PV Narsimha Rao Death Anniversary: नरसिम्हा राव ने मुश्किल समय में संभाली थी देश की बागडोर, ऐसे बने आर्थिक उदारीकरण के जनक

आज ही के दिन यानी की 23 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव का निधन हो गया था। देश में आर्थिक सुधारों का श्रेय पूर्व पीएम नरसिम्हा राव को दिया जाता है। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई ऐसे फैसले लिए, जिससे कि देश गरीबी से बाहर आ सके। एक दौर ऐसा था, जब देश को अपना सोना भी विदेशों में गिरवी रखना पड़ा था। जिसके बाद नरसिम्हा राव ने देसी बाजार खोल दिया था। हालांकि उस दौर में तो उनको इस कारण आलोचना का शिकार होना पड़ा था। लेकिन यह वही फैसला था, जिसकी बदौलत आज हम टॉप देशों में शामिल हैं। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर पीवी नरसिम्हा राव के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...जन्म और परिवारआंध्र प्रदेश के करीमनगर में 28 जून 1921 को पीवी नरसिम्हा राव का जन्म हुआ था। उनका पूरा नाम पामुलापार्ती वेंकट नरसिम्हा राव था। उन्होंने अपनी शिक्षा हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय, मुंबई विश्वविद्यालय और नागपुर विश्वविद्यालय से पूरी की थी। बता दें कि नरसिम्हा राव 10 भाषाओं में बात कर सकते थे और अनुवाद के भी उस्ताद थे।इसे भी पढ़ें: Chaudhary Charan Singh Birth Anniversary: किसानों के मसीहा कहे जाते थे पू्र्व PM चौधरी चरण सिंह, खत्म किया था पटवारी सिस्टमराजनीतिक सफरसाल 1957 से लेकर 1977 तक वह आंध्र प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। फिर 1977 से 84 तक वह लोकसभा के सदस्य रहे। दिसंबर 1984 में नरसिम्हा राव को रामटेक से 8वीं लोकसभा के लिए चुना गया। वह 14 जनवरी 1980 से 18 जुलाई 1984 तक विदेश मंत्री, फिर जुलाई 1984 से दिसंबर 1984 तक गृहमंत्री और दिसंबर 1984 से सितंबर 1985 तक रक्षामंत्री रहे। 25 सितंबर 1985 में नरसिम्हा राव ने राजीव गांधी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में पदभार संभाला।आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रीसाल 1971 से लेकर 1973 तक पीवी नरसिम्हा राव आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। फिर साल 1975 से लेकर 1976 तक अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव रहे। वहीं नरसिम्हा राव 1968 से 74 तक राज्य के तेलुगू अकादमी के अध्यक्ष और 1972 में मद्रास के दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के उपाध्यक्ष रहे थे।आर्थिक उदारीकरण के जनकराजनीति के अलावा पीवी नरसिम्हा राव संगीत, कला और साहित्य आदि की अच्छी खासी समझ रखते थे। वे नेहरू-गांधी परिवार के बाहर के पहले प्रधानमंत्री थे और दक्षिण भारत से देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने वाले पीवी नरसिम्हा राव पहले शख्स थे। जब नरसिम्हा राव ने पहली बार विदेश यात्रा की थी, तो उनकी उम्र 53 साल थी। उन्होंने मुश्किल समय में देश की कमान संभाली थी। क्योंकि उस दौर में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार चिंताजनक स्तर तक कम हो गया था। जिस कारण देश का सोना तक गिरवी रखना पड़ा था। जब नरसिम्हा राव ने रिजर्व बैंक के अनुभवी गवर्नर डॉ मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री बनाकर देश को इस आर्थिक भंवर से निकालने का काम किया था।मृत्युवहीं 23 दिसंबर 2004 को नई दिल्ली में 83 साल की उम्र में पीवी नरसिम्हा राव का निधन हो गया था।

