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<title>Prime News Studio &#45; : संत संस्कृति</title>
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<description>Prime News Studio &#45; : संत संस्कृति</description>
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<title>Love Horoscope For 7 September 2026 | आज का प्रेम राशिफल 7 सितंबर  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 7 सितंबर 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं। यहाँ बिना किसी सिंबल के आज का सभी 12 राशियों का लव राशिफल दिया गया है:राशि अनुसार लव राशिफलमेष राशि (Aries): पार्टनर के साथ दिन खुशनुमा बीतेगा। किसी सरप्राइज डेट की योजना बन सकती है। अगर आप सिंगल हैं, तो किसी खास व्यक्ति की ओर रुझान बढ़ सकता है।लव टिप: अपने पार्टनर की बात ध्यान से सुनें।वृषभ राशि (Taurus): पुराने मतभेद सुलझने का समय है। जीवनसाथी के साथ सामंजस्य अच्छा रहेगा। रिश्ते में विश्वास और गहराई आएगी।लव टिप: शाम को एक साथ वक्त बिताएं।मिथुन राशि (Gemini): आज का दिन थोड़ा सावधानी बरतने वाला है। गलतफहमियों की वजह से हल्की बहस हो सकती है। अपनी बात स्पष्टता से कहें।लव टिप: बातचीत में नरमी बनाए रखें।कर्क राशि (Cancer): भावनात्मक रूप से आज का दिन बेहद खूबसूरत रहेगा। आपके साथी का सहयोग आपको मजबूती देगा। सिंगल लोगों के लिए नए रिश्ते का प्रस्ताव आ सकता है।लव टिप: अपनी भावनाएं जाहिर करने में संकोच न करें।सिंह राशि (Leo): पार्टनर के साथ बाहर घूमने या डिनर का प्लान बन सकता है। रोमांस से भरपूर दिन रहेगा। वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहेगी।लव टिप: एक-दूसरे की पसंद का ध्यान रखें।कन्या राशि (Virgo): काम की व्यस्तता की वजह से पार्टनर को समय देना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। फोन के जरिए जुड़े रहने की कोशिश करें।लव टिप: छोटी-छोटी मुलाकातों का आनंद लें।तुला राशि (Libra): लव लाइफ में नए आयाम जुड़ सकते हैं। अगर आप किसी को पसंद करते हैं, तो आज दिल की बात बताने के लिए अनुकूल समय है।लव टिप: अपने व्यवहार में ईमानदारी रखें।वृश्चिक राशि (Scorpio): प्यार के मामले में दिन मिला-जुला रहेगा। पार्टनर की किसी बात से थोड़े उदास हो सकते हैं, लेकिन शाम तक सब ठीक हो जाएगा।लव टिप: धैर्य बनाए रखें।धनु राशि (Sagittarius): आपके और पार्टनर के बीच तालमेल बेहतरीन रहेगा। साथ में बिताया गया समय आपके रिश्ते को और मजबूत बनाएगा।लव टिप: किसी पुरानी अच्छी याद को ताजा करें।मकर राशि (Capricorn): अगर आप सिंगल हैं तो आज किसी नए रिश्ते की शुरुआत हो सकती है। शादीशुदा जातकों के लिए दिन थोड़ा शांति से बिताने वाला है।लव टिप: बेवजह की शंकाओं से बचें।कुंभ राशि (Aquarius): रिश्तों में स्पष्टता और खुलापन देखने को मिलेगा। लव पार्टनर के साथ कोई अहम फैसला ले सकते हैं।लव टिप: पार्टनर के विचारों का सम्मान करें।मीन राशि (Pisces): आज आप अपने पार्टनर के प्रति काफी झुकाव महसूस करेंगे। रोमांटिक डिनर या किसी खास तोहफे से साथी को खुश कर सकते हैं।लव टिप: अपने दिल की बात खुलकर कहें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 07 Sep 2026 10:31:40 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 07 September 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष कार्यक्षेत्र बढ़ाने के प्रयास सफल होंगे। मन शांत रहेगा, धैर्य सफलता की कुंजी है। वरिष्ठ अधिकारियों के कृपा पात्र रहेंगे। विपरीत परिस्थिति, अनुकूलता की ओर बढ़ेंगे।वृषदिन भर सफलताओं के योग, भाग्य प्रबल। अंहकार नए शत्रु पैदा करेगा। स्वयं तथा परिवार के लोगों के स्वास्थ्य की चिंता। सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेंगे।मिथुनविवाद बढ़ सकते हैं विशेषकर परिवार में। उन्नति का मार्ग खुलेगा। रोग का सही निदान होगा, स्वास्थ्य सुधरेगा। सत्कार्यों में धन खर्च से यश मिलेगा।कर्कऋण की चिंता, अज्ञात शत्रुओं से परेशानी। हर तरह से जोखिम से दूर रहें। पारिवारिक सामाजिक संदर्भ ठोस निर्णय लेंगे। रिश्तेदारों का आवागमन।सिंहस्वास्थ्य गड़बड़ और सम्मान खतरे में। जरूरी काम दोपहर तक होने चाहिए। परिवार में कोई मांगलिक कार्य। सामाजिक, धार्मिक कार्यों में व्यस्तता।कन्याबिगड़े संबंध सुधरेंगे, अपनापन मिलेगा। अपने से संबंधित क्षेत्रों से आगे बढ़ेंगे/रहेंगे। चलायमान स्थिति, भ्रमण होता रहेगा। योजनाएं मूर्त रूप लेगी, मन प्रसन्न होगा।तुलाकिसी खास स्वजन का स्वास्थ्य, चिंताजनक। परिवार में नई किलकारी गूंजेगी। अनेक कार्यक्रमों में व्यस्त रहेंगे। आध्यात्मिक कार्यों में रूचि और साधना भी।वृश्चिक समाज में कीर्ति बढ़ेगी। घर परिवार में आपका सुयश बढ़ेगा। परिस्थितियां विचलित कर सकती है। व्यापार के क्षेत्र में नवीनता और लाभ।धनुग्रह योग मिश्रित फल देने वाला है। संतान के संबंध में आशाजनक शुभ समाचार मिलेंगे। नौकरी में पदोन्नति और धन लाभ। अस्थिरता और मानसिक अशांति।मकर विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट सफल होंगे। दिन भर सफलताओं के योग, भाग्य प्रबल। डूबा धन मिलेगा, उन्नति के अवसर भी। सभी व्यक्तियों का सहयोग मिलेगा।कुंभआर्थिक स्थिति में सुधार होगा। पूंजी निवेश करने से बचें, दुविधाग्रस्त रहेंगे। कार्य व्यवसाय के संबंध में शिक्षण प्रशिक्षण लेंगे। परमार्थ के कामों में रूचि बढ़ेगी।मीनअनेक काम एक साथ न करें- हानि होगी। अभीष्ट नई वस्तुओं भी खरीदी करेंगे। परिवार में शुभ कार्य सम्पन्न होगा। मौसमी बीमारियों से सावधान रहें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 07 Sep 2026 09:40:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Aja Ekadashi 2026: अजा एकादशी आज, जानिए Muhurat, पूजन विधि और व्रत का महत्व</title>
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<description><![CDATA[ हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी का व्रत किया जाता है। इस बार आज यानी की 07 सितंबर 2026 को यह व्रत किया जा रहा है। अन्य एकादशी तिथियों की तरह अजा एकादशी का व्रत जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत करने और श्रद्धा व भक्तिभाव के साथ भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से समस्त पापों का नाश होता है। साथ ही जीवन से दुख-दरिद्रता दूर होती है। अजा एकादशी का व्रत करने से जातक को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं अजा एकादशी की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व आदि के बारे में...तिथि व शुभ मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक 06 सितंबर 2026 की शात 07:29 मिनट से अजा एकादशी तिथि की शुरूआत हो रही हैं। वहीं आज यानी की 07 सितंबर 2026 की शाम 05:03 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 07 सितंबर 2026 को अजा एकादशी का व्रत किया जा रहा है। वहीं द्वादशी तिथि के भीतर एकादशी व्रत का पारण सही समय पर करना शुभ माना जाता है। इसलिए 08 सितंबर को सुबह 06:02 बजे से सुबह 08:33 बजे तक पारण कर सकते हैं।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। अगर संभव हो तो इस दिन पीले कपड़े पहनें। फिर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें और सूर्य देव को अर्घ्य दें। अब पूजा स्थल की सफाई करें और एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर उस पर श्रीहरि विष्णु की मूर्ति स्थापित करें। अब भगवा विष्णु के सामने घी का दीपक जलाएं और धूप जलाएं। फिर श्रीहरि को पीले फूल, रोली, मौली, अक्षत और फल आदि अर्पित करें।भगवान विष्णु को फल और मिठाई आदि का भोग अर्पित करें। वहीं भोग में तुलसी दल को शामिल करना न भूलें। इसके बाद अजा एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। वहीं पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्र &#039;ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नम:&#039; मंत्र का 108 बार जाप करें। अंत में पूजा में हुई भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें।धार्मिक मान्यताएंधार्मिक मान्यता के मुताबिक अजा एकादशी का व्रत करने से जातक को पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन जो भी भक्त भगवान विष्णु की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करता है और व्रत करता है, उसको श्रीहरि की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 07 Sep 2026 09:37:23 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 06 September 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष ईष्ट मित्रों से सहयोग और लाभ। कलह और जोखिम दोनों से बचना जरूरी है। सामान्य दिनचर्या के बावजूद अच्छें मैत्री संबंध होंगे। उदारता के कारण परायों का भी प्यार मिलेगा।वृषनौकरी-विवाह के अटके हुए काम बनेंगे। दाम्पत्य जीवन में खुशी पर पुनः संचार। जरूरी काम दोपहर तक निपटा लें। पारिवारिक सुखों के लिए उत्तम दिन।मिथुननई योजनाओं पर कार्य आरंभ। कानूनी चक्करों में उलझ सकते हैं। धन उधार देना जोखिम से खाली नहीं। परोपकार की भावना से कार्य करेंगे।कर्कइज्जत और कार्य क्षमता बढ़ेगी। राजनैतिक दल से घनिष्ठता बढ़ेगी। प्रभावशाली लोगों से सम्पर्क मजबूत होंगे। चतुराई से बड़ा कठिन काम पूरा करा लेंगे।सिंहजो भी करेंगे उसमें सफलता मिलेगी। उधार दिया हुआ धन वापस आएगा। काम के दवाब से चिड़चिड़ापन। विद्यर्थियों के लिए दिन उत्तम सिद्ध होगा।कन्याप्रतियोगिता में आप श्रेष्ठ और सफल सिद्ध होंगे। सरकारी कामों में सफलता मिलेगी। चिंताजनक हालात बनेंगे। अनिश्चिता और बेचैनी का माहौल रहेगा।तुलायात्रा में कष्ट, प्रिय के संबंध में अप्रिय समाचार। रोजगार व्यवसाय में नई स्थापना। पारिवारिक मित्र के स्वास्थ्य की चिंता। लोगों को प्रभावित करने में सफल रहेंगे।वृश्चिक व्यावसायिक सम्पर्क बढ़ेंगे, लाभ भी देंगे। बार-बार धन लाभ और शुभ समाचार। अधिकारी वर्ग आपकी प्रशंसा करेगा। बिगड़े संबंध सुधरेंगे, अपनापन मिलेगा।धनुदिन भर धन लाभ के योग बनते रहेंगे। चुनौतियों भरा दिन है, सावधान रहें। परिवार में गुरुजनों का विशेष ध्यान रखें। परिवार की उन्नति, स्वच्छता और गृह सज्जा में दिन की समाप्ति।मकर परिवार में शुभ एवं मंगल कार्य होंगे। अपमान कराने वाला दिन है, सतर्क रहें। खास रिश्तेदार के स्वास्थ्य की चिंता सताएगी। प्रतियोगिता में आप श्रेष्ठ और सफल सिद्ध होंगे।कुंभदुविधा से बाहर आएंगे। वाहन चलाते समय कष्ट और अपमान। सम्पत्ति अर्जित करने में सफल रहेंगे। उच्चाधिकारी और सम्पर्क लाभप्रद होंगे।मीनस्वयं के कार्यकलाप ही बनता काम बिगाड़ देंगे। अनिश्चितता तथा परेशानी का अनुभव। बैंक बैलेंस बढ़ेगा, अच्छा धन लाभ। आत्म केन्दि्रत रहते हुए कार्यकलाप रखेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 06 Sep 2026 15:19:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Aja Ekadashi 2026: 6 या 7 सितंबर कब रखा जाएगा अजा एकादशी का व्रत? जानें भगवान विष्णु की Puja Vidhi</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। साल में कुल 24 एकादशी तिथि पड़ती है और हर महीने 2 एकादशी तिथि आती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत के रखने से और भगवान विष्णु की पूजा करने से आध्यात्मिक शांति एवं जीवन में सुख-समृद्धि बनीं रहती है। सितंबर में पड़ने वाली एकादशी को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। आइए आपको बताते हैं अजा एकादशी कब है, जानें पूजा-विधि और पारण का समय। कब रखा जाएगा व्रत?वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर 2026 को शाम 7.30 बजे आरंभ होगी और अगले दिन 7 सितंबर को शाम 5.05 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा।अजा एकादशी पर बन रहे हैं शुभ योगइस बार अजा एकादशी धार्मिक दृष्टि के लिहाज से बेहद खास मानी जा रही है। असल में 7 सितंबर की सुबह पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र का संयोग रहेगा। इतना ही नहीं, इस दिन वरीयान योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बनने की बात कही गई है।व्रत का पारण कब किया जाएगा?अजा एकादशी व्रत पारण अगले दिन 8 सितंबर 2026 को किया जाएगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन 6.02 बजे से 8.33 बजे तक 8.33 बजे तक पारण का शुभ समय रहेगा। साधक इस अवधि में स्नान, पूजा और भगवान विष्णु की आराधना करने के बाद व्रत खोलते हैं।अजा एकादशी की पूजा विधि - सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र को धारण करें। - इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर गंगाजल से शुद्धिकरण करें और व्रत का संकल्प लें। - अब पीले या लाल कपड़े पर भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। - फिर भगवान को पीला चंदन, अक्षत, फूल, माला और वस्त्र अर्पित करें। पूजा में तुलसी दल जरुर शामिल करें। - इसके बाद खीर, मिठाई और मौसमी फलों का भोग लगाएं। - घी का दीपक और धूप जलाकर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। - अब विष्णु चलीसा का पाठ करें और अजा एकादशी व्रत कथा को पढ़े या सुनें। - आखिर में भगवान विष्णु और एकादशी माता की आरती करें। - अगले दिन द्वादशी तिथि में पूजा करने के बाद निर्धारित समय में व्रत का पारण करें। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 06 Sep 2026 15:19:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Hastrekha Shastra: हथेली में कटी Fate Line देती है इन बड़े Career and Money Changes के संकेत</title>
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<description><![CDATA[ हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की अलग-अलग रेखाओं से व्यक्ति के करियर, धन, जीवन और अलग-अलग परिस्थितियों के बारे में आंकलन किया जाता है। इन्हीं में से एक प्रमुख रेखा भाग्य रेखा है। यह रेखा हथेली के निचले हिस्से से शुरू होकर ऊपर शनि पर्वत की तरफ जाती है। भाग्य रेखा से जातक के कामकाज, करियर और जीवन में आने वाली समस्याओं या उतार-चढ़ाव के संकेत मिलते हैं। अगर हथेली में भाग्य रेखा बीच के कटी या टूटी हुई दिखती है, तो हस्तरेखा में इसको अहम संकेत माना जाता है। तो आइए जानते हैं भाग्य रेखा का कटा होना किस बारे में संकेत देता है।भाग्य रेखा का बीच से कटा होनाहस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक अगर भाग्य रेखा का बीच से टूटना जीवन में आने अचानक बदलावों की ओर इशारा करता है। ऐसे जातक को करियर या फिर आर्थिक रूप से कुछ समय के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 6 September 2026 | आज का प्रेम राशिफल 6 सितंबर  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनकरियर में रुकावटेंअगर भाग्य रेखा में किसी जगह पर कटाव है, तो उस उम्र के आसपास बिजनेस या नौकरी में रुकावट, बदलाव या फिर ठहराव जैसी स्थिति आ सकती है। या फिर जातक को सफलता पाने के लिए पहले की तुलना में ज्यादा मेहनत करनी पड़े।आर्थिक स्थिति पर असरकटी या टूटी हुई भाग्य रेखा को आर्थिक उतार-चढ़ाव से जोड़कर भी देखा जाता है। उम्र के किसी पड़ाव पर आकर अचानक से खर्च बढ़ सकता है, धन प्राप्ति में देरी या काम से जुड़ी परेशानियां आ सकती हैं। इसलिए आर्थिक मामलों में सोच-समझकर फैसले लेना चाहिए।परिवार और मानसिक तनावभाग्य रेखा का कटा होना सिर्फ धन या करियर ही नहीं बल्कि इसका संबंध पारिवारिक जिम्मेदारियों और मानसिक दबाव से भी जुड़ा है। इससे यह संकेत मिलता है कि व्यक्ति को जीवन के किसी पड़ाव पर जिम्मेदारियों की वजह से तनाव का सामना करना पड़ सकता है।भाग्य रेखा कटने के बाद फिर जुड़ जाए तोअगर भाग्य रेखा एक जगह से टूटने के बाद दोबारा मजबूत और साफ आगे बढ़ती है, तो इसको एक पॉजिटिव संकेत माना जाता है। इसका मतलब है कि व्यक्ति परेशानियों के बाद अपनी कोशिशों से दोबारा स्थिति को संभाल लेगा और सफलता की ओर बढ़ेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 15:42:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 6 September 2026 | आज का प्रेम राशिफल 6 सितंबर  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 6 सितंबर 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं। यहाँ बिना किसी सिंबल के आज का सभी 12 राशियों का लव राशिफल दिया गया है:मेषदिल के करीब मौजूद दूरियां आज मिटने वाली हैं। पार्टनर के साथ संवाद सहज रहेगा, जिससे पुरानी शिकायतें खुद-ब-खुद सुलझ जाएंगी। अविवाहित जातकों की किसी सुलझे हुए इंसान से बातचीत शुरू हो सकती है।वृषभआज भावनाओं में बहकर तीखी प्रतिक्रिया देने से बचें। रिश्ते को थोड़ा वक्त दें और साथी के दृष्टिकोण को समझने की कोशिश करें। शाम का वक्त सुकून और मिठास से भरा रहेगा।मिथुनप्रेम जीवन में एक नया अध्याय जुड़ सकता है। उत्साह और रोमांस का अद्भुत मेल रहेगा। किसी लॉन्ग ड्राइव या कैंडललाइट डिनर की योजना आपके रिश्ते में नई जान फूंक देगी।कर्कअपने संकोच को किनारे रखकर दिल के जज्बात जाहिर करें। आपकी सादगी और सच्चाई पार्टनर के दिल को छू लेगी। परस्पर सम्मान और भरोसा आज आपकी सबसे बड़ी ताकत बनेगा।सिंहआपका सौम्य स्वभाव और आकर्षण साथी को आपकी ओर आकर्षित रखेगा। वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहेगी। एक-दूसरे के फैसलों का समर्थन करने से बॉन्डिंग और प्रगाढ़ होगी।कन्यादैनिक भागदौड़ के बीच जीवनसाथी के लिए वक्त निकालना थोड़ा कठिन हो सकता है। भले ही समय कम मिले, लेकिन एक आत्मीय फोन कॉल या संदेश उनकी पूरी थकान मिटा देगा।तुलाआपसी तालमेल और समझ के मामले में आज का दिन बेहद खूबसूरत है। बिना कुछ कहे भी एक-दूसरे की भावनाएं समझ लेंगे। सिंगल लोगों के जीवन में किसी नए रिश्ते की शुरुआत हो सकती है।वृश्चिकअनावश्यक संदेह और बाहरी लोगों के परामर्श से दूरी बनाएं। रिश्ते में किसी भी प्रकार की उलझन हो, तो सीधे बैठकर बातचीत करें। शाम तक गलतफहमियां दूर हो जाएंगी।धनुपार्टनर की तरफ से कोई खूबसूरत सरप्राइज आपका दिन बना सकता है। आज साथ बिताए गए पल लंबे समय तक याद रहेंगे। रिश्तों में नयापन और परिपक्वता देखने को मिलेगी।मकरदिखावे से परे जाकर रिश्ते में सादगी और अपनापन बनाए रखें। साथी की छोटी-छोटी जरूरतों का ध्यान रखना आपके संबंधों को और गहरा बनाएगा। भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हो सकती है।कुंभयदि आप किसी के प्रति आकर्षित हैं और इज़हार-ए-दिल का सोच रहे हैं, तो आज का दिन सकारात्मक संकेत दे रहा है। दांपत्य जीवन में पुरानी यादें फिर से ताजा होंगी।मीनआपका सहृदय और देखभाल करने वाला रवैया साथी का दिल जीत लेगा। एक-दूसरे की बात को ध्यान से सुनना और समझना मानसिक शांति और गहरा जुड़ाव देगा।सितारों के संकेत चाहें जो भी हों, सच्चा समर्पण, समझदारी और प्यार ही हर रिश्ते को स्थाई और खूबसूरत बनाता है। अपने प्रियजन का साथ थामें और आज के दिन को यादगार बनाएं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 12:26:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 05 September 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष खर्चों की अधिकता परिवार की चिंता। अकारण शत्रु पैदा होंगे, अनावश्यक विवाद भी। अदालती मामलों में विजय मिलेगी। विद्यार्थी/शोध छात्रों को विशेष लाभ।वृषपरमार्थ के कामों में रूचि बढ़ेगी। समाज में कीर्ति बढ़ेगी। उत्तरदायित्व बढ़ेंगे, उपकार भी करेंगे। रिश्वत का लेन-देन संभव है।मिथुनपारिवारिक संपत्ति से लाभ। धन संबंधी मामले में चिंतन बना रहेगा। अंधविश्वास और भरोसे से हानि होगी। विवाद बढ़ सकते हैं विशेषकर परिवार में।कर्कआपसी सहमति से विवाद सुलझेगा। कुछ घरेलू कारणों से मानसिक तनाव रहेगा। वृद्धजनों के प्रति सेवा और दया भाव रखें। आध्यात्मिक क्षेत्र में उन्नति के विशेष योग।सिंहकाम की अधिकता से थकावट। बड़ों का स्वास्थ्य नरम, रूकावटें भी अधिक है। हठ छोड़ें- पारिवारिक जीवन और प्रेम संबंधों में सफलता। सभी कार्य सरलता से पूरे होंगे।कन्यासरकारी क्षेत्र में रूके हुए काम आज बनेंगे। सार्वजनिक सम्मान से प्रसन्नता। ससुराल पक्ष से लाभ होगा। आत्मबल उत्तम रहेगा- मानसिक संतोष भी।तुलादीर्घकाल से अटका हुआ काम बनेगा। स्वास्थ्य गड़बड़ और सम्मान खतरे में। नए निवेश के साथ व्यवसाय का विस्तार। अपने भी परायों सा अजीब व्यवहार करेंगे।वृश्चिक अपनी क्षमता से ही समस्याओं का निपटारा। सभी के कल्याण की योजनाओं के आगे बढाएगें। सामाजिक कार्यों को समर्पित दिन है। आर्थिक दृष्टि से उत्तम दिन है।धनुपिछले पूंजी निवेश का उत्तम लाभ मिलेगा। काम अधूरे रहने के कारण पश्चाताप। आशा निराशा के झूले में रहेंगे। पैरों पर चोट लगने/कष्ट लेने के योग।मकर योजनाओं में आप सफल रहेंगे। बच्चों के भविष्य के प्रति चिंतित रहेंगे। मांगलिक एवं सार्वजनिक कार्यों में खर्च। व्यवसाय में लाभ, नौकरी में उन्नति।कुंभआपका उदार व्यवहार प्रभावशाली सिद्ध होगा। हर दृष्टि से सतर्क रहें, धोखे का योग है। अनेक संभावनाएं एवं सफलताएं। नई परियोजना का श्रीगणेश।मीनहाथ आया अवसर/धन फिसल सकता है। परिवार में प्रसन्नता से दिन बीतेगा। खतरों से खेलना हानिकर सिद्ध होगा। अपने दम पर ही कुछ नया कर दिखाएंगे। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 11:04:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Dahi Handi 2026: Vajra Yoga में मनेगा दही हांडी का पर्व, जानें Shubh Muhurat और Puja Vidhi</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी की 05 सितंबर 2026 को श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा दही हांडी का पर्व मनाया जा रहा है। यह जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया जाता है। इस दिन श्रीकृष्ण की माखन लीला को याद किया जाता है। दही हांडी पर्व पर जगह-जगह गोविंदा की टोलियां एक-दूसरे के कंधे पर चढ़कर मानव पिरामिड बनाती हैं और ऊंचाई पर रखी मटकी को फोड़ा जाता है। देश के कई हिस्सों में इस पर्व की रौनक देखने को मिलती है। तो आइए जानते हैं कि जन्माष्टमी के अगले दिन दही हांडी का पर्व क्यों मनाया जाता है और इसका शुभ मुहू्र्त क्या है और पूजा कैसे करें।तिथि और मुहूर्तआज यानी की 05 सितंबर 2026 को वज्र योग रहेगा। वहीं दोपहर 12:00 बजे से लेकर 12:50 तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। यह सबसे शुभ समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-अर्चना और शुभ कार्य किए जा सकते हैं। वहीं दोपहर 01:16 मिनट से लेकर 02:45 मिनट तक अमृत काल रहेगा।इसे भी पढ़ें: Krishna Janmashtami 2026: Krishna Janmashtami पर बना दुर्लभ संयोग, नोट करें Shubh Muhurat और Puja Vidhiक्यों मनाया जाता है दही हांडी का पर्वजन्माष्टमी की रात में श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का मुख्य अनुष्ठान किया जाता है। फिर अगले दिन श्रीकृष्ण के बाल रूप और नटखटपन की लीलाओं का उत्सव मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक श्रीकृष्ण को माखन बहुत पसंद था। कान्हा अक्सर गोपियों का माखन चुराते थे। माखन चोरी से परेशान होकर गोपियों ने मटकी को जमीन से ऊंचाई पर टांगना शुरू कर दिया, जिससे कि बाल कृष्ण वहां तक न पहुंचे।लेकिन नटखट कृष्ण अपने सखाओं के साथ आते और एक-दूसरे पर चढ़कर मानव पिरामिड बनाते थे। वहीं सबसे ऊपर रहने वाला साथी मटकी को फोड़ देता था। जिसके बाद सब दही और माखन का आनंद लेते थे। कान्हा की इस लीला की याद में दही हांडी का पर्व मनाया जाता है।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद श्रीकृष्ण या फिर लड्डू गोपाल की पूजा करें। इसके बाद भगवान पंचामृत से स्नान कराएं और फिर बाद में साफ जल से स्नान कराने के बाद नए कपड़े पहनें। अब कान्हा को बांसुरी, मुकुट और चंदन का तिलक लगाएं और उनका सुंदर सा श्रृंगार करें। कान्हा को सजाने के बाद उनको झूले में बिठाएं और श्रद्धा व भक्ति के साथ उनको झूला झुलाएं।एक छोटी मटकी में मक्खन, दही, पोहा, सूखे मेवे और कुछ सिक्के डालकर पूजा घर में रखें। भगवान श्रीकृष्ण को पंचमेवा, मक्खन-मिश्री और गोपालकाला का भोग अर्पित करें। पूजा के अंत में घी का दीपक और कपूर जलाकर श्रीकृष्ण की आरती करें। पूजा पूरी होने के बाद सभी लोगों में प्रसाद वितरित करें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 11:04:31 +0530</pubDate>
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<title>व्रत में Satvik Food ही क्यों खाया जाता है? जानिए इसके पीछे की पूरी परंपरा</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में त्योहारों और धार्मिक अवसरों पर व्रत रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। व्रत का मतलब सिर्फ भूखा रहना नहीं है, बल्कि इस दौरान शरीर, मन और विचारों पर संयम रखने पर जोर दिया जाता है। यही वजह है कि व्रत में खान-पान का भी खास ध्यान रखा जाता है। व्रत के दौरान ज्यादातर लोग सात्विक और हल्का भोजन करते हैं। माना जाता है कि इससे शरीर पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता और पूजा-पाठ, ध्यान और मंत्र जाप में मन लगाने में आसानी होती है।व्रत में सात्विक भोजन ही क्यों खाया जाता है?हमने अक्सर सुना है, &quot;जैसा खाए अन्न, वैसा होए मन।&quot; सात्विक भोजन को सादा, शुद्ध और आसानी से पचने वाला माना जाता है। व्रत का उद्देश्य सिर्फ खाना छोड़ना नहीं, बल्कि खुद को संयमित रखना और भगवान की भक्ति में मन लगाना भी है। अगर व्रत में बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या भारी खाना खाया जाए तो शरीर में सुस्ती और आलस महसूस हो सकता है। वहीं, हल्का और सात्विक भोजन शरीर को आराम देता है और मन को शांत रखने में मदद कर सकता है।इसे भी पढ़ें: Janmashtami 2026 Date to Puja Muhurat: 4 या 5 सितंबर? जानें सही Shubh Muhurat और तिथिव्रत में क्या-क्या खा सकते हैं?व्रत में फलाहार को सबसे आसान और अच्छा विकल्प माना जाता है। आप अपनी पसंद के अनुसार सेब, केला, अनार, पपीता, नारियल जैसे फलों का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा एनर्जी के लिए मखाना और सूखे मेवे भी खाए जाते हैं। दूध, दही और छाछ भी व्रत के दौरान कई लोग अपनी डाइट में शामिल करते हैं।सामान्य अनाज की जगह व्रत में कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना और राजगीरा जैसी चीजों से बने व्यंजन खाए जाते हैं। आलू और शकरकंद भी व्रत के दौरान खाए जाने वाले आम खाद्य पदार्थ हैं।व्रत में सेंधा नमक ही क्यों खाया जाता है?व्रत के दौरान सामान्य सफेद नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल करने की परंपरा है। इसे कई धार्मिक परंपराओं में उपवास के लिए उपयुक्त माना जाता है। व्रत में फल, सब्जियों या चाट जैसी चीजों में स्वाद बढ़ाने के लिए सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इसे &quot;सबसे शुद्ध&quot; या स्वास्थ्य के लिए अपने आप बेहतर मानने का दावा हर स्थिति में सही नहीं है, सेंधा नमक भी मुख्य रूप से नमक ही है, इसलिए इसकी मात्रा का ध्यान रखना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Hal Shashthi 2026: संतान की खुशहाली के लिए माताएं रखेंगी व्रत, जानें पूजन के लिए सही Shubh Muhuratव्रत में किन चीजों से परहेज किया जाता है?व्रत के नियमों के अनुसार आमतौर पर गेहूं, चावल, दाल, चना और मटर जैसे रोजमर्रा के अनाज और दालों से परहेज किया जाता है। कई हिंदू परंपराओं में प्याज और लहसुन को तामसिक भोजन माना जाता है, इसलिए व्रत के दौरान इन्हें नहीं खाया जाता। इसके अलावा मांस, अंडा और शराब जैसी चीजों से भी पूरी तरह दूरी रखी जाती है। व्रत के दौरान बहुत ज्यादा तेल और मसाले वाला खाना खाने से भी बचना चाहिए। आखिर व्रत का मकसद सिर्फ पेट भरना नहीं, बल्कि सादगी और संयम के साथ दिन बिताना है।हर व्रत के नियम अलग हो सकते हैंयह बात ध्यान रखना जरूरी है कि हर व्रत में खान-पान के नियम एक जैसे नहीं होते। नवरात्रि, एकादशी और जन्माष्टमी जैसे व्रतों में फलाहार और खाने-पीने के नियमों में अंतर हो सकता है। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ व्रतों में दिन में एक बार फलाहार या सात्विक भोजन किया जाता है। इसलिए किसी भी व्रत को रखने से पहले उसकी परंपरा और नियमों की जानकारी लेना बेहतर होता है।सात्विक भोजन व्रत का अहम हिस्साव्रत में सात्विक भोजन को सिर्फ एक खान-पान की परंपरा नहीं, बल्कि सादगी, संयम और ईश्वर के प्रति समर्पण से जोड़कर देखा जाता है। हल्का और सीमित भोजन करने से व्यक्ति अपना ध्यान पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों पर केंद्रित करने की कोशिश करता है। इसलिए अगली बार जब आप व्रत रखें तो सिर्फ यह न सोचें कि क्या खाना है, बल्कि यह भी समझें कि व्रत का असली उद्देश्य संयम और भक्ति है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 04:29:58 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 04 September 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष अप्रिय घटना और ऐसा ही समाचार मिल सकता है। किसी खास आदमी से लाभदायक मुलाकात। सत्कार्यों में धन खर्च से यश मिलेगा। अनुकूल समय, सुख साधनों की प्राप्ति।वृषबाहरी लोग निजी जीवन में हस्तक्षेप कर सकते हैं। विवाह समारोह आदि शुभ कार्य में भाग लेंगे। खर्च कम करें, कर्ज की नौबत आ सकती है। परिस्थितियां सुधार की ओर बढ़ रही हैं।मिथुनकिसी विशेष समस्या का हल निकलेगा। संपत्ति खरीदने के योग बन रहे हैं। चाहकर भी कार्य न होने का दुःख होगा। उत्साह के साथ लक्ष्य की ओर बढ़ते रहेंगे।कर्कचंद्रमा लाभकारी और सुखदायक है। विपरीत लिंग द्वारा आरोप लगाया जाएगा। नौकरी में पदोन्नति और धन लाभ। आर्थिक समृद्धि के योग प्रबल है।सिंहअशुभ समाचार मिल सकता है। परेशानी के समय अधिक संयम बरतें। &#039;फिटनेस&#039; पर ज्यादा ध्यान रहेगा। नौकरी में लापरवाही मंहगी पड़ेगी।कन्याशुभ निमंत्रण एवं मांगलिक समाचार मिलेंगे। पारिवारिक सुख शांति और मित्र मिलन। प्रतिष्ठा और सम्पत्ति दोनों में वृद्धि। मानसिक स्थिति में सुधार, काम निबटेंगे।तुलापरिवार का वातावरण प्रतिकूल रहेगा। आगे बढ़ें- तीर निशाने पर ही लगेगा। किसी विशेष व्यक्ति से बोलचाल बंद होगी। ज्ञान अज्ञात कारणों से परेशान-वाहन सावधानी से चलाएं।वृश्चिक आध्यात्मिक कार्यों में रूचि और साधना भी। ज्ञान विज्ञान में रूचि बढ़ेगी। विवेक से काम लेंगे तो परिस्थिति सामान्य होगी। आपकी योग्यता और सलाह, अन्यों के लिए उपयोगी।धनुजरूरी काम पूरे होंगे-धन लाभ भी होगा। परिश्रम अधिक, लाभ कम। कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। किसी षड्यंत्र के शिकार हो सकते हैं।मकर अनावश्यक तनावग्रस्त रहेंगे। परिवार में कोई मांगलिक कार्य। ज्ञान विज्ञान में रूचि, वैसे शुभशुभ दिन। आर्थिक समृद्धि के योग प्रबल है।कुंभलोकप्रियता प्राप्त होगी। व्यावसायिक मामलों में ठोस निर्णय और सफलता। मध्यस्थ के रूप में सम्मान प्राप्त होगा। डूबा धन मिलेगा, उन्नति के अवसर भी।मीनबदनामी होने का डर बना रहेगा। नया काम शुरू होगा, नए पुराने मित्रों से लाभ। परिचय क्षेत्र में धन बढ़ेगा। किसी और की गलती की सजा आपको मिलेगी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 04:29:57 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 3 September  2026 | आज का प्रेम राशिफल 3 सितंबर 2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 3 सितंबर 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं। यहाँ बिना किसी सिंबल के आज का सभी 12 राशियों का लव राशिफल दिया गया है:आज का लव राशिफलमेष: रिश्तों में नया जोश और आत्मीयता देखने को मिलेगी। एक-दूसरे के विचारों को प्राथमिकता देने से मन प्रसन्न रहेगा। अविवाहितों के लिए किसी नए परिचय की संभावना बन रही है।वृषभ: दांपत्य एवं प्रेम संबंधों में सौहार्द और सुकून रहेगा। परस्पर विश्वास बढ़ेगा। संयमित भाषा का प्रयोग करने से दिन बेहद सुखद बीतेगा।मिथुन: संबंधों में थोड़ी परिपक्वता और संयम से काम लें। बेवजह की शंकाओं से दूरी बनाएं और बातचीत का रास्ता खुला रखें।कर्क: दिल से दिल का खिंचाव महसूस होगा। पुरानी तल्खियां खत्म होंगी और आपसी समझ का दायरा और अधिक चौड़ा होगा।सिंह: आपकी स्पष्टवादिता और सौम्य व्यवहार साथी का मन मोह लेगा। साथ मिलकर भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करने के लिए दिन उत्तम है।कन्या: काम की अधिकता के बीच अपने प्रिय के लिए थोड़ा वक्त जरूर चुराएं। आपका यह प्रयास आपके रिश्ते में एक नई ऊर्जा भर देगा।तुला: प्रेम पक्ष में संतुलन और तालमेल बना रहेगा। बाहरी लोगों के हस्तक्षेप से दूर रहकर केवल एक-दूसरे की बात पर भरोसा रखें।वृश्चिक: मन में घुमड़ रहे विचारों को दबाने के बजाय सीधे शब्दों में जाहिर करें। पारदर्शिता आपके रिश्ते को और मजबूती प्रदान करेगी।धनु: आज आपकी लव लाइफ में उत्साह और उमंग का माहौल रहेगा। साथी की तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया आपका दिल खुश कर सकती है।मकर: रिश्ते में गंभीरता और आपसी आदर का भाव प्रमुख रहेगा। दिनभर के तनाव को अपने निजी स्थान में हावी न होने दें।कुंभ: अपनी अनुभूतियों और स्नेह को बयां करने के लिए शानदार समय है। अचानक बना कोई प्लान आपको और करीब लाएगा।मीन: आपकी संवेदनशीलता और परवाह करने का अंदाज पार्टनर को बेहद भाएगा। एकाकी जीवन जी रहे जातकों के जीवन में हलचल संभव है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 04:29:57 +0530</pubDate>
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<title>September Personality Traits: मेहनती और बुद्धिमान होते हैं सितंबर में जन्मे जातक, जानें इनके Top Secrets</title>
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<description><![CDATA[ अगर किसी व्यक्ति का जन्म सितंबर महीने में हुआ है। तो ज्योतिष मान्यताओं के मुताबिक इन जातकों के व्यक्तित्व में कुछ खास गुण हो सकते हैं। सितंबर के महीने में जन्म लेने वाले जातक आमतौर पर मेहनती, बुद्धिमान और प्रतिभाशाली होते हैं। इनका व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है और इनकी बात रखने की क्षमता काफी अच्छी होती है। यह मुश्किल समय में भी समाधान निकाल लेते हैं। कई बार इनकी यह खूबियां इनको प्रोफेशनल लाइफ में आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। तो आइए जानते हैं सितंबर महीने में जन्मे लोगों में क्या-क्या खूबियां होती हैं।काम में प्रति होते हैं जिम्मेदारयह लोग अपने काम के प्रति सजग रहते हैं। यह किसी भी काम को अधूरे मन से करना पसंद नहीं करते हैं। काम में छोटी-छोटी कमियों को दूर रखने की कोशिश करते हैं। यह आदत उनको अपने क्षेत्र में अलग पहचान बनाने में मदद करती है।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 3 September  2026 | आज का प्रेम राशिफल 3 सितंबर 2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनसमाधान निकालने में माहिरइस महीने जन्मे लोगों की एक खूबी यह है कि इनमें समस्या को सुलझाने की क्षमता होती है। फिर चुनौती चाहे व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी हो या कामकाज से। यह इससे घबराने की वजह समधान और कारण पर ध्यान देते हैं। शांत दिमाग से मुश्किल परिस्थितियों को समझना और सही रास्ता तलाशना इनकी खास विशेषता होती है।मेहनती और ईमानदारइन महीने जन्मे लोग अपने लक्ष्य को लेकर गंभीर होते हैं। यह एक बार जिस काम को हाथ में ले लेते हैं, उसको पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते हैं। वह अपनी सफलता को शॉर्टकट की जगह मेहनत और ईमानदारी से पूरा करने में विश्वास रखते हैं।प्रभावशाली संवाद शैलीसितंबर के महीने में जन्म लेने वाले लोगों की संवाद शैली काफी प्रभावशाली मानी जाती है। यह सामने वाले की बातों को ध्यान से सुनते हैं और परिस्थिति के हिसाब से अपनी बात को रखते हैं। आत्मविश्वास के साथ बात करते हैं, इनके यह क्षमता बिजनेस, ऑफिस और सामाजिक जीवन में लाभ पहुंचाती है।रिश्तों का साथ निभाते हैंइस महीने जन्म लेने वाले लोग रिश्तों के प्रति वफादार माने जाते हैं। यह लोग जिनको अपना मानते हैं, उनके साथ मुश्किल समय में खड़े रहते हैं। आपसी समझ और भरोसे को महत्व देने की वजह से टीमवर्क या पार्टनरशिप वाले कामों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं।फीलिंग्स पर रखते हैं कंट्रोलसिंतबर में जन्मे लोग सामान्य रूप से संतुलित और संयमित माने जाते हैं। कठिन परिस्थितियों में भी यह फौरन प्रतिक्रिया देने की जगह स्थिति को समझने की कोशिश करते हैं। गुस्से या तनाव के समय खुद पर कंट्रोल रखना इनकी ताकत होती है। इस कारण यह जीवन में आने वाली समस्याओं का सामना धैर्य के साथ कर पाते हैं।आलोचना को मानते हैं सीखइस महीने जन्मे लोग अपनी कमियों को स्वीकार करने के पीछे नहीं हटते हैं। वह सही आलोचना मिलने पर उससे सीख लेते हैं। अपनी गलतियों को सुधारते हैं और लगातार खुद को बेहतर बनाते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 04:29:56 +0530</pubDate>
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<title>Janmashtami 2026 Shubh Yoga: जन्माष्टमी पर बन रहा खास संयोग, जानें Yashoda Mata और गोवर्धन पूजा विधि</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है। आज 4 सितंबर 2026, को देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है। चारों-तरफ मंदिर ही मंदिर सजे हुए है। भक्तजन ने अपने घर के मंदिरों को सजाकर कान्हा की भक्ति में लीन हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में आधी रात को हुआ था। हर साल जन्माष्टमी पर अष्मटमी तिथि होती है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग हमेशा नहीं बनता है। इस साल यह शुभ संयोग बन रहा है, जिससे यह दिन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।कैसे करें लड्डू गोपाल की पूजा?भगवान कृष्ण का जन्मा आधी रात को हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की रात घर में लड्डू गोपाल का विशेष अभिषेक करना शुभ माना जाता है। आप इसके लिए दक्षिणावर्ती शंख का इस्तेमाल कर सकते हैं। शंख में केसर मिला हुआ कच्चा दूध भरकर भगवान को स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें साफ और सुंदर पीले वस्त्र ही पहनाएं। कान्हा जी को चंदन का तिलक लगाएं और मुकुट पहनाकर मोरपंख से सजाएं।इनकी भी करें पूजामाना जाता है कि श्रीकृष्ण के साथ ही माता यशोदा, बलराम जी, राधा रानी, गौम माता और गोवर्धन पर्वत की उपासना की जाती है। यदि संभव हो तो इस दिन इन सभी की मूर्तियां रखें। भोग में नंदलाल को उनका पसंदीदा माखन-मिश्री, दूध की मिठाइयां और ताजे फल अर्पित करें। ध्यान रहे कि प्रसाद में तुलसी के पत्ते डालना काफी जरुरी है, क्योंकि तुलसी के बिना कृष्ण भगवान की पूजा अधूरी मानी जाती है। इसके बाद सच्चे मन से धूप-दीप जलाकर आरती करें।मंत्र जप और पवित्र ग्रंथों का पाठपूजा के समय &#039;कृं कृष्णाय नम:&#039; या &#039;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#039; और &#039;राधे-राधे&#039; मंत्रों का कम से कम 108 बार जप करें। जप के लिए तुलसी की माला का इस्तेमाल सबसे अच्छा माना जाता है। इस दिन श्रीमद्भगवदगीता या हरिवंश पुराण का पाठ करना चाहिए। भगवान की लीलाओं को पढ़ना और सुनना भी पूजा का ही एक हिस्सा है।स्नान-दान का महत्वइस दिन यमुना नदी में स्नान करना काफी शुभ माना जाता है। यदि आपके लिए यमुना जी तक जाना संभव नहीं है, तो नहाने के पानी में थोड़ा-सा गंगाजल या यमुना जल मिलाकर घर पर ही स्नान कर सकते हैं। जब आप नहाएं तो गंगा और यमुना नदी का मन में ध्यान करें। इस दिन गरीबों या जरुरतमंदों को अपने क्षमता अनुसार दान अवश्य करें।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 04:29:56 +0530</pubDate>
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<title>Janmashtami Vrat Rules: जानिए रात 12 बजे के बाद श्रीकृष्ण पूजा के बाद Vrat Parana की सही विधि</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। इस दिन भक्तजन श्रद्धा भाव से श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। पूरे दिन व्रत रखने के बाद रात के समय भगवान कृष्ण के जन्म के समय पूजा-अर्चना की जाती है और इन्हें भोग लगाया जाता है। श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव के बाद व्रत का पारण भी किया जात है। जन्माष्टमी के व्रत का पारण बेहद खास होता है। वैसे यह अन्य व्रतों के पारण से काफी अलग होता है। इसमें व्रत वाले दिन ही उपवास खोला जाता है। इसके साथ ही व्रत के पारण में अन्न खाना भी अनिवार्य है। आइए आपको बताते हैं कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी के पारण की विधि और व्रत खोलते वक्‍त क्‍या खाना चाहिए। रात 12 बजे के बाद किया जाता है पारणधार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी की रात करीब 12 बजे भगवान के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान लड्डू गोपाल का अभिषेक, पूजन, आरती और भोग लगाया जाता है।ऐसे में कई लोग भगवान के जन्म और पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करके उसी समय व्रत खोलें। इसका मतलब है कि रात 12 बजे के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं। कुछ लोग अगले दिन सूर्योदय के बाद ही व्रत का पारण करते हैं। सबसे पहले लें भगवान का प्रसाद जब आप व्रत खोलें तो सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किया गया प्रसाद ग्रहण जरुर करें। पारण की शुरुआत चरणामृत, माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी या ताजे फल से होनी चाहिए। पहले चरणामृत ग्रहण करें, फिर थोड़ा प्रासद लेकर अपना व्रत खोलें।जन्माष्टमी पर रात में ही क्यों खोला जाता है व्रत?धार्मिक मान्यता के अनुसार, जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि का विशेष महत्व होता है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म इसी समय के दौरान हुआ था। इसलिए रात 12 बजे भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 04:29:56 +0530</pubDate>
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<title>Krishna Janmashtami Moon Rise Time: दिल्ली, मुंबई से Mathura तक जानें चंद्रोदय का सही समय</title>
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<description><![CDATA[ देशभर में आज 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा। भाद्रमास की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस दिन लोग अपने घरों के मंदिर को सजाते हैं, भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। खासतौर पर इस दिन रात के समय चंद्रमा को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है, रात 12 बजे के बाद चंद्रमा को जल अर्पित करने के बाद ही व्रत को पूर्ण माना जाता है। हालांकि, इस दिन चंद्रमा बाकी दिनों से काफी लेट निकालता है। आज चांद अलग-अलग शहरों पर अलग-अलग समय पर दिखाई देगा। आइए आपको इस लेख में बताते हैं, आपके शहर में चंद्रमा कब निकलेगा।जन्माष्टमी का चांद आपके शहर में कब निकलेगा? शहर	                चांद निकलने का समयदिल्ली	                 रात में 11 बजकर 24 मिनट परमथुरा	                  रात में 11 बजकर 26 मिनट परवृंदावन	                 रात में 11 बजकर 29 मिनट परलखनऊ	       रात में 11 बजकर 14 मिनट परमेरठ	              रात में 11 बजकर 22 मिनट परनोएडा	                 रात में 11 बजकर 23 मिनट परगाजियाबाद	          रात में 11 बजकर 22 मिनट परबिजनौर	              रात में 11 बजकर 18 मिनट परसोनीपत	            रात में 11 बजकर 25 मिनट परकानपुर	               रात में 11 बजकर 17 मिनट परमुंबई	          रात में 11 बजकर 59 मिनट परफरीदाबाद	     रात में 11 बजकर 25 मिनट परमुजफ्फरनगर	रात में 11 बजकर 19 मिनट परहिसार	             रात में 11 बजकर 29 मिनट परसिरसा	               रात में 11 बजकर 31 मिनट परअमृतसर	      रात में 11 बजकर 24 मिनट परअंबाला	            रात में 11 बजकर 20 मिनट परअजमेर	            रात में 11 बजकर 41 मिनट परउदयपुर	            रात में 11 बजकर 50 मिनट परगुरुग्राम	          रात में 11 बजकर 26 मिनट परपटना	                  रात में 11 बजेआगरा               रात में 11 बजकर 24 मिनट परउज्जैन	          रात में 11 बजकर 45 मिनट परकोलकाता	   रात में 10 बजकर 54 मिनट परचंडीगढ़ 	रात में 11 बजकर 20 मिनट परजन्माष्टमी पर चंद्रमा पूजा विधि और मंत्र - अपने शहर में चांद निकलने के बाद चंद्रमा के दर्शन जरुर करें और सबसे पहले &#039;सोमाय सोमेश्वराय सोमपतये सोमसम्भवाय सोमाय नमो नमः&#039; मंत्र का जप करें। - मंत्र जप करने के बाद चंद्रमा की पूजा करें और फिर शंख में जल, कुश, फल, गंध आदि लेकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। - अर्घ्य देने के बाद &#039;क्षीरोदार्णवसंभूत अत्रिनेत्रसमुद्भव, गृहाणार्घ्य शशांकेमं रोहिण्या सहितो मम। ज्योत्स्नापते नमस्तुभ्यं नमस्ते ज्योतिषां पते, नमस्ते रोहिणीकान्त अर्घ्य मे प्रतिगृह्यताम्।&#039; मंत्र का जप करें। - रात्रि के दौरान श्रीकृष्ण के नाम का भजन कीर्तन करना चाहिए। फिर सुबह स्नानादि करके पूजा के बाद भोजन किया जाता है। कुछ लोगों के यहां श्रीकृष्ण के जन्म के बाद, चंद्रमा दर्शन के बाद व्रत का पारण किया जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 04:29:55 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 5 September 2026 | आज का प्रेम राशिफल 5 सितंबर  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 5 सितंबर 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं। यहाँ बिना किसी सिंबल के आज का सभी 12 राशियों का लव राशिफल दिया गया है:आज का लव राशिफल: बदलती ग्रहों की चाल और आपके दिल के तारआज सितारे आपके प्रेम जीवन को एक नया मोड़ देने के संकेत दे रहे हैं। कुछ राशियों के लिए आज का दिन आत्मीयता और रोमांस से भरा रहेगा, तो कुछ को अपने संबंधों में थोड़ा धैर्य और संयम बरतने की आवश्यकता होगी। आइए जानते हैं कि आज आपकी राशि आपके दिल के राज के बारे में क्या कहती है:मेष (Aries)आज आपके प्रेम संबंधों में एक अनोखी गर्माहट और ताजगी देखने को मिलेगी। पार्टनर के साथ बिताए गए फुर्सत के पल आपसी बंधन को और गहरा करेंगे। यदि आप सिंगल हैं, तो आज आपकी जिंदगी में किसी दिलचस्प शख्स का प्रवेश हो सकता है।वृषभ (Taurus)प्रेम के सफर में आज सुकून और मिठास का अहसास रहेगा। आपकी सौम्य वाणी और सकारात्मक रवैया साथी का दिल जीत लेगा। पुरानी बातों को पीछे छोड़कर केवल एक-दूसरे के साथ का आनंद लें।मिथुन (Gemini)आज रिश्तों में थोड़ा धैर्य बनाए रखना हितकर रहेगा। छोटी-मोटी असहमतियों पर तूल देने से बचें। अपने विचार खुलकर और शांत मन से रखें, ताकि कोई गलतफहमी न पनपे।कर्क (Cancer)भावनात्मक रूप से आज का दिन बेहद खूबसूरत है। अगर पिछले कुछ दिनों से कोई तल्खी चली आ रही थी, तो आज वह पूरी तरह दूर हो जाएगी। आपस में भरोसा और आत्मीयता बढ़ेगी।सिंह (Leo)आपका आकर्षण और आत्मविश्वास आज पार्टनर को बेहद प्रभावित करेगा। दांपत्य जीवन में सामंजस्य रहेगा और साथ मिलकर आने वाले दिनों की योजनाएं बनाने के लिए दिन सही है।कन्या (Virgo)काम की भागादौड़ी के बीच अपने प्रिय के लिए थोड़ा वक्त जरूर निकालें। आपका एक छोटा सा प्यार भरा प्रयास या संदेश रिश्ते में नई ऊर्जा भर देगा।तुला (Libra)प्रेम जीवन में संतुलन और सहजता बनी रहेगी। किसी बाहरी व्यक्ति की सलाह पर ध्यान देने के बजाय अपने पार्टनर और अपने विवेक पर भरोसा रखें।वृश्चिक (Scorpio)मन में किसी भी तरह का संशय न रखें। बेबाक और पारदर्शी बातचीत ही आज आपके रिश्ते को मजबूत रखेगी। दिल की बात साफ शब्दों में कहें।धनु (Sagittarius)आज आपकी लव लाइफ में नई उमंग और उत्साह रहेगा। साथी की ओर से मिला कोई सरप्राइज या मीठा संदेश आपका पूरा दिन खुशनुमा बना सकता है।मकर (Capricorn)रिश्ते में परिपक्वता और आपसी आदर की भावना प्रमुख रहेगी। कार्यक्षेत्र का तनाव घर के माहौल पर हावी न होने दें, तभी निजी पलों में शांति मिलेगी।कुंभ (Aquarius)अपनी भावनाओं और स्नेह को व्यक्त करने के लिए आज का दिन शानदार है। अचानक हुई कोई मुलाकात या बातचीत आपके चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकती है।मीन (Pisces)आपका स्नेही और केयरिंग अंदाज पार्टनर के दिल को छू जाएगा। जो लोग लंबे समय से सिंगल हैं, उनके जीवन में किसी खास रिश्ते की शुरुआत का अहसास हो सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 04:29:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Shri Krishna Janmashtami 2026: रोहिणी नक्षत्र में होगा कान्हा का जन्म, जानें Shubh Muhurat और पूरी पूजा विधि</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म में भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का आठवाँ अवतार माना जाता है। उनका जीवन प्रेम, धर्म, नीति, करुणा, कर्म और भक्ति का अद्भुत संदेश देता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में पूरे भारत और विश्व के अनेक देशों में श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाई जाती है। हालांकि मथुरा, वृंदावन, द्वारका और देश के विभिन्न श्रीकृष्ण मंदिरों में इस पर्व की छटा अत्यंत मनोहर रूप लिये हुए होती है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार करते हैं, झांकियां सजाते हैं और मध्यरात्रि में उनके जन्मोत्सव का आयोजन करते हैं।श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026 की तिथिवर्ष 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी शुक्रवार, 4 सितंबर को मनाई जाएगी। यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, विशेष रूप से रोहिणी नक्षत्र के संयोग में मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की पूजा का विशेष आयोजन रात्रि में किया जाता है। तिथि और पूजा के समय में स्थान तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है, अतः श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार पूजा मुहूर्त की पुष्टि करनी चाहिए।इसे भी पढ़ें: Krishna Janmashtami 2026: ऐश्वर्य एवं वैराग्य का अद्भुत संगम है श्रीकृष्णश्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महत्वश्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं है, बल्कि यह अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक भी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार जब मथुरा के अत्याचारी राजा कंस के अत्याचार बढ़ गए और धर्म की स्थापना के लिए भगवान विष्णु के अवतार की आवश्यकता हुई, तब भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया।भगवान श्रीकृष्ण का जीवन अनेक प्रेरणाओं से भरा हुआ है। बाल्यकाल में उन्होंने पूतना, तृणावर्त और कालिय नाग जैसे दुष्टों का अंत किया तथा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। आगे चलकर उन्होंने महाभारत के युद्ध में अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया, जिसमें निष्काम कर्म, भक्ति और ज्ञान का संदेश दिया गया। जन्माष्टमी का पर्व भक्तों को यह प्रेरणा देता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां हों, सत्य, धर्म और कर्तव्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूजन विधिजन्माष्टमी के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें। पूजा स्थल को स्वच्छ करके भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की प्रतिमा स्थापित करें। यदि प्रतिमा पहले से स्थापित है तो उसे स्नान कराकर नए वस्त्र और आभूषणों से सजाया जा सकता है। पूजा के लिए सामान्यतः निम्न सामग्री का उपयोग किया जाता है—लड्डू गोपाल अथवा भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमापंचामृतगंगाजल या स्वच्छ जलचंदन और रोलीअक्षतपुष्प और मालातुलसी दलमाखन और मिश्रीफल और मिठाईधूप और दीपनए वस्त्र और श्रृंगार सामग्रीसंध्या अथवा रात्रि में पूजा स्थल को सुंदर ढंग से सजाएं और भगवान श्रीकृष्ण की झांकी तैयार करें। मध्यरात्रि में भगवान के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। लड्डू गोपाल को पंचामृत और जल से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें स्वच्छ वस्त्र पहनाकर चंदन, पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। माखन-मिश्री, फल और अन्य सात्त्विक भोग लगाएं। धूप-दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें और प्रसाद वितरित करें। पूजा के दौरान श्रद्धालु “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप कर सकते हैं। श्रीकृष्ण के नामों का स्मरण, भजन-कीर्तन और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ भी इस दिन विशेष रूप से किया जाता है।जन्माष्टमी व्रत का महत्वजन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और शारीरिक क्षमता के अनुसार व्रत रखते हैं। कई लोग दिनभर फलाहार करते हैं और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के बाद अथवा अगले दिन व्रत का पारण करते हैं। व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। क्रोध, असत्य और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर भगवान का स्मरण, भजन और सेवा करना इस पर्व का प्रमुख भाव है। परंपराओं के अनुसार व्रत की विधि और पारण का समय अलग-अलग हो सकता है, इसलिए अपने परिवार की धार्मिक परंपरा या स्थानीय पंचांग का पालन करना उचित है।श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की व्रत कथापौराणिक कथा के अनुसार मथुरा के राजा उग्रसेन के पुत्र कंस ने अपनी बहन देवकी का विवाह वसुदेव के साथ किया। विवाह के समय आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवाँ पुत्र कंस के वध का कारण बनेगा। यह सुनकर कंस भयभीत और क्रोधित हो गया। उसने देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया। देवकी की संतानों के जन्म लेते ही कंस उन्हें मार देता था। समय बीतता गया और देवकी के आठवें पुत्र के जन्म का समय आया। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में देवकी की कोख से अवतार लिया। कहा जाता है कि भगवान के जन्म के समय कारागार के पहरेदार गहरी निद्रा में चले गए और कारागार के द्वार स्वयं खुल गए। वसुदेव भगवान श्रीकृष्ण को एक टोकरी में लेकर यमुना नदी पार कर गोकुल पहुंचे। गोकुल में नंद बाबा और माता यशोदा के घर उसी समय एक कन्या ने जन्म लिया था। वसुदेव श्रीकृष्ण को यशोदा के पास छोड़कर उस कन्या को लेकर वापस कारागार लौट आए।जब कंस को देवकी की आठवीं संतान के जन्म की सूचना मिली, तो वह उसे मारने के लिए पहुंचा। लेकिन जैसे ही उसने उस कन्या को पकड़कर भूमि पर पटकने का प्रयास किया, वह दिव्य रूप धारण कर आकाश में प्रकट हो गई। देवी ने कंस से कहा कि उसका वध करने वाला जन्म ले चुका है और वह सुरक्षित स्थान पर पहुंच गया है। यह सुनकर कंस और अधिक भयभीत हो गया। आगे चलकर भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल्यकाल में अनेक दुष्ट शक्तियों का अंत किया और अंततः मथुरा पहुंचकर अत्याचारी कंस का वध किया। इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 04:29:49 +0530</pubDate>
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<title>Krishna Janmashtami 2026: Krishna Janmashtami पर बना दुर्लभ संयोग, नोट करें Shubh Muhurat और Puja Vidhi</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी की 04 सितंबर 2026 को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व होता है। इस मौके पर देश भर के सभी कृष्ण मंदिरों में लड्डू गोपाल की पूजा की जाती है। वहीं इस दिन सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाल जीवन की कामना के साथ व्रत भी किया जाता है। वहीं कृष्ण जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा होती है।  धार्मिक मान्यता के मुताबिक भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। वहीं इस बार भी जन्माष्टमी के दिन अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा का विशेष संयोग बन रहा है। तो आइए जानते हैं इस दिन की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व आदि के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरूआत 04 सितंबर की रात 02:25 मिनट से शुरू हो रही है। वहीं अगले दिन यानी की 05 सितंबर 2026 की रात 12:13 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। आज यानी की 04 सितंबर 2026 को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा का योग है। वहीं 04 सितंबर की रात 11:57 मिनट से 05 सितंबर की रात 12:43 मिनट तक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की पूजा का योग रहेगा।पूजन विधिश्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर पूजा स्थल पर एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर उस पर लड्डू गोपाल की प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बाद पंचामृत और शुद्ध जल से श्रीकृष्ण का अभिषेक करें। अब प्रभु को नए वस्त्र पहनाएं और उनका सुंदर सा श्रृंगार करें। श्रीकृष्ण को मोर मुकुट और बांसुरी जरूर अर्पित करना चाहिए।फिर लड्डू गोपाल को झूला झुलाएं और जन्मोत्सव की खुशियां मनाएं। भगवान को माखन-मिश्री का भोग लगाएं, साथ में पंजीरी और कुछ फल भी चढ़ा सकते हैं। भगवान कृष्ण की आरती करें और घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 04:29:48 +0530</pubDate>
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<title>Krishna Janmashtami 2026: ऐश्वर्य एवं वैराग्य का अद्भुत संगम है श्रीकृष्ण</title>
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<description><![CDATA[ भगवान श्रीकृष्ण भारत की माटी, भारत की आत्मा और भारत के जनजीवन की धड़कन हैं। वे केवल आराधना के देवता नहीं, बल्कि जीवन को देखने की एक दृष्टि, संघर्षों से जूझने की प्रेरणा और भविष्य की ओर बढ़ने की दिशा हैं। वे ऐश्वर्य एवं वैराग्य का अद्भुत एवं निराला संगम हैं। श्रीकृष्ण के बिना भारतीय जीवन-दर्शन की कल्पना अधूरी है। जीवन के लगभग प्रत्येक आयाम-परिवार, समाज, राजनीति, प्रशासन, अर्थव्यवस्था, युद्ध, शांति, प्रेम, मित्रता, कर्तव्य, त्याग, नेतृत्व और आध्यात्मिकता में श्रीकृष्ण के विचारों और आदर्शों की छाप दिखाई देती है। इसीलिए जन्माष्टमी केवल श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि उनके विचारों को जीवन में उतारने का अवसर है। श्रीकृष्ण भारतीय संस्कृति के ऐसे अद्भुत एवं विलक्षण महानायक हैं, जिनके व्यक्तित्व में विरोधाभास दिखाई देने वाले अनेक गुण एक साथ समाहित हो जाते हैं। वे द्वारका के शासक हैं, लेकिन उन्हें सामान्यतः ‘राजा श्रीकृष्ण’ नहीं कहा जाता। वे ब्रजनंदन हैं, नंदलाल हैं, कन्हैया हैं, माखनचोर हैं, गोपियों के चितचोर हैं और रासरचैया हैं। यही उनकी महानता है कि सत्ता के शिखर पर पहुंचकर भी वे जनमानस से कभी दूर नहीं हुए। उनका नेतृत्व राजमहलों तक सीमित नहीं था, वह गांवों की गलियों, ग्वाल-बालों, किसानों, पशुपालकों और सामान्य जन के हृदय तक पहुंचता था।श्रीकृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि श्रेष्ठ नेतृत्व केवल अधिकार प्राप्त करने का नाम नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने की कला है। उन्होंने सत्ता को कभी व्यक्तिगत सुख का साधन नहीं बनाया। समाज और राष्ट्र की व्यवस्था उनके लिए कर्तव्य थी और धर्म उनकी आत्मनिष्ठा। इसीलिए उन्होंने परिस्थितियों से पलायन नहीं किया। जहां प्रेम की आवश्यकता थी वहां प्रेम दिया, जहां मित्रता की आवश्यकता थी वहां मित्र बने, जहां संवाद जरूरी था वहां संवाद किया और जहां अधर्म का प्रतिकार आवश्यक हुआ वहां अत्यंत कठोर होकर सामने आए। यही संतुलन कुशल नेतृत्व की सबसे बड़ी पहचान है। आज प्रबंधन की दुनिया में निर्णय क्षमता, समय-प्रबंधन, संकट-प्रबंधन, नेतृत्व, संवाद-कौशल, मनोविज्ञान और रणनीति को सफलता की अनिवार्य शर्त माना जाता है। इन सभी क्षेत्रों में श्रीकृष्ण का जीवन असाधारण उदाहरण प्रस्तुत करता है। कुरुक्षेत्र में अर्जुन जब मोह और मानसिक द्वंद्व से घिरकर अपने कर्तव्य से विमुख होने लगे, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें केवल युद्ध के लिए प्रेरित नहीं किया, बल्कि जीवन का विराट दर्शन दिया। उन्होंने अर्जुन को कर्म का मर्म समझाया-मनुष्य का अधिकार कर्म पर है, परिणाम पर नहीं। यह संदेश आज भी हर विद्यार्थी, कर्मचारी, उद्यमी, प्रशासक, राजनीतिज्ञ और सामान्य व्यक्ति के लिए उतना ही उपयोगी है।इसे भी पढ़ें: Krishna Janmashtami 2026: 4 सितंबर को मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, 15 साल बाद रोहणी नक्षत्र में मनेगा श्रीकृष्ण का जन्मोत्सवहमारी सबसे बड़ी कमजोरी अक्सर कर्म से अधिक परिणाम की चिंता होती है। परिणाम की चिंता मन को भय, तनाव और असमंजस से भर देती है। श्रीकृष्ण का कर्मयोग इस मानसिक बोझ से मुक्ति का मार्ग देता है। अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा, क्षमता और ईमानदारी से करना और परिणाम को व्यापक व्यवस्था पर छोड़ देना-यह जीवन-प्रबंधन का ऐसा सूत्र है जिसकी उपयोगिता कभी समाप्त नहीं हो सकती। श्रीकृष्ण की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक थी-स्थिर बुद्धि। शिशुपाल ने राजसूय यज्ञ की सभा में उन्हें लगातार अपमानित किया, फिर भी वे शांत रहे। दुर्योधन के दरबार में शांति-दूत बनकर गए और वहां भी उनका अपमान हुआ, लेकिन वे विचलित नहीं हुए। इससे हमें सीख मिलती है कि उत्तेजना में लिया गया निर्णय प्रायः समस्या बढ़ाता है, जबकि शांत मन समाधान का रास्ता खोलता है। आधुनिक परिवारों से लेकर संसद, प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक, यह प्रबंधन-सूत्र आज भी उतना ही प्रासंगिक है।श्रीकृष्ण केवल युद्धनीति के ज्ञाता नहीं थे, वे शांति के भी सबसे बड़े समर्थक थे। महाभारत का युद्ध उनकी पहली पसंद नहीं था। उन्होंने युद्ध रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया। जब संवाद और न्याय की संभावनाएं समाप्त हो गईं, तभी धर्म की रक्षा के लिए युद्ध का मार्ग स्वीकार किया गया। इससे स्पष्ट होता है कि शक्ति का अर्थ हिंसा नहीं, बल्कि न्याय की रक्षा करने की क्षमता है। सच्ची शांति वही है जिसके पीछे न्याय और आत्मबल की शक्ति हो। श्रीकृष्ण का सामाजिक दृष्टिकोण भी अत्यंत व्यापक था। उन्होंने ग्रामीण जीवन, गौ-संस्कृति, प्रकृति और सामुदायिक जीवन को सम्मान दिया। गोवर्धन प्रसंग हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामुदायिक एकता का संदेश देता है। माखन और दूध-दही के प्रसंगों को केवल बाल-क्रीड़ा के रूप में देखने के बजाय उनमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय संसाधनों की रक्षा का संदेश भी देखा जा सकता है। श्रीकृष्ण का लोकजीवन से जुड़ाव बताता है कि कोई भी राष्ट्र तभी मजबूत बन सकता है जब उसकी विकास-यात्रा गांवों, किसानों, श्रमिकों और सामान्य नागरिकों को साथ लेकर चले। उनका व्यक्तित्व एक अद्भुत समन्वय है। वे अर्जुन के सारथी हैं और साथ ही विश्वरूप के दर्शन कराने वाले योगेश्वर। वे सुदामा के मित्र हैं और अत्याचारियों के लिए सुदर्शन चक्रधारी। वे बांसुरी की मधुरता हैं तो धर्मरक्षा के लिए आवश्यक कठोरता भी। वे प्रेम हैं, करुणा हैं, नीति हैं, रणनीति हैं, त्याग हैं और कर्म हैं। इसीलिए श्रीकृष्ण को किसी एक सीमा में बांधना उनके विराट व्यक्तित्व को छोटा करना होगा।श्रीकृष्ण का एक महत्वपूर्ण संदेश है कि व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का बहुआयामी विकास करना चाहिए। परंपरा में उनके द्वारा चौंसठ कलाओं के ज्ञान का उल्लेख मिलता है। इसका व्यापक संदेश यह है कि शिक्षा केवल रोजगार पाने का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व को पूर्ण बनाने की प्रक्रिया है। आज के समय में जब शिक्षा को केवल अंक, नौकरी और प्रतियोगिता तक सीमित करने का खतरा है, श्रीकृष्ण का जीवन हमें ज्ञान, कला, कौशल, सृजनशीलता और ]]></description>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 04:29:43 +0530</pubDate>
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<title>Famous Krishna Temple: Puri Jagannath से Bhalka Tirth तक, जानिए श्रीकृष्ण के चमत्कारी Temples का रहस्य</title>
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<description><![CDATA[ जन्माष्टमी के मौके पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस बार 04 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दौरान देश के कृष्ण मंदिरों में एक खास तरह की रौनक और उमंग देखने को मिलती है। श्रीकृष्ण को समर्पित हर मंदिर की अपनी कुछ न कुछ खासियत है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक भगवान श्रीकृष्ण के खूबसूरत, विशाल और प्राचीन मंदिर हैं। ऐसे में अगर आप भी इस बार जन्माष्टमी के मौके पर इन मंदिरों के दर्शन करना चाहती हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। भगवान कृष्ण के इन चमत्कारी मंदिरों में दर्शन मात्र से किस्मत बदल जाती है।द्वारकाधीश मंदिरगुजरात के द्वारकाधीश मंदिर को जगत मंदिर भी कहा जाता है। द्वारकाधीश मंदिर चारधाम यात्रा का मुख्य हिस्सा है। चारों धामों से यह पश्चिमी धाम है। यह मंदिर गोमती क्रीक पर स्थित है, वहीं मंदिर 43 मीटर की ऊंचाई पर बना है। द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन के बिना गुजरात में धार्मिक यात्रा को पूरा नहीं माना जाता है। जन्माष्टमी के मौके पर द्वारकाधीश मंदिर में उमंग भरा माहौल रहता है। वहीं इस मौके पर मंदिर के बेहद खास और खूबसूरत तरीके से सजाया जाता है।इसे भी पढ़ें: Famous Temple: देश के 10 Famous Krishna Temples जहां दर्शन मात्र से पूरी होती है भक्तों की हर मनोकामना बांके बिहारी मंदिरवृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण ने अपना बचपन बिताया था। वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर फेमस और प्रीचीन है। यहां पर श्रीकृष्ण को बांके बिहारी कहा जाता है। जन्माष्टमी के दिन मंदिर में मंगला आरती होती है, फिर रात 2 बजे मंदिर के पट भक्तों के लिए खुलते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि मंगला आरती साल में एक बार होती है। श्रीकृ्ष्ण के जन्म के बाद यहां पर भक्तों को कपड़े, खिलौने और अन्य दूसरी चीजें बेची जाती हैं।द्वारकाधीश मंदिर मथुराद्वारकाधीश मंदिर मथुरा का दूसरा सबसे फेमस मंदिर है। इस मंदिर में श्रीकृ्ष्ण के काले रंग की प्रतिमा की पूजा होती है। लेकिन यहां पर राधा रानी की मूर्ति सफेद रंग की है। प्राचीन मंदिर होने की वजह से इसकी वास्तुकला भी भारत की प्राचीन वास्तुकला से प्रेरित है। जन्माष्टमी के पर्व पर यहां खास रौनक देखने को मिलती है। यहां पर इस दौरान भक्तों की भारी भीड़ होती है।श्रीकृष्ण मठ मंदिरयह कर्नाटक का सबसे फेमस मंदिर है। यहां पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा खिड़की के 9 छिद्रों से की जाती है। यहां पर भक्तों का तांता लगा रहता है। वहीं जन्माष्टमी पर यहां पर विशेष रौनक देखने को मिलती है। पूरे मंदिर को लाइट्स और फूलों से सजाया जाता है। जन्माष्टमी के मौके पर दर्शन के लिए आपको 3 से 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ सकता है।जगन्नाथ पुरीपुरी में स्थित मंदिर में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। जन्माष्टमी के मौके पर यहां रौनक देखने लायक होती है। वहीं यहां की रथ यात्रा का विशेष महत्व होता है। रथ यात्रा में हिस्सा लेने से लिए देश-विदेश से भक्त पुरी आते हैं। रथ यात्रा के लिए तीन रथ तैयार किए जाते हैं। सबसे आगे बलराम जी का रथ, फिर देवी सुभद्रा का रथ और अंत में भगवान श्रीकृष्ण का रथ चलता है।बेट द्वारका मंदिरगुजरात में एक और फेमस मंदिर है, जिसको बेट द्वारका के नाम से जानते हैं। इसका नाम भेंट द्वारका है, लेकिन गुजरात में इसको बेट द्वारका कहा जाता है। इस नगरी का नाम दो कारण से भेंट पड़ा। मान्यता है कि इस जगह पर भगवान श्रीकृष्ण की मित्र सुदामा से भेंट हुई थी। इस मंदिर में श्रीकृष्ण और सुदामा की पूजा होती है। जब सुदामा श्रीकृष्ण से भेंट करने आए थे, तो अपने साथ चावल की एक पोटली लाए थे। इन चावलों को खाकर कृष्ण जी ने सुदामा की दरिद्रता को दूर किया था। इस वजह से आप भी यहां पर चावल दान करने की परंपरा है। मान्यता है कि यहां पर चावलों का दान करने से जातक कई जन्मों तक गरीब नहीं होता है।सांवलिया सेठ मंदिरभगवान कृष्ण को समर्पित यह मंदिर काफी फेमस है। यहां वह व्यापारी भगवान को अपना बिजनेस पार्टनर बनाने के लिए आते हैं। जिनको व्यापार में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा होता है। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित इस मंदिर का संबंध मीराबाई से बताया जाता है। मीरा के गिरधर गोपाल को बिजनेस पार्टनर होने के कारण सांवलिया सेठ के नाम से भी जाना जाता है। यह सांवलिया सेठ ही मीराबाई के गिरधर गोपाल हैं।गुरु वायूर मंदिरपीएम नरेंद्र मोदी फिर सत्ता में आने के बाद सबसे पहले 8 जून को को यहां गुरु वायूर मंदिर में दर्शन के लिए आए थे। केरल के इस मंदिर का संबंध गुजरात से माना जाता है। गुरु वायूर मंदिर में श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा होती है। वहीं मंदिर में विष्णु भगवान के 10 अवतारों को भी दिखाया गया है। गुरु वायूर मंदिर को दक्षिण की द्वारका और भूलोक के बैकुंठ के नाम से भी जाना जाता है। दिन में दो बार मंदिर में भक्तों के लिए फ्री में भंडारे की व्यवस्था है। वहीं यहां पर एकादशी का पर्व शिवेली बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस मंदिर का नाम पवनदेव वायु, देवताओं के गुरु बृहस्पति और ऊर यानी पृथ्वी के नाम से मिलकर बना है।भालका तीर्थसोमनाथ में स्थित भालका तीर्थ वह जगह है, जहां पर पेड़ के नीचे ध्यान मग्न बैठे भगवान श्रीकृष्ण को शिकारी द्वारा हिरण के भ्रम में तीर मार दिया गया था। भालका तीर्थ वहीं स्थान है, जहां पर श्रीकृष्ण ने पृथ्वी को छोड़ दिया था और वह स्वर्ग चले गए थे। इस जगह को कपिला, हीरान और सरस्वती नदी का संगम कहा जाता है। श्रीकृष्ण के साथ ही उस बरगद के पेड़ को यह मंदिर समर्पित है। ]]></description>
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<title>Vrindavan Shaktipeeth: मां Katyayani Temple का पौराणिक इतिहास और महारास से जुड़ा दिव्य रहस्य</title>
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<description><![CDATA[ वृंदावन की पावन धरती मां कात्यायनी का शक्तिपीठ मंदिर है। यह मंदिर आस्था और प्रेम का बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां पर स्वयं देवी राधा और गोपियों ने तपस्या की थी। वृंदावन का नाम आते ही मन में सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण की छवि उभर आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्रज भूमि की रक्षा और यहां की अधिष्ठात्री देवी मां कात्यायनी हैं। वृंदावन के राधा बाग इलाके में स्थित मां कात्यायनी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है।धार्मिक मान्यता के मुताबिक जब भगवान श्रीहरि विष्णु ने अपनी सुदर्शन चक्र से मां सती के शरीर के टुकड़े किए थे, तो देवी सती के केश यानी बाल इस स्थान पर गिरे थे। जिस कारण इसको उमा शक्तिपीठ भी कहा जाता है।इसे भी पढ़ें: Famous Krishna Temple: Puri Jagannath से Bhalka Tirth तक, जानिए श्रीकृष्ण के चमत्कारी Temples का रहस्यमंदिर का निर्माणइस मंदिर के निर्माण का इतिहास भी किसी चमत्कार से कम नहीं है। साल 1923 में स्वामी केशवानंद महाराज द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। स्वामी जी ने 33 सालों तक हिमालय की कंदराओं में कठिन तपस्या की थी। इस दौरान उनको एक दिव्य दृष्टि मिली, जिसमें उनको वृंदावन में इस लुप्त शक्तिपीठ को ढूंढने और मंदिर को स्थापित करने का आदेश मिला। स्वामी केशवानंद ने अपने योगबल से इस स्थान को पहचाना था। आज के समय में यह मंदिर भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र है।मंदिर की बनावट और मां की अष्टधातु की प्रतिमायह मंदिर सफेद संगमरमर से बना है, जोकि देखने में काफी भव्य लगता है। मंदिर के मुख्य द्वार पर दो सुनहरे शेर खड़े हैं, जोकि मां की शक्ति का एहसास कराते हैं। मंदिर के गर्भगृह में मां कात्यायनी की अष्टधातु की विशाल प्रतिमा है और मां की चार भुजाएं हैं। दाहिनी भुजाओं में वर और अभय मुद्रा है। वहीं बाईं भुजाओं में कमल का पुष्प और तलवार है। मां कात्यायनी के अलावा यहां पर भगवान विष्णु, भोलेनाथ, गणेश जी और सूर्य देव की मूर्तियां भी हैं। जोकि इस मंदिर को पूर्ण पंचदेव मंदिर बनाती हैं।श्रीकृष्ण ने गोपियों के लिए रचाया &#039;महारास&#039;इस मंदिर का संबंध द्वापर युग और भगवान श्रीकृष्ण से है। श्रीमद्भागवत पुराण के मुताबिक वृंदावन की गोपियों श्रीकृष्ण को अपने पति के रूप में पाना चाहती थीं। इसलिए लिए गोपियों ने पूरे कार्तिक माह यमुना नदी के किनारे मां कात्यायनी की बालू से मूर्ति बनाकर पूजा-अर्चना की थी।गोपियों की भक्ति से प्रसन्न होकर मां कात्यायनी ने उनको वरदान दिया। इस वरदान के चलते शरद पूर्णिमा की रात श्रीकृष्ण ने 16,108 रूप धारण किए थे। वहीं हर गोपी के साथ रास रचाया था। धार्मिक मान्यता है कि जो भी कुंवारे युवक-युवतियां यहां आकर मां के दर्शन करते हैं, उनके विवाह में आने वाली परेशानी दूर होती है। ]]></description>
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<title>Janmashtami Festival पर जानें क्यों &amp;apos;Krishna&amp;apos; से पहले &amp;apos;Radha&amp;apos; का नाम लेना माना जाता है बेहद शुभ</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी 4 सितंबर को देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। इस दिन भक्त श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबे रहते हैं, हालांकि कान्हा का स्मरण राधा रानी का नाम लिए बिना पूरा नहीं माना जाता है। कई बार आपने लोगों के मुंह से सुना होगा,  &#039;राधे-कृष्ण&#039;, &#039;राधे-राधे&#039; या &#039;राधा-कृष्ण&#039;। क्या आप जानते हैं कि भगवान कृष्ण का नाम लेने से पहले राधा का नाम क्यों लिया जाता है? इसके पीछे कई धार्मिक मान्यताएं और अद्भुत रहस्य छिपा है। आइए आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं।राधा नाम से प्रसन्न होते हैं श्रीकृष्णधार्मिक ग्रंथों में भगवान श्रीकृष्ण राधा रानी का नाम लेने से प्रसन्न होते हैं और हमेशा भक्तों पर कृपा बरसाते है। श्रीकृष्ण ने स्वंय राधा को अपनी आत्म बताया है और कहा कि राधा उन्हीं में वास करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राधा रानी को भगवान श्रीकृष्ण की शक्ति माना जाता है। जैसा कि सूर्य और उसकी किरणें कभी अलग नहीं होती है, वैसे ही राधा और कृष्ण भी एक-दूसरे के पूरक माने जाते है। राधा-कृष्ण का प्रेम साधारण नहीं है, बल्कि दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। माना जाता है कि जब भी कोई साधक राधा नाम जपता है, तो उसे श्रीकृष्ण की कृपा जरुर प्राप्त होती है।राधा नाम में छिपा है प्रेम और भक्ति का भाव असल में राधा-कृष्ण की कथा में राधा को निष्काम और पूर्ण प्रेम का प्रतीक माना गया है। उनका प्रेम किसी सांससारिक अपेक्षा से जुड़ा नहीं था, इसी कारण से कृष्ण भक्ति में राधा नाम को विशेष महत्व दिया है।राधा की कृपा से ही मिलते हैं कृष्णधार्मिक मान्यता के अनुसार, राधा रानी भगवान कृष्ण की सबसे प्रिय हैं। जो साधक राधा नाम का स्मरण करता है, उस पर राधा-रानी की विशेष कृपा रहती है और इनके माध्यम से श्रीकृष्ण आपकी इच्छाओं को पूरा करते हैं। कई धार्मिक कथाओं में इस बात का भी वर्णन किया है कि श्रीकृष्ण ने राधा रानी को स्वंय ये वरदान दिया है कि उनका नाम हमेशा कृष्ण से पहले लिया जाता है।जो भक्त राधा रानी की भक्ति करेगा, वो उसकी पुकार सबसे पहले सुनेंगे। इस भाव के कारण वृंदावन और बरसाना की गलियों में आज भी श्रद्धालु अभिवादन के तौर पर &#039;राधे-राधे&#039; कहते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 04:29:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 03 September 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष क्रोध और परेशानी आपके लिए है। आपकी निर्भीकता समस्या खड़ी करेगी। उधार दिया हुआ धन वापस आएगा। व्यक्तित्व में निखार, अनायास काम बनेंगे।वृषप्रयत्नों का सुपरिणाम मिलेगा। रिश्वत का लेन-देन संभव है। संघर्ष भी व्यर्थ जा सकता है। आप सही दिशा में आगे की ओर बढ़ रहे हैं।मिथुनपरिवार सहित कहीं यात्रा पर जाएंगे। अनिश्चित परिस्थितियां, अपमान भी संभव। मित्र मिलन का दिन है- संबंध सुधरेंगे। उत्साह का संचार होगा, वायदा पूरा करेंगे।कर्कअच्छा दिन है- जरूरी काम पूरे होंगे। सुख और शांति से दिन बीतेगा। आप आकर्षण के केंद्र बिंदु रहेंगे। बिगड़े हुए संबंध सुधर सकते हैं।सिंहपारिवारिक सहमति से प्रेम विवाह प्रस्ताव आगे बढ़ेगा। रिश्तों के बंधन मजबूत होंगे। कार्य क्षमता का विकास, विशेष निर्णय भी। अधूरा इलाज न छोड़े, अन्यथा हानि।कन्यारिश्तेदारों और मित्रों से निकटता बनेगी। नौकरी में पदोन्नति और धन लाभ। विशेष समारोह में स्वागत एवं आतिथ्य। पारिवारिक सामाजिक संदर्भ ठोस निर्णय लेंगे।तुलाविशेष प्रशिक्षण के लिए जा सकते हैं। क्रोध और वाणी दोनों को काबू में रखें। विदेशों से आयात-निर्यात करने पर लाभ उठाएंगे। अनेक समस्याओं और चिंताओं का अंत।वृश्चिक घर और कार्यालय बदलने के संकेत। छोटी सी बात बडा हंगामा खड़ा करेगी। असफल प्रेम संबंध निराशा और बेचैनी। न्यायालय के मामलों में चिंता रहेगी।धनुयथा समय कार्य पूरे होने पर प्रसन्नता। यात्रा भी संभव है। सर्वत्र स्वयं को व्यस्त पाएंगे, थकेंगे भी। आर्थिक गतिविधियों में संलिप्तता रहेगी।मकर पारिवारिक चिंताएं घेरे रहेगी। सुनियोजित ढंग से काम करें। स्वयं की गलती से व्यावसायिक हानि। कटु वचन रिश्तों में दरार डाल सकते हैं।कुंभअपने रहस्य प्रकट न करें। परेशानी के समय अधिक संयम बरतें। विवेकपूर्ण निर्णय से धन बढ़ेगा। परिस्थितियां सुधर रही है।मीनकठिन कार्य की पूर्ति से प्रशंसा मिलेगी। आत्मावलोकन एवं सुनियोजित संचालन लाभप्रद। आर्थिक उन्नति की ओर विशेष कदम। यथा समय कार्य पूरे होने पर प्रसन्नता। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 09:23:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 02 September 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष खर्चों की अधिकता परिवार की चिंता। अकारण शत्रु पैदा होंगे, अनावश्यक विवाद भी। अदालती मामलों में विजय मिलेगी। विद्यार्थी/शोध छात्रों को विशेष लाभ।वृषपरमार्थ के कामों में रूचि बढ़ेगी। समाज में कीर्ति बढ़ेगी। उत्तरदायित्व बढ़ेंगे, उपकार भी करेंगे। रिश्वत का लेन-देन संभव है।मिथुनपारिवारिक संपत्ति से लाभ। धन संबंधी मामले में चिंतन बना रहेगा। अंधविश्वास और भरोसे से हानि होगी। विवाद बढ़ सकते हैं विशेषकर परिवार में।कर्कआपसी सहमति से विवाद सुलझेगा। कुछ घरेलू कारणों से मानसिक तनाव रहेगा। वृद्धजनों के प्रति सेवा और दया भाव रखें। आध्यात्मिक क्षेत्र में उन्नति के विशेष योग।सिंहकाम की अधिकता से थकावट। बड़ों का स्वास्थ्य नरम, रूकावटें भी अधिक है। हठ छोड़ें- पारिवारिक जीवन और प्रेम संबंधों में सफलता। सभी कार्य सरलता से पूरे होंगे।कन्यासरकारी क्षेत्र में रूके हुए काम आज बनेंगे। सार्वजनिक सम्मान से प्रसन्नता। ससुराल पक्ष से लाभ होगा। आत्मबल उत्तम रहेगा- मानसिक संतोष भी।तुलादीर्घकाल से अटका हुआ काम बनेगा। स्वास्थ्य गड़बड़ और सम्मान खतरे में। नए निवेश के साथ व्यवसाय का विस्तार। अपने भी परायों सा अजीब व्यवहार करेंगे।वृश्चिक अपनी क्षमता से ही समस्याओं का निपटारा। सभी के कल्याण की योजनाओं के आगे बढाएगें। सामाजिक कार्यों को समर्पित दिन है। आर्थिक दृष्टि से उत्तम दिन है।धनुपिछले पूंजी निवेश का उत्तम लाभ मिलेगा। काम अधूरे रहने के कारण पश्चाताप। आशा निराशा के झूले में रहेंगे। पैरों पर चोट लगने/कष्ट लेने के योग।मकर योजनाओं में आप सफल रहेंगे। बच्चों के भविष्य के प्रति चिंतित रहेंगे। मांगलिक एवं सार्वजनिक कार्यों में खर्च। व्यवसाय में लाभ, नौकरी में उन्नति।कुंभआपका उदार व्यवहार प्रभावशाली सिद्ध होगा। हर दृष्टि से सतर्क रहें, धोखे का योग है। अनेक संभावनाएं एवं सफलताएं। नई परियोजना का श्रीगणेश।मीनहाथ आया अवसर/धन फिसल सकता है। परिवार में प्रसन्नता से दिन बीतेगा। खतरों से खेलना हानिकर सिद्ध होगा। अपने दम पर ही कुछ नया कर दिखाएंगे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 21:03:00 +0530</pubDate>
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<title>Banke Bihari Temple Mangla Aarti: जन्माष्टमी पर रात 1:45 बजे होंगे दर्शन, High Power Committee ने जारी किए Passes</title>
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<description><![CDATA[ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का बेहद नजदीक आ चुकी है। कान्हा के जन्मोत्सव के लिए लोग बड़े बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वहीं, मथुरा-वृंदावन में ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में भगवान श्री कृष्ण के जन्म के बाद होने वाली मंगला आरती को लेकर तैयारियां शुरु हो गई हैं। इस बार 4 और 5 सितंबर की मध्यरात्रि रात 1:45 बजे  मंगला आरती होगी। गौरतलब है कि इस विशेष आरती के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालुओं के वृंदावन पहुंचने की उम्मीद है। मंदिर समिति के अनुसार, इस बार भी मंदिर में सिर्फ 600 श्रद्धालुओं को ही प्रवेश दिया जाएगा। इससे संबंधित हाई पावर कमेटी की तरफ से पास जारी किए जाएंगे।  सुबह करीब 5:30 बजे मंदिर के पट बंद किए जाएंगे  जब मंगला आरती संपन्न हो जाएगी तो आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर में दर्शन खोल दिए जाएंगे। ठाकुर बांके बिहारी जी पूरी रात भक्तों को दर्शन देंगे। सुबह करीब 5.30 बजे मंदिर के पट बंद किए जाएंगे। फिर नियमित समय-सारिणी के अनुसार मंदिर में दर्शन होंगे। जन्माष्टमी के मौके पर वृंदावन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है।बैठक में सेवायतों ने पिछली मंगला आरती के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया है। सेवायतों ने बताया कि पिछली बार मंदिर के अंदर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी नजर आएं थे। इस कारण आरती के समय पुलिसकर्मियों की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बन गया था।व्यवस्था में बदलाव होगामंदिर के हाई पावर कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि इस बार व्यवस्था में कुछ बदलाव किया जाएगा। मंदिर के अंदर पुलिसकर्मियों और सुरक्षा में तैनात सिक्योरिटी गार्ड की संख्या सीमित रखी जाएगी। जरुरत के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए मंदिर परिसर में विशेष निगरानी रखी जाएगी। बैठक में मुख्यमंत्री के आगमन पर मंदिर की व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की गई। इस दौरान कमेटी के सदस्य सेवानिवृत जिला जज मुकेश मिश्रा, सेवायत हिमांशु गोस्वामी, रजत गोस्वामी, शैलेंद्र गोस्वामी, शैंकी गोस्वामी और मंदिर प्रबंधक मुनीश शर्मा आदि मौजूद रहे।सेवायत और यजमान भी पास से कर सकेंगे प्रवेशजन्माष्टमी के मौके पर मंगला आरती की व्यवस्था को लेकर हुई हाईपावर्ड कमेटी की बैठक में प्रवेश व्यवस्था पर विशेष चर्चा हुई। तय किया गया कि मंगला आरती में शामिल होने वालों को कमेटी की तरफ से पास जारी किए जाएंगे। इसमें मंदिर के सेवायतों के साथ उनके यजमान भी शामिल रहेंगे। बिना पास के किसी भी मंगला आरती के दौरान मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। वहीं, मंगला आरती की कवरेज के लिए मंदिर पहुंचने वाले मीडिया कर्मियों के लिए भी पास की व्यवस्था लागू रहेगी।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 21:02:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Banke, Bihari, Temple, Mangla, Aarti:, जन्माष्टमी, पर, रात, 1:45, बजे, होंगे, दर्शन, High, Power, Committee, ने, जारी, किए, Passes</media:keywords>
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<title>Love Horoscope For 2 September 2026 | आज का प्रेम राशिफल 2 सितंबर  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 2 सितंबर 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं। यहाँ बिना किसी सिंबल के आज का सभी 12 राशियों का लव राशिफल दिया गया है:आज का लव राशिफलमेष: पार्टनर के साथ आपसी समझ और उत्साह बढ़ेगा। साथ में कुछ फुर्सत के पल बिताने का मौका मिलेगा। सिंगल लोगों को किसी खास व्यक्ति से जुड़ने का इशारा मिल सकता है।वृषभ: रिश्ते में ठहराव और मिठास रहेगी। पुरानी बातों को दरकिनार कर केवल सकारात्मक पहलुओं पर ध्यान दें। संवाद में सौम्यता बनाए रखें।मिथुन: प्रेम जीवन में थोड़ा धैर्य बनाए रखने की जरूरत है। किसी छोटी बात को तूल न दें और खुलकर अपने विचार साझा करें।कर्क: साथी के साथ भावनात्मक जुड़ाव गहरा होगा। गलतफहमियां दूर होने से रिश्ते में नया भरोसा और मजबूती आएगी।सिंह: आपका आकर्षण और सकारात्मक रवैया पार्टनर का ध्यान खींचेगा। दांपत्य जीवन में बेहतर सामंजस्य और खुशहाली रहेगी।कन्या: भागदौड़ भरे दिन में भी पार्टनर के लिए समय जरूर निकालें। एक छोटा सा मैसेज या फोन कॉल रिश्ते में नयापन ला सकता है।तुला: प्रेम संबंधों में संतुलन बना रहेगा। पार्टनर के साथ अच्छा समय बीतेगा, बस दूसरों के परामर्श से परे अपने विवेक से काम लें।वृश्चिक: किसी भी बात को लेकर मन में शक या उलझन न रखें। आपस में सीधा और पारदर्शी संवाद आपकी बॉन्डिंग को मजबूत करेगा।धनु: प्रेम जीवन में एक नई ताजगी महसूस होगी। साथी की तरफ से कोई छोटा सा सरप्राइज या मीठी बात आपका दिन खास बना सकती है।मकर: रिश्ते में परिपक्वता और एक-दूसरे के प्रति सम्मान बढ़ेगा। व्यक्तिगत तनाव को अपने रिश्ते के आड़े न आने दें।कुंभ: अपनी बात और भावनाओं को जताने के लिए दिन अच्छा है। अचानक हुई कोई मुलाकात या बातचीत आपके मन को खुश कर देगी।मीन: साथी की देखभाल और उनका ध्यान रखने की आपकी आदत उनके दिल को छू लेगी। सिंगल लोगों के जीवन में किसी नए संबंध की शुरुआत हो सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 21:02:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Janmashtami Special: जानें Shri Krishna के श्रृंगार में शामिल 5 प्रमुख चीजों का Spiritual Significance</title>
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<description><![CDATA[ श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बेहद नजदीक आ चुका है। इस दिन साधक भगवान कृष्ण को श्रृंगार करते, प्रिय भोग बनाते हैं, मंदिर को सुंदर सजाते हैं, व्रत रखते हैं और भगवान की झांकी को सजाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का स्वरुप बेहद ही मनमोहक है। बांसुरी धारण किए, मोर मुकुट सजाए और अपनी लीलाओं से भक्तों का मन हरते भगवान कृष्ण को भक्त कई नामों से पुकारते हैं। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और इसी दिन से भक्त उनका जन्मोत्सव का बेहद धूमधाम से मनाते हैं। इस साल 4 सितंबर को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा। इस खास दिन पर भक्त घर के मंदिर में लड्डू गोपाल या श्री कृष्ण की प्रतिमा का श्रृंगार करते हैं। आइए आपको बताते हैं किन चीजों का खास महत्व है और किन चीजों के बिना उनके श्रृंगार को अधूरा माना जाता है।मोर मुकुटमान्यता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण के श्रृंगार में मोर मुकुट का खास महत्व माना जाता है। वैसे इसके पीछे कई धार्मिक कथाएं भी जुड़ी हैं, जो इस बात का भी प्रतीक है कि श्रीकृष्ण सभी जीवों से एक समान भाव से प्यार करते हैं।  धार्मिक मान्यता के अनुसार, मोरपंख को सुंदरता, सकारात्मकता और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। मोर पंख को राधा-रानी और श्री कृष्ण के सच्चे प्रेम के प्रतीक के रुप में भी देख सकते हैं।बांसुरीगौरतलब है कि बांसुरी सिर्फ श्रीकृष्ण के श्रृंगार का एक हिस्सा नहीं है, बल्कि उनके जीवन से बहुत खास तरीके से जुड़ी है। धार्मिक कथाओं में उनकी बांसुरी को मुरली, वेणु या वंशिका कहा गया है और बांसुरी बजाने की वजह से उन्हें मुरलीधर कहा जाता है। उनकी बांसुरी की मधुर धुन से संबंधित अनेक कथाएं और लोक परंपराओं में मिलती हैं। भक्तों के लिए बांसुरी प्रेम, मधुरता और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।वैजयंती मालाभगवान श्रीकृष्ण के गले में हमेशा वैजयंती माला सुशोभित रहती है और उनके श्रृंगार का मुख्य हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसके बिना श्रीकृष्ण का श्रृंगार और उनकी पूजा अधूरा मानी जाती है। वैसे यह माला भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को भी अति प्रिय है। पीतांबरयदि आप भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार कर रहे हैं, तो पीतांबर यानी पीले रंग के वस्त्र पहन सकते हैं। वैसे तो कन्हा जी को किसी भी रंग के कपड़े अर्पित कर सकते हैं, लेकिन ज्यादातर उन्हें पीतांबर, यानी पीले रंग वस्त्र धारण किए देखा जा सकता है। इसलिए उन्हें &#039;पीतांबरधारी&#039; भी कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में पीले रंग का ज्ञान, पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा से संबंधित माना जाता है।आभूषणश्रीकृष्ण के बाल गोपाल स्वरुप का श्रृंगार करते समय भक्तजन उन्हें मोर मुकुट और बांसुरी के साथ ही कुंडल, हार, बाजूबंद, कंगन, पायल और कमरबंध जैसे आभूषण भी पहनाते हैं। आप भी इन आभूषण को जरुर पहनाएं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 21:02:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Vastu Tips: घर में Radha Krishna Frame लगाने के सही Niyam, जानें सही Direction</title>
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<description><![CDATA[ राधा-कृष्ण को सौहार्द, प्रेम, भक्ति और आपसी समझ का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि बहुत से लोग अपने घरों में राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर रखते हैं। वास्तु शास्त्र में भी राधा-कृष्ण के स्वरूप को घर के लिए शुभ माना जाता है। लेकिन तस्वीर को लगाने की दिशा और स्थान को लेकर कुछ बातें बहुत प्रचलित हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि घर में राधा-कृष्ण की तस्वीर लगाने के वास्तु नियम क्या हैं।ईशान कोण है शुभ दिशावास्तु शास्त्र के मुताबिक राधा-कृष्ण की तस्वीर लगाने के लिए उत्तर पूर्व दिशा यानी की ईशान कोण को सबसे शुभ माना जाता है। इस दिशा को पूजा-पाठ और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए विशेष मानी जाती है।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 2 September 2026 | आज का प्रेम राशिफल 2 सितंबर  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनअगर घर में पूजा स्थान ईशान कोण में है, तो वहां पर राधा-कृष्ण की तस्वीर रखी जा सकती है। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में शांति, आध्यात्मिक और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।पूर्व दिशा में लगाएंअगर उत्तर-पूर्व दिशा में तस्वीर लगाना संभव नहीं है, तो पूर्व दिशा में राधा-कृष्ण की तस्वीर को लगाना चाहिए। वास्तु शास्त्र के मुताबिक पूर्व दिशा का संबंध प्रकाश और नई ऊर्जा से माना जाता है।ऐसी जगह पर राधा-कृष्ण की तस्वीर को लगाना चाहिए, जहां पर घर के सदस्य उनके आसानी से दर्शन कर सकें। वहीं आसपास का स्थान साफ होना चाहिए।बेडरूम में तस्वीर लगाने की क्या है मान्यताराधा-कृष्ण को प्रेम और आपसी समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस वजह से कुछ वास्तु मान्यताओं में बेडरूम में भी राधा-कृष्ण की तस्वीर लगाने की सलाह दी जाती है।मान्यता है कि बेडरूम की पश्चिम दिशा वाली दीवार पर इस तस्वीर को लगाने से पति-पत्नी के बीच प्रेम और आपसी समझ बढ़ती है। लेकिन इसको धार्मिक रूप से जरूरी नहीं माना जाना चाहिए।दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा में न लगाएंवास्तु के मुताबिक राधा-कृष्ण की तस्वीर को दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में नहीं लगाना चाहिए। कुछ धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इससे रिश्ते में निगेटिव असर हो सकता है। लेकिन इन बातों को वास्तु की मान्यताओं के रूप में देखना चाहिए।तस्वीर में राधा जीकुछ परंपराओं के मुताबिक चित्र में राधा जी को भगवान कृष्ण के बाएं ओर दिखाना शुभ माना जाता है। इसलिए तस्वीर खरीदते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए।तस्वीर को जमीन पर न रखेंराधा-कृष्ण की तस्वीर को सीधे जमीन या फर्श पर नहीं रखना चाहिए। इसको दीवार पर उचित ऊंचाई पर लगाना बेहतर है। तस्वीर को आंखों के स्तर के आसपास या इससे थोड़ी ऊंचाई पर हो, तो दर्शन करना काफी सहज होता है।साफ-सफाई का रखें विशेष ध्यानघर में जहां पर राधा-कृष्ण की तस्वीर लगी हो, वहां पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तस्वीर के आसपास धूल, कबाड़ या अनावश्यक सामान नहीं रखना चाहिए। पूजा या धार्मिक चित्रों के स्थान को साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 21:02:58 +0530</pubDate>
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<title>Krishna Janmashtami 2026: 4 सितंबर को मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, 15 साल बाद रोहणी नक्षत्र में मनेगा श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। इस दिन लोग व्रत रखकर और बिना व्रत के भी बड़े उल्लास के साथ भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं। इस बार 15 साल बाद जन्माष्टमी पर ऐसा विशेष संयोग बन रहा है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में मनाया जाएगा। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार जन्माष्टमी पर भी इसी तरह का संयोग बन रहा है। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्र कृष्ण अष्टमी तिथि, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र एवं वृष राशि में मध्य रात्रि में हुआ था। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस बार वर्ष 2026 में यह तिथि 3 सितंबर रात्रि 12:26 बजे शुरू होकर 4 सितंबर रात्रि 12:14 मिनट तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी का पर्व उस समय मनाना विशेष शुभ माना जाता है, जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में स्थित हो। इस साल रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत 3 सितंबर की रात 11:30 बजे होगी और यह 4 सितंबर की रात 12:14 बजे तक रहेगा। पंचांग की गणना के आधार पर कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। यह दिन श्रीकृष्ण को समर्पित होता है। जन्माष्टमी के इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-उपासना की जाती है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण के शरणागत रहने वाले जातकों को मृत्यु लोक में स्वर्ग समान सुखों की प्राप्ति होती है।ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि  शास्त्रों में इसका विशेष उल्लेख है। ’अर्द्धरात्रे तु रोहिण्यां यदा कृष्णाष्टमी भवेत्। तस्यामभ्यर्चनं शौरिहन्ति पापों त्रिजन्मजम्।’अर्थात अष्टमी तिथि, जन्म समय पर रोहिणी नक्षत्र और हर्षण योग में भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत एवं जन्मोत्सव मनाने वाले श्रद्धालुओं के तीन जन्म के पाप समूल नष्ट हो जाते हैं और ऐसा योग शत्रुओं का दमन करने वाला है। निर्णय सिंधु में भी एक श्लोक आता है-’त्रेतायां द्वापरे चैव राजन् कृतयुगे तथा। रोहिणी सहितं चेयं विद्वद्भि: समुपपोषिता।।’ अर्थात हे राजन्, त्रेता युग, द्वापर युग, सतयुग में रोहिणी नक्षत्र युक्त अष्टमी तिथि में ही विद्वानों ने श्री कृष्ण जन्माष्टमी का उपवास किया था इसीलिए कलयुग में भी इसी प्रकार उत्तम योग माना जाए। ऐसा योग विद्वानों और श्रद्धालुओं को अच्छी प्रकार से पोषित करने वाला योग होता है। शुभ मुहूर्तभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि पंचांग की गणना के अनुसार, इस बार जन्माष्टमी पर अबकी बार जन्मांतर के पापों का क्षय करने वाला जयंती योग बना है।अष्टमी तिथि का आरंभ:  3 सितंबर, रात्रि 12:26 मिनट परअष्टमी तिथि का समापन: 4 सितंबर, रात्रि 12:14 मिनट परधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी का पर्व उस समय मनाना विशेष शुभ माना जाता है, जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में स्थित हो। इस साल रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत 3 सितंबर की रात 11:30 बजे होगी और यह 4 सितंबर की रात 12:14 बजे तक रहेगा। पंचांग की गणना के आधार पर कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।इसे भी पढ़ें: Hal Shashthi 2026: संतान की खुशहाली के लिए माताएं रखेंगी व्रत, जानें पूजन के लिए सही Shubh Muhuratमध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र का संयोगभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि जन्माष्टमी की अर्धरात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का एक साथ होना विशेष फलदायी माना जाता है। कई वर्षों में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर वृष राशि में चंद्रमा तो रहता है, लेकिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बन पाता। इस बार सभी प्रमुख ज्योतिषीय तत्व एक साथ आ रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं में भी ऐसे संयोग में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।जन्माष्टमी का भोगभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि भगवान लड्डू गोपाल को माखन मिश्री का भोग बहुत पसंद है। इस वजह से जन्माष्टमी वाले दिन बाल श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाएं। इसके अलावा आप केसर वाला घेवर, पेड़ा, मखने की खीर, रबड़ी, मोहनभोग, रसगुल्ला, लड्डू आदि का भोग लगा सकते हैं।करें पूजाभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि जन्माष्टमी व्रत में अष्टमी के उपवास से पूजन और नवमी के पारण व्रत की पूर्ति होती है। इस व्रत के एक दिन पहले यानी सप्तमी के दिन हल्का और सात्विक भोजन ही करना चाहिए। व्रत वाले दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत होकर सभी देवताओं को नमस्कार करें। पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठ जाएं। हाथ में जल, फल और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें। मध्यान्ह के समय काले तिल का जल छिड़क कर देवकी जी के लिए प्रसूति गृह बनाएं। अब इस सूतिका गृह में सुंदर सा बिछौना बिछाकर उस पर कलश स्थापित करें। भगवान कृष्ण और माता देवकी जी की मूर्ति या सुंदर चित्र स्थापित करें। देवकी, वासुदेव, बलदेव, नन्द, यशोदा और लक्ष्मी जी का नाम लेते हुए विधिवत पूजन करें। यह व्रत रात 12 बजे के बाद ही खोला जाता है। इस व्रत में अनाज का उपयोग नहीं किया जाता। फलाहार के रूप में कुट्टू के आटे की पकौड़ी, मावे की बर्फी और सिंघाड़े के आटे का हलवा खा सकते हैं। व्रत करने से मिलेगी पाप-कष्टों से मिलती है मुक्तिभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि निर्णय सिंधु नामक ग्रंथ के अनुसार ऐसा संयोग जब जन्माष्टमी पर बनता है, तो इस खास मौके को ऐसे ही गवाना नहीं चाहिए। अगर आप इस तरह के संयोग में व्रत करते हैं तो 3 जन्मों के जाने-अनजाने हुए पापों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि इस तिथि और संयोग में भगवान कृष्ण का पूजन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। व्यक्ति को भगवत कृपा की प्राप्ति होती  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 21:02:55 +0530</pubDate>
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<title>Hal Shashthi 2026: संतान की खुशहाली के लिए माताएं रखेंगी व्रत, जानें पूजन के लिए सही Shubh Muhurat</title>
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<description><![CDATA[ हर साल भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हल षष्ठी का व्रत किया जाता है। इस बार 02 सितंबर 2026 को हल षष्ठी का व्रत किया जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। हल षष्ठी को चंदन षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं संतान की दीर्घायु, सुख और बेहतर सेहत के लिए व्रत करती हैं। महिलाएं इस दिन चंद्र देव को अर्घ्य दिया जाता है। तो आइए जानते हल षष्ठी की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...तिथि और मुहू्र्तवैदिक पंचांग के मुताबिक 02 सितंबर की सुबह 06:13 मिनट से भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरूआत होगी। वहीं इसी दिन मध्य रात्री के बाद यानी 3 सितंबर की सुबह 04:27 मिनट तक षष्ठी तिथि रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के मुताबिक 02 सितंबर 2026 को हल षष्ठी का व्रत किया जाएगा।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी उठकर महुए की दातून से दांत साफ करें और स्नान आदि करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें और पूजा स्थल पर गाय के गोबर से हल छठ माता, हल, सप्तऋषि, पशु और किसान से संबंधित चित्र बनाएं। एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर कलश स्थापित करें। फिर चौकी पर भगवान गणेश और मां पार्वती की प्रतिमा को स्थापित करें।फिर विधिविधान से पूजा-अर्चना करें और मिट्टी के कुल्हट में ज्वार की धानी और महुआ आदि रखें। वहीं मटकी में देवली-छेवली रखें। सबसे पहले हल छठ माता की पूजा करें, इसके बाद कुल्हड़ और मटकी की पूजा करें। इस पूजा में 7 तरह के अनाज, धूल के साथ भुना हुआ चना, आभूषण और हल्दी से रंगा हुआ वस्त्र अर्पित करें। परंपरा के मुताबिक भैंस के दूध से बने मक्खन से हवन करें। फिर हल छठ की कथा सुनें। पूजा के अंत में भगवान श्रीकृष्ण और बलराम की आरती करें।महत्वहरछठ का पर्व सिर्फ संतान की सुख-समृद्धि से जुड़ा पर्व नहीं बल्कि इस पर्व का संबंध ग्रामीण और कृषि जीवन से भी है। हल को भगवान बलराम का प्रमुख अस्त्र माना जाता है। इसलिए इस पर्व में हल और खेती से संबंधित वस्तुओं का विशेष महत्व माना जाता है। इस व्रत को करने से माताओं को संतान की अच्छी सेहत और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 02 Sep 2026 21:02:55 +0530</pubDate>
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<title>Famous Temple: देश के 10 Famous Krishna Temples जहां दर्शन मात्र से पूरी होती है भक्तों की हर मनोकामना</title>
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<description><![CDATA[ पूरे देश में भगवान श्रीकृष्ण के अनगिनत मंदिर हैं। जहां पर आपको हर समय भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलेगी। इनमें से कुछ मंदिर बेहद खास हैं। वहीं 04 सितंबर 2026 को पूरे देश में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस बार 04 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी का पर्व पड़ रहा है। ऐसे में अगर आप भी इस जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के कुछ बेहद खास मंदिरों के दर्शन करने के बारे में सोच रही हैं। तो यह आर्टिकल आपके लिए है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको भगवान श्रीकृष्ण के कुछ बेहद खास मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं।जगन्नाथ पुरी मंदिरधार्मिक पुराणों में जगन्नाथ पुरी को धरती का बैकुंठ बताया गया है। जगन्नाथ मंदिर की महिमा सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेश तक फैली है। पुरी में बना भगवान जगन्नाथ का मंदिर चार धामों में से एक है। यह मंदिर करीब 800 साल से ज्यादा पुराना है। इस मंदिर के शिखर पर लगा झंडा हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। वहीं जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चद्र भी है। इस सुदर्शन चक्र को आप किसी भी दिशा से खड़े होकर देखेंगे, आपको लगेगा कि चक्र का मुंह आपकी ओर है।प्रेम मंदिरवृंदावन का प्रेम मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। रात के समय भी यहां श्रद्धालुओं की भीड़ काफी ज्यादा होती है। प्रेम मंदिर की सजावट आकर्षण का केंद्र रहता है। रात के समय प्रेम मंदिर रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाता रहता है। वहीं रोशनी का रंग हमेशा बदलता रहता है।इस्कॉन मंदिरवृंदावन का इस्कॉन मंदिर भी बेहद फेमस है। इस मंदिर में राधा-कृष्ण की बेहद मनोहारी प्रतिमा है। जो भी इनकी प्रतिमा को देखता है, वह मंत्रमुग्ध हो जाता है। यह मंदिर कृष्ण-बलराम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। साल 1975 में इस मंदिर को बनाया गया था। वृंदावन के इस्कॉन मंदिर में श्रद्धालु झूमते-गाते हुए प्रभु की भक्ति और आराधना करते हैं। इस मंदिर में दर्शन के लिए विदेशी श्रद्धालु भी भारी तादात में आते हैं।द्वारकाधीश मंदिरमथुरा के द्वारकाधीश मंदिर की आरती विशेष होती है। द्वारकाधीश मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की सुंदर मूर्ति विराजमान है। मथुरा में पावन यमुना नदी पर कई घाट बने है। भक्त इन घाटों पर पूजा-आराधना करते हैं। साथ ही लोग नौका विहार का भी आनंद उठाते हैं।श्रीनाथ जी मंदिरयह मंदिर राजस्थान के नाथद्वारा में है। श्रीनाथ जी मंदिर अपनी मूर्तियों के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि इस मंदिर में मौजूद मूर्तियों को मेवाड़ के राजा गोवर्धन की पहाड़ियों से औरंगजेब से बचाकर लाए थे। श्रीनाथ जी मंदिर 12वीं शताब्दी में बनाया गया था। यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है।इस्कॉन मंदिरबैंगलोर का इस्कॉन मंदिर भारत के सबसे बड़े इस्कॉन मंदिर में शामिल है। यह मंदिर साल 1997 में बनवाया गया था। इस मंदिर के निर्माण का उद्देश्य देश में वैदिक और धार्मिक सभ्यताओं को बढ़ावा देने का था। वहीं बुजुर्ग और विकलांग लोगों के लिए यहां पर एलिवेटर भी लगा है।श्री रंछोद्रीजी महाराज मंदिरश्री रंछोद्रीजी महाराज मंदिर गुजरात के गोमती नदी के किनारे दकोर के मुख्य बाजार के बीचो-बीच है। 1772 में मंदिर की संरचना मराठा नोबेल द्वारा की गई थी। इस मंदिर में 8 गुंबद और 24 बुर्ज हैं। जोकि सोने से बनी हैं। इस मंदिर के साथ ही मां लक्ष्मी की भी मंदिर है, धार्मिक मान्यता है कि हर शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण लक्ष्मी मंदिर में मां लक्ष्मी से मिलने के लिए जाते हैं।अरुलमिगु श्री पार्थसारथी स्वामी मंदिरयह मंदिर 8वीं सदी में बनवाया गया था। अरुलमिगु श्री पार्थसारथी स्वामी मंदिर में भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। वहीं मंदिर में भगवान श्रीहरि विष्णु की कई तरह की मूर्तियां हैं। जोकि भक्तों को सबसे ज्यादा अपनी ओर आकर्षित करती है।बालकृष्ण मंदिरकर्नाटक के हंपी में स्थित बालकृष्ण मंदिर की संरचना बेहद अनोखे तरीके से की गई है। इस मंदिर को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया गया है। इस मंदिर में बालकृष्ण विराजमान हैं।उडुपी श्रीकृष्ण मठकर्नाटक शहर में भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक फेमस मंदिर है। 13वीं सदी में इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। इस मंदिर के पास एक तालाब मौजूद है, जिसके पानी में मंदिर का प्रतिबिंब दिखता है। भक्तों के लिए यह मंदिर बेहद पवित्र माना जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 17:18:34 +0530</pubDate>
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<title>Ank Jyotish 01 September: मूलांक 7 और 9 वालों के लिए Caution, जानें Horoscope अपडेट</title>
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<description><![CDATA[ सितंबर का महीना शुरु हो चुका है। आज है महीने का पहला दिन यानी 1 सितंबर, आज का दिन आपके लिए कैसा रहने वाला है, इसका संकेत आपके जन्मांक यानी के मूलांक से जान सकते हैं। 1 सितंबर को कुछ मूलांक जातकों के लिए करियर, नौकरी और कारोबार में तरक्की के नए अवसर मिलेंगे। कुछ लोगों को आर्थिक लाभ प्राप्त होने वाले हैं। प्रेम संबंध और पारिवारिक जीवन के लिहाज से भी दिन काफी अच्छा रहने वाला है। लेकिन कुछ लोगों का बेवजह खर्चा हो सकता है, हेल्थ और रिश्तों को लेकर सतर्क रहने की जरुरत है। आइए आपको बताते हैं 1 से 9 तक मूलांक वालों का दिन कैसा रहने वाला है।मूलांक 1मलूांक 1 वालों के लिए आज का दिन आर्थिक मामलों से संबंधित फैसले लेने के लिए बेहद खास माना जाता है। रोज की दिनचर्या में थोड़ा बदलाव करने की जरुरत है। कुछ नया करने से मन को ताजगी मिलेगी और शारीरिक व मानसिक थकान भी कम होगी। आप खुद को पहले से अधिक ऊर्जावन महससू करेंगे। शुभ अंक- 52 | शुभ रंग- सिल्वरमूलांक 2 आज उन लोगों से दूर बनाकर चलें, जिससे आपकी प्रतिष्ठा को नुकसान न पहुंचे या आपका कीमती समय व्यर्थ हो सकता है। आपकी भावुकता और दरियादिली का कोई पर्सन गलत फायदा हो सकता है। इसलिए किसी पर भरोसा करने से पहले उसके इरादों और परिस्थितियों को अच्छी तरह समझ लें। शुभ अंक- 22| शुभ रंग- ग्रेमूलांक 3बिजनेस से संबंधित गतिविधियां आज सामान्य गति से चलेंगी। वहीं, प्रोडक्शन में कमी आने के कारण थोड़ा तनाव हो सकता है। सरकारी नौकरी करने वाले जातक अपने काम में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। तय समय पर अपना टारगेट जरुर पूरा करें, वरना शिकायत की स्थिति बन जाएगी। शुभ अंक 12| शुभ रंग हरामूलांक 4मूलांक 4 वाले निजी और पेशेवर जीवन में संतुलन और आपसी तालमेल बना रहेगा। पार्टनरशिप से संबंधित रिश्तों में विश्वास और सहयोग बना रहेगा। किसी खास बातचीत या समझौते से आपको फायदा मिल सकता है। टीम के साथ मिलकर किए गए काम में अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे। शुभ अंक- 2| शुभ रंग- क्रीममूलांक 5पार्टनरशिप में बिजनेस करने वालों के लिए यह दिन बेहद खास है। नए सौदे और व्यापारिक अवसर प्राप्त होंगे। भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए समझदारी से फैसले लें। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ने से आगे नए रास्ते खुल जाएंगे। बैकिंग क्षेत्र से संबंधित लोगों के लिए दिन शुभ रहने वाला है। दरअसल, मीडिया और कम्यूनिकेशन से जुड़े लोगों को काम के लिए तारीफ मिल सकती है। शुभ अंक - 15| शुभ रंग- पीलामूलांक 6आज के दिन आपको कोई सुखद खबर या घटना आपका दिन को बेहतर बना देगी। भाग्य का पूरा साथ रहने वाला है। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं। दोस्तों का सहयोग मिलेगा और लंबे समय से अटेक काम भी पूरे होंगे। सरकारी मामलों में सफलता प्राप्त होगी, लेकिन अपने गु्स्से पर नियंत्रण जरुर रखें। शुभ अंक-3| शुभ रंग- गोल्डनमूलांक 7मूलांक 7 वालों को नौकरी में क्षमता के अनुसार जिम्मेदारी या काम मिल सकता है। व्यापार से संबंधित लोगों को यात्रा करनी पड़ सकती हैं। आज के दिन पेट से संबंधित पेरशानी या एलर्जी की समस्या परेशान कर सकती हैं, साथ ही आलस्य भी हावी रहेगा। प्रेम संबंधों में निराशा मिल सकती है, लेकिन शादीशुदा लोगों के बीच चल रही समस्याएं धीरे-धीरे दूर होने लगेंगी। शुभ अंक- 27| शुभ रंग- वॉइलेटमूलांक 8ग्रहों की स्थिति अनुकूल रहने वाली है और आपका सकारात्मक नजरिया आपको महत्वपूर्ण उपलब्धियां दिला सकता है। मिले हुए अवसरों का पूरा लाभ उठाने की कोशिश करें। अचानक किसी पुराने या करीबी दोस्त से मुलाकात हो सकती है। इस अवधि में किसी खास विषय पर बातचीत या महत्वपूर्ण विचार-विमर्श भी होने के योग है। शुभ अंक-14| शुभ रंग- लालमूलांक 9अचानक से आज प्रॉपर्टी या पैतृक संपत्ति से संबंधित किसी काम में अड़चन आने से तनाव बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में धैर्य बनाना बेहद जरुरी है और जल्दबाजी से बचना है। यदि किसी सरकारी मामले को लेकर परेशानी चल रही है, तो उसके समाधान के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ सकते हैं। संतान से जुड़ी किसी समस्या में आपका सहयोग काफी मददगार साबित होगा। शुभ अंक- 12| शुभ रंग- लेमन ]]></description>
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<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 15:05:00 +0530</pubDate>
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<title>Janmashtami 2026 Date to Puja Muhurat: 4 या 5 सितंबर? जानें सही Shubh Muhurat और तिथि</title>
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<description><![CDATA[ जन्माष्टमी का त्योहार नजदीक आ चुका है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भक्तजन हर्षोल्लास, भक्ति में लीन, धूमधाम से मनाते हैं। इस बार कुछ लोगों में दुविधा है कि इस बार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव किस दिन मनाया जाएगा। साधक 4 या 5 सितंबर को लेकर काफी कन्फ्यूज हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि जन्माष्टमी भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है और भगवान श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात को हुआ था। ऐसे में तिथि और रात के समय को देखकर सही दिन तय किया जाता है। इस बार अष्टमी तिथि 4 सितंबर से शुरु होकर 5 सितंबर की शुरुआत तक रहेगी। इसी कारण से दोनों तारीखों को लेकर उलझन होना तो नॉर्मल है। यदि आप ने अभी तक तय नहीं कर पाए हैं कि श्री कृष्ण का जन्मोत्सव किस दिन मनाना है या व्रत कब रखना है, तो इस लेख में आपको जानकारी बताएंगे।2026 में 4 या 5 सितंबर, कब है जन्माष्टमी?असल में श्री कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 शुक्रवार को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर को रात 2 बजकर 25 मिनट पर शुरु होगी और 5 सितंबर को रात 12 बजकर 12 मिनट तक रहेगी। इसका मतलब यह है कि 4 सितंबर को अष्टमी तिथि पूरे दिन रहने वाली है। इसी कारण से जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। रोहिणी नक्षत्र कबसे कब तक है?धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसी कारण से जन्माष्टमी पर रोहिणी  नक्षत्र बेहद खास माना जा रहा है। इस बार 4 सितंबर रोहिणी नक्षत्र रात 11 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। फिर मृगशिरा नक्षत्र शुरु होगा। वैसे जन्माष्टमी तिथि के लिए केवल नक्षत्र नहीं देखा जाता है। अष्टमी तिथि और आधी रात के जन्मोत्सव का समय भी जरुरी होता है। इस आधार पर 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।जन्माष्टमी पर कब होगा लड्डू गोपाल का जन्म?हिंदू धर्म में जन्माष्टमी की रात भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव आधी रात में मनाया जाता है। इस साल जन्माष्टमी का खास समय रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर 12 बजकर 43 मिनट रहने वाला है। इस दौरान घरों और मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होगा। इस दौरान लोग लड्डू गोपाल को नए कपड़े पहनाकर, उन्हें झूले में बैठाकर और पूजा करके जन्मोत्सव मना सकते हैं।जन्माष्टमी पर व्रत का पारण कब करें?इस बार आप जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले हैं, तो व्रत खोलने का समय भी जानना जरुरी है। इस साल जन्मोत्सव का समय रात 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। जो लोग रात के समय व्रत खोलते हैं, वो 12 बजकर 43 मिनट के बाद पारण कर सकते हैं। लेकिन कुछ घरों में जन्माष्टमी का व्रत सूर्योदय के बाद खोला जाता है। यह परंपरा मानने वाले 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद व्रत खोल सकते हैं। सुबह कब लें व्रत का संकल्प?यदि आप जन्माष्टमी का व्रत रखने वाली हैं, तो सुबह जल्दी उठाकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प ले सकते हैं। जन्माष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 30 मिनट से 5 बजकर 15 मिनट तक रहने वाला है। इस दौरान स्नान करके व्रत का संकल्प ले सकते हैं। जन्माष्टमी के दिन राहुकाल का समय क्या है? जन्माष्टमी यानी 4 सितंबर को राहुकाल सुबह 10 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भूलकर भी कोई शुभ कार्य नहीं करें, इस दौरान कोई भी काम बिल्कुल भी न करें।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 15:05:00 +0530</pubDate>
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<title>Surya Gochar 2026: सूर्य के राशि परिवर्तन से बदलेगा 3 राशियों का भाग्य, Career और Business में मिलेगा जबरदस्त लाभ</title>
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<description><![CDATA[ साल का 9वां महीना यानी की सितंबर की शुरूआत हो चुकी है। वहीं 17 सितंबर 2026 को सूर्य का महागोचर होने वाला है। सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। कन्या राशि सूर्य की मित्र राशि है, जिस कारण सूर्य का यह गोचर बेहद खास रहने वाला है। जिसके प्रभाव से 17 अक्तूबर 2026 तक कुछ राशियों को विशेष परिणाम मिलने की संभावना है। इस दौरान सभी क्षेत्रों में पॉजिटिव बदलाव देखने को मिल सकता है। तो आइए जानते हैं सूर्य के कन्या राशि में गोचर से किन राशियों को किस्मत का साथ मिलने वाला है।मेष राशिमेष राशि में सूर्य कुंडली में पंचम भाव के स्वामी होते हैं। वर्तमान समय में यह छठे स्थान पर गोचर होगा। ऐसे में मेष राशि के जातकों के करियर में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति मजबूत होगी। वहीं लंबे समय से अटके हुए काम धीरे-धीरे गति पकड़ेंगे। सेहत भी पहले की तुलना में काफी बेहतर रहने वाली है।कर्क राशिइस राशे के लोगों के लिए सूर्य कुंडली के धन भाव के स्वामी होकर तीसरे भाव में गोचर करने वाले हैं। कर्क राशि के जातकों का आत्मविश्वास बढ़ा रहेगा। घर या करियर के मामले में फैसले लेने की क्षमता शानदार रहेगी। नए लोगों से मुलाकात भविष्य में लाभ पहुंचा सकती है। नौकरी को लेकर पुरानी कोशिशों का अच्छा परिणाम मिलने के साथ धन लाभ के योग बन सकता है।धनु राशिधनु राशि के लिए सूर्य भाग्य भाव के स्वामी होकर दशम भाव यानी की कर्म भाव में गोचर करने वाले हैं। सूर्य का यह गोचर मेहनत का फल देने वाला रहेगा। बिजनेस में बड़ी सफलता मिल सकती है। कारोबारियों को नई डील मिलने के साथ बिजनेस में विस्तार के मौके मिलेंगे। आपका समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ सकती है। वहीं प्रेम जीवन को भी सही दिशा मिलेगी। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 15:05:00 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 01 September 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष अप्रिय घटना और ऐसा ही समाचार मिल सकता है। किसी खास आदमी से लाभदायक मुलाकात। सत्कार्यों में धन खर्च से यश मिलेगा। अनुकूल समय, सुख साधनों की प्राप्ति।वृषबाहरी लोग निजी जीवन में हस्तक्षेप कर सकते हैं। विवाह समारोह आदि शुभ कार्य में भाग लेंगे। खर्च कम करें, कर्ज की नौबत आ सकती है। परिस्थितियां सुधार की ओर बढ़ रही हैं।मिथुनकिसी विशेष समस्या का हल निकलेगा। संपत्ति खरीदने के योग बन रहे हैं। चाहकर भी कार्य न होने का दुःख होगा। उत्साह के साथ लक्ष्य की ओर बढ़ते रहेंगे।कर्कचंद्रमा लाभकारी और सुखदायक है। विपरीत लिंग द्वारा आरोप लगाया जाएगा। नौकरी में पदोन्नति और धन लाभ। आर्थिक समृद्धि के योग प्रबल है।सिंहअशुभ समाचार मिल सकता है। परेशानी के समय अधिक संयम बरतें। &#039;फिटनेस&#039; पर ज्यादा ध्यान रहेगा। नौकरी में लापरवाही मंहगी पड़ेगी।कन्याशुभ निमंत्रण एवं मांगलिक समाचार मिलेंगे। पारिवारिक सुख शांति और मित्र मिलन। प्रतिष्ठा और सम्पत्ति दोनों में वृद्धि। मानसिक स्थिति में सुधार, काम निबटेंगे।तुलापरिवार का वातावरण प्रतिकूल रहेगा। आगे बढ़ें- तीर निशाने पर ही लगेगा। किसी विशेष व्यक्ति से बोलचाल बंद होगी। ज्ञान अज्ञात कारणों से परेशान-वाहन सावधानी से चलाएं।वृश्चिक आध्यात्मिक कार्यों में रूचि और साधना भी। ज्ञान विज्ञान में रूचि बढ़ेगी। विवेक से काम लेंगे तो परिस्थिति सामान्य होगी। आपकी योग्यता और सलाह, अन्यों के लिए उपयोगी।धनुजरूरी काम पूरे होंगे-धन लाभ भी होगा। परिश्रम अधिक, लाभ कम। कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। किसी षड्यंत्र के शिकार हो सकते हैं।मकर अनावश्यक तनावग्रस्त रहेंगे। परिवार में कोई मांगलिक कार्य। ज्ञान विज्ञान में रूचि, वैसे शुभशुभ दिन। आर्थिक समृद्धि के योग प्रबल है।कुंभलोकप्रियता प्राप्त होगी। व्यावसायिक मामलों में ठोस निर्णय और सफलता। मध्यस्थ के रूप में सम्मान प्राप्त होगा। डूबा धन मिलेगा, उन्नति के अवसर भी।मीनबदनामी होने का डर बना रहेगा। नया काम शुरू होगा, नए पुराने मित्रों से लाभ। परिचय क्षेत्र में धन बढ़ेगा। किसी और की गलती की सजा आपको मिलेगी। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 08:11:13 +0530</pubDate>
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<title>Shani Gochar 2027: साल 2027 तक Shani Dev बरसाएंगे कृपा, इन राशियों को मिलेगा Bumper Wealth</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र में शनि का गोचर बेहद प्रभावशाली माना जाता है, क्योंकि यह करीब ढाई साल बाद राशि परिवर्तन करते हैं। धीमी गति से चलने वाले शनि लंबे समय तक अपना प्रभाव बनाए रखते हैं। इसी कारण से शनि की चाल का असर जातकों के जीवन में लंबे समय तक देखने को मिलता है। फिलहाल शनि देव मीन राशि में विराजमान हैं। माना जा रहा है कि, शनि 3 जून 2027 को मीन से निकालकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। शनि देव 3 जून 2027 को मीन से निकालकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। शनि के मेष राशि में जाते ही कई बडे़ बदलाव देखने को मिलेंगे। आइए आपको बताते हैं शनि के मेष राशि में गोचर करने तक किन राशियों को लाभ मिलने वाला है।वृषभ राशियह समय वृषभ राशि वालों के लिए समय खास रहने वाला है। आपके करियर को लेकर बनाई गई योजनाएं सफल होंगी। कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर प्राप्त होंगे। परिवार में किसी नए व्यक्ति के आने से घर का माहौल बदल जाएगा। इस दौरान आर्थिक मामलों में भी काफी लाभ प्राप्त होगा। विवाह के योग बनेंगे। आपकी कोई बड़ी मनोकामना पूर्ण होगी। कन्या राशिइस राशि के जातकों के लिए यह समय और भी नए मौके लेकर आएगा। इस अवधि में परिवार के साथ किसी बड़ी यात्रा पर जाने का अवसर मिल सकता है। करियर में बढ़ने के नए मौके प्राप्त होंगे और आपकी मेहनत को पहचान मिल सकती है। बिजनेस के लिए यह समय काफी अच्छा रहने वाला है। नए लोगों से संपर्क भविष्य में लाभ प्राप्त होगा। कला से संबंधित लोगों के काम की सरहाना होगी।मकर राशि करियर में मनचाही सफलता प्राप्त होगी। धन लाभ होगा और इस अवधि में मेहनत करने से अच्छे परिणाम मिलेंगे। आर्थिक स्थिति पहले के मुकाबले मजबूत होती है और आय के नए स्रोत बनने की संभावना है। परिवार की तरफ से आपको पूरा सहयोग प्राप्त होगा। किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता प्राप्त होगी।कुंभ राशि कुंभ राशि के लोगों को निवेश में मनचाह लाभ मिलेगा। काफी समय से रुके हुए कार्य पूरे होंगे और जरुरी काम में आपको सफलता प्राप्त होगी। बिजनेस में कोई अटकी हुई डील फाइनल हो सकती है, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी। आपके रुके हुए कार्य पूरे होंगे। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। आर्थिक स्थिति मजबूत करने के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 04:31:09 +0530</pubDate>
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<title>Kajari Teej 2026: क्यों कहलाती है यह Saturi Teej, जानें इस पावन Festival की पौराणिक पूजा विधि</title>
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<description><![CDATA[ भारतीय संस्कृति पर्वों और उत्सवों की संस्कृति है। प्रत्येक त्योहार अपने साथ धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परंपराओं का संदेश लेकर आता है। इन्हीं प्रमुख पर्वों में कजरी तीज का विशेष स्थान है। यह पर्व मुख्यतः उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ भागों में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य तथा अविवाहित कन्याओं के लिए मनोवांछित वर की प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है।कजरी तीज का महत्वकजरी तीज को सातूड़ी तीज या बूढ़ी तीज भी कहा जाता है। इस दिन महिलाएँ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि तथा परिवार के मंगल की कामना करती हैं। मान्यता है कि माता पार्वती ने कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। उसी तप, समर्पण और अटूट विश्वास की स्मृति में यह व्रत रखा जाता है।इसे भी पढ़ें: Kajari Teej Vrat: अखंड सौभाग्य का पर्व Kajari Teej आज, जानें Puja Vidhi और चंद्रोदय का समयपूजा-विधिकजरी तीज के दिन महिलाएँ प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लेती हैं। घरों और मंदिरों में भगवान शिव तथा माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। कई स्थानों पर मिट्टी से प्रतिमाएँ बनाकर उनकी आराधना की जाती है। पूजा में फल, फूल, दूर्वा, बेलपत्र तथा विशेष रूप से सत्तू का भोग लगाया जाता है। रात्रि में कथा-श्रवण और भजन-कीर्तन के साथ व्रत का समापन किया जाता है।लोकगीत और सांस्कृतिक परंपराकजरी तीज का सबसे आकर्षक पक्ष कजरी लोकगीत हैं। वर्षा ऋतु की मादकता, विरह, प्रेम और प्रकृति की सुंदरता का मनोहारी चित्रण इन गीतों में मिलता है। गाँवों में महिलाएँ समूह बनाकर झूले झूलती हैं और कजरी गीत गाती हैं। इन गीतों में लोकजीवन की भावनाएँ, पारिवारिक स्नेह और भारतीय संस्कृति की आत्मीयता झलकती है।कजरी तीज केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि परिवार और समाज को जोड़ने वाला उत्सव भी है। यह पर्व पति-पत्नी के पारस्परिक विश्वास, प्रेम और समर्पण को सुदृढ़ करता है। साथ ही महिलाओं को एक-दूसरे से मिलने, लोकगीतों और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने का अवसर प्रदान करता है। यह पर्व प्रकृति, वर्षा ऋतु और हरियाली के प्रति सम्मान का भी संदेश देता है।कजरी तीज भारतीय लोकजीवन की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह पर्व नारी की श्रद्धा, धैर्य, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों का उत्सव है। आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच भी कजरी तीज हमारी परंपराओं, लोककला और सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है।शुभा दुबे ]]></description>
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<pubDate>Tue, 01 Sep 2026 04:31:06 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 31 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष क्रोध और परेशानी आपके लिए है। आपकी निर्भीकता समस्या खड़ी करेगी। उधार दिया हुआ धन वापस आएगा। व्यक्तित्व में निखार, अनायास काम बनेंगे।वृषप्रयत्नों का सुपरिणाम मिलेगा। रिश्वत का लेन-देन संभव है। संघर्ष भी व्यर्थ जा सकता है। आप सही दिशा में आगे की ओर बढ़ रहे हैं।मिथुनपरिवार सहित कहीं यात्रा पर जाएंगे। अनिश्चित परिस्थितियां, अपमान भी संभव। मित्र मिलन का दिन है- संबंध सुधरेंगे। उत्साह का संचार होगा, वायदा पूरा करेंगे।कर्कअच्छा दिन है- जरूरी काम पूरे होंगे। सुख और शांति से दिन बीतेगा। आप आकर्षण के केंद्र बिंदु रहेंगे। बिगड़े हुए संबंध सुधर सकते हैं।सिंहपारिवारिक सहमति से प्रेम विवाह प्रस्ताव आगे बढ़ेगा। रिश्तों के बंधन मजबूत होंगे। कार्य क्षमता का विकास, विशेष निर्णय भी। अधूरा इलाज न छोड़े, अन्यथा हानि।कन्यारिश्तेदारों और मित्रों से निकटता बनेगी। नौकरी में पदोन्नति और धन लाभ। विशेष समारोह में स्वागत एवं आतिथ्य। पारिवारिक सामाजिक संदर्भ ठोस निर्णय लेंगे।तुलाविशेष प्रशिक्षण के लिए जा सकते हैं। क्रोध और वाणी दोनों को काबू में रखें। विदेशों से आयात-निर्यात करने पर लाभ उठाएंगे। अनेक समस्याओं और चिंताओं का अंत।वृश्चिक घर और कार्यालय बदलने के संकेत। छोटी सी बात बडा हंगामा खड़ा करेगी। असफल प्रेम संबंध निराशा और बेचैनी। न्यायालय के मामलों में चिंता रहेगी।धनुयथा समय कार्य पूरे होने पर प्रसन्नता। यात्रा भी संभव है। सर्वत्र स्वयं को व्यस्त पाएंगे, थकेंगे भी। आर्थिक गतिविधियों में संलिप्तता रहेगी।मकर पारिवारिक चिंताएं घेरे रहेगी। सुनियोजित ढंग से काम करें। स्वयं की गलती से व्यावसायिक हानि। कटु वचन रिश्तों में दरार डाल सकते हैं।कुंभअपने रहस्य प्रकट न करें। परेशानी के समय अधिक संयम बरतें। विवेकपूर्ण निर्णय से धन बढ़ेगा। परिस्थितियां सुधर रही है।मीनकठिन कार्य की पूर्ति से प्रशंसा मिलेगी। आत्मावलोकन एवं सुनियोजित संचालन लाभप्रद। आर्थिक उन्नति की ओर विशेष कदम। यथा समय कार्य पूरे होने पर प्रसन्नता। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 14:32:18 +0530</pubDate>
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<title>Rudraksha Benefits: पीरियड्स के दौरान रुद्राक्ष पहनने पर क्या कहते हैं शास्त्र? जानिए क्या है इसके पीछे की सच्चाई</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म और वैदिक ग्रंथों में रुद्राक्ष को बेहद पवित्र और शक्तिशाली माना गया है। भारत और दुनिया में कई लोग सदियों से रुद्राक्ष को धारण करते आ रहे हैं। हिंदू धर्म में रुद्राक्ष की मान्यता और भी खास इसलिए हो जाती है। क्योंकि इसको भगवान शिव से जुड़ा माना जाता है। शिव महापुराण के मुताबिक भगवान शिव के आंसुओं से रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई है।  इसको धारण करने से जातक के कर्म शुद्ध होते हैं और आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको रुद्राक्ष से जुड़े कुछ ऐसे मिथकों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको लेकर लोग असमंजस की स्थिति में रहते हैं।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 31 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 31 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनपीरियड्स के दौरान रुद्राक्ष उतारना सही है या नहींकई महिलाओं के मन में सवाल रहता है कि पीरियड्स के समय रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए। लेकिन इस बात में बिलकुल भी सच्चाई नहीं है। दरअसल, रुद्राक्ष एक बीज है, जिसकी एनर्जी नाजुक नहीं है। किसी भी धार्मिक शास्त्र में पीरियड्स के समय इसको न धारण करने के किसी भी नियम के बारे में नहीं बताया गया है। यह फैसला पूरी तरह से आप पर निर्भर करता है।अलग-अलग मुखी का रुद्राक्ष धारण करना अशुभसबसे पहले यह समझें कि हिंदू धर्म में रुद्राक्ष का आध्यात्मिक महत्व बेहद होता है। जिस कारण इसको धारण करना अशुभ नहीं माना जाता है। 5 मुखी और 7 मुखी रुद्राक्ष को एक साथ पहने से एक साथ मनके की एनर्जी काम करती है। न कि उसके खिलाफ। अलग-अलग मुखी रुद्राक्ष आपकी ऊर्जा को समर्थन करने के लिए है।साधु-संत और हिंदू ही धारण कर सकते हैं रुद्राक्षहिंदू धर्म के मुताबिक कोई भी व्यक्ति रुद्राक्ष को पहन सकता है। फिर चाहे उसका धर्म, जीवनशैली और लिंग कुछ भी हो। कई लोगों का मानना होता है कि सिर्फ साधु-संतों या कट्टर धार्मिक अनुयायी की मालाएं आदि पहन सकते हैं। जबकि रुद्राक्ष सार्वभौमिक आध्यात्मिक साधन है, जिसको कोई भी पहन सकता है।एक बार रुद्राक्ष पहनने के बाद कभी नहीं उतारेंजबकि सच्चाई यह है कि कई लोग नहाते समय, शारीरिक संबंध बनाते समय या शमशान घाट जाते समय रुद्राक्ष को उतार देते हैं। हालांकि ऐसा सम्मान के दृष्टिकोण से किया जाता है, न कि इससे रुद्राक्ष की एनर्जी कमजोर होती है। हिंदू धर्म में सम्मान का असल अर्थ पवित्र चीजों का सम्मान करना है। वहीं बार-बार इसको उतारने से रुद्राक्ष की ऊर्जा कम नहीं होती है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 14:32:17 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 31 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 31 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 31 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेषखामोशियों के पीछे छिपी आत्मीयता आज जुबां पर आएगी। पार्टनर के साथ हुई एक छोटी सी ईमानदार बातचीत पुराने सारे गिले-शिकवे धो देगी। जो लोग नए रिश्ते की राह देख रहे हैं, उन्हें आज किसी बेहद दिलचस्प शख्स का साथ मिल सकता है।वृषभआज का दिन थोड़ा ठहराव मांगता है। जज़्बात में आकर बोली गई बात रिश्ते में थोड़ी दूरी पैदा कर सकती है, इसलिए सब्र से काम लें। ढलती शाम के साथ गलतफहमियों की धुंध छटेगी और रोमांस वापस लौटेगा।मिथुनहवाओं में आज प्यार का खुमार रहेगा। आपका चुलबुला अंदाज़ साथी के चेहरे पर मुस्कान बिखेर देगा। किसी नए स्थान पर साथ बिताया गया वक्त आपके रिश्ते में एक नई, ताज़ा ऊर्जा भर देगा।कर्कअपने दिल के दरवाज़े खोलिए और जो सच है, उसे बिना किसी झिझक के बयां कर दीजिए। आपकी सादगी और निश्छल प्यार आज आपके पार्टनर को भावुक कर देगा। एक-दूसरे पर विश्वास और गहरा होगा।सिंहआपका जादुई व्यक्तित्व आज साथी को पूरी तरह अपनी ओर खींच लेगा। दांपत्य जीवन में रोमांस और समर्पण का अद्भुत संतुलन देखने को मिलेगा। साथ मिलकर लिया गया कोई फैसला भविष्य को और सुंदर बनाएगा।कन्याकाम की व्यस्तता शायद आपको थोड़ा दूर रखे, लेकिन प्यार दूरियों का मोहताज नहीं होता। एक छोटा सा आत्मीय संदेश या आपकी फिक्र जताता एक फोन कॉल भी पार्टनर का दिल जीतने के लिए काफी रहेगा।तुलारिश्ते में गज़ब का सामंजस्य और सुकून रहेगा। बिना कुछ कहे एक-दूसरे की आँखों की भाषा समझ लेना आज आपकी सबसे बड़ी खूबसूरती होगी। सिंगल जातकों के लिए आज कोई ख़ास प्रस्ताव आ सकता है।वृश्चिककिसी तीसरे इंसान के विचारों को अपने रिश्ते के बीच न आने दें। अपने साथी की नीयत और अपने प्यार पर भरोसा रखें। शाम होते-होते दूरियां मिटेंगी और आलिंगन में सुकून मिलेगा।धनुखुशियों का कोई अनपेक्षित तोहफा आज आपका इंतज़ार कर रहा है। पार्टनर का कोई सरप्राइज आपके दिन को खुशनुमा बना देगा। आज साथ गुज़ारे पल लंबे समय तक यादों के झरोखे में महकते रहेंगे।मकरदिखावे की दुनिया से दूर, आज का दिन सादगी भरे प्यार का है। पार्टनर की छोटी-छोटी ख़्वाहिशों का सम्मान करना आपको उनके और करीब ले जाएगा। रिश्ते में परिपक्वता और स्थायित्व आएगा।कुंभअगर दिल में छुपा कोई राज़ था, तो आज इज़हार-ए-मोहब्बत के लिए आसमान भी अपनी रज़ामंदी दे रहा है। शादीशुदा जोड़ों के बीच आज पुरानी यादें और गहरा नज़दीकी अहसास ताज़ा होगा।मीनआपकी संवेदनशीलता ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है। पार्टनर के मूड को भांपकर उन्हें मानसिक सुकून देना आज आपके रिश्ते को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। प्यार में एक ठहराव और शांति महसूस होगी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 14:32:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Weekly Horoscope Analysis: 31 अगस्त से 6 सितंबर तक किन राशियों को मिलेगा Property Profit और पैसा</title>
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<description><![CDATA[ यह सप्ताह कुछ राशियों के लिए बेहद अच्छा जाने वाला है। 31 अगस्त से 6 सितंबर तक पैसा, नौकरी, पढ़ाई और परिवार से संबंधित मुख्य बदलाव देखने को मिलेंगे। कुछ राशियों के लिए यह समय मिला-जुला रहने वाला है। कई राशियों को कारोबार में आमदानी बढ़ेगी। आइए आपको बताते हैं मेष से लेकर मीन राशि तक पूरा हफ्ता कैसा रहने वाला है।12 राशियों के लिए कुछ ऐसा रहेगा ये हफ्तामेष राशियह सप्ताह आपके लिए खास काम को करने की योजना सफल होगी। संतान की किसी उपलब्धि से आपको खुशियां और सुकून मिलेगा। दोस्तों और रिश्तेदारों से मुलाकात होगी। नेगेटिव तौर पर छोटी बातों पर विवाद हो सकता है। इसलिए अपनी भावनाओं को नियंत्रण जरुर करें। प्रॉपर्टी खरीदने का विचार कर रहे हैं, तो लेकिन यह समय आपके लिए सही नहीं है। धैर्य से काम लेना जरुरी है। निवेश करने से पहले एक बार अच्छे से जानकारी ले लें। लव-लाइफ बेहतर रहेगी और वैवाहिक जीवन भी सुखमय रहेगा। हेल्थ की बात करें तो खानपान हल्का और नियमित रखें। घर का सादा भोजन ज्यादा फायदेमंद रहने वाला है।वृषभ राशिपरिस्थितियों में काफी बदलाव देखने को मिलेगा। कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है। कुछ नया सीखने का समय होगा और आपका अनुभव कमाल रहेगा। जल्दबाजी में कोई फैसला न करें। प्रतिक्रिया देने से पहले एक बार अच्छे से सोचें। आपकी जिद के कारण तनाव भी बढ़ सकता है। बिजनेस में अतिरिक्त कमाई का कोई नया जरिया बन सकता है। कर्मचारियों के साथ अच्छा तालमेल बैठेगा। नौकरी करने वाले लोगों अपने कार्यों के तरीके जरुर बदलें। पति-पत्नि के बीच चलने वाले मतभेद दूर होंगे। हेल्थ में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। नियमित रुप से हल्की एक्सरसाइज करें।मिथुनआपके खास संपर्कों के कारण आपकी की गई कोशिश सफल हो सकती है। घर की जरुरत के लिए और सुख-सुविधा सें संबंधित चीजों को खरीद सकते हैं। विद्यार्थियों को पढ़ाई से संबंधित महत्वपूर्ण उपलब्धि मिल सकती है। ससुराल पक्ष के साथ चल रहा विवाद सुलझाने का मौका है। धन खर्चा हो सकता है, पैसों के मामले में बनाकर चलना जरुरी है। वर्क प्रेशर अधिक हो सकात है, कोई नया बिजनेस या कार्य करने के लिए यह समय सबसे बढ़िया है। पति-पत्नी  के बीच किसी गलतफहमी के चलते बहस हो सकती है। घर की निजी बातें बाहर जाने से समस्या और बढ़ सकती है। प्रेम संबंध बेहरीन रहेगा और पार्टनर के साथ अपनापन बना रहेगा। इस दौरान मानसिक थकान ज्यादा हो सकती है। खानपान पर विशेष ध्यान दें।कर्क राशियह समय दोस्तों से मिलने-जुलने के लिए सबसे बढ़िया है। विद्यार्थियों और युवाओं की कोई परेशानी सुलझ सकती है। जमीन में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो यह समय बढ़िया है। वहीं मुश्किल समय में धैर्य बनाने की जरुरत है। रिश्ते में अपनी तरफ से कोशिश करनी जरुरी है। कानूनी विवाद में पड़ने से परेशानी बढ़ सकती है। विद्यार्थियों को पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देने की जरुरत नहीं है। मेहनत करने से बिजनेस में काफी सुधार मिलेगा। नए तरीके अपनाने से फायदा होगा। नौकरी करने वाले काम का ज्यादा बोझ न लें। पति-पत्नी दोनों की व्यस्तता ज्यादा रहने से घर को कम समय दे पाएंगे। बच्चों की सहयोग से घर में माहौल अच्छा रहने वाला है। तनाव के कारण शारीरिक और मानसिक थकान महसूस हो सकती है। आराम करें और कुछ समय शांत रहे।सिंह राशिअचानक से रुका हुआ धन प्राप्त हो सकता है या कोई खास काम बन सकता है। इससे लंबे समय से चला आ रहा तनाव कम होगा। किसी करीबी से खराब हुए रिश्तों में सुधार आएगा। महत्वपूर्ण फैसले भावनाओं के बजाय वास्तविक स्थिति देखकर फायदा लेंगे तो आपको फायदा होगा। कुछ समय परेशनियां भी देखने को मिलेगी। किसी को भी अपनी निजी बातें शेयर न करें। जोखिम वाले कामों में पैसा लगाने से नुकसान हो सकता है। पति-पत्नी के बीच निजी मामलों को लेकर बहस हो सकती हैं। इसका असर घर के माहौल पर भी देखने को मिलेगा। प्रेम संबंध अच्छा रहेगा और पार्टनर के साथ नजदीकी बढ़ेंगी। सेहत ठीक रहेगी। महिलाओं को संक्रमण की परेशानी झेलनी पड़ सकती है, इसलिए डॉक्टर की सलाह लें।कन्या राशिसप्ताह की शुरुआत में कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है। योजना बनाकर काम करने से जिम्मेदारियां समय पर पूरी रहेंगी। नए संपर्क बनेंगे और उनसे आगे फायदा मिलेगा। किसी भी कार्य में लापरवाही करेंगे, तो नुकसान हो सकता है। अपनी समझ से फैसला लें, दूसरों की न सुनें। संतान से संबंधित किसी काम में रुकावट आने से परेशान रह सकते हैं। बिजनेस अच्छा चलेगा, फोन और ऑनलाइन के जरिए अच्छे ऑर्डर प्राप्त होंगे। अपना समय खराब न करें और मिले अवसर पर जल्दी काम करना शुरु करें। प्रोमोशन मिलने के चांस हैं। जीवनसाथी और परिवार का सहयोग मानसिक राहत प्रदान करेगा। लव-लाइफ में एक-दूसरे पर भरोसा बढ़ेगा और रिश्ता मजबूत होगा। तनाव के कारण पाचन पर असर पड़ेगा। खानपान को संतुलित बनाए रखें। एक्सरसाइज व योग करें। तुला इस हफ्ता निजी और सामाजिक गतिविधियों में बिजी रह सकते हैं। सामाजिक रुप से संपर्क बढ़ेंगे और उनसे नई उपलब्धियां प्राप्त होगी। किसी को उधार दिया पैसा वापस मिलेगा। आर्थिक मामले में राहत मिलेगी। यात्रा टालने से किसी परेशानी से बच सकते हैं। पुरानी बातों को वर्तमान में रिश्तों और काम पर हावी न होने दें। बिजनेस में कोई बड़ी जिम्मेदारी प्राप्त हो सकती है। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी। घर में किसी सदस्य की शादी को लेकर बातचीत शुरु होगी। प्रेम संबंधित परिस्थितियां आपके पक्ष में रहने वाली है। खानपान का ध्यान रखें, हल्की एक्सरसाइज और डॉक्टर की सलाह के मुताबिक दिनचर्या बनाए रखें।वृश्चिक राशिप्रॉपर्टी खरीदने-बिक्री से संबंधित काम आगे बढ़ेंगे। व्यवस्थित दिनचर्या के कारण काम समय पर पूरे होंगे। पैसों के निवेश से संबंधित मामलों पर ध्यान दें। परिवार के मामलों में ज्यादा दखल देने से तनाव झेलना पड़ सकता है। घर के किसी सदस्य की सेहत को लेकर चिंता हो सकती है। वर्कप्लेस पर परेशानियां हो सकती हैं। नौकरी करने वाले लोगों को ऊपर वर्क का बोझ  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 14:32:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Vastu Tips: Financial Growth के लिए Amitabh Bachchan ने घर में लगाया Running Bull, जानें वास्तु नियम</title>
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<description><![CDATA[ घर की दीवारों को सजाने के लिए लोग अक्सर तरह-तरह की पेंटिंग्स या मूर्ति आदि का इस्तेमाल करते हैं। कोई घर में दौड़ते हुए घोड़ों की पेंटिंग्स लगाना पसंद करते हैं। तो कुछ घर की दीवार पर उगते हुए सूर्य की छवि लगाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर में दौड़ते हुए बुल की पेंटिंग्स लगाने के क्या फायदे होते हैं। वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर में दौड़ते हुए बुल की पेटिंग्स लगाना काफी शुभ और फायदेमंद माना जाता है।वहीं बॉलीवुड इंडस्ट्री के शहंशाह अमिताभ बच्चन के घर पर भी इस तरह की पेंटिंग्स लगी हुई है। जिसकी फोटो सोशल मीडिया पर काफी लंबे समय से वायरल हो रही है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको घर में बिग बुल की पेंटिंग्स लगाने के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Rudraksha Benefits: पीरियड्स के दौरान रुद्राक्ष पहनने पर क्या कहते हैं शास्त्र? जानिए क्या है इसके पीछे की सच्चाईजानें बिग बुल की पेंटिंग्स लगाने के फायदेवास्तु शास्त्र के मुताबिक घर में बिग बुल की पेंटिंग्स या फिर प्रतिमा लगाने से घर में पॉजिटिव एनर्जी का प्रवाह बढ़ता है। साथ ही धन का प्रवाह भी अच्छा रहता है। बैल की मूर्ति या पेंटिंग लगाने के लिए सबसे अच्छी दिशा घर का साउथ ईस्ट डायरेक्शन माना जाता है। वहीं बैल को कभी भी खड़ी मुद्रा में नहीं लगाना चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।बैल की मूर्ति या पेंटिंग्स दौड़ती हुई मुद्रा में लगाना चाहिए। इससे आर्थिक संबंधों में तेजी आती है। घर में हमेशा पॉजिटिव एनर्जी का संचार रहता है और यह घर में रहने वाले लोगों के मूड पर भी अच्छा असर दिखाता है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में साउथ ईस्ट दिशा को फाईनेंनशियल कॉर्नर माना जाता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि बुल हमेशा आगे की तरफ मूवमेंट करता हो।जानिए महत्वभारतीय संस्कृति में सिर्फ बैल ही नहीं बल्कि सभी जानवर पूजा के योग्य माने जाते हैं। वहीं बैल का महत्व अधिक इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह महादेव के वाहन कहे जाने वाले नंदी का प्रतीक माना जाता है। भारतीय संस्कृति के मुताबिक नंदी बैल के कान में अपनी बात बोलने से मनोकामना पूरी होती है। इसलिए बुल की पेटिंग्स लगाने से घर की एनर्जी पर इसका अच्छा असर होता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 14:32:16 +0530</pubDate>
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<title>Kajari Teej Vrat: अखंड सौभाग्य का पर्व Kajari Teej आज, जानें Puja Vidhi और चंद्रोदय का समय</title>
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<description><![CDATA[ हर साल भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का व्रत रखा जाता है। इस बार आज यानी की 31 अगस्त 2026 को कजरी तीज का व्रत किया जा रहा है। इस व्रत को महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए करती हैं। यह व्रत भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पति होता है। इसलिए इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। वहीं कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की कामना से यह व्रत करती हैं। तो आइए जानते हैं कजरी तीज की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व आदि के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक 30 अगस्त की रात 09:39 मिनट से भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत होगी। वहीं इस तिथि की समाप्ति आज यानी की 31 अगस्त की रात 08:53 मिनट पर होगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर 31 अगस्त 2026 को कजरी तीज का व्रत किया जा रहा है।पूजा विधिइस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें। फिर पूजा का संकल्प लें और सूर्य देव को अर्घ्य दें। अब पूजा स्थल को साफ करें और भगवान शिव, मां पार्वती और नीमड़ी माता की प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बाद भगवान शिव को दूध, गंगाजल, दही और बेलपत्र आदि अर्पित करें। वहीं मां पार्वती को सिंदूर, कुमकुम, चूड़ी, बिंदी और श्रृंगार सामग्री अर्पित कर विधिविधान से पूजा करें। पूजा के बाद भगवान शिव और मां पार्वती की आरती करें और पूजा में हुई भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें।चंद्रमा को दे अर्घ्यकजरी तीज व्रत में भगवान शिव, मां पार्वती, नीमड़ी मां की पूजा करें। फिर चंद्र देव को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलें। चंद्रोदय होने पर एक लोटे में जल, दूध, अक्षत, रोली और फूल से अर्घ्य दें। वहीं इसके बाद एक ही जगह पर खड़े होकर चार बार परिक्रमा करें।महत्वविवाहित महिलाओं के लिए इस पर्व का विशेष महत्व होता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से दांपत्य जीवन सुखमय होता है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं सोलह श्रृंगार करके व्रत रखती हैं। यह व्रत सौभाग्य और समर्पण का प्रतीक है। कजरी तीज पर गीत-संगीत और लोक-नृत्य का विशेष महत्व होता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 14:32:12 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Kajari, Teej, Vrat:, अखंड, सौभाग्य, का, पर्व, Kajari, Teej, आज, जानें, Puja, Vidhi, और, चंद्रोदय, का, समय</media:keywords>
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<title>Bahula Chaturthi 2026: संतान की सुख&#45;समृद्धि के लिए इस दिन रखें व्रत, जानें Muhurat और पूजन विधि</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म में चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व होता है। हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की रक्षा, लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत करती हैं। इस दौरान भगवान गणेश और भगवान श्रीकृष्ण के साथ-साथ गौ माता की पूजा की जाती है। तो आइए जानते हैं बहुला चतुर्थी की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और धार्मिक महत्व आदि के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक 31 अगस्त को सुबह 08:52 मिनट पर भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरूआत होगी। इस तिथि की समाप्ति अगले दिन यानी की 01 सितंबर की सुबह 07:42 मिनट पर होगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर यह पर्व 31 अगस्त 2026 को किया जा रहा है।चंद्रोदय का समयबहुला चौथ पर भगवान गणेश और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन व्रत करने वाली महिलाएं शाम को चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। वैदिक पंचांग के मुताबिक बहुला चतुर्थी की शाम को रात 08:28 मिनट पर चंद्रोदय का समय है। व्रत करने वाली महिलाएं चंद्र देव के दर्शऩ और अर्घ्य देकर अपना व्रत पूर्ण करें।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान गणेश का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूरा दिन निराहार रहें और शाम को गाय और बछड़े की पूजा करें। पूजा के लिए तमाम तरह के पकवान आदि बनाए जाते हैं, जोकि भगवान गणेश और श्रीकृष्ण को भोग के रूप में अर्पित करते हैं। फिर इसको गाय और बछड़े को खिलाया जाता है। पूजा के बाद दाहिने हाथ में चावल के दाने लेकर बहुला चौथ की कथा सुननी चाहिए। वहीं कथा सुनने के बाद गाय और बछड़े की प्रदिक्षणा करें। साथ ही घर-परिवार में सुख-शांति और संतान की मंगलकामना के लिए प्रार्थना करें।महत्व हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि भगवान श्रीगणेश को समर्पित होती है। वहीं भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर भगवान गणेश और श्रीकृष्ण की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन व्रत करने से और पूजा-अर्चना करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। वहीं संतान के सुख में वृद्धि होती है और बाधाएं दूर होती हैं। इस दिन माताएं अपनी संतान की अच्छे सेहत और लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 14:32:11 +0530</pubDate>
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<title>Kajri Teej 2026: जानिए चंद्रमा को Arghya देने का धार्मिक महत्व और Marital Bliss के लिए पारंपरिक पूजा विधि</title>
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<description><![CDATA[ कल यानी 31 अगस्त 2026, सोमवार को कजरी तीज का व्रत रखा जाएगा। हिंदू धर्म में इस व्रत की खास महत्व है। कजरी तीज को कजली या सातुड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह बेहद ही खास पर्व है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और संतान की खुशहाली की कामना करती हैं और निर्जला व्रत रखती हैं। कजरी तीज व्रत में चंद्रदेव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने का विशेष महत्व बताया गया है।कजरी तीज पर चंद्रमा को अर्घ्य क्यों दिया जाता है?ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। चंद्रदेव शीतलता, सौंदर्य और भावनाओं से जुड़े माने जाते हैं। कजरी के दिन चंद्रमा की पूजा करने से मन को शांति और पॉजिटिव ऊर्जा प्राप्त होगी। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं। शाम के समय नीमड़ी माता की पूजा की जाती है और इसके बाद रात को चंद्रमा के दर्शन किए जाते हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।वैवाहिक जीवन में आती है मधुरतामाना जाता है कि कजरी तीज पर चंद्रदेव को जल अर्पित करने से दांपत्य जीवन में मधुरता बनीं रहती है। चंद्रमा मन और भावनाओं के कारण माने जाते हैं, इसलिए उनकी पूजा पति-पत्नी के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करने वाली मानी जाती है।धार्मिक मान्यता के अनुसार, चंद्रदेव की कृपा से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और दांपत्य जीवन से जुड़े तनाव कम होते हैं। इसी कारण से सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए चंद्रमा को अर्घ्य दें।जानें चंद्रमा को सही अर्घ्य देने की विधिकजरी तीज पर रात में चंद्रमा के दर्शन होने के बाद एक लोटे में साफ जल लें। इसमें थोड़ा कच्चा दूध, रोली, अक्षत और दूर्वा मिला लें। अब चंद्रमा की तरफ मुख करके श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें। अर्ध्य देते समय चंद्रदेव का ध्यान करें और अपनी मनोकामना कहें। फिर चंद्रमा के मंत्रों का जाप करें और पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि की प्रार्थना करें।  वैसे अलग-अलग जगहों पर इस व्रत को लेकर अलग ही रिवाज हैं। यदि आपके यहां चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है, तो ऊपर बताई हुई विधि का प्रयोग करें।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Aug 2026 19:26:42 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 30 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष चिंता परेशानी से भरा दिन। प्रयत्नों का सुपरिणाम मिलेगा। नई आर्थिक योजनाओं पर चर्चा होगी। किसी प्रतिभोज में शामिल होंगे।वृषस्वास्थ्य एवं परिस्थितियों में सुधार। विवेक और चतुराई से हानि भी लाभ में बदल जाएगी। अपनी कमी सुधारने का संकल्प लेंगे। कलह और वाद विवाद से परेशान रहेंगे।मिथुनचल अचल सम्पत्ति के प्राप्ति के योग। व्यापारी बड़ा सौदा कर सकते हैं। विद्यार्थियों की मनोकामनाएं पूरी होगी। आज के प्रयास भविष्य के लिए नींव बनेंगे।कर्कबना बनाया काम बिगड़ने से निराशा होगी। कर्मक्षेत्र में लाभ, उच्च सम्पर्क, परिवार में मतभेद। समाज में कीर्ति बढ़ेगी। मानसिक स्थिति में सुधार, काम निबटेंगे।सिंहघर और दफ्तर में स्थिति सामान्य रहेगी। नए सम्पर्कों से भविष्य में लाभ होगा। कठिनाइयों से घिरे रहेंगे। अपराहन में यात्रा के योग है।कन्याबुरा समय टल जाएगा, प्रयत्न सफल होगा। रूकावटें दूर होंगी, उन्नति का रास्ता साफ। बहुत अच्छा दिन, लाभ ही लाभ। कार्य की अधिकता लेकिन उसी अनुपात में लाभ भी।तुलापूंजी निवेश करने से बचें। दुविधाग्रस्त रहेंगे। पारिवारिक चिंताएं घेरे रहेगी। विदेश यात्रा और वीजा की चिंता। गुप्त चिंताओं से मुक्ति मिलेगी।वृश्चिक धैर्य से काम लें, समस्या दूर होगी। क्रोध और वाणी दोनों को काबू में रखें। घर पर सपरिवार सानंद समय बीतेगा। दिन आपके लिए वरदान कारक सिद्ध होगा।धनुसर्वत्र आपका कद बहुत ऊंचा होगा। कर्तव्य की उपेक्षा न करें, मित्रों का सहयोग मिलेगा। दाम्पत्य जीवन में विवाद, अपराहन अच्छा। विषम परिस्थितियों में भी आगे बढ़ेंगे।मकर यात्रा से धन और खुशी की प्राप्ति। मुख रोगों से परेशानी, उपहारों की प्राप्ति। आनंद एवं प्रसन्नता से आगे बढ़ेंगे। अटके हुए काम पूरे होंगे।कुंभआपकी छवि उन्नत रूप से निखरेगी। विदेश जाना का रास्ता साफ होगा। हानि-लाभ बराबर-अधिक चिंता न करें। व्यक्तित्व उदार और भावुकता पूर्ण। मीनपरिवार के सहयोग से मनोबल बढ़ेगा। तन मन के लिए दिन ठीक नहीं है। प्रतिष्ठा और सम्पत्ति दोनों बढ़ेंगे। धोखा और विश्वासघात संभव है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Aug 2026 19:26:42 +0530</pubDate>
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<title>Janmashtami 2026: Delhi&#45;NCR के इन 3 भव्य मंदिरों में होगा कृष्ण जन्मोत्सव, Mahaprasad की है विशेष व्यवस्था</title>
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<description><![CDATA[ कृष्ण जन्माष्टमी के आने में अब ज्यादा समय बचा नहीं। जन्माष्टमी के मौके पर देशभर के कृष्ण मंदिरों को फूलों से सजाया जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरुप की झांकी सजाई जाती है। हर साल लोग जन्माष्टमी पर अपने परिवार के साथ श्री कृष्ण मंदिर के दर्शन करने जरुर जाते हैं। कान्हा का जन्मोत्सव होने के बाद भक्तजन प्रसाद पाने की उम्मीद जरुर लगाते हैं। दिल्ली में राधा-कृष्ण के ऐसे कई मंदिर है, जहां आपको प्रसाद के तौर पर धार्मिक सामग्री और सुविधाएं देखने को मिलती हैं। अगर आप इस बार जन्माष्टमी पर मंदिर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए है। आज इस आर्टिकल हम आपको दिल्ली-NCR के फेमस और बड़े कृष्ण मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं।नोएडा सेक्टर 33 में स्थित इस्कॉन मंदिर, नोएडाअगर आप नोएडा या उसके आसपास रहते हैं, तो आप नोएडा के सेक्टर 33 में स्थित इस मंदिर के दर्शन जरुर करें। यह मंदिर काफी लोकप्रिय है। यहां पर आपको जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा के भी दर्शन हो जाएंगे। मंदिर में कृष्ण जी की लीलाओं से जुड़ी तस्वीरें लगी है, जिसे देखना अच्छा लगता है।  - मंदिर प्रत्येक दिन भगवान का श्रृंगार बदला जाता है और इन्हें सुंदर वस्त्र पहनाए जाते हैं। - जन्माष्टमी के अवसर पर यहां खास धार्मिक कार्यक्रम और उत्सव मनाया जाता है। - लोकेशन- A-5, महाराजा अग्रसेन मार्ग, सेक्टर 33, नोएडा। - यदि आप यहां नोएडा सेक्टर 18 और नोएडा सेक्टर 61 मेट्रो स्टेशन से पहुंच सकते हैं। - इस मंदिर में Mahaprasadam की सुविधा है, जो हजारों श्रद्धालुओं को परोसा जाता है। जन्माष्टमी के समय यहां पर प्रसाद बांटा जाता है।श्री श्री राधा पार्थसारथी मंदिर, दिल्लीदिल्ली में रहने वालों के लिए इस मंदिर का दर्शन करने के लिए जा सकते हैं। ईस्ट ऑफ कैलाश में स्थित इस्कॉन मंदिर जाना चाहिए। इस मंदिर को ही श्री श्री राधा पार्थसारथी मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की स्थापना 1998 में हुई थी। इस्कॉन मंदिर में राधा-कृष्ण के साथ ही सीता-राम और लक्ष्मण हनुमान जी के दर्शन कर सकते हैं। - जन्माष्टमी के मौके पर यहां आपको कृष्ण जन्म उत्सव, आरती और कीर्तन का माहौल देखने को मिलेगा।  - शाम की आरती के समय मंदिर का माहौल एकदम भक्तिमय होता है। - आप यहां पर जाने के लिए नेहरू प्लेस और कैलाश कॉलोनी मेट्रो स्टेशन से जा सकती हैं, दोनों वायलेट लाइन पर हैं। - लोकेशन- हरे-कृष्ण हिल्स, संत नगर मेन रोड, ईस्ट ऑफ कैलाश। - यहां प्रसाद में सूजी का हलवा, पंचामृत और भगवान को चढ़ा हुआ फूलों का हार भी मिल सकता है। श्री श्री राधा दामोदर मंदिर, गुरुग्रामगुरुग्राम के सेक्टर 67 में श्री श्री राधा दामोदर मंदिर स्थित है। यह मंदिर बेहद ही सुंदर है और इस मंदिर में आपको राजस्थानी वास्तुकला की झलक भी देखने को मिलेगी। - पूरा मंदिर मकराना मार्बल से बना हुआ है। - मंदिर परिसर में गोशाला और गोविंदा रेस्टोरेंट जैसी तमाम सुविधाएं दी गई हैं।  - मंदिर में आरती और कीर्तन होते रहते हैं। जन्माष्टमी के दिन यहां का नजारा काफी भक्तिमय होता है। - मंदिर परिसर में प्रसाद वितरण की बड़ी व्यवस्था है। - लोकेशन- गुरुग्राम-सोहना रोड, बादशाहपुर, सेक्टर 67। आप सेक्टर 55-56 मेट्रो स्टेशन से यहां पहुंच सकती हैं।   - राजीव चौक से भी यहां बस से आया जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 30 Aug 2026 19:26:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Janmashtami, 2026:, Delhi-NCR, के, इन, भव्य, मंदिरों, में, होगा, कृष्ण, जन्मोत्सव, Mahaprasad, की, है, विशेष, व्यवस्था</media:keywords>
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<title>सितंबर 2026 में दो बार Panchak का साया, इन तारीखों पर रहें सावधान: Astrology Report</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए शुभ-अशुभ मुहूर्त का खास ध्यान दिया जाता है। जब भी लोग कोई शुभ कार्य करने जाते हैं, तो पहले पंचांग जरुर देखते हैं। पंचांग में अशुभ दिनों और मुहूर्त में कार्य करने से बचा जाता है, इन्हीं में पंचक शामिल है।पंचक मतलब है कि पांच दिनों का अशुभ समय जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र से होकर गुजरता है, तो पंचक का असर इसके शुरुआती दिनों से जोड़ा जाता है। उदहारण के तौर पर, यदि रविवार के दिन शुरु होने वाले पंचक को रोग पंचक कहा जाता है, जबकि सोमवार को शुरु पंचक का नाम राज पंचक है। आइए आपको बताते हैं सितंबर महीने में कब और किस दिन पंचक लगने जा रहा है?सितंबर 2026 में पंचक से जुड़ी तारीखें?हिंदू पंचांग के अनुसार, सितंबर 2026 में दो बार पंचक का संयोग बन रहा है। पहला पंचक अगस्त के अंतिम दिनों में शुरू होकर सितंबर की शुरुआत तक रहेगा। इसकी अवधि 27 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक मानी जा रही है। वहीं, महीने का दूसरा पंचक 23 सितंबर से आरंभ होगा और 28 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान पंचक से जुड़े शुभ-अशुभ नियमों और धार्मिक मान्यताओं का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।ज्योतिष में बुधवार या गुरुवार से शुरु होने वाले पंचक को उपयुक्त (रोग, राज, अग्नि, चोर और मृत्यु) इनमें से किसी में नहीं आते हैं। इन्हें सामान्य पंचक कहा जाता है, इस पर किसी वार या दोष का नाम नहीं पड़ता है। पंचक में किन कामों को करने से बचना चाहिए? - पंचक के समय भूलकर भी घर में लकड़ी और इससे बने सामान, घास आदि खरीदना दोष माना जाता है। - पंचक के दौरान चारपाई को बुनना या फिर उसको खोलना या फिर से बांधना सही नहीं होता है। - इस दौरान छत डलवाने का कार्य भी नहीं किया जा सकता है। - माना जाता है कि पंचक के समय दक्षिण दिशा की तरफ यात्रा करना अशुभ होता है। क्योंकि यह दिशा यम की है।  - अगर पंचक के समय किसी की मृत्यु हो जाए, तो उसका अंतिम संस्कार सामान्य से करने के बजाय पंचक शांति के साथ करना चाहिए। पंचक शांति के लिए 5 पुतले बनाकर अंतिम संस्कार किया जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 17:12:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Marriage Line: हथेली की विवाह रेखा पर ये अशुभ निशान बिगाड़ सकते हैं आपका Relationship Status</title>
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<description><![CDATA[ हम सभी की हथेली पर कई तरह की रेखाएं बनी होती हैं। इन रेखाओं का कुछ न कुछ मतलब जरूर होता है। हस्तरेखा ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक हथेली पर विवाह रेखा होती है। जिस जातक के दांपत्य जीवन, वैवाहिक जीवन, आपसी रिश्तों, प्रेम के लिए बेहद जरूरी और महत्वपू्र्ण मानी जाती हैं। हस्तरेखा ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक कनिष्ठा उंगली के नीचे वाले हिस्से को विवाह रेखा कहा जाता है। इस पर बनने वाली विशेष रेखा और निशान का वैवाहिक जीवन में कई तरह के संकेत माना जाता है।द्वीप का निशानहस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक अगर विवाह रेखा के बीच में द्वीप जैसा कोई निशान दिख रहा है, तो इसको काफी अच्छा निशान माना जाता है। यह दांपत्य जीवन में तनाव और परेशानियों के संकेत होते हैं। विवाह रेखा पर द्वीप का निशान होता है, उनके विवाह में देरी या फिर वैवाहिक जीवन में लंबे जीवन तक चलने वाली परेशानियों की ओर इशारा करता है।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 29 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 29 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनक्रॉस का निशानकई लोगों की हथेली में विवाह रेखा के ऊपर क्रॉस का निशान होता है। इसको काफी अशुभ माना जाता है। इससे विवाह के होने में देरी, आपसी मेल-मिलाप और रिश्तों में विवाद का संकेत देता है। ऐसे लोगों का दांपत्य जीवन में संवाद की कमी रहती है।टूटी हुई विवाह रेखाअगर हथेली पर विवाह रेखा टूटी हुई दिखे, तो इसको अच्छा नहीं माना जाता है। हस्तरेखा ज्योतिष के मुताबिक दांपत्य जीवन में अलगाव और रिश्तों में मतभेद हो सकता है।विवाह रेखा का झुकावहस्तशास्त्र के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति की विवाह रेखा नीचे की ओर मुड़ती हुई दिखेती है, तो इसको रिश्तों में दूरी की ओर इशारा करता है। इससे साथी के प्रति ज्यादा से ज्यादा संवेदशील और प्यार करने वाला होना चाहिए।स्टार का निशानहस्तरेखा ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक विवाह रेखा पर अगर कोई स्टार का निशान है, तो इसको शुभ नहीं माना जाता है। यह निशान अचानक से रिश्तों में तनाव लाता है। इस दौरान समझदारी से निर्णय लेना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 17:12:08 +0530</pubDate>
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<title>Chandra Grahan 2026: Raksha Bandhan 2026 और Chandra Grahan का संयोग, क्या भारत में दिखेगा आंशिक ग्रहण</title>
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<description><![CDATA[ हर साल बेहद उत्साह के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा रहा है। वैदिक पंचांग के मुताबिक 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन पर मनाया जाएगा। इस दिन चंद्र ग्रहण का साया रहने वाला है। ग्रहण से पहले सूतक काल की शुरूआत होती है। इस दौरान भोजन और पूजा-पाठ करने की मनाही होती है। चंद्र ग्रहण की समाप्ति के साथ ही सूतक काल खत्म हो जाता है।इसके बाद स्नान करने के बाद मंदिर की साफ-सफाई करनी चाहिए। वहीं अब आपने मन में यह सवाल आ रहा होगा कि क्या रक्षाबंधन पर लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा या नहीं। साथ ही इसका सूतक काल मान्य होगा या नहीं। तो आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब।इसे भी पढ़ें: Horoscope September 2026: मेष से मीन तक कैसा रहेगा भविष्य, Career और Health को लेकर बड़ी ज्योतिषीय भविष्यवाणीचंद्र ग्रहण का डेट और टाइमवैदिक पंचांग के मुताबिक 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण लगेगा। भारतीय समय के मुताबिक चंद्र ग्रहण की शुरूआत सुबह 06:53 मिनट पर होगी। वहीं इसकी समाप्ति दोपहर 12:31 मिनट पर होगी। इस दौरान ग्रहण की अवधि 05 घंटे 39 मिनट पर होगी।भारत में चंद्र ग्रहण दिखेगा या नहींरक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण एक आंशिक चंद्र ग्रहण है। भारत में यह ग्रहण नहीं दिखेगा। वहीं यह चंद्र ग्रहण पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों, दक्षिणी अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप में दिखाई देगा।सूतक कालवहीं 28 अगस्त 2026 को भारत में चंद्र ग्रहण नहीं दिखाई देगा। जिस कारण इसका सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं होगा।इन बातों का रखें ध्यानसूतक काल शुरू होने के पहले खाने की चीजों में तुलसी की पत्ती डाल दें। धार्मिक मान्यता है कि भोजन में तुलसी दल डालने से खाने की चीजों पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव नहीं होता है और खाना भी दूषित नहीं होता है।सूतक काल से पहले मंदिर के कपाट बंद कर देना चाहिए। इस दौरान पूजा-अर्चना नहीं करना चाहिए और मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए।ग्रहण के दौरान इष्ट देव के मंत्रों, गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ होता है।वहीं प्रेग्नेंट महिलाओं को ग्रहण के समय घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 14:14:34 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 28 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष दूसरों के झगड़ों से दूर ही रहें। भाग्यबल से विकास पथ पर बढेंगे। आय के साधन बढ़ने से प्रसन्नता होगी। आपकी सफलताएं अग्रगण्य बनाएगी।वृषव्यवहार में कठोरता से लोग विचलित रहेंगे। बिना परवाह किए निश्चित पथ पर चलेंगे। मनोकामना पूरी होगी- अप्रत्याशित लाभ। सरकारी दफ्तरों में अटके हुए काम बनेंगे।मिथुनसभी प्रकार के विरोधी प्रबल रहेंगे। सावधान! जेब पर डाका पड सकता है। महत्वपूर्ण मित्रों/रिश्तेदारों से भेंट मुलाकात। कार्यक्षेत्र बढ़ाने के प्रयास सफल होंगे।कर्कपरीक्षर्थियों को अच्छे परिणाम से खुशी होगी। नकद और उपहारों की प्राप्त। व्यक्तित्व में निखार/उभार आयेगा। सफलताओं से परिपूर्ण दिन।सिंहपारिवारिक मामलों में उदासीन/उदास रहेंगे। परिवार में शुभ एवं मंगल कार्य होंगे। पड़ोसियों से संबंध मधुर/बेहतर होंगे। प्रेम संबंधों में आयेगा नयापन।कन्याविशेष उपलब्धि से सम्मान बढ़ेगा। धन लाभ और शुभ समाचार। जिद्दीपन छोड़ने पर व्यवस्थाएं सुधरेंगी। आवश्यक काम दोपहर से पहले निपटा लें, तत विवाद संभव।तुलास्वास्थ्य में सुधार होगा, परहेज रखें। अधिकार भी बढ़ेंगे और धन की आमदनी भी। शुभ कार्यों के लिए ऋण मिलेगा/उतरेगा। राजनैतिक दल से घनिष्ठता बढ़ेगी। वृश्चिक दूसरों की गलती और आरोप आप पर। उन्नति के सोपान पर चढ़कर गौरव की अनुभूति। नकद व अन्य रूप में उपहार मिलेंगे। उलझनें आपको घेरे रहेंगी।धनुआत्म केन्दि्रत रहते हुए कार्यकलाप रखेंगे। धन संबंधी समस्याएं खड़ी रहेगी। घर परिवार में शुभ कार्य का आयोजन। आपके कला-कौशल की प्रशंसा होगी। मकर प्रेम/विवाहोत्तर संबंध प्रगाढ़ होंगे। चिंताजनक हालात बनेंगे। व्यावसायिक मामलों में ठोस निर्णय और सफलता। मनोरथ पूरे होंगे, लक्ष्य सिद्ध होगा।कुंभमानसिक तनाव तथा सुस्ती बनी रहेगी। परिस्थितियां विचलित कर सकती है। सुख-सुविधा साधन जुटाने पर बल रहेगा। यात्रा संभव, स्थगित करना ठीक रहेगा।मीनआज व्यवसाय में मन लगेगा। किसी बुरी आदत के कारण खर्च एवं बदनामी। चल-अचल सम्पत्ति संबंधी कार्य सफल होंगे। चलायमान स्थिति, भ्रमण होता रहेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 14:14:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Raksha Bandhan पर साल का आखिरी Chandra Grahan, जानें 12 Zodiac Signs पर कैसा होगा ज्योतिषीय Impact</title>
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<description><![CDATA[ आज है साल का आखिरी चंद्रग्रहण। इस बार 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है। ग्रहण की शुरुआत शुरुआत सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर होगी और इसका समापन दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा। असल में यह चंद्रग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए इसका सूतक मान्य नहीं होगा। वैसे यह चंद्र ग्रहण कुंभ राशि पर लगने जा रहा है। ग्रहों की विशेष स्थिति और राहु-केतु असर राशियों पर पड़ सकता है। आइए आपको बताते हैं किन 12 राशियों पर चंद्र ग्रहण का असर देखने को मिलेगा।मेष राशिइस राशि के जातकों के लिए चंद्र ग्रहण खास रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत का अच्छा परिणाम देखने को मिलेगा। परिवार में खुशियां बनीं रहेगी। कानूनी मामलों में फैसला आपके पक्ष में आने वाला है।वृषभ राशिवृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय सामान्य रहने वाला है। इस दौरान सोच-समझकर फैसले लेने की जरुरत है। सुखद समय बिताने के लिए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति बढ़िया होने वाली है।मिथुन राशिसाल के आखिरी चंद्रग्रहण में थोड़ी सावधानी बरतनी जरुरी है। मिथुन राशि के जातक किसी भी कार्य में जल्दबाजी करने की कोई जरुरत नहीं है और महत्वपूर्ण फैसले सोच-समझकर ही लें। वर्कप्लेस पर आपकी मेहनत और क्षमता की सराहना होगी।कर्क राशिकर्क राशि के जातकों के लिए यह समय परीक्षा वाला होगा। इस अवधि में आपको धैर्य रखना है और बेवजह के तनाव से बचना होगा। पारिवारिक समस्याएं आपकी चिंता का बड़ा कारण बनेंगी।सिंह राशिइस अवधि में सिंह राशि के जातक धैर्य बनाकर चलें। कामकाज में आने वाली परेशानियों को समझदारी से सुलझाएं। लंबे समय से अटका हुआ कार्य आपका फिर से पूरा हो सकता है।तुला राशितुला राशि के जातकों के लिए चंद्र ग्रहण का लाभ दे सकता है। करियर और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। छात्रों को परीक्षा-प्रतियोगिता में मनचाहे परिणाम मिलेंगे।वृश्चिक राशिचंद्र ग्रहण के दिन वृश्चिक राशि सावधानी बरतें। आपको किस्मत का साथ मिलेगा। धन और कामकाज से जुड़े मामलों में सोच-सझकर कदम उठाएं।धनु राशिइस दौरान संयम बनाकर चलें। जल्दबाजी में लिए गए फैसले परेशान कर सकते हैं, इसलिए धैर्य बनाए रखें। धन प्राप्ति के लिए कई तरह के अवसरों की प्राप्ति हो सकती है।मकर राशिमकर राशि के जातक इस समय में अलर्ट रहे। प्रॉपर्टी संबंधित मामलों में किसी भी तरह का जोखिम लेने से बचें। कामकाज में लापरवाही न करें और किसी भी महत्वपूर्ण मामले में सोच-सझकर निर्णय लेना सही होगा।कुंभ राशिकुंभ राशि में इस साल का आखिरी चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। नौकरी करने वाले जातकों को नई नौकरी के कुछ बेहतर लाभ मिल सकते हैं। लाभ के भी अवसर प्राप्त हो सकते हैं और रुके हुए कार्य में गति आएगी।मीन राशियह समय मीन राशि के जातकों के लिए सकारात्मक रहने वाला है। आपको लाभ के बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे। करियर में तरक्की मिलने के चांस है। मेहनत का शानदार फल मिलने वाला है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 14:14:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope Secrets: मुकदमे में वादी जीतेंगे या प्रतिवादी? कुंडली के ये Yoga तय करते हैं कोर्ट का Final Result</title>
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<description><![CDATA[ हमारे प्राचीन ग्रंथों में 5 प्रकार के प्रमुख युद्धों का वर्णन किया गया है, वाक् युद्ध, द्यूत युद्ध, मदन युद्ध, मल्ल या द्वन्द युद्ध, सैन्य युद्ध। असल में वाक् युद्ध का मतलब है किसी के साथ वाद-विवाद, शास्त्रार्थ, किसी भी चीज का खंडन या मंडन, किसी टॉपिक पर पक्ष व विपक्ष मौखिक तर्क आदि। वहीं, दो पहलवानों या योद्धाओं की लड़ाई को द्वांद, दो देश की सेनाओं की लड़ाई को सैन्य युद्ध कहा जाता है। यह सब बातें तो हम सभी जानते हैं, लेकिन जब कोई व्यक्ति मुकद्देम दायर करता है, उसे वादी तथा जिस पर मुकद्दमा चलता है वह प्रतिवादी कहलाता है। अब सावल कुंडली में नवम स्थान से द्वितीय स्थान तक 6 भाव वादी का और तृतीय स्थान से अष्टम स्थान पर्यन्त 6 भाव प्रतिवादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसका विचार मुकदमे से संबंधित सवालों पर पूछने पर किया जाता है।कौन जीतता है मुकदमाकुंडली में 9वें स्थान से दूसरे स्थान तक समस्त शुभ ग्रह बलवान होकर बैठे हो, तो मुकद्दमे में अभियोक्ता की जीत होती है। अगर तीसरे स्थान से 8वें स्थान तक समस्त शुभ ग्रह बलवान होकर बैठा हो, तो प्रतिवादी की जीत होती है। जब मिश्रित ग्रहों के बैठने पर दोनों पक्षों में आपस में फैसला होता है। मुकदमा जीतने के प्रश्न कुण्डली के आधार पर योगदरअसल, प्रश्न लग्न वादी का और लग्न से सप्तम स्थान प्रतिवादी का प्रदर्शित करता है। लग्न शुभ ग्रह या लग्नेश हो अथवा लग्न पर शुभ ग्रह और लग्नेश की दृष्टि हो, तो मुकद्दमे में वादी की जीत होती है। अगर सप्तम स्थान में शुभ ग्रह हों या सप्तमेश हो अथवा सप्तम पर शुभ ग्रह की और सप्तमेश दृष्टि हो, तो प्रतिवादी की जीत होती है।अगर प्रश्न लग्न में क्रूर ग्रह हों, तो प्रश्नकर्ता मुकद्दमे में जीतता है और यदि सप्तम स्थान क्रूर ग्रह हो, तो उसका शत्रु जीत जाता है। वहीं, लग्नेश वक्री हो तो वादी की हार होती है। इतना ही नहीं, सप्तमेश व्रकी हो तो प्रतिवादी की हार का सामना करना पड़ता है। लग्न और सप्तम, दोनों जगहों में पापग्रह हो, तो जिस स्थान में अधिक बलवान ग्रह होगा, उससे संबंधित पक्ष की जीत होगी।  यदि भाग्य स्थान पर दो पाप ग्रह हों, तो प्रश्नकर्ता की हार और दो या उससे अधिक शुभ ग्रह हो, तो जीत पक्की है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 14:14:32 +0530</pubDate>
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<title>Chandra Grahan 2026: कुंभ राशि में चंद्र ग्रहण से Career और Business में इन राशियों को मिलेगा बंपर Profit</title>
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<description><![CDATA[ आज साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। इस बार रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026 को मनाया जा रहा है और इसी दिन साल का अंतिम चंद्र ग्रहण भी पड़ेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, ग्रहण की शुरुआत सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर होगी और यह दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर समाप्त होगा। हालांकि, यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाएगा। इस बार चंद्र ग्रहण कुंभ राशि में लगेगा। इस अवधि में कुछ राशि वालों को करियर में अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे। नौकरी और कारोबार में तरक्की के साथ धन लाभ के अवसर प्राप्त होंगे। आइए आपको बताते हैं कौन हैं ये लकी राशियां।मेष राशिइस राशि के जातकों के लिए यह समय काफी लाभ वाला हो सकता है। कोई भी रुका हुआ कार्य पूरा होगा और परिवार में खुशियां बनी रहेंगी। धन लाभ के अवसर आपको प्राप्त होंगे। विदेशों से संबंधित कामों में आपको सफलता मिल सकती है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी या कोई अच्छा अवसर प्राप्त हो सकता है। आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और लीडरशिप क्ववालिटी क्षमता मजबूत होगी।कन्या राशिकन्या राशि के लोगों के लिए यह समय बेहद खास और प्रभावशाली रहेगा। नए लोगों से मिलकर कुछ परेशनियों का हल निकलेगा। पारिवारिक जीवन में मतभेद मिटेंगे और वाद-विवाद का निपटारा होगा। वर्कप्लेस में आपके काम की सराहना हो सकती है। अचानक लाभ के अवसरों में वृद्धि होगी। लंबे समय से चल रही किसी परेशानी से राहत मिलने वाली है। आय में वृद्धि के अच्छे योग हैं। भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। आर्थिक लाभ के अवसरों में वृद्धि होगी।तुला राशितुला राशि के जातकों को नए लोगों से मिलकर खुशी होगी। कोई बड़ी खुशखबरी आपको प्राप्त होगी। बिजनेस में आने वाले समय में आपको कोई बेहतरीन डील मिल सकती है। कारोबार में नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। आय बढ़ने के रास्ते भी खुल सकते हैं। नौकरीपेशा जातकों को करियर में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा और आपकी मेहनत का अच्छा परिणाम प्राप्त होने का चांस है। संतान की तरफ से कोई अच्छी खबर मिल सकती है। धन लाभ के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।मकर राशिमकर राशि के जातकों सेहत संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। सुख-सुविधाओं में इजाफा होगा। नए सौदों से लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। परिवार संग बेहतर समय व्यतीत होगा। घर का माहौल भी सकारात्मक रहने वाला है। बेरोजगार लोगों को नौकरी मिलने की संभावना है। समााजिक पद-प्रतिष्ठा और सुख-सुविधाओं में इजाफा होगा। कारोबार में किए गए प्रयासों का अच्छा परिणाम मिल सकते हैं। काम से भी लाभ प्राप्त होने की संभावना बन रही है। रचनात्मक कार्यों में भी सफलता प्राप्त हो सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 14:14:32 +0530</pubDate>
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<title>Sawan Somwar के ये Astrology Tips दूर करेंगे शादी की अड़चनें, जल्द विवाह के लिए शिवलिंग पर चढ़ाएं दूध</title>
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<description><![CDATA[ कई बार लाख प्रयासों के बाद भी किसी भी काम में सफलता नहीं मिलती है। कई बार शादी होने में इतना देर होने लगती है कि उसका सही कारण नहीं समझ पाते हैं। माना जाता है कि कुंडली के 5 तत्वों में से जब वायु और अग्नि तत्व ज्यादा होता है, तो शादी में देर होती है। इसके अलावा मंगल दोष भी विवाह में समस्याएं पैदा कर सकता है।लेकिन सावन के महीने में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा से कई बिगड़े काम बन जाते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ज्योतिषीय उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आप सावन के महीने में आजमा सकती हैं।इसे भी पढ़ें: Horoscope Secrets: मुकदमे में वादी जीतेंगे या प्रतिवादी? कुंडली के ये Yoga तय करते हैं कोर्ट का Final Resultशिवलिंग पर चढ़ाएं जलसावन के सोमवार को अगर आप शिवलिंग पर जल के साथ कच्चा दूध मिलाकर चढ़ाते हैं। इससे आपके जीवन में कई प्रभाव दिख सकते हैं।भोलेनाथ को सावन में जल चढ़ाना एक प्रभावी उपाय होता है। इससे जातक की सभी मनोकमाएं पूरी होती हैं। लेकिन अगर शादी में किसी तरह की रुकावट आ रही है। तो सावन के हर सोमवार को शिवलिंग पर जल जरूर चढ़ाना चाहिए। इस उपाय को करने से सुयोग्य और शादी के जल्द योग बनेंगे।सावन सोमवार का व्रत करेंमाना जाता है कि अगर आप सावन के सोमवार के सभी व्रत को विधि-विधान से करेंगी। तो शादी में आने वाली समस्याओं का अंत होता है और इन परेशानियों से बाहर निकलने में मदद मिलेगी।अगर शादी की बात बनते-बनते बिगड़ जाती है। तो सावन का उपाय आपके लिए लाभकारी हो सकता है। सावन के पहले सोमवार से 16 सोमवार का व्रत करें। इससे जीवन की सभी समस्याएं दूर होती हैं और जल्द ही शादी के योग भी बनते हैं।माता पार्वती को अर्पित करें श्रृंगार की चीजेंसावन के सोमवार को मां पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करना चाहिए। इससे भी जल्दी शादी के योग बनते हैं। साथ ही इस उपाय को करने से जीवन में शादी को लेकर आने वाली परेशानियां दूर होती हैं।इस उपाय को करने से सुयोग्य जीवनसाथी मिलता है। सावन का महीना भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित होता है। इसलिए मां पार्वती की पूजा करना विशेष फलदायी होता है।शिव-पार्वती को चढ़ाएं एक ही मालाअगर आप भी इस सावन भगवान शिव और मां पार्वती को संयुक्त रूप से एक ही माला अर्पित करते हैं, तो जल्द शादी के योग बनते हैं। यह माला गेंदे के फूल के होने चाहिए। इस उपाय से जल्दी शादी के योग बनते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 14:14:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 29 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष नए प्रोजेक्ट पर कार्यारंभ की संभावना। घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदने में व्यस्तता। आर्थिक समस्या से मुक्ति का दिन है। विपरीत परिस्थिति, अनुकूलता की ओर बढ़ेंगे।वृषऐश-ओ-आराम में दिन बीतेगा। भाग्यवर्धक समय है, प्रतिष्ठा बढ़ेगी। उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा। उपलब्धियों से मन शांत और प्रसन्न रहेगा।मिथुनसाझेदारी के विवाद निपट जाएगें। सुख और सुख के साधन दोनों ही मिलेंगे। सोच समझकर फैसला लें। वरिष्ठ जनों का सहयोग बहुत लाभदायक सिद्ध होगा।कर्कआर्थिक स्थिति मजबूत होगी। अधूरे काम पूरे होंगे। नए पुराने परिचय ताजा होंगे। डॉक्टरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे।सिंहअपनी गलती ही धन लाभ से वंचित करेगी। विदेश यात्रा और वीजा की चिंता। लाभ के अवसरों का लाभ उठाना चाहिए। दूसरों की चिंता में आपकी हानि होगी।कन्याउच्चकोटि का साहित्य पढ़ने में रूचि। उच्च शिक्षण और शोध कार्यों में सफलता मिलेगी। परिवार में कोई मांगलिक कार्य। किसी खास आदमी से लाभदायक मुलाकात।तुलाव्यवसाय की कोई नई योजना बनेगी। रूके काम बनेंगे, विरोधी पस्त होंगे। कुछ भी ठीक नहीं है, घरेलू विवाद, अचानक संकट। कल्पनालोक से यथार्थ पर आएं।वृश्चिक अचल सम्पत्ति प्राप्ति के प्रयास सफल। परिवार में सम्मान और प्रभाव बढ़ेगा। मनोकामनाएं पूरी होगी, चिंता न करें। अधूरे सभी काम पूरे होंगे, लाभ भी होगा।धनुजुबान फिसलने से क्षमा मांगनी पड़ेगी। शिक्षा से संबंधित लोग सम्मानित होंगे। वरिष्ठ/प्रभावशाली लोगों से सम्पर्क होगा। अग्रज तुल्य लोगों से लाभ होगा।मकर नई योजनाओं की शुरूआत संभव है। शुभ कार्य शीघ्र सम्पन्न करें, दोपहर बाद कष्ट। यात्रा सफल रहेगी- मन प्रसन्न रहेगा। कुछ गलतफहमियां पनपेगी-परिवार में मतभेद।कुंभदोपहर बाद समय प्रतिकूल आ जायेगा। पुराने मित्र से नाता टूट सकता है। कामों में रूकावटें परेशान करेंगी। दूसरों के विवाद में ना पड़ें, लेने देने पड़ जायेंगे।मीननिर्धारित लक्ष्य पूरा करेंगे। विरोधियों का दमन करने में सफल रहेंगे। धन वृद्धि- प्रसन्नता से दिन बीतेगा। उच्चाधिकारियों से उलझना ठीक नहीं होगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 14:14:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>September 2026 Vrat Tyohar List: जन्माष्टमी से गणेश चतुर्थी तक, देखिए इस महीने के सभी मुख्य व्रत&#45;त्यौहारों की पूरी सूची</title>
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<description><![CDATA[ सितंबर का महीना व्रत-त्योहारों से भरा हुआ है। इस महीने में कई खास और मुख्य त्योहार आने वाले हैं। असल में इस माह की शुरुआत श्री कृ्ष्ण जन्माष्टमी से होने वाली है। सितंबर में हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी और पद्मा एकादशी का व्रत भी रखा जाएगा। महीने के आखिरी में पितृपक्ष की शुरुआत होगी। हिंदू धर्म में व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए इन व्रत-त्योहारों की तिथि को आप जल्दी से नोट कर लें। आइए आपको बताते हैं सितंबर महीने में पड़ने वाले व्रत और त्योहार की लिस्ट। सितंबर व्रत-त्योहारों की लिस्टश्रीकृष्ण जन्माष्टमी- 4 सितंबर, शुक्रवारअजा एकादशी- 7 सितंबर, सोमवारकुशाग्रहणी/पिठोरी अमावस्या- 10 सितंबर, गुरुवारहरतालिका तीज-	14 सितंबर, सोमवारकलंक चतुर्थी- 14 सितंबर, सोमवारगणेश चतुर्थी- 14 सितंबर, सोमवारश्रीमहालक्ष्मी व्रत शुरू - 18 सितंबर, शुक्रवारराधाष्टमी- 19 सितंबर, शनिवारपद्मा एकादशी- 22 सितंबर, मंगलवारवामन जयंती	- 23 सितंबर, बुधवारअनंत चतुर्दशी व्रत- 25 सितंबर, शुक्रवारप्रोष्ठपदी पूर्णिमा श्राद्ध- 26 सितंबर, शनिवारपितृपक्ष आरंभ- 27 सितंबर, रविवारश्री कृष्ण जन्माष्टमीइस बार 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाई जाएगी। हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने द्वापर युग में माता देवकी और पिता नंदन के घर अवतार लिया था। इस दिन बाल गोपाल की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है।अजा एकादशीहिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत किया जाता है। इस महीने में अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा।पिठोरी अमावस्याभाद्रपद मास की अमावस्या तिथि को पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण किया जाता है। वहीं, पूजा के लिए कुश इकट्ठा किया जाता है और सालभर पूजा में इन्हें ही प्रयोग करते हैं। इसलिए इसको कुशाग्रहणी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस साल यह तिथि 10 सितंबर, गुरुवार को है।हरतालिका तीजहरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। भाद्रपद मास की तृतीय तिथि को हरतालिका तीज का व्रत किया जाता है। इस बार यह तिथि 14 सितंबर 2026, सोमवार को पड़ रही है। महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के रखने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।गणेश चतुर्थीसितंबर का महीना त्योहारों के लिहाज से बेहद खास माना जा रहा है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि  से गणेश चतुर्थी का त्योहार शुरु होगा और यह पर्व 10 दिन तक चलेगा। इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को है। यह त्योहार गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी के दिन तक, भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है।कलंक चतुर्थी इस तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। भाद्रपद मास की चतुर्थी तिथि को कलंक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन शुरुआत से लेकर चतुर्थी तिथि की समाप्ति तक चंद्र दर्शन को पुराणों में वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अगर आप ने कलंक चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन कर लिए, तो मिथ्या कलंक यानी झूठे आरोप लगने की आशंका रहती हैं। इस साल कलंक चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को है।महालक्ष्मी व्रत आरंभभाद्रपद माह में श्रीमहालक्ष्मी व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी लक्ष्मी का व्रत और पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही आपके अटके हुए सारे कार्य पूर्ण होते हैं। महालक्ष्मी का व्रत 18 सितंबर 2026, शुक्रवार से शुरु होने जा रहा है, जो पूरे 16 दिनों तक रहने वाला है। राधाष्टमीसितंबर महीने में राधाष्टमी का व्रत भी रखा जाएगा। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधाष्टमी का व्रत किया जाएगा। माना जाता है कि इस दिन राधा-रानी का प्राकट्य हुआ था। इस दिन विधि-विधान से राधा-रानी की पूजा की जाती है। राधाष्टमी 19 सितंबर, शनिवार को मनाई जाएगी।पद्मा एकादशीभाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पद्मा एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत रुप से पूजा की जाएगी और व्रत रखने से शुभ फलों की प्राप्ति होगी। इस बार पद्मा एकादशी का व्रत 22 सितंबर, मंगलवार मनाई जाएगी।वामन जयंतीहिंदू धर्म में वामन जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। इस भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को वामन जयंती मनाई जाएगी। इस बार यह तिथि  23 सितंबर, बुधवार के दिन पड़ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रवण नक्षत्र के अभ‍िज‍ीत मुहूर्त में श्रीहर‍ि का वामन अवतार में प्रकाट्य हुआ था। वामन जयंती पर भगवान विष्णु की विधिवत रुप से पूजा-अर्चना की जाती है।अनंत चतुर्दशीअनंत चतुर्दशी के दिन गणेश उत्सव का समापन होता है। इस बार अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त बप्पा की विधि-विधान से पूजा करते हैं और उन्हें विदा करते हैं। मान्यता के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर गणेशजी को विराजमान करने के बाद उन्हेंडेढ़, ढाई, पांच, सात या फिर 11 दिनों तक घरों में विराजमान किया जाता है। वहीं, इस दिन जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु के अनंत स्वरुप की पूजा की जाती है। इस दिन 14 गांठों वाला रेशमी अनंत सूत्र कलाई पर बाधा जाता है, जो 14 लोकों और भगवान विष्णु की रक्षा का प्रतीक है।प्रोष्ठपदी पूर्णिमाभाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि प्रोष्ठपदी पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन पितरों की पूजा, तर्पण, श्राद्ध आदि कार्य किए शुरु हो जाते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस साल प्रोष्ठपदी पूर्णिमा 26 सि ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 14:14:30 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 29 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 29 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 29 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेषपार्टनर के साथ वैचारिक आत्मीयता बढ़ेगी। अगर पिछले कुछ दिनों से कोई खिंचाव था, तो आज सौहार्दपूर्ण बातचीत से वह दूर हो जाएगा। नए रिश्तों की तलाश कर रहे लोगों को उम्मीद की नई किरण दिखेगी।वृषभआज भावनाओं के आवेग में आकर प्रतिक्रिया देने से बचें। शांत रहकर बात सुनने की आदत आपके रिश्ते को किसी भी संभावित तनाव से बचा लेगी। दिन के उत्तरार्ध में सहचर्य का आनंद मिलेगा।मिथुनप्रेम जीवन में नया उल्लास और उमंग महसूस होगी। अपने साथी के साथ किसी रचनात्मक गतिविधि या पसंदीदा स्थान का लुत्फ उठा सकते हैं। अविवाहितों के लिए आज किसी से मुलाकात यादगार बन सकती है।कर्कअपने संकोच को दरकिनार कर प्रियतम के समक्ष मन की बात रखें। आपकी पारदर्शिता न केवल गलतफहमियों को मिटाएगी, बल्कि परस्पर निष्ठा को भी एक नया आधार देगी।सिंहआपका सौम्य व्यवहार और आत्मविश्वास साथी को बेहद प्रभावित करेगा। दांपत्य जीवन बिता रहे जातकों के बीच अटूट सामंजस्य देखने को मिलेगा। साथ में बिताया समय रिश्ते को नई ऊर्जा देगा।कन्याकामकाजी व्यस्तता के चलते थोड़ा खिंचाव मुमकिन है। अपनी प्राथमिकताओं को संतुलित करें और साथी को यह अहसास दिलाएं कि वे आपके लिए कितने खास हैं। एक छोटी सी पहल भी असरदार रहेगी।तुलाआज का दिन प्रेम संबंधों में मधुरता और संतुष्टि लेकर आया है। साथी के साथ आपकी ट्यूनिंग बेहद सहज और आनंददायक रहेगी। सिंगल जातकों को किसी मित्र के जरिए अच्छा रुझान मिल सकता है।वृश्चिककिसी भी प्रकार के संशय को अपने बीच न पनपने दें। आपस में सीधा और स्पष्ट संवाद ही आपकी बॉन्डिंग को मजबूत रखेगा। ढलती शाम के साथ आत्मीयता और सुकून बढ़ेगा।धनुपार्टनर की ओर से कोई सुखद सरप्राइज या स्नेहपूर्ण संदेश मिल सकता है। आज का दिन आपसी प्रेम को और गहरा करने तथा सुनहरे पलों को सहेजने के लिए बेहद मुफीद है।मकररिश्ते में दिखावे के बजाय परिपक्वता और सम्मान को तरजीह दें। एक-दूसरे की छोटी-छोटी खुशियों का आदर करना आपके दांपत्य को अधिक प्रगाढ़ और स्थाई बनाएगा।कुंभअगर आप किसी के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करने की सोच रहे हैं, तो आज का दिन अनुकूल संकेत दे रहा है। शादीशुदा जोड़ों में आपसी समझ और संवेदनशीलता की मिठास बनी रहेगी।मीनआपका दयालु और देखभाल करने वाला रवैया पार्टनर के दिल को छू लेगा। एक-दूसरे के विचारों को तवज्जो देने से मन का भारीपन खत्म होगा और रिश्ते में एक नया निखार आएगा।सितारों की चाल जो भी इशारा करे, ध्यान रखें कि सच्चा समर्पण, संवेदनशीलता और आपसी विश्वास ही हर रिश्ते की असली पूंजी है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 14:14:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Raksha Bandhan 2026: 28 अगस्त को भद्रा मुक्त शुभ मुहूर्त, जानें Rakhi बांधने का सटीक Time और Rituals</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी की 28 अगस्त 2026 को भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा रहा है। इस त्योहार के प्रति बहनों और भाइयों में अधिक उत्सुकता देखने को मिलती है। इस बार सावन माह की पूर्णिमा 27 अगस्त 2026 की सुबह शुरू होकर 28 अगस्त 2026 की सुबह समाप्त होगी। ऐसे में 28 अगस्त को यह पर्व मनाया जा रहा है। तो आइए जानते हैं इस पर्व की तिथि, मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक 28 अगस्त 2026 की सुबह 05:57 मिनट से 09:48 मिनट तक राखी बांधने का मुहूर्त है। इस दौरान करीब 3 घंटे 51 मिनट का समय मिलेगा। सुबह का यह मुहूर्त पूर्णिमा तिथि से जुड़ा होने की वजह से विशेष महत्व रखता है। सुबह 7:33 बजे से लेकर 9:10 बजे तक लाभ मुहूर्त रहेगा। वहीं इसके बाद 09:10 बजे से लेकर 9:48 बजे तक अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि इन मुहूर्त में राखी बांधना शुभ होता है।जानें भद्रा की स्थितिरक्षाबंधन के समय भद्रा की स्थिति को लेकर लोगों के बीच खासी सावधानी रहती है। धार्मिक परंपरा के मुताबिक भद्रा के समय राखी बांधने से बचा जाता है। लेकिन भद्राकाल 27 अगस्त 2026 को समाप्त हो जाएगा। इसलिए 28 अगस्त को रक्षाबंधन के पर्व पर भद्रा का साया नहीं रहेगा।भाई-बहन का पर्वआमतौर पर रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के रिश्ते से जोड़कर देखा जाता है। बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके सुख-समृद्धि, सेहत और दीर्घायु होने की कामना करती हैं। वहीं भाई भी अपनी बहन की सुरक्षा और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेता है।ऐसे बांधे राखीइस दिन राखी बांधने से पहले घर के मुख्य द्वार या दीवार पर गेरू और चावल के घोल से श्रवण कुमार का चित्र बनाएं। फिर इस चित्र की पूजा करें। वहीं इस दिन भगवान गणेश की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। अब अपने भाई को को लकड़ी के पाट पर बैठाएं और इस दौरान उनका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। पूजा थाली में कुमकुम, रोली, हल्दी, अक्षत, दीपक, राखी और मिठाई रखें।फिर दीपक जलाएं और भाई के सिर पर रुमाल या साफ कपड़ा रखें। अब हल्दी, कुमकुम और अक्षत से भाई के माथे पर मंगल टीका लगाएं। तिलक लगाने के बाद आरती करें और भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें। धार्मिक मान्यता है कि राखी में तीन गांठें लगाना शुभ होता है। यह तीन गांठें, सुख-सुरक्षा और समृद्धि के लिए होती है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 14:14:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Raksha, Bandhan, 2026:, अगस्त, को, भद्रा, मुक्त, शुभ, मुहूर्त, जानें, Rakhi, बांधने, का, सटीक, Time, और, Rituals</media:keywords>
