Himachal का 5000 साल पुराना रौलान पर्व, Social Media पर कैसे हुआ Viral? जानें इसकी अनसुनी कहानी

चांदी-सोने के आभूषणों से सजे चेहरे, चमकीले रंगों के स्टायरोफोम फूलों से सुसज्जित सिर और हाथ से बुनी पारंपरिक शॉल में लिपटा हुआ शरीर, रौलान उत्सव के दौरान स्थानीय लोग दुल्हन जैसे आउटफिट में नजर आती हैं। सर्दियों के विदा होने और नई फसल के आगमन का प्रतीक यह पौराणिक पर्व हिमाचल प्रदेश की किन्नौर घाटी और आसपास के गांवों के लोगों को एक साथ जोड़ता है, जहां वे कुछ दिनों तक नृत्य, संगीत और खुले दिल से खुशियां मनाते हैं। बता दें कि, यह पर्व 5000 वर्ष पुराना है। कुछ दिनों पहले तक यह उत्सव सोशल मीडिया की चकाचौंध से दूर था, अचानक से ट्रैवल ब्लॉगर्स के इंस्टाग्राम पेजों से ली गई तस्वीरें वायरल हो गईं। आइए आपको बताते हैं हिमाचल प्रदेश का पारंपरिक रौलान पर्व क्या है।कब मनाया जाता है रौलान?रौलान फेस्टिवल आमतौर पर होली के अगले दिन से शुरू होता है और मार्च में पांच दिनों तक चलता है। रौलान उत्सव हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से शहर किन्नौर का मूल त्योहार है और आसपास के गांवों सांगला और कल्पा की जनजातियां भी इसमें शामिल होती हैं। यहां के स्थानीय लोग बताते हैं कि इस त्योहार में पुरुष दूल्हे की तरह और महिलाएं दुल्हन की तरह सजती हैं और अपने खानदानी गहने पहनती हैं। लेकिन उनके क्षेत्र में यह त्योहार का कोई विशेष महत्व नहीं है। यह सिर्फ एक जनजातीय त्योहार है,” यहां के लोकल  बताते हैं कि, “पौराणिक कथाओं के अनुसार, सर्दियों के अंत में ही पर्वतीय परियों को वापस भेज देते हैं। यह एक बहुत पुराना, पारंपरिक और पीढ़ियों से चला आ रहा रिवाज है।”पहले दिन दो या तीन वैवाहिक जोड़े सज-धज कर आते हैं। अगले दिन पांच जोड़े आते हैं। तीसरे दिन आस-पास के गांवों से लोग उमड़ पड़ते हैं। वे नाचते-गाते हैं और पूजा करते हैं।”  यह उनका पहला अनुभव था जब वे इस उत्सव में शामिल हुए और इसे कवर किया। इस दौरान यह पर्व सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।  View this post on Instagram A post shared by Archit Kushwaha (@ttl.india)

PNSPNS
Mar 13, 2026 - 22:46
 0
Himachal का 5000 साल पुराना रौलान पर्व, Social Media पर कैसे हुआ Viral? जानें इसकी अनसुनी कहानी
चांदी-सोने के आभूषणों से सजे चेहरे, चमकीले रंगों के स्टायरोफोम फूलों से सुसज्जित सिर और हाथ से बुनी पारंपरिक शॉल में लिपटा हुआ शरीर, रौलान उत्सव के दौरान स्थानीय लोग दुल्हन जैसे आउटफिट में नजर आती हैं। सर्दियों के विदा होने और नई फसल के आगमन का प्रतीक यह पौराणिक पर्व हिमाचल प्रदेश की किन्नौर घाटी और आसपास के गांवों के लोगों को एक साथ जोड़ता है, जहां वे कुछ दिनों तक नृत्य, संगीत और खुले दिल से खुशियां मनाते हैं। बता दें कि, यह पर्व 5000 वर्ष पुराना है। कुछ दिनों पहले तक यह उत्सव सोशल मीडिया की चकाचौंध से दूर था, अचानक से ट्रैवल ब्लॉगर्स के इंस्टाग्राम पेजों से ली गई तस्वीरें वायरल हो गईं। आइए आपको बताते हैं हिमाचल प्रदेश का पारंपरिक रौलान पर्व क्या है।

कब मनाया जाता है रौलान?

रौलान फेस्टिवल आमतौर पर होली के अगले दिन से शुरू होता है और मार्च में पांच दिनों तक चलता है। रौलान उत्सव हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से शहर किन्नौर का मूल त्योहार है और आसपास के गांवों सांगला और कल्पा की जनजातियां भी इसमें शामिल होती हैं। यहां के स्थानीय लोग बताते हैं कि इस त्योहार में पुरुष दूल्हे की तरह और महिलाएं दुल्हन की तरह सजती हैं और अपने खानदानी गहने पहनती हैं। लेकिन उनके क्षेत्र में यह त्योहार का कोई विशेष महत्व नहीं है। यह सिर्फ एक जनजातीय त्योहार है,” यहां के लोकल  बताते हैं कि, “पौराणिक कथाओं के अनुसार, सर्दियों के अंत में ही पर्वतीय परियों को वापस भेज देते हैं। यह एक बहुत पुराना, पारंपरिक और पीढ़ियों से चला आ रहा रिवाज है।”

पहले दिन दो या तीन वैवाहिक जोड़े सज-धज कर आते हैं। अगले दिन पांच जोड़े आते हैं। तीसरे दिन आस-पास के गांवों से लोग उमड़ पड़ते हैं। वे नाचते-गाते हैं और पूजा करते हैं।”  यह उनका पहला अनुभव था जब वे इस उत्सव में शामिल हुए और इसे कवर किया। इस दौरान यह पर्व सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। 

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow