलावा कोई भी दादी का बताया हुआ उपाय बच्चे पर अप्लाई न करें।

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<pubDate>Tue, 23 Dec 2025 17:20:36 +0530</pubDate>
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<title>Testosterone Therapy: पुरुषों के लिए टेस्टोस्टेरोन थेरेपी, वरदान या छिपा हुआ खतरा? जानिए पूरा सच</title>
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<description><![CDATA[ अगर आपको हर समय थकान महसूस होती है या फिर आपकी मांसपेशियों और सेक्स ड्राइव की ताकत घट रही है। तो आप अकेले नहीं हैं, जिसके साथ ऐसा हो रहा है। अक्सर पुरुष इन बदलावों को सामान्य उम्र का संकेत मान लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, &#039;खोई हुई जवानी को वापस पाने का जादुई रास्ता&#039; बनकर टेस्टोस्टेरोन थेरेपी है। यह उन पुरुषों के लिए राहत का जरिया बन सकती है, जिन लोगों में हार्मोन का लेवल वाकई कम है। टेस्टोस्टेरोन थेरेपी मूड, एनर्जी और सेक्शुअल हेल्थ को नई रफ्तार दे सकती है।हालांकि, जिस तरह से हर चमकती चीज सोना नहीं होती है, उस तरह से टेस्टोस्टेरोन थेरेपी के कई साइड इफेक्ट्स भी हैं। जिन पर ध्यान देना जरूरी है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस ट्रीटमेंट के फायदे और नुकसान के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Ayurvedic Diet for Winter: सर्दियों में हेल्दी रहने के लिए इन खाद्य पदार्थों का सेवन, जानिए क्या कहता है आयुर्वेदक्यों ली जाती है टेस्टोस्टेरोन थेरेपीबता दें कि टेस्टोस्टेरोन एक महत्वपूर्ण हार्मोन है, जोकि सेक्शुअल हेल्थ, एनर्जी, मांसपेशियों की ताकत और मानसिक संतुलन जैसे कई पहलुओं को प्रभावित करता है। जब टेस्टोस्टेरोन का लेवल कम हो जाता है, तो हमारा शरीर कई तरह के संकेत देने लगता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह पर टेस्टोस्टेरोन थेरेपी एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। जानिए टेस्टोस्टेरोन थेरेपी के फायदेथकान में कमी और बढ़ेगी एनर्जीहार्मोन की कमी से अक्सर सुस्ती, लगातार थकान और एनर्जी में कमी महसूस होती है। थेरेपी से एनर्जी लेवल बेहतर होता है और दिन भर सक्रियता बढ़ती है।बेहतर सेक्शुअल हेल्थटेस्टोस्टेरोन पुरुषों की सेक्स ड्राइव, उत्तेजना और संपूर्ण यौन संतुष्टि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस ट्रीटमेंट से कामेच्छा में भी सुधार होता है और कई पुरुषों में पहले की तुलना में बेहतर यौन अनुभव महसूस करते हैं।मूड और मेंटल हेल्थ में सुधार होनाकम टेस्टोस्टेरोन अक्सर उदासी, चिड़चिड़ापन या मानसिक धुंधलेपन की वजह बनता है। इस ट्रीटमेंट से ध्यान और मूड बेहतर होता है और साथ ही मानसिक स्पष्टता भी बढ़ती है।मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूतीटेस्टोस्टेरोन हार्मोन शरीर में मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ बोन डेंसिटी को बनाए रखने में सहायता करता है। इसके रेगुलर ट्रीटमेंट से शरीर में मांसपेशियों की परिभाषा बेहतर होती है। वहीं उम्र बढ़ने पर हड्डियों से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी कम हो सकता है।यहां जानिए टेस्टोस्टेरोन थेरेपी के नुकसानहालांकि इस ट्रीटमेंट के साथ कुछ न कुछ खतरे भी जुड़े होते हैं। वहीं टेस्टोस्टेरोन थेरेपी भी इससे अलग नहीं है।ब्लड वेसल्स से जुड़ा खतराकुछ शोध के मुताबिक यह ट्रीटमेंट खासकर बुजुर्ग पुरुषों या पहले से दिल संबंधी बीमारी वाले लोगों में दिल का दौरा या स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती है।स्किन पर साइड इफेक्ट्सइस ट्रीटमेंट का साइड इफेक्ट स्किन पर भी दिखाई दे सकता है, जैसे स्किन का ऑयली होना, पिंपल और हेयर फॉल जैसी समस्याएं हो सकती हैं।स्लीप एपनियाजिन पुरुषों में पहले से स्लीप एपनिया है, उनमें यह समस्या अधिक गंभीर हो सकती है।प्रजनन क्षमता पर प्रभावयह ट्रीटमेंट लेने से शरीर अपने प्राकृतिक हार्मोन बनाना धीमा कर देता है। जिस कारण स्पर्म काउंट कम हो सकता है और यह प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।प्रोस्टेट से जुड़ा जोखिमवैसे सीधे तौर पर टेस्टोस्टेरोन प्रोसेस्ट कैंसर की वजह नहीं है, लेकिन यह पहले से मौजूद कैंसर सेल्स की एक्टिविटी को बढ़ा सकता है या फिर बढ़े हुए प्रोस्टेट के लक्षणों को अधिक गंभीर कर सकता है।यह ट्रीटमेंट आपके सही या नहींकई लोगों की जीवन गुणवत्ता में यह टेस्टोस्टेरोन थेरेपी बड़ा सुधार ला सकती है। लेकिन इसको शुरू करना एक बड़ा और सोच-समझकर लिया गया कदम होना चाहिए।इन बातों का रखें ध्यानडॉक्टर की सलाह पर विस्तृत जांच कराना चाहिए।दिल, प्रोस्टेट और हार्मोन की नियमित निगरानी जरूरी है।लगातार विशेषज्ञ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट या यूरोलॉजिस्ट से संपर्क में बने रहें।सावधानी और सही निगरानी के साथ यह ट्रीटमेंट कई पुरुषों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि हर स्थिति अलग होती है, इसलिए हमेशा एक्सपर्ट की सलाह पर लेना चाहिए।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 21 Dec 2025 18:27:50 +0530</pubDate>
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<title>सर्दियों में जिम की No Tension! सिर्फ घर पर ही फिट रहने के लिए 3 मिनट करें यह 1 एक्सरसाइज, जाने इसकी खासियत</title>
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<description><![CDATA[ सर्दियों के मौसम में रजाई से निकलना बेहद ही मुश्किल होता है। विंटर में जिम जाना या लंबी एक्सरसाइज करना भी नामुमकिन लगता है। यदि आप भी फिट रहना चाहती हैं, लेकिन ठंड की वजह से एक्सरसाइज नहीं करती, तो अब आपको चिंता करने की कोई जरुरत नहीं हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि घर में आसान तरीके से असरदार एक्सरसाइज करने से आप फिट नजर आएगी। रोजाना केवल 3 मिनट के लिए फिट और एक्टिव रह सकती हैं। यह एक्सरसाइज मालासन वॉक है। फिटेनस एक्सपर्ट के मुताबिक, मालासन वॉक महिलाओं के शरीर के लिए खासतौर पर फायदेमंद होती है। यह फिटनेस को बढ़ाती है और हार्मोनल बैलेंस और रिप्रोडक्टिव हेल्थ में भी काफी सहायक है। क्या है मालासन वॉक?मालासन एक स्कवाट पोज है, जिसमें पैरों को थोड़ा फैलाकर बैठा जाता है। फिर इसी पोज में धीरे-धीरे आगे बढ़ा जाता है, तो इसे मालासन वॉक कहते हैं। इसको आप घर के अंदर या खुले स्थान पर कहीं भी आराम से कर सकते हैं।मालासन वॉक कैसे करें?  - इसके लिए पैरों को थोड़ा चौड़ा करके स्क्वाट पोज में बैंठ जाएं।  - अब पीठ सीधी रखें और दोनों हाथ सामने या नमस्कार मुद्रा में रखें।  - इसी पोजिशन में छोटे-छोटे कदमों से आगे बढ़े।  - शुरु-शुरु में 30 सेकेंड से शुरु करें और धीरे-धीरे 3 मिनट तक करें। मालासन वॉक के फायदे  - इस एक्सरसाइज करने से महिलाओं की फर्टिलिटी बढ़ाने में सहायक होती है।  - पीरियड्स को रेगुलेट करती है और क्रैम्प्स कम करती है।  - कब्ज को राहत दिलाती है और डाइजेशन को सुधारती है। - यह एक्सरसाइज करने से लोअर बैक और हिप्स में मजबूती आती है।  - यह लोअर बॉडी को टोन भी करती है।  - यदि आप तेजी से कैलोरी बर्न करना चाहती हैं, तो इसे रोजाना करें।  - इसके अलावा, सेक्सुअल एनर्जी को बैलेंस करती है और इमोशनल ब्लॉकेज रिलीज करती है। क्या है इस एक्सरसाइज की खासियत?मालासन वॉक उन महिलाओं के लिए एक आसान और प्रभावी व्यायाम है, जिनके पास समय की कमी होती है या जो कठिन वर्कआउट नहीं कर पातीं। यह एक्सरसाइज हर उम्र की महिलाओं के लिए सुरक्षित मानी जाती है और सर्दियों के मौसम में शरीर को अंदर से गर्म रखने में भी मदद करती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 21 Dec 2025 18:27:49 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: 6 घंटे से कम नींद लेने पर हो जाना चाहिए अलर्ट, शरीर में शुरू हो जाती है &amp;apos;गंभीर हलचल&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप भी रोजाना देर रात तक काम खत्म करने, मोबाइल चलाने या फिर बस वक्त काटने के चक्कर में 6 घंटे से कम नींद लेते हैं। तो यह आदत धीरे-धीरे आपके शरीर के अंदर ऐसी हलचल पैदा करती है। जिसका लंबे समय तक असर महसूस होता है। हालांकि शुरूआत में चिड़चिड़ापन, थकान या भारीपन महसूस होता है। लेकिन असल नुकसान तो शरीर के भीतर शुरू हो चुका होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि 6 घंटे से कम नींद लेने पर शरीर को क्या नुकसान पहुंचता है।शरीर का रीसेट बटननींद सिर्फ आराम के लिए नहीं बल्कि यह वह समय होता है, जब शरीर खुद को रिपेयर करता है। हार्मोन संतुलित करता है और दिमाग से टॉक्सिन्स को साफ करता है। लेकिन जब आप 6 घंटे से कम नींद लेते हैं, तो इससे पूरा तंत्र बिगड़ने लगता है।इसे भी पढ़ें: Testosterone Therapy: पुरुषों के लिए टेस्टोस्टेरोन थेरेपी, वरदान या छिपा हुआ खतरा? जानिए पूरा सचहार्मोनल सिस्टम का असंतुलनसबसे पहले कम नींद एंडोक्राइन सिस्टम यानी हार्मोन तंत्र को प्रभावित करती है। तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का लेवल लंबे समय तक बढ़ा रहता है। जिस कारण लगातार शरीर अलर्ट मोड में रहता है। इसके साथ ही चिड़चिड़ापन, चिंता, भूख और ब्लड प्रेशर पर असर डालता है। रोजाना 6 घंटे से कम नींद लेने पर शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ने लगता है। जिससे टाइप 2 डायबिटीज का खतरा समय के साथ बढ़ जाता है।दिल पर बढ़ता है बोझनींद की कमी का सबसे ज्यादा असर हमारे हार्ट पर पड़ता है। रिसर्च के मुताबिक नियमित रूप से कम नींद लेने वाले लोगों में अनियमित दिल की धड़कन, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा अधिक होती है।नींद की कमी रक्त वाहिकाओं में सूजन को बढ़ाती है। जिसकी वजह से दिल लगातार दबाव में रहता है। वहीं अगर किसी को पहले से दिल की बीमारी है, तो नींद की कमी सेहत को अधिक गंभीर बना सकती हैं।कमजोर इम्युनिटीवहीं गहरी नींद के दौरान शरीर साइटोकिन्स जैसे प्रोटीन बनाता है। जोकि सूजन और इंफेक्शन से लड़ने में सहायता करते हैं। लेकिन नींद की कमी होने पर इस प्रोटीन का प्रोडक्शन घट जाता है। जिस कारण बार-बार बीमार होना, चोट या फिर संक्रमण का देर से ठीक होना है। लंबे समय तक ऐसा रहने से शरीर में लगातार बनी रहने वाली सूजन बढ़ जाती है, जोकि गठिया, मोटापा और मेटाबॉलिक समस्याओं से जुड़ी है।याददाश्त पर भी असरअगर आप कम नींद लेते हैं, तो इसका असर दिमाग पर दिखाई देने लगता है। सिर्फ एक रात की कम नींद आपके ध्यान, फैसले लेने की क्षमता और प्रतिक्रिया समय को खराब कर देती है।लंबे समय में दिमाग में जमा होने वाला कचरा भी नहीं साफ हो पाता है। इसमे बीटा एमिलॉइड भी शामिल है और वह प्रोटीन जिसको अल्जाइमर से भी जोड़ा जाता है। इसलिए लगातार कम नींद लेने से दिमाग की उम्र को तेजी से बढ़ा सकती है।मूड और भूख पर काबू रखना मुश्किलनींद की कमी हमारे भावनात्मक संतुलन को बिगाड़ देती है। मूड स्विंग, थोड़ी-थोड़ी सी बात पर चिड़चिड़ापन और तनाव संभालने में कठिनाई होना आम हो जाता है।भूख से जुड़े हार्मोन भी गड़बड़ा जाते हैं, जिससे तला-भुना, मीठा और अधिक कैलोरी वाला खाना खाने का मन करता है। इस कारण से कम नींद वेट बढ़ने की एक बड़ी वजह बन सकती है।ऐसे सुधारें सोने की आदतसोने जाने से पहले मोबाइल और स्क्रीन का इस्तेमाल कम से कम करें।रोजाना सोने और जागने का एक जैसा समय रखें।ठंडा, शांत और कम रोशनी वाला कमरा नींद की गुणवत्ता को बढ़ाता है।शाम के समय कैफीन का कम सेवन करें।सोने से पहले हल्का-फुल्का रिलैक्सिंग रूटीन अपनाएं।बता दें कि 6 घंटे से कम समय सोना शरीर के करीब हर अंग पर दबाव डालता है। आज के बिजी लाइफस्टाइल में लोग नींद को कम महत्व देते हैं, लेकिन अच्छी और गहरी नींद शरीर को एनर्जी, सेहत और उम्र के सही संतुलन को बनाए रखने में कारगर होता है।जब नींद अच्छी आती है, तो पूरा शरीर आराम पाता है और शरीर बेहतर तरीके से काम करता है। यह जल्द ठीक होता है और लंबे समय तक हमारा शरीर स्वस्थ रहता है। इसलिए नींद के समय देना खुद के लिए किया गया सबसे आराम और जरूरी इंवेस्टमेंट है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 21 Dec 2025 18:27:48 +0530</pubDate>
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<title>सावधान! क्या वाकई अंडा खाने से बढ़ता है कैंसर का खतरा? जानिए FSSAI की &amp;apos;फाइनल रिपोर्ट&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ आजकल सोशल मीडिया पर दावें किए जा रहे हैं कि अंडा खाने से कैंसर होता है। क्या है पूरी सच्चाई इस लेख में हम आपको जरुर बताएंगे। दरअसल, अंडों में कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ पाए जाने की चर्चाओं पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शनिवार को साफ तौर पर कहा कि देश में मिलने वाले अंडे इंसानों के खाने के लिए एकदम सेफ है। इतना ही नहीं, दूषित होने के दावों को गुमराह करने वाला बताते हुए, नियामक ने एक बयान में कहा कि &quot;ये वैज्ञानिक रूप से समर्थित नहीं हैं और बेवजह लोगों में डर पैदा कर सकते हैं।&quot;गौरतलब है कि FSSAI का यह बयान तब आया है जब हाल के दिनों में कई मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट में अंडों में नाइट्रोफ्यून मेटाबोलाइट्स (AOZ) कैंसर पैदा करने वाले पदार्थों की मौजूदगी का आरोप लगा था।जानिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने क्या कहा?बता दें कि, FSSAI अधिकारियों ने यह साफ किया है कि, &quot;खाद्य सुरक्षा और मानक (दूषित पदार्थ, टॉक्सिन और अवशेष) विनियम, 2011 के तहत पोल्ट्री और अंडों के उत्पादन के सभी चरणों में नाइट्रोफ्यूरान के इस्तेमाल पर सख्त रोक है।&quot;नियामक के अनुसार, नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स के लिए 1.0 माइक्रोग्राम प्रति किलोग्राम की बाहरी अधिकत्तम अवशेष सीमा (EMRL) केवल रेगुलेटरी लागू करने के मकसद से तय की गई है। यह सीमा उस न्यूनतम स्कर को दिखाती है जिसे एडवांस्ड लेबोरेटरी तरीकों से भरोसेमंद तरीके से पता लगाया जा सकता है और इसका मतलब है यह नहीं कि उस पदार्थ के इस्तेमाल की इजाजत है। नहीं होता स्वास्थ्य जोखिमएक अधिकारी के अनुसार, EMRL से कम मात्रा में पाए जाने वाले ट्रेस अवशेष न तो खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन माने जाते हैं और न ही उनसे किसी तरह का स्वास्थ्य खतरा होता है। FSSAI ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की नियामक व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मानकों और प्रथाओं के अनुरूप तैयार की गई है।खास बात तो यह है कि यूरोपियन यूनियन और अमेरिका भी खाना बनाने वाले जानवरों में नाइट्रोफ्यूरान के प्रयोग पर रोक लगाते हैं और कार्रवाई के लिए रेफरेंस पॉइंट या गाइडलाइन वैल्यू का इस्तेमाल केवल लागू करने के टूल के तौर पर करते हैं। कई देशों में न्यूमेरिकल बेंचमार्क में अंतर एनालिटिकल और रेगुलेटरी तरीकों में अंतर को दिखाता है, न कि कंज्यूमर सुरक्षा मानकों में अंतर को।FSSAI ने सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी आशंकाओं पर वैज्ञानिक सबूतों का उल्लेख करते हुए बताया कि भोजन के माध्यम से नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स की अत्यंत कम मात्रा में मौजूदगी और मनुष्यों में कैंसर या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बीच कोई ठोस कारण-संबंध स्थापित नहीं हुआ है। नियामक संस्था ने यह भी दोहराया कि किसी भी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी ने अंडों के सामान्य उपभोग को कैंसर के बढ़ते जोखिम से जोड़ने का निष्कर्ष नहीं दिया है।अंडों को असुरक्षित बताना गलतएक विशेष अंडा ब्रांड की जांच से जुड़ी रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस तरह की समस्याएं आमतौर पर सीमित और किसी खास बैच तक ही होती हैं। ये अधिकतर अनजाने प्रदूषण या पशु आहार से जुड़े कारणों के चलते सामने आती हैं और देशभर की पूरी अंडा आपूर्ति श्रृंखला की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शातीं। नियामक संस्था ने कहा कि कुछ अलग-अलग प्रयोगशाला परिणामों के आधार पर अंडों को असुरक्षित ठहराना वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं है।इतना ही नहीं, FSSAI ने उपभोक्ताओं से पुष्टि किए हुए वैज्ञानिक सबूतों और आधिकारिक सलाह पर भरोसा करने का भी आग्रह किया और दोहराया कि &quot;जब अंडे फूड सेफ्टी नियमों के अनुसार बनाए और खाए जाते हैं तो वे संतुलित आहार का एक सुरक्षित, पौष्टिक और कीमती हिस्सा बने रहते हैं।&quot; ]]></description>
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<pubDate>Sun, 21 Dec 2025 18:27:47 +0530</pubDate>
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<title>भूलकर भी रात को इन लक्षणों को नजरअंदाज ना करें, कहीं आप डायबिटीज के शिकार तो नहीं!</title>
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<description><![CDATA[ डायबिटीज जीवनशैली से जुड़ी खतरनाक बीमारी है। आज के समय में अधिकतर लोग हाई ब्लड शुगर यानी डायबिटीज बीमारी का शिकार हैं। कुछ सालों से डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी बढ़ी है। गौरतलब है कि गलत खानपान और अनहेल्दी लाइफस्टाइल के कारण ब्लड शुगर की बीमारी बढ़ती है। डायबिटीज बीमारी में शरीर में ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है। अगर ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल नहीं किया गया था किडनी और हार्ट संबंधी बीमारियों का भी रिस्क बढ़ता है। रात के समय शरीर में शुगर लेवल बढ़ने के कुछ लक्षण नजर आते हैं। रात को इन लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज ना करें।पिछले कुछ सालों से डायबिटीज के मरीज की संख्या तेजी से बढ़ रही है. गलत खानपान और अनहेल्दी लाइफस्टाइल की वजह से अधिकतर लोग हाई शुगर लेवल का शिकार हो रहे हैं। डायबिटीज बीमारी में शरीर में ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ जाता है. ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल नहीं किया गया था किडनी और हार्ट संबंधी बीमारियों का भी रिस्क बढ़ जाता है। शरीर में शुगर लेवल बढ़ने पर कुछ लक्षण नजर आते हैं इन लक्षण की पहचान कर डायबिटीज की समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है।रात को पसीना आना सर्दियों के दौरान भी रात को पसीना आना, तो इस लक्षण को इग्नोर ना करें। रोजाना रात को पसीना आना डायबिटीज का संकेत हो सकता है। रात के समय ज्यादा पसीना आना हाई ब्लड शुगर का संकेत हो सकता है। यदि आपको भी रात को पसीना आता है, तो एक बार आपको शुगर लेवल की जांच करानी चाहिए।बार-बार पेशाब आना महसूस होना रात के समय बार-बार पेशाब आना या फिर बार-बार पेशाब आना महसूस होना डायबिटीज का संकेत हो सकता है। जिन लोगों को रात के समय ज्यादा पेशाब आती है उन्हें इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसलिए जल्द से जल्द जांच कराएं।हाथ-पैरों में झुनझुनी अगर आपको भी रात को सोते समय हाथ-पैरों में झुनझुनी महसूस होती है, तो यह भी डायबिटीज का संकेत हो सकता है। हाथ-पैर में झुनझुनी के कई कारण हो सकता है जैसे विटामिन बी12 की कमी, नसो में कमजोरी आदि, हाथ-पैरों की झुनझुनी को आप बिल्कुल भी इग्नोर ना करें और डॉक्टर के पास जरुर जाएं।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 21 Dec 2025 18:27:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Lemon Water For Fat Loss: सही तरह से पीएंगे नींबू पानी तो देखते ही देखते पिघल जाएगी पेट की चर्बी</title>
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<description><![CDATA[ जब भी फैट लॉस की बात होती है तो हर कोई नींबू पानी को डाइट में शामिल करने की सलाह देता है। नींबू पानी बनाना आसान है और नींबू अक्सर फ्रिज में रखा ही होता है। महज कुछ सेकंड्स में बन जाने वाला नींबू पानी वजन घंटाने में किसी जादू की तरह काम करता है। लेकिन इसका असली फायदा तभी होता है, जब इसे सही तरह से लिया जाए। साथ ही साथ, हेल्दी डाइट व एक्सरसाइज को फॉलो किया जाए। नींबू पानी डाइजेशन में मदद करता है, सूजन कम करता है, हाइड्रेशन बेहतर करता है, और बेवजह की क्रेविंग को कंट्रोल करने में मदद करता है, जिसकी वजह से फैट लॉस करना काफी आसान हो जाता है। बस जरूरी है कि इसे सही समय पर और सही तरह से लिया जाए। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको फैट लॉस के लिए नींबू पानी पीने के सही तरीकों के बारे में बता रहे हैं-इसे भी पढ़ें: Health Tips: 6 घंटे से कम नींद लेने पर हो जाना चाहिए अलर्ट, शरीर में शुरू हो जाती है &#039;गंभीर हलचल&#039;खाली पेट लें नींबू पानीअगर आप अपने शरीर के फैट बर्निंग मोड को ऑन करना चाहते हैं तो नींबू पानी को सुबह खाली पेट पीएं। इस समय पीने से डाइजेस्टिव सिस्टम बेहतर होता है, टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और वॉटर रिटेंशन को कम करने में मदद मिलती है। बस एक गिलास गुनगुने पानी में आधा ताजा नींबू का रस डालकर पीएं।हमेशा गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें अगर आप सुबह-सुबह नींबू पानी पी रहे हैं तो इस बात का खास ख्याल रखें कि हमेशा गुनगुने पानी का ही इस्तेमाल करें। ठंडा नींबू पानी सुबह-सुबह आपके डाइजेशन को शॉक दे सकता है। वहीं, गुनगुना पानी मेटाबॉलिज्म को धीरे-धीरे एक्टिवेट करने, डाइजेशन को बेहतर बनाने और पेट की ब्लोटिंग कम करने में मदद करता है।अगर दिन में लेना हो नींबू पानीकुछ लोग जल्दी फैट लॉस के लिए नींबू पानी का सेवन बार-बार करते हैं। आप इसे दिन में भी ले सकते हैं, लेकिन बहुत ज्यादा ना लें। वैसे तो सुबह एक बार नींबू पानी लेना पर्याप्त है, लेकिन आप मिड मॉर्निंग या लंच से पहले भी इसे ले सकते हैं। अगर आपको एसिडिटी है तो खाली पेट नींबू पानी ना लें। साथ ही, देर रात या खाना खाने के तुरंत बाद भी नींबू पानी पीने से बचें।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Sun, 21 Dec 2025 18:27:45 +0530</pubDate>
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<title>रोजाना डिटॉक्स वॉटर पीना सेफ है होता है क्या? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट</title>
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<description><![CDATA[ आजकल लोग हेल्दी रहने के लिए डिटॉक्स वॉटर जरुर पीते हैं। डिटॉक्स वॉटर एक ऐसा पानी होता है, जिसमें हम फल-सब्जियां रात भर के लिए काटकर छोड़ देते हैं। सुबह इसी पानी का सेवन करते हैं, जिसे हम डिटॉक्स वॉटर के नाम से जानते हैं। इसमें कोई दोहराए नहीं डिटॉक्स वॉटर बॉडी के लिए रिफ्रेशिंग होता है, इसमें कम कैलोरी होती है। डिटॉक्स पानी पीने से शरीर को पोषक तत्व मिलते हैं और वजन कम करने में भी सहायक करता है। ओवरऑल हेल्थ के लिए डिटॉक्स वॉटर काफी फायदेमंद होती है। लेकिन रोजाना डिटॉक्स वॉटर पीने से सेफ है या नहीं, आइए आपको बताते हैं।क्या रोज डिटॉक्स वॉटर पीना सेफ होता हैहां, बिल्कुल रोजाना डिटॉक्स पानी पीने हेल्दी होता है। इसमें मुख्य रुप से किसी भी तरह का आर्टिफिशियल स्वीटनर जैसा कुछ भी केमिकल प्रोडक्ट यूज नहीं होता है। यह पानी मीठा नहीं होता है। डिटॉक्स वॉटर पीने से बॉडी हाइड्रेट होती है और यह किसी मेजिकल कलींजर की तरह काम करता है। इसके सेवन से हमारे बॉडी के टॉक्सिंस बाहर निकल जाते हैं। यह इम्यूनिटी को बूस्ट करता है। डिटॉक्स वॉटर में विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट जैसे तत्व होते हैं, जिसका हमारी ओवर ऑल हेल्थ पर असर अच्छा असर पड़ता है। एक रिसर्च के मुताबिक, पूरे दिन में सिर्फ डिटॉक्स वॉटर पीना काफी नहीं है। इससे आपके शरीर को फायदा होने के बजाय नुकसान हो सकता है। वहीं, किडनी के मरीजों के लिए भी डिटॉक्स वॉटर पीना नुकसानदायक हो सकता है। डिटॉक्स वॉटर रोज पीने के फायदेहाइड्रेशन में सुधारअक्सर लोग तब तक पानी नहीं पीते जब तक उन्हें प्यास न लगे, जबकि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से पर्याप्त पानी पीना बहुत जरूरी है। शरीर को सही तरीके से काम करने के लिए हाइड्रेशन आवश्यक होता है। ऐसे में डिटॉक्स वॉटर पीना एक अच्छा विकल्प है, क्योंकि इससे न सिर्फ शरीर में पानी की कमी पूरी होती है, बल्कि शरीर लंबे समय तक हाइड्रेट भी बना रहता है।पोषक तत्वों से भरपूरडिटॉक्स वॉटर में नींबू, खीरा, पुदीना और बेरीज जैसे फलों व जड़ी-बूटियों से बनता है। इसमें विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। इसलिए, जब आप रेगुलर डिटॉक्स वॉटर पीते हैं, तो इनमें मौजूद तत्व आपके शरीर तक पहुंचते हैं। पाचनतंत्र बेहतरीन होता हैकई लोग डिटॉक्स वॉटर में अदरक और पुदीना जैसी प्राकृतिक चीजें मिलाकर पीते हैं। ये दोनों ही तत्व पाचन को मजबूत बनाने में मददगार माने जाते हैं। अदरक और पुदीना के सेवन से पेट की गैस, भारीपन और सूजन जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। इसके अलावा, डिटॉक्स वॉटर पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म भी सक्रिय रहता है और पाचन प्रक्रिया बेहतर होती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 21 Dec 2025 18:27:44 +0530</pubDate>
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<media:keywords>रोजाना, डिटॉक्स, वॉटर, पीना, सेफ, है, होता, है, क्या, जानिए, क्या, कहते, हैं, एक्सपर्ट</media:keywords>
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<title>Ayurvedic Diet for Winter: सर्दियों में हेल्दी रहने के लिए इन खाद्य पदार्थों का सेवन, जानिए क्या कहता है आयुर्वेद</title>
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<description><![CDATA[ सर्दियों का मौसम सिर्फ ठंड का एहसास नहीं लाता, बल्कि यह मौसम हमारे शरीर को गर्म और हेल्दी बनाए रखने की चुनौती भी पेश करता है। आयुर्वेद जीवन और स्वास्थ्य का विज्ञान है, सर्दियों के दौरान डाइट और लाइफस्टाइल पर विशेष ध्यान देने की सलाह देता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि सर्दियों के मौसम में आयुर्वेद के मुताबिक कैसे हेल्दी रह सकते हैं।सर्दियों का खानपानसर्दियों में खानपान को औषधि के रूप में देखा जाता है। सर्दियों के साथ हमारे शरीर की पाचन अग्नि भी बदलती है। वहीं सर्दियों में पाचन अग्नि तेज होती है, इसलिए पोषण से भरपूर और गर्म तासीर वाले भोजन का सेवन करना चाहिए। ठंडे और कच्चे खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि यह शरीर को सुस्त बना सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Fruits For Diabetes: डायबिटीज के मरीजों के लिए अमृत हैं ये फल, दिल की बीमारियां रहेंगी दूरगर्माहट देने वाले खाद्य पदार्थघी और तेलनारियल तेल, घी और सरसों के तेल का उपयोग करना चाहिए। यह स्किन की नमी को बनाए रखने के साथ शरीर को भीतर से गर्म रखते हैं।मसालेकाली मिर्च, अदरक, हल्दी और दालचीनी जैसे मसाले न सिर्फ भोजन का स्वाद बढ़ाते हैं। बल्कि शरीर को सर्दियों में भी गर्म रखते हैं।सर्दियों की सुपरफूड सब्जियांशकरकंद, गाजर, चुकंदर और मूली जैसी सब्जियों में विटामिन और मिनरल्स पाया जाता है। यह पेट को भरा हुआ महससू कराती है और आप ओवरईटिंग से बच जाते हैं। इसका रोजाना सेवन ब्लड शुगर को कंट्रोल करने और ऊर्जा बनाए रखने में सहायक होती हैं।साबुत अनाज का महत्वसर्दियों में साबुत अनाज जैसे ओट्स, जौ और मक्का ऊर्जा का बेहतरीन स्त्रोत होता है। यह शरीर को गर्म रखने के साथ ही पाचन को भी सुधारता है। साबुत अनाज को भोजन में शामिल करने से शरीर का तापमान संतुलित रहता है।गर्म पेय और सूप का सेवनसर्दियों में ठंडे पेय पदार्थों की जगह गर्म पेय जैसे अदरक-हल्दी वाला दूध, हर्बल चाय और सब्जियों का सूप पीना चाहिए। यह न सिर्फ शरीर को गर्म रखते हैं, बल्कि इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है।व्यायाम और मालिशसर्दियों में रोजाना व्यायाम करने से शरीर सक्रिय बना रहता है। इसके साथ ही गर्म तेल से शरीर की मालिश करने से स्किन को मुलायम और ऊर्जावान बनाता है। व्यायाम और मालिश करने से शरीर ठंड से बचने का सबसे बेहतर तरीका है।जंक फूड छोड़ें और देसी भोजन अपनाएंसर्दियों में जंक फूड की जगह देसी और गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें। इस दौरान उपवास करने से बचें, क्योंकि यह पाचन अग्नि को नुकसान पहुंचा सकता है। संतुलित और नियमित आहार से वात दोष को कंट्रोल किया जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Dec 2025 00:59:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Ayurvedic, Diet, for, Winter:, सर्दियों, में, हेल्दी, रहने, के, लिए, इन, खाद्य, पदार्थों, का, सेवन, जानिए, क्या, कहता, है, आयुर्वेद</media:keywords>
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<title>Health Tips: मेडिकल अबॉर्शन के बाद इन लक्षणों को न करें नज़रअंदाज़, स्वास्थ्य के लिए बेहद ज़रूरी है सतर्कता</title>
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<description><![CDATA[ जब कोई महिला प्रेग्नेंट होती है तो यह उसके जीवन में कई उम्मीदों को जगा जाती है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के जीवन में कई सारे शारीरिक और मानसिक बदलाव आते हैं। जोकि हर महिला के लिए सुखद अनुभव होता है। लेकिन इसी के समय महिलाओं को यह भी हक होता है कि अगर वह प्रेग्नेंसी नहीं चाहती हैं, तो एक कानूनी समय सीमा के अंदर मेडिकल अबॉर्शन करवा सकता है। हालांकि कई बार कई कारणों से महिलाओं को मेडिकल अबॉर्शन का ऑप्शन चुनना पड़ता है।ऐसे में भले ही यह महिला का चयन हो, लेकिन इस दौरान महिला के शरीर में कई बदलाव और लक्षण नजर आते हैं। अबॉर्शन के बाद महिलाओं को कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि अबॉर्शन के बाद ये 5 लक्षण दिखने पर फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Health Tips: सुपरहेल्दी नारियल पानी इन लोगों के लिए बन सकता है खतरा, सेहत संबंधी हो सकती हैं समस्याएंअबॉर्शन के बाद होने वाली ये 5 समस्याएंज्यादा ब्लीडिंग होनाअबॉर्शन के बाद हैवी ब्लीडिंग होना एक सामान्य प्रोसेस है। यह तीन से चार सप्ताह तक चलती है। ऐसे में ज्यादा ब्लीडिंग होने पर आपको फौरन अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। वहीं अगर आप 1-2 घंटे के अंदर दो सेनेटरी पैड चेंज कर रही हैं, तो यह सामान्य ब्लीडिंग नहीं है। वहीं चक्कर आना और बड़े-बड़े ब्लड क्लोट निकलने आदि की समस्या होने पर फौरन डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।ऐंठन जैसा दर्द होनाअबॉर्शन के बाद महिला का यूट्रस वापस अपने आकार में आने लगता है। जिसकी वजह से महिलाओं को पीरियड जैसा दर्द महसूस हो सकता है। वहीं कई बार यह दर्द अधिक पीड़ादायक हो सकता है। हालांकि आप गर्म पानी पीने, गर्म थैली रखने के अलावा पेन किलर लेकर भी दर्द में कुछ राहत पा सकती हैं।इंफेक्शनवहीं अबॉर्शन के बाद कुछ समय के लिए यूट्रस खुला रह सकता है। जिस कारण पैल्विक या यूरीन पथ से इंफेक्शन होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इंफेक्शन से बचने के लिए आप टैम्पोन का इस्तेमाल कर सकत हैं। वहीं वजाइनल हाइजीन का खास ध्यान रखें। अगर इसके बाद भी संक्रमण हो जाता है, तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।फीवर आनाअबॉर्शन के बाद फीवर आना इस ओर संकेत देता है कि आपके शरीर में किसी तरह का संक्रमण है। वहीं अगर पेट के निचले हिस्से में दर्द है, वहीं अगर आपका तापमान 100 डिग्री से ऊपर है, तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।डिप्रेशनबता दें कि अबॉर्शन के बाद डिप्रेशन होना एक सामान्य समस्या है। लेकिन तनाव लेना किसी समस्या का हल नहीं है। ऐसे में बेहतर होगा कि आप इस स्थिति में अपने मन और शरीर दोनों को पर्याप्त आराम दें और किसी भी तरह का निगेटिव विचार अपने ऊपर हावी न होने दें। वहीं वर्तमान में ध्यान केंद्रित करने का प्रयास करें। इसके बाद भी अगर डिप्रेशन में चले गए, तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Dec 2025 16:22:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>सर्दियों में बार&#45;बार तला&#45;भुना खाने से बिगड़ गया है पाचन, तो कैसे करें सुधार, एक्सपर्ट ने बताए उपाय</title>
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<description><![CDATA[ सर्दियों के मौसम में सबसे ज्यादा तला-भुना खाना ठूस-ठूस लोग खाते हैं, क्योंकि इस मौसम में ज्यादा तले-भुना खाने से कोई दिक्कत नहीं होती है। लेकिन बार-बार पूड़ी, पराठा और जंक फूड खाने से कई बार पाचन की समस्या आती है। आजकल ज्यादा मिर्च-मसाले वाला भोजन हमारी रोजमर्रा की डाइट में शामिल हो गया है। इसे कभी-कभार खाने से नुकसान नहीं होता, लेकिन अगर यही आदत बन जाए तो यह धीरे-धीरे पाचन तंत्र को प्रभावित करने लगता है। कमजोर पाचन के कारण कब्ज, एसिडिटी, गैस और अपच जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट मानते है कि पाचन कमजोर होने पर तुरंत दवाओं पर निर्भर नहीं होना चाहिए, बल्कि डाइट में इन चीजों को शामिल करने से पेट पाचन दुरुस्त हो जाएगा। आइए आपको बताते हैं कुछ उपाय जिससे पाचन तंत्र मजबूत हो जाएगा।गुनगुना पानी, काला नमक, अजवाइन और हींगअगर आप अपने पाचन तंत्र को मजबूत करना चाहते हैं, तो एक गिलास गुनगुना पानी पिएं। इसमें काला नमक, अजवाइन और चुटकीभर हींग मिलाकर पिएं। गुनगुने पानी में काला नमक, अजवाइन और हींग का सेवन करने से पेट में गैस और अपच से राहत मिलती है। यह पाचन अग्नि को एक्टिव करने मदद मिलती है।खाना खाने के बाद 10 मिनट टहलें सर्दियों के दौरान लोग भर-भर पेट तो खा लेते हैं, लेकिन आलस के चक्कर में टहलते नहीं है। खाने को पचाने के ल‍िए खाने के बाद 10 म‍िनट वॉक करें। यदि आप खाना खाने के तुरंत बैठ जाते हैं या लेट जाते हैं, तो आपका पाचन धीमा हो सकता है। खाने के बाद 10 म‍िनट वॉक करेंगे, तो अपच और ब्‍लोट‍िंग की समस्‍या दूर होती है।चावल की कांजी प‍िएंहेल्थ एक्सपर्ट न बताया है, अच्छे पाचन के लिए सुबह चावल की कांजी का सेवन करना फायदेमंद होता है। यह शरीर को नेचुरल प्रोबायोट‍िक्‍स देता हैं। चावल की कांजी का सेवन करके गट में गुड बैक्‍टीर‍िया को बढ़ाकर पाचन को सुधारने में मदद म‍ि‍लती है। आइए आपको बताते हैं चावल की कांजी कैसे बनाएं-- उबले हुए चावल को पानी में भिगोकर रातभर रखें।- सुबह उस पानी को हल्का मसलकर नमक मिलाएं और काजी के तरह पी जाएं।- यदि आप चाहें तो इसमें नीम, राई और सरसों का तड़का लगा सकते हैं।एक्सरसाइज जरुर करेंतला-भुना भोजन खाने के बाद शरीर को फिर से संतुलन में लाने के लिए उसे सक्रिय रखना जरूरी होता है। इसके लिए हल्की एक्सरसाइज या योग करना फायदेमंद रहता है। इससे पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है और कब्ज व एसिडिटी जैसी परेशानियों से राहत मिलती है।फाइबर और प्रोबायोटिक्स बढ़ाएं अत्यधिक तला-भुना खाने से पाचन कमजोर हो जाता है। ऐसे में आप अपने डाइट में फल, सब्जियां, दही और छाछ को शामिल कर सकते हैं। यह गट की सफाई करेंगे और पाचन संतुलन में मदद करेंगे।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Dec 2025 16:22:25 +0530</pubDate>
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<title>Fruits For Diabetes: डायबिटीज के मरीजों के लिए अमृत हैं ये फल, दिल की बीमारियां रहेंगी दूर</title>
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<description><![CDATA[ पके हुए ताजे फल खाने से शरीर पर वैसा असर नहीं होता है, जैसा प्रोसेस्ड और शुगर से भरपूर फूड आइटम जैसे पेस्ट्री और केक जैसी चीजों को खाने से पड़ता है। बता दें कि फलों में फाइबर और पानी की एक सुरक्षा परत होती है। फल विटामिन्स, पॉलीफेनॉल एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल्स से भरपूर होते हैं। साबुत और ताजे फलों का सेवन करने से डायबिटीज के मरीजों में ब्लड ग्लूकोज काफी हद तक कम हो जाता है।  हालांकि फलों के चुनाव को लेकर डायबिटीज के मरीजों में कंफ्यूजन बना रहता है कि कौन सा फल उनके लिए सुरक्षित है और कौन सा नहीं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको ऐसे 6 फलों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका प्राकृतिक रूप से ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है।इसे भी पढ़ें: सर्दियों में बार-बार तला-भुना खाने से बिगड़ गया है पाचन, तो कैसे करें सुधार, एक्सपर्ट ने बताए उपायजानिए क्या है फलों का सुरक्षित डोजएक स्टडीज के अनुसार, डायबिटीज से पीड़ित जो मरीज फल खाते हैं, उनको दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है। इसके बाद भी इन मरीजों को एक तय मात्रा में फल खाने की सलाह दी जाती है।एक्सपर्ट के अनुसार, एक बारे में ढेर सारा फल खाने की बजाय पूरे दिन में इसको तीन हिस्सों में बांटे। फिर इनके खाने के समय के बीच में गैप रखें। एक बारे में दो बड़े चम्मच से लेकर एक चौथाई कप तक फल खाना सुरक्षित होता है।सेबसेब का सेवन करने से न सिर्फ ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। बल्कि सेब में घुलनशील फाइबर, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाया जाता है।नाशपातीनाशपाती में 84% तक पानी पाया जाता है। वहीं इस फल में काफी सारा विटामिन और फाइबर भी पाया जाता है, जोकि ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है। लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स होने के साथ यह शरीर इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाता है।एवोकोडोएवोकाडो हेल्दी फैट्स और पोटेशियम से भरपूर होता है। यह फल डायबिटीज के मरीजों के लिए लाभकारी होता है। यह बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के लेवल को कम करता है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स डायबिटीज मरीजों के लिए कम और सुरक्षित माना गया है।अनारडायबिटीज के मरीजों के लिए अनार काफी फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि अनार ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में सहायता करता है।पपीतापपीता में ढेर सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं। जो इसको डायबिटिक के लिए हेल्दी बनाते हैं। बल्कि हार्ट डिजीज से बचाव करने के लिए भी यह फायदेमंद है। पपीता में एंजाइम पाया जाता है, जो फ्री रेडिकल से बचाता है।संतरासंतरा डायबिटीज के अलावा भी कई बीमारियों में फायदेमंद माना जाता है। संतरा में फाइबर, विटामिन सी और बी1 पाया जाता है और इसमें शुगर की मात्रा भी कम होती है। जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है। संतरा में 87% तक पानी होता है और ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Dec 2025 16:22:24 +0530</pubDate>
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<title>कैसे मैनेज करें प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम? राहत पाने के लिए इन 5 न्यूट्रिशन हैक्स को अपनाएं</title>
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<description><![CDATA[ प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) एक ऐसी समस्या है जिसमें महिलाओं को मूड स्विंग्स, ब्लोटिंग,थकान, चिड़चिड़ापन, खाने की क्रेविंग, अनिद्रा जैसी समस्याएं होने लगती है। अक्सर पीएमएस के लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए महिलाएं दवाओं की मदद लेती है, लेकिन हेल्थ यह के लिए ठीक नहीं है। दरअसल, प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम आमतौर पर पीरियड्स शुरु होने से एक-दो हफ्ते पहले शुरु हो सकता है और पीरियड्स खत्म होने के साथ ही खत्म हो जाता है। हालांकि, आप प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के लक्षणों को न्यूट्रिशन के साथ कंट्रोल कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कैसे।मैग्नीशियम का सेवन बढ़ाएंपीएमएस के लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए आप मैग्नीशियम मसल्स को रिलैक्स करता है और पेट दर्द एवं क्रैम्स कम करने में सहायक होता है। इसके अलावा, यह मूड स्विंग्स और एंग्जाइटी को कंट्रोल करता है। आप नियमित तौर पर डार्क चॉकलेट, पालक, कद्दू के बीज और नट्स का सेवन कर सकते हैं।कॉम्प्लेक्स कार्ब्स को चूज करेंन्यूट्रिशन एक्सपर्ट ने बताया है कि कॉम्प्लेक्स कार्ब्स ब्लड शुगर को स्टेबल रखते हैं, जिससे चिड़चिड़ापन कम होता है। यह मीठे खाने की क्रेविंग को भी कंट्रोल करता हैं। इसके लिए आप ओट्स, ब्राउन राइस, मिलेट्स और शकरकंद खा सकते हैं।ओमेगा-3 फैटी एसिड का सेवन करेंआप पीएमएस के लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए ओमेगा-3 का सेवन करें। ओमेगा-3 में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो सूजन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं। इतना ही नहीं, यह डिप्रेशन और लो मूड से भी राहत देता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड के लिए आप अलसी के बीज, अखरोट और फैटी फिश खा सकते हैं।नमक और प्रोसेस्ड फूड्स कम करेंअगर आप अत्यधिक नमक का सेवन करेंगे तो आपको ब्लोटिंग और वाटर रिटेंशन बढ़ाता है इसलिए नमक और प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन करने से बचें। प्रोसेस्ड फूड्स हार्मोनल असंतुलन को और बिगाड़ सकता है। इसलिए घर का ताजा और हल्का खाना पीएमएस में ज्यादा फायदेमंद होती है। आयरन और विटामिन-बी6 लेंपीएमएस के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए आयरन और विटामिन-बी6 लें। आयरन थकान और कमजोरी से बचाता है, खासकर पीरियड्स से पहले। इसके अलावा, विटामिन-बी6 मूड सुधारने और इरिटेशन को कम करने में सहायक है। चुकंदर, अनार, केला, अंडा और दालें इसमें मदद कर सकती है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 17:49:31 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: सुपरहेल्दी नारियल पानी इन लोगों के लिए बन सकता है खतरा, सेहत संबंधी हो सकती हैं समस्याएं</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर नारियल पानी को हेल्दी और हाइड्रेटिंग ड्रिंग के तौर पर देखा जाता है। नारियल पानी हमारे शरीर को इलेक्ट्रोलाइट्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे पोषण देता है। वहीं गर्मियों में यह नेचुरल एनर्जी बूस्टर की तरह काम करता है। हालांकि नारियल पानी हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता है। वहीं कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में नारियल पानी का सेवन नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए उन लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको नारियल पानी का सेवन करने से बचना चाहिए।किडनी प्रॉब्लम्स होने परबता दें कि नारियल पानी में पोटैशियम की मात्रा ज्यादा होती है। किडनी के रोगियों को ज्यादा पोटैशियम हानिकारक हो सकता है। क्योंकि इन लोगों की किडनी इसको सही तरीके से फिल्टर नहीं कर पाती है। जिस कारण हार्ट रिदम बिगड़ सकता है।इसे भी पढ़ें: Giloy Ka Juice Pine Ke Fayde: पुरुषों के लिए चमत्कारी गिलोय जूस को फायदे जो बदल देंगे आपकी सेहत, आज ही जानेंडायबिटीज के मरीजप्राकृतिक रूप से नारियल पानी मीठा होता है। ऐसे में नारियल पानी का अधिक सेवन ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकता है। खासकर जब यह फ्लेवर्ड या प्रोसेस्ड हो। डायबिटिक मरीजों को सीमित मात्रा में नारियल पानी का सेवन करना चाहिए।लो बीपी वाले लोगनारियल पानी ब्लड प्रेशर को नेचुरली कम करता है। ऐसे में जिन लोगों का बीपी पहले से लो रहता है, अगर वह लोग नारियल पानी का सेवन करते हैं, तो उनको थकान, चक्कर या बेहोशी का समस्या हो सकती है।अस्थमा या एलर्जी से वाले व्यक्तिवहीं कुछ लोगों को नारियल पानी से एलर्जी हो सकती है। इसका सेवन करने से सांस लेने में दिक्कत, स्किन रैशेज या एनाफिलैक्सिस जैसी गंभीर समस्या हो सकती है।बार-बार पेशाब की समस्या होनाबता दें कि नारियल पानी एक नेचुरल डाइयूरेटिक है, जोकि बार-बार यूरिन आने की समस्या को अधिक बढ़ा सकता है। जिन लोगों को बार-बार पेशाब आने की परेशानी है। इसलिए इनका सीमित सेवन करना चाहिए।सर्जरी कराने वाले मरीजों कोसर्जरी से पहले नारियल पानी का सेवन इलेक्ट्रोलाइट्स के असंतुलन की वजह बन सकता है। इसको एनेस्थीसिया की प्रतिक्रिया पर असर हो सकता है। इसलिए डॉक्टर सर्जरी से कम से कम दो सप्ताह पहले इसका सेवन बंद करने की सलाह देते हैं।वजन बढ़ाने की कोशिश कर रहे लोगनारियल पानी काफी कम कैलोरी वाला होता है। ऐसे में कोई वेट बढ़ाने का प्रयास कर रहा है, तो यह पर्याप्त ऊर्जा नहीं प्रदान कर पाता है और ऐसे लोगों को ज्यादा कैलोरी वाले ऑप्शनल लेना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 17:49:27 +0530</pubDate>