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<title>Varalakshmi Vrat 2026: वरलक्ष्मी व्रत पर बरसेगी मां की असीम कृपा, जानें Importance और कलश स्थापना के नियम</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी की 28 अगस्त 2026 को वरलक्ष्मी व्रत रखा जा रहा है। यह मां लक्ष्मी के स्वरूप वरलक्ष्मी को समर्पित विशेष व्रत है। मुख्य रूप में विवाहित महिलाएं वरलक्ष्मी व्रत पति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। हालांकि पहली बार यह व्रत करने वाली महिलाओं को पूजा विधि और नियमों के बारे में जानना बेहद जरूरी है। तो आइए जानते हैं वरलक्ष्मी व्रत की तिथि, मुहू्र्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक 28 अगस्त 2026 को सावन का आखिरी शुक्रवार है। इसलिए इस दिन वरलक्ष्मी का व्रत किया जाएगा। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा स्थिर लग्न में की जाती है। आज मां लक्ष्मी की पूजा के लिए 4 शुभ मुहूर्त हैं। आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:28 मिनट से लेकर 05:12 मिनट तक है। वहीं अभिजीत मुहूर्त 11:56 से लेकर दोपहर 12:48 मिनट तक है।व्रत रखने के नियमइस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थान को अच्छे से साफ करके वहां चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। फिर मां वरलक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित करें। वहीं कई जगह पर कलश स्थापना की परंपरा है। कलश में जल भरकर इसके ऊपर आम के पत्ते या नारियल रखें। फिर पूजा के समय मां को फल, फूल, मिठाई, कुमकुम, हल्दी और अन्य श्रृंगार सामग्री अर्पित करें। अब वरलक्ष्मी का ध्यान करें और परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें। व्रत के दौरान मन, कर्म और वचनों में शुद्धता बनाए रखें।महत्वबता दें कि वरलक्ष्मी को महालक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि वर और लक्ष्मी के मेल से बना वरलक्ष्मी सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाली देवी का प्रतीक है। इस व्रत को करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से आर्थिक समस्याओं से निजात मिलती है और घर-परिवार का कल्याण होता है। वहीं कई महिलाएं संतान सुख और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से भी यह व्रत करती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 14:14:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 26 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष धन की परेशानी- चिंता अवसाद। कोर्ट-कचहरी के गोरख धंधे से बचें। डूबे हुए धन की प्राप्ति से खुशी। अचल सम्पत्ति प्राप्ति के प्रयास होंगे।वृषशारीरिक दुर्बलता के शिकार रहेंगे। पूर्ण स्वास्थ्य लाभ के लिए चिकित्सक बदलें। प्राप्त अवसरों का लाभ उठाएं। आर्थिक गतिविधियों में संलिप्तता रहेगी।मिथुनकिसी विशेष समस्या का हल निकलेगा। बेरोजगारों को रोजगार संबंधी शुभ समाचार। येन केन प्रकारेण- इज्जत बचाने में सफल रहेंगे। अपनी उपलब्धियों से खुशी होगी।कर्कआम समय का लाभ उठायें- लाभ ही लाभ। परिवार में आपकी प्रतिष्ठा बढेंगी। पूंजीनिवेश भविष्य के लिए लाभदायक। आपकी तारीफ करते लोग नहीं थकेगें। सिंहनौकरी व्यवसाय के संदर्भ में खास फैसला। ईमानदारी की सफलता भी यश देगी। उधार दिया गया धन वापस मिलेगा। जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं।कन्याहल्की-फुल्की दुर्घटना का योग है। कदम फूंक-फूंक कर रखें, धोखा मिलेगा। घर परिवार में आपका सुयश बढ़ेगा। परिस्थितियों के अनुकूल आचरण करेंगे।तुलाअनिर्णय की स्थिति बनी रह सकती है। अप्रत्याशित धन लाभ के योग है। विशेष प्रशिक्षण के लिए जा सकते हैं। अभीष्ट नई वस्तुओं भी खरीदी करेंगे।वृश्चिक व्यर्थ का खर्च, बदनामी का डर। उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे। निकट संबंधी मित्र के लिए अस्पताल के चक्कर। दो नंबर के धंधों से दूर रहें।धनुसरकारी क्षेत्र में रूके हुए काम आज बनेंगे। आर्थिक लेन-देन लाभदायक सिद्ध होगा। सरकारी कार्यों में सफलता की खुशी। आज का पूर्वाध अच्छा है।मकर लाभकारी दिन है, संपर्क बढ़ाएं। अप्रिय समाचार मिल सकते है, क्रोध से बचें। शुभ समाचारों की प्राप्ति से खुशी। यात्रा का प्रबल योग है- व्यावसायिक में।कुंभपरिश्रम के अनुरूप काम बनेंगे। दिन सामान्य, फिर भी रचनात्मक। अपने तथा जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। आध्यात्म में रूचि बढ़ेगी और लाभ भी होगा।मीनबच्चों के भविष्य के प्रति चिंतित रहेंगे। जरूरी काम दोपहर तक निपटा लें। बनते हुए काम अटक जाएगें। सरकारी क्षेत्र में प्रभाव बढ़ेगा, सफलता भी मिलेगी। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Aug 2026 04:29:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Horoscope, August, 2026, Aaj, Rashifal:, सभी, राशियों, का, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन, पढ़ें, आज, का, राशिफल</media:keywords>
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<title>Personalized Gifts का बढ़ता ट्रेंड: Raksha Bandhan 2026 में राशि के अनुसार ऐसे चुनें अपनी बहन के लिए तोहफा</title>
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<description><![CDATA[ रक्षाबंधन का त्योहार बेहद नजदीक आ चुका है। ऐसे में हर कोई फेस्टिवल की तैयारी में लगा है। इस बार यह पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने का पर्व नहीं है, बल्कि भाई-बहन के उस खूबसूरत रिश्ते का प्रतीक है, जिसमें प्यार, भरोसा और अपनापन होता है।राखी के बांधने के बाद भाई अपनी बहनों को उनकी पसंद का गिफ्ट जरुर देते हैं। खासतौर पर कपड़े, ज्वेलरी, कॉस्मेटिक्स और गैजेट्स तो आम गिफ्ट ऑप्शन हैं, लेकिन इस बार आप अपनी बहन की राशि के अनुसार खास तोहफा दे सकते हैं। चलिए इस लेख में आपको बताते हैं राशि के अनुसार बहन के लिए बेस्ट तोहफा।रक्षाबंधन पर राशि के अनुसार चुनें बहन के लिए गिफ्टमेष राशिइस राशि की बहनों को आप फिटनेस बैंड, स्पोर्ट्स शूज, ट्रैवल एक्सेसरीज या कोई जरुरी स्मार्ट गैजेट गिफ्ट कर सकते हैं। क्योंकि इस राशि के जातक उत्साही, जोशीले और कुछ नयी करने के लिए तैयार रहते है।वृषभ राशिज्योतिष में वृषभ राशि का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है। इसलिए इस राशि के जातक को आप खूबसूरत, आरामदायक और शानदार चीजों का गिफ्ट दे सकते हैं। जैसे कि परफ्यूम, ज्वेलरी, स्टाइलिश हैंडबैग, स्किनकेयर किट या कोई प्रीमियम गिफ्ट दे सकते हैं। मिथुन राशिमिथुन राशि के जातक काफी जिज्ञासु, बातचीत में रुचि रखने वाला और नई चीजें जानने का शौकीन होता है। इस राशि की बहन के लिए कोई अच्छी किताब, ईयरबड्स, स्मार्ट डिवाइस, खूबसूरत, डायरी या क्रिएटिव हॉबी किट गिफ्ट कर सकते हैं। कर्क राशिइस राशि के जातक को भावनाओं और परिवार से गहराई से जुड़ी होती है। इसलिए इस राशि की बहन के लिए भावनात्मक गिफ्ट दिए जा सकते हैं। जैसा कि परिवार की तस्वीरों से सजा फोटो फ्रेम, पर्सनलाइज्ड ज्वेलरी, यादों से भरा फोटो एल्बम या हाथ से लिखा भावुक पत्र, भाई-बहन के रिश्ते को और खास बना देगा।सिंह राशिसिंह राशि के जातक आत्मविश्वास, आकर्षक व्यक्तित्व और नेतृत्व क्षमता से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए अपनी बहनों के लिए स्टाइलिश वॉच, सनग्लासेज, डिजाइनर बैग, परफ्यूम या कोई ट्रेंडी फैशन एक्सेसरी गिफ्ट कर सकते हैं।कन्या राशिकन्या राशि के लोग समझदार, व्यवस्थित और व्यावहारिक स्वभाव वाला माना जाता है। इस राशि की बहन को प्लानर, ऑर्गनाइजर, स्मार्टवॉच, उपयोगी होम एक्सेसरी या अच्छी क्वालिटी का हैंडबैग गिफ्ट कर सकते हैं। तुला राशितुला राशि के लोगों को संबंध शुक्र ग्रह से होता है और इसे सुंदरता व सौंदर्यबोध से जोड़कर देखा जाता है। इस राशि की बहन के लिए एलिगेंट ज्वेलरी, परफ्यूम, मेकअप किट, स्टाइलिश वॉलेट या खूबसूरत डेकोर पीस गिफ्ट कर सकते हैं।वृश्चिक राशिइस राशि के जातक गहराई से सोचने वाले और रहस्यमयी स्वभाव के माने जाते है। इसलिए रक्षाबंधन पर अपनी बहन को पर्सनल टच वाला तोहफा दें। कोई पसंदीदा किताब, पर्सनलाइज्ड ज्वेलरी, खास परफ्यूम या ऐसा गिफ्ट चुना जा सकता है। धनु राशिधनु राशि के लोगों को रोमांच, यात्रा और नए अनुभवों से जोड़कर देखा जाता है। यदि आपकी बहन को घूमना पसंद है, तो ट्रैवल बैग, पासपोर्ट कवर, ट्रैवल ऑर्गनाइजर, कैमरा एक्सेसरी या किसी खूबसूरत ट्रिप का प्लान उनके लिए बेस्ट सरप्राइज हो सकता है।मकर राशिमकर राशि की बहनों के लिए ऐसा गिफ्ट खरीदें, जो कि काफी लॉन्ग लास्टिंग हो। इसलिए आप स्मार्टवॉच, ऑफिस बैग, वॉलेट, क्लासिक घड़ी या कोई इस्तेमाल की जाने वाली इलेक्ट्रॉनिक गैजेट तोहफे में दे सकते हो।कुंभ राशिअसल में कुंभ राशि के जातक काफी आधुनिक सोच, नए विचारों और कुछ अलग करने की चाह से जोड़ा जाता है। इसलिए कुंभ राशि की बहनों को आप स्मार्ट गैजेट, वायरलेस डिवाइस, यूनिक डेकोर पीस या कोई क्रिएटिव टेक एक्सेसरी गिफ्ट कर सकते हैं।मीन राशिइस राशि के जातक संवेदनशील, कल्पनाशील और कला व भावनाओं से जुड़े होते हैं। इस राशि की बहनों को आप आर्ट किट, कोई खूबसूरत किताब, म्यूजिक से जुड़ा गिफ्ट, पर्सनलाइज्ड ज्वेलरी या यादों से जुड़ा कोई भावुक तोहफा दे सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Aug 2026 04:29:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Raksha Bandhan 2026: भाई के माथे पर तिलक के साथ अक्षत का क्या है महत्व? जानें Importance और Rituals</title>
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<description><![CDATA[ इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और रक्षा के वचन का प्रतीक है। बहनें अपने भाई को तिलक लगाती हैं और उनकी कलाई पर राखी बांधती हैं। इसके बाद बहनें भाई के माथे पर तिलक और चावल लगाती हैं। अक्सर आपके मन भी यही सवाल आता होगा कि भाई के माथे पर तिलक के साथ चावल क्यों लगाए जाते हैं। आइए आपको बताते हैं इस लेख में इसके पीछे का महत्व, नियम और लाभ।राखी बांधने से पहले तिलक लगाने का महत्वरक्षाबंधन पर बहनें अपने भाई को राखी बांधने से पहले माथे पर तिलक लगाती हैं। असल में हिंदू धर्म में इसे काफी शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तिलक भगवान विष्णु का प्रतीक है। इसके साथ ही यह एकाग्रता और स्मरण शक्ति को तेज करता है। भौहों के मध्य वाले भाग में तिलक लगाया जाता है, इसे ज्ञान और चेतना का केंद्र माना जाता है। भाई को तिलक लगाने से उनके जीवन में सकारात्मकता आती है। हालांकि, जब बहनें तिलक लगाती है, उसके बाद अक्षत लगाती है, इसके पीछे क्या कारण छिपा है।माथे पर तिलक के साथ क्यों लगाते हैं चावल?हिंदू धर्म में माथे पर तिलक लगाने के बाद उस पर अक्षत यानी चावल लगाने की परंपरा है। अक्षत का अर्थ अटूट, जो कही से भी टूटा हुआ न हो। ऐसे में तिलक पर अक्षत लगाना बेहद शुभ माना जाता है। अक्षत लगाना इस बात का प्रतीक है कि भाई-बहन के बीच का रिश्ता और प्रेम भी सदैव अटूट रहेगा। इसके साथ ही तिलक के साथ चावल भाई की दीर्घायु और मंगल कामना के लिए लगाया जाता है। वैसे अक्षत रक्षा से जुड़ा भी माना जाता है। इतना ही नहीं, चावल को समृद्धि और लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। इसलिए तिलक श्री विष्णु जी के रुप में और अक्षत देवी लक्ष्मी के स्वरुप में लगाया जाता है। भाई को तिलक और अक्षत लगाने के नियम - राखी बांधने से पहले भाई के माथे पर तिलक और अक्षत जरुर लगाएं। फिर राखी बांधें। - तिलक लगाते समय भाई के सिर पर रुमाल या सफेद कपड़ा जरुर रखें। साथ ही बहनें भी सिर पर दुपट्टा या कपड़ा जरुर रखें। - ध्यान रहे कि तिलक पर सूखा अक्षत नहीं लगाएं। इसे गीला करने के बाद ही तिलक पर लगाएं। सूखा अक्षत देवी-देवताओं को भी नहीं चढ़ाया जाता है। - अक्षत कभी भी बीच में टूटा नहीं होना चाहिए क्योंकि, अक्षत का मतलब है जो टूटा या खंडित न हो। जब आप तिलक करें, तो इन नियमों को जरुर फॉलो करें।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Aug 2026 04:29:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 26 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 26 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 26 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशिआज जीवनसाथी के साथ संवाद का खूबसूरत अवसर मिलेगा। पुराने गिले-शिकवे दूर होंगे और आत्मीयता प्रगाढ़ होगी। अविवाहितों के जीवन में किसी नए शख्स की आहट हो सकती है।वृषभ राशिरिश्तों के मामले में आज संयम की आवश्यकता है। छोटी-छोटी बातों पर तकरार की आशंका है, इसलिए शब्दों के चयन में सतर्कता बरतें। ढलती शाम के साथ स्थिति सामान्य हो जाएगी।मिथुन राशिरोमांच और सकारात्मकता से लबरेज दिन है। प्रियतम के साथ किसी मनपसंद जगह पर जाने की योजना बन सकती है। एकाकी जीवन बिता रहे लोगों को आकर्षण का नया केंद्र मिल सकता है।कर्क राशिअपने मनोभावों को बिना झिझक उजागर करने का यह सही अवसर है। मन के संशय साथी से बांटे, इससे परस्पर विश्वास और प्रगाढ़ होगा।सिंह राशिआपकी आभा और व्यक्तित्व आज साथी को काफी प्रभावित करेगा। बॉन्डिंग में नया उत्साह और नयापन महसूस होगा। दांपत्य जीवन बिता रहे जातकों के लिए समय बेहद अनुकूल है।कन्या राशिभागदौड़ भरी दिनचर्या के कारण पार्टनर के लिए समय निकालना कठिन होगा, जिससे कुछ नाराजगी बढ़ सकती है। शाम ढलते ही एक छोटा सा उपहार माहौल को खुशनुमा बना देगा।तुला राशिसमीकरण और सामंजस्य के लिहाज से आज का समय शानदार है। परस्पर समझ बेहतरीन रहेगी। सिंगल जातकों को अपने कार्यक्षेत्र या पुराने परिचितों से कोई सकारात्मक संकेत मिल सकता है।वृश्चिक राशिअनावश्यक गलतफहमियों और बाहरी हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखें। अपने साथी के प्रति निष्ठा और सीधा संवाद ही आपके रिश्ते को सुरक्षित रखेगा।धनु राशिआज आपको अपने प्रिय से कोई अप्रत्याशित सरप्राइज या सुखद समाचार मिल सकता है। साथ बिताए पल यादगार और मन को सुकून देने वाले होंगे।मकर राशिपारदर्शिता और ईमानदारी आपके रिश्ते को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। साथी की छोटी-छोटी जरूरतों को प्राथमिकता दें और उनकी भावनाओं की कद्र करें।कुंभ राशिदिन प्रसन्नता और उल्लास से भरा रहेगा। यदि किसी के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करना चाहते हैं, तो आज का दिन पहल करने के लिए उत्तम है।मीन राशिसंवेदनशीलता और परस्पर देखभाल आज आपके रिश्ते का मूल आधार बनेगी। पार्टनर के दृष्टिकोण को समझने की कोशिश करें, इससे मन को असीम शांति मिलेगी।सितारों के इशारे चाहें जो भी हों, अंततः आपकी अपनी समझ और आत्मीयता ही आपके रिश्ते को खूबसूरत बनाती है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Aug 2026 04:29:46 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Love, Horoscope, For, August, 2026, आज, का, प्रेम, राशिफल, अगस्त, 2026, प्रेमियों, के, लिए, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन</media:keywords>
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<title>Horoscope 27 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष सूझबूझ से समस्याओं का निपटारा होगा। आर्थिक समस्या से मुक्ति का दिन है। ज्यादा काम-ज्यादा पैसा मिलेगा। विशेष चिंता का समाधान निकलेगा।वृषबनते-बनते काम बिगड़ सकते हैं। अनुकूल परिस्थितियां, सुखानुभूति। आपका उदार व्यवहार प्रभावशाली सिद्ध होगा। उत्तम समय है, अवसर का लाभ उठाएं।मिथुनदुर्घटना प्रधान दिन है- सड़क नियमों पर ध्यान दें। अचानक विषम परिस्थितियां पैदा होगी। रोजगार तथा अन्य आर्थिक कार्यों में सफलता। रोजगार व्यवसाय में अच्छा लाभ होगा।कर्कआप सही दिशा में आगे की ओर बढ़ रहे हैं। विदेश में पढ़ने की महत्वाकांक्षा पूरी होगी। निर्माण/पुननिर्माण का प्रस्ताव विचारणीय है। आर्थिक मामलों में उलझे रहेंगे।सिंहअपनी क्षमता से ही समस्याओं का निपटारा। निर्भीक रहेंगे, सटीक उत्तर देंगे। सोचे हुए सभी काम पूरे होंगे। बिगड़े हुए संबंध सुधर सकते हैं।कन्याविशेष व्यक्ति की सहायता से विशेष काम पूर्ण होगा। वैवाहिक कार्यक्रमों में व्यस्तता रहेगी। कटु वचन रिश्तों में दरार डाल सकते हैं। विद्यार्थी विशेष लाभ प्राप्त करेंगे।तुलाचिंता और समस्याएं घेरे रहेगी। रूके हुए काम बनेंगे, मित्र सहयोग मिलेगा। लोकप्रियता एवं धन में वृद्धि। परिस्थितियां सुधर रही है।वृश्चिक चहुं मुखी उन्नति और सफलता देने वाला दिन। पारिवारिक सुख शांति और मित्र मिलन। हाथ आया अवसर/धन फिसल सकता है। शुभ समाचार और रोजगार में वृद्धि।धनुअनुकूल वातावरण से मन प्रसन्न रहेगा। नई वस्तुओं से ऐश्वर्य और सम्मान बढ़ेगा। आपकी निष्ठा की प्रशंसा होगी। लाभ और खर्च बराबर, खर्च पर नियंत्रण करें।मकर स्वास्थ्य में सुधार होगा- चिंता न करें। जानबूझकर गलत काम न करें। कार्यालय में &#039;हीरो&#039; बनकर उभरेंगे। काम के दवाब से चिड़चिड़ापन।कुंभसामाजिक, धार्मिक कार्यों में व्यस्तता। किसी खास शिक्षण प्रशिक्षण में भाग ले सकते हैं। किसी और की गलती की सजा आपको मिलेगी। परिस्थितियां विपरीत विवेक से काम लें।मीनसामाजिक और धार्मिक संयुक्त यात्रा के योग हैं। अकारण शत्रु पैदा होंगे, अनावश्यक विवाद भी। कार्य भार अधिक, थकान हो सकती है। सभी काम सफलता की ओर बढ़ेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Aug 2026 04:29:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Horoscope, August, 2026, Aaj, Rashifal:, सभी, राशियों, का, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन, पढ़ें, आज, का, राशिफल</media:keywords>
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<title>Raksha Bandhan 2026: भाई की Rashi के अनुसार बांधें Rakhi, सुख&#45;समृद्धि और Health के लिए अपनाएं ये ज्योतिष उपाय</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में रक्षाबंधन का त्योहार काफी विशेष माना जाता है। सावन महीने की पूर्णिमा तिथि पर इस त्योहार को मनाते हैं। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी या रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी आयु और मंगल कामना करती हैं। इस पावन पर्व पर बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं और उनसे अपनी रक्षा का वचन लेती है। हेल्द के नजरिए से रक्षासूत्र काफी फायदेमंद माना जाते हैं। माना जाता है कि राखी बांधने से  कफ, पित्त और वात संबंधित बीमारियां दूर हो जाती है। वहीं, मन में कोई भय नहीं सताता है। अगर रक्षाबंधन पर भाई की राशि के अनुसार शुभ रंग वाली राखी बांधें। आइए आपको बताते हैं बहनों को कौन-से रंग का रक्षासूत्र बांधे।राशिनुसार बांधे राखीमेष राशि: इस राशि के स्वामी मंगल देव है, इसलिए अपने भाई की कलाई पर लाल रंग की राखी बांध सकते हैं और माथे पर लाल कुमकुम लगाएं। वहीं, भाई को मालपुआ खिलाएं। वृषभ राशि: शुक्र ग्रह इस राशि के स्वामी है। इसलिए बहनें अपने वृषभ राशि के भाई के कलाई पर सफेद रेशमी डोरी वाली राखी बांध सकती हैं और रोली से तिलक करें। दूध से बनीं मिठाई खिलाएं। ऐसा करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। मिथुन राशि: इस राशि के जातकों की कलाई पर हरे रंग की राखी बांध सकते हैं और हल्दी का तिलक लगा सकते हैं। वहीं, भाई को बेसन की बर्फी खिलाएं।कर्क राशि: चंद्रमा इस राशि के स्वामी है, जिसकी वजह से भाई की कलाई में चमकीले सफेद रंग की राखी बांध सकते हैं और माथे पर चंदन का टीका करें। मिठाई में रबड़ी खिलाएं। सिंह राशि: इस राशि के स्वामी में सूर्य है, इसलिए आप अपने भाई की कलाई पर गोल्डन पीले रंग की राखी बांध सकते हैं और हल्दी मिश्रित रोली का तिलक भी लगा सकते हैं। कन्या राशि: इस राशि के जातकों को गणेश जी के प्रतीक वाला रक्षासूत्र बांध सकते हैं और अपने भाई को मोतीचूर लड्डू खिलाएं। तुला राशि: इसके स्वामी शुक्र है। अपने भाई को नीले रंग की राखी बांधे और अपने भाई को हलवा बनाकर खिला सकते हैं। ऐसा करने से उनकी निर्णायक क्षमता बढ़ेंगी।वृश्चिक राशि: यदि आपके भाई की राशि वृश्चिक है, तो आप लाल कलर की राखी बांध सकते हैं। मोती युक्त वाली राखी बांधें। रोली का तिलक लगाएं और गुड़ से बनी मिठाई खिलाएं।धनु राशि: इस राशि के जातकों की कलाई पर पीले या सुनहरे रंग की राखी बांधे। हल्दी व कुमकुम माथे पर लगा सकते हैं। मिठाई के लिए आप रसगुल्ला खिला सकते हैं। मकर राशि: आप मकर राशि के भाईयों को नीले रंग की राखी बांधे, गहरे रंग का रक्षासूत्र इस राशि के लोगों की अशुभता से रक्षा करेगा। केसर का तिलक लगाएं और भाई को बालूशाही खिलाएं।कुंभ राशि: कुंभ राशि के भाई को रुद्राक्ष से निर्मित राखी बांधे। वहीं, हल्दी का तिलक करें और कलाकंद खिलाएं। मीन राशि: अगर आपके भाई की राशि मीन है, तो उनको पीले रंग की राखी बांधे और हल्दी का टीका लगाएं। साथ ही मिल्क केक खिलाएं।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Aug 2026 04:29:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Raksha Bandhan 2026 Remedies: रक्षाबंधन पर धन लाभ के लिए करें ये अचूक उपाय, बरसेगी Maa Lakshmi की विशेष कृपा</title>
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<description><![CDATA[ कल यानी 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। इस त्योहार इतंजार भाई-बहन बेसब्री से करते हैं। रक्षाबंधन का त्योहार पूर्णिमा तिथि पर आता है। खासतौर पर यह त्योहार भाई-बहन के निस्वार्थ प्रेम, विश्वास और स्नेह को दर्शाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई अपनी बहन को जीवन भर हर मुश्किल परिस्थिति में सुरक्षा और सम्मान देने का वचन देता है।रक्षाबंधन के दिन कुछ उपाय करने से धन लाभ के योग बनते हैं और शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। आइए आपको इस आर्टिकल में बताते हैं धन प्राप्ति के योग और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। अगर आप आर्थिक तंगी से परेशान हैं, तो ये उपाय जरुर करें।धन प्राप्ति और समृद्धि के अचूक उपायमां लक्ष्मी की पोटली का उपायरक्षाबंधन की पूजा के समय देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु को विधिवत रुप से पूजा करें। पूजा के थाल में एक लाल कपड़े में अक्षत (साबुत चावल), एक चांदी का सिक्का और एक चुटकी हल्दी रखकर मां लक्ष्मी को अर्पित कर सकते हैं। पूजन के बाद इस पोटली को अपनी तिजोरी या धन रखने के जगह पर रख दें। इससे तिजोरी हमेशा भरी रहती है।प्रथम पूज्य गणेश जी को राखीइस दिन भाई को राखी बांधने से पहले एक लाल या पीली राखी भगवान गणेश को चढ़ाएं। गणेश जी को मोदक और दूर्वा अर्पित कर सकते हैं। ऐसा करने घर की सभी बाधाएं दूर होती हैं और धन लाभ का योग बनता है।मुख्य द्वार पर दीपक शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं और इसमें थोड़ी-सी काली सरसों डाल दें। इस उपाय के करने से नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर धन आगमन के मार्ग प्रशस्त करता है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Aug 2026 04:29:44 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope September 2026: मेष से मीन तक कैसा रहेगा भविष्य, Career और Health को लेकर बड़ी ज्योतिषीय भविष्यवाणी</title>
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<description><![CDATA[ सितंबर का महीना ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। इस दौरान कई प्रमुख ग्रह राशि परिवर्तन करेंगे। जिसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर देखने को मिलेगा। इस अवधि में आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य, शिक्षा और पारिवारिक जीवन पर अलग-अलग रुप में देखने को मिल सकता है।महीने की शुरुआत में 2 सितंबर को शुक्र के तुला राशि में प्रवेश होंगे। फिर 7 सितंबर को बुध कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। 17 सितंबर को सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे, जबकि 18 सितंबर को मंगल कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। महीने के आखिर में 26 सितंबर को बुध तुला राशि में गोचर करेंगे।शनि देव मीन राशि में वक्री रहेंगे, बल्कि राहु-कुंभ और केतु सिंह राशि में स्थित रहेंगे। आइए आपको बताते हैं सितंबर का महीना 12 राशियों के लिए कैसा रहने वाला है।मेष राशिसितंबर के महीने की शुरुआत में मेष राशि के जातकों के साथ सौभाग्य पूरी तरह से रहने वाला है। मनचाहे कार्य पूरे होंगे, रुके हुए काम पूरे होंगे। सितंबर महीने के पहले दो सप्ताह में करियर-करोबार की दृष्टि अनुकूल रहने वाली है। घर और बाहर भरपूर सुख, सहयोग और समर्थन मिलेगा। घर-परिवार में प्रेम और सामंजस्य बना रहने वाला है। छात्र आलस्य त्याग कर पढ़ाई पर ध्यान दें। मन भटक सकता है। किसी बात को लेकर अपनों के साथ वाद-विवाद होने की आशंका रहने वाली है। छोटी-मोटी यात्राओं पर जा सकते हैं। महीने की तीसरे हफ्ते हेल्थ का ध्यान जरुर रखें, जरा भी लापरवाही न दिखाएं। महीने के आखिरी सप्ताह तक एक बार फिर चीजें पटरी पर लौटती हुई नजर आएंगी और आप करियर-करोबार आदि में अपना बेस्ट देने का समय है, सफलता जरुर प्राप्त होगी।उपाय: प्रतिदिन देवी दुर्गा की पूजा लाल पुष्प अर्पित करके करें तथा कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।वृषभ राशिइस महीने में वृषभ राशि के जातकों को शुरुआत में अपने कामकाज में खूब सावधानी बरतनी है। मध्य महीने अपने शत्रुओं से दूर रहे हैं, रिस्क लेने से बचें। इस अवधि में नियमों का उल्लंघन न करें और रिश्तों में मर्यादा बनाए रखें। प्रेम प्रसंग हो या फिर दांपत्य संबंध भावनाओं की कद्र करें। इस दौरान धन और समय का सदुपयोग करें, वरना परेशानी झेलनी पड़ सकती हैं। मध्य महीने में परिश्रम अधिक करना पड़ेगा। विनम्रता रहे तभी आपके काम बनेंगे। इस बात ध्यान रखें कि यह वह समय है, जब आप अपनी चीजों को पटरी पर ला सकते हैं और सफल हो सकते हैं।उपाय: प्रतिदिन भगवान श्री कृष्ण की विधि-विधान से पूजा एवं श्री कृष्णाष्टकम् का पाठ करें।मिथुन राशिइस राशि के जातकों का  सितंबर महीना बेहद ही शुभ और फायदेमंद रहने वाला है। इस समय भाग्य पूरी तरह से आपके साथ रहेगा। करियर और बिजनेस में मनचाही सफलता प्राप्त होगी। कारोबार के चलते यात्राएं करनी पड़ सकती हैं। आत्मीय लोगों के साथ हंसी-खुशी समय बिताने का मौका प्राप्त होगा। नौकरी करने वालों को प्रोमोशन मिल सकता है। माह के मध्य में  भूलकर भी कोई गलत निर्णय न लें। अचानक खर्चें बढ़ सकते हैं या फिर आपकी आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। ऐसे में माह की शुरुआत से ही अपने धन का प्रबंधन करके चलें। संतान या किसी से मतभेद या वाद-विवाद हो सकता है। करियर को लेकर जरा-भी लापरवाही न करें। निवेश करने से पहले किसी शुभ चिंतक का सलाह जरुर लें।उपाय: प्रतिदिन भगवान श्री गणेश जी की को दूर्वा या फिर शमीपत्र अर्पित करके पूजा तथा गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें।कर्ककर्क राशि के जातकों के लिए सितंबर का महीना मिश्रित रहने वाला है। बिजनेस में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। लंबे समय से रुक हुए कार्य पूरे होंगे। व्यवसाय में मनचाही प्रगति और लाभ मिलेगा। माह के मध्य में आपको विरोधी एक्टिव हो सकते हैं। सोचे हुए आपके कार्य पूरे होंगे। भाग्य उदय होगा और चीजें पटरी पर आएंगी। बिजनेस में मनचाह लाभ प्राप्त होगा। भूमि-भवन और वाहन आदि के क्रय का सपना पूरा हो सकता है। बिजेनस को लेकर लापरवाही न करें। महीने के तीसरे सप्ताह में किसी वाद-विवाद से बचें।उपाय: प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाकर रुद्राष्टकं का पाठ करें।सिंह राशिसितंबर का महीना सिंह राशि के जातकों के लिए मिलाजुला रहने वाला है। करियर को लेकर परेशनियों का सामना करना पड़ सकता है। महीने की शुरुआत ठीक रहेगी। करियर-कारोबार से संबंधित यात्राएं सुखद एवं सफल रहने वाली है। वाणी औप व्यवहार को बेहतर बनाना काफी जरुरी है। सेहत बिगड़ सकती है और आपके रिश्तों में अनबन हो सकती है। परिवार के किसी सदस्य से वाद-विवाद हो सकती है। इस अवधि में खर्चें हो सकते हैं। कठिनाईयों से थोड़ी बहुत शांति मिल जाएगी। इस समय आपको बुद्धि और विवेक से काम लेना है।उपाय: प्रतिदिन सूर्य देवता को अर्घ्य देकर आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।कन्या राशिसितंबर का महीना कन्या राशि के जातकों के लिए कभी गम तो कभी खुशी वाला होगा। कामों में अचड़न आएगी। महीने की शुरुआत में आपके संबंध सत्ता-सरकार से संबंधित लोगों के साथ बनेंगे। प्रभावी और आत्मीय व्यक्तियों की मदद से आप अपने अटके कार्यों को आसानी से कर पाएंगे। माह के पूर्वार्ध का समय में आर्थिक स्थिति शुभ रहेगी। रुका हुआ धन की प्राप्ति हो सकती है। बिजनेस में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। इस अवधि में वाहन सावधानीपूर्वक चलाएं अन्यथा चोट आदि लगने की आशंका रहेगी। भूमि-भवन के लेकर विवादों को कोर्ट नहीं आपस में बातचीत करके सुलझाएं।  वैसे छात्रों के लिए यह महीना अच्छे रहने वाला है।उपाय: प्रतिदिन हनुमान जी की पूजा में श्री सुंदरकांड का पाठ करें।तुला राशिइस राशि के जातकों के लिए सितंबर का महीना संयम बनाएं रखें। इस दौरान आपको ज्यादा फलों की प्राप्ति की संभावना नहीं करनी चाहिए। लेकिन जीवन में किसी भी क्षेत्र में सफलता और लाभ प्राप्त होंगे। महीने की शुरुआत में कामकाज से संबंधित मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। नौकरी करने वालों को अपने सहकर्मियों के साथ मित्रवत व्यवहार बना रहेगा।  किसी से बिना वजह के उलझे नहीं। सत्ता-सरकार से जुड़े मामले को सुलझाते समय ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Aug 2026 04:29:43 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 27 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 27 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 27 अगस्त 2026: दिल के रिश्तों में हर नया दिन नई उम्मीदें, मीठी यादें और कुछ नए अहसास लेकर आता है। ग्रहों की बदलती चाल आज आपकी लव-लाइफ में क्या नया मोड़ लाने वाली है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष (Aries)आज का दिन रिश्तों में गहराई और नज़दीकियां बढ़ाने का है। अगर मन में कोई पुरानी टीस या गिले-शिकवे थे, तो आज वे बातचीत से आसानी से सुलझ जाएंगे। सिंगल लोगों के लिए किसी अनजान से शुरू हुई बातचीत दिल के तार जोड़ सकती है।वृषभ (Taurus)भावुकता में बहकर कोई भी फैसला लेने से बचें। आज छोटी सी बात भी तूल पकड़ सकती है, इसलिए अपने लहजे में नर्मी बनाए रखें। दिन का दूसरा हिस्सा बहुत शांत और रोमांटिक रहने वाला है।मिथुन (Gemini)आज आपके रिश्ते में एक नई ताजगी और ऊर्जा देखने को मिलेगी। पार्टनर के साथ कहीं घूमने या डिनर का अचानक प्लान बन सकता है। अविवाहितों के लिए आज का दिन किसी नए रिश्ते की शुरुआत का संकेत दे रहा है।कर्क (Cancer)अपने दिल की बात को दबाने के बजाय पार्टनर के सामने खुलकर रखें। आपकी स्पष्टता और सच्चाई रिश्ते को और अधिक मजबूत बनाएगी। एक-दूसरे पर भरोसा ही आज आपकी सबसे बड़ी ताकत बनेगा।सिंह (Leo)आज आपका आकर्षण चरम पर रहेगा, जिससे आपका पार्टनर आपकी ओर खींचा चला आएगा। शादीशुदा लोगों के लिए दिन हंसी-खुशी और आपसी तालमेल से भरा रहेगा। पुराने मतभेद पूरी तरह खत्म होंगे।कन्या (Virgo)काम के सिलसिले में थोड़ी व्यस्तता रह सकती है, जिससे साथी को समय न दे पाने का मलाल होगा। ऐसे में एक प्यार भरा मैसेज या फोन कॉल भी उनके चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए काफी रहेगा।तुला (Libra)समीकरणों के मामले में आज आपका दिन बेहद शानदार है। पार्टनर के साथ अंडरस्टैंडिंग इतनी बेहतरीन रहेगी कि बिना कहे भी एक-दूसरे की बात समझ जाएंगे। सिंगल लोगों को कोई दिलकश प्रस्ताव मिल सकता है।वृश्चिक (Scorpio)किसी तीसरे की बातों में आकर अपने पार्टनर पर शक करने से बचें। अपनी बॉन्डिंग पर भरोसा रखें और जो भी बात हो, सीधे मिलकर साफ करें। ढलती शाम रिश्तों में मिठास वापस ले आएगी।धनु (Sagittarius)आज का दिन खुशियों के नए सरप्राइज लेकर आया है। साथी से कोई मनपसंद तोहफा या कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। साथ बिताए गए पल आपके रिश्ते को नया आयाम देंगे।मकर (Capricorn)रिश्ते में दिखावे के बजाय सादगी और अपनापन बनाए रखें। साथी की छोटी-छोटी खुशियों का ख्याल रखना आज आपको उनके और करीब ले जाएगा। शादी के फैसले के लिए दिन शुभ है।कुंभ (Aquarius)यदि आप लंबे समय से किसी से अपने दिल की बात कहना चाह रहे थे, तो आज का दिन इज़हार-ए-मोहब्बत के लिए सबसे मुफ़ीद है। शादीशुदा जोड़ों के बीच रोमांस और नयापन बना रहेगा।मीन (Pisces)आज आपकी संवेदनशीलता और देखभाल करने वाला स्वभाव पार्टनर का दिल जीत लेगा। एक-दूसरे की भावनाएं सुनना और समझना आज आपके बीच के मानसिक तनाव को पूरी तरह मिटा देगा।सितारों के संकेत चाहे जो भी हों, सच्ची समझ और आपसी सम्मान ही हर रिश्ते की असली ताकत होता है। अपने प्रियजन का हाथ थामें और आज के दिन को खास बनाएं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Aug 2026 04:29:43 +0530</pubDate>
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<title>Raksha Bandhan 2026: भाई&#45;बहन के अटूट प्रेम का पर्व, जानें सावन पूर्णिमा पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त</title>
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<description><![CDATA[ श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला पर्व रक्षा बंधन भाई बहन के प्रेम के प्रतीक का त्योहार है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांध कर उसके माथे पर तिलक लगाकर सदैव उसकी विजय की कामना करती है। भाई प्रतिज्ञा करता है कि यथाशक्ति मैं अपनी बहन की रक्षा करूंगा। रक्षाबंधन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्व है। राखी कच्चे सूत जैसी सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चांदी जैसी महंगी वस्तु तक की हो सकती है।इस दिन प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर लड़कियां और महिलाएं पूजा की थाली सजाती हैं। थाली में राखी के साथ रोली या हल्दी के अलावा चावल, दीपक और मिठाई भी होती है। लड़के और पुरुष तैयार होकर टीका करवाने के लिए पूजा या किसी उपयुक्त स्थान पर बैठते हैं। पहले अभीष्ट देवता की पूजा की जाती है, इसके बाद रोली या हल्दी से भाई का टीक करके चावल को टीके पर लगाया जाता है और सिर पर छिड़का जाता है, उसकी आरती उतारी जाती है, दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है। इसके बाद भाई बहन को उपहार या धन देता है। इस प्रकार रक्षाबंधन के अनुष्ठान के पूरा होने पर भोजन किया जाता है।इसे भी पढ़ें: सुकर्मा योग में पूरे दिन बहनें बांध सकेंगी राखी, इस बार रक्षाबंधन पर नहीं है भद्रा का सायारक्षा बंधन का इतिहास हिंदू पुराण कथाओं में है। हिंदू पुराण कथाओं के अनुसार, महाभारत में पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण की कलाई से बहते खून (श्रीकृष्ण ने भूल से खुद को जख्मी कर दिया था) को रोकने के लिए अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर बांधा था। इस प्रकार उन दोनों के बीच भाई और बहन का बंधन विकसित हुआ था, तथा श्रीकृष्ण ने उसकी रक्षा करने का वचन दिया था। इसी बंधन से ऋणी श्रीकृष्ण ने दुशासन द्वारा चीर हरण के समय द्रौपदी की लाज बचाई थी। मध्य कालीन इतिहास में एक ऐसी घटना दिल्ली में मिलती है जिसमें चित्तौड़ की रानी कर्मवती ने दिल्ली के मुगल बादशाह हुमायूं के पास राखी भेजकर अपना भाई बनाया था। हुमायूं ने राखी की इज्जत की और उसके सम्मान की रक्षा के लिए गुजरात के बादशाह से युद्ध किया।रक्षा बंधन व्रत कथाप्राचीन समय में एक बाद देवताओं और दानवों में बाहर वर्ष तक घोर संग्राम चला। इस संग्राम में राक्षसों की जीत हुई और देवता हार गए। दैत्य राज ने तीनों लोकों को अपने वश में कर लिया तथा अपने को भगवान घोषित कर दिया। दैत्यों के अत्याचारों से देवताओं के राजा इंद्र ने देवताओं के गुरु बृहस्पति से विचार−विमर्श किया और रक्षा विधान करने को कहा। श्रावण पूर्णिमा को प्रातरूकाल रक्षा का विधान संपन्न किया गया। सह धर्मिणी इन्द्राणी के साथ वृत्र संहारक इंद्र ने बृहस्पति की वाणी का अक्षरशः पालन किया। इन्द्राणि ने ब्राह्मण पुरोहितों द्वारा स्वस्तिवाचन कराकर इंद्र के दायें हाथ में रक्षा सूत्र को बांध दिया। इसी सूत्र के बल पर इंद्र ने दानवों पर विजय प्राप्त की।रक्षाबंधन जीवन को प्रगति और मैत्री की ओर ले जाने वाला एकता का एक बड़ा पवित्र त्योहार है। रक्षा का अर्थ है बचाव। मध्यकालीन भारत में जहां कुछ स्थानों पर, महिलाएं असुरक्षित महसूस करती थीं, वे पुरूषों को अपना भाई मानते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधती थीं। इस प्रकार राखी भाई और बहन के बीच प्यार के बंधन को मजबूत बनाती है, तथा इस भावनात्मक बंधन को पुनर्जीवित करती है। इस दिन ब्राह्मण अपने पवित्र जनेऊ बदलते हैं और एक बार पुनः धर्मग्रन्थों के अध्ययन के प्रति स्वयं को समर्पित करते हैं।- शुभा दुबे ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Aug 2026 04:29:39 +0530</pubDate>
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<title>सुकर्मा योग में पूरे दिन बहनें बांध सकेंगी राखी, इस बार रक्षाबंधन पर नहीं है भद्रा का साया</title>
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<description><![CDATA[ रक्षाबंधन का त्योहार बहन-भाई के बीच प्रेम का प्रतीक है। इसमें बहन भाई को तिलक लगाकर उसके दीर्घायु की कामना करती है। भाई भी जीवन भर बहन के सुख-दुख में साथ निभाने का वादा करता है और स्नेह स्वरूप बहन को उपहार भी देता है। इस त्योहार को प्राचीन काल से मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस पर्व को हिंदी पंचांग के श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। पूर्णिमा के दिन मनाएं जाने कि वजह से कई जगह इसे राखी पूर्णिमा भी कहते हैं। इस वर्ष रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026 को है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन का पर्व बेहद खास रहने वाला है। 28 अगस्त 2026 को पूरे दिन राखी बांधने के लिए शुभ समय रहेगा, क्योंकि भद्राकाल का साया नहीं रहेगा। पूर्णिमा पर आमतौर पर भद्रा रहती है और भद्राकाल में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।  इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का कोई व्यवधान नहीं रहेगा। पंचांग की गणना के अनुसार 27 अगस्त को सुबह 9:09 मिनट से भद्रा शुरू होगी, जो रात 9:25 मिनट तक रहेगी। जिससे 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पूरा दिन शुभ रहेगा। खास बात यह है कि इस बार रक्षाबंधन पर भद्राकाल का साया नहीं रहेगा, यानी बहनें सुबह से लेकर शाम तक कभी भी अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।  श्रावणी पूर्णिमा पर 28 अगस्त को शतभिषा नक्षत्र, सुकर्मा योग, बव उपरांत कौलव करण तथा मीन राशि के चंद्रमा की साक्षी में मनाया जाएगा। धर्मशास्त्रीय मान्यता के अनुसार बहनें भाई की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधेंगी। शुक्रवार के दिन सुकर्मा योग होने से भी यह दिन विशेष शुभ फलदायी माना जा रहा है।ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि रक्षाबंधन का त्योहार बहन-भाई के बीच प्रेम का प्रतीक है। इसमें बहन भाई को तिलक लगाकर उसके दीर्घायु की कामना करती है। भाई भी जीवन भर बहन के सुख-दुख में साथ निभाने का वादा करता है और स्नेह स्वरूप बहन को उपहार भी देता है। इस त्योहार को प्राचीन काल से मनाने की परंपरा चली आ रही है। रक्षाबंधन पर अबकी बार भद्रा का साया नहीं है। रक्षाबंधन पर अक्सर ऐसा होता है कि भद्रा का अशुभ साया भाई-बहन के इस पवित्र त्योहार में खलल डाल देता है और त्योहार का मजा किरकिरा हो जाता है। खुशी की बात यह है कि इस बार भद्रा नहीं है और भाई-बहन पूरे आनंद और प्रेम सौहार्द के साथ इस त्योहार को मनाएंगे। रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा को होता है। इस दिन बहनें राखी के रूप में अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं और भाई इसके बदले में बहनों को उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं।इसे भी पढ़ें: Famous Temple: मां बगलामुखी मंदिर क्यों है खास, Celebs और VIPs की आस्था का केंद्र बना Himachal Pradesh का यह सिद्ध धामनहीं रहेगा भद्रा का साया ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का कोई व्यवधान नहीं रहेगा। पंचांग की गणना के अनुसार 27 अगस्त को सुबह 9:09 मिनट से भद्रा शुरू होगी, जो रात 9:25 मिनट तक रहेगी। जिससे 28 अगस्त को रक्षाबंधन का पूरा दिन शुभ रहेगा।रक्षाबंधन तिथिभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। सावन के महीने के आखिरी दिन यानी के श्रावण पूर्णिमा को रक्षाबंधन मनाया जाता है। श्रवण शुक्ल पूर्णिमा, 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को रक्षाबन्धन है। इस दिन पूर्णिमा तिथि प्रातः 9:48 तक है। रक्षाबंधन पर्व पर भद्रा का साया नहीं होगा। पूर्णिमायां भद्रारहितायां त्रिमुहूर्त्ताधिकोदय व्यापिन्यामपराह्न प्रदोषे वा कार्यम् - धर्मसिन्धु । रक्षा बंधन : - 28 अगस्त 2026पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: - 27 अगस्त को सुबह 09:08 मिनट से शुरूपूर्णिमा तिथि समापन: - 28 अगस्त को सुबह 09:48 मिनट तकरक्षा बंधन का शुभ मुहूर्तचर-लाभ-अमृत का चौघड़िया प्रातः 06:08 से प्रातः 10:53 तक शुभ का चौघड़िया दोपहर 12:28 से दोपहर 02-03 तक अपराह्न दोपहर 01:44 से सायं 04:16 तक चर का चौघड़िया सायं 05-13 से सायं 05 06.48 तक अभिजित दोपहर 12:04 से दोपहर 12:53 तक है।राखी बांधने का सही तरीकाभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। बहनों को पूजा की थाली में चावल, रौली, राखी, दीपक आदि रखना चाहिए। इसके बाद बहन को भाई के अनामिका अंगुली से तिलक करना चाहिए। तिलक के बाद भाई के माथे पर अक्षत लगाएं। अक्षत अखंड शुभता को दर्शाते हैं। उसके बाद भाई की आरती उतारनी चाहिए और उसके जीवन की मंगल कामना करनी चाहिए। कुछ जगहों पर भाई की सिक्के से नजर उतारने की भी परंपरा है।भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास से जानते हैं राशि अनुसार बहनें अपने भाई के हाथ पर कोनसे कलर की राखी बांधें।मेष :- राशि के भाई को मालपुए खिलाएं एवं लाल डोरी से निर्मित राखी बांधे।वृषभ :- राशि के भाई को दूध से निर्मित मिठाई खिलाएं एवं सफेद रेशमी डोरी वाली राखी बांधे।मिथुन :- राशि के भाई को बेसन से निर्मित मिठाई खिलाएं एवं हरी डोरी वाली राखी बांधे। कर्क :- राशि के भाई को रबड़ी खिलाएं एवं पीली रेशम वाली राखी बांधे।सिंह :- राशि के भाई को रस वाली मिठाई खिलाएं एवं पंचरंगी डोरे वाली राखी बांधे।कन्या :- राशि के भाई को मोतीचूर के लड्डू खिलाएं एवं गणेशजी के प्रतीक वाली राखी बांधे।तुला :-राशि के भाई को हलवा या घर में निर्मित मिठाई खिलाएं एवं रेशमी हल्के पीले डोरे वाली राखी बांधे।वृश्चिक :- राशि के भाई को गुड़ से बनी मिठाई खिलाएं एवं गुलाबी डोरे वाली राखी बांधे।धनु :- राशि के भाई को रसगुल्ले खिलाएं एवं पीली व सफेद डोरी से बनी राखी बांधे।मकर :- राशि के भाई को मिठाई खिलाएं एवं मिलेजुले धागे वाली राखी बांधे।कुंभ :- राशि के भाई को ग्रीन मिठाई खिलाएं एवं नीले रंग से सजी राखी बांधे।मीन :- राशि के भाई को मिल्क केक खिलाएं एवं पीले-नीले ज ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Aug 2026 04:29:39 +0530</pubDate>
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<media:keywords>सुकर्मा, योग, में, पूरे, दिन, बहनें, बांध, सकेंगी, राखी, इस, बार, रक्षाबंधन, पर, नहीं, है, भद्रा, का, साया</media:keywords>
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<title>Radha Krishna Mythology: आखिर सुदामा के श्राप से क्यों धरा पर अवतरित हुईं बरसाना की महारानी</title>
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<description><![CDATA[ राधा रानी को प्रेम की देवी कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की धारा, राधा जी हैं। माना जाता है कि गोलोक में एक बार श्रीकृष्ण रास करने की इच्छा में लीन थे। तब भगवान श्रीकृष्ण के बाएं भाग से दिव्य स्वरूपा श्रीराधा प्रकट हुई थीं। भगवान श्रीकृष्ण ने धरा पर अधर्म का नाश करने के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया था। लेकिन माना जाता है कि बिना श्रीराधा के वासुदेव कृष्ण के ध्येय को दिशा नहीं मिल सकती थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्रीराधा रानी एक श्राप की वजह से श्रीकृष्ण से पहले धरती पर जन्मी थीं।पतिव्रता नारी थीं श्रीराधाराधा रानी के बिना श्रीकृष्ण की आराधना अधूरी मानी जाती है। भले ही राधा और कृष्ण ने संग में अधिक समय नहीं बिताया हो। लेकिन दोनों एक-दूसरे के दिल में हमेशा बसे रहे। राधा रानी एक पतिव्रता नारी थीं वह अपने पति आयन के प्रति पूरी तरह समर्पित रहीं। हालांकि श्रीकृष्ण के प्रति राधा रानी का प्रेम सात्विक और निश्छल था।इसे भी पढ़ें: Famous Temple: मां बगलामुखी मंदिर क्यों है खास, Celebs और VIPs की आस्था का केंद्र बना Himachal Pradesh का यह सिद्ध धामबरसाना की महारानीबरसाना राधा रानी की जन्मभूमि रही है। स्कंद पुराण के मुताबिक राधा और कृष्ण की आत्मा एक है। इसी कारण उनको &#039;राधारमण&#039; कहकर पुकारते हैं। पद्म पुराण में &#039;परमानंद&#039; रस को श्रीराधा-कृष्ण का युगल स्वरूप माना गया है। राधा-कृष्ण की पूजा किए बगैर जीव परमानंद को प्राप्त नहीं कर सकता है। भविष्य पुराण और गर्ग संहिता के मुताबिक द्वापर युग में श्रीकृष्ण पृथ्वी पर अवतरित हुए थे।वहीं महाराज वृषभानु की पत्नी कीर्ति के यहां भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन भगवती राधा अवतरित हुई। जिसके बाद भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि राधाष्टमी नाम से प्रसिद्ध हुईं। राधा और कृष्ण को पद्म पुराण में &#039;युगल सरकार&#039; की संज्ञा दी गई है। शिव पुराण में भगवान श्रीकृष्ण के परम मित्र से भिन्न सुदामा गोप द्वारा राधा रानी को श्राप दिए जाने का उल्लेख मिलता है।क्या था वो श्रापधार्मिक शास्त्रों के मुताबिक गोलोक में निवास करने वाली श्रीराधा को एक श्राप की वजह से पृथ्वी पर आकर श्रीकृष्ण से वियोग सहना पड़ा। श्रीकृष्ण की विरजा नाम की सखी का राधा ने अपमान किया था। अपमान से दुखी होकर विरजा नदी बनकर बहने लगी। तब सुदामा ने क्रोध में आकर श्रीराधा को कड़वे शब्द कहे। जिस पर श्रीराधा ने सुदामा को दानव बनने का श्राप दिया। इसके बाद सुदामा ने भी श्रीराधा को मानव जीवन में जन्म लेने का श्राप दिया। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Aug 2026 04:29:36 +0530</pubDate>
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<title>Famous Temple: मां बगलामुखी मंदिर क्यों है खास, Celebs और VIPs की आस्था का केंद्र बना Himachal Pradesh का यह सिद्ध धाम</title>
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<description><![CDATA[ बगलामुखी देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के बनखंडी में स्थित है। इसको पीतांबरा देवी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में देवी बगलामुखी का विशेष महत्व है और वह 10 महाविद्याओं में शामिल हैं। बगलामुखी को युद्ध की देवी भी कहा जाता है और तंत्र-साधना के लिए मां की पूजा होती है। धार्मिक मान्यता है कि जो भी जातक शत्रु और अज्ञात भय से परेशान होता है, वह मां बगलामुखी की पूजा करने से इन परेशानियों से मुक्त हो जाता है। वहीं जो व्यक्ति रोजाना बगलामुखी मां की चालीसा का पाठ करता है, वह अपने शत्रुओं पर विजय पाता है।बगलामुखी मंदिरयह मंदिर मां बगलामुखी को समर्पित है। मां बगलामुखी को 8वीं महाविद्या भी कहा जाता है। इनसे पीला रंग जुड़ा है, इसलिए इनका एक नाम पीतांबरा देवी भी है। धार्मिक मान्यता के मुताबित बगलामुखी मंदिर में पूजा-अर्चना करने मात्र से शत्रुओं की शक्ति कम होती है और वह असहाय हो जाते हैं। इस मंदिर में की जाने वाली पूजा कानूनी मामलों में जीत दिलाने के लिहाज से बेहद शक्तिशाली मानी जाती है। अक्सर भक्त इस धाम में आकर पंडितों से घरेलू कलह, अदालती मामलों, जमीन-जायदाद की समस्याओं और ग्रहों को शांत करने के शांति यज्ञ या सुझाव आदि लेते हैं।इसे भी पढ़ें: Famous Temple: मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक Matangeshwar Temple में साक्षात महादेव, जानिए मंदिर का रोचक इतिहासमंदिर की मान्यता काफी ज्यादा है। यहां पर बड़े-बड़े सेलिब्रिटी दर्शन के लिए आते हैं। यहां पर गोविंदा, शिल्पा शेट्टी, कंगना रनौत और एकता कपूर जैसे सितारे बगलामुखी माता के मंदिर में हवन और पूजा करते हुए दिखाई देते हैं। सेलिब्रिटीज के लिए यहां VIP दर्शन की विशेष व्यवस्था की जाती है।गर्मियों की छुट्टियों में मां बगलामुखी मंदिर में हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं। खासकर पंजाब राज्य के श्रद्धालुओं में मां के प्रति गहरी आस्था है। भक्तों को मां बगलामुखी मंदिर में आकर एक अलग ही सुकून मिलता है। वहीं इस मंदिर में आम भक्तों से लेकर सेलिब्रिटी और नेता भी दर्शन करने आते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Aug 2026 04:29:36 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Famous, Temple:, मां, बगलामुखी, मंदिर, क्यों, है, खास, Celebs, और, VIPs, की, आस्था, का, केंद्र, बना, Himachal, Pradesh, का, यह, सिद्ध, धाम</media:keywords>
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<title>Love Horoscope For 24 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 24 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 24 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष (Aries): वाणी की कड़वाहट से बचें। आज साथी को थोड़ा समय और ध्यान दें, इससे पुरानी दूरियां अपने आप मिट जाएंगी।वृषभ (Taurus): संबंधों में स्थायित्व और आत्मीयता बढ़ेगी। एक-दूसरे पर भरोसा गहरा होगा और शाम सुकून से भरी रहेगी।मिथुन (Gemini): मन के भावों को खुलकर व्यक्त करने का दिन है। सिंगल जातकों के जीवन में किसी नए मोड़ का आगमन हो सकता है।कर्क (Cancer): अति-संवेदनशीलता से बचें। साथी की मंशा को सही समझें और छोटी बातों को दिल से न लगाएं।सिंह (Leo): आपका सौम्य व्यवहार प्रियजन का दिल जीत लेगा। रिश्तों में आपसी सम्मान और आकर्षण दोनों चरम पर रहेंगे।कन्या (Virgo): दिनचर्या की व्यस्तता के बीच साथी के लिए थोड़ा समय जरूर निकालें। एक छोटा सा संदेश भी मिठास घोल देगा।तुला (Libra): प्रेम जीवन में संतुलन और खुशहाली बनी रहेगी। अपने मनपसंद व्यक्ति के साथ वक्त बिताने का सुखद अवसर मिलेगा।वृश्चिक (Scorpio): अतीत के गिले-शिकवे भुलाकर आगे बढ़ने का समय है। आपकी एक पहल रिश्ते में नई जान फूंक सकती है।धनु (Sagittarius): अपने व्यक्तिगत फैसलों में दूसरों का हस्तक्षेप न होने दें। साथी से सीधा संवाद ही हर समस्या का हल है।मकर (Capricorn): आपका परिपक्व दृष्टिकोण साथी को सुरक्षा का एहसास कराएगा। साथ मिलकर किसी महत्वपूर्ण बात पर सहमति बनेगी।कुंभ (Aquarius): रिश्ते में नयापन लाने की कोशिश करें। आपका कोई छोटा सा सरप्राइज साथी के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकता है।मीन (Pisces): मन में उमड़ते प्रेम के भावों को बहने दें। आज का दिन आत्मीयता, रोमांस और गहरी समझ से भरा रहेगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Aug 2026 04:30:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Raksha Bandhan 2026 पर भाई को न बांधें ये 4 तरह की Rakhi, जानें Shubh Muhurat और Vastu के जरूरी नियम</title>
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<description><![CDATA[ रक्षाबंधन त्योहार हिंदू धर्म में बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। सावन की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन पर्व को प्रेम और उत्साह के साथ मनाते हैं। बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और तरक्की की कामना करती हैं। साथ ही भाई भी अपने बहन की रक्षा का वचन देते हैं। यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है।इस समय बाजार राखी से सजा हुआ है। जब राखी की खरीदें, कुछ चीजों का ध्यान रखना बेहद जरुरी होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाई की कलाई पर बांधी जाने वाली राख एक धागा नहीं, बल्कि प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। इसलिए जब आप राखी खरीदने जाएं, तो वास्तु नियमों का ध्यान जरुर रखें। कुछ राखियों को बांधने से बचना बेहद जरुरी है।  आइए आपको बताते हैं किस तरह की राखियों को कभी नहीं बांधना चाहिए।रक्षाबंधन 2026 पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त इस बार राखी का पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5:57 बजे से सुबह 9:48 बजे तक रहेगा। लाभ-उन्नति मुहूर्त- सुबह 7:33 बजे से सुबह 9:10 बजे तकअमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त- सुबह 9:10 बजे से सुबह 10:46 बजे तककिन राखियों के खरीदने से बचना चाहिए भगवान की तस्वीर वाली राखी  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान की तस्वीर वाली राखी भाई को कभी नहीं बांधनी चाहिए। माना जाता है कि हाथ में इस तरह की राखी बांधना सही नहीं होता है।एविल आई वाली राखीरक्षाबंधन पर एविल आई यानी नजर से जुड़ी राखी को बांधने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तरह की राखी नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी होती है। रक्षाबंधन पर सकारात्मक प्रतीकों वाली राखी को खरीदने से बचना चाहिए।काले रंग की राखीकभी भी अपने भाई के कलाई पर काले रंग की राखी नहीं बांधनी चाहिए। क्योंकि शुभ अवसरों पर काले रंग को  उचित नहीं माना जाता है। जब आप राखी खरीदें तो लाल, पीले, केसरिया जैसे शुभ रंगों वाली राखी को खरीदें।प्लास्टिक की राखीज्योतिषी के अनुसार, प्लास्टिक को राहु ग्रह से संबंधित माना जाता है। ऐसे में रक्षा बंधन जैसे शुभ दिन पर राखी खरीदने से बचना चाहिए। इसलिए रेशम के धागे से बनी पारंपरिक राखी का चयन कर सकते हैं। यह भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Aug 2026 04:30:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 25 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष स्वास्थ्य में सुधार होगा। अटके हुए काम बनेंगे। दृढ़ संकल्प के साथ कोई नया आरंभ। अप्रिय घटना या दुर्घटना घट सकती है।वृषव्यावसायिक मामलों में विवेक से काम लें। दोपहर बार स्वास्थ्य संबंधी परेशानी। चिंता परेशानियों से घिरे रहेंगे। ससुराल मेहरबान रहेगी।मिथुनबच्चों के साथ मित्रवत् व्यवहार करें। वाणी पर नियंत्रण रखना हितकर। गुरुजनों एवं वरिष्ठ अधिकारों प्रसन्न रहेंगे। व्यवसाय में लाभ, नौकरी में उन्नति।कर्कपुरानी बीमारी और पुराने विवाद पुनः उभर सकते हैं। &#039;गजकेसरी&#039; योग का उत्तम फल। दीर्घकालीन समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। आध्यात्मिक अनुष्ठानों में रूचि बढ़ेगी।सिंहबुद्धि कुण्ठित हो सकती है- गलत निर्णय। विवाद और आरोपों से सावधान रहें। आर्थिक और पारिवारिक कार्यों में यश। किसी महिला/पुरुष से सहयोग मिलेगा।कन्यासाधनों ओर समय की सीमाओं का ध्यान रखें। विचारों में उदारता आएगी। कुसंग का बुरा असर पड़ेगा, राजदंड़ भी। उत्तम दिन, शुभ फलों की प्राप्ति।तुलामान सम्मान, उपहार प्राप्ति वाला दिन। सरकारी कार्यों में सफलता संतान से लाभ। जरूरी कार्य पूरा करने और कराने में सफल रहेंगे। जरूरी काम पूरे होंगे-धन लाभ भी होगा।वृश्चिक अनेक प्रकार के लाभ दिलाने वाला दिन। महत्वपूर्ण निर्णय बच्चों के संदर्भ में लेंगे। मिश्रित फलों की प्राप्ति। प्रेम प्रसंग सफलता से आगे बढ़ेंगे।धनुकिसी षड्यंत्र के शिकार हो सकते हैं। निंदक और विरोधी प्रबल रहेंगे, सावधान। आर्थिक मामलों में मूल को पकड़े रहें। संघर्ष होगा और विजय मिलेगी।मकर सामाजिक जीवन में प्रतिष्ठा बढ़ेगी। सामाजिक कार्यों में रूचि और व्यस्तता। रूके हुए काम बनाने में सफल रहेंगे। शत्रु बाधाएं पैदा करेंगे।कुंभआत्मबल उत्तम रहेगा- मानसिक संतोष भी। सकारात्मक सोच से स्वास्थ्य लाभ। प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता। स्वास्थ्य प्रतिकूल रहेगा।मीनरूके हुए काम आगे बढ़ेंगे- सफल होंगे। पारिवारिक आवश्यकता के लिए धन की व्यवस्था करेंगे। कर्तव्यपूर्ति और धन लाभ। संभावित लाभ से वंचित रहेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Aug 2026 04:30:18 +0530</pubDate>
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<title>Raksha Bandhan 2026: एक से ज्यादा भाई हों तो किसे पहले बांधें राखी? जानें Traditional Rituals और नियम</title>
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<description><![CDATA[ रक्षाबंधन का पर्व बेहद नजदीक आ चुका है। इस दौरान बाजारों में राखियों की भरमार लगी है। हर कोई राखी की शॉपिंग कर रहा है और त्योहार के लेकर तैयारियों में लगा हुआ है। इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है। जब परिवार में एक से अधिक भाई हो, तो अक्सर मन में यह सवाल आता है कि राखी बांधने की शुरुआत किस भाई से करें। बड़े या छोटे से? क्या उम्र के अनुसार क्रम तय होता है। आइए जानते इससे जुड़ी मान्यताएं। जानें सबसे पहले किस भाई को राखी बांधें?अगर आपके परिवार में दो या उससे अधिक भाई है, तो सामान्य पारिवारिक परंपरा के अनुसार बड़े भाई को राखी बांधना चाहिए। फिर छोटे भाई को राखी बांधना चाहिए। लेकिन राखी बांधने के लिए भाईयों की क्रम अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है। वैसे भाई जहां बैठा हो उसी के अनुसार राखी बांधना चाहिए। रक्षाबंधन का मुख्य उद्देश्य भाई-बहन के बीच प्रेम, सम्मान और एक-दूसरे की मंगलकामना करने का है। इसलिए राखी बांधते समय भाव और श्रद्धा देखना जरुरी है।भाइयों से पहले किसे राखी बांधना शुभ माना जाता है? - रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले भगवान गणेश को राखी बांधें। माना जाता है कि इससे कार्य में आने वाले विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना की जाती है। - असल में रक्षाबंधन सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है और इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु भगवान को रक्षा सूत्र अर्पित करते है, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि बनीं रहे। - जिन घरों में कुलदेवता या इष्टदेव की पूजा की जाती है, वहां उन्हें भी रक्षा सूत्र अर्पित करने की पंरपरा है। कई घरों में पहले देवता के चरणों में राखी बांधी जाती है, इसके बाद परिवार के सदस्यों में राखी बांधी जाती है।घर की वस्तुओं और पालतू जानवरों को राखी क्यों बांधते हैं?इस दिन राखी सिर्फ भाई की कलाई तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ परिवारों में नए वाहन, घर में लाई गई नई वस्तुओं और पालूत पशुओ को भी रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा है। ऐसा करने से सुरक्षा, शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। वाहन या नई वस्तु को राखी बांधते समय उसके सुरक्षित रहने की कामना करते हैं। दूसरी तरफ पशुओं के लिए अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Aug 2026 04:30:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Vastu Tips: घर के Main Entrance पर नंदी की स्थापना से दूर होगी Negative Energy, बरसती है महादेव की कृपा</title>
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<description><![CDATA[ वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को बेहद अहम माना जाता है। क्योंकि यह ऊर्जा के प्रवेश का सबसे अहम स्थान होता है। यहीं से पॉजिटिव और निगेटिव दोनों तरह की ऊर्जा घर में प्रवेश करती है। इसलिए इस स्थान को शुभ, साफ और संतुलित रखना जरूरी होता है। मान्यताओं के मुताबिक अगर घर के मुख्य द्वार पर भोलेनाथ के प्रिय वाहन नंदी का चित्र या प्रतिमा सही दिशा में रखी जाए, तो घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।दूर होगी निगेटिव एनर्जीवास्तु शास्त्र के मुताबिक घर के मुख्य द्वार पर नंदी की प्रतिमा को रखने निगेटिव एनर्जी का प्रवेश कम होता है। मान्यता है कि नंदी पॉजिटिव ऊर्जा को आकर्षित करते हैं और नकारात्मक प्रभावों और बुरी शक्तियों से घर की रक्षा करते हैं।इसे भी पढ़ें: Raksha Bandhan 2026 पर भाई को न बांधें ये 4 तरह की Rakhi, जानें Shubh Muhurat और Vastu के जरूरी नियमसुख-समृद्धि में होगी वृद्धिनंदी महादेव के परम भक्त हैं। जहां पर उनकी कृपा होती है, वहां सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। मुख्य द्वार पर नंदी की प्रतिमा रखने से घर में बरकत और खुशहाली आती है।कम होगा वास्तु दोषनंदी की प्रतिमा को रखने से अगर घर के मुख्य द्वार से जुड़ा कोई छोटा-मोटा वास्तु दोष भी दूर हो जाता है। लेकिन अन्य बड़े वास्तु दोषों के लिए वास्तु एक्सपर्ट की सलाह पर उपाए किए जा सकते हैं।बढ़ता है साहस और आत्मविश्वासनंदी को शक्ति, धैर्य और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि घर में नंदी की उपस्थिति से परिवार के लोगों में आत्मविश्वास बढ़ता है। वहीं मुश्किल परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने और सही निर्णय लेने की प्रेरणा मिलती है।सुरक्षा का प्रतीकशिवालयों में नंदी को हमेशा प्रवेश द्वार पर स्थापित किया जाता है। नंदी भोलेनाथ के रक्षक और द्वारपाल हैं। धार्मिक मान्यता है कि मुख्य द्वार पर नंदी की प्रतिमा लगाने से घर पर महादेव की कृपा बनी रहती है और परिवार की भी रक्षा होती है।वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक नंदी की प्रतिमा को घर के मुख्य द्वार पर रखना शुभ होता है। इससे निगेटिव एनर्जी दूर होती है और मानसिक शांति मिलती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Aug 2026 04:30:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Mercury Transit 2026: कन्या राशि में बुध का गोचर, Bhadra Yoga से इन 3 राशियों की बदलेगी किस्मत</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सितंबर की शुरुआत में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। सितंबर में बुध का महागोचर होने जा रहा है। बुध देव राशि परिवर्तन करके एक शक्तिशाली योग का निर्माण करेंगे। असल में 7 सितंबर 2026 को बुध कन्या राशि में प्रवेश करेंगे और भद्र महापुरुष योग का निर्माण होगा। इतना ही नहीं, बुध का प्रभाव इस दौरान सामान्य से अधिक रहने वाला है। ऐसे में कुछ राशि वालों को बड़ा लाभ प्रदान होने वाला है। बुध, वाणी, संवाद और व्यापार के कारक है, इसलिए जातकों को कारोबार में मनचाह लाभ प्राप्त होगा। इसके साथ ही सम्मान, सफलता, यात्रा, निवेश आदि में लाभ के योग बनेंगे। आइए आपको इन राशियों के बारे में बताते हैं।मेष राशिग्रहों के राजकुमार बुध कुंडली में तीसरे और छठे भाव के स्वामी है। कन्या राशि में गोचर करने के समय वह आपके छठे भाव में रहने वाले हैं। ऐसे में आपको मनचाह नौकरी की प्राप्ति होगी। इसके साथ ही प्रयास सफल होंगे और निवेश आपको परिणाम देंगे। नए लोगों के साथ बिजनेस में फायदा होगा और सफलता भी प्राप्त होगी। नए सौदें में लाभ प्राप्त होने के योग नजर आ रहे है। सिंह राशिबुध कुंडली में दूसरे और लाभ भाव के स्वामी है। इसलिए इस गोचर के बाद वह आपके दूसरे भाव में रहने वाले है। रुका हुआ कार्य पूरा होगा और समय आपको अच्छे परिणाम देगा। परिवार में खुशियां बनी रहेगी। घर में किसी नए व्यक्ति का आगमन हो सकता है। इसके अलावा, वाहन सुख प्राप्त होगा और कोई नए कार्य का शुभारंभ हो सकता है।धनु राशि आपकी कुंडली में बुध सप्तम भाव के स्वामी माने जाते हैं और दशम भाव के भी स्वामी माने जाते हैं। इस गोचर के होने से बुध ग्रह आपके कर्म स्थान पर रहने वाले हैं। आपको अपनी मेहनत का फल मिलेगा और धन लाभ के योग बनते हैं। निवेश संबंधी मामलों में अच्छा रिटर्न देखने को मिलेगा। लंबे समय से रुका हुआ कोई भी प्रोजेक्ट दोबारा शुरु हो सकता है। अपनी मेहनत के दम पर आप अच्छा नाम कमा सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Aug 2026 04:30:16 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 25 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 25 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 25 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशिआज पार्टनर के साथ समय बिताने का बेहतरीन मौका मिल सकता है। पुरानी दूरियां खत्म होंगी और आपसी समझ मजबूत होगी। सिंगल लोगों के लिए किसी खास व्यक्ति से मुलाकात के योग हैं।वृषभ राशिरिश्ते में थोड़ा धैर्य बनाए रखें। किसी बात को लेकर पार्टनर से बहस हो सकती है, इसलिए अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें। शाम तक माहौल खुशनुमा हो जाएगा।मिथुन राशिरोमांस और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर दिन है। पार्टनर के साथ कहीं बाहर घूमने का प्लान बना सकते हैं। जो लोग सिंगल हैं, उन्हें आज प्यार की कोई खुशखबरी मिल सकती है।कर्क राशिअपने भावनाओं को खुलकर व्यक्त करने का दिन है। यदि मन में कोई बात चल रही है तो पार्टनर से साझा करें। आपका रिश्ता और अधिक गहरा और भरोसेमंद बनेगा।सिंह राशिआज आपका आकर्षण पार्टनर को अपनी ओर खींचने में मदद करेगा। रिश्तों में नई ताजगी महसूस होगी। शादीशुदा लोगों के लिए दिन काफी सुखद रहने वाला है।कन्या राशिकाम की व्यस्तता के कारण पार्टनर को ज्यादा समय नहीं दे पाएंगे, जिससे वे थोड़ा नाराज हो सकते हैं। शाम को एक छोटा सा सरप्राइज देकर उनका दिल जीत लें।तुला राशिआज का दिन प्रेम संबंधों के लिए बेहद अनुकूल है। पार्टनर के साथ आपसी तालमेल शानदार रहेगा। सिंगल जातकों को आज किसी सहकर्मी या पुराने मित्र से अच्छा प्रस्ताव मिल सकता है।वृश्चिक राशिरिश्ते में किसी तीसरे व्यक्ति के दखल से बचें। अपने पार्टनर पर विश्वास बनाए रखें और संवाद बनाए रखें। दिन का उत्तरार्ध रिश्तों के लिहाज से बेहतर रहेगा।धनु राशिआज आपको अपने पार्टनर से कोई प्यारा तोहफा या अच्छी खबर मिल सकती है। मन प्रसन्न रहेगा और साथ में बिताए पल यादगार साबित होंगे।मकर राशिसच्चे और सच्चे इरादों से किया गया संवाद आपके रिश्ते को और मजबूत बनाएगा। पार्टनर की छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें और उनकी भावनाओं का सम्मान करें।कुंभ राशिआज का दिन खुशियों भरा रहने वाला है। अगर आप किसी को पसंद करते हैं तो अपने दिल की बात कहने के लिए आज का दिन सही है। पुराने रिश्तों में मिठास बढ़ेगी।मीन राशिसहानुभूति और प्यार आपके रिश्ते की चाबी बनेगी। पार्टनर के मूड का ध्यान रखें और उनकी बात को ध्यान से सुनें। एक-दूसरे का साथ मानसिक शांति देगा।आज का दिन आपकी राशि के अनुसार कैसा रहेगा, यह आपके विचारों और ग्रहों की चाल पर निर्भर करता है। अपने रिश्तों में मिठास और प्यार बनाए रखें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Aug 2026 04:30:16 +0530</pubDate>
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<title>Narmadeshwar Shivling के पीछे का रहस्य, क्यों Narmada River का हर पत्थर माना जाता है शिव स्वरूप</title>
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<description><![CDATA[ भारत की कुछ नदियों को बेहद पवित्र माना जाता है। इन नदियों का उल्लेख किसी देवी की तरह धार्मिक शास्त्रों और पुराणों में मिलता है। नर्मदा नदी को भी उन्हीं नदियों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि नर्मदा का हर कंकड़ भोलेनाथ का स्वरूप होता है। इसलिए यहां पर मिलने वाले प्राकृतिक शिवलिंगों को &#039;नर्मदेश्वर शिवलिंग&#039; कहा जाता है।देशभर में इन शिवलिंगों की पूजा मंदिरों और घरों में की जाती है। इसके अलावा इसके पीछे एक बेहद रोचक पौराणिक कथा है। जिसका उल्लेख &#039;स्कंद पुराण&#039;, &#039;वायु पुराण&#039; के रेवा खंड, &#039;नर्मदा माहात्म्य&#039; और &#039;मत्स्य पुराण&#039; में मिलता है।इसे भी पढ़ें: Mysterious Temple: इन मंदिरों में चलता है महिलाओं का राज, Rituals के दौरान पुरुषों के प्रवेश पर लगा है कड़ा प्रतिबंधनर्मदा ने किया था कठोर तपपौराणिक कथा के मुताबिक, मां नर्मदा ने कई सालों तक कठोर तपस्या की है। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्माजी प्रकट हुए और उनसे वरदान मांगने को कहा। देवी नर्मदा ने कहा, &#039;मुझे मां गंगा नदी की लोकप्रिय होना है।&#039; मैं चाहती हूं कि दुनियाभर में मुझे भी गंगा की तरह की महान समझा जाए और नर्मदा जी की पूजा की जाए। भगवान शिव देवी नर्मदा को अपनी जटाओं में स्थान दें।मां नर्मदा की बात सुनकर ब्रह्माजी मुस्कुराए और कहा, &#039;जिस दिन कोई दूसरा देवता भोलेनाथ के समान हो जाएगा।&#039; कोई दूसरा पुरुष भगवान विष्णु की बराबरी कर लेगा, कोई दूसरी स्त्री देवी पार्वती के समान होगी और कोई दूसरी नगरी काशी के बराबर मोक्षदायिनी हो जाएगी। उस दिन कोई दूसरी नदी भी गंगा के समान हो सकती है।महादेव को पाने के लिए किया था कठोर तपब्रह्मदेव की बातें सुनकर देवी नर्मदा समझ गईं कि उनको यह वरदान नहीं मिल सकता है। ऐसे में उन्होंने बिना किसी शिकायत के अपनी इच्छा को छोड़ दिया और काशी चली गईं। वहीं पर पिलपिला तीर्थ में एक शिवलिंग की स्थापना की और शिवजी के कठोर तपस्या करना शुरूकर दी। देवी नर्मदा की भक्ति और समर्पण से भोलेनाथ बेहद प्रसन्न हुए और उनको दर्शन दिया। महादेव ने कहा कि देवी नर्मदा मैं आपकी तपस्या से प्रसन्न हूं, जो चाहे वरदान मांगो।जिस पर देवी नर्मदा ने कहा कि सब मोह-माया को पीछे छोड़कर मैं आपके चरणों में स्थान पाऊं। देवी नर्मदा की इच्छा को जानकर भगवान शिव प्रसन्न हुए कि उनको ऐसा आर्शीवाद दिया कि देवी नर्मदा का स्थान सभी देवी-देवताओं जितना ऊंचा हो गया।भगवान शिव ने दिया वरदानभोलेनाथ ने मां नर्मदा को वरदान देते हुए कहा कि नर्मदा के तट पर जितने भी पत्थर होंगे, वह सभी शिवलिंग स्वरूप माने जाएंगे। तुम्हारे किनारे मिलने वाले यह पत्थर हर युग में नर्मदेश्वर शिवलिंग के रूप में पूजे जाएंगे। भोलेनाथ ने कहा कि गंगा नदी में स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं, यमुना में सात दिन स्नान करने और सरस्वती में 3 दिन स्नान करने से पापों का नाश होता है। लेकिन नर्मदा नदी के दर्शन मात्र से भक्तों के पाप दूर होंगे।वहीं नर्मदा द्वारा स्थापित नर्मदेश्वर शिवलिंग लोगों को पुण्य और मोक्ष प्रदान करेंगे। इसके बाद भोलेनाथ भी उसी शिवलिंग में लीन हो गए। तभी से नर्मदा नदी का हर पत्थर शिवलिंग का आकार लिए हुए होता है। वहीं तब से ही यह मान्यता प्रचलित हुई कि इस नदी का हर पत्थर शिव का स्वरूप है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Aug 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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<title>Famous Temple: मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक Matangeshwar Temple में साक्षात महादेव, जानिए मंदिर का रोचक इतिहास</title>
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<description><![CDATA[ वैसे तो मध्य प्रदेश में कई फेमस मंदिर हैं, जिनकी अपनी-अपनी खासियत है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जोकि साधारण नहीं है। मध्य प्रदेश में स्थित इस मंदिर की खासियत जानकर आप भी हैरान रह जाएंगी। यहां फेमस शिव मंदिर में एक ऐसा शिवलिंग है, जो हर साल 1 इंच बढ़ता है। ऐसे में अगर आप भी इस रहस्यमयी मंदिर के बारे में जानना चाहती हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। हम आपको इस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं।MP का मतंगेश्वर महादेव मंदिरमध्य प्रदेश के खुजराहो में एक फेमस शिव मंदिर है। यह कोई साधारण मंदिर नहीं है। बल्कि यहां स्थिति महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग हर साल थोड़ा-थोड़ा बढ़ता है। यहां मंदिर में मौजूद पीतल-कास्य से ढका शिवलिंग करीब 9 फीट ऊंचा है। महादेव मंदिर की बनावट ऊंचे चबूतरे जैसी है। इस मंदिर के ऊपर बने ऊंचे-ऊंचे &#039;शिखर&#039; कैलाश पर्वत का प्रतीक माने जाते हैं।इसे भी पढ़ें: Narmadeshwar Shivling के पीछे का रहस्य, क्यों Narmada River का हर पत्थर माना जाता है शिव स्वरूप10वीं शताब्दी में हुआ था निर्माणयूनेस्को के मुताबिक मतंगेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी में हुआ था। इसको चंदेल वंश के राजा हर्षदेव के शासनकाल में बनवाया गया था। यह खुजराहो के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। यहां पर महाशिवरात्रि के मौके पर 3 दिनों तक भव्य मेला लगता है। यहां पर इस दौरान भोलेनाथ का जलाभिषेक और विशेष श्रृंगार होता है।कब जाना रहेगा सहीअगर आप भी मंदिर दर्शन का प्लान बना रही हैं। तो सुबह सबसे पहले मतंगेश्वर मंदिर में दर्शन करें। फिर टिकट लेकर आसपास के ऐतिहासिक मंदिरों को एक्सप्लोर करें। यहां पर जाने का बेस्ट समय अक्तूबर से मार्च तक का है। वहीं सावन में भी यहां का मौसम सुहावना रहता है। मंदिर और ऐतिहासिक जगहों के अलावा आसपास आपको लोकल वेंडर्स और छोटे कैफे से आप बुंदेलखंडी खाने का लुत्फ उठा सकती हैं।कैसे पहुंचे मतंगेश्वर महादेव मंदिरअगर आप भी खुजराहो के मतंगेश्वर महादेव मंदिर जाने का मन बना रही हैं। तो आपको अपने किसी भी नजदीकी एयरपोर्ट से खुजराहो एयरपोर्ट पहुंचना होगा। अगर आप ट्रेन से जाती हैं, तो खुजराहो रेलवे स्टेशन तक जाएं। स्टेशन से पर्सनल कैब या ऑटो-रिक्शा करके मंदिर पहुंच सकती हैं। इसके अलावा सड़ग मार्ग से भी आप यहां तक आ सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 26 Aug 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 24 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष समाज में आपका कद ऊंचा होगा। नए लोगों से लाभ होगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। डांवाडोल स्थिति, समस्याएं आ सकती है।वृषइष्ट मित्रों से सहयोग मिलेगा। अचल सम्पत्ति विवाद संवाद से सुलझेगा। चिंता और खर्च की ज्यादा चिंता रहेगी। कर्ज उतारने की चिंता और तैयारी।मिथुनसंघर्ष के बाद अनुमान से कम सफलता। उचित परमर्श से ही पूंजीनिवेश करें। बनते हुए काम पुनः रूक सकते हैं। मुश्किलें अधिकारी वर्ग के सहयोग से दूर।कर्कआर्थिक मामलों के लिए अच्छा दिन। ससुराल से मतभेद हो/बढ़ सकते हैं। सभा समारोह में उत्साह से भाग लेंगे। दोपहर तक जरूरी काम निपटा लें।सिंहअच्छा दिन है, सुख संतोष मिलेगा। उत्साह का संचार होगा, वायदा पूरा करेंगे। किसी नई योजना का श्री गणेश होगा। दूसरों की बुद्धि से भी, अपने विवेक से काम लें।कन्यामहत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं। गुप्त योजनाएं बनेगी और सफल होगी। हर तरह से जोखिम से दूर रहें। किसी के आर्शीवाद विशेष से भाग्य चमकेगा।तुलाभाई-बहिन का महत्व समय में आयेगा। दुविधा की स्थिति, निर्णय लेने में अक्षम रहेंगे। जल्दबाजी में नुकसान ही नुकसान। खर्चें बढेंगे-सोच समझकर काम करें।वृश्चिक सरकारी कामों में सफलता मिलेगी। छोटी-छोटी बातों की उपेक्षा न करें। बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी करेंगे। अच्छा समय है अधिकार और प्रभाव बढ़ेंगे।धनुधन भी मिलेगा और उपहार भी। परिणाम आपके पक्ष में रहेंगे। मेल-मिलाप और पार्टी का आयोजन। कार्य क्षेत्र में खास सफलता।मकर वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। पारिवारिक संपत्ति से लाभ। जीवन शैली में परिवर्तन का विचार आयेगा। उन्नति/ विकास के अवसरों का लाभ लें।कुंभसभी कार्य सरलता से पूरे होंगे। मनोरंजन में व्यस्त रहेंगे। अपने &#039;राज&#039; किसी को न बताएं। विशेषाधिकार सहित सबकुछ मिलेगा।मीनचुनौतियों भरा दिन है, सावधान रहें। घरेलू वस्तुओं की खरीद में व्यस्तता। मित्रों के सहयोग से काम बनेंगे। किसी राजनेता या उच्चाधिकारी से मित्रता बढ़ेगी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 08:15:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Putrada Ekadashi 2026: व्रत पारण के बिना नहीं मिलता फल, नोट करें Shubh Muhurat और पारण की सही विधि</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। श्रावण महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस महीने में पुत्रदा एकादशी महत्वपूर्ण मानी जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi 2026) व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को सच्चे मन से करने से साधक को सभी पाप नष्ट हो हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि बनीं रहती है। किसी भी एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है, जब इसका पारण सही से किया जाए। अगर साधक व्रत का पारण नहीं करता है, उसे शुभ फलों की प्राप्ति नहीं होती है और व्रत अधूरा माना जाता है। द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण करना अनिवार्य होता है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि व्रत का पारण कब और कैसे करें।पुत्रदा एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक, इस बार 23 अगस्त को पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जाएगा और 24 अगस्त को वैष्णवजन पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी।पुत्रदा एकादशी तिथि की शुरुआत- 23 अगस्त को देर रात 02 बजे से। पुत्रदा एकादशी तिथि का समापन- 24 अगस्त को सुबह 04 बजकर 18 मिनट पर।पुत्रदा एकादशी व्रत पारण का समयपुत्रदा एकादशी का व्रत पारण 24 अगस्त को किया जाएगा। इस दिन व्रत का पारण करने शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 41 मिनट से लेकर शाम 04 बजकर 16 मिनट तक है। इस अवधि के दौरान किसी भी समय व्रत का पारण किया जा सकता है। पुत्रदा एकादशी व्रत की पारण विधि - द्वादशी के दिन स्नान करके सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दें। - मंदिर की सफाई करने के बाद गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध करें। - अब भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। - इसके बाद श्री विष्णु को फूल, फल, नैवेद्य और तुलसी दल अर्पित करें। - आरती करें और मंत्रों का जप करें।  - फिर व्रत के दौरान हुई किसी भी जाने-अनजाने भूल को लेकर प्रभु से क्षमा याचना करें। - पारण करने से पहले किसी मंदिर में या गरीब लोगों को आटा, दाल और चावल आदि का दान करें। - आखिर में भगवान को लगाए भोग और प्रसाद का ग्रहण कर अपना व्रत खोलें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Raksha Bandhan 2026 पर Rahu Kaal का रखें विशेष ध्यान, इस Shubh Time पर बांधें राखी और करें विशेष पूजा</title>
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<description><![CDATA[ सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करती है। हालांकि राखी बांधने से पहले विशेष पूजा होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ-मुहूर्त में विधि-विधान से रक्षाबंधन की पूजा करने से भाई के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आइए आपको बताते हैं रक्षाबंधन 2026 पर राखी की पूजा का शुभ समय और सही विधि।रक्षाबंधन 2026 पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्तइस साल 2026 में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। वैसे इस दिन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक बताया गया है। राखी बांधने का जो शुभ मुहूर्त है, उसी समय पूजा करना शुभ माना जाता है।हिंदू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर होगी और इसका समापन 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा। जबकि, राहुकाल सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक रहने वाला है। इस दौरान राखी बांधने और उसकी पूजा करने से बचना चाहिए।रक्षाबंधन पर किन देवी-देवताओं की पूजा करें?इस दिन राखी बांधने से पहले घर के मुख्य द्वार या दीवार पर गेरू और चावल के घोल से श्रवण कुमार का चित्र बनाकर उनकी पूजा करें। रक्षाबंधन के दिन भगवान गणेश और अन्य देवी-देवताओं की पूजा भी की जाती है। भाई की पूजा करने के लिए तैयारी ऐसे करेंरक्षाबंधन के दिन भाई लकड़ी के पाट पर बैठाएं और उनका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें। पूजा की थाली में रोली, कुमकुम, अक्षत, हल्दी, दीपक, राखी और मिठाई रखें।इसके बाद घी का दीपक जलाएं । अपने भाई के सिर पर रूमाल या कोई साफ वस्त्र रखें। कुमकुम, हल्दी और अक्षत से भाई के माथे पर मंगल तिलक लगाएं।राखी बांधने की सही विधिइसके बाद भाई की आरती उतारें। इसके बाद उसकी दाहिनी कलाई पर राखी बांधें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, राखी में तीन गांठें लगाना शुभ होता है। वैसे ये गांठें सुख, सुरक्षा और समृद्धि का प्रतीक है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Raksha, Bandhan, 2026, पर, Rahu, Kaal, का, रखें, विशेष, ध्यान, इस, Shubh, Time, पर, बांधें, राखी, और, करें, विशेष, पूजा</media:keywords>
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<title>31 अगस्त को Kajari Teej, Bahula Chauth और Sankashti Chaturthi का महासंयोग, जानें धार्मिक महत्व और शुभ मुहूर्त</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में व्रत-त्योहार का विशेष महत्व है। वैसे श्रावण मास का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है, जबकि भाद्रपद का महीना भगवान गणेश, भगवान श्री कृष्ण और श्रीविष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। इस साल सावन का महीना 28 अगस्त 2026 को श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन समाप्त हो जाएगा। इसके अगले दिन यानी 29 अगस्त, 2026 शनिवार के दिन भाद्रपद मास की शुरुआत होगी। भादो की शुरुआत में कुछ खास पर्व का एक साथ संयोग बन रहा है।31 अगस्त को एक साथ तीन-तीन पर्वहिंदू पंचांग के मुताबिक, 31 अगस्त 2026 सोमवार का दिन भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी  तिथि के दिन एक साथ तीन पर्व का शुभ संयोग बन रहा है।वैसे इस दिन कजरी तीज का व्रत रखा जाएगा, बहुला चौथ और हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब एक ही दिन प्रमुख तिथि या पर्व एक ही साथ पड़ती है, तो उसका आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है।कजरी तीज, बहुला चौथ और हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी क्या है?इस बार 31 अगस्त को कजरी तीज, बहुला चौथ और हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का शुभ संयोग बन रहा है- कजरी तीज भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज मनाई जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार भादो मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 30 अगस्त को शुरु होकर अगले दिन 31 अगस्त को सुबह 8 बजकर 52 मिनट पर होगी। उदया तिथि के अनुसार, इस साल कजरी तीज 31 अगस्त को मनाई जाएगी।बहुला चौथभाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर बहुला चौथ मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती है और भगवान श्री कृष्ण, गणेश जी और गौ माता की विशेषकार पूजा करते हैं।हेरम्ब संकष्टी चतुर्थीसनातन धर्म में भगवान गणेश को चतुर्थी तिथि समर्पित है। हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी भाद्रपद मास की चतुर्थी तिथि पर ही मनाई जाती है। यह पर्व भगवान गणेश के हेरम्ब स्वरुप को समर्पित है। वैसे इस साल यह व्रत 31 अगस्त को रखा जाएगा। इस दिन साधक संकटो और पापों से मुक्ति पाने के लिए रात में चंद्रमा के दर्शन जरुर करें, इसके बाद ही व्रत का पारण करें।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 04:30:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 23 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष सभी के कल्याण की योजनाओं के आगे बढाएगें। अच्छे परिणाम देने वाला दिन है। थोड़े से परिश्रम से बड़ा लाभ होगा। किए गये प्रयत्नों का सुपरिणाम मिलेगा।वृषसमस्याएं सरलता से सुलझ जाएगी। लापरवाही से बचें। मन अस्थिर और उदास रहेगा। स्वास्थ्य संबंधी चिंता हो सकती है।मिथुननए पुराने मित्रों से लाभ होगा। सेहत ढीली रहेगी। विदेश से शुभ समाचार और धन लाभ। चिर प्रतीक्षित अच्छे समय का शुभारंभ है।कर्कदफ्तर में अपमान सहना पड़ सकता है। संतान संबंधी चिंताएं बनी रहेंगी। भाइयों से सम्पत्ति विवाद सुलझेगा। अच्छे परिणाम देने वाला दिन है।सिंहराजदंड की आशंका बनी रहेगी। चिंता और फ्रिक से दूर रहें। धन के लेन-देन की समस्या। हानिकारक दिन है, सतर्कता बरतें। कन्यासंतान की शिक्षा/विवाह कार्य में सफलता। महत्वपूर्ण परिवर्तन के संकल्प ले सकते हैं। अटके-लटके हुए काम पूरे होंगे। काम मन लगाकर करें, उपेक्षा घातक।तुलाआपके अनुभव की विजय होगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। &#039;पार्टनरशिप&#039; में बाधा। राजनीतिज्ञों के साथ सम्पर्क बढ़ेंगे।वृश्चिक विरोधी पस्त होंगे, आप आगे बढ़ेंगे। भौतिक सुख साधन बढ़ेंगे। यात्रा और मनोरंजन करने का दिन है। सामान्य से शुभता की ओर बढ़ता दिन।धनुपदोन्नति के लिए सिफारिश होगी। मन अस्थिर रहेगा, निर्णय नहीं ले पाएंगे। निर्धारित लक्ष्य पूरे होंगे। उच्चाधिकारियों का सहयोग मिलेगा।मकर काम करने की पद्धति में परिवर्तन होगा। मान सम्मान बढ़ेगा, अधिकारियों की कृपा मिलेगी। सहयोगी ही निंदा और हानि करेंगे। षडयंत्र के शिकार हो सकते हैं।कुंभअशांति से शांति की ओर बढ़ेंगे। समाज में आपका कद बढ़ेगा। सभी कार्य सफल होंगे। लम्बी दूरी की यात्रा होगी।मीनसरकार से सहयोग और धन की प्राप्ति। किसी नए काम की जिम्मेदारी उठानी पड़ सकती है। विद्यार्थियों के प्रयास सार्थक होंगे। मिश्रित फलों की प्राप्ति, शुभाशुभ फल। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 04:30:12 +0530</pubDate>
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<title>Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर 3 गांठों का क्या है Vedic महत्व? Astrology से जानें लाभ</title>
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<description><![CDATA[ इस बार रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। हर साल सावन की पूर्णिमा तिथि पर राखी का पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है। रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास का पवित्र प्रतीक है।इस दिन बहनें अपने भाई कलाई पर राखी बांधती है और माथे पर तिलक लगाती हैं। वहीं, बहनें अपने भाई की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की प्रभु से कामना करती हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि राखी बांधते समय हमेशा तीन गांठे क्यों लगाई जाती है। दरअसल, यह परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। आइए आपको इस बारे में विस्तार से जानकारी बताते हैं।राखी पर 3 गांठों का महत्व&quot;त्रिदेव रक्षा कुर्वन्तु सर्वदा।&quot; — शास्त्रीय मान्यतात्रिदेवों का प्रतीक और उनका महत्वअसल में ये 3 गांठें त्रिदेवों- ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती है-पहली गांठ (ब्रह्मा) - भाई की लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य के लिए लगाई जाती है। दूसरी गांठ (विष्णु)- समृद्धि और सुरक्षा प्रदान करती है।तीसरी गांठ (शिव)- नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करती हैं और मानसिक शांति प्रदान की जाती है।ग्रहों और जीवन के पुरुषार्थों से कनेक्शनइसके अतिरिक्त, यह 3 गांठें नवग्रहों के अशुभ प्रभाव को शांत करने और भाई-बहन के रिश्ते को धर्म, अर्थ और काम के सही संतुलन से बांधने का प्रतिनिधित्व करती है।इन बातों का रखें ध्यान - जब आप राखी बांधें तो देखे लें कि भद्रा काल तो नहीं है। शास्त्रों में माना गया है कि भद्रा काल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। इस दौरान शुभ काम करने की मनाही होती है। - राखी को हमेशा शुभ मुहूर्त में ही बांधनी चाहिए। - राखी बांधते समय भाई-बहन काले कपड़े नहीं पहनें। माना जाता है कि काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।  - जब अपने भाई को राखी बांधे, तो भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। वही, बहन के मुख पश्चिम या दक्षिण दिशा की तरफ होना जरुरी है। - राखी बांधते समय बहन को किसी बारे में गलत नहीं सोचना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
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<title>Ganesh Chaturthi Celebration: फिल्मी या कस्टमाइज्ड मूर्ति से बचें, जानें गणेश चतुर्थी के लिए शास्त्र समम्मत Idol Selection के संबंधी कड़े नियम</title>
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<description><![CDATA[ करोड़ों भक्त गणेश चतुर्थी का बेसब्री से इंतजार करते हैं ताकि वह बप्पा का स्वागत कर सके। हिंदू धर्म में यह सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है गणेश चतुर्थी। देशभर धूमधाम से यह त्योहार मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की पूजा, उपासना और सेवा का प्रतीक है। इस बार गणेशोत्सव 14 सितंबर 2026, सोमवार के दिन मनाया जाएगा, यह 10 दिनों तक चलेगा। पूरे भारत वर्ष में गणेश चतुर्थी के मौके पर जगह-जगह गणपति जी के पंडाल लगाए जाते हैं। वहीं, इन पंडालों में भगवान गणेश की भव्य मूर्तियां स्थापित कराई जाती है। हर साल गणपति बप्पा की मूर्तियों में तरह-तरह की क्रिएटिविटी देखने को मिलती है।खासकर कई जगहों पर गणेश जी को महादेव के रुप में दर्शाया जाता है, तो कहीं नारायण के रुप में, कही उन्हें साधु-संतों के भेष में तो कहीं प्रसिद्ध फिल्मी पात्रों और मनुष्यों के चेहरे के साथ स्थापित किया जाता है।कभी किसी ने सोचा है कि, क्या देवमूर्ति को किसी भी रुप में बनाया जा सकता है? क्या भगवान गणेश की कस्टमाइज मूर्तियों की पूजा करने का विधान है और इस पर शास्त्र क्या कहते हैं? आइए आपको बताते हैं पूरी जानकारी।कस्टमाइज मूर्तियों की पूजा करनी सही या गलत?धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्रत्येक देवता की अपनी स्वतंत्र सत्ता, रुप और गुणों को निर्धारित किया गया है। पुराणों में और आगम शास्त्रों में कही भी ऐसा नहीं लिखा है कि किसी भी देवता की मूर्ति में दूसरे देवता का चेहरा लगाना चाहिए। जबकि हर एक देवता का रुप उसकी तत्व शक्ति का प्रकट स्वरुप माना जाता है। ऐसे में किसी भी देवता की मूर्ति का स्वरुप बदलना विकृति कहा जा सकता है। खासकर मूर्ति का स्वरुप जैसे शास्त्र में बताया गया है वैसे ही होना अनिवार्य है। किसी भी देवता का रुप जोड़ना, संतों का रुप मिलाना या फिर मनुष्यों का रुप मिलाना इसे वर्जित माना जाता है और यह शास्त्र समम्मत नहीं माना जाता है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक देवता के हाथों में कौन-सा आयुध हो, कौन-सी मुद्रा हो ये निश्चित होती है। जैसे भगवान विष्णु के हाथों में शंख, चक्र और गदा होता है, वैसे ही भगवान गणेश के हाथों में पाश, अंकुश, मोदक और अभय मुद्रा होती है।जब भी आप भगवान गणेश की मूर्ति खरीदें तो पहले इन बातों का जरुर ध्यान रखें कि, मूर्ति शास्त्र के अनुसार न बनी हो तो दैवीय शक्ति का आवेश उस मूर्ति में नहीं होता है। इसलिए जब आप गणेश चतुर्थी से पहले भगवान गणेश की मूर्ति खरीदन जाए, तो फैंसी या कस्टमाइज मूर्तियों को खरीदने से बचें। सच्चे मन से श्री गणेश जी की पूजा करें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Ganesh, Chaturthi, Celebration:, फिल्मी, या, कस्टमाइज्ड, मूर्ति, से, बचें, जानें, गणेश, चतुर्थी, के, लिए, शास्त्र, समम्मत, Idol, Selection, के, संबंधी, कड़े, नियम</media:keywords>
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<title>Shravan Putrada Ekadashi: श्रावण पुत्रदा एकादशी पर Lord Vishnu की कृपा पाने का सुनहरा अवसर, जानें सही व्रत नियम और महत्व</title>
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<description><![CDATA[ श्रावण माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी या पवित्रा एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत करने और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति को संतान सुख, परिवार की समृद्धि और संतान के उत्तम स्वास्थ्य की कामना पूरी होती है। इस बार आज यानी की 23 अगस्त 2026 को श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जा रहा है। तो आइए जानते हैं श्रावण पुत्रदा एकादशी की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक 23 अगस्त की रात 02:00 बजे से श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत हुई है। जोकि अगले दिन यानी की 24 अगस्त 2026 की सुबह 04:18 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 23 अगस्त को श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जा रहा है। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07:32 मिनट से लेकर दोपहर 12:24 मिनट तक है।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर व्रत का संकल्प करें और घर के पूजा स्थान की अच्छे से साफ-सफाई करें। फिर एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करें। अब श्रीविष्णु की प्रतिमा के सामने दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद उनको फल-फूल, माला, रोली, कुमकुम और नैवेद्य आदि अर्पित करें।भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल जरूर शामिल करना चाहिए। इसके बाद पुत्रदा एकादशी व्रत का पाठ करें और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। पूजा के अंत में भगवान श्रीहरि विष्णु की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि व संतान के कल्याण के लिए प्रार्थना करें। अंत में पूजा में होने वाली भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें।महत्वमाना जाता है कि श्रावण पुत्रदा एकादशी को संतान सुख और परिवार की खुशहाली के लिए विशेष फलदायी होती है। वहीं इस एकादशी का व्रत करने से सुख-समृद्धि, संतान की उन्नति और अच्छे स्वास्थ्य की कामना भी पूरी होती है। एकादशी का व्रत करने और पूजा-अर्चना से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 04:30:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Sawan Second Pradosh Vrat 2026: 24 या 25 अगस्त कब है सावन का दूसरा प्रदोष व्रत? जानें सही Date, Puja Muhurat और धार्मिक महत्व</title>
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<description><![CDATA[ श्रावण मास भगवान शिव को अति प्रिय है। इस महीने में सच्चे हृदय से भोलेनाथ की पूजा-पाठ करने से साधक को शुभ फल प्राप्त होते हैं। पूरे महीने में भक्तजन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के उपाय आजमाते हैं। वैसे इस महीने में पड़ने वाले सोमवार व्रत का सबसे ज्यादा महत्व है, उससे कई ज्यादा प्रदोष व्रत का महत्वपूर्ण माना जाता है।इस बार सावन में दो प्रदोष व्रत हैं जिनमें पहला व्रत सावन के दूसरे सोमवार को पड़ा था और अब दूसरा प्रदोष व्रत सावन शुक्ल पक्ष की त्रियोदशी को पड़ेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत जिस दिन पड़ता है उसी नाम से जाना जता है। उदाहरण के तौर पर सोमवार को पड़े तो सोम प्रदोष, शनिवार को पड़े शनि प्रदोष। वहीं, गुरुवार को प्रदोष पड़े तो इसको गुरु प्रदोष कहा जाता है , मंगलवार को भौम प्रदोष कहा जाता है।असल में सावन का दूसरा प्रदोष भी मंगलवार के दिन पड़ेगा, इसलिए यह भौम प्रदोष है। आइए आपको बताते हैं इसकी सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है?सावन का दूसरा प्रदोष व्रत 2026 कब है?हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही प्रदोष व्रत का शुभ मुहू्र्त इस प्रकार है- - त्रयोदशी तिथि आरंभ-  25 अगस्त 2026, मंगलवार, प्रातः 06 बजकर 20 मिनट से - त्रयोदशी तिथि समापन -  26 अगस्त 2026, बुधवार, प्रातः 7 बजकर 59 मिनट पर - खासतौर पर प्रदोष व्रत हमेशा उसी दिन मान्य जाता है, जिस दिन प्रदोष काल का शुभ समय मिल रहा होता है, इसलिए सावन का दूसरा प्रदोष व्रत 25 अगस्त को ही मनाया जाएगा। क्योंकि यह व्रत मंगलवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे भौम प्रदोष कहा जा रहा है।प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त-सावन प्रदोष व्रत ब्रह्रा मुहूर्त- 25 अगस्त, प्रातः 04 बजकर 27 मिनट से प्रातः 05 बजकर 11 मिनट तक-अभिजीत मुहूर्त- प्रातः 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक-विजय मुहूर्त दोपहर- 02 बजकर 32 मिनट से दोपहर 03 बजकर 24 मिनट तक-प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त- सायं 06 बजकर 51 मिनट से रात्रि 09 बजकर 04 मिनट तक - क्योंकि भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करनी शुभ मानी जाती है, तो आप इसी शुभ मुहूर्त में भौम प्रदोष की पूजा करें।सावन के दूसरे प्रदोष व्रत का महत्व क्या है?इस बार सावन का दूसरा प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ रहा है, इस दिन मंगला गौरी व्रत भी रखा जाएगा। इसलिए इस व्रत का माहात्म्य और ज्यादा बढ़ जाता है। वैसे यह व्रत मंगलवार को रखा जाएगा, इसलिए इसे भौम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा। प्रदोष व्रत में आप भगवान शिव के साथ माता गौरी की पूजा करेंगे, तो आपकी कई समस्याओं दूर जाएंगी। इस दिन आप माता गौरी और भगवान शिव के साथ ही हनुमान जी का पूजन भी करें। ऐसा करने से आपको सभी बाधाएं दूर होगी। जो साधक इस व्रत को सच्चे मन से रखता है उसका स्वास्थ्य और धन लाभ का आशीर्वाद मिलेगा।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Sawan, Second, Pradosh, Vrat, 2026:, या, अगस्त, कब, है, सावन, का, दूसरा, प्रदोष, व्रत, जानें, सही, Date, Puja, Muhurat, और, धार्मिक, महत्व</media:keywords>
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<title>Astrology Tips: शनिवार को भूलकर भी न खरीदें Salt और Broom, जीवन में बढ़ सकती है आर्थिक दरिद्रता</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष और ग्रह शास्त्र में शनिवार का दिन मुख्य रूप से न्याय और कर्म के देवता शनि देव को समर्पित होता है। शनि देव का स्वभाव कठोर माना जाता है। माना जाता है कि अगर कुंडली में शनि ग्रह की स्थिति अच्छी होती है, तो जातक को अपार सफलता मिलती है। वहीं हिंदू धर्म के ज्यादातर लोग शनिवार के दिन कुछ खास सावधानियों बरतते हैं। जिससे कि शनि दोष के प्रभाव से मुक्त रहा जा सके। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि शनिवार के दिन क्या करना सही और किन कार्यों को करने की मनाही होती है।शनिवार को क्या न खरीदेंलोहे और स्टील की चीजें न खरीदेंशनिवार के दिन स्टील और लोहे से जुड़ी चीजों को खरीदने से बचना चाहिए। लोहा शनि से जुड़ी वस्तु है। जिस कारण शनिवार को इन चीजों को खरीदने से घर-परिवार में दुर्भाग्य का आगमन होता है।इसे भी पढ़ें: Sawan Second Pradosh Vrat 2026: 24 या 25 अगस्त कब है सावन का दूसरा प्रदोष व्रत? जानें सही Date, Puja Muhurat और धार्मिक महत्वसरसों या वनस्पति का तेल न खरीदेंवहीं शनिवार को शनि देव की प्रतिमा पर सरसों का तेल चढ़ाना शुभ होता है। लेकिन शनिवार को सरसों का तेल आदि खरीदने से बचना चाहिए। इस दिन तेल खरीदने से बीमारियां घर आती हैं।नमकइसके अलावा शनिवार के दिन किसी से नमक न तो उधार या मांग कर लेना चाहिए और न ही इसको खरीदना चाहिए। अगर ऐसा करते हैं, तो इससे कर्ज बढ़ सकता है।झाड़ूशनिवार को झाड़ू भी नहीं खरीदना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में दरिद्रता का वास होता है। कुछ लोग शनिवार के दिन झाड़ू खरीदना शुभ मानते हैं, तो कुछ अशुभ मानते हैं।स्याही और पेनपेन, कॉपी, स्याही, कागज, कलम और दवात का संबंध विद्या से माना जाता है। वहीं विद्या का ग्रह बृहस्पति को माना जाता है। इसलिए पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी चीजों को गुरुवार के दिन खरीदना चाहिए। शनिवार को स्याही और पेन खरीदने से जातक अपयश का भागी होता है।ईंधनशनिवार के दिन ईंधन से जुड़ी वस्तुएं जैसे केरोसिन, पेट्रोल और माचिस खरीदने से बचना चाहिए। भारतीय संस्कृति में ईंधन को अग्नि देवता से जोड़कर देखा जाता है, जो पंच तत्वों में से एक और बेहद पवित्र है। माना जाता है कि, शनिवार के दिन खरीदा गया ईंधन परिवार को कष्ट पहुंचाने का कार्य करता है।काले जूतेमाना जाता है कि, शनिवार के दिन काले रंग के जूते, कपड़े और काली छतरी खरीदने से बचनी चाहिए। मान्यता है कि, शनिवार को खरीदी गई वस्तु का इस्तेमाल करने से व्यक्ति को असफलता का सामना करना पड़ सकता है।शनिवार के दिन क्या करेंशनिवार का दिन दान के लिए अत्यंत विशेष होता है। माना जाता है कि शनिवार को शनि से जुड़ी कुछ वस्तुओं का दान करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। वहीं इससे शनि देव भी प्रसन्न होते हैं।शनिवार के दिन शनिदेव को प्रसन्न करने से लिए उनकी प्रतिमा पर काले तिल अर्पित करना चाहिए। शनिदेव को तिल से बनी चीजें अत्यंत पसंद है। जो व्यक्ति शनिवार को काले तिल का दान करता है, उसके सभी शनि दोष मिटते हैं।शनिवार के दिन घर के पश्चिमी कोने में कच्चा नमक रखने से यह निगेटिव एनर्जी को सोख लेता है। वहीं जब नमक में नमी आ जाए, तो इसको बिना छुए पानी में बहा देना चाहिए।शनिवार के दिन उन तमाम लोगों को किसी न किसी तरह की मदद करें, जो आपको किसी न किसी तरह की सेवा प्रदान करते हैं। शनिदेव उन लोगों से काफी प्रसन्न होते हैं, जिन्हें दूसरों की मदद करना पसंद है।वहीं शनिवार को अनाथालय में किताब का दान करना चाहिए। ऐसा करने से करियर में सफलता मिलती है। क्योंकि शनि को अनुशासन पसंद है। ऐसे में अगर आप किसी जरूरतमंद को किताबों का दान करते हैं, तो उसका आध्यात्मिक लाभ कई गुना बढ़कर मिलता है।शनिवार को शनि देव के अलावा हनुमान जी की पूजा करने से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं। इस दिन शनि चालीसा और हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है।शनि देव को वह लोग अधिक पसंद हैं, जो अपना काम पूरी ईमानदारी से करते हैं। उनको निस्वार्थ, अन्याय और दुष्ट लोग नहीं पसंद होते हैं। ऐसे लोगों पर शनि देव की हमेशा महादशा रहती है। इसलिए शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सबसे पहले अपने अंदर ईमानदारी और सकारात्मक बदलाव लाने चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:30 +0530</pubDate>
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<title>Kajari Teej Vrat 2026: क्या कुंवारी लड़कियां रख सकती हैं कजरी तीज व्रत? जानें सही नियम और सटीक Rituals</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व माना जाता है। श्रावण मास का समापन होने के बाद भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि कजरी तीज का पर्व मनाया जाता है। वैसे साल में मुख्य रुप से तीज का पर्व 3 बार आता है, पहला सावन में पड़ने वाली हरियाली तीज, दूसरी भाद्रपद में आने वाली कजरी तीज और तीसरी भाद्रपद की हरतालिका तीज। इन सभी तीजों का अपना-अपना अलग महत्व है।हालांकि, भाद्रपद की कजरी तीज का त्योहार काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त 2026, सोमवार को रखा जा रहा है। वैसे यह व्रत मु्ख्य रुप से सुहागिन महिलाएं रखती हैं, वे अपने पति की लंबी आयु और अच्छी सेहत के लिए उपवास रखती हैं।इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इसके साथ ही नीमड़ी माता की पूजा की जाती है। अब कई लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या इस व्रत को कुंवारी लड़कियां रख सकती हैं? आइए आपको बताते हैं इसका सही उत्तर।क्या कजरी तीज का व्रत कुंवारी लड़कियां रख सकती हैं?जी हां, कजरी व्रत को कुंवारी लड़कियां भी अपने अच्छे जीवनसाथी की कामना में कर सकती हैं। पौराणिक कथा के कथा के अनुसार, यह व्रत माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था। माना जाता है कि यदि कुंवारी कन्याएं इस व्रत को रखती हैं और पूरे विधान से शिव जी और माता पार्वती की पूजा करती है, उन्हें अच्छा जीवनसाथी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।कुंवारी लड़कियों के लिए कजरी तीज व्रत के नियम - इस दिन सबसे पहले स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अब भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। - इसके बाद एक चौकी में लाल कपड़ा बिछाएं और उसमें भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। - इस पूजा में माता पार्वती को सुहाग की सामग्री, फूल और फल अर्पित करें। अब भगवान शिव को जल, बेलपत्र और पुष्प चढ़ाएं। - पूजा के समय कजरी तीज व्रत की कथा सुनें। इस व्रत में शाम के समय भी विधि-विधान से पूजा करें और आरती करें। - इसके अतिरिक्त पूरा दिन व्रत का पालन करें और अगले दिन ही व्रत का पारण करे। - कंजरी व्रत को कुंवारी कन्याएं पूरी श्रद्धा और सामर्थ्य के साथ करें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 20 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 20 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 20 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष (Aries)लव लाइफ: आज आपके स्वभाव में उत्साह रहेगा, लेकिन जल्दबाजी में कही गई बात पार्टनर को बुरी लग सकती है। सिंगल जातकों के जीवन में किसी पुराने मित्र के जरिए नया प्रेम प्रस्ताव आ सकता है।सलाह: साथी के विचारों का सम्मान करें और उनकी बात ध्यान से सुनें।उपाय: भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।वृषभ (Taurus)लव लाइफ: आज आपके रिश्ते में ठहराव और गहराई देखने को मिलेगी। जो लोग लंबे समय से रिलेशनशिप में हैं, वे शादी के बारे में अपने परिवार से बात कर सकते हैं।सलाह: अपने विचार जबरदस्ती पार्टनर पर न थोपें।उपाय: आज किसी मंदिर में सफेद फूल चढ़ाएं।मिथुन (Gemini)लव लाइफ: आज का दिन संवाद के लिहाज से बहुत अच्छा है। यदि पिछले कुछ दिनों से कोई गलतफहमी चल रही थी, तो आज खुलकर बात करने से वह पूरी तरह दूर हो जाएगी।सलाह: पार्टनर के साथ किसी छोटी ट्रिप का प्लान बना सकते हैं।उपाय: माता लक्ष्मी का स्मरण करके दिन की शुरुआत करें।कर्क (Cancer)लव लाइफ: आज आप भावनात्मक रूप से थोड़े संवेदनशील रह सकते हैं। पार्टनर की किसी बात को ज्यादा गहराई से न लें। शाम तक माहौल खुशनुमा हो जाएगा।सलाह: अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त करें, उन्हें मन में न दबाएं।उपाय: शिवलिंग पर जल अर्पित करें।सिंह (Leo)लव लाइफ: आपका आकर्षण और आत्मविश्वास चरम पर रहेगा। जो लोग सिंगल हैं, उन्हें आज कोई विशेष व्यक्ति आकर्षित कर सकता है। शादीशुदा जातकों के बीच आपसी तालमेल बहुत बढ़िया रहेगा।सलाह: अहंकार या &#039;मैं&#039; की भावना को रिश्ते के बीच न आने दें।उपाय: सूर्यदेव को जल चढ़ाएं।कन्या (Virgo)लव लाइफ: आज काम की अधिकता के कारण पार्टनर को समय देना कठिन हो सकता है। इससे साथी थोड़ी नाराजगी जता सकता है, लेकिन आपकी समझदारी से बात संभाल ली जाएगी।सलाह: फोन या मैसेज के जरिए पार्टनर से लगातार संपर्क में रहें।उपाय: तुलसी के पौधे में जल दें।तुला (Libra)लव लाइफ: प्रेम जीवन में सुख और संतुलन बना रहेगा। आज आपको पार्टनर से कोई सरप्राइज गिफ्ट या कोई खुशखबरी मिल सकती है। सिंगल जातकों के लिए भी दिन काफी सकारात्मक है।सलाह: पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताने के लिए कोई डिनर प्लान करें।उपाय: आज के दिन इत्र (Perfume) का प्रयोग करें।वृश्चिक (Scorpio)लव लाइफ: आज का दिन रोमांस से भरा रहेगा। पुराने मतभेद पूरी तरह से समाप्त होंगे और आप अपने पार्टनर के साथ एक नया और मजबूत जुड़ाव महसूस करेंगे।सलाह: अतीत की बातों को दोबारा उखाड़ने से बचें।उपाय: हनुमान जी के दर्शन करें और लाल फूल चढ़ाएं।धनु (Sagittarius)लव लाइफ: आज आपको अपनी लव लाइफ में नया मोड़ देखने को मिल सकता है। जो लोग नए रिश्ते में बंधे हैं, उनके बीच विश्वास बढ़ेगा। विवाहित जातकों को जीवनसाथी का पूरा सहयोग मिलेगा।सलाह: दूसरों की सलाह पर अपने रिश्ते के फैसले न लें।उपाय: चने की दाल या पीली वस्तु का दान करें।मकर (Capricorn)लव लाइफ: आज अपने पार्टनर की भावनाओं और जरूरतों को प्राथमिकता दें। काम के तनाव को घर या अपने रिश्ते पर हावी न होने दें, अन्यथा दूरी बढ़ सकती है।सलाह: थोड़ा समय निकालकर पार्टनर की बात सुनें।उपाय: शनिदेव की कृपा के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाएं।कुंभ (Aquarius)लव लाइफ: आज आपका मन प्रसन्न रहेगा। पार्टनर के साथ अच्छा तालमेल रहेगा और आप दोनों साथ मिलकर भविष्य के लिए कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।सलाह: किसी तीसरे व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत मामलों में दखल न देने दें।उपाय: किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं।मीन (Pisces)लव लाइफ: प्रेम जीवन में मिठास बनी रहेगी। अगर आप किसी को प्रपोज करने का विचार कर रहे हैं, तो आज का दिन आपके लिए अनुकूल साबित हो सकता है।सलाह: अपनी बात को विनम्रता और स्पष्टता के साथ रखें।उपाय: भगवान विष्णु की पूजा करें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 20 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष पिछली अप्रिय परिस्थितियां जारी रहेगी। धन आने से पहले, उसे खर्च करने की तैयारी। सकारात्मक फलों की प्राप्ति। विशेष प्रतियोगिता में विजय प्राप्त करेंगे।वृषबड़ों का स्वास्थ्य नरम, रूकावटें भी अधिक है। परिवार में सामंजस्य की स्थिति बनेगी। कार्य निबटाने में संघर्ष अधिक होगा। कुछ नए प्रश्न खड़े होंगे, आर्थिक लाभ भी होगा।मिथुनविचारों की कट्टरता छोड़ें, उदार बनें। प्राथमिकता देकर दोपहर तक कार्य पूरा कर लें। कार्य में उपेक्षा महंगी पड़ेगी। जीवनसाथी से समझौता करें, लाभ में रहेंगे।कर्कमहत्वपूर्ण समझौता कर सकते है। काम पर ध्यान दें, अफवाहों से बचें। अचानक अप्रिय घटना, घटने के योग। लम्बी दूरी की यात्रा संभव है।सिंहचारों तरफ निराशा ही निराशा होगी। वरिष्ठ अधिकारियों की कृपा रहेगी। प्रियजनों से विवाद और धन हानि के योग। घर के लिए कीमती सामान की खरीदारी।कन्यासमझौते द्वारा विवाद का हल। रोजगार के साधन बढ़ेंगे, संतान पक्ष से चिंता। मन उदार और उमंग भरा रहेगा। घरेलू सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी।तुलामहत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक दिन है। पारिवारिक जीवन में शांति और मधुरता। कलह और खर्च दोनों ही बढ़ सकते हैं। जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें।वृश्चिक तथा कथित &#039;अपने&#039; ही कष्ट देंगे- मन दुखायेंगे। अचानक विपरीत परिस्थितियां बन सकती है। परिचित के यहां समारोह में भाग लेंगे। विषम परिस्थितियां खर्च बढ़ायेंगी।धनुअधिकार और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। संकट के बादल छट जाएंगे। घर परिवार में आनंद से समय बीतेगा। मेहनत के अनुसार लाभ देने वाला दिन।मकर स्वास्थ्य ठीक नहीं, लोभ लालच सताएंगे। बड़े लोगों से आपका संपर्क बढ़ेगा। खानपान और वाणी पर संयम रखें। चिर-प्रतिक्षित कार्य पूरा होने पर प्रसन्नता।कुंभपारिवारिक सहमति से प्रेम विवाह प्रस्ताव आगे बढ़ेगा। व्यावसायिक क्षेत्र में कठिन प्रतिस्पर्धा, सम्मान। अटके-लटके काम पूरे होंगे। अस्थिरता और मानसिक अशांति।मीनकहीं &#039;सॉरी&#039; बोलना पड़ सकता है। सरकारी मामलों में सतर्क रहने की जरूरत। लेने के देने पड़ सकते हैं, सावधान रहें। विरोधी लोगों पर आप नजर रखें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Astrology Tips: आपकी ये Bad Habits बिगाड़ सकती हैं Planets की चाल, जानें जीवन पर होने वाले Negative Effects</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र में 9 ग्रहों को सबसे खास माना गया है। कहीं न कहीं व्यक्ति के जीवन पर ग्रहों का प्रभाव जरुर पड़ता है। कुंडली में हर एक ग्रह की स्थिति के अनुसार ही जातको को विभिन्न प्रकार के शुभ और अशुभ परिणाम देखने को मिलते हैं। ज्योतिष के अनुसार, ग्रहों को मजबूत स्थिति व्यक्ति सफलता, सम्मान और आत्मविश्वास दिलाती है, जबकि उनकी कमजोरी स्थिति के कारण जीवन में कई तरह की पेरशनियां, बांधाओं से घिर जाना, हर एक काम रुकावट आना और मानसिक अस्थिरता का सामना करना पड़ता है। अक्सर व्यक्ति के कर्म और आदतें भी ग्रहों की शुभ स्थिति को कमजोर कर सकती हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि किन कारणों के चलते ग्रह कमजोर हो जाते हैं।ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन आदतों से बचना चाहिए - धार्मिक मान्यता के अनुसार, गरीब, कमजोर और जरुरतमंद लोगों को परेशान करने से शनि की शुभ स्थिति कमजोर हो जाती है। कहते हैं हमेशा जरुरतमंद लोगों की सहायता करनी चाहिए, इससे जीवन में सकारात्मकता भी बनी रहती है।  - अगर आप बार-बार झूठ बोलते हैं, या फिर किसी को धोखा देते हैं और किसी व्यक्ति के साथ छल-कपट करते हैं, तो गुरु की स्थिति कमजोर हो जाती है। माना जाता है कि इससे व्यक्ति को जीवन में परेशनियों का सामना करना पड़ सकता है। - आपके घर में सुंदर-सुंदर पौधे लगे हैं, लेकिन आप समय पर पानी नहीं दे रहे हैं और उन्हें लगातार सूखा रखते हैं, तो यह बिल्कुल ठीक नहीं है। ऐसा करने से घर की सुख-समृद्धि प्रभावित होती है। पौधों की हमेशा देखभाल करें और नियमित रुप से पानी दें। वहीं, घर में लंबे समय तक सूखे या खराब पौधों को न रखें। - ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, जो व्यक्ति लालच या गलत तरीकों से कमाया हुआ धन शुक्र ग्रह की शुभ स्थिति को कमजोर करता है। यह भौतिक सुख, प्रेम और प्रभाव में मुश्किलें लेकर आता है। - ज्योतिषी के अनुसार, अगर आप गिलास में पानी छोड़ देते हैं, तो यह चंद्रमा की स्थिति को खराब कर देता है। ऐसा करने से तनाव बढ़ता है और मन लगातार अस्थिर रहता है। इसलिए पानी को व्यर्थ नहीं करना चाहिए।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:29 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 21 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 21 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 21 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।आइए जानते हैं कि आज सभी 12 राशियों का लव लाइफ कैसा रहने वाला है:मेष (Aries): आज का दिन पार्टनर के साथ खुशियां बांटने का है। अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करें, लेकिन बातचीत के दौरान वाणी में मधुरता बनाए रखें।वृषभ (Taurus): प्रेम जीवन में स्थिरता और विश्वास बढ़ेगा। अपने साथी के साथ कुछ यादगार पल बिताने का मौका मिलेगा, जिससे रिश्ते में मिठास आएगी।मिथुन (Gemini): सिंगल जातकों के जीवन में किसी खास व्यक्ति की दस्तक हो सकती है। जो लोग पहले से रिश्ते में हैं, उनके बीच का संवाद बेहतर होगा।कर्क (Cancer): भावनात्मक रूप से दिन थोड़ा संवेदनशील रह सकता है। पार्टनर की किसी बात को दिल से न लगाएं, बैठकर बात सुलझाने की कोशिश करें।सिंह (Leo): आज आपका आकर्षण चरम पर रहेगा। जीवनसाथी या पार्टनर का पूरा सहयोग मिलेगा। शाम का समय रोमांस से भरा रहेगा।कन्या (Virgo): काम की व्यस्तता के कारण पार्टनर को समय देना थोड़ा कठिन हो सकता है। फोन या संदेशों के माध्यम से उनसे जुड़े रहें ताकि गलतफहमी न हो।तुला (Libra): लव लाइफ में नया उत्साह देखने को मिलेगा। अगर आप अपने रिश्ते को अगला कदम देना चाहते हैं, तो आज का दिन सकारात्मक संकेत दे रहा है।वृश्चिक (Scorpio): पुरानी गलतफहमियां दूर होंगी और एक-दूसरे के प्रति भरोसा और गहरा होगा। पार्टनर के साथ किसी रोमांटिक डिनर या आउटिंग का प्लान बन सकता है।धनु (Sagittarius): आज अपने पार्टनर के विचारों का सम्मान करें। दूसरों के हस्तक्षेप के कारण रिश्ते में थोड़ा तनाव आ सकता है, इसलिए आपस में ही मामलों को सुलझाएं।मकर (Capricorn): जीवनसाथी या पार्टनर की ओर से कोई सुखद सरप्राइज मिल सकता है। आज आपसी केमिस्ट्री बहुत अच्छी रहने वाली है।कुंभ (Aquarius): रिश्तों में पारदर्शिता रखें। अपनी बातें स्पष्ट रूप से साझा करने से पार्टनर के साथ आपका भावनात्मक जुड़ाव और मजबूत होगा।मीन (Pisces): आज का दिन प्रेम के मामले में बेहद सुखद और सकारात्मक रहेगा। जो लोग किसी से अपने दिल की बात कहना चाहते हैं, उनके लिए समय अनुकूल है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Putrada Ekadashi 2026: क्या सिर्फ पुत्र प्राप्ति के लिए है यह व्रत? जानें बेटी की चाहत पर धार्मिक मान्यताएं और Puja Rituals</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। साल में कुल 24 एकादशी तिथियां पड़ती है और हर महीने 2 एकादशी के व्रत रखे जाते है। सावन के शुक्ल पक्ष में पुत्रदा एकादशी मनाई जाती है। इस बार सावन की पुत्रदा एकादशी 23 और 24 अगस्त 2026 को लेकर चर्चा में है। हिंदू पंचांग के अुनसार, जब एकादशी तिथि लगातार दो दिनों तक सूर्योदय के समय मौजूद रहती है, तो गृहस्थ लोगों के लिए पहले दिन व्रत रखने की परंपरा होती है। वैसे पुत्रदा एकादशी को संतान सुख से जोड़कर देखा जाता है। इस एकादशी में &#039;पुत्र&#039; शब्द होने से सबके मन में सवाल आता है कि बेची की इच्छा रखने वाले दंपति क्या यह व्रत कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं पूरी जानकारी।क्या पुत्रदा एकादशी केवल बेटे की प्राप्ति के लिए है?पुत्रदा एकादशी को पौराणिक कथा राजा सुकेतुमान और उनकी पत्नी से जुड़ी है, जो संतान न होने के कारण परेशान थे। पद्म पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु द्वारा इस एकादशी को संतान प्राप्ति से संबंधित बताया गया। कथा में राजा की इच्छा पुत्र प्राप्ति की होती है और व्रत के फलस्वरुप उन्हें योग्य एवं तेजस्वी पुत्र की प्राप्ती हुई। तभी से पारंपरिक रुप से पुत्रदा एकादशी  को पुत्र प्राप्ति की कामना से जोड़ा गया है। बेटी की चाह रखने वाले दंपती क्या करें?जिन दंपती को बेटी पाने की इच्छा है, वे एकादशी व्रत या भगवान विष्णु की पूजा को लेकर कोई विशेष धार्मिक रोक नहीं मानी जाती है। आप लोग स्वस्थ, संस्कारी और सुखी संतान की कामना के साथ व्रत रख सकते हैं। संकल्प लेते समय अपनी इच्छा को भगवान विष्णु के सामने प्रार्थना के रुप में रख सकते हैं।धार्मिक परंपरा में पुत्र और पुत्री दोनों को परिवार के लिए समान महत्व दिया गया है। मनुस्मति में भी “पुत्रेण दुहिता समा” का उल्लेख मिलता है, जिसका अर्थ है कि पुत्री को पुत्र के समान माना गया है। अब चाहे संतान बेटा हो या बेटी, सबसे महत्वपूर्ण कामना उसका उत्तम स्वस्थ, संस्कारी, सुरक्षित और सुखी होना है। बेटी की कामना हो तो पुत्रदा एकादशी पर करें ये पूजाएकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ माता लक्ष्मी का ध्यान करना चाहिए। देवी लक्ष्मी को सिर्फ धन की देवी नहीं, बल्कि समृद्धि, सौभाग्य, ऐश्वर्य और गृहस्थ सुख से भी संबंधित हैं।  - भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करना चाहिए। - मां लक्ष्मी को कमल और सफेय या लाल फूल अर्पित करें। - “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करें। - इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए अपनी मनोकामना प्रार्थना के रुप में रखें। - सामर्थ्य के अनुसार जरुरतमंदों को भोजन या जरुरी वस्तुओं का दान करें।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Raksha Bandhan 2026 पर Chandra Grahan का साया: Rahu&#45;Moon Yuti से इन 3 राशियों की बढ़ेगी Tension</title>
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<description><![CDATA[ इस बार 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, इस दौरान कुंभ राशि में चंद्रमा के साथ राहु की युति बनेंगी, जबकि इसके ठीक अगले राशि मीन में शनि देव विराजमान है। इसलिए चंद्रमा पर राहु और शनि, दोनों ग्रहों का प्रभाव पड़ने की स्थिति बनेगी। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक माना गया है। वहीं, राहु के प्रभाव से भ्रम और बेचैनी बढ़ सकती है, बल्कि शनि भावनात्मक दबाव और कार्यों में देरी का संकेत देता है। वैसे यह समय कुछ राशियों के लिए ठीक नहीं है। इस दौरान उन्होंने काफी सावधानी बरतनी है।सिंह राशिसिंह राशि के लोगों के लिए यह ग्रहण की स्थिति रिश्तों और साझेदारी से जुड़े मामलों में चुनौतीपूर्ण हो सकती है। पार्टनर के साथ किसी बात को लेकर मतभेद या गलतफहमी पैदा होने की आशंका है। बिजनेस में पार्टनरशिप में जल्दबाजी से फैसला लेने से बचें। किसी बड़े निवेश या आर्थिक लेन-देन को फिलहाल टालना आपके लिए बेहतर हो सकता है। भावनाओं में आकर कोई महत्वूर्ण निर्णय न लें और इसलिए हर मामले में दूसरे पक्ष की बात जरुर सुनें।कुंभ राशियह चंद्र ग्रहण कुंभ राशि में लगने जा रहा है, राहु और चंद्रमा की युति बनने के कारण इस राशि के लोगों को मानसिक स्तर पर अधिक सतर्क रहने की जरुरत है। मन में असमंजस और बेचैनी बनीं रह सकती है, जिसकी वजह से निर्णय लेने में परेशानी हो सकती है। कई बार आप खुद को दूसरों से भावनात्मक रुप से दूर भी महसूस कर सकते हैं। रिलेशनशिप, संतान और शिक्षा से जुड़े मामलों में धैर्य बनाए रखने का समय है। किसी भी निष्कर्ष पर आने से पहले परिस्थितियों को अच्छे से समझना आपके लिए काफी फायदेमंद रहने वाला है।मीन राशिमीन राशि में शनि विराजमान है और इससे पिछली राशि कुंभ में राहु-चंद्रमा की युति के प्रभाव से इस राशि के जातकों पर असर देखने को मिलेगा। वर्कप्लेस पर तनाव और जिम्मेदारियों का दबाव बढ़ने की संभावना है। कार्य के दौरान छोटी-छोटी बातों के लेकर चिंता बनीं रहेगी। हेल्थ के मामले में लापरवाही जरा भी न बरतें। नींद प्रभावित हो सकती है और बेवजह की चिंताएं मन को परेशान कर सकती हैं। खुद को आराम दें और पर्याप्त नींद जरुर लें। नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए ज्योतिषीय उपाय - ग्रहण वाले दिन भगवान शिव का ध्यान करें और पूजन करें। श्रद्धानुसार &#039;ॐ नमः शिवाय&#039; या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। - मन को स्थिर और शांत रखने के लिए  &#039;ॐ सोमाय नमः&#039; मंत्र का जाप कर सकते हैं। - ग्रहण समाप्त होने के बाद अपने सामार्थ्य के अनुसार सफेद वस्तुओं का दान जरुरतमंद व्यक्ति को करें। - शिवलिंग पर जल में थोड़ा कच्चा दूध मिलाकर अर्पित करें और भगवान शिव से मानसिक शांति की प्रार्थना करें।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:28 +0530</pubDate>
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<title>Career Growth और Success के लिए संकटमोचन हनुमान के ये 6 चमत्कारी मंत्र दूर करेंगे जीवन की हर बड़ी बाधा</title>
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<description><![CDATA[ भागदौड़ भरी जिंदगी में हर एक व्यक्ति किसी न किसी परेशानी से जूझ रहा है। हिंदू धर्म में हनुमान जी को &#039;संकटमोचन&#039; भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो भी भक्त सच्चे मन से बजरंगबली की आराधना करता है, उसके जीवन में बड़ी से बड़ी बाधा या संकट पल में दूर हो जाते हैं।यदि आपका जीवन में तनाव, बीमारी, करियर में समस्या चल रही या किसी भी प्रकार का डर बना रहता है, तो हनुमान जी के ये दिव्य मंत्र आपकी पूरी जिंदगी को बदल देगा। आइए आपको इन 6 चमत्कारी मंत्रों से मिलने वाले अद्भुत फायदों के बारे में बताते हैं-डर और नकारात्मकता दूर करने का मंत्रमंत्र: ॐ दक्षिणमुखाय पच्चमुख हनुमते करालबदनाय।रात के समय में आपको भी डर सताता है, बुरे सपने आते हैं या मन में हमेशा घबराहट बनी रहती है, तो आप रोजाना या फिर मंगलवार व शनिवार को इस मंत्र का जप करें। यह मंत्र बुरी नजर और हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करता है और यह एक कवच की तरह हमारी रक्षा करता है।जोश और सकारात्मक ऊर्जा जगाने वाला मंत्रमंत्र: नारसिंहाय ॐ हां हीं हूं हौं हः सकलभीतप्रेतदमनाय स्वाहा।जब आपका शरीर ऊर्जा कम महसूस करें या निराशा आप पर हावा हो रही है, तो इस मंत्र का कम से कम 21 बार जप करें। इससे तुरंत आपके अंदर एक नया जोश और कमाल की ऊर्जा महसूस होगी। शत्रुओं से बचाव और आत्मविश्वास के लिएमंत्र: ॐ पूर्वकपिमुखाय पच्चमुख हनुमते टं टं टं टं टं सकल शत्रु सहंरणाय स्वाहा।अक्सर आपने देखा होगा कि बिना बात के ही लोग आपके दुश्मन बन जाते हैं। ऐसे में मंगलवार या शनिवार को इस मंत्र का जप जरुर करना चाहिए। इस मंत्र के जप से आपके अंदर आत्मविश्वास आता है, बल्कि बिना मतलब के विरोधियों को भी शांत करने में मदद करेगा।नौकरी और तरक्की में आ रही बाधाओं के लिएमंत्र: मर्कटेश महोत्साह सर्वशोक विनाशन।क्या आप भी काफी मेहनत करते हैं, लेकिन बेहतरीन परिणाम नहीं मिलता है। जो आप चाहते हैं वह मुकाम नहीं मिल रहा है, तो आप मंगलवार को 108 बार इस मंत्र का जाप करें। इससे नौकरी और बिजनेस से संबंधित सारी रुकावटें दूर हो जाती है।हर मनोकामना पूरी करने वाली सिद्ध चौपाईमंत्र: मंगल भवन अमंगलहारी द्रवहु सो दशरथ अजिर विहारी।असल में यह चौपाई रामचरितमानस की बहुत ही मीठी और प्रसिद्ध चौपाई है। यदि आप इसको रोजाना पाठ करेंगे, तो शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के कष्ट दूर हो जाएंगे।रोगों से मुक्ति और सफलता का अचूक मंत्रमंत्र: ऊं हं हनुमते नम:इस मंत्र का जप आप रोजाना या फिर मंगलवार व शनिवार के दिन कर सकते हैं। रोज सुबह स्नान के बाद इस मंत्र का जप जरुर करें।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:27 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 21 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष विश्वासघात और धन नाश के योग। कोई गलत निर्णय ले सकते हैं, जल्दबाजी न करें। संतान की उन्नति के लिए योजना आगे बढ़ेंगी। फिजूलखर्ची के योग हैं।वृषथोड़ी सी भी लापरवाही निलंबित कर सकती है। सामाजिक कार्यों में उत्साह रहेगा। विशेष व्यक्ति से भेंट और लाभ के योग। कठिन परिश्रम करना पड़ेगा।मिथुनपरिश्रम का पूरा फल मिलेगा। व्यावसायिक क्षेत्र में कठिन प्रतिस्पर्धा, सम्मान। व्यापार व्यवसाय में तरक्की होगी। परिश्रम के अनुरूप फल मिलेगा।कर्कसम्पर्कों से सफलता के मार्ग खुलेंगे। संघर्ष पूर्ण समय रहेगा। उत्साह से आगे बढ़ेंगे, योजना साकार होगी। संघर्ष के बाद सफलता निश्चित।सिंहबेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। विभागीय पदोन्नति, परीक्षा में सफलता। पैर और एड़ी के दर्द से परेशानी, यात्रा स्थगन। काम बनने में बाधाएं आएगी।कन्याकठिन परिश्रम से ही सफलता मिलेगी। पूर्वकृत प्रयत्नों का सुपरिणाम मिलेगा। गुरुजनों की सलाह से लाभ और विजय। अवसर का लाभ उठाने में सफल रहेंगे।तुलावाहन कष्ट और अन्य कार्यों में रूकावट भी। गुरुजनों के मार्गदर्शन में बढ़ें, लाभ होगा। धन कमाने और संचय में सफलता। मेहमान सहायक सिद्ध होंगे।वृश्चिक शत्रु परास्त होंगे। आपका परिश्रम सुपरिणाम देगा। प्रतिभा प्रदर्शन के अवसर मिलेंगे। रचनात्मकता की प्रशंसा होगी।धनुवजन घटाने के चक्कर में पड़ें। नए सम्पर्क भविष्य में लाभप्रद। गुरुजनों की सलाह से सुधार होगा। आर्थिक स्थिति मजबूत बनेगी पत्रकारों की विशेष।मकर परिवार के मांगलिक कार्य का आयोजन। बाधाएं दूर होगी, व्यापारिक लाभ होगा। अच्छा दिन नहीं है, साजिश के शिकार होंगे। दाम्पत्य जीवन उत्तम और मधुर।कुंभसुनियोजित ढंग से काम करें- सफलता मिलेगी। विवेकपूर्वक निवेश भविष्य में लाभप्रद। उत्तम सफलता मिलेगी। युवक-युवतियों को उन्नति के अवसर मिलेगा।मीनअजनबी से नुकसान होगा। कोई खास चुनौती स्वीकारेंगे। शुभ दिन है, शुभ लाभ के समाचार। किसी खास व्यक्ति के कारण मन उदास। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:27 +0530</pubDate>
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<title>Vastu Remedies: क्या आपके घर में भी है निगेटिविटी? इन Effective Remedies से मिटाएं Money Loss और कलह</title>
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<description><![CDATA[ हर कोई चाहता है कि उनके घर में सुख-शांति और समृद्धि चाहता है। लेकिन अक्सर वास्तु दोष इसकी राह में बड़ी बाधा बन सकते हैं। लोग इन दोषों को सही करने के लिए घरों में तोड़फोड़ करने से घबराते हैं। लेकिन आप बिना किसी तोड़फोड़ के ही अपने घर के वास्तु दोष को आसानी से दूर कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ सरल और प्रभावी उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं। इन उपायों को अपनाकर घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मकता का संचार कर सकते हैं और अपने जीवन में खुशहाली ला सकते हैं।वास्तु दोष का प्रभाववास्तु शास्त्र भारतीय संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। जो घर या किसी स्थान की ऊर्जा को संतुलित करने के सिद्धांतों पर आधारित होता है। माना जाता है कि अगर किसी घर का निर्माण वास्तु के नियमों के हिसाब से नहीं होता है। तो घर में वास्तु दोष पैदा हो सकते हैं। इन दोषों की वजह से घर में निगेटिव एनर्जी का संचार बढ़ जाता है। जिस कारण घर में रहने वाले लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।इसे भी पढ़ें: Putrada Ekadashi 2026: क्या सिर्फ पुत्र प्राप्ति के लिए है यह व्रत? जानें बेटी की चाहत पर धार्मिक मान्यताएं और Puja Ritualsइन समस्याओं में करियर में बाधाएं, सेहत, धन की हानि, पारिवारिक कलह और व्यापार में असफलता आदि शामिल है। अक्सर लोग सोचते हैं कि वास्तु दोष को दूर करन के लिए घर में तोड़फोड़ करना जरूरी है। जबकि आप कुछ आसान उपायों को अपनाकर वास्तु दोष दूर कर सकते हैं।जानें वास्तु दोष दूर करने के उपायवास्तु शास्त्र के मुताबिक घर में कुछ छोटे और जरूरी बदलाव व उपायों को करके निगेटिव एनर्जी को दूर किया जा सकता है और पॉजिटिविटी लाई जा सकती है। इन उपायों को करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है।मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाएंघर के मुख्य द्वार पर सिंदूर से नौ अंगुल लंबा और 9 अंगुल चौड़ा स्वास्तिक का निशान बनाना चाहिए। इससे निगेटिव ऊर्जा खत्म होती है और वास्तु दोष भी दूर होता है। अगर आप हर मंगलवार को यह उपाय करते हैं, तो इससे मंगल ग्रह से जुड़े दोष भी समाप्त होते हैं।पूजा-पाठ करनाअगर घर में रोजाना पूजा-पाठ और कीर्तन आदि होते हैं, तो वहां पर मां लक्ष्मी का वास माना जाता है। इससे भी वास्तु दोष खत्म होता है। अगर आप रोजाना भजन-कीर्तन नहीं कर सकते हैं, तो रोजाना कम से कम गायत्री मंत्र और शांति पाठ करना चाहिए।साफ रखें घरघर की रोजाना और नियमित तरीके से साफ-सफाई करना बेहद जरूरी होता है। क्योंकि जहां पर गंदगी रहती है, वहां राहु सक्रिय रहता है। वहीं जहां दुर्गंध रहती है, वहां पर शुक्र अस्त हो जाता है। घर की साफ-सफाई होने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता हैसक्रिय रखें ईशान कोणघर का उत्तर पूर्वी कोना जल तत्व को दर्शाता है। इसको सक्रिय रखना शुभ होता है। इस दिशा को हमेशा साफ रखना चाहिए। आप यहां पर उगते सूरज, उड़ते हुए पक्षियों और नदियों आदि की तस्वीर को लगा सकते हैं। ईशान कोण दिशा में कलश रखना शुभ माना जाता है, जिससे कार्यों में बाधा नहीं आती है।रसोई का वास्तुअगर आपका रसोई घर गलत स्थान पर है। तो अग्निकोण में लाल बल्ब लगा देना चाहिए। इसको रोजाना सुबह-शाम जलाएं। इससे रसोई का वास्तु दोष दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।विंड चाइम्सयह सिर्फ एक सजावट का सामान नहीं होता है, बल्कि सही जगह पर रखने से घर में यह पॉजिटिव एनर्जी ला सकता है। वास्तु दोष की समस्या को खत्म करने के लिए 6-8 रॉड वाली विंड चाइम्स को मुख्य प्रवेश द्वार पर लगाना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:26 +0530</pubDate>
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<title>Astrology Tips: रक्षाबंधन पर भाई की कलाई से पहले Temple में इन देवताओं को बांधें राखी, दूर होंगी सभी Problems</title>
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<description><![CDATA[ रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। अपने भाई की कलाई पर बहनें राखी बांधती हैं और उनके भाई हमेशा साथ देने का वचन देते हैं। दरअसल, यह बंधन वैसे ही अटूट है, लेकिन राखी के डोर इसे और ज्यादा मजबूत बनाती है।आमतौर पर राखी मुख्य रुप से भाई को बांधी जाती है, लेकिन इससे पहले भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए देवी-देवताओं की भी राखी की डोर बांधी जाती है और यह परंपरा काफी समय से चली आ रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि राखी भाई से पहले ईश्वर को बांधी जाती है तो उनका आशीर्वाद भाई-बहन के रिश्ते में बना रहता है और इस बंधन को जन्मों तक के लिए अटूट बनाता है। आइए आपको बताते हैं सबसे पहले राखी कौन-सी भगवान को बांधनी चाहिए।सबसे पहले गणपति को राखी बांधेंप्रथम पूज्य भगवान गणेश को सबसे पहले रांखी बांधे। श्री गणेश की मूर्ति पर राखी बांधते हैं, तो आपके और भाई के जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अगर आपका भाई किसी कारण से दूर है, तो आप गणपति जी को भाई के जगह पर राखी बांध सकते हैं।शिवजी को बांधें राखीइसके बाद, आप भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग पर राखी बांध सकते हैं। असल में यह पर्व सावन के महीने की पूर्णिमा को आता है, इसलिए भगवान शिव को राखी बांधने से भाई और बहन के रिश्ते में प्रेम बढ़ता है और सभी समस्याएं दूर हो जाती है।हनुमानजी को बांधें राखीसनातन धर्म में हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है, इसलिए आप शिवजी के बाद इनकी मूर्ति या तस्वीर पर राखी बांध सकते हैं। ऐसा करने से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाएगी और आपके भाई के ऊपर भी बजरंगबली की कृपा बनीं रहेगी।लड्डू गोपाल को बांधें राखीअगर आपके घर में लड्डू गोपाल विराजमान है, तो उन्हें आप राखी जरुर बांधें। ऐसा करने से भाई-बहन दोनों के जीवन में भाग्य चमक उठता है और सुख-समृद्धि बनीं रहती है। अगर लड्डू गोपाल घर में नहीं हैं, तो आप कन्हा की मूर्ति को राखी बांध सकते हैं।मंदिर में रखे सभी देवों को बांधें राखीइतना ही नहीं, आपके मंदिर में जितने देवी-देवताएं विराजमान है, उन सभी मूर्तियों और तस्वीरों को राखी बांध सकती हैं। इसके साथ ही धार्मिक ग्रंथों के भीतर राखी की डोर रख सकते हैं। रक्षाबंधन वाले दिन सभी देवी-देवताओं को राखी बांधने के बाद अपने भाई की कलाई में राखी बांधें। ऐसा करने से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होगा।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:26 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 22 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष निकट दूरी की यात्रा के प्रसंग बनेंगे। धन-मन-तन तीनों की चिंता। आर्थिक लाभ- जमा पूंजी में वृद्धि। महत्वपूर्ण शुभ समाचार मिलन से प्रसन्नता।वृषस्वास्थ्य में कमजोरी बनी रहेगी। परिवार में सामंजस्य की स्थिति बनेगी। आपकी रचनात्मक क्षमता की तारीफ होगी। विशेष अवसर का लाभ उठाएं।मिथुनप्रेम प्रसंग आगे बढ़ेंगे। शुभफलों की प्राप्ति होगी। उत्साह के साथ पुनः आगे बढ़ेंगे। प्रेम संबंध विवाह का रूप लेगा।कर्कपरिश्रम के अनुरूप काम बनेंगे। निर्माण/सुधार में व्यस्तता। कलह और जोखिम दोनों से बचना जरूरी है। दोपहर बाद शुभ घटनाओं के योग।सिंहकानूनी चक्करों में उलझ सकते हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार। विवाद का हल निकलेगा, स्वास्थ्य की चिंता। दाम्पत्य जीवन में अच्छी समझदारी रहेगी।कन्याआवास परिवर्तन के संकेत मिल रहे हैं। पारिवारिक जीवन में शांति। पुराने मित्रों से मेल-मिलाप होगा। डूबा हुआ धन प्राप्त हो सकता है।तुलामनोरंजन और दावतों में होंगे। रूकावटों का सामना, कलह योग भी। इच्छानुसार काम पूरे होंगे। क्रोध पर काबू पाना मुश्किल हो जाएगा।वृश्चिक अपने ही परायों जैसा व्यवहार करेंगे। आर्थिक हानि का विशेष योग है। तन-मन-धन की स्थिति में सुधार होगा। वरिष्ठों का आर्शीवाद लें और आगे बढ़ें।धनुअपच और अतिसार से परेशानी। मनोवांछित कार्य पूरे होंगे। प्रतिस्पर्धा में विजय निश्चित है। स्वास्थ्य गड़बड़ गलतफहमी भी होगी।मकर दाम्पत्य जीवन में अच्छी आपसी समझ होगी। कुसंगति से हानि, धन खर्च भी। नए उत्तरदायित्व मिलेंगे। आपकी रचनात्मकता लोगों को प्रभावित करेगी।कुंभअनैतिक साधनों से काम निकालेंगे। किसी से विवाद हो सकता है। गुप्त प्रेम प्रसंग और मजबूत होंगे। भविष्य के लिए उत्तम सम्पर्क बनेंगे।मीनघरेलू परिस्थितियां अच्छी होगी। कलह और विवाद से भरपूर दिन है। पूंजी निवेश से भविष्य में लाभ। गलतफहमियां दूर होगी, छवि निखरेगी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 22 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 22 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 22 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।आइए देखते हैं आपकी राशि के अनुसार आज के प्रेम संबंध क्या मोड़ लेते हैं:मेष (Aries): साथी के साथ संवाद में सौम्यता बनाए रखें। पुराने मनमुटाव भुलाकर एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने से प्रेम गहरा होगा।वृषभ (Taurus): रिश्तों में प्रगाढ़ता और भरोसा बढ़ेगा। जीवनसाथी के साथ भविष्य की सुखद योजनाओं पर आत्मीय चर्चा हो सकती है।मिथुन (Gemini): नए संपर्कों के लिए दिन मुफीद है। अविवाहितों के लिए आकर्षण के नए अवसर बन रहे हैं, जबकि कपल्स के बीच आत्मीयता बढ़ेगी।कर्क (Cancer): अति-संवेदनशीलता से बचें। साथी की मंशा पर संदेह करने के बजाय सीधे और स्पष्ट शब्दों में बातचीत करना हितकर रहेगा।सिंह (Leo): आपका प्रभाव और आकर्षण बना रहेगा। प्रेमी जोड़े साथ में बेहतरीन समय बिताएंगे, बस अपने व्यवहार में थोड़ा लचीलापन रखें।कन्या (Virgo): दिनचर्या की भागदौड़ के बीच साथी के लिए समय निकालना आवश्यक है। छोटे-छोटे जतन भी आपके रिश्ते में ताजगी भर देंगे।तुला (Libra): प्रेम संबंधों में सामंजस्य और मधुरता बनी रहेगी। अपने मन के भावों को साझा करने के लिए आज का अवसर उत्तम है।वृश्चिक (Scorpio): दूरियां खत्म होंगी और आपसी समझ मजबूत बनेगी। पार्टनर के साथ किसी शाम के कार्यक्रम का आनंद ले सकते हैं।धनु (Sagittarius): बाहरी लोगों की बातों से प्रभावित न हों। अपने साथी पर भरोसा रखें और व्यक्तिगत मामलों को मिलकर ही हल करें।मकर (Capricorn): प्रियजन से कोई अनपेक्षित प्रसन्नता या भेंट मिल सकती है। आपसी तालमेल और भावनात्मक निकटता दिन को खास बनाएगी।कुंभ (Aquarius): रिश्तों में स्पष्टता बनाए रखना ही सफलता की कुंजी है। पार्टनर से खुलकर मन की बात कहें, इससे आत्मिक बल मिलेगा।मीन (Pisces): हृदय में प्रेम और उत्साह का संचार रहेगा। किसी नए मोड़ या प्रस्ताव के लिए आज का समय अनुकूल और सकारात्मक है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>अंक ज्योतिष विश्लेषण: 22 अगस्त को Moolank 4 की New Schemes और Moolank 8 को मिलेगी Success</title>
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<description><![CDATA[ आज की तारीख 22 अगस्त यानी आज की ऊर्जा अंक 4 है। जीवन में मिलने वाली बड़ी सफलताएं एक दिन में नहीं मिलती है, जब आप रोज नियमित रुप से कार्य करते हैं और पक्की कोशिशों का नतीजा होता है। आज का दिन आपको यही एहसास कराने वाला है। अंक 4 का यह स्थिर और मजबूत प्रभाव आपके जीवन में एक गहरी शांति और सुरक्षा का अहसास दिलाता है।मूलांक 1आज का दिन मूलांक 1 बालों के लिए एक विचारों को एक पक्की योजना में बदलने का समय है। अभी तक आपने जो काम शुरु किया था, उसे सही दिशा जरुर दें और हर एक फैसले को सोच-समझकर जरुर लें। एक दिन में कुछ नहीं होता है आगे बढ़ने के लिए एक-एक कदम से बढ़ना बेहद जरुरी है। सेहत के मामले में समय पर खाना जरुर खाएं। नींद पूरी लेना जरुरी है। बड़ी-बड़ी बातें न करें, बस अपने भरोसेमंद कामों से प्यार करें।मूलांक 2असल में मूलांक 2 के जातकों ने इस हफ्ते की शुरुआत में जिन रिश्तों और तालमेल को आपने मजबूत किया था, आज उनके लिए साफ और पक्के फैसले लेने का दिन है। सेहत के मामले में आपकी भावनाएं शांत और स्थिर रहने वाली है। वहीं, सुकून वाले पलों में अच्छा समय व्यतीत करें। आराम करना बेहद जरुरी है। रिश्तों में शब्दों के बजाय किसी जरुरी काम में मदद करके अपनापन दिखाएं।मूलांक 3 आने वाले हफ्ते में अनुशासन लाना बेहद जरुरी है। अपने विचारों को अच्छी तरह व्यवस्थित करें। समय सीमा तय करें और अपने कर्तव्य को ईमानदारी से पूरा करें। आपकी हमेशा की बेचैनी आज थोड़ी कम रहेगी, जो कि बहुत अच्छी बात है। वैसे इस शांति का इस्तेमाल अपने दिनचर्या को बेहतर बनाने के लिए करें। आपने रिश्तों में पुराने वादे किए हैं, वो आज पूरा करें।मूलांक 4मूलांक 4 के लिए आज का दिन मजबूत और बेहतरीन रहने वाला है। योजना बनाना, बजट तैयार कर सकते हैं, चीजों को व्यवस्थित करना, कागजी काम करना और लंबे समय के लिए कोई पक्की जिम्मेदारी लेना आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकती है। आपकी शारीरिक ताकत अच्छी रहने वाली है, लेकिन अधिक काम के कारण छोटी-मोटी थकान को नजरअंदाज न करें। आपके करीब रिश्तों को यह स्पष्ट करें कि आपकी यह पक्की और स्थिर मौजूदगी सिर्फ आदत नहीं, बल्कि आपका सच्चा प्यार है।मूलांक 5 आज दिन आपकी रफ्तार काफी धीमी हो सकती है। जो आपके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इस दौरान आप रुके हुए कागजी काम, हिसाब-किताब या ऐसी योजनाओं को पूरा करने के लिए करें, जिन्हें आप टालते आ रहे थे। यदि दिनचर्या एक जैसी लगे तो बेचैनी बढ़ सकती हैं, इसलिए किसी नए तरीके से व्यायाम करें। अपने रिश्तों में स्पष्टता पूरी रखें और किसी भी बात को अधूरा न छोड़ें।मूलांक 6घर-परिवार के मामले, पैसों का हिसाब और भविष्य का योजनाओं को लेकर आपका ध्यान ज्यादा आकर्षित होगा। अगर आप आसपास मौजूद लोगों की देखभाल करते हैं और अनुशासन रहते हैं, तो आज की ऊर्जा आपको अच्छा परिणाम देगी। दूसरों की मदद करते-करते अपनी खुद की सेहत और आराम को जरा भी न भूलें। आज के दिन अपनों के साथ प्यार जताने के लिए बढ़िया समय है।मूलांक 7मूलांक 7 वाले आज रिसर्च, किसी भी विषय की गहराई में जान सकते हैं और हर चीज को बहुत बारीकी से संभाल सकते हैं और यह समय काफी अनुकूल रहने वाला है। एक समय पर एक ही काम करना जरुरी है। इस दौरान कई सारे काम करने से बचना काफी जरुरी है। शांत माहौल में रहेगी तो आज आपकी मानसिक रुप से शांति मिलेगी। अकेले में सोचने के बजाय किसी अपने की मदद करने के लिए कोई ठोस और सहज कदम जरुर उठाएं, जिससे उन्हें असली राहत मिले।मूलांक 8आज आप अपनी स्थिति को मजबूत बनाएं और ज्यादा मजबूत करने , अनुबंधों को अंतिम रुप देने, पैसों के मामलों की समीक्षा करने या पुरानी प्रणालियों को बेहतर बनाने के लिए आज का दिन काफी अनुकूल रहने वाला है। दिखावटी चीजों से दूर धीरे-धीरे और लगातार की जाने वाली मेहनत आज आपके सबसे अच्छे नतीजे देगी। स्ट्रेस न लें और अपनों के साथ अपने अधिकार की बात करने के स्थान पर एक भरोसेमंद साथी बनकर दिखाएं।मूलांक 9अगर आपको कोई बड़े सपने देखें है, तो आज छोटे और सहज कदमों में बदलने की जरुरत है। अपने बड़ों लक्ष्य को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें  और इन्हें पूरा करने के लिए एक समय सारणी बना सकते हैं। तय और अनुशासित दिनचर्या आपको अंदर से काफी शांत और सुरक्षित महसूस कराती है। रिश्तों में बड़ी-बड़ी बातें न करें, अपनों को विश्वास का अहसास दिलाएं कि आप हमेशा उनके साथ हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Palmistry: हथेली के ये शुभ निशान दिलाते हैं Money और Prestige, क्या आप भी हैं भाग्यशाली</title>
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<description><![CDATA[ हस्तरेखा ज्योतिष में हथेली की बनावट, रेखाओं और निशानों को देखकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं। इनके गहन अध्ययन से जातक के व्यक्तित्व, स्वभाव और आर्थिक स्थिति के बारे में पता चलता है। हथेली पर होने वाली हर एक रेखा का अपना विशेष महत्व होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए आपको बताने जा रहे हैं कि हथेली पर बने अलग-अलग निशानों से जीवन के किन पहलुओं के बारे में पता चलता है।त्रिकोण का निशानकई लोगों की हथेली पर त्रिभुज का निशान होता है, जिसका अलग-अलग मतलब होता है। हथेली पर जीवन रेखा और भाग्य रेखा के बीच त्रिभुज का निशान होने से जातक को यश और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। ऐसे जातक का जीवन भोग-विलास और ऐशो-आराम के बीच बीतता है। वहीं मंगल पर्वत के ऊपर त्रिभुज का निशान होने से जातक साहसी और पराक्रमी होता है।इसे भी पढ़ें: Astrology Tips: रक्षाबंधन पर भाई की कलाई से पहले Temple में इन देवताओं को बांधें राखी, दूर होंगी सभी Problemsजाल का निशानकई जातकों की हथेली पर जालनुमा निशान होता है। इन जातकों का जीवन काफी संघर्षों से भरा होता है। ऐसे लोगों का करियर विशेष रूप से राजनीति में चमकता है।स्टार का निशानहथेली पर स्टार यानी की तारा का निशान होना भी शुभ माना जाता है। इन जातकों को भाग्य का साथ मिलता है। लेकिन अगर दोनों हथेली पर स्टार का निशान होता है, तो ऐसा अशुभ होता है। हथेली पर स्टार का निशान होने से जातक को बहुत धन-संपत्ति मिलती है। वहीं इन लोगों को सभी तरह के भौतिक सुख-सुविधाओं की भी प्राप्ति होती है। वृत का निशानकई लोगों की हथेली पर वृत का निशान भी बना होता है। इस निशान को बेहद शुभ माना जाता है। जिन जातकों की हथेली की रिंग फिंगर के नीचे ऐसा निशान होता है, वह सरकारी नौकरी में आते हैं। इन लोगों का समाज में ऊंचा नाम और पद-प्रतिष्ठा होती है। वहीं अगर मध्यमा उंगली के नीचे यह निशान होता है, तो जातक को अचानक धन लाभ होता है। साथ ही यह जातक काफी भाग्यशाली होते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:24 +0530</pubDate>
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<title>Eid Milad&#45;un&#45;Nabi 2026: 25 या 26 अगस्त? जानें भारत में कब है Prophet Muhammad का जन्मदिन और महत्व</title>
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<description><![CDATA[ इस्लाम धर्म में ईद मिलाद-उन-नबी को पाक और अजतम (गौरवशाली) दिनों में शामिल किया गया है। खासतौर पर यह पाक मौका है, जब पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की विलादत-ए-मुबारक यानी &#039;जन्म की बधाई&#039; को मनाते हैं। दुनियाभर के कई देशों में ईद मिलाद-उन-नबी, भारत में भी इसे अकीदत और एहतराम के साथ मनाया जाता है। भारत में भी इस दिन को मनाया जाता है। इसे नबी दिवस, मौलिद, मोहम्मद का जन्मदिन या पैगंबर मुहम्मद के जन्मदिन के रुप में जानते हैं। इस दिन सार्वजनिक अवकाश होता है। भारत में अधिकांश स्कूल और व्यवसाय इस दिन बंद होते हैं।भारत में कब ईद मिलाद-उन-नबी?इस्लाम धर्म में यह पवित्र त्योहार कब मनाया जाएगा, इसकी तारीख को लेकर काफी कन्यफूय्ज है। आइए आपको बताते हैं ईद मिलाद-उन-नबी का त्योहार 26 अगस्त 2026, बुधवार के दिन मनाया जाएगा।वैसे यह त्योहार इस्लामी तारीख चांद पर आधारित होती है, जिसके कारण अलग-अलग कैलेंडर और चांद देखने के तरीकों के कारण से ग्रेगोरियन तारीख में काफी अंतर देखने को मिलता है। वैसे कुछ इस्लामी कैलेंडरों में 12 रबी-उल-अव्वल 1448 हिजरी की तारीख 25 अगस्त है। वहीं, कुछ कैलेंडर और मुकामी रिवायतों में इसे 26 अगस्त को मनाया जाएगा। ईद मिलाद-उन-नबी के दिन लोग क्या करते हैं?इस दिन मुसलमान पैगंबर मुहम्मद के जन्म और उनकी शिक्षाओं को याद करते हैं, उन पर चर्चा करते हैं और जश्न मनाते हैं। कई सुन्नी मुसलमान इस अवसर को इस्लामी महीने रबी अल-अव्वल की 12 तारीख को मनाते हैं, बल्कि शिया समुदाय के लोग इसे रबी अल-अव्वल की 17 तारीख को मनाते हैं।इस दिन कई तरह की गतिविधियां की जाती हैं- - रात भर प्रार्थना सभाएं चलती हैं। - बड़ी भीड़ वाली पदयात्राएं और जुलूस निकलते हैं। - इतना ही नहीं, घरों, मस्जिदों और अन्य इमारतों को उत्सव के बैनर और झंडे से सजाया जाता है। - मस्जिदों से लेकर सामुदायिक भवनों में सामूहिक भोजन का आयोजन किया जाता है।  - इसके अलावा, मुहम्मद के जीवन, कार्यों और उनकी शिक्षाओं के बारे में कहानियों और कविताओं के जरिए लोगों का मार्गदर्शन करते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Mysterious Temple: इन मंदिरों में चलता है महिलाओं का राज, Rituals के दौरान पुरुषों के प्रवेश पर लगा है कड़ा प्रतिबंध</title>
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<description><![CDATA[ शायद आपने उन मंदिरों के बारे में तो सुना ही होगा, जहां पर महिलाओं का जाना वर्जित है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है, जहां पर पुरुषों का जाना वर्जित हो। भले ही आपको यह बात सुनने में हैरान करने वाली और थोड़ी अटपटी जरूर लगे। लेकिन ऐसा एक रहस्यमयी मंदिर है, जहां पर पुरुषों का जाना वर्जित है। इसलिए आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको उस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। साथ ही इसके पीछे के कारण के बारे में भी जानेंगे।केरल का अट्टुकल भगवती मंदिरकेरल का फेमस अट्टुकल भगवती मंदिर जहां पर पोंगल उत्सव के समय हजारों की संख्या में महिलाएं प्रसाद को तैयार करने के लिए एकत्र होती है। इस दिन पुरुषों को मंदिर परिसर में प्रवेश करने की मनाही होती है। हालांकि यह पूर्ण तरीके से प्रतिबंध नहीं है। लेकिन एक सामान्य भूमिकाओं का एक अनुष्ठानिक निलंबन है। जोकि महिलाओं को आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र में निर्बोध रूप से रहने की अनुमति देता है।इसे भी पढ़ें: Famous Temple: गुजरात का वो &#039;City of Temples&#039; जहां रात में रुकना है मना, जानें इसके Spiritual और दिव्य रहस्यचक्कुलाथुकावु मंदिर केरलकेरल के देव भगवती को समर्पित इस मंदिर में नारी पूजा नाम से वार्षिक अनुष्ठान आयोजित किया जाता है। इसका मतलब है कि महिलाओं की पूजा से, उस दिन पुरुषों का मंदिर में प्रवेश वर्जित माना जाता है।नारी पूजा के समय महिलाएं व्रत करने के साथ एकत्रित होती हैं। वहीं पुरुष पुजारी उनके पैरों को धोता है। जो सत्ता के पारंपरिक उल्टे क्रम को दिखाता है।असम का कामाख्या मंदिरमहान शक्तिपीठों में से एक मां कामाख्या मंदिर भी नारी शरीर से गहराई से जुड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां सती की योनि यहां पर गिरी थी।अंबुबाची मेले के दौरान देवी कामाख्या को मासिक धर्म होता है, इस दौरान मंदिर को तीन दिन के लिए बंद कर दिया जाता है और पुरुषों को मंदिर जाने की अनुमति नहीं होती है।तमिलनाडु का कुमारी अम्मन मंदिरकन्याकुमारी मंदिर कन्या कुंवारी दु्र्गा को समर्पित है। परंपराओं के मुताबिक विवाहित पुरुषों को गर्भगृह में अंदर जाने की अनुमति नहीं है। सिर्फ ब्रह्मचारी पुरुष या फिर संन्यासी ही पास जा सकते हैं।पुरुषों का तिरस्कार करने के लिए यह नियम नहीं बनाए गए हैं, बल्कि ब्रह्मचर्य, भक्ति और आध्यात्मिक वैराग्य की पवित्रता को बनाए रखने के लिए है।राजस्थान का ब्रह्मा मंदिरराजस्थान के पुष्कर में स्थित ब्रह्मा मंदिर विवाहित पुरुषों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं देता है। पौराणि कथाओं के मुताबिक जब भगवान ब्रह्मा ने देवी गायत्री से विवाह किया था, तो देवी सरस्वती ने ब्रह्मा जी को श्राप दिया और यह आदेश दिया कि मंदिर में कभी विवाहित पुरुष मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे।यह प्रतिबंध स्त्री शरीर के बारे में नहीं बल्कि खुद विवाह के बारे में है। जो भक्तों की व्यक्तिगत स्थिति को मंदिर की आध्यात्मिक संरचना से जोड़ने का काम करता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:15 +0530</pubDate>
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<title>Famous Temple: गुजरात का वो &amp;apos;City of Temples&amp;apos; जहां रात में रुकना है मना, जानें इसके Spiritual और दिव्य रहस्य</title>
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<description><![CDATA[ भारत का गुजरात राज्य अपने आप में ही अनोखा और समृद्ध माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुजरात के भावनगर जिले में शत्रुंजय पहाड़ियों की गोद में बसा पालिताणा एक ऐसी अनोखी जगह है। जिसको मंदिरों के शहर के नाम से जाना जाता है। पूर्व में यह स्थान पादलिप्तपुर नाम से फेमस था। यह शहर जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अटूट आस्था का केंद्र माना जाता है। इस जगह की खासियत यह है कि यहां पर 800 से ज्यादा संगमरमर के मंदिर मौजूद हैं। इसी वजह से इसको मंदिरों का शहर कहा जाता है। तो आइए जानते हैं गुजरात के पालीताणा मंदिर की खासियत के बारे में...यहां हैं 800 से ज्यादा भव्य मंदिरमाना जाता है कि जैन धर्म के लोगों में अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार इन मंदिरों के दर्शन करना निर्वाण या फिर मोक्ष के लिए जरूरी है। शत्रुंजय पहाड़ी पर स्थित यह स्थल इतना अधिक विशाल और भव्य है कि यहां पर करीब 836 संगमरमर से तराशे मंदिर हैं।इसे भी पढ़ें: Unique Temple: भगवान विष्णु के सहस्त्रबाहु मंदिर का &#039;सास-बहू&#039; नाम पड़ने के पीछे क्या है Fact? जानें पूरा सचइन मंदिरों तक पहुंचने का सफर भी किसी तपस्या से कम नहीं माना जाता है। क्योंकि मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 3500 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यह जगह इसलिए भी खास है, क्योंकि मान्यता के हिसाब से 24 में से 23 तीर्थकरों ने यहां आकर इस अपनी उपस्थिति से इस पहाड़ी को पावन किया था।रात को रुकना है मनापालिताणा की सबसे अनोखी बात को जानकर आपको हैरानी होगी। दरअसल, यह स्थान पूरी तरह से देवताओं का निवास स्थान माना गया है। यही वजह है कि यहां पर सूर्यास्त के बाद किसी भी इंसान को रात गुजारने की अनुमति नहीं है। यहां तक कि मंदिर की सेवा करने वाले पुजारियों को भी यहां पर रात में रुकने की मनाही है। सदियों से यह परंपरा इस स्थान की दिव्यता और पवित्रता को बनाए रखने के लिए चली आ रही है।जानें धार्मिक महत्वबता दें कि पहाड़ी पर बना मुख्य मंदिर प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव जी को समर्पित है। यह श्वेतांबर मूर्तिपूजक संप्रदाय के लिए सबसे अधिक पवित्र स्थान माना जाता है। हालांकि यहां पर दिगंबर जैन समुदाय का भी एक मंदिर है। यह पूरा क्षेत्र न सिर्फ धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अपनी अद्भुत नक्काशी और वास्तुकला के लिए भी पूरी दुनिया में जाना जाता है।ऐसे पहुंचें पालिताणाअगर आप भी इस पावन नगरी की यात्रा करना चाहते हैं, तो बता दें कि यहां तक पहुंचना बेहद आसान है।यहां का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा भावनगर एयरपोर्ट है। जोकि पालिताणा से सिर्फ 55 किमी दूर पर स्थित है।वहीं अगर आप ट्रेन से आना चाहते हैं, तो ये शहर भावनगर और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों से रेल से अच्छे से जुड़ा है।वहीं गुजरात के सभी प्रमुख शहरों से पालिताणा के लिए बेहतरीन सड़क कनेक्टिविटी भी मौजूद है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 16:52:15 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 19 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष उन्नति पक्ष पर अग्रसर होंगे। अधिकारी से फटकार मिलेगी। नए संपर्क लाभ देते हुए सुदृढ़ होंगे। षडयंत्र के शिकार हो सकते हैं।वृषस्वास्थ्य में सुधार से प्रसन्नता। संघर्ष पूर्ण समय रहेगा। अच्छा दिन है यश की, सफलता भी। आमदनी में सुधार होगा।मिथुनधन का अवैध लेन-देन दण्डित करा सकता है। पारिवारिक जीवन में शांति और मधुरता। निजी जीवन में &#039;किसी का&#039; हस्तक्षेप चौका देगा। स्वभाव में उग्रता आएगी, संयम रखें।कर्कपरोपकार के कार्यों में व्यस्ता। कल्पनालोक से यथार्थ की भूमिका पर आएंगे। अचानक धन लाभ संभव है। अधिकारी आपसे प्रभावित होंगे, प्रसन्न रहेंगे।सिंहउत्तम सफलता और धन लाभ। बड़ी योजनाओं को फिलहाल टाल दें। अनाप-शनाप खर्च से बचें। धन संबंधी योजनाएं आगे बढ़ेगी।कन्याविशेष परीक्षा में सफलता के योग है। रोजगार संबंधी समस्याएं खड़ी होंगी। प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी। जनसम्पर्क से लाभ होगा, प्रभाव भी बढ़ेगा।तुलासमस्याओं का अंत और धन का लाभ। यात्राओं से बचने में ही भलाई है। संतान संबंधी चिंता दूर होगी। यात्राएं होगी, समस्याओं का समाधान निकलेगा।वृश्चिक किसी पार्टी/समारोह में व्यस्त रहेंगे। व्यर्थ के तनाव से बचें। तन-मन-धन तीनों के लिए अशुभ दिन। आर्थिक हानि का विशेष योग है।धनुपरिवार के सहयोग से मनोबल बढ़ेगा। रोजगार व्यवसाय में उतार-चढ़ाव अधिक। निर्णायक क्षमता बढ़ेगी। दोपहर तक जरूरी काम निपटा लें।मकर पदोन्नति और स्थान परिवर्तन का संदेश। संतान की शिक्षा व्यवस्था की समस्या का समाधान। मनोकामनाएं पूरी होगी। सम्पत्ति विवाद में समझौता संभव।कुंभसुखद और आनंदवर्धक दिन। सभी से सहयोग मिलेगा, उन्नति होगी। विद्यार्थियों की उन्नति होगी। चतुराई से काम निकाल लेंगे।मीनसभी प्रतिस्पर्धाओं में सफल रहेंगे। व्यापार/रोजगार में तरक्की होगी। विपरीत लिंग द्वारा आरोप लगाया जाएगा। बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए बीमा पॉलिसी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 09:57:12 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Horoscope, August, 2026, Aaj, Rashifal:, सभी, राशियों, का, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन, पढ़ें, आज, का, राशिफल</media:keywords>
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<title>Unique Temple: भगवान विष्णु के सहस्त्रबाहु मंदिर का &amp;apos;सास&#45;बहू&amp;apos; नाम पड़ने के पीछे क्या है Fact? जानें पूरा सच</title>
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<description><![CDATA[ आप सभी ने हिंदू देवी-देवताओं के मंदिरों के बारे में तो जरूर सुना होगा। जहां पर विराजमान भगवान की नियमित रूप से पूजा होती है। लेकिन क्या आपने सास-बहु के नाम का मंदिर सुना है। यह सुनने में थोड़ा सा अजीब जरूर लग सकता है। लेकिन भारत में एक ऐसा मंदिर है, जिसका नाम सास-बहू मंदिर है। सास-बहू मंदिर का नाम सुनते ही हम सभी के दिमाग में सास-बहू के रिश्ते और उनके बीच होने वाली खट्टी-मीठी नोंकझोंक याद आता है।बता दें कि सास-बहू मंदिर में न तो सास की पूजा होती है और न ही बहू की पूजा होती है। तो ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस मंदिर का नाम सास-बहू मंदिर कैसे पड़ा।जानें सहस्त्रबाहु मंदिर का इतिहासराजस्थान के उदयपुर के राजसी शहर से करीब 22 किमी दूर सहस्त्रबाहु मंदिर है। जिसको सास-बहु मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की स्थापत्य कला 10वीं शताब्दी ईस्वी के आसपास की है।प्रचलित कहानियों के अनुसार, इस मंदिर का मूल नाम सहस्त्रबाहु था, जोकि भगवान विष्णु को समर्पित है। लेकिन समय के साथ यह मंदिर सास-बहु मंदिर के नाम से जाना गया।राजस्थान के नागदा गांव में स्थित इस परिसर के अंदर मुख्य दो मंदिर हैं। विशाल मंदिर सास और छोटा मंदिर बहू। सास मंदिर करीब 10 छोटे-छोटे मंदिरों के समूह से घिरा है। वहीं बहू मंदिर में 5 अन्य छोटे मंदिर हैं। सास के मंदिरों के समक्ष एक मेहराबदार प्रवेश द्वार है। जहां पर कुछ खास मौकों पर श्रीहरि की मूर्ति को रखा जाता है। इसमें 3 अलग दिशाओं में खुलने वाले तीन अन्य द्वार हैं। वहीं चौथा दरबार में आम जनता का जाना मना है।किसने बनवाया था मंदिरमंदिर के इतिहास के बारे में बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण कच्छवाह वंश के राजा महिपाला ने 10 या 11वीं शताब्दी के आसपास कराया था। महिपाला की रानी भगवान श्रीहरि विष्णु की परम भक्त थीं। वहीं राजा भी अपनी पत्नी के प्रति प्रेम और उदार स्वभाव रखता था। इस तरह से भगवान शिव को सम्मान देने के लिए अन्य मंदिर बनवाया। यह मंदिर राजा की बहू के बने भगवान श्रीविष्णु के मंदिर के बगल में था।जब श्रीहरि के मंदिर का निर्माण हुआ, तो इस मंदिर का नाम सहस्त्रबाहु मंदिर रखा गया। सहस्त्रबाहु का अर्थ हजार भुजाओं वाला, जोकि श्रीहरि विष्णु के रूप का प्रतीक था। वहीं समय बीतने के साथ ही इस मंदिर को सास-बहु मंदिर के नाम से जाना गया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 09:55:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Nag Panchami 2026: जीवित सांप को दूध पिलाना पुण्य या पाप? जानिए Religious और Scientific सच</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में नाग पंचमी त्योहार का विशेष महत्व है, जो कि सावन महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन लोग नाग देवता यानी सांप की पूजा करते हैं। आज यानी 17 अगस्त को नाग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन नाग देवता को दूध पीलाने  का अधिक महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन नाग देवता की प्रतिमा पर दूध अर्पित करने से कालसर्प दोष की समस्या दूर हो जाती है। क्या आप जानते हैं कि नाग पंचमी के दिन जीवित सांप को दूध पिलानी सही है या गलत है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि जीवित सांप को दूध पिलाना चहिए या नहीं।धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोणजीवित सांप को दूध पिलाना वर्जितधार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जीवित सांप को दूध पिलाना सही नहीं है, क्योंकि सांप स्तनधारी जीव नहीं है और दूध उनके फेफड़ों में जाकर उनकी मृत्यु का कारण बन जाएगा।प्रतिमा और शिवलिंग पर अभिषेकधार्मिक शास्त्रों में नाग देवता की प्रतिमा, शिवलिंग या सर्प की बांबी (मिट्टी के बिल) पर दूध अभिषेक करने का विधान बताया है। भूलकर भी जीवित सांप को दूध नहीं पिलाना चाहिए। शास्त्रसम्मत पूजा विधिधार्मिक मान्यता के अनुसार, नाग पंचमी पर नाग देवता की प्रतिमा पर दूध अर्पित करना ही शास्त्रसम्मत और जीव-दया के अनुकूल माना जाता है। नाग पंचमी की पूजा का महत्व  - माना जाता है कि नाग पंचमी के दिन पूजा-अर्चना करने से सर्प भय दूर हो जाता है। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों की सांप के काटने से रक्षा की जाती है। - हिंदू धर्म में नाग देवता का संबंध भगवान शिव से है। महादेव अपने गले में वासुकी नाग धारण कर रखा है और जगत के पालनहार भगवान विष्णु चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर विश्राम करते हैं। कहा जाता है कि नाग देव की साधना करने से महादेव के संग श्री विष्णु जी की कृपा प्राप्त होती है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 17 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष खुशी के समाचार मिलेंगे। अप्रिय घटना या समाचार से मन दुखी होगा। उपलब्धियों से प्रशंसा मिलेगी। पदोन्नति और नए व्यापार की शुरूआत।वृषचिंतामुक्त होंगे, मानसिक शांति मिलेगी। व्यावसायिक साझेदारी में मनमुटाव समाप्त होगा। मिश्रित फल वाला दिन है, विरोधाभास भी। चिकनी चुपड़ी बातों में फंस सकते हैं- सावधान।मिथुनसोच समझकर कोई भी कदम उठाएं। व्यापार के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। बेहतर हालात है, राहत मिलेगी। मन चिंताग्रस्त रहेगा।कर्कगलतफहमियां दूर होगी। पारिवारिक मंगल कार्य में भाग लेंगे। पारिवारिक समस्याएं सुलझेंगी। सोच विचार कर निर्णय ले, निर्णायक क्षण है।सिंहकाम बनेंगे- स्वास्थ्य सुधरेगा। उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा। पूंजी निवेश हितकर रहेगा। मित्रों, पड़ोसियों के साथ सम्पर्क बढ़ेंगे।कन्यामिश्रित फल, लेकिन चिंता मुक्ति भी। श्रेष्ठ लोगों से सुखद भविष्य का आश्वासन। परीक्षा का सुपरिणाम प्राप्त होगा। रोजगार व्यवसाय में प्रशंसा मिलेगी।तुलाछात्रों की मनोकामनाएं पूरी होगी। अहं का त्याग करते हुए व्यवहार करें। सर्वत्र अच्छा वातावरण मिलेगा। उच्चतर शिक्षा के लिए प्रयास सफल होंगे।वृश्चिक मिथ्यारोप का सामना करना पड़ेगा। सतर्क रहें, भांझा-भतीजा नुकसान पहुंचा सकते है। धन की प्राप्ति संकटों से मुक्ति। अच्छा दिन नहीं है, परेशान रहेंगे।धनुजल्दबाजी और वाद विवाद से बचें। बनते हुए कामों में रूकावटें आएगी। मान सम्मान में वृद्धि होगी। चुनौतियों से दिन भरा हुआ है।मकर पाचन पंत्र खराब हो सकता है। पारिवारिक परिस्थितियों सुधार होगा, धन लाभ। चिर प्रतीक्षित शुभ संदेश मिलेगा। रहस्य पूर्ण कार्यों में सफलता मिलेगी।कुंभस्वास्थ्य ढीला हो सकता है। थोड़ी सी भी असावधानी से दुर्घटना संभव। शारीरिक स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। किसी अन्य के लिए ऋण लेने की तैयारी।मीनदोपहर बाद अप्रिय घटना/समाचार। विद्यार्थियों के लिए विशेष उत्तम दिन। कार्य निबटाने में संघर्ष अधिक होगा। अधिकारी से फटकार मिलेगी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:40 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 17 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 17 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 17 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।आज का लव राशिफल: जानें आपकी राशि के सितारों का मूड और प्रेम जीवन के संकेतमेष (Aries): पार्टनर के साथ बातचीत में थोड़ी नरमी बरतें। पुरानी बातें उठाने से तनाव बढ़ सकता है, इसलिए साथ में शांत समय बिताएं।वृषभ (Taurus): सिंगल जातकों के जीवन में किसी खास व्यक्ति की एंट्री हो सकती है। जो लोग रिश्ते में हैं, उनका आपसी विश्वास और बढ़ेगा।मिथुन (Gemini): प्यार के मामले में दिन मिला-जुला रहेगा। काम की व्यस्तता के कारण साथी को समय देना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।कर्क (Cancer): भावनात्मक रूप से दिन काफी खूबसूरत रहेगा। अपने पार्टनर से दिल की बात साझा करने के लिए आज का दिन बिल्कुल सही है।सिंह (Leo): साथी के साथ किसी रोमांटिक डेट या वॉक का प्लान बन सकता है। आपकी लव लाइफ में उत्साह और नयापन देखने को मिलेगा।कन्या (Virgo): छोटी-छोटी बातों पर गलतफहमी होने की संभावना है। स्पष्ट बातचीत और समझदारी से काम लें, चीजें जल्दी ठीक होंगी।तुला (Libra): प्रेम जीवन में संतुलन बना रहेगा। अगर आप किसी को पसंद करते हैं, तो आज अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का अच्छा मौका है।वृश्चिक (Scorpio): पार्टनर के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव महसूस करेंगे। एक-दूसरे का सहयोग आपके रिश्ते को और मजबूत बनाएगा।धनु (Sagittarius): नए रिश्तों की शुरुआत के संकेत हैं। शादीशुदा जातकों के लिए दिन शांतिपूर्ण और सुखद रहेगा।मकर (Capricorn): पार्टनर से कोई सरप्राइज या खूबसूरत तोहफा मिल सकता है। आज आपसी केमिस्ट्री देखने लायक होगी।कुंभ (Aquarius): किसी तीसरे व्यक्ति की बातों में आकर अपने रिश्ते में शक न आने दें। साथी पर भरोसा रखें।मीन (Pisces): रोमांस से भरा दिन रहेगा। दूर रह रहे पार्टनर का कॉल या मैसेज आपके दिन को और खास बना देगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:39 +0530</pubDate>
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<title>Nag Panchami 2026 पर काल सर्प दोष से मुक्ति पाने का बड़ा अवसर, Pitra Dosh शांति के लिए करें ये अचूक उपाय</title>
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<description><![CDATA[ स बार सावन के तीसरे सोमवार पर बेहद ही शुभ संयोग बन रहा है। आज यानी 17 अगस्त को नाग पंचमी त्योहार मनाया जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष और पितृदोष है तो उससे मुक्ति पाने के लिए सावन का तीसरा सोमवार सबसे श्रेष्ठ माना जा रहा है।नाग पंचमी के दिन कालसर्प दोष और पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करते हैं, तो आपको काल सर्प दोष और पितृदोष से राहत मिल जाएगी। आइए आपको बताते हैं नाग पंचमी और सावन के के तीसरे सोमवार पर कालसर्प दोष और पितृदोष से मुक्ति पाने के कुछ अचूक उपाय।नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार पर करें ये उपाय - आज यानी 17 अगस्त को भगवान शिव और माता पार्वती की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा करें। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से विवाह में आ रही है बाधाएं दूर हो जाती है और भगवान शिव जल्द ही प्रसन्न होते हैं। - नाग पंचमी के दिन भगवान शिव के मंदिर जाकर चांदी या तांबे के नाग-नागिन का जोड़ा अर्पित करें। इस उपाय के करने से कुंडली में काल सर्प दोष शांत हो जाता है। इसके साथ ही करियर में आ रही बाधा दूर हो जाती है। - नाग पंचमी के दिन रुद्राभिषेक करें। भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन शिव का रुद्राभिषेक करके पितृ दोष शांत हो जाता है। इसके साथ ही घर-परिवार का क्लेश खत्म हो जाता है। इसके साथ ही जीवन में अचनाक होने वाली दुर्घटना से बचाता है। - इस दिन जल में काले तिल डालकर भगवान शिव का अभिषेक करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से राहु-केतु और शनि के बुरे प्रभाव कम हो जाते हैं।  - नाग पंचमी और सावन के सोमवार पर महामृत्युंजय मंत्र का जप जरुर करें। पूजा के दौरान आप इस महामंत्र का कम से कम 108 बार जरुर करें। ऐसा करने से साधक का मानसकि तनाव कम होता है। इसके साथ ही स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिलता है।  - नाग पंचमी के दिन नाग देवता की मू्र्ति या फोटो पर कच्चा दूध और फूल चढ़ाएं। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। इसके साथ ही पैसों की तंगी दूर हो जाती है। यदि आपको बुरे सपने आते हैं, तो इस उपाय के करने से बुरे सपने नहीं आएंगे। - सावन के तीसरे सोमवार को पीपल के पेड़ के पास घी का दीपक जलाएं। इस उपाय के करने से पितृदोष शांत होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पीपल के पेड़ में पितरों का वास होता है। इस उपाय के करने से बच्चों को करियर में सफलता प्राप्त होगी। वैसे इन उपाय के करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:39 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 18 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 18 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 18 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।आज का लव राशिफल: जानें आपकी राशि के सितारों का मूड और प्रेम जीवन के संकेतमेष (Aries): पार्टनर के साथ बातचीत में थोड़ी नरमी बरतें। पुरानी बातें उठाने से तनाव बढ़ सकता है, इसलिए साथ में शांत समय बिताएं।वृषभ (Taurus): सिंगल जातकों के जीवन में किसी खास व्यक्ति की एंट्री हो सकती है। जो लोग रिश्ते में हैं, उनका आपसी विश्वास और बढ़ेगा।मिथुन (Gemini): प्यार के मामले में दिन मिला-जुला रहेगा। काम की व्यस्तता के कारण साथी को समय देना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।कर्क (Cancer): भावनात्मक रूप से दिन काफी खूबसूरत रहेगा। अपने पार्टनर से दिल की बात साझा करने के लिए आज का दिन बिल्कुल सही है।सिंह (Leo): साथी के साथ किसी रोमांटिक डेट या वॉक का प्लान बन सकता है। आपकी लव लाइफ में उत्साह और नयापन देखने को मिलेगा।कन्या (Virgo): छोटी-छोटी बातों पर गलतफहमी होने की संभावना है। स्पष्ट बातचीत और समझदारी से काम लें, चीजें जल्दी ठीक होंगी।तुला (Libra): प्रेम जीवन में संतुलन बना रहेगा। अगर आप किसी को पसंद करते हैं, तो आज अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का अच्छा मौका है।वृश्चिक (Scorpio): पार्टनर के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव महसूस करेंगे। एक-दूसरे का सहयोग आपके रिश्ते को और मजबूत बनाएगा।धनु (Sagittarius): नए रिश्तों की शुरुआत के संकेत हैं। शादीशुदा जातकों के लिए दिन शांतिपूर्ण और सुखद रहेगा।मकर (Capricorn): पार्टनर से कोई सरप्राइज या खूबसूरत तोहफा मिल सकता है। आज आपसी केमिस्ट्री देखने लायक होगी।कुंभ (Aquarius): किसी तीसरे व्यक्ति की बातों में आकर अपने रिश्ते में शक न आने दें। साथी पर भरोसा रखें।मीन (Pisces): रोमांस से भरा दिन रहेगा। दूर रह रहे पार्टनर का कॉल या मैसेज आपके दिन को और खास बना देगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:38 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 18 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष सर्वाधिक शुभ दिन है। सपने साकार करने का दिन है। अचानक अप्रिय घटना, घटने के योग। श्रेष्ठ लोगों से सुखद भविष्य का आश्वासन।वृषमानसिक असंतोष, गलत कार्य कराएगा। सुखद भविष्य के लिए योजना की रूपरेखा। कार्यालय में प्रभाव बढ़ेगा। बनते हुए काम आज भी रूक जायेंगे।मिथुनआर्थिक लेन-देन सावधानी से करें। प्राप्त अवसरों का लाभ उठाने से प्रभाव बढ़ेगा। अचल सम्पत्ति से लाभ। गुप्त रहस्य उजागर हो सकता है।कर्कउच्चाधिकारियों से सहयोग मिलेगा। परिवार में सुखद वातावरण बना रहेगा। संघर्ष पूर्ण समय रहेगा। स्वभाव में उग्रता आएगी, संयम रखें।सिंहअध्ययन-अध्यापन में रूचि बढ़ेगी। गृहकार्य और साजसज्जा की प्रशंसा होगी। परिवारजन पूरा सहारा देंगे। प्रचुर मात्रा से धन की प्राप्ति।कन्यामेहमानों का आगमन। परिवार तथा व्यापार दोनों में झमेले होंगे। आत्मविश्वास के बल पर बिगड़ा काम बनेगा। अप्रत्याशित धन लाभ, उत्तम वैवाहिक सुख।तुलामजबूरी में कोई काम न करें। मनोवांछित कार्य पूरे होंगे। दाम्पत्य जीवन मधुरतम होगा। घर परिवार में कष्ट और तनाव।वृश्चिक विवाद बढ़ेंगे, दुखदायी विफलता। शुभ लाभ और सफलता का समाचार। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। अचानक लम्बी दूरी की यात्रा की योजना। धनुराजनैतिक लोगों के साथ व्यस्तता। आध्यात्मिक दिशा में उत्तम प्रगति। तनाव मुक्ति और सार्वजनिक सम्मान। आर्थिक विकास के लिए नया कदम उठायेंगे।मकर गुप्त शत्रु का नाम जानकर आश्चर्य होगा। सुख सुविधाओं के बावजूद मन में कसक रहेगी। प्रभाव बढ़ेगा, उन्नति होगी। आर्थिक लाभ के अच्छे अवसर मिलेंगे।कुंभपेट दर्द अथवा अन्य प्रकार से कष्ट होगा। अवकाश का आनंद लेकर मौजमस्ती। सफलता भरा दिन है। स्वजनों के आगमन से सुख होगा।मीनसकारात्मकता एवं रचनात्मकता का स्वागत। पारिवारिक कलह से परेशानी। चतुराई से काम निकाल लेंगे। परिश्रम का परिणाम अच्छा मिलेगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:38 +0530</pubDate>
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<title>Mangala Gauri Vrat 2026: तीसरे मंगला गौरी व्रत पर करें ये उपाय! Mangal Dosha और Marriage Obstacles होंगे दूर</title>
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<description><![CDATA[ श्रावण मास भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने का विशेष समय माना जाता है। हालांकि, इसी पावन महीने में पड़ने वाले मंगलवार भी देवी शक्ति की साधना के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। सावन महीने के हर एक मंगलवार को सुहागिन महिलाएं पति वैवाहिक सुख, अखंड सौभाग्य और पति के अच्छे स्वास्थ्य  के लिए मंगला गौरी व्रत रखती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं भी मनचाह जीवनसाथी प्राप्त करने के लिए यह व्रत रख सकती हैं। मंगला गौरी व्रत रखने से विवाह में आ रही रुकावटें और मंगल दोष से राहत पाने के लिए आप शिव-शक्ति की विशेष पूजा कर सकती हैं। तीसरे मंगला गौरी व्रत के शुभ मुहूर्ततीसरे मंगला गौरी व्रत रखने जा रही हैं, तो एक बार शुभ मुहूर्त जान लें--अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 बजे से 12:56 बजे तक-अमृत काल: रात 09:18 बजे से 11:01 बजे तक-ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:32 बजे से 05:20 बजे तकविवाह में रुकावट दूर करने का उपाय क्या आपके विवाह में काफी देरी हो रही है? तो आप मंगला गौरी व्रत के दिन मां गौरी की विधिवत रुप से पूजा कर सकती हैं। इस दिन 16 श्रृंगार की सामग्री मां गौरी को अर्पित कर सकती हैं। फिर &#039;ॐ गौरीशंकराय नमः&#039; मंत्र का 21 या 108 बार जाप जरुर करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने की कामना की जा सकती है।वही, आप अपने घर पर 5 या 7 कन्याओं को घर बुलाकर प्रेमपूर्वक भोजन कराएं। भोजन कराने के बाद उन्हें चूड़ी, बिंदी, फल आदि आप अपने हिसाब से भेंट कर सकती हैं। माना जाता है कि कन्या पूजन से देवी शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मंगल दोष से राहत पाने के लिए करें उपायमंगल साहस, ऊर्जा और भूमि से संबंधित ग्रह माने जाते हैं। कुंडली में मंगल प्रतिकूल स्थिति होने पर मंगला गौरी व्रत के दिन देवी की पूजा के साथ मंगल से जुड़े उपाय किए जाते हैं। इसलिए आप कल यानी तीसरे मंगलवार को दक्षिण दिशा में नीम का पौधा लगाएं। अगर पौधा लगाना संभव न हो तो नीम के पेड़ की श्रद्धापूर्वक पूजा करें। सुबह और शाम उसके नीचे दीपक जरुर जलाएं। मान्यता है कि मंगल से संबंधित अशुभ प्रभावों को शांत करने और रुके हुए मांगलिक कार्यों में गति आने लगती है। मंगल ग्रह की शांति के लिए मंत्र जापइस दिन आप मंगल ग्रह की शांति के लिए मंगल के मंत्रों का जाप कर सकते हैं। नीचे दिए गए इन मंत्रों में से कोई एक मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप कर सकते है-&#039;ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः&#039;या&#039;ॐ अं अंगारकाय नमः&#039;इसके अतिरिक्त, लाल मसूर की दाल, गुड़, तांबे की वस्तु या लाल रंग के वस्त्र का जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर सकते हैं। इन उपाय के करने से मंगल ग्रह शांत होगा और उसकी सकारात्मक ऊर्जा आपको प्राप्त होगी। इतना ही नहीं, भूमि विवाद या काननी मामलों जैसी मंगल से जुड़ी परेशानियों में अनुकूल परिणाम की प्रार्थना कर सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:38 +0530</pubDate>
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<title>सावन का आखिरी सोमवार लाएगा Golden Opportunity, इन राशियों के लिए Career और Wealth के क्षेत्र में होगा बड़ा बदलाव</title>
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<description><![CDATA[ सावन का आखिरी सोमवार 24 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सूर्य और बुध का शक्तिशाली योग बुधादित्य राजयोग बन रहे है। वहीं, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र और प्रीति योग भी रहेगा। इसके साथ ही शनि, गुरु और मंगल का शुभ प्रभाल भी राशियो पर बना रहेगा। ज्योतिष के मुताबिक, सावन के आखिरी सोमवार कुछ राशि वालों के लिए बेहद लाभकारी माना जा रहा है। यह समय जीवन में कई सारे सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। रुके हुए कार्य बनेंगे। आइए आपको बताते हैं कि किन राशियों के लिए यह समय काफी भाग्यशाली रहने वाला है।कर्क राशियह समय कर्क राशि वालों के लिए बेहद शुभ रहने वाला है। मनचाह कोई बड़ा लाभ प्राप्त होगा। परिवार में खुशियां बनी रहेगी और घर का माहौल सकारात्मक रहेगा। घर में कोई नई वस्तु आने से भौतिक सुख-सुविधाएं प्राप्त होगी। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिलेगी। करियर में तरक्की मिलने की संभावना अधिक रहने वाली है। वहीं, कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सरहाना हो सकती है। बड़ा धन लाभ होने से परिवार में खुशियां बनी रहेंगी।धनु राशिधनु राशि के जातकों का भाग्य उदय होने वाला है। नई योजनाओं को अमल में लाने का मौका मिलेगा। नए लोगों से मुलाकात भी हो सकती है। कोई बड़ी खुशखबरी मिलने की संभावना नजर रहेगी। नौकरीपेशा लोगों को नए प्रोजेक्ट मिलने के अधिक चांस है। करियर संबंधित मामले में आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त होंगे। यह समय नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है। घर में खुशियां बनी रहने वाली है।  मकर राशिमकर राशि के जातक के लिए यह समय रुके हुए कार्य को पूरा करने की संभावना रहेगी। जो लोग नौकरी कर रहे हैं, उनके लिए यह समय काफी शुभ रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति पहले से मजबूत हो सकती है और मेहनत का अच्छा परिणाम प्राप्त होगा। किसी भी नए काम की शुरुआत करने पर महादेव की कृपा आपको प्राप्त होगी। यह समय करियर के लिए सकारात्मक बदलाव लेकर आने वाला है। नई नौकरी के प्रयास सफल होने वाले हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:37 +0530</pubDate>
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<title>सुखी वैवाहिक जीवन के लिए Kajari Teej 2026 पर करें ये 4 विशेष Rituals, नोट करें सही Date और मुहूर्त</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में व्रत-त्योहार का विशेष महत्व माना गया है। हर साल कजरी तीज भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाई जाती है। इस व्रत को महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य व सुखी जीवन के लिए रखती है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान उपासना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन से जोड़ा जाता है। कुछ जगहों पर कजरी तीज के मौके पर नीम के पेड़ की पूजा करने की भी परंपरा है। आइए आपको बताते हैं कब रखा जाएगा कजरी तीज का व्रत?कजरी तीज 2026 - भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 31 अगस्त 2026, सोमवार को पड़ रही है। - तृतीया तिथि प्रारंभ- 30 अगस्त 2026, रविवार सुबह करीब 9 बजकर 36 मिनट पर। - तृतीया तिथि समाप्त- 31 अगस्त 2026, सोमवार, सुबह लगभग 8 बजकर 50 मिनट पर होगा।कजरी तीज 2026 शुभ मुहूर्त-अमृत चौघड़िया- सुबह 5 बजकर 58 मिनट से 7 बजकर 34 मिनट तक।-शुभ चौघड़िया- सुबह 9 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक।-लाभ चौघड़िया- दोपहर 3 बजकर 32 मिनट से शाम 5 बजकर 8 मिनट तक।-अमृत चौघड़िया- शाम 5 बजकर 8 मिनट से 6 बजकर 44 मिनट तक।कजरी तीज पर करें ये 4 काम - कजरी तीज के दिन शिवलिंग पर शहद, दूध और दही अर्पित कर विधि-विधान से पूजा करें। माना जाता है कि भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और दांपत्य जीवन में प्रेम बना रहता है। - पूजा के समय भगवान शिव और माता पार्वती को वस्त्र अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प जरुर लें। फिर परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें। - कजरी तीज के दिन माता पार्वती को सुहाग से संबंधित सामग्री की वस्तुएं अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। इससे अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होती है। - कजरी तीज के दिन नीम के पेड़ की पूजा करने का विधान है। इसलिए इस दिन विधिवत रुप से नीम के पेड़ की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनीं रहेगी।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:37 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 19 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 19 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 19 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।आइए जानते हैं सभी 12 राशियों के जातकों के लिए आज प्रेम जीवन के क्या संकेत हैं:मेष (Aries): बातचीत में अपना जोश बनाए रखें, लेकिन छोटी बातों पर बहस करने से बचें। शाम तक रिश्ते में तालमेल बेहतर होगा और पुरानी उलझनें सुलझ सकती हैं।  वृषभ (Taurus): प्रेम संबंधों में स्थिरता आएगी। पार्टनर के साथ भविष्य की योजनाओं या किसी खास बात पर चर्चा हो सकती है, जिससे भरोसा मजबूत होगा।  मिथुन (Gemini): सिंगल जातकों के लिए नए रिश्ते की शुरुआत का योग है। पार्टनर से खुलकर अपने मन की बात कहें, लेकिन बातचीत में तीखापन न आने दें।  कर्क (Cancer): भावनात्मक रूप से दिन काफी गहरा रहेगा। पार्टनर का सहयोग मिलेगा और रिश्ते की गलतफहमियां दूर करने का सही मौका है।  सिंह (Leo): व्यक्तित्व में आकर्षण और आत्मविश्वास रहेगा, जिससे साथी का भरपूर ध्यान मिलेगा। बस अपने रिश्तों में ईगो या घमंड दिखाने से बचें।  कन्या (Virgo): रिश्ते को लेकर थोड़ी गंभीरता बनी रहेगी। साथी का पूरा सहयोग मिलेगा, जिससे आपका भरोसा बढ़ेगा। बेवजह खुद की तुलना दूसरों से न करें।  तुला (Libra): प्रेम संबंधों में संतुलन बनाए रखें। दूसरों की बातों में आने के बजाय शांत रहकर पार्टनर के साथ बातचीत करें, पुराने वादे पूरे होंगे।वृश्चिक (Scorpio): प्रेम जीवन में नया उत्साह रहेगा। साथी के साथ कहीं घूमने या शाम को अच्छा समय बिताने का मौका मिल सकता है।  धनु (Sagittarius): अगर किसी से दूरी महसूस हो रही थी, तो आज बातचीत से वो करीब आ सकते हैं। घर और पारिवारिक माहौल में सुकून रहेगा।  मकर (Capricorn): पार्टनर को गहराई से समझने का दिन है। सूझबूझ से लिए गए फैसले आपके रिश्ते को नया मोड़ देंगे और सुखद अनुभव मिलेगा।  कुंभ (Aquarius): रिश्तों में किसी तीसरे व्यक्ति के बहकावे में आने से बचें। थोड़ा समय निकालकर अपने पार्टनर के साथ बिताएं, इससे विश्वास बढ़ेगा।मीन (Pisces): मन की बात व्यक्त करने में सहज महसूस करेंगे। साथी का ख्याल रखना और उनकी छोटी-छोटी बातों की परवाह करना आपके रिश्ते को खूबसूरत बनाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:36 +0530</pubDate>
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<title>Nag Panchami 2026: नाग पंचमी पर कैसे पाएं दोष से मुक्ति, जानें Nag Panchami 2026 की पूजा विधि</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में नागपंचमी पर्व का विशेष महत्व होता है। श्रावण माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा-आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन नागों की पूजा-अर्चना करने से सर्प भय, कालसर्प दोष और सर्पदंश जैसी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। वहीं आज लोग नाग देवता को दूध अर्पित करते हैं और उनको स्नान कराकर पूजा आदि करते हैं। साथ ही नाग देवता से सुरक्षा और समृद्धि की कामना करते हैं। तो आइए जानते हैं नाग पंचमी की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक 16 अगस्त की शाम 04:51 मिनट से पंचमी तिथि की शुरूआत होगी। वहीं 17 अगस्त ती शाम 05:00 बजे इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से आज यानी की 17 अगस्त को नागपंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 06:15 मिनट से लेकर 08:31 मिनट तक है।क्यों की जाती है नाग देवता की पूजाभगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों से नागों का संबंध जुड़ा माना गया है। जहां भगवान शिव के गले में वासुकी नाग सुशोभित होते हैं। तो वहीं शेषनाग भगवान विष्णु की शैया हैं। श्रीकृष्ण के जन्म के बाद शेषनाग ने उनको और वासुदेव को यमुना पार कराने में मदद की थी। इसके अलावा समुद्र मंथन में भी वासुकी नाग की अहम भूमिका मानी जाती है। यह दिन नाग देवताओं के प्रति सम्मान प्रकट करने का पर्व है।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें और सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद गाय के गोबर से नाग देवता का चित्र बनाएं और उनका आह्वान करें। अगर आपको व्रत करना हो, तो व्रत का संकल्प करें और फिर गुलाल, अबीर, मेहंदी, मेवा, फूल और दूध आदि अर्पित करें। इसके बाद मंत्रों का जाप करें और पूजा के बाद मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:32 +0530</pubDate>
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<title>Nag Panchami Special: नागों की पूजा से मिलता है अभय वरदान, जानिए शुभ मुहूर्त और पूरी पूजा विधि</title>
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<description><![CDATA[ श्रावण मास की पंचमी के दिन नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन नाग की पूजा कर उन्हें दूध पिलाया जाता है। दीवार पर नाग बनाकर भी पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में नागों को देवताओं के तुल्य माना गया है। भगवान विष्णु शेष शैय्या पर विराजमान रहते हैं तो शिवजी के तो आभूषण ही नाग हैं। यही कारण है कि शिवजी के इस मास के द्वितीय पक्ष की पंचमी को सर्पों की विशेष रूप से पूजा की जाती है। इस दिन आज भी गांवों में घरों को गोबर में गेरू मिलाकर लीपा जाता था। नागपंचमी के दिन एक रस्सी में सात गांठें लगाकर और उस रस्सी को सांप मानकर लकड़ी के एक पट्टे पर रखा जाता है।नाग पंचमी पूजन विधिहल्दी−रोली, चावल और फूल आदि चढ़ाकर नाग देवता की पूजा करने के बाद कच्चा दूध, घी और चीनी मिलाकर इस रस्सी को सर्प देवता को अर्पित किया जाना चाहिए। इस दौरान पूजन के समय सर्प देवता की स्तुति इस श्लोक से करनी चाहिए− &#039;अनन्तम्, वासुकि, शेषम्, पद्मनाभम्, चकम्बलम् कर्कोतकम् तक्षकम्। पूजन के बाद नाग देवता की आरती जरूर उतारें।इसे भी पढ़ें: Nag Panchami 2026: नाग पंचमी पर कैसे पाएं दोष से मुक्ति, जानें Nag Panchami 2026 की पूजा विधिनाग पंचमी व्रत कथाएक साहूकार था। उसके सात लड़के और उनकी सात बहुएं थीं। छह बहुओं का तो मायका था, लेकिन सबसे छोटी बहू का मायका नहीं था। सावन मास लगते ही छह बहुएं तो अपने भाइयों के साथ मायके चली गईं, परंतु सातवीं के भाई नहीं था, तो कौन लेने आता? वो घर में उदास बैठी मन ही मन विचार करती थी कि मेरा मायका नहीं है। नागदेवता मुझे भी मायका देना।इतना कहते ही नागदेवता ने दया की और ब्राह्मण का रूप धारण कर आए और सातवीं बहू को मायके के लिए लेकर चल दिए। थोड़ी दूर रास्ता तय करने पर उन्होंने अपना असली रूप धारण कर लिया, बहन मन में विचार करने लगी कि भाई मुझे लेकर कहां जाएगा। नागदेवता उसे नाग लोक में अपने घर ले आए और अपनी पत्नी से बोले कि यह मेरी बहन है, इसको अच्छी तरह से रखना, कोई दुख नहीं होने देना। एक दिन नागिन की जब प्रसूति हुई, तब वह दीया लेकर अपनी भाभी के बच्चों को देखने गई, लेकिन डर के कारण उसके हाथ से दीया गिर गया और नागिन के बच्चों की पूंछ जल गई। जिससे नागिन बहुत क्रोधित हुई और अपने पति से कहा कि आप अपनी बहिन को ससुराल भेज दो।तब नाग देवता ने अपनी बहन को बहुत सारा धन देकर ससुराल भेज दिया। जब अगला सावन आया तो छोटी बहू दीवार पर नाग देवता बनाकर विधिवत पूजन कर मंगल कामना करने लगी। अपनी माता से पूंछ जलने का कारण जान नाग बालक जब छोटी बहू से बदला चुकाने आए, तो छोटी बहू को अपनी ही पूजा में मगन देखकर वे बहुत प्रसन्न हुए और उनका क्रोध समाप्त हो गया। नाग बालकों ने छोटी बहू के हाथ से प्रसाद रूप में दूध और चावल भी खाए। नागों ने उसे सर्पों से निर्भय होने का भी वरदान दिया तथा उपहार में बहुत सी मणियों की माला दी। और यह वरदान भी दिया कि श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पंचमी को जो हमें भाई रूप में पूजेगा, उसकी हम सदा रक्षा करेंगे।शुभा दुबे ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Singh Sankranti 2026: सूर्य का स्वराशि प्रवेश, महापुण्य काल में Surya Puja से चमकेगी किस्मत</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में सूर्य को ग्रहों का राजा कहा गया है। वहीं सूर्य का राशि परिवर्तन भी विशेष महत्व रखता है। आज यानी की 17 अगस्त को सूर्य देव कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। जब सूर्य देव किसी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसको राशि की संक्रांति कहा जाता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा-आराधना और उनकी कृपा प्राप्त करने का विशेष मौका होता है। तो आइए जानते हैं आज की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और मंत्र आदि के बारे में...तिथि और मुहूर्तआज 17 अगस्त की सुबह 08:03 मिनट पर कर्क राशि से निकलकर सूर्य देव सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। सिंह संक्रांति का पुण्य काल मुहूर्त सुबह 05:51 मिनट से सुबह 08:04 मिनट तक रहेगा। वहीं इस दिन महापुण्य काल का समय 05:52 मिनट से लेकर सुबह 08:04 बजे तक रहेगा।पूजन विधियह दिन सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्ति का होता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य करें। इस दिन स्नान-ध्यान करने, सूर्य देव को अर्घ्य देने और दान करने से शारीरिक कष्टों का नाश होता है। जल में रोली, कुमकुम और अक्षत मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।मंत्र जाप&#039;ॐ सूर्याय नमः&#039;&#039;घृणि सूर्याय नमः&#039;इन मंत्रों के जाप के अलावा आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से सूर्य की स्थिति कुंडली में मजबूत होगी और सेहत लाभ, सम्मान और सुख-समृद्धि के रास्ते खुलते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:31 +0530</pubDate>
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<title>Kalki Jayanti 2026: कलयुग के अंत और Sat&#45;Yuga की स्थापना का प्रतीक, जानें शुभ Muhurat और पूजन विधि</title>
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<description><![CDATA[ हर साल सावन माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को कल्कि जयंती मनाई जाती है। इस बार आज यानी की 18 अगस्त 2026 को कल्कि जयंती मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यता है कि कलियुग के अंत में जब अधर्म अपने चरम पर होगा, तब धर्म की स्थापना के लिए भगवान विष्णु अपना 10वां और अंतिम कल्कि अवतार लेंगे। मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर भगवान कल्कि का प्राकट्य होगा। तो आइए जानते हैं कल्कि जयंती की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक 17 अगस्त की शाम 05:00 बजे से सावन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरूआत होगी। वहीं आज यानी की 18 अगस्त की शाम 05:50 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 18 अगस्त 2026 को कल्कि जयंती मनाई जाएगी। वहीं इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 04:31 बजे से शाम 05:50 बजे तक है।पौराणिक मान्यताएंपौराणिक ग्रंथों जैसे अग्निपुराण, श्रीमद्भागवत महापुराण, कल्कि पुराण, वायुपुराण के मुताबिक कलियुग के अंतिम चरण में &#039;शंभल&#039; नामक जगह पर विष्णुयश नामक तपस्वी ब्राह्मण के घर भगवान कल्कि का अवतरण होगा। वह देवदत्त नामक श्वेत घोड़े पर सवार होकर आएंगे। भगवान कल्कि पापियों और अधर्मियों का संहार करेंगे और फिर से सतयुग की स्थापना करेंगे। सिर्फ हिंदू धर्मग्रंथों में ही नहीं बल्कि सिख और बौद्ध धर्म में भी भगवान कल्कि के अवतार का वर्णन मिलता है। पूजन विधिकल्कि जयंती के दिन भगवान श्रीहरि के मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होते हैं। वहीं भक्त इस दिन व्रत भी करते हैं। इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर भगवान विष्णु का ध्यान करें और लकड़ी की चौकी पर लाल या पील कपड़ा बिछाएं। इस पर भगवान विष्णु या भगवान कल्कि के मूर्ति को स्थापित करें। इसके बाद भगवान विष्णु को चंदन, कुमकुम और हल्दी का तिलक करें।फिर ताजे फूल अर्पित करें और धूप-दीप, नैवेद्य अर्पित करें और तुलसी दल नैवेद्य में जरूर रखें। पूजा के अंत में आरती करें। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम और या कल्किपुराण का पाठ करें। साथ ही विष्णु मंत्रों का जाप करें। पूजा खत्म करने के बाद क्षमायाचना करें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:30 +0530</pubDate>
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<title>Wednesday Remedies: बुधवार और गणपति पूजा का खास कनेक्शन, संकटनाशन स्तोत्र से दूर होगी हर समस्या</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। गणेश भगवान को बुद्धि और ज्ञान का देवता माना जाता है। वहीं बुधवार को भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से बप्पा की कृपा प्राप्त होती है। वहीं गणपति बप्पा की कृपा के लिए बुधवार का व्रत भी किया जाता है। बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सुख-सौभाग्य और आय में वृद्धि होती है। वहीं इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।ऐसे में अगर आप भी आर्थिक विषमता से मुक्ति पाना चाहते हैं। तो बुधवार के दिन भक्ति भाव से भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए। वहीं पूजा के समय इस खास स्त्रोत का पाठ करना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 18 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 18 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनसंकटनाशन गणेश स्तोत्रप्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम ।भक्तावासं: स्मरैनित्यंमायु:कामार्थसिद्धये ॥प्रथमं वक्रतुंडंच एकदंतं द्वितीयकम ।तृतीयं कृष्णं पिङा्क्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम॥लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च ।सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टकम् ॥नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम ।एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ॥द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेन्नर:।न च विघ्नभयं तस्य सर्वासिद्धिकरं प्रभो ॥विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥जपेद्वगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत् ।संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय:॥अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वां य: समर्पयेत ।तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत:॥ऋणहर्ता गणेश स्तोत्रॐ सिन्दूर-वर्णं द्वि-भुजं गणेशं लम्बोदरं पद्म-दले निविष्टम् ।ब्रह्मादि-देवैः परि-सेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणामि देवम् ॥सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजित: फल-सिद्धए ।सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे ॥त्रिपुरस्य वधात् पूर्वं शम्भुना सम्यगर्चित:।सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे ॥हिरण्य-कश्यप्वादीनां वधार्थे विष्णुनार्चित:।सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे ॥महिषस्य वधे देव्या गण-नाथ: प्रपुजित:।सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे ॥तारकस्य वधात् पूर्वं कुमारेण प्रपूजित: ।सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे॥भास्करेण गणेशो हि पूजितश्छवि-सिद्धए ।सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे ॥शशिना कान्ति-वृद्धयर्थं पूजितो गण-नायक:।सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे ॥पालनाय च तपसां विश्वामित्रेण पूजित:।सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे ॥इदं त्वृण-हर-स्तोत्रं तीव्र-दारिद्र्य-नाशनं,एक-वारं पठेन्नित्यं वर्षमेकं सामहित:।दारिद्र्यं दारुणं त्यक्त्वा कुबेर-समतां व्रजेत्॥ ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:24 +0530</pubDate>
