धर्म परम सत्य है, इसके पालन से लोगों को साहस, दृढ़ संकल्प प्राप्त करने में मदद मिलती है : भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि धर्म परम सत्य है तथा जिम्मेदारी के साथ इस मार्ग पर चलने से समाज को शांतिपूर्ण बनाए रखने में मदद मिलेगी। यहां धर्म जागरण न्यास के कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर भागवत ने कहा कि धर्म का पालन और उसके प्रति प्रतिबद्ध रहने से लोगों को संकट के समय कोई रास्ता निकालने का साहस और दृढ़ संकल्प प्राप्त करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा, ‘‘यदि धर्म के प्रति आपकी प्रतिबद्धता दृढ़ है, तो आप कभी हिम्मत नहीं हारेंगे। सभी ने ‘छावा’ (छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित) फिल्म देखी है। केवल बड़े नाम ही नहीं, बल्कि आम लोगों ने भी धर्म के प्रति प्रतिबद्ध रहने के लिए अपना बलिदान दिया है।’’ भागवत ने कहा कि यह समाज की जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि लोग धर्म के मार्ग से विचलित न हों। उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया को ऐसे धर्म की आवश्यकता है जो हिंदू धर्म की तरह विविधताओं को समाहित करे। धर्म हमें अपनापन सिखाता है और विविधताओं को स्वीकार करने की अनुमति देता है। हम विविध हैं लेकिन एक-दूसरे से भिन्न नहीं हैं। अंतिम सत्य यह है कि हम अलग दिख सकते हैं लेकिन हम एक ही हैं।

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Aug 7, 2025 - 04:30
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धर्म परम सत्य है, इसके पालन से लोगों को साहस, दृढ़ संकल्प प्राप्त करने में मदद मिलती है : भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि धर्म परम सत्य है तथा जिम्मेदारी के साथ इस मार्ग पर चलने से समाज को शांतिपूर्ण बनाए रखने में मदद मिलेगी।

यहां धर्म जागरण न्यास के कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर भागवत ने कहा कि धर्म का पालन और उसके प्रति प्रतिबद्ध रहने से लोगों को संकट के समय कोई रास्ता निकालने का साहस और दृढ़ संकल्प प्राप्त करने में मदद मिलती है।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि धर्म के प्रति आपकी प्रतिबद्धता दृढ़ है, तो आप कभी हिम्मत नहीं हारेंगे। सभी ने ‘छावा’ (छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित) फिल्म देखी है। केवल बड़े नाम ही नहीं, बल्कि आम लोगों ने भी धर्म के प्रति प्रतिबद्ध रहने के लिए अपना बलिदान दिया है।’’

भागवत ने कहा कि यह समाज की जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि लोग धर्म के मार्ग से विचलित न हों। उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया को ऐसे धर्म की आवश्यकता है जो हिंदू धर्म की तरह विविधताओं को समाहित करे। धर्म हमें अपनापन सिखाता है और विविधताओं को स्वीकार करने की अनुमति देता है। हम विविध हैं लेकिन एक-दूसरे से भिन्न नहीं हैं। अंतिम सत्य यह है कि हम अलग दिख सकते हैं लेकिन हम एक ही हैं।

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