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Dec 23, 2025 - 17:21
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PV Narsimha Rao Death Anniversary: नरसिम्हा राव ने मुश्किल समय में संभाली थी देश की बागडोर, ऐसे बने आर्थिक उदारीकरण के जनक
आज ही के दिन यानी की 23 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव का निधन हो गया था। देश में आर्थिक सुधारों का श्रेय पूर्व पीएम नरसिम्हा राव को दिया जाता है। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई ऐसे फैसले लिए, जिससे कि देश गरीबी से बाहर आ सके। एक दौर ऐसा था, जब देश को अपना सोना भी विदेशों में गिरवी रखना पड़ा था। जिसके बाद नरसिम्हा राव ने देसी बाजार खोल दिया था। हालांकि उस दौर में तो उनको इस कारण आलोचना का शिकार होना पड़ा था। लेकिन यह वही फैसला था, जिसकी बदौलत आज हम टॉप देशों में शामिल हैं। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर पीवी नरसिम्हा राव के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

आंध्र प्रदेश के करीमनगर में 28 जून 1921 को पीवी नरसिम्हा राव का जन्म हुआ था। उनका पूरा नाम पामुलापार्ती वेंकट नरसिम्हा राव था। उन्होंने अपनी शिक्षा हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय, मुंबई विश्वविद्यालय और नागपुर विश्वविद्यालय से पूरी की थी। बता दें कि नरसिम्हा राव 10 भाषाओं में बात कर सकते थे और अनुवाद के भी उस्ताद थे।

इसे भी पढ़ें: Chaudhary Charan Singh Birth Anniversary: किसानों के मसीहा कहे जाते थे पू्र्व PM चौधरी चरण सिंह, खत्म किया था पटवारी सिस्टम

राजनीतिक सफर

साल 1957 से लेकर 1977 तक वह आंध्र प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। फिर 1977 से 84 तक वह लोकसभा के सदस्य रहे। दिसंबर 1984 में नरसिम्हा राव को रामटेक से 8वीं लोकसभा के लिए चुना गया। वह 14 जनवरी 1980 से 18 जुलाई 1984 तक विदेश मंत्री, फिर जुलाई 1984 से दिसंबर 1984 तक गृहमंत्री और दिसंबर 1984 से सितंबर 1985 तक रक्षामंत्री रहे। 25 सितंबर 1985 में नरसिम्हा राव ने राजीव गांधी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में पदभार संभाला।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री

साल 1971 से लेकर 1973 तक पीवी नरसिम्हा राव आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। फिर साल 1975 से लेकर 1976 तक अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव रहे। वहीं नरसिम्हा राव 1968 से 74 तक राज्य के तेलुगू अकादमी के अध्यक्ष और 1972 में मद्रास के दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के उपाध्यक्ष रहे थे।

आर्थिक उदारीकरण के जनक

राजनीति के अलावा पीवी नरसिम्हा राव संगीत, कला और साहित्य आदि की अच्छी खासी समझ रखते थे। वे नेहरू-गांधी परिवार के बाहर के पहले प्रधानमंत्री थे और दक्षिण भारत से देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने वाले पीवी नरसिम्हा राव पहले शख्स थे। जब नरसिम्हा राव ने पहली बार विदेश यात्रा की थी, तो उनकी उम्र 53 साल थी। उन्होंने मुश्किल समय में देश की कमान संभाली थी। क्योंकि उस दौर में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार चिंताजनक स्तर तक कम हो गया था। जिस कारण देश का सोना तक गिरवी रखना पड़ा था। जब नरसिम्हा राव ने रिजर्व बैंक के अनुभवी गवर्नर डॉ मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री बनाकर देश को इस आर्थिक भंवर से निकालने का काम किया था।

मृत्यु

वहीं 23 दिसंबर 2004 को नई दिल्ली में 83 साल की उम्र में पीवी नरसिम्हा राव का निधन हो गया था।

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