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<title>Nag Panchami Tradition: आखिर क्यों पीटी जाती है कपड़े की गुड़िया? जानिए UP की इस अनोखी Ritual के पीछे की पौराणिक कहानी</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी 17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है। अक्सर लोग यहीं जानते हैं कि इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है, हालांकि उत्तर प्रदेश के कुछ जगहों पर इस दिन एक अनोखी लोकपरंपरा देखने को मिलती है। इसके के बारे में कम ही लोग जानते होंगे।असल में नाग पंचमी के दिन कपड़े की गुड़िया बनाई जाती है और फिर इसे डंडे से पीटने की रस्म पूरी की जाती है। अब लोगों के मन में यही सवाल आया होगा कि आखिर गुड़िया पीटने का नाग पंचमी से क्या संबंध है? दरअसल, इसके पीछे एक लोककथा प्रचलित है, जो कि एक भाई, उसकी बहन और एक सांप से जुड़ी है। आइए आपको इस बारे में विस्तार से बताते है-नाग पंचमी पर कहां निभाई जाती है गुड़िया पीटने की परंपरा?उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में खासकर बुंदेलखंड से जुड़ी लोकपरंपराओं में कपड़े की गुड़िया पीटने का रस्म देखने को मिलती है। लेकिन, गोंड़ा, कानपुर, बलरामपुर, अयोध्या और बहराइच जैसी जगहों पर भी इस तरह की परपंरा को निभाई जाती है। नाग पंचमी के दिन कपड़े से एक छोटी गुड़िया बनाई जाती है। इसके बाद बच्चे या भाई उसे डंडे से पीटते हैं।भाई-बहन से जुड़ी है इसकी कहानीदरअसल, इसके पीछे एक लोककथा सुनाई जाती है। जिसमें एक भाई और उसकी बहन की कहानी है। बताया जाता है कि बहुत समय पहले एक लड़का भगवान शिव का भक्त था। वह नियमित तौर पर मंदिर जाता था और पूजा करता था। जिस मंदिर में वह जाता था, वहां एक साप रहता था। सांप उस लड़के को नुकसान नहीं पहुंचाता था। सांप उस लड़के पास जाता है और उसके पैर में लिपट जाता था। लड़का भी उससे डरता नहीं था। एक दिन लड़का अपनी बहन को भी मंदिर लेकर गया। पूजा के बाद जब दोनों वहां से जाने लगे तो सांप हमेशा की तरह लड़के के पास आया और उसके पैर से लिपट गया।सांप को देखकर डर गई बहनजब बहन ने देखा भाई के पैर से सांप लिपटा हुआ, तो वह डर गई। उसे लगा कि सांप उसके भाई को डंस लेगा। इसी डर के कारण उसकी बहन ने डंडा उठाकर सांप को पीट दिया। डंडे की चोट से सांप की मौत हो गई। जब गांव के लोगों को इस बारे में पता चला, तो उन्होंने यही समझा कि लड़की से अनजाने में कोई गलती हुई है।बच्चे की जगह गुड़िया को मिली सजालोककथा के मुताबिक, लड़की ने यह सब जानबूझकर नहीं किया था। उसने डर के कारण अपने भाई को बचाने की कोशिश की। ऐसे गांव वालों ने उसे सजा देने के स्थान पर कपड़े की एक गुड़िया बनाई। फिर गांव के लोगों ने गुड़िया को डंडे से पीटा। उस दिन से नाग पंचमी के दिन गुड़िया पीटने वाली परंपरा चलती जा रही है।क्यों गुड़िया बनाई जाती है?दरअसल, इस कहानी में गुड़िया का इस्तेमाल सिर्फ एक प्रतीक के तौर पर किया जाता है। समय के साथ यह रस्म वहां स्थनीय परंपरा का रुप ले लिया है। नांग पंचमी पर इसका क्या लेना-देना है?खासतौर पर इस रस्म का संबंध उस लोककथा में हुई सांप की मौत से है। नाग पंचमी पर नागों के प्रति सम्मान और उनकी पूजा के लिए खास मानी जाती है। इसी कारण से यह कहानी और गुड़िया पीटने की परंपरा नाग पंचमी से जुड़ी है। गुड़िया बनाने के बाद क्या किया जाता है।सबसे पहले कपड़ों की गुड़िया बना लेते हैं। फिर नाग पंचमी के दिन उसे डंडे से पीटने की रस्म निभाई जाती है। कुछ जगहों पर जब रस्म पूरी हो जाती है, तो इन गुड़ियों को पानी में बहाने या विसर्जित करने की परंपरा है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:24 +0530</pubDate>
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<title>Rajasthan के Pushkar में छुपा है 27वां शक्तिपीठ, जानिए Puruhota Hill पर मां सती के मणिबंध गिरने का रहस्य</title>
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<description><![CDATA[ भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका आदि देशों में आदिशक्ति मां के 52 शक्तिपीठ हैं। इन शक्तिपीठों में से एक पुष्कर की पुरूहोता पहाड़ी की तलहटी में राजराजेश्वरी मणिवेदिका शक्तिपीठ स्थित है। यह 27वां शक्तिपीठ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक यहां पर मां सती के हाथ की कलाइयां गिरी थीं। यहां पर मां आदिशक्ति और मां गायत्री एक साथ विराजमान हैं। बता दें कि स्थानीय लोग मां को चामुंडा माता के नाम से भी जानते हैं। वहीं स्कंद पुराण में भी इस पावन स्थान के बारे में उल्लेख मिलता है।27वां शक्तिपीठसृष्टि के रचयिता ब्रह्मा की नगरी पुष्कर में जगत जननी माता का 27वां शक्तिपीठ है। सावित्री मां की पहाड़ी के पास पुरूहोता पर्वत है। धार्मिक मान्यता है कि इस पर्वत पर मां सती के दोनों हाथों की कलाइयां गिरी थी। जिससे पर्वत के बीच एक विशाल गड्ढा हो गया था। इस स्थान तक पहुंचना काफी दुर्गम है। माना जाता है कि मां की एक बुजुर्ग भक्त की प्रार्थना पर मां पहाड़ी के बीच तलहटी में आ गई थीं। सदियों से यह स्थान गुप्त और अज्ञान रहा। पुष्कर आने वाले अधिकतर भक्तों को 27वें शक्तिपीठ के बारे में कम जानकारी है। अन्य फेमस मंदिरों की तरह मां के इस पावन शक्तिपीठ का उतना ज्यादा विकास नहीं हो सका है।इसे भी पढ़ें: Famous Shiv Temple: 3000 साल प्राचीन मंदिर की अनोखी बनावट, जहां गंगा जल में डूबे हैं महादेवपौराणिक कथापौराणिक कथाओं के मुताबिक महाराज दक्ष प्रजापति की पुत्री सती से भगवान शिव का विवाह हुआ था। लेकिन इस विवाह से महाराजा दक्ष प्रसन्न नहीं थे। जब प्रजापति दक्ष ने यज्ञ किया तो ब्रह्मा, विष्णु समेत सभी देवी-देवताओं को आमंत्रण दिया। लेकिन अपने दामाद और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया। लेकिन सती बिना आमंत्रण के अपने पिता के घर यज्ञ में शामिल होने के लिए जाती हैं। सती के पिता के घर पहुंचने पर दक्ष ने भगवान शिव का अपमान किया। जिससे क्रोधित होकर मां सती ने अग्निकुंड में अपनी देह का त्याग कर दिया।इस स्थान पर गिरे थे मणिबंधजब सती ने देहत्याग किया, तो भगवान शिव मां सती की देह को अपने हाथों में उठाकर रौद्र रूप के साथ ब्रह्मांड में इधर-उधर भटकने लगते हैं। जिससे सृष्टि में हाहाकार मच जाता है। ऐसे में श्रीविष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से मां सती की देह के टुकड़े कर दिए। मां सती की देह के टुकड़े जहां-जहां धरती पर गिरे, वहां-वहां पर शक्तिपीठ बन गए। पुष्कर में स्थिति पुरुहोता पर्वत पर मां सती के दोनों हाथ के मणिबंध यानी कलाइयां गिरी थीं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 04:30:24 +0530</pubDate>
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<title>बुध&#45;मंगल का Dashank Yog: इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, Career और Wealth में होगा बंपर इजाफा</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी 14 अगस्त 2026 को बुध और मंगल के बीच दशांक योग बनेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, दोपहर 12 बजकर 37 मिनट पर दोनों ग्रह करीब 36 डिग्री के कोण पर आएंगे। वर्तमान निरयन गोचर में मंगल मिथुन राशि में 7 डिग्री से अधिक और बुध कर्क राशि में करीब 13 डिग्री पर स्थित हैं। बुध पुष्य नक्षत्र और मंगल आर्द्रा नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। सबसे खास बात तो यह है कि कर्क राशि में बुध के साथ उच्च अवस्था में गुरु मौजूद है। इससे संयोग का महत्व अधिक बढ़ गया है। ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, तर्क, व्यापार, गणना, संवाद और निर्णय क्षमता का कारक माना जाता है। वहीं, मंगल ग्रह को साहस, ऊर्जा, पराक्रम, तकनीकी दक्षता और काम को अंजाम तक पहुंचने की क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है। वैसे इन दोनों ग्रहों का संबंध उन क्षेत्रों के लिए फायदेमंद है, जो कि रणनीति के साथ तुरंत एक्शन जरुरी होता है। लेकिन इसका प्रभाव कुछ ही राशियों पर पड़ेगा। आइए आपको बताते हैं कौन हैं, ये लकी राशियां।वृषभ राशिवृषभ राशि के जातकों के लिए बुध दूसरे और पंचम भाव के स्वामी होकर तीसरे भाव में है। वैसे यह भाव प्रयास, संवाद, लेखन, मार्केटिंग और नेटवर्क से जुड़ा होता है। वहीं, मंगल सातवें और बारहवें भाव के स्वामी होकर दूसरे भाव में स्थित हैं। ऐसे में कम्यूनिकेशन और स्किल के संबंधित कमाई के अवसर बढ़ जाते हैं। इस राशि के लोगों को मीडिया, सेल्स, कंटेंट, डिजिटल बिजनेस और कंसल्टिंग से संबंधित लोगों को नए प्रोजेक्ट मिल सकते हैं। लेकिन बोलचाल में संयम रखना बेहद जरुरी है। कन्या राशिकन्या राशि के लोगों के लिए बुध लग्न और कर्म भाव के स्वामी होकर लाभ भाव में हैं। मंगल तीसरे और आठवें भाव के स्वामी होकर कर्म भाव में स्थित हैं। कन्या राशि के लोगों को नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती हैं। महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट मिलने के चांस हैं। मेहनत करने से अच्छा परिणाम और वरिष्ठों से प्रशंसा मिलने के योग है। बिजनेस को पुराने संपर्कों और नए क्लाइंट से फायदा मिल सकता है। इसलिए प्रयास करने बेहद ही जरुरी है। सिंह राशिसिंह राशि के जातकों के लिए मंगल योगकारक ग्रह हैं और इस समय लाभ भाव में स्थित हैं। जो कि आय, नेटवर्क और इच्छापूर्ति से संबंधित मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। जबकि बुध दूसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामी होकर बारहवें भाव में है। विदेशी कंपनियों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, आईटी, मीडिया और इंटरनेशनल क्लाइंट से संबंधित लोगों को लाभ मिलेगा।तुला राशितुला राशि में बुध नवम और बारहवें भाव के स्वामी होकर दशम भाव में हैं, बल्कि मंगल दूसरे और सातवें भाव के स्वामी होकर नवम भाव में मौजूद है। इससे भाग्य और कर्म का संबंध मजबूत होगा। नौकरी बदलने के लिए बेहतर समय है, जबकि नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। व्यापार में विदेश या बड़े संस्थानों से जुड़े अवसर बन सकते हैं। दशम भाव में उच्च गुरु की उपस्थिति भी पॉजिटिव संकेत दे रही है।मीन राशिमीन राशि के लिए मंगल दूसरे और नवम भाव के स्वामी होकर चौथे भाव में है। बुध चौथे और सातवें भाव के स्वामी होकर पंचम में स्थित है। मीन राशि के जातकों को धन, शिक्षा, संपत्ति और पार्टनरशिप से जुड़े मामलों में प्रगति हो सकती है। प्रॉपर्टी या वाहन खरीदने की योजना आगे बढ़ सकती है। विद्यार्थियों को भी लाभ मिल सकता है। बिजनेस में पार्टनरशिप फायदेमंद साबित होगी और उच्च गुरु की मौजूदगी शिक्षा व रचनात्मक कार्यों के लिए सकारात्मक असर बढ़ाएगा।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:53:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Shravan Month Special: महादेव को क्यों प्रिय है रुद्राक्ष? जानें 14 Mukhi Rudraksha की महिमा और Importance</title>
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<description><![CDATA[ सावन का महीना चल रहा है। श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि महादेव की पूजा में रुद्राक्ष का बहुत बड़ा और खास महत्व क्यों माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है, इसलिए रुद्राक्ष को अत्यंत पवित्र और चमत्कारी माना जाता है। माना जाता है कि रुद्राक्ष को धारण करने से न सिर्फ मन को शांति मिलती है बल्कि भगवान शिव की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है। इसलिए आध्यात्मिक साधना करने वाले लोग और शिव भक्त रुद्राक्ष को अपने गले या शरीर पर जरुर धारण करते हैं। आइए आपको इसकी उत्पत्ति और इसके पीछे का महत्व। रुद्राक्ष का पेड़ कहां पाया जाता है?रुद्राक्ष का पेड़ हिमालय की तलहटी, गंगा के मैदानी इलाकों और इंडोनेशिया और पापुआ- न्यू गिनी समेत दक्षिण-पूर्व एशिया के क्षेत्रों में पाया जाता है। दरअसल, रुद्राक्ष के बीजों को ब्लूबेरी सीड्स भी कहा जाता है क्योंकि जब इनका बाहरी आवरण पूरी तरह पक जाता है, तो यह नीले रंग का होता है। सनातन धर्म भगवान शिव को अक्सर नीले रंग में दर्शाया गया है, जो अनंतता का प्रतीक है। भगवान शिव से जुड़ा होने के कारण यह बीज आध्यात्मिक साधकों के बीच खास महत्व रखता है। वैसे इस पेड़ का वैज्ञानिक नाम एलायोकैपर्स गैनीट्रस कहा जाता है। रुद्राक्ष का अर्थऋग्वेद के मुताबिक, रुद्राक्ष का अर्थ दुख और द्रव्यति का अर्थ मिटाना है। जिसका अर्थ है कि जो हमारे दुखों को पूरी तरह मिटाते हैं। श्वेताश्वतरोपनिषद में, सर्वोच्च चेतना (ब्रह्म) को ही रुद्र के रुप में पहचाना गया है।रुद्राक्ष की उत्पत्ति कैसे हुई?धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, एक बार भगवान शिव लंबी तपस्या में लीन थे। जब वे लंबे समय बाद जागे, तो उनकी आंखों से धरती पर कुछ आंसू टपक पड़े। वैसे ये आंसू बीज में बदल गए और इससे एक पेड़ उत्पन्न हुआ, जिसे &#039;रुद्राक्ष का पेड़&#039; कहा गया। इसके बाद, भगवान शिव द्वारा इन बीजों को विशेष शक्तियां प्रदान की गई है।रुद्राक्ष शब्द का अर्थ है रुद्र के आंसू। जो भक्त जन रुद्राक्ष पहनते हैं उन्हें आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान होती है और जीवन की हर बाधा का सामना करने की शक्ति देता है। शिव पुराण के अनुसार, रुद्राक्ष धारण करने वाला मनुष्य भगवान शिव के समान ऊर्जा और पवित्रता प्राप्त करता है।रुद्राक्ष के प्रकार मुखी और उनका महत्व  - 1 मुखी रुद्राक्ष- इस रुद्राक्ष के देवता भगवान शिव स्वयं है। इसे पहनने से इंसान को परम चेतना और आत्म-जागरुकता का ज्ञान प्रदान होता है। - 2 मुखी रुद्राक्ष- यह वाला रुद्राक्ष शिव और शक्ति के सम्मिलित रुप &#039;अर्धनाहरीश्वर&#039; का प्रतीक है। यह जीवन में आपसी तालमेल, एकता और गुरु-शिष्य के रिश्ते को मजबूत बनाता है। - 3 मुखी रुद्राक्ष- यह देवता अग्नि देव हैं। जो कि पिछले जन्मों या कर्मों के बंधन और पापों से मुक्ति दिलाने में मदद करता है। - 4 मुखी रुद्राक्ष- इस रुद्राक्ष के अधिष्ठाता देव गुरु बृहस्पति हैं। जो साधक उच्च ज्ञान और विद्या की तलाश करने वाले साधकों के लिए बहुत ही फायदेमंद है। - 5 मुखी रुद्राक्ष- यह &#039;कालाग्नि रुद्र&#039; का रुप माना जाता है। जो व्यक्ति इसको धारण करता है, उसकी आंतरिक चेतना जागृत हो जाती है।  - 6 मुखी रुद्राक्ष- इसके देवता भगवान कार्तिकेय हैं। इसके धारण से जीवन में संतुलन के साथ-साथ मानसिक और भावनात्मक स्थिरता प्रदान करती है। - 7 रुद्राक्ष- धन की देवी माता लक्ष्मी इसका प्रतिनिधित्व करती हैं। यह हेल्द सुधारने के साथ-साथ धन और समृद्धि के रास्ते खोलता है। - 8 मुखी रुद्राक्ष- इस रुद्राक्ष के देवता प्रथम पूज्य भगवान गणेश हैं। यह जीवन के सभी प्रकार के विघ्नों और बाधाओं को दूर करता है।  - 9 मुखी रुद्राक्ष- देवी मां दुर्गा इस रुद्राक्ष की अधिष्ठाता हैं। यह ऊर्जा और पराक्रम का प्रतीक है और सांसारिक सुख और मोक्ष दोनों प्राप्त करने में मदद करता है। - 10 मुखी रुद्राक्ष- इसके देवता भगवान कृष्ण है। यह सबसे शक्तिशाली रुद्राक्षों में से एक है, जो जीवन में प्रेम और शांति लेकर आता है। - 11 मुखी रुद्राक्ष- ग्यारह रुद्र इसके देवता है। वैसे यह रुद्राक्ष कुंडली में ग्रहों के बुरे प्रभावों और नकारात्मक असर को कम करता है।  - 12 मुखी रुद्राक्ष- इसके अधिष्ठाता सूर्य देव है। यह व्यक्ति में तेज, आत्मविश्वास और ऊर्जा प्रदान करता है और हीन भावना को दूर करके खुद को प्रेरित करता है। - 13 मुखी रुद्राक्ष-  वैसे इस रुद्राक्ष का देवता कामदेव हैं। यह आकर्षण क्षमता को बढ़ाता है और कुंडलिनी जागरण व अन्य सिद्धियों को प्राप्त करने में मदद करता है। - 14 मुखी रुद्राक्ष- संकटमोचन भगवान हनुमान इस रुद्राक्ष के देवता हैं। यह अटूट साहस, बहादुरी और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:53:21 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 15 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष तनाव बढ़ सकता है, विरोधी प्रस्ताव होंगे। मानसिक तनाव का ग्राफ बढ़ रहा है। परिश्रम का फल मिलेगा, अच्छा महसूस होगा। जीवनसाथी की सलाह लेकर काम करें।वृषबच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए बीमा पॉलिसी। विवाद विजय का दिन है। प्रेम प्रसंग विवाह प्रस्ताव में बदलेगा। इज्जत और कार्य क्षमता बढ़ेगी।मिथुनमहत्वपूर्ण अटका हुआ काम पूरा होगा। दोपहर बाद किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर न करें। उधार दिया गया धन वापस मिलेगा। अनुकूल समय- सुख साधनों की प्राप्ति।कर्कआपके व्यक्तित्व से जनता प्रभावित होगी। स्वास्थ्य में गड़बड़ और थकावट भी। रात्रिभोज पर कुछ विशेष रहेगा। उत्तम सफलता से प्रतिष्ठा मिलेगी।सिंहतथा कथित &#039;अपने&#039; ही कष्ट देंगे- मन दुखायेंगे। व्यापार के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। निर्धारित लक्ष्य पर ध्यान दें। अच्छी जगह है, तबादला होगा।कन्यापरिवार के लिए धन की व्यवस्था में व्यस्त रहेंगे। विशेष परीक्षा में सफलता के योग है। पुराने मित्रों और निकट संबंधी से मुलाकात होगी। किसी खास स्वजन का स्वास्थ्य, चिंताजनक।तुलाअनिर्णय की स्थिति, अतिथियों का आगमन। धन सम्पत्ति में वृद्धि होगी। आत्मावलोकन करें और परिवर्तन लाएं। कार्य सम्पन्न होने पर सुख चैन का अनुभव।वृश्चिक परोपकार के कार्यों में व्यस्ता। व्यापार/रोजगार में तरक्की होगी। थोड़े से परिश्रम से बड़ा लाभ होगा। उच्चतर शिक्षा के लिए प्रयास सफल होंगे।धनुछवि और बिखरेगी, सफलता मिलेगी। सभी बाधाएं दूर होगी- उत्साह से आगे बढ़ें। परिवार में सामंजस्य की स्थिति बनेगी। धन संबंधी योजनाएं आगे बढ़ेगी।मकर अपने काम पर विशेष ध्यान दें। वाहन कष्ट और अन्य कार्यों में रूकावट भी। वाद-विवाद और मन में अशांति। अप्रिय मेहमानों का आगमन अच्छा नहीं लगेगा।कुंभपारिवारिक कलह से परेशानी। यात्राओं से बचने में ही भलाई है। कई साधनों से धनागमन। दाम्पत्य जीवन का समस्याएं हल होंगी।मीनसर्वत्र लोकप्रियता और इज्जत बढ़ेगी। धन का लेनदेन आसान नहीं रहेगा। प्रतिष्ठित व्यक्तियों से मिलन, भविष्य में सहायक। स्वास्थ्य में सुधार होगा, विदेश यात्रा के योग भी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:53:21 +0530</pubDate>
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<title>Venus Plants For Shukra Grah: शुक्र दोष मिटाकर जीवन में सुख&#45;समृद्धि लाएंगे ये Vastu Remedy, देखें Full List</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को भौतिक सुख-सुविधाओं, सौंदर्य, धन, प्रेम और वैवाहिक जीवन का कारक माना जाता है। मजबूत शुक्र जीवन में आर्थिक स्थिति और सुख-सुविधाओं में वृद्धि करता है। वहीं वैवाहिक जीवन मधुर बनाता है। वहीं अगर शुक्र की स्थिति कमजोर हो तो ऐसी स्थिति में आर्थिक तंगी, फिजूलखर्ची और वैवाहिक जीवन में तनाव आदि समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में शुक्र को मजबूत करना बेहद जरूरी माना जाता है।लेकिन क्या आप जानती हैं कि सिर्फ कुछ पौधों को घर में लगाने से शुक्र की स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। इससे जातक पर मां लक्ष्मी की भी कृपा बनी रहती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन-किन पौधों को घर में सही दिशा में लगाने से शुक्र ग्रह मजबूत हो सकता है।इसे भी पढ़ें: बुध-मंगल का Dashank Yog: इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, Career और Wealth में होगा बंपर इजाफाकमजोर शुक्र के लक्षणशुक्र ग्रह की स्थिति मजबूत न होने पर घर, वाहन, वस्त्र आदि सुखों में कमी या समस्याएं परेशान कर सकती हैं।कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति कमजोर होती है, तो विवाह आदि में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।लव लाइफ में पार्टनर के साथ बार-बार तनाव और अनबन होना भी कमजोर शुक्र के लक्षण होते हैं।अच्छी कमाई होने के बाद भी अगर आपके हाथ में पैसा नहीं रुकता है और फिजूलखर्ची बनी रहती है। तो यह भी कमजोर शुक्र का लक्षण हो सकता है।इन लक्षणों के दिखने पर किसी जानकार ज्योतिष को अपनी कुंडली में शुक्र की स्थिति जरूर दिखवानी चाहिए। इसके बाद जरूरी उपाय करने चाहिए। वहीं वास्तु के मुताबिक घर में कुछ पौधों को लगाकर शुक्र की स्थिति को मजबूत कर सकते हैं।अनार का पौधाशुक्र ग्रह की स्थिति को मजबूत करने के लिए आप घर में अनार का पौधा लगा सकते हैं। इस पौधे को दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। सही दिशा में अनार का पौधा लगाने से बिगड़े हुए काम बनने शुरू हो सकते हैं। इससे धन संबंधी समस्याएं कम होती हैं और बिकती हुई प्रॉपर्टी के अच्छे दाम पर जाने के संयोग बनते हैं।तुलसी का पौधावास्तु शास्त्र में तुलसी के पौधे को शुक्र ग्रह से संबंधित माना गया है। हिंदू धर्म के मुताबिक यह बेहद पवित्र होता है और इसमें मां लक्ष्मी निवास करती हैं। इसलिए तुलसी के पौधे को घर में लगाना लाभकारी सिद्ध होता है। वास्तु के मुताबिक इसको दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में शुक्र ग्रह की अनुकूलता बनी रहती है। वहीं तुलसी के पौधे को लगाने से सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। साथ ही रोजाना तुलसी की पूजा जरूर करना चाहिए।गुड़हल का पौधावास्तु के मुताबिक घर में गुड़हल का पौधा लगाना बेहद शुभ माना जाता है। इस पौधे को लगाने से नवग्रह शांत होते हैं और शुक्र ग्रह भी मजबूत होता है। इससे जीवन में आने वाली समस्याएं कम हो सकती हैं। इस उपाय को करने से आर्थिक तंगी कम होती है और पैसे भी टिकते हैं। वास्तु के मुताबिक गुड़हल का पौधा लगाने से घर में सुख-शांति और समृद्धि के संयोग बनते हैं।गुलाब का पौधाघर की दक्षिण-पूर्व दिशा में गुलाब का पौधा लगाना शुभ माना जाता है। इससे शुक्र की अनुकूलता बनी रहती है। शुक्रवार को मां लक्ष्मी को ताजे गुलाब के फूल अर्पित करना चाहिए। इस उपाय को करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। वहीं मां लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:53:21 +0530</pubDate>
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<title>Shani Transit 2026: 20 अगस्त को शनि का नक्षत्र परिवर्तन, इन 3 राशियों के लिए Business और Investment में बड़े मुनाफे के योग</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष में ग्रहों के गोचर परिवर्तन विशेष माना जाता है। शनि का गोचर होना बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। अगस्त में कर्मफल दाता शनि देव का नक्षत्र परिवर्तन प्रभावशाली माना जा रहा है। अभी इस समय शनि मीन राशि में विराजमान हैं और यहां रहते हुए वह अन्य ग्रहों से युति बना रहे हैं। दरअसल, 20 अगस्त 2026 को न्याय देवता शनि रेवती नक्षत्र में गोचर करने जा रहे हैं। ज्योतिष के अनुसार, रेवती नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं और इन्हें ग्रहों के राजकुमार कहा जाता है। वाणी, व्यापार, सफलता और संवाद का कारक बुध ग्रह है। इनका शुभ असर जातकों के मान-सम्मान में वृद्धि और मनचाही सफलता के योग बनाता है। ऐसे में शनि का बुध नक्षत्र में प्रवेश करना कुछ राशियों के लिए कल्याणकारी रहने वाला है। इस दौरान व्यक्ति को मुनाफा, यात्रा और खुशखबरी की प्राप्ति संभव है। इसके साथ ही लंबे समय रुके हुए कार्य कुछ कामों में गति प्राप्त हो सकती है। आइए आपको इन लकी राशियों के बारे में बताते हैं- सिंह राशिसिंह राशि के लोगों के लिए यह समय किस्मत चमकाने वाला रहेगा। कोई बड़ा लाभ हो सकता है और लगातार मेहनत से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना मानी जाती है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी और करियर से जुड़े नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। आर्थिक मामलों में स्थिति बेहतर रहने वाली है। करियर के मामले में कोई अच्छी खबर सुनकर आप खुश रहेंगे। बिजनेस में लंबे समय के इंतजार के बाद आगे बढ़ने का संकेत नजर आएंगे।मकर राशिमकर राशि के जातकों के लिए सभी अटके काम मनचाहे तरीकों से पूरे हो सकते हैं। नौकरी में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर प्राप्त होगा। घर-परिवार में आपकी किसी उपलब्धि से खुशी का माहौल बन सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत और प्रयासों की तारीफें हो सकती हैं। वहीं, प्रेम संबंध मामलों में गलतफहमियां दूर हो सकती हैं और रिश्तों में पहले से अधिक मधुरता बनीं रहेगी। मीन राशिमीन राशि के जातकों को सफलता मिलेगी और कोई अच्छी खबर मिल सकती है। समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी और मान-सम्मान में भी वृद्धि होगी। प्रेम संबंधों में सकारात्मक बदलाव आएंगे। स्वास्थ्य अच्छा रहने वाला है और बिजनेस में लाभ देखने को मिलेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति मजबूत रहने वाली और मेहनत रंग लाने वाली है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:53:20 +0530</pubDate>
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<title>Hariyali Teej 2026 पर पहली बार रख रही हैं व्रत? जानिए Puja Vidhi और Rituals का धार्मिक महत्व</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी हरियाली तीज का पर्व 15 अगस्त, शनिवार को मनाया जा रहा है। तीज के दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं मनचाह जीवनसाथी पाने की इच्छा में तीज का व्रत रखती हैं। पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ने वाला यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन से जुड़ा है। माना जाता है कि श्रद्धा भाव से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से दांपत्य जीवन में प्रेम और सौहार्द बना रहता है। जो महिलाएं पहली बार व्रत रखने वाली हैं उनके लिए पूजा की सही विधि जरुर जानें।हरियाली तीज व्रत की विधि- हरियाली तीज व्रत वाले दिन महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा की तैयारी करें और मन में व्रत का संकल्प लें।- तीज के मौके पर मायके से बेटी के लिए सिंधारा भेजने की परंपरा है। इसमें चूड़ियां, मिठाई, मेहंदी और श्रृंगार से संबंधित चीजें शामिल होती हैं। माना जाता है कि, इस दिन मायके से आए वस्त्र धारण करना बेहद शुभ होता है। हरे रंग को हरियाली और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस त्योहार के दिन हरे रंग की साड़ी या परिधान पहनने की परंपरा है।- तीज के अवसर पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। इसको वैवाहिक सुख और सौभाग्य से जोड़ा गया है। - फिर शुभ मुहूर्त में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा की जाती है। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित की जाती है। वहीं भगवान शिव को जल, बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं।- इसके बाद हरियाली तीज व्रत कथा का पाठ करें या सुनें। असल में कई परिवारों में महिलाएं अपनी सास को वस्त्र और सुहाग सामग्री भेंट कर उनका आशीर्वाद लेती हैं।- हरियाली तीज पर महिलाएं गीत-संगीत के साथ सामूहिक रुप से पर्व मनाती हैं। झूला झूलने और हाथों में मेहंदी लगाने की भी परंपरा है। वहीं, व्रत का पारण अपनी पारिवारिक पंरपरा और मान्यता के अनुसार की जाती है।हरियाली तीज व्रत के नियम- इस दिन हरे और लाल रंग के वस्त्र पहनना काफी शुभ माना जाता है। भूलकर भी काले सफेद या भूरे रंग के कपड़े न पहनें। - व्रत के दौरान पानी या दूध का सेवन न करने की परंपरा भी प्रचलित है। - इस बात का ध्यान रखें कि पूजा में वही सामग्री का इस्तेमाल करें, जो मायके से प्राप्त हुई हो। - व्रत का पारण शुभ मुहूर्त से पहले न करें। - व्रत वाले दिन महिलाओं को किसी भी प्रकार का विवाद और नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए। - मान्यता के अनुसार, इस रात जागरण कर भजन-कीर्तन के जरिए शिव-पार्वती की आराधना करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:53:20 +0530</pubDate>
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<title>Chandra Grahan 2026: Raksha Bandhan पर ग्रहण का साया, इन राशियों के लिए Tension भरा समय, पढ़ें Horoscope Predictions</title>
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<description><![CDATA[ इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण रक्षाबंधन पर 28 अगस्त 2026 को लगने जा रहा है। ज्योतिष के अनुसार, यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जो शनि की राशि कुंभ और शतभिषा नक्षत्र में घटित होगा। माना जाता है कि ग्रहों-गोचरों का संयोग किसी खास पर्व पर बनना उसके महत्व और नियमों पर प्रभाव डालता है, जिस कारण से जातकों को लाभ-हानि से गुजरने के योग बनते हैं। इस बार रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण लगेगा। हालांकि, यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। हालांकि, इनका राशियों पर जरुर असर होगा। कुछ जातकों की परेशानी बढ़ जाएगी और कार्यों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल जाएंगे। आइए आपको बताते हैं चंद्र ग्रहण किन राशि के जातकों को तनाव और सावधानी का समय लेकर आया है।चंद्र ग्रहण का समयइस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगने जा रहा है। ग्रहण की शुरुआत 28 अगस्त को सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर होगा। इसका समापन दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर होगा। यह चंद्र ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। इसी कारण इसका सूतक काल और इसके नियमों दोनों ही मान्य नहीं होंगे। लेकिन, ज्योतिषीय दृष्टि से इसका प्रभाव कुछ राशियों पर देखने को मिलेगा।कर्क राशिकर्क राशि के लोगों को नए कार्य करने से बचना बेहद जरुरी है। यह समय आपके लिए अशुभ हो सकता है। इस अवधि में किसी भी तरह की यात्रा न करें। परिवार में विवाद में होने के चांस सबसे ज्यादा है। कार्यक्षेत्र में जल्दबाजी में लिए फैसले से आपकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। धन और कार्य से जुड़े मामलों में सावधान रहे हैं। दोस्तों के साथ अनबन होने की संभावना है।तुला राशितुला राशि के जातक सेहत को लेकर जरा भी लापरवाही न करें। धन का लेनदेन भारी पड़ सकता है। कोई भी नया काम करना आपके लिए भारी पड़ सकता है। इस दौरान किसी को बड़ी रकम उधार देने या बिना सोचे-समझें निवेश करने से बचें। कार्यक्षेत्र में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे। कोर्ट के मामले परेशान कर सकते हैं। इस समय वाणी का बेहद खास ध्यान रखें।धनु राशिधनु राशि के लोगों का मानसिक तनाव बढ़ सकता है। पुराने विवाद फिर से सामने आ सकते हैं। किसी भी बात को लेकर परिवार या करीबी लोगों के साथ मतभेद होने की संभावना अधिक है। गुस्से और जल्दबाजी से बचकर समझदारी से काम लेना बेहद जरुरी है। परिवार में खुशहाली बनीं रहेगी। हालांकि, कार्यक्षेत्र में धैर्य जरुर बनाए। ]]></description>
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<title>Horoscope 16 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष धन लाभ और मनोरंजन। अधीनस्थ लोग सहायक सिद्ध होंगे। मनोकामनाएं पूरी होगी। स्वास्थ्य ठीक नहीं रहेगा, कलह भी संभव।वृषमित्रों-परिजनों के साथ आनंद भरा दिन। अखबारों में नाम छप सकता है। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। आपसी सहमति से विवाद सुलझेगा।मिथुनकठिन से कठिन काम पूरा करेंगे। परिस्थितियां अनुकूल हो जाएगी। स्थान परिवर्तन/आवास पुर्ननिर्माण। आपका स्वभाव अड़ीयल हो सकता है।कर्कआर्थिक उन्नति की ओर विशेष कदम। आपके व्यक्तित्व से जनता प्रभावित होगी। आत्मविश्वास बढ़ेगा। लाभकारी सम्पर्क बढ़ेंगे, नई योजना भी।सिंहपरमार्थ के कामों में यश। जीवनशैली में परिवर्तन लाने का संकल्प लेंगे। गुप्त प्रेम प्रसंग में खटपट। पूर्वार्द्ध उत्तम रहेगा, अपराहन में परेशानियां।कन्यासेहत में सुधार होगा- अच्छा दिन है। सार्वजनिक सभा में सम्मानित हो सकते हैं। छोटी-बड़ी यात्रा का योग है। अनेक समस्याओं का समाधान हो जाएगा।तुलाघर की साज-सज्जा में व्यस्त रहेंगे। घरेलू उपयोग की महंगी खरीदारी। चिंता और परेशानी का दिन। कड़े संघर्ष का दिन है, लेकिन परिणाम पक्ष में।वृश्चिक कोई नई मुसीबत आ खड़ी होगी। व्यापार विस्तार- नए व्यापार की योजना भी। स्वजनों में सराहनीय सहयोग मिलेगा। सम्पर्क बढेंगे, प्रतिष्ठा भी देंगे।धनुकोर्ट कचहरी का चक्कर हो सकता है। कर्तव्य की उपेक्षा से तनाव रहेगा। आज विजय दिवस मनाएंगे। संतान संबंधी चिंताओं का निराकरण। मकर जायदाद की समस्या सुलझ सकती है। घरेलू समस्याएं घेरे रहेगी। अच्छे समय का पूरा लाभ उठाएं। षडयंत्र के शिकार हो सकते हैं।कुंभप्रतिभा मुखरित और प्रशसित होगी। राजनैतिक लोगों से लाभ और उनमें प्रतिष्ठा। कोई अशुभ समाचार मिल सकता है। शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में सफलता।मीनबिगड़े काम सुधारने का दिन। आमदनी और धन संचय दोनों की प्राप्ति। सामाजिक कार्यों और समारोह में भाग ले सकते हैं। गुप्त चिंताओं से मुक्ति मिलेगी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:53:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Numerology Prediction: 138 दिनों तक इन 3 Mulanks के लिए चुनौतीपूर्ण समय, बरतें विशेष सतर्कता</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को कर्मफलदाता और न्याय का देवता माना जाता है। जब शनि ग्रह अपनी चाल बदलते हैं, तो उसका प्रभाव सिर्फ राशियों पर ही नहीं बल्कि अंक ज्योतिष के मूलांकों पर भी पड़ता है। 27 जुलाई 2026 से शनि वक्री हो चुके हैं और 11 दिसंबर 2026 तक करीब 138 दिनों तक इसी अवस्था में रहेंगे। इस दौरान शनि ग्रह की टेढ़ी चाल कई लोगों के जीवन में देरी, आत्ममंथन और चुनौतियों की स्थिति हो सकती है।अंक ज्योतिष के मुताबिक इस अवधि में मूलांक 2, मूलांक 4 और मूलांक 7 के जातकों को खासतौर पर सतर्क रहने की जरूरत है। इन लोगों को आर्थिक मामलों, मानसिक तनाव में सावधानी रखने और रिश्तों में संतुलन को बनाए रखने की सलाह दी जाती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि इन तीन मूलांक वाले लोगों पर शनि की वक्री चाल किस तरह प्रभाव डाल सकती है और आपको क्या उपाय करना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Shani Transit 2026: 20 अगस्त को शनि का नक्षत्र परिवर्तन, इन 3 राशियों के लिए Business और Investment में बड़े मुनाफे के योगमूलांक 2मूलांक 2 के स्वामी ग्रह चंद्रमा माने जाते हैं। चंद्रमा भावनाओं, मन और संवेदनशीलता का प्रतिनिधित्व करता है। शनि की वक्री चाल की वजह से मूलांक 2 वाले जातकों को मानसिक अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है। छोटी बातें भी आपको परेशान कर सकती हैं। परिवार में मतभेद की स्थिति बन सकती है। मां की सेहत का विशेष ध्यान रखें। संयम, धैर्य और पॉजिटिव सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।मूलांक 4मूलांक 4 के स्वामी ग्रह राहु हैं। शनि के वक्री होने पर इस मूलांक के लोगों के जीवन में अचानक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आसानी से पूरे होने वाले काम में रुकावट आ सकती है। व्यापार करने वाले लोगों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए कार्यों में देरी हो सकती है। हर डॉक्यूमेंट्स को ध्यान से चेक करने के बाद ही आगे बढ़ना चाहिए। सेहत का ध्यान रखें। आपके विरोधी सक्रिय रह सकते हैं और आपकी गलतियों का फायदा उठा सकते हैं।मूलांक 7अंक ज्योतिष के मुताबिक मूलांक 7 के स्वामी ग्रह केतु हैं। शनि की वक्री अवस्था मूलांक 7 वाले लोगों की पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में उतार-चढ़ाव ला सकती हैं। रिश्तों में गलतफहमियां बढ़ने की संभावना होगी। जिससे प्रेमी, जीवनसाथी या बिजनेस पार्टनर के साथ मतभेद हो सकता है। करियर को लेकर असमंजस की स्थिति हो सकती है। इसलिए इस दौरान नौकरी बदलने या कोई बड़ा फैसला लेने में किसी तरह की जल्दबाजी नहीं करना चाहिए। आर्थिक मामलों में सतर्कता जरूरी है, क्योंकि अचानक से खर्च बढ़ सकते हैं। सोच-समझकर किए गए निर्णय और धैर्यपूर्ण व्यवहार आपको इस दौरान बेहतर परिणाम दिला सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:53:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Hariyali Teej 2026: महिलाओं का उत्सव है हरियाली तीज</title>
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<description><![CDATA[ तीज का उत्सव श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। यह महिलाओं का उत्सव है। सावन में जब सम्पूर्ण प्रकृति हरी ओढ़नी से आच्छादित होती है उस अवसर पर महिलाओं के मन मयूर नृत्य करने लगते हैं। वृक्ष की शाखाओं में झूले पड़ जाते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे कजली तीज के रूप में मनाते हैं। सुहागन स्त्रियों के लिए यह व्रत बहुत महत्व रखता है। आस्था, उमंग, सौंदर्य और प्रेम का यह उत्सव शिव-पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। चारों ओर हरियाली होने के कारण इसे हरियाली तीज कहते हैं। इस अवसर पर महिलाएं झूला झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और आनन्द मनाती हैं। सौंदर्य, प्रेम के उत्सव और आस्था के इस व्रत का महिलाओं के लिए बड़ा महत्व है, विशेष रूप से नव विवाहिताओं के लिए। यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तर भारत (राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर पदेश, बिहार और झारखंड) में धूमधाम से मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार नवविवाहिताएं पहला व्रत मायके में रखती हैं और इसके लिए झूले सजाए जाते हैं, लोक गीत गाए जाते हैं। देश के कई हिस्सों में मेले लगते हैं और माता पार्वती की सवारी निकाली जाती है।इसे भी पढ़ें: Hariyali Teej 2026: समृद्ध परंपराओं, प्रकृति-प्रेम और दांपत्य जीवन की पवित्रता का अनुपम उत्सव है हरियाली तीजवर्षा ऋतु में श्रावण के महीने में हमारे देश में चारों तरफ पानी बरसता रहता है। इस दौरान चारों तरफ हरियाली ही हरियाली नजर आती है। हरियाली के आगोश में प्रकृति इस तरह झूम उठती है मानो पृथ्वी अपनी हरी-भरी बाहें फैलाकर सबका अभिनंदन कर रही हो। श्रावण के महीने को हिंदू धर्मावलंबी भगवान शिव का महीना मान मानकर भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं। कावड़िए देशभर में विभिन्न नदी, तालाबों से जल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। गणगौर के बाद त्योहारों का सिलसिला रुक जाता है वह एक बार फिर श्रावण मास की तीज से प्रारंभ हो जाता है। श्रावण का महीना महिलाओं के लिए विशेष उल्लास का महीना होता है। इस महीने में आने वाले अधिकांश लोक पर्व  महिलाओं द्वारा ही मनाए जाते हैं। श्रावण मास का आगमन ही इस त्यौहार के आने की आहट सुनाने लगता है। समस्त सृष्टि सावन के अदभूत सौंदर्य में भिगी हुई सी नजर आती है। यह पर्व भारतीय जनमानस के अटूट विश्वास को और अधिक प्रगाढ़ता प्रदान करने का पर्व है। इस पर्व में हरियाली शब्द से ही साफ है कि इसका ताल्लुक पेड़-पौधों और पर्यावरण से है। यह त्योहार जीवन में जश्न का प्रतीक है और हरियाली तीज का पर्व प्रकृति का त्योहार हैं। इस मौके पर महिलाएं अच्छी फसल के लिए भी प्रार्थना करती हैं।सावन के महीने में सिंजारा, तीज, नागपंचमी एवं सावन के सोमवार जैसे लोकपर्व उत्साह पूर्वक मनाए जाते हैं। श्रावण के महीने में मनायी जानेवाली हरियाली तीज आस्था, प्रेम, सौंदर्य व उमंग का त्यौहार है। तीज को मुख्यतः महिलाओं का त्यौहार माना जाता है। यह पर्व महिलाओं की सांस्कृतिक मान्यताओं का प्रतीक है। सावन माह में मनाया जाने वाला हरियाली पर्व दंपतियों के वैवाहिक जीवन में समृद्धि, खुशी और तरक्की का प्रतीक है। तीज का त्यौहार भारत के कोने-कोने में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह त्यौहार भारत के  उत्तरी क्षेत्र में हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। श्रावण में में चारों ओर हरियाली की चादर सी बिखर जाती है। जिसे देख कर सबका मन झूम उठता है। सावन का महिना एक अलग ही मस्ती और उमंग लेकर आता है। श्रावण के सुहावने मौसम के मध्य में आता है तीज का त्यौहार। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को श्रावणी तीज कहते हैं। उत्तर भारत में यह हरियाली तीज के नाम से भी जानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए इस व्रत का पालन किया था। परिणामस्वरूप भगवान शिव ने उनके तप से प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया था। माना जाता है कि श्रावण शुक्ल तृतीया के दिन माता पार्वती ने सौ वर्षों के तप उपरान्त भगवान शिव को पति रूप में पाया था। इसी मान्यता के अनुसार स्त्रियां माता पार्वती का पूजन करती हैं। हाथों में रची मेंहंदी की तरह ही प्रकृति पर भी हरियाली की चादर सी बिछ जाती है। इस नयनाभिराम सौंदर्य को देखकर मन में स्वतः ही मधुर झनकार सी बजने लगती है और हृदय पुलकित होकर नाच उठता है। इस समय वर्षा ऋतु की बौछारें प्रकृति को पूर्ण रूप से भिगो देती हैं। सावन की तीज में महिलाएं व्रत रखती हैं। इस व्रत को अविवाहित कन्याएं योग्य वर को पाने के लिए करती हैं तथा विवाहित महिलाएं अपने सुखी दांपत्य की चाहत के लिए करती हैं।तीज पर मेहंदी लगाने, चूडियां पहनने, झूला झूलने तथा लोक गीतों को गाने का विशेष महत्व है। तीज के त्यौहार वाले दिन खुले स्थानों पर बड़े-बड़े वृक्षों की शाखाओं पर, घर की छत पर या बरामदे में झूले लगाए जाते हैं जिन पर स्त्रियां झूला झूलती हैं। हरियाली तीज के दिन अनेक स्थानों पर मेलों का भी आयोजन होता है।राजस्थान में जिन कन्याओं की सगाई हो गई होती है। उन्हें अपने होने वाले सास  ससुर से एक दिन पहले ही भेंट मिलती है। इस भेंट को स्थानीय भाषा में सिंझारा कहते हैं। सिंझारा में मेंहदी, लाख की चूडियां, लहरिया नामक विशेष वेश-भूषा, घेवर नामक मिठाई जैसी कई वस्तुएं होती हैं। पीहर पक्ष द्धारा अपनी विवाहित पुत्री को भी सिंजारा भेजा जाता है। जिसे पूजा के बाद सास को सुपुर्द कर दिया जाता है। राजस्थान में नवविवाहिता युवतियों को सावन में ससुराल से मायके बुलाने की भी परम्परा है।तीज के अवसर पर नवयुवतियां हाथों में मेंहदी रचाते हुए गीत गाती हैं। समूचा वातावरण शृंगार से अभिभूत हो उठता है। इस त्योहार की सबसे बड़ी विशेषता है कि महिलाओं का हाथों पर विभिन्न प्रकार से बेलबूटे बनाकर मेंहदी रचाना। राजस्थान में हाथों व पांवों में भी विवाहिताएं मेंहदी रचाती हैं। जिसे मेंहदी मांडना कहते हैं। इस दिन राजस्थानी बालाएं दूर देश गए अपने पति के तीज पर आने की कामना करती है ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:53:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Hariyali Teej 2026:  शिव&#45;पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक पर्व ‘हरियाली तीज’</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में ‘तीज’ पर्व का बहुत महत्व है, जो सालभर में तीन बार आता है। सबसे पहले आती है सावन के महीने में ‘हरियाली तीज’, उसके कुछ ही दिन बाद ‘कजरी तीज’ और फिर ‘हरतालिका तीज’। तीनों ही तीज भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित हैं और पूरे देश में बहुत धूमधाम से मनाई जाती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल तृतीया तिथि 14 अगस्त को शाम 6 बजकर 46 मिनट पर आरंभ होगी और 15 अगस्त को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए उदया तिथि के अनुसार हरियाली तीज 15 अगस्त को मनाई जाएगी। हर साल श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला हिंदू महिलाओं का महत्वपूर्ण त्यौहार है ‘हरियाली तीज’, जिसका वर्णन सनातन शास्त्रों में भी मिलता है। यह शिव-पार्वती की पूजा के साथ महिलाओं के सजने-संवरने और खुशियां मनाने का पावन त्यौहार है। हिंदू धर्म में हरियाली तीज को महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है।सनातन धर्म में हरियाली तीज का व्रत अपार भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है, जो भगवान शिव और देवी पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक है। मान्यता है कि तीज के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से कई गुना अधिक फलों की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथा के अनुसार इसी दिन माता पार्वती को 107 जन्मों तक तपस्या करने के बाद भगवान शिव ने अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड इत्यादि कई राज्यों में सुहागिन हिंदू महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना कर हरियाली तीज मनाती हैं।इसे भी पढ़ें: Hariyali Teej 2026: महिलाओं का उत्सव है हरियाली तीजतीज पर्व उस दिन की याद में मनाया जाता है, जब भगवान शिव ने देवी पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था, जिसके कारण पार्वती को ‘तीज माता’ के रूप में पूजा जाने लगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती को समर्पित ‘हरियाली तीज’ व्रत करने से विवाहित महिलाओं का जीवन खुशियों से भर जाता है, उनके पति को लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है जबकि अविवाहित लड़कियों की शीघ्र शादी के योग बनते हैं। यही कारण है कि विवाहित महिलाओं के साथ अविवाहित लड़कियां भी यह व्रत करती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। विवाहित महिलाएं अपने पति की सलामती और लंबी उम्र की प्रार्थना करने के लिए यह व्रत रखती हैं।श्रावण महीने में आने वाली इस ‘तीज’ को ‘हरियाली तीज’ इसीलिए कहा जाता है क्योंकि यह पर्व मानसून के ऐसे मौसम में मनाया जाता है, जब वातावरण सबसे हरा-भरा होता है। यह पर्व सावन के महीने में ऐसे समय मनाया जाता है, जब संपूर्ण धरा पर हरियाली की मनोहारी चादर बिछी रहती है। सावन की हरी-भरी ऋतु में आने के कारण ही यह पर्व ‘हरियाली तीज’ कहलाता है। हरियाली तीज के दिन वृक्ष, नदियों और जल के देवता वरुण देव की भी उपासना की जाती है। इसे ‘सिंधारा तीज’ भी कहा जाता है। ‘सिंधारा’ उपहार देने की ऐसी प्रथा है, जो नवविवाहितों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। हरियाली तीज को ‘सावन तीज’, ‘छोटी तीज’, ‘मधुश्रवा तीज’ इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। पंजाब में इसे ‘तीयां’ और राजस्थान में ‘शिंगारा’ तीज के नाम से जाना जाता है। राजस्थान में माता पार्वती या तीज माता की शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, वहीं हरियाणा में हरियाली तीज पर सरकारी अवकाश रहता है।इस दिन श्रृंगार करने का काफी महत्व माना जाता है। दरअसल इस त्यौहार पर सुहागिन महिलाओं का अपने हाथों पर मेहंदी लगाना, हरे या लाल रंग के कपड़े पहनना, श्रृंगार करना और हरे रंग की चूड़ियां पहनना बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रृंगार करने से मां पार्वती प्रसन्न होती हैं और अपना आशीर्वाद प्रदान करती हैं, इसलिए माता पार्वती की कृपा पाने के लिए सुहागिन महिलाएं श्रृंगार करती हैं और अपने अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। सावन माह में हरे रंग का विशेष महत्व होता है क्योंकि यह रंग प्रकृति का रंग होता है। हरे रंग का गहरा संबंध वर्षा ऋतु और हरियाली से होता है, जो मन को भी शांति देता है। हिंदू धर्म में हरा रंग अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। हरा रंग प्रकृति, वृद्धि और नवीनता का प्रतीक है, जो इन गुणों को विवाह में भी दर्शाता है। माना जाता है कि धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी भी हरे रंग को पसंद करती हैं। यही कारण है कि हरियाली तीज में इस रंग को पहनना शुभ माना गया है। इसीलिए हरियाली तीज के मौके पर सुहागिन महिलाएं हरी साड़ी, हरी कांच की चूड़ियां इत्यादि खासतौर से पहनती हैं।हरियाली तीज में बरगद (वट) वृक्ष की परंपरा बहुत महत्वपूर्ण है, घरों में तथा वट वृक्ष की शाखाओं पर झूले डाले जाते हैं, जिन पर महिलाएं एकत्रित होकर दिनभर झूला झूलती हैं, नृत्य करती हैं और लोकगीत गाते हुए खुशियां मनाती हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं में वट वृक्ष को बहुत पवित्र माना गया है, जो ज्ञान का प्रतीक है और हरियाली तीज पर इसकी पूजा करना शुभ माना जाता है। हरियाली तीज के दौरान महिलाएं कठोर निर्जला व्रत रखती हैं, जिसमें वे पूरे दिन भोजन और जल से परहेज करती हैं। शाम को चंद्रमा की पूजा के साथ व्रत का समापन किया जाता है। वृदांवन के कृष्ण मंदिरों में तीज का उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, जहां भगवान के लिए झूले बिछाए जाते हैं, जिसे ‘झूलन लीला’ कहा जाता है। खासकर विवाहित हिंदू महिलाओं के लिए तो देवी पार्वती और भगवान शिव के दिव्य मिलन को समर्पित यह त्यौहार करवा चौथ के समान महत्व रखता है।विभिन्न धार्मिक कथाओं के अनुसार ‘हरियाली तीज’ व्रत की शुरुआत पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता पार्वती ने की थी। माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए काफी लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी और यह व्रत किया था। इस व्रत के प्रभाव से ही भगवान शंकर उन्हें पति के रूप में प्राप्त हुए थे। हरियाली तीज मनाए जाने का वर्णन कई प ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:53:15 +0530</pubDate>
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<title>Hariyali Teej 2026: अखंड सौभाग्य के लिए किया जाता है हरियाली तीज का पर्व, जानिए पूजन विधि और महत्व</title>
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<description><![CDATA[ सावन का पवित्र महीना चल रहा है। हर साल सावन महीने के शुक्ल पत्र की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। इस बार आज यानी की 15 अगस्त 2026 को हरियाली तीज का पर्व मनाया जा रहा है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह पर्व खास होता है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा का विधान होता है।  इस तिथि पर बारिश का मौसम रहता है और चारों ओर हरियाली रहती है। जिस कारण इसको हरियाली तीज का पर्व कहा जाता है। इस दिन व्रत और पूजन करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। तो आइए जानते हैं हरियाली तीज की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...इसे भी पढ़ें: Hariyali Teej 2026:  शिव-पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक पर्व ‘हरियाली तीज’तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरूआत 14 अगस्त की शाम 06:47 मिनट पर हुई है। वहीं इस तिथि की समाप्ति आज यानी 15 अगस्त की शाम 05:29 मिनट पर होगी। उदयातिथि के मुताबिक 15 अगस्त 2026 को हरियाली तीज का पर्व मनाया जा रहा है।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद बालू से भगवान शिव और मां पार्वती की प्रतिमा बनाएं। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान शिव और मां पार्वती की प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बाद मां पार्वती को सुहाग का सामान जैसे बिंदी, चूड़ियां, सिंदूर और कंघी आदि को थाली में सजाकर अर्पित करें। वहीं नैवेद्य में खीर, पूरी, हलुआ या मालपुए चढ़ाएं। इसके बाद हरियाली तीज की कथा सुनें। पूजा के अंत में आरती करें और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना करें और पूजा में हुई भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें।महत्वसावन के महीने में आने वाली हरियाली तीज के पर्व का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मां पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। मां पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनको अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। तब से हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:53:15 +0530</pubDate>
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<title>Famous Shiv Temple: 3000 साल प्राचीन मंदिर की अनोखी बनावट, जहां गंगा जल में डूबे हैं महादेव</title>
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<description><![CDATA[ भारत में महादेव के कई फेमस मंदिर हैं, जो अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यों के कारण जाने जाते हैं। उन्हीं में से एक केरल के मलप्पुरम जिले में नीरपथूर महादेव मंदिर है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पर भगवान शिव का शिवलिंग सालभर पानी में डूबा रहता है। यही कारण है कि इस मंदिर में दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं।मॉनसून में मंदिर का नजारा बेहद खूबसूरत हो जाता है। सावन में यहां एक अलग रंग देखने को मिलता है। यहां चारों ओर हरियाली, बारिश का मौसम और पानी से भरा गर्भगृह इस मंदिर की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देता है। बताया जा रहा है कि यह मंदिर करीब 3,000 पुराना है।इसे भी पढ़ें: Famous Shiv Temple: हिमाचल के इन Famous Shiva Temples के दर्शन से मिलेगी अपार शांति, देखें पूरी Travel Guideकहां है ये मंदिरभगवान शिव का यह मंदिर केरल के मलप्पुरम जिले में पुथूर गांव में है। नीरपथूर महादेव मंदिर का संचालन मालाबार देवस्वम बोर्ड करता है। यहां पर हर साल बड़ी संख्या में भक्त भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं।इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियतनीरपथूर महादेव मंदिर की सबसे बड़ी खासियत गर्भगृह है। यहां पर महादेव शिवलिंग के रूप में विराजमान थे। यहां पूरे साल गर्भगृह में पानी भरा रहता है। यही कारण है कि यह मंदिर केरक के सबसे अनोखे शिव मंदिरों में शामिल है।हमेशा पानी में रहता है शिवलिंगमाना जाता है कि मंदिर में मौजूद शिवलिंग स्वयंभू है। यहां कि यह शिवलिंग अपने आप प्रकट हुआ था। वहीं गर्भगृह में भरा यह पवित्र जल मां गंगा का प्रतीक है।क्यों खास होते हैं यहां के दर्शननीरपथूर महादेव मंदिर के आसपाल हरियाली छाई रहती है। गर्भगृह में मौजूद पानी का दृश्य बेहद सुंदर दिखता है। यहां पर भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। वहीं कई बार भारी बारिश के कारण पानी का लेवल भी बढ़ जाता है। इस कारण मौसम के हिसाब से दर्शन की व्यवस्था बदल दी जाती है।यहां मनाए जाते हैं ये त्योहारनीरपथूर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि का पर्व बहुत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इसके अलावा यहां सहस्र दीपम भी यहां का प्रमुख उत्सव है। इस मौके पर मंदिर में बड़ी संख्या में ऊक्त पहुंचते हैं और दीपक की रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठता है।मंदिर की बनावटयह मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं बल्कि अपनी अनोखी बनावट के कारण भी खास है। जहां ज्यादातर मंदिरों में गर्भगृह सूखा रहता है। वहीं यहां पर शिवलिंग पूरे साल पानी से भरा रहता है।ऐसे पहुंचेआप यहां पर हवाई जहाज से पहुंच सकते हैं। बता दें के कालीकट से अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मंदिर से करीब 60 किमी दूर है।वहीं आप यहां पर ट्रेन से आना चाहती हैं, तो तिरूर रेलवे स्टेशन मंदिर से 60.7 किमी दूर है।वहीं अगर बस से आते हैं, तो पेरिंथलमन्ना KSRTC बस डिपो मंदिर से करीब 25.9 दूर है।इन बातों का रखें ध्‍यानबारिश के मौसम में फिसलन के लिए कंफर्टेबल जूते पहनें।मंदिर के अंदर जाने से पहले वहां के सभी नियमों का पालन करें।दर्शन और पूजा के दौरान शांति बनाए रखें।अगर आप मॉनसून में यहां जा रहे हैं, तो पहले मौसम की जानकारी ले लें। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 16 Aug 2026 10:53:12 +0530</pubDate>
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<title>Sawan 2026: सावन में जन्मे लोगों का जिद्दी स्वभाव है Lord Shiva का प्रभाव, जानिए क्या कहता है Skanda Purana</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में सावन का महीना बेहद पावन और पवित्र माना जाता है। यह महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। ऐसे में इस महीने जन्मे लोगों में भगवान शिव के स्वभाव का प्रभाव होता है। स्कंद पुराण के &#039;माहेश्वर खंड&#039; और इसके तहत आने वाले &#039;केदार खंड&#039; और &#039;श्रावण माहात्म्य&#039; के अध्यायों में भगवान शिव और मां पार्वती की कृपा और भक्तों में पाए जाने वाले लक्षणों का उल्लेख मिलता है।पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि जिन लोगों का सावन महीने में जन्म होता है, वह स्वभाव से जिद्दी होते हैं। जिद्दी से ज्यादा यह लोग दृढ़ संकल्प वाले होते हैं। यह एक बार जो ठान लेते हैं, वह पूरा करके ही दम लेते हैं। इसलिए कई बार इनके स्वभाव में जिद्दीपन भी झलकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको सावन में जन्मे लोगों के स्वभाव और विशेषता के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Career और Job में आ रही बाधाओं को दूर करेगा यह Ganesh Strotam, जानें पूजा की सही विधि और लाभभगवान शिव का प्रभावसावन में जन्मे लोगों में भगवान शिव की ऊर्जा जुड़ी होती है। यह लोग शांत लेकिन गंभीर स्वभाव के होते हैं। इन लोगों का गुण होता है कि यह लोग जो बोलते हैं वहीं करते भी हैं।आत्‍मविश्‍वास से भरपूरसावन के महीने में जन्मे लोग आत्मविश्वास से भरे होते हैं। इन लोगों को अपने लक्ष्यों को पूरा करना बहुत अच्छे से आता है। वहीं अच्छी बात यह है कि यह लोग कभी भ्रमित नहीं होते हैं। कई बार लोग इनके काम करने के तरीके को देखकर इनको अहंकारी भी कहते हैं। लेकिन यह सच नहीं होता है।इमोशनल होते हैं ऐसे लोगसावन के महीने में जन्मे लोग स्वभाव से काफी ज्यादा इमोशनल होते हैं। इनके लिए रिश्ते बेहद जरूरी होते हैं और किसी भी भौतिक सुख से ज्यादा यह जातक अपने रिश्तों को महत्व देते हैं। संवेदनशील होने की वजह से कई बार लोग इनका गलत फायदा भी उठा लेते हैं।सावन में जन्मे लोग जिद्दी नहीं बल्कि अपनी जुबान के पक्के होते हैं। यह लोग एक बार जो सोच लेते हैं, उसको पूरा करने की जिद पकड़ लेते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:41:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Shravan Special: महादेव पूजा में वर्जित हैं ये चीजें, Shiv Puja में न करें ये Mistakes</title>
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<description><![CDATA[ श्रावण मास भगवान शिव को अति प्रिय है। इस महीनें चारों-तरफ भक्ति, हरियाली और सुकून देने वाला वातावरण होता है। सावन के महीने में कई व्रत-त्योहार आते हैं। साधक अपनी मानोकामना पूर्ण करने के लिए सोमवार के व्रत रखते हैं और महादेव को प्रसन्न करने के लिए पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करना बेहद आसान है, क्योंकि उनके नाम में ही उनका स्वभाव काफी भोला है। महादेव को प्रसन्न करना बेहद सरल है। भगवान शिव को  दिखावटी या खर्चीले अनुष्ठान के बजाय एक लोटा जल में ही खुश हो जाते हैं। लेकिन शिव की पूजा में कुछ खास बातों का जरुर ध्यान रखा जाता है। आइए आपको बताते हैं 10 गलतियां, जिन्हें आप अक्सर करते होंगेशिव पूजा में भूलकर भी न करें 9 गलतियांतुलसी या तुलसी दल का प्रयोगसनातन धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र मानी जाती है। भगवान विष्णु की पूजा में मुख्य रुप से तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, भगवान शिव की पूजा में तुलसी अर्पित करना वर्जित माना जाता है। शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी तुलसी या उसके पत्तों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।हल्दी और कुमकुम के प्रयोग से बचेंभूलकर भी भगवान शिव की पूजा में हल्दी या कुमकुम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। क्योंकि भगवान शिव वैरागी और संहारक का देवता माने जाते है। बल्कि कुमकुम या हल्दी सुहाग, गृहस्थ प्रसाधन, सौंदर्य और सौभाग्य की वस्तुएं हैं।केतकी और केवड़े के फूलशिव पुराण के अनुसार, महादेव की पूजा में हमेशा फूलों का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए। इसलिए भूलकर भी केतकी या केवड़े के सुंगधित फूलों को अर्पित नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि इसके पीछे भगवान शिव से जुड़ा एक श्राप है जिस कारण केतकी के फूलों को शिवलिंग पर अर्पित करना वर्जित है।नारियल का पानीधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को साबुत नारियल चढ़ाया जा सकता है, लेकिन नारियल का पानी चढ़ाना अशुभ माना जाता है। शिवलिंग पर चढ़ाई गई वस्तुएं निवेद्य या निर्माल्य बन जाती है, जिन्हें ग्रहण करना मना है। इसलिए नारियल पानी का इस्तेमाल अभिषेक करने के बाद ग्रहण करने लायक नहीं होता है। इसी कारण से नारियल पानी के अभिषेक से बचें।शंख का पानीवैसे कई पूजा-पाठ में सभी देवी-देवताओं का अभिषेक शंख में पानी भरकर किया जाता है, लेकिन शिवलिंग पर शंख से जल चढ़ाना अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि, पूर्व काल में भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम का दैत्य का वध किया था। जिस कारण शंख को उसी दैत्य के अंश का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के अनुसार, शंख को माता लक्ष्मी का भाई माना जाता है। असल में समुद्र मंथन के दौरान निकलने वाले चौदह रत्नों में माता लक्ष्मी और शंख दोनों की उत्पत्ति एक साथ हुई थी। इसलिए भी शंख से जलाभिषेक नहीं किया जाता।टूटे हुए अक्षतहिंदू धर्म में पूजा-पाठ में अक्षत जरुर अर्पित किए जाते हैं। वहीं, शिवलिंग पर टूटे हुए या खंडित अक्षय अर्पित करना अशुभ माना जाता है।लौह के पात्र में जलजब आप शिवलिंग पर जल अर्पित करें, तो कांसे या तांबे के पात्र से ही जल अर्पित करें। लौह पात्र से जल अर्पित करना अशुभ माना जाता है। क्योंकि महादेव ने त्रिपुर जो सोना, चांदी और लोहा से बने था, उसका संहार किया था और त्रिपुरारि कहलाए।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:41:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 14 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष धन हानि और प्रगति में बाधाएं। दूसरों की सलाह पर चलेंगे तो हानि होगी। नौकरी व्यापार में परिवर्तन के संकेत। रूठे हुए लोग मान जाएंगे या आपको मना लेंगे।वृषव्यवसाय परिवर्तन का निर्णय ले सकते हैं। वैवाहिक जीवन विशेष सुखद रहेगा। विवेक से काम लें, अन्यथा हानि। पदोन्नति और नए व्यापार की शुरूआत।मिथुननौकरी में वरिष्ठों की कृपा रहेगी। रिश्वत का लेन-देन संभव है। गलहफहमी के शिकार होंगे। रोजगार व्यवसाय में उतार-चढ़ाव अधिक।कर्कविशेष चिंतन और कार्य से ही विश्वास जीत सकेंगे। निकट दूरी की यात्रा के प्रसंग बनेंगे। अच्छे परिणाम देने वाला दिन है। घर परिवार में कष्ट और तनाव।सिंहअपनी समस्याओं के समाधान ढूंढ़ ही लेंगे। मनोरंजन में व्यस्तता और उपहारों की प्राप्ति। पिछली अप्रिय परिस्थितियां जारी रहेगी। व्यर्थ के तनाव से बचें।कन्यासमय सावधानी से बिताए। घर परिवार में आनंद से समय बीतेगा। लाभ मिलेगा और यात्रा भी होगी। अच्छा दिन है यश की, सफलता भी।तुलाकोई नया काम करेंगे, नए मेहमान का स्वागत भी संभव। संतान की उन्नति के लिए योजना आगे बढ़ेंगी। चिंता और उदासीनता बनी रहेगी। दृढ़ संकल्प सफलता की कुंजी है।वृश्चिक आप रचनात्मक और सकारात्मक रहेंगे। पिछले पूंजी निवेश से आर्थिक लाभ। रोजगार तथा अन्य आर्थिक कार्यों में सफलता। पारिवारिक सुख शांति और मित्र मिलन।धनुवैवाहिक जीवन की खुशियां मिलेगी। पुण्य कार्यों में रूचि बढ़ेगी- तीर्थ यात्रा भी संभव। अपने तथा जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। चंद्रमा लाभकारी और सुखदायक है।मकर व्यवसाय के क्षेत्र में नए सम्पर्क। कार्य की अधिकता से थकान और परेशानी। कार्य भार अधिक, थकान हो सकती है। पारिवारिक संपत्ति से लाभ।कुंभचिंता और परेशानी भरा दिन है। परिवार के सदस्यों की उन्नति में योगदान रहेगा। व्यवसाय में नई कार्य शैली अपनाएंगे। व्यावसायिक क्षेत्र में कठिन प्रतिस्पर्धा, सम्मान।मीनचल-अचल संपत्ति विवाद हो सकता है। किसी खास आदमी से लाभदायक मुलाकात। प्रेम प्रसंग भी आगे बढ़ेंगे। पारिवारिक जीवन में शांति और मधुरता। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:41:43 +0530</pubDate>
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<title>Sawan Third Monday पर ग्रहों के राजा का राशि परिवर्तन, Lucky Zodiac Signs की बढ़ेगी Wealth और Reputation</title>
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<description><![CDATA[ इस बार सावन का तीसरा सोमवार 17 अगस्त 206 को पड़ रहा है। धार्मिक दृष्टि यह दिन बेहद खास और ज्योतिषीय नजर से भी यह और भी अच्छा माना जा रहा है। क्योंकि इस दिन ग्रहों के राजा सूर्य देव अपनी स्वयं की राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। सूर्य का अपनी राशि में गोचर करना बेहद शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। इसके प्रभाव जातकों के रुके हुए कार्य को पूरा करने , लाभ, आत्मविश्वास से लेकर मान-सम्मान को बढ़ाने का कार्य करता है। ज्योतिष के अनुसार, सूर्य का प्रभाव व्यक्ति के पर्सनालिटी में निखार लेकर आता है। सावन की सोमवार के शुभ संयोग का इस दिन होना और भी कई लाभ के संकेत दे रहा है। सावन के सोमवार पर भगवान शिव की पूजा और सूर्य के अपनी स्वराशि में प्रवेश का संयोग कुछ राशियों के लिए बेहद कमाल का रहने वाला है। आइए आपको बताते हैं कौन हैं ये लकी राशियां।सिंह राशिइस दैरान सिंह राशि के लिए समय काफी प्रभावशाली रहने वाला है। कला के क्षेत्र में कोई बड़ा नया अपडेट आपको देखने को मिल सकता है। आत्मविश्वास के दम पर आप अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ पाएंगे। करियर पहले से भी और बेहतर बनेंगा। मनचाहे कार्य में लाभ प्राप्त होगा। घर में किसी वस्तु आगमन हो सकता है। ताकि आपको भौतिक सुख प्रदान हो। बिजनेस में नई योजना बना सकते हैं। मान-सम्मान में वृद्धि होगी।तुला राशितुला राशि के जातकों के लिए सफलता और सम्मान की प्राप्ति अधिक होगी। आपके जीवन में नए लोग प्रेम और ऊर्जा के रंग भरेंगे। प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को सफलता मिलने के संकेत हैं। बता दें कि, घर में भी आपका प्रभाव बढ़ेगा। परिवार में किसी नए व्यक्ति का आगमन होगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां देखने को मिलेगी। निवेश के मामले में आपको लाभ मिलेगा।धनु राशिधनु राशि के लोगों को भाग्य का साथ पूरा मिलेगा। घर में पूजा-पाठ का आयोजन हो सकता है। कानून से संबंधित मामलों में भी राहत देखने को मिलेगी। रोजगार की तलाश में लगे लोगों को रोजगार मिलने के योग हैं। आर्थिक परेशनियों से भी राहत मिलने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में आपके प्रयास सफल हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। कोई अच्छी खबर मिल सकती है।  ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:41:43 +0530</pubDate>
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<title>Hariyali Teej 2026: समृद्ध परंपराओं, प्रकृति&#45;प्रेम और दांपत्य जीवन की पवित्रता का अनुपम उत्सव है हरियाली तीज</title>
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<description><![CDATA[ भारतीय संस्कृति में प्रत्येक पर्व का अपना विशेष महत्व है। इन्हीं पावन पर्वों में हरियाली तीज का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। वर्षा ऋतु के आगमन से जब धरती हरियाली की चादर ओढ़ लेती है, तब प्रकृति का यह अनुपम सौंदर्य हरियाली तीज के उत्सव को और भी मनोहारी बना देता है। यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए सौभाग्य, प्रेम, समृद्धि और आनंद का प्रतीक माना जाता है।पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी दिव्य मिलन की स्मृति में हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु एवं सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएँ योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं और माता पार्वती तथा भगवान शिव की पूजा करती हैं।इसे भी पढ़ें: Famous Shiv Temple: हिमाचल के इन Famous Shiva Temples के दर्शन से मिलेगी अपार शांति, देखें पूरी Travel Guideहरियाली तीज का उत्सव पूरे देश में उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। महिलाएँ हरे रंग के वस्त्र धारण करती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं, चूड़ियाँ पहनती हैं और पारंपरिक आभूषणों से श्रृंगार करती हैं। बाग-बगीचों में झूले डाले जाते हैं, लोकगीत गाए जाते हैं और नृत्य के माध्यम से उत्सव की खुशी व्यक्त की जाती है। विशेष रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों में इस पर्व की भव्यता देखने योग्य होती है। अनेक स्थानों पर भगवान शिव और माता पार्वती की शोभायात्राएँ भी निकाली जाती हैं।यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है। वर्षा ऋतु में चारों ओर फैली हरियाली हमें वृक्षों और वनस्पतियों के महत्व का स्मरण कराती है। हरियाली तीज हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने तथा पर्यावरण को सुरक्षित रखने की प्रेरणा देती है।आज के आधुनिक जीवन में भी हरियाली तीज की प्रासंगिकता बनी हुई है। यह पर्व परिवार में प्रेम, विश्वास और सौहार्द को मजबूत करता है तथा हमारी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। नई पीढ़ी को भी इस पर्व के सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराना आवश्यक है। हरियाली तीज भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं, प्रकृति-प्रेम और दांपत्य जीवन की पवित्रता का अनुपम उत्सव है। यह पर्व जीवन में उल्लास, प्रेम, आस्था और हरियाली का संदेश देता है।- शुभा दुबे ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:41:40 +0530</pubDate>
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<title>Amarnath Yatra: Sharika Bhawani Temple पहुंची Chhari Mubarak, महंत दीपेंद्र गिरी ने की विशेष पूजा</title>
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<description><![CDATA[ अमरनाथ यात्रा के तहत बृहस्पतिवार कोभगवान शिव के प्रतीक के तौर पर केसरिया रंग के वस्त्रों से सजी पवित्र ‘छड़ी मुबारक’ को यहां के प्राचीन शारिका भवानी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के लिए ले जाया गया।
छड़ी मुबारक के संरक्षक महंत दीपेंद्र गिरी ने कहा, ‘‘प्राचीन परंपराओं के अनुसार, श्रावण शुक्ल प्रतिपदा के मौके पर छड़ी मुबारक स्वामी अमरनाथ जी को हरि पर्वत स्थित शारिका भवानी मंदिर ले जाया गया, ताकि देवी ‘त्रिपुरसुंदरी’ के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जा सके।’’
उन्होंने कहा कि पूजनमें बड़ी संख्या में साधुओं और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। 
 देवी शारिका भवानी को श्रीनगर शहर की इष्ट देवी माना जाता है, जो हरि पर्वत पर एक शिला के रूप में प्रकट हुई थीं।
 शहर के बुदशाह चौक इलाके में स्थित श्री अमरेश्वर मंदिर अखाड़ा भवन में शनिवार को छड़ी स्थापना समारोह आयोजित किया जाएगा और 17 अगस्त को ‘नाग पंचमी’ के दिन पारंपरिक ‘छड़ी पूजन’ किया जाएगा।
‘छड़ी मुबारक’ 22 अगस्त को तीर्थयात्रा के मुख्य पड़ाव के लिए रवाना होगी।
गिरी ‘छड़ी मुबारक’ को अमरनाथ की पवित्र गुफा तक ले जाएंगे। वह 28 अगस्त को श्रावण-पूर्णिमा के शुभ अवसर पर पूजा और दर्शन करेंगे। इस यात्रा के दौरान वह 22 और 23 अगस्त को पहलगाम, 24 अगस्त को चंदनवाड़ी, 25 अगस्त को शेषनाग और 26 व 27 अगस्त को पंचतरणी में रात्रि विश्राम करेंगे। 
 दक्षिण कश्मीर में अमरनाथ की पवित्र गुफा के लिए 57 दिनों की वार्षिक तीर्थयात्रा तीन जुलाई को शुरू हुई और यह 28 अगस्त, 2026 को समाप्त होगी। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 14 Aug 2026 10:41:36 +0530</pubDate>
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<title>Famous Shiv Temple: हिमाचल के इन Famous Shiva Temples के दर्शन से मिलेगी अपार शांति, देखें पूरी Travel Guide</title>
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<description><![CDATA[ सावन का महीना भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए सबसे पहले खास होता है। इस दौरान शिवभक्तों की मंदिरों में भारी भीड़ देखने को मिलती है। अगर आप भी इस महीने कहीं घूमने के साथ-साथ भोलेनाथ के दर्शन करना चाहती हैं। तो हिमाचल प्रदेश एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। यहां कई ऐसे मंदिर हैं, जो ऊंचाई पर बने हुए हैं। इस शिव मंदिरों तक पहुंचने का सफर उतना ही खूबसूरत होता है, जितने सुंदर यहां के नजारे होते हैं।बिजली महादेव मंदिरकुल्लू में ऊंचे पहाड़ों पर स्थित बिजली महादेव मंदिर हिमाचल प्रदेश का सबसे फेमस शिव मंदिर है। यह मंदिर करीब 2,460 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां से कुल्लू और पार्वती वैली का खूबसूरत नजारा बेहद साफ दिखता है। मंदिर की मान्यता है कि समय-समय पर शिवलिंग पर बिजली गिरती है। फिर पारंपरिक तरीके से पुजारी शिवलिंग को जोड़ते हैं। यही कारण है कि इस मंदिर का नाम बिजली महादेव रखा गया है।इसे भी पढ़ें: Amarnath Yatra Rituals: कैसे करें बाबा बर्फानी की पूजा और क्या है प्रसाद वितरण का सही तरीकाबैजनाथ शिव मंदिरहिमाचल के कांगड़ा जिले में बैजनाथ मंदिर भी है। जो भोलेनाथ को समर्पित है। यह धौलाधार पर्वत की तलहटी में बना हुआ है। भगवान शिव का यह मंदिर अपनी खूबसूरत पत्थर की नक्काशी और अपने पुराने इतिहास के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि रावण भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए यहीं पर तपस्या की थी। सावन के महीने में यहां पर बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं।मणिमहेशचंबा जिले में स्थित मणिमहेश भगवान भोलनाथ का सबसे पवित्र स्थल है। यहां मणिमहेश लेक और इसके पीछे दिखने वाली मणिमहेश पीक बेहद खूबसूरत लगती है। सावन और जन्माष्टमी के आसपास यहां पर मणिमहेश यात्रा भी निकलती है। समुद्र तल से मणिमहेश कैलाश चोटी की ऊंचाई करीब 5,653 मीटर बताई जाती है।अर्द्धनारीश्वर मंदिरहिमाचल प्रदेश के मंडी शहर को छोटी काशी भी कहा जाता है। क्योंकि यहां पर कई प्राचीन मंदिर हैं। इनमें से एक अर्द्धनारीश्वर मंदिर है। जोकि भगवान शिव और मां पार्वती की शक्ति का प्रतीक है। पहाड़ों के बीच बसे इस शहर का धार्मिक माहौल सावन के महीने में अधिक खास हो जाता है।इन बातों का रखें ध्यानअगर आप भी सावन के महीने में हिमाचल के ऊंचाई वाले शिव मंदिरों में जाने का प्लान बना रहे हैं। तो मौसम की जानकारी पहले ले लें। क्योंकि बारिश की वजह से कई जगह सड़कें फिसलने वाली हो सकती है। इसलिए अच्छी ग्रिप वाले जूते पहनें। साथ में छाता या रेनकोट रख लें। ट्रैकिंग वाले मंदिरों में तब जाएं, जब आप फिजिकली फिट हों। ]]></description>
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<title>Career और Job में आ रही बाधाओं को दूर करेगा यह Ganesh Strotam, जानें पूजा की सही विधि और लाभ</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। उनको विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। माना जाता है कि जो भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान गणेश की पूजा करता है, उसको सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि और धन का देवता भी माना जाता है। वैसे को भगवान गणेश को खुश करने के तमाम उपायों के बारे में जानकारी मिलती है। लेकिन मंत्र जाप और स्त्रोतम का पाठ करने से गणपति बप्पा जल्दी प्रसन्न होते हैं।गणेश स्त्रोतम एक शक्तिशाली पाठ है, जो भक्तों को सुख और सुरक्षा प्रदान करता है। गणेश स्त्रोतम का हर श्लोक उनके गुणों का गुणगान करता है। जैसे कि उनकी करुणा, ज्ञान, शक्ति और विघ्नहर्ता के रूप में अहम भूमिका हो। जो भी भक्त इस स्त्रोतम का भक्तिपूर्वक पाठ करता है, उसका शरीर, मन और आत्मा तीनों संतुलित हो जाते हैं।इसे भी पढ़ें: Hariyali Teej 2026: दांपत्य जीवन में बढ़ेगा Love और Trust, सूर्यास्त के बाद कपूर-लौंग से करें ये अचूक Remedyगणेश स्तोत्रमप्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम्। भक्तवासं स्मेर् नित्यमयः कामार्थसिद्धये ॥1॥प्रथमं वक्रतुदं च एकदंत द्वितीयकम्। तृतीयं कृष्णपिघत्क्षं गजवत्रं चतुर्थकम् ॥2॥लंबोदरं पंचम च पष्ठं पीड़ितमेव च। सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ॥3॥नवमं भाल चन्द्रं च दशमं तु विनायकम्। एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजानन ॥4॥द्वादशैतानि नामानि त्रिसंज्ञन्यः पठेन्नरः। न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥5॥शिष्यं लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्। पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मो क्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥प्रणम्य शिरसा देवं गौरी पुत्रं विनायकम् ! भक्तवसं स्मरेत्रित्यमायुः काम अर्थ सिद्धये..!!प्रथमं वक्रतुंडं च, एकदंतं द्वितीयकम् ! तृतीयं कृष्ण पिंगक्षम, गजवक्त्रम चतुर्थकम्..!!लम्बोदरं पंचमं च, षष्ठं विकटमेव च ! सप्तमं विज्ञानराजं च, धूम्रवर्णं तथाष्टमम्..!!नवमं भालचन्द्रं च, दशमं तु विनायकम् ! एकादशम गणपतिम्, द्वादशम तु गजानन..!!द्वादसैथानि नामानि, त्रिसंध्यम् यः पथेनरा ! न च विघ्न भयं तस्य, सर्वसिद्धि करं परम..!!विधार्थी लभते विद्ध्यम्, दानार्थी लभते धनम् ! पुत्रार्थी लभते पुत्रन्, मोक्षार्थी लभते गतेम्..!!जपेत गणपति स्तोत्रं, षडभिर्मसै फलं लभेत्! संवत्सरेण सिद्धिं च, लभते नात्र संशयः..!!अष्टाभ्यो ब्रह्मोयश्र लिखित्वा यः समर्पयेत् ! तस्य विद्या भवेत्सर्व गणेशस्य प्रसादतः..!!!!..इति श्री नारद पुराणे संकट नाशनम् गणेश स्तोत्रम् सम्पूर्णम्..!!पूजा-विधिधार्मिक शास्त्रों में बुधवाक का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। इसलिए बुधवार को शांत जगह ढूंढे, पूर्व दिशा की ओर मुंह करके फर्श पर बैठें और मंत्रों का जाप शुरू करें।बप्पा के मंत्रों का उच्चारण करने से पहले एक वेदी की स्थापना करें। उस पर भगवान गणेश की प्रतिमा रखकर देसी घी का दीपक जलाएं।भक्त भगवान गणेश को उनकी प्रिय दूर्वा घास की 21 पत्तियां जरूर अर्पित करें।अपनी सुविधा के मुताबिक आप 1, 3, 5, 7, 11 या 21 बार गणेश स्त्रोत का पाठ कर सकते हैं।लाभगणेश स्त्रोतम का पाठ करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं।अगर आप बुधवार को पूरी श्रद्धा के साथ गणेश स्त्रोतम का पाठ करते हैं, तो नौकरी मिलने में सहायता मिलती है।जिन भी लोगों को अपने पेशेवर जीवन में किसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनको इसका पाठ जरूर करना चाहिए।पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स अपने प्रदर्शन में सुधार की इच्छा रखते हैं, तो बुधवार के दिन कम से कम एक बार इसका पाठ जरूर करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:43:04 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 13 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष दफ्तर में विरोधी हावी रहेंगे। प्रणय/विवाहेत्तर संबंध मजबूत बनेंगे। स्वजनों के साथ अच्छा समय बीतेगा। मित्रों के सहयोग से महत्वपूर्ण कार्य बनेगा।वृषधन के लेन-देन की समस्या। आप सही दिशा में आगे की ओर बढ़ रहे हैं। थकावट के बावजूद भी प्रसन्न रहेंगे। आवास परिवर्तन का प्रयास सफल रहेगा। मिथुनतनाव के साथ शुभ समाचार। निर्माण कार्य की योजना रोकनी पड़ेगी। अचल सम्पत्ति विवाद पक्ष में रहेगा। विद्यार्थी लक्ष्य से भटक सकते हैं।कर्कपैर और एड़ी के दर्द से परेशानी, यात्रा स्थगन। स्वास्थ्य में सुधार से प्रसन्नता। वैवाहिक कार्यों में बाधा। छोटी सी भूल/गलती भारी पड़ सकती है।सिंहपारिवारिक तनाव पर शीघ्र नियंत्रण। किसी के विशेष सहयोग से चिंता मुक्ति होगी। उलझन सुलझ जाएगी। मनोकामनाएं पूरी होगी।कन्याकार्यों में सफलता से खुशी। कठिन समय है, जोखिम से बचें। समस्या हल से राहत महसूस होगी। महत्वपूर्ण कार्यों में व्यस्तता।तुलाकठिनाई का डटकर सामना करें। दफ्तर और परिवार में प्रभाव बढ़ेगा। आत्मविश्वास से आगे बढ़ें, सफल होंगे। व्यापारिक साझेदारी से लाभ।वृश्चिक बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। पारिवारिक संपत्ति से लाभ। दूसरों को सेवा सहायता में अपना भी कल्याण। अवसर का लाभ उठाएं।धनुमनोरंजन और दावतों में होंगे। अधिकारियों से उलझना ठीक नहीं रहेगा। तनाव भी और धन लाभ भी। परिश्रम का पूरा फल मिलेगा।मकर लोकप्रियता बढ़ेगी। आपकी विनम्रता यश भी देगी, सफलता भी। उपलब्धियों की सराहना होगी। आचरण में संयम बरतने की जरूरत है।कुंभअंधविश्वास न करें, धोखा ही धोखा है। बिछड़े हुए तथा नए लोगों के साथ होगा मेल-मिलाप। विशेषज्ञ की सलाह से पूंजी निवेश करें। आत्मनिरीक्षण का समय है।मीनहर तरह से जोखिम से दूर रहें। साधनों ओर समय की सीमाओं का ध्यान रखें। सड़क पर वाहन से कोई परेशानी। न शरीर ठीक न धन। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 10:43:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Sawan Somwar 2026: महादेव की कृपा पाने के लिए इस विधि से करें जलाभिषेक, सावन के दूसरे सोमवार के लिए 4 खास मुहूर्त</title>
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<description><![CDATA[ देशभर में कल यानी 10 अगस्त 2026 को सावन माह का दूसरा सोमवार का व्रत रखा जाएगा। श्रद्धालु भक्ति भाव से भगवान शिव की पूजा अर्चना करेंगे और व्रत भी रखेंगे। इस तिथि पर आद्रा नक्षत्र और व्रज योग का शुभ संयोग रहेगा।धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन सोमवार पर महादेव की पूजा और रुद्राभिषेक करने से प्रभु प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही साधक पर अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं। क्योंकि सावन के दौरान सृष्टि का सारा कार्यभार भी महाकाल के हाथों में होता है। माना जाता है कि इस समय किए गए पुण्य कार्यों से व्यक्ति के भाग्य में वृद्धि होती है और उसे मनचाहे परिणाम प्राप्त होते हैं। आइए आपको बताते हैं सावन के दूसरे सोमवार को जलाभिषेक करने की विधि और शुभ मुहूर्त।पूजा का मुहूर्त-सावन सोमवार पूजा मुहूर्त - सुबह 5:47 से 7:27 बजे तक और सुबह 9:07 से 10:47 बजे तक।-सोम प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त - रात 7:05 बजे से रात 9:14 बजे तक।-अमृत चौघड़िया - सुबह 5 बजकर 47 मिनट से लेकर 7 बजकर 27 मिनट तक।-शुभ चौघड़िया - सुबह 9 बजकर 7 मिनट से लेकर 10 बजकर 46 मिनट तक।-अमृत चौघड़िया - शाम 5 बजकर 25 मिनट से लेकर 7 बजकर 5 मिनट तक।जलाभिषेक करने की विधि- सावन के दूसरे सोमवार पर शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए सबसे पहले शिवलिंग के सामने हाथ जोड़कर महादेव का स्मरण करें।- इसके बाद एक साफ लोटे में जल लें और उसमें गंगाजल की कुछ बूंदें डालें।- अब इस जल में दूध, दही, शहद, घी, शक्कर और गन्ने का रस मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें।- फिर इस मिश्रण को पतली धारा के रुप में शिवलिंग पर चढ़ाएं।- अब गंगाजल और साफ जल एक बार अर्पित करें।- अब कुछ काले तिल, फूल, अनाज और चावल शिवलिंग पर रखें।- इसके बाद महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।- अब आप महादेव को बेलपत्र, फूल व शहद अर्पित करें।- फिर आटे का दीपक जलाकर महादेव की आरती करें। शिवलिंग पर जल चढ़ाने का मंत्रमन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् ।तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि।शिव जी का मूल मंत्र  ॐ नमः शिवायभगवान शिव के प्रभावशाली मंत्रओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:51:14 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 09 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष विशेष आर्थिक लाभ का योग बन रहा है। भावी योजनाओं की रूपरेखाएं बनाएंगे। परिवार का वातावरण प्रतिकूल रहेगा। शारीरिक कष्ट और मानसिक वेदना से पीडि़त रहेंगे।वृषव्यापारियों को देश विदेश से लाभ, शुभ समाचार। आर्थिक समृद्धि के लिए अच्छा दिन है। आमोद-प्रमोद में दिन बीतेगा। प्रतिष्ठित और प्रभावशाली व्यक्तियों से भेंट।मिथुनसगाई-विवाह का प्रस्ताव आगे बढ़ेगा। खास रिश्तेदार निराश करेंगे। विवाद का हल निकलेगा। अनचाहे स्थान पर तबादला संभव।कर्कआपकी ईमानदारी की प्रशंसा होगी। दृढ़ता के साथ काम करें, लक्ष्य प्राप्ति होगी। प्रतिष्ठा एवं प्रभाव में वृद्धि। आमदनी अठ्ठन्नी और खर्चा रूपईया।सिंहआर्थिक दृष्टि से उत्तम दिन है। सरकारी कार्यों में सफलता मिलेगी। रूके हुए धन की प्राप्ति पर खुशी होगी। आमदनी के नए साधन बनेंगे।कन्याविवेक से काम लें। नौकरी में इच्छानुसार ट्रांसफर का योग। स्वास्थ्य का ध्यान रखें, और विवेक से काम लें। पैतृक संपत्ति का विवाद बढ़ेगा।तुलाव्यवहार में सावधानी-झूठा आरोप संभव। विवाद में विजय प्राप्त होगी। पुराने मित्रों, रिश्तेदारों का आवागमन सुखदायी। विवाद करने व बढ़ाने के लिए काम करें।वृश्चिक वाहन चलाते समय सावधानी बरतें। मन में अनिश्चिता और दुविधा बनी रहेगी। परिवार में अशांति और कलह का वातारण। आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।धनुरोजगार व्यवसाय के संबंध में कोई ठोस निर्णय लेंगे। प्रेम संबंधों में खटपट हो सकती है। पारिवारिक वैभव का विस्तार शुभ दिन है। आपकी प्रतिष्ठा के चार चांद लगेंगे।मकर आर्थिक उन्नति की ओर विशेष कदम। वैवाहिक जीवन में सुखद परिवर्तन। सभी सोचे हुए काम आसानी से बनेंगे। स्वास्थ्य में कुछ गड़बड़ झाला लगता है।कुंभसोचे हुए काम आसानी से बनेंगे। अधूरे पड़े हुए काम पूरे हो सकते हैं। अधीनस्थ और नौकरों से विश्वासघात। बिजनेस पार्टनर से सुलह समझौता होगा।मीनइंटरव्यू में सफलता, खुशी के समाचार मिलेंगे। अच्छी धन लाभ की संभावना है। डूबा हुआ धन प्राप्त होने से प्रसन्नता होगी। जनसम्पर्क बढ़ाने के लिए काम करें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:51:14 +0530</pubDate>
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<title>Sawan Tradition: सावन में बेटियों का घर आना क्यों माना जाता है सौभाग्य? जानिए सोलह श्रृंगार और Gifts का महत्व</title>
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<description><![CDATA[ सावन के पवित्र महीने में सिर्फ भगवान शिव की आराधना ही नहीं बल्कि पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का भी अच्छा मौका होता है। धार्मिक और लोक मान्यताओं के मुताबिक सावन के महीने में शादीशुदा महिलाओं को अपने मायके जरूर जाना चाहिए। शादीशुदा महिलाओं के सावन में मायके आने के पीछे यह तर्क दिया जाता है कि ऐसा करने से बेटी का अपने मायके वालों के साथ रिश्ता मधुर होता है। इसके साथ ही ऐसा करने से रिश्तों में सकारात्मक प्रभाव दिखता है। वहीं कई घरों में आज भी इस परंपरा का पालन किया जाता है। वहां पर बेटियों का सौभाग्य परिवार की सुख-समृद्धि और उन्नति पर अच्छा असर दिखाता है।बेटियों के मायके आने का महत्वधार्मिक मान्यता है कि विवाह के बाद शादीशुदा बेटियों को सावन के पवित्र महीने में अपने मायके जरूर आना चाहिए। इससे परिवार के सदस्यों को भावनात्मक और मानसिक सुख मिलता है। अक्सर यह देखने को मिलता है कि जब लड़की की शादी हो जाती है, तो उसका मायका काफी सूना हो जाता है।इसलिए माना जाता है कि सावन में शादीशुदा बेटियों के मायके आने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बरकरार रहती है। देखा जाए, तो इस परंपरा को नव-विवाहित बेटियों के लिए बड़ा खास माना जाता है। लेकिन जिन भी महिलाओं की शादी को लंबा समय हो चुका है, वह भी इस परंपरा का पालन करती हैं।पहली बार मायके आई बेटी का ऐसे करें स्वागतसावन के महीने पर बेटी के ससुराल से मायके आने पर उनका स्वागत पवित्रता और सादगी के साथ करें। वहीं बेटी की दहलीज पर सबसे पहले आरती उतारें।इसके बाद बेटी के माथे पर रोली, अक्षत और चंदन लगाएं।बड़े से पात्र में बेटी के पैरों को साफ पानी से धोकर अच्छे से पैरों को पोंछे।फिर सावन से जुड़े खास पकवान जैसे खीर, मालपुआ और घेवर जैसे मिष्ठान खिलाकर बेटी का मुंह मीठा कराएं।इसके बाद शादीशुदा बेटी के हाथों से घर में तुलसी का पौधा लगवाना भी शुभ माना जाता है। फिर बेटी को सोलह श्रृंगार का सामान भेंट करें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:51:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 10 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष विषम परिस्थितियां खर्च बढ़ायेंगी। सत्य को प्रिय शब्दों में प्रकट करें। भाग्यबल से संपत्ति संबंधी विवाद हल होगा। रिश्तेदार शुभ कार्य सम्पन्न होने में सहयोग देंगे।वृषरोजगार के क्षेत्र में समस्याएं दूर होगी। व्यस्तता और थकान भरा दिन है। आज लिया गया निर्णय दूरगामी परिणाम देगा। कष्टों और चिंताओं से मुक्ति मिलेगी।मिथुनमानसिक और आर्थिक उलझनें आएगी। दिन भर काम पूरे होते रहेंगे। दीर्घकालीन विवादों की समाप्ति। रचनात्मकता की प्रशंसा होगी।कर्कछोटी सी गलती बड़ी भूल साबित होगी। स्वास्थ्य पर ध्यान दें सही उपचार लें। निर्धारित लक्ष्य की ओर ध्यान दें, भटकें नहीं। कलह योग से तनाव बढ़ेगा।सिंहबुजुर्गों के सहयोग से कार्य पूरा होगा। घरेलू सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। धैर्य रखें कार्य सिद्ध होगा। चिंताओं से राहत मिलेगी।कन्याचिंताएं दूर होगी, काम में मन लगेगा। अपनी जेब देखकर ही सौदा करें। अप्रिय अतिथियों से परेशानी अनुभव करेंगे। आमदनी के नए साधन बन सकते है।तुलाकठोर परिश्रम से भी सफलता मिलना कठिन है। सामान्य तरीकों से ही सब ठीक हो जाएगा। निर्माण कार्य या पुनर्निर्माण का ठेका अपरिचित को न दें। लोगों में आपके प्रति विश्वास बढ़ेगा।वृश्चिक संचार माध्यमों से सुखद और समाचार। संघर्ष के बाद सफलताओं का दौर शुभ। मित्रों आदि की सहायता से उलझन सुलझेगी। डाक्टरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे।धनुसंभलकर चलें चोट/धोखे की संभावना। स्वजनों से निकटता बढ़ेगी। परिवार में मांगलिक कार्य का आयोजन। सामाजिक कार्यों में व्यस्तता रहेगी।मकर कोई नया प्रयोग भी आप कर सकते हैं। सुख शांति से दिन बीतेगा। व्यापार में लाभ और उपहार की प्राप्ति। आध्यात्मिक जीवन शैली पर ध्यान देंगे। कुंभअचानक खर्च में वृद्धि, स्वास्थ्य की चिंता। आज सब कुछ संभव है। व्यापार व्यवसाय में मन लगाकर काम करें। संबंध बनाने के लिए अच्छा दिन है।मीनसंपत्ति संबंधी विवाद सुलझने की ओर हैं। शुभ समाचार मिलेंगे, परिवार में प्रसन्नता। प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता। परिवार में बुर्जुगों के स्वास्थ्य पर ध्यान दें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:51:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Hariyali Amavasya 2026: पितरों की शांति के लिए लगाएं ये Trees, दूर होगा Pitru Dosha और बढ़ेगी सुख&#45;समृद्धि</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। सावन में पड़ने वाली हरियाली अमावस्या को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पितरों और महादेव की कृपा प्राप्त करना बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवसर पर पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती हैं और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार हरियाली अमावस्या कल यानी 12 अगस्त को मनाई जाएगी। धार्मिक ग्रंथ और गरुड़ पुराण के अनुसार, हरियाली अमावस्या के दिन कुछ विशेष पौधे लगाने से पितर प्रसन्न होते हैं, जिससे परिवार के सदस्यों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। आइए आपको बताते हैं हरियाली तीज अमावस्या के दिन पितरों की तृप्ति के लिए आपको कौन-से पौधे लगाने चाहिए।अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए पौधेपीपल का पेड़धार्मिक मान्यता के अनुसार, पीपल का पेड़ की जड़ को ब्रह्मा जी, तने में भगवान विष्णु और सबसे ऊपरी हिस्से को महादेव का वास माना जाता है। इसके साथ ही इस पेड़ में पितरों का वास माना जाता है। इसलिए हरियाली अमावस्या के शुभ अवसर पर पीपल का पेड़ लगाने से व्यक्ति की कुंडली में से पितृ दोष की समस्या दूर हो सकती है और जीवन में सुख-शांति बनीं रहती है। वहीं, शनिवार के दिन पेड़ के पास दीपक जलाकर पूजा करने से शनि की साढ़े साती और ढैय्या से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।बरगद का पेड़हरियाली अमावस्या के दिन बरगद का पेड़ लगा सकते हैं। ऐसा करने से पितर अधिक प्रसन्न होते हैं और परिवार के लोगों को आशीर्वाद देते हैं। हिंदू धर्म में बरगद के पेड़ दीर्घायु और वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस पेड़ की पूजा और परिक्रमा करने से पितरों की कृपा प्राप्त हो सकती हैं और व्यक्ति के जीवन में चल रही सभी बाधाएं दूर हो जाती है। बता दें कि, इस पेड़ को आप पूर्व या उत्तर दिशा में लगाएं।बेलपत्र का पौधागौरतलब है कि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस खास मौके पर आप बेलपत्र का पौधा लगा सकते हैं। सावन के महीने में पूजा के समय शिव जी को बेलपत्र चढ़ाने का अधिक महत्व है। इससे साधक को जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। ऐसा माना जाता है कि हरियाली अमावस्या के दिन बेलपत्र का पौधा लगाने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही पितरों को जन्म-मरण के चक्र से छुटकारा मिल जाता है। इस पौधा को आप  उत्तर-पूर्व दिशा या पूर्व दिशा में लगा सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:51:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 11 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष कलह और जोखिम दोनों से बचना जरूरी है। मेल-मिलाप और पार्टी का आयोजन। मौसमी बीमारियों से सावधान रहें। डूबा हुआ धन मिलेगा।वृषमौसम की बीमारियों से सावधान रहें। पुण्य कार्यों में उदारता पूर्वक दान देंगे। आपके विरुद्ध गलतफहमी फैलाई जाएगी। प्रयास सब तरह से सफल रहेंगे।मिथुनसभी सोचें हुए काम समय पर पूरे होंगे। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। गुप्त योजनाएं बनेगी और सफल होगी। लाभ एवं खुशी के समाचार मिलेंगे।कर्कशुभ समाचार मिलेगा। विपरीत योनि के प्रति आकर्षक बढ़ेगा। सम्मान बढ़ेगा, मेहमान घर आएंगे। किसी के कटु वचन तीर की तरह चुभेंगे।सिंहइज्जत और कार्य क्षमता बढ़ेगी। &#039;अहंकार&#039; से बचना चाहिए। मौजमस्ती करने का दिन है। कानूनी समस्या का समझौते से समाधान।कन्याकानूनी चक्करों में उलझ सकते हैं। किसी और की गलती की सजा आपको मिलेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। यातायात के नियम न तोड़े, जुर्माना होगा।तुलातन-मन-धन की स्थिति में सुधार होगा। अथक प्रयत्नों के बाद सफलता मिलेगी ही। दोपहर बाद समय अच्छा आएगा। छात्रों को उच्च शिक्षा की सुविधा मिलेगी।वृश्चिक रिश्तेदारों में आपका सम्मान बढ़ेगा। नया सम्पर्क भाग्योदय कारक। मित्रों एवं स्वजनों का आगमन होगा। दाम्पत्य जीवन में आया मन मुटाव समाप्त होगा।धनुबुर्जुगों से मतभेद संभव। घर-परिवार में अशांति का वातावरण रहेगा। सुखद यात्रा की संभावना। चल-अचल सम्पत्ति के प्रयास सफल होंगे।मकर अचानक कार्य/व्यसाय में हानि। परिवार में बुजुर्ग महिला के स्वास्थ्य की चिंता। अच्छा समय है अधिकार और प्रभाव बढ़ेंगे। पारिवारिक सुखों के लिए उत्तम दिन।कुंभनया परिचय महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। नई राह निकलेगी और उस पर चलेंगे भी। अभीष्ट नई वस्तुओं भी खरीदी करेंगे। जीवन के सभी रंगों में रंगे रहेंगे।मीनधैर्य से काम लें समस्या सुलझेगी। परिवार में कलह संभव है। रचनात्मक कार्य प्रतिष्ठा बढ़ाएंगे। कठिनाइयों से जूझना पड़ेगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:51:12 +0530</pubDate>
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<title>Sawan 2026: रुद्राभिषेक की हर सामग्री में छिपा है जीवन का महा मंत्र</title>
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<description><![CDATA[ सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की उपासना का सबसे सुंदर समय माना जाता है। श्रावण मास में विशेष रूप से रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाता है। वैदिक परंपरा में रुद्राभिषेक केवल शिव लिंग का स्नान नहीं, बल्कि हमारे मन,बुद्धि और आत्मा के शुद्धिकरण का अनुष्ठान भी माना गया है। रुद्राभिषेक की हर सामग्री में हमारे किसी न किसी सद्गुण को जागृत करने की शक्ति छिपी होती है। आइए जानते हैं-1) जल- रुद्राभिषेक की शुरुआत जल से होती है। जल ही जीवन है यह पवित्रता और स्वच्छता का प्रतीक है। मनुष्य का स्वभाव भी जल की तरह शीतल और निर्मल होना चाहिए । जलाभिषेक करने से क्रोध, अहंकार और कटुता के भाव शांत हो जाते हैं। इसे भी पढ़ें: Sawan Pradosh Vrat 2026: सोम प्रदोष व्रत पर शिवलिंग पूजा का महत्व, जानें Puja Timing और शुभ मुहूर्त2) दूध- शुद्धता, मातृत्व और सात्विकता का प्रतीक है। शिवलिंग पर दूध चढ़ाने का भाव है कि हमारे जीवन में भी करुणा, दया और शुद्धता बनी रहे। 3) दही- परिवर्तन और परिपक्वता का प्रतीक है। यह सिखाता है कि जीवन में परिस्थितियाँ बदलती रहेंगी लेकिन मन का संतुलन नहीं बिगड़ना चाहिए। धैर्य से काम लेना चाहिए। 4) घी – घी अग्नि को प्रज्वलित करता है। यह ज्ञान और ऊर्जा का प्रतीक है। इसका संदेश है कि हमारे जीवन में सत्कर्मों की ज्योति सदा जलती रहे। 5) शहद- शहद को मिठास का प्रतीक माना जाता है। शिव भक्ति तभी पूर्ण मानी जाती है, जब हमारे व्यवहार में मिठास, विनम्रता और प्रेम नजर आए। 6) शक्कर और मिश्री- शक्कर और मिश्री का स्वाद मीठा होता है और स्वभाव भी पारदर्शी होता है। हमारा चरित्र भी सरल पारदर्शी और मिठास से भरा होना चाहिए। 7) बिल्वपत्र – त्रि गुणों पर विजय प्राप्त करने का प्रतीक है। शिवजी को तीन पत्तों वाला विल्वपत्र अति प्रिय है। विल्वपत्र चढ़ाने का अर्थ है कि मनुष्य अपने भीतर के काम, क्रोध और लोभ पर विजय प्राप्त करे। 8) धतूरा और भस्म- धतूरा विषैला फल है जो संदेश देता है कि जीवन की कटुता को भी साधना के जरिए मधुरता में बदला जा सकता है वहीं भस्म याद दिलाती है कि यह देह नश्वर है अंत में जलकर भस्म हो जाएगी। इसलिए हमारे जीवन में अहंकार का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।- आरएन तिवारी ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:51:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Surya Grahan 2026: कर्क राशि में लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, जानें सभी राशियों पर Impact</title>
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<description><![CDATA[ साल का आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगने जा रहा है। इसका समय रात 9 बजकर 04 मिनट से 13 अगस्त को सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक रहने वाला है। ज्योतिषियों के मुताबिक, यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण है, लेकिन यह भारत में नहीं दिखाई देगा। हालांकि, यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि के साथ-साथ अश्लेषा नक्षत्र में घटित होने वाला है। इसी कारण से इसका प्रभाव सभी राशियों पर देखने को मिलेगा। असल में सूर्य ग्रहण के प्रभाव से राशियों को लाभ और हानि दोनों के योग का निर्माण होगा। आइए आपको बताते हैं 12 राशियों पर पड़ने वाला प्रभाव।मेष राशिसूर्य ग्रहण के प्रभाव से मेष राशि के जातकों को कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आर्थिक मामलों में लाभ पाने के लिए आपको पहले की अपेक्षा प्रयास करने होंगे। ध्यान रहे कि जल्दबाजी में कोई फैसला न लें।वृषभ राशिग्रहण का प्रभाव वृषभ राशि के जातकों पर देखने को मिलता है। इस दौरान अपनी सेहत को लेकर जरा भी लापरवाही न बरतें। विरोधी आपके काम में बाधा डालने की कोशिश कर सकते हैं। छोटी-सी अनदेखी भी परेशानी का कारण बन जाएगी।मिथुन राशिमिथुन राशि के जातकों के लिए ग्रहण का समय कुछ चुनौतियां लेकर आता है। कामकाज में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। किसी भी निर्णय को लेने से पहले अच्छी तरह विचार कर सकते हैं, तो आपके लिए सबसे बेहतर रहने वाला है।कर्क राशिकर्क राशि के जातकों के लिए इस अवधि में काफी सतर्क रहने की जरुरत है। ग्रहण का प्रभाव आपकी राशि पर पड़ने के कारण कुछ उलझनें बढ़ सकती हैं। विवादों से दूरी बनाकर चलें, तो ही आपके लिए बेहतर है। मौसमी बीमारियों से सावधान रहें।सिंह राशिइस राशि के जातकों के लिए यह समय मुश्किल भरा हो सकता है। वर्कप्लेस में दबाव बढ़ सकता है, कुछ ऐसी परिस्थितियां सामने आ सकती हैं, जिनसे निपटने के लिए संयम की जरुरत ज्यादा है। लेकिन वैवाहिक जीवन में सुख और सहयोग बनेगा।कन्या राशिकन्या राशि के जातकों सूर्य ग्रहण के दौरान सावधानी बरतनी है। घरेलू मामलों पर सोच-समझ के निर्णय लेना होगा। इसके अलावा, कामकाज में किसी भी तरह की लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है। आर्थिक मामलों में सोच-सझकर कदम उठाएं।तुला राशितुला राशि के जातकों के लिए ग्रहण का प्रभाव मिला-जुला रह सकता है। किस्मत आपका साथ देती नजर आएगी। रिश्तों और कार्यक्षेत्र से संबंधित मामलों में संतुलन बनाए रखना जरुरी है। किसी के साथ बहस या मतभेद को बढ़ाने से बचें।वृश्चिक राशिइस दौरान वृश्चिक राशि के लोगों को अपनी योजनाओं को लेकर थोड़ा सतर्क रहने की जरुरत है। लंबी यात्रा की योजना बनाते समय सावधानी जरुर बरतें। काम पूरा करने में अपेक्षा से अधिक समय लग सकता है। निवेश या धन से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी न करें।धनु राशिधनु राशि वालों के लिए ग्रहण कुछ बड़ी चुनौतियां लेकर आएगा। करियर में बदलाव या किसी महत्वपूर्ण निणर्य को लेकर असमंजस की स्थिति बन सकती है। लेकिन परीक्षाओं से संबंधित प्रयासों में सफलता प्राप्त हो सकती है।मकर राशिमकर राशि के जातकों को इस अवधि में अपने काम पर विशेष ध्यान काफी जरुरी है। आपके कंधे पर जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और मेहनत के बाद ही अपेक्षित परिणाम देखने को मिलेंगे। जब आप वरिष्ठ लोगों से बात करें, संयम जरुर रखें।कुंभ राशिकुंभ राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रहण का प्रभाव शुभ हो सकता है। भविष्य के लिए बनाई गई योजनाओं को आगे बढ़ाने में सफलता प्राप्त हो सकती है। इसके साथ ही प्रेम संबंधों में मुधरता मिलेगी और आकर्षण रहने वाला है।मीन राशिमीन राशि के जातकों को अनावश्यक चिंता करने से बचना है। करियर को लेकर महत्वपूर्ण फैसले सोच-समझकर कर लें। वहीं, आप जो भी कार्य साझेदारी से करते हैं, तो आपको काफी लाभ प्राप्त होगा। नए लोगों से मिलेंगे और जीवन में सकारात्मकता आएगी।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:51:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Hariyali Teej 2026 Astrology: 4 शुभ ग्रहों की युति, जानें Shubh Muhurat और सुखी Marital Life के उपाय</title>
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<description><![CDATA[ सावन के महीने में हरियाली तीज का व्रत रखा जाता है। तीज को पर्व को उत्साह के साथ मनाया जाता है। खासकर इस व्रत को सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवों के देव महादेव की साधना करने से वैवाहिक जीवन खुशहाल हो जाता है और कुंवारी कन्याओं के विवाह में आ रही बाधा दूर होती है।हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल हरियाली तीज का त्योहार 15 अगस्त 2026 को मनाया जा रहा है। हरियाली तीज के अवसर पर कई महासंयोग बन रहा है, यह योग बेहद ही शुभ माना जा रहा है। इस महासंयोग के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन पर पड़ेगा। आइए आपको आपको बताते हैं हरियाली तीज के दिन कौन-सा योग बना रहा है। हरियाली तीज 2026 शुभ मुहूर्त-ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:50 से 05:35 तक-अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:17 से 01:08 तक -विजय मुहूर्त: दोपहर 02:51 से 03:42 तक-गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:06 से 07:29 तक-अमृत काल: रात 08:18 से 09:53 तकहरियाली तीज 2026 चौघड़िया मुहूर्त-शुभ (उत्तम): सुबह 07:55 से 09:31 तक-लाभ (उन्नति): दोपहर 02:19 से 03:55 तक-अमृत (सर्वोत्तम): दोपहर 03:55 से 05:30 तक-चर (सामान्य): दोपहर 12:43 से 02:19 तक हरियाली तीज शुभ योगज्योतिष के अनुसार, इस बार तीज पर दुर्लभ योगों का निर्माण हो रहा है, इसकी शुभता कई गुना बढ़ जाती है। श्रद्धालु  तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए कई दुर्लभ ग्रह-नक्षत्रों के संयोग बन रहे हैं।तीज पर बनने वाले मुख्य शुभ योगइस बार हरियाली तीज पर रवि योग, सिद्धि योग, शुभ योग और अमृत सिद्धि योग की युति बन रही है-रवि योगइस योग से समस्त अनिष्टों और ग्रहों के दोषों को नष्ट करने की क्षमता होती है। माना जाता है कि इस योग में की गई पूजा-अर्चना से साधक को यश और पति को आरोग्य की प्राप्ति होती है।सिद्धि व शुभ योगसाधक इस दिन व्रत, जप और दान करता है, तो उसके फल कभी निष्फल नहीं होते हैं। यह योग दांपत्य जीवन में पुराने मतभेदों को मिटाकर आपसी सामंजस्य बढ़ाता है।गजकेसरी योगवहीं, चंद्र और गुरु की स्थिति से गजकेसरी योग का प्रभाव भी निर्मित होता है, जो घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि करता है।विशेष पूजन विधि और मंत्रज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन योगों के दौरान कोई भी सुहागिन महिला शिव-पार्वती का पंचामृत से अभिषेक करती है और &quot;ॐ नमः शिवाय&quot; अथवा &quot;ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः&quot; मंत्र का जाप करती है, तो उसके पति के जीवन से संकट टल जाता है और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।कैसे दूर करें वैवाहिक जीवन का क्लेशयदि आप वैवाहिक जीवन में किसी क्लेश का सामना कर रहे हैं, तो हरियाली तीज के दिन कपूर और लौंग को जलाकर पूरे घर में घुमाए। इससे आपके घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और पति-पत्नी के रिश्ते में मधुरता आती है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:51:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Solar Eclipse 2026: क्या भारत में दिखेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण? जानें Sutak Timing और महत्व</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी 12 अगस्त 2026 को लग रहा है साल का अंतिम सूर्य ग्रहण। ज्योतिष दृष्टि से सूर्य ग्रहण का विशेष महत्व माना जाता है। इसका समय रात 9 बजकर 04 मिनट से 13 अगस्त को सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक रहने वाला है। ज्योतिषियों के मुताबिक, यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण है, लेकिन यह भारत में नहीं दिखाई देगा। वैसे यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि के साथ ही अश्लेषा नक्षत्र में घटित होगा। इस दौरान सूर्य के साथ बुध, चंद्रमा और गुरु भी कर्क राशि में ही संचार कर रहे हैं। वहीं, ग्रहण से पीड़ित होने के बाद सूर्य देव अगले हफ्ते यानी अपनी सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। ग्रहण का असर दुनियाभर में देखने को मिलेगा। आइए आपको सूतक से मोक्ष के सूर्य ग्रहण के बारे में बताते हैं।सूर्य ग्रहण का सूतक लग गया, मोक्ष कब होगाआज भारतीय समय के मुताबिक रात 9 बजकर 4 मिनट पर लग रहा है। इसलिए ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूर्य ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले ही सूतक लग जाता है। सूर्य ग्रहण का सूतक लग चुका है और ग्रहण का मोक्ष या समपान रात 1 बजकर 27 मिनट पर होगा। क्या सूतक के समय मंदिर के कपाट बंद रहेंगेवैसे तो सूतक काल में मंदिर के कपाट बंद किए जाते है, लेकिन भारत के मंदिरों के कपाट आज सूर्यग्रहण के सूतक को लेकर बंद नहीं किए जाएंगे। क्योंकि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है कि यह सूर्यग्रहण भारत के किसी भी हिस्से में दिखाई नहीं देगा। सूर्य ग्रहण यूरोप के अधिकतर देशों, उत्तर-पश्चिम अफ्रीका के देशों, कनाडा, रूस के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में दिखाई देगा। सूर्यग्रहण का समयआज यानी 12 अगस्त को लगने वाला सूर्य ग्रहण करीब  4 घंटे 23 मिनट का होगा। वैसे यह सूर्यग्रहण का ग्रासमान 1.038 माना जा रहा है। वहीं, सूर्य ग्रहण का आरंभ रात 9 बजकर 4 मिनट पर होगा। खग्रास आरंभ रात 10 बजकर 28 मिनट पर होगा। सूर्य ग्रहण मध्य रात 11 बजकर 14 मिनट पर होगा। खग्रास समाप्त रात 12 बजकर 4 मिनट पर होगा। ग्रहण मोक्ष रात 1 बजकर 27 मिनट पर होगा।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:51:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 12 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं। अकारण शत्रु पैदा होंगे, अनावश्यक विवाद भी। चुनौतियों भरा दिन है, सावधान रहें। उच्चाधिकारी मेहरबान रहेंगे।वृषआज आपकी नई पहचान बन सकती है। रिश्तेदारों से संबंध सुधर सकते हैं। परिस्थितियों में सुखद सुधार होगा। उपहार और प्रशंसा मिलेगी।मिथुनरोजगार व्यवसाय में नई स्थापना। घरेलू सुख साधनों में वृद्धि। अटके हुए काम पूरे होंगे। किसी भी घटना या कथन पर सहसा न बोले।कर्कसंतान पक्ष से खुशी मिलेगी। परस्पर गलतफहमियां पनपेगीं। चिंता और भय मन में व्याप्त रहेंगे। मिश्रित फल, अधिकतर अच्छे होंगे।सिंहमाता-पिता के स्वास्थ्य के लिए दिन ठीक नहीं। वस्त्राभूषण नगद रूप में उपहार मिलेंगे। नई उम्मीदें लेकर सूर्योदय होगा। सरकारी यात्रा पर जा सकते हैं।कन्याविरोधियों के षड़यंत्र विफल होंगे। नई योजनाएं उज्ज्वल भविष्य से जुड़ी हैं। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। अपने काम पर ध्यान केन्दि्रत करें।तुलाव्यावसायिक मामलों में ठोस निर्णय और सफलता। सत्संग और अध्यात्म में रूचि बढ़ेगी। बाधाएं दूर होगी, लक्ष्य भी और आगे बढ़ेंगे। परीक्षा में सफलता मिलेगी।वृश्चिक परिस्थितियां सुधर रही है। साज सज्जा के कामों में व्यस्तता रहेगी। लोग आपकी ईमानदारी की प्रशंसा करेंगे। काम बिगड़ने पर पछतावा होगा।धनुलाभकारी योजनाओं का प्रस्ताव मिलेगा। अनिर्णय की स्थिति बनी रहेगी। हर दृष्टि से सतर्क रहें, धोखे का योग है। आमदनी और खर्च बराबर रह सकते हैं।मकर कठिन समस्याएं दूर कर सकेंगे। जीवनशैली में परिवर्तन करना अच्छा रहेगा। वरिष्ठजनों से लाभप्रद संपर्क। आर्थिक लाभ के नए साधन बनेंगे।कुंभकाम बनने में बाधाएं आएगी। हृदय, मधुमेह आदि के रोगी अपना ध्यान रखें। तनाव और खर्च भरा दिन है, सावधान रहें। वरिष्ठ अधिकारी पदोन्नति की सिफारिश करेंगे।मीनसभी कार्य सरलता से पूरे होंगे। चल अचल संपत्ति में बढ़ोत्तरी होगी। मित्रों की मदद लेनी पड़ेगी। पुत्र-पुत्री की शिक्षा संबंधी चिंता समाप्त होगी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:51:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Hariyali Teej 2026: दांपत्य जीवन में बढ़ेगा Love और Trust, सूर्यास्त के बाद कपूर&#45;लौंग से करें ये अचूक Remedy</title>
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<description><![CDATA[ हरियाली तीज का व्रत महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखती हैं। सावन के महीने में हर साल हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और प्रेम बना रहता है। यदि पति-पत्नी के बीच किसी भी तरह की बात को लेकर नाराजगी, तनाव या गलतफहमी चल रही है, तो आप इस खास अवसर पर कुछ धार्मिक उपाय करने से सभी समस्याएं दूर हो जाएगी। हरियाली तीज का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म में हरियाली तीज का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इसी कारण से सुहागिन महिलाएं इस दिन पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। इतना ही नहीं, अविवाहित कन्याएं मनचाहे जीवनसाथी और विवाह में आने वाली बाधाओं के दूर होने की प्रार्थना करती हैं। इस बार 15 अगस्त 2026 को हरियाली तीज व्रत रखा जाएगा।हरियाली तीज पर करें ये उपायवैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए उपायअगर आपके वैवाहिक जीवन में बार-बार मतभेद आ रहे हैं या छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव चल रहा है, तो इस बार हरियाली तीज पर कपूर और लौंग से जुड़ा यह उपाय जरुर करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय के करने से घर का वातावरण में सकारात्मकता बढ़ाने और दांपत्य रिश्ते में प्रेम व समझ बनाए रखने में मदद करता है।कैसे करें उपायसूर्यास्त के बाद कपूर का एक टुकड़ा लेकर भगवान शिव के सामने रखें। जिसके बाद सात साबुत लौंग लें। ध्यान रहे कि सभी लौंग सहीं और बिना टूटी हुई हों। इसके बाद सातों लौंग को दाहिने हाथ में रखकर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें और पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास, सुख और आपसी समझ बनाए रखने की प्रार्थना करें। जिसके बाद &#039;ॐ नमः शिवाय&#039;मंत्र का 11 माला जाप करें। जब जाप पूरा हो जाए, तो सातों लौंगों को कपूर के ऊपर रखकर जला लें।घर में सुख-समृद्धि के लिए उपायजब कपूर और लौंग जलने लगे तो उसके उठने वाले धुएं को घर के अलग-अलग हिस्सों में दिखाएं। ऐसा करने से नकारात्मकता दूर हो जाती है और वातावरण शुद्ध हो जाता है। कपूर पूरी तरह जल जाने के बाद थोड़ा जल हाथ में लेकर दीपक के चारों ओर घुमाएं और फिर उसे जमीन पर अर्पित करें।आखिर आप भगवान शिव औ माता पार्वती से परिवार की सुख, शांति, पति-पत्नि के बीच प्रेम और रिश्ते में मधुरता बनीं रहे, इसके लिए प्रार्थना करें।  अब आप 5 बार &#039;ॐ नमः शिवाय&#039; का जाप करें। महादेव की कृपा से आपके घर में सुख-समृद्धि बनी रहेगी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:51:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Sawan 2026: अमंगल हारी, करुणामयी शिवशक्ति का पावन पर्व है सावन शिवरात्रि</title>
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<description><![CDATA[ भारत में सर्वाधिक महत्व जिस देव का है, वो देवाधिदेव भगवान शिव ही हैं, जो आज भी समूचे भारतवर्ष में उतने ही पूजनीय और वंदनीय हैं, जितने सदियों पहले। देशभर में भगवान शिव की पूजा-उपासना व्यापक स्तर पर होती है, इसीलिए ‘शिवरात्रि’ पर्व को भारत में राष्ट्रीय पर्व का दर्जा प्राप्त है। वैसे तो शिवरात्रि हर माह मनती है किन्तु इनमें से फाल्गुन महाशिवरात्रि और सावन शिवरात्रि की महत्ता सर्वाधिक है। सावन शिवरात्रि प्रायः माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाई जाती है, जिसे भगवान शिव के प्रति भारतीयों की आस्था की प्रतीक ‘कांवड़ यात्रा’ का समापन दिवस भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भारत में सावन शिवरात्रि का बहुत महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन की शिवरात्रि सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है और वर्ष यह तिथि 11 अगस्त को प्रातः 4 बजकर 43 मिनट से शुरू होकर 12 अगस्त रात्रि 01 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, यह पर्व 11 अगस्त को ही मनाया जाएगा और इसी दिन शिवलिंग का जलाभिषेक होगा। सावन शिवरात्रि के पावन अवसर पर ही कांवड़ यात्रा का भी समापन होता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस साल सावन शिवरात्रि पर चतुर्ग्रही योग बन रहा है और इस दिन कर्क राशि में सूर्य, गुरु, बुध और चंद्रमा एक साथ बैठकर चतुर्ग्रही योग का निर्माण करने वाले हैं।धार्मिक ग्रंथों में ‘शिव’ और ‘रात्रि’ के शाब्दिक अर्थ को परिभाषित करते हुए बताया गया है, जिसमें सारा जगत शयन करता है, जो विकार रहित है, वह शिव है अथवा जो अमंगल का ह्रास करते हैं, वे ही सुखमय, मंगलमय शिव हैं। जो सारे जगत को अपने अंदर लीन कर लेते हैं, वे ही करूणासागर भगवान शिव हैं। जो भगवान नित्य, सत्य, जगत आधार, विकार रहित, साक्षीस्वरूप हैं, वे ही शिव हैं। महासमुद्र रूपी शिव ही एक अखंड परम तत्व हैं, इन्हीं की अनेक विभूतियां अनेक नामों से पूजी जाती हैं, यही सर्वव्यापक और सर्वशक्तिमान हैं, यही व्यक्त-अव्यक्त रूप से ‘सगुण ईश्वर’ और ‘निर्गुण ब्रह्म’ कहे जाते हैं तथा यही परमात्मा, जगत आत्मा, शम्भव, मयोभव, शंकर, मयस्कर, शिव, रूद्र आदि कई नामों से संबोधित किए जाते हैं। ‘रात्रि’ शब्द ‘रा’ दानार्थक धातु से बना है अर्थात् जो सुखादि प्रदान करती है, वह ‘रात्रि’ है। रात्रि सदा आनन्ददायिनी होती है, अतः सबकी आश्रयदात्री होने के कारण उसकी स्तुति की गई है। इस प्रकार शिवरात्रि का अर्थ है, वह रात्रि, जो आनंद देने वाली है, जिसका शिव नाम के साथ विशेष संबंध है।इसे भी पढ़ें: Sawan 2026: रुद्राभिषेक की हर सामग्री में छिपा है जीवन का महा मंत्रभगवान शिव को ‘कालों का काल’ और ‘देवों का देव’ अर्थात् ‘महादेव’ कहा गया है। देव-दानव, मानव-प्रेत, भगवान शिव इन सभी के आराध्य देव रहे हैं। ‘भोले बाबा’ के रूप में सर्वत्र पूजनीय भगवान शिव को समस्त देवों में अग्रणीय और पूजनीय इसलिए भी माना गया है क्योंकि वह अपने भक्तों पर बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं और दूध या जल की धारा, बेलपत्र व भांग की पत्तियों की भेंट से ही अपने भक्तों पर प्रसन्न हो जाते हैं तथा उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। भगवान शिव को भारत की भावनात्मक एवं राष्ट्रीय एकता तथा अखण्डता का प्रतीक माना गया है। एक होते हुए भी शिव के नटराज, पशुपति, हरिहर, त्रिमूर्ति, मृत्युंजय, अर्द्धनारीश्वर, महाकाल, भोलेनाथ, विश्वनाथ, ओंकार, शिवलिंग, बटुक, क्षेत्रपाल, शरभ इत्यादि अनेक रूप हैं। ग्रंथों में भगवान शिव के बारे में यही उल्लेख मिलता है कि तीनों लोकों की अपार सुन्दरी और शीलवती गौरी को अर्धांगिनी बनाने वाले शिव प्रेतों और भूत-पिशाचों से घिरे रहते हैं। उनका शरीर भस्म से लिपटा रहता है, गले में सर्पों का हार शोभायमान रहता है, कंठ में विष है, जटाओं में जगत तारिणी गंगा मैया हैं और माथे में प्रलयंकर ज्वाला है। बैल (नंदी) को भगवान शिव का वाहन माना गया है और ऐसी मान्यता है कि स्वयं अमंगल रूप होने पर भी भगवान शिव अपने भक्तों को मंगल, श्री और सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने भगवान शिव की अनुकम्पा प्राप्त करने के लिए उन्हें अपनी एक आंख समर्पित कर दी थी। इस बारे में कहा गया है कि भगवान विष्णु जब शिव को प्रसन्न करने के लिए 1008 कमल के फूलों से उनका अभिषेक कर रहे थे, तब आखिर में एक कमल कम रह गया। इस पर भगवान विष्णु ने तुरंत कटार से अपनी एक आंख निकाली और कम रहे कमल के स्थान पर शिव को अपनी आंख अर्पित कर दी। इससे शिव विष्णु पर इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने भगवान विष्णु को अपना दिव्य मंत्र प्रदान कर दिया:-ॐ त्रयम्बकं यजामहेसुगन्धिं पुष्टिवर्धनम।उर्वारूकमिव बन्धनात।मृत्योर्मुक्षीय मामृतात।।भगवान शिव के मस्तक पर अर्द्धचंद्र शोभायमान है। इसके संबंध में कहा जाता है कि समुद्र मंथन के समय समुद्र से विष और अमृत के कलश उत्पन्न हुए थे। इस विष का प्रभाव इतना तीव्र था कि इससे समस्त सृष्टि का विनाश हो सकता था, ऐसे में भगवान शिव ने इस विष का पान कर सृष्टि को नया जीवनदान दिया जबकि अमृत का पान चन्द्रमा ने कर लिया। विषपान करने के कारण भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया, जिससे वे ‘नीलकंठ’ के नाम से जाने गए। विष के भीषण ताप के निवारण के लिए भगवान शिव ने चन्द्रमा की एक कला को अपने मस्तक पर धारण कर लिया। यही भगवान शिव का तीसरा नेत्र है और इसी कारण भगवान शिव ‘चन्द्रशेखर’ भी कहलाए।- योगेश कुमार गोयल(लेखक 36 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार और ‘सागर से अंतरिक्ष तक: भारत की रक्षा क्रांति’ सहित कई पुस्तकों के लेखक हैं) ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:51:06 +0530</pubDate>
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<title>Kamika Ekadashi 2026: सावन में कामिका एकादशी व्रत का क्या है आध्यात्मिक महत्व? नोट करें Shubh Muhurat</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में कामिका एकादशी का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को कामिका एकादशी कहा जाता है। सावन महीने में पड़ने वाली इस एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। क्योंकि सावन का महीना भगवान शिव को अतिप्रिय होता है। वहीं एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।एकादशी का व्रत करने पर और भगवान विष्णु की पूजा करने से जातक के सभी तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं और मृत्यु लोक के बाद व्यक्ति विष्णु लोक को प्राप्त होता है। कामिका एकादशी का व्रत करने से गंगा स्नान, काशी, गया, पुष्कर और कुरुक्षेत्र जैसे महान तीर्थों के बराबर पुण्यफल प्राप्त होता है। तो आइए जानते हैं कामिका एकादशी की तिथि, मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक सावन माह के कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि की शुरूआत 08 अगस्त 2026 की दोपहर 01:59 मिनट पर शुरू होगी। वहीं अगले दिन यानी की 09 अगस्त की सुबह 11:04 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। उदयातिथि के मुताबिक कामिका एकादशी का व्रत 09 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। वहीं व्रत का पारण 10 अगस्त को सुबह 05:47 मिनट से लेकर 80:00 बजे तक होगा।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर भगवान विष्णु को पंचामृत, जल से स्नान कराने के बाद हल्दी और चंदन लगाएं। इसके बाद पीले फूल, तुलसी दल और भोग आदि अर्पित करें। फिर धूप-दीप जलाकर भगवान विष्णु से प्रार्थना करें। इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और एकादशी व्रत कथा सुनें। इसके बाद अगले दिन व्रत का पारण करें।मंत्रॐ नमो भगवते वासुदेवाय।ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात।ॐ श्रीं श्री लक्ष्मी-नारायणाभ्यां नमः।ॐ विष्णवे नमः। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:51:06 +0530</pubDate>
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<title>Hariyali Amavasya 2026: सावन की अमावस्या पर बन रहे विशेष संयोग, जानें Puja Vidhi और दान का महत्व</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी की 12 अगस्त 2026 को हरियाली अमावस्या मनाई जा रही है। सावन शिवरात्रि के ठीक अगले दिन और हरियाली तीज से 3 दिन पहले यह अमावस्या आती है। सावन के महीने में पड़ने की वजह से इसको हरियाली अमावस्या कहा जाता है। हरियाली अमावस्या के दिन पूजा-पाठ, दान, पितरों का स्मरण करना बेहद फलदायी माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं हरियाली अमावस्या की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की शुरूआत 12 अगस्त की सुबह 01:53 मिनट पर हो रही है। वहीं इस तिथि की समाप्ति रात 11:07 मिनट पर होगी। ऐसे में हरियाली अमावस्या 12 अगस्त 2026 को मनाई जा रही है।स्नान-दान मुहूर्तसावन माह के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान-दान करना शुभ माना जाता है। 12 अगस्त को सुबह 04:23 मिनट से लेकर 05:06 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा। वहीं पूजा के लिए अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:59 मिनट से लेकर 12:52 मिनट तक रहेगा।पूजन विधिहरियाली अमावस्या को पितरों के तर्पण के लिए सुबह जल्दी उठकर गंगाजल से स्नान आदि करें। इसके बाद अपने ईष्ट का ध्यान करें और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करें। भगवान शिव को मदार और आक के फूल चढ़ाएं और पीपल के पेड़ की पूजा करें। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।महत्वहरियाली अमावस्या को चितलगी अमावस्या, गटारी अमावस्या और चुक्कला अमावस्या के नाम से भी जानते हैं। इस दिन भगवान शिव की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जो भी जातक इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कष्टों से मुक्ति मिलती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:51:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Sawan 2026: Omkareshwar Jyotirlinga जहां विश्राम करते हैं Lord Shiva, जानें इस पावन धाम का History और धार्मिक महत्व</title>
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<description><![CDATA[ सावन का महीना चल रहा है। सभी श्रद्धालु महादेव की पूजा-अर्चना और प्रभु की कृपा पाने में लगे हैं। कई लोग सावन के महीने में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के लिए जाते हैं, इन्हीं से एक है चौथा ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का वर्णन स्कंद पुराण, शिव पुराण और वायु पुराण जैसे प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में भी देखने को मिलता है। मध्य प्रदेश के नर्मदा नदी के उत्तरी तट पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, जो कि इंदौर से करीब 77 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, यहां पर रोजाना तीनों लोकों की यात्रा के बाद भगवान शिव विश्राम करने के लिए आते हैं। इसलिए इस मंदिर में भगवान शिव के विश्राम व्यवस्था, अनुष्ठान और शयन दर्शन का ध्यान रखा जाता है। आइए आपको यहां के इतिहास के बारे में बताते हैं।ओंकारेश्वर के दर्शन नहीं किए तो तीर्थ यात्रा अधूरी मानी जाती हैहिंदू धर्म में सभी तीर्थ यात्रा के दर्शन के बाद ओंकारेश्वर के दर्शन करना व पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। यहां पर तीर्थ यात्री सभी तीर्थों का जल लेकर ओंकारेश्वर धाम में शिवलिंग पर जला अर्पित करते हैं, तभी सभी तीर्थ पूर्ण माने जाते हैं। वरना वे यात्रा अधूरी मानी जाती है।मंदिर में 3 समय होती है आरतीबता दें कि, ओंकारेश्वर में कई मंदिर स्थित है। नर्मदा के दोनों दक्षिणी व उत्तरी तटों पर मंदिर बसे हैं। ओंकारेश्वर में ओमकार पर्वत का परिक्रमा पथ करीब 7 किलोमीटर लंबा मार्ग है, जो कि पक्के सीमेंट से बना है। रास्ते भर मन मोह लेने वाले नजारे देखने को मिलते हैं। परिक्रमा पथ पर सुंदर संगम स्थल भी हैं।ओंकारेश्वर मंदिर में रोजाना 3 पूजा होती है। तीनों ही पूजा कराने के लिए अगल-अलग पुजारी है। सुबह के समय ट्रस्ट के पुजारी, दोपहर के समय सिंधिया घराने के पुजारी और शाम की पूजा में होलकर स्टेट के पुजारी पूजा करते हैं।हर सोमवार को एक पालकी पर भगवान ओंकारेश्वर की तीन मुखों वाली सोने की मूर्ति को रखकर जुलूस निकाला जाता है। इस भव्य नजारे को देखने के लिए स्थानीय लोगों को भगवान के दर्शन प्राप्त होते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:51:02 +0530</pubDate>
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<title>Sawan 2026: कामिका एकादशी पर Dwi&#45;Pushkar Yoga का महासंयोग, इन राशियों के खुलेंगे किस्मत के द्वार</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी 09 अगस्त 2026 को कामिका एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। इस बार कामिका एकादशी पर द्विपुष्कर योग और हर्षण योग का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है।जिसका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ने वाला है। लेकिन कुछ राशियों के लिए संयोग बेहद खास साबित होने वाला है। ज्योतिष के अनुसार, सावन मास के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी पर द्विपुष्कर योग और हर्षण योग का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। सावन का यह पवित्र महीना और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की कृपा के कारण यह एकादशी कई राशियों के लिए भाग्यवर्धक और धन-धान्य में वृद्धि देने वाली है। आइए आपको बताते हैं कामिका एकादशी पर किन राशियों का भाग्य बदलने वाला है।कामिका एकादशी पर भाग्यशाली राशियांवृषभ राशि: आर्थिक मामलों में आपको जल्द ही अच्छी खबर मिल सकती है। लंबे समय से रुका हुआ पैसा वापस आने के योग हैं। कारोबार करने वालों को कोई नया प्रोजेक्ट या बड़ा सौदा मिल सकता है। इस दौरान परिवार का पूरा सहयोग भी मिलेगा। कर्क राशि: आपकी आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते खुल सकते हैं और लंबे समय से चल रहा मानसिक तनाव कम होगा। सावन में भगवान शिव और विष्णु की कृपा से जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे। नौकरी करने वालों को अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है और प्रमोशन के अवसर भी बन सकते हैं।सिंह राशि: आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और समाज में मान-सम्मान भी बढ़ सकता है। करियर और कारोबार में आगे बढ़ने के नए मौके मिलेंगे। सरकारी या प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए समय अच्छा रहेगा और किसी महत्वपूर्ण काम में सफलता मिल सकती है। तुला राशि: इस समय भाग्य आपका साथ देगा और आमदनी में स्थिरता बनी रहेगी। अगर आप निवेश या प्रॉपर्टी खरीदने की सोच रहे हैं तो यह समय आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। परिवार या संतान की ओर से कोई अच्छी खबर मिलने की संभावना है।कुंभ राशि: लंबे समय से चली आ रही परेशानियां और करियर की रुकावटें धीरे-धीरे दूर हो सकती हैं। ऑफिस में आपके काम और योजनाओं की तारीफ होगी। जीवनसाथी के साथ रिश्ते बेहतर होंगे और आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ धन बचाने में भी सफलता मिल सकती है।कामिका एकादशी पर करें ये उपायतुलसी पत्र अर्पणआज के दिन आप भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी पत्र जरुर चढ़ाएं। ध्यान दें कि एकादशी के दिन तुलसी तोड़ना वर्जित है, इसलिए एक दिन पूर्व ही तोड़ लें।मंत्र जापइस दिन आप विष्णु सहस्रनाम या &quot;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&quot; मंत्र का जाप कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके आर्थिक कष्ट दूर होंगे। पीली वस्तुओं का दान करेंएकादशी के दिन केले, चने की दाल, पीले वस्त्र या केसरयुक्त खीर का दान करने से देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त होती है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:59:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Sawan Shivratri 2026: सावन शिवरात्रि पर जानें जलाभिषेक का Muhurat और भद्रा काल का समय</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में सावन शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। सावन का महीना भगवान शिव को अतिप्रिय होता है। इसलिए सावन माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। इस दौरान भगवान शिव का पूजन, जप, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और बाधाओं का नाश होता है। सावन महीने की शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा और आराधना शुभ और फलदायी मानी जाती है। तो आइए जानते हैं सावन शिवरात्रि की तिथि, मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में...तिथि और मुहूर्तहर साल सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि मनाई जाती है। पंचांग के मुताबिक इस साल चतुर्दशी तिथि की शुरूआत 11 अगस्त 2026 की सुबह 04:53 मिनट से हुई है। वहीं इस तिथि की समाप्ति अगले दिन यानी की 12 अगस्त को देर रात 01:51 मिनट पर होगी। उदयातिथि के मुताबिक 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि मनाई जा रही है। शिवरात्रि पर रात्रि के चारों प्रहर में शिव और पार्वती की पूजा का विशेष महत्व होता है।भद्रा का सायाइस बार सावन शिवरात्रि पर भद्राकाल का साया रहेगा। धार्मिक शास्त्रों में भद्राकाल को शुभ नहीं माना जाता है। आज सुबह से भद्रा लग जाएगी, जोकि दोपहर 03:22 मिनट तक रहेगी। लेकिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक में भद्रा दोष मान्य नहीं होगा। ऐसे में शिवभक्त बिना किसी डर के भद्राकाल में भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।पूजन विधिइस दिन सूर्योदय से पहले उठें और स्नान आदि करके साफ कपड़े पहनें। फिर घर के मंदिर की साफ-सफाई करें और पास में स्थित शिवालय में जाकर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करें। शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दही, दूध, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें। फिर शिवलिंग का दोबारा जल से अभिषेक करें। इसके बाद धतूरा, बेलपत्र, भांग, फूल और सफेद चंदन आदि अर्पित करें।अब भगवान शिव को फल और मिष्ठान आदि अर्पित कर नैवेद्य अर्पित करें। फिर &#039;ऊँ नम: शिवाय&#039; मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और शिव चालीसा का पाठ करें। अंत में भगवान शिव की आरती करें और पूजा में हुई भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:59:21 +0530</pubDate>
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<title>Sawan Pradosh Vrat 2026: सोम प्रदोष व्रत पर शिवलिंग पूजा का महत्व, जानें Puja Timing और शुभ मुहूर्त</title>
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<description><![CDATA[ सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा-आराधना का विशेष महत्व होता है। सावन माह में पड़ने वाले व्रत भी पुण्यदायी व्रतों में से एक माने जाते हैं। सावन में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। वहीं प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, इसको सोम प्रदोष व्रत भी कहा जाता है। प्रदोष में व्रत रखना और भगवान शिव की पूजा-आराधना करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है।धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस व्रत में प्रदोष काल में शिवलिंग का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, बेलपत्र और भांग-धतूरा आदि अर्पित किए जाते हैं। वहीं शिव मंत्रों के जाप से भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष कृपा मिलती है। प्रदोष व्रत करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, संतान सुख और रोग आदि से छुटकारा मिलता है। इस बार 10 अगस्त को सोम प्रदोष व्रत किया जा रहा है। तो आइए जानते हैं सोम प्रदोष व्रत की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व आदि के बारे मे...तिथि और मुहूर्तहिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 10 अगस्त को सुबह 8 बजे से होगी और इस तिथि का समापन 11 अगस्त को 4 बजकर 55 मिनट पर होगा। सावन सोम प्रदोष व्रत पर पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 05 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में पूजा करना शुभ और फलदायी होता है। पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करें और फिर भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प करें। फिर भगवान शिव का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद 11 या 21 बेलपत्र, आक के फूल, धतूरा, फल, सुपारी, इलायची, लौंग, धूप, दीप, फूल, गंध, चावल और नैवेद्य अर्पित करें। पूजा के दौरान घी और शक्कर से बनी मिठाई का भोग लगाएं।इसके बाद शिव मंत्रों का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें। प्रदोष व्रत कथा पढ़े और पूजा के अंत में घी के दीपक से भगवान शिव की आरती करें। पूरा दिन व्रत रखते हुए मन में भगवान शिव का स्मरण करें और शाम को फिर से स्नान आदि करके प्रदोष काल में भगवान शिव की फिर से विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें।महत्वप्रदोष व्रत पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना का महत्व होता है। वहीं सावन में प्रदोष व्रत का महत्व बढ़ जाता है। भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त प्रदोष काल होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक प्रदोष का समय होता है, जब भगवान शिव कैलाश पर तांडव करते हैं और सभी देवी-देवता उनकी आराधना करते हैं। प्रदोष व्रत रखने और प्रदोष काल में पूजा करने, दीपदान करने, शिव चालीसा और रुद्राष्टक का पाठ करने से सभी तरह के पापों का अंत हो जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:59:21 +0530</pubDate>
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<title>Amarnath Yatra Rituals: कैसे करें बाबा बर्फानी की पूजा और क्या है प्रसाद वितरण का सही तरीका</title>
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<description><![CDATA[ अमरनाथ यात्रा शुरू होने के बाद बाबा के दर्शन के लिए शिव भक्तों का तांता लग गया है। हर कोई बाबा बर्फानी को देखने के लिए उत्सुक नजर आ रहा है। इस यात्रा में सबसे कठिन और अहम तीर्थों में से एक मानी जाती है। भक्त भगवान शिव को अर्पित करने के लिए अपने साथ प्रसाद और पूजन की सामग्री लेकर जाते हैं।  जिसका काफी गहरा धार्मिक महत्व होता है। अमरनाथ यात्रा भक्तों को मन की शांति ही नहीं देती है, बल्कि यह आत्मा का परमात्मा से मिलन भी कराती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको अमरनाथ में चढ़ाए जाने वाले प्रसाद और पूजन सामग्री के धार्मिक महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Lucknow के Mohanlalganj में स्थित Kashishwar Temple, एक ही शिवलिंग पर दर्शन देता है पूरा शिव परिवारजानें अमरनाथ में प्रसाद और पूजन सामग्री का महत्वशिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है। इससे तीन गुण सत, रज और तम संतुलित होते हैं।मिश्री और फल अर्पित करना भी शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। यह भक्ति की सरलता को दर्शाता है।नारियल अर्पित करना भगवान के प्रति आपके समर्पण को दिखाता है। इसलिए भी प्रसाद चढ़ाया जाता है।पूजा में कपूर का इस्तेमाल वातावरण को शुद्ध करने और सकारात्मक ऊर्जा पैदा करने के लिए किया जाता है।प्रसाद के सेवन और बांटने के नियमभगवान शिव के मंदिर से लाए प्रसाद को फौरन नहीं खाना चाहिए। इसको सबसे पहले घर के मंदिर में रखें। इसके बाद आप खास सदस्यों और दोस्तों को बांटें।तीर्थ का प्रसाद खुद अकेले खाने की जगह दूसरों को खिलाने से इसका फल कई गुना बढ़ जाता है।प्रसाद खाने से पहले हाथ-पैर धोकर शुद्ध हो जाएं और कभी भी जूठे हाथों से प्रसाद को स्पर्श न करें।हमेशा प्रसाद को आने के बाद ही बांटे, इसको ज्यादा समय के लिए नहीं रखना चाहिए।बता दें कि अमरनाथ यात्रा में ले जाने वाली पूजन सामग्री सिर्फ बाजार से खरीदी गई वस्तुएं नहीं है। बल्कि यह भक्त की भावनाएं हैं, जो अपने आराध्य को समर्पित होता है। यह वस्तुएं हमको यह सिखाती हैं कि ईश्वर की भक्ति में भाव होना जरूरी होता है। जब हम पवित्र हृदय से बाबा बर्फानी को यह भेंट करते हैं, तो हम खुद को उनके चरणों में पूरी तरह समर्पित कर देते हैं। इसलिए भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए काफी लंबा इंतजार करते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Aug 2026 12:59:16 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 7 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 7 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 7 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं। यहाँ बिना किसी सिंबल के आज का सभी 12 राशियों का लव राशिफल दिया गया है:मेष: आज पार्टनर के साथ सामंजस्य बेहतरीन रहेगा। पुरानी कड़वाहट दूर होगी और शाम के समय साथ में सुखद पल बिताने का मौका मिलेगा।वृषभ: प्रेम जीवन में नया उत्साह देखने को मिलेगा। यदि किसी से दिल की बात कहना चाहते हैं, तो आज का दिन आपके पक्ष में रुख कर सकता है।मिथुन: व्यस्त दिनचर्या के बावजूद साथी के लिए समय निकालना जरूरी होगा। बातचीत में मधुरता रखें ताकि कोई अवांछित खिंचाव न पैदा हो।कर्क: साथी की ओर से कोई खास सरप्राइज या सहयोग मिल सकता है। आपके बीच का भावनात्मक जुड़ाव पहले से कहीं अधिक गहरा होगा।सिंह: पार्टनर के प्रति आपका स्वभाव थोड़ा अधिक संवेदनशील रहेगा। अपनी बातें थोपने के बजाय उनके नजरिए को भी समझने की कोशिश करें।कन्या: लव लाइफ में सुकून और शांति का माहौल रहेगा। सिंगल जातकों की किसी समझदार व्यक्ति से बातचीत शुरू होने के अच्छे आसार हैं।तुला: रिश्तों में किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचें। धैर्य से काम लेंगे तो साथी के साथ तालमेल और भी बेहतर होता जाएगा।वृश्चिक: आपके रिश्ते में ताजगी और एक नया आकर्षण देखने को मिलेगा। साथ बैठकर भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करना मन को प्रसन्न करेगा।धनु: किसी तीसरे व्यक्ति की राय को अपने रिश्ते के बीच न आने दें। आपस में सीधे संवाद से ही हर उलझन का समाधान निकलेगा।मकर: काम के तनाव को घर या रिश्ते तक न लाएं। शाम को पार्टनर के साथ समय बिताने से दिनभर की थकान मिट जाएगी।कुंभ: नए विचारों और साझा पसंद की गतिविधियों से संबंध में मजबूती आएगी। शादीशुदा जातकों के लिए आज का दिन काफी खुशनुमा रहेगा।मीन: साथी से अपनी भावनाएं व्यक्त करने में संकोच न करें। आपकी सच्चाई और सरलता पार्टनर का दिल जीत लेगी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:51:02 +0530</pubDate>
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<title>Shiv Bhakti और Discipline का महीना सावन, तामसिक भोजन से दूरी क्यों है जरूरी</title>
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<description><![CDATA[ सावन का पवित्र महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस पवित्र महीने में भक्त पूजा, उपवास, शिव सेवा, जलाभिषेक और भगवान शिव से संबंधित मंत्रों का जाप आदि करते हैं। वहीं सावन के महीने में लोग सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं। इस दौरान आध्यात्मिक अनुष्ठानों के अलावा कई घरों में प्याज, लहसुन, दही, कढ़ी और दूध आदि चीजों के सेवन करने की मनाही होती है। तो ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं सावन के महीने में इन चीजों को खाने की मनाही क्यों होती है।सावन का महीनाहिंदू मान्यताओं के मुताबिक सावन का महीना शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का समय होता है। ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं के मुताबिक इस पवित्र महीने में भक्तों को सांसारिक मोह-माया और विकर्षणों आदि से दूर रहकर शिव भक्ति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस महीने में भोजन का बेहद योगदान होता है। क्योंकि माना जाता है कि यह आपके विचारों और भावनाओं पर असर डालता है। इसलिए कहा जाता है कि सादा और सात्विक खाना मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक संतुलन और एकाग्रता को बनाए रखने में मदद करता है।इसे भी पढ़ें: Rudrabhishek In Sawan: महादेव की कृपा के लिए क्यों जरूरी है Rudrabhishek? जानें इसके Benefits और नियमप्याज और लहसुन परहेज क्योंआयुर्वेद और योग दर्शन के मुताबिक लहसुन-प्याज को तामसिक या फिर राजसिक खाद्य पदार्थों में शामिल किया जाता है। जोकि इंद्रियों को उत्तेजित करने के अलावा बेचैनी बढ़ाता है और मानसिक शांति कम कर सकते हैं।सावन का महीना ध्यान, मंत्र-जाप और आत्म अनुशासन के लिए समर्पित होता है। इस कारण भक्तों को तामसिक और राजसिक खाने की जगह दूध, फल, मेव और साधारण सब्जियों जैसे सात्विक खानों का चयन करना चाहिए। लहसुन और प्याज से परहेज करने से विचारों की शुद्धता बढ़ती है।जानें दही खाना सही या नहींआयुर्वेद के मुताबिक सावन का महीना बारिश वाला होता है। जिस कारण से पाचन प्रोसेस स्वाभाविक रूप से कमजोर हो जाती है। दही पौष्टिक तो है, लेकिन कुछ लोगों को खासकर रात में दही खाने से पेट भारी लगने के अलावा बलगम की समस्या को पैदा कर सकता है। यह महीना मानसून के दौरान पड़ता है। जिस कारण कई परिवारों में मौसमी खानपान के तहत दही खाने से बचा जाता है।जानें कढ़ी के सेवन से जुड़े नियमसावन के महीने में कई लोग कढ़ी-दही और बेसन से बनी चीजों को खाने से परहेज करते हैं। आध्यात्मिक नजरिए से कई लोग सावन व्रत के दौरान खट्टे खाने की चीजों का कम सेवन करते हैं। जोकि सादगी और अनुशासन का प्रतीक है। यह लोग हैवी खाने की बजाय उबले आलू, साबूदाना, फल, दूध और मक्खन जैसे हल्के व्यंजन करना पसंद करते हैं।भारत का हर परिवार अपने-अपने तरीकों से सावन की परंपराओं को निभाता है। अलग-अलग हिस्सों में यह रीति-रिवाज अलग हो सकते हैं। कुछ लोग सावन के महीने में मांस-मछली, प्याज-लहसुन, दही और कढ़ी आदि का सेवन नहीं करते हैं। वहीं कुछ लोग सिर्फ सोमवार या खास व्रत में ऐसा करते हैं। सावन महीने का संदेश कृतज्ञता, पवित्रता और अनुशासन के साथ जीना है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:51:02 +0530</pubDate>
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<title>Sawan में Rudraksha Mala से जाप करते समय न करें ये बड़ी गलतियां, जानिए रुद्राक्ष माला के जप के नियम</title>
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<description><![CDATA[ सावन का महीना एक ऐसा है जब आप भगवान शिव का आसानी से प्रसन्न कर सकते हैं। श्रावण मास भगवान शंकर को अति प्रिय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पवित्र महीने में महादेव का रुद्राभिषेक करने से जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है और भोलेनाथ की कृाप से बिगड़े काम पूरे होते हैं।इस महीने में रुद्राक्ष की माना से मंत्र जप करना अधिक फलदायी माना जाता है, क्योंकि रुद्राक्ष को भगवान शिव का अंश माना जाता है।धार्मिक मान्यता के अनुसार, रुद्राक्ष माला से जप करने से साधक को शुभ परिणाम मिलते हैं। जप के दौरान कुछ खास नियमों का पालन करना अनिवार्य है। नियम का पालन न करने से शुभ फल प्राप्त नहीं होता है और महादेव की कृपा नहीं बरसती। आइए आपको इस लेख में बताते हैं रुद्राक्ष माला से जप के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।रुद्राक्ष माला के जप के नियम- रुद्राक्ष की माला से जप करने से पहले स्नान करना अनिवार्य है और फिर सूर्य देव को अर्घ्य दें।- माला से जप करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए।- पूजा के समय भूलकर भी जमीन पर नहीं बैठना चाहिए। बैठने के लिए किसी आसन का इस्तेमाल करें।- रुद्राक्ष की माला फेरते समय अंगूठे और मध्यम उंगली का ही इस्तेमाल करें।जप के दौरान भूलकर भी न करें ये गलतियां- जब आप जप करें तो ध्यान रखें कि माला तर्जनी उंगली से स्पर्श नहीं होनी चाहिए।- जप करने के बाद माला को किसी पवित्र स्थान पर रखें। भूलकर भी जमीन पर नहीं रखें।- ध्यान रखें कि रुद्राक्ष का माला टूटा या चटका हुआ नहीं होना चाहिए। यदि माला खंडित है, तो उसे किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर दें।- आप जिस माला से भगवान शिव का नाम का जप करते हैं, तो उस माला को किसी अन्य व्यक्ति को न दें।- यदि आप माला को गले में धारण करें, तो उस माला से कभी जप नहीं करें। दोनों माला अलग-अलग नहीं होने चाहिए।- ध्यान रखें कि माला जप करने वाला व्यक्ति को तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।- रुद्राक्ष की माला को गंदे हाथों से और बिना स्नान किए भूलकर भी नहीं छूना चाहिए। - धार्मिक मान्यता के अनुसार, सच्चे मन और इन नियमों के पालन करने से रुद्राक्ष की माला से जप करने से महादेव जल्दी प्रसन्न होंगे और आपको शुभ फलों की प्राप्ति होती है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:51:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 8 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 8 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 8 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशि (Aries)आज आपके प्रेम जीवन में एक नया उत्साह देखने को मिलेगा। पार्टनर के साथ चला आ रहा कोई पुराना तनाव समाप्त हो सकता है। अगर आप सिंगल हैं, तो आज किसी खास व्यक्ति से मुलाकात होने की पूरी संभावना है।लव टिप: खुलकर बातचीत करें, अपने जज्बातों को न छुपाएं।वृषभ राशि (Taurus)पार्टनर के साथ समय बिताने के लिए आज का दिन बेहतरीन है। आपके छोटे-छोटे प्रयास रिश्ते को और मजबूत बनाएंगे। अगर कोई गलतफहमी है, तो शांत मन से बैठकर बात करने का सही समय है।लव टिप: शाम को साथ में डिनर की योजना बना सकते हैं।मिथुन राशि (Gemini)आज बातचीत में थोड़ा संतुलन बनाए रखें। बिना सोचे-समझे कही गई कोई बात पार्टनर को ठेस पहुँचा सकती है। सिंगल लोगों के लिए आज सोशल मीडिया के ज़रिए किसी से सकारात्मक बातचीत शुरू हो सकती है।लव टिप: बहस से बचें और पार्टनर के दृष्टिकोण को भी समझें।कर्क राशि (Cancer)आज आप भावनात्मक रूप से अपने पार्टनर के काफी करीब महसूस करेंगे। साथी की ओर से कोई प्यारा सरप्राइज मिल सकता है। जो लोग नए रिश्ते की शुरुआत करना चाहते हैं, उनके लिए आज का दिन शुभ है।लव टिप: अपने साथी की छोटी-छोटी खुशियों का ध्यान रखें।सिंह राशि (Leo)आज लव लाइफ में उत्साह और रोमांच का माहौल रहेगा। आपका आकर्षण चरम पर होगा, जिससे पार्टनर आपकी तरफ आकर्षित रहेगा। अविवाहित लोगों के लिए कोई अच्छा प्रस्ताव आ सकता है।लव टिप: अपने रिश्ते में अहम (Ego) को जगह न दें।कन्या राशि (Virgo)आज काम की व्यस्तता के कारण लव लाइफ पर थोड़ा असर पड़ सकता है। समय न दे पाने की वजह से पार्टनर नाराज हो सकता है। दिन के अंत में थोड़ा समय साथ बिताने का प्रयास करें।लव टिप: प्यार में ईमानदारी और समय दोनों ज़रूरी हैं।तुला राशि (Libra)रिश्तों में सामंजस्य और प्रेम बना रहेगा। अगर किसी बात पर मतभेद था, तो आज उसका समाधान निकल जाएगा। पार्टनर के साथ किसी छोटी यात्रा या आउटिंग का प्लान बन सकता है।लव टिप: अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करें।वृश्चिक राशि (Scorpio)आज रिश्तों में थोड़ा धैर्य बनाए रखने की जरूरत है। पुरानी बातों को उखाड़ने से बचें, अन्यथा तनाव बढ़ सकता है। पार्टनर के मूड का ध्यान रखें और उनके फैसलों का सम्मान करें।लव टिप: बात को ज्यादा तूल न दें, संयम रखें।धनु राशि (Sagittarius)आज का दिन खुशियों भरा रहने वाला है। अगर आप अपने दिल की बात किसी से कहना चाहते हैं, तो आज का दिन अनुकूल है। शादीशुदा जोड़ों के बीच तालमेल बहुत अच्छा रहेगा।लव टिप: अपनी हंसी-खुशी से माहौल को खुशनुमा बनाए रखें।मकर राशि (Capricorn)पार्टनर का सहयोग आपके दिन को खास बना देगा। आप दोनों एक-दूसरे की जरूरतों को अच्छी तरह से समझेंगे। सिंगल जातकों के जीवन में किसी नए व्यक्ति का प्रवेश हो सकता है।लव टिप: एक-दूसरे पर भरोसा बनाए रखें।कुंभ राशि (Aquarius)आज लव लाइफ में कुछ नयापन देखने को मिल सकता है। नए विचार और योजनाएं आपके रिश्ते को तरोताजा करेंगी। पार्टनर के साथ किसी गंभीर विषय पर सकारात्मक बातचीत हो सकती है।लव टिप: पार्टनर की बात को ध्यान से सुनें।मीन राशि (Pisces)भावनात्मक रूप से आज का दिन काफी यादगार रहेगा। साथी के साथ आपकी समझ बढ़ेगी और रिश्ते में परिपक्वता आएगी। पार्टनर के साथ बिताए गए पल आपको सुकून देंगे। लव टिप: दिल की बात कहने में संकोच न करें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:51:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Love, Horoscope, For, August, 2026, आज, का, प्रेम, राशिफल, अगस्त, 2026, प्रेमियों, के, लिए, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन</media:keywords>
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<title>Horoscope 08 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष नए लोगों से भेंट होंगी, जो लाभदायक होगी। संतान की प्रगति से सुख और प्रसन्नता। मनमर्जी नहीं चलेगी, मर्यादा में रहें। धन प्राप्ति के नए साधन बनेंगे।वृषचिंताओं से मुक्ति। अच्छे समाचार चिंता से मुक्त करेंगे। समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी। मांगलिक कार्य संपन्न होगा।मिथुनलोग आपकी प्रशंसा करेंगे। मेहमानों का स्वागत करेंगे। घर को सजाने संवारने में व्यस्त रहेंगे। अध्ययन-अध्यापन में रूचि और लाभ।कर्कखर्च की अधिकता से परेशानी। मित्रों से सहयोग मिलेगा, काम बनेंगे। व्यापारिक साझेदारी में लाभ होगा। परिवार और कार्यलय में तनाव।सिंहमनोकामनाएं पूरी होगी। मान-सम्मान होगा, धन की प्राप्ति भी। सप्ताह का श्रेष्ठ दिन सिद्ध होगा। शुभ समाचार प्राप्त होगा।कन्यास्वास्थ्य में सुधार महसूस करेंगे। स्वभाव सामान्य रखें। आश्चर्यजनक सुखर परिणाम। कोई आरोप लग सकता है।तुलास्वास्थ्य का ध्यान रखना आवश्यक है। अशुभ ग्रह चाल-अप्रिय घटना। सामाजिक कार्यों में उदार रहेंगे। विष जैसे रसापन से हानि।वृश्चिक दस्तावेजों में गड़बड़ है, सोचकर हस्ताक्षर करें। आपकी मजबूरी का लाभ उठा सकते हैं। मन और श्रम के अनुसार धन लाभ नहीं होगा। खास व्यक्तियों से भेंट होगी।धनुखास रिश्तेदार के स्वास्थ्य की चिंता सताएगी। विशेष उत्तरादायित्व के लिए यात्रा की संभावना। नई योजना/कार्य का &#039;श्रीगणेश&#039;। थकान महसूस करेंगे।मकर सम्पत्ति का विवाद हल हो सकता है। सरकारी अफसरों के खिलाफ कार्यवाही संभव। कार्यों में नाव डूब सकती है। मन में नकारात्मकता को न आने दें।कुंभपरीक्षा में सफलता मिलेगी। दोपहर बाद भटकाव चिंता और भागदौड़। अनेक कार्यक्रमों में व्यस्त रहेंगे। कार्य व्यवसाय के संबंध में शिक्षण प्रशिक्षण लेंगे।मीनसम्पत्ति संबंधी कार्यों में लाभ होगा। अंहकार और आडम्डर ठीक नहीं रहेंगे। कटु वाणी तथ वाणी दोष से हानि होगी। दोपहर बाद महत्वपूर्ण काम हाथ में लें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:51:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Horoscope, August, 2026, Aaj, Rashifal:, सभी, राशियों, का, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन, पढ़ें, आज, का, राशिफल</media:keywords>
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<title>Sawan Shivratri 2026 Date and Time: जानिए कब है सावन की शिवरात्रि?  जानें शिवलिंग पर जल चढ़ाने के नियम</title>
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<description><![CDATA[ सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। यह पावन महीना भगवान शिव की आराधना, कांवड़ यात्रा, हरियाली और श्रृंगार से सजा बेहद खास होता है। इस दौरान भक्तजन भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना करते हैं और उनसे मनचाहा वर मांगते हैं। सावन के महीने में कई व्रत और त्योहार पड़ते हैं। खासकर सावन में शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। आइए आपको बताते हैं सावन की शिवरात्रि कब है और इस दिन का क्या महत्व है।कब है सावन की शिवरात्रि?श्रावण मास की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि मनाई जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार सावन शिवरात्रि की 11 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी है। शिवरात्रि की तिथि 4 बजकर 43 मिनट पर शुरु होगी और समापन 12 अगस्त को रात 01 बजकर 51 मिनट पर होगा। उदया तिथि और निशिता मुहूर्त के आधार पर 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि मनाना काफी शुभ माना जाएगा। वहीं, 11 अगस्त की मध्यरात्रि को भोलेनाथ का पूजन बहुत फलदाई माना जाता है।सावन शिवरात्रि का महत्वधार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन शिवरात्रि के दिन कांवड़िये पवित्र नदियों से गंगाजल लाकर मुख्य शिव मंदिरों में शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं। माना जाता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से भोलेनाथ की पूजा करने से भगवान शिव अधिक प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है जो कि इस प्रकार है, समुद्र मंथन के समय जब भगवान शिव ने विष ग्रहण किया था, तो देवताओं ने गंगाजल अर्पित किया था।सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग पर जल चढ़ाने के नियम - पवित्रता का विशेष ध्यान रखें।- जल अर्पित करते समय मुंह उत्तर दिशा में रखें।- जब आप जल अर्पित करें, तो उस समय  &#039;ॐ नमः शिवाय&#039; या &#039;बम बम भोले&#039; का जाप करें।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Numerology Analysis: अगस्त में मूलांक 1 और 5 वालों की चमकेगी किस्मत, Career Opportunities के साथ मिलेगा बड़ा लाभ</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र में ग्रह-नक्षत्रों की गणनाओं का विशेष महत्व होता है। अगस्त का महीना शुरू हो चुका है। ऐसे में लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि यह महीना उनके लिए कैसा रहने वाला है। बता दें कि अंक ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक अगस्त का महीना कुछ मूलांकों के लिए नए अवसरों को लेकर आ सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि मूलांक 1 और मूलांक 5 वाले जातकों के लिए यह महीना कैसा रहने वाला है।मूलांक 1 के लिए यह महीनाजिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को होता है, उनका मूलांक 1 होता है। इस मूलांक के स्वामी ग्रह सूर्यदेव होते हैं। ऐसे में मूलांक 1 वाले जातकों के लिए अगस्त का महीना काफी बेहतरीन और शुभ रह सकता है। लंबे समय से अटका हुआ कोई काम आगे बढ़ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। व्यापार में नए तरह के अवसरों की प्राप्ति हो सकती है। वहीं अगस्त के महीने में कोई बड़ा फैसला आपके पक्ष में आ सकता है।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 8 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 8 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनमूलांक 5 के लिए यह महीनाकिसी भी महीने की 05, 14, 23 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 5 होता है। इस मूलांक के स्वामी बुध ग्रह होते हैं। करियर के लिहाज से मूलांक 5 वालों के लिए इस महीने का पहला सप्ताह शानदार रह सकता है। कुछ लोगों को प्रोफेशनल मौके के कारण किसी दूसरे शहर में जाना पड़ सकता है। इसमें कुछ मुश्किलें तो आएंगी, लेकिन निराश न हों। क्योंकि यह बदलाव आपके भले के लिए है। आपको कुछ छोटी-मोटी बीमारियां परेशान कर सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Numerology, Analysis:, अगस्त, में, मूलांक, और, वालों, की, चमकेगी, किस्मत, Career, Opportunities, के, साथ, मिलेगा, बड़ा, लाभ</media:keywords>
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<title>Kamika Ekadashi 2026: विष्णु की पूजा और दान करने से मिलता है कभी न खत्म होने वाला पुण्य</title>
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<description><![CDATA[ हर वर्ष सावन माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन कामिका एकादशी मनाई जाती है। यह पर्व भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन भगवान विष्णु एवं धन की देवी मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है।  9 अगस्त को सावन महीने की एकादशी का व्रत किया जाएगा। जिसका नाम कामिका एकादशी है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 8 अगस्त 2026 को रात 3:29 मिनट से आरंभ होगी और 9 अगस्त 2026 को रात 12:34 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार कामिका एकादशी का व्रत  9 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। कामिका एकादशी व्रत की कथा सुनना यज्ञ करने के समान है। इस व्रत के बारे में ब्रह्माजी ने देवर्षि नारद को बताया कि पाप से भयभीत मनुष्यों को कामिका एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। एकादशी व्रत से बढ़कर पापों के नाशों का कोई उपाय नहीं है। स्वयं प्रभु ने कहा है कि कामिका व्रत से कोई भी जीव कुयोनि में जन्म नहीं लेता। जो इस एकादशी पर श्रद्धा-भक्ति से भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पण करते हैं, वे इस समस्त पापों से दूर रहते हैं। पुराणों में कहा गया है कि इस तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली इस एकादशी पर भगवान विष्णु को तुलसी पत्र चढ़ाने से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं। इस दिन तीर्थ स्नान और दान से कई गुना पुण्य फल मिलता है।ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि कामिका एकादशी पर शंख, चक्र, गदाधारी भगवान विष्णु का पूजन होता है। भीष्म पितामह ने नारदजी को इस एकादशी का महत्व बताया है। उन्होंने कहा कि जो मनुष्य इस एकादशी को धूप, दीप, नैवेद्य आदि से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उन्हें गंगा स्नान के फल से भी उत्तम फल की प्राप्ति होती है। इस एकादशी की कथा सुनने से ही वाजपेय यज्ञ का फल मिल जाता है। भीष्म कहते हैं कि व्यतिपात योग में गंडकी नदी में और सूर्य-चन्द्र ग्रहण के दौरान स्नान करने से जितना पुण्य मिलता है। उतना ही महापुण्य सावन महीने में आने वाली कामिका एकादशी पर व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से मिल जाता है। इस दिन तुलसी पत्र से भगवान विष्णु की पूजा करने का भी विधान बताया गया है।इसे भी पढ़ें: विभिन्न द्रव्यों से बनते हैं शिवलिंग, जानिये किस द्रव्य से बने शिवलिंग के पूजन से क्या लाभ होता है?एकादशी तिथि भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 8 अगस्त 2026 को रात 3:29 मिनट से आरंभ होगी और 9 अगस्त 2026 को रात 12:34 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार कामिका एकादशी का व्रत  9 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।शुभ योगभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि पंचांग के अनुसार कामिका एकादशी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। यह शुभ योग सुबह 6:03 मिनट से 6:22 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि इस योग में भगवान विष्णु की पूजा और दान-पुण्य करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। व्रत का संकल्पभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि स्कंद पुराण में बताया गया है कि सावन महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी पर व्रत, पूजा और दान से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं। लेकिन, जानबूझकर दोबारा कोई पाप या अधर्म नहीं होगा, ऐसा संकल्प भगवान विष्णु के सामने लेने पर ही इसका फल मिलता है। ये व्रत साल की 24 एकादशियों में खास माना गया है।विष्णु पूजा कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि महाभारत और भविष्य पुराण में बताया गया है कि सावन महीने के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इनके अलावा विष्णुधर्मोत्तर पुराण में भी जिक्र है कि सावन महीने में भगवान विष्णु की पूजा और व्रत-उपवास से मिलने वाला पुण्य कभी खत्म नहीं होता है। पुराणों में कहा गया है कि सावन महीने के दौरान पंचामृत और शंख में दूध भरकर भगवान विष्णु का अभिषेक करने से जाने-अनजाने में हुए हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं।निर्जल व्रतभविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि सावन महीने में आने वाली एकादशियों को पर्व भी कहा जाता है। सावन मास में भगवान नारायण की पूजा करने वालों से देवता, गंधर्व और सूर्य आदि सब पूजित हो जाते हैं। एकादशी के दिन स्नानादि से पवित्र होने के बाद पूजा का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु की मूर्ति की पूजा करना चाहिए। भगवान विष्णु को फूल, फल, तिल, दूध, पंचामृत और अन्य सामग्री चढ़ाकर आठों प्रहर निर्जल रहना चाहिए। यानी पूरे दिन बिना पानी पीए विष्णु जी के नाम का स्मरण करना चाहिए। एकादशी व्रत में ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा का भी बहुत महत्व है। इस प्रकार जो यह व्रत रखता है उसकी कामनाएं पूरी होती हैं।गौ दान का पुण्यभविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि पितामह ने बताया कि पूरे साल भगवान विष्णु की पूजा न कर सकें तो कामिका एकादशी का उपवास करना चाहिए। इससे बछड़े सहित गौदान करने जितना पुण्य मिल जाता है। सावन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और उपवास करने से सभी देवता, नाग, किन्नर और पितरों की पूजा हो जाती है। जिससे हर तरह के रोग, शोक, दोष और पाप खत्म हो जाते हैं।मिलता है स्वर्गकुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि कामिका एकादशी के व्रत के बारे में खुद भगवान ने कहा है कि मनुष्यों को अध्यात्म विद्या से जो फायदा मिलता है उससे ज्यादा फल कामिका एकादशी का व्रत करने से मिल जाता है। इस दिन व्रत करने से मनुष्य को यमराज के दर्शन नहीं होते हैं। बल्कि स्वर्ग मिलता है। जिससे नरक के कष्ट नहीं भोगने पड़ते।दीपदान भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि भीष्म ने नारदजी को बताया कि कामिका एकादशी की रात में जागरण और दीप-दान करने से जो पुण्य मिलता है। उसको  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:54 +0530</pubDate>
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<title>Nag Panchami 2026: कब है नाग पंचमी? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त, महत्व, कथा, मंत्र और पूजा विधि</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में नाग यानी सांप को भगवान शिव से जुड़ा और पूजनीय माना जाता है। हर साल सावन महीने में नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने और उन्हें दूध अर्पित करने की परंपरा है। माना जाता है कि नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से घर-परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।हिंदू पंचांग के अनुसार सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है। नाग पंचमी 2026 में 17 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है।नाग पंचमी 2026 कब है?साल 2026 में नाग पंचमी का त्योहार 17 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा। पंचमी तिथि की शुरुआत 16 अगस्त की शाम 4 बजकर 55 मिनट से होगी और इसका समापन 17 अगस्त की शाम 5 बजे होगा। नाग पंचमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद नाग देवता और भगवान शिव की पूजा की जाती है। कई जगहों पर लोग मिट्टी से बने नाग की प्रतिमा या नाग के चित्र की भी पूजा करते हैं।नाग पंचमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्तनाग पंचमी पर पूजा के लिए सुबह का समय शुभ माना जाता है। साल 2026 में नाग पंचमी की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजे से 8 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। पूजा के लिए कुल समय 2 घंटे 10 मिनट का है।नाग पंचमी का महत्व क्या है?नाग पंचमी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग देवता की पूजा करने से परिवार की सुख-शांति बनी रहती है। भगवान शिव के गले में भी नाग विराजमान रहते हैं, इसलिए नाग पंचमी के दिन शिव पूजा को भी खास माना जाता है। गरुड़ पुराण में भी नाग पूजा का उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार घर के मुख्य दरवाजे के दोनों ओर नाग के चित्र बनाकर उनकी पूजा करना शुभ माना जाता है। इसे नाग पूजा की एक पुरानी परंपरा माना जाता है।नाग पंचमी के दिन कई महिलाएं व्रत रखती हैं और नाग देवता की पूजा करती हैं। इस दिन लड्डू और खीर जैसे पकवान बनाकर ब्राह्मणों को भोजन कराने की भी परंपरा बताई गई है। भगवान शिव के मंदिर में जाकर पूजा करना और नाग देवता को दूध अर्पित करना भी इस दिन की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। इसे भी पढ़ें: Sawan Shivratri 2026 Date and Time: जानिए कब है सावन की शिवरात्रि? जानें शिवलिंग पर जल चढ़ाने के नियमनाग पंचमी की पूजा कैसे की जाती है?नाग पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। पूजा के लिए नाग देवता की मिट्टी, चांदी या पत्थर से बनी प्रतिमा रख सकते हैं। कुछ जगहों पर पांच नागों की प्रतिमा स्थापित करने की भी परंपरा है।नाग देवता की प्रतिमा को साफ स्थान पर रखकर सबसे पहले भगवान गणेश और भगवान शिव का ध्यान करें। इसके बाद नाग देवता की पूजा करें। प्रतिमा पर जल, दूध, शहद और अन्य पूजा सामग्री अर्पित की जा सकती है। इसके बाद नाग पंचमी के मंत्र का जाप करें और भगवान से परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।नाग पंचमी की पूजा विधिनाग पंचमी की पूजा के लिए सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करें और वहां नाग देवता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद नाग देवता को जल, दूध और शहद अर्पित करें। पूजा में फूल, अक्षत, रोली और मिठाई भी चढ़ाई जा सकती है। भगवान शिव की पूजा करते समय शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाएं। पूजा के दौरान नाग देवता के मंत्र का जाप करें। अंत में नाग पंचमी की कथा सुनें या पढ़ें और आरती करें। पूजा पूरी होने के बाद परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।नाग पंचमी की कथा क्या है?नाग पंचमी की कथा महाभारत के राजा जनमेजय और सर्प यज्ञ से जुड़ी मानी जाती है। धार्मिक कथा के अनुसार राजा जनमेजय के पिता राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के काटने से हुई थी। अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए जनमेजय ने सभी सांपों को खत्म करने के लिए एक बड़ा यज्ञ शुरू किया। यज्ञ में किए जा रहे मंत्रों के कारण कई सांप अग्नि कुंड में गिरने लगे। जब नागों पर संकट आया, तब देवी मनसा के पुत्र ऋषि आस्तिक ने राजा जनमेजय से यज्ञ रोकने का अनुरोध किया।ऋषि आस्तिक की बात मानकर राजा जनमेजय ने यज्ञ रोक दिया और इस तरह कई नागों की जान बच गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह घटना सावन महीने की पंचमी तिथि को हुई थी। इसी वजह से इस दिन नाग पंचमी मनाने की परंपरा शुरू होने की कथा कही जाती है।नाग पंचमी 2026 का मंत्रनाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप किया जाता है:सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः।ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नमः॥मंत्र का जाप करते समय नाग देवता का ध्यान करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।नाग पंचमी पर क्या चढ़ाया जाता है?नाग पंचमी के दिन नाग देवता की प्रतिमा या तस्वीर पर जल, दूध और शहद चढ़ाने की परंपरा है। इसके अलावा फूल, अक्षत, रोली और मिठाई भी अर्पित की जाती है। कई स्थानों पर लोग मिट्टी से नाग की प्रतिमा बनाकर उसकी पूजा करते हैं। पूजा के बाद नाग पंचमी की कथा सुनने और आरती करने की भी परंपरा है।नाग पंचमी पर भगवान शिव की पूजा का महत्वभगवान शिव के गले में नाग विराजमान रहते हैं। इसी वजह से नाग पंचमी के दिन भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। भक्त इस दिन शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाते हैं और भगवान शिव से परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं।नाग पंचमी पर क्या नहीं करना चाहिए?धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी के दिन सांपों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। सांपों को पकड़कर या परेशान करके पूजा करने के बजाय नाग देवता की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा करना बेहतर माना जाता है।पूजा के दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखें और श्रद्धा के साथ पूजा करें। जीवित सांपों को दूध पिलाने की कोशिश करने के बजा ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:54 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Nag, Panchami, 2026:, कब, है, नाग, पंचमी, जानें, तिथि, पूजा, मुहूर्त, महत्व, कथा, मंत्र, और, पूजा, विधि</media:keywords>
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<title>वृंदावन का रहस्यमयी Bhandirvan, जहां स्वयं Brahma Ji ने कराया था Radha&#45;Krishna का दिव्य विवाह: जानिए इसका इतिहास</title>
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<description><![CDATA[ धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की लीलाभूमि ब्रज अत्यंत अलौकिक और रहस्यमयी माने जाते हैं। असल में वृंदावन के 12 मुख्य वनों में शामिल भांडीरवन एक ऐसा ही परम पवित्र स्थल है, जो श्री राधा-कृष्ण के अनोखे और दिव्य विवाह का साक्षी बना है। यहां के लोकल लोगों का मानना है कि राधा-कृष्ण का सांसारिक विवाह नहीं हुआ था, हालांकि शास्त्रों और ब्रज की प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, स्वयं जगत्पिता ब्रह्मा जी ने भांडीरवन में आचार्य बनकर दोनों का विवाह संपन्न करवाया था। वैसे यह पावन स्थल आज भी भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत केंद्र है, जहां कदम रखते ही आलौकिक शांति का अनुभव प्राप्त होता है। आइए आपको बताते हैं भांडीरवन के पौराणिक इतिहास, इसकी रहस्यमयी कथा और अन्य महत्वपूर्ण बातें।क्या कहती है भांडीरवन से जुड़ी कथा?पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय नंदबाबा रूपी श्रीकृष्ण को गोद में लेकर भांडीरवन से गुजर रहे थे। उसी दौरान भगवान की इच्छा से अचानक भयंकर आंधी-तूफान आ गया। नंदबाबा घबरा गए और कृष्ण को सुरक्षित रखने के लिए एक विशाल वटवृक्ष के नीचे खड़े हो गए। इसी दौरान वहां श्री राधारानी का प्राकट्य हुआ। नंदबाबा दोनों को दिव्य स्वरुप से भली-भांति परिचित थे, उन्होंने बाल-कृष्ण को राधा जी की गोद में सौंप दिया और प्रणाम कर वहां से चले गए। जब नंदबाबा यहां से चले गए तो आंधी थम गई और श्रीकृष्ण ने अपना पूर्ण पुरुषोत्तम रुप धारण कर लिया है। फिर  बाद में भगवान की योगमाया शक्ति से वहां ब्रह्मा जी प्रकट हुए। ब्रह्मा जी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ श्री राधा और कृष्ण का विवाह संस्कार संपन्न करवाया।भांडीरवन की मुख्य विशेषताएंराधा-कृष्ण मुख्य मंदिर - विवाह स्थल मंदिर- आपको बता दें कि, भांडीरवन के मुख्य मंदिर में एक विशाल पेड़ के नीचे श्री राधा-कृष्ण की मूर्तियां हैं, जहां वे एक-दूसरे को वरमाना पहना रहे हैं और ब्रह्मा जी विवाह की रस्में पूरी करा रहे हैं।- बलराम जी का मंदिर- यहां पर विवाह स्थल के पास ही बलराम जी का मंदिर स्थित है। यह वह स्थान है, जहां बलराम जी ने कंस द्वारा भेजे गए दैत्य प्रलंबसुर का वध किया था।भांडीरवन का गोपनीय रहस्य- एक कल्प भजन का पुण्य- श्रीमद्भागवत के मुताबिक, भांडीरवन में 1 घंटा बिताना 1 कल्प (करीब 4.32 अरब वर्ष) तक लगातार भजन-कीर्तन करने के समान फलदायी मानी गई है।- राधारानी की अनुकंपा- धार्मिक मान्यता है कि यहां वहीं श्रद्धालु आते हैं, जिन्हें राधारानी बुलाती हैं। पास में स्थित वंशीवट का अद्भुत रहस्यभांडीरवन से करीब 600 मीटर की दूरी पर स्थित वंशीवट अत्यंत रमणीक स्थान है। धार्मिक मान्यता है कि इस स्थान पर श्री कृष्ण अपने ग्वाल-बालों के साथ बैठकर भोजन किया करते थे और अपनी मधुर वंशी बजाकर राधारानी व गोपियों को बुलाते थे। यहां भी एक खास वृक्ष हैं, धार्मिक मान्यता है कि यदि कोई सच्चा साधक अपने कान इस पेड़ के तने पर लगाए, तो उसे आज भी रासलीला के मृंदग की मधुर ध्वनि सुनाई देती है।कैसे पहुंचे भांडीरवन?- टैक्सी या पर्सनल वाहन- वृंदावन से हाईवे मार्ग से यह करीब 21 किमी की दूरी पर है, जहां कैब या अपनी गाड़ी से आसानी से पहुंचा जा सकता है।- बाइक या यमुना मार्ग- मानसून के अलावा, आप अन्य किसी भी दिनों में केशी घाट से यमुना पार करके बेलवन होते हुए मात्र 8 किमी में भांडीरवन पहुंचा जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:51 +0530</pubDate>
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<title>विभिन्न द्रव्यों से बनते हैं शिवलिंग, जानिये किस द्रव्य से बने शिवलिंग के पूजन से क्या लाभ होता है?</title>
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<description><![CDATA[ शिवलिंग सम्पूर्ण वेदमय, समस्य देवमय, समस्त भूधर, सागर, गगनमिश्रित सम्पूर्ण विश्वब्रह्माण्डमय माना जाता है। वह शिवशक्तिमय, त्रिगुणमय और त्रिदेवमय भी सिद्ध होने से सबके लिए उपास्य है। इसलिये सृष्टि के प्रारम्भ से ही समस्त देवता, ऋषि, मुनि, असुर, मनुष्यादि विभिन्न ज्योतिर्लिंगों, स्वयंभूलिंग, मणिमय, रत्नमय, धातुमय, मृण्मय, पार्थिव तथा मनोमय आदि लिंगों की उपासना करते आये हैं। स्कन्दपुराण के अनुसार इसी उपासना से इन्द्र, वरूण, कुबेर, सूर्य, चंद्र आदि का स्वर्गाधिपत्य, राजराजाधिपत्य, दिक्पालपद, लोकपालपद, प्राजापत्य पद तथा पृथ्वी पर राजाओं के सार्वभौम चक्रवर्ती साम्राज्य की प्राप्ति होती आयी है। मार्कण्डेय, लोमश आदि ऋषियों के दीर्घायुष्टव, नैरुज्य, ज्ञान−विज्ञान तथा अणिमादिक अष्ट ऐश्वर्यों की सिद्धि का मूल कारण भी योगयोगेश्वर भगवान शंकर के मूल प्रतीक लिंग का विधिवत पूजन ही रहा है।भारत वर्ष में &#039;पार्थिव&#039; पूजा के साथ ही विशेष स्थानों में पाषाणमय शिवलिंग प्रतिष्ठित और पूजित होते हैं। ये अचल मूर्तियां होती हैं। वाणलिंग या सोने−चांदी के छोटे लिंग जंगम कहलाते हैं। इन्हें प्राचीन पाशुपत−सम्प्रदाय एवं लिंगायत−सम्प्रदाय वाले पूजा के व्यवहार में लाने के लिए अपने साथ भी रखते हैं। लिंग विविध द्रव्यों के बनाये जाते हैं। गरूण पुराण में इसका अच्छा विस्तार है। उसमें से कुछ का संक्षेप में परिचय इस प्रकार है-इसे भी पढ़ें: Ellora Kailasanatha Temple: एलोरा में भगवान शिव का दिव्य धाम, 7000 मजदूरों की मेहनत से बना Kailasa Temple1. गन्धलिंग दो भाग कस्तूरी, चार भाग चंदन और तीन भाग कुंकुम से बनाये जाते हैं। शिवसायुज्यार्थ इसकी अर्चा की जाती है।2. पुष्पलिंग विविध सौरमय फूलों से बनाकर पृथ्वी के आधिपत्य लाभ के लिए पूजे जाते हैं।3. गोशकृल्लिंग, स्वच्छ कपिल वर्ण की गाय के गोबर से बनाकर पूजने से ऐश्वर्य मिलता है। अशुद्ध स्थान पर गिरे गोबर का व्यवहार वर्जित है।4. बालुकामयलिंग, बालू से बनाकर पूजने वाला विद्याधरत्व और फिर शिवसायुज्य प्राप्त करता है।5. यवगोधूमशालिजलिंग, जौ, गेहूं, चावल के आटे का बनाकर श्रीपुष्टि और पुत्रलाभ के लिए पूजते हैं।6. सिताखण्डमयलिंग मिस्री से बनता है, इसके पूजन से आरोग्य लाभ होता है।7. लवणजलिंग हरताल, त्रिकटु को लवण में मिलाकर बनता है। इससे उत्तम प्रकार का वशीकरण होता है।8. तिलपिष्टोत्थलिंग तिल को पीसकर उसके चूर्ण से बनाया जाता है, यह अभिलाषा सिद्ध करता है।9−11. भस्मयलिंग सर्वफलप्रद है, गुडोत्थलिंग प्रीति बढ़ाने वाला है और शर्करामयलिंग सुखप्रद है।12. वंशांकुरमय (बांस के अंकुर से निर्मित) लिंग वंशकर है।13−14. पिष्टमय विद्याप्रद और दधिदुग्धोद्भवलिंग कीर्ति, लक्ष्मी और सुख देता है।15−18. धान्यज धान्यप्रद, फलोत्थ फलप्रद, धात्रीफलजात मुक्तिप्रद, नवनीतज कीर्ति और सौभाग्य देता है।19−24. दूर्वाकाण्डज अपमृत्युनाशक, कर्पूरज मुक्तिप्रद, अयस्कान्तमणिज सिद्धिप्रद, मौक्तिक सौभाग्यकर स्वर्णिनर्मित महामुक्तिप्रद, राजत भूतिवर्धक है।25−33. पित्तलज तथा कांस्यज मुक्तिद, त्रपुज, आयस और सीसकज शत्रुनाशक होते हैं। अष्टधातुज सर्विसद्धिप्रद, अष्टलौहजात कुष्ठनाशक, वैदूर्यज शत्रुदर्पनाशक और स्फटिकलिंग सर्वकामप्रद हैं।परंतु ताम्र, सीसक, रक्तचंदन, शंख, कांसा, लोहा, इन द्रव्यों के लिंगों की पूजा कलियुग में वर्जित है। पारे का शिवलिंग विहित है यह महान ऐश्वर्यप्रद है। लिंग बनाकर उसका संस्कार पार्थिव लिंगों को छोड़कर प्रायः अन्य लिंगों के लिए करना पड़ता है। स्वर्णपात्र में दूध के अंदर तीन दिनों तक रखकर फिर &#039;त्र्यम्बकं यजामहे&#039; इत्यादि मंत्रों से स्नान कराकर वेदी पर पार्वतीजी की षोडशोपचार से पूजा करनी उचित है। फिर पात्र से उठाकर लिंग को तीन दिन गंगाजल में रखना होता है। फिर प्राण प्रतिष्ठा करके स्थापना की जाती है।पार्थिवलिंग एक या दो तोला मिट्टी लेकर बनाते हैं। ब्राह्मण सफेद, क्षत्रिय लाल, वैश्य पीली और शूद्र काली मिट्टी ग्रहण करते हैं। परंतु यह जहां अव्यवहार्य हो, वहां सामान्य मृत्तिका का प्रयोग भी किया जा सकता है। लिंग साधारणतया अंगुष्ठप्रमाण का बनाया जाता है। पाषाणादि के लिंग इससे बड़े भी बनते हैं। लिंग से दूनी वेदी और उसका आधा योनिपीठ का मान होना चाहिए। योनिपीठ या मस्तकादि अंग बिना लिंग बनाना अशुभ है।लिंगमात्र की पूजा में पार्वती−परमेश्वर दोनों की पूजा हो जाती है। लिंग के मूल में ब्रह्मा, मध्य देश में त्रैलोक्यनाथ विष्णु और ऊपर प्राणस्वरूप महादेव स्थित हैं। वेदी महादेवी हैं और लिंग महादेव हैं। अतः एक लिंग की पूजा में सबकी पूजा हो जाती है।- शुभा दुबे ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:50 +0530</pubDate>
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<title>Lucknow के Mohanlalganj में स्थित Kashishwar Temple, एक ही शिवलिंग पर दर्शन देता है पूरा शिव परिवार</title>
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<description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज में स्थित काशीश्वर मंदिर की अपनी विशेषता के लिए फेमस है। यहां पर स्थापित करीब 4 फीट ऊंचे शिवलिंग में पूरा शिव परिवार विराजमान माना जाता है। इस शिवलिंग पर प्राकृतिक रूप से बनी लाल धारियों और आकृतियों में मां पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की छवि साफ दिखेगी। राजा काशी प्रसाद द्वारा यह मंदिर 1860 में बनवाया गया था। तो आइए जानते हैं इस मंदिर की खासियत के बारे में...इतिहासमंदिर निर्माण का कार्य राजा काशी प्रसाद ने 1860 में करवाया था। उन्हीं के नाम पर इस मंदिर का नाम भी काशीश्वर महादेव पड़ा। यह मंदिर भारतीय स्थापत्य कला और लखनवी नवाबी वास्तुकला के अधार पर बना है। इस मंदिर में अष्टकोणीय यानी 8 कोनों वाली संरचना है। वहीं इसके चारों और 8 छोटे शिवालय बने हुए हैं।इसे भी पढ़ें: विभिन्न द्रव्यों से बनते हैं शिवलिंग, जानिये किस द्रव्य से बने शिवलिंग के पूजन से क्या लाभ होता है?इस मंदिर का शिखर इतना ऊंचा है कि इसको कई किमी दूर से भी देखा जा सकता है। काशीश्वर महादेव का मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्थल है।शिवलिंग पर विराजमान पूरा शिव परिवारमोहनलालगंज में मौजूद इस मंदिर में शिवलिंग में मां पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की छवि है। शिवलिंग पर बनी लाल धारियों को शिव परिवार की छवि मानी जाती है। इसके अलावा गर्भग्रह में भगवान गणेश, मां दुर्गा, सूर्य देव और भगवान विष्णु की मूर्तियां विराजमान हैं। वहीं मंदिर के गर्भग्रह के बाहर नंदी महाराज विराजमान हैमंदिर खुलने और आरती का समयमंदिर सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहां भक्तों की भारी भीड़ लगती है। प्रतिदिन शाम को डमरू, नगाड़ों और मंजीरों की थाप पर बाबा का भव्य शृंगार और महाआरती की जाती है। इसके अलावा वह मंदिर के बारे में बताते हुए कहते हैं कि मंदिर का शिखर इतना ऊंचा है, कि पांच किलोमीटर दूर से यह नजर आता है।ऐसे पहुंचे काशीश्वर महादेव मंदिरअगर आप भी इस सावन काशीश्वर महादेव मंदिर के दर्शन करना चाहती हैं। तो आपको लखनऊ चारबाग स्टेशन या रायबरेली स्टेशन आना होगा।लखनऊ चारबाग स्टेशन से मोहनलालगंज की दूरी 25-30 किमी है। चारबाग से आप ऑटो या बस से यहां तक आ सकती हैं।वहीं रायबरेली स्टेशन से मोहनलालगंज की दूरी करीब 58 किमी है। आप बस या ऑटो से यहां पहुंच सकती हैं।वहीं मोहनलालगंज मेन रोड से मंदिर की दूरी करीब 740 किमी है। यहां से आप पैदल या फिर ऑटो आदि से मंदिर तक पहुंच सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 16:50:50 +0530</pubDate>
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<title>Ellora Kailasanatha Temple: एलोरा में भगवान शिव का दिव्य धाम, 7000 मजदूरों की मेहनत से बना Kailasa Temple</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में भगवान शिव और मंदिरों का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। माना जाता है कि भगवान ही इस सृष्टि का संचालन करते हैं। हिंदू मान्यता के मुताबिक भगवान हर जगह मौजूद हैं, लेकिन भारत की संस्कृति ऐसी है कि यहां पर जगह-जगह आपको अलग-अलग देवी-देवताओं के मंदिर मिल जाएंगे। सदियों से ऐसा चलता आ रहा है कि लोग अपनी श्रद्धा से मंदिरों का निर्माण करवाते हैं।आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको एक 100 साल के भी ज्यादा समय में बने एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित एलोरा की गुफाओं में यह मंदिर है। इस मंदिर को एलोरा के कैलाश मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। 276 फीट लंबे और 154 फीट चौड़े इस मंदिर की खासियत यह है कि इसको सिर्फ एक चट्टान काटकर बनाया गया है। वहीं इसकी ऊंचाई की बात करें, तो यह मंदिर किसी दो या तीन मंजिला इमारत के बराबर है।इसे भी पढ़ें: Moksha के लिए Kashi में सिर्फ Vishwanath नहीं, इन 6 प्राचीन Temples की चौखट पर माथा टेकना है बेहद जरूरीमाना जाता है कि इस मंदिर के निर्माण में करीब 40 हजार टन वजनी पत्थरों को काटा गया था। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसको हिमालय के कैलाश की तरह देने की कोशिश की गई है।माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण कराने वाले राजा का मानना था कि अगर कोई व्यक्ति हिमालय तक नहीं पहुंच पाए, तो वह यहां पर आकर अपने आराध्य भगवना शिव का दर्शन कर लें।मालखेड स्थित राष्ट्रकूट वंश के नरेश कृष्ण (प्रथम) (757-783 ई.) ने इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया था। इसको बनाने में 100 साल से अधिक का समय लगा था। करीब 7000 मजदूरों ने दिन-रात एक करके इस मंदिर के निर्माण में अपना योगदान दिया था।भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर से लोग इस भव्य मंदिर को देखने के लिए आते हैं। यह मंदिर में आज तक कभी पूजा की गई हो, इसका कभी प्रमाण नहीं मिलता है। यहां पर कोई पुजारी नहीं है। साल 1983 में यूनेस्को ने इस जगह को &#039;विश्व विरासत स्थल&#039; घोषित किया है। ]]></description>
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<title>Mars Transit Gemini: तुला से मीन तक किसकी चमकेगी किस्मत, जानें Career और Success पर ग्रहों का गहरा असर</title>
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<description><![CDATA[ वैदिक ज्योतिष में ग्रहों का गोचर विशेष माना जाता है। साहस और पराक्रम के ग्रह मंगलदेव 2 अगस्त 2026 को, बुध की राशि मिथुन में गोचर किया है। मंगल की ऊर्जा और बुध की बुद्धि का यह मिलन सभी 12 राशियों के जीवन के बड़े बदलाव लेकर आया है। अगर आप सही रणनीति और धैर्य से काम करेंगे, तो आपको अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे। तो चलिए बिना देर किए आपको बताते हैं तुला से लेकर मीन राशि वालों के जातकों के लिए यह अवधि कैसी रहने वाली है। तुला राशिइस अवधि में तुला राशि के जातकों को किस्मत का पूरा साथ मिलेगा। उच्च शिक्षा, लंबी यात्राएं और करियर में अच्छी प्रगति देखने को मिलेगी। ऐसे में आप कोई नई स्किल्स सीखने और विस्तार करने के लिए यह समय काफी अनुकूल है। जो लोग विदेश जाने या पढ़ाई के लिए योजना बना रहे हैं, उन्हें अच्छी खबर मिल सकती है। जीवन के बड़े फैसले लेने में आपका भरोसा बढ़ेगा। उपाय- मंगलवार के दिन हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाएं।वृश्चिक राशिसाझा के पैसों, निवेश और सेहत के मामलों में थोड़ी सावधानी बरतने की जरुरत है। किसी भी प्रकार का जोखिम लेने से बचें। पैसा संबंधिक कोई भी निर्णय सोच-समझकर करें। ऐसा करने से आपके अंदर एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। परिवार या पैसों से जुड़े नाजुक चर्चाओं के दौरान अपने दिमाग को शांत रखें और धैर्य बनाए।उपाय- नियमित तौर पर मंगल बीज मंत्र का जाप करें।धनु राशिमंगल के गोचर से धनु राशि के लोगों को अपने पर्सनल रिश्तों और बिजनेस पार्टनरशिप में नई ऊर्जा देखने को मिलेगी। मैरिड लाइफ में काफी सुधार होगा और बिजनेस में साझेदारों के साथ मिलकर किया गया काम बहुत बढ़िया मुनाफा देगा। जो लोग अकेले हैं, उन्हें कार्यक्षेत्र या सामाजिक दायरे में कोई खास मिल सकता है। साफ और सीधी बातचीत से पुरानी गलतफहमियां दूर करें।उपाय: मंगलवार के दिन लाल रंग के कपड़े दान करें।मकर राशिमंगल के गोचर से मकर राशि के लोगों को काफी लाभ होगा। इस दौरान प्रतियोगिताओं और दफ्तर की चुनौती में बड़ी सफलता मिलेगी। काम करने की क्षमता में काफी सुधार होगा। सेहत से जुड़ी छोटी-मोटी बातों का बिल्कुल नजरअंदाज न करें। नौकरी की तलाश करने वाले युवाओं को अच्छे अवसर प्राप्त हो सकते हैं। नौकरी करने वाले लोगों को अच्छे जिम्मेदारियां मिलेंगी। अपनी दिनचर्या को बेहतर बनाकर आप ज्यादा सफलता पाएंगे।उपाय: जरुरतमंद लोगों को दवाई या भोजन का दान करें।कुंभ राशिकुंभ राशि के जातकों को नए विचारों, पढ़ाई-लिखाई, प्रेम संबंधों और बच्चों से संबंधित मामलों में बहुत बढ़िया परिणाम देखने को मिलेगा। कलाकारों, छात्रों और बिजनेस करने वाले लोगों के लिए यह समय बहुत ही अच्छा रहने वाला है। आपके नए आइडियाज के चलते आपकी तारीफ हो सकती है। जोखिम वाले कामों से जुड़ें लोग हर फैसला बहुत सोच-समझकर ही लें।उपाय: मंगलवार को भगवान हनुमान जी को लाल फूल अर्पित करें।मीन राशिमीन राशि के जातक घर-परिवार और जमीन-जायदाद से संबंधित मामलों में थोड़ा धैर्य बनाए रखें। घर या प्रॉपर्टी से जुड़ा कोई भी फैसला जल्दबाजी या भावुक होकर न लें। अपनी मां की सेहत का पूरा ध्यान रखें। घर की जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, जिससे पारिवारिक रिश्ते और मजबूत होंगे। ग्रैटिट्यूड मेडिटेशन और मन की शांति आपको सही निर्णय लेने में मदद करेगी। उपाय- हर मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:47:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Mars, Transit, Gemini:, तुला, से, मीन, तक, किसकी, चमकेगी, किस्मत, जानें, Career, और, Success, पर, ग्रहों, का, गहरा, असर</media:keywords>
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<title>Love Horoscope For 6 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 6 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 6 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं। यहाँ बिना किसी सिंबल के आज का सभी 12 राशियों का लव राशिफल दिया गया है:मेष: रिश्तों में पुरानी आदतों को पीछे छोड़कर नयापन लाने की कोशिश करें। पार्टनर को आपका यह बदला हुआ और सहृदय अंदाज बेहद पसंद आएगा।वृषभ: आज मन में विश्वास की एक नई किरण जगेगी। अपने साथी के साथ भविष्य की सुंदर योजनाओं पर चर्चा करने के लिए दिन बेहद मुफीद है।मिथुन: दिल के मामलों में जल्दबाजी के बजाय ठहराव और संयम से काम लें। पार्टनर को अपनी बात रखने का पूरा अवसर देना संबंधों में मिठास घोलेगा।कर्क: आज आप और आपके साथी के बीच एक अनकही समझ देखने को मिलेगी। शब्दों से ज्यादा आपकी भावनाएं एक-दूसरे तक आसानी से पहुँचेंगी।सिंह: आत्मसम्मान की होड़ को किनारे रखकर अपने रिश्ते की सादगी को तरजीह दें। शाम होते-होते आपसी अपनत्व और गहरा होगा।कन्या: काम के दबाव के बीच भी पार्टनर के लिए समय निकालना आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए। एक छोटा सा संदेश भी उनके चेहरे पर मुस्कान ला सकता है।तुला: पुराने अनुभवों के आधार पर वर्तमान रिश्ते को न तौलें। नए नजरिए और खुले दिल से साथी की खूबियों को स्वीकार करें।वृश्चिक: आज का दिन आपसी संवाद में ताजगी और पारदर्शिता लाएगा। सच और निष्ठा आपके रिश्ते को एक नया आयाम देंगे।धनु: साथी के सपनों और प्राथमिकताओं को समझना आज बेहद जरूरी होगा। उनका संबल बनने से रिश्ते में गहरा भरोसा पैदा होगा।मकर: दूरियों को मिटाने के लिए पहल करने में संकोच न करें। दिल के दरवाज़े खोलकर बात करने से पुरानी गलतफहमियाँ हवा हो जाएँगी।कुंभ: नए विचारों और साझा शौक के जरिए पार्टनर के करीब आने की कोशिश करें। सिंगल जातकों के लिए आज कोई दिलचस्प मोड़ आ सकता है।मीन: सहचर्य और समर्पण का भाव आज आपके शादीशुदा जीवन में नई रवानगी लाएगा। एक साथ बिताया गया हर लम्हा यादगार बनेगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:47:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 06 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष नौकरी में पदोन्नति और धन लाभ। परिस्थितियां सुधरेगी, सुख प्राप्ति। संघर्ष प्रधान दिन- डटकर सामना करें। भटकाव और समय व्यर्थ बीतेगा।वृषसंतान पक्ष से पूरा सहयोग मिलेगा। आमदनी बढ़ाने वाले नए प्रस्ताव मिलेंगे। कार्य भार अधिक, थकान हो सकती है। स्वास्थ्य गड़बड़ और सम्मान खतरे में।मिथुनरंगमंच और संचारकर्मी यशस्वी होंगे। अग्रज तुल्य जनों से वाद विवाद न करें। अपने तथा जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। विषम परिस्थितियों में भी आगे बढ़ेंगे।कर्कनौकरी में वरिष्ठों की कृपा रहेगी। दिन आपके लिए वरदान कारक सिद्ध होगा। उधार दिया गया धन वापस मिलेगा। अधूरे सभी काम पूरे होंगे, लाभ भी होगा। सिंहअस्थिरता और मानसिक अशांति। निडरता से काम पूरा करा सकेंगे। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। व्यापारी नई शाखा खोल सकते हैं।कन्याइंटरव्यू में सफलता, खुशी के समाचार मिलेंगे। नए स्थान पर कार्यभार निपटा लें। आगन्तुक मित्र का सहयोग अच्छा रहेगा। भतीजे विवाद खड़ा कर सकते हैं।तुलाविचारों और कार्यों का केंद्र बिंदु धन ही रहेगा। परिस्थितियां विपरीत विवेक से काम लें। धन संबंधी योजनाएं आगे बढ़ेगी। नौकरी में लापरवाही मंहगी पड़ेगी।वृश्चिक व्यवहार में संतुलन रखें, तनाव से मुक्ति। कोर्ट-कचहरी के झंझट सताएंगे। आलोचनाओं का डटकर सामना करेंगे। कुल देवता की मन्नत शीघ्र काम बनाएगी।धनुप्रचुर धन लाभ के योग है। उन्नति का मार्ग खुलेगा। यथा समय कार्य पूरे होने पर प्रसन्नता। थोड़ी सी मेहनत से बड़ा काम बनेगा।मकर स्वजनों का आगमन अच्छा लगेगा। अपनी उपलब्धियों से खुशी होगी। विदेश में पढ़ने की महत्वाकांक्षा पूरी होगी। स्वास्थ्य सुधरेगा और परिस्थितियां भी।कुंभपरेशानी के समय अधिक संयम बरतें। व्यापारिक साझेदारी लाभप्रद। व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में सफलता मिलेगी। घर परिवार में कष्ट और तनाव।मीनप्रतियोगिता परीक्षा में सफलता। विवेक से काम लें, रिस्क से बचें। दाम्पत्य जीवन मधुरतम होगा। व्यापार के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:47:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 07 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष नौकरी पक्की होगी। व्यापारिक साझेदारी में कड़ी नजर रखें। संतान की उन्नति से प्रसन्नता। अशुभ समाचार, धन हानि और दुर्घटना।वृषकार्य में व्यस्तता लेकिन मेहनत अनुसार फल। सोच समझ कर बोलें और निर्णय लें। कामों में रूकावट आएगी। नौकरी पक्की हो सकती है।मिथुनकिसी सेमिनार या विशेष बैठक में भाग लेने के योग हैं। चुगलखोर हानि पहुंचाएगा। अध्यात्म में भी रूचि बढ़ेगी। कार्य बन जाएंगे, पत्थर तैर जाएगें।कर्करोजगार संबंधी नए प्रस्ताव मिलेंगे। ईर्ष्या, द्वेष के शिकार होंगे। बड़े लोगों से आपका संपर्क बढ़ेगा। कठिन कार्यों में सफलता से यश की प्राप्ति।सिंहबार-बार धन लाभ और शुभ समाचार। लाभदायक प्रतिष्ठित व्यक्तियों से सम्पर्क होगा। शुभ और प्रिय समाचार मिलेंगे। धार्मिक स्थल की यात्रा।कन्यातनावपूर्ण हालात- हानिकर दिन है। दाम्पत्य जीवन में अप्रिय वातावरण। बिगड़े संबंध सुधारने में सफलता। स्वभाव में उग्रता रहेगी।तुलास्वास्थ्य का ध्यान रखें, विवादों से दूर रहें। विशेष कार्य के लिए कोई जिम्मेदारी सौंपी जाएंगी। जो भी काम करेंगे उसमें सफलता मिलेगी। उधार दिया/डूबा हुआ धन मिलेगा।वृश्चिक धन की प्राप्ति, आध्यात्मिक उन्नति भी। अव्यवस्थित को व्यवस्थित बना देंगे। विशेष मित्र से भेंट, आर्थिक लाभ भी। कठिनाइयां आएगी भी और चली भी जाएगी।धनुकच्ची नौकरी पक्की हो सकती हैं। कुलदेवता की पूजा से समस्या दूर। स्वजनों के विकास और प्रमोशन से खुशी मिलेगी। शत्रु हावी रहेंगे, अत्याधित खर्च भी।मकर तनावमुक्त मस्ती भरा जीवन। अपने और जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर ध्यान दें। घर हो या दफ्तर आपका सिक्का चलेगा। अटके हुए काम बनेंगे।कुंभजोखिम से दूर रहें अन्यथा हानि। वरिष्ठों से परामर्श लेकर काम करें। वाहन से कष्ट- गलत निर्णय लेने की संभावना। स्थायी बजट से भविष्य सुधरेगा।मीनसफलता पर लोगों से प्रशंसा मिलेगी। योजना अनुसार ज्ञान आगे बढ़ेगा। आर्थकार क्षेत्र में वृद्धि, प्रभाव बढ़ेगा। मुसीबत में परिवार दृढ़ और एक रहेगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:47:24 +0530</pubDate>
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<title>Rudrabhishek In Sawan: महादेव की कृपा के लिए क्यों जरूरी है Rudrabhishek? जानें इसके Benefits और नियम</title>
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<description><![CDATA[ श्रावण माह का पवित्र महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू हुआ है। यह महीना भगवान शिव को अतिप्रिय है। ऐसे में इस दौरान उनकी आराधना करने के साथ ही रुद्राभिषेक का खास महत्व बताया गया है। इस महीने रुद्राभिषेक सिर्फ इसलिए खास नहीं कि इसमें शिवलिंग पर जल अर्पित किया जाता है। बल्कि वैदिक परंपरा में &#039;रुद्र&#039; के वैदिक मंत्रों के साथ महादेव का अभिषेक करना रुद्राभिषेक कहलाता है।सावन के महीने में शिवोपासना के लिए बेहद खास माना जाता है। देवशयनी एकादशी से शुरू होने वाले चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु और शिवजी की उपासना का महत्व माना गया है। इसी साधना काल का प्रमुख महीना श्रावण का होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि श्रावण माह में रुद्राभिषेक करवाना क्यों फायदेमंद होता है और श्रावण माह और रुद्राभिषेक के बीच क्या संबंध है।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 6 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 6 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनश्रावण में रुद्राभिषेक का महत्वशिव पुराण और स्कंद पुराण के मुताबिक सावन के महीने में महादेव की आराधना करने से विशेष फल मिलता है। पुराणों में श्रावण माह को भगवान शिव की पूजा और उपासना के लिए बेहद पुण्यकारी माना जाता है। ऐसे में रुद्राभिषेक का महत्व और फल दोनों बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि सावन महीने में रुद्राभिषेक कराया जाता है। इससे व्यक्ति को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होता है।जानें सावन और रुद्राभिषेक का संबंधधार्मिक मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना करना फलदायी होता है। वहीं श्रावण माह शिवजी को अतिप्रिय होता है। हरि शयन के बाद भगवान शिव के रुद्र अवतार सारे कार्यभार को संभालते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रावण माह में रुद्राभिषेक कराने से शिवजी की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।रुद्राभिषेक सिर्फ जलाभिषेक नहीं होता है, बल्कि इस दौरान भगवान रुद्र के वैदिक मंत्रों, विशेषकर श्रीरुद्रम के साथ अभिषेक किया जाता है। यही इसको सामान्य अभिषेक से विशिष्ट बनाता है।जानें श्रावण माह में रुद्राभिषेक कराने के फायदेसावन महीने में भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए लोग रुद्राभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में शिवजी की आराधना करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।रुद्राभिषेक के समय वैदिक मंत्रों के उच्चारण और पूजन विधि को करने से मन को शांति मिलती है। वहीं जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है।रुद्राभिषेक के जरिए से परिवार के सुख, सेहत और समृद्धि की कामना की जाती है।रुद्राभिषेक का उद्देश्य सिर्फ कामना की पूर्ति नहीं होता है, बल्कि भगवान शिव के प्रति समर्पण और आत्मिक शुद्धि माना जाता है।जानिए जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में फर्कजलाभिषेक में भक्त श्रद्धाभाव से शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं। तो वहीं रुद्राभिषेक के दौरान वैदिक विधि के साथ विशेष रूप से श्रीरुद्रम के मंत्रों के साथ शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। इसलिए जलाभिषेक और रुद्राभिषेक दोनों अलग हैं। सावन के दौरान भगवान शिव के रुद्र रूप की आराधना करने का विशेष महत्व है। यही वजह है कि रुद्राभिषेक करना बेहद शुभ माना जाता है। दूध, जल, बेलपत्र आदि से शिवलिंग का अभिषेक करना सावन महीने की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:47:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Moksha के लिए Kashi में सिर्फ Vishwanath नहीं, इन 6 प्राचीन Temples की चौखट पर माथा टेकना है बेहद जरूरी</title>
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<description><![CDATA[ काशी को मोक्षदायिनी कहा जाता है। कहा जाता है कि अगर अपने जीवनकाल में एक बार भी काशी नगरी के दर्शन हो जाएं, तो जातक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन यह मोक्ष इतनी आसानी से कहां मिलता है। स्कंद पुराण के &#039;काशी खंड&#039; का पहला श्लोक है- &#039;विश्वेशं माधवं धुण्डिं दण्डपाणिं च भैरवम्। वन्दे काशीं गुहां गङ्गां भवानीं मणिकर्णिकाम॥&#039;&#039; जिसका अर्थ है कि सिर्फ विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही काशी धाम की यात्रा पूरी नहीं होती है।हिंदू धर्म में ऐसे बहुत सारे तीर्थ स्थल हैं, जिनका अलग-अलग धार्मिक महत्व रहा है। लेकिन काशी विश्वनाथ को हिंदू धर्म का एक बेहद पवित्र धाम बताया गया है। जिसकी यात्रा काशी में मौजूद कुछ अन्य विशेष मंदिरों की चौखट पर माथा टेकने के बाद ही पूरी होती है।जानिए इन मंदिरों के बारे मेंकाल भैरव मंदिरकाशी के कोतवाल काल भैरव हैं। काशी में घुसते ही सबसे पहले इनके दरबार में हाजिर होना जरूरी है। बिना काल भैरव के अनुमति के काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन संभव नहीं है।माता अन्‍नपूर्णा मंदिरज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद मां अन्नपूर्णा के दर्शन जरूरी है। यह काशी की अन्न की देवी हैं। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि जो भी व्यक्ति यहां आता है, उसको जीवन में कभी भी अन्न की कमी नहीं होती है।धुंडीराज विनायक मंदिरकाशी विश्वनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही आपको गणेश जी का प्राचीन मंदिर मिल जाएगा। इनके दर्शन के बिना ज्योतिर्लिंग के दर्शन अधूरे हैं। धुंडीराज के दर्शन के बाद आपको भगवान शिव के दर्शन होते हैं।बिंदु माधव मंदिरबिंदु माधव मंदिर वाराणसी के पंचगंगा घाट पर स्थित है। यहां पर भगवान श्रीहरि विष्णु विराजमान हैं। धार्मिक मान्यता है कि यह वही स्थान है, जहां पर भगवान विष्णु ने महादेव की तपस्या की थी। इनके दर्शन के बिना भी काशी की यात्रा अधूरी मानी जाती है।विशालाक्षी मंदिर51 शक्तिपीठों में से एक विशालक्षी मंदिर भी इस यात्रा का अहम हिस्सा है। यह मंदिर मणिकर्णिका घाट पर है। यहां पर मां सती के दाहिने कान का कुंडल गिरा था। इसलिए जरूरी है कि आप इस मंदिर आकर देवी के दर्शन जरूर करें।दंडपाणि मंदिरदंडपाणि मंदिर काशी के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। यहां के दर्शन करना भी जरूरी है। यहां की विशेषता यह है कि यहां काशी का न्यायाधीश कहे जाने हरिकेश देव की पूजा होती है। यह हाथ में छड़ी लिए हुए हैं। कहा जाता है कि काशी में किसी भी गलत व्यक्ति को नहीं रहने देते हैं।ऐसे में अगर आप काशी यात्रा पर जा रहे हैं, तो आपको भी एक बार इन मंदिरों के दर्शन जरूर करने चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 07 Aug 2026 10:47:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 05 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष उपेक्षित और हताश महसूस करेंगे। विवाद विजय का दिन है। कोई बड़ा सौदा करने में सफल होंगे। सरकारी विभागों में घुसपैठ बढ़ेगी।वृषचल-अचल संपत्ति विवाद हो सकता है। विद्यार्थी विशेष लाभ प्राप्त करेंगे। निजी संबंधों में मधुरता बढ़ेगी। व्यापार की स्थिति मजबूत होगी।मिथुनव्यक्तित्व उदार और भावुकता पूर्ण। खास फैसला बहुत सोच-समझ कर लें। उत्साह से कठिन काम भी आसान होंगे। ग्रह कलह से परेशानी और दुविधा रहेगी।कर्कअधूरे काम पूरे होंगे। व्यर्थ के तनाव से बचें। यात्राओं से बचने में ही भलाई है। परिश्रम के अनुसार परिणाम मिलेगा। निकटवर्ती लोगों से अनबन संभव है।सिंहपरिस्थितियां विचलित कर सकती है। मित्रों के साथ अच्छा समय बीतेगा। अच्छा दिन नहीं है, सोच समझकर काम करें। मित्र और मित्रता की परीक्षा में सफल होंगे।कन्याव्यापार/रोजगार में तरक्की होगी। आत्मावलोकन एवं सुनियोजित संचालन लाभप्रद। विशेष प्रतियोगिता में विजय प्राप्त करेंगे। पुराने मित्रों से आर्थिक लाभ मिलेगा।तुलाधर्म-कर्म में रूचि बढ़ेगी, चिंताएं दूर होगी। गृह निवास से कोई शुभ समाचार मिलेगा। बिगड़े काम सुधार सकते हैं। विशेष व्यक्ति से सम्पर्क होगा।वृश्चिक सगे-संबंधियों के कारण दुःख और तनाव होगा। धन सम्पत्ति बढ़ाने का प्रयास करेंगे। काम पर ध्यान दें, अफवाहों से बचें। विद्यार्थियों के लिए उत्तम दिन।धनुउच्चतर शिक्षा के लिए प्रयास सफल होंगे। नया काम शुरू होगा, नए पुराने मित्रों से लाभ। स्व विवेक से समस्याएं सुलझेगी। सर्वत्र प्रतिष्ठा बढ़ेगी।मकर रोजगार तथा अन्य आर्थिक कार्यों में सफलता। कुछ गलतफहमियां पनपेगी-परिवार में मतभेद। व्यापार में अच्छी सफलता। बनते हुए काम बिगड़ेंगे।कुंभसंपत्ति संबंधी विवाद निपट सकता है। तनाव बढ़ सकता है, विरोधी प्रस्ताव होंगे। राहत मिलने की खबरें मिलेगी। विशेष समझौता/सौदा हो सकता है।मीनमित्रों का सहयोग मिलेगा। अधिकारी से फटकार मिलेगी। छोटी-सी लापरवाही नुकसानदायक होगी। शारीरिक दुर्बलता और स्वास्थ्य समस्या। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:46:21 +0530</pubDate>
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<title>Sawan में घर&#45;घर झूला डालने की Tradition क्यों है खास? जानिए इसके पीछे छिपे आध्यात्मिक Secrets और लाभ</title>
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<description><![CDATA[ सावन के महीने में चारों ओर हरियाली ही हरियाली देखने को मिलती है। इस दौरान पेड़ों पर नए पत्ते आ जाते हैं, मौसम सुहावना हो जाता है। वहीं घर से लेकर मंदिरों तक में शिवभक्ति का माहौल होता है। वहीं सावन के महीने में एक चीज और भी खास होती है, वह है झूला। आपने देखा होगा कि अक्सर सावन के महीने में लोग अपने घरों में झूला डालते हैं।वहीं लड़कियां और महिलाएं सज-धजकर झूला झूलती हैं और सावन के गीत गाती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर सावन में झूला की परंपरा कैसे शुरू हुई।इसे भी पढ़ें: Stress और Anxiety दूर करता है ‘Har Har Mahadev’ का जाप, Science ने भी मानी इस शिव मंत्र की Healing Powerसावन और झूले का कनेक्शनसावन के महीने को खुशियों, हरियाली और उत्सव का महीना माना जाता है। सावन का मौसम ठंडा और सुहावना भी होता है। इसलिए पुराने समय से लोग इस महीने पेड़ों पर झूले डालकर दोस्तों और परिवार के साथ झूला झूलते हैं और समय बिताते हैं। खासकर महिलाएं और लड़कियां इस महीने झूला झूलते हुए लोकगीत गाती हैं। धीरे-धीरे यह परंपरा सावन के खास रीति-रिवाजों में शामिल हो गई।मां पार्वती से जुड़ी है झूले की परंपराधार्मिक मान्यता है कि भगवान शंकर ने सावन के महीने में मां पार्वती के लिए झूला लगाया था। महादेव ने प्रेम से मां पार्वती को झूला झुलाया था। इस कारण से झूला पति-पत्नी के बीच सम्मान, प्यार और अच्छे रिश्ते का भी प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि जो भी दंपत्ति सावन में साथ झूला झूलते हैं। उनके रिश्ते में हमेशा अपनापन और प्रेम बना रहता है।सावन में मायके आई थीं मां पार्वतीइसके अलावा एक और कहावत सुनने को मिलती है कि सावन में मां पार्वती अपने मायके आई थीं। वहां पर मां पार्वती की सखियों ने झूला लगाया और उनको झूला झुलाया। इस दौरान सखियों ने लोक गीत गाए और खुशियां मनाईं। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।कृष्ण और राधा से भी जुड़ी है मान्यताभगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी से भी सावन में झूला झूलने की परंपरा का संबंध जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सावन के मौसम में भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी को झूला झुलाया था। फिर कई जगहों पर मंदिरों में राधा-कृष्ण के लिए सुंदर झूले सजाए जाते हैं। सावन के महीने में कई मंदिरों में झूलन उत्सव भी पड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।मंदिरों में सजाए जाते हैं झूलेबता दें कि सावन में कई मंदिरों में देवी-देवताओं और भगवान के लिए भी झूले सजाए जाते हैं। इन झूलों को फूलों और रंग-बिरंगी झालरों से इन झूलों को सुंदर बनाया जाता है। यह परंपरा कई राज्यों यह आज भी पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है।सावन में झूला झूलने का महत्वधार्मिक मान्यताओं के मुताबिक सावन में झूला झूलना बेहद शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इससे परिवार में प्यार और एकता बनी रहती है। पति-पत्नी के रिश्ते में मधुरता आती है और मां पार्वती का आशीर्वाद भी मिलता है। वहीं झूला झूलने से आपका मन भी प्रसन्न रहता है। सावन के सुंदर मौसम का आनंद लेने का मौका भी मिलता है।सावन में कैसे डालें झूलाझूला डालने के लिए मजबूत पेड़ की डाल, छत का हुक या लोहे की ग्रिल चुनें।नायलॉन, जूट या सूती की मोटी रस्सी लें।झूले पर बैठने के लिए मजबूत लकड़ी की बोर्ड लें।बोर्ड के दोनों तरफ रस्सी बांधने के लिए दो-दो छेद बनाएं।तख्ते और हुक पर सेफ्टी नॉट लगाएं।इसको आम के पत्तों, गेंदे के फूलों या सुंदर कपड़ों से झूले को सजाएं।झूले पर बैठने से पहले थोड़ा वेट डालकर इसकी मजबूती को जरूर चेक कर लें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:46:20 +0530</pubDate>
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<title>सावन सोमवार और Pradosh Vrat एक ही दिन पड़ जाए तो? पूजा विधि को लेकर Confusion छोड़ें, यहां जाने Shiv Puja का सटीक उपाय</title>
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<description><![CDATA[ श्रावण मास भगवान शिव को अति प्रिय है। इस दौरान पड़ने वाला हर सोमवार का अपना एक खास महत्व है। सावन के महीने में साधक भगवान भोलेनाथ की भक्ति में डूब जाते हैं, सच्चे मन से व्रत रखते है और पूजा अर्चना करते हैं। कई भक्तजन सावन के महीने से 16 सोमवार व्रत की शुरुआत करते हैं। वैसे हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है, जो कि यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष काल के शिव-पूजन के लिए श्रेष्ठ समय माना गया है।हालांकि, कई बार पंचांग में ऐसा दुलर्भ संयोग बन ही जाता है जब सावन का सोमवार और प्रदोष व्रत दोनों एक ही दिन पड़ जाए। ऐसे में साधक भी दुविधा में चले जाते हैं कि पूजा कैसे करे? क्योंकि दोनों व्रतों की अपनी अलग मुख्यता है और भगवान का अभिषेक किस समय करना सही होता है, आइए आपको बताते हैं।धार्मिक शास्त्र क्या कहते हैं?धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब सावन सोमवार और प्रदोष व्रत की तिथि एक साथ पड़ जाए,तो भगवान शिव और माता पार्वती की असीम कृपा का महा-संयोग मानना चाहिए। इस दिन की गई श्रद्धापूर्ण पूजा से जीवन में सुख-शांति आती है। इसलिए आपको दोनों व्रत अलग-अलग रखने की कोई जरुरत नहीं है। आप एक ही दिन में दोनों व्रत के नियमों का पालन कर सकते हैं।जाने सही पूजा-विधिइस खास संयोग के दौरान आप सुबह और शाम को पूजा कर सकती हैं-सुबह की पूजा (सोमवार व्रत के लिए)सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। भगवान शिव का स्मरण करते हुए दोनों व्रत का एक साथ संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग का जल या पंचामृत से अभिषेक करें। &#039;ॐ नमः शिवाय&#039;का जप करते हुए बेलपत्र अर्पित करें और सोमवार व्रत की कथा जरुर पढ़ें।शाम की पूजा (प्रदोष व्रत के लिए)वैसे प्रदोष व्रत की असली महत्व संध्या काल यानी &#039;प्रदोष काल&#039; में होती है। यह समय सूर्यास्त से लेकर करीब 2 घंटे बाद तक रहता है। शाम के समय एक बार फिर स्नान करने करें या हाथ-मुंह धोकर स्वच्छ हो जाएं। इसके बाद शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र, धतूरा, चंदन और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद प्रदोष व्रत की कथा सुनें, दीपदान करें और आखिर में भगवान शिव की आरती करें। वहीं व्रत का पारण (खोलना) आप अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार शाम की पूजा या फिर अगले दिन सुबह कर सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:46:20 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 5 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 5 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 5 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं। यहाँ बिना किसी सिंबल के आज का सभी 12 राशियों का लव राशिफल दिया गया है:मेष: पार्टनर के साथ आज किसी बात को लेकर हल्का मनमुटाव हो सकता है, लेकिन आपकी बुद्धिमानी से मामला जल्दी सुलझ जाएगा। शाम तक स्थिति सामान्य होगी।वृषभ: अगर आप किसी से अपने दिल की बात कहना चाहते हैं, तो आज का दिन सकारात्मक रुख दिखा सकता है। पहले से रिश्ते में मौजूद लोगों का दिन खुशनुमा रहेगा।मिथुन: पार्टनर के साथ आउटिंग या डिनर की योजना बन सकती है। एक-दूसरे को समझने के लिए आज का दिन बेहतरीन साबित होगा।कर्क: छोटी-छोटी बातों को तूल देने से बचें। किसी पुराने विषय पर बहस करने की जगह साथ बैठकर ठंडे दिमाग से बात करना फायदेमंद रहेगा।सिंह: लव लाइफ में आज उत्साह और सकारात्मकता बनी रहेगी। पार्टनर से मिला कोई प्यारा सरप्राइज आपके दिन को और स्पेशल बना देगा।कन्या: आज अपने पार्टनर की भावनाओं का सम्मान करें। काम की व्यस्तता के बावजूद उनके लिए थोड़ा समय निकालना रिश्ते में नजदीकी लाएगा।तुला: अपने और पार्टनर के बीच किसी तीसरे व्यक्ति का हस्तक्षेप न होने दें। आपसी विश्वास को प्राथमिकता देने से रिश्ता और मजबूत होगा।वृश्चिक: किसी पुराने दोस्त से अचानक संपर्क हो सकता है, जो लव लाइफ में एक नई शुरुआत का जरिया बन सकता है। विवाहितों के लिए दिन सुखद रहेगा।धनु: पार्टनर के प्रति आपका समर्पित रवैया उन्हें बेहद खास महसूस कराएगा। आज रिश्तों में नया आकर्षण देखने को मिलेगा।मकर: काम के तनाव का असर प्रेम संबंध पर न पड़ने दें। शाम को साथ समय बिताकर पुरानी दूरियों को पाटने की कोशिश करें।कुंभ: आपके सौम्य व्यवहार से पार्टनर बेहद प्रसन्न रहेगा। सिंगल जातकों के लिए भी किसी खास व्यक्ति की ओर रुझान बढ़ने के योग हैं।मीन: रिश्तों में ताजगी लाने के लिए आज कुछ नया और रोमांचक करने का प्रयास करें। जीवनसाथी का भरपूर सहयोग मिलेगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 05 Aug 2026 15:46:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Love, Horoscope, For, August, 2026, आज, का, प्रेम, राशिफल, अगस्त, 2026, प्रेमियों, के, लिए, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन</media:keywords>
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<title>Horoscope 02 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष सब तरफ से अशुभ समाचार। परिस्थितियों में सुधार होगा। मित्र के सहयोग से परिश्रम फलीभूत होगा। साझेदारी में काम से लाभ होगा।वृषगलतफहमी और अफवाहों से चिंता बढ़ेगी। घर परिवार में सुखद स्थिति। सावधानी से चलें और निवेश करें। सम्मान करोगे तो सम्मान पाओगे।मिथुनपरिश्रम के अनुसार सफलता मिलेगी। चिंताओं से मुक्ति मिलेगी। रोजगार तथा अन्य आर्थिक कार्यों में सफलता। बुद्धिमानी से जटिल कार्य आसान होगा।कर्कअनुकूल वातावरण से मन प्रसन्न रहेगा। धनागमन से खुशी होगी। परिश्रम के अनुरूप लाभ मिलने की खुशी। स्वभाव में उग्रता आएगी, संयम रखें।सिंहघर हो या दफ्तर निष्ठा से काम करेंगे। जरूरी काम दोपहर तक होने चाहिए। स्वास्थ्य में सुधार और मन में शांति महसूस करेंगे। डूबा हुआ धन वापिस मिलेगा।कन्याअविस्मरणीय दिन बनेगा। रोजगार व्यापार की जगह पर ख्याति और ईमानदारी के चर्चें। शुभ समाचार मिलेंगे। दाम्पत्य जीवन मधुरतम होगा।तुलादिन सामान्य है, जोखिम न उठाएं। अनावश्यक विवाद होगा, दिन अशुभ। सफलताओं भरा दिन है आगे बढ़ें। यात्रा करने से बचना चाहिए।वृश्चिक सामाजिक कार्यों और समारोह में भाग ले सकते हैं। परिस्थितियों के अनुकूल आचरण करेंगे। चल-अचल संपत्ति विवाद हो सकता है। व्यवसाय में विस्तार की योजना बनेगी।धनुमामा पक्ष से विशेष समाचार मिलेगा। वरिष्ठों के कृपापात्र बने रहेंगे। कुछ कामों में आशातीत सफलता मिलेगी। अच्छा दिन, शक्ति सामर्थ्य बढ़ेंगे। मकर गंभीर समस्या सुलझ जाएगी। आता हुए धन रूकेगा- निराशा होगी। किसी पर विश्वास न करें, कई बार सोंचे। आर्थिक स्थिति के लिए ठोस प्रस्ताव मिलेगा।कुंभकुछ जरूरी दस्तावेज गुम हो सकते हैं। दीर्घकाल में चला आ रहा विवाद समाप्त होगा। मौजमस्ती के लिए थिएटर या पिकनिक जा सकते हैं। संक्रामक रोगों से बचें।मीनजरूरी काम 12 बजे तक कर लें। स्वयं को उपेक्षित और हताश महसूस करेंगे। वरिष्ठ जनों का आर्शीवाद और सहयोग मिलेगा। बैंक बैलेंस बढ़ने की खुशी होगी। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:47:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Sawan Somvar 2026: सावन सोमवार पर कालसर्प दोष और Shani Dosh से मुक्ति के लिए अपनाएं ये अचूक ज्योतिषीय Remedies</title>
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<description><![CDATA[ भोलेनाथ का सबसे प्रिय महीना सावन चल रहा है। 3 अगस्त को सावन के सोमवार का पहला व्रत रखा जाएगा। इस दिन देशभर के सभी शिवालयों में पूजा-पाठ और शिव यात्राओं की भव्य रौनक देखने को मिलती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन सोमवार के शुभ दिन पर भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने से साधक के धन-धान्य में वृद्धि होने के साथ-साथ जीवन में स्थिरता आती हैं। अगर आप लंबे समय से समस्याओं से परेशान चल रहे हैं, तो सावन के सोमवार व्रत में ये उपाय जरुर करें। आइए आपको इन उपायों के बारे में बताते हैं।सावन के सोमवार के उपाय- सावन के सोमवार के दिन शिवलिंग पर आप केसर मिश्रित जल अर्पित कर सकते हैं। ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होंगे और योग्य जीवनसाथी मिलने की संभावना बढ़ जाती है।- इस दिन चांदी या तांबे के नाग-नागिन की पूजा करें। इस उपाय के करने से कालसर्प दोष दूर हो जाता है अन्य दोष भी कम हो जाते हैं।- इस दिन आप काले तिल से जलाभिषेक करें। इसके प्रभाव से शनि दोष से राहत और नकारात्मकता दूर हो जाती है। - सावन के सोमवार के दिन 9 नागों का स्मरण करें। इससे कालसर्प दोष दूर हो जाएगा। - इस दिन कच्चे दूध और शहद से अभिषेक करें। जिससे जीवन में सुख-समृद्धि के योग बनते हैं। - अगर आप भगवान शिव को जल और सुगंधित फूल अर्पित करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। इससे शुभ फल मिलने के साथ जीवन की बाधाएं दूर होती है। - किसी भी तरह का भय को दूर करने के लिए एकाग्रता के साथ महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। मंत्र के जप करने से मन के डर और भय दूर होते हैं और मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:47:13 +0530</pubDate>
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<title>आज मनाया जा रहा है Shravan Month का  गजानन संकष्टी चतुर्थी , जानें शुभ मुहूर्त और Ganesh Puja विधि</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी 2 अगस्त 2026, रविवार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है,जो रात 11.15 बजे तक रहेगी। इस दिन गजानन संकष्टी चतुर्थी भी मनाई जा रही है। यह तिथि भगवान गणेश को समर्पित है। चलिए आपको आज का पंचांग के बारे में बताते हैं। आज सूर्य कर्क राशि में और  चंद्रमा दोपहर 3:26 बजे तक कुंभ में रहकर मीन में प्रवेश करेंगे। वहीं, आज पूर्वभाद्रपद नक्षत्र है। शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 से 12:54 बजे तक और अमृत काल दोपहर 1:19 से 2:59 बजे तक रहने वाला है। राहुकाल शाम 5.30 से 7.11 बजे तक रहेगा। साथ ही इस लेख हम आपको भगवान गणेश जी की पूजन विधि का बताएंगे। आज का पंचांग-तिथि: कृष्ण चतुर्थी-मास: श्रावण-दिन: रविवार-संवत्: 2083महत्वपूर्ण विवरणतिथि: कृष्ण पक्ष की चतुर्थी – रात्रि 11बजकर 15 मिनट तक, फिर पंचमी तिथियोग: अतिगण्ड – रात्रि 10 बजकर 30 मिनट तक, फिर सुकर्माकरण: बव – प्रातः 11 बजकर 14 मिनट तककरण: बालव – रात्रि 11बजकर 15 मिनट तक, फिर कौलवसूर्यास्त और चंद्रमा की स्थितिसूर्योदय का समय: प्रातः 05 बजकर 43 मिनटसूर्यास्त का समय: सायं 07 बजकर 11 मिनटचंद्रोदय का समय: रात्रि 09 बजकर 24 मिनटचंद्रास्त का समय: प्रातः 08 बजकर 52 मिनट (03 अगस्त) सूर्य और चंद्रमा की राशियांसूर्य देव: कर्क राशि में स्थित हैंचन्द्र देव: कुंभ राशि में (दोपहर 03 बजकर 26 मिनट तक), फिर मीन राशि में प्रवेशआज के शुभ मुहूर्तअभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12: 00 बजे से दोपहर 12 बजकर 54 मिनट बजे तकअमृत काल: दोपहर 01 बजकर 19 मिनट से दोपहर 02 बजकर 59 मिनट तकआज के अशुभ समयराहुकाल: सायं 05 बजकर 30 मिनट से सायं 07 बजकर 11 मिनट तकगुलिकाल: दोपहर 03 बजकर 49 मिनट से सायं 05 बजकर 30 मिनट तकयमगण्ड: दोपहर 12 बजकर 27 मिनट से दोपहर 02 बजकर 08 मिनट तकगजानन संकष्टी चतुर्थी 2026चंद्रोदय समय: रात 09 बजकर 24 मिनटचतुर्थी तिथि प्रारंभ: 01 अगस्त, रात 11 बजकर 07 मिनटचतुर्थी तिथि समाप्त: 02 अगस्त, रात 11बजकर 15 मिनटजाने गणेश पूजा की विधि- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके और साफ वस्त्र पहनें। - अब घर के मंदिर की अच्छे से सफाई करें और इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर लाल या हरा कपड़ा बिछाएं। - चौकी पर गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और साथ ही मंगल कलश रखें। - इसके बाद गणेश जी की मूर्ति को दूध, दही, घी, शहद और चीनी के मिश्रण (पंचामृत) से स्नान कराएं, फिर साफ जल से स्नान कराएं। - अब बप्पा को वस्त्र, जनेऊ, चंदन का तिलक, धूप-दीप और फूल अर्पित करें। - भगवान गणेश जी की सबसे प्रिय दूर्वा (दूब घास) जरुर अर्पित करें। - गणेश जी को मोदक और गुड़ का भोग लगाएं। - इसके बाद गणपति मंत्रों का जप करें और पूरी श्रद्धा भाव के साथ उनकी आरती गाएं। - आखिर में सभी लोगों में प्रसाद वितरित करें। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:47:13 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 03 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष दूसरों के परिश्रम का श्रेय आपको मिलेगा। अतिथियों के सम्मान में व्यस्तता। व्यापार/रोजगार में तरक्की होगी। दोपहर बाद- शुभ समाचार मिलेंगे।वृषकार्य भार अधिक, थकान हो सकती है। ईमानदारी और कर्तव्य निष्ठा का लाभ मिलेगा। विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट सफल होंगे। अपनों के साथ गलतफहमी हो सकती है।मिथुनव्यवसाय ठीक रहेगा लेकिन दुर्घटना भी आशंका। व्यापारिक चुनौतियों में सफल रहेंगे। पारिवारिक सहमति से कोई निर्णय लें। प्रेम प्रसंग विवाह प्रस्ताव में बदलेगा।कर्कपरिस्थितियां शुभता की ओर बढ़ रही है। विपरीत परिस्थितियां रहेगी। घरेलू कामों में व्यस्तता रहेगी। स्वास्थ्य में गड़बड़ और थकावट भी।सिंहधन संबंधी योजनाएं आगे बढ़ेगी। अचल सम्पत्ति संबंधी विवाद हल होगा। जो भी करेंगे उसमें सफलता मिलेगी। प्रिय व्यक्ति के संबंध में अप्रिय समाचार मिलेंगे।कन्याअच्छा दिन है, चंहुमुखी प्रगति के अवसर। उन्नतिकारक यात्रा होगी। विश्वासपात्र ही विश्वासघात करेंगे। उधार न दें, जबान संभाल कर बात करें। तुलानौकरी में वरिष्ठों की कृपा रहेगी। अपराहन में धोखे के शिकार हो सकते हैं। उच्चतर शिक्षा के लिए प्रयास सफल होंगे। आपसी संवाद से समस्याएं दूरी होगी।वृश्चिक लाभ भी और प्रियजनों से भेंट भी। आज की शाम अशुभता के नाम। विद्यार्थियों को लक्ष्य केन्द्रित होना चाहिए। पैतिृक सम्पत्ति विवाद में प्रगति होगी।धनुअपने तथा जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। विवशता में कोई काम करना पड़ेगा। पुराने मित्रों और निकट संबंधी से मुलाकात होगी। समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी।मकर संवाद से समस्या हल हो सकती है। घर के बुजुर्ग बीमार हो सकते है। दफ्तर में जिम्मेदारियां बढ़ेगी, मानदेय भी बढ़ेगा। पदोन्नति और प्रतिष्ठा प्राप्ति के योग।कुंभघर परिवार में आपका सुयश बढ़ेगा। विरोधी सक्रिय रहेंगे, आप संतुलित रहें। आपके कार्यों की प्रशंसा होगी। व्यर्थ के तनाव से बचें।मीनपूंजी निवेश हानिकारक सिद्ध होगा। धन उधार देना शत्रुता मोल लेना सिद्ध होगा। आमदनी के नए साधन, तनाव मुक्त करेंगे। वाहन संबंधित समस्या का सामना। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:47:12 +0530</pubDate>
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<title>Sawan Somwar 2026: जानिए अपनी राशि के अनुसार शिव अभिषेक का सही विधान और विशेष ज्योतिषीय लाभ</title>
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<description><![CDATA[ 3 अगस्त 2026 को है सावन का पहला सोमवार। इस दिन महादेव की कृपा प्राप्त करने के लिए कई सार उपाय किए जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव और विधि-विधान से शिवलिंग का अभिषेक करने से जीवन की परेशानियां दूर हो जाती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर आप अपनी राशि के अनुसार शिवलिंग पर अभिषेक करते हैं, तो ग्रह दोष शांत हो जाते हैं। वहीं, कुंडली में ग्रहों की स्थिति मजबूत बनती हैं, जिससे शुभ फल प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाती है। आइए आपको सावन के पहले सोमवार को राशि के अनुसार साधक को किस वस्तु से शिवलिंग पर अभिषेक करना चाहिए।राशि के अनुसार करें शिव अभिषेकमेष राशि: इस दिन मेष राशि वालों के शहद से अभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और कार्यों में सफलता प्राप्ति के योग बन जाते हैं।वृषभ राशि: जातक को दूध और दही से अभिषेक करना चाहिए। इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है।मिथुन राशि: इस दिन आप गन्ने के रस से अभिषेक करना चाहिए। इससे शुभ परिणाम मिलते हैं।कर्क राशि: सावन के सोमवार को कर्क राशि वाले दही से शिवलिंग पर अभिषेक करें। ऐसा करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है।सिंह राशि: इस राशि के जातकों को शहद से अभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने से मान-सम्मान बढ़ता है।कन्या राशि: इस दिन कन्या राशि के जातकों को भांग मिश्रित जल से अभिषेक करना चाहिए। इससे आपके घर में सुख-समृद्धि भंडार लग जाएगातुला राशि: यह लोग घी से अभिषेक करें। ऐसा करने दांपत्य जीवन में मुधरता आती है।वृश्चिक राशि: इन लोगों को गंगाजल में गुलाब जल मिलाकर अभिषेक करें। ऐसा करने से धन लाभ के योग बनते हैं।धनु राशि: जल में पीली सरसों को मिलाकर अभिषेक करें। इससे भाग्य मजबूत बनता है।मकर राशि: आपको जल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अभिषेक करना है।कुंभ राशि: इस दिन पंचामृत से अभिषेक करें। ऐसा करने से बाधाएं दूर होती है।मीन राशि: इस राशि के जातक को केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करना चाहिए। इस उपाय के करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:47:12 +0530</pubDate>
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<title>क्या कुंवारी कन्याएं रख सकती हैं Mangla Gauri Vrat? जानें मनचाहा वर पाने के लिए Marriage Tips और नियम</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी 4 अगस्त को पहला मंगला गौरी व्रत रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत सुहागिन महिलाएं वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाने और पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। मंगला गौरी व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधा दूर हो जाती है और महादेव और मां पार्वती की कृपा से रिश्ते में मुधरता बनी रहती है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि मंगला गौरी व्रत क्या कुंवारी कन्याएं रख सकती हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं मंगला गौरी व्रत और इस व्रत से जुड़े महत्वपूर्ण नियम।क्या कुंवारी कन्याएं रख सकती है व्रत?हां, बिल्कुल कुंवारी कन्या भी मंगला गौरी का व्रत रख सकती हैं। जैसे सुहागिन महिलाएं वैवाहिक जीवन में सुख-शांति के लिए मंगला गौरी का व्रत करती हैं, वैसे ही कुंवारी कन्याएं भी मनचाह जीवनसाथी पाने के लिए इस व्रत को करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिवत रुप से करने से विवाह में आ रही सभी बाधाएं दूर हो जाती है और वैवाहिक जीवन में हमेशा खुशियों से भरा रहता है।मंगला गौरी व्रत के नियम- इस व्रत के दिन भूलकर भी किसी से वाद-विवाद न करें। माना जाता है कि इस तरह की गलती को करने से भगवान शिव और माता पार्वती नाराज हो जाते हैं। कई बार व्रत का शुभ फल प्राप्त नहीं होता है।- मंगला गौरी व्रत में काले रंग के कपड़े धारण नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा आकर्षित हो जाती है।- सच्चे मन से व्रत का संकल्प लें और पूजा अर्चना करें। - इस दिन मंदिर या गरीब लोगों को विशेष चीजों का दान करना चाहिए।  - व्रत के दौरान क्रोध, झूठ और वाद-विवाद से पूरी तरह से बचें। - पूजा के दौरान कथा का पाठ जरुर करें। इससे मां पार्वती के संग महादेव की कृपा प्राप्त होती है। ऐसा करने से मनचाह वर की प्राप्ति होती है। - इस दिन मां पार्वती को कुमकुम, हल्दी, लाल फूल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें। - इस दिन मां पार्वती को 16 श्रृंगार का सामान(लाल चुनरी, चूड़ियां, मेहंदी आदि) चीजें जरुर अर्पित करें।  कैसे रखें मंगला गौरी व्रत- मंगला गौरी व्रत के लिए सबसे पहले सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। - अब हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। - इसके बाद मंदिर की सफाई करने के बाद लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। - अब आप चौकी पर मां पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा को विराजमान करें। - भगवान शिव और माता पार्वती को रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें। - इसके बाद देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें। - माता पार्वती को 16 सोलह श्रृंगार की सभी वस्तुओं को दान करें। - अब आप व्रत कथा का पाठ करें। - पार्वती चालीसा का पाठ करें और मंत्रों का जप भी करें। - अब आरती के बाद सभी को प्रसाद बांटें।   ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:47:11 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 04 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष उधार दिया गया धन वापस मिलेगा। बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ सकती है। सामाजिक कार्यों और समारोह में भाग ले सकते हैं। शिक्षा से संबंधित लोग सम्मानित होंगे।वृषअप्रत्याशित धन लाभ और सफलता। परिवार के सदस्यों की उन्नति के योग है। मन के मुताबिक काम होते रहेंगे। अस्थायी नौकरी पक्की हो सकती है।मिथुनपुराने मित्रों और निकट संबंधी से मुलाकात होगी। सुख और शांति से दिन बीतेगा। प्रयत्नों का सुपरिणाम मिलेगा। परिस्थिति बदलेगी, समस्या सुलझेगी।कर्कबंधु-बांधवों से फिर अच्छे संबंध बनेंगे। अनहोनी की आशंका है, ईश्वरीय इच्छा। विदेश यात्रा संबंधी कार्यों में व्यस्ता। धन का लेन-देन योजनानुसार करें।सिंहझूठ और छल का मायाजाल घेर सकता है। किसी से कोई विवाद हो सकता है। बिगड़े हुए काम बनेंगे, प्रसन्नता होगी। भावनाओं पर नियंत्रण आवश्यक।कन्याउच्चाधिकारियों से उलझना ठीक नहीं होगा। शुभ समाचार मिलेंगे, साथी का सहयोग भी। निराशा मिटेगी, आशा का संचार होगा। धन लाभ, अचल संपत्ति में वृद्धि।तुलाउच्चाधिकारी नाराज लेकिन साथी प्रसन्न। परिवार के लोगों की उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान। स्वास्थ्य गड़बड़ा सकता है। कार्य क्षेत्र का विस्तार होगा।वृश्चिक कार्यक्षेत्र बढ़ाने के प्रयास सफल होंगे। मित्र और परिस्थितियां अनुकूल नहीं। सफलताएं लोकप्रियता बढ़ाएगें। आवश्यक काम शीघ्र निपटा लें।धनुसंघर्ष अधिक-फल मिश्रित। स्वास्थ्य संबंधी चिंता से मुक्ति मिलेगी। सरकारी विवादों को निपटाने का प्रयास करें। अपने ज्ञान/प्रवचन से लोगों को प्रभावित करेंगे।मकर स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। सुख और सुख के साधन दोनों ही मिलेंगे। क्रोध और वाणी दोनों को काबू में रखें। संघर्ष तो है, लेकिन बाद में विजय भी। कुंभसोच समझ कर वाणी का प्रयोग करें। आप रचनात्मक और सकारात्मक रहेंगे। व्यर्थ का कलह तन मन का कष्ट भी। नई वस्तुओं से ऐश्वर्य और सम्मान बढ़ेगा।मीनवरिष्ठ अधिकारी आपकी प्रशंसा करेंगे। श्रेष्ठ लोगों से सुखद भविष्य का आश्वासन। भाग्यबल से विकास पथ पर बढेंगे। ईर्ष्या द्वेष रखने वाले बढ़ेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:47:11 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 3 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 3 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 3  अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं। यहाँ बिना किसी सिंबल के आज का सभी 12 राशियों का लव राशिफल दिया गया है:मेष राशिदाम्पत्य या प्रेम जीवन में ऊर्जा का नया संचार होगा। आपसी अनबन को संवाद के जरिए सुलझाने का स्वर्णिम अवसर है, जिससे परस्पर आत्मीयता प्रगाढ़ होगी।वृषभ राशिआवेश या अत्यधिक संवेदनशीलता में आकर किसी भी निर्णय पर न पहुंचें। भ्रामक अफवाहों से प्रभावित होकर अपने प्रिय पर संदेह करने की भूल बिल्कुल न करें।मिथुन राशिअनुराग और उल्लास से परिपूर्ण दिवस है। वैचारिक मतभेद मिटेंगे और भविष्य के ताने-बाने को मिलकर बुनने के लिए यह अनुकूल बेला है।कर्क राशिअपने मनोभावों पर संयम रखना आवश्यक है। बाहरी व्यक्तियों के हस्तक्षेप को अपने पाले में जगह न दें, अन्यथा अकारण मानसिक व्यग्रता बढ़ सकती है।सिंह राशिप्रियतम का सान्निध्य और अकाट्य समर्थन प्राप्त होगा। आत्मीय पलों की अधिकता रहेगी तथा किसी अप्रत्याशित उपहार या आमोद-प्रमोद का कार्यक्रम तय हो सकता है।कन्या राशिसंबंधों में स्थायित्व और परिपक्वता दिखाई देगी। अपने स्नेहीजन के लिए कोई विशेष सरप्राइज रूपरेखा तैयार करें, जिससे आपसी तल्खी छूमंतर हो जाएगी।तुला राशिप्रसन्नता और सुकून का आवरण आपके दिन पर छाया रहेगा। प्रिय के संग गुजारने के लिए उत्कृष्ट क्षण मिलेंगे। बेबुनियाद बातों से अप्रभावित रहकर अपने साथी पर पूर्ण आस्था रखें।वृश्चिक राशिसंध्याकाल अत्यंत रमणीय रहेगा। किसी शांत या प्रिय स्थल पर विचरण करने की रूपरेखा बन सकती है। अपनी वाणी में मिठास और चित्त में धैर्य संजोए रखें।धनु राशिसाथी की परिपक्व सोच और अगाध स्नेह से मन प्रफुल्लित रहेगा। हर परिस्थिति में एक-दूसरे का संबल बनना आपके रिश्ते को और अधिक अमिट बनाएगा।मकर राशिआत्मीय रिश्तों में पारदर्शिता और संयम की अनिवार्यता है। कोई तृतीय पक्ष आपके मध्य दूरी पैदा करने की चेष्टा कर सकता है, अतः अपनी दृष्टि सतर्क रखें।कुंभ राशिअतीत के पन्नों को पीछे छोड़कर एक नए अध्याय की शुरुआत करने का अनुपम सुयोग है। अंतर्मन का यह तालमेल आपके रिश्ते में मिठास घोलेगा।मीन राशिप्रिय की ओर से कोई मनभावन सौगात मिलने के संकेत हैं। दूरस्थ स्थानों पर निवासरत प्रियजनों से संपर्क या पुनर्मिलन की संभावना आज बलवती हो सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:47:11 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 4 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 4 अगस्त  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 4 अगस्त 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं। यहाँ बिना किसी सिंबल के आज का सभी 12 राशियों का लव राशिफल दिया गया है:मेष: पार्टनर के प्रयासों की सराहना करें और छोटी-छोटी बातों पर तारीफ जताएं। सिंगल जातकों के लिए किसी नए व्यक्ति के प्रति आकर्षण के योग बन रहे हैं।वृषभ: रिश्ते में स्थिरता महसूस होगी। पार्टनर के साथ बिताया गया समय मन को सुकून देगा और संबंध और गहरा होगा।मिथुन: बातचीत में थोड़ी सतर्कता बरतें। यदि किसी बात पर गलतफहमी हुई है तो खुलकर बात करें, इससे रिश्ता सुधरेगा।कर्क: साथी से पूरा भावनात्मक सहयोग मिलेगा। बीते दिनों में पार्टनर द्वारा दिखाए गए धैर्य के लिए आभार व्यक्त करें।सिंह: मन में चल रही किसी परेशानी को पार्टनर से साझा करें। खुलकर बात करने से तनाव दूर होगा और साथी का सहयोग मिलेगा।कन्या: लव लाइफ में आज थोड़ा ठहराव महसूस हो सकता है। नकारात्मक सोचने के बजाय पार्टनर से अपनी उम्मीदों पर खुलकर चर्चा करें।तुला: विचारों के बार-बार बदलने से बचें, इससे पार्टनर के साथ अनबन हो सकती है। रिश्तों में स्थिरता और स्पष्ट निर्णय बनाए रखें।वृश्चिक: किसी बात को लेकर संकोच है तो पार्टनर के सामने सच बोलने से राहत मिलेगी। ईमानदारी से संबंध और मजबूत होंगे।धनु: आर्थिक या पारिवारिक निर्णय लेने से पहले पार्टनर की सलाह जरूर लें। आपसी रजामंदी से रिश्ते में भरोसा बढ़ेगा।मकर: प्रेम संबंध को बेहतर बनाने के लिए संवाद बनाए रखना जरूरी है। भावनात्मक मुद्दों को बातचीत के माध्यम से सुलझाएं।कुंभ: दूरियों या गलतफहमियों को केवल अंदाजा लगाने के बजाय सीधी बातचीत से दूर करने की कोशिश करें।मीन: शादीशुदा जातकों के लिए आज का दिन बेहद खास रहेगा। सरप्राइज या छोटे तोहफे से दिन और रोमांटिक बन सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:47:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Sawan Rituals: हरी चूड़ियां पहनने से पहले जरूर करें ये काम, Lord Shiva और Mata Parvati का मिलेगा आशीर्वाद</title>
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<description><![CDATA[ श्रावण मास सुख-समृद्धि लेकर आता है, चारों तरफ हरियाली और खुशनुमा मौसम होता है। भगवान शिव को यह महीना अति प्रिय है। हिंदू धर्म में सावन के महीने में हरे रंग को खुशहाली और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान महिलाएं हरी चूड़ियां और हरे कपड़े पहनती हैं। सावन के मास में शादीशुदा महिलाएं हाथों में हरे रंग की चूड़ियां पहनती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरी चूड़ियां न केवल एक सुंदरता से जुड़ी परंपरा ही नहीं हैं, बल्कि ये श्रावण के पवित्र महीने में समृद्धि, भक्ति, सद्भाव और भगवान शिव व माता पार्वती के दिव्य आशीर्वाद का प्रातीक है। आइए आपको बताते हैं सावन 2026 में भगवान भोलेनाथ कृपा प्राप्त करने के लिए हरी चूड़ियां पहनने की सही तरीका।श्रावण मास में हरी चूड़िया पहनने का सही तरीका?सावन के महीने में सुहागिन महिलाएं हरी चूड़ियां पहनती है। पारंपरिक रुप से इन्हें खुशहाली, आपसी तालमेल, वैवाहिक संबंध और शादीशुदा जीवन से जोड़ा जाता है। इस महीने में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा में महिलाएं हरी चूड़ियां पहनती हैं।सावन में हरी चूड़िया कब पहनें?सावन में हरी चूड़ियां पहने के लिए कुछ खास दिन हैं, जिनमें हरी चूड़ियां पहनना शुभ माना जाता है। श्रावण मास के पहले सोमवार को हरी चूड़ियां पहनें, अगर आप ने अभी तक नहीं पहनती हैं, तो आप सावन के किसी भी सोमवार को या फिर शुक्रवार को हरी चूड़ी पहन सकते हैं। शुक्रवार का दिन वैदिक ज्योतिष में प्रेम संबंध, मधुरता, दापंत्य जीवन का कारक माना जाता है। महिलाओं में सावन माह में स्नान करने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए और फिर श्रद्धापूर्वक हाथों में हरी चूड़ियां पहनें।चूड़िया पहनने से पहले क्या करें?जब आप हरी चूड़ियां पहने तो सबसे पहले इन्हें भगवान शिव और माता पार्वती के सामने रखें। पूजा करने के बाद भगवान से आशीर्वाद मांगे और फिर अटूट विश्वास के साथ इन चूड़ियों को पहन लें। इसके अलावा, महिलाओं को हरी चूड़ियों के साथ सुहाग से जुड़े दूसरे प्रतीकों को भी सम्मान करना चाहिए, जैसे कि मंगलसूत्र, सिंदूर, बिंदी और बिछिया पहन सकती हैं।क्या अविवाहित लड़कियां हरी चूड़ियां पहन सकती हैं?धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुंवारी लड़कियां भी सावन के महीने में हरी चूड़ियां पहन सकती हैं। असल में कई रीति-रिवाजों में हरा रंग को सुख-समृद्धि और उत्पत्ति का रंग माना जाता है। इसके अलावा इस रंग को मां पार्वती के आशीर्वाद से भी देखा जाता है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:47:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Sawan Somwar Vrat Rules: 16 सोमवार व्रत की शुरुआत में न करें ये गलती, मनोकामना पूर्ति के लिए महादेव के सामने बोलें यह मंत्र</title>
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<description><![CDATA[ भगवान शिव की कृपा पाने के लिए सोलह सोमवार का व्रत सबसे सरल और प्रभावी मार्ग है। सोलह सोमवार के व्रत की शुरूआत सावन महीने के सोमवार से की जाती है। इस बार सावन माह की शुरूआत 30 जुलाई से हुई है। वहीं इस महीने की समाप्ति 28 अगस्त 2026 को होगी। ऐसे में अगर आप भी पहली बार सोलह सोमवार व्रत रखने की सोच रही हैं, तो सावन के सोमवार से यह व्रत शुरू करना शुभ है। वहीं पूजा के बाद भगवान शिव के सामने इस एक मंत्र का जाप करने से जातक पर भगवान शिव की कृपा बनी रहेगी।जानें सावन के 16 सोमवार व्रत का महत्वसावन के सोलह सोमवार व्रत को शुरू करने के बाद अगले आने वाले 16 सोमवार तक यह व्रत किए जाते हैं। वहीं 17वें सोमवार को व्रत का उद्यापन किया जाता है। जो भी महिलाएं पहली बार सावन सोमवार व्रत शुरू करने जा रही हैं, उनको भगवान शिव की पूजा से जुड़े कुछ नियमों का पालन जरूर करना चाहिए।बता दें कि 16 सोमवार का व्रत 16 सप्ताह में किया जाता है। जिसमें एक-एक कर जातक अपने सभी पापों से मुक्त होता जाता है। वहीं सावन महीने में भगवान शिव की पूजा के साथ एक प्रार्थना जरूर करना चाहिए। सोमवार व्रत के दौरान महादेव की पूजा के बाद उनके समक्ष खड़े होकर इस एक श्लोक को दोहराएं।श्लोकयत् कृतं तु मया देव पापं जन्मान्तरार्जित्म।क्षन्तव्यं तत् महादेव प्रसीद परमेश्वरम।।इस श्लोक का अर्थ है कि जो भी इस जन्म में या पिछले जन्म में मुझसे पाप हुए हैं। मैं उनके लिए क्षमा मांगती हूं और मुझ पर अपनी कृपा बनाए रखें।जो भी महिलाएं पहली बार सावन का व्रत रखने वाली हैं, वह भी इस बात का खास ध्यान रखें कि सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए बेहद शुभ होता है। ऐसे में यह श्लोक भगवान शिव के सामने सच्चे मन से बोलें। जिससे कि सोलह सोमवार व्रत के पूरे होने के बाद आपकी इच्छा भी पूरी हो जाए।16 सोमवार का व्रत क्यों जरूरीजो भी महिलाएं अविवाहित हैं और योग्य जीवनसाथी की तलाश में हैं। उनको सावन के 16 सोमवार का व्रत जरूर करना चाहिए। इस व्रत को करने से विवाहित महिलाओं के जीवन में सामंजस्य स्थापित होता है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:47:09 +0530</pubDate>
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<title>Stress और Anxiety दूर करता है ‘Har Har Mahadev’ का जाप, Science ने भी मानी इस शिव मंत्र की Healing Power</title>
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<description><![CDATA[ सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही चारों ओर शिव भक्तों की गूंज सुनाई देने लगती है। मंदिरों में जल चढ़ाते शिवभक्त हों या फिर कांवड़ यात्रा पर निकले कांवड़िए। हर किसी की जुबान पर सिर्फ एक ही नाम &#039;हर हर महादेव&#039; होता है। इस जयघोष के बिना यह पर्व अधूरा माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह जयघोष लोग क्यों करते हैं और इसकी शुरूआत कहां से हुई है।पहली बार &#039;हर-हर महादेव&#039; का उत्घोषपौराणिक कथाओं के मुताबिक जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था, तो उसमें से बेहद विषैला हलाहल विष निकला था। इस विष की तपन से पूरी सृष्टि जलने लगी थी। संसार की रक्षा के लिए भगवान शंकर ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया था। भगवान शिव के इस त्याग से प्रसन्न होकर सभी ऋषियों-मुनियों और देवताओं ने आभार व्यक्त करने के लिए पहली बार &#039;हर हर महादेव&#039; का जयघोष किया था।इसे भी पढ़ें: Sawan Somwar Vrat Rules: 16 सोमवार व्रत की शुरुआत में न करें ये गलती, मनोकामना पूर्ति के लिए महादेव के सामने बोलें यह मंत्रइस जयघोष का अर्थ&#039;हर हर महादेव&#039; सिर्फ एक जयकारा नहीं बल्कि भगवान शिव से जुड़ी अटूट श्रद्धा और विश्वाक का प्रतीक है। जब-जब देवताओं पर कोई संकट आया था, या फिर कोई महान असुर सृष्टि पर अत्याचार करने लगा, तो लोगों ने मदद के लिए भगवान शिव का आह्वान किया। भोलेनाथ ने हमेशा आगे आकर अपने सभी भक्तों के सभी कष्टों और पापों का हरण किया था। यही वजह है कि संकट या परेशानी के समय शिव को याद करते हुए भक्त &#039;हर हर महादेव&#039; का जयघोष करने लगे।जयघोष करने से मिलती है ताकतसावन के महीने में जब कांवड़िए पवित्र नदियों से जल भरकर पैदल शिवधाम की तरफ बढ़ते हैं, तो &#039;हर हर महादेव&#039; का जयघोष करते हैं। सैकड़ों किमी की थकान भरे सफर में यह मंत्र भक्तों के अंदर एक नई ऊर्जा, भक्ति और जोश का संचार करता है। माना जाता है कि इस जयघोष के उच्चारण मात्र से मन की घबराहट और शरीर की शारीरिक थकान मिट जाती है। इस कारण से सावन का पवित्र महीना इस पावन जयकारे के बिना अधूरा माना जाता है।शिव मंत्र या &#039;हर हर महादेव&#039; का नियमित जाप करने से शरीर में तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन कम होता है। इससे चिंता, डिप्रेशन और घबराहट दूर होता है और मन शांत होता है। वहीं दिमाग की याददाश्त और ध्यान लगाने की क्षमता बेहतर होती है। सरल शब्दों, यह जाप दिमाग को तनावमुक्त और तेज बनाने वाली एक नेचुरल थेरेपी है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:47:08 +0530</pubDate>
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<title>Gajanan Sankranti 2026: सावन की गजानन चतुर्थी आज, इन Mantras के जाप से चमक सकती है आपकी Fortune</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। वहीं सावन महीने में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को गजानन संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान गणेश की पूजा करते हैं, उनके जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं। साथ ही सुख-समृद्धि आती है। इस बार आज यानी की 02 अगस्त को गजानन संक्रांति का व्रत किया जा रहा है। तो आइए जानते हैं इस दिन की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और मंत्र आदि के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक 01 अगस्त की रात 11:07 मिनट से सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरूआत हुई है। वहीं आज यानी की 02 अगस्त की सुबह 11:15 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के मुताबिक 02 अगस्त संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर भगवान गणेश का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। वहीं शाम को पूजा स्थान पर लकड़ी की चौकी लगाकर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। फिर धूप-दीप जलाएं और भगवान गणेश को चंदन, रोली और फूल आदि अर्पित करें।भगवान गणेश को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद संकष्टी व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें। वहीं चंद्रमा निकलने पर दूध, जल, फूल और अक्षत मिलाकर चंद्रदेव को अर्घ्य दें। इसके बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण करें।मंत्रवक्रतुंड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नम कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।ॐ गण गणपतए नमः।।गजाननं भूतगणादि सेवितं, कपित्थ जंबू फल चारु भक्षणम, उमा शतम् शोक विनाश कार्यक्रम, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम।। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 04 Aug 2026 17:47:04 +0530</pubDate>
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<title>कल से सावन की शुरुआत: Shravan Month में कांवड़ यात्रा के कड़े नियमों का करें पालन, वरना अधूरा रहेगा पुण्य</title>
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<description><![CDATA[ कल यानी 30 जुलाई 2026 से श्रावण मास की शुरुआत हो रही है। सावन शुरु होते ही कांवड़ यात्रा आरंभ हो जाती है। हिंदू धर्म में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। इस दौरान शिव भक्त बड़ी संख्या में हरिद्वार पहुंचते हैं और वहां से गंगाजल लेकर अपने घर के नजदीक शिवालयों में शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कांवड़ उठाने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और शिवजी की कृपा भक्तों को प्राप्त हो सकती है। लेकिन धार्मिक ग्रंथों में कांवड़ यात्रा से संबंधित कई कड़े नियम बताए हैं जिनका पालन करना बेहद जरुरी है। अगर आप इस सावन पहली बार कांवड़ उठाने जा रहे हैं, तो पहले इससे जुड़े सभी नियमों को अच्छे से जान लें। ताकि कांवड़ यात्रा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। आइए आपको बताते हैं कांवड यात्रा से जुड़े जरुरी नियम।कांवड़ यात्रा के 4 प्रकार होते है सावन में कांवड़ यात्रा के चार प्रकार होते हैं, इनमें से सामान्य कांवड़, डाक कांवड़, खड़ी कांवड़ और दांड़ी कांवड़। वैसे इनके अलग-अलग महत्व और नियम होते हैं। कांवड़ के प्रकार के अनुसार ही शिव मंदिर और घर में तैयारी की जाती है।- असल में सामान्य कांवड़ में शिव भक्त यात्रा के दौरान आराम कर सकते हैं। भक्तों के लिए जगह-जगह पर पंडाल की व्यवस्था देखने को मिलती है।- डांक कांवड़ के समय सभी कांवड़िया बिना रुके चलते रहते हैं जब तक की वे अपने घर के पास वाले शिवालय तक न पहुंच जाएं। गौरतलब है कि इसमें कहीं रुका नहीं जाता है। - खड़ी कांवड में कांवड़िया के साथ कोई न कोई मदद के लिए साथ में जरुर चलता है। जब कांवड़िया आराम करता है तो उनका साथी कांवड़ लेकर चलने के लिए अंदाज में कांवड़ को हिलाते-डुलाते रहते हैं।- दांडी कांवड़ सबसे मुश्किल होती है। इसमें शिवभक्त गंगाजी के पास से लेकर अपने क्षेत्र के शिवालय तक दंडवत प्रणाम यानी लेटते हुए जाते हैं। जिस वजह से इस यात्रा में कई बार महीना का समय भी लग जाता है। इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार ही कांवड़ यात्रा का चुनाव कर सकते हैं।कांवड़ यात्रा के दौरान ध्यान रखें ये नियम- माना जाता है कि कांवड़ यात्रियों को गंगा तट से लेकर अपने घर के नजदीक शिवालयों तक कांवाड़ियों को पैदल यात्रा करना चाहिए। ऐसा करने से आपको पुण्य फल प्राप्त होगा। - कांवड यात्रा के दौरान सबसे जरुरी नियम का विशेष ख्याल रखें कि जब भी आप कहीं पर आराम के लिए रुकें, तो कभी भी कांवड़ को जमीन पर न रखें। जगह-जगह पंडालों में इस तरह की व्यवस्था जरुर होती है। - यदि इस बार आप कांवड़ को उठा रहे हैं, तो भूलकर भी पूरे सावन मास में मांस, मदिरा आदि तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें। मन में सिर्फ शुभ विचार रखें।- कांवड़ यात्रा के समय कांवाड़ियों को मन में शिवजी का स्मरण करना चाहिए। पूरे रास्ते में बम बम भोले व हर हर महादेव के जयकारे लगाने चाहिए।  - यदि आप कांवड़ यात्रा के दौरान गलती से जमीन पर कांवड़ रख देते हैं,तो आपको फिर से गंगा जी से गंगाजल लेकर आना चाहिए।  - कांवड़ यात्रा के समय परिवार के सदस्यों को भी सावन से जुड़े सभी नियमों का पालन करना चाहिए। इस अवधि में तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूर रहे हैं। - शौंच करने के बाद कांवड़िये को स्नान करना बेहद जरुरी है और इसके बाद भी कांवड़ को उठाना चाहिए। दरअसल, बिना स्नान किए कांवड़ यात्रा उठाना उचित नहीं माना जाएगा।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Sawan 2026: सोमवार को Belpatra तोड़ने की मनाही क्यों? जानें Shivpuran के महत्वपूर्ण Rules और मान्यताओं का विश्लेषण</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व माना जाता है। श्रावण मास की शुरुआत 30  जुलाई 2026 से शुरुआत हो रही है और इसका समापन 28 अगस्त 2026 को होगी। सावन के सोमवार में भक्तजन बेलपत्र को महादेव को जरुर अर्पित करते हैं। शिवभक्त भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव को बेलपत्र अधिक प्रिय है और इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। खासतौर पर सोमवार के दिन बेलपत्र महादेव को अर्पित करना शुभ होता है। गौरतलब है कि लोग सोमवार के दिन बेलपत्र तोड़कर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं बेलपत्र तोड़ने के नियम के बारे में, शिवपुराण में कुछ विशेष नियम बताए हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि सोमवार और चतुर्दशी पर बेलपत्र तोड़ने के नियम क्या हैं और आखिर शास्त्रों में क्यों कहा गया है इन दिनों में बेलपत्र तोड़ने से बचना चाहिए?किन विशेष तिथियों में नहीं तोड़ना चाहिए बेलपत्रधार्मिक मान्यता के अनुसार, सोमवार, चतुर्दशी तिथि, अमावस्या, अष्टमी और नवमी तिथि को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। जो लोग सोमवार को व्रत रखते हैं, वे लोग रविवार के दिन ही बेलपत्र तोड़कर रख सकते हैं। क्योंकि सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है और इस दिन बेलपत्र तोड़ना शास्त्रों में उचित नहीं माना गया है। सोमवार को बेलपत्र तोड़ने की मनाही क्यों है?गौरतलब है कि हिंदू धर्म में हर एक दिन और तिथि का अपना धार्मिक महत्व होता है। मुख्य रुप से सोमवार का दिन भगवान शिव को अति प्रिय होता है और इस दिन शिव भक्त पूजन और व्रत करते हैं और उन्हें बेलपत्र अर्पित करते हैं।इस दिन भूलकर भी बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। अगर आपको सोमवार के दिन बेलपत्र अर्पित करनी है, तो आपको इसको एक दिन पहले यानी रविवार को तोड़कर रख लें। मान्यता है कि बेलपत्र कभी भी बासी नहीं होता है और इसलिए आप इसको पहले से तोड़कर रख सकते हैं। शिवपूजन में बेलपत्र का महत्वधार्मिक ग्रंथ शिवपुराण में बेलपत्र को पवित्र बताया है। मान्यता है कि बेलपत्र की तीन पत्तियां भगवान शिव के तीन गुणों सत्व, रज और तम का प्रतीक माना जाता है। यदि कोई भक्त सच्चे मन से शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करता है, तो भगवान शिव उसकी मनोकामनाएं जरुर पूरी करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Sawan, 2026:, सोमवार, को, Belpatra, तोड़ने, की, मनाही, क्यों, जानें, Shivpuran, के, महत्वपूर्ण, Rules, और, मान्यताओं, का, विश्लेषण</media:keywords>
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<title>Kanwar Yatra 2026: 30 जुलाई से शुरू हुई कांवड़ यात्रा, जानें Sawan Shivratri और जलाभिषेक की Date</title>
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<description><![CDATA[ हर साल लाखों की संख्या में शिव भक्त कांवड़ यात्रा का इंतजार करते हैं। इस बार 30 जुलाई 2026 से सावन माह और कांवड़ यात्रा की शुरूआत हो चुकी है। सावन का महीना आते ही हर ओर &#039;बोल बम&#039; और &#039;हर हर महादेव&#039; के जयकारे सुनने को मिलते हैं। लाखों की संख्या में कांवड़िए गंगा का पवित्र जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कांवड़ यात्रा की शुरूआत, जलाभिषेक और सावन शिवरात्रि के बारे में बताने जा रहे हैं।कांवड़ यात्रा 2026इस बार 30 जुलाई 2026 से कांवड़ यात्रा की शुरूआत हो रही है। इस दिन से सावन की भी शुरूआत मानी जा रही है। इस दौरान लाखों की संख्या में शिवभक्त हरिद्वार, ऋषिकेश और अन्य गंगा घाटों से गंगाजल लेकर अपने स्थानीय शिव मंदिरों की ओर पैदल यात्रा करते हैं। इस दौरान पूरे रास्ते सेवा, भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिलता है।जलाभिषेक और सावन शिवरात्रि की डेटवहीं 11 अगस्त 2026 को कांवड़ यात्रा की समाप्ति होगी। इसी दिन सावन शिवरात्रि भी मनाई जाएगी। कावड़िए अपनी यात्रा को पूरा करके सावन शिवरात्रि के मौके पर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। धार्मिक मान्यता है कि सावन शिवरात्रि को भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।कांवड़ यात्रा का महत्वकांवड़ यात्रा को भगवान शिव की भक्ति से जुड़ी सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक माना जाता है। इस दौरान कांवड़िए गंगा का जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान भक्त सादा जीवन अपनाते हैं और श्रद्धा के साथ महादेव का नाम लेकर आगे बढ़ते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 30 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष कई मामलों में सफलता मिलेगी। संतान की उन्नति रूके हुए काम बनेंगे। वीआईपी जैसा सम्मान मिलेगा। दोपहर बाद स्वास्थ्य हानि।वृषविशेष उपहार मिलेंगे। अस्थायी व्यवसाय, स्थायी हो सकता है। विषम परिस्थितियों में भी धैर्य और विजय। धन हानि और व्यर्थ की यात्रा।मिथुनस्वास्थ्य भी डगमगाएगा। अपने को चुनौतियों से घिरा पाएंगे। बड़े लोगों से आपका संपर्क बढ़ेगा। सगे संबंधियों से शुभ समाचार मिलेंगे।कर्कविश्वासघात से मन को गहरी चोट लगेगी। शुभ समाचारों से खुशी होगी। अनेक कार्यक्रमों में व्यस्त रहेंगे। नायक जैसा सम्मान प्राप्त होगा।सिंहडॉक्टरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। स्वास्थ्य को झटका लगेगा। अर्जित ज्ञान/प्रशिक्षण से प्रतिष्ठा मिलेगी। अविवाहितों को अच्छे विवाह प्रस्ताव मिलेंगे। कन्याकलह कारक दिन, वाणी पर नियंत्रण करें। यात्रा में खर्च बढ़ेगा। सामाजिक, धार्मिक कार्यों में व्यस्तता। जनहित के कामों में रूचि लेंगे और दान भी करेंगे।तुलाडॉक्टरों के चक्कर काटने पड़ेंगे। कलहकारी दिन हैं, संतुलन बनाये रखें। धैर्य रखें कार्य सिद्ध होगा। मामा पक्ष से मतभेद बढ़ सकते हैं।वृश्चिक पूंजीनिवेश भविष्य के लिए लाभदायक। पारिवारिक एवं संतान विषयक चिंताएं दूरी होगी। कोई गलत निर्णय ले सकते हैं, जल्दबाजी न करें। सोच समझ कर बातें करें।धनुराहत मिलने की खबरें मिलेगी। मिश्रित होते हुए भी दिन अच्छा है। रोजगार के साधन बढ़ेंगे, संतान पक्ष से चिंता। सरकारी काम आसानी से बनेंगे।मकर इटरंव्यू में सफलता मिलेगी। तनाव से छुटकारा मिलेगा, सहयोगियों से सहायता। दाम्पत्य जीवन में मधुरता। व्यस्तता के कारण भोजन नसीब नहीं होगा।कुंभरिश्तेदारों का आवागमन। गुरुजनों/वरिष्ठ अधिकारी प्रशंसा करेंगे। चिंताओं का अंत- सुखद परिणाम। खास सभा समारोह के भाग लेने के योग।मीनसुख-सुविधाएं बढ़ते हुए क्रम में है। गलतफहमियां दूर होगी, छवि निखरेगी। जरूरतमंदों की सेवा करने से खुशी। अचानक और अनाप-शनाप खर्च उदास रखेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>L Name Personality: प्यार में सबसे वफादार होते हैं L अक्षर वाले जातक, पार्टनर के लिए साबित होते हैं Best Partner</title>
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<description><![CDATA[ अंक ज्योतिष के मुताबिक जिन लोगों का नाम L अक्षर से शुरू होता है। उनके स्वामी देवगुरु बृहस्पति होते हैं। इन जातकों की पर्सनालिटी काफी अट्रैक्टिव, फ्रेंडली और पॉजिटिव होती है। ऐसे जातक रचनात्मक होते हैं और जहां भी रहते हैं उस जगह को खुशहाल बना देते हैं। इन जातकों के जीवन में ग्रोथ, ज्ञान और तरक्की का अच्छा मेल देखने को मिलता है। वहीं यह जातक बुद्धिमान, किस्मत वाले और अच्छे स्वभाव के होते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको L नाम वाले जातकों की पर्सनालिटी के बारे में बताने जा रहे हैं। साथ ही यह भी जानेंगे कि इन लोगों का करियर और लव लाइफ कैसी होती है।जानें कैसा होता है स्वभावजिन जातकों का नाम L अक्षर से शुरू होता है। उन लोगों की पर्सनालिटी काफी अट्रैक्टिव और चार्मिंग होती है। स्वभाव और व्यक्तित्व के कारण लोगों पर इनकी बातों का अधिक प्रभाव होता है।इसे भी पढ़ें: Kanwar Yatra 2026: 30 जुलाई से शुरू हुई कांवड़ यात्रा, जानें Sawan Shivratri और जलाभिषेक की Dateहमारे आसपास सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की ऊर्जा मौजूद होती है। अंक ज्योतिष के मुताबिक L नाम के लोगों में ऐसी एनर्जी होती है, जो आसपास के माहौल को खुशहाल और एनर्जेटिक बना देती है।L नाम वाले जातक अपने करियर और जीवन को लेकर बड़े सपने देखते हैं। हालांकि कई बार जरूरत से ज्यादा सोचने से बेचैन हो सकते हैं। ऐसे में इनके लिए संतुलन जरूरी होता है।इस नाम के जातक दिल के साफ और इमोशनल होते हैं। दूसरों की मदद के लिए यह हमेशा आगे होते हैं।L नाम वाले लोग शांत स्वभाव के होते हैं। लेकिन जब इनको किसी बात पर गुस्सा आती है, तो वह ज्यादा बढ़ने की आशंका होती है।लव लाइफयह जातक जिससे प्यार करते हैं, उनसे पूरे दिल से जुड़ जाते हैं। अंक ज्योतिष की मानें, तो L नाम वाले जातक अपने पार्टनर के लिए काफी वफादार होते हैं और उनको कभी धोखा नहीं देते हैं।प्यार के मामले में लोग बहुत रोमांटिक स्वभाव के होते हैं। यह जातक हमेशा अपने पार्टनर को हमेशा स्पेशल महसूस कराने की कोशिश में लगे रहते हैं। वहीं उनका पूरा ध्यान रखते हैं।यह जातक अपने प्यार के साथ-साथ परिवार का भी ध्यान रखते हैं। यह उनको लेकर कोई भी फैसला जल्दबाजी में फैसला नहीं करते हैं।L नाम वाले जातक अच्छे पार्टनर साबित होते हैं। क्योंकि अगर इनको किसी से एक बार प्यार हो जाता है, तो वह जीवनभर उसका साथ निभाते हैं।करियरकरियर के मामले में L नाम वाले जातक मेहनती स्वभाव के होते हैं। हर काम को यह पूरी मेहनत और लगन के साथ करते हैं। वहीं यह लोग अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से पूरा करना जानते हैं।इन लोगों के पास काम को लेकर नए और यूनिक आइडिया होते हैं। वहीं यह लोग काफी क्रिएटिव होते हैं। यह खूबी इनको बिजनेस और नौकरी के फील्ड में इनको आगे लेकर जाती हैं।इन जातकों में नेतृत्व क्षमता अच्छी होती है। ऐसे में अगर यह लोग किसी फील्ड में बड़ी पोजिशन पर बैठे हों, तो वहां एक अच्छे मैनेजर या बिजनेस लीडर बन सकते हैं।इन क्षेत्रों में मिलती है सफलताL नाम के जातकों को लेखन, शिक्षा, मैनेजमेंट, काउंसलिंग और फाइनेंस आदि के क्षेत्रों में अच्छी सफलता मिलती है। वहीं क्रिएटिव फील्ड में भी यह लोग अच्छा करते हैं। यह लोग पैसे कमाना अच्छे से जानते हैं। वहीं अच्छा जीवन जीने के लिए नए रास्ते खोजते हैं और उसके लिए मेहनत के साथ-साथ प्रयास भी करते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 31 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष उदर और छाती के रोग चिंता देंगे। सरकार और समाज- दोनों जगह प्रभाव बढ़ेगा। सोच समझकर बोलें। विचारों में स्थिरता नहीं रहेगी।वृषकोर्ट कचहरी में विजय की संभावना। समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी। विवेक से काम लें, परिस्थितियां प्रतिकूल है। उज्ज्वल भविष्य के लिए, उत्तम निर्णय लेंगे।मिथुनसमय को पहचान पर कार्य करें। व्यवसाय बढ़ेगा, समस्याएं हल होगी। व्यापार बढ़ाने के प्रयास सफल होंगे। शुभ समाचारों से खुशी होगी, रोजगार में प्रगति भी।कर्करोगीजनों को स्वास्थ्य लाभ होगा। अशुभ समय है- अप्रिय घटना और समाचार। मनोरंजन और मौजमस्ती का दिन है। थकावट महसूस करेंगे।सिंहआपका व्यक्तित्व निखरेगा। व्यापार विस्तार के योग है। दिन अच्छा है, लेकिन शंका बढ़ाने वाला भी। अशुभ और अप्रिय समाचार मिलेंगे।कन्याचुनौती स्वीकार करेंगे, आगे बढ़ेंगे। अनेक बाधाओं का सामना करना होगा। येन केन प्रकारेण- इज्जत बचाने में सफल रहेंगे। आर्थिक संकट रहेगा, शायद कर्ज भी लें।तुलाअधूरे पड़े हुए काम पूरे हो सकते हैं। साझेदारी में लाभ और सुख। काम पर ध्यान दें, अफवाहों से बचें। सबसे और सब जगह प्रेम और आदर मिलेगा।वृश्चिक खानपान में सावधानी बरतें। जो भी करेंगे, उसमें लाभ होगा। चुनौतियों का मुकाबला डटकर करेंगे। आत्मविश्वास बढ़ेगा।धनुशुभ समाचार मिलेंगे, प्रेम संबंध बढ़ेंगे। परिवार के लोग साथ खड़ें होंगे। पारिवारिक सहमति से महत्वपूर्ण निर्णय। व्यर्थ के कामों में दिन बीतेगा।मकर घर के लिए कीमती सामान की खरीदारी। न तो तन का रिस्क लें, न धन का। जो भी करेंगे उसमें सफलता मिलेगी। चारों तरफ से शुभ समाचार और लाभ।कुंभरिश्ते मजबूत होंगे। मित्र और गुरुजनों की सलाह से निर्णय लें। रंगमंच और संचारकर्मी यशस्वी होंगे। परिश्रम के अनुरूप फल प्राप्ति से खुशी।मीनमिश्रित फल मिलेंगे, दिनचर्या सामान्य। घरेलू सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य में सुधार होगा। मिश्रित फल वाला दिन, विवेक से काम लें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:53 +0530</pubDate>
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<title>August 2026 Festival List: रक्षाबंधन और Hariyali Teej से लेकर सूर्य&#45;चंद्र Grahan का असर, जानें महत्वपूर्ण व्रत&#45;त्योहारों का पूरा कैलेंडर</title>
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<description><![CDATA[ अगस्त का पूरा महीना व्रत-त्योहारों से भरा हुआ है। सावन की शुरुआत भी हो चुकी है, ऐसे में शिवभक्त भी भगवान भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए व्रत रखेंगे और पूजा-अर्चना करेगे। वैसे अगस्त 2026 की शुरुआत शुभ योग के साथ हो रही है। असल में यह पूरा महीना भक्ति में डूबने वाला है। व्रत-त्योहारों की झड़ी लगने वाली है। इस दौरान कई मुख्य व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे, जिनका हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। अगस्त में भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन, महिलाओं के लिए प्रमुख व्रत हरियाली चीज, एकादशी-प्रदोष व्रत सहित अन्य व्रत-त्योहारों की लिस्ट इस लेख में हम आपको बताएंगे। इस बार सावन के महीने में सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों लगेंगे। जिसका असर देश-दुनिया व विभिन्न राशियों पर देखने को मिलेगा। चलिए बिना देर किए आपको बताते हैं अगस्त महीने में पड़ने वाले व्रत-त्योहारों की लिस्ट।अगस्त में कब लगेंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण?अगस्त के महीने में सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों लगेंगे। 12 अगस्त 2026 को सूर्य ग्रहण लगेगा। भारत के समय के अनुसार, इसकी शुरुआत रात 9:04 बजे होगी और समाप्त 13 अगस्त की सुबह 4.25 बजे होगा। लेकिन यह सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा। जिसके चलते भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा। वहीं दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगेगा। भारत के समय के अनुसार, यह सुबह 6.53 बजे शुरु होकर दोपहर 12.31 बजे तक रहेगा। वैसे चंद्र ग्रहण भी भारत में नजर नहीं आएगा। इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा।  इसे भी पढ़ें: Hariyali Teej 2026 : सुहागिनों के लिए खास है हरियाली तीज व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और Vrat Rules की पूरी जानकारी अगस्त के प्रमुख व्रत और त्योहार अगस्त के महीने में आने वाले त्योहारों के लिए पहले से ही मन में उत्साह उत्पन्न हो जाती है, आइए आपको अगस्त के प्रमुख व्रत-त्योहारों के बारे में बताते है--2 अगस्त (रविवार)- गजानन संकष्टी चतुर्थी (सावन संकष्टी चतुर्थी)-3 अगस्त (सोमवार)- पहला सावन सोमवार व्रत-4 अगस्त (मंगलवार)- पहला मंगला गौरी व्रत-5 अगस्त (बुधवार)- सावन कालाष्टमी व्रत-7 अगस्त (शुक्रवार)- मासिक कार्तिगाई-8 अगस्त (शनिवार)- रोहिणी व्रत-9 अगस्त (रविवार)- कामिका एकादशी-10 अगस्त (सोमवार)- दूसरा सावन सोमवार व्रत, सोम प्रदोष व्रत-11 अगस्त (मंगलवार)- दूसरा मंगला गौरी व्रत, सावन शिवरात्रि-12 अगस्त (बुधवार)- सावन अमावस्या, हरियाली अमावस्या, सूर्य ग्रहण-13 अगस्त (गुरुवार)- सावन शुक्ल प्रतिपदा, श्रावण शुक्ल पक्ष प्रारंभ-15 अगस्त (शनिवार)- हरियाली तीज-16 अगस्त (रविवार)- सावन विनायक चतुर्थी-17 अगस्त (सोमवार)- तीसरा सावन सोमवार, नाग पंचमी, सिंह संक्रांति-18 अगस्त (मंगलवार)- तीसरा मंगला गौरी व्रत, कल्कि जयंती-19 अगस्त (बुधवार)- तुलसीदास जयंती-20 अगस्त (गुरुवार)- सावन मासिक दुर्गाष्टमी-23 अगस्त (रविवार)- श्रावण पुत्रदा एकादशी-24 अगस्त (सोमवार)- चौथा सावन सोमवार-25 अगस्त (मंगलवार)- चौथा मंगला गौरी व्रत-26 अगस्त (बुधवार)- ओणम-27 अगस्त (गुरुवार)- श्रावण पूर्णिमा व्रत-28 अगस्त (शुक्रवार)- श्रावण पूर्णिमा, रक्षाबंधन, चंद्र ग्रहण -31 अगस्त (सोमवार)	- कजरी तीज, श्रीगणेश चतुर्थी (बहुला चतुर्थी)  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:52 +0530</pubDate>
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<title>Sawan Month में श्रृंगी से जलाभिषेक क्यों है फलदायी? जानिए Lord Shiva के इस प्रिय पात्र का अद्भुत धार्मिक रहस्य</title>
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<description><![CDATA[ सावन का महीना शुरु हो चुका है। इस दौरान श्रद्धालु भगवान शिव का व्रत रखेंगे और पूजा-अर्चना करेंगे। हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा विशेष रुप से फलदायी मानी जाती है। यह पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित है। सावन के सोमवार को भक्तजन घर या मंदिर में रुद्राभिषेक का आयोजन करते हैं और शिवा जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।मान्यता के अनुसार, रुद्राभिषेक से भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका है और इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। खासतौर पर इस अनुष्ठान में मंत्रों के उच्चारण के साथ शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और अन्य पवित्र सामग्रियों से अभिषेक किया जाता है जिसे काफी फलदायी माना जाता है। असल में रुद्राभिषेक में एक विशेष पात्र का इस्तेमाल किया जाता है जिसे श्रृंगी कहते हैं। कहा जाता है कि इसके बिना अनुष्ठान पूर्ण नहीं है। आइए आपको बताते हैं हैं कि रुद्राभिषेक में श्रृंगी से जल चढ़ाना क्यों जरुरी है। क्या होता है श्रृंगी पात्र?खासकर श्रृंगी पूजा में इस्तेमाल होने वाला एक विशेष प्रकार का पात्र होता है, जिसका आकार गाय या किसी अन्य पशु के सींग जैसा होता है। दरअसल, श्रृंगी धातुओं का बना होता है जैसे चांदी, तांबे या पीतल से इसे बनाया जाता है। पूरे रुद्राभिषेक के समय इसी श्रृंगी से शिवलिंग पर जल की धारा अर्पित की जाती है। श्रृंगी से होकर गुजरने वाली जलधारा भगवान शिव को शीतलता प्रदान करती है, जिससे भक्तों को भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। शिवलिंग पर श्रृंगी से जल चढ़ाने का महत्व क्या है?धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रृंगी से शिवलिंग पर जल अर्पित करने से पूजा का प्रभाव और ज्यादा बढ़ जाता है। श्रृंगी से निकलने वाली जलधारा निरंतर होती है और ये सीधे शिवलिंग पर पहुंचती है। इसी कारण से श्रृंगी से रुद्राभिषेक करने से इस अनुष्ठान को पूर्ण माना जाता है। हिंदू कथाओं और शिवमहापुराण में बताया गया है कि यह पात्र भगवान शिव को उनके परम भक्त नंदी ने उपहार स्वरुप दिया था और तभी से शिव जी ने इसके अपने अभिषेक के लिए एक प्रिय पात्र के रुप स्वीकार किया था। तभी से इस पवित्र पात्र का इस्तेमाल अभिषेक करने के लिए किया जा रहा है। श्रृंगी का बिना इस्तेमाल किए रुद्राभिषेक किए जा सकता हैमाना जाता है कि रुद्राभिषेक किया जाए तो सिर्फ श्रृंगी से किया जाना चाहिए। अगर आपके पास श्रृंगी नहीं हैं, तो आप किसी अन्य पात्र जैसे तांबे के लोटे से भी जल अर्पित कर सकते हैं। जब आप जल अर्पित करें तो इस बात का ध्यान रखें कि शिवलिंग पर जलधारा टूटनी नहीं चाहिए।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:52 +0530</pubDate>
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<title>Vastu Tips: सूर्यास्त के बाद भूलकर भी न खरीदें ये 5 चीजें, घर में बढ़ सकती है Negative Energy और कंगाली</title>
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<description><![CDATA[ वास्तु शास्त्र में पॉजिटिव एनर्जी में वृद्धि और घर में फैली निगेटिविटी को दूर करने के लिए कई तरह के उपायों के बारे में बताया गया है। इसके अलावा कुछ आदतों की वजह से भी घर में निगेटिव और पॉजिटिव एनर्जी का प्रभाव पड़ता है। ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसी आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको वास्तु शास्त्र में सूर्यास्त के बाद नहीं करना चाहिए। वहीं कुछ चीजें ऐसी हैं, जिनको शाम के समय खरीदने से बचना चाहिए।वास्तु के नियमों के मुताबिक घर की पॉजिटिव एनर्जी पर अच्छा प्रभाव नहीं माना जाता है। इससे पारिवारिक जीवन में तनाव और आर्थिक परेशानियों में वृद्धि होती है। ऐसे में आइए जानते हैं शाम को किन-किन चीजों को नहीं खरीदना चाहिए।इसे भी पढ़ें: L Name Personality: प्यार में सबसे वफादार होते हैं L अक्षर वाले जातक, पार्टनर के लिए साबित होते हैं Best Partnerनमक खरीदने से बचना चाहिएवास्तु के मुताबिक घर की सुख-समृद्धि और शांति के लिए नमक का इस्तेमाल कारगर होता है। नमक भोजन का स्वाद बढ़ने के साथ जीवन में तरक्की के रास्ते खोलता है। भूलकर भी सूर्यास्त के बाद नमक नहीं खरीदना चाहिए। वास्तु शास्त्र के मुताबिक आर्थिक जीवन में कई तरह की बाधाएं आ सकती हैं। बेफिजूल के खर्चों में इजाफा हो सकता है।झाड़ू न खरीदेंधार्मिक शास्त्रों के मुताबिक झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में शाम के समय नई झाड़ू खरीदना अच्छा नहीं माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि पर निगेटिव असर होता है। जीवन में धन से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं।ना खरीदें सरसों का तेलसूर्यास्त के बाद सरसों का तेल खरीदना वर्जित माना जाता है। जिन घरों में सूर्यास्त के बाद सरसों का तेल खरीदा जाता है। वहां पर निगेटिव एनर्जी का प्रभाव बढ़ने लगता है। ऐसा करने से परिवार के सदस्य अक्सर बीमार रहने लगते हैं। इसके अलावा कार्यों में रुकावटें आने लगती हैं।शाम को न खरीदें दूधशाम के समय दूध खरीदने से बचना चाहिए। दूध का संबंध चंद्रमा से होता है और सूर्यास्त के बाद दूध खरीदने से बचना होगा। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ऐसा करने से घर में आने वाली निगेटिव एनर्जी में वृद्धि होती है।न खरीदें काला तिलवैसे तो काले तिल का दान करने से जीवन में आने वाली कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं। लेकिन सूर्यास्त के बाद काला तिल खरीदने से बचना चाहिए। इससे कष्टों और मानसिक तनाव में वृद्धि होती है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:51 +0530</pubDate>
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<title>Shukra Gochar 2026: कन्या राशि में शुक्र का प्रवेश, September तक इन 3 Zodiac Signs की चमकेगी किस्मत</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष के लिहाज से आज 01 अगस्त का दिन विशेष संयोग वाला है। क्योंकि आज सुख और विलासिता के कारक शुक्र राशि परिवर्तन करेंगे। ज्योतिष गणना के मुताबिक शुक्र अभी तक सिंह राशि में विराजमान थे। लेकिन आज 01 अगस्त को शुक्र का कन्या राशि में गोचर होगा। कन्या राशि के स्वामी बुध हैं, वहीं बुध और शुक्र के बीच मित्रता है। ऐसे में शुक्र का अपने मित्र ग्रह की राशि में गोचर शुभ माना जा रहा है। जिसका सकारात्मक प्रभाव कई राशियों पर देखने को मिलेगा। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि शुक्र के गोचर से किन राशियों के अच्छे दिन शुरू होंगे। मिथुन राशिमिथुन राशि के जातकों के लिए भी शुक्र का गोचर शुभ है। इस राशि के लोगों को कारोबार में सफलता मिलने के साथ आपके द्वारा किए गए प्रयासों को सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। पहले की तुलना में आर्थिक स्थिति ज्यादा मजबूत होगी। कोई अच्छी खबर सुनने को मिल सकती है। नौकरीपेशा लोगों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। सिंतबर तक भाग्य का साथ मिलेगा और कोई जरूरी काम आसानी से पूरा होने की संभावना है।सिंह राशिशुक्र का यह गोचर सिंह राशि वालों के लिए नए अवसर लेकर आया है। लंबे समय से अगर किसी कर्ज से परेशान हैं, तो उससे राहत मिल सकती है। वहीं लंबे समय से खोई हुई मूल्यवान वस्तु मिल सकती है। आर्थिक और व्यक्तिगत जीवन में पॉजिटिव बदलाव देखने को मिल सकते हैं। वहीं करियर में ऊंचा मुकाम हासिल हो सकता है।कन्या राशिशुक्र का यह गोचर कन्या राशि में हो रहा है। इसलिए इस राशि के लिए यह गोचर विशेष रूप से लाभकारी रहने वाला है। अचानक से धन लाभ होगा और निवेश से भविष्य में अच्छा लाभ मिल सकता है। व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा और लोग आपकी बातों से प्रभावित होंगे। व्यापार से जुड़े लोगों को अच्छा धन लाभ होगा। सिंतबर तक इस राशि के जातकों को जीवन में कई सकारात्मक बदलाव और सुखद अनुभव मिलेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 01 August 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष अधिकारी वर्ग आपकी प्रशंसा करेगा। भविष्य में लाभप्रद मित्रों की संख्या बढ़ेगी। शारीरिक मानसिक कष्ट देने और बढ़ाने वाला दिन है। धर्म-कर्म में रूचि बढ़ेगी, पूजा पाठ से लाभ।वृषपरिवार में मांगलिक कार्यों में कारण सक्रियता बढ़ेगी। दिन सुख शांति का संदेश लाया है। अस्थिरता और मानसिक अशांति। नौकरी व्यवसाय में लाभ की खुशी।मिथुनसुखद दिन कार्यो मे सफलता। परीक्षा में सफलता मिलेगी। अधूरे काम पूरे हो जाएंगे। मिश्रित फल वाला दिन है। प्रशंसनीय कार्य होंगे, लोकप्रियता बढ़ेगी। सरकारी दफ्तर में/व्यक्ति से विवाद न करें।कर्कपरिवार में मंगल कार्य का आयोजन। व्यवसाय में अच्छी सफलता के योग हैं। सभी व्यक्तियों का सहयोग मिलेगा। हर कार्य में सफलता मिलेंगे।सिंहअपने और जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। मजबूरी में मन मारकर काम करना होगा। बुजुर्गों के सहयोग से कार्य पूरा होगा। किसी के झगड़े में बीच बचाव न करें।कन्याविवाहितों को मिलजुल कर समस्या का हल ढूंढना चाहिए। तन मन के लिए दिन ठीक नहीं है। मान-प्रतिष्ठा से गौरव की अनुभूति। घरेलू कामों में व्यस्तता बनी रहेगी।तुलापिछली चिंताओं से मुक्ति का योग है। आर्थिक लाभ पर केन्दि्रत दिन। असंतोष और उदासी छाई रहेगी। आप सब को संतुष्ट करेंगे।वृश्चिक मनोरथ पूर्ति पर खुशी होगी। आध्यात्मिक कार्यों में प्रगति, शक्ति की प्राप्ति। भाग्योन्नति के शुभ समाचार। घरेलू चिंताएं घेरेगी।धनुनए कार्यों पर विचार करें, लाभ होगा। आत्मविश्वास और ऊर्जा से भरपूर रहेंगे। कार्यालय में आपकी प्रशंसा होगी। काम की अधिकता से तन मन थकेगा।मकर बहसबाजी से बचें, कोई रिस्क न लें। परेशानी में रहेंगे, आर्थिक हानि भी। अधिकारी आपसे प्रभावित होंगे, प्रसन्न रहेंगे। परिस्थितियां सुखद होगी।कुंभमान-प्रतिष्ठा और उत्साह की प्राप्ति। व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में सफलता मिलेगी। पालतू पशुओं से खतरा है। प्रेम विवाह का प्रस्ताव मिलेगा। मीनधन लाभ के अवसर घर पर। सत्ता सम्पन्न लोगों से सम्पर्क। जितना जोखिम कम लेंगे, उत्तम लाभ में रहेंगे। पदोन्नति के योग है, सहयोग भी मिलेगा। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Sawan 2026: व्रत शुरू करने से पहले जरूरी है संकल्प लेना, जानें इसका सही तरीका</title>
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<description><![CDATA[ सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है। इस साल 30 जुलाई से 28 अगस्त तक भगवान शिव की पूजा का विशेष समय रहेगा। इस पूरे महीने में लाखों शिव भक्त कांवड़ यात्रा करते हैं, जबकि कई लोग हर सोमवार का व्रत रखते हैं। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर आप सावन सोमवार का व्रत कर रहे हैं तो सिर्फ व्रत रखना ही काफी नहीं होता। व्रत शुरू करने से पहले संकल्प लेना भी बहुत जरूरी माना जाता है।व्रत की शुरुआत खाने से नहीं, संकल्प से होती हैअक्सर लोग सोचते हैं कि व्रत की शुरुआत सुबह कुछ न खाने से हो जाती है। लेकिन धार्मिक मान्यता कहती है कि व्रत की असली शुरुआत आपके मन के संकल्प से होती है। जब आप भगवान शिव के सामने पूरे विश्वास और सच्चे मन से संकल्प लेते हैं, तभी व्रत का महत्व और बढ़ जाता है।संकल्प कब लेना चाहिए?सावन के पहले सोमवार की सुबह संकल्प लेना सबसे शुभ माना जाता है। अगर संभव हो तो ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान करें। हल्के या साफ रंग के कपड़े पहनें। भगवान शिव के सामने शांत होकर बैठें। कुछ देर मन को शांत करें और पूरे विश्वास के साथ &quot;ॐ नमः शिवाय&quot; मंत्र का जाप करें। इसे भी पढ़ें: Sawan 2026 Special: नागपंचमी और महाशिवरात्रि पर खुलने वाले ये Unique Temples, जानें इनकी पौराणिक परंपराएंसंकल्प के लिए किन चीजों की जरूरत होगी?इस छोटी-सी पूजा के लिए आपको सिर्फ कुछ आसान चीजें चाहिए, जैसे 1 रुपये का सिक्का, थोड़े से कच्चे चावल, एक चम्मच जल, एक फूल (अगर हो तो) और शिवलिंग या भगवान शिव की तस्वीर। पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें और मन को पूरी तरह पूजा में लगाएं।संकल्प कैसे लें?भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग के सामने बैठें। अपने दाहिने हाथ में जल, चावल और 1 रुपये का सिक्का रखें। इसके बाद यह संकल्प मंत्र बोलें,देवदेव महादेव नीलकण्ठ नमोऽस्तु ते।कर्तुमिच्छाम्यहं देव श्रावण सोमवार व्रतं तव।।तव प्रभावाद्देवेश निर्विघ्नेन भवेदिति।कामाधाः शत्रवो मां वै पीडां कुर्वन्तु नैव हि।।इस मंत्र का मतलब: हे देवों के देव महादेव, नीलकंठ, आपको मेरा प्रणाम। मैं पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ सावन सोमवार का व्रत रखना चाहता/चाहती हूं। कृपया मुझे आशीर्वाद दें ताकि मेरा यह व्रत बिना किसी परेशानी के पूरा हो सके। मेरे मन से क्रोध, लालच, गलत इच्छाएं और अशांत करने वाले विचार दूर करें। मुझे शांत, पवित्र और हमेशा अपनी भक्ति में बनाए रखें। इसे भी पढ़ें: Sawan 2026: सोमवार को Belpatra तोड़ने की मनाही क्यों? जानें Shivpuran के महत्वपूर्ण Rules और मान्यताओं का विश्लेषणसंकल्प के बाद क्या करें?मंत्र बोलने के बाद भगवान शिव से अपने मन की इच्छा कहें। इसके बाद जल धीरे-धीरे शिवलिंग के चरणों में अर्पित करें। प्रेम और श्रद्धा से चावल चढ़ाएं। 1 रुपये का सिक्का अपने घर के मंदिर या पूजा स्थान पर रख दें। धार्मिक मान्यता है कि जब भक्त पूरे मन से भगवान शिव के सामने अपनी भावना व्यक्त करता है, तो उसकी भक्ति और भी मजबूत होती है।क्या सच में संकल्प लेना जरूरी है?ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकल्प लेने से व्यक्ति का मन एक लक्ष्य पर टिकता है। इससे व्रत केवल एक परंपरा नहीं रहता, बल्कि श्रद्धा, अनुशासन और भगवान शिव के प्रति समर्पण का माध्यम बन जाता है। यही कारण है कि कई विद्वान सावन सोमवार का व्रत शुरू करने से पहले संकल्प लेने की सलाह देते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:46 +0530</pubDate>
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<title>Kanwar Yatra 2026: 30 जुलाई से &amp;apos;बम&#45;बम भोले&amp;apos; की गूंज, जानें इस Holy Journey का धार्मिक महत्व</title>
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<description><![CDATA[ सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही भगवान शिव के भक्तों की सबसे बड़ी और धार्मिक कांवड़ यात्रा शुरू हो जाती है। पूरे उत्तर भारत में केसरिया वस्त्र पहने लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगाजल भरने के लिए हरिद्वार, ऋषिकेश, गोमुख और अन्य पवित्र नदियों के तटों पर पहुंचने के लिए पैदल यात्रा करते हैं। इस दौरान भक्त अपने कंधों पर कांवड़ लेकर हर-हर महादेव के जयकारों के साथ सैकड़ों किमी की यात्रा करके स्थानीय शिव मंदिरों में पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं। तो आइए जानते हैं कांवड़ यात्रा कब से शुरू हो रही है और यह यात्रा कब समाप्त होगी।कांवड़ यात्रा 2026हिंदू पंचांग के मुताबिक सावन के महीने की शुरूआत के साथ ही कांवड़ यात्रा की शुरूआत हो जाती है। इस बार आज से यानी की 30 जुलाई 2026 से सावन माह की शुरूआत हुई है। वहीं 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि के दिन से कांवड़ यात्रा की समाप्ति होगी। इस बार कुल 13 दिनों तक कांवड़ यात्रा चलेगी।जलाभिषेक की डेटकांवड़ यात्रा का सबसे प्रमुख दिन सावन शिवरात्रि होती है। हरिद्वार, ऋषिकेश और अन्य धामों से जल लेकर आने वाले श्रद्धालु सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। इस बार 11 अगस्त यानी की सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक के साथ कांवड़ यात्रा की समाप्ति होगी।क्यों निकलती है कांवड़ यात्रापौराणिक मान्यताओं के मुताबिक समुद्र मंथन के दौरान जब विष निकला, तो भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया था। विष के प्रभाव से महादेव का कंठ नीला पड़ गया और उनके शरीर का ताप अधिक बढ़ गया।भगवान शिव के शरीर के ताप और जलन को शांत करने के लिए देवताओं और परम शिव भक्त रावण ने पवित्र गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया था। तभी से सावन महीने में गंगाजल से शिवलिंग का जलाभिषेक करने और कांवड़ यात्रा निकालने की परंपरा चल रही है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:46 +0530</pubDate>
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<title>Jaya Parvati Vrat 2026: जया पार्वती व्रत का समापन, जानिए Puja Vidhi और Udyapan का सही समय और नियम</title>
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<description><![CDATA[ सावन माह की शुरूआत को चुकी है। वहीं आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी से जया-विजया पार्वती व्रत शुरू हुआ था। जोकि सावन कृष्ण तृतीया यानी की 5 दिनों तक रखा जाता है। जया पार्वती व्रत भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित है। यह व्रत महिलाएं अखंड सुहाग और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए रखती हैं और कुंवारी कन्याएं मनचाए वर की प्राप्ति के लिए रखती हैं। इस बार आज यानी की 01 अगस्त को जया पार्वती व्रत का समापन किया जाएगा।कैसे करें समापनजया पार्वती व्रत 5 दिनों तक चलने वाला विशेष व्रत है। इसको मुख्य रूप से सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं रखती हैं। वहीं व्रत के अंतिम दिन विधि-विधान से उद्यापन और समापन करना शुभ माना जाता है।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव और मां पार्वती का पूजन करें। पूजा में भगवान शिव और मां पार्वती को अक्षत, फूल, फल, धूप-दीप और नैवेद्य आदि अर्पित करें। इसके बाद व्रत कथा का पाठ करें। क्योंकि माना जाता है कि बिना कथा सुने व्रत का पूजा पूरा फल मिलता है। मां पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें और इसमें चूड़ियां, बिंदी, चुनरी, सिंदूर, मेहंदी और श्रृंगार की अन्य वस्तुएं शामिल करें।इसके बाद आरती करें और पूजा में हुई भूलचूक के लिए मां पार्वती और भगवान शिव से क्षमायाचना करें। वहीं अपनी श्रद्धा अनुसार ब्राह्मण, जरूरतमंद या किसी सुहागिन को फल, वस्त्र, दक्षिणा या अन्न का दान करें। प्रसाद वितरित करें और सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करें।धार्मिक मान्यताधार्मिक मान्यता है कि जो भी महिला विधिपूर्वक यह व्रत करके समापन करती हैं, उनका वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। वहीं अविवाहित कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Ram Lalla Shringar: Ayodhya Ram Mandir में Ram Lalla की पोशाक का रहस्य, क्यों Navgraha के अनुसार बदलते हैं वस्त्रों के रंग</title>
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<description><![CDATA[ अयोध्या के राम मंदिर में विराजमान रामलला के राजसी ठाठ हैं। हर रोज रामलला के वस्त्र बदले जाते हैं। रामलला हर रोज अलग-अलग रंग की पोशाकें पहन रहे हैं। वहीं रामलला की पोशाकें भक्तों को भी काफी आकर्षक लगती हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक रामलला की पोषाकों के रंगों का चयन ग्रहों के मुताबिक किया गया है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि रामलला का श्रृंगार रोज अलग रंग के कपड़ों से क्यों होता है और इसका क्या महत्व है।रामलला की पोषाकेंबता दें कि रामलला के अधिकतर वस्त्र बंगाल, राजस्थान, उड़ीसा, कश्मीर और आंध्र के सिल्क के बनते हैं। रामलला सोमवार को सफेद, मंगलवार को लाल, बुधवार का हरा, बृहस्पति वार को पीला, शुक्रवार को क्रीम, शनिवार को नीला और रविवार को गुलाबी रंग के कपड़े पहनते हैं। रोजाना नई धोती और दो पटका पहनते हैं। इसमें एक पटका छोटा और दूसरा बड़ा होता है। पटकों पर गुलाबी रंग की छपाई होती है। कुल मिलाकर यह पूरी तरह से भारतीय परंपरागत परिधान हैं।इसे भी पढ़ें: Simhachalam Temple में साल में सिर्फ 24 घंटे होते हैं असली दर्शन, Akshaya Tritiya पर हटती है चंदन की परतमहत्वआयोध्या में विराजमान रामलला अपने बाल रूप में हैं। इसलिए रामलला को नजर लगने का डर लगा रहता है। इस कारण रामलला को नवग्रह से बचाने के लिए उनकी पोशाक में नवरत्न जड़े गए हैं। भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप को किसी की नजर न लगे, इस कारण उनको खास तरह की पोशाकें पहनाई जाती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Sawan 2026 Special: नागपंचमी और महाशिवरात्रि पर खुलने वाले ये Unique Temples, जानें इनकी पौराणिक परंपराएं</title>
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<description><![CDATA[ श्रावण मास भगवान शिव को अति प्रिय है। कल यानी 30 जुलाई 2026 से सावन का महीना शुरु होने जा रहा है। इस महीने का इंतजार शिवभक्त लंबे समय से करते हैं। देशभर के शिवालयों में भक्तों की लंबी-लंबी लाइनें देखने को मिलती है। कुछ भक्तजन जलाभिषेक करने जाते हैं, तो कई लोग अपनी मनोकामना को लेकर भगवान भोलेनाथ के दरबार में पहुंच सकती हैं। क्या आप भी सावन में भगवान शिव के अनोखे मंदिरों के दर्शन करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है।भगवान शिव के अनोखे मंदिरभारत में भगवान शिव के हजारों मंदिर हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी मंदिर हैं जो अपनी अनोखी परंपराओं के लिए अलग पहचान रखते हैं। इन्हीं में से दो मंदिर ऐसे हैं जिनके कपाट पूरे साल बंद रहते हैं। सिर्फ साल में एक बार इनके कपाट खोले जाते हैं। बता दें कि, एक मंदिर के कपाट सावन में खुलते हैं। दूसरे के कपाट भगवान शिव के ही खास त्योहार पर खोले जाते हैं। आइए आपको इन दोनों मंदिर के बारे में बताते हैं।उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिरमध्य प्रदेश के उज्जैन जिला में स्थित महाकालेश्वर मंदिर परिसर में तीसरी मंजिल पर भगवान नागचंद्रेश्वर का भी मंदिर है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसके कपाट सिर्फ साल में एक बार नाग पंचमी के दिन 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं। जबकि पूरा साल यह मंदिर बंद रहता है।क्यों है यह मंदिर इतना खास?इस मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की दुर्लभ प्रतिमा है। यहां भगवान शिव नाग की शय्या पर हैं। ऐसी प्रतिमा बहुत कम जगह देखने को मिलती है। माना जाता है कि नाग पंचमी के दिन यहां दर्शन करने और पूजा करने से भगवान शिव और नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यहां आने वाले श्रद्धालु मानते हैं सच्चे मन से प्रार्थना करने पर उनकी मनोकामनाएं जरुर पूर्ण होती हैं। वैसे इस मंदिर के दर्शन के कालसर्प दोष दूर हो जाता है।कैसे पहुंचें उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर?यहां जाने के लिए आपको उज्जैन पहुंचना होगा। सबसे पहले आप उज्जैन जंक्शन मेन रेलवे स्टेशन पहुंच जाए। वहां से मंदिर मात्र 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर है, जहां से ऑटो या ई-रिक्शा आसानी से मिल जाएगा। फ्लाइट से आने के लिए आपको इंदौर के देवी अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट पर उतरना होगा, जो कि उज्जैन से करीब 53 किलोमीटर दूर है। यहां से आप बस या ट्रैक्सी लेकर पहुंच सकते हैं। इसके अलावा आप बस या प्राइवेट कार से भी उज्जैन पहुंच सकते हैं। उज्‍जैन के नागचंद्रेश्वर मंदि‍र इस तरह पहुंच सकते हैं-- नागचंद्रेश्वर मंद‍िर के ल‍िए आपको महाकाल मंदिर के लिए ऑटो या टैक्सी ले सकते हैं। - महाकालेश्वर मंदिर परिसर में सबसे ऊपरी मंजिल पर नागचंद्रेश्वर मंदिर मौजूद है। - नागपंचमी के दौरान यहां काफी भीड़ देखने को मिलती है। रायसेन का सोमेश्वर महादेव मंदिरएमपी के रायसेन जिले की पहाड़ियों पर स्थित है सोमेश्वर महादेव मंदिर, जो अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है। यह मंदिर ऊंचाई पर बना हुआ और यहां पर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को चढ़ाई करनी पड़ती है।कब खुलते हैं सोमेश्वर महादेव मंदिर के कपाट?यहां के लोकल के अनुसार, इस मंदिर के कपाट महाशिवरात्रि के दिन कुछ घंटों के लिए खोले जाते हैं। इसी समय भक्तजन पूजा और दर्शन के लिए आते हैं। वरना पूरे साल यह मंदिर बंद रहता है।मंदिर बंद रहने पर भी पहुंचते हैं श्रद्धालुजब यह मंदिर बंद रहता है, तो तभी श्रद्धालु यहां आना नहीं छोड़ते है। लोग मंदिर के बाहर से ही भगवान शिव को प्रणाम करते हैं और अपनी श्रद्धा को दर्शाते हैं। यहां पर आने वाले कई श्रद्धालुओं अपनी मनोकामना मांगते समय मंदिर के प्रवेश द्वार पर कलावा बांधते हैं। कहा जाता है कि इच्छा पूरी होने पर भक्त यहां पर दोबारा आकर कलावा खोलते हैं। वैसे यह यह स्थानीय परंपरा है।कैसे पहुंचें रायसेन के सोमेश्वर महादेव मंदिर?- यह मंदिर मध्य प्रदेश के रायसेन में स्थित है। इसलिए आपको रायसेन पहुंचना होगा। - एमपी की राजधानी भोपाल से रायसेन करीब 45 किलोमीटर दूर है। - रेलवे स्टेशन भोपाल जंक्शन से आप रायसेन के लिए टैक्सी ले सकती हैं। - जब आप रायसेन पहुंचेगी तो आपको किले के निचले हिस्से (तलहटी) तक जाना होगा। उधर से मंदिर तक जाने के लिए पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है। - वैसे मंदिर साल में एक बार महाशिवरात्रि पर खोला जाता है, बाकी समय आप किले के बाहर दर्शन कर सकते हैं। सावन के दौरान आप रायसेन का किला देख सकती हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>सावन में Greater Noida के इस प्राचीन शिव मंदिर का दर्शन हैं बेहद खास, भक्तों की भीड़ लगी रहती है!</title>
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<description><![CDATA[ सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है। श्रावण मास को बेहद ही पवित्र माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु व्रत व पूजा-अर्चना करते हैं। सावन के दौरान भक्तजन भगवान शिव के मंदिरों का दर्शन करने जरुर जाते हैं। अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं, तो एक बार नोएडा के इस मंदिर में घूमने जरुर जाएं। ग्रेटर नोएडा में प्रसिद्ध प्रचीन शिव मंदिर है, जिसे सावन के महीने में भक्तों के दर्शन के लिए बेहद खास माना जाता है। तो चलिए इस लेख में हम आपको बताते हैं यह मंदिर कहां है और क्यों खास है?ग्रेटर नोएडा में कहां है भोलेनाथ का सबसे खास मंदिर?भगवान शिव का यह मंदिर ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव में स्थित है। मंदिर का नाम प्राचीन शिव मंदिर है, जिसका संबंध रावण से जोड़कर देखा जाता है। दरअसल, बिसरख गांव को रावण का जन्मस्थल माना जाता है। वाल्मीकि रामायण के ग्रंथों के अनुसार रावण के पिता ऋषि विश्रवा और माता कैकेसी का आश्रम इसी गांव में था। इस कारण से इस मंदिर को शिव पूजा के लिए बेहद खास माना गया है, क्योंकि रावण भगवान भोलेनाथ के सबसे बड़े भक्त में से एक हैं।कहां पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर?यह मंदिर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बिसरख जलालपुर गांव में सेक्टर-1 स्थित है। यहां पर पहुंचना आसान है, आइए आपको बताते हैं कैसे यहां पर पहुंचे-- यदि आप दिल्ली से आ रही हैं, तो नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे या  NH-9 के रास्ते से यहां से जा सकती है। यहां पर पहुंचने पर आपको करीब 1 से 1.5 घंटे का समय लग सकता है। - अगर आप नोएडा से आने का प्लान कर रहे हैं, तो सेक्टर 62, सेक्टर 71 या गौर सिटी से कैब या ऑटो लेकर यहां पहुंचा जा सकता है। यदि आप मेट्रो से जाने का प्लान बना रही हैं, तो आप 52 या 59 मेट्रो स्टेशन पर उतरकर ऑटो लें सकती हैं।- दरअसल, मेट्रो का सबसे नजदीकी मेट्रो स्टेशन नोएडा सेक्टर 52 है। यहां से ऑटो या कैब लेकर बिसरख गांव पहुंच सकती हैं। दूरी करीब 11 किमी की है, जिसमें आपको 30 से 45 मिनट लग सकते हैं।प्राचीन शिव मंदिर से जुड़ी खास जानकारीइस मंदिर में आपको प्राचीन शिवलिंग पर चढ़ाने का अवसर प्राप्त होगा। सावन के दौरान यहां पर ज्यादा भीड़ रहती है इसिलए सुबह आने वाले भक्त जरुर ध्यान दें। इस मंदिर में आपके पूरे शिव परिवार की प्रतिमाओं के साथ-साथ अन्य देवताओं की प्रतिमा के दर्शन करने का मौका मिलेगा।- मंदिर सुबह 5 बजे से लेकर 12 बजे तक खुला रहता है। - शाम को 4 बजे से लेकर रात 9 बजे तक आप दर्शन कर सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 01 Aug 2026 17:42:41 +0530</pubDate>
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<title>शुक्र का कन्या राशि में महागोचर: Business और Career में तरक्की के संकेत, जानें किन राशियों के आएंगे Good Days</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का राशि परिवर्तन विशेष माना जाता है। शुक्र भौतिक सुख, वैवाहिक सुख, सौंदर्य, रोमांस, कला, और ऐश्वर्य का प्रतीक हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से 1 अगस्त 2026 का दिन बेहद खास रहने वाला है। इस दिन शुक्र सूर्य की राशि सिंह से निकालकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। सबसे खास बात यह है कि कन्या राशि के स्वामी बुध है और बुध-शुक्र के बीच गहरी मित्रता मानी जाती है। ऐसे में शुक्र का अपने मित्र ग्रह बुध की राशि में आना बेहद शुभ माना जाता है। इसका सकारात्मक प्रभाव कई राशियों पर देखने को मिलेगा। कुछ जातकों के लिए बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। आइए आपको बताते हैं कौन हैं ये लकी राशियां।मिथुन राशिशुक्र का यह गोचर मिथुन राशि के लोगों के लिए बेहद खास माना जा रहा है। बिजनेस में अपार सफलता प्राप्त होगी। आपके प्रयासों का सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं। आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी। आपको अचानक से कोई बड़ी खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। नौकरीपेशा लोगों को नए अवसर प्राप्त होंगे। आप कोई बड़ी खरीदारी प्लान बना सकते हैं। सितंबर के तक भाग्य का साथ मिलेगा और कई महत्वपूर्ण कार्य आसानी से पूरे होने की संभावना है।सिंह राशिसिंह राशि के जातकों के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। अगर आप लंबे समय से किसी पुराने कर्ज से परेशान है, तो उससे राहत मिलने के संकेत हैं। वहीं, आप काफी समय से खोई हुई मूल्यवान वस्तु को खरीद सकते हैं। आर्थिक और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। करियर में ऊंचा पद मिल सकता है।कन्या राशिशुक्र के गोचर से कन्या राशि के जातकों को काफी लाभ प्राप्त होगा। इस अवधि में आपको अचानक से धन लाभ हो सकता है। निवेश से भविष्य में अच्छा लाभ मिलने के संकेत है। इसके साथ ही आपका व्यक्तित्व का आकर्षण बढ़ेगा और लोग आपकी बातों से प्रभावित होंगे। व्यापार से संबंधित लोगों को अच्छा लाभ मिलने के चांसेज हैं। सितंबर तक जीवन में काफी सकारात्मक बदलाव और सुखद जीवन देखने को मिल सकता है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:32 +0530</pubDate>
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<title>Sawan 2026 में सूर्य&#45;चंद्र ग्रहण का Double Impact, Climate Change और वैश्विक सुरक्षा की बढ़ेगी चुनौती</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में सूर्य और चंद्र ग्रहण की घटना को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार सावन के महीने में दो बड़े ग्रहण लगने जा रहे हैं। विज्ञान में ग्रहण को खगोलीय घटना मानी जाती है। दरअसल, 12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण और 27-28 अगस्त 2026 को आंशिक चंद्र ग्रहण लगने वाला है। ग्रह को ज्योतिष में बेहद खास माना जाता है। माना जाता है कि यह समय सामूहिक घटनाओं, शासन, अर्थव्यवस्था, मौसम और लोगों भावनाओं को प्रभावित करता है। वैसे आपको बता दें कि, इनमे से कोई भी ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। आइए आपको बताते क्या इसका असर होगा या नहीं।भारत पर क्या होगा प्रभाव?ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य ग्रहण के चलते शासन, प्रशासन और नीतियों पर ज्यादा ध्यान रहने वाला है। इस दौरान सरकारें अपनी बड़ी योजनाओं की फिर से समीक्षा कर सकती हैं। राजनीतिक चर्चाएं और जन बहस काफी तेज हो सकती हैं। बड़े विकास कार्यों को आगे बढ़ाने से पहले उन पर दोबारा विचार किया जाएगा।दूसरी तरफ, चंद्र ग्रहण के कारण लोगों की भावनाएं संवेदनशील हो सकती हैं। जिसके चलते सामाजिक कल्याण, सेहत, खेती और पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी बातों पर चर्चा बढ़ सकती है। पानी और पर्यावरण से संबंधित मामलों पर भी ध्यान दिया जाएगा।ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर प्रभावजब ग्रहण लगता है, तो इस अवधि में शेयर बाजार और पैसों के मामलों में थोड़ा संभलकर चलने का होता है। निवेशक और व्यापारी काफी सोच-समझकर कदम बढ़ाते हैं। इतना ही नहीं, सरकारें भी बड़े बदलाव करने के स्थान पर अपनी पुरानी आर्थिक नीतियों को मजबूत करने पर ध्यान देती हैं। टेक्नोलॉजी, सेहत, ऊर्जा, खेती और जरुरी सेवाओं से जुड़े क्षेत्र इस अवधि में अधिक चर्चा हो सकती है। राजनैतिक और कूटनितिक हलचलसूर्य और चंद्र ग्रहण के प्रभाव से दुनिया भर की सरकारें अपनी कूटनीतिक रणनीतियों का फिर से आकलन कर सकती हैं। इन लोगों का पूरा ध्यान लंबे समय तक चलने वाली पार्टनरशिप पर रहेगा। मुख्य बातचीत, नीतियों की समीक्षा और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर काम तेज होगा।मौसम और प्राकृतिक घटनाएंग्रहण के कारण दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश, बाढ़, सूखे से निपटना और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। बता दें कि, यह सभी पारंपरिक ज्योतिषीय आकलन हैं।आध्यात्मिक महत्वगौरतलब है कि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है,जो इसे सभी भक्तों के लिए काफी पवित्र माना जाता है। ग्रहण का यह समय पूजा-पाठ, ध्यान, मंत्र जाप और खुद के अंदर झांकने के लिए काफी बढ़िया माना जाता है। भूलकर भी इस समय कोई भी नए और बड़े काम की शुरुआत न करें।   ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:32 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 28 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष शुभ एवं मंगल कार्यों का आयोजन- दावत। पूरा लाभ उठाएं। उपलब्धि के लिए विशेष सम्मान की प्राप्ति। क्रोध और वाणी दोनों को काबू में रखें।वृषशंका और गलतफहमियों को दूर करें। विदेश से व्यापार बढ़ेगा, शुभ समाचार मिलेंगे। किसी दबाव में निर्णय लेना भारी पड़ेगा। योग्य वर/कन्या का विवाह/सगाई निश्चित होंगे।मिथुनअचानक दुःखी और उदास हो सकते हैं। सरकारी क्षेत्र में विशेष लाभ और सम्मान। विशेष रूप से पेट के रोग पीडि़त करेंगे। पिकनिक पर जा सकते हैं, कोई विवाद भी संभव।कर्कपरोपकार करेंगे, दूसरों के दुख दूर करेंगे। समाज में यश बढ़ेगा। मित्रों के साथ पिकनिक मना सकते हैं। अचल सम्पत्ति बढ़ने के योग है।सिंहमित्रों आदि की सहायता से उलझन सुलझेगी। विषम परिस्थितियां खर्च बढ़ायेंगी। थोड़ा प्रयत्न करें, महत्वपूर्ण समझौता होगा। स्वास्थ्य में सुधार अनुभव करेंगे।कन्याबेकाबू गुस्सा- बनता काम बिगड़ेगा। नए पुराने मित्रों और पड़ोसियों से मिलन और लाभ। शुभ समाचार की प्राप्ति होगी। बेकारी और बेगारी- दोनों से सामना होगा।तुलाव्यर्थ के वाद-विवाद में समय नष्ट न करें। अध्ययन-अध्यापन में रूचि। धन की स्थिति मजबूत होगी। समाज में सम्मान बढ़ेगा, विद्यार्थी सफल रहेंगे।वृश्चिक जीवनशैली में परिवर्तन कर सकते हैं। रिश्तेदारों के व्यवहार में अजीब सा बदलाव। नई कार्य योजनाओं से धन प्राप्ति। सरकारी काम निबटानें का प्रयास करें।धनुपरेशानी के समय अधिक संयम बरतें। राजकीय कार्यों में सफलता मिलेगी। रोजगार के क्षेत्र में समस्याएं दूर होगी। जीवनशैली में परिवर्तन सुखद।मकर कठोर परिश्रम से भी सफलता मिलना कठिन है। भविष्य के लिए सुखद निर्णय लेंगे। अचल सम्पत्ति में वृद्धि, उत्तम दिन है। विशेष आर्थिक लाभ का योग बन रहा है।कुंभअच्छा दिन है, उत्साह बना रहेगा, मित्र समागम। व्यवहार में नम्रता से लाभ। विशेष प्रतियोगिता में विजय प्राप्त करेंगे। किसी नए काम की जिम्मेदारी उठानी पड़ सकती है।मीनव्यवसाय/नौकरी की चिंता रहेगी। विचार गोष्ठी विशेष परिचर्या के लिए निमंत्रण। अच्छे परिवर्तन अनुभव करेंगे। आप अपने में ही सुधार लाना चाहते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope 28 July 2026 | आज 28 जुलाई 2026 का दैनिक लव राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 28 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं। मेष (Aries)आज साथी के साथ आपके संबंध और मजबूत होंगे। पुरानी अनबन को पीछे छोड़कर नई शुरुआत करने का अच्छा अवसर है। एक-दूसरे की व्यक्तिगत सोच का आदर करें।वृषभ (Taurus)रिश्तों में जल्दबाजी और गुस्से से बचें। शांत रहकर बात करने से कई उलझनें टल सकती हैं। पार्टनर के नजरिए को भी समझने की कोशिश करें।मिथुन (Gemini)आज मन खुशमिजाज रहेगा और लव लाइफ में नया रोमांच देखने को मिलेगा। अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त करें, इससे आपका साथी आपके और करीब आएगा।कर्क (Cancer)आज का दिन रिश्तों में गहराई और भरोसा बढ़ाने वाला है। साथ में वक्त बिताने से गलतफहमियां दूर होंगी और एक-दूसरे के प्रति सम्मान बढ़ेगा।सिंह (Leo)प्यार के मामले में दिन खुशगवार रहेगा। किसी खास बातचीत या मुलाकात से दिन यादगार बन सकता है। रिश्ते में अपनापन और मिठास बनी रहेगी।कन्या (Virgo)सिंगल लोगों की आज किसी खास इंसान से बातचीत शुरू हो सकती है। जो लोग रिलेशनशिप में हैं, उनके बीच आपसी तालमेल और समझ मजबूत होगी।तुला (Libra)दांपत्य और प्रेम जीवन में सुकून बना रहेगा। साथी के साथ बेहतरीन तालमेल रहेगा, जिससे आप खुद को भावनात्मक रूप से बेहद सुरक्षित महसूस करेंगे।वृश्चिक (Scorpio)आज अपने साथी को खुश करने के लिए कुछ नया प्लान कर सकते हैं। आपकी सकारात्मक सोच और प्यार भरा अंदाज रिश्ते में नई ताजगी लाएगा।धनु (Sagittarius)प्रेम जीवन में सब कुछ सहज और सामान्य रहेगा। पार्टनर के साथ घूमना-फिरना या साथ में वक्त बिताना आपको मानसिक शांति देगा।मकर (Capricorn)आज रिश्तों में परिपक्वता दिखेगी। एक-दूसरे की जरूरतों का ख्याल रखें और किसी भी मसले को ठंडे दिमाग से सुलझाने का प्रयास करें।कुंभ (Aquarius)छोटी-मोटी बातों को तूल न दें। अपनी ओर से बातचीत का रास्ता खुला रखेंगे तो दिन का दूसरा हिस्सा बहुत खूबसूरत बीतेगा।मीन (Pisces)आज आपके दिल की बात साथी तक आसानी से पहुंचेगी। भावनात्मक जुड़ाव गहरा होगा और आपका रिश्ता पहले से ज्यादा खूबसूरत मोड़ लेगा।ज्योतिषीय टिप: आज रिश्ते में पारदर्शिता रखें और साथी की बात को अहमियत दें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:31 +0530</pubDate>
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<title>29 जुलाई 2026 को Guru Purnima: स्नान से लेकर संकल्प तक, जानें Step&#45;by&#45;Step गुरु पूजन विधि</title>
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<description><![CDATA[ कल यानी 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में गुरु को भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। इसी कारण से गुरु पूर्णिमा का दिन सनातन परंपरा में बेहद खास माना जाता है। वैसे यह दिन गुरुओं या माता-पिता के प्रति सच्ची श्रद्धा व सम्मान जाहिर करने के लिए मनाया जाता है। शायद ही आप जानते होंगे कि इस दिन को महर्षि वेदव्यास जी की जयंती के रुप में मनाया जाता है। इसलिए इसको व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं किस विधि से पूजा करें और स्नान मुहूर्त।गुरु पूर्णिमा पूजा विधि 2026स्नान व शुद्धिकरण जरुरीगुरु पूर्णिमा के दिन स्वच्छा का खास ध्यान रखा जाता है। इस दिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर नहाने के बाद साफ कपड़े पहनने चाहिए। फिर आप पूजा कक्ष को गंगाजल से पवित्र करें।गुरु स्थापनाइस मौके पर आप जिस भी गुरु के प्रति आपकी गहरी आस्था और श्रद्धा है, उनकी तस्वीर या चरण पादुका साफ आसन पर रखकर गुरु की स्थापना करें। आसन पर लाल कपड़ा बिछाएं उस पर चरण पादुका या तस्वीरे रख दें। दीपक प्रज्वलित गुरु पूर्णिमा के दिन दीप प्रज्वलन का बेहद खास महत्व है। इस दिन घी के दीपक के साथ धूप-अगरबत्ती जलाना शुभ माना जाता है। दीपक जलाने से वातावरण शुद्ध और भक्तिमय हो  जाता है।संकल्प लेनागुरु पूर्णिमा के दिन हाथ में जल लेकर गुरु की पूजा का संकल्प लेना बेहद शुभ माना जाता है। अब मन में गुरु का ध्यान करके उनके प्रति समर्पण की भावना रखें। गुरु की पूजा करने से पहले संकल्प जरुर लें। चारण पादुका पूजनसंकल्प लेने के बाद एक पात्र में गुरु के चरण रखकर दूध और जल से अभिषेक करना चाहिए। अब उसे साफ कपड़े से पोंछ कर उस पर चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है।भोग अर्पित करेंगुरु की पूजा के बाद फल, मिठाई या अन्य मिष्ठान का भोग अर्पित करना चाहिए। इसके बाद श्रद्धा से दक्षिणा अर्पित करें।गुरु मंत्र का जापइस दिन आप अपनी सामर्थ्य के अनुसार 11, 21, 51 या 108 बार गुरु से जुड़े किसी भी मंत्र का जाप कर सकते है, यह काफी शुभ माना जाता है। &#039;ऊं गुरुवे नम:&#039; और &#039;त्वमेव माता च पिता त्वमेव,त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,त्वमेव सर्वं मम देवदेव॥गुरु की आरती (बृहस्पति देव की आरती)जय बृहस्पति देवा, ऊं जय बृहस्पति देवा ।छिन छिन भोग लगा‌ऊं, कदली फल मेवा ॥ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता ।सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े ।प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ॥ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी ।पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ॥ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो ।विषय विकार मिटा‌ओ, संतन सुखकारी ॥ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥जो को‌ई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे ॥ऊं जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा ॥सब बोलो विष्णु भगवान की जय ।बोलो बृहस्पतिदेव भगवान की जय ॥ ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Guru Purnima 2026: जानें कब है गुरु पूर्णिमा, उदयातिथि के अनुसार शुभ मुहूर्त और Puja Vidhi</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। गुरु पूर्णिमा का दिन गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने के लिए होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, सफलता और सकारात्मकता का संचार होता है। हर साल आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था, जिनको प्रथम गुरु माना जाता है। महर्षि वेदव्यास ने वेदों और पुराणों का ज्ञान समाज तक पहुंचाया है।जानें कब है गुरु पूर्णिमाहिंदू पंचांग के मुताबिक आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि की शुरूआत 28 जुलाई की शाम 06:19 मिनट से शुरू हो रही है। जोकि 29 जुलाई की शाम 08:06 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।इसे भी पढ़ें: Famous Temple: Canada में अद्भुत नज़ारा, Shivarpanam Temple में स्थापित हैं 450 शिवलिंग, जानिए इस शिव धाम की पूरी Historyऐसे करें पूजाइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर अपने गुरुजनों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लें। अगर गुरु पास में नहीं हैं, तो उनके चित्र के जरिए उनको श्रद्धा अर्पित करें। फिर व्रत का संकल्प लें और दिनभर नियम और संयम के साथ इसका पालन करें। शाम को विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। वहीं पूजा के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।महत्वगुरु पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन गरीबों और जरूरतमंद लोगों को वस्त्र, अन्न, धन या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना चाहिए। इससे आत्मिक संतोष की प्राप्ति होती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 29 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष आपके बिगड़े काम बनेंगे। धन हानि और सम्मान को ठेस। बौद्धिक कार्यों से यश मिलेगा, संतान सुख भी। आरोग्य लाभ, मन प्रसन्न।वृषअचानक धन लाभ होगा। दिल और दिमाग दोनों से फैसला लें। धार्मिक प्रवृत्ति बढ़ेगी। शुभ समाचारों की प्राप्ति होगी।मिथुनभोजन में भी सावधानी बरतें। मौजमस्ती में/भक्ति में डूबे रहेंगे। उत्तम उपलब्धियों, प्रसिद्धि और प्रतिष्ठा देगी। ससुराल से परेशानी और मतभेद।कर्कपरिवार में कोई मांगलिक कार्य। अध्यात्म में रूचि बढ़ेगी। परिश्रम का परिणाम अच्छा रहेगा। बच्चों की सफलता से खुशी होगी।सिंहसंचार माध्यमों में अधिक रूचि रहेगी। परिवार का सहयोग मिलेगा। स्वजन शत्रुवत व्यवहार करेंगे। जल्दबाजी में निर्णय न लें।कन्याबैंक से कर्ज चुकाने का नोटिस मिलेगा। प्रचुर धन लाभ के योग है। स्वभाव पर काबू रखने से प्रसन्नता मिलेगी। सगाई-विवाह का प्रस्ताव आगे बढ़ेगा।तुलाआर्थिक स्थिति में सुधार लेकिन विश्वासघात भी। डूबा हुआ धन प्राप्त होगा। इंटरव्यू में सफलता, खुशी के समाचार मिलेंगे। शॉपिंग का भूत सवार होने से अधिक खर्च होगा।वृश्चिक समय सावधानी से बिताएं। इच्छानुसार फल प्राप्त होंगे। कार्य में सफलता मिलेगी। क्रोध से काम बिगड़ेगा, मौन रहें।धनुसमाज में कीर्ति बढ़ेगी। अकारण चिंतित हो सकते हैं। आज आप मिट्टी से भी सोना बना सकते है। रहस्यमय कार्यों में व्यस्तता और लिप्तता।मकर स्वास्थ्य की चिंता अवांछित अतिथि का आगमन। हाथ में लिए सभी काम पूरे होंगे। शारीरिक कष्ट और असफलता के कारण तनाव। निराशा दूर होगी, साहस से कदम बढ़ाए।कुंभअपेक्षित सहायता मिलने से काम बढ़ेगा, धन बढ़ेगा। अपने भाग्य की सराहना करेंगे। लोभ और क्रोध से सम्मान घटेगा। अपने भविष्य पर चिंतन भी निर्णय भी।मीनविश्वासघात से गहरा मानसिक आघात लग सकता है। उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे। भावी योजनाओं की रूपरेखाएं बनाएंगे। राजकार्यों के लिए दिन उत्तम है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:29 +0530</pubDate>
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<title>Guru Purnima 2026 Astrology Tips: राशि अनुसार उपहार देकर पाएं गुरु का आशीर्वाद, जीवन में आएगा Positive Change</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। आषाढ़ माह की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है, इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्वपूर्ण है। इस दिन गुरु के प्रति आभार, सम्मान और समपर्ण व्यक्त करने का अवसर होता है। माना जाता है कि गुरु के मार्गदर्शन से ही जीवन में सही दिशा, ज्ञान और सफलता प्राप्त होती है। इस खास दिन पर शिष्य अपने गुरु के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता। गुरु के आशीर्वाद से जीवन में सदैव सुख-समृद्धि और उन्नति के द्वार खुलते हैं। इस दिन को महर्षि वेदव्यास जी की जयंती के रुप में मनाया जाता है। इसलिए गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। इस बार कल यानी 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा को मनाई जाएगी। इस खास मौके पर लोग अपने गुरुओं को प्रसन्न करने के लिए उपहार अर्पित करते हैं। बता दें कि, यह उपहार केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक होता है। वैसे उपहार गुरु की पसंद या उनकी राशि के अनुसार दिया जाए, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाएगा।ज्योतिष के मुताबिक, गुरु की राशि के अनुसार ही भेंट देना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से गुरु प्रसन्न होते हैं और शिष्य का विशेष आशीर्वाद मिलता है। आइए आपको बताते हैं राशि के अनुसार गुरु को क्या गिफ्ट करें।राशि के अनुसार दें उपहार- मेष राशि: अपने गुरु को लाल रंग से संबंधित वस्तुएं जैसे कि लाल वस्त्र, गुलाब या गुड़हल का फूल अर्पित करना शुभ होगा।- वृषभ राशि: गुरु के लिए सफेद रंग की वस्तुएं जैसे दूध, दही, घी, बर्फी या सफेद वस्त्र भेंट कर सकते हैं। - मिथुन राशि: अपने गुरु को हरे रंग के फल, सब्जियां, हरी घास या हरे वस्त्र उपहार में दे सकते हैं। - कर्क राशि: इस दिन आप अपने गुरु को चांदी के आभूषण या सफेद खाद्य पदार्थ गिफ्ट कर सकते हैं। - सिंह राशि: अपने गुरु को लाल मिठाई, लाल वस्त्र, फूल या सूर्य से संबंधित धार्मिक ग्रंथ भेंट में दे सकते हैं। - कन्या राशि: गुरु को हरे रंग की वस्तुएं, फल, मिठाई या आभूषण भेंट किए जा सकते हैं। - तुला राशि: गुरु को सफेद वस्तुएं, नारियल, दूध या मिठाई देना शुभ रहेगा। - वृश्चिक राशि: पूर्णिमा के दिन गुरु को गुलाब, गुड़हल, अनार या मूंगा रत्न अर्पित कर सकते हैं। - धनु राशि: अपने गुरु को पीले वस्त्र या पीली मिठाइयां भेंट करना शुभ माना जाता है। - मकर राशि: गुरु के लिए आप नीले या काले रंग के वस्त्र भेंट कर सकते हैं। - कुंभ राशि: गुरु को आप गहरे रंग के कपड़े या दैनिक उपयोग की वस्तुएं दे सकते हैं। - मीन राशि: अपने प्रिय गुरु को आप पीले वस्त्र, धार्मिक ग्रंथ या उपयोगी वस्तुएं भेंट में दे सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:29 +0530</pubDate>
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<title>Sawan 2026: इस बार 13 दिन की होगी Kanwar Yatra, जानें कब से होगी शुरू?</title>
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<description><![CDATA[ देवों के देव महादेव का सबसे प्रिय महीना सावन 30 जुलाई से शुरू हो रहा है। सावन का महीना शुरू होते ही पवित्र कांवड़ यात्रा भी आरंभ हो जाएगी। इस बार सावन की शुरुआत 30 जुलाई, गुरुवार से हो रही है, इसलिए इसी दिन से यात्रा शुरू होगी। इस यात्रा का समापन सावन शिवरात्रि के दिन यानी 11 अगस्त, मंगलवार को होगा। मुख्य रूप से कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से 11 अगस्त तक चलेगी, हालांकि कई जगह यह पूरे सावन चलती है।3 से 11 अगस्त का समय रहेगा बेहद खास3 अगस्त को सावन का पहला सोमवार है और 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि है। इसलिए 3 से 11 अगस्त के बीच सड़कों और मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलेगी। इस दौरान शिव भक्त &#039;हर हर महादेव&#039; और &#039;बम बम भोले&#039; के जयकारे लगाते हुए अपने घरों और मंदिरों की ओर बढ़ते हैं। इसे भी पढ़ें: Shravan Month 2026 Rules: सावन व्रत में भगवान शिव के सामने जरूर बोलें ये एक मंत्र, पूरी होगी हर Wishसावन में कांवड़ यात्रा का धार्मिक महत्वकांवड़ यात्रा को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में भगवान शिव की पूजा करने से जितना पुण्य मिलता है, उससे कहीं ज्यादा पुण्य कांवड़ यात्रा से मिलता है। भक्त नंगे पांव पैदल चलकर या गाड़ियों से पवित्र नदियों का जल लाते हैं और शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। माना जाता है कि कांवड़ उठाने और जल चढ़ाने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं, भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं और मोक्ष के द्वार खोलते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:25 +0530</pubDate>
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<title>Jaya Parvati Vrat 2026: 27 जुलाई से 31 जुलाई तक चलेगा आस्था का पर्व, जानें Shubh Muhurat और व्रत पारण की Date</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में जया पार्वती के व्रत का खास महत्व होता है। इसमें लगातार 5 दिनों तक व्रत किया जाता है। इस दौरान भगवान शिव और मां पार्वती की जया के रूप में पूजा की जाती है। जया पार्वती व्रत अविवाहित कन्याएं और विवाहित महिलाएं दोनों रखती हैं। कुंवारी लड़कियां योग्य पति के लिए यह व्रत करती हैं। वहीं शादीशुदा महिला पति की लंबी उम्र और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत करती हैं। इसके साथ ही संतान प्राप्ति के लिए भी जया पार्वती व्रत रखा जाता है। तो आइए जानते हैं जया पार्वती व्रत की तिथि, महूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक हर साल आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से जया पार्वती व्रत की शुरूआत होती है। इस बार 26 जुलाई 2026 की दोपहर 01:57 मिनट से त्रयोदशी तिथि की शुरूआत हुई थी। इस तिथि की समाप्ति आज यानी 27 जुलाई की दोपहर 04:14 मिनट पर होगा। ऐसे में जया पार्वती व्रत 27 जुलाई को शुरू हो रहा है।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद शुद्ध कपड़े पहनें। फिर घर के मंदिर में एक छोटे पात्र में पानी में ज्वार और गेहूं के दाने बोएं। अब पात्र के ऊपर 3 या 7 बार कलावा लपेटें। जिसको कुमकुम से रंग लें। लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और मां पार्वती की मूर्ति को स्थापित करें। फिर हाथ में जल लेकर व्रत रखने का संकल्प लें।  इसके बाद भगवान शिव और मां पार्वती को जल, चंदन, अक्षत, वस्त्र, श्रृंगार का सामान, फल, फूल और मिठाई आदि अर्पित करें।घी का दीपक जलाकर &#039;ऊँ नम: शिवाय&#039; और &#039;ऊँ पार्वतीपतये नम:&#039; मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें। इसके बाद जया पार्वती व्रत की कथा पढ़ें और आरती करें। वहीं पूजा के अंत में क्षमायाचना करके पूजा का समापन करें।व्रत के नियमव्रत के हर दिन गेहूं, ज्वार और शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना करें।5 दिन व्रत के दौरान आप सिर्फ दूध, फल, दही, फलों का जूस और दूध से बनी चीजों का सेवन करें।इस व्रत में नमक वाला भोजन नहीं किया जाता है।वहीं 5 दिनों तक अनाज नहीं खाना चाहिए।व्रत में सभी तरह की सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए।दोपहर के समय सोना नहीं चाहिए।बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए।5वें दिन रात में सोने के बजाय जागरण करना चाहिए।व्रत की समापन तिथिहर साल आषाढ़ माह की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर जया पार्वती व्रत की समाप्ति होती है। इस बार 31 जुलाई 2026 को जया पार्वती व्रत का समापन होगा। लेकिन इन 5 दिनों के व्रत का पारण 01 अगस्त 2026 को किया जाएगा। जया पार्वती व्रत लगातार 5, 7, 9 या 11 वर्षों तक करना होगा है। वहीं अधिकतम 20 सालों तक करने का नियम है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:25 +0530</pubDate>
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<title>Guru Purnima 2026: 29 जुलाई को मनाया जाएगा गुरु पूर्णिमा का पर्व</title>
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<description><![CDATA[ आषाढ़ मास की पूर्णिमा 29 जुलाई को है। इस तिथि पर गुरु पूजा का महापर्व गुरु पूर्णिमा मनाया जाता है। आम इंसान ही नहीं, भगवान ने भी गुरु से ज्ञान प्राप्त किया है। गुरु पूर्णिमा महर्षि वेदव्यास की जन्म तिथि है। वेदव्यास ने वेदों का संपादन किया। 18 मुख्य पुराणों के साथ ही महाभारत, श्रीमद् भागवत कथा जैसे ग्रंथों की रचना की थी। श्रीराम ने ऋषि वशिष्ठ और विश्वामित्र से ज्ञान प्राप्त किया, श्रीकृष्ण के गुरु सांदीपनि थे। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई को शाम 6:18 मिनट से शुरू होकर 29 जुलाई को रात 8:05 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा। हनुमान जी ने सूर्य देव को अपना गुरु बनाया था। भगवान दत्तात्रेय ने 24 गुरु बनाए थे। इसीलिए गुरु का स्थान सबसे ऊंचा माना गया है। गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु की पूजा करें, अपने सामर्थ्य के अनुसार कोई उपहार दें और उनकी शिक्षाओं पर चलने का संकल्प लें। तभी जीवन में सुख-शांति के साथ ही सफलता भी मिल सकती है।ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि भारत में इस दिन को बहुत श्रद्धा- भाव से मनाया जाता है। धार्मिक शास्त्रों में भी गुरु के महत्व को बताया गया है। गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि गुरु ही भगवान तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं। हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक गुरु पूर्णिमा है। यह शुभ दिन गुरु की पूजा और उनका सम्मान करने के लिए समर्पित है, जो ज्ञान और आत्मज्ञान के मार्ग पर व्यक्तियों का मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।इसे भी पढ़ें: Simhachalam Temple में साल में सिर्फ 24 घंटे होते हैं असली दर्शन, Akshaya Tritiya पर हटती है चंदन की परतज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि हिन्दू धर्म में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊपर माना गया है। इनकी पूजा का दिन होता है गुरु पूर्णिमा, जो हर साल आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाया जाता है। इसीलिए इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। गुरु पूर्णिमा पर्व गुरुजनों को समर्पित है। शिष्य अपने गुरु देव का पूजन करेंगे। वहीं जिनके गुरु नहीं है वे अपना नया गुरु बनाएंगे। पुराणों में कहा गया है कि गुरु ब्रह्मा के समान है और मनुष्य योनि में किसी एक विशेष व्यक्ति को गुरु बनाना बेहद जरुरी है। क्योंकि गुरु अपने शिष्य का सृजन करते हुए उन्हें सही राह दिखाता है। इसलिए गुरु पूर्णिमा के दिन लोग अपने ब्रह्मलीन गुरु के चरण एवं चरण पादुका की पूजा अर्चना करते हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन अनेक मठों एवं मंदिरों पर गुरुओं की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता के अनुसार गुरु पूर्णिमा से ही वर्षा ऋतु का आरंभ होता है और आषाढ़ मास की समाप्ति होती है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान का भी विशेष पुण्य बताया गया है। पूर्णिमा तिथिज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई को शाम 6:18 मिनट से शुरू होकर 29 जुलाई को रात 8:05 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा। इस दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व भी मनाया जाएगा। गुरु पूर्णिमाभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर सुबह जल्दी उठें और सूर्य को जल चढ़ाने के बाद घर के मंदिर में पूजा करें। घर में पूजा करने के बाद अपने गुरु के घर जाएं। गुरु को ऊंचे आसन पर बैठाएं और हार-फूल, कुमकुम, चावल से पूजा करें। गुरु को मिठाई, फल और फूल चढ़ाएं। अपने सामर्थ्य के अनुसार उपहार और दक्षिणा दें। गुरु पूर्णिमा पर वेदव्यास की भी पूजा करें और उनके ग्रंथों के अध्यायों का पाठ करें। गुरु के सामने उनके उपदेशों को जीवन में उतारने का संकल्प लें।कर सकते हैं ये शुभ काम भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि आषाढ़ पूर्णिमा पर अनाज, धन, कपड़े, जूते-चप्पल, छाता, कंबल, चावल, खाना और ग्रंथों का दान कर सकते हैं। किसी गौशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं। किसी मंदिर में पूजन सामग्री भेंट में दें। शिवलिंग पर जल, दूध चढ़ाएं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करते हुए शिवलिंग पर चंदन का लेप करें। हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करें। भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग तुलसी के साथ लगाएं।- डा. अनीष व्यास भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:24 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Guru, Purnima, 2026:, जुलाई, को, मनाया, जाएगा, गुरु, पूर्णिमा, का, पर्व</media:keywords>
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<title>Kokila Vrat 2026: आज अखंड सौभाग्य के लिए कोकिला व्रत, जानें Muhurat, Puja Vidhi और धार्मिक महत्व</title>
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<description><![CDATA[ आषाढ़ माह की पूर्णिमा का दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-उपासना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। वहीं इस दिन महिलाएं कोकिला व्रत करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, सुख और सौभाग्य बना रहता है। वहीं कुंवारी लड़कियों योग्य जीवनसाथी की कामना के साथ कोकिला व्रत करती हैं। इस बार आज यानी की 28 जुलाई 2026 को कोकिला व्रत किया जा रहा है। तो आइए जानते हैं कोकिला व्रत कि तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...तिथि और शुभ मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि की शुरूआत 28 जुलाई की शाम 06:18 मिनट पर होगी। वहीं अगले दिन यानी की 29 जुलाई 2026 की रात 08:05 मिनच पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के मुताबिक यह व्रत 28 जुलाई 2026 को किया जा रहा है।पूजा का समयकोकिला व्रत की पूजा शाम के समय प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। आज प्रदोष काल का समय शाम 07:15 मिनट से लेकर रात 09:20 मिनट तक रहेगा। इस दौरान सुहागिन महिलाएं पूजा-अर्चना कर सकती हैं।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद भगवान शिव और मां पार्वती का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और गंगाजल से मंदिर की सफाई करें। फिर मंदिर में भगवान शिव और मां पार्वती की प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बाद पवित्र मिट्टी से कोयल की छोटी प्रतिमा बनाएं। क्योंकि कोयल को मां पार्वती का प्रतीक माना जाता है।इसके बाद इस कोयल की प्रतिमा को भगवान शिव और मां पार्वती की मूर्ति के पास चौकी पर स्थापित करें। फिर फूल, धूप, चंदन, दीप, बेलपत्र, भांग, धतूरा, मौसमी फल और मिठाई आदि अर्पित कर भगवान शिव और मां पार्वती की विधि-विधान से पूजा करें। बता दें कि प्रदोष काल में कोकिला व्रत की पूजा करना सबसे फलदायी माना जाता है। पूजा के दौरान कोकिला व्रत की कथा जरूर सुनना चाहिए। अंत में मां पार्वती की आरती करें और पूजा में हुई भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Guru Purnima 2026: जानें आषाढ़ पूर्णिमा पर गुरु पूजा का महत्व</title>
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<description><![CDATA[ यह आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा है जिसमें गुरु की पूजा का विधान है। पूरे भारत में यह पर्व बड़ी श्रद्धा व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन हमें अपने गुरुजनों के चरणों में श्रद्धा अर्पित कर अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करनी चाहिए। इस दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर ब्राह्मणों सहित &#039;गुरु परम्परा सिद्धयर्थं व्यासपूजा करिष्ये&#039; संकल्प करके श्रीपर्गी वृक्ष की चौकी पर तत्सम धौतवस्त्र फैलाकर उस पर प्राग पर (पूर्व से पश्चिम) और उदग पर (उत्तर से दक्षिण) गन्धादि से बारह बारह रेखाएं बनाकर व्यास पीठ निश्चित करें तथा दसों दिशाओं में अक्षत छोड़कर दिग् बंधन करें। तत्पश्चात ब्रह्म, ब्रह्मा परावर शक्ति, व्यास, शुकदेव, गौडपाद, गोविन्द स्वामी और शंकराचार्य के नाम मंत्र से आह्वान आदि पूजन करके अपने दीक्षा गुरु (माता, पिता, पितामह, भ्राता आदि) की देवतुल्य पूजा करें।प्राचीन काल में जब विद्यार्थी गुरु के आश्रम में निःशुल्क शिक्षा ग्रहण करता था तो इसी दिन श्रद्धाभाव से प्रेरित होकर अपने गुरु का पूजन करके उन्हें अपनी शक्ति और सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा देकर कृतार्थ होता था। परिवार में अपने से जो भी बड़ा है, उसे गुरुतुल्य ही समझना चाहिए। जैसे माता, पिता, बड़ा भाई, बड़ी बहन आदि। इस दिन स्नान और पूजा आदि से निवृत्त होकर उत्तम वस्त्र धारण करके गुरु को वस्त्र, फल, फूल व माला अर्पण कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। गुरु का आशीर्वाद ही प्राणीमात्र के लिए कल्याणकारी व मंगल करने वाला होता है।इसे भी पढ़ें: Guru Purnima 2026: 29 जुलाई को मनाया जाएगा गुरु पूर्णिमा का पर्वकहा जाता है कि इस दिन से चार महीने तक साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं। यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी है। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे और वेदों के सार ब्रह्मसूत्र की रचना भी वेद व्यास ने आज ही के दिन की थी। वेद व्यास ने ही वेद ऋचाओं का संकलन कर वेदों को चार भागों में बांटा था। उन्होंने ही महाभारत, 18 पुराणों व 18 उप पुराणों की रचना की थी जिनमें भागवत पुराण जैसा अतुलनीय ग्रंथ भी शामिल है। ऐसे जगत गुरु के जन्म दिवस पर गुरु पूर्णिमा मनाने की परंपरा है।प्राचीन काल से चले आ रहे इस पर्व का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। पारंपरिक रूप से शिक्षा देने वाले विद्यालयों में यह दिन गुरु को सम्मानित करने का होता है। इस दिन मंदिरों में पूजा होती है, पवित्र नदियों में स्नान होते हैं, जगह जगह भंडारे होते हैं और मेले लगते हैं। इस दिन विद्यार्थियों को चाहिए कि अपने गुरु को वस्त्र, फल, फूल व माला अर्पण कर प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। इस दिन केवल गुरु ही नहीं, अपितु माता-पिता, बड़े भाई-बहन आदि की भी पूजा का विधान है।- शुभा दुबे ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Guru Purnima 2026: गुरु पूजन से दूर होगा अज्ञान का अंधेरा, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व</title>
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<description><![CDATA[ आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा हिंदू धर्म के एक बेहद महत्वपूर्ण पर्व है। इस बार आज यानी की 29 जुलाई 2026 को यह पर्व मनाया जा रहा है। गुरु पूर्णिमा के मौके पर गुरु का सम्मान, उनके प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक आषाढ़ माह की पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना, चारों वेदों का विभाजन और 18 पुराणों का संकलन कर मानव समाज को ज्ञान का अमूल्य भंडार दिया। इसलिए उनको आदिगुरु माना जाता है। तो आइए जानते हैं गुरु पूर्णिमा की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...तिथि और मुहूर्तहिंदू पंचांग के मुताबिक आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि की शुरूआत 28 जुलाई की शाम 06:19 मिनट से हुई है। जोकि 29 जुलाई की शाम 08:06 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है।।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर अपने गुरुजनों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लें। अगर गुरु पास में नहीं हैं, तो उनके चित्र के जरिए उनको श्रद्धा अर्पित करें। फिर व्रत का संकल्प लें और दिनभर नियम और संयम के साथ इसका पालन करें। शाम को विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। वहीं पूजा के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।महत्वउपनिषदों और गुरु परंपरा में गुरु को त्रिदेवों यानी की ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूजनीय बताया गया है। क्यों बिना गुरु के मार्गदर्शन के आध्यात्मिक ज्ञान और मोक्ष प्राप्त करना कठिन है। गुरु पूर्णिमा आत्ममंथन, आत्मशुद्धि और ज्ञान प्राप्ति का पर्व है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:23 +0530</pubDate>
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<title>Ashadha Purnima 2026: गुरु पूर्णिमा पर बना दुर्लभ योग, जानिए शुभ Muhurat और पूजा की विधि</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी की 29 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है। इसको गुरु पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इस तिथि पर स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक आषाढ़ माह की पूर्णिमा पर व्रत और पूजा करने से भगवान श्रीहरि विष्णु, मां लक्ष्मी और चंद्रदेव का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।तिथि और मुहूर्तहिंदू पंचांग के मुताबिक 28 जुलाई की सुबह 06:18 मिनट पर पूर्णिमा तिथि की शुरूआत हुई थी। वहीं आज यानी की 29 जुलाई की शाम 04:35 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। उदयातिथि के हिसाब से आषाढ़ पूर्णिमा 29 जुलाई को मनाई जा रही है। इस दिन स्नान और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।दुर्लभ योगबता दें कि आज आषाढ़ पूर्णिमा के दिन दो दुर्लभ योग बने हैं। आज प्रीति और आयुष्मान योग बना है। वैदिक ज्योतिष में इन दोनों योगों को बेहद शुभ और मंगलकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस शुभ योग में पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करने से जातक को जीवन में सफलता और समृद्धि मिलती है।दानआषाढ़ पूर्णिमा को अन्न और गेहूं का दान करने से जीवन में धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती है।इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को कपड़ों का दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।आषाढ़ पूर्णिमा पर जल और घी का दान करने से जीवन में आरोग्यता की प्राप्ति होती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:22 +0530</pubDate>
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<title>Guru purnima 2026: गुरु पूर्णिमा पर्व है आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण</title>
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<description><![CDATA[ आज गुरु पूर्णिमा है, गुरु पूर्णिमा का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। गुरु पूर्णिमा पर किए गए अनेक उपाय को करने से दरिद्रता दूरी होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है तो आइए हम आपको गुरु पूर्णिमा पर्व का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं। जानें गुरु पूर्णिमा व्रत के बारे में हिंदू परंपरा में आषाढ़ माह की पूर्णिमा को आने वाली गुरु पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह दिन गुरु के प्रति आभार, सम्मान और समर्पण व्यक्त करने का अवसर होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु के मार्गदर्शन से ही जीवन में सही दिशा, ज्ञान और सफलता प्राप्त होती है। इसलिए इस दिन शिष्य अपने गुरु के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और उन्नति के द्वार खुलते हैं।इसे भी पढ़ें: Ashadha Purnima 2026: गुरु पूर्णिमा पर बना दुर्लभ योग, जानिए शुभ Muhurat और पूजा की विधियह महापर्व उस गुरु को समर्पित होता है जो अपने शिष्य को अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाता है। गुरु पूर्णिमा का पर्व न सिर्फ धार्मिक बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत ज्यादा मायने रखता है। हिंदू मान्यता के अनुसार गुरू पूर्णिमा के पर्व पर यदि पूजा से जुड़े कुछेक उपायों को श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाए तो न सिर्फ सिद्ध संतों का आशीर्वाद बल्कि सुख-सौभाग्य की भी प्राप्ति भी होती है।व्यास पूर्णिमा के नाम से भी प्रसिद्ध है गुरु पूर्णिमा हिन्दू धर्म में गुरु पूर्णिमा महान ऋषि वेद व्यास जी के जन्मदिवस और उनके द्वारा चारों वेदों के संकलन के उपलक्ष्य में भी मनाया जाता है। उन्होंने महाभारत और पुराणों की रचना कर मानवता को ज्ञान का अनमोल खजाना दिया, इसीलिए उनके सम्मान में इसे ‘व्यास पूर्णिमा’ कहा जाता है। गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसी तिथि पर महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। वेदव्यास को हिंदू धर्मग्रंथों का संकलनकर्ता और महान गुरु माना जाता है। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को मनाई जाएगी। इस पावन अवसर पर लोग अपने गुरु को प्रसन्न करने के लिए उपहार भी अर्पित करते हैं। यह उपहार केवल वस्तु नहीं, बल्कि सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक होता है। यदि उपहार गुरु की पसंद या उनकी राशि के अनुसार दिया जाए, तो उसका महत्व और भी बढ़ जाता है। गुरु पूर्णिमा का महत्व सिर्फ़ एक धर्म तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारत के तीन प्रमुख धर्मों हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म में भी इसका बहुत महत्व है। यह त्योहार हमारे गुरुओं या शिक्षकों की शिक्षाओं और उनके प्रयासों के सम्मान में मनाया जाता है। अगर हमारे मन में ज्ञान न भरा गया होता, तो हम सिर्फ़ मांस और हड्डियों का ढांचा ही होते।गुरु पूर्णिमा का जश्न सिर्फ़ स्कूल-कॉलेज के शिक्षकों या साधुओं तक ही सीमित नहीं है। कोई भी व्यक्ति शिक्षक हो सकता है चाहे वह आपकी मां हों जिन्होंने आपको चलना सिखाया, या आपका दोस्त जिसने आपको कोई वाद्य यंत्र या खेल सिखाया। असल में, यही असली &quot;टीचर्स डे&quot; (शिक्षक दिवस) है। हालांकि गुरु पूर्णिमा का महत्व सभी धर्मों के लिए एक जैसा है, लेकिन इससे जुड़ी कहानियां अलग-अलग हैं। गुरु पूर्णिमा पर पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं दीया, होगा लाभ पंडितों के अनुसार सनातन परंपरा में तुलसी के पौधे का संबंध धन की देवी मां लक्ष्मी से माना गया है, वहीं पीपल के पेड़ में श्री हरि का वास माना गया है। ऐसे में साधक को गुरु पूर्णिमा वाले दिन पीपल के पेड़ में जल अर्पित करने के बाद शुद्ध देशी घी का दीया जलाना चाहिए। इस उपाय से साधक को श्री हरि संग माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। गुरु पूर्णिमा पर देवालय पर दीया जलाना होता है शुभ हिंदू मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के मंदिर में जाकर शुद्ध देशी घी का दीया जलाने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। देवालयों में इस प्रकार दीए जलाने से जीवन के सभी दुख दूर और सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। गुरु पूर्णिमा व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा भी है रोचकशास्त्रों में वर्णित गुरु पूर्णिमा की पौराणिक कथा बहुत रोचक है। इस पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक बार भ्रमण के लिए महर्षि पराशर निकले थे। इस दौरान उनकी नजर एक महिला पर पड़ी, जिसका नाम सत्यवती था। वह एक मछुआरे की बेटी थी, वह अधिक खूबसूरत थी। उसके शरीर में से मछली की गंध आती रहती थी, क्योंकि उसका जन्म मछुआरे के घर हुआ था। इसलिए उन्हें मत्स्यगंधा भी कहा जाता था। ऋषि उसे देखकर व्याकुल हो गए, लेकिन पराशर ऋषि ने सत्यवती से संतान प्रदान करने की इच्छा जाहिर की। ऋषि की ये बात सुनकर सत्यवती ने अधिक आश्चर्यचकित होकर कहा कि मैं इस तरह से अनैतिक संबंध कैसे बना सकती हूं। इस तरह से संतान का जन्म लेना व्यर्थ है। ऐसे में ऋषि ने कहा कि जो संतान तुम्हारी कोख से जन्म लेगी। वह पूरे संसार के लिए महान काम करेगी। ऋषि की बात को सत्यवती ने मान लिया, लेकिन उसनें पहले ऋषि के सामने अपनी तीन शर्त रखी। पहली शर्त यह कि संभोग क्रीडा करते समय कोई न देखें। दूसरी शर्त में कहा कि होने वाला बच्चा महान ज्ञानी होने के साथ मेरी कौमार्यता को जीवन में कभी भंग न करे। वहीं, तीसरी शर्त थी कि शरीर से आने वाली गंध फूलों की खुशबू में बदल जाएं। इसके बाद सत्यवती की कोख से एक बेटे का जन्म हुआ, जिसका नाम द्वैपायन रखा था जो आगे चलकर वेदव्यास कहलाएं।धार्मिक मान्यता के अनुसार, महर्षि वेदव्यास का जन्म आषाढ़ माह की पूर्णिमा को हुआ। उन्हें महाभारत, अठारह पुराणों, ब्रह्मसूत्र, मीमांसा जैसे अद्वितीय वैदिक साहित्य दर्शन के रचयिता माना जाता है।भगवान शिव ने सप्तऋषियों को चुना शिष्य पुराणों के अनुसार शिव ने सप्तर्षियों को तुरंत ज्ञान नहीं दिया था। उन्होंने उन ऋषियों की कई वर्षों की कठोर तपस्या, धैर्य और अटूट पात्रता को देखा। जब सप्तर्षि पूर्णतः ‘खाली’ और ग्रहणशील ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:21 +0530</pubDate>
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<title>Famous Temple: Canada में अद्भुत नज़ारा, Shivarpanam Temple में स्थापित हैं 450 शिवलिंग, जानिए इस शिव धाम की पूरी History</title>
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<description><![CDATA[ भारत देश में तमाम प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कनाडा में एक ऐसा मंदिर है, जहां पर 1-2 नहीं बल्कि पूरे 450 शिवलिंग हैं। यह स्थल आपके मन को शांति से भर देगा। कनाडा में स्थित भगवान शिव को समर्पित यह शिवर्पणम मंदिर है। इस मंदिर में 450 शिवलिंग हैं। ऐसे में अगर आप भी कनाडा घूमने का प्लान कर रहे हैं, तो आपको इस मंदिर के दर्शन जरूर करना चाहिए। यह एक बेहद शांत और सुंदर मंदिर है। तो आइए जानते हैं इस मंदिर की खासियत के बारे में...450 शिवलिंगों वाला मंदिरवैसे तो कनाडा में कई हिंदू मंदिर हैं। लेकिन इनमें छिपा हुआ रत्न शिवर्पणम मंदिर है। यह मंदिर मॉन्ट ट्रेम्बलेंट क्षेत्र में स्थित है। टोरंटो से यहां पहुंचने में 6 घंटे का समय और मॉन्ट्रियल से एक घंटे का समय लगता है। यह मंदिर पहाड़ों और ताजी हवा से घिरा हुआ है। ऐसा नजारा आपको अन्य देशों में देखने को नहीं मिलेगा।इसे भी पढ़ें: Bemata Goddess: हाथ में कलम और दूतों का साथ, Ujjain में विराजमान Bemata कैसे तय करती हैं नवजात का Destinyमंदिर की विशेषताइस मंदिर की विशेषता यह है कि इसमें काले पत्थर से निर्मित 450 शिवलिंग हैं। यह शिवलिंग मंदिर परिसर में करीने से स्थापित हैं। केंद्र में विशाल शिवलिंग है और एक छोटा फव्वारा भी हैं। यह फव्वारा चारों और पानी छिड़कता है। इससे स्थान का जादुई वातावरण और भी बढ़ जाता है। शिवलिंग के अलावा यहां पर काले पत्थर से निर्मित भगवान शिव की एक मूर्ति और नंदी बैल की मूर्ति है।आध्यात्मिक यात्रा के लिएशिवर्पणम मंदिर के अलावा कनाडा के होप शहर में आशा महाकालेश्वर मंदिर है। इस स्थान की स्थापना शर्मिला नारायण ने की थी। यहां 8 फुट ऊंचा शिवलिंग औक 1008 छोटे शिवलिंग हैं। मंदिर में गौशाला भी है।दो प्रमुख भगवान शिव मंदिरों और अन्य कई हिंदू मंदिरों के साथ, कनाडा हिंदू भक्तों के लिए भी एक आध्यात्मिक यात्रा के लिए एकदम सही जगह है।ऐसे में अगर आप भी अपने परिवार या दोस्तों के साथ कनाडा घूमने का प्लान बना रहे हैं। तो आपको इन शांत और खूबसूरत जगहों पर जाना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Simhachalam Temple में साल में सिर्फ 24 घंटे होते हैं असली दर्शन, Akshaya Tritiya पर हटती है चंदन की परत</title>
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<description><![CDATA[ आंध्र प्रदेश का सिंहाचलम मंदिर भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित है। यह मंदिर बेहद दिव्य और अद्भुत है। आपको जानकर हैरानी होगी कि भगवान नरसिंह की मूर्ति से साल में सिर्फ 24 घंटे के लिए &#039;चंदन की परत&#039; हटाई जाती है। तभी यह मंदिर दर्शन के लिए खुलता है। ऐसे में भक्त साल में सिर्फ 24 घंटे के लिए भगवान नरसिंह के असली विग्रह के दर्शन कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस मंदिर से जुड़ी कुछ अनोखी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। कहां स्थित है दिव्य धामआंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में सिंहाचलम मंदिर स्थित है। यह मंदिर आस्था और वास्तुकला का अनोखा और अद्भुत संगम है। विशाखापट्टनम से लगभग 16 किमी दूर वराह लक्ष्मी नरसिम्हा मंदिर सिंहाचल पर्वत की चोटी पर स्थित है। माना जाता है कि भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद ने स्वयं इस मंदिर का निर्माण कराया था।इसे भी पढ़ें: Famous Temple: Canada में अद्भुत नज़ारा, Shivarpanam Temple में स्थापित हैं 450 शिवलिंग, जानिए इस शिव धाम की पूरी Historyक्यों लगाया जाता है चंदन का लेपभगवान विष्णु को नरसिंह अवतार उग्रता और वीरता का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक हिरण्यकशिपु का वध करने के बाद जब भगवान नरसिंह का क्रोध बहुत बढ़ गया, तो सभी देवताओं की भगवान नरसिंह को शांत कराने की कोशिश असफल रही।जिसके बाद भगवान नरसिंह अपने परम भक्त प्रह्लाद की प्रार्थना पर शांत हुए और सिंहाचलम पर्वत पर प्रकट हुए। भगवान नरसिंह की उग्रता और तेज को कम करने के लिए उनको चंदन से शीतल रखा जाता है। यही वजह है कि साल भर भगवान नरसिंह चंदन से ढके रहते हैं, जिससे कि उनका स्वरूप सौम्य रहे।जानें कब खुलता है यह मंदिरबता दें कि चंदन की मोटी परत से ढके रहने की वजह से भगवान नरसिंह की मूर्ति एक शिवलिंग के आकार में दिखती है। सिर्फ अक्षय तृतीया के पावन दिन पर यह चंदन हटाया जाता है। जिसको &#039;निजरूप दर्शन&#039; या &#039;चंदनोत्सव&#039; भी कहा जाता है। सिर्फ इसी दिन भक्त भगवान के असली विग्रह को देख पाते हैं। अक्षय तृतीया के दिन इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। वहीं नरसिंह जयंती पर भी भक्त मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। क्या है मंदिर की खासियतआमतौर पर आपको भगवान नरसिंग के अन्य मंदिरों में भगवान का उग्र रूप देखने को मिलेगा। लेकिन सिंहाचलम मंदिर में भगवान नरसिंह मां लक्ष्मी के साथ बेहद सौम्य और शांत मुद्रा में विराजमान हैं। वहीं मंदिर की वास्तुकला में चोल, चालुक्य और कलिंग शैलियों का मिश्रण देखने को मिलेगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:02:17 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope 25 July 2026 | जानें आपकी लव लाइफ में आज घुलेंगे मिठास के रंग या बढ़ेगी थोड़ी दूरी? आज का लव राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ प्यार एक खूबसूरत अहसास है, लेकिन हर दिन रिश्तों में नए मोड़ और नई ऊर्जा लेकर आता है। कभी मीठी-मीठी बातें तो कभी छोटी-मोटी तकरार—यही तो मोहब्बत की पहचान है! सितारों की चाल आज आपकी लव लाइफ में कौन-सा नया रंग भरने वाली है? क्या आज किसी नए रिश्ते की शुरुआत होगी या पुराने रिश्ते में फिर से वही पुरानी ताज़गी लौटेगी? आइए, जानते हैं मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों का आज का लव राशिफल!मेष (Aries)आज पार्टनर के साथ समय बिताने का बेहतरीन मौका मिलेगा। आपकी छोटी-सी पहल रिश्ते में नई मिठास घोल सकती है। सिंगल लोगों की किसी खास इंसान से बातचीत शुरू हो सकती है।वृषभ (Taurus)पार्टनर की बात को ध्यान से सुनें और किसी भी गलतफहमी को बातचीत से सुलझाएं। शाम तक माहौल खुशनुमा हो जाएगा।मिथुन (Gemini)आज आपकी बातें पार्टनर का दिल जीत लेंगी। लॉन्ग ड्राइव या कैंडललाइट डिनर का प्लान बन सकता है। सिंगल जातकों के लिए आज कोई सरप्राइज मिल सकता है।कर्क (Cancer)आज आप थोड़े भावुक महसूस कर सकते हैं। पार्टनर के प्रति अपना प्यार जताने का अच्छा दिन है, एक छोटी-सी तारीफ भी रिश्ते में मिठास बढ़ाएगी।सिंह (Leo)दिन का दूसरा हिस्सा रोमांस से भरपूर रहेगा। पार्टनर के साथ पुराने मतभेद सुलझने के योग बन रहे हैं।कन्या (Virgo)आज रिश्ते में नयापन और भरोसा देखने को मिलेगा। अविवाहित लोगों के लिए विवाह का कोई अच्छा प्रस्ताव आ सकता है।तुला (Libra)रोमांस के लिहाज से आज का दिन बेहद शानदार है। आप दोनों एक-दूसरे के करीब महसूस करेंगे और दिल की बात साझा करेंगे।वृश्चिक (Scorpio)काम की व्यस्तता के बावजूद पार्टनर के लिए समय निकालेंगे। एक छोटा-सा प्यार भरा मैसेज या सरप्राइज आपका दिन बना सकता है।धनु (Sagittarius)आज का दिन हंसी-मजाक और मस्ती से भरा रहेगा। पार्टनर के साथ कहीं घूमने का प्लान बन सकता है।मकर (Capricorn)रिश्ते में ईमानदारी और गंभीरता बनी रहेगी। एक-दूसरे के साथ भविष्य की योजनाएं बनाने के लिए बेहतरीन दिन है।कुंभ (Aquarius)बातचीत में मिठास बनाए रखें। दिन के अंत तक माहौल पूरी तरह रोमांटिक और सामान्य हो जाएगा।मीन (Pisces)आपके सितारे बता रहे हैं कि आज आपको पार्टनर की तरफ से कोई बहुत प्यारी खुशखबरी या सरप्राइज मिल सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:18:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Astrology Insights: सूर्य और शनि बनाएंगे शक्तिशाली Navpancham Rajyog, इन राशियों के लिए शुरू होंगे Good Days</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्रों में ग्रहों का गोचर और संयोग बनने का विशेष महत्व होता है। ज्योतिषी के अनुसार, समय-समय पर ग्रहों के संयोग के कारण कई तरह के योगों का निर्माण होता है, जिससे सभी 12 राशियों के जातकों के ऊपर प्रभाव पड़ता है। सूर्य देव ग्रहों के राजा हैं, हर महीने वे राशि परिवर्तन करते हैं। इस समय सूर्य कर्क राशि में है और गुरु के साथ युति करते हुए गुरु-आदित्य राजयोग का निर्माण कर रहे हैं। वर्तमान में सूर्य किसी न किसी ग्रह पर दृष्टि या फिर कोणीय संयोग का निर्माण कर रहे हैं। दूसरी तरफ अगस्त के माह में शनि जो मीन राशि में विराजमान हैं सूर्य उनके साथ संयोग करते हुए नवपंचम राजयोग का निर्माण कर रहे हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, 7 अगस्त को सुबह 8 बजकर 11 मिनट पर सूर्य और शनि एक-दूसरे से 120 अंश पर होंगे जिससे नवपंचम राजयोग का निर्माण करेंगे।कैसे बनता है नवपंचम राजयोगज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, जब दो ग्रह एक-दूसरे से पंचम और नवम भाव में होते हैं तो नवपंचम राजयोग का निर्माण होता है। वहीं, जब दो ग्रह एक दूसरे से 120 डिग्री पर होते हैं तो भी नवपंचम राजयोग बनता है। ऐसे में सूर्य का कर्क राशि में विराजमान होना और शनि का गुरु की राशि मीन में विराजमान होना संयोग है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य को पिता, नेतृत्व, आत्मविश्वास, मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और सरकारी सेवा का कारक माना जाता है। दूसरी तरफ शनि देव को धैर्य, मेहनत, न्याय, अनुशासन और कर्म का कारक माना जाता है। इसलिए नवपंचम राजयोग बनने से कुछ राशि के लोगों के लिए शुभ संकेत मिल सकते हैं। काफी समय से रुके हुए कार्य सफल होंगे। मेहनत का फल मिलेगा। करियर-कारोबार में बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। आइए आपको बताते हैं किन-किन राशियों की चमकेगी किस्मत।वृषभ राशिनवपंचम राजयोग बनने से वृषभ राशि के लोगों के काफी फायदा मिलेगा। सूर्य-शनि के संयोग से बना नवपंचम राजयोग बेहद फायदेमंद रहने वाला है। आपको शुभ फलों की प्राप्ति होगी और लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होंगे जिससे धन-धान्य में बढ़ोतरी के योग भी हैं। इस अवधि नौकरीपेशा जातकों को कोई बड़ी खुशखबरी सुनने के मिल सकती हैं। समाज में मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी।मिथुन राशिमिथुन राशि के जातकों के लिए नवपंचम राजयोग काफी फायदेमंद रहने वाला है। इस अवधि में जब तक नवपंचम का संयोग बनेगा तब तक आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार देखने को मिलेगा। नौकरीपेशा जातकों को नई नौकरी के लिए बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे। इसके साथ ही नौकरी में प्रमोशन और सैलरी वृद्धि के चांस अधिक है। काफी समय से रुका हुए धन वापस मिल सकता है और जीवन में एक साथ कई सारी गुड़ न्यूज सुनने को मिल सकती हैं।मकर राशिमकर राशि के जातकों के लिए यह नवपंचम राजयोग काफी लाभदायक सिद्द होगा। आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में बेहतर होगी। नौकरीपेशा जातकों को नई नौकरी के लिए एक साथ कई तरह के अवसर मिल सकते हैं। वर्कप्लेस पर आपके काम को लेकर सराहना हो सकती है। जो लोग बिजनेस में है उनको कोई अच्छी और बड़ी सफलता प्राप्त हो सकती है। भाग्य का पूरा साथ रहने वाला है और आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:17:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Astrology, Insights:, सूर्य, और, शनि, बनाएंगे, शक्तिशाली, Navpancham, Rajyog, इन, राशियों, के, लिए, शुरू, होंगे, Good, Days</media:keywords>
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<title>Horoscope 26 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। अच्छा समय है लाभ उठाएं। कोई नया काम शुरू कर सकते हैं। कदम कदम पर कठिनाई आएंगी।वृषमानसिक स्थिति में सुधार, काम निबटेंगे। आपको सफलता मिलेगी। पारिवारिक मतभेद दूर करने का दिन। मनोरथ सिद्धि से प्रसन्नता।मिथुनईर्ष्या-द्वेष प्रतिस्पर्धा और तनाव का कारण बनेंगे। धन देने वाले योग बने हैं। विश्वासघात से गहरा मानसिक आघात लग सकता है। व्यक्तियों और परिस्थितियों में अच्छा तालमेल।कर्कविद्याार्थी को स्कॉरशिप, शोध छात्र को नया प्रोजेक्ट। वैवाहिक संबंधों में मधुरता बढ़ेगी। रोजगार व्यवसाय में परिवर्तन के संकेत। अटके काम आगे बढ़ेंगे, इच्छा पूरी होगी।सिंहनई योजनाएं साकार रूप लेगी। जीवनसाथी से संबंध सुधरेंगे। लोकप्रियता बढ़ेगी, सार्वजनिक सम्मान भी। विषम परिस्थितियां, विवादकारक दिन।कन्याअचल सम्पत्ति विवाद में आपसी समझौता। दफ्तर में प्रभाव बढ़ेगी। धन प्राप्ति के प्रयास सफल होंगे। अशुभ समाचारों की प्राप्ति के योग है।तुलालापरवाही बड़ा नुकसान करा सकती है। ईष्ट मित्रों सहित भ्रमण का आनंद। पेट के रोगों से सावधान रहने की जरूरत है। मिलकर साझे से काम करें।वृश्चिक कोई बड़ी डील हो सकती है। सड़क पर सावधानी बरतें। अच्छी सफलता के साथ आज की शुरूआत होगी। दूसरों की चिंता में आपकी हानि होगी।धनुकोई बड़ी डील फानइल हो सकती है। कोई अनहोनी हो सकती है। प्रेम और श्रेय प्राप्ति वाला दिन। परिवार में मतभेद समाप्त, प्रेम बढ़ेगा।मकर संतान के संबंध में दुविधा की स्थिति दूर होगी। पेट और छाती संबंधी रोग आपको पीडि़त और चिंतित कर सकते हैं। धन संग्रह पर ध्यान देंगे। संवादहीनता न आने दें।कुंभअधिकारियों की प्रसन्नता से काम बनेंगे। राजसत्ता से जुड़े लोगों से सम्पर्क बढ़ेगा। आप गलतफहमी के शिकार हो सकते हैं। उत्साह के साथ आगे ही आगे बढ़ेंगे।मीनकठिन कार्य पूरे होने पर पक्ष मिलेगा। धन आगम के साधन बढ़ेंगे, चिंता दूर होगी। नए सम्पर्क भविष्य के लिए लाभप्रद सिद्ध होंगे। परिस्थितियां को संभालने की जरूरत है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:17:59 +0530</pubDate>
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<title>Shravan Month 2026 Rules: सावन व्रत में भगवान शिव के सामने जरूर बोलें ये एक मंत्र, पूरी होगी हर Wish</title>
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<description><![CDATA[ सावन का महीना शुरु होने अब ज्यादा दिन नहीं बचें है। भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय श्रावण मास है। शिव भक्त सावन महीने का बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस महीने में सावन के सोमवार का व्रत रखा जाता है और भगवान शंकर की विधिवत रुप से पूजा की जाती है।सोलह सोमवार का व्रत रखने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का सबसे आसान और बेहतरीन मार्ग है। इस व्रत की शुरु श्रावण मास के सोमवार से की जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार सावन की शुरुआत 30 जुलाई 2026 (गुरुवार) से हो रही है, जो 28 अगस्त 2026 शुक्रवार के दिन समाप्त होगा। वही सावन का पहला सोमवार व्रत 3 जुलाई 2026 को रखा जाएगा।सावन के सोलह सोमवार व्रत का महत्वइस व्रत को एक बार शुरू करने के बाद अगले आने वाले 16 सोमवार तक इस व्रत का पालन किया जाता है और 17वें सोमवार को व्रत का विधिपूर्वक उद्यापन किया जाता है। यदि आप पहली बार सावन सोमवार व्रत की शुरुआत करने जा रही हैं, तो आपको शिव जी की इस पूजा से जुड़ी नियमों का पालन करना चाहिए।असल में 16 सोमवार का व्रत 16 हफ्तों में किया जाता है। जिसमें आप एक-एक करके अपने सभी पापों से मुक्त हो सकते हैं। लेकिन सावन महीने में भगवान शिव की पूजा के साथ प्रार्थना अवश्य करें। हर सोमवार व्रत के दौरान भगवान शिव की पूजा करने के बाद उनके समक्ष खड़े होकर इस श्लोक को दोहराए-यत् कृतं तु मया देव पापं जन्मान्तरार्जित्म।क्षन्तव्यं तत् महादेव प्रसीद परमेश्वरम।।अर्थ- जो भी पाप मुझसे इस जन्म या पिछले जन्म में हुए हैं, उनके लिए मैं क्षमा मांगती हूं। मुझ पर अपनी कृपा बनाए रखें।इसके अतिरिक्त, सावन का व्रत रखने वाली सभी महिलाएं जो पहली बार व्रत रखने जा रही हैं, वो भी इस बात का ध्यान रखें कि यह महीना भगवान भोलेनाथ की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इसलिए इस स्लोक को भगवान शिव के समक्ष सच्चे मन से बोलें, ताकि सोलह सोमवार व्रत के पूर्ण होने के बाद इच्छा आपकी पूर्ण हो जाए।16 सोमवार का व्रत क्यों रखना जरूरी है?अविवाहित महिलाएं अपने लिए योग्य जीवनसाथी की तलाश में हैं, उन्हें 16 सोमवार का व्रत जरुर करना चाहिए। इस व्रत के रखने से विवाहित जीवन में सामंजस्य स्थापित होने के साथ सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। वहीं, बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा से भी राहत मिलती है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:17:58 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Shravan, Month, 2026, Rules:, सावन, व्रत, में, भगवान, शिव, के, सामने, जरूर, बोलें, ये, एक, मंत्र, पूरी, होगी, हर, Wish</media:keywords>
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<title>ग्रहों के सेनापति मंगल का बड़ा परिवर्तन, 12 अगस्त तक इन Zodiac Signs को मिलेगा तगड़ा Business Profit</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मंगल का नक्षत्र गोचर कुछ राशि वालों के लिए नई उपलब्धियों और सफलता लेकर आने वाला है। ग्रहों के सेनापति मंगल ने 24 जुलाई को बड़ा नक्षत्र परिवर्तन करके एक विशेष संयोग बनाया है। असल में मंगल ने चंद्रमा के नक्षत्र रोहिणी से निकलकर अपने खुद के स्वामित्व वाले मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश किया है। ज्योतिष के मुताबिक, मंगल ग्रह अपने ही नक्षत्र में गोचर करते हैं, तो उनकी शक्ति और प्रभाव कई गुना तक बढ़ जाता है। इसलिए माना जा रहा है कि मंगल का यह नक्षत्र परिवर्तन कुछ राशियों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। इस गोचर से साहस, आत्मविश्वास व धन लाभ में सकारात्मक वृद्धि कर सकता है। आइए आपको बतात हैं कौन हैं ये लकी राशियां।मेष राशिमंगल अपने नक्षत्र में प्रवेश करने करने से मेष राशि के जातकों को काफी लाभ मिलेगा, क्योंकि मंगल आपकी राशि के स्वामी हैं। इस समय आपका आत्मविश्वास पहले से अधिक मजबूत होगा। बिजनेस में आगे तरक्की करने के लिए नए लोगों से मुलाकात हो सकती है, जो कि भविष्य में आपके लिए काफी लाभदायक सिद्द होगा। बिजनेस और करियर में मनचाहे परिणाम मिल सकते हैं। वहीं, परिवार में लंबे समय से खुशियां बनीं रहेगी। अगर काफी समय से कार्य रुके हैं, तो गति आने की संभावना है।कन्या राशियह समय कन्या राशि के लोगों के लिए अच्छा रहने वाला है। वर्कप्लेस पर नए लोगों से बेहतरीन संपर्क होगा। किसी लंबी यात्रा पर जा सकते हैं। करियर संबंधित महत्वपूर्ण फैसले आपके पक्ष में जा सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को नए अवसर प्रदान होंगे। स्टूडेंट्स को उनकी मेहनत के अच्छे परिणाम मिलने से मन प्रसन्न रहेगा। काला क्षेत्र में आपकी अच्छी पहचान बन सकती है।मकर राशिमकर राशि के जातकों के लिए मंगल का नक्षत्र परिवर्तन काफी प्रभावशाली रहने वाला है। इस दौरान आपको मनचाहे अवसर प्राप्त हो सकते हैं। आय के नए स्रोत भी बन सकते हैं। अगर आप लंबे समय तक किसी भी कारोबार को आरंभ करने पर काम कर रहे हैं, तो उसमें सफलता मिल सकती है। इस अवधि में आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। समाज में आपकी छवि अच्छी बनेंगी।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:17:58 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 27 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष व्यवसाय में विस्तार की योजना बनेगी। अच्छा दिन है, लोग लोहा मानेंगे। गर्भवती महिलाओं को अधिक सावधान रहना है। अधिकारियों से विवाद हो सकता है।वृषमशीनरी संबंधी शिक्षण, प्रशिक्षण और प्रयोग से लाभ। परिवार में मेला सा लगा रहेगा। पुनः मान सम्मान की प्राप्ति। शुभ कार्यों की बाधाएं समाप्त होगी।मिथुनस्वास्थ्य में कुछ गड़बड़ झाला लगता है। मूत्राशय के रोग वृद्धों को विशेष परेशान करेंगे। बुद्धि और चतुराई से समस्या का समाधान मिलेगा। उत्सव समारोह में भाग लेंगे।कर्कआज छप्पर फाड़कर धन लाभ हो सकता है। भाइयों से आपसी प्रेम बढ़ेगा। विदेश जाना का रास्ता साफ होगा। खाने में असावधानी से स्वास्थ्य खराब।सिंहमन में भय और आशंकाएं बनी रहेगी। किसी समारोह में मित्र और संबंधियों से मिलन होगा। धन लाभ के अवसर और उनमें सफलता। लालची और स्वार्थी न बनें।कन्याविशेष सिद्धि के लिए साधना करेंगे। खुशी के समाचार मिलेंगे। परिश्रम का सुपरिणाम मिलेगा। व्यक्तिगत में और भी निखार आएगा।तुलानिष्ठा से काम करें, आशाएं सफल होगी। अनिर्णय की स्थिति रहेगी, धन हानि भी। धन और उपहार की प्राप्ति। दोपहर बाद परेशानी, कठिन समय हैं।वृश्चिक पारिवारिक सामाजिक संदर्भ ठोस निर्णय लेंगे। धन वर्षा होती रहेगी, आप बटोरते रहें। रिश्वत का लेन-देन संभव है। अधिक संघर्ष, फिर भी विजय और सफलता।धनुविशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। तन-मन दोनों का ध्यान रखें। स्वजनों से विरोध बढ़ेगा- वे दुश्मन बनेंगे। आज धन का लेन-देन न करें, हानि होगी।मकर स्वजनों के साथ आनंद से दिन बीतेगा। रिश्तेदार शुभ कार्य सम्पन्न होने में सहयोग देंगे। अस्पतालों/डाक्टरों के चक्कर। स्वजन शत्रुवत व्यवहार करेंगे।कुंभप्रयत्नों का सुपरिणाम मिलेगा। उपहारों का आदान-प्रदान। सरकारी विवाद- कार्यों में विलम्ब। डूबा हुआ धन प्राप्त होगा।मीनशुभ कार्य और अधिकारों की प्राप्ति। धन लाभ के प्रयास सफल होंगे। मनोवांछित सफलताएं प्राप्त होगी। धार्मिक कार्यों में रूचि बढ़ेगी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:17:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope 27 July 2026 | जानें आपकी लव लाइफ में आज घुलेंगे मिठास के रंग या बढ़ेगी थोड़ी दूरी? आज का लव राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ प्यार एक खूबसूरत अहसास है, लेकिन हर दिन रिश्तों में नए मोड़ और नई ऊर्जा लेकर आता है। कभी मीठी-मीठी बातें तो कभी छोटी-मोटी तकरार—यही तो मोहब्बत की पहचान है! सितारों की चाल आज आपकी लव लाइफ में कौन-सा नया रंग भरने वाली है? क्या आज किसी नए रिश्ते की शुरुआत होगी या पुराने रिश्ते में फिर से वही पुरानी ताज़गी लौटेगी? आइए, जानते हैं मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों का आज का लव राशिफल!मेष (Aries)आज आपके रिश्तों में मिठास और सामंजस्य बढ़ेगा। जीवनसाथी या लव पार्टनर के साथ चल रही किसी पुरानी गलतफहमी को सुलझाने का बेहतरीन दिन है। एक-दूसरे को थोड़ा समय और स्पेस दें।वृषभ (Taurus)प्रेम संबंधों में धैर्य बनाए रखना ज़रूरी है। किसी भी बात को लेकर जिद या अड़ियल रवैया अपनाने से बचें। पार्टनर की भावनाओं और उनकी राय का सम्मान करें।मिथुन (Gemini)भावनात्मक दृष्टिकोण से दिन सकारात्मक रहेगा। पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। अपने मन की बात स्पष्टता से कहें, बातचीत से नजदीकियां बढ़ेंगी।कर्क (Cancer)आज पार्टनर को समझने का प्रयास करें। धैर्य से काम लेंगे तो रिश्तों में विश्वास और गहराई आएगी। शाम का समय साथी के साथ सुकून भरा बीत सकता है।सिंह (Leo)रिश्तों में नया उत्साह और प्रेम बना रहेगा। प्रियजन से मुलाकात या किसी खास बातचीत के योग हैं। आपसी संतुलन बनाए रखें, रिश्ता और मजबूत होगा।कन्या (Virgo)सिंगल जातकों के लिए आज कोई नया रिश्ता या बातचीत शुरू होने की संभावना है। जो पहले से रिश्ते में हैं, उनके लिए आपसी समझ बढ़ाने वाला दिन रहेगा।तुला (Libra)प्रेम जीवन में सुख-शांति का माहौल रहेगा। पार्टनर के साथ तालमेल बहुत बढ़िया रहेगा और आप अपने दिल की बातें आसानी से साझा कर पाएंगे।वृश्चिक (Scorpio)पार्टनर को कोई सरप्राइज देने या उनके साथ समय बिताने के लिए दिन अनुकूल है। सकारात्मक दृष्टिकोण रखें, इससे रिश्ते में नयापन महसूस होगा।धनु (Sagittarius)प्रेम संबंधों में सहजता बनी रहेगी। साथी के साथ कहीं बाहर जाने या मनोरंजक पल बिताने की योजना बन सकती है।मकर (Capricorn)आपकी लव लाइफ में भरोसा और परिपक्वता लौटेगी। पार्टनर की बात को ध्यान से सुनें और किसी भी फैसले में जल्दबाजी करने से बचें।कुंभ (Aquarius)दिन मिला-जुला रहेगा। संवाद बनाए रखना सबसे अहम है, ताकि छोटी बात बड़ा रूप न ले। शाम तक स्थितियां पूरी तरह आपके पक्ष में होंगी।मीन (Pisces)प्रेम जीवन में सकारात्मक ऊर्जा रहेगी। पार्टनर के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव महसूस करेंगे और रिश्तों में तालमेल पहले से बेहतर होगा।ज्योतिषीय टिप: आज बातचीत के दौरान स्पष्टता रखें और एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:17:56 +0530</pubDate>
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<title>Ravi Pradosh Vrat 2026: Ravi Pradosh Vrat पर दूर होंगी जीवन की सभी बाधाएं, शाम को इस Muhurat में करें Lord Shiva की आराधना</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी की 26 जुलाई 2026 को आषाढ़ मास का आखिरी प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-उपासना करने का विधान है। वैदिक पंचांग के मुताबिक हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर यह व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति आती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। आषाढ़ माह का यह प्रदोष व्रत रविवार को पड़ रहा है, इसलिए इसको रवि प्रदोष व्रत कहा जा रहा है। तो आइए जानते हैं रवि प्रदोष व्रत की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में... तिथि और मुहूर्तहिंदू पंचांग के मुताबिक आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरूआत 26 जुलाई की दोपहर 01:58 मिनट पर होगी। वहीं इस तिथि की समाप्ति 27 जुलाई 2026 की शाम 04:15 मिनट पर होगी। ऐसे में प्रदोष काल का व्रत 26 जुलाई 2026 को किया जा रहा है।बता दें कि प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में करना बेहद शुभ माना जाता है। आज पूजा का शुभ मुहूर्त 26 जुलाई की शाम 07:16 मिनट से लेकर रात 09:21 मिनट तक है। इस अवधि में भगवान शिव की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। भगवान शिव का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। फिर 11 या 21 धतूरा, बेलपत्र, सुपारी, फल, आक के फूल, लौंग, फूल, इलायची, धूप, दीप, चावल और गंध आदि नौवेद्य आद अर्पित करें। इसके बाद शक्कर और घी से बनी मिठाई का भोग अर्पित करें। फिर शिव के मंत्र और शिव चालीसा का पाठ करें।अब प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें और अंत में घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें। पूरा दिन व्रत रखें और भगवान शिव का मन में स्मरण करते रहें। शाम के समय फिर स्नान आदि करें। वहीं प्रदोष काल में भगवान शिव की पूरे विधि-विधान से पूजा और आरती करें। ]]></description>
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<title>Chaturmas 2026: Devshayani Ekadashi से शुरू हो रहा Chaturmas, जानें 4 महीनों तक क्यों वर्जित हैं शुभ कार्य</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व होता है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी। इसको हरिशयनी और आषाढ़ी एकादशी के नाम से भी जानते हैं। इस देवशयनी एकादशी से चार महीनों के लिए भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। भगवान विष्णु के योगनिद्रा में होने की वजह से देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरूआत होती है। इस दौरान शुभ कार्यों जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। वहीं इस चातुर्मास के दौरान साधु-संत भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण नहीं करते हैं। तो आइए जानते हैं देवशयनी एकादशी कब है और चातुर्मास का क्या महत्व होता है।देवशयनी एकादशी 2026हिंदू पंचांग के मुताबिक इस साल 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी मनाई जा रही है। इसी एकादशी के साथ जगत के पालनहार भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा क्षीर सागर में चले जाते हैं। इसी के साथ चातुर्मास की शुरूआत होती है और इस दौरान चार महीने के लिए शुभ काम वर्जित हो जाते हैं।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope 23 July 2026 | प्यार की राह में किसके खिलेंगे दिल के फूल, किसे मिलेगी खास सलाह? पढ़ें आज का लव राशिफलमहत्वधार्मिक मान्यताओं के मुताबिक आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी क्षीर सागर में 4 महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के बाद भगवान शिव सृष्टि का संचालन करते हैं। इस चार महीनों में भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। भगवान शिव की आराधना के लिए पूरे महीने तक सावन पर विशेष रूप से पूजा की जाती है। इस दौरान पूजा-पाठ, दान, जप-तप और व्रत करने पर पुण्यफल की प्राप्ति होती है।चातुर्मास के चार महीनेधार्मिक मान्यताओं के मुताबिक देवशयनी एकादशी से शुरू होकर देवउठनी एकादशी तक श्रीहरि योगनिद्रा में रहते हैं। इस चार महीने के समय को चातुर्मास कहा जाता है। चातुर्मास के दौरान सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक महीने आते हैं। शास्त्रों में इन 4 महीनों का विशेष महत्व होता है। जिसमें भक्ति और साधना का विशेष महत्व होता है।चातुर्मास में शुभ कार्य क्यों नहीं होतेहिंदू धर्म में चातुर्मास के दौरान श्रीहरि के चार महीने योगनिद्रा और साधना के लिए बेहद अहम होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक शुभ और मांगलिक कार्यों में श्रीहरि की उपस्थिति रहती है। जिसमें पूजा और दूसरे धार्मिक अनुष्ठानों में आशीर्वाद देते हैं। लेकिन श्रीहरि के योगनिद्रा में रहने से किसी भी तरह के शुभ कार्यों में उनका आशीर्वाद नहीं मिल पाता है। जिस कारण चातुर्मास में शुभ कार्यों को स्थगित कर दिया जाता है। देवउठनी एकादशी पर श्रीहरि के जागने पर शुभ और मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 24 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष स्वास्थ्य में सुधार। कोई जोखिम भरा काम करेंगे। कृपया अपने आचरण पर ध्यान दें, नम्र रहें। नौकरी व्यवसाय में उन्नति का समाचार। धार्मिक/आध्यात्मिक अनुष्ठान का समारंम्भ।वृषथोड़ी सी उदण्डता और असफलता से निराशा होगी। कार्यक्षेत्र में उत्साहवर्धक स्थिति। जीवन स्तर ऊंचा उठेगा। निर्धारित लक्ष्य पर ध्यान दें।मिथुनअभीष्टकारी समय है। आपके बिगड़े काम बनेंगे। यथा समय कार्य पूरे होने पर प्रसन्नता। काम धीमी गति से ही आगे बढ़ेगा।कर्कपरिवार के कामों में व्यस्तता रहेगी। व्यर्थ के कामों में बेकार की गपशप में दिन बीतेगा। नए सम्पर्क भविष्य के लिए लाभप्रद सिद्ध होंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।सिंहनई योजनाएं बनेगी और आगे बढ़ेगी। दोपहर तक जरूरी काम निपटा लें। नौकरी व्यवसाय में उन्नति का समाचार। बिगड़े काम बनेंगे, सम्मानवर्धक दिन।कन्यास्वजनों का सहयोग मिलेगा। शुभ समाचार, उपहार और अन्य लाभ भी। परिवार के साथ मनोविनोद और भ्रमण में व्यस्तता रहेगी। मित्र से मतभेद हो सकता है।तुलाकार्य क्षेत्र में आप ख्याति प्राप्त करेंगे। महत्वपूर्ण चीज़ गुम हो सकती है। पैतिृक सम्पत्ति का विवाद हल होगा। दुर्लभ वस्तु भी सुलभ हो जाएगी।वृश्चिक चहुंमुखी विकास के अवसर मिलेंगे। आपके बिगड़े काम बनेंगे। अधिकारियों की प्रसन्नता से काम बनेंगे। नेकी कर-दरिया में डाल का मंत्र याद रखें।धनुविवाहित लोगों को आज वाणी पर विशेष संयम रखना चाहिए। दोपहर तक अच्छा महसूस करेंगे। अवकाश मनाने की विशेष योजना बनेगी। स्वजनों के साथ अच्छा समय बीतेगा।मकर परिवर्तन का दिन, परिवार के लिए विशेष। पड़ोसियों से व्यवहार ठीक रखें। लोकप्रियता बढ़ेगी, सम्मानवर्धक दिन। विवाहित लोगों को आज वाणी पर विशेष संयम रखना चाहिए।कुंभमित्रों और परिजनों से विरोध संभव। सामाजिक सरोकार के लिए उत्तम दिन। सुखपूर्वक दिन बीतेगा। कार्य क्षेत्र में आप ख्याति प्राप्त करेंगे।मीनपरीक्षा का सुपरिणाम प्राप्त होगा। रोजगार व्यवसाय में प्रशंसा मिलेगी। प्रिय मित्र का आगमन। पढ़कर ही दस्तावेज पर साइन करें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:45 +0530</pubDate>
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<title>Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी से शुरू होंगे चातुर्मास, भूलकर भी न करें ये काम, देखें Complete List</title>
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<description><![CDATA[ आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। देवशयनी एकादशी को पद्मा, हरिशयनी और आषाढ़ी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से जगत के पालनहार भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर योगनिद्रा में चले जाते हैं। देवशयनी से ही चातुर्मास की शुरूआत होती है। इस दौरान शुभ कार्य वर्जित होते हैं। तो आइए जानते हैं कि साल 2026 में देवशयनी एकादशी कब है और इसका क्या महत्व है। वहीं चातु्र्मास के दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए।देवशयनी एकादशी 2026इस बार 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी मनाई जा रही है। इस दिन से भगवान श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी दिन से चातुर्मास की शुरूआत होती है।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope 24 July 2026 | जानें आपकी लव लाइफ में आज घुलेंगे मिठास के रंग या बढ़ेगी थोड़ी दूरी? आज का लव राशिफलदेवशयनी एकादशी का महत्वधार्मिक मान्यता के मुताबिक देवशयनी एकादशी पर श्रीहरि विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान चार महीनों तक भगवान शिव सृष्टि का संचालन करते हैं। यही वजह है चातुर्मास के दौरान भगवान शिव और भगवान श्रीहरि की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दौरान जप, तप, दान, व्रत और सत्संग करने से विशेष पुण्यफल की प्राप्ति होती है।क्या है चातुर्मासदेवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक करीब 4 महीने का समय चातुर्मास कहलाता है। चातुर्मास के चार महीनों में सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक माह आते हैं। धार्मिक दृष्टि से यह चार महीने भक्ति, संयम और साधना के लिए सबसे उत्तम माना गया है।चातुर्मास में क्या करना चाहिएइस दौरान भगवान श्रीहरि विष्णु और भगवान शिव की नियमित रूप से पूजा करना चाहिए।एकादशी, प्रदोष और सावन के व्रत रखना चाहिए।रामचरितमानस, गीता और श्रीमद्भागवत गीता जैसे धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना चाहिए।गरीबों और जरुरतमंद लोगों को वस्त्र, अन्न और दक्षिणा का दान करना चाहिए।सात्विक भोजन करना चाहिए और अपने मन को शांत रखने का प्रयास करें।इस दौरान दीपदान और तुलसी पूजा करना शुभ माना जाता है।चातुर्मास में क्या नहीं करना चाहिएइस दौरान शुभ कार्य जैसे गृहप्रवेश, मुंडन और विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए।तामसिक भोजन, मांस और शराब आदि से दूर रहना चाहिए।झूठ, क्रोध और दूसरों की निंदा करने से बचना चाहिए।क्यों नहीं किए जाते शुभ कामधार्मिक मान्यता है कि जब भगवान श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं, तब विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के मुहूर्त नहीं निकाले जाते हैं। इसलिए चातुर्मास के दौरान ज्यादातर शुभ कार्य स्थगित रहते हैं। देवउठनी एकादशी पर जब भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं, तो फिर से विवाह और अन्य मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं।देवशयनी पर कैसे करें पूजासुबह जल्दी स्नान आदि के बाद लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। फिर इस पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा का स्थापित करें। उनको तुलसी दल, पीले फूल, पंचामृत और भोग आदि अर्पित करें। इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम या &#039;ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नम:&#039; मंत्र का जाप करें। फिर दीपक जलाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आरती करें और व्रत रखें। अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत का पारण करें।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope 24 July 2026 | जानें आपकी लव लाइफ में आज घुलेंगे मिठास के रंग या बढ़ेगी थोड़ी दूरी? आज का लव राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज, 24 जुलाई 2026, का दिन सभी राशियों की लव लाइफ में नए रंग, अहसास और कई बड़े बदलाव लेकर आया है। ग्रहों की बदलती चाल आपके रिश्तों में रोमांस, आपसी समझ और खुशहाली के नए अवसर लेकर आ रही है। जहाँ कुछ राशियों के लिए आज का दिन अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताने और दिल की बातें साझा करने का है, वहीं सिंगल लोगों के जीवन में भी किसी खास की एंट्री हो सकती है। अगर आप जानना चाहते हैं कि आज आपके प्रेम जीवन के तारे क्या कहते हैं और अपने रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, तो पढ़िए आज का यह खास लव राशिफल।मेष (Aries)आज पार्टनर के साथ समय बिताने का बेहतरीन मौका मिलेगा। अगर मन में कोई पुरानी बात या गलतफहमी चल रही थी, तो आज बातचीत के जरिए उसे सुलझाने की कोशिश करें। सिंगल लोगों की किसी नए व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है।वृषभ (Taurus)रिश्ते में आज थोड़ा धैर्य बनाए रखने की जरूरत है। पार्टनर के साथ किसी छोटी बात पर बहस हो सकती है, इसलिए शांत रहें और वाणी पर नियंत्रण रखें। शाम तक माहौल खुशनुमा हो जाएगा।मिथुन (Gemini)आज आपकी लव लाइफ में उत्साह बना रहेगा। आप अपने पार्टनर को कोई सरप्राइज देने का प्लान बना सकते हैं। पार्टनर के साथ संवाद बेहतर होगा, जिससे रिश्ते में मजबूती आएगी।कर्क (Cancer)आज का दिन भावनाओं से भरा रहेगा। आप अपने पार्टनर के प्रति काफी प्रोटेक्टिव और भावुक महसूस करेंगे। अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त करें, इससे आपका साथी बेहद खुश होगा।सिंह (Leo)आज आपका आकर्षण चरम पर रहेगा। सिंगल लोगों के जीवन में किसी नए प्यार की दस्तक हो सकती है। जो लोग पहले से रिश्ते में हैं, उनके बीच का रोमांस और समझ बढ़ेगी।कन्या (Virgo)आज पार्टनर के साथ काम के सिलसिले में व्यस्तता के कारण कम समय मिल पाएगा। हालांकि, एक छोटा सा मैसेज या कॉल भी रिश्ते में गर्मजोशी बनाए रखने के लिए काफी रहेगा।तुला (Libra)लव लाइफ के लिहाज से आज का दिन काफी शानदार रहने वाला है। आप अपने पार्टनर के साथ लॉन्ग ड्राइव या डिनर डेट पर जा सकते हैं। आपका साथी आज आपकी काफी सराहना करेगा।वृश्चिक (Scorpio)आज रिश्ते में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। किसी भी बात को छुपाने से बचें, वरना गलतफहमी हो सकती है। पार्टनर की बात ध्यान से सुनें और उन्हें समझने की कोशिश करें।धनु (Sagittarius)आज का दिन मस्ती और रोमांस से भरा रहेगा। पार्टनर के साथ हंसी-मजाक का माहौल रहेगा। यदि आप किसी को पसंद करते हैं, तो आज अपने दिल की बात कहने का सही समय है।मकर (Capricorn)रिश्ते में आपसी सहयोग और तालमेल बना रहेगा। आज आप और आपके पार्टनर भविष्य की योजनाओं को लेकर चर्चा कर सकते हैं। एक-दूसरे पर विश्वास बढ़ेगा।कुंभ (Aquarius)आज आपके लव पार्टनर के मूड में थोड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। उनकी भावनाओं को समझें और उन्हें थोड़ा व्यक्तिगत समय दें। शाम तक सब सामान्य हो जाएगा।मीन (Pisces)आज का दिन आपके लिए काफी रोमांटिक रहने वाला है। पार्टनर के साथ भावनात्मक जुड़ाव गहरा होगा। सिंगल लोगों के लिए आज का दिन किसी खास से मिलने का संकेत दे रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Devshayani Ekadashi: धार्मिक ही नहीं Scientific वजहों से भी खास है चातुर्मास, जानें क्या करें और क्या न करें</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। आज के दिन से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और इस दिन चातुर्मास की शुरुआत होती है। चातुर्मास की अवधि 4 महीने तक चलती है और इस दौरान किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। क्योंकि भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। जिसके बाद सृष्टि का सारा कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं। आइए आपको इस लेख में देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व।देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्वधार्मिक मान्यता के अनुसार, देवशयनी एकादशी सिर्फ भगवान सोने का दिन नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मनुष्य को विश्राम और आत्ममंथन का संदेश देती है। जब जगत के स्वामी ठहरते हैं, तो हमें भी अपनी भागदौड़ रोककर भक्ति में लीन होना चाहिए।इस तिथि का संबंध भगवान विष्णु के एक महान युद्ध और उसके बाद विश्राम की कथा से भी जुड़ा है। माना जाता है कि भगवान विष्णु शंखापुर  नामक दैत्य का वध करने के बाद थककर चार महीने के लिए क्षीरसागर में सोने चले गए।भगवान के इस शयन काल को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है, जिसके बाद से पूरे चार महीनों के लिए सृष्टि के संचालन की गति भी बदल जाती है और सांसारिक कार्यों पर विराम लग जाता है।वैज्ञानिक दृष्टिकोण से क्यों खास है देवशयनी एकादशी?धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय का एक बहुत बड़ा मौसमी महत्व भी बताया गया है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण के मुताबिक यह वर्षा ऋतु का समय होता है, जब वातारण में नमी बढ़ने के कारण कई प्रकार की संक्रामक बीमारियां तेज से बढ़ जाती है।  वैसे इस मौसम में शरीर की पाचन की शक्ति भी कमजोर हो जाती है। इसलिए माना जाता है कि इन 4 महीनों में व्रत रखने और संयमित जीवन जीने की सलाह दी जाती है ताकि हेल्थ ठीक बेहतर रहे। इसे भी पढ़ें: Chaturmas Rules: 25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास, Padma Purana के अनुसार इन 8 नियमों का करें पालन किन चीजों का परहेज करेंचातुर्मास में खान-पान और जीवनशैली में कुछ खास नियमों का पालन करना बेहद जरुरी है। - तामसिक भोजन जैसे कि मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन से दूरी बना लें। - गौरतलब है कि सावन में री पत्तेदार सब्जियों से परहेज, भाद्रपद में दही का त्याग, आश्विन में दूध का सेवन कम करना और कार्तिक में कुछ दालों का सेवन न करना। क्या करना अनिवार्य है?- इस दौरान भूमि पर शयन, ब्रह्मचर्य का पालन, सत्य बोलना और मौन रहना सबसे जरुरी है। - चातुर्मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे कार्य वर्जित होते हैं। इस दौरान भूलकर भी न करें। - इस अवधि में व्यक्ति को अनुशासन, संयम और आध्यात्मिक उन्नति के रास्ते में जरुर जाना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 25 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष मांगलिक कार्यों में आयोजन संभव है। अचानक धन लाभ होगा। व्यवहार में सावधानी-झूठा आरोप संभव। अतिथियों के स्वागत में व्यस्तता और प्रसन्नता।वृषइंटरव्यू आदि में आपका प्रभाव जमेगा। पुराने मित्रों से मिलकर खुशी होगी। समय अच्छा नहीं हैं, सतर्क रहें। भोजन में भी सावधानी बरतें।मिथुनबंधु बांधवों का आगमन खुशी देगा। स्वास्थ्य लाभ होगा, रोगमुक्ति की आशा। विभागीय परीक्षा में सफलता। धन की व्यवस्था करने में सफल रहेंगे।कर्कलोगों में आपकी छवि बहुत सुंदर उभर कर आएगी। प्रगति के अवसर मिलेंगे। अशुभ समाचार और अप्रिय घटनाएं। विभागीय परीक्षा में सफलता मिलेगी।सिंहसंतान के संबंध में दुविधा की स्थिति दूर होगी। उपहारों की प्राप्ति होगी। इच्छानुसार कार्य का फल प्राप्त होगा। व्यर्थ के कामों में दिन बीतेगा।कन्याआपकी प्रतिष्ठा में भी चार चांद लगेंगे। संतान पक्ष से सहयोग और लाभ की प्राप्ति। पर पुरुष/स्त्री से सर्तकता पूर्वक व्यवहार करें। थोड़ी सी असावधानी भी भारी पड़ेगी।तुलाअच्छा समय है लाभ उठाएं। उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे। उलझन सुलझेगी, शत्रु भी मित्र बनेंगे। दुर्घटना घट सकती है, चोट लग सकती है।वृश्चिक आत्मविश्वास प्रबल रहेगा, यश भी मिलेगा। बेटे-बेटी की शादी की चिंता दूर होगी। धन लाभ और सफलता। स्वास्थ्य और स्वभाव दोनों कमजोर।धनुपरिस्थितियां सुधार की ओर बढ़ रही हैं। विवेक से काम लें, अन्यथा हानि। शत्रु मान हानि नहीं कर सकेंगे। परिस्थितियां चिंताजनक रहेगी, अवसाद से बचें।मकर आपसी समझौते से सम्पत्ति विवाद हल होगा। ईष्ट मित्रों सहित यात्रा पर जाने के योग। मित्र से मतभेद हो सकता है। वैवाहिक मामलों में अच्छा दिन रहेगा।कुंभआपके अपने ही शत्रुवत व्यवहार करेंगे। कमी पूरी करते हुए आगे बढ़ेंगे। मांगलिक आयोजन और नए मेहमान का आगमन। व्यर्थ के कामों में बेकार की गपशप में दिन बीतेगा।मीनविद्याार्थी को स्कॉरशिप, शोध छात्र को नया प्रोजेक्ट। समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। व्यापार में लाभ होगा। परिश्रम के अनुरूप लाभ मिलने की खुशी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:43 +0530</pubDate>
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<title>Asha Dashami Vrat 2026: आशा दशमी व्रत से होते हैं सभी मनोरथ पूरे</title>
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<description><![CDATA[ धर्मग्रंथों में प्राप्त आशा दशमी के माहात्म्य से यह सिद्ध होता है कि दुर्लभ से दुर्लभ मनोरथों की पूर्ति के लिए आशा दशमी व्रत का पालन अवश्य करना चाहिए। यह व्रत विशेष रूप से स्त्रियों के लिए अत्यंत फलदायी, आरोग्यप्रद और श्रेयस्कर माना गया है।जानें आशा दशमी व्रत के बारे में हिंदू धर्म में व्रत और त्यौहार केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये जीवन में सकारात्मकता, आशा और उमंग का संचार करते हैं। ऐसा ही एक अत्यंत कल्याणकारी पर्व है &#039;आशा दशमी व्रत&#039; (Asha Dashami Vrat)। मान्यता है कि इस व्रत को सच्चे मन से करने से व्यक्ति की अधूरी आशाएं पूरी होती हैं और जीवन में कभी निराशा का सामना नहीं करना पड़ता। सनातन परंपरा में आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की दशमी तिथि का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है क्योंकि इसी पावन तिथि पर आशा दशमी व्रत रखा जाता है. अपने नाम के अनुरूप इस व्रत को आशाओं या फिर कामनाओं की पूर्ति की लिए विशेष रूप से रखा जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार इस दिन 10 आशा देवियों की विशेष रूप से साधना-आराधना और व्रत किया जाता है। सुहागिन महिलाएं इस दिन सुखी दांपत्य जीवन की कामना करते हुए माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना करती है।इसे भी पढ़ें: Nag Vasuki की अनन्य भक्ति से प्रसन्न हुए Lord Shiva, गले में धारण कर दिया सम्मानसनातन धर्म की विशाल आध्यात्मिक विरासत में &#039;आशा दशमी&#039; का व्रत एक ऐसा प्रकाशपुंज है जो मनुष्य को घोर हताशा, अवसाद और संकट के अंधकार से बाहर निकालकर &#039;उम्मीद&#039; की नई ऊर्जा से भर देता है। &#039;आशा&#039; शब्द का अर्थ केवल इच्छा नहीं, बल्कि वह अटूट विश्वास है जो असंभव को संभव बनाने की शक्ति रखता है। &#039;दशमी&#039; तिथि पूर्णता का प्रतीक है, जो यह सुनिश्चित करती है कि साधक को दसों दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ईशान, नैऋत्य, वायव्य, आग्नेय, आकाश और पाताल) से शुभ फल प्राप्त हों। यह महापर्व मूलतः जगदंबा माता पार्वती और दसों दिशाओं की अधिष्ठात्री &#039;आशा देवियों&#039; की आराधना का संगम है।आशा दशमी व्रत का शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार जिस आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की दशमी तिथि पर दसों दिशाओं की देवियों की पूजा पूजा और आशा दशमी व्रत रखा जाता है, वह 23 जुलाई 2026, बृहस्पतिवार को प्रात:काल 7:03 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 24 जुलाई 2026, शुक्रवार को प्रात:काल 09:12 बजे समाप्त होगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार आशा दशमी का व्रत 24 जुलाई 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा।आशा दशमी व्रत 2026आशा दशमी व्रत हिंदू धर्म में श्रद्धा, विश्वास और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। &quot;आशा&quot; का अर्थ है उम्मीद, विश्वास और सकारात्मक अपेक्षा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से भगवान की कृपा प्राप्त होती है, जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।आशा दशमी व्रत का धार्मिक महत्वआशा दशमी व्रत सकारात्मक सोच, धैर्य और ईश्वर में अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन पूजा और व्रत करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और मानसिक शक्ति प्राप्त होती है।इस दिन पूजा करने से मान्यता है कि—- मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।- जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।- परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।- मानसिक तनाव कम होता है।- सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।- भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।आशा दशमी व्रत कथाधार्मिक मान्यता के अनुसार, प्राचीन समय में एक धर्मपरायण परिवार अनेक कठिनाइयों से गुजर रहा था। उन्होंने श्रद्धा और विश्वास के साथ आशा दशमी व्रत रखा और भगवान की आराधना की। उनकी निष्ठा और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उनके सभी संकट दूर किए तथा उन्हें सुख, समृद्धि और संतोष का आशीर्वाद दिया।यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा, धैर्य और सकारात्मक विश्वास से कठिन परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है।आशा दशमी व्रत पूजा विधियदि आप आशा दशमी का व्रत कर रहे हैं, तो यह पूजा विधि अपनाएं—- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।- पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।- भगवान विष्णु या अपने इष्ट देव की प्रतिमा स्थापित करें।- दीपक और धूप जलाएं।- फल, फूल, तुलसी और नैवेद्य अर्पित करें।- विष्णु सहस्रनाम या अपने इष्ट मंत्र का जाप करें।- व्रत कथा का पाठ करें।- आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।आशा दशमी व्रत के नियम- सात्विक भोजन करें या फलाहार रखें।- क्रोध, झूठ और विवाद से बचें।- मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का त्याग करें।- जरूरतमंदों की सहायता करें।- दिनभर भगवान का स्मरण करें।आशा दशमी पर क्या करें?- भगवान की विधि-विधान से पूजा करें।- गरीबों को भोजन और वस्त्र दान करें।- धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।- परिवार के साथ भजन-कीर्तन करें।- सकारात्मक विचार रखें।क्या नहीं करना चाहिए?- किसी का अपमान न करें।- क्रोध और नकारात्मकता से बचें।- असत्य और छल-कपट से दूर रहें।- नशे और तामसिक भोजन का सेवन न करें।आशा दशमी व्रत के नियम हिंदू मान्यता के अनुसार सभी कामनाओं को पूरा करने वाले आशा दशमी व्रत को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष से प्रारंभ करके कम से कम 6 महीने या फिर 1 या 2 साल तक रखना चाहिए. यदि आप किसी कारणवश आषाढ़ मास में इस व्रत को न प्रारंभ कर पाएं तो आप इसे किसी भी मास के शुक्लपक्ष से प्रारंभ कर सकते हैं. व्रत के पूर्ण होने पर विधि-विधान से उद्यापन करें और सुहागिन स्त्रियों के साथ मिलकर रात्रि जागरण करें. व्रत के पूर्ण होने पर अपने सामर्थ्य के अनुसार किसी मंदिर के पुजारी को अन्न, वस्त्र और धन आदि का दान करना चाहिए।आशा दशमी से जुड़ी पौराणिक कथा 1. सती दमयंती और राजा नल की गाथा: बिछोह से मिलन तकप्राचीन काल में निषध देश के धर्मात्मा राजा नल अपने भाई से द्यूत (जुए) में सर्वस्व हार गए। विपत्ति के समय वे अपनी पत्नी दमयंती के साथ निर्जन वनों में भटकने लगे। एक समय ऐसा आया जब राजा नल के पास स्वयं को ढकने क ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:40 +0530</pubDate>