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<title>Google पर साल 2025 में सबसे ज्यादा सर्च किया गया HMPV वायरस, सरल भाषा में जानिए क्या है?</title>
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<description><![CDATA[ इस साल 2025 में इंटरनेट में यदि किसी एक वायरस के बारे में अत्यधिक सर्च किया गया है, तो वह है HMPV, इसके मामले काफी खबरों में बने रहे हैं। हर को गूगल पर सर्च करने लगा था यह क्या है? क्या यह नई कोई महामारी है बस एक प्रकार का मौसमी वायरल इन्फेक्शन। आइए आपको इस वायरस की पूरी कहानी बताते हैं।क्या है HMPV वायरस?आपको यह कन्फ्यूजन दूर करना है कि यह कोई नया वायरस नहीं है। HMPV का पूरा नाम ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस&#039; (Human Metapneumovirus) है। वैज्ञानिकों ने इस वायरस की खोज साल 2001 में ही कर ली थी। यह एक सामान्य &#039;रेस्पिरेटरी वायरस&#039; (सांस से संबंधित वायरस) है, यह बिल्कुल आम सर्दी-जुकाम या फ्लू की तरह होता है। HMPV वायरस हर साल सर्दियों व वसंत के मौसम में एक्टिव होता है, हालांकि 2025 में इसके सबसे ज्यादा केस देखे गए। जिस वजह से यह काफी चर्चा में रहा है।इसके क्या लक्षण हैंआमतौर पर HMPV के लक्षण कोरोना या फ्लू से काफी मिलते-जुलते हैं, इसीलिए लोग इस वायरस को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं। आमतौर पर संक्रमण होने से 3 से 6 दिनों के बाद लक्षण नजर आते हैं।- खांसी और गले में खराश: यह सबसे आम लक्षण है।- बुखार: हल्का या तेज बुखार आना।- नाक बहना या बंद होना: जैसे किसी भी वायरल फीवर में होता है।- सांस लेने में तकलीफ: छोटे बच्चों या बुजुर्गों में सांस फूलने की समस्या हो सकती है।कैसे फैलता है वायरस?गौरतलब है कि यह वायरस आसानी से एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। इसके फैलने के तरीके बिल्कुल कोविड-19 जैसे ही है-- हवा के जरिए- जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है।- संपर्क से - जब कोई संक्रमित व्यक्ति से हाथ मिलाता है या गले लगने से।- सतह छूने से- अगर वायरस किसी दरवाजे के हैंडल या खिलौने पर है और आपने उसे छूकर अपनी नाक या मुंह को छू लिया।किन लोगों को ज्यादा खतरा रहता है -छोटे बच्चे (5 साल से कम)- क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो रही होती है।- बुजुर्ग (65 साल से ऊपर)- जिन लोगों को अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी है।- जो लोग स्वस्थ वयस्क है फिर भी जुकाम जैसा वायरस फैल जाता है जो कि कुछ ही दिनों में ठीक नहीं करता।इलाज और बचाव- इस दौरान शरीर को रिकवर होने का समय दें और आराम करें।- शरीर को हाइड्रेटेड रखें, खूब पानी पिएं।- डॉक्टर की सलाह से सामान्य बुखार की दवा ले सकते हैं।- इससे बचने के लिए अपने हाथ साबुन से धोते रहें, जो लोग बीमार है उनसे दूरी बनाएं और खांसते समय मुंह को ढकें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 17:49:24 +0530</pubDate>
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<title>Giloy Ka Juice Pine Ke Fayde: पुरुषों के लिए चमत्कारी गिलोय जूस को फायदे जो बदल देंगे आपकी सेहत, आज ही जानें</title>
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<description><![CDATA[ गिलोय को आयुर्वेद में एक चमत्कारी औषधि मानी जाती है। गिलोय के ताजे पत्तों या डंठल से निकला जूस हमारे शरीर को अंदर से ताकतवर बनाने में मदद करता है। वहीं अगर आप रोजाना सुबह खाली पेट गिलोय जूस पीने की आदत बना लें, तो यह आपके शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचा सकते हैं।  गिलोय इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर ब्लड शुगर, पाचन और स्किन के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको रोजाना सुबह गिलोय का जूस पीने के फायदे के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: हद से ज्यादा पानी पीना सेहत के लिए हो सकता है नुकसानदायक, जानिए क्या है Overhydrationगिलोय का जूस पीने के फायदेइम्युनिटीगिलोय रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करता है। रोजाना सुबह इस जूस का सेवन करने से यह हमें सर्दी, खांसी जैसी आम बीमारियों से बचाता है और उनसे लड़ने की ताकत देता है। वहीं इसका रोजाना सेवन करने से आप मौसमी बीमारियों से भी खुद का बचाव कर सकते हैं।पाचन तंत्रइस जूस का सेवन करने से पेट की समस्याओं जैसे अपच, गैस और कब्ज की समस्या दूर होती है। वहीं सुबह गिलोय का जूस पीने से पेट हल्का लगता है और खाना आसानी से पचाया जा सकता है। खासतौर पर आंते साफ करने के लिए यह बेहद फायदेमंद होता है।ब्लड शुगर कंट्रोलगिलोय का जूस डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होता है। क्योंकि यह शुगर को कंट्रोल करता है और इसका सेवन करने से शुगर लेवल धीरे-धीरे कंट्रोल हो सकता है। शरीर को अंदर से साफशरीर के अंदर जमी हुई गंदगी और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में गिलोय मदद करता है। इसका सेवन करने से चेहरे पर निखार आता है और मुंहासे भी कम हो जाते हैं। गिलोय का जूस हमारी लिवर और किडनी को भी साफ रखने में सहायता करता है।थकान और टेंशनअगर आपको भी जल्दी थकान हो जाती है और बहुत ज्यादा टेंशन रहती है, तो रोजाना सुबह गिलोय का जूस पीना चाहिए। क्योंकि इससे दिमाग शांत रहता है और नींद भी अच्छी आती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 14 Dec 2025 16:48:02 +0530</pubDate>
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<title>तनाव से लेकर पीरियड्स के दर्द में राहत मिलेगी!बस पिएं गेदे के फूल की चाय, जानिए इसे बनाने का सही तरीका</title>
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<description><![CDATA[ अभी तक आप तुलसी, पुदीना या फिर अपराजिता के फूलों की चाय पी होगी, लेकिन आपने कभी गेंदे के फूलों की चाय पी है या नहीं। अक्सर लोगों को लगता है कि गेंदे का फूल सिर्फ पूजा में चढ़ाते हैं और घर की बालकनी की शोभा बढ़ाने के लिए होता है, लेकिन आप नहीं जानते है गेंदे के फूलों की चाय पीने से सेहत को कई फायदे होते हैं। गेंदे के फूलों की चाय आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में इस्तेमाल होती रही है। इसमें ल्यूटीन, जीएक्सैंथिन, फ्लेवोनॉइड्स और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। जो सेहत को कई गजब के फायदे देते हैं। आइए आपको इसके फायदे बताते हैं।पीरियड्स के दर्दपीरियड्स के समय कई महिलाओं को पेट दर्द और ऐंठन की समस्या होती है। ऐसे में गेंदे के फूल से बनी चाय एक प्राकृतिक उपाय के रूप में फायदेमंद हो सकती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट और सूजन कम करने वाले तत्व शरीर को आराम पहुंचाते हैं और मासिक धर्म के दौरान होने वाली परेशानी को कम करने में सहायक होते हैं।पाचन संबंधित जुड़ी समस्याओं को कम करती हैगेंदे के फूल की चाय पेट से जुड़ी समस्याओं को कम करती है। पेट की जलन, गैस, अपच, अल्सर और IBS जैसी समस्याओं में राहत दे सकती हैं, क्योंकि इसमें पाचन सुधारने और सूजन को कम करने वाले गुण मौजूद होते हैं। इतना ही नहीं, कब्ज, पेट दर्द और एसिडिटी को भी कम करने में सहायक होता है।सूजन कम करती हैं गेंदे की चायगेंदे की चाय पीने से सूजन कम होती है। क्योंकि इसमें सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण जोड़ों के दर्द, गठिया और शरीर की सूजन को कम करने में असरदार मानी जाती है। इसमें कैलेंडिक एसिड जैसे यौगिक होते हैं जो ऊतक मरम्मत और सूजन घटाने में मदद करती है।तनाव और अनिद्रा में राहतगेंदे के फूल से बनी चाय अपने प्राकृतिक हल्के शांतिदायक गुणों के कारण मन और शरीर को आराम देने में सहायक होती है। इसका नियमित सेवन नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद करता है और मानसिक तनाव को कम करता है। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट तत्व दिमाग को सुकून पहुंचाते हैं और मानसिक संतुलन बनाए रखने में उपयोगी होते हैं।मुंह के छालेगेंदे के फूल की चाय पीने से या इसके गराने करने से मुंह के छाले, मसूड़ों की सूजन और गले की खराश जल्दी ठीक होती है। क्योंकि इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और हीलिंग गुण होते हैं। यह घावों को भरने के लिए और सूजन को कम करने के लिए मदद करता है।कैसे बनाएं गेंदे के फूल की चायगेंदे के फूल की चाय तैयार करने के लिए सबसे पहले ताजे गेंदे के फूलों को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें। इसके बाद एक पैन में पानी गर्म करें और उसमें गेंदे की पंखुड़ियां डालकर कुछ देर तक उबालें। जब पानी अच्छी तरह पककर थोड़ा कम हो जाए, तो गैस बंद कर दें और चाय को छान लें। स्वाद और लाभ बढ़ाने के लिए इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर गर्मागर्म सेवन करें। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 14 Dec 2025 16:48:01 +0530</pubDate>
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<media:keywords>तनाव, से, लेकर, पीरियड्स, के, दर्द, में, राहत, मिलेगीबस, पिएं, गेदे, के, फूल, की, चाय, जानिए, इसे, बनाने, का, सही, तरीका</media:keywords>
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<title>सर्दियों में हॉट कोको पीने मिलते हैं जबरदस्त ये 5 फायदे, शरीर&#45;दिमाग रहता है मस्त&#45;मस्त</title>
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<description><![CDATA[ सर्दियों के मौसम में जैसे-जैसे तपमान गिरता है, ठंड भी बढ़ने लगती हैं। इस मौसम में शरीर धीमा हो जाता है और दिमाग भी थोड़ा सुस्त सा महसूस करता है। इस दौरान एक गर्म कप हॉट कोको केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि हेल्थ को बूस्ट करती है। कोको में मौजूद फ्लेवोनॉल्स, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और अन्य कंपाउंड्स इसे एक ऐसा ड्रिंक बनाते हैं जो शरीर और दिमाग दोनों को ही अंदर से एनर्जी प्रदान करता है। कई स्टडीज में पाया गया है कि हॉट कोको केवल एक चॉकलेट ड्रिंक नहीं, बल्कि मेटाबॉलिज्म, हार्ट हेल्थ, ब्रेन फंक्शन और ओवरऑल वेलनेस को सपोर्ट करने वाला एक नेचुरल टॉनिक है। कोको पाउडर को पानी में घोलकर पीने से मेटाबॉल्जिम सबसे बेहतर होता है। यह कॉलेस्ट्रॉल लेवल को सुधरता है और स्टेम सेल हेल्थ को भी सपोर्ट मिलता है। आप एक से दो चम्मच कोको पाउडर का सेवन कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कोको पाउडर ड्रिंक के फायदे। ब्रेन और बॉडी के लिए क्यों फायदेमंद है हॉट कोको?हॉट कोको शरीर के मेटाबॉलिज्म को सक्रिय कर ऊर्जा बढ़ाने में सहायता करता है। इसमें मौजूद फ्लेवोनॉल्स ब्लड सर्कुलेशन को सुधारते हैं, जिससे दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचते रहते हैं। इसी कारण यह ड्रिंक मूड बेहतर करने, तनाव कम करने और ध्यान बढ़ाने में मददगार मानी जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, कोको ड्रिंक दिल की सेहत, कोलेस्ट्रॉल के संतुलन और ब्लड शुगर नियंत्रण में भी फायदेमंद है। शोध बताते हैं कि नियमित रूप से कोको का सेवन करने से पेट और कमर की अतिरिक्त चर्बी घट सकती है और शरीर की बनावट में भी सुधार हो सकता है।कोको ड्रिंक पीने के फायदे- शुद्ध कोको में फ्लेवोनॉल्स होते हैं,इसका सेवन करने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है। यह दिल की सेहत बेहतर करता है और स्टेम सेल सपोर्ट में मदद मिलती है।- कोको ड्रिंक पीने से टोटल कोलेस्ट्रॉल कम होता है। इसे पीने से बैड कोलेस्‍ट्रॉल कम होता है और गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है।- ब्लड ग्लूकोज को बेहतर तरीके से कंट्रोल करने में मदद मिलती है।- अगर आप नियमित रुप से कोको ड्रिंक पीते हैं, तो बॉडी कंपोजिशन बेहतर होगा, कमर की चर्बी भी कम होगी और ओवरऑल वेलनेस में सुधार आएगा।कोको ड्र‍िंक पीने का सही तरीका- हमेशा हाई-क्वालिटी, अनस्वीटेंड कोको पाउडर का ही उपयोग करें।- एक कप गरम पानी में लगभग 2 चम्मच कोको पाउडर घोलें।- इसमें चीनी न डालें या फिर कम मात्रा में हल्की चीनी डाल लें।- कोको ड्रिंक में दूध की बजाय पानी बेहतर रहता है क्योंकि इससे कैलोरी कम होती हैं। - इसको आप दिन में एक बार, खासकर सुबह या दोपहर के समय लें, ताकि एनर्जी और फोकस दोनों बेहतर बने। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Dec 2025 13:43:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>सर्दियों, में, हॉट, कोको, पीने, मिलते, हैं, जबरदस्त, ये, फायदे, शरीर-दिमाग, रहता, है, मस्त-मस्त</media:keywords>
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<title>Health Tips: हद से ज्यादा पानी पीना सेहत के लिए हो सकता है नुकसानदायक, जानिए क्या है Overhydration</title>
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<description><![CDATA[ हम सभी यह सुनते हैं कि खूब सारा पानी पीना चाहिए। क्योंकि पानी हमारे शरीर को हाइड्रेट रखता है, थकान को दूर करता है और बॉडी को नेचुरली डिटॉक्स करने में सहायता करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। पानी का अत्यधिक सेवन या ओवरहाइड्रेशन आपके शरीर के लिए उतना ही अधिक खतरनाक हो सकता है, जितना कि शरीर में पानी की कमी।  यह खतरा उस लोगों में खासकर बढ़ जाता है, जिनकी बॉडी में पहले से लिवर संबंधी दिक्कतें मौजूद हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको ओवरहाइड्रेशन के बारे में बताने जा रहे हैं और साथ ही यह भी जानेंगे कि क्या हद से ज्यादा पानी पीना लिवर के लिए धीमे जहर की तरह काम करता है।इसे भी पढ़ें: सर्दियों में हॉट कोको पीने मिलते हैं जबरदस्त ये 5 फायदे, शरीर-दिमाग रहता है मस्त-मस्तजानिए क्या है ओवरहाइड्रेशनजब कोई व्यक्ति जरूरत से ज्यादा पानी पीता है या फिर बॉडी जरूरत से ज्यादा पानी को रोक लेता है। तो इस स्थिति को ओवरहाइड्रेशन कहा जाता है। इसके गंभीर रूप वॉटर इंटॉक्सिकेशन या वॉटर पॉइजनिंग के रूप में भी दिखाई दे सकते हैं। इस दौरान शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से इंबैलेंस हो जाते हैं।ओवरहाइड्रेशन के कारणकोशिकाएं सूजने लगती हैंकोशिकाओं में पानी भरने लगता हैखून में सोडियम का स्तर बहुत कम हो जाता हैगंभीर स्थिति में दिमाग की सूजन का खतरालिवर को नुकसान पहुंचता है ज्यादा पानीसामान्य और हेल्दी व्यक्ति में अधिक पानी सीधे-सीधे लीवर को नुकसान नहीं पहुंचाता है। क्योंकि पानी को फिल्टर करने का मुख्य काम किडनी का है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को पहले से सिरोसिस, लिवर की बीमारी या फिर एडवांस लिवर डिजी है, तो पानी का अधिक सेवन शरीर में अधिक फ्लूड जमा कर सकता है। जिस कारण कॉम्प्लिकेशन बढ़ जाते हैं।शरीर के भीतर पानी जमा होने लगनालिवर डैमेज के कारण प्रोटीन कम बननासोडियम का स्तर गिर जानापेट और शरीर में सूजन बढ़नादूषित पानी भी बढ़ा सकता है मुश्किलेंहमारे आसपास मिलने वाला पानी भी कई बार प्रदूषकों और भारी धातुओं से दूषित होता है। वहीं अगर फिल्टर और पानी की टंकियों को नियमित रूप से साफ नहीं किया जाता है, तो यह गंदगी शरीर में सीधे जा सकती हैं। यह स्थिति लिवर के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। क्योंकि इससे हमारे शरीर में टॉक्सिन्स जमा होते रहते हैं और लिवर पर तनाव बढ़ता है।जरूरत से ज्यादा पानी पीने पर मिलते हैं ये संकेतसिरदर्द और जी मचलानाथकान और मांसपेशियों में ऐंठनबार-बार पेशाब आनाबिल्कुल साफ (कलरलेस) पेशाबहाथों-पैरों में सूजनशरीर के लिए पानी की सही मात्राबता दें कि यह सोचना बिल्कुल गलत है कि हर किसी को रोजाना 8 गिलास पानी पीना चाहिए। शरीर को पानी की जरूरत मौसम, उम्र, सेहत और कामकाज के हिसाब से बदलती रहती है। शरीर के लिए सही पानी की मात्रा जानने के सबसे आसान तरीका है - पेशाब का रंग। पेशाब का हल्का पीला रंग होना हाइड्रेशन का सही संकेत है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Dec 2025 13:43:27 +0530</pubDate>
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<title>Abortion Pills Side Effects: इन कारणों से खुद न लें गर्भपात की दवाएं, गंभीर साइड इफेक्ट्स और जान का जोखिम</title>
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<description><![CDATA[ अबॉर्शन अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण फैसला होता है। यह महिलाओं के शारीरिक हेल्थ के अलावा मानसिक हेल्थ को भी प्रभावित कर सकता है। असुरक्षित अबॉर्शन के कारण हर साल हजारों की संख्या में महिलाएं अपनी जान गवां देती हैं। इसलिए कभी भी डॉक्टर की सलाह के बिना अबॉर्शन पिल्स लेने की गलती नहीं करना चाहिए। क्योंकि अगर आप खुद से अबॉर्शन पिल्स लेती हैं, तो इसके खतरनाक नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि बिना डॉक्टर की सलाह लिए अबॉर्शन पिल्स लेने के क्या नुकसान हो सकते हैं।एक्सपर्ट के अनुसार, प्रेग्नेंसी से 20वें सप्ताह अबॉर्शन कराना कानूनी तौर पर जायज है। लेकिन खुद से अबॉर्शन पिल्स लेने से स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंच सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हर दिन करीब 8 महिलाएं असुरक्षित गर्भपात की वजह से मौत हो जाती है। इसलिए इसके बारे में सावधानी बरतनी बेहद जरूरी होता है। इसे भी पढ़ें: Health Tips: गले की जलन का देसी इलाज है पान का पत्ता, जानिए कैसे करें इसका सेवनअबॉर्शन पिल्स के नुकसानबता दें कि अबॉर्शन पिल्स को सही मात्रा में और सही समय पर लेना जरूरी होता है, जोकि सिर्फ डॉक्टर बता सकते हैं। खुद से ये पिल्स लेने पर खतरा रहता है कि दवा की खुराक गलत हो, जिसकी वजह से यह संभावना रहती है कि गर्भपात अधूरा हो और अधिक ब्लीडिंग होने लगे। वहीं कुछ मामलों में ब्लीडिंग इतनी ज्यादा बढ़ सकती है कि खून चढ़ाने तक की नौबत आ सकती है या फिर सर्जनी भी करवानी पड़ सकती है।अधूरे गर्भपात की वजह से या यूट्रेस के बाहर प्रेग्नेंसी के मामले में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसको सेप्टक अबॉर्शन कहा जाता है। इसकी वजह से पेट दर्द, तेज बुखार या वजाइनल डिस्चार्ज से दुर्गंध जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। यह जानलेवा साबित हो सकता है। वहीं अबॉर्शन के बाद भी काफी सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इन पिल्स का सेवन करने के बाद सामान्य तौर पर मितली, पेट दर्द और ब्लीडिंग होती है। लेकिन ऐसा अबॉर्शन पिल्स के दुष्परिणामों की वजह से हो रहा है या फिर यह नॉर्मल है। यह डॉक्टर ही बता सकते हैं। वहीं अबॉर्शन के बाद उचित देखभाल नहीं होने पर भी कई खतरनाक नतीजे हो सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Dec 2025 00:07:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>सर्दियों में कौन&#45;से विटामिन की कमी से लगती है ज्यादा ठंड, जानें काम की बात</title>
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<description><![CDATA[ कुछ लोगों को सर्दियो में सबसे ज्यादा ठंड लगती है। अक्सर हाथ-पैर भी ठंडे रहते हैं। ऐसे लोग सर्दियों में हीटर के सामने ही दिन बिताते हैं या फिर रजाई में लेटे रहते हैं। यदि आपको भी इस मौसम में ठिठुरन वाली ठंड लगती हैं, तो यह लेख आपके लिए है। यदि आपके साथ भी ऐसा है तो यह गलती सर्दी की नहीं, बल्कि आपके शरीर में हो रही कमियों का परिणाम भी हो सकता है। शरीर में कुछ विटामिनों की कमी से व्यक्ति को ठंड ज्यादा लगती है। खासतौर पर बॉडी में रेड ब्लड सेल्स की कमी के कारण भी ठंड ज्यादा लगती है। क्योंकि यह शरीर के टिश्यूज को ऑक्सीजन पहुंचाते हैं। पूरे शरीर में कोशिकाओं को हीट देने और शरीर का टेंपरेचर बनाए रखने वाली मेटाबॉलिज्म प्रोसेस के लिए इस ऑक्सीजन की जरुरत होती है। अगर शरीर में विटामिन की कमी होती है तो रेड ब्लड सेल्स कम हो जाते हैं। जिस वजह से बाकी लोगों की तुलना में आपको ठंड ज्यादा लगती है। जानिए किस विटामिन की कमी से लगती है सर्दी।विटामिन बी12 की कमीजिन लोगों की बॉडी में विटामिन बी 12 कमी होती या फिर मेगा लो ब्लास्टिक एनीमिया की शिकायत होती है। ऐसे लोगों के रेड ब्लड सेल्स की संख्या कम हो जाती है और उनका आकार नॉर्मल से ज्यादा बढ़ जाता है। जिस वजह से ठंड के प्रति शरीर सेंसेटिव हो जाता है। इसलिए विटामिन बी 12 की कमी को दूर करें। अच्छी डाइट का सेवन करें।फोलेट की कमीआपको बता दें कि, फोलेट को विटामिन बी 9 के नाम से जाना जाता है। फोलेट की कमी होने से व्यक्ति को ठंड ज्यादा लगती है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, फोलेट शरीर में स्ट्रांग रेड ब्लड सेल्स का निर्माण करता है। जब शरीर में पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी 9 यानी फोलेट की मात्रा नहीं होगी तो विटामिन 12 की कमी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।आयरन की कमीज्यादा ठंड लगने के पीछे का कारण केवल विटामिन की कमी ही नहीं, बल्कि अक्सर आयरन की कमी से भी अधिक ठंड लगती हैय़ महिलाओं में आयरन की कमी सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। आयरन की कमी शरीर में होने वाले एनीमिया में बॉडी में रेड ब्लड सेल्स के निर्माण के लिए भरपूर मात्रा आयरन नहीं होता है। खून (हीमोग्लोबिन) के निर्माण के लिए सबसे जरुरी आयरन होता है। आप भी ठंड से बचने के लिए आयरन रिच फूड्स का सेवन जरुर करें।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Dec 2025 10:18:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: गले की जलन का देसी इलाज है पान का पत्ता, जानिए कैसे करें इसका सेवन</title>
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<description><![CDATA[ जब दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का लेवल तेजी से बढ़ता है। तब सबसे पहला असर सांसों, गले और फेफड़ों पर महसूस होता है। हवा में मौजूद धूल, हानिकारक कण और धुआं गले में खराश, जलन, सूखापन और खांसी को बढ़ा देता है। ऐसे समय में आयुर्वेद याद दिलाता है कि हर समस्या का इलाज सिर्फ दवा से नहीं बल्कि कई बार प्राकृतिक चीजों से भी होता है। वहीं हमारे पूर्वजों ने जिन पत्तियों पर भरोसा करते हैं, उनमें पान का पत्ता सबसे अधिक खास है।बता दें कि पान के पत्ते का इस्तेमाल सिर्फ पूजा-पाठ या खान में नहीं होता है, बल्कि यह ऊर्जा संतुलन और हीलिंग में भी काम आता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि पान के पत्ते का कैसे इस्तेमाल करना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Yoga In Winter: सर्दियों में योग करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना सेहत को पहुंच सकता है नुकसानपुरानी और भरोसेमंद दवाआयुर्वेद के मुताबिक पान के पत्ते में उष्ण वीर्य यानी शरीर को गर्माहट देने वाली प्राकृतिक ऊर्जा मौजूद होती है। जब प्रदूषण, ठंड या मौसम में बदलाव की वजह से कफ बढ़ता है, तो यह कफ शरीर में गले में जलन, भारीपन, खांसी और बंद नाक जैसी समस्याएं होती हैं। इन सभी परेशानियों से आपको पान का पत्ता निजात दिला सकता है। इस नुस्खे को आजमाने से आपको सिरप या फिर दवा की जरूरत नहीं पड़ेगी।गले में जलन का देसी इलाजइस विधि से खराश, सूखापन, गले की जलन, खांसी और कफ में जल्दी आराम मिलता है।ऐसे बनाएं पान के पत्ते का काढ़ासबसे पहले 1-2 पान के पत्ते पानी में डालें।फिर तुलसी के 3-4 पत्ते और 3-4 काली मिर्च डालकर अच्छे से उबालें।अब कुछ मिनट उबालकर छान लें।इसके बाद गर्म-गर्म पानी पिएं।सिर्फ 7-10 दिन तक इस पानी को पीने से आप महसूस करेंगी कि गले की जलन कम हो रही है, खांसी भी शांत हो रही है, गला हल्का, कफ पिघलकर निकलने लगता है और आरामदायक लग रहा। यह एक ऐसा उपाय है, जिसको हर उम्र का व्यक्ति अपना सकता है।पान के पत्ते का महत्वपान का पत्ता हल्का गर्म करके लेने से सांस खुलती है।पानी में उबालकर इसका काढ़ा बनाकर पीने से गले की खराश कम होती है।शहद के साथ इसका सेवन करने से यह गले को शांत करता है।वहीं स्टीम में डालकर लेने से कंजेशन फौरन कम हो जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Dec 2025 09:44:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Yoga In Winter: सर्दियों में योग करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना सेहत को पहुंच सकता है नुकसान</title>
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<description><![CDATA[ सर्दियों के मौसम में योग करना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। ठंडी हवाओं और कम तापमान के बीच योगाभ्यास करने से शरीर को गर्म और फिट रखने में मदद मिलती है। योग करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इस मौसम में योग करने के दौरान कुछ गलतियों से बचना जरूरी है। ऐसा हम आपको इसलिए बता रहे हैं, क्योंकि कई लोग सर्दियों में सुबह में योग को लेकर काफी ज्यादा उत्साहित होते हैं। लेकिन शरीर को तैयार किए बिना कठिन योगासन चोट की वजह बन सकता है।ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सर्दियों के मौसम में योग करने के दौरान अक्सर होने वाली गलतियों और उनको सुधारने के तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिससे कि आप सेफ और प्रभावी तरीके से योगासन कर सकें।इसे भी पढ़ें: Health Tips: कब्ज से राहत पाने के लिए डाइट में शामिल करें ये फूड्स, पेट के साथ आंतों की होगी सफाईवॉर्मअप किए बिना स्ट्रेच करनाठंडी के मौसम में शरीर का तापमान कम होता है और मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं। ऐसे में अगर आप बॉडी को गर्म किए स्ट्रेच या कठिन योगासन करते हैं, तो मांसपेशियों में खिंचाव और मोच या चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए योग करने से पहले हल्का वार्मअप एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग करना बेहद जरूरी होता है।खाने के बाद योग करनाहैवी खाना खाने के बाद फौरन योग करना पाचन को प्रभावित कर सकता है। इससे उल्टी या फिर पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सर्दियों में खाना धीरे-धीरे पचता है। इसलिए योग अभ्यास के कम से कम 1.5 या 2 घंटे पहले भोजन करना चाहिए।ठंडी हवा में योग करनाठंडियों में बाहर योग करते समय शरीर को पर्याप्त गर्म रखना बेहद जरूरी होता है। बिना गर्म कपड़ों में सर्दियों में योग करने से शरीर ठंडा हो सकता है और मांसपेशियां कठोर हो सकती हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इस दौरान हल्के जैकेट या थर्मल कपड़े पहनना चाहिए।गलत आसन या गलत तकनीक करनाठंडी में शरीर सुस्त हो जाता है, इसलिए गलत तरीके से योगासन करना चोट का कारण बन सकता है। योग की सही तकनीक, सांस पर ध्यान रखना और सही मुद्रा करना जरूरी होता है। किसी भी कठिन आसन को बिना किसी ट्रेनर की सलाह पर नहीं करना चाहिए।वार्मअप न करनासर्दियों में वार्मअप न करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन कम होता है और मांसपेशियां सख्त रहती हैं। ऐसे में स्ट्रेचिंग और योगासन करना खतरे भरा रहता है। कम से कम 5-10 मिनट का हल्का सा वार्मअप जरूर करना चाहिए।असावधानीपूर्ण योग करनाबता दें कि लंबे समय तक बिना सावधानी और बिना ब्रेक के योग करने से शरीर पर दबाव पड़ सकता है। इससे जोड़ों में चोट, मांसपेशियों में दर्द और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सर्दियों में योग सत्र छोटा लेकिन नियमित रखना बेहतर होता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Dec 2025 10:49:14 +0530</pubDate>
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<title>हार्ट अटैक आने से पहले शरीर देने लगते हैं खतरे के 5 संकेत, समय रहते कर लें ध्यान</title>
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<description><![CDATA[ वैसे एक रिसर्च में पाया गया है कि सबसे ज्यादा हार्ट अटैक सर्दियों के मौसम में पड़ते हैं। अक्सर हार्ट अटैक अचानक और बिना चेतावनी वाली घटना मानी जाती है, हालांकि, यह धारणा पूरी तरह से ठीक नहीं। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि हार्ट अटैक आने से पहले शरीर कई संकेत देता है, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर आप इन लक्षणों को सही समय पर पहचान लें, तो जान बचाई जा सकती है। वैसे इस तरह के संकेत काफी मामूली होते हैं, लेकिन इनकी अनदेखी जानलेवा मानी जाती है। आइए जानते हैं हार्ट अटैक से पहले शरीर कैसे संकेत देना शुरु करता है।काम करते वक्त सांस फूलनाअगर आपको चलने, सीढ़ियां चढ़ने या हल्की-फुल्की सफाई करते समय जल्दी-जल्दी सांस चढ़ने लगे, तो यह दिल की कार्यक्षमता घटने का संकेत हो सकता है। दिल जब पर्याप्त ताकत से खून नहीं पंप कर पाता, तो फेफड़ों को मिलने वाली ऑक्सीजन कम हो जाती है जिसके कारण सांस लेने में परेशानी महसूस होती है। इस स्थिति को डिस्प्निया कहा जाता है और यह हार्ट फेल्योर या कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है।सोने में दर्द, दबाव या बेचैनी महसूस करनाहार्ट अटैक का यह सबसे आम लक्षण है, हालांकि इसे हमेशा तेज दर्द के रुप में अनुभव किया जाता है। कई बार सीने में भारीपन, जलन, कसाव या दबाव जैसा महसूस होता है। यह दर्द कभी-कभी बाएं हाथ, जबड़े, गर्दन या पीठ तक फैलता है। यह आराम करने पर कम हो सकता है और शारीरिक या भावनात्मक तनाव में बढ़ सकता है। इसको आप नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं।चक्कर आना, बेहोशी या धड़कनों का तेज होनायदि आपको बिना किसी कारण से चक्कर आना, सिर हल्का होना या बेहोश हो जाना इस बात का संकेत है कि दिमाग तक सही मात्रा में ब्लड नहीं पहुंच पा रहा है। अगर धड़कने अचानक से तेज हो जाए, धीमा या अनियमित हो जाना भी हार्ट की एलेक्ट्रिक रिदम में गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। यह लक्षण एरिथमिया से जुड़ा हुआ हो सकता है।असामान्य कमजोरी या थकानअगर बिना कोई भारी काम किए ही लगातार थकान या कमजोरी महसूस होने लगे, खासकर महिलाओं में, तो यह दिल में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। ऐसी थकान आराम करने पर भी ठीक नहीं होती। इसकी वजह यह है कि दिल को पर्याप्त खून नहीं मिलता और शरीर तक ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है जिसके चलते व्यक्ति हमेशा थका-थका और सुस्त महसूस करता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Dec 2025 10:49:12 +0530</pubDate>
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<title>Premature Delivery: दिल्ली&#45;NCR में प्रदूषण का कहर, गर्भवती महिलाओं को हो रही प्रीमैच्योर डिलीवरी, शिशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर</title>
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<description><![CDATA[ वायु प्रदूषण की असर प्रेग्नेंट महिलाओं और नवजात शिशुओं पर भी पड़ता है। ऐसे में प्रीमैच्योर डिलीवरी की संख्या बढ़ने लगी है। एक्सपर्ट की मानें, तो एक साल में 13,500 डिलीवरी हुईं, जिनमें से 18% यानी की 2,430 बच्चे प्रीमैच्योर हुए। इसका प्रमुख वजह प्रदूषण है। क्योंकि हवा में घुला जहर सांसों के जरिए शरीर में जा रहा है। यह खून में मिलकर गर्भ में पलने वाले बच्चे तक पहुंच रहा है। हवा की खराब गुणवत्ता की वजह से खांसी-जुकाम और अस्थमा की समस्या बढ़ गई है।यह स्थिति न सिर्फ महिलाओं बल्कि गर्भ में पलने वाले बच्चे के लिए भी नुकसानदायक होती है। अधिक खांसी की असर गर्भ पर पड़ता है। ऐसे में यह सब वजह बच्चे के समय से पहले जन्म लेने की वजह बनते हैं। इसके अलावा मलेरिया, मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और डेंगू होने पर भी समय से पहले बच्चे के जन्म लेने की संभावना रहती है।इसे भी पढ़ें: Ginger and Garlic Soup: ठंड में बार-बार बीमार पड़ते हैं, घर पर बनाएं ये जादुई अदरक-लहसुन सूप, डायबिटीज और हार्ट के लिए भी वरदानएक्सपर्ट के मुताबिक 36 सप्ताह से पहले जन्म लेने वाले बच्चों को प्रीमैच्योर कहा जाता है। कई बच्चे 28 सप्ताह, तो कई बच्चे 28 से 32 सप्ताह और 37 सप्ताह से पहले जन्म ले रहे हैं। इनमें से सिर्फ 34 से 36 सप्ताह के बीच पैदा होने वाले बच्चों को अधिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। वहीं जन्म के समय से जितना पहले बच्चा जन्म लेता है, जोखिम उतना अधिक होता है।ऐसे बरतें सावधानीएक्सपर्ट की मानें, तो नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह से दवा लेकर प्रीमैच्योर डिलीवरी को कम किया जा सकता है। एनीमिया ग्रस्त महिलाएं जागरुकता के साथ प्रीमैच्योर डिलीवरी से बच सकती हैं। दूध, हरी सब्जियां और लस्सी के सेवन से महिलाएं पोषण की कमी को दूर किया जा सकता है। बच्चों को आती हैं समस्याएंसमय से पहले जन्मे बच्चे बाहरी तापमान सहन नहीं कर पाते हैं। उनमें हाइपरग्लेसेमिया, हाइपोथेरिमिया, पीलिया और इंफेक्शन होने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में इन बच्चों को अधिक देखभाल की जरूरत पड़ती है। कमजोर होने की वजह से बच्चे के रेटिना यानी की देखने की शक्ति में भी कमी आ सकती हैं। इससे जल्दी इंफेक्शन होने की आशंका रहती है। बाल्यावस्था में ध्यान न देने की वजह से बच्चे का आईक्यू भी कम हो सकता है।प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए हानिकारक है प्रदूषणबता दें कि महिलाओं में प्रदूषण प्रीमैच्योर डिलीवर की वजह बन सकता है। प्रदूषण की वजह से महिलाओं को इंफेक्शन का भी खतरा रहता है। स्वास्थ्य खराब होने की वजह से महिला पोषण नहीं ले पाती हैं। जिस कारण इम्यूनिटी कम हो जाती है। वहीं शरीर में प्रोटीन और विटामिन जैसे पोषक तत्व कम हो जाते हैं और गर्भ में पलने वाले बच्चे को भी पोषण नहीं मिल पाता है। प्रदूषण की वजह से प्लेसेंटा बच्चे तक ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पाता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Dec 2025 21:51:10 +0530</pubDate>
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<title>गर्म मोजे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाते हैं या सिर्फ भ्रम? फिजीशियन ने खोला राज, जानें सच्चाई</title>
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<description><![CDATA[ सर्दियों के दौरान सबसे ज्यादा ठंडे हमारे पैर रहते हैं। ठंड के मौसम में अचानक से पैर एकदम ठंडे हो जाते हैं। इसके पीछे डायबिटीक न्यूरोपैथी में होने वाली जलन से लेकर सुन्नपन तक, हमारे पैरों की सेहत हमारे पूरे शरीर की सेहत से गहराई से जुड़ी होती है। इस मौसम में ठंडे पैरों को गर्म रखने के लिए अक्सर लोग घर के अंदर भी गर्म मोजे पहनना पसंद करते हैं। कई लोगों को मानना होता है कि पैरों को गर्म रखने के लिए खून का प्रवाह अपने आप तेज हो जाता है। हालांकि, कुछ लोगों को मानना है कि यह केवल एक मिथ है और गर्म मोजे पहनने से सर्कुलेशन पर कोई असर नहीं दिखता है। आइए आपको बताते हैं पूरी सच्चाई क्या है?क्या गर्म मोजे पहनने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है?हेल्थ एक्सपर्ट ने मोजे सीधे तौर पर रक्त संचार को नहीं बढ़ाते, लेकिन वे कई तरीकों से इसे बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। ठंड बढ़ने पर शरीर रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर देता है, जिससे पैरों में रक्त प्रवाह कम हो जाता है। ऐसे में गर्म मोजे शरीर से निकलने वाली गर्मी को रोकते हैं, जिससे ब्लड वैसेल्स के अत्यधिक संकुचन की आवश्यकता नहीं पड़ती। इस तरह वे अप्रत्यक्ष रूप से रक्त संचार को संतुलित रखने में सहायक होते हैं। इसलिए ठंड के मौसम में गर्म मोजे एक प्रकार के थर्मल प्रोटेक्शन की तरह काम करते हैं।गर्म मोजे पहनने के फायदे- गर्म मोजे पहनने से कई फायदे तो जरुर मिलते हैं, जैसे कि- जिन लोगों का ब्लड सर्कुलेशन कमजोर हो।- ठंडे पैर ब्लड फ्लो को और खराब करते हैं, ऐसे में गर्म मोजे पैर को इंसुलेटेड रखता है और सुन्नपन कम कर देता हैं।- सोते समय पैर गर्म रखने से शरीर तेजी से स्लीप मोड में चला जाता है। वहीं, डायबिटिक मरीजों में पैरों में जलन सिंड्रोम होने पर भी राहत देता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Dec 2025 21:51:08 +0530</pubDate>
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<media:keywords>गर्म, मोजे, ब्लड, सर्कुलेशन, बढ़ाते, हैं, या, सिर्फ, भ्रम, फिजीशियन, ने, खोला, राज, जानें, सच्चाई</media:keywords>
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<title>Health Tips: पसंदीदा खाना भी खाएं और बिंज ईटिंग भी रोकें, जानें स्मार्ट तरीका</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप वेट लॉस पर हैं तो ऐसे में बिंज ईटिंग कहीं ना कहीं आपकी सारी जर्नी को खराब कर सकती है। हालांकि, बिंज ईटिंग कई वजह से हो सकती है, कभी स्ट्रेस, कभी बोरियत, कभी हार्मोन्स तो कभी सामने अपना फेवरिट फूड देखकर रुका ही नहीं जाता। फिर बाद में बस गिल्ट ही होता है।अमूमन लोग सोचते हैं कि बिंज ईटिंग रोकने के लिए उन्हें अपने फेवरेट फूड्स को खाना बंद करना पड़ेगा। जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है। अगर आप अपने फेवरेट फूड से दूरी बनाते हैं तो ऐसे में दिमाग उतना ज्यादा उसी खाने के बारे में सोचता रहता है। फिर क्रेविंग इतनी हाई हो जाती है कि हम कंट्रोल ही नहीं कर पाते। हो सकता है कि आप भी ऐसी ही स्थिति से गुजर रहे हों, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही तरीकों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपना पसंदीदा खाना खाते हुए भी बिंज ईटिंग को आसानी से मैनेज कर सकते हैं-इसे भी पढ़ें: Ginger and Garlic Soup: ठंड में बार-बार बीमार पड़ते हैं, घर पर बनाएं ये जादुई अदरक-लहसुन सूप, डायबिटीज और हार्ट के लिए भी वरदानखुद को खाने की दें परमिशनअक्सर यह देखा जाता है कि लोग अपने पसंदीदा खाने से लगातार दूरी बनाते हैं, लेकिन इससे उनका माइंड उसे ज्यादा खाने की इच्छा करता है। इसलिए, खुद को खाने की परमिश नें। आप अपने पसंदीदा स्नैक का एक छोटा सा हिस्सा जरूर खाएं। जब आपके माइंड को यह लगता है कि उसका पसंदीदा खाना उसके लिए अवेलेबल है तो ऐसे में क्रेविंग अपने आप कम होने लगती है। स्मार्टली खाएं अपना खानाअक्सर लोग अपना वजन कम करने के लिए कम खाना शुरू कर देते हैं, ऐसे में क्रेविंग और बिंज ईटिंग बहुत ज्यादा होने लगती है। इसलिए, आप कम खाने की जगह स्मार्ट खाना शुरू करें। अपने हर मील में फाइबर, प्रोटीन व गुड फैट को शामिल करें। ऐसे में आपका पेट भरा रहेगा और आपको जंक फूड की क्रेविंग कम होंगी।भूल से भी मील स्किप ना करेंअगर आप वजन कम करने के चक्कर में या फिर अपने कैलोरी काउंट को कम करने के लिए मील स्किप करते हैं तो ऐसे में बिंज ईटिंग और क्रेविंग्स को मैनेज करना काफी मुश्किल होगा। इसलिए, दिनभर में तीन मेन मील्स जरूर लें। साथ में, एक या दो लाइट व हेल्दी स्नैकिंग जरूर करें। जब आप टाइम से अपनी मील्स लेते हैं और वह फाइबर व प्रोटीन रिच होता है तो बिंज ईटिंग की इच्छा नहीं होती है।  एनवायरनमेंट पर भी दें ध्यानआमतौर पर हम सभी बिंज ईटिंग तब सबसे ज्यादा करते हैं, जब हमें खाना सामने दिखता है। इसलिए, बिंज ईटिंग को मैनेज करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने एनवायरनमेंट को भी हेल्दी बनाओ। जंक व अनहेल्दी फूड को आंखों के सामने से दूर रखो। इसकी जगह किचन में फलों को रखें, जो आपको आसानी से दिख जाएं। साथ ही, आप अपने फेवरेट स्नैक को छोटे पैक में रखें, ताकि आप ओवरईटिंग करने से बच जाएं।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Dec 2025 21:51:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>PCOD में हार्मोनल असंतुलन? इन सुपरफूड्स से पाएं राहत, जानें क्या है डाइट में बदलाव</title>
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<description><![CDATA[ खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण अक्सर PCOS और PCOD जैसी बीमारी हो जाती है। महिलाएं पीसीओएस और पीसीओडी सिर्फ पीरियड्स के अनियमित होने से जोड़कर देखती हैं, लेकिन बिल्कुल ऐसा नहीं है। इसका असर महिलाओं की फर्टिलिटी और पूरे शरीर पर होता है। PCOS और PCOD सिर्फ वजन या ओवरी में होने वाली सिस्ट तक सीमित नहीं माना जा सकता है। इसकी वजह से शरीर में हार्मोनल इंबैलेंस हो जाते हैं और इंबैलेंस के कारण महिलाओं के कई बॉडी फंक्शन्स पर असर होता है। यह स्थिति इंसुलिन रेजिस्टेंस और क्रॉनिक इंफ्लेमेशन को बढ़ा देती है, जिससे एंड्रोजन का स्तर ऊंचा हो जाता है और एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन का संतुलन बिगड़ जाता है। ऐसे में PCOS और PCOD को मैनेज करने के लिए शरीर में हार्मोनों का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है। इस लेख में हम आपको डाइट में कुछ ऐसे बदलाव बताएंगे, जिससे हार्मोन्स को बैलेंस करने में मदद मिलेगी। पीसीओडी में हार्मोन्स को बैलेंस करने के लिए डाइट में करें ये बदलाव- पीसीओडी में महिलाओं के शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेस बढ़ जाता है। ओवरीज में एंड्रोजन यानी मेल हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है और उसकी वजह से शरीर इंसुलिन का ठीक ढंग से इस्तेमाल नहीं कर  पाता है।- इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने के लिए ब्लूबेरी, दालचीनी, फ्लैक्स सीड्स और ब्रोकली खा सकते हैं। इन चीजों को आप अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करता है।- प्रोजेस्टेरोन हार्मोन महिलाओं के शरीर में पीरियड साइकिल को मैनेज करने और कंसीव करने में मदद करता है। पीसीओडी और पीसीओएस में इसके लेवल पर भी असर होता है। इसको मैनज करने के लिए डाइट में अमरूद, चेस्टबेरी, जीरा और गाजर को शामिल कर सकते हैं।- पीसीओडी में एस्ट्रोजन का लेवल बढ़ा हुआ होता है और प्रोजेस्टेरोन का लेवल कम हो जाता है। इसलिए डाइट में फूलगोभी, चिया सीड्स और नींबू को शामिल कर सकते हैं।- PCOD में मेल हार्मोन यानी के एंड्रोजन बढ़ जाता है। जिससे बाल झड़ने लगते हैं, पीरियड्स भी अनियमित हो जाते हैं और चेहरे पर अनचाहे बाल आने लगते हैं। पीसीओडी को कम करने के लिए पालक, कद्दू के बीज, पुदीने के पत्ते और मेथी दाना खाएं।- पीसीओडी और पीसीओएस में ओव्युलेशन पर भी असर देखने को मिलता है और कई बार एग सही समय पर रिलीज नहीं होते हैं। ओव्युलेशन के लिए सौंफ, तिल के बीज और भिंडी खाएं।- हार्मोनल इंबैलेंस में होने के कारण महिलाओं की मेंटल हेल्थ पर भी काफी असर देखने को मिलता है। शरीर में कोर्टिसोल का लेवल बढ़ जाता है। इसको कम करने के लिए तुलसी और पिपरमिंट की पत्तियां, अखरोट और शकरकंद खाएं।- इंफ्लेमेशन कम करने के लिए कच्ची हल्दी, स्ट्रॉबेरी और अदरक खाएं। इन चीजों में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Dec 2025 21:51:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: कब्ज से राहत पाने के लिए डाइट में शामिल करें ये फूड्स, पेट के साथ आंतों की होगी सफाई</title>
