Aarti Rules: शास्त्रों में क्या है Aarti का सही नियम? दीपक हाथ में रखना सही या थाली में

हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में आरती का विशेष महत्व होता है। आरती करना पूजा का एक ऐसा हिस्सा है, जिसमें भक्तगण दीपक जलाकर भगवान की स्तुति करते हैं औऱ उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। दीपक की लौ को साक्षात अग्नि तत्व और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है। धार्मिक शास्त्रों में आरती करने से जुड़े कुछ नियमों के बारे में बताया गया है। इनमें से एक यह भी है कि आरती करते समय दीपक को हाथ में रखना चाहिए या फिर थाली में।दीपक हाथ में रखें या थाली मेंबता दें कि आरती का मुख्य उद्देश्य दीपक को घुमाते हुए भगवान के विभिन्न अंगों की वंदना करना है। जब आप भगवान की मूर्ति या प्रतिमा के सामने खड़े होकर आरती करते हैं। तो परंपरा के मुताबिक दीपक को थाली में रखकर थाली को दोनों हाथों से पकड़कर घुमाया जाता है।इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 21 March 2026 | आज का प्रेम राशि फल 21 मार्च | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनशुद्ध रूप से सिर्फ दीपक को हाथ से पकड़ना कम प्रचलित है। क्योंकि आरती की थाली में दीपक के अलावा फूल, कपूर और घंटी होती है। जिसको एक साथ ईष्ट को समर्पित किया जाता है। ऐसे में थाली को हाथ में पकड़कर आरती करने से दीपक की लौ भगवान के चरणों से लेकर मुखमंडल तक ले जाई जाती है।यह पूरी क्रिया देवी-देवता के प्रति पूर्ण समर्पण और सेवा भाव को दर्शाती है। आरती समाप्त होने के बाद दीपक को एक सुरक्षित स्थान जिसको थाली कहा जाता है। उस पर रखा जाता है। आरती समाप्त होने के फौरन बाद दीपक को जमीन पर नहीं रखना चाहिए।दीपक को थाली में या फिर किसी ऊंचे साफ आसन पर रखना चाहिए। यह शुद्धता को बनाए रखने के लिए जरूरी है। क्योंकि दीपक अग्नि देवता का प्रतीक है और दीपक की लौ से सकारात्मक प्रवाह बढ़ता है।आरती पूरी होने के बाद भक्त दीपक की लौ या थाली पर हाथ फेरकर अपने सिर और आंखों पर लगाते हैं। इसको आरती लेना कहा जाता है। इस दौरान दीपक का थाली में सुरक्षित रखा होना जरूरी है। जिससे कि सभी लोग आसानी से आरती ले सकें।

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Mar 23, 2026 - 21:38
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Aarti Rules: शास्त्रों में क्या है Aarti का सही नियम? दीपक हाथ में रखना सही या थाली में
हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में आरती का विशेष महत्व होता है। आरती करना पूजा का एक ऐसा हिस्सा है, जिसमें भक्तगण दीपक जलाकर भगवान की स्तुति करते हैं औऱ उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। दीपक की लौ को साक्षात अग्नि तत्व और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है। धार्मिक शास्त्रों में आरती करने से जुड़े कुछ नियमों के बारे में बताया गया है। इनमें से एक यह भी है कि आरती करते समय दीपक को हाथ में रखना चाहिए या फिर थाली में।

दीपक हाथ में रखें या थाली में

बता दें कि आरती का मुख्य उद्देश्य दीपक को घुमाते हुए भगवान के विभिन्न अंगों की वंदना करना है। जब आप भगवान की मूर्ति या प्रतिमा के सामने खड़े होकर आरती करते हैं। तो परंपरा के मुताबिक दीपक को थाली में रखकर थाली को दोनों हाथों से पकड़कर घुमाया जाता है।

इसे भी पढ़ें: Love Horoscope For 21 March 2026 | आज का प्रेम राशि फल 21 मार्च | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन


शुद्ध रूप से सिर्फ दीपक को हाथ से पकड़ना कम प्रचलित है। क्योंकि आरती की थाली में दीपक के अलावा फूल, कपूर और घंटी होती है। जिसको एक साथ ईष्ट को समर्पित किया जाता है। ऐसे में थाली को हाथ में पकड़कर आरती करने से दीपक की लौ भगवान के चरणों से लेकर मुखमंडल तक ले जाई जाती है।

यह पूरी क्रिया देवी-देवता के प्रति पूर्ण समर्पण और सेवा भाव को दर्शाती है। आरती समाप्त होने के बाद दीपक को एक सुरक्षित स्थान जिसको थाली कहा जाता है। उस पर रखा जाता है। आरती समाप्त होने के फौरन बाद दीपक को जमीन पर नहीं रखना चाहिए।

दीपक को थाली में या फिर किसी ऊंचे साफ आसन पर रखना चाहिए। यह शुद्धता को बनाए रखने के लिए जरूरी है। क्योंकि दीपक अग्नि देवता का प्रतीक है और दीपक की लौ से सकारात्मक प्रवाह बढ़ता है।

आरती पूरी होने के बाद भक्त दीपक की लौ या थाली पर हाथ फेरकर अपने सिर और आंखों पर लगाते हैं। इसको आरती लेना कहा जाता है। इस दौरान दीपक का थाली में सुरक्षित रखा होना जरूरी है। जिससे कि सभी लोग आसानी से आरती ले सकें।

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