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<title>Devshayani Ekadashi Vrat 2026: देवशयनी एकादशी व्रत पर पूजा&#45;अर्चना से होती है पुण्य फलों की प्राप्ति</title>
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<description><![CDATA[ 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी व्रत है, देवशयनी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन से विष्णुजी चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास शुरु होता है। देवशयनी एकादशी के दिन सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से घर में खुशहाली और समृद्धि आती है तो आइए हम आपको देवशयनी एकादशी व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं। जानें देवशयनी एकादशी व्रत के बारे में पंडितों के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन से चातुर्मास, यानी चार महीने का पवित्र समय प्रारंभ होता है। इस साल 2026 में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई, शनिवार को मनाई जाएगी। देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व अत्यधिक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु राजा बलि के पास पाताल लोक में चार महीने के लिए विश्राम करने चले जाते हैं और कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। यह समय आंतरिक शांति, ध्यान, भक्ति और साधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस एकादशी तिथि से श्रीहरि 4 महीनों के लिए क्षीसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। पंडितों के अनुसार अगर आपके जीवन में परेशानी चल रही है या कोई भी काम नहीं बन रहा है, तो इस दिन विष्णुजी की श्रद्धापूर्वक पूजा करने के साथ-साथ आप उन्हें उनके प्रिय फूल अर्पित कर सकते हैं। देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को चढाएं ये फूल, होंगे लाभान्वित शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु को पीले रंग के फूल बेहद प्रिय हैं। ऐसे में उनकी पूजा के दौरान पीले पुष्प जरूर अर्पित करें। साथ ही, आप उन्हें ताजे गेंदे के फूलों की माला भी अर्पित कर सकते हैं। उनके वस्त्र का रंग भी पीला ही है, ऐसे में इस रंग की माला उन्हें चढ़ाने से विष्णुजी प्रसन्न हो सकते हैं। ऐसे में जातक के कार्यों में आ रही बाधा दूर हो सकती है। साथ ही प्रगति के योग भी बनते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु को कमल के फूल भी बहुत प्रिय हैं। साथ ही, इस पुष्प को देवी लक्ष्मी का भी प्रिय माना गया है। ऐसे में देवशयनी एकादशी के दिन संभव हो तो विष्णु भगवान को कमल के फूल जरूर अर्पित करने चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त हो सकती है। साथ ही, घर की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहती है। इसके अलावा, आप देवशयनी एकादशी पर आप अन्य पीले रंग के फूल भी भगवान विष्णु को अर्पित कर सकते हैं।चातुर्मास है संयम, साधना और दान का कालदेवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक मास तक चलने वाले चातुर्मास को आत्मसंयम, भक्ति, तप, जप और दान का श्रेष्ठ काल माना जाता है। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों को स्थगित कर दिया जाता है, क्योंकि इस दौरान भगवान विष्णु की अनुपस्थिति मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास में सात्त्विक जीवन अपनाने तथा धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने से आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इस चार माह की अवधि में संयम, साधना, सत्संग, सेवा और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। यह समय स्वयं को ईश्वर भक्ति में लीन करने और आध्यात्मिक विकास के लिए अत्यंत उपयुक्त है।देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व भी है खास देवशयनी एकादशी का धार्मिक महत्व अत्यधिक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु राजा बलि के पास पाताल लोक में चार महीने के लिए विश्राम करने चले जाते हैं और कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। यह समय आंतरिक शांति, ध्यान, भक्ति और साधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।देवशयनी एकादशी व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा भी है रोचक पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक धर्मात्मा और पराक्रमी राजा मान्धाता का राज्य था। उनके राज्य में प्रजा सुखी और संतुष्ट थी। एक समय वहां वर्षा रुक गई, जिससे सूखा और भयंकर अकाल पड़ गया। प्रजा दुखी और भूख से त्रस्त होने लगी। राजा ने कई धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ और तप करवाए, लेकिन फिर भी कोई समाधान नहीं हुआ। तब राजा तपोभूमि पर महर्षि अंगिरा के आश्रम में पहुँचे और उन्होंने स्थिति बताई। महर्षि अंगिरा ने कहा— &quot;हे राजन्! यह समय देवताओं की विशेष कृपा का है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को &#039;देवशयनी एकादशी&#039; कहा जाता है। इस दिन जो व्यक्ति व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करता है और रात्रि जागरण करता है, वह सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति पाता है। आप स्वयं यह व्रत कीजिए और प्रजा को भी प्रेरित कीजिए।&quot; राजा ने महर्षि की आज्ञा का पालन किया और पूरे राज्य में देवशयनी एकादशी का आयोजन कराया। लोगों ने उपवास रखा, पूजन किया, रात्रि जागरण और भजन-संकीर्तन किया। फलस्वरूप भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और जल्द ही मेघ गर्जना के साथ भारी वर्षा हुई। धरती पुनः हरी-भरी हो गई और प्रजा को अन्न-जल की प्राप्ति हुई। तब से इस व्रत का विशेष महत्त्व स्थापित हुआ। एक अन्य कथा के अनुसार, जब देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से पूछा कि &quot;हे प्रभु! आप दिन-रात जागकर सृष्टि का संचालन करते हैं, क्या आपको कभी विश्राम नहीं चाहिए?&quot; तब श्रीहरि विष्णु ने उत्तर दिया – &quot;हे लक्ष्मी! मैं आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक क्षीरसागर में योगनिद्रा में विश्राम करूँगा। इस काल में सृष्टि का संचालन देवगण करेंगे।&quot; तभी से इस तिथि को &quot;देवशयनी एकादशी&quot; कहा जाने लगा। इसी काल में भगवान विष्णु राजा बलि के लोक में निवास करते हैं। वामन अवतार की कथा के अनुसार जब भगवान ने तीन पग में सारा ब्रह्मांड माँग लिया, तब बलि ने आत्मसमर्पण कर दिया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने वचन दिया कि वे चातुर्मास में उसके लोक में निवास करेंगे। देवशयनी एकादशी से ही चातुर्मास का शुभारंभ होता है, जिसमें विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन आदि शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। यह समय तप, संयम, साधना और सेवा का काल माना गया है। इस दिन का उपवास, पूजन और कथा श्रवण कर ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:39 +0530</pubDate>
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<title>Devshayani Ekadashi 2026: Devshayani Ekadashi से Chaturmas शुरू, जानें Lord Vishnu पूजा का Muhurat</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी की 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी मनाई जा रही है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। देवशयनी एकादशी से भगवान श्रीहरि विष्णु 4 महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसलिए देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरूआत होती है। ऐसे में हम आपको देवशयनी एकादशी की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत 24 जुलाई की सुबह 09:12 मिनट से हुई है। वहीं आज यानी की 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। उदयातिथि के मुताबिक 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी मनाई जा रही है।इसे भी पढ़ें: Devshayani Ekadashi Vrat 2026: देवशयनी एकादशी व्रत पर पूजा-अर्चना से होती है पुण्य फलों की प्राप्तिवहीं एकादशी तिथि व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। देवशयनी एकादशी व्रत का पारण 26 जुलाई 2026 को किया जाएगा। वहीं पारण का समय सुबह 05:39 मिनट से लेकर 08:22 मिनट तक है।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद पीले वस्त्र धारण करें। फिर सूर्य देव को अर्घ्य दें और मंदिर की साफ-सफाई करें। इसके बाद मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें और फिर लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। अब इस चौकी पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित करें। फिर उन्हें पीले फूल, तुलसी दल और फल आदि अर्पित करें। देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें। इसके बाद एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और मंत्रों का जाप करें। फिर पूजा में हुई भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें।विष्णु मंत्रॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु।यद्दीदयच्दवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्”।।ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात्||ॐ तत्पुरुषाय विद्‍महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात्|| ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:39 +0530</pubDate>
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<title>Devshayni Ekadashi 2026: भगवान विष्णु के शयन के साथ चतुर्मास शुरू, जानें क्या हैं पूजा के नियम</title>
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<description><![CDATA[ आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। कहीं कहीं इस तिथि को पद्मनाभा भी कहा जाता है। इसी दिन से चौमासे का आरम्भ हो जाता है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु क्षीर सागर में शयन करते हैं। इस दिन उपवास करके श्री हरि विष्णु की सोना, चांदी, तांबा या पीतल की मूर्ति बनवाकर उसका षोडशोपचार सहित पूजन करके पीताम्बर आदि से विभूषित कर सफेद चादर से ढके गद्दे तकिये वाले पलंग पर उसे शयन कराना चाहिए।पुराणों में ऐसा भी मत है कि भगवान विष्णु इस दिन से चार मास तक पाताल में राजा बलि के द्वार पर निवास करके कार्तिक शुक्ल एकादशी को लौटते हैं। इसी प्रयोजन से इस दिन को देवशयनी तथा कार्तिक शुक्ल एकादशी को प्रबोधिनी कहते हैं। इन चार माह तक सभी मांगलिक कार्य बंद रहते हैं। व्यक्ति को चाहिए कि इन चार महीनों के लिए अपनी रुचि अथवा अभीष्ट के अनुसार नित्य व्यवहार के पदार्थों का त्याग और ग्रहण करें।इसे भी पढ़ें: Devshayani Ekadashi 2026: Devshayani Ekadashi से Chaturmas शुरू, जानें Lord Vishnu पूजा का Muhuratइस दिन त्याग करेंमधुर स्वर के लिए गुड़ का, दीर्घायु अथवा पुत्र-पौत्र आदि की प्राप्ति के लिए तेल का, शत्रु नाश आदि के लिए कड़वे तेल का, सौभाग्य के लिए मीठे तेल का और स्वर्ग प्राप्ति के लिए पुष्पादि भोगों का त्याग करें।इस दिन ग्रहण करेंदेह शुद्धि या सुंदरता के लिए परिमित प्रमाण के पंचगव्य का, वंश वृद्धि के लिए नियमित दूध का, कुरुक्षेत्र आदि के समान फल मिलने के लिए बर्तन में भोजन करने की बजाय पत्र का तथा सर्वपाप क्षय पूर्वक सकल पुण्य फल प्राप्त होने के लिए एकभुक्त, नक्तव्रत, अयाचित भोजन या सर्वथा उपवास करने का व्रत ग्रहण करें। चतुर्मासीय व्रतों में भी कुछ वर्जनाएं हैं। जैसे- पलंग पर सोना, भार्या का संग करना, झूठ बोलना, मांस, शहद और दूसरे का दिया दही भात आदि का भोजन करना, मूली, पटोल एवं बैंगन आदि शाक पात्र खाना त्याग देना चाहिए। इन दिनों अर्थात् इन चार माह में तपस्वी भ्रमण नहीं करते, वे एक ही स्थान पर रहकर तप कार्य करते हैं। इन दिनों केवल ब्रज की यात्रा की जा सकती है क्योंकि इन चार महीनों में पृथ्वी के सभी तीर्थ ब्रज में आकर निवास करते हैं। इस व्रत से प्राणी की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।देवशयनी एकादशी व्रत कथाएक बार देवऋषि नारदजी ने ब्रह्माजी से इस एकादशी के विषय में जानने की उत्सुकता प्रकट की, तब ब्रह्माजी ने उन्हें बताया कि सतयुग में मान्धाता नामक एक चक्रवर्ती सम्राट राज्य करते थे। उनके राज्य में प्रजा बहुत सुखी थी। राजा इस बात से अनभिज्ञ थे कि उनके राज्य में शीघ्र ही भयंकर अकाल पड़ने वाला है। उनके राज्य में तीन वर्ष तक वर्षा न होने के कारण भयंकर अकाल पड़ा। इससे चारों ओर त्राहि त्राहि मच गई। धर्म पक्ष के यज्ञ, हवन, पिण्डदान, कथा व्रत आदि सबमें कमी हो गई।दुखी राजा सोचने लगे कि आखिर मैंने ऐसा कौन सा पाप किया है जिसका दण्ड पूरी प्रजा को मिल रहा है। फिर इस कष्ट से मुक्ति पाने का उपाय खोजने के लिए राजा सेना को लेकर जंगल की ओर चल दिए। वहां वह ब्रह्माजी के पुत्र अंगिरा ऋषि के आश्रम में पहुंचे और उन्हें प्रणाम कर सारी बातें बताईं। उन्होंने ऋषिवर से समस्याओं के समाधान का तरीका पूछा तो ऋषि बोले− राजन! सब युगों से उत्तम यह सतयुग है। इसमें छोटे से पाप का भी भयंकर दण्ड मिलता है।ऋषि अंगिरा ने कहा कि आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करें। इस व्रत के प्रभाव से अवश्य ही वर्षा होगी। राजा अपने राज्य की राजधानी लौट आए और चारों वर्णों सहित पद्मा एकादशी का पूरी निष्ठा के साथ व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उनके राज्य में मूसलाधार वर्षा हुई और अकाल दूर हुआ तथा राज्य में समृद्धि और शांति लौटी इसी के साथ ही धार्मिक कार्य भी पूर्व की भांति आरम्भ हो गये।- शुभा दुबे ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Devshayni, Ekadashi, 2026:, भगवान, विष्णु, के, शयन, के, साथ, चतुर्मास, शुरू, जानें, क्या, हैं, पूजा, के, नियम</media:keywords>
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<title>Bemata Goddess: हाथ में कलम और दूतों का साथ, Ujjain में विराजमान Bemata कैसे तय करती हैं नवजात का Destiny</title>
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<description><![CDATA[ क्या आपने विधाता माता के बारे में जानते हैं। अगर आपका जवाब न है, तो आज हम आपको विधाता माता के बारे में बताने जा रहे हैं। विधाता माता को अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है। विधाता माता को भय माता, बेमाता, विधात्री देवी, छठी मैया या फिर षष्ठी माता के रूप में जाना जाता है। लोक मान्यताओं के मुताबिक बच्चे के जन्म के छठे दिन ही विधाता देवी बच्चे के भाग्य का लेखा-जोखा लिखती हैं।उज्जैन स्थित है मंदिरमहाकाल की नगरी उज्जैन में विधाता देवी का फेमस मंदिर है। विधाता देवी का मंदिर पटनी बाजार के पास मगरमुहा की गली में स्थित है। इसका इतिहास करीब 1500 साल पुराना माना जाता है। इस मंदिर में विधाता देवी की करीब ढाई फीट ऊंची खड़ी अवस्था में मूर्ति विराजित है। इसको एक स्वयंभू मूर्ति माना जाता है।इसे भी पढ़ें: Shani Dev Mantra: Shani Sade Sati और ढैय्या का कष्ट होगा कम, शनिवार को जरूर जपें ये विशेष Vedic Mantras और शनि स्त्रोतविधाता देवी के उल्टे हाथ में कपाल है। तो वहीं उनके सीधे हाथ में कलम है। इनके आसपास दो दूत भी विराजमान हैं। एक दूत का नाम चित्र और दूसरे का नाम गुप्त है। माना जाता है कि जब भी किसी बच्चे का जन्म होता है, तो विधाता देवी के यही दोनों दूत माता को इसकी जानकारी देते हैं।बच्चों के साथ आते हैं श्रद्धालुदेवी भागवत और दुर्गा सप्तशती सहित अवंतिका पुराण में विधाता माता का उल्लेख मिलता है। विधाता माता का पौराणिक नाम विद्यात्तय है। धार्मिक मान्यता है कि विधाता माता बच्चे के जन्म के छठे दिन उसका भाग्य लिखती हैं। यही वजह है कि विधाता माता के मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर में विधाता माता के दर्शन करते हैं, जिससे कि उनके बच्चे को सौभाग्य की प्राप्ति हो सके।जानें कैसे मिली मूर्तिबताया जाता है कि एक भक्त को माता ने सपने में दर्शन दिए थे, सपने में इस स्थान पर मूर्ति होने के संकेत मिले थे। जब उस स्थान पर खुदाई की गई तो वहां पर विधाता देवी की मूर्ति निकली। जिसके बाद इसी स्थान पर मूर्ति की स्थापना की गई और फिर मंदिर का निर्माण करवाया गया। तभी से यहां पर यह मंदिर स्थित है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Shani Dev Mantra: Shani Sade Sati और ढैय्या का कष्ट होगा कम, शनिवार को जरूर जपें ये विशेष Vedic Mantras और शनि स्त्रोत</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है। ठीक इसी तरह शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित होता है। ऐसे में अगर आप शनिदेव की साढ़ेसाती, ढैय्या या फिर शनि दोष से परेशान हैं। तो आपको शनिदेव के कुछ मंत्रों का जाप करना चाहिए।  इससे शनिदेव की कृपा होती है और साढ़ेसाती, शनि दोष और ढैय्या के कष्टों से भी मुक्ति मिलती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि साढ़े साती और शनि दोष को दूर करने के लिए शनिवार को किन मंत्रों का जाप करना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Nag Vasuki की अनन्य भक्ति से प्रसन्न हुए Lord Shiva, गले में धारण कर दिया सम्मानशनि मूल मंत्रॐ शं शनैश्चराय नमः।शनि बीज मंत्रॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।शनि गायत्री मंत्रॐ सूर्यात्मजाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नः सौरिः प्रचोदयात्॥शनि प्रणाम मंत्रॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।छाया मार्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌॥शनि वैदिक मंत्रॐ शन्नोदेवीर भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।शनि एकाक्षरी मंत्रशं॥साढ़ेसाती मंत्रऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुक मिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात्।।ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।संयोरभिश्रवन्तु न:। ऊँ शं शनैश्चराय नमः।।ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसंभूतं तं नमामिशानश्चराम।।ॐ शन्नोदेवीरभिस्ताय आपो भवन्तु पीतयेशनयोरभिस्रवन्तु नः, ॐ समं शनैश्चराय नमः।ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजंछायामार्तण्डसंभूतं तम नमामि शनैश्चरम।जानें शनि दोष से मुक्ति पाने के उपायअगर आप भी शनि दोष, ढैय्या और साढ़ेसाती के कष्टों से परेशान हैं, तो आप इन कुछ विशेष उपायों को अपनाकर राहत पा सकते हैं।हर शनिवार को सुबह स्नान आदि करने के बाद पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करना चाहिए और पेड़ की 7 बार परिक्रमा करें। यह उपाय शनि दोष के प्रभाव को कम करता है। शनिवार को शनिदेव की विधिविधान से पूजा-अर्चना करना चाहिए और श्रद्धा से &#039;शनि स्तुति&#039; का पाठ करना चाहिए।धार्मिक मान्यता यह भी है कि शनि देव हनुमान जी के भक्तों को कष्ट नहीं पहुंचाते हैं। इसलिए शनिवार को हनुमान जी की पूजा करें और नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। शनिदेव की कृपा पाने के लिए हर शनिवार को अपने सामर्थ्य के मुताबिक काले तिल, काले रंग के कपड़े, साबुत उड़द, सरसों का तेल और गुड़ आदि का दान करना चाहिए।ऐसे कार्यों या आचरण से दूर रहना चाहिए, जिससे शनिदेव रुष्ट हों। गरीबों, असहायों और बुजुर्गों आदि का अपमान नहीं करना चाहिए।वहीं अच्छे कर्म करने वाले लोगों पर शनिदेव की हमेशा कृपा बनी रहती है। इसलिए अपने कर्मों को अच्छा रखना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:07:33 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope 23 July 2026 | प्यार की राह में किसके खिलेंगे दिल के फूल, किसे मिलेगी खास सलाह? पढ़ें आज का लव राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ ग्रहों और नक्षत्रों की चाल का सीधा असर हमारे रिश्तों और भावनाओं पर पड़ता है। आज का दिन कुछ राशियों के लिए प्यार की नई खुशियां और पुराने मतभेद सुलझाने के खूबसूरत मौके लेकर आया है, तो वहीं कुछ राशि वालों को बातचीत के दौरान थोड़े संयम और समझदारी की जरूरत होगी। अगर आप जानना चाहते हैं कि आज आपकी लव लाइफ में रोमांस के रंग घूलेंगे या रिश्तों को संभालकर चलना होगा, तो आइए जानते हैं आपकी राशि का हाल।मेष (Aries)संगी के साथ बातचीत में मिठास बनी रहेगी। पार्टनर से मिला कोई छोटा सा सरप्राइज आपका दिल खुश कर सकता है। सिंगल लोगों की किसी नए व्यक्ति से मुलाकात के योग हैं।वृषभ (Taurus)रिश्ते में आ रही गलतफहमियों को दूर करने का यह सही समय है। साथ बैठकर शांति से बात करें। शाम का समय पार्टनर के साथ सुकून भरा बीतेगा।मिथुन (Gemini)आज मन खुशमिज़ाज रहेगा और आप अपने पार्टनर के साथ बेहतरीन वक्त बिताएंगे। अपने दिल की बात खुलकर कहें, रिश्ता और मजबूत होगा।कर्क (Cancer)रिश्ते में भावनाओं का सम्मान करें। पार्टनर की बातों को नजरअंदाज करने से तनाव हो सकता है। थोड़ा धैर्य और समझदारी से काम लें।सिंह (Leo)रोमांस के मामले में आज का दिन बहुत बढ़िया है। आपका आकर्षण पार्टनर को आपकी ओर खींचेगा। लव लाइफ में ताजगी का अहसास होगा।कन्या (Virgo)काम की व्यस्तता के बीच पार्टनर के लिए समय निकालना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। फोन या मैसेज के ज़रिए अपना प्यार जताते रहें।तुला (Libra)आज पार्टनर के साथ लंबी बातचीत या कहीं बाहर घूमने का प्लान बन सकता है। आपसी तालमेल बेहतर होगा और प्यार बढ़ेगा।वृश्चिक (Scorpio)पार्टनर से अपनी भावनाएं व्यक्त करने में संकोच न करें। किसी पुरानी बात को लेकर चर्चा हो सकती है, लेकिन सकारात्मक रुख अपनाएं।धनु (Sagittarius)आज का दिन खुशियों से भरा रहेगा। अगर आप सिंगल हैं, तो आपकी किसी खास व्यक्ति से रुचि बढ़ सकती है। जो पहले से रिश्ते में हैं, उनके बीच नजदीकियां बढ़ेंगी।मकर (Capricorn)रिश्ते में एक-दूसरे को स्पेस देना ज़रूरी है। छोटी-छोटी बातों पर बहस करने से बचें और एक-दूसरे के विचारों की कद्र करें।कुंभ (Aquarius)आज का दिन सरप्राइज और नई उम्मीदों वाला है। पार्टनर आपके विचारों का समर्थन करेगा। प्रेमी जोड़ों के लिए दिन काफी रोमांटिक रहेगा।मीन (Pisces)अपने संगी के साथ दिल खोलकर बातें करें। आपकी संवेदनशीलता और देखभाल करने वाला स्वभाव पार्टनर का दिल जीत लेगा। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 10:04:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 21 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष अपनों से विश्वासघात पाकर गहरा आघात। जल्दबाजी हानिकारक सिद्ध होगी। मन के अनुकूल धन लाभ नहीं होगा। मित्रों की सहायता लेने में संकोच न करें।वृषअपराहन में सहज ही कार्य बनेंगे। डॉक्टरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। दूसरों की निंदा न करें, न ही उन्हें नीचा दिखाए। विवाह एवं प्रेम प्रसंग में सावधानी बरतें।मिथुनयोग और अध्यात्म का सहारा। पिछले दिनों के दर्द भूलेंगे, धन लाभ। शोध छात्रों को विशेष लाभ/यश मिलेगा। भूमि भवन संबंधी समस्या खडी होगी।कर्कगलतफहमियां दूर होगी, संबंध सुधरेंगे। व्यापार में लाभ होगा। सरकारी काम आसानी से बनेंगे। सरकारी नौकरी में पदोन्नति संभव।सिंहअनचहें अतिथि और अप्रिय समाचार आएगें। प्राप्त अवसर का लाभ उठाए। आर्थिक उन्नति के प्रयास सफल होंगे। क्रोध पर काबू रखें और जबान पर ताला।कन्याकार्य की अधिकता से दिन में व्यस्तता। लाभ का मार्ग प्रशस्त होगा, नया करार मिलेगा। पत्रकारों और साहित्यकारों को विशेष लाभ। स्वास्थ्य में सुधार होगा।तुलाप्रेम प्रसंग में खटपट हो सकती है। मौजमस्ती के लिए पिकनिक, थिएटर या होटल जा सकते हैं। विद्यार्थियों को अपनी उपलब्धियों पर गर्व। काम पर ध्यान देने की जरूरत है।वृश्चिक कठिन समस्याओं का समाधान मिलेगा। व्यापारिक क्षेत्र में युवा वर्ग को लाभ। क्रमिक परेशानियां चैन नहीं लेने देंगी। रिश्तेदारों की तानाकशी मन को ठेस पहुंचाएगी। धनुबिगड़े हुए काम आसानी से बनेंगे। नई योजनाओं का विश्लेषण ठीक रहेगा। कच्ची नौकरी पक्की में बदल सकती है। धन संबंधी मामलों पर ध्यान रहेगा।मकर कई प्रकार से धन प्राप्त होगा। उच्च अधिकारी पदोन्नति की सिफारिश करेंगे। अपने अहित के लिए स्वयं सावधान रहें। जीवनसाथी आपकी भावनाओं का सम्मान करेंगे।कुंभप्रिय मित्र का आगमन सुखद रहेगा। देखपरख कर ही चीजें खरीदें। धन की प्राप्ति संकटों से मुक्ति। अच्छा दिन नहीं है, परेशान रहेंगे।मीनव्यापारिक साझेदारी में सुधार के साथ प्रगति। समाज के वरिष्ठ लोगों और दफ्तर के उच्चाधिकारियों से लाभ रहेगा। बुजुर्गों के आर्थिक काम आगे बढ़ेंगे। कानूनी मामलों में व्यस्तता बनी रहेगी। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:58:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Number 5 Numerology: क्या आपकी Birth Date में है Number 5? जानें आपके स्वभाव और Career पर इसका गहरा प्रभाव</title>
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<description><![CDATA[ कई लोग दूसरों के बहुत ज्यादा केयर करते हैं और जल्दी इमोशनल भी हो जाते हैं। हालांकि कई बार ज्यादा इमोशनल होने के कारण लोग मजाक भी बनाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा जन्म तारीफ में नबंर 5 बार-बार रिपीट होने के कारण होता है। अंक ज्योतिष की मानें, तो अगर किसी की जन्म तारीख में नंबर 5 बार-बार आता है। तो इसका प्रभाव व्यक्ति के माइंडसेट और व्यवहार पर देखने को मिलता है।अगर किसी व्यक्ति की जन्म तारीफ 5-05-2015 है तो इसमें 3 बार नंबर 5 रिपीट हो रहा है। ऐसे में आप भी अपनी जन्म तारीख में चेक कर सकते हैं कि आपकी जन्म तारीख में नंबर 5 कितनी बार रिपीट हो रहा है और डेट ऑफ बर्थ में नंबर 5 आने का क्या मतलब होता है।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope 20 July 2026 | इन 4 राशियों की लव लाइफ में बढ़ेगा रोमांस, जानें कैसा रहेगा आपका दिनवहीं अगर किसी जातक की जन्म तारीख में सिर्फ 1 बार नंबर 5 आता है। तो यह काफी समझदार व्यक्ति होते हैं। इनका नेचर केयरिंग होता है और भावनात्मक रूप से सुलझे हुए इंसान होते हैं। यह लोगों को अच्छी सलाह देते हैं। दूसरों की फीलिंग्स की वैल्यू करते हैं। इनको यह पता होता है कि कौन सी बात कैसे संभालनी है।अगर किसी व्यक्ति की जन्म तारीख में 2 बार नंबर 5 आता है। तो यह जातक तेज निर्णय लेने वाले होते हैं। यह फोकल के साथ काम करते हैं और इनके अंदर किसी भी काम को सही समय पर पूरा करने की काबिलियत होती है। हालांकि इनके अंदर धैर्य की कमी होती है, जिस कारण यह कई बार जल्दबाजी में फैसले लेते हैं। जिसका बाद में पछतावा होता है।अगर आपकी जन्म तारीफ में 3 बार नंबर 5 आता है। तो ऐसे व्यक्ति आत्मविश्वासी होते हैं। इनको जिंदगी में रोमांच काफी पसंद होता है। इसलिए यह लोग रिस्क लेने से भी नहीं डरते हैं। यह जातक जीवन में आने वाले बदलावों का आनंद लेते हैं। हालांकि कई बार बिना सोचे-समझे कठोर शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। जिस कारण दूसरों को बुरा लगता है।अंक ज्योतिष के मुताबिक अगर आपकी जन्म तारीख में 4 बार अंक 5 आ रहा है। तो इसको शुभ नहीं माना जाता है। क्योंकि जन्म तारीख में 4 बार 5 नंबर रिपीट होने से तनाव बढ़ता है। वहीं कामकाज में भी ठीक तरह से फोकस नहीं हो पाता है। ऐसे जातकों को कामकाज में थोड़ा सावधानी बरतनी चाहिए।नंबर 5 का निगेटिव असरअंक ज्योतिष एक्सपर्ट के मुताबिक अगर जन्म तारीख में नंबर 5 दो या इससे ज्यादा बार आता है। तो यह व्यक्ति के दिमाग में बेचैनी पैदा करता है। जिस कारण जातक जल्दबाजी में फैसले लेने लगते हैं। बाद में वही फैसले उस व्यक्ति को नुकसान पहुंचाते हैं।वहीं जन्म तारीख में तीन बार 5 अंक आने पर जातक की वाणी कठोर हो जाती है। लोग ऐसे व्यक्ति से दूर होने लगते हैं। वहीं यह लोग बिना सोचे लिए गए फैसले में समस्या पैदा करते हैं और करियर में ग्रोथ रुक जाती है।अगर जन्म तारीख में 5 नंबर 4 बार आता है। तो यह व्यक्ति थोड़ा असंतुलित हो जाता है। जिस कारण व्यक्ति को तनाव और फोकस करने में दिक्कत होती है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:58:33 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope 21 July 2026 | जानें आपकी लव लाइफ में आज घुलेंगे मिठास के रंग या बढ़ेगी थोड़ी दूरी?</title>
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<description><![CDATA[ प्यार का अहसास हर दिन एक नई कहानी लेकर आता है। कभी रिश्तों में नए उत्साह की सरगम बजती है, तो कभी छोटी-छोटी बातों को समझदारी से संभालने की जरूरत होती है। आज सितारे आपकी लव लाइफ के बारे में क्या संकेत दे रहे हैं? क्या आज आपको अपने पार्टनर से कोई खास सरप्राइज मिलेगा, या फिर सिंगल लोगों की जिंदगी में होगी किसी नए खास इंसान की एंट्री? आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन तक, सभी राशियों के लिए आज का प्यार का हाल!मेष (Aries)आज आपकी बातें पार्टनर के दिल को छू सकती हैं। अगर मन में कोई पुरानी गलतफहमी थी, तो बातचीत करके उसे खत्म करने का सही समय है। सिंगल लोगों को किसी नए इंसान से जुड़ने का मौका मिलेगा।वृषभ (Taurus)प्रेम संबंध में थोड़ा संयम और समझदारी दिखाएं। बात-बात पर प्रतिक्रिया देने से बचें। शाम का वक्त अपने पार्टनर के साथ सुकून से बिताएं, इससे रिश्ते में नजदीकियां बढ़ेंगी।मिथुन (Gemini)आज प्रेम जीवन में नया उत्साह देखने को मिलेगा। साथी के साथ किसी छोटी दूरी की यात्रा या आउटिंग का प्लान बन सकता है। सिंगल लोगों की किसी नए और दिलचस्प व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है।कर्क (Cancer)आज भावनाएं आप पर हावी रह सकती हैं। अपने पार्टनर से सीधे और साफ शब्दों में बात करें ताकि कोई गलतफहमी न हो। शाम होते-होते माहौल काफी रोमांटिक हो जाएगा।सिंह (Leo)लव लाइफ के लिहाज से आज का दिन बेहद खूबसूरत है। साथी की तरफ से कोई छोटा लेकिन दिल छू लेने वाला सरप्राइज मिल सकता है। एक-दूसरे पर विश्वास मजबूत होगा।कन्या (Virgo)रिश्ते को खूबसूरत बनाए रखने के लिए पार्टनर की बातों को तवज्जो दें। काम की व्यस्तता के बीच थोड़ा समय निकालकर उनसे बातचीत करें, इससे दूरियां खत्म होंगी। तुला (Libra)रोमांस और समझदारी का बेहतरीन तालमेल रहेगा। अपने पार्टनर के साथ बिताए गए पल आपको खुशी देंगे। शादीशुदा लोगों के लिए भी दिन सामंजस्य से भरा रहेगा।वृश्चिक (Scorpio)किसी की कही-सुनी बातों पर ध्यान न दें और अपने साथी पर भरोसा बनाए रखें। अगर कोई मनमुटाव है, तो मिलकर बैठकर सुलझाना ही सबसे बेहतर उपाय होगा।धनु (Sagittarius)प्यार के मामले में आज का दिन बेहद अनुकूल है। सिंगल लोगों के लिए नया रिश्ता शुरू होने के संकेत हैं। कपल एक-दूसरे के साथ खुशनुमा वक्त बिताएंगे।मकर (Capricorn)दिनभर की व्यस्तता के कारण साथी को पूरा समय देना मुश्किल हो सकता है। शाम को फोन या मैसेज के जरिए अपने प्यार का एहसास कराएं, वे आपकी स्थिति को समझेंगे।कुंभ (Aquarius)रिश्ते में ताजगी और सकारात्मकता बनी रहेगी। आप अपने पार्टनर के साथ मिलकर भविष्य की किसी योजना पर चर्चा कर सकते हैं। दिन प्यार भरा रहेगा।मीन (Pisces)आज आपका मन काफी भावुक और प्यार भरा रहेगा। आप अपने पार्टनर की छोटी-छोटी जरूरतों का ध्यान रखेंगे, जिससे उनके दिल में आपके लिए सम्मान और बढ़ जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:58:32 +0530</pubDate>
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<title>Sawan 2026: सावन में तुलसी के ये 5 Remedies बदल सकते हैं आपकी किस्मत, जानें Lord Shiva की पूजा का धार्मिक महत्व</title>
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<description><![CDATA[ श्रावण महीना हिंदू धर्म में बेहद खास माना जाता है। सावन का पवित्र महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस साल सावन की शुरुआत 30 जुलाई से हो रही है और इसका समापन 28 अगस्त को होगा। साधक इस महीने में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय करते हैं और शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं। श्रावण मास में तुलसी के पौधे से जुड़े कुछ आसान उपाय करने से जीवन में खुशहाली आती है और धन की कभी कमी नहीं होती है। आइए आपको बताते हैं सावन में तुलसी के कौन से उपायों से धन का आगमन होगा।सावन में तुलसी का पौधा लगाएंअगर आपके घर में तुलसी का पौधा पहले से रखा है, फिर भी आप सावन के महीने में नई तुलसी का पौधा जरुर लगाएं। इसलिए आप सावन के किसी भी गुरुवार के दिन आप घर में नया पौधा लाएं और इसे घर की छत या आंगन पर लगाएं। ऐसा करने से घर में खुशहाली बनी रहती है।तुलसी के पास घी का दीपक जलाएंसावन में तुलसी की पौधे की पूजा सबसे शुभ मानी जाती है। यदि आप सावन के पूरे महीने में घी का दीपक जलाएंगी और विधि-विधान से पूजा करेंगी तो आपके घर में धन का आगमन हो सकता है और आपको सभी कष्टों से मुक्ति भी मिल सकती हैं। सावन में तुलसी का यह उपाय करने से धन को आकर्षित करने का एक माध्यम माना जाता है। इसे पढ़ें: Sawan 2026 में Solah Somvar Vrat शुरू करने से पहले जानें ये 3 बड़े Rules और इसका विशेष धार्मिक महत्व तुलसी की मंजरी से करें ये उपायअगर आप सावन में तुलसी के पौधे से कुछ मंजरियों को अलग करके उन्हें लाल कपड़े में बांधकर रखती हैं, तो आपके घर में धन का आगमन होता है और आप पर सदैव माता लक्ष्मी की कृपा बनीं रहती है। यह उपाय आप सावन के किसी भी शुक्रवार के दिन करें इससे आपको पूर्ण फल मिलेंगे। सावन के सोमवार को शिवलिंग पर तुलसी की मंजरी चढ़ाएं, ऐसा करने से शुभ परिणाम मिलते हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि शिवलिंग पर कभी भी तुलसी के पत्ते अर्पित न करें।तुलसी के पौधे में शालिग्राम रखेंसावन के महीने में तुलसी के पौधे में शालीग्राम जरुर रखें। इस अवधि में तुलसी और शालीग्राम की पूजा एक साथ करनी चाहिए। इस उपाय से माता लक्ष्मी के साथ विष्णु जी की कृपा दृष्टि प्राप्त होती है। इसे भी पढ़ें:Sawan 2026 Special: सावन में कब रखा जाएगा मंगला गौरी व्रत? जानें पूजा विधि और उद्यापन के सभी Complete Rulesतुलसी के पौधे में हल्दी की गांठ रखेंसावन के महीने में तुलसी की पूजा करें, तो गमले के अंदर हल्दी की कुछ गांठ जरुर रखें। इतना ही नहीं, गमले की मिट्टी में कुछ सिक्के रखने चाहिए। यह उपाय करने से माता लक्ष्मी की कृपा दृष्टि सदैव बनी रहती है और धन लाभ के योग बनते हैं। इसके अलावा, आप सावन के किसी भी शुक्रवार के दिन तुलसी के पौधे में लाल चुनरी ओढ़ाकर इनकी पूजा करें।   ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:58:30 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope 22 July 2026 | जानें आपकी लव लाइफ में आज घुलेंगे मिठास के रंग या बढ़ेगी थोड़ी दूरी?</title>
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<description><![CDATA[ प्यार का अहसास हर दिन एक नई कहानी लेकर आता है। कभी रिश्तों में नए उत्साह की सरगम बजती है, तो कभी छोटी-छोटी बातों को समझदारी से संभालने की जरूरत होती है। आज सितारे आपकी लव लाइफ के बारे में क्या संकेत दे रहे हैं? क्या आज आपको अपने पार्टनर से कोई खास सरप्राइज मिलेगा, या फिर सिंगल लोगों की जिंदगी में होगी किसी नए खास इंसान की एंट्री? आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन तक, सभी राशियों के लिए आज का प्यार का हाल!मेष (Aries)आज आपके रिश्तों में मिठास और सामंजस्य बढ़ेगा। जीवनसाथी या लव पार्टनर के साथ चल रही किसी पुरानी गलतफहमी को सुलझाने का बेहतरीन दिन है। एक-दूसरे को थोड़ा समय और स्पेस दें।वृषभ (Taurus)प्रेम संबंधों में धैर्य बनाए रखना ज़रूरी है। किसी भी बात को लेकर जिद या अड़ियल रवैया अपनाने से बचें। पार्टनर की भावनाओं और उनकी राय का सम्मान करें।मिथुन (Gemini)भावनात्मक दृष्टिकोण से दिन सकारात्मक रहेगा। पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। अपने मन की बात स्पष्टता से कहें, बातचीत से नजदीकियां बढ़ेंगी।कर्क (Cancer)आज पार्टनर को समझने का प्रयास करें। धैर्य से काम लेंगे तो रिश्तों में विश्वास और गहराई आएगी। शाम का समय साथी के साथ सुकून भरा बीत सकता है।सिंह (Leo)रिश्तों में नया उत्साह और प्रेम बना रहेगा। प्रियजन से मुलाकात या किसी खास बातचीत के योग हैं। आपसी संतुलन बनाए रखें, रिश्ता और मजबूत होगा।कन्या (Virgo)सिंगल जातकों के लिए आज कोई नया रिश्ता या बातचीत शुरू होने की संभावना है। जो पहले से रिश्ते में हैं, उनके लिए आपसी समझ बढ़ाने वाला दिन रहेगा।तुला (Libra)प्रेम जीवन में सुख-शांति का माहौल रहेगा। पार्टनर के साथ तालमेल बहुत बढ़िया रहेगा और आप अपने दिल की बातें आसानी से साझा कर पाएंगे।वृश्चिक (Scorpio)पार्टनर को कोई सरप्राइज देने या उनके साथ समय बिताने के लिए दिन अनुकूल है। सकारात्मक दृष्टिकोण रखें, इससे रिश्ते में नयापन महसूस होगा।धनु (Sagittarius)प्रेम संबंधों में सहजता बनी रहेगी। साथी के साथ कहीं बाहर जाने या मनोरंजक पल बिताने की योजना बन सकती है।मकर (Capricorn)आपकी लव लाइफ में भरोसा और परिपक्वता लौटेगी। पार्टनर की बात को ध्यान से सुनें और किसी भी फैसले में जल्दबाजी करने से बचें।कुंभ (Aquarius)दिन मिला-जुला रहेगा। संवाद बनाए रखना सबसे अहम है, ताकि छोटी बात बड़ा रूप न ले। शाम तक स्थितियां पूरी तरह आपके पक्ष में होंगी।मीन (Pisces)प्रेम जीवन में सकारात्मक ऊर्जा रहेगी। पार्टनर के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव महसूस करेंगे और रिश्तों में तालमेल पहले से बेहतर होगा।ज्योतिषीय टिप: आज बातचीत के दौरान स्पष्टता रखें और एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करें। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:58:29 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 22 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष कार्यक्षेत्र में कुछ नई योजनाएं बनेगी। दिल जो भी कहेगा मानेंगे। किसी अप्रिय घटना के शिकार हो सकते है। स्वजनों का सहयोग मिलेगा, स्वास्थ्य सुधरेगा।वृषअपेक्षित सहायता मिलने से काम बढ़ेगा, धन बढ़ेगा। खानपान में संयम बरतें, स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव। लोगों में आपकी छवि बहुत सुंदर उभर कर आएगी। मिश्रित फल, लेकिन परेशानियां ज्यादा।मिथुनपेट और छाती संबंधी रोग आपको पीडि़त और चिंतित कर सकते हैं। कोई अप्रिय घटना विचलित करेगी। अटके काम आगे बढ़ेंगे, इच्छा पूरी होगी। अच्छे परिवर्तन अनुभव करेंगे।कर्कव्यवसाय में लाभ और संतान सुख। बिगड़े हुए काम आसानी से बनेंगे। परिवार के साथ मनोविनोद और भ्रमण में व्यस्तता रहेगी। चिंताएं आपका पीछा नहीं छोड़ेगी।सिंहपुरानी परेशानियां पुनः खड़ी होगी। परिवार में टकराव-मौन व्रत उत्तम। कार्यक्षेत्र में सार्थक विचारों पर बहस करेंगे। उपहारों की प्राप्ति से प्रसन्नता।कन्याक्रोध कारण कोई विवाद खड़ा हो सकता है। पारिवारिक चुनौतियों का सामना। राज्यकार्य में सफलता मिलेगी। सामाजिक और व्यवसायिक क्षेत्र में प्रगति।तुलाआर्थिक चिंता बनी रहेगी, दुखी भी रहेंगे। विशेष यात्रा का योग बन रहा है। किसी पर पुरुष/महिला से विशेष सहयोग मिलेगा। व्यवहार में कठोरता के कारण नौकरी में नाराजगी।वृश्चिक नियमित और आकस्मिक माध्यमों से धन लाभ। अच्छे परिवर्तन अनुभव करेंगे। नई कार्य योजना और उसमें सफलता। सरकारी कामों में सफलता, विवाद विजय भी।धनुसंचित धन में वृद्धि होगी, यात्रा भी संभव। &#039;उतावला से वावल&#039;, गंभीरता से समझें। उत्तम उपलब्धियों के साथ दिन दिन का शुभारंभ होगा। अपने काम पर ही विशेष ध्यान दें।मकर गुप्त प्रेम प्रसंग प्रकट न हो जाए, ध्यान रखें। दुर्लभ वस्तु भी सुलभ हो जाएगी। पदोन्नति के अवसर मिलेंगे और व्यापार रोजगार आगे बढ़ेगा। अचानक संकट और विश्वासघात।कुंभलक्ष्य प्राप्ति की प्रसन्नता होगी। धन आगम के साधन बढ़ेंगे, चिंता दूर होगी। अध्यात्म में रूचि और सत्संग में समय बीतेगा। मेहनत करने पर आपको सफलता और प्रशंसा मिलेगी।मीनजीवन में परिवर्तन महसूस करेंगे। सांस्कृतिक कार्यों में भाग ले सकते हैं। घर परिवार में आनंददायक वातावरण रहेगा। दिन अच्छा नहीं है, दुर्घटना भी संभव है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:58:29 +0530</pubDate>
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<title>Devshayani Ekadashi 2026: 25 जुलाई को रखा जाएगा व्रत, जानिए Chaturmas का धार्मिक महत्व और Lord Vishnu के पूजन का विधान</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। साल में कुल 12 एकादशी तिथियां आती है और हर महीने में दो एकादशी तिथि पड़ती है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी पर भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने की मान्यता है। देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है और कई मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है।देवशयनी एकादशी 2026 कब है?इस साल 2026 में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई, शनिवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 24 जुलाई 2026 की रात करीब 11.30 बजे प्रारंभ होगी और 25 जुलाई 2026 की रात लगभग 9.55 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर 25 जुलाई को व्रत रखा जाता, जबकि द्वादशी तिथि में 26 जुलाई 2026 को पारण होगा।देवशयनी एकादशी का शुभ मुहूर्त-ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:15 बजे से 4:58 बजे तक-अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:55 बजे तक-विजय मुहूर्त: दोपहर 2:44 बजे से 3:39 बजे तक-निशिता मुहूर्त: रात 12:06 बजे से 12:48 बजे तकजानें पूजन विधि- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ और हल्के कपड़े रंग के वस्त्र धारण करें। - अब आप घर के पूजा स्थान में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।  - इसके बाद श्री विष्णु को पीले पुष्प, तुलसी दल, चंदन, धूप, दीप और पंचामृत अर्पित करें।-  पूजा के दौरान विष्णु सहस्रनाम, श्री विष्णु चालीसा या ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है। आखिर में आरती करें और प्रसाद वितरित करें।देवशयनी एकादशी का महत्वधार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं और चार महीने बाद देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चार महीनों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, जबकि जप, तप, दान और भक्ति को विशेष महत्व दिया जाता है।इस उपाय को करेंइस दिन तुलसी के पौध के पास घी का दीपक जलाना, पीली वस्तुओं का दान करना, विष्णु मंदिर में शंख या फल अर्पित करना और जरुरतमंदों लोगों को भोजन कराना शुभ होता है। पारण का सही समयदेवशयनी एकादशी का पारण 26 जुलाई 2026, रविवार को द्वादशी तिथि में किया जाएगा। वैसे माना जाता है कि पारण का शुभ समय सुबह होता है। व्रत खोलने से पहले भगवान विष्णु को नैवेद्य अर्पित करना है और तुलसी युक्त जल ग्रहण करना शुभ माना जाता है।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:58:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Devshayani, Ekadashi, 2026:, जुलाई, को, रखा, जाएगा, व्रत, जानिए, Chaturmas, का, धार्मिक, महत्व, और, Lord, Vishnu, के, पूजन, का, विधान</media:keywords>
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<title>Horoscope 23 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष लक्ष्यसिद्धि के लिए अच्छा समय है। पढ़कर ही दस्तावेज पर साइन करें। विषैले जीव जंतु से हानि। अशुभ समाचारों की प्राप्ति के योग है।वृषदूसरों के कामों में टांग न अढ़ाए। संतान के शिक्षा और विवाह को लेकर चिंतित रहेंगे। बिगड़े हुए काम सुधरते हुए आगे बढ़ेंगे। व्यवहार में कठोरता के कारण नौकरी में नाराजगी।मिथुनमुकदमें बाजी सहित अनेक परेशानियां। अनुचित कार्य के लिए लोग उकसाएगें। बंधु बांधवों का आगमन खुशी देगा। मांगलिक कार्य की सफलता, धन लाभ भी।कर्कजीवनसाथी से संबंध सुधरेंगे। मनोवांछित लाभ प्राप्त होने के योग है। अच्छी सफलता के साथ आज की शुरूआत होगी। कमी पूरी करते हुए आगे बढ़ेंगे।सिंहनए दायित्व/जिम्मेदारी मिलने के योग हैं। संवादहीनता न आने दें। प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी। अचानक धन लाभ होगा।कन्याइंटरव्यू आदि में आपका प्रभाव जमेगा। आज छप्पर फाड़कर धन लाभ हो सकता है। आपकी प्रतिष्ठा में भी चार चांद लगेंगे। कटु संभाषण से घनिष्ठ टूटेंगे।तुलाआप गलतफहमी के शिकार हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें। व्यापार व्यवसाय में लाभ साझेदारी में शंका दूर होगी।वृश्चिक आप कोई गलत निर्णय भी ले सकते हैं। कर्तव्य और अध्यात्म का समन्वय। कोई खास काम बनेगा। कार्य की अधिकता से दिन में व्यस्तता।धनुबिगड़े हुए काम सुधरते हुए आगे बढ़ेंगे। घरेलू उलझनों में फसें रहेंगे। श्रीमती जी के &#039;यस मैन&#039; बनकर रहें। स्वजनों के साथ अच्छा समय बीतेगा।मकर शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें। शुभ और मांगलिक समाचारों की प्राप्ति। कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है। सावधानी से काम करें।कुंभतन-मन-धन, तीनों की स्थिति सुधरेगी। बेटे-बेटी की शादी की चिंता दूर होगी। ज्ञात-अज्ञात कारणों से मानसिक असंतोष। कदम कदम पर कठिनाई आएंगी।मीनअटका हुआ काम बन नहीं पाएगा। जनसम्पर्क बढ़ेगा, मित्र लाभ भी। चल अचल संपत्ति में वृद्धि होगी। मनोरथ सिद्धि से प्रसन्नता। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:58:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Hariyali Teej 2026 : सुहागिनों के लिए खास है  हरियाली तीज व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और Vrat Rules की पूरी जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व माना जाता है। सावन का पूरा महीना व्रत के लिए जाना जाता है। भगवान शिव के सोमवार व्रत, मंगला गौरी व्रत, कामिका और पुत्रदा एकादशी, हरियाली तीज और नाग पंचमी के व्रत प्रमुख हैं। हरियाली तीज का व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए करती हैं। इस दौरान महिलाएं निर्जला व फलाहार व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस व्रत के रखने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, सौहार्द और स्थिरता बनी रहती है। इसके साथ ही पति की आयु में वृद्धि और जीवन में खुशहाली आती है। हरियाली तीज के मौके पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं, झूला झूलती हैं और सावन के मधुर गीत गाती है। आइए आपको बताते हैं कब रखा जाएगा हरियाली तीज का व्रत और शुभ मुहूर्त।हरियाली तीज 2026 कब है?हिंदू पंचांग के अनुसार हरियाली तीज का पावन पर्व सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में तृतीया तिथि का आरंभ 14 अगस्त को सायं 6:46 बजे से होगा तथा यह 15 अगस्त को सायं 5:28 बजे तक प्रभावी रहेगी। उदया तिथि को मान्यता देने की परंपरा के अनुसार हरियाली तीज का व्रत और पर्व 15 अगस्त 2026, शनिवार को मनाया जाएगा।हरियाली तीज 2026 शुभ मुहूर्त-ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:50 से 05:35 तक-अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:17 से 01:08 तक-विजय मुहूर्त: दोपहर 02:51 से 03:42 तक-गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:06 से 07:29 तक-अमृत काल: रात 08:18 से 09:53 तकहरियाली तीज 2026 चौघड़िया मुहूर्त-शुभ (उत्तम): सुबह 07:55 से 09:31 तक-लाभ (उन्नति): दोपहर 02:19 से 03:55 तक-अमृत (सर्वोत्तम): दोपहर 03:55 से 05:30 तक-चर (सामान्य): दोपहर 12:43 से 02:19 तकहरियाली तीज व्रत के नियम- इस दिन हरे और लाल रंग के वस्त्र पहनना काफी शुभ माना जाता है। भूलकर भी काले सफेद या भूरे रंग के कपड़े न पहनें। - व्रत के दौरान पानी या दूध का सेवन न करने की परंपरा भी प्रचलित है। - इस बात का ध्यान रखें कि पूजा में वही सामग्री का इस्तेमाल करें, जो मायके से प्राप्त हुई हो। - व्रत का पारण शुभ मुहूर्त से पहले न करें। - पूजा का सारा सामान मंगलवार को न खरीदें। - व्रत वाले दिन महिलाओं को किसी भी प्रकार का विवाद और नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए। - मान्यता के अनुसार, इस रात जागरण कर भजन-कीर्तन के जरिए शिव-पार्वती की आराधना करना चाहिए।हरियाली तीज की पूजा विधि-हरियाली तीज व्रत वाले दिन महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर साफ वस्त्र पहनें। - इसके बाद मंदिर स्थल व पूजा स्थल को साफ करें। - अब एक चौकी पर कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री रखें। - इसके बाद शुद्ध मिट्टी या बालू से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाएं। - अगर मिट्टी की प्रतिमा बनाना संभव न हो, तो आप उनकी तस्वीर या मूर्ति को स्थापित करें। - इसके बाद आप माता पार्वती को लह श्रृंगार का सामान जैसे साड़ी, चुनरी, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, चूड़ियां, महावर, काजल, आदि अर्पित करें। फिर फल, फूल, मिठाई (घेवर और फीणी) चढ़ाएं। - अब आप भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, फल, जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, चीनी (पंचामृत) चंदन, अक्षत अर्पित करें।- इसके बाद हरियाली तीज व्रत कथा का पाठ करें या सुनें। - आखिर में भगवान शिव और देवी पार्वती की आरती करें और हाथ जोड़कर पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगे।  - अगले दिन जब आप व्रत को खोलें, तो मिट्टी की प्रतिमाओं और पूजा सामग्री को किसी नदी या पवित्र जल में विसर्जित कर दें।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:58:22 +0530</pubDate>
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<title>माता पार्वती जयंती व्रत है प्रेम, समर्पण एवं विश्वास का पर्व</title>
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<description><![CDATA[ 21 जुलाई को माता पार्वती जयंती व्रत है, सनातन धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। पार्वती जयंती के दिन देवों के देव महादेव की पत्नी माता पार्वती की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है तो आइए हम आपको माता पार्वती जयंती व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं। जानें माता पार्वती जयंती व्रत के बारे मेंसनातन धर्म में प्रत्येक व्रत का विशेष महत्व होता है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन जया पार्वती का व्रत रखा जाता है। ये व्रत सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं दोनों के लिए बड़ा खास होता है। भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए यह कठिन व्रत 5 दिनों में पूरा किया जाता है। जया पार्वती व्रत के दिन विधि-विधान से माता पार्वती का पूजन किया जाता है।इसे भी पढ़ें: Kark Sankranti 2026: सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश, आज से शुरू होगा Dakshinayan का शुभ कालमाता पार्वती जयंती व्रत का शुभ मुहूर्त हिन्दू पंचांग के अनुसार, इस बार 21 जुलाई 2026 की सुबह 4 बजकर 2 मिनट से आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ हो रहा है, जो कि कल 22 जुलाई 2026 की सुबह 5 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में 21 जुलाई 2026, वार मंगलवार को इस बार पार्वती जयंती मनाई जाएगी।आषाढ़ शुक्ल अष्टमी तिथि का महत्वआषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि यानी पार्वती जयंती का दिन देवी पार्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो कि शक्ति, भक्ति, प्रेम, सौंदर्य और मातृत्व (माता होने का भाव) का प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग सच्चे मन से माता पार्वती की उपासना करते हैं, उन्हें जीवन की तमाम समस्याओं से लड़ने की शक्ति मिलती है। साथ ही पाप नष्ट होते हैं और वैवाहिक जीवन खुशियों से भरा रहता है।माता पार्वती जयंती व्रत पर ऐसे करें पूजा, होगा लाभ पंडितों के अनुसार माता पार्वती जयंती व्रत बहुत खास होता है इसलिए पार्वती जयंती व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कार्य करने के पश्चात लाल या हरे रंग के शुद्ध कपड़े धारण करें। घर के मंदिर में शिव जी और मां पार्वती की साथ वाली मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। व्रत का संकल्प लेने के बाद घी का दीपक जलाएं। देवी-देवताओं को जल, वस्त्र, अक्षत, हल्दी, फल और फूल अर्पित करें। मां पार्वती को श्रृंगार का सामान अर्पित करने के बाद उन्हें समर्पित &#039;ॐ नमः शिवायै च शिवायै च नमो नमः&#039; मंत्र का 11 बार जाप करें। इसके बाद अपनी इच्छा को व्यक्त करके पूजा का समापन करें। पार्वती जयंती का व्रत अगले दिन अष्टमी तिथि के समाप्त होने के बाद या मुख्य तिथि वाले संध्या पूजा के पश्चात खोला जा सकता है।इसलिए मनाया जाता है माता पार्वती जयंती व्रतपार्वती जयंती देवी पार्वती के अवतरण (प्रकट होने) की याद में मनाई जाती है। वे प्रेम, भक्ति, शक्ति, मातृत्व और दैवीय स्त्री शक्ति की प्रतीक हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, वे भगवान शिव की शाश्वत संगिनी और सृष्टि, पालन व परिवर्तन का स्रोत हैं। यह दिन वैवाहिक सुख, परिवार की भलाई, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रार्थना करने की दृष्टि से बहुत शुभ माना जाता है।सिद्धि-विद्या देवी के रूप में भी प्रसिद्ध हैं माता पार्वतीशास्त्रों के अनुसार माता पार्वती को &#039;जगदंबा&#039; यानी ब्रह्मांड की माता के रूप में व्यापक रूप से पूजा जाता है, लेकिन प्राचीन ग्रंथों में उन्हें बारह सिद्धि-विद्या देवियों में से एक भी माना गया है। तांत्रिक परंपराओं में, भक्त देवी के सिद्धि-विद्या स्वरूपों के लिए विशेष अनुष्ठान करते हैं। पंडितों के अनुसार अनुशासित पूजा और ध्यान के माध्यम से की जाने वाली ये साधनाएं भक्तों को उनकी सच्ची इच्छाएं पूरी करने, बाधाओं को दूर करने और आध्यात्मिक यात्रा में आगे बढ़ने में मदद करती हैं।माता पार्वती जयंती व्रत का महत्वपंडितों के अनुसार माता पार्वती को शक्ति, भक्ति, समर्पण और अखंड सौभाग्य की देवी माना जाता है। इस दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। माता पार्वती प्रकृति और शक्ति का स्वरूप हैं। इनकी पूजा से जीवन में नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने और माता पार्वती की पूजा करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है और वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। यह दिन सौभाग्य और वैवाहिक सुख देने वाला होता है। अविवाहित कन्याएं यदि सच्चे मन से यह व्रत रखती हैं, तो उन्हें योग्य और मनचाहा जीवनसाथी मिलता है या मनवांछित वर की प्राप्ति होती है।माता पार्वती जयंती व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा भी है रोचक पौराणिक कथा के अनुसार, माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान सहन न कर पाने के कारण योगाग्नि द्वारा अपने शरीर का त्याग कर दिया था। इसके बाद उन्होंने हिमालयराज हिमवान और माता मैना के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। माता पार्वती बाल्यकाल से ही भगवान शिव को अपना पति मानती थीं। महर्षि नारद ने उन्हें बताया कि शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या करनी होगी। नारद जी के मार्गदर्शन पर माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की। उन्होंने जल, अन्न और यहां तक कि पत्ते यानी पर्ण खाना भी छोड़ दिया, जिसके कारण उन्हें &#039;अपर्णा&#039; भी कहा गया। उनकी अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसके बाद शिव और पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ। यही कारण है कि पार्वती जयंती को अटूट दांपत्य प्रेम और सौभाग्य का पर्व माना जाता है। पार्वती जयंती केवल देवी पार्वती के जन्मोत्सव का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रेम, तपस्या, समर्पण और अटूट विश्वास का संदेश भी देता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से माता पार्वती तथा भगवान शिव की आराधना करने से दांपत्य जीवन में सुख, परिवार में समृद्ध ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:58:21 +0530</pubDate>
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<title>Bhadli Navami 2026: भडल्या नवमी पर बिना मुहूर्त देखे किए जाते हैं शुभ काम, गुरु अस्त होने के बाद भी होंगे विवाह</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म में भडल्या नवमी का विशेष महत्व है। इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है। आसान शब्दों मंं कहें तो भडल्या नवमी पर बिना किसी ज्योतिषीय सलाह के सभी प्रकार के शुभ कार्य कर सकते हैं। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 22 जुलाई 2026 को सुबह 5:16 बजे से आरंभ होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 23 जुलाई 2026 की सुबह 7:03 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार 22 जुलाई को भडल्या नवमी मनाई जाएगी।  यह दिन अक्षय तृतीया की तरह शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। भडल्या नवमी स्वंयसिद्ध तिथि है। इस तिथि पर सभी प्रकार के शुभ कार्य कर सकते हैं। साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत कर सकते हैं।  ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि भडल्या नवमी 22 जुलाई को है। यह इस सीजन का आखिरी विवाह मुहूर्त है। हालांकि इस समय गुरु अस्त चल रहे हैं, इसलिए मांगलिक कार्यों पर रोक लगी हुई है, फिर भी भडल्या नवमी को अबूझ मुहूर्त माने जाने से इस दिन काफी संख्या में विवाह होंगे। इसके 2 दिन बाद 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चार महीने के लिए सभी मांगलिक कार्य थम जाएंगे, जो एक नवंबर को देवों के जागने के साथ शुरू होंगे।अद्ये कस्यापि मूढत्वे शुभकर्म न दोषकृत्। द्वयो मूढत्व मे प्रोक्तं दोषदं गुरुशुक्रयो:।।ज्योतिष विद्वानों और शास्त्र के अनुसार अबूझ मुहूर्त में किसी प्रकार का पंचांग या मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है और इसमें गुरु या शुक्र तारा अस्त भी नहीं देखा जाता है।इसे भी पढ़ें: Lord Vishnu Mantras: गुरुवार को Lord Vishnu की पूजा से दूर होगा Guru Dosha, इन Powerful Mantras के जाप से बरसेगी श्रीहरि की विशेष कृपाज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि 22 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल नवमी है। इसे भडल्या नवमी कहते हैं। इस दिन आषाढ़ गुप्त नवरात्रि भी खत्म हो रही है। इसके बाद 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी है, इस तिथि से चार महीनों के लिए श्रीहरि विश्राम करते हैं, इसलिए शुभ कामों के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं। देवशयनी एकादशी से पहले आने वाली भडल्या नवमी को अबुझ मुहूर्त माना जाता है यानी इस दिन विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नए काम की शुरुआत जैसे शुभ काम बिना मुहूर्त देखे किया जा सकते हैं। अभी आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि चल रही है, इस नवरात्रि की अंतिम भड़ली नवमी रहती है। इस नवमी पर गणेश जी, शिव जी और देवी दुर्गा की विशेष पूजा करनी चाहिए। जरूरतमंद लोगों को धन, अनाज, छाता, जूते-चप्पल, कपड़े का दान करना चाहिए।भडल्या नवमी तिथिभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 22 जुलाई 2026 को सुबह 5:16 बजे से आरंभ होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 23 जुलाई 2026 की सुबह 7:03 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार 22 जुलाई को मनाई जाएगी।15 जुलाई को गुरु कर्क राशि में अस्त भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है। इसके बाद भगवान विष्णु के योग निद्रा में होने की वजह से अगले 4 महीने तक कोई भी मांगलिक काम नहीं किया जा सकता है। ऐसे में चातुर्मास शुरू होने से पहले शुभ काम करने का अंतिम दिन भडल्या नवमी तिथि को होता है। 15 जुलाई को गुरु कर्क राशि में अस्त हो गए है। और 10 अगस्त को गुरु उदय होंगे।15 दिसंबर 2026 से 14 जनवरी 2027 तक खरमासभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस वर्ष नवंबर में केवल सात दिन और दिसंबर में सिर्फ पांच दिन विवाह मुहूर्त है। 15 दिसंबर 2026 से 14 जनवरी 2027 तक खरमास होने से विवाह नहीं हो सकेंगे। विवाह मुहूर्त 15 दिसंबर से चार फरवरी तक भी नहीं होंगे। शुक्र ग्रह के उदित होने के बाद पांच फरवरी से शुरुआत होगी।अबूझ या स्वयंसिद्ध मुहूर्तभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि भडल्या नवमी अबूझ या स्वयंसिद्ध मुहूर्त के रूप में मानी गई है। यानी इस दिन शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त के विचार की जरूरत नहीं होती। महत्वभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि भडल्या नवमी तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्त है। इस तिथि पर शुभ कार्य करने के लिए ज्योतिष गणना की आवश्यकता नहीं पड़ती है। किसी भी समय जातक अपनी सुविधा के अनुसार शुभ कार्य कर सकते हैं। साथ ही शुभ कार्य का श्रीगणेश कर सकते हैं। इस तिथि पर शुभ कार्य करने से अक्षय तृतीया के समतुल्य फल प्राप्त होता है।- डा. अनीष व्यासभविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:58:21 +0530</pubDate>
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<title>Bhadli Navami 2026: भड़ली नवमी होती है सकारात्मक ऊर्जा एवं सौभाग्य का प्रतीक</title>
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<description><![CDATA[ आज भड़ली नवमी है, यह व्रत आषाढ़ मास की नवमी तिथि को रखा जाता है। इसे भड़रिया नवमी के नाम से जाना जाता है। इस तिथि को अक्षय तृतीया के समान पुण्य फलदायी माना जाता है। इस तिथि पर किए गए शुभ कार्यों में सफलता, समृद्धि और शुभ फल की प्राप्ति होती है। जानें भड़ली नवमी के बारे में रोचक बातें आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी कहा जाता है। भड़ली नवमी को भड़रिया नवमी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में भड़रिया नवमी का विशेष महत्व बताया गया है। भड़ली नवमी को अक्षय तृतीया के समान ही पुण्य फलदायी माना गया है।  भड़ली नवमी का दिन इसलिए भी खास होता है क्योंकि इसके ठीक दो दिन बाद यानी 25 जुलाई 2026 से &#039;चातुर्मास&#039; शुरू हो जाते हैं। इसके बाद चार महीनों के लिए सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इसे भी पढ़ें: Bhadli Navami 2026: भडल्या नवमी पर बिना मुहूर्त देखे किए जाते हैं शुभ काम, गुरु अस्त होने के बाद भी होंगे विवाहजानें भड़ली नवमी का शुभ मुहूर्तहिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत 22 जुलाई को सुबह में 5 बजकर 16 मिनट पर होगा। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 23 जुलाई को सुबह 7 बजकर 3 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए भड़ली नवमी का व्रत 22 जुलाई को रखा जाएगा।हिन्दू धर्म में भड़ली नवमी का है खास महत्वधर्म शास्त्रों के अनुसार जिस लोगों के विवाह के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं निकलता है उनका विवाह इस दिन किया सकता है। भड़ली नवमी के बाद चातुमास लग जाता है जिसके बाद अगले 4-5 महीनें तक कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते है। ऐसा कहा जा सकता है कोई भी मांगलिक कार्य करने के लिए यह तीथि शुभ होता है। धार्मिक मान्यता है कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार माह की निद्रा के बाद जागृत होते हैं। तभी मांगलिक कार्य किए जाते है।इसलिए खास है भड़ली नवमीधार्मिक मान्यताओं के अनुसार भड़ली नवमी को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। &#039;अबूझ मुहूर्त&#039; का अर्थ ऐसे शुभ समय से है, जिसमें पूरे दिन में कभी भी किसी भी मुहूर्त में शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इस दिन ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग अपने महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत इसी तिथि पर करना पसंद करते हैं। देवशयनी एकादशी से पहले आने वाली भडल्या नवमी को अबुझ मुहूर्त माना जाता है यानी इस दिन विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नए काम की शुरुआत जैसे शुभ काम बिना मुहूर्त देखे किया जा सकते हैं। अभी आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि चल रही है, इस नवरात्रि की अंतिम भड़ली नवमी रहती है। इस नवमी पर गणेश जी, शिव जी और देवी दुर्गा की विशेष पूजा करनी चाहिए। जरूरतमंद लोगों को धन, अनाज, छाता, जूते-चप्पल, कपड़े का दान करना चाहिए।भड़ली नवमी से जुड़ी पौराणिक कथा भी है खास पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भड़ली नवमी का सम्बन्ध जगत के पालनकर्ता श्री विष्णु से है। भड़ली नवमी के ठीक दो दिन बाद यानी देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। सनातन धर्म में, विवाह जैसे मांगलिक कार्य भगवान विष्णु की साक्षी और आशीर्वाद के बिना पूर्ण नहीं माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी के बाद चातुर्मास शुरू होने पर देवता सो जाते हैं और अगले 4 महीनों तक (देवउठनी एकादशी तक) कोई भी शादी-ब्याह या शुभ संस्कार संपन्न नहीं होते हैं। भड़ली नवमी वह आखिरी दिन होती है, जब भगवान विष्णु के शयन में जाने से पहले भक्त उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। इस दिन गुप्त नवरात्र का समापन भी होता है, इसलिए देवी दुर्गा और भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों को सभी सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है। यह दिन उन लोगों के लिए विशेष वरदान समान है जिनके विवाह में कोई अड़चन आ रही हो या कोई अन्य शुभ मुहूर्त न मिल रहा हो। शुभ कार्यों के लिए इसलिए चुनी जाती है भड़ली नवमी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भड़ली नवमी सकारात्मक ऊर्जा, सौभाग्य और मंगल का प्रतीक मानी जाती है। इसलिए इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय का शुभारंभ, संपत्ति खरीदना, धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ, नामकरण और अन्य मांगलिक कार्य करना शुभ माना जाता है। पंडितों के अनुसार इस दिन शुरू किए गए कार्यों में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और सफलता की संभावना बढ़ती है।भड़ली नवमी पर रखें इन बातों का ध्यान पंडितों के अनुसार भड़ली नवमी का दिन बहुत खास होता है इसलिए इस दिन भगवान विष्‍णु और देवी दुर्गा की पूजा जरूरी करें। इस दिन परिवार में या दूर की रिश्‍तेदारी में भी शोक हो जाए, तो कोई भी शुभ काम टाल दें। भड़ली नवमी को अत्यंत शुभ तिथि मानी जाती है, फिर भी किसी बड़े धार्मिक या पारिवारिक आयोजन से पहले अपनी पारिवारिक परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं पर जरूर विचार कर लें।- प्रज्ञा पाण्डेय ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:58:20 +0530</pubDate>
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<title>Lord Vishnu Mantras: गुरुवार को Lord Vishnu की पूजा से दूर होगा Guru Dosha, इन Powerful Mantras के जाप से बरसेगी श्रीहरि की विशेष कृपा</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को समर्पित है। गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं। वहीं अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु दोष है, तो भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा और उपासना करनी चाहिए। गुरुवार को व्रत करने से व्यक्ति के जीवन की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। वहीं घर में धन की कमी नहीं रहती है। वहीं इस दिन भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करना शुभ होता है।धार्मिक मान्यता है कि रोजाना भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि रोजाना भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करने से सभी संकटों से मुक्ति मिलती है और धन-वैभव की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं इन मंत्रों के बारे में...इसे भी पढ़ें: Puri में Lord Jagannath Rath Yatra का दिव्य आगाज, 100 यज्ञों के पुण्य फल और मोक्ष की अद्भुत परंपराश्रीहरि विष्णु के पवित्र मंत्रॐ नमो भगवते वासुदेवायश्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।ॐ विष्णवे नम:ॐ हूं विष्णवे नम: ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।  लक्ष्मी विनायक मंत्रदन्ताभये चक्र दरो दधानं,कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रयालक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।धन-वैभव और संपन्नता का मंत्रॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि। ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।ॐ अं वासुदेवाय नम:ॐ आं संकर्षणाय नम:ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:ॐ नारायणाय नम:श्रीहरि का पंचरूप मंत्रॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान। यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्‍टं च लभ्यते।।भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा और आशीर्वाद पाने के लिए रोजाना इन मंत्रों का जाप करना चाहिए। इन मंत्रों का जाप करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। धन-वैभव और संपन्नता की प्राप्ति होती है। लेकिन इन मंत्रों का जाप करते समय इस बात का ध्यान रखें कि मंत्रों का उच्चारण साफ और शुद्ध होना चाहिए। वरना इसका फल नहीं मिलता है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:58:15 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Lord, Vishnu, Mantras:, गुरुवार, को, Lord, Vishnu, की, पूजा, से, दूर, होगा, Guru, Dosha, इन, Powerful, Mantras, के, जाप, से, बरसेगी, श्रीहरि, की, विशेष, कृपा</media:keywords>
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<title>Nag Vasuki की अनन्य भक्ति से प्रसन्न हुए Lord Shiva, गले में धारण कर दिया सम्मान</title>
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<description><![CDATA[ भगवान शिव का रूप जितना ज्यादा रहस्यमयी है, उतना ही आकर्षक भी है। भगवान शिव अपने शरीर में भस्म, जटाओं में गंगा, माथे पर चंद्रमा और गले में नाग धारण करते हैं। भगवान शिव के इन सभी चीजों को धारण करने के पीछे अलग-अलग मान्यताएं हैं। असल में महादेव न सिर्फ मनुष्यों बल्कि अन्य जीवों पर भी अपनी कृपा और आशीर्वाद बनाए रखते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि भगवान शिव अपने गले में नाग को धारण करते हैं।भगवान शिव एक ऐसे देवता हैं, जो समाज की बहिष्कृत चीजों को अपने साथ जोड़ते हैं। सांप को भगवान शिव ने अपने गले में धारण कर उसको सम्मान दिया। श्मशान की भस्म को अपने तन का लिबास बना लिया। कैलाश पर्वत को महादेव ने अपना घर बना लिया। तो आइए जानते हैं भगवान शिव ने अपने गले में सांप क्यों धारण किया है।इसे भी पढ़ें: Lord Vishnu Mantras: गुरुवार को Lord Vishnu की पूजा से दूर होगा Guru Dosha, इन Powerful Mantras के जाप से बरसेगी श्रीहरि की विशेष कृपाशिवजी ने क्यों धारण किया सांपधार्मिक कथाओं के मुताबिक नागराज वासुकी भगवान शंकर के परम भक्त थे। वह हमेशा भगवान शिव की पूजा-उपासना में लीन रहते थे। धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक समुद्र मंथन के समय नागराज वासुकी ने रस्सी का किया था। जिससे सागर को मथा गया था। नागराज वासुकी की भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उनको नागलोक का राजा बना दिया। साथ ही भगवान शिव ने अपने गले में आभूषण की तरह लिपटे रहने का वरदान दिया।क्या मिलता है संकेतभगवान शिव के विषैले सांप को अपने गले में धारण करना इस ओर भी संकेत देता है कि अगर दुर्जन भी अच्छे कर्म करें, तो ईश्वर उसको जरूर स्वीकार करते हैं। ऐसे में व्यक्ति को सिर्फ अच्छे कर्म करना चाहिए, चाहे उनका स्वभाव कैसा भी हो।यहां भी मिलता है उल्लेखधार्मिक मान्यताओं के मुताबिक समुद्र मंथन के अलावा एक अन्य स्थान पर भी वासुकी नाग का वर्णन मिलता है। जब भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय वासुदेव कंस की जेल से उनको गोकुल लेकर जा रहे थे। तब यमुना में एक भयंकर तूफान आया। ऐसे में नागराज वासुकी ने भगवान श्रीकृष्ण और वासुदेव को सुरक्षित यमुना पार कराने में सहायता की थी। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:58:14 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 20 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष आमदनी बढ़ेगी, आवश्यक कार्य में व्यस्तता। समाज में आपका सिक्का चलेगा। पत्नी और बच्चों के साथ सामान्य रहें, कलह रहें। विपरीत को भी अनुकूल बनाने में समर्थ रहेंगे।वृषपारिवारिक जीवन में सुख संतोष रहेगा। अभीष्टकारी समय है। आत्मविश्वास के बल पर बिगड़ा काम बनेगा। अप्रत्याशित धन लाभ, उत्तम वैवाहिक सुख।मिथुनपरिवार के साथ मनोरंजन में व्यस्तता। उत्तेजित न हो, अन्यथा काम बिगड़ जाएंगे। महत्वपूर्ण काम आजकल टाल दें। जीवनसाथी के साथ अच्छा तालमेल रहेगा।कर्कघर परिवार में अशांति का वातावरण रहेगा। जो मिल जाए उसी में संतोष करें। गुरुजनों के स्वास्थ्य की चिंता, खर्च भी बढ़ेगा। अपने काम से काम रखें। सिंहविरोधी पक्ष सम्मान पर चोट करेगा। साझेदारी में काम सफल, तेजी से आगे बढ़ेगा। लाभदायक समाचार और उपलब्धियों भरा दिन। अचानक यात्रा और धन लाभ दोनों।कन्याकार्य की उपेक्षा के कारण, अपमान का सामना। उनका सहयोग समस्याएं भी सुलझाएगा। सुखद वातावरण- व्यावसायिक प्रगति भी। लाभकारी यात्राओं होंगी।तुलाधन हानि के योग, पूंजी निवेश से बचें। जीवनशैली में परिवर्तन। परिवार के हित साधन में व्यस्त रहेंगे। मित्र और बांधवों की सहायता करेंगे।वृश्चिक त्वचा रोग दुबारा उभर सकते हैं। त्वचा रोग पुनः उभर कर कष्ट देंगे। सकारात्मक विचारों और रचनात्मक कार्यों से उन्नति होगी। दीर्घकालीन समस्याओं का अंत।धनुप्रियजनों से मुलाकात, समय आनंद में बीतेगा। मन भय और आशंकाओं से भरा रहेगा। जीवनसाथी से मनमुटाव समाप्त होगा। परोपकार और पुण्यकार्यों में व्यस्तता।मकर कटुवाणी से बना हुआ काम बिगड़ेगा। अधिकारी आपसे प्रभावित और प्रसन्न होंगे। प्रतिष्ठित व्यक्ति से भेंट उन्नति कारक होगी। चिंताजनक समय, सम्मान को ठेस।कुंभबेकार के कामों में शारीरिक मानसिक शक्ति का क्षय। घरेलू उपयोग के उपकरणों की खरीददारी। सामाजिक कार्यों में सफलता, आर्थिक उन्नति। विशेष शुभ समाचार भी मिलेगा।मीनआत्मबल के भरोसे नया काम करेंगे। अचानक ही आपको नकद लाभ होगा। प्रयत्नों में अधिक सफलता मिलेगी। आपका प्रभाव बढ़ेगा, समाज और सरकार दोनों में। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:19:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope 20 July 2026 | इन 4 राशियों की लव लाइफ में बढ़ेगा रोमांस, जानें कैसा रहेगा आपका दिन</title>
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<description><![CDATA[ आज का लव राशिफल: ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, आज का दिन सभी 12 राशियों के प्रेम जीवन और वैवाहिक संबंधों के लिए बेहद खास और उतार-चढ़ाव से भरा रहने वाला है। ग्रह-नक्षत्रों की बदलती चाल के कारण कुछ राशियों के जीवन में जहां रोमांस और आपसी तालमेल बढ़े-मेष राशिआज पार्टनर के साथ आपके रिश्ते में गहराई आएगी। आपसी बातचीत से पुरानी गलतफहमियां दूर होंगी। सिंगल लोगों की किसी खास व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है। साथी को थोड़ा समय जरूर दें।वृषभ राशिप्रेम जीवन के लिए दिन खुशनुमा रहेगा। अगर आप किसी को प्रपोज करने की सोच रहे हैं, तो आज का दिन अनुकूल है। शादीशुदा लोगों के बीच तालमेल और मजबूत होगा।मिथुन राशिपार्टनर के साथ किसी बात पर बहस हो सकती है, इसलिए अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें। गुस्से में आकर कोई फैसला न लें। शांत रहकर बात को संभालने की कोशिश करें, शाम तक सब ठीक हो जाएगा।कर्क राशिलव लाइफ में रोमांस बढ़ेगा। साथी से कोई खूबसूरत सरप्राइज मिल सकता है। आज आप उनके साथ यादगार वक्त बिताएंगे। सिंगल लोगों को आज प्यार का इजहार करने का मौका मिल सकता है।सिंह राशिआज अपने पार्टनर की भावनाओं का सम्मान करें। काम की व्यस्तता के कारण रिश्ते में थोड़ी दूरी महसूस हो सकती है, लेकिन एक छोटा सा संदेश या फोन कॉल भी आपके बीच की नजदीकियां बनाए रखेगा।कन्या राशिप्रेम संबंधों के मामले में आज का दिन सामान्य रहेगा। पार्टनर के साथ लॉन्ग ड्राइव या डिनर पर जाने का प्लान बन सकता है। एक-दूसरे पर भरोसा बनाए रखें, बाहरी लोगों को अपने रिश्ते में दखल न देने दें।तुला राशिआज का दिन खुशियों से भरा रहेगा। आपके बीच का आपसी आकर्षण बढ़ेगा और लव पार्टनर के साथ चल रहे पुराने विवाद सुलझ जाएंगे। दांपत्य जीवन में मधुरता रहेगी।वृश्चिक राशिआज लव लाइफ में थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। पार्टनर के मूड में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। उनकी बात को ध्यान से सुनें और अनावश्यक तर्कों से बचें।धनु राशिअगर आप सिंगल हैं तो आज किसी नए रिश्ते की शुरुआत हो सकती है। जो लोग पहले से रिलेशनशिप में हैं, उनका रिश्ता और परिपक्व होगा। पार्टनर के साथ भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हो सकती है।मकर राशिआज पार्टनर के प्रति आपका लगाव बढ़ेगा। कठिन समय में आपको अपने साथी का पूरा सहयोग मिलेगा, जिससे आपका भरोसा और मजबूत होगा। शाम का समय सुकून भरा रहेगा।कुंभ राशिआज आपको पार्टनर के साथ समय बिताने के कई मौके मिलेंगे। प्रेम जीवन में नयापन लाने के लिए कुछ नया ट्राई कर सकते हैं। रिश्तों में ईमानदारी और स्पष्टता रखना फायदेमंद रहेगा।मीन राशिआज लव लाइफ में किसी बात को लेकर असमंजस की स्थिति बन सकती है। पार्टनर से खुलकर बात करें और मन में कोई बात न छुपाएं। धैर्य से काम लें, आपसी समझ से हर समस्या हल हो जाएगी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:19:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Chaturmas Rules: 25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास, Padma Purana के अनुसार इन 8 नियमों का करें पालन</title>
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<description><![CDATA[ इस साल चातुर्मास का आरंभ 25 जुलाई 2026 से होने जा रहा है। हिंदू धर्म में चातुर्मास को बेहद खास माना जाता है। देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का प्रारंभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और अगले चार महीने तक वह निद्रा में रहते है। इस दौरान सृष्टि का संचार भगवान शिव के रुद्र अवतार करते हैं। मान्यता है कि इन दिनों किया गया जप-तप, दान पुण्य और व्रत विशेष फलदायी रहता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास की अवधि में भगवान विष्णु एक तो रुप में राजा बलि के पास रहते हैं और दूसरे रुप में शेष शय्या पर शयन करते हैं। आइए आपको बताते हैं पद्म पुराण के अनुसार, चतुर्मास में किन बातों का ज्यादा ध्यान देना चाहिए आपको बताते हैं  इस लेख में- चातुर्मास का नियम - पद्म पुराण के मुताबिक, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु शेषशैय्या पर सो जाते हैं। इसलिए इस महीने में धरती या फिर पलंग पर कंबल बिछाकर शयन करना चाहिए। इस पर गद्दा तो बिल्कुल न डालें। जो लोग इस महीने धरती पर शयन करते है, उन्हें धन, पुत्रादि की प्राप्ति होती है। इन लोगों को व्यक्ति को कोढ़ की बीमारी नहीं होती है।  - इन 4 महीनों में दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में दीपदान करने से ज्ञान में वृद्धि होती है और एक साथ हजारों दीपदान करने का फल मिलता है। - पद्म पुराण के अनुसार, चातुर्मास में 24 घंटे में व्यक्ति एक बार भोजन करता है, उस व्यक्ति की गिनती अग्निष्टोम यज्ञ करने के फल प्राप्त होता है। - इस अवधि में जो व्यक्ति दूध और सिर्फ फल खाता है, उसे पापों को नाश होता है। जो व्यक्ति इस महीने में दही का त्याग करता है उसे गोलोक की प्राप्ति होती है। चातुर्मास में आने वाले दोनों पक्षों की एकादशी का व्रत करना चाहिए।- चातुर्मास के दौरान तिल, आंवला और बिल्वपत्र जल में मिलाकर स्नान करने वाले व्यक्ति के पापों से नाश होता है और मन में प्रसन्नतादायक रहेगी। इसके साथ ही ओम नमः शिवाय का जप जरुर करें। फिर पानी का लोटा सिर पर डाले तो आपको पित्त की बीमार से राहत मिलेगी। - इस दौरान किसी भी व्यक्ति की निंदा न करें, कोशिश करें कि आप ब्रह्मचार्य का पालन करें। भजन सुने और संतों की सेवा करें, जिससे आपको अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इन चार महीनों में झूठ बिल्कुल भी न बोले। - चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु के आगे खड़े होकर पुरुष सूक्त का पाठ कर सकते हैं। ऐसा करने से बुद्धि में वृद्धि होती है। इस महीने में &#039;नमो नारायणाय&#039; मंत्र का जप कम से कम 108 बार जप करें।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:19:30 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 19 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 19 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 19 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष (Aries) - भाव: आकर्षणआज आपका चुंबकीय स्वभाव पार्टनर को आपकी ओर खींचेगा। अहंकार को छोड़कर पहल करें, आपकी एक मुस्कान आज पुराने सारे गिले-शिकवे मिटा देगी।वृषभ (Taurus) - भाव: सुरक्षाआप अपने साथी के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह हैं। आज आपकी यही फिक्र उनके मानसिक तनाव को दूर करेगी। शांत रहकर एक-दूसरे के साथ का आनंद लें।मिथुन (Gemini) - भाव: प्रफुल्लताआपका चुलबुलापन आज रिश्ते की नीरसता को खत्म कर देगा। पार्टनर के साथ हंसी-मजाक और हल्की-फुल्का बातचीत आज आपके प्रेम में नए रंग भर देगी।कर्क (Cancer) - भाव: संभरणआप रिश्ते को सींचना जानते हैं। आज पार्टनर की भावनात्मक जरूरतों को बिना कहे समझ लेना आपकी सबसे बड़ी खूबी बनेगा। आपका साथ उन्हें संबल देगा।सिंह (Leo) - भाव: उदारताप्यार में आपका दिल बहुत बड़ा है। आज साथी की किसी छोटी गलती को माफ कर के उन पर प्यार लुटाएं। आपका यह बड़प्पन रिश्ते को और ऊँचा ले जाएगा।कन्या (Virgo) - भाव: निष्ठाआपका प्रेम दिखावे से दूर और पूरी तरह समर्पित होता है। आज शब्दों से ज्यादा आपके छोटे-छोटे प्रयास पार्टनर को आपकी वफादारी का अहसास कराएंगे।तुला (Libra) - भाव: सौहार्दशांति और प्रेम आपके मूल मंत्र हैं। आज पार्टनर के साथ किसी भी तरह के टकराव को आप अपनी सूझबूझ से टाल देंगे। शाम का समय बेहद शांतिपूर्ण बीतेगा।वृश्चिक (Scorpio) - भाव: जुनूनआपका प्रेम अत्यंत तीव्र और गहरा होता है। आज अपनी इस ऊर्जा को शक या ईर्ष्या में बदलने के बजाय, साथी को यह बताने में लगाएं कि वे आपके लिए कितने खास हैं।धनु (Sagittarius) - भाव: उल्लासआप प्रेम को एक खूबसूरत उत्सव की तरह जीते हैं। आज पार्टनर के साथ कोई नया अनुभव शेयर करने या कहीं बाहर जाने का दिन है। रिश्ता और जीवंत होगा।मकर (Capricorn) - भाव: धैर्यआप जल्दबाजी में नहीं, बल्कि धीरे-धीरे गहरा होने वाला प्यार करते हैं। आज साथी की नाराजगी को अपने धैर्य से जीतें। आपकी चुप्पी भी आज बहुत कुछ कह जाएगी।कुंभ (Aquarius) - भाव: बौद्धिकताआप सिर्फ जिस्म से नहीं, दिमाग से भी जुड़ते हैं। आज पार्टनर के साथ किसी गहरी बात या भविष्य की प्लानिंग पर चर्चा आपके जुड़ाव को एक नया आयाम देगी।मीन (Pisces) - भाव: निस्वार्थताआप बिना किसी शर्त के प्यार करते हैं। आज आपकी यही निस्वार्थ भावना साथी के दिल में आपके लिए सम्मान और ज्यादा बढ़ा देगी। जज्बातों को बहने दें। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 20:12:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 19 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष जीवन में धर्मिकता अधिक रहेगी। खराब आचरण से अपयश और धन हानि। अपने काम पर खास ध्यान दें, उपेक्षा न करें। नौकरी में उपलब्धियों से संतोष होगा।वृषविभागीय परीक्षा में सम्मान सहित सफलता। अचानक किसी परेशानी में आ सकते हैं। अचल सम्पत्ति विवाद का हल निकलेगा। सम्पर्क क्षेत्र बढ़ेगा, अपने में परिवर्तन होगा।मिथुनघर और दफ्तर दोनों में तनाव महसूस करेंगे। आज किया गया पूंजी निवेश लाभदायक रहेगा। मांगलिक कार्य में भाग लेने के लिए यात्रा। पुराने ऋण पुनः उभरेंगे और रोग भी।कर्कसब तरफ यश फैलेगा, अहं से बचें। कोर्ट कचहरी के मामलों में विजय। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। रोजगार के क्षेत्र में आपको बड़ी उपलब्धि हासिल होगी।सिंहघर और दफ्तर में व्यस्तता रहेगी। व्यवसाय में शुभ संकेत मिलेंगे। कोई न कोई चिंता व्याप्त रहेगी। दोपहर बाद विशेष संयम बरतें।कन्यापदोन्नति के साथ-साथ स्थान परिवर्तन। शोक और अवसाद से परिपूर्ण दिन। संबंधियों से मनमुटाव खत्म होगा। धन संबंधी मामले में चिंतन बना रहेगा।तुलापारिवारिक संबंधों का विस्तार होगा। खतरों के खिलाड़ी न बनें। मानसिक पीड़ा और कष्ट। अधिकारों और आमदनी में वृद्धि।वृश्चिक मित्र बंधुओं की सहायता से काम बनेंगे। मिश्रित फल, शुभाशुभ समाचार, लाभ हानि। आलस्य और नकारात्मक उन्नति में बाधक। घरेलू सुख साधनों के उपकरण बढ़ेंगे।धनुलोकप्रियता में चार चांद लगेंगे। मिट्टी में हाथ डालने पर भी सोना ही मिलेगा। बड़े और प्रतिष्ठित लोगों से सम्पर्क। प्रेम प्रसंग में मुलाकातें सफल रहेगी।मकर भाग्य साथ देगा और काम भी बनेगा। अचानक चिंता और परेशानी की संभावना। जीवनसाथी के साथ हुए मतभेद समाप्त। विद्यार्थी गण को महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी।कुंभवरिष्ठ अधिकारी प्रशंसा करेंगे। श्री-वर्धक योग है, धन सम्पत्ति में वृद्धि। स्वजनों के साथ हंसी-खुशी में दिन बीतेगा। अपने ज्ञान और कौशल से लाभ उठाने का प्रयत्न करें।मीनजीवनसाथी के साथ मतभेद बढ़ेंगे। लोकप्रियता बढ़ेगी, प्रशंसा मिलेगी। उलझन सुलझेगी लेकिन देर से। अकारण कोई आरोप लग सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 20:12:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Ashadha Purnima 2026: गुरु पूर्णिमा पर लक्ष्मी पूजन से चमकेगी Destiny, इन उपायों से दूर होगी दरिद्रता और मिलेगी Wealth</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। इस बार आषाढ़ पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन व्रत रखने के साथ स्नान और दान का विशेष महत्व माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई की शाम 6 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर 29 जुलाई की रात 8 बजकर 05 मिनट तक रहने वाली है। इस दिन व्रत रखा जाता है और माता लक्ष्मी के साथ ही चंद्र देव की पूजा की जाती है। इस आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि इस दिन धन संबंधी उपाय करने से आय के रास्ते में रुकावट नहीं आती है और आर्थिक स्थिति भी मजबूत बनीं रहती है। इसलिए गुरु पूर्णिमा के दिन कुछ जरुरी उपाय जरुर करें, जिससे माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो सके, जिससे धन-संपत्ति और समृद्धि में बढ़ोतरी के योग बन पाए।आषाढ़ पूर्णिमा पर धन उपाय का शुभ समयपूर्णिमा के दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में धन से संबंधित उपाय करना श्रेष्ठ माने जाते हैं। प्रदोष काल की शुरुआत शाम 7 बजकर 21 मिनट के बाद होगी। खासकर मंत्र सिद्धि के लिए निशिता काल काफी महत्वपूर्ण है, जो रात 12  बजकर 07 मिनट से शुरु होकर 30 जुलाई की रात 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। आपको बता दें कि, इस दिन प्रीति और आयुष्मान योग का भी संयोग बन रहा है, जो शुभ फल देने वाला माना जाता है।आषाढ़ पूर्णिमा पर धन प्राप्ति के उपाय-धन लाभ के लिए यह उपाय प्रदोष काल में जरुर करें। ऐसा करने से माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश और कुबेर देव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सूर्यास्त के बाद अंधेरा होने के बाद, घी का दीपक जलाकर उसे घर के मंदिर में सभी देवी-देवताओं को अर्पित करें। फिर घर के मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली बनाकर उस पर दीपक स्थापित करें। इस बात का ध्यान रखें कि दीपक जलते समय मुख्य द्वार ओपन रहे। वहीं, भूलकर भी प्रदोष काल में झाडू न लगाएं।- पूजा करने के बाद कमलगट्टे की माला से महालक्ष्मी मंत्र का जाप करना लाभकारी होता है। ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः” इस मंत्र का नियमित जाप से धन वृद्धि में मददगार साबित होता है। इसके साथ ही  “ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः” या “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जप भी कर सकते हैं। इन मंत्रों का जाप निशिता काल में करने से विशेष फल प्राप्त होता है।- घर में सुख-शांति व समृद्धि बनाए रखने के लिए इस दिन माता लक्ष्मी के साथ ही भगवान विष्णु की पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है। पूजा के समय कमल के फूल अर्पित करना शुभ फल देता है और दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है। - इसके अलावा, इस दिन आप शाम के समय चांदी की कछुए के आकार वाली अंगूठी दाएं हाथ की तर्जनी उंगली में धारण करें। यह काफी शुभ माना जाता है। सनातन धर्म में कछुए को भगवान विष्णु के कूर्म अवतार का प्रतीक माना जाता है, जिसको धारण करने से जीवन में काफी सुख, संपन्नता और स्थिरता प्राप्त होती है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 20:12:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Chandra Gochar Alert: आज रात कन्या राशि में चंद्रमा का प्रवेश, इन 3 Zodiac Signs की बढ़ेगी मुसीबत</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी देर रात 18 जुलाई को चंद्रमा सिंह राशि से निकालकर कन्या राशि में प्रवेश करेगा। यह गोचर रात 11 बजकर 59 मिनट पर होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुध ग्रह चंद्रमा को अनुकूल नहीं मानते है। वहीं, जब चंद्रमा बुध की राशि कन्या में आता है, तो इसका प्रभाव कुछ राशियों के लिए अनिश्चित और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में कुछ राशियों के लिए यह समय काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। इसके साथ ही हेल्थ और पारिवारिक जीवन में भी कुछ परेशनियां देखने को मिल सकती है। इन राशियों के लोगों को सर्तक रहने की काफी जरुरत होती है। आइए आपको इन राशियों के बारे में बताते हैं।मेष राशिचंद्रमा का गोचर मेष राशि के छठे भाव में होने जा रहा है। यह भाव रोग, ऋण और शत्रु का भाव माना जाता है। इस कारण मेष राशि के जातकों के लिए यह समय अनुकूल नहीं है। अगर आप आपने किसी से उधार लिया है तो उसने चुकाने का दबाव बढ़ सकता है। इस दौरान आर्थिक मामलों में सावधानी बरतनी है। परिवार के साथ समय बिताने से तनाव पैदा हो सकता है। जब आप बातचीत करें, तो संयम और समझदारी बनाए रखना बेहद जरुरी होगा। छोटी-छोटी बातों का नजरअंदाज करना ही श्रेष्ठ है। इस दौरान शांति बनाए रखें और चंद्रमा में से संबंधित मंत्रों का जाप करें।तुला राशितुला राशि में चंद्रमा का गोचर बारहवें भाव में होने जा रहा है। जिससे इन लोगों अधिक खर्च और हानि का संकेत देता है। इस अवधि में आर्थिक स्थिति थोड़ी कमजोर हो सकती है। इसलिए पैसों से संबंधित जुड़े मामलों में सावधानी बरतें। किसी भी तरह के लेने-देने में जल्दबाजी न करें और कोशिश करें कि विश्वसनीय व्यक्ति से ही सलाह ले सकते हैं। वहीं, यह समय उधार देने से बचें, तो ही बेहतर रहेगा। सामाजिक जीवन में अपनी छवि को बनाए रखने के लिए सोच-समझकर ही कोई कदम उठाएं। मेटल हेल्थ को संतुलित रखने केलिए भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। कुंभ राशिचंद्रमा का यह गोचर कुंभ राशि में अष्टम भाव में होने जा रहा है, जिसे अचानक घटनाओं और अनिश्चितताओं का भाव माना जाता है। इस समय अधिक धन खर्च या हानि हो सकती है। जब आप यात्रा करें तो सामान का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि चोरी या नुकसान की आशंका हो सकती है। इस समय किसी पर भी आंख मूदकर भरोसा करना नुकसानदेह साबित होगा। जो जातक घर से दूर रहकर काम या पढ़ाई कर रहे हैं, उनको नुकसान झेलना पड़ सकता है। इस बात का ध्यान रखें कि अपनी निजी बातों को दूसरे शेयर बिल्कुल भी न करें। सतर्कता और समझदारी से ही आप इस समय को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करना बेहद शुभ हो जाता है।   ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 17:29:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>I Name Personality: अपनी क्रिएटिविटी और Hard Work से करियर में अलग मुकाम पाते हैं &amp;apos;I&amp;apos; नाम वाले लोग</title>
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<description><![CDATA[ अंक ज्योतिष के मुताबिक हर व्यक्ति के नाम के पहले लेटर का संबंधी किसी न किसी ग्रह से होता है। जिन लोगों का नाम &#039;I&#039; लेटर से शुरू होता है। उन जातकों पर सूर्य ग्रह का प्रभाव ज्यादा रहता है। इसी के कारण यह जातक काफी आत्मविश्वासी और क्रिएटिव होते हैं। वहीं इन जातकों में लीडरशिप क्वालिटी भी कमाल की होती है। वास्तु और अंक ज्योतिष के मुताबिक &#039;I&#039; नाम वाले जातक हमेशा दूसरों की सहायता के लिए तैयार रहते हैं। इन लोगों को अपनी अलग पहचान बनाना पसंद होता है। लव लाइफ के मामले में भी यह लोग अपने पार्टनर की खुशियों का ख्याल रखते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि I नाम वालों का स्वभाव, करियर और लव लाइफ कैसी होती है।जानें I नाम वालों का स्वभावजिन लोगों का नाम &#039;I&#039; लेटर शुरू होता है। उन लोगों में आत्मविश्वास कमाल का होता है। जिसके कारण यह जातक बिना डरे किसी काम को पूरा करने का साहस रखते हैं। वहीं यह लोग ऊर्जा से भी भरपूर होते हैं।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 18 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 18 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनअंक ज्योतिष के मुताबिक &#039;I&#039; नाम के लोग जल्दी किसी पर भरोसा नहीं करते हैं। जब तक कि यह लोग खुद उस की पुष्टि नहीं कर लें। यह जातक सतर्क और जागरुक रहते हैं।यह जातक सबसे पहले अपने सम्मान को आगे रखते हैं। किसी भी परिस्थिति में यह कदम या फैसला नहीं लेते हैं। जिससे उनके आत्म-सम्मान पर कोई बात न आए।&#039;I&#039; नाम के जातक काफी दयालु स्वभाव के होते हैं। अपनों के साथ-साथ यह लोग जरूरतमंदों की मदद करने के लिए भी तैयार रहते हैं। इन लोगों का स्वभाव अच्छा और मददगार होता है। यह जातक थोड़े इमोशनल भी हो सकते हैं।कई मामलों में &#039;I&#039; नाम के जातक मूडी भी हो सकते हैं। कुछ चीजों को लेकर इन लोगों का मूड बदलता रहता है। इसके कारण कभी-कभी फैसले लेने में उलझन का सामना करना पड़ सकता है।जानें &#039;I&#039; नाम वालों का करियरयह जातक काफी क्रिएटिव होते हैं और करियर के क्षेत्र में कलात्मक और रचनात्मकता के जरिए आगे बढ़ते हैं। इन लोगों को कला परखने की अच्छी समझ होती है।यह जातक करियर के मामले में स्वतंत्र रूप से काम करना पसंद करते हैं। इनको अपनी अलग पहचान बनानी होती है। इसके लिए भरपूर मेहनत और लगन के साथ अपना काम करते हैं।इन जातकों पर सूर्य का प्रभाव ज्यादा रहता है। जिसके कारण करियर में शुरू से ही इनके अंदर कमाल की नेतृत्व क्षमता होती है। यह जातक स्वाभिमानी होते हैं।जिन जातकों का नाम &#039;I&#039; से शुरू होता है। वह लोग डिजाइनिंग, आर्टिस्टिक पेंटिंग, फैशन इंडस्ट्री, फोटोग्राफी और क्रिएटिविटी से जुड़े क्षेत्रों में बहुत अच्छा प्रदर्शन करते हैं। वहीं यह लोग तरक्की भी प्राप्त करते हैं, क्योंकि ये जातक कलात्मक और रचनात्मक होते हैं।लव लाइफ&#039;I&#039; लेटर वाले जातक अपने पार्टनर की हर खुशी का ध्यान रखते हैं। यह अपने पार्टनर की भावनाओं को अच्छी तरह समझते हैं।यह जातक प्यार के मामले अपने मन की बात जल्दी जाहिर नहीं करते हैं। क्योंकि इन लोगों के मन में डर बना रहता है। लेकिन जब यह एक बार रिलेशनशिप में आ जाते हैं। तो उसको पूरे दिल से निभाते हैं।अगर इन लोगों का पार्टनर मुश्किल में होता है, तो ये कभी उसका साथ नहीं छोड़ते हैं। यह अपने पार्टनर का हर जगह पूरा ख्याल रखते हैं। लेकिन कई बार अपने जिद्दी स्वभाव की वजह से इनके बीच अनबन होने की आशंका होती है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 16:10:31 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 17 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष दाम्पत्य जीवन में मधुरता। सही दिशा में आगे बढ़ने पर लाभ होगा। उन्नति के योग सहनशक्ति भी बढ़ेगी। धन की आमद भी और खर्च भी।वृषपरोपकार की भावना बढ़ेगी। वाणी और जेब पर लगाम रखें। मांगलिक कार्यों का आयोजन संभव है। अच्छी यात्रा का योग है।मिथुनआपकी पदोन्नति हो सकती है। नए अच्छे सम्पर्क बनेंगे। व्यावसायिक क्षेत्र में सफल रहेंगे। आध्यात्मिक गुरु से भेंट और उत्तम लाभ।कर्कउदासीनता दूर होगी, ऊर्जावान अनुभव करेंगे। आपका कोई राज प्रगट हो सकता है। शारीरिक मानसिक कष्ट देने और बढ़ाने वाला दिन है। धर्म-कर्म में रूचि बढ़ेगी, पूजा पाठ से लाभ।सिंहसमय पर काम पूरा होने से खुशी होगी। दाम्पत्य जीवन में कटुता संभव। अतिथि से मिलकर प्रसन्नता मिलेगी। चिर प्रतीक्षित स्वप्न की पूर्ति होगी।कन्यादाम्पत्य जीवन पर विशेष ध्यान दें। सामाजिक पारिवारिक परिवेश बढ़ेगा। अस्थिरता खर्च की अधिकता और बेकार के झगड़े। सामाजिक समस्याओं के समाधान में सहायक होंगे।तुलाकर्तव्यनिष्ठा की प्रशंसा होगी। अधीनस्थ ऊपर शिकायत कर सकते हैं। अशुभ समाचार के कारण कष्ट और चिंता। व्यावसायिक यात्रा और महत्वपूर्ण बैठक में योगदान।वृश्चिक विवाद बढ़ेंगे, दुखदायी विफलता। शुभ लाभ और सफलता का समाचार। परिश्रम का पूरा फल प्राप्त होगा। लम्बी दूरी की सफल यात्रा।धनुसंचार माध्यमों से सुखद और समाचार। कीमती सामान गुम हो सकता है। साझेदारी में गलतफहमी हो सकती है। पारिवारिक उन्नति और सम्पत्ति की वृद्धि।मकर कुछ गलतफहमियां पनपेगी-भाइयों में। शुभ समाचार मिलेंगे, धन लाभ भी होगा। कोई ठोस निर्णय लेंगे। देश विदेश से सम्पर्क बढ़ेंगे।कुंभसुखद यात्रा के योग है। धन और सम्मान बढ़ेगा। मानसिक अस्थिरता, लक्ष्य प्राप्ति में बाधक। वैचारिक परिवर्तन से सुख मिलेगा।मीनप्रयासों का सही फल मिलेगा। कीमती सामान गुम हो सकता है। कोई बड़ा सौदा &#039;फाइनल&#039; हो सकता है। लोगों से प्रशंसा सुनकर खुशी होगी। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:51:58 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 17 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 17 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 17 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष (Aries): आज बातचीत से पुरानी दूरियाँ मिटेंगी। दिल के दरवाजे खुले रखें, सिंगल लोगों की लाइफ में किसी दिलचस्प शख्स की एंट्री हो सकती है।वृषभ (Taurus): आज साथी के सामने अपनी वाणी में नरमी रखें। बिना बात की बहस से बचें। सिंगल लोग नए रिश्ते के लिए थोड़ा इंतज़ार करें।मिथुन (Gemini): लव लाइफ के लिए आज बेहतरीन दिन है। पार्टनर के साथ मानसिक जुड़ाव बढ़ेगा और कोई छोटा सा सरप्राइज रिश्ते में नई ताजगी लाएगा।कर्क (Cancer): साथी के प्रति आपकी फिक्र और परवाह आज रिश्ते को और मजबूत बनाएगी। सिंगल लोग किसी पुराने दोस्त की तरफ आकर्षित हो सकते हैं।सिंह (Leo): आज रोमांस का जादू बिखरेगा। दिल की बात जुबां पर लाने के लिए दिन शानदार है। शादीशुदा लोगों के बीच पुराना आकर्षण वापस लौटेगा।कन्या (Virgo): बीती बातों को कुरेदने से बचें और वर्तमान का आनंद लें। शुरुआती मतभेद के बाद शाम तक आपसी तालमेल फिर से बेहतर हो जाएगा।तुला (Libra): आज आप और आपके पार्टनर एक ही वेवलेंथ पर होंगे। बिना कहे एक-दूसरे की बात समझ लेना आज के दिन की खूबसूरती होगी।वृच्छिक (Scorpio): साथी के मिजाज को समझने की कोशिश करें, शक या गलतफहमी को जगह न दें। आपका थोड़ा सा विश्वास रिश्ते को बचा लेगा।धनु (Sagittarius): आज पार्टनर के साथ लॉन्ग ड्राइव या डिनर का प्लान बन सकता है। सिंगल लोगों के जीवन में आज कोई खास दस्तक दे सकता है।मकर (Capricorn): व्यस्तता के कारण साथी को समय देना मुश्किल होगा। नाराजगी दूर करने के लिए आपका एक छोटा सा प्यार भरा मैसेज ही काफी रहेगा।कुंभ (Aquarius): आज प्रेम के सितारे बुलंद हैं। पार्टनर के साथ भविष्य की योजनाएं बनेंगी। अविवाहितों के लिए विवाह का कोई अच्छा प्रस्ताव आ सकता है।मीन (Pisces): आज आप थोड़े भावुक रह सकते हैं, इसलिए साथी की बात को दिल से लगाने के बजाय सीधे और शांत होकर संवाद करें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:51:57 +0530</pubDate>
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<title>July Career Predictions: Business Risk से बचें ये राशियाँ, July Career Horoscope में जानें मेष से मीन तक का पूरा भविष्यफल</title>
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<description><![CDATA[ जुलाई का आधा महीना निकल चुका है। हर किसी के मन में यह जिज्ञासा होती है कि यह महीना उनके नौकरी, करियर और व्यापार आदि किस दिशा में आगे बढ़ेगा। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक ग्रहों की चाल हमारे कामकाजी जीवन को गहराई से प्रभावित करती है। इस महीने ग्रहों की स्थिति हर एक राशि के लिए अलग-अलग संकेत बना रही है। जो यह तय करता है कि यह महीना किसके लिए संघर्षों भरा रहेगा और किसके लिए सफलता की नई राह खोलेगा। आइए जानते हैं जुलाई का महीना मेष से लेकर मीन राशि तक के लिए नौकरी और व्यापार आदि के लिए कैसा रहने वाला है।मेष राशिजुलाई के महीने में शनि का साथ मजबूत नहीं होगा। लेकिन बुध की मदद से कुछ कामों में राहत मिल सकती है। विदेश से जुड़े बिजनेस वाले लोगों के लिए स्थिति बेहतर रहेगी। महीने के अंत में शनि के वक्री होने से थोड़ी रुकावट आ सकती है। लेकिन गुरु का साथ औसत परिणाम देने में सहायता करेगा। मेष राशि के लोगों को बिजनेस में जोखिम लेने से बचना चाहिए। नौकरी में मेहनत बढ़ेगी और खासकर फील्ड वर्क से जुड़े लोगों को इसका फायदा मिल सकता है।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 17 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 17 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनवृषभ राशिवृषभ राशि के लोगों के लिए जुलाई का महीना करियर में राहत भरा हो सकता है। शनि की स्थिति मजबूत होने से मेहनत का अच्छा फल मिलेगा। बिजनेस में बुध का सहयोग रहेगा, बस जल्दबाजी और गुस्से से बचें। नौकरी पेशा लोगों को अच्छे रिजल्ट मिलेंगे। हालांकि बीच-बीच में थोड़ी बहुत अड़चने आ सकती हैं।मिथुन राशिइस महीने गुरु आपके पक्ष में होगा। महीने के आखिरी 15 दिनों में थोड़ा ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। नतीजे अनुकूल रहेंगे और व्यापार में कुछ नया करने से बचना चाहिए। नौकरी में जल्दबाजी और गुस्सा करने से बचें। संयम बनाए रखना जरूरी है। ईमानदारी और लगन से काम करने वाले लोगों को अच्छा फल मिलेगा।कर्क राशिइस महीने कर्क राशि के लोगों को मंगल का साथ मिलेगा। मेहनत रंग लाएगी, वहीं शनि की दृष्टि के कारण जल्दबादी करने से बचना चाहिए। व्यापार में परिणाम औसत से बेहतर रह सकते हैं। कोई बड़ा रिस्क लेने से बचें। नौकरी के मामले में यह महीना अनुकूल है। हालांकि आप अपने लक्ष्यों को पूरा कर सकेंगे।सिंह राशिशुक्र और मंगल का साथ रहने से समय आपके पक्ष में रहेगा। वरिष्ठों या सहकर्मियों के साथ तालमेल बिठाने में मुश्किल हो सकती है। लास्ट में नतीजे आपके पक्ष में रहेंगे। व्यापार में नया जोखिम न लें। नौकरी के लिए महीने का पहले 15 दिन अनुकूल रहेंगे।कन्या राशिबुध का गोचर कन्या राशि के लोगों के लिए अनुकूल रहेगा। कार्यक्षेत्र में भी इस महीने राहत रहेगी। बिजनेस में गुरु का साथ लाभकारी रहेगा। हालांकि बड़ा रिस्क लेने से बचें। समझदारी से लिए गए फैसले अच्छा रिजल्ट देंगे। राहु और सूर्य के कारण नौकरी में काफी हद तक अच्छे रिजल्ट मिलेंगे।तुला राशितुला राशि के लोगों के लिए बुध की स्थिति थोड़ी कमजोर होगी। लेकिन गुरु का साथ मिलने से स्थिति राहत देती रहेगी। 16 जुलाई के बाद सूर्य का साथ फायदेमंद रहेगा। बिजनेस में नया रिस्क लेने से बचें। नौकरीपेशा लोगों के लिए यह महीना अनुकूल रहेगा।वृश्चिक राशिमहीने का पहला हिस्सा करियर के लिए थोड़ा कमजोर रहेगा। जुलाई का आधा महीना गुजर जाने के बाद कार्यक्षेत्र की स्थिति में सुधार आएगा। हालांकि नौकरी में वाद-विवाद की स्थिति से बचना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। इस महीने का दूसरा हिस्सा बेहतर परिणाम देगा।धनु राशिइस महीने व्यापार-व्यवसाय में बुध की स्थिति अच्छे परिणाम ला सकती है। नया निवेश करने से बचना चाहिए। रिस्क से थोड़ा दूरी बनाकर रखना चाहिए। नौकरीपेशा लोगों को कठिन मेहनत करनी पड़ सकती है। मंगल का गोचर आपके पक्ष में अच्छे रिजल्ट लाने का काम करेगा। शनि के कारण बीच-बीच में कुछ परेशानियां आ सकती हैं।मकर राशिशुक्र की स्थिति बेहतर होने से कार्यक्षेत्र में राहत मिलेगी। बड़े-बुजुर्गों की सलाह व्यापार में फायदेमंद रहेगा। बुध का सहयोग मिलेगा, लेकिन 16 जुलाई के बाद सूर्य की स्थिति अनुकूल रहेगी। नौकरीपेशा लोगों के लिए यह महीना सामान्य रूप से अनुकूल रहेगा।कुंभ राशिइस महीने मंगल की स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं होगी। कार्यक्षेत्र में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। लेकिन बड़ा नुकसान होने से बचाव होगा। बिजनेस में किसी भी तरह का खतरा लेने से बचना चाहिए। नौकरीपेशा लोगों के लिए बृहस्पति ग्रह की स्थिति मजबूत रहेगी।मीन राशिबृहस्पति की मजबूत स्थिति कार्यक्षेत्र में अच्छे परिणाम दिलाएगी। भाग्य के स्वामी मंगल का सहयोग मिलेगा। व्यापार में बुध की स्थिति फायदेमंद रहेगी। नौकरीपेशा लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। खासकर महिला सहकर्मियों के साथ विवाद की स्थिति से बचना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:51:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Chaturmas 2026: जुलाई में कबसे शुरू हो रहा है चातुर्मास, जानें क्यों बंद हो जाएंगे सभी मांगलिक कार्य और क्या है Spiritual महत्व?</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में चातुर्मास का महीना बेहद खास और पवित्र माना जाता है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से आरंभ होकर कार्तिक मास की देवप्रबोधिनी एकादशी तक चलती है। चातुर्मास को आध्यात्मिक साधना, आत्मशुद्धि और अनुशासित जीवन के लिए अत्यंत पवित्र काल माना जाता है। ‘चातुर्मास’ शब्द का अर्थ है चार महीनों की अवधि है। इस अवधि में सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि जीवनशैली और हेल्थ के लिए भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।चातुर्मास में क्या होता है?धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों की अवधि में भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग की शय्या पर योग निद्रा में चले जाते हैं। इसलिए इस समय को देवों के विश्राम काल के रुप में जाना जाता है। इस दौरान सृष्टि का संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव के हाथों में होती है। क्योंकि इन चार महीनों श्री विष्णु निद्रावस्था में रहते हैं। मान्यता के अनुसार, इस समय विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य बिल्कुल भी नहीं किए जाते हैं। इस दौरान सिर्फ पूजा-पाठ, व्रत और तप के लिए यह समय सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।चातुर्मास 2026 कब से आरंभ हो रहा है ?इस बार चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई से शुरु होकर 20 नवंबर तक रहेगा। व्यक्ति को इन चार महीनों तक संयमित जीवन अपनाने, इंद्रियों पर नियंत्रण पाना और ईश्वर के प्रति भक्ति में लीन रहने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस समय किए जाने वाले जप, तप और दान का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। वहीं, सावन में शिव भक्ति, भाद्रपद में श्रीकृष्ण और गणेश पूजन का विशेष महत्व बताया गया है।चातुर्मास में क्या करें और क्या न करेंवैज्ञानिक नजरिए से इस दौरान बरसात के मौसम रहता है, जब वातावरण में नमी बढ़ जाता है और पाचन शक्ति कमजोर हो सकती है। संक्रमण और बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। इस समय संक्रमण और बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। इसलिए इस दौरान जितना हो सके सात्विक भोजन और उपवास करें। जिससे शरीर हेल्दी और संतुलित बना रहता है।किन चीजों का परहेज करें - चातुर्मास में खान-पान और जीवनशैली में कुछ खास नियमों का पालन करना बेहद जरुरी है। - तामसिक भोजन जैसे कि मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन से दूरी बना लें। - गौरतलब है कि सावन में री पत्तेदार सब्जियों से परहेज, भाद्रपद में दही का त्याग, आश्विन में दूध का सेवन कम करना और कार्तिक में कुछ दालों का सेवन न करना।क्या करना अनिवार्य है?- इस दौरान भूमि पर शयन, ब्रह्मचर्य का पालन, सत्य बोलना और मौन रहना सबसे जरुरी है। - चातुर्मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे कार्य वर्जित होते हैं। इस दौरान भूलकर भी न करें। - इस अवधि में व्यक्ति को अनुशासन, संयम और आध्यात्मिक उन्नति के रास्ते में जरुर जाना चाहिए।चातुर्मास के नियम-  चातुर्मास में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करना बेहद ही शुभ माना जाता है। - इन चार महीनों में नियमित रुप से रोजाना विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ जरूर करें। - इस अवधि में जरुरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और धन आदि का दान करना शुभ माना जाता है। - चातुर्मास में कोशिश करें कि रोजाना सुबह-शाम नियमित रुप से तुलसी में घी का दीपक जलाएं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:51:55 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 18 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष बच्चों का भी सुख मिलेगा। सब जगह आपके नाम की चर्चा रहेगी। अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई देंगे। बहुत दिनों बाद किसी प्रिय से मिलन होगा।वृषस्वास्थ्य और दस्तावेजों का ध्यान रखें। असफल प्रेम संबंध निराशा और बेचैनी। निकट संबंधी से संबंधित अशुभ समाचार। अप्रिय घटना और ऐसा ही समाचार मिल सकता है।मिथुनआपकी विश्वसनीयता और लोकप्रियता बढ़ेगी। अपने ही लोग फंसा कर रख देंगे। पारिवारिक जीवन स्तर उत्तम बनेगा। स्वास्थ्य में सुधार से प्रसन्नता।कर्कअतीत की मधुर स्मृतियां भावुक बनाएंगी। वाद-विवाद से बचें। धर्म-कर्म के प्रति रूचि, उच्च शिक्षा के अवसर। न्यायालय में आपको विजय प्राप्त होगी।सिंहआर्थिक स्थिति में मजबूती आएगी। लाभ ही लाभ के योग, अच्छे समाचार भी। रोजगार व्यवसाय में परिवर्तन के संकेत। योग और अध्यात्म से सुख प्राप्ति मिलेगी।कन्याविरोधी पक्ष प्रबल रहेगा। लाभ होना या न होना बराबर हो जाएगा। प्रश्नों के निर्भीक होकर उत्तर देंगे। स्वास्थ्य में सुधार होगा, तनाव से मुक्ति।तुलाआमदनी और खर्च सम समान। मिश्रित फल, शुभाशुभ घटनाएं। बाहरी लोगों के कारण घर में फूट- असंतोष। पति-पत्नी के बीच &#039;तीसरे&#039; को आगमन तनाव देगा। वृश्चिक उज्ज्वल भविष्य है, चिंतित न हो। धार्मिक वातावरण में रहना चाहेंगे। मांगलिक कार्यों में व्यस्तता बनी रहेगी। उदासीनता दूर होगी, डूबा धन मिलेगा।धनुउच्चाधिकारी से तनाव बढ़ सकता है। पहले किए गए कार्यों में उत्तम फल। स्वास्थ्य खराब हो सकता है। निंदा और आलोचना का सामना करना पड़ेगा।मकर अच्छे वातावरण में प्रसन्नता सफलता भी। संकट टल जाएगें। पत्रकार सम्मेलन का आयोजन करेंगे। परिवर्तन का दिन, परिवार के लिए विशेष।कुंभकिसी सामाजिक संस्था में उच्चपद मिलेगा। लोग आपसे ईर्ष्या करेंगे। अच्छा दिन है, अवसर का लाभ उठाएं। विरोधी पक्ष प्रबल, शत्रु भी बढ़ेंगे।मीनविरोधी पक्ष प्रबल रहेगा। आमदनी अच्छी होगी। हालात सुधरेंगे, कार्य क्षेत्र विस्तृत होगा। धन खर्च और डॉक्टरों के चक्कर। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:51:54 +0530</pubDate>
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<title>Shravan Rules: सावन में दाढ़ी&#45;बाल कटवाना क्यों है वर्जित? जानिए इसके पीछे का ज्योतिषीय कनेक्शन और प्रभाव</title>
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<description><![CDATA[ भगवान शिव को श्रावण मास सबसे प्रिय है। इस बार सावन का महीना 30 जुलाई से आरंभ होकर 28 अगस्त तक चलेगा। यह महीना भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने के लिए विशेष शुभ माना जाता है। सावन के महीने में शिव भक्त सोमवार का व्रत करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस पवित्र महीने में नियमित रुप से दैनिक दिनचर्या से संबंधित सभी नियमों का पालन करना  विशेष माना जाता है। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो भगवान शिव रुष्ट भी हो जाते हैं। सावन के महीने में दैनिक दिनचर्या का एक नियम दाढ़ी और बाल कटवाने से संबंधित है।  अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि सावन के महीने में दाढ़ी एवं बाल कटवाने चाहिए या नहीं। तो चलिए बिना देर किए आपको इस लेख में विस्तार से बताते हैं बाल कटवाना शुभ है या अशुभ।क्या सावन में दाढ़ी-बाल कटवाने चाहिए?धार्मिक मान्यता के अनुसार, भूलकर भी सावन के महीने में दाढ़ी और बाल कटवाना नहीं चाहिए। पूरे महीने बाल व दाढ़ी कटाना वर्जित माना जाता है। खासकतर,जो लोग सोमवार का व्रत रखेंगे या फिर कांवड़ यात्रा में शामिल होंगे। इन लोगों को सावन के महीने में दाढ़ी-बाल कटवाने जरुर बचें। इस दौरान इन नियमों को सख्ती से पालन करें। अगर आप नियमों का पालन नहीं करेंगे तो जीवन में अशुभ परिणाम प्राप्त होंगे। भगवान शिव नाराज हो जाते हैं, जिससे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस नियम को जरुर फॉलो करें।जानें इसके पीछे का कारणसावन का पवित्र महीना भगवान शंकर की पूजा-अर्चना करने के लिए बेहद शुभ होता है। वैसे भी समय महादेव की तपस्या करने का होता है। इसलिए दाढ़ी और बाल कटवाने के लिए मना किया जाता है। माना जाता है कि सावन सोमवार व्रत के समय दाढ़ी और बाल कटवाने से व्रत टूट सकता है, जिससे साधक को पुण्य की प्राप्त नहीं होती है।ज्योतिष शास्त्र में भी बताया गया है कि बालों की सुंदरता और चमक संबंध सुख, विवाह, प्रेम, सौंदर्य और कला के कारक  शुक्र ग्रह से होता है। मान्यता है कि सावन के महीने में दाढ़ी-बाल कटवाने से व्यक्ति की कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर हो जाता है, जिस कारण से घर में दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा का वास हो जाता है। इतना ही नहीं व्यक्ति को आर्थिक तंगी और वैवाहिक जीवन में भी कलह का सामना करना पड़ता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:51:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 18 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 18 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 18 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष (Aries) - भाव: समर्पणआज आपकी उग्रता प्रेम के समर्पण में बदलेगी। पार्टनर के प्रति आपका बढ़ता झुकाव पुराने हर मनमुटाव को खत्म कर देगा। सिंगल लोगों के जीवन में नए जज्बातों का संचार होगा।वृषभ (Taurus) - भाव: स्थिरताआप रिश्ते में स्थायित्व पसंद करते हैं, और आज यही स्थिरता आपके पार्टनर को सुकून देगी। गुस्से पर काबू रखें; आपकी शांत फिक्र आज उनके दिल को छू लेगी।मिथुन (Gemini) - भाव: अभिव्यक्तिआपके भीतर का संवाद आज रिश्ते में नया उत्साह भरेगा। पार्टनर से अपने दिल की हर बात खुलकर कहें, शब्दों का यही जादू आज आपके प्रेम को और गहरा कर देगा।कर्क (Cancer) - भाव: आत्मीयताआप स्वभाव से बेहद भावुक और परवाह करने वाले हैं। आज आपकी यही आत्मीयता साथी के लिए एक सुरक्षित अहसास बनेगी, जिससे आपसी भरोसा और मजबूत होगा।सिंह (Leo) - भाव: निश्छलताआपका प्रेम हमेशा निश्छल और पूरी शिद्दत वाला होता है। आज अपने हमसफर पर खुलकर प्यार लुटाने का दिन है। आपके इस खुले अंदाज से पार्टनर का दिन बन जाएगा।कन्या (Virgo) - भाव: संवेदनशीलताआज अपनी तार्किक सोच को थोड़ा आराम दें और दिल से सोचें। साथी की छोटी-छोटी बातों को महसूस करना और उन्हें अहमियत देना आज आपके रिश्ते को नई ऊर्जा देगा।तुला (Libra) - भाव: संतुलनरिश्तों में सामंजस्य बिठाना आपकी सबसे बड़ी खूबी है। आज आप पार्टनर की हर उलझन को अपने संतुलन से सुलझा देंगे। दोनों के बीच एक खूबसूरत मानसिक तालमेल रहेगा।वृश्चिक (Scorpio) - भाव: गहनताआपका प्रेम बहुत गहरा और आवेगी होता है। आज अपने इस जुनून को सकारात्मक दिशा दें। साथी पर अधिकार जताने के बजाय उन्हें अपनी अटूट निष्ठा का अहसास कराएं।धनु (Sagittarius) - भाव: स्वतंत्रताआप प्रेम में भी अपनी आजादी पसंद करते हैं। आज पार्टनर को भी थोड़ा स्पेस दें और उनके साथ किसी वैचारिक चर्चा का आनंद लें। शाम को कोई सुखद सरप्राइज मिल सकता है।मकर (Capricorn) - भाव: कर्तव्यआप प्यार को एक जिम्मेदारी की तरह निभाते हैं। आज अपनी व्यस्तता के बीच से थोड़ा समय निकालकर साथी को यह अहसास कराएं कि वे आपकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर हैं।कुंभ (Aquarius) - भाव: अनन्यताआपका प्रेम सबसे जुदा और अनोखा होता है। आज पार्टनर के साथ मिलकर भविष्य के कुछ अनोखे सपने बुनने का दिन है। सितारों का साथ आपके इस जुड़ाव को और गहरा करेगा।मीन (Pisces) - भाव: रूहानियतआप सीधे रूह से जुड़ने वाले प्रेमी हैं। आज आपकी यही संवेदनशीलता साथी को आपके और करीब लाएगी। किसी भी गलतफहमी को मन में रखने के बजाय शांत रहकर बात करें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:51:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Kokila Vrat 2026 Date: कब से शुरू हो रहा है कोकिला व्रत? जानें शुभ Muhurat और पूजा की संपूर्ण विधि और इसका धार्मिक महत्व</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म में व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसे ही हिंदू धर्म में कोकिला व्रत का खास महत्वपूर्ण है।  आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि से इस व्रत का आरंभ होता और इसका समापन श्रावण पूर्णिमा तिथि पर होता है। कोकिला व्रत सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए करती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं भी इस व्रत को शिवजी जैसा वर प्राप्ति की कामना करती हैं। यह व्रत आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा तिथि से शुरु होकर पूरे एक माह तक चलता है। इस व्रत में देवी पार्वती के कोकिला यानी कोयल स्वरुप और शिवजी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कोकिला व्रत करने से महिलाओं को सुख, सौभाग्य और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। आइए आपको बताते हैं कोकिला व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका महत्व।कोकिला व्रत कब है?कोकिला व्रत आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा तिथि से लेकर श्रावण पूर्णिमा तक रखा जाता है। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 28 जुलाई, मंगलवार को शाम के 6 बजकर 19 मिनट पर होगा। इसके अगले दिन यानी 29 जुलाई, बुधवार को रात 8 बजकर 6 मिनट तक पूर्णिमा तिथि रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, 29 जुलाई से कोकिला व्रत की शुरुआत हो रही है और श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि  27 अगस्त, गुरुवार को सुबह 9 बजकर 9 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानी 28 अगस्त, शुक्रवार को सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगी।  उदया तिथि के अनुसार, 28 अगस्त को कोकिला व्रत समाप्त होता है और इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा।कोकिला व्रत मुहूर्त-आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा तिथि आरंभ	28 जुलाई, मंगलवार को शाम के 6 बजकर 19 मिनट पर-आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा तिथि समाप्त	29 जुलाई, बुधवार को रात में 8 बजकर 6 मिनट पर-कोकिला व्रत की शुरुआत	29 जुलाई, बुधवार-श्रावण पूर्णिमा तिथि आरंभ	27 अगस्त, गुरुवार को सुबह 9 बजकर 9 मिनट पर-श्रावण पूर्णिमा तिथि समाप्त	28 अगस्त, शुक्रवार को सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर-कोकिला व्रत का समापन	28 अगस्त, शुक्रवारक्या है कोकिला व्रत?कोकिला व्रत का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा है। धार्मिक कथा के अनुसार, राजा दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव के अपमान से व्यथित होकर माता सती ने अपना देह योगाग्नि में त्याग दिया था। जिसके बाद उन्हें कुछ समय तक कोयल के रुप में रहना पड़ा। फिर उन्होंने पर्वतराज हिमालय के घर में माता पार्वती के रूप में जन्म लिया और कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव को पुनः पति के रुप में प्राप्त किया। इसलिए यह व्रत शिव-पार्वती के अटूट दांपत्य और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। कोकिला व्रत पूजा विधि- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। जिसके बाद दिन की शुरुआत में सूर्य को अर्घ्य दें। - सबसे पहले व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद माता पार्वती और शिवजी की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें। कुछ जगहों पर मिट्टी से कोयल की प्रतिमा भी बनाई जाती है। यह प्रतिमा देवी पार्वती के प्रतीक रूप में स्थापित करती है। वहीं, पूजा और आरती के बाद इस मिट्टी से बनी कोयल की प्रतिमा श्रद्धापूर्वक ब्राह्मण या अपने सास-ससुर को दान में दी जाती है। - इसके बाद भगवान शिव को दूध और गंगाजल के साथ अभिषेक करें और उन्हें बेलपत्र व धतूरा अर्पित करें। साथ ही आप सफेद, लाल फूल, भांग, धूप-दीप और अष्टगंध का उपयोग पूजा में करें। - अपनी क्षमता के अनुसार इस व्रत को निराहर रहकर पूरा कर सकते हैं। अगर संभव न हो तो आप एक समय फलाहार करके भी कोकिला व्रत कर सकते हैं।  - वहीं, शाम के समय कोकिला व्रत में पूजा का खास महत्व बताया गया है। इस दिन शाम को विधि-विधान से पूजा और आरती करें। शिवजी और मां पार्वती को भोग लगाएं। - शाम की पूजा करने के बाद ही व्रती को फलाहर करना चाहिए। इसके साथ ही, कोकिला व्रत का पाठ भी इस दिन जरुर करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से अत्यंत शुभ फलों की प्राप्ति होती है। क्या है इस व्रत का धार्मिक महत्व?असल में कोकिला व्रत सिर्फ मनचाहा वर पाने का ही नहीं, बल्कि धैर्य, निष्ठा,तप और वैवाहिक समपर्ण का प्रतीक भी है। यह व्रत भगवान शिव और पार्वती के आदर्श दांपत्य से जुड़ा हुआ है। इस व्रत से महिलाओं को श्रद्धा, संयम और सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने का संदेश दिया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सच्चे मन और विश्वास के साथ किया गया यह व्रत शुभ फलदायी माना जाता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:51:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Devshayani Ekadashi 2026: 25 जुलाई से बदलेगा इन 3 राशियों का भाग्य, करियर में होगा बड़ा उछाल</title>
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<description><![CDATA[ इस साल देवशयनी एकादशी 25 जुलाई, शनिवार को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी के साथ चातुर्मास की भी शुरुआत होती है। हालांकि इस दौरान भी भगवान विष्णु की पूजा और एकादशी का व्रत उतना ही शुभ माना जाता है।ज्योतिष के मुताबिक, इस बार की देवशयनी एकादशी 3 राशियों के लिए खास तौर पर शुभ मानी जा रही है। इन लोगों को करियर, पैसे और रिश्तों में अच्छे बदलाव देखने को मिल सकते हैं।मेष राशि वालों को करियर में मिल सकती है नई सफलतादेवशयनी एकादशी मेष राशि वालों के लिए अच्छी खबर लेकर आ सकती है। भगवान विष्णु की कृपा से कमाई के नए मौके मिल सकते हैं। अगर आपने पहले कहीं निवेश किया है, तो उससे फायदा होने की संभावना है। हालांकि कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले अच्छी तरह सोच लें।नौकरी या बिजनेस में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं और आपकी मेहनत का अच्छा रिजल्ट देखने को मिलेगा। बस जरूरत से ज्यादा कॉन्फिडेंट होने से बचें, क्योंकि इससे काम बिगड़ भी सकता है। लव लाइफ और शादीशुदा जिंदगी में भी खुशियां बढ़ सकती हैं और पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा।शुभ रंग: नीला इसे भी पढ़ें: Sawan 2026 में Solah Somvar Vrat शुरू करने से पहले जानें ये 3 बड़े Rules और इसका विशेष धार्मिक महत्ववृषभ राशि वालों को मेहनत का मिलेगा पूरा फायदावृषभ राशि वालों के लिए यह एकादशी करियर के लिहाज से काफी अच्छी रह सकती है। ऑफिस या काम की जगह पर आपकी मेहनत की तारीफ होगी और अच्छे नतीजे मिल सकते हैं।भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा से आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है। पुराने निवेश से अचानक फायदा मिलने के योग हैं, जिससे बचत भी बढ़ सकती है। अगर आप किसी क्रिएटिव फील्ड में हैं, तो आपको नई पहचान और अच्छे मौके मिल सकते हैं।शुभ रंग: लाल इसे भी पढ़ें: Sawan 2026 Calendar: शिव का प्रिय महीना कब होगा शुरू? जानें सावन सोमवार व्रत की पूरी Dates.कन्या राशि वालों को पैसों और परिवार दोनों में मिलेगी खुशियांकन्या राशि वालों के लिए देवशयनी एकादशी आर्थिक मामलों में शुभ मानी जा रही है। मां लक्ष्मी की कृपा से पैसों से जुड़ी परेशानियां कम हो सकती हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।अगर आप कोई नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं, तो समय आपके पक्ष में रह सकता है। करियर में आगे बढ़ने के अच्छे मौके मिलेंगे। सेहत ठीक रहेगी और परिवार का माहौल भी खुशहाल रहेगा। दोस्तों और करीबियों का साथ मिलेगा। किसी पुराने दोस्त से मुलाकात भी हो सकती है, जो आपको खुशी देगी।शुभ रंग: सफेद ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:51:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Puri में Lord Jagannath Rath Yatra का दिव्य आगाज, 100 यज्ञों के पुण्य फल और मोक्ष की अद्भुत परंपरा</title>
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<description><![CDATA[ आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को ओडिशा के पुरी नामक स्थान और गुजरात के द्वारका पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा बड़ी धूमधाम से निकाली जाती है। इस उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं का भक्ति भाव देखते ही बनता है क्योंकि जिस रथ पर भगवान सवारी करते हैं उसे घोड़े या अन्य जानवर नहीं बल्कि श्रद्धालुगण ही खींच रहे होते हैं। पुरी में श्री जगदीश भगवान को सपरिवार विशाल रथ पर आरुढ़ कराकर भ्रमण करवाया जाता है फिर वापस लौटने पर यथास्थान स्थापित किया जाता है। यह उत्सव अद्वितीय होता है। इस अवसर पर देश विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां एकत्र होते हैं।भगवद भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और उत्सव मनाते हैं। पुरी में जिस रथ पर भगवान की सवारी चलती है वह विशाल एवं अद्वितीय है। वह 45 फुट ऊंचा, 35 फुट लंबा तथा इतना ही चौड़ाई वाला होता है। इसमें सात फुट व्यास के 16 पहिये होते हैं। इसी तरह बालभद्र जी का रथ 44 फुट ऊंचा, 12 पहियों वाला तथा सुभद्रा जी का रथ 43 फुट ऊंचा होता है। इनके रथ में भी 12 पहिये होते हैं। प्रतिवर्ष नए रथों का निर्माण किया जाता है। भगवान मंदिर के सिंहद्वार पर बैठकर जनकपुरी की ओर रथयात्रा करते हैं। जनकपुरी में तीन दिन का विश्राम होता है जहां उनकी भेंट श्री लक्ष्मीजी से होती है। इसके बाद भगवान पुनः श्री जगन्नाथ पुरी लौटकर आसनरुढ़ हो जाते हैं।इसे भी पढ़ें: आस्था, परम्परा, आध्यात्मिक चेतना का विराट उत्सवदस दिवसीय यह रथयात्रा भारत में मनाए जाने वाले धार्मिक उत्सवों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। भगवान श्रीकृष्ण के अवतार &#039;जगन्नाथ&#039; की रथयात्रा का पुण्य सौ यज्ञों के बराबर माना जाता है। यात्रा की तैयारी अक्षय तृतीया के दिन श्रीकृष्ण, बलराम और सुभद्रा के रथों के निर्माण के साथ ही शुरू हो जाती है। जगन्नाथ जी का रथ &#039;गरुड़ध्वज&#039; या &#039;कपिलध्वज&#039; कहलाता है। रथ पर जो ध्वज है, उसे &#039;त्रैलोक्यमोहिनी&#039; या ‘नंदीघोष’ रथ कहते हैं। बलराम जी का रथ &#039;तलध्वज&#039; के नाम से पहचाना जाता है। रथ के ध्वज को &#039;उनानी&#039; कहते हैं। जिस रस्सी से रथ खींचा जाता है वह &#039;वासुकी&#039; कहलाता है। सुभद्रा का रथ &#039;पद्मध्वज&#039; कहलाता है। रथ ध्वज &#039;नदंबिक&#039; कहलाता है। इसे खींचने वाली रस्सी को &#039;स्वर्णचूडा&#039; कहते हैं।रथयात्रा आरंभ होने से पहले पुराने राजाओं के वंशज पारंपरिक ढंग से सोने के हत्थे वाली झाडू से ठाकुर जी के प्रस्थान मार्ग को साफ करते हैं। इसके बाद मंत्रोच्चार एवं जयघोष के साथ रथयात्रा शुरू होती है। सर्वप्रथम बलभद्र का रथ तालध्वज प्रस्थान करता है। थोड़ी देर बाद सुभद्रा की यात्रा शुरू होती है। अंत में लोग जगन्नाथ जी के रथ को बड़े ही श्रद्धापूर्वक खींचते हैं। लोग मानते हैं कि रथयात्रा में सहयोग से मोक्ष मिलता है, अत: सभी श्रद्धालु कुछ पल के लिए रथ खींचने को आतुर रहते हैं। जगन्नाथ जी की यह रथयात्रा गुंडीचा मंदिर पहुंचकर संपन्न होती है। &#039;गुंडीचा मंदिर&#039; वहीं पर स्थित है जहां विश्वकर्मा जी ने तीनों देव प्रतिमाओं का निर्माण किया था। यह भगवान की मौसी का घर भी माना जाता है। यहां भगवान एक सप्ताह प्रवास करते हैं और इस दौरान यहीं पर उनकी पूजा की जाती है। आषाढ़ शुक्ल दशमी को जगन्नाथ जी की वापसी यात्रा शुरू होती है। शाम तक रथ जगन्नाथ मंदिर पहुंच जाते हैं लेकिन प्रतिमाओं को अगले दिन ही मंत्रोच्चार के साथ मंदिर के गर्भगृह में फिर से स्थापित किया जाता है।- शुभा दुबे ]]></description>
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<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:51:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 15 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 15 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 15 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष (Aries): आज का दिन रिश्तों में संवाद की नई रोशनी लेकर आएगा। अगर बीते कुछ दिनों से कोई कड़वाहट थी, तो आज वह बातचीत की मिठास में बदल जाएगी। दिल के दरवाजे खुले रखें, सिंगल लोगों की मुलाकात आज किसी ऐसे शख्स से हो सकती है जो उनकी सोच से मेल खाता हो।वृषभ (Taurus): आज का दिन आपके सब्र की परीक्षा ले सकता है। साथी के साथ बातचीत करते समय लहजे में थोड़ी नरमी रखें; एक गलत शब्द भी गलतफहमी की वजह बन सकता है। सिंगल लोगों के लिए आज का मंत्र है—जल्दबाजी से बचें, सही वक्त का इंतजार करें।मिथुन (Gemini): आज आपकी लव लाइफ में खुशियों के रंग बिखरने वाले हैं। आप अपने पार्टनर के साथ न सिर्फ बेहतरीन वक्त बिताएंगे, बल्कि उनके साथ एक मानसिक जुड़ाव भी महसूस करेंगे। कोई छोटा सा सरप्राइज आज आपके रिश्ते में नई जान फूंक सकता है।कर्क (Cancer): आज आपका झुकाव अपने साथी को हर मुमकिन खुशी और सुरक्षा देने की तरफ रहेगा। आपकी यही परवाह आपके प्रति उनका सम्मान और बढ़ा देगी। सिंगल लोग आज किसी पुराने परिचित के करीब आ सकते हैं, जिससे दोस्ती प्यार में बदल सकती है।सिंह (Leo): आज का दिन रोमांस के नाम रहेगा। दिल में दबे जज्बातों को जुबां पर लाने के लिए समय बेहद खूबसूरत है; अगर किसी से दिल की बात कहनी है तो झिझक छोड़ दें। विवाहित जोड़ों के बीच आज एक नया आकर्षण और उत्साह देखने को मिलेगा।कन्या (Virgo): आज पुराने विवादों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने का दिन है। बीती बातों को कुरेदने से रिश्ता कमजोर हो सकता है, इसलिए वर्तमान के खूबसूरत पलों का आनंद लें। शाम होते-होते आपसी तालमेल फिर से बेहतर हो जाएगा।तुला (Libra): आज आप और आपके पार्टनर एक ही मानसिक धरातल पर होंगे, जिससे एक-दूसरे को समझना बेहद आसान हो जाएगा। दूर रहने वाले प्रेमी आज तकनीक के जरिए एक-दूसरे के बेहद करीब महसूस करेंगे और भविष्य की खुशनुमा यादें बुनेंगे।वृश्चिक (Scorpio): आज साथी के बदले हुए मिजाज से परेशान होने के बजाय, उनकी खामोशी को समझने की कोशिश करें। शक या अविश्वास को अपने खूबसूरत रिश्ते पर हावी न होने दें। थोड़ी सी समझदारी आज बड़े विवाद को टाल सकती है।धनु (Sagittarius): आज का दिन अपने पार्टनर के साथ किसी खूबसूरत सफर या यादगार डिनर पर जाने का है। एक-दूसरे के साथ बिताया यह वक्त आपके रिश्ते को और गहरा करेगा। सिंगल लोगों के जीवन में आज किसी खास शख्स की दस्तक हो सकती है।मकर (Capricorn): काम की व्यस्तता आज आपको अपने पार्टनर से थोड़ा दूर रख सकती है, जिससे उनके मन में थोड़ी नाराजगी होना स्वाभाविक है। लेकिन आपका एक प्यार भरा संदेश या छोटी सी कॉल भी उनकी सारी शिकायतें दूर करने के लिए काफी होगी।कुंभ (Aquarius): आज प्रेम के सितारे आपके पक्ष में हैं। पार्टनर के साथ आपका तालमेल इतना बेहतरीन रहेगा कि आप मिलकर जीवन के बड़े फैसले ले सकते हैं। अविवाहित लोगों के लिए आज विवाह या प्रेम का कोई खूबसूरत प्रस्ताव आने के योग हैं।मीन (Pisces): आज आप थोड़े ज्यादा भावुक रह सकते हैं, जिससे साथी की कोई साधारण बात भी आपके दिल को ठेस पहुंचा सकती है। अपनी भावनाओं पर थोड़ा नियंत्रण रखें और किसी भी बात को दिल से लगाने के बजाय सीधे संवाद का रास्ता चुनें। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 16 Jul 2026 17:15:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Love, Horoscope, For, July, 2026, आज, का, प्रेम, राशिफल, जुलाई, 2026, प्रेमियों, के, लिए, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन</media:keywords>
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<title>Love Horoscope For 16 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 16 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 16 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष (Aries): आज का दिन दिलों की दूरियाँ मिटाने का है। अगर पिछले कुछ दिनों से आपके बीच एक खामोश दीवार थी, तो आज आपकी एक मुस्कान और मीठी बात उस दीवार को गिरा देगी। सिंगल लोग आज किसी की आँखों में अपने लिए एक अनजाना सा खिंचाव महसूस कर सकते हैं।वृषभ (Taurus): आज प्यार में थोड़ी परिपक्वता (maturity) दिखाने का दिन है। साथी का मूड थोड़ा उखड़ा हुआ हो सकता है, ऐसे में उनकी बात काटने के बजाय उन्हें ध्यान से सुनें। याद रखें, कभी-कभी मौन रहकर भी प्यार का इज़हार किया जाता है। सिंगल लोग आज किसी भी नए रिश्ते की शुरुआत करने में जल्दबाजी न दिखाएं।मिथुन (Gemini): आज का दिन आपके रिश्ते में एक नई ताजगी और महक लेकर आया है। आप दोनों के बीच आज शब्दों से ज्यादा धड़कनों की भाषा काम करेगी। साथी से मिलने वाला कोई छोटा सा सरप्राइज या उनकी जादुई जादुई झप्पी (hug) आपका पूरा दिन बना देगी।कर्क (Cancer): आज आप अपने हमसफर के लिए एक मजबूत ढाल की तरह खड़े रहेंगे। उनकी छोटी से छोटी जरूरत और फिक्र का ध्यान रखना आपके रिश्ते की जड़ों को और गहरा कर देगा। सिंगल लोगों को आज एहसास हो सकता है कि जिसे वो हर जगह ढूंढ रहे थे, वो कोई और नहीं बल्कि उनका एक पुराना और पक्का दोस्त ही है।सिंह (Leo): आज का दिन आपके भीतर के रोमांटिक इंसान को जगाने का है। अगर दिल में किसी के लिए मोहब्बत का दरिया बह रहा है, तो आज उसे शब्दों में पिरोकर कह डालिए, जवाब सकारात्मक मिलने की पूरी उम्मीद है। शादीशुदा जोड़ों के जीवन में आज पुरानी यादें और वही पुराना जादू दोबारा लौट आएगा।कन्या (Virgo): आज पुराने गिले-शिकवों की राख को कुरेदने से बचें। गुज़री बातें सिर्फ दर्द देती हैं, इसलिए आज हाथ थामकर आने वाले कल की बात करें। शाम का समय बेहद सुकून भरा रहेगा, जहाँ आप दोनों एक-दूसरे के सानिध्य का आनंद ले पाएंगे।तुला (Libra): आज आपकी और आपके पार्टनर की लहरें (vibes) पूरी तरह मैच करेंगी। एक-दूसरे को बिना कुछ कहे समझ लेना आज के दिन की सबसे बड़ी खूबसूरती होगी। जो लोग लॉन्ग डिस्टेंस में हैं, आज उनकी वीडियो कॉल सिर्फ बातचीत नहीं, बल्कि दो रूहों का मिलन जैसी महसूस होगी।वृश्चिक (Scorpio): प्यार में विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी है, और आज इसी विश्वास की परीक्षा हो सकती है। साथी के व्यवहार में अगर कोई तल्खी दिखे, तो उसे उनका गुस्सा नहीं बल्कि उनकी परेशानी समझें। शक का कोई भी बीज आज अपने दिल में न पनपने दें।धनु (Sagittarius): आज का दिन रोज़मर्रा की भागदौड़ से दूर, सिर्फ और सिर्फ एक-दूसरे के नाम करने का है। किसी शांत जगह पर लॉन्ग ड्राइव या कैंडललाइट डिनर आपके रिश्ते में एक नया उत्साह भर देगा। सिंगल लोगों के जीवन के सूनेपन को दूर करने के लिए आज कोई खास दस्तक दे सकता है।मकर (Capricorn): आज जिम्मेदारियों का बोझ आपको अपने हमसफर को वक्त देने से रोक सकता है। पार्टनर का उदास होना लाज़मी है, लेकिन आपकी एक जादू भरी आवाज़ (कॉल) या एक छोटा सा रोमांटिक मैसेज उनकी इस उदासी को पल भर में दूर कर देगा।कुंभ (Aquarius): आज सितारे आपके प्रेम जीवन पर पूरी तरह मेहरबान हैं। आप अपने पार्टनर के साथ एक ऐसा आत्मीय जुड़ाव महसूस करेंगे, जहाँ भविष्य के सपने बुनना बेहद आसान हो जाएगा। अविवाहित लोगों के लिए आज का दिन कोई बड़ा और खूबसूरत मोड़ लेकर आ सकता है।मीन (Pisces): आज आपकी भावनाएं समंदर की लहरों की तरह उफान पर रहेंगी। साथी की कोई भी बात सीधे दिल पर लग सकती है, इसलिए अति-संवेदनशील होने से बचें। अपने पार्टनर पर भरोसा रखें, उनका इरादा आपका दिल दुखाने का कभी नहीं होता। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 16 Jul 2026 17:15:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 16 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष नौकरी में चयन हो सकता है। प्रयत्न करने पर कोई विवाद सुलझ सकता है। समस्या का समाधान निकलेगा। परिचित महिला/पुरुष उन्नति में सहायक।वृषअनेक प्रकार के गोरखधंधों में उलझे रहेंगे। कुछ नए लोग और व्यापारिक प्रस्ताव मिलेंगे। शत्रुओं से सावधान रहें। मन-मुटाव दूर होगा।मिथुनअशुभ समाचार के कारण दुःख और चिंता। राजनीतिक लोगों के लिए अच्छा दिन है। आज सफलता की ओर कदम बढ़ेंगे। खुशी में इनाम, भेंट दे सकते है।कर्कसामान्य समय कोई खतरा मोल न लें। विदेशों से आयात-निर्यात करने पर लाभ उठाएंगे। समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी। विपरीत परिस्थिति में भी घबराएं नहीं।सिंहमेहनत से सुख संतोष का लाभ। दीर्घकालीन समस्या का समाधान। वाहन से या अन्यथा से चोट लग सकती है। पूंजी निवेश भविष्य के लिए उत्तम।कन्याप्रशासन से कष्ट होगा, लेकिन अचानक धन लाभ भी। नई योजना आगे बढ़ेगी, खास व्यक्ति से भेंट। स्वास्थ्य में बिगाड़ हो सकता है। आशंकाओं से ग्रस्त रहेंगे।तुलाविविध समस्याओं का हल निकलेगा। समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी। नई संभावनाएं दिखाई देगी, आगे बढ़ें। खर्च बढ़ने से परेशानी महसूस करेंगे।वृश्चिक प्रतिष्ठित व्यक्ति से सहायता मिलेगी। स्वार्थी और वास्तविक हितैषी की समझ आएगी। मान-सम्मान और धन हानि के योग हैं। अच्छा महसूस करते हुए आगे बढ़ेंगे।धनुशत्रु और नकारात्मक विचार घिरें रहेंगे। अपने दम पर ही कुछ नया कर दिखाएंगे। विषम परिस्थितियों पर आत्मबल और आत्मविश्वास से विजय। दुर्घटना घट सकती है।मकर व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए जा सकते हैं। दफ्तर में उन्नति मिलने के योग है। दाम्पत्य जीवन में कटुता आयेगी। नम्र व्यवहार से यश फैलेगा।कुंभडूबा हुआ धन वापस मिलेगा। कैसे भी हो, धन हानि हो सकती है। अकारण विवाद से बनता काम बिगड़ेगा। दोपहर तक कोई आरोप लग सकता है।मीनउत्तरदायित्व की पूर्ति के लिए यात्रा का योग। आपके प्रयासों की प्रशंसा होगी। स्वास्थ्य खराब हो सकता है। स्वास्थ्य खराब, दुर्घटना भी संभव। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 16 Jul 2026 17:15:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Kark Sankranti 2026: सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश, आज से शुरू होगा Dakshinayan का शुभ काल</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी की 16 जुलाई 2026 को कर्क संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में कर्क संक्रांति का विशेष महत्व होता है। इस दिन सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करते हैं। वहीं आज से ही दक्षिणायन की शुरूआत भी होती है। जोकि 6 महीने तक चलता है। इस मौके पर पूजा-पाठ और स्नान-दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में आइए जानते हैं कर्क संक्रांति का मुहूर्त, स्नान-दान और महत्व के बारे में...शुभ मुहूर्तधार्मिक शास्त्रों के मुताबिक कर्क संक्रांति के दिन स्नान-दान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से तन और मन दोनों की शुद्धि होती है। वहीं दान करने से जातक के जीवन की निगेटिविटी दूर होती है और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है।आज स्नान-दान का शुभ मुहूर्त सुबह 04:12 मिनट से लेकर 04:53 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:06 मिनट से लेकर 12:59 मिनट तक रहेगा। किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत के लिए अभिजीत मुहूर्त बेहद उत्तम माना जाता है।क्या दान करेंधार्मिक मान्यता के मुताबिक इस दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन, अनाज, कपड़े, गुड़ और फल का दान करना शुभ माना जाता है। इस दिन गाय को हरा चारा खिलाना, पानी रखना और पक्षियों को दाना देना पुण्यदायी माना जाता है।पूजन विधिसुबह जल्दी किसी पवित्र नदी में स्नान करके साफ कपड़े पहनना चाहिए।अगर किसी पवित्र नदी में स्नान करना संभव न हो, तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए।स्नान आदि के बाद भगवान सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करना चाहिए।फिर भगवान विष्णु और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 16 Jul 2026 17:15:49 +0530</pubDate>
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<title>Jagannath Rath Yatra 2026: Jagannath Rath Yatra 2026 में उमड़ा आस्था का सैलाब, जानें महत्व और Full Schedule</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी की 16 जुलाई 2026 से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की शुरूआत हो रही है। यह यात्रा 24 जुलाई 2026 तक चलेगी। हिंदू धर्म में ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली इस रथ यात्रा को बेहद पवित्र माना जाता है। हर साल आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को इस दिव्य यात्रा की शुरूआत होती है। इस दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं।इस मौके पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विशाल रथों पर सवार होकर मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकलते हैं। इस दौरान भगवान अपने मुख्य मंदिर से मौसी के घर यानी की गुंडिचा मंदिर जाते हैं। तो आइए जानते हैं रथ यात्रा के पूरे शेड्यूल और महत्व के बारे में...रथ यात्रा 2026 शेड्यूलबता दें कि आज यानी की 16 जुलाई 2026 को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का शुभारंभ होगा। भगवान अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे।वहीं 24 जुलाई 2026 को भगवान जगन्नाथ की अपने मुख्य मंदिर में वापसी होगी।वहीं 25 जुलाई 2026 को भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का दिव्य सोने के आभूषणों से अलौकिक श्रृंगार किया जाता है।क्यों खास है रथयात्राआमतौर पर श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए मंदिर के गर्भगृह तक जाते हैं। लेकिन रथ यात्रा एक ऐसी अनोखी परंपरा है, जिसमें भगवान स्वयं मंदिर से बाहर आकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त मंदिर के अंदर नहीं जा पाते हैं, महाप्रभु जगन्नाथ स्वयं उन पर अपनी कृपा बरसाने के लिए मंदिर से बाहर आते हैं। तीनों देव पूरे 9 दिनों तक गुंडिचा मंदिर में रहते हैं। शास्त्रों के मुताबिक गुंडिचा मंदिर में भगवान के आड़प दर्शन करने से जातक को 100 यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।रथ खींचने की परंपरापुरी की रथयात्रा में धर्म, जाति, ऊंच-नीच और रंग-भेद का कोई स्थान नहीं होता है। रथ के रस्सों को थामने के लिए हर वर्ग के लोग एक साथ आते हैं।इसमें बिना किसी भेदभाव के भक्त भगवान का रथ खींच सकता है।भक्तों को पवित्र और शुद्ध मन, पारंपरिक वेशभूषा में ही रथ के रस्सों को स्पर्श करना चाहिए।धार्मिक मान्यता है कि यदि कोई भक्त सच्चे मन से भगवान का रथ कम से कम तीन कदम भी खींच लेता है, तो उन व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं। साथ ही वह जीवन-मरण के चक्र से भी मुक्ति पा जाता है।उमड़ता है सैलाबमुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर की दूरी करीब 3 किमी है। इस 3 किमी के लंबे मार्ग पर आस्था का सैलाब देखने को मिलता है। ढोल-मंजीरों की थाप, शंख की ध्वनि और &#039;जय जगन्नाथ&#039; की गगनभेदी जयकारों से पुरी की धरा बैकुंठ जैसी नजर आने लगती है। इस अलौकिक दृश्य का हिस्सा बनने के लिए पूरी दुनिया से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 16 Jul 2026 17:15:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Baidyanath Dham से Mehandipur Balaji तक, शारीरिक कष्टों के उपचार और Spiritual Peace के लिए विख्यात हैं ये 7 पावन स्थल</title>
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<description><![CDATA[ भारत में मंदिरों को सिर्फ पूजा-पाठ का स्थान नहीं बल्कि आशा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र माना जाता है। अलग-अलग हिस्सों में कुछ खास मंदिर हैं। जो मानसिक तनाव, सेहत संबंधी समस्याओं, संतान प्राप्ति और रोग मुक्ति की लोक मान्यताओं से जुड़े हैं। लाखों की संख्या में भक्त इन मंदिरों में मानसिक बल, आशीर्वाद और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त करने के लिए जाते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 7 ऐसे मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर भक्त आरोग्य और अच्छी सेहत की प्रार्थना करते हैं।नैना देवी मंदिरहिमाचल प्रदेश में स्थित नैना देवी मंदिर प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां पर मां सती की आंख गिरी थी। इस कारण इस स्थान को नैना देवी कहा जाता है। नैना देवी को ज्ञान, दृष्टि और दिव्य दर्शन की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।इसे भी पढ़ें: Gupt Navratri 2026: 15 जुलाई से शुरू हो रही है गुप्त नवरात्रि, जानें 10 Mahavidyas की पूजा का रहस्ययहां आने वाले भक्तों का मानना है कि आंखों से जुड़ी समस्याओं में देवी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं मानसिक स्पष्टता और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।मेहंदीपुर बालाजी मंदिरराजस्थान के दौसा जिले में स्थित यह मंदिर हनुमान जी के बाला जी रूप को समर्पित है। यह भारत के खास और चर्चित आध्यात्मिक केंद्रों में से एक है।बालाजी आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां पर दर्शन करने से चिंता, मानसिक तनाव, डर, बुरी नजर और मानसिक कष्ट दूर होते हैं। मंदिर का प्रसाद घर न ले जाने वाली परंपरा भी फेमस है।बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंगझारखंड में स्थित बैद्यनाथ शिवलिंग देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। वैद्यनाथ शब्द का अर्थ चिकित्सकों के स्वामी से है। भगवान शिव के इस रूप के दर्शन और पूजन से रोग और कष्ट दूर होते हैं।यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि वैद्यनाथ दर्शन करने से दीर्घकालिक रोगों से छुटकारा मिलता है। वहीं यहां दर्शन करने से मानसिक संतुलन, शारीरिक पीड़ा में राहत और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है।काशी विश्वनाथ मंदिरयूपी के वाराणसी शहर में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर को भारत के सबसे प्राचीन और पूजनीय शिव मंदिरों में से एक है। भक्तों का मानना है कि यहां पर भगवान शिव के समक्ष सच्ची प्रार्थना करने से सेहत, दीर्घायु और आध्यात्मिक शांति मिलती है।गर्भरक्षाम्बिगई मंदिरदक्षिण भारत के तमिलनाडु में स्थित गर्भरक्षाम्बिगई का मंदिर फेमस है। यहां पर देवी गर्भरक्षाम्बिगई की पूजा होती है। यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि मंदिर में दर्शन करने से सुरक्षित गर्भावस्था, संतान प्राप्ति और स्वस्थ प्रसव में आसानी होती है। दंपत्ति के बीच यह मंदिर काफी फेमस है।झंडेवालान मंदिरनई दिल्ली में मौजूद झंडेवालन मंदिर मां आदिशक्ति को समर्पित है। यहां पर दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के बीच मान्यता है कि जिन भी लोगों पर बुरी नजर होती है। उनके मंदिर में पूजा करने से यह समस्या दूर हो जाती है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 16 Jul 2026 17:15:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Sawan 2026 में Solah Somvar Vrat शुरू करने से पहले जानें ये 3 बड़े Rules और इसका विशेष धार्मिक महत्व</title>
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<description><![CDATA[ श्रावण मास शुरु होने में अब ज्यादा दिन नहीं बचें है। सावन का महीना देवों के देव महादेव को समर्पित है। इस महीने का इंतजार शिव भक्तों को काफी लंबे समय तक रहता है। सावन के समय देशभर के हर एक शिवालय में पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। सावन के महीने में श्रद्धालु कांवड़ यात्रा निकालकर पवित्र जल से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। माना जाता है कि सावन का माह में मन से की गई शिव उपासना से महादेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मानोकामनाएं पूर्ण होती है। इस महीने में कई श्रद्धालु सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत भी करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रावण मास में अगर कोई भी भक्तजन सच्चे मन से सोलह सोमवार व्रत का संकल्प लेता है, तो उस व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि, वैवाहिक सौभाग्य, आर्थिक उन्नति और मानसिक शांति का आगमन होता है। शायद ही लोग जानते होगे कि इस व्रत को शुरु करने से पहले कुछ जरुरी नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि सोलह सोमवार व्रत से संबंधित 3 बड़े नियम क्या है।कब से शुरु होंगे सावन?- इस साल सावन माह 30 जुलाई 2026 से आरंभ होकर 28 अगस्त 2026 तक रहेगा।-सावन का पहला सोमवार - 3 अगस्त 2026-सावन का दूसरा सोमवार - 10 अगस्त 2026-सावन का तीसरा सोमवार - 17 अगस्त 2026-सावन का चौथा सोमवार - 24 अगस्त 2026कैसे व्रत का संकल्प लिया जाता हैसोलह सोमवार व्रत शुरु करने से पहले भगवान शिव का ध्यान करके पूरे श्रद्धाभाव और निष्ठा के साथ व्रत का संकल्प लें। एक बार संकल्प ले लिया है, तो आप बिना किसी कारण के व्रत को बीच में बिल्कुल न छोड़ें।हर सोमवार विधि-विधान से करें पूजाअगर आप इस बार सोलह सोमवार के व्रत रखने जा रहे हैं, तो आप प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री शिवलिंग पर अर्पित करें। फिर आप सोलह सोमवार व्रत कथा को पढ़ें या सुनें। शिव चालीसा का पाठ करें, शिव आरती और शिव मंत्रों का जाप करें।व्रत का उद्यापन करना न भूलेंजब आपके सभी सोलह सोमवार व्रत पूर्ण हो जाए, तो आप 17वें सोमवार को विधि-विधान से व्रत का उद्यापन करना होगा। भगवान शिव की विशेषतौर पर पूजा करने के साथ ही प्रसाद का वितरण करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-पुण्य जरुर करें।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 15 Jul 2026 13:10:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Ashadha Gupt Navratri: शीघ्र विवाह के लिए करें ये 5 अचूक उपाय, Wedding बाधाएं होंगी दूर!</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। आषाढ़ महीने में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि का खास आध्यात्मिक महत्व है। साल में चार बार नवरात्रि आती है, चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि। गुप्त नवरात्र पहला माघ मास के शुक्ल पक्ष में और दूसरा आषाढ़ के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। खासतौर पर गुप्त नवरात्रि तंत्र-मंत्र और गुप्त साधना के लिए शुभ मानी जाती है, वहीं सामान्य नवरात्रि सामाजिक और उत्सव के लिए जानी जाती है। इस बार आषाढ़ नवरात्रि की शुरुआत 15 जुलाई से हो रही है और इसका समापन 23 जुलाई को होगा। ऐसे में किसी जातक के विवाह में काफी समय से बाधाएं आ रही हैं या फिर रिश्ते बनते-बनते ही टूट रहे हैं, या कुंडली में बृहस्पति और शुक्र का बल कमजोर है, तो यह समय मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए श्रेष्ठ है। गुप्त नवरात्र में करें ये उपाय जल्द आपके घर में बजेंगी शहनाई। गुप्त नवरात्रि में शीघ्र विवाह के लिए क्या करेंकल यानी 15 जुलाई से गुप्त नवरात्र शुरु हो रहे है, इन नौ दिनों में श्रद्धा के साथ ये जरुरी उपाय करें, तो विवाह के मार्ग जल्दी खुल जाते हैं और सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।मां कात्यायनी की पूजागुप्त नवरात्रि के 9 दिनों तक प्रतिदिन शाम को मां कात्यायनी के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाएं और कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरी...&quot; मंत्र का जप करें। इसको आप कम से कम एक माला जाप जरुर करें।हल्दी की गांठें अर्पित करेंजो लोग विवाह योग्य है, चाहे युवक हो या युवती इन नौ दिनों तक नियमित तौर पर भगवान शिव और माता पार्वती को हल्दी की गांठें अर्पित कर सकते हैं। ऐसा करने से जल्द ही शादी के योग बन जाते हैं।अर्गला स्तोत्र का पाठ करेंअगर आपके विवाह में काफी विलंब हो रहा है, तो दुर्गा सप्तशती के अर्गला स्तोत्र का नियमित रुप से पाठ करें। &quot;पत्नीं मनोरमां देहि...&quot; या &quot;रूपं देहि जयं देहि...&quot; की कामना के साथ यह पाठ करें। इसके पाठ से ही जल्दी ही विवाह योग बन जाता है।श्रृंगार सामग्री का दान करेंगुप्त नवरात्रि के दौरान पंचमी अथवा अष्टमी तिथि पर किसी विवाहित महिला को या किसी देवी मंदिर में सुहाग से जुड़ी वस्तुएं, जैसे सिंदूर, चूड़ियां, मेहंदी, बिंदी और लाल चुनरी श्रद्धापूर्वक अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह उपाय जन्मकुंडली में मौजूद मंगल दोष तथा राहु-केतु से उत्पन्न बाधाओं को कम करने में सहायक माना जाता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए इस दान से विवाह में आने वाली रुकावटें दूर होने लगती हैं तथा योग्य जीवनसाथी मिलने और शीघ्र विवाह के अवसर प्रबल होते हैं।पवित्र गठबंधन करेंगुप्त नवरात्रि के अंतिम दिन आप भगवान शिव और माता पार्वती के विग्रह पर कलावा लेकर सात बार लपेटते हुए गठबंधन करें और अपने शीघ्र विवाह की कामना करें। इस उपाय के करने से शादी में आने वाली सभी रुकावट दूर हो जाती है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 15 Jul 2026 13:10:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Ashadh Gupt Navratri Significance: क्यों खास है यह गुप्त नवरात्रि? 15 जुलाई से शुरू हो रही मां दुर्गा की Sadhana</title>
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<description><![CDATA[ कल यानी 15 जुलाई बुधवार से आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि का आरंभ हो रहा है। हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि की शुरआत हो रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, साल में 4 बार नवरात्रि आती हैं, 2 गुप्त नवरात्रि और चैत्र व शारदीय नवरात्रि। गुप्त नवरात्रि खासतौर पर साधना, मंत्र जाप और दस महाविद्यालओं के लिए जानी जाती है, वहीं सामान्य नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रुपों की पूजा की जाती है, इसके साथ ही भक्तजन पूजा-अर्चना व व्रत रखते हैं।आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 डेट और टाइम-प्रतिपदा तिथि की शुरुआत- 14 जुलाई को दोपहर 03 बजकर 12 मिनट पर - प्रतिपदा तिथि का समापन- 15 जुलाई सुबह को 11 बजकर 50 मिनट परवैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्र की शुरुआत 15 जुलाई से होगी। इसका समापन 23 जुलाई को होगा। इसे भी पढ़ें: Gupt Navratri में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, नोट करें Puja का शुभ मुहूर्त और सही विधि तांत्रिक साधना और महाविद्याओं की पूजागुप्त नवरात्रि का इंतजार तांत्रिकों को तंत्र साधना करने के लिए रहता है। इस अवधि में साधक लंबी साधना करके दुर्लभ शक्तियों को प्राप्त करने का प्रयास करता है। गुप्त नवरात्र में साधक महाविद्या(तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुरा भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।आखिर गुप्त नवरात्रि को क्यों कहा जाता है &#039;गुप्त&#039;धार्मिक मान्यता के अनुसार, कोई भी साधक साल में सिर्फ दो बार ही अपनी शक्ति बढ़ाने में के लिए तांत्रिक साधना में लग जाता है। असल में गुप्त नवरात्रि साल में दो बार आती है। पहला माघ मास के शुक्ल पक्ष में और दूसरा आषाढ़ के शुक्ल पक्ष में, जो कि कल से शुरु हो रही है। इस नवरात्रि के बारे में कम लोग ही जानते है, इसका ज्ञान न होने के कारण या इसके छिपे होने के कारण इसे गुप्त नवरात्र कहा जाता है। गुप्त नवरात्र में विशेष मनोकामनाएं पूर्ण होती है। गुप्त नवरात्रि को गायत्री नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। इन 9 दिनों तक देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए मुख्य विधि तंत्र विद्या के मंत्रों के साथ देवी का आह्वान किया जाता है। इस दौरान सबसे प्रसिद्ध विधि तांत्रिक विद्या है जिसमें धन, ज्ञान और समृद्धि प्राप्त करने के लिए देवी दुर्गा की साधना की जाती है।मंत्र और सिद्धि का महत्वगुप्त नवरात्र में  &quot;ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे&quot; के महा मंत्र की मदद से सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुप्त नवरात्रि के दौरान शक्तिशाली मंत्रों और तंत्र की विद्या और तांत्रिक साधनाओं के रुप में देवी की गुप्त पूजा भक्तों को उनकी सभी इच्छाओं और मनोकामनाओं को पूरा करने में मदद करती हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 15 Jul 2026 13:10:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 15 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष धैर्य आपका सबसे अच्छा मित्र होगा। पारिवारिक जीवन में खुशियां आएगी। सम्मेलन परिचर्चा में भाग लेंगे। दैनिक कार्य संपादन से संतोष मिलेगा।वृषसामान्य समय कोई खतरा मोल न लें। भाग्यवर्धक दिन है। अग्रज तुल्य जनों से वाद विवाद न करें। विरोधी पक्ष प्रबल, शत्रु भी बढ़ेंगे।मिथुनपीवीआर में चलचित्र दर्शन एवं मनोरंजन। चारों तरफ से खुशखबरी मिलेगी। सरकारी क्षेत्र में प्रभाव बढ़ेगा, सफलता भी मिलेगी। परिश्रम का पूरा प्रतिफल मिलेगा।कर्कमन उदास रहेगा, अप्रिय समाचार मिलेगा। अचानक परेशानी घेर सकती है। घर में अतिथियों के स्वागत सम्मान में व्यस्तता। वरिष्ठ जनों से सहायता मिलेगी।सिंहकार्यों में सफलता मिलेगी। सफलता भरा दिन है, उत्तम दिन। चारों तरफ प्रिय और शुभ समाचार। दोपहर तक अच्छा महसूस करेंगे।कन्यामन कारण-अकारण आशांकित रहेगा। शत्रु सम्मान पर चोट पहुंचाएंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत करने वाला दिन है। असयंमित वाणी और व्यवहार से दिन बिगड़ेगा।तुलाइष्ट मित्रों का सहयोग मिलेगा। परिवार से पूरा-पूरा सहयोग मिलेगा। धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में रूचि। परिचय क्षेत्र बढ़ेगा, सरकारी सामाजिक कार्य पूरे होंगे।वृश्चिक खेल भावना की सराहना मिलेगी। मित्रता के संबंध मजबूत होंगे। धन हानि के योग, शत्रु भी प्रबल। अंधविश्वास करना घातक सिद्ध होगा।धनुजीवनसाथी के साथ तालमेल उत्तम रहेगा। नए व्यापारिक प्रस्ताव मिलेंगे। संतान संबंधी कार्यों में सफलता और खुशी। उदासीनता दूर होगी, ऊर्जावान अनुभव करेंगे। मकर सरकारी मामले उल्टे पड़ सकते हैं। गुरुजनों से प्रेम और सहयोग मिलेगा। अप्रत्याशित अतिथियों से परेशानी। नुकसानदायक योग है।कुंभनया कार्य शुरू कर सकते हैं। मित्रों भी सही सलाह से लाभ होगा। प्रतियोगिता परिणाम पक्ष में रहेगा। पत्रकार सम्मेलन का आयोजन करेंगे।मीनकर्ज में लेन-देन की चिंता रहेगी। &#039;बोर&#039; और अकेला महसूस करेंगे। पूंजीनिवेश का अच्छा लाभ मिलेगा। घर का वातावरण अच्छा रहेगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 15 Jul 2026 13:10:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Jagannath Rath Yatra 2026: जाति&#45;धर्म का कोई बंधन नहीं, ऐसे खींचें भगवान का Chariot, जानें Puri के नियम</title>
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<description><![CDATA[ ओडिशा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरूआत 16 जुलाई 2026 से हो रही है। आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होने वाली इस 9 दिवसीय रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बदभद्र और बहन सुभद्रा गुंडिचा मंदिर की यात्रा करते हैं। ऐसे में अगर आप भी जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने जा रहे हैं। तो यह जान लेना जरूरी है कि आपको वहां पर किन नियमों का पालन करना होगा।वहीं रथ यात्रा में शामिल होने से पहले रथ निर्माण, ओसर घर, छर पहनरा, गुंडीचा मार्जन, रथयात्रा का आरंभ, गुंडिचा मंदिर आगमन और पुन: मंदिर आगमन कब होता है, यह सब जानना जरूरी होता है। तो आइए जानते हैं रथ यात्रा से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में...इसे भी पढ़ें: Ashadha Gupt Navratri: शीघ्र विवाह के लिए करें ये 5 अचूक उपाय, Wedding बाधाएं होंगी दूर!रथ यात्रा के नियमउड़ीसा के पुरी की विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा आस्था का एक ऐसा समंदर है। जहां पर भगवान खुद गर्भगृह से निकलकर भक्तों के बीच आते हैं।यात्रा में शामिलभगवान जगन्नाथ की अलौकिक रथ यात्रा का हिस्सा बनने के लिए किसी विशेष पात्रता की जरूरत नहीं होती है। इस रथ यात्रा में कोई भी व्यक्ति शामिल हो सकता है।जो भी व्यक्ति भगवान जगन्नाथ की पावन रथ यात्रा में शामिल होता है। उसको 100 यज्ञों के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है।तीनों रथों की संरचनानंदीघोष की ऊंचाई 45 फीट और पहियों की संख्या 16 है। इस रथ को खींचने वाली पवित्र रस्सी का नाम शंखाचुड़ा नाड़ी है।तालध्वज की ऊंची 43 फीट है और पहियों की संख्या 14 और इस रथ को खींचने वाली पवित्र रस्सी का नाम बासुकी है।दर्पदलन रथ की ऊंचाई 42 फीट है और पहियों की संख्या 14 है। इसकी पवित्र रस्सी का नाम स्वर्णचूड़ा नाड़ी है।यात्रा मार्ग और अवधिइन तीनों विशाल रथों को श्रद्धालुओं द्वारा खींचकर 3 किमी दूर स्थित &#039;गुंडिचा मंदिर&#039; ले जाया जाता है।यहां गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलभद्र 10 दिनों तक आराम करते हैं।वहीं यात्रा के 11वें दिन भगवान फिर से अपने धाम लौट आते हैं। रथ खींचने के नियमभगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने के लिए किसी भी तरह का कोई कठोर नियम या फिर सामाजिक बंधन नहीं है।यहां पर किसी भी तरह की जाति, धर्म, प्रांत या देश की कोई सीमा नहीं है। कोई भी व्यक्ति या भक्त इन रथों को खींच सकता है।श्रद्धालु निश्चित क्रम से तीनों रथों की रस्सियों को श्रद्धापूर्वक खींचते हैं।धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन और श्रद्धा भाव से भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचता है। तो वह जीवन-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।ऐसे करें जाने की तैयारीअगर आप उड़ीसा से बाहर रहते हैं, तो आपको वहां पर स्टे का इंतजाम करना होगा। वरना आप परेशान हो सकते हैं, क्योंकि वहां पर रहने के सीमित साधन हैं।अगर आपको पुरी के बाहर कहीं रुकने का स्थान मिलता है, तो उसको हायर कर सकते हैं।पुरी में मंदिर के सामने ही समुद्र हैं, तो इस पूरे क्षेत्र में घूमने के लिए आपको कम से कम 3 दिन के लिए यात्रा प्लान करना चाहिए।वहीं 3 दिन का खर्च कम से कम 4 से 5 हजार तक आ सकता है।पुरी में जगन्नाथ मंदिर के दर्शन के अलावा अथरनाला ब्रिज, चिलका वन्यजीव अभयारण्य, पुरी का गुंडिचा मंदिर और समुद्री तट को एक्सप्लोर कर सकते हैं।आप चाहें तो पुरी से कुछ किमी दूर कोणार्क मंदिर को देखने के लिए जा सकते हैं। हालांकि इसके लिए आपको 1 दिन और स्टे करना होगा।रथ यात्रा के दौरान बहुत ज्यादा भीड़ होती है। ऐसे में अगर आप परिवार के साथ जा रहे हैं तो सभी की सुरक्षा का ध्यान रखें।अगर आप बच्चों के साथ पुरी जा रहे हैं, तो रथ यात्रा के दर्शन दूर से करें। बाद में मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन करें।पुरी में आप पहले दिन जगन्नाथ मंदिर के दर्शन करें और रथ यात्रा का आनंद लें। फिर दूसरे दिन गुंडिचा मंदिर जा सकते हैं। वहीं यात्रा के तीसरे दिन समुद्र का आनंद ले सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 15 Jul 2026 13:10:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Jagannath Rath Yatra 2026: 16 जुलाई से शुरू होगा भक्ति का महाकुंभ जगन्नाथ रथ यात्रा, जानिए इस महापर्व से जुड़ी 10 खास बातें</title>
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<description><![CDATA[ कल यानी 16 जुलाई को जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत होने जा रही है और यह उत्सव 24 जुलाई, शुक्रवार तक चलेगा। हर साल उड़ीसा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर में हर साल रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया को होता है। इस रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन के लिए आते हैं। भगवान जगन्नाथजी अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ तीन अलग-अलग रथों में सवार होकर अपनी बुआ के घर यानी गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं। वहीं, इस रथ यात्रा में देश-दुनिया से लोग रथ की स्सियां खींचने के लिए आते हैं। आपको बता दें कि, जगन्नाथ रथ यात्रा 24 जुलाई तक चलेगी।  आइए आपको इस रथ यात्रा से संबंधित जगन्नाथ रथ यात्रा की खास बातें बताते हैं। जानें जगन्नाथ रथ यात्रा की खास बातें - जगन्नाथ रथ यात्रा शुभारंभ हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर होता है। उड़ीसा के पुरी में मौजूद जगन्नाथ मंदिर से इस यात्रा की शुरुआत होती है। प्रभु जगन्नाथ, बलराम और उनकी बहन सुभद्रा के लिए तीन अलग-अलग रथों को तैयार किया जाता है। भक्त बड़ी संख्या में इस रथ यात्रा में शामिल होते हैं।- इस रथ को बनाने के लिए खास किस्म की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए नीम के पेड़ को चुना जाता है। बता दें कि, इस रथ यात्रा के लिए समिति का गठन करके शुभ वृक्षों को चुना जाता है और उनसे रथ तैयार किए जाते हैं। वैसे इन लकड़ियों को दारु कहा जाता है। इसे भी पढ़ें: Jagannath Rath Yatra 2026: क्या वाकई प्रेमी जोड़ों के लिए अशुभ है जगन्नाथ मंदिर के दर्शन? जानिए क्या कहती है पौराणिक मान्यता!- दरअसल, रथ यात्रा में तीनों रथों का अलग-अलग नाम से जाना जाता है। भगवान जगन्नाथ जी के रथ को नंदीघोष या गरुड़ध्वज कहा जाता है। बलरामजी के रथ को तालध्वज कहते हैं और देवी सुभद्रा के रथ के दर्पदलन पद्म रथ के नाम से जाना जाता है। - सबसे बड़ी आश्चार्यजनक बात यही है कि इन रथों के निर्माण में किसी भी प्रकार की नुकीली चीजें जैसे कील आदि का प्रयोग नहीं किया जाता है। इन लकड़ियों का चयन बसंत पंचमी तिथि से शुरु कर दिया जाता है। जिसके बाद अक्षय तृतीया तिथि से रथ निर्माण का कार्य आरंभ हो जाता है। - रथ यात्रा के पांचवे यानी हेरा पंचमी के दिन माता लक्ष्मी नाराज होकर गुंडिचा मंदिर पहुंच जाती है। वहां पर देवी भगवान श्री जगन्नाथ के नंदीघोष रथ के पहिये को तोड़ देती हैं, जो कि यह एक सांकेतिक उत्सव होता है। देवी लक्ष्मी ऐसा इसलिए करती हैं क्योंकि भगवान उन्हें लंबे समय के लिए छोड़कर बुआ के घर चले जाते हैं। - मान्यता है कि इस रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ पूरे एक सप्ताह तक बुआ के घर पर ठहरते हैं और फिर , आषाढ़ शुक्ल दशमी तिथि के दिन वापस गुंडीचा मंदिर से लौटते हैं। इसको बहुड़ा यात्रा कहा जाता है। यहां तीन दिनों तक भगवान अपने भक्तों को मंदिर के बाहर दर्शन देते हैं और इसके बाद, अपने मंदिर के गर्भगृह में पहुंच जाते हैं। - धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां पहुंचकर भी भगवान जगन्नाथ जी को माता लक्ष्मी की नाराजगी का सामना करना पड़ता है। इसके बाद भगवान नाराज देवी लक्ष्मी को मनाते हैं, तब जाकर उन्हें गर्भगृह के अंदर प्रवेश मिलता है। इसको  नीलाद्रि विजय के नाम से जाना जाता है। - कहा जाता है कि इस रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ जी का रथ जाकर एक मुसलमान भक्त के मजार पर भी रुकता है। जिसका नाम सालबेग था, क्योंकि इस भक्त की माता हिंदू थी और पिता एक मुगल सिपाही थे। - बता दें कि, पुरी में मौजूद जगन्नाथ मंदिर से शुरु हुई रथ यात्रा के समय रथ पूरे 3 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। जिसमें गुंडिचा मंदिर पहुंचने में सुबह से शाम हो जाती है। वहीं, कई बार तो रथ अगले दिन मंदिर तक पहुंचता है। - धार्मिक मान्यता है कि इस रथ की रस्सियां जो खींचता है यानी रथ आगे बढ़ाता है, उसे पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही, हरि लोक में स्थान प्राप्त होता है। इसी कारण से रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालु रथ खीचने के लिए बड़ी संख्या में पहुंच जाते हैं।  इसे भी पढ़ें: Puri Rath Yatra 2026 Full Schedule: जानें किस दिन होगी कौन सी रस्म, ये रहा पूरा 12 दिनों का Calendar  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 15 Jul 2026 13:10:56 +0530</pubDate>
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<title>Gupt Navratri 2026: 10 Mahavidyas की साधना का महापर्व शुरू, गृहस्थ नोट करें Shubh Muhurat और नियम</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व मां शक्ति की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। हर साल यह पर्व चार बार मनाया जाता है। जिसमें दो नवरात्रि सार्वजनिक रूप से मनाई जाती हैं। तो वहीं दो गुप्त नवरात्रि होती हैं। माघ और आषाढ़ महीने में आने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि की शुरूआत 15 जुलाई 2026 से हुई है। तो वहीं इसकी समाप्ति 23 जुलाई 2026 को होगी।गुप्त नवरात्रि के दौरान व्यक्तिगत और गोपनीय साधना को अधिक महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि यह नवरात्रि तांत्रिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। लेकिन गृहस्थ लोग भी कुछ नियमों के पालन के साथ इन नवरात्रि का लाभ ले सकते हैं।घटस्थापना मुहूर्तआषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी की 15 जुलाई को घटस्थापना के साथ इस पर्व की शुरूआत होगी। आज कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 05:33 मिनट से लेकर सुबह 10:09 मिनट तक है। वहीं 23 जुलाई 2026 को नवमी तिथि है, इस दिन गुप्त नवरात्रि की समाप्ति होगी।पूजन विधिसुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद घर के ईशान कोण को साथ करें। फिर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा को स्थापित करें। एक पात्र में मिट्टी डालकर इसमें जौ बोए जाते हैं। फिर तांबे या मिट्टी के कलश में जल, अक्षत, सिक्का और एक सुपारी डालकर आम के पत्ते लगाएं और इसके ऊपर नारियल स्थापित करें। फिर दीपक जलाकर मां दुर्गा से अपनी मनोकामना का संकल्प लें।पूजा के नियमगुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा-उपासना की जाती है। दस महाविद्याओं में काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला शामिल हैं। ऐसे में गृहस्थ लोग मां मातंगी, मां कमला और मां भुवनेश्वरी की पूजा कर सकते हैं। अन्य देवियों की उग्र साधनाएं बिना गुरु के नहीं करना चाहिए।गुप्त नवरात्रि के दौरान विशेष सावधानियां रखनी चाहिए। इस दौरान की जाने वाली पूजा सामान्य भक्ति से अलग होती है। इनके लिए कठोर नियमों का पालन करना जरूरी होता है। पूरे 9 दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दौरान प्याज, लहसुन, मांस और शराब जैसे तामसिक चीजों से दूरी बनानी चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 15 Jul 2026 13:10:52 +0530</pubDate>
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<title>Gupt Navratri 2026: 15 जुलाई से शुरू हो रही है गुप्त नवरात्रि, जानें 10 Mahavidyas की पूजा का रहस्य</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो &#039;गुप्त नवरात्रि&#039; भी पड़ती हैं। गुप्त नवरात्रि शक्ति साधना का बेहद रहस्यमय और प्रभावशाली पर्व माना जाता है। माघ और आषाढ़ माह में आने वाली इन नवरात्रि को तांत्रिक और अघोरी के लिए खास मानी जाती है। इन नवरात्रि में अघोरी और तांत्रिक अपनी साधना को सिद्ध करने के लिए &#039;दस महाविद्याओं&#039; की पूजा-उपासना करते हैं। गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली साधना बेहद खास और प्रभावशाली मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं या विशेष देवियों की पूजा-आराधना करने से जातक को मनचाहा फल प्राप्त होता है।  कब है गुप्त नवरात्रिहर साल आषाढ़ माह की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि की शुरूआत होती है। इस बार 15 जुलाई 2026 से गुप्त नवरात्रि की शुरूआत हो रही है। वहीं इसकी समाप्ति 23 जुलाई 2026 को होगी।इसे भी पढ़ें: Amarnath Story का यह रहस्य जानते हैं आप? जब अमर कथा सुनने की इजाजत Ganesha को भी नहीं थीदस महाविद्याएंगुप्त नवरात्रि के दौरान 9 दुर्गा की जगह पर 10 देवियों की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। मां कालीमां तारामां त्रिपुर सुंदरी मां भुवनेश्वरी मां छिन्नमस्तामां त्रिपुर भैरवी मां धूमावती मां बगलामुखी मां मातंगी मां कमला गुप्त नवरात्रि पूजन विधि और सावधानियांबता दें कि गुप्त नवरात्रि की पूजा को &#039;गुप्त&#039; रखा जाता है। जितना ज्यादा इसको गुप्त रखा जाता है, फल उतना ही ज्यादा मिलता है।गुप्त नवरात्रि की साधना विशेष रूप से मध्यरात्रि, निशिथ काल में करना अच्छा माना जाता है।अगर संभव हो तो 9 दिन तक अखंड ज्योति जलाना चाहिए।मनोकामना के मुताबिक संबंधित देवी के मंत्रों का जाप करना चाहिए।गुप्त नवरात्रि के 9 दिनों तक सात्विक आहार लेना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। ]]></description>
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<title>Jagannath Rath Yatra 2026: क्या वाकई प्रेमी जोड़ों के लिए अशुभ है जगन्नाथ मंदिर के दर्शन? जानिए क्या कहती है पौराणिक मान्यता!</title>
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<description><![CDATA[ ओडिशा में स्थित जगन्नाथ मंदिर अपने चमत्कार के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। दूर-दूर से देश-दुनिया के लोग पुरी जगन्नाथ मंदिर का दर्शन करने आते हैं। माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से इस मंदिर के दर्शन करने आता है उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। वैसे आपने भी जगन्नाथ मंदिर संबंधित कई सारे चमत्कार की कहानी जरुर सुनी होगी, जहां पर भगवान ने भक्तों की मनोकामनाएं जरुर पूर्ण होती है। हालांकि शायद ही आप जानते होंगे कि इस मंदिर में शादी से पहले प्रेमी जोड़े दर्शन के लिए नहीं जा सकते हैं। क्या आपने इसके पीछे की मान्यता के बारे में सुना है, क्या है इसकी पौराणिक कथा? आइए आपको इस लेख में बताते हैं भगवान जगन्नाथ मंदिर में प्रेमी जोड़ो का जाना वर्जित क्यों हैं।जगन्नाथ मंदिर में क्यों प्रेमी जोड़ा का जाना मना है?दरअसल, पुरी के जगन्नाथ मंदिर में अविवाहित प्रेमी जोड़े या फिर जिन जोड़ों की शादी तय हो चुकी है लेकिन, हुई नहीं है उन लोगों के लिए दर्शन करने के लिए नहीं जाना चाहिए। असल में इसके पीछे एक पुरानी धार्मिक कथा है। लोककथाओं व मान्यताओं के अनुसार, एक बार राधा रानी जगन्नाथ भगवान के दर्शन करने के लिए पुरी पहुंची थी। हालांकि, राधा रानी को मंदिर के पुजारियों ने बाहर ही रोक दिया। पुजारियों ने कहा कि मंदिर में सिर्फ भगवान और उनकी पत्नियां ही प्रवेश कर सकती हैं। जब राधा रानी ने यह बात सुनी तो उन्हें काफी बुरा लगा। फिर राधा रानी ने उन्हें श्राप दिया कि यदि ऐसा है जो भी प्रेमी जोड़ा इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आएगा उनके प्रेम में बाधा आ जाएगी। इस श्राप के चलते आज भी भगवान जगन्नाथ मंदिर में प्रेमी जोड़े दर्शन के लिए एक साथ नहीं जाएंगे। इसे भी पढ़ें:पुरी नहीं जा पा रहे? Delhi-NCR के इन Jagannath मंदिरों में करें रथ यात्रा के दर्शन क्या जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल हो सकते हैं प्रेमी जोड़ा?पुरी में कल यानी 16 जुलाई से रथ यात्रा शुरु हो रही है। ऐसे में आपके मन में भी काफी सवाल आ रहे होगे। जी हां! जगन्नाथ रथ यात्रा में प्रेमी जोडे़ शामिल हो सकते हैं। बस प्रेमी जोड़े सिर्फ मंदिर में भगवान के दर्शन नहीं कर सकते हैं। लेकिन वह रथ यात्रा में शामिल हो सकते हैं। आज भी वहां के लोग इस परंपरा को मान रहे है। लेकिन मंदिर की तरफ से कोई भी रोक नहीं लगाई जाती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अविवाहित जोड़े यहां शादी से पहले आते हैं, तो उनके रिश्तों में समस्या आ सकती है।   ]]></description>
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<pubDate>Wed, 15 Jul 2026 13:10:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Jagannath, Rath, Yatra, 2026:, क्या, वाकई, प्रेमी, जोड़ों, के, लिए, अशुभ, है, जगन्नाथ, मंदिर, के, दर्शन, जानिए, क्या, कहती, है, पौराणिक, मान्यता</media:keywords>
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<title>Love Horoscope For 14 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 14 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 14 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष (Aries): आज का दिन आपसी समझ बढ़ाने का है। अगर पार्टनर के साथ कोई अनबन चल रही थी, तो बातचीत से मामला सुलझ जाएगा। सिंगल लोगों को कार्यस्थल या किसी सोशल गैदरिंग में कोई दिलचस्प व्यक्ति मिल सकता है।वृषभ (Taurus): रिश्तों में आज थोड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें, बिना बात की बहस रिश्ते में दूरी ला सकती है। साथी की भावनाओं का सम्मान करें। सिंगल लोग फिलहाल जल्दबाजी में कोई फैसला न लें।मिथुन (Gemini): लव लाइफ के लिहाज से आज का दिन शानदार है। पार्टनर के साथ अच्छा समय बीतेगा और आप उनके साथ अपने दिल की बातें खुलकर शेयर कर पाएंगे। कोई सरप्राइज या छोटा गिफ्ट आपके रिश्ते में और मिठास घोल देगा।कर्क (Cancer): आज आप अपने पार्टनर की सुरक्षा और उनकी परवाह को लेकर अधिक गंभीर रहेंगे। आपके बीच का भरोसा और मजबूत होगा। सिंगल लोग किसी पुराने दोस्त की तरफ आकर्षित हो सकते हैं।सिंह (Leo): आज लव लाइफ में थोड़ा उत्साह और रोमांस बढ़ेगा। अगर आप किसी को प्रपोज करने की सोच रहे हैं, तो आज का दिन अनुकूल है। शादीशुदा लोगों के जीवन में पुराना आकर्षण लौट कर आएगा।कन्या (Virgo): आज पार्टनर के साथ किसी पुरानी बात को लेकर मतभेद हो सकता है। बेहतर होगा कि आप पुरानी बातों को तूल न दें और वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करें। शाम तक स्थितियां सामान्य हो जाएंगी।तुला (Libra): प्रेम जीवन में आज खुशियां रहेंगी। आप और आपके पार्टनर एक-दूसरे के विचारों से पूरी तरह सहमत दिखेंगे। लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप वाले लोगों की आज वीडियो कॉल या मैसेज पर लंबी और सकारात्मक बातचीत होगी।वृश्चिक (Scorpio): आज आपको अपने साथी के व्यवहार में थोड़ा बदलाव महसूस हो सकता है। इसे नकारात्मक रूप से लेने के बजाय उनसे शांति से बात करें। शक या गलतफहमी को रिश्ते के बीच न आने दें।धनु (Sagittarius): लव पार्टनर के साथ आज बाहर घूमने या डिनर का प्लान बन सकता है। आपसी तालमेल बेहतरीन रहेगा। सिंगल लोगों के जीवन में किसी नए व्यक्ति की एंट्री हो सकती है, जो सकारात्मक बदलाव लाएगा।मकर (Capricorn): आज का दिन थोड़ा व्यस्त रह सकता है, जिससे आप पार्टनर को ज्यादा समय नहीं दे पाएंगे। इससे वे थोड़े नाराज हो सकते हैं। एक छोटा सा मैसेज या कॉल भी उनके मूड को ठीक कर सकता है।कुंभ (Aquarius): प्रेम के मामलों में आज का दिन बेहद अनुकूल है। पार्टनर के साथ आपकी नजदीकियां बढ़ेंगी और आप उनके साथ भविष्य की योजनाएं बना सकते हैं। जो लोग सिंगल हैं, उन्हें आज कोई अच्छा प्रपोजल मिल सकता है।मीन (Pisces): आज आप अपने रिश्ते को लेकर काफी भावुक रहेंगे। पार्टनर की कोई छोटी सी बात भी आपको चुभ सकती है, इसलिए भावनाओं में बहकर कोई प्रतिक्रिया न दें। साथी के साथ खुलकर बात करना गलतफहमियों को दूर करेगा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 14 Jul 2026 11:31:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Love, Horoscope, For, July, 2026, आज, का, प्रेम, राशिफल, जुलाई, 2026, प्रेमियों, के, लिए, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन</media:keywords>
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<title>Horoscope 14 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष व्यवसाय में साहसिक निर्णय लेंगे। पूंजी निवेश से भविष्य में लाभ। बिगड़ेगा हालत सुधरेंगे, वरिष्ठ जनों से लाभ। ऋण रोग और विवादों से मुक्ति मिलेगी।वृषएक दूसरे की सहायता से लाभ होगा। मित्र और शत्रु जैसा व्यवहार करेंगे। मिलजुल कर विवाद कर हल निकलेगा। खास आदमी से भेंट, धन लाभ।मिथुनजीवनसाथी से अनबन होगी। &#039;बैंक बैलेंस&#039; बढ़ेगा, आमदनी भी। सुलह से विवाद सुलझेगा। विरोधी शांत हो जाएंगे।कर्कअच्छा महसूस करेंगे। प्रेम संबंध उजागर होंगे। विदेश यात्रा की तैयारी में व्यस्तता। प्रगति पथ प्रशस्त होगा।सिंहसंभल कर चलें, सड़क पर भी व्यवहार में भी। अचल संपत्ति विवाद हल होंगे। मिट्टी में हाथ डालने पर भी सोना ही मिलेगा। लाभदायक लंबी यात्रा के योग हैं।कन्याआपकी योजना असफल रह सकती है। दाम्पत्य जीवन में मधुरता आएगी। अपने ज्ञान/प्रवचन से लोगों को प्रभावित करेंगे। उपलब्धियों की प्रशंसा होगी।तुलाविरोधी लोग आपका लोहा मानेंगे। संयम से काम लें। वृद्धजनों का मार्गदर्शन मिलेगा। व्यवसाय में अच्छी तरक्की होगी।वृश्चिक परिश्रम के अनुसार फल न मिलने पर निराशा। संकट कटेंगे, चिंताओं से मुक्ति। अपने ज्ञान और कौशल से लाभ उठाने का प्रयत्न करें। किसी समारोह में भाग लेंगे।धनुअवसर का लाभ उठाकर, समय सार्थक करें। सरकारी कामों में यश मिलेगा। आमदनी के नए प्रस्ताव प्राप्त होंगे। हारिए न हिम्मत, बिसारिए न राम।मकर विद्वानों से भेंट और उनका साथ। मन उखड़ा-उखड़ा सा रहेगा। कुछ गलतफहमियां पनपेगी-भाइयों में। अचानक धन लाभ से प्रसन्नता।कुंभसंबंधियों से मनमुटाव खत्म होगा। मित्र भी शत्रु बनेंगे। मिश्रित फल- अभीष्ट कार्य की सिद्धि भी। प्रयत्न शायद ही सफल हों।मीनसावधान रहेंगे तो हानि से बचेंगे। हीनभावना के शिकार हो सकते हैं। सपरिवार कहीं यात्रा पर जाएगें। समाज में आपका यश फैलेगा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 14 Jul 2026 11:31:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Horoscope, July, 2026, Aaj, Rashifal:, सभी, राशियों, का, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन, पढ़ें, आज, का, राशिफल</media:keywords>
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<title>Ashadha Amavasya 2026: 14 जुलाई को है आषाढ़ अमावस्या, Bhaumvati Amavasya पर बन रहा विशेष शुभ Muhurat</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। यह तिथि दान-पुण्य करने, पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और आध्यात्मिक साधना करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। हर अमावस्या तिथि का अपना महत्व होता है। वहीं आषाढ़ की अमावस्या को विशेष रूप से स्नान-दान, पितृ तर्पण और ईश्वर की उपासना के लिए अहम माना जाता है। इस बार 14 जुलाई 2026 को आषाढ़ अमावस्या है। वहीं मंगलवार को पड़ने के कारण इसको भौमवती अमावस्या कहा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं आषाढ़ भौमवती अमावस्या की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक 13 जुलाई 2026 की शाम 06:49 मिनट पर आषाढ़ अमावस्या तिथि शुरू हुई है। वहीं आज यानी की 14 जुलाई 2026 की दोपहर 03:12 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 14 जुलाई 2026 को आषाढ़ अमावस्या मनाई जाएगी।धार्मिक महत्वइस दिन पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर्म करना बेहद शुभ माना जाता है।आषाढ़ अमावस्या पर दान-पुण्य करने से पुण्य फल प्राप्त होता है।भौमवती अमावस्या होने से हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए।यह दिन सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और पितरों की कृपा पाने का श्रेष्ठ दिन है। करें ये शुभ कार्यइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करें। अगर संभव को तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें। लेकिन अगर नदी में स्नान करना संभव नहीं हो, तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। फिर काले तिल मिल जल से पितरों का तर्पण करें। इस दिन अन्न, वस्त्र, फल, काले तिल और जरूरतमंदों व गरीबों को भोजन कराना चाहिए। वहीं पीपल को जल अर्पित करें और सरसों के तेल का दीपक जलाएं।मंगलवार को अमावस्या पड़ने के कारण हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान जी को बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। फिर शाम के समय पीली सरसों, गुग्गल और काले तिल की धूप पूरे घर में देने से वातावरण शुद्ध और सकारात्मक होता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 14 Jul 2026 11:31:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Ashadha, Amavasya, 2026:, जुलाई, को, है, आषाढ़, अमावस्या, Bhaumvati, Amavasya, पर, बन, रहा, विशेष, शुभ, Muhurat</media:keywords>
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<title>Love Horoscope For 13 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 13 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 13 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशि (Aries): आज आपका मिजाज थोड़ा उग्र या संवेदनशील हो सकता है, जिससे पार्टनर से बहस की आशंका है। सलाह: अपने गुस्से और वाणी पर पूरा नियंत्रण रखें और शांत रहकर बात को संभालें।वृषभ राशि (Taurus): आज आप पूरी तरह से रोमांटिक और खुशनुमा मूड में रहेंगे। सलाह: इस बेहतरीन समय का फायदा उठाएं और अपने साथी को कोई सरप्राइज या स्पेशल डिनर देकर खास महसूस कराएं।मिथुन राशि (Gemini): आज आपका मन नए रिश्तों की ओर आकर्षित होगा और आप गहरी बातचीत के मूड में रहेंगे। सलाह: अगर मन में कोई बात है तो संकोच छोड़कर अपने दिल की बात खुलकर सामने वाले से कह दें।कर्क राशि (Cancer): आज आप पुरानी बातों को भूलकर एक नई और सकारात्मक शुरुआत करने के मूड में रहेंगे। सलाह: अतीत की कड़वाहट को पीछे छोड़ दें और वर्तमान में पार्टनर से मिलने वाले प्यार व सरप्राइज का आनंद लें।सिंह राशि (Leo): कामकाज के भारी बोझ के कारण आज आपका मिजाज थोड़ा चिड़चिड़ा या तनावग्रस्त हो सकता है। सलाह: अपने प्रोफेशनल लाइफ के तनाव को पर्सनल लाइफ पर हावी न होने दें और पार्टनर पर गुस्सा निकालने से बचें।कन्या राशि (Virgo): आज आप अपने रिश्ते और भविष्य के लक्ष्यों को लेकर काफी गंभीर और मैच्योर मूड में रहेंगे। सलाह: भविष्य की योजनाओं पर बात करते समय अपने पार्टनर के विचारों और इच्छाओं का भी पूरा सम्मान करें।तुला राशि (Libra): आज आपके भीतर पार्टनर के प्रति आकर्षण, नजदीकी और रोमांस की भावना बेहद मजबूत रहेगी। सलाह: यदि पिछले कुछ दिनों से कोई दूरी थी, तो आज मुलाकात करके इस खुशनुमा समय का पूरा आनंद लें।वृच्छिक राशि (Scorpio): आज आपका मिजाज थोड़ा लापरवाह हो सकता है, जिससे बातचीत में गलतफहमी होने की आशंका है। सलाह: आज बोलने से पहले सोचें; आपके किसी मजाक से पार्टनर की भावनाएं आहत न हों, इसका विशेष ध्यान रखें।धनु राशि (Sagittarius): आज आप बेहद सकारात्मक, ऊर्जावान और मनोरंजन के मूड में रहने वाले हैं। सलाह: इस बेहतरीन एनर्जी का इस्तेमाल करें और पार्टनर के साथ कहीं बाहर घूमने या लॉन्ग ड्राइव पर जाने का प्लान बनाएं।मकर राशि (Capricorn): आज आप प्यार के मामले में काफी साहसी महसूस करेंगे और दिल का इजहार करने के मूड में रहेंगे। सलाह: अगर किसी से दिल की बात कहना चाहते हैं, तो झिझक छोड़ें और आज अपनी भावनाओं को व्यक्त कर दें।कुंभ राशि (Aquarius): आज आप रिश्ते में गहराई और आपसी जुड़ाव को महसूस करेंगे। सलाह: पार्टनर पर किसी तरह का हक या दबाव जताने के बजाय एक अच्छे साथी की तरह उनकी बात और परिस्थिति को समझने की कोशिश करें।मीन राशि (Pisces): आज आपका रुख काफी व्यावहारिक रहेगा और आप पारिवारिक व गंभीर मुद्दों पर चर्चा के मूड में रहेंगे। सलाह: घर से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण मामले पर कोई भी फैसला अकेले लेने के बजाय पार्टनर के साथ मिलकर लें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 13 Jul 2026 19:43:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>भौमवती अमावस्या पर ग्रहों का बड़ा फेर, इन 4 राशियों पर पड़ेगा Negative Impact, जानें Astrology उपाय</title>
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<description><![CDATA[ कल यानी 14 जुलाई, मंगलवार को आषाढ़ी अमावस्या मनाई जाएगी। अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने का विधान होता है। ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इस बार आषाढ़ी अमावस्या मंगलवार को पड़ रही है, इसलिए इसे भौमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस बार आषाढ़ अमावस्या पर ग्रहों की चाल के प्रभाव से राशि के जातकों को सतर्क रहने की काफी जरुरत है। इस दौरान कुछ राशियों को समस्या का सामना करना पड़ता है। आइए आपको बताते हैं आषाढ़ की अमावस्या पर किन राशि के जातकों को सावधानी बरतने की जरुरत है।मिथुन राशिअमावस्या वाले दिन मिथुन राशि के जातक को मानसकि तनाव और स्वास्थ्य अनुकूल रह सकता है। इस अवधि में अज्ञात भय या भ्रम की स्थिति बन सकती है। खासकर इस दौरान वाणी पर नियंत्रण रखना काफी जरुरी है, नहीं तो अपनों से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। इस अवधि में वाद-विवाद से दूर रहना काफी जरुरी है।कर्क राशिकर्क राशि वाले इस दौरान भावनात्मक रुप से निर्णय लेने से बचें, नहीं तो धन-हानि होने का डर बन जाएगा। वहीं, चंद्रमा की स्थिति के कारण मन विचलित रह सकता है। इस बात का ध्यान रखें कि, इस समय कोई भी बड़ा आर्थिक निवेश करने से पूरी तरह से बचें और भावनाओं में आकर कोई भी बड़ा महत्वपूर्ण निर्णय न लें।वृश्चिक राशिवर्क प्लेस में तनाव और दुर्घटना होने का डर बना रह सकता है। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें। आपके जो छिप हुए शत्रुओं उनसे बचकर रहें, क्योंकि यह आपकी छवि को खराब करने की कोशिश करने में लगा है। कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ तालमेल जरुर बिठाए।मीन राशिइस दौरान मीन राशि के जातक पारिवारिक कलह और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान जरुर रखें। परिवार के सदस्यों के साथ किसी भी बात को लेकर तनाव देखने को मिल सकता है। हेल्थ लेकर जरा भी लापरवाही न बरतें। अपने खान-पान का विशेष ख्याल रखें। अमावस्या के प्रभाव को कम करने के सरल उपाय - दान-पुण्य: इस दिन आपने जरुरतमंद को श्रद्धा के अनुसार तिल, वस्त्र या अन्न का दान करें। - पितृ तर्पण: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि पूरी तरह पितरों को समर्पित है, इसलिए उनके निमित्त तपर्ण या धूप देकर उनका स्मरण करें। - मंत्र जाप: भगवान शिव के इन मंत्रों का जप करें। &#039;ॐ नमः शिवाय&#039; या महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम एक माला मानसिक जप जरुर करें।अमावस्‍या की तिथि समयहिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या 13 जुलाई को शाम 06 बजकर 50 पर शुरु होगी। वहीं, इसका समापन 14 जुलाई को दोपहर 03 बजकर 13 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार इस बार आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई को मनाई जाएगी।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 13 Jul 2026 19:43:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Pitru Dosh से हैं परेशान? Ashadh Amavasya पर ये Divine Tips दिलाएंगे सभी संकटों से मुक्ति</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। सालभर में 12 अमावस्या तिथियां पड़ती है, इन्हीं में से आषाढ़ी अमावस्या का अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अमावस्या के दिन पितरों का निमित्त तर्पण किया जाता है और यदि किसी व्यक्ति के घर में पितृ दोष है, तो यह दिन ऐसे दोष दूर करने के लिए काफी शुभ माना गया है।कल यानी आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई, मंगलवार को मनाई जाएगी। अगर आप पितरों की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो आप इन जरुरी उपाय को जरुर करें। ऐसा करने से आपके जीवन के सभी पितृ दोष दूर हो जाएंगे और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलेगी। आइए आपको इन उपायों के बारे में बताते हैं-ब्रह्म मुहूर्त में उठें और सूर्य को अर्घ्य देंअमावस्या वाले दिन आपको ब्रह्म मुहूर्त में उठना है और स्नान आदि करने के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। आप एक तांबे के लोटे में थोड़े से काले तिल डालें और एक चुटकी सिंदूर या रोली डालें और फिर इस जल को अर्पित करें। जब आप सूर्य देव को जल देते हैं, तो उस समय &#039;ओम नमः शिवाय&#039; मंत्र का जाप करें। इस उपाय से आपके जीवन में सूर्य देव की कृपा बनी रहेगी और पूर्वजों की नाराजगी भी दूर हो जाएगी।दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके पूर्वजों के नाम का तर्पण करेंइस दिन पूर्वजों के लिए किया तर्पण विशेष रुप से फलदायी होता है। अगर आप आषाढ़ अमावस्या के दिन एक लोटे में जल लेकर उसमें एक चुटकी काले तिल मिलाएं और दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके पितरों के नाम से तर्पण करें। इस उपाय से पूर्वजों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है और घर से पिृत दोष दूर हो जाते हैं।पीपल के पेड़ में शाम के समय दीपक जलाएंहिंदू धर्म में पीपल के पेड़ में पितरों का वास माना जाता है। इसलिए आप आषाढ़ अमावस्या के दिन शाम के समय पीपल के पेड़ पास सरसों का तेल का दीपक जलाएं और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें, जिससे आपको पितृ दोषों से मुक्ति मिल जाएगी और पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहता है।जरूरतमंदों को दान करेंअमावस्या वाले दिन दान करना बेहद शुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार ही जरुरतमंदों को वस्त्र और अन्न का दान जरुर करें। ऐसा करने से आपको शुभ फलों की प्राप्ति होती है और पूर्वजों  की आत्मा को शांति मिलती है। बता दें कि, ऐसा करने से कुंडली से पितृ दोष भी दूर होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 13 Jul 2026 19:43:13 +0530</pubDate>