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<description><![CDATA[ कब्ज एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है। कम फाइबर युक्त फूड, अनहेल्दी लाईफ स्टाइल, तनाव और पानी की कमी जैसी आदतों की वजह से कब्ज की समस्या होती है। जब पेट साफ करने में समस्या आती है, तो पेट दर्द, सिरदर्द, गैस, आलस्य और मुंह के स्वाद बिगड़ने जैसे लक्षण दिखते हैं।  दवाओं की जगह अगर सही और नेचुरल फूड को अपनाया जाए, तो कब्ज की समस्या जड़ से खत्म हो सकती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसे प्रभावी फूड्स के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं, जिनको अपनी डाइट में शामिल करने से कब्ज से राहत मिल सकती है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: पसंदीदा खाना भी खाएं और बिंज ईटिंग भी रोकें, जानें स्मार्ट तरीकापपीतापपीता में नैचुरल एंजाइम पपेन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जोकि पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है और आंतों को भी साफ रखता है। रोजाना सुबह खाली पेट पपीता खाना पेट के लिए काफी फायदेमंद होता है।भीगे हुए अंजीरअंजीर फाइबर का एक बेहतरीन स्त्रोत माना जाता है। रात को 2-3 भिगोए हुए अंजीर का सेवन करने से आंतों की गति बढ़ती है और मल आसानी से बाहर निकलता है।त्रिफला चूर्णआयुर्वेद में त्रिफला चूर्ण को कब्ज का सबसे असरदार उपायों में से एक माना जाता है। इसलिए रोजाना रात में सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से कब्ज धीरे-धीरे ठीक होता है।गुनगुना पानी और नींबूरोजाना सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीने से आंतें एक्टिव रहती हैं और शरीर में जमा टॉक्सिन्स भी बाहर निकलते हैं।पालकपालक में आयरन, फाइबर और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके सेवन से पाचन तंत्र को मजबूती मिलती है और पेट साफ करने में यह मदद करता है।किशमिशकिशमिश में नेचुरल लैक्सेटिव गुण पाया जाता है। इसलिए रात में किशमिश भिगोकर सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से इसका दोगुना फायदा मिलता है।सेबसेब में पेक्टिन नामक घुलनशी फाइबर पाया जाता है। जोकि पाचन क्रिया को सक्रिय करता है और इसके सेवन करने से पेट साफ करने में आसानी होती है।दहीदही में प्रोबायोटिक्स मौजूद होता है, जोकि गुड बैक्टीरिया को बढ़ाता है। इसका सेवन करने से पाचन बेहतर होता है और कब्ज की समस्या दूर होती है।बीन्स और दालेंराजमा, मसूर, मूंग और चना जैसी दालों में फाइबर की मात्रा अधिक पाई जाती है। जोकि आंतों की गति को नियमित करने का काम करती हैं।साबुत अनाजओट्स, जौ, ब्राउन राइस और क्विनोआ जैसे साबुत अनाज कब्ज से राहत देने वाले घुलनशील फाइबर प्रदान करते हैं।बता दें कि कब्ज की समस्या को नजरअंदाज करने से भविष्य में सीरियस डाइजेशन संबंधी समस्याओं को जन्म दे सकता है। ऐसे में यहां बताए गए फूड्स को नियमित रूप से डाइट में शामिल करना चाहिए। नियमित एक्सरसाइज करें, खूब पानी पिएं। इससे आपका पाचन बेहतर होता और पेट भी साफ रहेगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Dec 2025 21:51:06 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: यौन इच्छा बढ़ाने वाली &amp;apos;फीमेल वियाग्रा&amp;apos; फ्लिबेंसेरिन, उपयोग, खतरे और सावधानियां</title>
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<description><![CDATA[ आप में से बहुत से लोगों के लिए फ्लिबेंसेरिन शब्द नया हो, लेकिन कई महिलाएं इस शब्द को जानती होंगी। यह एक दवा का नाम है, जोकि खासतौर से महिलाओं के लिए बनाई जाती है। मार्केट में एड्डी फ्लिबेंसेरिन टैबलेट को फीमेल वियाग्रा दवा भी कहा जा सकता है। यह दवा उन महिलाओं के लिए है, जिनके अंदर दवा के माध्यम से बदलाव करके उनमें संभोग की इच्छा को जागृत करने में मदद करती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि फ्लिबनसेरिन का उपयोग कैसे करें और इसके क्या दुष्प्रभाव हैं।जानिए क्या है फ्लिबेंसेरिनबता दें कि यह दवा एफडीए अप्रूव्ड पहली और एकमात्र नॉन−हार्मोनल पिल है। जोकि प्रीमेनोपॉजल महिलाओं में एचएसडीडी यानी हाइपोएक्टिव सेक्सुअल डिजायर डिसआर्डर के लक्षणों के इलाज में मददगार है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मस्तिष्क के कुछ रसायनों को कंट्रोल करके काम करता है, जोकि यौन इच्छाओं को प्रभावित करते हैं। यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने अगस्त 2015 में इस दवा को मंजूरी दी थी। यह दवा उन महिलाओं के लिए लाभकारी माना जाता है, जिनको अभी तक रजोनिवृत्ति नहीं हुई और फिर भी कम यौन इच्छाओं की समस्या का सामना करना पड़ता है। लेकिन अगर आपको किसी मेडिकल या फिर मेंटल हेल्थ समस्या, रिश्ते में समस्याएं या फिर किसी दवा के सेवन की वजह से हो रहा है, तब फिर यह दवा आपके लिए नहीं है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: बीज से बोया जाएगा आलू, शुगर, यूरिक एसिड और मोटापे पर लगेगी लगाम, शोध में खुलासाऐसे करें दवाएड्डी फ्लिबेंसेरिन दवा की ऑफिशियल वेबसाइट के अनुसार, इस दवा का सेवन हरदिन बेडटाइम पर किया जाना चाहिए। वेबसाइट बताती हैं कि कुछ स्टडीज में औसतन 36 वर्षीय महिलाओं में इस दवा का प्रभावकारी असर आठ सप्ताह या उससे कम में नजर आया। हालांकि इसका ध्यान रखें कि यह सेक्सुअल परफार्मेंस को बेहतर नहीं बनाती, बस संभोग करने की इच्छा को जागृत करने में मदद करती है।हो सकती है यह समस्याएक्सपर्ट की मानें, तो यह दवा भले ही महिलाओं की यौन इच्छा शक्ति को बढ़ाने में मददगार हो, लेकिन उनको इससे कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस दवा का सेवन हमेशा डॉक्टर की सलाह पर और उनके ही निर्देशानुसार करना चाहिए। वहीं ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक इस दवा के लगातार सेवन से बेहोशी, हमेशा सोते रहना या फिर सोने में परेशानी होना, लो ब्लड प्रेशर, चक्कर आना, थकान, जी मचलाना, मुंह में सूखेपन का अहसास और दिन के समय भी स्लीपनेस जैसी समस्याएं हो सकती हैं।इन बातों का रखें ध्यानएक्सपर्ट की मानें, अगर आप फ्लिबेंसेरिन दवा का सेवन कर रही हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले इसके साथ किसी अन्य दवा, हर्बल दवाओं और ओवर द काउंटर दवा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर आप पहले ही इस दवा का सेवन कर रही हैं, तो इसके बारे में डॉक्टर से अपनी बात अवश्य करें।अगर आपको लिवर संबंधी समस्या है, तो आपको इस दवा का सेवन नहीं करना चाहिए।दवा लेने के फौरन पहले या बाद में अल्कोहल का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। प्रयास करें कि आप अल्कोहल का सेवन न करें। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 16:37:35 +0530</pubDate>
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<title>Ginger and Garlic Soup: ठंड में बार&#45;बार बीमार पड़ते हैं, घर पर बनाएं ये जादुई अदरक&#45;लहसुन सूप, डायबिटीज और हार्ट के लिए भी वरदान</title>
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<description><![CDATA[ सर्दियों के मौसम में लोग जल्दी बीमार पड़ते हैं। इस मौसम में सर्दी-जुकाम होना एक आम समस्या है। इसलिए इम्यूनिटी को बढ़ाना बेहद जरूरी है। हालांकि मार्केट में इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए ढेर सारी ड्रिंक्स और खाद्य पदार्थ मौजूद हैं। लेकिन बाहर की ड्रिंक्स पीने से अच्छा है कि आप घर पर ही पोषक तत्वों से भरपूर ड्रिंक बनाएं। बता दें कि अदरक और लहसुन का सूप इम्यून सिस्टम को रफ्तार देने के लिए एक अच्छा ऑप्शन है।  खासतौर पर इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए लोग अदरक-लहसुन के सूप का सेवन करते हैं। इस सूप में एंटी-ऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है। यह सूप डायबिटीज मरीज के लिए काफी लाभकारी है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस खास सूप के बारे में बताने जा रहे हैं और साथ ही कुछ अन्य फायदों और इसकी रेसिपी के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: यौन इच्छा बढ़ाने वाली &#039;फीमेल वियाग्रा&#039; फ्लिबेंसेरिन, उपयोग, खतरे और सावधानियांऐसे बनाएं अदरक-लहसुन का सूपअदरक-लहसुन के सूप को घर पर बनाना काफी आसान है।इस सूप को बनाने के लिए सबसे पहले 5-6 लहसुन की कलियां लें और 2-3 अदरक के छोटे टुकड़े।अब इन दोनों चीजों को पीसकर पेस्ट बना लें।फिर गैस पर कढ़ाई चढ़ाकर इसको भूनें और आप चाहें तो इसको घी से भी भून सकती हैं।अब आप इसमें अपनी पसंदीदा सामग्री जैसे धनिया, गाजर आदि डालें। फिर इसमें जरूरत के हिसाब से पानी डालें और इसको चलाते रहें।इस सूप को गाढ़ा करने के लिए आप इसमें थोड़ा सा आटा मिलाएं।फिर करीब 5 मिनट तक इसको चलाएं।इस आसान विधि से आपका अदरक-लहसुन का सूप तैयार है।इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायकलहसुन और अदरक दोनों ही इम्यूनिटी को बढ़ाने में काफी कारगर हैं। लहसुन में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी सेप्टिक और एंटी फंगल गुण पाए जाते हैं, जोकि संक्रमण से लड़ते हैं और इम्यून सिस्टम की कार्यक्षमता को बढ़ाने में कारगर हैं।वहीं रात के समय लहसुन और अदरक का गर्म सूप पीने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। अदरक में एंटी इंफ्लामेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसके सेवन से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। इनको कूटकर पीने से शरीर को जबरदस्त फायदा मिलता है।हार्ट के लिए हेल्दीअदरक और लहसुन दोनों ही हृदय के लिए लाभकारी होता है। सूप में अदरक की मात्रा होने से यह सूप एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भर जाता है। जो धमनियों में होने वाली सिकुड़न और कोलेस्ट्रॉल को रोकता है। इस सूप के सेवन से उच्च रक्तचाप की समस्या नहीं होती है और खून भी साफ होता है। लहसुन में पाए जाने वाले पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट्स बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन को सुचारू रखते हैं और हृदय की कोशिकाओं को भी क्षति पहुंचने से रोकते हैं। इस सूप को नियमित रूप से पीने से हृदय में होने वाली अन्य समस्याओं कोसों दूर रहती हैं।डायबिटीज के लिए कारगरखासतौर पर डायबिटीज के रोगियों को यह सूप पीना चाहिए। इससे उनका ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है। अदरक की मात्रा आपके शरीर में बढ़े हुए शुगर लेवल को घटाता है और ए1 सी नामक हीमोग्लोबिन को भी कंट्रोल करती है। इससे डायबिटीज का खतरा कम होता है। वहीं लहसुन टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को कम करता है। एक रिसर्च के मुताबिक लहसुन का सेवन डायबिटीज के खतरे को कम करता है। यह सूप डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 16:37:33 +0530</pubDate>
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<title>एक महीने चावल छोड़ा, तो शरीर में दिखे ये 3 बड़े बदलाव, आप भी हो जाएंगे हैरान!</title>
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<description><![CDATA[ क्या आपने कभी सोचा है कि 1 महीने तक चावल छोड़ने के बाद शरीर पर कैसा प्रभाव होगा। अगर आप एक महीने तक चावल का सेवन नहीं करेंगे तो इसका असर आपके ओवरऑल वॉडी पर जरुर दिखता है। अक्सर होता है कि थकान, चेहरे पर सूजन , अचानक से भूख लगना और हमेशा से सुस्ती महसूस करना कई बार चावल खाने से भी हो सकता है। अगर आप 1 महीने के लिए चावल छोड़ देंगे तो  यह आपको काफी आसान लग सकता है, लेकिन जैसे-जैसे दिन बढ़ते गए तो मन में आया कि क्यों न एक कटोरी चावल खा लें। आइए आपको बताते हैं चावल न खाने से क्या होता है।पहले 10 दिन में दिखेंगे ये असरवजन में तुरंत हल्की कमी जब पहले हफ्ते में वजन मशीन पर वेट चेक करोंगे तो आपको अपना वजन से पहले से कम दिखेगा। क्योंकि चावल में सबसे ज्यादा कार्ब होते हैं, जो शरीर में पानी रोकते हैं। इसे हटाते ही शरीर हल्का होने लगता है।शुगर लेवल हुआ कंट्रोलपहले 10 दिन चावल न खाने से आपको आपके शरीर में ब्लड शुगर अचानक से ऊपर-नीचे नहीं होगा। यह शुगल लेवल को कंट्रोल करेगा।पेट में हल्कापन जब आप पेट भर के खाना खाते हैं, तो भारीपन जरुर महसूस होता है, हालांकि चावल छोड़ने के बाद पेट एकदम हल्का महसूस होने लगा।  चावल छोड़ना इतना आसान नहींचावल खाना हर किसी के बेहद पसंद है। तीसरा हफ्ते तक रात में गर्मा-गरम चावल चावल की क्रेविंग्स होने लगती है। चावल की खुशबू याद आने लगती है। चावल न खाने से कई बार मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन तो कभी-कभी बिना वजह गुस्सा, कभी उदासी महसूस होती है।चावल के हेल्‍दी ऑप्शनआप चाहे तो चावल के जगह पर क्विनोआ, ओट्स,मल्टीग्रेन दलिया जैसे ऑप्शन अपनाने शुरु किए, तब शरीर में काफी बदलाव देखने को मिलेगा।- पेट अच्छे से साफ होता है।- सुबह उठना भी आसान रहता है।- थकान गायब होने लगी।- वजन कम होने लगा।एक महीन के बाद आप शारीरिक और मानसिक दोनों रुप से हल्का महसूस करेंगे। वहीं, डाइटिशियन ने बताया है कि वैसे चावल सेहत का दुश्मन नहीं है। बस सही मात्रा और सही समय पर खाना जरूरी है।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 16:37:32 +0530</pubDate>
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<title>Liver Transplant: अंगदान से जीवनदान, भारत में लिवर ट्रांसप्लांट की बढ़ती मांग के पीछे का पूरा सच</title>
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<description><![CDATA[ वैश्विक स्तर पर कैंसर और हृदय रोग सबसे बड़ा कारण है। भारत में हर साल लाखों की संख्या में लोगों की मौत समय पर जरूरी अंग न मिल पाने की वजह से भी हो जाती है। हालांकि इस दिशा में कई व्यापक प्रयास और जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं। जिसकी वजह से अंगदान के लिए अधिक से अधिक लोग आगे आएं और जरूरतमंदों को समय पर अंग मिल सकें। वहीं इससे संबंधित एक हालिया रिपोर्ट काफी राहत देने वाली है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया में सबसे ज्यादा संख्या में लिवर प्रत्यारोपण करने वाला देश बन गया है। यह जानकारी लिवर ट्रांसप्लांटेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया की तरफ से दी गई है।बड़ी संख्या में मौतेंमेडिकल रिपोर्ट्स पर एक नजर डालें तो यह पता चलता है कि भारत में हर साल प्रत्यारोपण के लिए जरूरी अंगों की कमी की वजह से करीब 5 लाख लोगों की मौत हो जाती है। हर दिन कम से कम 15 लोगों की मौतों की एक वजह अंगों की कमी होना है। बड़ी संख्या में लोगों की मौत लिवर फेलियर और समय पर लिवर ट्रांसप्लांट न होने की वजह से भी हो जाती है। हालांकि भारत ने इसमें काफी ज्यादा सुधार किया है। जहां पर हर साल करीब 30,000 मरीजों को लिवर ट्रांसप्लांट से बचाया जा सकता है, वहीं यह सिर्फ 1,800 को ही मिल पाता है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: बीज से बोया जाएगा आलू, शुगर, यूरिक एसिड और मोटापे पर लगेगी लगाम, शोध में खुलासालिवर ट्रांसप्लांटेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ने कहा कि भारत का लिवर ट्रांसप्लांट इकोसिस्टम विज्ञान, मानवता, नैतिकता के बीच पूर्ण सामंजस्य का प्रतिनिधित्व करता है। भारतीय मॉडल दुनिया के लिए लिविंग डोनर लिवर प्रत्यारोपण का एक स्वर्णिम मानक बन गया है।कब पड़ती है लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरतअब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत कब होती है। साथ ही पहले से ही क्या उपाय किए जाएं कि भविष्य में इस तरह की कोई नौबत न आने पाए।लिवर ट्रांसप्लांट एक ऐसी सर्जरी है, जिसमें फेल हो चुके या फिर ठीक से काम न कर रहे लिवर को निकाल दिया जाता है। उसकी जगह किसी डोनर लिवर को लगाया जाता है। इससे व्यक्ति की जान बच सकती है।क्योंकि लिवर शरीर का एक अहम अंग है, जोकि कई जरूरी काम जैसे दवाइयों, न्यूट्रिएंट्स और हॉर्मोन को प्रोसेस करने, खून को साफ करने, बाइल बनाने और भोजन को पचाने में सहायता करता है। इसलिए डोनर लिवर को लगाने से यह सारे काम फिर से सही तरीके से होने लग जाते हैं।लिवर फेलियर और इसकी वजहएक्सपर्ट की मानें, तो आमतौर पर लिवर ट्रांसप्लांट उन लोगों के लिए एक इलाज का तरीका होता है। जिनको आखिरी स्टेज की क्रॉनिक लिवर डिजीज है। लिवर ट्रांसप्लांट उन दुर्लभ मामलों में किया जाता है, जब किसी व्यक्ति का लिवर सामान्य तौर पर काम नहीं कर रहा होता है। परेशानी की बात यह है कि लिवर ट्रांसप्लांट के लिए इंतजार लोगों की संख्या, उपलब्ध डोनर लिवर की संख्या से अधिक है।हेपेटाइटिस बी और सी जैसे संक्रमण और एल्कोहॉलिक लिवर डिजीज, जिसमें अधिक शराब पीने से लिवर को नुकसान होता है। वहीं लिवर की अन्य गंभीर बीमारियों की वजह लिवर फेलियर का खतरा अधिक रहता है। इसमें भी लिवर ट्रांसप्लांट करने की जरूरत हो सकती है।इन समस्याओं से करें बचावहेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक पहले से ही कुछ जरूरी उपाय करने से आप लिवर को हेल्दी और फिट रख सकते हैं।लिवर को हेल्दी रखने के लिए फल, सब्जियों और लीन प्रोटीन से भरपूर संतुलित डाइट लें। अनहेल्दी फैट, चीनी और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करना चाहिए। इसके अलावा वेट कंट्रोल करने, नियमित व्यायाम करने और शराब से दूरी बनाकर आप अपने लिवर को बीमारियों से बचे रह सकते हैं। लिवर ट्रांसप्लांट जैसे जटिलताओं से भी अपना बचाव कर सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 04 Dec 2025 10:15:43 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: बीज से बोया जाएगा आलू, शुगर, यूरिक एसिड और मोटापे पर लगेगी लगाम, शोध में खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ आलू पर चलने वाले सीपीआर इंडिया का शोध अब पूरा हो चुका है। अब आलू की बोवाई कंद की जगह बीज से कराने की तैयारी की जा रही है। बीज में आलू के डीएनए-क्रामोसोम को कंट्रोल करना काफी आसान होगा। इस तरह से आलू की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकेगा। जीन में बदलाव से आलू के सेवन से ग्लूकोइनडेक्स में भी सुधार आता है और इससे मधुमेह और अन्य बीमारियों वाले मरीज आराम से इसका इस्तेमाल कर सकेंगे। साथ ही इससे आलू की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकेगा।आलू में सोलानिन, चाकोनिन और कार्बोहाइड्रेट को कम किया जा सकेगा। इससे कई तरह की बीमारियों और आलू के सेवन से पड़ने वाले प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा। सीपीआर इंडिया ने इस पर अपना शोध पूरा कर लिया है। अगले साल से टीपीएस डिपलाइड विधि से तैयार होने वाली आलू की नई प्रजातियों का बीज मौजूद होगा। इससे आलू को भी बीज से बोया जाएगा। अभी तक आलू का कंद टेट्रालाइड तकनीक से तैयार किया गया है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: दिल्ली की हवा जान का दुश्मन, प्रदूषण, धुंध और सर्दी का कहर, इन लापरवाही से तुरंत रहें दूर अब बीज से बोया जाएगा आलूदेश-दुनिया के सभी क्षेत्रों में आलू पैदा होने वाली फसल है। इसका प्रयोग भी विभिन्न रूप से करीब सभी लोग करते हैं। हालांकि अभी तक आलू को परंपरागत तरीके से बोया जाता है। इसके कंद को जमीन में दबाकर नई फसल तैयार की जाती है। कंद को टेट्रालाइड विधि से तैयार किया जाता है। इसके जीन में क्रोमोसोम के चार गुणसूत्र होते हैं। किसी न किसी गुणसूत्र में पुरानी प्रजाति के गुणधर्म पहुंचने की भी आशंका बनी रहती है।अभी हाल ही में एक शोध पूरा किया गया है। इसमे आलू के बीज अटालाइड की बजाय डिपलाइड विधि से तैयार किया जाएगा। इसमें जीन के क्रोमोसोम के दो गुणसूत्र होंगे। वहीं एक्सपर्ट भी इसको सही से कंट्रोल कर पा रहे हैं। परंपरागत इससे आलू के गुणधर्म में बदलाव किया गया है और आलू का ग्लूकोइंडेक्ट भी सुधारा गया है। इसमें ग्लूकोज के रिलीज होने की गति को भी आसानी से कम किया जा सकेगा। साथ ही कार्बोहाइड्रेट का लेवल भी कम किया जा सकेगा।ऐसे में मोटापे और मधुमेह के मरीजों को सामान्य रूप से आलू का प्रयोग कर सकेंगे। इसके साथ ही इस तरह से आलू के डीएनए में चाकोनिन और सोलानिन को भी कंट्रोल किया जा सकेगा। इससे सिर चकराने, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीज आराम से आलू का इस्तेमाल कर सकेंगे। आलू से बढ़े हुए यूरिक एसिड वाले लोगों को समस्या होती है।जानिए क्या होगा बदलावकृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान विज्ञानी की मानें, तो अब आलू की बुआई कंदों की जगह पर &#039;सच्चे आलू के बीज&#039; से होगी। इससे आलू उत्पादन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आया है। आलू के बीज या टीपीएस आलू के पौधों में फूल आने के बाद बनने वाली फलियों से प्राप्त छोटे-छोटे बीज होते हैं। यह सामान्य कंद वाले बीजों से अलग होते हैं। वहीं इन फसलों में बीमारियों को भी कंट्रोल किया जा सकेगा।आलू का शोध पूरा हो गया है। ऐसे में आने वाले साल में आलू को कंद की जगह बीज से बोया जाएगा। इसको ट्रायल के लिए हर राज्य को दिया जाएगा और फिर किसानों को आवंटन शुरू हो जाएगा। बीज से आलू बोने पर इसकी गुणवत्ता में काफी सुधार हो रहा है। इसमें कार्बोहाइड्रेट सहित अन्य कई तत्वों को कंट्रोल कर लिया गया है। इससे आलू की फसल में कम बीमारी लगेंगी और आलू का सेवन करने के दौरान बीमारियों का भी डर नहीं होगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 10:20:04 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: दिल्ली की हवा जान का दुश्मन, प्रदूषण, धुंध और सर्दी का कहर, इन लापरवाही से तुरंत रहें दूर</title>
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<description><![CDATA[ दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में सर्दियां बढ़ते ही घना धुंध, वायु प्रदूषण और ठंडी हवा का घातक मिश्रण एक गंभीर सेहत संकट पैदा करता है। प्रदूषण का लेवल बढ़ने और गिरते तापमान की वजह से अस्थमा, सांस की समस्याएं, सीओपीडी और ब्रोंकाइटिस के मरीजों की मुश्किलें काफी बढ़ जाती हैं। वहीं वातावरण में मौजूद PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण श्वसन मार्ग में स्थायी सूजन की समस्या पैदा करते हैं। बता दें कि इस जानलेवा वातावरण में हमारी रोजमर्रा की लापरवाहियां स्थिति को बदतर बना देती हैं और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती हैं।इसलिए यह समझना बेहद जरूरी है कि प्रदूषित हवा में सांस लेने से न सिर्फ हमारे फेफड़े बल्कि रक्त वाहिकाएं और हृदय भी प्रभावित होता है। हालांकि इन गंभीर सेहत संबंधी समस्याओं को कम करने के लिए आप कुछ आम और खतरनाक लापरवाहियों को फौरन सुधारना जरूरी है। यह छोटे-छोटे सुधार आपकी सेहत में बड़ा और सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।अधिक AQI में बाहर एक्सरसाइज करनाअधिक AQI वाले वातावरण में बाहर मॉर्निंग वॉक करना या फिर एक्सरसाइज करना सबसे बड़ी लापरवाही है। एक्सरसाइज के दौरान हम तेज और गहराई से सांस लेते हैं। जिस कारण फेफड़ों तक पहुंचने वाले PM2.5 कणों की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। फिर यह कण खून में मिलकर सूजन पैदा करते हैं और हृदय पर भी दबाव डालते हैं।घर के अंदर धूम्रपान करना या फिर कुछ जलानाघर के अंदर धूम्रपान करना या धूपबत्ती/मच्छर कॉइल जलाना इनडोर प्रदूषण को बढ़ा देता है। बंद कमरे में इन चीजों का धुआं आसानी से बाहर नहीं निकल पाता है। जिस कारण PM2.5 कणों का लेवल तेजी से बढ़ता है और सांस की नली में जलन पैदा करता है।मास्क न पहननाजब AQI &#039;बहुत खराब&#039; या &#039;गंभीर&#039; श्रेणी में हो, तब N99 या N95 मास्क न पहनना खतरनाक साबित हो सकता है। यह मास्क ही एक ऐसा प्रभावी तरीका है, जो सूक्ष्म PM2.5 कणों को फेफड़ों तक पहुंचने से रोकता है। बिना मास्क पहने घर से बाहर निकलना हृदय और फेफड़ों को सीधे नुकसान पहुंचाता है।हाइड्रेशन की कमीसर्दियों में कम प्यास लगने की वजह से लोग कम पानी पीते हैं। जिस कारण शरीर में डिहाइड्रेशन हो जाता है। इससे श्वसन मार्ग की श्लेष्मा झिल्ली सूख जाती है। सूखी झिल्ली प्रदूषकों और वायरस को फिल्टर करने में कम प्रभावी होती है। जिस कारण सांस की समस्याएं और संक्रमण का खतरा अधिक बढ़ जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 10:40:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>World AIDS Day: एचआईवी से एड्स बनने में लगता है कितना समय? डॉक्टर ने बताई सच्चाई</title>
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<description><![CDATA[ HIV का नाम सुनते ही कई लोगों के मन में सवाल जरुर आते हैं, यह एक ऐसी बीमारी है, जिसके साथ कई स्टिग्मा जुड़े हुए है। विश्व एड्स दिवस हर साल 1 दिसंबर को मनाया जाता है। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य HIV/AIDS के बारे में जागरूकता बढ़ाना, बीमारी से जुड़े मिथकों और भेदभाव को दूर करना, तथा इससे प्रभावित लोगों के प्रति समर्थन और संवेदना प्रकट करना है। एचआईवी Human Immunodeficiency Virus हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है। यह बीमारी अनसेफ सेक्शुअल रिलेशन, संक्रमित सुई और ब्लड से यह वायरस हमारे शरीर में प्रवेश कर सकता है। अगर सही समय पर इसके लक्षण नहीं पहचाने गए, तो एड्स एख लाइलाज बीमारी बन जाती है। वैसे तो एड्स पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता है लेकिन डॉक्टर की सलाह और लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण जीवन अवधि को बढ़ाया जा सकता है। आइए आपको बताते हैं एचआईवी वायरस से एड्स होने में कितना वक्त लगता है?World AIDS Day क्यों मनाया जाता है?विश्व एड्स दिवस हर वर्ष 1 दिसंबर को इसलिए मनाया जाता है ताकि HIV/AIDS के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। आज भी कई लोग इस बीमारी को लेकर डर, गलतफहमियों और मिथकों से घिरे रहते हैं। ऐसे में यह दिवस लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने और फैल चुकी गलत धारणाओं को दूर करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।एचआईवी से एड्स होने में कितना वक्त लगता है?- डॉक्टर के मुताबिक, शरीर में एचआईवी वायरस के प्रवेश करने के बाद यह धीरे-धीरे हमारे इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है। यदि सही समय पर HIV का इलाज न किया जाए, तो यह एड्स बनने में कई साल लग जाते हैं। कई मरीजों में 8-10 साल बाद एचआईवी, एड्स में बदलता है।- यह समय हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकता है। इस दौरान व्यक्ति की सेहत, इम्यून सिस्टम और देखभाल पर भी काफी निर्भर करता है कि यह वायरस कितने वक्त में एड्स में बदलेगा।- एड्स, एचआईवी संक्रमण का अंतिम चरण होता है, जिसमें व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली अत्यधिक कमजोर हो जाती है। यदि समय पर उचित इलाज और देखभाल न मिले, तो एचआईवी संक्रमित व्यक्ति में एड्स विकसित हो सकता है। हालांकि, आधुनिक एंटीरेट्रोवायरल दवाएं समय रहते जांच और सही उपचार मिलने पर एड्स बनने की प्रक्रिया को रोक सकती हैं।एचआईवी के शुरुआती लक्षण क्या-क्या हैं?- सिरदर्द- बुखार- रात में पसीना आना- अचानक से वजन कम होना- थकान महसूस होना- गर्दन के आस-पास सूजन और दर्द- भूख कम होना- स्किन पर रैशेज होनाएचआईवी के लक्षण नजर आने पर क्या करें?यदि आपको एचआईवी के लक्षण महसूस होते हैं, तो सबसे पहले आप डॉक्टर की सलाह लें। इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें। वरना यह आपकी मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। अगर सही समय पर लक्षणों की पहचान हो जाए, तो जल्दी इलाज हो सकता है और पेशेंट एक लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकता है। अगर एचआईवी के लक्षण सही समय पर पहचान कर लें, तो इंसान एक अच्छी लाइफ जी सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 01 Dec 2025 08:39:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: सर्दियों में जोड़ों का दर्द बढ़ा, ये 5 घरेलू और वैज्ञानिक उपाय देंगे तुरंत राहत, ठंड में मिलेगी गर्माहट</title>
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<description><![CDATA[ नवंबर का महीना खत्म होने वाला है और धीरे-धीरे ठंड भी बढ़ना शुरू हो गई है। ठंड के मौसम में गठिया या जोड़ों के दर्द के मरीजों की मुश्किलें बढ़ने लगती हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। ठंडे तापमान की वजह से हमारे शरीर की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। जिस कारण जोड़ों तक ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है। जिस वजह से जोड़ों में अकड़न और सिकुड़न बढ़ जाती है।वहीं तापमान कम होने पर जोड़ों के आसपास का साइनोवियल फ्लूइड गाढ़ा हो जाता है। यह जोड़ों की नेचुरल चिकनाई कम करता है। इस गाढ़ेपन की वजह से जोड़ों को हिलाने-डुलाने में ज्यादा दर्द और कठिनाई महसूस होती है। वहीं सर्दियों में लोग फिजिकल एक्टिविटी भी कम कर देते हैं। जिससे जोड़ों में दर्द और अकड़न बढ़ जाती है। इन कारण सर्दियों में गठिया के मरीजों को अपनी सेहत और जोड़ों की गर्माहट का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको गठिया के दर्द से राहत पाने के कुछ सरल और प्रभावी उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी के बाद पानी पीने को लेकर भ्रम? एक्सपर्ट से जानें नई मां के लिए क्या है सहीगर्माहट है पहली जरूरतगठिया के दर्द से राहत पाने के लिए सबसे जरूरी उपाय गर्माहट है। जोड़ों को गर्म रखने के लिए आप हीटिंग पैड या गर्म पानी की बोतल से 15-20 मिनट तक सिकाई करें। गर्म पानी से नहाने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। वहीं घर से बाहर निकलने के दौरान जोड़ों को ऊनी कपड़ों और सपोर्ट से ढककर रखें।व्यायाम और मूवमेंट है जरूरीसर्दी की वजह से गतिहीनता के कारण जोड़ों की अकड़न बढ़ती है। इसलिए मरीजों को रोजाना हल्का व्यायाम जरूर करना चाहिए। आप घर पर ही योग, स्ट्रेचिंग या धीमी गति से टहल सकते हैं। इससे जोड़ों में चिकनाई और लचीलापन बना रहता है।हाइड्रेशन और पोषक तत्वों से भरपूर डाइटअक्सर ठंड के मौसम में लोगों को डिहाइड्रेशन की समस्या होती है। क्योंकि सर्दियों में लोग कम पानी पीते हैं। जिससे दर्द बढ़ सकता है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पीते रहें। साथ ही ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर चीजों का सेवन करें और विटामिन डी के लिए धूप में बैठें।घरेलू नुस्खादर्द से राहत पाने के लिए अदरक और हल्दी प्राकृतिक उपाय है। इनमें शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। रोजाना हल्दी वाला दूध या फिर अदरक वाली चाय का सेवन करना चाहिए। वहीं अधिक दर्द होने पर घरेलू नुस्खों की जगह रूमेटोलॉजिस्ट से संपर्क करें। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Nov 2025 13:39:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>रात की अच्छी नींद के दुश्मन हैं ये 5 फूड्स, जानें सोने से पहले क्यों इनसे रहे दूर</title>
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<description><![CDATA[ कुछ लोगों की सबसे बड़ी समस्या रहती है बिस्तर पर जाने के बाद भी नींद नहीं आती है। जैसे ही आंख बंद करने की कोशिश करते है कि तो दिमाग में विचार चलने लगते हैं, शरीर तो थक चुका होता है पर नींद का कुछ नहीं पता चलता है। इसके पीछे की वजह दिन भर की थकान नहीं, बल्कि रात में खाया गया गलत खाना भी आपकी नींद को बुरी तरह प्रभावित करता है। अगर रात भर अच्छे से नहीं सोए, तो अगला दिन सुस्त, चिड़चिड़ा और थका हुआ लगता है। अगर आप सोने से पहले कुछ चीजें खाते हैं, तो यह सही है या नहीं। कुछ फूड्स ऐसे होते है कि जो आपके दिमाग को एक्टिव कर देते हैं, कई बार तो एसिडिटी बढ़ा देते हैं या पेट को भारी कर देते हैं। आइए आपको बताते हैं कौन-से 5 फूड्स हैं, जिन्हें सोने से पहले खाने की कभी गलती नहीं करनी चाहिए।मसालेदार खानारात के समय तेज मसाले, लाल मिर्च या तला-भुना मसालेदार खाना खाने से पेट में गरमी बढ़ सकती है। इसका परिणाम अक्सर एसिडिटी, जलन और सीने में भारीपन के रूप में सामने आता है। ऐसे लक्षण शरीर को पूरी तरह आराम नहीं करने देते, जिससे नींद आने में देर हो जाती है।चॉकलेटरात के समय कुछ लोग चॉकलेट जरुर खाते हैं। लेकिन सोने से पहले खाना सही विकल्प नहीं है। इसमें कैफीन और शुगर दोनों होते हैं, जो दिमाग को एक्टिव करते हैं और नींद आने से रोकते हैं। डार्क चॉकलेट में सबसे ज्यादा कैफीन की मात्रा होती है।कॉफी और एनर्जी ड्रिंक्सअगर आप रात के समय कॉफी या कोल्ड कॉफी, ग्रीन टी या एनर्जी ड्रिंक्स पीते हैं, तो यह आपकी नींद में खलल डाल देता है। इसमें मौजूद कैफीन लगभग आपको 6-8 घंटे तक असर करता है। अगर आप शाम या रात को इनका सेवन करते हैं, तो आपका शरीर स्लीप मोड में नहीं जाता है। जिसके बाद आपको नींद नहीं आती है। भारी और तला हुआ खानारात के समय अगर आप पनीर, छोले-भटूरे, पिज्जा, बर्गर या बहुत ज्यादा तले हुए फूड आइट्मस नहीं खाने चाहिए। इससे पेट भारी महसूस करता है। पाचन धीमा हो जाता है और नींद के दौरान भी शरीर खाना पचाने में ज्यादा समय ले लेता है। जिस कारण से गहरी नींद नहीं आती है।मीठे स्नैक्स और डेजर्टरात के समय केक, मिठाई, आइसक्रीम, शक्कर वाली चीजें ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाती है। शुगर आपके शरीर को एक्टिव करता है, जिससे नींद आने में देर होती है और नींद टूट-टूटकर आती है। रात के समय किस तरह का खाना खा सकते हैं?- एक गिलास गुनगुना दूध- केला- मुट्ठीभर मेवे- ओट्स- दलिया ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Nov 2025 13:39:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: टॉयलेट में ये गलती पड़ सकती है भारी, पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को पहुंचाता है नुकसान, जानिए कैसे बचें</title>
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<description><![CDATA[ कहते हैं कि डेली लाइफ की छोटी-छोटी आदतें हमारी सेहत को बनाने या फिर बिगाड़ने का काम करती हैं। आपके उठने-बैठने, खाने-पीने और चलने-फिरने जैसी छोटी-छोटी चीजें सेहत को प्रभावित कर सकती हैं। यहां तक कि आप टॉयलेट किस तरह से करती हैं, यह भी काफी मायने रखता है। महिलाएं अक्सर टॉयलेट जब जाती हैं, तो एक सबसे बड़ी गलती करती हैं, जिसका खामियाजा पेल्विक फ्लोर हेल्थ को भुगतना पड़ता है।बाथरूम की कुछ सामान्य आदतें पेल्विक फ्लोर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। जिसके बारे में ज्यादातर महिलाओं को नहीं पता है। ज्यादातर महिलाएं जब टॉयलेट जाती हैं, तो फौरन बाथरूम की ओर भागती हैं और कुछ ही सेकेंड में काम निपटाने की कोशिश करते हैं। इसके लिए एक्स्ट्रा जोर लगाते हैं, जिससे कि पेशाब जल्दी हो सके। ऐसा करने से आपको कई नुकसान हो सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: सर्दियों में जोड़ों का दर्द बढ़ा, ये 5 घरेलू और वैज्ञानिक उपाय देंगे तुरंत राहत, ठंड में मिलेगी गर्माहटपावर पीइंगपावर पीइंग के बारे में शायद आपने पहली बार सुना हो। यह पेल्विक फ्लोर की कमजोरी और यूरिनरी लीकेज में एक बड़ा भागीदार है। पावर पीइंग का मतलब है कि पेशाब करने के लिए जोर लगाना, अक्सर तेजी से पेशाब करना आदि। अगर आप टॉयलेट करने के दौरान यूरीन स्ट्रीम को पुश कर रहे हैं, जिससे कि वह तेजी से बाहर आ जाए। या फिर जितनी जल्दी हो सके काम पूरा करने के लिए दबाव डाल रहे हैं। तो आप पावर पीइंग कर रहे हैं।पावर पीइंग के नुकसानलोग टॉयलेट को बहुत देर तक रोके रखने के नुकसानों के बारे में तो बात करते हैं। लेकिन इसके बारे में नहीं जानते हैं कि पेशाब करने के दौरान लगाया जाने वाला एक्स्ट्रा जोर आपके पेल्विक फ्लोर हेल्थ को कितना नुकसान पहुंचा सकता है। जबकि ऐसा कई लोग करते हैं। जैसे जब कैब घर के बाहर आकर खड़ी हो तो काम निबटाने के चक्कर में अधिक जोर लगाकर पेशाब करती होंगी। या फिर बच्चे के रोने पर फौरन जोर लगाकर टॉयलेट को खत्म करना चाहती होंगी। लेकिन ऐसा करना आपकी सेहत के लिए हानिकारक है। असल में मूत्राशय को खाली करने के लिए ज्यादा जोर लगाने की जरूरत नहीं है। क्योंकि टॉयलेट पुश करने से एक्स्ट्रा दबाव पड़ता है। जोकि समय के साथ पेल्विक फ्लोर की हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकता है।छोड़ दें ये आदतेंएक्सपर्ट की मानें, तो अपने ब्लैडर को खाली करने के लिए एक्स्ट्रा जोर लगाने की जोर नहीं हैं। क्योंकि ब्लैडर वॉल पेशाब को बाहर धकेलने का काम करती है। लेकिन अगर आप पुश करते हैं, तो इससे एक्स्ट्रा दबाव के समय के साथ पेल्विक फ्लोर की मसल्स और लिगामेंट्स को स्ट्रेच कर सकता है। पेल्विर फ्लोर की कमजोरी, यूरिनरी लीकेज और यहां तक पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स की वजह बन सकता है। इससे बचने के लिए आपको पावर पीइंग की आदत को छोड़ना होगा। पेशाब करने का सही तरीकाअब जब आपने यह जान लिया है कि आप एक आदत से सेहत को क्या-क्या नुकसान पहुंच रहा है। इसलिए आपका यह जानना जरूरी है कि किस तरह से टॉयलेट करना सेफ है। जिससे कि आप इन नुकसानों से बचा जा सके। इसके लिए आपको दो बातों का ख्याल रखना चाहिए।सही से बैठें और रिलैक्स करेंअपने पूरे शरीर का वेट सीट पर रखें और आराम से बैठ जाएं। क्योंकि टॉयलेट सीट पर झूलने से आपकी पेल्विक फ्लोर की मसल्स टाइट हो जाती है। जिससे ब्लैडर को पूरी तरह से खाली करना मुश्किल हो सकता है। वहीं कुछ गहरी सांसें लें और वजाइनल मसल्क को रिलैक्स करें। ऐसा करने से यूरिनरी स्फिंकटर को रिलैक्स होने में सहायता मिलती है और पेशाब का फ्लो आसानी से आ जाता है।पुश नहीं करेंकभी भी टॉयलेट करने के दौरान एक्स्ट्रा पुश न करें। जोकि आप लास्ट की कुछ बूंदों को खाली करने के लिए करते होंगे। अगर लगे कि लास्ट में कुछ बूंदे बची हैं, तो अपने हिप्स को दाएं-बाएं हिलाएं। इसके अलावा खड़ी होकर दोबारा बैठने का प्रयास कर सकती हैं। जिससे कि बचा हुआ पेशाब बाहर आ जाए। हमेशा याद रखें कि पेशाब करते समय पुश या स्ट्रेन न डालें। पेल्विक फ्लोर की दिक्कतों से बचने के लिए टॉयलेट में अपना समय लें और पावर पीइंग करने से बचें। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Nov 2025 13:39:33 +0530</pubDate>
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<title>PCOS Symptoms: PCOS के &amp;apos;साइलेंट किलर&amp;apos; संकेतों को पहचानें, इन लक्षणों को भूलकर भी न करें अनदेखा</title>
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<description><![CDATA[ पीसीओएस एक ऐसी समस्या है, जो सिर्फ महिलाओं और लड़कियों को होती है। आज के समय में लाखों की संख्या में महिलाएं परेशान हैं। यह कहना गलत नहीं है कि PCOS महिलाओं के लिए सबसे आम और गंभीर हार्मोनल समस्याओं में से एक है। इसको &#039;साइलेंट किलर&#039; भी कहा जाता है। क्योंकि इसके शुरूआती संकेत इतने ज्यादा सामान्य होते हैं कि आसानी से महिलाएं इनको थकान या फिर तनाव मानकर इग्नोर कर देती हैं।PCOS में महिलाओं में पुरुष हार्मोन असंतुलित होने लगता है। जिससे अंडाशय पर छोटी-छोटी सिस्ट बनती है और ओव्यूलेशन अनियमति हो जाता है। यह सिंड्रोम अब सिर्फ अनियमित पीरियड्स तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह लाइफस्टाइल से जुड़ी एक चुनौती है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक PSOC के लक्षणों को पहचानना और समय रहते डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसे संकेतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको देखकर महिलाएं या लड़कियां नजरअंदाज कर देती हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: सर्दियों में जोड़ों का दर्द बढ़ा, ये 5 घरेलू और वैज्ञानिक उपाय देंगे तुरंत राहत, ठंड में मिलेगी गर्माहटपीरियड्स का मिस होनाअनियमित या मिस पीरियस भी PCOS का सबसे बड़ा और स्पष्ट संकेत है। अगर आपके पीरियड्स देर से आते हैं, हर महीने नहीं आते या फिर पूरी तरह से मिस हो जाते हैं। तो यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत है। यह ओव्यूलेशन में समस्या की वजह से होता है। इसलिए इन लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।बॉडी में बाल बढ़नाछाती, पीठ, चेहरे या फिर हाथ-पैर पर पुरुषों की तरह असामान्य रूप से बालों का बढ़ना और लंबे समय तक मुंहासे आना PCOS का दूसरा बड़ा लक्षण होता है। यह बॉडी में एण्ड्रोजन के अधिक उत्पादन की वजह से होता है।वेट गेन होना और गर्दन का कालापनतेजी से वजन बढ़ना या फिर वेट लॉस में अधिक कठिनाई महसूस होना PCOS से जुड़ी हो सकती है। इसके अलावा बगल, गर्दन या फिर जांघों के आसपास की स्किन का गहरा या फिर काला पड़ना इंसुलिन प्रतिरोध का संकेत है। जोकि PCOS से जुड़ा एक गंभीर खतरा है।प्रेग्नेंसी में समस्यापीसीओएस के कारण प्रेग्नेंसी में समस्या हो सकती है। वहीं इसका हार्मोनल असंतुलन मानसिक हेल्थ को प्रभावित करता है। जिससे तनाव, चिंता और अवसाद का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में शारीरिक और भावनात्मक संकेतों को समझें और फौरन एक्सपर्ट से मिलें। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Nov 2025 13:39:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: एंग्जाइटी में क्या खाएं? ये फूड्स ओवरईटिंग के बिना भी देते हैं इंस्टेंट कंफर्ट</title>
