Pandit Ravi Shankar Birth Anniversary: बनारस से America तक, सितार के सुरों से दुनिया जीतने वाले 'Maestro' की कहानी

भारतीय संगीत को दुनियाभर में लोकप्रिय बनाने वाले मशहूर सितार वादक पंडित रवि शंकर 07 अप्रैल को जन्म हुआ था। पंडित रविशंकर का संगीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच सुना जाता है। हालांकि शुरूआत में उनका झुकाव नृत्य की ओर था, लेकिन महज 18 साल की उम्र में उन्होंने सितार सीखना शुरू कर दिया था। फिर अपनी इस विधा में पंडित रविशंकर ने देश-विदेश में भारत का नाम रोशन किया था। वह संगीत की दुनिया के एक लीजेंड के रूप में जाने जाते हैं। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पंडित रविशंकर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...जन्म और परिवारबनारस में 07 अप्रैल 1920 को पंडित रविशंकर का जन्म हुआ था। वह 7 भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके भाई एक अच्छे डांसर हुआ करते थे। वहीं पंडित रविशंकर अपने भाई उदय शंकर के डांस ग्रुप के मेंबर थे। जिसके कारण वह अक्सर भारत से यूएस डांस मेंबर के रूप में जाने जाते थे। इस दौरान उन्होंने कई वाद्ययंत्रों को बजाना सीख लिया था। वहीं पंडित रविशंकर ने विदेशी संगीत जैसे जैज आदि की जानकारी भी हासिल की थी।इसे भी पढ़ें: Sam Manekshaw Birth Anniversary: World War II में 7 गोलियां खाकर भी नहीं मानी हार, ऐसे थे भारत के पहले Field Marshal सैम मानेकशॉसंगीत शिक्षासाल 1938 में पंडित रविशंकर ने डांस छोड़कर उस्ताद अलाउद्दीन खान से सितार वादन की शिक्षा लेनी शुरू की। उन्होंने मैहर घराने में 7 साल तक उस्ताद अलाउद्दीन खां से सितार की शिक्षा हासिल की। फिर वह सितार वादन में पारंगत हो गए।ऑल इंडिया रेडियो के म्यूजिक डायरेक्टरसाल 1944 में रविशंकर मुंबई चले गए। यहां वह इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन में शामिल हो गए। इसके लिए साल 1945 में बैलेट्स और 1946 में धरती के लाल के लिए संगीत तैयार किया। वहीं 25 साल की उम्र में पंडित रविशंकर उन्होंने 'सारे जहां से अच्छा' की धुन को फिर से तैयार किया। इसके अलावा वह साल 1949 से 1956 तक ऑल इंडिया रेडियो के संगीत निर्देशक रहे। उन्होंने एआईआर में इंडियन नेशनल ऑर्केस्ट्रा की स्थापना की।विश्व में गूंजी सितार की धुनबता दें कि 1960 का दशक आते-आते वह विश्व विख्यात हो गए थे। उनके संगीत की पूरी दुनिया दीवानी होने लगी थी। भारत से लेकर विदेशों तक में पंडित रविशंकर के सितार की धुन गूंज रही थी। वह लगातार पेरिस, लंदन, न्यूयॉर्क समेत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाकर अपने शो करने लगे। यहां तक उस दौर का फेमस बीटल्स बैंड भी उनके संगीत का दीवाना था।मृत्युवहीं 11 दिसंबर 2012 को 92 वर्ष की आयु में पंडित रविशंकर का अमेरिका के सैन डिएगो में निधन हो गया था।

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Apr 8, 2026 - 10:15
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Pandit Ravi Shankar Birth Anniversary: बनारस से America तक, सितार के सुरों से दुनिया जीतने वाले 'Maestro' की कहानी
भारतीय संगीत को दुनियाभर में लोकप्रिय बनाने वाले मशहूर सितार वादक पंडित रवि शंकर 07 अप्रैल को जन्म हुआ था। पंडित रविशंकर का संगीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच सुना जाता है। हालांकि शुरूआत में उनका झुकाव नृत्य की ओर था, लेकिन महज 18 साल की उम्र में उन्होंने सितार सीखना शुरू कर दिया था। फिर अपनी इस विधा में पंडित रविशंकर ने देश-विदेश में भारत का नाम रोशन किया था। वह संगीत की दुनिया के एक लीजेंड के रूप में जाने जाते हैं। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पंडित रविशंकर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

बनारस में 07 अप्रैल 1920 को पंडित रविशंकर का जन्म हुआ था। वह 7 भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके भाई एक अच्छे डांसर हुआ करते थे। वहीं पंडित रविशंकर अपने भाई उदय शंकर के डांस ग्रुप के मेंबर थे। जिसके कारण वह अक्सर भारत से यूएस डांस मेंबर के रूप में जाने जाते थे। इस दौरान उन्होंने कई वाद्ययंत्रों को बजाना सीख लिया था। वहीं पंडित रविशंकर ने विदेशी संगीत जैसे जैज आदि की जानकारी भी हासिल की थी।

इसे भी पढ़ें: Sam Manekshaw Birth Anniversary: World War II में 7 गोलियां खाकर भी नहीं मानी हार, ऐसे थे भारत के पहले Field Marshal सैम मानेकशॉ

संगीत शिक्षा

साल 1938 में पंडित रविशंकर ने डांस छोड़कर उस्ताद अलाउद्दीन खान से सितार वादन की शिक्षा लेनी शुरू की। उन्होंने मैहर घराने में 7 साल तक उस्ताद अलाउद्दीन खां से सितार की शिक्षा हासिल की। फिर वह सितार वादन में पारंगत हो गए।

ऑल इंडिया रेडियो के म्यूजिक डायरेक्टर

साल 1944 में रविशंकर मुंबई चले गए। यहां वह इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन में शामिल हो गए। इसके लिए साल 1945 में बैलेट्स और 1946 में धरती के लाल के लिए संगीत तैयार किया। वहीं 25 साल की उम्र में पंडित रविशंकर उन्होंने 'सारे जहां से अच्छा' की धुन को फिर से तैयार किया। इसके अलावा वह साल 1949 से 1956 तक ऑल इंडिया रेडियो के संगीत निर्देशक रहे। उन्होंने एआईआर में इंडियन नेशनल ऑर्केस्ट्रा की स्थापना की।

विश्व में गूंजी सितार की धुन

बता दें कि 1960 का दशक आते-आते वह विश्व विख्यात हो गए थे। उनके संगीत की पूरी दुनिया दीवानी होने लगी थी। भारत से लेकर विदेशों तक में पंडित रविशंकर के सितार की धुन गूंज रही थी। वह लगातार पेरिस, लंदन, न्यूयॉर्क समेत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाकर अपने शो करने लगे। यहां तक उस दौर का फेमस बीटल्स बैंड भी उनके संगीत का दीवाना था।

मृत्यु

वहीं 11 दिसंबर 2012 को 92 वर्ष की आयु में पंडित रविशंकर का अमेरिका के सैन डिएगो में निधन हो गया था।

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