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<title>Ashadha Amavasya 2026: 13 या 14 जुलाई? जानें Bhaumvati Amavasya की सही Date और पूजन विधि</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की विशेष महत्व होता है। इस बार आषाढ़ माह की अमावस्या मंगलवार को पड़ रही है। इस कारण इसको भौमवती अमावस्या भी कहा जाता है। ऐसे में इसका महत्व दोगुना हो जाता है। पितरों के तर्पण, मंगल दोष की शांति, दान-पुण्य और कालसर्प दोष निवारण के लिए यह दिन बेहद उत्तम माना गया है। हालांकि कई लोगों के मन में आषाढ़ अमावस्या की तिथि को लेकर कंफ्यूजन है। ऐसे में आइए जानते हैं कि आषाढ़ माह की अमावस्या 13 जुलाई को मनाई जा रही है या फिर 14 जुलाई को।इसे भी पढ़ें: भौमवती अमावस्या पर ग्रहों का बड़ा फेर, इन 4 राशियों पर पड़ेगा Negative Impact, जानें Astrology उपायआषाढ़ अमावस्या तिथिवैदिक पंचांग के मुताबिक 13 जुलाई की शाम 06:49 मिनट से आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की शुरूआत हो रही है। वहीं 14 जुलाई की दोपहर 03:12 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के मुताबिक 14 जुलाई 2026 को आषाढ़ अमावस्या मनाई जाएगी। वहीं इस दिन ही स्नान-दान, तर्पण और श्राद्ध आदि करना शास्त्र सम्मत माना गया है।भौमवती अमावस्याइस बार आषाढ़ अमावस्या मंगलवार को पड़ रही है। इस कारण इसको भौमवती अमावस्या भी कहा जाएगा। भौमवती अमावस्या पर तर्पण करने से आर्थिक संकट और शत्रु भय से मुक्ति मिलती है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। वहीं अगर किसी नदी में स्नान करना संभव नहीं हो, तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है।इस दिन किए गए उपायों से पितर प्रसन्न होते हैं। वहीं पितृ दोष भी दूर होता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इस दिन किए गए दान और तर्पण का कई गुना फल बढ़ जाता है। जो लोग पितृ दोष से पीड़ित हैं, उनके लिए यह तिथि विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 13 Jul 2026 19:43:13 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 13 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष खेल भावना से काम करने पर सफलता। आपकी पदोन्नति की सिफारिश होगी। व्यावसायिक यात्रा और महत्वपूर्ण बैठक में योगदान। व्यवहार में सावधानी-झूठा आरोप संभव।वृषसंतान की प्रगति से सुख और प्रसन्नता। नए संपर्क भविष्य के लिए अच्छे सिद्ध होंगे। स्वास्थ्य में बिगाड़, पूंजीनिवेश से घाटा। यात्रा में वाहन बिगड़ सकता है।मिथुनअप्रिय स्थान पर तबादले की संभावना। नई संभावनाएं दिखाई देगी, आगे बढ़ें। अपनी क्षमताओं का पूरा लाभ उठाएं। मलाई वाली पोस्टिंग मिल सकती है।कर्कजन सम्पर्क व्यापक होगा- फेसबुक से। कहीं से बकाया रकम वापिस मिलेगी। स्व विवेक से लिए गए निर्णय ही लाभप्रद होंगे। प्रसन्नता भरा दिन है।सिंहवैवाहिक कार्यक्रमों में व्यस्तता रहेगी। बाहरी हस्तक्षेप से घर का वातारण बिगड़ेगा। पारिवारिक कारणों से यात्रा का योग हैं। जन संपर्क बढ़ेगा, प्रेम संबंध भी।कन्यापारिवारिक जीवन सुख शांति पूर्ण रहेगा। जोश में होश खोना ठीक नहीं। लाभदायक समाचार और उपलब्धियां। जरूरी काम कल पर न टालें।तुलाआपकी तारीफ करते लोग नहीं थकेगें। व्यवसाय में उन्नति और विस्तार की योजना। मित्रों से सहयोग मिलेगा। नई योजनाएं आगे बढ़ेगी।वृश्चिक बुराई के बदले भलाई देकर सुख मिलेगा। जो भी करेंगे उसमें सफल रहेंगे। त्वचा रोग पुनः उभर कर कष्ट देंगे। पारिवारिक उद्देश्यों से यात्रा होगी।धनुघर-परिवार में आनंद-दायक वातावरण रहेगा। पहले किए गए प्रयासों का परिणाम मिलेगा। विपरीत को भी अनुकूल बनाने में समर्थ रहेंगे। विरोधी शांत होंगे।मकर बनते हुए काम बिगड़ने से दुख होगा। परिश्रम से पीछे न हटें, सफलता मिलेगी। अपने काम पर खास ध्यान दें, उपेक्षा न करें। डूबा हुआ धन मिलेगा।कुंभसंचार माध्यमों और जन-सम्पर्क में आर्कषण बढ़ेगा। जैसी करनी-वैसी भरनी। विशेष सफलताएं मिलेगी। समस्याओं का हल निकाल ही लेंगे।मीनचिंता से मुक्ति, धन प्राप्ति की खुशी। स्वास्थ्य की उपेक्षा उन्नति रोक सकती है। साहित्य में रूचि बढ़ेगी। सगे संबंधियों की उन्नति में सहयोग देंगे। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 13 Jul 2026 19:43:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Amarnath Story का यह रहस्य जानते हैं आप? जब अमर कथा सुनने की इजाजत Ganesha को भी नहीं थी</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में भगवान शिव और मां पार्वती की अमरकथा से जुड़ी एक रोचक कहानी सुनने को मिलती है। श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड ने लिखा है कि सदियों पर भगवान शिव से माता पार्वती ने पूछा कि उन्होंने मुंड माला कब और क्यों धारण करना शुरू किया। जिस पर भगवान शिव ने जवाब देते हुए कहा कि जब भी देवी पार्वती का जन्म होता है, तो वह अपनी माला में एक और सिर जोड़ लेते हैं।तब देवी पार्वती ने कहा कि मैं बार-बार मरती हूं, लेकिन आप अमर हैं। इसलिए मुझे अपनी अमरता का कारण बताइए। जिस पर भगवान शिव-शंकर ने उत्तर देते हुए कहा कि पार्वती इसके लिए आपको अमर कथा सुननी होगी।इसे भी पढ़ें: Jagannath Temple Significance: Puri के Jagannath Dham से जुड़े 5 Amazing Facts, क्यों मंदिर के ऊपर से नहीं उड़ते पक्षीअमरकथा सुनाने से पहले क्या-क्या त्यागाजब भगवान शिव जी माता पार्वती को अमरकथा सुनाने को तैयार हो गए। तो शिव-पार्वती ऐसी जगह के लिए चल पड़े, जहां पर अन्य कोई अमर कथा को न सुन सके। अमरकथा सुनाने के लिए उन्होंने अमरनाथ गुफा को चुना। लेकिन इससे पहले भगवान शिव ने अपने प्रिय भक्त और वाहन नंदी को पहलगाम में छोड़ दिया।वहीं अपने नागों को शेषनाग झील के किनारे छोड़ दिया। उन्होंने भगवान गणेश को महागुण पर्वत पर छोड़ा और जीवन के पंच तत्वों को पंजतरणी में त्याग दिया। जिनके वह स्वामी हैं। इन सभी को त्यागने के बाद भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ अमरनाथ गुफा में प्रवेश किया और समाधि ले ली।दो कबूतरों ने सुनी अमरता की कथाकोई भी अमरता से जुड़ा वृत्तांत न सुन पाए, यह सुनिश्चित करने के लिए भगवान शिव ने कालाग्नि को पैदा किया। कालाग्नि को गुफा के अंदर और इसके आसपास के सभी जीवों को नष्ट करने के लिए आग फैलाने का आदेश दिया। फिर भगवान शिव में मां पार्वती को अमरता का रहस्य बताना शुरू किया।लेकिन संयोगवश एक कबूतर के जोड़े ने अमरता का वृत्तांत सुन लिया और वह अमर हो गए। माना जाता है कि आज भी कई तीर्थयात्री उन पवित्र कबूतरों के जोड़े को वहां देखने का दावा करते हैं। वहीं तीर्थयात्री भी यह देखकर हैरान हो जाते हैं कि इतने ठंडे और पहाड़ी क्षेत्र में यह पक्षी जीवित कैसे रहते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 13 Jul 2026 14:52:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या पर भौमवती अमावस्या का संयोग, जानें सही तारीख और स्नान&#45;दान का शुभ मुहूर्त</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। आषाढ़ के महीने में आने वाली अमावस्या बेहद ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसको आषाढ़ी अमावस्या भी कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन पितरों के तर्पण व पु्ण्य कर्मों के लिए शुभ माने जाते हैं। अमावस्या के दिन पितरों के तर्पण की आत्मा को शांति मिलती हैं। इसके साथ ही परिवार पर उनकी कृपा बनीं रहती है। इस बार साल 2026 में पड़ने वाली आषाढ़ी अमावस्या के दिन मंगलवार है, इसलिए इसे भौमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। धार्मिक शास्त्रों में यह माना गया है कि आने वाली अमावस्या का पुण्यफल कई गुना अधिक माना जाता है। इस दिन पूजा-पाठ से हनुमान जी की भी विशेष कृपा मिलती हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं आषाढ़ माह की अमावस्या कब है।आषाढ़ अमावस्या 2026 कब है ?वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 13 जुलाई 2026, सोमवार को शाम 6:50 बजे आरंभ होगी। यह तिथि 14 जुलाई 2026, मंगलवार को दोपहर 3:14 बजे समाप्त हो जाएगी। चूंकि हिंदू धर्म में अधिकांश व्रत एवं पर्व उदया तिथि के आधार पर निर्धारित किए जाते हैं, इसलिए आषाढ़ी अमावस्या का पर्व 14 जुलाई 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा।आषाढ़ अमावस्या 2026 स्नान-दान का शुभ मुहूर्त - स्नान-दान का शुभ मुहूर्त- सुबह 4.30 बजे से 10.43 बजे तक। - सूर्योदय- सुबह 5.32 बजे। - स्नान-दान का उत्तम समय: सुबह 4:30 बजे से 10:43 बजे तक - लाभ चौघड़िया- सुबह 10.43 बजे से दोपहर 12.27 बजे तक - अमृत चौघड़िया- दोपहर 12.27 बजे से 2.10 बजे तक - पितृ तर्पण एवं श्राद्ध कर्म: दोपहर के समय करना शुभ माना गया है।आषाढ़ अमावस्या के दिन क्या करें? - आषाढ़ अमावस्या के दिन पवित्र नदी या घर में स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और भगवान विष्णु, भगवान शिव तथा पितरों का स्मरण करें। - अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार ही जरुरतमंदों को दान करें। ऐसा करने से आपको पुण्य फल की प्राप्ति होगी। - इसके बाद पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें और शाम के समय सरसों के तेल या घी का दीपक जलाकर परिक्रमा करें।- हनुमान चालीसा या &quot;ॐ नमः शिवाय&quot; मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें। - पितरों की शांति के लिए तर्पण एवं जरुरतमंदों को भोजन कराएं। - पूरे दिन घर में सात्विक वातावरण बनाए रखें। - मन को शांत रखें और नकारात्मक विचारों से दूर करें।पितृ दोष निवारण मंत्रॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः।गायत्री पितृ दोष निवारण मंत्रॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः।पितृ स्तोत्रं पाठ अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम् ॥इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ॥मन्वादीनां मुनीन्द्राणां सूर्याचन्द्रमसोस्तथा ।तान् नमस्याम्यहं सर्वान् पितृनप्सूदधावपि ॥नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा।द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि: ॥देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येsहं कृताञ्जलि: ॥प्रजापते: कश्यपाय सोमाय वरुणाय च ।योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ॥नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ॥सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ॥अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।अग्नीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ॥ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्निमूर्तय:।जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ॥तेभ्योsखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतमानस:।नमो नमो नमस्ते मे प्रसीदन्तु स्वधाभुज: ॥ ]]></description>
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<pubDate>Sun, 12 Jul 2026 22:41:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Ashadha, Amavasya, 2026:, आषाढ़, अमावस्या, पर, भौमवती, अमावस्या, का, संयोग, जानें, सही, तारीख, और, स्नान-दान, का, शुभ, मुहूर्त</media:keywords>
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<title>कल है Ravi Pradosh Vrat, इस Special पूजा विधि से करें Lord Shiva का अभिषेक, मिलेगा अक्षय पुण्य</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। इस बार जुलाई महीने का पहला प्रदोष व्रत रविवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत को करने से व्यक्ति को भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा मिलती है और आपकी सारी मानोकामनाएं पूरी होती है। इस बार जुलाई महीने का पहला प्रदोष व्रत कल यानी 12 जुलाई, रविवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत के करने से अनजाने में किए गए पाप से मुक्ति मिलती है। बता दें कि, रविवार को प्रदोष व्रत होने से इसको रवि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। आइए आपको रवि प्रदोष व्रत का महत्व और पूजा विधि।जानें प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त?हिंदू पंचांग के अनुसार, 11 जुलाई को रात्रि 2 बजकर 5 मिनट से त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा और 12 जुलाई को रात में 10 बजकर 31 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए प्रदोष व्रत 12 जुलाई को रखा जाएगा। माना जाता है कि जब त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल के समय लगी हो उस दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि- प्रदोष व्रत के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाएं। अब स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। - इसके बाद अपने घर के मंदिर में पूजा करें और सूर्यदेव को जल अर्पित करें और व्रत का संकल्प लें। - प्रदोष काल में भगवान शिव के मंदिर जाएं और भगवान शिव का अभिषेक करें। अब उन्हें धतूरा, अक्षत,शहद, फूल, चंदन, माला और बेलपत्र अर्पित करें। - अब घी का दीपक जलाएं और रवि प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। - आखिर में भगवान शिव की आरती करें और उन्हें भोग लगाएं। इसके बाद ही व्रत का पारण करें।रवि प्रदोष व्रत के फायदेशिव पुराण में बताया गया है कि, रवि प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को अनजाने में किए पापों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही पारिवारिक जीवन में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसके साथ ही प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं। इस समय जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा करता है और उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 12 Jul 2026 22:41:22 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 11 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 11 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 11 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशि: आज पार्टनर के साथ किसी बात को लेकर बहस हो सकती है। बेहतर होगा कि आप अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें और शांत रहकर बात को संभालें।वृषभ राशि: लव लाइफ के लिए आज का दिन बेहद खूबसूरत रहेगा। अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताने और उनके लिए कुछ स्पेशल प्लान करने का अच्छा मौका है।मिथुन राशि: यदि आप सिंगल हैं, तो आज किसी खास व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है। जो लोग पहले से रिश्ते में हैं, उनके बीच आपसी समझ और बढ़ेगी।कर्क राशि: आज पार्टनर से कोई सरप्राइज या तोहफा मिल सकता है। पुरानी गलतफहमियां दूर होंगी और रिश्ते में नयापन आएगा।सिंह राशि: कार्यक्षेत्र के तनाव को अपनी लव लाइफ पर हावी न होने दें। पार्टनर को समय दें और उनकी भावनाओं का सम्मान करें।कन्या राशि: आज आप अपने रिश्ते को लेकर कोई बड़ा या गंभीर फैसला ले सकते हैं। पार्टनर के साथ भविष्य की योजनाओं पर खुलकर चर्चा होगी।तुला राशि: प्रेम जीवन में रोमांस बढ़ेगा। अगर काफी समय से पार्टनर से दूर थे, तो आज मुलाकात की संभावना बन रही है।वृश्चिक राशि: आज बातचीत के दौरान थोड़ा संभलकर रहें। आपकी कोई छोटी सी बात पार्टनर को बुरी लग सकती है, इसलिए शब्दों का चयन सोच-समझकर करें।धनु राशि: दिन खुशियों से भरा रहेगा। पार्टनर के साथ कहीं बाहर घूमने जाने का प्लान बन सकता है। आपसी तालमेल शानदार रहेगा।मकर राशि: आज पार्टनर के प्रति आपका आकर्षण और बढ़ेगा। यदि किसी को प्रपोज करने की सोच रहे हैं, तो आज का दिन अनुकूल है।कुंभ राशि: रिश्ते में ईमानदारी और भरोसा बनाए रखें। पार्टनर को किसी बात के लिए मजबूर करने के बजाय उनकी स्थिति को समझने की कोशिश करें।मीन राशि: प्रेम संबंधों के लिए दिन सामान्य रहेगा। पार्टनर के साथ किसी पारिवारिक विषय पर गंभीर बातचीत हो सकती है, जिससे रिश्ता और परिपक्व होगा। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 12 Jul 2026 22:41:22 +0530</pubDate>
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<title>Sawan 2026 Special: सावन में कब रखा जाएगा मंगला गौरी व्रत? जानें पूजा विधि और उद्यापन के सभी Complete Rules</title>
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<description><![CDATA[ सावन महीने का इंतजार हर शिव भक्त करता है। श्रावण मास भगवान शिव को अति प्रिय है। ऐसे में शिव-शक्ति की कृपा पाने के लिए यह महीना बेहद खास होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार सावन की शुरुआत 30 जुलाई से होगी और समापन 28 अगस्त को होगा। इस महीने में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का अधिक महत्व है। इसके साथ ही मंगला गौरी व्रत भी रखा जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन होता है। इस व्रत के रखने से महादेव के संग मां पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। आइए आपको बताते हैं सावन में कब-कब किया जाएगा मंगला गौरी व्रत।कब-कब है मंगला गौरी व्रत 2026? -पहला मंगला गौरी व्रत- 4 अगस्त 2026-दूसरा मंगला गौरी व्रत- 11 अगस्त 2026-तीसरा मंगला गौरी व्रत- 18 अगस्त 2026-चौथा मंगला गौरी व्रत- 25 अगस्त 2026कैसे रखें मंगला गौरी व्रत- मंगला गौरी व्रत के लिए सबसे पहले सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। - अब हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। - इसके बाद मंदिर की सफाई करने के बाद लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। - अब आप चौकी पर मां पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा को विराजमान करें। - भगवान शिव और माता पार्वती को रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें। - इसके बाद देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें। - माता पार्वती को 16 सोलह श्रृंगार की सभी वस्तुओं को दान करें। - अब आप व्रत कथा का पाठ करें। - पार्वती चालीसा का पाठ करें और मंत्रों का जप भी करें। - अब आरती के बाद सभी को प्रसाद बांटें।मंगला गौरी व्रत के नियम- मंगला गौरी व्रत के दौरान किसी भी व्यक्ति से वाद-विवाद भूलकर भी न करें। मन में किसी के बारे में गलत न सोचें। मन को शांत रखें और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करें। - भूलकर भी इस दिन काले रंग का कपड़े न पहनें। - तामसिक चीजों का सेवन न करें।उद्यापन का नियममंगला गौरी व्रत रखने वाली महिलाएं, उनको 5 साल पूरे होने के बाद सावन के अंतिम मंगलवार के दिन विधिपूर्वक मंगला गौरी व्रत उद्यापन करना चाहिए। माना जाता है व्रत का उद्यापन न करने से व्रत सफल नहीं होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, उद्यापन करने से व्रत पूर्ण होता है और मां पार्वती की विशेष कृपा से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 12 Jul 2026 22:41:21 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 12 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष दिन भर सुखानुभूति और आनंद उत्सव। पदोन्नति के साथ तबादला। बनते हुए काम बिगड़ने पर खिन्न होंगे। उज्ज्वल भविष्य के लिए निर्णायक दिन।वृषआडम्बर और दिखावे में रूचि ज्यादा होगी। मानसिक रूप से त्रस्त रहेंगे। धन के लिए अच्छा, स्वास्थ्य के लिए खराब दिन। घर परिवार में शुभ कार्यों में आयोजन हो सकता है।मिथुनअशुभ समाचार मिलेंगे, बिजली आदि से सावधान। देश विदेश से सम्पर्क बढ़ेंगे। विरोधी पक्ष आप पर हावी रहेगा। सामान्य दिन हैं, मनोनुकूल सफलता।कर्कआज आप जन-नेता की श्रेणी में आ सकते हैं। नेतृत्व में टीम को विशेष सफलता। गुरुजनों से मार्गदर्शन और लाभ दोनों मिलेंगे। कोर्ट कचहरी के चक्कर लगेंगे।सिंहसक्रियता और रचनात्मकता की प्रशंसा होगी। चिंताओं से राहत मिलेगी। ग्रह कलह से परेशानी और दुविधा रहेगी। पदोन्नति का शुभ समाचार मिलेगा।कन्यानौकरी और व्यापार में नए एग्रीमेंट अथवा करार। बड़ों का स्वास्थ्य नरम, रूकावटें भी अधिक है। स्वास्थ्य में सुधार महसूस होगा। योजनाएं आगे बढ़ेगी।तुलासंतान भी अनुचित हरकत से मान हानि। एक बार में एक ही काम हाथ में लें। कार्य अधूरे लटकेंगे, वाद विवाद बढ़ेगा। अपनी करनी-अपनी भरनी।वृश्चिक नई कार्य योजना और उसमें सफलता। कोई जरूरी &#039;डील&#039; फाइनल होगी। सांसारिक सुख साधनों में वृद्धि। विशेष प्रशिक्षण के लिए जा सकते हैं।धनुसंतान की उन्नति का शुभ समाचार मिलेगा। अप्रिय समाचार पीडि़त कर सकता है। धन सम्पत्ति बढ़ाने का प्रयास करेंगे। सुखद यात्रा के योग हैं।मकर अधिक लालच के कारण नुकसान होगा। मान सम्मान बढेगा, विदेश से भी लाभ और सम्पर्क। विशेष चिंता का समाधान निकलेगा। सुलह से विवाद हल होगा।कुंभमन के अनुकूल धन लाभ नहीं होगा। नम्रता और चतुराई से कार्य सिद्धि होंगे। व्यापार में साझेदारी से लाभ होगा। शत्रु साजिश में फंसाएगें।मीनविशेष व्यक्तियों के साथ भेंट और भोजन। कलह योग हैं, अकारण विवाद से बचें। मिश्रित फल सुख भी, दुख भी। संतान के संदर्भ में चिंता बढ़ेगी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 12 Jul 2026 22:41:21 +0530</pubDate>
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<title>Sawan 2026 Calendar: शिव का प्रिय महीना कब होगा शुरू? जानें सावन सोमवार व्रत की पूरी Dates.</title>
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<description><![CDATA[ पूरे साल शिवभक्त सावन महीना का इंतजार करते हैं। हिंदू धर्म में सावन का महीना आस्था, भक्ति और साधना का विशेष समय माना जाता है। भगवान शिव को श्रावण मास सबसे प्रिय है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन अवधि में भगवान शिव ने माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रुप में स्वीकार किया था। पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने शिवजी को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की, जिसके बाद उनकी मनोकामना पूर्ण हुई। इसी कारण से सावन का महीना शिव-पार्वती के पावन मिलन और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस महीने में सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। खासकर सावन के सोमवार का महत्व अधिक बढ़ जाता है, इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं, तो भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। आइए आपको बताते हैं कब से सावन का महीना शुरु हो रहा है।सावन 2026 कब से शुरू होगा?साल 2026 में सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से आरंभ हो रहा है और यह 28 अगस्त तक रहेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह चातुर्मास का दूसरा महीना होता है, जो कि आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। इस समय पूरा माहौल भक्तिमय होता है।सावन के सोमवार की तिथियां  -पहला सोमवार- 3 अगस्त, -दूसरा सोमवार- 10 अगस्त, -तीसरा सोमवार- 17 अगस्त -चौथा सोमवार- 24 अगस्त 2026 इस दौरान शिवभक्त खासतौर पर व्रत रखते हैं और मंदिरों में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।सावन माह का महत्व धार्मिक नजरिए से सावन सोमवार का खास महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन पंचामृत से अभिषेक, रुद्राभिषेक और शिव मंत्रों को जाप करने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अगर आप की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, उन लोगों के लिए सावन में की गई पूजा-अर्चना बेहद फलदायी साबित हो सकती है।सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का भी विशेष महत्व है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों से गंगाजल लाकर पैदल यात्रा करते हैं और गंगाजल से शिव मंदिरों जलाभिषेक करते हैं। असल में यह यात्रा न सिर्फ आस्था प्रतीक है, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और विश्वास की एक अनोखी मिसाल भी प्रस्तुत करती है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 12 Jul 2026 22:41:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Jagannath Temple Significance: Puri के Jagannath Dham से जुड़े 5 Amazing Facts, क्यों मंदिर के ऊपर से नहीं उड़ते पक्षी</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में भगवान जगन्नाथ की पूजा का अधिक महत्व माना जाता है। भगवान जगन्नाथ का पावन धाम जिसको धरती का बैकुंठ भी कहा जाता है, वह ओडिशा के पुरी में स्थित है। सात प्राचीन पुरियों में एक इस पावन धाम में भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र के साथ विराजमान हैं। समुद्र के किनारे स्थित इस महाधाम की सिर्फ वास्तुकला नहीं बल्कि इससे जुड़े तमाम रोचक रहस्य भी हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको जगन्नाथ मंदिर और इससे जुड़ी रथ यात्रा से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में बताने जा रहे हैं।लकड़ी से बनी है मूर्तियांजगन्नाथ पुरी धाम में भगवान जगन्नाथ को श्रीकृष्ण का स्वरूप माना जाता है। यहां पर भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र के साथ मंदिर के गर्भगृह में विराजमान हैं। मंदिर में तीनों भगवान की मूर्तियां लकड़ी की बनी हैं, जिनको हर 12 साल में बदला जाता है।इसे भी पढ़ें: 84 Mahadev Temples in Ujjain: Ujjain Yatra होगी अधूरी, अगर नहीं किए 84 महादेव के दर्शन; जानें Route Map और महत्वअधूरी मूर्तियों की होती है पूजाहिंदू मान्यता के मुताबिक जब भगवान विश्वकर्मा से राजा इंद्रदयुम्न ने भगवान जगन्नाथ की मूर्तियों को बनाने का निवेदन किया। तो भगवान विश्वकर्मा ने यह शर्त रखी कि वह बंद कमरे में मूर्तियों को बनाएंगे और उस कमरे में कोई भी प्रवेश नहीं करेगा। माना जाता है कि जब जिज्ञासावश राजा इंद्रदयुम्न ने कमरे के पट खोल दिए, तो भगवान विश्वकर्मा अधूरी मूर्ति छोड़कर चले गए। तब से लेकर आज तक भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र की अधूरी मूर्तियों की पूजा की जाती है।जगन्नाथ की रथयात्राहर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ रथ यात्रा पर बाहर निकलते हैं। यह रथ यात्रा जगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर गुंडिचा मंदिर तक जाती है। फिर भगवान जगन्नाथ 9 दिनों बाद वापस अपने धाम को लौटकर आते हैं।मंदिर का मुकुट है सुदर्शन चक्रजगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगे सुदर्शन चक्र को मंदिर का चमत्कारी मुकुट भी कहा जाता है। आप इसको जिस भी तरफ से देखेंगे, यह आपको अपनी ओर घूमा हुआ नजर आएगा। मंदिर के शिखर पर बने सुदर्शन चक्र के दर्शन करना बेहद पुण्यदायी माना जाता है।हवा के विपरीत लहराता है ध्वजभगवान जगन्नाथ धाम के ऊपर लहराता हुआ ध्वज अपने आप में विशेष है। भगवान के मंदिर का यह ध्वज रोजाना बदला जाता है। यह परंपरा आज भी है। इस मंदिर के ध्वज की यह खासियत है कि यह हमेशा हवा के विपरीत लहराता है।भगवान जगन्नाथ का भोगभगवान जगन्नाथ की रसोई भी बेहद खास है। यहां पर रोजाना भगवान के लिए विशेष रूप से तमाम तरह के भोग बनकर तैयार किए जाते हैं। जिसको आप चढ़ाए जाने के बाद ही मंदिर परिसर से प्राप्त कर सकते हैं।कैसे पकता है भगवान जगन्नाथ का भोगभगवान जगन्नाथ का भोग बेहद पवित्रता के साथ रोजाना मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है। मंदिर परिसर में स्थित रसोई में चूल्हे पर मिट्टी के बर्तन एक के ऊपर एक रखे जाते हैं। वहीं सबसे ऊपर रखे बर्तन का भोग सबसे पहले पकता है और जो नीचे वाली मटकी होती है, उसका भोग सबसे आखिरी में पकता है।कम नहीं पड़ता महाप्रसादजब भोग को भगवान जगन्नाथ के लिए रसोई से मंदिर की ओर ले जाया जाता है। तो उस रास्ते के बीच में कोई भी नहीं आता है। वहीं यहां के महाप्रसाद की एक खासियत यह भी है कि यहां पर कितने ही भक्त आएं, लेकिन भोग समाप्त नहीं होता है। धार्मिक मान्यता है कि जगन्नाथ धाम पर हर पल मां अन्नपूर्णा और मां लक्ष्मी की कृपा रहती है। वहीं यहां पर कभी खाना बचता भी नहीं है।मंदिर के ऊपर से नहीं गुजरते पक्षी और जहाजभगवान जगन्नाथ धाम मंदिर के ऊपर के एक भी पक्षी या जहाज नहीं गुजरता है। वहीं जगन्नाथ मंदिर की कभी भी परछाई नहीं बनती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 12 Jul 2026 22:41:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Chaturmas 2026: योगिनी&#45;देवशयनी एकादशी कब? जानें व्रत&#45;पारण का पूरा Time</title>
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<description><![CDATA[ वैदिक पंचांग के मुताबिक 30 जून से आषाढ़ माह की शुरूआत हो चुकी है। वहीं इस माह की समाप्ति 29 जुलाई को होगी। आषाढ़ महीने में योगिनी एकादशी और देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होगी। देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरूआत होती है। इस अवधि में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि आषाढ़ माह में योगिनी एकादशी और देवशयनी एकादशी कब है।योगिनी एकादशी तिथि और मुहूर्तद्रिक पंचांग के मुताबिक आषाढ़ माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत 10 जुलाई की सुबह 08:16 मिनट से हो रही है। वहीं 11 जुलाई की सुबह 05:22 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। उदयातिथि के मुताबिक 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत किया जा रहा है।इसे भी पढ़ें: Yogini Ekadashi पर लगेगा Bhadra Kaal, जानें पूजा पर पड़ेगा असर? नोट करें सही Date और Shubh Muhuratव्रत पारण समययोगिनी एकादशी व्रत का पारण 11 जुलाई को किया जाएगा। इस दिन पारण का समय दोपहर 01:50 मिनट से लेकर शाम को 04:36 मिनट तक है।देवशयनी एकादशी तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का व्रत किया जाएगा और इसी दिन से चातुर्मास की शुरूआत होगी। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत 24 जुलाई की सुबह 09:12 मिनट पर होगी। वहीं अगले दिन यानी की 25 जुलाई को दिन में 11:34 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी।देवशयनी एकादशी पारण समय25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा। इस दिन पारण का समय सुबह 05:39 मिनट से लेकर सुबह 08:22 मिनट तक है। इस दौरान कभी भी व्रत पारण किया जा सकता है।इन बातों का रखें खास ध्यानएकादशी तिथि को चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।इस दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें और न तुलसी के पौधे में जल देना चाहिए।घर और मंदिर की साफ-सफाई करें।इस दिन बातचीत में गलत शब्दों का इस्तेमाल न करें।तामसिक भोजन करने से बचना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Jul 2026 09:07:58 +0530</pubDate>
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<title>सूर्य का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश: 20 July से 4 राशियों के लिए Career में आएगी Good News</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल और नक्षत्र परिवर्तन का विशेष महत्व माना जाता है। इस 20 जुलाई को सूर्य देव पुनर्वसु नक्षत्र से निकालकर शनि के स्वामित्व वाले पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं। बता दें कि, यह स्थिति 3 अगस्त तक बनीं रहेगी, जिसके बाद सूर्य देव अश्लेषा नक्षत्र में गोचर करेंगे। ज्योतिष के अनुसार, पुष्य नक्षत्र को काफी शुभ, फलदायी और समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। माना जाता है कि, सूर्य देव के इस नक्षत्र में आने से व्यक्ति को करियर, प्रतिष्ठा और आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। आइए जानते हैं सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन किन राशियों के लिए लाभदायक होगा।मेष राशि मेष राशि वालों के लिए सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन बेहद खास होने वाला है। अगर आप लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरा करने चाहते हैं, तो यह समय बेस्ट रहेगा। करियर में प्रगति के नए रास्ते खुलने वाले हैं। नौकरी करने वालों के लिए पदोन्नति के अवसर मिल सकते हैं और वेतन वृद्धि की भी संभावना बन रही है। इस समय कोई पुरानी इच्छा पूरी हो सकती है। इसके साथ, प्रतिष्ठित कंपनी से नौकरी का प्रस्ताव मिलने के भी योग बन सकते हैं।मिथुन राशि मिथुन राशि के जातकों के लिए यह गोचर कार्यक्षेत्र में सफलता दिलाने वाला है। जो भी आप कार्य करेंगे उसकी सरहाना होगी और वरिष्ठ अधिकारी आपसे प्रभावित रहेंगे। आपको नई जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं, जो भविष्य में आपके लिए फलदायी होगी। पहले से आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं और आय के नए स्रोत भी बनेंगे। सिंह राशियह समय सिंह राशि के लिए उन्नति और मान-सम्मान बढ़ाने वाला है। वर्कप्लेस में आपको कोई बड़ा प्रोजेक्ट मिल सकता है, जिससे आपकी पहचान मजबूत बनेंगी। इतना ही नहीं, समाज और ऑफिस में दोनों जगह आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। अगर आप नौकरी चेंज करने की सोच रहे हैं, तो यह समय अनुकूल है और आपको मनचाही नौकरी मिलने की संभावना है।वृश्चिक राशिवृश्चिक राशि के जातकों के लिए सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन बेहद खास होने वाला है। काफी समय से रुके हुए कार्य को पूर्ण करें और आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। अगर आपने कोई कर्ज लिया हुआ, तो उससे छुटकारा मिलने का संकेत है। इतना ही नहीं, आपको वाहन या संपत्ति सुख की प्राप्ति हो सकती है। हेल्थ में सुधार होगा और करियर में आगे बढ़ने के कई अवसर प्राप्त हो सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Jul 2026 09:07:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Puri Rath Yatra 2026 Full Schedule: जानें किस दिन होगी कौन सी रस्म, ये रहा पूरा 12 दिनों का Calendar</title>
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<description><![CDATA[ दुनिया भर में भगवान जगन्नाथ यात्रा प्रसिद्ध है और हर साल ओडिशा के पुरी में भव्य रथ यात्रा आयोजित होती है। खासकर इस रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन के लिए आते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति इस रथ यात्रा में शामिल होता है, उनके जीवन के सभी कष्ट भगवान जगन्नाथ हर लेते हैं और प्रभु की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस बार रथ यात्रा का शुभारंभ 16 जुलाई, गुरुवार से होने वाला है। अगर आप भी इस रथ यात्रा में शामिल होने चाहते हैं,तो इस लेख में जानते हैं रथ यात्रा का पूरा शेड्यूल। किस दिन रथ यात्रा शुरू होगी, कब तक चलेगी, किस दिन कौन सी रस्म होगी और अन्य तमाम जानकारी।पुरी रथ यात्रा 2026 का पूरा शेड्यूल15 जुलाई, बुधवार: नबजौबन दर्शनखासकर इस दिन भगवान जगन्नाथ एकांतवास से बाहर आते हैं और रथ यात्रा से पूर्व पहली बार सार्वजानिक तौर पर उनके दर्शन होते हैं।16 जुलाई, गुरुवार: रथ यात्रा का शुभारंभपुरी रथ यात्रा का शुभारंभ आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया को होता है। भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीनों रथों को खींचकर गुंडिचा मंदिर ले जाने का आरंभ होता है। यह आषाढ़ शुक्ल द्वितीय तिथि 15 जुलाई को 11.50 ए एम से लेकर 16 जुलाई को सुबह 8.52 बजे तक है।20 जुलाई, सोमवार: हेरा पंचमीइस दिन भगवान जगन्नाथ अपने भाई और बहन के साथ अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं। वहां वे विश्राम करते हैं, तब माता लक्ष्मी हेरा पंचमी के दिन गुंडिचा मंदिर आती है।23 जुलाई, गुरुवार: संध्या दर्शनइस दिन गुंडिचा मंदिर में संध्या के समय भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन होंगे।24 जुलाई, शुक्रवार: बहुदा यात्रागुंडिचा मंदिर से इस दिन उल्टी यात्रा का आरंभ होता है। प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र जी और सुभद्रा जी के तीनों रथों को खींचकर पुरी के मुख्य मंदिर ले जाया जाता है।25 जुलाई, शनिवार: सुना बेषाजैसा कि तीनों रथ मंदिर पहुंच जाते हैं, तो वहां सुना ना बेषा रस्म की जाती है। इसमें भगवान जगन्नाथ के साथ बलभद्र और सुभद्रा जी के सोने के आभूषणों से सजाया जाता है।26 जुलाई, रविवार: अधर पनाइस दिन भगवान जगन्नाथ के साथ उनके भाई और बहन को एक मीठा पेय पिलाया जाता है।27 जुलाई, सोमवार: नीलाद्री बीजेनीलाद्री बीजे रथ यात्रा का आखिरी अनुष्ठान होता है। इस रस्म में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को मुख्य श्री मंदिर के गृभगृह में रत्न सिंहासन पर विराजमान करवाया जाता है। इसके बाद ही रथ यात्रा का समापन होता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Jul 2026 09:07:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 11 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष डूबा हुआ धन प्राप्त होगा। सफलताओं से भरा दिन है। मातृतुल्य महिलाओं की स्वास्थ्य की चिंता। परिवार के लोगों की उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान।वृषदुविधाओं से मुक्ति मिलेगी। दूसरों के कामों में टांग न अढ़ाए। कार्यक्षेत्र में सार्थक विचारों पर बहस करेंगे। किसी खास शिक्षण प्रशिक्षण में भाग ले सकते हैं।मिथुनसांसारिक सुख सुविधाएं बढ़ेगी। परस्पर समझदारी और मधुरता बढ़ेगी। कुसंगति का बुरा परिणाम मिलेगा। शारीरिक कष्ट और असफलता का योग।कर्कपारिवारिक सुख साधनों में वृद्धि। पदोन्नति के अवसर मिलेंगे और व्यापार रोजगार आगे बढ़ेगा। बुद्धि कौशल से समस्याओं पर विजय। अच्छा दिन नहीं है, परेशान रहेंगे।सिंहवरिष्ठ अधिकारी आपके कार्यों से प्रसन्न रहेंगे। आर्थिक स्थिति के लिए अच्छा दिन है। जरूरी काम पूरे ना होने पर तनाव बढ़ेगा। ज्ञात-अज्ञात कारणों से मानसिक असंतोष।कन्यागलतफहमियां दूर होगी, संबंध सुधरेंगे। सहकर्मी प्रतिष्ठा बढ़ाने में सहायक होंगे। प्रयत्नों में अधिक सफलता मिलेगी। नौकर और अधीनस्थ से हानि की संभावना।तुलामन परिवर्तन का इच्छुक होगा। सफलता और सुयश से भरा दिन है। लक्ष्य प्राप्ति की प्रसन्नता होगी। वरिष्ठ अधिकारी सहयोग करेंगे।वृश्चिक आत्मबल और उत्साह से सिक्का जमेगा। गुप्त प्रेम प्रसंग प्रकट न हो जाए, ध्यान रखें। सम्मान और आर्थिक लाभ प्राप्त होंगे। व्यवहार में नम्रता से लाभ होगा। धनुविवेक से काम लें। विशेष शुभ समाचार भी मिलेगा। कच्ची नौकरी पक्की में बदल सकती है। रिश्तेदार के संबंध में अशुभ संदेश मिलेंगे।मकर विवाह योग्य संतान की सगाई होगी। धनागम के लिए उत्तम दिन। सकारात्मक विचारों और रचनात्मक कार्यों से उन्नति होगी। वरिष्ठों की नाराजगी रहेगी।कुंभसंभवतः पूरा दिन तनाव में बीतेगा। मन भय और आशंकाओं से भरा रहेगा। सभी काम सफलता की ओर बढ़ेंगे। उन्नति के कारण अलग पहचान बनेगी।मीनबच्चों को सुख-सुविधाएं देने की चिंता रहेगी। कार्य शैली में बदलाव संभव है। अपने को तनाव रहित अनुभव करेंगे। उन्नतिकारक समय है, विशेषकर संतान की। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 11 Jul 2026 09:07:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 10 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष नई वस्तुओं से ऐश्वर्य और सम्मान बढ़ेगा। जन सम्पर्क बढ़ेगा, धर्म गुरु का आर्शीवाद मिलेगा। थोड़ी सी उदण्डता और असफलता से निराशा होगी। बैंक बैलैंस बढ़ेगा- सुख साधन भी।वृषपरिश्रम का सुपरिणाम प्रसन्नता देगा। पठन-पाठन में रूचि बढ़ेगी। क्रोध कारण कोई विवाद खड़ा हो सकता है। धर्म गुरु की आर्शीवाद और धार्मिक यात्रा का योग।मिथुनआर्थिक मामलों में सावधान रहें। आज आप असंभव को भी संभव करेंगे। महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनका सहयोग समस्याएं भी सुलझाएगा।कर्कनिकटवर्ती लोगों से अनबन संभव है। दाम्पत्य जीवन में दरार-आर्थिक हानि भी। परिवार में वृद्धजनों का स्वास्थ्य बिगड़ेगा। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा।सिंहगुप्त योजनाओं/प्रेम प्रसंग में लिप्त रहेंगे। अधिकारी आपसे प्रभावित और प्रसन्न होंगे। विद्यार्थियों को सुयश दिलाने वाला दिन। सगे-संबंधियों के कारण दुःख और तनाव होगा।कन्याकार्य क्षेत्र का विस्तार होगा। सुख के दिन शुरू हुए है। प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी। भाग्य साथ दे रहा है, प्रयास करें।तुलाघर परिवार में अशांति का वातावरण रहेगा। किसी से कोई विवाद हो सकता है। उत्तम उपलब्धियों के साथ दिन दिन का शुभारंभ होगा। घर या कार्यालय में परिवर्तन की संभावना।वृश्चिक संतान पक्ष से अपेक्षित सुख संतोष का अभाव। आपके सद्व्यवहार से लोग प्रसन्न होंगे। आर्थिक लाभ और नई वस्तुओं की खरीद। पुराने मित्रों से मिलन-कार्यों में प्रभाव बढ़ेगा।धनुकुसंगति का बुरा परिणाम मिलेगा। स्वास्थ्य में कुछ गड़बड़ झाला लगता है। नई उम्मीदें लेकर सूर्योदय होगा। साझेदारी में सफलता मिलेगी।मकर आपके व्यक्तित्व का विकास होगा। परिवार के कामों में व्यस्तता रहेगी। सुख शांतिपूर्वक काम निपट जाएंगे। रूके हुए काम सफलता की ओर बढेंगे।कुंभआपकी साझेदारी सराहनीय रहेगी। तंत्र-मंत्र की साधना के लिए अच्छा दिन है। स्वास्थ्य में सुधार होगा, तनाव से मुक्ति। विशेष उत्तरादायित्व के लिए यात्रा की संभावना।मीनअटके हुए काम सरलता से बनेंगे। व्यापार तथा अन्य साधनों से धन लाभ। स्वास्थ्य संबंधी चिंता से मुक्ति मिलेगी। व्यापार की स्थिति मजबूत होगी। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:19:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 10 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 10 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 10 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशिआपकी राशि से द्वितीय भाव में चंद्रमा का गोचर होने के कारण आज आपकी वाणी में गजब की मिठास रहेगी। इस ज्योतिषीय प्रभाव से पार्टनर के साथ आपकी बातचीत बहुत सुखद रहेगी और आज आप दोनों आँखों ही आँखों में अपने दिल की बातें साझा करेंगे।वृषभ राशिचंद्रमा का आपकी ही राशि यानी प्रथम भाव में होना आज आपके मन को अत्यधिक भावुक और संवेदनशील बना रहा है। लव लाइफ के लिहाज से आज आपको अपने साथी के सानिध्य में असीम सुकून मिलेगा और पुराना हर शिकवा-शिकायत पूरी तरह दूर हो जाएगा।मिथुन राशिराशि स्वामी बुध का अनुकूल प्रभाव और द्वादश भाव का चंद्रमा मन में प्रेम की तीव्र इच्छा जगा रहा है। इस गोचर के कारण आज आपका पार्टनर खुलकर अपने प्यार का इजहार करेगा, जिससे आपके रिश्ते में एक नई ताजगी और सकारात्मकता आएगी।कर्क राशिएकादश भाव का चंद्रमा आज आपकी इच्छाओं की पूर्ति और प्रेम संबंधों में गहराई आने का स्पष्ट संकेत दे रहा है। आज आपका हमसफर आपकी हर अनकही बात को बिना बताए ही समझ लेगा, जिससे आप दोनों का आपसी कनेक्शन और मजबूत होगा।सिंह राशिआपके पंचम यानी प्रेम भाव के स्वामी पर शुभ ग्रहों की पूर्ण दृष्टि पड़ने से आज आपके आकर्षण में जबरदस्त बढ़ोतरी हो रही है। लव लाइफ में आज पार्टनर आपको विशेष महसूस कराने के नए-नए जतन करेगा और दिल की बात कहने के लिए समय श्रेष्ठ है।कन्या राशिनवम भाव यानी भाग्य स्थान में उच्च के चंद्रमा के विराजमान होने से आज आपके प्रेम संबंधों को भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। आप अपने साथी के साथ मिलकर भविष्य के हसीन सपने बुनेंगे और रिश्ते में ईमानदारी के साथ-साथ मिठास बढ़ेगी।तुला राशिआपकी राशि के स्वामी शुक्र की अत्यंत अनुकूल स्थिति आज आपके लव लाइफ में रोमांस और आकर्षण को चरम पर ले जा रही है। आज का दिन आप दोनों के लिए किसी जादुई उत्सव जैसा रहेगा और पुराना खोया हुआ रोमांस पूरी तरह वापस लौट आएगा।वृश्चिक राशिसप्तम भाव यानी विवाह और साझेदारी के घर में चंद्रमा का गोचर आज आप दोनों के बीच एक अनूठा मानसिक और शारीरिक खिंचाव बढ़ा रहा है। दिनभर की व्यस्तताओं के बावजूद आज आपका पार्टनर आपके लिए वक्त चुराएगा, जिससे आपका मन प्रसन्न रहेगा।धनु राशिछठे भाव का चंद्रमा थोड़ा तनाव दे सकता है, लेकिन शुक्र की शुभ दृष्टि प्रेम संबंधों में एक नया उत्साह और ऊर्जा भरने का काम करेगी। आज रिश्तों में नई उमंग आएगी और साथी के साथ किसी छोटी व बेहद सुखद यात्रा के योग बन रहे हैं।मकर राशिपंचम भाव यानी लव, रोमांस और संतान के घर में चंद्रमा का यह गोचर आपके लिए सबसे उत्तम और श्रेष्ठ फल देने वाला सिद्ध होगा। आज आपको अपने साथी की आँखों में बेपनाह मोहब्बत दिखेगी और वैवाहिक जीवन की सारी दूरियाँ पल भर में सिमट जाएंगी।कुंभ राशिचतुर्थ भाव का चंद्रमा आज आपकी लव लाइफ में मानसिक शांति, सुरक्षा की भावना और आपसी तालमेल को बहुत मजबूत करने वाला है। आज आपका पूरा दिन पार्टनर के निस्वार्थ प्रेम के साये में बीतेगा और आप खुद को बेहद भाग्यशाली महसूस करेंगे।मीन राशितृतीय भाव का चंद्रमा और उस पर गुरु की शुभ दृष्टि आज आपके प्रेम संबंधों में एक अटूट विश्वास और सम्मान पैदा कर रही है। आज आपको अपने जीवनसाथी का हर मोड़ पर अटूट साथ मिलेगा और आज साथ बिताया गया हर पल एक यादगार लम्हा बन जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:19:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Yogini Ekadashi पर लगेगा Bhadra Kaal, जानें पूजा पर पड़ेगा असर? नोट करें सही Date और Shubh Muhurat</title>
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<description><![CDATA[ आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी का व्रत किया जा रहा है। यह जुलाई महीने की पहली एकादशी भी है। इस बार योगिनी एकादशी पर 2 घंटे से ज्यादा के समय के लिए भद्रा का साया रहेगा। भद्रा का साया स्वर्ग में होगा। योगिनी एकादशी व्रत करने से जातक के सभी रोग और पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन के अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो भी योगिनी एकादशी का व्रत करता है, उसको 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक इस बार आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत 10 जुलाई की सुबह 08:16 मिनट पर हो रही है। वहीं 11 जुलाई की सुबह 05:22 मिनट तक यह मान्य रहेगी। वहीं 11 जुलाई को सुबह 10:32 मिनट पर हरि वासर खत्म हो रहा है। इस कारण से योगिनी एकादशी का व्रत दो दिन रखा जाएगा।इसे भी पढ़ें: July Vrat List: देवशयनी एकादशी से गुरु पूर्णिमा तक, जानें इस महीने के सभी प्रमुख व्रतवहीं 10 जुलाई 2026 को गृहस्थ लोग योगिनी एकादशी का व्रत रखेंगे और 11 जुलाई को वैष्णव संप्रदाय के लोग यह व्रत करेंगे। 10 जुलाई को योगिनी एकादशी की पूजा सुबह 08:16 बजे से तक सकते हैं। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10:42 मिनट तक रहेगा।पारण समय10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत करने वाले लोग 11 जुलाई की दोपहर 01:50 मिनट से लेकर शाम 04:36 मिनट के बीच व्रत का पारण कर सकते हैं। वहीं जो लोग 11 जुलाई को व्रत करेंगे, वह 12 जुलाई की सुबह 05:32 मिनट से लेकर सुबह 08:18 मिनट तक व्रत पारण करेंगे।योगिनी एकादशी पर भद्रा का सायाबता दें कि 10 जुलाई 2026 की सुबह 05:31 मिनट से भद्रा शुरू होगी, जोकि सुबह 08:16 मिनट तक रहेगी। यह भद्रा 2 घंटे से ज्यादा समय तक है, लेकिन भद्रा का वास स्वर्ग में है। ऐसे में धरती पर भद्रा का अशुभ प्रभाव नहीं होगा। इसलिए आप बिना किसी चिंता के व्रत और पूजा कर सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:19:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Yogini Ekadashi 2026: 88 हजार ब्राह्मणों के भोजन समान पुण्य, जानें Lord Vishnu पूजा की सही विधि</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। हर साल आषाढ़ माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी का व्रत किया जाता है। इस बार आज यानी की 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत किया जा रहा है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन श्रीहरि विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। योगिनी एकादशी के व्रत का पुण्य 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर माना जाता है। तो आइए जानते हैं योगिनी एकादशी की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक योगिनी एकादशी तिथि की शुरूआत 09 जुलाई की रात 09:31 मिनट से हो रही है। वहीं इसकी समाप्ति 10 जुलाई की रात 10:11 मिनट पर हो रही है। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई 2026 को किया जा रहा है।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। फिर व्रत का संकल्प लें और घर के मंदिर को गंगाजल से पवित्र करें। फिर पूजा स्थल पर पीले कपड़े बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा का स्थापित करें। भगवान को पीले रंग के फूल, चंदन, अक्षत, फल और भोग आदि अर्पित करें। पूजा में तुलसी दल जरूर शामिल करें। एकादशी को तुलसी पत्ते नहीं तोड़े जाते हैं, इसलिए एक दिन पहले इसको तोड़कर रख दें। पूजा के दौरान घी का दीपक जलाएं और योगिनी एकादशी व्रत का पाठ करें। इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और आरती करें। वहीं पूजा के अंत में हुई भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें। मंत्रऊँ श्री विष्णवे नम:ऊँ श्री परमात्मने नम:ऊँ श्री विराट पुरुषाय नम:ऊँ श्री क्षेत्र क्षेत्राज्ञाय नम:ऊँ श्री केशवाय नम:ऊँ श्री पुरुषोत्तमाय नम:ऊँ श्री ईश्वराय नम:ऊँ श्री हृषीकेशाय नम:ऊँ श्री पद्मनाभाय नम: ]]></description>
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<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:19:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 9 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 9 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 9 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशिआज आपका दिल अपने हमसफर के लिए पूरी तरह धड़केगा। उनकी एक मंद मुस्कान आपके दिनभर के तनाव को पल भर में मिटा देगी। आज आपको महसूस होगा कि मौन रहकर भी आँखों ही आँखों में कितनी बातें की जा सकती हैं। शाम को साथ बिताया गया कुछ समय आपके रिश्ते में असीम सुकून घोल देगा।वृषभ राशिदाम्पत्य जीवन में आज आपसी समझ और सानिध्य का एक बेहद खूबसूरत सवेरा हुआ है। आप दोनों एक-दूसरे की छोटी-बड़ी जरूरतों का ख्याल रखेंगे। यदि बीते दिनों कोई शिकवा-शिकायत थी, तो आज वह प्रेम की गर्माहट में पूरी तरह पिघल जाएगी। आज का दिन साथ में मुस्कुराने का है।मिथुन राशिआज आपका पार्टनर आपके प्रति अपनी अगाध श्रद्धा और असीम प्रेम को खुलकर बयां कर सकता है। उनके शब्द आपके दिल को छू लेंगे और आपके मन को एक अद्भुत तृप्ति का अहसास कराएंगे। रिश्तों में नई उमंग और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा, जो आपको दिनभर प्रफुल्लित रखेगा।कर्क राशिआज आपकी लव लाइफ में बहुत अधिक संवेदनशीलता और गहराई देखने को मिलेगी। आपका हमसफर आपकी हर अनकही भावना को बिना बताए ही समझ लेगा। आज किसी शांत जगह पर बैठकर एक-दूसरे का हाथ थामना आपके दिल के तार को सीधे उनके दिल से जोड़ देगा।सिंह राशिआज आपके व्यक्तित्व का जादू आपके पार्टनर के सिर चढ़कर बोलेगा। वे आपको विशेष महसूस कराने के लिए नए-नए जतन करते दिखेंगे। जो लोग लंबे समय से किसी को अपने दिल की बात कहना चाहते थे, उनके लिए आज अपनी भावनाएं प्रकट करने का सबसे सुंदर और अनुकूल दिन है।कन्या राशिसच्चा समर्पण और अटूट विश्वास ही आज आपके रिश्ते की सबसे बड़ी खूबसूरती बनेगी। जीवनसाथी के साथ हर बातचीत में एक अलग ही सोंधापन और मिठास रहेगी। आप दोनों मिलकर आने वाले कल के लिए कुछ हसीन सपने बुनेंगे, जो आपके आपसी जुड़ाव को और भी ज्यादा गहरा कर देंगे।तुला राशिप्रेम के मोर्चे पर आज का दिन किसी उत्सव जैसा आनंदमयी और जादुई रहने वाला है। आप दोनों के बीच का पुराना रोमांस और आकर्षण आज पूरी तरह से लौट आएगा। आज साथ बिताया गया हर एक पल किसी सुनहरी याद की तरह आपके दिल की डायरी में हमेशा के लिए दर्ज हो जाएगा।वृश्चिक राशिदिनभर की व्यस्तताओं के बीच भी आज आपका पार्टनर सिर्फ आपके लिए वक्त चुराएगा, जो आपको बेहद खास होने का अहसास कराएगा। उनका एक छोटा सा प्रेम भरा संदेश भी आपके चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान ला देगा। आज का दिन आपसी लगाव और अनुराग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।धनु राशिआज आपके प्रेम जीवन में एक नई उमंग और सुनहरी रोशनी का संचार होगा। आप अपने साथी के साथ मिलकर किसी छोटी लेकिन सुखद यात्रा की योजना बना सकते हैं। रिश्तों में केवल और केवल खुशहाली, हंसी-मजाक और मीठी बातें ही आज के दिन का मुख्य आकर्षण रहेंगी।मकर राशिवैवाहिक जीवन की रोजमर्रा की दिनचर्या से निकलकर आज आपका रिश्ता एक बेहद खूबसूरत मोड़ लेगा। साथी की आँखों में अपने लिए वही पुराना आदर, समर्पण और बेपनाह मोहब्बत देखकर आपका मन मयूर नाच उठेगा। आज दूरियाँ पूरी तरह सिमट जाएंगी।कुंभ राशिआज आपका पूरा दिन पार्टनर के निस्वार्थ प्रेम, परवाह और स्नेह के साये में गुजरेगा। वे आपकी हर छोटी-बड़ी खुशी का ध्यान इस तरह रखेंगे कि आप खुद को दुनिया का सबसे भाग्यशाली इंसान महसूस करेंगे। आज का दिन आपसी सामंजस्य की एक नई मिसाल बनेगा।मीन राशिआज ब्रह्मांड के सितारे आपके प्रेम जीवन पर अपनी पूरी कृपा बरसा रहे हैं। जीवनसाथी का अटूट साथ और उनका विश्वास आपकी सबसे बड़ी ताकत बनेगा। आज आप दोनों मिलकर अपनी पुरानी और हसीन यादों की गलियों में खो जाएंगे और एक-दूसरे के प्रति पूरी तरह समर्पित महसूस करेंगे।आज का लव टिप: प्रेम कोई उम्मीद या शर्त नहीं, बल्कि एक निस्वार्थ अहसास है। आज अपने साथी के पास बैठें, उनकी बातें सुनें और उन्हें महसूस कराएं कि वे आपकी दुनिया में सबसे अनमोल हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 09 Jul 2026 12:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Love, Horoscope, For, July, 2026, आज, का, प्रेम, राशिफल, जुलाई, 2026, प्रेमियों, के, लिए, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन</media:keywords>
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<title>Horoscope 09 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष अटके हुए काम बनेंगे। स्वजनों से मिलने के अवसर मिलेंगे। आर्थिक स्थिति की मजबूती, चिंताओं से मुक्ति। सुख के साधन बढ़ेंगे, अचल सम्पत्ति की खरीद।वृषव्यवहार में सुधार करें। आर्थिक लाभ और मान सम्मान की प्राप्ति। बेकार के लोगों के साथ धन और समय नष्ट होंगे। व्यवहार में सावधानी-झूठा आरोप संभव।मिथुनअपनी उपलब्धियों से खुशी होगी। विरोधी प्रबल रहेंगे। पदोन्नति के लिए विशेष सिफारिश संभव। आज सुख सुविधा में वृद्धि होगी।कर्कप्रसन्नता का वातावरण और प्रतिष्ठा बढ़ेगी। अप्रत्याशित धन लाभ, उत्तम वैवाहिक सुख। प्रचुर मात्रा में धन प्राप्ति होगी। मित्र और मित्रता की परीक्षा में सफल होंगे।सिंहचहुमुखी विकास के अवसर मिलेंगे। किसी परिचित के लिए अशुभ समाचार मिलेगा। अशुभ और अप्रिय समाचारों की प्राप्ति। उपलब्धि प्रसन्नता देने वाली है।कन्याधन हानि और अवसाद के योग है। क्रोध पर काबू रखें और जबान पर ताला। जरूरतमंदों की सहायता का सौभाग्य मिलेगा। शंका और आशंकाओं से मन घिरा रहेगा।तुलाआर्थिक समस्याएं सहज ही सुलझेंगी। अप्रिय घटनाएं घटेगी। गुरुजनों का आर्शीवाद मिलेगा। जरूरी कागजात या कीमती समान गुम होगा।वृश्चिक कई चिंताओं से मुक्ति मिलेगी। संचित धन में वृद्धि होगी, यात्रा भी संभव। घर में कलह और बनते काम बिगड़ने का दुःख। गुरुजनों की कृपा, परिश्रम के अनुसार लाभ। धनुपरिश्रम के अनुरूप फल प्राप्त नहीं होगा। उदर विकार और शारीरिक कष्ट। नौकरी में बदलाव करने के संकेत मिलेंगे। शारीरिक स्वास्थ्य गड़बड़ाएगा।मकर आध्यात्म में रूचि बढ़ेगी और लाभ भी होगा। डॉक्टरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। मित्रों से लाभ होगा। अध्यात्म में रूचि और सत्संग में समय बीतेगा।कुंभज्ञात अज्ञात कारणों से मन दुखी रहेगा। धन प्राप्ति होगी, बुद्धि की तारीफ होगी। पिछले दिनों किए गये कार्य सुपरिणाम देंगे। रंगमंच और संचारकर्मी यशस्वी होंगे।मीनमानसिक चिंताएं दूर होगी। विशेष प्रतियोगिता में विजय प्राप्त करेंगे। मन की अंशात स्थिति शांत होगी। यथा लाभ संतोष- का सूत्र याद रखें। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 09 Jul 2026 12:45:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>July Vrat List: देवशयनी एकादशी से गुरु पूर्णिमा तक, जानें इस महीने के सभी प्रमुख व्रत</title>
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<description><![CDATA[ जुलाई के महीने में एक साथ कई व्रत पड़ते हैं। पंचांग की गणना के मुताबिक जुलाई महीने में चातुर्मास की शुरुआत होने वाला है। वहीं इस महीने आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, देवशयनी एकादशी और जगन्नाथ रथ यात्रा जैसे कई व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे। जुलाई महीने में चातुर्मास की शुरूआत होने के साथ ही मांगलिक कार्य करीब 4 महीने के लिए बंद हो जाएंगे।  वहीं इस महीने में किए जप-तप और धार्मिक कार्यों को करने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको जुलाई के महीने में व्रत-त्योहारों के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 9 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 9 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनजुलाई व्रत त्योहार लिस्टयोगिनी एकादशी व्रत - 11 जुलाई 2026रवि प्रदोष व्रत - 12 जुलाई 2026आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरूआत - 15 जुलाई 2026श्री जगन्नाथ रथयात्रा पुरी - 16 जुलाई 2026आषाढ़ गुप्त नवरात्रि समाप्त - 22 जुलाई 2026हरिशयनी एकादशी व्रत\ देवशयनी एकादशी - 25 जुलाई 2026श्री विष्णु शयनोत्सव - 25 जुलाई 2026चतुर्मास का आरंभ - 25 जुलाई 2026रवि प्रदोष व्रत - 26 जुलाई 2026गुरु पूर्णिमा-व्यास पूजा - 29 जुलाई 2026कोकिला व्रत की शुरूआत - 29 जुलाई 2026योगिनी एकादशी व्रतआषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी का व्रत किया जाता है। योगिनी एकादशी का व्रत करने से अंजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।आषाढ़ गुप्त नवरात्रिआषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की गुप्त पूजा की जाती है। इस नवरात्रि में पूजा-पाठ और व्रत बहुत ही गुप्त तरीके से किया जाता है।हरिशयनी एकादशी व्रतहरिशयनी एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और पूरे 4 महीने बाद जागते हैं। इसको चातुर्मास कहा जाता है।चातुर्मास की शुरूआतजब भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, तो उसी दिन से चातुर्मास की शुरूआत हो जाती है। इस दौरान कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। हरिशयनी एकादशी से ही चातुर्मास की शुरूआत हो जाती है।गुरु पूर्णिमागुरु पूर्णिमा के मौके पर वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। इसलिए इसको गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। उनको हिंदू धर्म का परम गुरु माना जाता है। वहीं बौद्ध धर्म के मुताबिक इस दिन महात्मा बुद्ध ने सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था।कोकिला व्रतबता दें कि आषाढ़ माह की पूर्णिमा से कोकिला व्रत शुरू हो जाता है। कोकिला व्रत पूरे एक महीने तक चलता है। इस व्रत को महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए करती हैं। इस व्रत में मां पार्वती के कोयल रूप और भगवान शिव की पूजा की जाती है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 09 Jul 2026 12:45:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>July, Vrat, List:, देवशयनी, एकादशी, से, गुरु, पूर्णिमा, तक, जानें, इस, महीने, के, सभी, प्रमुख, व्रत</media:keywords>
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<title>July 2026 Vrat Tyohar: सावन, गुप्त नवरात्रि से देवशयनी एकादशी तक, देखें Festival की पूरी List</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म के लिए जुलाई का महीना काफी खास हो सकता है। क्योंकि जुलाई में कई बड़े व्रत और त्योहार पड़ते हैं। हिंदू पंचांग के मुताबिक जुलाई महीने की शुरूआत आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि से हो रही है। वहीं समाप्ति श्रावण माह की प्रतिपदा तिथि से होगी। जुलाई महीने में देवशयनी एकादशी, जगन्नाथ रथयात्रा, गुरु पूर्णिमा, योगिनी एकादशी और श्रावण माह की शुरूआत हो रही है।जुलाई महीने से ही चातुर्मास की शुरूआत होगी और भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाएंगे। वहीं इसके साथ ही मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे। चातुर्मास की शुरूआत होते ही श्रावण का महीना शुरू हो जाएगा।इसे भी पढ़ें: July Vrat List: देवशयनी एकादशी से गुरु पूर्णिमा तक, जानें इस महीने के सभी प्रमुख व्रतयोगिनी एकादशी 2026आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी व्रत किया जाएगा। आषाढ़ माह की एकादशी तिथि की शुरूआत 10 जुलाई की सुबह 08:16 मिनट पर हो रही है। जोकि अगले दिन यानी की 11 जुलाई की सुबह 05:22 मिनट तक है। ऐसे में 10 जुलाई को गृहस्थ लोग और 11 जुलाई को वैष्णव संप्रदाय के लोग व्रत करेंगे।आषाढ़ गुप्त नवरात्रिआषाढ़ माह में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। इस दौरान 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। 15 जुलाई 2026 से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरूआत हो रही है। जोकि 23 जुलाई 2026 को समाप्त होगी।जगन्नाथ रथयात्राआषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को जगन्नाथ रथयात्रा होगी। ओडिशा के पुरी के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी रथ यात्रा निकाली जाती है। इस बार 16 जुलाई 2026 को जगन्नाथ रथ यात्रा है।देवशयनी एकादशी व्रतदेवशयनी एकादशी का विशेष महत्व होता है। क्योंकि इस दिन से श्रीहरि सृष्टि की बागडोर को पूरे 4 महीने के लिए भगवान शिव को सौंपकर योग निद्रा में चले जाएंगे। इस कारण इसको देवशयनी या हरिशयनी एकादशी के नाम से जानते हैं। वहीं 4 माहों तक मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी।चातुर्मास 202624 जुलाई 2026 से आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत सुबह 09:12 बजे से शुरू होगी। वहीं 25 जुलाई की रात 11:34 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। उदयातिथि के अनुसार 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा और इसके साथ ही चातुर्मास की शुरूआत होगी।श्रावण मास 202630 जुलाई 2026 से भगवान शिव का प्रिय महीना श्रावण की शुरूआत हो रही है। वहीं श्रावण माह की समाप्ति 28 अगस्त को होगी। वहीं सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 को होगी। इस बार कुल 4 सावन पड़ने वाले हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 09 Jul 2026 12:45:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>शनि देव को करना है प्रसन्न? Haircut करवाते समय अपनाएं यह ज्योतिषीय उपाय, Life होगी बेहतर</title>
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<description><![CDATA[ क्या आप जानते हैं कि हमारे बालों का संबंध न्याय देवता शनि देव जुड़ा है? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शरीर का हर अंग ग्रहों से जुड़ा होता है। खासतौर पर सीधा संबंध हमारे जीवन पर पड़ता है। हमारे शरीर बाल और नाखून का संबंध सीधे तौर पर शनि देव से माना जाता है। ज्योतिष के मुताबिक,शनि देव को कर्मफल दाता कहा जाता है, जो कि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। वहीं, अच्छे कर्म करने वालों को सुख देते हैं और बुरे काम करने वालों को सजा देते हैं। अक्सर गलत समय पर बाल कटवाने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे शनि भी कमजोर हो सकता है। इसलिए आप एक काम करके शनि के प्रभाव को मजबूत कर सकते हैं। बाल का शनि से कैसे होता है संबंध?असल में हमारे बालों का सीधा कारक शनि होता है। कहा भी जाता है कि शनिवार के दिन बाल नहीं कटवाने नहीं चाहिए। ऐसा करने पर शनि की बाधा बढ़ जाती है।  शनिदेव को संयम अधिक प्रिय है। इसलिए अपने बालों का त्याग करना अच्छा भी नहीं माना जाता है। अगर आप सही समय का चयन करके इस प्रक्रिया को कर सकते हैं, जिससे आपके जीवन में किसी भी तरह बाधा नहीं आएगी।बाल कटवाने से पहले जरूर करें ये एक कामकिसी भी सैलून पर बाल कटवाने जाएं, तो सबसे पहले घर से निकलने से पहले थोड़ा कच्चा दूध अपने बालों में लगा लें। जिसके बाद अपने बालों को कटवाएं। कच्चा दूध मस्तिष्क को शांत रखने में मदद करता है और नकारात्मक ऊर्जा को कम करता है। वैसे यह उपाय बालों के कटवाने से पहले करना चाहिए, ऐसा करने से शनिदेव आपसे नाराज न हों और आप बाल भी अच्छे से कटवा सकते हैं।बाल कटवाने से पहले इन बातों का ध्यान रखें- शनिवार के दिन भूलकर भी बालों को न कटवाएं। ऐसा करने से आयु की कमी होती है। - एकादशी, पूर्णिमा और अमावस्या के दिन बालों को न कटवाएं। वरना आपका ध्यान भटक सकता है। - जब बाल कटवाने जाएं, तो पहले आप ऊपर बताए उपाय को जरुर करें।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Jul 2026 16:34:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 8 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 8 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 8 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशिआज साथी से असीम स्नेह मिलेगा, लेकिन पुरानी किसी बात के खुलने का डर भी रहेगा। सतर्क रहें, कोई भी बात छुपाने की कोशिश आज आपके मजबूत भरोसे को हिला सकती है।वृषभ राशिदाम्पत्य जीवन में रोमांस बढ़ेगा, परंतु ग्रहों की चाल अचानक गलतफहमी का संकेत दे रही है। सतर्क रहें, किसी तीसरे व्यक्ति की बातों में आकर अपने हमसफर पर शक न करें।मिथुन राशिपार्टनर आज आपके प्रति बहुत केयरिंग रहेगा, जिससे मन खुश होगा। सतर्क रहें, अपनी अत्यधिक उम्मीदों से उन पर दबाव न बनाएं, वरना एक छोटी सी तीखी बहस माहौल बिगाड़ सकती है।कर्क राशिआज दिल की नजदीकियां बढ़ेंगी, लेकिन मन में रिश्ता खोने का एक अनजाना डर हावी हो सकता है। सतर्क रहें, अतीत की कड़वी यादों को आज के खुशनुमा पलों पर भारी न पड़ने दें।सिंह राशिआज लव लाइफ में उत्साह रहेगा और साथी आपकी बात मानेगा, पर आपका जरूरत से ज्यादा हक जताना उन्हें परेशान कर सकता है। सतर्क रहें, पार्टनर की खामोशी के पीछे का कारण समझें।कन्या राशिरिश्ते में आज ईमानदारी और समर्पण रहेगा, जिससे भविष्य सुरक्षित लगेगा। सतर्क रहें, पैसों या बजट की बात को आज अपने प्रेम के बीच में न आने दें, वरना विवाद का डर है।तुला राशिरोमांस के मामले में आज का दिन जादुई रहेगा, लेकिन इस प्यार में इतने न खो जाएं कि जरूरी काम छूट जाएं। सतर्क रहें, परिवार और पार्टनर के बीच संतुलन न खोने का डर आज बना रहेगा।वृश्चिक राशिआज संबंधों में भरपूर आकर्षण रहेगा, लेकिन आपकी जरूरत से ज्यादा रोक-टोक करने की आदत पार्टनर में घुटन पैदा कर सकती है। सतर्क रहें, रिश्ते में थोड़ी आजादी जरूर दें।धनु राशिलव लाइफ में आज नई उम्मीदें जागेंगी, परंतु किसी पुराने परिचित की एंट्री से वर्तमान रिश्ते में उलझन का डर है। सतर्क रहें, अपने पार्टनर के भरोसे को ही सबसे ऊपर रखें।मकर राशिवैवाहिक जीवन में आज प्रेम और जिम्मेदारी दोनों दिखेंगे, लेकिन साथी का रूखा व्यवहार आपको डरा सकता है। सतर्क रहें, उनके गुस्से को नजरअंदाज न करें, पास बैठकर बात सुनें।कुंभ राशिपार्टनर आज आप पर पूरा प्यार लुटाएगा, जिससे रिश्ता मजबूत होगा। सतर्क रहें, काम की व्यस्तता के चलते उन्हें समय न दे पाना आज किसी बड़ी गलतफहमी की वजह बन सकता है।मीन राशिआज साथी के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव महसूस होगा। सितारे चेतावनी दे रहे हैं कि सोशल मीडिया या बाहरी लोगों की नजर आपके रिश्ते को लग सकती है। सतर्क रहें, निजी बातें गुप्त रखें।आज का लव टिप: रिश्ते में सतर्कता अच्छी है क्योंकि यह खोने के डर को दिखाती है, बस ध्यान रहे कि यह सतर्कता कभी शक में न बदले। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Jul 2026 16:34:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 08 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष कलहकारी गोचर कामों से रूकावट भी। जरूरी काम दोपहर तक निपटा लें। प्रतियोगिता में आप सफल होंगे। लक्ष्यसिद्धि के लिए अच्छा समय है।वृषविवाह एवं प्रेम प्रसंग में सावधानी बरतें। इंटरव्यू / प्रतियोगिता में सफलता। सांस्कृतिक कार्यों में भाग ले सकते हैं। रोजगार व्यवसाय में अच्छा लाभ होगा।मिथुनआपके अपने ही शत्रुवत व्यवहार करेंगे। विपक्ष कमजोर होगा, हार मानेगा। विद्यार्थियों को शुभ परिणाम मिलेंगे। शीतजन्य व्याधि और मां को कष्ट।कर्कपारिवारिक जीवन में सुख और शांति। धर्म-कर्म में रूचि, शांति का भी अनुभव। किए गये कार्यों का सुपरिणाम मिलेगा। जल्दबाजी हानिकारक सिद्ध होगी।सिंहगुरुजनों का आर्शीवाद मिलेगा। रोजगार के क्षेत्र में समस्याएं दूर होगी। आपका प्रभाव बढ़ाने वाला दिन है। अस्थायी नौकरी पक्की हो सकती है।कन्याभावनाओं में न बहें और क्रोध से भी बचें। समाज के वरिष्ठ लोगों और दफ्तर के उच्चाधिकारियों से लाभ रहेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा। अशुभ दिन, शायद ही सफलता मिलें।तुलाअच्छा काम करते हुए भी आरोप लगेगा। स्वजनों से सहयोग मिलेगा। कल्पना और यथार्थ में अंतर महसूस करेंगे। मुसीबत में परिवार दृढ़ और एक रहेगा।वृश्चिक आत्मविश्वास बढ़ेगा, असमजंस दूर होगा। मन अशांत, सहयोगी/सहयात्री से परेशानी। मित्रों से सहयोग मिलेगा, सराहनीय सफलता। सकारात्मक परिवर्तन की ओर बढ़ेंगे।धनुधनागम होगा, प्रसन्नता बढ़ेगी। जीवनसाथी आपकी भावनाओं का सम्मान करेंगे। मूत्र रोग, पुरानी बवासीर से कष्ट होगा। इंटरव्यू में सफलता, खुशी के समाचार मिलेंगे। मकर धन का लेन-देन योजनानुसार करें। काम पर ध्यान दें, अफवाहों से बचें। जरूरी काम पूरे न होने पर मन विचलित रहेगा। कलंक लगने और अपमान होने की संभावना है।कुंभरिश्तेदारों की तानाकशी मन को ठेस पहुंचाएगी। कार्यक्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। सम्पति संबंधी विवाद का हल निकलेगा। पारिवारिक शुभ कार्यों में व्यस्तता।मीनदूसरों के पचड़ें में न पड़े, विवाद संभव। आत्मबल से भरपूर रहेंगे। रचनात्मक कार्य प्रतिष्ठा बढ़ाएंगे। बिगड़े हुए काम सुधरते हुए आगे बढ़ेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Jul 2026 16:34:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>कब है Yogini Ekadashi 2026? जानें Lord Vishnu को प्रसन्न करने की संपूर्ण पूजा विधि और Shubh Muhurat</title>
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<description><![CDATA[ आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है और यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है, जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। योगिनी एकादशी 2026 की तारीख और शुभ मुहूर्तहिंदू पंचांग के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई, शुक्रवार को रखा जाएगा। वहीं, एकादशी तिथि की शुरुआत 10 जुलाई 2026 को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर होगी। तिथि का समापन 11 जुलाई 2026 को सुबह 5 बजकर 22 मिनट पर होगा। हालांकि, हरिवासर का अंत 10 जुलाई को सुबह 10 बजकर 32 मिनट पर होगा। व्रत का पारण 11 जुलाई 2026 को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से शाम 4 बजकर 36 मिनट के बीच किया जाएगा।योगिनी एकादशी की पूजा विधि- योगिनी एकादशी के दिन सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के मंदिर की सफाई करें और फिर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। - अब आप भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद तुलसी के पत्ते, पीले फूल, चंदन, धूप और घी का दीपक अर्पित करें। फल और सात्विक भोग जरुर चढ़ाएं। अब आप विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और &quot;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&quot; मंत्र का जाप करें।- शाम के समय श्री विष्णु की आरती करें। योगिनी एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद भजन-कीर्तन, ध्यान और भगवान के नाम का स्मरण करते हुए दिन बिताना शुभ माना जाता है।योगिनी एकादशी व्रत के नियम- साधक अपनी क्षमता के अनुसार ही व्रत रखें। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जिसनें पूरे दिन न तो भोजन किया जाता है और न ही पानी पिया जाता है।- कुछ लोग फलाहार व्रत रखते हैं, वे फूल, दूध, दही, सूखे मेवे, साबूदाना, सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन और सेंधा नमक का सेवन भी कर सकते हैं। - लेकिन व्रत के दौरान चावल, गेहूं, दालें, प्याज, लहसुन, मांसाहरी भोजन, शराब और किसी भी तरह का नशे से दूर रहने में भलाई है।  योगिनी एकादशी के आध्यात्मिक लाभधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और निमयपूर्वक करने से जातक के बुरे कर्मों के प्रभाव से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हेल्थ, सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है। वहीं, इस व्रत के रखने से आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है। मन शांत रहता है और भगवान के प्रति भक्ति बढ़ती है। जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Jul 2026 16:34:38 +0530</pubDate>
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<title>Vishnu Sahasranama का अचूक पाठ खोलेगा Success के द्वार, जानें इसके चमत्कारी Benefits और नियम</title>
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<description><![CDATA[ विष्णु सहस्रनाम भगवान श्रीहरि विष्णु के एक हजार नामों का संग्रह है। जिसको महाभारत के शांति पर्व में बताया गया है। हिंदू धर्म में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ बेहद पवित्र और फलदायी माना गया है। इसका पाठ करने से न सिर्फ व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में आने वाली हर तरह की बाधा का निवारण होता है।  महाभारत में विष्णु सहस्त्रनाम का उल्लेख मिलता है। बता दें कि जब भीष्म पितामह मृत्युशैया पर लेटे थे, तब उन्होंने विष्णु सहस्रनाम का महत्व युधिष्ठिर को समझाया था। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ न सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके जरिए से आत्मा और परमात्मा का मिलन संभव है। भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का यह सरल और प्रभावी उपाय है।इसे भी पढ़ें: Hindu Mythology: क्यों कहलाती हैं मां लक्ष्मी &#039;चंचला&#039;? जानें Goddess of Wealth से जुड़ा यह बड़ा Secretमहत्वविष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और रोजाना इसका पाठ करने से न सिर्फ विचार बल्कि कर्म भी शुद्ध होते हैं।विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ से मानसिक तनाव और निगेटिविटी दूर होती है। इससे घर में शांति का वातावरण और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।शास्त्रों के अनुसार, इसका पाठ करने से स्वास्थ्य लाभ और दीर्घायु प्राप्त होती है। इसके रोजाना पाठ से शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।हिंदू धर्म में भगवान श्रीहरि को सृष्टि का पालनहार माना गया है। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में धन, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है।जो भी व्यक्ति विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ करता है, उसको जीवन-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है। इससे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।नियमधार्मिक शास्त्रों में विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ के विशेष नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करने से पाठ का प्रभाव ज्यादा होता है।विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से पहले स्नान कर लें और साफ कपड़े पहनें। क्योंकि मन और शरीर दोनों की पवित्रता जरूरी है।सुबह के समय विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना सबसे अच्छा माना गया है। इसको शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठकर करें। अगर संभव हो तो भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठकर इसका पाठ करें।विष्णु सहस्त्रनाम पाठ शुरू करने से पहले श्रीहरि का ध्यान करते हुए मन में संकल्प लें। पाठ करते समय मंत्रों का उच्चारण शुद्ध और स्पष्ट होना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Jul 2026 16:34:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>84 Mahadev Temples in Ujjain: Ujjain Yatra होगी अधूरी, अगर नहीं किए 84 महादेव के दर्शन; जानें Route Map और महत्व</title>
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<description><![CDATA[ सर्दी का मौसम हो या गर्मी है, कुछ महिलाओं को घूमना बेहद पसंद होता है। वहीं महिलाएं अलग-अलग जगहों को एक्सप्लोर करती हैं। अगर आप भी इन्हीं महिलाओं में से एक हैं और आपको भी घूमना-फिरना काफी पसंद है। तो यह खबर आपके लिए है। आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर आप कुल 84 महादेव के दर्शन कर सकते हैं और इस जगह का बेहद महत्व भी माना जाता है।उज्जैन में मौजूद है 84 महादेवउज्जैन को बाबा महाकाल की नगरी कहा जाता है। यहां पर हर कोई ज्योतिर्लिंग और काल भैरव के दर्शन के लिए जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपको उज्जैन में एक नहीं बल्कि 84 महादेव के दर्शन करने को मिल सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको उज्जैन के सभी 84 महादेव के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Vishnu Sahasranama का अचूक पाठ खोलेगा Success के द्वार, जानें इसके चमत्कारी Benefits और नियमउज्जैन के 84 महादेवों के नामवहीं 84 महादेवों में सबसे पहले अगस्तेश्वर महादेव आते हैं। फिर गुहेश्वर, डमरुकेश्वर महादेव, ढुंढेश्वर महादेव, स्वर्णजालेश्वर महादेव, त्रिविष्टपेश्वर महादेव, धारकेश्वर महादेव, दशमुखेश्वर महादेव, करभेश्वर महादेव, कंटकेश्वर महादेव, कंडुकेश्वर महादेव, सिंहेश्वर महादेव, प्रहादकेश्वर महादेव, राजेंद्रेश्वर महादेव, कोटिश्वर महादेव, विमलेश्वर महादेव, अंधकेश्वर महादेव, नीलकंठेश्वर महादेव, कपालमोचन महादेव, अनादि सिद्धेश्वर महादेव, अनादि कल्पेश्वर महादेव, शुक्रेष्वर महादेव, संगमेश्वर महादेव, हाटकेश्वर महादेव, मुकुटेश्वर महादेव, जटेश्वर महादेव, च्यवनेश्वर महादेव, अप्सरेश्वर महादेव, वरुणेश्वर महादेव, दशपुरेश्वर महादेव, नागचंद्रेश्वर महादेव, कुट्टुम्बेश्वर महादेव, महाकालेश्वर महादेव, जटाश्रृंगेश्वर महादेव, कर्कटेश्वर महादेव, घटकेश्वर महादेव, रामेश्वर महादेव, कलकलेश्वर महादेव, अर्धनारीश्वर महादेव, सौरीश्वर महादेव, कुबेरेश्वर महादेव और कुंटेश्वर महादेव।आखिरी में लोमशेश्वर महादेवलोकेश्वर महादेव, तिलभांडेश्वर महादेव, गर्गेश्वर महादेव, गोपेश्वर महादेव, नुकुलेश्वर महादेव, विश्वेश्वर महादेव, चंद्रेश्वर महादेव, यमेश्वर महादेव, इंद्रेश्वर महादेव, सागरेश्वर महादेव, प्रयागेश्वर महादेव, सिद्धेश्वर महादेव, मार्कंडेश्वर महादेव। गंगाधरेश्वर महादेव, वीरेश्वर महादेव, कुरुक्षेत्रेश्वर महादेव, नारदेश्वर महादेव, मातृकेश्वर महादेव, रुद्रेश्वर महादेव, दशरथेश्वर महादेव, रामेश्वर महादेव (द्वितीय), पवनकेश्वर महादेव, लकुलीश्वर महादेव, दुर्वासेश्वर महादेव, पिंगलेश्वर महादेव, कायावरोहणेश्वर महादेव, चिंतामणेश्वर महादेव, अर्केश्वर महादेव, विष्णुकेश्वर महादेव, आंगारकेश्वर महादेव, कुटिकेश्वर महादेव, समीश्वर महादेव, कपिलासंगमेश्वर महादेव, अमृतेश्वर महादेव, कर्णेश्वर महादेव, ऋणमुक्तेश्वर महादेव (कर्ज मुक्ति के लिए विशेष प्रसिद्ध), स्थावरेश्वर महादेव,  ब्रह्मेश्वर महादेव, जलेश्वर महादेव, आनंदेश्वर महादेव, कंठेश्वर महादेव और अंत में लोमशेश्वर महादेव। बता दें कि यह सभी उज्जैन शहर और उसके आसपास 84 महादेव मंदिर मौजूद हैं।रूट मैप की लें सहायताउज्जैन में स्थानीय गाइड और स्थानीय प्रशासन की ओर से रूट मैप मिलता है। जोकि अगस्तेश्वर महादेव से शुरू होता है और लोमशेश्वर महादेव तक जाता है। आप इस आसानी से इस मैप का इस्तेमाल करके 84 महादेव के दर्शन कर सकती हैं। आपको इन सभी महादेव के दर्शन करने में 2 से 3 दिन का समय लगता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Jul 2026 16:34:32 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 07 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष मौजमस्ती के लिए पिकनिक, थिएटर या होटल जा सकते हैं। सफलताओं पर बधाइयां प्राप्त होगी। नियमित और आकस्मिक माध्यमों से धन लाभ। आपके कार्यशैली की प्रसन्नता होगी।वृषतन-मन-धन, तीनों की स्थिति सुधरेगी। आर्थिक लेन-देन की समस्या से चिंतित। सहकर्मियों का सहयोग उन्नति में सहायक। शुभ समाचार और मनोरंजन से प्रसन्नता।मिथुनकुछ नए कार्यों में रचनात्मक ढंग से जुड़ेंगे। नए दायित्व/जिम्मेदारी मिलने के योग हैं। प्रेम प्रसंग में धोखा मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।कर्ककुछ खास लोगों से परिचय होगा, भेंट भी संभव। अपने एवं जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं। अस्थिरता और मानसिक अशांति।सिंहआपके व्यक्तित्व और कृतित्व की प्रशंसा। प्रचुर धन लाभ के योग है। आपके कार्यशैली की प्रशंसा होगी। शुभ समाचार मिलेंगे।कन्याभूमि भवन संबंधी समस्या खडी होगी। वैवाहिक प्रस्ताव आगे बढ़ेगा। नए पुराने मुकदमें निपट सकते हैं। बुजुर्गों के सहयोग से कार्य पूरा होगा।तुलावरिष्ठ अधिकारियों से उचित व्यवहार करें। आत्मविश्वास से प्रतिकूल भी अनुकूल होगा। सोच विचार के बाद ही नई योजना शुरू करें। शुभ कार्यों के लिए दोपहर तक का समय है।वृश्चिक कारण/अकारण चिंताग्रस्त हो सकते हैं। इष्ट मित्रों का सहयोग अमूल्य सिद्ध होगा। नए व्यावसायिक अनुबंध हो सकते हैं। नए पुराने मित्रों से भेंट होगी।धनुरिश्तेदार शुभ कार्य सम्पन्न होने में सहयोग देंगे। वरिष्ठ अधिकारियों का भरोसा जीतने में सफल होंगे। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। विशेष आर्थिक लाभ का योग बन रहा है।मकर डूबा हुआ धन पुनः प्राप्त हो सकता है। चिंताओं से मुक्ति मिलेंगी। आत्मचिंतन सफलता की सीढ़ी सिद्ध होगी। परोपकार और पुण्यकार्यों में व्यस्तता।कुंभपुत्र-पौत्र आदि की उन्नति से हर्षित होंगे। आपकी सलाह किसी को महंगी पड़ सकती है। समय को पहचान पर कार्य करें। परिश्रम का सुखद परिणाम और रोग से मुक्ति।मीनअप्रिय अतिथि का आगमन। नई योजनाएं आगे बढ़ेंगी। लापरवाही बुरे परिणाम देगी। वरिष्ठ अधिकारियों के कृपा पात्र रहेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 07 Jul 2026 09:09:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Astrology Today: जन्म नक्षत्र से जानें अपनी Yogini Dasha, खुल जाएंगे आपके भाग्य के सारे राज</title>
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<description><![CDATA[ वैदिक ज्योतिष में विंशोत्तरी दशा की समरुप है योगिनी दशा और यह काफी महत्वपूर्ण दशा पद्धति है, जिसके द्वारा शुभाशुभ घटनाओं का समय और भाग्य का आकलन किया जाता है। वैसे विंशोत्तरी दशा की कुल अवधि 120 वर्ष है, वहीं योगिनी दशा की अवधि 36 वर्ष निर्धारित की गई है। दरअसल, योगिनी दशा में पहली, तीसरी, पांचवी और सातवी यानी मंगला, धान्या, भद्रिका और सिद्धा को शुभ सुखदायक माना जाता है और अन्य पिंगला, भ्रामरी, उल्का, संकटा को संघर्ष और अशुभ फलदायी मानी जाती है।आपको बताते चलें कि, ङ्गला, पिंगला, धान्या, भ्रामरी, भद्रिका, उल्का, सिद्धा तथा संकटा ये आठ दशायें योगिनी दशा में होती है और इनके वर्ष क्रमश: 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 ये हैं।मंगला पिंगला धान्या भ्रामरी भद्रिका तथा।उल्का सिद्धा संकटा च फलमासां स्वनामवत्।।योगिनी दशा की गणना कैसे की जाती है?दरअसल, योगिनी दशा की गणना करना काफी सरल है। इसके लिए अश्विनी नक्षत्र से प्रारंभ करके व्यक्ति का जन्म नक्षत्र गिनें, जो संख्या आए, उसमें 3 जोड़कर 8 का भाग देने से शेष संख्या योगिनी दशा होगी।स्वक्षं पिनाकिनयनयुक्तं च वसुभिर्हरेत्।शेषेण योगिनी ज्ञेया शून्यपातेन संकटा।।उदाहर के तौर पर यदि आपका जन्म पुनर्वसु नक्षत्र का है, तो अश्विनी नक्षत्र से गिनने पर पुनवर्सु नक्षत्र की संख्या7 आएगी, इसमें 3 की संख्या जोड़ने पर 10 आएगा, जिसमें 8 का भाग देने से 2 की संख्या शेष बच जाए, तो इसके अनुसार पिंगला की योगिनी दशा का जन्म रहेगा। स्पष्टता के लिए जन्मनक्षत्र के अनुसार मंगल, पिंगल योगिनी आदि देखने का तरीका इस तरह से अपना सकते हैं।-आर्द्रा, चित्रा, श्रवण नक्षत्र में जन्म होने पर एक वर्ष की अवधि वाली मंगला की योगिनी दशा।-पुनर्वसु, स्वाती, धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म होने पर दो वर्ष की अवधि वाली पिंगला की योगिनी दशा।-पुष्य, विशाखा, शतभिषा नक्षत्र में जन्म होने पर तीन वर्ष की अवधि वाली धान्या की योगिनी दशा।-अश्विनी, आश्लेषा, अनुराधा, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्म होने पर चार वर्ष की अवधि वाली भ्रामरी की योगिनी दशा।-भरणी, मघा, ज्येष्ठा, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्म होने पर पांच वर्ष की अवधि वाली भद्रिका की योगिनी दशा।-कृतिका, पूर्वाफाल्गुनी, मूल, रेवती नक्षत्र में जन्म होने पर छः वर्ष की अवधि वाली उल्का की योगिनी दशा।-रोहिणी, उत्तराफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्म होने पर सात वर्ष की अवधि वाली सिद्धा की योगिनी दशा।-मृगशिरा, हस्त, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में जन्म होने पर आठ वर्ष की अवधि वाली संकटा की योगिनी दशा।असल में मंगला की योगिनी चंद्रमा से प्रभावित है, पिंगल सूर्य से, धान्या गुरु से, भ्रामरी मंगल से, भद्रिका बुध से, उल्का शनि से, सिद्धा शुक्र से, संकटा केतु से एवं मतान्तर से राहु से प्रभावित है। बृहत्पाराशर के अनुसार, इन योगिनियों से ये ग्रह उत्पन्न हुए हैं योनि इन योगिनयों के ये ग्रह प्रभावक माने जाते हैं।ज्योतिष के अनुसार, योगिनी दशा का भुक्त-भोग भी बिल्कुल विंशोत्तरी दशा की तरह लेना चाहिए एवं लिखने आदि का क्रम भी विंशोत्तरी की तरह रहता है। योगिनी की पूरी वर्ष संख्या 36 ही है, आखिर में इस दशा की पुनरावृत्ति होती है, जिससे जीवन पर्यन्त की योगिनी दशा का विचार हो सके।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 07 Jul 2026 09:09:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 7 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 7 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 7 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशिआज आपके रिश्ते में प्रेम की कोई कमी नहीं रहेगी, लेकिन एक अनजाना डर आपको परेशान कर सकता है कि कहीं चीजें बदल न जाएं। आपके सितारे संकेत दे रहे हैं कि आपकी कोई पुरानी दबी हुई बात आज सामने आ सकती है। सतर्क रहें, अपने साथी से कुछ भी न छुपाएं, क्योंकि छोटा सा झूठ भी बड़े भरोसे को तोड़ सकता है।वृषभ राशिजीवनसाथी के साथ आज बहुत ही रोमांटिक और सुकून भरे पल बीतेंगे, लेकिन इस सुख के पीछे ग्रहों की एक ऐसी चाल भी है जो अचानक गलतफहमी पैदा कर सकती है। तीसरे व्यक्ति की बातों में आकर अपने साथी पर शक करने की भूल न करें। सतर्क रहें, बाहरी लोगों को अपने निजी जीवन में दखल न देने दें, अन्यथा रिश्ते में दरार आ सकती है।मिथुन राशिआज पार्टनर का व्यवहार आपके प्रति बेहद संवेदनशील और सुरक्षात्मक रहेगा, जिससे आपको असीम प्रेम का अहसास होगा। हालांकि, मन में यह डर बना रहेगा कि क्या यह प्रेम हमेशा ऐसा ही रहेगा। सतर्क रहें, अपनी अत्यधिक उम्मीदों के बोझ से पार्टनर को परेशान न करें। अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें, अन्यथा एक छोटी सी तीखी बात आज के खूबसूरत माहौल को बिगाड़ सकती है।कर्क राशिआज आपका दिल अपने हमसफर के लिए पूरी तरह धड़केगा और आप उनके बेहद करीब महसूस करेंगे। लेकिन आज चंद्रमा की स्थिति आपको थोड़ा भावुक और असुरक्षित बना सकती है, जिससे रिश्ता खोने का डर मन में बैठ सकता है। सतर्क रहें, अतीत की कड़वी यादों को आज के खुशनुमा माहौल पर हावी न होने दें।सिंह राशिआज आपका प्रेम जीवन बहुत ही ऊर्जावान और आकर्षक रहेगा, पार्टनर आपकी हर बात मानने को तैयार दिखेगा। परंतु, इस अत्यधिक अधिकार की भावना के पीछे एक डर भी है कि कहीं आपका अहंकार रिश्ते को चोट न पहुँचा दे। सतर्क रहें, साथी की खामोशी को नजरअंदाज न करें। उनके मन में क्या चल रहा है, यह जानने की कोशिश करें।कन्या राशिआज रिश्ते में समर्पण और ईमानदारी की खुशबू रहेगी, जो आपको एक सुरक्षित भविष्य का अहसास कराएगी। लेकिन आज का दिन आपको सतर्क भी कर रहा है कि वित्तीय मामलों या पैसों के लेन-देन को अपने प्रेम के बीच में न आने दें। थोड़ा सा भी आर्थिक मतभेद आपके बने-बनाए रिश्ते में कड़वाहट का डर पैदा कर सकता है।तुला राशिआज आप दोनों के बीच का आकर्षण और रोमांस चरम पर होगा, ऐसा लगेगा जैसे पूरी दुनिया ही थम गई है। लेकिन इस गहरे प्रेम के बीच एक सावधानी भी जरूरी है। सतर्क रहें कि आप अपनी लव लाइफ में इतने न खो जाएं कि अपने परिवार या अन्य जरूरी जिम्मेदारियों को भूल जाएं। संतुलन न बनाने का डर आगे चलकर बड़ी बहस का कारण बन सकता है।वृश्चिक राशिग्रहों की स्थिति आज आपके प्रेम संबंधों में बहुत अधिक तीव्रता और जुनून लेकर आ रही है। आपका पार्टनर आज आपके लिए कुछ बड़ा कर सकता है, लेकिन आपकी अत्यधिक पजेसिव (अधिकार जताने की) आदत उनके मन में एक डर या घुटन पैदा कर सकती है। सतर्क रहें, रिश्ते में जरूरत से ज्यादा पाबंदियां न लगाएं, उन्हें खुलकर सांस लेने का मौका दें।धनु राशिआज आपके रिश्ते में एक नई उम्मीद और सुखद बदलाव आने के योग हैं, जिससे आपका मन प्रफुल्लित रहेगा। हालांकि, ग्रहों का इशारा है कि आज किसी पुराने प्रेमी या दोस्त की वापसी आपके वर्तमान रिश्ते में भूचाल ला सकती है। सतर्क रहें, अपने वर्तमान साथी के विश्वास को सर्वोपरि रखें और किसी भी ऐसी स्थिति से दूर रहें जो उनके मन में असुरक्षा का डर पैदा करे।मकर राशिवैवाहिक जीवन में आज प्रेम और जिम्मेदारी का एक अनूठा तालमेल देखने को मिलेगा, जिससे आपका रिश्ता और परिपक्व होगा। लेकिन रोजमर्रा की व्यस्तता के कारण साथी का बदला हुआ मिजाज आपको थोड़ा डरा सकता है। सतर्क रहें, उनकी थकान या उदासी को केवल गुस्सा न समझें, बल्कि उनके पास बैठकर उनकी परेशानी साझा करें।कुंभ राशिआज आपका पार्टनर आप पर अपना पूरा प्यार लुटाएगा और आपकी हर छोटी जरूरत का ध्यान रखेगा। इस असीम प्रेम के बीच आपके मन में यह डर आ सकता है कि आप इस प्यार के बदले उन्हें उतना समय नहीं दे पा रहे हैं। सतर्क रहें, अपने काम और प्यार के बीच की रेखा को स्पष्ट रखें। समय न दे पाना आज किसी बड़ी गलतफहमी की वजह बन सकता है।मीन राशिआज का दिन आपके लिए गहरे भावनात्मक जुड़ाव और आत्मिक प्रेम का है, साथी की आँखों में आपको अपने लिए अगाध श्रद्धा दिखेगी। लेकिन सितारे चेतावनी दे रहे हैं कि आज सोशल मीडिया या किसी बाहरी गॉसिप के कारण आपके रिश्ते पर नजर लग सकती है। सतर्क रहें, अपने रिश्ते की निजी बातों को दुनिया के सामने जाहिर न करें, गोपनीयता बनाए रखना ही आज आपके प्रेम को सुरक्षित रखेगा।आज का लव टिप: प्रेम में भय और सतर्कता का होना बुरा नहीं है, यह इस बात का प्रमाण है कि आप उस व्यक्ति को खोना नहीं चाहते। बस अपनी सतर्कता को कभी भी शक का रूप न लेने दें। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 07 Jul 2026 09:09:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Love, Horoscope, For, July, 2026, आज, का, प्रेम, राशिफल, जुलाई, 2026, प्रेमियों, के, लिए, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन</media:keywords>
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<title>Vat Purnima Vrat 2026: वट पूर्णिमा व्रत में सुहागिनें भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें व्रत के सभी Important Rules</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी 29 जून, सोमवार को वट पूर्णिमा व्रत रखा जा रहा है। इस व्रत को सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। हिदू धर्म में वट पूर्णिमा व्रत का विशेष महत्व है। जैसा कि ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री व्रत किया जाता है और दूसरा ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि पर देश के कई हिस्सों में व्रत करने का विधान होता है।इस बार ज्येष्ठ मास में अधिक मास लगने से महिलाओं को इस व्रत का काफी इंतजार करना पड़ा। खासकर इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है और व्रत दौरान महिलाओं को महत्वपूर्ण नियमों का पलान जरुर करना चाहिए। आइए आपको बताते हैं वट पूर्णिमा व्रत पूजा की विधि और नियम।वट पूर्णिमा व्रत 2026 पूजा विधि- इस दिन जल्दी उठकर स्नानादि करने के बाद नए लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। - वट पूर्णिमा व्रत पर महिलाओं को 16 श्रृंगार जरुर करना चाहिए।   - वही, इस व्रत के लिए बांस की टोकरी में सात अलग-अलग प्रकार के अनाज रखें और उसे किसी साफ वस्त्र से ढक दें। - वट पूर्णिमा पर वट वृक्ष के नीचे बैठकर पूजा की जाती है। माना जाता है कि पूजन सामग्री को वट वृक्ष के पास ले जाना चाहिए। - वट वृक्ष के नीचे, देवी सावित्री और सत्यवान की पूजा विधि-विधान से करें। - इसके बाद वट वृक्ष पर जल चढ़ाए और आखिर में कुमकुम और अक्षत अर्पित करें। अब फूल, फल, रोली, दीपक सभी सामग्री के साथ विधिवत रुप से पूजा करें। इसके साथ ही कच्चा सूत लपेटते हुए वट वृक्ष की परिक्रमा करें। - सुहागिन महिलाओं को वट सावित्री व्रत की कथा जरुर सुने और फिर दान और दक्षिणा करें। - भोग में आप चना और गुड़ चढ़ाएं और साथ ही वट वृक्ष पर सुहाग सामान अर्पित करें। इसके बाद पति के पैर स्पर्श करें और उन्हें प्रसाद देना चाहिए। इसके साथ ही बांस के पंखे से हवा करने का भी खास महत्व होता है।वट पूर्णिमा व्रत में क्या करें? - इस दिन महिलाओं को सोलह श्रृंगार जरुर करना चाहिए। इसके साथ ही सुहाग की सामग्री को पूजा के दौरान जरुर अर्पित करें। - वहीं, इस व्रत का पारण महिलाओं को चने खाकर ही करना चाहिए। इसलिए पहले ही चने को पानी में भिगोकर रख सकते हैं। - ध्यान रखें कि पूजा में चढ़ाई गई सुहाग की सामग्री अपने परिवार की महिला को ही देनी चाहिए। इसे आप अपनी ननद, सास या किसी सुहागिन महिला को भेंट करें। - वट वृक्ष की पूजा के दौरान कच्चे सूत के साथ 5, 7, 11, 21 या 51 बार परिक्रमा जरुर करें। अगर संभव हो तो आप 108 बार वृक्ष की परिक्रमा कर सकते हैं।क्या नहीं करना वट पूर्णिमा व्रत में? - इस व्रत में महिलाओं के मन में किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचान नहीं आने चाहिए। इसके साथ ही, बहस और विवादों से दूर रहे हैं। - व्रत के समय अपने पति के साथ बहस न करें और न ही क्रोध की भावना मन में नहीं लानी चाहिए।  - इस दिन सुहागिन महिलाएं को नीले, काले और सफेद रंग के वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। - अगर आप वट सावित्री व्रत की कथा सुन रहे हैं, तो भूलकर भी बीच में उठकर नहीं जाना चाहिए। अपने स्थान पर बैठें रहे और पूरी कथा सुनें और बाद में ही वहां से उठें।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Vat, Purnima, Vrat, 2026:, वट, पूर्णिमा, व्रत, में, सुहागिनें, भूलकर, भी, न, करें, ये, गलतियां, जानें, व्रत, के, सभी, Important, Rules</media:keywords>
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<title>Nail Palmistry: आपके नाखून दे रहे हैं Bad Luck का संकेत? जानें ग्रहों का ये बड़ा इशारा</title>
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<description><![CDATA[ हर व्यक्ति के जीवन पर हर ग्रह का अलग-अलग प्रभाव होता है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में किसी ग्रह की स्थिति कमजोर होती है, तो इससे भाग्य बाधित हो सकता है। वहीं नाखून से भी ग्रहों की स्थिति के बारे में जाना जा सकता है। लाल किताब के मुताबिक नाखून के प्रकार, आकार और रंग भी ग्रहों की स्थिति का संकेत देते हैं। अगर नाखून में हरापन है, तो यह बुध के कमजोर होने का संकेत हो सकता है।  लाल किताब में हस्तरेखा, निशान, पर्वत और नाखून आदि के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको नाखूनों से जुड़े कुछ संकेतों के बारे में बताने जा रहे हैं। साथ ही यह भी जानेंगे कि ग्रहों के कमजोर होने पर नाखूनों पर कैसे संकेत दिख सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 29 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 29 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनकमजोर बुध के लक्षणअगर बुध ग्रह की स्थिति कमजोर हो, तो इसका प्रभाव हाथ के नाखूनों पर भी नजर आने लगता है। लाल किताब के अनुसार, ऐसे जातकों के हाथ की अंगुलियों के नाखून गोल होते हैं या नाखून में हल्का हरापन नजर आ सकता है।प्रभावज्योतिष में बुध ग्रह को वाणी, बुद्धि और व्यापार का कारक माना जाता है। बुध के अशुभ होने पर जातक को शिक्षा में बाधा सामना करना पड़ सकता है। वहीं व्यापार में भी समस्याएं आती हैं। जोकि आर्थिक समस्या की वजह बनता है।उपायबुधवार को हरे रंग के कपड़े पहनना चाहिए और गाय को हरा चारा खिलाना चाहिए। वहीं भगवान गणेश की पूजा करें और सुबह के समय घास पर नंगे पैर चलें। बुध के मंत्र &#039;ऊँ बुं बुधाय नम:&#039; मंत्र का 108 बार जाप करें।कमजोर राहु के लक्षणअगर कुंडली में राहु कमजोर स्थिति में हो, तो ऐसे व्यक्ति के नाखून चौड़े होते हैं। यह बिना किसी चोट के नीले रंग के नजर आते हैं। हाथ के नाखून झुके हुए, टेढ़े या सिक्के के रंग के नजर आएं, तो यह कमजोर राहु का संकेत होता है।प्रभावराहु कमजोर होने पर जातक के मन में हमेशा एक अजीब सा डर बना रहता है। कई बार अचानक भ्रम की स्थिति बनती है और इससे निर्णय में उलझन का सामना करना पड़ता है। इसका असर सेहत पर भी देखने को मिलता है। राहु के अशुभ प्रभाव से मांसपेशियों और ब्लड संबंधी समस्या हो सकती है।उपायउपाय के तौर पर नियमित रूप से &#039;ऊँ रां राहवे नम:&#039; मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। साथ ही भगवान शिव के मंदिर जाकर जलाभिषेक करना चाहिए।कमजोर शुक्र के लक्षणयदि हाथ के नाखून छोटे-छोटे हैं और इनका रंग सफेद नजर आए, तो यह कमजोर शुक्र का संकेत होता है। इन जातकों को शुक्र के प्रतिकूल प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है।प्रभावशुक्र ग्रह को सुखद दांपत्य जीवन, ऐश्वर्य, सौंदर्य और सुख-सुविधाओं में वृद्धि करने वाला ग्रह माना गया है। कुंडली में शुक्र की स्थिति कमजोर होने पर व्यक्ति को वैवाहिक जीवन में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं जातक के सुखों में बाधा आती है और आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ सकता है।उपायशुक्रवार के दिन सफेद वस्तुओं जैसे चीनी, दही और दूध आदि का दान करना चाहिए। वहीं शुक्र के मंत्र &#039;ऊँ शुं शुक्राय नम:&#039; मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। वहीं संभव हो तो शुक्रवार को सफेद या गुलाबी रंग के कपड़े पहनने चाहिए।कमजोर बृहस्पति के लक्षणअगर नाखून का साइज बहुत छोटा होता है और यह पीले रंग के हों तो यह कमजोर बृहस्पति का संकेत होता है। वहीं लंबे नाखून और सोने समान रंग के दिखने वाले नाखून भी कमजोर गुरु का संकेत होते हैं।प्रभावबृहस्पति को भाग्य, ज्ञान, धन और विवाह आदि का कारक माना जाता है। अगर कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति कमजोर होती है, तो व्यक्ति को करियर में रुकावट और भाग्य में कमी का सामना करना पड़ता है। विवाह में बाधा और वैवाहिक जीवन में समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।उपायबृहस्पति के दिन पीली वस्तुओं जैसे पीले वस्त्र, केला और चने की दाल आदि का दान करना चाहिए। वहीं अगर संभव हो तो गुरुवार को पीले रंग के कपड़े पहनें और नहाने के पानी में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर स्नान करें।कमजोर केतु के लक्षणअगर नाखून लंबे और ज्यादा तंग नजर आते हैं, तो यह कमजोर केतु का संकेत होता है। वहीं चितकबरे नाखून होना भी कमजोर केतु का संकेत होता है।प्रभावज्योतिष में केतु को छाया ग्रह माना गया है। जिस भी भाव में केतु कमजोर स्थिति में होगा, यह उस भाव के शुभ फल को कम कर देता है। जिसके प्रभाव से भाग्य में कमी और निर्णय लेने में उलझन जैसी स्थिति बन सकती है। यह सेहत संबंधी और मानसिक भ्रम की समस्याओं की वजह बन सकता है।उपायभगवान गणेश की पूजा-अर्चना करें और उनको दूर्वा अर्पित करें। वहीं कुत्ते को रोटी खिलाना भी शुभ माना जाता है। वहीं केतु के मंत्र &#039;ऊँ कें केतवे नम:&#039; का कम से कम 108 बार जप करना चाहिए।कमजोर शनि के लक्षणअगर किसी व्यक्ति के हाथ के नाखून मीडियम साइज के हैं और उनमें कालापन दिख रहा है। तो यह शनि की प्रतिकूलता को दिखा सकता है। शनि देव को न्याय और कर्म का देवता माना जाता है। वह व्यक्ति को उसके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं।प्रभावशनि की स्थिति कमजोर पर से व्यक्ति के करियर में लगातार कोशिशों और मेहनत के बाद भी अनुकूल परिणाम नहीं मिलते हैं। इन लोगों के कार्यों में बाधाएं आती हैं और शनि के अशुभ प्रभाव की वजह से जीवन में संघर्षों का सामना करना पड़ता है।उपायशनिवार के दिन गरीबों और जरूरतमंदों को काले वस्त्र, काला छाता और काले तिल आदि का दान करना चाहिए। वहीं शनिदेव के मंदिर में जाकर सरसों का तेल अर्पित कर &#039;ऊँ शं शनैश्चराय नम:&#039; मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 30 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 30 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 30 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष (Aries)दिल का हाल: संवाद से सँवरेगा कलआज का दिन दिलों की दूरियां मिटाने का है। यदि आपके और साथी के बीच कोई कड़वाहट थी, तो आज आपकी मीठी बातें जादू का काम करेंगी। सिंगल लोगों की जिंदगी में आज किसी नए और दिलचस्प व्यक्ति की एंट्री के खूबसूरत संकेत हैं।वृषभ (Taurus)दिल का हाल: मोहब्बत का खुशनुमा अहसासआज आपकी लव लाइफ में रोमांस की खुशबू बिखरी रहेगी। साथी के साथ बिताए पल आपको सुकून देंगे। रिश्तों को और गहरा करने के लिए आज का दिन उत्तम है; बस अहंकार को दूर रखें और प्रेम को बहने दें।मिथुन (Gemini)दिल का हाल: धैर्य की जरूरतसितारे कहते हैं कि आज अपनी भावनाओं पर थोड़ा काबू रखें। मूड स्विंग्स के कारण साथी से अनबन हो सकती है। बेहतर होगा कि आप उनकी बातों को गहराई से सुनें और प्रतिक्रिया देने में जल्दबाजी न करें।कर्क (Cancer)दिल का हाल: नेह के अनमोल तोहफेआज का दिन आपके लिए किसी खूबसूरत सौगात जैसा है। पार्टनर की तरफ से आपको भरपूर अटेंशन और कोई प्यारा सरप्राइज मिल सकता है। प्रेम के सागर में गोते लगाने और खुशियां बटोरने का दिन है।सिंह (Leo)दिल का हाल: सहजता और समर्पणहो सकता है कि आज जिम्मेदारियों के चलते आपका हमसफ़र आपको पर्याप्त वक्त न दे पाए। ऐसे में आपकी समझदारी और उनका साथ देना आपके रिश्ते की नींव को और भी मजबूत और अटूट बनाएगा।कन्या (Virgo)दिल का हाल: भरोसे का नया सवेराआज आप दोनों के बीच का आपसी विश्वास सातवें आसमान पर होगा। रिश्ते को एक पायदान आगे ले जाने या विवाह की चर्चा के लिए समय अनुकूल है। सिंगल लोग किसी की तरफ आकर्षित हो सकते हैं।तुला (Libra)दिल का हाल: शिकवे-शिकायतें होंगे दूरदिन के शुरुआती हिस्से में पुरानी बातें आपके मूड को थोड़ा खराब कर सकती हैं, लेकिन शाम होते-होते प्यार की ठंडी बयार सब ठीक कर देगी। अपनी वाणी में थोड़ा माधुर्य घोलें, दिन हसीन हो जाएगा।वृश्चिक (Scorpio)दिल का हाल: इश्क का परवानअगर आप किसी से अपने दिल का इजहार करना चाहते हैं, तो आज का दिन आपके पक्ष में है। शादीशुदा जोड़ों के बीच गजब का सामंजस्य और समर्पण देखने को मिलेगा। आज दिल खोलकर प्यार जताएं।धनु (Sagittarius)दिल का हाल: सफर और सुकूनआज का दिन एक प्यारी सी आउटिंग या कैंडललाइट डिनर के नाम रहने वाला है। रोज़मर्रा की भागदौड़ से दूर, आप दोनों एक-दूसरे की बांहों में सुकून के कुछ पल चुराने में कामयाब रहेंगे।मकर (Capricorn)दिल का हाल: प्राथमिकताओं का संतुलनकाम का तनाव अपनी जगह है और दिल का मामला अपनी जगह। आज अपने पार्टनर को यह अहसास कराएं कि वे आपकी जिंदगी में कितने खास हैं। छोटी-मोटी नोकझोंक को हंसकर टाल देना ही समझदारी होगी।कुंभ (Aquarius)दिल का हाल: रूहानी जुड़ावआज आपके बीच केवल शब्दों का नहीं, बल्कि रूह का तालमेल रहेगा। बिना कहे भी आप एक-दूसरे के दिल की बात समझ लेंगे। सिंगल्स के लिए आज का दिन किसी खास मुलाकात की उम्मीद जगा रहा है।मीन (Pisces)दिल का हाल: रोमांस की नई इबारतआज आपके रिश्ते में एक नई ताजगी और ऊर्जा महसूस होगी। पुराने सारे गिले-शिकवे भूलकर आप दोनों एक-दूसरे के प्रेम में सराबोर नजर आएंगे। आज का दिन यादों की डायरी में एक खूबसूरत पन्ना जोड़ने जैसा है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Shani Rahu Effects: Shani Rahu का प्रकोप! ससुराल से मिली ये Gifts बन सकती हैं बर्बादी का कारण, जानें Vastu Tips</title>
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<description><![CDATA[ वास्तु शास्त्र में घर और रिश्तों से जुड़ी कई ऐसी बातों का जिक्र मिलता है। जिनका सीधा असर व्यक्ति की सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिति पर देखने को मिलता है। वहीं शादी के बाद कुछ चीजों का लेन-देन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। खासतौर पर लड़कों को अपनी ससुराल से बिना वजह या मुफ्त में कुछ चीजों का लेना शुभ नहीं होता है। वहीं ऐसा करने से घर में मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानियां और ग्रह दोष बढ़ने की आशंका होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि पुरुषों को ससुराल से भूलकर भी कौन सी चीजें उपहार के रूप में नहीं लेना चाहिए।इलेक्ट्रॉनिक सामान से लेंवास्तु शास्त्र के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक सामान का संबंध राहु ग्रह से होता है। अगर कोई व्यक्ति बिना जरूरत या फिर मुफ्त में अपनी ससुराल से इलेक्ट्रॉनिक सामान लाता है, तो इससे राहु दोष बढ़ सकता है। राहु दोष बढ़ने पर अचानक खर्चे बढ़ने लगते हैं और आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।इसे भी पढ़ें: Saturn Transit Alert: शनि बदल रहे नक्षत्र, 4 राशियों की बढ़ेंगी मुश्किलें, रहें सावधानकाले रंग की चीजें न लेंकाले रंग को शनिदेव से जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि ससुराल वालों से गिफ्त में काले कपड़े या फिर काला कंबल आदि लेने से जीवन में संघर्ष बढ़ सकता है। वहीं कामकाज में रुकावट और मानसिक तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है।झाड़ू न लाएंझाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के मुताबिक महिलाओं को मायके से झाड़ू लाकर ससुराल में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से घर की सुख-समृद्धि या बरकत पर इसका असर पड़ सकता है।बरतें सावधानीमहिलाओं को अपने मायके से कैंची, चाकू या किसी तरह की नुकीली चीज नहीं लानी चाहिए। इससे रिश्तों में तनाव और कड़वाहट पैदा हो सकती है। वहीं ससुराल से लोहे की भारी सामान मुफ्त में नहीं लेना चाहिए। इससे परेशानी या दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है।पुराना सामान और रद्दी न लाएंवास्तु शास्त्र के मुताबिक महिलाओं को अपने मायके से रद्दी, बेकार किताबें और पुराने अखबार आदि नहीं लाने चाहिए। मान्यता है कि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा और अव्यवस्था बढ़ती है। वहीं जातक को निर्णय लेने में भ्रम और मानसिक परेशानी होती है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Saturn Transit Alert: शनि बदल रहे नक्षत्र, 4 राशियों की बढ़ेंगी मुश्किलें, रहें सावधान</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष में ग्रहों का गोचर बेहद खास माना जाता है। न्याय देवता शनि देव का गोचर हमेशा चर्चाओं में रहता है। इस बार 2 जुलाई 2026, गुरुवार की सुबह करीब 8 बजकर 22 मिनट पर शनि ग्रह नक्षत्र पद गोचर करने जा रहे हैं। आपको बता दें कि, यह गोचर रेवती नक्षत्र के दूसरे पद में होगा। ज्योतिष के अनुसार, शनि का नक्षत्र पद गोचर का प्रभाव कुछ राशियों के जीवन में पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ने की भी संभावना जताई जा रही है। वैसे कुछ राशियों के लिए इस गोचर का प्रतिकूल रहने वाला है। ऐसे में मेष, सिंह , वृश्चिक और कुंभ राशि के जातक पर प्रतिकूल असर रहने वाला है। आइए आपको बताते हैं किन राशियों को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।मेष राशिमेष राशि के जातकों के लिए शनि का यह नक्षत्र पद चुनौतियों से भरा हो सकता है। इस समय आपके खर्चों में बढ़ोतरी होने की संभावना है, चाहे घर जुड़ा कोई कार्य हो या अनाचक से अनावश्यक खर्च, जिससे आपका बजट हिल जाएगा। इसी वजह से मन में तनाव और बेचैनी और भी बढ़ जाएगी। यदि आपने हालिए में कहीं निवेश किया है या निवेश करने का प्लान बना रहे हैं, तो इस समय थोड़ा रुक सकते हैं। इस दौरान सोच-समझकर फैसला लें और बेहतर रहने वाला है, क्योंकि गलत निवेश से नुकसान होने के योग बन रहे हैं। आर्थिक मामलों में जल्दबाजी से बचें और हर खर्च को सोच-समझकर करें। सिंह राशियह गोचर सिंह राशि वालों के लिए मुश्किलों से भरा होने वाला है। जीवन में अचानक से उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा, जिससे मन अस्थिर रह सकता है और किसी भी फैसले को लेकर कन्फ्यूजन बना रहेगा। आर्थिक मोर्चे पर भी सावधानी बरतने की जरुरत है, क्योंकि पैसों से संबंधित कोई भी परेशानी या अनबन हो सकती है, जिससे मानसिक दबाव बढ़ सकता है। वैवाहिक जीवन में मनमुटाव आ सकता है। पार्टनर के साथ छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई या तनाव हो सकता है। इसलिए इस दौरान अपने साथी से खुलकर बातचीत करें। संयम बनाए और किसी भी मुद्दे में घुसने से पहले उसे सुलझाएं, ताकि रिश्ते में मधुरता बनीं रहे।वृश्चिक राशिवृश्चिक राशि के लोगों के लिए यह समय थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इस दौरान पैसों की परेशानी हो सकती है, क्योंकि जरूरत से ज्यादा खर्च होने की संभावना है। इससे आपकी बचत भी कम हो सकती है और मन में चिंता बनी रह सकती है। सेहत और सुरक्षा का भी खास ध्यान रखें। खासकर गाड़ी चलाते समय सावधानी बरतें, क्योंकि चोट या दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए तेज रफ्तार से बचें, ट्रैफिक नियमों का पालन करें और सुरक्षा के सभी जरूरी उपाय अपनाएं।कुंभ राशिइस दौरान कुंभ राशि के लिए समय भी मुश्किल भरा रह सकता है। अगर आप किसी के साथ साझेदारी में बिजनस कर रहे हैं, तो उन्हें अपने पार्टनर के साथ मतभेद या विचारों में टकराव का सामना करना पड़ेगा, जिससे व्यापार में अड़चन आ सकती है। इसलिए कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले पार्टनर से खुलकर बात करें और आपसी समझ से आगे बढ़ जाए। इसके अलावा, इस दौरान खर्चों में भी इजाफा होने की संभावना है, जिससे आर्थिक तौर पर थोड़ी परेशानी महसूस हो सकती है। इसलिए बेहतर यही है कि इस अवधि में अपने बजट पर खास ध्यान दें और बड़े या गैर-जरुरी खर्चों को टालने की कोशिश करें, जिससे वित्तीय स्थिति संतुलित रहे। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 01 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष अपने कार्यों से आत्मसंतोष मिलेगा। परमार्थ के कामों में रूचि बढ़ेगी। आवश्यक काम दोपहर से पहले निपटा लें, तत विवाद संभव। सामाजिक, धार्मिक कार्यों में व्यस्तता।वृषगुरुजनों से मार्गदर्शन और लाभ दोनों मिलेंगे। अनेक काम एक साथ न करें- हानि होगी। कोई विशेष योजना साकारता की ओर बढ़ेगी। पदोन्नति के योग, व्यवहार में सतर्कता की सलाह।मिथुनमित्रों और सहयोगियों से लाभ। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। सांसारिक सुख सुविधाएं बढ़ेगी। काम अधूरे रहने के कारण पश्चाताप।कर्कउच्चाधिकारी और सम्पर्क लाभप्रद होंगे। प्रियजनों से विवाद और कलह संभव है। कई प्रकार की रूकावटों का सामना। सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेंगे।सिंहउच्चाधिकारी आपको मनचाही पोस्टिंग दे सकते हैं। जरूरी काम दोपहर तक निपटा लें। कलहपूर्ण वातावरण, घर व्यवसाय में हानि। उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे।कन्याविद्यर्थियों के लिए दिन उत्तम सिद्ध होगा। अनावश्यक तनावग्रस्त रहेंगे। बच्चों को सुख-सुविधाएं देने की चिंता रहेगी। आगे बढ़ें- तीर निशाने पर ही लगेगा।तुलामन शांत रहेगा, धैर्य सफलता की कुंजी है। मध्यस्थ के रूप में सम्मान प्राप्त होगा। बच्चों का आर्थिक भविष्य सुनिश्चित करेंगे। अभीष्ट धन लाभ न होने से खिन्नता।वृश्चिक योजनाएं मूर्त रूप लेगी, मन प्रसन्न होगा। रिश्तेदारों और मित्रों से निकटता बनेगी। परिवार में शुभ एवं मंगल कार्य होंगे। येन केन प्रकारेण- इज्जत बचाने में सफल रहेंगे।धनुपूंजी निवेश करने से बचें, दुविधाग्रस्त रहेंगे। दोपहर तक संघर्ष अधिक रहेगा। अधिकार क्षेत्र व्यापक होगा, धनागम भी। भविष्य के लिए लाभदायक कोई सौदा होगा।मकर सरकारी समस्या विशेषकर टैक्स की हल हो जाएगी। स्वयं के कार्यकलाप ही बनता काम बिगाड़ देंगे। डूबा धन मिलेगा, उन्नति के अवसर भी। परिस्थिति अनुकूलता की ओर बढ़ेगी।कुंभपिता तुल्य लोगों से आर्शीवाद मिलेगा। न्यायालय में विजय मिलेगी। मानसिक स्थिति में सुधार, काम निबटेंगे। परिवार और रोजगार दोनों की समस्याएं सुलझेगी।मीनदोपहर बाद आचरण संयमित रखें। अधिकारियों और अधिनस्थों से न टकराएं। व्यवसाय में लाभ, नौकरी में उन्नति। दिन भर सफलताओं के योग, भाग्य प्रबल। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>July 2026 Festival Calendar: जगन्नाथ यात्रा से गुरु पूर्णिमा तक, देखें व्रत&#45;त्योहार की पूरी List</title>
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<description><![CDATA[ जुलाई 2026 का महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। इस महीने कई सारे तीज-त्योहार पड़ने वाले हैं। अभी से इन व्रत-त्योहारों की तिथि नोट कर लें। इस बार जुलाई के महीने में देवशयनी एकादशी, जगन्नाथ यात्रा और महीने की आखिरी में सावन की शुरुआत भी हो जाएगी। जुलाई के पूरे महीने में हर दूसरे-तीसरे दिन त्योहार मनाए जाएंगे। इतना ही नहीं, इस महीने गुप्त नवरात्रि भी मनाई जाएगी। इस लेख हम आपको बताते हैं कि जुलाई महीने में पड़ने वाले व्रत-त्योहार कौन-कौन से हैं।व्रत त्योहारों की लिस्ट-03 जुलाई 2026 -	संकष्टी गणेश चतुर्थी , संत थॉमस डे-10 जुलाई 2026- 	योगिनी एकादशी-12 जुलाई 2026	- रोहिणी व्रत , मास शिवरात्रि , प्रदोष व्रत-14 जुलाई 2026	- भौमवती अमावस्या -15 जुलाई 2026 - गुप्त नवरात्रि प्रारंभ-16 जुलाई 2026 -मुहर्रम समाप्त , पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा-17 जुलाई 2026	- वरद चतुर्थी-19 जुलाई 2026	- कौमार षष्ठी -25 जुलाई 2026 - 	देवशयनी एकादशी-26 जुलाई 2026	- जाया पार्वती व्रत , प्रदोष व्रत-29 जुलाई 2026 - 	गुरु पूर्णिमा ,व्यास पूजा-30 जुलाई 2026	- कांवड़ यात्रा प्रारंभयोगिनी एकादशी डेट और टाइमयोगिनी एकादशी का व्रत शुक्रवार, 10 जुलाई को रखा जाएगा। इस व्रत का पारण 11 जुलाई को दोपहर 1:50 बजे से शाम 4:36 बजे के बीच किया जा सकता है। जो लोग गौण योगिनी एकादशी मानते हैं, वे 11 जुलाई, शनिवार को भी यह व्रत रख सकते हैं।देवशयनी एकादशी डेट और टाइमजुलाई महीने में देवशयनी एकादशी 25 तारीख को मनाई जाएगी। तिथि का प्रारंभ 24 जुलाई को ही सुबह 9 बजकर 12 मिनट पर हो जाएगा और 25 जुलाई को सुबह 11 बजकर 34 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। उदया तिथि के अनुसार एकादशी का व्रत शनिवार को रखा जाएगा और इसका पारण 26 जुलाई रविवार के दिन सुबह 5 बजकर 39 मिनट से लेकर 8 बजकर 22 मिनट पर कर सकते हैं।गुरु पूर्णिमा डेट और टाइमआषाढ़ महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। यह पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा। पूर्णिमा की शुरुआत 28 जुलाई, मंगलवार को ही शाम 6 बजकर 18 मिनट पर पूर्णिमा तिथि लग जाएगी और बुधवार को रात 8 बजकर 5 मिनट पर तिथि समाप्त हो जाएगी। पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय का समय रात 7 बजकर 21 मिनट पर होगा।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 1 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 1 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 1 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष (Aries)प्रेम और संस्कार: वाणी में मधुरता और संवादआज का दिन आपसी मनमुटाव को दूर करने का है। अपनी वाणी में गंगा जल जैसी पवित्रता और सौम्यता रखें। यदि जीवनसाथी के साथ कोई वैचारिक मतभेद था, तो प्रभु का स्मरण कर ठंडे दिमाग से बात करें; आपसी तालमेल से रिश्ते में पुनः शांति स्थापित होगी।वृषभ (Taurus)प्रेम और संस्कार: समर्पण और लक्ष्मी-नारायण योगआज आपके दाम्पत्य व प्रेम जीवन में सुख-समृद्धि का वास रहेगा। आपके रिश्ते में सात्विक प्रेम और एक-दूसरे के प्रति आदर भाव बढ़ेगा। किसी मंदिर या धार्मिक स्थल पर साथ दर्शन करने का सौभाग्य मिल सकता है, जिससे मन और रिश्ता दोनों पवित्र होंगे।मिथुन (Gemini)प्रेम और संस्कार: धैर्य और अंतर्मन की शांतिआज ग्रहों की स्थिति आपके स्वभाव में थोड़ा भटकाव ला सकती है। क्रोध या उत्तेजना में आकर अपने अर्धांग/अर्धांगिनी को ठेस न पहुँचाएँ। मन को शांत रखने के लिए ईश-आराधना का सहारा लें और साथी की भावनाओं का सम्मान करें।कर्क (Cancer)प्रेम और संस्कार: ईश्वरीय कृपा और आनंदआज आपके प्रेम जीवन पर ईश्वर की विशेष अनुकंपा रहेगी। जीवनसाथी या प्रियतम की ओर से आपको असीम स्नेह और कोई मांगलिक समाचार मिल सकता है। आज का दिन आपसी विश्वास की नींव को और सुदृढ़ करने के लिए सर्वश्रेष्ठ है।सिंह (Leo)प्रेम और संस्कार: कर्तव्य और निश्छल प्रेमसंभव है कि आज आपके संगी अपने सांसारिक दायित्वों और कार्यों में अधिक व्यस्त रहें। ऐसे समय में अधीर होने के बजाय एक सच्चे सहधर्मी की भांति उनका संबल बनें। आपका यह त्याग और धैर्य रिश्ते को और अधिक सम्मानित बनाएगा।कन्या (Virgo)प्रेम और संस्कार: विवाह और मांगलिक चिंतनयदि आप अपने प्रेम को विवाह के पवित्र बंधन में बांधने का विचार कर रहे हैं, तो आज का दिन बड़ों आशीर्वाद और ईश्वरीय मार्गदर्शन लेने के लिए उत्तम है। रिश्ते में मर्यादा और सुचिता बनाए रखें, भविष्य मंगलमय होगा।तुला (Libra)प्रेम और संस्कार: क्षमा और करुणासुबह के समय पुराने किसी विवाद के कारण मन थोड़ा अशांत हो सकता है। शास्त्रों में &#039;क्षमा&#039; को सबसे बड़ा गुण बताया गया है; अतः बीती बातों को भुलाकर संगी को गले लगाएं। संध्या काल तक महादेव की कृपा से सब मंगलमय हो जाएगा।वृच्छिक (Scorpio)प्रेम और संस्कार: शिव-शक्ति जैसा अटूट जुड़ावआज आपके प्रेम में एक आध्यात्मिक गहराई देखने को मिलेगी। यदि आप किसी के समक्ष अपने सात्विक प्रेम का प्रस्ताव रखना चाहते हैं, तो समय अनुकूल है। वैवाहिक जीवन में शिव-पार्वती जैसा सामंजस्य और अगाध प्रेम बना रहेगा।धनु (Sagittarius)प्रेम और संस्कार: सह-यात्रा और सत्संगआज प्रियजन के साथ किसी सुंदर यात्रा या किसी धार्मिक-सामाजिक उत्सव में सम्मिलित होने का अवसर मिल सकता है। साथ मिलकर सत्संग सुनने या धर्म-चर्चा करने से आप दोनों के विचार एक-दूसरे के और करीब आएंगे।मकर (Capricorn)प्रेम और संस्कार: कर्म और धर्म का संतुलनसंसार के कर्म-क्षेत्र (ऑफिस/व्यवसाय) के तनाव को अपने गृहस्थ जीवन या प्रेम की वेदी पर हावी न होने दें। अपने संगी को ईश्वर का उपहार मानकर उन्हें समय और सम्मान दें। निश्छल प्रेम ही हर मानसिक तनाव की परम औषधि है।कुंभ (Aquarius)प्रेम और संस्कार: रूहानी और आत्मिक मिलनआज आपका प्रेम शारीरिक आकर्षण से ऊपर उठकर एक आत्मिक रूप ले लेगा। आप बिना कहे भी एक-दूसरे की अंतरात्मा की आवाज को सुन और समझ पाएंगे। सिंगल्स के जीवन में किसी संस्कारी और विचारवान व्यक्ति का आगमन हो सकता है।मीन (Pisces)प्रेम और संस्कार: भक्तिमय प्रेम और नव-ऊर्जाआज आपका रिश्ता प्रेम और विश्वास की नई ऊंचाइयों को छुएगा। जैसे भक्त का भगवान से नाता होता है, वैसा ही समर्पण आज आपके भीतर अपने साथी के प्रति रहेगा। पुराने सारे संशय दूर होंगे और प्रेम की नई ज्योति प्रज्वलित होगी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:44 +0530</pubDate>
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<title>Krishnapingala Sankashti Chaturthi: 3 या 4 जुलाई? दूर करें Confusion, नोट करें सही Date और Time</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं, संकष्टी चतुर्थी के व्रत बेहद ही महत्वपूर्ण माना जता है। सनातन धर्म में संकष्टी चतुर्थी व्रत प्रथमपूज्य भगवान गणेश को समर्पित है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन पड़ने वाले व्रत को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश जी की विधिवत रुप से पूजा की जाती और व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा और व्रत करने से भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है। श्री गणेश अपने सभी भक्तों पर कृपा बरसाते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनीं रहती है। जीवन की सभी बाधाएं दूर रहती हैं। आइए आपको बताते हैं कब कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा।कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी की तिथि द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ के महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 03 जुलाई को सुबह 11 बजकर 20 मिनट पर हो रही है और चतुर्थी तिथि का समापन अगले दिन 04 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगी। विशेषतौर पर संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रोदय का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसलिए आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर 03 जुलाई को चंद्रोदय प्राप्त हो रहा है। इस दिन चंद्रोदय 9 बजकर 53 पर होगा। इसलिए इस साल कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत 03 जुलाई को रखा जाएगा।जानिए कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्तइस बार कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन ब्रह्म मुहूर्त तड़के सुबह 04 बजकर 07 मिनट से 04 बजकर 47 मिनट पर होगा। जबकि अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक रहने वाला है। भगवान गणेश जी की पूजा का समय लाभ-उन्नति मुहूर्त 07 बजकर 12 मिनट से 08 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। हालांकि, अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 08 बजकर 56 मिनट से 10 बजकर 41 मिनट तक रहने वाला है। सर्वार्थ सिद्धि योग में करें गणेश का पूजनइस बार कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रहने वाला है। बता दें कि, सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह में 05 बजकर 28 मिनट से 11 बजकर 46 तक रहेगा। इस योग में गणेश जी की पूजा करें।कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत पूजा विधि- इस दिन सुबह सबसे जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करना काफी जरुरी है और इसके बाद स्नान आदि करें। - अब भगवान गणेश जी की पूजा के लिए संकल्प लें। इसके बाद श्री गणेश की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर उनकी पूजा करें।  - इस पूजा में आप दीप, धूप, फल, फूल आदि का प्रयोग करें। इसके बाद भगवान गणेश जी की कथा सुनें और फिर भजन कीर्तन करें। - व्रत के आखिर में व्रती को भगवान गणेश को अर्पित किया गया प्रसाद खिलाएं।  - इसके बाद व्रत की पूर्णता का संकल्प लें।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>July Hindu Festival List: जगन्नाथ रथयात्रा से गुरु पूर्णिमा तक, यहां देखें हिंदू त्योहारों की पूरी लिस्ट</title>
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<description><![CDATA[ साल 2026 का सातवां महीना यानी की जुलाई की शुरूआत हो चुकी है। यह महीना कई बड़े धार्मिक व्रत और त्योहारों से भरपूर रहने वाला है। जुलाई महीने में कई हिंदू धर्म के प्रमुख व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे। संकष्टी चतुर्थी से जुलाई महीने की शुरूआत हो रही है। इस महीने आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, जगन्नाथ रथयात्रा, देवशयनी एकादशी और गुरु पूर्णिमा जैसे व्रत-त्योहार मनाए जा रहे हैं। वहीं चातुर्मास लगने से कुछ समय के लिए सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको जुलाई में पड़ने वाले सभी हिंदू त्योहारों के बारे में बताने जा रहे हैं।यहां देखें जुलाई 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहार03 जुलाई - संकष्टी चतुर्थी10 जुलाई - योगिनी एकादशी12 जुलाई - रवि प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि15 जुलाई - आषाढ़ गुप्त नवरात्रि प्रारंभ16 जुलाई - जगन्नाथ रथयात्रा, कर्क संक्रांति21 जुलाई - मासिक दुर्गाष्टमी25 जुलाई - देवशयनी (हरिशयनी) एकादशी26 जुलाई - रवि प्रदोष व्रत29 जुलाई - गुरु पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा30 जुलाई - श्रावण (सावन) मास प्रारंभइसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 1 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 1 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनजुलाई 2026 के बड़े व्रत और त्योहारजगन्नाथ रथयात्राआषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पुरी में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकाली जाती है। इस दिन भगवान गुडिंचा मंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं। इस दौरान लाखों की संख्या में भक्त पुरी पहुंचते हैं।आषाढ़ गुप्त नवरात्रि15 जुलाई 2026 से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरूआत हो रही है। जोकि सामान्य नवरात्रि से अलग होती है। गुप्त नवरात्रि में साधक तंत्र-मंत्र और दस महाविद्याओं की विशेष साधना करते हैं। आध्यात्मिक उन्नति और विशेष सिद्धियों की प्राप्ति के लिए गुप्त नवरात्रि बेहद शुभ माना जाता है।देवशयनी एकादशी और चातुर्मासदेवशयनी एकादशी को हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है। इस बार 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी। मान्यताओं के मुताबिक इस दिन से जगत के पालनहार भगवान विष्णु 4 महीनों के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा के लिए जाते हैं। इसी दिन से चतुर्मास की शुरूआत होती है। इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्य जैसे गृह प्रवेश, विवाह और मुंडन आदि कार्यों से परहेज किया जाता है।गुरु पूर्णिमा और सावन की शुरुआतबता दें कि 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन से भगवान शिव के प्रिय माह श्रावण की शुरूआत होती है। पूरे सावन शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। गुरु पूर्णिमा का दिन गुरु और महर्षि वेदव्यास के प्रति श्रद्धा समर्पित करने के लिए होती है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 02 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष नया काम शुरू होगा, नए पुराने मित्रों से लाभ। घर और दफ्तर दोनों में तनाव महसूस करेंगे। अकर्मण्यता के कारण अवसर खो देंगे। सुखद यात्रा के योग हैं।वृषअचल सम्पत्ति संबंधी कार्यों में व्यस्तता। आशा निराशा के झूले में रहेंगे। विश्वासघात और ठगी के शिकार हो सकती है। दीर्घकाल से अटका हुआ काम बनेगा।मिथुनकिसी और की गलती की सजा आपको मिलेगी। सम्पत्ति अर्जित करने में सफल रहेंगे। सत्कार्यों में धन खर्च से यश मिलेगा। बिगड़े हुए संबंध, गलतफहमी दूर करने सुधरेंगे।कर्ककिसी षड्यंत्र के शिकार हो सकते हैं। अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने का काम न करें। व्यापार के क्षेत्र में नवीनता और लाभ। आध्यात्मिक कार्यों में रूचि और साधना भी।सिंहभाग्योदय की सूचना प्राप्त होगी। पिछले पूंजी निवेश का उत्तम लाभ मिलेगा। विपरीत परिस्थिति, अनुकूलता की ओर बढ़ेंगे। मित्रों की उन्नति होगी, आपको सहयोग मिलेगा।कन्यानौकरी में पदोन्नति और धन लाभ। धन प्राप्ति की नई योजनाएं बनेगी। परोपकार की भावना से कार्य करेंगे। शुभ कार्यों में बाधाएं।तुलाबच्चों के भविष्य के प्रति चिंतित रहेंगे। ग्रह योग मिश्रित फल देने वाला है। संचार माध्यमों और जन-सम्पर्क में आर्कषण बढ़ेगा। उच्च स्तर की बैठकों में भाग लेंगे।वृश्चिक परिवार में कोई मांगलिक कार्य। रोजगार व्यवसाय में नई स्थापना। सफलता देने वाला दिन है। व्यस्तता और थकान भरा दिन है।धनुपारिवारिक सुख शांति और मित्र मिलन। रोग का सही निदान होगा, स्वास्थ्य सुधरेगा। परिश्रम के अनुरूप फल प्राप्त नहीं होगा। बैंक बैलेंस बढ़ेगा, अच्छा धन लाभ।मकर व्यावसायिक मामलों में ठोस निर्णय और सफलता। प्रतियोगिता में आप श्रेष्ठ और सफल सिद्ध होंगे। परिवार की उन्नति, स्वच्छता और गृह सज्जा में दिन की समाप्ति। प्रतिष्ठा और सम्पत्ति दोनों में वृद्धि।कुंभज्ञान विज्ञान में रूचि बढ़ेगी। कर्तव्य की उपेक्षा भारी पड़ेगी। अपने से संबंधित क्षेत्रों से आगे बढ़ेंगे/रहेंगे। दिन भर &#039;मूडस्विंग&#039; करता रहेगा।मीनअकारण शत्रु पैदा होंगे, अनावश्यक विवाद भी। वरिष्ठ अधिकारियों के कृपा पात्र रहेंगे। घरेलू सुख साधन बढ़ाने पर खर्च करेंगे। पारिवारिक मित्र के स्वास्थ्य की चिंता। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Horoscope, July, 2026, Aaj, Rashifal:, सभी, राशियों, का, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन, पढ़ें, आज, का, राशिफल</media:keywords>
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<title>Astrology Remedy: राशि अनुसार पहनें सही रंग का धागा, बुरी नजर से होगा बचाव, मिलेगी सफलता</title>
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<description><![CDATA[ अक्सर आपने देखा होगा कि लोगों की कलाई या पैरों में धागा या अलग-अलग रंगों के धागे जरुर पहने होंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर राशि का संबंध  किसी न किसी ग्रह और तत्व से होता है। ऐसे में कई लोग राशि के अनुसार धागा भी धारण करते हैं।ज्योतिष में माना जाता है कि विभिन्न रंगों के धागे न सिर्फ व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर और अशुभ प्रभावों से बचने में सहायक होते हैं, बल्कि यह मानसिक तनाव को कम करने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का कार्य भी करते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि राशि के अनुसार कौन-से रंग का धागा धारण करना शुभ माना जाता है। आइए आपको बताते हैं आपकी राशि के अनुसार कौन-सा धागा पहनना चाहिए।राशि के अनुसार कौन से रंग का धागा पहनें- मेष राशि के जातकों को लाल रंग का धागा धारण करना चाहिए। क्योंकि यह साहस और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। - वृषभ राशि वाले लोगों को सफेद रंग का रेशमी धागा पहनना चाहिए। इससे मानसिक शांति मिलती है। - मिथुन राशि के जातकों को हरे रंग का धागा पहनना काफी लाभकारी सिद्द हो सकता है। - कर्क राशि के जातक सफेद या चमकीले रंग का धागा पहन सकते है, यह आपके लिए शुभ है। इससे भावनात्मक संतुलन बनाता है। - सिंह राशि वालों लाल, पीला या नारंगी रंग का धागा धारण करना शुभ होता है। यह सफलता दिलाता है। - तुला राशि के लोगों को सफेद या हल्के गुलाबी रंग का धागा पहनना चाहिए। - वृश्चिक राशि के जातकों लाल रंग का धागा शुभ माना गया है। - धनु राशि के जातकों को पीले रंग का धागा पहनना चाहिए। यह भाग्य वृद्धि और गुरु ग्रह के शुभ प्रभाव बढ़ाता है। - मकर राशि वालों के लिए काले रंग का धागा पहनना शुभ होता है। - कुंभ राशि के लोगों के नीले रंग का धागा पहनना लाभकारी रहता है।  - मीन राशि के जातकों के लिए हल्के पीले रंग का धागा धारण करना शुभ होता है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:42 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 2 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 2 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 2 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशिआज पार्टनर के साथ बातचीत करते समय थोड़ा संयम बरतें। बिना वजह की बहस आपके रिश्ते में खटास ला सकती है। सिंगल लोगों के लिए आज का दिन किसी पुराने मित्र से दोबारा जुड़ने का मौका ला सकता है।वृषभ राशिआपके और आपके जीवनसाथी के बीच आपसी समझ बढ़ेगी। यदि कोई मनमुटाव चल रहा था, तो वह आज सुलझ जाएगा। शाम को पार्टनर के साथ किसी खूबसूरत डिनर या वॉक पर जाने का प्लान बन सकता है।मिथुन राशिआज आप अपने दिल की बात खुलकर कह पाएंगे। रिश्तों में ताजगी लाने के लिए आज का दिन बेहतरीन है। लव पार्टनर से कोई खूबसूरत सरप्राइज मिल सकता है।कर्क राशिआज का दिन थोड़ा भावुक रह सकता है। पार्टनर की कोई छोटी सी बात आपको चुभ सकती है। बेहतर होगा कि आप मन में बातें रखने के बजाय उनसे शांति से बात करें।सिंह राशिआपका आत्मविश्वास और आकर्षण आज चरम पर रहेगा। सिंगल लोगों को आज कोई ऐसा मिल सकता है जो उनके दिल की धड़कनें बढ़ा दे। जो लोग पहले से रिश्ते में हैं, उनका प्रेम और गहरा होगा।कन्या राशिआज रिश्ते में पारदर्शिता बनाए रखें। पार्टनर से कोई बात न छुपाएं। वैवाहिक जीवन में खुशहाली रहेगी और आप एक-दूसरे के काम में हाथ बंटाएंगे।तुला राशिलव लाइफ के लिए आज का दिन बेहद रोमांटिक है। आप अपने पार्टनर के साथ एक मजबूत कनेक्शन महसूस करेंगे। अगर शादी की बात आगे बढ़ानी है, तो आज का दिन अनुकूल है।वृश्चिक राशिआज काम की व्यस्तता के कारण आप पार्टनर को ज्यादा समय नहीं दे पाएंगे, जिससे वे थोड़ा नाराज हो सकते हैं। एक छोटा सा लव मैसेज या फोन कॉल इस नाराजगी को दूर कर सकता है।धनु राशिरिश्तों में आज नया उत्साह देखने को मिलेगा। आप और आपके पार्टनर भविष्य की योजनाओं पर चर्चा कर सकते हैं। सिंगल लोगों के लिए आज सोशल मीडिया या किसी इवेंट के जरिए कोई नया रिश्ता दस्तक दे सकता है।मकर राशिवैवाहिक जीवन में आज थोड़ी नीरसता महसूस हो सकती है। रिश्ते में नयापन लाने के लिए कुछ अलग ट्राई करें। पार्टनर की भावनाओं का सम्मान करें, रिश्ता मजबूत होगा।कुंभ राशिआज आपका स्वभाव बहुत केयरिंग रहेगा, जो आपके पार्टनर को बेहद पसंद आएगा। लंबे समय से आ रही गलतफहमियां दूर होंगी। आपसी विश्वास में बढ़ोतरी होगी।मीन राशिलव लाइफ के लिहाज से आज आप खुद को भाग्यशाली महसूस करेंगे। पार्टनर का पूरा सहयोग और प्यार मिलेगा। आज आप उनके साथ पुरानी यादों को ताजा कर सकते हैं।आज का लव टिप: रिश्तों में हमेशा सही साबित होने की जिद न करें। कभी-कभी प्यार जताने के लिए झुक जाना भी रिश्ते को और खूबसूरत बना देता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:41 +0530</pubDate>
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<title>July Vrat And Festival List: सावन, रथ यात्रा से गुरु पूर्णिमा तक, देखें व्रत&#45;त्योहार का पूरा Calendar</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में हर महीने का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। वहीं जुलाई 2026 का महीना इस दृष्टि से खास है। जुलाई 2026 का महीना कई प्रमुख व्रत, त्योहारों और धार्मिक आयोजनों से भरा है। इस महीने में आषाढ़ और श्रावण जैसे पवित्र महीने का संयोग बनने से भगवान विष्णु, शिव और, जगन्नाथ, गुरु पूर्णिमा और देवशयनी एकादशी जैसे कई महत्वपूर्ण पर्व पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाए जाएंगे।इसी महीने से चातुर्मास की शुरूआत होगी। इस दौरान साधु-संत एक स्थान पर रहकर साधना करते हैं। वहीं श्रद्धालु दान-पुण्य, धर्म-कर्म और पूजा-पाठ का विशेष महत्व मानते हैं। ऐसे में अगर आप भी जुलाई के सभी व्रत एवं त्योहारों की सही तिथियां, महत्व और पूजा से जुड़ी जानकारी जानना चाहते हैं। तो यह आर्टिकल आपके लिए है। क्योंकि आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको जुलाई 2026 व्रत एवं त्योहारों के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Astrology Remedy: राशि अनुसार पहनें सही रंग का धागा, बुरी नजर से होगा बचाव, मिलेगी सफलताजुलाई 2026 के प्रमुख व्रत एवं त्योहार03 जुलाई - कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 07 जुलाई - कालाष्टमी 10 जुलाई - योगिनी एकादशी व्रत, अवतार मेहेर बाबा मौन पर्व। 12 जुलाई -  रवि प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि, रोहिणी व्रत 14 जुलाई - भौमवती अमावस्या, हलहारिणी आषाढ़ी अमावस्या। 15 जुलाई - आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि प्रारंभ।  16 जुलाई - जगन्नाथ रथयात्रा, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा।  17 जुलाई - विनायक चतुर्थी, सूर्य कर्क संक्रांति 21 जुलाई - मासिक दुर्गाष्टमी, मां ताप्ती जयंती 23 जुलाई - गुप्त नवरात्रि नवमी पूजन, भड़ली नवमी 24 जुलाई - आशा दशमी व्रत 25 जुलाई - देवशयनी एकादशी व्रत, चातुर्मास का प्रारंभ 26 जुलाई - रवि प्रदोष व्रत, वासुदेव, वामन द्वादशी 27 जुलाई - मंगला तेरस, विजया-पार्वती व्रत प्रारंभ 29 जुलाई - गुरु पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा, व्यास पूजा का दिन  30 जुलाई - श्रावण (सावन) मास प्रारंभ, कांवड़ यात्रा शुरू  बता दें कि 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी से जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु 4 महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके साथ ही सभी तरह के मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है।वहीं इस बार 30 जुलाई 2026 से भगवान शिव का प्रिय माह सावन का महीना शुरू हो रहा है। यह महीना शिव भक्तों के लिए बेहद खास और पवित्र माना जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:41 +0530</pubDate>
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<title>July Panchang Festival: जगन्नाथ रथ यात्रा से सावन तक, यहां देखें इस महीने के सभी व्रत&#45;त्योहारों का पंचांग</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में हर महीने का अपना एक खास महत्व होता है। हर महीने कई व्रत-त्योहार पड़ते हैं। वहीं साल 2026 का सातवां महीना यानी की जुलाई की शुरूआत हो गई है। हिंदू पंचांग के मुताबिक जुलाई का महीना कई व्रत और त्योहारों से भरपूर रहने वाला है। वहीं इस महीने कई शुभ तिथियां भी रहेंगी। इस महीने की शुरूआत संकष्टी चतुर्थी से हुई है। जिसके बाद योगिनी एकादशी, मासिक शिवरात्रि, गुप्त नवरात्रि और देवशयनी एकादशी आदि मनाया जाएगा।जुलाई के महीने में पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकलेगी। वहीं देवशयनी से भगवान विष्णु 4 माह के लिए योगनिद्रा में चले जाएंगे। इसके बाद गुरु पूर्णिमा जैसे व्रत-त्योहार और सावन माह की शुरूआत भी जुलाई महीने में होगी। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको जुलाई में आने वाले त्योहारों के पूरे पंचांग के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 3 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 3 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनजुलाई 2026 व्रत-त्योहार3 जुलाई - संकष्टी चतुर्थी10 जुलाई - योगिनी एकादशी12 जुलाई - रवि प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि15 जुलाई - आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 16 जुलाई - जगन्नाथ रथयात्रा, कर्क संक्रांति21 जुलाई - मासिक दुर्गाष्टमी, पार्वती जयंती22 जुलाई - भड़ली नवमी25 जुलाई - देवशयनी एकादशी (हरिशयनी एकादशी), गौरी व्रत प्रारंभ26 जुलाई - रवि प्रदोष व्रत29 जुलाई - गुरु पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा, गौरी व्रत समापन30 जुलाई - श्रावण (सावन) मास का शुभारंभजुलाई 2026 में ग्रह-गोचर04 जुलाई - शुक्र सिंह राशि में गोचर करेंगे।16 जुलाई - सूर्य का कर्क राशि में गोचर होगा।27 जुलाई - शनि होंगे मीन राशि में वक्री होंगे।जुलाई 2026 के बड़े और प्रमुख व्रत-त्योहारजगन्नाथ रथयात्राआषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि यानी की 16 जुलाई को ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की रथयात्रा निकाली जाएगी। इस दिन तीनों रथ पर सवार होकर गुडिंचा मंदिर यानी की अपनी मौसी के घर जाते हैं।देवशयनी एकादशी और चातुर्मासवहीं 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी। इसको हरिशयनी एकादशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु चार महीनों के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा के लिए चले जाते हैं। इस दिन से चातुर्मास की शुरूआत होती है। चातुर्मास में शुभ कार्यक्रम जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि कार्य नहीं होते हैं।गुरु पूर्णिमा और श्रावण की शुरुआतबता दें कि 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन महर्षि वेदव्यास को सम्मान और श्रद्धा व्यक्त की जाती है। वहीं 30 जुलाई 2026 से भगवान शिव के प्रिय माह श्रावण यानी की सावन माह की शुरूआत होगी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:40 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 3 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 3 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 3 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशिआज अपनी जुबान पर थोड़ा काबू रखें। बेवजह की बहसबाजी आपके आपसी संबंधों को बिगाड़ सकती है। जो लोग अकेले हैं, उनकी मुलाकात आज किसी पुराने दोस्त से हो सकती है।वृषभ राशिपति पत्नी के बीच आज तालमेल बहुत बढ़िया रहेगा। पुरानी दूरियां और मतभेद आज खत्म होंगे। शाम का समय साथी के साथ कहीं बाहर घूमने में बीत सकता है।मिथुन राशिआज आप अपने साथी के सामने दिल खोलकर अपनी भावनाएं जाहिर करेंगे। रिश्तों में नयापन लाने के लिए दिन अच्छा है। साथी की तरफ से कोई प्यारा तोहफा मिल सकता है।कर्क राशिआज आपका मन थोड़ा संवेदनशील रहेगा। जीवनसाथी की कोई बात आपको बुरी लग सकती है। मन में कड़वाहत रखने के बजाय उनसे खुलकर और शांति से बात करना ठीक रहेगा।सिंह राशिआज लोग आपकी तरफ आकर्षित होंगे। जो लोग किसी के साथ रिश्ते में आने की सोच रहे हैं, उन्हें आज सफलता मिल सकती है। शादीशुदा लोगों का आपसी तालमेल और मजबूत होगा।कन्या राशिअपने रिश्ते में आज कुछ भी न छुपाएं। साथी के साथ पूरी ईमानदारी बरतें। घरेलू जीवन में सुख-शांति रहेगी और आप दोनों मिलकर घर के काम संभालेंगे।तुला राशिप्रेम जीवन के मामले में आज का दिन बेहद खूबसूरत रहेगा। आप अपने साथी के बेहद करीब महसूस करेंगे। जो लोग विवाह के बंधन में बंधना चाहते हैं, उनके लिए आज बात आगे बढ़ाने का सही समय है।वृश्चिक राशिकाम के दबाव के चलते आज आप अपने हमसफर को वक्त नहीं दे पाएंगे, जिससे वे थोड़े उदास हो सकते हैं। एक प्यारा सा संदेश उनकी इस उदासी को तुरंत दूर कर देगा।धनु राशिआज आपके प्रेम संबंधों में एक नई ऊर्जा आएगी। आप दोनों मिलकर अपने भविष्य को लेकर कुछ बड़े फैसले ले सकते हैं। कुंवारे लोगों को आज किसी सामाजिक समारोह में कोई पसंद आ सकता है।मकर राशिवैवाहिक जीवन में आज थोड़ा अकेलापन या बोरियत महसूस हो सकती है। आपसी तालमेल को बेहतर करने के लिए कुछ नया करने की कोशिश करें। एक-दूसरे के विचारों को अहमियत दें।कुंभ राशिआज आपका पूरा ध्यान अपने साथी की जरूरतों पर रहेगा, जिससे उन्हें बेहद खुशी मिलेगी। पुरानी गलतफहमियां दूर होंगी और एक-दूसरे पर भरोसा और ज्यादा बढ़ेगा।मीन राशिआज सितारों का साथ मिलने से आपका प्रेम जीवन आनंदमयी रहेगा। जीवनसाथी से भरपूर स्नेह और सहयोग मिलेगा। आज आप दोनों मिलकर पुरानी खूबसूरत यादों को ताजा करेंगे।आज का लव टिप: हर बार अपनी बात को सही साबित करने की कोशिश न करें। रिश्ते को बचाने और निभाने के लिए कभी-कभी थोड़ा सा समझौता कर लेना समझदारी होती है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:40 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Love, Horoscope, For, July, 2026, आज, का, प्रेम, राशिफल, जुलाई, 2026, प्रेमियों, के, लिए, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन</media:keywords>
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<title>Horoscope 03 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष स्वजनों के साथ अच्छा समय बीतेगा। तन मन से परेशान और दुःखी। दिन भर सुखानुभूति और आनंद उत्सव। कार्य क्षमता का विकास, विशेष निर्णय भी।वृषअनिश्चिता और बेचैनी का माहौल रहेगा। उत्तरदायित्व बढ़ेंगे, उपकार भी करेंगे। &#039;आ बैल मुझे मार&#039; कहावत आप पर लागू होगी। शुभ कार्यों में व्यस्तता रहेगी।मिथुनपड़ोसियों से संबंध बिगड़ सकते हैं। अच्छा महसूस करेंगे, खर्च भी अधिक होगा। सफल यात्रा के योग, परिस्थितियों में सुधार। अस्थिरता और मानसिक अशांति।कर्करोगीजनों के स्वास्थ्य में सुधार। संतान पक्ष से पूरा सहयोग मिलेगा। धैर्य से काम लें, समस्या दूर होगी। बदनामी होने का डर बना रहेगा।सिंहअकारण विवाद से बनता काम बिगड़ेगा। विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट सफल होंगे। मन उदास रहेगा, प्रतियोगिता में विफलता। स्वजनों के साथ प्रसन्न रहेंगे।कन्यासरकारी कामों में सफलता मिलेगी। यात्रा में कष्ट के योग हैं, सावधान रहें। अपमान कराने वाला दिन है, सतर्क रहें। अंधविश्वास और भरोसे से हानि होगी।तुलाबाहरी लोगों का हस्तक्षेप, घर में अशांति। सामान्य दिनचर्या के बावजूद अच्छें मैत्री संबंध होंगे। पदोन्नति का उत्तम अवसर, खुशी मिलेगी। रिश्तेदारों में मनमुटाव।वृश्चिक बाहरी हस्तक्षेप से घर का वातारण बिगड़ेगा। कार्यशैली में बदलाव कर सकते है। लोकप्रियता बढ़ेगी, जनसंपर्क व्यापक होगा। वृद्धजनों के प्रति सेवा और दया भाव रखें।धनुऊंचाई से गिरने या वाहन से चोट लगने की संभावना। क्रोध और असफलता निराशा के कारण। संतान के संबंध में आशाजनक शुभ समाचार मिलेंगे। विभागीय परीक्षा में सफलता।मकर सब के साथ सब के बीच में भी अकेलापन। प्रयत्नों के सुपरिणाम मिलेंगे। दूर संचार माध्यमों से विशेष सूचनाएं एवं संदेश मिलेगा। ससुराल पक्ष से लाभ होगा।कुंभकिसी भी प्रकार से कार्यद्धि हो ही जाएगा। सर्वत्र स्वयं को व्यस्त पाएंगे, थकेंगे भी। विवादों में विजय प्राप्त करने की खुशी होगी। उधार दिया हुआ धन वापस आएगा।मीनयथा समय अच्छी सफलता मिलेगी। किसी नई योजना का श्रीगणेश। अंहकार नए शत्रु पैदा करेगा। अपराहन में विश्वासघात के शिकार होंगे। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Mars Transit: रोहिणी नक्षत्र में मंगल की एंट्री, इन 4 Lucky राशियों को Career में मिलेगी सफलता</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष में ग्रहों का नक्षत्र परिवर्तन महत्वपूर्ण माना गया है। ग्रह नक्षत्र बदलने से हर राशि पर इसका प्रभाव देखने को मिलता है। वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को ऊर्जा, साहस और पराक्रम का कारक माना जाता है। मंगल ग्रह के नक्षत्र परिवर्तन से कई राशियों को बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। मंगल ग्रह जल्द ही अपना नक्षत्र बदलने वाला है, जिससे करियर, व्यापार और आर्थिक मामलों के तौर पर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिष गणना के अनुसार, मंगल ग्रह 5 जुलाई 2026, रविवार के दिन दोपहर को 12 बजकर 01 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहा है। रोहिणी को चंद्रमा का नक्षत्र माना जाता है और मंगल का यहां प्रवेश ज्योतिषीय दृष्टि बेहद खास माना जा रहा है। मंगल ग्रह 24 जुलाई 2026 तक इसी नक्षत्र में गोचर करेंगे।जिसके बाद वे मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। इस अवधि के दौरान मंगल का प्रभाव कुछ राशियों के लिए बहुत ही लाभकारी माना जा रहा है। आइए आपको बताते हैं कौन हैं ये लकी 4 राशियां।मेष राशिमेष राशि के स्वामी मंगल ग्रह ऐसे में यह नक्षत्र गोचर, इस राशि के जातकों के लिए खास माना जा रहा है। इस अवधि में करियर में काफी सफलता प्राप्त होने वाली है। वर्कप्लेस पर नई और बड़ी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। जिसको आप अच्छे से निभा सकते हैं। इतना ही नहीं, लंबे समय से रुका हुए कार्य पूरा भी होगा, जिससे आपका मन भी प्रसन्न रहने वाला है।सिंह राशिसिंह राशि के जातको के लिए मंगल के इस शुभ प्रभाव से सारे रुके हुए काम अब बनने नजर आएंगे। समाज और वर्कप्लेस पर मान-सम्मान में बढ़ोतरी होगी। इस अवधि में आत्मविश्वास और मजबूत बनेगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए यह समय काफी अनुकूल रहने वाला है और प्रमोशन मिलने की भी संभावना बन रही है। बिजनेस से जुड़े लोगों के इस अवधि में पहले से अधिक मुनाफा हो सकता है।कर्क राशिइस राशि के जातकों के लिए भी मंगल का नक्षत्र परिवर्तन काफी लाभदायक हो सकता है। नौकरीपेशा वालों के लिए यह समय काम में सफलता मिलेगी और कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। वहीं, घर-परिवार को लेकर चलने वाला तनाव भी खत्म होने वाला है। घर में माहौल सामान्य रहने वाला है। इस दौरान धन लाभ के अच्छे संकेत बन रहे हैं। वृश्चिक राशियह समय वृश्चिक राशि के लोगों के लिए पैसों के मामले में अच्छा रह सकता है। अगर आप कहीं निवेश करने की सोच रहे हैं, तो आपको फायदा मिल सकता है। नौकरी या काम में आगे बढ़ने के मौके मिलेंगे और प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने की भी संभावना है। साथ ही, जो काम लंबे समय से रुके हुए थे, वे भी इस दौरान पूरे हो सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 4 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 4 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 4 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशिआज बातचीत के दौरान अपनी वाणी में सौम्यता बनाए रखें। आवेश में आकर कही गई बात आपसी तालमेल को प्रभावित कर सकती है। अकेले रह रहे लोगों की जिंदगी में आज किसी पुराने परिचित की वापसी संभव है।वृषभ राशिदाम्पत्य जीवन में आज सामंजस्य और प्रेम का संचार होगा। यदि बीते दिनों कोई मनमुटाव हुआ था, तो आज उसे सुलझाने का सबसे सही समय है। शाम का वक्त साथी के साथ सुकून से बीतेगा।मिथुन राशिआज आप बिना किसी झिझक के अपने साथी के सामने प्रेम का इजहार कर सकेंगे। संबंधों में नया उत्साह और ताजगी महसूस होगी। हमसफर की ओर से आज कोई सुखद सरप्राइज मिल सकता है।कर्क राशिआज आपका मिजाज थोड़ा संवेदनशील हो सकता है। साथी की कोई सामान्य बात भी आपके दिल को ठेस पहुँचा सकती है। चुप रहने के बजाय संवाद का रास्ता चुनें, गलतफहमी दूर होगी।सिंह राशिआज आपका व्यक्तित्व दूसरों को अपनी ओर खींचेगा। नए रिश्ते की शुरुआत के लिए समय बेहद अनुकूल चल रहा है। जो लोग पहले से प्रेम में हैं, उनके बीच का लगाव और गहरा होगा।कन्या राशिसच्चाई और ईमानदारी ही आज आपके रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। साथी से कोई भी बात साझा करने में संकोच न करें। पारिवारिक जीवन में आज एक-दूसरे का भरपूर सहयोग मिलेगा।तुला राशिप्रेम के मोर्चे पर आज का दिन खुशियों से भरा रहने वाला है। आप दोनों के बीच एक अनूठा मानसिक और भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिलेगा। विवाह के मामलों को आगे बढ़ाने के लिए दिन श्रेष्ठ है।वृश्चिक राशिदिनभर की भागदौड़ के कारण आज आप साथी को पर्याप्त समय नहीं दे पाएंगे, जिससे उनका साया थोड़ा उदास हो सकता है। एक छोटा सा प्रेम संदेश भी उनके चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए काफी होगा।धनु राशिआपके प्रेम संबंधों में आज एक नया मोड़ आ सकता है, जो रिश्तों को और परिपक्व बनाएगा। आप दोनों आने वाले कल की सुनहरी योजनाएं बना सकते हैं। अविवाहितों के लिए आज विवाह के नए प्रस्ताव आ सकते हैं।मकर राशिवैवाहिक जीवन की रोजमर्रा की दिनचर्या से आज थोड़ी नीरसता महसूस हो सकती है। रिश्ते में वही पुरानी रौनक वापस लाने के लिए साथी की इच्छाओं को प्राथमिकता दें और उनके साथ समय बिताएं।कुंभ राशिआज आपका पूरा समर्पण और ध्यान अपने हमसफर की खुशी पर रहेगा। बीते समय की कड़वी यादें आज पीछे छूट जाएंगी और आपसी विश्वास को एक नई मजबूती मिलेगी।मीन राशिआज भाग्य आपके प्रेम जीवन को संवारने में मदद कर रहा है। जीवनसाथी का अटूट प्रेम और विश्वास आपको संबल देगा। आज साथ बिताया गया हर पल यादगार लम्हों में तब्दील हो जाएगा।आज का लव टिप: रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए बहस जीतने की जिद को छोड़ना पड़ता है। कभी-कभी मौन रहकर मुस्कुरा देना बड़ी से बड़ी उलझन को टाल देता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:38 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 04 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष भावी रूपरेखा पर चलने का निर्णय लेना पड़ेगा। अटका काम बनेगा। स्व विवेक से लिए गए निर्णय ही लाभप्रद होंगे। लोकप्रियता बढ़ेगी और प्रसन्नता भी।वृषपदोन्नति के योग है, सहयोग भी मिलेगा। व्यर्थ का विवाद संभव। सरकारी कामों में सफलता मिलेगी। रोजगार बढ़ाने के प्रयासों का लाभ मिलेगा।मिथुनकार्य में विस्तार और अर्थ प्राप्ति की योजना आगे बढ़ेगी। दिन भर सफलताओं के योग, भाग्य प्रबल। महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं जीवनशैली में। प्रतियोगिता में आप श्रेष्ठ और सफल सिद्ध होंगे।कर्ककुछ जरूरी दस्तावेज गुम हो सकते हैं। शत्रु पक्ष आपका लोहा मानेगा। संचित धन में अच्छी वृद्धि होगी। रिश्तेदारों का आवागमन। कोर्ट कचहरी में विजय की संभावना।सिंहउन्नति का मार्ग खुलेगा। अनेक बाधाओं के बाद सफलता के योग। संतान के संबंध में आशाजनक शुभ समाचार मिलेंगे। विविध प्रकार से लाभ होगा।कन्याअंहकार नए शत्रु पैदा करेगा। अच्छे-अच्छे अवसर प्राप्त होंगे। सत्कार्यों में धन खर्च से यश मिलेगा। सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए अच्छा दिन है।तुलामित्रों और सहयोगियों से लाभ। उत्तम सफलताओं का दिन है। अपना वैभव दिखाने का प्रयास करेंगे। पदोन्नति संभव है, अधिकारों में भी वृद्धि।वृश्चिक बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान दें, तनावपूर्ण दिन है। नई योजनाओं पर विचार और उनका &#039;श्री गणेश&#039;। सभी व्यक्तियों का सहयोग मिलेगा। मिले जुले फलों का दिन है।धनुरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। शुभ लाभ की प्राप्ति और वैसे ही समाचार भी। दफ्तर में जिम्मेदारियां बढ़ेगी, मानदेय भी बढ़ेगा। अटके लटके हुए काम आगे बढ़ेंगे।मकर कोर्ट कचहरी में विजय प्राप्त होगी। रोग का सही निदान होगा, स्वास्थ्य सुधरेगा। परोपकार की भावना से कार्य करेंगे। घर तथा परिवार में कलह का वातावरण।कुंभघर का वातावरण अच्छा रहेगा। उत्साहपूर्वक आगे बढ़ेंगे, सफल रहेंगे। अचल सम्पत्ति में पूंजीनिवेश सलाह लेकर ही करें। अप्रिय अतिथि के आगमन से परेशानी।मीनपरिश्रम के अनुसार सफलता मिलेगी। खर्च अधिक होगा। अपनी क्षमताओं का पूरा लाभ उठाएं। लोकप्रियता बढ़ेगी और सम्पन्नता भी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:38 +0530</pubDate>
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<title>Shukra&#45;Ketu Yuti: जुलाई में बदलेगा 5 राशियों का भाग्य, क्या आपकी राशि है इस Lucky List में</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल हमेशा खास अहमियत रखती है। वहीं जुलाई 2026 का महीना कुछ राशियों के लिए बेहद खास रहने वाला है। 04 जुलाई 2026 को शुक्र ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। वहीं सिंह राशि में पहले से केतु ग्रह विराजमान हैं। इसलिए शुक्र ग्रह के गोचर से दोनों ग्रहों की युति बन जाएगी। ज्योतिष में इसको खगोलीय घटना मानी जाती है। जिसका कई राशियों पर असर पड़ने की संभावना है। वहीं कुछ राशियों को इस गोचर का लाभ मिलेगा। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि शुक्र और केतु की युति का किन 5 राशियों को लाभ मिलेगा।मेष राशिशुक्र-केतु की युति मेष राशि के जातकों के लिए लाभदायक रहने वाली है। स्टूडेंट्स जो किसी एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए यह समय विशेष रूप से अनुकूल है। मेहनत का फल मिलेगा और सफलता मिलने के योग हैं। कार्यक्षेत्र में सकारात्मक बदलाव होंगे और रुके हुए प्रोजेक्ट पूरे होने या अधिकारियों की सराहना मिलेगी। आर्थिक स्थिति में सुधार के योग हैं। आर्थिक समस्या से परेशान लोगों को राहत मिलेगी। इन जातकों के काम और व्यवहार की सराहना होगी और नए अवसर मिलेंगे।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 4 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 4 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनवृषभ राशिइस राशि के स्वामी शुक्र हैं। इसलिए इस युति का असर इस पर भी शुभ होगा। निवेश और धन से जुड़े फैसले लाभदायक रहेंगे। व्यवसाय से जुड़े लोगों को मुनाफा मिलने का समय है। रिश्तों पर भी अच्छी खबर मिलेगी। पति-पत्नी के बीच आपसी समझ बढ़ेगी। वहीं अविवाहित लोगों के लिए प्रेम संबंधों में आगे बढ़ने या फिर नए रिश्ते की शुरूआत हो सकती है। वहीं घर-परिवार में सुख-शांति का माहौल बना रहेगा।सिंह राशिसिंह राशि पर इस युति का प्रभाव सबसे ज्यादा होगा। लंबे समय से अटके हुए काम पूरे होंगे। मानसिक रूप से राहत महसूस करेंगे और करियर में नए रास्ते खुलेंगे। नौकरी और व्यवसाय बदलने की सोच रहे लोगों के लिए अनुकूल समय है। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। आय के नए स्त्रोत बनेंगे। आत्मसम्मान और नेतृत्व क्षमता में निखार आएगा।तुला राशितुला राशि के लिए भी शुक्र-केतु की युति खास है। आय बढ़ने के संकेत हैं और अतिरिक्त स्त्रोत से भी कमाई हो सकती है। करियर में सफलता मिलने के साथ नए अवसर मिलेंगे। रचनात्मक क्षेत्रों या सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए खास समय है। सुख-सुविधाओं में बढ़ोत्तरी होगी। पारिवारिक माहौल भी खुशनुमा रहेगा।कुंभ राशिआर्थिक दृष्टि से कुंभ राशि के लोगों के लिए शुक्र-केतु की युति लाभदायक है। पैसों से जुड़ी समस्याएं हल होंगी, धन-लाभ के नए स्त्रोत बनेंगे। शादीशुदा लोगों के लिए रिश्तों में नजदीकी बढ़ाने वाला समय है। जीवनसाथी के साथ तालमेल बेहतर रहेगा। इस दौरान कुंभ राशि के लोगों का सामाजिक दायरा बढ़ेगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Venus Transit से खुलेगा इन राशियों का भाग्य, क्या आपकी Zodiac Sign भी है इस List में?</title>
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<description><![CDATA[ आज की ऊर्जा पुरानी बातों को नए सिरे से देखने का है और साथ ही नई शुरुआत होने के चांस भी काफी नजर आ आ रहे हैं। असल में जिन राशियों का लग्न या भाव शुक्र के इस बदलाव से छू रहा है, उनके लिए आज दिन काफी अच्छा बनने वाला है। आज का दिन पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए काफी बढ़िया है। हालांकि बुध वक्री के कारण से नए कॉन्ट्रैक्ट, बड़ी शॉपिंग या हड़बड़ी में लिए फैसलों से थोड़ा बचकर चलें। आइए जानते हैं चंद्र और लग्न के हिसाब से कैसा रहेगा आज आपका दिन।मेष राशिसकारात्मक पक्ष- काफी पुराना कोई संपर्क अचानक से काम आ जाएगा, नेटवर्किंग में जोश बना रहेगा। - नकारात्मक पक्ष- यदि आप जरुरत ज्यादा महत्वाकांक्षी बनने से बचें। वही बुध वक्री के चलते नया एग्रीमेंट को रोक दें।- प्रेम और पारिवारिक संबंध- शुक्र के पंचम भाव में आने से पार्टनर के साथ रोमांस में एक क्रिएटिव टच नजर आएगा। अगर घर की बात करें, तो गुरु का साथ माहौल को हल्का और सहयोगी बनाए रखें। - आर्थिक स्थिति- इस समय गुरु पुष्यामृत योग चतुर्थ भाव में है और वर्कआउट के बीच पानी पीना बिल्कुल न भूलें। - करियर और कारोबार- आपका रुका हुए पुराना प्रोजेक्ट नेटवर्किंग के दम पर आगे खिसक सकता है। - उपाय- अपने किसी पुराने दोस्त को फोन करें, शिवलिंग पर जल जरुर चढ़ाएं। - शुभ रंग- लाल, शुभ अंक- 9वृषभ राशि- सकारात्मक पक्ष- आज का दिन टीम वर्क में रंग लेकर आएगा, आपकी लीडरशिप क्वालिटी क्षमता को लोग पहचानेंगे।  -नकारात्मक पक्ष- बुध वक्री तीसरे भाव में है, तो बातचीत में गलतफहमी न बने इसका खास ख्याल रखें। - प्रेम और पारिवारिक संबंध- लग्नेश के राशि बदलने से आपके अंदर आत्मविश्वास बढ़ेगा। जीवनसाथी के साथ बातचीत में गर्माहट रहने वाली है। - आर्थिक स्थिति- करियर संबंधित कमाई में स्थिरता देखने को मिलेगी, शाम को महंगी शॉपिंग से हाथ रोक लें, तो सबसे बेहतर है। - हेल्थ- यदि आपको तनाव से सिर भारी लगता है, तो इसके बीचों-बीच में छोटा ब्रेक लेकर लंबी सांस जरुर लें। - करियर और कारोबार- आपके इनोवेटिव आइडिया आज बॉस को पसंद आने वाले हैं, नई जिम्मेदारी मिल सकती है। - उपाय- माता लक्ष्मी को सफेद फूल अर्पित करें, ऐसा करने से करियर में लाभ प्राप्त होगा।शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 6मिथुन राशिसकारात्मक पक्ष- आज आपको विदेशी क्लाइंट या कोई दूर के काम से लाभ मिलेगा। - नकारात्मक पक्ष- पैसों से संबंधित जुड़े नए फैसले भावनाओं में बहकर न लें, थोड़ा ठहरकर सोचें। - प्रेम और पारिवारिक संबंध- मिथुन राशि में शुक्र के तीसरे भाव में आने से बातचीत में रोमांटिक कॉन्फिडेंस नजर आएगा। माता-पिता के साथ कोई आध्यात्मिक बात मन को सुकून दे सकती है। - आर्थिक स्थिति- गुरु पुष्यामृत धन भाव में है, पुराने लेन-देन को फिर से खंगालना फायदेमंद का सौदा होगा। - स्वास्थ्य- आपकी ऊर्जा का स्तर काफी अच्छा रहने वाला है, दिमाग भी हल्का फील करेगा। - करियर- कानूनी या कागजी काम में किस्मत का पूरा साथ मिलेगा। - उपाय: लक्ष्मीनारायण मंदिर जाकर सफेद फूल चढ़ाएं, मन ही मन मंत्र दोहराएं।कर्क राशिसकारात्मक पक्ष- सोच में गहराई नजर आएगी, व्यवहार भी पहले से ज्यादा मैच्योरिटी आएगी।नकारात्मक पक्ष- बोलने से पहले एक बार जरुर सोचें, बड़े फैसले जल्दबाजी में न लें। प्रेम और पारिवारिक संबंध- शुक्र के दूसरे भाव में आने से परिवार में एक शाही-सा माहौल बनेगा। पिता की तरफ से धन लाभ के भी आसार हैं। - आर्थिक स्थिति- योगकारक मंगल लाभ भाव में बैठे हैं, जिससे आपको कोई दोहरी अच्छी खबर मिल सकती है। - हेल्थ- लग्न पर गुरु की मौजूदगी से रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहेगी। - करियर और कारोबार- रुके हुए सारे काम आज निपटा लें, किसी भी फैसले पर हड़बड़ी न करें। - उपाय: घर के मंदिर में दीया जलाएं और आज के दिन हनुमान चालीसा जरुर सुनें। शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 2सिंह सकारात्मक पक्ष- आकर्षण और आत्मविश्वास आज चरम पर होगा, तारीफें भी खूब मिलेंगी। नकारात्मक पक्ष- बुध वक्री बारहवें भाव में हैं, कोई भी बड़ा समझौता करने से पहले कागजात दो बार जरुर चेक करें। - प्रेम और पारिवारिक संबंध- पहले से भी और बॉन्डिंग पार्टनर के साथ गहरी होगी, वहीं भाई-बहनों के साथ भी मन हल्का रहेगा। - आर्थिक स्थिति- सरकारी स्कीम या लंबी अवधि के निवेश से आज लाभ होगा। - हेल्थ- सेहत में काफी सुधार होगा, वॉक जरुर करें। - करियर और कारोबार- आपकी समझदारी आज सहकर्मी और बॉस दोनों नोटिस करेंगे। - उपाय- शिव जी का दूध से अभिषेक करें, आज खुद के लिए कुछ खास चीज खरीद लाएं।शुभ रंग: सुनहरा | शुभ अंक: 1कन्या राशिसकारात्मक पक्ष: आज अपने ऑनलाइन खर्चों पर ध्यान दें। इससे बेवजह चल रहे सब्सक्रिप्शन या फालतू खर्चों का पता चल सकता है।नकारात्मक पक्ष: फिलहाल किसी नई नेटवर्किंग या निवेश योजना में शामिल होने से बचें। साथ ही, ऑफिस की गपशप से दूरी बनाए रखें।प्रेम और पारिवारिक संबंध: शादीशुदा जीवन में आपसी भरोसा और समझ बनी रहेगी। वहीं, जीवनसाथी के साथ भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव भी पहले से बेहतर होगा।आर्थिक स्थिति: आय बढ़ाने के नए मौके मिल सकते हैं। रुका हुआ पैसा मिलने या अतिरिक्त कमाई के योग भी बन रहे हैं।स्वास्थ्य: खानपान में किए गए अच्छे बदलाव का असर अब आपकी सेहत पर साफ दिखाई देने लगेगा। शरीर पहले से ज्यादा स्वस्थ महसूस होगा।करियर और कारोबार: नौकरी और व्यापार में आज कुछ ऐसे फैसले लेने पड़ सकते हैं, जो आगे चलकर आपके लिए फायदेमंद साबित होंगे।उपाय: सुबह पक्षियों को अलग-अलग तरह के अनाज खिलाएं।शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 5तुला राशिसकारात्मक पक्ष: आज रचनात्मक कामों में नई सोच और अलग तरीका अपनाने से अच्छे नतीजे मिल सकते हैं।नकारात्मक पक्ष: पैसे से जुड़े मामलों में अहंकार से बचें। साथ ही, अभी किसी नए समझौते या एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने में जल्दबाजी न करें।प्रेम और पारिवारिक संबंध: प्रेम संबंधों में आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। परिवार में भी खुशियों और उत्साह का माहौल बना रहेगा।आर्थिक स्थि ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:36 +0530</pubDate>
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<title>कपूर का यह Weekly Remedy दूर करेगा हर संकट, घर में आएगी सुख&#45;समृद्धि और Positive Vibes</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म में घर की तुलना स्वर्ग से की जाती है। हर किसी व्यक्ति का यही सपना होता है कि उसके घर में हमेशा शांति बनीं रहे, लोगों के बीच आपसी प्रेम हो और कभी भी उनके घर में दरिद्रता न आए। अक्सर न चाहते हुए भी घर में बुरी ऊर्जाओं का साया मंडराने लगता है, जिसके बाद सब काम बिगड़ने लगते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार कपूर के कुछ ऐसे उपाय है, जो जरुर करें, ऐसा करने से आपके घर में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा बनीं रहेगी।मंगलवार और शनिवार करें यह कामवास्तु शास्त्र के अनुसार कपूर का इस्तेमाल बहुत शुभ माना जाता है। इसकी तेज खुशबू घर का माहौल अच्छा बनाती है। अगर कपूर में लौंग मिलाकर जलाया जाए, तो माना जाता है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। यह उपाय मंगलवार और शनिवार को करना सबसे अच्छा माना जाता है। मान्यता है कि इन दिनों यह उपाय करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और नकारात्मकता कम होती है।रविवार और सोमवार को करें यह कामइसके अलावा, रविवार और सोमवार को घर में शाम के समय कपूर और दालचीनी जलाएं। इस बात का ध्यान रखें कि इसे आग्नेय कोण में ही रखें। इस जगह पर सबसे अधिक नकारात्मक ऊर्जा रहती है। इनको जलाने पर निकलने वाली सुगंध घर की हवा को शुद्ध कर देती है। धन लाभ और समृद्धि के लिए यह एक अच्छा उपाय माना जाता है। इसको आप किसी भी मिट्टी या पीतल के बर्तन में ही जलाएं। बता दें कि, रविवार और सोमवार को यह उपाय इसलिए करने चाहिए, क्योंकि यह दिन सूर्य देव और भगवान शिव के होते हैं और दोनों ही देवता धन-धान्य की वृद्धि, तरक्की और समृद्धि देने वाला होता है।गुरुवार और शुक्रवार को करें यह कामवास्तु शास्त्र के मुताबिक, घर की पूर्व दिशा में आप कपूर और तेजपत्ता जलाते हैं, तो परिवार में प्रेम बना रहता है। इसके सुगंध गुरु, शुक्र और शनि को प्रभावित करती है, जिससे घर का वास्तु दोष खत्म कर देता है। इस उपाय के करने से घर में रहने वाले लोगों को मन शांत रहता है और वे तनावमुक्त रहने लगते हैं। बता दें कि, तेजपत्ते को गुरु का कारक माना जाता है, इसे जलाने से बुद्धि और सौभाग्य की बढ़ोतरी होती है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:36 +0530</pubDate>
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<title>Mercury Transit in Gemini: 7 जुलाई से बुध का गोचर, ये 3 गलतियां आपको कर सकती हैं कंगाल</title>
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<description><![CDATA[ वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह को ग्रहों का राजकुमार कहा जाता है। वाणी, बुद्धि, संचार और व्यापार का मुख्य कारक बुध ग्रह माना जाता है। माना जाता है कि अगर जातक की कुंडली में बुध कमजोर हो, तो बिजनेस में नुकसान और आर्थिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। वहीं, जातको काफी जीवन में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र  के अनुसार, 7 जुलाई को बुध मिथुन राशि में गोचर करने जा रहा है। इस गोचर के समय कुछ गलतियों को करने जरुर बचना चाहिए। इस समय बुध ग्रह व्रकी अवस्था में है। ज्योतिष के अनुसार, वर्जित कामों को करने से जीवन में समस्याएं काफी देखने को मिलती हैं और घर में अशांति का वातावरण हो जाता है। आइए आपको बताते हैं बुध गोचर के दौरान किन गलतियों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए।जल्दबाजी में निवेश न करें ज्योतिष के मुताबिक, बुध गोचर के समय भूलकर भी जल्दबाजी में किसी भी तरह का निवेश न करें। कई बार लोग भावनाओं में बहकर निवेश कर देते हैं। माना जाता है कि बुध गोचर के दौरान निवेश करने से कर्ज की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है और निवेश पूरी तरह से डूब सकता है। जब आप निवेश करने जा रहे हैं, तो पहले सही से सोचें और एक्सपर्ट की राय जरुर लें।अनावश्यक यात्राएंबुध गोचर के समय अनावश्यक यात्राओं को टाल ही दें। यदि कोई जरुरी यात्रा करनी है, घर से सावधानी से निकलें।वाणी पर कंट्रोल करेंअसल में बुध ग्रह व्यक्ति के बोलने के तरीके को नियंत्रित करते हैं। आप दूसरों के सामने खुद कैसे प्रस्तुत करते हैं। यह सब बुध तय करता है। इस गोचर के समय किसी से भी बातचीत के दौरान कठोर वाणी भूलकर भी न बोलें। माना जाता है कि इस तरह की गलती को करने से जॉब या बिजनेस में काफी नुकसान देखने को मिलता है। इसलिए अपने अंहकार को दूर करें और सबसे विनम्र रहें।बुध ग्रह के उपाय - जिन व्यक्ति के कुंडली में बुध ग्रह कमजोर है, उन लोगों के बुधवार के दिन सुबह स्नान करने के बाद चार मुख वाले रुद्राक्ष को जरुर धारण करें। माना जाता है कि इस उपाय के करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है और व्यक्ति को जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है और सभी परेशानियां दूर होती है। - वहीं, आप बुध ग्रह को मजबूत करने के लिए हरी चीजों का दान कर सकते हैं। ऐसा करने से बुध ग्रह प्रसन्न होते हैं और जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:35 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 05 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष वरिष्ठ जनों से सहायता मिलेगी। पूंजीनिवेश भविष्य के लिए लाभदायक। कुसंगति के कारण भटकाव और भविष्य गर्त्त में। सासंरिक सुखों में लिप्त रहेंगे।वृषनौकरी व्यापार के सदंर्भ में सफलता भरा दिन। सामाजिक, धार्मिक कार्यों में व्यस्तता। कुछ लोगों को &#039;वीआईपी&#039; लोगों से मिलना पड़ेगा। घर परिवार में शुभ कार्यों में आयोजन हो सकता है।मिथुनमन में हड़बड़ी रहेगी, काम में मुश्किलें। येन केन प्रकारेण- इज्जत बचाने में सफल रहेंगे। आडम्बर और दिखावे में रूचि ज्यादा होगी। संयम की जरूरत है।कर्करोजगार व्यापार की जगह पर ख्याति और ईमानदारी के चर्चें। इच्छित कार्य नहीं कर पाएंगे। बनते हुए काम बिगड़ने पर खिन्न होंगे। आपका सरकार में प्रभाव बढ़ेगा।सिंहपरिश्रम से पीछे न हटें, सफलता मिलेगी। दिन भर सफलताओं के योग, भाग्य प्रबल। योजनाएं आगे बढ़ेगी। दुविधा की स्थिति में व्यर्थ समय जाएगा।कन्याविपरीत परिस्थिति, अनुकूलता की ओर बढ़ेंगे। न्यायालय में बड़ी सफलता मिलेगी। मन-मुटाव दूर होगा। अधिकारी वर्ग आपकी प्रशंसा करेगा। तुलाजरूरी काम दोपहर तक होने चाहिए। बिगड़े हुए संबंध सुधर सकते हैं। व्यापार बढ़ाने के प्रयास सफल होंगे। शुभ समाचार और शांतिपूर्ण जीवन।वृश्चिक घर परिवार में आपका सुयश बढ़ेगा। धन प्राप्ति पर प्रसन्नता होगी। विद्यार्थी विशेष सफलता प्राप्त करेंगे। खास रिश्तेदार के स्वास्थ्य की चिंता सताएगी।धनुअच्छी सफलताएं मिलेंगी। ग्रह योग मिश्रित फल देने वाला है। असयंमित वाणी और व्यवहार से दिन बिगड़ेगा। घरेलू समस्याएं बनी रहेगी।मकर विद्यार्थियों को लक्ष्य केन्दि्रत होना चाहिए। सरकारी क्षेत्र में प्रभाव बढ़ेगा। किसी बड़े विश्वासघात की संभावना है। बिगड़े हुए काम बनेंगे, प्रसन्नता होगी।कुंभपूंजी निवेश करने से बचें, दुविधाग्रस्त रहेंगे। मांगलिक कार्यों में व्यय और व्यस्तता। व्यवसाय पर ध्यान केंदि्रत करें। अटके हुए सरकारी काम बनेंगे।मीनदोपहर बाद आचरण संयमित रखें। परिचय क्षेत्र बढ़ेगा, सरकारी सामाजिक कार्य पूरे होंगे। मनोरथ पूर्ण होंगे, अधिकार बढ़ेंगे, सफलता ही सफलता। मनोरंजन में व्यस्त रहेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 6 July 2026 | आज का प्रेम राशिफल 6 जुलाई  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 6 जुलाई 2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशिआज आपका रिश्ता गहरे विश्वास और अपनेपन की महक से महकने वाला है। साथी की एक प्यारी सी मुस्कान आपका दिन बना देगी। जो लोग सिंगल हैं, उनके जीवन में आज किसी खास व्यक्ति के आगमन की खूबसूरत शुरुआत हो सकती है।वृषभ राशिआज आप और आपके जीवनसाथी के बीच प्रेम और आपसी समझ का एक नया अध्याय शुरू होगा। आप दोनों एक-दूसरे की बाहों में असीम सुकून महसूस करेंगे। शाम का समय बेहद जादुई और यादगार रहने वाला है।मिथुन राशिआज आपका दिल खुशियों से भरा रहेगा क्योंकि आपका पार्टनर आपके प्रति अपने अटूट प्रेम को खुलकर बयां करेगा। रिश्तों में नई ताजगी और सकारात्मकता आएगी। आज आपको महसूस होगा कि आपका हमसफर आपकी कितनी परवाह करता है।कर्क राशिआज आपके संबंधों में संवेदनशीलता और गहराई बढ़ेगी। आपका साथी आपकी हर छोटी-बड़ी भावना का पूरा ख्याल रखेगा। आज साथ में बिताया गया कुछ समय आप दोनों के दिल के कनेक्शन को और भी ज्यादा मजबूत कर देगा।सिंह राशिआज आपका आकर्षण और प्रेम दोनों ही सातवें आसमान पर होंगे। साथी आपके साथ वक्त बिताने के बहाने ढूंढेगा। जो लोग किसी से अपने दिल की बात कहना चाहते हैं, उनके लिए आज का दिन सफलता और खुशियाँ लेकर आने वाला है।कन्या राशिआज आपके रिश्ते में ईमानदारी और समर्पण की एक खूबसूरत झलक देखने को मिलेगी। जीवनसाथी के साथ हर बातचीत में मिठास घुली रहेगी। आप दोनों मिलकर अपने सुनहरे भविष्य के सपने बुनेंगे, जो बहुत जल्द सच होंगे।तुला राशिलव लाइफ के लिहाज से आज का दिन किसी उत्सव जैसा आनंदमयी रहेगा। आप दोनों के बीच का रोमांस और आकर्षण चरम पर होगा। आज का दिन आपको अहसास कराएगा कि आप दोनों सचमुच एक-दूसरे के लिए ही बने हैं।वृश्चिक राशिकार्यक्षेत्र की व्यस्तता के बीच भी आज आपका पार्टनर आपके लिए समय निकालेगा, जो आपके दिल को छू लेगा। एक छोटा सा प्यारा सा संदेश भी आप दोनों के बीच के प्रेम को और गहरा कर देगा। आज का दिन आपसी लगाव को बढ़ाने वाला है।धनु राशिआज आपके प्रेम जीवन में एक नई उमंग और नई रोशनी का संचार होगा। आप अपने हमसफर के साथ मिलकर किसी सुखद यात्रा या भविष्य की खूबसूरत योजनाओं पर चर्चा कर सकते हैं। रिश्तों में सिर्फ और सिर्फ खुशहाली रहेगी।मकर राशिवैवाहिक जीवन में आज एक नया मोड़ आएगा, जो आपके रिश्ते में खोया हुआ पुराना रोमांस और गर्माहट वापस ले आएगा। साथी की आँखों में अपने लिए पुराना आदर और असीम प्रेम देखकर आपका मन आनंदित हो उठेगा।कुंभ राशिआज आपका पूरा दिन पार्टनर के निस्वार्थ प्रेम और देखभाल के साये में बीतेगा। उनकी हर छोटी कोशिश आपको विशेष महसूस कराएगी। आज का दिन आपसी तालमेल, हंसी-मजाक और मीठी यादों से भरपूर रहने वाला है।मीन राशिआज सितारे आपके प्रेम जीवन पर अपनी पूरी कृपा बरसा रहे हैं। जीवनसाथी का हर फैसला और हर बात आपको खुशी देगी। आप दोनों मिलकर आज पुरानी खूबसूरत यादों को जीते हुए एक-दूसरे के प्रति समर्पित महसूस करेंगे।आज का लव टिप: प्रेम कोई शर्त नहीं, बल्कि एक खूबसूरत अहसास है। आज अपने साथी को बिना किसी कारण के यह बताएं कि वे आपकी जिंदगी में कितने महत्वपूर्ण हैं और फिर देखिए रिश्ते का जादू। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:34 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 06 July 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष अपने ही लोगों के विरोध का सामना करना ठीक। धन बढ़ेगा, अधिकारी प्रसन्न होंगे। उच्चाधिकारी और सम्पर्क लाभप्रद होंगे। दीर्घ कालीन चिंता से मुक्ति का योग।वृषखास मेहमानों का आगमन, मन की प्रसन्नता। चल अचल संपत्ति में वृद्धि होगी। दाम्पत्य जीवन में सुख और समन्वय। मानहानि से तिलमिला उठेंगे।मिथुन&#039;आ बैल मुझे मार&#039; कहावत आप पर लागू होगी। अधीनस्थ आपसे बहुत प्रसन्न रहेंगे। आर्थिक विश्लेषण-संतुलित बजट पर जोर देंगे। संतान के लिए उन्नति कारक समय।कर्ककाम पर ध्यान देने की जरूरत है। अधूरी योजनाएं पूरी होगी। घर में अतिथियों की चहल-पहल। महत्वपूर्ण उपलब्धियां होगी।सिंहआध्यत्मिक कार्यों में रूचि और उनसे लाभ। प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी। आज दिन की उपलब्धियां अच्छी रहेगी। विषैले जीव जंतु से हानि।कन्यापरिवार तथा कार्यालय में वरिष्ठजनों की कृपा रहेगी। बिगड़े संबंध सुधरेंगे, अपनापन मिलेगा। वरिष्ठ जनों की कृपा से धन और यश लाभ। श्रीमती जी के &#039;यस मैन&#039; बनकर रहें।तुलापरिश्रम रंग लाएगा। डूबा हुआ धन वापिस मिलेगा। पुत्र-पुत्री की शादी का प्रस्ताव आगे बढ़ेगा। आपकी लोकप्रियता बढ़ेगी।वृश्चिक पूंजीनिवेश जोखिम भरा रहेगा। धन उधार देना जोखिम से खाली नहीं। सत्कार्यों में धन खर्च से यश मिलेगा। उच्चाधिकारी काम से असंतुष्ट रहेंगे।धनुअपने से संबंधित क्षेत्रों से आगे बढ़ेंगे/रहेंगे। पारिवारिक और धार्मिक कार्यों में व्यस्तता। आपकी मित्रता सच्ची सिद्ध होगी। स्वास्थ्य में लाभ होगा।मकर किसी से भी टकराव न लें, हानि होगी। पारिवारिक जीवन में सुख शांति। परिवार के साथ सुख से दिन बिताएंगे। चहुंमुखी विकास के अवसर मिलेंगे।कुंभकुछ गलतियां पर पछतावा होगा। सभा-समारोह में भाग लेंगे। भूमि भवन वाहन से लाभ और सुख। सम्पत्ति अर्जित करने में सफल रहेंगे।मीनधन हानि और बदनामी के योग हैं। परेशानी और विश्वासघात की प्रबल संभावना। जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव आएंगे। अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने का काम न करें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:34 +0530</pubDate>
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<title>July Numerology: मूलांक 3 और 6 के Relationship में घुल जाएगी &amp;apos;मिठास&amp;apos;, सभी के लिए Good News</title>
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<description><![CDATA[ अंकज्योतिष के अनुसार, हर एक दिन की अपनी एक अलग और खास ऊर्जा होती है। इस हफ्ते अंक 2 हमें याद दिलाता है कि हमेशा तेज भागना जरुरी नहीं होता है। दरअसल, कभी-कभी सबसे बड़ी कामयाबी धैर्य और अच्छे रिश्तों के नींव पर टिकी होती है। वर्क के मामले में टीम के साथ तालमेल बिठाकर चलना काफी जरुरी है। वहीं, एकदूसरे की बात मानना आपको सही रास्ते पर लेकर जाएगा। पैसों के मामलों में बजट बनाकर चलना और फालतू खर्च से बचना ही सझदारी है। इसके साथ ही, जीवन में जब आप सादगी और सम्मान के साथ बात करते हैं, तो रिश्ते और गहरे हो जाते हैं। हमेशा अपने अंदर की आवाज को जरुर सुनें और इस हफ्ते मिलने वाले मौकों का स्वागत करें। इस बार यह हफ्ता सुकून भरा हो सकता है।मूलांक 1जुलाई महीने की शुरुआत के बाद, अब यह समय है कि आप दूसरों के साथ मिलकर चलें। दूसरों का मार्गदर्शन जरुर करें। अपनी टीम की बातें जरुर सुनें और उन्हें सहारा दें, यही सबसे बड़ी कामयाबी है। काम के मामलों में किसी के साथ जुड़कर काम करना आपके लिए नए मौके लेकर आएगा। बिना सोचे-समझे पैसों को खर्च न करें, बचत पर ध्यान देना जरुरी है। खुद को शांत रखने के लिए छोटे-छोटे ब्रेक ले सकते हैं। सब्र रखना जरुरी है और रिश्ते और भी मजबूत होंगे।लकी नंबर : 1, 10, 19 | लकी रंग : गोल्ड, व्हाइट, लाइट ब्लूसुझाव : सही समय पर सुनना ही बड़े काम की निशानी है।मूलांक 2मूलांक 2 वालों के लिए यह सात दिन काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। आपकी समझदारी और मिलनसार स्वभाव आपको हर तरफ सम्मान दिलाएगा। टीम के साथ मिलकर कार्य करने से अच्छे लाभ प्रदान होंगे। पैसों के मामले में नियम बनाकर खर्च करने से आपको स्थिरता मिलेगी। पूरे हफ्ते आपकी भावनाएं थोड़ी अधिक हो सकती हैं, खुद को शांत रखने के लिए ध्यान या म्यूजिक को जरुर सुनें। रिश्तों में गर्माहट बनीं रहेगी और पुरानी बातें खत्म हो जाएगी। आपकी अंदर की आवाज आपको सही रास्ता तक पहुंचा देगी, इसलिए अपने अंदर की आवाज पर भरोसा रखें।लकी नंबर : 2, 11, 20 | लकी रंग : व्हाइट, सिल्वर, पर्ल व्हाइटसुझाव : आपकी अंदरूनी आवाज ही आपकी सबसे बड़ी साथी है।मूलांक 3इस हफ्ते आपकी अच्छी बातचीत करने की आदत आपको दूसरों से अलग पहचान दिलाएगी। ऑफिस में प्रेजेंटेशन हो या नए लोगों से मिलना, आपकी मेहनत सबको नजर आएगी। किसी भी काम को जल्दबाजी में करने के बजाय अच्छी तैयारी के साथ करें, तभी बेहतर सफलता मिलेगी। खर्च करते समय बजट का ध्यान रखें और बेवजह दिखावे पर पैसे न खर्च करें। समय पर भोजन करें और पूरी नींद लें, इससे आपका ध्यान और याद रखने की क्षमता बेहतर रहेगी। आपका खुशमिजाज स्वभाव लोगों को आपकी ओर आकर्षित करेगा। परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा और आपसी भरोसा भी मजबूत होगा।लकी नंबर : 3, 12, 21 | लकी रंग : येलो, क्रीम, ऑरेंजसुझाव : अपनी बातों से लोगों में उम्मीद और भरोसा जगाएं।मूलांक 4यह हफ्ता मूलांक 4 वालों के लिए मेहनत रंग लेकर आएगी। इस हफ्ते अपनी सभी योजनाओं को फिर से देखें और अपने काम की नींव को और मजबूत करें। आपका काम करने का तरीका वरिष्ठ साथियों को काफी पसंद आने वाला है। पैसों के मामले में नियम बनाए जिससे आपको अच्छे फल मिलेंगे। ज्यादा स्ट्रेस लेने की जरुरत नहीं है। काम के साथ अपने आराम का भी पूरा ध्यान रखें। परिवार  के लोग आपके काम के प्रति समर्पित होने की तारीफ करेंगे, हालांकि उनको आपके थोड़े प्रेम की जरुरत है। छोटे-छोटे आभार शब्द आपके रिश्तों में मिठास भर देंगे।लकी नंबर : 4, 13, 22 | लकी रंग : ग्रीन, ग्रे, व्हाइटसुझाव : मजबूती के साथ अगर प्यार हो तो सब कुछ मुमकिन है। मूलांक 5यह हफ्ता नए लोगों से मिलना और बातचीत करना आपके लिए नए रास्ते को खोल सकता है। आपकी उत्सुकता अच्छी है, लेकिन कोई भी कार्य को लेकर हां बोलने से पहले एक बार अच्छी तरह से समझ लें। पैसों के मामले में सोच-सझकर फैसला लेना जरुरी है। अच्छी सेहत के लिए बाहर घूमें या योग जरुर करें, इससे आपका मानसिक रुप से रिफ्रेश फील करेंगी। इसके साथ ही आप अपनी आजादी और अपनों के साथ रहने के बीच सही संतुलन जरुर बनाएं। साफ-सुथरी बातचीत से गलतफहमियां दूर होंगी। इस दौरान आपका हर एक छोटा कदम भविष्य में बड़ी भूमिका निभाएगा।लकी नंबर : 5, 14, 23 | लकी रंग : एक्वा ब्लू, ग्रीन, व्हाइटसुझाव : आपकी जिम्मेदारियां ही आपको सही मायने में आजाद बनाती हैं।मूलांक 6आपका हेल्पफुल नेचर ही आपके हर टीम का खास हिस्सा बनाएगी। क्लाइंट्स के साथ या किसी भी सिखाने से जुड़े काम में आपको बहुत बड़ी सफलता प्राप्त हो सकती है। वहीं, पैसों के मामले में सोच-समझकर ही फैसले लें। अच्छी सेहत के लिए मानसिक शांति का भी ध्यान रखें। रिश्तों में प्यार सबसे ऊपर रहने वाला है। परिवार के साथ सामंजस्य बढ़ेगा और जीवनसाथी के साथ समझदारी और गहरी होगी। जब आप दूसरों को प्यार देंगे, तो आपको कई गुना होकर वापस मिलेगा।लकी नंबर : 6, 15, 24 | लकी रंग : पिंक, पीच, रोज गोल्डसुझाव : दूसरों को दिया हुआ प्यार कभी बेकार नहीं जाता।मूलांक 7इस हफ्ते आपकी समझदारी और सोचने की क्षमता से मुश्किल काम भी आसान हो जाएंगे। पढ़ाई, रिसर्च और किसी भी काम की योजना बनाने के लिए समय अच्छा है। पैसे निवेश करते समय दूसरों की बातों में आने से बचें और भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखकर फैसला लें। मन को शांत रखने के लिए कुछ समय अकेले बिताएं। इस दौरान आपका मन लोगों से थोड़ी दूरी बनाकर रहने का कर सकता है, इसलिए अपने करीबियों को प्यार से अपनी बात समझाएं। खुलकर और साफ तरीके से बात करने से रिश्तों में गलतफहमी नहीं होगी।लकी नंबर : 7, 16, 25 | लकी रंग : इंडिगो, पर्पल, व्हाइटसुझाव : शांति में ही असली ज्ञान छिपा होता है।मूलांक 8 यह हफ्ता आपके लिए काम की जिम्मेदारियां बढ़ा सकता है, लेकिन आपका नियम ही आपको स्थिर रखेगा। सोच-समझकर साथ मिलकर काम करने से आपको आगे बढ़ने के नए मौके मिलेंगे। भविष्य के लिए की गई बचत और निवेश आपको सुकून देंगे। वर्क प्रेशर को सेहत पर हावी न होने दें। नियमित ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Masik Shivratri July 2026: महादेव की बरसेगी दोगुनी कृपा, Masik Shivratri पर बन रहा यह Special संयोग, जानें तारीख</title>
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<description><![CDATA[ हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। यह व्रत भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित होता है। शिव-पार्वती का आशीर्वाद पाने के लिए लोग मासिक शिवरात्रि का व्रत करते हैं। इस बार आषाढ़ माह की मासिक शिवरात्रि 12 जुलाई 2026 को पड़ रही है। वहीं इस दिन रवि प्रदोष व्रत का भी संयोग बन रहा है। जिससे इस तिथि का महत्व अधिक हो गया है।तिथि व मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक आषाढ़ माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरूआत 12 जुलाई 2026 की रात 10:30 मिनट से हो रही है। वहीं अगले दिन यानी की 13 जुलाई 2026 की शाम 06:49 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। वहीं भगवान शिव की पूजा के लिए मध्यरात्रि निशिता काल का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसलिए 12 जुलाई 2026 को मासिक शिवरात्रि का व्रत और पूजा की जाएगी।इसे भी पढ़ें: Mercury Transit in Gemini: 7 जुलाई से बुध का गोचर, ये 3 गलतियां आपको कर सकती हैं कंगालऐसे करें पूजाइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें। फिर महादेव के धतूरा, बेलपत्र, आक के फूल, अक्षत और चंदन आदि अर्पित करें। भोग में फल और मिठाइयों का भोग लगाएं। इस दौरान शिव मंत्रों का जाप करते रहें। शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में भगवान शिव की आरती करें।बन रहा ऐसा संयोगइस बार 12 जुलाई 2026 को एक दुर्लभ संयोग बन रहा है। इसी दिन रवि प्रदोष और मासिक शिवरात्रि एक साथ पड़ रहे हैं। रविवार को प्रदोष व्रत होने से इसको &#039;रवि प्रदोष&#039; व्रत कहा जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:33 +0530</pubDate>
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<title>Gupt Navratri 2026: अपनी राशि अनुसार मां दुर्गा को चढ़ाएं ये चीजें, हर मनोकामना होगी पूरी</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए नवरात्रि का समय सबसे अच्छा माना जाता है। साल भर में कुल चार बार नवरात्रि आती है। इनमें से दो नवरात्रि चैत्र और आश्विन महीने में आती हैं, जिसमें हम सब खुले रूप से माता रानी की बड़ी धूमधाम से पूजा करते हैं। वहीं, बाकी दो नवरात्रि, जो माघ और आषाढ़ महीने में पड़ती है, को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इसमें देवी दुर्गा की पूजा गुप्त तरीके से करने का नियम है।आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की तारीखइस साल 2026 में आषाढ़ महीने की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई तक मनाई जाएगी। ऐसी मान्यता है कि इन 9 दिनों में अगर आप अपनी राशि के हिसाब से माता रानी की पूजा करते हैं, तो आपकी हर इच्छा बहुत जल्दी पूरी हो जाती है। आइए जानते हैं कि किस राशि के व्यक्ति को क्या उपाय करना चाहिए।मेष राशिमेष राशि के लोगों को गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा को लाल रंग की चीजें चढ़ानी चाहिए। पूजा में लाल गुड़हल या गुलाब का फूल, लाल कपड़े, रोली और लाल चंदन का इस्तेमाल करें। माता रानी को लाल फल और लाल मिठाई का भोग लगाएं। साथ ही, कन्या पूजन के समय किसी कन्या को लाल रंग की चुनरी जरूर भेंट करें।वृषभ राशिवृषभ राशि के जातकों को माता रानी की पूजा में सफेद फूलों का इस्तेमाल करना चाहिए या उन्हें सफेद फूलों की माला चढ़ानी चाहिए। देवी मां को सफेद चंदन का तिलक लगाएं और भोग में सफेद रंग की मिठाई या बताशे अर्पित करें। इसे भी पढ़ें: Gupt Navratri में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, नोट करें Puja का शुभ मुहूर्त और सही विधिमिथुन राशिमिथुन राशि के लोगों को गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा को हरी चुनरी और हरी चूड़ियां चढ़ानी चाहिए। इसके साथ ही, पूजा के समय ॐ दुं दुर्गायै नमः मंत्र का ज्यादा से ज्यादा जाप करना चाहिए।कर्क राशिकर्क राशि के जातकों को माता रानी को चमेली का फूल चढ़ाना चाहिए। अगर चमेली का फूल न मिले, तो आप गुड़हल या गेंदे का फूल भी चढ़ा सकते हैं। मां दुर्गा को खीर का भोग लगाएं और ॐ ललिता देव्यै नमः मंत्र का जाप करें।सिंह राशिसिंह राशि के लोगों को बहुत ही गुप्त तरीके से मां की साधना करनी चाहिए। पूजा में कमल या कनेर का फूल चढ़ाएं। अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए मां दुर्गा के नवार्ण मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे का अधिक से अधिक जाप करें।कन्या राशिकन्या राशि के जातकों को माता रानी को प्रसन्न करने के लिए हरी चुनरी, पान का पत्ता और हरी चूड़ियां चढ़ानी चाहिए। इसके अलावा, रोज़ाना दुर्गा चालीसा का पाठ करें और ॐ शूल धारिणी देव्यै नमः मंत्र का जाप करें।तुला राशितुला राशि के लोगों को देवी मां की पूजा में सफेद रंग के फूल जैसे कमल, जूही या हरसिंगार चढ़ाने चाहिए। कन्या पूजन करने के बाद छोटी कन्याओं को सफेद रंग की मिठाई खिलाकर उनका आशीर्वाद लें। पूजा के समय ॐ ह्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का जाप करें। इसे भी पढ़ें: July 2026 Festival Calendar: जगन्नाथ यात्रा से गुरु पूर्णिमा तक, देखें व्रत-त्योहार की पूरी Listवृश्चिक राशिवृश्चिक राशि के लोगों को मां दुर्गा की पूजा में गुड़हल या गुलाब जैसे लाल फूल चढ़ाने चाहिए। माता रानी को लाल चुनरी, लाल फल और लाल मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के समय कमलगट्टे की माला से ॐ शक्तिरूपायै नमः मंत्र का जाप करें।धनु राशिधनु राशि के जातकों को गुप्त नवरात्रि में माता रानी को गेंदे या कमल का फूल और पीले रंग की चुनरी चढ़ानी चाहिए। इसके साथ ही हर दिन मां दुर्गा के नवार्ण मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे का जाप करना चाहिए।मकर राशिमकर राशि के लोगों को मां दुर्गा को अपराजिता चढ़ाना चाहिए और हर दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। अगर अपराजिता का फूल न मिले, तो आप गुड़हल या गुलाब का फूल भी चढ़ा सकते हैं।कुंभ राशिकुंभ राशि के जातकों को भी गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा को अपराजिता का फूल चढ़ाना चाहिए और छिपकर मां की साधना करनी चाहिए। इसके साथ ही ॐ ब्राह्मयै नमः मंत्र का अधिक से अधिक जाप करना चाहिए।मीन राशिमीन राशि के लोगों को माता रानी की पूजा में कमल, कनेर और गेंदे के फूल चढ़ाने चाहिए। अपनी इच्छाओं को जल्दी पूरा करने के लिए इन 9 दिनों तक ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं दुर्गा देव्यै नमः मंत्र का ज्यादा से ज्यादा जाप करें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:32 +0530</pubDate>
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<title>Vat Purnima 2026: अखंड सौभाग्य के लिए इस शुभ Muhurat में करें पूजा, जानें पूरी Puja Vidhi</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी की 29 जून 2026 को वट पूर्णिमा का व्रत किया जा रहा है। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विवाहिता वट यानी की बरगद के पेड़ की पूजा-अर्चना करती हैं। उत्तर भारत वट पूर्णिमा व्रत ज्यादा मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं बरगद के पेड़ की विधिवत पूजा करते हुए परिक्रमा कर अखंड सौभाग्यवती होने की कामना करती हैं। वट पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा भी कहा जाता है। तो आइए जानते हैं इस दिन की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...तिथि और मुहूर्तहिंदू पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरूआत 29 जून की सुबह 03:06 मिनट पर शुरु हो जाएगी। वहीं अगले दिन 30 जून की सुबह 05:26 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। उदयातिथि के आधार पर 29 जून 2026 को ज्येष्ठ पूर्णिमा मनाई जा रही है। इस दिन स्नान और पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:06 मिनट से लेकर 04:46 मिनट तक चलेगा। पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लें। पूजा के लिए हल्दी, अक्षत, कुमकुम, फूल, धूप, मिठाई, कच्चा सूत, घी का दीपक, फल, जल से भरा कलश, पान के पत्ते और नारियल जैसी सामग्री तैयार रखें। फिर बरगद के पेड़ की जड़ों में जल चढ़ाएं और वृक्ष को हल्दी, कुमकुम, अक्षत, चंदन और फूल आदि अर्पित करें। इसके बाद वट वृक्ष के चारों ओर 7, 11 या 21 बार कच्चा सूत लपेटें और अपने पति की दीर्घायु की कामना करें।इसके बाद सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें, क्योंकि इस कथा के बिना व्रत को अधूरा माना जाता है। फिर भगवान विष्णु, भगवान शिव और देवी सावित्री की प्रार्थना करें और घर-परिवार की सुख-समृद्धि के लिए कामना करें। पूजा की लास्ट में आरती करें।महत्वहिंदू धर्म में वट पूर्णिमा व्रत का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा और परिक्रमा का महत्व होता है। इस दिन विवाहित महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं और सूत बांधती हैं। इसके बाद सावित्री और सत्यवान की कथा सुनती हैं। इससे वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और पति-पत्नी के रिश्तों में मजबूती आती है। वहीं इस दिन व्रत करने और पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:26 +0530</pubDate>
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<title>Jyeshtha Purnima 2026: ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत से जीवन में आती है खुशहाली</title>
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<description><![CDATA[ आज ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत है, सनातन धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और चंद्रदेव की पूजा के साथ व्रत रखने की परंपरा है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक रखा गया व्रत सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और पुण्य फल प्रदान करता है तो हम आपको ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं। जानें ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत के बारे मेंज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव और चंद्रदेव की पूजा करना सर्वोत्तम माना जाता है। साथ ही, इस दिन तुलसी माता की पूजा करना भी विशेष फल प्रदान करता है। धार्मिक ग्रंथों में व्रत के दिन दूसरे के घर का भोजन (परान्न) खाने से भी बचने की बात कही गई है। घर में सात्विक और शुद्ध भोजन या फलाहार ग्रहण करना शुभ माना जाता है।इसे भी पढ़ें: Vat Purnima 2026: अखंड सौभाग्य के लिए इस शुभ Muhurat में करें पूजा, जानें पूरी Puja Vidhiज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत पर दूसरों के घर का भोजन खाने से बचेंधार्मिक ग्रंथों में व्रत के दिन परान्न यानी दूसरे के घर में बना भोजन खाने से भी बचने की सलाह दी गई है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार व्रत के दौरान सात्विकता और पवित्रता बनाए रखना जरूरी होता है। इसलिए घर में शुद्ध तरीके से तैयार भोजन या फलाहार का ही सेवन करना उचित माना जाता है।ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत का  शुभ मुहूर्तपूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 29 जून 2026, सुबह 3:06 बजेपूर्णिमा तिथि समाप्त: 30 जून 2026, सुबह 5:26 बजेचंद्रोदय: 29 जून 2026, शाम 7:16 बजेज्येष्ठ पूर्णिमा मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपायधार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से आर्थिक समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। शाम के समय मां लक्ष्मी को मखाने की खीर का भोग लगाएं और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें। मां लक्ष्मी के सामने 11 कौड़ियां अर्पित करें और अगले दिन लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें। पीपल के पेड़ पर कच्चा दूध और बताशा अर्पित कर पूजा करें। मां लक्ष्मी को एकाक्षी नारियल चढ़ाकर अगले दिन तिजोरी में रखें। पूर्णिमा की रात चंद्रदेव को दूध और गंगाजल से अर्घ्य दें। मान्यता है कि इससे चंद्र दोष दूर होता है और मानसिक तनाव में कमी आती है।ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत पर इन चीजों से बनाएं दूरीधार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत के दिन मांसाहार और शराब का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है। इसके अलावा शहद, बैंगन, मूली और शलजम जैसी कुछ चीजों से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है। इनका सेवन व्रत की शुद्धता को प्रभावित कर सकता है।ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत पर दूसरों के घर का भोजन खाने से बचेंधार्मिक ग्रंथों में व्रत के दिन परान्न यानी दूसरे के घर में बना भोजन खाने से भी बचने की सलाह दी गई है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार व्रत के दौरान सात्विकता और पवित्रता बनाए रखना जरूरी होता है। इसलिए घर में शुद्ध तरीके से तैयार भोजन या फलाहार का ही सेवन करना उचित माना जाता है।ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा भी है रोचक पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय भगवान श्रीकृष्ण ने माता यशोदा के पूछने पर पूर्णिमा व्रत के महत्व का वर्णन किया था। उन्होंने एक प्राचीन कथा सुनाई। प्राचीन काल में एक नगर में &#039;धनपाल&#039; नाम का एक बहुत ही धनी और दयालु ब्राह्मण रहता था। लेकिन उसके घर में कोई संतान नहीं थी, जिसके कारण वह और उसकी पत्नी हमेशा दुखी रहते थे। एक दिन एक संत उनके घर आए और उन्हें पूर्णिमा के व्रत और भगवान सत्यनारायण की पूजा करने की सलाह दी।ब्राह्मण दंपत्ति ने संत के बताए अनुसार हर पूर्णिमा का पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखना शुरू कर दिया। व्रत के प्रभाव से कुछ समय बाद उनके घर एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ। उन्होंने अपने बेटे का नाम &#039;देवीदास&#039; रखा। जब देवीदास बड़ा हुआ, तो उसे पढ़ने के लिए काशी भेजा गया। रास्ते में एक नगर में चोरों ने उसे अपना बंधक बना लिया। लेकिन पूर्णिमा के व्रत के प्रभाव से चोरों को देवीदास के रूप में राजा के बालक का भ्रम हो गया, जिससे डरकर उन्होंने उसे छोड़ दिया। आगे चलकर एक राक्षस ने देवीदास को मारने का प्रयास किया, लेकिन पूर्णिमा व्रत की पुण्य के प्रताप से राक्षस का ही वध हो गया। बाद में, जब काल (मृत्यु) उसके प्राण लेने आया, तो वह मूर्छित होकर गिर पड़ा। तब माता पार्वती ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि उस बालक की माता ने 32 पूर्णिमा के व्रत किए हैं, इसलिए उसे जीवनदान मिलना चाहिए। भक्तवत्सल भगवान शिव ने बालक को जीवनदान दिया। पूर्णिमा व्रत के प्रभाव से काल भी पीछे हट गया। तब से संसार में सुख, आरोग्य और सौभाग्य के लिए पूर्णिमा का व्रत विशेष रूप से फलदायी माना गया है। व्रत का उद्देश्य सिर्फ भूखे रहना नहींधार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि मन, वाणी और व्यवहार की शुद्धता का भी संकल्प है। इसलिए इस दिन क्रोध, झूठ, कटु वचन और नकारात्मक विचारों से भी बचना चाहिए। शांत मन से पूजा-पाठ, दान और भगवान विष्णु का स्मरण करने से व्रत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत पर करें ऐसे पूजा  पंडितों के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन इन कामों को करने से आराध्य होते हैं प्रसन्न। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, संभव हो तो जल में थोड़ा गंगाजल मिलाएं। स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत और पूजा का संकल्प लें। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को चंदन, अक्षत, तुलसी और मिठाई अर्पित करें। शाम को चंद्रमा के उदय होने पर दूध या जल से अर्घ्य दें. यह मानसिक शांति और तनाव मुक्ति के लिए उत्तम माना जाता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत में ये खाएं, सेहत के लिए होगा लाभदायीधार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के व्रत में फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा और सूखे मेवे का सेवन किया जा सकता है। कई लोग सेंधा नमक के साथ फलाहारी भोजन भी करते हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु निर्जला या केवल ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:25 +0530</pubDate>