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<description><![CDATA[ जब भी हम कभी स्ट्रेस महसूस करते हैं या फिर एंग्जायटी महसूस होती है तो खुद ब खुद खाने की क्रेविंग बढ़ जाती है। इस दौरान खुद को रिलैक्स करने के लिए बॉडी अपना कंफर्ट फूड मांगती है। हम सभी अपने जीवन में अक्सर कंफर्ट ईटिंग करते हैं, लेकिन असली प्रॉब्लम तब शुरू होती है, जब हम ओवरईट कर लेते हैं और फिर अपने वजन या सेहत को लेकर गिल्ट में आ जाते हैं।एक्चुअली, एंग्जायटी में हमारा माइंड एक तरह की सेफ्टी ढूढ़ता है, और खाने में उसे कहीं ना कहीं वह कंफर्ट महसूस होता है। इसलिए कंफर्ट फूड खाना किसी भी लिहाज से गलत नहीं है, बस जरूरत है कि आप सही चीजों को चुनें और उसे सही तरह से खाएं, जिससे आपकी एंग्जाइटी भी शांत हो और साथ ही साथ आपकी सेहत पर भी उसका अच्छा असर पड़े। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही सिंपल, टेस्टी, घर वाले इंडियन कंफर्ट फूड्स के बारे में बता रहे हैं, जो एंग्जायटी को कम करने के साथ-साथ डाइजेशन को बेहतर भी बनाते हैं। साथ ही साथ इससे आपका मूड भी रिलैक्स होता है-इसे भी पढ़ें: Health Tips: सर्दियों में जोड़ों का दर्द बढ़ा, ये 5 घरेलू और वैज्ञानिक उपाय देंगे तुरंत राहत, ठंड में मिलेगी गर्माहटगर्म हल्दी दूध हल्दी के दूध को गोल्डन मिल्क कहा जाता है और यह सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अगर आपको एंग्जायटी महसूस हो रही है तो ऐसे मे हल्दी का दूध पीना काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। दरअसल, हल्दी में करक्यूमिन होता है, जो एंग्जायटी कम करता है और नींद को बेहतर बनाता है। इसमें आप अगर चाहें तो शहद की 2-3 बूंदें भी डाल सकते हैं।वेजिटेबल दलियामेन्टल स्ट्रेस में शायद ही कोई दलिया खाना चाहता हो, लेकिन अगर आप इसे खाते हैं तो यकीनन आपको काफी रिलैक्स फील होगा। यह सॉफ्ट, गर्म और पेट के लिए काफी अच्छा है। चूंकि, दलिया स्लो कार्ब्स देता है, इसलिए यह शुगर स्पाइक नहीं होने देता। ऐसे में यह एंग्जायटी को तुरंत कम करता है। आप अपनी पसंद की सब्जियों के साथ इसे बनाएं और गरमा-गरम एक छोटा बाउल खाएं।नारियल पानी के साथ लें बादामकभी-कभी एंग्जायटी की एक मुख्य वजह डिहाइड्रेशन भी होता है। इसलिए ऐसे में नारियल पानी पीना काफी अच्छा होता है। इसमें मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स और हेल्दी फैट आपको तुरंत आराम महसूस करवाते हैं। आप एक गिलास नारियल पानी को पांच भीगे हुए बादाम के साथ खाएं। आपको तुरंत काफी अच्छा महसूस होगा।केसर दूध स्ट्रेस होने पर केसर दूध पीना भी काफी अच्छा विचार हो सकता है। दरअसल, केसर एक मूड लिफ्टर की तरह काम करता है। इससे ना केवल दिमाग शांत होता है, बल्कि नींद भी काफी अच्छी आती है। आप एक कप गर्म दूध में बस चुटकी भर केसर डालकर ले सकते हैं। इससे आपको काफी रिलैक्स और कंफर्ट फील होगा।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Nov 2025 13:39:31 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: सिर्फ 15 मिनट का कमाल, पैरों को इस खास पानी में भिगोने से दूर होगी दिनभर की थकान, पाएं सुकून भरी नींद</title>
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<description><![CDATA[ दिनभर का तनाव, थकान और बेचैनी को दूर करने से सबसे असरदार और आसान तरीका पैरों को गुनगुने पानी में भिगोना है। यह सदियों पुरानी थेरेपी है, जो आपके शरीर और दिमाग दोनों को आराम देती है। आप रोजाना रात में बिस्तर पर जाने से पहले कर सकती हैं। इस थेरेपी को अधिक फायदेमंद बनाने के लिए कुछ नेचुरल चीजें जैसे एलोवेरा, नीम और हल्दी मिला सकती हैं। यह जादुई टॉनिक थके हुए पैरों को सुकून मिलता है और सेहत को कई फायदे भी मिलते हैं।यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने के साथ मन को शांत करने और अच्छी नींद लाने में सहायक होता है। वहीं यह डायबिटीज से परेशान महिलाओं के लिए भी बेहद फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि यह ग्लूकोज लेवल को कंट्रोल कर सकता है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: दांत का दर्द बन रहा है सिरदर्द, ये सस्ता और असरदार आयुर्वेदिक उपाय देगा राहत, जानिए कैसेइस खास फुट सोक को ऐसे करें तैयारनीम के पत्ते- 10हल्दी- 1 चम्‍मचएलोवेरा- कुछ स्‍लाइसगुलाब की पत्तियां- थोड़ी सीइस पानी में अपने पैरों को 15 मिनट डुबोकर रखें। इस छोटे से काम अपनी नाइट रूटीन में शामिल करें और फिर देखें यह आपके शरीर को कितना आराम और सुकून देता है।इस खास फुट सोक के फायदेबेहतर ब्लड सर्कुलेशनइससे पैरों में ब्लड का फ्लो अच्छा रहता है और यह शरीर के लिए बेहद जरूरी है। खासकर डायबिटीज से परेशान महिलओं के लिए यह काफी कारगर है।थकान और तनाव से राहतयह दिन भर की थकान के बाद आपके पैरों को आराम देने का काम करता है। यह नर्वस सिस्टम को शांत करता है, जिससे मन हल्का हो जाता है।गहरी नींदजब आपका शरीर शांत होता है, तो आपको गहरी और अच्छी नींद आती है। यह सेहतमंद जीवन के लिए काफी जरूरी है।बॉडी डिटॉक्सयह बॉडी की गंदगी को अंदर से बाहर निकालने में सहायता करता है और आपको तरोताजा महसूस कराता है।जानिए फायदेबता दें कि हल्दी, नीम के पत्ते, एलोवेरा और गुलाब की पत्तियों को पानी में मिलाकर इस्तेमाल करने के कई फायदे होते हैं। खासकर जब आप इनको पैर भिगोने के लिए इस्तेमाल करती हैं।नीम में एंटी-फंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। यह स्किन को साफ करने और किसी भी तरह के इंफेक्शन से बचाते हैं।हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी सेप्टिक गुण पाया जाता है। यह सूजन को कम करने के साथ घावों को जल्दी भरता है।ऐलोवेरा स्किन को नमी देने के साथ स्किन को मुलायम बनाता है। यह थकी हुई स्किन को आराम पहुंचाता है।गुलाब की पत्तियां मन को शांति और सुकून देने का काम करती हैं। गुलाब की खुशबू से दिमाग तरोताजा होता है।यह एक ऐसा उपाय है, जो शरीर को नेचुरल तरीके से हेल्दी रखने में सहायता करता है। इसको हर उस महिला को आजमाना चाहिए, जिनको डायबिटीज है। यह सिर्फ नुस्खा नहीं बल्कि अपने शरीर का ध्यान रखने का प्यारा तरीका है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Nov 2025 22:56:37 +0530</pubDate>
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<title>अंडा से घटाएं पेट, कमर, हिप्स की चर्बी! डॉक्टर ने बताए सेवन के 5 असरदार कैलोरी&#45;कंट्रोल तरीके</title>
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<description><![CDATA[ दिनभर की आवश्यक प्रोटीन जरूरतों को पूरा करने के लिए अंडा एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। इसे अपनी डाइट में शामिल करके आप वजन नियंत्रण में भी मदद पा सकते हैं। हालांकि इसके लिए यह जानना जरूरी है कि अंडा कब और किस तरह खाना फायदेमंद रहता है, साथ ही दिन में इसकी कितनी मात्रा लेनी उचित होती है। अंडा को प्रोटीन का सबसे अच्छा सोर्स माना जाता है। वेजिटेरियन लोग भी इसे खा ही लेते हैं। इसके सेवन से वजन घटाने का भी बढ़िया तरीका है, अब आप इसकी मदद से कमर, पेट, हिप्स, हाथ, जांघ, हर जगह की चर्बी को कम करता है। अगर आप अपनी डाइट में अंडा शामिल करेंगे, तो आसानी से वेट लॉस कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कैसे अंडे का सेवन करें और कितना करना चाहिए। कितनी मात्रा में खाना चाहिएअगर आप एक दिन में बहुत ही ज्यादा मात्रा में अंडा खाते हैं, तो सावधान हो जाएं। अगर आप गलत तरीके से अंडा पकाते हैं, तो कैलोरी इनटेक बढ़ जाती है, जिससे आप वजन कम नहीं कर पाएंगे। वेट लॉस करने के लिए सही तरीके से अंडा खाना चाहिए।वेट लॉस कैसे करता है अंडा?हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि अंडा खाने से डाइट में कैलोरी को काम किया जा सकता है। ब्रेकफास्ट के समय अंडा खाने पूरे दिन की कैलोरी इनटेक कम की जा सकती है और आपका पेट भी भरा रहेगा और भूख कंट्रोल रहती है। वेट लॉस करने के लिए अंडा तो खाएं, साथ में एक्सरसाइज भी करें। एक दिन में कितने अंडे खा सकते हैं?एक रिसर्च से पता चला है कि हर दिन 3 अंडे खाना से सेफ होता है। यह आपकी भूख को शांत करता है और मसल्स मास बना देता है।  प्रतिदिन एग डाइट में 2-4 अंडे खाने चाहिए। बेहतर रिजल्ट के लिए इसके साथ आप वेजिटेबल और लीन प्रोटीन ले सकते हैं।अंडा को इन 5 तरीके से खाएं- उबालकर खाएं: आप चाहे तो रोजाना अंडे को उबाल को खाए।- पोच्ड: इसमें अतिरिक्त फैट मिलाए न्यूट्रिएंट बने रहते हैं।- स्क्रैम्बल्ड: इसको आप कुछ सब्जियों और हल्के मसालों के साथ भी बना सकते हैं।- ऑमलेट: इसमें मिर्च, पालक और टमाटर से भरपूर पौष्टिक मील खा सकते हैं।- फ्रिटाटा: इसमें अंडे के साथ सब्जियां मिलाकर खाया जा सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Nov 2025 22:56:35 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: नींद न आने की समस्या? इन 2 गलतियों से तुरंत करें तौबा, नहीं तो रातभर जागते रहेंगे</title>
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<description><![CDATA[ आजकल की बदलती लाइफस्टाइल के कारण लोगों की नींद काफी प्रभावित होती है। रोजाना कम घंटे की नींद के साथ सर्वाइव करना, लेट नाइट सोना, फोन स्क्रॉल करने के चक्कर में पर्याप्त नींद न लेना आदि लाइफस्टाइल का हिस्सा बनती जा रही हैं। हालांकि ऐसी तमाम स्टडीज सामने आ चुकी हैं, जिनमें कम नींद के साइड इफेक्ट्स के बारे में खुलासा हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे न सिर्फ आपकी फिजिकल हेल्थ बल्कि मेंटल हेल्थ प्रभावित होती है। वहीं कई बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है।एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की करीब 10% आबादी अनिद्रा का अनुभव करती है। यह एक आम नींद संबंधी विकार है। जिसमें रात में सोने में या सोते रहने में समस्या होती है। ऐसे में अर आप भी अनिद्रा के मरीज हैं, तो आपको कुछ गलतियां करने से बचना चाहिए। वरना आपका रोजाना का यह स्ट्रगल बढ़ सकता है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: सिर्फ 15 मिनट का कमाल, पैरों को इस खास पानी में भिगोने से दूर होगी दिनभर की थकान, पाएं सुकून भरी नींदजानिए क्या है अनिद्राअनिद्रा को इनसोम्निया कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसकी वजह आपको रात में अच्छी नींद नहीं आती है, या फिर टूट-टूटकर नींद आती है। इसकी वजह से आप जल्दी जाग सकते हैं और हो सकता है कि दोबारा सो पाने में सक्षम नहीं होंगे। एक हेल्दी वयस्क को रोजाना रात में 7-9 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है। अगर आप रोजाना 6 घंटे से कम सोते हैं, तो इससे आपका पूरा स्वास्थ्य प्रभावित होता है। ऐसे कंडीशन को बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करना चाहिए।न करें ये गलतियांआमतौर पर अनिद्रा खतरनाक नहीं है। वहीं इसका इलाज करने के भी कई तरीके मौजूद हैं। आप कुछ गलतियों से बचकर और कुछ चीजों को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाकर इस समस्या से राहत पा सकते हैं। हम आपके साथ कुछ ऐसे टिप्स शेयर करने जा रहे हैं, जिनको अपनाकर आप रात में अच्छी नींद पा सकती हैं।हैवी डिनरकई लोग रात में डिनर करे के फौरन बाद ही सोने चले जाते हैं। लेकिन कभी भी हैवी मील के बाद सोने के लिए नहीं जाना चाहिए। क्योंकि इससे शरीर में भोजन सड़ने, विघटित होने और गैस बनने लगती है। जिस कारण रात में नींद आने में परेशानी होती है। हमेशा रात का भोजन सोने से कम से कम 3 घंटे पहले कर लेना चाहिए। जिससे कि आपका गट पोषक तत्वों को पूरी तरह से अवशोषित कर सके और आपका शरीर हल्का हो जाए। इससे दिमाग शांत होकर बंद हो सके। वहीं खाना खाने के बाद करीब 10-15 मिनट की वॉक जरूर करें।इन खाद्य पदार्थों को खाने से बचना चाहिएकैफीनहमेशा सोने से कम से कम 8 घंटे पहले तक चाय या कैफीन का सेवन करें। प्रयास करें कि दोपहर 2 या 3 बजे के आसपास आप अपनी आखिरी कॉफी या चाय पिएं।फर्मेंटेड फूडआपको रात में फर्मेंटेड फूड खाने से बचना चाहिए। जैसे दही, किमची, कोम्बुचा, अचार, केफिर, इडली और डोसा बैटर। यह आपके गट को गुड बैक्टीरिया प्रदान करते हैं। लेकिन रात के समय इन चीजों को खाने से बचना चाहिए।फलसूर्यास्त के बाद फलों का सेवन करने से बचना चाहिए। फलों का आपके शरीर पर जागृत प्रभाव होता है, जोकि आपको एनर्जेटिक बनाता है और रात में इसकी जरूरत नहीं होती है।ऐसी चीजों का करें सेवनरात में हमेशा आपको ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए, जो आपके नर्वस सिस्टम को शांत करने के साथ सोने में मदद करे। इनमें अश्वगंधा, जायफल, जटामांसी, शंखपुष्पी, ब्राह्मी जैसी जड़ी-बूटियां शामिल हैं। यह चीजें ओवरथिंकिंग को कम करने और नर्वस सिस्टम को शांत करने में सहायता करती हैं।ऐसे करें इस्तेमालरोजाना रात में जायफल का सेवन करके चैन की नींद सो सकते हैं। इसके इस्तेमाल के लिए एक चुटकी जायफल को दूध के साथ उबालें। इसमें एक चम्मच घी, थोड़ी सी हल्दी, काजू का मक्खन मिलाएं। फिर रात में सोने के समय इसका सेवन करें। इससे आपका दिमाग शांत होगा और अच्छी व गहरी नींद आएगी। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Nov 2025 22:56:34 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: रात के खाने का सही समय और तरीका, वैज्ञानिकों ने बताया कैसे घटाएं पेट की चर्बी बिना डाइटिंग</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर जब हम वेट लॉस करने की कोशिश करते हैं, तो सबसे पहले यह सोचते हैं कि हमें क्या नहीं खाना है। जैसे कार्बोहाइड्रेट घटाना, या सिर्फ प्रोटीन वाली डाइट लेना और कैलोरी लेना। कई बार लोग वेट लॉस के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग जैसी ट्रेंडिंग टेक्निक अपनाते हैं। लेकिन वेट लॉस का मतलब सिर्फ कम खाना या भूखे रहना नहीं है। एक नई रिसर्च के मुताबिक वेट लॉस में यह ज्यादा जरूरी है कि आप कब और क्या खाते हैं।बता दें कि खासकर रात का खाना आपकी नींद, वजन और मेटाबॉलिज्म पर सीधा असर डालता है। अगर आप सही समय पर पौष्टिक और हल्का खाना खाते हैं, तो इससे पाचन बेहतर होता है। नींद बेहतर आती है, शरीर रात में फैट जल्दी जलाता है और ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है। एक स्टडीज के अनुसार, डिनर का सही समय और सही खाना चुनने से फैट कम करना काफी आसान हो जाता है, नींद की क्वालिटी बेहतर होती है और मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा भी कम होता है। ऐसे में अगर आप भी पेट की चर्बी कम करना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: नींद न आने की समस्या? इन 2 गलतियों से तुरंत करें तौबा, नहीं तो रातभर जागते रहेंगेकब करें डिनरवैज्ञानिक शोध बताते हैं कि शाम को 05:30 से 07:00 के बीच डिनर करने के वेट कंट्रोल करने का सही समय है। वहीं जो लोग रात 9-10 बजे या फिर इससे बाद में खाना खाते हैं, उनके शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। साथ ही फैट बर्निंग की गति भी कम होती है। रिर्सच के मुताबिक जो लोग शाम को 5 बजे के आसपास डिनर कर लेते हैं, उनकी बॉडी अधिक कैलोरी बर्न करती है और इन लोगों को बेहतर नींद आती है।सोने से 2-3 घंटे पहले खाएं खानाएक्सपर्ट की राय है कि सोने से करीब 2-3 घंटे पहले डिनर करना चाहिए। क्योंकि इससे खाना अच्छे से पचता है, गैस और एसिडिटी की समस्या नहीं होती और अच्छी नींद आती है। वहीं अगर आप देर से खाना खाते हैं, तो शरीर को बॉडी क्लॉक गड़बड़ा जाती है। क्योंकि रात में मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है।जल्दी डिनर के फायदेअगर आप जल्दी डिनर करते हैं, तो शरीर को 8-12 घंटे का नेचुरल फास्टिंग का टाइम मिल जाता है। इससे शरीर को स्टोर फैट जलाने, पाचन सुधारने और सूजन घटाने का समय मिलता है। इसी सिद्धांत पर इंटरमिटेंट फास्टिंग जैसी डाइट काम करती है। यानी की खाने का समय तय करना, जिससे शरीर को खुद को रिपेयर करने का समय मिले और वेट लॉस हो सके।प्रोटीन और हरी सब्जियां खाएंटोफू, दालें, ग्रिल्ड चिकन, फिश और बीन्स प्रोटीन के अच्छे स्रोत होते हैं। यह पेट को लंबे समय तक भरा रखने के साथ मसल्स को मजबूत बनाते हैं और मेटाबॉलिज्म को बढ़ाते हैं। आप अपने डिनर में हरी सब्जियां, सलाद, सूप और फाइबर युक्त भोजन शामिल करें। फाइबर डाइजेशन को धीरे करता है, भूख को कंट्रोल करता है और ब्लड शुगर को संतुलित रखता है।कार्ब्स और हेल्दी फैट्सअगर आपको कार्बोहाइड्रेट चाहिए तो आपको ब्राउन राइस, ओट्स, क्विनोआ या होल व्हीट जैसी चीजों का सेवन करना चाहिए। यह चीजें धीरे-धीरे पचती हैं और शरीर में शुगर का लेवल नहीं बढ़ाती हैं। थोड़ी मात्रा में नट्स, सीड्स, ऑलिव ऑयल और एवोकाडो लें। यह चीजें हार्मोन संतुलन में सहायता करती हैं और शरीर में विटामिन्स एब्जॉर्ब करने में सहायता करते हैं।रात में कौन सी डाइट सहीरात में मेडिटेरेनियन डाइट सही है। क्योंकि इस डाइट में दालें, फिश, होल ग्रेन, सब्जियां और हेल्दी फैट्स होते हैं। यह डाइट वेट लॉस और दिल की सेहत के लिए लाभकारी मानी जाती है। इसके अलावा लाइट एशियन डिनर और प्लांट-बेस्ड डाइट बढ़िया पोषण हैं। रात में तला हुआ और भारी खाना, प्रोसेस्ड मीट, मीठे ड्रिंक या डेजर्ट, क्रीमी या ग्रेवी वाला फूड, सफेद ब्रेड, पास्ता या रिफाइंड कार्ब्स आदि खाने से बचना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Nov 2025 22:56:32 +0530</pubDate>
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<title>प्रेग्नेंसी के बाद पानी पीने को लेकर भ्रम? एक्सपर्ट से जानें नई मां के लिए क्या है सही</title>
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<description><![CDATA[ प्रेग्नेंसी का सफर से लेकर डिलीवरी के बाद का समय किसी भी महिला के लिए काफी खास होता है। यह समय काफी स्पेशल होता है, इसके साथ ही काफी चैलेंजिंग भी होता है और ऐसे में महिलाओं को अपना खास ख्याल रखने का काफी जरुरत है। एक्सपर्ट ने बताया है कि किसी भी महिला के लिए एक नन्ही सी जान को अपने पालना इसके बाद उसे जन्म देना और ब्रेस्टफीड करवाना है, आसान नहीं होता है। इस दौरान महिला को खास ध्यान रखना भी बेहद जरुरी है। हर किसी महिला को प्रेग्नेंसी जर्नी और डिलीवरी का अनुभव अलग हो सकता है, इस दौरान सभी को अलग तरह के खान-पान की जरुरत हो सकती है। अक्सर डिलीवरी के बाद नई मां को कई तरह की सलाह दी जाती है। खान-पान से लेकर उठने-बैठने के तरीके और नई-नई बातें उनके सामने आती हैं। ऐसे में कई लोगों का कहना है कि नई मां को ज्यादा पानी नहीं पीना चाहिए। क्या यह सच में ऐसा है, आइए आपको बताते हैं क्या सही है क्या नहीं? क्या डिलीवरी के बाद नई मां को कम पानी पीना चाहिए?- डिलीवरी के बाद अक्सर नई मां को कम पानी पीने की सलाह दी जाती है, लेकिन डॉक्टर के मुताबिक यह बात पूरी तरह से गलत है।- हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, डिलीवरी के बाद 1-2 दिन तक, जब तक बाउल मूवमेंट सही न आ जाए, तब तक आप चाहे तो खान-पान में कुछ सावधानी बरतने की सलाह दी जा सकती है, लेकिन उसके बाद सही मात्रा में पानी पिएं।- एक्सपर्ट के मुताबिक कई जगहों पर लोग अभी भी नई मां को कम पानी पीने और कम खाना खाने की सलाह कुछ दिनों तक कम लेने की सलाह देते हैं, हालांकि, यह असल में जच्चा की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। - वहीं, डिलीवरी के बाद शरीर में फ्ल्यूड्स और एनर्जी की कमी हो जाती है और ऐसे में जब आप पानी नहीं पीती हैं या सहीं से खाना नहीं खाती हैं, तो इसका सीधा प्रभाव सेहत पर दिखता है और कमजोरी भी बढ़ सकती है। - डिलीवरी के बाद ब्रेस्टफीडिंग करवाने में भी कैल्शियम और कई जरुरनी मिनरल्स जाते हैं, ऐसे में सही खान-पान बहुत जरुरी हो जाता है। - ऐसे में नई मां को फल-सब्जियां, पानी, जूस और सभी विटामिन्स व मिनरल्स से भरपूर चीजें को सेवन करना चाहिए।- ध्यान रखें कि अगर आपको डॉक्टर ने किसी चीज को खान के लिए मना करें या किसी हेल्थ कंडीशन के हिसाब से आपकी डाइट में कोई बदलाव किया जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Nov 2025 22:56:31 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: दांत का दर्द बन रहा है सिरदर्द, ये सस्ता और असरदार आयुर्वेदिक उपाय देगा राहत, जानिए कैसे</title>
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<description><![CDATA[ कई बार दांत का दर्द इतना भयंकर होता है कि यह बर्दाश्त से बाहर हो जाता है। दांत का दर्द अचानक शुरू होता है और कई बार रात के समय इतना बढ़ जाता है कि नींद तक उड़ जाती है। ऐसे में दांत दर्द होने पर हम फौरन महंगी पेनकिलर खाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में मौजूद कुछ चीजें इस दर्द को पलक झपकते कम कर सकते हैं।  आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको एक ऐसा नुस्खा बताने जा रहे हैं, जो आयुर्वेदिक है। यह नुस्खा बिना किसी साइड इफेक्ट्स के आपको मिनटों में राहत दे सकता है। इस नुस्खे के लिए आपको सिर्फ 5 रुपए खर्च करने होंगे। यह नुस्खा किसी भी पेनकिलर से कई गुना तेजी से असर करता है। तो आइए जानते हैं इस नुस्खे के बारे में...इसे भी पढ़ें: पहले पीरियड्स से ही मां अपनी बेटी का रखें ख्याल, सही डाइट और देखभाल है जरुरी!सामग्रीकाली मिर्च- एक चुटकीलौंग का पाउडर- एक चुटकी (या एक पिसी हुई लौंग)सरसों का तेल- कुछ बूंदेंबनाएं यह असरदार पेस्टएक कटोरी में काली मिर्च और लौंग पाउडर डालें।अब इसमें 3-4 बूंद सरसों का तेल मिलाएं।इन तीनों को अच्छे से मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें।फिर इस पेस्ट को हल्के हाथों से दर्द वाले दांत या मसूड़ों के आसपास धीरे-धीरे लगाएं।इस पेस्ट को 2 मिनट तक लगा रहने दें और फिर गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें।इस पेस्ट को निगलना नहीं है और आपको 20 मिनट में आराम मिल जाएगा।ऐसे काम करता है यह पेस्‍टबता दें कि यह पावरफुल पेस्ट दर्द को नेचुरली कम करता है और इंफेक्शन से भी लड़ता है। यह तीनों चीजें मिलकर नेचुरल मल्टी-एक्शन फॉर्मूला बनाती है।लौंग का पाउडर यूजेनॉल से भरपूर होता है और यह एक पॉवरफुल एनेस्थेटिक है। यह दर्द वाले हिस्से को सुन्न करता है और सूजन को भी कम करता है।काली मिर्च में पिपेरिन नामक तत्व पाया जाता है। यह नेचुरल पेनकिलर है। यह मसूड़ों में बल्ड सर्कुलेशन को बढ़ाने के साथ दर्द के सिग्नल ब्रेन तक कम पहुंचते हैं।सरसों के तेल में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाया जाता है। लौंग और काली मिर्च के गुण मसूड़ों की गहराई तक ले जाता है। इसमें मौजूद गुण बैक्टीरिया और इंफेक्शन से लड़कर दर्द को कम करता है।यहां जानिए पेस्‍ट के अन्‍य फायदेसरसों के तेल में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होता है। यह सूजन को कम करता है और दांतों को मजबूत बनाता है।काली मिर्च में पिपेरिन पाया जाता है, जो मसूड़ों के टिश्यू में बल्ड सर्कुलेशन को बढ़ाता है। इससे दांतों की जड़ें मजबूत होती है और दर्द में भी राहत मिलती है।लौंग और सरसों के तेल का कॉम्बिनेशन मुंह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को कम करने का काम करता है, इससे मुंह की बदबू और इंफेक्शन दोनों कम होते हैं।यह पेस्ट नेचुरल एंटी सेप्टिक की तरह काम करता है। यह दांतों की सतह को साफ करने के साथ मसूड़ों में फंसे बैक्टीरिया को नष्ट करता है। सरसों के तेल और लौंग के यूजेनॉल तत्व गुण दांतों पर बनने वाले प्लाक को कम करता है और कैविटी से भी बचाव करता है।अगर ब्रश करने के दौरान आपके दांतों से ब्लड आता है, तो यह नुस्खा आपके लिए उपयोगी साबित हो सकता है। यह नुस्खा इंफेक्शन और सूजन को शांत करने के साथ मसूड़ों को हेल्दी बनाता है।यह पेस्ट एंटी-माइक्रोबियल गुणों से भरपूर है, जोकि लंबे समय तक आपको ताजगी का एहसास दिलाता है।सरसों के तेल और काली मिर्च का यह पेस्ट हल्का एक्सफोलिएटिंग असर देता है। यह नुस्खा दांतों के पीलेपन को कम करने नेचुरली सफेद बनाता है।लौंग दर्द को दूर करने और सरसों के तेल का गर्माहट भरा असर मिलकर नसों को शांत करता है और दांत दर्द को दूर करता है।पेनकिलर से पहले इसको आजमाएंअगर अगली बार दांत दर्द हो तो आप पेनकिलर की जगह इस आयुर्वेदिक नुस्खे को आजमाएं। यह नुस्खा आपको इंस्टेंट रिलीफ देगा और ओरल हेल्थ भी अच्छा रखेगा। इससे आपके दांत और मसूड़े अंदर से मजबूत होंगे। इस बात का ध्यान रखें कि यह नुस्खा अस्थायी राहत देता है। अगर बार-बार दर्द हो रहा है या तेज दर्द हो रहा है। तो असली वजह पता लगाने के लिए आपको डेंटिस्ट के पास जाना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Nov 2025 09:41:16 +0530</pubDate>
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<title>बच्चों में बढ़ रहा प्री&#45;डायबिटीज का खतरा; जानें एक्सपर्ट से कारण और बचाव के उपाय</title>
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<description><![CDATA[ डायबिटीज लाइफस्टाइल से जुडी एक गंभीर बीमारी है। मधुमेह की बीमारी व्यस्कों में आसानी से देखने को मिलती है। हालांकि, अब बच्चों में इस बीमारी के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। यदि बच्चों का पहले से डायबिटीज चेकअप कराएं, तो उन्हें इस समस्या से बचाया जा सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, डायबिटीज के पहले की कंडीशन को प्री-डायबिटीज कहा जाता है। इस परिस्थिति में ब्लड शुगर सामान्य से थोड़ा ज्यादा होता है, लेकिन यह डायबिटीज जितना नहीं होता।आइए आपको बताते हैं बच्चों में प्री-डायबिटीज बढ़ने के कारण और इसे कैसे मैनेज करने के तरीके बताएंगे।बच्चों में प्री-डायबिटीज होने के कारणNIH में छापी एक रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों में प्री-डायबिटीज 4 से 23 फीसदी तक बढ़ रही है, जो चिंताजनक है। इस बारे में लोगों में जागरुकता बढ़ाने की काफी जरुरी है, क्योंकि आजकल बच्चों में डायबिटीज के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आइए जानते हैं कि क्यों बच्चों में इसके मामले बढ़ रहे हैं।सही खान-पान न होनाआजकल के बच्चे जंक फूड का सेवन अत्यधिक करते हैं। बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, चॉकलेट, पैक्ड जूस, सॉफ्ट ड्रिंक्स और शुगर वाले स्नैक्स रोजमर्रा की आदत बन गए हैं। इनमें कैलोरी बहुत होती है और न्यूट्रिशन नाममात्र ही होता है। इस कारण से शरीर इंसुलिन को सही तरह इस्तेमाल नहीं कर पाता है और प्री-डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।फिजिकल एक्टिविटी न होनाबच्चे सिर्फ मोबाइल गेम, टीवी और टैबलेट में ही बिजी रहते हैं। स्कूल भी कई बार ऑनलाइन क्लास लेते है। इस वजह से बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी कम हो गई है। शरीर कम चलेगा, तो कैलोरी भी कम बर्न होती है। जिस वजह से वजन बढ़ता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने लगता है, जो प्री-डायबिटीज को बढ़ा सकता है।बचपन का मोटापाजंक फूड का अधिक सेवन और शारीरिक गतिविधियों की कमी पेट के आसपास चर्बी जमा होने का प्रमुख कारण बनते हैं। यह बढ़ा हुआ फैट इंसुलिन के कार्य को प्रभावित करता है, जिसके चलते बचपन में ही मोटापा बढ़ने लगता है और प्री-डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है। यदि समय रहते उपचार न किया जाए, तो यही स्थिति आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का मुख्य कारण बन सकती है।फैमिली हेस्ट्रीयदि आपकी फैमिली में पैरेंट्स या फिर दादा-दादी या नाना-नानी किसी को भी डायबिटीज की समस्या होती है, तो बच्चे में डायबिटीज का रिस्क भी बढ़ जाता है। यह सिर्फ एर जेनेटिक फैक्टर है , जिसको बदला नहीं जाता है। हार्मोनल बदलावयह स्थिति तब होती है जब लड़कियों में कम उम्र में ही पीरियड्स शुरू हो जाते हैं और हार्मोनल परिवर्तन जल्दी आने लगते हैं। इसे ‘अर्ली प्यूबर्टी’ कहा जाता है। ऐसे में बच्चों की ग्रोथ अचानक तेज हो सकती है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने का खतरा रहता है। इसलिए जिन लड़कियों में जल्दी पीरियड्स शुरू हों या लड़कों में समय से पहले प्यूबर्टी आए, उन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है।नींद पूरी न होनाआजकल के बच्चे पढ़ाई, मोबाइल पर गेम खेलने या फिर सोशल मीडिया के चलते रात में सोते नहीं है। जिससे इनकी नींद पर असर पड़ता है। इससे बॉडी में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं, जो स्ट्रेस बढ़ाते है। इससे ब्लड शुगर बढ़ने का रिस्क बढ़ जाता है।बच्चों में प्री-डायबिटीज कैसे मैनेज करें?- सॉफ्ट ड्रिंक, पेक्ड जूस और शुगर वाली चीजों को कम से कम खाने दें।- बच्चों को फल, सब्जियां, दलिया, मिलेट्स, रागी, ओट्स डाइट में शामिल करें।- बच्चे वॉक, दौड़ने और उनके फेवरेट गेम खेलने को प्रोत्साहित करें। यदि बच्चे का डांस में मन है, तो करने दें। ऐसा करने से बच्चे का शरीर एक्टिव रहेगा।- मोटे बच्चों  में केवल 5-7% वजन कम होने से ही ब्लड शुगर में बड़ा सुधार आ सकता है। बच्चों के वजन को कंट्रोल में रखें।- यदि डायबिटीज की फैमिली हिस्ट्री है, तो फास्टिंग ब्लड शुगर, HbA1c और लिपिड प्रोफाइल जरीर कराएं।- रात को बच्चों को सोने से पहले मोबाइल या टीवी बिल्कुल न देखने दें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Nov 2025 09:41:15 +0530</pubDate>
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<title>सिर के एक तरफ दर्द? हो सकती है ये गंभीर समस्या, इन संकेतों को न करें नजरअंदाज</title>
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<description><![CDATA[ सिरदर्द होना एक आम बात है और यह किसी वजह से हो सकता है। अगर आपने पूरे दिन खाना नहीं खाया, लंबे समय से किताब पढ़ रहे हैं, मोबाइल पर ज्यादा समय बिता लिया या फिर किसी बात को लेकर चिंता हो जाए, तो सिरदर्द होने लगता है। कई बार तो हम सभी सिरदर्द को गंभीर बिल्कुल नहीं लेते हैं। ऐसे ही एक तरफ सिरदर्द की समस्या कोई सीरियस नहीं लेता है। लोगों को यही लगता है कि एक तरफ सिरदर्द हो रहा है, बाद में ठीक हो जाएगा। क्या आपके मन में सवाल आया कि एक तरफ सिर में दर्द होना किसी बीमारी का संकेत नहीं है। आइए आपको बताते हैं एक तरफ सिरदर्द किसी खतरे की घंटी तो नहीं। एक तरफ सिरदर्द किसी खतरे की घंटी तो नहीं?वैसे एक तरफ सिरदर्द होना किसी तरह की गंभीर बीमारी की ओर संकेत नहीं होता है। हालांकि, सिरदर्द के कारणों की बात करें, तो इसमें माइग्रेन, टेंशन हेडेक। इस बात का ध्यान रखना कि कभी-कभी एक तरफ सिरदर्द होना किसी खतरे से कम नहीं है। अगर किसी को लंबे समय से एक तरफ सिरदर्द हो, उन्हें अन्य लक्षणों पर ध्यान देना भी जरुरी है। यदि किसी को एक तरफ सिरदर्द के साथ ही गर्दन में स्टिफनेस, उल्टी और कंफ्यूजन हो और नजर भी धुंधली हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।  एक तरफ सिरदर्द होने के क्या कारण होते हैं? माइग्रेन एक तरफ सिरदर्द होने के मुख्य कारण माइग्रेन हो सकता है। माइग्रेन का दर्द चुभने वाला महसूस होता है और इस तरह के दर्द की वजह से लाइट की रोशनी में भी दिक्कत होने लगती है।टेंशन हेडेकअक्सर इस तरह के दर्द सिर की एक तरफ होता है। इस दर्द में महसूस होता है कि जैसे सिर के एक साइड में तेज दबाव। स्ट्रेस, खराब पोस्चर और थकान की वजह से भी हो सकता है।साइनस की समस्याकई बार साइनस की वजह से भी सिर की एक तरफ दर्द बना रहता है। आपको बता दें कि साइन होने पर पूरे पर चेहरे दबाव बनता है, जिस कारण से माथे और आंखों के पीछे भी दर्द का एहसास होता है।डॉक्टर को कब दिखाएंदर्द का आना-जानायह ध्यान देने वाली बात है कि अगर सिर के एक हिस्से में होने वाला दर्द बार-बार आए और जाए, और उसका तीव्रता भी अधिक हो, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकती है, इसलिए तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।अचानक से दर्द होनायदि आपके सिर में एक तरफ अचानक से तीव्र दर्द शुरु हो गया है, तो बेहतर होगा है कि आप समय पर प्रोफेशनल से संपर्क करें। अचानक से दर्द होने वाला सामान्य नहीं होता है।अक्सर दवा लेना अगर आप अक्सर एक साइड हो रहे सिरदर्द की दवा लेते हैं, तो यह सही संकेत नहीं है। इससे पता चलता है कि आपको फ्रिक्वेंटली इस तरह की दिक्कत होती है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 25 Nov 2025 11:12:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>लिवर में जमा फैट से परेशान? इस खास देसी चाय से मिलेगी राहत, ग्रेड 1 फैटी लिवर को जड़ से खत्म करे</title>
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<description><![CDATA[ आजकल की खराब जीवनशैली और गलत खान-पान के कारण इसका असर सीधा शरीर पर होता है। इसके साथ ही हमारे लिवर भी प्रभावित होता है। रेगुलर तौर पर अनहेल्दी ईटिंग हैबिट्स के कारण, फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। जब लिवर में फैट जमा होने लगता है, तो इसे फैटी लिवर माना जाता है। फैटी लिवर शुरुआत में कई सारे लक्षण और समस्या लेकर नहीं, यदि लंबे समय तक इन चीजों पर ध्यान नहीं दिया तो लिवर डैमेज की स्थिति भी आ सकती है। अगर आपकी रिपोर्ट में ग्रेड 1 फैटी लिवर आ जाए, आप अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव जरुर करें।  Grade 1 Fatty Liver के लक्षणों को रिवर्स कर सकती है यह देसी चाय- एक्सपर्ट्स ने बताया है कि यदि आपकी रिपोर्ट में फैटी लिवर ग्रेड 1 पाया गया है, तो आप इस लिवर डिटॉक्स चाय का सेवन शुरू कर सकते हैं। यह चाय लिवर को साफ रखने, सूजन कम करने और शरीर को स्वाभाविक रूप से डिटॉक्स करने में मदद करती है।- डंडेलियन रूट बाइल प्रोडक्शन को बेहतर करती है, शरीर में जमे हुए टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है और लिवर को डिटोक्स करती है। - धनिया की पत्तियां, लिवर इंफ्लेमेशन को कम करती हैं और हैवी मील्स के बाद शरीर को डिटॉक्स करने में सहायक है। - हल्दी में कर्क्युमिन होता है, जो लिवर में जमे हुए फैट को कम करती है और इससे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से होने वाले डैमेज से लिवर सेल्स का बचाव होता है।- शरीर में कर्क्युमिन को काली मिर्च जरुर सुधारती है और इससे लिवर एंजाइम्स का सीक्रेशन बेहतर होता है।कैसे बनाएं चाय- सबसे पहले आप 1 पैन में 1 गिलास पानी डालें।- इसमें डंडेलियन रूट टी डालें।- इसमें धनिये की पत्तियां डालें।- अब 1 चुटकी हल्दी और काली मिर्च डालें।- फिर इसे अच्छे से उबालकर छान लें।- इसको आप दिन में 1 बार जरुर पिएं।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 25 Nov 2025 11:12:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: ठंड में वर्कआउट करने का मन नहीं करता? तो ये ट्रिक्स करें ट्राई</title>
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<description><![CDATA[ ठंड शुरू होते ही हम सभी का आलस बढ़ जाता है। इस मौसम में रजाई से बाहर निकलने का मन नहीं करता है और ऐसे में हम वर्कआउट को अवॉयड करने लग जाते हैं। यह तो सच है कि सर्दियों में सुस्ती महसूस होती है, पर इस बहाने की वजह से अपने फिटनेस गोल्स को खराब कर देना सही नहीं माना जाता है। भले ही इस मौसम में आपका मोटिवेशन कम हो जाए, लेकिन फिर भी कुछ आसान तरीकों को अपनाकर आप अपने वर्कआउट में कंसिस्टेंसी बनाए रख सकती हैं।तो चलिए आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही आसान तरीकों के बारे में बता रहे हैं, जो सर्दी, सुस्ती और “कल से पक्का” वाली आदत को पीछे छोड़कर रोज वर्कआउट की आदत को बनाए रखने में आपकी मदद करेंगे-टाइमिंग करें शिफ्टअगर आप सुबह वर्कआउट करते आए हैं, लेकिन ठंड में कम्बल छोड़कर वर्कआउट करने का मन ही नहीं करता। लेकिन आपका रूटीन ना बिगड़े, इसके लिए जरूरी है कि आप अपने वर्कआउट की टाइमिंग को शिफ्ट करें। आप सुबह 4-5 बजे जाने की जगह सुबह 10-11 बजे या फिर शाम को 5-7 बजे वर्कआउट करें। जब टाइमिंग कंफर्टेबल होगी तो बहाने भी कम होंगे।इसे भी पढ़ें: इंटरमिटेंट फास्टिंग से पहले पढ़ें यह बात—हर महिला के लिए नहीं है यह डाइटछोटे गोल्स करें सेटचूंकि ठंड में पहले ही वर्कआउट करने की इच्छा नहीं होती है, ऐसे में अगर आप खुद से यह कहते हैं कि आपको एक घंटा वर्कआउट करना है तो फिर आप वर्कआउट करते ही नहीं है। इसलिए, ठंड में अपनी कंसिस्टेंसी बनाए रखने के लिए आप छोटे गोल्स सेट करें। मसलन, आप खुद से सिर्फ 10 मिनट का वादा करें। बाद में जब आप वर्कआउट करना शुरू करते हैं तो वह अपने आप 25-30 मिनट में बदल जाते हैं।वर्कआउट रूम को थोड़ा गर्म रखोयह एक छोटा सा टिप है, लेकिन आपके बेहद काम आ सकता है। जब वर्कआउट रूम थोड़ा गर्म होता है तो ऐसे में वर्कआउट करना कंफर्टेबल लगता है। अगर आपके पास रूम हीटर नहीं हो तो आप मोटे मोजे या लाइट जैकेट पहनें। आप चाहें तो एक गर्म पानी सिप करके शुरू करो। जब बॉडी को शॉक नहीं लगेगा, तो आलस कम महसूस होगा।विंटर-फ्रेंडली वर्कआउट्स चुनोअगर आप ठंड के दिनों में वर्कआउट को पूरी तरह एन्जॉय करना चाहते हैं तो ऐसे में आपको समझदारी के साथ वर्कआउट को चुनना चाहिए। सर्दी में हैवी वर्कआउट्स डराने वाले लगते हैं, तो ऐसे में फिजिकली एक्टिव रखने के लिए आप डांस वर्कआउट, योगा, पिलेट्स आदि कर सकते हैं। इसमें आपको काफी मजा आता है तो खुद ब खुद वर्कआउट करने की इच्छा होती है।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Sun, 23 Nov 2025 21:49:41 +0530</pubDate>
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<title>पहले पीरियड्स से ही मां अपनी बेटी का रखें ख्याल, सही डाइट और देखभाल है जरुरी!</title>
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<description><![CDATA[ पीरियड्स के दौरान हर किसी लड़की को अपना ख्याल बेहद जरुरी होता है। इस दौरान एनर्जी लेवल कम होता है और शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसका असर सीधा बॉडी पर देखने को मिलता है। पीरियड्स के समय सही खान-पान बेहद जरुरी होता है। लड़कियों में पहली बार पीरियड्स की शुरुआत होती है, उस समय किसी भी लड़की के मन में कई सवाल होते हैं और इन सभी सवालों के जवाब उसे अपने मां से ही मिलते हैं। किसी भी मां के लिए यह काफी जरुरी है कि जब उनकी बेटी पीरियड्स के शुरु होने की उम्र के आस-पास पहुंच जाए, तो वे उसको पीरियड्स की बेसिक जानकारी जरुर बताएं। यदि आपकी बेटी 8-14 साल की है, उसे पहली बार पीरियड्स आ गए हैं या आने वाले हैं, तो इस समय पर आपको उसकी डाइट का खासा ख्याल रखता है। अगर आप सही डाइट पहले पीरियड्स के समय पर होने वाले फिजिकल और इमोशनल बदलावों से डील करने में मदद करता है। इस दौरान आपको अपनी बेटी की डाइट में किन चीजों को शामिल करना चाहिए, आइए आपको बताते हैं।पीरियड्स की शुरुआत से बेटी की डाइट में करें ये बदलावॉ- इस दौरान डाइट में हेल्दी फैट्स को शामिल करें। हेल्दी फैट्स जैसे कि घी, नारियल, सीड्स और भीगे हुए नट्स हार्मोनल बैलेंस को बनाए रखता है। वहीं, अनहेल्दी फैट्स मोटापा को बढ़ा सकते हैं और इनसे कई बीमारियों का खतरा रहता है। अनहेल्दी फैट्स इस समय पर शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव से डील करने में मदद करता है।- जंक फूड्स और शुगर से दूरी बनाना काफी जरुरी है। प्यूबर्टी के दौरान शरीर में हार्मोन्स ऊपर-नीचे होते हैं। अगर आप प्रोसेस्ड फूड्स या अधिक शुगल लेती हैं, तो हार्मोन्स डिस्टर्ब नहीं होते हैं।- डाइट में आयरन की मात्रा को अधिक बढ़ाएं। ऐसे में चुकंदर, खजूर, गुड़, पालक और काली किशमिश को डाइट का हिस्सा जरुर बनाएं। शरीर में आयरन की कमी के कारण, पीरियड्स में अधिक दर्द और कमजोरी महसूस होती है।- पीरियड्स के समय हट हेल्थ पर भी असर पड़ता है। इस समय पर दही, छाछ, कांजी और फर्मेंटेड चावल को डाइट में जरुर शामिल करें, ऐसा करने से हार्मोन्स बैलेंस होते हैं।- अपनी बेटी को पीरियड ट्रैकिंग सिखाएं। किसी एप या कैलेंडर की मदद से उसे पीरियड्स को ट्रैक करने की सलाह दी जाती है। - पीरियड्स के दौरान हल्की-फुल्की फिजिकल एक्टिविटी भी जरुर करें। योगा, वॉकिंग और डांसिंग मूड और हार्मोन्स को बूस्ट करता है।- अपनी बेटी से पीरियड्स के बारे में खुलकर बात करें।  अगर उसे कोई दिक्कत फील हो रही है, तो उसकी बात को समझने की कोशिश करें।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 23 Nov 2025 21:49:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>आयुर्वेद का वरदान: AQI बढ़ने पर गले की जलन से पाना है छुटकारा? पान के पत्ते का काढ़ा है असरदार</title>
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<description><![CDATA[ दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण (AQI) का लेवल तेजी बढ़ रहा है। जिस वजह से गले, सांसों और फेफड़ों पर महसूस होता है। हवा में मौजूद धूल, धुआं और हानिकारक कण गले में जलन, खराश, सूखापन और खांसी को बढ़ा देते हैं। ऐसे में घरेलू नुस्खा ही काम आते हैं। आयुर्वेद में बर समस्या का इलाज है, यह इलाज दवाओं से नहीं, कई बार प्राकृतिक चीजों से भी होता है। पान का पत्ता इन परेशानियों को दूर करने में किसी चमत्कार से काम नहीं है।  पान का पत्ता सिर्फ पूजा-पाठ या खाने के लिए नहीं होता, बल्कि यह हीलिंग और एनर्जी संतुलन में भी काम करता है।आयुर्वेद में पान का पत्ता की तासीर गर्म मानी गई है, यानी यह शरीर में स्वाभाविक गर्माहट बढ़ाने का गुण रखता है। ठंड, प्रदूषण या मौसम के बदलने पर जब कफ बढ़ जाता है, तो इससे गले में जलन, खांसी, बंद नाक और शरीर में भारीपन जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। ऐसी स्थिति में पान का पत्ता बिना किसी कफ सिरप या दवा के, प्राकृतिक रूप से इन समस्याओं को कम करने में मदद करता है।गले में जलन का देसी इलाजइस विधि से गले की जलन, खराश, सूखापन, खांसी और कफ में आराम मिलता है। पान के पत्ते से काढ़ा कैसे बनाएं- सबसे पहले पान के 1-2 पत्ते पानी में डालें।- इसमें तुलसी के 3-4 पत्ते और 2-3 काली मिर्च डालकर उबालें।- इसे कुछ मिनट उबालकर छान लें- इसको गर्म-गर्म पिएं।केवल 7-10 दिनों तक पीने से ही आप महसूस करेंगी कि गले की जलन कम हो रही है, खांसी शांत हो रही है, कफ भी पिघल जाएगा और गला हल्का महसूस करेगा।आयुर्वेद में भी पान के पत्ते का अनोखा महत्व है- हल्का गर्म करके लेने से सांस खुलने लगती है।- पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पीने से खराश कम होती है।- शहद के इस्तेमाल करने से गले को काफी आराम मिलता है।- इसके अलावा, स्टीम में डालकर लेने से कंजेशन तुरंत कम होता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Nov 2025 21:10:40 +0530</pubDate>
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<title>बच्चों को ये 3 चीजें खिलाना बंद करें, लिवर को हो सकता है गंभीर नुकसान, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट ने दी चेतावनी!</title>
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<description><![CDATA[ खराब लाइफस्टाइल और खानपान के कारण फैटी लिवर, डायबिटीज व मोटापा जैसी समस्या तेजी से फैल रही है। स्ट्रीट फूड का सबसे ज्यादा सेवन बच्चे ही करते हैं, जिससे उनकी सेहत जल्दी बिगड़ जाती है। बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए इन्हें सही और गलत फूड के बारे में जरुर बताएं। ज्यादातर पेरेंट्स बच्चे के खानपान पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते हैं। कुछ चीजों को हेल्दी सझकर खिलाते हैं। लेकिन ऐसे फूड हेल्दी न होकर बच्चों के लिवर को धीरे-धीरे बिगड़ने लगते हैं। आइए आपको बताते हैं 3 ऐसे फूड्स जो बच्चे की सेहत के लिए हानिकारक है।डीप फ्राईड फूड्स, प्रोसेस्ड फूड्सरोजाना बच्चों के फ्रेंच फ्राईज खिलाना या फिर बाजार से जंक फूड खिलाना कभी-कभी सेहत के लिए नुकसानदायक भी होता है। डीप फ्राईड फूड में खराब मात्रा वाले फैट्स पाएं जाते हैं। इसके साथ ही प्रिजरवेटिव्स की मात्रा भी इनमे काफी ज्यादा होती है। इन फूड्स में छिपी हुई मात्रा में फ्रक्टोज भी होता है। जो दस गुना तेजी से लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं। इस तरह के फूड्स का सेवन बंद ही करा दें।फ्रूट जूसज्यादातर लोग अपने बच्चे को फ्रूट जूस जरुर पिलाते हैं। कोई डॉक्टर इसे पीने की सलाह नहीं देते हैं।  गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट बताते हैं कि फ्रूट जूस सुनने में हेल्दी है। हालांकि, यह फ्रक्टोज से फुल होता है और इसमें जीरो फाइबर होता है। इस फ्रक्टोज को लिवर मेटाबोलाइज करके एनर्जी में बदल देते हैं। हालांकि, ज्यादा फ्रक्टोज को लिवर फैट में ट्रांसफर करता है और इससे फैटी लिवर का खतरा बढ़ता है।रिफाइंड सीड ऑयलआजकल हर घर में सनफ्लावर, कॉर्न या फिर सीड ऑयल से बनी हुई चीजें खिलाई जाती है, जो कि बच्चों के सेहत के लिए हेल्दी नहीं है। रिफाइंड सीड ऑयल ओमेगा 6 फैट्स से भरपूर होते हैं। जिनका असर लांग टर्म में लिवर की इन्फ्लेमेशन के रुप में दिखता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Nov 2025 21:10:39 +0530</pubDate>
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<media:keywords>बच्चों, को, ये, चीजें, खिलाना, बंद, करें, लिवर, को, हो, सकता, है, गंभीर, नुकसान, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट, ने, दी, चेतावनी</media:keywords>
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<title>इंटरमिटेंट फास्टिंग से पहले पढ़ें यह बात—हर महिला के लिए नहीं है यह डाइट</title>
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<description><![CDATA[ वेट लॉस के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग को काफी अच्छा माना जाता है। बहुत से लोग अपना वजन कम करने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग का ही सहारा लेते हैं। लेकिन हर भारतीय महिला को बिना सोच-समझे इसे फॉलो नहीं करना चाहिए। दरअसल, हमारा लाइफस्टाइल, बॉडी, हार्मोन्स और हमारी जिम्मेदारियां किसी भी वेस्टर्न डाइट से बहुत अलग होती हैं। ऐसे में यह कभी-कभी कुछ महिलाओं पर उल्टा असर भी कर सकती है।ऐसा नहीं है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग हमेशा ही नुकसान करती हैं, लेकिन किसी भी ट्रेंड को बिना सोचे-समझे फॉलो करना काफी मुश्किल साबित हो सकता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि हर भारतीय महिला के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग के लिए क्यों सही नहीं है-इसे भी पढ़ें: Health Tips: शरीर में जमे टॉक्सिन की अंदर से होगी सफाई, शरीर के लिए नेचुरल फिल्टर हैं ये जूसहार्मोनल समस्याएं होनाअगर आपको पीसीओडी, थायराइड, इंसुलिन रेसिस्टेंस व अनियमित पीरियड्स जैसी हार्मोनल से जुड़ी समस्याएं हैं तो ऐसे में आपको इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से बचना चाहिए। जब आप इंटरमिटेंट फास्टिंग करती हैं तो ऐसे में आप काफी लंबे गैप के बाद खाती हैं, जिसकी वजह से पीसीओडी के लक्षण बद से बदतर हो जाते हैं। हो सकता है कि आपको एक्ने, वजन बढ़ना व मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं अधिक हों। इसी तरह, थायराइड में लंबे समय तक खाना ना खाने से मेटाबॉलिज्म स्लो होने लगता है और थकान  व वजन कम होने में समस्या हो सकती है।   लो बीपी में ना करें इंटरमिटेंट फास्टिंगअगर आपको पहले से ही लो बीपी की शिकायत है तो भी इंटरमिटेंट फास्टिंग करना आपके लिए सही नहीं हो सकता है। लो बीपी में फास्टिंग करने से कमजोरी की समस्या हो सकती है। इससे ना केवल चक्कर आना, या आंखों के आगे अंधेरापन छाना जैसी शिकायत हो सकती है, बल्कि आपके हाथ-पांव भी ठंडे हो सकते हैं। इतना ही नहीं, फास्टिंग से इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस भी बिगड़ जाता है, जिससे बीपी और गिर सकता है।आयरन की कमी से हो सकती है समस्या भारतीय महिलाओं में आयरन की कमी बेहद आम है। ऐसी महिलाएं अगर इंटरमिटेंट फास्टिंग करती हैं तो इससे उनकी समस्या बढ़ सकती है। दरअसल, फास्टिंग करने से आयरन की कमी को दूर करना काफी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि आप मील कम खाती हैं और फिर आयरन रिच मील नहीं ले पाती हैं। इससे कमजोरी व थकान के अलावा बाल झड़ना व डार्क सर्कल्स की शिकायत भी हो सकती है।- मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 17:59:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>40 की उम्र में सोनम कपूर की दूसरी प्रेग्नेंसी, जानें डॉक्टर से, दूसरे बच्चे की प्लानिंग कैसे करें?</title>
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<description><![CDATA[ बॉलीवुड की स्टाइलिश डिवा सोनम कपूर ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर सेकेंड प्रेग्नेंसी का अनाउंस किया है। एक्ट्रेस 40 की उम्र में दूसरी बार मां बनने वाली है। पहले बेटे के जन्म के 2 साल बाद सोनम एक बार फिरसे प्रेग्नेंट हैं। सोनम कपूर की प्रेग्नेंसी की खबरें सुनकर कई सारे कपल्स भी दूसरे बच्चे का प्लान करने का जरुर सोच रहे हैं। आज के समय में ज्यादातर कपल्स बच्चा करना और उसकी जिम्मेदारी उठाने के लिए काफी स्ट्रगल कर रहे हैं। ऐसे में घर वालों का प्रेशर या किसी एक पार्टनर की चाहत के कारण कपल्स दुविधा में है कि, दूसरा बच्चा प्लान करें या नहीं। आमतौर पर महिलाएं भी कंफ्यूज रहती दूसरा बेबी प्लान करने को लेकर, ऐसे में वे भी किसी एक्सपर्ट की सलाह लेना जरुर चाहती होगी। गायनेकोलॉजिस्ट ने दूसरे बच्चे के प्लान को लेकर एकदम सही सलाह दी है। क्यों दूसरा बच्चा प्लान करना है?कई सारे कपल्स हैप्पी मैरिड लाइफ जी रहे हैं वो एक बच्चा करने के बाद दूसरे बच्चे के बारे में सोचते हैं। हालांकि, किसी एक पार्टनर का कंफ्यूजन उन्हें नतीजे तक नहीं पहुंचने देता है। घरवालों का प्रेशर या पार्टनर के चाहने से कोई  भी दूसरा बच्चा नहीं चाहता है। हालांकि, डॉक्टर की ये सलाह जरुर आपको डिसीजन लेने में हेल्प करेगी। दूसरा बच्चा करने की जरुरत?आखिर यह सवाल उठता है कि दूसरा बच्चा क्यों करना है। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि पहला बच्चा ज्यादातर पैरेंट्स खुद के लिए करते हैं। उसको हर दिन बढ़ते हुए देख और खुश होते हैं। हालांकि, दूसरा बच्चा लोग अपने पहले बच्चे के लिए करते हैं। क्योंकि उस बच्चे को एक सिबलिंग की जरुरत होती है। जिसके साथ वो खेले-कूदे, सीखे, पढ़े-लिखें और चीजों को शेयर करना सीखे। दोनों मिलकर एक्टीविटी करें और जब वो बच्चे बड़े हो जाए, तो एक-दूसरे का साथ दें। एक-दूसरे का सपोर्ट करें और हर मुश्किल और खुशी के समय में साथ रहते हैं। दूसरे बच्चे करने की कंफ्यूजन है, तो डॉक्टर की इस सलाह पर ध्यान दें।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 17:59:52 +0530</pubDate>
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<title>Pregnancy Tips: &amp;quot;आरामदायक प्रेगनेंसी&amp;quot; की चाहत, मां बनने से पहले जानें ये 5 ज़रूरी बातें, डॉक्टर से करें ये सवाल</title>
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<description><![CDATA[ जब महिलाएं प्रेग्नेंसी के बारे में सोचती हैं, तो उनके मन में ढेरों सवाल उठने लगते हैं। लेकिन इन सवालों के जवाब जाने बिना ही महिलाएं प्रेग्नेंसी प्लान कर लेती हैं। इस वजह से कई महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अगर आप प्रेग्नेंसी से पहले डॉक्टर से कुछ सवाल पूछ लेती हैं, तो इस सफर को काफी हद तक आसान बनाया जा सकता है। लेकिन इससे पहले यह जानना जरूरी है कि आप प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले डॉक्टर से कौन-कौन से सवाल पूछें। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले आपको डॉक्टर से किस प्रकार के सवाल पूछने चाहिए।गर्भधारण करने से पहले पूछें ये सवालप्रीकनसेप्शन टेस्ट और वैक्सीनआप डॉक्टर से प्रेग्नेंसी से पहले जेनेटिक स्क्रीनिंग, कोई ब्लड टेस्ट या वैक्सीनेशन कराने के बारे में पूछ सकती हैं। अगर डॉक्टर हां बोलता है, तो ऐसी स्थिति में फौरन टेस्ट करवा लें। वरना हो सकता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान आपको कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़े।इसे भी पढ़ें: इंटरमिटेंट फास्टिंग से पहले पढ़ें यह बात—हर महिला के लिए नहीं है यह डाइटसप्लीमेंटप्रेग्नेंसी के दौरान फोलिक एसिड या अन्य विटामिन लेने के बारे में डॉक्टर से परामर्श कर सकती हैं और इसकी सही मात्रा क्या होगी। यह सवाल काफी जरूरी है। इससे अगर आपके शरीर में कोई कमी है या फिर आपके शरीर को जरूरी विटामिन चाहिए, तो डॉक्टर कुछ सप्लीमेंट्स आपको दे सकते हैं।लाइफस्टाइल में बदलावव्यायाम, नींद, वेट और खानपान में कौन-कौन से बदलाव करना हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए जरूरी है। क्योंकि अगर आपको इस बारे में पहले से पता होगा कि आपके शरीर के लिए कैसी डाइट अच्छी है, तो आप गलत चीजों को खाने से बचेंगी।दवाइयां और आदतेंआप अपनी वर्तमान समय में चलते वाली दवाओं के बारे में पूछ सकती हैं और साथ ही यह भी पूछें कि आपको इस दौरान किन-किन आदतों से बचना चाहिए।हेल्थ रिस्कआप डॉक्टर से अपनी मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर पूछ सकती हैं कि क्या आपको डायबिटीज, थायराइड या हाई ब्लड प्रेशर की शुरूआती जांच की जरूरत है।प्रेग्नेंसी प्लानिंगआप डॉक्टर से यह भी सवाल कर सकती हैं कि गर्भधारण का सही समय कौन सा है और कितनी बार आपको चेकअप कराना चाहिए। क्योंकि अगर सही समय के बारे में आपको पहले से पता रहेगा तो आप रेगुलर चेकअप करवा पाएंगी। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 17:59:52 +0530</pubDate>
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<title>सर्दियों का सुपरफूड! मेथी खाने से मिलेंगे ये 10 अद्भुत फायदे, बीमारियों से रहेंगे दूर</title>
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<description><![CDATA[ सर्दियों के मौसम में सबसे ज्यागा हरी सब्जियां खाई जाती है, जो कि शरीर के लिए भी हेल्दी होता है। इस समय बाजारों में हरे साग-मेथी की बाहर देखने को मिलती है। सर्दियों मेथी खाना बेहद ही फायदेमंद मानी जाती है। मेथी केवल एक स्वादिष्ट सब्जी नहीं, बल्कि आयुर्वेदिक गुणों का ऐसा अनमोल खजाना है, जिसे रोज खाने से आपका शरीर अंदर से स्ट्रांग करता है और आपकी इम्यूनिटी बढ़ती है। जिससे आप कई मौसमी बीमारियों से बच सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि मेथी शरीर के तीनों दोषों को संतुलित करती है। इसलिए इसको आप अपनी डाइट में जरुर शामिल करें। मेथी का सेवन करने से शरीर को 10 ऐसे जबरदस्त फायदे मिलते हैं, जिनकी आप ने कभी कल्पाना भी नहीं की होगी। मेथी सेहत और सौंदर्य का खजाना है- मेथी खाने से पाचन अग्नि तेज होती है। यह गैस, ब्लोटिंग, कब्ज और खाने के बाद महसूस होने वाले भारीपन को कम करती है। यह आंतों के स्वास्थ्य को पूरी तरह दुरुस्त करके, भोजन के उचित अवशोषण करने में मदद करता है।- आयुर्वेद में मेथी को डायबिटीज को दूर करने वाला बताया गया है। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाती है और ब्लड ग्लूकोज को स्थिर रखने में मदद करती है। डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए अपनी डाइट में नियमित रुप से मेथी को एड ऑन कर सकते हैं।- मेथी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाएं जाते हैं। यह सर्दियों में जोड़ों की जकड़न, दर्द और त्वचा की सूजन वाली समस्याओं में राहत पहुंचाता है।- इसको आप नियमित रुप से सेवन करेंगे, तो आपका ब्लड शुद्ध होगा। जिससे आपकी स्किन में ब्राइट होगी और मुंहासे भी कम होंगे। इसके साथ ही पूरे शरीर का डिटॉक्सिफिकेशन अच्छी तरह से होता है।- मेथी लिवर के मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करता है और शरीर से अतिरिक्त विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके साथ ही शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाता है। आप पूरा दिन एनर्जेटिक महसूस करेंगे।- मेथी के पत्तियों में पर्याप्त मात्रा में प्राकृतिक आयरन पाया जाता है। यह एनीमिया (खून की कमी), थकान और बालों के झड़ने जैसी समस्याओं में अत्यंत लाभकारी है,यह शरीर में शक्ति बढ़ाता है।- मेथी के शीतल और कड़वे गुण शरीर में अतिरिक्त पित्त को कम करते हैं।  इससे त्वचा साफ, चमकदार और मुहांसे रहित बनती है, क्योंकि यह अंदरूनी गर्मी और जलन को कम करती है।- यदि आप वेट लॉस करना चाहते हैं, तो मेथी को अपनी डाइट में शामिल करें। मेथी मेटाबॉलिज्म को तेजी से बढ़ाती है, अनावश्यक क्रेविंग को कम करती है और फैट के पाचन में सुधार करती है, जिससे वजन नेचुरली कंट्रोल होता है।- इतना ही नहीं, मेथी ब्रेस्‍टफीडिंग कराने वाली माताओं में ब्रेस्ट मिल्क का उत्पादन बढ़ाने के लिए जानी जाती है। इसमें गैलेक्टागॉग नाम का तत्व होता है। इसके साथ ही डिलीवरी के बाद स्वास्थ्य को भी पोषण देता है। - मेथी में विटामिन, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, जो बालों की जड़ों को मजबूत करती हैं, डैंड्रफ कम करती है और बालों की ग्रोथ को बढ़ाती है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 20 Nov 2025 10:00:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>सर्दी में बूस्ट करें इम्युनिटी! ये 7 सुपरफूड्स बनेंगे आपका &amp;apos;विंटर कवच&amp;apos;, बीमारियों को कहें बाय&#45;बाय!</title>
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<description><![CDATA[ धीरे-धीरे तापमान गिरता जा रहा है, जिससे सर्दी बढ़ रही है। इस मौसम में गर्म कपड़े पहनने के साथ ही शरीर को भी सुपरफूड्स खाने की जरुरत है, जिससे बीमारी न बढ़े। सर्दी अपने साथ सर्दी-ज़ुकाम, सुस्त मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा में कमी लेकर आती है। हालांकि, ठंड के मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का राज महंगे सप्लीमेंट्स में नहीं, बल्कि प्रकृति के अपने भंडार में छिपा है। इस मौसम में अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ये 7 बेहतरीन सुपरफूड्स का सेवन जरुर करें। खट्टे फलसंतरे, नींबू और कीनू विटामिन सी से भरपूर होते हैं। यह विटामिन हमारे शरीर को बीमारियों से लड़ने में मदद करता है, हमारी त्वचा को स्वस्थ रखता है और हमें अधिक ऊर्जा देता है।जड़े में उगने वाली सब्जियां खाएंगाजर, शकरकंद, चुकंदर और शलजम जैसी सब्जियां सर्दियों में खानी चाहिए। ये अच्छे पाचन के लिए जरूरी फाइबर और स्वस्थ आंखों के लिए विटामिन ए जैसे जरूरी विटामिन प्रदान करती हैं।हरी सब्जियां सर्दी में बाजारों में हरी सब्जियों की भरमार देखने को मिल जाएगी। पालक, केल और मेथी जैसी हरी सब्जियों के लिए सबसे अच्छा मौसम है। इनमें आयरन और फोलेट भरपूर मात्रा में होते हैं, जो थकान दूर करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए जरूरी हैं। ये हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कैल्शियम भी प्रदान करते हैं और आपके पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं।मेवे और बीजबादाम, अखरोट, चिया बीज और अलसी के बीज सर्दियों के लिए बेहतरीन नाश्ते हैं। इनमें हेल्दी फैट्स होती है जो ड्राई और ठंडे मौसम में आपके दिमाग को तेज और आपकी त्वचा को नमीयुक्त बनाए रखती है।खूब बेरीज खाएंब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी और क्रैनबेरी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। ये हमारे शरीर को संक्रमणों से बचाने और याददाश्त व हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करते हैं। इसलिए सर्दियों में इनका ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए। अदरक और लहसुन हर भारतीय किचन में पाई जाने वाली ये अदरक और लहसुन जरुर मिल जाएंगी। यह एक शक्तिशाली और प्राकृतिक उपचारक हैं। अदरक पाचन में मदद करता है और जरूरी आंतरिक गर्मी प्रदान करता है, जबकि लहसुन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और हृदय स्वास्थ्य के लिए जाना जाता है। ये कई व्यंजनों में स्वाद बढ़ाने का भी काम करते हैं।ओट्स और साबुत अनाजओट्स, जौ और क्विनोआ जैसे खाद्य पदार्थ लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करते हैं और हमें लंबे समय तक पेट को भरा रखते हैं। जो सर्दियों के दौरान आपको स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है। ये ब्लड शुगर के स्तर को भी स्थिर रखते हैं और पाचन में सहायता करते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 20 Nov 2025 10:00:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: इंटरमिटेंट फास्टिंग के ये 3 साइड इफेक्ट्स आपको कर सकते हैं परेशान, जान लें बचने के उपाय</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में इंटरमिटेंट फास्टिंग का चलन काफी ज्यादा बढ़ा हुआ है। इस इटिंग पैटर्न को सेलेब्स भी आजमाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। वहीं अगर आप IF के बारे में नहीं जानते हैं, तो बता दें कि इंटरमिटेंट फास्टिंग सिर्फ एक स्पेसिफिक टाइम के दौरान ही अपना मील लेते हैं। शोध से पता चलता है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग करके आप वजन कंट्रोल कर सकते हैं और कुछ बीमारियों से भी बचाव और रिवर्स कर सकते हैं। लेकिन अगर आप ईटिंग प्लान को फॉलो कर रहे हैं, तो आपको कुछ गलतियां करने से बचना चाहिए।ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसी गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान करने से बचने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इससे आपको फायदे की जगह नुकसान पहुंच सकता है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: शरीर में जमे टॉक्सिन की अंदर से होगी सफाई, शरीर के लिए नेचुरल फिल्टर हैं ये जूसइंटरमिटेंट फास्टिंगऐसी कई डाइट हैं जो इस पर ध्यान केंद्रित करती हैं कि आपको क्या खाना चाहिए। वहीं इंटरमिटेंट फास्टिंग पूरी तरह से आपके खाने के समय पर केंद्रित होती है। इस ईटिंग पैटर्न में आप एक निर्धारित समय पर खाते हैं। इस समय के आखिरी में आप बहुत कम कैलोरी या नो कैलोरी पर स्विच कर देते हैं। ज्यादातर लोग अपना वजन कम करने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग आजमाना पसंद करते हैं। वहीं इसकी यह खासियत है कि आप अपनी सुविधानुसार फास्टिंग के समय को चुन सकते हैं। वहीं आपका उपवास कुछ घंटों या फिर पूरे दिन चल सकता है।इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान न करें ये 3 गलतियांएक्सपर्ट के अनुसार, आप अपने इंटरमिटेंट फास्टिंग के साथ संभवतः ये 3 गलतियां कर रहे हैं, जोकि आपके पाचन और गट हेल्थ को प्रभावित कर रही है। वहीं शायद यह गलतियां दिल को भी खतरे में डाल रही हैं।रात में खूब भोजन करनाबहुत सारे लोग यह गलती करते हैं कि रात को 9 बजे, 10 बजे या फिर 11 बजे 7 या 9 कोर्स मील लेते हैं। इसके बाद फिर सोने के लिए चले जाते हैं। लेकिन जब आप बिना पचे भोजन का ढेर लेकर सोने के लिए चले जाते हैं, तो यह फर्मेंट होना, गैस छोड़ना या सड़ना शुरूकर देता है। जिस कारण वेट गेन और यहां तक कि एब्डोमिनल डिस्टेंशन हो सकता है। इसलिए ऐसा करने से आपको बचना चाहिए। वहीं यह भी सुनिश्चित करें कि आप सोने से करीब 3 घंटे पहले डिनर खत्म कर लें।लंच न करें स्किपतमाम लोग इंटरमिटेंट फास्टिंग करते समय ब्रेकफास्ट और लंच को स्किप कर देते हैं और सीधे रात का खाना खाते हैं। लोगों का सोचना है कि वह अपने शरीर के साथ अच्छा कर रहे हैं। लेकिन आपको ऐसा करने से बचना चाहिए। दोपहर का खाना सबसे अहम मील होता है। जब दोपहर में 12 से 2 के बीच सूर्य चरम पर होता है, तब आपका पेट, पाचन रस और मेटाबॉलिज्म भी चरम पर होता है। इस समय दोपहर का खाना जरूर खाना चाहिए। वहीं सुनिश्चित करें कि आप एक अच्छा ब्रंच या फिर लंच करें। वहीं शाम को 6 बजे तक डिनर खत्म कर लें। फिर इसके बाद आप इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू कर दें।फास्टिंग के बाद कैफीन का सेवनहमेशा याद रखना चाहिए कि कैफीन के साथ कभी भी इंटरमिटेंट फास्टिंग कभी नहीं तोड़ना चाहिए। आप आप IF के सभी अच्छे प्रभावों को नष्ट कर देते हैं। वहीं कैफीन डिहाइड्रेटिंग और ड्राइंग होता हैं। क्योंकि यह आपके हार्ट हेल्थ को प्रभावित करता है और नर्वस सिस्टम को भी उत्तेजित करता है। जिससे चिंता बढ़ सकती है। सिर्फ इतना ही नहीं इसके दीर्घकालिक कब्ज के लक्षण भी उभर सकते हैं। कैफीन की जगह आप गुड फैट का सेवन कर सकते हैं। आप काजू वाले मक्खन, ए2 गाय का घी या नारियल वाले मक्खन ले सकते हैं। जोकि ब्यूटिरिक एसिड का अच्छा सोर्स है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 20 Nov 2025 10:00:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: शरीर में जमे टॉक्सिन की अंदर से होगी सफाई, शरीर के लिए नेचुरल फिल्टर हैं ये जूस</title>
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<description><![CDATA[ जिस तरह से हम घर की रोजाना सफाई करते हैं, ठीक उसी तरह से शरीर की सफाई करना जरूरी होता है। वैसे तो किडनी और लिवर हमारे शरीर से विषाक्त और अपशिष्ट पदार्थ निकालने में सहायता करते हैं। लेकिन यह बॉडी में विषाक्त और अपशिष्ट पदार्थ ज्यादा होने लगते हैं, तो डाइट की सहायता की जरूरत पड़ती है।  आहार, उत्पादों और पर्यावरण के संपर्क में आने से बॉडी में इनका निर्माण होता है। वहीं खराब डाइट और अनहेल्दी लाइफस्टाइल के कारण शरीर में टॉक्सिन्स और कचरा बढ़ने लगता है। जोकि आपकी स्किन को खराब कर सकते हैं। इससे धीरे-धीरे किडनी, दिल और दिमाग का फंक्शन कम कर सकते हैं। ऐसे में आप इससे बचाव के लिए इन 6 जूस का सेवन कर सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Women Health: पीरियड्स को रेगुलर करने के साथ मिलेगी दमदार इम्यूनिटी, बस आजमाएं ये 3 आसान घरेलू नुस्खेचुकंदर का जूसडाइटिशियन के अनुसाक, चुकंदर में विटामिन ए, बी6, बी12, सी, डी, ई, विटामिन के, आयरन, पोटैशियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस, जिंक, मैग्नीशियम और फाइबर होता है। यह शरीर को डिटॉक्सिफाई करने के साथ वेट लॉस में भी मदद करता है।क्रैनबेरी जूसक्रैनबेरीज में विटामिन सी, एंटी-ऑक्सीडेंट्स, सैलिसाइलिक एसिड और प्रोटीन की भरमार होती है। इसका सेवन करने से बॉडी में फैट का ब्रेकडाउन होता है और इम्यूनिटी बूस्ट होती है। क्रैनबेरी जूस पीने से एंटी-एजिंग गुण मिलते हैं।गाजर का जूसगाजर का जूस पीने से शरीर को मैग्नीशियम, कैरोटीन, कैल्शियम, पोटैशियम, विटामिन ए, विटामिन बी1, बी3, बी6, विटामिन सी और विटामिन-के मिलता है। गाजर का जूस पीने वाले लोगों का मेटाबॉलिज्म तेज रहता है और इससे इम्यूनिटी बढ़ती है।करेले का जूसकरेले में विटामिन सी, विटामिन बी1, बी2, बी3, जिंक, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, फोलेट, आयरन, मैंगनीज पाया जाता है। करेले का जूस पीने से बॉडी डिटॉक्स होता है और पाचन व मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और वेट लॉस में भी सहायता मिलती है।अनार का जूसअनार के दाने में फोलेट, कैल्शियम, प्रोटीन, आयरन, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और विटामिन सी से भरपूर होता है। अनार का जूस पीने से शरीर डिटॉक्स होता है और इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है।नींबू का जूसनींबू का जूस इम्यूनिटी बूस्ट करने, डिटॉक्सिफिकेशन और शरीर की अंदरुनी सफाई में मदद करता है। नींबू में जिंक, फॉस्फोरस, कैल्शियम, सोडियम, कॉपर, विटामिन सी, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, मैंगनीज और सेलेनियम पाया जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 13:33:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>रात के सोते समय पैर बायटा आने पर क्या करें? आजमाएं यह देसी नुस्खा, दर्द होगा गायब</title>
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<description><![CDATA[ रात के समय जब हम गहरी नींद में सोए होते हैं, तो अचानक से पैर की तेज ऐंठन या &#039;बायटा&#039;आने से चीखने लगते हैं। इस भयंकर दर्द में ऐसा लगता है कि किसी ने मांसपेशी को जोर से मरोड़ दिया हो। यह दर्द कुछ सेकंड का होता है, लेकिन इसका असर कई घंटों तक बना रहता है। रात की ऐंठन केवल दर्द नहीं, बल्कि शरीर में मिनरल्स की कमी, थकान, डिहाइड्रेशन या नर्व सिग्नल के गड़बड़ होने का संकेत भी हो सकती है, हालांकि इस परेशानी का आसान, तुरंत असर करने वाला और पूरी तरह नेचुरल इलाज आपकी अपनी रसोई में मौजूद है। इस देसी नुस्खे की मदद से आपको काफी आराम मिलेगा।बायटा के लिए देसी नुस्खाआपको बता दें कि, यह देसी नुस्खा शरीर पर लगाने के लिए है, न कि इसे खाने के लिए। यह उपाय पैर के दर्द को दूर करने के साथ पूरे शरीर की नसों और मांसपेशियमों को आराम पहुंचाता है।सामग्री  - शुद्ध देसी घी- 1 चम्मच - नारियल का तेल- 1 चम्मचकैसे इस्तेमाल करें - देसी घी और नारियल के तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर हल्का गुनगुना करें।  - इस मिश्रण को आप पैरों और हाथों के नाखूनों के सिरों पर लगाएं।- नाखूनों की मालिश करने के बाद, पैरों के तलवों और जहां ऐंठन आई है, वहां हल्के हाथों से मालिश करें।- रात को सोने से पहले रोज मालिश करने से बायटा आने का खतरा कम हो जाता है।पैरों में ऐंठन के लिए यह देसी नुस्खा कैसे काम करता है? - तंत्रिका तंत्र को शांत करना: इस देसी नुस्खा का इस्तेंमाल करने से पैरों के तलवों में मौजूद तंत्रिका सिरों को उत्तेजित करती हैं, जो सीधा दिमाग को संदेश भेजते हैं कि अब मांसपेशियों को आराम करना है। - ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है: मालिश करने से उस हिस्से में ब्लड का सर्कुलेशन तेज होता है, जिससे मांसपेशियों में जमा हुआ लैक्टिक एसिड, जो कि ऐंठन का मुख्य कारण है, यह तेजी से बाहर निकल जाता है।- घी का पोषण: देसी घी ऊतकों (टिश्यू) के गहरा पोषण देता है और वात कंट्रोल भी होता है, जिस वजह से दर्द और ऐंठन का अहम कारण है।-कूलिंग नारियल तेल: नारियल तेल में कूलिंग गुणों मौजूद होते है, जो सूजन को कम करता है और मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है।इस मिश्रण से टू-इन-वन फायदे- जब इस मिश्रण को रात के समय मालिश करते हैं, तो यह आपकी तंत्रिका तंत्र को शांत करता है।-  इसके इस्तेमाल से आप तनाव कम होता है, जिससे आपको गहरी और अच्छी नींद आती है।- यह नाखूनों और स्किन को भी स्वस्थ रखता है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 22:28:35 +0530</pubDate>
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<media:keywords>रात, के, सोते, समय, पैर, बायटा, आने, पर, क्या, करें, आजमाएं, यह, देसी, नुस्खा, दर्द, होगा, गायब</media:keywords>
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<title>दमकती त्वचा, मजबूत बाल और भरपूर ऊर्जा का राज; खाली पेट पिएं ये &amp;apos;सुपरफूड&amp;apos; जूस!</title>
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<description><![CDATA[ सर्दियों के मौसम में ठंडी हवाओं के कारण स्किन ड्राई, बालों का झड़ना और शरीर में एनर्जी की कमी देखने को मिलती है। ऐसे में अपनी सेहत से लेकर खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए आयरन से भरपूर ब्यूटी जूस जरुर पीना चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि, इन सभी परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए एक आसान तरीका बताया है। आप रोजाना नियमित रुप से अनार, संतरा और चुकंदर से बनने वाला आयरन-रिच ब्यूटी जूस पी सकते हैं। तीनों सुपरफूड आपके शरीर को पोषण देंगे, बल्कि आपकी त्वचा को ग्लोइंग बनाएंगे। इसके साथ ही आपके बालों की ग्रोथ बढ़ेगी व हेल्दी रहेंगे।ब्यूटी जूस के पीने के फायदेचुकंदर इस ब्यूटी जूस का पहला फायदा है कि यह शरीर को आयरन और फोलेट की भरपूर मात्रा प्रदान करता है। क्योंकि चुकंदर में प्राकृतिक रुप से आयरन के गुण पाए जाते हैं। चुकंदर का सेवन करने से शरीर में रक्त का निर्माण होता है, बॉडी में ऑक्सीजन की सप्लाई होती है। इसके साथ ही चेहरे पर ग्लो आता है।अनारअनार में एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो त्वचा की कोशिकाओं की मरम्मत करती है और कोलेजन को बूस्ट करती है, जिससे त्वचा चमकदार और जवां नजर आई।संतरासंतरा में सबसे ज्यादा विटामिन सी पाया जाता है, जो कि स्किन को ब्राइट करने, डार्क स्पॉट कम करने और फ्री-रेडिकल डैमेज से बचाने में मदद करता है। वहीं, विटामिन C आयरन के अवशोषण को बढ़ाता है , जिससे यह जूस शरीर को डबल फायदे देता है।बालों के लिए फायदेमंदइस जूस को पीने से बाल भी हेल्दी रहने लगते हैं। आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स का मिश्रण स्कैल्प में रक्त संचार सुधारता है जिससे हेयर फॉल कम होता है और नई हेयर ग्रोथ प्रदान करता है।हेल्थ टिप्सचुकंदर और अनार का कॉम्बिनेशन शरीर को नेचुरल तरीके से डिटॉक्स करता है और लीवर फंक्शन को बेहतर बनाता है। हेल्थ एक्सपर्टी की माने, तो इसे सुबह खाली पेट पीना चाहिए, ताकि शरीर इसे तेजी से अवशोषित कर सके और जल्द ही आपको ऊर्जा व ग्लो मिले। इस जूस के पीन से ब्यूटी बेनिफिट तो मिलता ही, साथ ही पूरे दिन शरीर को ऊर्जावन बनाएं रखता है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 22:28:29 +0530</pubDate>
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<title>Women Health: पीरियड्स को रेगुलर करने के साथ मिलेगी दमदार इम्यूनिटी, बस आजमाएं ये 3 आसान घरेलू नुस्खे</title>
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<description><![CDATA[ हर महीने समय पर पीरियड्स आना महिलाओं की हेल्दी फर्टिलिटी का संकेत होता है। यह इस ओर इशारा करता है कि महिला आसानी से कंसीव कर सकेंगी। हालांकि इसमें कई और भी बातें मायने रखती हैं। अनियमित लाइफस्टाइल, तनाव, गलत खानपान और हार्मोनल इंबैलेंस समेत कई वजहों से पीरियड्स डिले हो जाते हैं। पीरियड्स का समय पर न आना या हर महीने हफ्ते या 10 दिन पीरियड्स का डिले होना सही नहीं माना जाता है।अगर आपको भी लंबे समय से पीरियड्स डिले होने की समस्या हो रही है, तो आपको अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए। कई आयुर्वेदिक उपाय और घरेलू नुस्खे पीरियड्स को नियमित करने में मदद कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 3 ऐसे नुस्खों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको फॉलो कर आप भी फायदा पा सकती हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: पेट साफ करने की जंग अब खत्म, कब्ज तोड़ देगा ये रामबाण उपाय, जानें क्या है खासहल्दी वाला दूधपीरियड्स को नियमित करने में हल्दी वाला दूध भी मदद करता है। इसको पीने से पीरियड्स जल्दी और रेगुलर होते हैं। बता दें कि हल्दी में प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी और हार्मोनल बैलेंसिंग गुण पाए जाते हैं।हल्दी में मौजूद कर्क्युमिन यूट्रस को उत्तेजित करने के साथ ब्लड फ्लो को बढ़ाता है। इससे पीरियड्स जल्दी शुरू होने में मदद मिलती है।हल्दी वाले दूध का सेवन करने से खून साफ होता है और इम्यूनिटी मजबूत होती है। साथ ही इसको पीने से पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द कम होता है।एक गिलास गुनगुने दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर इसके सेवन करें, इससे आपको आराम मिलेगा।अदरक और गुड़ की चायअदरक और गुड़ की चाय पीने से पीरियड्स नियमित होते हैं और इन दोनों की तासीर गर्म होती है। इस चाय को पीने से पीरियड्स जल्दी आ सकते हैं।अगर आपके पीरियड्स डिले हो रहे हैं, तो आपको अदरक और गुड़ की चाय का सेवन करना चाहिए।अदरक में जिंजरॉल होता है और इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। यह चाय यूट्रस की मसल्स को कॉन्ट्रैक्ट करने में सहायता करती है और शरीर को गर्माहट देती है। इस चाय को पीने से पीरियड जल्दी आते हैं।अगर किसी को पीरियड्स के दिनों तेज दर्द होता है, तो उसको भी इस चाय का सेवन करना चाहिए। इससे ऐंठन और दर्द में राहत मिलती है।दालचीनी का पानीपीरियड्स देर से आने का एक कारण पीसीओएस में होने वाला हार्मोनल असंतुलन भी हो सकता है।दालचीनी का पानी इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने के साथ बॉडी में हार्मोन्स को बैलेंस करता है। यह पीरियड्स को जल्दी लाने में सहायक होता है।सोते समय दालचीनी का पानी पीने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। वहीं पीरियड्स भी जल्दी आते हैं। वहीं इससे शरीर को गर्माहट मिलती है और हार्मोनल इंबैलेंस दूर होता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 22:28:29 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: पेट साफ करने की जंग अब खत्म, कब्ज तोड़ देगा ये रामबाण उपाय, जानें क्या है खास</title>
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<description><![CDATA[ रोजाना सुबह आसानी से पेट का खुलकर साफ होना हेल्दी गट हेल्थ की निशानी होती है। लेकिन अगर आपका रोजाना पेट खुलकर साफ नहीं होता है और टॉयलेट सीट पर बैठकर पेट साफ करना जंग लगता है, तो इसका सीधा और साफ मतलब है कि आपका पाचन सही नहीं है। डाइट में फाइबर की कमी, नींद पूरी न होना, तनाव, फिजिकल एक्टिविटी कम होना या फिर किसी दवाओं के रिएक्शन की वजह से भी मल कड़ा हो जाता है, जिस कारण पेट साफ होने में मुश्किल होती है।वहीं कई बार पेट साफ करना किसी जंग से कम नहीं लगता है। अगर आपको कब्ज की दिक्कत है और आप इसको नजरअंदाज कर रही हैं, तो यह सही नहीं है। बल्कि आपको इस समस्या पर फौरन ध्यान देना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 3 ऐसे टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको अपनाकर आप कब्ज दूर कर सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: घर के सदाबहार फूल में छुपा है डायबिटीज कंट्रोल का राज, ऐसे करें सेवनमलासन में बैठकर गुनगुने पानी में घी डालकर पिएंअगर आप रोजाना सुबह मलासन में बैठकर गुनगुने पानी में घी मिलाकर इसको पीती हैं, तो आपका पेट आसानी से साफ हो जाएगा। दरअसल, देसी घी एक नेचुरल लुब्रिकेंट की तरह काम करता है और इससे मल मुलायम होता है और आसानी से बाहर निकलता है।घी में ब्यूरेटिक एसिड और हेल्दी फैट्स पाए जाते हैं। वहीं गुनगुने पानी में देसी घी मिलाकर पीने से डाइजेस्टिव एंजाइम्स एक्टिव होते हैं। आंतों की दीवारें चिकनी होती हैं, ऐसे में इसका सेवन करने से पेट आसानी से साफ होता है।मलासन में बैठकर यह ड्रिंक पीने से अब्डोमिनल नसों पर प्रेशर पड़ता है और कब्ज की समस्या से राहत मिलती है। यह आसन पेट को साफ करने में सहायता करता है। लेकिन जब आप इस तरह से बैठकर गुनगुने पानी में घी मिलाकर पीते हैं, तो पेट आसानी से साफ होता है।सूखा आलूबुखारा खाएंकब्ज की समस्या को दूर करने में सूखा आलूबुखारा भी काफी असरदार होता है। आलूबुखारा में मौजूद सॉल्यूबल फाइबर मल को आसानी से बाहर निकालने में सहायता करता है। सूखा आलूबुखारा पाचन को बेहतर बनाने के साथ गट को हेल्दी रखता है। वहीं इसका सेवन करने से पेट आसानी से साफ हो जाता है। एक्सपर्ट की मानें, तो आप कब्ज की समस्या से राहत पाने के लिए दिन में 2-3 सूखे आलूबुखारा खा सकती हैं।सौंफ के पानी का सेवनकब्ज की समस्या दूर करने के लिए सौंफ का पानी पीना चाहिए। सौंफ का पानी डाइजेशन को सुधारता है और यह नेचुरल लैक्सेटिव की तरह काम करता है। यह मल को मुलायम करके आसानी से बाहर निकालता है।यह डाइजेस्टिव एंजाइम्स को एक्टिव करता है। इसका सेवन करने से अपच, गैस, एसिडिटी, ब्लोटिंग और सीने में जलन की समस्या दूर होती है।सौंफ के पानी का सेवन करने से आंतें क्लीन होती हैं और पेट में खाने की मूवमेंट भी आसान बनती है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 10:00:56 +0530</pubDate>
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<title>सर्दियों में बीपी बढ़ने का खतरा? डॉक्टर ने बताया ये चीजें डाइट में करें शामिल</title>
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<description><![CDATA[ कुछ लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है, वहीं कुछ लोगों को लो होने की समस्या बनीं रहती है। जबकि हाई ब्लड प्रेशर काफी ज्यादा खतरनाक माना जाता है, क्योंकि इसमें व्यक्ति की जान भी जा सकती है। हाई ब्लड प्रेशर के कारण हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक होने का का खतरा रहता है। सर्दियों के मौसम में हाई बीपी बढ़ने का रिस्क ज्यादा हो जाता है। जिन लोगों का हाई बीपी की समास्या बनीं रहती है, वे लोग सर्दियों के दौरान इन चीजों को अपनी डाइट में जरुर शामिल करें। डॉक्टर ने भी माना है कि सर्दी मौसम में खानपान में काफी बदलाव देखने को मिलता है। ठंड के मौसम में आपको ऐसी चीजों को सेवन करना है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है।बीपी कंट्रोल करने के लिए डाइट में शामिल करें ये चीजेंपालक एम्स के डॉक्टर ने बताया है कि सर्दियों के दौरान पालक का सेवन सबसे ज्यादा करें। पालक पत्तेदार साग है, जिसमें नाइट्रेट नामक एक पादप-आधारित यौगिक अच्छी मात्रा में होता है, जो बीपी को कंट्रोल में रखता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम भी खूब होता है। एक शोध में पता चला है कि, हाई बीपी वाले लोगों को 150 ग्राम पालक खिलाई गई थी, जिससे उनका बीपी कंट्रोल में रहा था। ड्राई फ्रूट्ससूखे मेवों में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। काजू, बादाम, मखाना, अखरोट, मूंगफली वगैरह में प्रोटीन, विटामिन, खनिज और फाइबर जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। वहीं, इनमें ओमेदा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सिडेंट्स भी होते हैं, जो बीपी को कंट्रोल करने में हेल्प करते हैं। ड्राई फ्रूट्स खाने से ब्लड प्रेशर सही बना रहता है।अंडा जिन लोगों का हाई बीपी की समस्या है, वे लोग अंडा जरुर खाएं। सर्दियों में अंडा खाना सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद प्रोटीन शरीर के लिए अच्छी होती है। हाई बीपी की समस्या रहती है, तो रोजाना अंडा जरुर खाएं।गाजर सर्दियों में सबसे ज्यादा गाजर ही खाई जाती है। इस मौसम में कुरकुरी, मीठी गाजर हर किसी को खाने में पसंद आती है। रिसर्च में पता चला है कि, यदि आप रोजाना 100 ग्राम गाजर खाते हैं, तो हाई बीपी की संभावना 10 प्रतिशत कम हो जाती है। गाजर खाने से आंख की रोशनी बढ़ती है और कई हेल्थ बेनिफिट्स मिलते हैं।सीड्स आजकल लोग सीड्स का सेवन ज्यादा कर रहे हैं और यह काफी ट्रेंड में सीड्स का सेवन करना। पंपकिन, चिया, अलसी के बीज भी हेल्दी हार्ट और हाई बीपी को कंट्रोल रखने में मदद करता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, हेल्दी फैट्स, विटामिन और मिनरल्स जैसे तत्व पाए जाते हैं। इन बीजों के सेवन करने से बीपी कंट्रोल में रहता है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 10:00:55 +0530</pubDate>
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<title>ब्रेस्ट कैंसर से बचना है तो हर महिला ऐसे करे खुद जांच, जानें जानलेवा बीमारी से सुरक्षा का पहला कदम</title>
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<description><![CDATA[ महिलाओं को अपनी सेहत के साथ ही ब्रेस्ट का ध्यान रखना भी काफी जरुरी है। कई महिलाएं इसे नजरअंदाज ही करती है। अगर आप अपने ब्रेस्ट का केयर नहीं करेंगी तो आप कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का शिकार हो जाएगी। ब्रेस्ट कैंसर का इलाज समय रहते है पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है। फिर से मरीज एक हेल्दी लाइफ जी सकता है। हालांकि, जानकारी के अभाव के कारण अक्सर महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर के लास्ट स्टेज पर इस गंभीर बीमारी का पता चलता है। जिसके बाद इलाज जटिल बन जाता है और खतरा भी अधिक हो जाता है। यदि आप भी ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाना चाहती हैं, तो आप घर पर ही असामान्य गांठ की पहचान कर सकती हैं। जिसे मेडिकल भाषा में सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन कहते हैं। आइए आपको इस बारे में पूरी जानकारी बताते हैं, कैसे सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन कर सकते हैं। सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन कब करें?- नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेड‍िस‍िन में प्रकाश‍ित हुए एक शंघाई ट्रायल के मुताबिक, अगर आप ब्रेस्ट सेल्फ-एक्जामिनेशन की नियमित शिक्षा और प्रैक्टिस से स्तन कैंसर से होने वाली मृत्युदर में कमी पाई गई है। - हर महीने, हर महिला को सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन करना जरुरी है।- इसके लिए सबसे अच्छा समय पीरियड्स खत्म होने के 3-5 दिन बाद होता है, क्योंकि इस समय स्तन कम सेंसिटिव और सूजन रहित होते हैं।- यदि उम्र के कारण पीरिड्स बंद हो गए है, तो हर महीने एक दिन सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन करना चाहिए।कैसे करें सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशनपहले आप मिरर में खड़े हो जाएं- अपने स्तनों को आइने के सामने देखें। - दोनों हाथों को कंधों पर रखें, फिर ऊपर उठाकर देखें।- अगर आपको किसी असामान्यता, आकार में बदलाव, त्वचा में खिंचाव या निप्पल से तरल निकलने पर ध्यान दें।हाथ से जांच करें- अपनी उंगलियों का इस्तेमाल करें, स्‍तन की त्‍वचा को छूकर जरुर देखें।- स्तन को गोल या जिग-जैग पैटर्न में धीरे-धीरे दबाकर चेक करें।- इसके साथ ही, ऊपर, नीचे और बगल की तरफी भी चेक करें।लेटे हुए स्थिति में जांच करें- इसके लिए आप पीठ के नीचे तकिया रखें।- अब स्तनों को फैलाकर हाथों से जांच करें।- इस स्थिति में गांठें और असामान्यता आसानी से महसूस होती हैं।बदलावों नोट करें- हर महीने में होने वाले बदलाव को जरुर नोट करें।- किसी नई गांठ या असामान्यता दिखने पर डॉक्टर को जरुर दिखाएं।सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन के फायदे- ब्रेस्ट कैंसर गंभीर बीमारी है, अगर समय रहते किसी भी गांठ या असामान्यता का पता चल जाए, तो इलाज संभव है।- ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाने में मदद मिलती है।- अगर महिला को शक हो या कोई गांठ महसूस हो रही है, तो बिना किसी भय के डॉक्टर दिखाओं। मासिक जांच जरूरी हैहर महीने सेल्‍फ ब्रेस्‍ट एग्‍जाम‍िन‍ेशन करना चाहिए। पीरियड्स के बाद के दिन सबसे सही रहता है। नियमित मासिक जांच से नई गांठ या असामान्य बदलाव को पकड़ने में मदद मिलती है।शुरुआती पहचान बचा जा सकता हैअगर महिलाएं सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन पर ध्यान दें, तो इसकी मदद से समय पर ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों का पता चल जाएगा। इससे इलाज भी जल्दी शुरु होगा और जान भी बच सकती है। जिन मरीजों ने कैंसर का इलाज सही समय पर करवाया है, वो स्वस्थ जीवन जीते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 10:00:53 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: घर के सदाबहार फूल में छुपा है डायबिटीज कंट्रोल का राज, ऐसे करें सेवन</title>