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<title>Krishnapingala Sankashti Chaturthi: कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत से जीवन की सभी बाधाएं होती हैं दूर</title>
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<description><![CDATA[ 03 जुलाई को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत है, सनातन धर्म में संकष्टी चतुर्थी के व्रत का विशेष महत्व है। ये व्रत विघ्नहर्ता और प्रथमपूज्य भगवान गणेश को समर्पित किया गया है, संकष्टी चतुर्थी का व्रत हर माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है तो आइए हम आपको कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं। जानें कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत के बारे में हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी को ‘कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी’ के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को रखने से गणेश जी की विशेष कृपा जीवन पर बनी रहती है और घर की सुख-शांति बढ़ती है। हिंदू धर्म में गणेश जी बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के देवता माने जाते हैं। किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य की शुरुआत गणेश जी की उपासना के साथ की जाती है, ऐसा करने से सभी कार्य बिना विघ्न के संपन्न होते हैं। भगवान गणेश का आह्वान कर किसी भी कार्य की शुरुआत करने से सभी बाधाओं का अंत होता है।  भगवान गणेश को संकष्टी चतुर्थी व्रत समर्पित है जो हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर रखा जाता है।इसे भी पढ़ें: Jagannath Rath Yatra का रहस्य: Puri के इस मंदिर में दर्शन से क्यों मिलता है मोक्ष का वरदान?कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत 03 जुलाई को है, जो भगवान गणेश को समर्पित है। यह व्रत जीवन की बाधाएं दूर कर सुख-समृद्धि लाता है। इस दिन गणेश जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। चंद्रोदय का विशेष महत्व है। ब्रह्म मुहूर्त और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ मुहूर्तों में गणेश पूजन अत्यंत फलदायी होता है, जिससे घर में शांति बनी रहती है।सर्वार्थ सिद्धि योग में करें गणेश जी का पूजनपंडितों के अनुसार इस साल की कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह में 05 बजकर 28 मिनट से 11 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इस योग में गणेश जी की पूजा करें।आषाढ़ कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन ऐसे करें पूजा पंडितों के अनुसार कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन सबसे पहले जल्दी उठकर घर की साफ सफाई करें और स्नान करें। फिर भगवान गणेश की पूजा के लिए संकल्प लें, इसके बाद भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर उनकी पूजा करें। पूजा में दीप, धूप, फल, फूल आदि का उपयोग करें। भगवान गणेश की कथा सुनें और भजन कीर्तन करें। व्रत के आखिर में व्रती को भगवान गणेश को अर्पित किया गया भोजन (प्रसाद) खिलाएं। इस भोजन के बाद व्रत की पूर्णता का संकल्प लें।आषाढ़ कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत रखने से होते हैं ये फायदेशास्त्रों के अनुसार आषाढ़ कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत रखने और गणेश जी के ‘कृष्णपिंगल’ स्वरूप की पूजा करने से भक्तों के सभी दुखों का नाश होता है। गणेश जी का ‘कृष्णपिंगल’ स्वरूप काले वर्ण का होता है। इस रूप की पूजा करने से काम में आने वाली सभी बाधाओं और विघ्नों का अंत होता है। जो भक्त इस दिन श्रद्धा और विधि अनुसार व्रत रखें तो भय, भ्रम और मानसिक तनाव से मुक्ति मिल जाती है।आषाढ़ कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी पर ये करें, होगा लाभ पंडितों के अनुसार इस दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ या नए वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल को साफ करके भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा, लाल पुष्प, सिंदूर, मोदक, लड्डू और फल अर्पित करें। “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। गणेश चालीसा का पाठ करने से भी विशेष फल प्राप्त होता है। यदि आपने व्रत रखा है तो पूरे दिन संयम, सात्विकता और ब्रह्मचर्य का पालन करें। संध्या के समय पुनः गणेश जी की पूजा करें और रात में चंद्र दर्शन के बाद उन्हें अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें। इसके साथ ही अपनी क्षमता अनुसार दान करना भी पुण्यकारी माना गया है।आषाढ़ कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी पर ये न करें, होगा नुकसानधार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, अंडा, शराब तथा लहसुन-प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रत के दौरान क्रोध, झूठ, अपशब्द और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश पूजा में तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता, इसलिए इसका विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। इस दिन घर में कलह, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।आषाढ़ कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा भी है रोचक पुराणों में कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत के विषय में यह कथा प्रचलित है। इस कथा के अनुसार प्राचीन काल में माहिष्मती पुरी में महीजित नाम के एक प्रतापी राजा राज्य करते थे। राजा बहुत धर्मात्मा और प्रजापालक थे, लेकिन वे निसंतान थे। संतान सुख न मिलने के कारण वे हमेशा दुखी रहते थे। एक दिन राजा ने अपने राज्य के विद्वानों और ब्राह्मणों से इसका समाधान पूछा। ब्राह्मणों ने राजा की भलाई के लिए उन्हें लोमश ऋषि के आश्रम में जाने की सलाह दी। राजा वन में लोमश ऋषि के पास गए और अपनी व्यथा सुनाई। राजा बोले, &quot;हे मुनिवर! मैंने कोई पाप नहीं किया है। फिर भी मैं संतानहीन हूँ। कृपया मुझे ऐसा उपाय बताएं जिससे मुझे संतान की प्राप्ति हो।&quot; लोमश ऋषि ने राजा को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत के बारे में बताया। ऋषि ने कहा, &quot;आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी व्रत करें। भगवान गणेश के &#039;कृष्णपिंगल&#039; रूप का ध्यान करें। इस दिन उपवास रखें और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें। राजा महीजित ने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से यह व्रत किया। व्रत के प्रभाव से रानी गर्भवती हुईं और उन्हें एक सुंदर व तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई। इस कथा के अनुसार, जो भी भक्त पूरी निष्ठा से कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत करता है, उसके ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Krishnapingala, Sankashti, Chaturthi:, कृष्णपिंगल, संकष्टी, चतुर्थी, व्रत, से, जीवन, की, सभी, बाधाएं, होती, हैं, दूर</media:keywords>
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<title>Jyestha Purnima 2026: क्यों है यह साल की सबसे खास पूर्णिमा, जानें Puja Vidhi और इसका महत्व</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को बेहद शुभ और पुण्यदायी तिथि माना जाता है। हर महीने की आने वाली पूर्णिमा पूजा-पाठ, आध्यात्मिक साधना, स्नान और दान के लिए विशेष महत्व रखती है। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा का महत्व कई गुना अधिक माना जाता है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। इस दिए किए गए दान-पुण्य और व्रत का फल गई गुना अधिक मिलता है। तो आइए जानते हैं ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व आदि के बारे में...ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026वैदिक पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरूआत 29 जून की सुबह 03:06 मिनट पर शुरू हुई है। वहीं अगले दिन यानी की 30 जून 2026 की सुबह 05:26 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। उदयातिथि के मुताबिक 29 जून 2026 को ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाई जा रही है।स्नान-दान का मुहूर्तइस बार 29 जून 2026 को ज्येष्ठ पूर्णिमा मनाई जा रही है। यह सूर्योदय से लेकर रात में चंद्र दर्शन तक प्रभावी रहेगी। इसलिए इस दिन पूजा-पाठ, व्रत, स्नान और दान-पुण्य के धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं। इस दिन पवित्र नदी या फिर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इसके अलावा इस दिन जरूरतमंदों को वस्त्र, अन्न, जल और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना चाहिए। इससे व्यक्ति पर मां लक्ष्मी और श्रीहरि की कृपा बनी रहती है।महत्वहिंदू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा को बेहद शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति आती है। वहीं इस दिन सत्यनारायण की पूजा और कथा करना चाहिए। इससे परिवार में सौभाग्य, खुशहाली और सकारात्मकता बनी रहती है। इस दिन संध्या काल में मां लक्ष्मी की पूजा और प्रिय भोग अर्पित करने से उन्नति के मार्ग खुलते हैं। वहीं चंद्र देव को अर्घ्य देने से मानसिक शांति मिलती है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Krishnapingal Sankranti 2026: 3 जुलाई को कृष्णपिंगल चतुर्थी, जानें सही Puja Vidhi और प्रभावशाली मंत्र</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी की 03 जुलाई 2026 को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इसको कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। आज यानी की 03 जुलाई 2026 को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी मनाई जा रही है। इस दिन भगवान गणेश की विधिविधान से पूजा की जाती है। माना जाता है कि जो भी जातक इस दिन व्रत और पूजन करता है। उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। वहीं जीवन में सुख-सौभाग्य और समृद्धि का आगमन होता है। तो आइए जानते हैं कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी की तिथि, पूजन विधि, महत्व और मंत्र आदि के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरूआत 03 जुलाई की सुबह 11:20 मिनट पर हो रही है। वहीं अगले दिन यानी की 04 जुलाई 2026 की दोपहर 12:39 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 03 जुलाई 2026 को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी मनाई जा रही है।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान श्री गणेश की प्रतिमा को एक लकड़ी की चौकी पर स्थापित करें। अब गणेश जी को सिंदूर, दूर्वा, अक्षत और पुष्प आदि अर्पित करें। इसके बाद मोदक या बूंदी के लड्डुओं का भोग लगाएं। पूजा के दौरान &#039;ऊँ गं गणपतये नम:&#039; मंत्र का जाप करें। इसके बाद संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें और गणेश चालीसा करें। फिर भगवान गणेश की आरती करें। वहीं रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद अर्घ्य दें और व्रत का पारण करें।मंत्रऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥ॐ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥ॐ गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नम:।। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Puri का &amp;apos;चमत्कार&amp;apos;! एक ही आग पर रखे 7 बर्तनों में सबसे ऊपर वाला खाना पहले कैसे पकता है?</title>
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<description><![CDATA[ भारत ही नहीं, दुनिया भर में भगवान जगन्नाथ यात्रा लोकप्रिय है। हर साल ओडिशा में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। जब रथ यात्रा शुरु होती है, तो लाखों भक्त ओडिशा पहुंच जाते हैं। यहां पर श्रृद्धालुओं को रथ यात्रा के साथ-साथ कई और चीजें आकर्षित करती हैं और वो है जगन्नाथ मंदिर में बनने वाला महाप्रसाद। इस प्रसाद से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जिन्हें जानकर लोग हैरान भी हो जाते हैं। सबसे खास बात यह है कि यहां खाना मिट्टी के बर्तनों में पकाया जाता है। ये सभी बर्तन एक के ऊपर एक करके रखे जाते हैं। तो चलिए बिना देर किए आपको इस लेख में जगन्नाथ मंदिर की रसोई से जुड़ी खास बातें बताने जा रहे हैं।दुनिया के सबसे बड़े किचन में से एक है ये रसोईदरअसल, जगन्नाथ मंदिर की रसोई को दुनिया की सबसे बड़ी मंदिर रसोइयों में गिना जाता है। यहां की रसोई मंदिर परिसर के साउथ ईस्ट में है। वहीं, रसोई में करीब 150 फीट  लंबी, 100 फीट चौड़ी और लगभग 20 फीट ऊंची है। इसमें कुल 32 कमरे हैं और इसके अंदर लगभग 250 मिट्टी के चूल्हे बने हुए हैं। यहां हर दिन करीब 600 रसोइए और 400 लोगों मिलकर भगवान के लिए प्रसाद की तैयारी करते हैं।मिट्टी के बर्तन में बनता है प्रसादबता दें कि , इस रसोई की सबसे खास बात यही है कि इसका पारंपरिक तरीका है। यहां भोजन बनाने के लिए मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, चूल्हे के लिए लकड़ी की आग तैयारी की जाती है और फिर चावल, दाल, सब्जियां और दूसरे व्यंजन मिट्टी के बर्तनों में ही पकाए जाते हैं। माना जाता है कि यहां मां लक्ष्मी स्वयं खाना बनाती हैं।एक के ऊपर एक रखे जाते हैं बर्तनयहां पर महाप्रसाद बनाते समय मिट्टी के कई बर्तन एक-दूसरे के ऊपर रख दिए जाते हैं। खासतौर पर लोग यही सोचते हैं कि नीचे रखा बर्तन पहले पकेगा,क्योंकि आग के पास यही सबसे करीब है, लेकिन यहां एक अलग ही बात देखने को मिलती है। माना जाता है कि परंपरा के अनुसार, यहां सबसे ऊपर रखा बर्तन पहले पकता है।भगवान जगन्‍नाथ को लगता है छप्पन भोग जगन्नाथ प्रभु को 56 प्रकार के व्यंजनों को छप्पन भोग या महाप्रसाद कहा जाता है। भक्तजन इसे सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि भगवान का आशीर्वाद मानते हैं।भगवान को भोग लगाने के बाद बनता है महाप्रसादसबसे पहले रसोई में भोग तैयार होता है फिर भगवान जगन्नाथ को अर्पित किया जाता है। इसके बाद इसे देवी विमला को समर्पित किया जाता है। इसके बाद ये भोजन महाप्रसाद कहलाता है। अब इस भोग को श्रद्धालुओं में बांटा जाता है।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>City of Thousand Temples: भारत की &amp;apos;City of Thousand Temples&amp;apos;, जानिए क्यों है इतनी खास यह नगरी</title>
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<description><![CDATA[ हमारे यहां भारत में घूमने-फिरने के लिए एक से बढ़कर एक जगहें मौजूद हैं। वहीं भारत घुमक्कड़ों से भरा हुआ है। आमतौर पर लोग पहाड़ों और बीच पर जाना पसंद करते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में स्प्रिचुअल टूरिस्म का क्रेज लोगों में काफी देखने को मिल रहा है। बता दें कि भारत में कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जहां पर सिर्फ घूमना नहीं बल्कि इतिहास और आध्यात्मिकता को महसूस करना भी है।अक्सर धार्मिक जगहों के बारे में बात करते हुए मथुरा-काशी का जिक्र होता है। वहीं भारत में एक ऐसी जगह भी है, जिसको हजार मंदिरों वाली नगरी कहा जाता है। यह जगह कांचीपुरम में है। जोकि साउथ इंडिया में हैं। जो भी यहां आता है, तो इसकी खूबसूरती का जिक्र करते नहीं थकता है।हजार मंदिरों की नगरीकांचीपुरम को हजारों मंदिरों का शहर इसलिए कहा जाता है, क्योंकि पुराने समय में यहां पर करीब 1000 मंदिर थे। यह मंदिर अलग-अलग राजवंशों, चोल, पल्लवों और विजयनगर के समय में बनवाए गए थे। आज भी यहां पर 100 से अधिक बड़े और खूबसूरत मंदिर देखने को मिलेंगे। यह मंदिर अपनी नक्काशी और वास्तुकला के लिए दुनियाभर में फेमस है।क्यों खास है यहां के मंदिरकांचीपुरम में जितने भी मंदिर है, वह सिर्फ पूजा के लिए नहीं बल्कि कला और इतिहास का जीता-जागता उदाहरण है।कैलाशनाथर मंदिरयह मंदिर शहर का सबसे पुराना मंदिर है। यहां के पत्थरों की नक्काशी काफी ज्यादा खूबसूरत हैं।एकम्बरेश्वर मंदिरएकम्बरेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।कामाक्षी अम्मन मंदिरकामाक्षी अम्मन मंदिर की गिनती शक्तिपीठों में होती है।सुकून का होगा एहसासअगर आप भी कांचीपुरम जाती हैं, तो आपको यहां पर सुकून का एहसास होगा। यहां पर भीड़ काफी कम होती है और हर ओर मंदिरों की घंटियों की आवाजें सुनाई देती है। यह अपने आप में एक आध्यात्मिक अनुभव है। आप आराम से यहां पर मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं। कांचीपुरम में यहां की संस्कृति को करीब से महसूस कर सकती हैं। वहीं अगर आपको भीड़भाड़ ज्यादा पसंद नहीं है, तो आप यहां पर जा सकती हैं।शॉपिंग करेंकांचीपुरम का नाम आते ही कांजीवरम साड़ी का जिक्र जरूर होता है। यहां की रेशमी साड़ियां बहुत फेमस है। इन साड़ियों के डिजाइन देखने लायक होती है और यहां पर घूमने के अलावा शॉपिंग का भी मजा ले सकती हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:15 +0530</pubDate>
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<title>Hindu Mythology: क्यों कहलाती हैं मां लक्ष्मी &amp;apos;चंचला&amp;apos;? जानें Goddess of Wealth से जुड़ा यह बड़ा Secret</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। हर व्यक्ति यह चाहता है कि उनके घर-परिवार पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मां लक्ष्मी को &#039;चंचला&#039; क्यों कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों में मान्यताओं में मां लक्ष्मी को चंचला कहने के पीछे एक विशेष कारण बताया गया है। मान्यता के मुताबिक जिस घर में परिश्रम, स्वच्छता, दान-पुण्य और धर्म का पालन होता है, वहां पर मां लक्ष्मी का वास होता है। वहीं जिस घर में अहंकार, आलस, कलह और अनैतिक कार्य बढ़ जाते हैं, वहां पर मां लक्ष्मी वास नहीं करती हैं। इसी वजह से मां लक्ष्मी को चंचला कहा जाता है।चंचल मन से की गई मां लक्ष्मी की तुलनासंस्कृत भाषा में &#039;चंचला&#039; का अर्थ होता है, जो एक स्थान पर स्थिर न रहे, जैसे कि हमारा मन। आपने अक्सर लोगों से यह सुना होगा कि मन बहुत चंचल होता है। हमारा मन गतिशील रहता है। मां लक्ष्मी को चंचला नाम देने के पीछे की वजह यह है कि धन और संपत्ति कभी भी स्थायी नहीं होती है। जीवन में धन का आना-जाना एक स्वाभाविक प्रक्रिया होती है। आज जो व्यक्ति धनवान है, वह भविष्य में आर्थिक समस्याओं में घिर सकता है। वहीं कठिन परिस्थितियों में रहने वाला समय में धनी और समृद्ध बन सकता है।इसे भी पढ़ें: City of Thousand Temples: भारत की &#039;City of Thousand Temples&#039;, जानिए क्यों है इतनी खास यह नगरीवहीं पुराणों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि समुद्र मंथन के समय मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। मां लक्ष्मी ने भगवान श्रीहरि विष्णु को अपना पति चुना और क्षीर सागर में वास करने लगीं। वहीं भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार माना जाता है और वह संतुलन बनाए रखने का काम करते हैं। इसलिए माना जाता है कि लक्ष्मी भी उस स्थान पर ज्यादा समय रहती हैं, जहां पर अनुशासन, संतुलन और सद्गुण मौजूद होते हैं।लक्ष्मी प्राप्ति के सूत्ररोजाना घर की पहली रोटी गाय को और आखिरी रोटी कुत्ते को देना चाहिए। ऐसा करने से भाग्य का द्वार खुलता है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।हर शुक्रवार को नियमित रूप से श्रीसूक्त या लक्ष्मी सूक्त का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से मां लक्ष्मी का उस स्थान पर स्थायी वास होता है।रोजाना सुबह उठकर सबसे पहले मुख्यद्वार पर गृहलक्ष्मी को एक लोटा जल डालना चाहिए। इससे मां लक्ष्मी के घर आने का मार्ग प्रशस्त होता है।घर में पूजा के दौरान घी का जो दीपक जलाया जाता है, उसमें रुई की बत्ती की जगह मौली का इस्तेमाल करना चाहिए। क्योंकि मां लक्ष्मी को लाल रंग अतिप्रिय है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Jul 2026 12:59:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Planet Position का बड़ा खेल: कब ग्रह बनाते हैं भाग्यशाली और कब छीन लेते हैं सारा Good Luck</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब ग्रह उच्च राशि, मूल त्रिकोण राशि, स्वराशि आदि राशियों को प्राप्त होता है, तो वह उन्हीं की प्रवृत्ति के अनुसार ही रिजल्ट देता है। हर एक ग्रह किसी विशेष राशि में एक विशिष्ट अवस्था को प्राप्त करता है। जैसे कि- जब ग्रह अपनी उच्च की राशि में होता है, तो सर्वाधिक अनुकूल यानी के बलवान स्थिति को प्राप्त करता है और जब ग्रह अपनी नीच की राशि में होता है, तो सबसे ज्यादा प्रतिकूल मतलब कमजोर स्थिति को प्राप्त करता है।ग्रहों का उच्च राशि में फलज्योतिष के मुताबिक, ग्रह अपनी उच्च राशि में होने पर उत्तम फल देते हैं, नीच राशि में होने पर इसके विपरीत फल देता है। नीच का ग्रह दुर्बल हो जाता है, इसलिए प्रभावहीन रहता है। वहीं, अशुभ ग्रह यानी नीच की राशि में है, तो यह अशुभ फल नहीं देगा और शुभ ग्रह यदि नीच की राशि में है, तो शुभ फल नहीं देता, क्योंकि नीच के होने पर ग्रह प्रभावहीन हो जाते हैं, इसलिए फलादेश के समय उसे समझकर फलादेश करना चाहिए। इस रहस्य जानने के बाद फलादेश की सटीकता बढ़ाई जाती है। इसका मतलब है कि उच्च ग्रह उच्च भावना या प्रवृत्ति दर्शाता है। वहीं, नीच का ग्रह नीचता की ओर प्रवृत्ति या सोच देता है।ज्योतिषीय रिसर्च में ग्रहों की शक्ति और उनकी वास्तविक स्थिति का ज्ञान अत्यंत आवश्यक माना जाता है। यदि किसी ग्रह की सामर्थ्य, प्रभाव और परिस्थितियों का सही मूल्यांकन न किया जाए, तो सटीक भविष्यवाणी करना कठिन हो जाता है। फलित करते समय यह समझना जरूरी होता है कि कौन-सा ग्रह कब शुभ परिणाम प्रदान करेगा, कब प्रतिकूल प्रभाव डालेगा और किन अवस्थाओं में उसका असर कमजोर पड़ जाएगा। ग्रहों के इस गहन आकलन से भविष्यवाणी अधिक विश्वसनीय और सटीक बनती है।उदाहरण के तौर पर सूर्य का सिंह राशि पर अधिकार है, यदि किसी की जन्मपत्री में सूर्य सिंह राशि में हो, तो कहा जाएगा सूर्य बली है, क्योंकि वह अपनी राशि में स्वग्री है। अगर किसी जातक की जन्मपत्री में सूर्य मेष राशि में है, तो फलादेश के समय कहेंगे कि सूर्य अपनी उच्च राशि में है, इसे सर्वाधिक बली है। वहीं, किसी जातक की जन्मपत्री में सूर्य तुला राशि में हो, तो कहा जाएगा कि सूर्य अपनी नीच राशि में है, इसलिए बलहीन है। इसी प्रकार हर एक ग्रह के समझना काफी जरुरी है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:38:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 22 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 22 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 22 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशि (Aries)रिलेशनशिप: आज आपका साथी आपके शब्दों से ज़्यादा आपके छोटे-छोटे प्रयासों (Actions) पर ध्यान देगा। उनके प्रति अपनी परवाह दिखाने के लिए कोई छोटी सी मदद या सरप्राइज प्लान करें।सिंगल्स: आपका आकर्षण आज बढ़ा हुआ है। किसी खास को एक प्यारा सा संदेश भेजकर बातचीत की शुरुआत की जा सकती है।वृषभ राशि (Taurus)रिलेशनशिप: आपके लिए आज का दिन अपनी भावनाओं को लेकर पूरी तरह ईमानदार रहने का है। पार्टनर के सामने खुद को कम आंकने की जरूरत नहीं है; आपका असली रूप ही रिश्ते को मजबूत बनाएगा।सिंगल्स: आज आप किसी ऐसे व्यक्ति की ओर आकर्षित हो सकते हैं जो स्वभाव से गंभीर और बेहद वफादार हो।मिथुन राशि (Gemini)रिलेशनशिप: रिश्तों में किसी भी तरह की जल्दबाजी या दबाव बनाने से आज बचें, अन्यथा तनाव बढ़ सकता है। पार्टनर को थोड़ा स्पेस दें और बातचीत को बिल्कुल हल्का-फुल्का रखें।सिंगल्स: लव लाइफ को लेकर आज कोई भी बड़ा फैसला लेने से बचें, थोड़ा समय लेना आपके लिए बेहतर रहेगा।कर्क राशि (Cancer)रिलेशनशिप: आज आपके रिश्ते में रोमांस और हंसी-मजाक का माहौल रहेगा। पुरानी दूरियां मिटाने के लिए आज का दिन सबसे बेहतरीन है। अपने दिल की बात खुलकर कहें।सिंगल्स: सोशल मीडिया या किसी दोस्त के माध्यम से आज आपकी जिंदगी में किसी दिलचस्प व्यक्ति की एंट्री हो सकती है।सिंह राशि (Leo)रिलेशनशिप: प्यार में किसी भी तरह के दिखावे से दूर रहें। पार्टनर को प्रभावित करने के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाने के बजाय सहजता से साथ वक्त बिताएं।सिंगल्स: खुद पर पूरा भरोसा रखें। आपकी स्वाभाविक ऊर्जा और जिंदादिली ही किसी को भी आपकी ओर आकर्षित करने के लिए काफी है।कन्या राशि (Virgo)रिलेशनशिप: आज थोड़े वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। साथी की बातों पर तुरंत प्रतिक्रिया (React) देने के बजाय उनकी बात को शांति से सुनें। आपका धैर्य रिश्ते को बिगड़ने से बचाएगा।सिंगल्स: अतीत की किसी कड़वी याद के कारण आज आप नए लोगों पर भरोसा करने में थोड़ी हिचकिचाहट महसूस कर सकते हैं।तुला राशि (Libra)रिलेशनशिप: पुरानी कड़वाहट और गलतफहमियों को भुलाकर आगे बढ़ने का दिन है। पार्टनर से खुलकर बात करें और मन के डरों को दूर करें।सिंगल्स: यदि आप किसी को पसंद करते हैं और उनसे अपने दिल की बात कहना चाहते हैं, तो आज का दिन अनुकूल है।वृश्चिक राशि (Scorpio)रिलेशनशिप: आज आपकी अंतरात्मा (Intuition) बहुत मजबूत रहेगी। पार्टनर की अनकही भावनाओं और उनकी जरूरतों को समझने की कोशिश करें और उन्हें अपना पूरा सहयोग दें।सिंगल्स: किसी नए रिश्ते में कदम बढ़ाने से पहले केवल बाहरी चकाचौंध न देखें, बल्कि यह महसूस करें कि आप उनके साथ कितने सहज हैं।धनु राशि (Sagittarius)रिलेशनशिप: रूटीन लाइफ की बोरियत को दूर करने के लिए आज पार्टनर के साथ किसी शॉर्ट ट्रिप, लॉन्ग ड्राइव या डिनर पर जाएं। रिश्ते में नया उत्साह आएगा।सिंगल्स: आपकी खुशमिजाज प्रकृति आज दूसरों को आपकी ओर खींचने का काम करेगी।मकर राशि (Capricorn)रिलेशनशिप: रिश्तों में स्थिरता और जिम्मेदारी आज मुख्य भूमिका में रहेगी। बहुत ज्यादा प्रैक्टिकल होने के बजाय साथी की भावनाओं को भी पूरा समय और सम्मान दें।सिंगल्स: आज कोई पुराना दोस्त आपके करीब आ सकता है, जिसके साथ आप भविष्य की राह देख सकते हैं। कुंभ राशि (Aquarius)रिलेशनशिप: रोजमर्रा के ढर्रे से हटकर आज कुछ नया और रोमांचक करें। एक अनोखी डेट या छोटा सा सरप्राइज आपके पार्टनर का मूड बना देगा।सिंगल्स: आज किसी सोशल इवेंट या ग्रुप एक्टिविटी के दौरान आपकी मुलाकात किसी खास इंसान से हो सकती है।मीन राशि (Pisces)रिलेशनशिप: आज आप अपने साथी के साथ एक गहरा और भावुक जुड़ाव महसूस करेंगे। उनके सामने अपनी कमजोरियों या भावनाओं को साझा करने में संकोच न करें।सिंगल्स: आज आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि कोई आपकी खामोशी और आपकी भावनाओं को बिना कहे ही समझ रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:38:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Astrology Tips: तुलसी की मंजरी से दूर होगा दुर्भाग्य, ये उपाय घर में लाएंगे Good Luck और Positive Energy</title>
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<description><![CDATA[ तुलसी के पौधे की मंजरी सिर्फ बीज नहीं होता है, बल्कि इसको देवी तुलसी की शुभता और श्रृंगार का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक तुलसी मां को मंजरी के बोझ से मुक्त करना जरूरी होता है। जिससे कि तुलसी का पौधा हमेशा हरा-भरा बना रहे। वहीं इससे तुलसी की ऊर्जा का शुभ प्रवाह घर में हमेशा होता रहता है। वहीं शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि तुलसी के पौधे पर अधिक दिनों तक मंजरी का रहना मां तुलसी को कष्ट देता है और पवित्र ऊर्जा को बाधित करता है।जिस तरह से अगर हमारे शरीर पर जरूरत से ज्यादा कपड़े हो जाएं, या फिर कोई एक्स्ट्रा वस्तु हमारे शरीर पर लाद दी जाएं। तो हम परेशान हो जाते हैं। ठीक इसी तरह से तुलसी माता को मंजरी के साथ होने पर अनुभव होता है। लेकिन यह पूर्ण रूप से श्रद्धा और व्यक्तिगत भाव की बात है। तुलसी की मंजरी को बेहद पवित्र माना जाता है, इसलिए इसको तुलसी से तोड़ लेना चाहिए। लेकिन इसको फेंके नहीं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं तुलसी के पौधे से तोड़ी हुई मंजरी का क्या करना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Planet Position का बड़ा खेल: कब ग्रह बनाते हैं भाग्यशाली और कब छीन लेते हैं सारा Good Luckतोड़ी हुई मंजरी का क्या करेंभगवान विष्णु को तुलसी माता अतिप्रिय हैं। जब आप मंजरी को तोड़ते हैं, तो पहले इसको धोकर साफ कर लें। अब किसी भी पूजा या फिर अनुष्ठान के दौरान मंजरी को श्रीविष्णु के चरणों में अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से श्रीहरि विष्णु और मां लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है। वहीं इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।आप इस मंजरी का इस्तेमाल फौरन नहीं कर सकते हैं। इसको किसी पवित्र नदी जैसे गंगा या फिर यमुना में श्रद्धापूर्वक विसर्जित कर दें। वहीं अगर संभव नहीं हो, तो इसको किसी साफ पानी के स्त्रोत या फिर घर के पूजा स्थल पर रखे गंगाजल में डाल सकते हैं। यह तुलसी की मंजरी को सम्मान देने का सबसे अच्छा तरीका है।तुलसी की मंजरी को लाल रंग के साफ कपड़े या फिर चुनरी में लपेटकर धन के स्थान पर रखना चाहिए। क्योंकि तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का वास होता है। मंजरी को धन के स्थान पर रखने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। आप तिजोरी में कुछ मंजरी रखकर हर शुक्रवार को बदल सकते हैं।रोजाना पूजा के बाद बची हुई मंजरी को एक छोटे से डिब्बे में एकत्र करते रहें। जब स्नान करें, तो मंजरी के कुछ दानों को नहाने के पानी में मिला लें। इस उपाय को करने से सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है और दुर्भाग्य को दूर करता है।अगर किसी के दांपत्य जीवन में कोई तनाव या कलह है, तो कपल को मिलकर तुलसी मंजरी को भगवान विष्णु और कृष्ण जी को अर्पित करें। इस उपाय को करने से दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य को बढ़ाता है। मंजरी से निकले बीजों को पीसकर तिलक लगाने से व्यक्ति को पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:38:01 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Astrology, Tips:, तुलसी, की, मंजरी, से, दूर, होगा, दुर्भाग्य, ये, उपाय, घर, में, लाएंगे, Good, Luck, और, Positive, Energy</media:keywords>
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<title>Love Horoscope For 23 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 23 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 23 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशि (Aries)आज का दिन आपके प्रेम जीवन में खुशियाँ लेकर आएगा। यदि आप सिंगल हैं, तो आज किसी खास व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है। जो लोग पहले से रिलेशनशिप में हैं, वे अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताएंगे और आपसी समझ मजबूत होगी।वृषभ राशि (Taurus)प्रेम जीवन के लिए आज का दिन मिलाजुला रहेगा। किसी पुरानी बात को लेकर पार्टनर के साथ थोड़ी अनबन हो सकती है, इसलिए अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें। शाम तक स्थितियाँ सामान्य हो जाएंगी और बातचीत से मसले हल होंगे।मिथुन राशि (Gemini)आज आपके सितारे रोमांटिक मूड की ओर इशारा कर रहे हैं। पार्टनर से कोई खूबसूरत सरप्राइज या गिफ्ट मिल सकता है। लव बर्ड्स आज अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने (शादी या कमिटमेंट) के बारे में सोच सकते हैं।कर्क राशि (Cancer)आज काम की व्यस्तता के कारण आप अपने पार्टनर को पर्याप्त समय नहीं दे पाएंगे, जिससे वे थोड़े नाराज हो सकते हैं। अपने रिश्ते में संतुलन बनाने की कोशिश करें और एक छोटा सा मैसेज या कॉल करके उन्हें अपनी व्यस्तता के बारे में बताएं।सिंह राशि (Leo)सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन बेहद ऊर्जावान और प्यार से भरा रहेगा। आपके और पार्टनर के बीच का आकर्षण बढ़ेगा। सिंगल लोगों के लिए आज किसी को प्रपोज करने का अच्छा दिन है, सकारात्मक जवाब मिलने की संभावना है।कन्या राशि (Virgo)आज आपको अपने पार्टनर की भावनाओं का विशेष सम्मान करना होगा। किसी बाहरी व्यक्ति की बातों में आकर अपने रिश्ते में शक को जगह न दें। आपसी विश्वास ही आपके रिश्ते को मजबूत बनाएगा।तुला राशि (Libra)तुला राशि वालों के लिए आज का दिन यादगार साबित हो सकता है। पार्टनर के साथ कहीं बाहर घूमने या डिनर पर जाने का प्लान बनेगा। विवाहित जातकों के जीवन में मधुरता बनी रहेगी और जीवनसाथी का पूरा सहयोग मिलेगा।वृश्चिक राशि (Scorpio)प्रेम के मामले में आज आपको थोड़ा संभलकर चलने की जरूरत है। पार्टनर के स्वभाव में थोड़ा चिड़चिड़ापन दिख सकता है, ऐसे में बहस करने के बजाय शांत रहें। धैर्य से काम लेने पर रिश्ते में कड़वाहट नहीं आएगी।धनु राशि (Sagittarius)आज का दिन आपके लव लाइफ में नया उत्साह लेकर आएगा। लंबे समय से चल रही गलतफहमियां दूर होंगी। यदि आप किसी के सामने अपने प्यार का इजहार करना चाहते हैं, तो आज का दिन आपके पक्ष में है।मकर राशि (Capricorn)आज आपके और पार्टनर के बीच भावनात्मक जुड़ाव गहरा होगा। आप अपनी भविष्य की योजनाओं को लेकर जीवनसाथी या लव पार्टनर से खुलकर बात कर सकते हैं। परिवार का सहयोग भी आपके रिश्ते को मिल सकता है।कुंभ राशि (Aquarius)कुंभ राशि के सिंगल लोगों के जीवन में आज किसी नए व्यक्ति की एंट्री हो सकती है। वहीं, जो लोग रिलेशनशिप में हैं, उनके लिए दिन सामान्य रहेगा। पार्टनर के साथ पुरानी यादें ताजा करने का मौका मिलेगा।मीन राशि (Pisces)आज आपके प्रेम संबंधों में मजबूती आएगी। आपके पार्टनर आपकी हर छोटी-बड़ी बात का ख्याल रखेंगे, जिससे आपको खुशी महसूस होगी। वैवाहिक जीवन जी रहे लोगों के लिए भी आज का दिन आपसी तालमेल और रोमांस से भरा रहेगा।टिप: आज अपने पार्टनर से बात करते समय खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त करें, लेकिन उनके दृष्टिकोण को भी समझने का प्रयास करें। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:38:00 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 23 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष आर्थिक लाभ होगा, योजना समाप्त होगी। रोजगार व्यवसाय में नई स्थापना। पार्टनरशिप से लाभ होगा। आपके साथ विश्वासघात हो सकता है।वृषखास मेहमानों का आगमन, मन की प्रसन्नता। लोकप्रियता बढ़ेगी, जनसंपर्क व्यापक होगा। विरोधी शांत होंगे, खुशखबरी मिलेगी। मिश्रित फल प्राप्ति का दिन है।मिथुनदेश विदेश से व्यापारिक संबंध बढ़ेंगे। व्यापार और मार्केटिंग में बड़े आर्डर मिलेंगे। परिस्थितियों में सुखद सुधार होगा। आर्थिक दृष्टि से उत्तम दिन है।कर्कसफलताओं का सिलसिला जारी रहेगा। कार्य क्षेत्र बढ़ेगा, सम्मान में भी वृद्धि। अच्छे लोगों का साथ मिलेगा। शुभ समाचार मिलेंगे।सिंहकर्मठता से यश और धन की प्राप्ति। रोजगार व्यवसाय के संबंध में कोई ठोस निर्णय लेंगे। कोर्ट कचहरी में दिन बीतेगा। आपका जन-सम्पर्क काफी बढ़ सकता है।कन्याविद्यार्थियों के लिए उत्तम दिन उत्तम सफलता। घरेलू सुख-साधन भी बढ़ेंगे। धन लाभ के प्रबल योग कार्य कुशलता भी बढ़ेगी। रिश्तेदारों और मित्रों के साथ उत्सव भरा दिन। तुलाकाम का अधिक बोझ, थकान की अनूभूति। नए संपर्क, संतान सुख और उत्तम स्वास्थ्य। चुनौतियों भरा दिन है, सावधान रहें। सुधार की गुंजाइश, सुधार भी होंगे।वृश्चिक प्रेम संबंध मजबूती से आगे रहेंगे। दोस्तों के साथ मौज-मस्ती के मूड में रहेंगे। कुछ जरूरी दस्तावेज गुम हो सकते हैं। बिजली, वाहन मशीनों को सावधानी से बरतें।धनुमिश्रित समय, बार-बार रूकावटों का सामना। प्रगति का मार्ग प्रशस्त करने वाला दिन। मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि, उपहार प्राप्ति। नए मित्र बनेंगे।मकर कोई महामनोरथ पूरा होने वाला है। साझेदारी में कोई व्यवसाय संभव है। कोर्ट कचहरी में विजय की संभावना। धन और सम्मान में वृद्धि होगी।कुंभसरकारी क्षेत्र में मन प्रतिष्ठा बढ़ेगी। शायद ही कोई योजना परवान चढ़ें। अशुभ समाचार, शत्रु भय और धन हानि के योग है। समय का सदुपयोग करें, नम्र व्यवहार करें।मीनआर्थिक स्थिति मजबूत होगी। कार्य शैली में परिवर्तन से धन लाभ होगा। आज उत्तम सफलताएं प्राप्त होगी। विवादों में विजय पर, विजय दिवस मनाइए। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:38:00 +0530</pubDate>
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<title>Nirjala Ekadashi 2026 Date: जानें कब है साल की सबसे बड़ी एकादशी, मिलेगा अक्षय पुण्य का वरदान</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है। निर्जला एकादशी को अत्यंत पवित्र और सबसे उत्तम माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार,  इस एकादशी का व्रत रखने से साल की सभी 24 एकादशियों के समान फल प्राप्त होता है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इस एकादशी में पानी पीन वर्जित माना जाता है। पद्म पुराण के अनुसार, जो मनुष्य इस दिन पानी के नियम का पालन करें और विधिवत रुप से भगवान विष्णु की पूजा करे, तो जातक के सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।  माना जाता है कि इस दिन किए जाने वाले स्नान, दान, जप आदि कार्य अक्षय हो जाते हैं। निर्जला एकादशी के दिन मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-धन सहित आदि चीजों का दान करना बेहद शुभ माना जाता है। निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कि निर्जला एकादशी कब है और इस व्रत से पूरे साल की एकादशी का व्रत फल कैसे प्राप्त हो जाता है।निर्जला एकादशी 2026 कब है?वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 24 जून, बुधवार के दिन शाम 6 बजकर 13 मिनट पर हो रहा है। हालांकि, अगले दिन यानी 25 जून, गुरुवार को शाम के समय 8 बजकर 10 मिनट तक एकादशी तिथि समाप्त हो रही है। इसके बाद ही द्वादशी तिथि का प्रारंभ होगा। उदया तिथि के अनुसार, 25 जून 2026, गुरुवार को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा।-ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि आरंभ:	24 जून, बुधवार को शाम के 6 बजकर 13 मिनट पर-ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि समाप्त: 25 जून, गुरुवार को शाम के 8 बजकर 10 मिनट पर-निर्जला एकादशी 2026: 25 जून, गुरुवारनिर्जला एकादशी से मिलता पूरे साल की एकादशी व्रत का फलपौराणिक ग्रंथ पद्म पुराण के अनुसार, जब एक बार पांचों पांडवों में से भीमसेन ने वेद व्यासजी से पूछा कि मैंने आजतक एक भी व्रत नहीं किया है क्योंकि मेरे उदर में वृक नामक अग्नि सदा प्रज्वलित रहती है। जिसके कारण से मुझे हमेशा भूख महसूस होती है। ऐसे में मुझे कोई ऐसा व्रत बताइए जो सिर्फ एख बार करने से मेरा भी उद्धार हो जाए और मुझे स्वर्ग लोक की प्राप्ति हो जाए। तब व्यासजी ने भीमसेन को ज्येष्ठ मास में पड़ने वाली एकादशी को निर्जल रहकर व्रत रखने को कहा। यह एक ऐसा महीना है जो अधिक गर्म होता है उसमें निर्जल रहना अधिक कठिन होता है। इसीलिए इस एकादशी के व्रत को अत्यंत कठिन माना जाता है। व्यासजी ने बताया सिर्फ इस एक एकादशी के व्रत को करने से साल भर में पड़ने वाली सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है।अक्षय फल की होती प्राप्तियदि साधक साल भर में पड़ने वाली एकादशी तिथि को व्रत नहीं रख पाता है, तो वह ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी का व्रत कर सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन किए गए सभी पुण्य कार्य अक्षय हो जाते हैं। निर्जला एकादशी का व्रत भीमसेन ने भी रखा था, तभी इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को विधि-विधान के साथ रखा जाता है और पूजा करते द्वादशी के दिन व्रत का पारण किया जाता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:59 +0530</pubDate>
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<title>Numerology Tips: इन 2 मूलांक वालों पर बरसती है Lord Shiva की सीधी कृपा, क्या आप भी हैं शामिल</title>
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<description><![CDATA[ अंक ज्योतिष में हमारे जन्म की तारीख सिर्फ एक नंबर नहीं बल्कि हमारे स्वभाव और तकदीर का आईना होती है। शास्त्रों के मुताबिक निस्वार्थ और सादगी भरा मन भगवान शिव को बेहद प्रिय होता है। यही कारण है कि कुछ खास मूलांक के लोग अपने गहरे स्वभाव और मासूमियत की वजह से भगवान शिव के बेहद करीब होते हैं। ऐसे में अगर आपका भी मूलांक इनमें से है, तो समझ जाइए आप पर भगवान शिव की विशेष कृपा है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको उन दो खास मूलांक के बारे में बताने जा रहे हैं, जो भगवान शिव की कृपा के पात्र माने जाते हैं।मूलांक 2अगर किसी का जन्म किसी महीने की 2, 11, 20 या 29 तारीख हो होता है, तो उनका मूलांक 2 होता है। इस मूलांक का स्वामी &#039;चंद्रमा&#039; ग्रह है।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 23 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 23 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनजिस तरह से चंद्रमा में शीतलता होती है, वैसे ही मूलांक 2 वाले जातक भी शांत और कोमल हृदय के होते हैं। इन लोगों के मन में किसी के लिए बैर नहीं होता है।पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया है। चंद्रमा को भगवान शिव का अनन्य भक्त माना जाता है। यही वजह है कि मूलांक 2 के लोगों पर हमेशा महादेव की कृपा बनी रहती है।मूलांक 2 वाले जातक अपनी ईमानदारी और रिश्तों के प्रति वफादारी के कारण समाज में बेहद मान-सम्मान पाते हैं। भगवान शिव इनको जीवन के कठिन रास्तों पर भी सही दिशा दिखाते हैं।मूलांक 7अगर किसी व्यक्ति का जन्म 07, 16 या 25 तारीख को जन्म हुआ हो, तो इनका मूलांक 7 है। 7 अंक का स्वामी &#039;केतु&#039; ग्रह है, जिसको गहराई और मोक्ष का कारक माना गया है।इस मूलांक के लोग थोड़े अंतर्मुखी होते हैं। इनको शोर-शराबे से ज्यादा एकांत और गहरी सोच ज्यादा पसंद होती है। इस मूलांक के लोगों का &#039;योगी जैसा स्वभाव&#039; भगवान शिव को अति भाता है।यह लोग जन्मजात खोजी होते हैं, जोकि भगवान शिव स्वयं परमयोगी हैं। इन लोगों की पुकार को भगवान शिव बहुत जल्दी सुनते हैं।इस मूलांक के लोग किसी की नकल नहीं करते हैं। बल्कि यह जातक अपना रास्ता खुद बनाते हैं। भगवान शिव की कृपा से इनको वह समझदारी और ज्ञान मिलता है, जो दूसरों के पास नहीं होती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>10 जुलाई को Vyatipat Yog, 5 Zodiac Signs भूलकर भी न करें निवेश, करियर पर मंडराएगा बड़ा संकट</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के योगों को बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। वैदिक ज्योतिष में व्यतिपात योग उन विशेष योगों को गिना जाता है, जिसका प्रभाव व्यक्ति के निर्णयों, आर्थिक मामलों और दैनिक जीवन पर देखने को मिलता है। इस बार 10 जुलाई 2026 को व्यतिपात योग बनने जा रहा है, जिससे कई राशियों को सतर्क रहने की जरुरत है। ज्योतिष एक्सपर्ट के अनुसार, इस अवधि में जल्दबाजी में लिए गए फैसले, जोखिम भरे निवेश और अनावश्यक विवाद परेशानी का कारण बन सकता है। इस अवधि में धन, करियर और हेल्थ से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतनी है। आइए आपको बताते हैं व्यतिपात योग का प्रभाव किन राशियों पर अधिक पड़ सकता है और इस दौरान उन्हें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।क्या है व्यतिपात योग और क्यों माना जाता है चुनौतीपूर्ण?असल में ज्योतिष में व्यतिपात योग को 27 प्रमुख योगों में एक विशेष और संवेदनशील योग माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य और चंद्रमा एक खास खगोलीय स्थिति में आते हैं,तो उस दौरान यह योग बनता है। यह योग व्यक्ति की सोच, निर्णय क्षमता और कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसी समय के दौरान महत्वपूर्ण फैसले लेने, नए कार्य शुरु करने या बड़े निवेश करने से बचने की सलाह दी जाती है। इस साल व्यतिपात योग 10 जुलाई को सुबह 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। आपको बताते चले कि, इसकी अवधि काफी सीमित है, लेकिन ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इसका प्रभाव पूरे दिन रहने वाला है। इस दौरान मानसिक भ्रम, जल्दबाजी, गलत निर्णय और अनावश्यक विवादों की संभावना बढ़ सकती है। इस दौरान मानसिक भ्रम, जल्दबाजी, गलत निर्णय और अनावश्यक विवादों की संभावना बढ़ सकती हैं। इसलिए आर्थिक लेन-देन, यात्रा, निवेश और महत्वपूर्ण समझौतों में अतिरिक्त सावधान रहे। ध्यान दे कि जिन जातकों की कुंडली में राहु और केतु का प्रभाव अधिक होता है, उन्हें इस समय सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जाती है।वृषभ राशि इस राशि के जातकों को व्यतिपात योग के प्रभाव  के चलते आर्थिक मामलों में सावधान रहे। अचानक से कोई बड़ा खर्च सामने आने से वित्तीय योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। परिवार या करीबी लोगों के साथ बातचीत करते समय शब्दों का प्रयोग सोच-समझकर ही करें। छोटी-सी बात भी विवाद में बदल जाएगी। हेल्थ मामलों में आंखों और पाचन तंत्र से संबंधित परेशानियां हो सकती हैं। इसके अलावा, सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों को नजरअंदाज करने से रिश्तों में खटास आने की संभावना हो सकती है। धैर्य रखें और संतुलन बनाए रखें। मिथुन राशिव्यतिपात योग के प्रभाव के चलते मिथुन राशि के लोगों को धन और करियर दोनों मामलों में सावधानी बरतनी है। अनावश्यक खर्च या गलत वित्तीय निर्णय नुकसान का कारण बन सकता है। परिवार में किसी भी प्रकार का मतभेद हो सकता है। इस दौरान संयम से काम लें। कार्यक्षेत्र में लापरवाही या ध्यान भटक सकता है। मित्रता करने से पहले सोच-समझ लें और नकारात्मक संगति से दूरी बनाए रखें। हेल्थ के लिहाज से गले या श्वसन तंत्र संबंधित पुरानी समस्या उत्पन्न हो सकती है। सिंह राशिसिंह राशि के लोगों के लिए व्यतिपात योग कार्यों में रुकावट पैदा कर सकता है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ सकता है, जबकि व्यापारियों की कोई महत्वपूर्ण डील अंतिम समय में अटक सकती है। परिवार के किसी बड़े सदस्य की सेहत को लेकर चिंता बनी रहेगी, जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है। संपत्ति खरीदने, बेचने या किसी बड़े आर्थिक समझौते से जुड़े  फैसलों को फिलहाल टालना बेहतर रहेगा। इस दौरान धैर्य बनाएं रखें और सूझबूझ के साथ कठिन परिस्थितियों से बाहर निकाल जाएं।मकर राशिमकर राशि के जातकों के लिए व्यतिपात योग जिम्मेदारियों के तले दबा सकता है। काम का बोझ अपेक्षा से अधिक महसूस हो सकता है, जिससे मानसिक थकान बढ़ सकती है। बिजनेस से जुड़े हुए लोगों को लाभ नहीं होगा। उम्मीद के हिसाब से परिणाम नहीं मिलेंगे। निजी रिश्तों में संवाद की कमी होने के चलते दूरियां आ सकती हैं। हेल्थ से संबंधित किसी भी परेशानी को नजरअंदाज न करें। नियमित दिनचर्या बनाएं रखें और संयम से काम लें। कुंभ राशिकुंभ राशि के जातक 10 जुलाई के आसपास कोई नया कार्य की शुरुआत करने का सोच रहे हैं, तो भूल ही जाइए। इस दौरान अच्छे से विचार करें, फिर फैसला लें। बिजनेस में जल्दबाजी न करें, वरना नुकसान हो सकता है। निवेश, पार्टनरशिप या किसी नए प्रोजेक्ट को शुरु करने से पहले एक बार सभी पहलुओं पर विचार कर लें। यात्रा से जुड़े मामलों में सावधानी रखें, क्योंकि अनावश्यक यात्राएं और धन दोनों ही बर्बादी कर सकती हैं। मानसिक तनाव से बचने के लिए अपने कामों की स्पष्ट योजनाएं जरुर बनाएं। कोई भी निर्णय जल्दबाजी में न लें।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>जुलाई, को, Vyatipat, Yog, Zodiac, Signs, भूलकर, भी, न, करें, निवेश, करियर, पर, मंडराएगा, बड़ा, संकट</media:keywords>
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<title>क्या है हरि वासर? Nirjala Ekadashi Vrat का फल चाहिए तो जान लें पारण का यह Secret नियम</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। पूरे साल में 24 एकादशियां पड़ती है, लेकिन इन सभी एकादशियों में ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है। इस व्रत में अन्न-जल का त्याग कर दिया जाता है। यह व्रत अधिक श्रेष्ठ पवित्र और फलदायी माना जाता है।धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत को विधिवत रुप से करने से साधक को सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है और भगवान विष्णु की कृपा से सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है।खासतौर पर व्रत का पारण न करने से साधक का व्रत सफल नहीं होता है। इसलिए अगले दिन यानी द्वादशी तिथि के दिन व्रत का पारण करना चाहिए। जब पारण करें तो हरि वासर की अवधि का विशेष ध्यान रखें। हरि वासर के समय व्रत का पारण करना पूरी तरह वर्जित है। ऐसे में आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर क्या है हरि वासर? तो चलिए बिना देर किए, आपको इस बारे में बताते हैं-क्या है हरि वासर?धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वादशी तिथि के शुरुआती भाग को हरिवासर कहा जाता है। इस समय एकादशी व्रत का पारण करना शुभ नहीं माना जाता। आसान भाषा में समझें तो यदि द्वादशी तिथि 24 घंटे की है, तो उसके पहले लगभग 6 घंटे हरिवासर कहलाते हैं। इसलिए इस अवधि के समाप्त होने के बाद ही एकादशी व्रत का पारण करना चाहिए।पारण में क्यों रखा जाता है हरि वास का ध्यान?गौरतलब है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखना बेहद कठिन होता है। इतना कठिन होता है कि व्रत का पारण करते समय हरि वास का ध्यान नहीं दिया, तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। माना जाता है कि हरि वासर के समय व्रत का पारण करने से व्रत निष्फल हो जाता है। इसलिए कहा जाता है कि एकादशी व्रत करने से पहले इससे जुड़े नियम के बारे में जरुर जान लीजिए।निर्जला एकादशी में पानी कब पीना चाहिए?निर्जला एकादशी व्रत में पानी पीना का सही समय व्रत के पारण के समय ही होता है। एकादशी तिथि की शुरुआत से लेकर द्वादशी तक सूर्योदय तक पानी नहीं पीना चाहिए।कब है निर्जला एकादशी?ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 24 जून को शाम 06 बजकर 12 मिनट परज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 25 जून को रात 08 बजकर 09 मिनट परनिर्जला एकादशी 2026 व्रत पारण निर्जला एकादशी व्रत का पारण करने का समय- 26 जून को सुबह 05 बजकर 25 मिनट से 08 बजकर 13 मिनट तक ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:56 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 24 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष पारिवारिक, सामाजिक कार्यों में व्यस्तता रहेगी। वैचारिक परिवर्तन से सुख मिलेगा। दूर की यात्रा भी संभव है। कुछ खास लोगों पर आपका जादू चल जाएगा।वृषभाग्यबल कमजोर, अपेक्षा से कम लाभ। जल्दबाजी में नुकसान कर बैठेंगे। परिवार के सदस्यों का पुनर्मिलन होगा। मिश्रित फल वाला दिन है।मिथुनपरिस्थितियां बहुत अनुकूल होगी। सरकार में प्रभाव बढ़ेगा। संयम से काम लें अन्यथा बिगड़ सकता है। नई उलझन सुलझाने के व्यस्त रहेंगे।कर्कमनोरंजन में व्यस्तता और उपहारों की प्राप्ति। परिस्थितियां सुधरेगी, नए मित्र बनेंगे। आज तबादले का योग बन रहा है। उपलब्ध धन-मान की रक्षा की चिंता रहेगी।सिंहसभी सोचें हुए काम समय पर पूरे होंगे। यात्रा पर जाना पड़ सकता है। स्व विवेक से सहज सफलता मिलेगी। मन का बोझ हल्का हो जाएगा।कन्याअविवाहितों को सुखद विवाह प्रस्ताव मिलेगा। थोड़ी सी भी लापरवाही भारी साबित होगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें, और विवेक से काम लें। निःस्वार्थ सेवा का सौभाग्य और प्रसन्नता।तुलाबुद्धिमत्ता और रचनात्मकता की प्रशंसा होगी। नई उम्मीदें लेकर सूर्योदय होगा। &#039;इमोशनली ब्लैकमेल&#039; न हो, गलत निर्णय संभव। तन-मन-धन तीनो में सुखद उन्नति। वृश्चिक मन उदास रहेगा। मिश्रित फल प्राप्ति का दिन है। विशेष व्यक्ति से भेंट वार्ता लाभप्रद। दोपहर बाद समय अच्छा आएगा।धनुआवश्यकता पर मित्रों से सहयोग लें। आमदनी बढ़ाने के नए साधन बनेंगे। स्वास्थ्य में सुधार होगा, विदेश यात्रा के योग भी। व्यवसाय परिवर्तन संबंधी कठोर निर्णय ले सकते हैं।मकर विशेषज्ञ से सलाह लेकर निर्णय लें। धीरे-धीरे शुभ काम आगे बढ़ेंगे। प्रियजनों से भेंट होगी, अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति। सामाजिक क्षेत्र में आपको छवि और बिखरेगी।कुंभपरिवार में महिलाओं के बीच तुलना न करें। दाम्पत्य जीवन में मधुरता, कोई महत्वपूर्ण सफलता। रोजगार के संबंध में शुभ समाचार मिलेंगे। स्मार्ट और फिट रहने के लिए नए साधन अपनाएंगे।मीनसामाजिक मान प्रतिष्ठा की प्राप्ति। आपके विरुद्ध गलतफहमी फैलाई जाएगी। किसी रहस्य के उजागर होने से हानि और परेशानी। विदेश से लाभ, चारों तरफ से खुशखबरी मिलेगी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:56 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 24 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 24 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 24 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशि (Aries)आज आपके प्रेम संबंधों में मधुरता घुलेगी। अगर आप अकेले हैं, तो कार्यस्थल या किसी सामाजिक समारोह में किसी दिलचस्प व्यक्ति से आंखें चार हो सकती हैं। जो लोग रिश्ते में हैं, वे पार्टनर के साथ लंबी बातचीत करेंगे जिससे पुराने गिले-शिकवे दूर होंगे।वृषभ राशि (Taurus)लव लाइफ के लिहाज से आज थोड़ा संभलकर रहने का दिन है। छोटी सी बात पर अहंकार का टकराव हो सकता है, जिससे बहस बढ़ने की आशंका है। अपनी भाषा में सौम्यता बनाए रखें। शाम का समय साथी के साथ शांत माहौल में बिताएं, स्थितियां सुधर जाएंगी।मिथुन राशि (Gemini)आज आपके प्रेम जीवन में रोमांस का तड़का लगने वाला है। पार्टनर आपके लिए कोई सरप्राइज डिनर या लॉन्ग ड्राइव प्लान कर सकता है। आपसी तालमेल शानदार रहेगा। जो लोग विवाह के बंधन में बंधना चाहते हैं, उनके लिए बात आगे बढ़ाने का सही समय है।कर्क राशि (Cancer)आज काम के अत्यधिक दबाव के कारण आप अपने लव पार्टनर को समय नहीं दे पाएंगे। इससे उनके मन में थोड़ी उदासी या नाराजगी आ सकती है। बेहतर होगा कि आप उन्हें अपनी व्यस्तता के बारे में पहले ही प्यार से समझा दें, ताकि कोई गलतफहमी न हो।सिंह राशि (Leo)सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन पैशन और अट्रैक्शन से भरा रहेगा। आपके बीच का खिंचाव साफ महसूस होगा। यदि आप किसी से अपने दिल की बात कहना चाहते हैं, तो संकोच न करें; आज का दिन प्रपोज करने के लिए बेहद अनुकूल है।कन्या राशि (Virgo)आज आपको अपने साथी पर भरोसा मजबूत रखना होगा। सोशल मीडिया या किसी तीसरे व्यक्ति की कही-सुनी बातों पर यकीन करके अपने रिश्ते में कड़वाहट न लाएं। साथी से खुलकर बात करें, संदेह के बादल छंट जाएंगे।तुला राशि (Libra)आज का दिन आपके दांपत्य और प्रेम जीवन में नई खुशियां लाएगा। आप अपने पार्टनर के साथ किसी खूबसूरत जगह की यात्रा पर जा सकते हैं। शादीशुदा जातकों के बीच का आपसी तालमेल और गहरा होगा, जिससे मानसिक शांति मिलेगी।वृश्चिक राशि (Scorpio)प्रेम के दृष्टिकोण से आज का दिन थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा हो सकता है। मूड स्विंग्स के कारण पार्टनर का व्यवहार थोड़ा रूखा हो सकता है। ऐसे में प्रतिक्रिया देने के बजाय उनकी बात को धैर्य से सुनें। आपका संयम रिश्ते को बिगड़ने से बचा लेगा।धनु राशि (Sagittarius)धनु राशि के जातकों के लिए आज का दिन पुरानी कड़वाहट को भुलाकर नई शुरुआत करने का है। प्रेम जीवन में ताजगी का अहसास होगा। सिंगल्स के लिए आज कोई नया रिश्ता दस्तक दे सकता है, जिससे मन प्रसन्न रहेगा।मकर राशि (Capricorn)आज आप अपने पार्टनर के साथ भविष्य को लेकर कुछ गंभीर और सकारात्मक चर्चा कर सकते हैं। आपके इस परिपक्व अंदाज से साथी का आप पर भरोसा और बढ़ेगा। परिवार की ओर से भी आपके प्रेम संबंध को हरी झंडी मिल सकती है।कुंभ राशि (Aquarius)यदि आप किसी पुराने रिश्ते के टूटने से परेशान थे, तो आज आपको उस दर्द से राहत मिलेगी। जीवन में किसी नए और सकारात्मक व्यक्ति का आगमन हो सकता है। पहले से शादीशुदा लोगों का दिन सामान्य लेकिन सुखद रहेगा।मीन राशि (Pisces)मीन राशि के प्रेमियों के लिए आज का दिन भावनात्मक रूप से बेहद मजबूत रहेगा। आपका पार्टनर आपकी भावनाओं का पूरा सम्मान करेगा और आपको खास महसूस कराने की कोशिश करेगा। आपसी समझ और बढ़ेगी, जिससे रिश्ता और परिपक्व होगा।आज का लव मंत्र: अपने पार्टनर की केवल कमियां न देखें, बल्कि उनकी अच्छाइयों की सराहना भी खुलकर करें। एक छोटी सी तारीफ आपके रिश्ते में जादू कर सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Jyeshtha Purnima पर चमकेगी इन 4 Zodiac Signs की किस्मत, Career में तरक्की संग होगी धन की वर्षा</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। इस बार ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून, सोमवार को मनाई जाएगी। वैदिक पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 29 जून को प्रातः 3.06 बजे से होगी और इसका समापन 30 जून को सुबह 5.26 बजे होगा। इस खास दिन प्रदोष काल में माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है, जबकि रात्रि के समय चंद्रदेव को अर्घ्य दिया जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, इस साल पड़ने वाली ज्येष्ठ पूर्णिमा कुछ राशि वालों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। माना जा रहा है कि मां लक्ष्मी की विशेष कृपा से इन जातकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। साथ ही धन लाभ, नए निवेश के अवसर और भूमि-भवन से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है।इन 4 राशियों के लिए शुभ संयोगसिंह राशिइस दिन सिंह राशि के जातकों के लिए करियर के मामले में पॉजिटिव परिणाम मिलने वाले हैं। वर्कप्लेस पर अन्य लोगों का सहयोग मिल सकता है। माता लक्ष्मी की कृपा से आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है, जिससे आपकी वित्तीय स्थिति मजबूती होगी। अगर आपने पहले कभी निवेश किया है, तो आपको फायदा मिल सकता है। नए निवेश पर विचार करने और व्यापार की योजना बनाने के लिए यह समय काफी अनुकूल है। पारिवारिक जीवन में संतुलन और सुख बना रहता है।वृश्चिक राशिइस दिन वृश्चिक राशि के जातकों को पुराने विवादों या कानूनी मामलों में राहत मिलेगी। बिजनेस में किए गए प्रयास सफल रहेंगे और कोई नया प्रोजेक्ट या लाभदायक सौदा हाथ लग सकता है। सफलता के लिए आत्मविश्वास बनाए रखें और अपनी बात स्पष्ट रुप से रखें। अगर आप नई शुरआत करना चाहते हैं, तो यह समय अच्छा रहेगा।धनु राशिधनु राशि के लोगों के लिए इस दिन नए विचार और योजनाओं से भरा होता है। आपकी सोच में तेजी आएगी, जिससे करियर में आगे बढ़ने के रास्ते खुल जाएंगे। वर्कप्लेस पर आपको प्रयासों की सराहना होगी और आर्थिक लाभ मिलने के संकेत हैं।  पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने की संभावना है। परिवार में सुख-शांति रहेगी। दिन भी अनुकूल रहेगा।कुंभ राशिइस दिन कुंभ राशि के जातकों को अचानक से धन लाभ मिलेगा। रुका हुआ पैसा वापस मिलेगा। नौकरीपेशा और व्यापार से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। अपने संपर्कों और नेटवर्क का सही इस्तेमाल करने का लाभ प्राप्त होगा। यदि मेहनत और सही दिशा में प्रयास करेंगे, तो सफलता जल्दी मिलेगी। स्टूडेंट्स को एकाग्रता बनाए रखने के लिए समय उनके पक्ष में है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 25 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष शुभ समाचार मिलेगा। मित्रों और परिवार के लोगों के साथ अच्छा दिन बीतेगा। संबंधियों से सुलह होगी, मधुरता बढ़ेगी। प्रेम संबंध ज्यादा मजबूत हो सकते है।वृषसामाजिक सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। धन संबंधी कोई जोखिम न उठाएं। नई योजना का शुभारंभ कर सकते हैं। परिवार में प्रसन्नता से दिन बीतेगा।मिथुनभाग्यबल कमजोर, अपेक्षा से कम लाभ। जल्दबाजी में नुकसान कर बैठेंगे। आत्मबल से चुनौतियों का समाना करेंगे। कुछ कार्य आगे बढ़ेंगे लेकिन खर्च भी होगा।कर्कसभी सोचें हुए काम समय पर पूरे होंगे। यात्रा पर जाना पड़ सकता है। बेरोजगारों को रोजगार में सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार और स्थिरता।सिंहसामाजिक सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। धन संबंधी कोई जोखिम न उठाएं। जीवनसाथी से मन मुटाव होगा। अच्छे वातावरण में प्रसन्नता सफलता भी।कन्यासौभाग्य वृद्धि करने वाला दिन है। आनंदमय वातावरण हंसी खुशी में दिन बीतेगा। पारिवारिक सहमति से प्रेम विवाह प्रस्ताव आगे बढ़ेगा। अशुभ समाचार के कारण दुःख और चिंता।तुलाबुद्धिमत्ता और रचनात्मकता की प्रशंसा होगी। नई उम्मीदें लेकर सूर्योदय होगा। विद्यार्थी तरूण वर्ग के लिए सफलता भरा दिन। असफल प्रेम संबंध निराशा और बेचैनी। वृश्चिक धर्म-ध्यान-धारणा में व्यस्तता। धन हानि और कलह योग। दोपहर बाद अचानक संकट आएगा। अनेक प्रकार के गोरखधंधों में उलझे रहेंगे।धनुप्रतियोगिता में सफलता मिल सकती है। गलतफहमियां दूर होगी। बड़ों का स्वास्थ्य नरम, रूकावटें भी अधिक है। नई संभावनाएं दिखाई देगी, आगे बढ़ें।मकर प्रतियोगिता में सफलता मिल सकती है। गलतफहमियां दूर होगी। जल्दबाजी न करें, विशेषकर वैवाहिक मामले में। मित्र लोग भी सहयोग नहीं देंगे।कुंभऐसा वादा न करें, जो पूरा न कर सकें। आर्थिक लेन-देन की चिंता बनी रहेगी। परिश्रम अधिक, लाभ कम। परिवार के लिए धन की व्यवस्था में व्यस्त रहेंगे।मीनउपलब्धियों भरा समय है। दूरसंचार से जुड़े लोगों की पदोन्नति। संतान की चिंता और प्रेम संबंधों में बाधा से मन भटकेगा। निर्धारित लक्ष्य पर ध्यान दें। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 25 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 25 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 25 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशि (Aries)आज आपके प्रेम संबंधों में आपसी तालमेल बेहतरीन रहेगा। यदि आप सिंगल हैं, तो किसी पुराने दोस्त या परिचित के प्रति अचानक आकर्षण महसूस हो सकता है। जो लोग पहले से रिश्ते में हैं, उनके बीच आज विश्वास और बढ़ेगा।वृषभ राशि (Taurus)प्रेम जीवन के लिहाज से आज थोड़ा धैर्य रखने की जरूरत है। किसी पुरानी या छोटी सी बात पर पार्टनर के साथ वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। गुस्से में प्रतिक्रिया देने के बजाय शांत रहकर बात को संभालने का प्रयास करें।मिथुन राशि (Gemini)आज का दिन आपके लव लाइफ में नई ऊर्जा और रोमांस लेकर आएगा। पार्टनर की तरफ से आपको कोई खास सरप्राइज या उपहार मिल सकता है, जिससे आपका दिन खुशनुमा बन जाएगा। साथ में समय बिताने के लिए दिन उत्तम है।कर्क राशि (Cancer)आज व्यस्त दिनचर्या के कारण आप साथी को पर्याप्त समय नहीं दे पाएंगे। इससे उनके मन में थोड़ी नाराजगी हो सकती है। बेहतर होगा कि आप उन्हें अपनी व्यस्तता के बारे में पहले ही सूचित कर दें, ताकि कोई गलतफहमी न हो।सिंह राशि (Leo)सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन अपने दिल की बात कहने का है। यदि आप किसी को पसंद करते हैं, तो आज अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकते हैं, सकारात्मक परिणाम मिलने के योग हैं। शादीशुदा लोगों के बीच प्यार और बढ़ेगा।कन्या राशि (Virgo)आज अपने साथी पर भरोसा बनाए रखें। किसी बाहरी व्यक्ति या सोशल मीडिया की बातों में आकर अपने रिश्ते में शक को जगह न दें। बातचीत के जरिए किसी भी गलतफहमी को तुरंत दूर करना सही रहेगा।तुला राशि (Libra)तुला राशि के जातकों के लिए आज का दिन यादगार हो सकता है। पार्टनर के साथ किसी खूबसूरत जगह पर घूमने या डिनर का प्लान बन सकता है। जीवनसाथी के साथ आपका भावनात्मक जुड़ाव और गहरा होगा।वृश्चिक राशि (Scorpio)प्रेम संबंधों के मामले में आज का दिन सामान्य रहेगा। पार्टनर के बदलते मूड के कारण थोड़ा तनाव हो सकता है, लेकिन आपका हंसमुख स्वभाव माहौल को फिर से हल्का-फुल्का बना देगा। शाम को साथ बिताने से राहत मिलेगी।धनु राशि (Sagittarius)यदि आपके रिश्ते में पिछले कुछ समय से दूरियां आ रही थीं, तो आज वे दूर होंगी। बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान निकलेगा। सिंगल्स के लिए आज किसी नए रिश्ते की शुरुआत होने की संभावना है।मकर राशि (Capricorn)मकर राशि के लोग आज अपने पार्टनर के साथ भविष्य की योजनाओं पर गंभीर चर्चा कर सकते हैं। आपके इस परिपक्व रवैये से साथी का आपके प्रति सम्मान और बढ़ेगा। पारिवारिक जीवन में भी सुख-शांति बनी रहेगी।कुंभ राशि (Aquarius)कुंभ राशि के सिंगल लोगों के जीवन में आज किसी खास व्यक्ति का आगमन हो सकता है। जो लोग पहले से रिलेशनशिप में हैं, वे आज पुरानी खूबसूरत यादों को ताजा करेंगे, जिससे रिश्ते में नयापन महसूस होगा।मीन राशि (Pisces)मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन प्यार और खुशियों से भरा रहेगा। आपके पार्टनर आपकी भावनाओं की कद्र करेंगे और आपको विशेष महसूस कराएंगे। दांपत्य जीवन में मधुरता और तालमेल बना रहेगा।आज का प्रेम संदेश: एक मजबूत रिश्ते की नींव आपसी बातचीत और सम्मान पर टिकी होती है। आज पार्टनर की बात को केवल सुनें नहीं, बल्कि समझने का भी प्रयास करें। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:52 +0530</pubDate>
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<title>Braj की सीमा से बाहर न ले जाएं Govardhan शिला, Radha&#45;Krishna की कृपा रुक जाएगी, जानें वजह</title>
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<description><![CDATA[ मथुरा और वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की लीला से जुड़े स्थल होने के कारण बेहद पवित्र तीर्थ स्थल माने जाते हैं। यहां की रज को घर लाना बेहद शुभ माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी चीज भी है, जिसको मथुरा-वृंदावन से कभी नहीं लाना चाहिए। हालांकि अक्सर लोग उस एक चीज को अपने घर यह सोचकर ले आते हैं कि इससे उनके घर की सुख-समृद्धि और संपन्नता बढ़ेगी। लेकिन होता इसका उल्टा है। इसको घर लाने से सुख-समृद्धि घटने लगती है। साथ ही राधा-कृष्ण की कृपा दूर होने लगती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको उस एक वस्तु के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसको मथुरा-वृंदावन से कभी नहीं लाना चाहिए।मथुरा-वृंदावन से कौन सी वस्तु न लाएंकई धार्मिक ग्रंथों और विशेष रूप से गर्ग संहिता में यह बताया गया है कि आप यहां से भूलकर भी गोवर्धन पर्वत का पत्थर नहीं लाना चाहिए। ऐसा करना जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है, जो अधिकतर लोग अंजाने में बैठते हैं। इसकी पीछे एक अहम वजह है।इसे भी पढ़ें: Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर बुध-शुक्र का महासंयोग, 3 राशियों पर बरसेगी लक्ष्मी कृपा, मिलेगा Good Luckधार्मिक कथाओं के मुताबिक हर दिन गोवर्धन पर्वत तिल भर घट रहा है, जिस दिन गोवर्धन पर्वत पूरी तरह से धरती में समा जाएगा, उस दिन कलयुग अपने चरम पर पहुंच जाएगा। माना जाता है कि गोवर्धन पर्वत का हर हिस्सा पूजनीय है, लेकिन एक ऋषि द्वारा श्रापित है।एक ऋषि द्वारा गोवर्धन पर्वत को यह श्राप मिला था कि कलियुग के अंत तक वह धरती में समा जाएंगे। जिसके बाद से सबसे ऊंचे पर्वतों में से एक गोवर्धन धरती के बहुत करीब है। इस श्राप की पीड़ा से मुक्त करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने उन पर अपने चरण रखे थे।बता दें कि गोवर्धन पर्वत श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रिय माने जाते हैं। यही वजह है कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से गोवर्धन का स्वरूप भी उनके जैसा ही है। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है कि उनको गोवर्धन पर्वत अतिप्रिय है और इनको कोई 84 कोस से बाहर नहीं ले जा सकता है।यह ब्रज मंडल के मुकुट माने जाते हैं। अगर कोई भी इस पर्वत के किसी भी अंश को ब्रज की सीमा से बाहर ले जाता है, तो यह गिरिराज को उनके मूल निवास से जबरन दूर करने जैसा होता है। जिस कारण उससे भगवान कृष्ण और राधा रानी रुष्ट हो सकते हैं।गोवर्धन पर्वत के पत्थर को स्वयं श्रीकृष्ण के रूप में पूजा जाता है। जिसको गिरिराज शिला कहा जाता है। ऐसे में किसी भी देवी-देवता के साक्षात स्वरूप को घर लाने का मतलब है कि उनकी पूरी जिम्मेदानी लेना। वहीं इनकी पूजा और सेवा के नियम कठोर हैं।सामान्य गृहस्थ व्यक्ति के लिए गिरिराज की सेवा और पूजा को निभाना लगभग असंभव है। गोवर्धन शिला को घर पर स्थापित करने के लिए सात्विक जीवनशैली, अत्यधिक पवित्रता और चौबीस घंटे नियम पालन की जरूरत होती है। वहीं नियमों का उल्लंघन करने से व्यक्ति को पुण्य की बजाय महादोष लग सकता है।धार्मिक मान्यता है कि नियमों में कमी होने पर जातक के जीवन से धन, सुख-समृद्धि और शांति तेजी से चली जाती है और उसका अनिष्ट हो सकता है। इसलिए मथुरा-वृंदावन से ब्रज की रज लाएं, लेकिन गोवर्धन पर्वत के पत्थर को घर न लाएं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:51 +0530</pubDate>
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<title>Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर बुध&#45;शुक्र का महासंयोग, 3 राशियों पर बरसेगी लक्ष्मी कृपा, मिलेगा Good Luck</title>
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<description><![CDATA[ साल की सबसे बड़ी एकादशी निर्जला एकादशी है। 25 जून 2026 को निर्जला एकादशी का व्रत किया जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत करने से साल की सभी 24 एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है। इस बार निर्जला एकादशी पर लक्ष्मी नारायण राजयोग बन रहा है। जब बुध और शुक्र एक ही राशि या भाव में होते हैं, तो लक्ष्मी नारायण राजयोग बनता है। निर्जला एकादशी पर बुध-शुक्र कर्क राशि में एक साथ बैठकर यह राजयोग बनाएंगे। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन राशियों के लिए यह दुर्लभ संयोग फायदेमंद है।वृषभ राशिवृषभ राशि के जातकों के लिए यह संयोग बेहद शुभ है। करियर में किए गए आपके प्रयास काफी सफल होंगे। लंबे समय से अटके हुए काम पूरे होंगे। व्यवसाय से जुड़े लोगों को नई योजनाओं से फायदा मिलेगा। अगर आप नई दुकान या स्टार्टअप शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं, तो उनके लिए अच्छा समय है। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या फिर नई जिम्मेदारी मिलेगी। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा और वैवाहिक जीवन में अनुकूल परिणाम मिलने वाला है।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 25 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 25 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनकर्क राशिनिर्जला एकादशी पर लक्ष्मी नारायण राजयोग कर्क राशि में बन रहा है। यह योग इस राशि के जातकों के लिए आर्थिक मजबूती और उन्नति का संकेत दे रहा है। कार्यक्षेत्र में की गई मेहनत का उचित परिणाम मिलेगा। आय में बढ़ोत्तरी होगी और करियर में भी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। सामाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान में वृद्धि होगी। किसी उपलब्धि से आपका मन प्रसन्न रहेगा।तुला राशियह राजयोग तुला राशि के लोगों के लिए उन्नति के द्वार खोल सकता है। लंबे समय से चली आ रही परेशानियां दूर होंगी। नौकरी और व्यापार में किए गए प्रयास अच्छे परिणाम देंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ पारिवारिक रिश्तों में पॉजिटिविटी आएगी। मानसिक दबाव कम होगा, जिससे आपका मन शांत रहेगा।लक्ष्मी नारायण योगज्योतिष शास्त्र के मुताबिक शुक्र और बुध के मिलन से बना लक्ष्मी नारायण योग सफलता और सुख-समृद्धि का प्रतीक है। यह योग जातक को धन लाभ, भौतिक सुख और सामाजिक प्रतिष्ठा दिलाने में सहायक समझा जाता है। वहीं निर्जला एकादशी पर यह योग बनना शुभ संकेत है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:51 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 26 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 26 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 26 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं। मेष राशि (Aries)आज आपके प्रेम संबंधों में तालमेल और आपसी समझ का ग्राफ काफी ऊपर रहेगा। जो लोग सिंगल हैं, उन्हें अपने किसी परिचित या पुराने मित्र की तरफ से कोई सकारात्मक संकेत मिल सकता है। पहले से डेट कर रहे जोड़ों के बीच भरोसा बढ़ेगा।वृषभ राशि (Taurus)प्रेम के मोर्चे पर आज थोड़ा संभलकर और संयम से काम लेने की आवश्यकता है। अहंकार की वजह से साथी के साथ कुछ वैचारिक मतभेद उभर सकते हैं। तीखी प्रतिक्रिया देने के बजाय शांत होकर बात को सुलझाना आज के दिन को बेहतर बनाएगा।मिथुन राशि (Gemini)आज आपके लव लाइफ में खुशियों की बहार आने वाली है। आपका पार्टनर आपको कोई खूबसूरत सरप्राइज या तोहफा देकर हैरान कर सकता है, जिससे रिश्ता और खुशनुमा हो जाएगा। एक साथ बेहतरीन पल बिताने के लिए आज का दिन शानदार है।कर्क राशि (Cancer)आज जिम्मेदारियों और काम की अधिकता के चलते आप अपने हमसफर को समय नहीं दे पाएंगे। इस वजह से उनका मूड थोड़ा खराब हो सकता है। बेहतर होगा कि दिन की शुरुआत में ही उन्हें अपनी व्यस्तता से अवगत करा दें।सिंह राशि (Leo)यदि आप किसी के सामने अपने प्यार का इजहार करने की सोच रहे हैं, तो आज का दिन आपके पक्ष में झुका हुआ है। बेझिझक होकर अपनी भावनाएं सामने रखें। जो लोग शादीशुदा हैं, उनके बीच आपसी खिंचाव और प्रेम में बढ़ोतरी होगी।कन्या राशि (Virgo)आज आपको अपने रिश्ते की डोर को शक से बचाना होगा। किसी तीसरे व्यक्ति की बातों या सोशल मीडिया पर दिखी चीजों की वजह से साथी पर अविश्वास न करें। खुलकर संवाद करें, हर गलतफहमी आसानी से दूर हो जाएगी।तुला राशि (Libra)तुला राशि के जातकों के लिए आज का दिन काफी रोमांटिक और यादगार रहने वाला है। जीवनसाथी या लव पार्टनर के साथ किसी खूबसूरत जगह की सैर या कैंडललाइट डिनर का योग बन रहा है। आपका भावनात्मक जुड़ाव और मजबूत होगा।वृश्चिक राशि (Scorpio)प्रेम संबंधों के मामले में आज का दिन मिलाजुला रहेगा। साथी के स्वभाव में थोड़ा चिड़चिड़ापन दिख सकता है, लेकिन आपका मजाकिया अंदाज और सूझबूझ माहौल को फिर से हल्का-फुल्का बना देगी। शाम को सब सामान्य हो जाएगा।धनु राशि (Sagittarius)अगर पिछले कुछ समय से आपके और पार्टनर के बीच संवादहीनता या दूरियां चल रही थीं, तो आज वे खत्म होंगी। बातचीत के जरिए पुरानी कड़वाहट दूर होगी। सिंगल्स के जीवन में किसी नए प्रेम प्रसंग की शुरुआत होने के मजबूत संकेत हैं।मकर राशि (Capricorn)मकर राशि के जातक आज अपने लव पार्टनर के साथ भविष्य की योजनाओं या विवाह को लेकर कोई गंभीर चर्चा कर सकते हैं। आपका यह मैच्योर रवैया आपके पार्टनर का दिल जीत लेगा और रिश्ते को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।कुंभ राशि (Aquarius)जो लोग अभी तक अकेले (Single) हैं, उनके जीवन में आज किसी खास शख्स की एंट्री हो सकती है। वहीं, जो लोग पहले से रिलेशनशिप में हैं, वे आज पुरानी मीठी यादों को ताजा करेंगे, जिससे रिश्ते में एक नई ताजगी का अहसास होगा।मीन राशि (Pisces)मीन राशि के प्रेमियों के लिए आज का दिन खुशियों की सौगात लेकर आएगा। आपके पार्टनर आपकी छोटी-मोटी जरूरतों और भावनाओं का पूरा ख्याल रखेंगे। दांपत्य जीवन बिता रहे लोगों के बीच गजब का सामंजस्य और स्नेह देखने को मिलेगा।आज का प्रेम सूत्र: एक खूबसूरत रिश्ते के लिए जितना जरूरी अपनी बात कहना है, उतना ही आवश्यक पार्टनर की बात को बिना टोके सुनना और महसूस करना भी है। ]]></description>
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<title>Horoscope 26 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष मनोरंजन में व्यस्तता और उपहारों की प्राप्ति। परिस्थितियां सुधरेगी, नए मित्र बनेंगे। उन्नति का नया अवसर मिलेगा, लाभ उठाएं। झगड़े और झंझट का दिन है, विवेक से काम लें।वृषस्वास्थ्य बिगड सकता है। सहयोग लेने और देने का दिन है। धन की स्थिति मजबूत होगी। कोई न कोई चिंता व्याप्त रहेगी।मिथुनपरिस्थितियां बहुत अनुकूल होगी। सरकार में प्रभाव बढ़ेगा। सामाजिक कार्यों में यश मिलेगा। पूर्वकृत उद्योगों का सुपरिणाम मिलेगा।कर्कअपने अंदर झांकने का प्रयास करें, सुधार की गुजांइश है। उदासीनता दूर होगी, ऊर्जावान अनुभव करेंगे। लाभ और विजय आज आपके भाग्य में है। विवाह योग्य व्यक्तियों को प्रस्ताव मिलेंगे।सिंहपरिवार में महिलाओं के बीच तुलना न करें। दाम्पत्य जीवन में मधुरता, कोई महत्वपूर्ण सफलता। प्रेम प्रसंग और विवाह प्रस्ताव आगे बढ़ेंगे। स्वजनों के साथ हंसी-खुशी में दिन बीतेगा।कन्याअपने अंदर झांकने का प्रयास करें, सुधार की गुजांइश है। उदासीनता दूर होगी, ऊर्जावान अनुभव करेंगे। नई योजना की शुरूआत न करें। महत्वपूर्ण व्यक्तियों से लाभदायक सम्पर्क बनेंगे और बढ़ेंगे।तुलामन उदास रहेगा। मिश्रित फल प्राप्ति का दिन है। सकारात्मकता एवं रचनात्मकता का स्वागत। आज सफलता की ओर कदम बढ़ेंगे।वृश्चिक विशेषज्ञ से सलाह लेकर निर्णय लें। धीरे-धीरे शुभ काम आगे बढ़ेंगे। धन संबंधी मामले में चिंतन बना रहेगा। मनोरंजन में व्यस्त रहेंगे।धनुनए पुराने मित्रों के साथ मधुर मिलन, मनोरंजन और खानपान। अध्यात्मिक क्षेत्र में एक कदम आगे बढाएंगे। उधार न दें, अन्यथा धन डूब जाएगा। दूसरों की सलाह से काम करने पर हानि होगी। मकर गुरुजनों से सानिध्य से लाभ और यश। मौजमस्ती में रहेंगे- सम्मान भी बढ़ेगा। प्रयास तेज करें शीघ्र सफलता मिलेगी। विशेष प्रशिक्षण के लिए जा सकते हैं।कुंभनए पुराने मित्रों के साथ मधुर मिलन, मनोरंजन और खानपान। अध्यात्मिक क्षेत्र में एक कदम आगे बढाएंगे। आज किया गया पूंजी निवेश भविष्य में लाभ देगा। नई संपत्ति के क्रय-विक्रय से लाभ।मीनसुखदायक दिन है, तनाव मुक्त होंगे। आध्यात्म में रूचि, मानसिक प्रसन्नता। व्यावसायिक क्षेत्र में हानि संभव है। संचार माध्यमों से सुखद और समाचार। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 27 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 27 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 27 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशि (Aries)आज चंद्रमा का गोचर आपके पंचम भाव में होने से आपके प्रेम संबंधों में उत्साह और आकर्षण बढ़ेगा। जो लोग सिंगल हैं, उनकी किसी पुराने परिचित से अचानक मुलाकात हो सकती है जो आगे चलकर एक खूबसूरत रिश्ते में बदल सकती है। शादीशुदा लोगों के बीच आपसी समझ और गहरी होगी।वृषभ राशि (Taurus)आज मंगल की स्थिति आपके स्वभाव में थोड़ा उग्रपन ला सकती है, जिससे साथी के साथ बातचीत में वैचारिक मतभेद होने की आशंका है। अपनी वाणी और अहंकार पर संयम रखें। शाम को शुक्र का सकारात्मक प्रभाव स्थितियों को सुधारेगा और आपसी तनाव कम होगा।मिथुन राशि (Gemini)बुध और शुक्र की युति आज आपके प्रेम जीवन को बेहद रोमांटिक और आनंदमय बनाने वाली है। आपका पार्टनर आज आपको कोई खूबसूरत सरप्राइज या आपकी पसंद का उपहार दे सकता है। लव बर्ड्स के लिए एक साथ यादगार समय बिताने और दिल की बात साझा करने के लिए आज का दिन सर्वोत्तम है।कर्क राशि (Cancer)आज राहु की छाया के कारण काम का तनाव आपके प्रेम जीवन पर हावी हो सकता है, जिससे आप साथी को पर्याप्त समय नहीं दे पाएंगे। पार्टनर के मन में उपेक्षा का भाव आ सकता है। बेहतर होगा कि आप अपनी व्यस्तता के बारे में उन्हें पहले ही प्यार से समझा दें।सिंह राशि (Leo)सूर्य का शुभ प्रभाव आज आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा। यदि आप किसी के सामने अपने प्यार का इजहार करने की सोच रहे हैं, तो ग्रहों की चाल आज आपके पक्ष में है; आपको सकारात्मक जवाब मिल सकता है। विवाहित जातकों के बीच नया सामंजस्य देखने को मिलेगा।कन्या राशि (Virgo)आज के दिन केतु का प्रभाव आपके मन में कुछ अनजाने डर या शक पैदा कर सकता है। किसी बाहरी व्यक्ति की बातों में आकर अपने साथी पर अविश्वास करने से बचें। अपने रिश्ते की मजबूती के लिए खुलकर संवाद करें, संदेह के बादल छंट जाएंगे।तुला राशि (Libra)आज बृहस्पति (गुरु) की कृपा दृष्टि आपके प्रेम संबंधों पर बनी रहेगी, जिससे दांपत्य और प्रेम जीवन में खुशहाली आएगी। पार्टनर के साथ किसी धार्मिक या खूबसूरत यात्रा का योग बन रहा है। जीवनसाथी के साथ आपका भावनात्मक जुड़ाव पहले से कहीं अधिक मजबूत होगा।वृश्चिक राशि (Scorpio)शनि की ढैय्या के प्रभाव स्वरूप आज आपके प्रेम संबंधों में थोड़ा उतार-चढ़ाव आ सकता है। साथी का व्यवहार थोड़ा रूखा या उदासीन लग सकता है। ऐसे में बहस को बढ़ाने के बजाय शांति और धैर्य से काम लें, समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।धनु राशि (Sagittarius)आज ग्रहों की स्थिति आपके पक्ष में है, जो पुराने विवादों और गलतफहमियों को खत्म करने में मदद करेगी। लव लाइफ में एक नई ताजगी का अहसास होगा। जो लोग अकेले हैं, उनके जीवन में आज किसी नए और बेहद खास व्यक्ति की एंट्री हो सकती है।मकर राशि (Capricorn)आज मकर राशि के जातक अपने लव पार्टनर के साथ भविष्य की योजनाओं या विवाह को लेकर कोई गंभीर फैसला ले सकते हैं। शनि का गोचर आपके इस निर्णय में स्थिरता लाएगा। परिवार के बुजुर्गों की तरफ से भी आपके रिश्ते को सहयोग मिल सकता है।कुंभ राशि (Aquarius)आज सितारों की चाल आपके सामाजिक दायरे को बढ़ा रही है। सिंगल्स के लिए आज किसी मित्र के जरिए प्रेम का प्रस्ताव आने के योग हैं। जो लोग पहले से रिलेशनशिप में हैं, वे आज पुरानी मीठी यादों को ताजा करेंगे और साथ में अच्छा वक्त बिताएंगे।मीन राशि (Pisces)चंद्रमा का शुभ गोचर आज मीन राशि के प्रेमियों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आएगा। आपके पार्टनर आपकी भावनाओं और छोटी-मोटी जरूरतों का पूरा ख्याल रखेंगे, जिससे आपको मानसिक शांति मिलेगी। वैवाहिक जीवन में रोमांस और आपसी स्नेह बढ़ेगा।आज का प्रेम संदेश: ग्रहों की स्थिति चाहे जो हो, एक मजबूत रिश्ते की असली ताकत आपसी सम्मान, अटूट विश्वास और खुलकर की गई बातचीत में छिपी होती है। आज पार्टनर के दृष्टिकोण को भी समझने का प्रयास करें। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Vastu Tips: दीवारों की नमी करा सकती है भारी Financial Loss, Vastu के ये अचूक उपाय बचाएंगे बर्बादी से</title>
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<description><![CDATA[ घर की दीवारों पर सीलन दिखना एक आम बात है। अक्सर लोग इसको छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु शास्त्र में सीलन को वास्तु दोष का गंभीर कारण माना जाता है। वास्तु एक्सपर्ट की मानें, तो सीलन घर की दीवारों को कमजोर करने के अलावा परिवार का सुख-चैन भी छीन सकती है। घर में सीलन और नमी निगेटिव एनर्जी की सबसे बड़ी वजह होती है। इसकी वजह से परिवार के सदस्यों को मानसिक, शारीरिक समस्याओं, व्यवसाय और नौकरी आदि में भी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि सीलन और नमी की वजह से पैदा हुए वास्तु दोष को घर से कैसे दूर करें।सेहत पर असरसीलन और नमी के कारण दीवारों पर जमी फंगस घर की हवा को जहरीली बना देती है। जिसका सीधा असर आपकी सेहत पर होता है। सांस लेने में परेशानी, फेफड़ों में संक्रमण और अस्थमा जैसी कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। वहीं घर में लगातार सीलन रहने से तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ता है।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 27 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 27 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनसीलन का प्रभाववास्तु शास्त्र में कहा गया है कि जिस दिशा की दीवार पर सीलन आती है। उस दिशा से जुड़ी चीजें प्रभावित होने लगती हैं। सीलन का घर के सदस्यों के मानसिक शांति, सेहत और आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ता है।उत्तर दिशाअगर घर की उत्तर दिशा की दीवार पर सीलन है, तो व्यापार में नए मौके आने बंद हो जाते हैं और बनी-बनाई डील भी हाथ से निकल जाती है।दक्षिण-पश्चिम दिशावास्तु शास्त्र के मुताबिक घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा को वित्तीय स्थिरता, विकास और आय का प्रमुख स्थान माना जाता है। इस दिशा में सीलन होने पर पैसा पानी की तरह बहता है। वहीं पारिवारिक रिश्तों में भी दरार आने लगती है और पति-पत्नी के बीच झगड़े बने रहते हैं।दक्षिण-दक्षिण-पश्चिमघर इस दिशा में नमी या रिसाव होने पर घर के सदस्यों की एनर्जी खत्म होने लगती है। वहीं इस दिशा को डिस्पोजल की दिशा मानी जाती है। गैर-जरूरी खर्च बढ़ते हैं और पाचन संबंधी समस्याएं भी बढ़ती है।पूर्व दिशाघर की पूर्व दिशा की दीवार पर नमी होने से समाज में नाम और प्रसिद्धि पर असर पड़ता है। लोगों के साथ आपके रिश्ते खराब होते हैं और पिता-पुत्र के रिश्ते में भी तनाव आने लगता है।पश्चिम दिशाघर की पश्चिम में मौजूद सीलन लाभ रोकने का काम करती है। आप कितनी भी मेहनत कर लें, आपको उसका सही नतीजा नहीं मिलता है।वास्तु दोष दूर करने के उपायवास्तु के मुताबिक दीवारों पर सीलन की मौजूदगी घर में धन प्रवाह को रोकती है। कुछ आसान वास्तु उपायों की सहायता से आप सीलन और नमी की वजह से उत्पन्न वास्तु दोष को दूर कर सकते हैं।कपूर का उपायघर के जिस भी कोने में सीलन हो, वहां पर सफाई करने के बाद एक कटोरी कपूर रख दें। यह निगेटिव एनर्जी और बदबू दोनों को खत्म करता है।सेंधा नमक का पोछा लगाएंसप्ताह में 2 से 3 बार पानी में सेंधा नमक मिलाकर पोंछा लगाएं। इससे निगेटिव एनर्जी दूर होती है और गुरुवार के दिन पोछा लगाने से बचना चाहिए।सूरज की रोशनीप्रयास करें कि सीलन वाले कमरे में सूरज की रोशनी जरूर जाएं। सूर्य की किरणें वास्तु दोष को प्राकृतिक तरीके से ठीक करने का काम करती है।टपकता हुआ नलअगर दीवार के अंदर कोई पाइप लीक हो तो उसको फौरन ठीक करवाना चाहिए। वास्तु शास्त्र में बहता हुआ पानी या टपकता हुआ नल आर्थिक नुकसान की वजह बनता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:48 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 27 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष अपने ही लोग फंसा कर रख देंगे। विवाह समारोह आदि शुभ कार्य में भाग लेंगे। विशेष प्रशिक्षण के लिए जा सकते हैं। उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे।वृषसभी काम सफलता की ओर बढ़ेंगे। अचानक खर्च बढ़ने से परेशानी, कानूनी उलझनें भी। उच्चशिक्षा के लिए धन की व्यवस्था हो जाएगी। सभी के कल्याण की योजनाओं के आगे बढाएगें।मिथुनआपकी तारीफ करते लोग नहीं थकेगें। निर्णय पर दृढ़ रहें, भटकाव संभव। रोजगार व्यवसाय में प्रशंसा मिलेगी। सम्पर्क क्षेत्र बढ़ेगा, अपने में परिवर्तन होगा।कर्कसरकारी क्षेत्र में प्रभाव बढ़ेगा, सफलता भी मिलेगी। कुछ अच्छे फैसले लेने का दिन। उधार दिया गया धन वापस मिलेगा। स्वास्थ्य में सुधार से प्रसन्नता।सिंहदूसरों के झगड़ों में हस्तक्षेप न करें। सार्वजनिक सम्मान से प्रसन्नता। दीर्घकालीन पूंजी निवेश पर ध्यान दें। बड़ों का स्वास्थ्य नरम, रूकावटें भी अधिक है।कन्याचिंता और समस्याएं घेरे रहेगी। विवेक से काम लेंगे तो परिस्थिति सामान्य होगी। किसी खास शिक्षण प्रशिक्षण में भाग ले सकते हैं। जोखिम लेने पर बदनामी पल्ले पड़ेगी।तुलाबिगड़े हुए संबंध सुधर सकते हैं। नए पुराने परिचय ताजा होंगे। मनोकामनाएं पूरी होगी, चिंता न करें। दूसरों के झगड़ों से दूर ही रहें।वृश्चिक आर्थिक मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लेंगे। नए कार्य के संदर्भ में संवाद प्रारंभ करें। रोजगार व्यवसाय में अच्छा लाभ होगा। आत्म विश्वास के साथ आगे बढ़ें।धनुकारण-अकारण चिंता एवं परेशानी। किसी सामाजिक संस्था में उच्चपद मिलेगा। विशेष लोगों से भेंट के लिए आना या जाना। अच्छा दिन है, अवसर का लाभ उठाएं।मकर आर्थिक चिंता अनिद्रा का कारण। अधूरे कार्य पूरे होने वाले हैं। दिन सामान्य, फिर भी रचनात्मक। चल अचल सम्पत्ति के प्राप्ति के योग।कुंभसरकारी मामलों को निपटाने में देर न करें। परिश्रम अधिक, लाभ कम। असफल प्रेम संबंध निराशा और बेचैनी। किसी और की गलती की सजा आपको मिलेगी।मीनउद्योग, व्यापार में नए कदम रखेंगे। जीवनसाथी के साथ मतभेद की संभावना। खोई-हुई महत्वपूर्ण वस्तु प्राप्त होगी। हर दृष्टि से सतर्क रहें, धोखे का योग है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Horoscope, June, 2026, Aaj, Rashifal:, सभी, राशियों, का, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन, पढ़ें, आज, का, राशिफल</media:keywords>
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<title>जन्म की तारीख बताती है आपकी Personality, इस खास Astro&#45;Science से जानें भविष्य के संकेत</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र से किसी भी जातक की जन्म तिथि से बहुत कुछ जान सकते हैं। हर एक व्यक्ति जिस तिथि को जन्मा होता है, उसका फल ज्योतिषीय ग्रंथों में वर्णित है। जैसे कि प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णमासी और अमावस्या, इन तिथियों को नन्दा, भद्रा, जया, रिक्ता, पूर्णा की श्रेणियों में विभाजित किया गया है।ज्योतिष के अनुसार, प्रतिपदा, षष्ठी, एकादशी तिथि नंदा कहलाती है, चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी रिक्ता तिथि और पंचमी, दशमी, पूर्णिमा, साथ ही कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि यानि अमावस्या को भी विद्वान पूर्णा तिथि कहते हैं। इस लेख हम आपको इन तिथियों में जन्में लोगों का व्यवहार कैसा होता है, इसके बारे में बताएंगे।जानें नन्दा आदि तिथियों का फलादेशजिन व्यक्ति का जन्म नन्दा यानी प्रतिपदा, षष्ठी या एकादशी, इन तिथियों में से किसी भी एक तिथि पर होता है, तो ज्योतिष के अनुसार वह जातक ज्ञानी, पण्डित, देवताओं का भक्त और अपने परिवार के लोगों से प्रेम रखने वाला होता है।भद्रा तिथिकिसी भी व्यक्ति का जन्म भद्रा यानी द्वितीया, सप्तमी, द्वादशी तिथियों में से किसी भी तिथि को होता है, वह धनवान, संसार चक्र और बंधन से डरने वाला, परोपकार आदि कार्यों में चित्त लगाने वाला होता है।जया तिथिजिन लोगों का जन्म जया तिथि यानी तृतीया, अष्टमी या त्रयोदशी को होता है, उन्हें जीवन में मान-सम्मान मिलने की संभावना रहती है। ऐसे लोग साहसी, शांत स्वभाव के और लंबी उम्र वाले माने जाते हैं। उन्हें संतान सुख मिलता है और वे अपनी बड़ी इच्छाओं और लक्ष्यों को पूरा करने में सफल हो सकते हैं।रिक्ता तिथिकिसी भी जातक का जन्म रिक्ता यानी चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी तिथियों में से किसी भी तिथि को होता है, वह जातक तर्क करने वाला, लापरवाह, गुरु की निंदा करने वाला और दूसरे के घमंड को नष्ट करने वाला, अत्यधिक वासना वाला होता है।पूर्णा तिथिजिस व्यक्ति का जन्म पूर्णा तिथि यानी के पंचमी, दशमी, और पूर्णिमा व अमावस्या में से किसी एक तिथि को होता है, उसे धन-धान्य का अभाव नहीं रहता, वह वेद और शास्त्रों का ज्ञाता होता है, ये सत्य वाणी बोलने वाला होता है, चित्त का शुद्ध और अनेक विषयों का जानने वाला होता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Puja Rules: इन 3 देवताओं को भूलकर भी न चढ़ाएं Banyan Leaf, पूजा हो सकती है निष्फल</title>
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<description><![CDATA[ हर देवी-देवता की पूजा-अर्चना के लिए कुछ नियम बताए गए हैं। धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक हर भगवान को उनकी पसंद के फल, फूल और पत्ते आदि चढ़ाए जाते हैं। जिससे कि पूजा का पूरा फल मिल सके। वहीं कुछ ऐसी चीजें भी होती हैं, जिनको कुछ खास देवताओं पर अर्पित करना वर्जित माना जाता है। ऐसा ही एक नियम बरगद के पत्ते को लेकर भी है। जिसको अनजाने में चढ़ाने से आपकी पूजा अधूरी रह सकती है।ऐसे में इसके बारे में आपको पता होना बेहद जरूरी है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि घर-परिवार की सुख-समृद्धि को बनाए रखने और अंजाने में होने वाली गलतियों से बचने के लिए बरगद के पत्ते से जुड़े क्या नियम हैं। वहीं साथ ही यह भी जानेंगे कि बरगद के पत्तों को किन देवताओं पर नहीं चढ़ाना चाहिए।इसे भी पढ़ें: जन्म की तारीख बताती है आपकी Personality, इस खास Astro-Science से जानें भविष्य के संकेतकिन देवताओं पर नहीं चढ़ाते बरगद का पत्ताभगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा में तुलसी दल का सबसे ज्यादा महत्व होता है। मान्यताओं के मुताबिक श्रीहरि को सात्विक और कोमल चीजें प्रिय हैं। वहीं बरगद के पेड़ को वैराग्य और महाकाल का प्रतीक माना जाता है। इसलिए विष्णु जी की पूजा में बरगद का पत्ता चढ़ाना वर्जित माना जाता है।वहीं मां लक्ष्मी को धन और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है। मां लक्ष्मी को खुशहाली का भी प्रतीक माना जाता है। लेकिन बरगद का पेड़ मोक्ष और संन्यास से भी जुड़ा है। इसलिए मां लक्ष्मी को भी बरगद का पत्ता नहीं अर्पित करना चाहिए।भगवान श्रीगणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि का देवता माना जाता है। गणपति की पूजा में मोदक और दूर्वा चढ़ाने का विशेष नियम होता है। इसलिए बप्पा की पूजा में कड़े या वैराग्य पैदा करने वाले पत्तों को चढ़ाने की मनाही होती है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Puja, Rules:, इन, देवताओं, को, भूलकर, भी, न, चढ़ाएं, Banyan, Leaf, पूजा, हो, सकती, है, निष्फल</media:keywords>
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<title>Horoscope 28 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष उलझन और मुसीबत वाला दिन है। स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें। समकक्ष लोगों से कड़ी चुनौती मिलेगी। शारीरिक मानसिक कष्ट देने और बढ़ाने वाला दिन है।वृषयात्रा संभव, स्थगित करना ठीक रहेगा। अपनी उपलब्धियों से खुशी होगी। अपने दम पर ही कुछ नया कर दिखाएंगे। किसी देवी प्रेरणा से विशेष कार्य की पूर्ति।मिथुनकार्यक्षेत्र बढ़ाने के प्रयास सफल होंगे। अनुकूल वातावरण से मन प्रसन्न रहेगा। धन लाभ और उपहार प्राप्ति के योग। राज सत्ता से जुड़े विशेष व्यक्ति से संपर्क।कर्कज्ञान बढ़ाने वाली पुस्तकें पढ़ेंगे और खरीदेंगे। सभा समारोह में भाग लेना पड़ेगा। साहस करें, सफलता मिलेगी। अप्रिय घटना और ऐसा ही समाचार मिल सकता है।सिंहरिश्वत का लेन-देन संभव है। सम्मेलन परिचर्चा में भाग लेंगे। शारीरिक मानसिक परेशानी वाला दिन है। अचल सम्पत्ति संबंधी विवाद सुलझेगा।कन्याआर्थिक लाभ और कोर्ट में विजय। राजनैतिक दल से घनिष्ठता बढ़ेगी। जल्दबाजी में कोई कदम न उठाएं। रोजगार के क्षेत्र में लाभ होगा।तुलाचलायमान स्थिति, भ्रमण होता रहेगा। आध्यात्म में रूचि बढ़ेगी और लाभ भी होगा। विदेशों से आयात-निर्यात करने पर लाभ उठाएंगे। आत्म केन्दि्रत रहते हुए कार्यकलाप रखेंगे।वृश्चिक कुछ भी ठीक नहीं है, घरेलू विवाद, अचानक संकट। ऋण लेने की नौबत आ सकती है। परिवार के सहयोग से मनोबल बढ़ेगा। जरूरी काम पूरे होंगे-धन लाभ भी होगा।धनुधार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में प्रगति। पारिवारिक मतभेद समझौते से सुलझेगा। स्वास्थ्य में सुधार होगा, परहेज रखें। बहुत अच्छा दिन, लाभ ही लाभ।मकर स्वास्थ्य के लिए दिन ठीक नहीं है और धन के लिए भी। दाम्पत्य जीवन में खुशी पर पुनः संचार। रक्तचाप, मधुमेह रोगी सावधान रहें। मिश्रित फल, शुभाशुभ घटनाएं।कुंभशुभाशुभ फल मिलेंगे- कभी खुशी कभी गम। चतुराई से बड़ा कठिन काम पूरा करा लेंगे। स्वजनों के साथ उत्तम समय बीतेगा। धन संबंधी मामले में चिंतन बना रहेगा।मीनदोपहर बाद अपमानजनक अशुभ समय है। नई उम्मीदें लेकर सूर्योदय होगा। स्वास्थ्य में सुधार की आशा से दिन आरंभ। आत्मबल से सफलता कदम चूमेगी। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Nirjala Ekadashi 2026: जानें Date, शुभ मुहूर्त और Puja Vidhi, क्यों है यह व्रत सबसे कठिन और फलदायी?</title>
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<description><![CDATA[ ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली निर्जला एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस दिन श्रद्धालु पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करके व्रत रखते हैं तथा भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से वर्ष भर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महाभारत के भीमसेन ने इस व्रत को रखा था। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है। लोग गरीबों को जल, वस्त्र, फल और अन्न का दान करते हैं। इस साल निर्जला एकादशी 25 जून गुरुवार को पड़ रही है।उल्लेखनीय है कि हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष में चौबीस एकादशियां होती हैं। अधिकमास या मलमास में इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। इन्हीं में से एक ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। सभी एकादशियों में से यह एकादशी सर्वोत्तम मानी गई है। यह व्रत स्त्री और पुरुष दोनों को ही करना चाहिए। यह व्रत मन को संयम सिखाता है और शरीर को नई ऊर्जा देता है। कुछ व्रती इस दिन एक भुक्त व्रत भी रखते हैं यानि सायं को दान-दर्शन के बाद फलाहार और दूध का सेवन करते हैं। इसे भी पढ़ें: Ambubachi Mela 2026: कामाख्या शक्तिपीठ का सबसे बड़ा रहस्य, जानें Ambubachi Fair में क्यों बंद हो जाता है मां का दरबारनिर्जला एकादशी पूजा विधिएकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन का त्याग किया जाता है। इसके बाद दान, पुण्य आदि कर इस व्रत का विधान पूर्ण होता है। इस दिन सर्वप्रथम भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवायः मंत्र का जाप करे। इस दिन व्रत करने वालों को चाहिए कि वह जल से कलश भरें व सफेद वस्त्र को उस पर रखें और उस पर चीनी तथा दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें। इस दिन कलश और गौ दान का विशेष महत्व है।निर्जला एकादशी व्रत विधानइस दिन पानी नहीं पिया जाता इसलिए यह व्रत अत्यधिक श्रम साध्य होने के साथ−साथ कष्ट एवं संयम साध्य भी है। इस दिन निर्जल व्रत करते हुए शेषशायी रूप में भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व है। इस एकादशी का व्रत करके यथासंभव अन्न, वस्त्र, छतरी, जूता, पंखी तथा फल आदि का दान करना चाहिए। इस दिन जल कलश का दान करने वालों को वर्ष भर की एकादशियों का फल लाभ प्राप्त हो जाता है।निर्जला एकादशी व्रत कथाएक दिन महर्षि व्यास ने पांडवों को एकादशी के व्रत का विधान तथा फल बताया। इस दिन जब वे भोजन करने के दोषों की चर्चा करने लगे तो भीमसेन ने अपनी आपत्ति प्रकट करते हुए कहा, &#039;&#039;पितामह! एकादशी का व्रत करते हुए समूचा पांडव परिवार इस दिन अन्न जल न ग्रहण करे, आपके इस आदेश का पालन मुझसे नहीं हो पाएगा। मैं तो बिना खाए रह ही नहीं सकता। अतः चौबीस एकादशियों पर निराहार रहने की कष्ट साधना से बचने के लिए मुझे कोई एक ऐसा व्रत बताइए जिसे करने पर मुझे विशेष असुविधा न हो और वह फल भी मिल जाए जो अन्य लोगों को चौबीस एकादशी व्रत करने पर मिलेगा।&#039;&#039;महर्षि व्यास जानते थे कि भीमसेन के उदर में वृक नामक अग्नि है। इसीलिए अधिक मात्रा में भोजन करने पर भी उनकी भूख शांत नहीं होती। अतः भीमसेन के इस प्रकार के भाव को समझ महर्षि व्यास ने आदेश दिया, &#039;&#039;प्रिय भीम! तुम ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को ही मात्र एक व्रत किया करो। इस व्रत में स्नान आचमन के समय पानी पीने का दोष नहीं होता। इस दिन अन्न न खाकर, जितने पानी में एक माशा जवन की स्वर्ण मुद्रा डूब जाए, ग्रहण करो। इस प्रकार यह व्रत करने से अन्य 23 एकादशियों पर अन्न खाने का दोष छूट जाएगा तथा पूर्ण एकादशियों के पुण्य का लाभ भी मिलेगा।&#039;&#039; क्योंकि भीम मात्र एक एकादशी का व्रत करने के लिए महर्षि के सामने प्रतिज्ञा कर चुके थे, इसलिए इस व्रत को करने लगे। इसी कारण इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।- शुभा दुबे ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:41 +0530</pubDate>
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<title>Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी व्रत से होते हैं सभी संकट दूर</title>
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<description><![CDATA[ 25 मई को निर्जला एकादशी व्रत है, सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर आने वाली निर्जला एकादशी अत्यंत पुण्यदायी और मंगलकारी मानी जाती है। निर्जला एकादशी आत्मशुद्धि, संयम, भक्ति और दान का दिव्य पर्व है, इस व्रत से साधक को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है तो आइए हम आपको निर्जला एकादशी व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं। जानें निर्जला एकादशी के बारे में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत को रखने से व्यक्ति के जीवन के बड़े से बड़े संकट दूर होते हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साल 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगी। इस साल निर्जला एकादशी व्रत की खास बात यह है कि इस दिन शुभ रवि योग का संयोग भी बन रहा है। पंडितों के अनुसार यह योग बेहद प्रभावशाली होता है, इसमें पूजा-पाठ करने से साधक को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं और सभी प्रकार के दोषों से राहत मिलती हैं। हालांकि, संपूर्ण सामग्रियों के साथ पूजा करना शुभ माना जाता है। इसे भी पढ़ें: Gayatri Jayanti 2026: सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, जानें कैसे यह दिव्य मंत्र बदल सकता है जीवननिर्जला एकादशी पर दान का है विशेष महत्व शास्त्रों के अनुसार निर्जला एकादशी के अवसर पर दान करने का अधिक महत्व है। दान करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी अधिक प्रसन्न होते हैं, जिससे दरिद्रता का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। अगर आप भी अपना जीवन खुशहाल चाहते हैं, तो निर्जला एकादशी के दिन इन विशेष चीजों का दान जरूर करें। इससे जीवन में आर्थिक उन्नति और शुभ फल की प्राप्ति होगी। निर्जला एकादशी के अवसर पर जल दान को महादान माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन जल से भरा घड़ा मंदिर या गरीब लोगों में दान करने से धन के मार्ग खुलते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही साधक को जीवन में किसी भी चीज की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है।अगर आप शुभ फल की प्राप्ति चाहते हैं, तो निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद फल का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन फल का दान करने से अटका हुआ धन वापस मिलता और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। अगर आप दांपत्य जीवन खुशहाल चाहते हैं, तो निर्जला एकादशी के दिन सुहागिन महिलाओं को सुहाग की सामग्री का दान करें। इसके अलावा पीले वस्त्र, चने की दाल, और हल्दी का दान भी करें। ऐसा माना जाता है कि इन चीजों का दान करने से आर्थिक तंगी की समस्या दूर होती है और दांपत्य जीवन खुशहाल होता है। जीवन में आ रहे सभी कष्टों से छुटकारा पाने के लिए एकादशी के दिन जूता या चप्पल का दान करना शुभ माना जाता है। इससे साधक के जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है और बिगड़े काम बनते हैं। साथ ही कारोबार में सफलता प्राप्त होती है।निर्जला एकादशी का शुभ मुहूर्तपंडितों के अनुसार निर्जला एकादशी पर पूजा के लिए शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 05:25 ए एम से 07:10 ए एम तक है। इस समय में पूजा कर सकते हैं, नहीं तो लाभ-उन्नति मुहूर्त 12:24 पी एम से 02:09 पी एम भी है। उस दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:05 ए एम से 04:45 ए एम और अभिजीत मुहूर्त 11:56 ए एम से 12:52 पी एम तक है। एकादशी पर राहुकाल दोपहर 02:09 पी एम से 03:53 पी एम तक रहेगा।निर्जला एकादशी का पारणशास्त्रों के अनुसार निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून शुक्रवार को होगा। पारण सुबह 05:25 ए एम से लेकर सुबह 08:13 ए एम के बीच कर सकते हैं। पारण के दिन द्वादशी का समापन रात 10:22 पी एम पर होगा। जानें पारण का सही समयनिर्जला एकादशी का व्रत द्वादशी तिथि पर विधिपूर्वक खोला जाता है। स्नान, पूजा और दान के बाद ही जल और अन्न ग्रहण करना चाहिए। हिन्दू पंचांग के अनुसार 26 जून 2026 को द्वादशी तिथि पर पारण का समय प्रातः 6 बजे से 8 बजकर 39 मिनट तक शुभ माना गया है। पारण से पूर्व भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा करें और तत्पश्चात अन्नदान करके व्रत खोलें।भक्तों के पूरे साल रहता है निर्जला एकादशी का इंतजारपंडितों के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत सभी एकादशी व्रतों में उत्तम फलदायी होता है क्योंकि जो व्यक्ति पूरे वर्ष की सभी एकादशी व्रत नहीं कर सकता है, वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत करके सभी 24 एकादशी व्रतों का पुण्य लाभ प्राप्त कर सकता है। इसके साथ ही उसे विष्णु कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। वेद व्यास जी की सलाह पर भीमसेन ने भी निर्जला एकादशी का व्रत रखा था, इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। इस एकादशी के पुण्य प्रभाव को देखकर ही पूरे वर्ष निर्जला एकादशी का इंतजार रहता है।निर्जला एकादशी पर जरूर करें ये काम, होगा लाभशास्त्रों के अनुसार निर्जला एकादशी के दिन व्रत रखें या न रखें, उस दिन पूजा के बाद आप जल का दान करें। पितरों को जल अर्पित करें। किसी प्यासे को पानी पिलाएं या घर के बाहर राहगीरों के लिए पानी की व्यवस्था करें। निर्जला एकादशी पर जल का दान करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलेगा और आप सुखी रहेंगे।निर्जला एकादशी में पूजा के दौरान करें इन सामग्रियों का दान पंडितों के अनुसार भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर, पीले पुष्प और भगवान को अर्पित करने के लिए पीले वस्त्र। इसके अलावा मौसमी फल, पंचमेवा और मिष्ठान व पीला वस्त्र, जल से भरा कलश और कुछ आम के पत्ते, नारियल, तुलसी दल और पंचामृत, पान, लौंग, सुपारी और कपूर, हल्दी, कुमकुम, अक्षत और पीला चंदन, धूप, दीपक, तिल और पूजा की मौली भी दान के लिए खास मानी जाती है। यही नहीं दान के लिए चने की दाल, गुड़, पंखा, पानी का घड़ा और पीले फल, मिठाई और लड्डू भी निर्जला एकादशी के दिन दान के लिए खास माने जाते हैं। निर्जला एकादशी का है विशेष धार्मिक महत्वशास्त्रों में निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार महाबली भीमसेन भोजन के बिना नहीं रह पाते थे, इसलिए महर्षि वेदव्यास ने उन्हें वर्ष भ ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:40 +0530</pubDate>
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<title>Gayatri Jayanti 2026: सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, जानें कैसे यह दिव्य मंत्र बदल सकता है जीवन</title>
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<description><![CDATA[ भारतीय संस्कृति में वेदों और मंत्रों का विशेष महत्व है। इन मंत्रों में गायत्री मंत्र को सबसे श्रेष्ठ और प्रभावशाली माना गया है। इसी दिव्य मंत्र की अधिष्ठात्री देवी गायत्री के प्राकट्य दिवस को गायत्री जयन्ती के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी के आसपास विशेष रूप से मनाया जाता है और इसे ज्ञान, तप, साधना तथा आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक माना जाता है। गायत्री जयन्ती केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि मानव जीवन को प्रकाशमय बनाने वाली चेतना का पर्व है।गायत्री माता को वेदमाता भी कहा जाता है, क्योंकि वे चारों वेदों का सार मानी जाती हैं। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना के समय जिस दिव्य शक्ति का आह्वान किया, वही शक्ति गायत्री के रूप में प्रकट हुई। गायत्री मंत्र ऋग्वेद में वर्णित है और इसका जाप मनुष्य के मन, बुद्धि और आत्मा को शुद्ध करने वाला माना गया है। यह मंत्र इस प्रकार है —  “ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥”इस मंत्र का अर्थ है कि हम उस परम दिव्य शक्ति का ध्यान करते हैं जो समस्त संसार को प्रकाश और ऊर्जा प्रदान करती है। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सही मार्ग की ओर प्रेरित करे। यही कारण है कि गायत्री मंत्र को केवल धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि मानव जीवन के उत्थान का मार्गदर्शक माना गया है।इसे भी पढ़ें: Jagannath Rath Yatra का रहस्य: Puri के इस मंदिर में दर्शन से क्यों मिलता है मोक्ष का वरदान?गायत्री जयन्ती के अवसर पर भक्त प्रातःकाल स्नान करके माता गायत्री की पूजा करते हैं। घरों और मंदिरों में विशेष अनुष्ठान, हवन और मंत्र जाप किए जाते हैं। अनेक लोग इस दिन उपवास भी रखते हैं। गायत्री मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह माना जाता है कि नियमित रूप से गायत्री मंत्र का उच्चारण करने से मनुष्य की बुद्धि तेज होती है और उसके जीवन में सद्बुद्धि का विकास होता है।भारतीय समाज में गायत्री मंत्र का महत्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। यह मंत्र हमें सत्य, ज्ञान और सदाचार का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है। आज के समय में जब समाज में तनाव, हिंसा और नैतिक पतन बढ़ रहा है, तब गायत्री मंत्र का संदेश अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है। यह मंत्र मनुष्य को आत्मचिंतन और आत्मसंयम की ओर प्रेरित करता है।गायत्री जयन्ती का सामाजिक महत्व भी बहुत बड़ा है। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संस्थाएँ यज्ञ, सत्संग और सेवा कार्यों का आयोजन करती हैं। गरीबों को भोजन, वस्त्र और शिक्षा सामग्री वितरित की जाती है। इससे समाज में सहयोग और मानवता की भावना मजबूत होती है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि सच्ची पूजा केवल मंदिरों में दीप जलाने से नहीं, बल्कि मानव सेवा से भी होती है।गायत्री माता को ज्ञान और विवेक की देवी माना जाता है। विद्यार्थी विशेष रूप से इस दिन गायत्री मंत्र का जाप करते हैं ताकि उन्हें शिक्षा में सफलता प्राप्त हो। आध्यात्मिक साधक इसे आत्मज्ञान प्राप्त करने का माध्यम मानते हैं। इस दिन किया गया ध्यान और साधना मन को एकाग्र करने में सहायक माना जाता है।आधुनिक जीवन की भागदौड़ में मनुष्य मानसिक तनाव और चिंता से घिरा रहता है। ऐसे समय में गायत्री मंत्र और गायत्री जयन्ती का संदेश मनुष्य को आंतरिक शांति प्रदान करता है। यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल भौतिक सुख प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति भी है।अंत में कहा जा सकता है कि गायत्री जयन्ती भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व ज्ञान, प्रकाश और सद्बुद्धि का प्रतीक है। गायत्री मंत्र मानव जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है और व्यक्ति को सत्य तथा धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को इस पर्व के महत्व को समझते हुए अपने जीवन में अच्छे विचारों और संस्कारों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए।- शुभा दुबे ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:40 +0530</pubDate>
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<title>Nirjala Ekadashi 2026: साल की सबसे बड़ी एकादशी आज, एक व्रत से मिलेगा 24 एकादशियों का महापुण्य</title>
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<description><![CDATA[ ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का विशेष महत्व होता है। इस बार निर्जला एकादशी का व्रत शुभ संयोग में पड़ रहा है। इस बार आज यानी की 24 जून 2026 को निर्जला एकादशी का व्रत किया जा रहा है। शास्त्रों में बताया गया है कि अगर कोई जातक बिना जल ग्रहण किए निर्जला एकादशी का व्रत पूरा करता है, तो उसको पूरे साल की सभी 24 एकादशियों के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है। महिलाएं परिवार की खुशहाली और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत करती हैं। तो आइए जानते हैं तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...तिथि और मुहूर्तद्रिक पंचांग के मुताबित 24 जून की शाम 06:12 मिनट से एकादशी तिथि की शुरूआत हुई है। वहीं आज यानी की 205 जून 2026 की रात 08:09 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। वहीं उदयातिथि के मुताबिक आज 25 जून 2026 को निर्जला एकादशी का व्रत किया जा रहा है।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर पूजा स्थल की अच्छे से साफ-सफाई कर लें। अब हाथ में जल और फूल लेकर निर्जला एकादशी व्रत का संकल्प लें। अब एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करें। अब पंचामृत से श्रीहरि की अभिषेक करें। फिर विष्णु भगवान को चंदन, अक्षत, पीले पुष्प, हल्दी, तुलसी दल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी और वस्त्र आदि अर्पित करें।अब पूरी श्रद्धा के साथ विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें या सुनें। घी का दीपक जलाकर आरती करें और पूजा पूरी होने के बाद जल से भरा मिट्टी का कलश दान करें। इस दिन निराहार रहकर व्रत करें और भजन-कीर्तन में समय बिताएं। शाम को फिर से भगवान विष्णु की पूजा करें और संभव हो तो रात्रि जागरण करें। फिर अगले दिन स्नान आदि के बाद पूजा आदि से निवृत्त होकर यथासंभव दान दें और ब्राह्मण को भोजन कराएं। फिर व्रत का पारण करें।मंत्र ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान।यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते।।शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्, विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम् , वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥ ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Nirjala Ekadashi Vrat Katha: क्यों है यह सबसे कठिन और श्रेष्ठ व्रत? जानें इसकी कथा और Divine Blessings</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी की 25 जून 2026 को निर्जला एकादशी का व्रत किया जा रहा है। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी, पांडव एकादशी या भीम एकादशी के नाम से जाना जाता है। पदम पुराण के मुताबिक इस एकादशी का व्रत करने से जातक व्रत के प्रभाव से सभी पापों और तापों से मुक्त हो जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को रखने से साल भर की एकादशी का पुण्य फल प्राप्त होता है। मानव कल्याण के लिए श्रीविष्णु ने अपने शरीर से पुरुषोत्तम मास की एकादशियों सहित कुल 24 एकादशियों को प्रकट किया था। तो आइए जानते हैं निर्जला एकादशी का महत्व और व्रत कथा के बारे में...महत्वनिर्जला एकादशी के व्रत को &#039;देवव्रत&#039; भी कहा जाता है। श्रीविष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए एकादशी व्रत किया जाता है। पौराणिक मान्यता के मुताबिक एकादशी में ब्रह्महत्या सहित सभी पापों का शमन करने की शक्ति होती है। इस दिन मन, वचन, कर्म द्वारा किसी भी प्रकार के पाप कर्म को करने से बचना चाहिए। एकादशी के दिन तामसिक खाने से भी दूर रहना चाहिए।निर्जला एकादशी व्रत कथापौराणिक कथा के मुताबिक एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने महर्षि वेदव्यास से निर्जला एकादशी के महत्व के बारे में पूछा था। उस दौरान पांडवों में सबसे बलशाली भीमसेन ने अपनी समस्या को बताया था। उन्होंने कहा कि उनको भूख अधिक लगती है, जिस कारण उनके लिए हर एकादशी व्रत करना संभव नहीं है। भीमसेन ने व्यास जी से ऐसा उपाय बताने के लिए कहा जिससे उनको सभी एकादशियों का पुण्य मिल सके। लेकिन उनको बार-बार व्रत भी न करना पड़े।इस पर वेदव्यास में भीमसेन को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करने को कहा। उन्होंने बताया कि इस दिन अन्न और जल नहीं ग्रहण करना होता है। अगर गलती से जल पी लिया जाए, तो व्रत का फल नहीं मिलता है। इस एकादशी व्रत का पालन सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी के सूर्योदय तक किया जाता है। द्वादशी के दिन स्नान, दान-पुण्य करने से व्रत का पारण किया जाता है। जो भी जातक इस व्रत को विधिविधान और श्रद्धा भाव से करता है, तो साल भर की 24 एकादशियों का फल प्राप्त होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।ऐसा सुनकर भीमसेन प्रसन्न हुए और उन्होंने निर्जला एकादशी का विधिपूर्वक व्रत किया। भगवान विष्णु की आराधना करने के बाद द्वादशी को दान-पुण्य करके व्रत का पारण किया। इस व्रत के प्रभाव से भीमसेन को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त हुई और उनके सभी पाप नष्ट हो गए। अंतत: भीमसेन को स्वर्ग की प्राप्ति हुई। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Shani Pradosh Vrat 2026: शनि प्रदोष व्रत पर होती है भगवान शिव की भी पूजा</title>
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<description><![CDATA[ आज शनि व्रत है, इस दिन प्रदोष काल में शिव जी की पूजा करने से सुख, वैभव और धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है। शनि प्रदोष व्रत से सभी तरह की मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं, शनिवार के दिन प्रदोष व्रत होने के कारण उसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है तो आइए हम आपको शनि प्रदोष व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं। जानें शनि प्रदोष व्रत के बारे में हिंदू धर्म में शनि प्रदोष के व्रत का विशेष महत्व होता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार शनि प्रदोष व्रत इस बार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि को रखा जाएगा। शनिवार के दिन त्रयोदशी तिथि होने के कारण इसका महत्व काफी है, जिसे शनि प्रदोष व्रत कहते हैं। इस शनि प्रदोष व्रत पर एक साथ कई योग बन रहे हैं। शनि प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की विशेष पूजा-आराधना करने का महत्व होता है। संतान प्राप्ति के लिए शनि प्रदोष के व्रत का विशेष महत्व होता है। इस व्रत को रखने से भगवान शिव और न्याय के देवता शनिदेव दोनों की कृपा मिलती है। इस दिन प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के समय भगवान शिव का पूजन किया जाता है। इसे भी पढ़ें: Badrinath Dham Update: शीतकाल में बंद होंगे कपाट, जानें क्यों Joshimath में होती है भगवान की पूजाशनि प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त 2026शास्त्रों के अनुसार शनि प्रदोष पर पूजा के मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। जो लोग शनि प्रदोष व्रत रखते हैं उनके लिए पूजा का समय शाम 7 बजकर 23 मिनट से होगा और इसका समापन रात 09 बजकर 23 मिनट पर होगा। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। शनि प्रदोष व्रत पर ऐसे करें पूजा, होगा लाभ  पंडितों के अनुसार इस व्रत में सूर्यास्त के समय (प्रदोष काल) का विशेष महत्व होता है, सूर्यास्त से लगभग डेढ़ घंटे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। प्रदोष काल में भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी जी का पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक करें। पूजा के दौरान &quot;ॐ नमः शिवाय&quot; मंत्र का जाप करें। शिव पुराण में वर्णित शनि प्रदोष व्रत कथा को सुनें या पढ़ें। पूरे दिन निराहार (उपवास) रहना सर्वोत्तम है, लेकिन यदि संभव न हो तो फलाहार या साबूदाना और ताजे फलों का सेवन शाम को पूजा के बाद किया जा सकता है। शनि प्रदोष व्रत का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर माह दो प्रदोष व्रत रखे जाते हैं। एक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर और दूसरा कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर। प्रदोष व्रत भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित होता है और ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से हर तरह की मनोकामना पूरी होती है। जब शनिवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ता है, तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। शनि प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव के साथ शनिदेव की भी विशेष कृपा मिलती है। इस व्रत को करने से कुंडली में मौजूद शनि दोष दूर होता है।शनि प्रदोष व्रत पर कैसे करें शनि देव को प्रसन्नपंडितों के अनुसार झूठ, क्रोध, अपशब्द और किसी का अपमान करने से बचना शुभ माना जाता है। मेहनत, समय की पाबंदी और बुजुर्गों का सम्मान शनि से जुड़े महत्वपूर्ण आचरण माने जाते हैं। शनि प्रदोष व्रत के दिन शनि मंदिर जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं. श्रद्धा के साथ “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें। पीपल वृक्ष के नीचे दीपदान करना भी शुभ माना जाता है। जरूरतमंदों को काले तिल, उड़द दाल, कंबल या भोजन का दान करें। एक काले कपड़े में काले उड़द, सवा किलो अनाज, दो लड्डू, कोयला व लोहे की कील लपेटकर बहते जल में प्रवाहित कर दें। शनि प्रदोष के दिन काली गाय को बूंदी के लड्डू खिलाएं। हनुमान चालीसा का पाठ करें, बजरंगबली की कृपा से रोग, दोष का नाश होता है।शनि प्रदोष से जुड़ी पौराणिक कथा भी है रोचकपौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक नगर सेठ थे। उनके घर में धन-धान्य और सभी सुख-सुविधाएं मौजूद थीं, लेकिन संतान न होने के कारण सेठ और सेठानी हमेशा दुःखी और चिंतित रहते थे। संतान की चाह में एक दिन सेठ-सेठानी ने संन्यास लेने का निश्चय किया और घर-बार छोड़कर तीर्थयात्रा पर निकल पड़े। मार्ग में उन्हें एक विशाल वन में अत्यंत तेजस्वी और ध्यानी &#039;शांडिल्य ऋषि&#039; मिले। ऋषि के आश्रम में पहुंचकर सेठ और सेठानी ने उनसे आशीर्वाद लिया। मुनि शांडिल्य ने अंतर्ध्यान होकर उनकी पीड़ा जान ली और उन्हें शनि प्रदोष व्रत करने का सुझाव दिया। मुनि ने बताया कि शनिदेव के गुरु स्वयं भगवान शिव हैं, इसलिए जो भी भक्त शनि प्रदोष के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा और व्रत करता है, उसके सभी शनि संबंधी दोष दूर हो जाते हैं। मुनिराज के आदेश के अनुसार, सेठ और सेठानी ने पूरी निष्ठा और विधि-विधान से शनि प्रदोष का व्रत और शिवजी का पूजन किया। व्रत के प्रभाव से सेठानी को एक अत्यंत सुंदर और गुणी पुत्र की प्राप्ति हुई। इसके बाद से ही जीवन में संतान सुख, धन-वैभव और शनि देव के प्रकोप से बचने के लिए शनि प्रदोष व्रत रखने की परंपरा आरंभ हुई।शनि प्रदोष के दिन शिवलिंग पर अर्पित करें ये सामग्रीशास्त्रों के अनुसार पूजा के दौरान सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद पंचामृत अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद चंदन अर्पित करें। अंत में दीप और धूप जलाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें। श्रद्धा से अर्पित की गई ये सामग्री भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होती है। इसके अलावा गन्ने का रस, शहद और संभव हो तो गाय के कच्चे दूध से भी अभिषेक किया जा सकता है। साथ में यह भी ध्यान रखें कि पूजा में उपयोग की जाने वाली सभी सामग्री शुद्ध और ताजी हो।शनि प्रदोष पर इन गलतियों से जरूर बचेंधार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर कभी भी हल्दी, सिंदूर और तुलसी के पत्ते न चढ़ाएं। व्रत के दिन सात्विकता बनाए रखें और मांस-मदिरा या तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहें। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद ही करें। शनि प्रदोष व्रत के दिन इन बातों का रखें विशेष ध्यानपंडितों के अनुसार शनि प्रदोष व्रत का दिन बह ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Shani Pradosh Vrat 2026: आज Lord Shiva और शनि देव की कृपा पाने का शुभ योग, जानें Puja Vidhi</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी की 27 जून 2026 को शनि प्रदोष व्रत किया जा रहा है। इसको भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा, भक्ति और आस्था के साथ यह व्रत करता है, उसके जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं और शनि से जुड़े दोष भी कम होते हैं। जो भी इस व्रत की शुरूआत करना चाहते हैं, वह ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से प्रदोष व्रत शुरूकर सकते हैं। तो आइए जानते हैं इस दिन की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और मंत्र आदि के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक 27 जून की सुबह 10:22 मिनट से त्रयोदशी तिथि की शुरूआत हो रही है। वहीं अगले दिन यानी की 28 जून 2026 की रात 12:43 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। प्रदोष काल का ध्यान रखते हुए 27 जून 2026 को शनि प्रदोष व्रत किया जा रहा है।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें। प्रदोष काल में भगवान शिव, मां पार्वती, भगवान गणेश और नंदी महाराज की पूजा करें। शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शुद्ध जल से अभिषेक करें। इसके बाद धतूरा, सफेद चंदन, बेलपत्र, आक के फूल, भस्म और मौसमी फल आदि अर्पित करें। पूजा के समय &#039;ऊँ नम: शिवाय&#039; मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा, रुद्राष्टकम या शिव तांडव स्त्रोत का पाठ करें।पूजा के अंत में घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए कामना करें। शनिवार होने की वजह से आप शनिदेव के सामने तिल के तेल का दीपक जला सकते हैं। दिन भर सात्विक आहार का पालन करें और अपनी श्रद्धा और क्षमता के मुताबिक व्रत करें।मंत्रॐ नमः शिवायॐ श्रां श्रीं श्रौं सः सोमाय नमःऊँ ऐं ह्रीं शिव-गौरीमय-ह्रीं ऐं ऊँऊँ नमो धनदाय स्वाहाशिवजी रुद्र मंत्र:ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥ ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Famous Temple: Tirupati Balaji Temple के 5 Divine Facts, जिनके आगे विज्ञान भी हैरान, क्या आप जानते हैं</title>
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<description><![CDATA[ देश भर में कई ऐसे फेमस मंदिर हैं, जो अपने अपने आप में कई तरह के रहस्यों को समेटे हुए है। ऐसा ही एक मंदिर आंध्र प्रदेश राज्य के चित्तूर में तिरुमला पर्वत पर बसा तिरुपति बालाजी का मंदिर है। यह भगवान वेंकटेश्वर स्वामी को समर्पित है। तिरुपति बालाजी मंदिर दुनिया के सबसे अमीर और प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थलों में से शामिल है। तिरुमला का तिरुपति बालाजी मंदिर अपनी आस्था के अलावा गहरे तथ्यों के लिए भी पूरी दुनिया में विख्यात है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं।मंदिरों में बालों का दानतिरुपति बालाजी मंदिर में दान करने की अनोखी परंपरा है। यहां पर बालों का दान किया जाता है। माना जाता है कि भगवान विष्णु के धन और समृद्धि के देवता कुबेर देव जी से उधार लिया था। भगवान विष्णु ने कुबेर देव को वचन दिया था कि कलियुग का जब अंत होगा, तब तक पूरा उधार चुका दिया जाएगा।इसे भी पढ़ें: Ambubachi Mela 2026: कामाख्या शक्तिपीठ का सबसे बड़ा रहस्य, जानें Ambubachi Fair में क्यों बंद हो जाता है मां का दरबारउसी उधार को चुकाने के लिए यहां पर आने वाले श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर बालों का दान करते हैं। तिरुपति मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा बाल का दान ऋण की किस्त का प्रतीक माना जाता है।चावल-दही प्रिय भोगदक्षिण भारत का तिरुपति बालाजी मंदिर जहां भगवान विष्णु की पूजा श्रीवेंकटेश्वर स्वामी के रूप में की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, इस स्थान को कलयुग में श्रीविष्णु का निज निवास भी माना जाता है।मंदिर में आने वाले भक्तों की माने तो यहां मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। बात जब वेंकटेश्वर स्वामी को भोग लगाने की आती है, तब प्रसाद के रूप में लड्डू या छप्पन तरह के पकवान नहीं, बल्कि दही-चावल का भोग लगाया जाता है।मंदिर की प्रतिमा से जुड़े रहस्यतिरुपति बालाजी मंदिर की मूर्ति भव्य होने के साथ काफी अहम भी है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक प्रतिमा के पीछे से हमेशा समुद्र की लहरों की आवाजें आती हैं। जिन भी श्रद्धालुओं ने इसको कान लगाकर सुनने की कोशिश की, उनको समुद्र की लहरों की आवाज सुनाई देती है।इस मंदिर में मौजूद भगवान वेंकटेश्वर को मां लक्ष्मी और भगवान श्रीहरि विष्णु दोनों के ही वस्त्र पहनाए जाते हैं। क्योंकि मूर्ति को मां लक्ष्मी और श्रीविष्णु का अवतार माना जाता है।वेंकटेश्वर स्वामी के असली बालबता दें कि तिरुपति बालाजी मंदिर में मौजूद भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति पर लगे बाल असली हैं। जोकि आपस में बिगड़ते या उलझते नहीं हैं। यह बाल हमेशा काले और चमकदार दिखाई देते हैं। इसके अलावा गर्मी के मौसम में श्री वेंकटेश्वर स्वामी की प्रतिमा को पसीना भी आता है। जोकि काफी रोचक होने के अलावा उनकी मौजूदगी का भी एहसास दिलाता है।चमत्कारी दीपकतिरुपति बालाजी मंदिर में हमेशा एक दीपक जलता रहता है। इस दीपक में कभी भी तेल या घी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। लेकिन इसके बाद भी यह दीपक जलता रहता है। यह दीपक आज भी मंदिर में आने वाले हर भक्त के लिए रहस्य बना हुआ है।पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक त्रेतायुग में स्वयं भगवान ब्रह्मा ने इस दीपक को जलाया था। तब से यह दीपक बिना किसी रुकावट के लगातार जल रहा है। जिसको अनंत काल का भी प्रतीक माना जाता है।मंदिर में रखी छड़ी का रहस्यतिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य द्वार पर दरवाजे के दाईं ओर एक छड़ी है। इस छड़ी को लेकर कई लोक मान्यताएं हैं। माना जाता है कि बाल रूप में इसी छड़ी से बालाजी की पिटाई हुई थी। जिस कारण उनकी ठोड़ी पर चोट लग गई थी। तब से लेकर आज तक हमेशा उनकी ठोड़ी पर चंदन का लेप लगाया जाता है। जिससे कि उनका घाव सही हो जाए।तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े चमत्कारों और रहस्यों का मुख्य स्त्रोत वराह पुराण, स्कंद पुराण, मंदिर के शिलालेख और सदियों से चली आ रही स्थानीय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Badrinath Dham Update: शीतकाल में बंद होंगे कपाट, जानें क्यों Joshimath में होती है भगवान की पूजा</title>
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<description><![CDATA[ हर साल सर्दियों के मौसम की शुरूआत में बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद हो जाते हैं। क्योंकि इस क्षेत्र में भारी बर्फबारी होती है और मौसम बेहद सर्द हो जाता है। कपाट बंद होने की डेट हर साल दशहरा के बाद घोषित की जाती है। यह एक अहम धार्मिक घटना होती है। जब मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं, तब भगवान बद्री विशाल की पूजा की जाती है। ऐसे में अब आपने मन में यह सवाल होगा कि बद्रीनाथ के कपाट बंद हो जाते हैं, तो बद्री विशाल की पूजा कहां होती है।प्राप्त जानकारी के मुताबिक बर्फबारी के दौरान भगवान बद्री विशाल के पूजा को स्थानातंरित कर दिया जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि कपाट बंद होने के बाद बद्री विशाल की पूजा कहां होती है।इसे भी पढ़ें: Famous Temple: Tirupati Balaji Temple के 5 Divine Facts, जिनके आगे विज्ञान भी हैरान, क्या आप जानते हैंकहां होती है बद्रीविशाल की पूजाबता दें कि जब बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो जाते हैं, तो भगवान बद्री विशाल की पूजा की व्यवस्था को उनके शीतकालीन गद्दी स्थल पर स्थानांतरित कर दी जाती है। सर्दियों में बद्री विशाल की पूजा जोशीमठ स्थित श्री नरसिंह मंदिर में की जाती है। इस दौरान बद्रीनाथ मंदिर से भगवान के प्रतिनिधि के तौर पर कुबेर जी और उद्धव जी की डोली भी जोशीमठ लाई जाती है।सदियों पुरानी इस परंपरा का पालन करते हुए मुख्य पुजारी और अन्य लोग एक विशेष धार्मिक यात्रा के तहत भगवान की गद्दी को जोशीमठ लेकर जाते हैं। वहीं इस दौरान श्रद्धालु श्री नरसिंह मंदिर में बद्री विशाल की पूजा और दर्शन कर सकते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:32 +0530</pubDate>
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<title>Jagannath Rath Yatra का रहस्य: Puri के इस मंदिर में दर्शन से क्यों मिलता है मोक्ष का वरदान?</title>
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<description><![CDATA[ ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए हर साल लाखों भक्त पहुंचते हैं। मान्यता है कि जगन्नाथ धाम के दर्शन करने मात्र से जातक को उनकी कृपा प्राप्त होती है। वहीं ओडिशा के पुरी में सिर्फ जगन्नाथ मंदिर ही नहीं बल्कि गुंडिचा मंदिर भी है। यहां पर भगवान जगन्नाथ विश्राम के लिए आते हैं, इसको उनकी मौसी का घर भी कहा जाता है। गुंडिचा मंदिर जगन्नाथ धाम से करीब 3 किमी दूर स्थित है।हर साल भव्य और विशाल रथ यात्रा के दौरान गुंडिचा मंदिर सबसे अहम पड़ाव माना जाता है। इस बार 16 जुलाई 2026 से जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरूआत होगी। मान्यता है कि रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन मात्र से ही व्यक्ति को जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।इसे भी पढ़ें: Badrinath Dham Update: शीतकाल में बंद होंगे कपाट, जानें क्यों Joshimath में होती है भगवान की पूजागुंडिचा मंदिर क्यों है खासहिंदू परंपराओं के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर सवार होकर अपनी मौसी यानी की गुंडिचा मंदिर जाते हैं। इस दौरान भगवान यहां पर 7 दिनों तक रुककर विश्राम करते हैं। इस कारण पुरी के सबसे खास मंदिरों में गुंडिचा मंदिर शामिल है। हर श्रद्धालु जगन्नाथ भगवान के दर्शन करने के बाद गुंडिचा मंदिर जरूर आते हैं।आध्यात्मिक महत्वधार्मिक आस्था के अनुसार, भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान गुंडिचा मंदिर के दर्शन करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं कई पौराणिक और स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक जो भी भक्त पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ भगवान के रथ के दर्शन करता है या फिर रस्सी खींचता है। वह व्यक्ति पुनर्जन्म के बंधन से मुक्त हो जाता है।जानें रथ यात्रा का महत्वपुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा को देश के सबसे विशाल और धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है। इस दौरान दुनियाभर से लाखों भक्त भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में शामिल होते हैं। वहीं भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ, भाई बलभद्र का तालध्वज और सुभद्र का दर्पदलन रथ विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है।जगन्नाथ रथ यात्रा इस बात का भी संदेश देती है कि भगवान सिर्फ मंदिरों तक ही सीमित नहीं हैं। बल्कि वह खुद भक्तों के बीच आकर उनको दर्शन देते हैं। यही कारण है कि गुंडिचा मंदिर और जगन्नाथ रथ यात्रा दोनों को ही भक्ति और आध्यात्म का प्रतीक माना जाता है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:37:31 +0530</pubDate>
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<title>Vedic Astrology: Rahu&#45;Ketu का कालसर्प दोष कर रहा परेशान? ये 2 चमत्कारी Gemstone दूर करेंगे हर Problem</title>
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<description><![CDATA[ वैदिक ज्योतिष में कालसर्प दोष के बारे में बताया गया है। कुंडली में यह दोष तब बनता है, जब राहु और केतु ग्रह के बीच एक ही ओर आ जाते हैं। इस स्थिति में जातक को कालसर्प दोष की समस्या से सामना करना पड़ सकता है। कालसर्प दोष होने से जातक की तरक्की में बाधा आती है, जीवन में कई तरह की परेशानियां होती हैं। रत्न शास्त्र में कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए दो तरह के रत्नों के बारे में बताया गया है।  इन रत्नों को पहनने से कालसर्प दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में आने वाली परेशानियां भी कम होती हैं। साथ ही इस रत्न को धारण करने से धन लाभ के योग बनते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन रत्नों को पहनने से कालसर्प दोष दूर होता है।इसे भी पढ़ें: Nirjala Ekadashi 2026 पर बन रहा दुर्लभ लक्ष्मी नारायण योग, इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत!गोमेदगोमेद का संबंध राहु ग्रह से माना जाता है। अगर आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है, तो इस स्थिति में इस रत्न को धारण करना शुभ माना जाता है। गोमेद पहनने से रुके हुए काम पूरे होते हैं और करियर में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। वहीं इसको धारण करने से निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होती है। गोमेद को धारण करने के लिए शनिवार का दिन शुभ माना जाता है। इसको शतभिषा, स्वाति या आद्रा नक्षत्र में चांदी या फिर अष्टधातु की अंगूठी में पहनना शुभ माना जाता है।लहसुनियालहसुनिया का संबंध केतु से है, कालसर्प दोष की परेशानी में इस रत्न को पहनना लाभकारी माना जाता है। रत्न शास्त्र के मुताबिक इस रत्न को धारण करने से बुरी नजर और मानसिक तनाव की समस्या से छुटकारा दिलाता है। इसको पहनने से कामों में सफलता मिलती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। लहसुनिया व्यापार में तरक्की के मार्ग खोलता है और इसको पहनने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन शुभ माना जाता है। इसको चांदी की अंगूठी में तर्जनी या मध्यमा उंगली में पहनना चाहिए।इन बातों का रखें ध्यानअगर आपका रत्न खंडित हो गया है, तो इसको नहीं पहनना चाहिए। इससे रत्न आर्थिक हानि या फिर मानसिक तनाव दे सकता है।वहीं रत्न को पहनकर श्मशान घाट या फिर अंतिम संस्कार में नहीं जाना चाहिए।रत्न को धारण करने से पहले इसको भगवान के चरणों में रखकर और गंगाजल से धोकर ही पहनना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 09:14:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>June 2026 Vrat&#45;Tyohar: निर्जला एकादशी से वट पूर्णिमा तक, देखिए इस महीने की पूरी Festival List</title>
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<description><![CDATA[ धार्मिक और ज्योतिष दृष्टि से जून का महीना बेहद खास रहने वाला है। क्योंकि जून के महीने में कई बड़े व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं। जिनको बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने निर्जला एकादशी, ज्येष्ठ अधिक अमावस्या, वट पूर्णिमा व्रत और आषाढ़ माह की शुरूआत आदि है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि जून के महीने में कब-कौन से व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे।तारीख - त्योहार और व्रत20 जून 2026 - जमाई षष्ठी21 जून 2026 - भानु सप्तमी22 जून 2026 - धूमावती जयन्ती, मासिक दुर्गाष्टमी23 जून 2026 - महेश नवमी25 जून 2026 - गायत्री जयन्ती, निर्जला एकादशी26 जून 2026 - निर्जला एकादशी पारण, रामलक्ष्मण द्वादशी27 जून 2026 - शनि त्रयोदशी, शनि प्रदोष व्रत29 जून 2026 - वट पूर्णिमा व्रत, कबीरदास जयन्ती, बटुक भैरवी जयन्ती, ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत30 जून 2026 - आषाढ़ प्रारम्भइसे भी पढ़ें: Vedic Astrology: Rahu-Ketu का कालसर्प दोष कर रहा परेशान? ये 2 चमत्कारी Gemstone दूर करेंगे हर Problemपरम एकादशी 2026 डेट और समयवैदिक पंचांग के मुताबिक इस बार 11 जून 2026 को परम एकादशी व्रत किया जाएगा।अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत 11 जून 2026 की रात 12:57 मिनट पर होगी।वहीं अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की समाप्ति 11 जून की रात 10:36 मिनट पर होगी।निर्जला एकादशी 2026 डेट और समयवैदिक पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत 24 जून 2026 की शाम 06:12 मिनट पर होगी। वहीं अगले दिन यानी की 25 जून की रात 08:09 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के मुताबिक 25 जून 2026 को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा।ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 डेट और समयवैदिक पंचांग के मुताबिक 29 जून 2026 को ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत किया जाएगा।वहीं पूर्णिमा तिथि की शुरूआत 29 जून 2026 की रात 03:06 मिनट पर होगी।वहीं इस तिथि की समाप्ति 30 जून की सुबह 05:26 मिनट पर होगी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 09:14:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Nirjala Ekadashi Vrat Date: निर्जला एकादशी का व्रत गृहस्थ&#45;वैष्णव कब रखेंगे? जानें Lord Vishnu की पूजा का शुभ मुहूर्त</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। सभी एकादशी में निर्जला एकादशी बेहद ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस एकादशी का व्रत रखने से साल की सभी 24 एकादशियों के समान फल प्राप्त होता है। इसके साथ ही भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।निर्जला एकादशी के दिन मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-धन सहित आदि चीजों का दान करना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा करने से धन लाभ के योग बनते हैं। इसके साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। व्रत की तिथियों को लेकर गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय के नियम अलग-अलग होते हैं। क्योंकि, गृहस्थ और वैष्णव के लिए एकादशी व्रत की तारीखें अलग-अलग हो जाती हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं वैष्णव और गृहस्थ वाले कब रखेंगे निर्जला एकादशी का व्रत।निर्जला एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्तहिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार वैष्णव और गृहस्थ दोनों निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को ही रखेंगे, क्योंकि इस बार 25 जून को सूर्योदय के समय एकादशी की तिथि मिल रही है। -ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 24 जून को शाम 06 बजकर 12 मिनट पर-ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 25 जून को रात 08 बजकर 09 मिनट पर-व्रत पारण करने का समय- 26 जून को सुबह 05 बजकर 25 मिनट से 08 बजकर 13 मिनट तकब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 04 मिनट से 04 बजकर 45 मिनट तकअभिजित मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तकविजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 43 मिनट से 03 बजकर 39 मिनट तकगोधूलि मुहूर्त - शाम 07 बजकर 21 मिनट से 07 बजकर 42 मिनट तकअमृत काल- सुबह 06 बजकर 46 मिनट से 08 बजकर 32 मिनट तकनिर्जला एकादशी पर इन बातों का रखें ध्यान - इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प जरुर लें। - इसके बाद भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करें। - इस दिन अन्न-धन सहित आदि चीजों का दान करना श्रेष्ठ माना जाता है। - भोग में तुलसी के पत्ते को जरुर शामिल करें। - किसी भी व्यक्ति से वाद-विवाद न करें। - किसी के बारे में कोई भी गलत बात न सोचें। - तामसिक भोजन का सेवन न करें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 09:14:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Nirjala, Ekadashi, Vrat, Date:, निर्जला, एकादशी, का, व्रत, गृहस्थ-वैष्णव, कब, रखेंगे, जानें, Lord, Vishnu, की, पूजा, का, शुभ, मुहूर्त</media:keywords>
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<title>Horoscope 22 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष लोकप्रियता एवं धन में वृद्धि। व्यर्थ का खर्च, बदनामी का डर। &#039;आ-बैल मुझे मार&#039; कहावत चरितार्थ न करें। अपेक्षाएं पूरी करने और कराने में सफलता।वृषमिथ्यारोप का सामना करना पड़ेगा। कार्य व्यवसाय में उल्लेखनीय सफलता। जो भी करेंगे उसमें सफलता मिलेगी। पारिवारिक तनाव बढ़ सकता है, साथ ही खर्च भी।मिथुनआज विजय दिवस मनाएंगे। दोपहर बाद अचानक संकट आएगा। महिलाओं के कारण परिवार में कटुता बढ़ेगी। सामान्य से शुभता की ओर बढ़ता हुआ दिन।कर्कचुनौतियों से दिन भरा हुआ है। जीवनशैली में परिवर्तन लाने का संकल्प लेंगे। स्वास्थ्य के लिए दिन ठीक नहीं है और धन के लिए भी। पैत्तिृक सम्पत्ति के कारण विवाद होगा।सिंहकठिन से कठिन काम पूरा करेंगे। आत्मबल से चुनौतियों का समाना करेंगे। विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट सफल होंगे। निकट अथवा दूरी की लाभदायक यात्रा।कन्यासहयोग लेने और देने का दिन है। कलहकारी दिन, अप्रिय समाचार। व्यापार बढ़ाने के प्रयास सफल होंगे। बालकों की शादी और पढाई की चिंता रहेगी।तुलास्वजनों में सराहनीय सहयोग मिलेगा। मित्रों और परिवार के लोगों के साथ अच्छा दिन बीतेगा। स्वास्थ्य, कमजोर नरम गरम रहेगा। सम्पति संबंधी विवाद का हल निकलेगा।वृश्चिक यात्रा से आर्थिक लाभ, नए सम्पर्क। जीवनसाथी के साथ मतभेद की संभावना। पदोन्नति के योग है, सहयोग भी मिलेगा। समाज में नायक की तरह सम्मानित होंगे।धनुरहस्य पूर्ण कार्यों में सफलता मिलेगी। जीवनसाथी से मन मुटाव होगा। आवास तथा व्यवसाय के मामलों में जरूरी फैसला लेंगे। मन में भय और आशंका बनी रहेगी।मकर दाम्पत्य जीवन के लिए दिन अच्छा सिद्ध होगा। संतान पक्ष से चिंता बनी रहेगी। जरूरी काम दोपहर तक होने चाहिए। चुनौतियों का निड़रता से सामना करेंगे।कुंभनुकसानदायक योग है। बड़ों का स्वास्थ्य नरम, रूकावटें भी अधिक है। धन का लेन-देन सोच समझ कर करें। प्रेम भाव से समस्याएं सुलझ सकती है।मीननया कार्य शुरू करने के लिए अच्छा दिन। रोजगार में भारी प्रतियोगिता रहेगी। सामाजिक समारोह में सम्मान प्राप्त हो सकता है। क्रोध के कारण अपयश मिलेगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 09:14:31 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 20 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 20 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 20 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशि (Aries): आज का दिन थोड़ा संभलकर चलने का है। पार्टनर के साथ किसी पुरानी बात को लेकर बहस हो सकती है। अपनी वाणी पर थोड़ा कंट्रोल रखें और बात को बढ़ाने के बजाय शांत हो जाएं। शाम तक सब ठीक हो जाएगा।वृषभ राशि (Taurus): आपके प्रेम जीवन के लिए आज का दिन बेहद शानदार है। पार्टनर के साथ आपका रिश्ता और गहरा होगा। मुमकिन है कि आज आपको उनकी तरफ से कोई खूबसूरत सरप्राइज या गिफ्ट मिले। सिंगल लोगों के लिए भी आज कोई नया मोड़ आ सकता है।मिथुन राशि (Gemini): आज आप अपने बिजी शेड्यूल से समय निकालकर पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताएंगे। कहीं बाहर डिनर या लॉन्ग ड्राइव का प्लान बन सकता है। एक-दूसरे से दिल की बातें शेयर करने के लिए आज का दिन एकदम परफेक्ट है।कर्क राशि (Cancer): लव लाइफ में थोड़ा उतार-चढ़ाव आ सकता है। पार्टनर को ऐसा महसूस हो सकता है कि आप उन्हें पूरा समय या अहमियत नहीं दे रहे हैं। उनकी नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें एक प्यारा सा कॉल या मैसेज जरूर करें।सिंह राशि (Leo): आज आपका आकर्षण सातवें आसमान पर रहेगा। यदि आप किसी को मन ही मन पसंद करते हैं, तो आज अपने दिल की बात कहने (प्रपोज करने) के लिए दिन बहुत शुभ है। शादीशुदा लोगों के जीवन में रोमांस बढ़ेगा।कन्या राशि (Virgo): काम के तनाव को अपने रिश्ते पर हावी न होने दें। हो सकता है कि काम की वजह से आप आज पार्टनर से ज्यादा बात न कर पाएं, जिससे वे थोड़ा अकेला महसूस करें। उन्हें भरोसा दिलाएं कि वे आपकी प्राथमिकता हैं।तुला राशि (Libra): प्रेम के मामले में आज भाग्य आपके साथ है। अगर पार्टनर के साथ पिछले कुछ दिनों से कोई अनबन चल रही थी, तो आज वो पूरी तरह सुलझ जाएगी। सिंगल लोगों की लाइफ में किसी खास इंसान की एंट्री हो सकती है।वृश्चिक राशि (Scorpio): आज अपनी लव लाइफ में किसी बाहरी व्यक्ति या दोस्त को दखलअंदाजी न करने दें, वरना गलतफहमियां बढ़ सकती हैं। पार्टनर के साथ जो भी बात हो, सीधे बैठकर आपस में सुलझाएं। आपसी विश्वास बनाए रखें।धनु राशि (Sagittarius): आज का दिन खुशियों और सुकून से भरा रहेगा। आप और आपके पार्टनर एक-दूसरे के बेहद करीब महसूस करेंगे। मुमकिन है कि आप दोनों अपने रिश्ते को अगले पड़ाव (शादी या सगाई) पर ले जाने के लिए कोई गंभीर चर्चा करें।मकर राशि (Capricorn): प्रेमी जोड़ों के लिए आज का दिन सामान्य लेकिन सुखद रहेगा। भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच आज पार्टनर के साथ बैठकर चाय पीना और सुकून भरी बातें करना आपको बहुत मानसिक शांति देगा।कुंभ राशि (Aquarius): आज आपकी लाइफ में पुरानी यादें या कोई पुराना क्रश दोबारा दस्तक दे सकता है। जो लोग पहले से रिलेशनशिप में हैं, उनके रिश्ते में आज एक नयापन और ताजगी देखने को मिलेगी।मीन राशि (Pisces): आज आप थोड़े भावुक मूड में रहेंगे और पार्टनर से ज्यादा वक्त और ध्यान की उम्मीद करेंगे। अगर पार्टनर काम में व्यस्त हों, तो नाराज होने के बजाय उनकी स्थिति को समझने की कोशिश करें। शाम का समय रोमांटिक रहेगा।आज का लव मंत्र (Love Tip): रिश्ते में कभी-कभी &#039;जीतने&#039; के बजाय &#039;सामने वाले को समझना&#039; ज्यादा जरूरी होता है। आज अपने पार्टनर को बिना टोके सिर्फ ध्यान से सुनें, आपका रिश्ता अपने आप मजबूत हो जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:59:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 21 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष आर्थिक मामलों में उलझे रहेंगे। मांगलिक शुभ समाचार मिलेंगे। परिस्थितियां शुभता की ओर बढ़ रही है। उधार में दिया गया धन वापस नहीं मिलेगा।वृषअप्रिय समाचार पीडि़त कर सकता है। आवश्यकता पर मित्रों से सहयोग लें। कोई खास नुकसान उठाना पड़ेगा। समस्याओं और चिंताओं से घिरे रहेंगे।मिथुनचिंतामुक्त होंगे, मानसिक शांति मिलेगी। शुभ समाचार मिलेंगे। परिश्रम के अनुसार सफलता मिलेगी। शत्रु पराजित होंगे, नए लाभदायक परिचय।कर्कस्वास्थ्य में सुधार होगा। नई योजनाएं साकार रूप लेगी। रूकावटें का सामना करना पड़ेगा। प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा। सिंहपार्टनरशिप में लाभ होगा। आपका क्रोध किए धरे पर पानी फेर देगा। अकारण अपराध में फंसाएं जाएंगे। आमोद-प्रमोद और प्रेम प्रसंगों के लिए दिन अच्छा। कन्यासमय को पहचान पर कार्य करें। उन्नति के लिए नई संभावनाओं वाला दिन। प्रतिष्ठित लोगों से सम्पर्क बढेगा। परिस्थितियां सुधरेगी, नए मित्र बनेंगे।तुलाअप्रिय घटना या समाचार से मन दुखी होगा। समस्याओं का समाधान निकलेगा। लोगों की अपेक्षाएं पूरी करेंगे। खुशी के समाचार मिलेंगे।वृश्चिक छल कपट के शिकार हो सकते हैं, सावधान रहें। लम्बी दूरी की यात्रा पर जा सकते हैं। भावनाओं पर नियंत्रण जरूरी है। धन लाभ बढ़ेगा, सुख शांति भी।धनुप्रेम प्रसंग आगे बढ़ेंगे। प्रियजनों से विवाद और कलह संभव है। धैर्य से काम लें समस्या सुलझेगी। सफलता मिलेगी, नगद उपहार भी।मकर परिवार में आपकी अनबन हो सकती है। पारिवारिक सहमति से प्रेम विवाह प्रस्ताव आगे बढ़ेगा। मनोरंजन, पिकनिक में समय बीतेगा। आमदनी और खर्च में ज्यादा अंतर नहीं है।कुंभवाणी और स्वभाव पर नियंत्रण रखें। नकद और उपहारों की प्राप्त। सामाजिक अपमान अथवा निंदा, सहनी होगी। इष्ट मित्रों के साथ दिन सुखद रहेगा।मीनप्रतियोगिता में व्यस्तता, स्वाध्याय में रूचि। विशेषज्ञ से सलाह लेकर निर्णय लें। दफ्तर में जिम्मेदारियां बढ़ेगी, मानदेय भी बढ़ेगा। आपसी सहमति से घरेलू समस्याएं सुलझेगी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:59:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Ambubachi Mela 2026: क्यों 3 दिन बंद रहते हैं Kamakhya Temple के कपाट?  कब से अंबुबाची मेला शुरु होगा?  जानें मेले से जुड़ी मान्यता</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म में 51 शक्तिपीठ अत्यंत महत्वपूर्ण और पूजनीय तीर्थस्थल है। असम के गुवाहटी में नीलांचल पर्वत पर कामाख्या देवी मंदिर है। ये मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। धार्मिक व पौराणिक मान्यता के अनुसार, यहां पर देवी सती का योनि का हिस्सा गिरा था। इस मंदिर में देवी की कोई मूर्ति नहीं है और मंदिर में योनि आकार की शिला पूजी जाती है, जिसकी स्त्री शक्ति और जीवन के स्त्रोत का प्रतीक माना जाता है। हर साल की तरह इस बार भी यहां पर अंबुबाची मेला लगने जा रहा है। माना जाता है यह मेला पूर्वी भारत के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है।इस बार अंबुबाची मेले की शुरुआत 22 जून 2026 से शुरु हो रही है। कामाख्या देवी मंदिर में मेले को लेकर खासी तैयारियां शुरु हो चुकी हैं। मंदिर प्रशासन ने बताया है कि 22 जून को रात 9 बजकर 8 मिनट 42 सेकंड पर &#039;प्रवृत्ति&#039; अनुष्ठान होगा। इसके साथ ही मेले की शुरुआत हो जाएगी। साथ ही मां कामाख्या के वार्षिक रजस्वला यानी मासिक धर्म काल की शुरुआत मानी जाती है। इस समय मंदिर प्रशासन देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं, साधु-संतों और पर्यटकों के स्वागत की तैयारियां करने में लगा है।3 दिन तक देवी कामाख्या के कपाट बंद रहेंगेमंदिर प्रसाशन के अनुसार, अनुष्ठान शुरु होते ही मंदिर के कपाट तीन दिनों के लिए बंद कर दिए जाएंगे। यह देवी के रजस्वला काल के दौरान एकांतवास का प्रतीक है। इन 3 दिनों तक कोई पूजा-पाठ नहीं होती। भक्तों को भी कामाख्या देवी के दर्शन नहीं होते हैं। 26 जून की सुबह नियमित रुप पूजा पूर्ण होने के बाद मंदिर के कपाट फिर से खोले दिए जाएंगे। इसके बाद से श्रद्धालुओं को दर्शन और देवी के पूजन की अनुमति दी जाती है। अंबुबाची मेला की मान्यताजब मंदिर के कपाट फिर से खोले जाते है, तो श्रद्धालुओं को पवित्र अंगवस्त्र प्रसाद के रुप में दिया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि अंबुबाची मेले का संबंध तंत्र साधना से भी है। इस मेले के दौरान बड़ी संख्या में तांत्रिक, साधक और संत कामाख्या धाम पहुंचकर खासतौर पर तांत्रिक साधना करते हैं और पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में की जाने वाली साधना विशेष तौर पर आध्यात्मिक फल प्रदान करती है। असल में अंबुबाची मेला केवल एक धार्मिक आयोजन भर नहीं, बल्कि ये शक्ति, आस्था और प्रकृति की सम्मान का अद्भुत संगम है। हर साल इस मेले में लाखों श्रद्धालु आते हैं और इस दिव्य मेले का हिस्सा जरुर बनते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:59:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Ambubachi, Mela, 2026:, क्यों, दिन, बंद, रहते, हैं, Kamakhya, Temple, के, कपाट, कब, से, अंबुबाची, मेला, शुरु, होगा, जानें, मेले, से, जुड़ी, मान्यता</media:keywords>
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<title>Bhanu Saptami 2026: 21 जून को इस Shubh Muhurat में करें सूर्य देव की पूजा, जानें सही Puja Vidhi</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में भानु सप्तमी का विशेष महत्व होता है। यह व्रत सूर्य देव को समर्पित होता है। वहीं हर माह की शुक्ल या कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर यह व्रत किया जाता है। मान्यता के मुताबिक इस दिन सूर्य देव की पूजा-आराधना करने, व्रत करने आदि से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि, सौभाग्य और सफलता की प्राप्ति होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस दिन का मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं।तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक 20 जून 2026 की दोपहर 02:47 मिनट से सप्तमी तिथि की शुरूआत हुई है। वहीं आज यानी की 21 जून 2026 की दोपहर 03:21 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 21 जून 2026 को भानु सप्तमी का व्रत किया जा रहा है।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर तांबे के लोटे में जल भरकर इसमें अक्षत, रोली, लाल फूल और गुड़ या मिश्री मिलाएं। अब उगले हुए सूर्य को जल अर्पित करते हुए &#039;ऊँ सूर्याय नम:&#039; मंत्र का जाप करें। सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद तीन बार सूर्य देव की परिक्रमा करें। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। वहीं इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने से जातक को पुण्य फल की प्राप्ति होती है।महत्वपौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन पहली बार सूर्य देव अपने सात घोड़ों वाले दिव्य रथ पर सवार होकर प्रकट हुए थे। उनके तेज से पृथ्वी प्रकाशमान हो गई थी। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मबल, नेतृत्व क्षमता, प्रतिष्ठा, सेहत और पिता का कारक ग्रह माना गया है। माना जाता है कि भानु सप्तमी के मौके पर सूर्य देव की पूजा-उपासना करने से जातक को रोगों से मुक्ति मिलती है। आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:59:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Famous Temple: Visakhapatnam का अनोखा मंदिर, जहां शिवलिंग जैसे दिखते हैं नरसिंह, जानें इसके पीछे की &amp;apos;Secret Story&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित एक दिव्य मंदिर सिंहाचलम मंदिर है। बता दें कि यहां पर भगवान नरसिंह की मूर्ति से सिर्फ 24 घंटे के लिए &#039;चंदन की परत&#039; हटाई जाती है। वहीं तभी यह मंदिर दर्शन के लिए खुलता है। इस मंदिर को भगवान नरसिंह का घर कहा जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको मंदिर से जुड़ी कुछ अनोखी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं। कहां है यह दिव्य धामआंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में सिंहाचलम मंदिर स्थित है। जोकि आस्था और वास्तुकला का एक अद्भुत संगम है। वराह लक्ष्मी नरसिम्हा मंदिर विशाखापट्टनम से करीब 16 किमी दूर है। जोकि सिंहाचल पर्वत की चोटी पर स्थित है। इस वजह से मंदिर को सिंहाचलम मंदिर के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण खुद प्रह्लाद ने कराया था।इसे भी पढ़ें: Mysterious Temples: Mahabharat काल से जुड़ा है Panch Kedar का रहस्य, यहां दर्शन से मिलती है पापों से मुक्तिचंदन का लेपभगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को वीरता और उग्रता का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक हिरण्यकश्यपु का वध करने के बाद भगवान नरसिंह का क्रोध बेहद बढ़ गया था। ऐसे में सभी देवताओं को उनको शांत कराने का प्रयास असफल रहा।तब भगवान नरसिंह अपने परम भक्त प्रह्लाद की प्रार्थना पर शांत हुए और सिंहाचलम पर्वत पर प्रकट हुए थे। भगवान नरसिंह के तेज और उग्रता को कम करने के लिए उनको चंदन से शीतल रखा जाता है। यही वजह है कि वह साल भर तक चंदन से ढके रहते हैं, जिससे उनका स्वरूप सौम्य बना रहे।कब खुलता है मंदिरचंदन की मोटी परत से ढके रहने की वजह से भगवान नरसिंह की मूर्ति शिवलिंग के आकार में दिखती है। वहीं सिर्फ अक्षय तृतीया के मौके पर ही चंदन हटाया जाता है। जिसको &#039;निजरूप दर्शन&#039; या &#039;चंदनोत्सव&#039; कहा जाता है। श्रद्धालु इस दिन भगवान के असली विग्रह हो देख पाते हैं।ऐसे में इस मंदिर में अक्षय तृतीया के मौके पर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। वहीं नरसिंह जयंती के मौके पर यहां श्रद्धालु पहुंचते हैं।जानें मंदिर की खासियतआमतौर पर भगवान नरसिंह के अन्य मंदिरों में आपको उनका उग्र रूप देखने को मिलेगा। लेकिन सिंहाचलम मंदिर में भगवान माता लक्ष्मी के साथ बेहद शांत और सौम्य मुद्रा में विराजमान हैं। अगर मंदिर के वास्तुकला की बात की जाए, तो इस मंदिर में चालुक्य, चोल और कलिंग शैलियों का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलेगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:59:05 +0530</pubDate>
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<title>Ambubachi Mela 2026: कामाख्या शक्तिपीठ का सबसे बड़ा रहस्य, जानें Ambubachi Fair में क्यों बंद हो जाता है मां का दरबार</title>
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<description><![CDATA[ भारत अपनी संस्कृति और कलाओं के साथ-साथ अपनी आध्यात्म और धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। खासकर हिंदू धर्म में आस्था से जुड़े कई चमत्कार देखने को मिलते हैं। यहां कई ऐसे मंदिर हैं, जो अपना रहस्यों के लिए जाने जाते हैं। ऐसा ही एक मंदिर पूर्वोत्तर भारत के असम में स्थित है, जो कामाख्या देवी मंदिर है और इसको एक दिव्य और चमत्कारी जगह कहा जाता है। हर साल यहां जून के महीने में आध्यात्म, आस्था और रहस्य का अनूठा संगम देखने को मिलता है। जिसको दुनिया &#039;अंबुबाची मेला&#039; कहती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस बार यह मेला कब शुरू होगा और इस मेले की क्या खासियत है।रहस्यों से भरा मां का दरबारअसम के गुवाहाटी शहर की नीलाचल पहाड़ियों पर मां कामाख्या का यह पावन धाम मौजूद है। हिंदू धर्म की सभी 51 शक्तिपीठों में मां कामाख्या मंदिर का सबसे खास और ऊंचा स्थान माना गया है। मंदिर की मान्यता है कि यहां बाकी मंदिरों की तरह किसी देवी की मूर्ति नहीं है।इसे भी पढ़ें: Famous Temple: Visakhapatnam का अनोखा मंदिर, जहां शिवलिंग जैसे दिखते हैं नरसिंह, जानें इसके पीछे की &#039;Secret Story&#039;मूर्ति की जगह पर यहां एक प्राकृतिक रूप से निर्मित शिला की पूजा होती है। जिसका आकार योनि के समान है। माना जाता है कि देवी सती के योनि का भाग यहां पर गिरा था, जिसके बाद यहां पर शक्तिपीठ बना था।कब लगेगा अंबुबाची मेलेअंबुबाची मेला यहां पर होने वाला एक अहम पर्व है। इस मेले से प्राचीन और गहरी धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं। माना जाता है कि हर साल मेले के दौरान मां कामाख्या अपने मासिक धर्म से गुजरती हैं। इसी वजह से देवी मां को पूरा आराम दिया जाता है और मंदिर के मुख्य कपाट को तीन दिनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया जाता है।इन तीन दिनों में मंदिर के अंदर किसी भी तरह का पूजा-पाठ, आरती या अन्य कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं होता है। वहीं चौखे दिन शुद्धिकरण अनुष्ठान करने के बाद ही मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोले जाते हैं। इस साल 22 जून 2026 से अंबुबाची मेले की शुरूआत होने जा रही है, जोकि 26 जून तक चलेगा।बता दें कि अंबुबाची मेले से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। माना जाता है कि मंदिर का पट बंद करते समय यहां पर एक सफेद कपड़ा रखा जाता है, जोकि 3 दिन बाद मंदिर खुलने पर पूरी तरह से लाल हो जाता है। वहीं प्रसाद के रूप में भक्तों को यही &#039;अंगवस्त्र&#039; यानी लाल कपड़े का टुकड़ा दिया जाता है। जिसको लोग मां कामाख्य का परम आशीर्वाद मानते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 08:59:04 +0530</pubDate>
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<title>Samudrik Shastra: आपकी Sleep Position में छिपा है Future का संकेत, सामुद्रिक शास्त्र से जानें अपना भाग्य</title>
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<description><![CDATA[ सोना हमारी लाइफस्टाइल का एक जरूरी हिस्सा होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप जिस भी अवस्था में गहरी नींद लेते हैं, वह आपके अवचेतन मन का आईना होता है। सामुद्रिक शास्त्र में माना गया है कि आपकी &#039;स्लीप पोजीशन&#039; सिर्फ आराम के लिए नहीं बल्कि आपके स्वभाव, व्यवहार और स्वास्थ्य के बारे में काफी कुछ बताता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि आपकी &#039;स्लीप पोजिशन&#039; में भविष्य के क्या संकेत छिपे होते हैं।हाथ-पैर मोड़कर सोनाअगर आप हाथ-पैरों को मोड़कर या फिर बच्चे की तरह सिमटकर सोते हैं। तो इसको भ्रूण मुद्रा कहा जाता है। यह सोने वाली सबसे आम पोजिशन मानी गई है। यह लोग बाहर से दिखने में सख्त और अंदर से संवेदनशील और भावुक होते हैं। यह लोग सुरक्षित भविष्य की तलाश में रहते हैं।इसे भी पढ़ें: Vastu Tips: Main Door पर क्यों जरूरी है स्वास्तिक? जानें इसके Vastu Secrets और चौंकाने वाले फायदे करवट लेकर सोनाअगर कोई व्यक्ति एक ओर करवट लेकर सोता है। तो सामुद्रिक शास्त्र के मुताबिक ऐसे जातक सामाजिक, मिलनसार और भरोसेमंद होते हैं। यह लोग जल्दी दूसरों पर भरोसा कर लेते हैं। लेकिन कभी-कभी धोखा खाने की भी संभावना रहती है। सेहत की दृष्टि से इसको एक अच्छी पोजीशन माना जाता है।जानिए क्या कहता है सामुद्रिक शास्त्रबता दें कि जो लोग तकिए को बाहों में भरकर पेट के बल सोते हैं। ऐसे लोगों को साहसी स्वभाव का माना जाता है। ऐसे जातकों को अपनी जिंदगी में कंट्रोल पसंद होता है और यह व्यवस्थित तरीके से रहना पसंद करते हैं। इन लोगों को अपनी आलोचना सुनना पसंद नहीं होता है।वहीं अगर कोई व्यक्ति एकदम सीधे पीठ के बल लेटकर सोता है। तो ऐसे व्यक्ति को शांत, आत्मविश्वासी और अनुशासित व्यक्तित्व वाला माना जाता है। यह लोग फालतू की बातों में अपना समय नहीं गंवाते हैं। इनको खुद से और दूसरों से बहुत ज्यादा उम्मीदें होती हैं।सहारा लेकर सोनाअगर कोई व्यक्ति सोने के दौरान किसी चीज का सहारा लेकर या फिर तकिए को गले लगाकर सोते हैं। वह लोग भावनात्मक रिश्तों को अधिक महत्व देते हैं। वहीं ऐसे लोग दिल के भोले और साफ होते हैं। यह जातक जीवन में दूसरों का सहारा ढूंढते हैं और एक सच्चे साथी या दोस्त की तलाश में रहते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:57:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Rahu Dosh: बढ़ रहा है Mental Stress और Confusion? इन अचूक उपायों से करें राहु को शांत</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र में राहु को छाया ग्रह माना जाता है। इसका प्रभाव अक्सर अप्रत्यशित और गहरा माना जाता है। वैदिक ज्योतिष में माना गया है कि जब राहु अशुभ स्थिति में होता है, तो इसकी दशा एक्टिव हो जाती है। जिससे व्यक्ति के जीवन में चल रही अचानक रुकावटें, मानसिक अस्थिरता, भ्रम और परिस्थितियों मेंअनचाहे बदलाव देखने को मिल रहा है। गौरतलब है कि राहु सिर्फ चुनौतियां नहीं देता बल्कि सही दिशा में मेहनत और समझदारी से यही ग्रह व्यक्ति को बड़ी उपलब्धियां, विदेश से संबंधित अवसर और सामाजिक पहचान दिला सकता है। यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के जीवन में परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं, तो यह राहु के प्रभाव का संकेत हो सकता है। राहु ग्रह से संबंधित संकेतों को समझना बेहद जरुरी है और सही उपाय अपनाना काफी जरुरी है।किस तरह से पहचानें कि राहु जीवन में बाधाएं बना रहा है?ज्योतिष के अनुसार, जब राहु का प्रभाव एक्टिव होता है, तो जीवन में कुछ संकेत नजर आते हैं। कई बार बिना किसी स्पष्ट वजह से मन में उलझन और भ्रम बढ़ने लगता है और निर्णय लेना कठिन हो जाता है। आपके सारे कार्य अचानक से रुक जाते हैं या अंतिम समय पर कार्य बिगड़ जाते हैं। कुछ लोगों को इस अवधि में कानूनी मामलों, विवादों या अनचाही बहस में फंसना पड़ सकता है। मानसिक तनाव, असुरक्षा की भावना और अजीब-सा डर बना रहता है। रिश्तों के मामलों में गलतफहमियां, बार-बार झगड़े या दूरी जैसी स्थिति बन सकती है। इसके अलावा, गलत संगति की ओर आकर्षण, आदतों में गिरावट या असंतुलन भी देखने को मिल सकता है। अक्सर नींद में परेशानी, बेचैनी या अजीब सपनों का अनुभाव हो सकता है।राहु के अशुभ प्रभाव को कम करने वाले मंत्र और उपायज्योतिष में राहु के प्रभाव को कम करने के लिए कई उपाय बताएं है। आप राहु की शांति के लिए मंत्र जप कर सकते हैं। नियमित रुप से श्रद्धा भाव से किया जाने वाला जप मन को शांत करता है और नकारात्मक प्रभाव को कम करता है।राहु बीज मंत्र:ॐ रां राहवे नमःराहु तांत्रिक मंत्रॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमःराहु वैदिक मंत्रॐ कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावृधः सखा। कया शचिष्ठया वृता॥इन सभी मंत्रों के जप करने से मानसिक स्थिरता लाने और राहु के दुष्प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है।राहु शांति के लिए व्रत अगर आप राहु दोष को शांत करना चाहते हैं, तो आप शनिवार के दिन व्रत रख सकते हैं। कई लोग शनिवार के दिन व्रत जरुर रखते हैं और इस दिन विशेष पूजा की जाती है। काले रंग के वस्त्र पहनें, पीपल वृक्ष के नीचे दीपक जलाना और राहु मंत्र का जप करना बेहद फलदायी हो सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस तरह की साधना से मानसिक तनाव कम होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में चल रहीं रुकावटें धीरे-धीरे खत्म हो जाती है।राहु शांति के लिए दान और रत्नअगर आप राहु को शांत करना चाहते हैं, तो आप यह प्रभावी उपाय जरुर करें। जरुरतमंदों को काले तिल, सरसों का तेल, काला कंबल, लोहा, गेहूं और नीले या काले रंग की उपयोगी वस्तुएं दान करें। इसके अतिरिक्त आप रत्नों में गोमेद पहन सकते हैं, यह राहु का प्रमुख रत्न माना गया है, लेकिन इसे बिन सही कुंडली विश्लेषण के पहनना उचित नहीं माना जाता है। ज्योतिष की सही सलाह लेने के बाद ही इस रत्न को पहनें। गोमेद पहनने से व्यक्ति के जीवन में अवसरों और स्थिरता का मार्ग खुल जाता है, यदि इसका गलत चयन किया, तो आपको उल्टे परिणाम देखने मिल सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:57:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 20 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष मान सम्मान में वृद्धि होगी। तन-मन-धन के लिए दिन अच्छा नहीं है। रोजगार के क्षेत्र में प्रभाव बढ़ेगा, धन लाभ होगा। हर दृष्टि से सतर्क रहें, धोखे का योग है।वृषव्यावसायिक साझेदारी में मनमुटाव समाप्त होगा। सतर्क रहें, भांझा-भतीजा नुकसान पहुंचा सकते है। नौकर और अधीनस्थ जनों के साथ विवाद न करें। समस्याएं सुलझाने में सफल रहेंगे।मिथुनसम्पर्क बढेंगे, प्रतिष्ठा भी देंगे। प्रयासों में उत्तम सफलता। विशेष प्रशिक्षण के लिए जा सकते हैं। आर्थिक मामलों में मूल को पकड़े रहें।कर्कबड़ों का स्वास्थ्य नरम, रूकावटें भी अधिक है। विवादों में विजय और तनावों से मुक्ति मिलेगी। अपने दम पर ही कुछ नया कर दिखाएंगे। लाभ के द्वार खुलेंगे, आमदनी जारी रहेगी।सिंहविद्यार्थियों को यथेच्छ शिक्षा के अवसर। मित्रों और रिश्तेदारों से झगड़ा संभव। सरकारी कार्यों में सफलता की खुशी। मनोरंजन में व्यस्त रहेंगे।कन्याबहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी करेंगे। चाहकर भी कार्य न होने का दुःख होगा। परिश्रम के अनुरूप काम भी होगा, नाम भी और लाभ भी होगा। शत्रु बढ़ेंगे, अशुभ समाचार भी मिलेंगे।तुलाअचानक प्रत्याशित धन लाभ। किसी बुरी आदत के कारण खर्च एवं बदनामी। सोचे हुए सभी काम पूरे होंगे। पदोन्नति सहित अभीष्ट स्थान पर तबादला।वृश्चिक जरूरी काम पूरे होने पर खुशी। आपका परिश्रम सफल रहेगा। परिस्थितियों से समझौता करेंगे, शांत चित्त रहेंगे। हानिकारक दिन है, सतर्कता बरतें।धनुभाग्यबल कम, अतः परिश्रम का उचित फल नहीं। यात्रा पर जाना पड़ सकता है। पिछले दिनों हुई हानि की भरपाई हो जाएंगी। धर्म और अध्यात्म में रूचि। मकर व्यापार विस्तार- नए व्यापार की योजना भी। वैवाहिक जीवन की खुशियां मिलेगी। आपकी सफलताएं अग्रगण्य बनाएगी। भाई बहनों में आपसी प्रेम बढ़ेगा।कुंभपति-पत्नी के बीच की गलतफहमी दूर होगी। आर्थिक स्थिति मजबूती की ओर, राजकाज में सफलता। गुप्त योजनाएं बनेगी और सफल होगी। दृढ़ संकल्प के साथ कोई नया आरंभ।मीनपूर्वार्द्ध उत्तम रहेगा, अपराहन में परेशानियां। पुण्य कार्यों में रूचि बढ़ेगी- तीर्थ यात्रा भी संभव। मनमुटाव समाप्त होकर, सहयोग बढ़ेगा। सावधान! जेब पर डाका पड सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:57:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 19 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 19 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 19 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशि (Aries): आज पार्टनर के साथ किसी बात को लेकर गलतफहमी हो सकती है। अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें और बिना सोचे-समझे कोई तीखी प्रतिक्रिया न दें। सिंगल लोगों की किसी दिलचस्प व्यक्ति से बातचीत शुरू हो सकती है।वृषभ राशि (Taurus): प्रेम जीवन के लिए आज का दिन बेहद खूबसूरत है। जीवनसाथी या पार्टनर से कोई सरप्राइज गिफ्ट मिल सकता है। लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप वाले लोगों की आज वीडियो कॉल पर लंबी और प्यारी बातचीत होगी।मिथुन राशि (Gemini): आज आप अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताएंगे। कहीं बाहर डिनर या लॉन्ग ड्राइव पर जाने का प्लान बन सकता है। पार्टनर के साथ पुरानी यादें ताजा होंगी, जिससे रिश्ता और मजबूत होगा।कर्क राशि (Cancer): लव लाइफ में थोड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। पार्टनर को ऐसा लग सकता है कि आप उन्हें नजरअंदाज कर रहे हैं। थोड़ा समय निकालें और उनकी बात को ध्यान से सुनें।सिंह राशि (Leo): आज आपका आकर्षण चरम पर रहेगा। अगर आप किसी को पसंद करते हैं, तो आज दिल की बात कहने के लिए दिन बहुत अच्छा है। शादीशुदा लोगों के बीच आपसी तालमेल और रोमांस बढ़ेगा।कन्या राशि (Virago): काम के दबाव के कारण आप पार्टनर को समय नहीं दे पाएंगे, जिससे वे थोड़े नाराज हो सकते हैं। एक छोटा सा लव मैसेज या कॉल उनके मूड को तुरंत ठीक कर सकता है। रिश्तों में ईमानदारी बनाए रखें।तुला राशि (Libra): प्रेम के मामले में आज सितारे आपके पक्ष में हैं। पार्टनर के साथ चल रहा पुराना मनमुटाव आज सुलझ जाएगा। सिंगल लोगों को आज दोस्तों के जरिए कोई नया पार्टनर मिल सकता है।वृश्चिक राशि (Scorpio): आज अपनी लव लाइफ में किसी तीसरे व्यक्ति (दोस्त या रिश्तेदार) को दखल न देने दें, अन्यथा बात बढ़ सकती है। पार्टनर की किसी बात से दिल दुखी हो सकता है, लेकिन शांति से बात करने पर मामला सुलझ जाएगा।धनु राशि (Sagittarius): आज आप और आपके पार्टनर एक-दूसरे के प्रति बहुत अधिक जुड़ाव महसूस करेंगे। भविष्य की योजनाओं (जैसे शादी या साथ रहने) को लेकर गंभीर बातचीत हो सकती है। दिन खुशियों से भरा रहेगा।मकर राशि (Capricorn): लव लाइफ में आज का दिन सामान्य रहेगा। पार्टनर के साथ बैठकर चाय की चुस्कियों के साथ बातें करना आपको मानसिक शांति देगा। प्रेमी जोड़ों के लिए दिन सुकून भरा है।कुंभ राशि (Aquarius): आज आपकी कोई पुरानी मुलाकात या क्रश दोबारा जिंदगी में दस्तक दे सकता है। जो लोग पहले से रिलेशनशिप में हैं, उनके रिश्ते में नयापन आएगा और आपसी विश्वास बढ़ेगा।मीन राशि (Pisces): आज आप काफी इमोशनल रहेंगे और पार्टनर से ज्यादा समय की उम्मीद करेंगे। पार्टनर की व्यस्तता के कारण थोड़ी निराशा हो सकती है, लेकिन शाम तक सब ठीक हो जाएगा। एक-दूसरे पर भरोसा रखें।आज का लव टिप: आज पार्टनर के साथ बहस करने के बजाय उनकी बात को समझने की कोशिश करें। एक छोटी सी मुस्कान और &#039;आई लव यू&#039; का मैसेज आपके दिन को बना सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:57:08 +0530</pubDate>
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<title>Jagannath Rath Yatra: 42 पहिए, बिना धातु का इस्तेमाल, कैसे बनते हैं ये 3 भव्य रथ?</title>
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<description><![CDATA[ भारत में व्रत, त्योहारों और संस्कृतियों का समावेश है। यहां पर हर एक त्योहार की विशेष खासियत है। विविधताओं से भरा हुआ भारत में कई सारे त्योहारों को उत्साह के साथ मनाया जाता है। ऐसा ही हर साल ओडिशा के पुरी में निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक पर्व के रुप में मानी जाती है। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर तक जरुर पहुंचती हैं। दरअसल, रथ यात्रा का मुख्य आकर्षण केवल भगवानों के दर्शन तक सीमित नहीं होता है, बल्कि इन विशाल रथों का निर्माण और उनकी अनोखी बनावट भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र माना जाता है। असल में हर साल इन तीनों रथों का निर्माण नए सिरे से किए जाता है। आइए आपको बताते हैं रथ यात्रा के तीनों रथों की अनोखी संरचना के बारे में विस्तार से।कब शुरू होता है जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए रथ का निर्माण?भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के लिए रथों का निर्माण कार्य अक्षय तृतीया से आरंभ किया जाता है, जिसे सनातन परंपरा में बेहद मंगलकारी दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस शुभ तिथि पर शुरू किए गए कार्यों में सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है। यही कारण है कि रथ निर्माण की शुरुआत इसी दिन की जाती है। इस पावन अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और हवन के साथ रथ निर्माण का शुभारंभ किया जाता है।फिर मंदिर के पुजारी पूजा-अर्चना करके मुख्य कारीगरों को माला अर्पित करते हैं। इसके बाद तीनों रथों का निर्माण एक साथ शुरु किया जाता है और करीब एक ही समय पर पूरा भी किया जाता है। इन तीनों रथों का सबसे जरुरी हिस्सा इसके पहिए होते हैं। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीनों रथों के लिए कुल 42 पहिए बनाए जाते हैं। इन पहियों को तैयार करने के बाद उन्हें रथ के मुख्य ढांचे में लगाया जाता है।अलग-अलग तरह से रथों की सजावट होतीइन रथों की सजावट काफी अलग-अलग होती है। असल में जगन्नाथ रथ यात्रा के रथों की खूबसूरती उनकी कलात्मक सजावट में छिपी होती है। ओडिशा की पारंपरिक मंदिर वास्तुकला से प्रेरित नक्काशी रथों पर की जाती है। रथ की लकड़ी पर उकेरे गए डिजाइन और रंग-बिरंगी पेंटिंग इन रथों की भव्य रुप प्रदान करते हैं। रंथों के ऊपर लगाए जाने वाले विशाल कपड़े के छत्र लाल, पीले, हरे  और काले रंगों से सजाया जाता है। इन कपड़ों पर पारंपरिक कढ़ाई की जाती है, जो रथों की सुंदरता को और अधिक बढ़ा देता है।नंदीघोष- भगवान जगन्नाथ का रथभगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष के नाम से प्रसिद्ध है। यह तीनों रथों में सबसे भव्य माना जाता है और इसकी ऊंचाई करीब 45 फीट तक होती है। इस विशाल रथ को 16 बड़े पहियों से सजाया जाता है। रथ पर मुख्य रूप से लाल और पीले रंग का आकर्षक संयोजन देखने को मिलता है। वहीं, इसे आगे बढ़ाने वाले घोड़े सफेद रंग के होते हैं, जो पवित्रता और दिव्यता का प्रतीक माने जाते हैं।लालध्वज- भगवान बलभद्र का रथभगवान बलभद्र के रथ को तालध्वज कहा जाता है। इसकी ऊंचाई भी करीब 45 फीट होती है और इसके 14 पाहिए होते हैं। इस रथ को लाल और हरे रंग से सजाया जाता है। इसके घोड़े काले रंग के होते हैं।दर्पदलन- देवी सुभद्रा का रथदेवी सुभद्रा का रथ दर्पदलन या देबदलन होता है। इसकी ऊंचाई करीब 44 फीट 6 इंच होती है। वहीं, इसमें 12 पहिए होते हैं। रथ का प्रमुख रंग लाल और काला होता है। इसे खींचने के लिए घोड़े का रंग लाल होता है।बिना कील के बनाया जाता है रथइन रथ की सबसे खास बात यह है कि इनमें किसी भी प्रकार का धातु इस्तेमाल नहीं होता है बल्कि इनमें केवल लड़कियों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके निर्माण में लकड़ी के हिस्सों को आपस में जोड़ने के लिए खांचे और लकड़ी की खूंटियों का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे इसकी सरचना और भी खूबसूरत बन जाती है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:56:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Jagannath, Rath, Yatra:, पहिए, बिना, धातु, का, इस्तेमाल, कैसे, बनते, हैं, ये, भव्य, रथ</media:keywords>
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<title>Horoscope 19 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष गुरुजनों एवं वरिष्ठ अधिकारों प्रसन्न रहेंगे। निंदा और चुगली से मानहानि होगी। नए संपर्क भविष्य के लिए अच्छे सिद्ध होंगे। दूसरों के काम में अड़ंगा न लगाएं।वृषभागदौड़ बनी रहेगी। बिना परवाह किए निश्चित पथ पर चलेंगे। विश्वासघात से मन को ठेस पहुंचेगी। अपने अंदर झांकने का प्रयास करें, सुधार की गुजांइश है।मिथुनसंतान संबंधी चिंताओं का निराकरण। चिर प्रतीक्षित शुभ संदेश मिलेगा। परमार्थ के कामों में यश। व्यावसायिक क्षेत्र में हानि संभव है।कर्कराजकीय समस्याओं का सहज ही समाधान। विद्यार्थियों के लिए दिन विशेष शुभ रहेगा। सामाजिक और धार्मिक संयुक्त यात्रा के योग हैं। परिश्रम अधिक, लाभ कम। सिंहदिन अच्छा नहीं है, सड़क पर वाहन से परेशानी भी। प्रसन्नता और विवशता दोनों में अधिक धन खर्च। व्यापारिक साझेदारी में मतभेद सुलझ जाएंगे। अचानक कलह या विवाद में फंस सकते हैं।कन्यागुप्त प्रेम प्रसंग में खटपट। पारिवारिक, सामाजिक कार्यों में व्यस्तता रहेगी। परिस्थितियां अनुकूल हो जाएगी। हाथ से निकला हुआ अवसर पुनः प्राप्त होगा।तुलाप्राथमिकता से काम निपटा लें। सजग प्रहरी के रूप में प्रशंसा होगी। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। व्यावसायिक यात्रा के योग है।वृश्चिक रोजगार व्यवसाय में अच्छी सफलता मिलेगी। राजकीय कार्य में सफलता मिलेगी। सभी व्यक्तियों का सहयोग मिलेगा। दिल, दिमाग का बोझ हल्का होगा।धनुछल कपट और विश्वासघात होगा। सामाजिक पारिवारिक परिवेश बढ़ेगा। अंध विश्वास धातक सिद्ध होगा। विवाद में विजय प्राप्त होगी।मकर कोई नई मुसीबत आ खड़ी होगी। सभा सोसाइटी में सम्मान होगा, नए परिचय भी। पार्टी में मौजमस्ती करेंगे। विशेष प्रशिक्षण के लिए जा सकते हैं।कुंभनेतृत्व में टीम को विशेष सफलता। धन लाभ और शुभ समाचार। बुद्धि कौशल से सफलता और प्रसन्नता। मौजमस्ती और आत्मविश्वास से परिपूर्ण दिन।मीनसाधनों ओर समय की सीमाओं का ध्यान रखें। पुरानी बीमारी और पुराने विवाद पुनः उभर सकते हैं। किसी राजनैतिक विशेष व्यक्ति से संबंध बढ़ेगा। किसी पर तंज न कसें अन्यथा पछताएंगे। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:29:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Horoscope, June, 2026, Aaj, Rashifal:, सभी, राशियों, का, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन, पढ़ें, आज, का, राशिफल</media:keywords>
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<title>Vastu Tips: Main Door पर क्यों जरूरी है स्वास्तिक? जानें इसके Vastu Secrets और चौंकाने वाले फायदे</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में स्वास्तिक को भगवान श्रीगणेश का प्रतीक माना जाता है। वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि स्वास्तिक को घर के मुख्य द्वार पर बनाना बेहद शुभ माना जाता है। किसी भी पूजा-पाठ या शुभ काम से पहले स्वास्तिक जरूर बनाया जाता है। स्वास्तिक के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्वास्तिक हमेशा घर के मुख्य द्वार पर ही क्यों बनाया जाता है। अगर आप इसके बारे में नहीं जानते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। हम इस आर्टिकल के जरिए बताने जा रहे हैं कि घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने के पीछे का रहस्य क्या है।स्वस्तिक बनाने से मिलने वाले लाभवास्तु शास्त्र के मुताबिक घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 18 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 18 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनधार्मिक मान्यता के मुताबिक स्वास्तिक को भगवान श्रीगणेश का स्वरूप माना जाता है। इसलिए स्वास्तिक को घर के मुख्य द्वार पर बनाना शुभ होता है। इससे घर पर कोई संकट नहीं आता है और किसी बाधा का आगमन नहीं होता है।घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने से घर में सुख-शांति और सौभाग्य का आगमन होता है।वास्तु दोष का सामना करने वाले लोगों को घर के मुख्य द्वार पर कुमकुम या हल्दी से स्वास्तिक बनाना चाहिए। इससे वास्तु दोष दूर होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने से मां लक्ष्मी का आगमन होता है। वहीं मां लक्ष्मी की कृपा से घर में धन-धान्य और सौभाग्य की कमी नहीं होती है।यहां जानिए स्वास्तिक बनाने के नियमस्वास्तिक बनाने के लिए हमेशा रोली सिंदूर या फिर हल्दी का इस्तेमाल करना चाहिए।स्वास्तिक की भुजाएं घड़ी की सुई की दिशा में मुड़ी होना चाहिए।घर के मुख्य द्वारा के दोनों तरफ सिंदूर या रोली का स्वास्तिक बनाना चाहिए।हमेशा दाहिने हाथ की अनामिका उंगली से स्वास्तिक बनाना चाहिए।वहीं स्वास्तिक के चारों कोनों के बीच में एक बिंदु जरूर बनाना चाहिए।स्वास्तिक के आसपास शुभ-लाभ लिखना चाहिए।कभी भी भूलकर भी स्वास्तिक जमीन पर नहीं बनाना चाहिए।गंदे स्थानों या फिर बाथरूम आदि पर स्वास्तिक नहीं बनाना चाहिए।स्वास्तिक को कभी भी टेढ़ा-मेढ़ा नहीं बनाना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:29:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Gyan Ganga: शिकार ने पहुंचाया राजा प्रतापभानु को विनाश के द्वार, एक गलती और सब खत्म!</title>
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<description><![CDATA[ महर्षि याज्ञवल्क्य बड़े ही प्रेम, माधुर्य और भाव-विभोर वाणी से महर्षि भारद्वाज को श्रीरामकथा का अमृतपान करा रहे हैं। मनु-शतरूपा की परम पावन तपोगाथा का वर्णन करने के उपरान्त वे एक प्राचीन इतिहास का उद्घाटन करते हैं, जिसे स्वयं भगवान शंकर ने माता पार्वती को सुनाया था। यह कथा कैकय देश के परम प्रतापी नरेश सत्यकेतु और उनके पुत्र प्रतापभानु से संबंधित है।राजा सत्यकेतु धर्मरूपी धुरी के धारक, नीति के निधान, तेज और प्रताप के पुंज, शील और सदाचार की मूर्ति तथा अपार बल के स्वामी थे। उनके शासन में धर्म की पताका सदा ऊँची फहराती थी और प्रजा सुख, शांति तथा समृद्धि का जीवन व्यतीत करती थी। ऐसे पुण्यात्मा नरेश के दो वीर पुत्र थे, जो समस्त सद्गुणों के भंडार और रणभूमि के अद्वितीय योद्धा थे—‘धरम धुरंधर नीति निधाना। तेज प्रताप सील बलवाना।। तेहि कें भए जुगल सुत बीरा। सब गुन धाम महा रनधीरा।।’ज्येष्ठ पुत्र का नाम प्रतापभानु था और कनिष्ठ पुत्र अरिमर्दन कहलाता था। अरिमर्दन की भुजाओं में सहस्र गजराजों के समान बल विद्यमान था। दोनों भ्राताओं के मध्य ऐसा निर्मल स्नेह था, जिसमें छल, कपट और स्वार्थ का लेशमात्र भी स्थान न था।इसे भी पढ़ें: Gyan Ganga: Ram Katha में याज्ञवल्क्य ने सुनाया प्रसंग, जब हजारों साल की तपस्या से मिला राम जैसा पुत्रजब राजा सत्यकेतु ने देखा कि उनका ज्येष्ठ पुत्र राज्य संचालन में पूर्णतः समर्थ हो चुका है, तब उन्होंने राजसिंहासन प्रतापभानु को सौंप दिया और स्वयं वन में जाकर भगवान की भक्ति तथा तपस्या में लीन हो गए।राजा प्रतापभानु का एक अत्यन्त विद्वान, धर्मनिष्ठ और दूरदर्शी मंत्री था, जिसका नाम धर्मरुचि था। वह सदैव राजा को वेद-विहित मार्ग, धर्ममय आचरण और लोककल्याणकारी नीतियों का उपदेश देता रहता था। परिणामस्वरूप प्रतापभानु के राज्य में दुःख, दारिद्र्य और क्लेश का नामोनिशान तक न था। प्रजा ऐसे सुख का अनुभव करती थी, मानो स्वर्ग स्वयं पृथ्वी पर अवतरित हो गया हो। धीरे-धीरे प्रतापभानु के पराक्रम और नीति के प्रभाव से समस्त पृथ्वी उनके अधीन हो गई।एक दिन राजा प्रतापभानु शिकार की अभिलाषा से सुसज्जित होकर अपने तीव्रगामी अश्व पर आरूढ़ हुए और विशाल वन की ओर प्रस्थान किया। अनेक मृगों का आखेट करने के पश्चात उनकी दृष्टि एक असाधारण, विशालकाय और अत्यन्त बलवान वराह पर पड़ी। उस वराह का शरीर पर्वत के समान विशाल और गति वायु के समान तीव्र थी।राजा ने पूर्ण एकाग्रता और पराक्रम के साथ उस पर बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी, किन्तु वह विचित्र वराह प्रत्येक बार उनकी दृष्टि से ओझल हो जाता। ऐसा प्रतीत होता था मानो कोई मायावी शक्ति उसे संरक्षण प्रदान कर रही हो। अंततः वह भागता हुआ वन की गहनतम गहराइयों में स्थित एक अंधकारमयी गुफा में प्रवेश कर गया।प्रतापभानु ने गुफा के मुख पर पहुँचकर भीतर प्रवेश करने का विचार किया, किन्तु विवेक ने उन्हें रोक लिया। अज्ञात गुफा में प्रवेश करना उन्हें उचित न लगा। अतः उन्होंने लौटने का निश्चय किया।किन्तु तभी उन्हें एक नई समस्या का आभास हुआ। वराह का पीछा करते-करते वे वन के ऐसे निर्जन और अपरिचित भाग में पहुँच चुके थे, जहाँ से अपने राज्य की दिशा का कोई ज्ञान नहीं हो रहा था। दिन ढलने को था, शरीर थकान से चूर था और प्यास कण्ठ को दग्ध कर रही थी। वे कभी जल की खोज में इधर-उधर भटकते, कभी किसी वृक्ष की छाया में क्षणभर विश्राम करते और फिर आगे बढ़ जाते।इसी प्रकार भटकते-भटकते उनकी दृष्टि एक आश्रम पर पड़ी। आश्रम को देखकर उनके हृदय में आशा का संचार हुआ, किन्तु वे यह नहीं जानते थे कि वह किसी महात्मा का आश्रम नहीं, अपितु एक कपटी और प्रतिशोधाग्नि से दग्ध व्यक्ति का निवास था।वास्तव में वह कोई मुनि नहीं, बल्कि एक पराजित राजा था। कभी उसका प्रतापभानु से भीषण युद्ध हुआ था। उस युद्ध में स्वयं को पराजित होता देखकर वह अपनी सेना और राज्य त्यागकर प्राणरक्षा हेतु वन में भाग आया था और तब से मुनिवेष धारण कर वहीं निवास कर रहा था—‘फिरत बिपिन आश्रम एक देखा। तहँ बस नृपति कपट पुनिबेषा।। जासु देस नृप लीन्ह छड़ाई। समर सेन तजि गयउ पराई।।’ज्यों ही उस कपटी मुनि की दृष्टि प्रतापभानु पर पड़ी, वह उन्हें तत्काल पहचान गया। उसके हृदय में वर्षों से दबी प्रतिशोध की ज्वाला प्रचंड होकर भड़क उठी। वह मन ही मन हर्षित होकर सोचने लगा—“अहा! आज तो मेरा परम शत्रु स्वयं चलकर मेरे द्वार पर आ पहुँचा है। विधाता ने प्रतिशोध लेने का यह दुर्लभ अवसर मुझे प्रदान किया है।”यद्यपि उसके हृदय में वैराग्नि धधक रही थी, तथापि वह प्रत्यक्ष युद्ध का साहस नहीं कर सका। वह भली-भाँति जानता था कि प्रतापभानु का प्रताप और पराक्रम साधारण नहीं है। बाहर से वह तपस्वी का वेश धारण किए हुए था, किन्तु भीतर उसका मन विष से भरे कलुषित पात्र के समान कड़वा था। इसलिए उसने विचार किया कि जहाँ बल असफल हो जाए, वहाँ छल अपना कार्य सिद्ध कर सकता है।यह निश्चय कर उसने अपनी कुटिल बुद्धि का जाल बुनना आरम्भ किया। स्वयं को त्रिकालदर्शी और अंतर्यामी सिद्ध करते हुए वह राजा प्रतापभानु के समीप पहुँचा और उनसे कुछ ऐसी रहस्यमयी बातें कहने लगा, जिन्हें सुनकर राजा विस्मित रह गए।अब वह कपटी मुनि राजा से क्या कहता है, और किस प्रकार अपने छल-जाल में फँसाकर उनके पतन की भूमिका रचता है—यह जानेंगे अगले अंक में।जय श्रीराम। - सुखी भारती ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:29:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Mysterious Temples: Mahabharat काल से जुड़ा है Panch Kedar का रहस्य, यहां दर्शन से मिलती है पापों से मुक्ति</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में पंचकेदार की तीर्थयात्रा को बेहद पवित्र माना जाता है। पंच केदार की यात्रा को मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि का एक आध्यात्मिक मार्ग माना गया है। पंच केदार उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित है। पंच केदार की उत्पत्ति महाभारत काल की एक कथा से जुड़ी है। पौराणिक कथा के मुताबिक कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद पापों से छुटकारा पाने के लिए पांडव हिमालय पहुंचे। लेकिन भगवान शिव पांडवों से नाराज थे। जिस कारण महादेव पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे। इसलिए भगवान शिव बैल का रूप धारण करके धरती में लुप्त हो गए।धार्मिक मान्यता है कि मुताबिक जब भगवान शिव बैल रूप में धरती में समाए तो उनके शरीर के अलग-अलग हिस्से हिमालय के पांच अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए। इन्हीं 5 स्थानों पर पांडवों द्वारा भगवान शिव की पूजा की गई। जिसको पंच केदार के नाम से जाना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको पंच केदार और इसके महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Somnath Mandir की अद्भुत कहानी: जब चंद्रमा को मिला श्राप, Lord Shiva ने ऐसे की रक्षा केदारनाथपंचकेदार में केदारनाथ मंदिर सबसे प्रमुख माना जाता है। यहां पर बैल रूपी अवतार की पीठ का हिस्सा प्रकट हुआ था। केदारनाथ को आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है और हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ मंदिर आते हैं। यहां पर भगवान शिव की पूजा करने से जातक को पापों से मुक्ति मिलती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है।तुंगनाथधार्मिक मान्यता के अनुसार तुंगनाथ में भगवान शिव का हाथ प्रकट हुआ था। यह मंदिर सबसे ऊंचाई पर स्थित है। पांडवों ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तुंगनाथ मंदिर का निर्माण किया जाता है। माना जाता है कि यहां पर भगवान शिव के दर्शन से व्यक्ति को मन की शांति मिलती है।रुद्रनाथरुद्रनाथ में भगवान शंकर का मुख प्रकट हुआ था। यहां पर भगवान शिव की पूजा नीलकंठ के रूप में की जाती है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक इस मंदिर में साधना करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।मध्यमहेश्वरमध्यमहेश्वर में भगवान शिव की नाभि प्रकट हुई थी। पांडवों ने महादेव की आराधना की थी। इसको शांति और मोक्ष का केंद्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक जो भी भक्त मध्यमहेश्वर मंदिर में स्थित भगवान शिव की पूजा करता है। उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करता है।कल्पेश्वरबता दें कि जहां पर कल्पेश्वर मंदिर है, उसी स्थान पर भगवान शिव की जटाएं प्रकट हुई थीं। कल्पेश्वर एक मात्र ऐसा केदार है, जिसके कपाट भक्तों के लिए पूरे साल खुले रहते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:29:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Wedding Shubh Muhurat: जून में शादी के लिए सिर्फ 9 शुभ तारीखें, देखें पूरी Dates List</title>