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<description><![CDATA[ डायबिटीज को कंट्रोल करने में सही डाइट का मुख्य रोल होता है। अक्सर लोगों का मानना होता है कि सिर्फ मीठा खाने से शुगर बढ़ता है और यदि आप मीठा खाना छोड़ देते हैं, तो ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में आ जाता है। लेकिन असल में ऐसा नहीं है। भले ही मीठा खाने या न खाने से ब्लड शुगर लेवल पर इसका असर होता है, लेकिन यह डायबिटीज को मैनेज करने के लिए काफी नहीं होता है। बता दें कि ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करने में कई फल-फूल, सब्जियां और मसाले महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।इन्हीं में से एक सदाबहार का फूल है। यह फूल औषधीय गुणों से भरपूर होता है। सदाबहार की पत्तियां और फूलों में एल्कलॉइड पाया जाता है, जो इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि आप इसको डाइट में कैसे शामिल करना है और यह ब्लड शुगर लेवल को कैसे कंट्रोल करता है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: हार्ट अटैक से बचना है तो पिएं यह खास देसी चाय, नसों का हर बैड कोलेस्ट्रॉल पिघलेगाडायबिटीज कंट्रोल करेगा सदाबहार का फूलहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो सदाबहार यानी की कैथेरेन्थस रोजियस एक साधारण पौधा है। लेकिन यह साधारण सा पौधा ब्लड शुगर को बैलेंस करने में सहायता करता है। इसमें एल्कलॉइड्स इंसुलिन पाया जाता है, जो कि सेंसिटिविटी को सुधारते हैं और इससे पेनक्रियाटिक सेल्स को प्रोटेक्शन मिलता है।सदाबहार की फूल और पत्तियां सेल्स में ग्लूकोज पहुंचाने में सहायता करता है। इसमें हाइपोग्लाइसेमिक गुण पाए जाते हैं, जोकि ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद करते हैं। वहीं इसके सेवन से इंसुलिन सीक्रेशन बढ़ता है। इनके सेवन से बीटा-पैंक्रियाद सेल्स से इंसुलिन का उत्पादन बढ़ता है और यह बॉडी को डिटॉक्स करने में सहायता करता है और इससे खून भी साफ होता है।सदाबहार के फूल और पत्तियों को डाइट में करें शामिलबता दें कि खाली पेट सदाबहार के फूल की दो-तीन पत्तियों को चबाना चाहिए।रोजाना सदाबहार की पत्तियों का 1-2 चम्मच जूस पिएं।इसके अलावा आप 1-2 सदाबहार के फूल को पानी में उबालकर इसको दिन में 1 बार पिएं।सदाबहार की पत्तियों का पाउडर दिन में 2 बार गुनगुने पानी के साथ सेवन करना चाहिए।सदाबहार के फूल और पत्तियों को इस तरह से डाइट में शामिल करने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में आ सकता है। हालांकि ध्यान रखें कि इनका अधिक मात्रा में सेवन न करें, साथ ही सही डाइट पर भी ध्यान दें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 10:03:14 +0530</pubDate>
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<title>भूलने की बीमारी से पाएं छुटकारा! दिमाग को तेज करेंगी ये 3 असरदार एक्सरसाइज</title>
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<description><![CDATA[ सेहत के लिए हेल्दी डाइट लेने के साथ ही नियमित रुप से एक्सराइज करना भी बेहद जरुरी होता है। यह हमारे शरीर को हेल्दी और मजबूत भी बनाता है। इसके साथ ही आपका दिमाग भी दुरुस्त रहता है। हाल ही एक शोध से पता चला है बड़े होने के बाद भी इंसान का दिमाग नए ब्रेन सेल्स बना सकता है। इसको हिप्पोकैम्पल न्यूरोजेनेसिस कहा जाता है। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि नियमित एक्सरसाइज करने से दिमाग में नए न्यूरॉन्स (brain cells) बनते हैं। इसके कारण याददाश्त मजबूत होती है, सोचने-समझने की शक्ति बढ़ती है और मूड भी बेहतर होता है। आइए जानते हैं कि हाल की स्टडीज इस बारे में क्या बताती हैं।हिप्पोकैम्पस क्या है?साइंस डायरेक्ट जर्नल में छपी एक स्टडी से पता चला है  कि हिप्पोकैम्प दिमाग का वो हिस्सा होता है, जो सीखने, याद रखने, भावनाओं को कंट्रोल करने और दिशा पहचानने में सहायक होती है। रिसर्च में यह भी पता चला है कि जब हम फिजिकल एक्टिविटी करते हैं, तो इस हिस्से में नए ब्रेन सेल्स बनने लगते हैं, लेकिन हर एक्सरसाइज का असर एक जैसा नहीं है। यह निर्भर करता है कि आप कौन-सी एक्सरसाइज करें और कितनी देर के लिए करें।दिमाग के लिए करें ये जरुरी एक्सरसाइजड्यूल टास्क वॉकिंगयह वॉकिंग का एक अनोखा तरीका है, जिसमें चलने के साथ-साथ दिमाग को भी सक्रिय रखा जाता है। इसमें आप चलते हुए उलटी गिनती बोल सकते हैं, किसी खास अक्षर से शब्द सोच सकते हैं या टेबल दोहरा सकते हैं। रिसर्च में पाया गया है कि जो लोग वॉक करते समय मानसिक गतिविधियाँ भी करते हैं, उनकी याददाश्त और ध्यान क्षमता सिर्फ सामान्य वॉक करने वालों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ती है।रेजिस्टेंस ट्रेनिंगइस एक्सरसाइज में शरीर पर थोड़ा भार डालकर की जाती है। जैसा कि- डंबल उठाना, रबर बैंड से स्ट्रेचिंग करना या पुशअप्स लगाना। शोध के अनुसार, रेजिस्टेंस ट्रेनिंग से शरीर में ऐसे प्रोटीन और हार्मोन बनते है, जो दिमागी सेल्स की सुरक्षा करते हैं। जिससे आपका दिमाग हेल्दी और एक्टिव रहता है।लेग एक्सरसाइजशरीर की सबसे बड़ी मांसपेशियां पैर की होती है। आप जब चलते हैं, या फिर साइकिल चलाते हैं या सीढ़िया चढ़ते हैं, तो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन तेजी से बढ़ता है, जिससे दिमाग में ज्यादा ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलते हैं। रिसर्च के अनुसार, अगर आप रोजाना नियमित रुप से लेग एक्सरसाइज करेंगे तो उनके सोचने की क्षमता और याददाश्त बेहतर रहती है, खासतौरप पर जब आपकी उम्र बढ़ रही हो।कैसे एक्सरसाइज दिमाग को मजबूत बनाती है?आपको बता दे कि, नियमित रुप से एक्सरसाइज करने से शरीर में प्रोटीन बढ़ता है, जो दिमाग की नई कोशिकाओं को बढ़ने में मदद करता है। वहीं, ब्लड फ्लो बढ़ने से दिमाग को ज्यादा ऑक्सीजन और ग्लूकोज मिलता है, जिससे नई कोशिकाएं लंबे समय तक जिंदा रहती हैं। रोजाना एक्सरसाइज करने से  भी तनाव कम होता है। अगर आप थोड़ी-थोड़ी एक्सरसाइज करेंगे तो आप दिमाग भी फिट रहेगा। जब भी आप वॉक या फिर एक्सरसाइज करें, तो समझ जाएं कि केवल मसल्स नहीं, बल्कि नए ब्रेन सेल्स भी बन रहे हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 10:03:13 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: स्लिम दिखने के लिए दवा की नहीं होगी जरूरत, इन मसालों को एक साथ खाने से तेजी से होगा फैट बर्न</title>
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<description><![CDATA[ वेट लॉस करने के लिए अक्सर हम सभी तरह-तरह की डाइट फॉलो करती हैं, लेकिन फिर भी वह फायदा नहीं मिल पाता है। अगर आप भी तरह-तरह की डाइट फॉलो करके परेशान हो चुके हैं तो अब अपनी डाइट में मसालों के कॉम्बिनेशन पर ध्यान दें। जी हां, किचन में तरह-तरह के मसालों में फैट बर्निंग प्रोपर्टीज होती हैं। अगर इन्हें नजरअंदाज कर दिया जाए तो इससे वह रिजल्ट नहीं मिल पाता है, जिसकी हमें उम्मीद होती है।सुनने में आपको शायद अजीब लगे, लेकिन रोज़ के खाने में इस्तेमाल होने वाले मसाले जैसे हल्दी, जीरा, दालचीनी, अजवाइन, मिर्च आदि सिर्फ स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि फैट घटाने में भी मदद करते हैं। ये मसाले किसी नेचुरल मेटाबॉलिज्म बूस्टर की तरह होते हैं। अगर आप भी इन मसालों की मदद से फैट बर्निंग प्रोसेस को स्पीडअप करना चाहते हैं तो आपको मसालों के कॉम्बिनेशन पर ध्यान देना चाहिए। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही मसालों के कॉम्बिनेशन के बारे में बता रहे हैं, जो फैट बर्न करने में सहायक साबित हो सकते हैं- इसे भी पढ़ें: Health Tips: घर बैठे कंट्रोल करें अपना ब्लड शुगर, ये 3 हर्ब्स दिलाएंगे डायबिटीज से स्थायी राहतहल्दी और काली मिर्चअक्र हम अपनी सब्जी में हल्दी का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके साथ काली मिर्च का सेवन करना काफी अच्छा माना जाता है। दरअसल, हल्दी में कर्क्यूमिन होता है, जो सूजन कम करने और नई फैट सेल बनने से रोकने में मदद करता है। हालांकि, हल्दी का असर तब सबसे ज्यादा होता है, जब इसे काली मिर्च के साथ लिया जाए। दरअसल, काली मिर्च में मौजूद पिपरीन हल्दी को शरीर में अच्छे से अब्जॉर्ब होने में मदद करता है। जब इन्हें एक साथ लिया जाता है तो इससे मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है और फैट तेजी से बर्न होता है। आप अपनी सब्जी, दाल या सूप में इसे डाल सकते हैं। अदरक, लहसुन और जीराअदरक व लहसुन के साथ जीरे का कॉम्बिनेशन फैट बर्निंग के लिए काफी अच्छा माना जाता है। अदरक और लहसुन दोनों ही थर्मोजेनिक होते हैं, यानी ये शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ाते हैं जिससे ज्यादा कैलोरी बर्न होती है। वहीं, जीरा पाचन को बेहतर बनाता है और ब्लोटिंग को कम करता है, जिससे पेट फ्लैट दिखता है। आप खाना बनाते समय इन तीनों को तड़के में डालो।लाल मिर्च पाउडर और सरसों के दानेलाल मिर्च सिर्फ खाने का टेस्ट ही नहीं बढ़ाता, बल्कि यह फैट बर्नंग में भी मददगार है। दरसअल, लाल मिर्च में कैप्सैसिन होता है जो शरीर का तापमान बढ़ाता है कृ यही फैट बर्निंग ट्रिगर करता है। वहीं, सरसों के दाने भी मेटाबॉलिज्म को एक्टिव बनाते हैं। इन दोनों के कॉम्बिनेशन से फैट बर्न करने में का मदद मिलती है। आप सूप या सब्ज़ी में लाल मिर्च और सरसों के दानों का हल्का तड़का लगाओ।  - मिताली जैन ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 09:05:52 +0530</pubDate>
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<title>एक चुटकी नमक से दूर करें कई रोग! घर बैठे पाएं बुखार, दर्द और नींद की समस्या से मुक्ति</title>
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<description><![CDATA[ खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए नमक इस्तेमाल करें। इसके साथ ही ये नमक हमारे बॉडी के लिए भी जरुरी है। जिससे हमारे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस होना चाहिए। पुराने समय में नमक का इस्तेमाल कई तरह दवाओं के तौर पर किया जाता था। नमक लेना हमारे हेल्थ के लिए अच्छा माना जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक नमक से जुड़े ऐसे ही कुछ नुस्खों को शेयर किया है। इसकी मदद से सेहत से जुड़ी कुछ समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।बुखार की गर्मी उतारने में मदद करता हैजब बुखार होता है और सिर पर पट्टी करनी होती है। इसके लिए पानी में नमक मिलाकर सिर पर पट्टियां जरुर रखी जाती है। ऐसा करने से बुखार का टेंपरेचर डाउन हो जाता है और गर्मी निकल जाती है।रात को नींद न आएअगर रात को नींद नहीं आती है, तो नमक को किसी कपड़े में बांधकर पोटली बना लें और उसे गर्दन के पीछे सिर के नीचे वाले हिस्से पर बीचोबीच रखकर दबाने से स्ट्रेस कम होता है और माइंड शांत होता है, जिससे नींद भी जल्दी आ जाती है।खांसी आने पर नमक की सेंकअगर आप खांसी की समस्या से परेशान हैं, तो नमक को कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। फिर इस पोटली को सीने और गले पर रखकर नमक की सेंक लें। ऐसा करने से खांसी में आराम मिलता है।पैरों में दर्द के लिए थकान के कारण आपके पैरों में दर्द होता है, तो गुनगुने पानी में नमक डालकर उसे पैरों को भिगोने से दर्द आराम मिलता है। बंद नाक में आरामबदलते मौसम में आप जुकाम से परेशान हैं और सांस लेने में आपको समस्या आ रही है। अगर म्यूकस भरा हुआ है और बाहर नहीं निकाल पर रहे हैं तो नाक में दो बूंद साल्ट वाटर डालकर देखें। यदि आपको नाक में कंजेशन महसूस हो रही है, तो साफ पानी में कुछ चुटकी नमक डालकर साल्ट वाटर तैयार करें और इसे नाक में बूंद डाल दें। गले में खराशअगर आपको गले में खराश हो रही है, तो आप गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे करने से राहत मिलती है। यह उपाय गले में हो रही समस्या के लिए बड़े काम का होता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 09:05:51 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: पेट की हर समस्या का रामबाण इलाज, घर में बनाएं ये आयुर्वेदिक चूर्ण, लिवर भी रहेगा फिट</title>
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<description><![CDATA[ पाचन की खराबी को नजरअंदाज करने की गलती आपको भारी पड़ सकती है। अधिकतर लोग अपच, कब्ज, गैस, ब्लोटिंग और हाजमें से जुड़ी समस्याओं को हल्के में लेते हैं। लेकिन बार-बार पेट फूलना, स्मैली फार्ट और खट्टी डकारें आना इस बात का संकेत है कि आपका लिवर फंक्शन कमजोर है और आपकी गट हेल्थ सही नहीं है। कई बार हैवी खाना खाने के कारण पेट में होने वाली गड़बड़ इस तरफ इशारा करती है कि आपको अपनी लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव करने की जरूरत है। इसलिए आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको एक देसी चूर्ण के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसको घर पर बनाना आसान है। वहीं यह चूर्ण गुणों से भरपूर है।हाजमे को दुरुस्त करेगा यह आयुर्वेदिक चूर्णएक्सपर्ट के मुताबिक यह देसी चूर्ण हाजमे को दुरुस्त करता है। इस चूर्ण का सेवन करने से फंक्शन बेहतर होता है और गट हेल्थ में भी सुधार होता है। अगर आप इस चूर्ण को छाछ या दही में मिलाकर 2 महीने तक लेते हैं, तो पाचन से जुड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: स्लिम दिखने के लिए दवा की नहीं होगी जरूरत, इन मसालों को एक साथ खाने से तेजी से होगा फैट बर्नलिवर बाइल प्रोडक्शन का काम करता है और यह लिवर और गट के कनेक्शन को सुधारता है। साथ ही यह चूर्ण फैट को ब्रेकडाउन करने में सहायता करता है।लिवर हेल्थ खराब होने पर खाना ठीक तरीके से नहीं पचता है। साथ ही अनडाइजेस्टिव फैट बढ़ने लगता है। जिसके कारण एक्स्ट्रा गैस और ब्लोटिंग होने लगती है।बता दें कि अजवाइन में थाइमॉल पाया जाता है, जोकि पाचन एंजाइम्स के सीक्रेशन में मदद करता है। वहीं जीरा भी डाइजेशन को बेहतर करता है और सौंफ एसिडिटी और कब्ज को दूर करने में सहायता करता है।एक्सपर्ट की मानें, तो इस चूर्ण का रोजाना रात में सोते वक्त गुनगुने पानी के साथ भी ले सकती हैं। इससे पेट में फंसी गैस आसानी से बाहर निकलेगी। साथ ही इस चूर्ण का सेवन करने से पेट में ऐंठन भी नहीं होगी।ऐसे बनाएं ये चूर्णइस चूर्ण को बनाने के लिए जीरा, अजवाइन और सौंफ को बराबर मात्रा में लेना है।अब इन सभी चीजों को ड्राई रोस्ट करें और हल्का सा पीस लें।फिर इसमें 2 चम्मच हींग मिलाएं और बाकी चीजों से आधी मात्रा में सूखी अदरक का पाउडर मिलाना है।इसमें एक चम्मच काला नमक मिलाएं। इस आसान तरीके से देसी चूर्ण तैयार हो जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 09:05:50 +0530</pubDate>
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<title>फेफड़ों को प्रदूषण के जहर से बचाएं! डाइट में शामिल करें ये 5 सुपरफूड्स, मिलेगी सुरक्षा और इम्यूनिटी</title>
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<description><![CDATA[ लगातर बढ़ते हुए प्रदूषण का लेवल फेफड़ों पर दबाव डल रहा है। प्रदूषित हवा, धुआं और टॉक्सिक पदार्थ फेफड़ों में जमा होकर ऑक्सीडेटिव तनाव पैदा करता है, जिस वजह सेहत पर बुरा असर पड़ता है। अगर आप लंबे समय से प्रदूषिक हवाओं के संपर्क में रहने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ा देता है। वैसे तो हम बाहरी प्रदूषण को रोक नहीं सकते हैं, लेकिन अपनी लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव करके फेफड़ों को हेल्दी रख सकते हैं। यदि आप अपने फेफड़ों को टॉक्सिन्स बचाना चाहते हैं, तो अभी से डाइट में इन 5 सुपरफूड्स को शामिल कर लें।ब्रोकलीब्रोकली में एंटी-ऑक्सीडेंट्स, विटामिन-सी और सल्फोराफेन मौजूद होता है। यह शरीर के नेचुरल डिटॉक्स प्रोसेस को तेज करती है। ब्रोकली में पाएं जाने पोषक तत्व फेफड़ों की कोशिकाओं को प्रदूषण से होने वाले हानिकारक नुकसान से बचाता है।  इसके अलावा, ब्रोकली श्वसन मार्ग में जमा टॉक्सिंस को दूर करती है। खट्टे फलफेफड़ों में जमे टॉक्सिंस पदार्थों को निकालने के लिए खट्टे फल का सेवन जरुर करें। इनमें विटामिन-सी, फ्लोवोनोड्स और सिट्रिक एसिड का अच्छा स्त्रोत है। आप नियमित रुप से संतरा, मौसमी, नींबू या किन्नू जैसे फलों का सेवन कर सकते हैं। यह आपकी इम्यूनिटी को मजबूत करती है। खट्टे फलों में विटामिन-C शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट होता है, जो फ्री-रेडिकल्स को बेअसर करके फेफड़ों के ऊतकों की मरम्मत करता है और प्रदूषण से होने वाली सूजन को भी कम करता है।अखरोटफेफड़ों को अंदर से डिटॉक्स करने के लिए आपनी डाइट में अखरोट शमिल करें। अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और फाइबर पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। ओमेगा-3 सूजन को कम करके फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाता है। रेगुलर अखरोट खाने से सांस फूलना और सूजन जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।ब्लूबेरीब्लूबेरी में एंथोसायनिन, विटामिन-K और मैंगनीज जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह शरीर में फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को रोकती हैं। फेफड़ों के साथ ही यह त्वचा और दिल को भी प्रदूषण से बचाता है।मोरिंगा/तुलसीजड़ी-बूटियों में नेचुरल एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और डिटॉक्सीफाइंग गुण होते हैं। मोरिंगा और तुलसी दोनों ही श्वसन तंत्र को साफ करने में सहायक है। यह फेफड़ों से कफ और हानिकारक कणों से बाहर निकालता है, जिसके बाद आप आसानी से सांस ले सकते हैं। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है और फेफड़ों को इंफेक्शन से लड़ता है। फेफड़ों को हेल्दी रखने के टिप्स   - रोजाना स्टीम जरुर लें। यह प्रदूषण से जमी धूल और टॉक्सिंस को बाहर निकालता है। - नियमित रुप से प्राणायाम या डीप ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज करें, ऐसा करने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है।   - हाइड्रेशन जरुरी है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी जरुर पिएं। यह शरीर से टॉक्सिंस को बाहर निकालता है।   - इसके अलावा, स्‍मोकिंग और सेकंड हैंड स्मोक से बचें। यह आपके फेफड़ों के लिए सेफ नहीं है।  आप अपने घर पर मनी प्लांट, एलोवेरा और स्नेक प्लांट  के पौधे लगा सकते हैं, इनसे ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 09:05:48 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: दांत दर्द से राहत पाने के लिए आजमाएं ये आयुर्वेदिक नुस्खा, पेनकिलर की नहीं पड़ेगी जरूरत</title>
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<description><![CDATA[ दांत का दर्द ऐसा दर्द होता है, जोकि बर्दाश्त नहीं होता है। जब दांत का दर्द अचानक से शुरू हो जाता है और कई बार रात के समय यह दर्द इतना बढ़ जाता है कि नींद भी उड़ जाती है। ऐसे में इस दर्द से राहत पाने के लिए महंगी पेनकिलर खाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रसोई में मौजूद कुछ चीजें आपके दांत दर्द को पलक झपकते ही कम कर सकती हैं। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपके साथ दादी-नानी के जमाने का एक ऐसा आयुर्वेदिक नुस्खा शेयर करने जा रहे हैं, जो बिना किसी साइड इफेक्ट्स के आपको मिनटों में राहत दे सकता है।इस नुस्खे की खासियत यह है कि इसके लिए आपको सिर्फ 5 रुपए का खर्च आएगा और यह नुस्खा आपको किसी भी पेनकिलर से कई गुना ज्यादा तेजी से असर करता है। तो आइए जानते हैं इस आयुर्वेदिक असरदार नुस्खे के बारे में... इसे भी पढ़ें: Health Tips: पेट की हर समस्या का रामबाण इलाज, घर में बनाएं ये आयुर्वेदिक चूर्ण, लिवर भी रहेगा फिटजरूरी सामग्रीकाली मिर्च- एक चुटकीलौंग का पाउडर- एक चुटकी (या एक पिसी हुई लौंग)सरसों का तेल- कुछ बूंदेंऐसे बनाएं यह असरदार पेस्टएक छोटी सी कटोरी में लौंग का पाउडर और काली मिर्च डालें।अब इसमें 3-4 बूंद सरसों का तेल मिलाएं।फिर तीनों को अच्छे से मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाएं।इसके बाद पेस्ट को हल्के हाथों से दांत या मसूड़े वाली जगह के आसपास लगाएं।इस पेस्ट को 20 मिनट तक लगा रहने दें और फिर गुनगुने पानी से कुल्ला करें।वहीं 20 मिनट बाद ही आराम महसूस होगा।पावरफुल है ये पेस्‍टबता दें कि यह पावरफुल पेस्ट दर्द को नेचुरल तरीके से कम करता है और इंफेक्शन से भी लड़ता है। लौंग का पाउडर यूजेनॉल से भरपूर होता है और यह एक पावरफुल एनेस्थेटिक है। यह दर्द वाले हिस्से को सुन्न करता है और सूजन को कम करता है।काली मिर्च में पिपेरिन नामक तत्व पाया जाता है। यह एक नेचुरल पेनकिलर है और यह मसूड़ों में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है। इससे दर्द के सिग्नल ब्रेन तक कम पहुंचते हैं।सरसों के तेल में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। यह वाहक के तौर पर काम करता है। जोकि काली मिर्च और लौंग के गुणों को मसूड़ों की गहराई तक ले जाता है। इसमें मौजूद गुण बैक्टीरिया और इंफेक्शन से लड़कर दर्द को जड़ से खत्म करने का काम करता है।पेस्‍ट के अन्‍य फायदेसरसों के तेल में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी मौजूद होते हैं। यह मसूड़ों की सूजन को कम करते हैं और मजबूत बनाते हैं।काली मिर्च में पिपेरिन पाया जाता है और यह मसूड़ों के टिश्यू में बल्ड सर्कुलेशन बढ़ाता है। इससे दांतों की जड़ें मजबूत होती हैं और दर्द में भी राहत मिलती है।लौंग और सरसों के तेल का कॉम्बिनेशन मुंह में मौजूद हानिकारिक बैक्टीरिया को खत्म करता है। जिस कारण मुंह की बदबू और इंफेक्शन दोनों ही कम होते हैं।यह पेस्ट नेचुरल एंटी-सेप्टिक की तरह काम करता है। यह पेस्ट दांतों की सतह को साफ करता है और मसूड़ों में फंसी बैक्टीरिया भी खत्म होती है।लौंग में मौजूद यूजेनॉल तत्व और सरसों के तेल में मौजूद गुण दांतों पर बनने वाले प्लाक को कम करता है। यह कैविटी से भी बचाव करता है।जिन लोगों के दांतों से ब्रश करते समय ब्लड आता है, तो उनके लिए यह नुस्खा काफी उपयोगी है। यह इंफेक्शन और सूजन को शांत करने के साथ मसूड़ों को भी हेल्दी बनाता है।यह पेस्ट एंटी-माइक्रोबियस गुणों से भरपूर होता है। जोकि लंबे समय तक ताजगी का एहसास दिलाता है।सरसों के तेल और काली मिर्च का पेस्‍ट हल्का एक्सफोलिएटिंग असर देता है, जोकि दांतों से पीलापन कम करने के साथ दांतों को नेचुरली सफेद बनाता है।लौंग में दर्द को दूर करने वाले गुण पाए जाते हैं और सरसों के तेल की गर्माहट मिलकर नसों को शांत करते हैं और दांत दर्द को भी दूर करने में सहायक होता है।इसे भी आजमाएंअगली बार जब भी आपके दांत में दर्द हो, तो पेनकिलर की जगह इस आयुर्वेदि नुस्खे को जरूर आजमाएं। यह नुस्खा इंस्टेंट रिलीफ देता है और ओरल हेल्थ भी अच्छा रखता है। इससे आपके दांत और मसूड़े अंदरे से मजबूत होंगे। आप इस बात ध्यान रखें कि यह नुस्खा आपको अस्थायी रूप से राहत दे सकता है। वहीं अगर बार-बार दर्द हो रहा है या तेज दर्द होता है, तो असली वजह का पता लगाने के लिए आप डेंटिस्ट के पास जाएं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 09:05:47 +0530</pubDate>
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<title>प्रदूषण के कहर में फेफड़ों की ढाल बनेगा गुड़ पानी? जानें क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट</title>
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<description><![CDATA[ इस दौरान दिल्ली में प्रदूषण से बुरा हाल हो रखा है। लोगों को सांस संबंधिक समस्याएं परेशान कर रही है। बिना मास्क लगाए बाहर जाना किसी खतरे से कम नहीं है। जिन लोगों को फेफड़ों और सांस लेने की दिक्कत है, वो लोग घर पर ही घरेलू उपायों को जरुर करें। फेफड़ों को साफ और स्वस्थ रखने के लिए हल्दी या गुड़ वाला पानी जरुर पिएं। अब सवाल उठता है कि, क्या सच में गुड़ वाला पानी पीने से लंग्स बिल्कुल साफ हो जाते हैं और प्रदूषण से बचा जा सकता है। आइए आपको गुड़ वाला पानी पीने के फायदे बताते हैं।पोषण युक्त गुड़सर्दियों में गुड़ का सेवन करना हेल्थ के लिए अच्छा है। गुड़ की तासीर गर्म होती है। इसमें आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम, कैल्शियम, फास्फोरस और जिंक जैसे खनिज और विटामिन ए, बी-कॉम्प्लेक्स और सी जैसे विटामिनन्स होते हैं, जो शरीर, इम्यूनिटी और फेफड़ों के लिए फायदेमंद होता है।लंग्स के लिए फायदेमंदफेफड़ों की सफाई के लिए गुड़ वाला पानी पीते है, तो यह गलत नहीं है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक गुड़ फेफड़ों के लिए अच्छा है और किसी भी तरह के लंग्स इंफेक्शन से बचा सकते हैं। हालांकि, प्रदूषण के दौरान क्लीनिंग करने में मदद नहीं करता। सांस संबंधी या फेफड़ों में कोई दिक्कत लगे, तो आपको डॉक्टर को जरुर दिखाएं।गुड़ का पानी पीने के फायदे  - गुड़ खाने से इम्यूनिटी बूस्ट होती है।  - शरीर में आयरन की कमी दूर होती है। -  इसे खाने से हड्डियां भी मजबूत होती है। - गुड़ के सेवन से शरीर में विटामिन्स की कमी नहीं होती है। - गुड़ खाने से वजन नहीं बढ़ता। इसे डाइट में शामिल करने से वेट लॉस होता है।  पानी कैसे पिएंयदि आप गुड़ का पानी पीना चाहते हैं, तो आप 2 चम्मच गुड़ को गुनगुने पानी में मिक्स करें। इसे सुबह खाली पेट पिएं। यह आपके हेल्थ के लिए बढ़िया है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 09:05:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: PCOS, थायराइड ने बिगाड़ा फिगर, इन मॉडर्न टिप्स से घर बैठे पाएं परफेक्ट फिटनेस</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप PCOS, थायराइड और मोटापे जैसी हेल्‍थ समस्याओं से परेशान हैं। तो इन समस्याओं की वजह से आपका शरीर पहले जैसे शेप में नहीं रहा। या आप खुद को थका-थका महसूस करती हैं। तो इन समस्याओं से निजात पाने के लिए महिलाएं दवाएं, डाइटिंग और तरह-तरह के घरेलू नुस्खों को आजमाती रहती हैं। लेकिन इसके बाद भी मनचाहा रिजल्ट नहीं मिल पाता है। कई बार अनहेल्दी डाइट, हार्मोनल असंतुलन और इनएक्टिव लाइफस्टाइल की वजह से इन समस्याओं से छुटकारा पाना मुश्किल हो जाता है।लेकिन अब आपको भी ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं हैं। क्योंकि आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपके साथ 9 आसान और असरदार लाइफस्टाइल टिप्स लेकर आए हैं। जो आपकी समस्याओं को कंट्रोल करने में सहायता करेंगे, बल्कि आपकी ओवरऑल हेल्थ और फिटनेस को भी बेहतर करेंगे। आप इन आसान टिप्स को अपनी डेली रूटीन में बिना किसी परेशानी के शामिल कर सकती हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: दांत दर्द से राहत पाने के लिए आजमाएं ये आयुर्वेदिक नुस्खा, पेनकिलर की नहीं पड़ेगी जरूरतऐसे घटाएं मोटापासुबह की शुरुआतआपको अपने दिन की शुरूआत एक गिलास गुनगुने पानी से मलासन में बैठकर करना चाहिए। इसमें एक चम्मच गाय का घी मिलाएं। यह आपके डाइजेशन को अच्छा करता है और मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है, जिससे वेट तेजी से कम होता है।रेगुलर एक्‍सरसाइजरोजाना 12 सूर्य नमस्कार, 21 बार अनुलोम-विलोम, 21 बार भ्रामरी आसन और कम से कम 45 मिनट कार्डियो एक्सरसाइज करना चाहिए। इन एक्सरसाइज को करने से शरीर एक्टिव रहता है और वेट लॉस में भी मदद मिलती है।मेडिटेशनकई महिलाओं को आदत होती है कि वह स्ट्रेस होने पर अधिक खाने लगती हैं। इसलिए तनाव को कंट्रोल करने के लिए रोजाना 20 मिनट मेडिटेशन करना चाहिए। इससे आपका फोकस अच्छा रहता है।ऐसे कंट्रोल करें थायराइडआंवला पाउडरसुबह गुनगुने पानी में आधा चम्मच आंवला पाउडर मिलाकर इसका सेवन करना चाहिए। यह थायराइड के काम को सपोर्ट करता है और इम्यून सिस्टम को बढ़ाता है।बैलेंस डाइटआपको अपने भोजन में गुड फैट, प्रोटीन और फाइबर को शामिल करना चाहिए। आपको दिन के किसी भी मील को स्किप नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह मेटाबॉलिज्म पर बुरा असर डालता है।स्‍पेशल चायअगर संभ हो तो किसी अच्छी आयुर्वेदिक चाय का सेवन करना चाहिए। जो स्किन की चमक, ब्लड सर्कुलेशन और मेटाबॉलिज्म को अच्‍छा बनाने के साथ स्ट्रेस को कम करने में मदद करता है।PCOS कंट्रोल करने के लिए क्‍या करना चाहिएपीसीओएस नॉर्मल हेल्थ कंडीशन है। यह आपके हार्मोन को प्रभावित करती है। इसके होने पर पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और बाल ज्यादा उगने लगते हैं। वहीं पीसीओएस होने पर मुंहासे होने लगते हैं और इनफर्टिलिटी की समस्या भी होती है।मेथी दानारात भर के लिए एक चम्मच मेथी दाना भिगोकर रखें और सुबह खाली पेट इसको चबाकर खाएं या फिर आधा चम्मच मेथी पाउडर का सेवन करें। यह हार्मोनल बैलेंस और इंसुलिन रेजिस्टेंस को अच्छा करता है।समय पर करें भोजनरात का खाना 8 बजे से पहले खाने की आदत डालें, यह आपके हार्मोंस और डाइजेशन को अच्छा बना सकता है।काली मिर्चकाली मिर्च एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर होता है और यह पीसीओएस को मैनेज कर सकती है। काली मिर्च में ऐसे एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जोकि चर्बी को कम करने में सहायता करते हैं। काली मिर्च इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करती है। यह एंटी इंफ्लेमेटरी के तौर पर काम करती है, जिससे हार्मोन संतुलन होते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 09:05:45 +0530</pubDate>
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<title>तनाव बना रहा आपको बूढ़ा! कोर्टिसोल छीन रहा बालों की चमक, त्वचा की रौनक और जोड़ों का आराम</title>
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<description><![CDATA[ नाव हमारे दिमाग पर असर डलता है, बल्कि यह शरीर पर भी असर डलता है और आपके चेहरे, बालों और यहां तक की हड्डियों पर भी बुरा असर डलता है। कई बार स्ट्रेस के कारण चेहरे पर झुर्रियां और मुहांसे दिखने लगते हैं। बाल झड़ने की समस्या और जोड़ों में सूजन या दर्द की समस्या को बढ़ा देता है।  आइए आपको बताते हैं तनाव बढ़ने पर शरीर में क्या-क्या होता है।तनाव के बढ़ने से शरीर में क्या होता है?हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि स्ट्रेस लेने से शरीर में कोर्टिसोल नाम का हार्मोन बढ़ने लगता है। यह शरीर को फाइट या फ्लाइट मोड में ले आता है, यह शरीर किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार रहता है, लेकिन अगर ये हार्मोन लंबे समय तक बढ़ा रहे, तो ये शरीर के लिए हानिकारक बन जाता है। बता दें कि, कोर्टिसोल का बढ़ा हुआ लेवल शरीर के नेचुरल बैलेंस को बिगाड़ देता है। इससे स्किन, बाल और जोड़ों पर सीधा असर होता है।स्‍ट्रेस से त्वचा पर पड़ता है ये असरस्ट्रेस के कारण चेहरे पर एक्ने या एक्जिमा जैसी स्किन प्रॉब्लम्स देखने को मिलती है, क्योंकि कोर्टिसोल से शरीर में सूजन बढ़ जाती है। तनाव के कारण त्वचा की कोलेजन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे झुर्रियां और फाइन लाइन्स जल्दी नजर आने लगती है। तनाव के कारण नींद की कमी और डिहाइड्रेशन का शिकार होना पड़ता है, जिससे त्वचा बेजान और थकी हुई नजर आती है।तनाव से बाल झड़ते हैंतनाव के बढ़ने से ब्लड सर्कुलेशन ढंग से नहीं होता है और बालों को पोषण नहीं मिलता है। जिससे बाल भी झड़ने लगते हैं, पतले हो जाते हैं और कई बार सफेद हो जाते हैं। इन्हीं वजहों से बाल झड़ने लगते हैं।जोड़ों पर असर पड़ता हैतनाव  के कारण शरीर में सूजन बढ़ाता है। इससे जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द या अकड़न की समस्या होती है। अगर आप लंबे समय से तनाव में है, तो आपके घुटने, पीठ और कंधों में दर्द होना आम बात है। कुछ मामलों में ये आर्थराइटिस जैसी समस्या को बढ़ा सकती है। तनाव से कैसे बचें - स्ट्रेस को कम करने के लिए कम से कम 8 घंटे की नींद जरुर लें। - हेल्दी और सुंतलित आहार लें। - दिन में कुछ समय के लिए एक्सरसाइज, योग व गहरी सांस लेने की प्रैक्टिस कर सकते हैं। - खुद के लिए समय जरुर निकालें। - परिवार या दोस्तों से बात करें, ऐसा करने से आप कम सोच पाएंगे, बातें करने से स्ट्रेस कम होता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 09:05:44 +0530</pubDate>
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<media:keywords>तनाव, बना, रहा, आपको, बूढ़ा, कोर्टिसोल, छीन, रहा, बालों, की, चमक, त्वचा, की, रौनक, और, जोड़ों, का, आराम</media:keywords>
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<title>World Pneumonia Day 2025: आखिर क्यों मनाया जाता है निमोनिया दिवस? जानिए इस सील की थीम और इतिहास</title>
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<description><![CDATA[ निमोनिया फेफड़ों से संबंधित एक गंभीर बीमारी है, जो फेफड़ों में इफेक्शन के कारण होता है। इस बीमारी के चलते तेज बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ होती है।  हालांकि, इस बीमारी के कुछ साइलेंट संकेत होते हैं, जिन पर लोग ध्यान नहीं देते हैं। अधिकत्तर निमोनिया की समस्या शिशुओं में देखी जाती है। हालांकि, यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। निमोनिया एक गंभीर फेफड़ों का संक्रमण है, जो बैक्टीरिया, वायरस या फफूंद के कारण होता है।  इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, सीने में दर्द, ठंड लगना और थकान शामिल हैं। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग, बच्चे और बुजुर्ग इस रोग से अधिक प्रभावित होते हैं। निमोनिया का इलाज एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवाओं से किया जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। हर साल 12 नवंबर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है। आइए आपको इस साल की थीम, महत्व और इतिहास के बारे में बताते हैं।विश्व निमोनिया दिवस 2025 की थीमइस बार विश्व निमोनिया दिवस की थीम  &#039;चाइल्ड सर्वाइवल&#039; रखी गई है। इस थीम का उद्देश्य बच्चों को निमोनिया से बचाने की जरुरत पर फोकस करना है, जो बच्चों में मौत का एक बड़ा कारण है। यह थीम बच्चों को अच्छा पोषण, साफ हवा, वैक्सीनेशन और एंटीबायोटिक्स और ऑक्सीजन जैसे उपचारों तक जल्द से जल्द पहुंचने के महत्व पर जोर दिया गया है। इस थीम का उद्देश्य बच्चों की रक्षा और उनके जीवन को सुरक्षित रखना है।विश्व निमोनिया दिवस का इतिहासविश्व निमोनिया दिवस की शुरुआत 12 नवंबर 2009 को की गई थी। इसकी पहल बाल निमोनिया के खिलाफ वैश्विक गठबंधन (Global Coalition Against Child Pneumonia) ने की थी, जिसमें 100 से अधिक संगठन जुड़े थे। इस दिन को हर साल 12 नवंबर को मनाने का उद्देश्य निमोनिया की रोकथाम, उपचार और इससे होने वाली मौतों को कम करने पर ध्यान केंद्रित करना है। इसका मुख्य लक्ष्य लोगों में निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी के प्रति वैश्विक स्तर पर जागरूकता फैलाना है, क्योंकि यह बच्चों की मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है।विश्व निमोनिया दिवस का महत्व जागरुकता फैलानाइस दिन को लोगों में निमोनिया के बारे में सही सूचना और जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया जाता है। यह फेफड़ों का एक गंभीर इंफेक्शन है और दुनियाभर के बच्चों की मौत का अहम कारणों में से एक है।रोकथाम इलाज पर जोरनिमोनिया का रोकथाम, जैसे वैक्सीनेशन और उपचार के तरीकों के महत्व पर जोर देता है, जो इस बीमारी से बचाव करने में काफी प्रभावी है।  सरकार की नीति को बढ़ावासरकारों और हेल्थ संगठनों को नियमोनिया की रोकथाम और इलाज को ग्लोबल लेवल तक बढ़ाने पर जोर देना।बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखनाकमजोर लोगों, जैसे कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों और बुजुर्गों को निमोनिया के जोखिम से बचने की कोशिश पर फोकस करना।समय पर डायग्नोस होनायह दिन निमोनिया के जल्द निदान के महत्व पर जोर दिया है, जो कि बीमारी बढ़ने से रोक सकता है और मौत के जोखिम को कम कर सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 09:05:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: सोशल मीडिया का दावा, बर्फ के पानी से माइग्रेन गायब, जानें एक्सपर्ट की पूरी सच्चाई</title>
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<description><![CDATA[ इन दिनों सोशल मीडिया पर एक रील तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया गया है कि बर्फ के पानी में हाथ डालने से माइग्रेन के सिरदर्द से राहत मिलती है। लाखों लोग सोशल मीडिया पर इस नुस्खे को आजमा रहे हैं। लेकिन यह नुस्खा असरदार है या फिर सिर्फ एक ट्रेंड है। इस दावे की आज हम आपको सच्चाई बताने जा रहे हैं। एक्सपर्ट की मानें, तो यह घरेलू उपाय कई लोगों के लिए कारगर साबित हो, बशर्ते इस नुस्खे को सही तरीके से अपनाया जाए। अगर आपको भी अक्सर माइग्रेन का दर्द घेर लेता है, माइग्रेन में न सिर्फ सिरदर्द होता है, बल्कि दिन भर की ऊर्जा और मूड दोनों पर बुरा असर डालता है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि सिर्फ बर्फ के ठंडे पानी में हाथ डालने से माइग्रेन का दर्द मिनटों में कम हो सकता है। हालांकि यह सुनकर आपको थोड़ा सा अजीब लग सकता है। बर्फ का ठंडा पानी शरीर की नसों को अस्थायी रूप से संकुचित कर देता है, जिससे सिर का ब्लड फ्लो और प्रेशर कम होता है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: PCOS, थायराइड ने बिगाड़ा फिगर, इन मॉडर्न टिप्स से घर बैठे पाएं परफेक्ट फिटनेसयह उपाय न सिर्फ माइग्रेन का दर्द घटाता है बल्कि दिमाग के दर्द को भी डाइवर्ट करके रिलैक्सेशन सिग्नल भेजता है। यही कारण है कि कई महिलाएं इस घरेलू उपाय को &#039;नेचुरल पेनकिलर थेरेपी&#039; भी कहा जाता है। अगर आप भी माइग्रेन के दर्द से परेशान हैं और आप बिना दवा के राहत पाना चाहती हैं, तो यह तरीका फायदेमंद साबित हो सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि यह उपाय कैसे काम करता है और इसको अपनाने का सही तरीका क्या है।ब्लड वेसल्स का संकुचनजब भी आप अपने हाथों को ठंडे पानी में डालते हैं, तब शरीर की ब्लड वेसल्स सिकुड़ने लगती है। इसको Vasoconstriction बोला जाता है।माइग्रेन के दौरान सिर की नसें फैल जाती हैं, जिससे ब्लड फ्लो और प्रेशर बढ़ता है और दर्द होता है।हाथों की नसों के सिकुड़ने से शरीर का सर्कुलेशन थोड़ा बदल जाता है, इससे सिर का प्रेशर कम होता है और दर्द घटने लगता है।ब्रेन का ध्यान भटकानाजब शरीर ठंडे पानी का तीव्र स्पर्श करता है, तो यह ब्रेन को नया सिग्नल भेजता है।फिर ब्रेन दर्द पर नहीं सिर्फ उस ठंडक पर फोकस करता है।यह एक तरह की नेचुरल डिस्ट्रैक्शन थेरेपी है।इस नुस्खे से दिमाग को अस्थायी राहत मिलती है और माइग्रेन का असर कम हो जाता है।&#039;फील गुड&#039; हार्मोन्स का स्रावबता दें कि जब बॉडी अचानक से ठंड के संपर्क में आता है, तो यह एंडोर्फिन्स हार्मोन रिलीज करता है। जोकि शरीर के नेचुरल पेनकिलर कहलाते हैं।एंडोर्फिन्स हार्मोन दर्द को कम करने के साथ मूड सुधारने और शरीर को रिलैक्स करने में सहायता करता है।इस उपाय को करने से न सिर्फ माइग्रेन बल्कि तनाव और थकान में भी राहत मिलती है।इस्तेमाल का सही तरीकाएक बर्तन या टब में ठंडा पानी लें और इसमें बर्फ के टुकड़े डालें।इसके बाद दोनों हाथों को कलाई या फिर कोहनी तक पानी में डुबोएं।अब एक मिनट से 5 मिनट तक हाथों को पानी में डुबोकर रखें।अगर इस दौरान आपको सिरदर्द में राहत महसूस हो, तो हाथ बाहर निकाल लें और शरीर को धीरे-धीरे गर्म होने दें।इस नुस्खे को आप माइग्रेन के शुरूआती लक्षण महसूस होते आजमा सकती हैं।बरते ये सावधानियांबर्फ के पानी में अधिक देर तक हाथ न रखें, वरना इससे स्किन में सुन्नपन या फिर जलन महसूस हो सकती है।वहीं अगर आपको कोल्ड एलर्जी या ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो पहले डॉक्टर की सलाह लें।वहीं बच्चों या बुजुर्गों को यह नुस्खा नहीं करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 09:05:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: हार्ट अटैक से बचना है तो पिएं यह खास देसी चाय, नसों का हर बैड कोलेस्ट्रॉल पिघलेगा</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में कम उम्र में ही लोगों को हार्ट अटैक के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। इसके पीछे दिल से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। इनमें शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल का बढ़ा होना सबसे ज्यादा अहम माना जाता है। बता दें कि हमारे शरीर में दो तरह के कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है। जहां शरीर के लिए गुड कोलेस्ट्रॉल जरूरी होता है और वहीं बैड कोलेस्ट्रॉल यानी लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन धमनियों में जमकर प्लाक बना देते हैं, जिससे हार्ट अटैक और हार्ट ब्लॉकेज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो अगर आपकी रिपोर्ट में बैड कोलेस्ट्रॉल 160 mg/dL से ज्यादा आ गया है, तो आपको सतर्क होने की जरूरत है। ऐसे में आपको फौरन डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करना चाहिए। जिससे कि इस समस्या को मैनेज किया जा सके। तुलसी की पत्तियों, अर्जुन की छाल और कुछ अन्य चीजों से बनने वाली यह चाय आपकी सहायता कर सकती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस चाय के फायदे और इसको बनाने के तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: सोशल मीडिया का दावा, बर्फ के पानी से माइग्रेन गायब, जानें एक्सपर्ट की पूरी सच्चाईबैड कोलेस्ट्रॉल कम कर सकती है यह देसी चायबता दें कि अर्जुन की छाल एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायता करती है। इससे कार्डियक मसल्स मजबूत होती हैं और ब्लड फ्लो हेल्दी होता है।वहीं तुलसी की पत्तियां ट्राईग्लिसाइड्स और बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायता करती है। इससे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और ब्लड वेसल्स में इंफ्लेमेशन कम होता है।अदरक बैड कोलेस्ट्रॉस को कम करने में सहायता करती है। अदरक एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है और इससे इंफ्लेमेशन कम होता है।हल्दी में कर्क्युमिन पाया जाता है और यह बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। इससे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और इंफ्लेमेशन कम होता है और प्लाक भी नहीं जमा होता है।वहीं लहसुन से ट्राईग्लिसराइड्स और बैड कोलेस्ट्रॉल कम होता है और गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में सहायता मिलती है और कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ में सुधार होता है।लहसुन में एलिसिन पाया जाता है और यह ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में भी सहायता करता है।ऐसे बनाएं ये चायसबसे पहले 1 पैन में करीब 2 गिलास पानी लें।अब इसमें 1 चम्मच अर्जुन की छाल डालें।फिर इसमें 2 तुलसी की पत्तियां डालें और आधा इंच अदरक और 1 चुटकी हल्दी डालें।अब इसमें 3 कली लहसुन की डालें और फिर 5-7 मिनट तक उबालें।इसको छान लें और पूरा फायदा पाने के लिए इसका रोजाना सेवन करें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 09:05:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>World Diabetes Day 2025: लंबे समय तक डेस्क जॉब पर बैठे रहने  की ये गलतियां डायबिटीज का शिकार बना सकती है, जनिए डॉक्टर क्या कहते हैं</title>