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<description><![CDATA[ आखिकार अधिकमास का महीना खत्म हो चुका है। इसको मलमास भी कहा जाता है, जो हर तीन साल में एक  बार आता है और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। अब अधिकमास का महीना खत्म हो चुका है, अब सभी शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। मलमास में कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है बस ईश्वर भक्ति व दान-पुण्य के कार्य किए जाते हैं। कब से शुरुआत हो रही है शुभ कार्यों की?धार्मिक मान्यता के अनुसार, अधिकमास या पुरुषोत्तम मास में शादी-विवाह जैसे बड़े मांगलिक कार्यों पर रोक लगाई जाती है। ज्योतिषी भी मानते हैं कि यह पूरा महीना भगवान विष्णु की भक्ति के लिए समर्पित है। इस दौरान पूजा-पाठ और दान-पुण्य के कार्य करना शुभ माना जाता है, लेकिन विवाह, गृह प्रवेश या मुंडन के कार्यों पर रोक लग जाती है।अधिकमास की समाप्ति 15 जून को हो चुकी है। इसके समाप्त होते ही सभी मंगल कार्य फिर से शुरु किए जा रहे हैं और चारों तरफ उत्सव का माहौल बना हुआ है।19 जून से होंगी शादियांअधिकमास खत्म होते ही 19 जून से शादियों का सीजन शुरु हो रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार विवाह के बंधन के लिए परिवारों को बहुत ही सीमित समय मिल रहा है। इस बार 19 जून से शुरु होकर महीने के अखिरी तक कुल 9 बहुत ही शुभ मुहूर्त विवाह के बन रहे हैं। जिन परिवारों में शादी होनी है, उन्हें इसी कम समय में अपने सारे आयोजन निपटाने होंगे।जानें शादी-विवाह का मुहूर्तअगर आप जून में शादी करने की योजना बना रहे हैं, तो ये तारीखें बेहद शुभ मानी जा रही है- 19, 20, 23, 24, 25, 26, 27, 28 और 29 जून। इन शुभ तिथियों में फेरे लेना दूल्हा-दुल्हन के वैवाहिक जीवन के लिए काफी सुखद और मंगलकारी रहने वाला है। इसके बाद 4 महीने बाद होगी शादियांजून के बाद जुलाई में भी 12 तारीख तक ही शादी के मुहर्त है और इस वेडिंग सीजन के बाद, शुभ कार्यों पर एक बार फिर से 4 महीने का लंबा ब्रेक लग जाएगा। 25 जुलाई से चातुर्मास की शुरुआत हो रही है, जो 21 नवंबर तक चलेगा।धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चार महीनों में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और पाताल लोक में विश्राम करते हैं। क्योंकि सृष्टि के कर्ता-धर्ता इस अवधि में विश्राम करते हैं, इसलिए इस अवधि में शादी, मुंडन या नया घर नहीं खरीदा जाता।  ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:42:59 +0530</pubDate>
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<title>Astrology Tips: अमावस्या पर क्यों है बाल धोने की मनाही? जानें क्या कहता है हमारा Dharma Shastra</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में किसी भी अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। वहीं साल में 12 अमावस्या तिथियां होती हैं और सभी तिथियों का अपना अलग-अलग महत्व होता है। माना जाता है कि अमावस्या तिथि पर पितरों की शांति के लिए कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं। जिससे जातक के जीवन में शुभता बनी रहती है और पितृ दोषों से मुक्ति मिलती है। अमावस्या तिथि को लेकर कई नियम भी बनाए गए हैं। माना जाता है कि अगर आप इन नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो आपके जीवन में कई समस्याएं भी आ सकती हैं।अमावस्या पर इन नियमों का पालन न करने से पितृ दोष लग सकता है। वहीं इस तिथि को बाल धोने को लेकर भी कुछ नियम बनाए गए हैं। जिनका पालन जरूरी माना जाता है। मान्यता है कि किसी भी अमावस्या तिथि पर सुहागिन महिलाओं को बाल नहीं धोना चाहिए और इस दिन न ही बालों में तेल लगाना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या सच में अमावस्या तिथि को बाल धोना शुभ नहीं माना जाता है।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 16 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 16 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनअमावस्या पर बाल धोना अशुभधार्मिक मान्यता है कि कभी भी अमावस्या तिथि को बाल नहीं धोना चाहिए। इस दिन बाल धोना शुभ नहीं माना जाता है। अगर महिलाएं अमावस्या के दिन बाल धोती हैं, तो घर में कलह-कलेश होता है और धन हानि के भी योग बनते हैं। पैसा गलत जगह पर खर्च होने लगता है। वहीं अमावस्या को यदि कोई विवाहिता बाल धोती है, तो उसके मायके में समस्याएं आ सकती हैं। बाल धोने को लेकर फैले इस भ्रम की असली वजह बालों का टूटना माना जाता है। इसदिन बाल धोने से ज्यादा अशुभ बालों का टूटना माना जाता है।जानिए क्या कहते हैं शास्त्रशास्त्रों की बात की जाए, तो बाल धोने के कुछ नियमों में से एक नियम यह भी है कि अमावस्या तिथि को बाल नहीं धोना चाहिए। सुहागिन महिलाओं को खास तौर पर इस दिन बाल नहीं धोने चाहिए। क्योंकि बाल धोने के बाद सिंदूर लगाया जाता है और अमावस्या तिथि को बालों में सिंदूर भी नहीं लगाया जाता है। वहीं सुहागिन महिलाओं को अन्य कुछ दिनों में भी बाल धोने की मनाही होती है। जैसे गुरुवार, मंगलवार और शनिवार को बाल नहीं धोना चाहिए।यह प्रथा प्राचीन समय से चली आ रही है। जब लोग नदियों में स्नान करते थे। अमावस्या तिथि पर बाल धोने पर पानी गंदा हो जाता था, इसलिए लोग नदियों में स्नान के लिए जाते थे, तो उनको कोई समस्या न हो। इस कारण ऐसे नियम बनाए गए थे। आज भी अमावस्या तिथि पर उन्हीं नियमों का पालन किया जाता है।क्या गंदे बाल धो सकते हैंमाना जाता है कि अगर आपको पूजा से पहले बाल धोए बिना शुद्धिकरण नहीं लगता है। तो इस स्थिति में आप अमावस्या से एक दिन पहले बाल धो लें। वहीं अगर आपको लगता है कि सिर से पूरा स्नान किए बिना शुद्धि हुई है, तो आप इस दिन स्नान करने के बाद बाल न धोएं और बालों में सिर्फ पानी छिड़क लें। अगर आप किसी कारण इस दिन बालों को धो रही हैं, तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे अमावस्या को पूरे बालों को खोलकर नहीं धोना चाहिए बल्कि सिर्फ सिर पर पानी डालकर हल्का सा साफ करें, इससे आप शुद्ध हो जाएंगी और मान्यताओं का पालन भी होगा। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:42:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 18 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष लाभकारी दिन है, संपर्क बढ़ाएं। हाथ लगने वाली सफलता फिसल जाएगी। कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। भोजन में भी सावधानी बरतें।वृषहर तरह से जोखिम से दूर रहें। आज का पूर्वाध अच्छा है। उच्चाधिकारी मेहरबान रहेंगे। कार्यपद्धति में परिवर्तन होगा।मिथुनमहत्वपूर्ण व्यक्ति का सहयोग मिलेगा। अप्रिय घटना और ऐसा ही समाचार मिल सकता है। कलह योग है, सावधान रहें। पुराने और नए परिचय से लाभ मिलेंगे।कर्कआपकी कर्म कुशलता से धन और यश मिलेंगे। पदोन्नति होगी, कार्यक्षेत्र में यश। कानूनी चक्करों में उलझ सकते हैं। कार्य क्षेत्र में खास सफलता।सिंहलाभ हानि धन का आवागमन बराबर। अचानक विषम परिस्थितियां पैदा होगी। अधिकारों में वृद्धि की संभावना है। वातावरण में सुधार होगा, तालमेल से समस्या सुलझेगी। कन्याआर्थिक स्थिति में सुधार। अपनी फिटनेस पर ज्यादा ध्यान देंगे। पारिवारिक समस्याओं का निदान हो जाएगा। जीवनसाथी से विवाद खत्म होगा।तुलाउदासीनता दूर होगी, ऊर्जावान अनुभव करेंगे। बौद्धिक कार्यों में सफलता और यश। आज आपकी नई पहचान बन सकती है। पुराने मित्र से नाता टूट सकता है।वृश्चिक धार्मिक कार्यों में रूचि और उन्नति के अवसर। आर्थिक पक्ष कमजोर, विवाद भी संभव। जबान से निकला हुआ शब्द किसी को गहरा घाव देगा। काम बनने में बाधाएं आएगी।धनुजरूरी कार्य पूरा करने और कराने में सफल रहेंगे। जरूरी काम अटकने से निराश रहेंगे। संघर्ष भी व्यर्थ जा सकता है। अदालती मामलों में विजय मिलेगी।मकर नियमित आय के अलावा अन्य साधनों से धनागम। सरकारी दफ्तरों में अटके हुए काम बनेंगे। चहुं मुखी उन्नति और सफलता देने वाला दिन। सामान्य से शुभता की ओर बढ़ता दिन।कुंभसभा समारोह में उत्साह से भाग लेंगे। सामाजिक दृष्टि से व्यक्तित्व निखरेगा। अनिश्चितता तथा परेशानी का अनुभव। किसी खास आदमी से लाभदायक मुलाकात।मीननौकरी व्यवसाय के संदर्भ में खास फैसला। अनुकूल परिस्थितियां, सुखानुभूति। स्वास्थ्य में सुधार होगा। पारिवारिक मेल मिलाप का विशेष आयोजन। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:42:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Nirjala Ekadashi 2026 पर बन रहा दुर्लभ लक्ष्मी नारायण योग, इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत!</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म में निर्जला एकादशी को सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती है। इस बार 25 जून, गुरुवार को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस एकादशी का व्रत रखने से साल की सभी 24 एकादशियों के समान फल प्राप्त होता है। इस बार निर्जला एकादशी के दिन दुर्लभ संयोग बन रहा है, इस साल निर्जला एकादशी पर लक्ष्मी नारायण राजयोग भी बना रहा है। ज्योतिष के मुताबिक, बुध और शुक्र जब एक ही राशि या भाव में होते हैं तो लक्ष्मी नारायण राजयोग बनता है। इस बार निर्जला एकादशी पर बुध-शुक्र कर्क राशि में एक साथ बैठकर ये राजयोग बनाएंगे। आइए आपको बताते हैं यह दुर्लभ संयोग किन राशियों के लिए लाभदायक होने वाला है।वृषभ राशिवृषभ राशि के जातक के लिए यह संयोग बेहद लाभदायक है। काफी समय से अटके हुए पूरे कार्य पूर्ण होंगे। बिजनेस करने वाले लोगों को नई योजनाओं का फायदा मिलेगा। जिन लोगों की नई दुकान या स्टार्टअप आदि शुरु करने वाले उनके लिए यह समय काफी अच्छा है। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने वाली है और इसके साथ ही वैवाहिक जीवन में भी अनुकूल परिणाम मिलेगा।कर्क राशिनिर्जला एकादशी पर लक्ष्मी नारायण राजयोग आपकी राशि में बनेगा, इसलिए यह योग आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। आपकी उन्नति और आर्थिक रुप से आपका स्थिति मजबूत होगी। करियर में आगे बढ़ने के लिए नए अवसर प्राप्त होंगे। समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ेगी। किसी भी अच्छी खबर या उपलब्धि से आपका मन खुश रहने वाला है।तुला राशितुला राशि के जातकों के लिए लक्ष्मी नारायण राजयोग बेहद फायदेमंद रहने वाला है। लंबे समय से चली रही सभी परेशनियां दूर होंगी। नौकरी-बिजनेस में किए जाने वाले प्रयास अच्छे परिणाम देने वाले हैं। आत्मविश्वास में वृद्धि होने वाली है। आर्थिक स्थिति में काफी सुधार होने वाला है। पारिवारिक रिश्तों में सकारात्मक बदलाव आएगा। मानसिक दबाव कम होने से मन संतलुत और शांत रहेगा। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। किसी भी प्रकार की बीमारी व रोग से आपको मुक्ति मिलेगी। लक्ष्मी नारायण योग शुभ क्यों माना जाता?ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध-शुक्र के मिलन स बना लक्ष्मी नारायण योग सुख-समृद्धि और सफलता का प्रतीक माना जाता है। इस योग से व्यक्ति को धन लाभ, भौतिक सुख और सामाजिक प्रतिष्ठा दिलाने में सहायक समझा जाता है। निर्जला एकादशी पर बन रहा यह संयोग बेहद ही शुभ और दुर्लभ है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:42:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 18 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 18 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 18 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं। मेषआज पार्टनर के साथ दिल की बात साझा करने का सही समय है। अगर पिछले कुछ दिनों से आपके बीच कोई दूरी थी, तो आज खुलकर की गई बातचीत उस गलतफहमी को हमेशा के लिए दूर कर देगी। सिंगल लोग आज किसी पुराने परिचित की तरफ आकर्षित हो सकते हैं।वृषभप्रेम के मोर्चे पर आज का दिन खुशियों से भरा रहेगा। आपके पार्टनर का झुकाव आपकी तरफ ज्यादा रहेगा और वे आपकी हर छोटी इच्छा का सम्मान करेंगे। शादीशुदा जोड़ों के बीच आज एक नई और खूबसूरत केमिस्ट्री देखने को मिलेगी।मिथुनभागदौड़ भरी जिंदगी और काम के दबाव के कारण आज आप चाहकर भी साथी को समय नहीं दे पाएंगे। इससे उनके मन में थोड़ी शिकायत रह सकती है। शाम को एक छोटा सा प्यार भरा मैसेज या कॉल स्थिति को बिगड़ने से बचा लेगा।कर्कआज आपकी लव लाइफ में रोमांस का तड़का लगने वाला है। आप अपने पार्टनर के साथ किसी खूबसूरत डिनर डेट या लॉन्ग ड्राइव पर जाने की योजना बना सकते हैं। जो लोग किसी को प्रपोज करने की सोच रहे हैं, उनके लिए आज स्थितियां पक्ष में हैं।सिंहआज बातचीत के दौरान अपनी वाणी और लहजे को थोड़ा नरम रखें। जरा सी कड़वाहट या पुराना मुद्दा उखाड़ने से हंसता-खेलता माहौल तनाव में बदल सकता है। साथी की बात को भी उतनी ही तवज्जो दें जितनी आप अपनी बात को देते हैं।कन्यारिश्तों में मैच्योरिटी (समझदारी) आज आपके बंधन को और मजबूत बनाएगी। आप दोनों एक-दूसरे के करियर और फैसलों में पूरा सहयोग करेंगे। अविवाहित लोगों के घर में आज विवाह की चर्चा शुरू होने के प्रबल संकेत हैं।तुलाआज का दिन खट्टी-मीठी नोक-झोंक के साथ बीतेगा। पार्टनर के साथ किसी बात पर हल्की अनबन हो सकती है, लेकिन आपकी सूझबूझ और मजाकिया अंदाज उस गुस्से को तुरंत प्यार में बदल देगा। रिश्ते में नयापन महसूस होगा।वृश्चिकअगर लव लाइफ में लंबे समय से कोई उलझन चल रही थी, तो आज उसका सुखद अंत होगा। आप और आपके पार्टनर पुरानी सभी कड़वाहटों को भुलाकर एक नई शुरुआत करने के मूड में रहेंगे। एक-दूसरे पर विश्वास बढ़ेगा।धनुआज साथी के बदलते मूड के कारण आपको थोड़ा धैर्य रखना पड़ सकता है। वे किसी बाहरी तनाव की वजह से चिड़चिड़े हो सकते हैं, इसलिए उनकी बातों को दिल से लगाने के बजाय उन्हें भावनात्मक रूप से संभालने की कोशिश करें।मकरमकर राशि के जो जातक सिंगल हैं, उनके जीवन में आज किसी बेहद दिलचस्प इंसान की एंट्री हो सकती है। वहीं, जो लोग पहले से रिलेशनशिप में हैं, वे आज अपने पार्टनर के साथ मिलकर भविष्य की खूबसूरत योजनाओं पर चर्चा करेंगे।कुंभआज अपने रिश्ते को किसी तीसरे व्यक्ति की नजर या दखलअंदाजी से बचाकर रखें। सोशल मीडिया या किसी बाहरी दोस्त की बातें आपके बीच अविश्वास पैदा कर सकती हैं। पार्टनर से जुड़ी किसी भी बात पर दूसरों के बजाय सीधे उनसे बात करें।मीनआज आपके प्रेम जीवन में एक नया ठहराव और सुकून देखने को मिलेगा। जो लोग लंबे समय से एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं, वे आज अपने रिश्ते को शादी के अगले पड़ाव पर ले जाने का मन बना सकते हैं। विवाहित जातकों के लिए दिन बेहद शांतिपूर्ण रहेगा।आज का लव मंत्र: &quot;प्रेम में अधिकार जताने से बेहतर है एक-दूसरे को सम्मान और स्पेस देना।&quot; ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:42:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Pradyumn Vinayak Chaturthi 2026: प्रद्युम्न चतुर्थी व्रत से घर में आती है सुख&#45;समृद्धि, होता है लाभ</title>
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<description><![CDATA[ आज प्रद्युम्न चतुर्थी है, हिन्दू धर्म में प्रद्युम्न चतुर्थी का खास महत्व है। भगवान गणेश को समर्पित प्रद्युम्न चतुर्थी का व्रत रखने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं और मानसिक शांति मिलती है तो आइए हम आपको प्रद्युम्न चतुर्थी व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं।जानें प्रद्युम्न चतुर्थी के बारे में हिंदू धर्म में प्रत्येक चतुर्थी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। यह तिथि भगवान गणेश की पूजा और व्रत के लिए समर्पित होती है। चतुर्थी के दिन गणपति बप्पा की श्रद्धापूर्वक आराधना करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। जून माह में पड़ने वाली चतुर्थी को प्रद्युम्न चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। &#039;प्रद्युम्न&#039; का अर्थ अत्यंत तेजस्वी और ऊर्जा से भरपूर होता है। इस दिन भगवान गणेश की आराधना करने से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक सोच बढ़ती है और क्रोध, भ्रम तथा नकारात्मक भावनाओं पर नियंत्रण पाने की शक्ति मिलती है। इस बार प्रद्युम्न चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग और गुरु पुष्य योग जैसे शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ गया है।इसे भी पढ़ें: Somnath Mandir की अद्भुत कहानी: जब चंद्रमा को मिला श्राप, Lord Shiva ने ऐसे की रक्षाजानें प्रद्युम्न चतुर्थी व्रत का शुभ मुहूर्त हिन्दू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष प्रद्युम्न चतुर्थी तिथि का आरंभ 17 जून की रात 9 बजकर 38 मिनट से होगा। इसका समापन 18 जून की शाम 6 बजकर 58 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए प्रद्युम्न चतुर्थी का व्रत 18 जून, गुरुवार को रखा जाएगा।प्रद्युम्न चतुर्थी व्रत ऐसे करें भगवान गणेश की पूजापंडितों के अनुसार प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद मंदिर में लाल या पीला व्रत बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और दीपक जलाएं। भगवान गणेश को लाल चंदन का तिलक लगाएं, अक्षत अर्पित करें और उनकी प्रिय दूर्वा जरूर चढ़ाएं। इसके बाद मोदक, लड्डू या अन्य मिठाइयों का भोग लगाएं। पूजा के दौरान श्रद्धापूर्वक &#039;ॐ गं गणपतये नमः&#039; मंत्र का जाप करें और व्रत कथा का पाठ करें। अंत में कपूर या दीपक से गणेश जी की आरती उतारें और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रद्युम्न चतुर्थी पर विधि-विधान से पूजा करने वाले भक्तों पर भगवान गणेश की विशेष कृपा बनी रहती है। इससे जीवन के विघ्न दूर होते हैं, मानसिक शांति प्राप्त होती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। शास्त्रों के अनुसार, गणेश जी का मुख्य पूजन दोपहर (मध्याह्न काल) के समय किया जाना चाहिए। पूजा घर में लकड़ी की चौकी पर साफ लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। इसके बाद आसन पर बैठकर दूर्वा (दूब घास), गंगाजल, लाल फूल, लाल चंदन, अक्षत, धूप और गंध अर्पित करते हुए षोडशोपचार (16 सामग्रियों से) विधिपूर्वक पूजन करें। पूरे दिन फलाहार या निर्जला उपवास का पालन करें। शाम के समय भगवान गणेश को उनके प्रिय मोदक, लड्डू, खीर या पंचमेवा का भोग लगाएं। बप्पा को प्रसन्न करने के लिए गणपति अथर्वशीर्ष, गणेश स्तोत्र या गणेश चालीसा का पूरी भक्ति के साथ पाठ करें। अंत में कर्पूर जलाकर बप्पा की आरती करें और व्रत का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रद्युम्न चतुर्थी की पावन व्रत कथा का पाठ करें या श्रवण करें।प्रद्युम्न चतुर्थी व्रत दूर्वा चढ़ाने से लाभ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चतुर्थी की पूजा बिना दूर्वा के अधूरी मानी जाती है। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि भगवान गणेश को क्यों चढ़ाया जाता है 21 दूर्वा और इससे क्या लाभ होते हैं तो आइए हम आपको दूर्वा चढ़ाने से होने वाले लाभ के बारे में बताते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाने से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। अगर आप मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं, तो प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करें। इस दौरान प्रभु को 21 दूर्वा अर्पित करें। ऐसा माना जाता है कि दूर्वा चढ़ाने से व्यक्ति का मानसिक तनाव दूर होता है और जीवन खुशहाल रहता है।प्रद्युम्न चतुर्थी से जुड़ी पौराणिक कथा भी है खासशास्त्रों में वर्णित पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में अनलसुर नाम का राक्षस था। यह एक ऐसा राक्षस था, जो मुनियों, देवताओं को जिंदा निगल लेता था। इसने तीनों लोकों में आतंक मचा रखा था। राक्षस के प्रकोप से बचने के लिए देवी-देवता और ऋषि-मुनि महादेव और गणपति बप्पा के पास पहुंचे। इसके बाद भगवान शिव ने अनलसुर से युद्ध किया और उसके आतंक से ब्रह्मांड को बचाया। गणश जी ने अनलसुर को जिंदा निगल लिया, जिसकी वजह से पेट में भयंकर जलन होने लगी। ऐसे में ऋषि कश्‍यप ने भगवान गणेश को दूर्वा की 21 गांठें बनाकर खाने की सलाह दी। इसके बाद से ही दूर्वा गणेश जी की प्रिय वास्तु बन गई। इसलिए बुधवार या चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करने का विधान है।प्रद्युम्न चतुर्थी व्रत में पारण (व्रत खोलना) का नियम पुराणों के अनुसार, चतुर्थी के अगले दिन यानी पंचमी तिथि को सुबह किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन/दान देने के बाद ही नियमपूर्वक अपना व्रत खोलें (पारण करें)।प्रद्युम्न चतुर्थी व्रत का है विशेष धार्मिक महत्वस्कंदपुराण, गणेशपुराण और मुद्गलपुराण जैसे पूजनीय ग्रंथों में इस व्रत की महिमा का विस्तृत वर्णन है। स्कंदपुराण कहता है कि जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से व्रत रखता है, उसके जीवन के सारे संकट दूर हो जाते हैं। गणेशपुराण के अनुसार, इस दिन नियमपूर्वक उपासना करने से साधक को जीवन के चार मुख्य स्तंभ—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। गृहस्थों के लिए वरदान: यह व्रत पारिवारिक सुख-शांति, समृद्धि, संतान सुख और मानसिक तनाव से मुक्ति के लिए सबसे उत्तम माना गया है। प्रद्युम ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:42:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Somnath Mandir की अद्भुत कहानी: जब चंद्रमा को मिला श्राप, Lord Shiva ने ऐसे की रक्षा</title>
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<description><![CDATA[ गुजरात के पश्चिम−दक्षिण छोर पर सागर के तट पर स्थित पाटन जिसे प्रभासपात्तन भी कहा जाता है में स्थित है सोमनाथ मंदिर। यहां भगवान शिव का स्वयंभू ज्योतिर्लिंग है। यह भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख है। स्कन्दपुराण के प्रभासखण्ड में सोमनाथ की महिमा निरूपित है। प्रभासपाटन की चार वस्तुएं प्रसिद्ध हैं− नदी, नारी, अश्व तथा भगवान सोमनाथ का दर्शन। स्कन्दपुराण के अनुसार, दक्ष प्रजापति की 27 पुत्रियां थीं। उन सबके पति चन्द्रमा थे। इनमें रोहिणी सर्वाधिक सुन्दरी होने के कारण चन्द्रमा को अत्यधिक प्रिय थी। चन्द्रमा सदैव उसी के साथ रहते थे। उपेक्षित पत्नियों ने चन्द्रमा की शिकायत दक्ष प्रजापति से की।दक्ष के समझाने पर चन्द्रमा ने समस्त पत्नियों के साथ एक−सा व्यवहार करने का वचन दिया, लेकिन उनकी रोहिणी के प्रति आसक्ति पूर्व की भांति बनी रही। वे अन्य पत्नियों की उपेक्षा करते ही रहे। दुखी पत्नियां पुनः अपने पिता दक्ष के पास पहुंचीं और उन्हें अपनी व्यथा−कथा तथा उपेक्षा से परिचित कराया। दक्ष प्रजापति चन्द्रमा पर कुपित हो उठे। अत्यधिक क्रोधित होकर उन्होंने चंद्रमा को शाप दे दिया कि तू निस्तेज हो जाएगा और क्षयरोग से पीड़ित रहेगा।इसे भी पढ़ें: Hanuman Garhi Temple: Ayodhya में क्यों है हनुमान गढ़ी का इतना महत्व? जानें Lord Ram के दर्शन से जुड़ा ये रहस्यचन्द्रमा शक्तिहीन तथा निस्तेज होते गये। उनकी कांति मलिन हो गई। संसार में अंधेरा छाने लगा। चन्द्रमा की बीमारी से पशु, पक्षी, मनुष्य तथा देवता सभी चिंतित हो गये। देवताओं ने दक्ष से चन्द्रमा को शापमुक्त करने का निवेदन किया। दक्ष का क्रोध अभी तक शांत नहीं हुआ था, अतष्ः उन्होंने चंद्रमा को शाप से मुक्त नहीं किया। निर्बल तथा कांतिहीन चन्द्रमा ने दक्ष से वचनभंग करने के लिए क्षमा मांगी। दक्ष ने उनसे कहा कि तुम प्रभासपाटन जाकर शिव की आराधना करो। केवल वे ही तुम्हें निरोग कर सकते हैं।चन्द्रमा ने प्रभासपाटन जाकर अनेक वर्षों तक शिवजी की आराधना की। चन्द्रमा की तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने कहा कि मैं तुम्हें पूर्ण शक्ति तो नहीं दे सकता, लेकिन महीने में पंद्रह दिनों तक तुम नित्य बढ़ते रहोगे तथा शेष पंद्रह दिनों में तुम्हारी शक्ति का क्रमशः नित्य क्षय होता रहेगा। कृतज्ञता प्रकट करते हुए चन्द्रमा ने प्रभासपाटन में स्वर्ण का मंदिर निर्माण करने का संकल्प लिया। ब्रह्माजी ने प्रभासपाटन में भूमि कुरेदी तो वहां कागदी नींबू के आकार का एक शिवलिंग स्वयं प्रकट हो गया। उस स्थान को दूध तथा मधु से ढककर उप पर ब्रह्मशिला रखी गई। उस पर ब्रह्मा के निर्देशों के अनुसार चन्द्रमा तथा उनकी प्रिय पत्नी रोहिणी ने शिवलिंग की स्थापना की।भागवत, महाभारत आदि में अनेक स्थानों पर प्रभासपाटन का उल्लेख है। यहीं प्राची, सरस्वती, कपिला तथा हिरण्या नदियों का संगम हुआ है। यहीं यदुवंशियों का पारस्परिक युद्ध द्वारा संहार हुआ था। इसके निकट ही बालक तीर्थ है। इस स्थान पर पेड़ के नीचे लेटे हुए श्रीकृष्ण के तलुवे में भील का प्राणघातक तीर लगा था। यह स्थान देहोत्सर्ग कहलाता है। इसी स्थान के निकट बलरामगुका है। श्रीकृष्ण के भाई शेषावतार बलराम अपना कार्य पूरा कर इसी गुफा द्वारा पाताललोक गये थे।-शुभा दुबे ]]></description>
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<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:42:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 16 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष चिंता से मुक्ति मिलेगी। परिवार में मांगलिक कार्य का आयोजन। शुभ कार्यों में भाग लेंगे। समस्याओं का समाधान निकलेगा।वृषकठोर व्यक्तियों से भी काम निकलवा सकेंगे। कदम कदम पर रूकावटें आएगी। अटके हुए काम बनेंगे, नौकरी लग सकती है। चल अचल संपत्ति में बढ़ोत्तरी होगी।मिथुनअथक प्रयत्नों के बाद सफलता मिलेगी ही। सपरिवार पिकनिक/आनंद मनाएंगे। संचार माध्यमों से सुखद और समाचार। मेहनत के अनुसार लाभ देने वाला दिन।कर्कस्वयं की गलती से व्यावसायिक हानि। आप गलतफहमी के शिकार हो सकते हैं। मांगलिक एवं सार्वजनिक कार्यों में खर्च। आपके बिगड़े काम बनेंगे।सिंहशुभ निमंत्रण एवं मांगलिक समाचार मिलेंगे। काम के दवाब से चिड़चिड़ापन। पिछले पूंजी निवेश का उत्तम लाभ मिलेगा। क्रोध और वाणी दोनों को काबू में रखें।कन्याविवेकपूर्वक धैर्य से काम लें। विशेष व्यक्ति के समर्थन से प्रभाव बढ़ेगा। तन-मन-धन की स्थिति में सुधार होगा। अच्छा समय है अधिकार और प्रभाव बढ़ेंगे।तुलापिकनिक पार्टी में व्यस्त रहेंगे। मुकदमों में विजय पताका लहराएगी। आर्थिक उन्नति की ओर विशेष कदम। जनसम्पर्क बढ़ाने के लिए काम करें।वृश्चिक मांगलिक कार्यों का आयोजन, नए पुराने मित्रों से मिलन। विवाद समझौते से दूर होगा। धन संबंधी मामले में चिंतन बना रहेगा। आपको सफलता मिलेगी।धनुआध्यात्मिक दिशा में उत्तम प्रगति। उत्साह के साथ लक्ष्य की ओर बढ़ते रहेंगे। प्रभावशाली लोगों से सम्पर्क मजबूत होंगे। सफलता मिलते-मिलते रह जाएगी।मकर किसी खास व्यक्ति के कारण मन उदास। यथा समय कार्य पूरे होने पर प्रसन्नता। अच्छी घटनाएं घटेगी। आमदनी के नए साधन बन सकते है।कुंभस्वास्थ्य में सुधार होगा, अच्छा दिन है। लटके और अटके हुए काम निपट जाएंगे। पारिवारिक सुखों के लिए उत्तम दिन। तन मन के लिए दिन ठीक नहीं है।मीननया करार, नई डील संपन्न। तनावपूर्ण हालात- हानिकर दिन है। व्यावसायिक क्षेत्र में नई योजना। मिश्रित फल मिलेंगे, नए पुराने कामों का फल मिलेगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:10:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Gupt Navratri में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, नोट करें Puja का शुभ मुहूर्त और सही विधि</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। नवरात्र में मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्तजन व्रत और पूजा-पाठ करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, साल में 4 बार नवरात्रि आती हैं, 2 गुप्त नवरात्रि और चैत्र व शारदीय नवरात्रि। गुप्त नवरात्रि खासतौर पर साधना, मंत्र जाप और दस महाविद्यालओं के लिए जानी जाती है, वहीं सामान्य नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रुपों की पूजा की जाती है, व्रत रखा जाता है और पूजा-अर्चना की जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ और आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्रि का त्योहार आता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुप्त नवरात्र व्रत और पूजा करने से साधक को जीवन में सभी प्रकार के भय से छुटकारा मिल जाता है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। आइए आपको इस आर्टिकल में बताते हैं कि कब से गुप्त नवरात्र की शुरुआत है और घटस्थापना का शुभ मुहूर्त।आषाढ़ गुप्त नवरात्र 2026 डेट और टाइम-प्रतिपदा तिथि की शुरुआत- 14 जुलाई को दोपहर 03 बजकर 12 मिनट पर - प्रतिपदा तिथि का समापन- 15 जुलाई सुबह को 11 बजकर 50 मिनट परवैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्र की शुरुआत 15 जुलाई से होगी। इसका समापन 23 जुलाई को होगा।आषाढ़ गुप्त नवरात्र 2026 घटस्थापना शुभ मुहूर्त आषाढ़ गुप्त नवरात्र की घटस्थापना शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर की जाती है। इस बार यह तिथि 15 जुलाई को है। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 15 जुलाई को सुबह 06 बजकर 01 मिनट से 10 बजकर 17 मिनट तक।-ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 11 मिनट से 04 बजकर 52 मिनट तक-अभिजीत मुहूर्त- कोई नहीं-विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 45 मिनट से 03 बजकर 40 मिनट तक-गोधूलि मुहूर्त- शाम 07 बजकर 20 मिनट से 07 बजकर 40 मिनट तक-अमृत काल- दोपहर 04 बजे 05 बजकर 27 मिनट तकगुप्त नवरात्रि की पूजा सामग्री लिस्ट-लाल कपड़ा-कपूर-अक्षत-हल्दी-सुपारी-मौली-फूल-लौंग-रोली-फूल माला-इलायची-कलश-गंगाजलजटा वाला नारियल-आम या अशोक के पत्ते-अनाज, साफ जवा-मिट्टी का बर्तन-किसी पवित्र स्थान की मिट्टी (मंदिर आदि)-अखंड ज्योति के लिए बड़ा दीया, रुई की बातीगुप्त नवरात्रि में इन बातों का विशेष ध्यान रखें - गुप्त नवरात्र में कभी भी भूलकर लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा का सेवा नहीं करना चाहिए। - व्रत के दौरान कुट्टू, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना का सेवन कर सकते हैं। - गुप्त नवरात्र में बाल, दाढ़ी-मूंछ और नाखून नहीं काटने चाहिए। - ब्रह्मचार्य के नियम का पालन करना चाहिए। - यदि आप गुप्त नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाई हैं, तो उसे अकेला न छोड़ें। - रोजाना पूजा के दौरान दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। इससे मां दुर्गा प्रसन्न रहती हैं। - गुप्त नवरात्र में काले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:10:11 +0530</pubDate>
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<title>Astrology Tips: कलाई पर कौन सा कलावा देगा Good Luck? जानें ग्रहों से इसका गहरा Connection</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म में किसी भी धार्मिक आयोजन या फिर मांगलिक कार्यक्रम के दौरान कलाई में कलावा बांधा जाता है। कलावा को रक्षासूत्र भी कहा जाता है। जो निगेटिव एनर्जी से आपका बचाव करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हाथों में पहनना वाला यह कलावा आपकी एनर्जी पर भी असर दिखाता है। गलत तरीके और रंग का कलावा पहनने से ऊर्जा असंतुलन हो सकती है। जिस कारण व्यक्ति को तनाव और आलस जैसी निगेटिव एनर्जी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि कलाई पर किस रंग का कलावा पहनना चाहिए और किस रंग के कलावे का किस ग्रह से संबंध होता है।लाल रंग का कलावाज्योतिष शास्त्र के मुताबिक हाथ में लाल रंग का कलावा पहनने से बुरी नजर से बचाव होता है। वहीं जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है। लाल कलावा शक्ति, साहस देने के साथ मंगल दोष से भी बचाता है। हनुमान जी एवं मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए भी लोग लाल रंग का कलावा पहनते हैं। मंगलवार, नवरात्रि या हनुमान जयंती के मौके पर लाल रंग का कलावा पहनना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Bhanu Saptami 2026: 21 June को सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग, जानें Puja Rules और शुभ मुहूर्तकाला कलावाकलाई पर काले रंग का धागा आपको बुरी नजर और काले जादू से बचाता है। अक्सर बच्चों और बुजुर्गों के टखनों पर काला धागा बांधा जाता है। जिससे कि उनको किसी की नजर न लगे। काला धागा बांधने के लिए शनिवार का दिन सबसे अच्छा माना जाता है। वहीं जो लोग शनि दोष से परेशान हैं, उनको अपने हाथों में काला धागा जरूर पहनना चाहिए।पीला कलावाजिन भी लोगों को गुरु ग्रह कमजोर है, उनको पीला धागा पहनना चाहिए। पीले रंग का धागा पहनने से बुद्धि, ज्ञान और वाणी से जुड़ी समस्या धीरे-धीरे सही होने लगती है। पीले रंग का धागा कलाई में पहनने के लिए बृहस्पतिवार का दिन सबसे सही माना जाता है।हरा कलावावहीं हरे रंग के कलावे का संबंध बुध ग्रह से होता है। जिन भी लोगों को अपना बुध ग्रह मजबूत करना है, उनको हरे रंग का धागा पहनना चाहिए। इसको पहनने से बुद्धि, संचार और सेहत से जुड़े क्षेत्रों में लाभ मिलता है। वहीं हरे रंग का धागा बुधवार को पहनना चाहिए।सफेद कलावाबता दें कि सफेद रंग को पवित्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष में सफेद रंग का कलावा पहनने से शुक्र और चंद्रमा ग्रह मजबूत होता है। जब शुक्र और चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है, तो जातक को मानसिक शांति मिलती है और निगेटिविटी दूर होती है।कलावा बांधने के नियमज्योतिष शास्त्र के मुताबिक किसी भी रंग का धागा हाथ में पहनने से पहले इसको गंगाजल से शुद्ध करना चाहिए। पुरुषों को दाहिनी और महिलाओं को बाईं हाथ पर कलावा बांधना चाहिए।कलावा बांधते समय गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। हर 21 दिन बाद पुराने कलावे को बदलकर कलाई में नया धागा बांधना चाहिए। वहीं पुराने धागे को इधर-उधर फेंकनी की जगह पेड़ के नीचे दबा देना चाहिए। वहीं अपना पहना हुआ कलावा किसी और से शेयर करने से बचना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:10:10 +0530</pubDate>
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<title>Bhanu Saptami 2026: 21 June को सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग, जानें Puja Rules और शुभ मुहूर्त</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म में भानु सप्तमी का विशेष महत्व माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर भानु सप्तमी मनाई जाती है। इस दिन सूर्य देव की पूजा-अर्चना करना काफी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भानु सप्तमी के अवसर पर सूर्य देव की साधना करने से साधक को शुभ फलों की प्राप्ति होती है और जीवन में कई बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कब मनाई जाएगी भानु सप्तमी।भानु सप्तमी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 20 जून को दोपहर 3 बजकर 47 मिनट से आरंभ होगी और 21 जून को दोपहर 3 बजकर 21 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। उदयातिथि के आधार पर इस वर्ष भानु सप्तमी का व्रत और पूजन 21 जून को किया जाएगा।ब्रह्म मुहूर्त- 04 बजकर 04 मिनट से 04 बजकर 44 मिनट तकअभिजत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तकविजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 43 मिनट से 03 बजकर 38 मिनट तकगोधूलि मुहूर्त- शाम 07 बजकर 21 मिनट से 07 बजकर 41 मिनट तकसर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 09 बजकर 31 मिनट से 05 बजकर 24 मिनट तक (22 जून)कैसे मनाई जाती है?इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने का विधान है। इसके बाद साफ कपड़े धारण करें। अब तांबे के लोटे में जल, लाल फूल. कुमकुम और अक्षत मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। दीपक जलाकर आरती करें। इसके बाद आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य चलीसा का पाठ करें। अब फल और मिठाई का भोग लगाएं। इसके साथ ही मंदिर या फिर गरीब लोगों में अन्न-धन सहित आदि चीजों का दान करें। माना जाता है कि भानु सप्तमी के दिन साधना करने से जातक को ऊर्जा और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। भानु सप्तमी के नियम - इस दिन सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव की विधिवत रुप से पूजा करें। - भानु सप्तमी पर विशेष चीजों का दान करें। - किसी से वाद-विवाद न करें। - इसके अलावा किसी के बारे में गलत न सोचें। - काले रंग के कपड़े धारण न करें। - तामसिक भोजन का सेवन न करें।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:10:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 17 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 17 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 17 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष (Aries)आज आपके भीतर एक नया आत्मविश्वास और ऊर्जा देखने को मिलेगी। कार्यक्षेत्र में आपकी नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी। पैसों के लेन-देन में थोड़ी सावधानी बरतें। परिवार के साथ किसी पुराने मुद्दे पर खुलकर बात करना रिश्तों में जमी बर्फ को पिघला देगा।वृषभ (Taurus)आर्थिक रूप से आज का दिन भाग्यशाली रहने वाला है। निवेश के नए रास्ते खुल सकते हैं। काम के सिलसिले में की गई यात्राएं आने वाले समय में बड़ा मुनाफा देंगी। मानसिक शांति के लिए थोड़ा समय प्रकृति के बीच या अपने पसंदीदा शौक के लिए जरूर निकालें।मिथुन (Gemini)आज अपने विचारों को स्पष्ट रखना बहुत जरूरी है। ऑफिस में सहकर्मियों के साथ तालमेल बिठाने में थोड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है, लेकिन आपकी सूझबूझ से काम बन जाएंगे। शाम का समय किसी पुराने मित्र से मुलाकात होने के कारण बेहद खुशनुमा बीतेगा।कर्क (Cancer)आज आपकी रचनात्मकता और सोचने का दायरा बढ़ेगा। जो लोग कला, लेखन या डिजाइनिंग के क्षेत्र से जुड़े हैं, उन्हें कोई बेहतरीन अवसर मिल सकता है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह न रहें, खान-पान का विशेष ध्यान रखें। लव लाइफ में मधुरता बनी रहेगी।सिंह (Leo)करियर के मोर्चे पर आज का दिन कुछ नया सिखाकर जाएगा। व्यवसाय से जुड़े लोगों को कोई बड़ी डील हाथ लग सकती है। घर-परिवार में किसी मांगलिक कार्य की रूपरेखा बनेगी। अपनी वाणी पर थोड़ा नियंत्रण रखें, ताकि किसी को आपकी बात बुरी न लगे।कन्या (Virgo)आज योजनाबद्ध तरीके से काम करना आपको बड़ी सफलता दिलाएगा। अटके हुए सरकारी काम आज गति पकड़ सकते हैं। विद्यार्थियों के लिए एकाग्रता बढ़ाने का दिन है। शाम को जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद दूर होंगे और आपसी तालमेल बेहतर होगा।तुला (Libra)आज का दिन आपके लिए संतुलन बनाए रखने का है। काम और निजी जिंदगी के बीच सामंजस्य बिठाने में सफल रहेंगे। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा, लेकिन खर्चों पर लगाम लगाना भी जरूरी है। किसी अजनबी पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने से बचें।वृश्चिक (Scorpio)आज आपके सितारे बुलंदियों पर हैं। किसी बड़े प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी आपको सौंपी जा सकती है, जिससे आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। कोर्ट-कचहरी के मामलों में राहत मिलने के संकेत हैं। परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद आपके काम को और आसान बनाएगा।धनु (Sagittarius)आज आपको अपनी सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है, थकान या मौसमी बीमारी परेशान कर सकती है। व्यापार में कोई भी बड़ा रिस्क लेने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह अवश्य लें। संतान की ओर से कोई सुखद समाचार मिलने की संभावना है।मकर (Capricorn)मकर राशि वालों के लिए आज तरक्की के नए द्वार खुल रहे हैं। आपकी मेहनत का फल आज आपको बोनस या पदोन्नति के रूप में मिल सकता है। भूमि या वाहन खरीदने का विचार कर रहे हैं, तो आज का दिन प्लानिंग के लिए बहुत उत्तम है।कुंभ (Aquarius)आज आपके सामाजिक दायरे में बढ़ोतरी होगी और नए प्रभावशाली लोगों से संपर्क बनेंगे। नौकरीपेशा लोगों के ट्रांसफर या स्थान परिवर्तन के योग बन रहे हैं, जो आपके हित में होगा। पार्टनर के साथ शॉपिंग या लॉन्ग ड्राइव पर जाने का मौका मिलेगा।मीन (Pisces)आज आपका आध्यात्मिक झुकाव बढ़ेगा, जिससे मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों को आज अचानक धन लाभ होने के योग हैं। लव लाइफ में चल रहा सस्पेंस खत्म होगा और रिश्ते में एक नया ठहराव आएगा।आज का विशेष मंत्र: &quot;परिस्थितियां कैसी भी हों, आपकी सकारात्मक सोच ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है।&quot; ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:10:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 16 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 16 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 16 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं। मेष (Aries)आज आपके और पार्टनर के बीच कुछ भावनात्मक बातचीत हो सकती है। अगर कोई पुरानी गलतफहमी थी, तो आज उसे बैठकर सुलझाने का सही समय है। सिंगल जातकों को आज किसी खास व्यक्ति से बात करने का मौका मिल सकता है।वृषभ (Taurus)आज का दिन प्रेम संबंधों में मधुरता लेकर आएगा। आपका पार्टनर आपकी भावनाओं का सम्मान करेगा और आपको कोई सरप्राइज या गिफ्ट दे सकता है। शादीशुदा लोगों के बीच आपसी तालमेल बहुत खूबसूरत रहेगा।मिथुन (Gemini)काम के दबाव के कारण आज आप पार्टनर को पर्याप्त समय नहीं दे पाएंगे, जिससे उनके मन में थोड़ी नाराजगी हो सकती है। बातचीत का रास्ता खुला रखें और उन्हें समझाने की कोशिश करें। शाम तक माहौल बेहतर हो जाएगा।कर्क (Cancer)आज आप अपने पार्टनर के प्रति बेहद रोमांटिक महसूस करेंगे। कहीं बाहर घूमने जाने या डिनर डेट का प्लान बन सकता है। सिंगल लोगों के लिए आज कोई नया प्रेम प्रस्ताव आने की प्रबल संभावना है।सिंह (Leo)आज लव लाइफ में अहंकार (Ego) को बीच में न आने दें। पार्टनर के दृष्टिकोण को भी समझने की कोशिश करें। आपकी एक छोटी सी मुस्कान आज बड़ी से बड़ी बहस को खत्म कर सकती है, इसलिए शांत रहें।कन्या (Virgo)आज आपके प्रेम जीवन में स्थिरता और समझदारी देखने को मिलेगी। पार्टनर के साथ आपका विश्वास और मजबूत होगा। अविवाहित लोगों के लिए शादी की बात आगे बढ़ सकती है, जिससे घर का माहौल खुशनुमा रहेगा।तुला (Libra)तुला राशि वालों के लिए आज का दिन मिलाजुला रहेगा। किसी छोटी बात पर पार्टनर से अनबन हो सकती है, लेकिन आपका मजाकिया स्वभाव स्थिति को जल्दी ही संभाल लेगा। पार्टनर को थोड़ा स्पेस दें।वृश्चिक (Scorpio)आज का दिन आपके लव रिलेशनशिप में नई ऊर्जा भरने वाला है। आप और आपके पार्टनर एक-दूसरे के बेहद करीब महसूस करेंगे। पुरानी कड़वाहट भूलकर आप दोनों आज एक नई शुरुआत कर सकते हैं।धनु (Sagittarius)आज का दिन आपके लिए थोड़ा संभलकर चलने का है। पार्टनर के मूड में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में उनकी बातों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें। धैर्य से काम लें, परिस्थितियां अनुकूल हो जाएंगी।मकर (Capricorn)यदि आप किसी से अपने दिल की बात कहना चाहते हैं, तो आज का दिन अनुकूल है। शादीशुदा लोगों के जीवन में आज खुशियां बढ़ेंगी। पार्टनर के साथ मिलकर आप भविष्य की योजनाओं पर चर्चा कर सकते हैं।कुंभ (Aquarius)आज आपके लव लाइफ में कोई बाहरी व्यक्ति दखल देने की कोशिश कर सकता है, जिससे बचें। अपने पार्टनर पर भरोसा रखें और दूसरों की बातों में न आएं। आपसी बातचीत से हर समस्या का हल निकाला जा सकता है।मीन (Pisces)आज का दिन रोमांस से भरपूर रहने वाला है। आप पार्टनर के साथ यादगार पल बिताएंगे। जो लोग लंबे समय से रिलेशनशिप में हैं, वे आज अपने रिश्ते को अगले पड़ाव पर ले जाने (शादी के फैसले) का विचार कर सकते हैं।एक छोटा सा सुझाव: राशिफल ग्रहों की सामान्य गणना पर आधारित होता है। अपनी लव लाइफ को और मजबूत व खुशहाल बनाने के लिए हमेशा आपसी विश्वास, सम्मान और खुलकर बातचीत करने को प्राथमिकता दें।बहरहाल, हमारे सभी ऐप्लिकेशन की सारी सुविधाओं का इस्तेमाल करने के लिए Gemini Apps Activity को चालू करें. ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:10:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 17 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष कुछ कामों की रूकावट आज भी बनी रहेगी। परिवार भूमि और भवन का सुख मिलेगा। सूझबूझ से समस्याओं का निपटारा होगा। घरेलू वस्तुओं की खरीद में व्यस्तता।वृषमनोरंजन और दावतों में होंगे। ससुराल मेहरबान रहेगी। सभी कार्य सरलता से पूरे होंगे। &#039;गजकेसरी&#039; योग का उत्तम फल।मिथुनविषम परिस्थितियों का सामना होगा। वरिष्ठों का आर्शीवाद लें और आगे बढ़ें। यात्रा और मनोरंजन करने का दिन है। विचारों में उदारता आएगी।कर्कप्रतियोगिता परीक्षा में सफलता। सरकारी रूकावटें दूर होगी। मेल-मिलाप और पार्टी का आयोजन। व्यवसाय में लाभ संतान की उन्नति।सिंहक्रोध आचरण पर क्षमा याचना करनी होगी। पारिवारिक जीवन के संबंध में उल्लेखनीय सफलता। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। अटके हुए काम बनेंगे।कन्यास्वास्थ्य की उपेक्षा उन्नति रोक सकती है। विभागीय पदोन्नति, परीक्षा में सफलता। धन संबंधी समस्या से विवाद बढ़ सकता है। समाज और परिवार में विशेष आयोजन।तुलाप्राप्त अवसरों का लाभ उठाएं। जोश में होश खोना ठीक नहीं। एक बार में एक ही काम हाथ में लें। सब तरफ आपकी प्रशंसा होगी।वृश्चिक चिंता परेशानियों से घिरे रहेंगे। नई संभावनाएं दिखाई देगी, आगे बढ़ें। शुभ कार्यों में विध्न पैदा होंगे। उच्च कोटि के जन सम्पर्क बनेंगे।धनुदोपहर बाद शुभ घटनाओं के योग। आपकी पदोन्नति की सिफारिश होगी। स्वयं सफलताओं पर गर्व अनुभव करेंगे। आर्थिक हानि के योग है, खरीददारी में धोखा।मकर पैर और एड़ी के दर्द से परेशानी, यात्रा स्थगन। स्वास्थ्य प्रतिकूल रहेगा। किसी के आर्शीवाद विशेष से भाग्य चमकेगा। जीवनसाथी की सलाह पर ध्यान दें।कुंभधन के लेन-देन की समस्या। अप्रिय घटना या दुर्घटना घट सकती है। स्वास्थ्य में सुधार से प्रसन्नता। चल अचल सम्पत्ति से लाभ के योग।मीनचुनौतियों भरा दिन है, सावधान रहें। अप्रिय समाचार मिल सकते है, क्रोध से बचें। आपके कला-कौशल की प्रशंसा होगी। लाभ और खर्च बराबर, खर्च पर नियंत्रण करें। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:10:07 +0530</pubDate>
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<title>Mithun Sankranti 2026: Mithun Sankranti का महापुण्य काल आज, जानें Lucky Time और सूर्य पूजा का Special महत्व</title>
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<description><![CDATA[ आज यानी की 15 जून को मिथुन संक्रांति मनाई जा रही है। यह संक्रांति उस समय होती है, जब ग्रहों के राजा सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं। इस क्षण को संक्रांति कहा जाता है। मिथुन संक्रांति के मौके पर महापुण्य काल में लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। फिर इस दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व होता है। वहीं इस दिन सूर्य देव की पूजा-अर्चना के लिए बेहद खास होता है। तो आइए जानते हैं इसकी तिथि, महत्व, पूजन विधि के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक 15 जून को दोपहर 12:59 मिनट पर सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इस दौरान सूर्य की मिथुन संक्रांति होगी। सूर्य देव के मिथुन राशि में प्रवेश करने से इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर होता है।महापुण्य कालमिथुन संक्रांति पर महा पुण्य काल दोपहर में 12:59 मिनट पर शुरू होगा। यह महापुण्य काल दोपहर 03:19 मिनट तक रहेगा। मिथुन संक्रांति के महापुण्यकाल की अवधि 2 घंटे 20 मिनट तक रहेगा। मिथुन संक्रांति का पुण्य काल 6 घंटे 21 मिनट का होगा।दान-पुण्यमिथुन संक्रांति के दिन स्नान आदि के बाद अन्न, जल, वस्त्र, फल और गुड़ आदि का दान करना चाहिए। इससे सूर्य ग्रह मजबूत होता है और जातक का अपने पिता के साथ संबंध मजबूत होता है। साथ ही नौकरी में तरक्की के योग बनते हैं। पूजन विधिइस दिन सुबह किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर नदी में स्नान करना संभव नहीं है, तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए। फिर सूर्य देव का ध्यान करें और उनको अर्घ्य दें। इस दिन सूर्य देव के मंत्रों का जाप करें और पितरों का ध्यान किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।उपायलाल रंग का आकर्षणबता दें कि सूर्य देव को लाल रंग बेहद प्रिय है। पूजा के समय सूर्य देव को लाल वस्त्र और लाल फूल चढ़ाएं। वहीं इस दिन खुद भी लाल रंग के कपड़े पहनने चाहिए और चंदन का तिलक लगाएं। इससे व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ेगा।आदित्य हृदय स्तोत्रअगर कोई व्यक्ति जीवन में बार-बार असफल हो रहे हैं, तो संक्रांति के दिन आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करना चाहिए। यह सूर्य देव को प्रसन्न करने का सबसे शक्तिशाली तरीका है। आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करने से आत्मबल और तरक्की को बढ़ती है।प्रकृति की सेवा करेंरविवार के दिन पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करना चाहिए और पेड़ की परिक्रमा करनी चाहिए। वहीं घर में तुलसी के पौधे की सेवा करनी चाहिए। तुलसी सेवा से सूर्य देव भी प्रसन्न होते हैं और उत्तम स्वास्थ्य का वरदान मिलता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:10:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Jeth Adhik Amavasya 2026: नोट करें स्नान&#45;दान का Shubh Muhurat, ये Puja Vidhi दिलाएगी हर कष्ट से मुक्ति</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को ईश्वर की साधना और पितरों के स्मरण के लिए विशेष मानी जाती है। हर महीने एक अमावस्या आती है। लेकिन अधिक मास की अमावस्या का खास महत्व होता है। इस बार ज्येष्ठ अधिक मास अमावस्या 15 जून 2026 को मनाई जा रही है। सोमवार को होने की वजह से इसको सोमवती अमावस्या भी कहा जाएगा। अधिक माह की अमावस्या पर स्नान-दान करने से अमोघ पुण्य फल की प्राप्ति होती है। क्योंकि अधिकमास तीन साल में एक बार आता है। इसलिए यह अमावस्या भी तीन साल में एक बार ही आती है। इस तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। तो आइए जानते हैं जेठ अधिक अमावस्या पर स्नान-दान का मुहूर्त।तिथि और मुहूर्तद्रिक पंचांग के मुताबिक 14 जून 2026 की दोपहर 12:19 मिनट पर अमावस्या तिथि की शुरूआत हुई है। वहीं आज यानी की 15 जून की सुबह 08:23 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के हिसाब से 15 जून 2026 को ज्येष्ठ अधिक मास अमावस्या मनाई जा रही है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक है।पूजन विधिइस अमावस्या के दिन सुबह जल्दी नहाएं और नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और व्रत का संकल्प लें। फिर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। वहीं पूजा के दौरान &#039;ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नम:&#039; मंत्र का जाप करें। इस दिन तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाना चाहिए। पितरों का स्मरण करें और उनके नाम से जरूरतमंदों को अन्न का दान करें। वहीं शाम को पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं और कुछ न कुछ दान जरूर करें।महत्व माना जाता है कि अमावस्या तिथि पर दान करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्यफल की प्राप्ति होती है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्रों और जल का दान करना बेहद पुण्य का काम माना जाता है। इन चीजों का दान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:10:01 +0530</pubDate>
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<title>Famous Temple: Ujjain में Mahakal के पास है यह Special शक्तिपीठ, जहां दर्शन से हर मनोकामना होती है पूरी</title>
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<description><![CDATA[ पूरे भारत में अलग-अलग स्थानों पर मां सती के शक्तिपीठ हैं। मां सती के अंगों से 51 शक्तिपीठ बने, जिसमें उज्जैन का हरसिद्धि माता मंदिर भी शामिल है। हरसिद्ध माता मंदिर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के पास स्थित है। नवरात्रि या किसी खास मौके पर मंदिर में भव्य नजारा देखने को मिलता है। ज्यादा संख्या में भक्त हरसिद्ध माता मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको हरसिद्ध माता मंदिर से जुड़ी कथा और कई महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं।हरसिद्धि माता शक्तिपीठ मंदिरधार्मिक मान्यता के मुताबिक जिस-जिस स्थान पर माता सती के शरीर के अंग गिरे थे, वह सभी स्थान शक्तिपीठ में बदल गए। जिस स्थान पर देवी सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी, उस स्थान पर हरसिद्ध माता मंदिर बना। यह मंदिर शक्ति का केंद्र माना जाता है।इसे भी पढ़ें: Rahu Ketu Temples: Rahu-Ketu के प्रकोप से हैं परेशान? India के इन 6 मंदिरों में दर्शन से मिलेगा हर संकट से छुटकारा कथाउज्जैन के पवित्र स्थलों में शामिल हरसिद्धि माता शक्तिपीठ मंदिर में महालक्ष्मी और महासरस्वती की मूर्ति विराजमान है। इन मूर्ति के बीच में मां अन्नपूर्णा की मूर्ति है। इसके अलावा मंदिर में श्रीयंत्र भी स्थापित है। जिसके विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। शिव पुराण के मुताबिक जब भगवान शिव मां सती के जलते हुए शरीर को उठाकर जा रहे थे। तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े कर दिए। मां सती की दाहिनी कोहनी इस स्थान पर गिरी थी। जिसके बाद यहां पर हरसिद्धि माता शक्तिपीठ बना।स्कंद पुराण में बताया गया है कि कैसे देवी चंडी हरसिद्धि की उपाधि मिली। पौराणिक कथा के मुताबिक जब भगवान शिव और मां पार्वती एक साथ कैलाश पर एकांत में थे, तो उस दौरान दो राक्षसों में शिव-पार्वती के पास आने की कोशिश की। उन राक्षसों के नाम चंड और मुंड थे। महादेव ने राक्षसों को मारने के लिए देवी चंडी को बुलाया और देवी चंडी ने राक्षसों का अंत किया। इससे भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और उनको &#039;सब पर विजय पाने वाली&#039; की उपाधि प्रदान की।बता दें कि मराठा काल के समय इस मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया था। मंदिर में दो स्तंभ हैं और रोजाना शाम को इन स्तंभों पर दीपक जलाए जाते हैं। इस दौरान मंदिर का दिव्य और भव्य नजारा देखने को मिलता है। मंदिर में दर्शन और पूजन के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:57 +0530</pubDate>
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<title>Hanuman Garhi Temple: Ayodhya में क्यों है हनुमान गढ़ी का इतना महत्व? जानें Lord Ram के दर्शन से जुड़ा ये रहस्य</title>
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<description><![CDATA[ देश भर में हनुमान जी को समर्पित कई मंदिर है। इस मंदिरों का अपना विशेष महत्व है। इन्हीं मंदिरों में अयोध्या का हनुमान गढ़ी मंदिर शामिल है। यह मंदिर आस्था का केंद्र है और एक ऊंचे टीले पर स्थित है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को 76 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। हनुमान गढ़ी मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करने के बाद ही रामलला के दर्शन का शुभ फल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक हनुमान जी इस मंदिर में रक्षक के रूप में वास करती है।हनुमान गढ़ी मंदिर में आने पर भक्तों को खास ऊर्जा और शांति का अनुभव होता है। किसी खास मौके पर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको हनुमान गढ़ी मंदिर से जुड़े रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Rahu Ketu Temples: Rahu-Ketu के प्रकोप से हैं परेशान? India के इन 6 मंदिरों में दर्शन से मिलेगा हर संकट से छुटकारापौराणिक कथापौराणिक कथा के मुताबिक भगवान श्रीराम ने रावण की लंका पर विजय प्राप्त की और जब अयोध्या वापस आए, तो प्रभु श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के आने का उत्साह मनाया जा रहा था। भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ और राम जी ने सभी को विदा किया। लेकिन हनुमान जी अयोध्या को छोड़कर नहीं जाना चाहते थे।राम जी ने दी हनुमान जी को ये जगहहनुमानजी की भक्ति और प्रेम से प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को अयोध्या में रहने के लिए एक जगह दी। यह स्थान एक ऊंचे टीले पर मौजूद थी। जहां पर हनुमान गढ़ी मंदिर को बनाया गया था। धार्मिक मान्यता के मुताबिक ऊंचे टीले पर होने के कारण हनुमान जी को यहां से पूरी अयोध्या नगरी दिखती थी। राम जी ने रहने के लिए यह स्थान देते हुए हनुमान को यह वचन दिया कि अयोध्या मेरा दर्शन तब तक पूरा नहीं माना जाएगा, जब तक की हनुमान गढ़ी के दर्शन नहीं किए जाएंगे।मनोकामनाएं होती हैं पूरीइस प्रसंग का वर्णन स्कंद पुराण में देखने को मिलता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक हनुमान गढ़ी मंदिर में हनुमान जी के दर्शन मात्र से भक्तों के सभी पाप नष्ट होते हैं और उनकी हर मनोकामना पूरी होती है। वहीं व्यक्ति को हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है। हनुमान गढ़ी मंदिर में हनुमान जी को चोला अर्पित करने से सभी दोष की समस्या से छुटकारा मिलता है।हनुमान गढ़ी मंदिर में माता अंजनी की गोद में बाल हनुमान की प्रतिमा विराजमान है। इस मंदिर में दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं। वहीं यूपी सरकार की ऑफिशियल वेबसाइट के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण राजा विक्रमादित्य द्वारा कराया गया है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को 76 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Jun 2026 09:09:56 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 14 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 14 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 14 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशिफल (Aries):आज का दिन आपके प्रेम जीवन में नई ऊर्जा लेकर आएगा। अगर आप सिंगल हैं, तो कार्यक्षेत्र या किसी सामाजिक समारोह में किसी दिलचस्प व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है। जो लोग पहले से रिश्ते में हैं, वे अपने पार्टनर के साथ भविष्य की योजनाओं पर चर्चा कर सकते हैं। बातचीत में मधुरता बनाए रखें।वृषभ राशिफल (Taurus):आज आपको अपने पार्टनर की भावनाओं का विशेष सम्मान करना होगा। छोटी-छोटी बातों पर बहस करने से बचें, क्योंकि आज गलतफहमियां बढ़ने के आसार हैं। शाम का समय किसी शांत जगह पर साथ बिताने से रिश्ते में सुधार आएगा। लवमेट को कोई छोटा सा सरप्राइज देना आपके रिश्ते को मजबूत कर सकता है।मिथुन राशिफल (Gemini):मिथुन राशि वालों के लिए आज का दिन बेहद खुशनुमा रहने वाला है। आपके और पार्टनर के बीच का तालमेल देखने लायक होगा। यदि आप किसी से अपने दिल की बात कहना चाहते हैं, तो आज का दिन प्रपोज करने के लिए अनुकूल है। विवाहित जोड़ों के बीच का पुराना तनाव आज समाप्त होगा।कर्क राशिफल (Cancer):आज आप अपने व्यस्त शेड्यूल में से पार्टनर के लिए समय निकालने में सफल रहेंगे। आपके लव पार्टनर को आपकी कोई बात बहुत पसंद आ सकती है, जिससे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ेंगी। सिंगल लोगों को आज जल्दबाजी में कोई भी फैसला लेने से बचना चाहिए, पहले सामने वाले को अच्छी तरह समझ लें।सिंह राशिफल (Leo):आज का दिन आपके लव लाइफ में थोड़े उतार-चढ़ाव ला सकता है। अहंकार को अपने रिश्ते के बीच में न आने दें। अगर पार्टनर किसी बात से नाराज है, तो खुद पहल करके बात को संभालें। आपकी एक मुस्कान और प्यार भरा बर्ताव पुराने सारे गिले-शिकवे दूर कर सकता है।कन्या राशिफल (Virgo):कन्या राशि के जातकों के लिए आज का दिन रोमांस से भरपूर रहेगा। पार्टनर के साथ शॉपिंग या लॉन्ग ड्राइव पर जाने का प्लान बन सकता है। जो लोग लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में हैं, उनकी आज वीडियो कॉल या मैसेज के जरिए लंबी बातचीत होगी, जिससे मन प्रसन्न रहेगा।तुला राशिफल (Libra):आज आपके पार्टनर का मूड थोड़ा भावुक हो सकता है। उन्हें आपके सहयोग और मानसिक संबल की जरूरत होगी। अपने विचार उन पर थोपने के बजाय उनकी बात को ध्यान से सुनें। प्रेम जीवन में ईमानदारी रखना आज आपको किसी बड़े विवाद से बचाएगा।वृश्चिक राशिफल (Scorpio):आज आपकी लव लाइफ में आकर्षण और नयापन बढ़ेगा। आप और आपके पार्टनर एक-दूसरे के प्रति बेहद समर्पित महसूस करेंगे। सिंगल लोगों के जीवन में किसी पुराने मित्र की दोबारा एंट्री हो सकती है, जो आगे चलकर प्रेम का रूप ले सकती है।धनु राशिफल (Sagittarius):धनु राशि वालों को आज अपने लव पार्टनर के साथ बातचीत करते समय शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए। मजाक में कही गई कोई बात उन्हें बुरी लग सकती है। वैवाहिक जीवन जी रहे लोगों के लिए दिन सामान्य रहेगा, जीवनसाथी का सहयोग आपको काम में मदद देगा।मकर राशिफल (Capricorn):आज का दिन आपके प्रेम संबंधों को एक कदम आगे ले जाने का है। अगर आप अपने रिश्ते को शादी में बदलना चाहते हैं, तो इस विषय पर पार्टनर और परिवार से बात करने के लिए समय अच्छा है। आपकी समझदारी रिश्ते में स्थिरता लेकर आएगी।कुंभ राशिफल (Aquarius):कुंभ राशि के सिंगल लोगों के लिए आज का दिन खास हो सकता है। सोशल मीडिया या किसी कॉमन फ्रेंड के जरिए कोई नया रिश्ता दस्तक दे सकता है। वहीं, जो लोग पहले से रिलेशनशिप में हैं, वे आज एक-दूसरे के साथ बेहतरीन क्वालिटी टाइम एन्जॉय करेंगे।मीन राशिफल (Pisces):आज आपके प्रेम जीवन में खुशियां बनी रहेंगी। पार्टनर के साथ आपसी समझ बढ़ने से आप खुद को तनावमुक्त महसूस करेंगे। आज आप अपने लवमेट के साथ अपनी पुरानी खूबसूरत यादों को ताजा कर सकते हैं, जिससे रिश्ते में एक बार फिर से नयापन महसूस होगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:20:06 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 14 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष सहज ही बनें कामों से खुशी मिलेगी। महत्वपूर्ण काम स्थगित रखें। प्राथमिकता देकर जरूरी काम निपटा लें। विशेष परीक्षा में सफलता के योग है।वृषलोग आपके विवेक की तारीफ करेंगे। धर्म और अध्यात्म में रूचि बढ़ेगी। आर्थिक लाभ- मान प्रतिष्ठा भी। कई समस्याओं से मुक्ति, सम्मान भी होगा।मिथुनकई नई पुरानी चिंताओं से घिरे रहेंगे। मनोरंजन और संतान संबंधी कार्यों में सफलता। क्रोध और परेशानी आपके लिए है। कार्य निबटाने में संघर्ष अधिक होगा।कर्करूके हुए धन की प्राप्ति पर खुशी होगी। बिजनेस पार्टनर से सुलह समझौता होगा। अच्छे परिणाम देने वाला दिन है। कर्तव्यपूर्ति से गौरवानुभूति होगी।सिंहपरिश्रम रंग लाएगा, सब प्रकार से लाभ। आर्थिक समृद्धि के लिए अच्छा दिन है। वाहन कष्ट और अन्य कार्यों में रूकावट भी। गुप्त प्रेम संबंध/अन्य राज उजागर हो सकते हैं।कन्याअप्रिय अतिथियों के साथ समय नष्ट होगा। अचानक और अप्रत्याशित लाभ। विषम परिस्थितियां खर्च बढ़ायेंगी। कलह और अपव्यय कराने वाला दिन है।तुलासंतोषमय जीवन, सुखमय दिन। पूंजी निवेश करेंगे और सत्कार्य भी। परिवार में अशांति और कलह का वातारण। चिंताएं दूर होगी, काम में मन लगेगा।वृश्चिक अधिकारियों से उलझना ठीक नहीं रहेगा। विवाद करने व बढ़ाने के लिए काम करें। विशेष कार्य के लिए कोई जिम्मेदारी सौंपी जाएंगी। शुभ अवसरों में दावत का आनंद लेंगे।धनुसंतान सुख, ज्ञान विज्ञान में प्रगति। शुभाशुभ फलों की प्राप्ति के योग हैं। व्यावसायिक क्षेत्र में कठिन प्रतिस्पर्धा, सम्मान। बच्चों का आर्थिक भविष्य सुनिश्चित करेंगे।मकर आर्थिक मामले विचलित कर सकते हैं। अस्थिर और डांवाडोल स्थिति रहेगी। सुखद वातावरण- व्यावसायिक प्रगति भी। लाभकारी यात्राओं होंगी।कुंभपरिवार के गुरुजनों का आर्शीवाद मिलेगा। अप्रिय घटना घट सकती है। व्यवहार में सावधानी-झूठा आरोप संभव। पति-पत्नी में तू-तू मैं-मैं संभव है।मीनधन प्राप्ति के तरीकों में/साधनों में बदलाव। प्रतिष्ठा एवं प्रभाव में वृद्धि। पारिवारिक और मानसिक स्थिति सामान्य हो जायेगी। कुछ नई बातें सीखने, करने की मिलेगी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:20:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 15 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष परिवार के साथ मनोविनोद और भ्रमण में व्यस्तता रहेगी। समस्याएं कुछ ज्यादा ही रहेगी। महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं। संघर्ष होगा और विजय मिलेगी।वृषडूबा धन मिलेगा, सत्कर्म के लिए दूसरों को प्रेरणा देंगे। मनोकामनाएं पूरी होगी। परिचय क्षेत्र में धन बढ़ेगा। गृहकार्य और साजसज्जा की प्रशंसा होगी।मिथुनलोकप्रियता प्राप्त होगी। सपने साकार करने का दिन है। लाभ के अवसरों का लाभ उठाना चाहिए। महत्वपूर्ण शुभ समाचार मिलन से प्रसन्नता।कर्कयोजनाओं में आप सफल रहेंगे। संतान पक्ष से सहयोग और लाभ की प्राप्ति। रूकावटों का सामना, कलह योग भी। व्यावसायिक उन्नति पर ध्यान केंदि्रत रहेगा।सिंहबाहरी लोग निजी जीवन में हस्तक्षेप कर सकते हैं। दूसरों की चिंता में आपकी हानि होगी। अशुभ दिन है, पूंजी निवेश से विशेषकर बचें। मान सम्मान बढ़ेगा, अधिकारियों की कृपा मिलेगी।कन्यामिट्टी में हाथ डालेंगे, सोना बनेगा। सिविल सर्विस परीक्षा के लिए परिश्रम अधिक होगा। खतरों से खेलना हानिकर सिद्ध होगा। न्यायालय के मामलों में चिंता रहेगी।तुलाकिसी भूल या बुरी आदत के कारण लज्जित हो सकते हैं। लापरवाही बड़ा नुकसान करा सकती है। आप आकर्षण के केंद्र बिंदु रहेंगे। विवेक से काम लें, अन्यथा हानि।वृश्चिक विवेकपूर्ण निर्णय से धन बढ़ेगा। बिना पढ़े कहीं भी हस्ताक्षर न करें। व्यक्तित्व उदार और भावुकता पूर्ण। अनेक समस्याओं और चिंताओं का अंत। धनुकाम की अधिकता से थकावट। आर्थिक समृद्धि के योग प्रबल है। कलह और जोखिम दोनों से बचना जरूरी है। दोपहर तक जरूरी काम निपटा लें।मकर वरिष्ठ जनों से सहयोग और आर्शीवाद मिलेगा। आमदनी के नए साधन बनेंगे। दोपहर बाद अशुभ समाचार पाकर उदास हो सकते हैं। आर्थिक विकास के लिए नया कदम उठायेंगे।कुंभउन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा, शुभ समाचार मिलेंगे। नए सम्पर्क भविष्य के लिए लाभप्रद सिद्ध होंगे। नए निवेश के साथ व्यवसाय का विस्तार। रिश्तों के बंधन मजबूत होंगे।मीनतथा कथित &#039;अपने&#039; ही कष्ट देंगे- मन दुखायेंगे। अत्यंत व्यस्तता और कर्मठता वाला दिन। लोगों को प्रभावित करने में सफल रहेंगे। अधूरे सभी काम पूरे होंगे, लाभ भी होगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:20:04 +0530</pubDate>
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<media:keywords>Horoscope, June, 2026, Aaj, Rashifal:, सभी, राशियों, का, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन, पढ़ें, आज, का, राशिफल</media:keywords>
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<title>Sun Transit 2026: 15 जून से 6 राशियों को मिलेगा &amp;apos;New Start&amp;apos;, सूर्य देव बदलेंगे भाग्य</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का गोचर करना महत्वपूर्ण माना जाता है। कल यानी 15 जून, सोमवार को सूर्य देव बुध की मिथुन राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। वैदिक ज्योतिष में सूर्य का संबंध आत्मा और तेज से माना गया है और मिथुन राशि सोच-संबंध का कारक माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, जब ग्रहों के राजा सूर्य देव बुद्धि के देवता बुध ग्रह के घर में प्रवेश करते हैं, तो यह अवधि हमारी सोच की नई दिशा प्रदान करने के लिए साथ रिश्तों को मजबूत करता है। इस गोचर का खास प्रभाव बातचीत के तौर-तरीकों, नए समझौतों और जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता व्यक्ति के अंदर आ जाती है। इस गोचर से तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि वाले जातकों के लिए यह गोचर जीवन में किसी भी चीज की नई शुरुआत जैसा साबित हो सकता है। यह समय किसी के लिए मान-सम्मान की सीढ़ी चढ़ने का समय है, तो कुछ के लिए पुरानी उलझनों और समस्याओं से छुटकारा पाने का है। आइए आपको बताते हैं तुला से मीन पर सूर्य के गोचर से क्या प्रभाव होगा।तुला राशिसूर्य के राशि परिवर्तन से तुला राशि के जातकों का भाग्य करवट लेने जा रहा है। नौवें घर में सूर्य आपको लंबी यात्राओं पर ले जा सकते हैं, जो आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगी। पढ़ाई-लिखाई या फिर कुछ नया सीखने के लिए यह सबसे बेहतरीन रहने वाला है। पिता या घर के बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लें, उनके शब्द आपके लिए मार्गदर्शन बनेंगे। कुछ नया करने की सोचें, भाग्य पूरी तरह आपके साथ रहने वाला है। अपनी सोच को बड़ा रखें, रिजल्ट आपको बड़े रहेंगे। उपाय- अपने गुरुओं और माता-पिता का आशीर्वाद लेकर ही काम की शुरुआत करें।वृश्चिक राशिइस दौरान वृश्चिक राशि के जातकों को काफी संभलकर चलना हैं। आठवें घर में सूर्य का होना मतलब अचानक से कुछ चीजें बदल सकती हैं। इस बात का ध्यान रखें कि पैसा किसी गलत जगह न फंस जाए, इस बात का ध्यान रखें। कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले अपने किसी भरोसेमंद इंसान से सलाह जरुर लें। इस अवधि में धैर्य बनाए रखें। अपनी भावनाओं पर काबू रखें, यही आपको मुश्किलों से बचाएगा। रिस्क लेने से बचें, शांति से अपना काम करें।उपाय: अपनी भावनाओं को संतुलित रखें और जोखिम भरे निवेश से पूरी तरह दूरी बनाए रखें।धनु राशिसूर्य देव का मिथुन राशि में प्रवेश करने से धनु राशि के जातकों का रिश्तों का घर यानी सातवां घर अब एक्टिव हो रहा है। पार्टनर के साथ अगर कोई बात मन में दबी हुई है, तो उसको आप बाहर निकाल दें, पर लड़कर नहीं, प्यार से सब हैंडल करें। ईमानदारी से बातचीत करेंगे, तो रिश्ते और गहरे होंगे। अहंकार को घर के बाहर ही छोड़कर जाएं। पार्टनर के साथ समय बिताने का सही मौका है, तो उसे बिल्कुल न छोड़ें। आपकी सूझ-बूझ ही रिश्तों को और मजबूत बनाएंगे।उपाय: पार्टनर के साथ किसी भी तरह के अहंकार के टकराव से बचें और संवाद को खुला रखें।मकर राशिइस अवधि में आपके दुश्मन या आपके काम में जो बाधाएं थीं, वे अब सामाप्त होने वाली है। सूर्य देव आपके छठे घर में जीत दिलाने आ रहे हैं। आप अपने कार्य एकदम मजे में पूरा कर लेंगे। बस अपनी सेहत का थोड़ा ध्यान रखें, अपनी दिनचर्या को फिक्स कर लें। अनुशासन से रहेंगे तो आपको काफी ताकत मिलेगी। कोई भी चुनौती आपको छोटी लगेगी। खुद पर भरोसा रखें और अपने काम को पूरा मन से करें।उपाय: अपनी दिनचर्या को नियमित करें और स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें।कुंभ राशिकुंभ राशि के जातकों की रचनात्मकता का कोई मुकाबला नहीं है। यदि आप अपने दिमाग का सही इस्तेमाल करेंगे, तो सफलता पक्की है। जो विद्यार्थी काफी समय से पढ़ाई कर रहे हैं, तो उनके लिए यह समय उम्मीद की नई किरण लेकर आया है। अपनी काबिलियत पर नाज करें, घमंड न पालें। मेहनत पर विश्वास रखें और आगे बढ़ते रहे हैं। मनपसंद काम में समय बिताकर आप काफी खुश रहेंगे, कुछ नया सीखने के लिए यह समय काफी अच्छा है। उपाय: नई चीजें सीखने में अपना समय लगाएं और उत्पादक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करें।मीन राशिइस दौरान आपका पूरा ध्यान घर-परिवार और अपनों की सुख-सुविधाओं पर रहने वाला है। घर से जुड़ी किसी भी बड़ी बात पर चर्चा हो सकती है। जो भी फैसला लें, अपनों की बात को भी अहमियत दें।कभी-कभार घर की छोटी-छोटी खुशियों में ही पूरा सुकून छिपा होता है। आप परिवार के साथ मिलकर कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं, बड़ों का आशीर्वाद जरुर लें। अपने घर में प्यार और शांति बनाए रखने के लिए को कोशिश करें।उपाय: परिवार के साथ सामंजस्य बिठाकर रखें और बड़ों का आदर करें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Jun 2026 08:17:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 13 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 13 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 13 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष (Aries)वाणी पर रखें नियंत्रणआज मेष राशि वालों को अपने पार्टनर के साथ बातचीत करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। आपकी एक छोटी सी कड़वी बात बड़े विवाद का रूप ले सकती है।टिप: शांत रहें और बहस को टालने की कोशिश करें।वृषभ (Taurus)रिश्तों में बढ़ेगी मिठासवृषभ राशि वालों के लिए आज का दिन बेहद खूबसूरत है। पार्टनर के साथ आपसी तालमेल और प्रेम बढ़ेगा।अविवाहित: शादी के नए प्रस्ताव आ सकते हैं।विवाहित: शाम को किसी रोमांटिक डिनर पर जाने का योग है।मिथुन (Gemini)घूमने-फिरने का है योगआज आप अपने पार्टनर के साथ कहीं बाहर जाने का मन बनाएंगे। पुराने गिले-शिकवे दूर करने के लिए आज का दिन सबसे अच्छा है।टिप: अपने दिल की बात खुलकर कहें।कर्क (Cancer)भावुकता से बचेंकर्क राशि के जातक आज थोड़े भावुक रह सकते हैं। छोटी-छोटी बातों को दिल पर न लगाएं, वरना पार्टनर के साथ गलतफहमी हो सकती है।टिप: किसी भी फैसले में जल्दबाजी न करें।सिंह (Leo)प्यार का होगा इजहारआज का दिन आपके लिए काफी उत्साहजनक है। सिंगल लोग आज किसी खास को प्रपोज करने का मन बना सकते हैं।रिलेशनशिप: लॉन्ग डिस्टेंस वालों के लिए आज सरप्राइज मिल सकता है।कन्या (Virgo)मिलेगा पार्टनर का साथआज आपका पार्टनर आपकी ढाल बनकर खड़ा रहेगा। रिश्तों में ईमानदारी आपको एक-दूसरे के और करीब लाएगी।टिप: साथ मिलकर क्वालिटी टाइम बिताएं।तुला (Libra)नए रिश्ते की शुरुआततुला राशि वालों के लिए आज का दिन संतुलन भरा रहेगा। सिंगल लोगों की लाइफ में किसी खास व्यक्ति की एंट्री हो सकती है।टिप: पुराने रिश्तों को भूलकर आगे बढ़ने का समय है।वृश्चिक (Scorpio)भरोसे की है जरूरतआज आपको अपने पार्टनर पर शक करने से बचना चाहिए। बेवजह की ईर्ष्या आपके हंसते-खेलते रिश्ते में खटास डाल सकती है।टिप: बातचीत से गलतफहमियां दूर करें।धनु (Sagittarius)भविष्य की योजनाएंआज आप अपने साथी के साथ भविष्य को लेकर गंभीर चर्चा कर सकते हैं। आपसी तालमेल बहुत बढ़िया रहेगा।टिप: घर वालों से अपने रिश्ते की बात करने के लिए दिन अच्छा है।मकर (Capricorn)वक्त की कमीकाम की अधिकता के कारण आप आज अपने पार्टनर को समय नहीं दे पाएंगे, जिससे वे नाराज हो सकते हैं।टिप: एक प्यारा सा मैसेज या कॉल आपके रिश्ते में शांति बनाए रखेगा।कुंभ (Aquarius)रोमांटिक मिजाजआज आपका आकर्षण चरम पर होगा। पार्टनर आपकी बातों और आपके अंदाज से प्रभावित रहेगा।टिप: आज शाम कुछ खास सरप्राइज प्लान करें।मीन (Pismin)प्यार में मिलेगी सफलतामीन राशि वालों के लिए आज का दिन यादगार रहेगा। प्रेम विवाह के योग बन रहे हैं। जीवनसाथी के साथ आपके संबंध और गहरे होंगे।टिप: अपने साथी की छोटी-छोटी खुशियों का ख्याल रखें।आज का विशेष लव मंत्र:&quot;प्यार में &#039;सुनना&#039; भी उतना ही जरूरी है जितना कि &#039;बोलना&#039;। आज अपने पार्टनर की बातों को गहराई से समझें।&quot; ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:49 +0530</pubDate>
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<title>13 जून 2026 से बदलेगी किस्मत, Dwidwadash Yog से इन Zodiac Signs को मिलेगी Good News</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के गोचर और उनके बीच बनने वाले योगों का विशेष महत्व माना जाता है। कहा जाता है कि जब ग्रह अनुकूल अवस्था में आकर विशेष संबंध बनाते हैं, तो इसका प्रभाव कई राशियों पर देखने को मिलता है। कल यानी 13 जून 2026 को चंद्रमा के वृषभ राशि में प्रवेश करने और बुध के मिथुन राशि में स्थित रहने से एक विशेष द्विद्वादश योग का निर्माण होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में और बुध अपनी स्वराशि मिथुन में होने के कारण इस योग के प्रभाव और अधिक शुभ माना जा रहा है। इस अवधि में कुछ राशियों के लोगों के लिए भाग्य के द्वार खुल सकते हैं। नौकरी और व्यवसाय में प्रगति के संकेत मिलेंगे, वहीं धन संबंधी मामलों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही, लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने तथा नए अवसरों से लाभ प्राप्त होने के योग बन रहे हैं।वृषभ राशिद्विद्वादश योग वृषभ राशि के जातकों के लिए लाभदायक माना जा रहा है। इस अवधि में आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने मिलेंगे। काफी समय से चल रही रुकावटें समाप्त होगी और आपकी योजनाएं जल्द ही गति पकड़ लेगी। बिजनेस से जुड़े लोगों को किसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं या सौदे में सफलता मिल सकती है। नौकरीपेशा लोगों के लिए यह भी समय अच्छा रहने वाला है और वर्कप्लेस पर आपके कार्य को लेकर सराहना हो सकती है। आपका संवाद पहले से बेहतर होगा। इससे सामाजिक और पेशेवर संबंध मजबूत रहेगा। आर्थिक स्थिति पहले से अधिक मजबूत होगी और आपको धन लाभ होगा।सिंह राशिसिंह राशि वालों के लिए यह समय प्रोफेशनल लाइफ और आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। लंबे समय से किए गए प्रयासों का अनुकूल परिणाम मिलने के योग बन रहे हैं, जिससे मनोबल और आत्मविश्वास दोनों मजबूत होंगे। रोजगार की तलाश में लगे लोगों को नई संभावनाएं मिल सकती हैं, जबकि नौकरीपेशा जातकों को जिम्मेदारियों के साथ सम्मान और उन्नति प्राप्त होने के संकेत हैं। धन संबंधी मामलों में स्थिति बेहतर रह सकती है और पुराने निवेश भी अच्छा लाभ दे सकते हैं। जो लोग नया कारोबार शुरू करने का विचार कर रहे हैं, उन्हें किसी अनुभवी सलाहकार की मदद से सही दिशा मिल सकती है। वहीं विज्ञापन, प्रबंधन, प्रशासन, जनसंपर्क और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह अवधि विशेष सफलता और पहचान दिलाने वाली साबित हो सकती है।मीन राशिमीन राशि के जातकों के लिए द्विद्वादश योग नई संभावनाओं और उपलब्धियों का संकेत दे रहा है। इस दौरान आप अपनी प्रतिभा और क्षमताओं को बेहतर प्रयोग कर पाएंगे। करियर में आगे बढ़ने के लिए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। वर्कप्लेस में वरिष्ठ अधिकारी आपके काम से प्रसन्न होंगे और आपको नई जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। रिश्तेदारों और भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त हो सकता है। घर में वाहन या संपत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले ले सकते हैं। बिजनस में चली परेशानियां दूर होगी और रुके हुए कार्य पूरे होने लगेंगे। कुल मिलाकर यह समय आत्मविश्वास, प्रगति और आर्थिक स्थिति मजबूत करने वाली है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:49 +0530</pubDate>
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<title>Ank Jyotish Today: मूलांक 4 को मिलेगा Big Success, मूलांक 5 वाले न करें ये गलती, जानें भविष्यफल</title>
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<description><![CDATA[ आज की तारीख है 13 जून, 2026 है। आज की ऊर्जा काफी सकारात्मक है। आद का दिन जमीन पर उतारने और उन्हें एक ठोस रुप देने का है। अंक ज्योतिष के अनुसार, आज का दिन नंबर 4 का प्रभाव है, जो अनुशासन, जिम्मेदारी, मेहनत और संगठन का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही तारीखों का योग हमें नंबर 2 पर ले जाता है, जो धैर्य, कूटनीति और तालमेल के साथ काम करने की सीख देता है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं 1 से लेकर 9 मूंलाक के भविष्य के बारे में-मूलांक 1जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की तारीख 1, 10, 19 या 28 को हुआ है उनका मूलांक 1 होता है। आज का दिन आपके लिए टीम प्लेयर बनने की मांग कर रहा है। अकेले दौड़ में चलने के बजाय दूसरों के साथ लेकर चलें, इससे आपको ज्यादा बेहतर परिणाम मिलेगा। आज के दिन अपने बात को मनवाने के लिए जिद न करें, बल्कि अपनों की बात ध्यान से सुनें। सुझाव- एक अच्छा लीडर वहीं जो समय आने पर दूसरों की भी बात सुनता हो।मूलांक 2किसी भी महीने की 2, 11, 20 या 29 तारीख को जन्में लोग का मूलांक 2 है। आपकी सबसे बड़ी क्षमता धैर्य ही है। यदि आप अपने कार्यक्षेत्र में किसी विवाद गलतफहमी को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, तो आज का दिन बहुत अनुकूल है। आज के दिन आपको खुद को शांत रखें और दूसरों की आलोचना अपने दिल पर न लें।सुझाव : शांति और सद्भाव बनाए रखना ही आज आपकी सबसे बड़ी जीत है।मूलांक 3किसी भी जातक का जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो इनका मूलांक 3 है। आज आपके मन में कई नए और रचनात्मक विचार जन्म ले सकते हैं। यह समय केवल सोचने का नहीं, बल्कि उन योजनाओं को अमल में लाने का भी है। अपने कार्यों को सही दिशा और स्पष्ट योजना के साथ आगे बढ़ाएं। आलस्य या टालमटोल से दूरी बनाए रखें, क्योंकि आज किए गए प्रयास भविष्य में सफलता और लाभ का मजबूत आधार बन सकते हैं।सुझाव- अनुशासन के बिना आपकी क्रिएटिविटी का पूरा फल नहीं मिलता, इसे याद रखें।मूलांक 4जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 4 है। आज का दिन आपके लिए सकारात्मक ऊर्जा और उपलब्धियों से भरपूर रह सकता है। योजनाबद्ध तरीके से किए गए कार्यों में सफलता मिलने के अच्छे संकेत हैं। अपने कामकाज में नियमितता और अनुशासन बनाए रखने से बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे। आपके समर्पण और जिम्मेदार रवैये की लोग सराहना कर सकते हैं। हालांकि, स्वयं से अत्यधिक अपेक्षाएं रखने से बचें और परिस्थितियों के अनुसार लचीलापन बनाए रखें।सुझाव- धैर्य बनाए रखें, आपको बड़ी सफलता मिल सकती है।मूलांक 5किसी भी महीने 5, 14 या 23 तारीख को जन्में लोगों का मूलांक 5 होता है। आज आपका मन भागदौड़ या बदलाव की तरफ रहेगा। हालांकि आज की ऊर्जा आपसे थोड़ा धैर्य मांग रही है। नए कामों में हाथ डालने से पहले अपने अधूरे कार्यों को पूरा करें। अचानक से कोई बड़ा फैसला न लें, हर एक काम की प्लानिंग करें। सुझाव- आजादी का अर्थ जिम्मेदारी से भागना नहीं है, बल्कि उसे सही से निभाना है।मूलांक 6जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने के 6, 5 या 24 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 6 होता है। आज का दिन रिश्तों और परिवार के लिए काफी सुंदर है। अपनी टीम के साथ तालमेल बिठाकर काम करना आपको सफलता दिलाने वाली है। घर की छोटी-मोटी समस्याओं को सुलझाने के लिए आज का दिन बेस्ट है। दूसरों की सहायता जरुर करें। लेकिन खुद पर कोई बोझ न बढ़ाएं।सुझाव : सामंजस्य ही खुशी की कुंजी है, इसे बनाए रखें।मूलांक 7किसी भी महीने की 7, 16 या 25 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 7 होता है। आज आपका मन उन कार्यों में अधिक लगेगा जिनमें गहन अध्ययन, खोजबीन और विश्लेषण की आवश्यकता होती है। आपकी सूक्ष्म दृष्टि और समझ नई जानकारियां प्राप्त करने में मदद करेगी। यदि किसी विषय को लेकर दुविधा बनी हुई है, तो धैर्य और संयम के साथ उस पर विचार करें। दूसरों के साथ बातचीत करते समय अपनी बात साफ और सरल तरीके से रखें, ताकि किसी प्रकार का भ्रम या गलतफहमी पैदा न हो।सुझाव- मौन रहे अवलोकन करना आपके लिए आज सही रहने वाला है।मूलांक 8 जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 8,17 या 26 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 8 होता है। आज की लंबी अवधि की प्लानिंग और फाइनेंस के लिए बढ़िया रहने वाली है। आपकी व्यावहारिक बुद्धि आज आपको आगे ले जाएगी। काम बोझ के साथ-साथ अपने निजी जीवन का भी ख्याल रखें। अपनों को केवल आपकी आर्थिक मदद की ही नहीं, आपकी भावनापूर्ण साथ की भी जरुरत है। सुझाव- असली समृद्धि वही है, जिसमें शांति हो।मूलांक 9जिन लोगों का जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 9 होता है। अपनी ऊर्जा को सही जगह लगाएं और जो काम आपने शुरु किए है, उन्हें समाप्त करें। अपनी दया और उदारता से आज आप लोगों का दिल जीत पाएंगे। गुस्सें आकर कोई भी प्रतिक्रिया न दें। सुझाव- दूसरों की मदद करना आपकी आत्मा को मजबूती देता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 13 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें। महत्वपूर्ण काम दोपहर तक निपटा लें। अधूरे पड़े हुए काम पूरे हो सकते हैं। अशुभ समाचार योजनाओं में विफलता।वृषआपकी प्रतिष्ठा के चार चांद लगेंगे। तन-मन-धन का ध्यान रखें। सहज रहेंगे, काम भी सहज बनेंगे। संभलकर चलें चोट/धोखे की संभावना।मिथुनरिश्तेदार शुभ कार्य सम्पन्न होने में सहयोग देंगे। नई उम्मीदें लेकर सूर्योदय होगा। मित्र मिलन का दिन है- संबंध सुधरेंगे। विश्वासघात से गहरा मानसिक आघात लग सकता है।कर्कपदोन्नति का उत्तम अवसर, खुशी मिलेगी। रिश्तेदारों में मनमुटाव। परिवार का वातावरण प्रतिकूल रहेगा। खर्चों की अधिकता परिवार की चिंता।सिंहसत्कार्यों और दिखावे में अधिक खर्च होगा। किसी सम्मेलन या पार्टी संबंधी कार्य में व्यस्तता। परस्पर सहमति से काम आगे बढ़ेगा। कष्टों और चिंताओं से मुक्ति मिलेगी।कन्यागुमशुदा महत्वपूर्ण कागजात/वस्तुएं फिर मिलेगी। &#039;हीरो&#039; जैसा आदर सत्कार मिलेगा। दिन अच्छा नहीं, हानि हो सकती है। आनंदपूर्वक दिन बीतेगा। तुलाछोटी सी गलती बड़ी भूल साबित होगी। बाधाएं दूर होगी, लक्ष्य भी और आगे बढ़ेंगे। सब तरफ से शुभ समाचार और लाभ। मित्रता की परीक्षा में सफल होंगे।वृश्चिक अनसुलझे प्रश्नों के उत्तर मिलेंगे। मान प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। नौकरी और प्रतियोगिता के लिए सफल दिन। सार्वजनिक सम्मान से प्रसन्नता।धनुअपनी नौकरी और बच्चों की तरक्की की चिंता। आध्यात्मिक जीवन शैली पर ध्यान देंगे। परिस्थितियां सुधार की ओर बढ़ रही हैं। आपका स्वभाव अड़ीयल हो सकता है।मकर कलह और कष्ट का समय है। तनाव से मुक्ति-प्रसन्नता की प्राप्ति। भविष्य निर्माण में सहायक श्रेष्ठ सम्पर्क होंगे। ज्ञान विज्ञान के प्रति रूचि और प्रगति वाला दिन।कुंभजीवनसाथी के साथ संबंध सुधरेंगे। तनावमुक्त मस्ती भरा जीवन। धन और उपहार की प्राप्ति होगी। ईर्ष्या, द्वेष के शिकार होंगे।मीनबच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए बीमा पॉलिसी। आपके विरु़द्ध साजिश रूचि जा रही है। खर्च पर नियंत्रण रखें। रचनात्मक कार्य प्रतिष्ठा बढ़ाएंगे। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:48 +0530</pubDate>
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<title>Shukra Pradosh Vrat 2026: क्यों इतना खास है यह शुक्र प्रदोष व्रत? जानें Lord Shiva की पूजा का Perfect Time और विधि</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। बता दें कि हर महीने की शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस व्रत को पूरी श्रद्धा और नियम के साथ करता है, उस पर महादेव की विशेष कृपा होती है और जीवन के सभी कष्टों का नाश होता है। वहीं अधिकमास में आने वाले प्रदोष व्रत को अधिक फलदायी माना जाता है। इस बार आज यानी की 12 जून 2026 को शुक्र प्रदोष व्रत किया जा रहा है। तो आइए जानते हैं शुक्र प्रदोष व्रत की तिथि, मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में...तिथि और मुहूर्तज्येष्ठ अधिकमास भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। यह विशेष महीना 3 साल में एक बार आता है। इस पवित्र अधिकमास में शुक्र प्रदोष व्रत का शुभ संयोग बन रहा है। वैदिक पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरूआत 12 जून की शाम 07:36 मिनट से हो रही है। जोकि अगले दिन यानी की 13 जून की शाम 04:07 मिनट पर समाप्त होगी।इसे भी पढ़ें: Parama Ekadashi 2026: 3 साल में एक बार आती है Parama Ekadashi, जानें Lord Vishnu को प्रसन्न करने का मुहूर्त और विधिप्रदोश काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए इस बार 12 जून 2026 को प्रदोष व्रत किया जा रहा है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है। क्योंकि यह व्रत शुक्रवार को पड़ रहा है, इसलिए इसको शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा।प्रदोष काल में प्रदोष व्रत की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। आज प्रदोष काल का शुभ समय शाम 07:36 बजे से 09:20 बजे तक रहेगा। इस अवधि में महादेव की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है और जातक की मनोकामना पूरी होती है।पूजन विधिइस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करके साफ कपड़े पहनें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर को साफ करके गंगाजल का छिड़काव करें। फिर लकड़ी की चौकी पर भगवान शिव की प्रतिमा को स्थापित करें। &#039;ऊँ नम: शिवाय&#039; मंत्र का जाप करते हुए पूजा शुरू करें। शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें और भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग और शमी पत्र अर्पित करें।भगवान शिव को अक्षत, चंदन और कनेर के फूल अर्पित करें और घी का दीपक जलाकर भगवान शिव के सामने बैठकर शिव चालीसा का पाठ करें और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। अब अंत में भगवान शिव की आरती करें और पूजा संपन्न करने के बाद भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:43 +0530</pubDate>
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<title>Famous Temple: Sabarimala Temple ही नहीं, इन मंदिरों में भी महिलाओं की &amp;apos;No Entry&amp;apos;, वजह कर देगी हैरान</title>
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<description><![CDATA[ आपको जानकर हैरानी होगी कि कुछ मंदिरों में महिलाओं का प्रवेश करना वर्जित माना जाता है। प्राचीन मान्यताओं, लोक परंपराओं और सदियों पुरानी रीति-रिवाजों की वजह से कुछ मंदिरों में महिलाओं का प्रवेश वर्जित माना जाता है। यह मंदिर सिर्फ पूजा स्थल ही नहीं बल्कि अपने आप में सदियों पुरानी भक्ति, शक्ति और रहस्यों से भरी कहानियों को समाहित किए हुए हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको देश के 5 ऐसे मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर आज भी महिलाओं के प्रवेश पर नो एंट्री है।सबरीमाला मंदिरकेरल का सबरीमाला मंदिर भारत के सबसे फेमस तीर्थ स्थलों में से एक है। जहां भगवान अयप्पा के ब्रह्मचर्य से जुड़ी सदियों पुरानी मान्यताओं की वजह से महिलाओं के प्रवेश की मनाही है।इसे भी पढ़ें: Ekadashi Rules: एकादशी व्रत में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, Lord Vishnu हो सकते हैं नाराजकेरल का यह मंदिर दुनियाभर में भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है। 41 दिनों का उपवास के दौरान जो भी भक्त उनकी गहन शक्ति और अनुशासन को दर्शाता है। हालांकि इस मामलों को लेकर कानूनी लड़ाई जारी है। लेकिन फिर भी आध्यात्मिक परंपरा मजबूत बनी है।शनि शिंगणापुर मंदिरमहाराष्ट्र का शनि शिंगणापुर मंदिर भगवान शनि देव को समर्पित है। यहां पर गर्भ गृह में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं है। क्योंकि मान्यताओं के मुताबिक शनि की शक्तिशाली ऊर्जा महिलाओं पर अलग तरह से असर दिखा सकती है।शनि शिंगणापुर मंदिर अपनी चमत्कारी कहानियों को लेकर फेमस है। इन कहानियों में चोरी की गई चीजों को लौटाने वाले चोरों की कहानियां भी शामिल हैं।गुरुवायूर मंदिरकेरल का एक और गुरुवायूर मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। यहां पर मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के लिए कड़े नियम हैं।परंपराओं के मुताबिक महिलाओं को कुछ गर्भ गृह में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है। जोकि अनुष्ठानिक पवित्रता में सदियों पुरानी मान्यताओं को दर्शाता है। श्रद्धालु इसको दैवीय निर्देश मानते हैं। जोकि भेदभाव की जगह आध्यात्मिकता पर आधारित है।कोटिलिंगेश्वर मंदिरकर्नाटक का कोटिलिंगेश्वर मंदिर लाखों शिवलिंग के लिए फेमस है। सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार, आध्यात्मिक एनर्जी को सुरक्षित करने की परंपरा के तहत खास पर्व-त्योहारों के दौरान मंदिर के कुछ आंतरिक क्षेत्रों में महिलाओं को जाने की मनाही है। यह मंदिर ध्यान, गहरी भक्ति और तपस्या का प्रतीक माना जाता है।मूकाम्बिका मंदिरकर्नाटक का मूकाम्बिका मंदिर कोडाचाद्री पहाड़ियों पर बसा है। यह मंदिर मूकाम्बिका देवी को समर्पित है। इस मंदिर की ऐतिहासिक परंपराओं के मुताबिक कुछ आयु वर्ग की महिलाओं को पारंपरिक रूप से मंदिर के कुछ हिस्सों में प्रवेश की अनुमति नहीं देता है।नवरात्रि और अन्य त्योहारों के दौरान हजारों की संख्या में तीर्थयात्री इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। जोकि अनुशासन, आस्था और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:40 +0530</pubDate>
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<title>Kedarnath के &amp;apos;रक्षक&amp;apos; हैं भैरव बाबा, इनके दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है तीर्थ यात्रा</title>
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<description><![CDATA[ हर एक शिवभक्त का सपना होता है कि एक दिन केदारनाथ धाम जरुर जाएं। अक्सर देखा जाता है कि लोग केदारनाथ बाबा के दर्शन तो कर लेते हैं, लेकिन काल भैरव के दर्शन करके नहीं आते हैं। माना जाता है कि इससे आपकी यात्रा अधूरी रह जाती है। करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए केदारनाथ मंदिर आस्था का केंद्र है, लेकिन कई लोग आस-पास स्थित खास जगहों के बारे में कम ही जानते हैं। हर साल लाखों लोग देश-विदेश से केदारनाथ के दर्शन करने जाते हैं, लेकिन काल भैरव के दर्शन करना भूल ही जाते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि काल भैरव मंदिर कैसे जाएं और यह कहां पर स्थित है। केदारनाथ में काल भैरव मंदिर कहां पड़ता है?जब हम केदारनाथ मंदिर जाते हैं, तो यह वहां से ज्यादा दूर नहीं हैं। केदारनाथ से करीब 1 किमी की दूरी पर स्थित है यह मंदिर। यहां पहुंचने के लिए कोई वाहन नहीं जाता है, इसलिए इस मंदिर में जाने के लिए पैदल ही यात्रा करनी पड़ती है। यहां पहुंचने के लिए आपको करीब 15 से 20 मिनट की चढ़ाई करनी पड़ेगी। रास्ता काफी छोटा है, लेकिन चढ़ाई के कारण यहां समय लग जाता है।कब जाना अच्छा है?इस बात का ध्यान रखें कि यहां जाने के लिए आपको केदारनाथ की तरह पालकी ले जाने की जरुरत नहीं है। वहीं, हेलीकॉप्टर भी तक यहां तक नहीं जाता, दूरी कम है, इसलिए आपको पैदल ही सफर करना होगा। आप यहां सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक दर्शन करके लौट आएं। वैसे यहां पर भीड़ कम होती है और सूर्यास्त के समय केदारनाथ घाटी का नजारा और सुंदर भी हो जाता है। ध्यान रखें कि, रात के समय यहां पर न जाएं, क्योंकि रास्ते में लाइट नहीं होने के कारण आपको परेशानी हो सकती है। दिन के समय में ही दर्शन करना अच्छा है।श्रद्धालु कैसे दर्शन करने जाते हैं - भक्तजन पहले केदारनाथ जाते हैं और इसके बाद होटल या धर्मशाला में अपना सामान रख देते हैं। - केदारनाथ बाबा के दर्शन करने के बाद काल भैरव जाएं। - जितना हो सके समय रहते हुए नीचे आ जाए, क्योंकि होटल आपको नीचे ही मिलेगा। - वैसे काल भैरव के पास कोई भी होटल नहीं है, इसलिए आपको नीचे आना होगा।यात्री इस बात का ध्यान रखें कि केदारनाथ यात्रा से पहले केदारनाथ मंदिर आता है, इसके बाद काल भैरव मंदिर आता है। केदारनाथ धाम के पीछे जा रहे रास्ते पर चढ़कर काल भैरव मंदिर पहुंचाना होता है।  ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Rahu Ketu Temples: Rahu&#45;Ketu के प्रकोप से हैं परेशान? India के इन 6 मंदिरों में दर्शन से मिलेगा हर संकट से छुटकारा</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को भी उतना ही महत्वपूर्ण ग्रह हैं, जिनके की अन्य ग्रह हैं। राहु-केतु ग्रह को छाया ग्रह माना जाता है और इनको जीवन में अचानक होने वाले बदलाव, भ्रम और कर्मों के सबक के लिए जिम्मेदार माना जाता है। वहीं इन दोनों ग्रहों को आध्यात्मिक विकास और आत्म साक्षात्कार की तरफ बढ़ने वाली शक्तिशाली ताकतों के रूप में भी पूजा जाता है। देशभर में राहु-केतु से जुड़े 6 ऐसे मंदिर हैं, जहां पर भक्त इन स्थानों पर आकर अपने ग्रहीय प्रभावों को कम करने के लिए धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन करते हैं।श्री कालहस्तीश्वर मंदिरआंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में श्रीकालहस्तीश्वर में स्थित है। यह मंदिर देश के सबसे पूजनीय शैव तीर्थों में शामिल है। यहां पर भगवान शंकर को कालहस्तीश्वर के रूप में पूजा जाता है। जोकि वायु का प्रतिनिधित्व करते हैं।इसे भी पढ़ें: Ekadashi Rules: एकादशी व्रत में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, Lord Vishnu हो सकते हैं नाराजइस मंदिर को राहु-केतु क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है। जिस कारण से स्थानीय इसको दक्षिण कैलाशम भी कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से राहु-केतु से जुड़े दोष कम होते हैं।तिरुनागेश्वरम नागनाथर मंदिरतिरुनागेश्वर नागनाथर मंदिर तमिलनाडु में स्थित है। इसको राहु स्थलम के नाम से भी जाना जाता है। तिरुनागेश्वरम नागनाथर मंदिर तमिलनाडु के कुंभकोणम के नजदीक एक पूजनीय शिव मंदिर है। स्थानीय लोग यहां पर भगवान शिव को नागनाथ और मां पार्वती को पिरैसूदी अम्मन के रूप में पूजते हैं।नवग्रह स्थलों में शामिल यह स्थान राहु ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। मंदिर में चार गोपुरम, कई मंदिर और हॉल बने हैं। जिनमें सबसे ज्यादा आकर्षक नायक काल में बना भव्य अलंकृत हॉल शामिल है।श्री नागनाथस्वामी केथु मंदिरश्री नागनाथस्वामी केथु मंदिर तमिलनाडु के कीझापेरुमपल्लम में स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव के नागनाथ स्वामी के रूप में समर्पित है। यह मंदिर समतल, साधारण और राजगोपुरम और दो प्रकारम है। यहां पर रोजाना सुबह 6 बजे से 8:30 बजे तक दिन में 4 बार पूजा होती है। वहीं महाशिवरात्रि के मौके पर मंदिर में भीड़ रहती है।राहु केतु मंदिरतेलंगाना में स्थित राहु-केतु मंदिर अपने शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। देश भर से भक्त यहां पर आते हैं और राहु-केतु से जुड़े दोषों के निदान के लिए धार्मिक अनुष्ठान करवाते हैं। मंदिर का शांत वातावरण इन ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को कम करता है और आध्यात्मिक रूप से यह मंदिर खास स्थान प्रदान करता है।श्री नीलकंडेश्वर मंदिरचेन्नई के गेरुगमबक्कम में श्री नीलकंडेश्वर मंदिर स्थित है। यहां पर भगवान शंकर को नीलकंडेश्वरार के रूप में पूजा जाता है। वहीं मां पार्वती की पूजा मां कामाक्षी के रूप में होती है। मंदिर में केतु को समर्पित एक मंदिर है। जहां पर केतु से जुड़े दोषों से छुटकारा पाने के लिए अनुष्ठान किया जाता है।राहु मंदिरउत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ों के बीच राहु मंदिर है। राहु को समर्पित यह मंदिर अपने अनुष्ठानिक महत्व और खुले वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां के सौम्य और शांत वातावरण में भक्त ध्यान करते हैं। वहीं राहु के अशुभ दोषों को कम करने के लिए अनुष्ठानों में हिस्सा लेते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:38 +0530</pubDate>
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<title>Mysterious Temple: Uttarakhand का Kasar Devi Temple, जहां Van Allen Belt की शक्ति के आगे Science भी फेल</title>
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<description><![CDATA[ देवभूमि के नाम से फेमस उत्तराखंड अपनी सांस्कृतिक, सुंदरता और अनोखी परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां कई ऐसे मंदिर हैं, जहां पर देश-विदेश से भक्त दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन आज हम आपको उत्तराखंड में मौजूद एक ऐसे मंदिर के रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां लोग दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं। अल्मोड़ा का कसार देवी मंदिर अपनी अनोखी चुंबकीय शक्ति के लिए काफी ज्यादा लोकप्रिय है।इस मंदिर में भक्तों के अलावा वैज्ञानिकों भी आते हैं और इसके पीछे का रहस्य जानने के लिए के लिए। लेकिन माना जाता है कि आज तक कोई भी इस मंदिर से जुड़े चमत्कार के पीछे का असल कारण कोई पता नहीं लगा पाया। तो आइए जानते हैं इस रहस्यमयी मंदिर के बारे में... इसे भी पढ़ें: Famous Temple: Sabarimala Temple ही नहीं, इन मंदिरों में भी महिलाओं की &#039;No Entry&#039;, वजह कर देगी हैरानइन मशहूर हस्तियों ने किया दर्शनउत्तराखंड के अल्मोड़ा में स्थित कसार देवी मंदिर में स्वामी विवेकानंद ध्यान-योग के लिए आए थे। तब से यह मंदिर भक्तों के बीच काफी फेमस है। स्वामी विवेकानमद को यह जगह इतनी पसंद आई थी कि उन्होंने अपने लेखन में भी इस मंदिर का जिक्र किया था। इस मंदिर की महिमा इतनी विशाल है कि यहां पर जॉर्ज हैरिसन, बॉब डायलन, एलन गिन्सबर्ग, कैट स्वीवंस और टिमोथी जैसी शख्सियत आ चुकी हैं। साल 1970 में यह जगह हिप्पी हिल बन गई थी।क्यों फेमस है मंदिरइस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां पर देवी मां साक्षात अवतार में आई थीं। माना जाता है कि यह भारत की एकमात्र ऐसी जगह है, जहां चुंबकीय पिंड है। वैज्ञानिकों की मानें, तो कसार देवी मंदिर के आसपास का एरिया वैन एलेन बेल्ट है। जहां धरती के भीतर भू-चुंबकीय पिंड है।कसार देवी मंदिर से कई शक्तियां जुड़ी हैं। जिसके बारे में पता लगाने नासा के वैज्ञानिक भी आए थे। लेकिन उनको इसके पीछे का रहस्य नहीं पता चला और वैज्ञानिकों को खाली हाथ लौटना पड़ा। इस क्षेत्र के आसपास के लोगों को यहां पर मानसिक शांति मिलती है।ऐतिहासिक महत्वयहां के स्थानीय लोगों के बीच कसार देवी मंदिर का बड़ा ऐतिहासिक महत्व है। यह मंदिर पवित्र तीर्थ स्थलों में शामिल है। हर साल कार्तिक माह की पूर्णिमा के मौके पर कसार देवी मंदिर में मेला लगता है। जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं। माना जाता है कि इस मेले का महत्व सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेश से आए श्रद्धालुओं के बीच भी है।कसार देवी मंदिर में भक्त अक्सर मानसिक शांति और गहन साधना के लिए यहां आते हैं। यहां के नजारे और हरियाली आपको मानसिक शांति और अंदर से तरोताजा कर देंगी। कसार देवी मंदिर बिनसर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के काफी ज्यादा करीब है। यहां पर हर प्रजाति के पक्षी देख सकते हैं। गहन ध्यान और साधना वाले लोगों की यह जगह आज भी पहली पसंद बनी है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 13:18:38 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 11 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 11 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 11 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशि (Aries)आज आपके प्रेम संबंध में एक नई ऊर्जा और ताजगी महसूस होगी। अगर पिछले कुछ दिनों से कोई गलतफहमी चल रही थी, तो आज बातचीत के जरिए उसे दूर करने का सही समय है। जो लोग अकेले हैं, उनकी जिंदगी में किसी खास शख्स की एंट्री हो सकती है।वृषभ राशि (Taurus)आज साथी के जज्बातों को समझने की कोशिश करें। काम के बढ़ते दबाव के चलते आप उन्हें ज्यादा वक्त नहीं दे पाएंगे, जिससे वे थोड़ा उदास हो सकते हैं। शाम को कोई छोटा सा सरप्राइज या उनकी पसंद का काम करना आपके रिश्ते में मिठास घोल देगा।मिथुन राशि (Gemini)रोमांस के लिहाज से आज का दिन बेहद खूबसूरत रहने वाला है। आपके और आपके पार्टनर के बीच आपसी तालमेल और गहरा होगा। अगर आप अपने इस रिश्ते को शादी के बंधन में बदलने की सोच रहे हैं, तो परिजनों से बात करने के लिए समय पूरी तरह अनुकूल है।कर्क राशि (Cancer)आज लव लाइफ में थोड़ा संभलकर रहने की जरूरत है। किसी तीसरे व्यक्ति की दखलअंदाजी आपके रिश्ते में तनाव पैदा कर सकती है। सुनी-सुनाई बातों पर यकीन करने के बजाय अपने साथी पर भरोसा रखें और शांति से स्थिति को संभालें।सिंह राशि (Leo)आज आपका आकर्षण चरम पर रहेगा और आपका पार्टनर आपकी तरफ काफी खिंचाव महसूस करेगा। उनकी ओर से आपको कोई प्यारा सा तोहफा मिल सकता है। जो लोग सिंगल हैं, उनके लिए आज अपने दिल का हाल बयां करने का बहुत अच्छा मौका है।कन्या राशि (Virgo)आज आपको अपनी बातचीत के तरीके पर थोड़ा ध्यान देना होगा। गुस्से या जल्दबाजी में कही गई कोई बात पार्टनर के दिल को दुखा सकती है। अपनी भावनाएं जरूर व्यक्त करें, लेकिन आपके शब्दों में नरमी होनी चाहिए।तुला राशि (Libra)प्यार के मामले में आज का दिन बेहद आनंदमयी और यादगार रहेगा। आप अपने पार्टनर के साथ कहीं बाहर घूमने या कैंडललाइट डिनर का प्लान बना सकते हैं। एक-दूसरे के साथ बिताया यह समय आपके जुड़ाव को और मजबूत करेगा।वृश्चिक राशि (Scorpio)आज प्रेम जीवन में थोड़े उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। किसी पुरानी या दबी हुई बात को लेकर पार्टनर के साथ तीखी बहस होने के संकेत हैं। बात को ज्यादा तूल देने के बजाय समझदारी से मामले को वहीं रफा-दफा करें।धनु राशि (Sagittarius)धनु राशि वालों के लिए आज का दिन खुशियों की सौगात लेकर आया है। साथी के साथ बेहतरीन पल बिताने का अवसर मिलेगा, जिससे आपकी पुरानी सुनहरी यादें फिर से ताजा हो जाएंगी। रिश्ते में एक नया उत्साह और जोश देखने को मिलेगा।मकर राशि (Capricorn)अगर आप लंबे समय से किसी को पसंद करते हैं और कह नहीं पाए हैं, तो आज अपने प्यार का इजहार कर दीजिए, दिन बढ़िया है। शादीशुदा जातकों के जीवन में तालमेल बना रहेगा और उन्हें हर मोड़ पर जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा।कुंभ राशि (Aquarius)आज पार्टनर के साथ आपका मानसिक और भावनात्मक तालमेल और भी मजबूत होगा। आप दोनों मिलकर अपने भविष्य को लेकर कुछ गंभीर चर्चाएं कर सकते हैं। अविवाहित लोगों के जीवन में किसी नए प्रेम-संबंध की शुरुआत होने के प्रबल योग हैं।मीन राशि (Pisces)आज भावनाओं के आवेग में आकर कोई भी जल्दबाजी भरा फैसला न लें। मुमकिन है कि पार्टनर की कोई बात आपको बुरी लग जाए, लेकिन याद रखें कि हर उलझन का हल सिर्फ संवाद से ही निकलता है। थोड़ा धैर्य बनाए रखें। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Vastu Tips: Bedroom की Negative Energy से हैं परेशान? Good Luck के लिए आजमाएं ये अचूक Vastu Tips</title>
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<description><![CDATA[ बेडरूम सिर्फ सोने की जगह नहीं बल्कि यह वह स्थान है, जहां पर हम अपना अधिकतर समय बिताते हैं। लेकिन कई बार सब ठीक होने के बाद भी बेडरूम में कदम रखते ही तनाव, निगेटिविटी या भारीपन महसूस होता है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो आपको वास्तु शास्त्र में बताए गए कुछ उपायों को करना चाहिए। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको 3 ऐसे वास्तु उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको करने से बेडरूम की निगेटिविटी छूमंतर हो जाएगी।बेडरूम से हटाएं मिररवास्तु शास्त्र में बेडरूम में मिरर को लेकर कई कड़े नियम बताए गए हैं। अगर बेडरूम में शीशा ऐसी जगह पर लगा है, जहां पर सोते समय आप इसमें नजर आते हैं, तो फौरन इसकी दिशा को बदल देना चाहिए। वरना इससे आपको नुकसान हो सकता है और वैवाहिक जीवन में तनाव हो सकता है। कोशिश करें कि मिरर को ढककर रखें, जिससे कि आपके ऊपर इसका निगेटिव असर न हो।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 11 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 11 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनसेंधा नमक और कपूर काअगर आपको भी बेडरूम में निगेटिविटी महसूस हो रही है, तो आपका सेंधा नमक और कपूर का उपाय करना चाहिए। इससे बेडरूम में भारीपन और बुरे सपने जैसी समस्या नहीं होगी। कांच की कटोरी में कपूर और सेंधा नमक लेकर इसको बेड के पास रख दें। एक सप्ताह बाद इसको बदल देना चाहिए। इससे आपको पॉजिटिविटी महसूस होने लगेगी।बेड की सही दिशा जरूरीकई बार अंजाने में हम सही दिशा में बेड को नहीं रख पाते हैं। जिसके कारण वैवाहिक जीवन पर निगेटिव असर पड़ता है। इसलिए प्रयास करें कि बेड को सही दिशा में रखें। जिससे कि इसका शादीशुदा जीवन पर सही प्रभाव पड़े।बेडरूम में पॉजिटिव एनर्जी बनाए रखने के लिए इन उपायों के साथ-साथ सुबह की जाती हवा और धूप को कमरे में आने दें। बेडरूम की दीवारों पर हमेशा हल्के और शांत रंग जैसे लाइट पिंक, क्रीम और स्काई ब्लू का इस्तेमाल करना चाहिए। इन छोटे-छोटे उपायों से आपका बेडरूम पॉजिटिविटी और खुशियों से भर जाएगा। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 12 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष किसी पूर्व कृत्य के कारण बदनामी मिलेगी। खर्च की अधिकता और कुसंग से परेशानी। मन अस्थिर रहेगा, निर्णय नहीं ले पाएंगे। अत्यंत व्यस्तता और कर्मठता वाला दिन।वृषपैतृक संपत्ति संबंधी विवाद सुलझेगा। विद्यार्थियों के उत्तम और यशस्वी दिन। प्रेम प्रसंग विवाह प्रस्ताव में बदलेगा। बुरा समय टल जाएगा, प्रयत्न सफल होगा।मिथुनविदेशों से आयात-निर्यात करने पर लाभ उठाएंगे। निकट दूरी की यात्रा के प्रसंग बनेंगे। रोजगार व्यवसाय में नई स्थापना। आत्मबल और आत्म सम्मान दोनों ही बढ़ेंगे।कर्कधन और यश की प्राप्ति। संघर्ष पूर्ण समय रहेगा। कुछ दीर्घकालीन चिंताओं का अंत होगा। जो चाहे, जैसा चाहे मिलेगा।सिंहभविष्य के लिए लाभदायक जन सम्पर्क बढ़ेंगे। सम्पति संबंधी विवाद का हल निकलेगा। शुभ समाचार, उपहार और अन्य लाभ। आपके व्यक्तित्व से जनता प्रभावित होगी।कन्याकलहपूर्ण वातावरण, घर व्यवसाय में हानि। पूंजीनिवेश करने से बचें। जालसाझी के शिकार हो सकते हैं। कोई खास चुनौती स्वीकारेंगे।तुलाविद्यार्थियों की अनेक समस्याओं का निवारण होगा। कर्ज लेने की स्थिति आ सकती है। सुखद भविष्य के लिए योजना की रूपरेखा। रोजगार के क्षेत्र में लाभ होगा।वृश्चिक पड़ोसियों से संबंधों में सुधार होगा। परिश्रम सफल होगा, आर्थिक उन्नति होगी। कुछ गलतियां पर पछतावा होगा। अविवेकपूर्ण निर्णय धन हानि करा सकता है।धनुपरोपकार के कार्यों में व्यस्ता। गलतफहमी के शिकार हो सकते हैं। कार्य भार अधिक, थकान हो सकती है। बहुत अच्छा दिन, लाभ ही लाभ।मकर अधिकार क्षेत्र व्यापक होगा, धनागम भी। थोड़े से परिश्रम से बड़ा लाभ होगा। पुराने मित्रों और निकट संबंधी से मुलाकात होगी। व्यवसाय की कोई नई योजना बनेगी।कुंभजोखिमों से दूर रहने में ही भलाई है। सरकारी अधिकारियों से सम्पर्क और संबंध बढ़ेंगे। बड़ों का स्वास्थ्य नरम, रूकावटें भी अधिक है। विवाद विजय का दिन है।मीनमानसिक उलझनें दूर हो जायेंगी। स्वास्थ्य में सुधार होगा, अपने को ऊर्जावान महसूस करेंगे। रोजगार तथा अन्य आर्थिक कार्यों में सफलता। नए पुराने परिचय ताजा होंगे। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:35 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 12 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 12 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 12 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष: आज पार्टनर के साथ बहस से बचें। आपकी छोटी सी बात विवाद का रूप ले सकती है। शांति बनाए रखना ही बेहतर होगा।वृषभ: रोमांस के लिए बेहतरीन दिन है। पार्टनर के साथ आपसी समझ बढ़ेगी। अविवाहितों के लिए शादी की बात आगे बढ़ सकती है।मिथुन: आज आप काफी खुशमिजाज रहेंगे। लव पार्टनर के साथ किसी लंबी यात्रा या डिनर का प्लान बन सकता है।कर्क: भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला न लें। पार्टनर की किसी बात से मन दुखी हो सकता है, लेकिन बातचीत से मामला सुलझ जाएगा।सिंह: प्रेम जीवन में उत्साह बना रहेगा। अगर आप किसी को पसंद करते हैं, तो आज दिल की बात कहने के लिए दिन शुभ है।कन्या: रिश्तों में ईमानदारी आपको करीब लाएगी। पुराने मतभेद दूर होंगे और आप एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम बिताएंगे।तुला: रिश्तों में संतुलन बना रहेगा। साथी का सहयोग आपको मानसिक शांति देगा। सिंगल लोगों को कोई नया दोस्त मिल सकता है।वृश्चिक: ईर्ष्या या शक को अपने रिश्ते पर हावी न होने दें। पार्टनर की प्राइवेसी का सम्मान करें, इससे प्यार बढ़ेगा।धनु: आज आप अपने पार्टनर के साथ भविष्य की बड़ी योजनाएं बना सकते हैं। घर वालों का सहयोग मिलने की भी संभावना है।मकर: काम के बोझ की वजह से आप साथी को समय नहीं दे पाएंगे। फोन या मैसेज के जरिए जुड़ाव बनाए रखें ताकि उन्हें अकेलापन महसूस न हो।कुंभ: आपके आकर्षण में वृद्धि होगी। पार्टनर आपकी बातों से प्रभावित रहेगा। आज का दिन यादगार पलों से भरा हो सकता है।मीन: प्रेम विवाह के इच्छुक लोगों के लिए दिन अनुकूल है। पार्टनर के प्रति आपका समर्पण रिश्ते को और मजबूत बनाएगा।आज का खास लव टिप&quot;रिश्तों में &#039;शब्दों&#039; से ज्यादा &#039;एहसासों&#039; की अहमियत होती है। आज अपने पार्टनर को यह महसूस कराएं कि वे आपके लिए कितने खास हैं।&quot; ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:35 +0530</pubDate>
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<title>Parama Ekadashi 2026: 3 साल में एक बार आती है Parama Ekadashi, जानें Lord Vishnu को प्रसन्न करने का मुहूर्त और विधि</title>
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<description><![CDATA[ अधिकमास में आने वाली परमा एकादशी का विशेष महत्व होता है। यह एकादशी सभी पापों का नाश करने, कष्टों से मुक्ति देने और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाली मानी जाती है। क्योंकि परमा एकादशी 3 साल में एक बार आती है, इसलिए इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। परमा एकादशी का व्रत करने से जातक को भगवान श्रीविष्णु की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस बार 11 जून 2026 को परमा एकादशी का व्रत किया जा रहा है। तो आइए जानते हैं इसकी तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व के बारे में...तिथि और मुहूर्तवैदिक पंचांग के मुताबिक 10 जून की रात 12:57 मिनट पर एकादशी तिथि की शुरूआत होगी। वहीं आज यानी की 11 जून की रात 10:36 मिनट पर इस तिथि की समाप्ति होगी। ऐसे में उदयातिथि के मुताबिक 11 जून 2026 को परमा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है।शुभ योगइस बार परमा एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग और शोभन योग का विशेष संयोग है। ज्योतिष शास्त्र में इन दोनों योगों को बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन शुभ योगों में भगवान श्रीविष्णु की पूजा, जप-तप, दान और व्रत करने से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।पूजन विधिइस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और फिर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें। उनको पीले भूल, धूप, दीप, पंचामृत और मौसमी फल आदि अर्पित करें। भगवान विष्णु को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं, उसमें तुलसी दल जरूर शामिल करना चाहिए। पूजा के दौरान एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें। वहीं पूजा के अंत में हुई भूलचूक के लिए क्षमायाचना करें।मंत्रश्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।ॐ नारायणाय विद्महे।वासुदेवाय धीमहि ।तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।ॐ विष्णवे नम: ]]></description>
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<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 09:13:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 11 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष उलझन और मुसीबत वाला दिन है। दोपहर बाद जेब संभाल कर रखें। संतान की उन्नति के लिए योजना आगे बढ़ेंगी। धन हानि के प्रबल योग हैं।वृषकुछ घरेलू कारणों से मानसिक तनाव रहेगा। पारिवारिक कलह से परेशानी। कठोर परिश्रम से भी सफलता मिलना कठिन है। तन-मन में थकावट महसूस करेंगे।मिथुनधैर्य से काम लें समस्या सुलझेगी। मन और वाणी पर नियंत्रण रखें, कलह होगा। सगाई-विवाह का प्रस्ताव आगे बढ़ेगा। भावनाओं में न बहें और क्रोध से भी बचें।कर्कमंत्र साधना आध्यात्मिक उन्नति में रूचि रहेगी। निजी समस्याएं दूर होगी/सुलझेगी। अचानक अप्रिय घटना, घटने के योग। कलह योग और कामों में रूकावट।सिंहप्रियजनों से विवाद और कलह संभव है। जीवनसाथी में परिवर्तन स्मरणीय दिन। गुप्त मंत्रणाओं/बैठकों में व्यस्त रहेंगे। बार-बार धन लाभ और शुभ समाचार।कन्याआपकी ईमानदारी की प्रशंसा होगी। आगे बढ़ने के लिए संभावनाओं पूर्ण दिन। लाभ के अवसरों का लाभ उठाना चाहिए। पारिवारिक जीवन में शांति और मधुरता।तुलाअस्पताल से छुट्टी मिल सकती है। शुभ समाचार मिलेंगे, खुशी मिलेगी। अच्छा दिन है यश की, सफलता भी। दूसरों के लिए सहायक एवं देवता के रूप में उभरेंगे।वृश्चिक तनाव से मुक्ति-प्रसन्नता की प्राप्ति। आपका सामर्थ्य बढ़ेगा, कष्ट दूर होंगे। रोजगार व्यवसाय में उतार-चढ़ाव अधिक। कार्य व्यवसाय को आगे बढ़ाएं।धनुपारिवारिक समस्याएं सुलझाने वाला दिन। विफलता को सफलता की सीढ़ी बना लें। किसी सेमिनार या विशेष बैठक में भाग लेने के योग हैं। कुशल मार्गदर्शन में प्रगतिपथ पर बढ़ेंगे।मकर असफल प्रेम संबंध निराशा और बेचैनी। अच्छी जगह है, तबादला होगा। स्वभाव में क्रोध और चिड़चिड़ापन रहेगा। आध्यात्मिक उपासना में व्यस्त रहेंगे।कुंभदोपहर बाद अपमानजनक अशुभ समय है। बच्चों से संबंधित समस्याएं दूर होगी। घर परिवार में आनंद से समय बीतेगा। खास काम संपन्न हो जाएंगे।मीननौकरी में पदोन्नति अथवा विशेषाधिकार मिलेंगे। गुरुजनों का आर्शीवाद प्रसन्नता देगा। पिछली अप्रिय परिस्थितियां जारी रहेगी। धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में प्रगति। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:54:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Parma Ekadashi 2026: परमा एकादशी व्रत से होती है दरिद्रता दूर, आती है समृद्धि</title>
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<description><![CDATA[ 11 जून को परमा एकादशी है, हिन्दू धर्म में परमा एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। अधिकमास में पड़ने के कारण इस एकादशी का महत्व बढ़ गया है। परमा एकादशी पावन एकादशी है, इस व्रत को करने से व्रत का पूरा पुण्यफल मिलता है तो आइए हम आपको परमा  एकादशी व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं। जानें परमा  एकादशी व्रत के बारे में हिन्दू धर्म में इस दिन भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही अन्न-धन समेत आदि चीजें दान की जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, परमा  एकादशी का व्रत करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही सभी पापों से छुटकारा मिलता है। इस दिन कुछ गलतियों को करने से साधक को जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है और भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं। सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। प्रत्येक माह आने वाली एकादशी भक्तों को आत्मशुद्धि और भक्ति का संदेश देती है। लेकिन जब अधिकमास में आने वाली परमा एकादशी का अवसर आता है, तब इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। यह दुर्लभ एकादशी लगभग तीन वर्ष में एक बार आती है, इसलिए इसे अत्यंत विशेष और कल्याणकारी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत एवं पूजा करने से मनुष्य के जीवन के समस्त पाप नष्ट होते हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।इसे भी पढ़ें: Ekadashi Rules: एकादशी व्रत में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, Lord Vishnu हो सकते हैं नाराजपरमा एकादशी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्तवैदिक पंचांग के अनुसार अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 11 जून 2026 को प्रातः 12 बजकर 57 मिनट पर होगा तथा इसका समापन उसी दिन रात्रि 10 बजकर 36 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026, दिन गुरुवार को रखा जाएगा। परमा एकादशी का है विशेष महत्वपंडितों के अनुसार ‘परमा‘ शब्द का अर्थ होता है सर्वोत्तम अथवा श्रेष्ठ। इसी कारण इस एकादशी को सभी एकादशियों में विशेष फलदायी माना गया है। धर्मग्रंथों के अनुसार यह व्रत दरिद्रता और पापों से मुक्ति दिलाने वाला है। पौराणिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि धन के देवता कुबेर ने इसी व्रत के प्रभाव से भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर देवताओं के कोषाध्यक्ष का पद पाया था। वहीं सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने भी परमा एकादशी के पुण्य प्रभाव से अपना खोया हुआ वैभव और परिवार पुनः प्राप्त किया था। जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्यफल प्राप्त होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि जो भक्त इस दिन भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की आराधना करता है, उसे मृत्यु के पश्चात बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।परमा एकादशी पर ऐसे करें पूजा, मिलेगा लाभपंडितों के अनुसार परमा एकादशी का व्रत खास होता है, इसलिए इस पावन दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल को शुद्ध कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान को पीले पुष्प, धूप, दीप, चंदन, पंचामृत और फल अर्पित करें। श्रीहरि को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं तथा उसमें तुलसी दल अवश्य रखें, क्योंकि तुलसी के बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते। पूजा के पश्चात परमा एकादशी व्रत कथा का श्रवण करें तथा विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। भक्तजन भजन-कीर्तन, मंत्र जाप और भगवान के ध्यान में रात्रि व्यतीत करते हैं। परमा एकादशी पर ब्राह्मणों, जरूरतमंदों अथवा दीन-हीन, असहाय लोगों को भोजन एवं दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण किया जाता है। परमा एकादशी पर दान का भी है महत्वसनातन संस्कृति में दान को धर्म का प्रमुख आधार माना गया है। विशेष रूप से परमा एकादशी के दिन किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करने वाला बताया गया है। धर्मग्रंथों में वर्णित है कि इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करने से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं।  स्कन्द पुराण में दान का उल्लेख करते हुए कहा गया है-न्यायोपार्जितवित्तस्य दशमांशेन धीमतः।कर्तव्यो विनियोगश्च ईश्वरप्रीत्यर्थमेव च॥अर्थात बुद्धिमान मनुष्य को अपने ईमानदारी से अर्जित धन का एक भाग ईश्वर की प्रसन्नता और जनकल्याण के कार्यों में अवश्य लगाना चाहिए। इस दिन अन्नदान, जलसेवा, फल वितरण, धार्मिक ग्रंथों का दान तथा रोगियों एवं दिव्यांगजनों की सहायता करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। नि:स्वार्थ भाव से किया गया दान जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है।परमा एकादशी से जुड़ी पौराणिक कथा भी है रोचकशास्त्रों के अनुसार काम्पिल्य नगर में सुमेधा नाम का एक अत्यंत धार्मिक लेकिन गरीब ब्राह्मण अपनी पत्नी पवित्रा के साथ रहता था। अत्यधिक निर्धनता के कारण कई बार उन्हें भूखा रहना पड़ता था। इसके बावजूद, पतिव्रता पत्नी ने कभी अपने भाग्य की शिकायत नहीं की और पूरी निष्ठा से अपने पति तथा अतिथियों की सेवा की। अपनी पत्नी के कष्टों को देखकर एक दिन सुमेधा परदेश जाने लगे, लेकिन उनकी पत्नी ने उन्हें रोक लिया और कहा कि मनुष्य को अपने पूर्व कर्मों के अनुसार ही धन-संपत्ति प्राप्त होती है। उसी समय संयोग से वहां कौण्डिन्य मुनि का आगमन हुआ।  ब्राह्मण दंपती ने मुनि से दरिद्रता दूर करने का उपाय पूछा। मुनि ने उन्हें अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी के व्रत का विधान बताया। उन्होंने बताया कि यह एकादशी सभी पापों और दरिद्रता को नष्ट करने वाली है। कौण्डिन्य मुनि के निर्देशानुसार सुमेधा और उनकी पत्नी ने पूर्ण श्रद्धा के साथ पांच दिनों तक &#039;पंचरात्रि&#039; व्रत और परमा एकादशी का उपवास किया। व्रत के प्रभाव ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:54:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Parma, Ekadashi, 2026:, परमा, एकादशी, व्रत, से, होती, है, दरिद्रता, दूर, आती, है, समृद्धि</media:keywords>
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<title>Ekadashi Rules: एकादशी व्रत में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, Lord Vishnu हो सकते हैं नाराज</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में सभी तिथियों में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। एकादशी तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। एकादशी को किया गया व्रत, जप, तप व ध्यान का विशेष महत्व होता है। धार्मिक शास्त्रों को मुताबिक एकादशी का व्रत करने से सांसारिक जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। वहीं इस व्रत के प्रभाव से जातक जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है और अंत में बैकुंठ धाम को प्राप्त करता है।धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक एकादशी तिथि पर कुछ कार्यों को करने से बचना चाहिए। अगर आप इस तिथि को कोई वर्जित कार्य करते हैं, तो आपको कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि एकादशी तिथि को कौन से कार्य भूलकर भी नहीं करना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Shyam Baba Puja: &#039;हारे का सहारा&#039; को ऐसे लगाएं इत्र की अर्जी, जानें Khatu Shyam Temple के 3 अचूक नियम एकादशी तिथि पर न करें ये कामएकादशी तिथि को रात में नहीं सोना चाहिए। क्योंकि यह तिथि पुण्यदायी होती है और इस रात भगवान विष्णु के भजन गाने चाहिए, मंत्र या आरती सुननी चाहिए। भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने बैठकर पूरी रात जागकर आदि करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।एकादशी तिथि को भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। एकादशी के दिन चावल खाने वाला व्यक्ति अगले जन्म में रेंगने वाली योनि में जन्म लेता है। वहीं अगर आप द्वादशी तिथि को चावल खाते हैं, तो आपको इस योनि से मुक्ति मिल जाती है।इस पावन तिथि को दातुन या मंजन करना वर्जित माना गया है। वहीं इस दिन क्रोध करना, चुगली करना, झूठ बोलना और दूसरों की बुराई करना आदि चीजों से बचना चाहिए। ऐसे लोगों को परिवार बल्कि पूरे समाज में सम्मान नहीं मिलता है और पाप के भागी बनते हैं।एकादशी तिथि को तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। शास्त्रों में इसको वर्जित माना गया है। वहीं द्वादशी तिथि को जब पारण करें, तो तुलसी के पत्ते से ही करना चाहिए। लेकिन एकादशी तिथि को तुलसी की पत्ती नहीं तोड़ना चाहिए।एकादशी तिथि को चना दाल, उड़द दाल, गोभी, मसूर दाल, गाजर, शलजम, पालक का साग आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। वहीं इस दिन शारीरिक और मानसिक रूप से किए जाने वाले बुरे कर्मों से बचना चाहिए।एकादशी तिथि के दिन चोरी करना, हिंसा करना, पान खाना, मैथुन, क्रोध करना, स्त्रीगमन और कपट आदि चीजों से बचना चाहिए। वहीं अगर इस तिथि पर कोई गलती हो जाए, तो आपको उसके लिए माफी मांगनी चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 08:54:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 9 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 9 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 9 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशि (Ameis)आज आपके पार्टनर के साथ आपकी समझ और बेहतर होगी। यदि आप सिंगल हैं, तो सोशल मीडिया या किसी दोस्त के जरिए कोई दिलचस्प इंसान आपके जीवन में आ सकता है।वृषभ राशि (Taurus)रिश्ते में किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचें। आज आपका पार्टनर आपसे थोड़े समय और ध्यान की मांग कर सकता है। शांत रहकर उनकी बात सुनें, रिश्ता मजबूत होगा।मिथुन राशि (Gemini)आज का दिन बातचीत के लिए बेहतरीन है। अगर दिल में कोई बात दबी है, तो आज उसे अपने साथी से साझा करने का सही समय है। शाम को एक रोमांटिक वॉक या डिनर का प्लान बन सकता है।कर्क राशि (Cancer)आज आप अपने पार्टनर के प्रति बेहद संवेदनशील और केयरिंग महसूस करेंगे। विवाहित जोड़ों के लिए आज का दिन आपसी तालमेल और खुशियों से भरा रहने वाला है।सिंह राशि (Leo)आज आपका आकर्षण चरम पर रहेगा। लोग आपकी तरफ खिंचे चले आएंगे। यदि आप किसी को पसंद करते हैं, तो आज अपने दिल की बात कहने के लिए दिन अनुकूल है।कन्या राशि (Virgo)रिश्ते में पुरानी बातों या गलतफहमियों को पीछे छोड़ने का समय है। अपने साथी पर भरोसा दिखाएं। सिंगल लोगों को आज पुरानी यादों से बाहर निकलने की जरूरत है।तुला राशि (Libra)लव लाइफ के लिए आज का दिन बेहद खूबसूरत है। आपको अपने पार्टनर से कोई सरप्राइज या खूबसूरत तोहफा मिल सकता है। रिश्तों में नयापन महसूस होगा।वृश्चिक राशि (Scorpio)आज किसी छोटी सी बात पर पार्टनर के साथ बहस हो सकती है। अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें और अहंकार को बीच में न आने दें। प्यार से बात संभालें।धनु राशि (Sagittarius)आज आप अपने पार्टनर के साथ किसी लंबी यात्रा या आउटिंग का प्लान बना सकते हैं। साथ बिताया गया समय आपके रिश्ते में नई ऊर्जा भर देगा।मकर राशि (Capricorn)काम की व्यस्तता के बीच भी आप अपने लव पार्टनर के लिए समय निकालने में कामयाब रहेंगे। आपकी यही कोशिश आपके पार्टनर को बेहद खास महसूस कराएगी।कुंभ राशि (Aquarius)आज आपके प्रेम जीवन में उत्साह और रोमांच बना रहेगा। सिंगल जातकों की मुलाकात किसी ऐसे व्यक्ति से हो सकती है जो उनकी सोच और मिजाज से मेल खाता हो।मीन राशि (Pisces)आज आपको अपने रिश्ते में थोड़ा स्पेस (स्पेस) देने की जरूरत महसूस हो सकती है। पार्टनर की भावनाओं का सम्मान करें। शांत दिमाग से लिया गया फैसला रिश्ते को बचाए रखेगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Astrology: 30 की उम्र के बाद इन 4 Lucky Zodiac Signs का खुलता है किस्मत का ताला, पाते हैं Success</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र में यह माना गया है कि हर एक राशि की जीवन अलग अनुभावों और परिस्थितियों से होकर गुजरता है। ऐसे में कुछ राशियों के लिए शुरुआती जीवन कुछ खास नहीं होता है। खासकर 30 वर्ष की उम्र तक उन्हें कई चुनौतियों, संघर्षों और उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। हालांकि, उनके लिए यह कठिन दौर आगे चलकर व्यक्तित्व को मजबूत बनाता है और इन लोगों को 30 के बाद ही जीवन में सुख, सफलता और स्थिरता प्राप्त होती है। आइए बताते हैं कौन हैं ये 4 राशियां।वृषभ वृषभ राशि के जातक वैसे तो सौभाग्यशाली होते हैं लेकिन इनकी किस्मत और प्रसिद्धि धीरे-धीरे बढ़ती हैं। इस राशि के जातक अपने बीज बोने और धीरे-धीरे सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ने का समय लेते हैं। जैसे ही यह बड़े होते हैं इन्हें सफलता प्राप्त होती है और सुख-समृद्धि मिलती है। इस राशि के जातक अच्छे से समझते धैर्य और लगन के क्या मतलब है। इनका शुरुआती जीवन भले ही काफी लेट हो और धीमा हो, लेकिन एक दिन इन्हें सफलता जरुर मिलती है।वृश्चिक राशिइस राशि के जातक हमेशा से स्वभाव से गहरे और रहस्यमयी माने जाते हैं। इनको अपनी दुनिया में रहना पसंद होता है और जल्द ही किसी पर भरोसा नहीं करते है। वृश्चिक राशि के लोगों का जीवन शुरुआती वर्षों में भावनात्मक उथल-पुथल से गुजरता है। अक्सर इन्हें अकेलापन, असुरक्षा या मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। लेकिन यह हमेशा अपने लक्ष्यों को लेकर बेहद स्पष्ट और समर्पित होते हैं। वृश्चिक राशि के लोग लगातार मेहनत और धैर्य के बल पर धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं। 30 साल के बाद इनकी सोच में परिपक्कता आती है और ये जीवन को बेहतरीन तरीके से संभालते हैं। इसके बाद इन्हें करियर और निजी जीवन दोनों में सफलता मिलने लगती है।मकर राशिमकर राशि के स्वामी शनि ग्रह है, जिन्हें कर्म और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। इस राशि के लोग बचपन से ही जिम्मेदारियों को बोझ उठाते हैं। इन लोगों को हर उपलब्धि के लिए काफी मेहनत करने पड़ती है और सफलता आसानी नहीं मिलती है। शुरुआत में इन्हें काफी निराशा का सामना करना पड़ता है, बाद में ये हार मानने वालों में से नहीं होते हैं। 30 की उम्र पार करते ही इनके प्रयास रंग लाने लगते हैं। फिर चाहे नौकरी हो या व्यापार, इन्हें स्थिरता और ऊंचाईयां दोनों मिलने लगती हैं। कुंभ राशिइस राशि के लोग अलग सोच और अनोखा नजरिया रखते हैं। यह राशि भी शनि के प्रभाव में रहती है, इसलिए इनका जीवन धीरे-धीरे आगे बढ़ता है। शुरुआती समय में इन्हें अपनी मेहनत का पूरा परिणाम नहीं मिलता, जिससे कई बार निराशा बनीं रहती है। ये लोग कभी अपने रास्ते से नहीं भटकते हैं। यह लोग हमेशा अलग कुछ करने की चाह रखते हैं, जो इन्हें भीड़ से अलग बनाती है। कुंभ राशि के जातकों 30 के बाद इनके जीवन में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है और इन्हें समाज में सम्मान, आर्थिक मजबूती और आत्मसंतुष्टि मिलने लगती है। यह लोग बस अपने आलस्य पर नियंत्रण रखना होता है, तभी ये अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच पाते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:35 +0530</pubDate>
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<title>Astrology Tips: Negative Energy को कहें Bye&#45;Bye! घर से तुरंत हटा दें ये चीजें, Feng Shui के ये Tips हैं अचूक</title>
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<description><![CDATA[ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी हर कोई अपने जीवन में सुख-शांति और पॉजिटिविटी चाहता है। लेकिन कई बार कड़ी मेहनत के बाद भी घर में आर्थिक तंगी या तनाव बना रहता है। चीनी वास्तु शास्त्र यानी फेंगशुई में माना गया है कि हमारे आसपास की वस्तुएं और दिशाएं हमारे जीवन में गहरा असर डालती हैं। लेकिन अगर आप घर में फेंगशुई के कुछ आसान और छोटे नियमों का ध्यान रखते हैं, तो इससे पॉजिटिव एनर्जी का प्रवाह तेजी से बढ़ता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि फेंगशुई के अनुसार आपके घर का सेटअप कैसा होना चाहिए।जानें बेडरूम और बेड की सही दिशाबेडरूम वह जगह है, जहां पर आप दिनभर की थकान को मिटाते हैं। फेंगशुई के मुताबिक आपके सोने के स्थान की व्यवस्था का असर आपकी नींद और मानसिक शांति पर पड़ता है। ऐसे में आपका पलंग हमेशा पश्चिम या दक्षिण दिशा की दीवार के सहारे टिका होना चाहिए। वहीं सोते समय आपका सिर हमेशा दक्षिण दिशा की तरफ होना चाहिए।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 9 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 9 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनआपका बिस्तर हमेशा व्यवस्थित होना चाहिए। जिससे कि लेटते समय आपको कमरा का मुख्य दरवाजा साफ दिखाई देता है। लेकिन पैर दरवाजे की सीध में न हों। बेडरूम में हमेशा हल्की रोशनी और हल्के व शांत रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए।घर में पॉजिटिविटी बढ़ाने वाली चीजेंअगर आपके घर में बिना किसी कारण अक्सर ही लड़ाई-झगड़े होते हैं, तो इसके लिए फेंगशुई में कुछ असरदार चीजें रखने की सलाह दी गई है। इसमें कपूर, कछुए की मूर्ति और सुगंधित मोमबत्तियां और क्रिस्टल बॉल शामिल हैं। इन चीजों को घर में रखने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जिससे घर के सदस्यों की बीच तालमेल बेहतर होता है। वहीं घर में रंग-बिरंगी मछलियों का एक्वेरियम या बहते पानी का फव्वारा रखना सौभाग्य को आकर्षित करता है। घर में रखें ये पौधेफेंगशुई में सकारात्मक ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत पेड़-पौधों को माना गया है। ऐसे में अगर आप घर में बांस का पौधा रखते हैं, तो इससे पॉजिटिव एनर्जी का प्रवाह बढ़ता है। इसको घर के उसी स्थान पर रखना चाहिए, जहां सभी सदस्य एक साथ बैठते हों। वहीं घर में मनी प्लांट और जेड प्लांट भी रख सकते हैं। इनको रखने के लिए घर की दक्षिण-पूर्व दिशा को सबसे अच्छा माना गया है। इन पौधों को घर में लगाने से वित्तीय स्थिरता बनी रहती है।भूलकर भी घर में नहीं रखनी चाहिए ये चीजेंजिस तरह से कुछ चीजें भाग्य को बदल सकती हैं, ठीक उसी तरह घर में रखी कुछ चीजें दुर्भाग्य की वजह बन सकती हैं। फेंगशुई के मुताबिक पाइप या नल से पानी टपकना सीधे तौर पर धन की बर्बादी को दिखाता है। इसलिए इसको फौरन ठीक करवा लेना चाहिए।वहीं घर में चटके हुए बर्तन, टूटा आईना, टूटी हुई घड़ी या खराब पड़े इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स को भी हटा देना चाहिए। क्योंकि यह चीजें आपकी तरक्की में बाधा बन सकती है। वहीं फटे और खराब हो चुके जूतों को भी घर में जमा करके नहीं रखना चाहिए। इससे भी नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:35 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 10 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष युवक-युवतियों को उन्नति के अवसर मिलेगा। विवाह समारोह आदि शुभ कार्य में भाग लेंगे। आत्मनिरीक्षण का समय है। अचानक खर्च बढ़ने से परेशानी, कानूनी उलझनें भी।वृषआर्थिक स्थिति दृढ़ और यात्रा सफल होगी। मिश्रित फल वाला सामान्य दिन है। परिस्थिति समझें, &#039;अहं&#039; भाव का त्याग करें। परिवार में प्रसन्नता से दिन बीतेगा।मिथुनउपलब्धियों से प्रशंसा मिलेगी। व्यापार/रोजगार में तरक्की होगी। न शरीर ठीक न धन। मनोकामनाएं पूरी होगी, चिंता न करें।कर्कनए संपर्क लाभ देते हुए सुदृढ़ होंगे। श्रेष्ठ लोगों से सुखद भविष्य का आश्वासन। धन और सम्पत्ति उच्च से उच्चतर होगी। सार्वजनिक सम्मान से प्रसन्नता।सिंहकोई विशेष योजना साकारता की ओर बढ़ेगी। सब तरह से समय शुभ और फलदायक है। हर दृष्टि से सतर्क रहें, धोखे का योग है। असफल प्रेम संबंध निराशा और बेचैनी।कन्याआपकी रचनात्मकता लोगों को प्रभावित करेगी। कठिन कार्य की पूर्ति से प्रशंसा मिलेगी। नई योजनाओं की शुरूआत संभव है। संपत्ति खरीदने के योग बन रहे हैं।तुलाआपका स्वभाव उदार बनेगा। धन कमाने के लिए यत्न के साथ मुक्ति करनी होगी। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। विवेक से काम लेंगे तो परिस्थिति सामान्य होगी।वृश्चिक तनाव बढ़ सकता है, विरोधी प्रस्ताव होंगे। ज्ञान बढ़ाने वाली पुस्तकें पढ़ेंगे और खरीदेंगे। स्वास्थ्य में सुधार से प्रसन्नता। उच्चतर शिक्षा के लिए प्रयास सफल होंगे।धनुमनोकामनाएं पूरी होगी, चिंता न करें। पदोन्नति और नए व्यापार की शुरूआत। पूर्वकृत प्रयत्नों का सुपरिणाम मिलेगा। चल अचल सम्पत्ति के प्राप्ति के योग।मकर विपरीत लिंग द्वारा आरोप लगाया जाएगा। अधिकारी से फटकार मिलेगी। नौकरी में वरिष्ठों की कृपा रहेगी। अपने दम पर ही कुछ नया कर दिखाएंगे।कुंभअपने तथा जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। जो भी करेंगे, सफल रहेंगे। अत्यन्त कठिन कार्य पूरा करने में सफलता मिलेगी। जोखिम लेने पर बदनामी पल्ले पड़ेगी।मीनचल-अचल संपत्ति विवाद हो सकता है। अप्रिय घटना और ऐसा ही समाचार मिल सकता है। डॉक्टरों/अस्पतालों के काटने पड़ेंगे चक्कर। कुछ घरेलू कारणों से मानसिक तनाव रहेगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Pushya Nakshatra में शुक्र का गोचर, इन राशियों को मिलेगी Good Luck, Money की नहीं होगी कमी</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का नक्षत्र परिवर्तन बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। शुक्र ग्रह का यह राशि परिवर्तन विशेष प्रभाव डालने वाला माना जा रहा है। इस दौरान व्यक्ति केवल तात्काल आनंद पर नहीं, बल्कि भविष्य की खुशहाली, पारिवारिक सामंजस्य और जीवन में स्थायित्व स्थापित करने की दिशा में अधिक ध्यान देगा। यह समय रिश्तों को मजबूत बनाने और दीर्घकालीन सुख-सुविधाओं की नींव रखने के लिए अनुकूल माना जाता है।पुष्य नक्षत्र में शुक्रदेव का यह भ्रमण हमारे करियर, वित्त और व्यक्तिगत संबंधों के लिए अत्यंत सहायक सिद्ध होगा। शुक्रदेव पुष्य नक्षत्र में गोचर से करियर में सफलता मिलेगी और जीवन में नई दिशा मिलेगी। आइए आपको बताते हैं शुक्रदेव के राशि परिवर्तन से किन राशियों की किस्मत चमक उठेगी।तुला राशिशुक्रदेव तुला राशि के दशम भाव में विराजमान रहेंगे। यह करियर और कर्म के क्षेत्र में नई चमक लाने वाला समय साबित होगा। वर्कप्लेस पर आपको पहचान मिलेगी और आपकी मेहनत की सराहना होगी। अपनी चतुराई और मृदुभाषी स्वभाव से आप कठिन परिस्थितियों को भी अपने अनुकूल बनाने में सफल रहेंगे। व्यवसायी वर्ग को नए लाभदायक सौदा मिलेंगे।वृश्चिक राशिशुक्रदेव आपके नवम भाव यानी भाग्य के घर में हैं। भाग्य का सितारा बुलंद होगा और वह आपके हर महत्वपूर्ण निर्णय में आपका साथ रहेगा। आपको कोई सुखद यात्रा या किसी अनुभावी गुरु का सानिध्य आपके जीवन की नई दिशा दिखा सकता है। आपको वैचारिक क्षमता का विस्तार होगा और आप नई चीजों को सीखने के प्रति उत्सुक रहेंगे।धनु राशिधनु राशि के लोग इस समय सतर्क रहे। शुक्रदेव आपके आठवें भाव में आ रहे हैं। इसलिए सोच-सझकर और सतर्क रहे। धन के मामलों में बहुत सावधानी बरतें और किसी भी विषय पर बात करते हुए समय जल्दबाजी न करें। धैर्य ही आपकी सफलता की कुंजी है। भविष्य में इसके बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे।मकर राशिमकर राशि में शुक्रदेव सातवें भाव में गोचर करेंगे, जो साझेदारी और रिश्तों का घर है। यह गोचर आपके प्रेम और वैवाहिक जीवन में नई मिठास भर देगा। यदि आप अपने जीवनसाथी या पार्टनर के साथ किसी विषय पर मनमुटाव महसूस कर रहे थे, तो अब वह दूर हो जाएगी। तालमेल बढ़ेगा और आप एक-दूसरे को बेहतर समझ पाएंगे। बिजनेस में अच्छी डील मिल सकती है।कुंभ राशिशुक्र देव कुंभ राशि में छठे भाव में रहने वाले हैं। यह समय अपनी मेहनत को एक नई लय और अनुशासन देने का है। काम को बोझ बढ़ सकता है, लेकिन अनुशासन और संयम से आप सब संभाल लेंगे। अपनी दिनचर्या को ठीक रखें और अपने हेल्थ पर ध्यान रखें। लोगों से मिल-जुलकर रहने से कार्यस्थल पर भी माहौल सकारात्मक रहेगा।मीन राशिमीन राशि में शुक्रदेव पांचवे भाव में आ रहे हैं, जिसे विद्या, प्रतिभा, संतान और प्रेम संबंधों का भाव माना जाता है। यह गोचर जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता लेकर आएगा। छात्रों के लिए यह अवधि विशेष रूप से लाभकारी रहेगी, क्योंकि पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी और सीखने की क्षमता मजबूत होगी। प्रेम संबंधों में मधुरता और आपसी समझ बेहतर होगी। कला, लेखन, संगीत या अन्य रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने के नए अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, इस दौरान कोई शुभ सूचना या मनचाही उपलब्धि मिलने के भी प्रबल संकेत हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Adhik Maas में 3 साल बाद आई परम एकादशी, जानें Shubh Muhurat, कहीं चूक न जाएं ये महासंयोग</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। अधिक मास में आने वाली एकादशी महत्वपूर्ण मानी जाती है। अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, जो कि  3 साल में एक बार आने वाला महीना होता है। पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विशेष माना जाता है। पंचांग के अनुसार, अधिक मास के कृष्ण पक्ष में परम एकादशी का व्रत रखा जाता है। जैसा कि गृहस्थ और वैष्णव के एकादशी व्रत की तारीखें अलग-अलग हो जाती हैं। इसको लेकर भी लोगों के मन में काफी कंफ्यूजन रहती है, तो आइए आपको इस लेख में वैष्णव और गृहस्थ वाले कब रखेंगे परम एकादशी व्रत और शुभ मुहूर्त के बारे में बताते हैं।परम एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्तवैदिक पंचांग के अनुसार, अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 11 जून को रात 12 बजकर 57 मिनट पर शुरु होगी। इस तिथि का समापन 11 जून को रात 10 बजकर 36 मिनट पर होगा। इस बार 11 जून को सूर्योदय के समय शुद्ध एकादशी तिथि मिल रही है। दोनों ही लोग 11 जून को परम एकादशी का व्रत रखेंगे। व्रत का पारण करने का समय 12 जून को सुबह 05 बजकर 23 मिनट से 08 बजकर 10 मिनट तक है।-ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 42 मिनट से 04 बजकर 42 मिनट तक-अभिजित मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक-विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 40 मिनट से 02 बजकर 36 मिनट तक-गोधूलि मुहूर्त - शाम 07 बजकर 18 मिनट से 07 बजकर 38 मिनट तक-निशिता मुहूर्त - रात 12 बजकर 01 मिनट से 12 बजकर 41 मिनट तक-सर्वार्थ सिद्धि योग- पूरे दिनपरम एकादशी का महत्वखासकर यह एकादशी हर साल नहीं आती है। यह व्रत पुरुषोत्तम मास के कृष्ण पक्ष में आता है। वैसे यह शुभ संयोग 3 वर्ष में सिर्फ एक बार नहीं बनता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से जीवन से आर्थिक समस्या दूर हो जाती हैं।अपने नाम के अनुरूप यह व्रत सर्वोच्च सुख, समृद्धि और सिद्धियों की प्राप्ति कराने वाला माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में मौजूद गरीबी और धन संबंधी परेशानियां दूर होने लगती हैं। साथ ही, यह अनजाने में हुए पापों का क्षय कर व्यक्ति को पुण्यफल और श्रेष्ठ लोक की प्राप्ति का मार्ग दिखाता है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:33 +0530</pubDate>
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<title>Hast Rekha: हथेली के ये 3 निशान बनाते हैं दुर्लभ राजयोग, Politics में दिलाते हैं Power</title>
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<description><![CDATA[ हस्तरेखा शास्त्र में हाथ की रेखाओं और निशानों का विशेष महत्व बताया गया है। जातक के हाथ पर मौजूद कुछ खास चिन्हों के जरिए उनके भाग्य, सेहत और जीवन में आने वाले बदलावों का आकलन किया जाता है। हाथ में कुछ निशानों को बेहद खास माना जाता है। हथेली पर इनका होना बेहद शुभ और राजयोग देने वाला माना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि हाथ में ऐसे कौन से निशान होते हैं, जिनके होने से जातक को जीवन में सफलता की ऊंचाइयों तक ले जाते हैं।भाला, धनुष या बाण का निशान होनाहस्त रेखा शास्त्र के मुताबिक अगर किसी महिला या पुरुष के हाथ पर बाण, धनुष या भाला का निशान दिखाई दे रहा है। तो ऐसे जातक अपने जीवन में मान-सम्मान और उच्च पद प्राप्त करते हैं। यही लोग आगे जाकर राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल करते हैं, सत्ता पर विराजमान होते हैं। इन लोगों में नेतृत्व क्षमता कूट-कूटकर भरी होती है और यह लोग निर्णय लेने में भी माहिर होते हैं।इसे भी पढ़ें: Astrology: 30 की उम्र के बाद इन 4 Lucky Zodiac Signs का खुलता है किस्मत का ताला, पाते हैं Successअगर किसी जातक के हाथ पर ये तीनों निशान होते हैं, तो इसको एक अत्यंत दुर्लभ राजयोग माना जाता है। हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक ऐसे लोग राजा या रानी के समान सुख-सुविधाएं प्राप्त करते हैं। यह जातक राजनीति में बड़ी सफलता हासिल करते हैं और समाज में अपना प्रभावशाली रुतबा रखते हैं। इनको जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं होती है।हथेली पर राजयोग वाले निशानइसके अलावा हाथ पर ध्वज और चक्र का निशान होना शुभ माना जाता है। अगर किसी व्यक्ति के हाथ में दोनों निशान एक साथ होते हैं, तो जातक को प्रतिष्ठा, अपार धन और मान-सम्मान दिलाता है। ऐसे जातकों को अपने देशवासियों का सम्मान प्राप्त होता है और आगे चलकर यही लोग प्रधानमंत्री और महान शासक बनते हैं। यह लोग अपनी बुद्धिमानी और अच्छे व्यवहार की वजह से प्रसिद्धि पाते हैं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:32 +0530</pubDate>
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<title>Shyam Baba Puja: &amp;apos;हारे का सहारा&amp;apos; को ऐसे लगाएं इत्र की अर्जी, जानें Khatu Shyam Temple के 3 अचूक नियम</title>
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<description><![CDATA[ बाबा खाटू श्याम के भक्तों के बीच इत्र अर्पित करने की एक बेहद पावन और गहरी मान्यता है। इत्र को सकारात्मकता, प्रेम और पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि अगर सही विधि से बाबा श्याम को &#039;इत्र की अर्जी&#039; लगाई जाए, तो हारे के सहारे बाबा श्याम अपने भक्तों की मनोकामना फौरन पूरी कर देते हैं। लेकिन क्या आप बाबा खाटू श्याम को इत्र चढ़ाने के सही तरीके के बारे में जानते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इसके बारे में बताने जा रहे हैं।बाबा श्याम को इत्र चढ़ाने का तरीकाअक्सर बाबा के दरबार में अर्पित करने के लिए कई भक्त इत्र की तीन शीशियां लेकर आते हैं। जिसके पीछे बेहद सुंदर भाव छिपा है। जिसके मुताबिक पहली शीशी बाबा के दरबार में अपनी अर्जी लगाने के लिए चढ़ाई जाती है। दूसरी शीशी अपनी मनोकामना पूरी होने के प्रार्थना के साथ बाबा श्याम को धन्यवाद देने के लिए होता है। वहीं तीसरी शीशी की बात की जाए, तो जब मनोकामना पूरी हो जाती है, तो शीशी श्याम बाबा को आभार प्रकट करते हुए भोग के रूप में भेंट की जाती है।इसे भी पढ़ें: Ekadashi Vrat: जानिए कैसे हुई पहले एकादशी व्रत की शुरुआत, क्या है इसकी Divine Vrat Kathaजब आप बाबा श्याम के मंदिर में दर्शन के लाइन में लगे हों, तो पुजारी के जरिए तीनों शीशियों को बाबा श्याम के चरणों या विग्रह के पास अर्पित करवाएं। जब सेवादार इत्र अर्पित करे, तो हाथ जोड़कर बाबा के सामने अपनी अर्जी लगाएं। अपने मन में समस्या या फिर मनोकामना को स्पष्ट रूप से कहें। पुजारी जी प्रसाद के रूप में उन तीनों शीशियों में से कोई एक शीशी या थोड़ा सा इत्र आपको वापस कर देंगे। इस इत्र को अपने घर ले जाएं, फिर इस शीशी को तब अर्पित करें, जब आपकी समस्या हल हो जाए, या मनोकामना पूरी हो जाए।ध्यान रखें ये बातेंबता दें कि बाबा श्याम को खुशबू काफी प्रिय है। लेकिन बाबा को इत्र अर्पित करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी है, जिससे आपको पूजा का पूरा फल मिल सके।धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक बाबा श्याम को गुलाब और केसर दोनों इत्र अधिक प्रिय हैं। इसलिए हमेशा असली और शुद्ध इत्र का चुनाव करना चाहिए।इत्र को हमेशा बाबा श्याम के चरणों में स्पर्श कराएं। या फिर फूलों की माला या गजरे पर रुई के फोहे की मदद से इत्र अर्पित करें।जानिए इत्र अर्पित करने के नियमअगर आप घर पर बाबा श्याम की पूजा में इत्र अर्पित कर रहे हैं, तो कभी बाबा के शीश पर सीधे तौर पर इत्र नहीं लगाना चाहिए। हमेशा अपने दाहिने हाथ की अनामिका उंगली से ही इत्र को स्पर्श कराना चाहिए। दीपक जलाने के बाद ही बाबा श्याम को इत्र सेवा देनी चाहिए। ऐसा करने से घर में पॉजिटिव एनर्जी का प्रवाह तेजी से बढ़ता है। साथ ही इत्र हमेशा सीमित मात्रा में अर्पित करना चाहिए। क्योंकि इत्र लगाने से फूलों की अपनी प्राकृतिक महक दब जाती है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:07:26 +0530</pubDate>
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<title>Pitru Dosh से हैं परेशान? Somvati Amavasya पर ये अचूक Remedy दिलाएगी Full Benefit</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमावस्या तिथि को पितरों का आशीर्वाद पाने का सबसे विशेष अवसर माना जाता है। इस बार अमावस्या सोमवार को पड़ रही है, सोमवार के दिन अमास्या पड़ने से इसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस बार अधिकमास के दौरान 15 जून को यह शुभ संयोग बन रहा है। इसी कारण इस तिथि का महत्व कई गुना बढ़ गया है। आइए आपको आप बताते हैं अमावस्या के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं।माना जाता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य और सेवा कार्यों से पितरों की कृपा मिलती है। इसके साथ ही पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनीं रहती है। जरूरतमंदों को भोजन कराएंहिंदू धर्म में अन्नदान यानी के अनाज के दान को सबसे उत्तम माना गया है। यदि सोमवती अमावस्या के दिन किसी भूखे व्यक्ति, साधु-संत, गरीब परिवार या जरुरतमंद को अन्न का दान करना चाहिए या फिर भोजन कराए। यह बेहद ही पुण्यदायी माना जाता है। आप अपनी क्षमता के अनुसार, भोजन, राशन या अनाज का दान कर सकते हैं।जूते-चप्पल का दानइस भीषण गर्मी और बरसात के मौसम में कई लोग अवाश्यक जरुरतों से वंचित रहते हैं। कुछ लोग धूप में नंगे पैर चलने की जगह कोई चारा नहीं होता है। ऐसे में किसी भी गरीब व्यक्ति, वृद्ध, मजदूर या अनाथ बच्चों को जूते-चप्पल दे सकते हैं। माना जाता है कि इस तरह के दान करने से पितरों की कृपा बनीं रहती है और वह अपना आशीर्वाद बरसाते हैं। काले तिल से करें तर्पणअमावस्या के दिन काले तिल का उपयोग अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन प्रातःकाल स्नान करने के बाद जल में काले तिल डालकर श्रद्धापूर्वक पितरों का तर्पण किया जाता है। इसके अलावा जरूरतमंदों को काले तिल का दान देना भी लाभकारी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और पितृ दोष से संबंधित बाधाओं तथा कष्टों में कमी आने की संभावना रहती है।दीपदान का महत्वसोमवती अमावस्या के दिन दीपदान करना बेहद ही शुभ माना जाता है। मंदिर, नदी के किनारे या पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना शुभ होता है। माना जाता है  कि दीपदान अंधकार को दूर कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और पितरों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का जरिया माना जाता है।तुलसी चालीसा का पाठसोमवती अमावस्या के दिन तुलसी चालीसा का पाठ करना अति पुण्यकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन तुलसी चालीसा का पाठ करने से जीवन में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।&#039;&#039;श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।&#039;&#039;नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:57:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 09 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष प्रणय/विवाहेत्तर संबंध मजबूत बनेंगे। अतिथियों के स्वागत में व्यस्तता। सामाजिक कार्यों और समारोह में भाग ले सकते हैं। यात्रा से धन और खुशी की प्राप्ति।वृषविशेष प्रशिक्षण के लिए जा सकते हैं। प्रेम प्रसंग और विवाह प्रस्ताव आगे बढ़ेंगे। विशेष जनों से होने वाली भेंट भविष्य के लिए उत्तम। काम के दबाव से थकान अधिक।मिथुनसकारात्मकता एवं रचनात्मकता का स्वागत। धन संबंधी योजनाएं आगे बढ़ेगी। घर/दफ्तर में परिवर्तन के योग एवं तनाव। दूसरों के दुःख में दुःखी, परोपकार करेंगे।कर्कआर्थिक उन्नति की ओर विशेष कदम। विशेष प्रशिक्षण के लिए जा सकते हैं। कलह योग और कामों में रूकावट। परिवार में सामंजस्य की स्थिति बनेगी।सिंहबड़ों का स्वास्थ्य नरम, रूकावटें भी अधिक है। समकक्ष लोगों से कड़ी चुनौती मिलेगी। आप रचनात्मक और सकारात्मक रहेंगे। व्यापार के क्षेत्र में सफलता मिलेगी।कन्याधन का अवैध लेन-देन दण्डित करा सकता है। व्यर्थ के तनाव से बचें। पारिवारिक सहमति से प्रेम विवाह प्रस्ताव आगे बढ़ेगा। यात्राओं से बचने में ही भलाई है।तुलापारिवारिक सहमति से प्रेम विवाह प्रस्ताव आगे बढ़ेगा। खर्च कम करें, कर्ज की नौबत आ सकती है। उधार दिया गया धन वापस मिलेगा। गर्भवती स्त्रियों को सावधानी बरतनी है।वृश्चिक ससुराल पक्ष से लाभ के योग है। दाम्पत्य जीवन में विवाद, अपराहन अच्छा। धन लाभ से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। बच्चों के साथ दिन सानंद व्यतीत होगा।धनुआर्थिक उन्नति की ओर विशेष कदम। घर परिवार में कष्ट और तनाव। सभी के कल्याण की योजनाओं के आगे बढाएगें। व्यापार के क्षेत्र में सफलता मिलेगी।मकर सभी के कल्याण की योजनाओं के आगे बढाएगें। धन संबंधी मामले में चिंतन बना रहेगा। धन-संपत्ति देने वाला दिन। षडयंत्र के शिकार हो सकते हैं।कुंभअतिथि का आगमन लाभप्रद सिद्ध होगा। शुभ समाचार, उपहार और अन्य लाभ। &#039;अति लोभो न कर्तव्यम्&#039; मंत्र को ध्यान रखें। धन संबंधी मामले में चिंतन बना रहेगा।मीनपारिवारिक सहमति से प्रेम विवाह प्रस्ताव आगे बढ़ेगा। खर्च कम करें, कर्ज की नौबत आ सकती है। परिवार के सहयोग से मनोबल बढ़ेगा। स्वभाव में उग्रता आएगी, संयम रखें। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:57:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>बुध का नक्षत्र परिवर्तन: इन 3 राशियों के Career में आएगा बड़ा उछाल, होगी Money की बारिश</title>
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<description><![CDATA[ ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के नक्षत्र परिवर्तन को बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। ग्रहों के नक्षत्र परिवर्तन से सीधा असर व्यक्ति के जीवन, सोच और भाग्य पर पड़ता है। खासकर बधु ग्रह, जो कि बुद्धि, वाणी और बिजनेस का कारक माने जाते हैं। बुध जब अपनी चाल में बदलाव करते हैं, तो इसका असर सभी राशियों पर पड़ता है। 11 जून को बुध ग्रह आर्द्रा नक्षत्र से निकलकर पुनर्वसु नक्षत्र प्रवेश करेंगे। बधु का नक्षत्र परिवर्तन सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर होगा। वहीं 8 जुलाई तक बुध इसी नक्षत्र में गोचर करेंगे और फिर आगे बढ़ेंगे। ज्योतिष के अनुसार गुरु के नक्षत्र में बुध का प्रवेश करना शुभ संकेत देने वाला है। इस दौरान कुछ राशियों के लिए तरक्की, सफलता और सम्मान के नए मार्ग खुल सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कौन है ये लकी राशियां, जिनके लिए यह समय राजयोग जैसे परिणाम दिलाएगा। मिथुन राशिबुध का यह नक्षत्र परिवर्तन मिथुन राशि के जातकों के लिए अनुकूल साबित होगा। इस अवधि में मानसिक संतुलन और शांति का अनुभव होगा, जिससे आप अपने फैसले अच्छे ले पाएंगे। करियर में लंबे समय किए जाने वाले प्रयासों का फल मिलने का समय आ चुका है और वर्क प्लेस में आपके काम की सरहाना हो सकती है। ऑफिस के सहकर्मियों के साथ तालमेल अच्छे से बैठेगा। शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रगाति के संकेत हैं। अगर कोई सरकारी काम लटका हुआ है, तो वो जल्द ही पूरा हो सकता है। वैवाहिक जीवन में मधुरता बनीं रहेगी।सिंह राशिबुध का नक्षत्र परिवर्तन सिंह जातकों के लिए आत्मविश्वास और सफलता लेकर आ सकता है। लीडरशिप क्वालिटी बढ़ेंगी और निर्णय लेने की शक्ति मजबूत बनेंगी। जो लोग व्यापार करते हैं, उनको अचानक से धन लाभ के संयोग बन सकते हैं। नौकरी तलाश करने वाले जातकों के लिए मनचाही जगह पर अवसर मिल सकता है। आईटी या तकनीकी क्षेत्र से संबंधि लोगों का प्रामोशन मिलने की अधिक चांस है। परिवार में भाई-बहन के साथ संबंध अच्छे रहेंगे। कुछ लोगों को विदेश यात्रा या वहां से जुड़े अवसर प्राप्त होंगे।तुला राशि तुला राशि के लोगों के लिए यह समय सामाजिक और प्रोफेशनल जीवन में प्रगति लेकर आ सकता है। वाणी से आकर्षण बढ़ेगा, जिससे लोग आपकी बातों से प्रभावित होंगे। सामाजिक रुप से आपकी पहचान और भी मजबूत होगी। अगर आप राजनीति या किसी सामाजिक क्षेत्र में एक्टिव रहते हैं, तो आपकी लोकप्रियता बढ़ सकती है। करियर में नई उपलब्धियां हासिल होने के लिए यह समय सबसे उत्तम है। इसके साथ ही आप अपनी समझदारी से नया काम और व्यवसाय शुरू करने में सफल हो सकते हैं। धार्मिक कार्यों में रूचि बढ़ेगी और यात्रा के योग भी बन सकते हैं। इसके साथ ही आर्थिक रुप से भी यह समय काफी मजबूत रहने वाला है।  ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:57:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Ekadashi Vrat: जानिए कैसे हुई पहले एकादशी व्रत की शुरुआत, क्या है इसकी Divine Vrat Katha</title>
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<description><![CDATA[ सनातन धर्म में सभी व्रतों में एकादशी व्रत का बड़ा महत्व बताया जाता है। साल में पूरी 24 एकादशी आती है। जिनमें देव प्रबोधनी, देवशयनी और मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का बड़ा महत्व होता है। इस एकादशी को उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि उत्पन्ना एकादशी से ही एकादशी व्रत की शुरूआत हुई थी। क्योंकि सतयुग में इसी एकादशी तिथि को जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु के शरीर से देवी का जन्म हुआ था। इसी देवी ने भगवान विष्णु के प्राण बचाए और जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने इनको एकादशी का नाम दिया था।धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक जो भी व्यक्ति उत्पन्ना एकादशी के दिन पर व्रत करता है, भगवान विष्णु संग देवी एकादशी की पूजा करता है। तो उसके कई जन्मों के पाप कट जाते हैं। वहीं व्यक्ति उत्तम लोग में स्थान पाने का अधिकारी बन जाता है।इसे भी पढ़ें: Dhar Bhojshala का 700 साल पुराना इंतजार खत्म, ASI रिपोर्ट के बाद अब गूंजेंगे स्तुति मंत्रउत्पन्ना एकादशी व्रत कथामुर नामक असुर से युद्ध करते हुए जब श्रीविष्णु थक गए, तो वह बद्रीकाश्रम में गुफा में जाकर विश्राम करने लगे। लेकिन मुर असुर श्रीहरि विष्णु का पीछा करते हुए बद्रीकाश्रम पहुंच गया। वहां पर निद्रा में लीन विष्णु को जब मुर ने लात मारना चाहा, तो श्रीहरि विष्णु के शरीर से एक देवी का जन्म हुआ और उन देवी ने मुर का वध कर दिया।देवी के कार्य से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने कहा कि हे देवी ! तुम्हारा जन्म मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को हुआ है। इस कारण तुम्हारा नाम एकादशी होगा। वहीं आज से एकादशी को मेरे साथ तुम्हारी भी पूजा होगी। वहीं जो भी व्यक्ति एकादशी का व्रत करेगा, वह सभी पापों से मुक्त हो जाएगा।मार्गशीर्ष माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को एकादशी देवी का अवतार हुआ था। इसलिए सभी एकादशी में इसका बड़ा महत्व माना जाता है। यह एकादशी भगवान श्रीविष्णु की माया से प्रकट हुई थी। धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक जो भी व्यक्ति पूरे श्रद्धाभाव से उत्पन्ना एकादशी का व्रत करता है, वह मोहमाया के प्रभाव से मुक्त हो जाता है और उसमें छल-कपट की भावना कम हो जाती है। वहीं एकादशी व्रत के प्रभाव से जातक विष्णु लोक में स्थान पाने योग्य बन जाता है।व्रत विधिजो भी लोग इस व्रत को करना चाहते हैं, उनको एकादशी पर सुबह उठकर स्वच्छ होकर भगवान विष्णु के साथ देवी एकादशी की पूजा-अर्चना करना चाहिए। वहीं पूरा दिन निराहार रहकर संध्या पूजन करनी चाहिए और फलाहार करना चाहिए। इस दौरान मन में छल-कपट, लालच, परनिंदा और द्वेष की भावना मन में नहीं लाना चाहिए। वहीं द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन और यथा संभव दान के बाद भी पारण करना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:57:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 6 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 6 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 6 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशि (Aries)आज आपके प्रेम संबंध में एक नई ऊर्जा और ताजगी महसूस होगी। अगर पिछले कुछ दिनों से कोई गलतफहमी चल रही थी, तो आज बातचीत के जरिए उसे दूर करने का सही समय है। जो लोग अकेले हैं, उनकी जिंदगी में किसी खास शख्स की एंट्री हो सकती है।वृषभ राशि (Taurus)आज साथी के जज्बातों को समझने की कोशिश करें। काम के बढ़ते दबाव के चलते आप उन्हें ज्यादा वक्त नहीं दे पाएंगे, जिससे वे थोड़ा उदास हो सकते हैं। शाम को कोई छोटा सा सरप्राइज या उनकी पसंद का काम करना आपके रिश्ते में मिठास घोल देगा।मिथुन राशि (Gemini)रोमांस के लिहाज से आज का दिन बेहद खूबसूरत रहने वाला है। आपके और आपके पार्टनर के बीच आपसी तालमेल और गहरा होगा। अगर आप अपने इस रिश्ते को शादी के बंधन में बदलने की सोच रहे हैं, तो परिजनों से बात करने के लिए समय पूरी तरह अनुकूल है।कर्क राशि (Cancer)आज लव लाइफ में थोड़ा संभलकर रहने की जरूरत है। किसी तीसरे व्यक्ति की दखलअंदाजी आपके रिश्ते में तनाव पैदा कर सकती है। सुनी-सुनाई बातों पर यकीन करने के बजाय अपने साथी पर भरोसा रखें और शांति से स्थिति को संभालें।सिंह राशि (Leo)आज आपका आकर्षण चरम पर रहेगा और आपका पार्टनर आपकी तरफ काफी खिंचाव महसूस करेगा। उनकी ओर से आपको कोई प्यारा सा तोहफा मिल सकता है। जो लोग सिंगल हैं, उनके लिए आज अपने दिल का हाल बयां करने का बहुत अच्छा मौका है।कन्या राशि (Virgo)आज आपको अपनी बातचीत के तरीके पर थोड़ा ध्यान देना होगा। गुस्से या जल्दबाजी में कही गई कोई बात पार्टनर के दिल को दुखा सकती है। अपनी भावनाएं जरूर व्यक्त करें, लेकिन आपके शब्दों में नरमी होनी चाहिए।तुला राशि (Libra)प्यार के मामले में आज का दिन बेहद आनंदमयी और यादगार रहेगा। आप अपने पार्टनर के साथ कहीं बाहर घूमने या कैंडललाइट डिनर का प्लान बना सकते हैं। एक-दूसरे के साथ बिताया यह समय आपके जुड़ाव को और मजबूत करेगा।वृश्चिक राशि (Scorpio)आज प्रेम जीवन में थोड़े उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। किसी पुरानी या दबी हुई बात को लेकर पार्टनर के साथ तीखी बहस होने के संकेत हैं। बात को ज्यादा तूल देने के बजाय समझदारी से मामले को वहीं रफा-दफा करें।धनु राशि (Sagittarius)धनु राशि वालों के लिए आज का दिन खुशियों की सौगात लेकर आया है। साथी के साथ बेहतरीन पल बिताने का अवसर मिलेगा, जिससे आपकी पुरानी सुनहरी यादें फिर से ताजा हो जाएंगी। रिश्ते में एक नया उत्साह और जोश देखने को मिलेगा।मकर राशि (Capricorn)अगर आप लंबे समय से किसी को पसंद करते हैं और कह नहीं पाए हैं, तो आज अपने प्यार का इजहार कर दीजिए, दिन बढ़िया है। शादीशुदा जातकों के जीवन में तालमेल बना रहेगा और उन्हें हर मोड़ पर जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा।कुंभ राशि (Aquarius)आज पार्टनर के साथ आपका मानसिक और भावनात्मक तालमेल और भी मजबूत होगा। आप दोनों मिलकर अपने भविष्य को लेकर कुछ गंभीर चर्चाएं कर सकते हैं। अविवाहित लोगों के जीवन में किसी नए प्रेम-संबंध की शुरुआत होने के प्रबल योग हैं।मीन राशि (Pisces)आज भावनाओं के आवेग में आकर कोई भी जल्दबाजी भरा फैसला न लें। मुमकिन है कि पार्टनर की कोई बात आपको बुरी लग जाए, लेकिन याद रखें कि हर उलझन का हल सिर्फ संवाद से ही निकलता है। थोड़ा धैर्य बनाए रखें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Name Numerology: क्या Name Spelling बदलने से सच में चमकती है किस्मत? जानिए Numerology का पूरा Science और Logic</title>
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<description><![CDATA[ आपने कई बार देखा होगा कि कुछ लोग अचानक से अपने नाम की स्पेलिंग बदल लेते हैं। कोई अपने नाम के एक अक्षर ज्यादा जोड़ता है, तो कोई अपना पूरा नाम ही बदल लेता है। फिल्म इंडस्ट्री, सोशल मीडिया और बिजनेस की दुनिया में यह ट्रेंड ज्यादा आम हो चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सिर्फ अलग दिखने या स्टाइल की चाह नहीं होती है। बल्कि ऐसा मानना होता है कि नाम की शक्ति व्यक्ति की सोच, जीवन और सफलता पर भी असर डाल सकता है।अंक ज्योतिष में काम सिर्फ पहचान नहीं बल्कि एक कंपन यानी की ऊर्जा का स्त्रोत माना जाता है। माना जाता है कि हर एक अक्षर की अपनी एक ताकत होती है, जब यह अक्षर मिलते हैं, तो यह व्यक्ति के करियर, व्यक्तित्व, रिश्तों और मानसिक स्थिति पर भी प्रभाव डालते हैं।इसे भी पढ़ें: Sun Transit in Mrigashira: 8 जून से 6 राशियों पर सूर्य देव होंगे मेहरबान, ये 3 राशियां रहें सावधानइस कारण आज के समय में युवाओं के बीच अंक ज्योतिष चर्चा का विषय बन चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नाम और अंकों का संबंध कैसे बनता है और यह आपके जीवन पर कैसे असर डालता है।नाम की स्पेलिंग बदलने से करियर पर असरनाम अंक ज्योतिष में कई लोग मानते हैं कि नाम की ऊर्जा व्यक्ति के करियर की ग्रोथ से भी जुड़ी होती है। जिस वजह से बिजनेसमैन, अभिनेता और पब्लिक फिगर अपने नाम की स्पेलिंग में बदलाव करते हैं। इसके पीछे की सोच यह होता है कि सही कंपन वाले अक्षर का नाम अवसरों को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है। जिससे व्यक्ति की पहचान और ज्यादा मजबूत बन सकती है।बता दें कि नाम अंक ज्योतिष में इसको ऊर्जा संतुलन का तरीका माना जाता है। सोशल मीडिया और ग्लैमर इंडस्ट्री के कई लोग अपने नाम में एक से ज्यादा अक्षर जोड़ते हैं। जैसे किसी के नाम में &#039;A&#039;, &#039;Y&#039; और &#039;K&#039;।आज के समय में नाम अंक ज्योतिष सिर्फ ट्रेंड नहीं है, बल्कि यह लोगों के बीच पहचान, आत्मविश्वास और जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने की गहरी जिज्ञासा का विषय बन गया है। कई लोग इसको सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास से जोड़कर देखते हैं। तो कई लोग इसको सहायक मार्गदर्शन की तरह देखते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:57 +0530</pubDate>
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<title>Horoscope 06 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष कुछ कामों में आशातीत सफलता मिलेगी। कटु वचन रिश्तों में दरार डाल सकते हैं। सार्वजनिक सम्मान से प्रसन्नता। अच्छा दिन है, सुख संतोष मिलेगा।वृषकिसी और की गलती की सजा आपको मिलेगी। नई संभावनाएं दिखाई देगी, आगे बढ़ें। स्वास्थ्य में सुधार से प्रसन्नता। पदोन्नति के लिए विशेष सिफारिश संभव।मिथुननेतृत्व में टीम को विशेष सफलता। वाहन संबंधित समस्या का सामना। सामाजिक पारिवारिक परिवेश बढ़ेगा। सत्परामर्श दाता की भूमिका में रहेंगे।कर्कगैर कानूनी कामों से दूर रहने में ही भलाई। अचानक विषम परिस्थितियां पैदा होगी। आर्थिक गतिविधियों में संलिप्तता रहेगी। चिंता और परेशानी का हल निकाल सकेंगे।सिंहचारों तरफ से शुभ समाचार और लाभ। व्यावसायिक मामलों में ठोस निर्णय और सफलता। धन संबंधी मामले में चिंतन बना रहेगा। पारिवारिक संपत्ति से लाभ।कन्याअचल सम्पत्ति संबंधी निर्णय ले सकते है। संचार माध्यमों से सुखद और समाचार। आपका उदार व्यवहार प्रभावशाली सिद्ध होगा। परिवार में वृद्धजनों का स्वास्थ्य बिगड़ेगा।तुलाबेरोजगारों को रोजगार संबंधी शुभ समाचार। आर्थिक मामलों में उलझे रहेंगे। परिश्रम अधिक, लाभ कम। स्वजनों के कल्याण कार्यों में व्यस्त रहेंगे।वृश्चिक शुभ समाचारों से खुशी होगी, रोजगार में प्रगति भी। दिन सामान्य, फिर भी रचनात्मक। चिंता और उदासीनता बनी रहेगी। स्वास्थ्य में सुधार और रोग मुक्ति।धनुरोजगार की तलाश पूरी, नया परिचय लाभप्रद। पदोन्नति होगी, कार्यक्षेत्र में यश। सर्वत्र लोकप्रियता और इज्जत बढ़ेगी। कल्पना और यथार्थ में अंतर महसूस करेंगे।मकर बच्चों के भविष्य के प्रति चिंतित रहेंगे। आप सब को संतुष्ट करेंगे। विशेष प्रशिक्षण के लिए जा सकते हैं। दिन तनावपूर्ण रहेगा, अंसतोष भी।कुंभस्वविवेक से निर्णय, सब तरह से ठीक रहेगा। किसी षड्यंत्र के शिकार हो सकते हैं। बिगड़े हुए संबंध सुधर सकते हैं। कला और रचना धार्मिता की प्रंशसा होगी।मीनआर्थिक और पारिवारिक कार्यों में यश। आत्म केन्दि्रत रहते हुए कार्यकलाप रखेंगे। नया करार, नई डील संपन्न। दूसरों की बुद्धि से भी, अपने विवेक से काम लें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>सुंदरकांड पाठ के दौरान न करें ये 5 बड़ी गलतियां, वरना रुष्ट हो जाएंगे हनुमान जी! नहीं मिलेगा पूरा फल</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म में हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। हनुमान जी अपने भक्तों के दुख-दर्द, पीड़ा और संकट सब हर लेते हैं। लोग बजरंगबली की कृपा प्राप्त करने के लिए सुंदरकांड का पाठ जरुर करते हैं, लेकिन इसका पाठ करते समय कुछ न कुछ गलती कर ही देते हैं। रामचरितमानस का पांचवां अध्याय सुंदरकांड हनुमान जी की महिमा, उनके साहस और बुद्धि का अद्भुत विवरण दिया है।धार्मिक मान्यता के अनुसार, जहां भी सुंदरकांड का पाठ पूरी श्रद्धा से होता है, वहां हनुमान जी खुद किसी न किसी रुप में मौजूद रहते हैं। यह पाठ जीवन के बड़े से बड़े संकट को टालने और आत्मविश्वास जगाने की शक्ति रखता है। लेकिन कई बार लोग पूरी श्रद्धा से पाठ करते हैं, फिर भी मनचाह फल प्राप्त नहीं होता है, जिसका मुख्य कारण पाठ के दौरान होने वाली कुछ अनजानी गलतियां है। क्या आप जानते हैं कि अनजाने में की गई कुछ गलतियों से इसके पुण्य फल समाप्त हो जाते हैं। किन गलतियों से बचेंअपवित्रता और सूतक का ध्यान न रखनाधार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं और उन्हें पवित्रता बहुत प्रिय है। पाठ शुरु करने से पहले स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। यदि परिवार में सूतक यानी के किसी के जन्म या मरण का समय लगा हो, तो सुंदरकांड का पाठ न करें।आसन और स्थान का बार-बार बदलनाजब आप सुंदरकांड का पाठ शुरु करते हैं, तो एक शांत स्थान का चयन करें और कुशा या ऊनी आसान पर बैठ जाएं। पाठ के दौरान इधर-उधर बैठना, बीच-बीच में उठना या किसी से बात करना वर्जित है। ऐसा करने से एकाग्रता समाप्त हो जाती है और पाठ का आध्यात्मिक प्रभाव खत्म हो जाता है। बीच में पाठ अधूरा छोड़नाअगर आप सुंदरकांड का पाठ करते हैं, तो इसे एक ही बार में पूरा पाठ करना चाहिए। कई लोग समय की कमी के कारण आधा पाठ आज और आधा कल करते हैं, जो कि सही नहीं है। अगर आपके पास ज्यादा समय नहीं है, तो आप हनुमान चलीसा या बजरंग बाण का पाठ कर सकते हैं, लेकिन सुंदरकांड को बीच में अधूरा न छोड़ें।तामसिक भोजन और आचरणयदि आप नियमित रूप से सुंदरकांड का पाठ करते हैं या मंगलवार अथवा शनिवार को इसका विशेष व्रत एवं संकल्प रखते हैं, तो उस दिन घर में मांसाहार, शराब, प्याज और लहसुन का सेवन या उपयोग करने से परहेज करना चाहिए। साथ ही, पाठ के दौरान और पूरे दिन अपने विचारों को सकारात्मक बनाए रखें तथा किसी के प्रति द्वेष, गुस्सा या कटु वचन बोलने से बचें।आरती और भोग को नजरअंदाज करनासुंदरकांड का पाठ समाप्त होने के बाद श्री राम जी और हनुमान जी की आरती करना अनिवार्य है। इसके बाद ही उन्हें बूंदी के लड्डू , चना-चिरौंजी या फल का भोग लगाएं। आरती किए बिना और बिना प्रसाद के सुंदरकांड का पाठ पूरा नहीं माना जाता। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Love Horoscope For 7 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 7 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 7 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशिफल (Aries):आज आपके अंतस में अनुराग का एक सर्वथा नूतन अंकुर प्रस्फुटित होगा। आपकी चेतना के क्षितिज पर प्रणय की एक ऐसी रश्मि चमकेगी, जो आपके हृदय को असीम आनंद से सराबोर कर देगी। प्रियजन के साथ बिताया गया हर पल एक खूबसूरत कविता की तरह महसूस होगा, जहाँ शब्द कम और भावनाएँ अधिक मुखर होंगी।वृषभ राशिफल (Taurus):सहजीवन के पथ पर आज आपको चरम धैर्य और आत्म-नियंत्रण का परिचय देना होगा। जीवन की आपाधापी के बीच अपने संगी के दृष्टिकोण को भी अपनी विचार-वीथि में स्थान दें। ढलती शाम जब मौसम में एक मखमली शालीनता आएगी, तब किसी शांत स्थल पर उनका सानिध्य ग्रहण करें; सारी कड़वाहट तत्क्षण तिरोहित हो जाएगी।मिथुन राशिफल (Gemini):प्रणय-प्रसंग के दृष्टिकोण से आज का दिवस अद्वितीय और चिर-स्मरणीय सिद्ध होगा। आपके मध्य का अंतर्निहित संकर्षण और आत्मिक सामंजस्य रिश्ते को एक अभिनव आयाम प्रदान करेगा। यदि आप किसी विशिष्ट जन के समक्ष अपने सुकोमल अंतर्भावों को उद्घाटित करने के अभिलाषी हैं, तो इस भाव-निवेदन के लिए यह बेला सर्वथा श्रेयस्कर है।कर्क राशिफल (Cancer):अहर्निश की व्यस्तताओं के मध्य भी आज आप अपने प्राणप्रिय के लिए समय का अर्जन करने में पूर्णतः सफ़ल सिद्ध होंगे। आपकी कोई सूक्ष्म भाव-चेष्टा या संवेदी प्रयास सहचर के ओष्ठों पर अनुपम हास्य बिखेर सकता है। आज उनके नयनों में झांककर आपको अहसास होगा कि मौन की भी अपनी एक मुग्ध कर देने वाली भाषा होती है।सिंह राशिफल (Leo):आज आपको अपने दंभ या आत्मश्लाघा को प्रीत के पावन मार्ग की बाधा नहीं बनने देना चाहिए। यदि किसी संशयजन्य कटुता के कारण परस्पर दूरियां बढ़ गई थीं, तो स्वयं अग्रगामी बनकर संवाद का सूत्रपात करें। आपका यह सुकोमल विन्यास और कल्याणकारी वचन बिगड़े हुए अंतर्संबंधों को तत्क्षण माधुर्य से परिपूर्ण कर देंगे।कन्या राशिफल (Virgo):दांपत्य और साहचर्य के लिहाज से आज का समय-चक्र उल्लास और उद्वेग से परिपूर्ण रहेगा। अपने सहयात्री के साथ किसी सुरम्य उपवन में भ्रमण की रूपरेखा निर्मित हो सकती है। आज परस्पर विश्वास की एक ऐसी शीतल बयार चलेगी, जो आपके आपसी प्रेम को और अधिक प्रगाढ़, जीवंत और अटूट बना देगी।तुला राशि (Libra)प्यार के मामले में आज का दिन बेहद आनंदमयी और यादगार रहेगा। आप अपने पार्टनर के साथ कहीं बाहर घूमने या कैंडललाइट डिनर का प्लान बना सकते हैं। एक-दूसरे के साथ बिताया यह समय आपके जुड़ाव को और मजबूत करेगा।वृश्चिक राशि (Scorpio)आज प्रेम जीवन में थोड़े उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। किसी पुरानी या दबी हुई बात को लेकर पार्टनर के साथ तीखी बहस होने के संकेत हैं। बात को ज्यादा तूल देने के बजाय समझदारी से मामले को वहीं रफा-दफा करें।धनु राशि (Sagittarius)धनु राशि वालों के लिए आज का दिन खुशियों की सौगात लेकर आया है। साथी के साथ बेहतरीन पल बिताने का अवसर मिलेगा, जिससे आपकी पुरानी सुनहरी यादें फिर से ताजा हो जाएंगी। रिश्ते में एक नया उत्साह और जोश देखने को मिलेगा।मकर राशि (Capricorn)अगर आप लंबे समय से किसी को पसंद करते हैं और कह नहीं पाए हैं, तो आज अपने प्यार का इजहार कर दीजिए, दिन बढ़िया है। शादीशुदा जातकों के जीवन में तालमेल बना रहेगा और उन्हें हर मोड़ पर जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा।कुंभ राशि (Aquarius)आज पार्टनर के साथ आपका मानसिक और भावनात्मक तालमेल और भी मजबूत होगा। आप दोनों मिलकर अपने भविष्य को लेकर कुछ गंभीर चर्चाएं कर सकते हैं। अविवाहित लोगों के जीवन में किसी नए प्रेम-संबंध की शुरुआत होने के प्रबल योग हैं।मीन राशि (Pisces)आज भावनाओं के आवेग में आकर कोई भी जल्दबाजी भरा फैसला न लें। मुमकिन है कि पार्टनर की कोई बात आपको बुरी लग जाए, लेकिन याद रखें कि हर उलझन का हल सिर्फ संवाद से ही निकलता है। थोड़ा धैर्य बनाए रखें। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
<media:keywords>Love, Horoscope, For, June, 2026, आज, का, प्रेम, राशिफल, जून, 2026, प्रेमियों, के, लिए, कैसा, रहेगा, आज, का, दिन</media:keywords>
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<title>Horoscope 07 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष परिश्रम का फल मिलेगा, अच्छा महसूस होगा। आर्थिक समस्या से मुक्ति का दिन है। वाद-विवाद और मन में अशांति। अनैतिक और अवैध कार्यों से बचें।वृषप्रचुर मात्रा में धन प्राप्ति होगी। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। अपने दम पर ही कुछ नया कर दिखाएंगे। दूसरों की गलती और आरोप आप पर।मिथुनजरूरी काम पूरे होंगे-धन लाभ भी होगा। जरूरी काम जल्दी-जल्दी निपटा लें। अपने दम पर ही कुछ नया कर दिखाएंगे। आपकी विनम्रता यश भी देगी, सफलता भी।कर्कमन की अंशात स्थिति शांत होगी। लाभ और विजय आज आपके भाग्य में है। अकारण शत्रु पैदा होंगे, अनावश्यक विवाद भी। परिश्रम का सुपरिणाम प्रसन्नता देगा।सिंहअप्रिय घटना और ऐसा ही समाचार मिल सकता है। जरूरतमंदों की सहायता का सौभाग्य मिलेगा। नई जिम्मेदारी के साथ नई पहचान मिलेगी। रोजगार व्यवसाय में प्रशंसा मिलेगी।कन्याआचरण में संयम बरतने की जरूरत है। विदेशों से आयात-निर्यात करने पर लाभ उठाएंगे। वरिष्ठ अधिकारी आपके कार्यों से प्रसन्न रहेंगे। अधिकतर समय सामान खरीदने में बीतेगा।तुलाव्यवसाय परिवर्तन का निर्णय ले सकते हैं। यात्रा जारी रह सकती है। चाहकर भी कार्य न होने का दुःख होगा। विशेष लोगों से भेंट के लिए आना या जाना।वृश्चिक व्यवसाय के क्षेत्र में नए सम्पर्क। चोरी और विश्वासघात के शिकार हो सकते हैं। रोजगार के क्षेत्र में लाभ होगा। व्यापारिक साझेदारी से लाभ।धनुधर्म और अध्यात्म में रूचि बढ़ेगी। निर्णय पर दृढ़ रहें, भटकाव संभव। नौकरी में बदलाव करने के संकेत मिलेंगे। आत्म विश्वास के साथ आगे बढ़ें।मकर परेशानियां दूर होगी, भाग्योदय होगा। नए व्यापारिक संबंध, लाभ के सौदे। स्वास्थ्य में सुधार से प्रसन्नता। कारण-अकारण चिंता एवं परेशानी।कुंभअपनी समस्याओं के समाधान ढूंढ़ ही लेंगे। दूसरों के द्वारा, किए गये कार्यों का श्रेय भी आपको मिलेगा। कोई अशुभ समाचार मिल सकता है। दूसरों के झगड़ों से दूर ही रहें।मीनआर्थिक उन्नति की ओर विशेष कदम। आप सही दिशा में आगे की ओर बढ़ रहे हैं। मनोकामनाएं पूरी होगी। अपेक्षा से अधिक सफलता मिलने की खुशी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Horoscope 08 June 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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<description><![CDATA[ आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।मेष परिश्रम अधिक, लाभ कम। रक्तचाप, मधुमेह रोगी सावधान रहें। बड़ों का स्वास्थ्य नरम, रूकावटें भी अधिक है। कदम फूंक-फूंक कर रखें, धोखा मिलेगा।वृषसार्वजनिक सम्मान से प्रसन्नता। परिश्रम अधिक, लाभ कम। प्रतिष्ठित व्यक्तियों से मिलन, भविष्य में सहायक। अचल सम्पत्ति प्राप्ति के प्रयास होंगे।मिथुनमहत्वपूर्ण कार्यों में व्यस्तता। धन की स्थिति मजबूत होगी। धार्मिक कार्यों में रूचि, रचनात्मक भी। कोई आरोप लग सकता है, अपयश मिलेगा।कर्कधन संबंधी स्थिति मजबूत होगी। साझेदारी से काम और व्यापार में लाभ। महत्वपूर्ण अटका हुआ काम पूरा होगा। अभीष्ट नई वस्तुओं भी खरीदी करेंगे।सिंहनया सम्पर्क भाग्योदय कारक। लाभ के अवसरों का लाभ उठाना चाहिए। पारिवारिक सुख शांति और मित्र मिलन। कुछ ले-दे कर काम पूरा हो जाएगा।कन्याअचानक खर्च बढ़ने से परेशानी, कानूनी उलझनें भी। आर्थिक मामलों में उलझे रहेंगे। घर में कलह और बनते काम बिगड़ने का दुःख। व्यवसायिक क्षेत्र में विश्वासघात की संभावना।तुलाथकान होगी- मनोरंजन और आराम की इच्छा। रोजगार व्यवसाय में प्रशंसा मिलेगी। नई राह निकलेगी और उस पर चलेंगे भी। कुछ अच्छे फैसले लेने का दिन।वृश्चिक लव अफेयर्स की दृष्टि से खास दिन है। आर्थिक मामलों में उलझे रहेंगे। नौकरी व्यापार में परिवर्तन के संकेत। ईमानदारी की सफलता भी यश देगी।धनुबिछड़े हुए तथा नए लोगों के साथ होगा मेल-मिलाप। विवाह समारोह आदि शुभ कार्य में भाग लेंगे। सतर्क रहकर दिन बिताएं। साहस करें, सफलता मिलेगी।मकर सामाजिक मान-सम्मान पाकर आपको प्रसन्नता होगी। महत्वपूर्ण कार्य न होने का कष्ट होगा। संबंधों का महत्व समझें, बहुत आवश्यक है। अप्रिय घटना और ऐसा ही समाचार मिल सकता है।कुंभमनोकामनाएं पूरी होगी। ज्ञान विज्ञान में रूचि, वैसे शुभशुभ दिन। चाहकर भी कार्य न होने का दुःख होगा। व्यवसाय में लाभ, नौकरी में उन्नति।मीनहर दृष्टि से सतर्क रहें, धोखे का योग है। किसी भी घटना या कथन पर सहसा न बोले। परिवार से परामर्श लेकर जरूरी निर्णय लें। नए पुराने मित्रों से मेल मिलाप। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>PNS</dc:creator>
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<title>Astrology Tips: कुंडली में सूर्य को करें मजबूत, Job&#45;Promotion में आ रही हर बाधा होगी दूर</title>
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<description><![CDATA[ हिंदू धर्म भानु सप्तमी का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य देव को जल अर्पित करने से कुंडली दोष दूर हो जाते हैं। सप्तमी तिथि सूर्य देव को समर्पित है। मान्यता के अनुसार, इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से भगवान सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और भक्तों के जीवन से अंधकार को दूर कर देते हैं। अगर आप अपनी कुंडली में सूर्य ग्रह को मजबूत करना चाहते हैं, समाज में मान-सम्मान, उच्च पद और अच्छा स्वास्थ्य चाहते हैं, तो भानु सप्तमी के दिन भगवान सूर्य देव के विधि अनुसार अर्घ्य दें, जिससे आपके जीवन के सभी संकटों का नाश हो जाएगा।सूर्य से जुड़े शुभ-अशुभ प्रभावअगर आपकी कुंडली में सूर्य देव के कमजोर हैं, तो ऐसे जातक को वर्कप्लेस पर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, मेहनत का क्रेडिट नहीं मिलता और कारोबार में बाधाएं आती हैं। जब सूर्य मजबूत होते हैं, तो व्यक्ति में लीडरशिप क्वालिटी आती है। वहीं, सरकारी नौकरी के योग बनते हैं और कारोबार में सही फैसले लेने की समझ आ जाती है।सही तरह से अर्घ्य देने की विधि - इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लें और फिर साफ वस्त्र धारण कर सकते हैं।  - अर्घ्य को हमेशा तांबे के लोटे से देना शुभ माना जाता है। इसलिए भूलकर भी स्टील, प्लास्टिक या कांच के बर्तनों का इस्तेमाल न करें। - तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर। इसमें थोड़ा-सा लाल चंदन, कुमकुम, अक्षत और लाल रंग के फूल डालें। अगर बिजनेस में सफलता चाहते हैं, तो जल में थोड़ी मिश्री भी मिलाएं। - इसके बाद सूर्य देव के सामने खड़े होकर लोटे को अपने दोनों हाथों से पकड़ें। फिर हाथ को सिर से ऊपर तक ले जाएं। धीरे-धीरे जल को चढ़ाएं। - इस बात का ध्यान रखें कि जल चढ़ाते समय आपकी नजर सीधे सूर्य पर नहीं, बल्कि गिरती हुई जल धारा के बीच आने वाली सूर्य की किरणों पर होनी चाहिए।इन मंत्रों का जप करें - जब आप जल अर्पित करें, तो ॐ सूर्याय नमः या ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप कम से कम 11 बार करें। अर्घ्य पूरा होने के बाद उस स्थान पर क्लॉकवाइज तीन बार परिक्रमा करें और गिरे हुए जल को अपने माथे और आंखों पर जरुर लगाएं। - पूजा की आखिरी में भगवान सूर्य की भाव के साथ आरती करें। - इस बात का ध्यान भी रखें कि, जब आप जल अर्पित करें, तो जल की बूंदें आपके पैरों पर न पड़ें। इसके लिए आप कोई गमला या थाली रख सकते हैं या फिर उस जल को बाद में पौधे को जड़ में डाल सकते हैं।  ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:53 +0530</pubDate>
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<title>Love Horoscope For 8 June 2026 | आज का प्रेम राशिफल 8 जून  2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन</title>
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<description><![CDATA[ दैनिक प्रेम राशिफल 8 जून  2026: इन राशियों के जातकों में आज रोमांटिक माहौल रहने की संभावना है। सभी सूर्य राशियों के लिए दैनिक ज्योतिषीय भविष्यवाणियां पाएं।मेष राशि (Aries)&quot;दिलों में नई सुगबुगाहट&quot;आज आपकी मोहब्बत की फिजाओं में एक नई खुशबू घुलेगी। पुराने गिले-शिकवे मोम की तरह पिघल जाएंगे और बातचीत के जरिए दिलों की दूरियां सिमटेंगी। जो दिल अब तक अकेले हैं, उनकी जिंदगी की खाली किताब में आज मोहब्बत का एक नया और हसीन पन्ना जुड़ सकता है।वृषभ राशि (Taurus)&quot;जज्बातों की कद्र और मखमली एहसास&quot;मसरूफियत के इस दौर में आज अपने हमसफ़र की खामोश निगाहों को पढ़ने की कोशिश करें। मुमकिन है कि काम की वजह से आप उन्हें ज्यादा वक्त न दे पाएं और उनके दिल में थोड़ी मायूसी छा जाए। शाम को एक छोटा सा सरप्राइज या कोई प्यारी सी बात उनके चेहरे पर मुस्कान बिखेर देगी।मिथुन राशि (Gemini)&quot;रूहानी ताल्लुक और चाहत का परवान&quot;रोमांस के आसमां पर आज आपकी चाहत का सितारा सबसे ज्यादा चमकेगा। आपके और आपके हमकदम के बीच एक ऐसा रूहानी जुड़ाव महसूस होगा, जो शब्दों से परे है। अगर आप इस पाक रिश्ते को उम्र भर का साथ (शादी) बनाना चाहते हैं, तो अपनों से दिल की बात कहने का इससे खूबसूरत लम्हा नहीं मिलेगा।कर्क राशि (Cancer)&quot;भरोसे की ढाल और अटूट बंधन&quot;आज आपकी मोहब्बत के गुलशन पर किसी बाहरी नजर का साया पड़ सकता है। कोई तीसरा आपके दरमियान गलतफहमियों की दीवार खड़ी करने की कोशिश करेगा। दुनिया की अनसुनी बातों को दरकिनार कर अपने साथी की वफा पर यकीन रखें; आपकी खामोशी और भरोसा ही आज जीत दिलाएगा। सिंह राशि (Leo)&quot;कशिश का जादू और धड़कनों की रवानी&quot;आज आपका अंदाज-ए-बयां और कशिश इतनी दिलकश होगी कि आपका साथी आपकी तरफ खिंचा चला आएगा। उनकी धड़कनें सिर्फ आपके लिए धड़केंगी और उनकी तरफ से कोई नायाब तोहफा आपके दिन को हसीन बना देगा। सिंगल्स के लिए आज अपनी दबी हुई चाहत का इजहार करने का जादुई दिन है।कन्या राशि (Virgo)&quot;लफ्जों की नजाकत और एहसास-ए-मोहब्बत&quot;मोहब्बत के तराजू में आज आपके लफ्जों का वजन बहुत मायने रखेगा। जल्दबाजी या तल्खी में कही गई कोई बात आपके दिलबर के नाजुक दिल को ठेस पहुंचा सकती है। अपनी बात जरूर कहें, लेकिन उसमें थोड़ी नजाकत, थोड़ी नरमी और ढेर सारा प्यार शामिल करें।तुला राशि (Libra)&quot;यादगार शाम और धड़कता दिल&quot;आज का दिन आपकी प्रेम कहानी में एक सुनहरे ख्वाब जैसा रहेगा। कैंडललाइट डिनर की मद्धम रोशनी या किसी खामोश रास्ते पर हाथ में हाथ डालकर चलना, आज आपको एक-दूसरे के बेहद करीब ले आएगा। यह शाम आपकी यादों के झरोखे में हमेशा के लिए महफूज हो जाएगी।वृच्छिक राशि (Scorpio)&quot;सुलझती उलझनें और बढ़ता प्यार&quot;आज जज्बातों के समंदर में थोड़ी हलचल मच सकती है। अतीत की कोई दबी हुई चिंगारी आज बहस का रूप ले सकती है। लेकिन याद रखें, जहां बेपनाह मोहब्बत होती है, वहां तकरार भी होती है। बात को बढ़ाने के बजाय अपनी बांहों के घेरे में लेकर शिकवों को वहीं थाम लें।धनु राशि (Sagittarius)&quot;खुशियों की बहार और पुरानी यादें&quot;धनु राशि के प्रेमियों के लिए आज की सुबह खुशियों का पैगाम लेकर आई है। अपने हमनवा के साथ बिताए गए हसीन लम्हे आपकी पुरानी सुनहरी यादों को फिर से तरोताजा कर देंगे। रिश्ते में एक ऐसा नया जोश और दीवानगी देखने को मिलेगी, जो आपको एक-दूसरे का दीवाना बना देगी।मकर राशि (Capricorn)&quot;इजहार-ए-इश्क और मुकम्मल साथ&quot;अगर दिल के किसी कोने में किसी के नाम की शमा जल रही है और आप अब तक कह नहीं पाए हैं, तो आज अपनी खामोशी को आवाज दीजिए; किस्मत आपके साथ है। शादीशुदा लोगों की जिंदगी में आज एक ठहराव और गहरा सुकून रहेगा, जहां जीवनसाथी का साथ हर राह को आसान बना देगा।कुंभ राशि (Aquarius)&quot;दो जिस्म एक जान का एहसास&quot;आज आपका अपने साथी के साथ एक ऐसा मानसिक और भावनात्मक तालमेल बैठेगा कि बिना कुछ कहे भी सब समझ आ जाएगा। आप दोनों आने वाले कल के हसीन सपने बुनेंगे। जो दिल अभी तन्हा हैं, उनकी जिंदगी में किसी नए और मुकम्मल रिश्ते की दस्तक होने के मजबूत योग हैं।मीन राशि (Pisces)&quot;सब्र की मिठास और गहरा संवाद&quot;आज भावनाओं के भंवर में बहकर कोई फैसला न लें। मुमकिन है कि किसी बात पर आपके हमसफ़र का रवैया आपको थोड़ा उदास कर दे, लेकिन याद रखें कि हर उलझन का सिरा सिर्फ और सिर्फ प्यार भरे संवाद से ही सुलझता है। थोड़ा सब्र रखें, क्योंकि शाम ढलते ही प्यार की गर्माहट सब ठीक कर देगी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:52 +0530</pubDate>
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<title>Bhanu Saptami 2026: अधिकमास भानु सप्तमी व्रत से प्राप्त होता है यश, मिलती है सफलता</title>
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<description><![CDATA[ 7 जून को अधिकमास भानु सप्तमी व्रत है, हिन्दू धर्म में भानु सप्तमी का बहुत महत्व है। इस व्रत से जीवन में आती है सुख-शांति तो आइए हम आपको अधिकमास भानु सप्तमी व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं। जानें अधिकमास भानु सप्तमी के बारे में  पंडितों के अनुसार अधिकमास भानु सप्तमी हिंदू धर्म से जुड़ा एक खास व्रत है जो सूर्य भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्यदेव की आराधना और पूजा करने से साधक के बिगड़े काम पूरे हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। भानु सप्तमी उस दिन का भी संकेत देती है, जब भगवान सूर्य अपने रथ पर पृथ्वी पर आये थे। भगवान सूर्य के आगमन ने पृथ्वी पर नया जीवन ला दिया। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, सूर्यदेव एक पवित्र कमल के फूल पर स्वर्ण रथ पर सवार थे। सात घोड़े रथ खींचते हैं और ये घोड़े सूर्य की सात किरणों को दर्शाते हैं। हिंदू परंपराओं के अनुसार, जो भी व्यक्ति भगवान सूर्य की पूजा करने के साथ भानु सप्तमी का व्रत रखता है, उन्हें अच्छी सेहत और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस वर्ष अधिकमास भानु सप्तमी 7 जून को पड़ रही है। इसे भी पढ़ें: Dhar Bhojshala का 700 साल पुराना इंतजार खत्म, ASI रिपोर्ट के बाद अब गूंजेंगे स्तुति मंत्रअधिकमास भानु सप्तमी का आध्यात्मिक महत्व भी है खास पुराणों के अनुसार अधिकमास भानु सप्तमी पर जो भी व्यक्ति भगवान सूर्य देव की पूजा करता है, उसे धन, दीर्घायु और अच्छी सेहत का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भानु सप्तमी के दिन भक्त सूर्य देव को खुश करने के लिए कई पवित्र सूर्य स्तोत्रों और आदित्य हृदय स्तोत्रों का जाप करने के साथ सूर्यदेव का महा-अभिषेक भी करते हैं।अधिकमास भानु सप्तमी व्रत करने से होते हैं ये लाभ पंडितों के अनुसार अधिकमास भानु सप्तमी व्रत बहुत खास होता है, इस दिन भगवान सूर्य की उपासना और और भानु सप्तमी के दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को कई तरह के लाभ मिलते हैं। भानु सप्तमी की पूर्व संध्या पर पवित्र गंगा में स्नान करने से भक्तों को अपने जीवन में कभी भी आर्थिक चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ता है। भानु सप्तमी के दिन पूजा करने वाली महिलाओं को अपने अगले जन्म में अच्छे और योग्य वर की प्राप्ति होती है। भानु सप्तमी के दिन व्रत रखने से स्वस्थ और सुखी जीवन के साथ भगवान सूर्य का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। सूर्य देव के आशीर्वाद से भक्त घातक रोगों से छुटकारा पाने के साथ सच्चे ज्ञान को प्राप्त करते हैं।अधिकमास भानु सप्तमी व्रत के दिन ऐसे करें पूजा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास भानु सप्तमी व्रत बहुत खास होता है। इस भानु सप्तमी व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल फूल, अक्षत और रोली डालें। उगते हुए सूर्य को यह जल अर्पित करें और सूर्य मंत्रों का जाप करें। पूजा के दौरान सूर्य देव को लाल पुष्प, गुड़, गेहूं और लाल वस्त्र अर्पित करना और आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है।अधिकमास भानु सप्तमी व्रत पर दीपदान का है विशेष महत्वपंडितों के अनुसार अधिकमास में दीपदान (दीपक जलाना) सबसे उत्तम माना गया है। पंचमी की शाम को घर के मंदिर में, तुलसी के पौधे के पास और संभव हो तो किसी पवित्र नदी या पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जरूर जलाएं।अधिकमास भानु सप्तमी व्रत पर करें दान इन चीजों का दान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भानु सप्तमी के दिन लाल वस्त्र, गुड़, गेहूं, तांबे के बर्तन का दान करना शुभ माना गया है। इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। साथ ही व्यक्ति को मान-सम्मान, आत्मविश्वास और उन्नति का आशीर्वाद मिलता है। इसलिए जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और दान-पुण्य करना भी इस दिन विशेष फलदायी माना गया है।अधिकमास भानु सप्तमी पर व्रत रखें और नमक का त्याग करें पंडितों के अनुसार इस दिन विधिपूर्वक व्रत करना चाहिए। इस दौरान नमक का सेवन न करें। साथ ही व्रत से जुड़े नियम का पालन जरूर करें। इससे आपको व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होगा। साथ ही सूर्य देव आपकी हर मुरादें पूरी करेंगे।अधिकमास भानु सप्तमी व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा भी है खास पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भानु सप्तमी के व्रत और कथा का सीधा संबंध भगवान श्रीकृष्ण और जामवंती के पुत्र साम्ब से जुड़ा है। एक बार श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब को अपनी शारीरिक सुंदरता और रूप-रंग पर बहुत अहंकार हो गया। अपने इसी घमंड में आकर उन्होंने महर्षि दुर्वासा का अपमान कर दिया। साम्ब के इस व्यवहार से क्रोधित होकर महर्षि दुर्वासा ने उन्हें कुष्ठ रोग (कोढ़) होने का श्राप दे दिया। साम् के कुष्ठ रोग से ग्रस्त हो जाने पर पूरी द्वारका में शोक की लहर दौड़ गई। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र साम्ब को सूर्य देव की उपासना करने की सलाह दी। पिता की आज्ञा मानकर साम्ब ने चंद्रभागा नदी (वर्तमान कोणार्क, ओडिशा) के तट पर कठोर तपस्या की। उन्होंने कई वर्षों तक केवल सूर्यदेव का ध्यान करते हुए उनका विधिवत व्रत रखा।साम् की सच्ची भक्ति और कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर, भगवान सूर्य ने उन्हें दर्शन दिए और उनके सभी पापों व श्राप का निवारण कर दिया। सूर्य देव की कृपा से साम्ब का शरीर पहले जैसा निरोगी और अत्यंत कांतिवान हो गया।तब से ही यह मान्यता है कि जो भी भक्त भानु सप्तमी के दिन पूर्ण श्रद्धा और उपवास के साथ सूर्यदेव की पूजा करता है, उसे असाध्य रोगों, विशेषकर त्वचा और नेत्र संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है।अधिकमास भानु सप्तमी के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियांधार्मिक मान्यताओं के अनुसार भानु सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना और सूर्य देव को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। देर तक सोना इस दिन अशुभ माना जाता है। इस दिन मांसाहार, शराब, लहसुन-प्याज और अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए और सात ]]></description>
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<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:55:49 +0530</pubDate>
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