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<description><![CDATA[ हर साल 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस मनाया जाता है। इसके पीछे का उद्देश्य है कि डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरुक कर सके। बिजी लाइफस्टाइल और भागदौड़ भरी जिंदगी में आजकल डेस्क जॉब करने वालों लोगों को डायबिटीज का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। जब हम ऑफिस में काम करते हैं, तो कुछ ऐसी आदतें बना लेते हैं, जिन पर कभी ध्यान भी नहीं देते है। ऑफिस में दिनभर की छोटी-छोटी आदतें, डायबिटीज मरीजों के लिए परेशानी का काम करती है। कई बार लोगों को समझ नहीं आता है। सही समय पर इन आदतों पर समय रहते हुए पहचान लें, तो डायबिटीज कंट्रोल किया जा सकता है।ऑफिस डेस्क पर लंबे समय तक बैठे रहनाज्यादातर समय ऑफिस जॉब्स में लोग घंटों तक कुर्सी पर बैठे रहते हैं। एक जगह पर लगातार बैठे रहने से शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता धीमी पड़ जाती है। इसके अलावा, मेटाबोलिज्म धीमा और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि शरीर ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने में कमजोर होता है और ब्लड शुगर आसानी से बढ़ने लगता है। हर घंटे आपको 3-5 मिनट वॉक करना हेल्दी हो सकता है।खानपान का बिगड़ा हुआ शेड्यूलअक्सर होता है कि लोग मीटिंग्स, डेडलाइन और बिजी शेड्यूल के कारण कई लोग सही समय पर खानी नहीं खा पाते हैं। कभी लंच लेट करना या कई बार उसे पूरी तरह से स्किप करना, ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव लेकर आता है। यह बदलाव डायबिटीज के मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। शरीर को एक तय ऊर्जा की जरुरत होती है। एक फिक्स टाइम पर खाना जरुर खाएं।काम का स्ट्रेसऑफिस का तनाव कई लोगों में देखा जाता है। डायबिटीज मरीजों के लिए यह तनाव ग्लूकोज का लेवल को अचानक बढ़ा सकता है। स्ट्रेस के कारण शरीर में कॉर्टिसोल नामक हार्मोन रिलीज हो जाता है, जो यह ब्लड शुगर को नियंत्रित नहीं होने देता है। वर्क लोड और जल्दबाजी की स्थितियों में काम करना डायबिटीज को और कठिन बना देता है। मेडिटेशन, डीप ब्रीदिंग, छोटे ब्रेक और समय पर काम को मैनेज करना स्ट्रेस कम करने में मदद करता है।रात को कम नींद लेनाअगर आप रात को देर तक जागने की आदत और नींद कम आना है। कम नींद लेने से शरीर जल्दी थक जाता है और इंसुलिन के असर को कम कर देती है, जिस कारण से ब्लड शुगर जल्दी बढ़ता है।  डायबिटिक रोगी को कम से कम 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद लेना काफी जरुरी है।चाय, कॉफी और मीठे स्नैक्सवर्क के दौरान अक्सर लोग कॉफी, चाय और मीठे स्नैक्स जरुर खाते हैं। इनमें कैफीन की मात्रा होती है और मीठा खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। यदि आप हल्की भूख लगे तो आप फल, नट्स और हेल्दी स्नैक्स खा सकते हैं।इन आदतों को कैसे सुधारा जाए  - अगर आप ऑफिस के हर एक घंटे में कुछ मिनट के लिए खड़े होकर चले। - पर्याप्त पानी जरुर पिएं।  - स्ट्रेस को कम करने के लिए छोटे-छोटे ब्रेक जरुर लें। - कैफीन और शुगरी स्नैक्स को सीमित करें। - सही समय पर सोने और उठने की आदत बनाएं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 09:05:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: घर बैठे कंट्रोल करें अपना ब्लड शुगर, ये 3 हर्ब्स दिलाएंगे डायबिटीज से स्थायी राहत</title>
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<description><![CDATA[ डायबिटीज को कंट्रोल करने में हेल्दी खानपान की अहम भूमिका होती है। बता दें कि कई ऐसे फल, सब्जियां, मसाले और हर्ब्स हैं, जोकि डायबिटीज को मैनेज करने में सहायता कर सकते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक दवाओं के साथ अगर आप कुछ हर्ब्स को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएंगे और खान-पान से रिफाइंड शुगर को दूर रखेंगे, तो आप आसानी से ब्लड शुगर को मैनेज कर पाएंगे। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 3 ऐसे हर्ब्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनसे हर डायबिटीज पेशेंट को दोस्ती करना चाहिए। आज हम आपको इन हर्ब्स के फायदे और इनको खाने के सही तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं।विजयसारआयुर्वेद में विजयसार को ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने वाला एक पॉवरफुल हर्ब माना गया है। विजयसार मेटाबॉलिज्म को सुधारने के साथ एक्स्ट्रा कफ, फैट और टॉक्सिन्स को कम करता है। आयुर्वेद के मुताबिक जब डाइजेशन धीमा हो जाता है और बॉडी में वेस्ट जमने लगता है, तो डायबिटीज हो सकती है। विजयसार के सेवन से यह साफ होता है। हालांकि यह खाने में थोड़ा कड़वा और नेचर में ड्राई होता है। लेकिन यह हमारी सिस्टम से एक्स्ट्रा शुगर को बाहर निकालने में सहायता करता है। इसके सेवन से डाइजेशन में सुधार होता है और एनर्जी बैलेंस में रहती है। इसकी लकड़ी को रातभर पानी में भिगोकर रख दें। फिर अगली सुबह वह पानी पिएं। इससे ब्लड शुगर लेवल बैलेंस होता है और मेटाबॉलिज्म भी दुरुस्त होता है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: ओमेगा-3 की कमी को दूर करेंगे ये 4 सुपरफूड्स, दिल-दिमाग को मिलेगा &#039;रामबाण&#039; इलाजगुड़मारबता दें कि यह एक ऐसा हर्ब है, जो डायबिटीज से लड़ने में मदद करता है। साथ ही यह अतिरिक्त कफ को भी बैलेंस करता है और बॉडी से एक्स्ट्रा मधु को बाहर निकालता है। जोकि शुगर की वजह होता है। गुड़मार एक्स्ट्रा फैट और टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है और इसका सेवन करने से मेटाबॉलिज्म और डाइजेस्टिव फायर दुरुस्त होता है। गुड़मार शरीर में शुगर अब्जॉर्बेशन को कंट्रोल करता है।कलौंजीआयुर्वेद में कलौंजी को गुणों की खान माना जाता है। कलौंजी डायजेशन को सुधारने के साथ टॉक्सिन्स को कम करता है। वहीं जिन लोगों का मेटाबॉलिज्म स्लो है, तो उनको कलौंजी का सेवन जरूर करना चाहिए। यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के साथ ही इंसुलिन फंक्शन को भी सुधारता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Nov 2025 00:08:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>सर्दियों में अंडा नहीं खाते? शरीर को गर्म रखने और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए खाएं ये 5 चीजें!</title>
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<description><![CDATA[ ठंड के मौसम में लोग शरीर को गर्म रखने के लिए अंडा का सेवन करते हैं। हालांकि, आप शरीर को गर्म रखने के लिए अंडे की जगह अन्य चीजों का सेवन करें। इस मौसम में सर्द हवाएं, सुहानी सुबह और गर्म कपड़ों का एहसास ही अलग होता है। हालांक, यह मौसम अपने साथ कई बीमारियां भी लेकर आता है। इस मौसम में हमारा इम्यून सिस्टम अक्सर कमजोर हो जाता है, जिस वजह से शरीर का तापमान भी कम हो जाता है, जिस वजह से ठंड भी लगने लगती है। इस मौसम में सर्दी-जुकाम, खांसी, जोड़ों में दर्द और थकान जैसी समस्याएं बढ़ जाती है। ठंड के मौसम में लोग शरीर को गर्म रखने के लिए अंडा जरुर खाते हैं और इसे सर्दियों में खाना फायदेमंद माना जाता है। जिन लोगों को अंडा खाना पसंद नहीं, वे लोग सर्दियों में शरीर को गर्म रखने के लिए इन चीजों का सेवन कर सकते हैं। अंडे की जगह पर इन 5 चीजों का सेवन कर सकते हैं।शरीर को गर्म रखने के लिए अंडे की जगह इन चीजों को खाएंगुड़हर भारतीय किचन में आपको गुड़ जरुर देखने को मिल जाएगा। यह मीठे के साथ ही शरीर को एनर्जी प्रदान करता है, बल्कि ब्लड फ्लो को बढ़ाता है और आयरन की कमी को पूरा करने में मदद करता है। ठंड के मौसम में शरीर सुस्त और कमजोर महसूस करने लगे, तो गुड़ का सेवन जरुर करें। यह शरीर को एनर्जी देता है। गुड़ में आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम और विटामिन शरीर को गर्म रखता और साथ ही इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। इसके आप लड्डू, गुड़ चाय या गर्म पानी के साथ खा सकते हैं। ड्राई फ्रूट्सअब आपको सर्दियों में अंडा खाने की जरुरत नहीं है। इसकी जगह आप ड्राई फ्रूट्स जैसे कि- बादाम, काजू, अखरोट, किशमिश और अंजीर का सेवन कर सकते हैं। इन ड्राई फ्रूट्स प्रोटीन, हेल्दी फैट्स, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होता है, जो शरीर को गर्म रखता है। इसके साथ ही बादाम और अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो शरीर को गर्म रखता है और स्किन की ड्राईनेस दूर होती है। किशमिश और अंजीर पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है, जिससे शरीर को पोषक तत्व मिलते हैं।अदरकइस मौसम में अदरक वाली चाय पीने का एक अलग ही मजा होता है। अदरक एक ऐसी जड़ी-बूटी है, जो हर घर में आसानी से मिल जाती है। अदरक में जिंजरॉल के नाम का तत्व होता है, जो शरीर को गर्म रखता है। इससे ब्लड फ्लो तेज होता है। अदरक का सेवन करने से सर्दी-जुकाम, गले की खराश, खांसी और पाचन से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है।लहसुनआयुर्वेद में लहसुन को प्राकृतिक औषधि के रुप में जानी जाती है। इसमें एलिसिन नाम का तत्व बैक्टीरिया और वायरस से शरीर को सुरक्षित रखने में मदद करता है। लहसुन के सेवन करने से शरीर में गर्मी को बढ़ाता है और ब्लड का फ्लो को बेहतर करता है, जिससे सर्दियों में ठंडी कम लगती है।  रोजाना कम से कम 1 या 2 कच्चे लहसुन खाने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, दिल की सेहत में सुधार आता और बीमारियां दूर होती है।हल्दीहर भारतीय किचन में हल्दी जरुर होती है। हल्दी में करक्यूमिन शरीर की गर्मी बढ़ाने में मदद करता है, जिससे सूजन, दर्द और इन्फेक्शन की समस्या से बचाव होता है। विंटर सीजन में हल्दी वाला दूध पीना शरीर की गर्मी को बढ़ाने और हेल्दी रखने लिए फायदेमंद माना जाता है। हल्दी वाला दूध पीने सर्दियों में शरीर से अंदर गर्म रहता है। इसके साथ ही सर्दी-जुकाम में राहत मिलता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 09 Nov 2025 00:08:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>सर्दियों, में, अंडा, नहीं, खाते, शरीर, को, गर्म, रखने, और, इम्यूनिटी, बढ़ाने, के, लिए, खाएं, ये, चीजें</media:keywords>
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<title>Health Tips: भागदौड़ में मन को चाहिए शांति, योग&#45;मेडिटेशन भूल जाएं, हमिंग से पाएं तुरंत आराम</title>
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<description><![CDATA[ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग बीमारियों का तेजी से शिकार हो रहे है। आजकल के दौर में स्ट्रेस यानी की तनाव भी एक आम समस्या हो गई है। परिवार की जिम्मेदारियां, काम का दबाव और हर वक्त की दौड़ती सोच हमें थका देती है। ऐसे में लोग तनाव से छुटकारा पाने और मन को शांत करने के लिए दवा, योग और मेडिटेशन आदि का सहारा लेते हैं। लेकिन हर किसी के बाद इन चीजों का समय नहीं होता है।तनाव को कम करने के लिए &#039;हमिंग&#039; यानी की हल्की गुनगुनाहट ही काफी होती है। बता दें कि यह कोई जादू नहीं बल्कि साइंस से जुड़ी एक बेहद आसान टेक्निक है। एक्सपर्ट के मुताबिक जब हम गुनगुनाते हैं, तो हमारी बॉडी की एक खास नस, जिसको वागस नर्व कहते हैं, वह एक्टिव हो जाती है। वागस नर्व दिमाग को शांत करती है और दिल की धड़कन को नॉर्मल बनाने के साथ सांसों को संतुलित रखती है। ऐसे में बिना दवा, योग या मेडिटेशन के सिर्फ कुछ मिनट की &#039;हमिंग&#039; से आप अपने मन को शांत और शरीर को आराम पहुंचा सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: सेहत का दुश्मन है ठंडा खाना, डिप्रेशन और पेट की बीमारियों से बचने का ये है उपायजानिए क्या है हमिंगहमिंग का मतलब धीरे-धीरे गुनगुनाने या फिर होंठ बंद करके आवाज निकालना है। जब हम कोई गाना गुनगुनाते हैं या फिर &#039;ऊँ&#039; का उच्चारण करते हैं, तो यह बहुत नॉर्मल लगता है, लेकिन उसके पीछे भी साइंस है।जानिए कैसे काम करती है ये ट्रिकआपके मन में यह सवाल चल रहा होगा कि आखिर यह ट्रिक काम कैसे करती हैं। तो बता दें कि जब भी हम &#039;हमिंग&#039; करते हैं, तो हमारे शरीर में मौजूद वागस नर्व एक्टिव हो जाती है। यह वागस नस दिमाग को लंग्स, हार्ट और डाइजेस्टिव सिस्टम से जोड़ती है।वागस नर्व हमारे शरीर के पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम का हिस्सा होती है। यह वही हिस्सा होता है, जो शरीर को संतुलन और आराम की स्थिति में रखता है। वहीं जब हम गुनगुनाते हैं, तो यह नस दिमाग को सिग्नल भेजती है कि सब ठीक है, अब कोई खतरा नहीं है। यह सिग्नल मिलने पर दिल की धड़कन सामान्य होती है, सांसें स्थिर होती हैं और हमारा दिमाग भी शांत महसूस करता है।कब करना चाहिए हमिंगबता दें कि जब भी घबराहट, तनाव या फिर बेचैनी महसूस हो, तो गहरी सांस लें और धीरे-धीरे हमिंग करना शुरू करें। आप किसी भजन, मंत्र या &#039;ओम्&#039; का जाप भी इस तरह से कर सकती हैं। अगर आप रोजाना कुछ मिनट के लिए हमिंग करती हैं, तो धीरे-धीरे शरीर खुद ही तनाव को शांत करना सीख जाएगा।ऐसे में आप बिना किसी खर्च, दवा या योग के सिर्फ कुछ मिनट की हमिंग से शरीर और मन दोनों को आराम पहुंचा पाएंगी। वहीं अगली बार जब आपको तनाव या घबराहट महसूस हो, तो दिमाग को शांत करने के लिए गुनगुनाना शुरूकर दें। इससे आपको फर्क खुद ब खुद महसूस होगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 22:16:22 +0530</pubDate>
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<title>पीरियड्स में लगातार देरी? ये संकेत दे रहे हैं गंभीर बीमारी के लक्षण, तुरंत जानें असली वजह</title>
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<description><![CDATA[ हर महीने में पीरियड्स स्किप होना या डिले होना एक आम समस्या बनती जा रही है, जिससे महिलाएं कभी न कभी जरूर गुजरती है। सेहत के लिहाज से हर महीने महिलाओं में पीरियड्स सही समय पर आना काफी जरुरी है। यदि आपके पीरियड्स स्किप या डिले हो रहे हैं, तो यह आपकी सेहत के लिए अच्छा संकेत नहीं है। पीरियड्स कभी तनाव के कारण, हार्मोनल उतार-चढ़ाव तो कभी लाइफस्टाइल में बदलाव होने के वजह से पीरियड्स डिले हो जाते हैं। लेकिन आपके इसके पीछे कारण नहीं जानते होंगे। आपको बता दें कि, पीरियड्स के देर से आने का मतलब है कि ओवरी में एग नहीं बन रहे हैं। आइए आपको बताते हैं क्यों डिले हो रहे हैं पीरियड्स।पीरियड्स का देर से आना  - एक्सपर्ट के मुताबिक, पीरियड्स समय पर न आने के कई कारण हो सकते हैं। पीसीओडी में पीरियड्स डिले हो जाते हैं।   - इसका मतलब यह नहीं कि आपकी ओवरीज काम नहीं कर रही हैं या एग नहीं बना रही है, बल्कि इसका यह मतलब है कि आपकी ओवरीज जरुरत से ज्यादा काम कर रही हैं।  - पीरियड्स देर में आते हैं, तो पीसीओडी की समस्या होती है, आपकी ओवरीज एग तो बनाती हैं, लेकिन वो एग रिलीज नहीं हो पाते हैं और इसलिए फर्टिलाइज नहीं होते हैं। यही कारण है कि महिलाओं को कंसीव करने में काफी मुश्किल होता है। - पीसीओडी के दौरान हमारी बॉडी में इम्मैच्योर एग्स बनते हैं और ये एग रिलीज नहीं हो पाते हैं। अगर आपके पीरियड्स स्किप हो रहे हैं, अगर आपको 35 दिनों से ज्यादा तक पीरियड्स नहीं आते हैं, तो यह बड़ी समस्या है।   -   अगर अचानक से पीरियड्स में फ्लो बढ़ने लगता है, तो शरीर में इंबैलेंस और पीसीओडी का लक्षण हो सकता है। अगर आप पीरियड्स वाले दिन 3 पैड बदल रही थीं और अब आपको अचानक से 5-6 पैड बदल रहे हैं, तो यह सही नहीं है।   - पीरियड्स के दौरान एक्ने हो जाना, ओव्युलेशन या पीएमएस में क्रेविंग्स होना और मूड का अचानक से अधिक चिड़चिड़ा हो जाना। इन संकेतों पर जरुर ध्यान देना चाहिए।  - तनाव के वजह से भी हार्मोनल इंबैलेस हो जाते है, जिससे पीरियड्स डिले होते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 22:16:21 +0530</pubDate>
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<title>Benefits of Yoga: दवाओं से बचना है तो सर्दी&#45;खांसी में करें ये योगासन, तुरंत मिलेगा आराम</title>
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<description><![CDATA[ कई लोग जुकाम-खांसी की समस्या होने पर दवाओं का सेवन करना पसंद नहीं करते हैं। क्योंकि इसकी दवा लेने से कई लोगों के पेट में गर्मी बढ़ जाती है। इसलिए यह लोग प्रयास करते हैं कि सर्दी को जल्द से जल्द दूर भगाया जाए, वह भी किसी अन्य तरीके से। वहीं योग के पास करीब-करीब हर मर्ज का इलाज है। ऐसे में सर्दी-जुकाम और खांसी की समस्या का उपचार भी योग से बिल्कुल संभव है, इसलिए जुकाम होने पर आप दिनचर्या में कुछ योगासन को शामिल करना चाहिए। इन योगासन का अभ्यास करने से आपको जल्द से जल्द इस समस्या से राहत मिल सके।हस्तपादासनजुकाम और खांसी की समस्या से निजात पाने में हस्तपादासन करना बहुत लाभकारी साबित हो सकता है। इस आसन को करना बेहद आसान है। इस आसन को खड़े होकर करें। खड़े होकर आगे की ओर झुकने से ब्लड का प्रवाह हमारे सिर की ओर बढ़ता है। प्रयास करें, झुकते समय घुटने नहीं मोड़े। यह क्रिया सायनस को साफ करने का काम करती है। इस आसन को करने से नाड़ीतंत्र को बल मिलता है और शरीर तनाव मुक्त रहता है। इस आसन को करने से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। जिस कारण से बार-बार जुकाम नहीं होता है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: सेहत का दुश्मन है ठंडा खाना, डिप्रेशन और पेट की बीमारियों से बचने का ये है उपायशवासनजुकाम होने पर सही तरीके से किया गया शवासन काफी उपयोगी साबित हो सकता है। इस आसन को करना बेहद आसान है, इसको हर कोई कर सकता है। इसलिए इस आसन को करने के लिए सबसे पहले लेट जाएं। लेटने के बाद पूरा ध्यान अपनी श्वासों पर लगाएं। नियम से लंबी और गहरी श्वास लें और थोड़ी देर तक अगर आप यही करते रहे, तो संभव है कि आसन करते समय आपको जुकाम में फर्क महसूस होने लगे।नाड़ी शोधन प्राणायामनाक के छेदों को बंदकर-खोलकर बारी-बारी श्वास लेने से सर्दी की वजह बंद पड़े नासिका द्वार खुल जाते हैं। इस आसन को करने से फेफड़ों तक सही तरीके से ऑक्सीजन पहुंच पाती है। ऐसे में बार-बार इस आसन का अभ्यास करने से नाक में समस्या नहीं होती है। सर्दी की वजह से होने वाले स्ट्रेस से भी छुटकारा मिलता है। बार-बार जुकाम होना आम बात है, तब आपको इस आसन को अपना लेना चाहिए।मत्स्यासनइस आसन के अभ्यास से धीरे-धीरे जुकाम ठीक होने लगता है। हालांकि शुरूआत में यह आसन थोड़ा कठिन लग सकता है। लेकिन बार-बार अभ्यास से यह आसन सही तरीके से होने लगता है। वहीं इसका परिणाम भी मिलने लगता है। जिन लोगों की पीठ में हल्का सा झुकाव दिखाई देने लगता है, उन लोगों के लिए यह आसन फायदेमंद हो सकता है। इस आसन का अभ्यास करने से पीठ अपने पुराने स्वरूप में आ जाती है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 22:15:57 +0530</pubDate>
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<title>योग&#45;मेडिटेशन नहीं, अब क्रिएटिविटी से करें स्ट्रेस मैनेज,मेंटल हेल्थ के लिए नया तरीका आर्ट थेरेपी</title>
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<description><![CDATA[ भागदौड़ भारी जिंदगी में स्ट्रेस दिनों-दिन बढ़ ही रहा है। हर किसी के जिदंगी में तनाव जरुर है। लोग स्ट्रेस को मैनेज को करने के लिए मेडिटेशन या योग का सहारा लेते हैं, तो कुछ लोग अपनी क्रिएटिविटी में सुकून ढूंढते हैं। हालिए में एक इंटरव्यू में बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा ने बताया है कि जिनके लिए पेंटिंग सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि एक तरह की थेरेपी (Art Therapy) है। एक्ट्रेस ने आगे बताया है कि जब भी वह उदास होती थीं, तो पेंटिंग करने लगती थीं। पेंटिंग करने से उनका दिमाग पूरी तरह शांत हो जाता था। उन्हें ऐसा लगता था जैसे मैं किसी और दुनिया में पहुंच गई हूं। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि अपने पति से मिलने के बाद उन्होंने पेंटिंग करना छोड़ दिया, लेकिन उनके पति जहीर इकबाल उन्हें बार-बार याद दिलाते हैं कि उन्हें फिर से ब्रश उठाना चाहिए, क्योंकि यही उनकी असली थेरेपी है।क्या है आर्ट थेरेपी?आर्ट थेरेपी एक ऐसी थेरेप्यूटिक प्रोसेस है, जिसमें कला का प्रयोग करके भावनाओं को जाहिर किया। आर्ट केवल कलाकारों के लिए नहीं। आर्ट परफेक्शन पर नहीं, बल्कि उसे बनाने की प्रक्रिया पर होता है। अब आप अपने स्ट्रेस को कम करने के लिए रंगों से खेले या कुछ लिखें। यह आपके मन के बोझ को कम करता है।आर्ट थेरेपी के फायदे - स्ट्रेस और एंग्जायटी कम करता है।  - ट्रॉमा प्रोसेस करना  - माइंड रिलैक्स करना    - सेल्फ कॉन्शियसनेस बढ़ाना  - भावनाएं जाहिर करनाकैसे करते हैं आर्ट थेरेपी- ड्रॉइंग और स्केचिंग- पॉटरी- कोलाज और मिक्स मीडिया- पेटिंगकिन लोगों के लिए फायदेमंद है?- बच्चों और टीनेजर्स के लिए  - युवाओं और बुजुर्गों के लिए  - डिप्रेशन और एंग्जाएटी से पीड़ित लोगों  के लिए  - स्ट्रेस या बर्न आउट से गुजर रहे लोगआर्ट थेरेपी स्ट्रेस को कैसे कम करता हैनेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक रिपोर्ट के अनुसार, आर्ट थेरेपी शरीर और मन के बीच बैलेंस बनाकर तनाव को कम करने में मदद करती है। ट्रेडिशनल “टॉक थेरेपी” की तरह इसमें शब्दों पर नहीं, बल्कि भावनाओं की अभिव्यक्ति पर जोर दिया जाता है। कोई भी व्यक्ति आर्ट बनाता है, तो उसका ध्यान अपनी चिंताओं से हटकर उस आर्ट पर फोकस करता है, जिससे मानसिक शांति मिलती है।मन को सुकून देने वाली प्रक्रियाआर्ट थेरेपी करने से न केवल मुड सुधारती है, बल्कि नींद, कॉन्सनट्रेशन और इमोशनल बैलेंस बनाने में मदद करता है। व्यक्ति अपनी क्रिएटिविटी से जुड़ता है। इसके अलावा दिमाग में डोपामाइन जैसे फील गुड हार्मोन रिलीज करता है, जो तनाव और उदासी को कम करता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 22:15:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>एयर प्यूरीफायर बच्चों की इम्युनिटी के लिए हानिकारक नहीं, एक्सपर्ट ने बताई सच्चाई, दूर करें भ्रम</title>
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<description><![CDATA[ इस समय दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हवा के कारण कई लोग वायु गुणवत्ता (AQI) कम करने के लिए अपने घरों में एयर प्यूरीफायर लगाने पर मजबूर हो गए हैं। हालांकि एयर प्यूरीफायर हवा की गुणवत्ता सुधारने में मदद करते है, लेकिन इनके बार-बार इस्तेमाल से जुड़ी कई भ्रामक तथ्य हैं, जिनमें यह धारणा भी शामिल है कि ये बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम कर देते हैं। नवजात शिशु विशेषज्ञ ने बताया कि क्या एयर प्यूरीफायर हानिकारक हैं और उनके इस्तेमाल से जुड़े मिथक का खंडन किया। एयर प्यूरीफायर के इस्तेमाल से आपके बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर नहीं होगी।क्या एयर प्यूरीफायर आपके बच्चे के लिए हानिकारक हैं?हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया कि जब लोग एयर प्यूरीफायर खरीदते हैं, तो उनके दिमाग में कई सवाल आते हैं, जैसे कि- क्योंकि इसका इस्तेमाल सिर्फ एक ही कमरे में किया जा सकता है। जब बच्चा दूसरे कमरों में जाएगा, तब भी घर के अंदर वायु प्रदूषण होगा। तो क्या दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले बच्चों को भी इसकी आदत नहीं डालनी चाहिए? माता-पिता अक्सर पूछते हैं, &quot;अगर हम एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें तो यह कैसे करें?&quot;हेल्थ एक्सपर्ट ने कहा कि वायु विषाक्तता के कण और इम्युनिटी का आपस में कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि- &quot;जो व्यक्ति दिन में 20 सिगरेट पीता है, उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और सहनशीलता 5 सिगरेट पीने वाले व्यक्ति से ज्यादा नहीं होती। इसलिए, अगर हो सके तो रात में कम से कम 8 से 10 घंटे प्यूरीफायर चलाएं ताकि बच्चे के फेफड़े ठीक हो सकें।&quot;अगर आपके पास एयर प्यूरीफायर नहीं है तो क्या करेंअगर आपके घर में एयर प्यूरीफायर नहीं है, तो आप अपने घर पर हवा को साफ रखने वाले पौधे जरुर लगाएं। आप अपने घर पर एलोवेरा, स्नैक प्लांट, मनी प्लांट, बांस जैसे पौधे लगा सकते हैं। - बच्चों के कमरें चारकोल बैग रख सकते हैं। इसके अलावा DIY पंखे के फिल्टर भी काफी मदद कर सकते हैं।- जब हवा की गुणवत्ता सही हो, तो घर में ताजी हवा के लिए खिड़कियां खोल सकते हैं।- घर में धुएं, धूपबत्ती का धुआं और डार्क रंगों का इस्तेमाल कम करें। क्योंकि यह हवा को और खराब कर देंगे।- नमी को संतुलित रखने के लिए पंखे और फिल्टर को साफ करें। फफूंदी से बचें।

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<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 22:15:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Colon Cancer: खराब लाइफस्टाइल से बढ़ते कॉलन कैंसर को कहें अलविदा, डाइट में जोड़ें ये 4 खास फल</title>
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<description><![CDATA[ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत का ध्यान नहीं रख पाते हैं। जिस कारण लोगों में कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। डायबिटीज, मोटापा और दिल की बीमारियां आम हो गई हैं। वहीं कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी भी लोगों को तेजी से अपना शिकार बना रही है। इसके पीछे अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खराब खानपान जिम्मेदार है। हम जो कुछ भी खाते हैं, उसका सीधा असर हमारे गट और उसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पर पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि हम अपनी डाइट में हेल्दी फलों को शामिल करें। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसे फलों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका सेवन कॉलन यानी की आंतों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। कीवीगट हेल्थ के लिए कीवी काफी फायदेमंद होता है। कीवी में एक्टिनिडिन नामक एंजाइम पाया जाता है। यह प्रोटीन को तोड़कर डाइजेशन को अच्छा बनाता है और इसके सेवन से कब्ज की समस्य़ा भी दूर होती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और प्रीबायोटिक्स आंतों को मजबूत बनाने का काम करता है। कीवी का सेवन करने से इंफ्लेमेशन और कोलन कैंसर का खतरा कम होता है।इसे भी पढ़ें: Benefits of Yoga: दवाओं से बचना है तो सर्दी-खांसी में करें ये योगासन, तुरंत मिलेगा आरामसाइट्रस फ्रूट्सनींबू, संतरा और ग्रेपफ्रूट जैसे साइट्रस फ्रूट्स सिर्फ ताजगी ही नहीं बल्कि शरीर के लिए नेचुरल डिटॉक्सिफायर की तरह काम करते हैं। इन फलों में विटामिन सी और फ्लेवोनॉइड्स की मात्रा अच्छी पाई जाती है। जोकि शरीर के हानिकारक तत्वों को खत्म करते हैं और सेल्स को नुकसान होने से बचाते हैं। इन फलों का सेवन करने से कैंसर का खतरा कम होता है।सेबसेब में पेक्टिन फाइबर पाया जाता है, जोकि गट बैक्टीरिया के लिए फायदेमंद होता है। जब यह कोलन में जाकर टूटता है, तो ब्यूट्रेट नामक फैटी एसिड बनता है, जोकि कैंसर सेल्स से बचाव करता है। सेब के छिलके क्वेरसेटिन मौजूद होता है, जोकि एक पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट है। यह सेल्स के डीएनए को नुकसान होने से बचाता है।तरबूजगट हेल्थ के लिए फाइबर जितना जरूरी होता है, पानी भी उतना ही जरूरी होता है। वहीं तरबूज में 90% पानी पाया जाता है, जोकि शरीर को हाइड्रेट रखता है और डाइजेशन को दुरुस्त रखता है। इसमें मौजूद लाइकोपीन एक ऐसा एंटीऑक्सीडेंट है, जोकि कैंसर से बचाव में सहायता करता है। साथ ही यह कॉल समेत कई कैंसर के खतरे को कम करता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 22:15:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Health Tips: ओमेगा&#45;3 की कमी को दूर करेंगे ये 4 सुपरफूड्स, दिल&#45;दिमाग को मिलेगा &amp;apos;रामबाण&amp;apos; इलाज</title>
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<description><![CDATA[ ओमेगा-3 फैटी एसिड को मछली और मांसाहारी डाइट से जोड़कर देखा जाता है। ओमेगा 3 फैटी एसिड ऐसा जरूरी पोषक तत्व है, जो आपके पूरे हेल्थ के लिए &#039;रामबाण&#039; से कम नहीं है। शरीर इसको खुद नहीं बना सकता है, इसलिए इसको डाइट से लेना जरूरी है। यह हार्ट को हेल्दी रखने, मस्तिष्क के कार्य को बेहतर बनाने और शरीर में होने वाली सूजन को कम करने में अहम भूमिका निभाता है।आजकल की बिजी लाइफस्टाइल और प्रोसेस्ड फूड पर बढ़ती निर्भरता की वजह से हमारी डाइट में इसकी कमी आम हो गई है। जिसकी वजह से अवसाद, हृदय और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं होती हैं। वहीं शाकाहारी लोग कुछ आसानी से उपलब्ध भारतीय खाद्य पदार्थों के जरिए पर्याप्त ओमेगा-3 ALA आसानी से कंज्यूम कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको चार &#039;सुपरफूड्स&#039; के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका सेवन करने से आप ओमेगा 3 की कमी को आसानी से पूरा कर सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Colon Cancer: खराब लाइफस्टाइल से बढ़ते कॉलन कैंसर को कहें अलविदा, डाइट में जोड़ें ये 4 खास फलअलसी के बीजअलसी के बीज पोषक तत्वों का पावरहाउस ओमेगा-3 फैटी एसिड का सबसे सस्ता और प्रभावी स्त्रोत है। यह छोटे भूरे बीज अल्फा लिनोलेनिक एसिड ALA ओमोगा 3 से भरपूर होते हैं। 100 ग्राम अलसी के बीजों में 22 ग्राम ओमेगा 3 होता है। यह शरीर में जाकर EPA और DHA में परिवर्तित होता है। आप अलसी के बीजों को पीसकर स्मूदी, दही के साथ या फिर आटे में मिलाकर सेवन कर सकते हैं। इसको खाने से पाचन में भी सुधार होगा।चिया सीड्सपोषण के मामले में चिया सीड्स किसी सुपरफूड से कम नहीं हैं। अलसी की तरह यह भी ओमेगा 3 का अच्छा ऑप्शन है। चिया सीड्स में 17 ग्राम ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है। वहीं यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है, जोकि वेट बैलेंस और पाचन में भी लाभकारी होता है। आप चिया सीड्स को पुडिंग, सलाद के ऊपर छिड़ककर या पानी में भिगोकर अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।अखरोटआमतौर पर मेवे काफी महंगे होते हैं, लेकिन अखरोट मेवों की तुलना में सस्ते होते हैं और अखरोट ओमेगा 3 का एक अच्छा स्त्रोत है। खासकर जब अखरोट का सेवन सीमित मात्रा में किया जाए। अखरोट में अन्य नट्स की तुलना में सबसे ज्यादा ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है। रोजाना 2-3 अखरोट का सेवन करने से मेंटल हेल्थ अच्छी होती है। क्योंकि DHA मस्तिष्क के ऊतकों का एक अहम हिस्सा है। साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने में मददगार है।राई और सरसों के तेलभारतीय किचन में इस्तेमाल होने वाला राई या फिर सरसों का तेल भी ओमेगा 3 फैटी एसिड का अच्छा स्त्रोत माना जाता है। अन्य रिफाइंड तेलों की तुलना में सरसों के तेल में हेल्दी फैट का बेहतर अनुपात होता है। लेकिन ध्यान रखें कि इसको अधिक गर्म करने से इसके पोषक तत्व कम हो जाते हैं। इसलिए इसको हल्की आंच पर खाना पकाने या फिर सलाद की ड्रेसिंग के लिए उपयोग करना सबसे अच्छा है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 22:15:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>पेट की चर्बी हो या बेजान त्वचा, रोज पिएं यह &amp;apos;मैजिक&amp;apos; आंवला ड्रिंक और देखें कमाल!</title>
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<description><![CDATA[ हमारी सेहत के लिए आंवला सबसे फायदेमंद माना जाता है। आंवले में विटामिन सी और कई अन्य पोषक तत्व पाएं जाते हैं, जो सेहत को दुरुस्त बनाएं रखते हैं। आंवला, इम्यूनिटी, स्किन और हेयर हेल्थ, वेट मैनेजमेंट और ओवरऑल हेल्थ के लिए फायदेमंद माना जाता है। आंवले को आप किसी प्रकार से सेवन कर सकते हैं, इसका चाहे आप अचार या सब्जी बनाकर, सलाद के रुप में या फिर जूस बनाकर भी पिया जा सकता है। आंवले को इफेक्टिव बनाने के लिए कुछ और भी चीजों को साथ मिक्स जरुर करें। हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि आंवला जूस की एक रेसिपी बताई, जिससे आपकी स्किन ग्लोइंग बनेंगी, हेल्दी हेयर और फ्लैट बेली होने में मदद करता है।  आइए आपको आंवला के फायदे बताते हैं।वेट लॉस में क्यों फायदेमंद है आंवला?हेल्थ एक्सपर्ट मुताबिक, एक आंवले में करीब 20 संतरों के जितना विटामिन सी मौजूद होता है। यह मेटाबॉलिज्म को इंप्रूव करता है, जिससे फैट बर्निंग का प्रॉसेस फास्ट होता है। यदि आपके पेट के आसपास चर्बी जमी हुई ,तो आंवले का सेवन करना काफी फायदेमंद हो सकता है। आंवला के सेवन से क्रेविंग कंट्रोल होती है और पेट भी लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है। स्किन और हेयर के साथ ही अपने शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए अपनी डाइट में आंवले को जरुर एड ऑन करें।रोज पिएं 1 आंवले की ड्रिंकहेल्थ एक्सपर्ट ने बताया है कि यदि आप आंवले का जूस रोजाना सुबह पिएं तो यह फैट लॉस करने में मदद करता है। आंवले के जूस के साथ आप कुछ चीजों को मिला सकते हैं। जूस बनाने के लिए एक आंवला, 1 इंच कच्ची हल्दी का टुकड़ा, अदरक का टुकड़ा, चुटकी भर काली मिर्च और 6-7 करी पत्ते ले लें और इन्हें पीसकर जूस बना लें। इसको छान लें और खाली पेट सुबह इस ड्रिंक का सेवन करें।ड्रिंक के क्या फायदे हैंइस ड्रिंक को लगातार पीने से 1 महीने के अंदर आपको जबरदस्त परिणाम मिलेंगे। ये फैट लॉस में सहायक है, यदि आफको बेली फैट कम करना है, तो ये ड्रिंक जरुर पिएं। इसके सेवन से ग्लोइंग स्किन और हेल्दी घने बाल मिलेंगे। यह ड्रिंक किसी जादू से कम नहीं है। यदि आप ब्राइड बनने वाली है, तो इसे आपने रूटीन में जरुर एड करें।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 22:15:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>National Cancer Awareness Day 2025: क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस? जानिए  साल 2025 की थीम और इसका महत्व</title>
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<description><![CDATA[ कैंसर एक जानलेवा बीमारी है, इसका नाम सुनते ही अच्छे-अच्छे लोगों इस बीमारी से डरने लगते हैं। कुछ सालों कैंसर जैसी घातक बीमारी के मामलों में तेजी से उछाल आए है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को लेकर हर साल जागरुकता बढ़ाने के लिए नेशलन कैंसर अवेयरनेस डे (National Cancer Awareness Day) मनाया जाता है। इस खतरनाक बीमारी को लेकर हर किसी कई तरह की अलग-अलग धाराणाएं हैं। इसलिए इस दिन लोगों के बीच लक्षणों, इलाज और रोकथाम  को लेकर सही जानकारी पहुंचाने को लेकर समर्पित हैं। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को, अगर सही समय पर पहचान किया जाए, तो इसका इलाज संभव है। आइए आपको इस लेख में नेशनल कैंसर जागरूकता दिवस पर इसका महत्व क्या है और क्यों मनाया जाता है, इस साल इसकी क्या थीम है, बताते हैं।राष्ट्रीय कैंसर अवेयरनेस डे का इतिहासभारत में हर साल 7 नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जाता है। इसके अलावा, आज के दिन नोबेल पुरस्कार विजेता और वैज्ञानिक मैरी क्यूरी का जन्मदिन होता है। इसलिए इस दिन को उन्हें समर्पित किया गया है। दरअसल, मैरी क्यूरी ने कैंसर के इलाज के लिए रेडियोएक्टिवटी की खोज की थी। इस दिन को मुख्य रुप से देश में कैंसर के प्रति जागरुकता लाने के लिए शुरु किया गया था। इस दौरान, भारत में कैंसर के मामले काफ हद तक बढ़ रहे, स्क्रीनिंग और समय पर इलाज की कमी को ध्यान में रखते हुए इस दिन को मनाने का फैसला लिया गया।राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस का महत्व-  नेशलन कैंसर अवेयरनेस डे मनाने का मुख्य उद्देश्य जनता के बीच यह कैंसर जैसी बीमारी को लेकर समझ को बढ़ाना है। कैंसर केवल बीमारी ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या भी है।- इस दिन की मदद से लोगों में जागरुकता लाने से समय पर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता लगता है, क्योंकि कैंसर के बारे में जल्दी पता लग जाएं, तो इसका सही इलाज कराना संभव होता है।- इस दिन लोगों को जागरुक करके, उनकी लाइफस्टाइल में जरुरी बदलाव करने के लिए बढ़ावा दिया जाता है। जैसे कि- तंबाकू से दूर रहना, संतुलित आहार, नियमित एक्सरसाइज  और अपने स्वास्थ्य का सही ध्यान रखना बेहद जरुरी है, ताकि कैंसर के जोखिम को कम किया जा सके।- भारत में ग्रामीण-शहरी, आर्थिक स्थिति, शिक्षा आदि के आधार पर लोगों तक इलाज और देखभाल की पहुंच अलग-अलग होती है। इस दिन इन असमानताओं को दूर करने पर जोर दिया जाता है। - कैंसर एक जानलेवा बीमारी है इसको लेकर लोगों में कई प्रकार की गलत धारणाएं, डर और सामाजिक हटाव जैसी चीजों को दूर करने और लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना है।राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस 2025 की थीमनेशनल कैंसर जागरूकता दिवस पर हर साल कोई न कोई थीम जरुर तय की जाती है। इन्हीं थीम के आधार पर देशभर में अलग-अलग जगहों पर कार्यक्रम, सेमिनार और इवेंट कराएं जाते हैं। इस साल 2025 में  नेशलन कैंसर अवेयरनेस डे के लिए &#039;यूनाइटेड बाय यूनिक&#039;थीम रखी गई है। बता दें कि, इस थीम के यूनिक का मतलब है कि हर कैंसर रोगी, हर देखभाल करने वाले, हर परिवार की कहानी अलग-अलग होती है, उनकी चुनौतियां, संसाधन, सामाजिक भिन्नता होती है। वहीं, यूनाइटेड का मतलब होता है कि हम सब एक लक्ष्य के लिए हैं, कैंसर को रोकना, निदान को बढ़ावा देना, देखभाल बेहतर बनाना। हम सभी अलग-अलग हैं, लेकिन इसके बाद भी एक साथ हैं। यह थीम इस बात पर जोर देती है कि स्वास्थ्य प्रणालियां, नीतियां और कार्यक्रम इस तरह बने हों कि वे हर मरीज का ध्यान में रखें।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 22:15:52 +0530</pubDate>
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<media:keywords>National, Cancer, Awareness, Day, 2025:, क्यों, मनाया, जाता, है, राष्ट्रीय, कैंसर, जागरूकता, दिवस, जानिए, साल, 2025, की, थीम, और, इसका, महत्व</media:keywords>
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<title>हेल्दी मानकर रात में खाते हैं डार्क चॉकलेट? छीन सकती है आपकी सुकून भरी नींद, हो जाएं सावधान!</title>
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<description><![CDATA[ हम सभी भारतीय खाने के बड़े शौकीन होते हैं। अक्सर होता है कि खाना खाने के बाद मीठा जरुर खाया जाता है। कई बार तो लोगों को मीठे क्रेविंग होती है, कुछ न कुछ जरुर खाते हैं। अक्सर होता है कि रात में क्रेविंग के दौरान चॉकलेट जरुर खाते हैं। अब चाहे रात में सोने से पहले या आधी रात को कुछ मीठा खाने का मन करता है, तो लोग चॉकलेट खाते हैं। डार्क चॉकलेट साधारण चॉकलेट से हेल्दी मानी जाती है। इसलिए इसे रात में लोग खा लेते हैं। क्योंकि इसमें कोको ज्यादा होती है, शुगर कम होती है। वैसे चॉकलेट मूड को भी अच्छा बनाती है। रात के समय अगर आपको मीठे की क्रेविंग होती है और आप डार्क चॉकलेट खाते हैं, तो यह आपकी नींदें उड़ा सकती है। रात को सोने से पहले डार्क चॉकलेट खाने से स्लीप साइकिल पर जरुर असर पड़ता है। आइए आपको बताते हैं क्यों नींद में खलल उत्पन्न होती है।रात को डार्क चॉकलेट खाना नींद में खलल डाल सकता हैडार्क चॉकलेट में कैफीन और थियोब्रोमाइन होते हैं, जो दोनों ही एक्साइटमेंट बढ़ाने का काम करते हैं। अब जितनी डार्क चॉकलेट खाएंगे, उसमें कैफीन की मात्रा उतनी ही ज्याद हो जाएगी। यदि आप इसे सोने ठीक पहले खाते हैं, तो आपकी नींद आने में काफी समय लग सकता है या आपकी नींद टूट ही जाएगी। अगर आप डार्क चॉकलेट खा रहे हैं, तो एक-दो छोटे टुकड़े ही खाएं। वहीं, डार्क चॉकलेट में अलग-अलग वैरायटी देखने को मिलती है। 70 से अधिक कोकोआ वाली चॉकलेट में इसकी मात्रा अधिक होती है, जो रात में आपके दिमाग को रिलैक्स नहीं होने देती है। जिस वजह से आपकी नींदें उड़ जाती हैं या कई बार नींद खुल जाती है। इसलिए रात को डार्क चॉकलेट खाने से बचना चाहिए। एसिडिटी की समस्या हो सकती हैयदि आपको एसिडिटी या रिफ्लक्स की समस्या रहती है, तो डार्क चॉकलेट को खाने से आपको परहेज करना चाहिए। इसमें पाई जाने वाली थियोब्रोमाइन खाने की नली की मसल्स को ढीला कर देती है। जिससे खाना या एसिड ऊपर की तरफ जाने लगता है। इसे खाना खाने के तुरंत बाद या लेटने से पहले न खाएं।डार्क चॉकलेट कितनी मात्रा में खाएं और कब खाएं  - आप दिन में या शाम को 6 से 7 बजे का समय अच्छा है।  - रोजाना 20-30 ग्राम ही खाएं।डार्क चॉकलेट के फायदे- डार्क चॉकलेट खाने से तनाव कम करता है और माइड को रिलैक्सेशन मिलता है। कम मात्रा में डार्क चॉकलेट सोने से पहले मूड को बेहतर और शांत करती है, अगर ज्यादा खाली है, तो आपकी नींदें उड़ जाएगी।- डार्क चॉकलेट में  फ्लेवोनॉयड्स नाम के ऐंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में सूजन और सेल डैमेज को कम करते हैं।मूड को अच्छा करता हैअगर आप उदास और थके हुए महसूस करते हैं, तो डार्क चॉकलेट किसी वरदान से कम नहीं है। यह आपके मूड को अच्छा करती है। इसमें मौजूद सेरोटोनिन और एंडॉर्फिन जैसे फील गुड हार्मोन दिमाग को शांत करते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 22:15:50 +0530</pubDate>
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<title>Benefits of Sarpagandha: सर्पगंधा सेहत का वरदान या घातक जहर, जानें इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह क्यों है जरूरी</title>
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<description><![CDATA[ कोविड महामारी के बाद से न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर में आयुर्वेद के इलाज को काफी ज्यादा प्राथमिकता मिलने लगी है। घरेलू उपायों और जड़ी बूटियों से मिलने वाले फायदों के बारे में हर कोई जानने का प्रयास करता है। आयुर्वेद में बहुत सारी जड़ी बूटियां शामिल हैं, जिनमें सर्पगंधा भी है। यह आमतौर पर सांप को भगाने वाला पौधा माना जाता है, क्योंकि इसकी खूशबू के कारण इस पौधे से सांप दूर भागते हैं। आयुर्वेद में इसको एक औषधीय पौधा माना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सर्पगंधा से मिलने वाले फायदे, नुकसानों और इलाज के तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं।सर्पगंधा के फायदेसर्पगंधा के इस्तेमाल से हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में काफी मदद मिलती है। यह नर्वस सिस्टम पर प्रभाव डालकर बीपी को कम करने में सहायता करता है।इसे भी पढ़ें: Health Tips: नींद में हाई बीपी बन रहा &#039;साइलेंट किलर&#039;, हार्ट अटैक से बचने के लिए जानें उपायबता दें कि यह नेचुरल नींद लाने वाली औषधि के रूप में भी काम करती हैं। यह दिमाग की उत्तेजना को शांत करके नींद लाने में सहायता करती है। सर्पगंधा खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद होता है, जोकि अनिद्रा की समस्या से पीड़ित हैं।इसके साथ ही सर्पगंधा को कुछ हद तक ब्रेन टॉनिक के रूप में भी जाना जाता है। क्योंकि यह घबराहट, तनाव, बेचैनी और चिड़चिड़ेपन को शांत करने में सहायता करता है।इस औषधि को सिजोफ्रेनिया, साइकोसि और अन्य मानसिक समस्याओं में भी फायदेमंद माना जाता है। इसका इस्तेमाल हमेशा डॉक्टर की सलाह पर करना चाहिए।माना जाता है कि सर्पगंधा पुरुषों के लिए काफी फायदेमंद होता है। क्योंकि यह तनाव की वजह से होने वाली यौन दुर्बलता को कम करने के साथ ही अनिद्रा की वजह से होने वाली थकावट को भी दूर करता है।सर्पगंधा के नुकसानअगर किसी व्यक्ति का बीपी कम है, तो सर्पगंधा का सेवन करने से मरीज का स्थिति अधिक खराब हो सकती है। इसका सेवन करने से बेहोशी, चक्कर आने जैसी स्थिति आ सकती है।माना जाता है कि यदि लंबे समय तक सर्पगंधा को एक्सट्रैक्ट फॉर्म में लिया जाता है, तो यह निगेटिव सोच को बढ़ावा दे सकता है। खासकर मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित लोगों को सावधानी से इसका इस्तेमाल करना चाहिए।लंबे समय तक और अधिक मात्रा में सर्पगंधा के इस्तेमाल से फेफड़ों पर निगेटिव असर पड़ सकता है। जोकि फेफड़ों की काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।अधिक मात्रा में सर्पगंधा का सेवन करना लिपिड लॉस का कारण बन सकता है, जोकि पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या को बढ़ा सकता है।किसे नहीं करना चाहिए सर्पगंधा का इस्तेमालजिन लोगों का बीपी कम होता है, उनको सर्पगंधा का उपयोग नहीं करना चाहिए।रात में अगर सांस लेने में समस्या होती है, तो इन लोगों को भी इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।दिल से जुड़ी बीमारी होने पर भी सर्पगंधा का सेवन नहीं करना चाहिए।प्रेग्नेंट और ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाओं को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए।बच्चों और बुजुर्गों को बिना डॉक्टर के सलाह के सर्पगंधा देने से बचना चाहिए।कैसे करें सर्पगंधा का सेवनबता दें कि आप कई तरीके से सर्पगंधा का सेवन कर सकते हैं। लेकिन डॉक्टर की सलाह के बिना इसके इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आप चूर्ण या फिर टैबलेट के रूप में इसको मरीज को खिला सकते हैं। सर्पगंधा चूर्ण को शहद या गुनगुने पानी के साथ लेना अधिक फायदेमंद होता है। ध्यान रखें कि एक दिन में सिर्फ 500 mg से 1 ग्राम या फिर दिन में एक या दो बार इसको दे सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Nov 2025 10:13:20 +0530</pubDate>
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<title>दिवाली पर क्यों है जिमीकंद खाने की प्रथा? सिर्फ शुभ ही नहीं, सेहत का खजाना भी है ये सब्जी</title>
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<description><![CDATA[ दिवाली के दौरान हर एक के घर में कई सारे पकवान बनते हैं। इस दिन किचन में बनने वाले भोजन ऐसी कई चीजें हैं, जो ट्रेडिशन के साथ ही शुभता का प्रतीक माने जाते हैं। ऐसी ही एक सब्जी है , जो दिवाली पर जरुर बनाई जाती है। जिमीकंद हर एक घर में खाई जाती है, इसको सूरन के नाम से भी जाना जाता है। ज्यादातर घरो में इसकी सब्जी बनाई जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। इसके अलावा, यह सब्जी सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद है। आइए आपको बताते हैं जिमीकंद खाने के फायदे।जिमीकंद में पोषक तत्वों का खजाना हैजिमीकंद में कई सारे न्यूट्रिशन पाएं जाते हैं। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन बी 1, बी 6, फोलिक एसिड, बीटा-कौरोटीन, विटामिन सी, पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और कॉपर जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। जिमीकंद सब्जी खाने के फायदेवजन घटाने में मदद करताइस सब्जी में सबसे ज्यादा फाइबर पाया जाता है और इसमें कैलोरी भी कम होती है। जिमीकंद खाने से पेट भरा रहता है। व्यक्ति को बार-बार भूख नहीं लगती  और यह सब्जी वजन करने में मदद करती है।हार्ट को हेल्दी रखताजिमीकंद में पोटैशियम अधिक मात्रा में पाया जाता है और यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। इसके अलावा, दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने में सहायक है।इम्यूनिटी बढ़ाता हैदिवाली पर जिमीकंद की सब्जी खाने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। जिमीकंद में विटामिन-सी मौजूद होता है, जो प्रतिरोधक क्षमता स्ट्रांग करता है और इसके सेवन से इंफेक्शन खतरा कम होता है।पाचन तंत्र मजबूत होता हैजिमीकंद में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है और यह पाचन क्रिया को सुधारने में मदद भी करता है। यह मल को मुलायम करता है, जिससे कब्ज की समस्या में राहत मिलती है। इतना ही नहीं, जिमीकंद बवासीर मरीजों के लिए भी लाभदायक होता है। कब्ज को बवासीर का मुख्य कारण माना जाता है। इसके सेवन से पाचन संबंधी सभी समस्या दूर हो जाएगी। स्किन और हेयर्स के लिए फायदेमंदजिमीकंद में विटामिन ए और ई अधिक मात्रा में पाई जाती है। यह त्वचा और बालों के लिए भी काफी फायदेमंद है। विटामिन बी, विशेष रुप से बी3 (नियासिन) और बी7 (बायोटिन), त्वचा की चमक और बालों का स्ट्रांग करता है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Nov 2025 10:13:19 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: स्मोकिंग ने छीन ली है फेफड़ों की जान, ये आसान योग देंगे उन्हें नई जिंदगी, करें ट्राई</title>
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<description><![CDATA[ सिगरेट-बीड़ी पीने से फेफड़ों में जहरीला धुआं भर जाता है, जिस कारण सांस लेने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में बहुत से लोग हैं, जिनको घुट-घुटकर सांस आती है। वहीं कम सांस आने का मतलब है कि आपके फेफड़े बीमार हैं। सांस कम आने से कई नुकसान होते हैं, जैसे - दिल पर दबाव बढ़ना, जल्दी थकान महसूस होना, दिल का जल्दी थक जाना, फेफड़ों पर बोझ, मानसिक तनाव, दिमाग पर असर और गंभीर बीमारी आदि के संकेत शामिल हैं।आपको बता दें कि फेफड़े करीब 6 लीटर हवा को पकड़ सकते हैं, जिसको टोटल लंग कैपेसिटी कहा जाता है। वहीं इसका मतलब यह है कि जब हम पूरी सांस अंदर लेते हैं, तो फेफड़ों में कुल इतनी हवा समा सकती है, जितनी की एक सामान्य वयस्क एक मिनट में 12 से 15 सांसे लेता है। लेकिन स्मोकिंग करने और एक्सरसाइज न करने और अन्य कई कारणों से फेफड़ों की सांस लेने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। जिस कारण डायाफ्राम कमजोर हो जाती है और फेफड़ों की लोच घट जाती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको ऐसे आसन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको करने से आप फेफड़ों के सांस लेने की क्षमता को बढ़ा सकते हैं।इसे भी पढ़ें: दिवाली पर क्यों है जिमीकंद खाने की प्रथा? सिर्फ शुभ ही नहीं, सेहत का खजाना भी है ये सब्जीकुंभक प्राणायामइसको करने से फेफड़े मजबूत होते हैं। इस आसन को करने के लिए सांस को थोड़ी देर तक रोककर रखा जाता है। सबसे पहले ध्यान मुद्रा में बैठें और रीढ़ को सीधा रखें। फिर 4 सेकेंड तक सांस अंदर लें और फिर 8 सेकेंड तक सांस रोककर रखें। इसके बाद 4 सेकेंड में धीरे-धीरे छोड़ दें। इस आसन को रोजाना करने से फेफड़ों की क्षमता और सांस लेने की शक्ति बढ़ती है।इंटरकोस्टल ब्रीदिंगइंटरकोस्टल ब्रीदिंग का अभ्यास करने से पसलियां और उनसे जुड़ी मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इसको करने के लिए आराम से बैठ जाएं और हाथों से पसलियों को पकड़ें। फिर गहरी सांस अंदर लें और पसलियों को फैसने दें। वहीं सांस छोड़ते समय वापस सामान्य स्थिति में आएं। इससे फेफड़ों में ज्यादा हवा भरती है और शरीर को बेहतर तरीके से ऑक्सीजन मिलती है।भस्त्रिका प्राणायामइस आसन को बेलोज ब्रीदिंग भी कहा जाता है। इस आसन में तेजी से सांस लेना और छोड़ना शामिल है। इस आसन को करने के लिए पहले ध्यान मुद्रा में बैठें और फिर 1-2 बार लंबी सांस लें और छोड़ें। फिर सांस रोककर पेट को तेजी से अंदर-बाहर करें और इसको कम से कम 5 से 15 बार करना चाहिए। इस आसन को करने से फेफड़े साफ होते हैं, शरीर ऊर्जावान होता है और सांस लेने की क्षमता बढ़ती है।ताड़ासनतड़ासन पूरे शरीर को खींचता है और फेफड़ों को खोलता है। इस आसन को करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं और पैरों में 1 फुट की दूरी रखें। अब सांस अंदर लेते हुए हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और पंजों के बल खड़े हो जाएं। कुछ देर इस स्थिति में रहते हुए सांस छोड़ते हुए हाथ नीचे आएं। इससे पसलियां और डायाफ्राम मजबूत होती हैं।कोणासन-2इस आसन को करने से फेफड़ों के छोटे-छोटे हिस्से सक्रिय होते हैं। इस आसन को करने के लिए पैरों को 2.5 से 3 फीट की दूरी पर रखकर खड़े हो। फिर सांस अंदर लेते हुए हाथ को सिर के पास ले जाएं और धीरे-धीरे एक तरफ झुकें। थोड़ी देर सांस रोकें और फिर सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में वापस आएं। फिर दूसरे ओर से भी यह प्रक्रिया दोहराएं। इससे शरीर में ज्यादा ऑक्सीजन पहुंचता है और फेफड़े मजबूत होते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Nov 2025 10:13:18 +0530</pubDate>
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<title>क्या वजाइनल डिस्चार्ज से सच में कमजोर होती हैं हड्डियां? एक्सपर्ट ने बताई चौंकाने वाली सच्चाई!</title>
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<description><![CDATA[ महिलाओं में ज्यादातर वजाइनल डिस्चार्ज की समस्या देखने को मिलती है। इस बारे में अधकित्तर महिलाओं कोई जानकारी भी नहीं होती है। वजाइनल डिस्चार्ज एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है जिसमें योनि से तरल या स्राव निकलता है। यह स्राव मृत कोशिकाओं और बैक्टीरिया को बाहर निकालकर योनि को साफ और स्वस्थ रखने में मदद करता है। महिलाएं कई बार इंटिमेट हेल्थ और वजाइनल डिस्चार्ज या इंफेक्शन से जुड़े कई मिथ्स पर यकीन कर लेती है। वजाइनल डिस्चार्ज सभी महिलाओं को होता है लेकिन यह कितनी मात्रा में हो रहा है, किन दिनों में हो रहा है, क्या इसमें किसी तरह का दर्द या जलन हो रही है, क्या डिस्चार्ज से बदबू आ रही है या क्या इसके साथ और कोई समस्या भी हो रही है, इन बातों पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। इस मामले में देखा जाता है कि महिलाओं को लगता है कि वजाइनल डिस्चार्ज से हड्डियां कमजोर होने लगती है या फिर हड्डियों के गलने से सफेद पानी की दिक्कत होती है, क्या यह सच है, तो चलिए आपको हेल्थ एक्सपर्ट के बताई बातों के बताते हैं।क्या वजाइनल डिस्चार्ज होने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं?- हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक वजाइनल डिस्चार्ज से हड्डिया कमजोर होना या हड्डियों के गलने के कारण, वजाइनल डिस्चार्ज होता है, यह एक प्रकार का मिथक है। वजाइनल डिस्चार्ज एक सफेद या हल्का पारदर्शी लिक्विड होता है, जो वजाइनसा से निकलता है।- यह वजाइन का क्लीन करने और इंफेक्शन से बचाने का एक तरीका है, यह पूरी तरह से नॉर्मल है। वजाइनल डिस्चार्ज से योनि में ड्राईनेस नहीं होती है।- अगर आपको काफी समय से डिस्चार्ज हो रहा है, तो हो सकता है कि आपको कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। इस बात पर ध्यान देना काफी जरुरी है।- आपको बता दें कि, वजाइनल डिस्चार्ज सीधे तौर पर हड्डियों के कमजोर होने का कोई कनेक्शन नहीं, यह आपकी शरीर की कमजोरी हो सकती है।- कई बार हार्मोनल इंबैलेंस, वजाइनल इंफेक्शन, इंटिमेट हाइजीन का ख्याल नहीं रखना और सेक्शुअल रिलेशन के दौरान साफ-सफाई का ख्याल न रखना समेत कई कारणों से वजाइना से अधिक डिस्चार्ज हो सकता है।- अगर डिस्चार्ज का रंग हरा, पीला, बदबूदार हो या उसमें खुजली, जलन या दर्द हो, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Nov 2025 10:13:18 +0530</pubDate>
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<title>How To Clean Lungs: अपनी सांसों को दें मजबूती, इन आदतों से फेफड़ों की बीमारियों को रखें दूर</title>
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<description><![CDATA[ जिंदा रहने के लिए सेल्स को ऑक्सीजन देने का काम फेफड़ों द्वारा किया जाता है। लेकिन लोगों का इस पर ध्यान तभी जाता है, जब फेफड़ों में दिक्कत आने लगती है। सांस लेने में समस्या या खांसी का न बंद होना फेफड़ों संबंधित समस्या में शामिल हैं। हालांकि आप अपनी लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करके और कुछ नई आदतों को शामिल करके रेस्पिरेटरी हेल्थ की रक्षा कर सकते हैं। इसको बेहतर बनाने से फेफड़ों की बीमारी का खतरा कई गुना कम होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसी हेल्दी आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको अपनाकर आप लंग्स लाइफ को बेहतर बना सकते हैं।फिजिकल एक्टिविटीहेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो फिजिकल एक्टिविटी से लंग कैपेसिटी और फंक्शन में सुधार होता है। साइकिल चलाना, तेज चलना और तैराकी जैसे एरोबिक एक्सरसाइज करने से हार्ट रेट बढ़ता है और फेफड़ों को ऑक्सीजन का अच्छे से उपयोग करने में सहायता मिलती है। फिजिकल एक्टिविटी का सामान्य लेवल रखने वाले लोगों में रेस्पिरेटरी प्रोसेस बेहतर होता है और सीओपीडी बढ़ने की संभावना कम होती है। आप रोजाना 30 मिनट वॉक करके भी यह फायदा पा सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Health Tips: स्मोकिंग ने छीन ली है फेफड़ों की जान, ये आसान योग देंगे उन्हें नई जिंदगी, करें ट्राईब्रीदिंग एक्सरसाइजस्ट्रक्चर्ड ब्रीदिंग एक्सरसाइज का अभ्यास करने से फेफड़े के फंक्शन शारीरिक रूप से बेहतर होते हैं। डायाफ्रामिक ब्रीदिंग यानी पेट से सांस लेना और होंठ सिकोड़कर श्वास लेने जैसे तरीके वायुमार्ग को लंबे समय तक खुला रखने में सहायता कर सकते हैं। यह अभ्यास सांस फूलने की दिक्कत को भी कम कर सकती हैं। खासकर अस्थमा या सीओपीडी से पीड़ित व्यक्तियों में इस एक्सरसाइज का अच्छा असर देखने को मिलता है।हेल्दी वजनपेट के आसपास अधिक चर्बी होने से डायाफ्राम पर दबाव पड़ता है और लंग वॉल्यूम कम हो सकता है। क्लीनिकल इंवेस्टिगेशन में स्लीप एपनिया के खतरे, लंग वॉल्यूम में कमी और अस्थमा कंट्रोल में कमी देखी गई है। दूसरी तरफ हेल्दी तरीके से वेट लॉस करना लंग मैकेनिज्म और ऑक्सीजनेशन के लिए फायदेमंद होता है। सब्जियों, फलों और साबुत अनाज से बनी हेल्दी डाइट लेने से एंटीऑक्सीडेंट मिलता है, जोकि लंग टिश्यू में ऑक्सीडेटिव तनाव से लड़ते हैं।एयर क्वालिटीबता दें कि आप जितनी अच्छी एयर क्वालिटी में सांस लेंगे, आपके फेफड़े उतने ही ज्यादा मजबूत होंगे। घरेलू धुएं या व्यावसायिक धूल और प्रदूषण आदि के संपर्क में लंबे समय तक रहने से लंग ग्रोथ धीमी हो जाती है और इससे रेस्पिरेटरी डिजीज का खतरा बढ़ता है।पानी से भरे फूड्सहाइड्रेशन से लंग और एयरवे में बलगम को पतला करने में सहायता मिलती है। इससे फेफड़ों द्वारा बलगम को बाहर निकालने में आसानी होती है। साथ ही इनमें पनप रहे बैक्टीरिया या वायरस बाहर निकल जाते हैं। क्लिनिकल नजरिए से समझें, तो हाइड्रेशन से फेफड़ों के नेचुरल क्लीयरिंग सिस्टम को सपोर्ट मिलता है। इसके लिए खीरा-ककड़ी, पानी और हर्बल टी जैसे पानी से भरे फूड्स का सेवन करना चाहिए।छोड़ें धूम्रपान और स्मोकिंगफेफड़ों के लिए धूम्रपान छोड़ने से ज्यादा फायदेमंद कुछ नहीं है। क्योंकि सिगरेट के धुएं में हजारों केमिकल होते हैं, जोकि फेफड़ों के टिश्यू को नुकसान पहुंचाते हैं। एयरवे को सिकोड़ते हैं और फेफड़ों के सीओपीडी, कैंसर और हृदय रोग के खतरे को तेजी से बढ़ाते हैं। इसके साथ ही सेकेंडहैंड स्मोकिंग से भी बचना चाहिए। क्योंकि इससे वायुमार्ग में सूजन आ सकती है और उम्रबढ़ने के साथ ही फेफड़ों का फंक्शन कम हो जाता है।नींदखराब नींद और लगातार तनाव होने के कारण इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है। जिससे फेफड़े संक्रमण के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं। नींद की कमी को सांस की नली की सूजन से जोड़ा गया है। योग, ध्यान और नेचर वॉक जैसे अभ्यास से स्ट्रेस हार्मोन को कम किया जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Nov 2025 10:13:17 +0530</pubDate>
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<title>दिल्ली में सांसों पर संकट! प्रदूषण से करें खुद का बचाव, जानिए फेफड़ों को कैसे रखें सुरक्षित</title>
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<description><![CDATA[ दिवाली के बाद से दिल्ली का AQI एक बार फिर &quot;बहुत खराब&quot; श्रेणी में पहुंच गया है, जिससे शहर में सांस संबंधी बीमारियों में तेजी से बढ़ती जा रही है। अभी तक एयर क्वालिटी इनडेक्स (PM2.5 और PM10) पहुंचा है। वायु की गुणवत्ता खराब होने से फेफड़ों पर असर पड़ता है और अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जिक राइनाइटिस और गले के संक्रमण को बढ़ा देता है। जिन लोगों को फेफड़ों की बीमारी उनके लिए यह प्रदूषण नुकसान पहुंचा सकता है। आइए आपको बताते हैं कैसे अपनी सेहत का ध्यान रखें। डॉक्टर को कब दिखाएं- कुछ दिनों से अधिक समय तक लगातार खांसी या घरघराहट हो।- सीने में जकड़न, सांस लेने में तकलीफ, या आराम करते समय भी सांस लेने में कठिनाई हो।- गले में जलन या खराश, नाक बहना, या आंखों में जलन जो ठीक न हो। - अस्थमा या सीओपीडी जैसी पहले से ही फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित मरीजों को जरुरत पड़ने पर डॉक्टर को जरुर दिखाएं।खुद को सुरक्षित कैसे करें- जब बाहर प्रदूषण ज्यादा हो तो (सुबह या देर शाम) के दौरान घर के अंदर ही रहें।- बाहर निकलते समय मास्क पहनें।- घर में एयर प्यूरीफायर का प्रयोग करें और खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें।- साइकिल चलाने या जॉगिंग जैसे बाहरी एक्सरसाइज से बचें; इसके बजाय इनडोर वर्कआउट चुनें।- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, पानी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।- फेफड़ों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए हल्दी और तुलसी जैसे एंटीऑक्सीडेंट रिच फूड्स का सेवन करें और अपने आहार में खट्टे फल शामिल करें।सबसे अधिक खतरा किसे हुआ- बच्चे और बुज़ुर्ग: कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण उनमें संक्रमण का फैलन का खतरा ज्यादा होता है।- अस्थमा और सीओपीडी के मरीज: प्रदूषित हवा लक्षणों को बढ़ा सकती है या उन्हें बदतर बना सकती है।- गर्भवती महिलाएं: प्रदूषित हवा के लगातार संपर्क में रहने से मानसिक स्वास्थ्य और भ्रूण के विकास पर असर पड़ सकता है।- हृदय रोग या डायबिटीज से पीड़ित लोग: खराब वायु गुणवत्ता हृदय और मेटाबॉलिज्म संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है।घर पर करें ये घरेलू उपाय- स्टीम लें: स्टीम लेने से नाक का रास्ता साफ होने लगता है और गले की जलन कम करता है।- गर्म नमक के पानी से गरारे करना: गले की खराश को कम करता है और कीटाणुओं को खत्म करने में मदद करता है।- अदरक या तुलसी की चाय के साथ शहद: बंद नाक से राहत और खांसी से राहत दिलाने के लिए एक प्राकृतिक कफ निचोड़ने के रूप में कार्य करता है।- अपने घर को साफ रखें: घर के अंदर प्रदूषण को कम करने के लिए नियमित रूप से एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें और धूल साफ करें। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Nov 2025 10:13:17 +0530</pubDate>
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<title>क्या थायराइड से सुन्न होते हैं हाथ&#45;पैर? जानें गर्भावस्था में क्यों बढ़ जाता है यह खतरा</title>
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<description><![CDATA[ थायराइड बीमारी आमतौर पर एक हार्मोनल बीमारी है, जो थायराइड ग्रंथि की खराबी के कारण होती है। यह ग्रंथि गर्दन के निचले हिस्से में स्थित होती है और शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने वाले हार्मोन का उत्पादन करती है। अक्सर मरीजों में अलग-अलग लक्षण महसूस होते हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि थायराइड के मरीज को अक्सर हाथ-पैरों में सुन्न क्यों हो जाते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान थायराइड से पीड़ित महिलाओं में ये लक्षण देखे जाते हैं। लेकिन क्यों, आइए आपको बताते हैं।क्या सच में थायराइड के कारण हाथ-पैर सुन्न हो जाते हैंथायराइड की बीमारी हाथों-पैरों में सुन्नता पैदा करती है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, हाइपोथायराडिज्म में, जब थायरॉइड कम सक्रिय होते हैं, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। जिस कारण से तंत्रिकाओं और रक्त संचार पर असर पड़ता है। इसलिए हाथों-पैरों में सुन्नता, झुनझुनी या सुई चुभने जैसा एहसास होता है। कई बार तो थायरॉइड के निम्न स्तर के कारण द्रव प्रतिरोधक और सूजन तंत्रिकाओं पर दबाव डाल सकती हैं, जिससे सुन्नता और बढ़ जाती है।क्या प्रेग्नेंसी में भी थायराइड के कारण हाथ-पैर सुन्न होते हैंहेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, प्रेग्नेंसी में थायराइज के कारण अक्सर महिलाओं को हाथ-पैर में सुन्नता की समस्या महसूस होती है। यह संबंध गर्भावस्था के दौरान होता हैं क्योंकि हार्मोनल बदलाव और वॉटर रिटेंशन के कारण बनते हैं और तंत्रिका प्रणाली को प्रभावित करते हैं।थायराइड में हाथ-पैर सुन्न के अन्य कारणजब न्यूरोपैथी के कारण भी हाथ-पैर सुन्न होने लगते हैं। जब हमारे शरीर में थायराइड ग्रंथी सही से इस हार्मोन को नहीं प्रड्यूस कर पाती है, तब वॉटर रिटेंशन होता है, जिससे नसों पर दबाव पड़ता है। जिस वजह से  लोगों को हाथ-पैर सुन्न होने लगते हैं।  वहीं, हाइपोथायरायडिज्म से लोगों को कार्पल टनल सिंड्रोम हो सकता है, जो कलाई की नस संकुचित करता है, जिस कारण से हाथ में सुन्नता और दर्द होने लगता है। जब यह पैरों में होता है तो ये टार्सल टनल सिंड्रोम की वजह से होता है, जिससे टखने और पैर में जलन और सुन्न होने लगते है। इसके अलावा, थायराइड के मरीजों में मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होने लगता है। फिर हाथ-पैर ठंडे और सुन्न होने लगते है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Nov 2025 10:13:16 +0530</pubDate>
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<title>Guava leaf Mouthwash: मुंह की बदबू से लेकर मसूड़ों की सूजन तक, अमरूद के पत्तों में छिपा है हर समस्या का राज</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में अधिकतर लोगों को छाले, मसूड़ों में सूजन, दांतों में दर्द और मसूड़ों से खून आने जैसी ओरल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिसकी वजह से कई लोग परेशान रहते हैं। हालांकि इस समस्या से राहत पाने के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक और औषधीय गुणों से भरपूर अमरूद के पत्ते लाभकारी माने जाते हैं। अमरूद के पत्तों से बने माउथ वॉश का इस्तेमाल करने से मुंह की कई समस्याओं से राहत मिल सकती है।बता दें कि अमरूद के पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-ऑक्सीडेंट्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-माइक्रोबियल गुए पाए जाते हैं। जोकि मुंह के स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि ओरल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं से राहत के लिए अमरूद के पत्तों से माउथ वॉश कैसे बनाएं और इससे क्या फायदे मिलते हैं।इसे भी पढ़ें: How To Clean Lungs: अपनी सांसों को दें मजबूती, इन आदतों से फेफड़ों की बीमारियों को रखें दूरअमरूद के पत्तों का माउथवॉशइसके लिए एक गिलास पानी में 4-5 अमरूद के पत्ते, 1/4 छोटी चम्मच नमक और 2-3 लौंग डालकर इसको तब तक उबालें, जब तक पानी आधा न रह जाए। फिर इसमें 1 चम्मच नारियल का तेल मिला दें। अब इस माउथ वॉश से कुल्ला करें।माउथ वॉश के फायदेएक्सपर्ट के मुताबिक अमरूद के पत्तों में कई तरह के औधषीय गुण पाए जाते हैं। इसके पत्तों का माउथवॉश का इस्तेमाल करने से मुंह का स्वास्थ्य दुरुस्त होने के साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं।मुंह की बदबू से राहतअमरूद के पत्तों और लौंग में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। इस माउथ वॉश का इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया खत्म होती है और मुंह की बदबू से भी राहत मिलती है। इसका इस्तेमाल करने से फ्रेश फील होता है।छालों से दे राहतबता दें कि अमरूद के पत्तों में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। ऐसे में इस माउथ वॉश का इस्तेमाल करने से मुंह के संक्रमण से बचाव होता है और छालों की समस्या से भी राहत मिलती है। वहीं इस माउथ वॉश के इस्तेमाल से मुंह के पीएच को बैलेंस रखने में सहायता मिलती है।कैविटीज से बचावइस नेचुरल माउथ वॉश के इस्तेमाल से दांतों के दर्द को कम करने, कैविटीज से बचाव करने, दांतों के पीलेपन को कम करने और इनको हेल्दी बनाए रखने में सहायता मिलती है।मसूड़ों की मजबूतीअक्सर लोगों को मसूड़ों में ब्लीडिंग और सूजन होने की समस्या से परेशान रहते हैं। ऐसे में इस नेचुरल माउथ वॉश का इस्तेमाल करने से मसूड़ों की सूजन कम होती है। साथ मसूड़ों को टाइट कर मजबूती देने, ब्लीडिंग से बचाव करने और इंफेक्शन से बचाव करने में सहायता मिलती है।दांतों होंगे हेल्दीअमरूद के पत्ते, लौंग और नारियल तेल से बना माउथ वॉश से दांतों को मजबूती मिलती है। इससे दर्द और सूजन भी कम होती है। साथ ही इस माउथ वॉश के इस्तेमाल से दांतों को नेचुरली साफ करने में मदद मिलती है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Nov 2025 10:13:15 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: पेट दर्द, खुजली और अपच... कहीं पित्त की थैली में पथरी तो नहीं, तुरंत जानें ये लक्षण</title>
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<description><![CDATA[ आजकल लाइफस्‍टाइल में गड़बड़ी जैसे बढ़ता वजन, अनहेल्दी डाइट और फिजिकल एक्टिविटी में कमी से शरीर में अन्य बीमारियों के अलावा पित्ताशय में पथरी होने का खतरा भी बढ़ता है। पित्ताशय को अंग्रेजी भाषा में गॉलब्लैडर कहा जाता है। यह शरीर का एक छोटा सा अंग है, जोकि लिवर के नीचे मौजूद होता है। शरीर में पित्त का काम जरूरी होता है, यह लिवर द्वारा बने पित्त को स्टोर करता है और छोटी आंत में छोड़ता है। जिससे कि वसा का पाचन अच्छे तरीके से हो सके।दूसरे और आसान भाषा में कहा जाए, तो पित्त के बिना पाचन क्रिया का काम नहीं हो सकता है। हालांकि कुछ कारणों से पित्ताशय में पथरी जमा होने लगती है। वहीं अधिक दिनों तक पित्त की थैली में पथरी होने से शरीर में कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में इसके लक्षणों के बारे में जानना बेहद जरूरी होता है। इसलिए आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इसके लक्षणों और कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Piles Reason: टॉयलेट में फोन की लत बढ़ा रही बवासीर का खतरा, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतीजानिए क्या कहते हैं एक्सपर्टएक्सपर्ट की मानें, तो पित्त की थैली में पथरी होना एक आम समस्या है, जोकि किसी भी उम्र में हो सकती है। जब पित्त की थैली में पथरी होती है, तब पित्त फ्लो रुक जाता है, जिससे वसा के पाचन में समस्या होती है। पित्त की थैली में पथरी होने पर पेट के दाहिने हिस्से में अचानक से तेज दर्द हो सकता है और यह दर्द न सिर्फ बार-बार बल्कि व्यक्ति को कई घंटों के लिए बेहाल कर सकता है। वहीं गंभीर होकर यह पीठ के ऊपरी हिस्से तक फैल सकता है। इसके लक्षणों को नजरअंदाज करने की गलती नहीं करना चाहिए। क्योंकि अधिक समय तक पित्त की थैली में पथरी होने पर शरीर में कई तरह की परेशानियां होने लगती हैं। वहीं सही समय पर सही इलाज से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।क्यों होती है पित्त की थैली में पथरीबता दें कि पित्त में पथरी तब होती है, जब कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है। यह एक जगह जमा होकर सख्त हो जाता है और य़ह छोटे-छोटे पत्थरों का रूप ले लेता है। वहीं शुरूआत में इस तरफ अगर ध्यान नहीं दिया जाए, तो पथरी का साइज बढ़ने लगता है। बाद में इस सर्जरी को निकलवाने के लिए सर्जरी करानी पड़ सकती है।पित्त की थैली में पथरी के कारणपर्याप्त पित्त लवण न बननाफैट और कोलेस्‍ट्रॉल से भरपूर अनहेल्‍दी फूड्स खानाकैल्शियम और बिलीरूबिन की ज्यादा मात्रापित्त में कोलेस्ट्रॉल की ज्‍यादा मात्राडायबिटीजपित्ताशय की थैली पूरी तरह से खाली न होनाज्‍यादा वजन या मोटापालक्षणस्किन में खुजलीपित्त की थैली में पथरी की वजह स्किन में खुजली होती है। जिस कारण आपको असुविधा महसूस हो सकती है। साथ ही नियमित रूप से अधिक पसीना आना भी पथरी का लक्षण है।दाएं कंधे में दर्दपित्त की थैली में पथरी की वजह से दाएं कंधे में दर्द हो सकती है, जोकि कभी पीठ और पेट तक भी जा सकता है।पेट फूलना और डकारकुछ भी तीखा और तला हुआ खाने से खट्टी डकार आती है। लेकिन रोजाना खाना खाने के बाद खट्टी डकारे आ रही हैं, तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। पेट का अक्सर फूलना और लंबे समय तक फूले रहना भी पित्ताशय की पथरी का लक्षण हो सकता है।पेट में भारीपनतला हुआ खाने के बाद पेट में भारीपन महसूस होता है, जो गॉलब्‍लैडर से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है। वहीं अगर खाना खाने के बाद खाना पच नहीं रहा है और उल्टी हो रही है, तो यह भी पथरी का लक्षण हो सकता है।कड़वा स्वादपथरी की वजह से मुंह में कड़वा स्वाद आ सकता है, जिस कारण खाने का स्वाद भी बदल जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Nov 2025 10:13:14 +0530</pubDate>
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<title>Piles Reason: टॉयलेट में फोन की लत बढ़ा रही बवासीर का खतरा, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती</title>
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<description><![CDATA[ मोबाइल हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया है। लोग एक भी दिन बिना फोन के नहीं गुजार पाते हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि आज के समय में आप अपनी जरूरत के सभी काम फोन से करते हैं, जैसे शॉपिंग करना, न्यूज पढ़ना, लोगों से कनेक्ट रहना, पेमेंट करना और अपनी फेवरेट मूवी और शो को बिंज वॉच करना आदि। आज के समय में लोग फोन से इस तरह से जुड़ चुके हैं कि वह टॉयलेट सीट पर बैठने के दौरान भी फोन को खुद से दूर नहीं करते हैं। हालांकि यह आदत हाइजीन के नजरिए से बिल्कुल भी सही नहीं है। टॉयलेट इस्तेमाल करने के दौरान फोन चलाना न सिर्फ आपके हाइजीन को खराब करता है, बल्कि यह आपके स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसा करने से बवासीर होने के चांसेज कई गुना बढ़ जाते हैं।टॉयलेट में फोन का इस्तेमालअगर आप भी उन लोगों में शुमार हैं, जो टॉयलेट में फोन लेकर जाते हैं, तो इससे न सिर्फ आपके फोन में बैक्टीरिया चिपक जाते हैं, बल्कि आपको पाइल्स होने का खतरा भी अधिक बढ़ जाता है। हालिया स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि टॉयलेट में फोन स्क्रॉल करने की आदत पाइल्स के विकास के खतरे को 46 फीसदी तक बढ़ा सकती है।इसे भी पढ़ें: Guava leaf Mouthwash: मुंह की बदबू से लेकर मसूड़ों की सूजन तक, अमरूद के पत्तों में छिपा है हर समस्या का राजबवासीरबवासीर को पाइल्स भी कहते हैं, मलाशय या गुदा के अंदर और आसपास सूजी हुई और बढ़ी हुई नसें होती हैं। यह असुविधाजनक और दर्दनाक हो सकती हैं और ब्लीडिंग का कारण बन सकती हैं। बता दें कि सभी लोग बवासीर के साथ पैदा होते हैं, लेकिन आमतौर पर यह हमें परेशान नहीं करती हैं, लेकिन जब यह नसें सूज जाती हैं और बढ़ जाती है, तो यह परेशान करने वाले लक्षण पैदा करती हैं।लक्षण और वजहअगर आप लंबे समय तक टॉयलेट में बैठे रहते हैं, मल त्यागते समय अधिक जोर लगाते हैं, नियमित रूप से भारी सामान उठाते हैं, लंबे समय तक दस्त या कब्ज से परेशान रहते हैं और कम फाइबर वाली डाइट लेते हैं, तो बवासीर होने के चांसेज अधिक बढ़ जाते हैं। पाइल्स दो तरह के होते हैं, आंतरिक बवासीर और बाहरी बवासीर।आंतरिक बवासीरमल में, टॉयलेट पेपर पर या शौचालय में चमकीला लाल खून दिखाई दे सकता है।बाहरी बवासीरगुदा के पास एक या अधिक कठोर और कोमल गांठें, गुदा के आसपास खुजली या जलन, गुदा में दर्द खासकर जब आप बैठते हैं और पोंछने पर खून निकलता है।फोन चलाने से बवासीरबता दें कि लंबे समय तक टॉयलेट में बैठे रहने को भी बवासीर से भी जोड़ा जाता है। क्योंकि जब आप टॉयलेट में फोन लेकर जाते हैं, तो आप वहां पर अधिक समय बिताते हैं, जिससे बवासीर का खतरा अधिक बढ़ जाता है। माना जाता है कि टॉयलेट सीट पर लंबे समय तक बैठने से पेल्विक फ्लोर के अंदर दबाव बढ़ता है और गुदा के वैस्कुलर कुशन में ब्लड जमा हो जाता है। जिससे पाइल्स विकसित होने की संभावना ज्यादा हो जाती है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Nov 2025 10:13:14 +0530</pubDate>
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<title>हील्स पहनकर पैरों में होता है भयंकर दर्द? इन स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज से पाएं तुरंत आराम!</title>
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<description><![CDATA[ लड़कियां स्टाइलिंग और फैशन के मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं करती। स्टाइलिश बनाने के लिए कभी-कभी लड़किया दर्द सहने को भी तैयार रहती हैं। ऑफिस, पार्टी और शादी में आउटफिट लुक को परफेक्ट बनाने के लिए महिलाएं हील्स जरुर पहनती है। हील्स पहनना सभी को पसंद है और यह लुक भी गजब का देता है। लंबे समय तक हील्स पहनने से पैरों में दर्द या फिर टखनों में जकड़न की शिकायत होने लगती है। कई बार तो दर्द इतना भंयकर होता है कि चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है। आइए आपको बताते हैं कुछ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज के बारे में, जो हील्स पहनने में काफी फायदेमंद रहेगी। इन स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने से हील्स पहनने के बाद दर्द नहीं होगाकफ स्ट्रेच आमतौर पर हील्स पहनने पर पिंडलियों में टाइटनेस आ जाती है। कफ स्ट्रेच करने से उस मसल्स की टाइटनेस को कम करने में मदद करता है। यह ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है। आप चाहे तो वॉल के पास खड़े होकर काफ स्ट्रेच कर सकते हैं। इसे करने के लिए दीवार के सामने सीधे खड़े हो जाएं। अब एक पैर आगे और दूसरा पीछे रखें। पीछे वाला पैर एड़ी के साथ जमीन पर टिका रहे। दोनों हाथ दीवार पर रखकर थोड़ा आगे झुके, जब तक पीछे वाले पैर की पिंडली में खिंचाव न महसूस हो। इसे करीब 20-30 सेकंड ऐसे ही रुको। अब दूसरे पैर से भी इसी तरह स्ट्रेच करें।फुट आर्च स्ट्रेचइसे करते समय टॉवल या रेसिस्टेंस बैंड का इस्तेमाल किया जाता है। हील्स पहनने से जो मसल्स टाइट हो जाती है, उन्हें ये स्ट्रेच खोलता है। इसे करने  के लिए एक टॉवल या रेसिस्टेंस बैंड लो। इसे अपने पैरों के पंजे में फंसाएं और धीरे-धीरे अपनी तरफ खींचो। ऐसा करने से पैरों के आर्च और एड़ी खिंचाव फील होगा। अपने क्षमतानुसार इसी पोजिशन में रुकें और सामान्य अवस्था में लौट आएं। एंकल रोल्स एंकल रोल्स स्ट्रेच को आप कुर्सी पर बैठकर कर सकते हैं। यह आपके एंकल ज्वॉइंट्स को फ्लेक्सिबल बना देता है और पैर की सूजन भी कम हो जाती है। इसे करने के लिए सबसे पहले आप कुर्सी पर बैठ जाएं। अब एक पैर ऊपर उठाओ और एंकल को पहले घड़ी की दिशा में, फिर उल्टी दिशा में घुमाओ। ऐसे ही दूसरे पैर से भी करें। इस तरह आप दोनो डायरेक्शन में 10-10 बार रोल करें।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Nov 2025 10:13:13 +0530</pubDate>
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<title>बदलते मौसम भयानक हो सकता है जोड़ों का दर्द, इन आसान तरीकों से अभी से करें बचाव</title>
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<description><![CDATA[ मौसम में धीरे-धीरे बदलाव आने लगा है। बदलते मौसम में अक्सर जोड़ों में जकड़न, दर्द या सूजन की शिकायत बढ़ जाते हैं। ठंड के मौसम की शुरुआत भी होने लगी है। यह समस्या बदलते मौसम में ज्यादा बढ़ जाती है। आयुर्वेद में बताया है कि जब शरीर में वात दोष बढ़ता है,  तो वह जोड़ों में सूखापन और कठोरता पैदा करता है। इसी वजह से कई लोगों को गठिया या जोड़ों दर्द की पुरानी तकलीफ पैदा हो जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, सर्दी या नमी वाले दिनों में शरीर की ऊष्मा कम हो जाती है, जिससे रक्त प्रवाह धीमा पड़ने लगता है। जिस वजह से जोड़ों में जकड़न और सूजन बढ़ जाती है। हल्का दर्द अचानक तीव्र हो जाता है। जोड़ों के दर्द से राहत देंगी ये आयुर्वेदिक उपाय  - जोड़ों के दर्द से आराम पाने के लिए सुबह गुनगुने तिल या सरसों के तेल से जोड़ों की हल्के मालिश करें। - नहाने से पहले शरीर पर तेल की मालिश करें और रक्त संचार भी बेहतर होता और मांसपेशियां की जकड़न कम हो जाती है।  - सर्दियों के दौरान नहाने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें, इस दौरान ठंडे पानी से नहाने बचना जरुरी है।  - भोजन में अदरक, हल्दी, लहसुन और मेथी शामिल करें। इन सभी चीजों में नैचुरल सूजनरोधी गुण होते हैं। - ज्यादा देर बैठे या खड़े न रहें, बीच-बीच में एक्सरसाइज करें।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Nov 2025 10:13:11 +0530</pubDate>
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<title>Health Tips: फूड क्रेविंग्स से हेल्थ को हो सकता है नुकसान, इसे रीसेट करने के लिए आजमाएं ये आसान ट्रिक्स</title>
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<description><![CDATA[ हम सभी को अक्सर फूड क्रेविंग्स होती ही हैं। कभी-कभी कुछ मीठा खाने का मन होता है तो कभी हम कुछ चटपटा खाते हैं। जब यह क्रेविंग्स होती हैं तो हम खुद को रोक ही नहीं पाते हैं। अचानक से मन करता है कि अभी चॉकलेट चाहिए, बस अभी! ऐसे में अक्सर हम अपना फ्रिज टटोलने लग जाते हैं या फिर बाहर अपना पसंदीदा फूड खाने के लिए निकल जाते हैं। हो सकता है कि आप भी अपने टेस्ट बड अैर फूड क्रेविंग्स की वजह से परेशान हो और इससे आपकी सेहत को लगातार नुकसान हो रहा हो।हालांकि, ऐसे में आपको परेशान होने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। अगर आप चाहें तो अपनी फूड क्रेविंग्स को आसानी से रीसेट कर सकती हैं। बस आपको अपना माइंडसेट बदलने की जरूरत है और कुछ छोटी-छोटी आदतों को अपाने की जरूरत है। जब आप ऐसा करते हैं तो क्रेविंग्स आप पर हावी नहीं हो पाएंगी। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही आसान तरीकों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप फूड क्रेविंग्स को आसानी से रीसेट कर सकते हैं-इसे भी पढ़ें: Health Tips: पेट दर्द, खुजली और अपच... कहीं पित्त की थैली में पथरी तो नहीं, तुरंत जानें ये लक्षणपहले पीएं पानी अगर आपको फूड क्रेविंग्स हो रही हैं, तो ऐसे में कुछ भी खाने से पहले एक पूरा गिलास पानी पियो और फिर 10 मिनट के लिए रुक जाओ। इससे कई बार आपकी क्रेविंग्स खुद ब खुद खत्म हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि कई बार शरीर की प्यास को दिमाग भूख समझ लेता है। पानी पीने से शरीर हाइड्रेट होता है, झूठी भूख की फीलिंग कम होती है और आप बेवजह की स्नैकिंग से बच पाते हैं।नींद के साथ समझौता नहींअक्सर लोग पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं और इससे भी उनकी फूड क्रेविंग्स बढ़ने लगती हैं। दरअसल, कम नींद लेने से घ्रेलिन हार्मोन बढ़ता है और लेप्टिन हार्मोन घटता है। यही असंतुलन जंक फूड की क्रेविंग बढ़ाता है, खासकर कार्ब्स और मिठाइयों की क्रेविंग्स कई गुना बढ़ने लगती है। इसलिए रोज़ाना 7-8 घंटे की गहरी अवश्य लें। करें माइंडफुल ईटिंग अगर आप बेवजह की फूड क्रेविंग्स से बचना चाहती हैं तो ऐेसे में माइंडफुल ईटिंग करना यकीनन काफी अच्छा रहता है। आप हमेशा धीरे-धीरे खाएं और बिना किसी डिस्ट्रैक्शन के खाना खाएं। दरअसल, जब आप माइंडफुल ईटिंग करते हैं तो ऐसे में दिमाग को समझ आता है कि पेट भर गया है। जल्दी-जल्दी खाने से ये सिग्नल कन्फ्यूज हो जाते हैं और बाद में दोबारा कुछ खाने का मन करता है, भले ही पेट भरा हो।- मिताली जैन ]]></description>
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<title>पाचन शक्ति बढ़ाएगा भुना जीरा या जीरा पानी? जानें कौन है सबसे बेहतर उपाय!</title>
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<description><![CDATA[ खराब जीवनशैली और गलत खानपान के कारण कई बीमारियां शरीर को घेर लेती है। आजकल लोग मोटापे से काफी परेशान हैं। वहीं, कुछ लोगों का डाइजेशन खराब रहता है। पेट भारी होने से उन्हें कुछ भी खाने का मन नहीं होता है। पेट की पाचन क्रिया जबरदस्त रहती है तो शरीर भी हेल्दी रहता है। खाना खाने के बाद भोजन पच नहीं रहा, तो एसिडिटी, गैस और पेट दर्द जैसी परेशानियां होने लगती है। अब आपको जानना बेहद जरुरी है कि भुना जीरा या जीरे का पानी कौन है सबसे बेहतर। आइए आपको बताते हैं- भुना जीरा के फायदे - ये डाइजेशन एंजाइम्स को एक्टिव करता है। यह खाना को जल्दी और आसानी से डाइजेस्ट हो जाता है। - भुना हुआ जीरा खाने से गैस और पेट फूलने की समस्या दूर हो जाती है।  - भुना हुआ जीरा सेवन करने से शरीर को ज्यादा पोषण मिलता हैं।  - इसमें पाए जाने वाला एंटीऑक्सीडेंट्स आंतों की सूजन कम करते हैं।    कैसे सेवन करें   भुना जीरा को आप अपने खाने में डाल सकती है। इसको आप सलाद, रायता, दही या सब्जी में मिलाकर सेवन कर सकती हैं।जीरा पानी के फायदे  - जीरा पानी पीने से पेट के एंजाइम्स को एक्टिव करता है, जिससे खाना आसानी से डाइजेस्ट भी हो जाता है।  - जीरा पानी पीने से एसिडिटी और जलन से भी राहत मिलती है।  - ये पानी शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।  कैसे सेवन करें  आपको सुबह खाली पेट गुनगुना जीरा पानी पीना सबसे बेहतरीन माना जाता है। यह आपके पाचन को बेहतर करता है। कौन बेहतर है- भुना जीरा या जीरा पानी अगर आपक हल्की-फुल्की गैस है, तो भुना जीरा का सेवन कर सकते हैं। यदि आपको बार-बार एसिडिटी, कब्ज और पेट फूलने की समस्या हो रही है, तो आपको जीरा पानी का सेवन करना चाहिए। दोनों ही अपने तरीके से फायदेमंद है। आप जैसा चाहे इसका सेवन करें।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Nov 2025 10:13:10 +0530</pubDate>
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